RUDRADIP- The God And Devil - Page 5 - SexBaba
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RUDRADIP- The God And Devil

अपडेट 38

मैंने दोनों को भी अपने गले लगाया उन दोनों के गले लगने से मेरे दिल को आज बहुत hi ठंडक पहुंच रही थी..

जैसे बरसो से मई इनकी hi रह देख रहा था.. मेरे जिंदगी में जितना भी सुख है बस यही है ऐसा मुझे महसूस हो रहा था..

ऐसा लग रहा था जैसे ये दोनों मेरी जान है इनके बिना मई कुछ भी नहीं हु...

मैंने उन दोनों को छोड़ने को कहा पर उन दोनों में से कोई भी मुझे नहीं छोड़ रहा था..

तभी त्रिगुणा मेरे गले लगे हुए hi रट हुए कहने लगी........................

आगे............................

त्रिगुणा- (रट हुए) नहीं भैया अगर हमने इस बार आपको छोड़ा तो फिर से आप हम सबको छोड़कर चले जायेंगे और लौटकर भी नहीं आएंगे...

Shatakshi-Ha भैया अब हम आपको कभी नहीं छोड़ेंगे... इटंर सालो बाद आप हमे मिले हो...

मई उन दोनों का प्यार देखकर बहुत hi खुश हुवा..

और मेरे भी आँखों सी आंसू आने लगे.. तो मैंने उन दोनों को कहा...

Mai-Nahi मई तुम दोनों को अब नहीं छोड़कर जाऊंगा कभी भी नहीं और कही भी नहीं..

मई तो यहाँ तुम दोनों को hi मिलने आया हु.. अगर तुम दोनों ऐसी रोटी रही तो मई चला जाऊंगा...

उन दोनों ने मुझे फिर जोर से गले लगाया और कहने लगी...

त्रिगुणा- नहीं भैया अब आपको कही भी नहीं जाने देंगे हम...

Mai-Acha ठीक नहीं जाता पर ये रोना तो बंद करो और जरा मुस्कुराओ नहीं तो सच में चला जाऊंगा...

ये कहकर उन दोनों में मुझे छोड़ा और अपनी आंखे पोछने लगी.. और मुझे देखते हुए वो मुस्कुरायी..

तो मई उनका मुस्कुराते चेहरा देख पर मेरा भी दिल बहुत खुश हुवा और मई भी उन्हें देखकर मुस्कुराने लगा...

तभी मुझे कुछ याद आया तो मई उनसे कहने लगा....

मई- वैसे गुड़िया मई जब यहाँ आया था तो तुम मुझे ऐसे घर घर का क्यों देख रही थी..

मेरे मुँह से ये सुनकर एक पल के लिए तो वो दोनों कुछ शॉक हो गयी और फिर से उसकी आँखों में आंसू आ गए..

तो इसबार मई उसकी आँखों से पानी आने का कारन नहीं जान सका तो मई उसको पूछ बैठा..

Mai-(Dantate हुए) देखो मैंने तुम्हे मन किया था रोने को तुम फिर रो रही है ये सही बात नहीं है अब मई चला जाता हु...

वैसे मेरा भी मन वह से जाने का तो नहीं था पर जब कह hi दिया है तो ..

मई खड़ा होने लगा लेकिन तभी त्रिगुणा ने मेरा हाथ पकड़ लिया तो वो कहने लगी ..

Triguna-Bhaiya वैसे ये मेरे ख़ुशी के आंसू थे क्यों की ये नाम मई आपके मुँह से सुनने के लिए बहुत सालो से तड़प रही थी...

तो अपने जाने अनजाने में hi मेरा नाम ले लिया इसलिए मेरे आँखों से आंसू आ गले...

उसकी ये बात और उसके कहने का अंदाज सुनकर मई अपने आप को रोक न सका और जाकर उसके गले लग गया...

और वो भी मेरे साइन से लग गयी . उसने तो ऐसा पकड़ा हुवा जैसे वो मुझे कभी चोदे hi न...

मई उसे गले लगाया हुए शताक्षी को देखा तो उसे देखकर इशारा किया तो वो भी आकर मेरे एक साइड से गले लग गयी...

कुछ देर बाद मैंने उन दोनों को छोड़ने को कहा लेकिन वो छोड़ने को तैयार hi नहीं थी जैसे तैसे उन्होंने छोड़ा और हम फिर से बैठ गए..

लेकिन अब इस बार मई उन दोनों के बिच बैठा हुवा था और वो दोनों मेरे साइड में मुझसे हुग करके बैठी हुयी थी..

मुझे उनसे कुछ पूछना था तो मई उन दोनों से कहने लगा..

मई- वैसे तुम दोनों मुझे एक बात बताओ की मेरे आने के बाद से अब तक तुम दोनों मुझे सिर्फ घर क्यों रही थी...

त्रिगुणा- वो बात ऐसे है न भैया की... हम जब छोटे थे मतलब तब मई कुछ 10-11 साल की होंगी..

तब दादाजी ने आपको बहुत मारा और आपको इस महल से कही दूर फेक दिया...

उन्होंने आपको इतना मारा क्यों और हम से दूर कर दिया ये हमने सबसे पूछा पर किसी ने भी हमारा सही जवाब नहीं दिया...

तभी शताक्षी कहती है...

शताक्षी- है भैया हम दोनों हर समय हर दिन आपके बारे में माँ से बाबा से और बस से पूछते..

पर कोई भी हमारा कुछ जवाब नहीं देता सब हमे टालते थे.. बस इतना कहते थे वो एक दिन आएंगे जरूर...

त्रिगुणा- और पता है भैया जब से आपको दादाजी ने भेजा दिया था. तब से हमने उनसे बात भी नहीं की..

वो तो हमे रोज बात करने को कहते और सब लोग भी पर हमने किसी से भी बात नहीं की...

Mai-Nahi मेरी गुड़िया ऐसे नहीं कहते.. अगर उन्होंने ऐसा कुछ किया होगा तो उसके पीछे कुछ कारन तो होगा न...

Shatakshi-Ha होगा कोई कारन पर वो इस तरह हमे हमारे भैया से दूर नहीं कर सकते...

ये बात उसने इस अंदाज से कही की मई तो उन दोनों का मेरे प्रति इतना प्यार देखकर मई खुद hi अपने पुराने आप पर जलने लगा..

इसलिए मैंने फिर से उन दोनों को अपने बहो में ले लिया और जल्दी सेअपने आँखों में जो आंसू ए थे उन्हें पॉच लिया...

त्रिगुणा- फिर पता है भैया कुछ दिनों से महल में बहुत चहल पहल हो रही थी..

पुरे महल को इस पुरे इलाके को सजाने का काम हो रहा था..

हमने पूछने की कोशिश की पर सबने कहा की तुम्हारे लिए एक तौफा है बस वो आने के बाद देख लेना..

Shatakshi-Ha भैया हमे लगा कोई आता होंगे.. और जब हमने आपको हमारे सामने देखा तो ये हम दोनों के लिए अकल्पनीय था..

हम दोनों ने कदापि नहीं सोचा था की आप होंगे वो जिसके लिए ये सब चल रहा था वार्ना हम इससे ाचा कुछ करते...

Mai-Nahi मेरी गुड़िया ये भी आप सबने किया है वो भी मेरे लिए अकल्पनीय hi है..

और सबसे बड़ी बात मुझे तो पता hi नहीं था की यहाँ पर सब लोग मुझे इतना याद करते है..

मुझे आप इतना प्यार करते ho..Varna मई तो पहले hi आ जाता..

शताक्षी- लेकिन भैया आपको दादाजी ने यहाँ से क्यों भेज दिया था बहार इतने दूर और इतने लम्बे समय तक..

मई- वो सब तो मुझे भी नहीं पता गुड़िया.. क्यों की मुझे पहले का कुछ भी याद नहीं है..

कुछ भी नहीं... तो क्या तुम दोनों मुझे वो सब बताउंगी...

त्रिगुणा- है जरूर भैया क्यों नहीं अगर आपको वो सब याद नहीं है तो हम वो सब आपको याद दिला देंगे...

लेकिन उससे पहले आप वडा करो अब आप हमे कही भी छोड़कर नहीं जाओगे ..

मई उन दोनों को फिर से गले लगते हुए कहता हु...

मई- है मेरी गुड़िया रानी मई तुम दोनों से वडा करता हु की अब मई तुम दोनों को छोड़कर कही नहीं जाऊंगा...

तभी मुझे कुछ याद अत है तो मई उन दोनों से पूछता हु..

मई- लेकिन मुझे एक बताओ तुम दोनों ये इतना बड़ा महल है..

यहाँ पर एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए बहुत वक़्त लगता होगा न...

शताक्षी- नहीं भैया.. ये महल जितना बड़ा है उससे भी कई ज्यादा इसके राज है... हमे भी सिर्फ उतने hi पता है जितने हमे बताये गए है...

Triguna-Aur यहाँ पर एक जगह से दूसरी जगह जाना कोई बड़ी बात नहीं है क्यों की यहाँ पर...

अपनी आंखे बंद करके किसी भी जगह का अगर आप स्मरण करेंगे ये किसी भी चीज का तो आप खुद hi वह पहुंच जाते हो..

और आप जब अपनी आंखे खोलते हो तो आप वह पर खुद होते हो...

मई- (खुश होते हुए) ाचा ये तो बहुत hi अछि बात है..

फिर हम तीनो बहुत देर ऐसे hi बाते करते रहे लेकिन तभी मुझे बहार एक साया दिखाई दिया..

जो मुझे दूर से देखते hi पहचान गया था पर वो मुझे ऐसा छिपकर क्यों देखा रहा है ये नहीं पता...

इसलिए मई उन दोनों से विदा लेकर बहार आ गया.. वैसे वो दोनों तो मुझे बहार भी नहीं जाने दे रही थी..

पर मैंने उनसे बाद में मिलने का वडा लेकर वह से बहार आ गया...

पर वह पर कोई भी नहीं था और होगा भी कैसे मेरे आने से पहले hi वो वह से गायब हो गया होंगे..

और मुझे पता था वो कोण है इसलिए मई उसकी रूम की तरफ चलने लगा...

चलने क्या मैंने उसकी रूम का स्मरण किया और आंखे खोलते hi मई उस रूम के सामने खड़ा था.. शायद ये उसी का hi रूम होगा..

तो मई उस रूम में जाने के लिए आगे बढ़ने लगा.. वैसे आप सबकी जानकारी के लिए बता दू..

वो साया कोई और नहीं बल्कि मेरी छोटी बहन दित्य hi थी..

वैसे वो वह क्या कर रही थी यही सोचते हुए मई आगे बढ़ने लगा...

और उसके दूर के पास जाकर धीरे से ढाका दिया तो वो दूर धीरे धीरे खुलने लगा और मुझे अंदर का नजारा दिखने लगा था................................
 
अपडेट 39

वो साया कोई और नहीं बल्कि मेरी छोटी बहन दित्य hi थी..

वैसे वो वह क्या कर रही थी यही सोचते हुए मई आगे बढ़ने लगा...

और उसके दूर के पास जाकर धीरे से ढाका दिया तो वो दूर धीरे धीरे खुलने लगा और मुझे अंदर का नजारा दिखने लगा था................................

आगे............................

दित्य का भी रूम बिलकुल वैसा hi था जैसा त्रिगुणा का था..

पर बस इसमें कुछ अलग बात थी की इसमें कुछ चीजे अलग जगह पर राखी हुयी थी...

बाकि सब कुछ ठीक था मैंने जब अंदर देखा तो वह पर दित्य सोफे जैसा कुछ था..

उस पर बैठे हुए कुछ सोच रही थी. शायद उसे मेरा आना भी महसूस नहीं हुवा..

वैसे तो दूर खुला हुवा था पर मैंने दूर को नॉक करते हुए बहार से बोलै...

मई- क्या मई अंदर आ सकता हु...

मेरी अबाज सुनकर दित्य तो एक पल के लिए कुछ दर सी गयी. और सहम कर अपनी जगह ढंग से बैठ गयी...

फिर उसने मुझे देखा पर बोलै कुछ नहीं सिर्फ मुझे देखती रही...

उसे कुछ बोलते हुए न देख मई फिर से कहने लगा...

Mai-Kya मई अंदर आ सकता हु...

इस बार भी उसने कुछ नहीं कहा पर निचे मुँह करते हुए है में सर हिलाया..

तो मई उसके पास चला गया और सामने बैठ गया. उसके सामने बैठकर मई उसे देखने लगा और वो निचे..

दित्य निचे मुँह कर के बैठी हुयी थी वो नहीं मेरी तरफ देख रही थी और नहीं कुछ बोल रही थी..

सिर्फ अपने दोनों हाथ एक दूसरे में रगड़ रही थी और निचे अपने दोनों पेअर के अंगूठे...

सच में मेरी छोटी बहन बहुत hi सुन्दर थी... और उतनी hi नाजुक और क्यूट भी...

जिसे देखकर हर एक का दिल उसे प्यार करना चाहे. मई तो कुछ देर के लिए उसके प्रीटी फेस को और अट्रैक्टिव चहरे को बस देखते hi जा रहा था...

पर शायद उसे किसी बात का दर था या कुछ और पर वो बहुत hi शांत बैठती थी..

पर जिस तरह मुझे त्रिगुणा ने दित्य के बारे में बताया था.. वैसा कुछ भी मुझे नजर नहीं आया था...

(अब त्रिगुणा के मुँह की कहानी दित्य के बारे में)

दित्य एक बहुत hi चुलबुली लड़की है.. वो कभी भी एक जगह ज्यादा देर नहीं बैठती..

हर समय किसी न किसी को परेशां करती रहती है.. पर है वो उतनी hi शर्मीली भी है...

आअज तक उसे कभी भी किसी भी बात पर और किसी से भी गुस्सा नहीं आया और नहीं किसी और को उसपर न जाने क्यों...

पर उसकी हर एक हरकत बचो जैसी और नटखट है जिसे देखकर बस ऐसा लगे उसकी ऐसी हरकते देखते hi जाये...

माँ को तो लगता था जैसे वो और कोई नहीं आप hi का दूसरा रूप हो पर आपसे कुछ काम hi नटखट है ये...

उसने आज तक इस महल के बहार कभी भी पेअर नहीं रखा..

क्यों की बुआ ने उसे कभी भी अपने से दूर और इस महल से बहार जाने hi नहीं दिया...

बल्कि जब भी हम दोनों (त्रिगुणा और शताक्षी) बहार जाते थे तब भी नहीं..

उसने इस महल के लोगो को छोड़कर बहार के किसी को भी नहीं देखा...

इसलिए अगर कोई दादाजी से मिलने अत तो वो उससे चुपर देखती या कभी वो सब बहार की बाटे करते तो वो छुपकर सुनती थी...

और हम दोनों भी उसे बहुत सी साडी बाते बहार की बताते थे और वो भी बड़े इत्मीनान से सुनती थी..

हमने उसे कभी भी आपके बारे में नहीं बताया क्यों की बुवा का सख्त आदेश था क उसे आपके बारे में कुछ भी बताया नहीं जाये...

और फिर आप ए और उसे आज hi पता चला की उसका कोई बड़ा भाई भी है.. और वो कोई और नहीं आप हो..

इसलिए उसे कैसे प्रतिक्रिया दे वो समाज नहीं आ रहा है.. और सबसे बड़ी बात इसलिए शायद वो आपसे दर रही है...

अगर भैया आप उसे हमारे जैसा प्यार करेंगे उसे प्यार से बोलेंगे तो वो भी जल्द hi आपसे भी हमारे जैसे hi घुलमिल जाएगी...

बल्कि दित्य की एक खास बात है अगर उसे कोई चीज पसंद आ गयी न तो उससे वो चीज कोई भी दूर नहीं कर सकता..

फिर तो आप उसके बड़े भाई हो वो आपको कैसे दूर करेगी या जाने देंगी...

(अब मेरी जुबानी)

मुझे उस वक़्त दित्य के बारे में इतना सब कुछ सुनकर बहुत hi बुरा लग रहा था..

बल्कि मेरे आँखों में आंसू भी आ गए थे. पर मैंने जल्द hi उन्हें साफ़ किया कोई देखे न...

न जाने माँ के ऐसा करने के पीछे क्या कारन था पर उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था...

और जब मैंने दित्य को बहार खड़े देखा तो मई अपने आप को रोक न सका..

और वह से दित्य की तरफ आ गया उससे मिलने उससे बात करने के लिए...

