Mere Khandan Ki Anmol Phuddiyan - Page 3 - SexBaba
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Mere Khandan Ki Anmol Phuddiyan

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सर आप कहानी पढ़ रहे हाँ.. वो भी मेरी........... कैसे मई अपनी ख़ुशी का इज़हार करूँ.. समझ में नहीं आ रहा :ीकडांस:
 
अठारहवीं क़िस्त

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मई भाभी की गांड देखने वाला था. गांड के सुराख़ को टच hi नहीं करने वाला था. अपनी ऊँगली भी अंदर डालने वाला था. जज़्बात थे कह नदी की शोर मचती लहरों की तरह बेकाबू होते जा रहे थे. जैसे नदी की तेज़ लहरें अपने अंदर हर एक चीज़ को अपने साथ बहा कर पल भर में hi कहीं से कहीं ले जाती हाँ. वैसे hi मई भी जबज़टों की तनड़ो तेज़ लहरों के मेरे वजूद के अंदर उठने से मई बेकाबू होने लगा था. जिस्म का रुअन रुअन सुलगने लगा था, झूमने लगा था. अंग अंग में नशा दौड़ने लगा था. मई अपने लुंड को पकड़ कर मसलता हुआ बाथरूम के दूर की तरफ देखने लगा. जहाँ किसी भी पल भाभी निकलती दिखाई देने वाली थी. और इस बार मुझे दिखाई देने वाली भाभी हर लिहाज़ से मेरी थी. आह्हः जिस्म ो जान से मेरी थी..

लुंड था मुझसे भी ज़यादा झूम उठा था. मेरे हाथ में मसाला जा रहा था. फिर भी उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था.. कमीने को कितनी जल्दी थी, कितनी छह थी भाभी की फुद्दी में उतरने की.. लेकिन नहीं जनता था. अभी तो बास भाभी की फुद्दी की थोड़ी सी झलक hi दिखाई दे सकती है. वर्ण तो आज गांड के दर्शन होने वाले थे.

भाभी ने दूर खोल दिए.. उम्मम्मम्म भाभी का शरमाया और निखरा चेहरा मुझे नज़र आया तो ऐसा लगा. मई भाभी को पहली बार देख रहा हों. देखने की नज़र भी तो बदल गई थी.

भाभी की नज़र जैसे hi कमरे की ोंन लाइट और मेरे हाथ में मेरे लुंड पर पड़ी.. भाभी शर्माती झिझकती हुई वापिस से बाथरूम में घुस गई.. भाभी की कनपटी हुई आवाज़ सुनाई दी - बाबू.. तुमने लाइट बंद नहीं की..

मई बखूबी में बोलै - क्या ज़रूरत है भाभी लाइट ऑफ करने की.. ऐसे hi चली आइये न

भाभी - नहीं.. तुम लाइट बंद करो.. और ये तुम क्या कर रहे थे.. देखो बाबू.. तुम खुद पर काबू खो रहे हो. मई खुद से कर लेती हों

भाभी ने पास ो पेश का मुज़ाहिरा किया.. तो मई घबरा गया. कहीं आज मिलने वाला मौका न हाथ से निकल जाए.. मई जल्दी से बोर्ड के पास गया और कमरे की इकलौती लाइट बंद कर दी.. अँधेरा नहीं हुआ था कमरे में.. दिन का वक़्त था. लेकिन अँधेरे जैसे hi था कमरे में...

मई जबज़ट से बोझल आवाज़ में बोलै - भाभी आ जाइये.. मैंने लाइट बंद कर दी है

=

भाभी ने सर बहार निकल कर देखा.. फिर कमरे में मलगजा अँधेरा देख वो शर्म से झिझकती हुई धीमी चाल चलती हुई बाथरूम से निकल कर बीएड की तरफ आने लगी.. भाभी के क़दमों की धमक मेरे दिल पर हो रही थी. भाभी की चाल कितनी मस्त हो गई थी शर्म और झिझक के चलते.. भाभी ने बड़ा सा दुपट्टा ओढ़ रखा था. सर पर नहीं था. लेकिन भाभी के दोनों हाथ दुपट्टे में छुपे हुए थे.. भाभी बीएड पर बेथ गई.. मई भी अजब नशे में भाभी के करीब जा बैठा.. मैंने भाभी का एक हाथ दुपट्टे के अंदर से थमने की कोशिश की तो मेरे भाभी का जिस्म और मेरा हाथ कैंप रहा था..

भाभी बेचारी खामोश रही.. जो होने वाला था. वो अनोखा तो नहीं था.. लेकिन देवर और भाभी के बीच न होने वाला काम था.. भाभी शर्म और झिझक में थी और मई अपने बेकाबू दिल की धड़कनो के साथ था..

मैंने धड़कते दिल के साथ भाभी को गले से लगा लिया.. उफ्फ्फ्फ़ भाभी का दिल तेज़ रफ़्तार ट्रैन की स्पीड से धड़क रहा था.. देर करना सही नहीं था. मैंने भाभी को कहा - आप लेट जाइये..

भाभी मुझे देखे बिना, कुछ बोले बिना बीएड पर उलटी लेट गई.. भाभी के हाथ में मुझे क्रीम दिखाई दी.. भाभी ने कांपते हाथ के साथ वो क्रीम बीएड पर राखी.. और अपना दुपट्टा अपने सर पर करती अपना चेहरा तक छुपा गई... मई उलटी लेती भाभी को देखने लगा.. मुझे ऐसा लग रहा था. जैसे भाभी भाभी न होकर मेरी बीवी हो. और एक बीवी अपने शोहर को खुली छूट दे रही हो.. आओ जो करना है कर लो.. मई तो तुम्हारी हों.. तुम्हे नहीं रोकूंगी...

मैंने भाभी की कमीज़ के पिछले पलु को उठा कर भाभी के चूतड़ों के ऊपर कर दिए.. भाभी की कनपटी हुई आवाज़ सुनाई दी - बाबू.. दूर को फिरसे अछि तरह चेक कर लो प्ल्ज़

दूर को मैंने पहले hi अच्छे से बंद कर दिए था. लेकिन सच कहूं तो मई भी घबराया हुआ था. मैंने दूर को देखा.. वो मुझे लॉक्ड दिखा.. लेकिन मई फिर भी बीएड से उतर कर दूर के पास गया.. अचे से लॉक को चेक किया. फिर वापिस आ कर अपनी रुकी सांस को बहाल किआ.. और भाभी की शलवार में कैद गांड को ताड़ने लगा.. वहां देखने लगा.. जहाँ भाभी की गांड का सुराख़ था.. शलवार ढीली थी.. फटी हुई ठीक से नज़र नहीं आ रही थी. मलजगा अँधेरा भी था... मैंने कांपता हाथ भाभी के चुत्तड़ पर रख दिए.. भाभी हिली.. लेकिन कुछ बोली नहीं

मैं ऑंखें बंद करता हुआ अपने दिल की धड़कन को काबू में करने लगा.. सराह भाभी की गांड जो किसी हिसाब से मेरी नहीं थी.. आज सराह भाभी की गांड पर मेरा हाथ धरा था.. आह्ह्ह्ह uffffffffffffffffffffff ummmmmmmmmmmmmmmmmmmm मई मज़े और नशे से पागल होने लगा. अजब अहसास पैदा हो रहा था. सुरूर और लज़्ज़त की लहरें सी मेरे वजूद में उठती हुई पूरी स्पीड के साथ मेरे जिस्म में ट्रेवल कर रही थी...

फिर मैंने भाभी की शलवार को दोनों हथु से पकड़ा और तान दिए.. मैंने हाथ लगा कर चेक किआ.. पंतय तो नहीं है.. लेकिन नहीं थी... uffffffffffff... भाभी के चुत्तड़ बिना पंतय के मेरी दस्तरस में थे... लुंड साहिब और भी जोश में आने लगे भाभी की गांड की नरम ो मुलायम जिलस को पर.. आठ कनपटी हुई जिल्द गर्म भी थी.

फिर मैंने फटी शलवार वाला एरिया तलाश किआ और उसके अंदर से एक ऊँगली भाभी की गांड के सुराख़ पर रख दी... भाभी उछाल पड़ी.... उनके मोह से कोई लफ्ज़ निकलने वाला था. लेकिन भाभी ने अपने मोह को ब्रेक लगा दी थी. शायद अपना एक हाथ अपने मोह पर रख लिया था. बेचारी शर्मा रही थी. अपनी गांड पर मेरी ऊँगली के लम्स को महसूस कर गई थी. पैदा होने वाले अहसास ने उन्हें कुछ कहने के लिए उकसाया.. लेकिन वो बड़ी शर्म वाली थी.. शर्म हावी हो गई..

मई नरम गर्म और खुद्रादि गांड को ऊँगली से महसूस करने लगा. ऊँगली को दरार में ऊपर लेजाने लगा तो भाभी कनपटी हुई बोली - बाबू... ऐसा न करो प्ल्ज़.. वही करो. जो करना ज़रूरी है..

मई - भाभी आप मुझे मेरी मर्ज़ी करने दें. मैंने आप से वडा किआ है.. कुछ भी ज़यादा आपसे पूछे बिना नहीं करूँगा.. आप मेरी हो भाभी.. पहली बार आप को ऐसी जगा छू रहा हों. जहाँ कभी मेरा हक़ नहीं रहा था. लेकिन अब आप ने आप के दिल में मुझे हक़ बख्श दिए है तो मुझे थोड़ा सा तो अपना हक़ पाने दें

भाभी खामोश हो गई.. मई ऊँगली से भाभी की गांड के सुराख़ और लकीर को चेक करने लगा. भाभी की गांड की लकीर में मेरी ऊँगली चल रही थी. मलजगे अँधेरे में भाभी की गांड की स्किन साफ़ दिखाई नहीं दे रही थी.. सुराख़ भी तो बहुत छोटा था शलवार में. मई बस महसूस करने लगा. और देखने से भी ज़यादा मज़ा आता है महसूस करने में.. और मई मज़ा लेने लगा..

ज़यादा देर नहीं कर सकता था. भाभी के कमरे में था.. और हम घर पर थे. कोई भी किसी काम से हमें डिस्टर्ब कर सकता था. एक तो हमारा ाचा वक़्त हमारे हाथ से निकल जाता. दूसरा हमें सँभालने का मौका नहीं मिलता.. ऐसे कोई गड़बड़ भी हो सकती थी...

मैंने क्रीम उठा कर भाभी की गांड के सुराख़ पर राखी और दबाता हुआ थोड़ी सी क्रीम भाभी की गांड के सुराख़ पर गिरा गया.. क्रीम ठंडी थी.. भाभी अपनी गांड हिला गई.. लेकिन फिर सुकून से हो गई... अब वो धीरे धीरे कैंप रही थी. ये कांपना तो रहने वाला था.. और भी बढ़ने वाला था...

मैंने क्रीम साइड रख एक हाथ से भाभी की शलवार को काबू में किआ.. दूसरे हाथ की ऊँगली से क्रीम भाभी की गांड के सुराख़ पर अच्छे से लगाने लगा.. लेकिन आसानी नहीं बानी..

मैंने तकिया देखा.. उसे उठा कर भाभी से बोलै - भाभी ये तकिया नीचे ले लीजिये

भाभी ने अपनी गांड उठा दी.. मैंने तकिया नीचे रख दिए.. ऐसे कह भाभी की फुद्दी तकिये के बीच में आ गई.. भाभी की गांड उठ चुकी थी. मैंने भाभी की टांगें पकड़ कर पहला दें.. देखा तो भाभी के चुत्तड़ कैसे जा चुके थे. मैंने जब ऊँगली भाभी की गांड के सुराख़ पर दबाई.. तो भाभी siiiiiiiiiiiii कर उठी.. मेरी ऊँगली भाभी की गांड के सुराख़ में थोड़ी सी एंटर कर गई थी.. क्रीम बड़ी जुड़ असर थी. जल्द hi मुझे महसूस हुआ. मेरी ऊँगली और भाभी की गांड का सुराख़ और आस पास की स्किन सुन्न होने लगी है... मैंने साइड्स में अचे से क्रीम लगाई.. फिर क्रीम उठा कर उसके मोह को भाभी की गांड के सुराख़ में घुसा दिए..

भाभी कनपटी हुई - बाबू ये क्या कर रहे हो

मई - अपना काम!

भाभी चुप कर गई. मैंने थोड़ी सी क्रीम भाभी की गांड के सुराख़ में डाली.. फिर बीएड पर रख अपनी एक ऊँगली भाभी की भाभी की गांड में उतरने लगा. भाभी कसमसाई.. अभी उन्हें मेरी ऊँगली महसूस हो रही थी.. मैंने धीरे धीरे करके अपनी आधी से ज़यादा ऊँगली भाभी की गांड में उतार दी.. फिर ऊँगली से hi क्रीम भाभी की गांड में अंदर मूव करने लगा.. थोड़ी hi देर में मैंने भाभी से पूछाए

मई - भाभी क्या मेरी ऊँगली अब आप को महसूस हो रही है

भाभी नहीं बोली.. शर्म से पानी पानी हो रही थी. उनकी गांड में उसके शोहर की ऊँगली नहीं उनके लव उनके देवर की ऊँगली थी..

मई - बताइये न भाभी जी

भाभी - नहीं

बास इतना hi बोल सकीय.. मई मुस्कुराया नहीं. मई तो होश खोता जा रहा था.. भाभी की किसी बात पर रियेक्ट कैसे करता.. मेरे सामने भाभी का नायब जिस्म था. और गांड में मेरी ऊँगली थी..

भाभी ने कहा.. मेरी ऊँगली उन्हें महसूस नहीं हो रही है.. तब मैंने ऊँगली निकल कर गांड के साइड्स कहीं भी हाथ न लगा कर अपनी दो उँगलियाँ भाभी की गांड में घुसाने लगा.. जब घुस गई तो मैंने फिरसे भाभी से पूछा

भाभी नहीं बोली.

मैंने देखा.. भाभी की गांड का सुराख़ मेरी दो उँगलियों को निगल गया था.. मैंने तीसरी ऊँगली भी घुसा दी... फिर भी भाभी नहीं हिली तो मैं तीन उँगलियाँ भाभी की गांड में घुसा कर गोल गोल घूमने लगा. ऐसे भाभी की गांड का सुराख़ अचे से खुल जाता.. मेरी तीन उँगलियाँ मिला कर इतनी चौड़ी हो जाती thi..teen इंच के करीब बन जाती थी. इतना hi मेरा लुंड था.. भैया का लुंड तो इतना मोटा नहीं होगा..

अब मई पागल होने लगा था. इतने दिनों से किसी की न फुद्दी मारी थी न hi गांड.. एक तो गांड मेरे सामने थी. दूसरा अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था.. मई अपना लुंड बहार निकाल गया..

