Kasam - Love is not Everything (Completed) - Page 18 - SexBaba
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Kasam - Love is not Everything (Completed)

थैंक्स कीर्ति जी फॉर योर सपोर्ट एंड review...Wo सोशल मीडिया वाला आईडिया अतुल के लिए लिखा tha...Shayad उससे ऊपर के पैराग्राफ में निशा और अंजलि के बारे में लिखा था इस वजह से पढ़ते वक्त निशा से रिलेटेड हो गया hoga...Abb एडिट कर के और भी स्पेसिफिक कर दिया hai...Thank यू फॉर पॉइंटिंग आईटी आउट एंड कीप सपोर्टिंग लिखे थिस. :हैप्पी:
 
अपडेट 128

राहुल सर!!!

अतुल की मुंह से बस इतना hi निकला.

राहुल सर भी हैरानी से अतुल को देख रहे थे.

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डॉ. राहुल:- तो ये बात है? एक बार मुझसे बात कर लेता.

राहुल सर अतुल को अपने घर में लाने के बाद बोले.

अतुल:- सर आप जानते हैं निशा के बारे में.

अतुल ने उम्मीद भरी आवाज में kaha...Pyase को कुआ मिल गया ho...Kuch ऐसा hi हाल था अतुल का.

डॉ. राहुल:- हाँ.

अब्ब तो ख़ुशी का ठिकाना नहीं tha...Murjhaya चेहरा में अचानक से ख़ुशी का लहर आ गया.

अतुल:- बताइये ना sir...Jaldi.

डॉ. राहुल:- रुक आधा ghanta...Bataata हूँ.

शायद राहुल सर भी अतुल का मजा लेना चाहते थे.

अतुल:- प्लीज sir...Aur इंतजार नहीं हो रहा है.

अतुल का बेचैनी भी बढ़ता जा रहा था.

डॉ. राहुल:- आधा घंटा तो तुझे इंतजार करना hi padega...Abhi मई भी भूल चूका हूँ एड्रेस.

हॉस्पिटल जाना padega...Yaad है वो दिन जब निशा की पापा का एक्सीडेंट हुआ था और वो एडमिट हुए थे.

बस उस दिन फॉर्मेलिटी के लिए एड्रेस पूछा tha...Report में लिखा hai...Jo अभी याद नहीं.

अब्ब अतुल ने गुस्से में अपना सर pitaa...Ye बात वो सोच नहीं saka...Nisha की तलाश में उसने कितना कुछ किया tha...Lekin ये छोटी सी बात भूल गया था.

अतुल का बेचैनी इतना बढ़ गया था की वो भी सर के साथ हॉस्पिटल गया.

एड्रेस एक गांव का tha...Address पता चलने के बाद.

अतुल अपना हाथ जोड़ कर.

अतुल:- बहुत बहुत शुक्रिया sir...Sab कहते है गुरु भगवान् सामान होते hai...Aapne मुझे ज्ञान देने के साथ साथ जिंदगी की एक मकशद भी दे दिया.

आज राहुल सर के लिए अतुल के दिल में इज़्ज़त काफी बढ़ गया tha...Rahul सर को देखते हुए उसकी आँखों में एक आंसू आ गया.

लेकिन इस आंसू में एक ख़ुशी था, एक इज्जत था.

डॉ. राहुल:- विवा (प्रैक्टिकल एग्जाम, इंटरव्यू जहा टीचर क्वेश्चन पूछ कर स्टूडेंट्स को मार्क देते है) के वक्त हमेशा तुझे आल थे बेस्ट कहा hai...Aaj जिंदगी की इम्तिहान में भी आल थे best...Jaa जी ले अपनी jindagi...You डेसेर्वे आईटी.

राहुल सर ने अतुल को गले लगा कर kaha...Wo भी खुश थे आज अतुल को इतने दिनों बाद खुश देख कर.

राहुल सर से विदा ले कर अतुल अजय को एक कॉल सेण्टर से फ़ोन करके बुलाता है.

अजय:- हाँ भाई बोल.

अतुल उससे सब कुछ बता देता है.

अजय:- तो अब्ब क्या करना है?

अतुल:- ये ले 20 रस.

अजय हैरानी से अतुल को देखता है.

अतुल:- कोई बात nahi...Rakh le...Kaam आएगा ऑटो से जाने में.

इतना कह कर अतुल अजय की हाथ से बाइक की कीस छीन लेता है.

कुछ देर तो अजय अतुल को बस देखता raha...Jab समझ में आया तो वो भी अतुल के साथ हसने लगा.

आज अतुल को खुश और पुराने अंदाज में देख उससे भी बहुत अच्छा लगा.

अजय:- मई भी साथ चलता हूँ.

अतुल:- Nahi...Aaj मेरे और निशा के बिच कोई नहीं.

अजय:- अच्छा ठीक hai...Lekin कल चले jaana...Abhi रात के 10 बज रहे है.

अतुल:- आज तो वक्त भी मुझे नहीं रोक सकता.

अजय भी समझ गया की अतुल को रोकना उसके बस की नहीं है.

अजय:- Accha...Aaram से जाना.

फिर निकल पड़ता है निशा की गांव के liye...Bike की स्पीड करीब 100 km/hr tha...Jald से जल्द वो निशा के पास जाना चाहता tha...Usse आज जी भर कर देखना चाहता tha...Dil में उठ रहे हजार बातें करना tha...Ek बार फिर दिल और दिमाग से बस अपने निशु का बनना था.

करीब 5 मिनट बाद अजय का फ़ोन आया.

अजय:- धीरे जाएगा तो जरूर pahunchega...Agar तेज जाएगा तो बता नहीं sakta...Ye बात डॉ. अतुल को अतुल से कहना chaahiye...Prevention इस बेटर थान क्योर.

फिर अजय फ़ोन कट कर देता है.

अतुल:- कमीने मुझे hi मेरा डायलाग सुना रहा है.

अजय की बात अतुल को सही laga...Wo स्पीड को 100 से 60 में गिरा देता है.

और करीब 10 मिनट बाद वो पल आया जब दोनों hi 5 साल और 6 महीने इंतजार कर रहे थे.

निशा Nisha...Chillate हुए अतुल घर के अंदर ghusha...Abb उससे और रहा नहीं गया.

निशा भी ये सुनते hi दौड़ कर हॉल में आ gayi...Kaise भूल जाती इस आवाज को जिससे सुनने के लिए उसके कान तरस गए थे.

दोनों hi एक दूसरे के आमने सामने आ गए thhe...Kya पल था वो?

दोनों बस एक दूसरे को hi देख रहे thhe...Dil का धड़कन काफी तेज हो गया tha...Dil में पूरा प्यार भर aaya...Aankhein...Aankho को तो एक सुकून मिल गया tha...Itna सुकून की वो बर्दास्त के बाहर हो गया tha...Dhire धीरे दोनों की आँखें भींग गए.

बस दोनों पूरी दुनिया भुला कर एक दूसरे में खो गए thhe...Kisi से उन्हें कोई लेना देना नहीं tha...Naa hi गेट खोलने वाले निशा के पापा से और ना hi अतुल की आवाज से हॉल में आयी निशा की माँ से.

बस दोनों एक दूसरे में hi खोये थे जैसे 5 साल की आँख और दिल का प्यास अभी मिटा लेना चाहते थे.

पापा मई ये शादी नहीं करुँगी?

थोड़स विरोध और गुस्से में निशा बोली.

न. डैड:- लेकिन क्यों?

निशा:- मुझे रवि बिलकुल भी पसंद नहीं hai...Infact मई शादी hi नहीं करना चाहती कभी भी.

निशा की पापा बस निशा को देखे जा रहे थे हैरानी से.

निशा:- मैंने आपकी बात को maana...Aapki इज्जत रखा की अतुल के साथ भागने की सोचा भी nahi...Aur कभी आपसे विरोध भी नहीं किया इस रिश्ते को ठुकराने के liye...Aap अपनी जगह सही thhe...Aur आज मई अपनी जगह सही हूँ.

न. डैड:- लेकिन ऐसे कैसे चलेगा?

निशा:- अब्ब आप जबरदस्ती करेंगे तो मई कुछ नहीं kahungi...Abb आप पर देपेंद करता है की आप अपनी बेटी की बात मानेंगे या फिर एक ईगोइस्ट पापा की तरह अपने ईगो पूरा करने के लिए जबरदस्ती मेरी शादी करवाएंगे.

न. डैड:- Nahi...Koi जबरदस्ती नहीं karunga...Teri मर्जी से hi सब कुछ hoga...Bas मई तेरे ख़ुशी के लिए....

निशा:- कैसी ख़ुशी? वो ख़ुशी जो शादी करने के बाद मई पूरी तरह से मर jaau...Wo ख़ुशी?

निशा की पापा को अब्ब कुछ समझ में नहीं आ रहा था.

निशा:- मर तो उसी दिन गयी थी जब अतुल से अलग हो gayi...Aur आज अतुल सब कुछ छोड़ कर चला गया hai...Abb और सहने की हिम्मत नहीं है मुझमे.

आपका मान rakha...Aapko अतुल का परिवार सही नहीं लगा और शादी के लिए मन कर diya...Maine कुछ नहीं kaha...Pata नहीं मैंने सही किया या गलत.

लेकिन अब्ब मई शादी करना hi नहीं चाहती hun...Kisi से भी नहीं.

प्यार का ये कैसा जादू था की आज एक बेटी अपने hi बाप से लड़ रही थी प्यार के मामले में.

