Romance भंवर (पूर्ण) - Page 20 - SexBaba
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Romance भंवर (पूर्ण)

Update:- 170 (B)

दोनो हाथ में 2 छोटी सी कुल्हाड़ी और दौड़ते वक़्त ना तो इस बात की चिंता की कुछ ही दूरी पर दीवार है और वो दीवार से टकरा सकता है। हवा को मेहसूस करने की अद्भुत क्षमता और खुद के लचीले पन की ताकत के साथ वो आवाज़ को ओर तेजी से दौड़ लगा रहा था।

जहां से गुजरा फिर तो हर किसी को मेहसूस हुआ कि कोई तेजी मै उसके करीब से गुजरा, और तेज चींख के साथ अपने बहते खून को रोकने की कोशिश में जुट जाता। कोई अपने जांघ पकड़े है तो कोई अपने कंधे।

जितना अफरा तफरी का माहौल उतना ही अपस्यु को मदद मिल रहा था। हर कोई बस चींख रहे लोगों की आवाज सुनकर, घुएं में इधर उधर देखने की नाकाम कोशिश कर रहे थे और महों उनके अंदर भय सा महसूस करवा रहा था। अपस्यु वहां मौजूद हर किसी को अंधेरे का भय करवा रहा था और लोग चिल्ला चिल्ला कर बेहोश हुए जा रहे थे। इतने में नीचे का धुआं हल्का सा छंटा और भय में खड़े किडनैपर्स को थोड़ा थोड़ा दिखना शुरू हो चुका था।

कांपते 6 लोग और हाथ में पकड़ा रायफल हल्का-हल्का हिलता, खून में नहाया एक लड़का अपनी कुल्हाड़ी लिए बीच में खड़ा, बस अपनी नजरे चारो ओर दौरा रहा था। राइफल का प्वाइंट अपस्यु के ओर और अपस्यु अपने लोहे कि कुल्हाड़ी अपने कमर के ऊपर सामने के ओर किए श्वांस अपने अंदर भर रहा था और उन 6 रायफल को देख रहा था। गोलियां फायर हुई और अपस्यु अपने कुल्हाड़ी को हवा में तेज लहराते, अपने बदन को हवा की भांति ऐसे लहरा रहा था कि सारी गोलियां कुल्हाड़ी से टकराकर दाएं बाएं जाने लगी, किन्तु एक भी उसके बदन को छू ना सकी। देखते ही देखते इनकी मैगज़ीन खत्म हो गई लेकिन एक भी गोली अपस्यु को छू नहीं पाई।

"उफ्फ ! क्या जलवा दिखाया है बेबी"… सम्मान और उत्साह में जोड़दार विस्सेल साउंड सबने दिया। ऐमी के इशारे पर एक बार और बाहर धुएं कि चादर बाना दी गई थी और ऐमी के साथ सभी वीरदोयी, बिल्डिंग के अंदर का धुआं छंटते ही पहुंचे थे। जैसे ही सब दरवाजे से अंदर घुस, अपस्यु का हवा में लहराकर अपने कुल्हाड़ी को अपने बदन के चारो ओर 360⁰ में लहराना और 6 रायफल के मैगज़ीन कि गोली को इस कदर रोकते देखकर सब जोश के साथ ये कारनामा देख रहे थे।

अपस्यु का एक्शन और स्टंट जैसे ही अल्प विराम लिया, उसके बाद तो जैसे उस ट्रिपल स्टोरी बिल्डिंग में कहर बरस रहा था। पहले फ्लोर के 6 लोगो को नीचे जमीन पर धराशाही करने के बाद हर फ्लोर पर बस खून ही खून और नीचे परे घायल लोग, जिनकी चींख गली के किनारे तक गूंज रही थी।

अपस्यु नीचे के फ्लोर पर 2 और कुकर्मी को ढूंढने लगा जिसे मारने का हुक्म मिला था। कुछ ही देर में वो दोनो भी मिल गए। दर्द से करारहते हुए दीवार से टिककर बैठे थे। दोनो के पास जैस ही अपस्यु पहुंचा, दोनो उसके पाऊं में गिरते.. "हमारी जान मत लो, तुम जो कहोगे मै करूंगा।"

"रिजवान, खलील, अमरेन्द्र, नीरज, विश्वेश्वर".. अपस्यु उनके पास बैठकर नाम लेना शुरू किया और ये लोग "माफ कर दो, माफ केर दो" की गुहार लगाने लगे … "अक्षत, राजू, सलीम, नदीम, पारेख, मोहन, गुलाब, मोहित, सुरेन्द्र, आनंद, अखिल, नितिन, अस्लाम, मुकेश और 2 महीने पहले तुम्हारा हाथो मरा साजिद।"…. "हमे माफ कर दो।"..

"सॉरी दोस्त तुम्हारा टिकिट कट चुका है।".. अपस्यु बैठकर उनके मुख्य गुनाह याद करवाते, उल्टे हाथ से एक कुल्हाड़ी मुख्तार के नाके के बीचोबीच मार कर उसके चेहरे को आधा चिर दिया। ये देखकर अनवर का हार्ट फेल कर गया और वो अपना सिना पकड़े तेज दर्द से चिंख्ने लगा। अपस्यु उसके चेहरे को भी बीच से चीरते हुए उसके प्राण को शरीर से आजाद कर दिया।

अबतक बाकी के लोग भी उस बिल्डिंग का पुरा मामला साफ करके, उनके गन पर कुल्हाड़ी मारकर बर्बाद कार चुके थे। सभी तेजी के साथ नीचे अाए। 2 बजकर 25 मिनट, गड़ी गली के दूसरे ओर से बाहर निकालने के लिए तैयार थी। काया, आरव और स्वास्तिका भी अपना बुलेट प्रूफ जैकेट पहन कर अपने हाथ में कुल्हाड़ी लिए कार के बाहर खड़े हुए थे, बाकी के लोग 3 स्टोरी बिल्डिंग को लगभग साफ कर चुके थे और धुवां छंट चुका था। लोग चिल्लाते हुए दौड़ लगा दिए। कुछ लोग फायरिंग करते जा रहे थे तो कुछ लोग अपने हाथ में धारदार हथियार लिए उनके ओर दौड़े…

"जहां मारो अंग भंग हो, तरपे और जिंदगी छटपटाहट में गुजरे की डेविल ग्रुप से पंगे क्यों लिए।".. आरव दहाड़ा..

"बड़े शौक से भाई, आज इनके भिड़ की ताकत भी देखते है, यही वो लोग है ना जिन्होंने हमे कहा था कि नंगा घुमाएंगे तो भी यहां कोई पूछने वाला नहीं। आज हम पूछ लेते है, और देखते है किसकी मां ने जाना है वो पुत जो जवाब दे दे।".. सवास्टिका की ललकार..

"चलो फिर इनको आज काल के दर्शन करवाए और कल आकर पूछा जाए क्या भाई हमे नंगा नहीं घुनाएगा क्या।".. काया के आखरी शब्द और तीनों शान से कदम से कदम बढ़ाते चले। सामने से आती भिड़ में घिरे तीनों ने, साथ कुल्हाड़ी उठा कर मारा, आगे खड़े लोग के कंधे पर कुल्हाड़ी लगा और फिर सीने पर लात मारकर उन्हें पीछे धकेलते… "सिर्फ मजबूत दिलवाले ही आगे आओ।"..

कुल्हाड़ी पेट की लाइन से दाएं से बाएं चली, खून के फ़व्वारा छूटा, सामने खड़े लोग की चीख हलख़ से निकली और सीने पर लात खाकर पीछे जाकर गिरे। इसी के साथ उन तीनों के साथ 10 वीरदोयी आकर खड़े हो गए। गली के दूसरे ओर अपस्यु और ऐमी के साथ 10 वीरदोयी खड़ा था और फिर शुरू हुआ भिड़ पर काल बरसना।

सटाक सटाक सटाक.. कुल्हाड़ी चलनी अब तेज सी हो गई थी, किसी के पेट कट रहे थे तो किसी के कंधे। चींख ऐसी की आज से पहले कभी एक साथ इतने लोगों की चींख कभी किसी ने ना सुनी हो। भिड़ इतनी की आगे खड़े लोग चींख सुनकर मुत रहे थे लेकिन पीछे हटने की जगह नहीं। खून ही खून चारो ओर और पुलिस को बुलाने के लिए जब फोन कर रहे थे, तब कोई कॉल नहीं लग रहा।

तकरीबन 400 पुलिस वाले उस गली के दोनो ओर खड़े थे। चीख और डर वो लोग गली के छोड़ तक मेहसूस कर रहे थे और हर पुलिस वाला जैसे अपने आप में कुछ अच्छा मेहसूस कर रहा था। गली के छोड़ को ब्लॉक किए हर पुलिस वाले के जेहन में, इस गली के पास खड़े होकर सुने वो अभद्र गालियां और लोगों के बीच खाए थप्पड़ याद आ रहे थे, जो यहां के लोग इन्हे दिया करते थे। आज अंदर से कुछ अच्छा मेहसूस कर रहे थे।

कुछ फरियादी गली के बाहर दौरे, पुलिस वालो के पाऊं पकड़े और मदद की गुहार लगाई। कुछ पुलिस वाले अपने चेहरे पर छलके खुशी के आशु को पोछा और बाहर निकाल रहे लोगो पर डंडा चार्ज करना शुरू कर दिया। पुलिस वालों के पास भी तो दिल था, उनकी भी तो भावनाएं रही होंगी। आत्मसम्मान जहां पर खोया था उस खोए आत्मसम्मान की आह निकल रही थी।

दोनो ओर से वहां मौजूद हर ऑफिसर ने लाठी चार्ज का हुकुम दे दिया। गली के दोनो ओर से पुलिस वालों का बेरहम डंडा चल रहा था। हर पुलिसवाला इतना ही का रहा था, "अब आ जा जिसे आना है।"

आज इस गली में कहर बरस रहा था। वीरदोयी और डेविल ग्रुप की लाइन टूट चुकी थी। हर कोई भिड़ में घुसा था, अपनी कुल्हाड़ी कंधे पेट और पीठ पर चलाते हुए बस सबको धराशाही कर रहा था। चिंखे इतनी तेज की आस पास के इलाके तक गूंज जा रही थी। अजिंक्य ने एक दिन पहले ही, उस पुलिस ऑफिसर के तार छेड़े थे, जिसको इस गली में नंगा करके घुमाया गया था और वो कितना बेबस है इस बात का एहसास करवाया गया था। दिल्ली के इस इलाके के एसपी को। खुन्नस खाया एसपी मामला सुरू होते ही 1 किलोमीटर का दायरा घेर चुका था। अपने 800 पुलिस वालों को बुला चुका था।

मीडिया को उसने घुसने नहीं दिया। पॉलिटीशियन घुसने कि कोशिश कर रहे थे उनसे इतना ही कहा गया, अंदर सेंट्रल होम मिनिस्टर का बेटा फसा है। कारवाही होने तक कोई अंदर नहीं जाएगा। एडिशनल सीआरपीएफ की 4 टुकड़ी और पहुंच गई, उसके हेड एसपी से मिला। एसपी अपने नम आंखो से यहां का दास्तां बताया और फिर अंदर क्या हो रहा है उसका ब्योरा। अंत में उसने इतना ही कहा.. "आपके ऊपर है, आपको क्या करना है। हम तो आत्मसम्मान गवाए बैठे है।"

वो हेड जैसे अपने किसी मजबूर साथी का हाथ थाम रहा हो। सबको लाइन से खड़ा किया और आदेश दिया, जान बचाकर लोगों तोड़ते रहो। उन्हें तबतक तोड़ो जबतक इनके हौसले ना टूट जाए। सब लोग दूसरे और तीसरे गली से घुस गए और अब तो चारो ओर से कहर बरसना शुरू हो चुका था जिसमें रहम को कोई गुंजाइश नहीं थी। लोग भागने को आ रहे थे लेकिन अब हर भागने वाली गली में फोर्स थी, और सबके हाथ पाऊं तोड़ रही थी।

ऐसे माहौल में क्या हो जब 800 पुलिस वाले, जो पहले से यहां के लोगों के कारण आत्मसम्मान खोया सा मेहसूस करते हो, 200 सीआरपीएफ के जवान जो अपने एक मजबूर साथी की अर्जी सुनी हो, ऐसा लगा जैसे उसके बटालियन के कई साथियों को फक्र की मौत नहीं दी गई है बल्कि उसे छल करके मार दिया हो। इधर बेरहम वीरदोयी जो अकेला 1 बटालियन के बराबर थे, यहां वो 20 की संख्या में थे और फिर आक्रोशित डेविल ग्रुप, जिसके परिवार के लोगों को भी इस इलाके में जलील किया गया, अपनी ताकत का नमूना पेश किया गया था।

पागलों की तरह चिंख्ते हुए अपस्यु, भिड़ में घुसकर अपने पूरे बदन को हवा में झुककर गोल-गोल लहराते, कुल्हाड़ी के वार पर वार किए जा रहा था। हर किसी के ऊपर खून के धब्बे लगे हुए थे और सभी खून में लथपथ। तकरीबन 4000 लोग इनके हमले से घायल होकर चारो ओर गली में दर्द से चिल्ला रहे थे। भिड़ गली से बाहर भागने कि कोशिश में थी और भागने की हर जगह से जब फोर्स इन्हे अंदर धकेल रही थी, तब वीरदोयी और अपस्यु के हाथो और लोग शिकार होने आ रहे थे..

2 बजकर 20 मिनट से लेकर 3 बजकर 20 मिनट, पूरे 1 घंटे इनकी कुल्हाड़ी चलती रही। बाहर भाग रही भीड़ को जब फोर्स खदेड़ती हुई अंदर पहुंची, पहली बार फोर्स को गली के अंदर का नजारा यहां से वहां तक दिखा… इस बार पुलिस वालों और सीआरपीएफ के जवानों के चौंकने की बारी थी। सबको जैसे सांप सूंघ गया हो और स्तब्ध खड़े होकर गली में बिखरे लोगों के कटे फटे घायल शरीर को और खून से लाल हो चुके गली को देख पा रहे थे।

2 पुलिस वाला और 2 सीआरपीएफ का जवान भागते हुए एसपी और सीआरपीएफ हेड के पास पहुंचा। अंदर जो उसने देखा, वो आंखो देख सुनाया। एसपी, अजिंक्य को लेकर अंदर भगा। फोर्स के भिड़ को एक किनारे करते, उसने सबको रुकने कहा। अजिंक्य वहां की हालत देखकर दूर से ही चिल्लाया अपस्यु नहीं रुक जाओ। रुक जाओ।

अपस्यु के कानो में जैसे ही आवाज़ परी उसने अपनी कुल्हाड़ी रोकी, तेजी से चिल्लाया… "वैल डॉन डेविल्स .. अब रुक जाओ।".. जैसे ही सब रुके अपस्यु ने अपना मास्क उतरा…

"बहुत नंगा नाचे इस गली में तुम सब भिड़ के दम पर। मेरी फैमिली थी यहां और क्या क्या कहा था। … हम फिर आएंगे, आते रहेंगे.. आज के बाद किसी ने यहां भिड़ को धौंस दिखाई तो इस बार घायल करके छोड़ा है, शायद अगली बार मै तुम जैसा ना बन जाऊं, और जान से मारना ना शुरू कार दूं। तुम्हारे 4 बॉस ऊपरवाले को प्यारे हो गए, और किसी को यदि यहां का बॉस बनना हो तो मुझसे मिल लेना। सब बॉस को एक ही जगह पहुंचा दूंगा।"… अपस्यु वहां बीच में खड़ा होकर अपनी बात कहा, जबतक एसपी भी पहुंच गया।

एसपी आते ही खून में नहाए अपस्यु को गले से लगाकर रोने लगा। पीछे सीआरपीएफ का हेड था जो अपने कुछ लोगो के साथ आया था तो कुछ और करने, लेकिन रुक गया। एसपी अशोक बंसल रोते हुए उसे धन्यवाद कहने लगा।

अपस्यु उसे खुद से अलग करते… "सर इतना दिल में दर्द था तो एक बार अपनी कहानी हमसे तो कहकर देखते। बस एक रिक्वेस्ट है 5 से 7 के बीच मै अपनी कहानी आज सारी दुनिया को टीवी में बताऊंगा, प्लीज उसके बाद मुझे अरेस्ट करना। नाम अपस्यु रघुवंशी। पता राठौड़ मेंशन। शाम 7 बजे मै आपको ऑडिटोरियम में मिल जाऊंगा। फिर आप आराम से अरेस्ट केर लेना।"

अशोक:- हम्मम ! मै भी तुम्हारी कहानी देखूंगा आज शाम 5 बजे से, उसके बाद ही कोई कार्यवाही होगी। मै रास्ता साफ करवाता हूं, तुम अपनी फैमिली को लेकर निकलो।

अपस्यु:- रहने दीजिए सर… ब्वॉयज एंड गर्ल्स 2 मिनट में रास्ता क्लियर चाहिए। सर केवल और केवल मेरा नाम आना चाहिए।

आरव अपना मास्क हटाते.. अपस्यु के गले लगा… "नहीं सर पुरा ग्रुप सरेंडर करेगा, ऑडिटोरियम में ही हम सब मिलेंगे। लिखिए 16 कुल लोग थे।

ऐमी अपना मास्क उतारती… "लेडीज फर्स्ट होगी ना, पहले लड़कियां अरेस्ट होगी। सर टोटल 24 लोग लिखिए और हां घायलों को ले जाइए जल्दी वरना अभी 4 मर्डर है बाद ने पता ना कितने हो जाए।

अशोक:- तुम लोग निकलो अभी मीडिया आ गई तो बहुत प्रॉब्लम होगी। अजिंक्य केवल एम्बुलेंस आना चाहिए और कोई भी हस्पताल कर्मचारी कोई स्टेटमेंट ना दे। हर एम्बुलेंस में फोर्स रहेगी।

सीआरपीएफ हेड:- सर हम कुछ एडिशनल हेल्प कर दे।

अशोक:- मेहरबानी होगी सर। इन्हे बस घायल किया है, किसी को जान से नहीं मारा है, शिवाय 4 लोगों को, जिन्हे हमने ही कहा था मारने। ये सब प्रोफेशनल्स है और उन्हें पता था हथियार कहां चलना है। 24 लोगों ने इन कुत्तों को उनके घर में घुसकर औक़द दिखाई है। हमारी इज्जत और अपने परिवार के लिए लड़े, ना लड़ते तो 8000 की भीड़ ने 24 को मारा होता, प्लस उनकी फैमिली को, केस भी रजिस्टर नहीं हो पाता। लेकिन महज 24 लोगों ने ये कर दिया, और हम खुद की रक्षा करने वालों को ही पकड़ रहे।

तभी अजिंक्य ने उन्हें ट्रिपल स्टोरी की कहानी बताई। सब लोग वहां पहुंचे और जमीन पर बर्बाद हुए हथियार देखने लगे।… "ये सब तो लेटेस्ट वैपन है और ये लोग यहां क्या कर रहे है। ये सब तो हाई ट्रेंड आतंकवादी है।.. सीआरपीएफ वालो ने 1,2 को पहचानते हुए कहा।

अशोक मुस्कुराया और अजिंक्य के कंधे कर हाथ रखते… "किसी भी मदरचोद को आधे घंटे तक कोई मेडिकल हेल्प मत दो, और मीडिया के अहम चैनल को बुलवाया जाए। बाहर बरियर 7 बजे तक घिरा रहेगा, यहां एक टीवी लगवाओ और हम भी उस लड़के की कहानी देखेंगे….
 
