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Update:- 170 (B)
दोनो हाथ में 2 छोटी सी कुल्हाड़ी और दौड़ते वक़्त ना तो इस बात की चिंता की कुछ ही दूरी पर दीवार है और वो दीवार से टकरा सकता है। हवा को मेहसूस करने की अद्भुत क्षमता और खुद के लचीले पन की ताकत के साथ वो आवाज़ को ओर तेजी से दौड़ लगा रहा था।
जहां से गुजरा फिर तो हर किसी को मेहसूस हुआ कि कोई तेजी मै उसके करीब से गुजरा, और तेज चींख के साथ अपने बहते खून को रोकने की कोशिश में जुट जाता। कोई अपने जांघ पकड़े है तो कोई अपने कंधे।
जितना अफरा तफरी का माहौल उतना ही अपस्यु को मदद मिल रहा था। हर कोई बस चींख रहे लोगों की आवाज सुनकर, घुएं में इधर उधर देखने की नाकाम कोशिश कर रहे थे और महों उनके अंदर भय सा महसूस करवा रहा था। अपस्यु वहां मौजूद हर किसी को अंधेरे का भय करवा रहा था और लोग चिल्ला चिल्ला कर बेहोश हुए जा रहे थे। इतने में नीचे का धुआं हल्का सा छंटा और भय में खड़े किडनैपर्स को थोड़ा थोड़ा दिखना शुरू हो चुका था।
कांपते 6 लोग और हाथ में पकड़ा रायफल हल्का-हल्का हिलता, खून में नहाया एक लड़का अपनी कुल्हाड़ी लिए बीच में खड़ा, बस अपनी नजरे चारो ओर दौरा रहा था। राइफल का प्वाइंट अपस्यु के ओर और अपस्यु अपने लोहे कि कुल्हाड़ी अपने कमर के ऊपर सामने के ओर किए श्वांस अपने अंदर भर रहा था और उन 6 रायफल को देख रहा था। गोलियां फायर हुई और अपस्यु अपने कुल्हाड़ी को हवा में तेज लहराते, अपने बदन को हवा की भांति ऐसे लहरा रहा था कि सारी गोलियां कुल्हाड़ी से टकराकर दाएं बाएं जाने लगी, किन्तु एक भी उसके बदन को छू ना सकी। देखते ही देखते इनकी मैगज़ीन खत्म हो गई लेकिन एक भी गोली अपस्यु को छू नहीं पाई।
"उफ्फ ! क्या जलवा दिखाया है बेबी"… सम्मान और उत्साह में जोड़दार विस्सेल साउंड सबने दिया। ऐमी के इशारे पर एक बार और बाहर धुएं कि चादर बाना दी गई थी और ऐमी के साथ सभी वीरदोयी, बिल्डिंग के अंदर का धुआं छंटते ही पहुंचे थे। जैसे ही सब दरवाजे से अंदर घुस, अपस्यु का हवा में लहराकर अपने कुल्हाड़ी को अपने बदन के चारो ओर 360⁰ में लहराना और 6 रायफल के मैगज़ीन कि गोली को इस कदर रोकते देखकर सब जोश के साथ ये कारनामा देख रहे थे।
अपस्यु का एक्शन और स्टंट जैसे ही अल्प विराम लिया, उसके बाद तो जैसे उस ट्रिपल स्टोरी बिल्डिंग में कहर बरस रहा था। पहले फ्लोर के 6 लोगो को नीचे जमीन पर धराशाही करने के बाद हर फ्लोर पर बस खून ही खून और नीचे परे घायल लोग, जिनकी चींख गली के किनारे तक गूंज रही थी।
अपस्यु नीचे के फ्लोर पर 2 और कुकर्मी को ढूंढने लगा जिसे मारने का हुक्म मिला था। कुछ ही देर में वो दोनो भी मिल गए। दर्द से करारहते हुए दीवार से टिककर बैठे थे। दोनो के पास जैस ही अपस्यु पहुंचा, दोनो उसके पाऊं में गिरते.. "हमारी जान मत लो, तुम जो कहोगे मै करूंगा।"
"रिजवान, खलील, अमरेन्द्र, नीरज, विश्वेश्वर".. अपस्यु उनके पास बैठकर नाम लेना शुरू किया और ये लोग "माफ कर दो, माफ केर दो" की गुहार लगाने लगे … "अक्षत, राजू, सलीम, नदीम, पारेख, मोहन, गुलाब, मोहित, सुरेन्द्र, आनंद, अखिल, नितिन, अस्लाम, मुकेश और 2 महीने पहले तुम्हारा हाथो मरा साजिद।"…. "हमे माफ कर दो।"..