निशा की पापा कुछ बोल नहीं पा रहे thhe...Uss वक्त तो उन्होंने सोचा निशा धीरे धीरे समझ jaayegi...Aur वो निशा पर कोई जबरदस्ती भी नहीं करना चाहते थे.

तुमने शादी के लिए मन कर दिया?

दर्द भरी आवाज में रवि ने पूछा.

निशा:- हाँ.

बिना किसी भाव में निशा ने जवाब दिया.

रवि:- लेकिन क्यों?

निशा:- तुम मुझे बिलकुल भी पसंद नहीं ho...Tum जैसे घटिया इंसान को देखना तक पसंद नहीं करती शादी तो दूर की बात है.

रवि:- लेकिन क्यों? बहुत प्यार करता हूँ यार तुमसे? आखिर मुझ में ऐसा क्या नहीं है जो अतुल में है?

निशा:- (हँसते हुए) अतुल से खुद को कपड़े कर रहे हो.

निशा की ये हंसी रवि की दिल में चुभ gaya...Aaj फिर अतुल से छोटा मेषसुस किया usne...Wo कुछ बोल नहीं पाया.

निशा:- सबसे बड़ी baat...Atul मुझे सिर्फ प्यार नहीं करता hai...Wo मुझे रेस्पेक्ट भी करता hai...Mera हर फीलिंग का रेस्पेक्ट करता hai...Ek बार उससे मन कर दिया इस शादी के liye...Mera मज़बूरी समझ कर वो ये भी मान गया.

और एक तुम हो जब पसंद ना होने के बावजूद जबरदस्ती कोशिश करते रहते ho...Yaha तक की इतना बड़ा साजिश भी कर दिया.

रवि:- प्लीज एक बार प्यार कर lo...Jindagi भर खुश रखूँगा तुम्हे.

रवि अब्ब गिड़गिड़ाने लगा था.

निशा:- हर कुछ भीख में नहीं milta...Kuch चीजें हासिल करने के लिए उसके लायक होना पड़ता hai...Tum जैसे घटिया इंसान प्यार के लायक?

निशा अब्ब वह से जाने hi वाली थी की.

रवि:- मुझे जबरदस्ती करना भी आता है.

अब्ब रवि के पास और कोई रास्ता नहीं था.

निशा:- और मुझे अजय से बात करना भी आता है.

अजय का नाम सुनते hi रवि चुप हो gaya...Kuch हिम्मत hi नहीं बचा.

निशा:- तुम्हारा हालत अजय का नाम सुन कर ठीक वैसा होता है जैसा भूतों का बजरंग बलि का नाम सुन कर.

रवि:- Ajay...Ajay...Ajay के अलावा है hi कौन तुम लोगो के पास.

निशा:- शुक्र मनाओ अतुल के बारे में सोचा nahi...Agar अतुल को पता चल गया तो वो तुम्हे यही जिन्दा गाड़ देगा.

इतना कह कर निशा वह से चली gayi...Jindagi में वैसे भी इतना टेंशन था और ऐसे में वो कब तक उस बेवकूफ से बात करती रहती.

बस रवि खुद को हारा हुआ महसूस कर निशा को जाते हुए hi देख सका.

निशा की पापा ने भी कुछ कोशिश किया निशा की रिश्ता के liye...Ek दो रिश्ता भी देखा उन्होंने लेकिन निशा अपने जिद्द में अड्डी रही.

प्यार का एक ऐसा शिद्दत और जूनून था की वो अतुल को कभी भुला भी नहीं पा रही thi...Ulta प्यार और भी बढ़ रहा था.

निशा की पापा जबरदस्ती नहीं करना चाहते थे और निशा भी मानने के लिए तैयार नहीं थी.

वो कुछ कर नहीं पा रहे थे और निशा को ऐसे दुखी देख भी नहीं पा रहे थे.

अपना फैसला को बदल कर निशा को बिन बताये वो अतुल के घर भी गए लेकिन अतुल तब तक वह से दूर चला गया था.

अतुल के घर वालो ने भी उन्हें अतुल से मिलने की हर रास्ता बंद कर दिया था.

निशा भी धीरे धीरे अस ा डॉक्टर ड्यूटी करने लगी और बाद में मद की taiyaari...Vakt बीत रहा था लेकिन उसका अतुल के लिए प्यार नहीं.

जब उसका घर में घुटन बढ़ रहा था अतुल की याद में तो उसके पेरेंट्स निशा को ले कर अपने गांव शिफ्ट हो gaye...Fir निशा वही पास के सेहर में काम करने लगी.

निशा ने घर की खर्चा अपने कंधे पर उठा liya...Apne पेरेंट्स का अच्छे से ख्याल रखती लेकिन उसका दर्द और घुटन उसके पेरेंट्स से भी अनजान नहीं था.

वो भी मजबूर थे और ऐसे hi चमत्कार के इंतजार में थे जो आज जा कर पूरा हुआ.

निशा बस यही सब सोच रही थी तभी...

अतुल अब्ब और खड़ा नहीं रह paaya...Itne दिनों की थकान की वजह से वो निचे जमीन में गिर गया.

निशा भी बिना देर किये पहुँच गयी अतुल के paas...Usse संभालने.
 
अपडेट 129

क्या देख रहे हो?

कुछ देर से अतुल को लगातार आसमान को घूरते देख निशा ने पूछा.

दोनों को छत पर आये तो काफी देर हुआ था लेकिन अभी तक एक दूसरे से कोई बात नहीं किया था दोनों ने.

आज दोनों बस खामोशी को जी रहे थे dono...Iss में छुपा प्यार ko...Dono एक दूसरे के साथ और पास thhe...Yahi काफी था दोनों के लिए.

निशा की इस सवाल से अतुल का ध्यान टूटा.

अतुल:- बस आसमान की इन् तारो को देख रहा हूँ.

जब भी पहले देखता तो ऐसा लगता की ये सभी मिल कर मुझे छिड़ा रहे hai...Mere हालत पर हंस रहे hai...Lekin aaj...Aaj इनकी चमक देख लग रहा है की ये मेरे खुशियों का स्वागत कर रहे है.

ये कहने के बाद अतुल का मुस्कान और भी बढ़ gaya...Abb वो अपनी नजर आसमान से हटा कर निशा को देखने लगता है.

निशा:- सुपरस्टीटियस!!!

अतुल:- हाँ सुपरस्टीशन तो hai...Jaise तुम्हे खोने के बाद फिर से पाना भी तो एक सुपरस्टीशन hi तो है.

अतुल की इस जवाब पर निशा सिर्फ स्माइल hi कर पायी.

निशा:- वैसे सूना है तुम अभी भी सिंगल ho...Shreya से डाइवोर्स हो गया क्या मर. एक?

अतुल:- क्या तुम भी? उस दिन मिसुन्दरस्टण्डींग हुआ था इस वजह से वो सब करना पड़ा.

वैसे तुम और रवि उस दिन साथ कैसे थे?

निशा:- वो दिन hi पनौती tha...Ek प्रोजेक्ट tha...Team में कुछ डॉक्टर्स के अलावा वो रवि भी था unfortunately...Project कम्पलीट होने के बाद मॉल में गयी थी कुछ शौप्पोइंग करने के liye...Ravi पीछे hi पद gaya...Haar माना नहीं था usne...Manaane की कोशिश कर रहा था उस दिन भी.

जैसे hi मई उसको इग्नोर कर के मॉल से बाहर निकली तो वो भी आ gaya...Aur सामने तुम और श्रेया.

अतुल:- बताया क्यों नहीं उस वक्त तुमने?

निशा:- कुछ बताती उससे पहले hi तुम ने ये शॉक दे दिया की तुम और श्रेया ने शादी कर लिया है और आरव तुम दोनों का बीटा hai...Fir क्या बताती? मई तुम दोनों के लाइफ में दखल नहीं देना चाहती थी.

अतुल:- साला रवि!!!! उसका अच्छे से खबर लूंगा.

अतुल के मुंह से गुस्से में निकला.

निशा:- उसको साइड hataao...Uss के दो दिन बाद पब्लिक में उसका ऐसे इंसल्ट किया की दुबारा मुंह दिखाने का हिम्मत भी नहीं कर पाया.

अतुल ने कुछ जवाब नहीं दिया इस बात ka...Bas मन में सोच लिया रवि को सबक सिखाने का.

निशा:- अगर उस दिन वो ग़लतफहमी ना होती तो?

अतुल:- शायद किस्मत से ज्यादा और वक्त से पहले कुछ नहीं मिलता.

निशा:- बड़ा फिलोसोफर बन गए हो.

अतुल:- हाँ तुमसे बिछड़ने के बाद कुछ ज्यादा hi फलसफा झाड़ने लगा हूँ लाइफ के बारे में.

अतुल ने दांत दिखा कर कहा.

निशा:- और अगर और भी ज्यादा बिछड़ते तो विद्वान बन जाते.

बुरा मुंह बना कर निशा बोली.

अतुल:- फलसफा जाए भाड़ में मुझे तो सिर्फ तुम चाहिए.

इतना कह कर अतुल निशा को अपने बाहो में खिंच लेता hai...Nisha भी संभल नहीं पाती और अतुल पर गिर पड़ती है.

निशा:- Ouch!!!Kya तुम?

फिर निशा की नजर अतुल पर पड़ती hai...Atul प्यार से उसकी आँखों में देख रहा था.

आँखों की ये प्यार बढ़ते बढ़ते कब होंठों तक पहुँचता है पता hi नहीं चलता है.

