Romance भंवर (पूर्ण) - Page 46 - SexBaba
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Romance भंवर (पूर्ण)

So Solly ... Main b likhte likhte so gaya tha.. subah utha to sabke comment padhkar hi main lag gaya kaam par .. hajir hun update ke sath ..

Ismile plz
 
Ye macchar na hote to shayad mai mar jata .. machhar wo girlfriend hai jo khun to chusti hai par har waqt jahan man kare wahan chumne ko taiyar rahti hai.. mai so bhi jaun to bhi kano ke pass sangit baja kar mujhe chumte rahti hai....

Kitna hi mar kar bhaga do fir bhi kabhi bura nahi manti.. samne se aakar chume ya 50 ek sath .. inme aapas me jalan ki bhawana bhi nahi hoti..

Aur bhi is macchar gf ke liye likhne laga to din kam par jayenge .. ek din usne update na likhne di usme panic nahi hote
 
Jo Jo leechad (matlab wo log jo chup chap post padh kar bina comment kiye chale jate hain) ki tarah padh kar bhag jate hain .. unse anurodh hai ki meri mehnat par apne swarth ka tarka na mare .. kyonki fir agli kahani likhne ki himmat nahi hogi ..

Jo padhe usi ka comment dijiye .. nahi jaroori hai pahle update se hi comment shuru karna .. so .. active baniye aur dusron ki mehnat ka usko pura bhugtan kijiye ..

Nahi to baat wahi hai.. kisi ki mehanat ka bhugtan aap nahi karoge aur koi aap ke mehnat ka bhugtan nahi karega ..
 
Update:-78

लोकेश के दिखाए रास्ते पर एक नई कहानी लिखा जा चुका था। अब तक 4 लोग मिलकर जिसपर शक कर लिए उन्हें दोषी मानकर रास्ते से हटा दिया जाता था, किंतु इस बार जिंदल और विक्रम ने अपने साथ हो रहे घटनाओं पर विराम लगाने के लिए उन प्राइवेट एजेंसी को हायर कर रहे थे जो यूएस गवर्नमेंट के लिए स्पेशल ऑपरेशन ऑपरेट करते थे।

दुश्मन खेमे का माहौल जो कुछ भी हो लेकिन ये वक़्त तो अपस्यु का था, उसकी सेलिब्रेशन दुगनी थी और उसे वो पूरा दिल से मानना चाहता था। ऐमी को पूरा चिढ़ाकर वो सिन्हा जी के पास जा चुका था। ऐमी बड़ी तेजी के साथ सिन्हा जी के पास पहुंची… "डैड चलो मेरे साथ"..

अपस्यु:- बापू आप जा रहे हो क्या ऐमी के साथ?

ऐमी:- डैड आपने सुना नहीं, चलो मेरे साथ…

सिन्हा जी:- छोटे बाद में मिलता हूं, अभी जाने दे।

अपस्यु:- बापू आप मुझे छोड़कर जा भी कैसे सकते हैं।

ऐमी:- डैड मै दोबारा नहीं कहूंगी, चुपचाप चलो मेरे साथ वरना नंदनी आंटी को मजबूरन मुझे भेजना होगा..

सिन्हा जी:- अरे यार अब तो जाना ही पड़ेगा। बाय छोटे मिलते हैं एंगेजमेंट में।

ऐमी सिन्हा जी का हाथ पकड़कर ले जा रही थी और पीछे मुड़कर अपस्यु का उतरा चेहरा देखकर जोड़-जोड़ से हंसती हुई चलते बनी। उसे जाते देख अपस्यु खुद से कहने लगा… "अरे यार ये तो मज़ा किरकिरा हो गया"…

"क्या हुआ अपस्यु बहुत ज्यादा टेंशन में दिख रहे हो बात क्या है।"… ध्रुव, अपस्यु को ड्रिंक देते हुए पूछने लगा…

अपस्यु:- कुछ नहीं यार, अपने हमजोली के साथ बैठक लगाने का सोच रहा था, उस पागल ऐमी ने सब स्तायानाश कर दिया। मूड ही ऑफ हो गया। खैर छोड़ो, मै भी क्या लेकर बैठ गया। साची कहीं नहीं दिख रही, कहां गई?

ध्रुव:- साची, लावणी को एंगेजमेंट के लिए तैयार करने गई है।

अपस्यु:- ओह, ठीक है दोस्त तुम अपने दोस्तों के पास जाओ, मै भी चलता हूं।

ध्रुव:- हेय, आओ हमारे साथ ज्वाइन करो।

अपस्यु:- नहीं भाई रहने दो फिर कभी। अभी के लीए माफ़ करो। वैसे तुम्हारे डैड और सीस कहीं नजर नहीं आ रही।

ध्रुव:- एक छोटी सी मीटिंग है वहीं गए हुए है। अपस्यु मेरी छोटी सी रिक्वेस्ट है अब मान भी लो और चलो मेरे साथ..

