Meri Aashiqui Tumse hi (Bhai aur Behen) - Page 12 - SexBaba
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Meri Aashiqui Tumse hi (Bhai aur Behen)

मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 106

श्रुति : वो घर पे नहीं है कहीं बहार गया है.... उसे आने में शायद 6 दिन और लग जाएंगे.... जब वो आ जाए तब उस से मिल लेना....

सोना : ठीक है....

ये कह के सोना वहां से जाने hi वाली होती है की तभी किसी की तस्वीर देख के उसके पेअर वहीँ रुक जाते हैं.... वो गौर से उस तस्वीर को देखने लगती है.... फिर पलट से श्रुति से पूछी है....

सोना : ये तस्वीर किसकी है....?

श्रुति : ये प्रिंस की फोटो है... देखने में कितना स्मार्ट डैशिंग और हैंडसम लगता हैं न...

श्रुति की बात पे सोना बस हाँ में अपनी गर्दन हिला देती है... बस फिर क्या था श्रुति प्रिंस की तारीफ के पल बाँधने लग जाती है.... फिर आखरी में जो कहती है उसे सुन के सोनो चौंक के प्रिंस की फोटो के बेहद करीब जा के उसे गौर से देखने लगती है... वहां उसे कुछ ऐसा नज़र आता है जिसे देख के वो बुरी तरह से चौंक जाती है....?????

अब आगे...

श्रुति : जानती हो प्रिंस में सब से ख़ास बात क्या है.... वो है उसकी नीली आँखें और आँखों के किनारे का काला टिल.... उसे जो एक बार देख ले वो उस में खो सा जाता है....

श्रुति की बात सुन सोना गौर से प्रिंस की फोटो की आँखों की तरफ देखती है..... प्रिंस की नीली नीली आँखों में वो खो सी जाती है.... फिर जैसे hi उसकी नज़र प्रिंस की नीली आँखों के किनारे के काले टिल पे जाती है वो चौंके बिना रह नहीं पाती... उसे कुछ याद आता है और वो गहरी सोच में डूब जाती है..... सोना को इस तरह प्रिंस की तस्वीर में खोये देख श्रुति....

श्रुति : देखा मैंने कहा था न की इसकी नीली आँखों में जादू है कोई लड़की अगर एक बार इसकी आँखों में देख ले वो उस में खो सी जाती है.... जैसा अट्रैक्शन इस के फेस और बॉडी में है वैसा hi इसकी आँखों में भी है.... इसे देखते hi दिल इसका दीवाना हुआ जाता है.... और जब ये प्यार से देखते हुए बात करता है और ख़ास करके मुस्कुराता है तब दिल इस का हो जाने को तड़प उठता है.... देखना कहीं ऐसा न हो की तुम्हे भी इस से प्यार हो जाए.....

श्रुति की बात सुन के सोना एक बार पलट के उसकी तरफ देखती है.... फिर कुछ देर प्रिंस की फोटो के एक बार फिर से निहारने लग जाती है.... फिर बिना कुछ कहे वहां से अपने घर की तरफ चल देती है....

सोना कुछ सोचते सोचते घर में दाखिल होती है.... और सामने जा के डाइनिंग टेबल पे बैठ के नाश्ता करने लगती है.... तभी उसकी माँ जमीला उसे यूँ कहीं खोये हुए देख उस से पूछती है.....

जमीला : सोना ये सुबह सुबह तू कहाँ चली गयी थी....?

माँ की आवाज़ सुन के सोना की तंत्र टूट टी है.....

सोना : जी माँ आप ने कुछ कहा क्या....?

माँ : ध्यान कहाँ है तेरा...? मैंने पुछा तू इतनी सुबह सुबह कहाँ गयी थी.....?

सोना : वो माँ जाने क्यों आज फिर से एक अजीब सी बेचैनी हो रही थी.... जाने क्यों ऐसा लगा जैसे की सुलतान बेहद तकलीफ में है.... बस उसकी को ले के परेशान हो गयी थी.... यहाँ मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा था तो अपने मन को शांत करने बहार गार्डन में चली गयी थी.... फिर वहां से अपने घर के पीछे वाले हिस्से की तरफ चली गयी थी....

सोना की बात सुन के वहां मौजूद सब चौंक जाते हैं....

जमीला शॉकेड : क्या कहा घर का पीछे वाला हिस्सा.....!!!!!

सोना : हाँ.... वो मैं वो.... बस ऐसे hi देखने चली गयी थी....

जमीला : मैंने तुझे वहां जाने से मन किया था न.... फिर भी तू वहां गयी.... तू न आज कल मेरी एक भी बात नहीं सुनती है....

सोना : माँ मैं जान के वहां नहीं गयी थी वो तो बस अनजाने में चली गयी थी....

जमीला : जान के हो या अनजाने में.... जब मैंने तुझे वहां जाने से मन किया था तब तू वहां गयी hi क्यों....? तू जानती है न वहां क्या हुआ था....? और तेरे वहां जाने से क्या हो सकता है....? मुझे तो सोच के hi दर लगता है.... मगर फिर भी तू वहां गयी.... न तो तुझे अपनी फ़िक्र है और न मेरी....

अपनी माँ को नाराज़ होते देख सोना माँ को मानाने के लिए उनके करीब जा के प्यार से उनके गाल पे किश कर के उन्हें मानते हुए कहती है...

सोना : सॉरी न माँ.... मैं वहां गलती से चली गयी थी अब नहीं जाउंगी.... अब तो गुस्सा थूक दो....

जमीला : तू न मुझे मानाने की कोशिश मत कर मैं नहीं मान ने वाली.... तू आज कल मेरी कोई बात नहीं मानती बस जब देखो तब अपने मन की करती है.... आज कितने दिन हो गए कॉलेज खुले हुए तू एक दिन भी कॉलेज नहीं गयी.... मगर वहां घर के पीछे वाले हिस्से में जाना नहीं भूली.... आखिर मेरे लाख मन करने पे भी हर बार तू वहां क्यों चली जाती है....? ये जानते हुए भी की वहां क्या हुआ था और आगे जाने क्या हो सकता है....? जा बात मत कर मुझसे आज मैं तुझसे बहुत नाराज़ हूँ....

सोना : माँ सॉरी न माँ.... अब जाने भी दो न.... आप तो मेरी अच्छी माँ हो न....

जमीला : तेरी माँ हूँ इसी लिए तो मुझे तेरी फ़िक्र रहती है.... मगर तुझे मेरी ज़रा भी फ़िक्र नहीं....

सोना : किसने कहा की मुझे आपकी फ़िक्र नहीं है.... मुझे जितनी अपनी फ़िक्र नहीं रहती उस से कई ज़्यादा आपकी फ़िक्र रहती है... तभी तो आपको मीठा खाने से रोकती हूँ.... मगर आप हो की मेरी कोई बात नहीं सुनती.... देखो आज भी कैसे प्लेट में गाजर का हलवा ले के मज़े से खा रही हो.... आप को पता है न डॉ को ने आप को मीठा खाने से मन किया है.... मगर नहीं आप को तो बस वही करना है जो आपको मन किया जाता है.... आप न बिलकुल मुझपे गयी हो.... ठीक मेरी तरह वो hi करती हो जिसे करने से मन किया जाता है....

सोना की बात सुन के जमीला कुछ कहने hi वाली होती है की तभी अरबाज़ बीच में ऐसा कुछ बोल पड़ते हैं... जिसे सुन के सब हसने लगते हैं....

अरबाज़ : सही कहा सोना तू ने तेरी माँ तुझपे गयी है और तू अपनी माँ पे.... दोनों माँ बेटी बिलकुल एक जैसी हो.... तीखी मिर्ची.... जो बस अपने मन की करती है... न कभी किसी की सुनती है और न hi कभी किसी की मानती है.... बस अपनी बात मनवाना जानती है.... लेडी डॉन की तरह.... किसी ने कुछ कहा नहीं की हो गई धुंवाडार फायरिंग शुरू....

अरबाज़ की बात सुन के जहाँ सब हसने लगते हैं वहीँ दोनों माँ बेटी गुस्से से उनकी तरफ देखती है.... अरबाज़ फ़ौरन अपनी नज़रें झुका के नाश्ता करने लग जाता है....

हहहहहहहहह.....

सोना : माँ ये अच्छा हुआ की मैं वहां गयी आपको पता है.... हमारा घर अब हमारा बिलकुल भी नहीं रहा....

इमरान : ये क्या कह रही है सोना तू... वो घर जब हमारा है तो हमारा कैसे नहीं रहा....?

सोना : चाचू वो बात ऐसी है की वो घर अब पहले जैसा बिलकुल भी नहीं रहा.... जिसे आपने वो घर रेंट पे दिया है उसने उस घर को जन्नत से भी ज़्यादा खूबसूरत बना दिया है....

सोना की बात सुन के वहां मौजूद सब बुरी तरह से चौंक जाते हैं..... सब के मुँह से एक साथ एक hi शब्द निकलता है...

Kyaaaaaaaaaaaa....?????

सोना : हाँ अगर यकीन न हो तो आप सब खुद चल के देख लीजिये.... वो घर अब पूरी तरह से बदल चूका है.... जब मैंने उसे देखा तो उस की खूबसूरती में खो सी गयी.... ऐसा घर मैंने आज तक कहीं नहीं देखा.... न टीवी पे और न रियल लाइफ में.... जन्नत से भी ज़्यादा खूबसूरत है वो घर.... चलिए खुद चल के देख लीजिये....

ये कह के सोना वहां की हर एक चीज़ की तारीफ करने लगती है... जिसे सुन के सब उस घर की खूबसूरती को देखने के लिए तड़प जाते हैं....

सोना : अगर आप सब को मेरी बात पे यकीन न hi है तो चलिए खुद चल के देख लीजिये....

सोना सब को लेके उस घर की तरफ चल देती है.... जैसे hi सब घर के अंडर जाते हैं.... वहां की खूबसूरती देख सब की आँखें फटी की फटी रह जाती हैं... सब के मुँह से बस इतना hi निकल पाटा है....

वूऊऊवववववव....

सब घर की खूबसूरती में खो से गए हैं.... सब अपने अपने तरीके से घर की तारीफ करने में लगे हुए हैं.... की तभी सोना अपनी बुआ नज़मा की बेटी नाज़ की बात सुन के बुरी तरह से चौंक जाती है....!!!!

सोना शॉकेड : क्या कहा नाज़ तू ने....? एक बार फिर से बोल.....

नाज़ प्रिंस की फोटो को गौर से देखते हुए.....

नाज़ : इसकी आँखें तो बिलकुल सुलतान से मिलती हैं..... वो hi नीली आँखें और आँखों के किनारे ठीक वैसा hi काला टिल....

सोना : नाज़ क्या तुझे पूरा यकीन है की ये आँखें सुलतान की आँखों जैसी hi हैं....?

नाज़ : हैरत है सोना ये बात तू मुझसे पूछ रही है.... मुझसे ज़्यादा तो इन आँखों को तू जानती है.... तू इन के ज़्यादा करीब है.... तेरे बनायीं हुई साड़ी तस्वीरों में सब से ज़्यादा तस्वीरें तो इन नीली आँखों की hi हैं.... जो हु बहु इस जैसी hi हैं..... कहीं ये सुलतान तो नहीं....

सोना : ये कैसे मुमकिन है....? नहीं ये सुलतान नहीं हो सकता.... हरगिज़ नहीं....

नाज़ : क्यों नहीं हो सकता....?

सोना : इस क्यों की वजह तू अच्छे से जानती है.... फिर भी ये सवाल पूछ रही है....

नाज़ : हाँ पूछ रही हूँ.... जानती है क्यों....? वो इस लिए क्यों की बचपन में जब तू सुलतान की आँखें देखती थी तो ठीक ऐसे hi उनमे खो जाय करती थी जैसे की अभी खो गयी थी.... और गौर से देख इन आँखों को ये सुलतान की आँखों जैसी नहीं बल्कि उसी की आँखें हैं.... इसे पहचान ने में मैं तो क्या तू भी कभी भूले से भी भूल नहीं कर सकती... याद है तुझे सुलतान क्या कहता था.... उसके दिल में अगर तुझे उतरना है तो उसका एक hi रास्ता है उसकी ये आँखें.... उसकी आँखों को देख के hi मदहोश हो के उसके दिल में उतरा जा सकता है.... और तेरे साथ भी बिलकुल वैसा hi होता था.... जब भी तू उसकी आँखों में देखती थी.... तू उसमे खो सी जाती है.... उसकी आँखों में hi नहीं बल्कि उसके दिल में भी तेरी तस्वीर नज़र आया करती थी.... जिन्हे देख के तू तकलीफ में भी खुश हो जाय करती... तेरे दिल को बेहद सुकून मिलता.... और फिर उस मनहूस दिन के बाद तो न सुलतान हमारे साथ रहा और न hi उसकी ये आँखें....

सोना : हाँ नाज़ तू जो कह रही है वो सच है... लेकिन अगर ये सुलतान hi है तो फिर यहाँ आने के बाद ये हमसे दूर क्यों है....? क्यों यहाँ आते hi हमारे पास नहीं आया....? क्यों हम से ख़ास कर के मुझसे अपनी सोना से इतनी दूर रह रहा है....? क्यों.....?

नाज़ : अब इस क्यों का जवाब तो वो hi दे सकता है....? वैसे वो है कहाँ....?

सोना : उसका तो पता नहीं मगर हाँ जिसकी ये तस्वीर है उसका नाम प्रिंस है.... काम के सिलसिले में कुछ दिन के लिए वो बहार गया है.... अगले 6 से 7 दिन में वो यहाँ लौट आएगा....

नाज़ : जब वो लौट आये तब खुद उस से इस बारे में पूछ लेना....

सोना : हाँ तू ठीक कह रही है.... मगर उस से पहले मुझे कुछ पता करना है जो सिर्फ प्रोफेसर रिआज़ hi बता सकते हैं.... मुझे लगता है मेरे कुछ सवालों के जवाब वो ज़रूर बता देंगे.... बाकी प्रिंस के आने पे मैं उस से पूछ लुंगी....

जब तक सोना प्रोफेसर रिआज़ से अपने सवालों के जवाब पता करती है आइये देखते हैं प्रिंस का क्या हाल है....?

इधर प्रिंस बुरी तरह से ज़ख़्मी हालत में बेहोश पड़ा हुआ है.... नेमत और मुस्कान उसे इस हाल में देख के उसके पास जाने के लिए तड़प रही हैं.... मगर छह के भी उसके पास नहीं जा पा रही हैं.... मुस्कान अपनी पूरी ताक़त लगा के उठना चाहती है मगर उठ नहीं पा रही है.... बस घुटनो से नीचे तक hi अपने पेअर हिला पा रही है.... जैसे hi उसे ये महसूस होता है की उसके पेअर हिल रहे हैं... उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता.... उसका दिल ख़ुशी से झूम उठता है.... वहीँ दूसरी तरफ प्रिंस का हाल देख उसकी आँखों से आंसू बह रहे हैं.... वो प्रिंस को बताना छह रही है की देखो प्रिंस मेरे पेअर ठीक हो गए.... तुम्हारी म्हणत रंग लायी.... मगर छह के भी वो बता नहीं पा रही है.... न इस वक़्त वो बोल सकती है और न hi प्रिंस सुन सकता है....

नेमत के साथ साथ मुस्कान भी ऊपर वाले से दुआ करने लगती हैं.... उनका दिल तड़प तड़प के प्रिंस के लिए दुआएं मांगने लगता है.... और फिर वो होता है जिसे देख उन्हें ऐसा लगता है की जैसे ऊपर वाले ने उनकी दुआ क़ुबूल कर ली.... प्रिंस के जिस्म में उसकी रिकवरी पावर्स एक्टिवटे हो जाती है.... और धीरे धीरे उसके घाव भरने लगते हैं.... उसके जिस्म से बहा हुआ खून वापिस उसके जिस्म में जाने लगता है.... कुछ hi देर में वो पूरी तरह से ठीक हो जाता है....

मुस्कान का नाम ले के प्रिंस चीख के होश में आ जाता है.... होश में आते hi वो इधर उधर मुस्कान को ढूंढने लगता है..... जैसे hi उसकी नज़र मुस्कान पे पड़ती है वो फ़ौरन उसके पास जाता है.... मुस्कान की आँखों में आंसू देख के वो घबरा जाता है.... फिर शुरू हो जाती है उसके सवालों की बौछार....

प्रिंस : मुस्कान तुम ठीक तो हो न....? तुम्हे कुछ हुआ तो नहीं न....? ये तुम रो क्यों रही हो....? बोलो न बोलती क्यों नहीं....?

और न जाने क्या क्या सवाल वो मुस्कान से पूछने लगता है.... साथ hi उसके पूरे जिस्म को गौर से छू छू के चेक करने लगता है.... प्रिंस को अपने लिए इतनी फ़िक्र करते देख मुस्कान को उसपे बेहद प्यार आने लगता है.... उसका दिल चाहता है जैसे की वो प्रिंस को कास के अपने सीने से लगा ले..... अभी उसने ऐसा सोचा hi था की तभी प्रिंस की नज़र उसके पैरों पे पड़ती है जिसे हिलते देख प्रिंस ख़ुशी से उछाल पड़ता है..... वो ख़ुशी में मुस्कान को अपने सीने से लगा के कहता है....

प्रिंस : मुस्कान देखो तुम्हारे पेअर ठीक हो गए.... देखा तुमने ये ठीक हो गए.... बस अब कुछ दिन और फिर तुम पूरी तरह से ठीक हो जाओगी.... मेरी दोस्त पूरी तरह से ठीक हो जायेगी.... वाओ.... मैं बता नहीं सकता तुम्हारे पैरों को ठीक देख के मुझे कितनी ख़ुशी हो रही है....

ये कह के प्रिंस मुस्कान को कास के अपने सीने से लगा लेता है.... उसे अपनी गॉड में उठा के ख़ुशी से नाचने लगता है.... प्रिंस को अपने लिए इतना खुश देख के मुस्कान भी बेहद खुश हो जाती है....

प्रिंस : नेमत देख मुस्कान में पेअर ठीक हो गए.... देखा तू ने इसके पेअर ठीक हो गए जल्द hi ये पूरी तरह से ठीक हो जायेगी.... है न ख़ुशी की बात.... नेमत.... ( फिर इधर उधर देखते हुए....) ये नेमत कहाँ चली गयी....

फिर जब उसकी नज़र नेमत पे पड़ती है तब....

प्रिंस : अबे तू वहां कड़ी कड़ी क्या कर रही है....? इधर आ देख मुस्कान को उसके पेअर ठीक हो गए.....

प्रिंस की बात सुन के नेमत को गुस्सा आने लगता है साथ hi गुस्से से उसका चेहरा लाल होने लगता है....

नेमत मन में : साले कमीने एक तो खुद यहाँ मुझे पावर्स से बांध रखा है और उलटे मुझ hi से ये सवाल कर रहा है की मैं यहाँ कड़ी कड़ी क्या कर रही हूँ.....? बस एक बार मुझे आज़ाद होने दे फिर बताती हूँ मैं तुझे....

प्रिंस : अबे तुझे मेरी बात सुनाई नहीं दे रही है क्या.....? वहां कड़ी कड़ी क्या कर रही है.... इधर आ देख मुस्कान के पेअर ठीक हो गए.... हमारी म्हणत बेकार नहीं गयी.... अब बस कुछ दिन में मुस्कान पूरी तरह ठीक हो जायेगी.... आ न इधर देख न....

नेमत बेहद गुस्से में प्रिंस को देखते हुए मन में कहती है.....

नेमत : कमीने पहले मुझे आज़ाद तो कर फिर बताती हूँ मैं तुझे.....

नेमत को वहां से न हिलते देख प्रिंस हैरत से उसकी तरफ देखता है.... फिर जैसे hi उसे कुछ याद आता है वो फ़ौरन मुस्कान को पास पड़े व्हीलचेयर पे बैठा के मुस्कान की तरफ अपने हाथ का इशारा करता है.... जिस से जादू से उसके जिस्म पे उसके कपडे आ जाते हैं.... फिर वो नेमत की तरफ देख के अपने हाथ का इशारा करता है.... उसका इशारा पाते hi नेमत के मुँह और हाथ से वो रेज़ जिसने उसे जकड़ा हुआ था वो हैट जाती है... और नेमत आज़ाद हो जाती है.... आज़ाद होते hi नेमत बेहद गुस्से में भागते हुए प्रिंस के पास आती है और उसके ऊपर कूद के रट हुए उसे मारने लगती है.... प्रिंस बस हैरत से नेमत को देख रहा है उसे नेमत की कोई बात समझ नहीं आ रही है न hi उसका यूँ रोना और न hi उसका यूँ उसे मारना.... नेमत को यूँ रट देख प्रिंस का दिल तड़प जाता है.... वो उसके दोनों हाथ पकड़ के उस से उसके रोने की वजह पूछता है....

प्रिंस : नेमत क्या हुआ तुझे.....? तू अचानक से रोने क्यों लगी....? बता मुझे बात क्या है....? तुझे कोई प्रॉब्लम है क्या....?

नेमत गुस्से में : साले कमीने तेरी हिमायत कैसे हुई ऐसा करने की....? तू क्या समझता है अपने आप को....? क्या सोच के तू ने ये किया....? और तो और मुझे भी अपनी पावर्स से बंद दिया... ताकि मैं तेरे पास जा के तेरी मदत न कर सकूँ.... साले ये सब करने से पहले तू ने एक बार भी ये नहीं सोचा की अगर तुझे कुछ हो जाता तो क्या होता....? मैं तो जीते जी मर hi जाती.... मगर नहीं तुझे अपनी दोस्त की फ़िक्र है साथ hi बाकी सब की फ़िक्र है मगर मेरी ज़रा भी फ़िक्र नहीं.... आज मैं तेरी वो हालत करुँगी की फिर ऐसा करने से पहले तू 100 नहीं बल्कि 1000 बार सोचेगा....

ये कह के नेमत प्रिंस को पीटने लगती है.... नेमत की बात सुन के और अपने लिए उसका प्यार और फ़िक्र देख प्रिंस की आँखों में आंसू आ जाते हैं साथ hi उसे नेमत पे बड़ा प्यार आने लगता है.... वो प्यार से नेमत के चेहरे को देख के उसकी मार खता रहता है फिर आगे बढ़ के उसे अपने सीने से लगा लेता है....

नेमत : कमीने ये क्या कर रहा है चोर मुझे.... कहीं तेरे ऊपर फिर से नील ज़हर का असर तो नहीं हो गया....? हाँ शायद तभी तू ने मुझे गले लगाया है.... साले चोर मुझे मैं वैसी लड़की नहीं हूँ... अगर तू ने मेरे साथ कुछ भी गलत करना का सोचा भी तो मैं तेरी टांगें तोड़ दूंगी....

ये कह के नेमत उस खुद को चोर्ने को तो कह रही है मगर न hi वो उसे खुद से दूर कर रही है न hi खुद उस से दूर जा रही है.... बल्कि वो खुद कास के प्रिंस को अपने सीने से लगाए हुई है...

प्रिंस भी उसे खुद से दूर करना नहीं छह रहा है.... उसे नेमत पे बड़ा प्यार आ रहा है.... वो और कास के उसे अपने सीने से लगा लेता है....

दोनों को एक दूसरे की बाहों में बेहद सुकून मिल रहा है.... दोनों hi इस वक़्त एक दूसरे से अलग नहीं होना छह रहे हैं.... दोनों को इस वक़्त एक दूसरे के जिस्म की गर्मी महसूस हो रही है... ये गर्मी नील ज़हर को बेकाबू होने पे मजबूर कर देती है और फिर वो होता है जिसे महसूस करके नेमत के साथ साथ प्रिंस को भी एक झटका सा लगता है....????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 107

नेमत : कमीने ये क्या कर रहा है चोर मुझे.... अगर तू ने मेरे साथ कुछ भी गलत करना का सोचा भी तो मैं तेरी टांगें तोड़ दूंगी....

ये कह के नेमत उस खुद को चोर्ने को तो कह रही है मगर न hi वो उसे खुद से दूर कर रही है न hi खुद उस से दूर जा रही है.... बल्कि वो खुद कास के प्रिंस को अपने सीने से लगाए हुई है...

प्रिंस भी उसे खुद से दूर करना नहीं छह रहा है.... उसे नेमत पे बड़ा प्यार आ रहा है.... वो और कास के उसे अपने सीने से लगा लेता है....

दोनों को एक दूसरे की बाहों में बेहद सुकून मिल रहा है.... दोनों hi इस वक़्त एक दूसरे से अलग नहीं होना छह रहे हैं.... दोनों को इस वक़्त एक दूसरे के जिस्म की गर्मी महसूस हो रही है... ये गर्मी नील ज़हर को बेकाबू होने पे मजबूर कर देती है और फिर वो होता है जिसे महसूस करके नेमत के साथ साथ प्रिंस को भी एक झटका सा लगता है....?????

अब आगे....

ये गर्मी नील ज़हर को बेकाबू होने पे मजबूर कर देती है और फिर वो होता है जिसे महसूस करके नेमत के साथ साथ प्रिंस को भी एक झटका सा लगता है.... प्रिंस का लुंड पूरी तरह से खड़ा होक नेमत की छूट पे दस्तक देने लगता है.... नेमत फ़ौरन प्रिंस से दूर हो जाती है और गुस्से में उसे घूरते हुए कहती है....

नेमत : तू ये सब जान के तो नहीं कर रहा है न.... कहीं ऐसा तो नहीं की नील ज़हर की आड़ में तू ये सब खुद कर रहा है....

प्रिंस : अबे कमीनी तुझे पता भी है की तू क्या बक रही है.... सब कुछ जान ने के बाद भी तू ये कह रही है.... मुझे तुझसे ऐसी उम्मीद नहीं थी....

नेमत : तू सच कह रहा है न....

प्रिंस : तो तुझे क्या लगा की तेरे साथ वो मैं जान के कर रहा हूँ.... और अगर मुझे वो करना hi होगा तो दुनिया में लडकियां क्या मर गयी हैं जो मैं तेरे साथ वो करूँगा....

नेमत प्रिंस के करीब जा के गुस्से में उसका गिरेबान पकड़ के कहती है....

नेमत : क्यों मुझे में क्या कमी है जो तू किसी और के पास जाना चाहता है.... हाँ....

प्रिंस : अबे कमीनी पहले तू अपनी एक बात पे तो कायम रह... कभी कहती है की मेरे साथ ऐसा वैसा कुछ करने का सोचा भी तो तेरी टांगें तोड़ दूंगी.... और अब खुद कह रही है की मुझ में क्या कमी है.... तुझे जो करना है मेरे साथ कर.... तू पहले ये तय करले की तू चाहती क्या है....?

नेमत : कमीने वो तो मैं बस ऐसे hi कह रही थी.... और मैं कब ऐसा कहा की तुझे जो करना है मेरे साथ कर.... मैंने तो बस इतना कहा की मुझ में क्या कमी है जो तू किसी और लड़की के पास जाना चाहता है....

बस फिर क्या था दोनों बिना बात के एक दूसरे के साथ लड़ने लग जाते हैं.... मुस्कान हैरत से दोनों को लड़ते हुए देख रही है.... उसे समझ hi नहीं आ रहा है की दोनों आखिर लड़ किस बात पे रहे हैं.... एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए या फिर नहीं करने के लिए....

तभी वहां बाबा आ जाते हैं....

बाबा : तुम दोनों पागल तो नहीं हो गए....? ये क्या कर रहे हो....? और किस बात पे लड़ रहे हो....?

बाबा की बात का दोनों कोई जवाब नहीं दे पाते.... वो कहते भी तो क्या....? अब ये तो नहीं कह सकते की उनकी लड़ाई सेक्स को ले के हो रही है.... करना न करना ये फैसला तो खुद वो भी नहीं कर पा रहे हैं इसी बात पे लड़ रहे हैं.... शर्म के मारे उनकी नज़रें झुक जाती हैं....

बाबा : ये क्या हरकत है प्रिंस.....? तुम इतने समझदार हो के ऐसा कर रहे हो.... नेमत तो मासूम है... मगर तुम ऐसा करोगे... मुझे तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी....

नेमत : हाँ देखो न बाबा ये बिना बात के मुझसे लड़ रहा है....

प्रिंस : बाबा इतनी भी मासूम नहीं है ये जितना नज़र आ रही है... एक नंबर की कमीनी है... जब देखो तब मुझ से लड़ने का कोई न कोई बहाना ढूंढती रहती है....

बस फिर क्या था दोनों एक बार फिर से शुरू हो जाते हैं... बड़ी मुश्किल से बाबा उन्हें रोकते हैं.....

बाबा : यहाँ तुम दोनों को लड़ाई से फुर्सत नहीं है और वहां क्या हो गया है तुम्हे पता भी है....?

बाबा की बात सुन के दोनों शर्मिंदगी से अपना सर झुका लेते हैं....

प्रिंस : क्या बात है बाबा आप इतना परेशान क्यों लग रहे हैं....?

बाबा : वो बात hi कुछ ऐसी है.... तुम्हे अंदाजा भी नहीं की बात कितनी बड़ी है.... जो नहीं होना चाहिए था वो हो गया है.... मगर होनी को ताला भी तो नहीं जा सकता है न.... जो होना होता है वो हो के hi रहता है.... और आखिर वो शुरू हो गया जिसका दर था...

प्रिंस : वो hi तो मैं पूछ रहा हूँ की आखिर बात क्या है....? ऐसा क्या हो गया है....? और किस बात का दर....? ऐसी क्या बात हो गयी बाबा जिसे ले के आप इतना परेशान बने हुए हैं.... बताइये मुझे....

बड़ी मुश्किल से बाबा बस इतना hi कह पाते हैं.....

बाबा : व.... व.... वो... माँ.... Mali...ka Su....neh....ri....

प्रिंस : मलिका सुनेहि....!!!! मतलब....?

बाबा : मलिका सुनहरी को तुम्हारे यहाँ आने की खराब हो गयी है....

प्रिंस शॉकेड : उसे खबर हो गयी.... मगर कैसे...?

बाबा : मुस्कान के ज़रिये....

प्रिंस : मगर कैसे....? मुस्कान न hi चल सकती है और न hi कुछ बोल सकती है... नहीं कोई यहाँ आया.... और न hi यहाँ मौजूद किसी ने यहाँ से बहार जा के किसी को कुछ बताया.... यहाँ हम चारों के अलावा और कोई नहीं.... फिर कैसे....?

बाबा : मुस्कान के ज़रिये.... उसे तुम्हारे बारे में पता चल गया है... और साथ hi ये भी की तुम यहाँ आ चुके हो....

प्रिंस : मगर ये कैसे हो सकता है.... मुस्कान उसे कैसे और क्यों कुछ बताएगी....?

बाबा : मुस्कान ने उसे कुछ नहीं बताया फिर भी उसे सब पता चल गया वो भी मुस्कान के hi ज़रिये से....

प्रिंस : यही तो मैं समझ नहीं पा रहा हूँ की मलिका सुनहरी को पता चला तो चला कैसे....?

बाबा : वो ऐसे क्यों की मुस्कान और कोई नहीं बल्कि मलिका सुनहरी का hi एक हिस्सा है....

प्रिंस शॉकेड : क्याआआआआ....?????

बाबा : हाँ ये सच है... जिस तरह रूही और अवनि.... पारी का हिस्सा हैं ठीक वैसे hi मुस्कान भी मलिका सुनहरी का hi एक हिस्सा है....

प्रिंस : तो इसमें परेशानी की क्या बात है.....?

बाबा : परेशानी की बात ये है की जैसे hi मलिका सुनहरी को तुम्हारे यहाँ आने का एहसास हुआ उसका दिल ख़ुशी से झूम उठा.... मगर वहीँ जब उसे तुम्हारे साथ यहाँ किसी और लड़की (नेमत) के होने का एहसास हुआ तो उसकी वही ख़ुशी गुस्से में बदल गयी.... और उसने गुस्से में इस ड्रीम वर्ल्ड को अपनी पावर्स से बांधना शुरू कर दिया... जल्द hi ये प्लेनेट पूरी तरह से बांध जाएगा..... फिर यहाँ से कोई बहार नहीं जा पायेगा....

