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मेरी आशिकी तुमसे hi.....
अपडेट 86
सैर : यार वो प्रिंस का फ़ोन नहीं लग रहा बहुत देर से तरय कर रही हूँ... मगर बुजी आ रहा है.... मुझे उसकी फ़िक्र हो रही थी.... वो ठीक से पहुंचा की नहीं.... तेरी उस से कुछ बात हुई की नहीं यही पूछने मैं यहाँ चली आयी....
मैक्स : हाँ मेरी बात हो गयी है.... वो ठीक से वहां पहुँच गया है.... और वहां उसने रेंट पे एक रूम भी ले लिया है....
फिर मैक्स उन दोनों को वो सब बताता है जो प्रिंस ने उसे बताया था..... वो उन्हें सिर्फ उतना hi बताता है जितना ज़रूरी है.... अब उन्हें वो ये बताता भी तो कैसे की प्रिंस ने वहां क्या क्या देखा और महसूस किया.... यहाँ तक की सुल्तानगढ में रह के भी वो यहाँ सब को देख पा रहा है..... जब की इस बात को जान के वो खुद बेहद हैरान है.....
इस सब को जान के कुछ और भी लोग हैं जो प्रिंस मैक्स और ज़रा की तरह हैरान हैं और वो हैं.....
अब आगे.....
ये लोग और कोई नहीं बल्कि बेगम साहिबा और शलाका हैं....
बेगम साहिबा : ये आप क्या कह रहे हैं....?
बाबा : वो hi जो सच है..... प्रिंस सुल्तानगढ पहुँच चूका है.....
दोनों एक साथ : Kyaaaaaaaaaa....? A....gar ये सच है तो फिर तो प्रिंस का क्या होगा....? क्या मलिका सुनहरी प्रिंस को माफ़ कर पाएगी....? क्या प्रिंस उसके गुस्से को शांत कर पायेगा....? और सब से बड़ी बात तो ये की जब प्रिंस मलिका सुनहरी और पारी आमने सामने होंगे तब क्या होगा....?
बाबा की बात सुन के दोनों बुरी तरह से चौंक जाती हैं.... दर के मारे उनकी हालत खराब हो जाती है.... इतना दर तो उन्हें शैतान से भी नहीं है जितना वो सुल्तानगढ और मलिका सुनहरी के नाम से दर जाती हैं.... पूरा गुलिस्तां सुल्तानगढ और ख़ास कर के मलिका सुनहरी के नाम से काँप जाता है.... मगर हमेशा से ऐसा न था.... एक वक़्त था जब मलिका सुनहरी के नाम से गुलिस्तां जी उठता था.... तो फिर अचानक से ऐसा क्या हो गया जो मलिका सुनहरी के नाम से यहाँ की परियां hi नहीं बल्कि पूरा गुलिस्तां डरने लगा.....? क्यों प्रिंस छह कर भी उस दर को नहीं मिटा पाया....? आखिर इस सब की वजह क्या थी.....? आखिर क्यों आज भी वो दर वो खौफ यहाँ सभी के दिलो में मौजूद है....? आखिर दर है तो है किस बात का और kyunnnnnnnnnnn.....?
इस सब का पता वक़्त आने पे चलेगा फिलहाल चल के पता करते हैं की बाबा आखिर क्या जवाब देते हैं बेगम साहिबा और शलाका के सवाल का.....?
बाबा : आगे का तो पता नहीं मगर हाँ इस वक़्त प्रिंस को कोई खतरा नहीं है.... न hi पारी से और न hi शैतानो से.... जब तक प्रिंस सुल्तानगढ में है.... शैतान उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकते.... न hi पारी.... मगर रही बात मलिका सुनहरी की तो उसके बारे में मैं भी कुछ नहीं कह सकता.... सुल्तानगढ पे मलिका सुनहरी की हुकूमत चलती है.... ये वो जगह है जो उसने खुद अपने हाथों से प्रिंस के लिए बड़े प्यार बनायीं थी.... और फिर गुस्से में खुद अपने hi हाथों से इसकी खूबसूरती को बदसूरती में बदल दिया.... ये जगह जितनी खूबसूरत है उतनी hi खौफनाक भी.... सुल्तानगढ की सबसे खूबसूरत जगह है वो महल जो मलिका सुनहरी और प्रिंस के सच्चे प्यार की यादगार है.... जिसे प्रिंस ने खुद बनाया था.... वो हमेशा कहा करता था की अपनी जान के साथ वो साड़ी ज़िन्दगी यहाँ गुज़ारना चाहता है.... मगर किस्मत को ये मंज़ूर न था.... किस्मत ने प्रिंस को मलिका सुनहरी के साथ साथ पारी से भी दूर कर दिया.... जिस हवेली को प्यार की निशानी बनना था वो खौफनाक मौत के किले में तब्दील हो गयी.... यहाँ दोनों hi चीज़ें दफ़न हैं तकलीफदेह ज़िन्दगी और हस्ती मुस्कुराती मौत.... वो मौत जो ज़िन्दगी से ज़्यादा हसीं और खुशनुमा है..... यहाँ ज़िन्दगी और मौत दोनों का राज है..... किसकी ज़िन्दगी और किसकी मौत ये कहना थोड़ा मुश्किल है....? अब तक तीनो hi इस से अछूते नहीं रह पाए हैं.... तीनो ने ज़िन्दगी और मौत दोनों का मज़ा चखा है.... वो ज़िन्दगी जिसने जितनी ख़ुशी न दी उस से कई ज़्यादा तकलीफ दी है.... और मौत जिसने जितनी तकलीफ न दी उस से कई ज़्यादा ख़ुशी दी है.... अब ख़ुशी किसके हिस्से में आयी और तकलीफ किसके हिस्से में ये उन तीनो के सिवाए और कोई नहीं जानता..... (मगर हाँ कोई ऐसा भी है जिसको इन तीनो की ख़ुशी और तकलीफ से ख़ुशी भी होती थी और तकलीफ भी....)
