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CHAPTER 10
क्या मेरी माँ पहले hi पाप में गिर चुकी है?
क्या वह अपनी बिगड़ी हुई माँ के रास्ते पर चल रही है?
उस रात घर पहुंचा, साँसें अब भी तेज़ी से चल रही थी उस पागल दौड़ से. दिमाग़ तूफ़ान था, सूरज
के अलाहदा बंगला का हैरत अंगेज़ मंज़र बार बार दोहरा रहा था: दादी उस खुले अंदाज़ में, सूरज
का नंगा जिस्म, उनका निजी चुम्बन, ट्रे पर मन पोर्क.
घर की रोशनियां धीमी थी, सिर्फ किचन और बैठक से हलकी चमक बहार निकल रही, इशारा की कोई अब
भी जाग रहा. मैंने दरवाज़े पर जूते उतारे, सांस सँभालने की कोशिश, बाज़ुओं पर शाखों की
छोटी खरोचें शर्ट के किनारे से पोंछते हुए.
हॉलवे में कदम रखा तो अम्मी किचन से निकली, चेहरे पर रहत और माँ वाली हलकी फ़िक्र का मिला जुला
अंदाज़. वह आरामदेह निघ्टड्रेस में थी, ऊपर गर्माहट के लिए ढीला रोबे बंधा, बाल ढीले
पीछे बंधे, हाथ में डिश टॉवल अब भी पकड़ा जो देर रात की सफाई से बचा था.
"बीटा, आखिर आ गया," उन्होंने कहा, सुर धीमा लेकिन वह रोज़ की फ़िक्र भरा जब मैं उम्मीद से ज़्यादा देर
बहार रहता. पास आयी, धीमी रौशनी में घोर से देखा. "इतनी रात को कहाँ था? सोचा था दादी को
उनकी सैर से लाने या जाबिर से मिलने गया था. सब ठीक? चेहरा लाल लग रहा है."
नाना क़ादिर बैठक में थे, मैं अंदर आया तो किताब थोड़ी नीचे कर के उत्सुक लेकिन be-fikr अंदाज़ से
देखा. "हाँ, beta—Daadi मिली? उन्होंने कहा था किसी दोस्त से मिलने जा रही, लेकिन काफी देर हो गयी."
जवाब देने से पहले नाना का फ़ोन साइड टेबल पर बजा, वह खुशगवार रिंगटोन जो दादी ने विजिट में
सेट की थी ख़ामोशी काट टी हुई. उन्होंने उठाया, स्क्रीन देख कर प्यार भरी छोटी हंसी. "यह, फरिश्ता की बात
—ज़ैनब का hi."
स्पीकर पर किया आदत से ताकि सब सुन लें, सुर गरम और तसल्ली बख्श. "ज़ैनब? Salam—tumhari तरफ सब
ठीक?"
दादी की आवाज़ साफ़ आयी, हलकी और आम, पीछे हलकी सरसराहट जैसे पेड़ों में हवा या पंखा. "व सलाम
, Qadir—haan, यहाँ सब अच्छा. फ़िक्र मत करो. मैं दोस्त के घर हूँ; बातें शुरू हुई और वक़्त का पता
hi नहीं चला. पुराने दिनों की yaadein—jaante हो न. रात यहीं गुज़ार लूंगी और सुबह ताज़ा आ जाउंगी.
शाहिदा और बेटे को कहना जागने मत रहे."
नाना ने सर हिलाया भले देख नहीं सकती, सुर आराम से. "ठीक है, अगर आराम है. कौन सी दोस्त फिर?
सावधान rehna—rickshaw या कुछ चाहिए तो कॉल करना."
"ओह, पुराणी जान पहचान सालों पहले ki—haal में फिर मिली," उन्होंने आसानी से कहा. "मैं ठीक हूँ,
सच. Goodnight—sab को मेरा प्यार देना."
कॉल ख़तम, नाना खुश. अब्बू किचन से देर रात पानी का गिलास ले कर आये, आखरी बात सुन ली.
"हाँ, दादी को आज कल साइरेन पसंद आ गयी. सब से मिलना julna—shayad रेसिपीज या गाओं की गॉसिप नयी औरत
दोस्तों से." नाना क़ादिर ने कहा.
अम्मी गरम मुस्कुरायी. "सच में मीठा है. अम्मी हमेशा लोगों से जुड़ती थी. और किचन में मदद—
खाने में वह एक्स्ट्रा लज़्ज़ा."
अब्बू ने सर हिलाया. "सही. फ़िक्र मत karo—safe और खुश हैं. मोरे पावर तो उन्हें."
हम सब हलकी हंसी, माहौल आसान और मज़ाक़िया, दादी की नयी एनर्जी और सोशल अंदाज़ पर कुछ और
बातें. "अगली बात, सुबह की सैर के लिए पूरा ग्रुप बना लेंगी," नाना ने मज़ाक़ किया. "मुझसे आगे निकल
जाएंगी!"
अंदर से मैं हंसने का नाटक किया, हंसी थोड़ी मजबूर, बाँटेर में शामिल होने के लिए ताकि शक न हो.
"हाँ, वह रूकती नहीं," मैंने कहा, आवाज़ में ज़बरदस्ती जोश दाल कर. लेकिन अंदर सच खाने लगा
जैसे kaanta—mujhe पता था असल में क्या हो रहा, वह "दोस्त" बिलकुल औरत नहीं, वह हरामी सूरज जो दादी
को बिगाड़ रहा था.
अगली सुबह घर के रोज़ के लहजे में गुज़री. अब्बू स्टाल के लिए जल्दी निकले, दरवाज़े पर अम्मी को गुडबाय
चूमा देते हुए रोज़ की आदत से.
मुझे पता था दादी अब भी सूरज के घर thi—kal रात कॉल में "दोस्त" का घर. यह जान करि पेट में
पत्थर सा बैठा, लेकिन जाना नहीं चाहता, और उस मन दुनिया के नज़ारे से दिमाग़ और बिगड़ने का खतरा
नहीं लेना.
अम्मी बैठक में अकेली थी, बड़े दीवान पर पेट के बल लेती हुई, थोड़ी तकिये के नीचे चीन टिका आराम
से, पेअर घुटनों से मुद कर हवा में हिल रहे. गहरी सोच में थी और भौं चढ़ी हुई.
सामने मैगज़ीन खुली पड़ी थी, लेकिन आँखें उससे आगे देखती, be-fokus, जैसे कहीं दूर खोई हुई. फिर
कड़ी हुई और आईने के पास गयी खुद को देखने, जो सुना उस से हैरान रह गया.
अम्मी: [apne aks se, saans se thodi upar] शाहिदा… खुद को देखो. क्या कर रही हो? क्या बन रही हो?
[Dheere side par mud kar, aankhen jism par—pehle kamar ke curve par, phir upar poore seene par, phir
peeche kamar aur gaand ke gol swell par kurte ke neeche ubhre hue.]
अम्मी: [dheere, vishwaas nahi jaise] गजेंद्र… रेस्टोरेंट के बहार वह शब्द कहे थे… “बड़ा सीना,
पूरी कमर… भरी चीज़ें जो चलना थका देती…” या ,.', अभी क्यों उसकी आवाज़ इतनी साफ़ सुन रही हूँ?