प्रिंस : ये आप क्या कह रहे हैं बाबा....? अगर ऐसा हुआ तो हम यहाँ क़ैद हो के रह जाएंगे....

बाबा : हाँ.... इस लिए हम को जल्द से जल्द यहाँ से निकलना होगा.... इस से पहले की मलिका सुनहरी इस पूरे प्लेनेट को अपनी पावर्स से बाँध दे... और हम यहाँ क़ैद हो के रह जाएँ.... हम को न चाहते हुए भी अभी यहाँ से जाना होगा....

प्रिंस : नहीं बाबा ये मुमकिन नहीं.... मैं चहुँ तब भी यहाँ से बहार नहीं जा सकता.... अभी मुस्कान का इलाज पूरा नहीं हुआ है.... उसमे अभी 6 दिन बाकी हैं.... ऐसे में यहाँ से जाना मतलब मुस्कान के इलाज को बीच में चूर्ण.... और अगर मैंने ऐसा किया तो फिर वो कभी ठीक नहीं हो पाएगी.... न चाहते हुए भी ज़िंदा लाश की तरह उसे साड़ी ज़िन्दगी गुज़ारनी पड़ेगी.... जो मुझे मंज़ूर नहीं.... मुझे यहाँ क़ैद होक जीना मंज़ूर है... मगर अपनी दोस्त का इलाज बीच में चूर्ण मंज़ूर नहीं.... ये मैं नहीं कर सकता.... कभी नहीं....

बाबा : प्रिंस तुम बात को समझ नहीं रहे.... जो तुम कह रहे हो वो ठीक है... मगर ज़रा ये भी तो सोचो की मुस्कान के ठीक होने के बाद भी क्या होगा.... वो साड़ी ज़िन्दगी तुम्हारे साथ यहाँ क़ैद हो के रह जायेगी.... ये क़ैद भी क्या किसी मौत से काम होगी... अपनों से जुड़ा होक जीना भी का कोई जीना है..... और तुम्हारे उन अपनों का क्या होगा जिन्हे ढूंढने के लिए तुम सुल्तानगढ गए थे....? क्या तुम अपने अपनों को ढूंढना नहीं चाहते...? क्या तुम उसके साथ जीना नहीं चाहते....? क्या तुम एक भरे पूरे परिवार के साथ जीना नहीं चाहते....? एक लड़की (मुस्कान) को ठीक करने के लिए अपने परिवार के तमाम लोगों से जुड़ा हो के जीना क्या सही है.....? बताओ मुझे जवाब दो....?

प्रिंस : बाबा आप जो कह रहे हैं वो मैं भी जानता हूँ.... और मैं भी सब की तरह अपने पूरे परिवार के साथ जीना चाहता हूँ.... बचपन से ले के आज तक उनके जिस प्यार के लिए मैं तरसता रहा हूँ उसे पाना चाहता हूँ.... मगर उसकी कीमत मुस्कान ऐडा करे ये मुझे मंज़ूर नहीं.... देखिये उसे वो भी कोई गैर नहीं बल्कि मेरी दोस्त है.... गौर से देखिये उसकी आँखों में आप को एक भरोसा एक यकीन नज़र आएगा.... जो वो मुझपे करती है.... उसे यकीन है की उसका दोस्त प्रिंस अपना वादा पूरा करेगा... और उसे ठीक कर के यहाँ से ले जाएगा.... बताइये क्या उस मासूम से किये उस वादे को मैं तोड़ दूँ.... क्या उसे इसी तरह एक ज़िंदा लाश बन के जीने पे मजबूर कर दूँ..... बस अपने परिवार का प्यार पाने के लिए.... नहीं बाबा नहीं.... मैं ऐसा नहीं कर सकता.... मैं इतना स्वार्थी नहीं हो सकता.... ये मुझसे नहीं होगा.... न hi मैं उसका वादा तोड़ सकता हूँ और न hi उसका वो भरोसा जो वो मुझपे करती है.... मैं अपनी ख़ुशी के लिए ये जानते हुए भी की मैं उसे ठीक कर सकता हूँ उसे मौत से भी बत्तर ज़िन्दगी जीने पे मजबूर नहीं कर सकता.... ये मुझसे नहीं होगा....

बाबा : मगर प्रिंस तुम बात को समझ नहीं रहे....

प्रिंस : नहीं बाबा.... अब चाहे जो हो जाए क़यामत hi क्यों न आ जाए.... जब तक मुस्कान पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाती मैं यहाँ से कहीं नहीं जाने वाला... उसे ठीक कर के hi यहाँ से ले जाऊँगा....

बाबा : उसके ठीक होने के बाद अगर तुम यहाँ से नहीं निकल पाए तो.....?

प्रिंस : पहले तो यहाँ से निकलने की मैं पूरी कोशिश करूँगा... लेकिन अगर कहीं मैं यहाँ से नहीं निकल पाया.... और मेरी किस्मत में यहाँ hi क़ैद हो के जीना लिखा है तो मैं अपनी दोस्त के साथ यहाँ साड़ी उम्र ख़ुशी से गुज़ार लूंगा..... मगर उसे ठीक कर के hi डैम लूंगा.... ये मेरा वादा है उस से.... अब इस से पहले की देर हो जाए आप नेमत को ले के फ़ौरन यहाँ से जाइये.....

नेमत : प्रिंस तुम पागल तो नहीं हो गए....? ये क्या कह रहे हो....?

प्रिंस : मैं जो भी कह रहा हूँ पूरे होश हवास में कह रहा हूँ.... अब और कोई बेहेस नहीं इस से पहले की देर हो जाए... तुम बाबा के साथ जाओ यहाँ से.... आप दोनों को मेरी कसम जाओ यहाँ से....

नेमत आगे कुछ कह hi नहीं पाती प्रिंस की कसम के आगे वो मजबूर हो जाती है... वो आगे बढ़ के कास के प्रिंस के सीने से लिपट जाती है.... उसकी आँखों से आंसू बहने लगते है.... बाबा की आँखें भी नाम हो जाती हैं.....

न चाहते हुए भी दोनों प्रिंस और मुस्कान को वहां चोर के ड्रीम वर्ल्ड से बहार चले जाते हैं.... उनके बहार निकलते hi ड्रीम वर्ल्ड पूरी तरह से मलिका सुनहरी के पावर्स से बांध जाता है....

मुस्कान सब की बातें सुन भी रही थी और समझ भी रही थी.... प्रिंस की बातें सुन के उसे उसपे बेहद प्यार आने लगता है.... प्रिंस ने क्या कुछ नहीं किया उसके लिए.... बेइन्तेहाँ दर्द सेः और तो और सिर्फ और सिर्फ उसकी खातिर.... उसे ठीक करने की खातिर यहाँ इस ड्रीम वर्ल्ड में उम्र भर के लिए क़ैद हो के जीनो को भी तैयार है.... इतना hi नहीं अभी उसे जाने और कितनी तकलीफ झेलनी है और कितना दर्द सहना है सिर्फ उसे ठीक करने के लिए.... अपने उस वादे को निभाने के लिए जो उसने अपनी दोस्त के साथ किया है.... उस दोस्त के साथ जिसे वो ठीक से जानता तक नहीं.... यहाँ तक की वो उसका नाम भी नहीं जानता... बस कुछ दिन पहले hi गलती से उस से मिला है.... ये कोई आम इंसान तो हो hi नहीं सकता.... ये एक नेक फरिश्ता है..... जो सिर्फ देना जानता है... सब पे प्यार लूटना जानता है.... चाहे उसके लिए उसे कितना hi दर्द क्यों न सहना पड़े....

ये सोचते hi मुस्कान की आँखों से आंसू बहने लगते हैं वो रोने लगती है... उसे रट देख प्रिंस परेशान हो जाता है और फ़ौरन उसके करीब जा के उस से उसके रोने की वजह पूछता है...

प्रिंस : क्या हुआ मुस्कान तुम अचानक से रोने क्यों लगी....? कुछ प्रॉब्लम हो गयी क्या....? तुम्हे कोई तकलीफ है क्या....? बताओ मुझे..... मैं अभी उसे ठीक कर दूंगा.... बोलो न बोलती क्यों नहीं.... बताओ मुझे....

फिर जब उसे ये याद आता है की मुस्कान बोल नहीं सकती तब वो अपना सर पीट के कहता है....

प्रिंस : मैं भी न कितना पागल हूँ.... ये जानते हुए भी की तुम कुछ बोल नहीं सकती तुम्हे बोलने को कह रहा हूँ.... मगर जब तक तुम मुझे कुछ बताओगी नहीं मुझे पता कैसे चलेगा की तुम्हे क्या परेशानी है जिसकी वजह से तुम रो रही हो....? कहीं तुम इस बात को ले के तो नहीं रो रही की मैं तुम्हारा इलाज बीच में चोर दूंगा.....? अगर ऐसा है तो ये अच्छे से समझ लो और अपने दिल और दिमाग को भी समझा दो की चाहे जो हो जाए.... मैं तुम्हारा इलाज पूरा कर के hi डैम लूंगा.... इसके लिए चाहे मुझे कुछ भी क्यों न करना पड़े.... अब प्लीज चुप हो जाओ.... तुम्हे पता है न की मुझसे तुम्हारा रोना देखा नहीं जाता..... आंसू तुम्हारी आँखों से निकलते हैं और दर्द मुझे होता है.... तुम क्या चाहती हो रो के यूँ आंसू बहा के मुझे दर्द देना या फिर मुस्कुरा के मुझे सारे जहाँ की ख़ुशी देना..... जानती हो तुम्हारे मुस्कुराते हुए प्यारे से चेहरे को देख के मेरे सारे दर्द साड़ी तकलीफ दूर हो जाती है.... प्लीज मेरी बात मान लो और चुप हो जाओ....

प्रिंस की बात सुन के मुस्कान चुप हो जाती है.... प्रिंस उसके आंसू पॉच के कहता है....

प्रिंस : ये हुई न बात.... चलो अब जल्दी से मुझे अपनी वो प्यारी सी मुस्कान दिखाओ जिसे देख के मेरे दिल को सुकून मिलता है...

प्रिंस की बात सुन के मुस्कान के चेहरे पे प्यारी सी मुस्कान आ जाती है जिसे देख प्रिंस ख़ुशी से उछाल पड़ता है.... और नाचने लगता है.... जिसे देख मुस्कान की होंठों की मुस्कान और भी गहरी हो जाती है....

प्रिंस : यार ऐसे खामोश बैठे बैठे मैं बोर हो गया हूँ.... कुछ बात करें क्या....?

प्रिंस मुस्कान बन के अपनी hi बात का जवाब देता है....

पमुस्कान : बोर तो मैं भी हो गयी हूँ..... और रही बात बात करने की तो वो मैं नहीं कर सकती... मजबूर जो हूँ....

प्रिंस : हाँ यार वो तो मैं भी जानता हूँ मगर जल्द hi ये मजबूरी भी दूर हो जायेगी.... और अगले 6 दिन बाद तुम जितना चाहे उतना बात कर पाओगी.... तुम्हे बोलने से कोई नहीं रोक पायेगा.... तब तक तुम मेरे ज़रिये मुझसे बात करो...

पमुस्कान : ये भी भला कोई बात हुई क्या....? तुम खुद hi सवाल करो और खुद hi उसका जवाब दो.... हो सकता है की तुम्हारे कुछ सवालों के जवाब सही भी हो.... मगर बिना मेरे दिल की बात जाने कुछ भी जवाब देना वो भी तो ठीक नहीं.... हो सकता है तुम अपने सवाल का जो जवाब अपने मन से सोच के दो वो जवाब मेरे हिसाब से गलत हो....

प्रिंस : हाँ यार बात तो तुमने ठीक कही है.... अब तुम्हारे मन में क्या है ये मैं कैसे जान सकता हूँ.... और बिना जाने अपने मन से जवाब देना वो भी सही नहीं है.... तो फिर क्या किया जाए कैसे ये पता किया जाए की तुम्हारे मन में क्या है....?

पमुस्कान : अच्छा जी अब ये भी मुझसे hi पूछोगे.... तो फिर तुम्हारे स्मार्ट होने का फायदा hi क्या....? अपना दिमाग लगा के सोच की इसका क्या हल होना चाहिए....? या फिर ये मान लो की तुम बस कहने की लिए स्मार्ट हो.... असल में नहीं....

प्रिंस : यार अब तो बात इज़्ज़त की है... प्रिंस कुछ सोच जल्दी वर्ण तेरी इज़ाद का जनाज़ा निकलने में देर नहीं लगेगी....

प्रिंस अपना दिमाग लगा के सोचने लगता है.... उसे यूँ सोचते देख मुस्कान के होंठों पे मुस्कान आ जाती है....

जब तक प्रिंस मुस्कान से बात करने का आईडिया सोचता है... हम चल के देखते हैं की शिमला और सुल्तानगढ में क्या हो रहा है.....

पहले शिमला चलते हैं....

यहाँ ज़रा के यूँ अचानक से सुल्तानगढ जाने से सब बेहद परेशान बने हुए हैं....

मैक्स : यार मुझे इस बात का दर सत्ता रहा है की अगर प्रिंस को इस बात का पता चला की उसकी इजाज़त के बिना ज़रा सुल्तानगढ गयी है तो वो क्या करेगा....? कहीं वो उसके साथ साथ हम सब पे भी नाराज़ न हो जाए.... और उसकी नाराजगी का मतलब है सब की बंद बजना....

विजय : अबे साले तू बिना बात के डरा क्यों रहा है....? गलती ज़रा करे और उसका हर्जाना हम भुगते.... ये कहाँ का इन्साफ है.... हम ने थोड़े hi उसे कहा था की वो वहां जाए... बल्कि उसे तो जाने से रोका था.... मगर वो कहाँ किसी की सुनती है.... प्रिंस की तरह वो भी हमेशा वो hi कर है जो उसका दिल चाहता है.... अब जब बिना प्रिंस की इजाज़त के वो वहां गयी है तो उसका जवाब भी वो hi प्रिंस को देगी... हमारा इस में क्या लेना देना....

मैक्स : तेरी बात सही है मगर हम को उसे रोकना तो चाहिए था न....

विजय : अबे उसे रोका तो था... और कैसे रोकते.... उस वक़्त वो किसी की कोई बात सुन ने को तैयार hi नहीं थी.... उसे हम समझा hi सकते थे.... वो कोई मामूली लड़की नहीं है जिसे हम पकड़ के एक रूम में बंद कर देते... वो इस दुनिया की बेस्ट हार्डकोर फिघ्टर्स में से एक है.... हम में से कोई उसे ज़बरदस्ती रोकने की कोशिश करता तो उसे तो रोक नहीं पाटा मगर हाँ खुद के इलाज के लिए हॉस्पिटल ज़रूर पहुँच जाता.... और सब से बड़ी बात वो प्रिंस की दीवानी है.... और प्रिंस की दीवानी को उस से मिलने से कोई नहीं रोक सकता....

सैर : वो सब तो ठीक है.... मगर सोचो की अब क्या किया जाए...?

सैम : करना क्या है....? कुछ नहीं.... अब तो जो भी करना है वो प्रिंस hi करेगा.... बस दुआ करो की इस सब पे उसे गुस्सा न आये.... उसे गुस्सा आने का मतलब है क़यामत का आना..... तो यहाँ बैठ के सोच सोच के दर दर के रहने से तो अच्छा है की ऑफिस चल के कुछ काम किया है....

सैर : आज पहली बार तू ने अकाल की बात की है...

सैम : मैं तो हमेशा की अकाल की बात करता हूँ.... ये अलग बात है की मेरी बात तुम्हे आज समझ में आयी....

इस से पहले की सैर सैम की बात का कुछ जवाब देती विजय बीच में बोलता है....

विजय : क्या कहा तू ने....? कहीं तू ये तो नहीं कहना छह रहा है की सैर को कुछ समझ hi नहीं है.... वो बेवक़ूफ़ है....

सैम : साले कमीने तू पागल तो नहीं हो गया ये क्या बक रहा है.... मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा.... कमीने तेरी hi वजह से सैर हमेशा मुझसे नाराज़ हो जाती है मगर इस बार नहीं.... इस बार मैं तेरी ऐसी बंद बजाऊंगा की फिर ऐसा कुछ कहने से पहले तू लाख बार सोचेगा...

विजय की बात सुन के सैम को उसपे बेहद गुस्सा आ जाता है वो उसे मारने के लिए उसके ऊपर झपट ता है मगर इस से पहले की वो उसे मार पाटा विजय बहार की तरफ दौर लगा देता है....

अब चलते हैं सुल्तानगढ.....

इधर सोना कॉलेज पहुंच के अपनी क्लास में जाने के बजाये सीधे प्रोफेसर रिआज़ के पास जाती है.... सोना को देख के प्रोफेसर रिआज़ बेहद खुश हो जाते हैं.... सोना उनकी फवौरीते स्टूडेंट्स में से एक है.... वो पढ़ाई में इतनी होशियार जो है.... स्कूल से ले के कॉलेज तक वो हमेशा hi हर एक चीज़ में टॉप रही है.... चाहे वो पढ़ाई हो सिंगिंग हो स्पोर्ट्स हो या फिर फाइटिंग..... सोना सब में टॉप रही है.... उसकी फाइटिंग स्किल्स इतनी कमाल की है की इस कॉलेज में तो क्या पूरे शहर में फाइटिंग में उसे हराना किसी के बस की बात नहीं.... वो देखने में जितनी खूबसूरत है फाइटिंग में उतनी hi खतरनाक है.... बड़े से बड़े पहलवान भी उसके सामने ज़्यादा देर तक टिक नहीं पाते.... कितने hi गुंडे उसकी मार खा के महीनो से हॉस्पिटल में पड़े अपना इलाज करवा रहे हैं.... कितने तो उसकी मार के दर से शहर चोर के भाग गए हैं.... वो जितनी खतरनाक है उतनी hi स्वीट और प्यारी भी....

प्रोफेसर रिआज़ : अरे सोना आओ आओ.... व्हाट ा प्लीजेंट सरप्राइज.... आज कितने दिनों बाद तुम्हे देख रहा हूँ.... आओ बैठो...

सोना : सर मुझे कुछ सवाल के जवाब आप से जान ने थे....

प रिआज़ : अच्छा अब समझा.... सोना यहाँ मुझसे मिलने नहीं आयी बल्कि कुछ सवालों के जवाब लेने आयी है....

सोना : नहीं सर वैसी बात नहीं है..... मैं भी आप से काफी दिन से मिलना छह रही थी मगर बिजी होने के कारण मिल न सकीय.... आज सोचा की आप से मिल भी लून और अपने कुछ सवालों के जवाब भी जान लून.....

प रिआज़ : चलो कोई बात नहीं काम से काम तुम इसी बहाने मुझसे मिलने तो आयी.... चलो पूछो क्या सवाल पूछना चाहती हो....?

सोना जो सवाल प्रोफेसर रिआज़ से पूछती है उनके जवाब पा के वो बुरी तरह से चौंक जाती है....?????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 108

सोना : सर मुझे कुछ सवाल के जवाब आप से जान ने थे....

प रिआज़ : अच्छा अब समझा.... सोना यहाँ मुझसे मिलने नहीं आयी बल्कि कुछ सवालों के जवाब लेने आयी है....

सोना : नहीं सर वैसी बात नहीं है..... मैं भी आप से काफी दिन से मिलना छह रही थी मगर बिजी होने की वजह से मिल न सकीय.... आज सोचा की आप से मिल भी लून और अपने कुछ सवालों के जवाब भी जान लून.....

प रिआज़ : चलो कोई बात नहीं काम से काम तुम इसी बहाने मुझसे मिलने तो आयी.... चलो पूछो क्या सवाल पूछना चाहती हो....?

सोना जो सवाल प्रोफेसर रिआज़ से पूछती है उनके जवाब पा के वो बुरी तरह से चौंक जाती है....?????

अब आगे.....

सोना : सर मैं ये पूछना चाहती हूँ की क्या दो इंसानो की आँखें हु बहु एक जैसे हो सकती हैं....?

प रिआज़ : नहीं ये मुमकिन नहीं... हर एक इंसान की आँखों की बनावट एक दूसरे से अलग होती है.... जिस तरह किसी इंसान के फिंगरप्रिंट किसी दूसरे से मैच नहीं करते उसी तरह आँखें भी सब की अलग hi होती हैं....

फिर सोना प रिआज़ को अपने मोबाइल के वॉलपेपर पे सुलतान के बचपन की फोटो है दिखा के पूछती है....

सोना : सर क्या आप जानते हैं की ये किसकी फोटो है....?

प रिआज़ : ये कैसा सवाल है....?

सोना : सर मुझे नहीं लगता की ये कोई मुश्किल सवाल है.... बस आप को ये बताना है की क्या आप जानते हैं की ये किसकी फोटो है....?

प रिआज़ : फोटो देख के सर के होंठों पे मुस्कराहट फैल जाती है वहीँ उनकी आँखें नाम हो जाती है....

सोना : ये क्या सर आपकी आँखों में आंसू....!!!

प रिआज़ : आज तुम ने सुलतान की फोटो दिखा के पुराणी याद को ताज़ा कर दिया.... दिल में बरसो से दबे उस दर्द को फिर से उभार दिया.... जो दर्द उसके अचानक से चले जाने की वजह से काफी महीनो तक रहा बड़ी मुश्किल से मैं और मेरी मासूम बेटी उस दर्द से उभर पाए थे.... आज फिर से उसकी तस्वीर देख के उसकी याद ताज़ा हो गयी और साथ hi वो सब याद आ गया जो उस मासूम ने हम बाप बेटी के लिए किया था.... कहने को तो वो मेरा सब से फवौरीते स्टूडेंट था.... मगर मेरे लिए वो मेरे बेटे से काम न था.... वो जितना प्यारा था उतना hi नेक भी....

प रिआज़ की बात सुन के सोना की आँखें भी नाम हो जाती हैं.... अपने आंसू पॉच के बड़ी मुश्किल से वो खुद संभालती है.... फिर प रिआज़ को प्रिंस की फोटो दिखा के पूछती है....

सोना : सर अब इस फोटो को देख के बताइये क्या आप इसे जानते हैं....?

प रिआज़ गौर से उस फोटो को देखने लगते हैं.... फिर वो सुलतान के बचपन की फोटो देखते हैं.... वो कभी प्रिंस की फोटो देखते हैं तो कभी सुलतान के बचपन की फोटो देखते हैं.... वो काफी देर तक दोनों की फोटो को देखते रहते हैं.... उन्हें दोनों में काफी कुछ एक सा नज़र आता है.... फिर वो जो जवाब सोना को देते है उसे सुन के सोना बुरी तरह से चौंक जाती है....

प रिआज़ : ये दोनों hi फोटो सूलां की है एक उसके बचपन की तो दूसरी उसकी जवानी की....

सोना शॉकेड : Kyaaaaaaaaaaa.....?

प रिआज़ : इसमें इतना चौंकने वाली क्या बात है.... मैं तो क्या कोई भी इन दोनों तस्वीर को गौर से देखते hi बता देगा की ये दोनों फोटो एक hi इंसान की हैं....

सोना : ये मुमकिन नहीं.... क्यों की ये दोनों hi दो अलग अलग लोगों की फोटो है.... पहली फोटो सुलतान के बचपन की है और दूसरी फोटो प्रिंस के जवानी की है....

प रिआज़ : ये प्रिंस कौन है....?

सोना : प्रिंस शिमला में रहता था कुछ दिन पहले hi यहाँ आया है और मेरे घर के पीछे का हिस्सा इसने रेंट पे लिया है.... इतना hi नहीं उसने इस कॉलेज में एडमिशन भी लिया है....

सोना की बात सुन के प रिआज़ हसने लगते हैं....

प रिआज़ : हहहहहहहह.....

उन्हें यूँ हस्ते देख सोना को अजीब लगता है....

सोना : ये क्या सर.... यहाँ मैं आप से इतनी सीरियस बात पूछ रही हूँ और आप हैं की हंस रहे हैं....

प रिआज़ : क्या सोना तुम हे सुबह सुबह मैं hi मिला था बेवक़ूफ़ बनाने के लिए.... जो मुझे सुलतान की बचपन और जवानी की फोटो दिखा के जाने क्या क्या कहानियां सुनाये जा रही हो.... वो क्या था.... हाँ प्रिंस.... सर ये सुलतान की नहीं प्रिंस की फोटो है.... प्रिंस शिमला में रहता था कुछ दिन पहले hi यहाँ आया है और मेरे घर के पीछे का हिस्सा इसने रेंट पे लिया है.... इतना hi नहीं उसने इस कॉलेज में एडमिशन भी लिया है.... वैसे कहानी ाची थी... काफी मज़ा आया सुन के....

सोना : सर मैं कोई कहानी नहीं सुना रही बल्कि वो hi कह रही हूँ जो सच है....

प रिआज़ : क्या सच है ये की ये दोनों फोटो दो अलग अलग इंसान की हैं.... नहीं कभी नहीं... ये दो नहीं बल्कि एक hi इंसान की दो अलग अलग उम्र की फोटो है.... और वो भी किसी प्रिंस की नहीं बल्कि सुलतान की....

सोना : ये आप कैसे कह सकते हैं की ये फोटो दो अलग अलग इंसान की नहीं बल्कि एक hi इंसान की हैं और वो और कोई नहीं बल्कि सुलतान hi है...?

प रिआज़ : वो ऐसे की भले hi ये फोटो उम्र के दो अलग अलग पड़ाव की हैं मगर इनमे काफी समानताएं हैं..... एक तो दोनों तस्वीर में आँखें नीली हैं... साथ hi आँखों की पुतलियों की बनावट भी एक सी hi हैं.... और उन आँखों के किनारे पे एक hi जगह पे टिल का होना और दूसरी बात चेहरे की एक जैसी बनावट साथ hi स्माइल करते वक़्त दोनों के गाल पे घड़े का बनना.... गौर से देखने की ज़रुरत hi नहीं दोनों फोटो को देख के साफ़ पता चल रहा है की ये फोटो एक hi इंसान की हैं.... और वो इंसान और कोई प्रिंस नहीं बल्कि सुलतान है.... हमारा सुलतान....

प रिआज़ की बात सुन के सोना बुरी तरह से चौंक जाती है.... वो फ़ौरन उन दोनों तस्वीरों को गौर से देखने लगती है.... काफी देर तक उन्हें देखने के बाद उसे उन दोनों तस्वीर में वो hi नज़र आता है जो प रिआज़ ने उसे बताया था.... वो उनमे खो सी जाती है.... उसकी तंत्र प रिआज़ की आवाज़ से टूट टी है....

प रिआज़ : सोना मेरी क्लास का वक़्त हो गया है.... स्टूडेंट्स मेरा इंतज़ार कर रहे होंगे.... मैं चलता हूँ....

ये कह के प रिआज़ वहां से अपनी क्लास की तरफ चल देते हैं.... प रिआज़ के जाते hi सोना एक बार फिर से उन दोनों तस्वीर को गौर से देखने लगती है.... और हाँ सुलतान से कहना की जल्द से जल्द मुझसे आ के मिले....

प रिआज़ की बात सुन के सोना बस हाँ में अपनी गर्दन हिला देती है फिर उनके जाने के बाद प्रिंस की फोटो को गौर से देखते हुए अपने मन में उठ रहे सवालों के बारे में सोचने लगती है....

सोना मन में : क्या वाकई में तुम सुलतान हो...? मेरे सुलतान....? लेकिन अगर तुम सुलतान हो तो फिर यहाँ आने के बाद तुम मुझ से मिलने क्यों नहीं आये....? एक बार भी तुम ने ये जान ने की कोशिश नहीं की की तुम्हारी सोना कैसी है...? किस हाल में है....? तुम्हारे बिना वो ज़िंदा भी है की नहीं....? मेरा सुलतान तो ऐसा न था... उसे खुद से ज़्यादा अपनी सोना की फ़िक्र लगी रहती थी.... सोना को एक खरोच भी आ जाए तो सुलतान का दिल तड़प जाता था.... चोट सोना को लगती तो दर्द सुलतान होता.... आंसू सोना की आँखों में आते और दिल सुलतान का रो पड़ता.... अपनी सोना को सुलतान कभी कोई तकलीफ नहीं होने देता... वो उसे अपनी पलकों पे बैठा के रखता.... हमेशा उसे हसता और खुश रखता.... सोना की एक मुस्कान देखने के लिए सुलतान जाने क्या क्या करता.... जब सोना मुस्कुराती तब सुलतान का दिल ख़ुशी से झूम उठता.... वो सोना को प्यार से अपने हाथों से खाना खिलता... सोना को वो कोई काम नहीं करने देता... उस का हर काम वो खुद करता.... जब सोना बीमार पड़ती तो वो दिन रात उसकी हर तरह से खिदमत करता.... वो सोना को एक पल के लिए भी खुद से दूर नहीं होने देता.... और फिर उस मनहूस दिन के बाद अचानक से सुलतान बिना कुछ बताये कही चला गया अपनी सोना को अकेला चोर के.... जानते हो तुम्हारी सोना ने कैसे गुज़ारे हैं ये 10 साल अपने सुलतान के बिना.... ये 10 साल ऐसे गुज़रे हैं जैसे की 10 साड़ियां बीत गयी.... इन 10 सालों में ऐसा कोई पल नहीं गुज़रा जब सोना ने अपने सुलतान को याद न किया हो.... जाने वो क्या वजह थी जो तुम अचानक से अपनी सोना को बिना कुछ बताये रोने और साथ hi तड़पने के लिए अकेली चोर गए.... और अब जब वापिस आये हो तो एक बार भी अपनी सोना से मिलने नहीं आये.... क्या अब तुम्हारे दिल में सोना की वो जगह नहीं रही....? क्या अब तुम अपनी सोना से प्यार नहीं करते....? क्या गुज़रे 10 सालों ने सुलतान के कोमल दिल को पत्थर का बना दिया है....? जिसे किसी बात का एहसास भी नहीं होता.... क्या उसे अपनी सोना के दिल की पुकार सुनाई नहीं देती....? क्या उसे अपनी सोना के दिल का दर्द महसूस नहीं होता....? जो गया था वो मेरा सुलतान था.... मगर जो आया है क्या वो सुलतान नहीं है....? क्या सच में ये सुलतान नहीं बल्कि प्रिंस है....? आखिर सोना को उसका सुलतान क्यों चोर गया....? और जो लौटा है वो सुलतान की जगह प्रिंस बन के क्यों लौटा है....? क्युन्न्न्नन्न्न्नन....? आखिर क्या है इस सब सवालों के जवाब.....? एक hi इंसान है जो इन सब सवालों के जवाब दे सकता है और वो है सुलतान या फिर प्रिंस.... मगर वो भी कहीं बहार गया है और 6 दिन बाद आएगा.... 6 दिन.... कैसे काटेंगे ये 6 दिन तुम्हारे इंतज़ार में....? कैसे....? ये कहते कहते सोना की आँखें नाम हो जाती हैं.... उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं.... काफी देर तक वो सुलतान की फोटो को अपने सीने से लगा के रोटी रहती है.... फिर कुछ देर बाद जब उसका मन कुछ हल्का हो जाता है तो खुद hi अपने आंसू पॉच के क्लास की तरफ चल देती है....

इधर सुल्तानगढ में.....

प्रिंस मुस्कान से बात करने का आईडिया सोचने लगता है..... उसे कुछ समझ नहीं आ रहा है की कैसे मुस्कान से बात की जाए.... काफी देर तक सोचने के बाद अचानक से उसे एक आईडिया आता है.... और वो ख़ुशी से नाचने लगता है.... फिर मुस्कान के करीब जा के उसके दोनों गालों को प्यार से चूम लेता है....

