Kasam - Love is not Everything (Completed) - Page 15 - SexBaba
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Kasam - Love is not Everything (Completed)

हैंग तोह नहीं karunga...Itna यकीं है अगर लाइफ में कुछ अनएक्सपेक्टेड उनवोईडाबले प्रॉब्लम नहीं आया toh...Abhi तक किसी भी स्टोरी में गैप लिया नहीं hai...Aur डिले भी 1 वीक का मैक्सिमम है जब हद्द से ज्यादा बिजी रहता hoon...Wahi 2, 3 डेज का इंटरवल रहता hai...Next स्टोरी में भी 4,5 डेज से लेकर वीकली अपडेट hi सही पोस्ट करता रहूँगा.
 
कम्पलीट तोह हर स्टोरी को करता आया हूँ और rahunga...Vajah एक hi hai...Pehle मई महि रीडर tha...Uncompleted स्टोरी देख कर कैसा लगता है मैंने भी फील किया hai...Story स्टार्ट भी तब करता हूँ जब लगे की कम्पलीट कर paaunga...Agar नहीं कर पाया तोह समझ लीजिये की बहुत hi मजबूर हालात में hoon...Ummeed है ऐसा कभी नहीं होगा :).

बस डिले की प्रॉब्लम hai...3rd ईयर से और भी बिजी हो जाऊँगा इस liye...Fir भी अपडेट की क्वालिटी में कोई कमी नहीं आये पूरी कोशिश करूँगा.

साथ बने रहिये भाई.
 
अपडेट 107

इतना हंस क्यों रही हो?

चांदनी रात में निशा का चमकता हुआ खूबसूरत चेहरा से तोह अतुल का ध्यान हैट hi नहीं रहा tha...Upar से निशा का यूँ खिलखिला कर hasna...Atul का दिल का धड़कन कई गुना ज्यादा बढ़ाने की काम कर रहा था.

निशा:- हंसी तोह आएगी hi...Ghar मैं झूठ बोलने की भी अलग hi मजा hai...Library मैं होने की बोल कर ऐसे बहार आ gaye...Winter नाईट डेटिंग.

अतुल:- हाँ कभी कभी झूठ बोलने का भी अलग hi मजा hai...Jindagi है कुछ पलों ki...Kyu न इसमें से थोड़ा वक्त अपने लिए निकाल le...Apne हिसाब से जीने के लिए मस्तियों के साथ.

अतुल अपना हाथ जो कुछ देर से आग में सीख रहा था उससे निशा की गालों पर फेरते हुए बोलै.

निशा:- कभी कभी तुम मुझे गलत साबित कर देते हो!!!

अतुल:- और वो कैसे?

निशा:- कभी कभी मुझे लगता है तुम बहुत hi अनरोमांटिक टाइप हो लेकिन...

अतुल:- क्या? मई और unromantic...Abhi बताता हूँ मैं कितना रोमांटिक हूँ और किस हद्द तक जा सकता hoon...Woh तोह विंटर है इस्सलिये...

अतुल कुछ पल के लिए चुप हो जाता है और फिर.

अतुल:- एक minute...Romance का असली मजा तोह विंटर में hi hai...Kyun ना थोड़ी गर्मी लाया जाए?

अतुल की आँखें और बातो में मस्ती चढ़ता देख.

निशा:- नहीं.

अतुल:- हाँ.

निशा:- No.

अतुल:- यस.

अतुल को अपनी तरफ बढ़ता देख निशा वहां से भागने लगती हैं.

कुछ देर की भागम भाग के बाद.

निशा:- (हाँफते हुए) अब्ब और नहीं.

अतुल:- कितना तेज भागती हो yaar...Mujhe भी थका दिया.

अतुल भी हाँफते हुए बोलै.

निशा:- गर्मी लानी थी naa...Abb आ गयी है garmi...Aise hi एक्ससरसीसे और जॉगिंग करते रहो और गर्मी लाते रहो.

अतुल:- थिस इस नॉट फेयर.

निशा:- एवरीथिंग इस फेयर इन लव एंड वॉर. :ेविलौगह:

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निशा:- कब तक हम यहाँ और बैठे रहेंगे?

अतुल:- बैठते हैं ना कुछ देर aur...Abhi तोह आये thhe...Kuch देर और rahenge...Pyar भरी कुछ बातें करेंगे और कुछ यादगार लम्हे जियेंगे.

अतुल जो अभी नाश्ता तैयार कर रहा था उससे निशा की तरफ बढ़ाते हुए कहा.

निशा:- हम कुछ ज्यादा hi रिस्क नहीं ले रहे है?

अतुल:- Haan...Le तो रहे है.

निशा:- तोह फिर?

निशा की बातों का मतलब समझ कर अतुल हल्का मुस्कान के साथ कहता है.

अतुल:- फ़िक्र मत karo...Main हूँ naa...Kuch गलत होने नहीं दूंगा.

निशा को फिर भी चुप देख.

अतुल:- रिस्क तोह हम लाइफ के हर वक्त हर पल लेते आये hai...Future को कौन जानता हैं? ना जाने अगले पल क्या होगा.

हमारा प्यार भी तोह रिस्क hi है madam...Kya पता हमारे घर वाले हमारे रिश्ते के लिए इंकार कर दे? फिर सोचो क्या हाल होगा humaara...Lekin फिर भी रिस्क लेना हम छोड़ते है क्या?

और वैसे भी रिस्क फ्री लाइफ का कोई मतलब nahi...So, don't worry...Har पल जियो बिना किसी दर ke...Agar कुछ मुशीबत आ भी जाए तोह मिल कर देख लेंगे.

निशा भी बात को समझ गयी और मुस्कुराने लगी.

अतुल:- अब्ब और कुछ सोचो मत? बस कुछ पल दिमाग को आराम दे कर इसा पल को जीते है साथ में.

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एकदम शांत माहौल में एक इर्रिटेटिंग सा आवाज से दोनों होश में आ जाते hai...Aawaj था अतुल के मोबाइल में फ़ोन कॉल की.

निशा:- कौन है?

अतुल:- वही मनहूस अजय.

अतुल ने ना खुश आवाज में kaha...Aur फिर फ़ोन में बात करने लगा.

निशा:- क्या बात है? खुश नहीं लग रहे हो?

अतुल:- उसे बेवकूफ का किसी दोस्त का बर्थडे पार्टी hai...Mujhe भी कल साथ चलने के लिए कह रहा है.

निशा:- यह तोह अच्छी बात है.

अतुल:- लेकिन मुझे बोरिंग लगता है.

निशा:- तोह फिर?

अतुल:- अब्ब कर क्या सकता हूँ? जाना तोह पड़ेगा hi.

फिर दोनों की बिच कुछ देर के लिए ख़ामोशी छ जाती है.

तभी अतुल को रीलीज़ होता है की उसकी मूड का असर दोनों पर पद रहा hai...Maahaul को पहले जैसे बनाने के लिए.

अतुल:- लेकिन एक बात तोह अच्छा है.

निशा:- क्या?