बेगम साहिबा : बाबा उस वक़्त क्या होगा प्रिंस का जब मलिका सुनहरी को ये पता चलेगा की प्रिंस सुल्तानगढ में आ चूका है....?
बाबा : उसे इस बात का पता चल चूका है.... जैसे hi प्रिंस ने सुल्तानगढ में पहला कदम रखा मलिका सुनहरी ने उसका ठीक वैसे hi स्वागत किया जैसा वो हमेशा से करती आयी है.... पहले तो उसने प्रिंस के ऊपर उसके पसंद के फूलों की बारिश की और फिर अपनी उस प्यारी दिल को छू जाने वाली हंसी की आवाज़ प्रिंस को सुनाई जिसका वो दीवाना है.... और फिर उसने वो किया जिसे सोच के दिल देहल उठा.... उसने सुलतान के सबसे प्यारे और जिगरी दोस्त शेरा (वो विशालकाय शेर जिसने प्रिंस पे छलांग लगायी थी) और उसकी ताक़त को प्रिंस को मारने के लिए उसपे चोर दिया.... प्रिंस की जान लेने के लिए शेरा ने उसपे छलांग लगा दी.....
बाबा की इस बात को सुनते hi गुलिस्तां के साथ साथ वहां मजूद सभी का दिल देहल गया सब की आँखों से आंसू बहने लगे..... उनके लैब सील से गए थे... जुबां जैसे पत्र सी गयी थी.... उन्हें बस एक hi चीज़ महसूस हो रही थी.... दिल में उठता हुआ बेतहाशा दर्द.... ये कहते कहते बाबा की आँखें भी नाम हो गयी thi....Baba ने अपने जज़्बातों को काबू किया और मगर कह के वो खामोश हो गए.....
बाबा : मगर.....
बाबा के मुँह से मगर सुन के सब को एक झटका सा लगा..... उम्मीद की एक किरण सी सब के दिल में चमक उठी.... ये सोच के की शायद असल बात वो नहीं है जो वो समझ रहे हैं.... हो सकता है की बात कुछ और hi हो..... मगर ये भी मुमकिन नहीं की शेरा के वार से कोई बच पाए..... शेरा में बेइन्तेहाँ पावर्स हैं.... जिनका मुक़ाबला इस पूरी क़ायनात में कोई नहीं कर सकता सिवाए सुलतान के.... शेरा को देख के शैतानो का दिल भी देहल जाता है.... दो hi लोग हैं इस पूरी कायनात में जो शेरा को काबू कर सकते हैं.... पहला सुलतान और दूसरी उसकी जान मलिका सुनहरी.... शेरा जितना प्रिंस को चाहता है उतना hi मलिका सुनहरी को भी... दोनों hi उसकी जान हैं.... क्यों....? और Kaise....?"Is सब के बारे में आगे पता चलेगा...."
बाबा : मगर इस से पहले की शेरा प्रिंस को जान से मारता अचानक वहां से सब कुछ गायब हो गया.... बस रह गयी तो मलिका सुनेहि की प्यारी सी दिल को छू जाने वाली हंसी.... उसकी हंसी में उस वक़्त जितना गुस्सा था उतना hi दर्द भी और साथ साथ बेइन्तेहाँ प्यार भी.....
बाबा की बात सुन के सब को राहत महसूस हुई.... ये बात अलग थी की अब भी सब की आँखों से आंसू अब भी बह रहे थे... और वो प्रिंस की सलामती की दुआ कर रहे थे....
मगर फिर बाबा ने जो कहा उसे सुन के दोनों एक बार फिर से बुरी तरह से दर गयी.... दोनों का दिल ज़ोर से धड़क गया.... न चाहते हुए भी दोनों के मुँह से चीख निकल गयी.....
बाबा : प्रिंस वहां बिलकुल भी सेफ नहीं है.... उसे कभी भी कुछ भी हो सकता है.... उसकी जान को भी खतरा है....
दोनों : क्याआआआआ....?
बाबा : हाँ.....
बेगम साहिबा : T....To... क्याआ.... होगा प्रिंस का....? क्या मलिका सुनहरी उसके साथ कुछ गलत करेगी....?
बाबा : पता नहीं....
बेगम साहिबा : क्यों न हम प्रिंस को वहां से बाहर निकाल लाये....?
बाबा : नहीं ये मुमकिन नहीं.... क्यों की प्रिंस के सफर की शुरुवात सुल्तानगढ से hi होनी है.... जिसका आगाज़ हो चूका है... प्रिंस वहां पहुँच चूका है.... वहीँ से उसे अपनी पावर्स को हासिल करने का तरीका पता चलेगा.... और वहीँ प्रिंस सेफ भी रहेगा....
