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रौशनी जी कैसी हो आप .. बहुत दिनों बाद मुलाक़ात हुयी हैं आपसे”
“नमस्ते रमेश जी .. में ठीक हूँ .. बस कुछ काम के सिलसिले जाना पड़ा था .ल
“अच्छा मैडम ठीक है. .. वैसे आप आज ंगो नहीं गयी .. यहाँ मार्किट आयी हो?”
“रमेश जी में और कुछ दिनों की छुट्टी ली ंगो से .. और घर के बहुत सारे सामानों की खरीदारी करनी भी हैं ..”
“अच्छा ठीक हैं रौशनी जी वैसे में आपकी खरीदारी में मदद करू ..?”
“रमेश जी नहीं आप अपने काम को छोर ऐसे नहीं करिये .. में करुँगी खरीदारी.”
“अरे रौशनी जिनकारूँगा न मदत .. काम पर तोह रोज़ जाता हूँ , आप जैसी बसीं की मदत करने का मायका बार बार नहीं मिलता ..”
रमेश की उसे हसीं कहने के बात पर रौशनी मुस्कुरायी …
“रौशनी जी वह हस्ती हुयी कितनी खिल उठ टी हो आप .. वैसे भी कुछ ज्यादा hi खिल उठी हो उस दिन से तोह बहुत .. क्या बायत हैं सर ने आपके साथ बहुत मस्तियाँ की हैं न”
“उफ़ रमेश जी आप भी न कुछ भी .. ऐसे कुछ नहीं”
रौशनी बस सलीम द्वारा चूड़ी की सोच सिहर उठती हैं … सलीम से बड़ी मस्त चुदाई आकृ थी उसने .. बुद्धा होकर भी बड़े दमदार तरीके से उसकी चुदाई किट hi उन्होंने उफ्फ्फ्फ़… उसे फिर यह बात भी याद आती हैं कैसे वह रमेश जी के मोठे लुंड की सोच सोच अपनी बुर से खेली थी दो दिनों से .. उसकी नज़र अनजाने में रमेश जी की क्रॉत्च क्षेत्र में जाती hi हैं और हलके से अपने होठों पर जीभ फेरती हुई फिर जल्द से वहां से अपनी नज़रें वह निकलती हैं.
“रौशनी जिनकहन खो गयी .. चलिए आपकी मदत करता हूँ..”
L”nahi रहने दीजिये न रमेश जी”
लेकिन रमेश उसकी बात नहीं सुनता और उसकी हाथों से थैली लेता हैं ..
रौशनी भी कुछ नहीं बोलती बस मार्किट में जाती हैं एक सब्ज़ी वाले के पास.
“आईये बीबी जी,, आज तो बड़े दिनों के बाद आये है.”
“ हाँ अब बस सब्ज़ी अच्छी दिखाओ.”
“ बढ़िया hi दिखाएंगे बीबीजी ,. आप बढ़िया है तो सब्ज़ी कैसे घटिया दिखयेंगे.” रौशनी काफी शीम उठी उसके ऐसे शब्दों से .. अपनी ऊपर नियंत्रण पाकर हॉक्स से मुस्कुरायी.
भाईसाब “अब मस्का लगाना बंद करो बातें मीठी करते करते सब्ज़ी ख़राब दाल डोज आप”
“अरे नहीं बीबी जी आप जैसे ग्राहक को नरराज नहीं कर सकते हैं .. वैसे आज का सब्ज़े ताज़ी सब्ज़ियां हैं बैह्गां और लौकी”
“कुछ भी कहते हो .. पिछली बार यहाँ इसी मार्किट से लिए बैंगन सारे खराब निकले”
“अरे मेमसाब उस दिन में यहाँ नहीं था .. वह रामु , दूसरे सब्ज़ीवाले ने दिए होंगे ..
.. वैसे आपको पता हैं न बैगन अलग अलग सिज़ेस के आते है. .. उसके पास बैंगन छोटे हैं यह मेरे पास तोह बड़े बैंगन है. ..”
“क्या मतलब आपका भाईसाब …” रौशनी जरा चौंकते हुए बोली.
“अरे बीबी जी मतलब में जो अभी दे रहा हूँ मोठे और बड़े फ्रेश बैंगन हैं..
इस सब सो सुन रमेश जो बातें एन्जॉय कर रहा था अब उसे लगा की वह सब्ज़ीवाला कुछ ज्यादा hi उड़ रहा था ( बस में hi रौशनी जी से ऐसी बातें कर सकता हूँ ..)
“ज्यादा मत बोल .. मैडम जी आप चलिए इससे मत लीजिये कुछ भी..”
“रमेश जी आप प्ल्ज़ शांत रहिये .. आप जाओ वहां दूसरे सब्ज़ी वाले के पास जाओ जिसने उस दिन मुझे ख़राब बैंगन दिए थे … उससे आप लड़िये .... में यहाँ संभल लुंगी, वैसे भी बैंगन फ्रेश और मोठे हैं इनके….. रौशनी बिना सोचे बोल दी दोहरी मतलबी चीज़ .. लेकिन सब्ज़ीवाला वह समझ मुस्कुराया.
रमेश चुप के से फिर दूसरे सब्ज़ीवाले के पास जाता हैं.
रमेश जाता हैं तोह रौशनी फिर से उस सब्ज़ी वाले के पास देखती हैं और उसकी आँखें एकदम से उस सब्ज़ी वाले के पैरों के वहां जाते है. अब बात ऐसी थी की उसका कला लोढ़ा उसकी लुंगी से थोड़ी बहार आते हुए उसके आँखों के सामने hi था .. उफ्फ्फ सच में काफी मोटा लोढ़ा था उसका..
सब्ज़ीवाले ने रौशनी की नज़र पकड़ ली थी लेकिन वह ऐसे नाटक कर रहा था जैसे कोई बात हुयी hi न हो.
रौशनी बस सोचती हुयी ( उफ़ रमेश जी जैसे कोटा तोह नहीं लेकिन फिर भी हैं काफी बड़ा .. यह बुद्धों का ऐसे कैसे इतना मोटा लुंड होता हैं उफ्फ्फ)
. उस सब्ज़ी वाले ने रौशनी की सोच को तोड़ते हुए
“देखो मैडम देखो, सोच क्या रहे हो आपके लिए hi हैं बड़े ताज़े बैंगन.
रौशनी उस बात पर शर्मायी .. कुछ ज्यादा hi हो रहा था ये सब उसे लगा.
“वैसे भाईसाहब ये गोभी कैसी हैं”
“मैडम जी, 60 रस किलो, देखिये मेमसाब एकदम ताज़ी है. और उसने उस पर ऐसे हाथ फिराया और उसे रौशनी के सामने hi दबाने लगा मनो वह गोबी नहीं रौशनी की चूचियां हो ..
तब तक रमेश भी वापस वहां आ गया..
हु सब्ज़ीवाला बोलै “मैडम हमने होम डिलीवरी भी स्टार्ट किया है आप फ़ोन पर बता दीजिये में खुद सब्ज़ी दे जाएगंगा आपको इस वािण को लेने की कोनो ज़रुरत नहीं.”
रमेश , रौशनी के कुछ बोलने से पहले hi “बस होगया जल्दी से सब्ज़ी दीजिये और हम जाते है .., रौशनी जी चलिए सब्ज़ी लीजिये और जाते हैं.”
पैसे देकर फिर रौशनी और रमेश वहां से चले गए ..सब्ज़ीवाला बुदबुदाता हुआ (साला कम्बख्त बीच में क्यों घुस रहा था .. मैडम जी के वहां होम डिलीवरी करने का मौका मिल रहा था .. चुटिया बुद्धा)
फिर दोनों एक और दुक्काँ जाते हैं दूध लेने.
“भैया गाय का फ्रेश स्किम मिल्क वाले दूध का पैकेट दीजिये 500मल.”
दूकान में और एक बुद्धा था , रौशनी को देख उसकी आँखें खिल उठी … (उफ़ क्या गोरी मैडम हैं यार मम आज तोह मेरा लकी दिन हैं)
“मैडम जी आप गाय का फ्रेश क्रीम दूध लीजिये, अभी फ्रेश डेरी से आया हैं”
“नहीं भैया स्किम मिल्क दे दीजिये”
“लीजिये न मेमसाहब, आप जैसी गोरी मेम ने फ्रेश क्रीम दूध hi पीना चाहिए …”
“भाईसाहब क्या कह रहे हो … में कही न स्किम मिल्क वाला दीजिये”
हु दुकानदार मन में बुदबुदाता हुआ “उफ्फ्फ्फ़ आपकी दूध की फेयरी भी बड़ी मस्त हैं मैडम … वहां से फ्रेश दूध निकलता हैं क्या … और वह रौशनी की चूचियों के वहां घूरे जा रहा था जिससे रौशनी काफी उनकंफर्टबले फील कर रही थी.
रमेश से सब देखा फिर बोलै” अरे मैडम को स्किम मिल चाहिए तेरे को क्या पड़ी हैं … चल जल्दी दे हमे जाना हैं…”
वह दुकानदार रमेश को एक ग़ुस्से की नज़र से देखता हैं और दूध की पैकेट रौशनी को देता हैं.