अब एते है असली समय पर जहा पर मई दित्य के सामने बैठा था और वो मेरे सामने निचे देखते हुए बैठी हुयी थी...

मई- दित्य...

Ditya-Hhhmmm....

Mai-Kya तुम मुझसे नाराज हो या मुझसे दर रही हो.. बात क्या है तुम मुझे बता सकती हो...

लेकिन दित्य ने कुछ नहीं कहा वो शांत hi रही तो मई अपनी जगह से उठ खड़ा होकर उसके साइड में बैठ गया..

जब उसने महसूस किया की मई उसके पास बैठा हु तो उसकी सांसे जोर जोर से चलने लगी और दित्य ने अपनी आंखे जोर से बंद कर दी...

मई- देखो दित्य मई तुम्हारा बड़ा भाई हु और तुम्हे मुझसे डरने की कोई जरुरत नहीं है..

मई तुम्हे कोई नुकसान नहीं पहुँचाऊँगा. बल्कि मई तो तुम्हारी ख़ुशी चाहता हु..

क्या तुम नहीं चाहती की मई तुमसे बात करू..

ये सुनकर दित्य ने नाह में सर हिलाया तो ये देखकर मई कहने लगा...

Mai-Kya तुम सच में नहीं चाहती की मई तुमसे बात करू... तो ठीक है अगर तुम सच में hi नहीं चाहती तो मई यहाँ क्यों हु...

ये कहकर मई जैसे hi उठने लगा था तभी दित्य ने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहने लगी...

दित्य- (मेरी तरफ देखते हुए) मैंने ये नहीं कहा की आप मुझसे बात मत करो मैंने तो ये कहा था की.....

मई फिर से दित्य के पास बैठ गया और उसका मुँह अपनी तरफ करते हुए कहने लगा ..

मई- दित्य बीटा मई तुम्हारा बड़ा भाई हु.. मन की मैंने आज तक भाई होने का कोई भी फ़र्ज़ नहीं निभाया है..

क्यों की आज तक मुझे खुद भी मालूम नहीं था की मेरी इतनी प्यारी और बहुत hi सुन्दर छोटी बहन भी है..

वार्ना मई अपने आप को रोक hi नहीं पता और सबसे पहले यहाँ आ जाता तुमसे मिलने...

मेरे मुँह से ये सब सुनकर दित्य तो शर्माने लगी.. और उसने मुझसे नजरे चुरा ली तो मई आगे कहने लगा ..

मई- मुझे त्रिगुणा ने बताया की माँ ने तुम्हे आज तक इस महल के बहार कभी भी नहीं जाने दिया..

और नहीं तुमने किसी और को देखा है अपने परिवार को छोड़कर...

पर अब तुम्हारा ये बड़ा भाई आ गया है न अब तुम्हे डरने की कोई बात नहीं है..

तुम्हारी हर ख्वाहिश ,हर तमन्ना ये तुम्हारा बड़ा भाई पूरा करेंगे...

बल्कि ये तुम्हारा बड़ा भाई तुम्हे कल hi महल से बहार ले जायेगा तुम्हे बहार की दुनिया दिखने के लिए...

ये सुनकर दित्य की आँखों में एक चमक ा गयी थी और वो अपने इमोशंस को कण्ट्रोल न कर सकीय..

और वो अपनी hi जगह उछलते हुए कहने लगी ..

Ditya-(Khushi से) सच भैया........ सच में...

उसके मुँह से पहली बार भैया सुनकर मई इतना खुश हुवा की पूछो hi मत..

क्यों की यहाँ पर आने के बाद उसने मेरा नाम hi नहीं लिया और नहीं उसने मुझसे कुछ बात भी की थी मेरा नाम लेकर...

उसके मुँह से भैया सुनकर मेरे आँखों में तो ख़ुशी के आंसू hi आ गए...

और मैंने उसे गले लगा liya...wo भी ख़ुशी के मरे मेरे गले लग गयी...

उसके गले लगते hi मेरे दिल में एक अजीब सा सुकून महसूस हुवा ..

जैसे इसके पहले किसी के गले लगने से महसूस नहीं हुवा था...

मुझे ऐसा लग रहा था जैसे आज मेरे दिल का टुकड़ा मुझे मिल गया हो.. और आज मेरा दिल पूरा हो गया हो..

भले hi आज तक मई इस कभी नहीं मिला था नहीं इस जनम में और नहीं पिछले जनम में...

पर फिर भी मुझे ऐसा लग रहा था जैसे हर समय मई इसे मिस कर रहा था..

और आज जब दित्य के गले लगा तो मुझे ऐसा लग रहा था की मेरे दिल का एक टुकड़ा जो खो गया था आज वो मिल गया हो..

वो भी मेरे गले लगे हुए थी.. शायद उसका भी मेरे जैसा hi कुछ हाल था...

इसलिए वो खुद अपनी आंखे बंद किये हुए मुझे अपनी बहो में महसूस कर रही थी...

कुछ देर बाद मैंने उसे छोड़ दिया तो उसे मेरे आँखों में पानी दिखाई दिया तो वो मेरे आंसू पोछते हुए कहने लगी...

Ditya-Bhaiya आप रो रहे हो क्या बात है.. बताओ न ..

Mai-Kuch नहीं बीटा बस ये तो ख़ुशी के आंसू है.. जो तुम्हारे मिलने की ख़ुशी में ए है.. और तुम्हारे भैया कहने के ख़ुशी में..

Ditya-Ab आप मेरे भैया है तो आपको भैया hi कहूँगी न या और कुछ कहूँगी...

उसकी ऐसी बात सुनकर मेरे आँखों में आंसू होकर भी मेरे चहरे पर मुस्कान आ गयी..

और मुझे हसी आ गयी.. मुझे हस्ता हुवा देखकर वो फिर से पूछने लगी...

Ditya-Ab ये लो.. अभी तो रो रहे थे और अब है रहे हो.. आखिर बात क्या है क्या आप कभी भी ऐसे hi हस्ते और रट हो...

Mai-(Uske चहरे को अपने हाथो में पकड़ते हुए) नहीं मेरी जान ये सब तो तुम्हारे बातो का जादू है..

जो मुझे ख़ुशी से रोना भी आ रहा है और हसना भी... मुझे खुद कुछ समाज नहीं आ रहा है क्या करू और क्या नहीं...

ये कहकर मैंने एक बार उसके माथे को चुम लिया और फिर से उसके साइड से गले लगाया और फिर आगे कहने लगा ..

Mai-Beta अब कभी भी अपने आप को अकेली मत समझना और है कभी भी डरना मत...

कोई भी बात हो सीधा अपने बड़े भाई को आकर बताना तेरी हर ख्वाहिश पूरी करना अब से मेरा पहला कर्तव्य होगा..

अगर तुझे कोई डटें भी तो मुझे बताना मई उसको डाटूंगा...

दित्य- ठीक है भैया... आज मई बहुत बहुत ज्यादा खुश हु... आपको पता है मुझे भाई क्या होता है..

वो कभी पता hi नहीं था.. बल्कि मुझे तो ये बात भी किसी ने नहीं बताई की मेरा कोई बड़ा भाई है और वो भी इतना प्यारा.

(ये बात उसने मेरे दोनों गलो को पकड़कर खींचते हुए कही)

वार्ना सबसे पहले मई तो आपको hi यहाँ बुला लेती...

और आपको माँ के बारे में सबकुछ बता देती और फिर आप माँ को बहुत डाँटते न...

Mai-Ha मेरा बचा... माँ को भी और सब को भी...

ये कहकर मैंने उसे फिर से गले लगेगा...

हम दोनों की ऐसे hi प्यार भरी बाटे चल रही थी.. देखो न जब वो मुझे जानती नहीं थी...

तब तो वो मुझसे बात तो क्या देखती भी नहीं थी...

और अब देखो मुझे तो बोलने का मौका hi नहीं मिल रहा है वो खुद hi बोलते जा रही थी...

पर मुझे उसकी बाते सुन्ना भी बहुत ाचा लग रहा था..

अभी हम दोनों बाटे hi कर रहे थे की तभी हम दोनों के पीछे से किसी की अबाज अति है...

अबाज- तो आप दोनों यहाँ हो... और मई आप दोनों को पुरे महल में ढूंढ रही थी...

और यहाँ आकर देखा तो आप दोनों तो मेरे hi बारे में बाते कर रहे हो पर ऐसी बाते दित्य.......................................
 
अपडेट 40

अभी हम दोनों बाटे hi कर रहे थे की तभी हम दोनों के पीछे से किसी की अबाज अति है...

अबाज- तो आप दोनों यहाँ हो... और मई आप दोनों को पुरे महल में ढूंढ रही थी...

और यहाँ आकर देखा तो आप दोनों तो मेरे hi बारे में बाते कर रहे हो पर ऐसी बाते दित्य.......................................

आगे............................

ये अबाज सुनकर हम दोनों भी पहचान गए थे की ये कोण है.

पर वो अबाज सुनने के बाद हम दोनों में से कोई भी कुछ न कह सका...

हम दोनों hi वो अबाज सुनने के बाद पीछे भी नहीं देखा हम दोनों तो सिर्फ एक दूसरे को देखे जा रहे थे..

क्यों की हम दोनों जिनके बारे में अभी बाटे कर रहे थे ये वही थी हमारे पीछे...

मतलब हमे अबाज देने वाली और कोई नहीं हम दोनों की माँ hi थी जो बहुत देर पहले hi आयी हुयी थी..

जब मई और दित्य बाटे कर रहे थे.. उनको भी दित्य के दिल का का हाल जानकर बहुत बुरा लग रहा था..

और उनके आँखों में भी आंसू आ गए the..Kyu की ये सब उनकी hi गलती थी..

उन्होंने hi तो दित्य को कभी इस महल से बहार नहीं जाने दिया..

पर इसका ये असर होगा की वो अपने hi बड़े भाई से अजनबियों की तरह डरने लगी...

ये तो उन्होंने नहीं चाहा था पर हुवा तो ऐसा hi था इसलिए वो रो रही थी..

पर लास्ट में हम दोनों को हस्ता हुवा देखकर उनके भी होठो पर मुस्कराहट आ गयी...

फिर उनको कुछ आईडिया आया तो वो इस तरह हमारे पीछे से आबाज देते हुए आयी और आकर सीधा हमारे सामने कड़ी हो गयी...

माँ- क्यों दित्य अपने भैया के एते hi अपने माँ की बुराइया करनी शुरू कर दी है तुमने...

और इतने सालो से तुम मेरे साथ रह रही हो उसका कुछ भी नहीं है...

वैसे मुझे तो पता चल गया था की माँ मजाक कर रही है क्यों की उनकी बातो सी पता चल रहा था...

पर दित्य ठैरी बची.. उसने इतना सुनते hi उसके आँखों में आंसू आ गए...

मैंने यहाँ आने के बाद पहली बार ऐसे दित्य के आँखों में आंसू देखे थे..

और उसके आँखों में आंसू देखकर मेरे दिल भी रोने को हुवा..

मई उसके आंसू बर्दास्त न कर saka..aur दित्य को फिर से गले लगा लिया...

मई- दित्य ऐसे बचो की तरह नहीं रट माँ तो मजाक कर रही थी.. उन्हें सब पता है माँ बस हमे परेशां करना चाहती थी...

माँ ने भी सोचा नहीं था दित्य ऐसे रो देगी.. इसलिए वो भी दित्य के एक तरफ आकर बैठ गयी. और दित्य से कहने लगी...

Maa-Are बीटा मई तो मजाक कर रही थी.. मैंने तुम दोनों का प्यार बहुत पहले से hi देख रही थी..

और तुम दोनों प्यार भाई बाटे सुन रही थी .. तो मैंने सोचा मई भी तुम्हारे साथ कुछ मजा करू...

Ditya-(Apne आंसू पोछते हुए) माँ आप बहुत hi बुरी हो एक पारी जैसी बची को कोई ऐसे रुलाता है क्या...

उसकी ऐसी बाते सुनकर हम दोनों के भी चहरे पर मुस्कराहट आ गयी..

बल्कि मुझे तो हसी hi आ गयी थी उसकी ऐसी बाते सुनकर पर मैंने खुद को कण्ट्रोल किया और दित्य से कहने लगा...

Mai-Beta माँ से ऐसे बात नहीं करते वो कुछ भी करे वो हमसे बड़ी है...

और उनका पूरा हक़ है हम पर वो जो भी चाहे वो हमारे साथ कर सकती है...

क्यों की ये सब वो हमारे भलाई के लिए hi करती है सामजी...

Ditya-(Meri तरफ देखते हुए) ठीक है भैया ... (और फिर माँ की तरफ देखते हुए) मुझे माफ़ कर दो माँ...

माँ- नहीं मेरी बची तुझे माफ़ी मांगने की कोई जरुरत नहीं है तुमने सच hi तो कहा है..

मैंने आज तक अपनी बची को कभी इस महल के बहार नहीं जाने दिया.. और नहीं किसी और से बाटे करने दिया...

इसलिए मेरी बेटी ऐसी हुयी की वो अपने बड़े भाई से hi डरने लगी थी...

ये कहकर माँ के आँखों में आंसू आ गए तो माँ का हाथ दित्य के हाथ पर था..

तो मैंने अपना हाथ उनके हाथ के ऊपर रखते हुए कहने लगा..

Maa-Nahi माँ आप रो मत.. मुझे पता है आपके ऐसा करने के पीछे जरूर कोई न कोई कारन होगा..

चाहे आप हमें बताओ या मत बताओ.. पर हम पूछेंगे नहीं लेकिन है इस बार मई कह देता हु की...

माँ- (मेरी तरफ देखते हुए) क्या....

मई- मई कह रहा था की आजसे आप दित्य को किसी भी बात पर नहीं रोकेंगी... महल के बहार जाने के लिए या कही और भी...

क्यों की अब उसका भाई आ चूका है और इसलिए वो जो चाहे वो कर सकती है उसकी हर ख्वाहिश अब मेरी hai.aisa मैंने उसको वचन दिया है...

और है जब तक ये भाई उसके साथ है उसका कोई कुछ भी बिगड़ सकता...

Maa-Ab तुमने कह hi दिया है तो मई कोण होती हु तुम दोनों को रोकने वाली..

तुम दोनों भाई बहन ho..Tum जो चाहे अपनी बहन के लिए कर सकते हो...

ये सुनकर दित्य तो बहुत खुश हुयी जैसे उसे पुरे जहाँ की खुशिया मिल गयी हो...

ऐसे वो खुश हो रही थी. और उछाल उछाल कर अपनी ख़ुशी जाहिर कर रही थी ..

और उसे ऐसे खुश देखकर मई और माँ दोनों भी बहुत खुश थे....

फिर माँ को कुछ याद आया तो कहने लगी...

माँ- अरे तुम दोनों की बातो में तो मई बताना भूल hi गयी.. चलो सब निचे तुम दोनों की खाने पर रह देख रहे है...

फिर हम तीनो वह पर चले गए तो देखा सब हमारी hi रहा देख रहे थे.. उसके बाद हम तीनो वह पर बैठ गए...

आज मुझे और दित्य माँ त्रिगुणा और शताक्षी सबको खुश देखकर सब समाज गए थे की बात क्या हो गयी है..

इसलिए कोई कुछ नहीं bola.Par आज भी सब कल की तरह hi खाना खा रहे थे..

मतलब मई माँ के हाथो से और मेरी बहाने मेरे हाथो से...

ऐसे hi हसी मजाक करते हुए हम सबने खाना खाया और मई माँ के साथ वह से उनके रूम में चला गया...

मई यहाँ पर जबसे आया था तबसे मैंने मेरा रूम नहीं देखा था..

बल्कि मई तबसे माँ के hi साथ रह रहा था... और अब तो मेरे साथ दित्य भी चली आ गयी...

और हम तीनो लेते hi थे की तभी त्रिगुणा और शताक्षी वो दोनों भी आ गए मेरे पास सोने के लिए...

अब माँ उन दोनों को कैसे मन करती इसलिए हम सब उस एक hi बीएड पर सो गए..

अब मैंने आप सबको पहले hi बता दिया था की वो बीएड का साइज कैसा है..

इसकिये उस बीएड पर हम सब आराम से सो गए.. हालाँकि मेरे एक और त्रिगुणा तो दूसरी और दित्य सोई हुयी थी..

और दित्य के पास माँ तो त्रिगुणा के पास शताक्षी सोई हुयी थी...

हम वैसे hi सोते हूजे कुछ दे बाटे करते रहे और वैसे hi सो गए...