मई नशे से चूर आवाज़ में बोलै - भाभी

भाभी नहीं बोली

मई - भाभी मैं आप से परमिशन मांग रहा हों भाभी.. प्ल्ज़ मुझे थोड़ा सा अंदर दाल लेने दीजिये

भाभी काँपी.. फिर सर उठा कर पीछे मुद दुपट्टे से चेहरे को ढांपे हुए hi बोली

भाभी - नहीं बाबू.. ऐसा मत करना.. अभी मई इसके लिए त्यार नहीं हों

मई - लेकिन मई तो त्यार हों भाभी जी.. कसम से नहीं रहा जा रहा है

भाभी शर्म से बोल रही थी - देखो बाबू. मैंने तुमसे पहले hi कहा था.. तुमने वडा किआ था

मई - हाँ वडा किआ था.. इसी लिए तो आप से पूछ रहा हों भाभी.. मैंने तीन उँगलियाँ दाल कर देखि हाँ.. आप को महसूस नहीं हुआ.. भाभी थोड़ा सा दाल लेने दीजिये.. आप को परेशानी नहीं होगी

भाभी की जज़्बात से ओझल भरी सांस की आवाज़ सुनाई दी - देखो बाबू.. तुम मुझे पहले hi पागल बना चुके हो. और पागल न बनाओ.. एक तो मेरा डर नहीं जा पाया है. दूसरा मई अभी तुम्हे वहां नहीं करने दे सकती.. वहां पहले नदीम hi करेगा..

मई - देखें न भाभी जी.. आप अपनी शर्म से मजबूर हाँ.. अभी आप मेरे सामने खुल कर नहीं आना चाहती.. अभी आप मेरे सामने बेलिबास होने की हिम्मत नहीं पति है.. लेकिन ऐसे hi माहौल में कुछ तो हो hi सकता है न.. प्ल्ज़ मुझे इजाज़त दे दें.

भाभी - बाबू तुम ज़िद्द पर उतर आये हो.. एक तो मई शर्म से पानी पानी हुई जा रही हों... ऊपर से तुम बच्चों जैसी ज़िद कर रहे हो

मई - भाभी ये आप के दिल की भी तो आवाज़ है

भाभी - जो भी है... लेकिन तुम अभी नहीं कर सकते

मई मायूस होने लगा. अपनी मर्ज़ी कर सकता था. लेकिन प्यार में मन मणि नहीं चला करती.. और फिर मुझे कोनसा एक hi बार में भाभी के सुराखों में घुसना था.. बार बार घुसना था. और बिना इजाज़त के किसी की ज़मीन पर खेती जबरन तो हो सकती है. रज़ामंदी से नहीं... और ज़मीन रज़ामंद न हो तो अनाज भी ख़ुशी से नहीं देती..

फिर मुझे कुछ याद आया - भाभी.. अगर मई पीछे के रस्ते न जा कर आगे के रस्ते से आ जाओ तो ??

भाभी खामोश रही.

मेरा दिल ख़ुशी से झूम उठा. भाभी दिल से राज़ी थी..

मई अपना लुंड भाभी की टांगों में छूट के करीब फंसा कर भाभी के ऊपर hi चढ़ आया.. भाभी झट से अपना सर बीएड पर गिरा गई... कनपटी हुई बोली - बाबू ये क्याआआआ.. मैंने तुम्हे मन किआ है.. और ये तुमने.... तुमने बहार क्यों निकला

मई अपना चेहरा भाभी के चेहरे के करीब करता हुआ सरगोशी में बोलै - भाभी उसे बहार न निकलता तो बेचारा दम घुटने से मर जाता.. अब खुली हवा में है. आप की सबसे महकती वादी के पास है. आप की वादी और मेरा मुन्ना दोनों एक दूसरे से राज़ ो नियस में मसरूफ हाँ.. भाभी हम भी एक दूसरे की मान लेते हाँ न...

भाभी - तुम कहाँ मेरी मान रहे हो

मई - मई आपकी नहीं आप के दिल की बात कर रहा हों भाभी.. आप का दिल तो बिना वक़्त ज़यादा किये मेरे उस को आप की उसके अंदर लेने को बेताब है

इशारे में हुई खुली बात पर भाभी मेरे नीचे दबी बुरी तरह काँप उठी. मैंने एक हाथ से अपना लुंड पकड़ कर भाभी की फटी शलवार के सुराख़ में घुसा कर लुंड को भाभी की नंगी चिकनी फुद्दी के साथ टच कर दिए... भाभी उछाल पड़ी

कनपटी हुई नशीली आवाज़ में बोली - baaaaaabuuuuuuuuuuuuuuuuu..... हटा लो वह से

मैं अपनी गर्म साँसें भाभी के गाल पर छोड़ता हुआ भाभी के गाल को दुआपत्त्ते के ऊपर से hi चुम गया...

मई - भाभी.. यहाँ देर है तो बास आप के हाँ कहने की. आप का दिल हाँ कह रहा है. आप अपनी ज़ुबान से भी हाँ कह दें न... प्ल्ज़ अपने बाबू की खातिर... प्ल्ज़ भाभी जी प्ल्ज़

भाभी - बाबू मुझे पता होता तुम ज़िद्द पर उतरा आओगे तो मई--

मई - प्यार में ज़िद न हो तो दोनों प्रेमी प्यासे रह जाते हाँ भाभी जी

भाभी - ठीक है बाबू.. लेकिन तुम ज़यादा नहीं करोगे.. थोड़ा सा करके बाकि का बाद के लिए.... अगर मेरी मान लेते हो तो ठीक है.. वर्ण तुम जाओ कमरे से.. बाकि की क्रीम अब मई खुद hi लगा लूंगी

मई दुपट्टे को भाभी के चेहरे पर से हटा गया. भाभी के गाल को चुम गया.. भाभी हड़बड़ा कर अपने दुपट्टे से फिरसे अपना चेहरा ढांप गई.. लरज़ती हुई बोली - न बाबू... दुपट्टा न हटाओ.. शर्म मुझे मार degi..tum तो बेशरम हो..

मई खुश होता हुआ बोलै - थोड़ा सा बेशरम मई आप को भी बना दूंगा भाभी...

फिर बोलै - भाभी अब आप धयान रखियेगा.. मई अंदर डालने वाला हों..

फिर मैंने अपने लुंड को पकड़ कर अचे से भाभी की फुद्दी पर सेट कर दिए.. लेकिन साथ hi एक ऊँगली से भाभी की फुद्दी को मसल भी दिए था. गर्म फुद्दी का गरम लेसदार पानी बड़ा मज़ा दे गया मुझे... मैं अपने लुंड की कैप को भाभी की फुद्दी के लेसदार पानी से भिगोने लगा.......

अब मेरा लुंड भाभी की फुद्दी के सुराख़ में था.. एक धक्का और मैंने मैदान मार लेना था......

 


उन्नीसवीं क़िस्त

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मेरा सख्त लोहे के लोहे जैसा गोरा चिकना लुंड भाभी की चिकनी हो चुकी फुद्दी के लबों को चुम रहा था. भाभी की फटी शलवार ने छोटे से सुराख़ से गुज़रता हुआ मेरा लुंड भाभी की फुद्दी में जाने को बेक़रार था. आठ मई भाभी पर झुका भाभी की तकिये पर राखी गांड के ऊपर था.

जज़्बात के बेपनाह उधम मचाते तुफानो के की बदलत मेरी सांसें अलग hi शोर मचा रही थी. गरम साँसें मेरी नक् से निकलती हुई मेरे हालत को बिगड़ रही थी. फिर मई और भी झुकता हुआ धीरे से बड़े प्यार से नशे से चूर लहजे में बोलै

मई----- भाभी में डालने वाला हों. क्या आप तैयार हाँ

भाभी ने एक दबी दबी सांस छोड़ी और कनपटी हुई आवाज़ में बोली--- बाबू मुझसे कुछ मत पोछो. बास अपने दिल कर जाओ

मई--- क्या आप के दिल नहीं कर रहा हों मई

भाभी---- मेरा दिल मेरा रहा hi कहाँ है बाबू. वो तो तुम्हारा हो चूका है.

मई--- अब आप की सबसे कीमती चीज़ भी मेरी होने जा रही है. भाभी जी क्या आप ख़ुशी ख़ुशी इसे मुझे दे रही हाँ

भाभी--- ख़ुशी न होती तो जो तेरी कभी नहीं थी. वो तुझे देती hi क्यों बाबू.

मई---- मई फिर आ रहा हों भाभी

भाभी--- आ जाओ बाबू.. लेकिन थोड़ा सा आना

मई---- जी भाभी

और मई अपनी सांस अपने सीने में दबाता हुआ अपने लुंड को दबाओ बढ़ा गया था. मेरा मोटा सख्त लुंड भाभी की भीगी चिकनी फुद्दी को खोलता हुआ अंदर जाने लगा.

भाभी----- siiiiiiiiii ummmmmmmmmmmmmmm

फिर एक सांस लेकर अपने सीने में रोक गई. भाभी का जिस्म थोड़ा सा उठा.. फुद्दी थोड़ी सी टाइट हुई. मई भाभी की फुद्दी और अपने लुंड के मिलान को फील करता हुआ और दबाओ बढ़ा गया. मेरे लुंड का सर भाभी की फुद्दी में पूरा समां गया.. भाभी की फुद्दी ने मेरे लुंड को कास लिए.. आह्हः कितना मज़ा था भाभी की फुद्दी में.. मेरा नशा और मज़ा बढ़ने लगा. भाभी इस वक़्त मुझे दुन्या की सबसे पायरी औरत लग रही थी.

मई तेज़ सांस लेता भाभी के चेहरे पर झुक कर बोलै---- भाभी ाचा लग रहा है न

भाभी की शर्म से भीगी आवाज़ सुनाई दी--- बाबू तुम ऐसे वक़्त क्यों ज़यादा बोल रहे हो

मई---- तकह हमें हमारे पहले मिलान का पूरा पूरा मज़ा आ जाए. क्या आप पूरा पूरा मज़ा नहीं लेना चाहती हाँ ?

भाभी--- पता नहीं मई क्या क्या चाहती हों बाबू.. और क्या क्या चाहने लगी हों

मई--- आप खुश तो हाँ न भाभी

भाभी---- हाँ बाबू. आज मुझे वो ख़ुशी मिल रही है. जो आज से पहले कभी नहीं मिली

मई दोनों हाथ साइड्स बीएड पर रख अपना सारा वज़न हथु पर दाल भाभी पर झुका हुआ था. ऐसे hi अपना चेहरा भाभी के चेहरे पर करता हुआ दुपट्टे के ऊपर से hi भाभी के गाल को चुम लिया.. फिर अपना एक गाल भाभी के गाल से रगड़ता हुआ मई बोलै--- भाभी और आगे धकेलों

भाभी--- हम्म्म

मई---- भाभी मोह से बोलिये न. मुझे ाचा लगेगा

भाभी--- हम्म्म धकेल दो बाबू

मई भाभी के गाल से गाल को रगड़ता हुआ और भी नशे में होता हुआ बोलै---- ये होइ न बात. आप बहुत प्यारी हाँ भाभी जी

भाभी--- तुम भी बहुत प्यारे हो बाबू

फिर मैंने अपने लुंड को भाभी की फुद्दी में धकेलना शुरू कर दिए.. टाइट फुद्दी खुलती चली गई.. मई महसूस कर रहा था.. मेरे लुंड के अंदर घुसते hi भाभी की फुद्दी की अंदरूनी दीवारें बड़ी मुश्किल से फैलती जा रही हाँ

मई---- भाभी दर्द हो रहा है न

भाभी--- हम्म्म्म

मई---- मेरा ज़यादा मोटा है न

भाभी--- हम्म्म्म

मई---- ऐसे hi प्यार से डालूं.. या ज़ोर से

भाभी---- प्यार किया है तो प्यार से hi डालोगे न बाबू..

मई--- हाँ भाभी.. प्यार किया है तो प्यार से hi करूँगा.. आप की इजाज़त है तो मई भी पूरा पूरा प्यार आपको दूंगा.. दूँ पूरा प्यार आपको भाभी जी

भाभी--- हम्म्म्म

मई--- मोह से बोलिये भाभी जी

भाभी---- हाँ बाबू दो अपना पूरा प्यार

मई----- दर्द होगा भाभी

भाभी---- पता है

मई---- मेरे लिए सारा दर्द सहन कर रही हाँ ना आप

भाभी--- तेरे प्यार के लिए बाबू.. सब प्यार की वजा से हो रहा है. प्यार न होता तो कहाँ हम तुम इतने करीब आ पते

मई-- सही कहा भाभी जी आप ने..

फिर मैंने हल्का सा धक्का मार दिए

भाभी---- आह्हः

मई--- दर्द हुआ

भाभी---- हैं

मई---- ज़यादा हुआ

भाभी--- हाँ ज़यादा हुआ

मई---- प्यार भी ज़यादा hi मिलेगा.. बोलिये दर्द से डरेंगी या प्यार पाना चाहेंगी

भाभी---- ज़यादा प्यार पाना चाहूंगी

मई---- मेरी अछि भाभी जी

भाभी--- मेरा जणू मेरा बाबू.. अब जल्दी करो बाबू.. कोई आ न जाए

मई---- जी भाभी जी

भाभी ने कहा था थोड़ा सा hi लुंड फुद्दी में घुसना.. भला शर्म वाली भाभी ये तो नहीं कह सकती थी. पूरा नहीं घुसना.. वो तो थोड़ा सा hi घुसाने को मान इशारा दे गई थी. कर लो.. जितना करना है. जैसे करना है. मैंने तो इजाज़त दे दी है

बास मई भाभी के दिल की मानता हुआ धीरे धीरे पानी से सनी भाभी की फुद्दी में अपना लुंड अंदर और अंदर करता चला गया. जैसे जैसे मेरा लुंड आगे जा रहा था. भाभी की फुद्दी की दीवारें टाइट होती जा रही थी.. फिर एक जगा मेरे लुंड ने धीरे धीरे जाने से इंकार कर दिए.. मई समझ गया. यहाँ तक hi नदीम भाई पोहंच सके हाँ..

इससे आगे मई पोहचने वाला था.

मई--- भाभी जी मज़े का क्या हाल है

भाभी-- मत पूछो बाबू. इतना मज़ा आ रहा है.. किसी और hi दुन्या में खुद को फील कर रही हों

मई--- उस दुन्या के नज़ारे कैसे हाँ भाभी जी

भाभी--- बहुत हसीं.. बहुत अट्रैक्टिव.. मैं नहीं है वहां से लौटने का

मई---- वहां के नज़रों का सुरूर और अट्रैक्शन बढ़ा डॉन

भाभी--- बढ़ा दो

मई--- दर्द होगा

भाभी--- मज़ा भी आएगा

मई-- तो आप त्यार हाँ

भाभी--- हाँ बाबू

मई--- अपने मोह पर हाथ रख लें

भाभी--- मोह पर हाथ रख लून!. लेकिन क्यों ??

मई--- चीख न निकल जाए

भाभी--- चीख क्यों निकलेगी

मई--- बस निकलेगी न.. मेरा मोटा और लम्बा है न

भाभी---- ओह्ह्ह हाँ.. t-to क्या तुम सारा डालना चाहते हो

मई---- जी भाभी जी

भाभी--- मैंने तो ठोस सा hi कहा था

मई---- मेरा दिल है भाभी. और फिर मई आप को सारा प्यार देना चाहता हों

भाभी---- तेरे लिए कुछ भी बाबू.. ठीक है. दो अपना सारा प्यार..