"सॉरी दोस्त तुम्हारा टिकिट कट चुका है।".. अपस्यु बैठकर उनके मुख्य गुनाह याद करवाते, उल्टे हाथ से एक कुल्हाड़ी मुख्तार के नाके के बीचोबीच मार कर उसके चेहरे को आधा चिर दिया। ये देखकर अनवर का हार्ट फेल कर गया और वो अपना सिना पकड़े तेज दर्द से चिंख्ने लगा। अपस्यु उसके चेहरे को भी बीच से चीरते हुए उसके प्राण को शरीर से आजाद कर दिया।
अबतक बाकी के लोग भी उस बिल्डिंग का पुरा मामला साफ करके, उनके गन पर कुल्हाड़ी मारकर बर्बाद कार चुके थे। सभी तेजी के साथ नीचे अाए। 2 बजकर 25 मिनट, गड़ी गली के दूसरे ओर से बाहर निकालने के लिए तैयार थी। काया, आरव और स्वास्तिका भी अपना बुलेट प्रूफ जैकेट पहन कर अपने हाथ में कुल्हाड़ी लिए कार के बाहर खड़े हुए थे, बाकी के लोग 3 स्टोरी बिल्डिंग को लगभग साफ कर चुके थे और धुवां छंट चुका था। लोग चिल्लाते हुए दौड़ लगा दिए। कुछ लोग फायरिंग करते जा रहे थे तो कुछ लोग अपने हाथ में धारदार हथियार लिए उनके ओर दौड़े…
"जहां मारो अंग भंग हो, तरपे और जिंदगी छटपटाहट में गुजरे की डेविल ग्रुप से पंगे क्यों लिए।".. आरव दहाड़ा..
"बड़े शौक से भाई, आज इनके भिड़ की ताकत भी देखते है, यही वो लोग है ना जिन्होंने हमे कहा था कि नंगा घुमाएंगे तो भी यहां कोई पूछने वाला नहीं। आज हम पूछ लेते है, और देखते है किसकी मां ने जाना है वो पुत जो जवाब दे दे।".. सवास्टिका की ललकार..
"चलो फिर इनको आज काल के दर्शन करवाए और कल आकर पूछा जाए क्या भाई हमे नंगा नहीं घुनाएगा क्या।".. काया के आखरी शब्द और तीनों शान से कदम से कदम बढ़ाते चले। सामने से आती भिड़ में घिरे तीनों ने, साथ कुल्हाड़ी उठा कर मारा, आगे खड़े लोग के कंधे पर कुल्हाड़ी लगा और फिर सीने पर लात मारकर उन्हें पीछे धकेलते… "सिर्फ मजबूत दिलवाले ही आगे आओ।"..
कुल्हाड़ी पेट की लाइन से दाएं से बाएं चली, खून के फ़व्वारा छूटा, सामने खड़े लोग की चीख हलख़ से निकली और सीने पर लात खाकर पीछे जाकर गिरे। इसी के साथ उन तीनों के साथ 10 वीरदोयी आकर खड़े हो गए। गली के दूसरे ओर अपस्यु और ऐमी के साथ 10 वीरदोयी खड़ा था और फिर शुरू हुआ भिड़ पर काल बरसना।
सटाक सटाक सटाक.. कुल्हाड़ी चलनी अब तेज सी हो गई थी, किसी के पेट कट रहे थे तो किसी के कंधे। चींख ऐसी की आज से पहले कभी एक साथ इतने लोगों की चींख कभी किसी ने ना सुनी हो। भिड़ इतनी की आगे खड़े लोग चींख सुनकर मुत रहे थे लेकिन पीछे हटने की जगह नहीं। खून ही खून चारो ओर और पुलिस को बुलाने के लिए जब फोन कर रहे थे, तब कोई कॉल नहीं लग रहा।
तकरीबन 400 पुलिस वाले उस गली के दोनो ओर खड़े थे। चीख और डर वो लोग गली के छोड़ तक मेहसूस कर रहे थे और हर पुलिस वाला जैसे अपने आप में कुछ अच्छा मेहसूस कर रहा था। गली के छोड़ को ब्लॉक किए हर पुलिस वाले के जेहन में, इस गली के पास खड़े होकर सुने वो अभद्र गालियां और लोगों के बीच खाए थप्पड़ याद आ रहे थे, जो यहां के लोग इन्हे दिया करते थे। आज अंदर से कुछ अच्छा मेहसूस कर रहे थे।
