Kasam - Love is not Everything (Completed) - Page 11 - SexBaba
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Kasam - Love is not Everything (Completed)

अपडेट 84

निशा की पापा को सामने देख अतुल एक दम से चौंक gaya...Wo अपनी जगह से उठ गया और निशा की पापा को घूरने laga...Ek बार तो उसको विश्वाश hi नहीं हुआ.

लेकिन जब आस पास देखा तो यकीं करने पर मजबूर हो gaya...Atul के सभी घर वाले चौंक कर निशा की पापा को hi देख रहे थे.

ा. डैड:- आप यहाँ? आइये na...Baithiye.

अतुल की पापा खुद गेट तक जा कर उनको अपने साथ ले कर आये.

अतुल की पापा की इस हरकत सभी को एक बार फिर से चौंकाने के लिए काफी tha...Aaj तक दोनों एक दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करते थे लेकिन अभी जो हुआ उससे देख कोई भी विश्वाश नहीं कर पा रहा था.

अतुल भी शांत सब कुछ देख रहा tha...Shreya अतुल को देख रही थी और जो रहा था उससे समझने की कोशिश कर रही थी.

निशा की पापा भी अतुल की पापा को हैरानी से देख रहे the...Aise बदलाव उनको भी विश्वास नहीं हो रहा tha...Atul की पापा की आँखों में पश्चाताप साफ़ दिख रहा tha...Aur ये देख कर उनकी आँखों में भी वही पश्चाताप दिखने लगा.

Vakt...Sabse balwaan...Sabse ताक़त war...Kab किसको क्या बना दे? क्या करने पर मजबूर कर दे? इसका जवाब वक्त के पास hi होता है.

ये वक्त hi था जिसने आज सभी की जिंदगी बदल कर रख दिया tha...Haalaath क्या से क्या बन गया था.

यही वक्त था जिसने दो इंसान को नफरत की जगह पश्चाताप की आग में जलने पर मजबूर कर दिया tha...Har पल paschataap...Har पल दिल में एक बोझ.

अतुल:- अंकल बैठिये न.

अतुल ने सामने की सोफे की तरफ इशारा किया.

निशा की पापा के बैठने के बाद hi अतुल बैठा.

अतुल की छोटी छोटी बातों को वो गौर कर रहे the...Wohi sanskaar...Jo हॉस्पिटल में एक झलक सा दिखा tha...Aaj भी वही sanskaar...Ek बार फिर खुद से नफरत करने से रोक नहीं पाए निशा की पापा? "क्यों मैंने जल्दबाज़ी कर दी?" बस यही सवाल उनको अंदर से खाये जा रहा था.

अतुल:- Di...Please चाय बना कर लाइए ना.

अतुल की इस बात सुनते hi निशा की पापा को एक झटका सा laga...Jaise hi अतुल ने ये महसूस किया.

अतुल:- नहीं नहीं Uncle...Uss बात का बदला नहीं ले raha...Aap हमारे मेहमान hai...Aur मेहमान का सम्मान करना हमारा कर्त्तव्य hai...Mai तो वो बात भूल hi चूका था.

अतुल की बात से उनको थोड़ा राहत मिला.

फिर अतुल की नजर श्रेया पर पड़ा.

अतुल:- ये है निशा की Papa...Bataya था ना तुम्हे.

(तो Nisha's डैड) और ये है Shreya...Meri....

अतुल इस इ आगे कुछ बोलता उससे पहले...

आरव:- मई जा रहा हु खेलने.

फिर आरव वह से दौड़ कर निकल गया बाहर खेलने.

अतुल का ध्यान आरव पर चला गया और वो श्रेया को इंट्रोडस करना भूल hi गया.

निशा की पापा जवाब सुन्ना तो चाहते थे लेकिन पूछ नहीं paaye...Atul को सवाल करने का हिम्मत भी नहीं जूता पा रहे थे वो.

ा. डैड:- आप यहाँ? कोई मुशीबत तो नहीं हुई आने में?

न. डैड:- यहाँ का एड्रेस पता करने में थोड़ा प्रॉब्लम तो हुआ tha...Lekin किसी तरह पता कर liya...Atul से एक बार मिलना चाहता था.

अतुल:- मुझसे? कोई ख़ास काम?

थोड़ा हैरानी के साथ अतुल ने पूछा.

(इन हिज मंद) अब्ब क्या काम बाकी रह गया?

न. डैड:- उस दिन हॉस्पिटल एडमिट करने के लिए थैंक यू बोलना चाहता था.

अतुल:- इसमें थैंक यू की क्या बात है Uncle...Agar ऐसा नहीं करता तो इंसानियत की हत्या हो जाता मुझसे.

और एक डॉक्टर हो कर इंसानियत कैसे भूल सकता हु?

आप की जगह कोई और होता तो भी मई उसके लिए यही karta...Aur आप तो निशा के पापा hai...Aap को कैसे छोड़ देता.

निशा की नाम बहुत hi प्यार से लिया अतुल ने.

न. डैड:- आज भी प्यार करते हो निशा से?

निशा की पापा श्रेया की तरफ देख कर बोले.

लेकिन अतुल एक बार फिर निशा में ऐसे खोया था की वो इस बात को समझ hi नहीं पाया.

अतुल:- करता rahunga...Aakhiri सांस तक करता rahunga...Aur इतना करता हु की बयान नहीं कर sakta...Meri बदकिस्मती है की वक्त रहते आपको यकीं नहीं दिला पाया कितना प्यार करता हु मई निशा se...Uski ख़ुशी के लिए साड़ी हद्द पार कर सकता hu...Meri बदकिस्मती.

न. डैड:- (इन हिज मंद) मेरी बदकिस्मती है की मई समझ नहीं paaya...Samajhne की कोशिश hi नहीं किया.

न. डैड:- अब्ब क्या कर रहे हो? बहुत बड़े डॉक्टर बन गए होंगे? बहुत तारीफ़ सुना था निशा se...Padhne में बहुत अच्छे हो.

अतुल:- मद कर liya...Aur लोगो के इलाज में काम आ सकू ऐसे डॉक्टर बन गया हु.

निशा ने भी अपनी स्टडी को कंटिन्यू रखा न?

न. डैड:- उसने भी मद कर लिया है.

अतुल:- (इन हिज मंद) थैंक गॉड.

न. डैड:- अच्छा लगा तुम्हे आगे बढ़ता देख कर.

निशा की पापा ने एक नजर अतुल और फिर श्रेया की तरफ देख कर कहा.

अतुल:- जब साथ देने वाला कोई अपना हो तो ग़म को भूलने में वक्त नहीं लगता.

यही साथ श्रेया की दोस्ती से mili...Jindagi में आगे बढ़ने की एक वजह.

अगर श्रेया का दोस्ती और साथ ना होता तो अभी इस घर के अलावा और कही hota...Yaa तो उपरवाले के पास, या फिर पागल खाना या फिर कोई रिहैबिलिटेशन सेंटर.

किस्मत से बार बार धोखा मिलने के बाद शायद किस्मत को hi मुझ पर तरस आ gaya...Aur श्रेया मेरी जिंदगी की एक मोड़ पर मुझे मिली.

अतुल खुद को मजबूत दिखाने की हर एक कोशिश कर रहा tha...Ki वो आगे बढ़ gaya...Lekin उसका दर्द उसके अलावा भी सब महसूस कर रहे the...Aur सभी उसकी तरह hi मजबूर थे.

