Kasam - Love is not Everything (Completed) - Page 7 - SexBaba
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Kasam - Love is not Everything (Completed)

थैंक्स चिंटूरोस्की भाई फॉर योर सपोर्ट एंड comment...Story प्रेजेंट में भी chalegi...Abhi इस टूर कम्पलीट होने के बाद प्रेजेंट में आएगा story...Tour के उपदटेस को ऐसे hi पेंडिंग में छोड़ना स्टोरी के फ्लो में थोड़ा इफ़ेक्ट दाल सकता hai...Issi लिए अभी पास्ट में hi लिख रहा हु story...Story पास्ट और प्रेजेंट दोनों में hi चलता rahega...Present में भी बहुत कुछ होना बाकी hai...Saath बने रहिये भाई.
 
थैंक्स बिंदास भाई फॉर योर सपोर्ट एंड comment...Bhai अभी बहुत दिन बाद घर आया हु तो सभी के साथ टाइम स्पेंड करने की वजह से अपडेट के लिए ज्यादा टाइम नहीं मिल रहा hai...Vacation बाद कॉलेज है और फिर स्टडी में बिजी होने के बाद भी ज्यादा टाइम नहीं milta...Koshish तो हर बार यही है की जितना हो सके उतना रेगुलर rahe....Aage भी यही कोशिश rahega...Bas आप सब साथ बने रहिये भाई.
 
अपडेट 55

नेक्स्ट मॉर्निंग

आगे के डेस्टिनेशन के लिए एक बार फिर सब साथ होटल से बाहर निकले.

आज इन् का आखिरी डेस्टिनेशन tha...Cave विजिट.

अतुल और अजय को देखते hi काजल बोली.

काजल:- ये तुम दोनों की आँखें इतनी लाल क्यों है?

दोनों कुछ बोलते उससे पहले hi,

निशा:- सस्ती नशा का कमाल है.

निशा की इस बात से सभी हैरानी से दोनों को देखने लगते hai...Rahul सर भी.

अजय बुरी तरह से चौंक गया लेकिन अतुल...

अतुल:- (इन हिज मंद) प्यार का नशा इतना सस्ता nahi...Lekin बहुत नशीली है.

अतुल ये सोच कर मुस्कुराता है फिर.

अतुल:- मई nahi...Isne किया है nasha...Wo भी रात भर.

अब्ब सभी का ध्यान अजय पर चला जाता है.

अजय:- क्या कुछ भी बोल देता है और कही भी?

अजय को अतुल का मजाक बिलकुल भी पसंद नहीं आया था और वो इस वक्त मजाक के मूड में भी नहीं था.

डॉ. राहुल:- अच्छा है जो नहीं kiya...Aur इस टूर में करने की सोचना भी mat...College के रेपुटेशन काम हो ऐसी कुछ भी चीज करने की सोचना भी मत.

निशा:- क्या सर आप भी? सिर्फ टूर में?

डॉ. राहुल:- Ha...Sirf इस टूर तक hi मेरा हक़ है कहने ka...Baaki सब की पर्सनल लाइफ hai...As ा टीचर सिर्फ एडवाइस दे सकता हु लेकिन फाॅर्स नहीं कर सकता.

निशा:- हम्म ये भी सही hai...Tum दोनों ने बताया नहीं आँख लाल होने की वजह.

अतुल:- मई मूवीज देख रहा था और ये (अजय) मच्चर मार रहा था.

अजय अतुल की इस बात पर गुस्से से देखता hai...Atul भी समझ जाता है इस वक्त अजय मजाक के मूड में नहीं है.

निशा:- मूवीज?

फिर अतुल मूवीज के नाम बता देता hai...Movies का नाम सुन कर सभी चौंक जाते hai...Sabse ज्यादा Nisha...Aur वो अतुल को जोर से पिंच कर देती है.

अतुल:- Oucchhhh....Kya कर रही हो?

निशा:- सपने में हो या फिर होश में? टेस्ट कर रही थी.

अतुल:- तो फिर क्या पता चला?

निशा:- होश में hi ho...Lekin लगता है तुम्हारा फिमाग़ी संतुलन हिल गया है.

निशा को अभी भी यकीं नहीं आ रहा था.

काजल:- अतुल तुम मूवीज भी देखने लगे और वो भी रोमांटिक?

अतुल:- इंसान hi hu...Emotions नाम के चीज मुझ में भी है.

अतुल ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया.

काजल:- और अजय तुम?

अजय:- वैसे hi...Mujhe नींद नहीं आ रहा था.

काजल:- कोई प्रॉब्लम या फिर टेंशन?

अजय:- नहीं आदत हो चूका है.

फिर सभी अतुल की टांग खींचने लगते है अतुल की इस बदलाव पर.

अजय सिर्फ और सिर्फ अंजलि को hi देख रहे था इस उम्मीद में की एक नजर अंजलि भी उससे देख le...Lekin अंजलि थी की अजय को कोई भाव दे hi नहीं रही thi...Aur ये सब देख अजय को अपने अंदर कुछ टूटता महसूस हो रहा था.

अपने दिल का दर्द अजय ना तो सेह पा रहा था और ना hi किसी को बता सकता tha...Pyar कितना हस्सें और खूबसूरत होता है ये बात तो वो भी जानता था लेकिन एक तरफ़ा प्यार और दिल टूटने का दर्द आज वो महसूस कर रहा था.

फिर सभी आगे निकल जाते hai...Ajay के अलावा सभी हंसी मजाक करते हुए आगे चल रहे thhe...Aise hi सब केव में hi पहुँच गए.

वह 4 केव्स थे एक दूसरे के paas...Chhota सा जंगल के बिच बना हुआ केव बहुत बड़ा और खूबसूरत tha...Jungle की ठंडी हवा और आस पास का नजारा केव को और भी खूबसूरत बना रहा tha...Baaki डेस्टिनेशंस की तरह ये डेस्टिनेशन भी सभी को बहुत पसंद aaya...Sabhi केव के अंदर जाने के लिए एक्ससिटेड thhe...Lekin अजय यहाँ आ कर भी अपने hi दुनिया में खोया हुआ था.

राहुल सर के पास जितना कनौलड़ेगे था उस केव के बारे में वो सभी को बता रहे thhe...Cave कितना पुराण हो सकता है? स्ट्रक्चर और जियोग्राफी कैसा है? जानवर कैसे रहते है? यही सब बातो की इनफार्मेशन दे रहे थे.

फिर सभी अलग अलग केव में जा कर ऑब्जरवेशन करने lage...Yaha पर भी अतुल और निशा एक साथ आ जाते है.

निशा:- सो मर. अतुल!!!

अतुल:- यस मिस निशा.

निशा:- अचानक ये बदलाव कैसे?

अतुल:- कैसा बदलाव?

निशा:- यही की प्यार के नास्तिक को पहली बार रोमांटिक मूवीज देखते हुए सुना.

अतुल:- प्यार के नास्तिक?

निशा:- हां तुम.

फिर अतुल मुस्कुरा कर कहता है.

अतुल:- है नास्तिक hi था.

निशा:- तो अब्ब?

अतुल:- अब्ब लग रहा है की मई गलत tha...Sach में प्यार चीज की बात hi अलग है.

निशा सिर्फ मुस्कुराती रही.

अतुल:- और इस बार गलत होने में भी मजा आ रहा है.

निशा:- मुस्कुरा तो ऐसे रहे हो जैसे सच में तुम्हे किसी से प्यार हो गया है.

अतुल:- मेरी ऐसी किस्मत कहा जो कोई मुझसे प्यार करे.