अब एते hi इधर धरती पर यहाँ मेरे धरती वाले घर पर सब नार्मल था..

क्यों की ऋतू ने उन सबको मेरे बारे में ऐसा बताया था की कोई ज्यादा सोच नहीं रहा था.

बस सब मुझसे नाराज थे की मई उनकोबिना कहे hi कही चला गया हु...

दरअसल बात ये थी ऋतू ने उन्हें बताया था की मई किसी काम से बहार चला गया hu.Jaha पर कोई नेटवर्क नहीं है..

और वो जल्दी hi आने को कह दिया है.. और फिर ऋतू ने रसिका से कहकर मैजिक से सब का बिहेवियर इस बात पर नार्मल कर दिया..

मतलब किसी पर भी मेरे ऐसे जाने से हो या मेरे ऐसे बिहेवियर से ज्यादा किसी पर भी कोई इफ़ेक्ट न हो और कोई ज्यादा दुखी न हो...

पर वो तो बेचारी अकेली hi रद की यादो में रात भर रोटी रहती थी..

न ज्यादा किसी से बात करती थी और नहीं ठीक से खाना कहती थी..

पर उसे ये जरूर मालूम था की मई एक दिन जरूर लौट आऊंगा... इसलिए उसने ऐसा महल बनाया था...

बस वो दिन भर मेरी hi रह देखते हुए दिन गुजर रही थी...

दी भी नार्मल रह रही थी.. क्यों की रसिका ने सब पर मैजिक जो किया था..

पर कही न कही उनके दिल में एक बैचेनी सी रहती थी. जिसे वो समाज नहीं प् रही थी की इसका कारन क्या है...

वैसे रसिका ने ऐसा करने के पीछे का कारन ऋतू से पूछा जरूर था पर उसने कुछ नहीं बताया बस करने को कहा..

रसिका ने भी मुझे ढूंढ़ने की अपनी तरह से कोशिश की पर कोई फायदा नहीं हुवा...

उसने चिका से भी कह दिया था की मई कही बहार गया हु जल्द hi लौट आऊंगा..

इसलिए वह की वो सीक्रेट रूम अभी भी बंद थी.. क्यों की वो मेरे सिवा ये शुरू hi नहीं करना चाहते थे...

और मई यहाँ अपने पुराने परिवार के साथ मौज मस्ती कर रहा था..

धरती पर hi उसी घनघोर जंगल में एक ऐसी जगह जहा पर वो अघोरी तांत्रिक बैठा हुवा था...

और अपने सबसे प्रिय सेवक कन्ट्रा को कुछ बता रहा तहत तो चले सुनते है ..

अघोरी- क्या हुवा मैंने जो सब कहा था वो सब हो गया है न...

कन्ट्रा- है गुरुवर्य सब हो गया है बस अब आप ये बता दीजिये की उस पूजा सामग्री को कैसे और कहा रखना है.. उसी तरह हम उसे रखवा देंगे..

फिर उन दोनों में कुछ देर बाटे होती रही और आखिर में अघोरी कह रहे थे..

Aghori-Thik है अब मई ध्यान में जा रहा हु. रत में एक छोटी सी पूजा होगी ..

जिसके कारन हमारे काम में आने वाले विघ्न और बढ़ा नहीं होंगी... और हमे जो चाहिए वो आसानी सी मिल जायेगा...

Kantra-Lekin गुरुवर्य आप इस पूजा में किसकी बलि देने वाले हो...

अघोरी ये बात सुनकर एक पल के लिए तो हँसा और दूसरे hi पल कहता है...

अघोरी- जब उसे देखोगे न तब तुम्हारी रूह भी कम्प जाएगी.. और अभी से बता दिया तो...

यहाँ पर कोई भी नहीं रहेगा... इसलिए ये बात को राज hi रहने दो.. जब वक़्त आएगा तब खुद देख लेना..

ऐसा कहकर वो अघोरी फिर से ध्यान में चला गया और मई यहाँ नींद सी उठ गया...

नींद से उठकर मैंने देखा सब चले गए थे कहा वो पता नहीं...

लगता है मई अकेला hi बहुत देर सोता रहा.. पर चलो कोई बात नहीं अब उठ hi गया हु तो कुछ फ्रेश भी हो चलता हु..

और मई उठकर फ्रेश होकर बहार hi आया था की मेरे आगे सोफे पर मेरी साडी बहने बैठी हुयी थी...

और वो तीनो बस मेरी hi रह देख रहे थे... मई तो ऊपर से फुल नंगा था पर निचे मैंने शार्ट पहना हुवा था..

और उनको मेरे सामने ऐसे बैठे देख मई फिर से भगाते हुए अंदर चला गया...

मुझे ऐसी हालत में और ऐसे उलटे पेअर भागते हुए देख वो तीनो भी हसने लगे थे...

मई क्या करता मुझे उनके सामने ऐसे जाने से शर्म भी तो आ रही थी...

तो मई फिर ड्रेस चेंज करके बहार चला गया इस बार भी मई धरती के ड्रेस पहने हुए थे..

मुझे ऐसे डैशिंग लुक में देखकर वो तीनो भी मुझे देखती hi रह गयी...

त्रिगुणा- चलो भैया अब आप रेडी हो गए है तो...

Mai-Lekin कहा ... कहा जाना है हम सबको.. और तुम सब इतनी सुबह तैयार होकर कहा जाने की बात कर रही हो...

Shatakshi-Kya भैया आपने hi तो कल कहा था न की हम आज बहार घूमने जा रहे है इसलिए हम ए है...

मई- कब.. मैंने कब कहा... नहीं मई ऐसा क्यों kahunga...Bahar जाने के लिए... और तुम्हे तो पता hi है न दित्य के बारे में फिर...

ये सुनते hi उन तीनो का चेहरा फिर से उतर गया.. उन्हें ऐसा मुँह फूलते हुए देख मई हस्ते हुए कहता हु...

Mai-Are मई तो मजाक कर रहा था चलो कहा चलना है...

ये सुनकर फिर तीनो के चहरे पर हसी आ gayi...aur वो तीनो ख़ुशी से उछलने लगी थी...

और दूसरे hi पल तीनो ने आपस में कुछ इशारा करके मेरी तरफ मुझे मरने के लिए दौड़ी...

मई भी हस्ते हुए कुछ देर उनसे भागता रहा और फिर बाद में उनके हाथ लग hi गया...

फिर उनकी शुरू हुयी पिटाई.. पिटाई क्या उनके मुलायम हाथो से ऐसा लग रहा था...

जैसे वो तीनो मुझे प्यार से अपने हाथो से सहला रहे हो...

उनके मारने के बाद हम तीनो भी वही सोफे पर आकर बैठ गए और वो तीनो मेरे साइड में ..

दित्य तो मेरे गोदी में hi बैठी हुयी थी.. तभी शताक्षी कहती है...

शताक्षी- क्यों भैया अब लेंगे हमसे पन्गा.. देखा न लड़कियों की पावर्स...

मई भी जैसे मुझे बहुत कागा हो ऐसा नौटंकी करते हुए कहता हु..

मई- (दर्द की एक्टिंग करते हुए) है देख भी लिया और सह भी लिया...

ये कहकर मई हसने लगा और उन्हें लगा मई फिर से उन तीनो के साथ मजाक कर रहा हु...

इस बार उन तीनो ने फिर से मुझे प्यार से सहला दिया.. मुझे सहलाने के बाद

हम फिर से वैसे hi बैठ गए..

लेकिन तभी दित्य अपने hi अंदाज़ में कहती है......................................
 
अपडेट 41

ये कहकर मई हसने लगा और उन्हें लगा मई फिर से उन तीनो के साथ मजाक कर रहा हु...

इस बार उन तीनो ने फिर से मुझे प्यार से सहला दिया.. मुझे सहलाने के बाद

हम फिर से वैसे hi बैठ गए..

लेकिन तभी दित्य अपने hi अंदाज़ में कहती है......................................

आगे............................

दित्य- भैया ये आप ऐसे घर में नंगे hi रहता हो क्या नहाने के बाद.. और ये आपका जिस्म ऐसा क्यों है...

दित्य के ऐसे बचो जैसी बाते से मई शर्माने लगा क्यों की सबके सामने ये कहने से मई उनकंफर्टबले फील कर रहा था..

और वही पर ये बात सुनकर त्रिगुणा और शताक्षी दोनों पेट पकड़कर हसने लगी..

मुझे दित्य से क्या कहे कुछ समाज नहीं आया तो मई त्रिगुणा की तरफ देखने लगा...

तभी त्रिगुणा अपनी हसी रोकते हुए दित्य को समजते हुए कहती है .

त्रिगुणा- गुड़िया ये बात तुम्हे अभी समाज नहीं आएगी जब तुम कुछ बड़ी हो जाएगी न तब खुद समाज जाओगी . नहीं तो मई खुद हु hi तुम्हे बताने के लिए ..

Ditya-Par दी मई तो बड़ी हो गयी हु न.

ये सुनकर जहा पर वो दोनों फिर से है रही थी वह पर मई ये सुनकर किसी और hi सोच में था..

तभी शताक्षी मुझे हिलती है और इशारो से पूछती है कहा खो गए हो...

तो मैंने भी उसे इशारे से कह दिया कुछ नहीं बस ऐसे hi...

Triguna-Ha मेरी गुड़िया तू बड़ी हो गयी है पर और कुछ बड़ी हो जा तभी मई बताउंगी...

दित्य- (कुछ सोचते हुए) ठीक है बाद में बताना जरूर.. अगर आप नहीं बटेगी तो मई खुद भैया से पूछ लुंगी...

ये सुनकर वो दोनों तो फिर से हसने लगी पर मई विषय चेंज करने के लिए उन सबसे कहने लगा...

मई- चलो अब देर नहीं हो रही है क्या तुम सबको..

उसके बाद हम चारो महल के बहार की तरफ आने लगे. जैसे hi हम बहार ए..

बहार का सुन्दर दृश्य देखकर दित्य तो जैसे ख़ुशी में उछलने hi लगी थी...

और वह की हर एक चीज को बहुत hi बारीकी से और ध्यान से देख रही थी..

जैसे वो चीज फिर कभी देखेगी hi नहीं या पहले कभी देखि hi नहीं..

सभी और देखते हुए जैसे वो खो hi गयी थी बहार का नजारा देखकर..

बहार की हर एक चीज देखने में उसकी चमक और भी बढ़ती हुयी जा रही थी...

ऊपर नीला आसमान उसपे सफ़ेद बदल.. चारो और पेअर पौधे.. हवा में उड़ाते हुए पानी का फव्वारे..

चारो और लम्बे चौड़ी सड़क. महल के दूर तक रेड कारपेट बिछाई हुयी..

सब बहुत hi मनमोहक था और उसी मनमोहक दृश्य को दित्य मोहित होकर देख रही थी.

और उससे भी ज्यादा खुश हो रही thi.Vaha पर कुछ ऐसे भी चीजे थी जो मैंने भी पहले कभी नहीं देखि थी...

फिर त्रिगुणा ने वह पर कालीन बुलाई जो हवा में उड़ते हुए हमारे सामने आकर हवा में hi रुक गयी...

त्रिगुणा- चलो अब सब उस कालीन पर जाकर खड़े हो जाओ...

हम सब तो उस कालीन पर चढ़ गए पर दित्य वही कड़ी चारो और देख रही थी..

मैंने उसे अबाज दी तो वो होश में आयी और उसे हाथ देकर मैंने दित्य को कालीन पर ले लिया...

तब त्रिगुणा ने कालीन को उड़ने का इशारा किया तो हम चारो उस कालीन पर खड़े हुए उड़ने लगे..

दित्य ऐसे हवा में बदलो में पहली बार उड़ रही थी इसलिए वो ये नजारा देखकर बहुत hi खुश हो रही थी.

दित्य तो जोर जोर से चिल्ला रही thi.Aur उसे खुश देखकर हम सब बहुत खुश हो रहे थे...

वो कभी कालीन को इस तरफ जाने को कहती तो कभी उस taraf...Isliye दित्य ने गिरने के दर से मुझे जोर से पकड़ लिया..

और मई उसे समजने लगा की तुम नहीं गिरेगी पर फिर भी उसने मुझे नहीं छोड़ा और वैसे hi मजा लेने लगी..

हमारे निचे जो कोई देव मनुष्य खड़े थे. वो सब हमे निचे से ऐसे हवा में उड़ते हुए और मजा करते हुए देख रहे थे...

और हम उन्हें देखकर हाथ हिला कर प्रणाम कर रहे थे...

वैसे मई तो पहले से hi हवा में उड़ शक्ति था पर ऐसे सबके साथ कालीन पर बैठकर उड़ने में मुझे और भी मजा आ रहा था..

बहुत देर उड़ने के बाद और वह पर ज्यादातर सब जगह देखने के बाद..

मतलब जहा तक हो सके वह तक हमने वो महल चारो और से देख लिया था...

सच में अंदर से जितना वो महल बड़ा और सुन्दर था उतना hi बड़ा और सुन्दर बहार से भी था..

उसके बाद हम उस महल से कुछ दूर आ गए इतना नहीं की हमे वो महल दिखे न बस थोड़ा..

जहा पर एक बहुत hi बड़ा और रमणीय बगीचा था.. वह पर हर तरह के पेड़ पौधे थे..

और हर तरह के पैर पर फल थे जो पक्के हुए थे..

वह पर बैठने के लिए और आराम करने के लिए भी बहुत hi आलीशान जगह थी..

जो मैंने पहले कभी नहीं देखि... जो भी वह पर जाये बस वो वही का हो जाये..

ऐसी सुंदरता थी उस बगीचे की. और वो बगीचा इतना बड़ा था की उस पुरे बगीचे को घूमने के लिए 1 साल निकल जाये लेकिन वो ख़तम hi होंगे...

और सबसे बड़ी बात जो भी उस बगीचे में गया फर्स्ट टाइम खो hi गया संजो..

उसका बहार आना असंभव hi था. वह पर बचो से लेकर बढ़ो तक बहुत सी खेलने की और बहुत सी चीजे थी जो वो उसे कर सके.

ये सब देखकर जितनी दित्य खुश और शॉक हुयी थी.. उतना भी मई भी हुवा था..

क्यों की ये जगह तो मई पहली बार hi देख रहा था..

तभी त्रिगुणा हमें उस जगह के बारे में बताने लगी जो मैंने आपको ऊपर बताया है..

वह पर एक गार्डन का पहरेदार आता है हमे वह पर देखकर बहुत hi खुश हो जाता है..

और एते hi हमारे सामने झुककर प्रणाम करता है.. और कहता है...

गार्ड- आप आ गए युवराज.. आपको यहाँ देखकर हमे बहुत ख़ुशी हो रही है...

पता है जब से आप गया है ये बगीचा जैसे वीरान पड़ा हुवा है.. जैसे इसमें भी अब जान नहीं हो..

लेकिन आपके आने की ख़ुशी में देखो न यहाँ पर कितने सरे फल और फूल आ चुके है..

आपके स्वागत के लिए और पहली बार यहाँ पर आपके साथ छोटी राजकुमारी भी आ गयी है..

तो आप दोनों के स्वागत के लिए और आप सबका बहुत मनोरंजन हो इसलिए ये सब खुद बगीचे ने की hi किया है..

Mai-(Shock होते हुए) मतलब खुद बगीचे ने मई कुछ समजा नहीं...

तभी त्रिगुणा उस गार्ड को जाने का इशारा करती है और उसके जाने के बाद वो हमसे कहती है...

त्रिगुणा- भैया ये बगीचा एक जादुई बगीचा है.. इसके अंदर भी जान है..

इसको भी दर्द होता है और अगर ये किसको चाहे तो उसको इस बगीचे में कुछ भी करने को देता है..

और जब इसे कोई पसंद नहीं आता और वो देव मनुस्य अगर आ जाये तो...

ये उसे इतना परेशां करके छोड़ता है की पूछो hi मत फिर से वो देवमनुश्य वह ए hi न...

पर आपके बारे में बात कुछ अलग है...

ये बात कहते हुए वो कुछ रहस्य मई तरीके से हसने लगी थी..

जिसे मई और दित्य कुछ समाज नहीं पाए तो मैंने उसे पूछा...

मई- मतलब.. मई समजा नहीं ..

त्रिगुणा- जब आप छोटे थे तब इस बगीचे में जाया करते थे.. उस वक़्त हम भी नहीं थे..

तब आप इस बगीचे में जाकर बहुत खेलते कूदते थे.. जो फल हाथ में आया वो कहते थे..