दोनों आज इतने सालो की प्यास मिटा रहे thhe...Pyar का ये रूप और भी बढ़ते जा रहा tha...Aur धीरे धीरे दोनों एक दूसरे पर टूट पड़ते है.

प्यार का ये नशा अब्ब अतुल के सर पर चढ़ चूका tha...Wo और अभी आगे बढ़ रहा था की.

निशा:- (कान में) शादी के बाद.

पता नहीं कैसा जादू था निशा की आवाज me...Atul पिघल gaya...Kuch देर ऐसे hi किश करने के बाद.

अतुल:- तुम्हारी यही adaa...Kahi मर ना जाओ तुम्हारे प्यार में.

एक संतुष्टि के साथ अतुल बोलै.

निशा:- फिर मरने की बात?

अतुल:- सॉरी sorry...Aadat से मजबूर हूँ.

निशा:- वैसे किस अदा की बात कर रहे थे?

निशा ने प्यार से pucha...Shayad अपना तारीफ़ सुनने का बहुत मन कर रहा था इतने सालो बाद अतुल से.

अतुल:- तुम्हारी ये प्यारी प्यारी बातें!!! कभी भी कुछ भी मनवा hi लेती hun...Tumse चाहे कितना भी गुस्सा हो जाऊं लेकिन तुम्हारी ये प्यारी बातें और खूबसूरत सा चेहरा देख पिघल hi जाता हूँ.

निशा जवाब में सिर्फ मुस्कुराती है.

अतुल:- वैसे मई तुमसे नाराज हूँ.

निशा:- नाराज क्यों?

अतुल:- हमेशा मई बोलता हूँ और तुम सुनती ho...Mera भी तो दिल hai...Aur ये दिल चाहता है तुम्हारी बातें सुनने ko...Tumhari इच्छा जाने ko...Unhe पूरा करने की हर एक कोशिश करने को.

निशा:- अच्छा तो ये है तुम्हारी shikayat...Abhi पूरा कर देती hun...Bolo क्या सुन्ना चाहते हो?

अतुल:- हमारा लव स्टोरी का सुरुवात मेरे प्रोपोज़ करने से हुआ tha...Aaj हम फिर मिल रहे है? तुम प्रोपोज़ करो इस बार मुझे.

निशा कुछ सोच hi रही थी की...

अतुल:- कुछ ऐसे प्रोपोज़ करो की दिल खुश हो jaaye...Koi घिसा पीटा पुराना लाइन नहीं.

निशा:- तो सुनो.

अतुल:- सुनाओ.

अतुल बहुत hi एक्ससिटेड था.

निशा:- व्हॅनवर ी सी यू, ी फील यू, ऑक्सीटोसिन (लव हॉर्मोन) इस सिंथेसिज़ेड इन माय एंटीरियर हाइपोथैलेमस एंड रेलेअसेद फ्रॉम पोस्टीरियर पिट्यूटरी तो सर्कुलेशन. एंड माय इंटेंसिटी ऑफ़ लव फॉर यू इन्क्रेअसेस तो मल्टीप्ल टाइम्स.

निशा ने मुस्कुराते हुए कहा तो अतुल कुछ देर हैरान रह gaya...Jab कुछ समझ में आया तो वो भी मुस्कुराने लगा.

[Oxytocin name ka ek hormone hota hai humaare body me jo pyar, emotion jaise feeling ke vakt kaafi jyada release hota hai humaare body se.]

अतुल:- ओह ho...Meri डॉक्टर बीवी.

इतना कह कर अतुल फिर निशा को कास कर गले लगा लेता है.

अतुल:- सच में दिल के साथ साथ हर एक अंग (ऑर्गन) खुश हो गया.

निशा:- अभी तुम्हारी बीवी नहीं हूँ.

अतुल:- कोई बात nahi...Ho jaaogi...Iss प्रोपोज़ सुनने के बाद तो और रुका hi नहीं जा रहा है.

निशा कुछ नहीं bolti...Lekin खुश बहुत thi...Wo भी तो यही चाहती थी.

फिर दोनों ऐसे hi एक दूसरे से प्यार भरी बात चीत करते hai...Itne दिनों की गीले शिकवे भी मिटा रहे थे और साथ hi आने वाले दिन की सुनहरे सपने.

निशा:- अब्ब नींद आ रही hai...Mai जा रही हूँ सोने.

अतुल:- ये क्या यार? इतने दिनों बाद मिले hai...Aaj की रात हमारी hai...Aaj पूरी रात एक दूसरे के साथ रहेंगे मीठी मीठी बातें करेंगे.

और फिर दोनों अपनी बातें जारी रखते hai...Dhire धीरे निशा अतुल की बाहो में सर रख सोने की कोशिश करती है.

अतुल भी उसको साइड से बाहो में भर लेता hai...Ek नजर निशा की फेस पद डालता hai...Aaj अलग hi सुकून मिल रहा था जिसका वो 5 सालो से इंतजार कर रहा tha...Dhire धीरे वो निशा की बालो पर हाथ फेर कर उससे सुलाने लगता है.

निशा भी धीरे धीरे नींद की आग़ोश में चली जाती hai...Atul की कन्धा पर सर रख वो सुकून के साथ सू गयी थी.

अतुल कभी सू रही निशा को प्यार से देखता तो कभी आसमान में देख ऊपरवाला का शुक्रिया अदा करता.

अब्ब स्टोरी 3 उपदटेस और बाकी है...3 या 4 दिन में स्टोरी कम्पलीट हो jaayega...Aap सब ऐसे hi साथ बने रहिये. :थैंक्स:

[Friends aaj hi next story start kiya hai Ek Bhool 2...Uss story me bhi jarur saath dijiye jaise aap sabhi ne mere sabhi stories me diya hai...Link niche hai. :thankyou:

एक भूल 2
 
अपडेट 130

आज भी लेट?

शिकायत भरी आवाज में निशा ने पूछा.

अतुल:- पुराने अतुल बनने की कोशिश कर रहा hun...Aur ऐसा कभी हुआ है क्या की मई डेटिंग में टाइम पर पहुंचा हूँ. :स्मार्त्य:

निशा:- आओ अभी पुराना अतुल बना देती हूँ.

अतुल:- कैसे?

निशा:- पीट पीट kar...Yaad है ना पुराना अतुल को कितना पीट टी थी मई.

निशा की इस बात पर अतुल कुछ देर बुरा सा मुंह बनाता है और फिर.

अतुल:- मंजूर hai...Tum कहो तो जान दे दूँ मार खाना कौन सी बड़ी बात है.

निशा कुछ देर अतुल को गुस्से से देखती है और फिर सच में पीटने लगती है.

निशा:- हमेशा मरने की baat...Kya इसी लिए इस दिन का इंतजार कर रही थी मई?

इस बार निशा की आवाज में सच में गुस्सा था.

अतुल :- सॉरी sorry...Kabhi कभी कुछ ज्यादा hi रोमांटिक हो जाता hun...Aage से नहीं.

अतुल निशा को अपनी बाहो में भर कर कहता है.

अतुल:- ये क्या है?

एक बॉक्स को देखते हुए अतुल ने कहा जो अभी निशा ने बैग से निकाला था.

निशा:- आँखें बंद करो.

अतुल आँख बंद कर लेता है और निशा अतुल के गले में कुछ बाँध देती है.

निशा:- अब्ब खोलो.

आँख खोलने पर अतुल देखता है की वो एक गोल्डन चैन tha...Jo इस चांदनी रात में और भी चमक रहा था.

अतुल:- ये ?

अतुल सच में सुरप्रीसेड tha...Usse कुछ बोलै भी नहीं जा रहा था.

निशा:- 3 साल पहले ख़रीदा tha...Dekhte hi पसंद आ gaya...Socha तुम पर अच्छा lagega...Aur खरीद liya...Bas दुःख इसी बात का था की उस वक्त तुम्हे दे नहीं पायी.

ये सुनते hi अतुल ने फिर से निशा को गले लगा liya...Iss बार उसकी आँखों में आंसू आ gaye...Khushi और प्यार के आंसू.

अतुल:- मैं बहुत खुश किस्मत हूँ की तुमने मुझे प्यार kiya...Itna प्यार की शायद hi मई डेसेर्वे करता हूँ.

निशा अतुल की होंठ पर ऊँगली रख देती है.

निशा:- तुम hi कहते हो ना की प्यार हैसियत देख कर नहीं किया जाता.

अतुल:- प्यार में भूल जाता हूँ.

मुस्कुरा कर अतुल ने कहा.

कुछ वक्त ऐसे hi प्यार भरी बात करने के बाद.

अतुल:- निशु एक बात समझ में नहीं aaya...Aaj हमारी डेटिंग तुमने यहाँ क्यों सेलेक्ट किया?

निशा:- अकेले में वक्त गुजारना चाहती thi...Ek शांत माहौल mein...Jaha सिर्फ हम दोनों हो और हमारा प्यार.

और वैसे भी यहाँ इसी ग्राउंड में ना जाने कितनी रातवीं बीती है तन्हाई ke...Aankho में आंसू लिए चाँद को देखते हुए हजारो रातें बिठाये है.

सोचा आज इसी चाँद के निचे ख़ुशी के पल bitaau...Ghum के हर एक पल का हिसाब बराबर करना hai...To सोचा आज से hi सुरुवात करू.

निशा की ये बात अतुल के दिल को छू gaya...Yaa फिर यूँ कहे की अतुल के दिल की बात निशा ने कह दी.