शलाका : हम उसे वहां से ला नहीं सकते तो क्या वहां रह के उसकी हिफाज़त तो कर hi सकते हैं न....
बाबा : ये भी मुमकिन नहीं.... क्यों की वहां जाते hi हमारी पावर्स बांध के रह जायेगी.... हम वहां अपनी पावर्स का इस्तेमाल खुद को बचने के लिए तो कर पाएंगे मगर अपनी पावर्स से वार करना नामुमकिन है.... हमारे लिए तो क्या इस पूरे ब्रह्माण्ड में प्रिंस और मलिका को चोर के अपनी पावर्स का इस्तेमाल सुल्तानगढ में करना किसी के लिए भी मुमकिन नहीं..... फिर भी अगर किसी ने वहां अपनी पावर्स से वार किया तो उस पावर्स से जितना नुक्सान और तकलीफ मलिका सुनहरी या फिर प्रिंस को होगी उतनी hi तकलीफ उसको भी होगी जिसकी वो पावर्स है....
बेगम साहिबा रट हुए : तो आप क्या चाहते हैं की हम हाथ पे हाथ धरे बैठे रहें.... और प्रिंस को मौत के मुँह में जाने दें..... नहीं बाबा ये नहीं होगा हमसे....
बाबा : इस बात की तकलीफ तो मुझे भी है....
शलाका : बाबा कोई तो रास्ता होगा जिस से प्रिंस को वहां से निकाला जाए और मलिका सुनहरी उसे कुछ न करे.....?
बाबा : उसके बस दो hi रास्ते हैं.... पहला ये की प्रिंस जितनी जल्दी हो सके अपनी पूरी पावर्स को हासिल कर ले.... ताकि उसका कोई कुछ न बिगाड़ सके.... जिसमे काफी वक़्त लगेगा... इस बीच किसी भी उन्होनी का होना मुमकिन है....
शलाका : और दूसरा रास्ता....
बाबा : दूसरा रास्ता ये की प्रिंस मलिका सुनहरी को जान से मार दे.... जो की नामुमकिन है.... प्रिंस हस्ते हस्ते अपनी जान मलिका सुनहरी पे क़ुर्बान कर तो सकता है मगर मलिका की जान वो कभी नहीं ले सकता.... मलिका को एक खरोच भी आये ये प्रिंस कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता.... प्रिंस को मलिका सुनहरी से सिर्फ और सिर्फ सुलतान का मलिका के लिए बेइन्तेहाँ प्यार hi बचा सकता है.... और कुछ नहीं जो की पारी के रहते मुमकिन नहीं.... प्रिंस पारी को चाहता है और सुलतान मलिका सुनहरी ko.....isi तरह मलिका सुनहरी सुलतान को चाहती है और प्रिंस से नफरत करती है वहीँ पारी प्रिंस को चाहती है और सुलतान से नफरत करती है..... इनके बीच दो hi चीज़ें हैं और वो है एक दूसरे के लिए बेइन्तेहाँ प्यार और साथ hi बेइन्तेहाँ नफरत भी.... अब जीत प्यार की होती है या नफरत की ये आगे पता चलेगा....
बेगम साहिबा : तो अब आप hi बताइये की क्या किया जाए....?
बाबा : एक hi रास्ता है वो ये की जल्द से जल्द प्रिंस अपनी पूरी पावर्स को हासिल कर ले.... उसके लिए मुझे खुद वहां जा के उसे आगे का रास्ता दिखाना होगा....
बेगम साहिबा : क्या हम भी साथ चल सकते हैं....?
बाबा : नहीं इस वक़्त मुझे वहां अकेले hi जाना होगा.... वहां सब का जाना प्रिंस के लिए खतरा बन सकता है... कहीं ऐसा न हो की सब को वहां देख मलिका सुनहरी कुछ गलत समझ बैठे... और प्रिंस पे जान लेवा हुम्ला कर बैठे.... इस वक़्त प्रिंस के पास उतनी पावर्स नहीं है की वो मलिका सुनहरी का सामना कर सके....
शलाका : मगर प्रिंस के जिस्म में आप के साथ साथ काय जिनि की नीलम पावर्स भी तो है....
बाबा : हाँ है मगर उनका कैसे इस्तेमाल करना है ये प्रिंस को नहीं पता.... और वैसे भी मलिका के पास बेशुमार पावर्स है जिसके के आगे प्रिंस के जिस्म में जो पावर्स हैं वो दो पल भी न टिक पाएगी.... अपना दम तोड़ देगी....
बेगम साहिबा : तो फिर देर किस बात की है... जल्दी जाइये और प्रिंस की मदत कीजिये....
बाबा : नहीं अभी नहीं.... मैं वहां 2 दिन बाद जाऊँगा.... वहां जाने से पहले मुझे पूरी तैयारी करनी होगी.... ताकि मैं जब वहां जाऊं तब मलिका सुनहरी को इस बात की खबर न हो.... मैं वहां उसी वक़्त जा पाऊंगा जो वक़्त झूटी सुबह का होगा....
बेगम साहिबा : झूटी सुबह....