आरव:- पापा मुझे चॉकलेट चाहिए.

एक जिद्द लेकर आरव फिर घर में वापस aaya...Pehle तो वो गौरव के पास जा रहा था लेकिन अतुल को देख उसकी तरफ आ गया.

आरव:- मुझे चॉकलेट खाना है.

अतुल:- थोड़ी देर बाद खाएंगे.

फिर अतुल ने किसी तरह उसको मन लिया.

अब्ब निशा की पापा की बाकी का शक यकीं में बदल gaya...Sochne सझने के लिए कुछ बाकी नहीं tha...Aankho से दिखी और कान से सुनी बात को उन्होंने सच मान लिया.

ा. डैड:- निशा कैसी है?

न. डैड:- जी वो भी अच्छी hai...Khush है.

ये बात सुनते hi अतुल की दिल में एक मीठा सा दर्द hua...Jo वो सुन्ना चाहता था एक बार फिर सुन लिया.

न. डैड:- अच्छा तो अब्ब चलता hu...Atul से मिलने आया tha...Atul को आगे बढ़ता देख बहुत अच्छा लगा.

निशा की पापा से अब्ब वह रहा नहीं जा रहा था.

ा. डैड:- चलिए मई गेट तक छोड़ देता हु.

फिर दोनों साथ चलते है.

ा. डैड:- आप मुझसे नाराज तो नहीं है ना.

न. डैड:- नाराज हो कर भी क्या hoga...Hamaara आपसी नाराजगी से hi आज ये हाल है.

जो भी हुआ ऐसा होना नहीं चाहिए था.

ा. डैड:- बहुत गलत hua...Apna घमंड और नफरत का शिकार अपने hi बच्चे हो गए.

न. डैड:- खैर अब्ब दोनों खुश है अपनी जिंदगी me...Koshish करेंगे आगे कभी ऐसी गलती ना हो.

न. डैड:- अच्छा अब्ब इज़ाज़त दीजिये.

अतुल की पापा आँखों से hi इज़ाज़त देते hai...Bolne की हालत में तो वो भी नहीं थे.

Uncle...Uncle.

पीछे से चिल्लाते हुए अतुल aaya...Atul की आवाज सुन निशा की पापा रुक गए.

अतुल:- आप बहुत hi लकी hai...Nisha आपकी बेटी hai...Aise बहुत काम hi पिता होते है जिन्हे ऐसी बेटी मिलती है.

आपकी इज़्ज़त और सम्मान के लिए उसने अपने प्यार तक को hi कुर्बान कर diya...Hazaar बार मनाया था लेकिन एक बार भी वो नहीं maani...Kehti थी वो मुझसे भी ज्यादा आपसे प्यार करती hai...Aapka इज़्ज़ार और आपका प्यार hi सब कुछ है उसके liye...Jo आप कहेंगे वो वही करेगी.

ऐसी थी Nisha...Ek बेटी की फ़र्ज़ निभाने में उसने कही कोई कमी नहीं rakha...Request है आपसे कभी उसको कोई दुःख होने मत dijiye...Khush और मुस्कुराती हुई hi वो अच्छी लगती है.

इतना कह कर अतुल वापस चला गया और निशा की पापा भी चले गए.

थोड़ी दूर आगे बढ़ने के बाद उनकी आँखों में आंसू आ gaye...Haar की aansu...Ek पिता की हार की आंसू.
 
अपडेट 85

श्रेया:- क्या सोच रहे हो?

रात के वक्त छत में अतुल को अकेले गुमसुम देख श्रेया बोली.

अतुल कुछ बोलता उससे पहले hi...

श्रेया:- ये क्या सिगरेट?

अतुल ने अपने पास 2 सिगरेट रखा था.

श्रेया:- डॉक्टर हो कर cigarette...Galat बात है न.

प्यार से देखती हुई श्रेया बोली.

जवाब में कुछ देर अतुल श्रेया को देखता रहा फिर बोलै.

अतुल:- ये डॉक्टर भी तो आखिर एक इंसान hi hai...Uska भी दिल hai...Usko भी दर्द होता है.

श्रेया:- लेकिन सिगरेट से दर्द काम तो नहीं हो जाएगा...

अतुल:- पता hai...Lekin कुछ देर के लिए दर्द को भुला देता है.

दारू को हाथ लगाए बहुत साल हो गए hai...Shayad 5 saal...Tab से इसी सिगरेट का hi साथ hai...Wo भी कभी कभी hi पीटा hu...Jab दर्द बर्दास्त के बाहर हो जाता hai...Seh नहीं पाटा हु तब.

श्रेया:- तो क्या आज बहुत दर्द हो रहा है?

अतुल:- हद्द से ज्यादा...

अतुल ने बस इतना hi कहा था की श्रेया अतुल की दोनों सिगरेट्स छत से निचे फेंक देती है.

अतुल हैरानी से सिगरेट्स को गिरते देखता रह जाता hai...Atul का चेहरा देख श्रेया हसने लगती है.

अतुल भी कुछ देर बाद साथ hi हसने लगता है.

अतुल:- सिगरेट को तो दूर कर diya...Lekin दिल का dard...Isse कैसे दूर करोगी?

श्रेया:- अगर कर दिया तो?

अतुल:- नहीं कर पाओगी.

श्रेया:- कर दूंगी.

अतुल:- चैलेंज.

श्रेया:- एक्सेप्टेड.

श्रेया ने चैलेंज तो एक्सेप्ट कर liya...Lekin उससे पता नहीं था की करना क्या है.

श्रेया:- अच्छा ये सब chhodo...Ye बताओ अगर निशा दी होती तो वो भी ऐसे hi सिगरेट फेंक देती ना.

अतुल:- पागल दीखता हु क्या मई tumhe...Nisha के सामने cigarette...Itna हिम्मत मुझ me...Kabhi नहीं.

मार मार कर हालत ख़राब कर देती wo...Aur जब निशा साथ होती तो सिगरेट की जरुरत hi क्यों पड़ती?

अतुल पुरानी बातें सोच कर मुस्कुराने लगा.

श्रेया:- कहा था naa...Tumhara दर्द भी दूर कर दूंगी.

अतुल:- बस यादें hi का तो साथ hai...Jo दो पल के लिए मुस्कान होंठो पर ला देती hai...Warna ये jakhm...Isse कोई भर नहीं सकता.

अतुल की आवाज में अब्ब भी दर्द झलक रहा था.

श्रेया:- (इन हेर मंद) आज भले hi ना sahi...Lekin बहुत जल्द तुम्हारा जख्म भी भर dungi...Vaada है तुमसे.

अतुल:- मई भी अपनी इस कहानी को सुना कर तुम्हे बोर कर रहा हु ना? तुम भी सोच रही होगी की कैसा इंसान है ये जो प्यार में हारने के बाद ऐसे जी रहा है जैसे पूरी दुनिया hi ख़त्म हो गयी है.

श्रेया:- Nahi...Jab भी तुम्हारी कहानी सुनती हु तो तुम्हारे लिए दिल में इज़्ज़त और भी बढ़ जाती है.

आज के वक्त में सच्चा प्यार बहुत hi काम देखने और सुनने को मिलता hai...Aur जो भी सच्चा प्यार में हारते है उनको मैंने बर्बाद होते देखा hai...Paagal होते और सुसाइड करते देखा है.