मई-- मोह बंद कर लीजिये..

भाभी ने अपना दुपट्टा अपने मोह में घुसा दिए.. मई देख रहा था.. मई भाभी के गाल को फिरसे दुपट्टे के ऊपर से चूमता हुआ अपने लुंड को थोड़ा सा पीछे खेंच कर एक ज़ोर का धक्का मार गया..

भाभी हूँ हूँ करके मेरे नीचे तड़पने लगी.. भाभी की आगे की फुद्दी की साडी दीवारें भी अब खुल गई थी. मेरा लुंड भाभी की फुद्दी में जड़ तक उतर चूका था..

मई भाभी के गाल को चूमता हुआ ----- बस्स्स भाभी जी सारा चला गया

भाभी मोह से कपडा निकल सिसकती हुई बोली---- कितना दर्द दे दिए मुझे बाबू

मई---- अब मज़ा भी दूंगा भाभी जी

फिर मैंने अपने लुंड को सलौली सलौली खेंच कर कैप तक बहार निकला और ऐसे hi सलौली सलौली प्यार से भाभी की फूडी में पूरा का पूरा लुंड अंदर डालने लगा.. अंदर आगे जा कर मेरा लुंड भाभी की बच्चेदानी से टकरा रहा था..

भाभी--- आह्हः बाबू... दर्द

मई--- मज़ा भाभी जी मज़ा

भाभी के रोटी आवाज़ आई--- हम्म्म मज़ा भी

मैंने धीरे धीरे अपने लुंड को निकाल पूरा पूरा भाभी की फुद्दी की दीवारों को खोल अंदर डालने लगा. जल्द hi भाभी मस्त होने लगी. मोठे लम्बे लुंड ने भाभी को अब मज़ा देना शुरू कर दिए था..

भाभी अपनी गांड हिला गई.. मई अब पूरा hi भाभी के ऊपर लेट गया था. भाभी के सीने में नीचे हाथ दाल कर भाभी के मुम्मों के नीचे रख भाभी को छोड़ने लगा

मई--- ाचा लग रहा है न भाभी जी

भाभी---- हम्म्म

मई--- बड़े और मोठे से ज़यादा मज़ा आता है न भाभी जी

भाभी--- हम्म्म्म

मई--- भाभी स्पीड बाधाओं अब

भाभी---- हम्म्म्म

मैंने स्पीड बढ़ा दी.. धीरे धीरे भाभी की फुद्दी में पानी बढ़ने लगा.. जो हर धक्के के साथ बहार ा रहा था.. फिर भाभी की गांड हिलने तेज़ हो गई

मई भाभी के चेहरे के करीब गर्म सांस छोड़ता हुआ बोलै--- भाभी आप का होने वाला है

भाभी--- हम्म्म्म

मई--- और स्पीड बाधाओं

भाभी---- ह्म्म्मम्म

और मैंने स्पीड बढ़ा दी.. जल्द hi भाभी मेरे नीचे मचलने लगी.. उनका जिस्म बहुत ज़यादा अब गर्म हो चूका था. जल्द hi भाभी अपने जिस्म को अकड़ती हुई एक झटका कहती हुई झाड़ गई..

मई कुछ पलों के लिए रुक गया.. भाभी तेज़ तेज़ साँसें लेने लगी.. मैंने अपने लुंड से पहली बार भाभी की फुद्दी को सुख दे दिए था.

भाभी रिलैक्स हुई तो मई बोलै--- भाभी जी पहला लव वाटर निकल आया है

भाभी--- हाँ बाबू

मई--- तो अब आप थोड़ा सा खुलेंगी मेरे साथ

भाभी धीरे से है पड़ी--- इतना सब तुम्हे करने दिए है बाबू.. बा भी खुलने की बात कर रहे हो

मई--- हाँ भाभी जी

भाभी---- और कितना खुलून बाबू

मई---- जितना प्यार में ज़रूरी होता है

भाभी---- प्यार की डिमांड्स भी कभी पूरी हुई हाँ बाबू

मई--- नहीं हुई हाँ

भाभी--- प्यार तो डेली डिमांड्स पर डिमांड्स बढ़ता hi चला जाता है.

मई-- अच्छी बात है न

भाभी--- देख बाबू.. मुझे बेशरम नहीं बनना है.. बाकि तू जितना खोलेगा मुझे मई खुल जाउंगी.. लेकिंन आज नहीं.. धीरे धीरे.. अच्छे बच्चे बड़ों की बात मान लिए करते हाँ

मई भाभी के मोह से दुपट्टे को हटाता हुआ---- अब लगी हाँ आप असली प्यार करने वाली भाभी

भाभी--- हेहेहे तो क्या मई पहले प्यार करने वाली भाभी नहीं थी

मई--- थी.. पर जब से हमारा प्यार बदला है न.. तब से आप झिझको भाभी बन गई हाँ

भाभी--- हेहेहे झिझको bhabhi..hehehe बाबू तुम भी ना

मई--- भाभी ऐसे hi करता रहूं क्या

भाभी---- तो कैसे करने का इरादा रखता है मेरा बाबू

मई--- सीधे आप के ऊपर लेट कर किश करते हुए

भाभी--- नहीं बाबू.. अभी मुझे बड़ी शर्म आ रही है.. तुम बास जल्दी से अपना काम पूरा करो. और जाओ मेरे कमरे से.. कहा न धीरे धीरे खुलूँगी.

मई-- मान जाइये न भाभी

भाभी मस्ती में गई थी--- कहा न नहीं. वर्ण जितना कहा था.. तुमने उससे ज़यादा कर लिए है.. मई रोक दूंगी...

भाभी ने धमकी दी मुझे

मई भाभी के गाल को चुम कर--- मई डर गया

भाभी है पड़ी---- हेहेहे... मुझसे डरते hi रहना तुम.. समझे.. बड़ी हों. भाभी भी हों. और भी बहुत कुछ हो गई हों

मई--- जनता हों

भाभी---- फिर जल्दी करो.. ऐसा hi हो. कोई आ जाये तो तुम्हे ऐसे hi भूके पेट जाना पड़े

मई है पड़ा.. फिर स्पीड के साथ कभी भाभी के गाल को चूमता हुआ कभी भाभी के गाल से गाल को रगड़ता हुआ भाभी को छोड़ने लगा..

कुछ मिनट और गुज़र गए.. भाभी मस्त होने लगी. एक बार फिरसे वो मूड में आने लगी.. धीरे धीरे न चाहते हुए भी उनके मोह से आहें निकलने लगती थी. वर्ण भाभी मेरे सामने अपनी सिसकियाँ और आहें दबाये रखना चाहती थी. धीरे धीरे hi खुलने वाली थी. और ये धीरे धीरे खुलना मुझे ज़यादा मज़ा देने वाला था..

फिर मेरे लुंड में भी जोश बढ़ने लगा. जो बढ़ता hi गया. मेरे धक्कों की स्पीड के साथ भाभी की गांड की उछाल कूद भी बढ़ती चली गई...

भाभी झड़ी तो 15 20 धक्कों के बाद मेरा लुंड ने भी हार मानते हुए भाभी की फुद्दी में रोना शुरू कर दिए...

सारा लुंड भाभी की फुद्दी में खली करने के बाद मई भाभी के ऊपर लेता हांप रहा था.... uffffffffffffffffff लाइफ की पहली फॅमिली चुदाई मैंने कर ली थी

आज से पहले चुदाई का इतना ज़यादा मज़ा मुझे नहीं आया था. मैंने अच्छा फैसला किआ था.. अब से बहार मोह मारना बंद.. कोई प्यार करने वाली मिली तो ज़रूर उसे छोडूंगा.. प्यार से चुदाई में अलग hi मज़ा मिलता है.. आज सही मनो में पता चल रहा था..

मई उलटी लेती भाभी के ऊपर लेता hi रिलैक्स होने लगा.
 
अपडेट पोस्ट कर दिए है भाई लोगो

देर सावेर होती रहती है. कोई रीज़न बताओं तो रीडर्स कहते हाँ. कोई नहीं फॅमिली मैटर्स & बिज़नेस फर्स्ट

फिर भी कुछ रीडर्स लुंड पर चढ़ने लगते हाँ. स्टोरी उपदटेस कुछ लेट हो जाए तो अक्सर वो रीडर्स माँ छुड़ाने के लिए आ जाते हाँ. जिन्हो ने कभी एक भी अपडेट पर कमेंट नहीं दिए होता

यहाँ उपदटेस की दमाद वहीँ करें. जो हर अपडेट पर अपना रिव्यु देते हाँ. वेटिंग के लिए बोलना हो तो शराफत से बोलै करें. वर्ण साइलेंट हो तो साइलेंट hi बनकर रहो समझे. अपडेट न मिलने पर don't ब्रेक थे साइलेंस

सलूट करता हों अच्छे और सबर का मुज़ाहिय्रा करने वाले रीडर्स को ✋ 🫡
 


बीसवीं क़िस्त

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भाभी और मई दोनों hi बड़े हलके हो चुके थे. हमारा अनमोल प्यार, मेरे अनमोल लुंड और भाभी की अनमोल फुद्दी के संगम से और भी अनमोल हो गया था.. अपने लुंड की साडी मणि भाभी की फुद्दी में उतार का मैं सीधा हुआ और भाभी को खूब देर तक चूमता रहा.. भाभी एक सच्ची माशूका की तरह खिलखिला कर हस्ती रही थी..

फिर भाभी बाथरूम में घुस नहाने चली गई. और मई अपने कमरे में जा कर वहां के बाथरूम में घुस नहाने लगा.. नहाते हुए एक बार फिरसे मेरा लुंड खड़ा होने लगा.. और मई अपने लुंड को पकड़ बड़े फखर के साथ बड़े प्यार के साथ हिलने लगा.. ठन्डे पानी के नीचे खड़े होकर मई अपने गर्म और मोठे तगड़े लुंड को हिलता हुआ देख रहा रहा था.

मई खुद से बोलै - वहहह बाबू आज तो तेरी सच्ची लॉटरी लग hi गई.. क्या फुद्दी थी भाभी जी की. और क्या hi मस्त अंदाज़ से भाभी ने मुझसे अपनी फुद्दी मरवाई. इतना सब होने के बावजूद भी मेरे अंदर कहीं दूर दूर तक हवस नहीं थी. मई अपना लुंड छोड़ शावर के गिरते पानी के नीचे खड़ा हुआ सोचने लगा. ये माहिरा एपीआई तो कमल की निकली.. कितनी गरम है वो.. अपने hi भाई के लिए कैसी फीलिंग्स वो अपने अंदर पाल गई.

फिर मेरे दिल में आया.. किन्ज़ा एपीआई ने भी बाद में बुरा नहीं मनाया था. किन्ज़ा एपीआई के दिल में कोई और था.. जो भी था. अब मुझे जानना था. उनके दिल में मई कितनी गहराई तक हों. और किस हिसाब से हों. क्या उनके दिल में भी माहिरा एपीआई के जैसे hi मेरे लिए चाहत जनम ले चुकी है. क्या वो मेरे सामने भी माहिरा एपीआई के जैसे खुल सकती हाँ. अम्मी जान खुल चुकी थी. फुफु भी मेरे साथ बहुत खुल चुकी थी. लेकिन मेरे प्यार के इस नए रुख को जान वो कैसे रियेक्ट करेंगी. अब मुझे जानना था.. और फिर दादी जान.

मई नाहटा हुआ कुछ और भी सोचता रहा.

मैं नाहा कर कपडे बदल कर जब नीचे गया तो वहां मुझे बास अम्मी जान hi दिखी. मई उनके पास जा कर उनके गले में बाहें दाल कर बेथ गया

अम्मी जान ने मेरे गाल को चुम एक बहुत hi मीठी स्माइल दी मुझे

अम्मी जान - मेरा बाबू मुझसे इतना करीब होकर दूर दूर क्यों रहने लगा है

मई भी अम्मी जान के गाल को चुम कर उनके माथे को चुम कर बोलै - क्या करूँ अम्मी जान. जब से मेरे अंदर नए प्यार ने जनम लिया है. मुझे सब का ख्याल भी है. घर में सब को भी मेरे अनमोल प्यार की चाहत पहले से ज़यादा होने लगी है. भाभी जान हाँ तो हमारी hi अम्मी जान. पर कुछ दिनों तक वो बड़ी अपसेट रही हाँ. अब मैं उन्हें ज़यादा वक़्त दे रहा हों. मई चाहता हों अम्मी जान. वो अपने मायके से भी बढ़कर इस घर में प्यार को पाएं

अम्मी जान खिल उठी - मेरा बाबू कितना समझदार और कितना प्यारा हो गया है

मई - आप की hi पाक कोख में रहा हों मई अम्मी जान वो भी 9 महीने तक. आप की कोख बड़ी महकती हुई और बड़ी hi प्यार वाली है अम्मी जान. यही प्यार पहले आप के दूध पीने से मेरी नस नस में उतरा. फिर खुल कर अनमोल प्यार करने से मेरे रुएँ रुएँ में उतर ज़ाहिर होने लगा है. ये सब आप hi की बदौलत है अम्मी जान.

अम्मी जान का पुरनूर चेहरा और भी चमक उठा. फिर से मेरे चेहरे को चुम बोली - अब तो मैं hi नहीं भरता तुझे चूमने से

मई - और मेरा भी.

हम हसने लगे.

मई - दादी कहाँ हाँ

अम्मी जान - अपने कमरे में हाँ

मई - मई दादी जान से मिलके आता हों

अम्मी जान - हाँ वो भी तुम्हे पूछ रही थी बाबू. जाओ मिल आओ अपनी दादी जान से. उन्हें भी तुम्हारे अनमोल प्यार की बड़ी आरज़ू है

मई उठा और अम्मी जान को प्यार देने के बाद दादी जान के कमरे तक जा पोहंचा. पहले दूर को नॉक किआ. अंदर से इजाज़त मिली तो मई अंदर घुस गया

दादी बीएड पर बैठी अपने सामने कपड़ों के ढेर को खंगाल रही थी

मई दूर को अंदर से लॉक करने लगा

दादी - बाबू ये दूर क्यों लॉक कर रहे हो. बिना इजाज़त तो कोई नहीं आता

मई - दादा जान तो आ सकते हाँ न

दादी है पड़ी - उन्हें इजाज़त की क्या पड़ी है. और फिर उनसे कैसा पर्दा

मई आंख मार बोलै - क्यों दादी. क्या पता मई आप को प्यार कर रहा हों. और दादा जान आ जाएँ. वो कुछ गलत समझें और बंदूक उठा कर ले आएं. फिर हम दोनों को घुसे से देखते हुए थाआठ ठाठ ठाठ ठाठ

दादी कपडे रख खिलखिला कर है पड़ी

दादी - बाबू तुम भी ना... हेहेहे.. भला वो क्यों गलत समझेंगे. तेरा प्यार तो बड़ा hi अनमोल है बाबू

मई - इसी अनमोल प्यार के चलते कुछ गड़बड़ होने लगी है दादी जान

दादी - कैसी गड़बड़

मई - दादी मुझे लग रहा है. मेरा अनमोल प्यार कुछ ज़यादा hi है

दादी - कैसे

मई - ाचा पहले ये बताएं. आप अम्मी जान से मेरे लिए क्यों पूछ रही थी

दादी - वो इसलिए.. क्यों कह आज कल मेरा तुम्हारे साथ ज़यादा से ज़यादा वक़्त बिताने को दिल करने लगा है.