[Ek haath dheere kamar par rakha, ungliyan andar ki gehraai par, phir bahar kamar ke phailao par.]
अम्मी: [dheere] वह खड़ा घूर रहा था, मेरे जिस्म पर इतनी be-sharmi से बात... और मैंने रोका, लेकिन
उसके शब्द अब भी यहाँ. दिमाग़ में अटके हुए.
[Puri tarah aaine ki taraf mud kar, nazar seene par, saanson se upar neeche hote dekh.]
अम्मी: [awaaz kaamp ti] यह पहले कभी नहीं हुआ. कभी नहीं. इतने साल शादी, बीटा पाला, परदह किया
… किसी मर्द ने ऐसे बात नहीं की. किसी ने ऐसे नहीं देखा जैसे गजेंद्र देखता tha—jaise खा जाएगा.
[Haath be-khudi upar, seene ke neeche brush, phir tezi se hata jaise jal gaya.]
अम्मी: [hil kar] और पहले… बैठक में… जब वह पीछे खड़ा, हाथ बाज़ुओं पर, मुँह गर्दन पर
… महसूस किया उसका हाथ यहाँ... [haath naaf ke neeche rakha, dheere gol ghumate yaad kar] …और
मैंने तुरंत नहीं हटाया. कुछ सेकण्ड्स होने दिया.
[Gaalon par laali, pet mein garmahat phailti mehsoos.]
अम्मी: [aaine mein aankhen badi] एक बात में सही था… मैं कर्तव्य हूँ. जितना कभी माना नहीं.
देखो यह कमर… यह सीना… यह गांड. पूरी, भरी, जैसे उसने कहा. अब देख रही हूँ. समझ रही
क्यों उसकी नज़रें नहीं हैट रही थी.
[Garmahat badhi; saansen gehri. Jaanghein thodi dabayi, rokne ki koshish.]
अम्मी: [awaaz tezi se, khud ko daant te] नहीं. रुको. मैं इज़्ज़तदार औरत हूँ. बीवी. माँ. गजेंद्र
गन्दा, खतरनाक आदमी जो यह सोच दाल रहा, मैं उसे बिगड़ने नहीं दूँगी. वह आग जो बात करता था
… गुनाह है. गजेंद्र की धीरी आवाज़ दिमाग़ में.
[Baazuon se khud ko mazbooti se lapeta, jaise sab andar rakhe.]
अम्मी: [aks se minnat karte] किसी ने सिर्फ शब्दों और नज़रों से ऐसा महसूस नहीं कराया जैसे गजेंद्र
ने. किसी ने जिस्म ऐसा रियेक्ट नहीं कराया. क्यों वह? क्यों अब?
[Aaine se tez mud kar, dupatta kandhon par mazbooti se lapeta, lekin ruk kar aakhri baar peeche dekha.]
अम्मी: [dheemi, tooti si] गजेंद्र… दिमाग़ से निकल जाओ. प्लीज.
मैंने धीरे पास आया, टाइल पर कदम धीमे, फ़िक्र खींच रही थी. "अम्मी? ठीक हो? कहीं दूर खोई
लग रही थी."
वह थोड़ी चौंक कर पालक झपकाई, जैसे दिमाग़ से वापस खींच ली गयी, फिर तेज़ी से तसल्ली बख्श
मुस्कराहट के साथ बैठ गयी जो आँखों की दूरी को पूरी मिटा नहीं सकीय. ड्रेस ठीक की, be-khudi
बाल कान के पीछे डाले.
"ओह, beta—main ठीक, सच," उन्होंने कहा, सुर हल्का लेकिन वह चालाक ताल जो कुछ छुपाने में
इस्तेमाल करती. "बस अगले हफ्ते की soch—groceries, सफाई, तेरी पढ़ाई. माँ का दिमाग़ कभी आराम नहीं
करता, जानते हो. और अम्मी कल रात बहार... सोच रही उनकी मुलाक़ात कैसे रही."
"पक्का?" मैंने धीरे ज़िद की, दीवान के किनारे बैठ कर. "गहरी सोच में लग रही thi—jaise कुछ
परेशां कर रहा."
उन्होंने हलकी हंसी के साथ ताल दिया, कड़ी होकर कुशिओं ठीक करते हुए. "कुछ सीरियस नहीं, वादा.
बस रोज़ की छोटी फिक्रें. जा, जाबिर के साथ या जो प्लान है एन्जॉय कर."
"ठीक है," मैंने कहा, भले पूरी तरह यक़ीन नहीं, खड़ा होकर जाते हुए. "जाबिर से मिलने जा रहा
hoon—lunch के लिए वापस."
"सावधान रहना," उन्होंने पुकारा जब मैं बहार निकला, आवाज़ गरम लेकिन वह अंदर की be-chaini साथ.
मैं ताज़ी सुबह में बहार निकला, लेन पर चलते हुए गजेंद्र को dekha—pehli बार सामने से, छुप कर
देखे वाक़ियात के इलावा. वह अपने घर से निकल रहा था, नीली शर्ट और ट्रॉउज़र में साफ़ सुथरा.
उसने मुझे देखा और दोस्ताना मुस्कराहट के साथ पास आया, हाथ बढ़ाया. "Hello—tum शाहिदा के
बेटे होंगे. आस पास देखा है. मैं गजेंद्र, नया पडोसी."
मैं एक पल झिझका, उसकी घूरने वाली यादें चमकी, लेकिन शिस्तगी से हाथ मिलाया. "हाँ... hello. मिल
कर अच्छा लगा."
उसने सर हिलाया, पकड़ मज़बूत. "अच्छा ilaqa—shaant, दोस्ताना लोग. तुम्हारा परिवार मेहरबान; तुम्हारी
अम्मी ख़ास कर उस दिन पानी के मामले में वेलकमिंग थी."
"शुक्रिया," मैंने न्यूट्रल रखा.
"आखिर बात कर के अच्छा लगा," वह बात चीत में जारी. "कॉलेज कैसा? छुट्टियां अब भी एन्जॉय कर रहे?"
"ठीक है," मैंने कहा. "पढ़ाई और दोस्त."
वह मुस्कुराया. "अच्छा अच्छा. जवान ladka—energy से भरा. वैसे, तुम्हारी अम्मी शाहिदा घर पर हैं?
फिर शुक्रिया कहना था पडोसी मदद का."
मैं झिझका, शक चुभा. "हाँ... घर पर हैं."
"परफेक्ट," वह आसानी से. "फिर मिलते हैं."
मैं चला गया, जाबिर की तरफ जाने का नाटक, लेकिन सर्किल कर के दीवार के पीछे छुप गया, उत्सुकता
से देखने. गजेंद्र ने हमारे दरवाज़े पर कॉंफिडेंट खटखटाया. जब अम्मी ने खोला, हैरान, वह
खुद अंदर घुस गया बिना पूरी दावत के, पास से गुज़रते "अंदर आ जाऊं एक मिनट? बस छोटी सी बात."
गजेंद्र: [muskurate] अस्सलामु अलैकुम, शाहिदा जी. गुज़रते हुए सोचा पसंदीदा पडोसी का हाल पूछ
लून.