“रौशनी जी कहा था न यहाँ से न करिये खरीदारी .. चलिए में आपको अच्छे मार्किट ले जाऊंगा ..”
“रमेश जी ठीक हैं चलिए”
फिर दोनों रिक्शा में बैठ जाते हैं और मार्किट के लिए रवाना हो जाते हैं.
कुछ 1 घंटे बाद वह मार्किट पहुँचते हैं, लेकजण दोनों में बातें नहीं होती क्यूंकि रास्ते में रौशनी अपनी सहेली के साथ फ़ोन पर बातें कर रही थी.
मार्किट में 2 घंटों तक रौशनी खरीदारी करती हैं. वहां उसे कई चीज़ीं मिली थी अच्छे दाम में और वह काफी खुश थी.
“रमेश जी सच बहुत अच्छे मार्किट ले आये हो आप .. जरा सी गन्दगी हैं और बदबू हैं लेकिन बहुत अच्छे दाम में मिलता हैं सब कुछ.
“हाँ रौशनी जी वह आप जैसी महिलाऐं उस मार्किट में वहां के नाम और प्रसिद्ध होने के वजह से जाती हो .. लेकिन अच्छी खरीदारी घर के सामन की ऐसी hi मार्किट में होती हैं .. अच्छे डैम में और काफी वैरायटी भी.”
“हाँ रमेश जी सच हैं शुक्रिया आपका.”
तभी रौशनी को उसके ोाती रोनित का कॉल अत हैं .. हु उसे कहता हैं की वह शाम को नहीं आएगा बल्ली सीधे 11 बजे रात को hi आएगा. रौशनी समझ गयी की वह होने उन दोस्तों के साथ जा रहा होगा और रात को पि कर hi आएगा .. आज रात तोह सेक्स होगी hi नहीं ..
रमेश बात सुन केता हैं की रौशनी के पति लेट नाईट आने वाले हैं तोह वह खुश होता हैं और रौशनी के साथ समय बिताने के प्लान बनता हैं.
“रौशनी जी रास्ते में एक होटल हैं बहुत स्वादिष्ट खाना मिलता हैं .. वैसे भी शाम हुयी हैं .. 6 बजे हैं. वहां हम 7 बजे तक पहुंचेंगे और फिर आप डिनर भी वही कर लीजिये , आपके पति लेट आने वाले हैं न घर”
“रमेश जी हाँ लेकिन में थक गयी हूँ , घर जाना चाहती हूँ वही कुछ बना कर खाउंगी.”
“रौशनी जी चलिए न .. बहुत स्वादिष्ट खाना मिलताभाईन वहां .. उँगलियाँ चाटती रहोगी आप खाना खाने के बाद”
वैसे रौशनी को भूक भी लगी hi थी .. खरीदारी और ट्रेवल से वह भुकी थी .. और रेस्टोरेंट जाने तैयार होती हैं.
रमेश को पता था वह होटल उनके नार्मल रास्ते पर नहीं हैं और उसे दूसरी ज़रा सी सुनसान जगह से रौशनी को पे जाना था. और तोह और उसका घर भी उसी के रास्ते के बीच में था .. वह रौशनी को अपना घर भी दिखाएगा वह सोचने लगा .
फिर दोनों रेस्टोरेंट 1 घंटे बाद पहुँच जाते हैं.
अंदर रौशनी देख सकती थी बहुत भीड़ थी और अभी तोह 7 hi बजे थे. सच में रेस्टोरेंट लङखङा बहुत स्वादिष्ट होगा. उन्हें बस एक hi सीट मिलती हैं वह भी रेस्टोरेंट के अंत में.. और ऐसी सीट जहाँ एक कपल पहले से hi बैठे थे .. और जगह के लिए उन्हें 30मं रुकना पड़ता इसीलिए दोनों वहां बैठने तैयार होते हैं.. उस कपल को भी कोई ऐतराज़ नहीं था.
दोनों ने खाना माँगा लिया . वह कपल जो बैठे थे काफी घुल मिल रहे थे … वह लड़की उस लड़के से चिपक कर बैठी थी .. खाने के बीच बीच दोनों खिलखिलाकर हस्ते ..
अब वह सीट भी काफी छोटी थी और रौशनी और रमेश को भी ज़रा सा पास बैठना पड़ा … इतने करीब की रौशनी की झंघों का टच रमेश के जहगों से हो रहा था ..
रमेश इस करीबी से बहुत खुश था .. रौशनी के बदन से बड़ी खुस्भु आ रही थी .. उसका लोढ़ा रौशनी की खुशबु से और रौशनी की करीबी को पाकर उभर रहा था ..
उनके साइड की टेबल की सीट पर बैठा आदमी उठ कर जा रहा था तोह वह एकदम रौशनी की लारीबी से गुज़र गया और चुने hi वाला था की रौशनी साइड में करि होने बदन को .. लेकिन जगह इतनी काम थी की वह खुद को सँभालने उसने अपने हाथों को रमेश के झंघों पर रखज .. वह भी ऐसी जगह जो रमेश ले उभरते लुंड के लाफ़ी करीब थी मानो उसे कभी भी छू सकेगी .. रौशनी को भी एहसास हुआ की उसके हथीन के साइड में कुछ उभरा हुआ था .. वह देखि तोह पायी की रमेश का लोढ़ा उसकी पंत में टाइट जो रहा था और रमेश की क्रॉत्च का एरिया बिलकुल उसके हाथों के करीब था .. रमेश भी यह महसूस करा लेकिन ऐसे करने लगा मानक कुछ न हुआ हो .. रौशनी की नज़रें बस अब रमेश के लुंड की उभर पर hi था और वह सिहर उठी ..
वह रात कन्जंसिडेंट्स के बारे में सोची जब वह रमेश के लुंड को इमेजिन करते हुए कूद की बुर पर अपनी उँगलियों को चला रही थी और झट भी चुकती थी .. इस सोच से उसके गाल लाल हुए लेकिन उसकी नज़र रमेश के लुंड से नहीं हटी .. बस उसके उभर को देखती रही , उसकी गर्मी बढ़ती रही और वह रमेश के लुंड को नग्न सोचने लगी ..
फिर वेटर खाना लेकर आया तब रौशनी अपने ख्यालों से निकलती हुयी सीधी बैठ गयी और अपने हाथों को रमेश के झंघों से निकल ली .. फिर दोनों खाना खाने लगे .. लेकिन रमेश का लोढ़ा अब बैठने का नाम नहीं ले रहा था.
“रमेश जी खाना बहुत hi स्वादिष्ट हैं .. “
“मैंने कहा था न रौशनी जी … बहुत स्वादिष्ट खाना होता हैं यहाँ …”
खाना लहणे के बाद बिल की बारी आयी .. बिल वेटर ने रखते hi दोनों बिल को पकड़ने आगे बढ़ाये हाथों को तोह रौशनी ने पहले बिल पकड़ लिया और फॉर रमेश ने रौशनी के हाथों को पकड़ लिया ..
“रौशनी जी बिल का भुगतान में करूँगा”
“नहीं रमेश जी में करुँगी ..”
इसी बात पर दोनों बात करने लगे लेकिन रमेश , रौशनी के हाथों को पकडे hi रखा .. उसके खुरदरी हाथ अब रौशनी की नाज़ुक हाथों में थे … और वहां हु दबोचने लगा .. रौशनी को अब एहसास हुआ की उसके हाथ अब रमेश के हाथों पर थे .. उसके रफ़ हाथ उसे अपने मुलायम हाथों पर महसूस कर वह शर्मायी.. रमेश भी उसके हाथों को अब मसल रहा था बातों बातों में.
“रमेश जी छोड़िये न …”
“रौशनी जी क्या चोरु .. बताइये”
“उफ़ रमेश जी आप मेरे हाथों को छोड़िये न .”
“नहीं फिर आप बिल का भुगतान करोगी .. नहीं में बिल भरूंगा … जब तक आप मुझे बिल नहीं देती में आपके हाथों को नहीं छोड़ूंगा.”
“उफ़ रमेश जी यह कैसी ज़िद्द … उफ्फ्फ छोड़िये मेरे हाथों को”
“नहीं आप फिर बिल भरोगी .. आप बिल मेरे हवाले करो फिर hi आपके हाथों को छोड़ूंगा.”
“उफ्फ्फ आप तोह बहुत hi ज़िद्दी हैं … ये लीजिये बिल और मेरे हाथों को छोड़िये” ऐसे कहते हुए रौशनी अपने चेहरे पर मुस्कराहट छिपा न सकीय ..
रौशनी बिल देती हैं रमेश को और रमेश, हाथों को एक आखरी बार दबोचते हुए छोर देता हैं.
बिल भर कर दोनों वहां से निकल जाते हैं.. रास्ते में बारिश होने लगती हैं ..
“ओह रमेश जी बारिश आने लगी”
“हाँ रौशनी जी आज दुपहर में इतनी धुप और नमी थी , इसीलिए शाम को बारिश आ रही हैं”
“में भीग रही हूँ रमेश जी “
“रौशनी जी माफ़ करिये आज में रक्षा के परदे लाना भूल गया जो बारिश को बहार रखते हैं ..”