प्रिंस : आईडिया आ गया मुस्कान.... तुमसे बात करने का.... तुमसे बात करने के लिए अब मुझे एक पल भी और इंतज़ार करने की ज़रुरत नहीं मैं जब चाहे तुम से बात कर सकता हूँ.... और तुम भी जब चाहे मुझसे बात कर सकती हो.... चाहे हम पास हो चाहे दूर.... हम पास तो क्या एक दूसरे से दूर रह के भी एक दूसरे से बात कर सकते हैं..... वाओ प्रिंस यार यू अरे तो गुड एंड स्मार्ट आल्सो.... क्या मस्त आईडिया निकाला है....

मुस्कान को प्रिंस की कोई बात समझ आ रही है बस नज़र आ रहा है तो है प्रिंस का ख़ुशी से खिला हुआ चेहरा.... प्रिंस को खुश देख के वो भी बेहद खुश हो जाती है....

प्रिंस : यार मैं तुमसे बात करने के लिए तुम्हारी आवाज़ सुन ने के लिए मारा जा रहा हूँ.... मैं भी तो देखूं की मेरी प्यारी सी स्वीट सी जानत की पारी से भी सेक्सी दोस्त की आवाज़ कितनी प्यारी है.... तुम्हारी आवाज़ सुन ने के लिए अब मुझसे एक पल भी और इंतज़ार नहीं हो रहा....

जब वो मुस्कान को अपनी तरफ हैरत से देखते पाटा hai....Tab...

प्रिंस : तुम यही जान न चाहती हो न की जब तुम बोल नहीं सकती तो मुझसे बात कैसे करोगी....?

प्रिंस की बात पे मुस्कान अपनी पलकें झुका के हाँ का इशारा करती है....

प्रिंस : रुको अभी बताता हूँ...

ये कह के प्रिंस आगे बढ़ता है और मुस्कान के सर पे हाथ रख के कुछ पढता है.... प्रिंस के हाथ से सफ़ेद रौशनी निकल के मुस्कान के सर में जाने लगती है.... कुछ देर बाद प्रिंस मुस्कान के सर पे से अपना हाथ हटा के उसके बेहद करीब जा के कहता है....

प्रिंस : मुस्कान अब से तुम जब चाहे जो चाहे मुझे कह सकती हो.... मुझसे जी भर के बातें कर सकती हो... हमारे दिमाग अब एक दूसरे से जुड़ चुके हैं.... अब से तुम जो भी अपने अंडर कहोगी वो मुझे सुनाई देगा.... चलो अब जल्दी से कुछ कहो... ताकि मैं तुम्हारी प्यारी और साथ साथ मीठी आवाज़ सुन सकूँ....

मुस्कान को प्रिंस की बात पे यकीन नहीं आता.... की ऐसा भी कभी हो सकता है क्या...? की कोई दिमाग के ज़रिये भी किसी से बात कर सकता है क्या....? फिर वो सोचती है की जब ये बात प्रिंस ने कही है तो वो झूट कैसे हो सकती है.... उसने जो कहा है वो ज़रूर होगा... क्यों न एक बार आज़मा के देखा जाए....

ये सोच के वो प्यार से प्रिंस का नाम पुकारती है....

मुस्कान की आवाज़ सुन के और ख़ास कर के उसकी प्यारी आवाज़ में अपना नाम सुन के प्रिंस बेहद खुश हो जाता है....

प्रिंस : वाओ यार मुस्कान तुम्हारी आवाज़ जितनी प्यारी है उतनी hi मीठी भी.... तुम्हारी आवाज़ सुन के ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने शहद घोल दिया है.... कहीं ऐसा न हो की तुम्हारी मीठी आवाज़ से मुझे डायबिटीज हो जाए....

ये कह के प्रिंस हसने लगता है....

हहहहहहह...

फिर अपना सर पीट के कहता है....

प्रिंस : मैं भी कितना पागल हूँ... भला परियों की रानी की आवाज़ सुन के भी कोई बीमार पड़ा है क्या....? है इस आवाज़ की मिठास से तो कान के साथ साथ दिल भी मदहोश हो चूका है...

फिर मुस्कान के बेहद करीब जा के बैठ जाता है और प्यार से उसका हाथ अपने हाथ में ले कहता है....

प्रिंस : मुस्कान प्लीज अपनी इस प्यारी सी आवाज़ में एक बार फिर से मेरा नाम पुकारो न....

प्रिंस के मुँह से अपनी तारीफ सुन के मुस्कान बेहद खुश हो जाती है....

मुस्कान : प्रिंस....

प्रिंस : एक बार और....

मुस्कान : प्रिंस....

प्रिंस : एक बार और....

मुस्कान : प्रिंस.... प्रिंस... प्रिंस.... अब खुश...

प्रिंस : बहुत खुश.... आज तुम्हारे मुँह से अपना नाम सुन के ऐसा लग रहा है जैसे की मैंने सारा जहां पा लिया.... ऐसा लग रहा है जैसे की मेरा कुछ मुझसे दूर चला गया था वो आज मुझे वापिस मिल गया है... जानती हो इस वक़्त मेरा दिल छह रहा है जैसे की ये वक़्त यहीं ठहर जाए और तुम प्यार से मेरा नाम लेती जाओ और मैं सुनता जाऊं....

मुस्कान : प्रिंस एक बात कहूं अगर तुम्हे बुरा न लगे तो....

प्रिंस : यार तुम मेरी दोस्त हो.... मुझपे तुम्हारा पूरा हक़ है... मुझसे कुछ कहने के लिए तुम्हे मेरी इजाज़त की ज़रुरत नहीं... जो कहना है दिल खोल के कहो.... रही बात बुरा लगने की तो मुझे तुम्हारी कोई बात बुरी लग hi नहीं सकती....

मुस्कान : मुझे बहुत ज़ोर की प्यास लगी है....

मुस्कान की बात सुन के प्रिंस चौंक के उसकी तरफ देखता है....

प्रिंस : क्या कहा क्या लगी है....?

मुस्कान : मुझे प्यास लगी है... वो भी बहुत ज़ोर की....

प्रिंस : मैं भी न यार कितना पागल हूँ.... बिना तुम्हारे बताये मुझे जान लेना चाहिए था मगर नहीं.... मुझे तो कुछ होश hi नहीं.... बस अपनी पड़ी है ये भी नहीं सोचा की तुम्हे पानी पिए काफी वक़्त हो गया है... तुम्हे प्यास के साथ साथ भूक भी लगी होगी.... है न...

मुस्कान : हाँ भूक भी लगी है.... मगर यहाँ खाना कहाँ से आएगा...?

प्रिंस : वो मेरी प्रॉब्लम है... तुम्हे बस एक मलिका की तरह मुझे आर्डर देना है... खाना तो क्या तुम्हारे लिए मैं तारे भी तोड़ के ला सकता हूँ....

मुस्कान : नहीं तारे नहीं चाहिए... फिलहाल के लिए पानी और खाना hi बहुत है....

प्रिंस थोड़ा झुक के बेहद अदब से : जो हुकुम मेरी मलिका....

प्रिंस की बात सुन के मुस्कान खिलखिला के हंस देती है....

मुस्कान : मलिका.... क्या बात है....? तुमने तो यार मुझे ज़मीन से उठा के आसमान में बैठा दिया...

प्रिंस अपने अंडर नीलम जीनी की पावर्स के ज़रिये फ़ौरन एक से एक डिशेस और जूस हाज़िर कर देता है.... जिसे देख मुस्कान बेहद खुश हो जाती है....

प्रिंस : खाना और जूस हाज़िर है मेरी स्वीट मलिका जी....

मुस्कान : हाँ देख रही हूँ... खाना तो ले आये मगर खिलायेगा कौन...? चलो जल्दी से मुझे खिलाओ.... डिशेस देख के मेरे मुँह में पानी आ रहा है... साथ hi भूक की वजह से पेट में चूहों की जगह हाथियों ने कब्बडी खेलना शुरू कर दिया है... इस से पहले की भूक के मारे वो हाथियों से शेर बन जाए... जल्दी से मुझे अपने हाथों से खाना खिलाओ... और हाँ उस से पहले थोड़ा पानी पिलाओ.... और हाँ मेरे साथ साथ मेरे दोस्त मेरे प्रिंस को भी खाना खिलाओ....

प्रिंस : जो हुकुम मेरी मलिका....

फिर प्रिंस प्यार से अपने हाथ से मुस्कान को खिलता है और खुद भी खता है.... खाना कहते हुए मुस्कान प्यार भरी नज़रों से प्रिंस को देखती रहती है.... अपने लिए उसका इतना प्यार देख उसकी आँखों में ख़ुशी के आंसू आ जाते हैं... जिसे देख के प्रिंस परेशान हो जाता है....

प्रिंस : ये क्या मुस्कान तुम रो रही हो....? क्या खाना तुम्हे पसंद नहीं आया....?

मुस्कान : जानते हो प्रिंस पिछले 10 सालों से ले के आज तक किसी ने मुझे इतने प्यार से खाना नहीं खिलाया... हाँ ये अलग बात है की मेरी प्यारी बहिन मुझे अपने हाथों से खाना खिलाया करती थी.... मगर जो प्यार आज मुझे अपने दोस्त से मिल रहा है वो पिछले 10 साल में मुझे कभी नहीं मिला.... जानते हो तुम्हारा प्यार और मेरे लिए फ़िक्र देख के मुझे उसकी याद आ जाती है.... जब मैं छोटी थी तब वो भी मुझे इसी तरह मलिका की तरह अपने प्यारे से नन्हे हाथों से खाना खिलाया करता... तुम्हारी तरह हमेशा hi मेरे साथ hi रहता.... तुम्हारी तरह hi वो मेरी फ़िक्र भी करता....

प्रिंस चीड़ के : अच्छा ऐसा भी कोई है क्या...? मुझे तो लगा की तुम्हारी फ़िक्र करने वाला सिर्फ एक मैं hi हूँ... मगर लगता है कम्पटीशन में और भी कोई शामिल है...

प्रिंस की बात सुन के मुस्कान के होंठों पे मुस्कराहट आ जाती है.... प्रिंस को जलते देख वो उसे और जलने के लिए और भी बहुत कुछ कहती है... जिसे सुन के प्रिंस सच में जल उठता है....

प्रिंस : जाने दो जाने दो... ये बेकार की तारीफ न करो उसकी...

मुस्कान : जाने क्यों मुझे कहीं से कुछ जलने की बू आ रही है.... तुम्हे भी आ रही है क्या...?

प्रिंस : भला मैं क्यों किसी से जलने लगा.... जो सच है वो hi मैंने कहा.... मुझसे अच्छा न कोई तुम्हारा ख़याल रख सकता था... न रख सकता है और न hi रख पायेगा....

प्रिंस की बात सुन के मुस्कान प्यार से उसकी आँखों में देखते हुए कहती है....

मुस्कान : तुमने सही कहा... मेरे लिए जो तुमने किया है और जितना दर्द सहा है... शायद वो कोई और कर hi नहीं सकता.... न hi तुमसे बढ़ कर मेरा ख़याल कोई रख सकता है.... किस्मत ने मुझसे जो चीन था वो तुम्हारे रूप में मुझे लौटा दिया... जितनी तकलीफ किस्मत ने मुझे दी थी.... उस से कई गुना ज़्यादा ख़ुशी तुम्हे मेरा सच्चा और प्यारा दोस्त बना के दे दी है... मेरे लिए तुम ऊपर वाले का सब से कीमती तोहफा हो... जो वो किसी ख़ास को hi देता है....

प्रिंस : यार अब बस भी कर मैं इतना भी अच्छा नहीं हूँ जितना तुम कह रही हो....

मुस्कान : तुम क्या हो ये मेरे दिल से पूछो.... तुम वो नेक फरिश्ता हो... जो बिना किसी लालच के बेइन्तेहाँ दर्द सेहके भी सिर्फ और सिर्फ प्यार लूटना जानता है....

प्रिंस : यार तुम हो hi इतनी प्यारी की तुम्हे देखते hi तुमपे अपना सब कुछ लुटाने को जी चाहता है....

मुस्कान प्यार से प्रिंस की आँखों में देखते हुए उस से पूछती है....

मुस्कान : और क्या क्या चाहता है तुम्हारा दिल....?

मुस्कान की बात पे प्रिंस आगे बढ़ के उसके माथे को प्यार से चूमता है फिर गाना गाने लगता है....

बुलावे तुझे यार आज मेरी गालियां

बसउ तेरे संग मैं अलग दुनिया

बुलावे तुझे यार आज मेरी गालियां

बसउ तेरे संग मैं अलग दुनिया

न आये कभी दोनों में जरा भी फासले

बस एक तू हो, एक मैं हु और कोई न

है मेरा सब कुछ तेरा तू समझ ले

तू चाहे मेरे हक़ की ज़मीन रख ले

तू साँसों पे भी नाम तेरा लिख दे

मैं जियु जब जब तेरा दिल धड़के

तुझसे मेरा ये जी नहीं भरता

कुछ भी नहीं असर अब करता

मेरी राह तुझी से मेरी चाह तुझी से

मुझे बस यही रह जाना

लगी है तेरी आदतें मुझे जब से

है तेरे बिन पलके बरस लगते

बुलावे तुझे यार आज मेरी गालियां

बसउ तेरे संग मैं अलग दुनिया

जो होव तू उदास मुझे देख हसदे

तू चाहे मेरे हक़ की ज़मीन रख ले

तू साँसों पे भी नाम तेरा लिख दे

मैं जियु जब जब तेरा दिल धड़के

तुझसे मिली तो शिखा मैंने हसना

आया मुझे सफर में ठहरना

मैं तो भूल गयी दुनिया का पता

यारा जब से तुझे है जाना

है तू Hi दिल जान है मेरी अब से

वे ज़िकर तेरा न जाये मेरे लैब से

बुलावे तुझे यार आज मेरी गालियां

बसउ तेरे संग मैं अलग दुनिया

जो हॉवे तू उदास मुझे देख हसदे

तू चाहे मेरे हक़ की ज़मीन रख ले

तू सांसो पे भी नाम तेरा लिख दे

मैं जियु जब जब तेरा दिल धड़के

प्यार दी राव उत्ते यार तू ले आया

मैनु जीने डा मतलब आज समझ आया

पराया मैनु कर ना न तू सोहनिया

चन्ना मैं तो टुर्र जाना...

प्रिंस का गाना सुन के मुस्कान का दिल ख़ुशी से झूम उठता है.... वो प्रिंस को प्यार भरी नज़रूँ ऐसे देखती है जैसे कहना छह रही हो की....

मुस्कान : मुझे कास के अपने सीने से लगा लो ताकि मेरे दिल के साथ साथ मेरी रूह को भी करार आ जाए....

मुस्कान की आँखों के ज़रिये hi प्रिंस उसके दिल की बात समझ जाता है और आगे बढ़ में उसे कास के अपने सीने से लगा लेता है.... प्रिंस के सीने से लग के मुस्कान का दिल ख़ुशी से झूम उठता है.... काफी देर तक प्रिंस उसे अपने सीने से लगाए रहता है...

फिर कुछ देर बाद मुस्कान जो कहती है उसे सुन के प्रिंस बुरी तरह से चौंक जाता है....??????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 109

प्रिंस का गाना सुन के मुस्कान का दिल ख़ुशी से झूम उठता है.... वो प्रिंस को प्यार भरी नज़रों से ऐसे देखती है जैसे कहना छह रही हो की....

मुस्कान : मुझे कास के अपने सीने से लगा लो ताकि मेरे दिल के साथ साथ मेरी रूह को भी करार आ जाए....

मुस्कान की आँखों के ज़रिये hi प्रिंस उसके दिल की बात समझ जाता है और आगे बढ़ में उसे कास के अपने सीने से लगा लेता है.... प्रिंस के सीने से लग के मुस्कान का दिल ख़ुशी से झूम उठता है.... काफी देर तक प्रिंस उसे अपने सीने से लगाए रहता है...

फिर कुछ देर बाद मुस्कान जो कहती है उसे सुन के प्रिंस बुरी तरह से चौंक जाता है....??????

अब आगे.....

इधर ड्रीम वर्ल्ड से निकल के बाबा और नेमत पैंडोरा प्लेनेट आ जाते हैं....

बाबा : शुक्र है हम सही वक़्त पे ड्रीम वर्ल्ड से बहार निकल आये.... वर्ण वहां क़ैद हो के रह जाते....

नेमत : हम तो आ गए मगर प्रिंस का क्या होगा....? क्या वो वहां हमेशा के लिए क़ैद हो के रह जाएगा....? क्या वो वहां से कभी निकल नहीं पायेगा....?

बाबा : इस पूरे ब्रह्माण्ड में ऐसी कोई ताक़त नहीं जो प्रिंस को क़ैद कर सके....

नेमत : मतलब की मुस्कान का इलाज करने के बाद वो मलिका सुनहरी के घेरे को पार करके यहाँ आ सकता है....

बाबा : हाँ....

नेमत : अच्छा अगर ऐसा है तो फिर मलिका सुनहरी ने ड्रीम वर्ल्ड को अपनी पावर्स से बाँधा क्यों....? ये जानते हुए भी की प्रिंस उसे आसानी से तोड़ सकता है....

बाबा : हाँ ये जानते हुए की मलिका सुनहरी के घेरे को प्रिंस अपनी पावर्स से आसानी से तोड़ सकता है.... मलिका सुनहरी ने ड्रीम वर्ल्ड को अपनी पावर्स से घेर दिया..... जानती हो उसने ऐसा क्यों किया.....?

बाबा की बात सुन के नेमत न में अपना सर हिलती है....

बाबा : ड्रीम वर्ल्ड को अपनी पावर्स से घेरने के पीछे मलिका सुनहरी की जो ख़ास वजह थी वो प्रिंस को क़ैद करना नहीं बल्कि हम दोनों को वहां से प्रिंस से दूर करना थी.... वो ये अच्छे से जानती थी की प्रिंस को जो तकलीफ वो पहुँचाना चाहती है वो हमारे वहां रहते मुमकिन नहीं हो पाटा..... इस लिए उसने ये खेल खेला...

नेमत : बाबा ये आपने hi कहा था की मलिका सुनहरी सुल्तानगढ की उसी हवेली में क़ैद है जिसे प्रिंस बे बड़े प्यार से अपनी जान के लिए बनाया था.... तो जब वो वहां क़ैद है तो वो यहाँ कैसे आ सकती है.... और तो और प्रिंस को नुक्सान कैसे पहुंचा सकती है....? और सबसे बड़ी बात तो ये की जब वो प्रिंस को दिलो जान से चाहती है तो फिर वो उसे क्यों नुक्सान पहुँचाना चाहती है....?

बाबा : तुम्हारे सवालों के जवाब तुम्हे वक़्त आने पे मिल जाएंगे.... फिलहाल के लिए तुम बस इतना जान लो की सुलतान को दर्द में देख के मलिका सुनहरी को जितनी तकलीफ होती है.... उस से कई ज़्यादा ख़ुशी उसे प्रिंस को दर्द और तकलीफ में देख के होती है.... वो ये जानती है की वो छह के भी खुद प्रिंस को तकलीफ दे नहीं सकती तो इसके लिए उसने अपने hi हिस्सों को चुना है....

नेमत शॉकेड : मलिका सुनहरी का हिस्सा तो मुस्कान और सोना हैं तो क्या मलिका सुनहरी उनके ज़रिये प्रिंस को दर्द देना चाहती है...?

बाबा : हाँ.... मलिका सुनहरी की तरह वो दोनों भी जितना प्यार सुलतान से करती हैं उतनी नफरत उन्हें प्रिंस से है.... फिलहाल दोनों इस बात से अनजान हैं... मगर मलिका सुनहरी नहीं.... वो इन दोनों के ज़रिये प्रिंस को हर पल हर लम्हा तकलीफ पहुँचाना चाहती है.... जिसकी शुरुवात उसने मुस्कान के ज़रिये से शुरू कर दी है.... अगले 6 दिनों तक प्रिंस हर पल मुस्कान के साथ अकेले रह के उसका इलाज करने वाला है और उस इलाज की वजह से नील ज़हर हर पल प्रिंस के जिस्म में एक्टिवटे होता रहेगा..... और साथ hi प्रिंस को बेइन्तेहाँ दर्द सहने को मजबूर करता रहेगा....

नेमत : मगर बाबा वो दर्द तो प्रिंस को बस उन 30 मिनट्स तक सहना होगा.... 30 मिनट्स के बाद प्रिंस अपनी पावर्स की वजह से ठीक हो जाएगा.... तो फिर मलिका सुनहरी कैसे बाकी के 23.30 घंटे तक प्रिंस को तकलीफ पहुंचा सकती है....

बाबा : मलिका सुनहरी ऐसे हालात पैदा करवाएगी जिसकी वजह से बार बार सेक्स की फीलिंग के साथ प्रिंस मुस्कान की तरफ बढ़ेगा.... उसके ऐसा करते hi.... नील ज़हर एक्टिवटे होता जाएगा... और वो प्रिंस को मुस्कान के साथ सेक्स करने पे मजबूर करेगा.... जो की प्रिंस करना नहीं चाहेगा... उस फीलिंग को रोकने की वजह से प्रिंस को फिर से उस बेइन्तेहाँ दर्द और तकलीफ को सहना होगा....

बाबा की बात सुन के नेमत को मलिका सुनहरी पे बेहद गुस्सा आने लगता है.... गुस्से से उसकी आँखें लाल हो जाती हैं....

नेमत : मैं उस कमीनी को छोड़ूंगी नहीं.... उस कमीनी की हिम्मत कैसे हुई प्रिंस के साथ ऐसा करने की....? उसकी जान लिए बिना मुझे चैन नहीं आएगा....

बाबा : ये मुमकिन नहीं.... तुम तो क्या इस पूरे ब्रह्माण्ड में ऐसा कोई नहीं जो मलिका सुनहरी और पारी का बाल भी बांका कर सके.... दोनों का जिस्म प्रिंस की बेहद पावरफुल सुरक्षा शैलद से घिरा से हुआ है.... उसे तोड़ पाना इस पूरे ब्रह्माण्ड में किसी के लिए भी मुमकिन नहीं.... प्रिंस सब बर्दाश्त कर सकता है मगर उसकी जान को एक खरोच भी आये ये वो नहीं सेह सकता....

नेमत : तो इसका मतलब मलिका सुनहरी और पारी जो चाहे प्रिंस के साथ कर सकती है... उसे जितनी चाहे उतनी तकलीफ पहुंचा सकती हैं और हम छह के भी दोनों को ऐसा करने से रोक नहीं सकते....

बाबा : यही विधि का विधान है.... प्रिंस का प्यार hi है जो उनकी इस नफरत को मोहोब्बत में बदल सकता है....

नेमत : आप कहना छह रहे हैं की जब तक उन कामिनियों की नाफ़ात मोहोब्बत में नहीं बदल जाती तब तक प्रिंस को न चाहते हुए भी सब सहना होगा....

बाबा : ये hi उसकी किस्मत है.... जो पिछले कई जन्मो से उसके ऊपर ज़ुल्म करती आ रही है.... हर जनम में उसे अपने सच्चे प्यार को साबित करना पड़ा है.... सिर्फ और सिर्फ अपने प्यार के लिए उसने ख़ामोशी से जाने क्या कुछ नहीं सहा.... यहाँ तक की उसने अपना दिल अपनी जान तक अपने प्यार की खातिर क़ुर्बान कर दी.... मगर फिर भी उसे तकलीफ और दर्द के सिवाए कुछ हासिल नहीं हुआ.... आज तक वो अपने प्यार से महरूम रहा.... इस जनम में भी आज तक उसे तकलीफ के सिवाए कुछ नहीं मिला.... फिर भी वो सब में सिर्फ और सिर्फ प्यार बाँट रहा है... सच्चे मन से सब की मदत कर रहा है.... जाने इस जनम में उस मासूम के साथ क्या होने वाला है.....? जाने इस जनम में उसे अपना प्यार मिलेगा की नहीं....

आँखों में आंसुओं की नमी के साथ साथ गुस्से से भरे अंगारे लिए नेमत कहती है....

नेमत : इस बार उसके साथ मैं हूँ उसकी नेमत.... मैं देखती हूँ की कोई मेरे प्रिंस के साथ कैसे कुछ गलत करता है... उसे तकलीफ पहुँचाने वाले को मैं ऐसी मौत मारूंगी की वो दोबारा प्रिंस के साथ कुछ गलत करने से पहले 1000 बार सोचेगा.... और रही बात उन दोनों कामिनियों की तो मेरे रहते वो मेरे प्रिंस का कुछ बिगाड़ नहीं सकती.... मैं उन दोनों को प्रिंस के साथ कुछ भी गलत नहीं करने दूंगी.... कभी nahi.....bas एक बार वो दोनों कमीनी मेरे सामने आ जाए फिर बताउंगी मैं उन्हें..... की नेमत के प्रिंस के साथ गलत करने का क्या अंजाम होता है....

इधर ड्रीम वर्ल्ड में....

मुस्कान बेहद शर्माते हुए प्रिंस से कुछ कहती है... जिसे सुन के प्रिंस बुरी तरह से चौंक जाता है.....

मुस्कान : व.... व.... वो मुझे स... स.... Su....su जाना है....

प्रिंस : kyaaaaaaaaaaaa....?????

मुस्कान हाँ कह के अपनी नज़रें झुका लेती है....

प्रिंस : यार यहाँ इस हाल में तो मुश्किल है.... अगर टॉयलेट होता तो कुछ आसान हो जाता.... क्यों न यहाँ एक घर बना दूँ.... हाँ यही ठीक रहेगा....

प्रिंस फ़ौरन अपने हाथ आगे करता है और जादू से एक बेहद hi खूबसूरत घर बना देता है..... अब उसमे जीनी की पावर्स होने की वजह से ये उसके लिए मामूली सी बात है.... उस घर की खूबसूरती को देख मुस्कान उसमे खो सी जाती है.... प्रिंस उसे घर के अंडर वाशरूम में ले जाता है.... वहां पहुँच के वो चुप चाप खड़ा रहता है....

प्रिंस को कुछ न करते देख मुस्कान....

मुस्कान : क्या हुआ प्रिंस तुम कुछ करते क्यों नहीं....?

प्रिंस अपना सर झुका के शर्माते हुए कहता है....

प्रिंस : व.... वो.... यार mu...jhe शर्म आ रही है.... वो क्या है न की मैंने ऐसा पहले कभी किया नहीं है.... तो....

मुस्कान : शर्म मुझे आणि चाहिए.... जब की शर्मा तुम रहे हो.... ये शर्माना चोरो और जल्दी से कुछ करो इस से पहले की देर हो जाए.... और मेरी सुसु मेरे कपड़ों में hi निकल जाए....

प्रिंस : यार बात को समझो.... ये इतना आसान नहीं है.... वो क्या है न आज पहली बार मैं किसी लड़की के साथ वो करने वाला हूँ.... अब शर्म तो आणि hi है....

मुस्कान : तुम कहना क्या चाहते हो की मैं रोज़ लड़कों के सामने ऐसा करती हूँ....?

प्रिंस : नहीं यार तुम गलत समझ रही हो.... मेरे कहने का वो मतलब नहीं था.... मैं तो बस वो कह रहा था जो सच है.... और सच ये है की आज से पहले मैंने कभी किसी लड़की के कपडे उतार के उसे सुसु नहीं करवाया.... ये मेरा पहली बार है....

मुस्कान : मेरा भी पहली बार hi है.... की मैं किसी लड़के के सामने सुसु करुँगी...

प्रिंस : वो hi तो मैं कह रहा हूँ... और उसी वजह से मुझे शर्म आ रही है....

मुस्कान : यहाँ सुसु के प्रेशर की वजह से मेरी बंद बजी हुई है और तुम्हे शर्म आ रही है.... सीधे सीधे क्यों नहीं कहते की तुम्हे वो नहीं करना.... ये बेकार के बहाने मत बनाओ.... सच बात तो ये है की तुम मेरी मदत करना चाहते hi नहीं.... वर्ण यूँ खड़े खड़े बहाने न बना रहे होते....

प्रिंस : नहीं यार ऐसी कोई बात नहीं है....

मुस्कान : अच्छा अगर ऐसी बात नहीं है तो फिर इस से पहले की देर हो जाए और मेरे कपडे मेरी सुसु से गंदे हो जाए.... जल्दी से मेरे कपडे निकाल के मुझे सुसु कराओ....

प्रिंस मरता क्या न करता.... न चाहते हुए भी उसे वो काटना पड़ता है.... वो आगे बढ़ के मुस्कान की कमीज उतारने लगता है....

मुस्कान : अबे पागल तो नहीं हो गए ये क्या कर रहे हो....?

प्रिंस : तुम्हे सुसु करने के लुए तुम्हारे कपडे उतार रहा हूँ और क्या....?

मुस्कान : तुम क्या सुसु जिस्म के ऊपरी हिस्से से करते हो....?

प्रिंस : नहीं तो क्यों....? मैं भी सबकी तरह नीचे अपनी पंत खोल के hi करता हूँ....

मुस्कान : अबे तो फिर मेरी कमीज क्यों उतार रहे हो....? तुम्हारी जानकारी के लिए बता दूँ मैं भी सब की तरह सुसु नीचे से hi करती हूँ.... वो अलग बात है की मैं अपना पजामा खुद नहीं उतार सकती....

मुस्कान की बात सुन के प्रिंस को अपनी गलती का एहसास होता है.....

प्रिंस : सॉरी यार वो जल्दबाज़ी और घबराहट में मैं तुम्हारा पजामा उतारने के बजाये तुम्हारी कमीज उतारने लगा....

मुस्कान : यहाँ प्रेशर के मारे मेरी बंद बजी हुई है और तुम हो की.... याद रखना अगर गलती से भी मेरी सुसु मेरे कपड़ों में हो गयी न तो मैं तेरी बंद बजा दूंगी....

प्रिंस : उसके लिए तुम्हे पहले ठीक होना होगा....

मुस्कान : हाँ तो उसमे कौनसी बड़ी बात है..... बंद आज नहीं तो क्या 6 दिन बाज बजाउगि.... मगर बजाऊंगी ज़रूर....

प्रिंस : अब जब तुम ने ये तये कर hi लिया है की तुम मेरी बंद बजाये बिना मानोगी नहीं तो फिर आज वो हो hi जाए.... आज तुम अपने पाजामे में सुसु कर hi दो.... ज़रा मैं भी तो देखूं की बच्चों की तरह अपने पाजामे में सुसु करती हुई तुम कैसी लगती हो....

ये कह के प्रिंस मुस्कुराने लगता है.... हर गुज़रते पल के साथ सुसु के प्रेशर बढ़ता hi जा रहा है साथ hi मुस्कान hi हालत खराब हो टी जा रही है... उस से अब और एक पल भी अपनी सुसु को रोकना मुश्किल होता जा रहा है.... वो प्रिंस की तरफ प्यार भरी नज़रों से देखते हुए कहती है....

मुस्कान : प्रिंस तुम मेरे अच्छे दोस्त हो न.... प्लीज मेरी बात मान जाओ और मुझे जल्दी से सुसु करवाओ इस से पहले की देर हो जाए.... Pleaseeeeeeeeee.....

प्रिंस : हाँ ये हुई न बात.... अब आया ूँथ पहाड़ के नीचे.... पहले तो बड़ा धमका रही थी.... एक बार ठीक हो जाने दूँ फिर देखती हूँ तुम्हे.... अब क्या हुआ....? अब कैसे भीगी बिल्ली बन गयी....

मुस्कान : क्या करें यार वक़्त पे गधे को भी बाप बनाना पड़ता है....

प्रिंस : क्या कहा गधा....?

मुस्कान : नहीं यार मैंने तो कहा गुस्सा.... हाँ मेरा प्यारा स्वीट सा दोस्त बिना बात पे hi मुझसे गुस्सा हो गया.... जानते हो वो इतना स्वीट और प्यारा है की बिना बोले hi दिल की बात समझ लेता है और फ़ौरन मदत करने लग जाता है... मुझे यकीन है अभी भी वो ऐसा hi करेगा.... इस से पहले की मेरा सुसु मेरे पाजामे में निकल जाए वो मेरी मदत करेगा.... है न....