मई - क्यों ??

दादी साद होती हुई बोली - बाबू.. तुम्हारी अम्मी जान तुम्हारे अब्बू और तुम सब अभी भी जवान हो. लेकिन मई तो अब बूढी हो चुकी हों न. 72 साल की हो गई हों. कभी भी ऊपर से बुलावा आ सकता है. इसलिए मई चाहती हों. तुम्हारा ज़यादा से ज़यादा अनमोल प्यार पा लून

दादी बड़ी दुखी हो गई थी. मई झट से दादी को गले से लगा गया.. दादी अपनी गोरी गरम बाहें मेरे गिर्द लपेट गई.

मई - ना दादी जान ना.. ऐसा फिरसे कभी न कहियेगा.. आप को मेरी भी उम्र लग जाए.. आप हज़ारों साल और जियो.. दुन्या में कितनी hi ऐसी हाँ. जो 100 साल से भी ऊपर की ज़िन्दगी जीती हाँ.. हमारे पठानों में भी तो लम्बी उम्र जीती हाँ. आप ऐसा न कहें दादी जान. सुनिए मेरे दिल की धड़कन.. कितनी बढ़ गई है..

दादी - गलत भी तो नहीं कहा बाबू मैंने. जो सच है.. वो बोल गई. दूसरा सच ये भी है बाबू.. पहले ऐसा सब सोचती थी तो डर नहीं लगता है. जो भी जींद दुन्या में आई है. उसे दुन्या से तो जाना hi पड़ता है. लेकिन तेरा ये अनमोल प्यार जबसे देखा और पाया है न.. तब से मई लालची होने लगी हों.. दुन्या से जाने की बात जब भी मेरे दिल में आती है.. दिल इंकार करने लगता है.. हाँ बाबू तेरा ये अनमोल प्यार मई भी और 100 साल तक पति रहना चाहती हों.

मई - ऐसा hi होगा दादी.. देखना मई बूढा भी हो गया न. तो भी आप हमारे साथ होंगी. मेरा अनमोल प्यार हमारा अनमोल प्यार बन जाएगा.. यही प्यार हमें इतनी ताकत बख्श देगा. कोई कभी बीमार hi नहीं होगा.. जब कभी कोई बीमारी पास नहीं आएगी तो फिर ुमारें भी लम्बी हो जाएंगी..

दादी - तेरे मोह में घी शक्कर बाबू.. मई भी ऐसी hi खुशियों भरी लम्बी ज़िन्दगी की दुआएं अपने लिए तेरे दादा जान और सब के लिए अब करने लगी हों

फिर दादी मेरे चेहरे को चूमने लगी

मई जो बाथरूम में नहाते वक़्त सोच रहा था. वो सोचता हुआ मई दादी जान को देख बोलै

मई - दादी जान आप मेरे अनमोल प्यार के किस कदर आगे बढ़ चुकी हाँ

दादी - कोई हद hi बाकि नहीं बाबू

मई - फिर भी दादी

दादी जान बड़े प्यार से - कहा न.. जब कोई हद hi नहीं रही. तो फिर मई तुम्हारे ऐसे सवाल का जवाब कैसे दे सकती हों बाबू.

मई खड़ा हुआ . दादी जान को घूरता हुआ बोलै - दादी जान मुझे आप के अपने लिए प्यार की हद को जानना है

दादी जान है पड़ी - कैसे जानना है मेरे बाबू को मेरे दिल में अपने अनमोल प्यार की हद को

मई - दादी बीएड से उतर कर कड़ी हो जाइये

दादी ने एक पल भी नहीं लगाया. और बीएड से उतर फर्श पर कड़ी हो गई.

मई दादी जान से बोलै - दादी जान अपना दुपट्टा उतार बीएड पर रख दीजिये

दादी जान को समझ तो नहीं आई. पर मुझे देखती हुई एक मुस्कान के साथ अपना दुपट्टा उतार बीएड पर रख गई

मई दादी जान की कमीज़ को देख बोलै - ये कमीज़ भी उतार दीजिये

अब दादी जान मुझे कुछ हैरानी से देख बोली - बाबू ये तुम क्या कह रहे हो

मई - मुझे जाननी है अपने लिए अनमोल प्यार की हद दादी जान. कमीज़ उतार बीएड पर रख दीजिये

दादी - बाबू मई कुछ समझ नहीं प् रही हों.. तुम ऐसा क्यों बोल रहे हो

मई - बास जो कहा जा रहा है. उसपर धयान दीजिये दादी जान.. मई देखना चाहता हों. मेरे लिए आप के दिल में प्यार की शिद्दत और मुझपर भरोसे की हद क्या है. बिना भरोसे के सच्चा प्यार नहीं किआ जा सकता न.. तो उतार दीजिये अपनी कमीज़

दादी जान अब मेरी आँखों में जैसे उतरने लगी. कुछ पल देखती रही. फिर एकदम से अपनी कमीज़ के दोनों पल्लू दोनों हाथ से पकड़ ऊपर उठाने लगी. और उठती चली गई.. पहले दादी की इलास्टिक वाली शलवार का इलास्टिक मुझे नज़र आया. फिर दादी का पेट.. जैसे जैसे कमीज़ ऊपर होती गई. दादी का गोरा पठानी जिस्म मेरे सामने नंगा होता चला गया.. मेरे लुंड ने झटका खाया.. पर खड़ा नहीं हुआ..

दादी ने कमीज़ उतार दी. अब दादी ऊपर से बड़ी ब्रा में थी.. गोरा जिस्म पर ऊपर बस एक ब्रा.. अब लुंड गरम होने लगा.

दादी की आँखों में बड़ी ज़यादा शर्म उतर आई थी. फिर दादी जान एक गहरी सांस लेकर बोली -- तो जान लिए तुमने अपने लिए अनमोल प्यार को.. देख लिए मई अपने बाबू से कितना प्यार करती हों. उसपर कितना भरोसा करती हों

मई अजीब लहजे में बोलै - दादी जा ब्रा उतार कर शलवार और पंतय भी उतार दीजिये

अब दादी जान को झटका लगा

दादी जान कड़ी कड़ी कैंप उठी.. अब वो मुझे हैरानी से काम और परेशान नज़रों से ज़यादा देख रही थी

मई - ऐसे मत देखिये मुझे दादी जान.. ब्रा उतार कर बीएड पर फ़ेंक दीजिये. फिर शलवार और पंतय भी अपने बदन से अलग कर दीजिये

दादी जान की कनपटी हुई आवाज़ सुनाई दी - बाबू तेरे लिए न प्यार की कमी है मेरे दिल में न hi तुझपर भरोसे की. तू ऐसा क्यों कर रहा है. मई समझ नहीं प् रही हों. तेरी आँखों में मुझे कुछ अजीब दिख रहा है. पर एक औरत के सामने एक मर्द गन्दी सोच लेकर आये. जो जैसा कुछ दीखता है. वैसा कुछ नहीं है.. कुछ समझ में आ रहा है, कुछ दिखाई दे रहा है तो प्यार... अनमोल प्यार.. लेकिन बाबू मई इससे ज़यादा कुछ नहीं कर सकती.. आज तक कभी तेरे दादा जान के शिव मैंने किसी और के सामने कपडे नहीं निकले हाँ.. निकले हाँ तो अकेले में..

मई ड्रेसिंग टेबल के पास गया.. हमारे घर के तकरीबन हर कमरे में एक एक पिस्तौल था.. हम पठान था. और हथ्यार हमारा ज़ेवर. हर पठान लड़की कहाः वो कहीं की भी रहने वाली क्यों न हो.. वो पिस्तौल चलना तो ज़रूर सीखती है. मेरे घर में भी सब चलना जानती थी.. मई तो पिस्तौल के साथ साथ दूसरी कुछ और गन्स भी चलना सीख चूका था

मई ड्रेसिंग टेबल की दराज़ खोल पिस्तौल निकल अपनी कनपटी पर रख गया

दादी जान चीख पड़ी.. फिर भाग कर मेरे पास आने लगी

मई घुर्राया -- वही रुक जाइये दादी जान.

दादी जान उन्ही क़दमों पर थम सी गई.. अब मुझे रोटी हुई देखने लगी

दादी - पिस्तौल हटा ले बाबू.. नहीं तो मुझे हार्ट अटैक आ जायेगा. मेरा दिल इतना भी मज़बूत नहीं है

मई - मुझे इस वक़्त कुछ जानना है तो अनमोल प्यार को जानना है. आप अपनी ब्रा और शलवार पंतय उतारती हाँ या मई खुद को शूट कर दूँ

मेरी आवाज़ से कहीं से भी ऐसा नहीं लग रहा था. मई मज़ाक कर रहा हों

दादी जान ने एक hi पल में जैसे मेरी दीवानगी को जाएं लिया...

वो दरी हुई बोली -- ठीक है ठीक है. तू गोली मत चलना. मई उतारती हों

दादी ने झट दोनों हथु पीछे ले जा कर अपनी ब्रा की हुक खोल दी. फिर अपने गोर बदन से अलग करती हुई बीएड पर उछाल अपनी इलास्टिक वाली शलवार और पंतय एक साथ नीचे सरकती चली गई.

बास मई इतना hi देखना चाहता था. देख कर मैंने पिस्तौल अपनी कनपटी से हटा दिए

पिस्तौल हैट ते hi दादी ऐसे hi नंगी भाग कर आए और मेरे हाथ से पिस्तौल छीन बीएड पर फ़ेंक मेरे गले से लग रोने लगी

मई अजीब अहसासात के भंवर में डूबता चला गया... आईने में खुद को देखता हुआ अपने चेहरे पर हाथ फेरने लगा. दादी सिसकती रही. आंसू बहती रही और मई अपने चेहरे पर हाथ फेर सोचने लगा

मई - ये क्या है.. क्या है ये सब.. ऐसा प्यार तो कभी देखा न सुना.. मई तो पहले किन्ज़ा एपीआई को सोच उसे छोड़ने का मैं बना गया था. फिर उसकी नहाते वक़्त की वीडियो रिकॉर्ड कर अपने लैपटॉप में सेव कर गया था. कर बार लैपटॉप में नहाती हुई नंगी किन्ज़ा एपीआई के भीगे साबुन लगे नंगे सेक्सी बदन को देख मुठ लगा चूका था. अपने लुंड से मणि ख़ारिज कर चूका था. सोचा नहीं था. ऐसा भी वक़्त आएगा. जब मेरे घर की पठान लड़कियां और औरतें मेरे प्यार में ऐसी पागल हो जाएंगी. शर्म भले hi उनके अंदर से जाए.. लेकिन मेरे प्यार में ऐसी अंधी हो जाएंगी.. कुछ भी यकीन करने लायक नहीं था.. पठान तो खंडन में ऐसी सोच रखने वाले को पहली फुर्सत में शूट कर दिए करते हाँ.. और मेरे लिए जैसे सब hi नंगी होने लगी थी

दादी जान चेहरा उठा कर मुझे देखने लगी.. मुझे आईने में खुद को देखते खुद में खोये जान वो बोली - बाबू ये सब क्या है.. ऐसा क्या देख रहे हो खुद को

मई - दादी जान ये दुन्या वही है न.. जिस दुन्या में मैंने आप सब ने ऑंखें खोली हाँ

दादी - हाँ बाबू.. ये वही दुन्या है

दादी जान भी मेरे सामने आईने के सामने नंगी थी

मई दादी जान के नंगे जिस्म को आईने में देखते हुए बोलै - फिर ये दुन्या कोण सी है दादी जान

दादी जान खुद को आईने में मेरे साथ नंगी देख घबरा गई. शर्म से पानी पानी होने लगी

मई - बताइये दादी जान

दादी जान ने शर्म से झुकी पलकें उठा कर मुझे देखा. मेरी आँखों को समझता. फिर सांस खींच छोड़ती हुई बोली

दादी - पता नहीं ये दुन्या कोनसी दुन्या है बाबू. पर इस दुन्या में दिखाई दे रहे सरे रंग अनमोल प्यार के रंग हाँ

मई - लेकिन दादी अनमोल प्यार में ऐसे रंग तो नहीं देखने को मिलते कहीं भी

दादी - ऐसा अनमोल प्यार भी तो कहीं देखने को मिलता बाबू

मई - दादी आप अब भी बहुत हसीं हो. आप अब भी जवान हो दादी

दादी शर्मा गई

मई - दादी कपडे पहन लीजिये

दादी - तू फिरसे कोई उलटी सीढ़ी हरकत तो नहीं करेगा न

मई - नहीं दादी. मई भी अनमोल प्यार के साथ एक लम्बी उम्र जीना चाहता हों. बास मुझे जानना था अपने लिए अनमोल प्यार को

दादी - तो अब तुमने जान लिए

मई - हाँ दादी जान लिए. अब आपने कपडे न पहने न. तो फिर मेरा अनमोल प्यार शकल बदलने लगेगा

मई हँसा तो दादी झट मुझसे अलग होकर बोली - बेशरम

फिर हस्ती हुई नंगी भरी गांड नाचती हुई अपने कपडे उठा कर बाथरूम में जा घुसी.. मई अब मुस्कुराता हुआ कमरे का दूर खोल किन्ज़ा एपीआई के कमरे की तरफ जाने लगा.. मुझे जानना था, किन्ज़ा एपीआई के दिल में मेरे लिए अनमोल प्यार की शिद्दत क्या है.
 
ऊह्ह्ह्ह ऐसा क्या

तब तो सॉरी बोलते हाँ सवेरा जी अआप से

और दिक्कत कोई नहीं है सवेरा जी

जितना पैसा आप के पास है. वो सब आप का hi है या आप के पेरेंट्स का

उसी पैसे का मान करना बनता है.. जो खुद के दम पर कमाया गया हो

अगर तो आपने खुद के दम पर खूब सारा पैसा कमाया है................... तब तो आप ग्रेट हुई

अगर आप ने खूब सारा पैसा कमा कर अपनी hi ज़ात के लिए सर्फ़ कर रख है..................... तब आप ग्रेट नहीं रही

और अहसान क्या करना किसी पर....................................... अच्छे बुरे तो हर जगा मिल जाते हाँ.. भूके नंगे भी हर मुल्क हर गली चौराहे पर

वर्ल्ड में सबसे बढ़कर भीकरियों की लिस्ट में किस कंट्री के लोग आते हाँ......................................... ज़रा ये भी बता द्जियेगा

अगर तो आप दिल की अच्छी हो तो उपरवाले से प्रे कीजिये........... कोई कभी रत को भूका न सोये.. जिसके पास पैसे हों अउ उसके आस पास कोई भूका सोये तो उस पैसे वाले के लिए प्रे कीजिये... वो कभी चैन से सो न पाए

शुकिर्या जो मेरे थ्रेड को इतना पसंद कर रही हाँ आप.. अपडेट के लिए इतनी शिद्दत से वेट कर रही हाँ

वैसे क्या मेनचेस्टर में ठण्ड बहुत ज़यादा है..................... अगर हाँ................... तो बाप रे...... सर्दी से मई दूर भागता हों :डी

लव यू सवेरा जी इतने प्यारे रिव्यु के लिए... दिल की बात दिल में न रख कर मेरे सामने रखने के लिए.. नेक्स्ट ख्याल रखूँगा.. बास अपने कमैंट्स देती रहिएगा :थैंक्स:
 
मई आप से पूछता हों भाई.. क्या मिलता है रीडर्स को सबर न कर के...