लेकिन बहुत काम hi ऐसे लोग होते है जो प्यार सच्चे दिल से करते है, प्यार को निभाते है और साथ hi मुश्किल से मुश्किल वक्त में खुद को संभल लेते hai...Pyar में hi खो कर बाकी की जिम्मेदारी को भूलते नहीं है.

ी रेस्पेक्ट यू अस ा रेस्पोंसिबल एंड टैलेंटेड डॉक्टर, ा ग्रेट लवर एंड ओने ऑफ़ थे ऑनेस्ट एंड बेस्ट पीपल ी हैवे एवर मेट.

श्रेया की ये बात सुन कर अतुल भी खुद को मुस्कुराने से रोक नहीं paaya...Wo एक पल में hi अपने सारे ग़म भुला कर खुश हो gaya...Aur अपना तारीफ़ किसे पसंद नहीं आता?

श्रेया:- अब्ब बोलो? क्या सोच रहे थे तभी?

अतुल:- कुछ ख़ास nahi...Vakt का khel...Bahut अच्छे से खेला है वक्त ने मेरी जिंदगी के साथ.

आज जो इंसान आये थे निशा के Papa...Unko जो बात 5 साल पहले समझना चाहिए tha...Wo आज समझ रहे hai...Jab सब कुछ ख़त्म हो गया? बर्बाद हो गया?

एक बार फिर अतुल की आवाज में दर्द tha...Bhale hi 5 साल की बात thi...Lekin अतुल के लिए तो जिंदगी भर का देरी हो गए the...Hamesha हमेशा के लिए वो अपनी निशा से बिछड़ गया था.

श्रेया:- मुझे लगता है की वो कुछ जरुरी काम से आये थे?

अतुल:- ये देखने के लिए की मई जिन्दा भी हु या nahi...Unka उस फैसला ने तो मेरे रूह को उसी वक्त मार दिया tha...Baaki है तो ये sharir...Bas यही देखने आये होंगे.

इस बार अतुल की आवाज में दर्द के साथ साथ गुस्सा भी था.

अतुल का ये गुस्सा देख श्रेया भो सोच में पद gayi...Dimaag में उठ रहे सवाल उसने पूछ hi लिया.

श्रेया:- तुम्बे अभी तक उन्हें माफ़ नहीं किया?

अतुल:- मेरे माफ़ करने और ना करने से क्या हो jaayega...Beeta हुआ वक्त तो वापस नहीं आ जाएगा.

बस उनका इज़्ज़त इस लिए करता हु क्यों की वो निशा की पापा है और निशा भी उनकी इज़्ज़त करती thi...Isse ज्यादा कुछ नहीं.

श्रेया:- तो क्या वो सब झूठ था? उनको एक्सीडेंट से बचाना और तुम्हारी बातें?

अतुल:- सिर्फ एक hi झूठ बोलै maine...Ki मई अपने जिंदगी में आगे बढ़ चूका हु और खुश hu...Agar ये झूठ नहीं बोलता तो क्या करता?

उनकी पाउ में गिर जाता और रट हुए कहता बर्बाद हो गया हु मई? कुछ सेल्फ रेस्पेक्ट अभी भी बाकी hai...Kisi तरह खुद को दिखाना था की मई भी आगे बढ़ चूका हु.

और रही बात उनको बचाने की तो उसमे अपना कोई फायदा नुकशान नहीं देखा tha...Ek डॉक्टर होने की नाते मई अपने किसी भी दुश्मन को बचने की कोशिः करता.

फिर भी वो मेरी निशा की पापा hai...Unko कैसे कुछ होने दे सकता था.

अतुल की ये बात सुन श्रेया बस अतुल को hi देख रही thi...Usse समझने की कोशिश कर रही थी की अतुल जो भी कर रहा है वो सही है या नहीं?

और निशा की पापा के आने के बाद और उनकी और अतुल की बात सुन कर उससे ऐसा लग रहा था की कुछ तो गलत हो रहा है जो होना नहीं चाहिए.

अतुल:- उनके आने से एक बात तो अच्छा hua...Ye बात तो पता चला की निशा अपनी जिंदगी में खुश है जो दुआ मई हमेशा से करते आया हु.

सच में निशा की बारे में जान कर बहुत सुकून मिल रही है.

ये कहते hi अतुल के होंठो में एक मुस्कान आ गया निशा की ख़ुशी के liye...Kaisa प्यार था ये अतुल का? जो हर बीत ते वक्त के साथ और भी गहरा होता जा रहा था ये जानते हर भी इस प्यार का अब्ब कोई फ्यूचर hi नहीं है.

सच्चा pyar...Shayad यही वजह था जो अतुल अपने परवाह किये बिना निशा की ख़ुशी का hi दुआ मांगता tha...Uski ख़ुशी में hi खुश हो रहा था.

[Note:- Sorry for no replies since last 2 updates...Will reply from tomorrow.]
 
थैंक यू ट्रू लव :दोस्त: फॉर योर ग्रेट सपोर्ट एंड reviews...Abhi तो शुरुवात है अतुल और निशा की प्यार ka...Padhai, दोस्ती, प्यार, दुश्मनी और saajish...Abhi तो इन् सब से गुजरना है दोनों को.

निशा के Papa...Wo सुन तो लेंगे सब्र से लेकिन क्या समझेंगे वो तो नेक्स्ट अपडेट में पता चल hi गया :D...Aise hi साथ बने रहिये :दोस्त:
 
अभी उस बारे में सोचा नहीं है bhai...Bahut से रीडर्स पहले hi पढ़ चुके hai...Aur वो यहाँ pdf में भी अवेलेबल hai...Agar आप को pdf चाहिए तो पं कर dijiye...Mai सेंड कर दूंगा.

अभी तो ये भी सूरे नहीं हु की आगे कसम के बाद कोई स्टोरी लिखूंगा भी या nahi...Khair, कसम hi अभी बहुत बाकी hai...Iss स्टोरी पर hi कंसन्ट्रेट कर रहा हु अभी. :)
 
थैंक्स पैराडॉक्स भाई फॉर योर सपोर्ट एंड appreciation...Aashiq भाई, इशू एंड रोमी भाई वेरे ऑलवेज इन माय फवौरीते list...Bahut कुछ सीखा है उनकी स्टोरी कर se...Jaan कर अच्छा लगा की उनके स्टोरी जैसे hi तुम्हे ये अपडेट पसंद aaya...Koshish हमेशा यही है की खुद को इम्प्रूव करता जाओ और आगे भी यही कोशिश rahegi...Saath बने रहिये भाई.
 
अपडेट 86

अतुल:- ओह Shit...Mai तो भूल hi गया!!!

श्रेया:- क्या?

अतुल:- गांव में कैसा है? सब कुछ ठीक तो है ना.

श्रेया:- अब्ब जाके डॉ. साहब को अपने पेशेंट्स का ख्याल आया.

अतुल:- प्लीज बताओ na...Sach में भूल गया था.

श्रेया:- अभी तक तो सब कुछ ठीक है.

अतुल:- और वो आकाश (पास वाले गांव का Doctor)...Wo अच्छे से काम कर रहे है ना?

श्रेया:- Ha...Wo hi सब संभाल रहे है.

अतुल ने राहत की कुछ सांस liya...Uski गैर मौजूदगी में भी सब कुछ ठीक चल रहा था.

श्रेया:- आगे का क्या सोचा है?