बाबा : हाँ झूटी सुबह.... ये ऐसा वक़्त है जो सुबह सूरज के निकलने से ठीक पहले 10 मिनट्स का होता है.... उस वक़्त सूरज की हलकी रौशनी सी हर तरफ फैल जाती है ऐसा लगता है जैसे की सुबह हो गयी... मगर असल में ऐसा होता नहीं.... वो वक़्त ऐसा होता है जो न hi सुबह का वक़्त होता है न hi रात का बस झूट होता है एक छलावा जैसा.... उस वक़्त मलिका सुनहरी से चुप के वहां जाय जा सकता है.... उस वक़्त उसे कुछ पता नहीं चल पायेगा की वहां कोई आया भी है....
बेगम साहिबा : तो क्यों न उस वक़्त हम भी आप के साथ वहां जाए....?
बाबा : नहीं कभी नहीं सब के वहां जाने से हो सकता है कुछ गलत हो जाए.... मलिका सुनहरी को पता चल जाए.... और अगर ऐसा हुआ तो जाने क्या होगा.... प्रिंस की जान को भी खतरा हो सकता है... और मैं कभी भी ये नहीं चाहूंगा की प्रिंस को कोई खतरा हो... मुझे उम्मीद है की आप सब भी कभी प्रिंस की जान को खतरे में नहीं डालना चाहेंगे....
बेगम साहिबा बाबा की बात समझ के खामोश सी हो जाती है.... बाबा उनसे अलविदा ले के अपनी तैयारी करने चल देते हैं....
इधर धरती पे प्रिंस मैक्स से बात करने के बाद सोचता हुआ बहार की तरफ चल देता है....
उधर अरबाज़ अपने पूरे परिवार के साथ नाश्ता कर रहे होते हैं.... आज उनकी आँखों में आंसू के साथ साथ उनके होंठों पे मुस्कराहट भी है.... जिसे देख उसकी पत्नी को हैरानी सी होती है....
जमीला से अपने पति को देख के पूछती है....
जमीला : क्या बात है....? आपकी तबीयत तो ठीक है न....? एक तरफ आपकी आँखों में आंसू हैं वहीँ आपके होंठों पे मुस्कराहट भी है....
अरबाज़ : हाँ बात hi कुछ ऐसी है.... मेरी आँखों में जो आंसू हैं वो अपनी जान से प्यारी बेटी सोना की तकलीफ की वजह से है.... और होंठों पे जो ख़ुशी है वो इस बात से है की घर के जिस हिस्से को हम पिछले 3 साल से रेंट पे देना चाहते थे वो काम आज आखिर हो hi गया....
जमीला : क्या मतलब....? मैं कुछ समझी नहीं....
इस से पहले की अरबाज़ कुछ कहते उनके छोटे भाई इमरान से रहा न गया और वो बीच में hi बोल पड़े....
इमरान : भाभी बात hi ख़ुशी की है.... आज हम ने घर के उस हिस्से को रेंट पे दे दिया... है न ख़ुशी की बात....
इमरान की बात वहां मौजूद सब बेहद खुश हो जाते हैं....
इमरान : ये तो कुछ भी नहीं है असल बात जब आपको पता चलेगी तो आपकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहेगा....
जमीला : ऐसी क्या बात है ज़रा मैं भी तो sunu....?Aisa कौनसा तीर मार लिया आप दोनों भाइयों ने....?
इमरान : मारा है भाभी बहुत बड़ा तीर मारा है हमने.... वो भी ठीक निशाने पे....
जमीला : अच्छा.... ऐसी बात है... चलो बताओ तो वो कौनसा तीर मार दिया....?
इमरान : जानती हैं की उसका डिपाजिट और रेंट कितना है....
जमीला : ज़्यादा से ज़्यादा डिपाजिट 40 लाख और रेंट 2 लाख महीना.... अब इस से ज़्यादा और क्या होगा....?
इमरान : जी नहीं.... बल्कि इस से भी कई ज़्यादा..... 1 करोड़ डिपोसिट और 5 लाख महीने के रेंट.... इतना hi नहीं डिपाजिट के साथ साथ पूरे 2 साल का रेंट एडवांस में लिया है हम ने उस से.... पूरे 2 करोड़ 20 लाख.....
इमरान की बात सुन के सब बुरी तरह से चौंक जाते हैं.... सब के मुँह से एक साथ एक hi लफ्ज़ निकलता है और वो है...
सब : Kyaaaaaaaaaaaaaaa...??????
इमरान की बात सुन के एक तरफ सब को बेहद ख़ुशी होती है तो वहीँ दूसरी तरफ हैरानी भी....
जमीला : या तो तुम पागल हो गए हो....? या फिर हम सब को पागल बना रहे हो....
अरबाज़ : नहीं जमीला इमरान ने अभी जो भी कहा वो सच है..... ये देखो घर का रेंट एग्रीमेंट और डिपोसिट के साथ साथ 2 साल के रेंट का चेक भी.... पूरे 2 करोड़ 20 लाख का चेक....
अरबाज़ की बात का किसी को यकीन नहीं होता.... सब फ़ौरन आगे बढ़ के उस चेक को देखते हैं.... हैरत से सब की आँखें बड़ी हो जाती है....
जमीला : अरे जिसे आप लोगो ने रेंट पे रहने दिया है.... उसके बारे में कुछ पता भी किया है की ऐसे hi पैसो को देख के किसी भी ैरे गैर को घर दे दिया....
अरबाज़ : नहीं जमीला सब कुछ देख के hi दिया है....
जमीला : अच्छा.... क्या जानते हैं आप उसके बारे में ज़रा मैं भी तो सुनु.....?????