प्रिंस : तू भी न... बातें बनाना कोई तुझसे सीखे.... चल अब ज़्यादा मस्का लगाने की ज़रुरत नहीं है... तू चाहे न चाहे मैं फिर भी हर पल हर लम्हा तेरी मदत करूँगा.... मैं तो गैरों की भी दिल से मदत किया करता हूँ.... तू तो फिर भी मेरी अपनी सब से प्यारी दोस्त है....

ये कह के प्रिंस मुस्कान का पजामा उतार देता है और उसे गॉड में उठा के टॉयलेट सीट पे बैठा के वहां से जाना चाहता है मगर जा नहीं पाटा.... मजबूरन उसे वहां रुकना पड़ता है.... मुस्कान बिना सहारे के उस पे बैठ नहीं सकती.... प्रिंस को समझ नहीं आ रहा है की वो करे तो क्या करे.... अभी वो ये सोच hi रहा होता है की तभी जो आवाज़ उसके कानो में पड़ती है उसे सुनते hi वो उस तरफ देखने से खुद को रोक नहीं पाटा....

मुस्कान की कमसिन कुंवारी छूट से सीटी बजाते हुए पिशाब की धार निकलने लगती है.....

Shuuuuuuuuuuuuuuu......

मुस्कान की छूट से निकल रहे पेशाब के साथ आ रही सीटी की आवाज़ में इतनी मिठास और कामुकता होती है की प्रिंस खुद को वहां देखने से रोक नहीं पाटा.... वो गौर से मुस्कान की छूट की तरफ देखने लगता है.... उसकी कमसिन कुंवारी गोरी गुलाबी छूट से पिशाब की मोती धार सीटी बजाते हुए निकल रही है... जिसे देखते hi प्रिंस के जिस्म में नील ज़हर का असर शुरू हो जाता है और साथ hi उसका लुंड एक ज़ोर का झटका ले के लोहे के रोड की तरह खड़ा हो जाता है... साथ hi मस्ती में झटके भी लेने लगता है....

मुस्कान मजबूरी में शरमाते हुए प्रिंस के सामने अपनी नंगी छूट लिए मूत रही है.... ऐसा आज पहली बार हुआ है की वो किसी लड़के के सामने नंगी हो के सीटी बजाते हुए अपनी चुतरनी से पिशाब की तेज़ धार बहते हुए मूट रही है.... शर्म से उसकी नज़रें झुकी हुई हैं.... वो छह के भी अपनी नज़रें ऊपर नहीं उठा पा रही हैं....

कहीं ऐसा तो नहीं की प्रिंस मुझे मूट ते हुए देख रहा है....?

ये सोच के मुस्कान जैसे hi अपनी नज़रें उठा के प्रिंस की तरफ देखती है.... अपनी छूट की तरफ प्रिंस को घूट हुए पाती है... शर्म के मारे उसके गोर गाल के साथ साथ उसकी गोरी गुलाबी छूट भी गुलाबी से सुर्ख लाल हो जाती है.... उसकी नज़र फ़ौरन शर्म से झुक जाती हैं.... बड़ी मुश्किल से वो प्रिंस का नाम ले के उसे पुकारती है....

मुस्कान : Princeeeeeeeeee....

मगर प्रिंस को तो जैसे कुछ होश hi नहीं आज लाइफ में पहली बार वो किसी लड़की को सीटी बजाते हुए मूट ते हुए देख रहा है.... वो भी कोई ऐसी वैसी लड़की नहीं बल्कि इस दुनिया की सब से खूबसूरत और सेक्सी लड़की की कमसिन कुवारी बेहद खूबसूरत और निहायत hi सेक्सी पावरोटी की तरह पहली हुई छूट से निकलते हुए पिशाब को देख रहा है.... जिसे देख के वो और उसका एनाकोंडा रुपी लुंड पूरी तरह से मस्ती में पागल हो जाता है.... वो आगे बढ़ के मुस्कान की छूट को जी भर के प्यार करना चाहता है.... उसे चाट चाट के उसका रास पीना छठा है.... उसमे अपना लुंड दाल के उसे छोड़ना चाहता है.... वो अभी ये सोच hi रहा होता है की तभी मुस्कान की आवाज़ सुन के उसकी तंत्र टूट टी है.... और वो मस्ती की दुनिया से हक़ीक़त की दुनिया में वापिस आ जाता है....

मुस्कान : प्रिंस क्या साड़ी ज़िन्दगी मुझे यहीं टॉयलेट सीट पे hi बैठा के रखने का इरादा है....? मेरा हो गया जल्दी से मुझे साफ़ करो....

मुस्कान की बात सुन के प्रिंस को अपनी गलती का एहसास होता है.... वो फ़ौरन अपनी नज़र वहां से हटा के पास पड़े स्प्रे के मुस्कान के छूट को साफ़ करता है फिर उसे पैजामा पहने के वापिस व्हील चेयर पे बैठा के रूम में ले आता है....

वो बड़ी मुश्किल से खुद को मुस्कान के करीब जाने और उसके साथ सेक्स करने से रोक रहा है.... वहीँ नील ज़हर उसे मुस्कान के साथ सेक्स करने के लिए पूरी तरह से मजबूर कर रहा है....

तभी मुस्कान की बात सुन के प्रिंस का लुंड तेज़ी से उछाल कूद मचने लगता है....

मुस्कान : तुम्हे शर्म नहीं आयी मेरे वहां देखते हुए....? ऐसे भी भला कोई किसी लड़की के वहां देखता है क्या....? और वो भी जब वो अपनी सीटी बजाते हुए सुसु कर रही हो....

प्रिंस ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की मुस्कान ऐसा कुछ कहेगी.... उसकी बात सुन प्रिंस हैरत से मुस्कान की तरफ देखने लगता है.... उसे समझ नहीं आ रहा है की वो मुस्कान की बात का क्या जवाब दे....

तभी मुस्कान जो कहती है उसे सुनके प्रिंस के होश उड़द जाते हैं उसकी आँखें शर्मिंदगी की वजह से झुक जाती हैं.... साथ hi उसकी आँखों से आंसू भी बहने लगते हैं.... अपनी इस हरकत पे वो खुद को धिक्कारने लगता है....

मुस्कान : बोलो न बोलते क्यों नहीं....? क्या तुम्हे मुझ जैसी एक मजबूर लड़की को उस हाल में देख के ज़रा भी शर्म नहीं आयी....?

प्रिंस : न.... न.... नहीं... मुस्कान मैंने जान के नहीं देखा.... वो तो बस अपने आप hi हो गया.... कसम से.... मेरा यकीन करो मैंने तुम्हे गलत नज़र से बिलकुल भी नहीं देखा....

मुस्कान गुस्सा दिखते हुए : झूट बोलते हो तुम...

प्रिंस : नहीं मुस्कान मेरा यकीन करो मैं झूट नहीं बोल रहा.... वो अनजाने में हुआ उसमे मेरी कोई गलती नहीं थी... कसम से मैंने तुम्हे गलत निगाह से नहीं देखा....

मुस्कान : अच्छा अगर ऐसा है तो फिर वो जो तुम्हारे पंत में बड़ा सा तम्बू बनाये हुए है क्या वो भी झूट hi है....? क्या किसी लड़की को बिना गलत निगाह से देखे hi वैसा हुआ है....? बोलै न बोलते क्यों नहीं... कह दो की ये भी झूट है....

एक तरफ उसके जिस्म में नील ज़हर तेज़ी से अपना असर दिखते हुए उसे सेक्स करने पे मजबूर कर रहा है तो दूसरी तरफ मुस्कान की बातें उसे तकलीफ पहुंचा रही है... एक तरह से देखा जाए तो मुस्कान सच hi कह रही है.... मगर ये भी उतना hi सच है की इस वक़्त प्रिंस भी गलत नहीं है.... माना की किसी लड़की को इस हाल में देखना सही नहीं है... मगर हालात hi ऐसे थे की न चाहते हुए भी प्रिंस वो कर चूका है जो उसे नहीं करना चाहिए था.... जवानी और नील ज़हर के असर के आगे मजबूर हो के वो मुस्कान की छूट से सीटी बजाते हुए पिशाब की धार को निकलते हुए देख चूका है.... खुद को नील ज़हर के आगे मजबूर होक मुस्कान के साथ सेक्स करने से प्रिंस खुद को रोक रहा है जिस से उसे एक बार फिर से अपने जिस्म में तेज़ दर्द का एहसास हो रहा है.... मगर ये दर्द उस दर्द के आगे कुछ भी नहीं है जो इस वक़्त मुस्कान की कड़वी मगर सच्ची बातें सुन के उसे हो रहा है....

इस वक़्त मुस्कान की बातें सुन के प्रिंस खुद को गुनेहगार मान रहा है.... उसकी आँखों से तेज़ी से आंसू बहने लगते हैं... उसे खुद पे बहुत गुस्सा आने लगता है....

प्रिंस को कुछ न कहते देख मुस्कान एक बार फिर से उस से वही सवाल करती है...

मुस्कान : बोलो प्रिंस.... जवाब दो मेरी बात का.... क्या किसी मजबूर लड़की को तुंहारा उस हालत में देखना सही था....?

प्रिंस से कुछ कहा नहीं जा रहा है... वो शर्मिंदगी में ना में अपनी गर्दन हिला के कहता है....

प्रिंस : नहीं वो सही नहीं बल्कि गलत है.... मगर मैंने वो गलती जान के नहीं की.... अनजाने में हो गयी...

मुस्कान : गलती तो गलती होती है जान के की हो या फिर अनजाने में.... और जब तुमने गलती की है तो तुम्हे उसकी सजा भी मिलेगी.... और तुम्हारी सजा ये है की....

अभी मुस्कान ने इतना hi कहा था की तभी प्रिंस के हाथ में बिजली का हंटर आ जाता है और वो तेज़ी से अपने जिस्म पे उस हंटर को बरसाने लगता है....

Chataaaaaaaaaaaaaak.....

उस हंटर की हर चोट के साथ साथ प्रिंस के मुँह से दर्दनाक चीख भी निकल रही है...

अअअअअअगगगगगगगठ्हहहहह....

जिसे सुन के मुस्कान को एक ज़ोर का झटका लगता है.... वो बुरी तरह चौंक जाती है.... उसने ये नहीं सोचा था की प्रिंस ऐसा कुछ करेगा.... मुस्कान प्रिंस का नाम ले के ज़ोर से चीख उठती है....

मुस्कान : Princeeeeeeeeeeeee..... तुम पागल तो नहीं हो गए ये क्या कर रहे हो....?

प्रिंस उसकी बात का कोई जवाब नहीं देता वो तब तक खुद को उस हंटर से मारता रहता जब तक वो गिर के बेहोश नहीं हो जाता.... उसका जिस्म बुरी तरह से ज़ख़्मी बना हुआ है जिस्म के कई हिस्से से खून निकल रहा है....

मुस्कान से प्रिंस की ऐसी हालत देखि नहीं जाती... उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं....

कुछ देर तक प्रिंस इसी तरह ज़ख़्मी हालत में बेहोश पड़ा रहता है.... फिर अचानक से उसके जिस्म में रिकवरी पावर्स एक्टिवटे हो जाती है और उसके घाव भरने लगते हैं.... और वो ठीक होने लगता है.... फिर जब उसे होश आता है तब वो मुस्कान से अपने किये की माफ़ी मांगता है....

प्रिंस : मुस्कान... मेरा यकीन करो वो सब मैंने जान के नहीं किया था... वक़्त और हालात की वजह से अनजाने में हो गया था.... मुझे पता है उस वजह से तुम्हे बहुत बुरा लगा है.... बस इस बार के लिए मुझे माफ़ कर दो मैं वादा करता हूँ आइंदा से ऐसा कभी नहीं होगा... प्लीज बस इस बार के लिए मुझे माफ़ कर दो.... तुम जो चाहे मुझे सजा दे दो मैं उफ़ तक नहीं करूँगा... बस सिर्फ इस बार के लिए मुझे माफ़ कर दो.... प्लीज.... ी ऍम सॉरी....

मुस्कान : नहीं प्रिंस तुम ने ऐसी कोई गलती नहीं की जिसके लिए तुम्हे माफ़ी मांगनी पड़े.... बल्कि माफ़ी तो मुझे मांगनी चाहिए.... जिसने तुम्हारी गलती न होने पे भी तुम्हे गलत ठहराया... मगर वो सब मैंने जान के नहीं कहा था.... बस तुम्हे परेशान करने के लिए कहा था.... मुझे क्या पता था की मेरी कही बातें तुम्हे इतनी बुरी लगेगी की तुम खुद को उस गलती की सजा डोज जो तुमने की hi nahi....Maine एक नेक फ़रिश्ते पे झूठा इलज़ाम लगा के उसे खुद को दोषी मान के खुद को सजा देने पे मजबूर कर दिया.... माफ़ी तो मुझे मांगनी चाहिए.... मैं बुरी हूँ बहुत बुरी... तभी तो ऊपर वाले ने मुझे ऐसी सजा दी है.... ये सजा मेरे उस गुनाह के लिए बहुत hi काम है जो मैंने एक नेक फर्ष्ट को गलत ठीकरा की किया है.... हंटर तो मेरे जिस्म पे पड़ने चाहिए... तुम्हारे नहीं.... मेरी गन्दी जुबां को काट देना चाहिए.... जिस से मैंने नेक फ़रिश्ते पे इलज़ाम लगाया....

प्रिंस : नहीं मुस्कान.... तुम ने कुछ गलत नहीं कहा.... जो कहा वो कुछ हद तक ठीक hi था.... मुझे hi खुद को कण्ट्रोल कर के रखना चाहिए था... इस सब में तुम्हारी कोई गलती नहीं है... वो वक़्त और हालात hi ऐसे थे की वो हो गया जो नहीं होना चाहिए था.... इस लिए प्लीज खुद को दोषी मत मानो....

मुस्कान रट हुए : मैं माफ़ी के काबिल तो नहीं मगर फिर भी क्या तुम मुझे माफ़ कर सकते हो....?

प्रिंस : जब तुम्हारी कोई गलती hi नहीं है तो माफ़ी कैसी.... मुझे तुमसे कोई गिला कोई नाराज़गी नहीं....

मुस्कान : ऐसे नहीं मुझे सीने से लगा के कहो तब मानूगी की तुमने मुझे माफ़ कर दिया.....

मुस्कान की बात सुन के प्रिंस आगे बढ़ के उसके आंसू पॉच के उसे कास के अपने सीने से लगा लेता है....

अगले 5 दिन तक ऐसा hi चलता है.... हर रोज़ मुस्कान का इलाज करते करते प्रिंस को नील ज़हर के असर को काम करने के लिए खुद पे बिजली के हंटर का वार करना पड़ता है.... साथ hi बेइन्तेहाँ दर्द भी सहना पड़ता है.... प्रिंस के उस दर्द को और बढ़ने में मुस्कान की छूट से पिशाब के साथ निकली सीटी अपना पूरी तरह से साथ देती है.... हर दिन मुस्कान के जिस्म का एक हिस्सा ठीक होता जाता है....

1सत डे मुस्कान के दोनों पेअर की उँगलियों से लेके दोनों घुटनो तक का हिस्सा ठीक होता है.... 2ंद डे उसके घुटनो से ऊपर कमर तक का हिस्सा.... 3रद डे उसकी कमर से ले के गले तक का हिस्सा... 4तह डे उसके दोनों हाथ.... 5तह डे उसके गले से सर तक का हिस्सा.... 6तह डे उसका पूरा दिमाग ठीक हो जाता है....

और अब आखरी दिन बारी है मुस्कान की आवाज़ के लौटने की.....

क्या आज 7तह दिन मुस्कान की आवाज़ वापिस लौट आएगी....? अगर हाँ तो कैसे....?????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 110

अगले 5 दिन तक ऐसा hi चलता है.... हर रोज़ मुस्कान का इलाज करते करते प्रिंस को नील ज़हर के असर को काम करने के लिए खुद पे बिजली के हंटर का वार करना पड़ता है.... साथ hi बेइन्तेहाँ दर्द भी सहना पड़ता है.... प्रिंस के उस दर्द को और बढ़ने में मुस्कान की छूट से पिशाब के साथ निकली सीटी अपना पूरी तरह से साथ देती है.... हर दिन मुस्कान के जिस्म का एक हिस्सा ठीक होता जाता है....

1सत डे मुस्कान के दोनों पेअर की उँगलियों से लेके दोनों घुटनो तक का हिस्सा ठीक होता है.... 2ंद डे उसके घुटनो से ऊपर कमर तक का हिस्सा.... 3रद डे उसकी कमर से ले के गले तक का हिस्सा... 4तह डे उसके दोनों हाथ.... 5तह डे उसके गले से सर तक का हिस्सा.... 6तह डे उसका पूरा दिमाग ठीक हो जाता है....

और अब आखरी दिन बारी है मुस्कान की आवाज़ के लौटने की.....

क्या आज 7तह दिन मुस्कान की आवाज़ वापिस लौट आएगी....? अगर हाँ तो कैसे....?????

अब आगे....

प्रिंस का दिल आज बेहद बेचैन बना हुआ है.... उसे आज अपने दिल की धड़कन कुछ अलग सी महसूस हो रही है... एक अजीब सी घबराहट सी उसे हो रही है.... जैसे कुछ बुरा होने वाला है बहुत बुरा.... मगर क्या....? पता नहीं.... कुछ तो ऐसा है जो प्रिंस समझ नहीं पा रहा है.... फ़िज़ा में भी इस वक़्त एक ख़ामोशी सी छायी हुई है.... ऐसा जैसे की इस ख़ामोशी को चीयर के एक बहुत hi बड़ा तूफ़ान आने वाला है.... वो तूफ़ान अपने साथ क्या लाएगा.... और तबाही मचा के अपने साथ क्या ले जाएगा.... ये अभी कहना मुश्किल है... मगर कुछ तो ज़रूर होने वाला.... कुछ ऐसा जो प्रिंस की सोच से परे है.... फिलहाल प्रिंस उस सब को अपने दिमाग से झटक के आगे बढ़ता है और मुस्कान के करीब जा के खड़ा हो जाता है.... और प्यार से उसकी आँखों में देखते हुए कहता है....

प्रिंस : मुस्कान आज के आखरी इलाज के बाद तुम पूरी तरह से ठीक हो जाओगी.... है न ख़ुशी की बात.... आज मेरी दोस्त पूरी तरह से ठीक हो जायेगी.... आज मैं बेहद खुश हूँ.... बेहद....

प्रिंस की बात सुन के मुस्कान भी खुश हो जाती है.....

फिर प्रिंस मुस्कान की इजाज़त ले के उसका इलाज शुरू करता है.... मगर जैसे जैसे वो मुस्कान का इलाज करना शुरू करता है..... वैसे वैसे उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगती है... उसे अलग सी बेचैनी होने लगती है.... एक दर सा उसके दिल में उठने लगता है.... प्रिंस को बेहद घबराहट सी होने लगती है.... नील ज़हर आज पूरे उफान पे है और प्रिंस को सेक्स करने पे मजबूर कर है.... आज नील ज़हर के आगे प्रिंस खुद को कमज़ोर महसूस कर रहा है.... वो छह के भी नील ज़हर के असर को दबा नहीं पा रहा है.... जैसे जैसे प्रिंस मुस्कान के जिस्म पे अपने हाथों से मसाज कर रहा है वैसे वैसे उसके जिस्म में इतनी hi तेज़ी से सेक्स की तड़प बढ़ रही है.... उसका लुंड पूरे जोश में खड़े हो के उसे सेक्स करने को मजबूर कर रहा है..... मुस्कान की दिलकश और कमसिन जवानी भी प्रिंस को अपनी और खींच रही है.... प्रिंस छह के भी खुद को मुस्कान के अपनी सेक्स की भावनाओं को बढ़ने से नहीं रोक पा रहा है.... आज प्रिंस के हाथों को अपने ठोस बूब्स और छूट पे महसूस कर के मुस्कान का पूरा जिस्म मस्ती में उदा जा रहा है.... उसके जिस्म में तेज़ी से सिरहन हो रही है.... उसकी छूट से कॉमर्स बह रहा है.... जिसकी खुशबु प्रिंस के साथ साथ उसके एनाकोंडा रुपी लुंड को मदहोश किये जा रही है.... प्रिंस छह के भी अपनी नज़रें मुस्कान की ठोस चूची और रास चोरटी छूट से नहीं हटा पा रहा है.... उसका लुंड पूरे जोश में झटके ले रहा है.... आखिर प्रिंस भी तो एक इंसान hi है.... मुस्कान के कामुक और सेक्सी जिस्म को देख उसके दिल में ऐसी भावनाओं का आना कोई बड़ी बात नहीं है.... मुस्कान के नंगे जिस्म को देख मुर्दे का भी लुंड खड़ा हो जाए.... यहाँ तो फिर भी प्रिंस ज़िंदा है..... वो छह के भी खुद को मुस्कान की तरफ आकर्षित होने से रोक नहीं पाटा....

वो मुस्कान की मालिश पूरी करने के बाद उसके चेहरे की तरफ बढ़ता है..... फिर उसके मासूम और प्यारे चेहरे को अपने हाथों में लेके अपना चेहरा उसके चेहरे के करीब ले जाने लगता है.... मुस्कान को ये समझते देर नहीं लगती की प्रिंस आगे क्या करने वाला है.... वो ख़ामोशी से प्रिंस की आँखों में देखती रहती है..... धीरे धीरे दोनों के चेहरे एक दूसरे के बेहद करीब आ जाते है.... दोनों के दिल की धड़कन काफी तेज़ हो जाती है.... एक दूसरे की साँसों को वो अपने चेहरे पे महसूस करके मस्ती के आसमान में उड़ने लगते हैं.... उनके जिस्म में मस्ती की तेज़ लेहेर सी दौरने लगती है....

प्रिंस : मुस्कान तुम्हारी आवाज़ वापिस लाने के लिए मुझे तुम्हे किश करना होगा जिस से तुम्हारे मुँह और गले में काली शक्तियों का असर पूरी तरह से ख़तम हो जाएगा और तुम फिर से बोल पाओगी.... जानता हूँ की ये सही नहीं है.... कोई भी लड़की ये कभी नहीं चाहेगी की अपनी लाइफ का पहला किश जिसपे उसके अपने प्रेमी या पति का हक़ होता है वो किसी और को दे.... ये गलत है बहुत गलत मगर इस वक़्त न चाहते हुए भी तुम्हारे लिए ये hi सही है....

ये कह के प्रिंस मुस्कान की आँखों में देखने लगता है जैसे की उस से आगे बढ़ने की इजाज़त मांग रहा हो.... मुस्कान प्रिंस की बात समझ के अपनी आँखें बंद कर लेती है और अपने दिमाग के ज़रिये उसकी बात का जवाब देती है....

मुस्कान : मैं ये अच्छे से जानती हूँ प्रिंस की ये तुम सिर्फ मेरा इलाज करने के लिए कर रहे हो.... न की किसी गलत नीयत से.... मुझे तुमपे पूरा यकीन है.... तुम सपने में भी मेरे साथ कभी कुछ गलत नहीं कर सकते.... तुम्हे किश की क्या मेरे साथ कुछ भी करने की पूरी इजाज़त है.... मुस्कान का जवाब पा के प्रिंस की आँखें नाम हो जाती हैं....

वो अपने होंठ मुस्कान के होंठों से जोड़ देता है और प्यार से उसे अपने मुँह में ले के चूसने लगता है.... मुस्कान का ये पहला किश है.... जिसे महसूस करके वो मस्ती के आसमान में उडी जा रही है.... उसकी छूट मस्ती में कॉमर्स की बूंदों का छिड़काव का रही है.... उसके जिस्म के साथ साथ उसकी छूट में भी मस्ती की करंट सी दौर रही है.... किश में वो भी प्रिंस का साथ देने लग जाती है.... वो कभी प्रिंस के नीचे के होंठों को चूसती है तो कभी ऊपर के होंठों को.... धीरे धीरे मस्ती में दोनों की किश वाइल्ड होने लगती है.... मुस्कान मस्ती में प्रिंस के होंठों को काटने लगती है.... प्रिंस क भी हाल काफी बुरा है.... उसका लुंड पूरे जोश में खड़े हो के जटके लेने लगता है..... जिसकी ठोकर मुस्कान को अपनी छूट पे साफ़ महसूस होने लगती hai...wo कास के प्रिंस से जिस्म से लिपट जाती है और मस्ती में ा जुबां प्रिंस के मुँह में दाल के घूमने लगती है.... मुस्कान की जुबां को अपने मुँह में महसूस करके प्रिंस फ़ौरन उसे चूसने लगता है.... मुस्कान के होंठों और जुबां के रास को मज़े ले पीने लगता है..... दोनों पूरी शिद्दत से एक दूसरे को किश करने में लगे हुए हैं.... कोई भी अलग होना नहीं छह रहा hai....Muskaan की चूर कॉमर्स से सराबोर हो चुकी है और जाने कितना रास बहाये जा रही है.... करीब 10 मिनट्स तक दोनों एक दूसरे के होंठों और जुबां को चूसते रहते हैं.... फिर जब उसकी साँसें उखाड़ने लगती हैं तब न चाहते हुए भी उन्हें एक दूसरे से अलग होना पड़ता है....

इस से पहले की मुस्कान के होंठ प्रिंस के होंठों से अलग होते.... प्रिंस अपनी पावर्स के ज़रिये मुस्कान के गले और मुँह में काली शक्तियों के जो अंश बचे थे उन्हें मुस्कान के मुँह से चूस के बाहर निकालने लगता है.... मुस्कान के मुँह से काले रंग का धूंवा निकल के प्रिंस के अंडर जाने लगता है..... देखते देखते प्रिंस का चेहरा काला पड़ने लगता है.... जब वो मुस्कान के गले से काली शक्तियों के अंश को पूरी तरह से निकाल लेता है तब वो फ़ौरन मुस्कान को खुद से दूर हटा के उसके जिस्म में बेहद पावरफुल सुरक्षा शैलद को दाल के एक्टिवटे कर देता है ताकि वो काली शक्तियों के अंश वापिस मुस्कान के अंडर न जा सके....

एक तो नील ज़हर का असर और अब काली शक्तियों का असर प्रिंस को अपने जिस्म में असीम दर्द महसूस होने लगता है.... दोनों शक्तियां मिल के प्रिंस को तकलीफ पहुँचाने लगती हैं.... प्रिंस अपनी वाइट पावर्स से उनको दबाने की कोशिश करने लगता है.... उन्हें दबाने में प्रिंस को अपने अंडर एक तेज़ ऊर्जा के बढ़ने का एहसास होता है.... एक तरफ काली पावर्स तो दूसरी तरफ प्रिंस की वाइट पावर्स दोनों के बीच जुंग सी छिड़ी हुई है.... जो प्रिंस को अंडर से काफी नुक्सान पहुंचा रही है उसे बेहद तकलीफ हो रही है.... दर्द से वो चीखने लगता है....

अअअअअअअअअगगगगगठ्हहहह.....

उसकी चीखने सुन के साथ hi उसका हाल देख के मुस्कान का दिल तड़पने लगता है उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं.... वो प्रिंस के करीब जाना चाहती है मगर प्रिंस उसे अपने करीब आने से रोक देता है.... प्रिंस अपनी पूरी पावर्स लगा के नील ज़हर के साथ साथ काली शक्तियों को रोकने की कोशिश कर रहा है.... जिसकी वजह से वो अंदर से ज़ख़्मी होने लगता है उसके नाक कान से खून निकलने लगता है.... वो अपनी पूरी ताक़त लगा के काली शक्तियों पे वार करता है... उस वार से काली शक्तियां नष्ट हो जाती हैं.... साथ hi प्रिंस को बुरी तरह से ज़ख़्मी कर जाती हैं.... प्रिंस नीचे गिर के बेहोश हो जाता है.... प्रिंस की ऐसी हालत देख के मुस्कान का दिल देहल जाता है वो प्रिंस का नाम ले के चीख उठती है....

Princeeeeeeeeeeeeeeeee....

वो प्रिंस के करीब जा के बैठ जाती है और प्रिंस के सर को अपनी गॉड में रख के उसे उठाने की कोशिश करने लगती है....

मुस्कान : प्रिंस.... उठो न प्रिंस.... देखो न तुम्हारी दोस्त ठीक हो गयी... प्लीज उठ जाओ... प्रिंस.... तुम्हारी ये हालत मुझसे देखि नहीं जा रही है प्रिंस प्लीज उठ जाओ.... Neemaaaaaaaaaat.... बबाआआआआ.... कोई है.... देखो न प्रिंस का क्या हाल हो गया....? प्लीज कोई तो आओ.... Princeeeeeeeeee..... आज मेरी वजह से तुम्हारा ये हाल हो गया है.... मैं बहुत बुरी हूँ.... न मैं तुमसे मिलती और न hi मेरी वजह से तुम्हे इतनी तकलीफ पहुँचती.... न hi तुम्हारा ऐसा हाल होता.... प्लीज प्रिंस होश में आओ... बात करो मुझसे.... देखो न मैं ठीक हो गयी.... देखो न तुम्हारी दोस्त ठीक हो गयी..... प्लीज उठ जाओ न....

ये कह के वो ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है....

कुछ देर बार प्रिंस की हीलिंग पावर्स एक्टिवटे हो जाती है और प्रिंस के ज़ख्म भरने लगते हैं वो ठीक होने लगता है.... फिर उसे होश आ जाता है... होश में आते hi जब वो मुस्कान को रट देखता है तो उसका दिल तड़प जाता है.... वो फ़ौरन उठ के बैठ जाता है....

प्रिंस : क्या हुआ मुस्कान....? तुम इस तरह से रो क्यों रही हो....? तुम्हे कोई प्रॉब्लम है क्या....? बताओ मुझे... जवाब दो... क्या हुआ....? प्लीज बताओ न....

प्रिंस को ठीक देख मुस्कान की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता वो फ़ौरन आगे बढ़ के उसे अपने सीने से लगा लेती है... और ख़ुशी के मारे ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है.... वो प्रिंस का चेहरा अपने हाथों में ले के उसके पूरे चेहरे को चूमने लगती है.... साथ रट हुए hi एक hi बात बार बार बोले जा रही है....

मुस्कान : ऊपर वाले का लाख लाख शुक्र है प्रिंस तुम ठीक हो गए... तुम्हे कुछ नहीं हुआ.... प्रिंस तुम ठीक हो गए....

मुस्कान की आवाज़ सुन के प्रिंस की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता....

प्रिंस : मुस्कान तुम्हारी आवाज़ लोट आयी मुस्कान तुम बोल सकती हो....

मुस्कान : हाँ प्रिंस मैं बोल सकती हूँ.... मैं बोल सकती हूँ.... आज मैं बेहद खुश हूँ... और ये ख़ुशी मुझे सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी वजह से मिली है... मेरे सब से प्यार और सच्चे दोस्त की वजह से.....

प्रिंस : मुस्कान मैं बता नहीं सकता तुम्हे पूरी तरह से ठीक देख के मुझे कितनी ख़ुशी हो रही है....

मुस्कान : ये सब तुम्हारी वजह से hi हुआ है.... मुझे ठीक कर के तुमने अपना वादा पूरा कर दिया..... तुम्हे पता है जब मेरे परिवार वाले ख़ास कर के मेरी बहिन जब मुझे इस हाल में देखेगी तो कितना खुश होगी....

मुस्कान की बात सुन के अचानक से प्रिंस की आँखें नाम हो जाती हैं.... जिसे देख मुस्कान घबरा जाती है.....

मुस्कान : क्या हुआ प्रिंस अचानक से तुम्हारी आँखें नाम क्यों हो गयी....? क्या दर्द अभी भी हो रहा है....?