निशा कुछ कहती इससे पहले hi काजल उससे बुलाती है.

निशा बस अतुल को देख मुस्कुराती है और वह से चली जाती hai...Sach में उससे अतुल की इस बदलाव देख बहुत अच्छा लग रहा tha...Nisha की मुस्कान देख अतुल भी कुस्कराये बिना नहीं रह पाटा.

अजय भी कुछ देर केव्स में इधर उधर देख रहा था.

जब उससे रहा नहीं गया तो अंजलि की तलाश में निकल गया.

बहुत जल्द अंजलि उससे मिल गया और वो भी अकेली.

अजय अंजलि के पास जाता है और अंजलि अजय से दूर जाने की कोशिश करती है.

अजय:- रुको.

अंजलि रुक जाती है और अजय को देखती hai...Iss वक्त अजय की आँखों में बेबसी और गुस्सा था.

अंजलि:- आती हु कुछ देर में.

अजय:- Nahi...Mujhe बात करना hai...Wo भी अभी.

अंजलि:- कहो.

अजय:- ये सब क्या है अंजलि.

एक बार फिर टूट सा गया अजय.

अंजलि:- क्या?

अजय:- तुम नहीं समझ रही हो?

एकदम से अजय गुस्सा में बोलै.

अंजलि:- क्या?

अजय:- कल मैंने तुम्हे प्रोपोज़ किया था?

अजय गुस्से में बोलै और फिर उम्मीद भरी निगाहो से अंजलि को देखने लगा.

अंजलि:- अच्छा wo...Sorry कल जवाब नहीं दे paayi...Lekin मई तुमसे प्यार नहीं करती.

अंजलि के चेहरा में कोई भाव नहीं था.

अजय:- लेकिन क्यों?

अजय बिलकुल hi टूट चूका था.

अंजलि:- क्या क्यों? प्यार नहीं करती तो नहीं करती.

अजय:- लेकिन मैंने भी तुम्हारी आँखों में प्यार देखा था अपने लिए?

अंजलि:- मेरी भूल थी wo...Mujhe भी लगता था की मई तुमसे प्यार करती hu...Sirf अट्रैक्शन था wo...Accha हुआ पहले hi पता चल गया.

अजय:- लेकिन तुम ऐसे कैसे कर सकती हो? नाराज हो क्या मुझसे?

अंजलि:- Nahi...Lekin प्यार भी नहीं करती hu...Jitna जल्दी समझ जाओ उतना hi बेहतर है तुम्हारे लिए.

अजय अब्ब सिर्फ अंजलि को देखता hi raha...Abhi भी उससे अंजलि की बातो पर यकीं नहीं हो रहा था

अंजलि:- अभी भी कुछ कहना बाकी है या फिर मई जाओ?

अजय अंजलि की जाने के लिए इशारा कर देता hai...Abb कहने के लिए बाकी hi क्या था.

अंजलि के जाने के बाद अब्ब अजय से रहा नहीं gaya...Aankho आंसुओं से भर gaye...Pyar में पहली बार रू रहा था wo...Aur दर्द था की सहा hi नहीं जा raha...Wo अंजलि के रूप में अपनी जिंदगी को खुद से दूर जाता देख रहा था.
 
अपडेट 56

रात के 12 बज रहे thhe...Waise तो ये सब का सोने का वक्त tha...Lekin दो आँखें ऐसे थे जो आसमान में सितारा गईं रहा tha...Aankho में आंसू और होंठो में muskaan...Dard भरी मुस्कान.

कभी वो ऊपर देख भगवन से शिकायत करता तो कभी खुद की हालात पर हँसता.

Useless...Useless है तू Ajay...Useless...Kisi काम का nahi...Issi लिए अंजलि ने भी तुझे निकाल दिया अपनी जिंदगी से.

कभी ये कह कर अजय खुद को hi कोस्टा तो कभी अपनी इस हालत पर rota...Dil टूटने का दर्द नहीं सहा जा रहा था अजय से.

और अपनी दर्द को भुलाने के लिए पिछली 2 घंटे में 1 बियर की बोतल और 20 सिगरेट फंक चूका tha...Lekin दर्द था की जा hi नहीं जा रहा tha...Jaata भी कैसे दिल टूटने का दर्द था, प्यार में हारने का दर्द था.

इतना प्यार करने लगा था वो अंजलि से की ना hi वो अब्ब उससे भूल पा रहा था, ना hi नफरत कर पा रहा था और ना hi आगे बढ़ पा रहा tha...Bas अपने किस्मत को कोसते हुए उम्मीद की दुनिया में जीने लगा था.

अजय

एक प्यारी सी आवाज ने अजय का ध्यान तोडा.

पीछे dekha...Raat के अँधेरा में भी अंजलि का दूध सा चेहरा चाँद की रौशनी में चमक रहा tha...Anjali आज बहुत hi प्यारी और खूबसूरत लग रही thi...Ajay अंजलि से अपना नजर हटा hi नहीं पा रहा था और ना hi विश्वास कर पा रहा था की ये सच है.

अंजलि भी अपनी आँखें बंद कर के बोली.

अंजलि:- ी लव यू तू.

फिर अंजलि अजय को देखती hai...Ajay को अभी भी विस्वाश नहीं हो रहा tha...Yahi तो वो 3 मैजिकल वर्ड्स थे जो अजय सुनने को तरस गया tha...Aur जब सुना तो विस्वाश नहीं कर पा रहा tha...Usse खुद ऐसा लग रहा था जैसे वो सपने में है.

अजय का हैरान चेहरा देख अंजलि मुस्कुराये बिना नहीं रह पायी.

अंजलि:- कैसा लगा सरप्राइज और बर्थडे गिफ्ट?

अंजलि की इस बात पर अजय खुद को यकीं दिलाने के लिए पिंच करने लगता hai...Tabhi गलती से हाथ सिगरेट से जल जाता है.

अजय:- आउच.

अब्ब जाके अंजलि को भी एहसास होती है की अजय सिगरेट पी रहा hai...Smell भी आ रहा था और आस पास उससे और भी सिगरेट्स और बियर की बोतल दीखता है.

यकीं नहीं हो रहा था की अजय खुद को इतना भी नुकशान पंहुचा सकता है.

जल्दी से वो अजय के पास जा कर वो सिगरेट फेंक देती है.

अंजलि:- क्या है हे सब? क्यों कर रहे हो ऐसा?

अंजलि ने डांटते हुए kaha...Lekin अजय अंजलि की होंठो में अपना ऊँगली रख देता hai...Abb उसकी होंठो में भी मुस्कान आ जाता है.

अजय:- फिर से बोलो न?

अंजलि:- क्या?

अजय:- वही?

अंजलि:- क्या वही?

अजय:- वही 3 मैजिकल वर्ड्स.

अंजलि:- नहीं मुझे शर्म आती है.

अंजलि सच में शर्मा कर निचे देखने लगती है.

अजय:- प्लीज.

अजय की ऐसी नजर और प्यार भरी बात सुन कर अंजलि और भी शर्माने लगती है.

अजय:- प्लीज एक बार और.

अंजलि:- ी लव यू.

फिर अंजलि भाग कर छत के दुआरे कोने में चली जाती है.

अब्ब अजय के दिल को सुकून mila...Ek पल में hi उससे दुनिया भर की साड़ी खुशियां मिल gayi...Saare गीले सिक्वे दूर हो गए और सारे नशा gaayab...Bas अब्ब चेहरे में ख़ुशी hi ख़ुशी झलक रहा था.

दौड़ कर वो अंजलि के पास गया.