अतुल:- क्या सोचा है? मतलब?

श्रेया:- यही ki...Aage कभी वाइट कोट पहनोगे या फिर रिटायरमेंट लेने का सोच लिया है?

अतुल:- बस कुछ दिन और...5 साल बाद घर आया hu...Kuch दिन और रहने का सोच रहा hu...Maa और दी को अच्छा lagega...Fir अपना कर्मभूमि वापस लौट जाऊँगा.

श्रेया कुछ देर से अतुल को नोटिस कर रही थी.

श्रेया:- ऐसे बाल पर हाथ क्यों फेर रहे हो?

अतुल:- Ye...Ye तो बचपन से आदत है.

अतुल ने मुस्कुराते हुए कहा.

श्रेया अतुल को अब्ब और भी गौर से देख रही थी.

अतुल:- अब्ब क्या हुआ?

श्रेया:- बहुत हैंडसम हो.

ऐसे hi श्रेया ने कह दिया.

अतुल:- व्हाट?

हैरानी से अतुल ने जवाब दिया.

श्रेया:- लेकिन ये सफ़ेद baal...Color क्यों नहीं करते? और भी हैंडसम लगोगे!!!

अतुल ने कोई जवाब नहीं diya...Bas मुस्कुराता रहा.

श्रेया:- क्यों मुस्कुरा रहे हो?

अतुल:- तुम 17तह इंसान हो? जिसने ये सवाल पूछा मुझसे.

श्रेया:- तो 17तह बार जवाब भी दो.

अतुल:- आज तक किसी को सही जवाब नहीं diya...Bas कह देता "ऐसे hi."

श्रेया:- क्यों?

अतुल:- अगर सच बताता तो सब हंस देते.

श्रेया:- ऐसी भी क्या वजह है.

अतुल:- बहुत साड़ी.

श्रेया:- बताओ कुछ.

अतुल:- फर्स्ट reason...Tum ये सवाल थैला अजित के फैन से पूछ रही ho...Bahut पहले hi उनसे इंस्पायर्ड हुआ tha...Tum जैसे हो वैसे hi ठीक ho...Tum अपना काम दिल लगा कर karo...Logo को अच्छा लगेगा तो वो जरूर तुम्हे और तुम्हारे काम का रेस्पेक्ट karenge...Mera माना है की लोग दूसरे लोग का इज्जत चेहरा से ज्यादा उनके काम से करते है.

श्रेया:- 2ंद रीज़न.

अतुल:- अब्ब इस बुढ़ापे में कोई लड़की तो मिलेगी nahi...Aur लड़की की बाप को इम्प्रेस करने की जरुरत भी nahi...Single hi आया था सिंगल hi marunga...Abb लुक्स बनाऊंगा भी तो किसके लिए?

ये रीज़न अतुल ने मजाकिया अंदाज में कहा.

श्रेया इस जवाब पर अतुल को कुछ देर के लिए घूरती रही.

श्रेया:- और 3रद रीज़न.

अतुल:- किसी को कहना मत?

श्रेया:- नहीं bataaungi...Abb बताओ भी?

अतुल:- मई बहुत आलसी hu...Abb कौन इतना टाइम वास्ते karega...Pehle हेयर कलर की पैकेट को kholo...Uska सलूशन banao...Baalo पर लगाओ, sukhaao...Itna time...Mujhse नहीं होता.

इस बार श्रेया अतुल को हैरानी से घूरने लगी.

श्रेया:- तो क्या मैंने गलत सुना है लोगो se...Dr. अतुल एक मेहनती डॉक्टर hai...Patient के लिए किसी भी वक्त हाजिर रहते है और कितने भी वक्त देते है.

अतुल:- सही suna...Lekin ये आधा सच है.

श्रेया बस अतुल को घूर हु रही थी.

अतुल:- तुमने डॉ. अतुल के बारे में जो सुना है वो सच hai...Lekin अतुल के बारे में nahi...Dr. अतुल इस रेस्पोंसिबल एंड केयरफुल डॉक्टर बूत अतुल इस जस्ट ा रैंडम केयरलेस गाए.

अगर कोई भी पेशेंट को आधी रात में भी मेरी जरुरत पड़े तो पूरी दिल से उसकी इलाज में लग जाऊँगा चाहे मई खुद hi किसी भी हाल में क्यों ना राहु.

लेकिन अगर मुझे खुद की इलाज करना पड़े तो...5 मं बाद कह कह कर ना जाने कितना लेट कर देता हु.

अतुल ने मुस्कुराते हुए kaha...Jaise उससे खुद की लापरवाही पे गर्व था.

श्रेया:- ये तो गलत है naa...Jab तुम पेशेंट्स को सलाह तो देते है लेकिन खुद के लिए भूल जाते हो.

अतुल:- एक अच्छा सा एक्साम्प्ले देता hu...Ham जब बच्चे थे और स्कूल जाते the...Tab टीचर हमें कहते थे हमें अपना नेल छोटा रखना चाहिए भले hi उनकी नेल कितना भी बड़ा हो.

और जब कुछ बड़े हुए तो टीचर्स हमें कहते थे की हमें अल्कोहल और सिगरेट से दूर रहना chaahiye...Lekin खुद hi ना जाने कितनी बोतल और कितने पैक एक बार में खाली कर देते थे.

उनका काम था समझाना और ज्ञान dena...Agar स्टूडेंट्स समझदार है तो वो समझ jaayenge...Mere केस में भी ऐसा hi है.

और ऐसा भी नहीं है की मई टोटली केयरलेस hu...Agar तेज बुखार है तो करेलेस्सेनेस्स में दवाई खाना तो बंद नहीं कर दूंगा.

बस छोटी छोटी बातो के लिए केयरलेस hu...Iska भी अलग hi मजा है.

श्रेया:- फिर भी ये गलत hai...Tum कैसे लापरवाह हो सकते हो.

अतुल:- लापरवाह नहीं बनूँगा तो क्या karunga...Sambhaalne वाली तो बहुत पहले hi छोड़ कर चली gayi...Sach कहु तो अकेले में मई क्या करता हु बस कुछ याद hi nahi...Bas खोया खोया रहता हु उस की यादों में.

अचानक से अतुल की आँखों में आंसू आ gaye...Fir अगले hi पल.

अतुल:- सॉरी sorry...Pata नहीं क्या हो गया tha...Khud को रोक hi नहीं पाया.

श्रेया:- कोई बात nahi...Hota hai...Jaruri भी है जो भी दिल में है उससे बाहर आने do...Aise दबा कर बातें रखना भी नहीं चाहिए.

फिर कुछ देर तक दोनों के बिच खामोशी छायी रहती hai...Koi कुछ बोल नहीं रहा था.

फिर श्रेया कुछ सोच कर कहती है.

श्रेया:- Atul...Movie देखने चले.

अतुल:- मूवी?

थोड़ा हैरानी के साथ अतुल ने पूछा.

श्रेया:- क्यों? कोई प्रॉब्लम है?

अतुल:- प्रॉब्लम तो नहीं hai...But movie...Bahut टाइम से देखना छोड़ दिया है.

श्रेया:- कही कसम तो नहीं खाया? मूवी ना देखने की?

अतुल:- नहीं ऐसी बात नहीं है.

श्रेया:- अब्ब ये मत कहना की मूवी पसंद nahi...Tum एक एक्टर के फैन हो.