उसका कहानी भी तो ऐसा hi tha...Har वक्त एक khaalipan...Ek dard...Ek tanhaayi...Khaalipan में hi तो जीना सिख गया था वो bhi...Aur ना जाने कितनी रात चाँद को भीगी आँखों से देख रातें गुजारा था.

और aaj...Sab कुछ उससे मिल gaya...Uski दिल की धड़कन और आँखों की sukoon...Uski Nishu...Aaj उसके पास thi...Hamesha हमेशा के लिए.

अतुल:- तुम्हारा प्यार का कोई जवाब nahi...Aur आज जिस तरह से तुमने अपना प्यार जताया उसका तो मई दीवाना हो गया.

अतुल की आँखों में भी अब्ब दीवानापन झलक रहा था.

निशा बस मुस्कुराते हुए अतुल को देखती है.

कुछ देर बाद अतुल के दिमाग में एक सवाल आता है.

अतुल:- वैसे तुम यहाँ इस गांव में कैसे?

निशा:- तुम्हारे जाने के बाद मेरा भी मन वह नहीं लगता tha...Bheed भाड़ वाले उस जगह से कही दूर भागना चाहती थी.

पापा को भी लगा एक दिन की वह से शिफ्ट हो जाना chaahiye...Aur फिर हम अपने दादा जी की इस गांव और घर में आ गए.

और यहाँ आने के बाद एक वजह भी मिल गया जीने ki...Khud के लिए और अपनी फॅमिली को सपोर्ट करने के लिए पास hi की छोटी सी सेहर के हॉस्पिटल में काम करती हूँ.

और थोड़ा बहुत पैसो से गांव वालो की इलाज.

तुम भी तो वह गांव में वही करते हो naa...Jab तुम इतना अच्छा काम कर सकते हो तो मई क्यों नहीं?

प्यार करती हूँ तुमसे और तुम्हारा हर अच्छाई और हर बुराई को अपनाया है. :डी

अतुल के दिल में निशा के लिए प्यार और भी बढ़ रहा tha...Pyar के साथ इज़्ज़त bhi...Aaj अतुल की नजर में निशा का प्यार बहुत महान था.

अतुल:- इतना प्यार?

निशा:- क्यों? प्यार करने का और जताने का कॉपीराइट तुम लड़को के पास hi है?

अतुल:- Nahi...In फैक्ट, राइट (हक़) तो लव इस फॉर आल ऑर्गनिज़मस फ्रॉम एनारोबिक बैक्टीरिया तो ह्यूमन बैंग्स.

कुछ देर घूरने के बाद.

निशा:- कुछ ज्यादा फलसफा नहीं झाड़ दिया?

अतुल:- प्यार में कभी कभी बकवास भी करने लग जाता हूँ.

निशा:- अच्छा तो फिर ये bataao...Ki प्यार में तुम क्या नहीं करते हो?

अतुल:- तुम्हारी ख़ुशी की दुआ माँगना नहीं भूलता.

निशा जवाब में सिर्फ मुस्कुराती है.

दोनों ऐसे hi हंसी मजाक कर रहे थे की अतुल को कुछ याद आता है.

अतुल:- मैंने जाते वक्त तुम्हे एक कसम दिया था जो तुमने नहीं निभाया?

निशा:- क्या कसम?

अतुल:- तुम्हे खुश रहने ka...Lekin तुम्हारी जिंदगी में भी मेरी तरह दर्द hi दर्द था.

मैंने तो अपना कसम निभाया की कभी शादी करूँगा लेकिन तुमने?

निशा:- मैंने भी निभाया hai...Tumne कहा था खुश रहने के लिए.

और मेरी ख़ुशी इसी में था की तुम्हारे यादो में jeena...Tumhare बारे में sochna...Tum से प्यार karna...Tumhara इंतजार करना.

हर पल तुम्हे अपने आस पास चाहती thi...Hakikat में ना सही यादो में hi सही.

अतुल कुछ बोल नहीं paaya...Bas निशा को अपने सामने महान देख रहा था.

निशा:- वैसे तुम गलत थे उस वक्त?

अतुल:- कैसे?

निशा:- तुमने कहा tha..."Love इस नॉट एवरीथिंग."

मुस्कुराते हुए

अतुल:- वो तो बस तुम्हारा हिम्मत बढ़ाने के लिए कह दिया tha...Ye नहीं चाहता था की मेरे यादो में तुम अपना जिंदगी बर्बाद कर लो

निशा:- लेकिन प्यार की गहराई में उतर कर dekho...Sabse जरुरी चीज प्यार hi lagega...Apno का साथ और अपनों की khushi...Issi के लिए तो हम जीते hai...Love इस मेन्टल एंड फिजिकल सटिस्फैक्शन एंड ा वे ऑफ़ happiness...Iske सामने बहुत कुछ फींका पद जाता है.

अतुल:- नॉट एक्साक्ट्ली, "लव इस एवरीथिंग" बूत लव इस थे बेस्ट एवर इमोशन एंड मोस्ट इम्पोर्टेन्ट कॉम्पोनेन्ट ऑफ़ लाइफ.

मेरे लिए bhi...Bahut कुछ हासिल किया लाइफ mein...Higher डिग्री, फेम, रेस्पेक्ट और पैसे कमाने का बड़े बड़े मौके लेकिन प्यार के सामने ये चीज कुछ भी नहीं लगा.

हमेशा प्यार को तलाशता रहा और वो तलाश तुम्हारे मिलने से पूरी हो gayi...Aur साड़ी खुशियां वापस मिल गए.

जिंदगी में हर एक चीज जरुरी hai...Sahi वक्त में सही cheej..Lekin प्यार, अपनों का साथ, और फिजिकल एंड मेन्टल सटिस्फैक्शन hi मुझे भी सबसे ज्यादा जरुरी laga...Agar ये सब है तो और किसी भी जरुरत को पूरी कर सकते है.

ये कह कर अतुल ने निशा को देखा जो अतुल की बात पर सहमत नजर आ रही थी.
 
अपडेट 131

माँ आप और दी को शादी में आना होगा.

अतुल ने ख़ामोशी को तोड़ कर kaha...Kaha कुछ देर पहले सब खुश थे अतुल और निशा को साथ देख kar...Lekin अतुल की इस बात ने सभी को निराश कर diya...Khaas कर अतुल के पापा को.

अतुल:- सिर्फ आप दोनों.

इस बार अतुल ने गौरव और पापा को देखते हुए कहा जो जख्म में नमक डालने का काम कर रहा था.

फिर से एक ख़ामोशी छा gaya...Maa और दी भी कुछ बोल नहीं पा रहे थे और गौरव और पापा कुछ बोल नहीं सकते थे.

अतुल:- दी, क्या निशा आपके रूम में रह सकती है कुछ दिन के लिए?

निधि:- Haan...Jarur.

बस इतना hi बोल पायी Nidhi...Kaha वो ससुराल से अतुल को मिलने आयी thi...Uski ख़ुशी देखने आयी थी इतने सालो के बाद लेकिन Atul...Wo अतुल के लिए खुश तो बहुत थी दोनों को साथ देख कर लेकिन अतुल की ये कड़वी baat...Ye बातों में भी अलग hi दर्द था.

अतुल फिर अपने रूम की तरफ जाने hi वाला था की.

गौरव:- भाई.

हिम्मत कर के गौरव ने अतुल को रोकने की कोशिश की.

अतुल वापस मुद कर गौरव को घूरता है.

गौरव:- काम से काम पापा को भी बुला लेता.

अतुल:- मुझे फिर से शादी नहीं तुड़वाना है.

पापा की तरफ देखते हुए अतुल ने कहा.

गौरव:- तुझसे ये उम्मीद नहीं था.

निराश आवाज में गौरव ने कहा.

अतुल:- अच्छा, बुरा का ज्ञान दे भी कौन रहा है?

अतुल हँसते हुए बोलै.

गौरव:- हाँ बुरा था mai...Lekin इसका ये मतलब नहीं की और भी गलतियां करू और किसी की गलती पर चुप राहु ये सोच कर की कभी मई भी गलत था.

अतुल ने कुछ नहीं कहा.

गौरव:- माँरा हूँ मैंने तेरे साथ गलत किया hai...Nafrat करता था tujhse...Lekin Papa...Unki क्या गलती?

अतुल:- गलती उनका nahi...Mera tha...Maine hi कुछ ज्यादा एक्सपेक्टेशन कर लिया था unse...Ye एक्सपेक्टेशन की एक पिता को उनके संतान की प्रति फ़र्ज़ निभाने ki...Lekin शायद ये कुछ ज्यादा था.

पूछ पापा se...Kabhi वो मेरे किसी सक्सेस के लिए खुश थे? कभी मेरा किसी इच्छा को दिल से पूरा किया? पूछ.

हमेशा तुझे hi अपना बीटा माना है unhone...Ye गलत nahi...Apne बीटा से प्यार करना गलत nahi...Lekin भेदभाव?

पूछ? ये बायस्ड है या नहीं? पूछ?

अतुल की आवाज में जमाने भर का गुस्सा tha...Bolna तो और भी चाहता था वो लेकिन बोलै नहीं.

गौरव:- मुझे पूछने की जरुरत नहीं.

ये सुन अतुल गुस्से मर भी मुस्कुराता है ये सोच कर की गौरव के पास उसके सवाल के जवाब नहीं है.

गौरव:- क्यों की मई जानता हूँ कितना प्यार करता है ये tujhe...Dekha है, महसूस किया hai...Puchne की जरुरत नहीं है.