जो ठीक लगे वो कहते थे और जो नहीं उसे आप कही पर भी फेक देते थे..

ये बात उस बगीचे को पसंद नहीं आयी की आप उसे गन्दा कर रहे हो..

तब उसने आपसे कहकर ऐसा न करने को कहा पर आपने उसकी बात नहीं मणि और वैसे hi वह खेलने लगे..

जब उसने आपको परेशां करने का सोचा इस बगीचे में...

तब उसका यही डाव उल्टा उस पर hi निकल गया.. मतलब उसने आपको परेशां करने का सोचा..

जिससे आप वह कभी जाओ hi न.. लेकिन आपने hi उसे परेशां कर दिया..

बल्कि उसकी साडी हेकड़ी hi निकली की.. और वह पर ऐसे उत्पात मचाया की..

वो किसी को कुछ कह भी नहीं सकता था और दिखा भी नहीं सकता था..

ये कहकर वो और शताक्षी दोनों हसने लगी.. और फिर हम दोनों.. फिर त्रिगुणा आगे कहती है...

एक दिन आपसे तंग आकर उसने दादाजी से शिकायत करदी आपके नाम से. लेकिन यही उसकी सबसे बड़ी भूल थी..

क्यों की दादाजी भी आप के ऐसे विषय में फुल साथ देते थे..

दादाजी ने तो तब उस बगीचे को है कहा पर उसके जाने के बाद आपका hi पूरा साथ दिया..

और फिर क्या अपने वह जाकर फिर से वही किया जो आप हमेशा करते थे या चाहते थे...

लेकिन उसके बाद वो तो बिलकुल ठीक hi हो गया मतलब जैसे उसे कोई फरक hi नहीं पड़ता की आप कुछ भी करो वह पर..

लेकिन बाकियो के बारे में ऐसा नहीं था.. बाकियो के लिए वो अभी भी वैसा hi है जैसा पहले था...

वैसे वो जितना आपसे डरता है उतनी आपकी वो इज्जत भी करता है..

इसलिए आपको वो कुछ कहता नहीं अब इसका क्या कारन है ये तो वही जाने...

ये सुनने के बाद मुझे कुछ तो अंदाज हो गया था की मई पहले कैसा था...

और ये सुनकर तो दित्य भी बहुत खुश हो गयी थी और कहती है...

दित्य- वाओ... भैया पहले ऐसे थे. फिर तो बहुत मजा अत होगा आपको और सबको...

त्रिगुणा- है गुड़िया और अब तुम hi देखो की वो कितना मजा करते है तुम्हारे साथ भी...

फिर हम सब उस बगीचे में जाने लगे थे की तभी उस बगीचे के सामने hi एक आदमी प्रकट होता है और सीधा हम सबके सामने झुक जाता है...

देवमनुश्य- प्रणाम रुद्रदीप जी... वैसे मई आपको याद तो नहीं हूँगा पर मई hi हु वो बगीचा जो आपकी बरसो से रह देख रहा था..

बहुत सालो से आपकी कमी को ये बगीचा बहुत महसूस कर रहा है.. आपका यहाँ पर फिर से आने का तह देल से शुक्रिया...

इतना कहकर वो उठा और साइड में होकर हमें अंदर जाने के लिए रह दिखाई तो हम उस बगीचे के अंदर चले गए..

मैंने अंदर जाते हुए उस देव मनुष्य को एक बार देखा और उसकी और देखके मुस्कुराते हुए मई अंदर गया...

सच में वो बगीचा जितना सोचा था उससे कई गुना सुन्दर tha.aur बहुत hi रमणीय भी था..

जो एक बार उस बगीचे में जाये तो बस उस जगह में hi खो जाये... बहुत hi मनमोहक जगह थी वो..

अलग अलग तरह के पेड़ थे वह पर. कुछ देर जाने के बाद नदी और झरने सब थे वह पर..

मई और दित्य तो ये जगह देखकर बहुत hi खुश हो रहे थे...

त्रिगुणा- सिर्फ देखते hi रहोगे या यहाँ की हर एक चीज का मजा भी लेना है...

फिर क्या था ये सुनने के बाद जैसे हम सब टूट hi पड़े वह का मजा लेने में..

जो फल पसंद आया वो खा गए और जो नहीं वो फेक दिया.. वह पर झरना था तो हम सब उसमे उतर गए..

और वह पर मस्तिया करने लगे.. हमने वह पर उस बगीचे दिन भर इतनी मस्ती की बस पूछो hi मत..

जहा देखो वह हम hi थे.. दित्य तो इतनी खुश थी और वो तो सबसे ज्यादा मजा ले रही थी इस पल का..

और सही भी है ये सब तो उसके लिए पहली बार hi हो रहा था इसलिए वो खुलकर एन्जॉय कर रही थी..

मेरी बाकि बहने तो थक गयी दिन भर मस्ती करके...

लेकिन दित्य तो थकने का नाम hi नहीं ले रही थी... पेड़ पर झूला झूलना.. बगीचे में जो जानवर थे उनके साथ खेलना..

पहले तो वो सबसे बहुत दर भाग रही थी.. लेकिन जब मैंने दित्य की उनके साथ दोस्ती की तब से वो तो बस उनके साथ खेलना छह रही थी..

इधर उधर दौड़ रही थी.. फल कहते जा रही थी... फूलो की सुगंध लेते जा रही थी...

झरने में मस्ती करना यही सब हम चारो दिन भर करते रहे..

जब कभी उसे किसी पेड़ के फल पसंद नहीं ए तो मैंने सीधा उस पेड़ को hi उखड कर दूर फेक Diya.Aur फिर कहने लगा...

Mai-Jo मेरे बहनो को पसंद नहीं वो चीज यहाँ रह hi नहीं सकती..

ये सुनकर तो उन तीनो में मुझे गले लगा लिया.. सभी लोग बहुत खुश थे आज..

और फिर शाम होते hi हम सब अपने गंदे कपड़ो के साथ महल में लौट ए...................................
 
अपडेट 42

Mai-Jo मेरे बहनो को पसंद नहीं वो चीज यहाँ रह hi नहीं सकती..

ये सुनकर तो उन तीनो में मुझे गले लगा लिया.. सभी लोग बहुत खुश थे आज..

और फिर शाम होते hi हम सब अपने गंदे कपड़ो के साथ महल में लौट ए...................................

आगे............................

इधर धरती पर आज एक बहुत hi बड़ी पूजा का एक छोटा सा नमूना होने वाला था..

ऐसा समाज लो की आज से उस पूजा का प्रारम्भ होने वाला था...

जिसका गवाह वो अघोरी तांत्रिक था और उसके चेले मतलब शिष्य.. वही थे जो ये सब करने वाले थे ..

वह पर वो अघोरी एक यज्ञ के सामने बैठा हुवा था और कुछ मंत्र पढ़ रहा था..

और उसके सामने उसके सब चेले मतलब शिष्य बैठे हुए थे.

और वही उस तांत्रिक के साइड में किसी को रस्सी से बाँदा हुवा था..

वो जो कोई भी था उसे कोई देख नहीं प् रहे थे. क्यों की उसका चेहरा मतलब सर से लेकर पाओ तक उसे किसी कपडे से ढाका हुवा था..

ऐसा इसलिए क्यों की जैसे वो किसी सुनहरे पल का इंतज़ार कर रहे हो..

फिर शुरू हुवा उस अघोरी तांत्रिक के मंत्र का जाप शुरू...

और वो मंत्र पड़ते हुए उस यज्ञ में कुछ दाल भी रहा था. जिस बजह से उस यज्ञ की आग भड़कते hi जा रही थी..

और जब अंत में अघोरी तांत्रिक ने उस यज्ञ में कुछ डाला तो कुछ देर के लिए उस यज्ञ में से एक कला धुवा निका...

जो सीधा जाकर उस अघोरी के अंदर चला गया और उस अघोरी ने अपनी दोनों आंखे बंद कर दी...

और कुछ hi देर में उस तांत्रिक की आंखे खुल गयी.. पर इस बार उसकी आंखे कुछ लाल और काली हो गयी थी..

और उसी के साथ आँखों की पुतलिया भी बड़ी हो गयी थी.. जैसे किसी सैतान की होती है...

और वो यज्ञ की आग भी कुछ शांत हो गयी थी...

फिर उस अघोरी ने अपने सबसे बड़े शिष्य को देखते हुए कुछ इशारा किया..

तो वो अपनी जगह से उठा और उस तांत्रिक को प्रणाम करते हुए उस बन्दे हुए व्यक्ति के पास गया...

और उस व्यक्ति को वह से छुड़ाकर फिर से अघोरी के पास ले आया..

शायद वो व्यक्ति बेहोश थी इसलिए वो तांत्रिक के शिस्य यानि कन्ट्रा के सहारे चल रही थी..

उसके बाद कन्ट्रा ने उस व्यक्ति को अघोरी के सामने खड़ा किया.. और फिर अघोरी ने कुछ इशारा किया..

और तभी कन्ट्रा ने उस व्यक्ति के ऊपर से वो कपडा हटा दिया..

और जैसे hi उस व्यक्ति के ऊपर से कपडा हटा वो व्यक्ति सबके नजर में आ गयी..

वो व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि एक लड़की थी और वो भी सर से पाओ तक फुल नंगी.. उस अघोरी के सामने कड़ी..

फिर उस कन्ट्रा ने उस लड़की को अघोरी के सामने बिठाया और फिर अपनी जगह चला गया...

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उस तांत्रिक ने एक बार उस लड़की की तरफ देखा.. तो वो लड़की बेहोश तो थी पर सीधी तरह अपनी जगह बैठ गयी थी..

और उसकी दोनों आंखे बंद thi..Phir उस तांत्रिक ने उस लड़की के मस्तिष्क पर अपना हाथ लगाया..

और तभी वो लड़की अपने होश में आ गयी..

और जैसे hi उस लड़की ने महसूस किया की वो कहा है और किश हालत में है तो वो जोर जोर से चिल्लाने लगी...

पर एक बात और थी वो लड़की भले hi जोर जोर से चिल्ला रही थी रो रही थी.. सबको बचने के लिए कह रही थी..

पर उसी तरह वो अपनी जगह से हिल भी नहीं प् रही thi..Bhale hi उसके हाथ और पाओ बंधे न हुए हो..

पर वो अपने बॉडी के किसी भी पार्ट्स को हिला भी नहीं प् रही थी..

इसलिए वो बहुत hi ज्यादा दर गयी थी.. और ऊपर से वो पूरी नंगी...

जैसे वो किसी कोमा में हो पर उसे सब बातो का होश वो और एक्सप्रेस भी कर सकती हो ऐसा उसका कुछ हाल हो गया था ..

फिर उस तांत्रिक के सब शिस्यो ने अपने चहरे पर एक अजीब hi तरह का मास्क लगाया..

और सब एक साथ किसी मंत्र का जाप करना शुरू कर दिया . वैसे hi वो अघोरी अपनी जगह से उठा और उस लड़की के पास चला गया.

उसने उस लड़की को तरफ बहुत hi हवशी नजर से देखा..

सच में वो लड़की नंगी hi बहुत hi खूबसूरत दिख रही थी.. और वो लड़की रूप से बहुत hi गोरी थी..

उसके बॉडी का शेप और साइज बिलकुल मेन्टेन करके रखा हुवा था...

उसके वो पिंक निप्पल.. गोरी और पतली सी बिना बालो की कुंवारी छूट..

उस लड़की के पुरे बॉडी पर एक अजीब hi तरह का आयल लगा हुवा था.. जिसके कारन उसकी बॉडी पूरी चमक रही थी..



name1.jpg




और वो उसके कारन और भी हॉट और सेक्सी लग रही थी.. पर ये सब तो उसके मर्जी के खिलाफ hi हो रहा था...

अब वो तांत्रिक उस लड़की के पास जाकर उस लड़की को वही पर लिटा देता है.. और ये देखकर वो लड़की...

और भी जोर जोर से चिल्ला और रो रही थी.. उस तांत्रिक पर रहम खाने की भिक मांग रही थी...

पर यहाँ पर उसकी गुहार सुनने वाला कोई नहीं था.. पर अभी भी वो रहम की भिक मांग रही थी.. कोई तो उसकी गुहार सुनने...

अब वो तांत्रिक उस लड़की के ऊपर झुककर उस लड़की की आँखों में देखता है वैसे hi वो लड़की भी उसकी आँखों में देखती है..

और वो उस तांत्रिक के आँखों में जो देखती है उसकी बजह से उस लड़की की तो अबाज hi बंद हो जाती है.. अब तो उसके मुँह से कुछ भी नहीं निकलता .

क्यों की उस तांत्रिक के आँखों में देखकर जो दर और मरने का ख्वाब जो उसने देखा था..

उसकी रेड और ब्लैक अंगारे निकले हुए बड़ी बड़ी आँखों में.

उसकी बजह से वो एक मूर्ति की तरह उसकी बोलती hi बंद हो जाती है..

और इसके आगे जो उसके साथ होने वाला था ये तो उसने सोचना भी बंद कर दिया था इस दर से...

****************************

इधर हम चारो जैसे hi अपनी गन्दी कपड़ो के साथ अंदर गए तो मामीजी और माँ वो सब अंदर बाटे करते हुए बैठे थे...

जैसे hi उन्होंने हमें देखा वो सब तो एक पल के लिए शॉक hi रह गए कोण आ गया सोचके..

इतने गंदे कपड़ो के साथ... पर जब उन्होंने हमें पहचाना वो सब हमे ऐसे देखकर तो हसने hi लगी थी...

Maa-Bacho ये क्या हाल बनाया है तुम सबने.. कहा गए थे तुम सब जो ऐसा हाल बनाकर ए हो...

और दित्य तुम भी इनके साथ चली गयी थी.. और रूद्र तुम भी....

वैसे माँ के मुँह से दित्य ने अपने बारे में सुनकर उसे माँ से दर लगने लगा.

ये मैंने देख लिया तो मई माँ से कहने लगा...

Mai-Ha माँ मई hi दित्य को अपने साथ ले गया था.. और आप इस विषय में दित्य से कुछ नहीं कहोगी..

क्यों की वो अब मेरी छोटी बहन मेरी गुड़िया है.. और आप उसे कुछ नहीं कह सकती... जो भी कहना है मुझसे कहोगी..

और रही ऐसे आने की बात तो मई इतने सालो बाद अपने बहनो से मिला हु.. तो कुछ तो इनके साथ मस्ती करूँगा hi न..

और हम अभी अभी उस बगीचे से लौटकर ए है.. वही हमारा ये सब हाल हुवा है...

दित्य ने जब मेरे मुँह से अपने बारे में सुना तो वो बहुत खुश हो गयी..

उसे भी लगा की कोई तो है जो उसके लिए लड़ सकता है अपने hi माँ से. किसी भी बात के लिए..

और फिर माँ को भी ाचा लगा की उसका बीटा अब अपनी बहनो की ख़ुशी के लिए hi सही कुछ तो कर रहा है..

अब उनके महल की भी खुशिया लौट आएंगी.. और फिर से सब बहुत hi ख़ुशी ख़ुशी यहाँ रहेंगे...

Ishani-Rudra बीटा तुम्हारे माँ के कहने का ऐसा मतलब नहीं था.. पर जाने दो...

लगता है तुम सब बहुत गंदे हो गए हो अब जाओ और अपने रूम में जाकर नहाकर आ जाओ..

फिर हम सब अपने मतलब मई माँ के रूम में और बाकि सब अपने रूम में चले गए.

मई फ्रेश होकर बहार आया और अपने ड्रेस पहन लिया तभी माँ रूम में आ गयी...

माँ- नाहा लिया बीटा...

मई- है माँ मई तो नाहा लिया लेकिन 2 दिनों से मुझे नानाजी दिखाई नहीं देते...

कही गए है क्या वो सिर्फ खाने की hi वक़्त दिखाई देते है मुझे...

माँ- नहीं बीटा वो यही रहते है दिनभर वो एक ऐसे जगह जाते है जहा पर पुरे दुनिया की शांति है...

और वह पर उनके अलावा कोई भी नहीं जा सकता. वह पर जाकर वो तपस्या में लीन होते है मतलब ध्यान करते है...

और इस पुरे सृष्टि पर एक तरह से नजर रखते है.

मई ये सुनकर कुछ शॉक होता हु तो मई माँ से कहता हु..

मई- मतलब वो ऐसे थकते नहीं एक जगह बैठते हुए... और वो उससे ऊब नहीं जाते क्या..