अतुल:- एक टाइम था मूवी का क्रेज हद्द से ज्यादा tha...Jab जब प्यार हुआ tha...Har दिन एक से दो मूवीज देखता था.

उस टाइम कोई भी ऐसा रोमांटिक एंड थ्रिलर मूवीज नहीं था जो मैंने ना देखि हो.

लेकिन अब्ब धीरे धीरे मूवीज का क्रेज भी ख़त्म हो गया.

अतुल की इस जवाब से श्रेया भी चुप हो gayi...Abb वो जबरदस्ती तो ले जा नहीं सकती थी.

कुछ देर बाद.

अतुल:- चलो.

श्रेया:- कहा?

अतुल:- मूवी देखने.

श्रेया:- अचानक से.

अतुल:- Socha...Dekh hi लेता hu...Bahut दिन बाद देख रहा hu...Fresh भी हो जाऊँगा.

ात सिनेमा हॉल

श्रेया:- ये क्या रोमांटिक मूवी की टिकट!!!

थोड़ा हैरान हो कर श्रेया ने पूछा.

अतुल:- क्यों? तुम्हे पसंद नहीं.

श्रेया:- मुझे तो पसंद hai...Lekin तुम कैसे?

अतुल:- कभी रोमांस मेरा फवौरीते गेंरे हुआ करता था मूवीज me...Abb देखने आये है तो dekhenge...Aise डरने से क्या होगा.

फिर दोनों चले जाते है अंदर मूवी देखने.

अतुल तो मूवी देख रहा tha...Lekin श्रेया कभी मूवी तो कभी अतुल को.

वो नोटिस कर रही थी की अतुल का सिर्फ एक hi इमोशन tha...Romantic सन में भी और दर्द भरे सन में bhi...Wo सिर्फ मुस्कुरा रहा था.

फर्क इतना था की रोमांटिक सन में उसका चेहरा मुस्कान से खिल रहा था तो दर्द भरे सन में मुस्कान में भी दर्द की लकीरें साफ़ दिख रही thi...Dard में भी मुस्कुराना सिख गया था.

और यही तो उसकी जिंदगी tha...Bhale hi अंदर कितना भी दर्द छुपा हो बाहर दिखाता सिर्फ मुस्कान hi था.

श्रेया:- कैसा लगा मूवी?

अतुल:- बहुत accha...Khud से hi रेलाते कर रहा tha...Wo प्यार भरी baatein...Wo खूबसूरत पल ...वो mastiyan...Wo रूठना मनाना :लव:.

और फिर वो दर्द, वो तन्हाईयाँ, वो बिछडन :(.

ऐसा लग रहा था मेरी hi जिंदगी मेरे सामने चल रही है.

अतुल:- ऐसे क्या देख रही हो मुझे? कुछ नहीं हुआ hai...Abb तो आदत बन चुकी hai...Aise दर्द में जीने ki...Sambhaal lunga...Ye पहली बार थोड़े hi है.

अतुल ने महसूस किया की श्रेया उसकी इस हालत पर शायद तरस खा रही hai...Wo श्रेया के साथ साथ खुद को भी समझा रहा था.

समझा तो रहा tha...Lekin समझ पाना इतना आसान भी नहीं tha...Dil का दर्द इतनी आसानी से किसकी सुनता है?

अब्ब वापसी की वक्त अतुल भी कभी कभी श्रेया को देखने laga...Aaj श्रेया ने अतुल को एक बार फिर से खुद को खुद से मिला दिया था.

जो अतुल शायद खुद को hi भूल गया tha...Ek बार फिर खुद की आदत, हरकत, इमोशंस सब से जान पहचान हो gayi...Sirf और सिर्फ श्रेया की बातों से.

पहले तो उसका दिल hi था जो जरुरत से ज्यादा काम करता था दर्द सहने ka...Abb उसका दिमाग भी जरुरत से ज्यादा काम करने लगा tha...Shak करने का!!! खुद पर और श्रेया पर.
 
अपडेट 87

अंजलि:- कितना टॉप करेगी यार? इस बार भी?

अजय:- कोंग्रटुलतिओन्स.

निशा:- थैंक्स.

अतुल की तरफ देख कर...

निशा:- थैंक्स.

अतुल:- अब्ब मुझे किस बात की थैंक्स.

निशा:- वो रात भर साथ डिसकस करके पढ़ने के liye...Tumne hi तो प्रॉबब्ले क़ुएस्तिओन्स बताया था और एग्जाम में मोस्ट ऑफ़ थे क़ुएस्तिओन्स वही थे.

अजय:- क्या क्या क्या रात भर डिसकस? कैसे? लाइब्रेरी तो 10:00 पं तक hi खुलता है और कैसे?

अतुल:- अबे बेवक़ूफ़, कभी वीडियो चाट का नाम सुना है?

अजय:- हद्द है yaar...Padhaai के लिए भी वीडियो चाट.

अतुल:- इससे कहते है टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल.

(बड़बड़ाते हुए) पढाई के अलावा और भी बहुत कुछ होता है.

अतुल की ये बात पास बैठी निशा hi सुनती hai...Aur वो अतुल को घूरने लगती है.

अतुल जवाब में बस मुस्कुरा देता है.

अजय:- क्या बात है? प्यार मिलते hi दोस्त को भूल gaya...Mere साथ तो 2 घंटा भी नहीं पढता और निशा के लिए पूरी रात?

अतुल:- तू कबसे पढ़ने laga...Tera तो पढाई के साथ सालो पहले ब्रेक उप हो गया hai...Agar फिर कभी पैच उप हुआ तो याद कर लेना.

अतुल की इस बात पर सभी हसने लगते है.

अजय:- भाई थोड़ा तो इज़्ज़त का ख्याल kar...Hamesha टांग खींचता रहता है.

अतुल:- अच्छा तो अब्ब से हाथ खींचूंगा.

अजय:- तू नहीं सुधरेगा.

अतुल:- तेरे जैसे दोस्त हो तो कौन सुधर सकता है.

अजय:- तुझसे तो बातें करना hi बेकार है.

अतुल:- तेरी बातें सुन्ना hi बेकार है.

निशा:- बस bas...Kaha की बातें कहा ले जा रहे ho...Aur ये कैसा घटिया आर्गुमेंट है?

अतुल:- ये बात इस बेवक़ूफ़ अजय से पूछो.

अजय:- नहीं इस बेवक़ूफ़ अतुल से.

अंजलि:- प्लीज अब्ब nahi...Pehle hi बहुत इर्रिटेट कर चुके हो.

फिर अतुल अजय को देख कर हसने लगता hai...Aur अजय भी.

अजय:- अच्छा ये bata...Kahi तू जान बुझ कर तो सेकंड नहीं होता?

अतुल:- Nahi...Kabhi nahi...Mai हमेशा अपना बेस्ट एफर्ट देता hu..Iss बार भी diya...Aur मार्क्स भी एक्सपेक्टेटेड hi tha...Mai अपने रिजल्ट से खुश हु.

बूत निशा इस excellent...Knowledge लगभग शामे hi है हम दोनों me...But निशा का वृत्तिंग skill...Koi जवाब nahi...Just एक्सीलेंट... ग्रामर से ले कर वर्ड सिलेक्शन, डिस्क्रिप्शन, हैंड राइटिंग और राइटिंग का sequence...Perfect.