अंजलि:- बताया नहीं तुमने कैसा लगा तुम्हारा बर्थडे सरप्राइज?

अजय ने टाइम देखा...12:15 am...Yaani की आज उसका बर्थडे था.

अजय:- आज तक का best...Sach में पहली बार बर्थडे में इतनी ख़ुशी मिला hai...Lekin तुमने बहुत गलत किया.

अंजलि:- क्यों?

अजय:- इतना कौन तड़पाता है? और सिर्फ इस लिए तुम मुझे ना कह रही थी.

अंजलि:- Nahi...Ye भी देखना चाहती थी की मेरे ना कहने पर तुम क्या करते हो मेरे liye...Kaise मनाते हो?

अजय:- अरे तुम्हारे बिना तो मई कुछ हु hi nahi...Mar जाऊँगा तुम्हारे बिना...

अजय इससे आगे कुछ कहता अंजलि अपने हाथ अजय की मुंह पर रख देती है.

अंजलि:- लेकिन तुम तो फिर से नशा करने लग गए.

अंजलि ने नाराज होते हुए कहा.

अजय अपने पॉकेट से 2 सिगरेट का पैक निकालता है और छत से फेंक देता है.

अजय:- अब्ब खुश.

अंजलि मुस्कुराने लगती है.

अजय फिर से अंजलि को देखने लगता hai...Usse बहुत प्यार आ रहा था अंजलि पर.

अजय:- सच में बहुत तड़पाया tumne...Lekin बड़ी बड़ी प्यार की कहानियो में ऐसी छोटी छोटी बातें होती रहती है.

अंजलि:- बरी प्यार की बातें?

अजय:- अगर नहीं है तो बना denge...Bas तुम्हारा साथ चाहिए.

अजय की बात पर अंजलि फॉर से शर्मा गयी.

अंजलि:- क्या बात है? आज बहुत बोल रहे हो? पहले तो मुंह से एक शब्द नहीं निकलता था.

अजय:- सब प्यार की ताकत hai...Tumhaari प्यार की.

अंजलि सिर्फ मुस्कुराती है.

अजय:- अब्ब तो तुमसे प्यार करने के बाद दर लगने लगा hai...Aisa शॉक देती हो की कही हार्ट अटैक न आ जाए.

अंजलि:- हार्ट अटैक मतलब मायोकार्डियल इन्फार्क्शन.

अजय:- (हाथ जोड़ कर) प्लीज इतनी रोमांटिक रात में अतुल मत बनो.

अजय की इस बात पर अंजलि खिल खिला कर हसने लगती hai...Ajay भी मुस्कुराते हुए उससे प्यार से देखने लगता hai...Anjali को हँसते हुए देख अजय को बहुत सुकून मिल रहा था.

तभी अजय की मोबाइल में मैसेज आता है.

अजय:- नाम लिया शैतान हाजिर.

अतुल:- अबे वो प्यार में हारा हुआ aashiq...Chhat में सू तो नहीं गया.

तभी अंजलि की मोबाइल में निशा की मैसेज आता है.

निशा:- रात भर डेटिंग की प्लानिंग कर रही है क्या? रात बहुत हो चूका hai...Abb आ भी जा.

ये मेस्सगेस देख दोनों का मूड ऑफ हो जाता है. इतनी रोमांटिक रात होने वाली थी लेकिन...

अंजलि:- अच्छा तो चलती हु.

अजय:- कल साथ चलोगी?

अंजलि:- कहा?

अजय:- कॉफ़ी पीने.

अंजलि हां में सर हिला कर चली जाती है.

अजय भी निचे अपनी रूम की तरफ चला जाता hai...Jaate वक्त उसके चेहरे में दुनिया भर का ख़ुशी tha...Bhul गया था की कुछ वक्त पहले वो टूटा हुआ आशिक़ था.

अब्ब तो उससे बस वो खुद और अंजलि hi दिखाई दे रहे thhe...Anjali के उसके प्यार को अपनाने के बाद उससे ऐसा लग रहा था जैसे उससे एक नयी जीवन मिला hai...Anjali का उसकी जिंदगी में होना और ना होना क्या मायने रखता है उससे पता चल गया था.

उसने खुद से hi एक वादा किया, "वो जिंदगी भर अंजलि से ऐसे hi प्यार करता रहेगा और उसकी प्यार का हमेशा सम्मान करेगा."

रूम में पहुंचने के बाद.

अतुल:- हो गए सारे गीले शिकवे दूर.

अतुल ने हस्ते हुए कहा.

अजय:- मतलब?

अतुल सिर्फ हँसता hi रहता है.

अजय:- मतलब तुझे सब कुछ पता था.

अतुल हां में सर हिलाता है और अजय पर हसने लगता है.

अजय:- कामिनी!!!

अजय फिर अतुल की बीएड की तरफ बढ़ जाता है.
 
सॉरी फ्रेंड्स इस बार सच मई बहुत लेट हो gaya...Abhi रिलेटिव्स के यहाँ hu...Jyada टाइम नहीं मिल रहा hai...Update कल पोस्ट करूँगा.

और एक हफ्ते तक सभी रिलेटिव्स के यहाँ जाना hai...Vacation ख़त्म हो रहा hai...Agle 1 वीक में ज्यादा उपदटेस पोस्ट नहीं कर पाऊंगा ...उसके बाद रेगुलर रहने की कोशिश करूँगा.

सॉरी फॉर डिले एंड थिस news...Update कल.
 
अपडेट 57

आफ्टर ा रेसलिंग सेशन

इस रेसलिंग में मारने वाला अजय था और मार खाने वाला अतुल.

अतुल:- बस बस bhai...Pehle hi 2 हड्डियां तोड़ चूका hai...Aur कितना मारेगा?

अजय:- तुझे तो जान से मारने का मन कर रहा hai...Aisa भी कोई करता है kya...Wo भी अपने दोस्त के साथ?

अतुल:- दोस्त के साथ hi तो करते है मस्ती मजाक.

अजय:- ये मस्ती मजाक था? मेरा तो जान hi निकल रहा था.

अतुल:- इसका भी अलग hi मजा है.

अजय:- जब तेरे साथ ये सब होगा न तब पता chalega...Pyar में दिल टूटने का dard...Bata नहीं सकता yaar...Kya क्या गुजर रहा था मुझ par...Haara हुआ इंसान महसूस कर रहा tha...Saare के सारे ख्वाहिशें एक पल में टूट gaye...Saare सपने बिखर gaye...Aur यहाँ तक की जिंदगी जीने का मकशद bhi...Bahut दर्द होता है yaar...Bhagwan ऐसा किसी दुश्मन के साथ भी न करे.

अतुल:- अबे oye...Itna सेंटी क्यों हो रहा है अब्ब? अंजलि मिल गयी न तुझे.

अजय:- अगर तू नहीं होता तो बहुत पहले मिल जाती.

अतुल:- प्यार में साबरा chaahiye...Have ा पेशेंस bro...Muft मई अगर कुछ चीज मिल जाए ना तो उसका कोई मोल नहीं hota...Abb तो तुझे पता चल गया न अंजलि तेरे लिए क्या माईने रखती है.

अतुल की बात पर अजय भी सहमत tha...Kuch देर बाद.

अजय:- बहुत बड़ा सरप्राइज था yaar...Lekin ये सब तूने किया कैसे?

अतुल:- जब तेरा सदा हुआ मुंह देखा तो पता चल गया कुछ गड़बड़ hai...Tune बताने से मन कर दिया तो मैंने अंजलि से जा कर बात किया.