माँ- नहीं मेरे बचे.. वो इससे भला कैसे थक सकते है.. यही तो उनका काम है अपने बचो पर नजर और उनका ख्याल रखना...

मई माँ की बात समाज hi नहीं पाया लेकिन जाने दो मई इस सरे सवालो के जवाब मई नानाजी से hi पूछता हु...

मई यहाँ आया तो हु पर उनसे मेरी ज्यादा बातचीत भी नहीं हुयी है..

यही सब सोचते हुए मेरे मन में एक ख्याल आया की चलो मई नानाजी से मिलकर hi आ जाता हु तो मई माँ से पूछता हु.

मई- वैसे माँ अपने बताया की नानाजी जिस जगह गए है वो किसी को नहीं पता और वह पर कोई जा भी नहीं सकता.

फिर मई तो वह जा hi नहीं सकता और मुझे तो उनसे मिलना है पर मई ये सोच रहा हु की मई उनसे कैसे मिलु...

ये सुनकर माँ कुछ देर के लिए हस्ती है और फिर कहती है...

Maa-(Haste हुए) लगता है बाबा ने तुम्हे अभी तक पूरी आजादी नहीं दी है शक्तियों के और अपने ज्ञान के बारे में...

वर्ण तुम सब समाज जाओगे मतलब वो ऐसा नहीं चाहते है...

माँ के इस बात का मतलब मई बिलकुल भी समाज hi नहीं paya...to मई माँ से फिर से पूछता हु ..

मई- मतलब.... अपने अभी क्या कहा मई समाज नहीं पाया ...

माँ फिर से किसी सोच में डूबता हुए कहती है..

माँ- (गहरी सोच me)Baba ने ऐसा कुछ सोचकर hi किया होगा.. अगर उन्होंने ऐसा सोचा है तोयही सही..

फिर माँ अपनी सोच से बहार एते हुए और मेरी तरफ देखते हुए कहती है ..

Maa-Tum एक काम करो अपने मन में नानाजी का ध्यान करो और उनसे कहो की तुम्हे उनसे मिलना hai..uske बाद दो पल में hi तुम वह पहुंच जाओगे ..

ये कहकर माँ वह से चलो गयी.. और माँ की बात पर मई गौर करने लगा..

Mai-(man में) माँ ने ऐसा क्यों कहा की पूरी आज़ादी नहीं दी है... इसकी बजह मई नानाजी से जरूर पूछूंगा..

फिर मैंने आंखे बंद करते हुए नानाजी को मन में याद किया और उनसे कहा की मुझे आपसे मिलना है..

तो उसके बाद मुझे नानाजी की hi अबाज आयी जो मुझे आंखे खोलने के लिए कह रहे थे...

मैंने आंखे खोली तो मेरे सामने पूरा उजाला था . मतलब चारो और सिर्फ और सिर्फ रौशनी hi थी..

वह पर एक जगह ुचि जगह थी वही पर किसी आसान पर बैठे हुए नानाजी धायण कर रहे थे...

फिर मैंने चारो और देखा तो ऐसा लगा जैसे इस जगह का कोई अंत hi नहीं है..

जहा भी मेरी नजर जा रही थी वह पर सिर्फ और सिर्फ उजलयानी रौशनी hi दिखाई दे रही थी..

और वही पर एक hi ऊँची जगह जहा पर नानाजी (थे लार्ड) ध्यान में बैठे हुए थे...

मई उनके पास चला गया तो उन्होंने अपनी आंखे खोली और मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखने लगे.................................
 
अपडेट 43

जहा भी मेरी नजर जा रही थी वह पर सिर्फ और सिर्फ उजलयानी रौशनी hi दिखाई दे रही थी..

और वही पर एक hi ऊँची जगह जहा पर नानाजी (थे लार्ड) ध्यान में बैठे हुए थे...

मई उनके पास चला गया तो उन्होंने अपनी आंखे खोली और मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखने लगे.................................

आगे............................

इधर धरती पर मतलब उस जंगल में तो कुछ और hi हो रहा था..

जो बहुत hi दर्दनिया और जो किसी ने भी नहीं सोचा था ऐसा खेल चल रहा था वह पर...

वो तांत्रिक अघोरी उस लचर असहाय लड़की पर जोर जोर से बलात्कार कर रहा था..

और ऊपर से वो लड़की वर्जिन भी.. और उस अघोरी को ऐसे hi लड़की चाहिए थी सैतान को खुश करने के लिए...

जब उस तांत्रिक का खेल ख़तम हुवा तो लास्ट में जब उस लड़की के छूट से खून निकलता है..

वो सीधा उड़ते हुए उस आग में चला जाता है..

एक तरह से कहा जाये तो उस लड़की की खून की आहुति उस सैतान को दी गयी हो...

और जब ये हुवा तभी उस अग्नि से एक कला धुवा निकला जो सीधा जाकर उस अघोरी तांत्रिक के अंदर चला गया..

जब वो तांत्रिक साइड में हटा तो वो लड़की अचानक से सुखकर कंकाल बन गयी..

जैसे उसमे कोई खून की बून्द भी न बची हो.. उसमे कोई जान hi न हो...

और अब वो कंकाल भी हवा में गायब हो गया जैसे उसे सैतान ने अपने पास बुला लिया...

वही पर तांत्रिक अघोरी ये सब देखकर बहुत hi खुश हुवा क्यों की उसकी बलि सैतान ने स्वीकार कर की थी..

और एक तरह से उसे जो चाहिए था उसे वो पाने के लिए और भी करीब आ गया...

अब उस अघोरी तांत्रिक को और 2 लड़किया चाहिए थी अपने मंजिल तक पहुंचने के लिए...

और उसे देखकर लग रहा था की उसने इसका भी इंतज़ाम किया हुवा है..

अब उसके पास इतनी तो शक्ति आ गयी थी की वो सामने वाले की शक्ति अपने अंदर खींच कर..

सामने वाले को कमजोर और पॉवरलेस बनाकर उसका भोग सैतान को लगा सके..

उसके सभी साथी भी उस कंकाल को देखकर एक पल के लिए दर hi गए थे..

पर अपने गुरु तांत्रिक अघोरी के होते हुए वो निश्चिंत थे उन्हें किसी का भय नहीं था..

पर अब उस तांत्रिक ने अपने इच्छापूर्ति के लिए किसे चुना था ये तो अब कल का दिन hi बता सकता है..

न जाने कल किसकी मंजिल कहा लेकर जाएगी अब ये तो आगे hi पता चलेगा तब तक चलते है रूद्र के पास...

मई उनके पास चला गया तो उन्होंने अपनी आंखे खोली और मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखने लगे...

थे लार्ड- (अपने आगे की तरफ इशारा करते हुए) आओ रूद्र यहाँ पर बैठो...

फिर मई जाकर उनके सामने बैठ गया.. तो वो आगे कहने लगे..

थे लार्ड- (मुस्कुराते हुए) क्यों रूद्र यहाँ आने में कोई तकलीफ तो नहीं हुयी न...

ये कहकर वो हसने लगे और मई उनकी बातो का मतलब समझकर हसने लगा..

पर मेरे मन में अभी भी बहुत कुछ सवाल थे जो मई उनसे पूछना चाहता था पर शुरुवात कहा से करू..

Mai-Wooo.... नानाजी.....

नानाजी- है है मुझे पता है तुम क्या कहना चाहते हो पर...

मई फिर भी तुम्हारे मुँह से सुन्ना चाहता हु तो बोलो अब..

नानाजी के ऐसे बात से मेरी कुछ झिझक काम हो गयी थी. इसलिए मई उनसे पूछता हु...

Mai-Nanaji मेरे यहाँ आने से पहले माँ कुछ कह रही थी की मुझे वो मेरे समाज नहीं आया तो वो क्या कह रही थी..

उनके कहने का मतलब क्या था और वो बोल रही थी की ऐसा अपने किया है.. क्या किया है आपने मेरे साथ...

नानाजी मेरी बात पर मुस्कुराते है.. वैसे तो वो हमेशा मुस्कुराते hi रहते है..

उन्होंने मेरी हर एक बात का जवाब हमेशा मुस्कुराकर hi दिया है...

Nanaji-Tumhari माँ सच कह रही है रूद्र.. मैंने तुम्हारे दिमाग की ताकद को कुछ हद तक रोक दिया है..

मतलब तुम्हारी जो सोचने और समजने की शक्ति को कुछ काम किया हुवा है...

मई नानाजी के बात से कुछ शॉक तो हुवा पर मेरे मन में कुछ सवाल भी ए तो मैंने उनसे पूछ लिया...

Mai-Nanaji आपने ऐसा क्यों किया मेरे साथ... क्या बजह थी आपको ऐसा करने की...

Nanaji-Kyu की मई नहीं चाहता था की जो पहले हुवा है वो फिर से हो..

तुम दिमाग को अपने शांत रखो.. और जो सही फैसला है वही लो

और अगर मैंने तुम्हारे दिमाग की शक्तियों को रोका नहीं होता तो तुम्हारी शक्तिया तुम पर हावी हो जाती..

बल्कि तुम अपने शक्तियों के काबू में हो जाते.. और ये मई होने देना नहीं चाहता था...

मई- पर नानाजी अपने जो किया है उसकी बजह से मई बहुत से बातो का मतलब..

और उनके कहने का उद्देश्य समाज नहीं पता हु.. क्या ये आपको सही लगता है..

नानाजी- है मेरे बचे.. क्यों की अगर मैंने तेरे दिमाग पर प्रतिबन्ध नहीं लगाया होता...

तो साधारण इंसान से कई गुना ज्यादा तुम्हारा दिमाग चलता और जो धरती पर रहने वालो का नहीं है..

वह पर जादू और शक्तिया ज्यादा देखने को नहीं मिलती. या ऐसा कहे तो होती hi नहीं है..

अगर तुम वह अपने दिमाग की शक्तियों से कुछ करते तो वह पर सभी जगह हाहाकार हो जाता..

क्यों की उस वक़्त तुम्हारा तुम्हारी शक्तियों पर नियंत्रण भी नहीं था.

इसलिए मैंने ये फैसला किया.. और एक कारन भी है इसके पीछे .

मई- अब इतना सब कुछ बता दिया है तो वो भी बता दो ..

Nanaji-Rudra बीटा अगर ऐसा होता तो तुम्हारे दुश्मनो को तुम्हारे बारे में पता चल जाता.. और वो तुम्हे ढूंढ लेते..

मई- अगर उन्होंने ढूंढ भी लिया होता तो ज्यादा क्या होता आप हो न मेरी रक्षा के लिए आप आ जाते...

नानाजी- मई कब तक करता तुम्हारी रक्षा बीटा और तुम्हे किन किन से बचता.

आखिर में तुम्हे खुद भी रक्षा करनी अणि चाहिए न क्यों की तुम मेरे वंशज हो..

तुम्हे अगर खुद की रक्षा नहीं करने आएगी तो तुम इस दुनिया की क्या रक्षा करोगे..

अगर मुझे ऐसा hi करना होता तो पहले hi......

Mai-Pahle hi क्या नानाजी... बोलो न अब....

नानाजी- मुझे मेरे hi बातो में फसा रहे हो.. कुछ भी हो दुसरो को अपने hi बातो में फ़साना तुम नहीं भूले हो..

चलो अब ज्यादा न घूमते हुए मई मुख्या बात पर आता हु पर उससे पहले मई तुम्हे कुछ बताना चाहता हु...

Mai-Ha बोलिये न नानाजी क्या बात है..

Nanaji-Rudra तुम्हे जो रितिका ने सच्चाई बताई है वो कुछ अधूरी hi है..

क्यों की उसने इतना hi बताया जितना उसे पता होना चाहिए था.. या हर किसी को पता है..

पर असल में बात कुछ और hi है.. जो मैंने आज तक सबसे छुपाई है..

मतलब ये बात पहले तुम्हे पता थी

पर अब तुम भूल चुके हो..

तुम्हारे बाद मेरे दोनों बेटे मतलब तुम्हारे मामाजी और तुम्हारे बाबा को...

Mai-Aisi क्या बात है नानाजी जो अपने सबसे छुपाई है. जरा मुझे भी तो बताओ...

नानाजी- जब वो दोनों स्टोन्स की शक्ति एक होकर तुम्हारे अंदर आ रही थी..

तो तुम्हे बताया था न की वो डेविल बिच में आ गया था उस शक्ति के..

और उस शक्ति के तेज रौशनी को वो सहन नहीं कर पाया और उस शक्ति ने उसे दूर फेक दिया..

पर असल में जब वो बिच में आया था तो उस शक्ति का कुछ अंश उसके भी अंदर जा चूका था...

मई- इसका क्या मतलब हुवा नानाजी...

Nanaji-Iska मतलब ये हुवा की तुम्हारी शक्तियों का कुछ अंश उसके भी अंदर जा चूका है...

इसी की बजह से तुम जहा भी जाओ वो तुम्हे सूंघ सकता है तुम्हे पहचान सकता है..

और तुम्हारी शक्तियों का उसपे असर बहुत काम होगा और उसका भी तुम पर..

पर जब तक तुम्हे कुछ याद नहीं आ जाता तब तक तुम्हे उससे बहुत खतरा है..

क्यों की वो तुम्हे कभी भी ढूंढ सकता है और तुम्हारी पूरी शक्ति उसके अंदर ले भी सकता है..

इसलिए जब तुम्हे मैंने धरती पर भेजा था तो कुछ ऐसा इंतज़ाम किया था की..

वो तुम्हे ढूंढ भी न पाए और तुम्हे लेकर कोई फैसला भी नहीं कर पाए...

मई- ऐसा क्या किया है आपने नानाजी जो वो मुझे ढूंढ भी नहीं पायेगा और कुछ भी नहीं कर पायेगा...

नानाजी- ये मई तुम्हे वक़्त आने पर बता दूंगा उससे पहले तुम्हे तुम्हारी कुछ शक्तिया तो लौटा दू...

जिसकी तुम्हे अब सबसे ज्यादा जरुरत पड़ेगी.. और अब तुम तुम्हारे दिमागी शक्तियों को नियंत्रण और इस्तेमाल भी कर सकते हो..

पर पूरी तरह नहीं इसलिए तुम्हे रोज योग करना hoga,Dhyan करना होगा और तुम्हारे पावर्स को कण्ट्रोल करना सीखना होगा...

Mai-Thik है नानाजी आप जैसा कहेंगे मई वैसा hi करूँगा...

Nanaji-Iske बाद मुझे और भी कुछ बताना है पर मुझे लगता है..

तुम ये शक्तिया हासिल करने के बाद अचे से समाज जाओगे...

फिर उन्होंने मुझे और पास बुलाया और मेरे सर पर अपना देना हाथ रख दिया और अपनी आंख बंद की और मुझे भी बंद करने को कहा...

तभी उनके हाथो में से कुछ रौशनी के किरणे निकलने लगी और वो सीधा मेरे सर में जाने लगी..

जिसकी बजह से मेरा सर मुझे अचानक से हल्का हल्का और एक दम से बहुत hi ज्यादा भरी लगने लगा...

उसी तरह मेरे अंदर एक नयी ऊर्जा और नयी फुर्तीले पैन का जोश महसूस हो रहा था...

मैंने आंखे बंद की हुयी थी तो मेरे चारो और मुझे एक तेज रौशनी दिखाई दे रही थी..

जहा पर मई अकेला hi हु और कोई भी नहीं है वह लेकिन तभी मुझे एक अबाज सुनाई देती है.............................
 
अपडेट 44

तभी उनके हाथो में से कुछ रौशनी के किरणे निकलने लगी और वो सीधा मेरे सर में जाने लगी..

जिसकी बजह से मेरा सर मुझे अचानक से हल्का हल्का और एक दम से बहुत hi ज्यादा भरी लगने लगा...

उसी तरह मेरे अंदर एक नयी ऊर्जा और नयी फुर्तीले पैन का जोश महसूस हो रहा था...

मैंने आंखे बंद की हुयी थी तो मेरे चारो और मुझे एक तेज रौशनी दिखाई दे रही थी..

जहा पर मई अकेला hi हु और कोई भी नहीं है वह लेकिन तभी मुझे एक अबाज सुनाई देती है.............................

आगे............................

एक ऐसा उजाला एक ऐसी जगह जहा पर मेरे अलावा कोई भी नहीं था..

लेकिन तभी मुझे एक किसी इंसान का अक्ष दिखाई Diya.Jo हूबहू मेरी तरह hi दिख रहा था..

