Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi - Page 6 - SexBaba
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Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi

रौशनी जी कैसी हो आप .. बहुत दिनों बाद मुलाक़ात हुयी हैं आपसे”

“नमस्ते रमेश जी .. में ठीक हूँ .. बस कुछ काम के सिलसिले जाना पड़ा था .ल

“अच्छा मैडम ठीक है. .. वैसे आप आज ंगो नहीं गयी .. यहाँ मार्किट आयी हो?”

“रमेश जी में और कुछ दिनों की छुट्टी ली ंगो से .. और घर के बहुत सारे सामानों की खरीदारी करनी भी हैं ..”

“अच्छा ठीक हैं रौशनी जी वैसे में आपकी खरीदारी में मदद करू ..?”

“रमेश जी नहीं आप अपने काम को छोर ऐसे नहीं करिये .. में करुँगी खरीदारी.”

“अरे रौशनी जिनकारूँगा न मदत .. काम पर तोह रोज़ जाता हूँ , आप जैसी बसीं की मदत करने का मायका बार बार नहीं मिलता ..”

रमेश की उसे हसीं कहने के बात पर रौशनी मुस्कुरायी …

“रौशनी जी वह हस्ती हुयी कितनी खिल उठ टी हो आप .. वैसे भी कुछ ज्यादा hi खिल उठी हो उस दिन से तोह बहुत .. क्या बायत हैं सर ने आपके साथ बहुत मस्तियाँ की हैं न”

“उफ़ रमेश जी आप भी न कुछ भी .. ऐसे कुछ नहीं”

रौशनी बस सलीम द्वारा चूड़ी की सोच सिहर उठती हैं … सलीम से बड़ी मस्त चुदाई आकृ थी उसने .. बुद्धा होकर भी बड़े दमदार तरीके से उसकी चुदाई किट hi उन्होंने उफ्फ्फ्फ़… उसे फिर यह बात भी याद आती हैं कैसे वह रमेश जी के मोठे लुंड की सोच सोच अपनी बुर से खेली थी दो दिनों से .. उसकी नज़र अनजाने में रमेश जी की क्रॉत्च क्षेत्र में जाती hi हैं और हलके से अपने होठों पर जीभ फेरती हुई फिर जल्द से वहां से अपनी नज़रें वह निकलती हैं.

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“रौशनी जिनकहन खो गयी .. चलिए आपकी मदत करता हूँ..”

L”nahi रहने दीजिये न रमेश जी”

लेकिन रमेश उसकी बात नहीं सुनता और उसकी हाथों से थैली लेता हैं ..

रौशनी भी कुछ नहीं बोलती बस मार्किट में जाती हैं एक सब्ज़ी वाले के पास.

“आईये बीबी जी,, आज तो बड़े दिनों के बाद आये है.”

“ हाँ अब बस सब्ज़ी अच्छी दिखाओ.”

“ बढ़िया hi दिखाएंगे बीबीजी ,. आप बढ़िया है तो सब्ज़ी कैसे घटिया दिखयेंगे.” रौशनी काफी शीम उठी उसके ऐसे शब्दों से .. अपनी ऊपर नियंत्रण पाकर हॉक्स से मुस्कुरायी.

भाईसाब “अब मस्का लगाना बंद करो बातें मीठी करते करते सब्ज़ी ख़राब दाल डोज आप”

“अरे नहीं बीबी जी आप जैसे ग्राहक को नरराज नहीं कर सकते हैं .. वैसे आज का सब्ज़े ताज़ी सब्ज़ियां हैं बैह्गां और लौकी”

“कुछ भी कहते हो .. पिछली बार यहाँ इसी मार्किट से लिए बैंगन सारे खराब निकले”

“अरे मेमसाब उस दिन में यहाँ नहीं था .. वह रामु , दूसरे सब्ज़ीवाले ने दिए होंगे ..

.. वैसे आपको पता हैं न बैगन अलग अलग सिज़ेस के आते है. .. उसके पास बैंगन छोटे हैं यह मेरे पास तोह बड़े बैंगन है. ..”

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“क्या मतलब आपका भाईसाब …” रौशनी जरा चौंकते हुए बोली.

“अरे बीबी जी मतलब में जो अभी दे रहा हूँ मोठे और बड़े फ्रेश बैंगन हैं..

इस सब सो सुन रमेश जो बातें एन्जॉय कर रहा था अब उसे लगा की वह सब्ज़ीवाला कुछ ज्यादा hi उड़ रहा था ( बस में hi रौशनी जी से ऐसी बातें कर सकता हूँ ..)

“ज्यादा मत बोल .. मैडम जी आप चलिए इससे मत लीजिये कुछ भी..”

“रमेश जी आप प्ल्ज़ शांत रहिये .. आप जाओ वहां दूसरे सब्ज़ी वाले के पास जाओ जिसने उस दिन मुझे ख़राब बैंगन दिए थे … उससे आप लड़िये .... में यहाँ संभल लुंगी, वैसे भी बैंगन फ्रेश और मोठे हैं इनके….. रौशनी बिना सोचे बोल दी दोहरी मतलबी चीज़ .. लेकिन सब्ज़ीवाला वह समझ मुस्कुराया.

रमेश चुप के से फिर दूसरे सब्ज़ीवाले के पास जाता हैं.

रमेश जाता हैं तोह रौशनी फिर से उस सब्ज़ी वाले के पास देखती हैं और उसकी आँखें एकदम से उस सब्ज़ी वाले के पैरों के वहां जाते है. अब बात ऐसी थी की उसका कला लोढ़ा उसकी लुंगी से थोड़ी बहार आते हुए उसके आँखों के सामने hi था .. उफ्फ्फ सच में काफी मोटा लोढ़ा था उसका..

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सब्ज़ीवाले ने रौशनी की नज़र पकड़ ली थी लेकिन वह ऐसे नाटक कर रहा था जैसे कोई बात हुयी hi न हो.

रौशनी बस सोचती हुयी ( उफ़ रमेश जी जैसे कोटा तोह नहीं लेकिन फिर भी हैं काफी बड़ा .. यह बुद्धों का ऐसे कैसे इतना मोटा लुंड होता हैं उफ्फ्फ)

. उस सब्ज़ी वाले ने रौशनी की सोच को तोड़ते हुए

“देखो मैडम देखो, सोच क्या रहे हो आपके लिए hi हैं बड़े ताज़े बैंगन.

रौशनी उस बात पर शर्मायी .. कुछ ज्यादा hi हो रहा था ये सब उसे लगा.

“वैसे भाईसाहब ये गोभी कैसी हैं”

“मैडम जी, 60 रस किलो, देखिये मेमसाब एकदम ताज़ी है. और उसने उस पर ऐसे हाथ फिराया और उसे रौशनी के सामने hi दबाने लगा मनो वह गोबी नहीं रौशनी की चूचियां हो ..

तब तक रमेश भी वापस वहां आ गया..

हु सब्ज़ीवाला बोलै “मैडम हमने होम डिलीवरी भी स्टार्ट किया है आप फ़ोन पर बता दीजिये में खुद सब्ज़ी दे जाएगंगा आपको इस वािण को लेने की कोनो ज़रुरत नहीं.”

रमेश , रौशनी के कुछ बोलने से पहले hi “बस होगया जल्दी से सब्ज़ी दीजिये और हम जाते है .., रौशनी जी चलिए सब्ज़ी लीजिये और जाते हैं.”

पैसे देकर फिर रौशनी और रमेश वहां से चले गए ..सब्ज़ीवाला बुदबुदाता हुआ (साला कम्बख्त बीच में क्यों घुस रहा था .. मैडम जी के वहां होम डिलीवरी करने का मौका मिल रहा था .. चुटिया बुद्धा)

फिर दोनों एक और दुक्काँ जाते हैं दूध लेने.

“भैया गाय का फ्रेश स्किम मिल्क वाले दूध का पैकेट दीजिये 500मल.”

दूकान में और एक बुद्धा था , रौशनी को देख उसकी आँखें खिल उठी … (उफ़ क्या गोरी मैडम हैं यार मम आज तोह मेरा लकी दिन हैं)

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“मैडम जी आप गाय का फ्रेश क्रीम दूध लीजिये, अभी फ्रेश डेरी से आया हैं”

“नहीं भैया स्किम मिल्क दे दीजिये”

“लीजिये न मेमसाहब, आप जैसी गोरी मेम ने फ्रेश क्रीम दूध hi पीना चाहिए …”

“भाईसाहब क्या कह रहे हो … में कही न स्किम मिल्क वाला दीजिये”

हु दुकानदार मन में बुदबुदाता हुआ “उफ्फ्फ्फ़ आपकी दूध की फेयरी भी बड़ी मस्त हैं मैडम … वहां से फ्रेश दूध निकलता हैं क्या … और वह रौशनी की चूचियों के वहां घूरे जा रहा था जिससे रौशनी काफी उनकंफर्टबले फील कर रही थी.

रमेश से सब देखा फिर बोलै” अरे मैडम को स्किम मिल चाहिए तेरे को क्या पड़ी हैं … चल जल्दी दे हमे जाना हैं…”

वह दुकानदार रमेश को एक ग़ुस्से की नज़र से देखता हैं और दूध की पैकेट रौशनी को देता हैं.

“रौशनी जी कहा था न यहाँ से न करिये खरीदारी .. चलिए में आपको अच्छे मार्किट ले जाऊंगा ..”

“रमेश जी ठीक हैं चलिए”

फिर दोनों रिक्शा में बैठ जाते हैं और मार्किट के लिए रवाना हो जाते हैं.

कुछ 1 घंटे बाद वह मार्किट पहुँचते हैं, लेकजण दोनों में बातें नहीं होती क्यूंकि रास्ते में रौशनी अपनी सहेली के साथ फ़ोन पर बातें कर रही थी.

मार्किट में 2 घंटों तक रौशनी खरीदारी करती हैं. वहां उसे कई चीज़ीं मिली थी अच्छे दाम में और वह काफी खुश थी.

“रमेश जी सच बहुत अच्छे मार्किट ले आये हो आप .. जरा सी गन्दगी हैं और बदबू हैं लेकिन बहुत अच्छे दाम में मिलता हैं सब कुछ.

“हाँ रौशनी जी वह आप जैसी महिलाऐं उस मार्किट में वहां के नाम और प्रसिद्ध होने के वजह से जाती हो .. लेकिन अच्छी खरीदारी घर के सामन की ऐसी hi मार्किट में होती हैं .. अच्छे डैम में और काफी वैरायटी भी.”

“हाँ रमेश जी सच हैं शुक्रिया आपका.”

तभी रौशनी को उसके ोाती रोनित का कॉल अत हैं .. हु उसे कहता हैं की वह शाम को नहीं आएगा बल्ली सीधे 11 बजे रात को hi आएगा. रौशनी समझ गयी की वह होने उन दोस्तों के साथ जा रहा होगा और रात को पि कर hi आएगा .. आज रात तोह सेक्स होगी hi नहीं ..

रमेश बात सुन केता हैं की रौशनी के पति लेट नाईट आने वाले हैं तोह वह खुश होता हैं और रौशनी के साथ समय बिताने के प्लान बनता हैं.

“रौशनी जी रास्ते में एक होटल हैं बहुत स्वादिष्ट खाना मिलता हैं .. वैसे भी शाम हुयी हैं .. 6 बजे हैं. वहां हम 7 बजे तक पहुंचेंगे और फिर आप डिनर भी वही कर लीजिये , आपके पति लेट आने वाले हैं न घर”

“रमेश जी हाँ लेकिन में थक गयी हूँ , घर जाना चाहती हूँ वही कुछ बना कर खाउंगी.”

“रौशनी जी चलिए न .. बहुत स्वादिष्ट खाना मिलताभाईन वहां .. उँगलियाँ चाटती रहोगी आप खाना खाने के बाद”

वैसे रौशनी को भूक भी लगी hi थी .. खरीदारी और ट्रेवल से वह भुकी थी .. और रेस्टोरेंट जाने तैयार होती हैं.

रमेश को पता था वह होटल उनके नार्मल रास्ते पर नहीं हैं और उसे दूसरी ज़रा सी सुनसान जगह से रौशनी को पे जाना था. और तोह और उसका घर भी उसी के रास्ते के बीच में था .. वह रौशनी को अपना घर भी दिखाएगा वह सोचने लगा .

फिर दोनों रेस्टोरेंट 1 घंटे बाद पहुँच जाते हैं.

अंदर रौशनी देख सकती थी बहुत भीड़ थी और अभी तोह 7 hi बजे थे. सच में रेस्टोरेंट लङखङा बहुत स्वादिष्ट होगा. उन्हें बस एक hi सीट मिलती हैं वह भी रेस्टोरेंट के अंत में.. और ऐसी सीट जहाँ एक कपल पहले से hi बैठे थे .. और जगह के लिए उन्हें 30मं रुकना पड़ता इसीलिए दोनों वहां बैठने तैयार होते हैं.. उस कपल को भी कोई ऐतराज़ नहीं था.

दोनों ने खाना माँगा लिया . वह कपल जो बैठे थे काफी घुल मिल रहे थे … वह लड़की उस लड़के से चिपक कर बैठी थी .. खाने के बीच बीच दोनों खिलखिलाकर हस्ते ..

अब वह सीट भी काफी छोटी थी और रौशनी और रमेश को भी ज़रा सा पास बैठना पड़ा … इतने करीब की रौशनी की झंघों का टच रमेश के जहगों से हो रहा था ..

रमेश इस करीबी से बहुत खुश था .. रौशनी के बदन से बड़ी खुस्भु आ रही थी .. उसका लोढ़ा रौशनी की खुशबु से और रौशनी की करीबी को पाकर उभर रहा था ..

उनके साइड की टेबल की सीट पर बैठा आदमी उठ कर जा रहा था तोह वह एकदम रौशनी की लारीबी से गुज़र गया और चुने hi वाला था की रौशनी साइड में करि होने बदन को .. लेकिन जगह इतनी काम थी की वह खुद को सँभालने उसने अपने हाथों को रमेश के झंघों पर रखज .. वह भी ऐसी जगह जो रमेश ले उभरते लुंड के लाफ़ी करीब थी मानो उसे कभी भी छू सकेगी .. रौशनी को भी एहसास हुआ की उसके हथीन के साइड में कुछ उभरा हुआ था .. वह देखि तोह पायी की रमेश का लोढ़ा उसकी पंत में टाइट जो रहा था और रमेश की क्रॉत्च का एरिया बिलकुल उसके हाथों के करीब था .. रमेश भी यह महसूस करा लेकिन ऐसे करने लगा मानक कुछ न हुआ हो .. रौशनी की नज़रें बस अब रमेश के लुंड की उभर पर hi था और वह सिहर उठी ..

वह रात कन्जंसिडेंट्स के बारे में सोची जब वह रमेश के लुंड को इमेजिन करते हुए कूद की बुर पर अपनी उँगलियों को चला रही थी और झट भी चुकती थी .. इस सोच से उसके गाल लाल हुए लेकिन उसकी नज़र रमेश के लुंड से नहीं हटी .. बस उसके उभर को देखती रही , उसकी गर्मी बढ़ती रही और वह रमेश के लुंड को नग्न सोचने लगी ..

फिर वेटर खाना लेकर आया तब रौशनी अपने ख्यालों से निकलती हुयी सीधी बैठ गयी और अपने हाथों को रमेश के झंघों से निकल ली .. फिर दोनों खाना खाने लगे .. लेकिन रमेश का लोढ़ा अब बैठने का नाम नहीं ले रहा था.

“रमेश जी खाना बहुत hi स्वादिष्ट हैं .. “

“मैंने कहा था न रौशनी जी … बहुत स्वादिष्ट खाना होता हैं यहाँ …”

खाना लहणे के बाद बिल की बारी आयी .. बिल वेटर ने रखते hi दोनों बिल को पकड़ने आगे बढ़ाये हाथों को तोह रौशनी ने पहले बिल पकड़ लिया और फॉर रमेश ने रौशनी के हाथों को पकड़ लिया ..

“रौशनी जी बिल का भुगतान में करूँगा”

“नहीं रमेश जी में करुँगी ..”

इसी बात पर दोनों बात करने लगे लेकिन रमेश , रौशनी के हाथों को पकडे hi रखा .. उसके खुरदरी हाथ अब रौशनी की नाज़ुक हाथों में थे … और वहां हु दबोचने लगा .. रौशनी को अब एहसास हुआ की उसके हाथ अब रमेश के हाथों पर थे .. उसके रफ़ हाथ उसे अपने मुलायम हाथों पर महसूस कर वह शर्मायी.. रमेश भी उसके हाथों को अब मसल रहा था बातों बातों में.

“रमेश जी छोड़िये न …”

“रौशनी जी क्या चोरु .. बताइये”

“उफ़ रमेश जी आप मेरे हाथों को छोड़िये न .”

“नहीं फिर आप बिल का भुगतान करोगी .. नहीं में बिल भरूंगा … जब तक आप मुझे बिल नहीं देती में आपके हाथों को नहीं छोड़ूंगा.”

“उफ़ रमेश जी यह कैसी ज़िद्द … उफ्फ्फ छोड़िये मेरे हाथों को”

“नहीं आप फिर बिल भरोगी .. आप बिल मेरे हवाले करो फिर hi आपके हाथों को छोड़ूंगा.”

“उफ्फ्फ आप तोह बहुत hi ज़िद्दी हैं … ये लीजिये बिल और मेरे हाथों को छोड़िये” ऐसे कहते हुए रौशनी अपने चेहरे पर मुस्कराहट छिपा न सकीय ..

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रौशनी बिल देती हैं रमेश को और रमेश, हाथों को एक आखरी बार दबोचते हुए छोर देता हैं.

बिल भर कर दोनों वहां से निकल जाते हैं.. रास्ते में बारिश होने लगती हैं ..

“ओह रमेश जी बारिश आने लगी”

“हाँ रौशनी जी आज दुपहर में इतनी धुप और नमी थी , इसीलिए शाम को बारिश आ रही हैं”

“में भीग रही हूँ रमेश जी “

“रौशनी जी माफ़ करिये आज में रक्षा के परदे लाना भूल गया जो बारिश को बहार रखते हैं ..”

“उफ्फ्फ फिर क्या करू में रमेश जी बहुत भीगी जा रही हूँ ..”

रमेश देख सकता था आईने से की रौशनी की साड़ी और ब्लाउज भीग रही थी .. उसकी गोरी से बदन पर पानी के बूंदों से वह और चमक रही थी .. अँधेरा भी च चूका था .. अब उसके प्लान का अगला स्टेप आने वाला था.

“रौशनी जी घर पहुँचाने में और 1 घंटा लगेगा :. जरा ज्यादा भी लग सालता हैं क्यूंकि मुझे चलने की स्पीड भी काम रखनी होगी”

“उफ़ फिर क्या करे रमेश जी में तोह ौरी भीग जाउंगी और फिर सर्दी ज़ुकाम हो जाएगा .. दो दिन बाद मुझे ंगो भी काम पर जाना हैं”

“हम्म रौशनी जी एक उपाय हैं .. मेरा घर रास्ते में hi पड़ता हैं और वह बस 20मं की दुरी पर हैं.. आपको में वहां ले जाएंगे और वहां आप रुक पाओगी जब तक बारिश रुक नहीं जाता .. आप भीगोगी भी नहीं और वहां आप ड्राई कर पप्गी खुद को”

“रौशनी कुछ सोचतिभाईं (उफ्फ्फ्फ़ अब और क्या कर सकते हैं .. उनके घर जाउंगी तोह बारोश से रहत मिलेगी और भीगूँगी भी नहीं पूरी तरह से .. लेकिन उनके घर कैसे जा सकती हूँ .. उफ्फ्फ उनकी बीवी भी नहीं होती हैं शहर के घर पर .. लेकिन में भी ऐसे भीग नहीं सकती और 1 घंटे तक)

“अच्छा ठीक हैं वहां ले चलिए जल्दी से”

रमेश के मन में लड्डू फुट रहे थे .. वह आज रौशनी को अपने घर ले जा रहा था .. वह दोनों वहां अकेले होंगे .. वैसे भी बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही हैं , यही मौका हैं रौशनी जी के साथ और करीबी बना सकू …

“हाँ चलिए रौशनी जी ..”

फिर दोनों 20मं में पहुँच जाते हैं.. रमेश के घर के आसपास की घरों में लाइट भी नहीं थी .. उसका घर छोटा था , कुछ कंक्रीट के स्टोन्स से बना हुआ और कुछ अभी भी कच्चे मिटटी का .. घर के आस पास काफी गंदगी भी थी … रौशनी को उस गंदगी के बदबू से को कुछ समय तक रौशनी अपने रुमाल से अपने नाक को ढकने लगी.