क्या मिलता है रीडर्स को ढेर साडी उपदटेस पढ़ने पर भी लिखे और कमैंट्स न करने पर

डिअर स्टोरी लिखने के लिए वक़्त hi नहीं चाहिए होता है.. मूड मैं चीज़ होती है............ हालत के हिसाब से बदलता रहता है. आज कल हालत सभी को एक रहने hi कहाँ देते हाँ

ज़रा सोहसिये
 


इक्कीसवीं क़िस्त

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मई किन्ज़ा एपीआई से मिलने उनके कमरे में जा रहा था. जब मई सीढ़ियां चढ़ने लगा तो सराह भाभी एक चमकते हुए सूट में नीचे आती दिखाई दी. बड़ा निखरा निखरा चेहरा था भाभी जी का.. मुझपर नज़र पड़ते hi भाभी का चेहरा शर्म से लाल हो गया.. फ़ौरन hi मेरी तरफ अपनी पीठ कर गई.. मई सीढ़ियां चढ़ उनके पीछे गया.. फिर उनके कान के पास मोह करते हुए बोलै..

मई - भाभी जी क्या ऐसे मुझे पीछे के रास्ते भी आने के लिए कह रही हाँ आप

शर्म से भाभी का चेहरा और भी गुलाबी होने लगा

भाभी -- शर्म करो बाबू. ऐसे सीढ़ियों पर hi तुम ऐसा बोलने लगे

मई -- भाभी जी आप बहुत पायरी लग रही हाँ

भाभी -- हम्म अब तो लगूंगी hi तुम्हे मई प्यारी

भाभी के होंटो पर एक शर्मीली लेकिन बहुत पायरी मुस्कान उभर आई थी

मई -- हाँ मई अब मतलबी हो गया हों न.

भाभी -- मैंने ऐसा तो नहीं कहा

मई -- तो चलिए कमरे में चलते हाँ

भाभी सर घुमा कर मेरी आँखों में देखने लगी. मई स्माइल करने लगा. वो फिरसे शर्मा कर चेहरा फेर गई

मई -- भाभी आप की अदाएं जानलेवा हाँ

भाभी कुछ बोलती.. नीचे से अम्मी जान की आवाज़ आई.

अम्मी जान -- देवर भाभी अब सीढ़ियों पर भी राज़ ो नियाज़ करने लगे

अम्मी जान हस्ती हुई बोली थी. भाभी झट से सर घुमा कर पीछे देखने लगी. तभी भाभी की नक् मेरी नक् से टकरा गई. वो कराह कर अपनी नक् पकड़ गई. मई भी अपनी नक् पकड़ गया

अम्मी जान ये देख हसने लगी

अम्मी जान -- खूब तो अब नक् से फाइट भी होने लगी मेरे घर में

मई हसने लगा.. लेकिन मेरी नाज़ुक भाभी की नक् का कोका उन्हें चुभ गया था.. तभी अम्मी जान भी जल्दी से ऊपर आने लगी..

मई -- आप वही रुकिए.. मई भाभी जी के साथ नीचे hi आ रहा हों.. मई भाभी का हाथ पकड़ नीचे जाने लगा. नीचे पोहंच एक सोफे पर बाथ अम्मी जान भाभी जी की नक् पर झुक गई

भाभी -- मई ठीक हों अम्मी जान.. बस अचानक से लगी तो दर्द हुआ.. अब मई ठीक हों

अम्मी जान मुझे गुरति हुई बोली -- बाबू तेरी नक् मुझे काटनी पड़ेगी, लगता है.

मई दोनों हाथ अपनी नक् पर रख नक् को छुपा गया.. अम्मी जान और भाभी जी दोनों खुल कर हसने लगी

तभी दादी भी कमरे से निकल कर वही आ गई.. मैंने देखा दादी जान उन्ही कपड़ों में थी.. पर अब ब्रालेस थी

मई दादी के मुम्मे घूरने लगा.. पर दादी नार्मल hi रही.. वहहहह दादी जान तो कुछ ज़यादा hi दलेर सबत हुई

दादी जान -- भाई हमें भी हसने का पूरा पूरा मौका दिए करो.. किस बात पर हँसा जा रहा है.. मुझे भी बताओ

मई नक् पर दोनों हाथ रखे हुए hi बोलै -- दादी जान ये अम्मी जान मेरी नक् की दुश्मन बन गई हाँ.. मेरी नक् काटना चाहती हाँ

दादी जान भी हस्ती हुई -- हेहेहे... नहीं गुलशन नक् काटने की बायत न करो तुम.. मेरे बाबू की नक् बड़ी कीमती है

अम्मी जान -- मेरी सराह की नक् से लड़ाई करती है इसकी नक्. मई तो काटूंगी

हमरे हसने पर माहिरा एपीआई और किन्ज़ा एपीआई भी ऊपर से नीचे आती दिखाई दी

किन्ज़ा एपीआई -- अम्मी जान मई खींची लेकर आऊं क्या

माहिरा एपीआई हस्ती हुई -- खींची की क्या ज़रूरत है किन्ज़ा एपीआई.. आप के नाख़ून क्या खींची से काम हाँ

सब हसने लगी.. किन्ज़ा एपीआई अपने नाख़ून देखती हुई सीढ़ियां उतरती हुई बोली

किन्ज़ा -- कभी सोचा नहीं था. मई अपने नाखुनो से ऐसा कोई काम भी करुँगी. लेकिन अब लगता है. ये छोटा सा काम मई अपने नाखुनो से कर hi दालों

मई दोनों हाथ और भी कसके अपनी नक् पर दबा गया.. तब सब और भी मस्ती में एते हुए मेरे गिर्द घेरा दाल गए.. माहिरा और किन्ज़ा एपीआई भी पास ा कर मुझे घेर कर कड़ी हो गई

किन्ज़ा एपीआई अपने नाखुनो से नाख़ून रगड़ गोया तेज़ करती हुई बोली -- जल्दी से पेशेंट को रेडी किआ जाए.. मुझे एक दूसरे पेशेंट को भी ऑपरेट करना है

मुझे एक सोफे पर बिठा दिए गया. और भाभी मुझसे चुद कुछ ज़यादा hi तेज़ी दिखने लगी थी.. मेरी एक राण पर अपना घुटना रख बड़ी सीरियस होकर बोली

भाभी -- किन्ज़ा पेशेंट को काबू में कर लिया गया है

किन्ज़ा -- मेरे ग्लव्स कहाँ हाँ

दादी जान -- हाहाहा. ग्लव्स चढ़ा कर नाखुनो से खींची का काम कैसे लोगी

अम्मी जान -- मेरी पगली डॉक्टर बेटी.. ये तो डॉक्टर बनकर ज़रूर गुल खिलाएगी

माहिरा -- ावें ीे... ग्लव्स को उँगलियों पर से थोड़ा थोड़ा काट देंगे.. गोलवेस के ग्लव्स और खींची भी काम में रहेगी

किन्ज़ा -- शाबाश छोटी.. तू सच में मेरी असिस्टेंट बनने लायक है... मई तुझे भरी सैलरी दिए करुँगी.. अब सब रेडी

अम्मी जान -- हम तो कबकी रेडी हाँ. तुम अपना ऑपरेशन चालू करो

दादी जान -- लेकिन इसके हाथ तो इसकी नक् पर अभी भी हाँ

मई -- वो तो कोई हटा भी नहीं सकता

भाभी -- डॉक्टर साहिबा पहले पेशेंट के उलटे हाथ पर टीका लगाओ.. हाथ खुद से हैट जाएंगे

मई भाभी को घूरने लगी. बदले में वो मुझे घूरने लगी...

भाभी -- ऑंखें किसे दिखता है बे..

माहिरा -- बे!! हाहाहा.. भाभी.. बे!

किन्ज़ा एपीआई भी हसी --- हाहाहा.. भाभी पूरी टपोरी लग रही है

भाभी भी हसने लगी.. फिर सीरियस होती हुई बोली -- अपुन एक समय पर एक से hi पुंगा लेता है... तू पतली सी नाज़ुक सी छोकरी मुझसे पन्गा लेती है.. जानती नहीं है क्या मुझे.. सराह.... सराह खान हों मई

सब हसने लगे. पर मई नहीं हँसा..

भाभी -- जल्दी से हाथ पर टीका लगाओ नाख़ून वाला

किन्ज़ा एपीआई ने एक नाख़ून से मेरी उलटी हथेली को ठोकना शुरू कर दिए..

फिर बोली -- ऐसे hi नॉक करके न हैंड दूर खुलवाया जाए

अम्मी जान -- हेहेहे.... शाबाश.. मई तो ऐसे hi तुझे अनारी डॉक्टर समझ रही थी.. तुम तो वेट्रेस का काम भी बखूबी सर अंजाम दे सकती हो

माहिरा -- हाहाहा.. एपीआई सिटी बेस्ट फाइव स्टार होटल में वेट्रेस की जॉब करेंगी.. हाय एपीआई आप वेट्रेस की वर्दी में कितनी पायरी दिखोगी.

किन्ज़ा -- मई डॉक्टर hi अच्छी हों.. वेट्रेस देखने का शोक है तो खुद वर्दी पहन आईने में खुद को देख लेना.

फिर अपन सूनी कलाई देखती हुई बोली --- उफ़्फ़्फ़ो ी ऍम गेटिंग लेट.. यू लज़ी नर्स एंड स्टाफ किसी काम के नहीं हो.. ी विल फाइन यू.. मुझे अपने हॉस्पिटल में ऐसा लज़ी स्टाफ नहीं चाहिए... नाउ यू कैन जो आल..

अब मई हँसा --- जुमा जुमा चार दिन हुए नहीं मेडिकल की स्टूडेंट बने.. और रॉब तो देखो महारानी का

तभी भाभी ने ज़ोर लगा कर मेरे हाथ मेरे मोह से हटा दिए

माहिरा एपीआई ने नैरा मार दिए... हिप्पपपपप हिप्प्प्प्प हुर्र्र्राआआआआ सराह भाभी ज़िंदाबाद सराह भाभी ज़िंदा---

मैंने फिरसे दोनों हाथ मोह पर रख नक् छुपा ली तो माहिरा एपीआई की बोलती बंद हो गई

अब मई अपने मोह पर कसके हाथ रख ज़ोर से हसने लगा.. माहिरा एपीआई भाभी को घूर कर देखने लगी..

भाभी और माहिरा एपीआई को छोड़ बाकि तीनो है पड़ी.. साथ hi आवाज़ आई दादा जान के हसने की

सब उधर देखने लगा...

दादा जान -- भाई जब कभी ऐसा रौनक मेला लगाना हो तो मुझे बुला लिए करो.. वैसे क्या सलूम तुम सब करने जा रहे हो मेरे बाबू के साथ

किन्ज़ा एपीआई अपने नाख़ून रगड़ती हुई -- दादा जान हम नाख़ून कैंची से बाबू की नक् काटने जा रही हाँ

दादा जान -- क्याआआआ!!.. नक्.. हाहाहा... लेकिन क्यों

अम्मी जान -- अब्बू जी इस बाबू की लम्बी नक् ने मेरी सराह की नक् से लड़ाई की ha..isliye हमने फैसला किआ है. बाबू की नक् को उतार देते han..jab कभी ये बहार जायेगा.. नक् लगा कर जाएगा.. यौन किसी को पता भी नहीं चलेगा.. और हमारे बाबू की नक् दुन्या वळून के सामने पहले के जैसी hi रहेगी..

दादा जान खुल कर हस्ते हुए करीब hi बेथ गए -- काटो काटो. मई भी देखना चाहूंगा

मई दादा जान को घूरने लगा

दादा जान -- भाई मुझे मत घूरो तुम.. मेरी न तो कोई गलती है न hi कोई कसूर. मई तो तमाशा देखने आया हों. देख कर चला जाऊंगा.

सब ने मिलकर मुझे जकड़ा हुआ था. मेरा ज़ोर कहाँ चलने देने वाली थी इतनी साडी गरम गरम जिस्म वालियां.. हाँ लेकिन अपनी अपनी फुद्दी और गांड पर भी वो अब कोई रोक नहीं लगा सकती थी. यहाँ सबका पलड़ा भरी थी. लेकिन फिर मेरा पलड़ा भरी होने वाला था. और ऐसा होने वाला था... सब देखती रह जाती..

मई हैरान भी था. दादी जान को देख कर लगता hi नहीं था. वो मेरे सामने पूरी की पूरी नंगी हो चुकी थी.

मेरे हाथ हटा दिए गए.. सोफे पर पहला कर अम्मी जान भाभी जान और माहिरा एपीआई के साथ साथ दादी जान ने भी मेरे बाज़ो को कास कर पकड़ते हुए मेरे मोह से दूर कर दिए था.. किन्ज़ा एपीआई बड़े डरमै अंदाज़ में अपने नाख़ून मेरी नक् के करीब करती हुई पीछे हटा लेती

कभी हाथ पीछे ले जा कर एकदम से मेरी नक् की तरफ बढ़ा देती. ऐसे वक़्त मई भी ड्रामा करता हुआ चीख पड़ता.. दादा जान को मदद के लिए पुकारता.. सब खूब है रहे थे..

फिर किन्ज़ा एपीआई मेरी नक् पर नाख़ून रख थोड़ा सा दबाओ बढ़ा गई.. मई कराह उठा

तभी अम्मी जान ने झट मेरे बाज़ो को छोड़ मेरी नक् को पकड़ करीब से देखने शरू कर दिए

किन्ज़ा -- अरे अम्मी जान.. आप डरेंगी तो काम बन नहीं पायेगा

अम्मी जान -- मई डर गई थी.. कहीं तू सीरियस होकर सच में मेरे बाबू की नक् न काआत दे

अम्मी जान अब हस्ती हुई बोली.. फिर सब हसने लगे.. कुछ देर और ड्रामा हुआ... फिर अम्मी जान मेरे साथ लग कर बैठी और मेरे मोह को चूमती चली गई. दादी जान ने भी चूमा... और चूमती चली गई

दादा जान -- बाबू तुम सच में बहुत लकी हो.. तुम्हारा अनमोल देख दिल में एक सुकून की लहार दौड़ जाती है..

तभी होम मोबाइल की घंटी बजने लगी.. कॉल पिक करने पर पता चला.. फुफु की कॉल है

सब फुफु से बात करने लगे.. मेरी बरी आई तो अम्मी जान बोली -- जाओ.. वो तुम्हे बुला रही हाँ

मई -- अच्छी बात है.. यौन भी बहुत दिनों से मई उधर नहीं गया..