अपस्यु:- अब इतना भी मै स्पेशल केस नहीं की इतना कहने पर ना जाऊं। लेकिन प्लीज मुझे कोई खास बताकर किसी से इंट्रोड्यूस मत करवाना।

ध्रुव:- चिंता मत करो … मेरे दोस्तो के बीच तुम पहले से इंट्रोड्यूस हो.. बस तुम्हे उन्हें जानना है।

अपस्यु भी चल दिया उन्ही लोगों के बीच। अपस्यु की फेवरेट कॉकटेल सर्व होती रही, बातों का दौर शुरू हो चुका था और हर कोई अपस्यु की कंपनी पूरा एन्जॉय कर रहे थे।

इधर नंदनी लगभग तीनों को संभाल चुकी थी। लेकिन तीनों के मायूस चेहरे देखकर नंदनी को कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था। इसी बीच ऐमी वहां पहुंच गई…. "आंटी आप जाओ मैं इन सब को देखती हूं। और हां साथ में डैड को भी लेते जाइए।… जैसे ही नंदनी सिन्हा जी के साथ 2 कदम आगे बढ़ी होगी… "सुनिए आंटी, मेरे डैड अपने छोटे के साथ बैठक लगाने के इरादे से है, इसलिए प्लीज़ इन्हे अपने पास से खिसकने नहीं दीजिएगा वरना समझिए कि आज के पार्टी का सत्यानाश।"..

नंदनी:- तुम चिंता नही करो, अच्छा किया जो पहले मुझे दोनों के बारे में बता दी थी, आज इन बापू और छोटे का मिलन नहीं होगा। तुम बस इन सब को जल्दी से तैयार करो, बस आधे घंटे बचे हैं।

नंदनी अपनी बात कहकर वहां से सिन्हा जी को लेकर निकल गई। नंदनी जैसे ही बाहर निकली ऐमी बाथरूम में गई और एक बाल्टी पानी भर लाई और तीनों के ऊपर उड़ेल दी… बहुत ज्यादा असर तो नहीं हुआ तीनों पर, बस तीनों ही ऐमी के ओर देखने लगे…. "सुनो तुम तीनों, अपस्यु ने कहा है कल तक पूर्ण न्याय हो जाएगा, यदि उसपर भरोसा हो तो घर में आयी खुशी को एन्जॉय करो वरना तुम्हारी मर्जी, मै जा रही हूं जरा तैयार होकर आ जाऊं। वूहू….. वूहू .….वूहू..... बस थोड़ी ही देर में छछूंदर का एंगेजमेंट है।"

स्वस्तिका जो बिस्तर पर बेजान परी थी वो ऐमी को रोकती हुई, उसके पास आकर कहने लगी… "रुक ऐमी, मै भी चलती हूं। तैयार होने में थोड़ी हेल्प कर देना, मै भी आज अपने भाई के एंगेजमेंट में खूब नाचूंगी। तेरे रूम में कुछ व्यवस्था तो है ना।…

ऐमी खुश होती हुई उसके गले लगती … "अरे नहीं भी होगी तो पूरा बार वहां लगा देंगे.. तू बस चल तो सही।"..

इसी बीच वो दोनों भी उठकर खड़े हो गए.. दोनों खुश होते हुए उनके है साथ लटक गए और चारो गले मिलकर थोड़े आंसू के साथ मुकुराते हुए हूटिंग शुरू कर चुके थे। बीती बात को एकदम से दरकिनार करते हुए ऐमी और स्वस्तिका साथ निकली और जल्द ही तैयार होकर वापस आरव के कमरे के ओर जा ही रही थी कि उधर से पार्थ और आरव दोनों तैयार होकर सामने से आ रहे थे।

आरव को देखकर स्वस्तिका ने दोनों को भेज दी और आरव को लेकर उसे थोड़ा और संवरने के लिए उसे वापस उसके कमरे में लेकर चली आयी। ऐमी और पार्थ दोनों आगे बढ़ रहे थे… "थैंक्स यार, हम पागल से हो गए थे, अच्छा हुआ तुम दोनों ने अपना होस नहीं खोया था।"

ऐमी:- डार्लिंग, अभी वो बात करनी जरूरी है क्या? चुपचाप एंगेजमेंट पर कन्सन्ट्रेट नहीं कर सकते, या एक बार फिर तुम्हे धूल चटानी पड़ेगी…

पार्थ:- हुंह बड़ी आयी धूल चटाने वाली, जाकर सपने देख।

ऐमी:- अच्छा बेटा इतनी जल्दी भूल गया, आ दिल्ली वहीं बताती हूं?

पार्थ:- तू ज्यादा उड़ मत, उस बार लड़की समझकर छोड़ दिया था, इस बार कोई रहम नहीं दिखाऊंगा। खैर वो तो आने वाला वक़्त बताएगा लेकिन एक बात जो मुझे हैरान कर रही है…

ऐमी:- क्या ??

पार्थ:- यही मिस ऐमी कोई बड़ी गड़बड़ी कर आयी है और आनेवाले परिणाम को सोचकर काफी रोमांचित हो रही है।

ऐमी:- यक.. कुछ भी.. मतलब ऐसे बकवास भी कोई गेस होता है क्या?

पार्थ:- अब जो बोलना था वो मैंने बोल दिया नहीं पसंद तो भी एडजस्ट कर ले।

दोनों एक दूसरे के साथ छेड़छाड़ करते अपनी जगह पर पहुंच चुके थे। ऐमी आते ही सबसे पहले सिन्हा जी और अपस्यु को ही ढूंढ़ने लगी। लेकिन उस माहौल में ना तो सिन्हा जी थे और ना ही अपस्यु।

ऐमी नंदनी के पास पहुंच ही रही थी तभी सिन्हा जी भी दिख गए और वो अपना रास्ता बदलती कुंजल के पास पहुंच गई। कुंजल उससे देखती ही कहने लगी… "साड़ी को इतने सेक्सी अदा से भी पहन सकते है, ऐमी मुझे भी सिखाओगी क्या?"