अम्मी: [darwaze mein mazbooti se khadi] व अलैकुम अस्सलाम. गजेंद्र जी, क्या चाहते हो?
गजेंद्र: [dheere cigarette kheench kar, bina intezaar andar kadam] कुछ बड़ा नहीं. बस रेस्टोरेंट के
बहार हमारी छोटी बात के बाद हाल देखना था.
अम्मी: [tez darwaza band, mud kar tez] ऐसे अंदर नहीं घुस सकते! मैंने दावत नहीं दी.
गजेंद्र: [kandhe uchaal kar, aasaan] दरवाज़ा खुला था, तुम वहीँ थी. वेलकम महसूस हुआ. अच्छा
ghar—sab तरतीब से, ताज़ा खुशबू. तुम सच में ख्याल रखती हो.
अम्मी: [baazu jod kar, awaaz thodi upar] यह मेरे शौहर का भी घर है. अब जाइये.
गजेंद्र: [sofe ki taraf chal kar, peeth par haath ferte] नरम सोफे. दीवारों पर गरम रंग. पर्दे भी
मैच. तुम पर सूट karta—sab शांत और सुन्दर. शाम में यहाँ बैठती होगी अकेली, किसी के इंतज़ार
में कंपनी की.
अम्मी: [aur khafa] रुक जाओ. मैं किसी के इंतज़ार में नहीं बैठती.
गजेंद्र: [muskurahat] हाँ हाँ. लेकिन तुम जैसे aurat—din भर खाना, सफाई, इतनी अच्छी dikhti—thodi टी
अवज्जोह डेसेर्वे करती. तुम्हारा शौहर खुशनसीब. ज़्यादा कहता है कितनी स्तुन्निंग लगती हो कुर्ते में?
अम्मी: [thodi laali, lekin jhatka] यह तुम्हारा मामला नहीं. और मेरे शौहर की बात मत करो.
गजेंद्र: [paas kadam] ठीक. लेकिन किसी को तो कहना पड़ता. तेरी वह आँखें… गहरी, काली. मर्द खो
जाए. और वह मुस्कराहट जो छुपाती हो? खतरनाक.
अम्मी: [nazar hata kar] मैं मुस्कुरा नहीं रही. और यह तारीफें नहीं चाहिए.
गजेंद्र: [dheemi qahqaha] कहती हो, लेकिन साँसें तेज़ी से, गाल गुलाबी. पहले सोच रही थी मुझ पर?
सड़क पर जो कहा उस पर?
अम्मी: [mazboot] नहीं. कोशिश कर रही थी तुम्हे न सोचूँ. और तुम्हे फिर नहीं देखना चाहती,
गजेंद्र जी. कभी.
गजेंद्र: [bhaun utha] कभी नहीं? तेज़ शब्द. लेकिन जिस्म कुछ और कह रहा अभी.
अम्मी: [tez sur] एक पल भी मत सोचो की मुझे तुम पसंद हो या यह सब. नहीं. तुम बद्तमीज़, सुनते
नहीं, हर हद्द क्रॉस करते. मैं shaadi-shuda—shauhar से मोहब्बत. जो भी मेरी आँखों या साँसों
में देख रहे, वह तुम्हारे लिए नहीं.
गजेंद्र: [aur muskurata] खुद को यह बताती रहो. मुझे पता है तुम जैसे औरतों का. दिन भर
परफेक्ट, ढकी, फ़र्ज़ ऐडा... लेकिन कभी अंदर छोटी आग सुलगती. शांत, लेकिन गरम. अभी देख रहा
हूँ.
अम्मी: कोई आग नहीं. सपने मत देखो.
गजेंद्र: [dheere peeche mud kar] ठीक ठीक. लेकिन यार, पीछे से यह नज़ारा… पतली कमर से
फैलती पूरी कमर. परफेक्ट शेप. और सीना इतनी तेज़ी se—notice करना मुश्किल नहीं.
अम्मी: [saansen saaf tez] गजेंद्र जी… रुक जाओ.
गजेंद्र: [baazuon par dheere haath rakha] महसूस करो साँसें कितनी तेज़ी? गरम, तेज़ी... यह जिस्म
की बात है. मुझे बिलकुल पता है मतलब.
अम्मी: प्लीज…
गजेंद्र: [paas jhuk kar, gardan ke paas saans] खुशबू कितनी अच्छी. जस्मिने और वह narmi—sirf तुम.
[Woh gardan ke side par dheera chuma diya.]
अम्मी: [chhoti si hilkar, dheemi siski, thodi der wahin rahi, saansen tezi se]
गजेंद्र: [ek haath aage saraka kar, naaf ke neeche rakha, dheere gol ghumaya] यहाँ… वह छोटी
काँप. पेट सख्त है न? यह सच जाग रहा.
अम्मी: [awaaz kaamp ti] मैं… नहीं कर सकती…
गजेंद्र: [dheere] लड़ना नहीं पड़ता.
अम्मी: [achanak aage kadam, mud kar saamne—ankhen gusse mein lekin poori naraz nahi, chehra laal]
बस करो! अभी मेरे घर से निकल जाओ. और कभी वापस मत आना.
गजेंद्र: [smirk, haath upar] ठीक ठीक. गुस्से में और सुन्दर लगती हो.
[Darbaze par zor ki khatkhatahat. Dono jam gaye. Ammi ki aankhen badi.]
अंदर धीमी आवाज़ें. फिर khatkhatahat—Abbu, उनेक्सपेक्टेद्ली जल्दी घर. अम्मी हैरान, चेहरा सफ़ेद:
घर में दूसरा आदमी, अकेली, अब्बू के bina—bara गुनाह, मन, अगर देखा गया तो बदनामी. दीं
और परदह चिल्ला रहे थे खतरा; ग़ैर महरम अंदर गलत हर लेवल पर.
[Dusri khatkhatahat, zor se.]
अम्मी: [aankhen dheere badi, saans atak] ओह… ओह नहीं…
[Teesri, zid se. Asli ghabrahat aayi.]
अम्मी: [tez dheere, mud kar] गजेंद्र ji—chhupo! अभी!
गजेंद्र: [poori shaant, smirk] रिलैक्स, सुन्दर. कौन?
अम्मी: [kaamp ti awaaz, seene par dhakka] नहीं pata—shayad शौहर! छुपा!
गजेंद्र: [mazaakiya] कहाँ?
अम्मी: [hallway ki taraf ishaara] लांड्री room—wahaan! वह दरवाज़ा! जाओ!
गजेंद्र: [aur muskurate peeche hat te] लांड्री रूम? तुम्हारे कपड़ों से घिरा... अच्छा चॉइस,
शाहिदा जी. बहुत निजी.
अम्मी: [hiss kar] रुको यह! जाओ! मेरी शादी बर्बाद नहीं चाहती तुम्हारी वजह se—please!
गजेंद्र: [dheemi hansi, darwaze ki taraf] ठीक ठीक. तुम्हारे लिए छुप रहा... इस बार.
[Woh tezi se chhote laundry room mein ghus kar darwaza lagbhag band kiya, chhota sa gap chhoda.]
[Ammi darwaze ki taraf daudi, haathon se hawa hilaa kar cigarette ki halki dhuyen taalne ki koshish.