और उसकी बहुत धीरे से अबाज सुनाई दे रही thi.jisr मई समाज नहीं प् रहा था.

और ऊपर से उस अक्ष का चेहरा भी मुझे दिखाई नहीं दे रहा था...

मई जितना भी उस अक्ष के पास जाने की कोशिश करता वो उतना hi मुझसे दूर चला जाता.

लेकिन तभी मुझे कुछ अबाज सुनाई देने लगे..

और धीरे धीरे उस शक्श के साथ साथ वो तेज ुजहला भी काम होता चला गया..

पर जो वो अबाज थी वो तेज होते चली गयी और मेरी आंखे खुल गयी...

मैंने आंखे खोली तो मई मेरे सामने देखकर कुछ शॉक hi हो गया

क्यों की मई अपने मतलब माँ के रूम में उनके बीएड पर सोया हुवा था .

और मेरे चारो और मेरा परिवार खड़ा है जो मुझे पुकार रहे था..

मेरी बहाने उसी बीएड पर मेरे चारो और बैठे हुए है और मुझे अजीब सो नजर से देख रही थी..

ये सन देखते hi मई अपनी जगह से उठ बैठ गया और याद करने लगा की मई यहाँ कैसे आया मई तो.....

तभी मुझे याद आया की मई तो नानाजी के साथ था और वो मेरे सर पर हाथ रखकर कुछ कर रहे थे..

उसी की बजह से मेरी आंखे बंद हो गयी थी तो अभी hi खुली है...

लगता है ये सब उस शक्ति का कमल है जो नानाजी ने मुझे दी है..

इसी बजह से मई इतनी देर से बेहोश रहा और मई यहाँ महल पहुंच गया...

इसलिए मई होश में आकर सबसे पूछता हु...

मई- आप सब लोग यहाँ इस तरह और मई यहाँ कैसे मई तो....

Maa-(Mere सर पर हाथ रखते हुए) है पता है तुम तुम्हारे नानाजी के साथ थे पर उन्होंने hi तुम्हे यहाँ लाया है..

और मुझे कहा था इसका ख्याल रखने के लिए.. वैसे तुम्हे क्या हो गया था तुम बेहोश कैसे हो गए थे...

मई- माँ वो नानाजी मेरी कुछ शक्तिया जगाना चाहते थे इसलिए उन्होंने मेरे सर के ऊपर हाथ रख दिया था...

पर तभी मई बेहोश हो गया. और उसके बाद अभी hi होश आया है

ये सुनकर माँ को समाज आ गया की बात क्या hai..aur माँ मन hi मन हसने लगी..

ये बात शायद मेरे दोनों मामाजी भी समाज गए थे इसलिए वो दोनों भी एक दूसरे की और देख रहे थे...

पर इन सब में मेरी लाड़ली बहन कैसे चुप बैठ सकती है..

वो तो अपने चुलबुले पर मेरी प्रेम के खातिर गुस्से से मेरी लाड़ली बहन दित्य माँ से कहती है...

दित्य- माँ आप नानाजी से कहो की आगे से ऐसा मेरे भैया के साथ कुछ न करे.

जैसे भी है मेरे बहिया मेरे लिए बहुत hi सही और अचे है.. उन्हें कोई शक्ति भक्ति की जरुरत नहीं है..

नहीं तो वो फिर से मुझसे दूर हो जायेंगे. एक तो कितने दिनों बाद मिले है...

ये बात सुनकर माँ के साथ सब हसने लगे और माँ दित्य से कहती है...

Maa-Thik है बीटा अब मई तुम्हारे नानाजी से जरूर कहूँगी और उन्हें डाटूंगी भी की...

वो आगे से ऐसा तुम्हारे रूद्र भैया के साथ बिलकुल न करे. वार्ना उनकी पोती उनसे बात भी नहीं करेगी...

मई भी मेरी प्यारी गुड़िया की बात का समर्थन करते हुए बोलै.. पर बोलते हुए मैंने दित्य को एक साइड से गले लगाया...

Mai-Ha माँ जैसी मेरी गुड़िया कहती है वैसा hi होना चाहिए...

मेरे इस बात से दित्य बहुत खुश हुयी तो उसने भी मुझे जोर से हुग किया...

लेकिन ये देखकर मेरी बाकि दो बहाने कैसे ये मौका छोड़ती वो भी आ गयी और दूसरे साइड मेरे गले लग गयी...

फिर सब लोग मेरा हल चल पूछकर चले गए..

लेकिन मेरी बहने वही पर बैठ गयी मुझसे बाते करने के लिए.. हम सबने बहुत hi हसी ख़ुशी से कुछ देर बाटे की...

और फिर माँ आयी और मुझे आराम करने का कहकर मेरे बहनो को जाने दिया..

वैसे वो जाना तो नहीं चाहती थी पर माँ के आगे किसी की भी नहीं चलती थी तो इनकी क्या चलती..

उनके जाने के बाद मई फ्रेश हुवा और मई आकर बीएड पर बैठ गया तभी...

मेरा सर मुझे कुछ भरी भरी लगने लगा. और उसमे कुछ दर्द भी होने लगा..

तो मई अपना सर पकड़कर बैठ गया तभी मुझे नानाजी की कही हुयी बात याद आयी...

ये शुरू में मुझे जरूर होगा तो ऐसे समय में मुझे योग साधना में बैठकर ध्यान करना चाहिए...

और मेरे मन और दिमाग को शांत करते हुए अभी जागृत की हुयी शक्तियों को कण्ट्रोल करना चाहिए...

पर ये जगह उसके लिए सही नहीं थी.. तो मैंने सोचा जहा पर नानाजी गए है...

मई भी वही चला जाऊ तो मई आंखे बंद करते हुए उस जगह को याद किया..

और मई वह पर पहुंच भी गया जहा पर पहले से नानाजी ध्यान में बैठे हुए थे..

मई उनके पास चला गया और उनके सामने बैठ गया.. वो अभी भी ध्यान में बैठे हुए थे.

शायद उन्हें मेरे यहाँ आने का अहसास नहीं हुवा होगा या शायद हुवा भी होगा...

इसलिए मैंने उन्हें डिस्टर्ब न करते हुए मई उनके सामने बैठकर ध्यान करने लगा..

पहली बार मई बहुत दिनों बाद ध्यान में बैठ रहा था इसलिए मेरा मन शांत hi नहीं हो रहा था..

और दूसरी बात ऊपर से मेरा सर भरी भी हो रहा था और दर्द भी कर रहा था..

मुझे पहले तो कुछ वक़्त लगा ध्यान लगाने में पर उसके बाद तो जैसे मई खुद ध्यान में खो hi गया..

मई पूरी तरह ध्यान में चला गया था.. मुझे सिर्फ और सिर्फ उस नयी शक्ति का hi अहसास हो रहा था..

जो अभी जागृत हो गयी थी उस शक्ति की अनुभूति हो रही थी..

और उस शक्ति के फायदे और उसका कार्य सब मुझे ज्ञात हो रहा था..

उस शक्ति की बजह से मेरे अंदर एक नयी फुर्ती नया तेज का संचार हो रहा था यही सब मुझे महसूस हो रहा था...

मई मन hi मन उस शक्ति को कण्ट्रोल करना सिख रहा था तभी मुझे एक हलकी सी अबाज अति है...

जिसे मई समाज भी नहीं पाया और ठीक तरह से सुन भी नहीं पाया...

पर उसकी बजह से मेरा ध्यान जरूर टूट गया और मुझे होश आ गया...

मैंने जब आंखे खोली तो नानाजी मेरी और देखकर मुस्कुरा रहे थे.. ये देखकर मई उनसे पूछता हु...

मई- क्या हुवा नानाजी आप है क्यों रहे हो. और आप मुझे कब से देख रहे थे..

नानाजी- कुछ नहीं रूद्र जब से तुम ध्यान में बैठे हो तब से मई तुम्हे देख रहा हु..

और तुम्हे ऐसे ध्यान में बैठे हुए देख बहुत ाचा लग रहा है...

लगता है तुम अब तुम्हारी जागृत हुयी शक्ति को कण्ट्रोल करना सिख रहे हो...

Mai-Ha नानाजी मई वही कर रहा था...

Nanaji-To फिर ठीक है अब मई तुम्हे जो बात कर सकता हु जो मई तुम्हे बताने वाला था..

वो बात तुम अब बहुत अचे से समाज सकते हो और उसे पूरी तरह निभा भी कर सकते हो...

मई- आप सिर्फ बताइये नानाजी क्या करना है. मई आपका बताया हुवा हर काम करूँगा ..

नानाजी- रूद्र बीटा तुम्हारा जो भी कुछ कारन था धरती पर जाने का वह के परिवार से मिलने का वो विधि लिखित था..

वो सब पहले से hi तय था. उसमे तुम्हारी और इस पुरे विश्व की भलाई छुपी हुयी है..

मई- तो आप क्या कहना चाहते हो की मेरे धरती पर जाने के पीछे कोई कारन छुपा हुवा है.

जिसकी बजह से इस पुरे विश्व की भलाई हो.. पर ऐसा क्या हो सकता है.

नानाजी- ऐसा hi कुछ समाज लो. पर वो है क्या ये तुम्हे मई बताऊंगा पर वक़्त आने पर. अब तुम मेरे कहने का उद्देश्य तो समाज चुके होंगे ..

Mai-Samaj तो गया हु की आप मुझे फिर से धरती पर भेजना चाहते हो.

पर क्या वह मेरा जाना सही होगा क्यों की वह पर तो मेरा कोई परिवार भी नहीं है..

जो भी है यही है तो मई इस परिवार को छोड़ कर धरती पर क्यों जाऊ.

और रही बात भलाई की तो मई यहाँ रहकर भी वो सब कर सकता हु..

नानाजी- ऐसा है तो फिर हमे तुम्हे सजा देने की क्या जरुरत थी जरा तुम भी सोचो..

अगर किसी जेवर या हिरे को उसे करना हो किसी अचे काम के लिए तो उसे पहले घिसना पड़ता है..

सब तरह के कार्य करने पड़ता है उसके बाद hi वो निखार कर सामने आ जाता है.

और अपना महत्व समाज जाता hai.Aur उसी की बजह से से वो सभी तरह जे धातु पर एक नंबर पर आता है..

मई नानाजी के कहे बात पर सोच hi रहा था तभी नानाजी आगे कहते है..

जब से तुम्हे होश है तुम्हे याद है तब से तुम्हे कभी ऐसा लगा की तुम उस परिवार के हिस्सा नहीं हो .

या उन्होंने कभी तुम्हे ऐसा दर्शाया है की तुम उस परिवार के कोई भी नहीं हो और वो तुमसे नफरत करते है...

ये सुनकर मई बचपन से लेकर अब तक का पिक्चर मेरे सामने एक मूवीज की तरह चलने लगे..

पर वह पर कभी भी मुझे ऐसा कभी नहीं लगा की मई उनके परिवार का सदश्य नहीं हु..

उन्होंने हमेशा मुझे अपना भाई अपना बीटा अपना वारिस hi समाज है..

बल्कि उन्होंने उनके अपने बचो से ज्यादा मुझे प्यार किया hai..waise मई भी उनका एक तरह का बचा hi हु पर फिर भी...

ऋतू के बताने से पहले मुझे कभी भी ऐसा नहीं लगा की वो सब मेरा परिवार नहीं है वो सब मुझे प्यार नहीं करते या मई नहीं करता ..

मई भी उन सबसे बहुत प्यार करता हु. और अगर उस परिवार की तरफ इससे पहले किसी ने भी आंख उठाकर भी देखा था तो उसका क्या हश्र किया था..

ये सब मुझे याद एते hi मुझे मेरी गलती का अहसास हो गया.. और मुझे वो भी सन याद आ गया..

जो मैंने ऋतू के साथ किया था और बाकि परिवार वालो के साथ..

उनके साथ अचानक से रूडली बेहवे किया उन्हें कभी भी सीधे मुँह से बात नहीं की..

पर उन्होंने कभी भी मेरे बात का बुरा नहीं मन था ये सब याद एते hi...

मुझे तो अपने आप पर हु गुस्सा आने लगा ये बात ध्यान में एते hi नानाजी कहते है...

Nanaji-Dekho रूद्र उस वक़्त तुम्हे hi क्या किसी को भी ऐसा लग्न जायज बात है..

क्यों की बचपन से हम जिसके साथ रह रहे है वो हमारा परिवार नहीं हो तो उस वक़्त गुस्सा जरूर अत है..

पर तुम्हे उस वक़्त दोनों साइड से भी सोचना चाहिए था...

लेकिन जो हुवा वो जाने दो अब तुम ये गलती सुधर सकते हो...

Mai-Par अब कैसे.... मतलब....

नानाजी- है तुम सही सोच रहे हो की अब तुम्हे धरती पर जाना चाहिए क्यों की वह अभी तुम्हे बहुत से काम करने है.

सिर्फ वही नहीं और भी बहुत से जगह है वह का भी तुम्हे ख्याल रखना है..

जो तुम धरती पर जाने के बाद hi कर सकते हो.. और सबसे बड़ी बात तुम्हे तुम्हारी शक्तिया भी हासिल करनी है...

उसके लिए तुम्हारे सामने जो कुछ भी आएगा जिस भी परीक्षा को तुम बहुत hi अछि तरह से पार करोगे उससे तुम और भी निखार जाओगे..

मई- पर नानाजी अगर मई वह गया तो यहाँ पर क्या होगा माँ कैसे और मेरी बहाने.....

Nanaji-Dharti पर जाने के बाद भी तुम अपने परिवार के साथ मिलना चाहते हो तो यहाँ पर कभी भी आ सकते हो..

सिर्फ इस महल को याद करना है पल भर में यहाँ पहुंच जाओगे...

लेकिन अब तुम्हे तुम्हारी बहनो को समजना है वो मई नहीं कर सकता...

Mai-(Kuch सोचते हुए) ठीक है नानाजी मई आपको मेरी बहनो से बात करने के बाद hi इस बारे में बताऊंगा...

नानाजी- लेकिन जल्दी बताना क्यों की धरती पर बहुत जल्द कुछ ऐसा होने वाला है जिसे कोई नहीं रोक सकता..

और वह पर तुम्हारा होना बहुत hi जरुरी है.. वार्ना बहुत बड़ा अनर्थ हो जायेगा..

शायद ये बात तुम्हारे परिवार से भी जुडी हो सकती है...

ये बात कहकर वो फिर से ध्यान में मगन हो गए पर मुझे सोच में दाल गए...

अब क्या किया जाये नानाजी तो चले गए ध्यान में. इसलिए मई वह से महल चला गया...

क्यों की मुझे कुछ वक़्त चाहिए था सोचने के लिए..

तो मई वह कुछ देर अपने बारे में सोचने लगा...

और फिर कुछ फैसला करने के बाद hi मई वह से महल की और निकल पड़ा अपनी बहनो की तरफ.............................
 
अपडेट 45

क्यों की मुझे कुछ वक़्त चाहिए था सोचने के लिए..

तो मई वह कुछ देर अपने बारे में सोचने लगा...

और फिर कुछ फैसला करने के बाद hi मई वह से महल की और निकल पड़ा अपनी बहनो की तरफ.............................

आगे............................

लेकिन इधर धरती पर तो कुछ और hi हाल हो गया था उस जंगल में..

वो अघोरी तांत्रिक एक बहुत hi बड़ी पूजा कर रहा था जिसके लिए उसने इतने बलि दिए थे कुवांरी लड़कियों के..

उसे अपने मतलब को पूरा करने के लिए अब सिर्फ 2 लकडिया चाहिए थी जो उसने पहले से hi तय करके राखी थी..

की वो लड़किया कोण है. जो उसके मतलब को पूरा कर सकती है...

उसी लिए वो अपनी ये बहयनक पूजा स्टार्ट कर दी थी..

इसके बाद वो इतना शक्तिशाली होने वाला था की उसे इस पुरे विश्व में हारने वाला भी कोई नहीं था...

पूजा के वक़्त उस अघोरी के पास एक वाद्य (फ्लूट) था जो उसके आधे शिष्य बजा रहे थे...

और दूसरी तरफ एक खास तरह का मंत्र था जो उसके आधे शिष्य सामने रखे यज्ञ में आहुति देकर कह रहे थे...

उस खास तरह के फ्लूट से और मंत्र शक्ति से hi उसकी ीचा पूर्ति होने वाली थी..

पर एक बात और थी जो वह पर बैठे कोई नहीं जनता था सिवाय उस तांत्रिक और उसके सबसे बड़े शिष्य कन्ट्रा के अलावा...