रौशनी अब और भी भीग चुकी थी. उसकी ब्लाउज पीछे से गीली थी … साड़ी नाभिनके वहां गीली थी .. उसकी बदन से चिपकी हुयी थी उसकी साड़ी.. उसके बाल भी जरा गीले थे .. उसके लम्बे गीली बालों को डेल्ह रमेश का लोढ़ा उभरने लगा .. (उफ्फ्फ क्या कमाल की लग रही हैं रौशनी जी .. उफ्फ्फ क्या बदन हैं गोरा सा .. क्या चूचियां होगी पक्के ाक़ों जैसी … और बारिश से भीगी हुयी और भी शाइन कर रह हैं .. क्या माल हैं यार …)

दोनों अंदर चले जते हैं … उसके घर पर do-teen hi लाइट ों होते थे .. एक बैडरूम था , एक हॉल जहाँ किचन भी एक कोने में hi था … हॉल में रस्सियों के ऊपर रमेश के बनियान और चड्डियाँ भी थी .. उसके घर को देख रौशनी को सलीम और असलिम के घर की याद आयी .. रमेश कंघर तोह उनके घर से और भी चिटा था ..

रमेश बोलै “रौशनी जी आप मेरे कमरे में जाकर खुद को सूखा सकती हो ..”

“हाँ रमेश जी व्है करुँगी .. लेकिन बहुत गीली हो चुकिभाईं मेरी साड़ी .. इसका क्या करू”

रमेश कुछ समय तक बस रौशनी के बदन को घूरे जा रहा था .. उसका लोढ़ा उसकी पंत में उभर भी रहा था ..

“रमेश जी क्या घर रहे हो .. मेरी समस्या का क्या करे.”

“रौशनी जी अंदर अलमारी में मेरी बीवी के कुछ कपडे होंगे .. चाहिए तोह आप उसे पहनिए .. तब तक आपकी साड़ी को पंखे के निचे सूखा देंगे”

“अच्छा लेकिन आपकी बीवी के कपडे बैठेंगे मुझ पर ..”

“वैसे रौशनी जी मेरी बीवी काफी केहतेभें न स्लिम हैं … और आप तोह गदरायी ….”

रौशनी अब आँखें बड़ी कर रमेश को देखने लगी ..

“रौशनी जी सच तोह हैं आप की कर्व्स ज्यादा हैं .. आपकी …

और रमेश अब रौशनी की चूचियों पर नज़र डालता हैं..

“आपकी चीज़ें बड़ी बड़ी हैं तोह अब तरय करना पड़ेगा मेरी बीवी के कपडे आप पर बैठनेगे या नहीं ..”

(उफ़ यह रमेश जी क्यब्कया कह रहे हैं .. ओह गॉड मुझे तोह शर्म आ रही हैं … उफ्फ्फ्फ़)

रौशनी कुछ नान कहते हुए रमेश के कमरे में चली जाती हैं अपनी चूतड़ों को मटकते हुए. वहां रमेश अपने लोडे को मसलने लगता है (उफ़ क्या चूतड़ हैं यार इसकी ममम आईटी ी गोल गोल .. भागती हैं तोह कितने मटकते हैं उफ्फ्फ्फ़ आज तोह रौशनी जी के करीब और जाना hi होगा …)

रौशनी अब कमरे में जाती है. .. बहुत छोटा सा कमरा था… सब मर्दों जैसे काफी मेस्सी रखा था रमेश ने अपना कमरा .. वह अलमारी को खोली तोह उसे बस 3-4 hi ड्रेस दिखे रमेश की पत्नी के .. उसने उन्हें बहार निकला.

उसमें से दो साड़ी , ब्लाउज और पत्तिकत्स की पेअर थे और दो कुर्ती और लेग्गिंग्स .. वह उन्हें निकली बहार .. वह डेल्ह कर hi नाता सकती थी की रमेश के पत्नी के कपडे काफी टाइट थे और उसके कपड़ों से 2साइज छोटे भी .. उफ़ अब वह अगर कपडे बदलेगी उनमें तोह इतने टाइट होंगे रमेश की पत्नी के कपडे उसके लिए ..

रौशनी सोची की वह नहाएगी भी. वह रमेश को कमरे से ोुकरते हए “रमेश जी में चाहती हूँ नाहा लू लेकिन गरम पानी कैसे मिलेगा .. आपका हीटर कहाँ हैं.”

(उफ्फ्फ रौशनी जी नहाना भी चाहती हैं … ममम काश थोड़ी झलक दिख मुझे उसके नंगे गोर बदन का)

“रौशनी जी वाहन बाथरूम के अंदर एक स्विच हैं .. लेकिन याद रखिये 10 मं बाद hi पानी गरम होगा और गरम भी बस 5-10 मं के लिए hi रहेगा और फिर ठंडा हो जाएगा”

“अच्छा ठीक हैं रमेश जी”

उसने कमरे का दरवाज़ा बंद किया.. लेकिन उसे पता नहीं था की दरवाज़ा बड़े हॉक्स से hi लैच होता हैं .. कुछ आवाज़ से या वाइब्रेशन से आसानी से खुल भी सकता था.. उसे लगा की दरवाज़ा बंद हो गया हैं और वह कपडे निकलते हुए बाथरूम में 10मं बाद चली गयी और गर्म पानी से नहाने लगी.

उसने जैसे hi दरवाज़ा बंद किया था , उसके बाथरूम के दरवाज़े के बंद होने के वाइब्रेशन से कमरे का दरवाज़ा ज़रा खुल गया.. रमेश को भी यह बात पता चली और वह बहार खड़ा hi था दूर के बने गैप से अब वह कमरे के अंदर थोड़ा झाँक सकता था.

रौशनी का नहाना बंद हुआ और वह टॉवल को बदन से लपेटी हुयी बहार आयी. फिर वह बिस्तर के पास चली गयी जहाँ उसने रमेश की बीवी के कपडे रखे थे. अब बात ऐसे हुयी की रमेश डेल्ह सकता था गैप से की रौशनी टॉवल लपेटी आयी थी.. उसकी नज़र रौशनी की झंघों पर गईंजप टॉवल छोटा होने के कारन से साफ़ साफ़ दिखाई दे रहे थे .. (उफ्फ्फ क्या गोरी झांघें हैं रौशनी जी की ममम मुलायम और दूध जैसी गोरी उफ्फ्फ और इतनी मस्त गदरायी झांघें उफ्फ्फ्फ़ .. )पहली बार वह रौशनी की झंघों को इस प्रकार देख रहा था.

रौशनी को तोह पात hi नहज था रमेश उसे गैप से डेल्ह सकता था . उसकी पीठ थी दरवाज़े के अगेंस्ट और वह अपनी टॉवल को निचे निकली..

रमेश अब रौशनी की गोरी सी पीठ और अब उसकी नग्न चूतड़ों को देख सका .. उसका लोढ़ा एकदम से टाइट हो गया .. और वह उसे मसलने लगा (हे भगवान् उफ्फ्फ क्या माल हैं यार .. क्या चूतड़ हैं मम गोरी और गोल गोल …. गुबारों जैसी चूतड़ रौशनी की … मममम) रमेश अब अपने लोडे को पंत से निकलते हुए मसल रहा था .. उसका लोढ़ा पूरा टाइट हो चूका था और सलामी दे रहा था रौशनी की नंगी चूतड़ों को देख .. उसके लोडे से प्रेकम भी निकलने लगा था .. वह अपने लोडे को मसलता और उसे आगे पीछे हिलता …

फिर रौशनी जरा झुक गयी और अब रमेश उसकी छुअतड़ों के बीच भी देख प् रहा था .. वह जरा नज़दीक आया दरवाज़े के ताकि व और अच्छी तरह से देख सके .. उसका लोढ़ा तोह अब काफी लॉकिंग करने लगा था .. ज़मीन पर भी उसके लोडे का लॉकिंग टपक रहा था .. फिर रौशनी अपनी पंतय पेहेन्ने लगी. रमेष होने लोडे को हिलता हुआ नज़र देकब रहा था उसके लोडे से काफी लॉकिंग शुरू हुयी थी ज़मीन पर टपकते हुए .. (िफ्फ्फ रौशनी जी आज तोह आपके नग्न गांड को देख धन्य होगया उफ्फ्फ क्या गोल गोल हैं मममम क्या मस्तवहैँ .. उन्हें हॉक्स से थप्पड़ मरूंगा तोह कैसे मस्त हिलेंगे .. उफ्फ्फ रौशनी जी उन चूतड़ों को तोह में चूमना चाहता हूँ .. रगड़ना चाहते हूँ अपने मोठे लोडे से और उसकी चुदाई करना चाहता हूँ … मममम गोरी माल हो तुम)

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रौशनी अब कमरे में ने अब पंतय पहनी और ब्रा भी पेहेन ली. उसकी पीठ अभी भी रमेश को दिखाई दे रही थी .. आगे से कुछ नहीं दिखाई दे रहा था .लेकिन रोषनिनको क्या पता की बहार से गैप में से रमेश उसकी गोटी पीठ और चूतड़ों को साफ़ साफ़ नग्न देख कर अपने लोडे को हिला रहा था और उसके लोडे से ढेर सारा रास टपक रहा था .. फिर रौशनी एक ब्लाउज पेहेन्ने लगी .. काफी टाइट ब्लाउज थी .. उसकी चूचियों को सामने से धक् भी नहीं प् रही थी .. ( उफ़ रौशनी … तेरी चूचियां तोह सच में रमेश की बीवी से ज्यादा hi बड़े हैं … उफ्फ्फ .. यह ब्लाउज मुझे फिट hi नहीं हो रही है. ..रुको दूसरी ब्लाउज तरय करुँगी.)

अब दूसरी ब्लाउज से उसके स्तन तोह धक् रहे थे लेकिन बटन बस 3 hi लग रहे थे .. ऊपर के दो बटन उसकी चूचियों के बड़े होने के कारन लग hi नहीं रहे थे .. इस नज़ारे को रमेश देखता तोह वही रौशनी को पकड़ कर छोड़ देता .. रौशनी की चूचियां उस छोटे से ब्लाउज में उभरी हुयी थी .. उसकी नेकलेस उसकी चूचियों के बीच समां रही थी .. उसके निप्पल्स का ऊपरी हिस्सा भी दिखाई दे सकता था ब्लाउज से ..

रौशनी ने फिर कुर्ती लेग्गिंग्स भी तरय करि .. वहां पर भी कुर्ती 2 साइज काम होने के कारन वह उसे पेहेन hi नहीं पायी. अब उसके पास अपने hi गीले कपडे पेहेन्ने के इलावा कोई चारा नहीं था .. लेकिन अब बात थी की उसकी अपनी ब्लाउज तोह ज़मीन पर गिरी थी बाथरूम के दरवाज़े के पास और अंदर का पानी बहार आकर उसकी ब्लाउज और भी भीग चुकी थी ..

(उफ्फ्फ रौशनी तुम्हरी hi ब्लाउज सुर भी गीकी हुयी हैं .. अब क्या करेगी … क्या पहनेगी .. उफ्फ्फ यह कैसी मुसीबत .. रमेश जी की बीवी के कपडे भी नहीं बैठ रहे हैं मुझे .. उफ़ अब क्या करू …) फिर रौशनी सर पर हाथ रखे बिस्तर पर बैठ गयी . बैठ ते hi बिस्तर ने एक क्रीकिंग की आवाज़ दी …

अब वह ऐसे बैठी थिन्की उसकी ब्रा में कैद चूचियां अब गैप में से रमेश को साफ़ साफ़ दिख रहे थे .. बहार रमेश तोह भूके नारों से रौशनी को ब्रा और पंतय में बैठे देख प् रहा था .. उफ़ क्या माल हैं यार .. आगे से भी ऐसी hi धमाकेदार माल हैं उफ्फ्फ क्या चुच्यां हैं मममम इतनी मुलायम होगी .. गोरी भी … उफ्फ्फ दूध से भरी दूधियाँ लगती हैं यासर .. बस उसमें अपने लोडे को दाल वहां की चुदाई करनी हैं .. उफ़ क्या माल हैं ….उसे फिर दिखा की रौशनी ऊपर देखने hi वाली थी .. और उसकी चोरी पकड़ने से पहले hi रमेश वहां से हैट कर बहार चला गया …

रौशनी ने ऊपर देखा और दरवाज़े को ज़रा खुला पलर और वहां गैप पाकर चौंक उठी .. ( उफ्फ्फ यह क्या रौशनी , दरवाज़ा ज़रा खुला हैं और गैप दिख रहा हैं .. ओह गॉड क्या रमेश जी वहां से देख रहे थे .. क्या उन्होंने मुझे पीछे से नग्न देख किया .. और उफ़ क्या उन्होंने मुझे ब्रा पंतय में भी आगे से देख लिया …) वह दरवाज़े के और करीब गयी लेकिन उसे कोई नहीं दिखाई दिया .. फिर वह दरवाज़े को फिर से लैच लगाकर अब बाजू के एक स्टूल पर बैठ गयी ..

(उफ़ रौशनी तुझे अब तोह बस उस ब्लाउज के सिवाय कोई उपाय नहीं हैं .. जरा फिर से उसमें अपनी ब्रेअस्ट्स को फिट करने की तरय करती हूँ.) और वह फिर से ब्लाउज पहने लगी .. इस बार कड़ी म्हणत के साथ उसने अपनी चूचियों को कैसे तोह कर उस ब्लाउज में फिट करि और बटन लगा दिए .. लेकिन उसकी बड़ी चूचियों के तनाव से बटन भी मनो टूटेगा ऐसे hi स्तिथि में था .. फिर रौशनी ने साड़ी पेहेन ली , साड़ी भी काफी चीप मटेरियल की थी .. और बहुत hi पतली सी.. उसे ज़रा खोजकी भी होने लगी उस रफ़ टेक्सचर के साड़ी और ब्लाउज के कारन. फिर वह धीरे धीरे दरवाज़ा खोली .. बहार कोई नहीं था .. रमेश कही दिखाई नहीं दिए उसे ..

कुछ सेकंड बाद रमेश घर के अंदर आ गया .. रौशनी और उसकी आँखें मिली .. फिर रौशनी बहार आने के किये बढ़ी तोह एकदम से उसकी साड़ी दरवाज़े के लैच में अटक गयी और जैसे वह आगे बढ़ी उसकी साड़ी ुनरवेल होने लगी .. वह ज़ारवुसके वाहह से घूमी और उसकी साड़ी का पल्लू निचे गिर गया और अब वह बस ऊपर से उस टाइट ब्लाउज में hi थी रमेश के सामने ..

यह सब इतने जड़ी हुआ की दोनों को उसकी समझ नहीं आयी .. और तोह और उस ब्लाउज का ऊपर का बटन भी अब टूट गया और अब रौशनी की चूचियों का ऊपरी सफ़ेद दूध जैसे हिस्सा रमेश के आँखों के सामने आया..

दोनों की नज़रें मिली … और फिर रमेश की नज़र फिर से रौशनी की चूचियों के वहां गयी जहाँ बटन खुल चूका था .. रौशनी की नज़र भी रमेश के क्रॉत्च क्षेत्र में गयी और वह देख प् रही थी की उसका लोढ़ा ोान्त में ोुरा टाइट उभर बनाये हुए था और उसकी पंत में उसके लोडे के टॉप के वहां काफी गीली निशानी चोर दी थी .. बेशक वह निशानी रमेश की प्रेकम की होगी ..

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इस बात कोह सोच रौशनी शर्मिंदगी से निचे देखने लगी …
 
अपना पल्लू ठीक कर रौशनी और रमेश की नज़रें अभी भी मिली हियी थी .. रौशनी अपने पल्लू तो ठीक कर लिया था लेकिन उसकी ब्लाउज के ऊपरी वाले बटन के खुलने से उसकी चूचियों का बड़ा सा क्लीवेज दिख रहा था रमेश को . और उसका लोढ़ा उसकी पंत में पूरा टाइट हो चूका था ..

रौशनी की नज़रें उसकी उभर पर पड़ी … फिर उसकी चूचियों की डरा और .. यह जान कर की उस वजह से रमेश का लोढ़ा टोघट हुआ था यह शर्मा कर कही और देखने लगी .. लेकिन वही कड़ी रही .. रमेश का लोढ़ा बुरी तरह से झटकों पर खटके मार रहा था .. उफ्फ्फ क्या दूधिया जैसी दरार थी रौशनी की ज़…. उफ्फ्फ्फ़ एक दम कामुक लग रही थी रौशनी ..

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रौशनी इस गर्मी के महल को बदलने बोली “रमेश जी उफ़ आप भी भीग चुके हो .. आप भी कपडे बदलिए न..”

“नहीं रौशनी जी ठीक हैं , कोई बात नहीं … इतना भी नहीं भीगा हूँ”

“नहीं नहीं आप जाइये और कपडे बदलिए .. जाइये”

“ओह रौशनी जी आप कितना ख्याल रखती हैं .. आपके षहुअर बहुत खुशकिस्मत हैं .. आप जैसी ख्याल रखने वाली प्यारी बीवी जो मिली हैं उन्हें”

“शुक्रिया रमेश जी लेकिन अब आप जाइये और कपडे बदलिए.”

रमेश फिर अपने बैडरूम जटाभाईन .. वहां रौशनी बहार (उफ़ अच्छा हुआ उन्हें अंदर भेज दिया .. उफ्फ्फ मेरी इस ब्लाउज की बटन के लहुल्ने से उन्हें तोह मेरी वहां की दरार दिख रही थी .. उफ़ और उनका लोढ़ा ीनता टाइट हो चूका था … हे भगवान् कब यह बसरोष रुकेगी और में जा पाऊँगी घर ..) रौशनी बहार जाती हैं तोह अभी भी लाफ़ी बारिश हो रही थी .. (हे भगवन यह बारोश रुकने का नाम hi नहीं ले रही हैं … ज़रा देखु तोह रोनित कहा हैं …) फिर रौशनी अंदर अपने फ़ोन के पास जातिभाईं लेकिन उसे दीखता हैं की उसके फ़ोन का नेटवर्क hi नहीं था .. उफ्फ्फ अब वह रोनित से बुइ बात कर नहीं पाएगी …

वहां बैडरूम में रमेश का दिमाग चलने लगा था .. उसे आज रौशनी को अपने घर पाने का आईटी ा अच्छा अवसर मिला था .. वह इसका ोुरा फायदा उठाना चाहता था .. वह अंदर से बोलै .. रौशनी जी में भी जरा नाहा लेता हूँ..”

“हाँ ठीक हैं रमेश जी नहाइये और कपडे बदलिए”

रमेश नहाने जाता हैं ..

बहार रौशनी को अब जाके स्ट्राइक होता हैं की रमेश नाहा रहे होंगे तोह पुरे नंग भी होंगे .. उफ्फ्फ उनका मोटा लोढ़ा … उनका मोटा झटकता हुआ लोढ़ा .. उसके बारे में सोच रौशनी की बुर में हलचल होने लगती हैं .. उसकी गर्मी ज़रा बढ़ने लगती हैं.

रमेश ने अपने बैडरूम का दरवाज़ा जान बुझ कर लॉक नहीं लारा था .. इसलिए अब उसके कमरे का दरवाज़ा काफी खुला था .. यह चीज़ रौशनी को कुछ टाइम बाद दिखी .. वह खुद को रोक न पायी और दरवाज़े के गैप से बैडरूम में झाँकने लगी..

रमेश अब जान बुझ कर बाटरूम से निकल कर बैडरूम में नग्न आता हैं और गैप के वहां खड़ा हो जाता हैं. ..

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रौशनी अब रमेश जी के नग्न बदन को देख सकती थी .. वह सलीम जैसे ाहत्ते काटते नहीं थे लेकिन वजनसार तोह थे hi .. उनका पेट जरा ज्यादा बहार आया हुआ था .. रमेश अब साइड पोज़ में खड़ा था और उसका टाइट लोढ़ा अब रसोहनी को दिख रहा था ..

रौशनी न चाहते हुए भी उस गैप से रमेश जिनके मोठे कुंड को देखते रही .. रमेश की नज़रें दरवाए के तरफ नहीं थी इसीलिए रौशनी को उसके लोडे को देखने की हिम्मत बढ़ती गयी .. अब रमेश जी के मोठे लोडे को देख उसकी बुर गीली होने लगी .. वह पीछे दो रातों से रमेसब जी के इसी मोठे लोडे के बार ेमिन ख्यालों में सोचते हुए मस्टुर्बते कर चुकी थी .. और वह लोढ़ा ोुरा औकात में उसके अब ानकोहन के सामने लाइव था .. न चाहतेभये भी उसका एक हाथ उसकी चूचियों पर जाकर उन्हें दबाने लगी . ( उफ्फ्फ क्या मोटा लोढ़ा हैं रमेश जी का भी .. ओह गॉड यह बुड्ढे होकर भी इतना बड़ा लोढ़ा .. उनकी पत्नी तोह काफी मज़्ज़े हैं .. जब भी घर आती होगी .. रमेश जी उसकी चुदाई उनके मोठे लोडे से करती होगी उफ्फ्फ्फ़ , सच इस लोडे से छोड़ने में कितना मज़्ज़ा होगा …, ओह गॉड रौशनी तू यह क्या सोच रही है. ..) रौशनी इस सब चीज़ें अपने दिम्माग में चलने के बावजूद रमेश जी के मोठे लोडे को साइड से देख रही थी ..