Kurta theek ki, kaamp ti saans, laundry room ki taraf bechain nazar, phir darwaza khola.]
[Abbu living room mein aaye. Ammi ne peeche tez band kiya.]
अब्बू: [thake muskurate] अस्सलामु अलैकुम, शाहिदा. आज थोड़ा जल्दी आ gaya—bazaar शांत था.
अम्मी: [awaaz thodi zyada khush, zabardasti muskurahat] व अलैकुम अस्सलाम! जल्दी? अच्छा! आओ आओ.
अब्बू: [aage kadam, maathe par halka chuma] ठीक हो? थोड़ी गरम लग रही.
अम्मी: [ghabraayi hansi] हाँ haan—kapde फोल्ड और सफाई कर रही थी. काम से गर्मी लग जाती.
[Abbu sofa par gaye, thake baith kar saans bhari, collar dheela. Theek baith kar gehri saans li, naka
chadhaayi.]
अब्बू: [thodi bhaun] हम्म… अजीब. घर में सिगरेट जैसी खुशबू. कोई आया था?
अम्मी: [shaant, haath hila kar] वह बची खुशबू? पडोसी का लड़का और दोस्त बहार घूम रहे थे—
खिड़की के पास स्मोक. हवा सीधा अंदर आयी. सब खिड़कियां खोल दी थी, लेकिन जानते हो कभी चिपक जाती.
अब्बू: [dheere sar hilate, aankhen malte] आज कल के बच्चे… तमीज नहीं. ठीक, अंदर नहीं थी तो.
अम्मी: [bagal mein baith kar, fikr se] कभी नहीं. तुम बहुत थके लग रहे. दुकानें पर सख्त दिन?
अब्बू: [karwi hansi] सख्त से ज़्यादा. लैंडलॉर्ड सुबह आया. पूरी लाइन खली कर raha—koi बड़ी कंपनी ने
पूरा ब्लॉक लीज किया. सिर्फ एक महीना दिया पैक करने को.
अम्मी: [aankhen badi] एक महीना? मुमकिन नहीं! ऐसा नहीं कर सकता.
अब्बू: [karwi hansi] कर सकता, और कर रहा. ज़्यादा वक़्त माँगा, लेकिन नहीं माना. बिज़नेस है कहता.
अम्मी: [baazu par dheere haath rakha, sehlaate] हे… इधर आओ, सर टिकाऊ. [Paas kheench kar kandhe
par sar, baal sehlaate] अकेला मत उठाओ. रास्ता निकल आएगा.
अब्बू: [aankhen band, thaki awaaz] कहाँ, शाहिदा? नए जगह डिपाजिट मांगते. रेंट दो गुना. हमारी
सेविंग्स khatam—do महीने के बिल, नयी दूकान नहीं.
अम्मी: [baazu sehlaati tasalli se] श… एक एक कदम. पहले लैंडलॉर्ड से साथ बात करेंगे. शायद मैं
साथ जाऊं तो माने. काम से काम तीन महीने.
अब्बू: [saans] सख्त आदमी. लेकिन... शायद.
अम्मी: और कल कजिन को call—bazaar के आधे मालिकों को जानता. कोई छोटी खली दूकान मिलेगी. या
थोड़ी देर शेयर.
अब्बू: [ruk kar] शेयर से इनकम घटेगी... लेकिन कुछ नहीं से बेहतर.
अम्मी: [maathe par dheere chuma] बिलकुल. और बजट और tight—extra बंद, सदा खाने, बाजार काम.
पहले सख्त वक़्त गुज़ारे, हमेशा मज़बूत निकले.
अब्बू: [dheere] तुम मेरी से ज़्यादा अच्छी. यह फ़िक्र डेसेर्वे नहीं करती.
अम्मी: [garam muskurahat] बकवास. हम टीम. याद है दो साल पहले दूकान में पानी? सोचे
ख़तम. साथ ठीक किया.
अब्बू: [chhoti muskurahat] सच... ,.' मेहरबान था.
[Laundry room se chhoti si thud—aise jaise plastic bottle ya dabba washing machine se giri.]
अब्बू: [tez sar utha kar hallway ki taraf] यह आवाज़ क्या थी?
अम्मी: [natural muskurahat, kandhe par thapki distract karne] ओह वह? बड़ा डिटर्जेंट बोतल ऊपर
रखा था कपडे सॉर्ट करते. आखिर गिर गया. यह पुराणी मशीन बंद भी विबरते karti—jaante हो.
अब्बू: [ek second sun kar, bhaun] थोड़ी भरी लगी. पक्का कुछ और नहीं गिरा?
अम्मी: [dheemi hansi, dheere waapas kheench] पक्का. Be-dhyani से स्टैक किया था. बाद में ठीक कर
लूंगी. आओ, वापस लेट jao—zyada टेंस हो.
अब्बू: [dheere aaraam] शायद सही... आज जुम्पी हूँ.
अम्मी: [baal sehlaati, dheemi awaaz] कोई भी होता. लेकिन ठीक हो जाएगा. कल plan—har जगह लिखेंगे,
हर इंसान से पूछेंगे. रात इस्तीखरा. ,.' दरवाज़ा खोलेगा.
अब्बू: [aankhen band, dheemi] तुम हमेशा मुमकिन बना देती...
अम्मी: [maathe par phir chuma] क्यूंकि है. तुम पर भरोसा. हम पर. अब आराम. चाय बनाती हूँ.
अब्बू: [dheere] शुक्रिया, शाहिदा… तुम बिना पता नहीं क्या करता.
अम्मी: [muskurate, baal sehlaati] कभी पता नहीं करना पड़ेगा.
[Laundry room se poori khamoshi. Ammi darwaze ki taraf pal bhar dekhi, chehra mustaqil, phir poori
narmi Abbu ko tasalli mein.]
मैं घर के एक हिस्से में, अब भी बहार, उत्सुकता खींच रही लांड्री रूम चेक करने. कुर्सी पर
चढ़ कर ऊंची खिड़की से झाँका, हैरान रह गया: गजेंद्र अम्मी के धुले नहीं पैंतीस और कपड़ों
के बीच खड़ा, सुखाने लटके, बेसिन तरतीब से.
वह इधर उधर मुस्कुराते देखा, फिर पैंतीस से भरे बेसिन par—type से सॉर्ट, उनकी तरतीब. एक सफ़ेद
उठायी, नरम कपडे को उँगलियों में महसूस, फिर नका के पास ले कर गहरी सूंघ, आँखें बंद
ख़ुशी से. हैरान देख ता रहा वह गहरा सूंघता, मज़ा लेता.
राखी, गुलाबी उठायी, वह भी
सूंघी. खुद से: "छूट वाला हिस्सा नमकीन, tangy—jaise दिन भर की उसकी खुशबू. गांड वाला
स्टिन्की, जैसे दिन भर फागी, erotic—woh बड़ी गांड चलती, लचकती."
वह अम्मी और अब्बू सुन raha—Abbu शिकायत दूकान निकालने की. गजेंद्र अँधेरी मुस्कराहट, फ़ोन
निकाल कर चुपके कॉल. "जो कहा था कर लिया?" सुना, नहीं पता किस se—shayad स्टाल का मामला उसी ने
करवाया लिवरेज के लिए?