हमेशा चाहा मैंने तेरे लिए पापा के दिल में नफरत पैदा karu...Tera गलतियां दिखा कर बहुत बार तुझ पर गुस्सा होने के लिए मजबूर करने ki...Lekin पापा में कभी बदलाव नहीं aaya...Ye जितना प्यार मुझसे करते है उतना तुझसे hi करते है.

अतुल:- तेरा ये जोके इतना बकवास है की मुझे हंसी भी नहीं आ रहा है.

गौरव:- अगर तू पापा को गलत समझता है तो तू भी गलत hi है.

अतुल कुछ नहीं bola...Bas गुस्से से गौरव को घूरता रहा.

गौरव:- पापा को तू जानता hi hoga...Wo कभी ज्यादा बातें नहीं karte...Bas जरुरत की हिसाब se...Tujhe लगता है की पापा तेरे उतना करीब नहीं thhe...To मई पूछता हूँ की तूने पापा के करीब जाने की कोशिश कभी किया?

अतुल इस सवाल पर कुछ बोल नहीं पाया.

गौरव:- मई जाता tha...Haan मकशद अलग tha...Lekin फिर भी जाता tha...Issi लिए तुझे लगता है की पापा सिर्फ मुझसे hi प्यार करते थे.

लेकिन मैंने खुद को स्पेशल कभी फील नहीं किया इस मामले mein...Wo तुझसे फिर भी उतना hi प्यार करते थे.

अतुल अब्ब गौरव की बात सीरियसली सुनने लगा.

गौरव:- और तेरा मब्ब्स में एडमिशन की वक्त !!! हाँ तेरा और पापा के बिचार अलग thhe...Tera कंप्लेंट ये था की पापा तेरे विश के खिलाफ है.

तू अपनी जगह सही tha...Lekin पापा भी गलत नहीं thhe...Unhone अपने टाइम के स्ट्रगल देखा hai...Unhe लगा की तू बिज़नेस को कंटिन्यू करके अच्छा खासा पैसा कमा सकता है.

तू चाहता तो पापा को अच्छे से समझा सकता tha...Lekin एक दो बार samjhaya...Papa कन्विंस्ड नहीं हुए तो अपने दिमाग में ये बात सेट कर ली की पापा तेरी विश पूरा करना नहीं चाहते और उन्हें और समझने की कोशिश hi बेकार है.

अतुल अभी भी बस गौरव की बात सुन रहा था.

गौरव:- एक बात kahu...Agar जितना टाइम तू निशा को देता था उससे आधा पापा को देता तो आज बात और होती.

अतुल:- आईये....

गुस्से में चीखा अतुल.

गौरव:- सच बात है ye...Aur वैसे भी गु सिर्फ उन्ही से बात करता था जो तुझे प्यार दिखते thhe...Maa, दी, निशा और तेरे दोस्तों के अलावा किसी से तूने कभी टाइम स्पेंड किया है?

अतुल इस बार भी कुछ बोल नहीं पाया.

गौरव:- घमंड तो तुझ में tha...Iss बात की घमंड की तू सही है और तुझे उनकी कोई जरुरत नहीं जो तुझे मतलब ना दे.

अगर पापा के साथ थोड़ा बहुत टाइम स्पेंड करता तो पता चलता कितना प्यार करते है ये तुझ se...Agar पापा में कुछ कमी है तो ये की ये अपने फीलिंग्स को अच्छे से जाहिर नहीं कर पाते.

याद kar...Tera पॉकेट money...Tujhe लगता होगा की ये तुझे माँ से मिलता tha...Lekin पापा hi माँ को वक्त से देते thhe...Ye कह कर की तुझे कोई कमी नहीं होना chaahiye...Bahut बार देखा है मैंने खुद hi...Tera हर डिमांड बाइक, लैपटॉप, मोबाइल, इंटरनेट, स्पोर्ट्स, Tour...Kisi में भी बिना कोई सवाल किये पूरा किया है.

लेकिन tujhe...Tujhe तो साबुत चाहिए.

और तुझे लगता है की उन्हें तेरा सक्सेस से कोई मतलब nahi...Jab तू यहाँ से चला गया तब मैंने कई बार सुना है पापा को अपने दोस्तों के साथ बात करते hue...Bahut तारीफ़ करते थे ये तेरी अच्छाई की, तेरी सक्सेस की.

लेकिन tu...Jab तक नहीं सुनेगा नहीं देखेगा विश्वास नहीं करेगा.

और पापा का तेरे लिए प्यार का एक और example...Jab टोनर निशा से शादी की बात पापा को bataya...Kuch वक्त लेने के बात ये मान गए मेरे लाख भड़काने के baawjud...Tere लिए अपनी दुश्मनी तक भुला दिया.

अतुल:- और शादी किसने तोडा था?

गौरव:- पापा ne...Lekin सामने कौन है ये भी तो dekh...Mere प्लान ने पापा को मजबूर कर दिया ये फैसला लेने में.

पहले भी बता चूका hun...Ye हम तीनो से बराबर प्यार करते है.

मैंने हालत ऐसा बना दिया और पापा को बताया की निशा की पापा ने मुझे उनके घर में मारा और पापा को भी बहुत बातें सुनाया.

तेरे लिए पापा मेरे साथ गलत नहीं कर सकते thhe...Aur मैंने निशा की पापा को विलन की तरह dikhaya...Aur ये भी की तुझे निशा से भी अच्छी लड़कियां मिल जाएंगी.

वर्ण पापा लव मैरिज के अगेंस्ट नहीं thhe...Maine भी लव मैरिज किया है और दी ने bhi...Tera भी होने वाला था...

अतुल गुस्से से गौरव को देखता है ये सुन कर की उसने साजिश किया था दोनों को अलग करने ki...Ek बार फिर वो पल याद आ गए.

गौरव:- और पापा जितना प्यार करते है उतना hi नाराज भी होते hai...Jab मैंने ये सचाई उन्हें बताया तो उन्होंने मुझे आज तक माफ़ नहीं किया ये जान कर की अनजाने में तेरे साथ ना इंसाफ़ी हुआ hai...Aaj तक सीधे मुंह कभी पापा ने मुझसे बात नहीं किया है उस दिन के बाद.

अतुल को भी रीलीज़ हुआ की उसने भी आज कल पापा को गौरव के साथ बात करते नहीं देखा है.

गौरव:- अगर तुझे लगता है पापा इतने गलत है तो माँ और दी से hi पूछ ले.

अतुल दोनों को देखता है.

ा. माँ:- नहीं वो शादी के वक्त वाली बात को छोड़ कर तेरे पापा गलत नहीं थे.

अतुल कुछ बोल नहीं पाया.

गौरव:- हाँ प्यार दिखा नहीं paaye...Iska मतलब ये नहीं की ये प्यात hi नहीं करते thhe...Pitaa होने की हर एक जिम्मेदारी निभाया है पापा ne...Bas अपना पगार जाता नहीं paaye...Yahi कमी था पापा में और आज भी.

आज भी वो तुझ से बात करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे है.

गौरव:- तू hi soch...Samajhdaar है tu...Kya पापा की अनजाने में हुआ गलती इतना बड़ा था की उन्हें 6 साल की नाराजगी सहना चाहिए?

पहले मई गलत tha...Aur अगर अब्ब तूने माफ़ नहीं किया तो अब्ब गलत तू होगा.

गौरव की इस बात ने अतुल को सोचने पर मजबूर कर दिया.

गौरव:- माँ का प्यार को तो सभी महान मानते hai...Aur वो है bhi...Lekin पिता का प्यार? वो ुंदेररातेड़ hai...Aur कई बार उन्हें साबुत भी देना पड़ता है.

माँ की आंसू तो सब को दीखता है लेकिन पिता के हाथो का घाव और जख्म? क्या उसका कोई मोल नहीं.

माँ बच्चे को प्यार से पालती है, प्यार से बड़ा करती hai...Lekin Pitaa...Wo भी तो हर जिम्मेदारी पूरा करते है.

माँ का प्यार महान है और होना भी chahiye...Lekin पिता का प्यार को भी काम नहीं सोचना chahiye...Aakhir यही दोनों तो है जो हमे एक बेहतरीन जिंदगी देते है.

कभी सोचना इस बारे me...Aur ये भी की पापा ने तेरे जिम्मेदारी में कोई कमी रखा है या नहीं?

अगर माफ़ कर सकता है तो माफ़ कर देना.

इतना कह कर गौरव चुप हो gaya...Uske आँखों से भी आंसू आने लगे.

घर में मौजूद सभी के हाल वैसा hi tha...Sab चाहते थे अतुल पापा को माफ़ कर de...Aur शायद अतुल खुद भी.

कभी सोचा नहीं था गौरव की बात उससे सोचने पर मजबूर karega...Lekin aaj...Aaj तो सही बात कहा था उसने.

एक नजर अतुल ने पापा को देखा जो अतुल को आस भरी नजरो से देख रहे थे.

[Friends abb story mein 2 update aur baaki hai...Ye update thoda long ho gaya...Issi liye kal iska continuation update post karunga.]
 
अपडेट 132

कल फिर अगर तेरे बच्चे भी तेरे साथ वैसा hi करे तो ये मत कहना की गलती उनकी hai...Shikayat करने का हक़ तेरे पास नहीं रहेगा?

अतुल को चुप देख गौरव एक बार फिर बोलै.

अतुल कुछ देर और सोचता raha...Ek बार सभी की तरफ dekha...Sab उससे उम्मीद भरी नजरों से देख रहे थे.

अब्ब अतुल उठ कर पापा के पास पहुंचा और झुक कर उनके पेअर छू लिया.