ऐमी:- मुझे जरूरत नहीं होगी सीखने की क्योंकि मेकअप डिपार्टमेंट तुम्हारे बहन के हाथ में है, उसने मुझे सिखाया है तुम्हे भी सीखा देगी।

कुंजल:- और यदि मुझे तुमसे ही कुछ सीखना हुआ तो..

ऐमी:- ठीक है बाबा मुझे से ही सीख लेना अब खुश..

कुंजल:- बहुत खुश.. चलो "डोला-डोला" पर नाचते हैं…

ऐमी:- क्यों तुम्हारी वो "दिल्ली वाली गर्लफ्रेंड सोंग" का क्या हुआ..

कुंजल, आंख मारती… "रणवीर नहीं मिला ना, अब उसके इंतजार में क्या मै भाई के एंगेजमेंट को एन्जॉय ना करूं।"..

ऐमी, कुंजल को ऊपर से नीचे तक देखती हुई…. "ओह माय गॉड मैंने अब तक ध्यान क्यों नहीं दिया।"..

कुंजल:- क्या हुआ सब ठीक तो है ना ऐमी..

ऐमी:- इसे ठीक नहीं मस्त पटाखा बोलते है।

"कामिनी लेस्बो.. जाकर कोई लड़का ढूंढ़ अपने लिए, जब देखो तब लड़कियों में इंट्रेस्ट लेते रहती है।"… साची उनके पास पहुंचती हुई बोलने लगी..

"2 मिनट रुक तू साची, फिर मै तुझे बताती हूं, फिलहाल जरा मै लावणी से मिल लूं।"… ऐमी अपनी बात कहती लावणी के पास पहुंची और उसे देखकर मुस्कुराती हुई कहने लगी…. "लावणी यहां तुम से ज्यादा प्यारी कोई नहीं, आरव के लिए मुझे खुशी है। तुम उसके साथ रहोगी तो वो हमेशा मुस्कुराता रहेगा।"

लावणी बड़ी प्यारी हंसी अपने चेहरे पर लाती हुई…. "थैंक्यू सो मच। मुझे लगा आप कभी मुझ से बात ही नहीं करोगी।"..

ऐमी:- हेय ऐसा किसने कहा तुमसे.. और सॉरी मै यदि तुम्हे ऐसा फील हुआ हो तो। दिल से सॉरी…

इतने में कुंजल फिर से सबको कहने लगी… "किसी को चलना है "डोला-डोला" पर डांस करने या मै ये मान लूं कि केवल यहां मेरे ही भाई का एंगेजमेंट है।"

"यह माहौल भी ऐसा है की ठीक से बात भी नहीं हो पाएगी, पर हां भुटकी तुमसे ढेर सारी बातें करूंगी, लेकिन अभी चल, चलकर "डोला-डोला" पर थोड़े ठुमके लगा आते है।"… ऐमी लावणी हाथ पकड़ कर खींचती हुई कहने लगी। लावणी इतनी भीड़ को देख कर थोड़ा संकोच करने लगी, ऊपर से उसकी मां और बाकी के कुछ रिश्तेदार सब यहीं पर थे।

लावणी थोड़ी प्रतिरोध करती रही, लेकिन ऐमी के साथ कुंजल मिलकर उसे भी हॉल के मध्य में ले आयी और फिर जो ही चारो लड़कियों का ठुमका लग रहा था… जो भीड़ अपने अपने कामों में लगी थी, सभी का ध्यान आकर्षित हो गया और सब लोग उनके बीच पहुंच गए।

कुंजल की नजर अपने मां पर गई और वो उसका हांथ पकड़ती खींच ली। नंदनी भी अपनी बेटी के साथ वहां बीच में आती, सबके बीच ठुमके लगाने लगी। नाच गाने का पूरा रंग जम चुका था। इसी बीच स्वस्तिका और आरव भी वहां पहुंच गए थे और पहला गाना अभी अभी बंद हुआ था।

फिर क्या था इस बार बारी थी स्वस्तिका की और चला उसके पसंद का गाना… "तौबा तेरा जलवा, तौबा तेरा प्यार"… इस गाने पर स्वस्तिका और कुंजल ने लावणी को घेर लिया, ऐमी और साची ने आरव को। इस गाने के शुरू होते ही आरव और लावणी पर इमोशनल अत्याचार शुरू हो चुका था। अल्हर डांस मूव और जबरदस्ती तानो के समान उठते इशारों से हाथ.. आरव और लावणी को शरमाने और हसने पर मजबुर किए जा रहे थे।

सब झूम रहे थे लेकिन नंदनी की नजरें अपने परिवार के बड़े लड़के को ढूंढ़ रही थी जो इस खुशी के माहौल से नदारद था। नंदनी कुंजल को डांस के बीच से बाहर निकाली और अपस्यु को ढूंढकर लाने के लिए कहने लगी। कुंजल ने भी जब अपस्यु को वहां नहीं देखा तब वो भी थोड़ी मायूस हुई।

कुंजल निकल ही रही थी अपस्यु को ढूंढ़ने की इतने में अपस्यु ध्रुव के साथ हॉल में शिरकत किया। 2 गोरी मैम के बीच अपस्यु उन दोनों के कंधों पर हाथ डाले थोड़ा हिलते, डुलते और लड़खड़ाते हुए पहुंचा। नंदनी उसकी हालत देखकर अपने सर पर हाथ रख ली… "सब कुछ अच्छा है लेकिन किसी दिन इसकी हरकतों से मै ही घर छोड़कर चली जाऊंगी।"

कुंजल:- मां प्लीज, छोड़ दो भाई को, वो अपने हिसाब से मस्ती कर रहे है करने दो। प्लीज आप गुस्सा ना हो।