Update:- 171

31 दिसंबर… 2014… शाम के 5 बजे..

अपने लाइव प्रोग्राम और ऑनलाइन डिबेट से तहलका मचाने वाले सात्त्विक आश्रम के संचालक, एक बड़े से हॉल के मंच पर बैठे हुए थे। अपने भक्तों के अनुरोध पर अपने जीवन से जुड़ी हर घटना पर प्रकाश डालने आये थे, जिसके लाइव शो के सवाल और जवाब की प्रैक्टिस पिछले 2-3 घंटे से यहीं पर चल रही थी।

टीवी जगत के 3 बड़े चैनल ने अलग-अलग जगह के लाइव शो के राइट खरीद लिए थे। ऑडिटोरियम में बैठे तकरीबन 200 खास दर्शक, जिसमे ज्यादातर युवा थे, हर कोई दोनो का नाम लेकर चिल्ला रहे थे। ऑडिटोरियम में बाहर बड़े से मैदान में चारो ओर स्टूडेंट ही स्टूडेंट थे, जो बाहर लगे बड़े-बड़े कई सारे स्क्रीन पर इस शो को देखते और बाहर से किसी आनेवाले को बाहर ही रोके रहते। वहीं होम मिनिस्टर साहब ने चैनल के स्टूडियो के बाहर कुछ फोर्स, और रिले रूम और एडिटिंग रूम में भी फोर्स डाल चुके थे, ताकि इस प्रोग्राम को बिना बाधा के चलाया जा सके।

मंच आयोजक पूरे गर्मजोशी के साथ अनुप्रिया और महिदिपी का नाम चिल्ला रहे थे। दोनो ही मुख पर मुस्कान और चेहरे पर सरलता के साथ, दोनो हाथ उठाकर आशीर्वाद देते हुए चले आए।

महिदीपा अपने हाथो में माईक थामते…. "जय जय कार तो केवल उस प्रकृति की होनी चाहिए, जिसने हमें जीवन सृजन दिया, जीने की अनुकूल माहौल दिया, ऐसा इकोसिस्टम विकसित किया, जिसमें हर जीव-जंतु तथा पेड़०p-पौधे अपना भरन पोषण कर सके।"

मंच संचालक:- क्या बात है गुरुजी, आज ऐसा लग रहा है, जैसे लोगों को उनकी करतूत और प्रयावरण के ऊपर खूब डांट पड़ने वाली है।

अनुप्रिया:- माफ कीजिएगा संचालक महोदय, मै एक बार फिर अपने सुनने वाले को बताना चाहूंगी, हम जो यहां बोलते है उसमे ऐसा कुछ नया नहीं है जो पहले कभी आपने नहीं सुना है। मै केवल एक ही बात पर जोड़ देती हूं.. और वो क्या है…

भिड़ चिल्लाते हुए… "सुनने से कुछ नहीं होता वो हमे केवल भटकाता है, सुनने के बाद उसपर अमल करने और उस संदर्व में काम करने से होता है।"

मंच संचालक….. "क्या खूब कही आप। आप दोनो कृपया बैठ जाए। अब हम गुरु महिदिपी और अनुप्रिया की जिंदगी को और करीब से जानने के लिए, मै बुलाना चाहूंगा आप सब के चहेते और दिल्ली में इनकी जोड़ी को सबसे ज्यादा लोगो ने सराहा है, मिस्टर अपस्यु रघुवंशी। जोरदार तालियां हो जाए इनके लिए भी..

हैवी इंटेंस संगीत चारो ओर बजने लगा हो जैसे। अनुप्रिया और महिदिपी के चेहरे की रंगत बिल्कुल उड़ गई। दोनो भौचक्के खड़े होकर ऐसे देख रहे थे मानो सामने से भूत चलकर आ रहा हो।.. चेहरे की सारी खुशियां जैसे हवा हो गई हो।

"हमारा इंटरव्यू ये थोड़े ना लेने वाला था।".. अनुप्रिया थोड़ी घबराई सी आवाज में पूछने लगी।

मंच संचालक:- नहीं मैडम यही तो है ए.आर.. इनकी अनुपस्थिति में आपसे स्टूडियो का एक लड़का बस डेमो सवाल पूछ रहा था। इतने में अपस्यु वहां पहुंचकर माईक अपने हाथ में लिया और दोनो को देखकर मुस्कुराते हुए कहने लगा… "मेरे स्वागत में इतनी बड़ी हस्ती खड़ी हो गई, वहीं मेरे लिए काफी है। बैठ जाइए सर, बैठ जाइए मैम। आप दोनो कुछ घबराएं से है, तबीयत तो खराब नहीं हो गई कहीं।"..

अनुप्रिया:- संचालक महोदय जी मेरी तबियत कुछ ठीक नहीं लग रही, हम जाना चाहते है।

संचालक:- सर, मैम.. 400 करोड़ का स्पॉन्सर है और आपने हमसे 200 करोड़ लिए मांग किया था, चाहिए तो 20 करोड़ और बढ़ा लीजिए लेकिन है प्रोग्राम छोड़कर मत जाइए।

महिडिपु:- पहले इस लड़के को हटाओ, फिर हम यहां रुकेंगे।

संचालक:- मैडम ये बिल्कुल नहीं जा सकता पुरा शो का फाइनेंसर यहीं है। और ये उतना भी सारिफ नहीं उसने यदि दावा ठोका ना तो कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक आपको तत्काल 400% भुगतान करना होगा।

अनुप्रिया और महिदिपी आपस में कुछ चर्चा करते, तभी माईक पर अपस्यु की आवाज गूंज गई… "लगता है अनुप्रिया और माही जी तय नहीं कर पा रहे की उन्हें सवालों के जवाब देना चाहिए या नहीं। शायद उनका भूतकाल उतना अच्छा नहीं, लेकिन इन्हीं की एक कहीं बात याद आ रही है… 'जो अपने अतीत से मुंह छिपता है जरूर या तो वो कायर है या फिर उसने अपना मुंह इतना काला किया है कि खुद की शक्ल याद नहीं करना चाहता।"..

अपस्यु की बात सुनकर महिदिपी फीका मुस्कुराया… "लगता है ये लड़का भ्रम की दुनिया से निकलकर आया है। अभी ही इसकी बातो में इतना रोष है, ऐसा प्रतीत होता है कि हमे बदनाम करने का मन बनाकर आ चुका है।"..

अपस्यु:- लेकिन आप तो गुरु कहलाते है ना महाशय। ज्ञान के प्रकाश से जो अंदर के अन्धकार को भगा दे, वो गुरु। रोष तो केवल माध्यम मार्ग है गुरुदेव, जो अंदर के विकार को निकालता है। और यदि मेरे अंदर कोई विकार है, तो उसे समझकर शांत करने हेतु आप अपने ज्ञान की वाणी मुझे दें, यही तो गुरु कर्तव्य है। फिर भी मै अपने सवाल आपसे नहीं पूछूंगा.. बल्कि लोगों ने बहुत से सवाल पूछे है, उन्हीं में से मै सवाल पूछूंगा। अब खुश है आप।

दोनो एक साथ.. "बालक हमे किसी प्रकार के सवाल से कोई भय नहीं है। जैसे तुम्हारी मर्जी हो सवाल पूछिए।"

अपस्यु:- चलिए तो शुरू करते है। ये सवाल है लगभग 20 लाख लोगों ने पूछा है.. आप दोनो के गुरु कौन थे, जिनसे आपने शिक्षा प्राप्त की थी..

अनुप्रिया:- हमारे कोई जीवित गुरु नहीं थे जिनसे हमने शिक्षा ली हो, लेकिन हां कुछ वक़्त तक हम गुरु निशी के आश्रम में रहे थे और उनकी सेवा की थी।

अपस्यु:- आप सबको मै बताना चाहूंगा कि मैंने भी अपने प्रारंभिक जीवन के कई साल गुरु निशी के "आध्यात्म गुरुकुल नमः" का छात्र रह चुका हूं। जानकर अच्छा लगा कि आपने कुछ साल उनकी सेवा की है। चलिए अब आगे बढ़ते है.. लगभग 40 हजार लोगों ने यह सवाल अभी-अभी किया है ऊपर स्क्रीन पर नजर आ रहा होगा। इस वक़्त गुरु निशी कहां है?

महिदिपी:- क्यों तुम्हे नहीं पता जो मुझसे पूछ रहे हो? तुम तो उसके शिष्य भी राज चुके हो।

अपस्यु:- सर यहां आप दोनो के जीवन के बारे में लोग जानना चाह रहे है, उनसे जुड़ी बातें। इसलिए कृपा आप अपने उत्तर दे दीजिए, मुझे कुछ जानकारी हुई तो मै साझा कर दूंगा।

अनुप्रिया:- उनकी सेवा करने के बाद मै वर्ष 1983 में अपने भाई महा के साथ देहरादून चली आयी। फिर हमने देश विदेश घूमकर गुरुकुल शिक्षा का प्रसार किया। उसके बाद फिर हमे कोई जानकारी नहीं गुरु निशी के बारे में।

अपस्यु:- हम्मम ! शायद टेक्नोलॉजी का प्रसार उस दौर में उतना नहीं रहा हो इसलिए आप संपर्क में नहीं रह पाई। दर्शकों के सवाल का जवाब देते हुए मै बता दू की गुरु निशी को वर्ष 2007 में आग के हवाले कर दिया गया था। जिन्होंने उन्हें मारा वो केवल वही तक नहीं रुके, उस आग में उनके 160 शिष्य को भी जिंदा जला दिया गया था। वहां कुछ आश्रम के बाहर के लोग भी थे, जो जीने के ग्रीष्म कालीन छुट्टी में आए थे।

उन जलने वाले बाहरी लोगों के जलने वालों में एक मेरी मां भी थी। मेरी होने वाली पत्नी जो हर साल गुरुकुल छुट्टियों में आती थी, उसकी मां और उसका भाई भी उसके आग के हवाले झोंक दिया गया था। उस घटना के साक्ष्य बने कुल 5 लोग किस्मत से बचे थे, जिसमे से एक मै, दूसरा मेरा जुड़वा भाई आरव, तीसरा पार्थ, चौथी गुरी निशी की गोद ली हुई पुत्री स्वास्तिका, और पंचवि ऐमी बच गई थी, जो गर्मियों कि छुट्टी में नैनीताल आश्रम आयी हुई थी। शायद यहां सुनने वालों को यकीन ना हो, इसलिए 2007 के उन हादसों की कुछ तस्वीरें मै आप सबसे साझा करना चाहूंगा, यह कहकर कि यदि आपका दिल कमजोर है तो यह तस्वीरें नहीं देखे।

अपनी बात कहकर अपस्यु ने खींची गई हर तस्वीर को दिखाया, जो पहाड़ के ऊपर मंदिर से उन लोगो ने फोकस करके ली थी। जहां साफ-साफ देखा जा सकता था, कुछ लोग हथियार लिए आश्रम में घूम रहे थे। एक बड़ा सा विकराल हवन कुंड कुवां, जिसमें जिंदा जलाए हुए लाश, जो एक के ऊपर ढांचे बने राख के ढेर में थे, और वहां आस पास घूमते लोग। दुनिया भर के 12 करोड़ दर्शक कब 22 करोड़ हुए किसी को पता नहीं चला।

अपस्यु से जुड़े सभी लोग पहली बार उसके मुंह से पूरी सच्चाई सुन रहे थे, आखों के सामने वो विचलित करने वाली तस्वीरें देख रहे थे। हर कोई स्तब्ध और बिल्कुल मौन सा था। अपस्यु को जानने वालों को अब समझ में आ रहा था कि क्यों वो इतना रहस्यमई है। अपस्यु के आग्रह पर फ्रांस में अनुप्रिया के बच्चो को भी ये प्रोग्राम दिखाया जा रहा था।

कंजन ने जब पहली बार अपनी बहन के बारे में सच्चाई सुनी, वो धम्म से बेहोश हो गई। पायल मुंबई में बैठी ये प्रोग्राम देख रही थी और अब पहले से ज्यादा आत्मग्लानि मेहसूस कर रही थी, क्योंकि जिस हादसे को लेकर वो अपस्यु और उसके परिवार से खफा थी, खुद उसके जीवन में भी भीषण हादसा हो चुका था।

अजिंक्य, एसपी अशोक बंसल, होम मिनिस्टर, और सौरव भी देख रहे थे। खैर अपस्यु का तो पुरा परिवार ही इस प्रोग्राम में मौजूद था, जो रो रहा था। किसी के आंसू रुके नहीं रुक रहे थे। केवल वहां शांत और मुसकुराते हुए 3 लोग थे, अपस्यु, आरव और ऐमी। कुछ आश्चर्य के भाव महिदिपी ने दिए, तो अनुप्रिया फुट फुट कर रोना शुरू कर दी। थोड़ा सा ड्रामा हुआ और फिर अपस्यु बोलना शुरू किया।

"कोई बात नहीं है, शायद आप उस दौर में मसरूफ ज्यादा थी। बहरहाल जो 2 करोड़ दर्सकों के सवाल है वो ये कि अनुप्रिया जी की शादी किससे हुई थी।".. अपस्यु गुरु निशी से हटकर सवाल का पूरा मूड चेंज कर दिया..

अनुप्रिया अपस्यु को घूरती हुई… "हमारी गुप्त शादी थी, मै लोगो के बीच इसे साझा नहीं करना चाहती।"..

अनुप्रिया का यह जवाब सुनकर तो मानो सवालों कि बौछार लग गई… "अनुप्रिया जी 10 करोड़ लोग कह रहे है, गुप्त तो गर्लफ्रेंड ब्वॉयफ्रैंड का रिलेशन होता है, आप पति से रिश्ता गुप्त रख रही।"..

अनुप्रिया:- जी मै पुराने रिती रिवाज को मानती हूं और मै अपने पति का नाम ना तो बोल सकती हूं और ना ही लिख सकती।

अपस्यु:- जी हम आपकी भावनाओं की कदर करते है, ये सवाल हम आपके भाई महिदिपी से पूछ लेते है। सर आप ही कुछ प्रकाश डाले इस सवाल पर।

महिदिपी, माईक को ऑफ करके धीरे से कुछ कहने कि कोशिश करने लगा, तभी बैठे हुए लौंडे चिल्लाने लगे… "सर क्या भूत से विवाह हुआ था, जो लीपा पोती कर रहे हो।"..

महिदिपी, ना चाहते हुए भी…. "चन्द्रभान रघुवंशी"..