“उफ्फ्फ फिर क्या करू में रमेश जी बहुत भीगी जा रही हूँ ..”
रमेश देख सकता था आईने से की रौशनी की साड़ी और ब्लाउज भीग रही थी .. उसकी गोरी से बदन पर पानी के बूंदों से वह और चमक रही थी .. अँधेरा भी च चूका था .. अब उसके प्लान का अगला स्टेप आने वाला था.
“रौशनी जी घर पहुँचाने में और 1 घंटा लगेगा :. जरा ज्यादा भी लग सालता हैं क्यूंकि मुझे चलने की स्पीड भी काम रखनी होगी”
“उफ़ फिर क्या करे रमेश जी में तोह ौरी भीग जाउंगी और फिर सर्दी ज़ुकाम हो जाएगा .. दो दिन बाद मुझे ंगो भी काम पर जाना हैं”
“हम्म रौशनी जी एक उपाय हैं .. मेरा घर रास्ते में hi पड़ता हैं और वह बस 20मं की दुरी पर हैं.. आपको में वहां ले जाएंगे और वहां आप रुक पाओगी जब तक बारिश रुक नहीं जाता .. आप भीगोगी भी नहीं और वहां आप ड्राई कर पप्गी खुद को”
“रौशनी कुछ सोचतिभाईं (उफ्फ्फ्फ़ अब और क्या कर सकते हैं .. उनके घर जाउंगी तोह बारोश से रहत मिलेगी और भीगूँगी भी नहीं पूरी तरह से .. लेकिन उनके घर कैसे जा सकती हूँ .. उफ्फ्फ उनकी बीवी भी नहीं होती हैं शहर के घर पर .. लेकिन में भी ऐसे भीग नहीं सकती और 1 घंटे तक)
“अच्छा ठीक हैं वहां ले चलिए जल्दी से”
रमेश के मन में लड्डू फुट रहे थे .. वह आज रौशनी को अपने घर ले जा रहा था .. वह दोनों वहां अकेले होंगे .. वैसे भी बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही हैं , यही मौका हैं रौशनी जी के साथ और करीबी बना सकू …
“हाँ चलिए रौशनी जी ..”
फिर दोनों 20मं में पहुँच जाते हैं.. रमेश के घर के आसपास की घरों में लाइट भी नहीं थी .. उसका घर छोटा था , कुछ कंक्रीट के स्टोन्स से बना हुआ और कुछ अभी भी कच्चे मिटटी का .. घर के आस पास काफी गंदगी भी थी … रौशनी को उस गंदगी के बदबू से को कुछ समय तक रौशनी अपने रुमाल से अपने नाक को ढकने लगी.
रौशनी अब और भी भीग चुकी थी. उसकी ब्लाउज पीछे से गीली थी … साड़ी नाभिनके वहां गीली थी .. उसकी बदन से चिपकी हुयी थी उसकी साड़ी.. उसके बाल भी जरा गीले थे .. उसके लम्बे गीली बालों को डेल्ह रमेश का लोढ़ा उभरने लगा .. (उफ्फ्फ क्या कमाल की लग रही हैं रौशनी जी .. उफ्फ्फ क्या बदन हैं गोरा सा .. क्या चूचियां होगी पक्के ाक़ों जैसी … और बारिश से भीगी हुयी और भी शाइन कर रह हैं .. क्या माल हैं यार …)
दोनों अंदर चले जते हैं … उसके घर पर do-teen hi लाइट ों होते थे .. एक बैडरूम था , एक हॉल जहाँ किचन भी एक कोने में hi था … हॉल में रस्सियों के ऊपर रमेश के बनियान और चड्डियाँ भी थी .. उसके घर को देख रौशनी को सलीम और असलिम के घर की याद आयी .. रमेश कंघर तोह उनके घर से और भी चिटा था ..
रमेश बोलै “रौशनी जी आप मेरे कमरे में जाकर खुद को सूखा सकती हो ..”
“हाँ रमेश जी व्है करुँगी .. लेकिन बहुत गीली हो चुकिभाईं मेरी साड़ी .. इसका क्या करू”
रमेश कुछ समय तक बस रौशनी के बदन को घूरे जा रहा था .. उसका लोढ़ा उसकी पंत में उभर भी रहा था ..
“रमेश जी क्या घर रहे हो .. मेरी समस्या का क्या करे.”
“रौशनी जी अंदर अलमारी में मेरी बीवी के कुछ कपडे होंगे .. चाहिए तोह आप उसे पहनिए .. तब तक आपकी साड़ी को पंखे के निचे सूखा देंगे”
“अच्छा लेकिन आपकी बीवी के कपडे बैठेंगे मुझ पर ..”
“वैसे रौशनी जी मेरी बीवी काफी केहतेभें न स्लिम हैं … और आप तोह गदरायी ….”
रौशनी अब आँखें बड़ी कर रमेश को देखने लगी ..
“रौशनी जी सच तोह हैं आप की कर्व्स ज्यादा हैं .. आपकी …
और रमेश अब रौशनी की चूचियों पर नज़र डालता हैं..
“आपकी चीज़ें बड़ी बड़ी हैं तोह अब तरय करना पड़ेगा मेरी बीवी के कपडे आप पर बैठनेगे या नहीं ..”
(उफ़ यह रमेश जी क्यब्कया कह रहे हैं .. ओह गॉड मुझे तोह शर्म आ रही हैं … उफ्फ्फ्फ़)
रौशनी कुछ नान कहते हुए रमेश के कमरे में चली जाती हैं अपनी चूतड़ों को मटकते हुए. वहां रमेश अपने लोडे को मसलने लगता है (उफ़ क्या चूतड़ हैं यार इसकी ममम आईटी ी गोल गोल .. भागती हैं तोह कितने मटकते हैं उफ्फ्फ्फ़ आज तोह रौशनी जी के करीब और जाना hi होगा …)
रौशनी अब कमरे में जाती है. .. बहुत छोटा सा कमरा था… सब मर्दों जैसे काफी मेस्सी रखा था रमेश ने अपना कमरा .. वह अलमारी को खोली तोह उसे बस 3-4 hi ड्रेस दिखे रमेश की पत्नी के .. उसने उन्हें बहार निकला.
उसमें से दो साड़ी , ब्लाउज और पत्तिकत्स की पेअर थे और दो कुर्ती और लेग्गिंग्स .. वह उन्हें निकली बहार .. वह डेल्ह कर hi नाता सकती थी की रमेश के पत्नी के कपडे काफी टाइट थे और उसके कपड़ों से 2साइज छोटे भी .. उफ़ अब वह अगर कपडे बदलेगी उनमें तोह इतने टाइट होंगे रमेश की पत्नी के कपडे उसके लिए ..
रौशनी सोची की वह नहाएगी भी. वह रमेश को कमरे से ोुकरते हए “रमेश जी में चाहती हूँ नाहा लू लेकिन गरम पानी कैसे मिलेगा .. आपका हीटर कहाँ हैं.”
(उफ्फ्फ रौशनी जी नहाना भी चाहती हैं … ममम काश थोड़ी झलक दिख मुझे उसके नंगे गोर बदन का)
“रौशनी जी वाहन बाथरूम के अंदर एक स्विच हैं .. लेकिन याद रखिये 10 मं बाद hi पानी गरम होगा और गरम भी बस 5-10 मं के लिए hi रहेगा और फिर ठंडा हो जाएगा”
“अच्छा ठीक हैं रमेश जी”
उसने कमरे का दरवाज़ा बंद किया.. लेकिन उसे पता नहीं था की दरवाज़ा बड़े हॉक्स से hi लैच होता हैं .. कुछ आवाज़ से या वाइब्रेशन से आसानी से खुल भी सकता था.. उसे लगा की दरवाज़ा बंद हो गया हैं और वह कपडे निकलते हुए बाथरूम में 10मं बाद चली गयी और गर्म पानी से नहाने लगी.
उसने जैसे hi दरवाज़ा बंद किया था , उसके बाथरूम के दरवाज़े के बंद होने के वाइब्रेशन से कमरे का दरवाज़ा ज़रा खुल गया.. रमेश को भी यह बात पता चली और वह बहार खड़ा hi था दूर के बने गैप से अब वह कमरे के अंदर थोड़ा झाँक सकता था.
रौशनी का नहाना बंद हुआ और वह टॉवल को बदन से लपेटी हुयी बहार आयी. फिर वह बिस्तर के पास चली गयी जहाँ उसने रमेश की बीवी के कपडे रखे थे. अब बात ऐसे हुयी की रमेश डेल्ह सकता था गैप से की रौशनी टॉवल लपेटी आयी थी.. उसकी नज़र रौशनी की झंघों पर गईंजप टॉवल छोटा होने के कारन से साफ़ साफ़ दिखाई दे रहे थे .. (उफ्फ्फ क्या गोरी झांघें हैं रौशनी जी की ममम मुलायम और दूध जैसी गोरी उफ्फ्फ और इतनी मस्त गदरायी झांघें उफ्फ्फ्फ़ .. )पहली बार वह रौशनी की झंघों को इस प्रकार देख रहा था.
