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मैंने दोनों को भी अपने गले लगाया उन दोनों के गले लगने से मेरे दिल को आज बहुत hi ठंडक पहुंच रही थी..
जैसे बरसो से मई इनकी hi रह देख रहा था.. मेरे जिंदगी में जितना भी सुख है बस यही है ऐसा मुझे महसूस हो रहा था..
ऐसा लग रहा था जैसे ये दोनों मेरी जान है इनके बिना मई कुछ भी नहीं हु...
मैंने उन दोनों को छोड़ने को कहा पर उन दोनों में से कोई भी मुझे नहीं छोड़ रहा था..
तभी त्रिगुणा मेरे गले लगे हुए hi रट हुए कहने लगी........................
आगे............................
त्रिगुणा- (रट हुए) नहीं भैया अगर हमने इस बार आपको छोड़ा तो फिर से आप हम सबको छोड़कर चले जायेंगे और लौटकर भी नहीं आएंगे...
Shatakshi-Ha भैया अब हम आपको कभी नहीं छोड़ेंगे... इटंर सालो बाद आप हमे मिले हो...
मई उन दोनों का प्यार देखकर बहुत hi खुश हुवा..
और मेरे भी आँखों सी आंसू आने लगे.. तो मैंने उन दोनों को कहा...
Mai-Nahi मई तुम दोनों को अब नहीं छोड़कर जाऊंगा कभी भी नहीं और कही भी नहीं..
मई तो यहाँ तुम दोनों को hi मिलने आया हु.. अगर तुम दोनों ऐसी रोटी रही तो मई चला जाऊंगा...
उन दोनों ने मुझे फिर जोर से गले लगाया और कहने लगी...
त्रिगुणा- नहीं भैया अब आपको कही भी नहीं जाने देंगे हम...
Mai-Acha ठीक नहीं जाता पर ये रोना तो बंद करो और जरा मुस्कुराओ नहीं तो सच में चला जाऊंगा...
ये कहकर उन दोनों में मुझे छोड़ा और अपनी आंखे पोछने लगी.. और मुझे देखते हुए वो मुस्कुरायी..
तो मई उनका मुस्कुराते चेहरा देख पर मेरा भी दिल बहुत खुश हुवा और मई भी उन्हें देखकर मुस्कुराने लगा...
तभी मुझे कुछ याद आया तो मई उनसे कहने लगा....
मई- वैसे गुड़िया मई जब यहाँ आया था तो तुम मुझे ऐसे घर घर का क्यों देख रही थी..
मेरे मुँह से ये सुनकर एक पल के लिए तो वो दोनों कुछ शॉक हो गयी और फिर से उसकी आँखों में आंसू आ गए..
तो इसबार मई उसकी आँखों से पानी आने का कारन नहीं जान सका तो मई उसको पूछ बैठा..
Mai-(Dantate हुए) देखो मैंने तुम्हे मन किया था रोने को तुम फिर रो रही है ये सही बात नहीं है अब मई चला जाता हु...
वैसे मेरा भी मन वह से जाने का तो नहीं था पर जब कह hi दिया है तो ..
मई खड़ा होने लगा लेकिन तभी त्रिगुणा ने मेरा हाथ पकड़ लिया तो वो कहने लगी ..
Triguna-Bhaiya वैसे ये मेरे ख़ुशी के आंसू थे क्यों की ये नाम मई आपके मुँह से सुनने के लिए बहुत सालो से तड़प रही थी...
तो अपने जाने अनजाने में hi मेरा नाम ले लिया इसलिए मेरे आँखों से आंसू आ गले...
उसकी ये बात और उसके कहने का अंदाज सुनकर मई अपने आप को रोक न सका और जाकर उसके गले लग गया...
और वो भी मेरे साइन से लग गयी . उसने तो ऐसा पकड़ा हुवा जैसे वो मुझे कभी चोदे hi न...
मई उसे गले लगाया हुए शताक्षी को देखा तो उसे देखकर इशारा किया तो वो भी आकर मेरे एक साइड से गले लग गयी...
कुछ देर बाद मैंने उन दोनों को छोड़ने को कहा लेकिन वो छोड़ने को तैयार hi नहीं थी जैसे तैसे उन्होंने छोड़ा और हम फिर से बैठ गए..
लेकिन अब इस बार मई उन दोनों के बिच बैठा हुवा था और वो दोनों मेरे साइड में मुझसे हुग करके बैठी हुयी थी..