कुछ फरियादी गली के बाहर दौरे, पुलिस वालो के पाऊं पकड़े और मदद की गुहार लगाई। कुछ पुलिस वाले अपने चेहरे पर छलके खुशी के आशु को पोछा और बाहर निकाल रहे लोगो पर डंडा चार्ज करना शुरू कर दिया। पुलिस वालों के पास भी तो दिल था, उनकी भी तो भावनाएं रही होंगी। आत्मसम्मान जहां पर खोया था उस खोए आत्मसम्मान की आह निकल रही थी।
दोनो ओर से वहां मौजूद हर ऑफिसर ने लाठी चार्ज का हुकुम दे दिया। गली के दोनो ओर से पुलिस वालों का बेरहम डंडा चल रहा था। हर पुलिसवाला इतना ही का रहा था, "अब आ जा जिसे आना है।"
आज इस गली में कहर बरस रहा था। वीरदोयी और डेविल ग्रुप की लाइन टूट चुकी थी। हर कोई भिड़ में घुसा था, अपनी कुल्हाड़ी कंधे पेट और पीठ पर चलाते हुए बस सबको धराशाही कर रहा था। चिंखे इतनी तेज की आस पास के इलाके तक गूंज जा रही थी। अजिंक्य ने एक दिन पहले ही, उस पुलिस ऑफिसर के तार छेड़े थे, जिसको इस गली में नंगा करके घुमाया गया था और वो कितना बेबस है इस बात का एहसास करवाया गया था। दिल्ली के इस इलाके के एसपी को। खुन्नस खाया एसपी मामला सुरू होते ही 1 किलोमीटर का दायरा घेर चुका था। अपने 800 पुलिस वालों को बुला चुका था।
मीडिया को उसने घुसने नहीं दिया। पॉलिटीशियन घुसने कि कोशिश कर रहे थे उनसे इतना ही कहा गया, अंदर सेंट्रल होम मिनिस्टर का बेटा फसा है। कारवाही होने तक कोई अंदर नहीं जाएगा। एडिशनल सीआरपीएफ की 4 टुकड़ी और पहुंच गई, उसके हेड एसपी से मिला। एसपी अपने नम आंखो से यहां का दास्तां बताया और फिर अंदर क्या हो रहा है उसका ब्योरा। अंत में उसने इतना ही कहा.. "आपके ऊपर है, आपको क्या करना है। हम तो आत्मसम्मान गवाए बैठे है।"
वो हेड जैसे अपने किसी मजबूर साथी का हाथ थाम रहा हो। सबको लाइन से खड़ा किया और आदेश दिया, जान बचाकर लोगों तोड़ते रहो। उन्हें तबतक तोड़ो जबतक इनके हौसले ना टूट जाए। सब लोग दूसरे और तीसरे गली से घुस गए और अब तो चारो ओर से कहर बरसना शुरू हो चुका था जिसमें रहम को कोई गुंजाइश नहीं थी। लोग भागने को आ रहे थे लेकिन अब हर भागने वाली गली में फोर्स थी, और सबके हाथ पाऊं तोड़ रही थी।
ऐसे माहौल में क्या हो जब 800 पुलिस वाले, जो पहले से यहां के लोगों के कारण आत्मसम्मान खोया सा मेहसूस करते हो, 200 सीआरपीएफ के जवान जो अपने एक मजबूर साथी की अर्जी सुनी हो, ऐसा लगा जैसे उसके बटालियन के कई साथियों को फक्र की मौत नहीं दी गई है बल्कि उसे छल करके मार दिया हो। इधर बेरहम वीरदोयी जो अकेला 1 बटालियन के बराबर थे, यहां वो 20 की संख्या में थे और फिर आक्रोशित डेविल ग्रुप, जिसके परिवार के लोगों को भी इस इलाके में जलील किया गया, अपनी ताकत का नमूना पेश किया गया था।
पागलों की तरह चिंख्ते हुए अपस्यु, भिड़ में घुसकर अपने पूरे बदन को हवा में झुककर गोल-गोल लहराते, कुल्हाड़ी के वार पर वार किए जा रहा था। हर किसी के ऊपर खून के धब्बे लगे हुए थे और सभी खून में लथपथ। तकरीबन 4000 लोग इनके हमले से घायल होकर चारो ओर गली में दर्द से चिल्ला रहे थे। भिड़ गली से बाहर भागने कि कोशिश में थी और भागने की हर जगह से जब फोर्स इन्हे अंदर धकेल रही थी, तब वीरदोयी और अपस्यु के हाथो और लोग शिकार होने आ रहे थे..