अपडेट 86
सैर : यार वो प्रिंस का फ़ोन नहीं लग रहा बहुत देर से तरय कर रही हूँ... मगर बुजी आ रहा है.... मुझे उसकी फ़िक्र हो रही थी.... वो ठीक से पहुंचा की नहीं.... तेरी उस से कुछ बात हुई की नहीं यही पूछने मैं यहाँ चली आयी....
मैक्स : हाँ मेरी बात हो गयी है.... वो ठीक से वहां पहुँच गया है.... और वहां उसने रेंट पे एक रूम भी ले लिया है....
फिर मैक्स उन दोनों को वो सब बताता है जो प्रिंस ने उसे बताया था..... वो उन्हें सिर्फ उतना hi बताता है जितना ज़रूरी है.... अब उन्हें वो ये बताता भी तो कैसे की प्रिंस ने वहां क्या क्या देखा और महसूस किया.... यहाँ तक की सुल्तानगढ में रह के भी वो यहाँ सब को देख पा रहा है..... जब की इस बात को जान के वो खुद बेहद हैरान है.....
इस सब को जान के कुछ और भी लोग हैं जो प्रिंस मैक्स और ज़रा की तरह हैरान हैं और वो हैं.....
अब आगे.....
ये लोग और कोई नहीं बल्कि बेगम साहिबा और शलाका हैं....
बेगम साहिबा : ये आप क्या कह रहे हैं....?
बाबा : वो hi जो सच है..... प्रिंस सुल्तानगढ पहुँच चूका है.....
दोनों एक साथ : Kyaaaaaaaaaa....? A....gar ये सच है तो फिर तो प्रिंस का क्या होगा....? क्या मलिका सुनहरी प्रिंस को माफ़ कर पाएगी....? क्या प्रिंस उसके गुस्से को शांत कर पायेगा....? और सब से बड़ी बात तो ये की जब प्रिंस मलिका सुनहरी और पारी आमने सामने होंगे तब क्या होगा....?
बाबा की बात सुन के दोनों बुरी तरह से चौंक जाती हैं.... दर के मारे उनकी हालत खराब हो जाती है.... इतना दर तो उन्हें शैतान से भी नहीं है जितना वो सुल्तानगढ और मलिका सुनहरी के नाम से दर जाती हैं.... पूरा गुलिस्तां सुल्तानगढ और ख़ास कर के मलिका सुनहरी के नाम से काँप जाता है.... मगर हमेशा से ऐसा न था.... एक वक़्त था जब मलिका सुनहरी के नाम से गुलिस्तां जी उठता था.... तो फिर अचानक से ऐसा क्या हो गया जो मलिका सुनहरी के नाम से यहाँ की परियां hi नहीं बल्कि पूरा गुलिस्तां डरने लगा.....? क्यों प्रिंस छह कर भी उस दर को नहीं मिटा पाया....? आखिर इस सब की वजह क्या थी.....? आखिर क्यों आज भी वो दर वो खौफ यहाँ सभी के दिलो में मौजूद है....? आखिर दर है तो है किस बात का और kyunnnnnnnnnnn.....?
इस सब का पता वक़्त आने पे चलेगा फिलहाल चल के पता करते हैं की बाबा आखिर क्या जवाब देते हैं बेगम साहिबा और शलाका के सवाल का.....?
बाबा : आगे का तो पता नहीं मगर हाँ इस वक़्त प्रिंस को कोई खतरा नहीं है.... न hi पारी से और न hi शैतानो से.... जब तक प्रिंस सुल्तानगढ में है.... शैतान उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकते.... न hi पारी.... मगर रही बात मलिका सुनहरी की तो उसके बारे में मैं भी कुछ नहीं कह सकता.... सुल्तानगढ पे मलिका सुनहरी की हुकूमत चलती है.... ये वो जगह है जो उसने खुद अपने हाथों से प्रिंस के लिए बड़े प्यार बनायीं थी.... और फिर गुस्से में खुद अपने hi हाथों से इसकी खूबसूरती को बदसूरती में बदल दिया.... ये जगह जितनी खूबसूरत है उतनी hi खौफनाक भी.... सुल्तानगढ की सबसे खूबसूरत जगह है वो महल जो मलिका सुनहरी और प्रिंस के सच्चे प्यार की यादगार है.... जिसे प्रिंस ने खुद बनाया था.... वो हमेशा कहा करता था की अपनी जान के साथ वो साड़ी ज़िन्दगी यहाँ गुज़ारना चाहता है.... मगर किस्मत को ये मंज़ूर न था.... किस्मत ने प्रिंस को मलिका सुनहरी के साथ साथ पारी से भी दूर कर दिया.... जिस हवेली को प्यार की निशानी बनना था वो खौफनाक मौत के किले में तब्दील हो गयी.... यहाँ दोनों hi चीज़ें दफ़न हैं तकलीफदेह ज़िन्दगी और हस्ती मुस्कुराती मौत.... वो मौत जो ज़िन्दगी से ज़्यादा हसीं और खुशनुमा है..... यहाँ ज़िन्दगी और मौत दोनों का राज है..... किसकी ज़िन्दगी और किसकी मौत ये कहना थोड़ा मुश्किल है....? अब तक तीनो hi इस से अछूते नहीं रह पाए हैं.... तीनो ने ज़िन्दगी और मौत दोनों का मज़ा चखा है.... वो ज़िन्दगी जिसने जितनी ख़ुशी न दी उस से कई ज़्यादा तकलीफ दी है.... और मौत जिसने जितनी तकलीफ न दी उस से कई ज़्यादा ख़ुशी दी है.... अब ख़ुशी किसके हिस्से में आयी और तकलीफ किसके हिस्से में ये उन तीनो के सिवाए और कोई नहीं जानता..... (मगर हाँ कोई ऐसा भी है जिसको इन तीनो की ख़ुशी और तकलीफ से ख़ुशी भी होती थी और तकलीफ भी....)