वो ये की जो दो लड़किया अंत में बची थी आहुति के लिए वो अभी तक उस जगह उपस्थित hi नहीं थी..

और वो दोनों है कोण ये तो उस तांत्रिक के अलावा कोई भी नहीं जनता था...

उन दो लड़कियों को यहाँ बुलाने के लिए hi उसने ये मंत्र और वाद्य जाल बिछाया हुवा था.

जिसकी तरफ आकर्षित होकर वो दोनों लड़किया आने वाली थी उसके पास...

पर वो दोनों कोण थी जो उस शक्ति पर आकर्षित होकर एंड वाली थी ये तो सिर्फ उस अघोरी तांत्रिक को hi ज्ञात था..

अब वो तांत्रिक उस चीज को पाने के लिए अंतिम पड़ाव पर था.. उसी की बजह से वह पर अब बहुत जोर जोर से हवा चलने लगी थी...

उस हवा में यज्ञ की आग न बुझे इस लिए तांत्रिक ने कुछ कर रखा था..

और जो बाकि शिष्य थे वो अपनी मंत्र की शक्ति के स्पीड को बढ़ने को बोलै था और साथ hi उस वाद्य की sangit(Flute) को भी..

वो वाद्य किसी दो चीजों से बनाया हुवा था. एक तो Flute(Basuri) और दूसरा ढोल..

जिसकी बजह से उसका जो संगीत था वो बहुत hi अजीब तरह से बज रहा tha..Jo एक साथ दो संगीत बजा रहा था..

सुनने में वो आम इंसान के लिए बहुत दर्दनिय था पर जिसे वो तांत्रिक बुलाना चाहता था उसके लिए वो बहुत hi प्रिय और आकर्षणीय था...

जिसकी अबाज सुनकर वो कही से भी भागकर आ जाये और एक कारन था..

जो आगे पता चल जायेगा जब वक़्त आएगा तब मई आपको याद दिला दूंगा...

वह पर अब बहुत hi तेज हवाएं चल रही थी.. आकाश में बदल गरज रहे थे...

और साथ hi बिजलिया भी जोरो शोरो से चमक रही थी.. उनके ऐसे अचानक बदलाव का कारन कोई भी नहीं जनता था...

वह पर मनो एक बहुत बड़ा तूफान आने वाला हो.. स्टॉर्म जैसा माहौल हो गया था वह..

तभी वह पर एक चमक सी दिखने लगी जो धीरे धीरे बढ़ने लगी और कुछ hi देर बाद काम हुयी ..

जब वो चमक बड़ी तो उस अघोरी तांत्रिक को और उसके सरे शिष्य को आगे का नजारा देखना असंभव हो गया था..

जब कुछ देर बाद वो रौशनी कुछ काम हुयी तो उन्हें आगे का नजारा दिखाई दिया...

जहा पर उस अघोरी तांत्रिक के शिष्य आगे का नजारा देखकर इतने दर गए थे की वो ऊपर से लेकर निचे तक थार थार कैंप रहे थे..

और वही दृश्य देखकर वो तांत्रिक ख़ुशी के मरे पहले नहीं समां रहा था..

उसकी ख़ुशी छुपाते हुए भी नहीं चुप रही थी.. ऐसा हाल हो गया था उसका.

पर अपने शिष्य का हल देखकर और उन्होंने अपना मंत्र और वाद्य बजाना और पड़ना बंद कर दिया था...

इसलिए वो उसके शिष्य पर क्रोधित होकर अपना कार्य शुरू रखने के लिए कहा...

जो आगे का नजारा देखकर अपने गुरु यानि तांत्रिक को गुस्सा होते हुए देख उनके मुँह से एक शब्द भी नहीं निकल रहा था...

पर जैसे तैसे उन्होंने अपने गुरु तांत्रिक को खुश देखकर उन्हें कुछ अहसास तो हो गया था...

की उन्हें कुछ नहीं होगा और जो उनके गुरु (अघोरी) को जो चाहिए था वो मिल चूका है...

पर फिर भी आगे का नजारा hi कुछ ऐसा था की वो सब अपना दर छुपाते हुए भी नहीं छुपा प् रहे थे...

उन सबके सामने दो लड़किया कड़ी थी.. और वो दोनों भी एक से बढ़कर ब्यूटीफुल और बहुत hi अट्रैक्टिव दिख रही थी...



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पर उसी के साथ वो दोनों भी खतरनाक और दिल दहला देने वाली सूरत से वह पर कड़ी दिख रही थी...



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उन दोनों में से एक लड़की किसी जिन की तरह हवा में लटकी हुयी और बहुत hi सुन्दर दिख रही थी...



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और दूसरी लड़की किसी ड्रैगन की तरह उसके दो बड़े बड़े पंक फैले हुए थे..



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और एक बात उसके पेअर तो थे पर पेअर के साथ ड्रैगन जैसी पूछ भी थी..

वैसे वो दोनों लड़किया अपनी तरफ किसी को भी अत्त्रक्ट कर सकती थी ऐसा चेहरा था उनका...



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पर साथ hi वो दोनों भयानक भी उनके इस अवतार के कारन दिख रही थी...

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अब उन्हें देखकर आपको समाज hi आ गया होंगे की वो दोनों कोण है अगर नहीं समाज आया तो मई खुद hi बता देता हु...

की वो जो जिन है वो और कोई नहीं जीन के दुनिया की राजकुमारी रसिका है...



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और दूसरी लड़की ड्रैगन के दुनिया की राजकुमारी सोनम है...



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और ये दोनों वही है जिन्हे रुद्रदीप अपने घर लाया था जो मन hi मन रूद्र को अपना पति मानती है..

अब ये यहाँ कैसे पहुंचे तो चलते है कुछ देर पहले पीछे जिस वक़्त वो अघोरी तांत्रिक अपनी मंत्र और वाद्य को बजा रहा था..

और उन दोनों को बुलाने के लिए बहुत कोशिश कर रहा था..

और यहाँ पर ये दोनों आज घर पर hi थी.. पर रूद्र उस घर न होने के कारन वो घर होकर भी नहीं था..

मतलब किसी के चहरे पर खुलकर हसी नहीं थी जो पहले हुवा करती थी..

पर रसिका के जादू के कारन ये सबको ज्यादा फील नहीं हो रहा था..

सब काम हो जाने के बाद रसिका और सोनम दोनों एक साथ बैठी हुयी थी..

वो दोनों आपस में बाते कर रही थी तभी वह ऋतू आ जाती है .



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रितिका- क्या चल रहा है यहाँ तुम दोनों एक साथ...

रसिका- कुछ नहीं ऋतू दी. हम तो बस ऐसे hi बाटे कर रहे है.. वो क्या है न सुबह से मेरा मन बहुत घबरा रहा है...

और कुछ घुटन सी भी हो रही है.. कुछ समाज नहीं आ रहा क्या हो रहा है...

ये सुनकर सोनम भी चौंक जाती है और वो कहती है..

सोनम- क्या तुम्हे भी ऐसा hi कुछ हो रहा है क्या..?

Rasika-(Chonkte huye)Matlab...Kyu तुम्हे भी सुबह से ऐसा hi कुछ हो रहा है...

Sonam-Ha रसिका सुबह से मेरे साथ भी ऐसा hi हो रहा है.. कुछ समाज नहीं आ रहा क्या हो रहा है..

(ऋतू की तरफ देखते हुए) ऋतू दी क्या आपको भी ऐसा hi लग रहा है...

Ritu-Nahi तो.. मई तो नार्मल फील कर रही हु.. बस आज मुझे तुम्हारे जैसा तो नहीं पर....

(कुछ सोचते हुए) जाने दो वो कोई जरुरी बात नहीं तुम बताओ तुम दोनों को शामे hi फीलिंग क्यों आ रही है..

रसिका- पता नहीं रितिका दी ये सब क्यों हो रहा है..

तभी रसिका को कुछ अबाज सुनाई देती है जिसकी बजह से वो बोलते बोलते अचानक से चुप हो गयी..

और वो अबाज बहुत hi ध्यान से सुनते जा रही ये देखकर ऋतू उसे हिलती है और कहती है....

ऋतू- क्या हुवा रसिका किस सोच में दुब गयी तुम...

Rasika-(Abhi जो अबाज सुनाई दिया उसके बारे में सोचते हुए) ऋतू दी अपने ये अबाज सुनी किसी संगीत की तरह लग रही है...

लगता है ये संगीत मैंने कही तो सुना है पर कहा ये याद नहीं आ रहा है..

पर ऐसा लग रहा है जैसे ये मुझे अपनी तरफ खींच रही है...

Ritu-Nahi तो मुझे कोई अबाज सुनाई नहीं दी.. सोनम क्या तुम्हे....

ये कहकर ऋतू सोनम की तरफ देखती है पर वो तो किसी बात को रसिका की तरह hi सुनते जा रही थी..

जैसे वो किसी बात से रसिका की तरह hi खो गयी हो ऋतू ने उसे हिलाया तभी वो होश में आयी और शामे रसिका की तरह वो बोली...

सोनम- आपने ये अबाज सुनी बहुत hi अजीब सो अबाज लग रही है..

पर ऐसा लग रहा है जैसे ये मुझे अपनी तरफ खींच रही है..

ऋतू उन दोनों की शामे बात और शामे फीलिंग से बहुत घबरा गयी थी..

और एक तरह से परेशां भी हो गयी thi..Isliye वो कहती है...

ऋतू- ये क्या हो गया है तुम दोनों को तुम दोनों एक जैसे hi बाते की जा रही हो..

रसिका और सोनम इस बार दोनों भी एक साथ एक hi लब्ज बोलती है...

दोनों एक साथ- पता नहीं ऋतू दी ये अबाज सुनने के बाद मई अपने आप को बहुत कमजोर फील कर रही हु...

और साथ hi ये अबाज भी मुझे अपनी तरफ खींच रही है...

रसिका- कुछ समाज नहीं आ रहा है ऋतू दी... और मेरी इस कमजोरी और थकन की बजह से मेरी शक्तिया काम होती जा रही है मेरे साथ तो ऐसा तब हुवा था जब...

ऋतू- तब क्या तब बताओ रसिका कब तुम्हे ऐसा लगा था...

रसिका- जब मुझे उस जादूगर ने कैद करके रखा था पर उस वक़्त तो वो सब Unke(Rudra) के शक्तियों के कारन हो गया था पर अब...

Sonam-Muje बचाओ ऋतू दी.. मई भी मेरे असली रूप में आ रही हु.

अगर ऐसा हुवा न तो बहुत अनर्थ हो जायेगा... ऐसे हुवा तो सिर्फ मुझे wo(Rudra) hi मुझे is(Ladki) रूप में ला सकते है...

ऋतू उन दोनों की ऐसी बात सुनकर बहुत घबरा गयी थी उसे क्या करे और क्या कहे कुछ समाज नहीं आ रहा था...

तभी वो दोनों एक साथ चिल्लाती है...

दोनों एक साथ- हमें बचाओ ऋतू दी.. बचाऊओऊ............

ये कहते hi वो दोनों अचानक से वह से गायब हो गयी और सीधा जाकर उस जंगल में प्रकट हो गयी...

अपने इस आधे जिन और आधे ड्रैगन के रूप में आ गयी जो मैंने ऊपर बताया था...

उन्हें ऐसा अचानक से गायब और ऐसे चिंतित देखकर रितिका बहुत घबरा गयी थी..

और सबसे बड़ी बात Rudradip(Mai) भी वह नहीं था इसलिए वो और भी दर गयी थी...

उसे क्या करे और क्या न करे कुछ समाज नहीं आ रहा था...

वो दोनों को जोर जोर से अबाज देती रही पर दोनों वह से कहा गायब होकर चली गयी थी उसे कुछ भी नहीं पता था..

अब तो रितिका अपने शक्तियों की मदद से उन दोनों को ढूंढ़ने की कोशिश करने लगी...

रितिका के बहुत कोशिश करने के बाद भी उसे वो दोनों दिख hi नहीं रही थी...

आखिर में उसने अपनी पूरी शक्ति लगाकर उन दोनों को ढूंढ़ने की कोशिश की तो उसे एक झलक दिखाई दी..

लेकिन वो झलक कुछ देर के लिए hi थी उसके बाद वो गायब हो गयी...

फिर बार बार कोशिश करने के बाद भी उसे कोई नहीं मिला तो वो उस झलक के बारे में सोचने लगी जो इस तरह की थी..

उसे रसिका और सोनम अपने आधे जिन और आधे ड्रैगन के रूप में एक जगह कड़ी हुयी दिखी...

पर उन दोनों के सामने बहुत से तांत्रिक यज्ञ करते हुए दिखाई दिए...

और दूसरी दिशा में बहुत से तांत्रिक कुछ अजीब सा इंस्ट्रूमेंट्स बजा रहे थे..

और फिर चारो और देखने के बाद उसे एक कला घनघोर और बहुत hi डरावना जंगल दिखाई दिया...

जहा पर उजाले के नाम पर उस यज्ञ की आग hi दिखाई दिख रही और कुछ नहीं...

और फिर वो झलक ासाहनक से गायब हो गयी...

इसके आगे वो कुछ देख न पायी क्यों की बहुत कोशिशों के बाद भी उसे कुछ नहीं दिखा...

तो वो जंगल खोजने के बहाने से अपने घर से निकल गयी...

और वो जगह खोजने लगी जो उसने अपने शक्तियों की मदद से उस जगह की झलक देखि थी...

जहा पर रसिका और सोनम अपने आधे अधूरे रूप के साथ कड़ी थी....

रितिका जो जगह ढूंढ रही थी पर जितनी वो जगह ढूंढ़ने की कोशिश करती उतनी hi उसे नाकामयाबी hi हाथ लगती...

इस इंडिया में बहुत से जंगल थे उसने वो सब जंगल देख लिया पर किसी भी जंगल में उसे कुछ भी दिखाई नहीं दिया...

आखिर में उसने अंश का सहारा लेना hi सही लगा और ऋतू ने अंश को अपनी पास बुलाया..

और अंश भी पल भर में वह पहुंच गया जहा अपर रितिका कड़ी थी...

और इधर मई अपने महल पहुंच गया..

और अपने परिवार और बहनो को क्या बताया जाये और कैसे उन सबको मनौ..

यही सब सोचते हुए मई महल के अंदर आ गया जहा पर माँ और मेरे दोनों ममी बाटे कर रहे थे........................
 
अपडेट 46

आखिर में उसने अंश का सहारा लेना hi सही लगा और ऋतू ने अंश को अपनी पास बुलाया..

और अंश भी पल भर में वह पहुंच गया जहा अपर रितिका कड़ी थी...

और इधर मई अपने महल पहुंच गया..

और अपने परिवार और बहनो को क्या बताया जाये और कैसे उन सबको मनौ..

यही सब सोचते हुए मई महल के अंदर आ गया जहा पर माँ और मेरे दोनों ममी बाटे कर रहे थे........................

आगे............................

मुझे एते हुए देखकर पहले तो माँ मुस्कुराती है और फिर कहती है...

माँ- आ गया मेरा बचा इधर आ मेरे पास कहा गया था तू...

मई- कुछ नहीं माँ वो नानाजी के पास गया था उन्होंने मुझे कुछ जरुरी काम से बुलाया था...

माँ मेरे ऐसा कहने से और मेरे उतरा हुवा चेहरा देखने से hi समाज गयी थी की...

इसकी बजह क्या है पर वो मेरे मुँह से सुन्ना चाहती थी इसलिए उन्होंने मुझसे hi पूछा..

Maa-(Mere चहरे पर हाथ फिरते हुए) क्या हुवा मेरे बेटे को.. तेरा ये मुँह क्यों लटका हुवा है..

नानाजी ने कुछ कहा क्या तुमसे.. या और कुछ बात है...

अब मई माँ को क्या बताता और किस मुँह से बताता की अब मुझे धरती पर जाना है...

लेकिन बताना तो था hi तो इसलिए मैंने जैसे तैसे हिम्मत जुटते हुए माँ से कहने लगा.. पर मई पूरी बात माँ से कह hi नहीं सका..

मई- Woo...Mmaaa ... बात कुछ नहीं है...

माँ मेरा हाल समाज गयी थी इसलिए उन्होंने मेरे सर पर प्यार से किश किया और प्यार से कहने लगी...

Maa-Dekho बीटा मई तुम्हारी माँ हु और तुम्हारे मन की बात जानती हु.

और मुझे पता है की तुम बहुत उदास हो.. और तुम्हारा मुँह क्यों लटका हुवा है...