रौशनी को तोह पात hi नहज था रमेश उसे गैप से डेल्ह सकता था . उसकी पीठ थी दरवाज़े के अगेंस्ट और वह अपनी टॉवल को निचे निकली..
रमेश अब रौशनी की गोरी सी पीठ और अब उसकी नग्न चूतड़ों को देख सका .. उसका लोढ़ा एकदम से टाइट हो गया .. और वह उसे मसलने लगा (हे भगवान् उफ्फ्फ क्या माल हैं यार .. क्या चूतड़ हैं मम गोरी और गोल गोल …. गुबारों जैसी चूतड़ रौशनी की … मममम) रमेश अब अपने लोडे को पंत से निकलते हुए मसल रहा था .. उसका लोढ़ा पूरा टाइट हो चूका था और सलामी दे रहा था रौशनी की नंगी चूतड़ों को देख .. उसके लोडे से प्रेकम भी निकलने लगा था .. वह अपने लोडे को मसलता और उसे आगे पीछे हिलता …
फिर रौशनी जरा झुक गयी और अब रमेश उसकी छुअतड़ों के बीच भी देख प् रहा था .. वह जरा नज़दीक आया दरवाज़े के ताकि व और अच्छी तरह से देख सके .. उसका लोढ़ा तोह अब काफी लॉकिंग करने लगा था .. ज़मीन पर भी उसके लोडे का लॉकिंग टपक रहा था .. फिर रौशनी अपनी पंतय पेहेन्ने लगी. रमेष होने लोडे को हिलता हुआ नज़र देकब रहा था उसके लोडे से काफी लॉकिंग शुरू हुयी थी ज़मीन पर टपकते हुए .. (िफ्फ्फ रौशनी जी आज तोह आपके नग्न गांड को देख धन्य होगया उफ्फ्फ क्या गोल गोल हैं मममम क्या मस्तवहैँ .. उन्हें हॉक्स से थप्पड़ मरूंगा तोह कैसे मस्त हिलेंगे .. उफ्फ्फ रौशनी जी उन चूतड़ों को तोह में चूमना चाहता हूँ .. रगड़ना चाहते हूँ अपने मोठे लोडे से और उसकी चुदाई करना चाहता हूँ … मममम गोरी माल हो तुम)
रौशनी अब कमरे में ने अब पंतय पहनी और ब्रा भी पेहेन ली. उसकी पीठ अभी भी रमेश को दिखाई दे रही थी .. आगे से कुछ नहीं दिखाई दे रहा था .लेकिन रोषनिनको क्या पता की बहार से गैप में से रमेश उसकी गोटी पीठ और चूतड़ों को साफ़ साफ़ नग्न देख कर अपने लोडे को हिला रहा था और उसके लोडे से ढेर सारा रास टपक रहा था .. फिर रौशनी एक ब्लाउज पेहेन्ने लगी .. काफी टाइट ब्लाउज थी .. उसकी चूचियों को सामने से धक् भी नहीं प् रही थी .. ( उफ़ रौशनी … तेरी चूचियां तोह सच में रमेश की बीवी से ज्यादा hi बड़े हैं … उफ्फ्फ .. यह ब्लाउज मुझे फिट hi नहीं हो रही है. ..रुको दूसरी ब्लाउज तरय करुँगी.)
अब दूसरी ब्लाउज से उसके स्तन तोह धक् रहे थे लेकिन बटन बस 3 hi लग रहे थे .. ऊपर के दो बटन उसकी चूचियों के बड़े होने के कारन लग hi नहीं रहे थे .. इस नज़ारे को रमेश देखता तोह वही रौशनी को पकड़ कर छोड़ देता .. रौशनी की चूचियां उस छोटे से ब्लाउज में उभरी हुयी थी .. उसकी नेकलेस उसकी चूचियों के बीच समां रही थी .. उसके निप्पल्स का ऊपरी हिस्सा भी दिखाई दे सकता था ब्लाउज से ..
रौशनी ने फिर कुर्ती लेग्गिंग्स भी तरय करि .. वहां पर भी कुर्ती 2 साइज काम होने के कारन वह उसे पेहेन hi नहीं पायी. अब उसके पास अपने hi गीले कपडे पेहेन्ने के इलावा कोई चारा नहीं था .. लेकिन अब बात थी की उसकी अपनी ब्लाउज तोह ज़मीन पर गिरी थी बाथरूम के दरवाज़े के पास और अंदर का पानी बहार आकर उसकी ब्लाउज और भी भीग चुकी थी ..
(उफ्फ्फ रौशनी तुम्हरी hi ब्लाउज सुर भी गीकी हुयी हैं .. अब क्या करेगी … क्या पहनेगी .. उफ्फ्फ यह कैसी मुसीबत .. रमेश जी की बीवी के कपडे भी नहीं बैठ रहे हैं मुझे .. उफ़ अब क्या करू …) फिर रौशनी सर पर हाथ रखे बिस्तर पर बैठ गयी . बैठ ते hi बिस्तर ने एक क्रीकिंग की आवाज़ दी …
अब वह ऐसे बैठी थिन्की उसकी ब्रा में कैद चूचियां अब गैप में से रमेश को साफ़ साफ़ दिख रहे थे .. बहार रमेश तोह भूके नारों से रौशनी को ब्रा और पंतय में बैठे देख प् रहा था .. उफ़ क्या माल हैं यार .. आगे से भी ऐसी hi धमाकेदार माल हैं उफ्फ्फ क्या चुच्यां हैं मममम इतनी मुलायम होगी .. गोरी भी … उफ्फ्फ दूध से भरी दूधियाँ लगती हैं यासर .. बस उसमें अपने लोडे को दाल वहां की चुदाई करनी हैं .. उफ़ क्या माल हैं ….उसे फिर दिखा की रौशनी ऊपर देखने hi वाली थी .. और उसकी चोरी पकड़ने से पहले hi रमेश वहां से हैट कर बहार चला गया …
रौशनी ने ऊपर देखा और दरवाज़े को ज़रा खुला पलर और वहां गैप पाकर चौंक उठी .. ( उफ्फ्फ यह क्या रौशनी , दरवाज़ा ज़रा खुला हैं और गैप दिख रहा हैं .. ओह गॉड क्या रमेश जी वहां से देख रहे थे .. क्या उन्होंने मुझे पीछे से नग्न देख किया .. और उफ़ क्या उन्होंने मुझे ब्रा पंतय में भी आगे से देख लिया …) वह दरवाज़े के और करीब गयी लेकिन उसे कोई नहीं दिखाई दिया .. फिर वह दरवाज़े को फिर से लैच लगाकर अब बाजू के एक स्टूल पर बैठ गयी ..
(उफ़ रौशनी तुझे अब तोह बस उस ब्लाउज के सिवाय कोई उपाय नहीं हैं .. जरा फिर से उसमें अपनी ब्रेअस्ट्स को फिट करने की तरय करती हूँ.) और वह फिर से ब्लाउज पहने लगी .. इस बार कड़ी म्हणत के साथ उसने अपनी चूचियों को कैसे तोह कर उस ब्लाउज में फिट करि और बटन लगा दिए .. लेकिन उसकी बड़ी चूचियों के तनाव से बटन भी मनो टूटेगा ऐसे hi स्तिथि में था .. फिर रौशनी ने साड़ी पेहेन ली , साड़ी भी काफी चीप मटेरियल की थी .. और बहुत hi पतली सी.. उसे ज़रा खोजकी भी होने लगी उस रफ़ टेक्सचर के साड़ी और ब्लाउज के कारन. फिर वह धीरे धीरे दरवाज़ा खोली .. बहार कोई नहीं था .. रमेश कही दिखाई नहीं दिए उसे ..
कुछ सेकंड बाद रमेश घर के अंदर आ गया .. रौशनी और उसकी आँखें मिली .. फिर रौशनी बहार आने के किये बढ़ी तोह एकदम से उसकी साड़ी दरवाज़े के लैच में अटक गयी और जैसे वह आगे बढ़ी उसकी साड़ी ुनरवेल होने लगी .. वह ज़ारवुसके वाहह से घूमी और उसकी साड़ी का पल्लू निचे गिर गया और अब वह बस ऊपर से उस टाइट ब्लाउज में hi थी रमेश के सामने ..
यह सब इतने जड़ी हुआ की दोनों को उसकी समझ नहीं आयी .. और तोह और उस ब्लाउज का ऊपर का बटन भी अब टूट गया और अब रौशनी की चूचियों का ऊपरी सफ़ेद दूध जैसे हिस्सा रमेश के आँखों के सामने आया..
दोनों की नज़रें मिली … और फिर रमेश की नज़र फिर से रौशनी की चूचियों के वहां गयी जहाँ बटन खुल चूका था .. रौशनी की नज़र भी रमेश के क्रॉत्च क्षेत्र में गयी और वह देख प् रही थी की उसका लोढ़ा ोान्त में ोुरा टाइट उभर बनाये हुए था और उसकी पंत में उसके लोडे के टॉप के वहां काफी गीली निशानी चोर दी थी .. बेशक वह निशानी रमेश की प्रेकम की होगी ..