नंदनी:- चुपकर भाई की चमची। देख नहीं रही इतना पिए है की ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा है। रघुवंशी खानदान का कोई तो है नाम रौशन करने वाला। इसकी हरकतें बिल्कुल इसके दादा की तरह है।

कुंजल:- दादू, उनके बारे में आपने कभी नहीं बताया।

नंदनी:- हां तो अपने भाई को देखकर बस समझ जा ऐसे ही थे वो भी। मैं उन्हीं के बारे में क्यों कह रही हूं। तेरे नाना भी ठीक वैसे ही थे, और दोनों ही पूरे ईगो वाले। प्राण जाए पर मूंछ की शान ना जाए।

कुंजल:- हहाहाहा… मां बस भी करो, वो दौड़ अलग था अब चलो जल्दी से स्माइल करो और ये समझ लो कि आप के ससुर और पापा दोनों ही इस हॉल में है। अब मुझे एक बात बताओ, आप क्या उन दोनों पर ऐसे गुस्सा हो सकती थी..

नंदनी:- मेरी हिम्मत मेरे बेटे की दी हुई है.. नहीं तो मै बहुत डरपोक हुआ करती थी। सुनंदा दीदी ससुर जी को सुना भी दिया करती थी लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हुई कभी…

दोनों मां बेटी बातें कर ही रही थी कि तभी स्वस्तिका ने पहले नंदनी को खिंचा फिर वो सुलेखा को खींची और सुलेखा ने अनुपमा को खींच लिया। गाना था "इन्हीं लोगों ने ले ली ना दुप्पटा मेरा।".. पूरा फ्लोर बस किनारे खड़े होकर तालियों की थाप दे रहा था और तीनों नंदनी, सुलेखा और अनुपमा डांस फ्लोर पर ओल्ड क्लासिकल धुन पर वहां जलवा बिखेर रही थी, और अपस्यु घूरती नजरों से ऐमी को देखा.. ऐमी उसकी हालत पर हंसती हुई इशारा करने लगी आज वो अपनी उन्हीं गोरी मैम के साथ रहे.. वो इन सब के बीच एन्जॉय कर रही है…

अपस्यु उसे फ्लाइंग किस्स देते उन दोनों गोरी मैम को छोड़ा और ऐमी को बेस्ट ऑफ लक कहते हुए वापस से बार काउंटर पर चला गया। इधर डांस के बाद थोड़ा विराम लग चुका था। मनीष और राजीव सभा में पहुंच चुके थे और साथ में उसके दोनों बेटे भी.. अब आगे का कार्यक्रम शुरू होने जा रहा था।
 
:D chatni khane ka man ho to bata dijiye ... Emili ke sath uske gur ko bhi nipta dun .. :D..

Rahi baat nahle dahle ki to ek bar patte hath me hi rakhe the.. fir jo hi master sahab ne kan pakad kar chand dikha diya ki tab se nahle dahla nahi pata sooooo Solly :(
 
:) Amy .. she was a good friend .. she was the host in KNTB ... She remove her all emotions for Aakash... She had lots of word to exchange but... Payal aur kahani me... uski kahani kahin kho gayi.. uske emotions kahin dikhe hi nahi..

It was simply injustice.. Mujhe bahut afsos hua tha chalti kahani ke sath usse likhne ke liye.. bina swarth ke usne kiya tha... She was damn good friend without hope

Many things to say about Amy .. but kah nahi paunga... Dil me chubhan thi .. bus yahan wo feeling khatam kar raha hun .. this is the simple reason I love this charecter most .. Last Amy aur is Aimee me jyada anter bhi nahi diya isliye ..

And I am very happy :)
 
Update:-79

अपस्यु उसे फ्लाइंग किस्स देते उन दोनों गोरी मैम को छोड़ा और ऐमी को बेस्ट ऑफ लक कहते हुए वापस से बार काउंटर पर चला गया। इधर डांस के बाद थोड़ा विराम लग चुका था। मनीष और राजीव सभा में पहुंच चुके थे और साथ में उसके दोनों बेटे भी.. अब आगे का कार्यक्रम शुरू होने जा रहा था।

सब खास लोग स्टेज पर आ चुके थे। डॉलर में कमानेवाले पंडित जी भी मंत्र उच्चारण शुरू कर चुके थे और नंदनी ऐमी को बोल ही रही थी कि अपस्यु को बार से उठकर यहां पर लेकर आए।

इधर डांस के बीच में जब अपस्यु ऐमी को बेस्ट ऑफ लक कहकर निकला तो सीधे बार काउंटर के पीछे गया, जहां सिन्हा जी जितने पेग लगाए थे उतने ही ग्लास उसके कॉकटेल के बनवा कर रखे हुए थे।… "क्या बापू, अकेले-अकेले 6 पेग मार चुके।"

सिन्हा जी:- छोटे, ऐमी और तेरी मां ने मिलकर पहरा लगा डाला था। इसलिए बार काउंटर तक पहुंचने में समय लग गया। वरना अपने बेटे के एंगेजमेंट में 12-15 पेग तो लगा ही चुका होता।

अपस्यु ने अपना एक पेग उठाया और सिन्हा जी के साथ टोस्ट करते हुए… "कोई ना बापू कौन सा इनका अभी नाचना खत्म हो गया है। अभी वक़्त है हमारे पास।"

जबतक इनलोगों का नाचना खत्म हुआ और सब स्टेज पर पहुंचे थे, तबतक अपस्यु और 10 पेग लगा चुका था और सिन्हा जी 8 पेग के साथ झूमना शुरू कर चुके थे। इधर नंदनी ने जैसे ही ऐमी को बुलाने के लिए कहीं, वो बार काउंटर पर अपनी नजर दी… बापू और छोटे की जोड़ी कंधे पर हाथ डाले वीरभद्र से कुछ बातें कर रहे थे। उनको देखती ही… "लो हो गई अब एंगेजमेंट"..