मुझे उनसे कुछ पूछना था तो मई उन दोनों से कहने लगा..
मई- वैसे तुम दोनों मुझे एक बात बताओ की मेरे आने के बाद से अब तक तुम दोनों मुझे सिर्फ घर क्यों रही थी...
त्रिगुणा- वो बात ऐसे है न भैया की... हम जब छोटे थे मतलब तब मई कुछ 10-11 साल की होंगी..
तब दादाजी ने आपको बहुत मारा और आपको इस महल से कही दूर फेक दिया...
उन्होंने आपको इतना मारा क्यों और हम से दूर कर दिया ये हमने सबसे पूछा पर किसी ने भी हमारा सही जवाब नहीं दिया...
तभी शताक्षी कहती है...
शताक्षी- है भैया हम दोनों हर समय हर दिन आपके बारे में माँ से बाबा से और बस से पूछते..
पर कोई भी हमारा कुछ जवाब नहीं देता सब हमे टालते थे.. बस इतना कहते थे वो एक दिन आएंगे जरूर...
त्रिगुणा- और पता है भैया जब से आपको दादाजी ने भेजा दिया था. तब से हमने उनसे बात भी नहीं की..
वो तो हमे रोज बात करने को कहते और सब लोग भी पर हमने किसी से भी बात नहीं की...
Mai-Nahi मेरी गुड़िया ऐसे नहीं कहते.. अगर उन्होंने ऐसा कुछ किया होगा तो उसके पीछे कुछ कारन तो होगा न...
Shatakshi-Ha होगा कोई कारन पर वो इस तरह हमे हमारे भैया से दूर नहीं कर सकते...
ये बात उसने इस अंदाज से कही की मई तो उन दोनों का मेरे प्रति इतना प्यार देखकर मई खुद hi अपने पुराने आप पर जलने लगा..
इसलिए मैंने फिर से उन दोनों को अपने बहो में ले लिया और जल्दी सेअपने आँखों में जो आंसू ए थे उन्हें पॉच लिया...
त्रिगुणा- फिर पता है भैया कुछ दिनों से महल में बहुत चहल पहल हो रही थी..
पुरे महल को इस पुरे इलाके को सजाने का काम हो रहा था..
हमने पूछने की कोशिश की पर सबने कहा की तुम्हारे लिए एक तौफा है बस वो आने के बाद देख लेना..
Shatakshi-Ha भैया हमे लगा कोई आता होंगे.. और जब हमने आपको हमारे सामने देखा तो ये हम दोनों के लिए अकल्पनीय था..
हम दोनों ने कदापि नहीं सोचा था की आप होंगे वो जिसके लिए ये सब चल रहा था वार्ना हम इससे ाचा कुछ करते...
Mai-Nahi मेरी गुड़िया ये भी आप सबने किया है वो भी मेरे लिए अकल्पनीय hi है..
और सबसे बड़ी बात मुझे तो पता hi नहीं था की यहाँ पर सब लोग मुझे इतना याद करते है..
मुझे आप इतना प्यार करते ho..Varna मई तो पहले hi आ जाता..
शताक्षी- लेकिन भैया आपको दादाजी ने यहाँ से क्यों भेज दिया था बहार इतने दूर और इतने लम्बे समय तक..
मई- वो सब तो मुझे भी नहीं पता गुड़िया.. क्यों की मुझे पहले का कुछ भी याद नहीं है..
कुछ भी नहीं... तो क्या तुम दोनों मुझे वो सब बताउंगी...
त्रिगुणा- है जरूर भैया क्यों नहीं अगर आपको वो सब याद नहीं है तो हम वो सब आपको याद दिला देंगे...
लेकिन उससे पहले आप वडा करो अब आप हमे कही भी छोड़कर नहीं जाओगे ..
मई उन दोनों को फिर से गले लगते हुए कहता हु...
मई- है मेरी गुड़िया रानी मई तुम दोनों से वडा करता हु की अब मई तुम दोनों को छोड़कर कही नहीं जाऊंगा...
तभी मुझे कुछ याद अत है तो मई उन दोनों से पूछता हु..
मई- लेकिन मुझे एक बताओ तुम दोनों ये इतना बड़ा महल है..
यहाँ पर एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए बहुत वक़्त लगता होगा न...