अपस्यु:- दर्शक साफ सुन नहीं पाए, क्या कहा आपने…

महिदिपी:- चन्द्रभान रघुवंशी।

अपस्यु:- "जिन लोगो को पता नहीं उन्हें मै बता दू की चन्द्रभान रघुवंशी वहीं व्यक्ति है, जिन्होंने मेरी मां को उस आग में झोंक था। उस अग्नि कुंड में पहली जिंदा जलने वाली और जिसकी चींख उन वादियों में सबसे पहले गूंजी थी। एक और बात है इसमें भी, वो चन्द्रभान रघुवंशी और कोई नहीं मेरा पिता था और मै अनुप्रिया जी का सौतेला बेटा हूं। शायद इन्हे ये बात ज्ञात ना हो।"

"चन्द्रभान रघुवंशी का एक छोटा भाई था भूषण रघुवंशी, जिनकी धरम पत्नी का नाम है नंदनी रघुवंशी, जिसके पूरे परिवार को साजिश के तहत 2006 में मार दिया गया था। आप सबने शायद 15 अगस्त की वो न्यूज देखी हो। दोनो कांड आपस में लिंक थे। चन्द्रभान रघुवंशी ने ही मेरी छोटी मां के चचेरे भाई को, मायलो ग्रुप को हथियाने का काम सौंपा था और खुद अपने छोटे भाई का कत्ल करवाकर, मेरी छोटी मा और बहन को दर-दर भटकने के लिए छोड़ दिया। उफ्फ ये खौफनाक इतिहास, दौलत और ताकत की जंग।"

अनुप्रिया उठकर वहां से जाने लगी तभी अपस्यु उसे रोकते हुए… "आप लोगो को शायद पता हो कि ना हो लेकिन महिदिपी के पुत्र रुद्रा और अनुप्रिया की के पुत्र युक्तेश्वर और हंस दोनो इस वक़्त फ्रांस की जेल में है। इन तीनों ने मिलकर कुछ दिन पहले फ्रांस कि बड़ी बैंक बीएनपी परिबास में 300 बिलियन यूरो की चोरी को अंजाम दिया था। ये देखिए फ्रेंच पुलिस का स्टेटमेंट.."

जैसे ही स्क्रीन पर फ्रेंच पुलिस को लोगो लाइव देखा और सुना, सब के सब शॉक्ड हो गए। अनुप्रिया और महिदिपी दोनो अपस्यु के पास आकर उसका कॉलर पकड़ते.. "तुम्हे तो मै कोर्ट में देख लूंगी लड़के, चलो माही।"..

अपस्यु:-" क्या हुआ अनुप्रिया जी महिदिपी जी.. सवालों से इतना भी क्या घबराना। शायद आपको पता नहीं तो मै बता दूं…. अभी-अभी मैंने बड़ी मुश्किल से अपने पूरे परिवार को दिल्ली के सबसे ख़तरनाक इलाके से बचाकर ला रहा हूं, जहां अनुप्रिया और महिदिपी के 2 पुराने साथी ने मेरे बचे हुए परिवार को मारने कि पूरी साजिश रच दी थी।"

अपस्यु की बात सुनकर तो जैसे अनुप्रिया और महिदिपी झटके पर झटका खा रहे थे। दोनो किसी भी तरह से यहां से निकलने की कोशिश में जुट गए लेकिन तभी अनुप्रिया की पूरी प्रमोशनल टीम मंच पर आ गई। दोनो को आराम से बिठाकर घेर लिया गया। इनके बॉडीगार्ड जो मंच पर आने के लिए पगलाए थे, उन्हें वीरदोयी का फटका लगा और वो चुपचाप जाकर कोना पकड़ लिया।

2 मिनट के इस विराम के बाद अपस्यु फिर अपनी बात आगे बढ़ने लगा……. "हां तो बात हो रही है अभी और आज के ताजा घटना की जहां 14 लोगों को मारने कि साजिश रची जा चुकी थी जिसमे मुख्य था मेरा पूरा परिवार, मेरी होने वाली पत्नी ऐमी के डैड, मेरे भाई के होने वाली पत्नी के पुरा परिवार।"

"और इस साजिश में सामिल है अनुप्रिया के नाजायज पति राजीव मिश्रा, जिनसे इनका एक पुत्र भी है युक्तेश्वर। और दूसरा है मुख्य साजिश करता है, मनीष मिश्रा जिसकी एक और नाजायज पत्नी है, जिसकी बेटी श्रेया मिश्रा को कुछ दिन पहले मेरे पीछे लगाया गया था। आप लोगों को जानकर हैरानी होगी कि राजीव मिश्रा और मनीष मिश्रा का परिवार ही मेरे भाई का ससुराल है। और ये दोनो भाई भी मेरे बाप के पर चिह्न पर चलते हुए अपनी ही पत्नी और बेटी का बली चढ़ाने का रहे थे। वह रे पैसा और ताकत की माया।"

"अनुप्रिया जी से मै एक बात समझने कि कोशिश कर रहा हूं, कि पहली बार मेरी मां इनके पति के हाथो मारी गई। कई सालो बाद जब अपने टूटे परिवार को जोड़ लिया, तो भी इस बार इनके नाजायज पति और उसका भाई बीच में आ गया मेरे परिवार को मारने। अनुप्रिया जी से गुजारिश है कि वो बता दे उनके और कितने पति है, जो आने वाले भविष्य में मेरे परिवार के लिए तो खतरा है ही, साथ ही साथ अपने परिवार के लिए भी ना कहीं खतरा बन जाए।"

अनुप्रिया:- कमाल का शो होस्ट किया है, ऐसा लग रहा है एडिटिंग और फिक्शनल स्तिरी से इस शो के टीआरपी में चार चांद लगाने की कोशिश की जा रही है। प्रोग्राम तो ऑर्गनाइज हुआ था मेरे जीवन पर प्रकाश डालने के लिए, और यहां मंच संचालक ना जाने क्यों अपने जीवन की कहानी को मुझसे जोड़ रहा।

बेटा जब तुम्हे अपने बारे में ही पूरी कथा बतानी थी फिर मुझे क्यों बुलाया यहां। तुम्हारी को तुम्हारे पिता ने मारा, और गलती से वो मेरा पति भी था। हां वो मेरा पति भी था, तो क्या उसने मुझे धोका नहीं दिया। उसके बाद मै बड़ी ही सलिंता से शांत बैठकर अपने चरित्र पर लांछन लगते देख रही, और तक मेरे चरित्र को भारी सभा में उछाल रहे। क्या मै तुमसे जान सकती हूं कि ऐसा कौन सा पति होगा जो अपनी पत्नी को जिंदा आग में झोंक दे? क्या कहानी रही होगी उस पति की भी, जिसकी पहले से एक पत्नी हो लेकिन किसी ट्रिया चरित्र की औरत के मोह में वो पर गया हो और उस इंसान का जब भ्रम टूटा हो, असलियत आखों से दिखी हो तब वो मजबूर होकर ऐसे कदम उठा लिया हो।

मेरा परिवार सिर्फ मै और मेरा भाई और हमारे बच्चे है। इसके अलावा कोई अपनी निजी जिंदगी में क्या कर रहा है उसका दोषी यदि मुझे बनना है तो कोई बात नहीं, हम वो भी सह लेंगे, क्यों आक्रोशित होकर धैर्य खोना हमने नहीं सीखा। शायद इस सभा में मेरी कुछ ज्यादा ही बेज्जती हो चुकी है इसलिए आप लोगो से इजाजत चाहूंगी, आप लोगों ने इस लड़के की सुनी मेरी भी सुन किए अब फैसला आओ हाथ में है। हम बीच ने जा रहे है इसके लिए क्षमा चाहती हूं।

अपस्यु जोड़ जोड़ से हंसते हुए… "अच्छा बोल लेती है आप अनुप्रिया जी, बहुत अच्छा। लेकिन मैं यहां पर जो भी बोल रहा हूं, उनके सबूतों कि कॉपी यहां के कानून व्यवस्था के पास पहुंच चुकी है। इसलिए आराम से बैठ जाओ अनुप्रिया और महिदिपी, बाहर पुलिस ही इंतजार कर रही है। जिन लाशों के सीढ़ी पर चढ़कर तुम दोनो भाई बहन यहां तक पहुंचे हो, उस कीर्तिमान को तो सुनते चले जाओ।.. अच्छा लोग बोर हो रहे है ये फैमिली ड्रामा सुनकर, इन्हे रिफ्रेश करने के लिए एक फिल्मी अमाउंट बताता हूं, साथ में सबूत भी दिखेंगे स्क्रीन पर.. पेश है अनुप्रिया और महिदिपी के जिंदगी से जुड़ी एक और सच…

"ये फिल्मी कहानी कुछ इस प्रकार है, एक क्लोज डोर मीटिंग हुई और यहां मौजूद पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने मिलकर, अपनी काली कमाई को एक जगह जमा किया, जो था अनुप्रिया का काला खाते। कारन इसके पीछे तो वर्ष 2016 में होने वाले लोकसभा इलेक्शन में, ये पुरा देश को अपने मुट्ठी में रखे।"

"ये थी एक फिल्मी कहानी अब इनकी काली कमाई दिखता हूं आपको स्क्रीन पर, जिसका सबूत और एफ आई आर हो चुका है। पैसे कैसे और कौन-कौन अकाउंट से कहां कहां पहुंचे उसका पूरा ब्योरा।"

"जो लोग ज़ीरो नही गिन पा रहे, या अंक की गणना नहीं कर पा रहे, उन्हें मै बता दू ये अमाउंट डेढ़ लाख करोड़ रुपया हैं। इस काले धन को केवल 3 लोगों ने मिलकर जमा किया है, जिसका 80 हजार करोड़ अनुप्रिया और महिदिपी, और 70 हजार करोड़ पक्ष और विपक्ष के मुख्या पार्टी के पार्टी अध्यक्ष का है। इस सच्चाई को बाहर लाने में मददगार साबित हुए श्रीमान होम मिनिस्टर और उनकी पूरी टीम, जिन्हे शक था कि राजीव मिश्रा और मनीष मिश्रा जैसा टॉप ब्रेन, जो ऊपर से दिखाने के लिए गुंडों जैसा व्यवहार करता है, अंदर से जरूर कोई खिचड़ी पका रहा है।"

"और जब उनकी छानबीन आगे बढ़ी तो उन्होंने मुझसे संपर्क किया, क्योंकि इनकी कब्र खोदने के पीछे मै तो 2007 से लगा हुआ था, जिसमें हमारी मार्गदर्शक रही मेरी मां की करीबी दोस्त और राजीव मिश्रा की धर्म पत्नी सुलेखा मिश्रा, जिसके एक छोटी सी बात ने 2008 में ही 160 शिष्यों के साथ गुरु निशी की हत्याकांड के सभी आरोपी को बेनकाब कर दिया था। उनका साफ कहना था, दोनो मिश्रा बंधु को केवल फॉलो करो, तुम्हें धीरे-धीरे सब मिल जाएंगे। वक़्त लगा इनके किए की सजा दिलवाने में लेकिन मै आज सुकून में हूं।"

15 अगस्त 2014 की सुबह के न्यूज के पीछे का कारन भी मै ही हूं, लेकिन तब मैंने अनुप्रिया और महिदिपी से अलग हुए इनके साथी विक्रम राठौड़ और प्रकाश जिंदल को उनके तत्काल गुनाह, और कुंवर सिंह राठौड़ के मर्डर में लपेटा था, लेकिन आज पूर्ण सच्चाई सबके सामने है।"

"मै हर उस इंसान से माफी चाहूंगा जिसका इस्तमाल मैंने अपने योजना के अंतर्गत किया। फिर चाहे मुझे यूएस सीनेटर प्रकाश जिंदल और इनसे अलग हुए ग्रुप को फसने के लिए, मनीष मिश्रा की बेटी साची को ट्रैप करके उसका इस्तमाल करना परा हो, या फिर मेरे दोस्त और होम मिनिस्टर जी के लड़के सौरव हो, जो मेरे एक कहने पर बिना ये सोचे कि उसके पापा सेंट्रल मिनिस्टर है और यदि वो कोई लड़की को गलत ढंग से छेड़ता है तो बहुत बदनामी होगी, फिर भी साची को ट्रैप करने के चक्कर में खुद की बेज्जती सह लिया, लेकिन दोस्त की मदद के लिए आगे खड़ा रहा।

आज सौरव और मेरे पुराने कॉन्टैक्ट सोमेश के वजह से मेरा परिवार जिंदा है। क्योंकि दिल्ली की जिन गलियों में मेरे परिवार को मारने कि योजना बनी थी, वहां 20 पुलिस वाले को सड़क पर मार दिया गया था और उस गली से एक भी गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी। आज भी मैंने उसी सौरव और अपने पुराने एक और दोस्त जो उम्र में काफी बड़े है और जिन्हे मै अंकल कहता हूं सांसद सोमेश दत्त, वो उस गली में घुसे और मेरे पूरे परिवार को निकालने मै मदद कि।.. मै माफी चाहूंगा सोमेश दत्त की बेटी लिसा से भी, जिसे मैंने ट्रैप किया और अनुप्रिया के आश्रम भेजा सवाल जवाब करने और टीबी जगत पर उन्हें आने के लिए प्रेरित करने।

इसी क्रम में यहां मौजूद उन स्टूडेंट्स सब का भी शुक्रिया, खासकर विकास, मालविका, निशा, खुशी और उसके अन्य दोस्त, जो एक गलत राह पर भटके थे फिर मैंने उन्हें अपने फायदे के लिए इस्तमाल किया और दिमाग में यह डाला की अनुप्रिया से सवाल जवाब करे। अनुप्रिया दिल की कली जरूर है लिकन वो गुरु निशी की शिष्य है, जिसके जवाब सुनकर सबका बौद्धिक विकास हुआ। उसका प्रचार हुआ और एक प्रोग्राम उसका करोड़ कि टीआरपी में गया। अनुप्रिया को मै आज के लिए इस मंच पर देखना चाहता था। ताकि आज जब मै उन लोगो को वास्तविक बता सकूं कि मै ऐसा क्यों हो गया, मैंने उनका इस्तमाल क्यों किया, जब मै ये कहानी पूरी दुनिया के सामने खुलकर बता सकूं, तब ये दोनो भी सुन सके।

मेरे इतने लंबे इंतजार के सफर के 2 मुख्य साथी, मेरे गॉडफादर और गॉडमदर जिन्होंने मुझे इस लायक ट्रेंड किया की मै इन जैसे का सामना कर पाऊं वो कुछ दिन पहले ही देश के लिए सहीद हो गए। वो जहां कहीं भी इस वक़्त होंगे, मेरी मां जहां कहीं भी होगी, मेरे साथ बड़े हुए वो 160 मित्र, ऐमी की मां और उसका भाई, मेरे अंकल, मेरी छोटी मां का पूरा मायका.. सब के सब.. आज जरूर खुश होंगे।

मै बदले कि राह पर नहीं था इसलिए इतने मौत होने के बावजूद भी मैंने किसी को नहीं मारा। मारना तो इनके लिए मुक्ति होती। बस जिस पैसे और पॉवर के लिए कइयों के मासूम जिंदगी में ये जहर घोल चुके, उसका पूरा भुगतान किए बिना इन्हे मरने कैसे देता। इनसे इनका पैसे छीनना था, सो मैंने छीन लिया। इनकी पॉवर छिन्नना था, वो भी मैंने छीन लिया। सबूत जमा कर दिए गए है, कोर्ट सजा भी तय करेगी इनका, ये वादा है। और आज नहीं मै 7 साल बाद इनसे पूछूंगा, क्या हासिल किया तुमने इतना लाश का ढेर बनाकर।

सॉरी जिन स्पॉन्सर का आज एड नहीं चल पाया, वो कृपया अपने अमाउंट वापस लेते जाएगा। इसी के साथ मै अपने और अपने परिवार के ओर से आप सभी से इजाजत चाहूंगा। अब शायद मेरा दिल रोने का हो रहा है और यहां रुक पाना काफी मुश्किल।

अपस्यु ने जैसे ही बोलना बंद किया.. स्क्रीन पर सवालों के बौछार लग गए। चन्द्रभान का क्या हुआ.. चन्द्रभान का क्या हुआ..