ये सब उसका प्लान था और मई भी इस में शामिल हो gaya...Tere हालत का मजा लेने का सोचा हम सबने.

बस यही वजह था तेरे अकेलेपन में भी किसी ने साथ नहीं diya...Sirf काजल hi थी जो थोड़ा बहुत बात कर रही थी तुझसे.

अतुल की बात सुनने के बाद अजय कुछ देर बाद अतुल को देखता रहा.

अजय:- अगर मई कोई गलत कदम उठा लेता तो प्यार में हारने की ग़म में?

अतुल:- तेरा आस पास hi था mai...Agar ऐसा लगता तो दो कान के निचे लगाता और होश में वापस ले आता.

अजय:- बहुत कमीना है तू.

अतुल:- हर दोस्त कमीना होता है.

अजय:- इंतजार है मुख्य भी उस मौके का जब मई भी कमीना बन कर तेरा बंद बजाओ.

अजय की इस बात पर दोनों हसने लगते है.

कुछ देर बाद.

अजय:- हां याद aaya...Tu भी कुछ रोमांटिक होने लगा है.

अजय की इस बात पर अतुल एकदम से चुप हो gaya...Usne अंदाजा लगा लिया अब्ब अजय मूड में hai...Abb वो क्या से क्या पूछेगा ये तो बस भगवान् hi जाने.

अजय:- कौन है वो?

अतुल:- कौन?

अजय:- वही जिससे तू प्यार करता है? मतलब तेरी गफ?

अतुल:- अभी तक कोई नहीं.

अजय:- क्या? तो फिर खुद से hi प्यार करता है?

अतुल:- नहीं re...Abhi तक कोई मिली नहीं है.

अजय:- निशा भी नहीं?

अजय की इस बात ने अतुल पर बहुत बड़ा धमाका कर diya...Ajay से पहले एक दो दोस्त ने भी अतुल से यही पूछा tha...Yaha तक की वो भी सोच में पद गया tha...Kya वो और निशा इतना क्लोज है?

अतुल:- नहीं वो सिर्फ मेरी फ्रेंड hai...Best फ्रेंड.

अतुल बात को टालने की कोशिश कर रहा था.

अजय:- बेस्ट फ्रेंड hi या इससे भी ज्यादा.

अतुल:- ये क्या बकवास कर रहा है? बोल दिया न फ्रेंड मतलब friend...Aur इससे ज्यादा उसके बारे में सोच भी नहीं sakta...Wo किसी और से प्यार करती है.

अब्ब ये बकवास बंद कर.

अतुल ने गुस्से में कहा और वह से चला gaya...Ajay बस देखता hi रह गया.

अतुल वह से निकल कर छठ में चला gaya...Aur अकेले में बड़बड़ाने लगा.

अतुल:- लोग और उनकी mentality...Kya एक लड़का और लड़की दोस्त नहीं हो सकते? साथ देखे नहीं की प्यार और अफेयर का नाम दे देते hai...Sick मेंटालिटी.

बाकी कोई कुछ भी बोले मुख्य मतलब नहीं लेकिन Ajay...Wo भी ऐसी बकवास सोचता hai...Ladki से दोस्ती करना जैसे गुनाह hi हो गया है.

मई इतना क्यों सोच रहा hu...Ye लोगो की सिक मेंटालिटी है जो बदल तो नहीं sakta...Wo जो भी सोचे मुझे क्या.

फिर अतुल का गुस्सा शांत होने लगता है.

अतुल:- लेकिन मई इतना गुस्सा क्यों हो रहा tha...Itna भी तो कह सकता था की मई और निशा सिर्फ दोस्त है.

अतुल फिर सोच में पद जाता hai...Aur इस बार उसके सोच में सिर्फ निशा hi thi...Uske साथ बिठाये pal...Har सुख दुःख का पल, मस्ती मजाक का पल, मिसुन्दरस्टण्डींग और लड़ाई के pal...Apne लाइफ के सभी यादगार पल में निशा hi उससे याद आने lagi...Chahe परेशानी हो या फिर khushiyan...Har पल में निशा अतुल के साथ थी.

निशा सच में अतुल के दिल और दिमाग के गहराई में बस गयी thi...Ek बार तो अतुल भी सोच में पद gaya...Lekin अगले पल hi ये ख्याल दिमाग से निकाल दिया.

"नहीं हम सिर्फ दोस्त hai...Close friend...Best friend...Issi लिए इतने अच्छे से एक दूसरे को जानते है, समझते है और याद करते hai...Aur ये दोस्ती हमेशा ऐसे hi रहेगा."

"और निशा भी तो किसी और से प्यार करती hai...Mai कैसे उसके बारे में ऐसा सोच सकता hu...Ye तो दोस्ती के नाम पर कलंक होगा."

फिर अतुल अपना सोच पक्का कर लेता hai..."Nisha उसकी बेस्ट फ्रेंड है और हमेशा फ्रेंड hi रहेगी."

अतुल और निशा की साथ बिठाये पल और निशा की बातों का असर अतुल पर इस तरह पड़ा था की अतुल का सोच और नजरिया में बहुत बदलाव आने लगा tha...Nisha उसके दिल की गहराइयो में बस्ती जा रही थी और अभी वो इस बात से अनजान tha...Pyar का सुरुवात तो हो चूका tha...Lekin अतुल का इस प्यार को झुठलाने की कोशिश इस प्यार को नया मोड़ की तरफ ले जा रहा tha...Ek खतरनाक मोड़.

अतुल अपने सोच में hi व्यस्त था की पीछे से एक प्यारी सी आवाज उसके कान पर पड़ता है.

"Hello मर. एक"

आवाज सुनते hi अतुल के होंठो पर एक मुस्कान आ जाता है और वो अंदर से खुश हो जाता hai...Aur होंठो में मुस्कान के साथ पीछे निशा की तरफ मदद जाता है.
 
अपडेट 58

लेकिन पीछे कोई नहीं tha...Atul आस पास चल कर निशा को ढूंढ़ने लगता है लेकिन निशा नहीं मिलती.

तब अतुल को अँधेरा का एहसास होता hai...Ghadi में देखा तो 1:00 ऍम बज रहा था.

अतुल:- इतनी रात को वो कैसे यहाँ आ सकती है :डोह: पता नहीं मई hi कुछ भी देख लेता हु और कुछ भी सुनने लग जाता hu...Abhi नहीं सोऊंगा तो पता नहीं और क्या क्या देखना पड़ेगा.

नेक्स्ट मॉर्निंग

निशा:- हम कहा जा रहे है?

अतुल:- केक आर्डर karne...Aaj अजय का बर्थडे है.

निशा:- सरप्राइज बर्थडे :डी

अतुल:- हां और Naa...Ajay को बताया तो नहीं है लेकिन उससे पता होगा की उससे सरप्राइज milega...Experienced हो चूका है वो सरप्राइज से भी ुनसुरप्रीसे होने का.

निशा:- क्या रिएक्शन था अजय का हमारा सरप्राइज प्लानिंग का?

अतुल:- पूछो मत.

अतुल ने मुंह बिगाड़ते हुए कहा.

निशा:- क्या हुआ?

अतुल:- क्या होगा जब एक क्रिकेट प्लेयर को रेसलिंग खेलने भेजोगे तो? वही हुआ.

अतुल की इस बात पर निशा बुरी तरह से हसने लगी.

अतुल:- अभी भी पुरे बॉडी में पैन hai...Aage से ऐसे सरप्राइज खुद को भी नहीं दूंगा.

अतुल ने मुंह और बिगाड़ते हुए कहा तो निशा और भी हसने लगी.