रमेश क ोटोः ोेहले से हिनोएटा था की रौशनी दरवाज़े के गैप में सेउसके लोडे को डेल्ह रहिभाईं .. इसीलिए वह उसके लोडे को अपने हाथों में लेकर उसे हिला रहा था … उसके लुंड की चमड़ी को पीछे सरकता जिससे उसके लुंड का पिंक टॉप दीखता रौशनी को .. उसके लोडे की ख़ास बात थी की उसके लोडे का टॉप बहुत मोटा था और काफी पिंक रंग का .. वैसे रमेश ज्यादा काळा नहीं थे .. इसलिए उनका लुंड भी जरा टाइट ब्राउन रंग का hi था ..

रमेश ने अब अगला प्लान आगे बढ़ने की सोचा .. वह दरवाज़े के अंदर से वह बोल

“रौशनी जी , रौशनी जी … में अपना टॉवल भूल गया हूँ बहार .. क्या आप मुझे टॉवल dogi.”roshni अब रमेश के मोठे लोडे को देखने में इतनी लग गयी थी की उसे रमेश जी का आवाज़ सुनकर सेहम उठी .. ओह गॉड अगर रमेश जी ने मुझने उनके लोडे को देखते हुए पकड़ लिया तोह … ओह गॉड.. और रौशनी वहां से हड़बड़ी में जाकर एक कुर्सी पर बैठ जाती हैं…

रौशनी जी जरा मेरा टॉवल तोह दीजिये … हु सूखने रख दिया हैं रस्सी पर … प्ल्ज़ दीजिये”

रौशनी फिर उठ जाती हैं .. रस्सी पर तोह रमेश के काफी सरे बनियान और कच्चे थे … सब धोये हुए सूखने रखे थे .. उसे आखिर में एक टॉवल दिखा .. उसे वह लेने गयी तोह रमेश की साइड की कच्ची निचे ज़मीन पर गिर गयी ..

रौशनी बिना कुछ सोचे उसे उठायी .. फिर उसे एहसास हुआ की उसके हाथों में रमेश जी का लच्छा था .. वहां से धो कर भी एक स्मेल आ रही थी … रौशनी को समझ आयी वह स्मेल किसी और का नहीं उनके वीर्य का हैं जो सफाई के बाद भी नहीं जा रही थी वहां से स्मेल .. रौशनी को घिन्न की बजे एक अलग सीस ुर सूरी सी महसूस हुयी उस स्मेल से .. काफी स्ट्रांग स्मेल थिस और वह स्मेल उसे सलीम और असलम की कच्चे सभी आयी थी … (हे भगवन इनका वहां का स्मेल इतना स्ट्रांग हैं उफ्फ्फ , धोकर भी नहीं जा रहा हैं … मेरे पति रोनित के वहां से काफी स्ट्रांग … .. और वह उस कच्चे को रस्सी पर लटका देती हैं फिर से ..

“रौशनी जी क्या हुआ .. मेरा टॉवल कहाँ हैं … दीजिये न .. ठण्ड से मारा जा रहा हूँ … उफ्फ्फ दीजिये न , अपने बदन को सुखना हैं.”

रौशनी बस रमेश के अभी देखे नग्न बदन की सोची .. उनके लटकते लोडे के बारे में सोची और सिहर उठी.. वह दरवाज़े के पास टॉवल देने चली गयी.. उसने दरवाज़े के गैप से टॉवल अपने हाथों से रमेश जी को देने hi लगी की एकदम से उसके घर की बिजली hi चली गयी .. पूरा अँधेरा चाय हुआ था ..

रमेश ने इस माये का फायदा उठाते hi .. टॉवल के साथ रौशनी की मुलायम हाथों को भी पकड़ लिया और अपने पास खींच लिया .. रौशनी को समझ आने से पहले hi वह खुद को रमेश जी के कमरे में जाते हुए पायी …

उसे पता था रमेश अंदर नग्न हैं लेकिन यह सब इतने जल्दी में हुआ की वह उस टाइम पर उस बात को समझ न पायी ..

एकदम से लाइट ों हुयी और रौशनी पायी की रमेश जी उसके सामने अब नग्न खड़े थे ..: उनके हाथों में टॉवल ..

“ओह गॉड रमेश जी उफ्फ्फ अपना बदन कवर करिये टॉवल से .. आप निचे से उफ्फ्फ्फ़ …”

रमेश इस सब कल्कि मज़्ज़े ले रहा था .. वह अपने मग्न बदन को टॉवल से कवर करने के किसी भी जल्दी में नहीं थे .. वह रौशनी के शरमाते हुए चेहरे को डेकेहे जा रहा था .. उसका लोढ़ा निचे झटकों पर झटके देते हुए .. उसे लोडे के वहां से उसका प्रेकम का रास टपक रहा था .. उससे उनका लोढ़ा चमक रहा था ..

रौशनी कही और देख रही थी .. “उफ्फ्फ और रमेश जी आपने मुझे ऐसे क्यों अंदर खींच लिया .. आप तोह नग्न हैं अंदर …”

“अरे रौशनी जी माफ़

करिये बिकली चाकी गयी थी इसीलिए देख न पाया की आपके हाथों को hi पकड़ कर अंदर खींच लिया .. गलती हुयी रौशनी जी .. आप मुझे नहीं बिजली को कोसिये ..”

(रौशनी सोची .. हाँ बात भी सही है. … लाइट अचानक चली गयी थी तोह शायद उस के वजह से उन्हे न दिखाई दिया हो ..)

“फिर भी आप ऐसे नहीं खींचने चाहिए थे .. आराम से लेना था टॉवल … या रुक जाते बिजली आने तक..”

“रौशनी जी आप बेरहम हैं .. में उतना टाइम ठण्ड में रहता .. और मुझे क्या पता था की बिजली आईटी इ जल्दी आएगी .. यहाँ पर एक बार बिजली चली जाती हैं तोह घंटे तक नहीं आती. तब तक क्या आप मुझे ऐसे नग्न , ठण्ड में रहने देती ..?”

बिजली फिर से चली जाती हैं लेकिन इस बार बहार एक लाइटिंग भी चलती हैं बहुत जोरों से .. रौशनी कइटिंग से डर्टी थी इसलिए एक दम से डर गयी और रमेश के बाँहों में चली गयी उनसे चिपक गयी और अपने सर को उनकी छाती पर टिका दी ..

रमेश इस सब के मज़्ज़े लेते हुए अब अपने हाथों को रौशनी की डीप कट ब्लाउज पर अपने हाटों को फेरता और उसकी मुलायम पीठ को मसलने लगता हैं .. उसके हायह ढीरे से रौशनी की चूतड़ों पर जाकर वहां टीला देता हैं और फिर दबाने भी लगता हैं .. इस हमले से रौशनी सिहर उठी और अहह की हलकी कराह निकली .. और एक लाइटिंग की वजह से एक करारे थंडर की आवाज़ से रौशनी और दर्री हुयी रमेश के साइन से और चिपकी रही .. रमेश उसके चूतड़ों को और पीठ को मसलते हुए उसे अब परवाह नहीं थी .. वह काफी दरी हुयी उनसे चिपकी hi रही ..

अब बात ऐसे थी की रमेश का मोटा लोढ़ा अब सीधे रौशनी जी की नाभि से चिपका हुआ था और उसके नाभिनपर अपने प्रेकम का रास चोर रहा था .. उससे रौशनी की पूरी नाभि रमेश जी के प्रेकम क ेरस से भीग गयी.. रमेश अब रौशनी को और कसकर गले लगाए रखा और उसका लोढ़ा अब रौशनी की मुलायम पेट से दबता हुआ और झटके मारा .. थे एहसास रौशनी को भी हुआ और उसे मज़्ज़ा आने लगा .. उसकी बुर से रास टपकने लगा … रमेश भी मस्ती से अपने लोडे को रगड़ रहा था रौशनी की पेट से और रौशनी ाः की आवाज़ें निकल रही थी.. कागि गर्मी का सन बना था .. रमेश नग्न , रौशनी के बदन से चिपका हुआ था .. वह रौशनी की नैक के साइड की सुगंध , सूंघ रहा था जिससे उसका लोढ़ा और भी झटके मार रहा था जो सीधा रौशनी जी के पेट से hi ताकत और मनो उसकी नाभि में जाने को रास्ता बना रहा हो ..

लाइट अभी भी ऑफ थी .. रमेश और रौशनी , दोनों की गर्मी बढ़ी हुयी थी … रमेश ने फॉर रौशनी के चेहरे को पकड़ कर उसके होठों को चूमने लगा .. रौशनी भी अब बिना झिझक उस गर्मी के महिल के वागंजाः से खुद को रोक न पायी और वह भी रमेश जी के होठों को चूमने लगी ..

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दोनों की चुम्बन गहराई में जाने लगी जैसे hi रमेश की जीभ होना रास्ता रौशनी की मुँह में पाकर उसकी जीभ से खेलने लगा था .. दोनों अब गहराई की चुम्बन में लगे हुए थे … निचे रमेश का लोढ़ा बुरी तरह से झटके मारता हुआ रौशनी की नाभि पर रगड़ता और उसका प्रेकम सब रौशनी की पेट पर लगे जा रहा था .. अब नाभि के आसपास का भी एरिया रमेश जी के लोडे से निकलते रास से भीग चुकी थी..

कुछ 10 मं दोनों की चुंबन टूटने का नाम hi नहीं ले रही थी .. दोनों एक दूसरे के बाँहों में कोई प्रेमियों जैसे गहरी चुम्बन में hi लगे हुए थे ..

फिर लाइट वापस आ गयी … कुछ सेकंड और चुंबन के बाद रौशनी किनबंद आँखें खुली .. रमेश जो ऐसे चूमते हुए पाकर वह सेहम उठी और झट से रमेश जी के बाँहों से अलग हो गयी ..

ओह गॉड उसने क्या किया था .. वह बह गयी थी और रमेश के नग्न बदन से चिपकी हुयी थी और उन्हें गहराई से चुम रही थी … उफ्फ्फ्फ़ .. फिर उसे यह भी एहसास हुआ की उसकी नाभि गीली हो गयी थी ..: उसे समझ आयी की वह गीलापन रमेश जी के लुंड से निकलते प्रेकम के वजह से थी …

“ओह गॉड रमेश जी यह क्या किया आपने … आपका हु तोह यहाँ मेरी नाभि को … उफ्फ्फ

अआप प्ल्ज़ टॉवल पेहेन लीजिये न …. आप का नग्न बदन को कवर कीजिये उफ्फ्फ..”

रमेश झट से र निचे घुटनों पर जाते हुए , रौशनी के हाथों को पकड़े हुए, अपने टॉवल से रौशनी की नाभि को साफ़ कर लेता हैं .. और फिर वहां चुम केता है. …

“उफ़ रमेश जी आप वहां चुम क्यों रहे हो … उफ्फ्फ मममम छोड़िये और अपने उस चीज़ को धकिये न टॉवल से .. ..”

“रौशनी जी आप भी न क्यों यह छोड़िये लगा बैठी हो .. हम क्यों आपको कोई नुकसान पहुंचेंगे ..? वैसे भी अभी तोह कुछ टाइम पहले आप दरवाज़े के गैप में से देख तोह रही थी .. और अब आप शर्मा कर बातें कर रही हो ..”

(हे भगवन रमेश जी ने मुझे उनके नग्न शरीर और बड़े लुंड को चुपके से देखते पकड़ लिया हैं .. उफ्फ्फ्फ़ …)

रमेश अब और जोरों से रौशनी किन अभी को चूमने लगता हैं … गीली पुप्पियाँ देने लग जाता हैं .. रौशनी को उनकी चुम्मे पसंद आने लगते हैं … उसकी बुर में तोह हलचल मची hi थी … रमेश अब रौशनी की कमर की सौदे को चूमता हैं .. उसके हाथ अब रौशनी की चूतड़ों पर थे और वहां से दबा रहा था … रौशनी की गर्मी बढ़ रही थी .. वह खुद पर नियंत्रण खो रही थी …

रमेश अब उठ जाता हैं और रौशनी को बाँहों में फिर से भर लेता हैं … इस बार उसकी पीठ को अपने तरफ कर वहां पर गीली चूमियाँ देने लगता हैं … ढेर साड़ी गीली चुम्मियाँ …

रौशनी आगे झुक जाती हैं :. और रमेश जी की चुम्मों का आनंद लेने लगती है. … उसे अपने अंदर इतनी गर्मी पाकर वही सरप्राइज थी … पीछे से अब रमेश का लोढ़ा रौशनी की चूतड़ों पर डाब रहा था … उसका मोटा लुंड जो पूरा सख्त था अब उसकी मुलायम चूतड़ों से डाब रहा था .. रमेश जम्भी हलके से आगे के स्ट्रोक्स दे रहा था .. उसकी बीवी की साड़ी जो रौशनी ोेहनी थी काफी थीं मटेरियल किट hi .. उसकी लगातार आगे की स्ट्रोक्स से अब उसका लोढ़ा साड़ी में से रौशनी की चूतड़ों के बीच घु जाता और उसकी चूतड़ों की छेद से टकराता … उस हरकत से रौशनी की गर्मी और बढ़ रही थी और उसकी बुर से पानी काफी निकलना शुरू हुआ था … उसकी मुँह से अह्ह्ह उफ्फ्फ मम की आवाज़ें निकलती जीसे सुन रमेश और जोरों से अपने लोडे को उसकी चूतड़ों पर मारने लगता और उसकी चूतड़ों के बीच डाब जाता ..

रमेश अब रौशनी को बिस्तर की तरफ ले जाता हैं .. और फिर रौशनी को बिस्तर पर बिठा ता हैं .. उसका अभी भी नग्न लोढ़ा अब वह रौशनी के मुँह के पास ले जाता हैं .. रौशनी गर्मी से और शर्मिंदगी से अपने आँखों को बंद कर दित hi … रमेश अब अपना लोढ़ा रौशनी की गुलाबी होठों के पास ले जाता हैं .. हलके से रौशनी की होठों से

टच करता हैं .. और उसका गीला प्रेकम अब रौशनी की होठों पर आ जाता हैं …

रौशनी पूरी गर्मी में थी … उसे रहसास नहीं था की वह क्या कर रही हैं..

रमेश अपने लोडे को अब रौशनी की होठों पर रगड़ने लगता हैं और उसका ऑरेकम अब रौशनी की गुलाबी होठों पर स्प्रेड होने लगता हैं … रौशनी बिना सोचे वहां अपनी जीभ फिरती हैं और रमेश जिनके लोडे से निकलते परिकम्मको टास्ते करती हैं .. इससे उसकी गर्मी और बढ़ रही होती हैं..

रौशनी भी अब रमेश के मोठे लोडे को लेना चाहती थी .. वह बहुत दिनों से उसके बारे में सोच कर मुठ मारी थी .. अब उसे रमेश का लुंड चाहिए था … वह अब उसके लोडे को चूसना चाहती थी ..

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उसने अपने होठों को खुद खोल लिए .. और रमेश ने अपने मोठे लोडे के सर को रौशनी के मुँह मेजन डालने लगा .. उसके लोडे की चमड़ी पीछे कर अब उसके लोडे का लाल सर रौशनी के मुँह में जा रहा था .. उफ्फ्फ रौशनी की गुलाबी मुलायम होठों के अंदर अपने लोडे के जाने के एहसास से उसे और गरम कर दिया और उसने अब रौशनी के सर को ोाकद कर अपने लोडे को उसकी मुँह के अंदर दाल दिया … उसके सर को पकड़ कर वह अपने मोठे लोडे को आगे पीछे हिलने लगा रौशनी की मुँह में … उसका आधा लोढ़ा hi अंदर गया था रौशनी के मुँह में .. रौशनी अब पूरी हवस में क्विड रमेश के लोडे को चूसने लगी .. उसकी बुर से काफिर अस टपक रहा था जिससे उसकी पंतय अब भीग चुकी थी आगे से ..

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रमेश अब अपने लोडे को और अंदर घुसते और चुसवा रहा था .. रौशनी की आँखें खुली और वह रमेश को नज़रों से देखने लगी .. लेकिन रमेश के लोडे को अपने मुँह से नहीं निकला बस चुस्ती रही .. अब वह हवस की शिकार बन चुकी थी … वह रमेश के लोडे को बेशर्मी से चुस्ती रही .. अब वह भूल गयी थी वह एक शादी शुदा औरत हैं .. उसके सामने के लोढ़ा था जिसने उसे बहुत गर्म कर चूका था और अब वह उसकी को चूसने वाली थी .. आज वह अपनी हवस की शिकार होने वाली थी ..

रौशनी अब रमेश के लोडे को मस्ती से चूसने लगी .. अपने हाथों को उनके कमर पर रख अब उसके लोडे को पूरी तरह से अपने मुँह में लेकर चूस रही थी ..

उसकी कमर को पकड़ अब रौशनी खुद रमेश जी के लोडे को होने मुँह में धकेलने की कोषसिंह करती .. रमेश का लोढ़ा रौशनी के मुँह में था .. रमेश अब रौशनी के मुँह की हलके से चुदाई करने लगा .. रौशनी के मुँह से ममंफ़फ़फ़ … ममम ऐसी hi आवाज़ें निकल ताहि थी .. वह आज अपने आप को मनो रमेश के पुरे हवाले कर चुकी थी .. आज वह रमेश जी से यहाँ तक की छोड़ने को भी तैयार हो रही थी .. बरसात की रत में एक कुटिया में रौशनी और रमेश की एक नयी इन्निंग्स शुरू होने वाली थी .. दोनों के बीच सब कुछ खुलने वाला था .. आज बारिश में , बहार नहीं बल्कि उस कुटिया के अंदर तूफ़ान चलने वाला था ..
 
रौशनी पूरी हवस में अपने आप को खो चुकी थी और रमेश के लोडे को चूसी जा रही थी .. रमेश वहां मम आह की आवाज़ें करते हुए रौशनी के सर को ोाकद कर उसकी लोडे को रौशनी की मुँह में धकेलता फिर बहार निकलता और फिर धकेलता .. निचे से रौशनी बस सिक्सकीयों पर सिसकियाँ मारती रही ..

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उसके मुँह से रमेश के लोडे से टपकती लार अब फर्श पर गिर रही थी … बहार ठण्ड का मौसम था और रौशनी और रमेश के बीच गर्मी का मौसम चल रहा था ..

“उफ्फ्फ मम रोशनिमं क्या छू रही हो तुम ममम उफ्फ्फ तमहरे जैसे कोई नहीं चुस्त .. ाहहव ममम और चूसिये मेरे लोडे को मेरी जान …”

रौशनी अब रमेश के कमर पर अपने हाथों को रख उसके धक्कों को सेहती हुयी रमेश के लोडे को चुस्ती रही .. उसकी बुर से ढेर सारा रास वह चोर्ने लगी थी … रमेश अब अपने हाथों से रौशनी की ब्लाउज के ऊपर से उसके मुम्मों को मसलना शुरू कर दिया .. इस टच ने रौशनी की ानकेहिं खोली और उसे एहसास हुआ की वह अश्लील खेल , खेल रही थी रमेश के साथ .. उसका मोटा लोढ़ा उसके मुँह में लेकर वह उसे चुद रही थी .. उसकी मुँह की चुदाई चल रही थी …. वह खुद को वहां से निकलते हुए अपने मुँह को रमेश के कोड़े के ऊपर से हटाने की कोषसिंह कर रहे थी लेकिन रमेश ने काफी ताक़त से उसके सर कोपकड़ते हुए बेतहाशा उसकी मुँह की चुदाई करते रहा ../ उसके मुँह से रमेश के लुंड से और उसकी मुँह से निकलते रसों का मेल निचे ज़मीन पर गिर रहा था ..

एक आखरी पुश के साथ रौशनी अपने आप को रमेश के व से चुरा ोायी .. वह शरमाते हुए उठ कर सीधे बहार मि और फिर से चली गयी ..उसकी चूतड़ों को हिलाते हुए बहार भाग गयी रौशनी … रमेश भी नग्न अब ऐसे hi रौशनी के पीछे चला गया … एयर उसके रौशनी को फिर से पीछे से जकड लिया और अपने लोडे को पीछे से रौशनी की चूतड़ों के बीच दबाने लगा … रमेश के मोठे सकत लोडे को अपने चूतड़ों के बेच जातेहुए अपनी छूट से टकराते हुए रौशनी के एहसास ने उसकी मुँह से एक लम्बी ाः की सिसकियाँ निकली … रमेश अब उसकी गर्दन को ोीचे से चूमने लगा और पुरे टाइम तक अपने लोडे को रौशनी की चूतड़ों के बीच दबाते हुए उसे जकड़े रखा था ..

