EPISODE – 50
शाम में गोविन्द, आशा के ऑफिस आता हे और दोनों रघु के केस को डिसकस कर रहे हे… ये सब बाटे पहले से गोविन्द जान चूका होता हे…
आशा… “रघु के स्टेटमेंट पर हम ने सेठ राजेंदर के मैनेजर को बुलाया… मगर उस ने इंकार कर दिया के उस का या सेठ राजेंदर का कोई सम्बन्ध हे रघु के लाला जी की ज़मीन पर आग लगाने से और सेठ गिरधारी लाल के बेटे के किडनैप करने से…”
आशा… “सेठ राजेंदर खुद मुल्क से बहार हे और उस ने इंस्पेक्टर से फ़ोन पर बात की और कहा के जेसे hi वापिस ए गए खुद पेश होगा पुलिस के पास और तब तक उस का मैनेजर फुल कोआपरेट करे गए पुलिस के साथ…”
आशा… “अब एक तरफ एक क्रिमिनल का स्टेटमेंट हे और दूसरी तरफ एक बारे रियल एस्टेट टाइकून के मैनेजर का स्टेटमेंट हे… पुलिस फ़िलहाल मैनेजर को अरेस्ट नहे कर सकती… क्यों के मैनेजर का स्टेटमेंट रघु के स्टेटमेंट के मुक़ाबले में ज़यादा क़ाबिल इ ऐतबार हे… पुलिस फुरदर इन्वेस्टीगेशन ज़रूर कर सकती हे… और करे गई… पुलिस ने पाबंद कर दिया हे मैनेजर को के वो पुलिस को इन्फॉर्म किये बग़ैर शहर से बहार नहे जये गए…”
अब पुलिस के रिकॉर्ड पर ये बात आ गयी थी के सेठ गिरधारी लाल का बीटा किडनैप हुआ था और वो खुद से hi वह से निकल गया था… बिपिन लाल ने खुद स्टेटमेंट दिया था पुलिस को…
गोविन्द, को आशा की बात ठीक लगी के पुलिस की अपनी मजबूरिऑन हैं… मगर उस ने ये बात अछि तरह समझ ली के अब उस को अपनी शक्ति इस्तेमाल करनी परे गई सेठ रेजेन्दर या उस के मैनेजर को बे नक़ाब करने के लिए… ये बात वो पहले से समझता था के इतने बारे बिज़नेस मन को यूँ क्रिमिनल साबित नहे किया जा सकता… वो पहले hi मैनेजर के दिमाग़ तक पोहंचा हुआ था…
गोविन्द और आशा उस वक़्त उस की ऑफिस में अकेले थे…
गोविन्द… “जणू… एक जगा हे मिलने के लिए… जब तुम कहो…”
आशा ये सुनते hi शर्मा गयी… और नज़रे उस की नीचे झुक गयी… कुछ देर चुप रही तो गोविन्द ने पुछा…
गोविन्द… “बताओ न जान… कब मिलना हे…”
आशा… नज़रे नीचे झुकाये हुए… “किस लिए…”
गोविन्द… “लूडो खेलने के लिए…”
आशा पहले तो समझी नहे के गोविन्द ने क्या कह दिया हे फिर जब उस ने नज़र उठा कर गोविन्द की तरफ देखा जो के उस वक़्त मुस्कुरा रहा था तो वो फिर से शर्मा गयी…
आशा… “पूरे बदमाश हो तुम… हर वक़्त एक hi बात का सोचते हो…”
गोविन्द… “क्या करूँ इन मीठे मीठे लबो का रास जो पीने का मन करता हे… इस कामुक बदन को अपनी बांहो में भरने का मन जो करता हे… इन नशीली आँखों से मधुरा पीने को मन जो करता हे…”
आशा की नज़र और झुक गयी और गाल लाल हो गए…
आशा… धीमी जज़्बात बहरी आवाज़ में… “और….???”