अतुल:- फ्री का दारू मिल जाएगा.

निशा:- दारू !!! मन किया है न तुम्हे?

अतुल:- अरे madam...Hamesha नेगेटिव hi क्यों सोचती हो?

निशा:- मई नेगेटिव सोचती हु? और दारू पॉजिटिव है.

अतुल:- Haan...Positive तो hain...Alcohol है पॉजिटिव इफेक्ट्स ों heart...Heart जितना अच्छा रहेगा उतना hi तोह तुम्हे और प्यार कर पाऊंगा.

निशा:- लिवर और ब्रेन में कैसा इफ़ेक्ट होता है फिर?

अतुल:- (धीरे से) नेगेटिव.

निशा:- हद्द से ज्यादा negative...Aur हार्ट का काम सिर्फ ब्लड पंप करना hai...Sab कुछ का कण्ट्रोल ब्रेन एंड नर्वस सिस्टम से होता है.

अतुल:- अच्छा तोह ठीक hai...Aaj से तुम्हे दिमाग से प्यार करूँगा दिल से नहीं!!

निशा:- सोचना भी mat...Pyar तोह तुम दिल से hi करोगे?

निशा दांत दिखते (मुस्कुराते) हुए boli...Saath में अतुल भी मुस्कुराये बिना नहीं रह पाया.
 
अपडेट 108

एक ढंग का पुल्ल शॉट नहीं मार पाटा और खुद को रोहित का फैन बोलता है.

शाम के क्रिकेट सेशन के बाद अतुल एयर अजय रास्ते में चलते हुए एक दूसरे से बात कर रहे thhe...Dono अभी इस वक्त अकेले थे.

अजय:- जैसे तू तोह हर बॉल पे हेलीकाप्टर शॉट मारता hai...Bada आया धोनी का फैन.

अतुल:- वो तोह कभी मार नहीं paunga...Itna पावर गेनेराते नहीं होता मुझसे.

अजय:- धोनी से याद aaya...Ek बात bata...Tu धोनी का बड़ा फैन है या अजित (तमिल मूवी एक्टर) का? हमेशा खुद को थैला फैन कहता hai...So थैला अजित और थैला धोनी?

अतुल:- दिए हार्ड फैन तोह किसी का भी नहीं.

अजय:- अब्ब ये क्या बोल रहा है?

अतुल:- फैन तोह hu...Lekin एक हद्द tak...Usse ज्यादा nahi...Aur मेरा मन्ना है की इससे ज्यादा होना भी नहीं चाहिए.

फैन तोह मई हर उस इंसान का हूँ जिन्होंने इन्स्पिरिंग काम किया hai...Unse सीखता भी हूँ और अप्प्रेसियते भी करता hoon...Yahi बात hai...Ajith सर और धोनी सर की पर्सनालिटी और काम अच्छा लगता hai...Issi लिए कुछ हद्द तक इंस्पायर्ड हूँ.

है लेकिन दिए हार्ड फैन या हद्द से ज्यादा nahi...Jo राइवल फैन से मरने मारने पर उतर aaye...Social मीडिया पर नेगेटिविटी फैलाते रहते है दिन रात भर अपना काम धंधा छोड़.

अजय:- वाह bhai...Waah.

अजय ने बस इतना hi कहा था की....

ऐसी क्या बात बोल दिया इस बेवकूफ ने की तू इतना खुश हो रहा है.

ये बात सुनते hi अतुल और अजय दोनों पीछे मुड़े गुस्से se...Aawaj पहचानते hi thhe...Ravi...Jo अभी अभी बाइक से दोनों के पास पहुंचा hi था.

पीछे मुड़ने पर पता चला रवि अकेले hi नहीं है...5 बाइक और hai...Bike को साइड में पार्क कर के 10 लोग उतर aaye...Saath में उनके हाथ में कुछ हॉकी बट्स, क्रिकेट बट्स और विकेट्स भी थे.

दोनों को मामला समझने में देर नहीं लगा.

अजय अतुल के कंधे पर हाथ रखता है जैसे इशारे से कहना चाहता हो, "बस देखता जा."

अतुल को ये देख गुस्सा भी आ रहा था तोह साथ में दर भी लग रहा tha...Aisa सिचुएशन उसके साथ पहले कभी नहीं हुआ था.

रवि:- बहुत हीरो बन रहा था न उस दिन.

अजय:- ये सब क्या है यार?

रवि:- तू चुप रह !!! मई अतुल से बात कर रहा hoon...Jab दो बड़े बात कर रहे हो तोह बिच में तुझ जैसे चूतियों को बोलना नहीं चाहिए.

अजय बस उससे गुस्से से देखता रह गया.

रवि:- (तो अतुल) चुप क्यों है? दर गया क्या?

अजय:- डरता तोह ये तेरे बाप से भी नहीं.

रवि:- फिर बिच में बोलै तू.

अभिशेख:- कुत्ते की पूँछ कभी सीधी नहीं होती.

अजय:- बहुत पता है कुत्तों के बारे me...Pichli जन्म में कुत्ता था क्या?

अजय ने हँसते हुए कहा.

अभिशेख:- अपनी औकात में रह.

रवि:- कही ऐसा ना हो की अतुल से पहले तू hi अपना हाथ पेअर तुड़वा ले.

अजय भी इस बार चुप हो gaya...Gussa तोह उससे भी बहुत आ रहा था लेकिन दिखा नहीं रहा था.

रवि:- सो guys...Yahi है Atul...Iske बारे में hi बात कर रहा tha...Acche से खातिरदारी करो इसकी.

अजय:- खातिरदारी करनी hai...Chalo होटल mein...Acche से खिलाता हूँ तुम सबको.

फिर एक गुंडा आगे बढ़ कर अजय को एक थप्पड़ मारता है.

रवि:- (तो अभिशेख) कभी देखा है कॉमेडी को पीटते हुए?

अभिशेख:- सिर्फ मूवीज में देखा है.

रवि:- आज रियलिटी में देख ले.

रवि की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं tha...Atul और अजय को इस हाल में देख उससे बहुत सुकून मिल रहा था और अपना सारा भड़ास निकालने का सोच रहा था.

अजय:- (गाल सहलाते हुए) इतने तगड़े लगते हो? लेकिन दम कुछ ख़ास नहीं है.

वो गुंडा दूसरी बार करने के लिए हाथ उठता hi है की.

अजय:- कितना कमजोर है यार तू? बात का इस्तेमाल कर रहा है मुझे मरने के लिए.

रवि:- चल तेरी ये इच्छा पूरा कर hi देता hu...Aeee...Bina बात के hi इसके हाथ पेअर तोड़ दे?

अजय:- शुक्रिया Ravi...Mai तेरा यह एहसान कभी नहीं भूलूंगा.

रवि:- साला पीट रहा hai...Lekin फिर भी कॉमेडी कर रहा है.

अभिशेख:- जोकर जो hai...Aadat से बाज़ थोड़ी न आएगा.

फिर सुरु होता है अजय और उस गुंडे के बिच का fight...Kabhi अजय पीट जाता तोह कभी भागने की कोशिश कर रहा था.