कभी पढ़ना निशा की अंसवेरस एंड notes...Aur एहि वो एरिया है जहा मई निशा के आस पास भी nahi...She डेसेर्वेस तो टॉप.

और कभी कम्पेटेशन किया भी नहीं maine...Padhne आये hai...Knowledge जरुरी hai...Baaki की चीजें सेकेंडरी hai...Khaas फर्क नहीं पड़ता.

अंजलि:- इतना भी तारीफ़ मत karo...Bechaari की गाल लाल हो गयी है शर्म से.

ये सुनते hi निशा अंजलि को मारने लगती है.

तभी अतुल बहुत देर से शांत रवि की तरफ देखता है.

अतुल:- कोई बात nahi...There इस ऑलवेज नेक्स्ट चांस एंड नेक्स्ट tomorrow...Agli एग्जाम में मुझे हरा देना.

रवि:- नहीं yaar...Abb nahi...Abb मुझे भी लगता है मार्क्स का कम्पटीशन फ़ालतू की चीज hai...Knowledge मैटर्स मोस्ट.

फिर कुछ देर सभी ऐसे hi बातें करते hai...Jab घर जाने के लिए सभी कैंटीन से निकलते है तब.

अतुल:- (इन Nisha's एअर) सो मिस topper...Mujhe ट्रीट चाहिए.

निशा:- Sure...Chalo बाहर चलते है घूमने.

अतुल सर.

आवाज की पीछा करते हुए अतुल एक लड़की की तरफ मुदा.

अतुल:- यस.

लड़की:- सर. मई नई बैच से हु.

अतुल:- Sir...Matlab किसी ने अच्छे से रैगिंग लिया है.

अतुल मुस्कुराते हुए निशा और अंजलि की तरफ देखता hai...Dono ना में इशारा करती है.

अतुल:- नाम क्या है तुम्हारा.

लड़की:- Sir...Preeti.

अतुल:- कोई काम था मुझसे?

प्रीती:- सर आपके बारे में बहुत तारीफ़ सुना hai...Aap स्टडी में बहुत अच्छे है.

मुझे पैथोलॉजी समझ में नहीं आ रहा hai...Aap क्या मुझे कुछ देर के लिए पढ़ा सकते है?

प्रीती थोड़ा डर्टी हुई और रिक्वेस्ट करती हुई बोली.

अतुल:- टॉपिक?

प्रीती:- नेक्रोसिस एंड इन्फ़्लम्मतिओं.

ये सुनते hi अतुल मुस्कुराने लगता hai...Issi टॉपिक ने कभी उसका भी दिन का छैन और रातो की नींद उड़ा दिया था.

अतुल:- Ok...Kabse पढ़ना चाहती हो?

प्रीती:- क्या आज से hi पढ़ सकते है?

निशा:- (तो अतुल) अभी तो हम बाहर जा रहे है.

अतुल:- थोड़ी देर बाद चले jaayenge...Tum अभी घर जाओ मई जल्द hi आता hu...Fir साथ चलेंगे.

एक बार के लिए तो निशा अतुल को देखती रह gayi...Aaj पहली बार अतुल ने उसको मन कर दिया वो भी किसी लड़की को पढ़ाने के लिए.

गुस्सा तो बहुत आ रहा था usse...Lekin कण्ट्रोल करके वो वह से जाने लगी.

अतुल:- (तो प्रीती) तुम लाइब्रेरी jaao...Mai आ जाऊँगा.

प्रीती लिब्ररी जाती है एयर अतुल अजय को एक कोना में ले जा कर.

अतुल:- जूनियर्स का रैगिंग सुरु हो चूका hai...Tune बताया क्यों नहीं?

अजय भी कुछ देर हैरानी से अतुल को देखता है.

अजय:- हम भी रैगिंग लेंगे?

अतुल:- रैगिंग नहीं इंटरेक्शन.

अजय:- फर्क क्या है?

अतुल:- रैगिंग जितना एक्सट्रीम नहीं hoga...Chutiyo वाला टास्क नहीं denge...Jaise की किसी लड़की को प्रोपोज़ karo...Ladki वाला रोले karo...Aur फिजिकल टास्क भी नहीं देखेंगे.

सिर्फ ये देखेंगे मेंटली कितना स्ट्रांग hai...Patience कितना है unme...Aur ऐटिटूड कितना है?

अजय:- क्या ये सब जरुरी है?

अतुल:- बहुत जरुरी hai...Sirf फर्स्ट मीटिंग के liye...Uske बाद तो सभी अपना भाई hi hai...As ा सीनियर वो सभी हेल्प करेंगे जो हमारी रिस्पांसिबिलिटी है.

फिर कभी बताऊंगा की ये इंटरेक्शन क्यों जरुरी है.

फिर अतुल भी लाइब्रेरी चला जाता hai...Ajay बस अतुल की बातें hi सोच रहा था.

अतुल लाइब्रेरी तो चला वाया प्रीती को पढ़ाने के liye...Lekin वो इस बात से साफ़ अनजान था की उसने किस खतरा को आमंत्रण (इनविटेशन) दिया है.

एक तरफ Nisha...Jo आज पहली बार अतुल से नाराज हो गयी thi...Aur दूसरी तरफ एक मौका का इंतजार करता हुआ Ravi...Aaj उससे थोड़ा मौका तो दिख hi गया निशा की नाराजगी me...Wo इस चिंगारी को आग का रूप देने का सोच रहा था.

कितनी सही शुरुवात हुआ था अतुल और निशा का दिन? वो रिजल्ट, निशा की टॉप करना, अतुल की तारीफें और साथ घूमने का planning....Aur अंत हुआ तो निशा की नाराजगी से.

न जाने इस नाराजगी का शुरुवात और प्रीती से ये मुलाक़ात, अतुल और निशा की प्यार में क्या असर पड़ने वाला है?
 
अपडेट 88

सॉरी sorry...Thoda लेट हो गया.

दौड़ते हुए अतुल निशा के पास पंहुचा.

निशा:- थोड़ा सा late...Pure 1 ऑवर से वेट कर रही हु.

निशा की बात सुन अतुल ने मुस्कुराते हुए एक बार फिर कहा.

अतुल:- सॉरी.

निशा:- अब्ब ये पीला दांत क्यों दिखा रहे हो?

अतुल:- पीला? ये टूथपेस्ट कंपनी पर अब्ब केस करना पड़ेगा.

निशा:- बकवास मत करो.

अतुल:- तो फिर क्या करू? तुम hi बोलो.

अतुल ने शरारती आवाज में कहा.

निशा जवाब में सिर्फ घूरती hi रही.

अतुल अब्ब निशा के पास आया और निशा की कंधे में अपना हाथ रख कर प्यार से बोलै.

अतुल:- नाराज हो मुझसे?

निशा अपने कंधे से अतुल की हाथ हटा कर.

निशा:- दूर रहो मुझसे.

अतुल:- मतलब सच में नाराज हो?

निशा की गाल पर पिंच करते हुए अतुल ने पूछा.

निशा:- कितने बे परवाह हो गए हो tum...Pehle तो गलती करो और फिर अब्ब ये मजाक.

अतुल को समझते देर नहीं लगा की निशा सच में नाराज है.

अतुल अपने घुटनो में बैठ गया.

निशा:- ये ये क्या कर रहे हो?

अतुल बिना कुछ जवाब दिए निशा का एक हाथ अपने हाथ में लेता है और प्यार से निशा की आँखों में देख कर.