इस बात कोह सोच रौशनी शर्मिंदगी से निचे देखने लगी …
“नमस्ते रमेश जी .. में ठीक हूँ .. बस कुछ काम के सिलसिले जाना पड़ा था .ल
“अच्छा मैडम ठीक है. .. वैसे आप आज ंगो नहीं गयी .. यहाँ मार्किट आयी हो?”
“रमेश जी में और कुछ दिनों की छुट्टी ली ंगो से .. और घर के बहुत सारे सामानों की खरीदारी करनी भी हैं ..”
“अच्छा ठीक हैं रौशनी जी वैसे में आपकी खरीदारी में मदद करू ..?”
“रमेश जी नहीं आप अपने काम को छोर ऐसे नहीं करिये .. में करुँगी खरीदारी.”
“अरे रौशनी जिनकारूँगा न मदत .. काम पर तोह रोज़ जाता हूँ , आप जैसी बसीं की मदत करने का मायका बार बार नहीं मिलता ..”
रमेश की उसे हसीं कहने के बात पर रौशनी मुस्कुरायी …
“रौशनी जी वह हस्ती हुयी कितनी खिल उठ टी हो आप .. वैसे भी कुछ ज्यादा hi खिल उठी हो उस दिन से तोह बहुत .. क्या बायत हैं सर ने आपके साथ बहुत मस्तियाँ की हैं न”
“उफ़ रमेश जी आप भी न कुछ भी .. ऐसे कुछ नहीं”
रौशनी बस सलीम द्वारा चूड़ी की सोच सिहर उठती हैं … सलीम से बड़ी मस्त चुदाई आकृ थी उसने .. बुद्धा होकर भी बड़े दमदार तरीके से उसकी चुदाई किट hi उन्होंने उफ्फ्फ्फ़… उसे फिर यह बात भी याद आती हैं कैसे वह रमेश जी के मोठे लुंड की सोच सोच अपनी बुर से खेली थी दो दिनों से .. उसकी नज़र अनजाने में रमेश जी की क्रॉत्च क्षेत्र में जाती hi हैं और हलके से अपने होठों पर जीभ फेरती हुई फिर जल्द से वहां से अपनी नज़रें वह निकलती हैं.
“रौशनी जिनकहन खो गयी .. चलिए आपकी मदत करता हूँ..”
L”nahi रहने दीजिये न रमेश जी”
लेकिन रमेश उसकी बात नहीं सुनता और उसकी हाथों से थैली लेता हैं ..
रौशनी भी कुछ नहीं बोलती बस मार्किट में जाती हैं एक सब्ज़ी वाले के पास.
“आईये बीबी जी,, आज तो बड़े दिनों के बाद आये है.”
“ हाँ अब बस सब्ज़ी अच्छी दिखाओ.”
“ बढ़िया hi दिखाएंगे बीबीजी ,. आप बढ़िया है तो सब्ज़ी कैसे घटिया दिखयेंगे.” रौशनी काफी शीम उठी उसके ऐसे शब्दों से .. अपनी ऊपर नियंत्रण पाकर हॉक्स से मुस्कुरायी.
भाईसाब “अब मस्का लगाना बंद करो बातें मीठी करते करते सब्ज़ी ख़राब दाल डोज आप”
“अरे नहीं बीबी जी आप जैसे ग्राहक को नरराज नहीं कर सकते हैं .. वैसे आज का सब्ज़े ताज़ी सब्ज़ियां हैं बैह्गां और लौकी”
“कुछ भी कहते हो .. पिछली बार यहाँ इसी मार्किट से लिए बैंगन सारे खराब निकले”
“अरे मेमसाब उस दिन में यहाँ नहीं था .. वह रामु , दूसरे सब्ज़ीवाले ने दिए होंगे ..
.. वैसे आपको पता हैं न बैगन अलग अलग सिज़ेस के आते है. .. उसके पास बैंगन छोटे हैं यह मेरे पास तोह बड़े बैंगन है. ..”
“क्या मतलब आपका भाईसाब …” रौशनी जरा चौंकते हुए बोली.
“अरे बीबी जी मतलब में जो अभी दे रहा हूँ मोठे और बड़े फ्रेश बैंगन हैं..
इस सब सो सुन रमेश जो बातें एन्जॉय कर रहा था अब उसे लगा की वह सब्ज़ीवाला कुछ ज्यादा hi उड़ रहा था ( बस में hi रौशनी जी से ऐसी बातें कर सकता हूँ ..)
“ज्यादा मत बोल .. मैडम जी आप चलिए इससे मत लीजिये कुछ भी..”
“रमेश जी आप प्ल्ज़ शांत रहिये .. आप जाओ वहां दूसरे सब्ज़ी वाले के पास जाओ जिसने उस दिन मुझे ख़राब बैंगन दिए थे … उससे आप लड़िये .... में यहाँ संभल लुंगी, वैसे भी बैंगन फ्रेश और मोठे हैं इनके….. रौशनी बिना सोचे बोल दी दोहरी मतलबी चीज़ .. लेकिन सब्ज़ीवाला वह समझ मुस्कुराया.
रमेश चुप के से फिर दूसरे सब्ज़ीवाले के पास जाता हैं.
रमेश जाता हैं तोह रौशनी फिर से उस सब्ज़ी वाले के पास देखती हैं और उसकी आँखें एकदम से उस सब्ज़ी वाले के पैरों के वहां जाते है. अब बात ऐसी थी की उसका कला लोढ़ा उसकी लुंगी से थोड़ी बहार आते हुए उसके आँखों के सामने hi था .. उफ्फ्फ सच में काफी मोटा लोढ़ा था उसका..
सब्ज़ीवाले ने रौशनी की नज़र पकड़ ली थी लेकिन वह ऐसे नाटक कर रहा था जैसे कोई बात हुयी hi न हो.
रौशनी बस सोचती हुयी ( उफ़ रमेश जी जैसे कोटा तोह नहीं लेकिन फिर भी हैं काफी बड़ा .. यह बुद्धों का ऐसे कैसे इतना मोटा लुंड होता हैं उफ्फ्फ)
. उस सब्ज़ी वाले ने रौशनी की सोच को तोड़ते हुए
“देखो मैडम देखो, सोच क्या रहे हो आपके लिए hi हैं बड़े ताज़े बैंगन.
रौशनी उस बात पर शर्मायी .. कुछ ज्यादा hi हो रहा था ये सब उसे लगा.
“वैसे भाईसाहब ये गोभी कैसी हैं”
“मैडम जी, 60 रस किलो, देखिये मेमसाब एकदम ताज़ी है. और उसने उस पर ऐसे हाथ फिराया और उसे रौशनी के सामने hi दबाने लगा मनो वह गोबी नहीं रौशनी की चूचियां हो ..
तब तक रमेश भी वापस वहां आ गया..
हु सब्ज़ीवाला बोलै “मैडम हमने होम डिलीवरी भी स्टार्ट किया है आप फ़ोन पर बता दीजिये में खुद सब्ज़ी दे जाएगंगा आपको इस वािण को लेने की कोनो ज़रुरत नहीं.”
रमेश , रौशनी के कुछ बोलने से पहले hi “बस होगया जल्दी से सब्ज़ी दीजिये और हम जाते है .., रौशनी जी चलिए सब्ज़ी लीजिये और जाते हैं.”
पैसे देकर फिर रौशनी और रमेश वहां से चले गए ..सब्ज़ीवाला बुदबुदाता हुआ (साला कम्बख्त बीच में क्यों घुस रहा था .. मैडम जी के वहां होम डिलीवरी करने का मौका मिल रहा था .. चुटिया बुद्धा)
फिर दोनों एक और दुक्काँ जाते हैं दूध लेने.
“भैया गाय का फ्रेश स्किम मिल्क वाले दूध का पैकेट दीजिये 500मल.”
दूकान में और एक बुद्धा था , रौशनी को देख उसकी आँखें खिल उठी … (उफ़ क्या गोरी मैडम हैं यार मम आज तोह मेरा लकी दिन हैं)
“मैडम जी आप गाय का फ्रेश क्रीम दूध लीजिये, अभी फ्रेश डेरी से आया हैं”
“नहीं भैया स्किम मिल्क दे दीजिये”
“लीजिये न मेमसाहब, आप जैसी गोरी मेम ने फ्रेश क्रीम दूध hi पीना चाहिए …”
“भाईसाहब क्या कह रहे हो … में कही न स्किम मिल्क वाला दीजिये”
हु दुकानदार मन में बुदबुदाता हुआ “उफ्फ्फ्फ़ आपकी दूध की फेयरी भी बड़ी मस्त हैं मैडम … वहां से फ्रेश दूध निकलता हैं क्या … और वह रौशनी की चूचियों के वहां घूरे जा रहा था जिससे रौशनी काफी उनकंफर्टबले फील कर रही थी.
रमेश से सब देखा फिर बोलै” अरे मैडम को स्किम मिल चाहिए तेरे को क्या पड़ी हैं … चल जल्दी दे हमे जाना हैं…”
वह दुकानदार रमेश को एक ग़ुस्से की नज़र से देखता हैं और दूध की पैकेट रौशनी को देता हैं.