इस बिच वो अतुल को आँखों से hi इशारा कर देता है, "फ़िक्र मत कर."

अतुल भी गुस्से के साथ चुप hi रहता है.

तभी एक जोर का थप्पड़ उसके गालो में परता hai...Gusse से वो रवि को और भी घूरने लगता है.

रविइइइइइइ, गुस्से से भरी एक चींख अजय के मुंह से निकलता है.

रवि का ध्यान भी उसकी तरफ जाता है.

अजय:- बहुत गलत कर रहा है तू?

रवि:- Haan...Galat कर रहा हूँ mai...Lekin वजह भी ये hai...Isne hi मुझे मजबूर किया है.

अजय:- क्या किया इसने?

रवि:- क्या नहीं किया? मुझसे मेरा फर छीन लिया? मई निशा से प्यार करता tha...Love ात फर्स्ट सिघ्त था mera...Lekin isne...Bahut hi घटिया ट्रिक उसे कर के निशा को पता लिया.

अजय:- इसने पता लिया? अबे बेवकूफ gadhe...Ye दोनों एक दूसरे से प्यार करते hai...Tu hi है जो बिन बुलाये बाराती की तरह दोनों के बिच आ रहा है.

रवि:- है मैं आ रहा hu..Dono के बिच नहीं दोनों को अलग karne...Kyuki मई निशा से प्यार करता hu...Saccha pyar...Ye इंसान (अतुल) कितना घटिया है सिर्फ मई hi जानता हु.

अजय:- साले दिमाग से पैदल hi रहेगा तू.

रवि:- क्या...

रवि ये कहते कहते रुक gaya...Achanak से वह एकदम से 10 बाइक आ जाते hai...Aur उसमे से 20 लोग उतारते hai...Kuch के हाथ में बट्स था तो कुछ के में चाक़ू.

रवि:- Yeh...Yeh सब क्या है?

अजय:- तेरे औकात और सोच से बाहर की चीज.

अभिशेख:- मुझे तो यह इनके आदमी लग रहे है.

अभिशेख डरते हुए bola...Unka सोच से सच में बाहर की चीज था ye...Kaha अतुल को मिडिल क्लास सोच रहे थे और कहा ये 20 लोग उसके साथ में.

रवि:- कैसे बुलाया तुम लोगो ने इन्हे?

अजय:- बाए हाथ का खेल hai...Jab मई क्लास के फर्स्ट बेंच में बैठ कर टीचर से नजर चुरा कर गफ से चाट कर सकता हूँ तोह इन्हे मश्ग करना कौनसी बड़ी बात है.

अब्ब रवि और अभिशेख की हालत ख़राब हो जाता hai...Sath में ऊके गुंडों का भी जो अजय के दोस्तों से घिरा हुआ था.

अजय:- Comedian...Yahi था न मेरा aukaat...Abb पता चलेगा तुझे मई कौन हूँ.

तभी इस लिए मार खा रहा था क्यों की 15 मिनट तक तुम लोगो को डाइवर्ट कर रहा tha...Warna तुझ M*******d में इतना दम नहीं की मुझ से पन्गा ले.

रवि:- Ajay...Jubaan संभाल कर.

अजय:- चुप Bs*k...Baap को बोलना सिखाएगा.

एक जोरदार थप्पड़ रवि के गाल पर लगा कर अजय ने कहा.

अब्ब रवि एक दम से चुप हो जायेगा.

अजय:- तेरा यह हाल बहुत पहले कर चूका होता बस अतुल ने रोक रखा tha...Lekin तू आज अतुल को hi...

अजय:- सुन saale...Jo तू आज ये कर रहा है naa...Wo मैं बहुत पहले करके छोड़ चूका हु....10 तह में आते आते सिगरेट, दारु और गाली देने का ऐसा लत लग चूका था की पूछ hi mat...Din भर धुँआ उड़ाते रहता और टल्ली रहता था.

और कभी कभी तुझ जैसे नमूने के साथ ऐसे hi रोड में गंगफिघ्ट.

मेरे पापा अगर किसी बात से डरते थे तोह सिर्फ मेरे फ्यूचर से.

वो तोह 11तह में अतुल से मुलाकात हुआ हॉस्टल में और ऐसी काम बहुत हद्द तक छोड़ दिया इसके सांगत me...Aur तेरी वजह से मुझे पहले वाला अजय बनना पड़ा जो कही मर गया था.

अजय ने काफी गुस्से में kaha...Aur ये सुनते hi रवि और अभिशेख की बाकी हिम्मत भी जवाब दे गया.

बस एक अफ़सोस भी tha..Atul के बारे में तोह सब पता कर लिया लेकिन अजय?

अजय:- आज तूने जो kiya...Infact मौका मिलते hi अतुल के खिलाफ जो करता है उससे तुझ पर भरोषा नहीं कर sakta...Agar अतुल को कभी कोई खरोच भी आया और मेरा शक तुझ पर गया तोह सोच लेना तेरा क्या होगा.

फिर अजय दोनों को देखता hai...Dono का चिह्रा नीला पद गया था.

अजय:- (हँसते हुए) अब्ब सोच रहा hoga...Mujhe रास्ते से हटाने ki...Jyada तारीफ़ नहीं करूँगा खुद ka...Bas इतना याद रख ले.

ी ऍम अजय Singh...Son ऑफ़ डॉ. रंजीत सिंह.

उम्मीद है समझ गया होगा तू.

अब्ब बाकी रखा hi क्या tha...Ravi अब्ब अजय से आँखे तक नहीं मिला पा रहा था.

अजय:- जिस बाप के नाम और पैसा पर तुझे इतना घमंड hai...Agar मई अपने पापा से एक बार कहु तोह तेरे पापा को मेरा घर का टॉयलेट क्लीनर तक बना सकते hai...Yeh है तेरा औकात.

फिर अजय अतुल को तरफ देख कर.

अजय:- सोचा था कभी अपने पापा का नाम और पहचान से अपना काम नहीं nikalwaunga...Sirf अपना खुद का आइडेंटिटी से पढूंगा, काम karunga...Lekin ऐसे चूतिये मिल जाते है की मजबूरन ऐसा करना पड़ता है.

अतुल भी अब्ब आके एक पंच रवि के फेस पर मारता है.

अतुल:- (तो अजय) भाई बहुत गुस्से में hoon...Kuch भी कर सकता हु और कुछ भी गलत कर सकता hoon...Bas इसको (रवि) औकात पर ले aa...Aaj के बाद कभी ये हिम्मत ना करे अपना साजिश करने का.

अगर ज्यादा उड़ने लगे तो पंख काट de...Jyada मर्द बने तो नपुंशक बना de...Lekin इसको औकात पर ले आ.

और साथ में इस शकुनि (अभिशेख) का भी!!!

फिर इतना कह कर अतुल वह से निकल गया.

थ्री डेज लेटर ात कॉलेज.

क्लास के फर्स्ट लेक्चर में जब सभी ने रवि और अभिशेख का हालत देखा तोह हैरान हो गए.