फिर रमेश ने रौशनी को अपने तरफ कर लिया .. रौशनी ने एक पिश देते हुए खुद को रमेश से चुरा तोह लिए लेकिन रमेश ने चालाकी से उसकी साड़ी के पल्लू को पकड़ लिया और अब रौशनी घूमते हुए उसकी साड़ी की वस्त्र हरण होते रोक नहीं पायी .. और अब वह बस अपनी टोघट ब्लाउज जिसमें से उसकी चूचियां मनो बहार hi निकल रहे थे … और बस उस पतली सी मटेरियल वाली पेटीकोट में अब रमेश के सामने कड़ी थी.. रौशनी को ऐसे देख रमेश का लोढ़ा झटकों पर झटके मारने लगा और उसके लुंड के टिप से रास निकलता hi रहा … रौशनी अपने नज़रों को रमेश के मोठे लोडे पर ले जाने से रोक नहीं सकीय .. रमेश के मोठे लोडे को देख उसकी बुर से और रास छूटने लगा .. उसकी पंतय अब पूरी तरह से भीग चुकी थी .. रौशनी हवस से खुद को बहकी पाने लगी ..

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रमेश अब पूरा बोल्ड होते जा रहा था .. वह आगे बढ़ रौशनी पर झपटा और उसे अपने बाँहों में फिर से भर लिया .. रौशनी खुद को फिर से रमेश की बाँहों में पाकर उसके मर्दाने शरीर के एहसास से उसकी गर्मी बढ़ती रही .. रमेश ने रौशनी की कमर को पलादतेंबहुये घुटनो पर जाते हुए रौशनी की पेटीकोट को निचे सरकने लगा .. रौशनी भी उसे रोक नहीं रही थी …

रमेश धीरे से रौशनी की नाभि को चुनने लगा और फिर वहां चाटने लगा .. रौशनी अपने सर को पीछे तरफ फेकते हुए अह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ करते हुए अब रमेश की इस हरकत का मनो आनंद लेने लगी थी .. रमेश ढेर साड़ी वहां चुम्मिएन देकर अब उसकी झंघों को चूमने लगा … काफी शातिरर था रमेश .. वह जान बुझ कर रौशनी की झंघों के अंदरूनी हिस्से को चुंबे लगा चाटने लगा .. बस इतने करीब रौशनी की ोांत्य में उसकी बुर के … बस वही चाटने कागा , वहुम्बे कागा .. रौशनी हवस में अपने सर को पीछे करा अहह उफ्फ्फ की सिसकियाँ मारने लगी .. रमेश एक चुम्मा रौशनी की पंतय के ठीक लेफ्ट साइड देता और फिर एक चुम्मा ठीक राइट साइड ओर … औंजनूंगियों को भी वह रोशनीकी पंतय के ऊपर से hi उसकी बुर पर चलने लगा था … बस वही उसकी छूट के दान र से उसकी पतली सी पंतय के ऊपर से रगड़ने लगा था ..

“अह्ह्ह उफ्फ्फ मम रमेश जी ममम क्या कर रहे हो … मम वहां से हटिये .. उफ्फ्फ्फ़ ममम रमेश जी ममम पलज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़”

रमेश अब नहीं हटने वाला था .. रौशनी की सिसकियों ने उसे और बोल्ड बना दिया था और वह वीआएन्हि रौशनी की पंतय के ऊपर से उसकी बुर और उसकी बुर के दाने से खेलते रहा .. अब उसने वहां अपनी जीभ रखज और उसकी ोात्य कोही चाटने लगा ठीक रौशनी की बुर के लाइन पर .. रौशनी की गर्मी बहुत बढ़ गयी थी .. रमेश अपनी जीभ को अब रौशनी की बुर के ऊपर मारते रहा .. उसके हाथों को रौशनी की चूतड़ों के पीछे ले जाकर वहां पर मसलने लगा … रोषबी. मिनचूतडों को दबोचने लगा … वहां उसकी चूतड़ों के साथ खेलने लगा .. आगे से अपनी जीभ को रौशनी की अन्त्य के ऊपर से hi उसकी बुर के लाइन पर चलते रहा … रौशनी की सिसकियाँ बढ़ती गयी .. उसकी बुर से रसा ुर निकलता रहा और उसकी ोांत्य और गीली गमकारी दी .. वहां रमेश की थूक से भी बहार से रौशनी की ोांत्य गीली हियी थी और अंदर उसकी बुर से टपकते रास ने उसकी पंतय भिगो दित hi …. इस एहसास ने रौशनी की गर्नी और बढ़ा दी .. इतनी बढ़ा दी की वह खुद रमेश के सर को पकड़ कर उसके मुँह पर अपनी पंतय में कैद बुर को मारने लगी ..

रमेश ऐसे hi कुछ और सेकंड कर .. हलके से रौशनी की पंतय को साइड में करता हैं … रौशनी की आँखें हवस से बांध थी .. उसे इसका एहसास नहीं था मि अब उसकी बुर हॉक्स से एक्सपोज्ड हैं … वह फिर से रमेश के सर को पकड़ कर अपने बुर पर मारती की अब रमेश की जीभ hi उसकी बुर से टकराती .. और रमेश भी एक बड़ी सी सलूरररप करते हुए रौशनी की बुर के लाइन को चाट लेता हैं. ..

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“अह्ह्ह ममम रमेश जी आपने मेरी बुर को hi उफ्फ्फ ममममम” और रौशनी हॉक्स से रमेश की सर पर एक टपकी मारती हैं … इससे रमेश फिर से रौशनी की बुर के कइने को चाटने लग जाता है. .. और इस बार दो बार पूरी तरह से चाट लेता हैं .. निचे से ऊपर और फिर ऊपर से निचे .. रौशनी ढेर सारा रास चोर रही थी अपनी बुर से और इससे रमेश के मुँह पर अब रौशनी की बुर क िरस की चमक दिखने लगी ..

रमेश पीछे से रौशनी की चूतड़ों को एक हाथ से मसलते रहता और आगे से एक हाथ से रौशनी की पंतय को साइड में सरकाये हुए उसकी बुर अब चाटने लगतावहिं .. स एक बार .. दो बार .. तीन बार … रौशनी बस अब अहह मम्मीएस रमेश जी उफ्फ्फ ममम हाँ मममम की आवाज़ें करती हियी अब रमेश की चटाई के मज़्ज़े लेने लग जाती है. .. गणेश बड़े प्यार से अब रौशनी की बुर बार बार चाटने लगता हैं .. फिर अपनी जीभ को रौशनी की छूट में से उभरते दाने को अब चाटने कागता हैं … एक बार .. दो बार .. तीनबार …. रौशनी की गर्मी इतनी बढ़ गयी थी की वह अब बार बार अपनी बुर को रमेश के मुँह पर मारती .. मनो उसकी चटाई को और ज्यादा बढ़ावा देती हो .. और रमेश भी अब बिना झिझक, पूरी तरह से रौशनी की बुर को चटाने लगा था ..

रमेश ने फिर धीरे से रौशनी की पंतय भी निचे करि … और अब उसकी छूट पुरो एक्सपोज़ थी रमेश के सामने .. रौशनी की बुर से काफी सारा रास टपक रहा था .. उसे अब रमेश अपनी जीभ से चाटने लग गया … और पुरे सफाई से वहां क ेरस को चाटने लगा .. लेकिन रौशनी की बुर रास चोरटी रही और रमेश उसकी बुर के रास को फिर से पिटे रहा ..

ऐसी कुछ 5 मं की चूसै के बाद .. रमेश ने रौशनी के चूतड़ों को अपने तरफ कर लिया और उसकी छुअतड़ों के लेफ्ट और राइट साइड पर चूमने लगा … फिर अपने चेहरे को रौशनी की चितदों के बीच लेजाकर उसकी बुर में होइ जीभ रख वहां फिर से चाटने लगा .. अब रौशनी रूम के दिवार को पकडे हुए थी और पीछे से रमेश उसकी बुर चाट इ लग गया .. रौशनी मि मुँह से बस सिसकियाँ hi निकलती रही .. “अहह उफ्फ्फ मम रमेश जी आआप .. ईई … माअत .. कारीयीए .. अहह ममम पलज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ रमेश जीईई”

लेकिन इस सब का असर अब रमेश पर होने नहीं वाला था और वह और तेज़ी से रौशनी की बुर को चाटने लगा .. उसका चेरा अब रौशनी की चूतड़ों के बीच दबा हुआ था और उसकी जीभ उसकी बुर चाट रही थी .. ऊपर से रौशनी बस सिसकियाँ मारने से खुद को रोक नहीं पाई .. उसे मज़्ज़ा भी आ रहा था लेकिन शर्मिंदगी भी की रमेश जैसे बुद्धा रक्षा वाला उसकी बुर को चाट रहा हैं .. और तोह और इसका उसे बहुत hi मज़्ज़ा आ रहा था .. और वह नहीं चाहती थी की रमेश उसकी बुर को चाटने से खुद को रोके … वह अपनी निचली होठों को काटने हुए बस सिसमियाँ hi मार रही थी .. अहह यफड़ ममम ूएस एस आह मम रमेश जीई अहह ममम प्ल्ज़ ऐसी hi चाटिये … ममम उसकी धुन भी बदल गयी थी .. इस सब ला मज़्ज़ा रमेश लेते रहा .. निचे से उसका मोटा लोढ़ा झटकों अपर झटके मार रहा था और वह ीोष ी की गुलाबी छूट को चाटने के स्वर्ग में खुद को लहो चूका था … वह साइड से अब रौशनी की चूतड़ों को भी दबाने लगा और निचे से उसकी जीभ से रौशनी की बुर की चटाई करते रहा .. अब उसने अपनी जीभ रौशनी की छूट में प्रवेश करने लगा … उसका सांप जैसे जीभ मनो किसी बिल में घुसने की कोशिश कर रहा हो ऐसे hi कुछ हो रहा था … अब वह रौशनी की बुर के अंदरूनी हिस्से को भी चाटने लगा .. इससे रौशनी की एयर मस्ती चढ़ी … रोनित भी ऐसे उसकी बुर नहीं छाता था … सलीम भी बस ऊपर से hi उसकी बुर और बुर के दाने को hi छाता था ..

रमेश जी तोह और पागलों की तरह रौशनी की बुर चाट रहा था … पोछे से उसकी चूतड़ों को भी जोरों से दबा रहा था जिससे रौशनी की गर्मी और बाद रही थी और उसकी बुर से बहुत सारा रास टपकने लगा था ..

रौशनी की आँखें बंद थी … वह बस रमेश के लोडे के बारे में सोचने लगी … इससे उसकी हवस और बढ़ रही थी और वह रमेश के द्वारा चटाई से और मज़्ज़े लेने लगी थी … वह आज खुद को पूरा खो चुकी थी हवस में और वह रमेश के द्वारा सब कुछ करवाने की सोच में डूबी हुयी थी …

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रमेश अपने मुँह को रौशनी की चूतड़ों के बीच पूरी तरह से समाया हुआ था और अपनी जीभ से लगातार रौशनी की छूट को चाट रहा था… उसका लोढ़ा नोचे से इतना सारा प्रेकम लीक लार रहा थाई वह ज़मीन पर गिर रहा था .. आज तोह उसने भी ठान ली थी की वह रौशनी के साथ सब कुछ करने वाला था जो वह इतने महीनों से करना चाहता था

“रमेश जी ममम अआप उफ्फ्फ ममम इतनी ाचे से ममम हम्म्म्म…”

रमेश अपनी जीभ बा रौशनी की बुर से निकलते हुए “रौशनी जी बताओये न में इतना अच्छे से क्या … ममम बताइये रोष ी जी …”

फॉर रमेश रौशनी की बुर में अपनी उँगलियों से उसकी छूट के दाने से खेलने लग जाता है और रौशनी की गर्नी और बढ़ने लगता हैं ..

रौशनी की गर्मी इस हरकत से बढ़ती रहती हैं ..”ममम रमेश जी अआप इतनी मस्त तरीके से बुर चाट रहे हो…. उफ्फ्फ मममम … लज़ और चाटिये न अहह उम्मम्मम”

रमेश बस यही सुन्ना चाहता था और वह रौशनी की बुर चाट इ फिर से लग जाता हैं ..

ऐसे hi कुछ 10 मं और रौशनी की बुर को चायत कर … रमेश खड़ा हो जाता हैं और रौशनी को अपनी तरफ खींच लेता हैं और उसकी चेहरे को अपने चेहरे की तरफ मुदा लेता हैं .. फिर वह रौशनी को चूमने लगतावहिं .. रौशनी की बुर से रास जो रमेश के होठों पर था यही रास वह रौशनी अब रमेश के होठों को अपनी गुलाबी होठों से चूमते हुए टास्ते करने लग जाती हैं .. इस एहसास ने उसे और गरम बना दिया था और वह अब रमेश को और गहराई से चूमने लगती हैं ..

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उसके हाथ अब रमेश के कन्धों पर थे और उसकी गर्दन को घेरे हुए उसे अपने और पास खींचते हुए खुद अब रमेश को चूमने लग जाती हैं .. दोनों के जीभ अंदर एक दूसरे से मिल जाते हैं और एक दूसरे की मुँह से रास चूसने लग जाते हैं …. महिला काफी गरम हो चूका था … दोनों हवस में अपने आप को खो चुके थे … बहार बारिश और तेज़ी से हो रही थी .. तूफान चल रहा था और अंदर कमरे में एक अलग hi बड़ा सा तूफान आने की सम्भावना दिख रहा था

एक बुद्धा और एक जवान शादी शुदा औरत के बीच के चुदाई भरे सम्बन्ध की शुरुवात अब कुछ पलों में होने hi वाली थी !!!!!! ..
 
वैरी सॉरी बूत उनवोईडाबले पर्सनल सरकमस्टान्सेस मैंट ी जस्ट couldn’t इवन व्रिठे ान अपडेट .. ु शुड अंडरस्टैंड वे आल हैवे ा लाइफ कम्प्लीटली डिफरेंट फ्रॉम हेरे … ी haven’t इवन विजिटेड थे साइट इन थे लास्ट मंथ. एअरलिएर ी हद लॉट्स ऑफ़ फ्री टाइम एंड माय पर्सनल लाइफ वास् गोइंग स्मूथली . नाउ फ़ीर्स्तल्य माय पर्सनल लाइफ है हद तो बे अत्तेंदेद तू एंड माय फ्री टाइम है बीन कम्प्लीटली कट शार्ट.

सॉरी फॉर इनकन्वेनैंस एंड विल पोस्ट मोरे तो मेक उप फॉर आईटी !!!
 
रौशनी और रमेश की गहराई वाली चुम्बन कुछ 5 मं और चली .. दोनों ने फिर चुम्बन तोड़ते हुए .. उन दोनों के होठों पर उस चुंबन से बन लार की धार निकली थो .. इतनी गहरी चुम्बन हुयी थी दोनों के बीच ..

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रौशनी अब शरमाते हुए रमेश के नज़रों से नज़ारे नहीं मिला पा रही थी .. वहां उसकी बुर की अच्छी से चूसै करि थी रमेश ने … उसकी ुर में अभी भी उस की सोच से फुदक रही थी … रमेश का मोठे लोढ़ा अब उसकी छड़ी में जोरों से नाच रहा था … उसके लोडे से भी काफी सारा प्रेकम निकल रहा था … आज तोह उसने रौशनी की चिकनी छूट की ऐसी चूसै करि थी जैसे उसने कभी किसी बुर की चूसै न करि हो .. आज तोह हु रौशनी की बुर में अपने लोडे से बहुत उसकी बुर की कुटाई करने वाला था .. इस सोच से उसका लोडे और जोरों से निचे नाचने लगा … रौशनी की नज़रें निचे थी और सीधे रमेश के चड्डी पर जा पड़ी , जहाँ उसका लोढ़ा नाच रहा था ..



(उफ्फ्फ क्या मोटा लोढ़ा हैं …. मममम इतना मोटा बिलकुल सलीम के लुंड जैसे … उसकी बुर और बुरी तरह से फुदकने लगी थी …. आअज क्या हु सब शर्मा ुर गया छोर कर रमेश के मोठे लोडे से छोड़ना चाहती थी … उफ्फ्फ उसे यह क्या हुआ था … उसने ज़िन्दगी में कभी भी रोनित के लोडे के बारे में सोचे बिना किसी और के लोडे की सोची भी नहीं थी .. लेकिन यह तीनो बुद्धों ने उसपर कैसा माया जाल डाला था की वह अब बस तीनो के लोडे के बारे में hi सोचती रहती .. और आज तोह रमेश का लोढ़ा बस उसकी चड्डी से उसके नज़रों से ढाका हुआ था .. इतना मोटा और मस्त दिख रहा था .. मममम ऐसे मोठे लोडे से क्या उसे प्यार हो चूका था .. पहले उस दिन सलीम ने उसके मोठे लोडे ने उसकी बुर का ऐसे मस्त चूसै करा था .. उसकी छूट को इतना बेहाल कर चूका था .. लेकिन उसे बहुत मज़्ज़ा भी आया था .. बस ऐसे hi सोचते हुए रौशनी ने खुद अपने हाथों को आगे लेजाकर रमेश के चड्डी पर से उसके उभरे हुए लोडे को सहलाने लगी …

रौशनी की इस हरकत से रमेश का लुंड अब और नाचने लगा .. उफ्फ्फ रौशनी के हाथ उसके लोडे के उभर पर था … मममम वह बस चाहता था की रौशनी उसके गरम लोडे को पकड़ ले और उसे उसकी चड्डी से निकलते हुए चूस के .. चुम के .. चाट के ..

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ऐसे कुछ पलायन के लिए रौशनी बस रमेश के मोठे लोडे को चड्डी के ऊपर से सहलाती रही .. उसकी छूट निचे फुदकती रही .. लेकिन फिर उसे एहसास हुआ की वह रमेश जैसे बुड्ढे के साथ ऐसे कैसे कर सकती हैं .. और उसने अपने हाथों को वहां से निकल दिया …

“उफ्फ्फ रौशनी जी क्या हुआ मममम क्यों चोर दिया मेरे लोडे को … अहह मम रौशनी जी देखो न आपके लिए कैसे नाच रहा हैं ..”

रौशनी को यह भी एहसास हुआ की वह अब रमेश के सामने इस सिमटी थी में कड़ी थी की उसकी ोांत्य उसके घुटनो तक आयी हुयी थी और उसकी रास से टपकती बुर , रमेश के सामने नग्न थी … लेकिन उसने अपनी पंतय को ऊपर करने की कोई कोष ऐश नहीं करि ..

“रौशनी जी देखिए न इस बेचारे को …” रमेश ने अपने लोडे पर इशारा करते कहा ..

“रौशनी जी देखिये न इस बेचारे को आपके मुलायम हाथों का स्पर्श चाहिए .. उफ्फ्फ इसे वह इच्छा पूरी करिये अउ राइज सेहलायी ये न … ममम रौशनी जी … एआईए न ..”

“रमेश जी प्ल्ज़ नहीं बस हुआ अब और नहीं … मुझे अब घर जाना हैं … में ऐसी हरकतें नहीं कर सकती में … शादीय … शुद्दाआ हुण्णं रमेश जीई…”

बिजली की तेज़ आवाज़ों से रौशनी फिर से डर गयी .. और फिर से रमेश से चिपक गयी … अब रमेश उसे बाँहों में लिए उसकी मुलायम नग्न पीठ को सहलाने लगा .. उसका लोढ़ा और नाचने लगा और चड्डी में से hi रौशनी किन अभी से बार बार जा टकराया जिससे रौशनी की फुदकती बुर से रसा ुर भी टपकने लगा .. इस बार उसकी बुर से निकलते रास ने रमेश के चड्डी को भी भिगोना शुरू कर दिया ..

“रमेश जी … आप मुझे छोड़िये न … उफ्फ्फ …”

“रौशनी जी क्या जल्दी हैं … बारिश अभी भी तेज़ी से हो रही हैं .. आप अब यही मेरे साथ hi रहोगी … आज तोह रात शुरुवात भी नहीं हुयी हैं और तूफान और बारिश रुकने का नाम भी नहीं ले रही हैं “

रमेश हाँ सही हैं लेकिन मुझे छोड़िये .. ये गलत हैं .. हम दोनों के बीच ऐसे नहीं हो सकते सम्बन्ध … आप समझिये मेरी बात पलज़्ज़ज़ ..”