अतुल:- सॉरी.

निशा बस घूरे hi जा रही थी अतुल ko...Atul की इस हरकत पर निशा को उस पर बहुत प्यार आ रहा था लेकिन इतनी जल्द वो अपना गुस्सा भूलना भी नहीं चाहती थी.

अतुल:- सॉरी.

निशा कुछ नहीं bolti...Lekin जब उससे लगा की आस पास के कुछ लोग उन्हें hi देख रहे है तब.

निशा:- ये क्या कर रहे ho...Utho.

अतुल:- सॉरी.

निशा:- Utho...Sab देख रहे है.

अतुल:- सॉरी.

अतुल की मुस्कान भी बढ़ता hi जा रहा tha...Aur निशा वही बेचैन होती जा रही थी.

निशा:- मैंने कहा ना utho...Ye क्या कर रहे हो?

अतुल:- जब तक तुम मुझे माफ़ नहीं karogi...Mai नहीं उठूंगा.

निशा कुछ देर तक अतुल को घूरती रही.

निशा:- सब लोग देख रहे है.

अतुल:- देखने do...Unhe भी तो पता चले हम दोनों में कितना प्यार है.

निशा:- प्यार? मई नहीं करती तुमसे प्यार.

अतुल:- अच्छा जी.

निशा:- नहीं करती मतलब नहीं करती.

अतुल:- अब्ब तो मई तब hi उठूंगा जब तुम मुझे सब के सामने kahogi..."I लव यू."

निशा फिर अतुल को घूरने lagi...Abb वो भी समझ गयी थी की अतुल भी इतनी जल्दी नहीं माने वाला.

निशा:- प्लीज.

बहुत hi प्यार से निशा ने रिक्वेस्ट किया.

अतुल:- No...First से 3 मैजिकल वर्ड्स.

निशा:- प्लीज.

इसा बार निशा ने इतना प्यार से रिक्वेस्ट किया की अतुल भी अब्ब मन नहीं कर पाया.

अतुल:- अच्छा ठीक hai...Baad में बोल dena...Lekin पहले मुझे माफ़ तो करो.

निशा:- माफ़ कर दिया.

निशा ने भी मुस्कुराते हुए कहा.

अब्ब अतुल भी उठ गया.

निशा:- पागल हो तुम.

अतुल:- पागल हु इसी लिए तो तुमसे प्यार करता हु.

निशा कुछ देर अतुल को घूरती है और फिर उसकी बातो पर मुस्कुराने लगती है.

अतुल:- मुझसे प्यार नहीं karti...Agli बार ऐसी बात गलती से बोलना भी mat...Tumhari एक "ी लव यू" सुनने के लिए कान तरस जाते hai...Raat में सोता भी हु तो सिर्फ उस अगली सुबह की इंतजार में जब तुमसे प्यार की दो बातें कर सकू.

और तुम हो की ऐसी बातें करती हो.

अतुल की बातो में एक अलग hi तड़प tha...Aur शायद यही तड़प निशा देखना चाहती थी.

निशा:- और tum...Tumhe तो मजा आता है न मुझे परेशां करने में.

निशा भी एक डैम से सीरियस हो गयी और जो बातें कुछ दिनों से चुभ रही थी अब्ब वो बातें उसकी होंठो पर आ चुकी थी.

अतुल:- तुम्हे परेशान?

निशा:- पिछले कुछ दिनों se...Mujhe इग्नोर करने लगे ho...Jab मई कही साथ चलने के लिए बोलती हु तो तुम दोस्तों के पार्टी में बिजी होते ho...Kabhi cricket...Kabhi study...Mere लिए तो वक्त hi नहीं.

और कभी आ भी जाते हो तो इतना लेट.

आज तो हद्द hi हो gayi...Uss junior...Naam क्या tha...Ha Preeti...Uss प्रीती के लिए मुझे इग्नोर कर रहे थे.

अतुल कुछ देर के लिए ये बातें सुन कर शॉकेड रह gaya...Aisi छोटी छोटी बातों को निशा इस तरह से सोच रही है उससे अंदाजा hi नहीं था.

निशा:- क्या हुआ abb...Kuch बोल क्यों नहीं रहे हो? कुछ देर पहले तो प्यार की बहुत बातें कर रहे थे? अब्ब?

अतुल:- यार सोचा नहीं tha...Tum मेरी बातों का ये मतलब निकलोगी.

निशा:- तो क्या मतलब निकालू?

अतुल:- यार सच में बिजी tha...Dost अब्ब बर्थडे पार्टी के लिए जिद्द करे तो अब्ब क्या कर सकता hu...Dost hai...Aise कैसे ना कह du...Aur कोइंसिडेन्स ये है की तुम्हारा फ़ोन भी उसी वक्त आता है.

और रही बात क्रिकेट ki...Seniors और दोस्त इतना रिक्वेस्ट करते है की रिजेक्ट कर भी नहीं सकता.

और padhaai...Kabhi कभी तो पढ़ना भी पड़ता है ना.

निशा:- और वो प्रीती.

अतुल:- बात सिर्फ इतनी है की मई स्टडी का बहुत रेस्पेक्ट करता hu...Koi कुछ सिखने आये तो मन कैसे कर du...Knowledge बाटने से hi बढ़ती है और ऐसी नॉलेज का क्या फायदा जो दुसरो को सिखाने में काम नहीं आये.

टॉपिक भी ऐसा था उसकी जो शुरुवात में खुद से पढ़ना किसी के लिए भी मुश्किल हो jaaye...Bas मैंने प्रीती की जगह खुद को रख कर dekha...Mere टाइम में सीनियर्स इतने कोआपरेटिव नहीं thhe..Aur उस कांसेप्ट को समझने में लगभग 1 मंथ लग गए थे.

निशा कुछ नहीं boli...Bas वो अतुल को देखे जा रही थी.

अतुल:- तुम्हे मेरा लेट होना दीखता hai...Lekin मेरा सरप्राइज नहीं dikhta...Jab जब लेट होता हु पाइप से तुम्हारे रूम में चढ़ने के लिए हाथ कैसे चील जाता है वो नहीं दीखता. (अतुल अपने घाव का निशाँ दिखाता है)

और तो और तुम्हारा वो kutta...Chor समझ कर दो बार काट चूका hai...Aur काटा भी ऐसी जगह पर ना किसी को बता सकता हु और ना किसी को दिखा सकता hu...Injection भी सभी से चुप कर लेता था किसी को शक न हो जाए.

अतुल की इस बात पर निशा को थोड़ा हंसी आ गया.

अतुल:- प्लीज हसो मत.

अतुल अब्ब सीरियस हो गया था.

अतुल:- बात सिर्फ ये है की आज कल सब दिखाना पड़ता hai...Publicity करना पड़ता hai...Tab hi लगता है की हां ये प्यार करता है वर्ण नहीं.

निशा:- नहीं मेरा मतलब ये नहीं था.

अतुल:- प्लीज अभी मुझे बोलने दो.

तुम्हे लगता है की मई तुम्हे इग्नोर करने लगा hu...Lekin सच्चाई ये है की तुम्हे hi मई अपना दुनिया माने लगा hu...Tumhare लिए कुछ भी कर सकता hu...Bas एक बार बोल कर देखना.

अगर तुम्हे मेरा वो पार्टी, क्रिकेट, किसी को पढ़ना पसंद नहीं तो बोल do...Aaj से सब कुछ छोड़ दूंगा.