दोनों के चेहरे पर कई जगह टेप लगा tha...Ravi का एक हाथ और अभिशेख का एक टांग टूटा हुआ था.

दोनों ने बाइक एक्सीडेंट कह कर ये बात ताल diya...Ek तोह अजय का दर और दूसरा अपना बेइज़्ज़ती का dar...Sach बोलने की ताक़त किसी में नहीं था.

रवि और अतुल का जब आँखें मिला तोह कुछ देर तक रवि की आँखों में गुस्सा और नफरत था लेकिन अगले hi पल वो आँखें निचे कर वह से चला gaya...Abb वो हिम्मत भी नहीं रहा.

जब निशा को ये सब अजीब लगा तोह उसने अतुल से ये बात पूँछ liya...Atul ने भी सब कुछ बता दिया.

निशा:- इतनी बुरी तरह से मरना जरुरी था?

अतुल:- Haan...Laato के भूत बातो से नहीं maante...Kitna मौका दिया था उससे सुधरने ka...Lekin वो तोह कुतरे का पूँछ है.

साला कैंसर की तरह hai...Agar थोड़ा लेट हो जाता तोह फिर से हमारे प्यार को खोकला करने की कोशिश में लग jaata...Accha है इससे उखाड़ फेंको.

प्रेजेंट

ये सोचते hi अतुल मुस्कुराने लगा.

अतुल:- (इन हिज मंद) लेकिन जब अपने hi अपनों के खिलाफ हो जाए और साजिश में लग जाए तोह?

[Note:- Next week after a week and pending replies soon.]
 
फ्रेंड्स "एक भूल" को फिर से स्टार्ट किया है नई थ्रेड pe...Ek भूल 2 स्टार्ट करने से पहले एक भूल को फिर से पिस्ट करने की सोचा hai...Wo इस टॉपिक का फर्स्ट स्टोरी है इस लिए.

और एक भूल की वजह से कसम की उपदटेस में डिले नहीं hoga...Ek भूल कम्पलीट है और बस अपडेट को कॉपी पेस्ट करना hai...Kasam का उपदटेस रेगुलरली पोस्ट होता रहेगा 2, 3 डेज में.

उम्मीद है नई रीडर्स को पसंद आएगा और पुराने रीडर्स जो पहले hi पढ़ चुके है वो चाहे तोह फिर से पढ़ सकते है.

ये रहा लिंक.
 
अपडेट 109

डॉ. Atul...Dr. अतुल

अबे क्या डॉ. डॉ. लगा रखा hai...Naam से बुला usko...Atul.

आवाज इतना तेज था की इस बार अतुल को भी सुनाई दिया.

नींद से उठ कर आँखें मलते हुए उसने घडी पर एक नजर ghumaya...Subah का 7:00 ऍम बज रहा था.

अतुल:- अब्ब क्या मुशीबत आ गया?

खुद से hi बड़बड़ाते हुए वो निचे हॉल में चला gaya...Aawaj भी पहचाना हुआ नहीं लग रहा था.

जब निचे का नजारा देखा तोह गुस्से का कोई हद्द नहीं रहा.

उसके सभी घर वाले हैरानी में सर झुकाये खड़े थे वही दूसरी तरफ प्रीती के बाप और भाई जो मन में आये वही बोले जा रहे thhe...Preeti थी जो एक कोने में मुंह निचे करके रू रही थी जैसे ना जाने उस पर क्या जुल्म हुआ है.

और सबसे गुस्से की vajah...Police...Police का ऐसे घर में घुस आना और चीखना चिल्लाना.

यह सब क्या है?

अतुल काफी गुस्से में बोलै.

इधर aa...Abhi बताता हुआ क्या हुआ है?

एक इंस्पेक्टर बोलै.

अतुल:- जरा तमीज से.

अतुल भी उसके पास आ कर आँख में आँख मिला कर बोलै.

इंस्पेक्टर:- तमीज तोह मई तुझे जेल में सिखाऊंगा.

अतुल:- जेल !!!!

इस बार अतुल की आवाज में गुस्सा की जगह हैरानी था.

इंस्पेक्टर:- Yes...You अरे अंडर अरेस्ट !!! अब्ब जो भी सफाई देना हो वो जेल में hi चल कर देना.

अतुल:- फॉर व्हाट चार्ज?

एक दम से अतुल गुस्सा हो गया.

प. डैड:- बात में वक्त क्यों बर्बाद कर रहे है? जल्दी अरेस्ट कीजिये isse...Aise लोगो की वजह से hi आज कल लड़कियां सेफ नहीं है.

बस प्रीती की पापा का इतना hi कहना था की अतुल सब समझ gaya...Unki बात और प्रीती का वो overacting...Sab क्लियर हो गया.

इंस्पेक्टर हथकड़ी अतुल के हाथ में लगाने hi वाला था की अतुल उसको दूर धकेल देता है.

इंस्पेक्टर:- (गुस्से से) पुलिस वाले पर हाथ उठाता है.

अतुल:- (उससे भी जोर से) कॉमन सिटीजन को बिना किसी गुनाह पर परेशां करता है.

मई ी के इन?

अतुल:- (बिना गेट की तरफ देखे) वाह क्या टाइमिंग है?

आवाज से hi अतुल अजय को पहचान गया.

और साथ hi प्रीती के पुरे खानदान का हालत भीगी बिल्ली की तरह हो गया tha...Wo तो सोच रहे थे अतुल का कांटेक्ट अजय से हमेशा के लिए ख़त्म हो गया है.

अजय:- यह सब क्या चल रहा है?

सामने का नजारा देख अजय का गुस्सा का भी कोई सीमा नहीं रहा.

अतुल:- कुछ खास nahi...A क्लासिकल एक्साम्प्ले ऑफ़ मिसयूज ऑफ़ power...Ye साले सोच रहे hain...Mujhe एक बकवास सी केस में फसा देंगे.

अजय:- हुआ क्या है? साफ़ साफ़ बोल.

अतुल:- यह जो मैडम रू रही hai...Yaa फिर यूँ कहे ओवरएक्टिंग कर रही hai...Unki शिकायत है की मैंने उनकी मोलेस्टेशन किया है?

अजय:- क्या? Wtf?

अतुल:- यही बात है.

अजय:- (प्रीती की तरफ देख) Molestation...Atul तुझ पर थूकना भी पसंद नहीं karega...Aur तू मोलेस्टेशन की बात कर रही है.

इतना कह कर अजय हसने लगता hai...Yaa फिर सबके सामने उसकी मजाक उड़ा रहा था.

इंस्पेक्टर:- कौन है तू? और यह सब क्या चल रहा है.

फिर वो इंस्पेक्टर अतुल की तरफ बढ़ता है हथकड़ी ले कर.

अजय:- ऐ Inspector...Apni लिमिट में reh...Sabut क्या है तेरे पास?

इंस्पेक्टर:- मुझे साबुत की कोई जरुरत नहीं है.

अजय:- चुप चाप यहाँ से निकल le...Warna...