रौशनी जी मुझे पता हैं आआप शादी शुदा हैं लेकिन आप को भी दिख रहा हैं हमारे बीच कुछ हैं .. कुछ ऐसी गर्मी हैं एक दूसरे के प्रति जो हम दोनों चाहते हैं बुझ जाए …”

“नहीं रमेश जी मुझे आपके प्रति कोई गर्मी नहीं हैं .. .. आप की गलत फमी हैं …”

“अच्छा रौशनी जी … फिर आपकी बुर कुछ और hi कह रही हैं .. ज़रा देखिये कैसर अस चोर रही है. .. और अब जो मैंने कुछ पल पहले करा था उससे तोह आपको बहुत मज़्ज़ा आ रहा था .. .. आप तोह बड़ी सिसकियाँ मार रही थी …”

अब रौशनी भी क्या कहती .. अभी कुछ पलों पहले जब रमेश उसकी बूत चाट रहा तहत ओह उसे सच में बहुत मज़्ज़ा आ रहा था .. ऐसी बुर की चूसै उसकी कभी नहीं हुयी थी .. न उसके पति ने कभी करि थी न hi उस दिन सलीम जी ने … उसे अलग hi एहसास गाइस था कामुकता का …

“उफ़ रमेश जी हु .. वह .. आपने ज़बरदस्ती से मेरी वहां चूसै करि थी … ..

“ओह यह करलो बात .. रौशनी जी सब ऐसे न कहिये … आप भी लुफ्त उठा रही थी मेरी चूसै की .. तभी कहती रमेश जी न चूसिये मेरी बुर तोह में नहीं चुस्त न ..”

रमेश जिनके मुँह से बुर जैसे शब् सुन कर रौशनी सेहम उठी .. उसे अजीब लग रहा था लेकिन अंदर hi अंदर अच्छा भी लग रहा था … सच हु अपनी बुर की चूसै के दौरान कभी भी रमेश जी को रोकने के लिए कह सकती थी लेकिन नहीं कही .. उसे भी सच में ऐसी चूसै की कामुकता में वह बह चुकी थी .. लेकिन अब क्या … रमेश जी का राक्षसी मोटा लुंड अब काफी नाच रहा था .. वैसे भी इतना मोटा लुंड उनका .. उसके बारे में सोचते hi उसकी बुर से और पानी निकलता था ..

रमेश ने फॉर रौशनी को पकड़ लिया और ह गहराई से वापस उसे चूमने लगा .. रौशनी कुछ पल रेसिस्ट करि लेकिन फिर खुद को भी चुम्बन की गहराई में पाते हुए अपनी रेजिस्टेंस छोर अब फिरसे रमेश के होठों को चूमने लगी और उनके गहरी चुम्बन का साथ देने लगी …

रमेश फिर पीछे से रौशनी की चूतड़ों को दबाने लगा .. उसका मोटा लुंड अब उसकी चड्डी को मनो फाड़ता हुआ रौशनी की गोलाकार नाभि से टकराने लगा था … इस एहसास ने रौशनी की गर्मी और बढ़ा दो थी और वह फिर से रमेश के चुम्बन में खुद को खोई प् रही थी .. कुछ ऐसे hi करने के बाद रमेश ने रौशनी की गर्मी का फायदा उठाते हुए उसे उसके गम घुटनी के बाल बिठा कर अपने चड्डी को रौशनी के मुँह के पुरे करीब ला चूका … रौशनी की नाक अब रमेश की चड्डी को चुने लगी .. रौशनी भी रमेश के लोडे की खुशबु प् रही थी जो उसे और पागल बना रही थी … रमेश ने रौशनी के सर को पकड़ कर अपनी चड्डी को रौशनी के होठों पर रगड़ने लगा .. उसके गालों पर ..

फिर कुछ सेकंड बाद अब रौशनी खुद अपने चेहरे को रमेश के चड्डी पर रगड़ने लगी .. उसके बड़े उभर पर ..

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उसके लोडे की सुगंध सूंघते हुए उसकी बुर से और रास टपकते हुए … फिर रौशनी न वहां रमेश की चड्डी पर जहाँ उसके मोठे लोडे का टॉप था वहां चूमने लगी जिससे रमेश का लोढ़ा उसकी चड्डी में और जोरों से नाचने लगा और काफी प्रेकम चीरने लगा .. जो अब रौशनी अपनी होठों पर महसूस कर प् रही थी वहां पर जो गीलापन हुआ था …

रौशनी के सर को पकड़ कर रमेश अब अपने लुंड के उभर को रौशनी के चेहरे पर रगड़ रहा था … “अहह उफ्फ्फ ममम रौशनी जी ममम मेरे लोडे की खुशबु सुन्घिये अहह ममम …. मेरी जान ममम हाँ उफ्फ्फ ममम”

रौशनी बस अब रमेश के लोडे से निकलती सुगंध का आनंद ले रही थी .. उसे उस सुगंध से एक अलग hi मस्ती च रही थी … उसका बदन सिहर उठा और हु और भी पागलों जैसे अपने चेहरे को वहां मसलने लगी .. रमेश के लोडे के उभर को चूमने लगी ..

फिर उसने धीरे से अपने उँगलियों से रमेश के चड्डी के इलास्टिक बंद के निचे सरकने लगी … धीर धीरे रमेश का लुंड उसकी चड्डी में क़ैद था हु निकलने लगा … रमेश का लुंड उसकी चड्डी से निकलते hi पहले रौशनी की आँखों से टकराया .. फिर उसके नाक से … फिर उसके होठों पर जा टिल गया … उसके लोडे से निकलता प्रेकम अब रौशनी की होठों को भिगो रहा था … मनो रौशनी के होठों पर लिपस्टिक लगा रहा हो .. रौशनी हलके से अपनी जीभ को अपने होठों पर फेरी और रमेश के लोडे का प्रेकम चखने लगी .. आईएएस से उसके बदन में और मस्ती च गयी और वह और सिहर उठी ..

“ममम रमेश जी आपका लोढ़ा इतना मोटा हैं उफ्फ्फ उम्म्म … कैसे इतना मोटा बनाया आपने उफ्फ्फ्फ़

“रौशनी जी देसी घी मक्खन से बन गया हैं मेरा लोढ़ा … बस ये विलायती खाना , शक्कर सब कुछ नहीं इस्तेमाल करता ..

L”umm अच्छा रमेश जी … उम् “ रौशनी फिर से अपने आप को इस मस्ती में खो चुकी थी .. भूल चुकी थी की वह रमेश जैसे बुड्ढे रिक्शा वाले के लोडे के बारे में प्रशंसा कर रही थी और उसके लोडे के लिए पागल बन रही थी ..

“हाँ आज कल के लौंडो जैसे विलायती खाना .. सब नहीं हज़म होता .. इससे आज कल के लौंडो में हु ताकत न रही … सब नल… “

अहह उफ़ रौशनी की लेकिन तू आज कल के लड़कियों जैसे hi है. अहह मम क्या मस्त फीलिंग हैं तुम्हारे साथ इस सब में. अह्ह्ह्ह”

रौशनी पहले तोह रमेश के लोडे के सर को चूमने लगी …

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रौशनी अब रमेश के लोडे को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी .. उसका आधा लोढ़ा hi उसके मुँह में जाते hi वह पागलों जैसे उसे चूसने लगी .. रमेश भी रौशनी के सर को पकड़ कर उसके मुँह में अपने लोडे को घुसा रहा था .. अपने लोडे को छुड़वा रहा था .. रौशनी की बुर किट ओह हालत ख़राब हो चुकी थी .. इतना रास छोर रही थी उसकी बुर ….

रौशनी अब प्यार से रमेश के लोडे को चूसने लगी .. उसके लुंड के बॉल्स को सहलाने लगी … रमेश अब रौशनी के सर को पकड़ उसकी मुँह की हलके से चुदाई कर रहा था .. उसका आधा लोढ़ा hi अब तक रौशनी के सकीय थी … लेकिन रमेश की कोशिश थी की अपना पूरा लोढ़ा वह रौशनी के मुँह में डाले … इसी कोशिश को पूरा करने धीरे धीरे से वह अपने लोडे को और रौशनी के मुँह में धकेल रहा था …

“अहह मम रौशनी जी उफ्फ्फ मम क्या चुस्ती हो तुम .. अहह मममम मेरे लोडे को और चुसो आज मेरी जानू ममम चुसो मेरा मोटा लोढ़ा …”

रौशनी का मुँह अब रमेश के लोडे से फुल हुआ था .. वह बस ममंफ़फ़फ़फ़ ऐसे hi आवाज़ें कर प् रही थी … वह अब ऊपर रमेश को देखने लगी और उसके लोडे को चुस्ती रही ..

“अहह रौशनी जी उफ्फ्फ्फ़ ममम ऐसे hi मुझे देखती रहो और मेरे लोडे को चुस्ती रही … अह्ह्ह ममममम क्या मस्त माल हैं तू .. अह्ह्ह तुझे पाकर में बड़ा खुश हूँ .. अहह मेरी रौशनी ममम चूस मेरा लोढ़ा …”

अब और 2 इन रमेश का लोढ़ा , रौशनी के मुँह में चला गया था .. अब उसके 9 इन का लोढ़ा .. लगभग 7 इन रौशनी के गले में जा चूका था .. और उसके लोडे को होने ठीक से भिगोते हुए उसके लोडे को चूस रही थी … रमेश फिर अपने हाथों से रौशनी के मुलायम चूचियों को दबाने लगा ..

“अह्ह्ह रौशनी जी क्या चूचियां हैं तुम्हारी अहह ममम इतनी मुलायम .. इतनी गोरी .. इतने बड़ा बड़े तरबूज़ अह्ह्ह मममम सच में ऐसी माल हो तुम की अब तुझे मेरी hi बना कर रखना चाहता हूँ ..”

रौशनी अपनी चूचियों और निप्पल्स पर रमेश के कठोर हाथों को महसूस करा ुर सिहर उठी और वह और मस्ती में रमेश के लोडे को चुस्ती रही … ..उसके बड़े बॉल्स को सहलाती रही … रमेश का पूरा लोढ़ा उसकी थूक से हिला हो चूका था .. और उसकी चूसै बंद होने ला नाम hi नहीं ले रही थी

.. एक दो और धक्कों के साथ फिर रमेश अपने लोडे को रौशनी के मुँह से निकलते हुए उसके चेहरे पर फिर से रगड़ने लगा …. रौशनी इस सब का भरपूर आनंद ले रही थी .. ऐसी हरकतें तोह रोनित ने उसके साथ कभी नहीं करि थी .. और उसे रमेश के इस अंदाज़ से मस्ती और च रही थी ..

अब दोनों नंगे हो गए थे .. रमेश अब एक झट से रौशनी को होने बाँहों में उठा लिया और उसे अपने बिस्तर किआ ुर ले चलने लगा .. इस पुरे दौर रौशनी ने अपने बाँहों से रमेश को कास कर पकड़ लिया था .. और दोनों एक दूसरे को चूमते हुए रमेश के खटिये जैसे बिस्तर तक पहुँच गए ..

रमेश ने रौशनी को अब बिस्तर पर लिटा दिया .. रौशनी अब बिस्तर पर लेती रमेश के नग्न बदन को देखती रही .. उसके मोठे झूलते हुए लोडे को देख रही थी .. उसे फिर से शर्म महसूस हुयी और वह अपने पैरों को बंद कर लेती रही .. वह शर्म से लाल हो चुकी थी लेकिन रौशनी , रमेश के लोडे से नज़रें हटा नहीं रही थी …
 
रौशनी अब बिस्तर पर लेती हुयी थी और उसके सामने रमेश खड़े थे .. उनका मोटा लोढ़ा रौशनी की आँखों के सामने खुल रहा था ..: बड़ा मोटा और कला लोढ़ा था .. रौशनी की बुर से काफी रास वह चूका था .. उसने अपनी टांगें बंद करि थी … मन मेजन शर्म थी लेकिन अपनी नज़र व मह रमेश के मोठे लोडे से हटा न सकीय .. रमेश भी वहां इस सब के मज़्ज़े लिए खड़ा था .. फिर अपने हाथों में अपने मोठे लोडे को लेकर उसे सहलाने लगा .:: उसके लोडे के टिप से काफी प्रेस्क बह रहा था .. रौशनी का एक तोह मन कर रहा था की वह उनके लोडे के टिप से प्रेकम चाट ले .. लेकिन दूसरी तरफ काफी शर्मिंदगी महसूस हो रही थी उसे ..

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रमेश फिर आगे आने लगा …

“रौशनी जी उफ्फ्फ अपनी टांगें खोलिये … अब मुझे आपके बुर का दृश्य देखना हैं … खोलिये अपने टांगों को”

“नहीं रमेश जी अब और नहीं बस … उफ्फ्फ अआप बड़े बेशरम हैं :. उफ्फ्फ इतना सब किया वही बहुत हैं बस और नहीं …”

“अरे रौशनी जी अब इतनी तड़प लगायी hi हैं आपने और ज़रा तड़प काम हुयी हैं .. और मस्ती करने दीजिये और यह तड़प पूरी तरह से मिटाइये तोह सही .. वैसे भी बहार बड़ी बारिश हैं.. और कही जा भी नहीं पाएंगे .. अब इस महिला के मज़्ज़े उठाने दीजिये और आप भी उठाइये न ..”

“रमेश जी प्ल्ज़ आप समझिये बात .. इतना सब किया हैं और आगे मत बढ़ना प्ल्ज़ … मेरी इज़्ज़त की खैर करिये रमेश जी … “

“रौशनी जी आप तोह हमें दोस्त मणि हैं न .. इज़्ज़त तोह दोस्ती के बीच hi रहेगी और किसी पराये के पास तोह नहीं जा रही हैं न .. चलिए अब टांगें खोलिये ..”

रौशनी न में सर हिलती रही और अपनी टांगों को बंद राखी …

रमेश का लोढ़ा काफी नाच रहा था .. उसकी हवस पूरी तरह से बढ़ चुकी थी .. आज वह रौशनी की बुर की चुदाई कर hi मानने वाला था .. उसने रौशनी की टांगों को पकड़ लिया और जुड़ा करने की कोषसिंह करि .. रौशनी थोड़ी रेसिस्ट कर रही थी … उसकी भी गर्मी बढ़ चुकी थी लेकिन उसकी शर्मिंदगी अभी भी मन में थी ..

लेकिन वह भी अंदर से चाहती hi थी की वह आज रमेश के साथ पूरी तरह से मज़्ज़े ले ले .. कुछ फिर मं बाद उसकी रेजिस्टेंस काम होते गयी और फिर रमेश उसकी टांगें जुड़ा करने में सफल रहे ::

“अहह उफ्फ्फ क्या बुर हैं आपकी रौशनी जी .. उफ्फ्फ्फ़ ऐसी सुंगंध .. उफ्फ्फ्फ़ कितना रास छोर रही हैं आपकी बुर रौशनी जी .. उफ्फ्फ आप भी मज़्ज़े लेना चाहती हैं न बताइये ..”

रौशनी कुछ न बोली बस नहीं का इशारा करते हुए अपने सर को हिलती रही ..

“अरे खुल कर बताइये रौशनी जी …”

रौशनी कुछ न बोली .. अब न भी नहीं कर रही थी , न hi हाँ में कुछ बोल रही थी ..

फिर रमेश अपने मुँह को रौशनी क िरस से सनी बुर के तरफ ले जाकर उसकी छूट की लिप्स को चाटने लगा .. इस हरकत से रौशनी के मुँह से एक हलकी सी आह निकल गयी .. रमेश फिर और उत्साह से अब रौशनी की बुर को चाटने लगा … उसकी बुर को चाटने लगा .. बूत के होठों को .. उसकी बुर के दाने को ..

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कुछ और देर बाद रौशनी भी बड़ी सिसकियाँ मारने लगी .. वह रमेश के सर को पकड़ कर अपनी छूट पर और धकेली और अपनी छूट को भी उनके मुँह अपर दबाने लगी .. अह्ह्ह उम्म्म उफ्फ्फ की आवाज़ें अब निकल रहे थी रौशनी की मुँह से .. उन्हें सुन रमेश और पागलों जैसे उसकी बुर में अपने मुँह को फाड़ा कर वहां चाटने लगा .. रौशनी की बुर से निकलते रास को पिने लगा … रौशनी अब रमेश के सर को और जोरों से अपनी बुर पर और मारने लगी :: अहह ममम की सिसकियाँ निकलते हुए अब वह भी अपनी बुर को रमेश के चेहरे पर दबाने लगी ..

“अह्ह्ह ममम क्या स्वादिष्ट रास हैं आपकी बुर से रौशनी … ममम क्या मस्त हैं उफ्फ्फ्फ़ “

“रौशनी बस अहह उम् उफ्फ्फ ममम की सिसकियाँ hi मार रही थी .. वह अपनी चूचियों को कास कर दबाने भी लगी .. उसकी निप्पल्स को उँगलियों से निचोड़ने लगी .. वह अब पूरी हवस की शिकार होने hi वाली थी .. रमेश बड़ी प्यार से उसकी बुर चूस रहा था .. ऐसे चूस रहा था मनो बरसों के बाद किसी बुर की चूसै कर रहा हो .. अहह मम उफ्फ्फ एस अहह की आवाज़ें बस उस कमरे में चल रही थी .. बहार तेज़ी की बारिश अभी भी थी और अंदर की आवाज़ें बहार तक जा भी नहीं प् रही थी …

इस पुरे वक़्त रमेश का लोढ़ा काफी टाइट था और काफी प्रेकम छोर रहा था … अब बस रौशनी की बुर की चुदाई hi बाकी थी ..

रमेश अब रौशनी की बुर को छोर अपने मोठे लोडे को रौशनी की बुर पर रगड़ने लगा …

रौशनी की गर्मी अब काफी बढ़ चुकी थी … उसकी बुर इतना रास चोर रही थी की रमेश के लोडे पर भी उसका रास अब निकल रहा था .. रमेश भी बड़ी चालाकी से रौशनी की बुर की छेद पर अपने लोडे को एक इंच अंदर दाल बस अपने लोडे को रौशनी की बुर से निकलते रास में भिगोता रहा … फिर निकल कर बुर के दाने पर रगड़ने लगा और फिर से जार असा अंदर दाल फिर से अपने लोडे को रौशनी की बुर से निकलते रास में भिगोने लगता … इस हरकत से एक तोह रौशनी की गर्मी बढ़ती और दूसरी बात रौशनी की सिसकियाँ जारी रहती … अब रौशनी की तरफ से कोई शिकायत या रेजिस्टेंस नहीं थी :. वह चाहती थी की रमेश अपना लोढ़ा उसकी छूट में दाल उसकी चुदाई करे .. लेकिन वह अभी भी खुद नहीं कह प् रही थी रमेश से की उसे चोदे ..

रमेश को रौशनी की गर्मी और तड़प देख बड़ा मज़्ज़ा आ रहा था .. वह चाहता था की रौशनी खुद उसे कहे की उसे चोदे … तब तक वह बस ऐसे hi रौशनी की बुर से खेलते रहने में hi खुश था …

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रौशनी जी कैसे लग रहा हैं आपको मेरा लोढ़ा .. बताइये अंदर डाली आपकी बुर में ..?”

रौशनी बस सिसकियाँ मारती रही लेकिन कुछ बोली नहीं .. उसे अभी भी मन में शर्मिंदगी महसूस हो रही थी की वह खुद कैसे कहे रमेश जी से की वह उसकी चुदाई करे ..

रमेश फिर अपने लोडे के टिप को रौशनी की बुर में धकेलने लगा .. धीरे से उसे कोई जल्दी नहीं थी .. वह बस रौशनी को और तड़पना चाहता था .. अपने लोडे के पुरे लाल टॉप को वह रौशनी की बुर में डालता फिर निकलता और फिर से अंदर धकेलता .. रौशनी की मुँह से बस अहह उम् की आवाज़ें hi निकल रही थी .. रोमेश फिर से अपने लोडे कके टिप को रौशनी की बुर में धकेलने लगा .. अब वह उसकी कमर पकड़ करा ुर अंदर अपने लोडे को पेलने की कोषसिंह कर रहा था .. धीरे से हलके से बिना कोई जल्दबाज़ी किये .. रौशनी की गर्मी और बढ़ रही थी .. बढ़ती जा रही थी .. अब इतने बढ़ गयी की उसे अब रोका नहीं जा रहा था ..

” उफ्फ्फफ्फ्फ़ उम्म्म . … रमेश जी आप इतना क्यों तुंग कर रहे हैं मुझे ?? आपका मोटा लो…. तो मेरी वहां का रूस पी भी चूका है न. अब पूरा अपना हु दाल भी दीजिये अंडर “. रौशनी का दिल अब ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा था. जिस लुंड के वो रात में सपने देखती थी अब उसका मोटा सुपर मेरी छूट के अंदर भी ज़रा जा चूका हैं …

उफ्फ्फ बस और कुछ धक्कों से पूरा लुंड उसकी बुर में चला जाएगा ..