अपस्यु मुसकुराते हुए…. "उस रात 120-130 लोगो की टीम आयी थी, जिसमें से मात्र कुछ लोग वापस गए, बाकी अनुप्रिया जी की अनुकम्पा से इन्होंने सबूत मिटाने के नाम पर, उन्हें भी नहीं छोड़ा जिन्होंने उस कुंड में जिंदा लोगों को डाला था। उन्हीं में से एक चन्द्रभान रघुवंशी भी था, जिसे उन्ही के साथियों ने आग के हवाले कर दिया (पिता की मौत की असली वजह को छिपा लिया गया।)

एक लंबे दौर का समापन सा हो चला हो जैसे। प्रोग्राम समाप्त होते ही अपस्यु अपने आप में टूटा हुआ मेहसूस कर रहा था। ऐसे ही कुछ फीलिंग स्वास्तिका, ऐमी और आरव की भी थी। किसी से भी अब ज्यादा देर रुक पाना मुश्किल हो रहा था। वो चारो तेजी के साथ एक कमरे में दाखिल हुए और सीधे जाकर बेड पर रोना शुरू कर दिया।
 
Update:- 172

1 जनवरी 2015 को सुबह के न्यूज में केवल नैनीताल की ही वो घटना छाई रही। हर मीडिया हाउस अनुप्रिया और महिदिपी को ही कवर करने में लगा हुआ था। दिल्ली के उस भीषण मारपीट की न्यूज, इस न्यूज़ के आगे कहीं दब सी गई थी। इसी बीच अशोक बंसल को भी पुरा मौका मिल गया, क्योंकि जैसे ही उस शो का ओपनिंग हुआ और अपस्यु ने गुरु निशी के हत्याकांड का खुलासा किया, छप्पर तोड़ टीआरपी को देखकर, हर मीडिया हाउस वालो ने पुलिस के रिस्ट्रिक्टेड इलाके को कोई भाव ही नहीं दिया और साढ़े पांच बजते-बजते हर मीडिया हाउस ऑडिटोरियम के बाहर अपस्यु के जुड़े लोगो से सवाल जवाब करने में लग गया था।

दर्शक भी कमाल के होते है उन्हें जब मुख्य स्टोरी पसंद आती है, फिर उसके साइड लाइन में चलने वाले चीजों को भी चटकरा मार-मार कर सुनते है। विकास और उसके फ्रेंड्स के पास भी मीडिया के लोग पहुंचे। सौरव के पास भी मीडिया के लोग थे और अपस्यु ने जिन-जिन का नाम लिया उन सबके पास भी मीडिया के लोग थे।

सात्विक आश्रम को पूरी तरह लपेटने के लिए रातों रात सलेशल टीम ने 2 जगह पर रेड की। एक तो सात्त्विक आश्रम और दूसरा वहीं से 100 मीटर की दूरी पर बाना एक मल्टी स्टोरी बिल्डिंग, जो सात्विक आश्रम की ही बेनामी संपत्ति थी और वहीं से पुरा सर्विलेंस और गुंडों को हायर करने की नीति चलती थी।

वहां के कंप्यूटर से बहुत सारे लोगो के नाम बाहर अाए जो जांच के लपेटे में थे। कई संदिग्ध वीडियो भी थे हाई प्रोफ़ाइल लोगो के, जो उन्हें भी नहीं पता कि कब लिया गया। रिमोट एसेस वैपन और ऐसे ऐसे हथियार वहां से बरामद हुए जो पूरे दिल्ली को दहला सकते थे।

1 जनवरी सुबह के 10 बजे पुलिस मुख्यालय में आला अधिकारियों की मीटिंग चल रही थी, जिसमे गर्वनर और हाई कोर्ट की एक बेंच उपस्थित थीं। जहां कल के हुए उस भीषण मारपीट पर चर्चा होनी थी। इन्वेस्टिगेशन में साफ पता चल चुका था कि ये पुरा कांड, लगभग 6000 लोगो को घायल करना और 4 मर्डर किसका किया हुआ है, लेकिन जब अपस्यु को अरेस्ट करने की बात आयी, तो तकरीबन 3000 पुलिस वालों ने यह कहकर इस्तीफा दे दिया कि…

"जितने भी घायल है वो दोषी है किडनैपिंग और मर्डर की साजिस में, सभी पर अलग-अलग थाने में केस दर्ज है। उन्होंने अलग-अलग ग्रुप के टेररिस्ट को, राजीव और मनीष मिश्रा के कहने पर पनाह दी। और यदि उन 24 लोगो ने खुद का और अपने परिवार का बचाव ना किया होता, तो यहां की भीड़ उन 20 पुलिस वालों की तरह इन्हे भी मारकर गायब कर देती और हम केस को ये कहकर क्लोज कर देते की भीर में किसने मार डाला किसी को पता ही नहीं चला। और हम ये सच्चाई मीडिया के सामने कहने से भी नहीं कतराएंगे।"

कांड भी हुए सबूत भी थे, लेकिन अपस्यु और उसके साथियों को अरेस्ट करना डिपार्टमेंट के लिए ही सर दर्द बना हुआ था। जबकि कल रात के बाद से वो देश के लिए एक हीरो के रूप में उभर कर आया था, जिसने ना केवल एक पूरे गिरोह को बेनकाब किया, बल्कि उनकी कली कमाई के पैसा-पैसा को भारत सरकार को सौंप गया। यधपी उसने सारे क्रेडिट बांट दिए हो लेकिन चेहरा तो अपस्यु ही था।

जहां इतने दोस्त थे, वहां दुश्मन भी होते ही है। इसलिए अनुप्रिया और महिदिपी के साथ फसने वालो के सागे संबंधी, इस घटना को तूल देकर अपस्यु को जेल के पीछे देखना चाहते थे वहीं डिपार्टमेंट के 3000 लोगो ने मोर्चा खोल दिया था। जज की बेंच बैठी थी जो भावनाओ पर नहीं बल्कि सबूत पर चलती है।

पाए गए दोषी के सबूत उसके और उसकी टीम की पूरी आक्रमकता को दिखा रहे थे, हालांकि पुलिस ने केवल 2 की शिनाख्त की और बाकी को नकाबपोश बताया। वहीं इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता था कि जो लोग हमला करने आ रहे थे, वो उनको घायल करने की कोशिश में नहीं आ रहे थे, उनके साफ शब्द सुने जा सकते थे कि मार डालो सबको। काट डालो। किसी ने नहीं कहा कि जाने दो, छोड़ दो।

वहीं 4 लाश की तस्वीर भी सामने थी, जिसे जान से मारा गया था। हाई कोर्ट की जज के बेंच ने पुरा मामला सुनने के बाद फैसला सुनाते हुए कहने लगे… "परिस्थिति किसी को भी हथियार उठाने पर मजबूर कर सकती है। पुलिस की नाकामी भी साफ दिखाई देती है जो आज तक इन इलाकों में चल रहे क्राइम को हटाने में और लोगो में कानून का पालन करवाने में नाकाम रही है।"

"लेकिन हालात कैसे भी हो, इनकी अनुकूल ट्रेनिग और मारने कि क्षमता किसी प्रोफेशनल की तरह है, यदि इसे नजरंदाज किया गया तो आने वाले भविष्य में खतरनाक साबित हो सकता है। कोर्ट सभी बात को ध्यान में रखकर मुख्य आरोपी अपस्यु रघुवंशी और उसकी कदम से कदम साथ मिलाने वाली उसकी मंगेतर अवनी सिन्हा को अपना पक्ष रखने का एक मौका देगी। उनकी सुनवाई केवल केस से जुड़े लोगों के बीच होगी।"

"3000 पुलिस वालों का एक साथ इस्तीफा और किसी एक के बचाव मै ऐसे खड़े होना, एक गैर जिम्मेदाराना रवैया है, जो नहीं होना चाहिए था। पुलिस अपना पक्ष कोर्ट मै रखने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन इस प्रकार के कदम एक गलत व्यवस्था का सृजन करेगी, इसलिए कोर्ट सभी 3000 पुलिस वालों पर डिपार्टमेंटल इंक्वायरी चलने के आदेश देती है और इस दौरान सभी पुलिस कर्मी सस्पेंड रहेंगे, साथ ही साथ उनका इस्तीफा भी ना मंजूर किया जाता है।"

"दिल्ली का उस इलाका में प्रशासनिक वायवास्थ लाने के लिए, वहां 4 नए चौकी खोले जाएंगे और जान से मारने कि कोशिश कर रहे सभी दोषियों के खिलाफ चार्गशीग दायर करके उन पर अलग से मुकदमा चलाया जाए। साथ ही साथ कई आतंकवादी को एक जगह पनाह देने के लिए, उस इलाके में 3 टुकड़ी परा मिलिट्री फोर्स को भी तैनात किया जाए और इस मामले की तह तक जाने और पूर्ण छानबीन की जिम्मेदारी उन पर होगी। ये परा मिलिट्री फोर्स तबतक वहां बनी रहेगी, जबतक यह सुनिश्चित ना हो जाए कि वहां हर एक संदिग्ध को पकड़ ना लिया गया हो।

1 जनवरी राठौड़ मेंशन… जश्न के माहौल में डूबा हुआ समा था। इस समा में चार चांद तब लग गया जब साथ रह रही वैदेही उर्फ वैली, पहली बार सबके बीच बैठी और नम आखों से कहने लगी… "मुझे लगता था सिर्फ मेरे साथ ही बुरा हुआ है, कल शाम पता चला ये हंसने और हसाने वाला पुरा परिवार, अपने अंदर इतना दर्द समेटे है।"… सभी ने उंगली उपर उठाते हुए एक बैनर दिखा दिया.. "जिंदगी में रोने के मौके हर कदम आएंगे, इसलिए हंसकर उनका सामना करने का।"..

15 अगस्त के तरह, 1 जनवरी को भी पॉलिटिकल सरगर्मी कुछ ज्यादा ही बढ़ी हुई थी, लेकिन इस बार कोई खींचातानी नहीं थी। क्योंकि बहुत से बुड्ढे के लपेटे जाने से, नए लोग जो आगे आए थे, फिर वो पक्ष के थे या विपक्ष मे, एक सर्वदलीय मीटिंग बुलाकर होम मिनिस्टर को धन्यवाद कह रहे थे। अपस्यु ने अपनी 10% के इमाम की राशि होम मिनिस्टर को ही दे चुका था। जिसे होम मिनिस्टर ने पक्ष और विपक्ष में बांट दिया, अपस्यु रघुवंशी को भूलने की कीमत या उससे लडने की कीमत बताकर। जिसकी जैसी स्वेक्षा हो, अपस्यु रघुवंशी के लिए अपनी राय बनाकर काम करे, वो उनका स्वतंत्र मत है।

कई सारे राज जब खुले तो मिश्रा परिवार पर मानो बिजली सी गिर चुकी थी। दूसरी बिजली तो तब उन पर गिर गई जब बेटो ने ये कहकर यूएस से लौटने से मना कर दिया की वो ऐसी फैमिली का हिस्सा रहना पसंद ना करेंगे, जिसके दामन पर इतने दाग हो।

सुलेखा तो दर्द का लंबा दौर झेलते आ रही थी, शायद जिसका अंत कल रात को हो चुका था। लेकिन अनुपमा, साची और लावणी के लिए यह सच पचा पाना मुश्किल था कि मनीष और राजीव उन्हें जान से मार देना चाहते थे। सुलेखा शायद इसी दौड़ के लिए खुद को मजबूत बना रही थी, ताकि विपत्ति जब आए तो वो अपने परिवार को समेट सके, बल्कि टूटने ना दे।

ना सिर्फ उसने अपने परिवार को सहारा दे रही थी, बल्कि दोनो लड़को को समझा भी रही थी। हां लेकिन ये भी सत्य है कि कोई कितना भी बड़ा फिलॉसफर क्यों ना हो, तबतक किसी को नहीं समझा सकता, जबतक वो सुनने को राजी ना हो जाए और मिश्रा के दोनो कपूत कुछ सुनने को तैयार ही नहीं थे।

1 जनवरी की देर रात अपस्यु और ऐमी वापस से उसी बस्ती में पहुंचे जहां कल दंगे हुए थे। उसे देखकर ही सबके होश गुम थे। जिस काम के लिए आया था वो काम भी तुरंत ही हो गया। राठौड़ मेंशन से चोरी किए गए 250 करोड़ रुपए। तकरीबन 50 लोगों ने बांटे थे। अपस्यु ने इधर पैसे लौटाने के लिए अनाउंस किया और उधर तुंरत सब उसके पाऊं में पैसे डालकर गया।

जमा मस्जिद के पीछे का इलाका तो और भी ज्यादा खौफ जदा था। 31st को ही वहां पता चल गया था कि किसके घर में उन्होंने चोरी कि है, ऊपर से बड़े बाजार वाले चोर ने जमा मस्जिद के पीछे वाले चोर को इक्ताल्ला कर दिया था, कि वो डेविल वहीं पहुंच रहे है। पहले तो वो सब भागने का सोचे, फिर ख्याल आया कि पैसे तो दूसरी पार्टी ने भी लिया था और खर्च तो वो भी किया होगा, लेकिन वो जिंदा है। मतलब उसे केवल पैसा चाहिए।

कुछ लुक्खों की यहां गैंग थी लेकिन उस जगह के मुकाबले ये जगह अपस्यु को पसंद आया। साथ में नदीम खान का मजाकिया अंदाज़ अपस्यु को कुछ ज्यादा ही भा गया। 2 करोड़ उसके और उसके दोस्तो के लिए छोड़कर वो जाते हुए कहता चला, चोरी छोड़कर कोई और काम शुरू कर लो। लेकिन नदीम तो अपनी सोच में काफी क्लियर था, वो भी पीछे से सुना दिया.. "सर जी चोरी समुद्र में ही करता हूं, जिन्हे चोरी हुए धन ना भी मिले तो दारू पीकर कह दे, जाने दो।"

1 जनवरी की रात एक और घटना जो देर रात घट रही थी। सोमेश को लिसा का एक पत्र मिला जिसमें उसने लिखा था, सॉरी पापा मै आपकी वो बेटी नहीं बन पाई जैसी आपको उम्मीद थी। मै यूके वापस जा रही हूं, इस उम्मीद में कि कभी आप मुझे समझ सके। मै अपने लवर के साथ जा रही हूं, शादी की सूचना आपको भीजवा दूंगी। प्लीज आप परेशान मत होना। आपकी लाडली लसीता।

2 और 3 जनवरी के दिन ऐमी और नीलू काफी मसरूफ रहे। अब तक दोनो 6 लड़को से मिल चुकी था, सातवे का इंतजार था, जो सामने से चला आ रहा था। उसके चलने के अंधा और खूबसूरत चेहरे को देख, दोनो ने मेट्रिमोनयल कि तस्वीर एक बार देखी और एक बार नजर उठा कर लड़के को देखा। नाम सुभाष कुमार, हाइट 5 फिट 11 इंच। रंग सांवला। आंखो पर दादा जी वाला चस्मा। बाल तेल में डूबे हुए। शर्ट व्हाइट चेक, पैंट बिल्कुल फैले हुए पैरेलल। और जब वो अपने नाके फलका कर हंसा तो अजंता की मूरत लग रहा था। नीलू उसे देखते ही… "मुझे ये लड़का पसंद है।"..

सुभाष:- मुझे भी आप बहुत पसंद आयी।

नीलू:- मै जॉब करती हूं।

सुभाष:- मै भी जॉब करता हूं।

नीलू:- मैं मायलो ग्रुप के प्रोजेक्ट डेवलपमेंट चीफ हूं और यदि काम आ गया तो 6 महीना या साल भर तक मुझे प्रोजेक्ट डेवलप होने तक, प्रोजेक्ट की जगह पर ही रहना पड़ता है।

सुभाष:- जी मै घरेलू लड़का हूं। जॉब भी घर से ही करता हूं। एफसीएस (fcs) में काम करता हूं। लेकिन मेरा भी आपके जैसा हाल है, यदि कोई असाइनमेंट आ गया तो महीनों या सालो घर से दूर रहना पड़ता है। फिर तो आपको इक्छा यदि हुई मिलने की, तो मेरे पास आना होगा। और एक बात, मै वर्जिन नहीं हूं।

नीलू:- मुझे कोई दिक्कत नहीं। बस शादी के बाद किसी से अफेयर मत करना।

सुभाष:- जी वादा रहा, लेकिन सेक्स ???

नीलू:- अपने नीड के हिसाब से, पर मेरे कानो तक ये बात नहीं आनी चाहिए।

सुभाष:- फैमिली प्लानिंग

नीलू:- वादा करना होगा कोई एक बच्चे के पास रहेगा, तभी कोई बच्चा प्लान करेंगे।

सुभाष:- और यदि किसी अर्जेंट वजह से दोनो को साथ निकालना परे तो।

नीलू:- ऐसे केस के लिए मेरा बहुत बड़ा मायका है।

सुभाष:- फिर रिश्ता पक्का समझे, क्योंकि मेरे घर में सिर्फ मै हूं।

निलू:- यहां भी वही हाल है। रिश्ता पक्का करते है। एक कोर्ट का केस चल रहा है उसका फैसला आने के बाद डेट तय केर लेते है।

सुभाष:- ठीक है फिर। आप को व्हाट्स एप किया है कुछ, देख लीजिए।

नीलू:- हा हा हा हा हा.. थैंक्स.. ऐसे ही संदेश भेजते रहना। कल मिलते है।

सुभाष:- हां ठीक है।

ऐमी जो तबसे दर्शक बनी हुई थी… "जीजाजी में क्या पसंद आ गया जो उसे खुल्लम खुल्ला सेक्स की छूट दी जा रही थी। उल्लू ऐसे कोई कहता है क्या वो भी शादी के लिए मिलने अाए लड़के से पहले मीट में।"

नीलू:- अच्छा बता हम दोनों में ज्यादा हॉट, सेक्सी और ब्यूटीफुल कौन हैं।

ऐमी:- मुझे नहीं पता।

नीलू:- अब नखरे क्यों कर रही है बता ना..

ऐमी:- हां ठीक है तू है..