क्या मेरी माँ पहले hi पाप में गिर चुकी है?
क्या वह अपनी बिगड़ी हुई माँ के रास्ते पर चल रही है?
उस रात घर पहुंचा, साँसें अब भी तेज़ी से चल रही थी उस पागल दौड़ से. दिमाग़ तूफ़ान था, सूरज
के अलाहदा बंगला का हैरत अंगेज़ मंज़र बार बार दोहरा रहा था: दादी उस खुले अंदाज़ में, सूरज
का नंगा जिस्म, उनका निजी चुम्बन, ट्रे पर मन पोर्क.
घर की रोशनियां धीमी थी, सिर्फ किचन और बैठक से हलकी चमक बहार निकल रही, इशारा की कोई अब
भी जाग रहा. मैंने दरवाज़े पर जूते उतारे, सांस सँभालने की कोशिश, बाज़ुओं पर शाखों की
छोटी खरोचें शर्ट के किनारे से पोंछते हुए.
हॉलवे में कदम रखा तो अम्मी किचन से निकली, चेहरे पर रहत और माँ वाली हलकी फ़िक्र का मिला जुला
अंदाज़. वह आरामदेह निघ्टड्रेस में थी, ऊपर गर्माहट के लिए ढीला रोबे बंधा, बाल ढीले
पीछे बंधे, हाथ में डिश टॉवल अब भी पकड़ा जो देर रात की सफाई से बचा था.
"बीटा, आखिर आ गया," उन्होंने कहा, सुर धीमा लेकिन वह रोज़ की फ़िक्र भरा जब मैं उम्मीद से ज़्यादा देर
बहार रहता. पास आयी, धीमी रौशनी में घोर से देखा. "इतनी रात को कहाँ था? सोचा था दादी को
उनकी सैर से लाने या जाबिर से मिलने गया था. सब ठीक? चेहरा लाल लग रहा है."
नाना क़ादिर बैठक में थे, मैं अंदर आया तो किताब थोड़ी नीचे कर के उत्सुक लेकिन be-fikr अंदाज़ से
देखा. "हाँ, beta—Daadi मिली? उन्होंने कहा था किसी दोस्त से मिलने जा रही, लेकिन काफी देर हो गयी."
जवाब देने से पहले नाना का फ़ोन साइड टेबल पर बजा, वह खुशगवार रिंगटोन जो दादी ने विजिट में
सेट की थी ख़ामोशी काट टी हुई. उन्होंने उठाया, स्क्रीन देख कर प्यार भरी छोटी हंसी. "यह, फरिश्ता की बात
—ज़ैनब का hi."
स्पीकर पर किया आदत से ताकि सब सुन लें, सुर गरम और तसल्ली बख्श. "ज़ैनब? Salam—tumhari तरफ सब
ठीक?"
दादी की आवाज़ साफ़ आयी, हलकी और आम, पीछे हलकी सरसराहट जैसे पेड़ों में हवा या पंखा. "व सलाम
, Qadir—haan, यहाँ सब अच्छा. फ़िक्र मत करो. मैं दोस्त के घर हूँ; बातें शुरू हुई और वक़्त का पता
hi नहीं चला. पुराने दिनों की yaadein—jaante हो न. रात यहीं गुज़ार लूंगी और सुबह ताज़ा आ जाउंगी.
शाहिदा और बेटे को कहना जागने मत रहे."
नाना ने सर हिलाया भले देख नहीं सकती, सुर आराम से. "ठीक है, अगर आराम है. कौन सी दोस्त फिर?
सावधान rehna—rickshaw या कुछ चाहिए तो कॉल करना."
"ओह, पुराणी जान पहचान सालों पहले ki—haal में फिर मिली," उन्होंने आसानी से कहा. "मैं ठीक हूँ,
सच. Goodnight—sab को मेरा प्यार देना."
कॉल ख़तम, नाना खुश. अब्बू किचन से देर रात पानी का गिलास ले कर आये, आखरी बात सुन ली.
"हाँ, दादी को आज कल साइरेन पसंद आ गयी. सब से मिलना julna—shayad रेसिपीज या गाओं की गॉसिप नयी औरत
दोस्तों से." नाना क़ादिर ने कहा.
अम्मी गरम मुस्कुरायी. "सच में मीठा है. अम्मी हमेशा लोगों से जुड़ती थी. और किचन में मदद—
खाने में वह एक्स्ट्रा लज़्ज़ा."
अब्बू ने सर हिलाया. "सही. फ़िक्र मत karo—safe और खुश हैं. मोरे पावर तो उन्हें."
हम सब हलकी हंसी, माहौल आसान और मज़ाक़िया, दादी की नयी एनर्जी और सोशल अंदाज़ पर कुछ और
बातें. "अगली बात, सुबह की सैर के लिए पूरा ग्रुप बना लेंगी," नाना ने मज़ाक़ किया. "मुझसे आगे निकल
जाएंगी!"
अंदर से मैं हंसने का नाटक किया, हंसी थोड़ी मजबूर, बाँटेर में शामिल होने के लिए ताकि शक न हो.
"हाँ, वह रूकती नहीं," मैंने कहा, आवाज़ में ज़बरदस्ती जोश दाल कर. लेकिन अंदर सच खाने लगा
जैसे kaanta—mujhe पता था असल में क्या हो रहा, वह "दोस्त" बिलकुल औरत नहीं, वह हरामी सूरज जो दादी
को बिगाड़ रहा था.
अगली सुबह घर के रोज़ के लहजे में गुज़री. अब्बू स्टाल के लिए जल्दी निकले, दरवाज़े पर अम्मी को गुडबाय
चूमा देते हुए रोज़ की आदत से.
मुझे पता था दादी अब भी सूरज के घर thi—kal रात कॉल में "दोस्त" का घर. यह जान करि पेट में
पत्थर सा बैठा, लेकिन जाना नहीं चाहता, और उस मन दुनिया के नज़ारे से दिमाग़ और बिगड़ने का खतरा
नहीं लेना.
अम्मी बैठक में अकेली थी, बड़े दीवान पर पेट के बल लेती हुई, थोड़ी तकिये के नीचे चीन टिका आराम
से, पेअर घुटनों से मुद कर हवा में हिल रहे. गहरी सोच में थी और भौं चढ़ी हुई.
सामने मैगज़ीन खुली पड़ी थी, लेकिन आँखें उससे आगे देखती, be-fokus, जैसे कहीं दूर खोई हुई. फिर
कड़ी हुई और आईने के पास गयी खुद को देखने, जो सुना उस से हैरान रह गया.
अम्मी: [apne aks se, saans se thodi upar] शाहिदा… खुद को देखो. क्या कर रही हो? क्या बन रही हो?
[Dheere side par mud kar, aankhen jism par—pehle kamar ke curve par, phir upar poore seene par, phir
peeche kamar aur gaand ke gol swell par kurte ke neeche ubhre hue.]
अम्मी: [dheere, vishwaas nahi jaise] गजेंद्र… रेस्टोरेंट के बहार वह शब्द कहे थे… “बड़ा सीना,
पूरी कमर… भरी चीज़ें जो चलना थका देती…” या ,.', अभी क्यों उसकी आवाज़ इतनी साफ़ सुन रही हूँ?