“रौशनी जी कहा था न यहाँ से न करिये खरीदारी .. चलिए में आपको अच्छे मार्किट ले जाऊंगा ..”
“रमेश जी ठीक हैं चलिए”
फिर दोनों रिक्शा में बैठ जाते हैं और मार्किट के लिए रवाना हो जाते हैं.
कुछ 1 घंटे बाद वह मार्किट पहुँचते हैं, लेकजण दोनों में बातें नहीं होती क्यूंकि रास्ते में रौशनी अपनी सहेली के साथ फ़ोन पर बातें कर रही थी.
मार्किट में 2 घंटों तक रौशनी खरीदारी करती हैं. वहां उसे कई चीज़ीं मिली थी अच्छे दाम में और वह काफी खुश थी.
“रमेश जी सच बहुत अच्छे मार्किट ले आये हो आप .. जरा सी गन्दगी हैं और बदबू हैं लेकिन बहुत अच्छे दाम में मिलता हैं सब कुछ.
“हाँ रौशनी जी वह आप जैसी महिलाऐं उस मार्किट में वहां के नाम और प्रसिद्ध होने के वजह से जाती हो .. लेकिन अच्छी खरीदारी घर के सामन की ऐसी hi मार्किट में होती हैं .. अच्छे डैम में और काफी वैरायटी भी.”
“हाँ रमेश जी सच हैं शुक्रिया आपका.”
तभी रौशनी को उसके ोाती रोनित का कॉल अत हैं .. हु उसे कहता हैं की वह शाम को नहीं आएगा बल्ली सीधे 11 बजे रात को hi आएगा. रौशनी समझ गयी की वह होने उन दोस्तों के साथ जा रहा होगा और रात को पि कर hi आएगा .. आज रात तोह सेक्स होगी hi नहीं ..
रमेश बात सुन केता हैं की रौशनी के पति लेट नाईट आने वाले हैं तोह वह खुश होता हैं और रौशनी के साथ समय बिताने के प्लान बनता हैं.
“रौशनी जी रास्ते में एक होटल हैं बहुत स्वादिष्ट खाना मिलता हैं .. वैसे भी शाम हुयी हैं .. 6 बजे हैं. वहां हम 7 बजे तक पहुंचेंगे और फिर आप डिनर भी वही कर लीजिये , आपके पति लेट आने वाले हैं न घर”
“रमेश जी हाँ लेकिन में थक गयी हूँ , घर जाना चाहती हूँ वही कुछ बना कर खाउंगी.”
“रौशनी जी चलिए न .. बहुत स्वादिष्ट खाना मिलताभाईन वहां .. उँगलियाँ चाटती रहोगी आप खाना खाने के बाद”
वैसे रौशनी को भूक भी लगी hi थी .. खरीदारी और ट्रेवल से वह भुकी थी .. और रेस्टोरेंट जाने तैयार होती हैं.
रमेश को पता था वह होटल उनके नार्मल रास्ते पर नहीं हैं और उसे दूसरी ज़रा सी सुनसान जगह से रौशनी को पे जाना था. और तोह और उसका घर भी उसी के रास्ते के बीच में था .. वह रौशनी को अपना घर भी दिखाएगा वह सोचने लगा .
फिर दोनों रेस्टोरेंट 1 घंटे बाद पहुँच जाते हैं.
अंदर रौशनी देख सकती थी बहुत भीड़ थी और अभी तोह 7 hi बजे थे. सच में रेस्टोरेंट लङखङा बहुत स्वादिष्ट होगा. उन्हें बस एक hi सीट मिलती हैं वह भी रेस्टोरेंट के अंत में.. और ऐसी सीट जहाँ एक कपल पहले से hi बैठे थे .. और जगह के लिए उन्हें 30मं रुकना पड़ता इसीलिए दोनों वहां बैठने तैयार होते हैं.. उस कपल को भी कोई ऐतराज़ नहीं था.
दोनों ने खाना माँगा लिया . वह कपल जो बैठे थे काफी घुल मिल रहे थे … वह लड़की उस लड़के से चिपक कर बैठी थी .. खाने के बीच बीच दोनों खिलखिलाकर हस्ते ..
अब वह सीट भी काफी छोटी थी और रौशनी और रमेश को भी ज़रा सा पास बैठना पड़ा … इतने करीब की रौशनी की झंघों का टच रमेश के जहगों से हो रहा था ..
रमेश इस करीबी से बहुत खुश था .. रौशनी के बदन से बड़ी खुस्भु आ रही थी .. उसका लोढ़ा रौशनी की खुशबु से और रौशनी की करीबी को पाकर उभर रहा था ..
उनके साइड की टेबल की सीट पर बैठा आदमी उठ कर जा रहा था तोह वह एकदम रौशनी की लारीबी से गुज़र गया और चुने hi वाला था की रौशनी साइड में करि होने बदन को .. लेकिन जगह इतनी काम थी की वह खुद को सँभालने उसने अपने हाथों को रमेश के झंघों पर रखज .. वह भी ऐसी जगह जो रमेश ले उभरते लुंड के लाफ़ी करीब थी मानो उसे कभी भी छू सकेगी .. रौशनी को भी एहसास हुआ की उसके हथीन के साइड में कुछ उभरा हुआ था .. वह देखि तोह पायी की रमेश का लोढ़ा उसकी पंत में टाइट जो रहा था और रमेश की क्रॉत्च का एरिया बिलकुल उसके हाथों के करीब था .. रमेश भी यह महसूस करा लेकिन ऐसे करने लगा मानक कुछ न हुआ हो .. रौशनी की नज़रें बस अब रमेश के लुंड की उभर पर hi था और वह सिहर उठी ..
वह रात कन्जंसिडेंट्स के बारे में सोची जब वह रमेश के लुंड को इमेजिन करते हुए कूद की बुर पर अपनी उँगलियों को चला रही थी और झट भी चुकती थी .. इस सोच से उसके गाल लाल हुए लेकिन उसकी नज़र रमेश के लुंड से नहीं हटी .. बस उसके उभर को देखती रही , उसकी गर्मी बढ़ती रही और वह रमेश के लुंड को नग्न सोचने लगी ..
फिर वेटर खाना लेकर आया तब रौशनी अपने ख्यालों से निकलती हुयी सीधी बैठ गयी और अपने हाथों को रमेश के झंघों से निकल ली .. फिर दोनों खाना खाने लगे .. लेकिन रमेश का लोढ़ा अब बैठने का नाम नहीं ले रहा था.
“रमेश जी खाना बहुत hi स्वादिष्ट हैं .. “
“मैंने कहा था न रौशनी जी … बहुत स्वादिष्ट खाना होता हैं यहाँ …”
खाना लहणे के बाद बिल की बारी आयी .. बिल वेटर ने रखते hi दोनों बिल को पकड़ने आगे बढ़ाये हाथों को तोह रौशनी ने पहले बिल पकड़ लिया और फॉर रमेश ने रौशनी के हाथों को पकड़ लिया ..
“रौशनी जी बिल का भुगतान में करूँगा”
“नहीं रमेश जी में करुँगी ..”
इसी बात पर दोनों बात करने लगे लेकिन रमेश , रौशनी के हाथों को पकडे hi रखा .. उसके खुरदरी हाथ अब रौशनी की नाज़ुक हाथों में थे … और वहां हु दबोचने लगा .. रौशनी को अब एहसास हुआ की उसके हाथ अब रमेश के हाथों पर थे .. उसके रफ़ हाथ उसे अपने मुलायम हाथों पर महसूस कर वह शर्मायी.. रमेश भी उसके हाथों को अब मसल रहा था बातों बातों में.
“रमेश जी छोड़िये न …”
“रौशनी जी क्या चोरु .. बताइये”
“उफ़ रमेश जी आप मेरे हाथों को छोड़िये न .”
“नहीं फिर आप बिल का भुगतान करोगी .. नहीं में बिल भरूंगा … जब तक आप मुझे बिल नहीं देती में आपके हाथों को नहीं छोड़ूंगा.”
“उफ़ रमेश जी यह कैसी ज़िद्द … उफ्फ्फ छोड़िये मेरे हाथों को”
“नहीं आप फिर बिल भरोगी .. आप बिल मेरे हवाले करो फिर hi आपके हाथों को छोड़ूंगा.”
“उफ्फ्फ आप तोह बहुत hi ज़िद्दी हैं … ये लीजिये बिल और मेरे हाथों को छोड़िये” ऐसे कहते हुए रौशनी अपने चेहरे पर मुस्कराहट छिपा न सकीय ..
रौशनी बिल देती हैं रमेश को और रमेश, हाथों को एक आखरी बार दबोचते हुए छोर देता हैं.
बिल भर कर दोनों वहां से निकल जाते हैं.. रास्ते में बारिश होने लगती हैं ..
“ओह रमेश जी बारिश आने लगी”
“हाँ रौशनी जी आज दुपहर में इतनी धुप और नमी थी , इसीलिए शाम को बारिश आ रही हैं”
“में भीग रही हूँ रमेश जी “
“रौशनी जी माफ़ करिये आज में रक्षा के परदे लाना भूल गया जो बारिश को बहार रखते हैं ..”