2 बजकर 20 मिनट से लेकर 3 बजकर 20 मिनट, पूरे 1 घंटे इनकी कुल्हाड़ी चलती रही। बाहर भाग रही भीड़ को जब फोर्स खदेड़ती हुई अंदर पहुंची, पहली बार फोर्स को गली के अंदर का नजारा यहां से वहां तक दिखा… इस बार पुलिस वालों और सीआरपीएफ के जवानों के चौंकने की बारी थी। सबको जैसे सांप सूंघ गया हो और स्तब्ध खड़े होकर गली में बिखरे लोगों के कटे फटे घायल शरीर को और खून से लाल हो चुके गली को देख पा रहे थे।
2 पुलिस वाला और 2 सीआरपीएफ का जवान भागते हुए एसपी और सीआरपीएफ हेड के पास पहुंचा। अंदर जो उसने देखा, वो आंखो देख सुनाया। एसपी, अजिंक्य को लेकर अंदर भगा। फोर्स के भिड़ को एक किनारे करते, उसने सबको रुकने कहा। अजिंक्य वहां की हालत देखकर दूर से ही चिल्लाया अपस्यु नहीं रुक जाओ। रुक जाओ।
अपस्यु के कानो में जैसे ही आवाज़ परी उसने अपनी कुल्हाड़ी रोकी, तेजी से चिल्लाया… "वैल डॉन डेविल्स .. अब रुक जाओ।".. जैसे ही सब रुके अपस्यु ने अपना मास्क उतरा…
"बहुत नंगा नाचे इस गली में तुम सब भिड़ के दम पर। मेरी फैमिली थी यहां और क्या क्या कहा था। … हम फिर आएंगे, आते रहेंगे.. आज के बाद किसी ने यहां भिड़ को धौंस दिखाई तो इस बार घायल करके छोड़ा है, शायद अगली बार मै तुम जैसा ना बन जाऊं, और जान से मारना ना शुरू कार दूं। तुम्हारे 4 बॉस ऊपरवाले को प्यारे हो गए, और किसी को यदि यहां का बॉस बनना हो तो मुझसे मिल लेना। सब बॉस को एक ही जगह पहुंचा दूंगा।"… अपस्यु वहां बीच में खड़ा होकर अपनी बात कहा, जबतक एसपी भी पहुंच गया।
एसपी आते ही खून में नहाए अपस्यु को गले से लगाकर रोने लगा। पीछे सीआरपीएफ का हेड था जो अपने कुछ लोगो के साथ आया था तो कुछ और करने, लेकिन रुक गया। एसपी अशोक बंसल रोते हुए उसे धन्यवाद कहने लगा।
अपस्यु उसे खुद से अलग करते… "सर इतना दिल में दर्द था तो एक बार अपनी कहानी हमसे तो कहकर देखते। बस एक रिक्वेस्ट है 5 से 7 के बीच मै अपनी कहानी आज सारी दुनिया को टीवी में बताऊंगा, प्लीज उसके बाद मुझे अरेस्ट करना। नाम अपस्यु रघुवंशी। पता राठौड़ मेंशन। शाम 7 बजे मै आपको ऑडिटोरियम में मिल जाऊंगा। फिर आप आराम से अरेस्ट केर लेना।"
अशोक:- हम्मम ! मै भी तुम्हारी कहानी देखूंगा आज शाम 5 बजे से, उसके बाद ही कोई कार्यवाही होगी। मै रास्ता साफ करवाता हूं, तुम अपनी फैमिली को लेकर निकलो।
अपस्यु:- रहने दीजिए सर… ब्वॉयज एंड गर्ल्स 2 मिनट में रास्ता क्लियर चाहिए। सर केवल और केवल मेरा नाम आना चाहिए।
आरव अपना मास्क हटाते.. अपस्यु के गले लगा… "नहीं सर पुरा ग्रुप सरेंडर करेगा, ऑडिटोरियम में ही हम सब मिलेंगे। लिखिए 16 कुल लोग थे।
ऐमी अपना मास्क उतारती… "लेडीज फर्स्ट होगी ना, पहले लड़कियां अरेस्ट होगी। सर टोटल 24 लोग लिखिए और हां घायलों को ले जाइए जल्दी वरना अभी 4 मर्डर है बाद ने पता ना कितने हो जाए।
अशोक:- तुम लोग निकलो अभी मीडिया आ गई तो बहुत प्रॉब्लम होगी। अजिंक्य केवल एम्बुलेंस आना चाहिए और कोई भी हस्पताल कर्मचारी कोई स्टेटमेंट ना दे। हर एम्बुलेंस में फोर्स रहेगी।
सीआरपीएफ हेड:- सर हम कुछ एडिशनल हेल्प कर दे।
अशोक:- मेहरबानी होगी सर। इन्हे बस घायल किया है, किसी को जान से नहीं मारा है, शिवाय 4 लोगों को, जिन्हे हमने ही कहा था मारने। ये सब प्रोफेशनल्स है और उन्हें पता था हथियार कहां चलना है। 24 लोगों ने इन कुत्तों को उनके घर में घुसकर औक़द दिखाई है। हमारी इज्जत और अपने परिवार के लिए लड़े, ना लड़ते तो 8000 की भीड़ ने 24 को मारा होता, प्लस उनकी फैमिली को, केस भी रजिस्टर नहीं हो पाता। लेकिन महज 24 लोगों ने ये कर दिया, और हम खुद की रक्षा करने वालों को ही पकड़ रहे।
तभी अजिंक्य ने उन्हें ट्रिपल स्टोरी की कहानी बताई। सब लोग वहां पहुंचे और जमीन पर बर्बाद हुए हथियार देखने लगे।… "ये सब तो लेटेस्ट वैपन है और ये लोग यहां क्या कर रहे है। ये सब तो हाई ट्रेंड आतंकवादी है।.. सीआरपीएफ वालो ने 1,2 को पहचानते हुए कहा।
अशोक मुस्कुराया और अजिंक्य के कंधे कर हाथ रखते… "किसी भी मदरचोद को आधे घंटे तक कोई मेडिकल हेल्प मत दो, और मीडिया के अहम चैनल को बुलवाया जाए। बाहर बरियर 7 बजे तक घिरा रहेगा, यहां एक टीवी लगवाओ और हम भी उस लड़के की कहानी देखेंगे….