प्रिंस : नहीं ये दर्द की वजह से नहीं बल्कि ख़ुशी और गम की वजह से है.... ख़ुशी इस बात की मेरी सब से प्यारी दोस्त आज पूरी तरह से ठीक हो गयी.... और गम इस बात का है की अब वो मुझे चोर के चली जायेगी....

मुस्कान : आज कह दिया दोबारा गलती से भी ऐसी बात की न तो मैं तुमसे नाराज़ हो जाउंगी.... और रही बात तुम्हे चोर के जाने की तो ऐसा कभी नहीं होगा... मैं तुम्हे चोर के कभी नहीं जाउंगी... तुम चाहोगे तब भी नहीं.... उम्र भर तुम्हारे साथ hi रहूंगी....

प्रिंस : जाओ जाओ... ये सिर्फ बोलने की बात है... एक बार तुम्हारे अपने तुम्हे मिल जाए फिर देखना कैसे तुम इस दोस्त को चोर के चली जाओगी....

प्रिंस की बात सुन के मुस्कान बेहद गुस्से में आ जाती है....

मुस्कान बेहद गुस्से में उसका गिरेबान पकड़ के कहती है....

मुस्कान : एक बार में तुम्हे बात समझ नहीं आती क्या...? अब चाहे जो हो जाए... चाहे मेरे घर वाले आ जाए या फिर क़यामत hi क्यों न आ जाए.... मुस्कान अपने दोस्त प्रिंस को चोर के कहीं नहीं जायेगी... कभी नहीं जायेगी.... मौत करे तो करे मगर ज़िन्दगी अब हम को अलग नहीं कर सकती.... तुम चाहो न चाहो अब महक ज़िन्दगी भर तुम्हारे साथ रहेगी....

मुस्कान की बात सुन के प्रिंस बेहद खुश हो जाता है.... कास के उसे अपने सीने से लगा लेता है...

प्रिंस : ये महक कौन है...?

मुस्कान : महक मेरा नाम है...

प्रिंस : वाओ कितना प्यारा नाम है.... महक...

मुस्कान : हाँ वो तो है... मगर उस से भी प्यारा नाम है मुस्कान.... जानते हो क्यों....? क्यों की ये मुझे मेरे सब से प्यारे दोस्त ने प्यार से दिया है.... आज से मेरा नाम महक नहीं बल्कि मुस्कान है.... और तुम मुझे उसी naam.se बुलाओगे... न की महक के नाम से.... जिस दिन तुम ने मुझे मुस्कान की जगह महक कह के पुकारा उस दिन मैं समझ जाउंगी की मेरा दोस्त मुझ से नाराज़ है....

प्रिंस : मैं और अपनी सब से प्यारी दोस्त से नाराज़ हो जाऊं ये मुमकिन नहीं....

प्रिंस की बात सुन के मुस्कान ख़ुशी में कास के उसके सीने से लिपट जाती है....

कुछ देर इसी तरह बातें करने के बाद वो वहां से चलने लगते हैं.... मगर जैसे hi वो ड्रीम वर्ल्ड से बहार निकलने वाले होते हैं.... मलिका सुनहरी के पावर्स का घेरा प्रिंस के आगे होने की वजह से उस से टकरा जाता है.... जिस से एक धमाका सा होता है और एक सुनहरी रौशनी प्रिंस के जिस्म के अगल बगल घूमने लगती है.... धीरे धीरे वो प्रिंस को पूरी तरह से घेर लेती है.... और फिर अचानक से वो प्रिंस के जिस्म में समां जाती है.... प्रिंस को एक तेज़ झटका सा लगता है वो उड़ते हुए दूर जा गिरता है.... प्रिंस को देख मुस्कान की चीख निकल जाती है....

Princeeeeeeeeee....

वो दौर के प्रिंस के पास जाती है....

मुस्कान : प्रिंस क्या हुआ... तुम ठीक तो हो न.....

प्रिंस : हाँ ठीक हूँ.... बस कुछ अजीब सा महसूस हो रहा है....

मुस्कान : वो क्या था.... वो सुनहरी रौशनी अचानक से कहाँ से आ गयी और वो तुम्हारे जिस्म में समां गयी.... कहीं वो कुछ नुक्सान तो नहीं पहुंचाएगी न.....?

प्रिंस : पता नहीं.... वो क्या था... मगर जो भी था कुछ अजीब सा था.... जैसे hi उस सुनहरी रोशनी ने मुझे चुवा.... मुझे ऐसा लगा जैसे की मेरा कोई अपना मुझे छू रहा है... और जैसे hi वो रौशनी मेरे जिस्म में समायी.... ऐसा लगा जैसे की किसी ने मुझे दिल की गहराइयों से आवाज़ दी हो... और फिर वो मुझ में समां न चाहता हो.... वो कौन था.... क्या था... पता नहीं.... शायद वो कोई लड़की थी....

प्रिंस के मुँह से लड़की का नाम सुन के मुस्कान चीड़ जाती है....

मुस्कान : तुम्हे कैसे पता की वो कोई लड़की थी....?

प्रिंस : अब जब आवाज़ लड़की की थी तो लड़की hi होगी न....

मुस्कान : वो आवाज़ तो मेरी थी.... जब तुम्हे झटका लगा तब तुम्हारा नाम ले के मैं hi चिल्लाई थी.... तुम ने मेरी hi आवाज़ सुनी थी....

प्रिंस : नहीं वो आवाज़ तुम्हारी नहीं बल्कि किसी और लड़की की थी.... उस आवाज़ में बेइन्तेहाँ दर्द था तकलीफ थी प्यार था तड़प थी.... उस आवाज़ को सुन के मेरा दिल तड़प गया... मेरी रूह तक हिल गयी.... दिल में एक अजीब सा दर्द उठा... दिल उस से मिलने को तड़प गया... फिर अचानक से सब गायब सा हो गया... वो दर्द वो प्यार वो तकलीफ वो तड़प अचानक से जाती रही.... और दिल खाली सा हो गया.... ऐसा लगा जैसे एक हवा का झोंका सा आया और मुझे उसका एहसास करा के चला गया.... वो कौन है...? क्या है....? क्यों है....? पता नहीं.... मैं कुछ नहीं जानता...

मुस्कान चीड़ के : वो कुछ नहीं है बस तुम्हारा वेहम है.... अब चलो यहाँ से.... इस से पहले की तुम और बहकी बहकी बातें करने लगो.... यहाँ मेरे और तुम्हारे आलावा और कोई नहीं है.... चलो अब यहाँ से वहां पैंडोरा में बाबा और नेमत हमारा इंतज़ार कर रहे हैं....

प्रिंस मुस्कुराते हुए : मुझे ऐसा क्यों लग रहा है की कहीं कुछ जल रहा है....?

मुस्कान : जी नहीं कहीं कुछ नहीं जल रहा है.... और अगर तुम जल्दी से यहाँ से नहीं चले न तो तुम्हारा बहुत कुछ जलने लगेगा.... तुम लड़के न बहुत कमीने होते हो.... एक से तुम्हारा दिल नहीं भरता... मेरे आलावा किसी और के बारे में सोचा भी न तो तुम्हारी टांगें तोड़ दूंगी.... अब चलो यहाँ से....

मुस्कान की बात सुन के प्रिंस हंस देता है....

फिर वो दोनों वहां से पैंडोरा आ जाते हैं.... दोनों को ठीक देख के बाबा के साथ साथ नेमत भी बेहद खुश हो जाती है..... फिर बाद में मिलने का कह के बाबा वहां से चले जाते हैं और प्रिंस मुस्कान और नेमत के साथ सुल्तानगढ लौट आता है.... इस बात से बेखबर की सुल्तानगढ इस बार एक बड़े धमाके से उसका स्वागत करने वाला है....?????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 111

प्रिंस मुस्कुराते हुए : मुझे ऐसा क्यों लग रहा है की कहीं कुछ जल रहा है....?

मुस्कान : जी नहीं कहीं कुछ नहीं जल रहा है.... और अगर तुम जल्दी से यहाँ से नहीं चले न तो तुम्हारा बहुत कुछ जलने लगेगा.... तुम लड़के न बहुत कमीने होते हो.... एक से तुम्हारा दिल नहीं भरता... मेरे आलावा किसी और के बारे में सोचा भी न तो तुम्हारी टांगें तोड़ दूंगी.... अब चलो यहाँ से....

मुस्कान की बात सुन के प्रिंस हंस देता है....

फिर वो दोनों वहां से पैंडोरा आ जाते हैं.... दोनों को ठीक देख के बाबा के साथ साथ नेमत भी बेहद खुश हो जाती है..... फिर बाद में मिलने का कह के बाबा वहां से चले जाते हैं और प्रिंस मुस्कान और नेमत के साथ सुल्तानगढ लौट आता है.... इस बात से बेखबर की सुल्तानगढ इस बार एक बड़े धमाके से उसका स्वागत करने वाला है....?????

अब आगे....

जैसे hi प्रिंस सुल्तानगढ पहुँच के अपने घर में घुसता है सामने खड़े शख्स को देख बुरी तरह से चौंक जाता है.....

इस से पहले की वो कुछ कहता ज़रा भागते हुए प्रिंस के करीब आती है और कास के उसके सीने से लिपट जाती है.... उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं.... वो प्रिंस का चेहरा अपने हाथों में ले के उसे किश करने लगती है.... ज़रा की हरकत को देख प्रिंस के साथ साथ नेमत और मुस्कान भी चौंक जाते हैं.... नेमत और मुस्कान को तो बुरी तरह से जलन होने लगती है साथ hi ज़रा पे बेहद गुस्सा भी आने लगता है....

गुस्से में नेमत आगे बढ़ती है और खींच के ज़रा को प्रिंस से अलग करती है....

नेमत : अबे कमीनी तू है कौन और तेरी हिम्मत कैसे हुई प्रिंस को गले लगाने की इतना hi नहीं तू ने उसे किश भी किया....?

ज़रा : तू है कौन और तेरी हिमायत कैसे हुई मेरी जान से मुझे अलग करने की....?

नेमत : मैं जो भी हूँ वो तुझे बताने की ज़रुरत नहीं... इस से पहले की मेरा दिमाग घूम जाए और मैं मार मार के तेरी हालत बिगाड़ दूँ चुप चाप निकल ले यहाँ से.... कमीनी एक तो चोरी से घर में घुस आयी और ऊपर से मेरे प्रिंस को किश भी करने लगी.... और उलटे मुझे hi धमका रही है..... चुप चाप निकल ले यहाँ से कहीं ऐसा न हो की तुझे यहाँ से ले जाने के लिए एम्बुलेंस को बुलाना पड़े....

ज़रा : अबे तू है क्या बे जो मुझे ज़रा थे बेस्ट हार्डकोर फाइटर को धमकी दे रही है....? मेरा एक हाथ पड़ेगा न तो तू दुनिया चोर के निकल लेगी....

बस फिर क्या था दोनों एक दूसरे को मारने लग जाती हैं....

मुस्कान और प्रिंस हैरत से उन्हें लड़ते देख रहे हैं.... बात को हद से गुज़रते देख प्रिंस बीच में आ के दोनों को रोकता है....

प्रिंस : अबे तुम दोनों पागल तो नहीं हो गयी....? क्यों बिना बात के लड़ रही हो....

नेमत : मैं कहाँ लड़ रही हूँ... लड़ाई तो इस कमीनी ने शुरू की थी.... इसकी हिम्मत कैसे हुई तुम्हे गले लगा के किश करने की.....?

ज़रा : प्रिंस मेरी जान है मैं उसे किश करूँ या उसके साथ सुहागरात मनौ... तू होती कौन है हमारे बीच में आने वाली....

नेमत : मुझे पता hi था की तू एक नंबर की कमीनी है... देखो कैसे बेशर्मो की तरह किसी अनजान के साथ सुहागरात मानाने की बात कर रही है.... सुहागरात तो बहुत दूर की बात है तू बस एक बार प्रिंस को हाथ लगा के तो दिखा.... फिर बताती हूँ मैं तुझे की कैसे मनाई जाती है सुहागरात.... यहीं मार मार के तेरी पहाड़ न दी तो मेरा नाम नेमत नहीं....

ज़रा : कमीनी मुझे ज़रा को धमकी दे रही है रुक अभी बताती हूँ मैं तुझे....

ये कह के दोनों फिर लड़ने लग जाती हैं.... उन्हें फिर से लड़ते देख प्रिंस गुस्से से पागल हो जाता है... और ज़ोर से चीखता है....

प्रिंस : आआआआहहहहह.... बस बहुत हो गया.... अब तुम दोनों ने एक भी लफ्ज़ और अपनी जुबां से निकला न तो मैं अभी तुम दोनों को घर से बहार निकाल दूंगा... फिर बहार जा के आराम से लड़ती रहना....

अभी दोनों कुछ कहने hi वाली होती है की तभी प्रिंस आँखें दिखा के दोनों को खामोश कर देता है.... फिर ज़रा की तरफ देख के उस से गुस्से से पूछता है....

प्रिंस : तू यहाँ क्या कर रही है....? मैंने तुझे मन किया था न बिना मेरी इजाज़त के यहाँ आने से.... फिर तू क्यों आयी यहाँ....?

ज़रा : तो मैं और क्या करती... तेरी जुदाई मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रही थी.... एक महीने से तू मुझसे दूर है... और तो और पिछले 12 दिन से तेरा न तो फ़ोन आया है और न hi कोई खबर.... मुझे तेरी फ़िक्र हो रही थी... आफ्टर आल तू जान है मेरी... मैं तुझे दिल ो जान से प्यार करती हूँ....

ये कह के ज़रा की आँखों में आंसू आ जाते हैं.... वो रोने लगती है....

ज़रा की बातें सुन के नेमत के साथ साथ मुस्कान की भी बुरी तरह से जल जाती है... दोनों को hi ज़रा से जलन होने लगती है... मगर प्रिंस की वजह से वो कुछ कह नहीं पाती....

इधर ज़रा की बात सुन के प्रिंस अपना सर पीट लेता है.... उस से ज़रा का रोना देखा नहीं जाता वो आगे बढ़ के उसे सीने से लगा लेता है और प्यार से उसके सर पे हाथ फेरते हुए चुप करने लगता है....

प्रिंस : सॉरी न ज़रा.... मुझे माफ़ कर दे... यार वो कुछ काम ऐसा आ गया था की मैं उसमे काफी बुजी हो गया था.... तुझे तो क्या किसी को कॉल करने का वक़्त hi नहीं मिला.... अब वादा करता हूँ जब भी जहाँ भी जाऊँगा तुझे बता के जाऊँगा.... अब प्लीज रोना बंद कर दे... तू जानती है न की मैं तेरी आँखों में आंसू नहीं देख सकता.... तेरी आँखों में आंसू देख मेरा दिल तड़प जाता है... अब तू क्या चाहती है की मैं भी रो दू....

प्रिंस की बात सुन के ज़रा न में अपनी गर्दन हिला देती है.... और अपने आंसू पूछ के कहती है...

ज़रा : नहीं मेरे रहते ऐसा कभी नहीं हो सकता.... और खबरदार जो तेरी आँख में आंसू की एक बूँद भी आयी तो.... मैं सब कुछ बर्दाश्त कर सकती हूँ मगर तेरी आँखों में आंसू नहीं देख सकती....

प्रिंस : अबे ये क्या तू तो मेरी लाइन बोल रही है... जो मुझे कहना चाहिए वो तू कह रही है....

ज़रा : क्यों न कहूं....? तू और मैं कोई अलग थोड़े hi हैं.... और जब दोनों एक hi हैं तो दोनों की लाइन भी एक hi होगी न.... तू ने कही मैंने कही एक hi बात है.... अब जल्दी ये बता की जो काम करने तू यहाँ आया था वो हुआ की नहीं... और ये दोनों चिपकिलियाँ कौन हैं....?

ज़रा के मुँह से अपने लिए छिपकिली सुन के दोनों बेहद गुस्से में आ जाती हैं मगर प्रिंस की वजह से खामोश कड़ी रहती हैं....

प्रिंस : ज़रा तू फिर शुरू हो गयी....

ज़रा : सॉरी बाबा... अब नाराज़ न होना.... मैंने तो ऐसे hi कह दिया था.... वैसे ये दोनों हैं कौन....?

प्रिंस : बहुत लम्बी कहानी है....

ज़रा : तो सुना न मुझे कौनसी जल्दी है....

फिर प्रिंस शुरू से ले के अब तक की पूरी कहानी ज़रा को सुना देता है... जिसे सुन के ज़रा की आँखों से आंसू बहने लगते हैं... साथ hi गुस्सा भी आने लगता है....

ज़रा : तू सच कह रहा है या फिर....

प्रिंस : नहीं ज़रा मैं कभी तुझसे झूट कह सकता हूँ क्या.....?

ज़रा गुस्से में प्रिंस के गाल पे खींच के थप्पड़ मार के कहती है.....

Chataaaaaaaaaaaaaak....

ज़रा : कमीने.... ये सब करने से पहले तू ने एक बार भी मेरे बारे में नहीं सोचा.... अगर तुझे कुछ हो जाता तो मैं कैसे ज़िंदा रहती..... मैं भी उसी वक़्त मर जाती.... जा तू बात मत कर मुझसे.... बहुत खराब है तू... जा चला जा यहाँ से.... नहीं तू क्यों जाएगा.... मैं hi चली जाती हूँ यहाँ से....

ये कह के ज़रा रोटी हुई वहां से जाने लगती है.... उसने अभी दो कदम भी नहीं बढ़ाये थे की तभी प्रिंस की आवाज़ सुन के रुक जाती है.....

प्रिंस : ज़रा तुझे कसम है जो तू मुझे चोर के गयी तो.... मैं सब कुछ सेह सकता हूँ मगर तेरी नाराज़गी नहीं.... तेरी नाराज़गी ले के मैं जी नहीं पाऊंगा... मैं मर....

अभी प्रिंस ने इतना hi कहा था की तभी ज़रा दौरति हुई प्रिंस के पास आती है और खींच के उसे एक और थप्पड़ मारती है...

Chataaaaaaaaaaaaaak....

ज़रा बेहद गुस्से में रट हुए : आज कह दिया दोबारा मरने की बात की न तो मुझसे बुरा कोई न होगा.... तू जान है मेरी... समजा.... और मेरी जान को कुछ होने से पहले मैं इस पूरी दुनिया को आग लगा दूंगी.... मौत को भी तुझ तक पहुँचने से पहले मुझ से हो के गुज़ारना पड़ेगा....

प्रिंस : अबे कमीनी वो सब तो ठीक है मगर तू बार बार मार क्यों रही है....?

ज़रा : मारुं नहीं तो क्या तेरी आरती उतारूं.... तू ने मरने की बात की hi क्यों....?

प्रिंस : वो तो बस मैंने ऐसे hi कह दिया था.... तू मुझसे नाराज़ जो हो गयी थी...

ज़रा : हाँ तो जो नाराज़ हो जाते हैं उन्हें मनाया जाता है... न की मरने की बात कर के उन्हें और गुस्सा दिलाया जाता है... अब जल्दी से मुझे मन.... इस से पहले की मैं तुझसे और नाराज़ हो जाऊं....

प्रिंस : मनौ.... तुझे... मगर कैसे...? मुझे तो मानना भी नहीं आता... अब तू hi बता दे की तुझे मनौ तो कैसे....?

प्रिंस की बात सुन के ज़रा अपना सर पीट लेती है.... फिर आगे बढ़ के वो करती है जिसे देख शॉक से प्रिंस के साथ साथ नेमत और मुस्कान का मुँह भी खुला का खुला रह जाता है.....

ज़रा आगे बढ़ के प्रिंस का चेहरा अपने हाथों में ले के उसके होंठों को अपने मुँह में ले के उसे चूसने लगती है.... प्रिंस उसे खुद से अलग करने की बहुत कोशिश करता है मगर ज़रा है की उसे चोर्ने को तैयार hi नहीं.... वो कास के प्रिंस के चेहरे को पकड़ के उसके होंठों को चूस रही है.... ज़रा की इस हरकत को देख नेमत गुस्से से पागल हो जाती है वो आगे बढ़ के ज़रा को प्रिंस से अलग करने की कोशिश करती है... मगर ज़रा है की उसे चोर्ने को तैयार hi नहीं... 5 मिनट्स तक प्रिंस के होंठों को चूसने के बाद जब ज़रा को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है तब जा के वो अपना किश तोड़ के प्रिंस से अलग होती है.... फिर अपनी साँसों को काबू करने के बाद कहती है....

ज़रा : इस तरह से रूठे हुए को मनाया जाता है.... अब से जब भी मैं तुझसे नाराज़ हो जाउंगी तू मुझे इसी तरह मानना..... वैसे मुझे नहीं पता था की तू इतना स्वीट है... (फिर अपने होंठों पे अपनी जुबां फेर के कहती है) ममममममम तुझे किश कर के मज़ा आ गया.... साथ hi मेरा मुँह भी मीठा हो गया....

ज़रा की बात सुन प्रिंस अपना सर पीट लेता है.... वहीँ नेमत गुस्से से कहती....

नेमत : दोबारा ऐसी हरकत की न तो तेरी टांगें तोड़ दूंगी....

नेमत की बात सुन के ज़रा आगे बढ़ के प्रिंस के होंठों को चूम के कहती है....

ज़रा : ले कर लिया अपनी जान को मैंने एक और बार किश.... उखाड़ ले जो उखाड़ सकती है.... अब तो मैं अपनी जान को बार बार किश करुँगी.... तुझे जो उखाड़ना है उखाड़ ले....

बस फिर क्या था एक बार फिर से प्रिंस को ले के जुंग शुरू हो जाती है.... बड़ी मुश्किल से प्रिंस दोनों को रोकता है....

प्रिंस : यार अब बस भी करो तुम दोनों.... अब अगर मैंने तुम दोनों में से किसी को भी लड़ते देखा न तो मैं कभी उस से बात नहीं करूँगा....

प्रिंस की बात सुन के दोनों अपना सर झुका के सॉरी कहती हैं....

प्रिंस : जानती हो मुस्कान की तरह तुम दोनों भी मुझे बेहद अज़ीज़ हो.... तुम तीनो के बैगैर मुझे चैन नहीं.... तुम से जुड़ा हो के मैं जी नहीं पाऊंगा.... मगर तुम हो की मेरी कोई फ़िक्र hi नहीं.... बस लड़ने में लगी हुई हो.... मुस्कान को देखो वो कैसे खामोश कड़ी है.... वो बहुत समझदार है.... वो तुम दोनों जैसी नहीं है....

मुस्कान : सही कहा प्रिंस तुम ने मैं इन दोनों कामिनियों के जैसे नहीं हूँ... बस एक बार तुम बीच में से हैट जाओ.... ( बड़े से चाकू को दोनों की तरफ करते हुए...) इन दोनों का सर धार से न अलग कर दिया तो मेरा नाम मुस्कान नहीं.... इनकी हिम्मत कैसे हुई तुम्हे मुझसे चीन ने की.... बड़ी देर से इन कामिनियों की बातें सुन रही हूँ और हरकतें भी देख रही हूँ.... मगर अब तो हद hi हो गयी.... दोनों की हिम्मत कैसे हुई तुम्हे किश करने की....

प्रिंस : मगर किश तो सिर्फ ज़रा ने किया है....

मुस्कान : तो ये कमीनी नेमत कौनसी दूध की धूलि है.... मौका मिलते hi ये भी तुमपे टूट पड़ेगी फिर किश के साथ साथ न जाने और क्या कर दे.... इस से पहले hi मैं इस चाक़ू से दोनों का काम तमाम न कर दूँ....

प्रिंस : अबे पागल हो गयी है क्या...? ये क्या बक रही है....? और तेरे पास ये चाकू कहाँ से आया....? चल फ़ेंक इसे....

ये कह के प्रिंस मुस्कान के हाथ से चाकू ले के उसे तीनो को दिखा के कहता है....

प्रिंस : तुम तीनो को अगर मेरे साथ रहना है तो ठीक तरह से रहना होगा.... यूँ झगड़ा करके नहीं.... अगर गलती से भी तुम तीनो में से किसी ने किसी को कुछ करना तो दूर कुछ कहा भी तो मैं उस से नाराज़ हो जाऊँगा.... चलो अब एक दूसरे के गले लग के एक दूसरे को सॉरी कहो और दोस्ती का हाथ बढ़ाओ....

प्रिंस की बात सुन के न चाहते हुए भी तीनो एक दूसरे के गले लगती है और सॉरी बोल के फ्रेंड्स बन जाती हैं....

प्रिंस ये अच्छे से जानता है की ये तीनो बस उसे दिखने के लिए एक दूसरे के गले लगी हैं.... जबकि अंडर से एक दूसरे को हज़ार गालियां दे रही hain....phir प्रिंस तीनो को अलग अलग रूम में भेज के खुद भी अपने रूम में आराम करने चल देता है.....

अगली सुबह प्रिंस योग साधना और एक्सरसाइज करने के बाद तैयार होक बहार आता है..... तब ज़रा उसे देखती रह जाती है.....

ज़रा : वाओ यार प्रिंस क्या बात है....? आज तो तुम कुछ ज़्यादा hi हैंडसम और डैशिंग लग रहे हो.... तुम्हे देख के दिल तुम्हारा दीवाना हुआ जा रहा है....

प्रिंस : ये तो मुझे तुम्हे कहना चाहिए... आज तुम पहले से कई ज़्यादा हसीं और खूबसूरत लग रही हो.....

ज़रा : ये तो तुम्हारे प्यार का असर है वर्ण हम इतने हसीं कहाँ.... वैसे इतना बन थान के कहाँ चल दिए....

प्रिंस : कॉलेज जा रहा हूँ.... अपने और अपने परिवार के बारे में पता करने....

ज़रा : मौन भी चलूँ साथ....

प्रिंस : नहीं.... तुम ........ जगह जा के कंपनी का काम देखो.... कितना हुआ है..... मुझे जल्द से जल्द ये कंपनी शुरू करनी है....

प्रिंस की बात सुन के ज़रा का चेहरे उतर जाता है....

प्रिंस : क्या हुआ यार इतनी सी बात पे नाराज़ हो गयी....

ज़रा : नाराज़ न होऊं तो और क्या करूँ अभी तुम हम ठीक से मिले भी नहीं थे की तुम जुड़ा होने की बात कर रहे हो....

प्रिंस : तू भी न कुछ भी कहती है.... मैं तुझे कहीं दूर नहीं भेज रहा बल्कि कंपनी का काम पूरा हुआ की नहीं वो देखने को कह रहा हूँ.... ताकि जल्द से जल्द उसे शुरू कर सकूँ.... और रही बात जुड़ा होने की तो तू मुझे से छह के भी जुड़ा नहीं हो सकती.... तू ने गलती से भी मुझसे दूर जाने की बात की न तो मैं तेरी टांगें तोड़ दूंगा....

प्रिंस की बात सुन के ख़ुशी से ज़रा की आँखें नाम हो जाती हैं और वो दौर के प्रिंस के करीब जा के उसके सीने से लिपट जाती है और उसके चेहरे को अपने हाथों में ले के उसके होंठों को चूसने लगती है.... प्रिंस भी किश में उसका साथ देने लगता है.... बस फिर क्या था.... नील ज़हर को तो मौका चाहिए एक्टिवटे होने का.... वो अपना असर प्रिंस के लुंड पे दिखाना शुरू कर देता है.... प्रिंस का लुंड अपना सर उठाने लगता है.... जिसे महसूस करते hi प्रिंस को एक झटका सा लगता है इस से पहले की हालात काबू से बहार हो जाए.... वो फ़ौरन ज़रा को खुद से दूर कर देता है....

प्रिंस की इस हरकत पे ज़रा बुरी तरह से चौंक जाती है....

ज़रा : क्या हुआ...? तू अचानक से मुझसे अलग क्यों हो गया...? अभी तो मैंने तुझे ठीक से किश भी नहीं किया था....

प्रिंस : किश तो मैं भी तुझे करना चाहता हूँ.... मगर मजबूर हूँ... अगर एक पल की और देरी हो जाती तो नील ज़हर मुझे अपने काबू में ले लेता और फिर वो होता जो तू सोच भी नहीं सकती....

ज़रा : ज़्यादा से ज़्यादा क्या होता यही न की बिन फेरे हम तेरे हो जाते....

प्रिंस : मतलब....!!!

ज़रा : मतलब ये मेरी जान बिना निकाह के hi हमारी सुहागरात हो जाती... है उसका भी अपना hi एक मज़ा होता....

प्रिंस शॉकेड : अबे तू पागल तो नहीं हो गयी ये क्या बक रही है....? कुछ तो शर्म कर लिया कर.....

ज़रा : शर्म hi करती रहूंगी तो तेरे बच्चों को पैदा कैसे करुँगी.... है.... जानता है मैं कितने बच्चों का सोच रखा है... 6...

प्रिंस : Kyaaaaaaaaaaaa....?

ज़रा : हाँ हमारे काम से काम 6 बच्चे होंगे.... और पूरे घर में मस्ती करते फिरेंगे....

ज़रा की बात सुन के प्रिंस अपना सर पीट लेता है वहीँ नेमत गुस्से और जलन में ज़रा को देख के कहती है.....

नेमत : देखा प्रिंस.... मैंने कहा था न ये एक नंबर की कमीनी है... मौका मिला नहीं की इसने अपनी छिछोरी हरकतें शुरू कर दी.... इस कमीनी से दूर hi रहना कहीं ऐसा न हो की ये किसी दिन तेरा रपे hi न कर दे....

नेमत की बात सुन के ज़रा को गुस्सा तो बहुत आता है.... मगर वो अपने गुस्से को दबा के नेमत को जलने के लिए कहती है....

ज़रा : वैसे तेरी शकल तो ठीक नहीं है मगर तू ने बात पते की की है.... वाःह्ह्ह.... क्या मस्त आईडिया दिया है....? अब तो मैं पक्का प्रिंस का रपे hi करुँगी.... है उसमे भी अलग hi मज़ा आएगा....

नेमत गुस्से और जलन में : कमीनी गलती से भी तू ने प्रिंस के साथ कुछ ऐसा वैसा करने का सोचा भी न तो मैं तेरी टांगें तोड़ दूंगी....

बस फिर क्या था दोनों एक दूसरे को मारने के लिए एक दूसरे पे झपट पड़ती हैं.... प्रिंस बड़ी मुश्किल से उन्हें रोक के अलग करता है....

प्रिंस गुस्से में : अब अगर तुम दोनों में से किसी ने गलती से भी कुछ कहा न तो अभी के अभी उसे यहाँ से बहार निकाल दूंगा.... चलो चुप चाप जा के नाश्ता करो....

दोनों चुप चाप प्रिंस के साथ नाश्ता करने बैठ जाती हैं... तब तक मुस्कान भी फ्रेश हो के आ जाती हैं.... फिर न चाहते हुए भी ज़रा कंपनी की तरफ चल देती है वहीँ प्रिंस मुस्कान bye बोल के नेमत के साथ कॉलेज के लिए निकल जाता है....

वहां पहुँच के वो नेमत को क्लास में भेज के खुद कैंटीन की तरफ चल देता है ताकि अपने बचपन और साथ hi अपने परिवार के बारे में कुछ पता कर सके.... मगर वहां पहुँचते hi वो कुछ ऐसा देखता है जिसे देख वो बुरी तरह से चौंक जाता है....?????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 112

प्रिंस बड़ी मुश्किल से उन्हें रोक के अलग करता है....

प्रिंस गुस्से में : अब अगर तुम दोनों में से किसी ने गलती से भी कुछ कहा न तो अभी के अभी उसे यहाँ से बहार निकाल दूंगा.... चलो चुप चाप जा के नाश्ता करो....

दोनों चुप चाप प्रिंस के साथ नाश्ता करने बैठ जाती हैं... तब तक मुस्कान भी फ्रेश हो के आ जाती हैं.... फिर न चाहते हुए भी ज़रा कंपनी की तरफ चल देती है वहीँ प्रिंस मुस्कान को bye बोल के नेमत के साथ कॉलेज के लिए निकल जाता है....