अतुल:- आउच...

इस बार थोड़ा जोर से चीखा Atul...Aur अचानक से गुस्सा में दिखने laga...Nisha भी सीरियस हो गयी.

इधर उधर देखने पर एक फुटबॉल mila...Samajhte देर नहीं लगा की बॉल उसके चेहरे पर लगा है.

फिर अतुल इधर उधर प्लेयर्स को देखने लगता hai...Lekin उसका गुस्सा एक hi पल में शांत हो जाते है.

"सॉरी भैया", कुछ बच्चे लग भाग 2 या 3 क्लास के स्टूडेंट्स होंगे वो अतुल के पास आ कर बोलते hai...Unki मासूमियत देख अतुल अपना सारा गुस्सा थूक देता है.

"कोई बात नहीं" कह कर अतुल उन्हें बॉल दे देता है.

"भैया आप भी खेलिए na...Hamaare पास गोआल कीपर hi नहीं है और हार रहे है."

"अरे नहीं beta...Mujhe फुटबॉल खेलना नहीं आता."

निशा:- बीटा

निशा चौंक कर कहती है.

अतुल:- (इन Nisha's एअर) अगर अभी शादी करूँगा तो 3, 4 साल में इतने बड़े बच्चे हो hi जाएंगे.

ये सुनते hi निशा अतुल को मारना लगती है.

निशा:- कुछ bhi...Bahut बकवास जोक्स था.

"प्लीज भैया"

निशा:- ठीक hai...Bhaiya जरूर खेलेंगे.

अतुल:- लेकिन मुझे प्रैक्टिस नहीं है फुटबॉल खेलने की.

निशा:- क्या फर्क hai...Cricket में विकेट कीपर और फुटबॉल में गोआल कीपर.

अतुल:- लेकिन मई विकेट कीपर नहीं बैटिंग आल राउंडर हु.

निशा:- (आँखे दिखाते हुए) चुप चाप खेलो.

अतुल भी अब्ब मन नहीं कर पाटा है.

निशा:- और प्रैक्टिस की क्या jarurat...Koi बड़ा लीग थोड़ी खेल रहे ho...Baccho के साथ मस्ती hi तो है.

निशा:- क्या मई भी खेल सकती हु?

बच्चे मान जाते है और अतुल हैरानी से निशा को देखने लगता है.

निशा:- आँखे इतनी बड़ी क्यों कर रहे ho...School में girl's टीम का बेस्ट फुटबॉल प्लेयर thi...Abb खेलना छोड़ दिया.

और मैच स्टार्ट हो जाता hai...Atul और निशा एक दूसरे का ॉपपोनेंट्स the...Atul गोआल कीपर और निशा स्ट्राइकर.

गेम सुरु होने के कुछ देर बाद अतुल को भी मजा आने लगता है.

सुरु में तो उसका फोकस सिर्फ गेम पर hi tha...Lekin धीरे धीरे कब वो निशा की तरफ खींचते हुए चला गया उससे खुद hi पता नहीं चला.

दौड़ते वक्त हवाओं में लहराती निशा की खुली baal...Aur जब भी वो बाल निशा के चेहरे को ढकता और निशा बड़ी अदाओं से उससे हटाती ये देख अतुल अपना पूरा होश hi खो बैठा tha...Aaj उससे पता चल रहा था निशा कितनी खूबसूरत hai...Passene से भीगा हुआ चेहरा और भी ज्यादा चमक रहा था.

हालत ऐसा हो गया था अतुल का की वो गेम में काम निशा पर ज्यादा ध्यान दे रहा था.

उस पर से निशा की skills...Bahut अच्छे से खेल रही थी wo...Ye देख कर तो अतुल भी उसका फैन बनने से खुद को रोक नहीं पाया.

और थकान के वक्त जब निशा लम्बी लम्बी सांसें ले रही थी तब अतुल ने सिर्फ दो पल hi उसको देख पाया की,

अतुल:- (इन हिज मंद) नहीं नहीं ये बहुत गलत hai...Itna भी निचे नहीं गिर सकता मई.

फिर अतुल निशा की खूबसूरत चेहरा को hi देखने लगता hai...Aur एक बार फिर उसमे खो गया.

गोआल.

बहुत तेज आवाज से बच्चे चिल्लाने लगे तब जा कर अतुल होश में aaya...Dekha तो सच में गोआल tha...Baccho और निशा की celebration...Baccho की तरह निशा खुश हो गयी जैसे वो भी बच्ची hai...Nisha को इतना खुश देख अतुल भी मुस्कुराये बिना नहीं रह पाया.

2 गोआल...3 गोआल...4 गोआल.

निशा:- ऐसे तो हार जाओगे.

निशा ने अतुल को चिढ़ाते हुए कहा.

अतुल:- (इन हिज मंद) तुम्हारी एक हंसी के लिए एक मैच तो क्या हज़ार मैच कुर्बान कर दू.

और फिर अतुल निशा पर hi खोने लग गया.

5 गोआल...6 goal...aur 7 गोआल.

फाइनल स्कोर 7-2.

निशा और ॉपपोनेंट के बच्चे बहुत खुशियां मन रहे थे.

अतुल का टीम का वो बच्चा जिसने अतुल को खेलने के लिए बुलाया था.

"क्या bhaiya...Aapne तो हरा दिया?"

बच्चा बहुत दुखी tha...Atul उसको अपने कंधे में उठा कर मुस्कुराते हुए कहता है.

अतुल:- कभी कभी हारना भी पड़ता hai...Haar का भी अलग hi मजा है.

बच्चे को कुछ समझ में नहीं आया लेकिन वो बोलै भी कुछ नहीं.

फिर अतुल सभी बच्चो को और निशा को बुला कर साथ ले चलता है और सभी बच्चो को कुछ चॉकलेट्स खरीद कर देता hai...Bacche खुस हो कर चले जाते है.

फिर अतुल अपने लिए और निशा के लिए कुछ चॉकलेट्स लेता है.

निशा:- अभी भी खाते हो चॉकलेट्स?

अतुल:- हां खता hu...Abhi भी का क्या मतलब? अभी भी खाता हु और हमेशा खाता rahunga...Bahut अच्छा लगता है.

निशा:- अभी भी बच्चे hi हो.

अतुल:- अगर ऐसा है तो है बच्चा hi hu...Aur हमेशा रहूँगा.

अतुल ने भी मुस्कुरा कर जवाब दिया.

निशा:- कैसा लगा आज का मैच.

अतुल:- बहुत मजा aaya...Baccho के साथ हम भी बच्चे बन गए थे.

निशा:- Ha...Kitna मजा आ रहा tha...Abhi भी बच्चे बन ने me...11th के बाद रिस्पांसिबिलिटी की वजह से कब समझदार बन गए पता hi नहीं chala...Bacchpana तो कब भूल गए वो भी पता नहीं chala...Lekin आज सच में बहुत अच्छा लगा एक बार फिर बचपन की यादें ताजा हो गयी.

अतुल:- Hmm...Abb उतना वक्त नहीं milta...Aur मिले भी तो ये सब सोचने की फुर्सत hi nahi...Lekin आज का तो कुछ बता hi नहीं sakta...Childhood इस थे बेस्ट मोमेंट ऑफ़ आवर लाइफ.

अतुल की इस बात पर निशा सिर्फ मुस्कुराती है.

निशा:- क्या देख रहे हो?

अतुल:- कुछ नहीं.

निशा:- अरे बोलो न?