दोनो हाथ में 2 छोटी सी कुल्हाड़ी और दौड़ते वक़्त ना तो इस बात की चिंता की कुछ ही दूरी पर दीवार है और वो दीवार से टकरा सकता है। हवा को मेहसूस करने की अद्भुत क्षमता और खुद के लचीले पन की ताकत के साथ वो आवाज़ को ओर तेजी से दौड़ लगा रहा था।
जहां से गुजरा फिर तो हर किसी को मेहसूस हुआ कि कोई तेजी मै उसके करीब से गुजरा, और तेज चींख के साथ अपने बहते खून को रोकने की कोशिश में जुट जाता। कोई अपने जांघ पकड़े है तो कोई अपने कंधे।
जितना अफरा तफरी का माहौल उतना ही अपस्यु को मदद मिल रहा था। हर कोई बस चींख रहे लोगों की आवाज सुनकर, घुएं में इधर उधर देखने की नाकाम कोशिश कर रहे थे और महों उनके अंदर भय सा महसूस करवा रहा था। अपस्यु वहां मौजूद हर किसी को अंधेरे का भय करवा रहा था और लोग चिल्ला चिल्ला कर बेहोश हुए जा रहे थे। इतने में नीचे का धुआं हल्का सा छंटा और भय में खड़े किडनैपर्स को थोड़ा थोड़ा दिखना शुरू हो चुका था।
कांपते 6 लोग और हाथ में पकड़ा रायफल हल्का-हल्का हिलता, खून में नहाया एक लड़का अपनी कुल्हाड़ी लिए बीच में खड़ा, बस अपनी नजरे चारो ओर दौरा रहा था। राइफल का प्वाइंट अपस्यु के ओर और अपस्यु अपने लोहे कि कुल्हाड़ी अपने कमर के ऊपर सामने के ओर किए श्वांस अपने अंदर भर रहा था और उन 6 रायफल को देख रहा था। गोलियां फायर हुई और अपस्यु अपने कुल्हाड़ी को हवा में तेज लहराते, अपने बदन को हवा की भांति ऐसे लहरा रहा था कि सारी गोलियां कुल्हाड़ी से टकराकर दाएं बाएं जाने लगी, किन्तु एक भी उसके बदन को छू ना सकी। देखते ही देखते इनकी मैगज़ीन खत्म हो गई लेकिन एक भी गोली अपस्यु को छू नहीं पाई।
"उफ्फ ! क्या जलवा दिखाया है बेबी"… सम्मान और उत्साह में जोड़दार विस्सेल साउंड सबने दिया। ऐमी के इशारे पर एक बार और बाहर धुएं कि चादर बाना दी गई थी और ऐमी के साथ सभी वीरदोयी, बिल्डिंग के अंदर का धुआं छंटते ही पहुंचे थे। जैसे ही सब दरवाजे से अंदर घुस, अपस्यु का हवा में लहराकर अपने कुल्हाड़ी को अपने बदन के चारो ओर 360⁰ में लहराना और 6 रायफल के मैगज़ीन कि गोली को इस कदर रोकते देखकर सब जोश के साथ ये कारनामा देख रहे थे।
अपस्यु का एक्शन और स्टंट जैसे ही अल्प विराम लिया, उसके बाद तो जैसे उस ट्रिपल स्टोरी बिल्डिंग में कहर बरस रहा था। पहले फ्लोर के 6 लोगो को नीचे जमीन पर धराशाही करने के बाद हर फ्लोर पर बस खून ही खून और नीचे परे घायल लोग, जिनकी चींख गली के किनारे तक गूंज रही थी।
अपस्यु नीचे के फ्लोर पर 2 और कुकर्मी को ढूंढने लगा जिसे मारने का हुक्म मिला था। कुछ ही देर में वो दोनो भी मिल गए। दर्द से करारहते हुए दीवार से टिककर बैठे थे। दोनो के पास जैस ही अपस्यु पहुंचा, दोनो उसके पाऊं में गिरते.. "हमारी जान मत लो, तुम जो कहोगे मै करूंगा।"
"रिजवान, खलील, अमरेन्द्र, नीरज, विश्वेश्वर".. अपस्यु उनके पास बैठकर नाम लेना शुरू किया और ये लोग "माफ कर दो, माफ केर दो" की गुहार लगाने लगे … "अक्षत, राजू, सलीम, नदीम, पारेख, मोहन, गुलाब, मोहित, सुरेन्द्र, आनंद, अखिल, नितिन, अस्लाम, मुकेश और 2 महीने पहले तुम्हारा हाथो मरा साजिद।"…. "हमे माफ कर दो।"..