“उफ्फ्फ्फ़ रौशनी जी तुम्हारी छूट तो बिलकुल फूली हुई हिममम”

” उफ़ रमेश जी ममम आपको अच्छी लगी ?”

” बहुत मस्त हैं रौशनी जी .. बहुत hi मस्त बुर हैं आपकी.”

” तो रमेश जी अब फिर ले लीजिये na..Ab अपना पूरा लुंड डालिये न प्लीज…”

रौशनी अब पूरी गर्मी में अपनी कमर को उचका के रमेश का लुंड अपनी छूट में और अंदर जाते महसूस कर बोली..

रौशनी की छूट इतनी गीली थी की रमेश का लुंड आधा अंदर घुस भी चूका था .

.

” …. ..आआह टी जी ..mmmm…aaapka तो बहुत ..उफ्फफ्फ्फ़ मोटा है.”

अपने लोडे को और अंदर धकेलने के लिए अब रमेश रौशनी की चूचियों को मसलते हुए अब एक करारा सा धक्का दे सका और उसका अब पूरा लोढ़ा रौशनी की बुर में उसने पेल दिया …



उम्म्म्म…. ाआअह.. ..उफ्फ्फ्फ़ अअअअअअअ ” रौशनी बस सिसकियाँ मारती रही और रमेश के धक्कों का आननद लेती रहे… अब कुछ दिन पहले सलीम के मोठे लोडे से चुद कर वह ऐसे मोठे लोडे को थोड़ी और आसानी से झेल प् रही थी… और मज़्ज़े भी ले रही थी…

रमेश बस उसकी चूचियों का सहारा लेते हुए अपना लोढ़ा और जोरों से रौशनी की बुर में पेलने लगा ..

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“अहह मम क्या चूर हैं तुम्हारी रौशनी … अहह ममम मस्त बूत हैं यार मेरे लोडे को बहुत पसंद है ऐसी बुर .. ममम ये ले रौशनी ले रमेश का लोडे तेरी इस तंग छूट में. ..”

रमेश बस धक्कों के ऊपर ढ़ाके देते हुए रौशनी की बुर पेले जा रहा था .. बिना रुकावट .. और उसके नीस रौशनी बस सिसकियाँ पर सिसकियाँ मारते हुए चुदती रही .. और मज़्ज़े लेते रही …

दोनों की चुदाई की आवाज़ें उस छोटे से कमरे के चरों और गूंज रही थी .. अब दोनों एक दूसरे के हवस में समां चुके थे और दोनों मस्ती से चुद रहे थे … रमेश धक्के देता और रौशनी उसके जवाब में अपनी चूतड़ों को ऊपर उठा उठा कर रमेश के लोडे से चुदती .. वह रमेश भी रौशनी की मुलायम गोरी सी चूचियों को पकड़ धक्कों पर धक्के देते हुए अपने मोठे लोडे को रौशनी की बुर में पेल रहा था ../ दोनों पसीने से लथपथ थे लेकिन उन्हें कोई परवाह नहीं थी .. दोनों बस अपनी गर्मी की आग को शांत करना चाहते थे और चुदाई का मज़्ज़ा लेना चाहते थे . रौशनी भी सब शर्मिंदगी भूल गयी थी और एक बुड्ढे रिक्शा वाले के निचे रह कर चुद रही थी … चुदाई के मज़्ज़े ले रही थी … रमेश फिर आगे झुक अब रौशनी की चूचियों को चुनने लगा .. उसकी निप्पल्स को चाटने लगा .. इससे रौशनी की गर्मी और बढ़ती रही और वह अपनी बुर से और रास चोरटी रही ..

अहह रौशनी तुम्हारी चूचियां तोह उफ्फ्फ ला जवाब हैं इतनी मुलायम मम उफ्फ्फ्फ़ ममम चूसने का बहुत मन कर रहा हैं … ममम”

रमेश अब रौशनी की चूचियों को चूसते हुए निचे से अपने लोडे को पल्टेर अहा .. रौशनी की सिसकियाँ अब और तेज़ होगयी … और गूंजने लगी उस छोटे से कमरे में …

“अहह ले ले मेरा लोढ़ा ले मेरी रानी मेरी डार्लिंग रौशनी अहह बहुत दिनों से तेरी इस छूट का इंतज़ार कर रहा था .. अहह तेरी इस जवान बदन का दीवाना बना दिया हैं तुमने रौशनी अहह मम लेया ुर धक्के ले मेरे इस लोडे के .. अह्ह्ह ले ुर ले मममम”

“उफ़ रमेश आप का लोढ़ा तोह में सपनो में देखती थी .. अहह ममम क्या मोटा लोढ़ा हैं आपका उफ्फ्फ ममम अआप क्या दमदार छोड़ती हो ममम उफ्फ्फ अह्ह्ह एस रमेश जी मेरी छूट किआ ुर चुदाई करिये न .. अहह भूल जाइये में किसी और की बीवी हूँ बस मुझे अपनी प्रेमिका जैसे छोड़िये अहह ममम क्या लोढ़ा हैं उउउउम्मम्म उफ्फ्फ एस एस्सस.”

“अहह यह हुयी न बात रौशनी … ममम अब दोस्ती से प्रेमिका ममम बहुत अच्छा … अन्न ले देख कैसे में अपनी प्रेमिका की चुदाई करता हूँ … अह्ह्ह लव ु मेरी जान .. ममम मेरी डार्लिंग ले मेरा लोढ़ा और अंदर .. अहह मममम ले ले …”

रमेश के धक्कों की गति तोह काम नहीं हुयी .. .. पूरा बिस्तर हिल रहा था … आवाज़ें चुदाई वाली गूंज रही थी … क्या महिला था उस छोटे से कमरे में …

फिर रमेश कुछ और देर बाद अपने लोडे को रौशनी के बुर से निकल कर उसे चूमने लगा .. दोनों गहराई की चुम्बन में लगे हुए थे .. रौशनी बड़े प्यार से रमेश का लोढ़ा सेहला रही थी .. उस सख्त रख रही थी .. और दोनों चुम्बन किआ घोष में खोये हुए थे .. रमेश भी रौशनी की चूचियों के साथ खेलने लगा …

फिर रमेश बिस्तर पर खड़ा हुआ और रौशनी की मुँह में अपने लोडे को दाल उसके चूसने को बढ़ावा देने लगा .. रौशनी अब पूरी हवस में , रमेश के लोडे को चूसने लगी … उसके लोडे पर अपनी बुर की रास का टास्ते कर वह और पागलों जैसे रमेश के लोडे को चुस्ती रहे .. अब रमेश भी रौशनी के सर को पकड़ उसकी मुँह की चुदाई करने लगा ..

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उसकी मुँह में मनो उसकी बुर जैसे hi अपने लोडे को पेलने लगा … रौशनी भी अब बिना झिझक रमेश के लोडे को चुस्ती रही …. उसके बड़े बॉल्स के साथ खेलती रही … कुछ 5 मं की चूसै के बाद रमेश ने अपने लोडे को रौशनी की मुँह से निकलने लगा .. रौशनी अब रमेश को देखने लगी .. उसकी नज़र में बड़ी कामुकता भरी थी … वह इस सब का ढेर सारा आनंद ले रही थी ..

“रमेश जी मुझे क्या पता था आप जैसे बुड्ढे घोड़े में भी इतना दम हैं .. कहा फस गयी में बुड्ढे के हाथों .” और रौशनी इस बार कामुकता से मुस्कुराने लगी .

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“अच्छा रौशनी अब तुझे घोड़ी बना कर छोडूंगा … अपने पैरों और हाथों पर जा और घोड़ी बन जा …

में बुद्धा घोडा होकर भी जवान घोड़े से ज्यादा कमीना और चूड़ाकड हूँ मेरी जान , अब तू देखेगी की तेरी जैसी घोड़ी के लिए मेरे जैसा घोडा hi चाहिए …”
 
ी वोउल्ड लिखे तो थैंक एवरीवन फॉर हेल्पिंग माय स्टोरी रीच 11 लाख लाइक्स !! ी लव एच एंड एवरीवन ऑफ़ यू हु लिखे एंड कमेंट ों माय स्टोरी ..: 💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕

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ी ऍम वैरी सॉरी तो आल माय लॉयल रीडर्स . ी हद ा पर्सनल ट्रेजेडी इन थे पर्सनल लाइफ हंस बीन ुनाबले तो इवन विजिट थे साइट लेट अलोन व्रिठे फॉर यू आल. होवेवेर ी विल पोस्ट उपदटेस … नॉट अस रेगुलरली अस बिफोर माय ब्रेक बूत ी विल तरय माय हर्देस्ट ..

वन्स अगेन थैंक्स फॉर स्टॉकिंग बी में इवन थो ी haven’t पोस्टेड उपदटेस इन थे लास्ट फ्यू मोनथस !!

ी ऍम पोस्टिंग ान अपडेट बी इवनिंग !!
 
रमेश अब रौशनी को घोड़ी बना कर उसकी छूट मई सात से गहराई तक अपना लुंड सरकार हैं है और दोनों पुरे नंगे एक दूसरे को कास कर दबा लेते है. रमेश अब रौशनी के मोठे मोठे दूध को अपने दोनों हांथो से बुरी तरह मसलने लगता है फिर वह उसकी बुर पर चढ़ कर कास कास के अपना लोढ़ा रौशनी की छूट मई मरने लगता है.

रौशनी जोर जोर से सिसकारियां मरने लगती है और रमेश रौशनी की छूट में अपना मोटा लुंड पेल पेल कर ठोकने लगता है, रौशनी भी सी सी आह आह कर के अपने चूतड़ हिला हिला कर रमेश के लुंड पर मरने लग जाती है

“अह्ह्ह शाबाश मेरे छोड़ू राजा .. ऐसे hi और जोर से आह और जोर से खूब छोड़ और जोर से छोड़ रमेश … मेरी छूट को पहाड़ दे अपनी घोड़ी की छूट और जोर से मर आह आह्ह्ह्हह.”

रौशनी के चुड़ते वक़्त वाले एक्सप्रेशंस देखने लायक थे ..

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पुरे कमरे मई थप थप की आवाज गूंजने लगती तभी रमेश फिर से एक कास कर धक्का रौशनी की पहली हुयी छूट पर मरता है जो की सीधा रौशनी की बच्चेदानी से टकराता है.

ऐसे hi कुछ 10 मं तक जोरों की ठुकाई के बाद रमेश अपना लोढ़ा रौशनी की छूट से निकल लेता हैं .. और उसके ऊपर से उतर जाता है .

रौशनी , रमेश के लोडे को फिर से अपनी छूट में लेने के लिए तड़पने लग जाती है और उठ कर रमेश का लोढ़ा अपने मुँह मई भर कर पागलो की तरह चूसने लगती है और रमेश सातवे आसमान पर पहुंच जाता है और मज़्ज़े लेता हैं इस बात की , रौशनी उसके लुंड से रास चूसने लगती है और रमेश के लुंड को अपने मुँह के बहार छोड़ने का नाम नहीं लेती है और रमेश भी रौशनी के मोठे मोठे पपीता को अपने हांथो मई भर भर कर दबाने लगता है और अपनी एक हाँथ को रौशनी की गांड के पास लेजाकर उसकी गांड के छेड़ मई एक ऊँगली दाल कर तब तक दबाता है जब तक की उसकी पूरी ऊँगली रौशनी की गांड मई समां नहीं जाती है

अब इस हरकत से रोष ी उसके लुंड को पूरा अपने मुँह मई जड़ तक भर लेती है और फिर रमेश के लुंड और उसके बॉल्स को चाटने लगती

रमेश मस्त होकर अपनी ऊँगली निकलता है और फिर पास में रखे तेल मई अपनी दो उंगलिया डुबो कर रौशनी की गांड मई पूरी भर देता है. और उसकी गांड की उँगलियों से चुदाई करने लगता हैं … इसे खोलने लगता है ..

रौशनी समझ गयी थी की रमेश को अब उसकी मोती गांड की चुदाई करनी है. …

अपने गांड में ऐसे मोठे लोडे को कैसे लेगी इसी सोच में थी फिर भी हवस में इतनी खुद को खो चुकी थी की इस सोच से उसकी मस्ती और बढ़ रही थी और हु और जोरों से रमेश का लुंड चूसने लगी..

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कुछ देर बाद रमेश रौशनी को फिर से घोड़ी बना कर अपने लोडे पर ढेर सारा तेल लगा कर रौशनी की मोती गांड मई अपना लुंड लगा कर एक तगड़ा झटका मरता है और रौशनी अकड़ जाती है और उसके मुँह से एक बड़ी सी चीख निकल जाती है और रमेश अब अपने लोडे का आधे से ज्यादा साइज रौशनी की गांड मई फंसा लेता है,

“उफ्फ्फ रमेश जी ममम नहीं प्ल्ज़्ज़्ज़्ज़ ोलज़्ज़्ज़्ज़्ज़ मेरे छोड़ू रहा .. नहीं बहुत दर्द कर रहा है अपना लुंड बाहर निकल ले आह आह…”

रमेश कहता है “ठीक है रौशनी जी में निकलता हु लेकिन आप थोड़ा अपनी गांड को ढीली करो.

रौशनी इस बात से रहत महसूस करती हैं और अपनी गांड के चीक्स को ढीली करती है लेकिन रमेश उसके लोडे को उसकी गांड से न निकलते हुए , रमेश कास कर एक धक्का और मर देता है जिससे उसका बड़ा लुंड और अंदर घुसता हैं .. और अब उसका कोड़ा रौशनी की गांड मई घुस जाता है और रौशनी “ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह मर गई रे ोमा आह आह आवाज़ें करि हैं ..

रमेश फिर अपना लैंड धीरे धीरे आगे पीछे करने लगता है और रौशनी आह आह मत कर मेरे छोड़ू राजा कहती रहती हैं ......आ आह आह्ह्ह्हह”

ये सुनते hi रमेश अपने लुंड को एक डैम झटके से बहार तक खींचता है और एक और तगड़ा झटका रौशनी की मोती गांड मई फिर से धकेल देता है और अबकी बार उसका लुंड एक hi झटके मई रौशनी की गांड के जड़ तक चला जाता है और रौशनी उस झटके के साथ hi बीएड पर पेट के बल गिरती है.

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रमेश बुड्ढे का इतना बड़ा लुंड रौशनी की गांड में फंसा होने से रमेश भी उसके ऊपर गिर जाता है जिससे रमेश का लोढ़ा पूरा रौशनी की गांड मई बहुत गहराई तक धस जाता है और रौशनी की भी आवाज बंद हो जाती है.

कुछ देर रमेश अपना मोटा लोढ़ा रौशनी की की गांड मई फसाये उसकी चिकनी पीठ के ऊपर पड़ा रहता है

रमेश फिरसे अब धीरे से अपने लुंड को रौशनी की गांड में झटके मारते हुए रौशनी की चूचियों को कास कर दबाने लगता है और धीरे धीरे लेकिन गहरे धक्के रौशनी की गांड मई मरते हुए रौशनी की गांड को छोड़ने लगता है, और साइड से रौशनी के गोर गलो को चूमने लगता है.

रौशनी भी धीरे धीरे लेकिन मज़े वाली आवाज़ें और सिसकियाँ निकलती पड़ी रहती है,

रमेश अब रौशनी की गांड छोड़ते छोड़ते, “रौशनी जी कैसे लग रहा है आपको, मेरा कोड़ा अपनी गांड में पसंद आ रहा हैं न … अह्ह्ह ये ले मेरा लोढ़ा मेरी जाएअनुऊ”

“ओह्ह्ह मेरे छोड़ू राजा उफ्फ्फ ममम ाअब अच्छाआ अह्ह्ह .. अछाअअअ लग रहा है अह्ह्ह्ह मेरी गांड की चुदाई और करिये अह्ह्ह्ह.”

रमेश अब धीरे धीरे अपनी स्पीड बढ़ने लगता है और रौशनी अपने पैरो को थोड़ा और फैला देती है, इससे रमेश के धक्को मई जैसे जैसे तेजी आती जाती है रौशनी भी मस्ती मई सीसियति जाती है, और करीब आधे घंटे तक रमेश, रौशनी की मोती गांड मर मर कर लाल कर देता है उसका लोढ़ा रौशनी की टाइट गांड मई सटासट सटासट आने जाने लगता है, और फिर वह अपना हाथ रौशनी की छूट के नीचे लेजाकर छूट मई दो ऊँगली दाल कर उसे अपने लोडे की और उठाते हुए कास कास कर रौशनी की गांड मरने लगता है.

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रौशनी का इससे अब मज़्ज़ज़ा दोगुना हो जाता है और वह चिल्लाने लगती है “छोड़ और जोर से छोड़ आह आह आह और जोर से छोड़ मेरे छोड़ू राजा मेरी इस गांड को ऐसे आह आह पहाड़ दाल पहाड़ दे मेरी गांड और उसकी खूब कास कास कर छोड़ और छोड़ जोर से छोड़ मेरे छोड़ू राजा.. आह आह सी सी आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह”

तभी रमेश एक करारा झटका मरता है और रौशनी आआअह्हह्ह्ह्ह सिसकियाँ मारते हुए बीएड से चिपक जाती है और रमेश , रौशनी की गांड की गहराई मई अपना लैंड दबा दबा फिर अपने लोडे से अपना सारा गाढ़ा माल रौशनी की गांड में hi छोर देता hai.wahan रौशनी की बुर से भी एक लम्बी अह्ह्ह्ह के सात रास पूरा टपकने लग जाता हैं .

एक घंटे दोनों इतनी भयंकर चुदाई के बाद पड़े रहने के बाद रमेश की आँखें खुलती है रौशनी

पूरी नंगी आँखे बंद कर के पड़ी हुई थी, रमेश रौशनी के रसीले होंठो को अपनेहोंठो से दबा कर एक गहरा चुम्बन लेता है जिससे रौशनी भी आँखे खोल देती है रमेश ,रौशनी का सर उठा कर अपनी बांहो मई लेकर उसके चेहरे को अपने बिलकुल करीब लता है

और एक और गहरा चुम्बन उसके होंठो पर कर के उसकी आँखों को एक कामुक नजर से देख कर मुस्कुराता है तो रौशनी को एक पल के लिए शर्म आ जाती है और वह अपनी गर्दन झुका लेतीहै तब रमेश को पर प्यार आ जाता है और वह रौशनी के रसीले होंठो को पूरा अपने मुँह मई भर कर चूसने लगता है, रौशनी उसके होंठो से अपने होंठ छुड़ा कर रमेश किसीने मई अपना मुँह छुपाने लगती है, रमेश उसकी थोड़ी पकड़ कर रौशनी का चेहरा ऊपर उठता है और ओके गलो पर अपने गलो को हलके हलके रगड़ता हुआ रौशनी के कण मई धीरे से कहता है

“रौशनी तुम इतना शर्मा क्यों रही है, तेरी जैसी गदराई और जवान घोड़ी अगर मेरे जैसे मर्द के पास होगी तोह वह उसे चोदे बिना नहीं रह पायेगा और चाहेगा की तुझ से बस हर रोज़ चुदाई का खेल खेलता राहु.”

रमेश के इस बात से चौंकने का नाटक करते हुए,

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“ उफ्फ्फ्फ़ रमेश जी क्या मतलब है तुम्हारा, यह सब एक गलती थी … आज जो हुआ उसे भूल जाओ … में फिर से तुम्हारे साथ ये सब नहीं करुँगी …”

“अरे मेरी रानी .. इसमें बुराई क्या है. .. तू जवान घोड़ी हैं , में एक बुद्धा लेकिन ताक़तवर घोडा हूँ .. दोनों की जोड़ी इतनी मस्त जमेगी .. हर रोज़ चुदाई का खेल खेलेंगे तोह और भी मस्त जोड़ी बनेगी हमारी.”

“उफ़ नहीं रमेश जी और कभी नहीं ..”

“अच्छा ठीक हैं जाओ … ऐसे hi सब लोडे का मज़्ज़ा लेते हैं फिर चले जाते है .. टब hi वैसी hi हैं. नहीं चाहिए तुम्हारी दोस्ती मुझे चली जाओ ..”

“रमेश जी आप ऐसे क्यों कह रहे हो .. बस चुदाई नहीं .. लेकिन आपसे कहाँ दोस्ती ख़तम करना चाहती हूँ में .. प्ल्ज़ आप मेरे अच्छे दोस्त हो .. आप की दोस्ती मेरे लिए बड़े मैंने रखती हैं.”

“हाँ हाँ अब तुम्हे तोह बस दोस्ती चाहिए … अभी तोह चुद रही थी छोड़ू राजा कह कह कर .. और अब .. चलो जाओ तुमसे फिर से कभी न मिलूंगा .. न बातें करूँगा.”