नीलू:- चल झुटी.. मुझे सामान्य खूबसूरत कहा जाएगा और तुझे हटके। ऐसा की बार-बार देखने को जी ललचाए। लेकिन उसने सिर्फ तुम्हे पहली बार आते वक़्त देखा, उसके बाद कोशिश भी नहीं किया। हो सकता है सरिफ़ बनने की कोशिश कर रहा हो, लेकिन कम से कम सामने से तो सरीफ़ है ना।

ऐमी:- इसलिए सेक्स नीड अनुसार कह दी।

नीलू:- तू अब भी नहीं समझी। वो बेलो एवरेज दिखने वाला लड़का, मेरे अनुसार नहीं उसके अनुसार की फीलिंग बता रही। बेलो एवरेज दिखने वाला लड़का कह अपने बारे में रहा था लेकिन को सवाल मेरे लिए था। जैसे उसे पूछना था, क्या तुम वर्जिन हो। लेकिन वो ऐसा ना पूछकर सीधा मुझसे कह दिया में वर्जिन नहीं।

ऐमी:- ओह समझ गई। तब तो तुमने हीरा ढूंढ लिया है बेबी.. चल पार्टी दे।

नीलू:- कहे अपने होने वाले को गाली सुना रही है। सारे पैसे दान कर दिए बेस का रखा सारा पैसा खत्म। जिंदगी अब सैलरी पर कट रही है गरीबी में।

ऐमी:- कितनी गरीबी।

नीलू:- 40 हजार।

ऐमी:- इसलिए बड़े बुजुर्ग कुछ कुछ अच्छी बात कह गए है। बेटा पैसा ज्यादा हो तो बचना सीखो। लालच बुरी बला है। लेकिन तुम् बुजुर्ग की सुनो तब ना।

नीलू:- एक बुजुर्ग पर तरस खाकर उसकी बात सुनी थी। बेचारे का दावा लेने के बाद मुश्किल से खड़ा किया और खड़ा होने के 5 मिनट बाद ढीला। फिर वो पसीने में तर होकर, पूरी रात उंगली चलाता रहा और मुझे सुनाता रहा। और मै भी बड़े मज़े से सुनती रही।

ऐमी:- तुझमें ना पल्लवी भाभी की आत्मा आ गई है।

नीलू:- कम से कम उन्हें जिंदा तो रख रही हूं। फिर तो लगता है अपस्यु को बिस्तर पर लेने का प्लान कर लेना चाहिए।

ऐमी उसकी बात सुनकर भरी कॉफी हाउस में उसे मारना शुरू केर दी और वो भागना।
 
Update:- 173

राजीव मिश्रा, मनीष मिश्रा, अनुप्रिया और महिदिपी को 31 की रात को ही रिमांड में ले लिया गया। इन लोगों के साथ साथ कुल 80 हाई प्रोफाइल लोग फसे थे, जिन्हे 3 जनवरी से 5 जनवरी के बीच चली लगातार सुनवाई के बाद सभी को दोषी पाया गया। मनीष मिश्रा, राजीव मिश्रा, अनुप्रिया और महिदिपी को आजीवन कारावास और बाकियों को उसके गुनाह के अनुसार सजा मिल गई।

5 जनवरी को ही सुनवाई में बाद चारो को जेल में शिफ्ट किया जा रहा था, तभी रास्ते में धमाका हुआ, अचानक ही सब दिखना बंद। जबतक किसी को कुछ समझ में आता, 4 कैदी फरार, जिसकी सूचना तुरंत अधिकारियों तक पहुंचाई गई और चप्पे चप्पे पर पुलिस अलर्ट।

बिल्कुल इन चारो का भी वहीं ट्रीटमेंट हुआ, जैसा विक्रम, प्रकाश और लोकेश के साथ हुआ था। एक रात रखकर बदन के सारे नाखून, बाल सब गायब। इन्हे भी शुरवात के 10 मिनट तक अंधेरे में छोड़ा गया, और उनका भविष्य दिखा दिया गया।

ये लोग थोड़ा ढिट थे, इन्होंने ऐसी प्रतिक्रिया दी, जैसे इन्हे कोई फर्क नहीं परता। फिर सामने के स्क्रीन पर फ़्लैश हुई एक तस्वीर, विक्रम, प्रकाश और लोकेश 15 अगस्त के पहले और 16 अगस्त में बाद।

तीनों चेन से बंधा बाहर आया। तेज रौशनी में कुछ देर तक उनकी आखें नहीं खुली। कुछ देर बाद उनके आखों के सामने खड़े कुछ लोग, जो धुंधले नजर आ रहे थे, वो बिल्कुल साफ दिखाई दे रहे थे। प्रकाश तो देखकर ही अपनी स्माइल देने लगा।…. "आय हाय, अपनी एक्स गर्लफ्रेंड को देखकर कैसे मुस्कान आ गई।".. ऐमी ने टोंट किया..

विक्रम और प्रकाश बस चेहरे की प्रतिक्रिया ही दे रहे थे, बाकी इतनी जान अंदर नहीं बची की आवाज निकाल सके। उनके होंठ तो हिल रहे थे, लेकिन आवाज़ ही नहीं आ रही थी। चारो उन तीनों को देखकर आश्चर्य से… "ये यहां है।"..

अपस्यु:- और मेरे दुश्मनों, आप का भविष्य भी यही है।

अब लगे चारो गिड़गिड़ाने। मिन्नते करने और रिश्तेदारी निभाने। लोकेश में थोड़ी जान बाकी थी… "ये मिश्रा हमारे लेवेल के खिलाड़ी है क्या?"

अपस्यु:- उससे भी बड़े लेवल का है लोकेश। ये लोग उस दौड़ के साथी है, जब अनुप्रिया और महिदिपी साथ में पढ़ा करते थें। तुमने सुना होगा इसके 2 छिपे हुए पार्टनर।

प्रकाश और विक्रम हां में सर हिलाते हुए सहमति देने लगे, हां हम जानते है। तभी लोकेश बोल परा… "साला मेरा कमीना भाई अपने अकाउंट पर हमसे छिपकर पैसे रखा था, अपस्यु ने उसे ट्रांसफर करके कानून कि सजा काटने भेज दिया। ऊपर से मेरी दिलदार बुआ ने मेरी भाभी को ढाई हजार करोड़ दिए है, वो तो किसी भी वक़्त छूट जाएगा। यहां तो 5 लाख में लोग छुड़ाने का इंतजाम कर लेते है।"..

अपस्यु, लोकेश की बात कर हंसते हुए… "इन लोगो को निचोड़ लिया गया है, इनके पास अब कोई पैसे नहीं।"..

मनीष अपस्यु को कोने मै ले जाते… "देखो मेरे पास बहुत पैसा है।"..

अपस्यु:- कितना पैसा है..

मनीष:- लैपटॉप लाओ..

मनीष लैपी से अकाउंट लोग इन करके अमाउंट दिखाए… "इतने है।"..

अपस्यु:- सिर्फ 10000 करोड़, इतने का तो सामान बर्बाद करके युक्रेन से आ रहा हूं।

"रुको",.... फिर दूसरा अकाउंट लॉग इन किया, वहां 5000 करोड़। ऐसे ही धीरे धीरे खींचकर अपस्यु ने उससे 25000 करोड़ निकलवा लिए। उसे अपस्यु कोने में भेज दिया। फिर अाई राजीव मिश्रा की बारी… भाई साहब के पास 6 अकाउंट और कुल 16000 करोड़ का माउंट। फिर बारी आयी दोनो भाई बहन की, जो खंगाल कर 4 लाख निकाल पाई। सबका पैसा खींचने और उनकी हाय सुनने के बाद अपस्यु जोड़ जोड़ से हंसते हुए चारो को अंदर डाल दिया। विक्रम और प्रकाश को भी अंदर भेज दिया।

लेकिन जैसे ही उसने लोकेश को अंदर करना चाहा… "हम तो भाई है एक मिनट सुन तो लो।"

अपस्यु:- जी सुना दीजिए…

लोकेश:-तुम्हरा मैंने अभी अभी अरबों का फायदा करवाया। उसपर से ये तो बेईमानी है। तुम्हे यहां केवल बुड्ढे को रखा है, इकलौता मै नेक्स्ट जेनरेशन का। फिर मेरे साथ ये नाइंसाफी क्यों?

अपस्यु:; क्योंकि तुम्हारी सजा निम्मी ने तय की थी, और वो अभी यहां नहीं है जो उससे तुम्हारा फेवर करके तुम्हारे सजा के बारे में पुछ लूं।

लोकेश:- नहीं मुझे भी मेरे भाई और अनुप्रिया के बच्चो की तरह बाहर के जेल में डालो।

अपस्यु हंसते हुए… सामने स्क्रीन पर देखो अनुप्रिया के बच्चो के लिए काया की दी हुई सजा। वैसे तुम्हे भी इसी सजा के लिए काया बोल रही थी। लेकिन मैंने माना कर दिया, कहा निम्मी के आने के बाद ही कुछ होगा।

लोकेश सामने की स्क्रीन पर देखा। रुद्रा, युक्तेश्वर और हंस झुके हुए थे, उनके पैंट नीचे पाऊं में और पीछे से एक दैत्याकार का मोटा कैदी रुद्रा के पीछे, जिसका खुला पिछ्वाड़ा दिख रहा था और रुद्रा को फ्रेच जेल की सजा से रूबरु करवा रहा था। यही हाल युक्तेश्वर और हंस का भी था। लोकेश अपना मुंह फाड़े, घोर आश्चर्य करते… "नही निम्मी को सजा ही बेहतर है।"

इन सब को अंधेरे में डालने के बाद अपस्यु और ऐमी ऊपर आए। 4 महीने में वो जगह लगभग पुरा बनकर तैयार थी, बस थोड़े काम और बाकी रह गया था। परमानेंट कुटिया बनी हुई थी, लेकिन सब वैसे ही झोपड़ी की तरह दिख रही थी। चारो ओर का वैसा ही इलाका और जिस जगह सबको जलाया गया था वहां 170 मूर्तियां वहां के लोगों की समाधि के रूप में जो बली चढ़ गए किसी की गन्दी महत्वकांछा में।

इसी के साथ एक बार फिर दोनो उसी पहाड़ी के नीचे थे, जहां के ऊपर के फूल से पहली कहानी शुरू हुई थी। अपस्यु और ऐमी के मायूस चेहरे पर आज की ये पहली खिली और सच्ची मुस्कान थी। दोनो एक दूसरे को देखकर मुस्कुराए। हालांकि ऊपर चढ़ने के लिए शानदार लिफ्ट की व्यवस्था करवा दी गई थी, लेकिन दोनो ही पहाड़ पर फिर से चढ़े, बिना किसी सुरक्षा के।

ऊपर आकर दोनो ने महादेव बंदना कि और पहाड़ के किनारे बैठकर एक दूसरे के कंधे से टीके, घंटो उस जगह को देखते रहे… "आज हमारे कितने दोस्त होते नहीं। सब अपनी अपनी लाइफ में मस्त होते और हम अचानक से किसी के यहां पहुंचकर उन्हें चौंका देते।"..

अपस्यु:- हम्मम ! चलो चलते है।

दोनो पैदल ही वापस जेके और पल्लवी के कॉटेज तक आए, जहां आस पास 8-10 घर बन चुके थे, लेकिन वो कॉटेज अब भी वैसे ही खड़ा था। वो बगीचा अब भी वैसा ही था, बस आम के पेड़ के साथ कई जंगली पेड़ भी खड़े हो गए थे। ऐसा लग रहा था अभी कल ही की तो बात है, अंदर से ऐमी की आती आवाज़।

दोनो कॉटेज में घुसे और सीधा तहखाने में जाकर अपने लिए छोड़े गए वो सामान को उठा लिया, जिसे जेके और पल्लवी ने अपस्यु और ऐमी के लिए उस दौर में छोड़ा था जब ट्रेनिंग देते थे, यह कहकर कि एक दिन जब हम नहीं होंगे, फिर ये तुम्हारा होगा, संभाल कर रखना, अच्छे से समझना और इसे आगे बढ़ाते रहना।

दोनो ने उस बक्से की धूल झाड़ी और अंदर के समान को एक बार देखकर वापस बक्सा बंद कर दिया और पुराने यादों को एक बार आंखो मै संजो कर दोनो उस जगह को छोड़ दिए।

वापस दिल्ली पहुंचते ही अगले दिन हाई कोर्ट मै पेसी का नोटिस पहुंच चुका था। 31st की घटना पर फाइनल सुनवाई होनी थी। अपस्यु के साथ सभी पागल जेल जाने को आतुर। किसी तरह मनाकर सबके नाम केस से हटवाए गए। सबूत के साथ थोड़ी से छेड़छाड़ पहले दिन ही हो गई थी, जहां केवल और केवल अपस्यु और ऐमी ही दिख रहे थे।

काफी तीखी बहस चली कोर्ट में। सिन्हा जी जहां खुद ही मोर्चा संभाले हुए थे वहीं पब्लिक प्रॉसिक्यूटर भी उतना ही भिड़ा हुआ था, लेकिन सिन्हा जी के हाथ में भी कुछ नहीं था, क्योंकि सबूत पुख्ते थे और दोनो पक्षों के वकील अपना फाइनल स्टेटमेंट दे चुके थे।

हाई कोर्ट के जज की वहीं बेंच थी और शायद सजा भी पहले से तय थी। दोनो को 3 साल के लिए देश से ही तड़ीपार कर दिया गया। याधपि उन्हें दोषी करार नहीं दिया गया, सेल्फ डिफेंस के मामले को देखते उन्हें क्लीन चिट दिया गया और उनके खतरनाक इतिहास को देखते और पिछले 7 साल से एक ही बात सोचते रहने कर कारन, दोनो को 3 साल तक देश के बाहर रहने के आदेश मिले। ताकि इन 3 साल में वो लोग इन जगहों से दूर रहे जो उनकी अक्रमता को बढ़ा देती है, और अपने ट्रेनिंग के कारन ये बेहद खतरनाक साबित होंगे।

देश छोड़ने के लिए उन्हें 25 जनवरी तक वक़्त दिया गया और इसी के साथ कोर्ट कि सभा भी समाप्त हो गई। सजा के बारे में सुनकर घर के सारे लोग भन्नाए हुए थे। कुंजल और नंदनी तो रह रह अपस्यु और ऐमी का चेहरा देखती और 2 बातें कोर्ट को सुनाने लगती। काफी गुस्से में दिख रही थी दोनो।

ऐमी, खड़ी होकर नंदनी के कंधे को पीछे से पकड़कर उसके ऊपर लटकती… "मां, घूमने जा रहे है हम, 3 साल ही तो है यूं गुजर जायेंगे। और हम यहां नहीं आ सकते तो क्या हुआ आप आती रहना।"..

नंदनी:- मुझे तो इन दोनों पर ही शक हो रहा है कि ऐसी सजा खुद ही तय करवाए होंगे। दूसरे देश ऐसे कैसे भेज सकते है, फिर कोर्ट रहने और खाने पीने का पैसा दे।

सिन्हा जी:- नंदनी जी आप जज्बाती हो रही है। कोर्ट ने इन्हे कोई सजा नहीं दी है। बस उनका मानना है कि ये दोनों लंबे समय से एक ही मिशन में मानसिक रूप से ऐसे फसे है कि इन्हे जहां कहीं भी कोई मजलूम दिखेगा तो ये खतरनाक फैसला करने लगेंगे। इसलिए 3 साल का देश से बाहर रहने का आदेश मिला है ताकि इन इलाकों से जितना दूर रहेगा खुद के बारे में और अपने बारे में सोचने का मौका मिलेगा।

नंदनी:- हां! कोर्ट का ऐसा सोचना तो बिल्कुल सही है। ठीक है दोनो की शादी करवाकर 3 साल के हनीमून पर भेज देते है। दोनो को मंजूर।

अपस्यु और ऐमी मुसकुराते हुए… "हम इस कोर्ट का फैसला भी कैसे टाल सकते है।"..

रात के वक़्त दोनो भाई अकेले छत पर बैठे हाथ में बियर लिए चांद को देख रहे थे। आरव, अपस्यु को देखकर मुस्कुराते हुए कहने लगा… "साला अपनी किस्मत में अलग ही रहना लिखा है।"..

अपस्यु:- हां शायद। वैसे भी परिवार की जिम्मेदारी तुझे ही तो लेनी है।

आरव:- कमीना, और तू देश विदेश घूमते रहना। ऐसी जिंदगी क्यों चुन रहा है। तू और ऐमी साथ में तो है, यहीं रुक जा आराम से परिवार शुरू कर।

अपस्यु:- इमोशनल ना कर, हंस कर विदाई दे।

आरव:- तू जेके भईया और पल्लवी भाभी के कातिलों के पीछे जा रहा है?

अपस्यु:- अभी उसपर सोचा तो नहीं है लेकिन हां, जल्दी काम शुरू करूंगा। फिलहाल एक वैकेशन पर हूं।

"तुम ही दोनो सगे हो ना, मुझे तो भुल ही गए।"… दोनो के बीच जगह बनती कुंजल भी अपना बियर का बॉटल लिए बैठी। दोनो भाई आखें बड़ी किए… "ये क्या है।"..

कुंजल:- बियर की बोतल है, देखो लिखा है।

आरव:- हां लेकिन हमारे साथ लेकर बैठी है?

कुंजल:- अभी मै कॉलेज की सीनियर हूं और अपने दोस्तो के साथ बैठी हूं। ओक जूनियर्स।

दोनो भाई हंसते हुए.. "ओक सीनियर"..

स्माइल.. ही ही.. खी खी.. कुछ देर तक ऐसी ही आवाज़ ऊपर से आती रही, तीनों सेल्फी पर सेल्फी लेते रहे।..

कुंजल:- साची से मिले थे क्या दोनो।

आरव और अपस्यु:- नहीं मुलाकात नहीं हो पाई थी। वहां सब ठीक तो है ना..

कुंजल:- पुरा परिवार वापस गांव जा रहा था, मैंने किसी तरह समझा बुझाकर वहां तुम्हारे फ्लैट में शिफ्ट करवाया, लेकिन मेरे ख्याल से तुम दोनो को मिल लेना चाहिए। साची और लावणी के भाइयों ने इंडिया वापस आने से मना कर दिया है, कहते है, बदनाम परिवार है उनका।

अपस्यु:- 10 दिन में भागकर आएंगे तू टेंशन ना ले। चल फिलहाल चलकर मिलते है। वैसे वहां सुलेखा आंटी है इसलिए मुझे उतनी चिंता नहीं। बहुत बुरे दौड़ से गुजर रहे है थोड़ा वक़्त तो लगेगा संभलने में। क्या हमे वो वक़्त नहीं लगा था।

कुंजल:- ऐसे इमोशनल बातें करोगे तो मै चली जाऊंगी।

अपस्यु और आरव दोनो ने कुंजल के गले में हाथ डालकर उसके गर्दन को दबाते हुए… "ऐसे कैसे चली जाएगी। अच्छा सुन तुम्हे एक काम देकर जाऊं।"..