"सॉरी दोस्त तुम्हारा टिकिट कट चुका है।".. अपस्यु बैठकर उनके मुख्य गुनाह याद करवाते, उल्टे हाथ से एक कुल्हाड़ी मुख्तार के नाके के बीचोबीच मार कर उसके चेहरे को आधा चिर दिया। ये देखकर अनवर का हार्ट फेल कर गया और वो अपना सिना पकड़े तेज दर्द से चिंख्ने लगा। अपस्यु उसके चेहरे को भी बीच से चीरते हुए उसके प्राण को शरीर से आजाद कर दिया।
अबतक बाकी के लोग भी उस बिल्डिंग का पुरा मामला साफ करके, उनके गन पर कुल्हाड़ी मारकर बर्बाद कार चुके थे। सभी तेजी के साथ नीचे अाए। 2 बजकर 25 मिनट, गड़ी गली के दूसरे ओर से बाहर निकालने के लिए तैयार थी। काया, आरव और स्वास्तिका भी अपना बुलेट प्रूफ जैकेट पहन कर अपने हाथ में कुल्हाड़ी लिए कार के बाहर खड़े हुए थे, बाकी के लोग 3 स्टोरी बिल्डिंग को लगभग साफ कर चुके थे और धुवां छंट चुका था। लोग चिल्लाते हुए दौड़ लगा दिए। कुछ लोग फायरिंग करते जा रहे थे तो कुछ लोग अपने हाथ में धारदार हथियार लिए उनके ओर दौड़े…
"जहां मारो अंग भंग हो, तरपे और जिंदगी छटपटाहट में गुजरे की डेविल ग्रुप से पंगे क्यों लिए।".. आरव दहाड़ा..
"बड़े शौक से भाई, आज इनके भिड़ की ताकत भी देखते है, यही वो लोग है ना जिन्होंने हमे कहा था कि नंगा घुमाएंगे तो भी यहां कोई पूछने वाला नहीं। आज हम पूछ लेते है, और देखते है किसकी मां ने जाना है वो पुत जो जवाब दे दे।".. सवास्टिका की ललकार..
"चलो फिर इनको आज काल के दर्शन करवाए और कल आकर पूछा जाए क्या भाई हमे नंगा नहीं घुनाएगा क्या।".. काया के आखरी शब्द और तीनों शान से कदम से कदम बढ़ाते चले। सामने से आती भिड़ में घिरे तीनों ने, साथ कुल्हाड़ी उठा कर मारा, आगे खड़े लोग के कंधे पर कुल्हाड़ी लगा और फिर सीने पर लात मारकर उन्हें पीछे धकेलते… "सिर्फ मजबूत दिलवाले ही आगे आओ।"..
कुल्हाड़ी पेट की लाइन से दाएं से बाएं चली, खून के फ़व्वारा छूटा, सामने खड़े लोग की चीख हलख़ से निकली और सीने पर लात खाकर पीछे जाकर गिरे। इसी के साथ उन तीनों के साथ 10 वीरदोयी आकर खड़े हो गए। गली के दूसरे ओर अपस्यु और ऐमी के साथ 10 वीरदोयी खड़ा था और फिर शुरू हुआ भिड़ पर काल बरसना।
सटाक सटाक सटाक.. कुल्हाड़ी चलनी अब तेज सी हो गई थी, किसी के पेट कट रहे थे तो किसी के कंधे। चींख ऐसी की आज से पहले कभी एक साथ इतने लोगों की चींख कभी किसी ने ना सुनी हो। भिड़ इतनी की आगे खड़े लोग चींख सुनकर मुत रहे थे लेकिन पीछे हटने की जगह नहीं। खून ही खून चारो ओर और पुलिस को बुलाने के लिए जब फोन कर रहे थे, तब कोई कॉल नहीं लग रहा।
तकरीबन 400 पुलिस वाले उस गली के दोनो ओर खड़े थे। चीख और डर वो लोग गली के छोड़ तक मेहसूस कर रहे थे और हर पुलिस वाला जैसे अपने आप में कुछ अच्छा मेहसूस कर रहा था। गली के छोड़ को ब्लॉक किए हर पुलिस वाले के जेहन में, इस गली के पास खड़े होकर सुने वो अभद्र गालियां और लोगों के बीच खाए थप्पड़ याद आ रहे थे, जो यहां के लोग इन्हे दिया करते थे। आज अंदर से कुछ अच्छा मेहसूस कर रहे थे।