अतुल:- यही की कितनी जल्दी तुम्हारे साथ इतना क्लोज हो गया hu...Friends तो बहुत सारे है जिनसे hi hello करता hu...Lekin क्लोज फ्रेंड्स बहुत hi kam...Jinke साथ वक्त बिताना पसंद करता हु, स्पेशल फील करता हु और हमेशा साथ रहने की ख्वाहिश होता hai...Tum, अजय और काजल hi हो ऐसे friends...Sach में बहुत लकी हु तुम सब को अपना दोस्त के रूप में पा कर.

निशा भी अतुल की बात पर बहुत खुश हो जाती hai...Sach में बहुत बदलाव आ गया था अतुल me...Aur ये बात वो अभी नहीं फुटबॉल मैच के वक्त से hi नोटिस कर रही थी.

निशा:- दोस्ती चीज hi ऐसी है मर. अतुल.

अतुल:- हम्म सही kaha...Aur दोस्तों के साथ वक्त बिताना वो भी ऐसी जगह में और भी khaas...Naa लाइफ की कोई टेंशन और ना hi फ्यूचर के लिए planning...Sirf दोस्ती और मस्ती.

निशा:- कितना जल्दी ख़त्म हो गया न ये tour...Aaj लास्ट डे hi है हमारा yaha...Aur सभी डेस्टिनेशंस भी ख़त्म हो gaye...Bahut मजा आया इस टूर में और बहुत hi अच्छा एक्सपीरियंस था.

Atul:-Hmm...Accha तो बिलकुल भी नहीं लग रहा है इतनी जल्दी यहाँ से निकलने वाले hai...Kaas कुछ दिन और....

निशा:- अरे इतना सेंटी क्यों हो रहे हो? फिर बाद में भी aayenge...Waise भी हम सब दोस्त तो साथ hi hai...College में भी मस्ती करेंगे.

निशा की इस बात पर अतुल उसकी तरफ मुस्कुराते हुए देखता hai...Nisha भी मुस्कुरा रही thi...Atul एक बार फिर निशा की इसी मुस्कान में खो गया.
 
सॉरी friends...Aaj अपडेट देने की बात कहा था लेकिन आज दे नहीं paaunga...Study का प्रेशर बहुत है कल के liye...Aur दिमाग भी सही से काम नहीं कर रहा hai...Kal और परसो ज्यादा स्टडी प्रेशर नहीं hai...So कल और परसो उपदटेस जरूर dunga...Aaj के लिए सॉरी.

एक्साम्स में अभी 3 मोनथस टाइम बाकी hai...Iss बिच रेगुलर रहने की कोशिश karunga...Agar आज जैसा स्टडी प्रेशर ना रहा तो.

सॉरी फॉर टुडे.
 
अपडेट 59

अजय:- पेअर (लेग) कहा है तेरा? ऐसा बर्थडे सेलिब्रेशन साला जिंदगी में कभी नहीं हुआ.

अजय:- है हंस le...Hans Hans...Udaa ले मजाक.

अतुल अभी भी हांसे जा रहा था.

अजय:- ऐसा विशेष साला आज पहली बार मिला.

अजय थोड़ा गुस्सा में बोलै.

अतुल:- था न यूनिक?

अजय:- Unique...Majaak था विश के नाम पर.

अतुल:- ऐसा क्यों लगा तुझे?

अजय:- एक तो सभी डिपार्टमेंट के लेक्चरर के दर्शन हो gaye...Unhe देख कर ऐसे hi मेरे हालत खराब हो गया tha...Aur बाकी के काम उनके विश ने कर दिया.

फ्रॉम Anatomy..."Happy बर्थडे Ajay...Best विशेष फॉर you...Yahi उम्मीद करता हु की तुम प्रैक्टिकल मुस्कले के नाम ना सही आर्टरी और वीन पहचाने की कोशिश करो."

इसी तरह सब डिपार्टमेंट ने विशेष किया और सब ने सुग्गेस्टिव भी दिया.

Biochemistry...Practical के वक्त टेस्ट तुबेस मत फोड़ो.

Microbiology...Mai हु इसी लिए कुछ नहीं कहता hu...Maaf कर देता हु मिस्टेक्स ko...Lekin बैक्टीरिया माफ़ नहीं karega...Ek बार इन्फेक्शन हो गया तो तुम जानते hi ho...Microbiology के प्रैक्टिकल में कोई मजाक नहीं."

फिजियोलॉजी:- ात लीस्ट 12 तक का नॉलेज hi sahi...Kuch तो पढ़ लो.

फार्माकोलॉजी:- कैप्सूल और टेबलेट तो पहचान लो.

पैथोलॉजी:- बहुत इम्प्रूवमेंट chahiye...Atleast माइक्रोस्कोप में लिविंग सेल और नेक्रोटिक सेल पहचानो.

और लास्ट में रवि.

रवि:- तुझसे तो बात भी नहीं करना chaahta...Birthday है तो चल विश कर hi देता hu...Exam में जस्ट पास hi सही हो जा.

(तो अतुल) इतना बेकार हु क्या mai...Itna majaak...Sala सबको सही वक्त मिला मेरा मजाक उड़ाने का.

गुस्सा और बेज्जती में अजय का आँख लाल हो गया tha...Atul थोड़ा मुस्कुरा कर.

अतुल:- माय डिअर स्टुपिड friend...Baat का गलत मतलब कैसे निकाले ये तुझसे सीखना चाहिए.

टीचर्स ने क्या कहा ये तो तूने suna...Lekin उनकी बात का तरीका नहीं समझ paaya...Sabhi मजाक में कह रहे थे.

सभी जानते है तू टैलेंट hai...Dimaag hai...Lekin पढता nahi...Wo जानते है तू जरूर पढ़ेगा और अच्छा स्टूडेंट banega...Agar नहीं तो आज तक सभी डिपार्टमेंट के चक्कर काट रहा होता.

उनकी विशेष में कितनी सच्चाई है तुझे ये दिखा भी nahi...Bas मस्ती मजाक के लिए उन्होंने ऐसा kaha...Lekin उन्हें ये क्या पता था की तू ये बात सीरियसली लेगा.

अजय एक बार फिर सोच में पद गया.

अतुल:- अभी नहीं samjhega...Dimaag ठंडा हो जाए न तब sochna...Aur है पोसिटीवेली.

अजय:- अच्छा तो वो रवि?

अतुल:- उसकी बात छोड़ na...Wo तो साला है hi bewkuf...Usne पास होने की चैलेंज किया था na...Tu उससे भी अच्छा कर के दिखा दे.

अजय:- लेकिन कैसे?

अतुल:- ज्यादा लेट हुआ hi नहीं hai...Abhi से पढ़ना स्टार्ट kar...Sab कैच कर लेगा.

अजय सिर्फ सोच hi रहा था.

अतुल:- टैलेंटेड है यार tu...Issi लिए सभी टीचर्स को विश्वास है तुझ par...Aur तुझे टाइम दे रहे hai...Tujhe भी तो पता है कब और कैसे पढ़ना hai...Mujhe भी विश्वास hai...Agar लेट हुआ पढ़ने में तो लात मार कर पढ़ाऊंगा.

अभी तक तुझे पढ़ने के लिए कहा nahi...Kyuki मई तेरा पोटेंशियल जानता hu...Kuch hi मोनथस तो हुए है कॉलेज ज्वाइन kiye...Enjoy कर le...Abb तो जिंदगी भर पढ़ना hi है.

अजय अभी भी कुछ बोल नहीं रहा tha...Sirf सोच hi रहा था.

आफ्टर सम टाइम्स.

अजय:- थैंक्स यार.

अतुल:- और वो किस लिए?