तीनों छत से नीचे आकर फ्लैट के ओर चलने लगे… "कुसुम रोज जाती है चिल्ड्रंस केयर, तुम भी क्यों नहीं उसके साथ जाती। शायद वो भी अकेली मेहसूस केर रही होगी हमारी तरह, पर दिल की मजबूत है। कभी मुझे वहां अपने चेहरे से जतायी नहीं। उसे भी एक बहन मिल जाएगी, और दोस्त भी। कभी-कभी उसे अकेले सबके साथ खेलते देखता हूं तो वहीं दर्द सा मेहसूस होता है जैसे पहले कभी मै मेहसूस करता था। कोई बाउंड्री नहीं है, तेरा मन हो तो करना।"..
 
Update:-174

तीनों छत से नीचे आकर फ्लैट के ओर चलने लगे… "कुसुम रोज जाती है चिल्ड्रंस केयर, तुम भी क्यों नहीं उसके साथ जाती। शायद वो भी अकेली मेहसूस केर रही होगी हमारी तरह, पर दिल की मजबूत है। कभी मुझे वहां अपने चेहरे से जतायी नहीं। उसे भी एक बहन मिल जाएगी, और दोस्त भी। कभी-कभी उसे अकेले सबके साथ खेलते देखता हूं तो वहीं दर्द सा मेहसूस होता है जैसे पहले कभी मै मेहसूस करता था। कोई बाउंड्री नहीं है, तेरा मन हो तो करना।"..

कुंजल:- स्माइल करो और कुसुम की चिंता मत करो। मै देख लुंगी। चलो अब भाभी से और साची से मिलकर आया जाए। वैसे भाभी के नाम से ही इनका चेहरा देखो कैसे खिल गया है।

कुछ ही देर में तीनों वहां पहुंचे, जैसे ही अंदर घुसे… "मासी, मौसा.. यहां।"..

कंचन अपस्यु और आरव को देखते ही दोनो को खींचकर 1-1 थप्पड़ लगाई और उसका गला पकड़कार रोती हुई कहने लगी… "मेरी बहन के मौत के पीछे की सच्चाई ही छिपा दिए। क्यों किया बता ना.. क्यों?"..

बीच से कुंजल उसकी आंसू पूछती… "हर चीज का अपना एक वक़्त होता है मासी। मकसद सच्चाई छिपाना नहीं था बल्कि, जबतक उन्हें अंजाम तक पहुंचा ना दो सच्चाई को बस दबा कर रखनी थी।"..

सभी बैठ गए डायनिंग टेबल पर, सुलेखा मिश्रा से बातें चल रही थी। वहीं लावणी कहीं गुम बस ख़ामोश हर किसी की बात पर फीकी मुस्कान दे रही थी। अपस्यु ने आरव को इशारा किया और आंख मार दिया। आरव लावणी के पास बैठा। कुछ देर तक सबकी बातें सुनता रहा, और नीचे से उसके कमर में चीकोटि काट ली। लावणी एक बार आरव को देखकर वहीं फीकी मुस्कान दी.. "अभी मन नहीं। रहने दो ना।"..

"इतनी ख़ामोश लावणी।"… आरव को लगा जैसे दिल में किसी अंदर तक पीन घुसा दिया हो… "यहां हुआ क्या है, और साची कहां है।"..

आरव के इस सवाल पर दोनो मां बेटी ख़ामोश, एक बार सवाल दोहराया गया तब सुलेखा कहने लगी…. "अनुपमा दीदी की हालत देखकर साची हताश थी। उसने पार्थ से रिश्ता तोड़ दिया और दोनो मां बेटी गांव चले गए।"

अपस्यु:- लेकिन क्यों? चलो चलते है।

सुलेखा:- नहीं रहने दो, साची जाते जाते कहती गई….. "जिस उलझन में अपस्यु ने मेरी जिंदगी फसाई थी, वहीं उलझन मेरी मां के जिंदगी में भी डाल दिया। उसने तो मुझे किसी तरह समझा दिया, लेकिन मै अपनी मां को कैसे समझाऊं की उनके जिंदगी भर का रिश्ता एक धोका था।"

"अपस्यु को कहना मेरे पीछे ना अाए, उसकी कोई गलती नहीं। मेरे पापा ने जो उसके साथ किया उसके लिए हम यही डिजर्व करते है। अपनी जिंदगी में वो आगे बढ़े, मैं भी आगे बढ़ गई हूं। अपनी समस्या का हाल मै खुद ढूंढ लूंगी, और जब मै खुद से खड़ी हो जाऊंगी, तब हम फिर से एक अच्छे दोस्त की तरह मिलेंगे। लेकिन तब तक मेरे पीछे आकर ये एहसास ना करवाए की मै असहाय हूं।"

लावणी रोती हुई आरव के गले लग गई और बिना कुछ बोले बस रोती ही रही।

अपस्यु ने तुरंत ही एक टेक्स्ट किया.. स्माइली डाला और नीचे लिखा.. "गिल्टी सा मेहसूस हो रहा है।"..

साची:- पागल हो नो मोर गिल्टी, बस वापस आने नहीं कहना। तुम्हारे लिए मै बहुत खुश हूं। मै थोड़े गुस्से में थी इसलिए छोटी मां को बहुत कुछ कह गई थी। बाद में जब ट्रेन में बैठी तो सारी बातें एक एक करके दिमाग में आती रही, फिर लगा, शायद यही जिंदगी है। मेरी चिंता मत करना। बस खुद से खड़ा होना सीख रही हूं। बुरा वक़्त आया तो खुद के भाई ने साथ छोड़ दिया, रुला गई ये बात फिर तुमसे क्या गिला, जिसमे अपनी मां को ही जिंदा जलते देखा हो। मै उन तस्वीरों को देख रही थी और मेरी रूह कांप रही थी। तुमसे मिलकर तुम पर गुस्सा निकालना चाहती थी, फिर ख्याल आया मिलने गई तो तुम जाने नहीं दोगे, इसलिए बिना मिले चली आयी।

अपस्यु:- मै अब तुमसे उस दिन मिलूंगा जब तुम खुद में सक्षम हो जाओ। बस एक बात ध्यान रखना, तुम्हारी खुद की परेशानी तो ठीक है लेकिन किसी ने तुम पर एक्स्ट्रा परेशानी लादी तो बेफिक्र होकर हमे बताना।

साची:- क्या सबके एक्स्ट्रा परेशानी के लिए तुम खड़े रहोगे अपस्यु। मेरी लाइफ की हर परेशानी मेरी है। मै खुद से झेल लूंगी। वक़्त सब सीखा देता है। शायद अब बात नहीं कर पाऊं। कभी कभी टेक्स्ट करते रहना।

अपस्यु अपने छलकते आशु पूछते हुए गांव में बैठे आईटी वाले आदर्श को कॉल लगाया, और साची का नंबर देते हुए कहने लगा… "ये कभी गुम नहीं होनी चाहिए। नजर बनी रहे और कोई गंभीर चिंता का विषय हो तो तुरंत मदद मिल जानी चाहिए।"..

अपस्यु साची से बात करके अंदर आया। कुछ हल्का मेहसूस कर रहा था। अंदर अब भी लावणी, आरव के गले लगे सुबक रही थी। कंचन अपने आने का मकसद पहले ही बता चुकी थी। सुलेखा में वो सुनंदा को ढूंढ़ती हुई अाई थी और बहन मोह में कंचन सुलेखा को अपने साथ लेने आयी थी।.. बहुत समझाने के बाद सब तय हो गया। 16 जनवरी की शादी के बाद सुलेखा कंचन के साथ चली जाएगी।

सब लोग बात करने में व्यस्त थे, माहौल धीरे धीरे नॉर्मल सा हो रहा था, इसी बीच अपस्यु वहां से निकलकर काया से मिलने चला आया। काया अपने फ्लैट में कुछ कर रही थी, अपस्यु को देखकर मुस्कुराती हुई कहने लगी… "मुझे लगा कि तुम भुल गए।"..

अपस्यु:- मै कुछ नहीं भूलता। तैयार रहना 20 जनवरी को हम यूके जाएंगे और 24 जनवरी की तुम्हारी शादी।

काया:- पागल, मुझे कोई शादी नहीं करनी, वो नीलू को ही करने कहो।

अपस्यु:- अब इमोशन छिपाने से क्या फायदा मै सब जानता हूं। एक वो पागल थी लिसा, जिसे लगा मात्र एक ट्रैप के कारन तुम साथ थी और अब तुम्हे ज्यादा परेशान नहीं करना इसलिए चली गई।

काया:- ही ही ही ही… सही तो की है।

अपस्यु:- 20 जनवरी को यूके चलो और यही बात उसके सामने कह देना।

काया:- और मना कर दू तो जिद करोगे, ड्रामे और प्लांनिंग यही ना..

अपस्यु:- हां सही है..

काया थोड़ी संजीदा होती… "वैभव से दूर रहना पिरा दे रहा है अपस्यु इसलिए मै चाहकर भी नहीं गई। यहां परी हूं, कहीं गई नहीं काम खतम करके, उससे भी नहीं समझे क्या।"..

अपस्यु:- हां समझ गया हूं कबका, इसलिए तो बापू को मैंने समझा दिया और कहा आप तो पुरा चिल्ड्रंस केयर की ही देखभाल करो। वो मान चुके है। हम भी मान चुके है। और मुझे और ऐमी को पता है कि वैभव की मां बिल्कुल कमजोर अभिभावक नहीं है।

काया अपस्यु के गले लगकर उसे सुकून दिल से धन्यवाद कहती हुई अलग हुई और खुशी खुशी साथ चलने के लिए राजी हो गई। लेकिन साथ में दिल की एक ख्वाहिश भी जाहिर कर दी। उसकी शादी में पुरा भरा पूरा माहौल चाहिए, पूरे परिवार का। इसलिए शादी कि प्लांनिंग यूके चलकर। काया के चेहरे से उसकी खुशी साफ पता चल रही थी और इधर अपस्यु उसकी खुशी देखकर वो भी खुश था।

10 जनवरी का दिन राठौड़ मेंशन में शादी की तैयारी में तब झटका लग गया जब लावणी सामने से आकर शादी से इंकार कर गई। काफी देर पूछने के बाद लावणी ने अपनी मनसा जाहिर करती हुई कह दी कि उसकी बड़ी बहन की शादी हुई नहीं, इसलिए उसका दिल गवाही नहीं दे रहा। उनका ख्याल ना करके स्वार्थ में केवल अपनी खुशी कैसे देखूं, एक ही तो बहन है।"

अपस्यु ने पुरा मामला साची को समझाया। कुछ से बाद साची का कॉल आया। उसका कॉल देखकर ही लावणी रोने लगी। उधर के भी वही हालत थे। कुछ देर बाद के बाद आंसू साफ हुए, और आगे बात होते-होते लावणी के चेहरे पर मुस्कान और फिर अंत में शर्माना। फिर फोन वो नंदनी को थमा दी। सब कुछ फिर तय समय पर ही होने तय हुआ।

16 जनवरी शाम के 6 बजे.. राठौड़ मेंशन का बड़ा सा लॉन खास गेस्ट से भड़ा हुआ था। होम मिनिस्टर साहब अपने बेटे के साथ आए थे और आजकल बाप बेटे हर जगह लगभग साथ ही घूमा करते थे। सौरव अपने बाप के पास से हटकर राठौड़ मेंशन में दाखिल हो गया। बेचारा अंदर आया और बाहर जाने लगा, क्योंकि सामने ही बहुत सारी लेडीज बैठी हुई थी। जैसे ही सौरव जाने लगा वैसे ही कुंजल भागकर गई और सौरव का हाथ पकड़कर उसे खींचकर लाती हुई औरतों के बीच बिठाकर उसका परिचय करवाने लगी.. "आप लोग इनसे मिलिए, मेरे प्यारे जीजाजी।"..

सब लेडीज सवालिया नजरो से कुंजल को देखने लगी, फिर कुंजल अपनी बात को क्लियर करती… "ये हमारी सबसे बड़ी बहन कलिका दीदी के होने वाले पति है।"..

कुंजल की बात पर सब हसने लगे। अपस्यु सबको इस बारे में पहले ही बता चुका था। फिर तो जैसे वो सभा के बीच मनोरंजन का खिलौना बन गया। इतने मज़ाक उड़ाए गए की बेचारे का कान गरम हो गया। इसी बीच अपस्यु निकल कर आया।.. "अरे जीजाजी आप औरतों के बीच क्या कर रहे है।"..

सौरव, बेबस सा चेहरा लिए… "तुम्हे ही ढूंढने आया था और इसने मुझे पकड़ कर यहां बिठा दिया।"..

अपस्यु:- इसने नहीं कुंजल ने। अब आपसे मज़ाक नहीं करेगी तो बेचारी किससे करेगी।

सौरव उस बीच से लगभग भागते हुए निकला और अपस्यु के साथ चलते… "भाई मेरे काम का क्या हुआ? कलिका भी क्या फ्रांस कि जेल में है? उसे भी चोरी के केस में फसाया है क्या?"..

अपस्यु:- 3 फरवरी को यूके पहुंच जाना शाम के 4 बजे से पहले। 4 फरवरी को तुम्हे कलिका मिल जाएगी अब शादी एन्जॉय करो, मै लोगो से मिल लेता हूं।

अपस्यु सबसे मिल ही रहा था कि सामने से साची और अनुपमा अंदर आती हुई नजर आयी। अपस्यु अनुपमा का चेहरा अपने हाथ मै थामकर उसे देखने लगा। अनुपमा फीकी सी मुस्कान देती हुई कहने लगी… "इतना अफ़सोस मत करो। तुमने कुछ नहीं किया, और जिसने किया वो अपनी हर खुशियों से मरहूम हो गया। बुरा वक़्त है धीरे धीरे सब ठीक हो जायेगा। चल अब मुझे छोड़ वरना मुझे ही लोग स्पेशल गेस्ट मान लेंगे।"

अपस्यु झुक कर अनुपमा के क़दमों में गिर गया। अनुपमा जब उसे खड़ा की तो वो कहने लगा… "मुझे वो दूसरी शादी की बात ओपन नहीं करनी चाहिए थी। मुझसे बहुत बड़ी भुल हो गई। कभी कभी रात को ये ख्याल सोने नहीं देता है।"

अनुपमा:- फिर सुलेखा कैसे इतने सालो से सोती होगी, जिसे ये पता था कि उसका पति धोखेबाज के साथ साथ गद्दार है। हम तुम्हारे कारन नहीं टूटे अपस्यु उल्टा तुमने तो मायाजाल से निकला है। बस इस मायाजाल से निकलने के बाद वाला दर्द संभालने में थोड़ा वक़्त लगेगा। अब जारा हट शादी में आयी हूं रुला मत।

अनुपमा के जाते ही साची अपस्यु के गले लगती… "थैंक्स पीछे नहीं आने के लिए। जिंदगी को करीब से समझने का मौका मिल रहा है।"..

अपस्यु साची के साथ वहीं किनारे लगे बेंच पर बैठते… "मै दुनिया को तो नहीं जानता लेकिन तुम्हे तो जानता हूं। ये रखो।

अपस्यु अपनी बात कहकर अपनी जेब से एक लिफाफा निकालकर दे देता है.. साची उस लिफाफे को देखकर… "इसमें क्या है अपस्यु।"..

अपस्यु:- तुम्हारे हिस्से के पैसे। अब ये मत कहना कि मै ये नहीं ले सकती। अंजाने में ही सही, तुमने जो मेरा काम किया है, उसके बिना ये सब अधूरा रहता। ये तुम्हारे काम का मेहनताना। प्लीज इसे लेने से मना मत करना वरना ऐसा लगेगा जैसे कुछ गलत करके आगे बढ़ा हूं।

साची अपस्यु का चेहरा देखकर मुस्कुराई हुई… "ठीक है रख ली, अब स्माइल करो और जाकर जयमाला स्टेज संभालो, देख तेरी सेक्सी बीवी को सब लौंडे कैसे तार रहे है। और उसकी कमर बोल ढक कर रखने, पुरा कर्वे बनाई हुई है। लाल रंग के लहंगे में देखने में बिल्कुल क़यामत लगती है उसकी कमर।

अपस्यु:- ध्रुव को क्यों छोड़ दी?