शताक्षी- नहीं भैया.. ये महल जितना बड़ा है उससे भी कई ज्यादा इसके राज है... हमे भी सिर्फ उतने hi पता है जितने हमे बताये गए है...
Triguna-Aur यहाँ पर एक जगह से दूसरी जगह जाना कोई बड़ी बात नहीं है क्यों की यहाँ पर...
अपनी आंखे बंद करके किसी भी जगह का अगर आप स्मरण करेंगे ये किसी भी चीज का तो आप खुद hi वह पहुंच जाते हो..
और आप जब अपनी आंखे खोलते हो तो आप वह पर खुद होते हो...
मई- (खुश होते हुए) ाचा ये तो बहुत hi अछि बात है..
फिर हम तीनो बहुत देर ऐसे hi बाते करते रहे लेकिन तभी मुझे बहार एक साया दिखाई दिया..
जो मुझे दूर से देखते hi पहचान गया था पर वो मुझे ऐसा छिपकर क्यों देखा रहा है ये नहीं पता...
इसलिए मई उन दोनों से विदा लेकर बहार आ गया.. वैसे वो दोनों तो मुझे बहार भी नहीं जाने दे रही थी..
पर मैंने उनसे बाद में मिलने का वडा लेकर वह से बहार आ गया...
पर वह पर कोई भी नहीं था और होगा भी कैसे मेरे आने से पहले hi वो वह से गायब हो गया होंगे..
और मुझे पता था वो कोण है इसलिए मई उसकी रूम की तरफ चलने लगा...
चलने क्या मैंने उसकी रूम का स्मरण किया और आंखे खोलते hi मई उस रूम के सामने खड़ा था.. शायद ये उसी का hi रूम होगा..
तो मई उस रूम में जाने के लिए आगे बढ़ने लगा.. वैसे आप सबकी जानकारी के लिए बता दू..
वो साया कोई और नहीं बल्कि मेरी छोटी बहन दित्य hi थी..
वैसे वो वह क्या कर रही थी यही सोचते हुए मई आगे बढ़ने लगा...
और उसके दूर के पास जाकर धीरे से ढाका दिया तो वो दूर धीरे धीरे खुलने लगा और मुझे अंदर का नजारा दिखने लगा था................................
मैंने दोनों को भी अपने गले लगाया उन दोनों के गले लगने से मेरे दिल को आज बहुत hi ठंडक पहुंच रही थी..
जैसे बरसो से मई इनकी hi रह देख रहा था.. मेरे जिंदगी में जितना भी सुख है बस यही है ऐसा मुझे महसूस हो रहा था..
ऐसा लग रहा था जैसे ये दोनों मेरी जान है इनके बिना मई कुछ भी नहीं हु...
मैंने उन दोनों को छोड़ने को कहा पर उन दोनों में से कोई भी मुझे नहीं छोड़ रहा था..
तभी त्रिगुणा मेरे गले लगे हुए hi रट हुए कहने लगी........................
आगे............................
त्रिगुणा- (रट हुए) नहीं भैया अगर हमने इस बार आपको छोड़ा तो फिर से आप हम सबको छोड़कर चले जायेंगे और लौटकर भी नहीं आएंगे...
Shatakshi-Ha भैया अब हम आपको कभी नहीं छोड़ेंगे... इटंर सालो बाद आप हमे मिले हो...
मई उन दोनों का प्यार देखकर बहुत hi खुश हुवा..
और मेरे भी आँखों सी आंसू आने लगे.. तो मैंने उन दोनों को कहा...
Mai-Nahi मई तुम दोनों को अब नहीं छोड़कर जाऊंगा कभी भी नहीं और कही भी नहीं..
मई तो यहाँ तुम दोनों को hi मिलने आया हु.. अगर तुम दोनों ऐसी रोटी रही तो मई चला जाऊंगा...
उन दोनों ने मुझे फिर जोर से गले लगाया और कहने लगी...
त्रिगुणा- नहीं भैया अब आपको कही भी नहीं जाने देंगे हम...
Mai-Acha ठीक नहीं जाता पर ये रोना तो बंद करो और जरा मुस्कुराओ नहीं तो सच में चला जाऊंगा...
ये कहकर उन दोनों में मुझे छोड़ा और अपनी आंखे पोछने लगी.. और मुझे देखते हुए वो मुस्कुरायी..