अजय:- सच में यूनिक बर्थडे tha...Pehle अंजलि का propose....Aur सभी दोस्तों के साथ celebration...Aur टीचर्स का wishes...Sach में यार बहुत मस्ती मजाक चल रहा tha...Wo तो मई hi सीरियस हो गया और मूड स्पोइल हो गया.

अतुल:- इतनी जल्दी सोच बदल गया?

अजय:- सब नजरिये की बात hai...Abb सब समझ में आ रहा है.

अतुल:- 10:00 पं बजा hai...Aaj का दिन में 2 हरष बाकी hai...Ye तेरा दिन hai...Enjoy kar...Munh को सदा हुआ करेला बनाने से कोई फायदा nahi...Enjoy मन.

अजय:- तेरा तारीफ़ करना अच्छा तो नहीं lagta...Par आज kahunga...Sahi में बहुत ाचा दोस्त है yaar...Padhaai से लेकर सब kuch...Har चीज में हेल्प करता है.

अतुल:- वो तो मई जानता हु.

अतुल ने बहुत hi शान में कहा.

अजय:- अब्ब ज्यादा उड़द मत.

अतुल:- क्यों? क्या करेगा? मेरा पंख काटेगा?

अतुल कुछ कहता उससे पहले hi अतुल को फ़ोन आता hai...Phone निशा का था.

आज पहली बार अतुल को निशा के फ़ोन को पिक करने बाहर जाना पड़ा.

.

.

.

.

.

अतुल:- कहा ले जा रही हो?

निशा:- अरे चलो न चुप chaap...Kitni सवाल करते हो?

फिर निशा अतुल को एक मॉल पर ले जाती है.

निशा:- डरो mat...Tumhara पॉकेट खाली नहीं करुँगी.

फिर निशा 2 ice-creams लेकर मॉल से निकलती है.

अतुल:- पागल हो क्या? इतनी रात को आइस क्रीम?

निशा:- खाओ तो?

अतुल:- नहीं nahi...Mujhe ठण्ड लग रहा है.

अतुल ठंडी हवा की वजह से थोड़ा कांप भी रहा था.

फिर निशा की थोड़ी जिद्द करने पर अतुल ice-cream खाने लगता है.

फिर दोनों साथ चलने लगता है.

इस बार निशा अतुल का हाथ पकड़ लेती है.

निशा का हाथ पकड़ने से अतुल को अलग hi झटका लगता hai...Kabhi वो किसी लड़की के इतना करीब नहीं आया tha...Aur आज इतनी रात ko...Thandi ठंडी mausam...Aur इतने सुनसान में दोनों इतने पास चल रहे the...Atul की दिल और दिमाग में तरह तरह के ख्याल आने लगा था.

कभी वो निशा को प्यार से देखता तो कभी अपने सोच को झटक देता.

फिर दोनों एक फील्ड पर जा कर बैठ जाते है.

अतुल कुछ नहीं बोल रहा tha...Kabhi निशा को देखता तो कभी अपने दिल और दिमाग पर काबू कर लेता.

निशा:- क्या हुआ?

अतुल:- ककुछः नाहीइ?

निशा:- किसी सोच में हो?

अतुल:- नाहीई.

अतुल के पास बोलने के लिए शब्द काम अड़ रहे thhe...Aur निशा अतुल की हालत पर हंस रही थी.

निशा:- पूछोगे नहीं? यहाँ क्यों लायी हु?

अतुल:- बताऊओं.

अतुल को गुस्सा आने लगा था खुद पर अपनी इस बेवकूफी पर और अपने दिल पर काबू ना कर पाने की वजह से.

निशा:- कभी रात में अकेले घुमा है?

अतुल:- नहीं.

निशा:- बस इसी liye...Tour और इन् लोकेशंस को खूबसूरती तो दिन में हम देख hi चुके hai...Lekin रात में?

रात की खूबसूरती भी अलग hai...Dekho na...Chaandni raat...Sunsaan jagah...Thandi mausam...Khaalipan...Aur इन् खालीपन में भी कितना कुछ hai...Dil में अलग hi सुकून मिलता hai...Koi परेशानी हो तो शान्ति मिलता hai...Aur किसी से बात करने का मजा hi अलग है.

(तो अतुल) क्यों डॉ. Sahab...Sach बोल रही हु न?

अतुल:- जी डॉ. Sahiba...Aap कभी गलत बोल सकती है क्या?

निशा:- किताब से बाहर आइये kabhi...Aur कुदरत का मजा lijiye...Har तरह se...Dekhna जल्दी hi आप जिंदगी के हर रंग को जीना सिख jaayenge...Aur पता चलेगा की कुदरत की तरह हमारी जिंदगी कितनी खूबसूरत hai...Din हो या raat...Sukh हो या dukh...Har पल को जीना चाहिए.

अतुल:- इतना भी पढ़ाकू नहीं हु जितना तुम सोचती hu...Jindagi को जीता भी hu...Lekin तुमसे मिलने के बाद पता चला की जिंदगी को कितने अच्छे से जी सकते है.

फिर अतुल निशा को देखता hai...Iss चांदनी रात में निशा की खूबसूरती और भी चमक रहा tha...Ek बार फिर वो निशा में खोने लगा tha...Tarah तरह के ख्याल और सपने भी आने लगा था.

अतुल:- (तो हिमसेल्फ) काश इसी तरह निशा की साथ जिंदगी भर मिलता rahe...To जिंदगी कितनी खूबसूरत होगी.

निशा की प्यार ने अतुल को उसकी सोच बदलने पर मजबूर कर hi diya...Atul को भी उसकी मीठी बातों, अदाओं और प्यार भरी साथ के सामने हार मानना hi pada...Pyar होता hi ऐसा hai...Insaan को कब और कैसे बदल दे कुछ पता hi नहीं चलता.
 
अपडेट 60

अतुल:- एक्सक्यूज़ में.

श्रेया:- क्या हुआ? किसका फ़ोन था.

लेकिन अतुल श्रेया की बात को अनसुना कर अपना बैग पैक करने लगता hai...Shreya बस उससे देखते hi रह gayi...Naa hi अतुल कुछ बोल रहा था और ना hi ध्यान दे रहा था.

बैग पैक करने के बाद.

अतुल:- सॉरी बूत मुझे निकलना hai...Maa का फ़ोन आया था घर से दीदी की तबियत बहुत ख़राब hai...Mujhe जाना होगा.

अतुल की चेहरे में परेशानी के साथ दर भी tha...Kahi दीदी को कुछ हो न जाए इस बात का दर उससे अंदर से खाये जा रहा था.

श्रेया भी रूम से निकल आती hai...Atul भी जल्दी से ताला लगा कर वह से निकल जाता hai...Kuch दूर चल कर पीछे मुड़ता है.

अतुल:- जल्द वापस आऊंगा.

श्रेया:- इंतजार करुँगी.

फिर अतुल चला जाता hai...Shreya भी अतुल की दीदी की तबियत को ले कर दुआ करने लगी.

अतुल वह से सीधा बस स्टॉप चला gaya...Bus में छड़ कर वो एक विंडो सीट में बैठ गया.

बस खुलने में थोड़ा टाइम tha...Iss बिच अतुल के मन में ना जाने कितने ख्याल आ रहे thhe...Kabhi उससे दर लगता तो कभी वो खुद को hi हौसला देता की कुछ नहीं होगा.

एक तो पहले hi निशा से बिछड़ने का दर्द और अब्ब उसकी दीदी की तबियत ख़राब होने की khabar...Bilkul टूट सा गया था अतुल.