भाभी और किन्ज़ा एपीआई ने भी जाने का बोल दिए.. मई गाड़ी में भाभी और किन्ज़ा एपीआई के साथ फुफु से मिलने के लिए निकल पड़ा. मेरा इरादा था आज फुफु के साथ भी रिलेशन को कुछ स्टेप आगे बढ़ा लिए जाए. आखिर वो भी तो एक थी मेरे लुंड से छोड़ने वळून की लिस्ट में..
 


बाईसवीं क़िस्त

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एक फ्लावर शॉप पर गाड़ी रोक हम तीनो नीचे उतर पड़े.

भाभी और किन्ज़ा एपीआई बेस्ट और फ्रेश फ्लावर्स देखने लगी.. वहां एक और फॅमिली भी कड़ी थी. एक लेडी जो अम्मी जान की हम उम्र थी. मुझे और भाभी सराह और किन्ज़ा एपीआई को घोर से देखने लगी. वो कुछ देर बड़े धयान से हम तीनो को देखती रही. फिर गाड़ी का दूर खोल गाड़ी से बहार निकल मेरे पास आ गई.

करीब आने पर मैं उन्हें चौंक कर देखने लगा. क्या बताऊँ.. अम्मी जान और दादी जान के hi चेहरे की तरह इन मोहतरमा का चेहरा भी बड़ा hi पाकीज़ा और चमकदार था. देख कर दिल गर्दन गर्दन हो गया..

वो फ़ौरन hi बोलै - बीटा क्या मई जान सकती हों.... ये

वो भाभी सराह और किन्ज़ा एपीआई को देख कर बोली.. भाभी और एपीआई दोनों मुझसे कुछ कदम के फासले पर थी. और बड़े hi महवियत से फूलों में खोयी हुई थी. लेडीज हों और फूलों के पास हों.. फिर भी वो हाज़िर हों. कहीं और उनका धयान चला जाये.. ऐसा सहज ो नादिर hi देखने को मिलता है. भाभी सराह और किन्ज़ा एपीआई भी मुझसे बेगानी बानी कड़ी थी.

मई बड़े प्यार से बोलै - जी वह (सराह भाभी की तरफ इशारा करता हुआ) वह मेरी भाभी जी हाँ... (किन्ज़ा एपीआई की तरफ इशारा करता हुआ) वो मेरी सिस्टर हाँ

तभी एक रहत भरी सांस मेरे मद्दे मुक़ाबिल कड़ी मोहतरमा के मोह से ख़ारिज हुई. फिर एक मीठी खानदानी और शफ़क़त भरी मुस्कान उनके होंटो पर सज गई. मुझे बड़ी प्यारी लगी उनके होंटो की ये मुस्कान. मई देखता hi रह गया

तभी वो बोलै -- शुक्र है.. मैं कुछ गलत नहीं बोली

मई - जी

वो - बीटा गलत मत समझना.. वो देख रहे हो

भाभी सराह और किन्ज़ा एपीआई के साथ hi 3 गर्ल्स कड़ी थी. भाभी जी और किन्ज़ा एपीआई की तरह वो भी बड़ी hi हसीं और पाकीज़ा चेहरों वाली थी.

मोहतरमा फिरसे बोली - वो मेरी बेटियां हाँ. एक बहु है.. लेकिन मैंने कभी उसे बहु नहीं समझा है. जब से मेरे घर में मेरे बेटे की दुल्हन बनकर आई है.. मेरी बेटी बनकर रह रही है.. और हमेशा बेटी बनकर hi रहेगी. असल में बीटा.. तुम्हारा रोशन चेहरा कुशादा पेशानी आँखों में शर्म और अपनी भाभी और बहन के लिए ढेरों प्यार देख मई खुद को रोक नहीं पाई.. वजा ये है. मई हमेशा अच्छे और प्यार करने वळून की तलाश में रही हों. इसे तुम मेरी हॉबी भी समझ सकते हो बीटा. वर्ण तो पहले मुझे लगा था. इन दोनों में से कोई तुम्हारी बीवी होगी

आंटी मुस्कान से बोली तो मई है पड़ा.. भाभी सराह और किन्ज़ा एपीआई मेरी हंसी सुन मुझे देखने लगी.. मुझे एक पाकीज़ा चेहरे वाली आंटी के साथ मसरूफ इ गुफ्तफू देखा तो आँखों में चमक लिए मुझे देखने लगी.. आंटी को भी आँखों hi आँखों में कहा.. हम भी आ रही हाँ आप के पास.. वहां आंटी की बेटियां और बहु भी मेरी हसी सुन हमें देखने लगी.. मुझे अपनी मम्मी के करीब देख वो हैरान हुई. मुझे घोर से देखने लगी.. फिर उनके चेहरों पर हाय की लाली उतर आई.. और वो फूलों की तरफ धयान बढ़ा गई..

आंटी फिरसे बोली - बीटा क्या हम रेगुलर राब्ते में रह सकते हाँ.

मई समझ रहा था. आंटी के दिल में क्या है.. मैंने उन्हें अपना नंबर दे दिए.. आंटी के पास लेटेस्ट ीफोने था. मेरा नंबर डायल करती मुझसे बोली.. मेरा नंबर तुम्हारे पास आ गया है बीटा.. यहाँ रोड पर ज़यादा बातें मुनासिब नहीं हाँ.. हम कॉल पर बात करेंगे.. अगर तुम्हे कोई ऐतराज़ न हो तो.. अगर तुम्हे मायूब न लगे तो

मई - कैसी बात करती हाँ आप माँ जी.. आप के मुकदस चेहरे की कसम.. आप के चेहरे में मुझे मेरी अम्मी जान की झलक एक hi पल में दिखाई दे गई थी. कैसे अब आप से दूर रहने की सोच भी सकता हों.

मेरी बात पर वो खिल उठी - बीटा तुम हर पल मेरे दिल में और भी गहराई तक उतारते जा रहे हो. क्या बताओं. कैसे अपने दिल की ख़ुशी को बयां करूँ. बीटा आज के ज़माने में जहाँ सच्ची ख़ुशी ढूंढ़ने से भी नहीं मिलती है. वहां तुम्हारे जैसे बेटे मिलने मुमकिन hi नहीं है.

किन्ज़ा एपीआई और भाभी सराह के साथ साथ आंटी की भी दोनों बेटियां और बहु हमारे पास आ गई. वही खड़े खड़े सरसरी का इंट्रोडक्शन हुआ.. दो चार बातें हुई फिर हम अपनी अपनी गाड़ी में बेथ अपनी अपनी मंज़िल की ऑर्डर बढ़ गए.

किन्ज़ा - क्या कह रही थी आंटी तुमसे

भाभी सराह फूलों के एक गुलदस्ते को नक् से लगा कर स्मेल ले रही थी

मई होंटो पर स्माइल लता हुआ बोलै - जहाँ तक मेरा अंदाज़ा है.. किन्ज़ा एपीआई आप आंटी को भ गई है. ज़रूर आंटी ने वहां आप को देख अपने बेटे की दुल्हन बनाने का मैं बना लिए होगा

भाभी सराह हसने लगी. किन्ज़ा एपीआई मुझे घूरने लगी. फिर तुर्की बा तुर्की बोली

किन्ज़ा - वहां आंटी की भी दो बियाँ थी. और तो mash*l*ah हो भी बड़े हैंडसम. देर तक आंटी तुमसे बातें करती रही हाँ. और तुम तो हो भी ऐसे. एक बार जो तुमसे मिल ले.. तुम्हारा हो जाए.. ज़रूर आंटी ने तुम्हे अपनी किसी बेटी के लिए मुन्तख़ब कर लिए होगा

किन्ज़ा एपीआई जल कर बोली थी.. मई और भाभी ज़ोर से हसने लगी

फिर मई बोलै - भाभी बदलूक फॉर यू.. आप मेरी भाभी निकली.. वर्ण किन्ज़ा एपीआई के साथ साथ आप की भी शादी अपने दूसरे बेटे से करने की सोच जाती.

हम ऐसे hi हस्ते बातें करते फुफु के घर जा पोहंचे. वहां पहले से hi सब लॉन में बैठे हमारा वेट कर रहे थे.

फुफु फॅमिली

सुल्ताना खान फुफु

ज़ुबैर खान फूफा

हिना खान

बिलाल खान

सजल खान

हम गाड़ी से उतरे hi थे. सजल ख़ुशी से चीखती हुई भाग कर हमारे पास आने लगी. मई हस्ते हुए दोनों बाहें पहला गया. भगति हुई सजल एकदम से रुक कर मुझे घूरने लगी. सब है पड़े. सजल सब को घूर मुझे घूरती हुई ऊँगली उठा कर वारं करती हुई - मेरे से पन्गा नहीं लेना समझे

और भाग कर किन्ज़ा एपीआई के गले लग उनके गाल पर किश कर गई. फिर भाभी से मिलने लगी. मई चलता हुआ पहले फूफा फिर बिलाल खान से मिला. फिर फुफु से मिला.

फुफु मेरे गाल को चुम कर - तुझे न देखो तो चैन नहीं आता बाबू. तुम तो इतने दिनों से आये नहीं. मैंने hi कॉल करके तुम्हे बुला लिए.

फुफु मीठी नाराज़गी से बोली

मई - कल hi की तो बात है फुफु.. जब हम हमारे घर में मिले थे.. मुझे तो आप की दूरी का अहसास भी नहीं हुआ.. होता तो कसम से ज़रूर उड़ कर मिलने आ जाता

सब हसने लगे. सजल और किन्ज़ा विथ भाभी सराह भी वही आ गई.. फिर खूब बातें होने लगी. वही चाय भी पि गई.

बिलाल से मेरी अछि बात चीत थी. उससे देर तक बातें होती रही. फूफा चले गए बहार..

बाद में फुफु जब मुझे अकेले में मिली मेरे गलों को चुम कर बोली - बाबू तेरे गालों की लाली बहुत बढ़ गई है

मई अपनी मुनचुन पर हाथ फेरता हुआ बोलै - मेरी मूंछें भी तो पहले से ज़यादा जानदार हो गई हाँ फुफु

फुफु है पड़ी - ये मूछें तो तुम मर्दों की शान होती हाँ बीटा.

मई फुफु के कण में धीरे से बोलै - मतलब मेरी मर्दानगी की शान आपके शोहर से भी ज़यादा है.

उनकी मूछें मेरी मूचनओं मेरी मुचुन से हलकी थी. फुफु मुझे घूरने लगी. फिर हस्ती हुई बोली - बेशरम.. अपनी फुफु से ऐसी बात करता है

मई - फुफु मैंने तो सोच लिए है. मई इससे भी ज़यादा अब आप के साथ खुल कर बात करूँगा

फुफु - अछ्हा!. भला वो कैसे

मई फुफु के पिछवाड़े को देख बोलै - फुफु क्या आप को पता है.. आप के बदन में सबसे ज़यादा कशिश किस part में है

फुफु - हेहेहे.. मुझे क्या पता.. और तुम रॉंग साइड क्यों घूरने लगे.. बेशरम बनते जा रहे हो तुम तो

मई - कसम से फुफु हम पठानों का hi कमल है.. जो अपनी औरतों को--

फुफु ने मेरे मोह पर हाथ रख दिए.. मुझे घूरने लगी. लेकिन उनकी आँखों में स्माइल थी.. शर्म थी..

फुफु - आगे कुछ मत बोलो बाबू. पता नहीं तुम आज क्या खा कर आये हो.. जब से आये हो. अजीब अजीब बातें hi किये जा रहे हो..

मई - अजीब हाँ तो क्या हुआ मज़े की भी हाँ न

फुफु - ख़ाक मज़े की हाँ.. तुम्हारे मोह से ऐसी बातें मज़ा नहीं देती..

मई फुफु का गरम और नरम हाथ पकड़ कर -- सच में मेरे मोह से ऐसी बातें आप को मज़ा नहीं देती

फुफु - तो और क्या.. मई क्या कोई झूट बोल रही हाँ.. ज़हर लग रही हाँ मुझे ऐसी बातें तेरे मोह से सुन्ना

मई -- तो फिर मेरे मोह में अपने मोह की मिठास घोल कर मेरे मोह को मीठा बना दीजिये.. फिर ज़हर भी मीठा लगने लगेगा

फुफु मेरी बात पर है पड़ी -- और तेरे मोह में मिठास मई अपने मोह की कैसे घुलूंगी.. ये भी बता दो

मई -- क्या फुफु आप के पास मोबाइल फोन नहीं है क्या

फुफु -- है तो

मई -- तब क्या आप मोबाइल पर सब कुछ शरीफों वाला देखती हाँ

फुफु -- हेहेहे तो और क्या मई मोबाइल उसे करते हुए बेशरराम बन जाया करूँ

मई -- थोड़ी सी बेशरम बन्न जाने में बुराई भी क्या है

फुफु -- अच्छे भी क्या है

मई -- है ना... अच्छे भी है न

फुफु -- अच्छा तो बताओ.. कोनसी अच्छे है भला इसमें

मई -- सिंपल लव रेयर लव बनाने में मदद मिलती है

फुफु की आँखों की चमक बढ़ती जा रही थी -- ये रेयर लव कहीं सुना हुआ नहीं है. वो क्या होता है

मई --- जो आप सब मेरे साथ करती हाँ.. वो रेयर लव hi तो है

फुफु ने मुझे पकड़ लिया -- जब मेरा तुम्हारे लिए लव रेयर है तो फिर मुझे मोबाइल पर कुछ उल्टा सीधा सर्च करने की क्या ज़रूरत है

मई -- रेयर लव को सही से जान्ने के लिए

फुफु -- कैसे ??. डिटेल में बताओगे कुछ

मई --- आप के कान जलने लगेंगे

फुफु -- मेरे कानो की कलियाँ हाँ न.. ये एंटी फायर भी हाँ.. मेरे कानो को जलने नहीं देंगी.. तू बोल

मई --- क्या फुफु आप मैरिड होकर तीन तीन बच्चों की माँ होकर

फुफु -- वेट वेट वेट.. ये तीन तीन से क्या मुराद है तुम्हारी... तीन hi तो हाँ.. बाकि के तीन कहाँ से घसीट लाये तुम

मई फुफु को घूरने लगा.. फुफु हसने लगी

मई --- आप सच में मेरी hi फुफु हाँ...

फुफु --- कोई शक है क्या तुम्हे बाबू.. हेहेहे

मई --- देखते हाँ आप के कान जलते हाँ क्या नहीं.

फुफु -- तुम बोलो.. जलने होंगे तो जल जायेंगे. वर्ण मुझे तो नहीं लगता तुम कुछ ऐसा बोलो और मेरे कण हीट बर्दाश्त न करते हुए जलने लगें.

मई -- अरे फुफु मोबाइल में किश इस---

फुफु -- बास बास मई सब समझ गई...

मई --- आप ने मुझे पूरा बोलने नहीं दिए. वर्ण ज़रूर आप के कण जलने लगते

फुफु -- नहीं जलते.. और मेरे बच्चे हो बाबू.. अपने बच्चों से भी तुम मुझे प्यारे हो.. मुझे कोई डर भी नहीं है समझे.. हाँ शर्म ज़रूर आएगी मुझे. दूसरी बहुत सी बातों का भी धयान हाँ.. वर्ण तो तुझे किश मई बचपन में किआ hi करती थी

मई फुफु को चौंक कर देखने लगा... फुफु हसने लगी..