नंदनी:- क्या हुआ इतने चिंता में क्यों दिख रही हो?

ऐमी नंदनी को उल्टा घूमती हुई कहने लगी… "लो खुद ही देख लो"… दोनों को साथ देखकर नंदनी कहने लगी… "इन पियक्कड़ों को रेगिस्तान में भी छोड़ आओ तो भी अपना जुगाड और साथी ढूंढ़ लेंगे।"

नंदनी अपनी बात समाप्त की ही थी कि यहां की भी लाइट चली गई, लेकिन इस बार फोकस जोड़ों पर नहीं बल्कि अपस्यु और सिन्हा जी पर था, और दोनों के हाथ में थी माइक….

सिन्हा जी:- छोटे आज मेरे बेटे का एंगेजमेंट है इसलिए यहां कोई एक्शन नहीं होगा। बस रोमांस होगा..

अपस्यु:- ओय बापू.. ये क्या बोल रहे हो.. पूरी फैमिली है..

सिन्हा जी:- आे तेरी ! साले ये बैंचों फिल्म वाले, इतना ना एक्शन और रोमांस को साथ में लिख दिए की मुंह से निकल गया.. सॉरी लेडीज एंड जेंटलमैन. मेरा छोटा एक्शन नहीं करेगा बल्कि डांस करेगा.. और अब मेरे इस हैंडसम हंक के लिए एक पार्टनर की जरूरत है.. ऐमी को छोड़कर कोई भी इंटरेस्टेड गर्ल आ सकती है..

अपस्यु:- जे बात बापू.. ये सही कहा आपने .. हमारे बीच दरार डालने वाली वही है… जलती है यार अपने से वो। लेकिन… लेकिन… लेकिन .. इस से पहले की कोई डांस शुरू हो, पहले आप लोग हमारे परिवार के कुछ पलो का आनंद उठाएं..

जैसे ही वहां अंधेरा हुआ था, और इन दोनों का नाटक शुरू हुआ… मनीष, राजीव से तानो में कहने लगा… हमारे परिवार के संस्कार तो नंदनी जी ने बता दिया था, अब ये क्या है भक्तिमय माहौल।

अनुपमा:- आप भी ना, ना वक़्त देखते हो ना जगह। चुपचाप सामने पर्दे पर चल रहे तस्वीरों को देखो, संस्कार पता चल जाएगा.. शोले में तो धर्मेन्द्र भी दारू पीकर पानी टंकी पर चढ़ा था, फिर क्यों रट लगाए रहते .. मेरा फेवरेट सीन.. आगे देखो…

कई सारी खट्टी मीठी यादें थी उन तस्वीरों में। एक तस्वीर और उभर कर आयी जो काफी लेटेस्ट थी अभी कुछ देर पहले की, जिसमे नंदनी ने तीनों को गोद में सुला रखा था। इस आखरी तस्वीर के समाप्ति के साथ ही रौशनी हुई और सभी बच्चे नंदनी के कंधे से लगे खड़े थे और नंदनी उनके बीच मुस्कुरा रही थी।

स्टेज पर ये माहौल चल रहा था और नीचे कई लड़कियों की भीड़ लग चुकी थी। इस बार अपस्यु ऐमी का चेहरा देख रहा था। गुस्से में बिल्कुल बिलबिलाती, वो अपस्यु को देख रही थी।… "छोटे गाना बजवाया जाए क्या?"..

अपस्यु:- अरे बापू आज के आप मेरे डांस पार्टनर..

सिन्हा जी:- ना रे, तू वो मुझे हवा में झुलाएग, मेरे हार्ट अटैक कर जाएगा।

अपस्यु:- अरे ना बापू ऐसे आज दो हमजोली नाचेंगे.. आरव तू कुछ देर और रुक, हम दोनों जरा रंग जमा कर आए…

सिन्हा जी:- ठीक है पर हम एक ही गाने पर नाचेंगे..

अपस्यु:- कौन सा बापू…

सिन्हा जी:- साले को बोल, "मेरा तन डोले मेरा मन डोले" बजाए…

अपस्यु को जब सिन्हा जी गाने कि फरमाइश कर रहे थे तब अपने बदन को ऐसे लहराए की देखने वालों की हंसी निकल आयी।… और फिर बजने लगा नागिन के धुन वाली तन डाले मन डोले..