तो मई उनका मुस्कुराते चेहरा देख पर मेरा भी दिल बहुत खुश हुवा और मई भी उन्हें देखकर मुस्कुराने लगा...
तभी मुझे कुछ याद आया तो मई उनसे कहने लगा....
मई- वैसे गुड़िया मई जब यहाँ आया था तो तुम मुझे ऐसे घर घर का क्यों देख रही थी..
मेरे मुँह से ये सुनकर एक पल के लिए तो वो दोनों कुछ शॉक हो गयी और फिर से उसकी आँखों में आंसू आ गए..
तो इसबार मई उसकी आँखों से पानी आने का कारन नहीं जान सका तो मई उसको पूछ बैठा..
Mai-(Dantate हुए) देखो मैंने तुम्हे मन किया था रोने को तुम फिर रो रही है ये सही बात नहीं है अब मई चला जाता हु...
वैसे मेरा भी मन वह से जाने का तो नहीं था पर जब कह hi दिया है तो ..
मई खड़ा होने लगा लेकिन तभी त्रिगुणा ने मेरा हाथ पकड़ लिया तो वो कहने लगी ..
Triguna-Bhaiya वैसे ये मेरे ख़ुशी के आंसू थे क्यों की ये नाम मई आपके मुँह से सुनने के लिए बहुत सालो से तड़प रही थी...
तो अपने जाने अनजाने में hi मेरा नाम ले लिया इसलिए मेरे आँखों से आंसू आ गले...
उसकी ये बात और उसके कहने का अंदाज सुनकर मई अपने आप को रोक न सका और जाकर उसके गले लग गया...
और वो भी मेरे साइन से लग गयी . उसने तो ऐसा पकड़ा हुवा जैसे वो मुझे कभी चोदे hi न...
मई उसे गले लगाया हुए शताक्षी को देखा तो उसे देखकर इशारा किया तो वो भी आकर मेरे एक साइड से गले लग गयी...
कुछ देर बाद मैंने उन दोनों को छोड़ने को कहा लेकिन वो छोड़ने को तैयार hi नहीं थी जैसे तैसे उन्होंने छोड़ा और हम फिर से बैठ गए..
लेकिन अब इस बार मई उन दोनों के बिच बैठा हुवा था और वो दोनों मेरे साइड में मुझसे हुग करके बैठी हुयी थी..
मुझे उनसे कुछ पूछना था तो मई उन दोनों से कहने लगा..
मई- वैसे तुम दोनों मुझे एक बात बताओ की मेरे आने के बाद से अब तक तुम दोनों मुझे सिर्फ घर क्यों रही थी...
त्रिगुणा- वो बात ऐसे है न भैया की... हम जब छोटे थे मतलब तब मई कुछ 10-11 साल की होंगी..
तब दादाजी ने आपको बहुत मारा और आपको इस महल से कही दूर फेक दिया...
उन्होंने आपको इतना मारा क्यों और हम से दूर कर दिया ये हमने सबसे पूछा पर किसी ने भी हमारा सही जवाब नहीं दिया...
तभी शताक्षी कहती है...
शताक्षी- है भैया हम दोनों हर समय हर दिन आपके बारे में माँ से बाबा से और बस से पूछते..
पर कोई भी हमारा कुछ जवाब नहीं देता सब हमे टालते थे.. बस इतना कहते थे वो एक दिन आएंगे जरूर...
त्रिगुणा- और पता है भैया जब से आपको दादाजी ने भेजा दिया था. तब से हमने उनसे बात भी नहीं की..
वो तो हमे रोज बात करने को कहते और सब लोग भी पर हमने किसी से भी बात नहीं की...
Mai-Nahi मेरी गुड़िया ऐसे नहीं कहते.. अगर उन्होंने ऐसा कुछ किया होगा तो उसके पीछे कुछ कारन तो होगा न...
Shatakshi-Ha होगा कोई कारन पर वो इस तरह हमे हमारे भैया से दूर नहीं कर सकते...
ये बात उसने इस अंदाज से कही की मई तो उन दोनों का मेरे प्रति इतना प्यार देखकर मई खुद hi अपने पुराने आप पर जलने लगा..
इसलिए मैंने फिर से उन दोनों को अपने बहो में ले लिया और जल्दी सेअपने आँखों में जो आंसू ए थे उन्हें पॉच लिया...
त्रिगुणा- फिर पता है भैया कुछ दिनों से महल में बहुत चहल पहल हो रही थी..