साची:- अब जाओगे यहां से। और हां हम सदा दोस्त है और रहेंगे, बस हमारी राहें अलग है। जो भी किया वो कुछ छुब्द मानसिकता के लोग थे जिन्होंने अपने ही परिवार में जहर घोल दिया, फिर चाहे वो तुम्हारे पिता हो हा मेरे। तुम उस दौर से निकल गए और मुझे थोड़ा वक़्त लगेगा, बस अफ़सोस है कि मै चाह कर भी अपने पिता का गला नहीं घोंट सकती वरना उसकी जान मै मांग लेती। कभी हिम्मत जुटा पाई तो तुम्हारे साथ मै चलूंगी उनसे मिलने और पूछूंगी की क्या हासिल कर लिया उन्होंने ये सब करके।

अपस्यु उसका हाथ थामते… "मै 3 साल के लिए बाहर जा रहा हूं। अपना ख्याल रखना और कोई भी समस्या हो तो हमे याद करना। मै कॉन्टैक्ट में रहूंगा। देखो साची मै ये नहीं कह रहा तुम आश्रित हो जाओ, बस ये समझ रहा हूं कि जब लोग साथ होते है तो उम्मीदें उन्हीं से होती है। मै उन सबको अंजाम तक पहुंचा पाया क्योंकि मैंने हर किसी से मदद ली, बिना मदद के मै एक दिन भी नहीं टिक पाता।

साची:- हम्मम ! जहां कहीं भी फसुंगी, तुम्हे और आरव को संदेश मिल जाएगा।

अपस्यु:- थैंक्स यार,

साची:- अब तुम जाओ मै भी चली स्वास्तिका के पास, लावणी के शादी में नहीं नाची तो उसका दिल टूट जाएगा, इसलिए हटो और मुझे तैयार होने के लिए जाने दो।

नाच गाना और खुशियों के बीच शादी का रंगारंग कार्यक्रम चल रहा था। उसी बीच सभी जोड़े… अपस्यु-ऐमी, आरव-लावणी, स्वास्तिका-दीपेश, नीलू-सुभाष.. बैठ कर शादी का मंत्र सुन रहे थे, तभी माध्यम आवाज़ में ऐमी की आह निकल गई। ऐमी अपस्यु को धीमे कान में कहती…. "इतने सारे लोग है, यहां तो हरकतें बंद करो।"..

अपस्यु:- सबसे बात हुई तुमसे कहां हुई है, अब अभी ही मुलाकात हो रही है फुरसत से, तो मै क्या करूं।

ऐमी:- काबू रखो, वरना ये जो आंखो पर हवस का चस्मा दिख रहा है, उसे मै हारताल के बैरियर से ढक दूंगी।

अपस्यु:- अब तो शादी हो रही, एक ही कमरे में रहेंगे, कितने देर बैरियर लगाए रहोगी।

ऐमी:- दि मम्मी रिटर्स में छोटा सा फ्लैशबैक था, उसमे राजा अपनी सेक्सी पत्नी के वहां पर ताला लगा कर रखता था। ऑनलाइन सर्च मारी तो वो मिल गया।

अपस्यु:- पागल कहीं की।…

दूल्हा दुल्हन सभी फेरे के लिए खड़े हो गए। हर कोई फूल की बारिश करने लगा। इसी बीच कुंजल को ऐसा लगा जैसे फुल फेकते वक़्त किसी ने जान बूझकर धक्का मारा हो। वो नजरंदाज करती अपना ध्यान आगे लगाई, तभी उसे एहसास हुआ कि कोई बिल्कुल किनारे से उससे चिपक कर खड़ा हो गया है और कमर पर हाथ भी फेर दिया… कुंजल अपनी आखें बड़ी करती सोचने लगी… "यहां इतनी डेरिंगबाज कौन हो रहा है जो मुझे छेड़ रहा।".. जब वो थोड़ा किनारे खिसकर साइड में देखी तो उसके जीजाजी दीपेश का दोस्त निर्मल खड़ा था।

कुंजल वापस अपनी जगह पर आकर होंठ उसके कान के पास ले जाती… "यहां सीसी टीवी है चारो ओर, कहीं मेरे भाइयों ने देख लिया ना छेड़ते, तो जिंदगी उल्टी लटक जाएगी। उनके कारनामे टीवी और अखबारों से पता ना चला क्या।"

निर्मल:- देखा पढ़ा और सुना भी, तो क्या ये साले तुम्हारी जवानी पर ताला लगा देंगे। क्या तुम्हारा दिल और अरमान नहीं है।

कुंजल:- सब अरमान है और शादी के लिए रिश्ता भी देख रहे है। कोई पसंद आ गया तो हां कह दूंगी।

निर्मल:- और उस बीच..

कुंजल:- उस बीच में मतलब..

निर्मल:- शादी के लिए हां कहने और अभी के बीच के समय में क्या करोगी..

"साले लौंडे, उंगली दो तो कलाई पकड़ने के लिए तैयार रहते है।".. कुंजल मन में सोचती हुई मुस्कुराई फिर जवाब देने लगी… "तबतक पढ़ाई लिखाई और काम काज है ना।"..

निर्मल कुछ सोचते हुए… "यहां कोई ऐसी जगह नहीं, जहां सीसी टीवी कवरेज ना हो।"..

कुंजल:- क्यों क्या करना है तुम्हे?

निर्मल:- कुछ नहीं बस चलते कुछ बातें करने..

कुंजल:- जी नहीं सॉरी, यहां मेरे भाई, बहन की शादी चल रही है और वो छत पर इकलौती ऐसी जगह है जहां सीसी टीवी कवर नहीं।

निर्मल:- हां तो शादी खत्म होने के बाद मिलते है वहां।

कुंजल:- ही ही ही ही… ठीक है 6 फ्लोर पाइप से चढ़कर पहुंच गए तो मुझे कॉल कर देना मै आ जाऊंगी।

कुंजल अपनी बात कहती हुई उसे आंख मारी और अंदर ही अंदर हंसते… "अभी इस मजनू की हवा निकलेगी।"..

20 जनवरी 2015.. पुरा खानदान उठकर एयरपोर्ट पर आए हुए था। ऐमी और अपस्यु, काया और वैभव के साथ हाथ हिलाते हुए बोर्डिंग पास के एरिया में बढ़ रहे थे और इधर सब लोग उन्हें जाते हुए देख रहे थे।
 
Update:-175

22 जनवरी दोपहर के 2 बजे, धड़ाम से एक किराए के कमरे का दरवाजा खुलता है और काया सबसे पहले अंदर। दरवाजा खुलने से उस छोटे से कमरे में लेटी हुई लिसा उठकर खड़ी हो जाती है। पल जैसे थाम गया हो लिसा और काया के बीच। दोनो की नजरे एक दूसरे से मिलने लगी और दोनो अपने एक कदम बढ़ाकर होंठ से होंठ लगाकर चूमने लगे। काया, लिसा के दोनो गाल को पकड़े, किसी मासूक की तरह उसे चूम रही थी।

तभी ऐमी वैभव के आंख को अपने हाथ से ढकती… "शर्म करो पीछे 3 लोग खड़े है।"

काया अपने हाथ के इशारे से उन्हें बाहर जाने बोली। दोनो हंसते हुए वैभव को लेकर बाहर आ गए और दरवाजा सटाकर वहीं सीढ़ियों पर बैठ गए, लगा थोड़ा प्यार जाता कर बाहर आ जाएंगे।

तभी बाहर टननननन .. टूननननननन.. छननननननन.. खटटटटटटट.. आव आराम से.. जैसी साफ और जोरदार आवाज बाहर आने लगी। ऐमी और अपस्यु वैभव को वहां से लेकर भागते हुए कहने लगे.. "हम घर फाइनल करके कॉल करते है।"…

4 फरबरी 2015.. काया के इक्छा अनुसार उसकी शादी में पुरा परिवार शरीक होने आया था। कैथोलिक रीति रिवाज से शादी थी, इसलिए चर्च को पूरा सजा दिया गया था और गेस्ट पुरा भरे पड़े थे। लिसा के पिता सोमेश दत्त अपने पत्नी और बेटे के साथ शादी में शरीक हुआ था। अपस्यु और ऐमी बेस्ट फ्रेंड के किरदार में थे, जहां ऐमी लिसा के साथ आती वहीं वैभव सबसे आगे सूट-बुट पहने और पीछे से काया अपस्यु के बाजू में हाथ देकर चली आ रही थी।

नंदनी और सोमेश दत्त दोनो आस पास बैठे थे और दोनो ही परिवार को दूल्हे के बारे में नहीं पता था। नंदनी को बस इतना पता था कि काया की शादी में उसका भी एक परिवार हो और लिसा की भी यही ख्वाहिश थी कि उसकी शादी में कोई आए की नहीं आए उसके पापा जरूर आने चाहिए। अपने पिता के बहुत करीब थी वो।

नंदनी, सोमेश से कहती… "इनकी शादी जल्दी हो जाती है। लगता है कि पहले काया की शादी होगी फिर लसीता की।

सोमेश, लिसा को आते देखा, जो जाकर काया के सामने खड़ी हो गई।… "नहीं बहनजी लगता है दोनो की शादी साथ में होगी, लेकिन दूल्हा कहीं नजर नहीं आ रहा।"

तभी पादरी अपना कार्यक्रम शुरू कर देता है। सोमेश खुश होते .. "लगता है शादी की रस्म शुरू हो गई है, कुछ देर में दूल्हे को बुलाएंगे।"..

इतने में ही दोनो एक दूसरे को अंगूठी पहनते है और होंठ से होंठ लगाकर चूमने लगते है। सोमेश दत्त बेहोश। घर पर बड़ा ही आक्रोशित माहौल। बस कोई खुलकर कह नहीं पा रहा था कि शादी मतलब छोड़ा छोड़ी का इंटरकोर्स, ना की छोड़ी छोड़ी का कुछ भी। बस सब ये शादी को गलत गलत बोले जा रहे थे और लिसा मज़े लेती पूछ रही थी कि क्या गलत है।

अंत में उसकी मां ने कह ही दिया, शादी मतलब वंश बढ़ना। बच्चा कहां से लाएगी। इसपर पहले से पका हुए जवाब था वैभव। फिर एक बार सब चुप। अब आगे क्या कहे। तभी काया हर किसी हाथ जोड़कर, सबसे विनती करती हुई कहने लगी… "इतना मत सोचिए कि ये गलत है वो गलत है। हमारी भावनाएं जुड़ी है और हम अलग नहीं रह सकते।"..

ना पचने वाला रिश्ता मंजूर करके सब वहां से वापस चले गए और अपस्यु ने दोनो का 1 वीक का हनीमून पेरिस में रखवा दिया। सब तो चले गए बस सौरव रह गया, जो बेचारा अपनी कलिका को ढूंढ़ते हुए आया था।

उसकी बेबसी पर तरस खाते हुए अपस्यु उसे लेकर सबसे पहले युक्रेन पहुंचा, जहां श्रेया अपनी टीम के साथ फसी थी। कंगाल और बदहाल सी हालत में, लेकिन उन चारो ने अपनी मेहनत से मक्का को वहां लहरा दिया था। हाथ से खेत कोरकर खेती करना मुश्किल होता है, लेकिन फिर भी 500 स्क्वेयर मीटर में लंबा चौड़ा फसल उगा रखा था।

उन चारो को दूर से ही एक कार आती हुई दिखाई दी, जो बड़ी तेजी के साथ उनके पास से गुजरी और एक किनारे के फसल को रौंदकर चली गई। चारो के सीने में ऐसा दर्द उठा मानो किसी ने उनके बच्चे को घायल करके भाग गया हो।

वो कार वापस आयी और इस बार फसल के बीचों बीच रौंदने आ रही थी। जैसे ही उन चारो ने ये नजारा देखा, चारो हाथ पकड़ कर अपनी फसल के आगे खड़े हो गए। कार तेजी में बिल्कुल उनके करीब आयी। चारो ने टक्कर की सोच कर अपनी आखें मूंद ली। अचानक ही हैंड फुट ब्रेक सब एक ही बार में लगे और व्हील क्राउच करती हुई बिल्कुल उनके इंच भर के फासले से दाएं मुड़ गई।

उनकी बेकाबू धड़कने जब सामान्य हुई तब सामने से उसे अपस्यु खड़ा नजर आया। श्रेया, जेन, प्रदीप, और गुफरान चारो अपने कमर में खोसी छोटी सी चाकू लेकर उनके पीछे दौरे… "ओ पगलाए लोग मुझे मार दोगे तो यहां से निकलोगे भी नहीं। रुक जाओ यार।"

लेकिन चारो गालियां देते हुए उनके ओर भागने लगे। बहुत दौड़ने के बाद चारो थककर एक जगह बैठ गए… "मूर्खो बस इतना ही स्टम्ना रहा। खेती कर रहे हो यार, कुछ तो स्टमना दिखाओ।"..

चारो एक साथ हाथ जोड़ते… "नीचे कंटेनर ने 4 आदमी के लिए उतना खाना नहीं था कि रोज 2 वक़्त का खाकर गुजर कर सके, इसलिए 1 वक़्त के खाने पर जिंदा है। हां कभी कोई जानवर हाथ लग गया फिर पार्टी होती है।"

अपस्यु:- इस से अच्छा 200 किलोमीटर पैदल ही चल देते, 4-5 दिन में पहुंच जाते।



प्रदीप:- पहुंचकर क्या भीख मांगते। तुमने हमें यहां ज़ीरो करके छोड़ दिया जिसका कोई अस्तित्व नहीं। काम भी उन्हीं को मिलता है जिनकी पहचान हो।

श्रेया:- कुत्ते, यहां हमे नंगा करवाते शर्म नहीं आयी तुम्हे?

अपस्यु:- सबक था जो मुझे लगता है अब तक सीख चुकी होगी। चलो 2 महीने का करावश खत्म हुआ।

जेन:- सब कुछ तो खतम हो गया। तुम्हारा शो यहां चलाया तो गया था, अब जाकर क्या करेंगे..

अपस्यु:- यहां भी तो मैंने सब कुछ खत्म कर दिया, तो क्या जिंदगी रुक गई। चारो अपना घर बसाओ और मेहनत से आगे बढ़ो। अब चलो उठो। इतना प्यारा फसल लगाई हो मेहनत से, तो क्या अपनी मेहनत से मुकाम हासिल नहीं कर सकते। टैलेंट तो है तुम चारो में।

गुफरान:- सही कहा भाई। वैसे भी जैसे जैसे खुद के मेहनत का फसल बड़ा होते देखा ना तब समझ में आया कि किसी के मेहनत का पैसा छीनने का दर्द क्या होता होगा।

अपस्यु चारो को लेकर सौरव के साथ वहां से निकल गया। रास्ते में सौरव अपना गुस्सा दिखते… "कलिका के पास जाना था यहां क्यों ले आए।".

अपस्यु:- मेरी दोस्त लिसा को यहां किसी एक लड़की से अपने साथ हुए धोक का बदला लेना है। यहां तुम दोनों में से तो किसी एक ने उसके साथ सेक्स भी किया है।

जेन:- हीहीहीही… बहुत ऊंची चीज है लिसा, प्रदीप को ब्वॉयफ्रैंड तो बनाई लेकिन ओरल से ऊपर कभी आने नहीं थी। उसका सर हमेशा उसके कमर के नीचे ही रहा कभी उसने आगे बढ़ने ही नहीं दी इन्हे..

श्रेया प्रदीप को आखें दिखती… "जेन क्या कह रही है, तुम लिसा के साथ सेक्स करना चाहते थे।"..

प्रदीप:- सॉरी बेबी.. वो तो तब की बात थी ना, जब हम मिशन पर थे।

श्रेया:- मिशन माय फुट, मै भी तो थी, अपस्यु भी तो था। हमारे बीच में कहां कुछ हुए था। ठरकी..

गुफरान:- आज प्रदीप तो गया..

जेन:- तुम्हे बहुत मज़ा आ रहा है ना सुनने में।

सौरव:- बंद करो अपनी अपनी बकवास। यहां क्या बात किया था मैंने और कहानी को कहां से कहां पहुंचा दी। चुपचाप कलिका के पास चलो।

फ्रांस का सहर पेरिस.. अपस्यु सौरव को लेकर एक होटल की रिसेप्शन पर आया। वहां उसने अपना कार्ड दिखाया और रिसेप्शन से उसे एक चाभी दे दी गई। जैसे ही अपस्यु के आने की सूचना मिली, किसी कमरे के बाहर खड़े 2 गार्ड वहां से चले गए और अपस्यु, सौरव को लेकर उस कमरे में दाखिल हुआ।

सामने कलिका को देखकर वो रुक नहीं पाया और उसे गले से लगाते हुए उसके होंठ चूमने लगा। कलिका ख़ामोश, उसने कोई प्रतिक्रिया दिए बिना सौरव से अलग हो गई, और अपस्यु को देखती हुई पूछने लगी….

"जब सब को जेल में डलवा दिए फिर मुझे यहां क्यों लाकर रखा। दिल में दर्द उठा था क्या की जेल में जैसे मेरे भाइयों के साथ हो रहा होगा वैसे ही मेरे साथ दिन रात लोग लगे ना रहे और नोचते ना रहे।"..

अपस्यु:- हां कह सकती हो, सौतेली ही सही, बहन तो हो। मेरे लिए ये शब्द ही काफी है। वो भी भाई ही है। दर्द कहीं ना कहीं थोड़ा सा है उनके लिए भी। लेकिन उसकी सजा काया ने तय की थी, जिसके लिए मेरे दि क में कुछ ज्यादा ही दर्द है। तुम्हे मैंने नहीं बाहर रखा है, तुम्हारी किस्मत ने बाहर रखा है। सौरव को तुममें अच्छाई दिखी, और तुम उसकी किस्मत से बाहर हो। मै अब चलता हूं। कम से कम इसे धोका मत देना।

कलिका:- रुको..

अपस्यु:- हां कहो क्या है?