कुछ फरियादी गली के बाहर दौरे, पुलिस वालो के पाऊं पकड़े और मदद की गुहार लगाई। कुछ पुलिस वाले अपने चेहरे पर छलके खुशी के आशु को पोछा और बाहर निकाल रहे लोगो पर डंडा चार्ज करना शुरू कर दिया। पुलिस वालों के पास भी तो दिल था, उनकी भी तो भावनाएं रही होंगी। आत्मसम्मान जहां पर खोया था उस खोए आत्मसम्मान की आह निकल रही थी।
दोनो ओर से वहां मौजूद हर ऑफिसर ने लाठी चार्ज का हुकुम दे दिया। गली के दोनो ओर से पुलिस वालों का बेरहम डंडा चल रहा था। हर पुलिसवाला इतना ही का रहा था, "अब आ जा जिसे आना है।"
आज इस गली में कहर बरस रहा था। वीरदोयी और डेविल ग्रुप की लाइन टूट चुकी थी। हर कोई भिड़ में घुसा था, अपनी कुल्हाड़ी कंधे पेट और पीठ पर चलाते हुए बस सबको धराशाही कर रहा था। चिंखे इतनी तेज की आस पास के इलाके तक गूंज जा रही थी। अजिंक्य ने एक दिन पहले ही, उस पुलिस ऑफिसर के तार छेड़े थे, जिसको इस गली में नंगा करके घुमाया गया था और वो कितना बेबस है इस बात का एहसास करवाया गया था। दिल्ली के इस इलाके के एसपी को। खुन्नस खाया एसपी मामला सुरू होते ही 1 किलोमीटर का दायरा घेर चुका था। अपने 800 पुलिस वालों को बुला चुका था।
मीडिया को उसने घुसने नहीं दिया। पॉलिटीशियन घुसने कि कोशिश कर रहे थे उनसे इतना ही कहा गया, अंदर सेंट्रल होम मिनिस्टर का बेटा फसा है। कारवाही होने तक कोई अंदर नहीं जाएगा। एडिशनल सीआरपीएफ की 4 टुकड़ी और पहुंच गई, उसके हेड एसपी से मिला। एसपी अपने नम आंखो से यहां का दास्तां बताया और फिर अंदर क्या हो रहा है उसका ब्योरा। अंत में उसने इतना ही कहा.. "आपके ऊपर है, आपको क्या करना है। हम तो आत्मसम्मान गवाए बैठे है।"
वो हेड जैसे अपने किसी मजबूर साथी का हाथ थाम रहा हो। सबको लाइन से खड़ा किया और आदेश दिया, जान बचाकर लोगों तोड़ते रहो। उन्हें तबतक तोड़ो जबतक इनके हौसले ना टूट जाए। सब लोग दूसरे और तीसरे गली से घुस गए और अब तो चारो ओर से कहर बरसना शुरू हो चुका था जिसमें रहम को कोई गुंजाइश नहीं थी। लोग भागने को आ रहे थे लेकिन अब हर भागने वाली गली में फोर्स थी, और सबके हाथ पाऊं तोड़ रही थी।
ऐसे माहौल में क्या हो जब 800 पुलिस वाले, जो पहले से यहां के लोगों के कारण आत्मसम्मान खोया सा मेहसूस करते हो, 200 सीआरपीएफ के जवान जो अपने एक मजबूर साथी की अर्जी सुनी हो, ऐसा लगा जैसे उसके बटालियन के कई साथियों को फक्र की मौत नहीं दी गई है बल्कि उसे छल करके मार दिया हो। इधर बेरहम वीरदोयी जो अकेला 1 बटालियन के बराबर थे, यहां वो 20 की संख्या में थे और फिर आक्रोशित डेविल ग्रुप, जिसके परिवार के लोगों को भी इस इलाके में जलील किया गया, अपनी ताकत का नमूना पेश किया गया था।
पागलों की तरह चिंख्ते हुए अपस्यु, भिड़ में घुसकर अपने पूरे बदन को हवा में झुककर गोल-गोल लहराते, कुल्हाड़ी के वार पर वार किए जा रहा था। हर किसी के ऊपर खून के धब्बे लगे हुए थे और सभी खून में लथपथ। तकरीबन 4000 लोग इनके हमले से घायल होकर चारो ओर गली में दर्द से चिल्ला रहे थे। भिड़ गली से बाहर भागने कि कोशिश में थी और भागने की हर जगह से जब फोर्स इन्हे अंदर धकेल रही थी, तब वीरदोयी और अपस्यु के हाथो और लोग शिकार होने आ रहे थे..