गोविन्द… “छोड़ने को मन करता हे…”
आशा ने अपने चेहरे को हाथो से छुपाते हुए… “बदमाश… अनरोमांटिक… गंदे…”
अब फिर से गोविन्द हंसने लगा… और अब उठने लगा…
गोविन्द… “ाचा जणू… अब में चलता हु…”
आशा… “कुछ देर तो बैठो… अभी तो ए थे… प्रोग्राम तो फाइनल कर लो न मिलने का…”
गोविन्द… “बस 1 – 2 दिन में… bye…”
आशा… बरी निराशा भरी आवाज़ में … “bye… अपना ख्याल रखना मेरे मेहबूब…”
गोविन्द बहार प् के पास आ कर वह से फ़ोन कॉल की घर पर और ेषणा और सीमा को कहा के तैयार रहे बहार जाना हे आइस क्रीम खाने… उन को पिक कर के ले गया आइस क्रीम खिलने… ेषणा पिछली सीट से साइड से गोविन्द को हाथ से सहलाती रही… सीमा को इस सब का पता न चला… फिर ये लोग घर वापिस आ गए…
गोविन्द ने घर आ कर बापू और पापा और प्रकाश से मिला… वर्क प्रोग्रेस डिसकस हुई… पापा ने बापू के हवाले से एक काम का आईडिया दिया के अगर कैलाश बाबू चाहे तो 1000 स्क्वायर यार्ड्स का स्पेस प्लाट पर खली हे… वहां पर दूध वाले मवेशी रख कर पूरे शहर को दूध सप्लाई का काम किया जा सकता हे… क्यों के बापू का पहले इस काम का तजरुबा भी हे… और साथ साथ ये के बापू को वैसे भी लाला के मवेशी की देख बल के लिए सुबह सवेरे उठना hi था तो वो अपने काम को भी देख सकते थे… लाला के मवेशी तो सिर्फ इस लिए थे के उन की ब्रीडिंग कर के आगे बेचना था… और बापू का काम होता दूध के मवेशी रख के उन का दूध सेल करना पूरा शहर में…
बापू को ये मश्वरा ठीक लगा… और उन्हों ने कहा के पहले वाला काम ख़तम हो जये प्लाट पर तो फिर इस काम के लिए भी कंस्ट्रक्शन स्टार्ट करवा दें गए… अब 7 बजने वाले थे तो गोविन्द ने कहा के वो रेडी हो रहा हे डिनर के लिए सेठ गिरधारी लाल के वह जाने के लिए…
गोविन्द, सेठ गिरधारी लाल की मेन्टल एप्रोच को जनता था तो उस ने क़ीमती कपड़े पहने उन को इम्प्रेस करने के लिए… रस्ते से मिठाई और चॉकलेट्स और फ्लावर्स ले कर गोविन्द पोहंच गया उन के घर…
कार पार्क करने के बाद… गोविन्द जब कोठी के दरवाज़ पर पोहंचा तो उस का दिल धारक रहा था… काया पता डीडीओ में से कोई दरवाज़ा खोले… कोण सी दीदी हो गई दरवाज़े पर…. वर्षा दीदी या अक्षरा दीदी…
क्या सोचें गई उसे देख कर… क्या पहचान सके गई अपने मुन्ने बहिया को…
ऐसे बोहत सरे सवाल उस के मन में थे… उस के कदम लरज़ रहे थे… दिल बोहत तेज़ी से धारक रहा था…
वैसे तो कई बार अपनी डीडीओ के दिमाग़ में जा चुक्का था मगर सामना अब करे गए… ऑंखें नुम सी हो गयी… उस ने फिर अपने आप को संभाला… अपनी हिम्मत जुताई… और लरज़ते हाथो और धड़कते दिल के साथ दूर बेल्ल बजा दी…
दरवाज़ा खुला और जो लड़की उस को नज़र आयी दरवाज़े पे तो वो ये सोचने लगा के कही किसी ग़लत एड्रेस पर तो नहे आ गया… क्यों के उस के सामने कोई और नहे बल्कि
रिया खरी थी….