इतना कह कर अजय रुक गया.

इंस्पेक्टर:- वर्ण क्या?

अजय:- वर्ण suspend...Nahi nahi...Suspend तोह बहुत छोटी बात hai...Naukri से हाथ धो बैठेगा.

अजय की बात और कॉन्फिडेंस देख इंस्पेक्टर भी एक पल के लिए दर gaya...Lekin अगले hi पल.

इंस्पेक्टर:- हो कौन तुम?

अजय:- Ajay...Dr. अजय सिंह.

इतना काफी tha...Inspector का चेहरा पल भर में लाल हो गया.

इंस्पेक्टर:- सॉरी सर.

अतुल:- वाह क्या बात hai...Bahut तर्रकी कर लिया तूने toh...Pehle डॉ. रंजीत सिंह के नाम से काम चलता tha...Abb...Abb डॉ. अजय सिंह.

क्या बात है.

अजय:- पोलिटिकल बैकग्राउंड का यही तोह फायदा hai...Doctor + पॉलिटिशियन.

अतुल:- ये बेवकूफ लोग सोच रहे थे मुझे अपना पावर दिखा कर अपनी बात मन लेंगे.

लेकिन कौन समझाए इनको सामने वाला डॉक्टर है.

इतनी आसानी से फसा लेंगे mujhe...Agar डॉक्टर ट्रीटमेंट करते वक्त पेशेंट का डेथ भी हो जाए तोह भी डॉक्टर बच सकता hai...Bas इंटेंशन सही होना चाहिए.

और ये इतनी छोटी सी केस ले कर आये थे मुझे अरेस्ट karne...Thoda बहुत मेडिकल लॉज़ मैंने भी पढ़ा hai...Doctor को एथिक्स और लॉ को कैसे बैलेंस करना पड़ता है.

अगर रपे हो तोह सीमेन टेस्ट पॉजिटिव होना पड़ता hai...Molestation होता तोह कोई स्ट्रांग प्रूफ या फिर fingerprints...Lekin ये लोग सोचते है ओवरएक्टिंग और इमोशंस से कोर्ट में मुझे फसाएँगे.

पूरा खानदान hi मंदबुद्धि है.

अजय:- तोह अब्ब क्या सोचा है?

अतुल:- सर्जन Ajay...Tujhse एक सवाल hai...Agar तेरे बॉडी में टूमओर (कैंसर सेल) hai...Aur वो मेटास्टेसिस (स्प्रेड) होने वाला है? तो तू क्या करेगा?

अजय:- निकल फेकूंगा उस टूमओर को.

जवाब सुन अतुल हसने laga...Ajay भी उसकी बात समझ गया.

अजय:- मतलब इनको भी उखड फेंकना है.

भीगी बिल्ली तोह वो पहले hi बन चुके thhe...Abb हालत ऐसा हो गया था की काटो तोह खून नहीं.

अतुल:- समझदार हो गया.

रिया:- ये सब क्या है?

गौरव:- ठीक hi तोह चल रहा है.

रिया:- मेरे घर वालों की इतनी beijjati...Mai अब्ब इस घर में एक पल नहीं रह सकती.

गौरव:- अभी जा सकती हो.

गौरव की इस बात पर रिया हैरानी से उसको देखने lagi...Aaj तक ब्लैकमेल करने का जो जरिया था उसका आज ये जवाब?

गौरव:- बस बहुत hua...Tumse प्यार करता था इसका मतलब हर बातें आँख बंद कर मान लेना नहीं hai...Aur अब्ब सच में तंग आ चूका हु tumse...Main तोह यही चाहता हु की तुम सच में चली जाओ.

और जब जाओगी उस दिन मई समझ जाऊँगा अब्ब तुम्हे मेरे साथ रहना नहीं hai...Main डाइवोर्स फाइल भी भेज दूंगा.

आरव की टेंशन मत lo...Usse पालने के लिए मई काफी hoon...Aur अगर पाल नहीं पाया तोह उसके लिए दूसरी माँ ले aaunga...Jo तुमसे तोह कई गुना अच्छी होगी.

गौरव की ये बात तोह रिया सपने में भी सोच नहीं सकती thi...Abb कहने सुनने के लिए कुछ बाकि नहीं tha...Wo बस हैरानी से गौरव को देख रही थी.

प्रीती की फॅमिली का भी अब्ब बाकि बची कुछ उम्मीद भी ख़त्म हो gaya...Wo मुंह छुपा कर भागने hi वाले थे की.

अजय:- तू इन्हे उखड फेंकने की बात कर रहा था? कोई केस है?

अतुल:- नहीं है.

अजय:- फिर.

अतुल:- तू किस दिन काम आएगा?

अजय:- मतलब फेक केस और प्रूफ्स.

अतुल:- हाँ.

अजय:- ये तू कह रहा है?

अतुल:- एक कहावत है "तित फॉर Tat"...Aur मुझे वो बहुत पसंद hai...Aise लोगों के साथ यही करना पड़ता hai...Tab जाके इनका अकाल जो घुटनो में हैं वो सही जगह पर आ जाएगा.

गलती ना करना अच्छी बात है लेकिन गलती सहना बहुत galat...Aur अब्ब मई और नहीं सेह सकता.

अजय:- बहुत जल्द इंतजाम करता हूँ.

प्रीती की पूरी फॅमिली अब्ब वह से सर झुकाये जाने लगे और अब्ब अपने बचाव के लिए उपरवाले से दुआ मांगने lage...Kyuki अतुल के सामने उनका कुछ चलने वाला तोह था नहीं.

अतुल:- प्रीती.

प्रीती मूड कर अतुल को देखती है.

अतुल:- आज तक तुम्हारे लिए थोड़ा बुरा तोह लगता था ये सोच कर की तुम मुझसे प्यार करती ho...Lekin abb...Abb तुम्हारे साथ कुछ भी हो जाए मुझे परवाह nahi...Now गेट लॉस्ट.

प्रीती बिना कुछ कहे वह से चली गयी.

अजय:- आप लोगो को अलग से इनविटेशन देना पड़ेगा क्या?

पुलिस की तरफ देख कर अजय ने कहा.

अतुल:- और इस इंस्पेक्टर के खिलाफ bhi...Ye बेवकूफ सोच रहा था पावर का गलत इस्तेमाल करके मुझे fasayega...Abb तू अपना पावर का गलत इस्तेमाल करके इस्को fasayega...Tab इसको पता chalega...Bina गुनाह का सजा कैसे महसूस होता है.

इंस्पेक्टर कुछ देर के लिए तोह गिड़गिड़ाते रहा लेकिन अतुल आज उसकी बात सुनने की मूड में नहीं था.

अजय:- (बाकी के पुलिसवालो से) आप लोगो का काम है कानून का पालन करना और दूसरों से भी karwaana...Taaki लोगो का कानून और न्याय पर भरोषा rahe...Lekin आप भी इस बिकी हुए इंस्पेक्टर का साथ दे रहे है.