वहां पहुँच के वो नेमत को क्लास में भेज के खुद कैंटीन की तरफ चल देता है ताकि अपने बचपन और साथ hi अपने परिवार के बारे में कुछ पता कर सके.... मगर वहां पहुँचते hi वो कुछ ऐसा देखता है जिसे देख वो बुरी तरह से चौंक जाता है....?????

अब आगे.....

कैंटीन में शनाया प्रिंस की यादों में खोयी हुई थी की तभी शांती भाई अपने कुछ गुंडों के साथ वहां आ जाता है.....

उसका एक आदमी शनाया की तरफ इशारा करके कहता है....

स गुंडा 1 : भाई यही है वो लड़की जिसकी वजह से उस कमीने ने अपने भाई गुलशन को मारा.....

शनाया को देख शांती भाई गुस्से में आ जाता है.... और शनाया को धमकाते हुए कहता है....

शांती : कमीनी.... तू hi है न वो जिसकी वजह से आज मेरा भाई हॉस्पिटल में कोमा में पड़ा हुआ है.... तू और तेरे उस यार ने मेरे भाई पे हाथ उठा के गलती कर दी.... अब देख मैं तुम दोनों की कैसी हालत करता हूँ..... यहाँ सब के सामने उस कमीने के जिस्म की साड़ी हड्डियां तोडूंगा और फिर तुझे सब के सामने नंगी कर के तेरे इस जिस्म को मसलूंगा.... मेरे बाद मेरे साथी तेरे जिस्म के साथ खेलेंगे... फिर इस कॉलेज का हर एक लड़का तेरी छूट फाड़ेगा...

शांती की बात सुन के शनाया का दिमाग गुस्से से फटने लगता है वो आगे बढ़ के खींच के एक झन्नाटेदार थप्पड़ शांती को रसीद करती है....

Chataaaaaaaaaaaaaak....

शनाया : साले कमीने तेरी हिम्मत कैसे हुई मुझसे इतनी गिरी हुई बात कहने की....

थप्पड़ खा के शांती का दिमाग घूम जाता है वो बेहद गुस्से में आ के शनाया के गाल पे एक झापड़ रसीद कर देता है....

Chataaaaaaaaaaaaaak....

शांती : साली मुझपे हाथ उठाएगी... देख अभी कैसे सब के सामने तुझे नंगी करके तेरी छूट फाड़ता हूँ...

ये कह के वो शनाया के साथ ज़बरदस्ती करने लगता है उसके कपडे फाड़ने लगता है.... की तभी वहां प्रिंस आ जाता है.... प्रिंस को देख जहाँ शनाया खुश हो जाती है वहीँ प्रिंस गुस्से से अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लेता है....

प्रिंस : ये नहीं सुधरने वाली.... जब देखो तब लड़ाई झगडे में लगी रहती है... इस के अलावा इन दोनों भाई बेहेन को कुछ नहीं आता.... आज मैं बीच में नहीं आऊंगा.... ऐसे लोगों से मेरा कोई वास्ता नहीं....

ये कह के प्रिंस दूसरी तरफ चल देता है.... प्रिंस को जाते देख शनाया का दिल तड़प जाता है.... वो प्रिंस को मदत के लिए आवाज़ दे टी है.... मगर प्रिंस उसे इग्नोर कर के आगे बढ़ जाता है.... जैसे की उसे जानता तक नहीं.... ये देख शनाया की आँखों से आंसू बहने लगते हैं.... वहीँ शांती ज़ोर ज़ोर से हसने लगता है....

शांती : हहहहहहहह.... कोई नहीं आएगा तुझे बचने.... कोई नहीं..... आज तक कोई ऐसा मर्द पैदा नहीं हुआ जो शांती के सामने खड़ा हो सके.... उसे रोकना तो बहुत दूर की बात है..... चलो रे बजाओ रे अपना म्यूजिक.... ताकि इसकी चुदाई में मज़ा आ सके.....

शनाया प्रिंस को जाते हुए देख के कहती है.....

शनाया : सही कहा तू ने ऐसा कोई नहीं है जो मेरी हिफाज़त करे.... जिसे मैंने अपना समझा वो hi पराया निकला.... मुझे बीच रास्ते में चोर के जा रहा है.... आज मेरी इज़्ज़त का रखवाला hi मेरा तमाशाई बन बैठा है.... आज मुझे भी देखना है की जिसे मैंने अपनी जान से बढ़ के चाहा... वो कैसे सब के सामने मेरी इज़्ज़त नीलाम होने देता है.... मुझे अच्छाई का पाठ पड़ने वाले तू भी तो आज वो hi कर रहा है जो कभी मैं किया करती थी.... किसी की परवाह न करके आगे बढ़ जाय करती थी.... और आज तो बात एक मासूम की इज़्ज़त की है जो तेरे रहते सरे आम नीलाम हो ने वाली है....

शांती को शनाया की कोई बात समझ नहीं आ रही है.... उसे तो बस दिखाई दे रहा है शनाया का सेक्सी जिस्म जिसे लूटने के लिए वो ललचायी नज़रों से आगे बढ़ता है.... और अपने नापाक हाथ शनाया के जिस्म की तरफ बढ़ता है.... शनाया अपनी आँखें इस यकीन के साथ बंद कर लेती है की चाहे जो हो जाए आज प्रिंस मुझे और मेरी इज़्ज़त को लूटने से ज़रूर बचाएगा.... साथ hi उसे इस बात का दर भी सत्ता रहा है की कहीं उसका ये यकीन टूट न जाए....

वो अभी ये सोच hi रही थी की तभी शांती के हाथ शनाया की टीशर्ट पे जाते हैं और वो उसे खींच के पहाड़ देता है.... जैसे hi उसकी टीशर्ट पहात टी है.... उसके यकीन की भी धज्जियां उड़द जाती हैं.... वो फ़ौरन अपने हाथों से अपने बेपर्दा हुए जिस्म को छुपाने की नाकाम कोशिश करती है.... उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं साथ hi वो प्रिंस का नाम ले के ज़ोर से चीख उठती है....

शनाया : Princeeeeeeeeee....

शनाया के दिल से निकली दर्द भरी पुकार को सुन के प्रिंस का दिल देहल जाता है.... जाने क्यों उसकी आँखों से आंसू की बूँद टपक जाती है.... और पालक झपकते hi वो शनाया के पास पहुँच जाता है... वो फ़ौरन अपनी टीशर्ट उतार के शनाया को पहना देता है... ये सब इतनी जल्दी होता है की किसी को कुछ समझ hi नहीं आता....

अचानक से प्रिंस को वहां देख के शांती हैरान हो जाता है....

शांती : अबे तू कौन है....? और यहाँ कहाँ से आया....? चल हैट बाद में आना अभी मैं किसी और काम में बिजी हूँ....

ये कह से शांती शनाया की तरफ आगे बढ़ता है.... वो शनाया को छूने hi वाला होता है की तभी एक झन्नाटेदार थप्पड़ उसके गाल पे रसीद होता है....

Chataaaaaaaaaaaaaak....

थप्पड़ खा के शांती उड़ता हुआ पीछे अपने साथियों पे जा गिरता है.... उसका पूरा सर घूम जाता है.... इसके कान से खून निकलने लगता है.... कुछ देर के लिए उसे सुनाई देना बंद हो जाता है साथ hi सब 2 - 2 दिखाई देने लगता है.... बड़ी मुश्किल से वो खुद को संभालते हुए उठता है और अपने साथी से पूछता है....

प्रिंस की 8 पैक्स मस्कुलर बॉडी देख के वहां मजूद सभी के होश उड़द जाते हैं.... ख़ास कर के शांती के.... कॉलेज की लडकियां तो बस एक तक प्रिंस की बॉडी के देखते हुए ाँहें भरने लग जाती हैं....

शांती शॉकेड : अबे ये कौन है बे....? साले ने एक hi थापड़ में पूरा दिमाग हिला डाला....

स साथी : बी.... बी.... भाई ये वो hi है जिसने गुलशन भाई को मारा था.... साला मारता काम है गैज़ेट ता ज़्यादा है... और इस का एक हाथ जिसपे पद जाए वो बुरी तरह से हिल जाता है.... उसे अपना अगला पीछा सात जनम याद आ जाता है....

शांती : साले मेरा आदमी हो के उस कमीने की तारीफ कर रहा है.... कमीनो मेरा मुँह क्या देख रहे हो जाके मारो साले को....

शांती की बात सुन के उसके गुंडे साथी प्रिंस को मारने के लिए हथियार ले के आगे बढ़ते हैं.... किसी के हाथ में चाकू है तो किसी के हाथ में हॉकी तो किसी के हाथ में लोहे की रोड....

शांती का एक साथ भागते हुए प्रिंस के पास आता है और उसपे रोड से वार करता है...... प्रिंस एक तरफ झुक के उस वार से बचते हुए उसकी गर्दन अपने पंजे में दबोच के उसे घूमता है फिर उसे उठा के दूर फ़ेंक देता है..... फिर आगे बढ़ के शांती के एक आदमी के मुँह पे ज़ोरदार पंच मारता है और एक रिवर्स किक दूसरे की गर्दन पे मारता है.... दोनों उड़ते हुए दूर जा गिरते हैं.... पहले वाले के सामने के पूरे दांत शहीद हो जाते है साथ hi उसके मुँह से खून का फव्वारा निकलने लगता है..... दूसरे की गर्दन टूट के एक तरफ लटक जाती है..... दोनों उसी वक़्त बेहोश हो जाते हैं....

अपने सहथीयों के ऐसी हालत देख के एक पल के लिए शांती की भी पहात के हाथ में आ जाती है....

शांती : देख मेरी तुझसे कोई दुश्मनी नहीं है.... मुझे बस उस लड़की से मतलब है जिसकी वजह से आज मेरा भाई हॉस्पिटल में कोमा में पड़ा है.... तू हमारे बीच में से हैट जा और हम को उस लड़की को यहाँ से ले जाने दे....

प्रिंस एक बार शनाया को देखता है फिर....

प्रिंस : मैं खुद तुम दोनों के बीच में नहीं आना चाहता था.... मगर उस दिन तेरे भाई ने मजबूर किया और आज तू ने.... तू कुछ भी कर लेता तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता.... मगर इस मासूम की इज़्ज़त पे हाथ दाल के तू ने बहुत बड़ी गलती कर दी है.... जिसकी कोई माफ़ी नहीं.... अब तो बस तेरे पास एक hi रास्ता बचा है और वो है मार खा के अपने भाई की बगल में हॉस्पिटल में लेटना....

शांती : अबे तू जानता भी है की मैं कौन हूँ.... म्यूजिकल डॉन शांती.... मैं म्यूजिक बजा बजा के सब की बजता हूँ....

प्रिंस : तो क्यों न आज तेरे hi म्यूजिक पे तेरी hi बजा दी जाए.... जिस के बाद जब भी तुझे म्यूजिक सुनाई दे तुझे आज की मार याद आ जाए.... और तू फिर कभी किसी मासूम की इज़्ज़त के साथ खिलवाड़ करने से भी डरे.... बजाओ रे म्यूजिक....

प्रिंस की आवाज़ सुन के म्यूजिक शुरू हो जाता है और साथ hi शुरू हो जाती है उन गुंडों की धुलाई....

प्रिंस शैतानी स्माइल के साथ आगे बढ़ता है जिसे देख सब की हवा टाइट हो जाती है.....

फिर भी गुंडे तो गुंडे होते हैं वो कहाँ बाज़ आने वाले थे.... उनमे से एक प्रिंस को मारने के लिए पीछे से वार करता है.... प्रिंस हवा की तेज़ी से पीछे पलट ता है और लेफ्ट हाथ से उसके वार को ब्लॉक कर के एक पंच उसके पेट में मारता है.... वो उड़ता हुआ अपने दो साथियों पे गीता है.... वार इतना ज़बरदस्त होता है की उस गुंडे के मुँह से खून निकलने लगता है साथ hi जिनपे वो गिरा था उन्हें भी काफी चोट आयी थी....

फिर एक गुंडे के पास जा के एक हाथ से उसका हाथ पकड़ते है और दूसरे हाथ से उसकी गर्दन पकड़ के ऊपर उठा के खींचा के सर के बल ज़मीन पे पटक देता है.... नीचे गिरते hi उस गुंडे का सर पहात जाता है और उसमे से खून निकलने लगता है.... अपने साथियों की ऐसी दर्दनाक हालत देख के बाकी बचे गुंडे भाग जाते हैं... बस बच जाता है तो वो है शांती.... दर के मारे तो शांती की भी फटी पड़ी है मगर वो फिर भी अपने कमीने पैन से बाज़ नहीं आता वो प्रिंस के करीब जाता है और उस से माफ़ी मांगने का नाटक करते हुए चुपके से चाक़ू से प्रिंस पे वार करता है.... वक़्त रहते प्रिंस उसे देख लेता है और फ़ौरन पीछे हो के खुद को बचता है.... चाक़ू प्रिंस के सीने में तो नहीं लगता मगर हाँ उसके हाथ को ज़रूर ज़ख़्मी कर देता है....

प्रिंस को ज़ख़्मी देख शांती खुश हो जाता है और प्रिंस को गाली दे के बात करता है....

शांती : साले.... मुझे क्या तूने चुटिया समझ रखा है जो तू आएगा और इस शहर के सब से बड़े डॉन शांती भाई की बजा के चला जाएगा.... साले देख अब मैं तेरी कैसे बजता हूँ.... फिर इस कमीनी के साथ साथ तेरी माँ भी कैसे छोड़ता हूँ....

यही शांती की सब से बड़ी गलती साबित होती है.... उसने प्रिंस को उसकी माँ की गाली दे के अपनी मौत को दावत दे दी थी.... प्रिंस सब कुछ बर्दाश्त कर सकता है मगर जैसे hi कोई उसे माँ पे गाली देता है प्रिंस गुस्से से पागल हो जाता है....

प्रिंस बेहद गुस्से में आगे बढ़ के शांती को दिल खोल के पीटने लगता है.... वो उसे ऐसे मार रहा है जैसे की उसकी जान ले के hi दम लेगा.... शांती की चीखें पूरे कॉलेज में गूंजने लगती हैं.... शांती का पूरा जिस्म ज़ख्मों से भर जाता है उसके हाथ पेअर यहाँ तक की पसली की हड्डियां भी टूट चुकी हैं.... उसकी हालत ऐसी हो गयी है की वो अब मारा तो तब मारा... मगर प्रिंस है की न तो उसका गुस्सा काम हो रहा है और न hi उसके हाथ पेअर रुक रहे हैं.... वो शांती को मारता hi जा रहा है.... शांती अपनी जान बचने के लिए कभी प्रिंस के पैरों में गिर के रेहम की भीक मांगने लगता है.... तो कभी शनाया के.... मगर दोनों में से कोई भी उसे माफ़ करने को तैयार hi नहीं है....

लेकिन जब शनाया ये देखती है की अब अगर प्रिंस ने शांती को मारना बंद नहीं किया तो वो मर जाएगा.... ये देख वो फ़ौरन प्रिंस के पास जा के उसे रोकती है.... मगर प्रिंस उसे दूर झटक देता है.... तभी वहां कॉलेज के प्रिंसिपल आ जाते हैं.....

प्रिंसिपल : प्रिंस चोर दो उसे नहीं तो वो मर जाएगा....

प्रिंस : मरता है तो मर जाए.... साला जी के भी क्या कर लेगा.... बुरे काम hi करेगा या किसी मासूम की इज़्ज़त लूटेगा....

प्रिंसिपल : जो भी हो प्रिंस... इसे मार के क्यों अपने हाथ गंदे कर रहे हो.... इसे पुलिस के हवाले कर देते हैं....

तभी वहां पुलिस आ जाती है और सब का बयान ले के शांती और उसके गुंडे साथियों को वहां से ले जाती है....

प्रिंसिपल सब को क्लास में जाने का बोल के वहां से चले जाते हैं....

शनाया रोटी हुई प्रिंस के पास आती और उसके सीने से लिपट जाती है....

शनाया : प्रिंस आज तुम वक़्त पे नहीं आते तो अनर्थ हो जाता... मैं किसी को मुँह दिखने के काबिल न रहती.... और जब तुम मुझे देख के भी अनदेखा कर के जा रहे थे.... तब मुझे ऐसा लगा जैसे की मेरी रूह मुझसे जुड़ा हो रही है.... मगर मुझे यकीन था की चाहे जो हो जाए.... मेरा प्रिंस मुझे ज़रूर बचाएगा.... और मुझे बचा के तुम ने ये साबित कर दिया की मैं गलत नहीं थी... मेरा प्रिंस मेरा है.....

प्रिंस फ़ौरन उसे खुद से दूर कर के कहता है....

प्रिंस : तुम पहले भी गलत थी और आज भी गलत hi हो... तुम जैसी लड़की न कभी सुधरी थी और न hi कभी सुधरेगी.... उस दिन और आज जो तुम्हारे साथ हुआ वो तुम्हारी hi करनी का नतीजा था.... गलत काम का नतीजा हमेशा गलत hi होता है.... और रही बात मेरी तो तुम हे मैंने पहले भी कहा था और आज भी कहता हूँ... कान खोल के सुन लो.... मैं तुम जैसी आवारा लड़कियों का होना तो दूर की बात है उन्हें देखना भी पसंद नहीं करता.... तो मुझ से दूर रहो..... गलती से भी मेरे करीब आने की गलती न करना....

शनाया रट हुए : अगर इतनी hi नफरत करते हो मुझसे तो फिर मुझे बचाया hi क्यों....? उन्हें मेरी इज़्ज़त लूट के मारने क्यों नहीं दिया.... बोलो जवाब दो....

प्रिंस : मैंने तुम्हे नहीं बल्कि एक लड़की की इज़्ज़त बचायी है.... तुम्हारी जगह अगर कोई और भी होती तब भी मैं उसकी इज़्ज़त बचता.... लड़की की इज़्ज़त से बढ़ के कुछ नहीं.... यहाँ तक की मेरी जान भी नहीं.... जाते जाते एक तोहफा साथ लेती जाओ....

ये कह के प्रिंस अपने हाथ से बेहटा खून शनाया के चेहरे पे मॉल के कहता है....

प्रिंस : आज के बाद जब भी तुम आइना देखोगी तुम्हे अपने चेहरे पे मेरा खून नज़र आएगा.... जो तुम्हे ये याद दिलाता रहेगा की किसी की इज़्ज़त के साथ खेलना किसी मासूम को सतना उसे परेशान करना कितना गलत होता है.... जब बात अपनी इज़्ज़त पे आती है तो कैसा महसूस होता है.... जाओ चली जाओ यहाँ से और भूल के भी कभी मेरे सामने न आना.... दोस्त तो क्या तुम जैसी आवारा और घमंडी लड़की मेरी दुश्मन बनने के भी लायक नहीं है....

ये कह के प्रिंस अपने ज़ख़्मी हाथ पे अपना रुमाल बाँध के वहां से घर की तरफ चल देता है.... शनाया प्रिंस को आवाज़ देती रह जाती है मगर वो उसकी आवाज़ को सुन के भी अनसुना कर के निकल जाता है....

शनाया भी रोटी हुई अपने घर की तरफ चल देती है....

इधर सोना क्लास ख़तम होने के बाद अपने घर की तरफ चल देती है.... उसे कॉलेज में हुए हादसे के बारे में पता चलता है मगर जब उसे इस में शनाया का नाम सुन ने में आता है तो वो उसे इग्नोर कर देती है.... वो पूरी बात नहीं पता करती इस से उसे ये नहीं पता चल पाटा की शनाया को प्रिंस ने बचाया था....

वो कॉलेज से सीधे घर आती है... घर पहुंचते hi उसकी नज़र घर के उस हिस्से पे पड़ती है जिसे प्रिंस ने किराये पे लिया था.... वो ये सोच के उस तरफ चल देती है की शायद आज प्रिंस लौट आया हो.... और उसकी मुलाक़ात उस से हो जाए.... वहां जाने के लिए अभी वो आगे बढ़ी hi थी की तभी वहां उसके चाचा इमरान आ जाते हैं न चाहते हुए भी उनके साथ वो अपने घर के अंडर चली जाती है.... और फ्रेश होने के बाद अपने रूम में लगी सुलतान की तस्वीर से बातें करने लग जाती है.... पिछले 10 साल से वो घंटो रोज़ सुलतान की तस्वीर से बात करती आयी है.... रोज़ की तरह आज भी वो सुलतान की फोटो से बात करने लग जाती है और पूरे दिन में क्या क्या हुआ उसे बताते हुए अपनी डायरी में लिखने लगती है.....

इधर प्रिंस अपने घर आ जाता है.... अब तक उसकी हीलिंग पावर की वजह से उसके घाव भर गए थे.... घर पहुंच कर फ्रेश होने के बाद प्रिंस मुस्कान के साथ बैठ के बातें करने लग जाता है....

तभी वहां बाबा आ जाते हैं....

बाबा : कैसे हो प्रिंस....? और मुस्कान तुम....?

दोनों : ठीक हूँ....

प्रिंस : बाबा आप अचानक से यहाँ कुछ बात है क्या.....?

बाबा : क्यों मैं बिना बात क्र यहाँ नहीं आ सकता क्या....?

प्रिंस : आ सकते हैं मगर आज आपके के यहाँ आने की कोई ख़ास वजह है....

बाबा : ठीक कह रहे हो तुम..... मेरे यहाँ आने की एक बेहद ज़रूरी वजह है और वो ये की 7 दिन बाद तुम्हे मेरे साथ 3 महीने के लिए कैरो प्लेनेट जाना होगा वहां इस ब्रह्माण्ड में जितने भी फाइट के तरीके हैं उसे सीखने के लिया....

प्रिंस शॉकेड : 3 महीना....!!!! ये कुछ ज़्यादा नहीं है....

बाबा : ज़्यादा नहीं बल्कि काम है....

प्रिंस : मगर बाबा अभी मैं अपने परिवार वालों को ढूंढ भी नहीं पाया था की आप 3 महीने के लिए मुझे यहाँ से ले जाना चाहते हैं....

बाबा : ये तुम्हारे लिए अपने परिवार को ढूंढने से भी ज़्यादा ज़रूरी है... तुम्हे जल्द से जल्द तैयार होना होगा.... हर तरह से त्रिनेड होना होगा... ताकि अपने दुश्मनो का डट के मुक़ाबला कर सको.... ये कोई मामूली दुश्मन नहीं है बल्कि बेहद ताक़तवर दुश्मन जो काली शक्तियों के मालिक हैं.... जिसमे शैतान.... अघोरी.... पाताल लोक के हैवान.... वामपिरेस..... वरवोल्फ.... और जिन्नात के साथ साथ और भी बहुत से हैवान हैं..... तुम सब से मुक़ाबला करना है और उन्हें हराना है.... इनमे से कुछ के इलाकों में यहाँ तक की कुछ के अंडर तुम्हारी पावर्स हैं... जिन्हे तुम्हे हासिल करना है....

प्रिंस : मैं एक मामूली इंसान भला किऐसे इन हैवानो दरिंदों और शैतानो का मुक़ाबला करूँगा....

बाबा : वो तुम्हे वक़्त आने पे पता चलता जाएगा.....

प्रिंस : क्या मैं ये जान सकता हूँ की मेरी वो कौन सी पावर्स हैं जिन्हे मुझे हासिल करना है....

बाबा : तुम्हारी सब से बड़ी पावर्स जो है वो दो हिस्सों में बाटी हुई है... या ये कहना ज़्यादा ठीक होगा की उसे तुमने hi दो हिस्सों में बात था... और अपनी दोनों जान पारी और मलिका सुनहरी के अंडर उन्हें सुरक्षित कर दिया था.... जिन्हे तुम्हारे अलावा कोई हासिल नहीं कर सकता... पारी और मलिका सुनहरी को मारना तो दूर कोई उन्हें छू भी नहीं सकता.... तुमने जो सुरक्षा शैलद उसके जिस्म में डाला था वो बड़े से बड़े शैतान को उन तक पहुँचने नहीं देगा....

प्रिंस : बाबा एक बात मेरी आज तक समझ नहीं आयी.... वो ये की अगर कोई किसी को दिल ो जान से चाहता है तो वो उसकी जान लेने की कोशिश कैसे कर सकता है.... क्यों की प्यार तो अपने मेहबूब पे जान देना सिखाता है न की अपने मेहबूब की जान लेना....

बाबा : जो तुम कह रहे हो वो सच है मगर ये भी उतना hi सच है की बेइन्तेहाँ प्यार किसी पागलपन से काम नहीं है..... और जब प्यार बढ़ते बढ़ते इतना बढ़ जाता है की वो पागापन की हद पार कर जाता है तब तुम्हारा वो hi मेहबूब तुम्हे किसी और के साथ देख के बर्दाश्त नहीं कर पाटा..... उसे हमेशा इस बात का दर लगा रहता है की कहीं कोई तुम्हे उस से चीन न ले..... इस लिए वो तुम्हे सब से छुपा के रखना चाहता है.... ठीक ऐसा hi उन दोनों के साथ भी हुआ था.... जब दोनों ने तुम्हारे प्यार को एक दूसरे के साथ बात ते हुए देखा तो वो बर्दाश्त नहीं कर पायी और गुस्से और पागलपन में वो कर गयी जो उन्हें नहीं करना चाहिए था.... एक ने तुम्हारे दिल को कैद कर लिया तो दूसरे ने तुम्हारी रूह को....

प्रिंस : क्याआआआआ....? मगर क्यों....?

बाबा : उसी बेइन्तेहाँ प्यार भरे पागलपन की खातिर जो वो तुम से करती हैं....

प्रिंस : बाबा ये प्यार हो या पागलपन.... ये मेरी समझ के बाहर है.... मैं इसे प्यार नहीं मानता.... सच्चा प्यार तो हमेशा देना hi सिखाता है... न की लेना....

बाबा : सच कहा तुमने की सच्चा प्यार सिर्फ देना hi सिखाता है.... अपना सब कुछ अपने प्यार पे क़ुर्बान करना सिखाता है... जो तुम हमेशा से करते आये हो.... अपने सच्चे प्यार को साबित करने के लिए हर बार अपनी क़ुर्बानी देते आये हो....

प्रिंस : बाबा क्या वाकई में वो सब हुआ था जो आप कह रहे हैं.....?

बाबा : हाँ.... वो सब और साथ hi और भी बहुत कुछ हुआ था जिस से इस वक़्त तुम अनजान हो.... जल्द hi सब जान जाओगे.... वो कैसे और क्यों हुआ....? फिलहाल के लिए अपनी फाइटिंग की ट्रेनिंग और पावर्स को पाने के बारे में सोचो.... बाकी सब वक़्त पे चोर दो....

प्रिंस : क्या मैं जान सकता हूँ की वो कौनसी पावर्स हैं जो मुझे हासिल करनी है....??????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 113

बाबा : सच कहा तुमने की सच्चा प्यार सिर्फ देना hi सिखाता है.... अपना सब कुछ अपने प्यार पे क़ुर्बान करना सिखाता है... जो तुम हमेशा से करते आये हो.... अपने सच्चे प्यार को साबित करने के लिए हर बार अपनी क़ुर्बानी देते आये हो....

प्रिंस : बाबा क्या वाकई में वो सब हुआ था जो आप कह रहे हैं.....?

बाबा : हाँ.... वो सब और साथ hi और भी बहुत कुछ हुआ था जिस से इस वक़्त तुम अनजान हो.... जल्द hi सब जान जाओगे.... वो कैसे और क्यों हुआ....? फिलहाल के लिए अपनी फाइटिंग की ट्रेनिंग और पावर्स को पाने के बारे में सोचो.... बाकी सब वक़्त पे चोर दो....

प्रिंस : क्या मैं जान सकता हूँ की वो कौनसी पावर्स हैं जो मुझे हासिल करनी है....??????

अब आगे....

बाबा : जैसा की मैंने बताया तुम्हारी मैं पावर्स मलिका सुनहरी और पारी के अंडर है.... तुम्हारा सुरक्षा कवच तुम पहले hi पा चुके हो..... उसके अलावा तुम्हारी तलवार जिस से बिजली और आग दोनों निकलते हैं.... तुम्हारा धनुष जो एक बार में 1000 तीर चला सकता है.... तुम्हारे पंख जो तुम्हे जब चाहे जहाँ चाहे हवा में उदा के ले जा सकते हैं.... तुम्हारी दो धारी कतार जो इस ब्रह्माण्ड की किसी भी चीज़ को बड़ी आसानी से काट सकती है.... तुम्हारा जादुई लिबास जिसे पेहेन के तुम गायब हो सकते हो..... और तुम्हारा जिगरी दोस्त शेरा एक विशालकाय शेर जो तुम्हारी सबसे बड़ी ताक़त है.... जब भी तुम्हे उसकी ज़रुरत होगी वो तुम्हारे अंडर समां जाएगा.....

बाबा की बात सुन प्रिंस शॉकेड हो जाता है.....

बाबा : क्या हुआ तुम अचानक से शॉकेड क्यों हो गए.....?

प्रिंस शॉकेड : इतना बड़ा झटका देने के बाद पूछ रहे हैं की मैं शॉकेड क्यों हूँ.....? जिन और जितने पावर्स की आप बात कर रहे हैं उन्हें पाने में तो मेरी उम्र भी काम पद जायेगी.... ये कुछ ज़्यादा नहीं हो रहा है....?

बाबा : तुम्हारी जगह अगर ये बात और किसी ने की होती तो वो सही भी होता.... मगर तुम्हारे लिए ये कोई बड़ी बात नहीं है....

प्रिंस : क्यों बड़ी बात नहीं है.... मैं भी तो एक आम इंसान hi हूँ....

बाबा : किसने कहा की तुम एक आम इंसान हो....? तुम नेकी का वो फरिश्ता हो जिसे ऊपर वाले ने खुद अपने हाथों से बड़े प्यार से बनाया था.... और रही बात तुम्हारी पावर्स की तो वो तुम्हे खुद अपने दम पे हासिल की थी न की तुम्हे किसी ने दी थी.... ये इस ब्रह्माण्ड की वो पावर्स हैं जो इस ब्रह्माण्ड का संतुलन बनाने के लिए ज़रूरी है.... ये पावर्स जिसके भी पास होगी वो इस पूरे ब्रह्माण्ड पे राज करेगा..... अगर ये किसी गलत शख्स या फिर शैतान के पास चली जाए तो पूरा ब्रह्माण्ड उसका गुलाम बन जाएगा..... फिर हर तरफ मौत hi मौत नज़र आएगी और चारो तरफ शैतानो का hi राज होगा.... सब से बड़ी बात ये है की इन पावर्स को पाना जितना मुश्किल है उसे संभालना उस से कई ज़्यादा मुश्किल है.... उन पावर्स को पाके नेक से नेक फरिश्ता भी घमंड में पल भर में हैवान बन जाए..... मगर वो पावर्स तुम्हे न बदल सकीय.... तुम्हारे अंडर की अच्छाई नेक दिली और तुम्हारे प्यार भरे दिल ने तुम्हे बदलने नहीं दिया.... इस बात से चीड़ के और तुम्हारी पावर्स को हासिल करने के लिए शैतान के बादशाह अघोरा ने एक ऐसा माया जाल बिछाया जिसके शिकार तुम और मलिका सुनहरी हो गए.... उस माया जाल की वजह से तुम दोनों ऐसे एक दूसरे से अलग हुए की आज 5000 साल बाद भी मिल न पाए.....

प्रिंस : बाबा आप की कुछ बातें तो समझ आ रही हैं मगर कुछ बिलकुल नहीं.... कभी आप कहते हैं की मलिका और पारी ने मेरे साथ जो किया वो जलन और प्यार में अंधे हो के किया... और अब ये कह रहे हैं की ये सब शैतान का माया जाल है....