निशा:- नहीं मेरा वो मतलब नहीं था.

फिर निशा अतुल को देखती hai...Atul बस उससे hi सुन रहा था.

निशा:- जानती हु तुम मुझसे बहुत प्यार करते ho...Lekin प्यार को जताया भी karo...Accha लगता है.

और अगर कोई प्रॉब्लम है तो bataao...Samajh जाउंगी yaar...Itna भी ना समझ नहीं हु.

आज भी अगर तुम प्रीती को पढ़ाने की बात समझा कर कहते तो नाराज नहीं होती लेकिन तुमने सीधे जाने को बोल दिया.

बहुत प्यार करते हो तुम लेकिन थोड़ा जताया भी करो.

निशा की इस बात पर अतुल कुछ देर सोचता रहा.

अतुल:- बात तो सही है.

अतुल को एकदम से याद आया.

अतुल:- आज तो तुम्हारा दिन hai...College टोपर मिस Nisha...Bhulo मत तुम्हारा ट्रीट अभी पेंडिंग है.

निशा:- ओह्ह haa...Bhul hi गयी थी.

अतुल:- और हम यहाँ फ़ालतू की बात पर डिबेट कर रहे थे.

निशा:- सुरुवात तुमने की थी.

अतुल:- नहीं तुमने.

निशा:- तुमने.

अतुल:- तुमने.

निशा:- फिर बहस करना चाहते हो.

अतुल:- Nahi...Iss बार आपकी प्रकोप से मुझे कोई बचा नहीं पायेगा.

फिर ऐसी hi बातें करते हुए दोनों हसने लगते है और ये भी भूल जाते है की कुछ देर पहले दोनों एक दूसरे से नाराज थे.

ात सिनेमा हॉल

अतुल:- तो ये है मैडम का ट्रीट.

निशा:- Haa...Kyu पसंद नहीं आया.

अतुल:- बहुत पसंद है मूवीज देखना चलो.

दोनों मूवी का टिकट लेते hai...Treat निशा की तरफ से था तो पाय निशा करती है.

मूवी सुरु होता है और दोनों मूवीज देखने में लग जाते है.

15 मिनट भी नहीं हुआ था की अतुल को इर्रिटेट फील होने लगता है.

हिम्मत करके थोड़ी देर और देखने की कोशिश करता hai...Movie और भी बोरिंग होती जा रही थी.

एक नजर निशा की तरफ देखता hai...Usse भी मूवी पसंद नहीं आ रहा था.

अतुल धीरे से अपना एक हाथ निशा की कन्धा पर रख देता है.

निशा:- क्या कर रहे हो?

अतुल:- प्यार?.

निशा:- यहाँ नहीं.

अतुल:- फिर कहा?

निशा:- कही aur...Yaha नहीं.

अतुल:- तो फिर यहाँ क्या करू?

निशा:- मूवी देखो.

अतुल:- इससे अच्छा अणि आँखें फोड़ lu...Ghatiya मूवी है.

अतुल की कहने की अंदाज से निशा भी हंस पड़ी.

निशा:- तुम्हारी hi पसंद की मूवी है.

अतुल:- अब्ब मेरी पसंद कुछ और है.

इतना कह कर अतुल निशा की कमर पकड़ कर अपनी तरफ खिंच लेता है.

अचानक हुई इस हमले से निशा अतुल को गुस्से से देखती hai...Fir आस पास देखती hai...Waha कोई नहीं था.

फ्लॉप मूवी देखने आते भी kaun...Sirf कुछ लोग फ्रंट सीट्स में थे.

दोनों फिर मूवी देखने लगते hai...Sirf आँखें hi मूवी देख रही thi...Dil और दिमाग बस एक दूसरे की तरफ था.

अतुल ऐसे hi मस्ती में अपना होंठ निशा की गर्दन (नैक) के पास ले जा कर किश करने लगता है.

निशा:- क्या कर रहे ho...Ohh...Gudgudi हो रही hai...Chhodo.

निशा अतुल को अपने से दूर करने की कोशिश कर रही thi...Lekin अतुल पर तो इस वक्त प्यार का जूनून सवार था.

कुछ देर ऐसे hi किश करने के बाद निशा अतुल को थोड़ा धक्का दे कर अलग करती hai...Atul को कुछ समझ में आता उससे पहले hi निशा अतुल पर अपने होंठो से हमला कर देती है. :अटैक:

और ना जाने कितने देर तक दोनों hi प्यार की पंछी एक दूसरे के प्यार में डूबे रहे.
 
फ्रेंड्स आज से कम्युनिटी पोस्टिंग के लिए एक गांव में आया hu...Yaha का वर्कलोड के हिसाब से अपडेट dunga...Daily अपडेट के चान्सेस hai...Lekin आज पूरी दिन सफर की वजह से थक गया hu...Kal से तरय करूँगा.

एंड योर सपोर्ट एंड कमैंट्स विल मोटीवेट में फॉर this...Jitne जल्दी कमैंट्स आएंगे उतना hi अच्छा लगेगा और लिखने का मन करेगा.

डील नहीं है की आप सब कमैंट्स दो और मई मैट dunga...Jitna भी रेस्पॉन्सेस आये मई अपनी तरफ से पूरी कोशिश करता रहूँगा डेली उपदटेस की.

पसंद आये तो कमैंट्स कीजिये , न आये तो आपकी मर्जी बूत स्टे कनेक्टेड विथ story...Stay तुनेड.
 
ग्लिम्पसे ऑफ़ अपडेट 89

कुछ दिनों से आप किसी सोच में खोये है? क्या बात है?

कुछ नहीं?

इतना कह कर वो उठ कर जाने hi वाले थे की.

आपको बताना होगा पापा?

कुछ देर तक वो अपनी बेटी को देखते hi रहे और साथ में सोच भी रहे थे की उन्हें क्या करना चाहिए.

कुछ समझ में नहीं आ रहा है निशा.

निशा अब्ब और भी गौर से पापा को देख रही thi...Yakin तो हो गया था उससे की पापा उससे कुछ छुपा रहे है.

निशा:- सच सच बताइये पापा.

न. डैड:- (थोड़ा हिम्मत जूता कर) मई अतुल से मिलने गया था.

Atul...Ye सिर्फ नाम नहीं था निशा के liye...Ek इमोशन thi...Ek फीलिंग थी.

बे इन्तेहाह प्यार से ले कर असहनीय dard...Har वो फीलिंग एक पल में hi निशा की दिल में घर कर गयी.

बहुत से सवाल the...Bahut कुछ जाना tha...Dil एक बार फिर तेजी से धड़क रहे the...Dimaag काम करना बंद कर चूका था.

बस वो अपने पापा को hi देख रही thi...Atul के बारे में सुनने को दिल मचल रही थी.

एक बार फिर हिम्मत कर के निशा के पापा ने बोलना सुरु कर दिया.

[Note:- Bas ye update ka jhalak tha...Will post complete update tomorrow...Aaj update pura likha nahi hai thakan ki vajah se aur kal bola tha aaj update post karunga.

Abhi aur likhne ki haalat me nahi hu...Bas ek jhalak hai aap sab ke saamne...Isse sochne ke liye bahut kuch hai aapke paas.

So comment me bataiye Nisha ke Papa usko kya batayenge aur Nisha ka kya kya reaction hoga? Full update on tomorrow.]
 
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