तभी उससे फ़ोन आता है.

अतुल:- Hello Maa...Kaisi है अब्ब दी की तबियत? ठीक तो है ना वो? उन्हें बोलो घबराये nahi...Mai आ रहा hu...Sab ठीक कर दूंगा.

अतुल ने एक hi सांस में सब बोल diya...Bolte वक्त भी वो डरा और बेचैन लग रहा था.

ा. माँ:- अब्ब वो थोड़ा ठीक hai...BP अब्ब धीरे धीरे काम हो रहा hai...Lekin तुझे बहुत याद कर रही hai...Jaldi आजा बीटा.

अतुल:- आ रहा हु Maa...Unhe कुछ मत होने देना.

फिर अतुल फ़ोन कट कर देता hai...Maa की बात सुन कर अतुल को थोड़ा सुकून मिलता है की अब्ब खतरा की कोई बात नहीं है.

फिर अतुल वही बस में बैठे बैठे सोचने लगता है आगे क्या करना hai...Kaise दीदी का इलाज करना hai...Kaise वो उस घर में जाएगा जहा उससे अपने पापा और भैया का सामना करना padega...Bas इसी सोच में अतुल एक गहरी नींद में चला जाता है.

नींद उसकी तब खुलती है जब बारिश की कुछ बूँद उसके चेहरे में पड़ता hai...Jaldbaazi में वो विंडो बंद कर देता है लेकिन जब उससे अपने आस पास कोई नहीं दीखता तो वो विंडो को फिर से खोलता है.

बाहर बारिश देख उसके होंठो में एक मुस्कान आता है और खिड़की से बाहर अपना निकाल कर एक रोमांटिक अंदाज में अपने दोनों बाहो को फैलाये बारिश में पूरी तरह भींग जाता hai...Iss वक्त उसके दिल और दिमाग में सिर्फ निशा और निशा के साथ बिठाये प्यार भरे लम्हे thhe...Bahut hi ख़ास रिश्ता था उसका बारिश के साथ.

निशा:- हटो यहाँ se...Window सीट में मई hi बैठूंगी.

अतुल:- ऐसे kaise...Window सीट तो मेरा hi hai...Kisi को नहीं दूंगा.

निशा:- मुझे भी नहीं?

अतुल:- नहीं.

निशा:- तो फिर ठीक hai...Tum hi बैठो.

अतुल:- थैंक you...Lekin तुम इतनी जल्दी मान कैसे गयी.

निशा:- बूत ात योर ओन risk...Mujhe वोमिट आएगा तो तुम्हारे ऊपर hi वोमिट करुँगी.

अतुल:- Chheee...Yuck :yuck:...Tum hi बैठो.

फिर अतुल साइड हो जाता है.

निशा:- तुमसे अपनी बात कैसे मनवाना है अच्छे से जानती हु.

अतुल:- मतलब तुम ऐसे hi कह रही थी.

निशा हँसते हुए हां में सर हिलाती है.

अतुल:- यू चेटर :बीए:

निशा:- एवरीथिंग इस फेयर इन लव.

अतुल:- Haa...Yahi तो गलती है mera...Naa hi तुमसे प्यार करता और ना hi कुछ भी फेयर होता.

निशा:- किसने कहा था मेरे पीछे दौड़ने के liye...Mujhe hi तरस आ गया तुम पर जो तुम्हारे प्रोपोज़ को एक्सेप्ट कर लिया.

अतुल:- अब्ब पचता रहा हु.

निशा:- (विथ स्माइल) पछताते raho...Jindagi भर के लिए मेरे बन चुके हो tum...Abb जो भी मि कहूँगी वही फेयर होगा.

फिर निशा विंडो को स्लाइड करती hai...Aur बारिश की झटका दोनों को भिनगा देता है.

अतुल:- Ye...Ye क्या कर रही हो tum...Bhing जाएंगे हम.

निशा:- भींग गए है हम.

अतुल:- जल्दी बंद karo...Ye क्या बचपना hai...Baarish में ऐसे कौन भींगता है.

निशा:- (सर पर हाथ मारते हुए) कितना अनरोमांटिक बर्फ है?

अतुल:- Kya...Kya कहा तुमने? मई अनरोमांटिक hu...Kiss की बात करता हु तो दूर भागती हो...2 दिन से तड़पा रही हो.

निशा:- अरे धीरे bolo...Koi सुन लेगा.

अतुल:- अच्छा ji...Unromantic हो जाओ तो प्रॉब्लम और रोमांटिक होने में भी problem...Sun ले koi...Mujhe kya...Mai अपनी गफ से बातें कर रहा hu...Waise भी बस खाली hi है.

निशा:- आ आ छी.

निशा बहुत जोर से छनकती है.

अतुल:- अरे ठीक तो हो naa...Nisha की पीठ को सहलाते हुए अतुल अपना चाणक्य पास करता है.

निशा के नार्मल होने के बाद अतुल विंडो बंद कर देता है.

अतुल:- जानती हो तुमने क्या kiya...S. पनुमोनीए, म. ट्यूबरक्लोसिस, ह. इन्फ्लुएंज़ाई राइनो वायरस, अडेनो वायरस जैसे बैक्टीरिया और वायरस को हवाओ में फैला रही हो.

निशा:- इतना hi नहीं. स. पयोगेनेस, बी. पर्टुसिस और स. डिप्थेरिए भी.

निशा अतुल को गुस्से से देखती है.

निशा:- यहाँ मुझे जुखाम हो गया है और तुम्हे मजाक लग रहा है.

अतुल अपना जैकेट निकाल कर निशा को प्यार से पहना देता है.

निशा भी प्यार भरी निघावों से अतुल को देखती है.

अतुल:- अब्ब ऐसे भी मत dekho...Bahut कुछ होता है.

निशा:- क्या होता है?

फिर अतुल निशा की कान में कुछ कहता है.

निशा:- You...Bahut मारूंगी तुम्हे?

फिर निशा अतुल को मारने लगती hai...Atul मर खाने के बावजूद भी हंस रहा tha...Kuch देर बाद निशा भी शर्माते हुए हसने लगी.

निशा:- तुमने तो अपना जैकेट मुझे दे diya...Tumhe भी जुखाम हो गया तो?

अतुल:- No chance...Immunity बहुत अच्छा है mera...Aise छोटे मोठे बैक्टीरिया मेरा कुछ उखाड़ नहीं पाएंगे.

अतुल ने इतना hi कहा था की उससे भी बहुत जोर से चींख आता है.

अतुल:- आ चींईईई.

निशा ये देख जोर जोर से हसने लगती है.

निशा:- अब्ब मई बोलू तुम ने कितने बैक्टीरिया हवा में फैलाया है.

अतुल:- माफ़ कर दीजिये madam...Abb आप से कोई पंगा नहीं.

ऐसी hi प्यार और मस्ती भरी यादें और प्यार भरी नोक झोक सोच अतुल मुस्कुराने लगता hai...Aur जब इस बात का एहसास होता है की निशा उसकी जिंदगी से बहुत दूर चली गयी है तो आँखें फिर से नम्म होने लगता है.

इस बार का दर्द भी कुछ ऐसा hi tha...Iss जुदाई का दर्द उससे सहा नहीं जा रहा tha...Sabhi की नजरो से बचने के लिए अपना चस्मा उतार कर एक ब्लैक सुन गिलास लगा लेता है और जी भर कर रोने लगता है.

न जाने कितना दर्द था इस प्यार में और कितना और सहना बाकी hai...Bas दर्द hi दर्द रह गया था अतुल की जिंदगी में.
 
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