पापा भी उससे उठा कर गले लगा लेते है.

दोनों के hi आँखों में आंसू thhe...Ek सुकून.

अतुल:- बच्चों की बात तो बहुत देर की hai...Unki बारे में कुछ सोचा भी नहीं.

पहले जो गलत करने जा रहा हूँ वो करने से खुद को रोक रहा हूँ.

फिर अतुल अपनी पापा की तरफ देखता hai...Shayad hi उन्हें इतना खुश कभी उसने देखा tha...Dil से एक बहुत बड़ा बोझ उतर गया था.

अतुल:- Papa...Aaj भी याद है mujhe...Aap मेरे कितने बड़े से बड़ी गलतियां माफ़ कर चुके हैं.

बचपन में आप के दोस्त के hi पैसे चुराना हो या फिर पड़ोस के एक लड़के को पीट पीट कर हॉस्पिटल में एडमिट कराना हो.

घर में आये मेहमान को परेशान करना हो या फिर गुस्सा निकालने के लिए घर के hi सामान का तोड़ फोड़ जैसे नए टीवी और लैपटॉप.

बहुत शरारत किया बचपन mein...Lekin आपने हमेशा मुझे माफ़ hi किया था.

अब्ब सब कुछ याद आ रहा है.

आप ने हमेशा मुझे माफ़ hi किया है तोह क्या मई आपकी एक गलती माफ़ नहीं कर सकता जो अनजाने में हुआ और उसमे कही ना कही मेरा भी गलती था.

ा. डैड:- नहीं तेरा गलती नहीं tha...Har बच्चे का इच्छा और हक़ होता है की उसके माँ बाप उससे बहुत प्यार करे और उसका ख्याल रखे.

लेकिन mai...Uss वक्त थोड़ा बिजी था और पैसो की जरुरत में काम में इतना व्यस्त हो गया की तुझ पर उतना ध्यान नहीं दे पाया.

मई एक्सक्यूज़ नहीं दे रहा हूँ उस वक्त मई गलत tha...Busy होने के बाद भी थोड़ा वक्त निकालना चाहिए tha...Jo नहीं कर पाया और उस वक्त शायद समझ भी नहीं पाया.

धीरे धीरे तू बड़ा होता gaya...Tu अपने माँ और दीदी के करीब था जो हमेशा तेरा ख्याल रखती thi...Mai बस तेरा जरुरत hi पूरा करता tha...Vakt नहीं निकलता था.

गौरव ये खुद मेरे पास आता tha...To इसके साथ बातें कर लेटस tha...Aur इसी वजह से शायद तुझे लगा की मई सिर्फ इस से प्यार करता हूँ.

प्यार तो सभी को करता हूँ लेकिन शायद दिखा नहीं paaya...Pehle से hi मई ज्यादा बातें नहीं करता tha...Shayad यही मेरा सबसे बड़ी गलती साबित hua...Pyar करना hi काफी नहीं जताना भी पड़ता है.

धीरे धीरे हमारे बिच बातें और भी काम होने laga...Shayad बातें करने में भी झिझक सी होने लगा tha...Mai बस एक पिता की जिम्मेदारी के रूप में तेरा जरुरत पूरा करता चला gaya...Vishwash भी शायद काम होता चला गया हम दोनों के रिश्ते में.

और देखते hi देखते अनजाने में क्या से क्या हो गया.

अतुल:- ताली एक हाथ से नहीं bajta...Mai भी अनजाने में hi सही गलती में शामिल tha...Aap मेरे पास नहीं आटे थे तो मई भी आपके पास नहीं जाता था.

ऐटिटूड problem...Shayad कुछ जल्दी hi ये बात दिमाग में बैठ गया tha...Bahut पहले hi ये सोचता था की अगर कोई मुझे इग्नोर करे तो मई भी उससे इग्नोर करूँगा.

आप को भी करने laga...Bas जरुरत की बातें hi करता था आपसे.

शायद उस वक्त ऐटिटूड को भूल कर थोड़ा समझदारी से काम चलना चाहिए था.

इसी तरह दोनों बाप बेटे अपना गीले शिकवे दूर करते hai...Dono के दिल से एक बोझ उतर गया था और उसकी जगह लिया था सुकून ne...Ek ख़ुशी ने.

गौरव:- भाई हो सके तो मुझे भी माफ़ कर दे.

एक पश्चाताप भरी आवाज में गौरव ने कहा.

अतुल बस उससे घूरता रहा.

गौरव:- इस मामले में तुझे जोर जबरदस्ती नहीं कर sakta...Kyu की मई शायद उस लायक भी नहीं हूँ.

अतुल:- लगता हज अब्ब तू भी कोई घीसा पिता कहानी सुनाने वाला है.

गौरव:- शायद ऐसा लग सकता है tujhe...Lekin जो कुछ भी बोलूंगा सच hi बोलूंगा.

गौरव ने एक लम्बी सांस लिया और बोलना सुरु किया.

बचपन से hi तू मुझे पसंद नहीं tha...Kabhi तुझे अपना भाई माना भी nahi...Hamesha से नफरत करता आया हूँ.

छोटी सी उम्र में hi कुछ ऐसे दोस्तों का साथ मिला जो किसी के भी जिंदगी तबाह करने के लिए काफी हो.

छोटे से बड़े हर तरह के दोस्त thhe...Unke साथ उठना बैठना, बदमासी करना यही सब मेरा काम होता था.

उनसे hi सुना था की घर में दो भाई होना अच्छी बात नहीं hai...Maa और पापा का प्यार बाँट जाता hai...Paise और सब कुछ आपस में बात जाता है.

और जब तू पैदा हुआ तब ये बात सच भी laga...Dekhta था की माँ का ध्यान मुझ से ज्यादा तुझ पर hai...Aisa लगता था जैसे माँ तो मुझे भूल hi गयी hai...Aur जब तू थोड़ा बड़ा हुआ तो मेरा खिलौना भी तेरा हो गया.

तभी से वो बातें सच लगने laga...Acche से सही गलत समझने वाले काम थे और कान भरने वाले ज्यादा.

और जब जवानी के टाइम में आया तब ये दूरियां बहुत बढ़ gaya...Pehle hi ऐसे दोस्तों का सांगत में काफी बिगड़ चूका tha...Bahut जल्द सिगरेट, गांजा और दारु भी सुरुवात कर दिया था.

और ऐसे में तेरा दखल अंदाज़ी मुझे बिलकुल भी पसंद नहीं tha...Har बिट ते दिन तुझसे और भी नफरत होने लगा था.

तू भी मुझसे नफरत करने laga...Tera मुझसे ना डरना और हर बात का जवाब dena...Ye हमारी दुश्मनी को काफी आगे ले गया.

ऊपर से दोस्तों की बातों का असर की पापा की सभी प्रॉपर्टी हम दोनों में डिवाइड हो jaayega...Issi वजह से पापा के दिल में तेरे लिए नफरत घोलना सुरु कर दिया और तुझे घर से निकालने का प्लानिंग सुरु कर दिया.

लेकिन उसी वक्त रिया से प्यार हो gaya...Uski प्यार में इतना अँधा था की कुछ भी कर लेता था बिना सोचे samjhe...Mai तो इससे बहुत प्यार करता था लेकिन ये मुझे क्यों प्यार करती है आज तक समझ में नहीं aaya...Naa hi इसके पास पैसों की कोई कमी था और ना hi किसी चीज का.

खैर, ये चाहती थी की तेरा शादी प्रीती से ho...Iss लिए घर से निकालने का प्लान कैंसिल कर तुझे निशा से अलग करने की कोशिश में लग गया.

अतुल:- तो अब एक रात में कैसे बदल गया?

गौरव:- बदलाव एक रात की नहीं hai...Kayi साल की है.

जब तू घर छोड़ कर गया तो मई बहुत खुश tha...Sab कुछ मेरे हिसाब से चल रहा था.

एक दिन पापा को बिज़नेस में बहुत लोस्स हो gaya...Haalath ऐसा था की घर चलना भी मुश्किल हो गया था.

उस vakt...Mera वो कोई दोस्त मेरा काम नहीं aaya...Khushi में तो सब साथ देता है लेकिन ग़म में? एक पल में पता चल गया कौन अपना है और कौन पराया !!!

तू भी इतना दूर चला गया था की शायद hi कभी वापस आता.

मज़बूरी में मुझे काम संभालना pada...Tab धीरे धीरे पता चला जिंदगी क्या होता है?

संघर्ष किस्से कहते है? मज़बूरी किस्से कहते है? बुरे दिन किस्से कहते है?

सब कुछ सिख गया उसी पल mein...Ye भी पता चला की जिंदगी सिर्फ साजिश नहीं होता hai...Aur जिंदगी इतना आसान भी नहीं जितना मई सोचता था.

जब काम करते गया तब पता चला जिंदगी को ईमानदारी से जीना कितना मुश्किल होता hai...Mushkil तो होता है लेकिन अलग hi सुकून मिलता है.

किसी तरह अपने घर को संभाल रहा tha...Aur उसी वक्त आरव का जन्म hua...Soch लिया था की इससे गलत रास्ते पर जाने नहीं dunga...Jo गलतियां खुद किया था वो उससे करने नहीं दूंगा.

घर और आरव को सँभालते सँभालते मुझ में बहुत बदलाव aaya...Maa से बात करता तो सिर्फ एक hi बात पता chalta...Wo तुझे फिर से इस घर में देखना चाहती थी.