हम तोह कानून का बहुत इज़्ज़त करते हैं और करते रहना चाहते hain...Lekin बिच में आ जाते है ऐसे लोग की हमें भी अपना पावर का गलत इस्तेमाल करना पड़ता hai...Galat है लेकिन करना पड़ता है.

आप लोग तोह कानून के रखवाले hain...Pehla कदम आप को hi उठाना padega...Fir बाकी के लोग भी karenge...Aur अगर ना करे तोह उनका अकाल ठिकाने पर लाइए.

उम्मीद है आप आगे से इसकी (इंस्पेक्टर) की तरह बिकेंगे नहीं.

पुलिस वाले सर हिला कर वह से चले गए.

अतुल:- अच्छा तोह बता यहाँ आने का वजह?

अजय:- (बुरा सा मुंह बना कर) क्या मैं हमेशा काम के वक्त hi आता हु?

अतुल:- आज तक तोह ऐसा hi करते आता है.

अजय:- लेकिन आज तुझसे मिलने आया hoon...Aur साथ में रात के लिए इनविटेशन dene...Aaj राज (Ajay's सोन) का बर्थडे है!!!

अतुल:- जरूर.

अतुल कुछ देर से नोटिस कर रहा था की अजय श्रेया को देख रहा hai...Shayad पेहचाने की कोशिश कर रहा था.

अतुल अजय को श्रेया के पास इ जा कर.

अतुल:- Ajay...Ye है मेरी दोस्त Shreya...Aur Shreya...Ye है मेरा बेस्टेस्ट फ्रेंड Ajay...Thoda बेवकूफ है अकाल से अँधा है पर है बहुत hi ख़ास दोस्त.

श्रेया:- बहुत सूना है आपके बारे me...Lekin जितना सुना था उससे भी अच्छा पर्सनालिटी है आपका.

श्रेया ने हाथ आगे बढ़ाते हुए कहा.

हाथ मिलाने के बाद.

अजय:- वो तोह होगा hi...Atul ने तारीफ़ किया है मतलब कुछ बुराई hi किया hoga...Aur यकीं मानिये इतना बुरा भी नहीं हु.
 
थैंक यू भाई फॉर योर words...Ek भूल में आपका स्वागत hai...Main भी जल्द आपका कहानी पढ़ने वाला hu...Iss लिए नहीं की आप मेरा मेरा कहानी पढ़ते hain...Aapka रेविएवस और सोच अच्छा लगता hai...Issi विश्वास से की आपका राइटिंग भी काफी अच्छा hoga...Bas स्टडी और बाकी चीज में थोड़ा बिजी tha...Jald आऊंगा आपकी कहानी मोक्ष में.
 
अपडेट 110

अजय फिर जाके अतुल की माँ और पापा के पेअर छू कर आशिर्बाद लेता hai...Papa के पेअर छूटे वक्त थोड़ा हिचकिया भी लेकिन फिर भी अपने से बड़ा सोच कर पेअर छू लिया.

गौरव की तरफ देखा तक nahi...Atul के साथ क्या हुआ था इस बात से वो बिलकुल भी अनजान नहीं था.

ा. माँ:- आज कल आते hi नहीं हो बीटा? ऐसी भी क्या नाराजगी?

अजय:- कैसे aau...Jab भी आने की सोचता हु अतुल की याद आ जाता hai...Aur वो सब kuch...Himmat hi नहीं होता.

अजय की एक hi बात में सभी सवालों का जवाब था.

ा. माँ:- फिर भी कभी कभी आते rehna...Accha लगेगा.

अजय:- मैं तोह कभी भी आ jaaunga...Bas अतुल हमेशा के लिए वापस आ जाए.

अतुल:- एंड थिस इस बोथ थेओरेटिकल्ल्य एंड प्रक्टिकली इम्पॉसिबल.

इस जवाब से वह मौजूद सभी लोगों को झटका laga...Khaas कर माँ और दी.

निधि:- यह क्या बोल रहा है तू?

अतुल:- दी यह आप भी जानती hain...Aur सच कहु तोह मेरा यहाँ रहने का बिलकुल भी मन नहीं hai...Har पल दम घुटता hai...Sirf आप दोनों के लिए आया था.

निधि:- पर...

अतुल:- प्लीज di...Force मत kijiye...Waise भी बहुत परेशां hun...Aur ये जबरदस्ती पता नहीं कही...

अतुल कहते कहते रुक गया.

अतुल:- कुछ दिनों के लिए आप दोनों के पास आया था ताकि आप सब को अच्छा लगे.

अतुल के चुप होने के बाद सभी के चेहरा लटक gaya...(Except रिया)

अतुल:- लेकिन आप कभी भी बुला लीजिये अगर जरुरत पड़े या फिर मिलने का मन ho...Kabhi भी आ jaaunga...Lekin रुकने के लिए मत कहिये!!

ऐसे हालत में अतुल की यह बात भी काम नहीं tha...Jaha वो 5 सालो में एक बार भी नहीं आया tha...Abb वो बुलाने पर आने के लिए राजी हो गया tha...Thodi सी ख़ुशी आखिर माँ और दी के चेहरे पर दिखा.

आफ्टर सोमेटिमे.

अजय:- अच्छा तोह Atul...Raat को आ jaana...Aur श्रेया जी आप भी आइए ना.

श्रेया:- Sorry...Mai...Nahi.

अजय हैरानी से श्रेया को देखता हैं.

अतुल:- वो अनजान जगह और बड़े पार्टीज में ज्यादा नहीं जाती.

फिर अजय अतुल को हैरानी से देखता है.

अतुल:- इसमें हैरानी की क्या बात hai...Main भी बड़े पार्टीज में नहीं jaata...Ye पार्टी तेरी तरफ से है बस इसी लिए आ रहा हूँ.

ात नाईट दूरिंग पार्टी.

पार्टी ख़त्म करने के बाद.

अजय:- ये क्या yaar...Tune तोह बिलकुल भी एन्जॉय नहीं किया.

अतुल:- तू एक्सपेक्ट कर भी कैसे सकता hai...Bas अटेंडेंस के लिए आया tha...Taaki तुझे अच्छा लगे और कुछ बातें भी करना tha...Pata नहीं फिर कब मुलाक़ात हो.

अजय:- अभी तक?

अतुल:- तेरा मतलब निशा से रिलेटेड है?

अजय:- हाँ.

अतुल ने कुछ जवाब नहीं दिया.

अजय:- आखिर कब तक? कब तक इन् यादों के सहारे ग़म की दुनिया में jiyega...Kyu अपने जिंदगी के सबसे दर्दनाक पल को भुला नहीं देता? कभी भुला कर तोह देख जिंदगी बहुत खूबसूरत है?

अतुल:- जिंदगी के जिस पल को तू दर्दनाक कहता है वो मेरे लिए सबसे हसीं पल hai...Aur गलत सवाल पूछ लिया तूने!!! उससे भूल जाओ !!! इससे बेहतर ये पूछता की तू सांस लेना कब भूलेगा? तेरा दिल धड़कना कब बंद करेगा? वो तोह मेरी सांस, धड़कन और यादों में रहती hai...Aur हमेशा रहेगी.