कलिका अपस्यु से लिपटकर रोती हुई… "तुम्हे पता था ना हमे मौका मिलेगा तो हम तुम्हे मार देंगे। मेरे भाई जिस दिन जेल से बाहर आएंगे वो तुमसे बदला लेंगे, इसके बावजूद तुमने हमें जिंदा क्यों छोड़ दिया।"

अपस्यु:- पता नहीं बस कभी ख्याल नहीं आया कि किसी को मारना भी है।

कलिका:- तुम 7 साल से हमारे पीछे थे और हमे भनक तक नहीं। कुछ बातें है जो मुझे समझ में नहीं आ रही। क्या तुम मुझे उसका जवाब दे सकते हो।

अपस्यु:- शायद हां, शायद ना.. वो तो सवाल पर डिपेंड करता है।

कलिका:- हम्मम ! ठीक है तुम्हारी मर्जी.. मुझे ये बताओ की कैसे आखिर जगह बदले जाने पर भी तुम जीत गए और हम हार गए। मिश्रा बंधु का पीछा करके भी तुम हम तक नहीं पहुंच सकते थे, क्योंकि बहुत ही सिक्रेट कॉन्टैक्ट था और यदि जान भी जाते तो भी हमारे प्लान का कैसे पता चला।

अपस्यु:- "श्रेया के कारण। मै दिल्ली ऐसे ही नहीं आया हूं। होम मिनिस्टर हमारे हुक्म का इक्का था। हम शुरू से कॉन्टैक्ट में थे, बस दिखाने के लिए हमे अपने रिश्ते को नया अंगेल देना परा। उन्होंने है बताया था कि सात्त्विक आश्रम और लोकेश के बीच जंग शुरू हो चुकी है। सही समय है अपने काम को अंजाम देने का।"

"मै लोकेश पर फोकस किए था और मिश्रा परिवार से नजदीकियां बाना रहा था। उन्हें झांसे में लेने और खुद को काम का आदमी साबित करने के लिए मैंने होम मिनिस्टर का सहारा लिया और उसे मेरा फैन बनने के लिए कहा।"

"मै अपनी बजी चल चुका था, तुम्हीं लोग बीच में श्रेया को प्लॉट करके मुझसे लोकेश को खत्म करवाना चाहते थे। बस श्रेया के साथ मुझे एक ही परेशानी थी कि वो घर में घुस चुकी थी और मां कहीं भावना में आकर सब सच ना बता दे। इसलिए मां को उसकी सच्चाई बताकर उन्हे भी ड्रामा करने बोल दिया।"

"बस ऐसे ही एक रात वो दारू पिलाकर मुझसे मेरे राज उगलवाने आयी थी और मैंने उसे सुलाकर उसके अंदर मस्त एक नॉन ट्रेस वाला माईक, उसके जिस्म में फिट कर दिया। अब मेरी किस्मत या तुम्हारी बदकिस्मती, मेरा सर्विलेंस वहीं कर रही थी और कंप्यूटर रूम की सारी बातें मुझतक पहुंच रही थी।"

"वहीं से तो पता चला था कि तुम युक्रेन के ईस्ट बॉर्डर पर अपने 450 लोगों को रखी हो। मैंने भी उनके तम्बू वाले एरिया की खुदाई करवाई दी। कुल 1200 लोग काम कर रहे थे वहां नीचे, दिन रात। जबसे यहां तुम्हारे लोग पहुंचे थे।"

कलिका:- हम तो खुद से ही बेवकूफ बन गए। वैसे ये पैसे का क्या चक्कर था? बैंक वाले आए, पुलिस आयी लेकिन वहां सबने पैसों के कंटेनर को छोड़ दिया।"

अपस्यु:- 24 दिसंबर की रात को तुम लोगो को धुएं से बेहोश कर दिया था और रात को हो पैसा गायब। और रही बात मेरे कंटेनर की तो जब कभी बैंक में चोरी ही नहीं हुई तो हमारे कंटेनर में असली यूरो कहां से आ गए।

कलिका:- व्हाट्, जो पैसा चोरी नहीं हुआ उसकी सजा काट रहे मेरे भाई। आखिर कैस, कैसे फिर बैंक प्रबंधन ने चोरी कि बात कबूल की.. पुलिस और मीडिया को कैसे मैनेज किया। और वो 6 किलोमीटर में जो धुआं हुआ था, 60 कंटेनर अलग अलग जगह जाना..

अपस्यु:- हां वो सब हुआ था पर बैंक में चोरी नहीं हुई थी, बल्कि बैंक के सीईओ के साथ एक प्यारा और फेयर डील हुई थी। 300 बिलियन की चोरी करना क्या हलवा है। बीएनपी बैंक वालो को मैंने लालच दिया था कि 100 बिलियन हम तुझे 5 साल के लिए इस्तमाल करने देंगे। बदले में चोरी कि अफवाह उड़ाओ और फ्रेंच पुलिस को मैनेज करो, रही बात चोर की, तो 25 दिसंबर तक बहुत से लोग अपनी गिरफ्तारी और चोरी कबूल करने के लिए पगलाए होंगे। वहीं कबूल करवाना, उसके पास के हथियार जब्त करना और नाम कमाना। ऑन पेपर चोरी हुई, ऑन पेपर पैसे भी वापस आ गए। बीच ने लटकने वाले लंबा लटक गए।

कलिका:- मास्टर स्ट्रोक, नीलू ने सच ही कहा था, वो दुश्मन को अपने से 1000 गुना ज्यादा ताकतवर समझ कर चलता है। कैलकुलेशन की चूक अब समझ में आ रही है। तुम हम जैसों से 1000 गुना ज्यादा क्षमता वाले हो। और इस लेवल पर होने के बाद तुम प्लान करते हो की दुश्मन तुमसे 1000 गुना ज्यादा आगे है। कहां से तुम्हारी प्लांनिंग के आगे हमारी प्लांनिंग टिकती।

अपस्यु:- ठीक है अब सारी बात क्लियर हो गई है तो मै जाऊं।

कलिका:- रुको एक मिनट..

अपस्यु:- अब क्या है..

कलिका:- थोड़ी देर बैठकर मेरे साथ बातें करो ना.. प्लीज।

सौरव को लगा कि शायद इनको अकेला छोड़ना ही बेहतर होगा इसलिए अपस्यु को इशारे में बैठने के लिए बोलकर वो वहां से चला गया। अपस्यु कुछ देर ख़ामोश बस बैठा रहा…… "बैठ गया.. मुझे भी एक बात समझ में नहीं आ रही। उस दिन एंगेजमेंट में तुमने मुझे लिटल ब्रदर क्यों कहा था?"

कलिका:- बस ऐसे ही मन किया।

अपस्यु:- यकीन नहीं हुआ, फिर से पूछता हूं, उस दिन लिटल ब्रदर क्यों कही थी।

कलिका:- "बहुत छोटी थी मै जब तुम पैदा हुए थे। पहली बार मैंने तुम्हे गुरु निशी के आश्रम में देखी थी। मै भी रहती थी वहां लेकिन तुम्हारे आने के 1 महीने बाद मै चली गई थी। तुम्हे जब भी देखती तो बस मन करता बाहों में भरकर चेहरे को चूमती रहूं। इकलौती इंसानी भावना जो मेरे जहन में बसी हुई है आज तक। उसके अलावा कुछ नहीं।"

"बाकियों के लिए जों भी हो, पर दिल से मैंने कभी नहीं चाहा की तुम्हे कुछ हो। उस दिन एंगामनेट में जब तुम्हे देखी, तो बचपन की वहीं भावना जाग गई। ऐसा लगा मेरा क्यूटी सा छोटकी ब्रदर मेरे सामने है। यही कारन था कि खुद को रोक नहीं पाई।"

"फिर तस्वीरों ने उस दिन का हादसा देखी, जब तुम मां को बेनकाब कर रहे थे। लगा कि यार इसकी जगह कोई भी होता तो अबतक सबको मार चुका होता, इतने धैर्य के साथ कौन आगे बढ़ता है। फिर ख्याल आया, आज तक ये लड़का इतने बड़े गेम टिका ही केवल अपने धैर्य की वजह से है, वरना जिनके पीछे ये पड़ा था उन सब के खाते में कई मर्डर दर्ज है, जिनके बच्चे बदला लेने के ख्याल से तो आए और अपना मर्डर करवाकर लिस्ट केवल लंबी कर गए। खैर छोड़ो बिते वक़्त की बातें।"

अपस्यु:- हां छोड़ना ही बेहतर है।

कुछ देर तक दोनो ख़ामोश रहे। बस कुछ सोचते, फिर कलिका इस खामोशी को तोड़ती… "तुम्हारी पसंद काफी अच्छी है, तुम्हारी प्रेसनलिटी और कैरेक्टर से मैच करती, ऐमी। ब्यूटीफुल, क्यूट, हॉट, सेक्सी और मै उसे खिताब देना चाहूंगी मोस्ट डेंजरस गर्ल की। तुम दोनो साथ हो तो तुम्हे हरा पाना लगभग नामुमकिन। उसे साथ नहीं लाए।

अपस्यु:- वो पेरिस में ही है, लेकिन अपने दोस्तों के साथ। जहां तुम फसी थी, तुम्हे ढूंढते हुए श्रेया भी वहां फंस गई थी। उसे वहां से निकालकर यहां आ रहा हूं।

कलिका, अपस्यु को बड़े ही ध्यान से देखती… तुम चन्द्रभान रघुवंशी के बेटे बिल्कुल नहीं हो। ना ही उसके जैसा तुम्हारा दिमाग है। तुम केवल अपनी मां के बेटे हो, जो अच्छे लोगो के बीच पाला है। हां लेकिन अच्छे और दुनिया के खतरनाक लोग। चन्द्रभान रघुवंशी के तो बच्चे हम सब है।

दोनो गहरी श्वांस लेते कुछ पल के लिए फिर ख़ामोश हो गए। अपस्यु कलिका के ओर देखते उसका हाथ थाम लिया… "आगे क्या करोगी।"

कलिका:- 1000 करोड़ है बचे मेरे पास, वापस जाकर अपनी इमेज बनाऊंगी।

अपस्यु:- और पैसे चाहिए हो तो मुझसे ले लेना।

कलिका:- हाहाहाहा… शायद तुम्हारे लिए अच्छी दिख रही हूं अपस्यु, लेकिन मुझमें अच्छाई ढूंढने की कोशिश मत करो।

अपस्यु:- वादा कर दो बस किसी का बुरा नहीं करोगी, मै तुम्हे अच्छाई करने कह भी नहीं रहा।

कलिका:- मेरा इकलौता रिश्तेदार तुम और एक जिससे अब तक मिली नहीं वो है आरव, जब तक तुम दोनो मुझसे मिलते रहोगे एहसास रहेगा कि मेरा भी एक परिवार है और मेरे ये दोनो भाई मुझसे रिश्ता तोड़ लेंगे, जब मै किसी के साथ बुरा करूंगी, बस इस ख्याल से किसी का बुरा नहीं करूंगी।

अपस्यु:- और सौरव..

कलिका:- मेरे भाई हम दोनों को पता है कि पॉलिटीशियन और बिना किसी का बुरा किए ऊपर आए हो। उन्हें कोई आपत्ती नहीं होगी यदि मै किसी के साथ बुरा करती हूं तो। हां लेकिन तुम्हे या आरव को देखती रहूंगी तो किसी के साथ बुरा करने की इक्छा नहीं होगी।

अपस्यु:- ठीक है अब मै चलता हूं। सौरव अच्छा लड़का है, उसका थोड़ा ख्याल रखना।

कलिका:- यार इतने अच्छे लोगो के बीच रहने की आदत नहीं। फिर भी जिसकी वजह से जान बची है उसे मै अपनी जान बनाकर रखूंगी।

अपस्यु:- ठीक है अब तुम दोनों यहां से इंडिया वापस चली जाओ। बिजनेस सेटअप के लिए पैसे चाहिए तो बता देना, है मेरे पास।

कलिका अपस्यु के चेहरे पर अपना हाथ रखती उसके चेहरे को गौर से देखती हुई… "अपना ख्याल रखना और वक़्त मिले तो कॉल करते रहना। मेरे पास प्रयाप्त पैसा है। यें पैसा नहीं भी होता तो भी मै ज़ीरो से शुरू कर लेती। तुझे साल भर बाद पैसे चाहिए हो तो बेझिझक मांग लेना। वादा है कोई ब्लैक की कमाई नहीं, सब व्हाइट पैसा होगा।

अपस्यु:- ठीक है अब मैं चलता हूं दीदी तुम भी अपना ख्याल रखना।

कलिका दीदी सुनकर लगभग रो दी बस आशु बाहर नहीं आया। उसने हक से अपस्यु को अपने बाहों में की और उसका चेहरे चूमती हुई कहने लगी… "मेरा क्यूटी सा छोटकी ब्रदर।"..

जाते वक़्त दोनो के चेहरे पर सुकून भारी स्माइल थी। अपस्यु वहां से बाहर निकाला सौरव उसे जाते हुए रिसेप्शन पर मिल गया। अपस्यु उसे अलविदा कहते हुए वहां से चला…

जून 2015…

दक्षिण प्रशांत महासागर एक छोटा सा टापू। बिल्कुल शांत और चारो ओर हरियाली। नीले सागर की उजली रेत उस जगह को मनमोहक बाना रही थी। टापू के एक किनारे छोटा सा बोट था और टापू के पूर्वी खाली भाग में एक छोटा सा 4 सीटर प्लेन। हरे नारियल के पेड़ के बीच एक प्यारा सा कॉटेज बाना हुआ था और कॉटेज के 100 मीटर आगे बीच साइड डबल बेड लगा हुआ था, जिसके चारो ओर पतले उजले पर्दे और ऊपर उसी पर्दे की छत बनी हुई थी।

उसी के कुछ दूर आगे दो लकड़ी के बेड सन बाथ लेने के लिए लगे हुए थे, जिसपर लैदर के गद्दे लगे थे। शानदार हवा चल रही थी। अपस्यु लकड़ी की बेड पर लेटे, पीछे से सर पर टेका लगाए, नारियल पानी पीते हुए खिली धूप का मज़ा ले रहा था।

तकरीबन 50 मीटर आगे बीच थी। उस बीच से ऐमी अपने बाल को झटकती हुई समुद्र से नहाकर चली आ रही थी। लाल डोरी वाली वो ब्रा पैंटी पहने, पुरा बदन चमकता हुआ। अपस्यु अपने आंखो के आगे ठंडे नजरे ले रहा था।

ऐमी धीरे-धीरे आगे बढ़ती शॉवर के ओर पहुंची और पुरा बदन साफ करने के बाद आकर लड़की की बेड पर उल्टी लेट गई। अपस्यु ऊपर से लेकर नीचे तक उसके बदन का नजारा लेने लगा।… "बेबी सन क्रीम लगा दो जारा।" ..

अपस्यु यह सुनकर मुकुराय। ब्रा के नॉट को खोलकर उसने अपने दोनो हाथ पर सन क्रीम मला और हाथ आहिस्ता-आहिस्ता ऊपर से नीचे तक लाया। हाथ जब कमर तक पहुंची, तब अपस्यु पैंटी की नॉट को दोनो ओर से खोलकर उस ऊपर से निकालकर साइड कर दिया और फिर पूरे खुले बैंक के कर्व पर आहिस्ते से हाथ फेरते हुए सन क्रीम लेशन लगाने लगा।

ऐमी सीधी घूम गई और अपस्यु को देखती हुई… "4 महीने से सुबह साम यहां सेक्स किए जा रहे हो, बोर नहीं हुए क्या।"..

अपस्यु, मुसकुराते हुए…. "क्यों तुम्हे अब मज़ा नहीं आ रहा है क्या?"

ऐमी, गहरी श्वांस लेती… "सोचती हूं अब मज़ा धीरे धीरे कम हो जाएगा, पर अब तक तो नहीं हुआ, लेकिन.."..

अपस्यु, ऐमी को सवालिया नजरो से देखते उसके कमर के नजदीक बैठ गया। ऐमी के होंठ पर अपना होंठ रखते… "लेकिन क्या स्वीटी।"..

ऐमी:- कुछ नहीं छोड़ो।

अपस्यु:- हे, क्या हुआ.. घर की याद आ रही..

ऐमी:- वीडियो कॉल हो जाती है तो उतना नहीं अखरता, वो बात नहीं है।

अपस्यु:- फिर बात क्या है?

ऐमी:- यहां अब बोर हो गई हूं। चलो चलते है यहां से।

अपस्यु:- मै समझता हूं हमे कहां जाना है। लेकिन उसके लिए अभी हम तैयार नहीं है। जाएंगे तो जरूर, लेकिन कुछ तैयारी पुख्ता करने के बाद। हम जिसके पीछे है, वो भूत है। दि डेविल वर्सेज घोस्ट"

"एक बार फिर वही भंवर होगा लेकिन इस बार गेम अलग है। वो हमसे कई गुना ज्यादा तेज है। वो पैसे और जिस्म के भूखे नही, बस ताकत और तादात बढ़ाने में विश्वास रखते है। अब तक हर कॉन्टिनेंट में उसने अपनी छाप छोड़ी है, सबको सिर्फ़ एक नाम पता है रिजिलिएंट, लेकिन अब तक जितनो ने उसका सामना किया, उसमे से केवल एक ही बच पाया है, और तुम जानती हो वो कौन है। इसलिए गेम शुरू करने से पहले, उसके बारे में जानना जरूरी है कि हम किसके सामने खड़े है। फिर शुरू करेंगे भंवर.. दि गेम ऑफ शैडो"
 
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