2 बजकर 20 मिनट से लेकर 3 बजकर 20 मिनट, पूरे 1 घंटे इनकी कुल्हाड़ी चलती रही। बाहर भाग रही भीड़ को जब फोर्स खदेड़ती हुई अंदर पहुंची, पहली बार फोर्स को गली के अंदर का नजारा यहां से वहां तक दिखा… इस बार पुलिस वालों और सीआरपीएफ के जवानों के चौंकने की बारी थी। सबको जैसे सांप सूंघ गया हो और स्तब्ध खड़े होकर गली में बिखरे लोगों के कटे फटे घायल शरीर को और खून से लाल हो चुके गली को देख पा रहे थे।
2 पुलिस वाला और 2 सीआरपीएफ का जवान भागते हुए एसपी और सीआरपीएफ हेड के पास पहुंचा। अंदर जो उसने देखा, वो आंखो देख सुनाया। एसपी, अजिंक्य को लेकर अंदर भगा। फोर्स के भिड़ को एक किनारे करते, उसने सबको रुकने कहा। अजिंक्य वहां की हालत देखकर दूर से ही चिल्लाया अपस्यु नहीं रुक जाओ। रुक जाओ।
अपस्यु के कानो में जैसे ही आवाज़ परी उसने अपनी कुल्हाड़ी रोकी, तेजी से चिल्लाया… "वैल डॉन डेविल्स .. अब रुक जाओ।".. जैसे ही सब रुके अपस्यु ने अपना मास्क उतरा…
"बहुत नंगा नाचे इस गली में तुम सब भिड़ के दम पर। मेरी फैमिली थी यहां और क्या क्या कहा था। … हम फिर आएंगे, आते रहेंगे.. आज के बाद किसी ने यहां भिड़ को धौंस दिखाई तो इस बार घायल करके छोड़ा है, शायद अगली बार मै तुम जैसा ना बन जाऊं, और जान से मारना ना शुरू कार दूं। तुम्हारे 4 बॉस ऊपरवाले को प्यारे हो गए, और किसी को यदि यहां का बॉस बनना हो तो मुझसे मिल लेना। सब बॉस को एक ही जगह पहुंचा दूंगा।"… अपस्यु वहां बीच में खड़ा होकर अपनी बात कहा, जबतक एसपी भी पहुंच गया।
एसपी आते ही खून में नहाए अपस्यु को गले से लगाकर रोने लगा। पीछे सीआरपीएफ का हेड था जो अपने कुछ लोगो के साथ आया था तो कुछ और करने, लेकिन रुक गया। एसपी अशोक बंसल रोते हुए उसे धन्यवाद कहने लगा।
अपस्यु उसे खुद से अलग करते… "सर इतना दिल में दर्द था तो एक बार अपनी कहानी हमसे तो कहकर देखते। बस एक रिक्वेस्ट है 5 से 7 के बीच मै अपनी कहानी आज सारी दुनिया को टीवी में बताऊंगा, प्लीज उसके बाद मुझे अरेस्ट करना। नाम अपस्यु रघुवंशी। पता राठौड़ मेंशन। शाम 7 बजे मै आपको ऑडिटोरियम में मिल जाऊंगा। फिर आप आराम से अरेस्ट केर लेना।"
अशोक:- हम्मम ! मै भी तुम्हारी कहानी देखूंगा आज शाम 5 बजे से, उसके बाद ही कोई कार्यवाही होगी। मै रास्ता साफ करवाता हूं, तुम अपनी फैमिली को लेकर निकलो।
अपस्यु:- रहने दीजिए सर… ब्वॉयज एंड गर्ल्स 2 मिनट में रास्ता क्लियर चाहिए। सर केवल और केवल मेरा नाम आना चाहिए।
आरव अपना मास्क हटाते.. अपस्यु के गले लगा… "नहीं सर पुरा ग्रुप सरेंडर करेगा, ऑडिटोरियम में ही हम सब मिलेंगे। लिखिए 16 कुल लोग थे।
ऐमी अपना मास्क उतारती… "लेडीज फर्स्ट होगी ना, पहले लड़कियां अरेस्ट होगी। सर टोटल 24 लोग लिखिए और हां घायलों को ले जाइए जल्दी वरना अभी 4 मर्डर है बाद ने पता ना कितने हो जाए।
अशोक:- तुम लोग निकलो अभी मीडिया आ गई तो बहुत प्रॉब्लम होगी। अजिंक्य केवल एम्बुलेंस आना चाहिए और कोई भी हस्पताल कर्मचारी कोई स्टेटमेंट ना दे। हर एम्बुलेंस में फोर्स रहेगी।
सीआरपीएफ हेड:- सर हम कुछ एडिशनल हेल्प कर दे।
अशोक:- मेहरबानी होगी सर। इन्हे बस घायल किया है, किसी को जान से नहीं मारा है, शिवाय 4 लोगों को, जिन्हे हमने ही कहा था मारने। ये सब प्रोफेशनल्स है और उन्हें पता था हथियार कहां चलना है। 24 लोगों ने इन कुत्तों को उनके घर में घुसकर औक़द दिखाई है। हमारी इज्जत और अपने परिवार के लिए लड़े, ना लड़ते तो 8000 की भीड़ ने 24 को मारा होता, प्लस उनकी फैमिली को, केस भी रजिस्टर नहीं हो पाता। लेकिन महज 24 लोगों ने ये कर दिया, और हम खुद की रक्षा करने वालों को ही पकड़ रहे।
तभी अजिंक्य ने उन्हें ट्रिपल स्टोरी की कहानी बताई। सब लोग वहां पहुंचे और जमीन पर बर्बाद हुए हथियार देखने लगे।… "ये सब तो लेटेस्ट वैपन है और ये लोग यहां क्या कर रहे है। ये सब तो हाई ट्रेंड आतंकवादी है।.. सीआरपीएफ वालो ने 1,2 को पहचानते हुए कहा।
अशोक मुस्कुराया और अजिंक्य के कंधे कर हाथ रखते… "किसी भी मदरचोद को आधे घंटे तक कोई मेडिकल हेल्प मत दो, और मीडिया के अहम चैनल को बुलवाया जाए। बाहर बरियर 7 बजे तक घिरा रहेगा, यहां एक टीवी लगवाओ और हम भी उस लड़के की कहानी देखेंगे….