मौत कभी भी आ जाए यह पॉसिबल है लेकिन उसको भुलाने की तोह सवाल hi पैदा नहीं होता.

अजय:- इतना प्यार?

अतुल:- तू भी जानता है.

फिर एक लम्बी सी खामोशी छा जाता है दोनों के bich...Ajay बस अतुल को देख रहा tha...Atul को देख उससे बहुत बुरा लग रहा था लेकिन उसके लिए कुछ कर नहीं पा रहा था इस बात से उससे खुद पर hi गुस्सा आ रहा था.

अजय:- अच्छा ये बता श्रेया कैसी है?

अतुल:- अच्छी hai...Lekin क्यों?

अजय:- मेरा मतलब तुम दोनों की दोस्ती?

अतुल:- बहुत अच्छी दोस्ती है.

अजय:- सिर्फ दोस्ती.

अतुल:- अब्ब सच में गुस्सा आ रहा hai...Tu बार बार बात को वही ले जा रहा है घुमा kar...Keh दिया ना मैं निशा से आगे कभी कुछ सोचूंगा नहीं.

हाँ श्रेया बहुत अच्छी दोस्त hai...Mushkil वक्त में साथ दिया है एक दोस्त की रूप mein...Kabhi मौका मिले तोह मई भी दोस्ती निभाउंगा.

लेकिन तू और तेरी soch...Dosti को भी प्यार का नाम दे रहा tha...Aisi दोस्ती तोह मेरा अंजलि से भी था? फिर तेरे हिसाब से?

अतुल कहते कहते रुक gaya...Gussa इस बार उसके चेहरे में साफ़ झलक रहा था.

अजय:- सॉरी yaar...Main तोह बस तुझे इस ग़म से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा था.

अतुल:- और यह तू भी जानता है की तू कर नहीं paayega...Kyun को मई खुद hi इस ग़म से निकलना नहीं चाहता.

हाँ थोड़ा सुधर जरूर आया hai...Andhera से बाहर निकल कर लोगों के साथ थोड़ा घुल मिला रहा hun...Lekin तुम लोगो की ऐसी hi बातें?

फिर अतुल वह से जाने laga...Kuch दूर आगे जा कर.

अतुल:- मेरा हाल उस क्रोनिक पेशेंट की तरह hain...Jo पूरी तरह से ठीक कभी नहीं हो सकता लेकिन किसी तरह जी रहा है.

जिस अतुल को तू जानता हैं वो तोह उसी पल मर गया था जब वो निशा से जुड़ा हो gaya...Lekin अभी भी रिस्पांसिबिलिटी नाम की क़र्ज़ चुकाने के लिए वो जिन्दा है.

फिर अतुल वह से चला gaya...Ajay के पास अब्ब सिर्फ एक hi रास्ता tha...Duaa ka...Aisa दुआ जो शायद असंभव tha...Atul और निशा का फिर से मिलना.

दूसरी तरफ

बहुत तेज दौड़ते लड़खड़ाते डॉ. समीर अपने घर पहुँच hi गए.

माँ पापा चिल्ला कर वो घर के अंदर घुसा.

लेकिन रूम में पहुँचने पर उससे सुकून mila...Uske माँ और पापा सही सलामत थे.

और तभी उसका नजर पड़ा निशा पे.

निशा फिर बाहर आ gayi...Sameer कुछ देर अपने माँ और पापा से बात करने के बाद फिर बाहर आ गया.

निशा:- आप को तोह कोई फ़िक्र hi nahi...Kabhi भी नशे कर लो और कही पर भी पड़े रहो.

समीर बस शर्मिंदा हो कर खड़ा रहा.

निशा:- आप के घर से कॉल आया tha...Lekin आप तोह थे nahi...Neha ने मुझे बताया इसके बारे में तोह मैं hi आ gayi...Aapka क्या भरोषा?

समीर गुस्से में दो पंच दीवाल पर मारता है.

Sameer:-Ye nasha...Ye शराब साला ये भी मेरा सच्च दोस्त नहीं nikla...Koi भी किसी का साथ नहीं deta...Aaj जब उन्हें मेरी जरुरत था तब मैं hi नहीं था.

थैंक्स ा लोट डॉ. Nisha...Aap नहीं जानती आपने आज मेरे लिए क्या किया hai...Aapka जिंदगी भर शुक्र गुजार रहूँगा.

इतना कह कर समीर ने निशा के सामने हाथ जोड़ दिए.

निशा:- आप बस एक सवाल का जवाब dijiye...Itne नशा क्यों करते हैं आप?

समीर:- हैं एक कहानी.

दुःख भरी आवाज में समीर ने जवाब दिया.
 
सॉरी फ्रेंड्स आज भी अपडेट पोस्ट नहीं कर paaunga...Achanak से तबियत ख़राब हो गया hai...Jyada सीरियस नहीं है बूत कुछ लिखने का मन नहीं कर रहा hai...Aur ऊपर से कल 10 हॉर्स का सफर है कॉलेज जाने के liye...Abhi स्पोर्ट्स वीक में घर गया था 1 वीक के liye...Kal के लिए एक अच्छी रेस्ट की जरुरत है.

प्लीज 1-2 दिन और एडजस्ट कर lijiye...Sorry फॉर थिस न्यूज़.
 
अपडेट 111

अब्ब महसूस कर रहा हूँ ज्यादा सख्त होना भी ठीक नहीं.

कुछ सोचते हुए डॉ. राहुल बोले.

अतुल:- नहीं sir...Aap जैसे थे बिलकुल सही thhe...Waisa hi होना tha...Agar किसी को पसंद नहीं आये तोह आप की गलती थोड़ी hai...Nisha की अपनी सोच hogi...Lekin आप भी गलत नहीं थे.

डॉ. राहुल:- लेकिन इसमें भी क्या अच्छाई की किसी के लिए बुरा बन जाओ?

अतुल:- सर आप hi कहते थे nah...Overthinking ज्यादा नहीं करना चाहिए.

मेरे लिए आप हमेशा इंस्पिरेशन थे और rahenge...Aap की बातें चाहे वो आपका मार्ग दर्शन हो या gussa...Sabhi ने मुझर डायरेक्टली और इंदिरेक्ट्ली हेल्प किया hai...Bahut कुछ सीखा है आपसे जिंदगी के बारे में पढ़ाई के अलावा भी.

मैं अपने कई ऐसे दोस्तों को जानता हूँ जो आपको पसंद नहीं करते thhe...Lekin आपने एक लेक्चरर का काम अच्छे से किया hai...Wo भले hi आपको पसंद करे या न करे क्या फर्क पड़ता hai...Aapne तोह अपना कर्र्तव्य हमेशा निभाया hai...Unko उनकी लक्ष्य हासिल करने में मद्दत किया hai...Aapko इस बात में गर्व होना चाहिए सर.