सभी खड़े लोग हंसते-हंसते लोटपोट थे, और वहां फ्लोर पर 20 सपेरे और एक नाग। सब अपस्यु के आगे बीन बजा रहे थे और अपस्यु सबको डसने में लगा हुआ था। अब ये दोनों नौटंकी कर रहे हो और कोई घटना ना हो। कबीर वहीं उनके पास खड़ा होकर देख ही रहा था, कि सिन्हा जी के धक्के से वो गिरा।

अपस्यु के ठीक ऊपर वो गिरा था और अपस्यु उसे थामते हुए अपने पास लिटा दिया। तेजी से उठकर अपस्यु उसके ऊपर आया और अब सपेरा अपस्यु था और नाग कबीर। उसने बहुत कोशिश की वहां से उठकर निकल जाए लेकिन 20 लोगों की भीड़ से नाग तब तक नहीं निकला जबतक नंदनी ने अाकर दोनों बापू और छोटे की जोड़ी को कान पकड़ कर ऊपर स्टेज पर ना ले आए।

कबीर जब खड़ा हुआ तब उसके पूरे कपड़े खराब हो चुके थे। कुछ लोगों के तो वाइन भी उसके कपड़े पर गिरा हुआ था। काफी गुस्से में वो लग रहा था। इधर जैसी कबीर कि हालात थी ठीक वैसी ही अपस्यु की भी थी, लेकिन अपने भाई को ठीक सामने देखते ही आरव बाहें फैलाए उसके गले से लगा और कान में कहने लगा…

"कमिने आज की पार्टी खराब होते होते बची है, मुझे तो लगा कि वो कबीर गया आज"…. "अबे आज मै एक्शन के मूड से नहीं था। वो बापू भिड़ा हुआ था किसी तरह लड़ाई फसाने के लिए। उसने नीचे नहीं लिटाया होता तो तू जानता है तेरा ससुर ही क्यों ना हो, बापू से बदतमीजी पर तो मै उसे भी का छोड़ूं।…… "हहाहा, उन्होंने कब मार नहीं फसाया है तू ये बता।"…. "अबे छोड़ बे अब कितना गले लगेगा।"..

अपस्यु ने जैसे ही आरव को छोड़ा लावणी ने अपने दोनो हाथ ऊपर कर लिए अपस्यु उसे भी गले लगाते हुए कहने लगा… "लगता है इसने बाप वाला कॉन्सेप्ट तुम्हे भी बता दिया।"…. "थैंक्स भईया, आप ने जो किया वो मेरे एंगेजमेंट का बेस्ट मोमेंट था।".. अपस्यु उससे अलग होते हुए, आरव से कहने लगा… "सुन बे अगर इसने मुझ से तेरी कुछ सिकायात की ना तो तेरी खैर नहीं।"..

"अरे अब बस भी करो भारत मिलाप, वरना यहां पूरा खानदान खड़ा है मिलाप के लिए। दोनों एक दूसरे को अंगूठी भी पहनाओ।".. पीछे से सुलेखा हंसती हुई कहने लगी… इसी के साथ दोनों की अंगूठी सेरेमनी भी पूरी हुई। सभी लोग मेलमिलाप में लगे थे और इधर अपस्यु सुलेखा को भीड़ से थोड़ा अलग ले जाकर पूछने लगा… "आप खुश तो हो ना आंटी।"

सुलेखा:- बेहद खुश हूं। ऐसा लगा जैसे ज़िन्दगी में कोई तो अच्छा काम किया।

अपस्यु:- आप तो शुरू से अच्छा काम करती आ रही हैं। आपने जो किया है, उसके लिए हिम्मत चाहिए। लोग संसार से तो लड़ सकते है, लेकिन परिवार से हार जाते है। हम सबसे बड़ी लड़ाई तो आप लड़ रही हैं।

सुलेखा:- जानता है, मेरी नजर अब भी अपनी सुनंदा को ढूंढ़ रही है। तुझमें पूरी अपनी मां कि छवि है।

अपस्यु:- आप भी तो मां की ही परछाई हो। बिल्कुल मेरी मां जैसी। जो बीत गया उसे जाने दो, और आज में जीना सीखो। देखो तो लावणी को कितनी प्यारी लग रही है। दोनों की जोड़ी कमाल कि है।

सुलेखा:- उसकी जोड़ी तो लग गई, तेरी जोड़ी कब लगेगी।

अपस्यु:- उसमे अभी समय है आंटी फिलहाल तो अभी ध्यान कहीं और है।

सुलेखा:- अच्छा सुन, कोई थर्ड पार्टी तुम्हारे टारगेट के बीच आने वाला है, जरा संभलकर रहना।

अपस्यु:- हम्मम! अब आप चिंता नहीं कीजिए, मै बिल्कुल इनके सामने और ठीक बीच में हूं। आपको अब जोखिम उठाने की जरूरत नहीं है, हर बात अब मुझे पता चल जाएगी। बस आप अपना ख्याल रखिए और हां आज से आप जितना चाहे उतना प्यार लुटा सकती है, आप के मार और संभाल के काम से भी छुट्टी।

सुलेखा:- सच !!! वैसे अचानक ये तब्दीली, कहीं सच में तो तेरे और साची के बीच कुछ चलना तो शुरू नहीं हो गया।

अपस्यु:- नहीं वो बात नहीं है। मैंने साची को समझा दिया कि जो उसके साथ हुआ वो महज एक छल था।

सुलेखा:- ये क्या कर दिया तुमने.. पूरी बात बता दी क्या ?

अपस्यु:- ना, बस उतना, जितना उसे उसके गम से उबार दे, और उतना जितना आगे भविष्य में जब उसे पता चले कि घर की भेदी आप है तो आप से उसे कभी नफरत ना रहे। बस अब इसपर प्लीज कोई सवाल नही कीजिएगा..

सुलेखा मुस्कुराती हुई… "ठीक है कोई सवाल नहीं करती, चल अब चलती हूं, आज खुशी से अपने बच्चों से मिलूंगी, और तेरी उस हिटलर मां से भी। नंदनी क्या बोली थी उस दिन अपस्यु, ऐसा लग रहा था मिश्रा जी डर से जमीन में ना घुस जाए।

अपस्यु:- हाहाहाहा.. हां मैंने भी सुना, बस ये यादगार क्षण जब चल रहा था तब मै क्यों नहीं था उसी का अफसोस है।

"ऐमी, तुम्हे अपस्यु बुला रहा है। ले तू ऐमी के साथ अफसोस कर, मै चली।".. इतना कहकर सुलेखा वापस से लोगों के बीच चली आयी।… "क्या है? अब क्या जीत गए उसकी बधाइयां दूं तुम्हे।"..