[Ek haath dheere kamar par rakha, ungliyan andar ki gehraai par, phir bahar kamar ke phailao par.]
अम्मी: [dheere] वह खड़ा घूर रहा था, मेरे जिस्म पर इतनी be-sharmi से बात... और मैंने रोका, लेकिन
उसके शब्द अब भी यहाँ. दिमाग़ में अटके हुए.
[Puri tarah aaine ki taraf mud kar, nazar seene par, saanson se upar neeche hote dekh.]
अम्मी: [awaaz kaamp ti] यह पहले कभी नहीं हुआ. कभी नहीं. इतने साल शादी, बीटा पाला, परदह किया
… किसी मर्द ने ऐसे बात नहीं की. किसी ने ऐसे नहीं देखा जैसे गजेंद्र देखता tha—jaise खा जाएगा.
[Haath be-khudi upar, seene ke neeche brush, phir tezi se hata jaise jal gaya.]
अम्मी: [hil kar] और पहले… बैठक में… जब वह पीछे खड़ा, हाथ बाज़ुओं पर, मुँह गर्दन पर
… महसूस किया उसका हाथ यहाँ... [haath naaf ke neeche rakha, dheere gol ghumate yaad kar] …और
मैंने तुरंत नहीं हटाया. कुछ सेकण्ड्स होने दिया.
[Gaalon par laali, pet mein garmahat phailti mehsoos.]
अम्मी: [aaine mein aankhen badi] एक बात में सही था… मैं कर्तव्य हूँ. जितना कभी माना नहीं.
देखो यह कमर… यह सीना… यह गांड. पूरी, भरी, जैसे उसने कहा. अब देख रही हूँ. समझ रही
क्यों उसकी नज़रें नहीं हैट रही थी.
[Garmahat badhi; saansen gehri. Jaanghein thodi dabayi, rokne ki koshish.]
अम्मी: [awaaz tezi se, khud ko daant te] नहीं. रुको. मैं इज़्ज़तदार औरत हूँ. बीवी. माँ. गजेंद्र
गन्दा, खतरनाक आदमी जो यह सोच दाल रहा, मैं उसे बिगड़ने नहीं दूँगी. वह आग जो बात करता था
… गुनाह है. गजेंद्र की धीरी आवाज़ दिमाग़ में.
[Baazuon se khud ko mazbooti se lapeta, jaise sab andar rakhe.]
अम्मी: [aks se minnat karte] किसी ने सिर्फ शब्दों और नज़रों से ऐसा महसूस नहीं कराया जैसे गजेंद्र
ने. किसी ने जिस्म ऐसा रियेक्ट नहीं कराया. क्यों वह? क्यों अब?
[Aaine se tez mud kar, dupatta kandhon par mazbooti se lapeta, lekin ruk kar aakhri baar peeche dekha.]
अम्मी: [dheemi, tooti si] गजेंद्र… दिमाग़ से निकल जाओ. प्लीज.
मैंने धीरे पास आया, टाइल पर कदम धीमे, फ़िक्र खींच रही थी. "अम्मी? ठीक हो? कहीं दूर खोई
लग रही थी."
वह थोड़ी चौंक कर पालक झपकाई, जैसे दिमाग़ से वापस खींच ली गयी, फिर तेज़ी से तसल्ली बख्श
मुस्कराहट के साथ बैठ गयी जो आँखों की दूरी को पूरी मिटा नहीं सकीय. ड्रेस ठीक की, be-khudi
बाल कान के पीछे डाले.
"ओह, beta—main ठीक, सच," उन्होंने कहा, सुर हल्का लेकिन वह चालाक ताल जो कुछ छुपाने में
इस्तेमाल करती. "बस अगले हफ्ते की soch—groceries, सफाई, तेरी पढ़ाई. माँ का दिमाग़ कभी आराम नहीं
करता, जानते हो. और अम्मी कल रात बहार... सोच रही उनकी मुलाक़ात कैसे रही."
"पक्का?" मैंने धीरे ज़िद की, दीवान के किनारे बैठ कर. "गहरी सोच में लग रही thi—jaise कुछ
परेशां कर रहा."
उन्होंने हलकी हंसी के साथ ताल दिया, कड़ी होकर कुशिओं ठीक करते हुए. "कुछ सीरियस नहीं, वादा.
बस रोज़ की छोटी फिक्रें. जा, जाबिर के साथ या जो प्लान है एन्जॉय कर."
"ठीक है," मैंने कहा, भले पूरी तरह यक़ीन नहीं, खड़ा होकर जाते हुए. "जाबिर से मिलने जा रहा
hoon—lunch के लिए वापस."
"सावधान रहना," उन्होंने पुकारा जब मैं बहार निकला, आवाज़ गरम लेकिन वह अंदर की be-chaini साथ.
मैं ताज़ी सुबह में बहार निकला, लेन पर चलते हुए गजेंद्र को dekha—pehli बार सामने से, छुप कर
देखे वाक़ियात के इलावा. वह अपने घर से निकल रहा था, नीली शर्ट और ट्रॉउज़र में साफ़ सुथरा.
उसने मुझे देखा और दोस्ताना मुस्कराहट के साथ पास आया, हाथ बढ़ाया. "Hello—tum शाहिदा के
बेटे होंगे. आस पास देखा है. मैं गजेंद्र, नया पडोसी."
मैं एक पल झिझका, उसकी घूरने वाली यादें चमकी, लेकिन शिस्तगी से हाथ मिलाया. "हाँ... hello. मिल
कर अच्छा लगा."
उसने सर हिलाया, पकड़ मज़बूत. "अच्छा ilaqa—shaant, दोस्ताना लोग. तुम्हारा परिवार मेहरबान; तुम्हारी
अम्मी ख़ास कर उस दिन पानी के मामले में वेलकमिंग थी."
"शुक्रिया," मैंने न्यूट्रल रखा.
"आखिर बात कर के अच्छा लगा," वह बात चीत में जारी. "कॉलेज कैसा? छुट्टियां अब भी एन्जॉय कर रहे?"
"ठीक है," मैंने कहा. "पढ़ाई और दोस्त."
वह मुस्कुराया. "अच्छा अच्छा. जवान ladka—energy से भरा. वैसे, तुम्हारी अम्मी शाहिदा घर पर हैं?
फिर शुक्रिया कहना था पडोसी मदद का."
मैं झिझका, शक चुभा. "हाँ... घर पर हैं."
"परफेक्ट," वह आसानी से. "फिर मिलते हैं."
मैं चला गया, जाबिर की तरफ जाने का नाटक, लेकिन सर्किल कर के दीवार के पीछे छुप गया, उत्सुकता
से देखने. गजेंद्र ने हमारे दरवाज़े पर कॉंफिडेंट खटखटाया. जब अम्मी ने खोला, हैरान, वह
खुद अंदर घुस गया बिना पूरी दावत के, पास से गुज़रते "अंदर आ जाऊं एक मिनट? बस छोटी सी बात."
गजेंद्र: [muskurate] अस्सलामु अलैकुम, शाहिदा जी. गुज़रते हुए सोचा पसंदीदा पडोसी का हाल पूछ
लून.