रौशनी को चुदाई का बड़ा सुख मिला था और हु रमेश से नाराज़ नाह थी .. आखिर कर उसने भी तोह उन्हें पूरी तरह से रोका नहीं .. उनसे चुद गयी और अपनी गांड की छेद की भी कुटाई करवाई .. रौशनी की नज़र रमेश के अर्ध सख्त कुंड पर गयी जो अभी भी मुरझाये हुए भी करीब 5-6 इन का था .. हु फिर से अपने पति को कोसने लगी की अगर उसने उसकी आग शांत राखी होती बिस्तर पर तोह आज यह सब नहीं होता .. वैसे भी रमेश ने ज़बरदस्ती नहीं करि .. में खुद उनका साथ देने लगी थी .

रौशनी न चाहते हुए भी अब रमेश के करीब आ चुकी थी और इस चुदाई ने तोह दोनों को बिलकुल करीब लाया था ..

रौशनी के हाथ रमेश के लोडे के तारीफ बढ़ने लगते हैं और अब वह रमेश का लैंड पकड़ते हुए सहलाती रहती हैं…

“रौशनी जी सच कहु तोह में दीवाना हो गया हु आपके बदन का, आपके ऐटिटूड का .. आपके चूतड़ों का .. तुम्हे तोह दिन भर मई अपने लोडे पर hi पूरी नंगी करके बैठाये रखना चाहता हूँ और चाहता हूँ की दिनरात तेरी ये तंग गांड और तेरी छूट मरता राहु” और रमेश रौशनी के मोठे मोठे चूतड़ों को दबोच कर रौशनी के नंगे चूतड़ों की गहरी और फैली हुई डरा को अपने हाथो से और फैला कर उसकी गांड के छेड़ को पागलो की तरह सूंघने लग जाता है और फिर उसकी आँखों का रंग

लाल होने लगता है और वह रौशनी की गांड के छेड़ से लेकर छूट के तने हुए मोठे दानों को अपनी जीभ से चाटने लगता है और रौशनी पूरी उलटी होकर पेट के बल फिर से लेट जाती है और रमेश कहता हैं …

“आज रौशनी तुम्हारी इज़्ज़तदार हो तोह में तुम्हे रात भर छोड़ना चाहता हूँ.”

रौशनी भी पूरी हवस के गिरफ्त में थी और बोली “ हाँ रमेश .. आज मई तुझसे रत भर पूरी नंगी होकर अपनी छूट मरवाउंगी, आह ...आह ..आह बस मेरी गांड नहीं उफ्फ्फ दर्द हो रहा हैं वहां …”

रमेश हस्ता हैं और रौशनी की छूट और गांड दोनों की बारी बारी चुराई करने लग जाता हैं और रौशनी इस हरकत से सिसकियाँ मरती रहती हैं.

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“ उफ्फ्फ्फ़ रमेश जी आप बहुत अच्छे से छूट और गांड चाट रही हो अह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ ममममम. ओह रमेश … इस तरीके से तो मेरे पति रोनित ने भी कभी मेरी छूट नहीं छोड़ी थी…”

“ओह रौशनी मेरी जानू .. तूने मेरी असली ठुकाई देखि कहा है जब मई औरत को पूरी नंगी करके ठोकता हु तक उसकी बुर मर मर के उसकी बुर से मूत भी निकल देता हु”

रौशनी – “उफ्फफ्फ्फ़ तो क्या तू मेरी भी मुतायेगा अह्ह्ह.”

रमेश अब रौशनी की छूट मई दो उंगलिया दाल कर उसके तने हुए छूट के दाने को अपने होंठो मई दबा कर ऐसे चुस्त है जैसे किसी पेन की रिफिल से इंक खिंच रहा हो और वहां रौशनी सिसकियों पर सिसकियाँ देते हुए ..

“आह क्या कर रहे हो आप रमेश .. अभी मुता डोज क्या.. उफ्फ्फ्फ़”

कुछ और देर ऐसी चूसै के बाद फिर रमेश रौशनी को उलटी करके उसकी गांड को ऊपर उठा कर उसे घोड़ी बना कर अपना मोटा लैंड एक झटके मई रौशनी की छूट मई उतर देता है और रौशनी जोर से चिल्लाती आह आह और तेज छोड़ो मेरे छोड़ू रहा … खूब कास कास कर पेलो पेरी छूट .:”

रमेश धामा धाम रौशनी की बुर की कुटाई चालू कर देता है वह जितना तगड़ा शॉट रौशनी की बुर मई पेला है रौशनी उतनी hi तेज आवाज मई चिल्लालति है और रमेश रौशनी की बच्चेदानी मई अपने मोठे लोडे की ठोकर मर मर कर उसकी छूट पेलते रहता हैं.

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फिर से लगभग आधे घंटे की मस्त छूट कुटाई से रौशनी की बुर लाल पद जाती है, और रमेश अपना लोढ़ा बहार निकल कर फिर झटका मरता है और फिर अपना लोढ़ा बहार निकलता और और रौशनी की गुलाबी छूट के छेड़ को देख कर फिर तगड़े झटकों के साथ रौशनी की मस्त बुर को पेलते रहता हैं ..

रौशनी “आअह्ह्ह्हह आह आआआह उम्मम्मम उफ्फ्फ अह्ह्ह्ह” करते करते इतना पानी अपनी छूट से छोड़ती है रमेश के लोडे के ऊपर hi .. उसके लोडे को पूरा भिगोते हुए ..

रमेश अब अपना लोढ़ा रौशनी की छूट में सटासट सटासट करता हुआ पहच पहच की आवाज के साथ रौशनी की छूट पेलता रहता है और रौशनी अपनी छूट से सारा माल छोर देती है. लेकिन इस बार रमेश के लोडे से उसका रास नहीं बहा था … इस तरह बहार तूफानी रात में अंदर उस कुटिया में रमेश , रत भर रौशनी की छूट मर मर कर उसे लाल कर देता है, फिर दोनों इस घमासान चुदाई के बाद नंगे चिपक कर सो जाते है एक दूसरे के बाँहों में ..

रौशनी के चेहरे पर एक मुस्कान सी छायी थी ऐसी मस्त चुदाई के बाद..

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सुबह रौशनी की आँखें खुल जाती हैं … वह अपने आप को देखती हैं फिर बाजु में सोये रमेश के नग्न बदन को देखती हैं.

उसे शाम और रात में हुयी मस्ती की झलकें आँखों के सामने आ जाती हैं और शर्मा जाती हैं.

सलीम से छोड़ने के बाद जो उसे गिल्ट फीलिंग हुयी थी, वैसी फीलिंग न जाने क्यों उसे रमेश के साथ चुदाई के बाद आयी नहीं.

क्या वह चाहती थी की रमेश उसकी चुदाई करे और जो अब कर दिया हैं चुदाई तोह उसे कोई गिल्ट नहीं हैं या फिर दूसरी बार अब अपने पति पर चीट कर उसे हु पहली बार जैसी गिल्ट की फीलिंग नहीं आ रही हैं.

हु यह भी सोचती हैं की अगर उसके पति रोनित ने उसकी हवस को मिटै रहती तोह वह ऐसे दो मर्दों के साथ चुदाई नहीं करती और खासकर रमेश से खुद चुदती नहीं.. उसी की गलती हैं सब .. यही सोचती हुयी रौशनी उठ जाती हैं और बदन पर बेडशीट लपेटे बाथरूम चली जाती हैं..

आईने में खुद को हु देखने लगती हैं.. उसकी बाल बिखरे हुए थे , बदन पूरा लाल हो चूका था .. रमेश सच में जानवरों जैसे उसकी चुदाई करे थे . साला बुड्ढे होकर भी ऐसे चूड़ाकड होगा हु कभी सोची नहीं थी..

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उन्होंने कितनी बार निचोड़ निचोड़ कर छोड़ा था रास भर ..गिनती भी नहीं कर पा रही थी रौशनी.. रोनित तोह ऐसी चुदाई करता नहीं था .. रमेश की चुदाई सलीम जैसे hi वाइल्ड थी लेकिन उसमें रौशनी को प्यार भी दिखाई दिया था .. सलीम के साथ चुदाई बस एक हवस मिटने की चुदाई थी. लेकिन सेल दोनों बुद्धों ने उसे काफी निचोड़ निचोड़ कर छोड़ा था और कई बार उसकी बुर से रास निकला था और कई बार खुद भी अपने अपने लुंड से इतना गधा माल छोरा था उफ्फ्फ्फ़. उसकी गांड की छेद में दर्द हो रहा था .. उस रमेश ने उसकी गांड की भी चुदाई करि थी ..: क्या तगड़े स्ट्रोक्स देते हुए छोड़ा था .. उसे तोह चलने में दिक्कत हो रही थी..

साले दोनों पागल चुदाई के भूके सांड बुड्ढे उसी को मिलने थे उफ्फफ्फ्फ़.

रौशनी अब मूतने बैठ जाती हैं और उसकी इतनी बड़ी सी धार निकलती हैं और निकलते जाती हैं .. उफ्फ्फ इतनी जोरों से पिशाब हो रही थी .. उफ्फ्फ रात को चूसते वक़्त भी उसकी काफी नुत निकल गयी थी .. ऐसी तोह बस एक जामदार चुदाई के बाद hi होती हैं उफ्फ्फ.

फिर अपने फेस अपर पानी छिड़क करा ुर वहां पड़े सोप से चेहरे को साफ़ कर हु बहार चली जाती हैं और रमेश अब बिस्तर पर बैठे अपने लोडे को हाथ में लिए रौशनी को देख रहा था ..

रमेश , रंगीन बुद्धा अब अपनी दोनों टांगो को चोरी करके बैठे रौशनी की और देख कर मुस्करा रहा था जबकि उनका 10 इंच का हथियार अब बी उनकी टांगों के बीच झटके मार रहा था . रमेश ने इशारे से रौशनी को पास आने को कहा तोह रौशनी शर्माती हुयी अपने आँखों से ये बताने की कोशिश करने लगी की उनका मोटा लुंड अभी तोह रात भर मेरी बुर में फसा हुआ था .. और अब फिर से तैयार हैं.

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रमेश बस मुस्कुराया और रौशनी को इशारे से अपने लुंड को फिर से चुसवाने को कहने लगे.

रौशनी अब मुस्कुराते और शरमाते इधर उधर देखने लगी…

रमेश- जानू आओ ना देखो मेरा लोढ़ा कैसे फिर से खड़ा हैं, जरा इसको अपने होंठों से hi शांत करो, देखो अब ये तुम्हारे गुलाबी होंठों का प्यार फिर से पाने के लिए तड़प रहा हैं..

अब कोई भी औरत हो, हु जब मर्द उससे ऐसे तड़प कर अपने पास बुलाता हैं तो उस औरत के चेहरे की चमक एक्चुअली देखने लायक बनती हैं .. वैसे hi हाल था रौशनी का और वह दूर खड़े अब रमेश के मोठे काळा लोडे को देखती रही और मुस्कराती रही..

रौशनी “अरे रमेश जी अभी तोह शाम और रात भर मेरी बुर का ऐसे आपने हाल किया हैं .. उफ्फ्फ थोड़ा ब्रेक दीजिये उफ्फ्फ.”

रमेश बोलता हैं- वैसे सच कहु .. माँ कसम रौशनी तेरी जैसी मासूक हो ना तोह लोढ़ा खड़ा hi रहता हैं. कसम से एक दम मालदार लग रही हो .. अब नखरे न करो और चलो आ ना मेरे लोडे को चूस चूस कर इसका रास निकल दो फिर से..

अब रौशनी देख रही थी की रमेश अब इस तरह से खुली बातों से उसे उनकी माशूका बुला रहे थे और उसे फिर से उनका मोटा कला लुंड चूसने को बोल रहे थे…

रमेश का उसके साथ इस तरह रोमांस करते देख रौशनी भी फिर से थोड़े रोमांस के मूड मि आ गयी और हु रमेश के आँखों में देख उनके तरफ फिर से बढ़ने लगी .. और रमेश ने झट से रौशनी को फिर से अपने बाँहों में लेकर अपनी नाक को रौशनी की नाक से रगड़ने लगे और दोनों फिर से गहर्री चुम्बन में चले गए ..

रौशनी को अब रमेश के काळा भद्दे होठों पर अपने गुलाबी होठों को चिपकने में जार अभी शर्म नहीं महसूस हो रहे थी … निचे से उसका तना हुआ लुंड उसकी नाभि को छू रहा था और उसकी नाभि के अंदर अपना प्रेकम चोर रहा था …

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उसे उस एहसास ने और गर्म कर दिया और वह जोरों से उसे चूमने लगी .. कुछ 5 मं तक राशन चलता रहा की उसकी नज़र ऊपर क्लॉक पर पड़ी.. सुबह के 9 बजे थे और उसे ंगो में काम पर भी जाना था .. वह रमेश से जुड़ा हुयी

“रमेश जी मुझे पहले घर जाना होगा और फिर ंगो … चलो न तैयार होने दीजिये ..”

“अर्रे मेरी जानू चोर दो आअज मेरे साथ hi बिताओ मस्ती में पल ..”

“‘नहीं रमेश जी जाना होगा प्लीज चलिए .. अब तोह जब भी बुलाओगे आउंगी .. लेकिन अब जाना होगा प्ल्ज़ जल्दी करिये..”

रमेश अब रौशनी की कमर को जोरों से दबाया हैं .. और रौशनी की मुँह से अहह निकल जाती हैं.

“अच्छा चलिए .. अब तोह आप और में दोस्त से भी बढ़ कर हैं …और रमेश अब आँख मारता हैं.

रौशनी अपना चेहरा अपनी हाथों में छिपाते हुए चली जाती हैं.

कुछ समय में दोनों तैयार होते हैं .. रौशनी अपना फ़ोन देखती हैं तोह सरप्राइज होती हैं की उसके पति के कोई मिस्ड कॉल्स भी नहीं थे .. क्या उन्होंने उसे मिस नहीं किया था, रात भर हु घर भी नहीं आयी थी , क्या उन्हें उसकी चिंता नहीं हैं ..

यशो सब सोचते अब रौशनी . रमेश के रिक्शा में बैठती हैं और रमेश उसे उसके घर ड्राप कर्तव्हीन.

“रौशनी जी चाहिए तोह से आपके साथ आपके घर … आपके बिस्तर” और रमेश आंक मारता हैं.

“धत बदमाश .. मेरे पति होंगे वहां .. कुछ भी कहते हो उफ्फ्फ आप रुको में आती हूँ.”

रमेश मन में ..(साला उसका पति नहीं होता तोह अभी उसी के बिस्तर में ले जाकर पटक पटक कर छोड़ता …)

“अच्छा, रौशनी जी आप तैयार हो जाइये में आपके लिए रुक जाता हूँ ..”

रौशनी स्माइल देते हुए अपनी चूतड़ों को हिलाते चली जाती हैं और रमेश उसकी हिलती डुलती चूतड़ों को देख अपना लोढ़ा दबाने लगता हैं.

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रौशनी घर पर देखती हैं की रोनित उसके पति वहां पर नहीं थे ..

रौशनी फिर नहाने चली जाती हैं और फिर तैयार होने लग जाती हैं.. उसे काफी लेट हो गया था इसीलिए हु बस तैयार जल्दी होने में लग जाती हैं.

कुछ देर बाद तैयार होकर हु निचे रमेश की रिक्शा में बैठ जाती हैं और रमेश उसे ंगो ड्राप करता हैं.

रौशनी में शाम को आकर रुकूंगा यहाँ.. आप आइये फिर ले जाऊंगा में आपको..

रौशनी स्माइल देती हैं और आजु बाजू देखती हैं और कोई न दिखने पर हु रमेश के गलों पर अपनी गुलाबी होठों को चिपका देती हैं और फिर वहां से चली जाती हैं..

रमेश वहां खुश था की रौशनी जैसी मैरिड माल उसकी बन रही थी .. वह रौशनी के साथ ढेर सारी मस्तियाँ करना चाहता था …

रौशनी काम पर लग जाती है.. आज पहली बार उस दिन की चुदाई के बाद हु सलीम को कैसे फेस करे उसकी की सोचती रहती हैं..

दुपहर का वक़्त हुआ होता हैं , आज तोह लंच उसने लाया नहीं था इसीलिए उसे बहार जाकर लंच करना पद रहा था .. और वह ंगो के बहार जाने hi लगती हैं की ोीचे से उसे आवाज़ सुनाई देती हैं..

“रौशनी जी कहाँ जा रही हो …”

रौशनी आवाज़ से hi पहचानती हैं की हु असलम की hi आवाज़ हैं. वह पीछे मुद कर देखती हैं और उसे स्माइल देते हुए

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“असलम जी में लंच लाना भूल गयी इसीलिए बहार जाकर खाउंगी.”

“रौशनी जी सारे बहार क्यों .. आप मेरे घर आइये , आज खुद में बिरयानी बनाई हैं..”

रौशनी तोह उस घर में सलीम से मिलने से कटरा रही थी..

“‘नहीं असलम जी आप क्यों तकलीफ करते हो .. में बहार खा कर आउंगी.”

“रौशनी जी आइये न .. सलीम भी नहीं हैं 2 दिन तक .. में अकेले अकेले लंच करने में बोर हो जाऊंगा..”

रौशनी यह बात सुनकर की सलीम नहीं होगा .. मन hi मन खींच हो जाती हैं.

“अच्छा ठीक हैं असलम जी .. लेकिन आप क्यों तकलीफ कर रहे हो ..

“अरे आप भी न रौशनी जी .. चलिए आइये , मस्त सा लंच करेंगे हम.”

फिर रौशनी और असलम उसके घर जाने लग जाते हैं.. रौशनी आगे चल रही होती हैं और असलम पीछे से रौशनी की चूतड़ों और नंग कमर को देख अपने लोडे को दबाने लग जाता हैं जो अब अपनी औकात में आ रहा था .

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दोनों लंच करने लग जाते हैं.

“असलम जी बताइये अब आपको कैसे लग रहा हैं ..”

असलम कहता हैं दुखद बनने का नाटक कर..

“अच्छा नहीं हूँ सच कहु तोह .. रौशनी जी, मेरी हु बीमारी फिर से बड़े पैमाने में तंग कर रहे हैं..

फिलाल hi एक नौकरानी राखी थी ंगो ने और अपनी बेगम समझ कर उसे बाँहों में लेकर उसे बहुत चूमा .. और वह ग़ुस्से से मुझे देख चली गयी और फिर उसके भाइयों को लेकर मुझे बहुत पिता …”

“अरे ऐसे क्या .. उफ्फ्फ सॉरी में आपकी इस बीमारी का इलाज hi नहीं करवा पायी.. मुझे काफी गिल्ट फील हो रही हैं..”

“रौशनी आप क्यों .. आपने काफी तरय किया हैं अब क्या करू मेरी किस्मत hi ऐसी हैं तोह ..

आप मेरी बेगम बनती थी तब आपको देख .. आपको बाँहों में लेकर मेरी यह बिमारी मेरी काबू में रहती थी.. आप नहीं तोह तोह बेगम समझ कर किसी भी महिला को दबोच लेता हूँ.. मुझे भी यह पसंद नहीं .. में अपनी बेगम को बहुत hi किश कर रहा हूँ .. हु हमारी शादी की सालगिरह कल hi हैं. उसे बहुत मिस कर रहा हूँ, आपको क्या बताऊ.”

“ओह ी सी , अब में क्या करू .. आपको बीमारी का किसी और से इलाज करवाई क्या .. उफ्फ्फ्फ़”

“रौशनी जी क्या आप .. कल … नहीं चोर दीजिये..”

“असलम जी बताइये न क्या ..”

“नहीं चोर दीजिये आपने इतनी मदत करि हैं .. में hi अकेले में बिताऊंगा कल का दिन.”

“असलम जी नहीं बताइये न क्या कर सकती हूँ में आपके लिए?”

“वह … अगर आप कल शाम मेरे साथ hi बिताओगी और आप मेरी बेगम बनने का नाटक करोगी तोह शायद में अपनी बेगम को मिस नहीं करूँगा .. बस कल शाम के दिन ..”

रौशनी सोच में पद जाती हैं … फिर फैसला करती हैं की हु असलम की मदद जरूर करेगी और उसे हाँ कह देती हैं.

असलम बड़ा खुश हो जाता है ..

“शुक्रिया रौशनी जी … अगर आप मेरी सच में बीवी होती तोह बड़ा चूमने का मन करता .. आप बहुत अच्छी हो … कल मिलते हैं शाम में.

रौशनी फिर वहां से चली जाती हैं.

उसे जाते देख असलम सोचता हैं (मेरी बेगम तोह तुम्हे पूरी तरह से बना दूंगा कल शाम और रात भर मेरी जानू. कल तू असलम का बिस्तर गर्म करेगी और मेरे निचे चटपटा लेट हुए छुड़ेगी ….) और वह अपने लोडे को मसलते अपने बैडरूम में चला जाता हैं.

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शाम का वक़्त अब हो चूका था और रौशनी ंगो के बहार जाती हैं तोह उसे रमेश की रिक्शा दिखाई देती हैं और उसमें चढ़ जाती हैं.