तब जाके एहसास हुआ कितना बड़ा गलती हुआ है mujhse...Tere साथ हमेशा गलत किया वो भी दुसरो के कहने par...Har बार मुझे खुद की hi गलती दिखने laga...Nafrat सा हो गया खुद से की बे वजह तेरा जिंदगी तबाह कर दिया.

मैंने जिस किसी का भी नुकशान किया था उन् सब से माफ़ी maanga...Papa से भी सच कह कर माफ़ी मांग liya...Lekin मुझे माफ़ी नहीं मिला.

और फिर इसी पश्चाताप में आज भी जी रहा हूँ एक उम्मीद के साथ की हमारे परिवार में सब कुछ ठीक hoga...Abb नहीं चाहिए मुझे कोई पैसा कोई प्रॉपर्टी जो हर चीज खरीद सकता है लेकिन ख़ुशी नहीं, सुकून नहीं और ना hi छैन.

मुझे तू चाहिए अतुल अपने छोटे भाई के रूप mein...Bachpan तो मिस कर दिया लेकिन जब दूसरा मौका मिला तो चाहता हूँ अब्ब बड़े भाई का फ़र्ज़ निभाने का.

इतना कह कर गौरव चुप हो गया और अतुल को देख फिर बोलै.

गौरव:- अगर तू मुझे माफ़ी के लायक समझता है तो प्लीज माफ़ कर देना.

अतुल कुछ देर सोचता रहा और फिर दी की तरफ dekha...Shayad अभी भी उससे गौरव पर भरोषा नहीं था और ऐसे hi फिर वो गौरव पर विश्वाश करना नहीं चाहता था.

माँ की तरफ देखा तोह वो भी उम्मीद भरी नजरों से अतुल को देख रही थी.

दी की तरफ से भी इशारा में जवाब आया की गौरव सच कह रहा है.

अतुल कुछ देर सोच hi रहा था की उससे एक फ़ोन aaya...Phone अजय का था.

वो फ़ोन पिक करने बाहत जाने laga...Raaste में गौरव की कन्धा पर हाथ रख उसने अपना जवाब दे दिया.

गौरव ने सुकून में आँखें बंद कर liya...Maa की भी आँखों से आंसू आ gaye...Unka सपना पूरा हो gaya...Pura परिवार एक होने का.

अतुल:- कहा है वो?

नफरत भरी आवाज में अतुल ने पूछा.

अजय अतुल को रवि के पास ले गया.

गुस्से में रवि पर दो चार मुक्कों का बरसात किया अतुल ne...Fir भी.

रवि:- कितना भी maar...Lekin मुझे अफसोश nahi...Khush हूँ की तेरा इतना वक्त बर्बाद कर दिया.

अतुल बस उससे गुस्से से देखता raha...Andar hi अंदर वो कुछ सोच रहा था.

रवि:- एक बात bata...Aakhir मेरे प्यार में क्या कमी था जो निशा मुझे नहीं तुझे प्यार करती थी?

इस बार रवि की बातों में दर्द था.

अतुल:- तुझ जैसे घटिया इंसान से कौन प्यार karega...Tu इंसान घटिया, तेरा प्यार घटिया और तेरा प्यार का चॉइस भी घटिया.

अगर तू सच में निशा से प्यार करता तो उसकी ख़ुशी के लिए sochta...Uske पीठ पीछे साजिश नहीं करता.

और तू मेरा प्यार से कपड़े करता hai...Nisha जब सुरु में मुझसे बात नहीं करना चाहती थी तो मई उससे दूर hi रहता tha...Hamesha उसका रेस्पेक्ट किया.

तेरा प्यार में निशा के लिए ख़ुशी और सम्मान है hi nahi...Hamesha तूने खुद का socha...Pyar नहीं तेरा जूनून था ये.

फिर अतुल चुप हो गया और अजय को साइड में बुला कर.

अतुल:- अब्ब इससे और मौका नहीं दे sakta...Agar मई कुछ करने लगा तो ये पक्का मर जाएगा.

तू hi कुछ कर iska...Physically नहीं mentally...Ek खौफ्फ़ बिठा दे इसका दिमाग में जिससे ये कभी उभर hi न paaye...Aur कुछ करने का सोचे भी nahi...Aur बाद में उस रोहित का भी. (अतुल का क्लासमेट जिसने निशा और रवि की शादी की झूठी फोटो अतुल को दिखाया था.)

इस बार अतुल की हर एक बातों में नफरत tha...Wo अपने गुनेहगार को माफ़ करने का मूड में बिलकुल भी नहीं था.

[Abb bas ek short and sweet update baaki hai aur fir story complete.]
 
अपडेट 133 (फाइनल)

6 इयर्स लेटर

6 साल बाद काफी कुछ बदल गया था सभी की जिंदगी mein...Atul अपने पुरे फॅमिली के साथ गांव शिफ्ट हो चूका tha...Atul और निशा दोनों hi उसी हॉस्पिटल में अस ा डॉक्टर काम करने लगे थे.

हॉस्पिटल के अलावा दोनों का अपना क्लिनिक भी tha...Jaha फ्री टाइम में दोनों काम करते thhe...Iske अलावा गौरव ने भी अपना बिज़नेस सुरु किया था.

कुल मिला कर पूरी फॅमिली सुख और शान्ति से जी रहे thhe...Pariwar में सब कुछ ठीक चल रहा था गौरव और रिया को छोड़ kar...Abhi भी दोनों में खास जमता नहीं था.

गौरव सिर्फ 2 चीज का hi इंतजार कर रहा था आज bhi...Ek या तो रिया पूरी तरह से बदल जाए और दूसरा या फिर रिया उससे छोड़ कर चला jaaye...Lekin दोनों में से कुछ भी नहीं हो रहा था और ना hi गौरव को कुछ खास मतलब tha...Wo तो रिया से इस तरह तंग आ चूका था की अब्ब वो ये भी जानना नहीं चाहता था की रिया के दिल में क्या hai...Uska ध्यान अब्ब सिर्फ आरव, फॅमिली और बिज़नेस पर था.

रिया भी अब्ब पहले की तरह गौरव पर हक़ जमा नहीं पा रही थी और ना hi अपना कुछ भी मर्जी चला पा रही thi...Abb वो भी सिर्फ आरव पर hi ध्यान देती थी.

अतुल के पापा और माँ भी अपने बच्चों और पोता पोती के साथ वक्त बिताते थे.

श्रेया का भी गांव के hi एक लड़का के साथ शादी हो गया tha...Suruwaat में काफी मुश्किल हुआ उससे आगे बढ़ना लेकिन अतुल के लिए वो आगे बढ़ hi गयी अपने दिल के आगे मजबूर होने के बावजूद भी. :(

धीरे धीरे वो भी अपने लाइफ में सेटल हो गयी और अपने पति के साथ खुश रहने लगी.

आज भी अतुल और श्रेया का दोस्ती बहुत hi ख़ास tha...Dono hi एक दूसरे के घर के फंक्शन में शामिल होते और जरुरत पड़ने पर एक दूसरे का साथ देते.

और दोनों एक और काम में एक साथ hote...Shreya की पापा पर जोर जबरदस्ती करने के liye...Kisi भी तरह दोनों उनको दवाई खिला hi देते उनके मर्जी से या फिर उनके मर्जी के खिलाफ :डी.

निशा के मिल जाने से अतुल का ख़ुशी का कोई ठिकाना hi नहीं tha...Shaadi के 6 साल बाद भी अतुल का दीवानापन में कोई कमी नहीं tha...Aaj भी नए नए तरीके से वो अपना प्यार निशा को जताता tha...Uski हर ख्वाहिश पूरा करता tha...Nisha से अलग होने के बाद जानता था वो की निशा क्या एहमियत रखती है उसकी जिंदगी mein...Agar कभी दोनों में लड़ाई होता भी तो दोनों प्यार से एक दूसरे को मनाते. :लव:

शादी होने के बाद दोनों कभी कभी निशा की गांव भी जाते थे वह की जरुरत मंद लोगों की सेवा करने.

अतुल और निशा की सोशल लाइफ भी काफी अच्छा चल रहा tha...Atul का दोस्ती अजय, श्रेया और आमिर से काफी गहरा हो गया था तो कभी कभी वो राहुल सर से भी मिल leta...Kabhi कभी काजल से भी बातें हो जाता था फ़ोन में.

वही निशा का अंजलि से दोस्ती फिर से काफी अच्छा हो गया था और कॉलेज के कुछ और फ्रेंड्स के साथ भी.

दोनों hi अपनों में और दोस्तों की ख़ुशी देख बहुत खुश थे.

ऐसे hi एक दिन अपना ड्यूटी ख़त्म करने के बाद अतुल अपने घर आता है.

गेट में पहुँचते hi उससे हैरानी होता है.

अतुल:- ये आप?

निशा की पापा को अपना सामान के साथ देख वो हैरान था.

न. डैड:- 2 दिन रह liya...Abb जाने की सोच रहा hun...Tumse मिलने हॉस्पिटल hi आने वाला था.

अतुल:- कुछ दिन और रह लेते.

न. डैड:- फिर कभी आऊंगा?

अतुल कुछ बोलता उससे पहले hi.

न. डैड:- ये मत सोचना की तुम्हे ऐसे hi छोड़ dunga...Time टाइम पर सुपेर्विसिओं करता रहूँगा tumhara...Bhulna मत तुम भी एक बेटी का पिता ho...Mujhse भी अच्छा परवरिश करना होगा तुम्हे मीरा का.

बात तो उन्होंने मुश्कुराते हुए किया लेकिन उनकी बातों में एक धमकी भी tha...Atul भी मुस्कुराते हुए.