बेगम साहिबा : बाबा उस वक़्त क्या होगा प्रिंस का जब मलिका सुनहरी को ये पता चलेगा की प्रिंस सुल्तानगढ में आ चूका है....?
बाबा : उसे इस बात का पता चल चूका है.... जैसे hi प्रिंस ने सुल्तानगढ में पहला कदम रखा मलिका सुनहरी ने उसका ठीक वैसे hi स्वागत किया जैसा वो हमेशा से करती आयी है.... पहले तो उसने प्रिंस के ऊपर उसके पसंद के फूलों की बारिश की और फिर अपनी उस प्यारी दिल को छू जाने वाली हंसी की आवाज़ प्रिंस को सुनाई जिसका वो दीवाना है.... और फिर उसने वो किया जिसे सोच के दिल देहल उठा.... उसने सुलतान के सबसे प्यारे और जिगरी दोस्त शेरा (वो विशालकाय शेर जिसने प्रिंस पे छलांग लगायी थी) और उसकी ताक़त को प्रिंस को मारने के लिए उसपे चोर दिया.... प्रिंस की जान लेने के लिए शेरा ने उसपे छलांग लगा दी.....
बाबा की इस बात को सुनते hi गुलिस्तां के साथ साथ वहां मजूद सभी का दिल देहल गया सब की आँखों से आंसू बहने लगे..... उनके लैब सील से गए थे... जुबां जैसे पत्र सी गयी थी.... उन्हें बस एक hi चीज़ महसूस हो रही थी.... दिल में उठता हुआ बेतहाशा दर्द.... ये कहते कहते बाबा की आँखें भी नाम हो गयी thi....Baba ने अपने जज़्बातों को काबू किया और मगर कह के वो खामोश हो गए.....
बाबा : मगर.....
बाबा के मुँह से मगर सुन के सब को एक झटका सा लगा..... उम्मीद की एक किरण सी सब के दिल में चमक उठी.... ये सोच के की शायद असल बात वो नहीं है जो वो समझ रहे हैं.... हो सकता है की बात कुछ और hi हो..... मगर ये भी मुमकिन नहीं की शेरा के वार से कोई बच पाए..... शेरा में बेइन्तेहाँ पावर्स हैं.... जिनका मुक़ाबला इस पूरी क़ायनात में कोई नहीं कर सकता सिवाए सुलतान के.... शेरा को देख के शैतानो का दिल भी देहल जाता है.... दो hi लोग हैं इस पूरी कायनात में जो शेरा को काबू कर सकते हैं.... पहला सुलतान और दूसरी उसकी जान मलिका सुनहरी.... शेरा जितना प्रिंस को चाहता है उतना hi मलिका सुनहरी को भी... दोनों hi उसकी जान हैं.... क्यों....? और Kaise....?"Is सब के बारे में आगे पता चलेगा...."
बाबा : मगर इस से पहले की शेरा प्रिंस को जान से मारता अचानक वहां से सब कुछ गायब हो गया.... बस रह गयी तो मलिका सुनेहि की प्यारी सी दिल को छू जाने वाली हंसी.... उसकी हंसी में उस वक़्त जितना गुस्सा था उतना hi दर्द भी और साथ साथ बेइन्तेहाँ प्यार भी.....
बाबा की बात सुन के सब को राहत महसूस हुई.... ये बात अलग थी की अब भी सब की आँखों से आंसू अब भी बह रहे थे... और वो प्रिंस की सलामती की दुआ कर रहे थे....
मगर फिर बाबा ने जो कहा उसे सुन के दोनों एक बार फिर से बुरी तरह से दर गयी.... दोनों का दिल ज़ोर से धड़क गया.... न चाहते हुए भी दोनों के मुँह से चीख निकल गयी.....
बाबा : प्रिंस वहां बिलकुल भी सेफ नहीं है.... उसे कभी भी कुछ भी हो सकता है.... उसकी जान को भी खतरा है....
दोनों : क्याआआआआ....?
बाबा : हाँ.....
बेगम साहिबा : T....To... क्याआ.... होगा प्रिंस का....? क्या मलिका सुनहरी उसके साथ कुछ गलत करेगी....?
बाबा : पता नहीं....
बेगम साहिबा : क्यों न हम प्रिंस को वहां से बाहर निकाल लाये....?
बाबा : नहीं ये मुमकिन नहीं.... क्यों की प्रिंस के सफर की शुरुवात सुल्तानगढ से hi होनी है.... जिसका आगाज़ हो चूका है... प्रिंस वहां पहुँच चूका है.... वहीँ से उसे अपनी पावर्स को हासिल करने का तरीका पता चलेगा.... और वहीँ प्रिंस सेफ भी रहेगा....