अम्मी: [darwaze mein mazbooti se khadi] व अलैकुम अस्सलाम. गजेंद्र जी, क्या चाहते हो?
गजेंद्र: [dheere cigarette kheench kar, bina intezaar andar kadam] कुछ बड़ा नहीं. बस रेस्टोरेंट के
बहार हमारी छोटी बात के बाद हाल देखना था.
अम्मी: [tez darwaza band, mud kar tez] ऐसे अंदर नहीं घुस सकते! मैंने दावत नहीं दी.
गजेंद्र: [kandhe uchaal kar, aasaan] दरवाज़ा खुला था, तुम वहीँ थी. वेलकम महसूस हुआ. अच्छा
ghar—sab तरतीब से, ताज़ा खुशबू. तुम सच में ख्याल रखती हो.
अम्मी: [baazu jod kar, awaaz thodi upar] यह मेरे शौहर का भी घर है. अब जाइये.
गजेंद्र: [sofe ki taraf chal kar, peeth par haath ferte] नरम सोफे. दीवारों पर गरम रंग. पर्दे भी
मैच. तुम पर सूट karta—sab शांत और सुन्दर. शाम में यहाँ बैठती होगी अकेली, किसी के इंतज़ार
में कंपनी की.
अम्मी: [aur khafa] रुक जाओ. मैं किसी के इंतज़ार में नहीं बैठती.
गजेंद्र: [muskurahat] हाँ हाँ. लेकिन तुम जैसे aurat—din भर खाना, सफाई, इतनी अच्छी dikhti—thodi टी
अवज्जोह डेसेर्वे करती. तुम्हारा शौहर खुशनसीब. ज़्यादा कहता है कितनी स्तुन्निंग लगती हो कुर्ते में?
अम्मी: [thodi laali, lekin jhatka] यह तुम्हारा मामला नहीं. और मेरे शौहर की बात मत करो.
गजेंद्र: [paas kadam] ठीक. लेकिन किसी को तो कहना पड़ता. तेरी वह आँखें… गहरी, काली. मर्द खो
जाए. और वह मुस्कराहट जो छुपाती हो? खतरनाक.
अम्मी: [nazar hata kar] मैं मुस्कुरा नहीं रही. और यह तारीफें नहीं चाहिए.
गजेंद्र: [dheemi qahqaha] कहती हो, लेकिन साँसें तेज़ी से, गाल गुलाबी. पहले सोच रही थी मुझ पर?
सड़क पर जो कहा उस पर?
अम्मी: [mazboot] नहीं. कोशिश कर रही थी तुम्हे न सोचूँ. और तुम्हे फिर नहीं देखना चाहती,
गजेंद्र जी. कभी.
गजेंद्र: [bhaun utha] कभी नहीं? तेज़ शब्द. लेकिन जिस्म कुछ और कह रहा अभी.
अम्मी: [tez sur] एक पल भी मत सोचो की मुझे तुम पसंद हो या यह सब. नहीं. तुम बद्तमीज़, सुनते
नहीं, हर हद्द क्रॉस करते. मैं shaadi-shuda—shauhar से मोहब्बत. जो भी मेरी आँखों या साँसों
में देख रहे, वह तुम्हारे लिए नहीं.
गजेंद्र: [aur muskurata] खुद को यह बताती रहो. मुझे पता है तुम जैसे औरतों का. दिन भर
परफेक्ट, ढकी, फ़र्ज़ ऐडा... लेकिन कभी अंदर छोटी आग सुलगती. शांत, लेकिन गरम. अभी देख रहा
हूँ.
अम्मी: कोई आग नहीं. सपने मत देखो.
गजेंद्र: [dheere peeche mud kar] ठीक ठीक. लेकिन यार, पीछे से यह नज़ारा… पतली कमर से
फैलती पूरी कमर. परफेक्ट शेप. और सीना इतनी तेज़ी se—notice करना मुश्किल नहीं.
अम्मी: [saansen saaf tez] गजेंद्र जी… रुक जाओ.
गजेंद्र: [baazuon par dheere haath rakha] महसूस करो साँसें कितनी तेज़ी? गरम, तेज़ी... यह जिस्म
की बात है. मुझे बिलकुल पता है मतलब.
अम्मी: प्लीज…
गजेंद्र: [paas jhuk kar, gardan ke paas saans] खुशबू कितनी अच्छी. जस्मिने और वह narmi—sirf तुम.
[Woh gardan ke side par dheera chuma diya.]
अम्मी: [chhoti si hilkar, dheemi siski, thodi der wahin rahi, saansen tezi se]
गजेंद्र: [ek haath aage saraka kar, naaf ke neeche rakha, dheere gol ghumaya] यहाँ… वह छोटी
काँप. पेट सख्त है न? यह सच जाग रहा.
अम्मी: [awaaz kaamp ti] मैं… नहीं कर सकती…
गजेंद्र: [dheere] लड़ना नहीं पड़ता.
अम्मी: [achanak aage kadam, mud kar saamne—ankhen gusse mein lekin poori naraz nahi, chehra laal]
बस करो! अभी मेरे घर से निकल जाओ. और कभी वापस मत आना.
गजेंद्र: [smirk, haath upar] ठीक ठीक. गुस्से में और सुन्दर लगती हो.
[Darbaze par zor ki khatkhatahat. Dono jam gaye. Ammi ki aankhen badi.]
अंदर धीमी आवाज़ें. फिर khatkhatahat—Abbu, उनेक्सपेक्टेद्ली जल्दी घर. अम्मी हैरान, चेहरा सफ़ेद:
घर में दूसरा आदमी, अकेली, अब्बू के bina—bara गुनाह, मन, अगर देखा गया तो बदनामी. दीं
और परदह चिल्ला रहे थे खतरा; ग़ैर महरम अंदर गलत हर लेवल पर.
[Dusri khatkhatahat, zor se.]
अम्मी: [aankhen dheere badi, saans atak] ओह… ओह नहीं…
[Teesri, zid se. Asli ghabrahat aayi.]
अम्मी: [tez dheere, mud kar] गजेंद्र ji—chhupo! अभी!
गजेंद्र: [poori shaant, smirk] रिलैक्स, सुन्दर. कौन?
अम्मी: [kaamp ti awaaz, seene par dhakka] नहीं pata—shayad शौहर! छुपा!
गजेंद्र: [mazaakiya] कहाँ?
अम्मी: [hallway ki taraf ishaara] लांड्री room—wahaan! वह दरवाज़ा! जाओ!
गजेंद्र: [aur muskurate peeche hat te] लांड्री रूम? तुम्हारे कपड़ों से घिरा... अच्छा चॉइस,
शाहिदा जी. बहुत निजी.
अम्मी: [hiss kar] रुको यह! जाओ! मेरी शादी बर्बाद नहीं चाहती तुम्हारी वजह se—please!
गजेंद्र: [dheemi hansi, darwaze ki taraf] ठीक ठीक. तुम्हारे लिए छुप रहा... इस बार.
[Woh tezi se chhote laundry room mein ghus kar darwaza lagbhag band kiya, chhota sa gap chhoda.]
[Ammi darwaze ki taraf daudi, haathon se hawa hilaa kar cigarette ki halki dhuyen taalne ki koshish.