पुरे महल को इस पुरे इलाके को सजाने का काम हो रहा था..
हमने पूछने की कोशिश की पर सबने कहा की तुम्हारे लिए एक तौफा है बस वो आने के बाद देख लेना..
Shatakshi-Ha भैया हमे लगा कोई आता होंगे.. और जब हमने आपको हमारे सामने देखा तो ये हम दोनों के लिए अकल्पनीय था..
हम दोनों ने कदापि नहीं सोचा था की आप होंगे वो जिसके लिए ये सब चल रहा था वार्ना हम इससे ाचा कुछ करते...
Mai-Nahi मेरी गुड़िया ये भी आप सबने किया है वो भी मेरे लिए अकल्पनीय hi है..
और सबसे बड़ी बात मुझे तो पता hi नहीं था की यहाँ पर सब लोग मुझे इतना याद करते है..
मुझे आप इतना प्यार करते ho..Varna मई तो पहले hi आ जाता..
शताक्षी- लेकिन भैया आपको दादाजी ने यहाँ से क्यों भेज दिया था बहार इतने दूर और इतने लम्बे समय तक..
मई- वो सब तो मुझे भी नहीं पता गुड़िया.. क्यों की मुझे पहले का कुछ भी याद नहीं है..
कुछ भी नहीं... तो क्या तुम दोनों मुझे वो सब बताउंगी...
त्रिगुणा- है जरूर भैया क्यों नहीं अगर आपको वो सब याद नहीं है तो हम वो सब आपको याद दिला देंगे...
लेकिन उससे पहले आप वडा करो अब आप हमे कही भी छोड़कर नहीं जाओगे ..
मई उन दोनों को फिर से गले लगते हुए कहता हु...
मई- है मेरी गुड़िया रानी मई तुम दोनों से वडा करता हु की अब मई तुम दोनों को छोड़कर कही नहीं जाऊंगा...
तभी मुझे कुछ याद अत है तो मई उन दोनों से पूछता हु..
मई- लेकिन मुझे एक बताओ तुम दोनों ये इतना बड़ा महल है..
यहाँ पर एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए बहुत वक़्त लगता होगा न...
शताक्षी- नहीं भैया.. ये महल जितना बड़ा है उससे भी कई ज्यादा इसके राज है... हमे भी सिर्फ उतने hi पता है जितने हमे बताये गए है...
Triguna-Aur यहाँ पर एक जगह से दूसरी जगह जाना कोई बड़ी बात नहीं है क्यों की यहाँ पर...
अपनी आंखे बंद करके किसी भी जगह का अगर आप स्मरण करेंगे ये किसी भी चीज का तो आप खुद hi वह पहुंच जाते हो..
और आप जब अपनी आंखे खोलते हो तो आप वह पर खुद होते हो...
मई- (खुश होते हुए) ाचा ये तो बहुत hi अछि बात है..
फिर हम तीनो बहुत देर ऐसे hi बाते करते रहे लेकिन तभी मुझे बहार एक साया दिखाई दिया..
जो मुझे दूर से देखते hi पहचान गया था पर वो मुझे ऐसा छिपकर क्यों देखा रहा है ये नहीं पता...
इसलिए मई उन दोनों से विदा लेकर बहार आ गया.. वैसे वो दोनों तो मुझे बहार भी नहीं जाने दे रही थी..
पर मैंने उनसे बाद में मिलने का वडा लेकर वह से बहार आ गया...
पर वह पर कोई भी नहीं था और होगा भी कैसे मेरे आने से पहले hi वो वह से गायब हो गया होंगे..
और मुझे पता था वो कोण है इसलिए मई उसकी रूम की तरफ चलने लगा...
चलने क्या मैंने उसकी रूम का स्मरण किया और आंखे खोलते hi मई उस रूम के सामने खड़ा था.. शायद ये उसी का hi रूम होगा..
तो मई उस रूम में जाने के लिए आगे बढ़ने लगा.. वैसे आप सबकी जानकारी के लिए बता दू..
वो साया कोई और नहीं बल्कि मेरी छोटी बहन दित्य hi थी..
वैसे वो वह क्या कर रही थी यही सोचते हुए मई आगे बढ़ने लगा...
और उसके दूर के पास जाकर धीरे से ढाका दिया तो वो दूर धीरे धीरे खुलने लगा और मुझे अंदर का नजारा दिखने लगा था................................