बाबा : मैंने जो भी कहा वो सच है.... दोनों hi बातें अपनी जगह सही है.... तुम्हे वो समझ इस लिए नहीं आ रही है क्यों की तुम्हे उन बातों के पीछे का पूरा सच नहीं पता.... जल्द hi सच तुम्हारे सामने होगा.... वो दिन किसी क़यामत से काम न होगा.... उस दिन के बारे में सोच के भी मेरी रूह कांप जाती है.... खैर बाद का बाद में देखेंगे.... फिलहाल 7 दिन बाद मेरे साथ चलने को तैयार रहना....

ये कह के प्रिंस के अंडर सवालों का जकीरा चोर के बाबा वहां से चले जाते हैं.... बाबा की बात सुन के जितना प्रिंस हैरान हुआ था उस से कई ज़्यादा हैरान मुस्कान हुई थी.... वो हैरत से प्रिंस को देखे जा रही थी और ये समझने की कोशिश कर रही थी की क्या वाकई में प्रिंस वो है जो बाबा ने कहा यानी नेकी का फरिश्ता या फिर उसके जैसा एक आम इंसान.....

इधर कॉलेज के बाद क्या हुआ चल के पता करते हैं..... प्रिंस से मार खाने के बाद शांती का क्या हाल है.....?

शांती बीएड पे बेहोश पड़ा हुआ है.... जब भी उसे होश आता वो दर के मारे बचाओ बचाओ कह के चीकने लगता और फिर बेहोश हो जाता..... उसके जिस्म की कुछ hi हड्डिया सही सलामत बची हुई हैं.... जो हालत उसकी प्रिंस ने की है उस से वो अगले 1 साल तक तो हॉस्पिटल के बीएड से उठने से रहा.... जब ये बात शांती के बाप और उसकी दोनों छोटी बहनो को पता चलती है तब वो फ़ौरन वहां के लिए निकल जाती हैं.....

ऑस्ट्रेलियाई डॉन दिनेश ठाकुर - शांती का बाप.... और प्रिंस के बिज़नेस राइवल जिब्रान का भाई....

कुसुम - शांती की छोटी बेहेन जो अपने डैड के साथ ऑस्ट्रेलिया में रहती है.... फिगर 36 - 32 - 38.... ये गुस्से की जितनी तेज़ है उतनी hi सेक्सी और खतरनाक भी..... इसे देखते hi कोई भी इसका दीवाना होने से खुद को रोक नहीं पाटा..... अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद ये ऑस्ट्रेलिया में एक कैसिनो और फाइट क्लब चलती है.... ये खुद भी किसी हार्डकोर फाइटर से काम नहीं.... इसके आगे बड़े से बड़े फिघ्टर्स पल भर में घुटने तक देते हैं.....

रिया - शांती की दूसरी बेहेन.... ये भी कुसुम की तरह बेहद खूबसूरत और सेक्सी है.... फिगर 34 - 30 - 36.... फर्क सिर्फ इतना है की कुसुम जितनी गुस्सैल और खतरनाक है..... रिया उतनी hi प्यारी.... मासूम और चंचल है.... अपने बाप और भाई के काले धंधे से इसे नफरत है जिस वजह से ये अपना घर चोर के अपने चाचा जिब्रान जो की एक नंबर का कमीना है उसे वो शरीफ समझ के उसके घर शिमला में रहती है..... इसकी और जिब्रान की बेटी सुहानी की बहुत जमती है.... दोनों एक hi कॉलेज में एक hi क्लास में पढ़ती है.... दोनों में इतना प्यार है की कोई भी इन्हे देख के ये नहीं कह सकता की ये दोनों चचेरी बहने हैं.... ये सगी बहनो से भी बढ़ के hain....ek दूसरे के कहने से पहले hi एक दूसरे के दिल की बात जान जाती हैं.... दोनों हर पल हर लम्हा साथ hi रहती हैं.... अपना सब कुछ दोनों साथ मिल के करती हैं.... यहाँ तक की अपनी हर एक चीज़ आपस में बात टी हैं चाहे वो दुःख हो या ख़ुशी....

शांती और गुलशन के बारे में जब दिनेश ठाकुर और ख़ास कर के कुसुम को पता चलता है तब वो फ़ौरन सुल्तानगढ आ जाते हैं.... शांती और गुलशन की हालत देख के दोनों को बहुत दुःख होता है साथ hi बेहद गुस्सा भी आने लगता उस शख्स पे जिसकी वजह से दोनों की ये हालत हुई है....

कुसुम गुस्से में शांती के साथी जुगनू से कहती है.....

कुसुम : कल सुबह तक उस कमीने की पूरी जनम कुंडली मुझे चाहिए.... ज़रा भी देर हुई की तुम में से कोई ज़िंदा नहीं बचेगा..... जाओ जा के पता करो की वो कमीना कौन है और उसकी हिम्मत कैसे हुई मेरे भाइयों पे हाथ उठाने की.... कल सुबह तक उसकी जन्मकुंडली के साथ उसे घसीट ते हुए मेरे पास ले के आओ.... उस कमीने को मैं अपने हाथों से मारूंगी....

कुसुम की बार सुन के सब दर जाते हैं और फ़ौरन प्रिंस के बारे में पता करने चल देते हैं....

इधर शनाया रोटी हुई अपने घर में दाखिल होती है और बिना किसी को कुछ कहे सीधे अपने कमरे में चली जाती है.... उसकी ऐसी हालत देख के उसके डैड फ़ौरन उसके पास जाते हैं.... और उस से उसके रोने की वजह पूछते हैं.... शनाया कॉलेज में हुए पूरी बात बताती है.... फिर ये कह के ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है....

शनाया : मेरा पहले प्यार अधूरा रह गया डैड.... मेरा पहला प्यार अधूरा रह गया.... जिसे मैं दिल ो जान से प्यार करती हूँ वो मुझसे नफरत करता है डैड नफरत....

स डैड अपने बेटी को गले से लगा के चुप करने की कोशिश करते हैं मगर वो है की चुप होने को तैयार hi नहीं.... बस रोये जा रही है....

स डैड : बीटा मुझे लगता है की तुझे ग़लतफहमी हो रही है.... वो तुझसे नफरत नहीं करता.... बस तेरी हरकतें उसे पसंद नहीं है....

शनाया रट हुए : डैड मैं मानती हूँ की अपनी पिछली ज़िन्दगी में मैंने बहुत सी गलतियां की हैं.... न जाने कितनो का दिल दुखाया है.... न किसी की परवाह की न hi इज़्ज़त.... मैंने आप को भी बहुत तकलीफ पहुंचाई है.... मगर अब मैं बदल चुकी हूँ.... अब मैं वो पहले वाली शनाया नहीं रही... जो हर बुरा काम अच्छा समझ के करती थी.... मैं बदल गयी हूँ डैड... मैं बदल गयी हूँ.... अब मुझे सब की परवाह रहती है.... मैं अब न तो किसी को परेशान करती हूँ और न hi किसी से लड़ती हूँ.... फिर क्यों प्रिंस मुझसे नफरत करता है.... जिसने मुझे बदला वो क्यों मेरे इस बदले हुए रूप को नहीं देखता....? क्यों उसे अपने लिए मेरा ये प्यार नज़र नहीं आता....? क्यों डैड क्यों....?

स डैड : जानती है इसकी सब से बड़ी वजह क्या है....? वो ये नहीं जानता की तू बदल चुकी है.... तू अब वो पहले वाली शनाया नहीं रही.... तूने वो सारे बुरे काम चोर दिए हैं... सिर्फ और सिर्फ उसके लिए... इस बात का एहसास तुझे प्रिंस को दिलाना होगा.... तुझे उसे अपने प्यार से अपने करीब लाना होगा.... ये वक़्त रोने का नहीं है बल्कि अपने सच्चे प्यार को पाने का है.... और तू कब से इतनी कमज़ोर हो गयी जो इतनी सी बात पे तू ने हार मान ली.... मेरी बेटी तो ऐसी न थी.... वो तो बड़े से बड़े तूफ़ान का डट के सामना किया करती थी.... चल उठ और ये रोना धोना बंद कर और प्रिंस को अपने बदले हुए रूप से वाकिफ करा के उसका प्यार हासिल कर इस से पहले की वो किसी और का हो जाए....

शनाया : नहीं डैड ये नहीं हो सकता.... वो सिर्फ मेरा है और मेरा hi रहेगा.... उसे मैं अपने प्यार का एहसास करा के hi दम लुंगी.... अब चाहे मुझे कुछ भी क्यों न करना पड़े प्रिंस के दिल में अपने प्यार को जगा के रहूंगी....

स डैड : ये हुई बात.... अब यूँ रोना बंद कर और फ्रेश हो के नीचे आ साथ में खाना कहते हैं....

डैड की बात सुन के शनाया फ्रेश होने वाशरूम में चल देती है.... वहीँ उसके डैड ऊपर वाले से अपनी बेटी को उसका प्यार पाने के लिए दुआ करने लगते हैं....

स डैड : हे ऊपर वाले मेरी बेटी को उसका प्यार पाने में मदत करना....

इधर घर पे मुस्कान गौर से प्रिंस को देखने लगती है जैसे की समझना छह रही हो.... की आखिर वो है कौन.....? जाने क्यों उसे प्रिंस की सूरत जानी पहचानी सी लगती है.... प्रिंस उसे किसी और का एहसास करता है.... प्रिंस को देखते hi उसे किसी की याद आ जाती है..... खुद को इस तरह घूरते देख प्रिंस मुस्कान से पूछता है.....

प्रिंस : अब तुझे क्या हुआ....? तू मुझे इस तरह क्यों घूर रही है....?

मुस्कान : घूर नहीं रही बल्कि तुम्हे पेहचाहने की कोशिश कर रही हूँ.... ये समझना छह रही हूँ की आखिर तुम हो कौन.....? तू वो हो जिसे मैं जानती हूँ.....? मेरा सबसे प्यारा दोस्त प्रिंस..... या फिर वो जिसके बारे में बाबा बता रहे थे.... नेकी का फरिश्ता जिसे ऊपर वाले ने अपने हाथों से बनाया है....

प्रिंस : यार तू मत शुरू हो जाना.... बाब की बातें सुन के पहले मेरे दिमाग घूर रहा है.... मैं खुद नहीं समझ पा रहा हूँ की आखिर मैं कौन हूँ.... प्रिंस... या फिर नेकी का फरिश्ता..... या फिर कोई और....?

मुस्कान : इस बात को पात करने का एक hi तरीका है और वो ये की तू मुझे अपने बारे में सब बता तब कुछ पता चले की तू है कौन.....? मगर हाँ याद रक् तुझे सब कुछ बताना है.... छोटी से छोटी बात भी..... सब कुछ....

प्रिंस : तू तो ऐसे तहकीकात कर रही है जैसे की मुस्कान न हो के जेम्स बांड हो....

मुस्कान : मुझे जेम्स बांड hi समझ ले..... चल अब जल्दी से सब कुछ बता....

प्रिंस : नहीं पहले खाना कहते हैं उसके बाद मैं तुझे सब कुछ बताऊंगा....

फिर सब साथ मिल के खाना कहते हैं.... उसके बाद प्रिंस मुस्कान को अपने बारे में सब कुछ बताने लगता है.... जब वो 8 साल का था तब से ले के अब तक का सब कुछ....

प्रिंस की बात सुन के कभी मुस्कान के होंठों पे हंसी आ जाती है.... तो कभी उसकी आँखें नाम हो जाती हैं.... कभी वो ख़ुशी से उछाल पड़ती है तो कभी उसका दिल तरप जाता है और उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं.... कभी वो ख़ुशी से पागल हो जाती है तो कभी वो पागलों की तरह रोने लगती है.... फिर आगे बढ़ के प्रिंस के सीने से कास के लिपट जाती है.... वो उसके सीने से लिपट के काफी देर तक रोटी रहती है.... प्रिंस उसे चुप करने की बहुत कोशिश करता है मगर वो चुप होने का नाम hi नहीं ले टी.... बड़ी मुश्किल से प्रिंस उसे चुप करता है....

कुछ देर बाद जब वो नार्मल होती है तब....

मुस्कान : प्रिंस तुमने वादा किया था मुझे अपने बारे में सब कुछ बताने का.... मगर तुमने सिर्फ आधी बात बताई.... तुमने अपने पैदा होने से ले के 8 साल तक के बारे में कुछ नहीं बताया.... न hi अपने परिवार वालों के बारे में.... तुम्हे माँ डैड कौन हैं तुम्हारे कितने भाई बेहेन हैं तुम्हारे परिवार में और कौन कौन है.... और वो सब कहाँ रहते हैं.....

प्रिंस : जब मुझे खुद उस सब के बारे में पता नहीं तो मैं तुम्हे कैसे बता सकता हूँ.... न hi मुझे ये याद है की मेरे बचपन से ले के मेरे 8 साल तक के होने के बीच क्या हुआ....? न hi मुझे अपने माँ डैड भाई बहिन या फिर अपने किसी परिवार वाले के बारे में कुछ पता है न hi उन में से किसी का चेहरा याद है.... मैं तो खुद उन्हें यहाँ ढूंढने आया था.... मुझे बस अपने और अपने परिवार वालों के बारे में इतना पता चल पाया है की हम यहाँ रहते थे....

मुस्कान : जब तुम्हे कुछ पता hi नहीं न hi कुछ याद है... न hi तुम्हारे पास उनकी कोई फोटो है.... तो फिर तुम उन्हें ढूंढोगे कैसे....?

प्रिंस : मेरे पास बस मेरे बचपन की तस्वीर है जिसके सहारे मैं अपने परिवार को ढूंढने आया हूँ.... और ये पता करने आया हूँ की आखिर वो कौनसी ऐसी वजह थी जिस ने मुझे मेरे परिवार से जुड़ा होने पे मजबूर कर दिया....

ये कह के प्रिंस मुस्कान को अपने बचपन की फोटो दिखता है.... जिसे देख वो बुरी तरह से चौंक जाती है....????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 114

मुस्कान : जब तुम्हे कुछ पता hi नहीं न hi कुछ याद है... न hi तुम्हारे पास उनकी कोई फोटो है.... तो फिर तुम उन्हें ढूंढोगे कैसे....?

प्रिंस : मेरे पास बस मेरे बचपन की तस्वीर है जिसके सहारे मैं अपने परिवार को ढूंढने आया हूँ.... और ये पता करने आया हूँ की आखिर वो कौनसी ऐसी वजह थी जिस ने मुझे मेरे परिवार से जुड़ा होने पे मजबूर कर दिया....

ये कह के प्रिंस मुस्कान को अपने बचपन की फोटो दिखता है.... जिसे देख वो बुरी तरह से चौंक जाती है....?????

अब आगे....

वो कभी प्रिंस के बचपन की फोटो देखती है तो कभी उसके चेहरे को.... उसे एक जतका सा लगता है.... प्रिंस के बचपन की फोटो देख के उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं.... वो उसे फ़ौरन पहचान लेती है....

मुस्कान का दिल चीख चीख के एक hi नाम लेता है और वो नाम है....

म दिल : Sultaaaaaaaaaaaaaaan.... हाँ ये सुलतान की फोटो है.... तो इसका मतलब प्रिंस hi सुलतान है.... मेरा सुलतान....

ये बात सोचते hi मुस्कान का दिल ख़ुशी से झूम उठता है.... वो आगे बढ़ के प्रिंस को अपने सीने से लगाना चाहती है मगर तभी अपने दिमाग की बात सुन के रुक जाती है....

म दिमाग : ये क्या करने जा रही है तू....? कहीं तू पागल तो नहीं हो गयी....? प्रिंस को बताने जा रही है की वो प्रिंस नहीं बल्कि सुलतान है....

म दिल : हाँ तो.... जो सच है वो hi तो बताने जा रही हूँ की वो प्रिंस नहीं बल्कि सुलतान है.... मेरा सुलतान....

म दिमाग : तुझे पता भी है की जब तू उसे ये बताएगी की वो प्रिंस नहीं बल्कि सुलतान है... तब क्या होगा....?

म दिल : क्या होगा....? सुलतान मुझे कास के अपने सीने से लगा लेगा....

म दिमाग : जी नहीं बल्कि वो तुझसे हज़ारों सवाल पूछने लग जाएगा.... क्या तू उसके सवालों के जवाब दे पाएगी....? नहीं तू उसके किसी भी सवाल के जवाब नहीं दे पाएगी.... क्या तू उसे ये बता पाएगी की बचपन में ऐसा क्या हुआ था जिसकी वजह से उसे यहाँ से जाना पड़ा....? उसे सालो तक अपने उस परिवार से दूर रहना पड़ा जिन्हे वो दिल ो जान से चाहता था.... नहीं तू उसे कुछ नहीं बता पाएगी.... बल्कि सच बता के तू उसे खुद से और भी ज़्यादा दूर कर देगी....

म दिल : तू ने जो कहा वो सही है मगर उसे बताना तो पड़ेगा न की वो सुलतान है.... मेरा सुल्तान....

म दिमाग : हाँ और साथ hi ये भी बता देना की उस मनहूस रात क्या हुआ था....? क्या किया था तुम सब ने मिल के उस मासूम के साथ.... जो तुम सब ने मिलके उसके साथ किया था वो कोई दरिंदा किसी गैर के साथ भी न करे जो तुम सब ने उस के साथ किया जिसे तू अपना कह रही है.... क्या अपनों के साथ वैसा किया जाता है.... वो सोच के भी मेरी रूह कांप जाती है....

म दिल : नहीं ये झूट है.... मैंने कुछ नहीं किया था.... मैं भला अपनी जान के साथ वो कैसे कर सकती थी.... नहीं कभी नहीं उस में मेरा कोई हाथ नहीं था....

म दिमाग : हाँ माना की उसमे तेरा कोई हाथ नहीं था.... मगर ये भी सच है की तू सुलतान के साथ वो होने से रोक सकती थी.... मगर तू ने ऐसा नहीं किया.... तू खामोश कड़ी देखती रही... ये भी तो एक तरह से गलत hi था.... तेरी ख़ामोशी की कितनी बड़ी कीमत चुकाई है सुलतान ने जानती है.... क्या कुछ नहीं सहा उस ने.... भरा पूरा परिवार होने के बावजूद सालों अकेले रह के अपनी ज़िन्दगी गुज़ारी है उसने.... किसकी वजह से तेरी ख़ामोशी की वजह से.... उस वक़्त तो सच बता देती तो वो नहीं होता जो हुआ..... न hi सुलतान वो सब सेहत और न hi अपने परिवार से दूर रहता.... सब तेरी hi वजह से हुआ है....

म दिल रट हुए : नहीं उसमे मेरी कोई गलती नहीं थी.... मैं मजबूर थी.... उस वक़्त मैं छह के भी कुछ नहीं कर पायी.... मैं दर गयी थी.... मैं क्या करती एक मासूम सी बच्ची थी मैं.... सुलतान के साथ वो होते देख मुझे भी तकलीफ हो रही थी.... मैं उसे रोकना चाहती थी.... मगर छह के भी उसे रोक न सकीय.... जिसकी मुझे सजा मिली.... सालों तक मैं बेजान सी अपाहिज सी ज़िन्दगी जीने को मजबूर हो गयी...... उस वक़्त और उस वक़्त से ले के आज तक जितना सुलतान ने सहा है..... मैंने भी उस से काम नहीं सहा.... वो अपनों से दूर हो गया तो मैं भी अपनों के साथ रह के उनसे दूर रहने पे मजबूर हो गयी.... उसकी तरह मैं भी अपनों के प्यार और साथ के लिए तरसती रही....

म दिमाग : ये कह लेने से तेरे गुनाह काम नहीं हो जाएंगे.... जो दर्द जो तकलीफ जो अकेलापन सुलतान ने सहा है वो बदल नहीं जाएगा.... सुलतान तो क्या तेरी वजह से सोना को भी बेइन्तेहाँ तकलीफ सहनी पड़ी.... आज तक वो न उस हादसे से उभर पायी है और न hi अपनी जान सुलतान को भूल पायी है.... ऐसा कोई दिल या रात न गुज़री हो जब उसने सुलतान को याद न किया हो.... उसके लिए तदपि न हो.... आज भी वो सुलतान की याद में तड़प रही है.... अपनी जान के इतने पास हो के भी सोना उस से दूर है.... ये सब तेरी वजह से हुआ है..... और तू कहती है की तू ने कुछ नहीं किया....

म दिल : हाँ मैंने कुछ नहीं किया.... उस में मेरी कोई गलती नहीं....

म दिमाग : अच्छा अगर ऐसा है तो बता दे सुलतान को.... वो सब बता जो उस मनहूस रात को हुआ था..... बता दे की तू मुस्कान नहीं बल्कि महक है उसकी जान उसकी सब से प्यारी बेहेन महक.... फिर देखते हैं की सुलतान क्या सोचता है और साथ hi क्या फैसला करता है तेरे बारे में.....

म दिल : नहीं कभी नहीं... मैं उसे कुछ नहीं बताउंगी.... कभी नहीं.... मैं ये नहीं चाहती की सच जान के वो मुझे गलत समझ के एक बार फिर से मुझसे दूर हो जाए....

म दिमाग : तो इसका मतलब तो उसे धोका देगी....

म दिल : मैंने उसे कोई धोका नहीं दिया था और न hi अब दे रही हूँ.... मैं अब उसे वो प्यार दूंगी जिसका वो हक़दार है.... सुलतान जान है मेरी..... उसे अब कभी भी खुद से दूर नहीं जाने दूंगी.... उसे इतना प्यार दूंगी की इस पूरे ब्रह्माण्ड में किसी ने किसी को इतना प्यार नहीं किया होगा.....

मुस्कान को यूँ रट देख प्रिंस परेशान हो जाता है...

प्रिंस : क्या हुआ मुस्कान.....? तुम अचानक से यूँ रोने क्यों लगी....?

प्रिंस की बात सुन के मुस्कान हड़बड़ा जाती है मगर फिर खुद को संभालते हुए कहती है....

मुस्कान : वो तुम्हारी बातें और तकलीफ के बारे में जान के रोना आ गया.....

अपने लिए मुस्कान का अपनापन देख प्रिंस आगे बढ़ के कास के उसे अपने सीने से लगा लेता है..... उसके आंसुओं को पोछने के बाद प्यार से उसके गाल को चूम के कहता है....

प्रिंस : मैं बहुत खुशकिस्मत हूँ जो मुझे तुम जैसी सच्ची और प्यारी दोस्त मिली....

मुस्कान : खुशकिस्मत तो मैं हूँ जो मुझे तुम जैसा सच्चा प्यारा और नेक दिल फरिश्ता मिला.... (फिर प्यार से उसकी आँखों में देख के कहती है....) मुझे कभी चोर के तो न चले जाओगे....?

प्रिंस : कोई पागल hi होगा जो तुम जैसी प्यारी और खूबसूरत पारी को चोर के जाएगा....

मुस्कान : नहीं ऐसे नहीं बल्कि मुझसे वादा करो चाहे जो हो जाए.... कैसे भी हालात क्यों न आ जाएँ.... तुम मुझे हमेशा इसी तरह प्यार करते रहोगे.... और हमेशा मेरा साथ दोगो.... वादा करो मुझसे तब मानूंगी....

प्रिंस मुस्कान के गाल चुम के प्यार से कहता है.....

प्रिंस : क्या तुम्हे अपने दोस्त पे इतना भी भरोसा नहीं....?

मुस्कान : तुम तो मैं खुद से ज़्यादा भरोसा करती हूँ मगर अपनी किस्मत पे ऐतबार नहीं.... वो जाने कब कहाँ कैसे धोका दे दे.... इस लिए मैं अपने दोस्त से वादा चाहती हूँ....

प्रिंस प्यार से उसकी आँखों में देखते हुए कहता है....

प्रिंस : मैं वादा करता हूँ.... चाहे जो हो जाए.... कैसे भी हालात क्यों न आ जाए.... मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगा.... कभी तुम्हे खुद से अलग नहीं करूँगा.... हमेशा इसी तरह तुम्हे प्यार और तुम्हारी केयर करता रहूँगा.... अब खुश....

प्रिंस की बात सुन के मुस्कान ख़ुशी से उछाल पड़ती है..... और प्रिंस के चेहरे को अपने हाथों में ले के उसके पूरे चेहरे को चूमने लगती है.... फिर उसके होंठों पे एक लम्बा सा किश करके उसके सीने से लिपट जाती है....

ठीक तभी वहां नेमत और ज़रा आ जाते हैं.... मुस्कान की हरकत देख दोनों बुरी तरह से जल जाते हैं....

ज़रा : देखो कमीनी को कैसे बेशर्मो की तरह मेरे प्रिंस को किश कर रही है....

मुस्कान : अपनी जान से लिपटने एयर उसे किश करने में शर्म कैसी....?

प्रिंस शॉकेड : अबे मैं तो तुम्हारा दोस्त था न ये जान कब से बन गया....?

मुस्कान : उसी पल से जिस पल मैंने तुम्हे देखा था....

मुस्कान की बात सुन के जहाँ ज़रा को गुस्सा आ जाता है वहीँ नेमत भी गुस्से में आ जाती है....

नेमत : खबरदार जो तुम दोनों कामिनियों ने मेरे माल को अपना कहा तो मार मार के तुम दोनों की हालत खराब कर दूंगी....

प्रिंस : माल....!!!!

नेमत : हाँ तू मेरा माल है और इनकी हिम्मत कैसे हुई मेरे माल पे हाथ लगाने की....

ज़रा : साली कमीनी ये कोई माल वाल नहीं बल्कि मेरे बचपन का प्यार और जवानी का साथी है....

बस फिर क्या था तीनो मिल के प्रिंस पे अपना हक़ ज़माने लगती हैं.... साथ hi उसको अपनी तरफ खींचने लगती हैं.... तीनो की बात सुन के प्रिंस का सर घूम रहा है.... उसे समझ नहीं आ रहा है की वो क्या करे.....? तीनो में से कोई भी किसी से काम नहीं.... न hi प्रिंस को चोर्ने को तैयार है.....

प्रिंस : अबे बस भी करो तुम तीनो.... ये क्या पागलपन है.... मैं तुम तीनो में की जागीर नहीं हूँ जो मेरी लिए लड़ रही हो....

ज़रा : सही कहा तू ने.... तू इनकी जागीर नहीं बल्कि मेरी जान है.... मेरे बचपन का प्यार प्रिंस.....

मुस्कान : आआह्ह्ह... बड़ी आयी मेरे प्रिंस को अपना कहने वाली... चल दूर हैट ये तेरा नहीं बल्कि मेरी जान है... लव ऑफ़ माय लाइफ....

नेमत : दूर हटो तुम दोनों ये तुम दोनों की जान वाना नहीं बल्कि मेरी रूह मेरा जिस्म यहाँ तक की मेरे जीने की वजह है....

बस फिर क्या था एक बार फिर से प्रिंस को लेके तीनो आपस में लड़ने लग जाती हैं....

प्रिंस उन्हें शांत करने की बहुत कोशिश करता है मगर कोई भी शांत होने को तैयार hi नहीं.... गुस्से में प्रिंस अपनी पावर्स से तीनो को हवा में उठा के एक दूसरे से अलग करता है.... प्रिंस को गुस्से में देख तीनो खामोश हो जाती हैं.... मगर अब भी गुस्से में एक दूसरे को घूर रही हैं.....

प्रिंस : बस बहुत हो गया अब एक और लफ्ज़ नहीं....

प्रिंस अभी आगे कुछ और कहने hi वाला होता है की तभी वहां बाबा आ जाते हैं....

बाबा : ये क्या प्रिंस.... ये मैं क्या देख रहा हूँ.... तुम अपनी पावर्स का इस्तेमाल इन मासूम बच्चियों पे कर रहे हो.... मुझे तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी....

प्रिंस : मासूम और ये तीनो.... जानते हैं ये मासूम बच्चियां क्या कर रही थी.... मुझ अकेले को तीन हिस्सों में बात रही थी....

तभी ज़रा बीच में बोलती है....

ज़रा : नहीं मुझे कोई हिस्सा नहीं बल्कि पूरा का पूरा प्रिंस चाहिए ओने पीेछे में...

ज़रा की बात सुन के जहाँ बाबा को हंसी आ जाती है वहीँ प्रिंस गुस्से से उसकी तरफ देख के कहता है....

प्रिंस : तू फिर बोली.... अब एक और शब्द नहीं.... और आप हंस के मेरा मज़ाक उदा रहे हैं न.... जाइये बात मत कीजिये मुझसे....

बाबा : अरे तू तो नाराज़ हो गया.... मैं हंस नहीं रहा हूँ बल्कि ये सोच रहा हूँ की जब इन तीनो को तू नहीं संभाल पा रहा है तो बाकी 11 को कैसे संभालेगा.... इन सब में सब से खतरनाक तो मल्लिका सुनहरी और पारी हैं.... उन दोनों को संभालना तो तेरे लिए नामुमकिन सा है.... ये सोच के मैं परेशान हो रहा हूँ....

प्रिंस : आप बता रहे हैं की डरा रहे हैं....?

बाबा : इस पूरे ब्रह्माण्ड में ऐसा कोई नहीं है जो प्रिंस को डरा सके.... वो अपनी जान से दर रहा है... जो उसे दिल ो जान से चाहती हैं....

प्रिंस : हाँ क्यों की वो जितना मुझे चाहती हैं उस से कई ज़्यादा मुझे सिर्फ अपने पास चाहती हैं... वो ये भी चाहती हैं की मैं सिर्फ उनका बन के रहूं.... अब आप hi बताइये की ये कैसे मुमकिन है.... जब मेरी किस्मत में 14 लड़कियों का प्यार लिखा है तो फिर मैं एक का हो के कैसे रह सकता हूँ.... ये बात ये मान ने को तैयार नहीं.... अब आप hi बताइये की मैं क्या करूँ....?

बाबा : इस में मैं तो क्या ऊपर वाला भी तेरी मदत नहीं कर सकता.... वो तेरी दिवानियाँ हैं उन्हें तुझे hi संभालना पड़ेगा....

बाबा की बात सुन के प्रिंस नाराज़ हो जाता है....

प्रिंस : आप इतनी रात गए मुझे ये बताने आये थे....?

बाबा : नाराज़ मत हो प्रिंस ये कोई गैर नहीं बल्कि तेरी अपनी हैं.... और मैं तेरा बाबा हूँ....

प्रिंस : जानता हूँ की आप मेरे बाबा हैं और ये तीनो मेरी जान हैं.... साथ hi एक दूसरे की सौतन भी.... और आज तक ऐसा कभी हुआ नहीं की किसी ने अपनी सौतन से लड़ाई न की हो.... सौतने होती हैं एक दूसरे से लड़ने के लिए... ये उनका जनम सिद्ध अधिकार है.... अब आप बताई क्या बताने आये थे....?

बाबा : बात ये है की शैतान और वामपिरेस तुमपे हुम्ला करने की फिराक में हैं.... ये हुम्ला कब कैसे और कहाँ होगा ये नहीं पता मगर होगा ज़रूर.... तो थोड़ा सावधान रहना....

प्रिंस : वो मुझपे हुम्ला क्यों करना छह रहे हैं... अभी तो मेरे पास मेरी पूरी पावर्स भी नहीं हैं...?

बाबा :हुम्ला सिर्फ मारने केलिए hi नहीं किया जाता... बल्कि अपने काबू में करने के लिए भी किया जाता है....

प्रिंस : मतलब....?

बाबा : मतलब ये की हो सकता है की वो किसी लड़की के रूप में तुमपे हुम्ला करे... जान लेवा वार नहीं बल्कि प्यार का ऐसा वार की जिसमे तुम गिरफ्तार हो जाओ और तुम्हे पता भी न चले.... वो तुम्हे अपने प्यार के जाल में फसा के तुम्हारी पावर्स को तुमसे हासिल करने की कोशिश करे.... क्यों की तुम्हारी पावर्स को तुम्हारी मर्ज़ी के अलावा कोई हासिल नहीं कर सकता.... और तुम उसे hi अपनी पावर्स दे सकते हो और वो ले सकती है जिसे तुम प्यार करते हो.....