“उफ्फ्फ फिर क्या करू में रमेश जी बहुत भीगी जा रही हूँ ..”
रमेश देख सकता था आईने से की रौशनी की साड़ी और ब्लाउज भीग रही थी .. उसकी गोरी से बदन पर पानी के बूंदों से वह और चमक रही थी .. अँधेरा भी च चूका था .. अब उसके प्लान का अगला स्टेप आने वाला था.
“रौशनी जी घर पहुँचाने में और 1 घंटा लगेगा :. जरा ज्यादा भी लग सालता हैं क्यूंकि मुझे चलने की स्पीड भी काम रखनी होगी”
“उफ़ फिर क्या करे रमेश जी में तोह ौरी भीग जाउंगी और फिर सर्दी ज़ुकाम हो जाएगा .. दो दिन बाद मुझे ंगो भी काम पर जाना हैं”
“हम्म रौशनी जी एक उपाय हैं .. मेरा घर रास्ते में hi पड़ता हैं और वह बस 20मं की दुरी पर हैं.. आपको में वहां ले जाएंगे और वहां आप रुक पाओगी जब तक बारिश रुक नहीं जाता .. आप भीगोगी भी नहीं और वहां आप ड्राई कर पप्गी खुद को”
“रौशनी कुछ सोचतिभाईं (उफ्फ्फ्फ़ अब और क्या कर सकते हैं .. उनके घर जाउंगी तोह बारोश से रहत मिलेगी और भीगूँगी भी नहीं पूरी तरह से .. लेकिन उनके घर कैसे जा सकती हूँ .. उफ्फ्फ उनकी बीवी भी नहीं होती हैं शहर के घर पर .. लेकिन में भी ऐसे भीग नहीं सकती और 1 घंटे तक)
“अच्छा ठीक हैं वहां ले चलिए जल्दी से”
रमेश के मन में लड्डू फुट रहे थे .. वह आज रौशनी को अपने घर ले जा रहा था .. वह दोनों वहां अकेले होंगे .. वैसे भी बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही हैं , यही मौका हैं रौशनी जी के साथ और करीबी बना सकू …
“हाँ चलिए रौशनी जी ..”
फिर दोनों 20मं में पहुँच जाते हैं.. रमेश के घर के आसपास की घरों में लाइट भी नहीं थी .. उसका घर छोटा था , कुछ कंक्रीट के स्टोन्स से बना हुआ और कुछ अभी भी कच्चे मिटटी का .. घर के आस पास काफी गंदगी भी थी … रौशनी को उस गंदगी के बदबू से को कुछ समय तक रौशनी अपने रुमाल से अपने नाक को ढकने लगी.
रौशनी अब और भी भीग चुकी थी. उसकी ब्लाउज पीछे से गीली थी … साड़ी नाभिनके वहां गीली थी .. उसकी बदन से चिपकी हुयी थी उसकी साड़ी.. उसके बाल भी जरा गीले थे .. उसके लम्बे गीली बालों को डेल्ह रमेश का लोढ़ा उभरने लगा .. (उफ्फ्फ क्या कमाल की लग रही हैं रौशनी जी .. उफ्फ्फ क्या बदन हैं गोरा सा .. क्या चूचियां होगी पक्के ाक़ों जैसी … और बारिश से भीगी हुयी और भी शाइन कर रह हैं .. क्या माल हैं यार …)
दोनों अंदर चले जते हैं … उसके घर पर do-teen hi लाइट ों होते थे .. एक बैडरूम था , एक हॉल जहाँ किचन भी एक कोने में hi था … हॉल में रस्सियों के ऊपर रमेश के बनियान और चड्डियाँ भी थी .. उसके घर को देख रौशनी को सलीम और असलिम के घर की याद आयी .. रमेश कंघर तोह उनके घर से और भी चिटा था ..
रमेश बोलै “रौशनी जी आप मेरे कमरे में जाकर खुद को सूखा सकती हो ..”
“हाँ रमेश जी व्है करुँगी .. लेकिन बहुत गीली हो चुकिभाईं मेरी साड़ी .. इसका क्या करू”
रमेश कुछ समय तक बस रौशनी के बदन को घूरे जा रहा था .. उसका लोढ़ा उसकी पंत में उभर भी रहा था ..
“रमेश जी क्या घर रहे हो .. मेरी समस्या का क्या करे.”
“रौशनी जी अंदर अलमारी में मेरी बीवी के कुछ कपडे होंगे .. चाहिए तोह आप उसे पहनिए .. तब तक आपकी साड़ी को पंखे के निचे सूखा देंगे”
“अच्छा लेकिन आपकी बीवी के कपडे बैठेंगे मुझ पर ..”
“वैसे रौशनी जी मेरी बीवी काफी केहतेभें न स्लिम हैं … और आप तोह गदरायी ….”
रौशनी अब आँखें बड़ी कर रमेश को देखने लगी ..
“रौशनी जी सच तोह हैं आप की कर्व्स ज्यादा हैं .. आपकी …
और रमेश अब रौशनी की चूचियों पर नज़र डालता हैं..
“आपकी चीज़ें बड़ी बड़ी हैं तोह अब तरय करना पड़ेगा मेरी बीवी के कपडे आप पर बैठनेगे या नहीं ..”
(उफ़ यह रमेश जी क्यब्कया कह रहे हैं .. ओह गॉड मुझे तोह शर्म आ रही हैं … उफ्फ्फ्फ़)
रौशनी कुछ नान कहते हुए रमेश के कमरे में चली जाती हैं अपनी चूतड़ों को मटकते हुए. वहां रमेश अपने लोडे को मसलने लगता है (उफ़ क्या चूतड़ हैं यार इसकी ममम आईटी ी गोल गोल .. भागती हैं तोह कितने मटकते हैं उफ्फ्फ्फ़ आज तोह रौशनी जी के करीब और जाना hi होगा …)
रौशनी अब कमरे में जाती है. .. बहुत छोटा सा कमरा था… सब मर्दों जैसे काफी मेस्सी रखा था रमेश ने अपना कमरा .. वह अलमारी को खोली तोह उसे बस 3-4 hi ड्रेस दिखे रमेश की पत्नी के .. उसने उन्हें बहार निकला.
उसमें से दो साड़ी , ब्लाउज और पत्तिकत्स की पेअर थे और दो कुर्ती और लेग्गिंग्स .. वह उन्हें निकली बहार .. वह डेल्ह कर hi नाता सकती थी की रमेश के पत्नी के कपडे काफी टाइट थे और उसके कपड़ों से 2साइज छोटे भी .. उफ़ अब वह अगर कपडे बदलेगी उनमें तोह इतने टाइट होंगे रमेश की पत्नी के कपडे उसके लिए ..
रौशनी सोची की वह नहाएगी भी. वह रमेश को कमरे से ोुकरते हए “रमेश जी में चाहती हूँ नाहा लू लेकिन गरम पानी कैसे मिलेगा .. आपका हीटर कहाँ हैं.”
(उफ्फ्फ रौशनी जी नहाना भी चाहती हैं … ममम काश थोड़ी झलक दिख मुझे उसके नंगे गोर बदन का)
“रौशनी जी वाहन बाथरूम के अंदर एक स्विच हैं .. लेकिन याद रखिये 10 मं बाद hi पानी गरम होगा और गरम भी बस 5-10 मं के लिए hi रहेगा और फिर ठंडा हो जाएगा”
“अच्छा ठीक हैं रमेश जी”
उसने कमरे का दरवाज़ा बंद किया.. लेकिन उसे पता नहीं था की दरवाज़ा बड़े हॉक्स से hi लैच होता हैं .. कुछ आवाज़ से या वाइब्रेशन से आसानी से खुल भी सकता था.. उसे लगा की दरवाज़ा बंद हो गया हैं और वह कपडे निकलते हुए बाथरूम में 10मं बाद चली गयी और गर्म पानी से नहाने लगी.
उसने जैसे hi दरवाज़ा बंद किया था , उसके बाथरूम के दरवाज़े के बंद होने के वाइब्रेशन से कमरे का दरवाज़ा ज़रा खुल गया.. रमेश को भी यह बात पता चली और वह बहार खड़ा hi था दूर के बने गैप से अब वह कमरे के अंदर थोड़ा झाँक सकता था.
रौशनी का नहाना बंद हुआ और वह टॉवल को बदन से लपेटी हुयी बहार आयी. फिर वह बिस्तर के पास चली गयी जहाँ उसने रमेश की बीवी के कपडे रखे थे. अब बात ऐसे हुयी की रमेश डेल्ह सकता था गैप से की रौशनी टॉवल लपेटी आयी थी.. उसकी नज़र रौशनी की झंघों पर गईंजप टॉवल छोटा होने के कारन से साफ़ साफ़ दिखाई दे रहे थे .. (उफ्फ्फ क्या गोरी झांघें हैं रौशनी जी की ममम मुलायम और दूध जैसी गोरी उफ्फ्फ और इतनी मस्त गदरायी झांघें उफ्फ्फ्फ़ .. )पहली बार वह रौशनी की झंघों को इस प्रकार देख रहा था.