अतुल:- निराश नहीं करूँगा :डी

मुस्कुराते हुए अतुल ने जवाब दिया.

फिर वो अपने ससुर के पास आ कर उनके पेअर छू कर उन्हें विदा करता है.

पापा मई दवा नहीं खाउंगी!

एक प्यारी सी आवाज में मीरा अपने पापा की तरफ आते हुए बोली.

अतुल:- कौन खिला रहा है मेरी प्यारी सी बेटी को दवा?

अतुल ने मीरा को अपनी बाहो में उठा कर पूछा.

मीरा:- माँ.

नाराजगी भरी आवाज में मीरा ने कहा और निशा से मुंह फेर लिया.

अतुल:- ये गलत बात है Nishu...Meera दवा नहीं खायेगी.

मीरा:- थैंक यू पापा.

अतुल:- वही दवा मई मीरा को इंजेक्शन लगा कर दूंगा.

ये सुनते hi मीरा अतुल पर टूट पड़ती hai...Aur जोर जोर से अतुल की कन्धों पर मुक्को की बरसात करने लगती है.

मीरा:- पापा आप बहुत बुरे hain...Doctoe है तो क्या इंजेक्शन लगा denge...Maa आप अच्छी hai...Bahut अच्छी hai...Sweet माँ.

मीरा की बात ऑन निशा , अतुल के साथ घर के सभी हसने लगते है.

अतुल:- अगर दवा नहीं खाओगी तो बुखार से ठीक कैसे होगी tum...Aur ठीक नहीं हुई तो ice-cream कैसे खाओगी?

Ice-Cream सुनते hi.

मीरा:- मई खाउंगी दवा.

बात के साथ साथ मीरा की आवाज भी बदल गयी.

निशा:- और हर्ष (अतुल का छोटा बीटा) के साथ कौन खेलेगा?

अभी चलने और मुस्कुराने की कोशिश करते हुए हर्ष की तरफ देख मीरा बोली.

मीरा:- मई.

ा. डैड:- और अपने दादा के साथ टीवी कौन देखेगा?

मीरा:- मई.

ा. माँ:- और दादी की कहानी कौन सुनेगा.

मीरा:- मई.

गौरव:- और मैंने जो डेरी मिल्क लाया है वो कौन खायेगा?

मीरा:- मई.

रिया:- और मेरे साथ शॉपिंग पर कौन चलेगा?

मीरा:- मई.

आरव:- मेरे साथ लूडो कौन खेलेगा?

मीरा:- नहीं bhaiya...Mai आपके साथ लूडो नहीं khelungi...Aap हमेशा बेईमानी करके मुझे हरा देते हो.

मुंह फुलाते हुए मीरा बोली.

फिर इसी तरह मना कर अतुल मीरा को दवाई खिला देता है.

घर का माहौल खुशाल tha...Aarav और मीरा की वजह से सबका मन लगा rehta...Harsh का परवरिश में भी सभी बहुत ध्यान देते थे.

ात नाईट

मीरा और हर्ष सू चुके थे.

निशा:- क्या सोच रहे हो?

अतुल:- कुछ ख़ास nahi...Kal मीरा को स्कूल में एडमिशन कराने का सोच रहा हूँ.

निशा:- क्या बनाने का प्लान है मीरा को? डॉक्टर या इंजीनियर?

अतुल:- कुछ nahi...Meera वही बनेगी जो वो डीडे karegi...Bas हमे बेसिक एजुकेशन देना है और अच्छे संस्कार के साथ परवरिश करना hai...Baaki इसकी लाइफ hai...Yahi फैसला करेगी अपनी जिंदगी की.

फिर अतुल हर्ष को देख कर मुस्कुराता है.

निशा:- क्या सोच रहे हो?

अतुल:- सोच रहा hun...Bada हो कर ये कितना मार खायेगा मुझसे.

निशा:- खबरदार जो मेरे बेटे पर हाथ उठाने का सोचा भी तो.

इस बार मुंह फुलाने का बारी निशा का था.

अतुल:- अगर बदमाशी करेगा तो मार तो खायेगा hi!!!

निशा:- नहीं ये कोई बदमाशी नहीं करेगा.

अतुल:- मजाक कर रहा tha...Atul जर. है ye...Mujhse भी आगे जाएगा ये.

हर्ष के सर को सहलाते हुए अरुल ने kaha...Aur फिर मीरा को देखते हुए.

अतुल:- हम दोनों को मिल कर इन् दोनों का hi अच्छे से परवरिश करना होगा.

निशा भी सहमति में सर हिला कर.

अतुल:- ऐसे क्या देख रही हो?

निशा:- कुछ nahi...Bas सोच रही thi...Aaj भी हम दोनों शादी के फेरे में लिए हुए हर कसम को निभा रहे hai...Bas यही दुआ है की आगे भी हम दोनों के बिच ऐसे hi प्यार रहेगा.

अतुल:- अरे क्यों नहीं? अभी तोह हमारा प्यार को नेक्स्ट लेवल में ले जाना है.

अतुल ने कॉन्फिडेंस के साथ kaha...Aur निशा को अपने बाहों में भर लिया.

अतुल:- थैंक्स निशा फॉर लोविंग में एंड मेकिंग माय लाइफ स्पेशल.

इतना कह कर अतुल ने पहले निशा के सर को चूमा और धीरे धीरे उसका होंठ निशा की तरफ बढ़ गया.

थे एन्ड ऑफ़ स्टोरी नॉट ऑफ़ इम्मोर्टल लव

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Writer's नोट

सबसे पहले तो आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया मेरा ये स्टोरी पढ़ने के liye...Aur स्टोरी भर साथ बने रहने के लिए.

2 साल लग गए स्टोरी को लिखते likhte...Agar सोस्सिप बंद ना होता तोह और भी जल्द कम्पलीट हो jaata...Khair...Xossip का अधूरा काम यहाँ पूरा कर diya...Xp के मेंबर्स जो स्टोरी को पढ़ नहीं पाए साइट बंद होने से उम्मीद है उन् दोस्तों तक भी जल्द पहुँच जाए ये स्टोरी.

आज थोड़ा अजीब जरूर लग रहा है की ये स्टोरी कम्पलीट हो गया hai...Aur अब्ब ये स्टोरी और लिख नहीं paaunga...Bahut यादें जुड़ा है इस स्टोरी के साथ और आप सभी के saath...Lekin स्टोरी कम्पलीट करने के लिए प्राउड भी फील कर रहा hun...Aur काफी खुश हूँ की आज तक सभी स्टोरीज को कम्पलीट किया है.

अब्ब स्टोरी कम्पलीट हो चूका है तो आप सभी का कमैंट्स का इंतजार जरूर रहेगा की स्टोरी आप सब को कैसा laga...Apna कमैंट्स जरूर दीजिये.

अगर मुझे hi कमेंट करना हो तो यही कहूंगा की ये स्टोरी मेरे लिए बहुत ख़ास hai...Kuch पार्ट्स अच्छा लिखने में कामयाब रहा तो कुछ पार्ट्स और अच्छा लिख सकता tha...Maine अपनी तरफ से पूरी कोशिश किया है आप सब के लिए और खुद के लिए भी एक अच्छा स्टोरी लिखने की.

आखिर में एक बार फिर से शुक्रिया अदा करूँगा उन् सभी रीडर्स का जिन्होंने मेरा स्टोरी को पढ़ा, साथ दिया और आगे लिखने का हौसला भी badhaya...Xp से ले कर सफ तक का सफर आप सभी के साथ बहुत अच्छा raha...Story के हर पल और हर वक्त साथ बने रहने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया.

आप सभी के साथ से hi मई आज स्टोरीज लिख पा रहा hu...Uske लिए बहुत बहुत धन्यबाद.

उम्मीद है आप मेरा नई स्टोरी एक भूल 2 में भी जरूर साथ देंगे.

एक भूल 2:- क्लिक हेरे
 
थैंक्स कामदेव भाई फॉर योर सपोर्ट एंड रेविएवस थ्रौघोउट थे story...Aapne स्टोरी में सुरुवात से लेकर अंत तक साथ दिया है कभी तारीफ़ करके तो कभी कुछ कमियां की और इशारा कर के.

एक भूल के बाद एक इमोशनल स्टोरी लिखना चाहता था जो किसी हद्द तक सफल भी raha...Jo आप सभी के कमैंट्स से पता chala...Ummeed है ख्वाहिशें भी आपको पसंद आएगा.

ऐसे hi साथ बने रहिये भाई. :थैंक्स:
 
थैंक्स सैम फॉर योर सपोर्ट एंड रेविएवस थ्रौघोउट थे story...Jab पहली बार तुम्हे थ्रेड में देखा तो हैरानी भी हुआ और जब धीरे धीरे रेविएवस आने लगा तो एक मोटिवेशन भी mila...Tumhara रिव्यु उस वक्त से आ रहा है जब स्टोरी में ज्यादा रीडर्स नहीं थे और उस वक्त ष्प की उपदटेस को hi पोस्ट कर रहा tha...Ending तक तुम्हारा कमेंट आया जो हर वृटवृ के लिए जरुरी होता है.

और रही बात आशिक़ सर की तूने मेरे जाना कभी नहीं Jaana...That वास् ा मास्टरपीस :D...Mera भी फवौरीते स्टोरीज में से एक है.

इस स्टोरी में साथ बने रहने के लिए शुक्रिया Sam...Kabhi वक्त मिले तो एक भूल 2 भी पढ़ना :डी.
 
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