शलाका : हम उसे वहां से ला नहीं सकते तो क्या वहां रह के उसकी हिफाज़त तो कर hi सकते हैं न....
बाबा : ये भी मुमकिन नहीं.... क्यों की वहां जाते hi हमारी पावर्स बांध के रह जायेगी.... हम वहां अपनी पावर्स का इस्तेमाल खुद को बचने के लिए तो कर पाएंगे मगर अपनी पावर्स से वार करना नामुमकिन है.... हमारे लिए तो क्या इस पूरे ब्रह्माण्ड में प्रिंस और मलिका को चोर के अपनी पावर्स का इस्तेमाल सुल्तानगढ में करना किसी के लिए भी मुमकिन नहीं..... फिर भी अगर किसी ने वहां अपनी पावर्स से वार किया तो उस पावर्स से जितना नुक्सान और तकलीफ मलिका सुनहरी या फिर प्रिंस को होगी उतनी hi तकलीफ उसको भी होगी जिसकी वो पावर्स है....
बेगम साहिबा रट हुए : तो आप क्या चाहते हैं की हम हाथ पे हाथ धरे बैठे रहें.... और प्रिंस को मौत के मुँह में जाने दें..... नहीं बाबा ये नहीं होगा हमसे....
बाबा : इस बात की तकलीफ तो मुझे भी है....
शलाका : बाबा कोई तो रास्ता होगा जिस से प्रिंस को वहां से निकाला जाए और मलिका सुनहरी उसे कुछ न करे.....?
बाबा : उसके बस दो hi रास्ते हैं.... पहला ये की प्रिंस जितनी जल्दी हो सके अपनी पूरी पावर्स को हासिल कर ले.... ताकि उसका कोई कुछ न बिगाड़ सके.... जिसमे काफी वक़्त लगेगा... इस बीच किसी भी उन्होनी का होना मुमकिन है....
शलाका : और दूसरा रास्ता....
बाबा : दूसरा रास्ता ये की प्रिंस मलिका सुनहरी को जान से मार दे.... जो की नामुमकिन है.... प्रिंस हस्ते हस्ते अपनी जान मलिका सुनहरी पे क़ुर्बान कर तो सकता है मगर मलिका की जान वो कभी नहीं ले सकता.... मलिका को एक खरोच भी आये ये प्रिंस कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता.... प्रिंस को मलिका सुनहरी से सिर्फ और सिर्फ सुलतान का मलिका के लिए बेइन्तेहाँ प्यार hi बचा सकता है.... और कुछ नहीं जो की पारी के रहते मुमकिन नहीं.... प्रिंस पारी को चाहता है और सुलतान मलिका सुनहरी ko.....isi तरह मलिका सुनहरी सुलतान को चाहती है और प्रिंस से नफरत करती है वहीँ पारी प्रिंस को चाहती है और सुलतान से नफरत करती है..... इनके बीच दो hi चीज़ें हैं और वो है एक दूसरे के लिए बेइन्तेहाँ प्यार और साथ hi बेइन्तेहाँ नफरत भी.... अब जीत प्यार की होती है या नफरत की ये आगे पता चलेगा....
बेगम साहिबा : तो अब आप hi बताइये की क्या किया जाए....?
बाबा : एक hi रास्ता है वो ये की जल्द से जल्द प्रिंस अपनी पूरी पावर्स को हासिल कर ले.... उसके लिए मुझे खुद वहां जा के उसे आगे का रास्ता दिखाना होगा....
बेगम साहिबा : क्या हम भी साथ चल सकते हैं....?
बाबा : नहीं इस वक़्त मुझे वहां अकेले hi जाना होगा.... वहां सब का जाना प्रिंस के लिए खतरा बन सकता है... कहीं ऐसा न हो की सब को वहां देख मलिका सुनहरी कुछ गलत समझ बैठे... और प्रिंस पे जान लेवा हुम्ला कर बैठे.... इस वक़्त प्रिंस के पास उतनी पावर्स नहीं है की वो मलिका सुनहरी का सामना कर सके....
शलाका : मगर प्रिंस के जिस्म में आप के साथ साथ काय जिनि की नीलम पावर्स भी तो है....
बाबा : हाँ है मगर उनका कैसे इस्तेमाल करना है ये प्रिंस को नहीं पता.... और वैसे भी मलिका के पास बेशुमार पावर्स है जिसके के आगे प्रिंस के जिस्म में जो पावर्स हैं वो दो पल भी न टिक पाएगी.... अपना दम तोड़ देगी....
बेगम साहिबा : तो फिर देर किस बात की है... जल्दी जाइये और प्रिंस की मदत कीजिये....
बाबा : नहीं अभी नहीं.... मैं वहां 2 दिन बाद जाऊँगा.... वहां जाने से पहले मुझे पूरी तैयारी करनी होगी.... ताकि मैं जब वहां जाऊं तब मलिका सुनहरी को इस बात की खबर न हो.... मैं वहां उसी वक़्त जा पाऊंगा जो वक़्त झूटी सुबह का होगा....
बेगम साहिबा : झूटी सुबह....