अपस्यु:- तुम्हे प्यार से गले लगाकर चूमने कि इक्छा हो रही।

ऐमी:- अभी !!!

अपस्यु:- हां अभी।

"ठीक है, नो प्रॉबलम".. कहती हुई ऐमी लगभग चिपक ही चुकी थी, तभी अपस्यु एक कदम पीछे हटते हुए…. "क्या कर रही हो, सब लोग यहीं है और कुछ तो हम दोनों को ही देख रहे है।"

ऐमी:- तो वो बात बोलो जो कर सको, अपने ये 20 और 40 पेग पीकर झुमनें का नशा किसी और के पास करना।

अपस्यु:- नक्चढ़ी, आज गुस्से में तुम्हारी नाक लाल है..

ऐमी:- नजर साफ करो, वो मेकअप लगा है।

अपस्यु:- अच्छा बाबा सॉरी, माफ़ कर दो मुझे।

ऐमी:- अपस्यु तुम्हे पता है जब मै गुस्से में होती हूं तो मुझे मनाने कि कोशिश मत किया करो। गुस्सा अभी गया नहीं है और तुम्हारी हरकतें उसमे इजाफा कर रही है।

अपस्यु:- गुस्सा छोड़ भी दो, आज मूड बहुत रोमांटिक है। चलो कहीं घूम कर आते है।

"कुंजल के साथ मेरा पहले से सब प्लान बन चुका है। हुआ तो लावणी को भी साथ ले लूंगी। वैसे एक बात जानते हो"… अजीब सी खुशी जो इस वक़्त ऐमी के चेहरे पर थी, जिसे अपस्यु साफ पढ़ सकता था।

अपस्यु:- क्या ऐमी?

ऐमी:- लावणी से जब मैंने बात की आज, तो वो मुझ से कहती है.. "मुझे तो लगा आप कभी बात ही नहीं करेंगी मुझसे".. बहुत प्यार है यार वो। बिल्कुल मासूम रुई की गुड़िया हो जैसे।

अपस्यु:- हाहाहाहा.. ठीक है फिर इसी खुशी में आज रात तुम और मै.. सेलीब्रेट करेंगे..

ऐमी:- हट हट हट.. छूना भी मत, पहली बात… तुम्हे याद दिलाना चाहूंगी क्या तय हुआ था….. हमारा रिश्ता छिपा रहेगा और नो रोमांस, जबतक एक ही जगह पर सब लोग हो। और दूसरी बात कोई नहीं भी होता तो भी मेरा कोई मूड नहीं है। बाय डार्लिंग हैव ए स्वीट नाइट।

"बापू के चक्कर में इसे नाराज कर दिया। कोई नहीं चलो चले हम अकेले में खुद के गम मिटाते हैं और 2-4 जाम उठाते है।".. अपस्यु खुद से ही बात करते बार काउंटर पर बैठ गया। लेकिन आज अपस्यु की किस्मत.. बार काउंटर पर जैसे ही बैठा की पास में नंदनी अाकर खड़ी हो गई। अपस्यु ने नंदनी पर ध्यान नहीं दिया और जाम को होंठ से लगाकर चुस्की लगाया ही था… "अब तू इतना बड़ा हो गया है कि अपनी मां के सामने पिएगा।"..

जैसे ही उसने सामने नंदनी को देखा बेचारा सरक गया। नंदनी उसके सर पर हाथ थपथपाती… "इतना चौंकने की क्या जरूरत थी, पीते रहता, छोटे बड़े की इज्जत और लिहाज तो सब पहले ही बेच खाया है।"..

अपस्यु, शांत होकर अपना सर नीचे झुकाए… "सॉरी मां, वो मैंने आप को नहीं देखा।"..

नंदनी:- वाह बेटा !! मुझे नहीं देखा, और ये भी ख्याल नहीं रहा होगा कि मै इसी हॉल में हूं। कुछ ढंग के बहाने बना ले, या फिर-साफ साफ बोल दे, मेरी जिंदगी में दखल मत दो। तुम आज कल के लड़के नशा बस नशे करते रहो, पर उसे छोड़ने कहो तो लाइफ में दखलंदाजी हो जाती है।

अपस्यु सरपट उतरा अपने टेबल से और कान पकड़ कर कहने लगा… "बस करो मां, ताना मारना बंद करो। समझ गया ना मै अब.. चलो भी भूख लगी है।"

नंदनी:- तुमसे जब भी मै कुछ कहती हूं, ये तेरी भूख को क्या हो जाता है? मेरी बातें कोई डाइजेस्टिव एंजाइम है क्या? अभी जब दारू की चुस्की ले रहा था तब तो तुझे भूख नहीं लगी थी?

अपस्यु:- आप पहले पी कर देखो की मै क्या पीता हूं फिर आप कुछ कहना।

नंदनी:- मतलब तू अपनी मां को शराब पीने कह रहा है। लोग हैं वरना मै भी नहीं जानती कितने थप्पड तुझे पड़ चुके होते।

अपस्यु:- नहीं मां, आप पी कर देखो, मै केवल कॉकटेल पीता हूं, जिसमे कोई नशा नहीं होता।

नंदनी:- बेटा मै तेरी मां हूं .. हूं हूं..