फुफु -- तुझे किसी ने नहीं बताया है न इसलिए.. वर्ण मई शुरू से hi बड़ी शरारती रही हों. मेरे प्यार का लेवल hi अलग था. फिर तुम बड़े हो गए.. और मई भी बच्हन वाली हो गई.. इधर तुम जवान हुए उधर मेरे बच्चे भी जवान हो गए.. और मई बूढी हो गई

मई --- नहीं आप कहाँ बूढी हाँ.. अभी भी आप 18 19 से ज़यादा की नहीं हुई हाँ

फुफु -- तुम्हारी इस बात पर मुझे शर्म भी नहीं आएगी और हसी भी नहीं आएगी

मई -- अच्छा फुफु एक बात और

फुफु -- बोल दो.. आज मेरा भी दिल है तुझसे ढेर साडी बातें करने का.. जब से ये तुमने अनमोल प्यार को ज़ाहिर किआ है न.. मई भी थोड़ी सी खुलने लगी हों.. और भी खुलना चाहती हों.. सच बात तो ये है.. मई जैसे पहले थी न.. अब वैसी नहीं रही. मई फिरसे पहले जैसी बनना चाहती हों

मई -- लेकिन मई तो नहीं जनता. आप पहले कैसी थी

फुफु -- तुम क्या करोगे जान कर

मई -- चलें हम इसपर बाद में बात करते हाँ.. पहले हम थोड़ा सा और खुल लें

फुफु -- ये एक प्लस पॉइंट होगा हमारे लिए बाबू

मई -- फुफु आप की कोई ऐसी चीज़ है. जिसपर कभी किसी का हक़ नहीं बन सकता. कोई आप से वो चीज़ मांगे और आप न देना चाहें.. मतलब आप देने से इंकार नहीं भी करती हाँ तो किसी को भी आप की वो चीज़ पानी का हक़ नहीं है. एक हिसाब से वो इललीगल है.. उसे इस्तेमाल में लाया hi नहीं जा सकता.. अक्सर ये होता है.. आप hi की तरह दुन्या में कई ऐसी हाँ.. जिनके पास भी वो चीज़ है.. लेकिन वो चीज़ कभी किसी ने इस्तेमाल नहीं की

फुफु उलझती हुई -- ऐसी कोनसी चीज़ हो सकती है

मई -- अभी मेरी बात पूरी नहीं हुई है फुफु.. तो मई कह रहा था. आप की वो चीज़ जिसका किसी क भी इस्तेमाल में आना गलत है. लेकिन आप किसी को वो चीज़ इस्तेमाल करने से मन भी न करें. वो ख़ुशी ख़ुशी वो चीज़ उसे देती रही. बार बार देती रहें.

फुफु और उलझी -- ऐसी चीज़ जो मई किसी को देना भी नहीं चाहती हों. और देने पर आऊं तो बार बार देने लागूं.. बाबू तुम मुझे उलझा रहे हो

मई -- फुफु मई सब बात खोल दूंगा. आप पहले ये बताइये. वो चीज़ एक तो आप चाहती हाँ.. किसी के भी इस्तेमाल में न रहे.. फिर अगर कोई खास वो चीज़ इस्तेमाल करने लगता है.. क्या फिर वो चीज़ मेरे लिए हो सकती है.

फुफु -- पता नहीं.. मई समझ hi नहीं प् रही हों बाबू.. तो तुम्हे कैसे कह सकती हों. तुम वो चीज़ भी इस्तेमाल कर सकते हो

मई -- देखिये फुफु ज़यादा सोचने की ज़रूरत नहीं है.. आप ने खुद कहा.. मई आपके बच्चों से भी बढ़कर हों आप की नज़र में

फुफु -- सही कहा

मई -- तो मई आप से एक ऐसी चीज़ मांग लून. जो किसी और का हक़ नहीं है. लेकिन वो उसे आप की मर्ज़ी से इस्तेमाल में ला रहा है. तब क्या आप अपनी वो चीज़ अपने बाबू को नहीं दे सकती

फुफु -- बाबू तेरे लिए तो जान भी हाज़िर है.. बोल क्या है वो ऐसा. जो है तो मेरा. लेकिन कोई और इस्तेमाल कर रहा है.. और तुम भी वो इस्तेमाल करना चाहते हो

मई बात के शुरू करने से पहले डरा था.. लेकिन फिर फुल्ली दोनफिडेन्स के साथ मई बात करता चला गया था. अब मैंने ठान ली थी. मई बात तो करके hi रहूँगा..

मई -- फुफु वो इललीगल चीज़ ऐसी है.. जिसके इस्तेमाल पर सख्ती से मन किआ गया है.. लेकिन हम पठान मर्द हर औरत की वो खास चीज़ ज़बरदस्ती हासिल कर लेते हाँ

तभी मैंने फुफु के पिछवाड़े को देखा.. और उठ कर खड़ा हो गया.. फुफु सब समझती हुई एक झटके से उठ कड़ी हुई... मई चार कदम दूर फुफु से खड़ा हो गया था..

फुफु मुझे घुसे से तो नहीं लेकिन बहुत से मिले जुले एक्सप्रेशन के साथ देख रही थी. और मई फुफु को फुल नॉटी स्माइल से देख रहा था

फिर फुफु चीखती हुई मेरे पीछे भागी --- यू बाबू के बच्चे.. तुम.. तुम.. रुको मई तुम्हे बताती हों. मेरे लाड प्यार का तुमने कुछ ज़यादा hi फायदा उठा लिए तुमने.. आज तुम्हारी हड्डी पसली न एक कर दी तो मेरा नाम भी सुल्ताना खान नहीं..

फुफु भाग कर मुझे मारने के लिए दौड़ी. और मई वही खड़ा फुफु के करीब आने का वेट करने लगा. और फुफु मेरे सामने आए कर मेरे सीने पर हाथ मारने लगी.. लेकिन नरम हाथ

मैंने दोनों बाहें पहला कर फुफु को अपनी सीने के साथ जकड लिए.. फुफु मुझे घूरने लगी.. मई फुफु की आँखों में देखता हुआ फुफु के गालों को चूमने लगा.

बरी बरी दोनों गलों को चुम मई फुफु की आँखों को चूमने लगा. माथे को चूमने लगा..

फुफु खुद को घुसे में ज़ाहिर करती हुई बोली -- छोडो मुझे बाबू के बच्चे.. तुम कितने बेशरम हो गए हो. आअज तो सच में मई तुम्हारी मुरम्मत करके रहूंगी

मई --- दिल करेगा आप का मुझे हाथ भी लगाने को

फुफु -- हाथ क्या आज तो मई डंडे मार मार कर तुम्हारी ऐसी धुलाई करुँगी.. ज़माना देख परेशान हो जायेगा. एक फुफु अपने भतीजे का ऐसा भी हाल कर सकती. ज़माना सोच कर अचम्भे में पद जाएगा

मई -- और जब ज़माने को पता चलेगा.. फुफु अपने भतीजे को क्यों मार रही हाँ तब

फुफु -- मई किसी को बताउंगी hi नहीं

मई --- सच... ये तो गुड न्यूज़ है. आप किसी को नहीं बताएंगी

फुफु के चेहरे पर शर्म तो थी.. पर ज़यादा नहीं..

फुफु -- बाबू तुझे ऐसी बात करते हुए ज़रा सी भी शर्म नहीं आई

मई -- शर्म तो तब आई फुफु. जब मई अपने इरादों में लचक महसूस करता

फुफु अब चौंकी -- क्या मतलब है तुम्हारा बाबू

मई --- फुफु मई सच में आप के साथ वो सब करके हमारा प्यार को अनमोल बना देना चाहता हों

फुफु मेरे सीने में दबी मेरी आँखों में दुन्या भर की हैरत समोते हुए बोली

फुफु -- बाबू तुम्हारे दिमाग का कोई स्क्रू तो ढीला नहीं है न

मई -- आप बताएं.. क्या मेरे दिमाग का कोई स्क्रू ढीला हो सकता है

फुफु -- लगता तो नहीं.. पर तुम्हारी बात से सबत तो होता है

मई --- फुफु आप भी आज से अपने दिमाग का एक स्क्रू ढीला कर दें न. अपने बाबू की खातिर

फुफु -- मरवाना का इरादा है तुम्हारा मुझे

मई खुश होकर -- इसका मतलब है.. आप मेरे साथ सब करने को दिल से राज़ी हो सकती हाँ. लेकिन बाकियों का दर्द है आप को.. है न यही बात

फुफु --- ोये बाबू तू कितनी गलत फहमियां दिल में पालने लगा है.. मई क्यों तेरे साथ ऐसा कुछ करने की सोचों.. मेरे पास है न

मई -- सब कुछ है आप के पास.. लेकिन बाबू भी तो एक hi है न.. फुफु मैंने जान लिए है.. आप मेरे साथ प्यार में बहुत आगे तक जाना चाहती हाँ. लेकिन आप के पास कोई रास्ता नहीं है.. फुफु आप की आँखों में मेरे लिए जो प्यार है. वो हम और भी गहरा कर देते हाँ..

फुफु की अब सांस भरी हुई.. फुफु के अंदर जज़्बात मचलने लगे --- पागल हुए हो तुम बाबू.. मई भला ऐसा क्यों चाहूंगी..

मई -- आप ऐसा न चाहती होती तो मई जितना भी आप को पायरा होता.. आप एक खेंच के तमाशा मेरे मोह पर मार देती

फुफु -- तमाशा तो दूर की बात है बाबू.. मई तो तुझे घुसे से देख भी नहीं सकती.. अपने बच्चों पर तो मई गुसा कर सकती हों. लेकिन तुझपर नहीं

मई --- फुफु फिर फूफा भी तो आप की ज़मीन के एक हिस्से को इललीगल तरीके से उसे कर रहे हाँ न..

फुफु -- तुम ये बात कैसे कह सकते हो बाबू.. हो सकता है. वो ऐसा कुछ न करते हों

मई -- आप मोह से तो ऐसा बोल रही हाँ फुफु.. लेकिन आप की ऑंखें सब बता रही हाँ.. मई कितना सच बोल रहा हों

फुफु -- उफ़्फ़्फ़ो अब तुम आँखों की भाषा भी समझने लगे हो बाबू

मई -- मई क्या कुछ नहीं समझने लगा हों फुफु.. एक और सच कहूं

फुफु -- कहो

मई -- मेरे बहार दो लड़कियों के साथ रिलेशन्स थे हर तरह के.. मैंने वो रिलेशन्स ख़तम कर दिए

फुफु -- दो दो से रिलेशन्स थे.. तोड़ भी दिए.... क्यों ??

मई -- मई बदल गया हों फुफु.. देखो क्या कोई बीटा अपनी माँ सम्मान फुफु से इतने कॉन्फिडेंस के साथ ऐसी बात कर सकता था

फुफु -- नहीं

मई -- मई कर रहा हों.. फुफु मैंने खुद को पूरी तरह बदल दिए है.. और अब चाहता हों... आप के दिल की मान लून.

फुफु के चेहरे की शर्म अब ज़यादा बढ़ने लगी थी. लेकिन वो पुरे ऐतमाद के साथ मेरे सीने से लगी कड़ी थी

मई --- फुफु जो किसी के लिए भी सही है.. वो गलत को आप सही समझ सालों से करती आ रही हाँ.. वही गलत मेरे साथ भी कर लीजिये. इससे हमारा प्यार और भी बढ़ जायेगा कसम से...

फुफु -- बाबू अभी मुझे छोडो... मई फिलहाल इस टॉपिक पर कोई बात मज़ीद नहीं करना चाहती

मई -- ठीक नहीं हम इस टॉपिक पर बात नहीं और नहीं करते. लेकिन मई आप को छोड़ नहीं सकता

मई फिरसे फुफु के चेहरे को चूमने लगा. और फुफु पहली बार मेरे होंटो को अपने चेहरे पर और ढंग से महसूस करने लगी...

फुफु ने टाइम मांग लिए.. वहां घर में एक किन्ज़ा एपीआई को छोड़ अब तक साडी hi मेरे लिए लाइन पर आ चुकी थी.. फिर मई फुफु पर तरय करके उन्हें लाइन में क्यों न लता.. और फुफु को जैसे मैंने घनचक्कर बनाया था.. फुफु उस घनचक्कर में उलझती हुई मेरी बात को सोचने पर मजबूर हो गई थी...

मई किन्ज़ा एपीआई और भाभी जान लंच फुफु के घर में hi करने के बाद वापिस अपने घर लौट गए...

अम्मी जान पापा को सुलाने के बाद मेरे कमरे में आ गई.. आते hi खुद से मेरे कमरे को लॉक करती हुई मेरे साथ बीएड पर आ कर मेरे साथ लेट गई.. मुझे चूमने लगी..

अम्मी जान - हाँ तो मेरे बाबू ने मुझसे कोनसी बात करनी है.
 


तेईसवीं क़िस्त

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अम्मी जान.. गुलशन

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अम्मी जान पापा को सुलाने के बाद मेरे कमरे में आ गई.. आते hi खुद से मेरे कमरे को

लॉक करती हुई मेरे साथ बीएड पर आ कर मेरे साथ लेट गई.. मुझे चूमने लगी..

अम्मी जान - हाँ तो मेरे बाबू ने मुझसे कोनसी बात करनी है.

अम्मी जान के बदन से बड़ी hi मसहूरकुन खुशबु आ रही थी. मई लम्बी सांस

खेंच खुशबु अपने अंदर उतरने लगा. खुशबु उतारता मई ऑंखें बंद कर गया था.

अम्मी जान मुझे मीठी स्माइल से देखने लगी. फिर मेरे गाल पर किश कर गयी

मैंने ऑंखें खोल देखा तो अम्मी जान मुस्कुरा रही थी. मुझे कुर्बान हो जाने वाली

निगाह से देख रही थी.

मई - अम्मी जान आप दुन्या में सबसे हसीं हाँ

अम्मी जान - अच्छा जी

मई - जी अम्मी जान

अम्मी जान - दुन्या का कोण बीटा ऐसा होगा. जिसे अपनी अम्मी जान दुन्या की सबसे हसीं

अम्मी जान नहीं दिखती.

मई अम्मी जान के गोर महकते गालों के बीच तीखी नक् को चूमता हुआ बोलै

मई - हर उस बेटे की अम्मी जान सबसे ज़यादा हसीं नहीं हाँ अम्मी जान. जिस अम्मी जान

का बीटा बाबू नहीं है

अम्मी जान है पड़ी - हेहेहे.. बाबू तुम भी न. ये तो अब कन्फर्म हो चूका है. दुन्या

में एक hi बाबू है

मई - रो फिर मान लीजिये.. आप hi दुन्या में सबसे ज़यादा हसीं हाँ

अम्मी जान हस्ती हुई - मान लिया. अब खुश

मई - नहीं

अम्मी जान मुझे घूर कर - वो क्या भला

मई - ख़ुशी इतनी सी बात पर भला थोड़ी न हासिल हो जाती है.