प्रिंस : तो अब ये कैसे पता चलेगा की मैं आगे जिस से प्यार करूँगा वो कोई वैम्पायर या शैतान या फिर कोई और नहीं होगी.... जो मेरी पावर्स को हासिल करने के लिए मुझसे झूठे प्यार का नाटक कर रही होगी....?

बाबा : उन्हें तुम्हे खुद hi पहचानना होगा.... अपने दिमाग और पावर्स के दम पे तुम्हे उनके प्यार की परख करनी होगी.... की वो कौन हैं और उनका प्यार झूठा है की सच्चा....

बाबा की बात सुन के प्रिंस अपना सर पीट लेता है.....

प्रिंस : यार ये क्या मुसीबत है.... एक प्रॉब्लम ख़तम नहीं होती की दूसरी सर पे सवार हो जाती है....

बाबा : फिलहाल तो अपनी तीनो प्रेमिकाओं को नीचे उतारो जिन्हे तुमने हवा पे सवार कर रखा है.....

बाबा की बात सुन के प्रिंस तीनो को ज़मीन पे उतार देता है....

फिर बाबा के जाने के बाद चारो खाना खा के सो जाते हैं.... ये अलग बात है की प्रिंस के साथ सोने की लिए भी तीनो झगड़ा करने से बाज़ नहीं आयी... मगर प्रिंस तीनो को उनके रूम में भेज के अपने रूम में सो जाता है....

सुबह जब उसकी आँख खुलती है तो वो बुरी तरह से चौंक जाता है.... इस वक़्त बीएड पे वो अकेला नहीं है बल्कि उसके साथ वो तीन देवियाँ हैं जो रात उसके लिए एक दूसरे से लड़ रही थी.... तीनो प्रिंस को कास के जकड के सो रहो हैं.... ऐसी की अगर उनमे से किसी ने प्रिंस को खुद से अलग किया तो दूसरी उसे वहां से ले उड़ेगी.... अपनी लिए उनका प्यार देख प्रिंस को उनपे बेहद प्यार आने लगता है..... वो आगे बढ़ के एक एक कर के तीनो के होंठों को चूम के उन्हें उठता है..... तीनो एक बार फिर से झगड़ने लगती हैं..... बड़ी मुश्किल से प्रिंस उन्हें रोकता है....

प्रिंस : यार मुझे समझ नहीं आता की तुम तीनो की आखिर प्रॉब्लम क्या है....? तुम इस बात से डर्टी हो न की कहीं मुझे तुमसे कोई चीन न ले.... तुम्हे अपने अलावा किसी और पे भरोसा नहीं है.... यही बात है न....

प्रिंस की बात सुन के तीनो हाँ में अपनी गर्दन हिला देती हैं.....

प्रिंस : बंद करो यूँ बिना बात के लड़ना.... और एक दूसरे पे शक करना.... तुम्हे क्या लगता है..... तुम तीनो को इस तरह लड़ते देख मुझे अच्छा लगता है.... नहीं मुझे बेहद तकलीफ होती है जब तुम तीनो आपस में यूँ लड़ती हो और एक दूसरे को चोट पहुंचती हो.... मुझे ऐसा लगता है जैसे की मेरे दिल का एक हिस्सा मेरे दिल के दूसरे हिस्से को ज़ख़्मी कर रहा है.... जितना दर्द तुम नहीं होता उस से हज़ार गुना ज़्यादा दर्द मुझे महसूस होता है.... मेरा दिल तड़प के रो पड़ता है.... मैं अपने जिस्म पे हज़ार ज़ख्म बर्दाश्त कर सकता हूँ मगर तुम तीनो पे एक आंच भी आ जाए ये मैं कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता..... यार एक दूसरे पे न सही काम से काम जिस से प्यार करने का दावा करती हो उसपे तो यकीन करो.... मैं वादा करता हूँ तुम में से किसी को मैं न कभी छोड़ूंगा और न hi तुमपे कोई तकलीफ आने दूंगा.... तुम्हारे हिस्से का पूरा प्यार दिल खोल के हर एक पे लुटाऊंगा.... यार बात को समझो.... मैं छह के भी किसी एक का होक नहीं रह सकता... ये मेरी किस्मत में लिखा है.... और किस्मत के लिखे को कोई नहीं बदल सकता.... न तुम न मैं और न hi कोई और.... अब प्लीज मेरा यकीन करो और लड़ना बंद करो.... अब ये फैसला तुम्हे करना है की तुम तीनो क्या चाहती हो.... आपस में लड़ के मुझे तकलीफ पहुंचा के इसी तरह अपनी ज़िन्दगी गुज़ारना या फिर इस सच को मान के की मेरी ज़िन्दगी में तुम्हारे अलावा भी कोई और है उसे अपना के मेरे साथ प्यार भरी ज़िन्दगी गुज़ारना....

प्रिंस की बात सुन के तीनो की आँखें नाम हो जाती हैं और तीनो एक साथ एक hi बात कहती हैं....

तुम्हारे साथ अपनी ज़िन्दगी गुज़ारना.....

प्रिंस : तो फिर वादा करो की तुम तीनो अब कभी नहीं लड़ेगी....

तीनो : वादा....

तीनो के मुँह से वादा सुन के प्रिंस अपनी बाहें फैला के उन्हें अपनी बाहों में सामने का इशारा करता है....

बस फिर क्या था तीनो एक बार तिरछी निगाह से एक दूसरे को घूर के देखती हैं और फिर प्रिंस पे छलांग लगा के उसके सीने से लिपट जाती हैं.... प्रिंस लड़खड़ा के पीछे बीएड पे गिर जाता है.... और इस बात को समझ जाता है की सिर्फ उसकी बात रखने के लिए तीनो ने हाँ कहा है.... मगर अंडर से तीनो अब भी अपनी जान को किसी दूसरे के साथ नहीं देखना चाहती.....

प्रिंस मन में : यार ये मुमकिन hi नहीं की कोई भी प्रेमिका अपने प्रेमी को किसी और के साथ देख के खुश रहे.... दूसरी लड़की से जलना उसका जनम सिद्ध अधिकार है.... अपने प्यार को यूँ बात ते देख वो कभी खुश नहीं रह सकती.... हमेशा वो इसी फिराक में लगी रहेगी की उसके प्रेमी का सारा प्यार सिर्फ उसी के हिस्से में आये.... यार जब सिर्फ इन तीनो को संभालने में मेरे हाल बुरा बना हुआ है तो सोचो की जब पूरी 14 एक साथ मेरे सामने होंगी जाने मेरा क्या होगा....? हे उपरवाले अब बस एक तेरा hi सहारा है बचा लेना....

फिर प्रिंस तैयार हो के नेमत के साथ कॉलेज निकल जाता है..... और ज़रा नई कंपनी के काम में लग जाती है साथ hi प्रिंस के परिवार वालों का पता करने के लिए अपने आदमी भी लगा देती है....

इधर कॉलेज पहुँचने के बाद प्रिंस नेमत को क्लास में जाने को बोल के खुद कैंटीन की तरफ चल देता है.... वहां पहुँचते hi वो सामने का नज़ारा देख बुरी तरह से चौंक जाता है....?????
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 115

प्रिंस मन में : यार ये मुमकिन hi नहीं की कोई भी प्रेमिका अपने प्रेमी को किसी और के साथ देख के खुश रहे.... दूसरी लड़की से जलना उसका जनम सिद्ध अधिकार है.... अपने प्यार को यूँ बात ते देख वो कभी खुश नहीं रह सकती.... हमेशा वो इसी फिराक में लगी रहेगी की उसके प्रेमी का सारा प्यार सिर्फ उसी के हिस्से में आये.... यार जब सिर्फ इन तीनो को संभालने में मेरे हाल बुरा बना हुआ है तो सोचो की जब पूरी 14 एक साथ मेरे सामने होंगी जाने मेरा क्या होगा....? हे उपरवाले अब बस एक तेरा hi सहारा है बचा लेना....

फिर प्रिंस तैयार हो के नेमत के साथ कॉलेज निकल जाता है..... और ज़रा नई कंपनी के काम में लग जाती है साथ hi प्रिंस के परिवार वालों का पता करने के लिए अपने आदमी भी लगा देती है....

इधर कॉलेज पहुँचने के बाद प्रिंस नेमत को क्लास में जाने को बोल के खुद कैंटीन की तरफ चल देता है.... वहां पहुँचते hi वो सामने का नज़ारा देख बुरी तरह से चौंक जाता है....????

अब आगे....

जब प्रिंस कैंटीन की तरफ जाता है तो सामने का नज़ारा देख बेहद गुस्से में आ जाता है... ठीक उसी वक़्त शनाया का भाई और उसके डैड वहां पहुँच जाते हैं.... कुछ गुंडे शनाया को परेशान कर रहे हैं उसे देख इन दोनों को भी बेहद गुस्सा आ जाता है... गुस्से में वो आगे बढ़ के वहां जाने hi वाले होते हैं की तभी प्रिंस को देख शनाया का भाई आयुष अपने डैड को आगे जाने से रोकता है....

स डैड : गुंडे तेरी बेहेन को परेशान कर रहे हैं उसे हमारी ज़रुरत.... वहां जा के अपनी बेहेन को बचने के बजाये तू मुझे रोक रहा है....

आयुष : हाँ डैड मैं आप को रोक रहा हूँ.... हम को वहां जाने की कोई ज़रुरत नहीं है.... जानते हैं क्यों.....? क्यों की शनाया को बचने वाला आ गया है.... उसके रहते शनाया को कोई छू भी नहीं सकता उसे नुक्सान पहुंचना तो बहुत दूर की बात है....

स डैड : कहीं तू ये तो नहीं कहना छह रहा है की ये....

आयुष : हाँ डैड ये और कोई नहीं बल्कि प्रिंस hi है..... जब तक ये शनाया के साथ है उसे कोई छू भी नहीं sakta.....Prince न कभी खुद शनाया को कभी कोई नुक्सान पहुंचाएगा और न hi कभी किसी और को उसे नुक्सान पहुँचाने देगा..... आप बस देखते जाइये की वो कैसे इन गुंडों की जैम के पिटाई करता है.....

दोनों दूर से सब देखने लगते हैं....

सामने का नज़ारा देख प्रिंस अपना सर पीट लेता है और बेहद गुस्से में आगे जा के शनाया का हाथ पकड़ के उसे अपनी तरफ खींच के कहता है....

प्रिंस : आखिर तेरी प्रॉब्लम क्या है.....? तू क्यों बार बार वो hi काम करती है जिस से मुझे चीड़ है..... तुझे एक बार में बात समझ नहीं आती क्या.....? क्यों रोज़ किसी न किसी से लड़ाई करती है....? क्युन्न्न्नन्न्न्नन....? और फिर मुझे आना पड़ता है तुझे बचने के लिए.... तुझे क्या लगता है तुझे बचाना के अलावा मेरे पास और कोई काम नहीं है क्या....? हाँ.... बोल न बोलती क्यों नहीं.... वैसे तो बहुत बोलती है अब तुझे क्या हो गया....? तू चुप क्यों हो गयी....?

अपने लिए प्रिंस के दिल में इतनी फ़िक्र देख उसे बेहद ख़ुशी हो रही है.... प्रिंस की बात सुन के प्यार से उसे देख के मुस्कुराये जा रही है....

प्रिंस : मैंने तुझे मुस्कुराने को नहीं कहा बल्कि सवाल का जवाब देने को कहा है....

अभी प्रिंस ने इतना hi कहा था की तभी दिनेश ठाकुर ( शांती का बाप ) के गुंडे जिन्हे शनाया और प्रिंस के बारे में पता करने और उन्हें उठा के लाने के लिए ( शांती की बेहेन ) कुसुम ने भेजा है....

ग 1 : अबे तू कहाँ से बीच में आ गया बे.... चल दूर हैट और हम को इसे उठा के ले जाने दे....

प्रिंस गुस्से में खींच के एक झन्नाटेदार थप्पड़ उसे रसीद करता है....

Chataaaaaaaaaaaaaak.....

वो गुंडा उड़ता हुआ दूर जा गिरता है.... उसे दिन में तारे नज़र आने लगते हैं साथ hi उसके कान से खून निकलने लगता है....

प्रिंस उसकी तरफ इशारा कर के गुस्से में कहता है....

प्रिंस : साले दिखाई नहीं देता... मैं बात कर रहा हूँ न.... जब तक मेरी बात ख़तम नहीं हो जाती कोई बीच में नहीं आएगा....

फिर शनाया की तरफ घूम के कहता है...

प्रिंस : तू क्या मुस्कुराये जा रही है.... मैंने तुझसे कुछ पुछा था उसका जवाब दे....

प्रिंस को गुस्से में देख और उसकी बात सुन के शनाया की मुस्कराहट और गहरी हो जाती है....

शनाया प्यार से प्रिंस को देखते हुए कहती है....

शनाया : तुम गुस्से में और भी ज़्यादा क्यूट और प्यारे लगते हो....

शनाया की बात सुन के....

प्रिंस : तेरा कोई स्क्रू ढीला है क्या....? मैं तुझसे क्या पूछ रहा हूँ और तू क्या कह रही है....?

अभी प्रिंस ने इतना hi कहा था की तभी दूसरा गुंडा अपने साथी की हालत देख उसे मारने के लिए आगे आता है.... वो प्रिंस को मारने hi वाला होता है की तभी प्रिंस उसका हाथ पाकर के एक रिवर्स किक उसके पेट में मारता है.... जिस से उस गुंडे की चीख निकल जाती है.... वो अपना पेट पकड़ के वहीँ बैठ जाता है....

प्रिंस : सालो एक बार में बात समझ नहीं आती क्या....? मैंने कहा न की मैं इस लड़की से बात कर रहा हूँ मुझे बीच में डिस्टर्ब मत करो.... मगर नहीं तुम कमीनो को कुछ सुन न hi नहीं है.... ये मेरी लास्ट वार्निंग है तुम कमीनो के लिए.... जब तक मेरी बात पूरी नहीं हो जाती कोई बीच में नहीं आएगा.... और अगर आया तो फिर उसका क्या हाल होगा वो तो मैं खुद भी नहीं बता सकता....

इतना कह के अभी प्रिंस शनाया से बात करने के लिए पलटा hi था की तभी एक गुंडा पीछे से आ के प्रिंस की पीट के बेसबॉल स्टिक से ज़ोर से मारता है.... बेस बॉल स्टिक टूट जाती है.... सब हैरत से कभी उस स्टिक के देखते हैं तो कभी प्रिंस को...

प्रिंस शनाया से कहता है : तू बस 2 मं रुक इन कमीनो की बंद बजा के मैं तुझसे बात करता हूँ.....

फिर प्रिंस पीछे मुद के बेहद गुस्से में उन गुंडों की जैम के धुलाई करने लगता है..... देखते hi देखते सब खून से लतपथ ज़मीन पे बेहोश नज़र आते हैं.... बस एक को चोर के....

प्रिंस : सुन बे 2 मिनट्स के अंडर इन सब को ले के यहाँ से निकल ले 2 मिनट के ऊपर एक पल के लिए भी तू यहाँ रुका या फिर इनमे से कोई मुझे यहाँ दिखा तो फिर अभी तो सब बस बेहोश हैं जल्द hi इनके साथ तेरा भी नर्क का टिकट काट व दूंगा....

प्रिंस का इतना कहना था की तभी वो गुंडा जल्दी से अपने साथियों को जैसे तैसे गाडी में भर के वहां से 9 2 11 हो जाता है....

प्रिंस : हाँ अब तू ये बता की आखिर तेरी प्रॉब्लम क्या है....? रोज़ तुझे कोई न कोई पन्गा लेना ज़रूरी है क्या.....? और तो और जब मैं कॉलेज आता हूँ तभी hi गुंडे तुझपे हुम्ला करते हैं.... जान सकता हूँ की ये इत्तेफ़ाक़ है या फिर.... वैसे तुझे और तेरे भाई को लड़ाई झगडे के अलावा और कोई काम नहीं है क्या....? वैसे तेरा वो इडियट भाई है कहाँ.....?

ये कह के प्रिंस इधर उधर देखने लगता है.... उसे वहीँ थोड़ी दूर आयुष नज़र आ जाता है.... प्रिंस इशारा कर के उसे अपने पास आने को कहता है... मगर आयुष दर के मारे न में अपनी गर्दन हिला देता है....

स डैड : अरे जा न देख तुझे बुला रहा है....

आयुष : नहीं डैड वो गुस्से में पता नहीं मुझे भी उन गुंडों के जैसे मारने लगे....

स डैड : तेरी जगह अगर मैं होता तो ज़रूर जाता.... एक सच्चा और नेक दोस्त पाने के लिए अगर थोड़ी मार कहानी भी पड़े तो उसमे कोई प्रॉब्लम नहीं..... चल जा...

प्रिंस : अबे साले आता है की मैं वहां आऊं....

आयुष डरते डरते वहां चला जाता है....

आयुष के वहां पहुँचते hi प्रिंस खींच के एक थप्पड़ उसके गाल पे रसीद करता है....

Chataaaaaaaaaaaaaak.....

आयुष अपने गाल सहलाते हुए....

आयुष : अबे मैंने क्या किया जो मुझे यूँ मार रहा है....?

प्रिंस : साले वो hi तो प्रॉब्लम है की जो तुझे करना चाहिए वो तू करता नहीं और जो नहीं करना चाहिए वो hi करता है.... साले जब भी तेरी बेहेन को गुंडे परेशान करने आते हैं ठीक उसी वक़्त तू गायब हो जाता है.....

आयुष : तू है न शनाया की जान उसकी मदत करने के लिए....

प्रिंस : क्या कहा बे... साले तुम दोनों भाई बेहेन रायता फैलाओ और उसे साफ़ मैं करूँ क्यों....? मुझे और कोई काम नहीं है क्या....? अब से तुम दोनों किसी भी पंगे में नज़र आये न तो वो गुंडे तो तुम्हे बाद में मारेंगे पहले मैं तुम दोनों की बंद बजाऊंगा....

इस से पहले की आयुष कुछ और कहता शनाया प्रिंस के बेहद करीब जा के उसकी आँखों में आँखें दाल के कहती है....

शनाया : मारो मुझे....

प्रिंस : क्या!!!!

शनाया : तुम मुझे मारने की बात कर रहे थे न.... तो चलो मारो मुझे.... मैं आज देखना चाहती हूँ की मुझे बचने वाला कैसे मुझे मारता है.... चलो मारो मुझे....

प्रिंस : तेरा स्क्रू ढीला hi नहीं बल्कि गिर गया है.... तभी बहकी बहकी बातें कर रही है.... अबे ले के जा इसे....

शनाया : नहीं जब तक तुम मुझे मारते नहीं मैं न खुद यहाँ से जाउंगी और न hi तुम्हे यहाँ से जाने दूंगी....

प्रिंस : यार तेरी प्रॉब्लम क्या है...? क्यों बिना बात के बात बढ़ा रही है.... देख इस वक़्त मैं बहुत गुस्से में हूँ मैं सच में तुझे थप्पड़ मार दूंगा.... इस से पहले की मेरा गुस्सा और तेज़ हो जाए अपने भाई के साथ यहाँ से चली जा....

प्रिंस की बात सुन के शनाया गौर से प्रिंस की आँखों में देखती है फिर अचानक से उसके करीब जा के उसका चेहरा अपने हाथों में लेके उसके होंठों को अपने मुँह में ले के उसे चूसने लगती है.... उसकी इस हरकत पे सब चौंक जाते हैं इस से पहले की प्रिंस कोई रियेक्ट करता शनाया उसे किश करने के बाद उसे ी लव यू कह के उसके जवाब का इंतज़ार करने लगती है.....

शनाया : ी लव यू....

शनाया की इस हरकत पे प्रिंस को गुस्सा तो बहुत आता है मगर जाने क्यों वो उसे कुछ कहे बिना hi वहां से चला जाता है... शनाया उसे रोकने की बहुत कोशिश करती है मगर प्रिंस है की उसकी एक नहीं सुनता....

वो वहां से सीधा क्लास में चला जाता है.... प्रिंस के वहां से जाती hi शनाया की आँखों से आंसू बहने लगते हैं वो रोने लगती है.... उसके डैड आके उसे संभालते हैं....

शनाया : वो चला गया डैड उसने मेरी बात का जवाब भी नहीं दिया.... बिना कुछ कहे hi चला गया.... वो मुझसे प्यार नहीं करता डैड.... वो मुझसे प्यार नहीं करता....

ये कह के शनाया अपने डैड के सीने से लिपट के रोने लगती है....

डैड उसे चुप करते हुए कहते हैं...

स डैड : नहीं बीटा ऐसी बात नहीं है... अगर उसे तुमसे प्यार नहीं होता तो जो हरकत तुमने की थी उसके लिए तुम्हे ज़रूर मारता.... मगर उसने ऐसा नहीं किया....

शनाया : तो फिर वो चला क्यों गया....?

स डैड : वो इस लिए चला गया की उसने ये उम्मीद नहीं की थी की तुम वैसा कुछ करोगी.... हो सकता है की इस वक़्त वो नाराज़ है जब उसकी नाराज़गी दूर हो जायेगी तब वो ज़रूर तुम्हारे पास लौट आएगा और फिर तुमसे बात भी करेगा और अपने प्यार का इज़हार भी करेगा....

शनाया : सच बाबा ऐसा होगा न....

स डैड : हाँ मेरी बच्ची... ऐसा ज़रूर होगा.... अब चल घर चलते हैं....

इधर पूरा दिन प्रिंस शनाया के बारे में सोचता रहता है.... क्लास में क्या चल रहा है उसे कुछ होश hi नहीं.... क्लास ख़तम होने के बाद वो नेमत के साथ घर लौट आता है.... दोपहर का खाना खा के वो अपने रूम में आराम कर रहा होता है की तभी उसका मोबाइल बजने लगता है....

प्रिंस : Hello.... जी कौन.... ? मैंने आपको पहचाना नहीं....

स डैड : मैं मला कुंवर सिंह बोल रहा हूँ.... मैं तुमसे मिलना चाहता हूँ तुमसे कुछ बात करनी है.... तो क्या तुम आज शाम मेरे घर आ सकते हो....?

प्रिंस : जी मैं तो आपको जानता भी नहीं फिर.....

स डैड : घर आ जाओ जान पहचान भी हो जायेगी और बातें भी....

प्रिंस : ठीक है....

स डैड : मैं तुम्हे अपना एड्रेस मश्ग कर देता हूँ.... शाम ठीक 8 बजे आ जाना....

प्रिंस : जी ठीक है मैं आ जाऊंगा...

ठीक तभी नेमत रूम में आती है....

नेमत : क्या हुआ प्रिंस किसका फ़ोन था और कहाँ जाने के बात कर रहे थे....?

प्रिंस : वो कोई मला कुंवर सिंह हैं उन्होंने मुझे शाम 8 बजे अपने घर बुलाया है.... उन्हें मुझसे कुछ बात करनी है....

नेमत : मला को तुमसे क्या काम आ गया....?

प्रिंस : वो तो वहां जाने के बाद hi पता चलेगा....

रात 8 बजे प्रिंस मला के घर पहुँच जाता है.... वहां वो मला से मिल hi रहा होता है की तभी शनाया को ऊपर से नीचे हॉल की तरफ आते देखता है.... शनाया को देख के प्रिंस को जितनी हैरानी होती है उतनी ज़्यादा ख़ुशी शनाया को प्रिंस को अपने घर में देख के होती है....

मला : प्रिंस इस से मिलो ये मेरी बेटी शनाया है....

इतना सुन्ना hi था की प्रिंस बिना कुछ कहे वहां से बहार की तरफ चल देता है....

प्रिंस को यूँ बिना कुछ कहे जाते देख शनाया दौर के उसके पास जाती है और उसका हाथ पकडकड के उसे रोकती है..... मगर प्रिंस उसका हाथ झटक के वहां से बहार की तरफ चल देता है.... शनाया उसे बहुत रोकने की कोशिश करती है मगर प्रिंस उसकी एक नहीं सुनता है....

प्रिंस के जाते hi शनाया बेहद दुखी हो जाती है उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं वो रोटी हुई अपने रूम में चली जाती है....

वहीँ स डैड फ़ौरन बहार जा के प्रिंस को रुकने को कहते हैं....

स डैड : प्रिंस प्लीज रुक जाओ.... मुझे तुमसे बात करनी है....

प्रिंस : मुझे आपसे कोई बात नहीं करनी....

स डैड : प्रिंस बस 10 मिनट्स.... प्लीज.... मैं तुमसे उम्र में बड़ा हूँ काम काम इस नाते तो रुक जाओ प्लीज....

प्रिंस : ठीक है.... मगर आप को जो भी बात करनी है वो यहीं कीजिये.... मैं आपके घर में नहीं जाऊँगा....

स डैड : घर में न सही काम से काम वहां गार्डन में बैठ के तो बात कर सकते हैं न....

प्रिंस : आप को जो कहना है यहीं कहिये.... नहीं तो मैं जा रहा हूँ....

स डैड : ठीक है मगर वादा करो पूरी बात सुने बगैर यहाँ से नहीं जाओगे.... मैं तुमसे वादा करता हूँ किसी बात के लिए तुम्हे मजबूर नहीं करूँगा.... बूत प्लीज एक बार मेरी पूरी बात सुन लो....

प्रिंस : ठीक है कहिये....

स डैड : जैसा की तुम जानते हो मेरे बच्चे तुम्हारे साथ कॉलेज में पढ़ते हैं.... वो कैसे हैं....? क्या करते हैं...? उनके दोस्त कौन हैं और दुश्मन कौन....? उनमे कितनी बुराइयां हैं.... सब कुछ....

प्रिंस : ..........

स डैड : मगर वो हमेशा से ऐसे न थे... वो भी तुम्हारी तरह hi प्यारे और नेक दिल थे...

प्रिंस : अच्छा मज़ाक कर लेते हैं आप.... वो और नेक दिल.... ऐसा कौनसा बुरा काम है जो वो नहीं करते... शराब पीना.... लोगों को परेशान करना.... बिना बात के झगड़ा करना... रात रात भर घर से बहार रहना.... ऐय्याशी करना... दुनिया में शायद hi कोई ऐसा बुरा काम नहीं जो वो नहीं करते हैं....

स डैड : हाँ ये सच है मगर आधा सच.... वो हमेशा से ऐसे न थे.... न hi आयुष और न hi शनाया....

फ्लैशबैक.....

स डैड : बात तब की है जब मेरे बच्चे बहुत छोटे थे एक कार एक्सीडेंट में उनकी माँ गुज़र गयी.... करीब एक हफ्ते तक वो रट रहे.... न ठीक से कुछ कहते थे और न hi किसी से बात करते थे.... माँ के मरने का गम उसने दिल से जा hi नहीं रहा था.... उस वक़्त जब उन्हें मेरी ज़रुरत थी तब मैं पूरी तरह से उनके साथ नहीं रह पाटा था.... ज़्यादातर इलेक्शन और पार्टी के काम में बिजी रहता था.... बड़ी मुश्किल से मेरे समझने पे 1 महीने बाद दोनों स्कूल जाने को तैयार हुए.... आयुष ने तो कुछ हद तक खुद को संभाल लिया था मगर शनाया खुद को नहीं संभाल पा रही थी.... स्कूल में भी वो बस अपनी माँ को याद करके रोटी रहती.... मुझे उसकी बड़ी फ़िक्र सी होने लगी.... रिश्तेदारों ने कहा की अपने बचूं की खातिर मैं दूसरी शादी कर लून.... मगर मैंने इस दर से दूसरी शादी नहीं की की उनके सर पे माँ का साया लाने के चक्कर में मैं उनके ऊपर कोई ज़ुल्म न कर दूँ.... सौतेली माँ कहीं मेरे बच्चों की तकलीफ काम करने के बजाये बढ़ा न दे इस दर से मैंने दूसरी शादी नहीं की.... मगर एक दर ये भी था की मेरे बच्चे अगर इसी तरह अपनी माँ की यादों में रहे तो कभी ठीक से न तो रह पाएंगे और न hi जी पाएंगे.... तभी 2 महीने बाद अचानक से एक दिन अपने बच्चो के चेहरे पे मुझे मुस्कान दिखी.... उनको खुश देख मुझे इतनी ख़ुशी हुई की मैं बता नहीं सकता.... शनाया जो हसना बिलकुल भूल गयी थी वो 2 महीने बाद उस दिन खिलखिला के हंस रही थी.... यहाँ तक की ख़ुशी में पूरे गार्डन में दौर भी रही थी.... मैं अपनी बेटी के पास गया और ख़ुशी में कास के मैंने उसे अपने सीने से लगा लिया....

स डैड : क्या बात है आज मेरी बेटी बहुत खुश है....

शनाया : बात hi ख़ुशी की है डैड.... आज मैं इतनी खुश हूँ इतनी खुश हूँ की मैं आपको बता नहीं सकती....

स डैड : अच्छा ऐसी क्या वजह है... ज़रा मैं भी तो सुनु....

शायना : डैड आपको याद है माँ अक्सर कहा परियों और राजकुमार की कहानी सुनाया करती थी.... और ख़ास कर के ये कहा करती थी की एक राजमुमार आएगा और अपने मुझे अपने साथ प्यार और ख़ुशी की नगरी में ले जाएगा.... आप जानते हैं आज वो राजकुमार मुझे मिल गया.... आज मुझे मेरा राजकुमार मिल गया डैड.... वो मुझे मिल गया.... है न ख़ुशी की बात....

स डैड : बीटा बात तो ख़ुशी की है मगर तुम्हे ये कैसे पता चला की जिस राजकुमार की तुम्हारी माँ बात किया करती थी ये वो hi है.... ये कोई और भी तो हो सकता है न....

शनाया : नहीं डैड ये कोई और हो hi नहीं सकता ये वही है... ये मेरा राजकुमार है....

स डैड : अच्छा ये तुम इतने यकीन से कैसे कह सकती हो की ये वही है...? क्या तुमने अपने राजकुमार को पहले कभी देखा है....?

शनाया : नहीं डैड मैंने आज से पहले उसे कभी नहीं देखा... उसे पहली बार देखने पे मुझे लगा की शायद ये वही राजकुमार है जिसके बारे में माँ अक्सर मुझे बताया करती थी.... मगर मुझे उसपे डाउट हुआ तो मैंने जा के सब कुछ खुद चेक किया.... तो पाया की माँ ने मुह्हे राजकुमार के बारे में जो भी कुछ बताया था वो सब इस में मौजूद था...

स डैड : ऐसा क्या बताया था तुम्हारी माँ ने ज़रा मुझे भी तो बताओ....

शनाया : माँ ने कहा था की उसकी आँखें नीली होंगी और आँखों में काला टिल होगा.... उसकी कमर के पीछे एक खंजर का निशाँ होगा... उसके राइट पेअर में 6 उंगलियां होंगी... मेरी आँखों में आंसू देख के उसका दिल तड़प जाएगा.... मुझे रट देख वो भी रो देगा... और जब तक वो मुझे हंसा न दे वो चैन से नहीं बैठेगा.... और उसका नाम "......." होगा.... ये सब निशानियां उसमे मौजूद हैं... आज जब उसने मुझे रट देखा तो फ़ौरन मेरे पास आ गया और जब तक उसने मुझे रट ते हंसा न दिया वो चैन से नहीं बैठा.... अब आप hi बताई की क्या वो मेरा राजकुमार नहीं है....?

स डैड : अब ये तो उस से मिलने के बाद hi पता चलेगा.... हम भी तो देखें की हमारी बेटी का राजकुमार कैसा है....?

शनाया : चलिए अभी मिल लीजिये मेरे राजकुमार से वो यहीं गार्डन में बैठा है....

फिर मैं शनाया के साथ उस से मिलने गया.... जो जो बातें शनाया ने बताई थी वो सब उसमे मौजूद थी.... और फिर आखरी में उसने अपना नाम बताया और वो नाम है "........"

स डैड के मुँह से उसका नाम सुन के प्रिंस चौंक जाता है....??????
 
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