“कैसी हो रौशनी .. आज का दिन कैसे रहा.”

“रमेश जी बहुत अच्छा , बहुत काम हुआ आज कम्पलीट .. बस कल शाम को मेरी एक सहेली के घर जाना हैं और वही मुझे पिचकूप करने आएगी कल ंगो से.”

रमेश कहता हैं “अच्छा ठीक हैं .. फिर आज शाम चले मेरे वहां .. कल शाम और रात की मस्ती को फिर से करे क्या ..”

“उफ़ रमेश जी आप भी न … बड़े वह हो.”

“क्या हु हूँ रौशनी जी बताइये ..”

“उफ्फ्फ आप तोह पक्का वह hi हो ..”

“अरे जानू बता तोह जरा .. क्या हु हूँ में और रमेश पीछे मुद करा आंख मारता हैं..”

“उफ्फ्फ आप रिक्शा अच्छे से चलिए .. आगे देखिये रोड पर ..”

“ओह जानू तुम जैसी मालदार आइटम हो तोह कैसे तुमसे नज़र हटा लू .. उफ़ क्या लग रही हो मेरी जानू.”

रमेश जी आप तोह .. बड़े कमीने हैं ..”

“अरे इस कमीने को फिर से मस्ती करने दो .. फिर देखो कैसे कमीने से जानू बुलाओगी मेरे निचे चुड़ोगी तब .. चलो आज भी चुदाई का खेल खेलते हैं..”

रौशनी अब उस बुड्ढे रमेश को उसके सामने चूसै जैसे अश्लील शब् कहते देख शर्मा जाती हैं ..( उफ्फ्फ किस बुड्ढे से पला पड़ा हैं .. उफ्फ्फ ) रौशनी यही सोचती हैं लेकिन बुरे नज़र से नहीं मस्ती भरी नज़र से ..

रमेश को पता था की मछली उसके जाल में फस चुकी हैं .. वह उसे बिना बोले अपनी रिक्शा को उस गार्डन की तरफ ले जाने लगतभाईन जहाँ हु पहले रौशनी क ओले गया था..

“रमेश जी यह हम कहाँ जा रहे हैं ..?

“रौशनी जी उस दिन के पार्क में ले जा रहा हूँ … इस दिन मस्ती नहीं कर पाए .. चलो आज करते हैं खुले में.”

“उफ्फ्फ नहीं रमेश जी ऐसे मत करो मुझे घर चोरो.”

“रौशनी जी चलिए न , कहाँ मेरे घर ले जा रहा हूँ , पार्क hi तोह जा रहे हैं. वहां एन्जॉय करेंगे .. मुझे आप प्यार होने लगा हैं और आपको कहते हैं न गर्लफ्रेंड की तरह चाहने लगा हूँ .. आज मुझे मेरी गर्ल फ्रेंड को पार्क घूमना हैं. वैसे भी वहां बस कपल्स hi रहते हैं तोह क्या हर्ज़ है .”

रौशनी भी चाहती थी की उस पार्क में घूमे .. उसके पति तोह कभी ऐसे पार्क घूमते hi नहीं थे .. और उसे अनजाने में रमेश से भी चाहत होने लगी थी और उसकी गर्लफ्रेंड बनने में उसे अब कोई प्रॉब्लम नहीं था.

दोनों पार्क में पहुँच जाते हैं.

आज पार्क में और दिनों के कपड़े में भीड़ काम थी.. वैसे भी अब तक 8 बज चुके हुए थे तोह काफी तादाद में परिवार वाले भी अपने बच्चों के साथ उस समय पार्क आये थे. रौशनी और रमेश जैसे मस्ती वाले जोड़ियां काम थी

. कपल्स ज्यादातर 9:00 बजे hi पार्क में आने शुरू होते हैं, जब परिवार वाले वापस जाने लग जाते हैं. पार्क बहुत बड़े एरिया में फैला हुआ था. बड़े ग्रीन ग्रास की अस पास एक वाकिंग ट्रैक था . और एक एरिया में छोटे बच्चों के लिए एक जगह पर कई तरह के झूले और स्लाइड्स भी बने हुए थे. पार्क के एक साइड पर , चारों और चाट, paav-bhaji, कफ ड्रिंक, आइसक्रीम, gol-gappe, खुशबूदार पान के कई स्टाल थे जिन पर काफी भीड़ थी. मान-

“रमेश जी , उफ्फ्फ आज तो तुम मुझे आईटी ी मस्त पार्क में ले आए हो. बहुत hi अच्छी जगह है...”

रमेश फिर बिना जूझि करे रौशनी के नाज़ुक गोरी चमड़ी वाली हाथों को अपने काळा रफ़ हाथों में लेते हुए उसे एक जगह ले जाता हैं जहाँ काम लाइट थी, मनो मूड लिघ्तों हे हो. और वहां पर एक फाउंटेन भी था वहां पर गाने चल रहे थे और संगीत की धुन और उस मूस लाइटिंग में दोनों रौशनी और रमेश खड़े थे. . फाउंटेन ऐसी जगह थी जहाँ के चारों और अब काफी सारे यंग कपल्स बी थे , कई तोह रौशनी से काफी काम उम्र के भी मनो कॉलेज के premi-premika हो. , रौशनी जैसी मस्त उम्र वाली लेडीज भी बहुत थी जिनका, शरीर रौशनी के शरीर जैसे उभारों को उजागर करते फिगर थे और काफी सेक्सी शर्ट स्कर्ट्स या फिर स्लीवलेस ब्लाउज साड़ी में सजी धजी लेडीज अपने प्रेमियों के साथ खुल कर हंस रही थी.

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वहां के सब औरतें अब इस दिलकश वातावरण का पूरा मजा ले रही थी, अपने प्रेमियों के साथ हाथ में हाथ डाले घुल मिलकर बातें कर रहे थर. रौशनी की नज़र खासकर एक लेडी पर गयी जो उसी की उम्र की होगी , हो सकती हैं कुछ 3-4 साल इससे बड़ी .. उस महिला ने अपने होठों लोन पर एक रूबी रेड लिपस्टिक लगायी थी .. लम्बे खुले बाल थे उसे , उसने एक स्कर्ट जीन्स पहनी थी जो काफी टाइट थी जिसमें से उसके कैसे नितम्ब पीछे उभर आ रहा था और उसने अपनी झंघों की आधे से भी काम लेंथ की जीन्स शॉर्ट्स पहनी थी. उस औरत ने क्लीवेज दिखानी वाली टॉप पहनी थी. इतनी गहरी क्लीवेज की कभी भी एक hi झटके में उसकी चूचियां बहार भी आ सकती थी उसकी टॉप से.. वैसी कामुकता से भरपूर महिला थी हु. उसे देख रौशनी सोची की (उफ्फ्फ ऐसे भी खुले कपड़ों वाली लेडीज यहाँ आती हैं … यह तोह बढ़िया मॉडर्न पार्क हैं … फॉर रौशनी अपनी साड़ी को देखि .. और सोची की अगर हु महिला ऐसे कपडे पेहेन सकती थी तोह हु भी तोह उससे और जवान थी और बड़ी अच्छी फिगर वाली थी .. हु भी पेहेन कर रमेश के साथ घूमने यहाँ आ सकती हैं.)

-रौशनी की पहली सोच थी रमेश जैसे काळा बुड्ढे के साथ वापस उन कपड़ों में आने की न की उसके पति रोनित के साथ-

. . दोनों 15 मं तक उस फवारे का आनंद लेते रहे

. रमेश- “चलो डिअर, पहले कुछ पि लेते हैं फिर तुम्हें पूरा पार्क दिखाऊंगा...”

रमेश अब रौशनी को लेकर वहां एक milkshake/juice के स्टाल्स में आ गए.. दोनों ने वहां की फेमस रोज मिल्कशेक पीने की ठान ली.

रौशनी दो मिल्कशेक मांगने वाली थी की रमेश ने उसकी कानों में खुश उस फुसफुसाते बोलै “ रौशनी डार्लिंग , आज हूँ मिलकर इस मिल्कशेक का आनद लुटाएंगे .. और रौशनी को देख हु मुस्कुराया.

रौशनी शर्मायी , “उफ़ आप भी न रमेश जी .. उफ़ एक hi गिलास में दोनों… ओह गॉड ऐसे तोह रोनित भी नहीं करते उफ्फ्फ..”

रमेश – “हाँ रौशनी जी में रोनित नहीं हूँ न .. चलिए मुझे तोह ऐसे hi मिल्कशेक पीना हैं ..”

रौशनी – “अच्छा बाबा नाराज़ न होना .. . भैया एक hi रोज मिल्कशेक देना और दो स्ट्रॉस.”

रमेश फिर से रौशनी की कानों में फुसफुसाते हुए

“ रौशनी जी अगर एक hi गिलास हैं तोह स्ट्रॉ क्यों दो .. और रमेश अब आँख मारता hain.”roshni शर्माती हैं और रमेश के चौड़े साइन पर अपने हाथों को मुट्ठी बनाकर हलके से मारती हैं..

रौशनी – “उफ़ रमेश जी आप भी न .. भैया बस एक hi स्ट्रॉ देना ..”

दोनों के बीच की बातें हु मिल्कशेक वाला आदमी दांग रह जाता हैं. ऐसे काळा से बुड्ढे के साथ ऐसी जवान गदरायी बदन वाली मॉडर्न लेडीज कैसे .. क्या माल पटाया हैं बुड्ढे ने . काश हम से भी ऐसी पैट जाती.

फिर दोनों वहां से चले गए

रमेश- “रौशनी जी यह पार्क बहुत बड़ा है. क्या पार्क का पूरा चक्कर काट के देखोगी तुम मेरे साथ साथ ?”

रौशनी-- “हाँ, जरूर वैसे भी देखिये न कैसे लोग कैसे चक्कर काट रहे हैं. चलो चक्कर काट ले..."

रौशनी की बात सुनकर रमेश ने उसकी तरफ हाथ बढ़ा दिया, जिसे पकड़कर रमेश ने रौशनी को अपने बाँहों में खींच लिया और फिर उसके गोरी सी नाज़ुक कमर पर अपने हाथों को सर्किल करते हुए दोनों पार्क की चक्कर काटने निकल पड़े.

9:30 बज गए थे. जैसे हु पार्क की ुर भीतर जाने लगे , रौशनी को अब और नौजवान जोड़ियां अब दिख रही थी, , जितने भी जोड़ियां थी वहां के मर्द सब अपनी अपनी महिलाओं के हाथ में हाथ डाले, उनके कन्धों पर हाथ रखे, कई कई उन महिलाओं की कमर में हाथ डाले या उनके बदन को अपने बदन से बिलकुल सताए दीं दुनिया से बिलकुल बेखबर होकर चल रहे, बैठ रहे. थे.

वहां अब रौशनी और रमेश , एक खूबसूरत बीवी और एक कला बुद्धा रिक्शा वाला , अब उनकी जोड़ी दुनिया की नजर में जो भी हों, हु दोनों सब से बेखबर उस रोमांचक अपर में साथ साथ बिलकुल करीब हुए चल रहे थे.

chalate-chalate दोनों अब आख़िरकार पार्क के उस भाग में आ पहुंचे जहां कुछ अँधेरा था और काफी तादाद में घने झाड़ थे. हर झाड़ के से में एक जोड़ा बैठा हुआ था, एंट्रेंस के विपरीत दिशा में मुंह किए एक दूसरे को बाँहों में . समेटे गड्डमड्ड हो रहे थे, पुरुष महिलाओं की जाँघों पर लेते हुए थे, कुछेक पुरुष तो महिलाओं के चहरे पर झुके हुए होठं से होठं लगा कर किश कर रहे थे.

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चारों तरफ बहुत hi रंगीन और वासनात्मक नज़ारा था. रौशनी अब साइड से वहां के जोड़ों की हरकतें देख रही थी और रमेश के साथ बैठी रही थी. ऐसे वातावरण में किसी भी गरम खून की युवा महिला का मन विचलित होना लाजिमी था खासकर जब एक जवान मस्त माल को एक बुद्धा पूरा, , अपना बनाना चाह रहा था. फिर भी अपने आप पर पूरा काबू कर रखा था और उसकी और से कोई जल्दबाज़ी करना नहीं चाहता था.

रमेश , रौशनी की सेक्स की भूख को पूरा जगा देना चाहता था और उसमें तड़प पैदा करना चाह रहा था.

दोनों अब बैठकर एक hi स्ट्रॉ से मिल्कशेक मजे से पि रहे थे.

पहले रौशनी एक सिप लेती और फिर रमेश एक सिप लेता उसी एरिया से जहाँ रौशनी ने सिप

लिया था . रौशनी , रमेश की ऐसी हरकते देख मज़्ज़े ले रही थी. फिर उसने भी वही जगह से पिने लगी और रमेश का सलीवा अब उसकी होठों अपर था और वह उसके साथ मिली हुयी मिल्कशेक पिने लगी.

दोनों एक दूसरे के आँखों में देख रहे थे .. रमेश न अब रौशनी को बिलकुल अपने से सताए हुए करीब ले रखा था सुर रौशनी भी उसके बगल में रमेश से चिपक कर बैठी थी.

रमेश ने मिल्कशेक के बाजु के स्टाल से strawberry’s लाये थे :.

उसने एक स्ट्रॉबेरी को अपने मुँह में राखी और रौशनी को दूसरे साइड से वहां पर बाईट लेने का इशारा करा.

रौशनी कुछ बोली नहीं बस अपने होठों को आगे लेकर एक साइड से स्ट्रॉबेरी की बाईट किआ ुर एक दो बाईट में डॉन ओने स्ट्रॉबेरी खा गए .. जैसे hi रमेश उस बहाने रौशनी को चूमने आगे बढ़ा , रौशनी पीछे हटी और उसे देख मुस्कुरायी और फिर अपनी जीभ बहार निकल उसे चिढ़ाने लगी:

रमेश भी मुस्कुराया और फिर से और एक स्ट्रॉ बेर मुँह में राखी और रौशनी ने वही बात फिर से दोहराई. ऐसे और सो बार हुआ .. अब 4तबार जा ऐसे hi स्ट्रॉबेरी खा गए दोनों रमेश ने अपने होठों को जोर से आगे बढ़ा कर रौशनी के होठों से चिपका hi दिया .. इस बार अब, दोनों के होठं एक दूसरे से जुड़ गए थे और दोनों बड़े लम्बे चुम्बन में समां गए .. रौशनी की बुर पानी टपका रही थी उसकी ोांत्य में और रमेश का फनफनाता हुआ लोढ़ा भी प्रेकम उसकी अंडरवियर में लीक करने लगा था .

ऐसी दोनों की चुम्बन चली रही और दो स्ट्रॉबेरी कहते हुए वैसे चुने .. फिर साथ पिटे पिटे मिल्कशेक भी ड्रिंक कर गए. फिर रमेश बोलै.

.रमेश - “रौशनी तुम यहीं बैठो, मैं ice/cream यहीं ले आता हूँ. कैसी लाऊं? कैंडी या कोन?”

रौशनी - “मेरे लिए तो वही चूसने वाली hi लाना ...”

और रौशनी ने रमेश को देख आंक मारी. इस हरकत से रमेश तोह और मदहोश हो गया , और फोड़ा हुआ रौशनी पर और एक लम्बी चुम्बन देते हुए आइसक्रीम लाने चला गया .

रौशनी अब अकेली बैठी कपल्स को देख रही थी.. (उफ़ रौशनी तू आज रमेश जैसे बुड्ढे से यह सब कर रहे हैं उफ़ .. फिर सोची – हाँ इसमें गलत क्या बात हैं , रोनित तोह ऐसे रोमांचक जगहों पर उसे लता hi नहीं .. उसकी जवानी की ख्याल कैसे रखनी हैं इस बुड्ढे को hi ज्यादा पता हैं .. और तोह और उसका हु फौलादी कला नाग .. ) उफ्फ्फ उसके बारे मैंने सोचता हुए रौशनी मन hi मन शर्मायी और मुस्कुरायी ..

तब तक रमेश भी पहुँच गया

रमेश- “रौशनी जी ये लो , तुम्हारे लिए एक कैंडी और मेरे लिए एक कोन लेकर आ गया हूँ

. रौशनी अब कैंडी आइसक्रीम बार को मुंह में लेकर चूसने लगी और रमेश की और देखने लगी .. ऐसे लग रहा था मनो रमेश के लोडे को hi उस कैंडी समझ कर चूस और चाट रहे हो, और वहां रमेश कोन में जीभ डुबो डुबो कर .. आइसक्रीम खाने लगा मनो हु रौशनी की छूट में अपने जीभ को डालते हुए उसकी बुर की क्रीम छठा रहा हो.

रमेश - "देखिये न रौशनी , तुम्हे आइसक्रीम कैंडी चूस के खाने में मजा आता है पर मुझे तो इस लम्बी कोन में जीभ दाल दाल कर उसे चाट के खाने में मजा आता है.”

रौशनी , रमेश की बातें सुन खिलखिलाकर हंस पड़ी फिर खुद अब रमेश के करीब जाते हुए उसकी होठों पर अपने गुलाबी होठों को सरकार उसे चूमने लगी और उसके मुँह से रास पिने लगी .. रमेश भी पूरी तरह से साथ देते हुए उसे चूमते रहा..

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चुम्बन तोड़ते हुए रमेश - “क्यों रौशनी, यहां इस आज इस पार्क का आनंद आपको आ रहा है न?

रौशनी - “मुझे एक बात यहां की बहुत अच्छी लगी की लोग एक दूसरे से मतलब नहीं रखते की कौन क्या पेहेन रहा है, कैसे रह रहा है और यहाँ जोड़ियां एक दूसरे के साथ मस्तियों में लगे हुए हैं :? रमेश- "रौशनी, अब यहां तुम कैसे एन्जॉय करती हो, यह कोई देखने वाला नहीं या तुम्हारे बारे में कुछ गलत सोचने वाला नहीं. मैं तुम्हें हर वो सुख दूंगा जो आज तक तुझे तुम्हारे पति की इतनी सेवा करके भी नहीं मिला. अब से मेरा केवल एक hi उद्देश्य है की तुझे दुनिया का हर वह सुख हूँ जो तुम जैसी सुन्दर और जवान महिला को मिलना चाहिए...” रमेश dheere-dheere पास फ़ेंक रहा था.

रौशनी भी उस फांसी में आ रही थी और रमेश के काफी करीब आ चुकी थी.

गर्मी काफी बढ़ गयी थी दोनों के बीच लेकिन फिर उन्हें सुनाई दिया की पार्क बंद होने वाला हैं.. और रौशनी फिर अपनी वाच पर टाइम देखि .. उफ़ 10.30 बज चुके थे और उसे अब घर जाना था .. .रमेश को पता था की खेल लम्बा चलने वाला हैं और हु उस खेल को उसी पेस में खेलेगा .. चुदाई तोह हु रौशनी की कर hi चूका हैं .. अब उसे अपना बनाने का टाइम हैं और फिर रौशनी जब चाहे जैसे चाहे … जब बोले उसके पास चली आएगी और हु आराम से रात भर और कई बार रौशनी की बुर की कुटाई कर पाएगा .. उसे अपना बना लेगा ..

दोनों फिर पार्क में एक आखरी चक्कर काट के दोनों पार्क से बाहर आ गए. 11.00 बजे रमेश ने रौशनी को घर पहुँचाया .

रौशनी जाते जाते रमेश के होठों को चूमि और रमेश ने भी रौशनी की चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से hi दबाया ..

रौशनी ने रमेश के इस हरकत को देख बोली “धत कमीने कही के .. बड़े ा तमीज दोस्त बन गए हो आप.”

फिर वहां से अपनी कमर और चूतड़ों को मटकते हुए चली गयी.

आज घर पर फिर से एक नोट लिखा था और रोनित ने लिखा था की वह आज उसके दोस्तों के साथ बहार हैं और मिडनाइट के बाद hi आएगा .

पहले तोह रौशनी को बुरा लगता था जब हु घर आती और रोनित नहीं होते थे .. लेकिन अब उसे इतना फर्क नहीं पद रहा था .. वैसे भी देर रात तक वह एक रोमांचक बुड्ढे के साथ वक़्त बीते थी और उसे रोनित को भी उसका कुछ जवाब नहीं देना पद रहा था . रौशनी अब रमेश के बारे में सोचती हुई अपनी बैडरूम में चली गयी और रमेश के लोडे और आज की पार्क में हरकतों की सोचते हुए अपनी बुर में अपनी नयी लायी डिलडो के साथ खेलते हुए जहर गयी और फिर इत्मीनान से सो गयी. कल तोह उसे असलम के सात शाम बितानी थी , वह भी उसकी बेगम का नाटक कर .. उस बात को तोह हु भूल hi गयी थी.
 
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