अम्मी जान - तो फिर कैसे हासिल होती है. मुझे बताओ. मई अपने बेटे को ख़ुशी कहीं

से भी इकठी करके तोहफे के तौर कर दे दूंगी

मई - तोहफे के तुअर कर

अम्मी जान - हेहेहे तो और कैसे दूँ

मई - वो तो एक अम्मी जान का फ़रीज़ा होगा न

अम्मी जान - चलो तो फिर मेरा बाबू अपनी अम्मी जान को खुद hi बता दे

मई - कोई भी अम्मी जान इतनी भोली तो नहीं होती. जो अपने बेटे की असली ख़ुशी से

अनजान हो

मेरी इस बात पर अम्मी जान के चेहरे पर शर्म की लाली आई.. फिर चेहरे की साडी

लाली आँखों में सिमट एक मीठी स्माइल में कन्वर्ट हो गई.

अम्मी जान - अम्मी जान का बाबू इतना प्यारा होने के साथ साथ गहरा भी हो. तो अम्मी जान

जो पुराने ख़यालात की मालिक है, अम्मी जान अगर आज के ज़माने की पूरी सूझ बूझ न

रखती हों तो कैसे भला वो ऐसा सब जान सकती हाँ.

मई मुस्कुरा पड़ा अम्मी जान के बात ताल जाने के खूबसूरत अंदाज़ पर

अम्मी जान भी मेरे hi जैसे अंदाज़ में स्माइल करने लगी. फिर आगे होकर मेरे गाल को

चुम गई

अम्मी जान - बाबू मेरे बाबू मेरे दिल के सुकून तुम लम्हा बा लम्हा और भी ज़यादा

प्यारे होते जा रहे हो.

मई - और आप

अम्मी जान - मई भी 😅

मई - ाचा अम्मी जान पता है आप मुझे बहार कोण मिली थी

"मिली थी" पर अम्मी जान ने मुझे चौंक कर देखा

अम्मी जान - कहीं उन्ही दो लड़कियों में से तो कोई नहीं मिल गयी तुम्हे बाबू

मई - 🤣😃 जलन तो नहीं होने लगी आप को

अम्मी जान 😂😂 हस्ती हुई मेरे गाल पर चुटकी काट गयी - मई भला क्यों जलने लगी

तेरे साथ किसी लड़की का सुनकर

मई - मैंने कब कहा मुझे कोई लड़की मिली थी 😄

अम्मी जान हैरानी से - तोह ??

मई - वो मुझे आज एक और अम्मी जान मिल गयी थी 😛😛

अम्मी जान हैरान रह गयी - एक और अम्मी जान

मई हस्ता हुआ - क्या ख्याल है. पापा आप से चीटिंग नहीं कर सकते. आखिर वो

पठान हाँ

मई अम्मी जान के पिछवाड़े को देख आगे बोलै - किसी और की भी पापा को इनसपिरे कर

सकती है.

अम्मी जान का पूरा मोह खुल गया - kyaaaaaaaaaaaa

मई - दिल किसी पर आये तो बाँदा सबर कर लेता है अम्मी जान. पर पठानों को एक hi

चीज़ साडी दुन्या भुला सकती है. और वो है गाआआआ----

अम्मी जान झट से मेरे मोह पर हाथ रख मेरा मोह करती हुई बोली - बेशरम.. अपनी

अम्मी जान से बेहूदा बात करता है.

कमल की अम्मी जान थी मेरी. ज़रा भी गुसा नहीं आया मेरी बात पर.. शर्म की लाली

उनके गोर गालों पर फिरसे बढ़ गई. आँखों में भी बढ़ गई. कानों पर भी बढ़

गई.

मई अम्मी जान को सीधा करता अपनी जगा लेता हुआ अम्मी जान का चेहरा पकड़ पहले बरी

बरी दोनों गाल चुम गया. फिर अम्मी जान के माथे को, फिर दोनों आँखों को बरी बरी

चूमा, फिर अम्मी जान की नक् को. आखिर में मैंने अम्मी जान के कण को मोह में ले लिया.

ऊपर से hi ले सका. नीचे तो अम्मी जान ने कांटे पहने हुए थे.

मई कानो अच्छे से चूस hi गया

अम्मी जान की शर्म से सांस भरी हुई. लेकिन वो खुद पर काबू बनती हुई बोली

अम्मी जान - बाबू ये क्या. भला कण भी कोई चूमता है.

मई - मई बाबू हों न. मेरा प्यार अनमोल है न. मई कुछ भी कर सकता हों. कहीं भी

चुम सकता हों. क्यों मैंने सही कहा न

अम्मी जान हस्ती हुई - हाँ बाबू तुम बाबू हो. तुम्हारा प्यार अनमोल है. तुम कुछ भी कर

सकते हो. तुम मुझे कहीं भी चुम सकते हो. अब खुश

मई - अम्मी जान यू अरे ग्रेट. तो आखिर आप ने मेरे दिल की सदा सुन hi ली

अम्मी जान घबरा कर - kk--kaise सदा बाबू

मई - 😂😂😂 आप हकला क्यों रही हाँ अम्मी जान. आपने hi तो कहा है. मई कुछ भी कर

सकता हों. कहीं भी आप को चुम सकता हों. थैंक गॉड जो आप ने मुझे परमिशन दे

दी. वर्ण तो मई समझ रहा था.. नजाने मुझे कितने पापड़ बेलने पड़ेंगे

अम्मी जान के चेहरे पर एक रंग आने लगा, दूसरा जाने लगा.

पहले hi अम्मी जान के माथे से माथा जोड़ मई अम्मी जान के मोह से बहुत कुछ बुलवा

चूका था. फिर बाद में मैंने कोई ऐसी बात नहीं करि थी. शायद अम्मी जान भूल गई

थी. शायद उनके ख्याल में ये रहा होगा. मई अभी ऐसी कोई बात नहीं करूँगा.

हकलाना तो बनता hi था.

फिर मई हसने लगा. अम्मी जान की हालत देख मुझे हसी आ गई थी

अम्मी जान मेरी हसी सुन मुझे घूरने लगी.. एक लम्बी सांस लेने के बाद मोह के रस्ते

छोड़ती हुई मुझे सीधा लिटा कर मेरे सीने पर एक हाथ रख भार डालती हुई बोली

अम्मी जान - बाबू के बच्चे. मुझे लगा तो एक hi जस्ट में--

मई - 😂😂 क्या एक hi जस्ट में.. 😂😂 बताइये न क्या एक hi जस्ट में 🤣🤣🤣🤣

अम्मी जान रोथ गयी.. ऐसे hi मेरे सीने पर हाथ रख मुझे घूरती हुई नज़रें फेर

गई और बोली - जाओ बाबू के बच्चे मई तुमसे बात नहीं करती.

अम्मी जान को मेरा अनमोल प्यार ऐसा बहाने लगा था. अम्मी जान एक अम्मी जान से एक बेस्ट

फ्रेंड एक माशूका बनकर सरे नखरे साडी अदाएं दिखने लग पड़ी थी.

अम्मी जान मेरे प्यार की तरह दिन बा दिन और भी पायरी होती जा रही थी. और भी

हसीं होती जा रही थी. असल में जो कोई दिल के बहुत ज़यादा करीब आ जाये. दूसरा

फारद उसी के संग hi ऐसे खुला करता है. उसकी साडी अदाएं सरे अंदाज़ उसके अंदर से

बहार निकल ज़ाहिर होना शुरू हो जाते हाँ.

मई अम्मी जान को कमर से पकड़ अपने ऊपर कर गया. अम्मी जान पूरी तरह मेरे ऊपर

थी. अम्मी जान की फुद्दी मेरे लुंड पर थी. लेकिन लुंड अभी शांत था. बहुत शांत.

अम्मी जान वैसे hi रूठी हुई मेरी आँखों से ऑंखें फेरे हुए थी.

मई अम्मी जान के चेहरे को चूमने लगा. अम्मी जान एक नखरीली और नाराज़ माशूका की

तरह अपने चेहरे साइड करती मेरे होंटो से हटा रही थी

अम्मी जान - न कर मुंडिया तू देख नहीं रहा मई रूठी हुई हों तुझसे

मई - वही तो कर रहा हों. जो माशूका के नाराज़ होने पर उसका आशिक़ करता है. मई

मन रहा हों अम्मी जान आप को

अम्मी जान ने मुझे घूरा - माशूका ?. कोण ?. क्या तू मुझे माशूका कह रहा है

मई राइट साइड मिरर में अम्मी जान को देखता हुआ - नहीं मई तो उसे कह रहा हों.

अम्मी जान ने झट उधर देखा. फिर तेज़ी से सर घुमा कर मेरी आँखों में देखा और

है पड़ी

अम्मी जान - उधर भी मई hi हों

फिर सीरियस होकर बोली - तू मुझसे कुछ ज़यादा hi छेड़ कहानी नहीं कर रहा है

मई - माशूका दिल से राज़ी हो. उसे छेड़ कहानी पर मज़ा भी आता हो तो माशूक़

बेचारे की ये ड्यूटी होती है न. उसका दिल न भी करे तो भी वो उसे अपनी ड्यूटी

निभानी hi पड़ती हुई.. k**da किसी की माशूका तो दे.. लेकिन ऐसी माशूका

अम्मी जान - क्या मतलब.. मई क्या अच्छी माशूका नहीं हों.

मई है पड़ा - ो लवली अम्मी जान. आप मान गई. आप मेरी माशूका हो

अम्मी जान चौंकती हुई अपने लफ़्ज़ों पर धयान देने लगी. फिर मुझे देख हसने लगी

अम्मी जान - मई भी तुझसे थोड़ी सी मस्ती कर रही थी. भला एक अम्मी जान अपने बाबू

जैसे बेटे की माशूक़ा बन भी कैसे सकती है

मई - वैसे अम्मी जान. आप कुछ ज़यादा hi हेअल्थी नहीं हो गई. मेरा तो सीना hi डाब

गया है. साँस लेने में दुश्वारी होने लगी है

अम्मी जान ने झट अपने गरेबान में देखा.. उनके मोठे मुम्मे दबे हुए थे मेरे सीने

पर

अम्मी जान मुझे घूरने लगी. और मई शरीफ बच्चा बन साइड देखने लगा

अम्मी जान ने मेरी नक् अपने डेंटन में भर ली. हलके से काट कर बोली - पीटूँगी तुझे

मई बाबू के बच्चे

मई - जब मई बच्चा था तब भी ये भरी hi थे.. और मेरी प्रॉपर्टी हुआ करते थे

अम्मी जान - अब तो बच्चे नहीं हो न.. अब क्यों उधर धयान दिए तुमने

मई - किधर ध्यान दी मैंने अम्मी जान

अम्मी जान मुझे घूरने लगी - तुम सब समझ रहे हो बाबू

मई - क्या समझ रहा हों अम्मी जान. मई तो शरीफ बच्चा हों. भोला बच्चा हों.

मुझे कहाँ ऐसी बातों की समझ है

अम्मी जान को हसी आने लगी. लेकिन वो अपने दोनों होंठ अपने डेंटन में दबा कर अपनी

हस्ती रोकती हुई मेरी आँखों में घूरने लगी. मई हसने लगा.. अम्मी जान अपनी हसी को

काबू में करने की कोशिश में लगी रही

नाकाम होने लगी. तो झट से मेरे एक गाल पर दांत गाढ़ गई हलके से प्यार से

फिर जब अम्मी जान ने मेरे दन्त छोड़े तो उनकी हसी पर उनका पूरा पूरा कण्ट्रोल बन

चूका था.

अम्मी जान - कोण मिली थी तुम्हे आज बहार

मई - बताया तो था अम्मी जान मिली थी. आप hi की तरह हसीं

अम्मी जान ने घूरा - मेरी hi तरह

मई - आप hi की तरह पाकीज़ा चेहरे वाली

अम्मी जान - मेरी जितनी पाकीज़गी उनके चेहरे पर थी 😯

मई - बातों में शहद के जितनी मिठास

अम्मी जान हैरान हुई - मुझसे भी ज़यादा मीठा बोलती हाँ वो

मई - उनका रोशन चेहरा, उनका बातें करना का अंदाज़, उनकी आँखों में मेरे लिए प्यार

बेशुमार 😍😍😍 कुछ भी तो आप से मुख्तलिफ नहीं था अम्मी जान. कुछ चेंज होगा तो

फ्यूचर में पता चलेगा

अम्मी जान - भला वो कैसे पता चलेगा तुझे

मई - उनके माथे से माथा जोड़, उनके अंदर की बातें जान कर, उनके साथ भी अनमोल

प्यार की शुरुआत करके, फिर उनके साथ भी वही साडी बातें जो मैंने उस दिन आपके

साथ कारण थी

अम्मी जान ने मेरे होंटो पर हाथ रख दिए - बास बास अब वापिस आ जा.. खुली आँखों

से खवाब नहीं देखते हाँ बाबू.. बनाने वाले ने मुझे एक hi बना कर भेजा था.

मेरी कोई जुड़वां नहीं है मेरे बच्चे..

मई - हो भी नहीं सकती.

फिर मई ज़यादा न अम्मी जान को परेशान करते हुए मोबाइल निकल आज मिलने वाली फूल

शॉप वाली आंटी से पहले खुद बात करने के बाद अम्मी जान से उनकी बात करवाने लगा.

अम्मी जान मेरे ऊपर hi रहती हुई उनसे बात करने लगी.

जब तक अम्मी जान उनसे बात कर रही थी. मई अम्मी जान को परेशान नहीं करने वाला

था... ये खिलाफ इ तहज़ीब भी होता और मेरी अम्मी जान की शान में गुस्ताखी के साथ

साथ उनकी इज़्ज़त के लिए गलत होता.

इस बार मई एक लायक फयक और सुलझा हुआ बच्चा बन गया था..

अम्मी जान पहले हैरानी से फिर बेपनाह ख़ुशी के साथ उनसे बातें करने लगी...

और मई अम्मी जान को देखने और सुनने लगा.

कुछ मिनट की बात चीत के बाद मैंने एक बार फिरसे आंटी से बात करि और गूडनिघत

बोल कर कॉल एन्ड कर दी.

अम्मी जान - बहुत पायरी और सुलझी हुई हाँ तेरी दूसरी अम्मी जान 😂😂😂😂😂😂

मई भी हसने लगा 🤣🤣🤣

अम्मी जान - वैसे मई कुछ समझ नहीं पाई हों बाबू.. उन्हों ने क्यों तुझसे रोड पर

बात करि. और नंबर भी एक्सचेंज कर लिए.

मई स्माइल करता हुआ - दो दो बेटियों की अम्मी जान हाँ आप अम्मी जान.. किन्ज़ा एपीआई और

माहिरा एपीआई के लिए रिश्ते की बात आगे बधाई जा सकती है. अच्छी फॅमिली है. फ्यूचर

में काम आ सकती है. वैसे तो जोड़े ऊपर वाला बनता है.. पर कुछ ज़िम्मेदारियाँ

हमारी भी होती हाँ.. कुछ कहा नहीं जा सकता है.. क्या पता आने वाला वक़्त क्या

कुछ ले आये.

अम्मी जान मुझे इस बार हैरतों की इन्तहा के साथ देख रही थी.
 
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