रौशनी को तोह पात hi नहज था रमेश उसे गैप से डेल्ह सकता था . उसकी पीठ थी दरवाज़े के अगेंस्ट और वह अपनी टॉवल को निचे निकली..
रमेश अब रौशनी की गोरी सी पीठ और अब उसकी नग्न चूतड़ों को देख सका .. उसका लोढ़ा एकदम से टाइट हो गया .. और वह उसे मसलने लगा (हे भगवान् उफ्फ्फ क्या माल हैं यार .. क्या चूतड़ हैं मम गोरी और गोल गोल …. गुबारों जैसी चूतड़ रौशनी की … मममम) रमेश अब अपने लोडे को पंत से निकलते हुए मसल रहा था .. उसका लोढ़ा पूरा टाइट हो चूका था और सलामी दे रहा था रौशनी की नंगी चूतड़ों को देख .. उसके लोडे से प्रेकम भी निकलने लगा था .. वह अपने लोडे को मसलता और उसे आगे पीछे हिलता …
फिर रौशनी जरा झुक गयी और अब रमेश उसकी छुअतड़ों के बीच भी देख प् रहा था .. वह जरा नज़दीक आया दरवाज़े के ताकि व और अच्छी तरह से देख सके .. उसका लोढ़ा तोह अब काफी लॉकिंग करने लगा था .. ज़मीन पर भी उसके लोडे का लॉकिंग टपक रहा था .. फिर रौशनी अपनी पंतय पेहेन्ने लगी. रमेष होने लोडे को हिलता हुआ नज़र देकब रहा था उसके लोडे से काफी लॉकिंग शुरू हुयी थी ज़मीन पर टपकते हुए .. (िफ्फ्फ रौशनी जी आज तोह आपके नग्न गांड को देख धन्य होगया उफ्फ्फ क्या गोल गोल हैं मममम क्या मस्तवहैँ .. उन्हें हॉक्स से थप्पड़ मरूंगा तोह कैसे मस्त हिलेंगे .. उफ्फ्फ रौशनी जी उन चूतड़ों को तोह में चूमना चाहता हूँ .. रगड़ना चाहते हूँ अपने मोठे लोडे से और उसकी चुदाई करना चाहता हूँ … मममम गोरी माल हो तुम)
रौशनी अब कमरे में ने अब पंतय पहनी और ब्रा भी पेहेन ली. उसकी पीठ अभी भी रमेश को दिखाई दे रही थी .. आगे से कुछ नहीं दिखाई दे रहा था .लेकिन रोषनिनको क्या पता की बहार से गैप में से रमेश उसकी गोटी पीठ और चूतड़ों को साफ़ साफ़ नग्न देख कर अपने लोडे को हिला रहा था और उसके लोडे से ढेर सारा रास टपक रहा था .. फिर रौशनी एक ब्लाउज पेहेन्ने लगी .. काफी टाइट ब्लाउज थी .. उसकी चूचियों को सामने से धक् भी नहीं प् रही थी .. ( उफ़ रौशनी … तेरी चूचियां तोह सच में रमेश की बीवी से ज्यादा hi बड़े हैं … उफ्फ्फ .. यह ब्लाउज मुझे फिट hi नहीं हो रही है. ..रुको दूसरी ब्लाउज तरय करुँगी.)
अब दूसरी ब्लाउज से उसके स्तन तोह धक् रहे थे लेकिन बटन बस 3 hi लग रहे थे .. ऊपर के दो बटन उसकी चूचियों के बड़े होने के कारन लग hi नहीं रहे थे .. इस नज़ारे को रमेश देखता तोह वही रौशनी को पकड़ कर छोड़ देता .. रौशनी की चूचियां उस छोटे से ब्लाउज में उभरी हुयी थी .. उसकी नेकलेस उसकी चूचियों के बीच समां रही थी .. उसके निप्पल्स का ऊपरी हिस्सा भी दिखाई दे सकता था ब्लाउज से ..
रौशनी ने फिर कुर्ती लेग्गिंग्स भी तरय करि .. वहां पर भी कुर्ती 2 साइज काम होने के कारन वह उसे पेहेन hi नहीं पायी. अब उसके पास अपने hi गीले कपडे पेहेन्ने के इलावा कोई चारा नहीं था .. लेकिन अब बात थी की उसकी अपनी ब्लाउज तोह ज़मीन पर गिरी थी बाथरूम के दरवाज़े के पास और अंदर का पानी बहार आकर उसकी ब्लाउज और भी भीग चुकी थी ..
(उफ्फ्फ रौशनी तुम्हरी hi ब्लाउज सुर भी गीकी हुयी हैं .. अब क्या करेगी … क्या पहनेगी .. उफ्फ्फ यह कैसी मुसीबत .. रमेश जी की बीवी के कपडे भी नहीं बैठ रहे हैं मुझे .. उफ़ अब क्या करू …) फिर रौशनी सर पर हाथ रखे बिस्तर पर बैठ गयी . बैठ ते hi बिस्तर ने एक क्रीकिंग की आवाज़ दी …
अब वह ऐसे बैठी थिन्की उसकी ब्रा में कैद चूचियां अब गैप में से रमेश को साफ़ साफ़ दिख रहे थे .. बहार रमेश तोह भूके नारों से रौशनी को ब्रा और पंतय में बैठे देख प् रहा था .. उफ़ क्या माल हैं यार .. आगे से भी ऐसी hi धमाकेदार माल हैं उफ्फ्फ क्या चुच्यां हैं मममम इतनी मुलायम होगी .. गोरी भी … उफ्फ्फ दूध से भरी दूधियाँ लगती हैं यासर .. बस उसमें अपने लोडे को दाल वहां की चुदाई करनी हैं .. उफ़ क्या माल हैं ….उसे फिर दिखा की रौशनी ऊपर देखने hi वाली थी .. और उसकी चोरी पकड़ने से पहले hi रमेश वहां से हैट कर बहार चला गया …
रौशनी ने ऊपर देखा और दरवाज़े को ज़रा खुला पलर और वहां गैप पाकर चौंक उठी .. ( उफ्फ्फ यह क्या रौशनी , दरवाज़ा ज़रा खुला हैं और गैप दिख रहा हैं .. ओह गॉड क्या रमेश जी वहां से देख रहे थे .. क्या उन्होंने मुझे पीछे से नग्न देख किया .. और उफ़ क्या उन्होंने मुझे ब्रा पंतय में भी आगे से देख लिया …) वह दरवाज़े के और करीब गयी लेकिन उसे कोई नहीं दिखाई दिया .. फिर वह दरवाज़े को फिर से लैच लगाकर अब बाजू के एक स्टूल पर बैठ गयी ..
(उफ़ रौशनी तुझे अब तोह बस उस ब्लाउज के सिवाय कोई उपाय नहीं हैं .. जरा फिर से उसमें अपनी ब्रेअस्ट्स को फिट करने की तरय करती हूँ.) और वह फिर से ब्लाउज पहने लगी .. इस बार कड़ी म्हणत के साथ उसने अपनी चूचियों को कैसे तोह कर उस ब्लाउज में फिट करि और बटन लगा दिए .. लेकिन उसकी बड़ी चूचियों के तनाव से बटन भी मनो टूटेगा ऐसे hi स्तिथि में था .. फिर रौशनी ने साड़ी पेहेन ली , साड़ी भी काफी चीप मटेरियल की थी .. और बहुत hi पतली सी.. उसे ज़रा खोजकी भी होने लगी उस रफ़ टेक्सचर के साड़ी और ब्लाउज के कारन. फिर वह धीरे धीरे दरवाज़ा खोली .. बहार कोई नहीं था .. रमेश कही दिखाई नहीं दिए उसे ..
कुछ सेकंड बाद रमेश घर के अंदर आ गया .. रौशनी और उसकी आँखें मिली .. फिर रौशनी बहार आने के किये बढ़ी तोह एकदम से उसकी साड़ी दरवाज़े के लैच में अटक गयी और जैसे वह आगे बढ़ी उसकी साड़ी ुनरवेल होने लगी .. वह ज़ारवुसके वाहह से घूमी और उसकी साड़ी का पल्लू निचे गिर गया और अब वह बस ऊपर से उस टाइट ब्लाउज में hi थी रमेश के सामने ..
यह सब इतने जड़ी हुआ की दोनों को उसकी समझ नहीं आयी .. और तोह और उस ब्लाउज का ऊपर का बटन भी अब टूट गया और अब रौशनी की चूचियों का ऊपरी सफ़ेद दूध जैसे हिस्सा रमेश के आँखों के सामने आया..
दोनों की नज़रें मिली … और फिर रमेश की नज़र फिर से रौशनी की चूचियों के वहां गयी जहाँ बटन खुल चूका था .. रौशनी की नज़र भी रमेश के क्रॉत्च क्षेत्र में गयी और वह देख प् रही थी की उसका लोढ़ा ोान्त में ोुरा टाइट उभर बनाये हुए था और उसकी पंत में उसके लोडे के टॉप के वहां काफी गीली निशानी चोर दी थी .. बेशक वह निशानी रमेश की प्रेकम की होगी ..
इस बात कोह सोच रौशनी शर्मिंदगी से निचे देखने लगी …