निशा से तोह बहुत प्यार करता हूँ और उसकी बहुत साड़ी बातें बहुत अच्छी लगती hai...Lekin ये बात nahi...Lekin उसकी भी कोई सोच होगी इसी लिए उसको इस बात पर कभी समझाने की कोशिश नहीं किया.

अतुल ने कप उठाकर एक घूँट चाय पी कर kaha...Aaj पहली बार वो डॉ. राहुल के घर आया tha...Unko अपनी जिंदगी में खुश देख काफी खुश tha...Apni पत्नी और दो छोटे बच्चों के साथ वो अपनी जिंदगी में काफी खुश thhe...Bas था कुछ पुरानी यादें जो उन्हें परेशान कर रहा था.

उधर राहुल सर भी अपनी hi सोच में गुम्म thhe..."Kaise एक दिन सर्जरी की क्लास में अतुल और निशा को उनकी laaparwahi/masti के बिच बुरी तरह से दांत दिया tha...Patients और अपने दोस्तों के बिच ये बातें निशा को एक अपमान सा laga...Aur उसी दिन की गुस्सा या फिर नाराजगी एक ऐसा जख्म बन गया की जिस दिन डॉ. राहुल ने निशा की पापा का इलाज किया उस दिन भी निशा ने उनसे अच्छे से बात नहीं kiya...Aaj भी वो नाराज थी.

यही वजह था जो वो सोच रहे थे ज्यादा सख्त होना भी सही नहीं."

डॉ. राहुल:- अच्छा मौका था yaar...Uss दिन निशा की बारे में कुछ बातें पता चलता तो तुझे बता deta...Lekin वो तोह जैसे मुझे देखना चाहती hi नहीं.

अतुल:- अब्ब पता करके भी क्या faaidaa...Uski शादी हो चुकी hai...Aur शायद अपनी जिंदगी में खुश भी है.

डॉ. राहुल:- क्या सच में उसकी शादी हो गयी?

राहुल सर शायद अभी भी इससे मानना नहीं चाहते thhe...Wo अभी भी जवाब ना में सुन्ना चाहते थे.

अतुल:- यस सर.

डॉ. राहुल:- और तुझे कैसे पता वो खुश है?

अतुल:- ऐसा लगता hai...Yaa फिर मई यही चाहता हूँ की वो जिंदगी में खुश रहे.

डॉ. राहुल:- और बता? क्या चल रहा है बाकी?

राहुल सर अब्ब बात को बदलना चाहते thhe...Shayad वो अतुल को और दुखी नहीं देखना चाहते थे.

अतुल:- वही sir...Jo डॉक्टर्स की होती hai...Apne टाइम में duty...Aur कभी वक्त मिले तोह गांव में हेल्थ रिलेटेड कुछ प्रोग्राम जैसे सफाई, बिमारी बारे लोगों को जागरूक करना और स्वस्थ (हेअल्थी) जीवन जीने के लिए प्रेरित karna...Aur कभी कभी छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ना.

और बाकी की vakt...(Thodi देर रुक कर) सर आप जानते hi हैं.

लेकिन दर्द फिर भी अतुल की आवाज में आ hi गया.

डॉ. राहुल:- (इन हिज मंद) आज तक कभी किस्मत जैसी चीज पर भरोषा नहीं kiya...Lekin कोई इतना बदकिस्मत कैसे हो सकता है? अच्छा इम्तेहान ले रहा है ऊपरवाला.

कुछ देर वो अतुल को देखते rahe...Bahut बुरा लग रहा था उन्हें अतुल को इस हाल में देख कर.

डॉ. राहुल:- लेकिन ये मेरा स्टूडेंट hai...Vishwash है कभी ये टूटेगा nahi...Jarur उठ खड़ा hoga...Surgery जैसी मुश्किल चीज इतनी आसानी से दिख सकता हैं तोह जिंदगी जीना क्यों nahi...Dheere धीरे hi sahi...Waapas पहले जैसा हो जाएगा.

डी. राहुल को अभी भी विश्वास tha...Shayad वो अपने होनहार स्टूडेंट अतुल को अच्छे से जानते थे.

डॉ. राहुल:- एक बात कहना चाहता hun...Jaruri hai...Main अपने एक्सपीरियंस से कह रहा hun...Hamesha पॉज के लिए काम मत karna...Haan म्हणत बराबर पैसा जरूर मिलना chaahiye...Lekin कभी कोई जरुरत मंद बीमार तेरे पास आया तोह उससे सिर्फ पैसन की वजह से मन मत कर देना.

पैसा तोह मिलता रहेगा लेकिन पुण्य कमाने के ऐसे मौका बार बार नहीं मिलते हैं.

अतुल:- सर सिर्फ इतना समझ lijiye...Ye बात आपके कहने से पहले hi कर चूका हूँ और करता भी रहूँगा.

इस बात पर अतुल के साथ साथ डॉ. राहुल भी मुस्कुराने लगे.

फिर दोनों के बिच ऐसे hi बातें होती rahi...Dr. राहुल अतुल से बातें कर काफी खुश थे तो अतुल का भी उनसे बात करके दिल काफी हल्का हो चूका था.

Papa...Papa आप ठीक तोह है ना.

दौड़ती हुई श्रेया अपने पापा के रूम में pahunchi...Atul भी साथ tha...Achanak से उनकी तबियत ख़राब होने की बात सुन्न दोनों बिना देर किये वापस आ गए.

कुछ देर श्रेया अपने पापा से बातें करती रही और कुछ शिकायत भी.

स. डैड:- क्या हुआ अतुल? तब से वही खड़े ho...Kuch कहना चाहते हो?

अतुल:- कुछ नहीं मुखिया ji...Bas आप पर गुस्सा आ रहा है?

स. डैड:- गुस्सा? क्यों?

अतुल:- आप इस गांव के मुखिया hai...Bhale hi मुखिया ऑफिशियली नहीं hai...Lekin लोग आप को अपना मुखिया hi मानते hai...Kaafi इज़्ज़त करते है सब आपका.

आप सब का अच्छे से ख्याल भी रखते hai...Har बात मानते है वो aapka...Lekin आप? खुद का hi ख्याल क्यों नहीं रखते? क्यों खुद की hi बात नहीं मानते?

हजार बार समझाया है naa...Dawaai हमेशा लेते rahiye...Blood प्रेशर काफी हाई hai...Aur आप है की दवाई खाते hi नहीं?

श्रेया की पापा बस मुस्कुरा रहे थे.

स. डैड:- गलती से मिस्टेक हो गयी बीटा.

अतुल:- अब्ब मैं और क्या kahu...Aap खुद hi समझदार हैं.

स. डैड:- Accha...Abb आगे से हमेशा दवाई लेता रहूँगा.

फिर वो अपने आस पास सभी को देखते hain...Aur वो अतुल के अलावा सभी को वह से जाने को बोल देते हैं.

सभी के जाने के बाद.

वो एक लम्बी सी सांस लेते hai...Aur कहना सुरु करते hai...Unki बात ऐसी थी की अतुल भी कुछ सोच समझ नहीं पा रहा tha...Munh से कुछ शब्द निकल भी नहीं रहे थे.
 
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