Kurta theek ki, kaamp ti saans, laundry room ki taraf bechain nazar, phir darwaza khola.]
[Abbu living room mein aaye. Ammi ne peeche tez band kiya.]
अब्बू: [thake muskurate] अस्सलामु अलैकुम, शाहिदा. आज थोड़ा जल्दी आ gaya—bazaar शांत था.
अम्मी: [awaaz thodi zyada khush, zabardasti muskurahat] व अलैकुम अस्सलाम! जल्दी? अच्छा! आओ आओ.
अब्बू: [aage kadam, maathe par halka chuma] ठीक हो? थोड़ी गरम लग रही.
अम्मी: [ghabraayi hansi] हाँ haan—kapde फोल्ड और सफाई कर रही थी. काम से गर्मी लग जाती.
[Abbu sofa par gaye, thake baith kar saans bhari, collar dheela. Theek baith kar gehri saans li, naka
chadhaayi.]
अब्बू: [thodi bhaun] हम्म… अजीब. घर में सिगरेट जैसी खुशबू. कोई आया था?
अम्मी: [shaant, haath hila kar] वह बची खुशबू? पडोसी का लड़का और दोस्त बहार घूम रहे थे—
खिड़की के पास स्मोक. हवा सीधा अंदर आयी. सब खिड़कियां खोल दी थी, लेकिन जानते हो कभी चिपक जाती.
अब्बू: [dheere sar hilate, aankhen malte] आज कल के बच्चे… तमीज नहीं. ठीक, अंदर नहीं थी तो.
अम्मी: [bagal mein baith kar, fikr se] कभी नहीं. तुम बहुत थके लग रहे. दुकानें पर सख्त दिन?
अब्बू: [karwi hansi] सख्त से ज़्यादा. लैंडलॉर्ड सुबह आया. पूरी लाइन खली कर raha—koi बड़ी कंपनी ने
पूरा ब्लॉक लीज किया. सिर्फ एक महीना दिया पैक करने को.
अम्मी: [aankhen badi] एक महीना? मुमकिन नहीं! ऐसा नहीं कर सकता.
अब्बू: [karwi hansi] कर सकता, और कर रहा. ज़्यादा वक़्त माँगा, लेकिन नहीं माना. बिज़नेस है कहता.
अम्मी: [baazu par dheere haath rakha, sehlaate] हे… इधर आओ, सर टिकाऊ. [Paas kheench kar kandhe
par sar, baal sehlaate] अकेला मत उठाओ. रास्ता निकल आएगा.
अब्बू: [aankhen band, thaki awaaz] कहाँ, शाहिदा? नए जगह डिपाजिट मांगते. रेंट दो गुना. हमारी
सेविंग्स khatam—do महीने के बिल, नयी दूकान नहीं.
अम्मी: [baazu sehlaati tasalli se] श… एक एक कदम. पहले लैंडलॉर्ड से साथ बात करेंगे. शायद मैं
साथ जाऊं तो माने. काम से काम तीन महीने.
अब्बू: [saans] सख्त आदमी. लेकिन... शायद.
अम्मी: और कल कजिन को call—bazaar के आधे मालिकों को जानता. कोई छोटी खली दूकान मिलेगी. या
थोड़ी देर शेयर.
अब्बू: [ruk kar] शेयर से इनकम घटेगी... लेकिन कुछ नहीं से बेहतर.
अम्मी: [maathe par dheere chuma] बिलकुल. और बजट और tight—extra बंद, सदा खाने, बाजार काम.
पहले सख्त वक़्त गुज़ारे, हमेशा मज़बूत निकले.
अब्बू: [dheere] तुम मेरी से ज़्यादा अच्छी. यह फ़िक्र डेसेर्वे नहीं करती.
अम्मी: [garam muskurahat] बकवास. हम टीम. याद है दो साल पहले दूकान में पानी? सोचे
ख़तम. साथ ठीक किया.
अब्बू: [chhoti muskurahat] सच... ,.' मेहरबान था.
[Laundry room se chhoti si thud—aise jaise plastic bottle ya dabba washing machine se giri.]
अब्बू: [tez sar utha kar hallway ki taraf] यह आवाज़ क्या थी?
अम्मी: [natural muskurahat, kandhe par thapki distract karne] ओह वह? बड़ा डिटर्जेंट बोतल ऊपर
रखा था कपडे सॉर्ट करते. आखिर गिर गया. यह पुराणी मशीन बंद भी विबरते karti—jaante हो.
अब्बू: [ek second sun kar, bhaun] थोड़ी भरी लगी. पक्का कुछ और नहीं गिरा?
अम्मी: [dheemi hansi, dheere waapas kheench] पक्का. Be-dhyani से स्टैक किया था. बाद में ठीक कर
लूंगी. आओ, वापस लेट jao—zyada टेंस हो.
अब्बू: [dheere aaraam] शायद सही... आज जुम्पी हूँ.
अम्मी: [baal sehlaati, dheemi awaaz] कोई भी होता. लेकिन ठीक हो जाएगा. कल plan—har जगह लिखेंगे,
हर इंसान से पूछेंगे. रात इस्तीखरा. ,.' दरवाज़ा खोलेगा.
अब्बू: [aankhen band, dheemi] तुम हमेशा मुमकिन बना देती...
अम्मी: [maathe par phir chuma] क्यूंकि है. तुम पर भरोसा. हम पर. अब आराम. चाय बनाती हूँ.
अब्बू: [dheere] शुक्रिया, शाहिदा… तुम बिना पता नहीं क्या करता.
अम्मी: [muskurate, baal sehlaati] कभी पता नहीं करना पड़ेगा.
[Laundry room se poori khamoshi. Ammi darwaze ki taraf pal bhar dekhi, chehra mustaqil, phir poori
narmi Abbu ko tasalli mein.]
मैं घर के एक हिस्से में, अब भी बहार, उत्सुकता खींच रही लांड्री रूम चेक करने. कुर्सी पर
चढ़ कर ऊंची खिड़की से झाँका, हैरान रह गया: गजेंद्र अम्मी के धुले नहीं पैंतीस और कपड़ों
के बीच खड़ा, सुखाने लटके, बेसिन तरतीब से.
वह इधर उधर मुस्कुराते देखा, फिर पैंतीस से भरे बेसिन par—type से सॉर्ट, उनकी तरतीब. एक सफ़ेद
उठायी, नरम कपडे को उँगलियों में महसूस, फिर नका के पास ले कर गहरी सूंघ, आँखें बंद
ख़ुशी से. हैरान देख ता रहा वह गहरा सूंघता, मज़ा लेता.
राखी, गुलाबी उठायी, वह भी
सूंघी. खुद से: "छूट वाला हिस्सा नमकीन, tangy—jaise दिन भर की उसकी खुशबू. गांड वाला
स्टिन्की, जैसे दिन भर फागी, erotic—woh बड़ी गांड चलती, लचकती."
वह अम्मी और अब्बू सुन raha—Abbu शिकायत दूकान निकालने की. गजेंद्र अँधेरी मुस्कराहट, फ़ोन
निकाल कर चुपके कॉल. "जो कहा था कर लिया?" सुना, नहीं पता किस se—shayad स्टाल का मामला उसी ने
करवाया लिवरेज के लिए?