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संजय और संजना पहले उसको शांति से बैठने को बोलते hai.Aryan शांति से एक जगह बैठ जाता है. फिर संजय और संजना उसको सब कुछ बता है के कैसे उसने उनकी जान bachayi,kaise वह हॉस्पिटल गया वह डॉक्टर ने क्या bola,phir formula,unke बेटे के बारे में सब कुछ.
आर्यन यह सब कुछ सुन्न बिलकुल शॉक में था उसको समाज नहीं आरहा था के वह क्या रियेक्ट करे.
कुछ देर शांति बानी रहती है कोई कुछ नहीं बोलता. फिर वह दोनों बोलते है देखो हम्हारे पास तुम्हारी जान बचने के लिए और कोई रास्ता नहीं था इसीलिए हमलोगो को यह करना पढ़ा. अब अगर तुम चाहो तोह तुम अपनी फॅमिली के पास वापस जा सकते हो हम तुम्हे नहीं रोकेंगे पर हुम्हे एक प्रॉमिस करो हमलोगो ने जो तुमपर विशवास करके यह फार्मूला उसे किया है तुम उसका कभी गलत इस्तेमाल नहीं करोगे.
फॅमिली का नाम सुन्न कर आर्यन की आँखों में गुस्सा और नफरत उतर आती है जिसको संजय और संजना ने साफ़ साफ़ देख लिया था.
संजना: क्या फॅमिली का नाम सुनकर तुम्हारी आँखों में इतनी नफरत और गुस्सा क्यों है. . हुम्हे भी तुम्हारे अंदर अपना खोया हुआ बीटा नज़र आता है. अगर चाहो तोह हमसे शेयर कर सकते हो.
आर्यन की आँखों में आंसू थे तोह संजना ने आगे बढ़ कर उनको पॉच आर्यन को अपनस गले से लगा लेती है. आर्यन को भी इसमें माँ की ममता के स्पर्श का एहसास होता है तोह वह संजना को और कसके पकड़ लेता है और रोने लगता है.
थोड़ी देर बाद वह चुप होता है और बचपन से लेकर उनसे मिलने तक का सबसे उनको बता देता है.
आर्यन की कहानी सुन्न संजय और संजना को बहोत दुःख होता है. वह सोचते कैसे कोई अपने बेटे के साथ ऐसा कर सकता है.
फिर संजय उसको बोलता है देखो जो हुआ वह तोह हम बदल नहीं सकते पर अगर तुम चाहो तोह यहाँ हम्हारे बेटे बनकर रह सकते हो इससे तुम्हे भी साथ मिल जाएगा और हुम्हे लगे गए हुम्हे हमारा खोया हुआ बीटा मिल गया.
पर मैं कैसे आपलोगो के साथ रह सकता हु. आपलोगो को परेशानी होगी.
संजना: हुम्हे कोई परेशानी नहीं होगी. मैंने तुम्हे पहले दिनसे hi अपना बीटा मन है. और अब तुम एहि रहोगे हुम्हारा बेटे बन कर. मैं कुछ नहीं जानती.
आर्यन उनको बहोत मनाता है पर वह नहीं मानते. फिर आखिर में आर्यन वह उनका बीटा बन के रहने के लिए मान जाता है.
ऐसे hi और 1 हफ्ता निकल जाते है. एक दिन संजय आर्यन के रूम में आता है तोह देखता है वह किसी की फोटो देख के आंसू बहरहा होता है. संजय उस्क्स पास जाके वह फोटो देखता है तोह शॉक होजाता है. वह आर्यन से पूछते है यह फोटो किसकी है तोह आर्यन बोलता है मेरे दादाजी मर. जीत मल्होत्रा की.
संजय उसको झट्ट से गले लगा लेता और बोलता है तुम इनके पोते हो.
आर्यन: जी. बूत क्या आप उनको जानते है.
संजय: बहोत अच्छी तरह से. मेरे पिताजी और तुम्हारे दादाजी बहोत अच्छे दोस्त थी. एकबार मेरे पिताजी को मेरी पढाई के लिए पैसो की कमी होगयी वह मुझे और पढ़ा नहीं पाते. पर उस वक़त तुम्हारे दादाजी ने मेरे पिताजी की पैसो से मदद की जिसके चलते आज में साइंटिस्ट बना. मैंने उनको ढूंढ़ने की बहोत कोशिश की बूत वह मिले hi नहीं
फिर हमलोग भी यहाँ मुंबई शिफ्ट होगये और आज देखो इतने सालो बाद उनका पोता मेरे सामने खड़ा है आज मैं बहोत खुश हु.
यह सब जो तुम देख रहे हो ना बीटा यह सब तुम्हारे दादाजी के वजह से hi है
अगर वह ना होते तोह आज न मैं साइंटिस्ट बन पता और ना यह सब कुछ होता.