यही हल
रिया का था… गोविन्द को देख कर…
उस दिन के बाद से गोविन्द रिया को नहे मिला था और अब यहाँ उस के घर पोहंच गया था…
रिया ये समझी के गोविन्द उस की वजा से उस के घर तक आ गया हे…
रिया… “गोविन्द… तुम ऐसे मेरे घर तक क्यों आ गए… यूनिवर्सिटी में मिल लेते में मन तो न करती… में तो खुद तुम से मिलना चाहती थी… प्लीज चले जाओ… किसी ने देख लिया तो प्रॉब्लम हो जये गई…”
गोविन्द पहले तो घबरा गया फिर उस ने अपने आप को संभाला और पुछा…
गोविन्द… “ये क्या सेठ गिरधारी लाल का घर नहे…??”
रिया… “हाँ सेठ गिरधारी लाल का घर hi हे स्टुपिड… में उन की बेटी हु… अब निकलो जल्दी यहाँ से… प्लीज कल यूनिवर्सिटी में मिले गए… 4 बजे कैंटीन में…”
गोविन्द… “रिलैक्स हो जाओ मेरी जान… में आज तुम्हारे घर पे इन्वितेद हु डिनर करने लिए…”
रिया… “ता ता ता तुममम… लाला जी के बेटे हो जिस ने बिपिन भैया की जान बचाई थी… ओह्ह्ह्ह सहित… रियली….??”
गोविन्द… “जी में hi… लाला जी का बीटा गोविन्द हु… अब रास्ता दो अंदर आने का… स्टुपिड….”
रिया अब अपने मुंह पे हाथ रख कर हंसने लगी… और उस के रस्ते से हैट गयी… गोविन्द अंदर दाखिल हो गया तो उस ने दरवाज़ा बंद कर दिया… और मुस्कुराती… उस को साथ ड्राइंग रूम में ले आयी… गोविन्द ने मिठाई, चॉकलेट्स और फ्लावर्स एक टेबल पर रख दिए… ड्राइंग रूम में किसी को न देख कर गोविन्द ने कहा…
गोविन्द… “यहाँ तो कोई नहे हे… मेरी जान एक किश तो दे दो…”
रिया घबरा गयी… “ये क्या कह रहे हो… पागल तो नहे हो गए… सब घर पर हे कोई भी किसी वक़्त भी आ सकता हे…”
मगर गोविन्द ने उस को अपनी बांहो में भर कर ज़ोर से चूम लिया उस के होंटो पर… और हैट ते हुए उस के चुके बरी ज़ोर से मसल दिए…
रिया… “उफ़… चोरो … पागल… इतने दिन से मिले नहे और अब ऐसे तंग कर रहे हो… चोरो”
और अपनी बेतरतीब सांसे सँभालने लगी… चेहरा शर्म से लाल… मगर अंदर से बोहत खुश हुई उस का यूँ अपने लिए प्यार देख कर… और इस से पहले के गोविन्द उसे और तंग करता… वो ड्राइंग रूम से बहार निकल गयी और सब को बता दिया के लाला जीवट राम का बीटा गोविन्द जी ए हैं…
चेतन लाल और बिपिन लाल तो फ़ौरन पोहंच गए… और पूरे जोश से गले लगा कर मिले…
“बोहत धनवाद तुम्हारा…” चेतन बोलै…
बिपिन भी कहने लगा “यार बारे इंतज़ार कराया हे कीतिनि बार बोलने के बाद ए हो घर पे…”
रिया भी आ गयी थी तो बिपिन ने परिचय कराया के उन की बहन हे… दोनों ने प्रणाम किया एक दुसरे को… फिर सेठ गिरधारी लाल और उन की पत्नी ए… गोविन्द दोनों के पाऊँ छु कर आशीर्वाद लिया… इस बात से वो दोनों बोहत खुश हुए… कितने अचे संस्कार हे तुम्हारे बीटा… अरे भाई दोनों बहु को बुलाओ…
और फिर गोविन्द का इंतज़ार ख़तम हुआ…