बाबा : हाँ झूटी सुबह.... ये ऐसा वक़्त है जो सुबह सूरज के निकलने से ठीक पहले 10 मिनट्स का होता है.... उस वक़्त सूरज की हलकी रौशनी सी हर तरफ फैल जाती है ऐसा लगता है जैसे की सुबह हो गयी... मगर असल में ऐसा होता नहीं.... वो वक़्त ऐसा होता है जो न hi सुबह का वक़्त होता है न hi रात का बस झूट होता है एक छलावा जैसा.... उस वक़्त मलिका सुनहरी से चुप के वहां जाय जा सकता है.... उस वक़्त उसे कुछ पता नहीं चल पायेगा की वहां कोई आया भी है....
बेगम साहिबा : तो क्यों न उस वक़्त हम भी आप के साथ वहां जाए....?
बाबा : नहीं कभी नहीं सब के वहां जाने से हो सकता है कुछ गलत हो जाए.... मलिका सुनहरी को पता चल जाए.... और अगर ऐसा हुआ तो जाने क्या होगा.... प्रिंस की जान को भी खतरा हो सकता है... और मैं कभी भी ये नहीं चाहूंगा की प्रिंस को कोई खतरा हो... मुझे उम्मीद है की आप सब भी कभी प्रिंस की जान को खतरे में नहीं डालना चाहेंगे....
बेगम साहिबा बाबा की बात समझ के खामोश सी हो जाती है.... बाबा उनसे अलविदा ले के अपनी तैयारी करने चल देते हैं....
इधर धरती पे प्रिंस मैक्स से बात करने के बाद सोचता हुआ बहार की तरफ चल देता है....
उधर अरबाज़ अपने पूरे परिवार के साथ नाश्ता कर रहे होते हैं.... आज उनकी आँखों में आंसू के साथ साथ उनके होंठों पे मुस्कराहट भी है.... जिसे देख उसकी पत्नी को हैरानी सी होती है....
जमीला से अपने पति को देख के पूछती है....
जमीला : क्या बात है....? आपकी तबीयत तो ठीक है न....? एक तरफ आपकी आँखों में आंसू हैं वहीँ आपके होंठों पे मुस्कराहट भी है....
अरबाज़ : हाँ बात hi कुछ ऐसी है.... मेरी आँखों में जो आंसू हैं वो अपनी जान से प्यारी बेटी सोना की तकलीफ की वजह से है.... और होंठों पे जो ख़ुशी है वो इस बात से है की घर के जिस हिस्से को हम पिछले 3 साल से रेंट पे देना चाहते थे वो काम आज आखिर हो hi गया....
जमीला : क्या मतलब....? मैं कुछ समझी नहीं....
इस से पहले की अरबाज़ कुछ कहते उनके छोटे भाई इमरान से रहा न गया और वो बीच में hi बोल पड़े....
इमरान : भाभी बात hi ख़ुशी की है.... आज हम ने घर के उस हिस्से को रेंट पे दे दिया... है न ख़ुशी की बात....
इमरान की बात वहां मौजूद सब बेहद खुश हो जाते हैं....
इमरान : ये तो कुछ भी नहीं है असल बात जब आपको पता चलेगी तो आपकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहेगा....
जमीला : ऐसी क्या बात है ज़रा मैं भी तो sunu....?Aisa कौनसा तीर मार लिया आप दोनों भाइयों ने....?
इमरान : मारा है भाभी बहुत बड़ा तीर मारा है हमने.... वो भी ठीक निशाने पे....
जमीला : अच्छा.... ऐसी बात है... चलो बताओ तो वो कौनसा तीर मार दिया....?
इमरान : जानती हैं की उसका डिपाजिट और रेंट कितना है....
जमीला : ज़्यादा से ज़्यादा डिपाजिट 40 लाख और रेंट 2 लाख महीना.... अब इस से ज़्यादा और क्या होगा....?
इमरान : जी नहीं.... बल्कि इस से भी कई ज़्यादा..... 1 करोड़ डिपोसिट और 5 लाख महीने के रेंट.... इतना hi नहीं डिपाजिट के साथ साथ पूरे 2 साल का रेंट एडवांस में लिया है हम ने उस से.... पूरे 2 करोड़ 20 लाख.....
इमरान की बात सुन के सब बुरी तरह से चौंक जाते हैं.... सब के मुँह से एक साथ एक hi लफ्ज़ निकलता है और वो है...
सब : Kyaaaaaaaaaaaaaaa...??????
इमरान की बात सुन के एक तरफ सब को बेहद ख़ुशी होती है तो वहीँ दूसरी तरफ हैरानी भी....
जमीला : या तो तुम पागल हो गए हो....? या फिर हम सब को पागल बना रहे हो....
अरबाज़ : नहीं जमीला इमरान ने अभी जो भी कहा वो सच है..... ये देखो घर का रेंट एग्रीमेंट और डिपोसिट के साथ साथ 2 साल के रेंट का चेक भी.... पूरे 2 करोड़ 20 लाख का चेक....
अरबाज़ की बात का किसी को यकीन नहीं होता.... सब फ़ौरन आगे बढ़ के उस चेक को देखते हैं.... हैरत से सब की आँखें बड़ी हो जाती है....
जमीला : अरे जिसे आप लोगो ने रेंट पे रहने दिया है.... उसके बारे में कुछ पता भी किया है की ऐसे hi पैसो को देख के किसी भी ैरे गैर को घर दे दिया....
अरबाज़ : नहीं जमीला सब कुछ देख के hi दिया है....
जमीला : अच्छा.... क्या जानते हैं आप उसके बारे में ज़रा मैं भी तो सुनु.....?????