संजय और संजना पहले उसको शांति से बैठने को बोलते hai.Aryan शांति से एक जगह बैठ जाता है. फिर संजय और संजना उसको सब कुछ बता है के कैसे उसने उनकी जान bachayi,kaise वह हॉस्पिटल गया वह डॉक्टर ने क्या bola,phir formula,unke बेटे के बारे में सब कुछ.
आर्यन यह सब कुछ सुन्न बिलकुल शॉक में था उसको समाज नहीं आरहा था के वह क्या रियेक्ट करे.
कुछ देर शांति बानी रहती है कोई कुछ नहीं बोलता. फिर वह दोनों बोलते है देखो हम्हारे पास तुम्हारी जान बचने के लिए और कोई रास्ता नहीं था इसीलिए हमलोगो को यह करना पढ़ा. अब अगर तुम चाहो तोह तुम अपनी फॅमिली के पास वापस जा सकते हो हम तुम्हे नहीं रोकेंगे पर हुम्हे एक प्रॉमिस करो हमलोगो ने जो तुमपर विशवास करके यह फार्मूला उसे किया है तुम उसका कभी गलत इस्तेमाल नहीं करोगे.
फॅमिली का नाम सुन्न कर आर्यन की आँखों में गुस्सा और नफरत उतर आती है जिसको संजय और संजना ने साफ़ साफ़ देख लिया था.
संजना: क्या फॅमिली का नाम सुनकर तुम्हारी आँखों में इतनी नफरत और गुस्सा क्यों है. . हुम्हे भी तुम्हारे अंदर अपना खोया हुआ बीटा नज़र आता है. अगर चाहो तोह हमसे शेयर कर सकते हो.
आर्यन की आँखों में आंसू थे तोह संजना ने आगे बढ़ कर उनको पॉच आर्यन को अपनस गले से लगा लेती है. आर्यन को भी इसमें माँ की ममता के स्पर्श का एहसास होता है तोह वह संजना को और कसके पकड़ लेता है और रोने लगता है.
थोड़ी देर बाद वह चुप होता है और बचपन से लेकर उनसे मिलने तक का सबसे उनको बता देता है.
आर्यन की कहानी सुन्न संजय और संजना को बहोत दुःख होता है. वह सोचते कैसे कोई अपने बेटे के साथ ऐसा कर सकता है.
फिर संजय उसको बोलता है देखो जो हुआ वह तोह हम बदल नहीं सकते पर अगर तुम चाहो तोह यहाँ हम्हारे बेटे बनकर रह सकते हो इससे तुम्हे भी साथ मिल जाएगा और हुम्हे लगे गए हुम्हे हमारा खोया हुआ बीटा मिल गया.
पर मैं कैसे आपलोगो के साथ रह सकता हु. आपलोगो को परेशानी होगी.
संजना: हुम्हे कोई परेशानी नहीं होगी. मैंने तुम्हे पहले दिनसे hi अपना बीटा मन है. और अब तुम एहि रहोगे हुम्हारा बेटे बन कर. मैं कुछ नहीं जानती.
आर्यन उनको बहोत मनाता है पर वह नहीं मानते. फिर आखिर में आर्यन वह उनका बीटा बन के रहने के लिए मान जाता है.
ऐसे hi और 1 हफ्ता निकल जाते है. एक दिन संजय आर्यन के रूम में आता है तोह देखता है वह किसी की फोटो देख के आंसू बहरहा होता है. संजय उस्क्स पास जाके वह फोटो देखता है तोह शॉक होजाता है. वह आर्यन से पूछते है यह फोटो किसकी है तोह आर्यन बोलता है मेरे दादाजी मर. जीत मल्होत्रा की.
संजय उसको झट्ट से गले लगा लेता और बोलता है तुम इनके पोते हो.
आर्यन: जी. बूत क्या आप उनको जानते है.
संजय: बहोत अच्छी तरह से. मेरे पिताजी और तुम्हारे दादाजी बहोत अच्छे दोस्त थी. एकबार मेरे पिताजी को मेरी पढाई के लिए पैसो की कमी होगयी वह मुझे और पढ़ा नहीं पाते. पर उस वक़त तुम्हारे दादाजी ने मेरे पिताजी की पैसो से मदद की जिसके चलते आज में साइंटिस्ट बना. मैंने उनको ढूंढ़ने की बहोत कोशिश की बूत वह मिले hi नहीं
फिर हमलोग भी यहाँ मुंबई शिफ्ट होगये और आज देखो इतने सालो बाद उनका पोता मेरे सामने खड़ा है आज मैं बहोत खुश हु.
यह सब जो तुम देख रहे हो ना बीटा यह सब तुम्हारे दादाजी के वजह से hi है
अगर वह ना होते तोह आज न मैं साइंटिस्ट बन पता और ना यह सब कुछ होता.