अपस्यु, अपना सर हां ने हिलाता… "हूं"..

नंदनी:- कल का जन्म लिया मुझे सीखने चला है कि एल्कोहलिक और नॉन-एल्कोहलिक कॉकटेल क्या होता है। और वो क्या ऊटपटांग नाम है.. एटम शैम्पेन.. ऐसे ही कुछ नाम है ना तेरे उस दारू का।

अपस्यु छोटा सा मुंह बनाए..... चलिए चल रहा हूं समझ गया कि आप मेरी मां है।

नंदनी उसे सबके बीच लेकर चलती हुई… "अच्छा हुआ समझ गया वरना और भी रास्ते थे समझाने के।"…

ठीक इसी वक़्त रात के लगभग 11 बजे, हाड़विक (मेघा का पति) और मेघा एक प्राइवेट आर्मी के संचालन ऑफिस में बैठे हुए थे। यूएसए की सबसे बड़ी प्राइवेट आर्मी सप्लाई एजेंसी जिसका मुख्यालय वॉशिंगटन डीसी में था। दोनों पूरा पता लगाने के बाद उनके शिकागो ऑफिस पहुंचे थे।

दोनों बैठकर वहां के संचालक का इंतजार कर ही रहे थे, जो कुछ ही देर में इन दोनों के सामने था।… "मिस्टर एंड मिसेज मित्तल, कहिए आप के लिए क्या कर सकते है।" (परिवर्तित भाषा)

मेघा:- मिस्टर ड्यूक फोन पर तो आपको बताई ही थी, कोई है जो घात लगाकर हमे नुकसान पर नुकसान पहुंचाते जा रहा है और हम उनकी पहचान नहीं कर पा रहे।

ड्यूक:- देखो मेघा, हम छोटे केस नहीं लेते, बेहतर होगा तुम कोई प्राइवेट डिटेक्टिव हायर कर लो।

मेघा:- अपनी फि बताओ मिस्टर ड्यूक और मेरा काम कब तक खत्म होगा। मुझे मत सिखाओ की मेरा केस बड़ा है या छोटा।

ड्यूक:- 10 मिलियन यूएसडी, वो भी एक साथ।

मेघा:- मैं 20 मिलियन दूंगी, लेकिन काम की गरेंटी होनी चाहिए।

ड्यूक:- हाहाहाहा.. बच्चों जैसी बातें कर रही हो मेघा, क्या तुम हमारे टीम को जानती भी हो। एक टीम में 2 इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर, 2 टेक्नीशियन, जरूरत के हिसाब से हम हैकर भी देते है और 10 प्रोफेशनल एसासियान। तुम्हे अब भी लगता है कि इतने स्ट्रोंग टीम के सामने कोई टिक पायेगा। इस वक़्त हमारे 5 बटालियन कई यूएस आर्मी के ब्लैक ऑप्स मिशन में है।

मेघा:- मुझे प्रोफाइल से मतलब नहीं है मिस्टर ड्यूक, मुझे बस रिजल्ट चाहिए। मै 2 गुना कीमत देने को तैयार हूं क्या तुम्हारी टीम जल्द रिजल्ट देगी।

ड्यूक ने इस मिशन इंचार्ज को अंदर बुलाकर दोनों से इंट्रोड्यूस करते हुए… "ये हैं आप के केस और अपनी टीम के इंचार्ज.... सार्जेंट जेम्स होऑप्स।

औपचारिक हाय हेल्लो के बाद सार्जेंट ने मेघा से केस फाइल लिया, एक-एक करके हर मुख्य घटना कि झलकियां देखने के बाद, उसने आज रात की घटना कि झलकियां भी देखी। केस फाइल की पूरी झलकियां देखने के बाद…

जेम्स:- मेघा अपने डैड का इन्फ्लुएंस यूज करके इस घटना को ऐक्सिडेंट करार देकर पुलिस से फाइल क्लोज करवाओ, बाकी आज से मेरी पूरी टीम इसपर इन्वेस्टिगेशन शुरू करते हैं। कल शाम की मीटिंग में बाकी की बात होगी।

मेघा 1 मिलियन का चेक देती हुई कहने लगी…. "कल के मीटिंग के बाद मै तय करूंगी की मुझे ये केस तुम्हे देना चाहिए या नहीं। अभी के लिए ये पेशगी दिए जाती हूं, पसंद नहीं आया कल का मीटिंग तो ये भी वापस ले लूंगी।"… मेघा अपनी बात कहकर जेम्स को बेस्ट ऑफ लक कहती वापस आ गई।
 
Yessssss... Dhamaka hi dhamaka aur dher sara toofan .. kahani apne flow me hain.. kripya aap bhi flow me aise hi comment marte rahen :declare:

:thanks: for your lovely comment... Keep reading 🌹
 
:) Thank you so much for your overall views .. it's a pleasent to watch such a view...

Aur thode dil ko sukoon bhi ki kahani apne track par hai.. halanki maine bahut dino se break bhi nahi liya overall story line check karne ke liye but iss comment se thodi help milegi.. thanks again and please time to give a short overall views... And ofcourse questions too .. so that story never deviate form path...

:thanks: for your lovely comment... Keep reading 🌹
 
:thanks: for your lovely comment chunmun bro.. Keep reading 🌹 .. baki abhi Sinha ji aur Apasyu ka chepter close nahi hua hai is event me .. aap ne bhi shayad dekh liya ho...
 
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