पर मई तुम्हारे मुँह से सुनना चाहती हु की इसका कारन क्या है...

माँ के ऐसा कहने से मुझे कुछ हिम्मत मिल गयी थी तो मई माँ से कहने लगा...

Mai-Maa वो नानाजी कह रहे है की मुझे अब धरती पर वापस जाना चाहिए...

क्यों की वह पर मेरे बहुत से अधूरे काम रह चुके है और मेरा अभी वह का वक़्त पूरा भी नहीं हुवा है..

और सबसे बड़ी बात वह पर भी मेरा एक परिवार है जिन्होंने मुझे बचपन से पला है...

वो सब भी मुझे बहुत प्यार करते है. और उन्हें मेरी जरुरत है...

और यहाँ आने का और रहने का समय अभी आया नहीं है मेरा...

मुझे और भी बहुत कुछ काम करने है जो वह रहकर hi मई पूरा कर सकता हु...

माँ मेरी बात को पुरे ध्यान और शांति से सुन रही थी. उन्होंने मेरी पूरी बात होने तक कुछ भी नहीं कहा और जब मई रुक गया तो वो कहने लगी...

माँ- मुझे बहुत ाचा लगा की अब तुम सबके बारे में सोचते हो.. और तुम्हे तुम्हारा कार्य पता है..

तुम उसे अपनी तरह से निभा सकते हो और पूरी सिद्धांत से उसे पूर्ण भी कर सकते हो...

तुम्हे समाज आ गया है की तुम्हे क्या करना चाहिए और क्या नहीं आज मई बहुत खुश हु..

अगर Baba(The लार्ड) की यही ीचा है तो तुम्हे जाना चाहिए धरती पर अपने उस परिवार के पास...

Mai-Par माँ मई आप सब लोगो को यहाँ ऐसे छोड़कर भी नहीं जाना चाहता मई क्या करू माँ... क्या करू..

ये कहकर मई माँ की अंचल में जाकर रोने लगा.. क्यों की सच में इन कुछ दिनों में hi मुझे इन सबसे बहुत लगाव हो गया था..

मुझे इन सबकी आदत हो गयी thi..Khaskar मेरे बहनो की..

पर इन्हे ऐसे छोड़कर जाने की सोच से hi मेरे दिल बैचेनी सी होती थी..

और मेरा मन hi नहीं मान रहा था की मई उन्हें छोड़कर यहाँ से कही दूर चला जाऊ एक पल के लिए भी..

इसलिए मुझे रोना आ Gaya.Mera ऐसा रोना देख मेरे दोनों ममी और माँ के आँखों में भी आंसू आ गए..

पर उन्होंने खुद को रोका और माँ मुझे चुप करते हुए मेरी आंसू पोछती है और कहती है...

माँ- क्या रूद्र तुम इतने बड़े होकर भी एक बचे की तरह रो रहे ho..Ab तुम्हे सबके आंसू पोछने है न की खुद तुम्हे रोना है..

और रही बात हमे छोड़कर जाने की तो जब भी तुम्हारा मन हो...

तुम हमे मिलने आ जाना.. अब से जब भी कभी तुम्हारे मन हो हंस मिलने का...

या कभी भी तुम्हे हमारी याद आएगी तो इस महल को याद कर लेना...

तुम खुद बा खुद हमारे पास पल भर में hi पहुंच जाओगे...

माँ ने मेरे आंसू पोछे पर उनकी भी आंखे नाम थी जो उन्होंने मई देखने से पहले hi पॉच दिए..

वैसे माँ के ऐसा कहने से मेरा कुछ मन शांत तो हो गया tha.Phir आगे माँ कहती है...

Maa-Dekho रूद्र बीटा तुम्हारे सामने बहुत सी कठिनाइया आएगी.. कभी कभी अपने hi पराये हो जायेंगे और कभी पराये अपने..

पर तुम अपना धैर्य और अपने इच्छापूर्ति को पूरा करने के लिए अपना दृढ़ निश्चय और सबसे बड़ी बात अपने लक्ष्य को पाने का अटल निर्णय..

ये सब तुम्हारे साथ हो न और तुम इन सबको हमेशा याद रखोगे न तो...

तुम किसी भी पड़ाव को आसानी से पार करके वह पहुंच जाओगे जहा पर आज तक सिर्फ तुम hi पहुंच पाए हो...

पर इस बार बात कुछ अलग होगी.. उसका आगाज कुछ अलग होगा.. और उस जगह को पाने वाले का अंदाज भी...

ये कहकर माँ मुझे प्यार से सहलात्र हुए मुस्कुराती है.

तो उनके चहरे पर मुस्कराहट देखकर मेरे भी चहरे पर फीकी सी हसी आ जाती है..

मई माँ की बात तो समाज गया था पर उनकी बात कहने का उद्देश्य नहीं और अब सही वक़्त भी नहीं था की मई उनसे कुछ पूछ लू...

इस समय तो मई अपने प्यारी और मेरी सबसे अजीज जान माँ के साथ रहना चाहता था...

अपने परिवार के साथ रहना चाहता था.. अपने बहनो क्र साथ कुछ हसी ख़ुशी पल गुजरना चाहता था...

पर शायद अभी के लिए वो सब यहाँ संभव नहीं है.. पर जैसे hi मुझे मेरे बहनो का ख्याल आया तो...

मेरे मन में सवाल आ गया तो मई माँ से कहने लगा...

मई- माँ मई तो धरती पर चला जाऊंगा पर अपनी बहनो को क्या कहूंगा..

उन्हें कैसे मनाऊंगा.. वो सब तो मुझे न hi कहेगी जाने के लिए...

अभी माँ कुछ कहती उससे पहले hi मेरे राइट साइड से एक अबाज आयी जो एक लड़की की थी...

जिसे मई सुनते hi पहचान गया था की ये मेरी प्यारी बहन मेरी गुड़िया त्रिगुणा की अबाज है...

त्रिगुणा- भैया हमने सब सुन लिया है और हम सब जान चुके है...

ये सुनते hi मैंने उसकी तरफ देखा तो त्रिगुणा और शताक्षी दोनों साथ hi कड़ी थी..

दित्य उनके साथ मुझे कही दिखाई नहीं दी शायद नहीं भी हो.. पर जब मैंने उन्हें देखा तो उन दोनों के आँखों में आंसू थे ..

जो मुझे समजते देर नहीं लगी की वो भी मेरे hi बजह से होंगे...

उनके आंसू मुझे देखे नहीं गए इसलिए उनको मैंने अपने पास बुलाया और दोनों hi एक साथ दौड़ते हुए मेरे पास आ गयी और आकर सीधा मेरे गले लग गयी...

गले लगते hi दोनों ने रोना शुरू कर Diya..unhe ऐसा रोटा हुवा देख मेरे भी आँखों में आंसू आ Gaye..Par मैंने जल्द hi वो पॉच लिए..

माँ और मेरे दोनों ममी हम Bhai-Bahan का प्यार देखकर बहुत खुश हुयी..

और उनके भी आँखों में आंसू आ गए थे पर उन्होंने भी मेरे तरह अपनी आंसू पॉच दिए थे..

मई उन्हें समजने लगा पर मुझे ज्यादा मुश्हकात नहीं करनी पड़ी इन दोनों को मानाने के लिए...

क्यों की वो दोनों तो पहले से hi जानती थी. इसलिए वो दोनों जल्द hi शांत हो गयी...

उनसे दूर होकर मैंने उन दोनों की आंखे पोची और उनसे कहने लगा..

Mai-Kya तुम दोनों भी.. इतनी बड़ी होकर भी बचो की तरह रो रही हो.. और हमे भी रुला रही हो...

शताक्षी- है तो आप कर hi ऐसे रहे हो.. हमे छोड़कर जाना चाहते हो तो क्या रोना नहीं ेगा क्या..

वैसे आपको ए हुए कुछ दिन भी नहीं हुए है और आप जाना चाहते हो...

Mai-Ab क्या करू बीटा काम है तो जाना पड़ेगा hi न लेकिन जब तुम में से मुझे कोई भी पुकारेगा..

जब भी तुम या त्रिगुणा तुम दोनों को अगर मेरी याद आएगी तो बस मुझे याद कर लेना मई उसी पल मई यहाँ तुम्हारे सामने हाज़िर हो जाऊंगा...

त्रिगुणा- कोई बात नहीं भैया.. हम सब जान चुके है हम दोनों ने आपकी बात सुन ली है और बुवा की भी..

आप जहा चाहते हो तो चले जाना पर हमसे वडा कीजिये की जब भी हम आपको बुलाएँगे आपको यहाँ आना पड़ेगा...

है है.. हमको पता है की अपने हमसे अभी अभी वही कहा है पर पहले hi..

हम आपको चेतावनी दे रहे है.. बाद में कोई भी बहाना नहीं चलेगा...

मई- ठीक है मेरी प्यारी गुडियो... मई तुमसे वडा करता हु की जब भी तुम दोनों मुझे याद करोगी..

मई यहाँ पहुंच jaunga..(Lekin तभी कुछ याद करते हुए)...

तुम दोनों तो समाज गयी लेकिन अब ये बात उस महारानी (दित्य ) को कोण batayega...Kon समजायेगा...

ये सुनते hi मेरी दोनों बहनो के साथ माँ और दोनों मामियो ने भी मेरी तरफ इशारा कर दिया... और मई उनका इशारा समझते hi उनसे कहने लगा..

Mai-ye तो सरासर नाइंसाफी है मेरे साथ. अब ये काम तो तुम में से कोई तो कर लो यार.. कितना फसते हो तुम मुझे.. हर बार ऐसा hi होता है..

इशानी (Choti)Mami- बीटा तुम कुछ भी कहो उसे मानना तो सिर्फ तुम्हे hi अत है...

और वैसे भी तुम्हे जाना है धरती पर हमे नहीं.. इसलिए तुम hi देखो...

ये कहते hi ममी हसने लगी और उनके साथ सब लोग.. ये देखकर मई कहता हु...

Mai-Acha Mami..Meri hi ममी मुझसे hi म्यू...

ये बात सुनने के बाद सब तो फिर से हसने लगे.. लेकिन छोटी ममी मुँह फूलकर.. पर वो भी मन hi मन है रही थी..

Mai-Thik है मई जा रहा हु मेरी गुड़िया को मानाने.. लेकिन याद रखना इसका बदला मई जरूर lunga...aur वो भी तुम सब के साथ चुन चुनकर..

ये कहकर मई दित्य की रूम की तरफ चला गया और वह पर मेरे जाते hi उनमे से शताक्षी कुछ कह रही थी पर मई तो बिना सुने hi वह से चला गया..

पर मेरे जाने के बाद मेरी बातो दे सब बहुत है रहे the..Par अंदर से रो तो सब रहे थे मेरे जाने से...

तभी मई कुछ आगे जाकर रुक गया और एक बार पीछे देखा...

जो बहार से तो सब है रहे थे पर उनके अंदर का हाल मई समजे गया था. इसलिए मई उसी जगह से उन सबको कहने लगा...

मई- क्या आप सब लोग भी.. एक गॉड होकर नार्मल इंसानो की तरह रो रहे हो.. याद करो आप सब कोण हो और क्या कुछ नहीं कर सकती..

और आप सब सिर्फ इस एक बात के लिए रो रहे हो.. आप सब मुझे कहते हो अपने आप को पहचानो..

अब मई आप सब लोगो से कह रहा हु आप सब लोग भी खुद को पहचानो...

आप तो इस पूरी दुनिया को एक ऊँगली पर नचा सकते हो फिर भी...

अब आप सबको क्या करना चाहिए ये मुझे बताने की जरुरत नहीं है ये आप खुद hi जानती हो..

(और फिर ये मैंने कुछ मजाकिया अंदाज में कहा जिससे सब नार्मल रहे ) लेकिन वो मेरी महारानी (दित्य) नहीं न जानती. इसलिए मई चला उसे मानाने.. B-bye......

ये कहकर मई फिर से दित्य के रूम की तरफ निकल गया और वह वो सब मेरे ऐसे अचानक से...

बदले हुए बिहेवियर और उन्हें समजने के तरीके से सब चौंक गए थे चौंक क्या वो सब बूत बनकर खड़े हो गए...

अब वो कब तक वैसे रहे और कब अपना काम करने लगे ये तो वो खुद hi जाने..

तब तक चलो चलते है रितिका की तरफ वह देखते है वो अंश को क्या कहती है...

रितिका -अंश मुझे बताओ ये रसिका और सोनम के साथ क्या हुवा है...

और वो दोनों ऐसे अचानक से कहा गायब हो गयी.. और वो सन क्या था जो मुझे धायण में दिखा था...

अंश- उन दोनों को बंदी बनाया हुवा है किसी अघोरी तांत्रिक ने किसी ऐसी जगह...

जहा पर अब तक इस धरती का एक भी मनुष्य वह तक पहुंच नहीं पाया और नहीं कभी पहुंच पायेगा...

रितिका- मुझे वो सब नहीं जानना मुझे वह अभी ले चलो मुझे उन्हें बचाना है. वो दोनों बहुत बड़ी संकट में है...

Ansh-Mujhe माफ़ करना लेकिन मई उस जगह तक आपको नहीं ले जा सकता..

क्यों की वो जगह वो दुनिया पूरी तरह से मायावी है.. जिसके चारो और एक अजीब सा सुरक्षा कबच है...

जिसे आज तक कोई भेद नहीं पाया है सिवाय उसके अंदर रहने वालो के अलावा..

मन

Ritika-(Gusse से जोर से चिल्लाते हुए) ाँणष्ह्ह्ह्ह..... मुझे तुम गुस्सा दिला रहे हो..

याद है न रूद्र ने क्या कहा था तुमसे... और तुम मेरी बात ताल कैसे सकते हो..

वो दोनों वह पर खतरे में है न जाने उनका वह पर क्या हाल हो रहा होंगे..

कैसे वह पर वो अघोरी तांत्रिक उनके साथ बर्ताव कर रहा होंगे...

और तुम मुझे वह ले जाने के बजह यहाँ पर मुझसे माफ़ी मांग रहे हो..

तुम मेरी बात मान नहीं रहे ho.Mujhe तुम्हारे बारे में सब पता है ये मत भूलो तुम...

इस दुनिया (विश्व) में ऐसी कोई जगह नहीं है जो तुम्हे आने से या जाने से रोक सकती है..

और तुम तो रुद्रदीप के अंश होकर मेरी बात को ताल रहे हो. चलो अब मुझे जल्द से जल्द वह ले चलो...

रितिका का गुस्सा देखकर भी अंश शांत hi था.. न जाने किश मिटटी का बना था ये अंश...

इसे किसी की फ़िक्र hi नहीं थी.. बस मन में आया तो मदद कर दी नहीं तो हो गया गायब...

रितिका की बात सुनने के बाद अंश अपने hi शांत लहजे में कहता है...

अंश- मुझे माफ़ करना राजकुमारी पर मई ये सब आपके hi भलाई के लिए कह रहा हु..

वह पर आपको बहुत बड़ा खतरा hai..Aur मई आपको सुरक्षित रखना चाहता हु...

आप तो जानते hi हो की मई रुद्रदीप का अंश हु. तो मई उन्ही के तरह hi सोचता हु..

मुझे भी पता है की रुद्रदीप भाई के दिल में आपके लिए क्या जगह है.. इसलिए मुझे आपकी फ़िक्र है...

इसलिए मई कह रहा हु आप घर जाकर आराम कीजिये वो दोनों खुद बी खुद लौट आएंगे...

रितिका को अंश की बात तो पूरी तरह से समाज तो आ गयी थी.. पर वो इस तरह अपनी बहनो को ऐसे संकट में देख शांत कैसे बैठ सकती है...

इसलिए उसके गुस्से का पारा अब धीरे धीरे बढ़ने लगा था ये अंश ने भी महसूस किया था...

पर वो रितिका को किसी भी संकट में नहीं डालना चाहता था इसलिए वो इस विषय को ताल रहा था..

रितिका- (गुस्से से) खुद बा खुद वो कैसे लौट आएगी.. तुम तो हमारी मदद कर नहीं रहे हो...

और वो Chachundar(Mai) तो चला गया है अपने घर.. और मुझे नहीं लगता की वो अब कभी लौट भी आएगा..

तो ये सब मुझे hi देखना पड़ेगा न.. और अगर उन्हें बचते हुए...

मेरी जान भी चली जाये न तो मुझे कोई गम नहीं hai.Par मई उन दोनों को बचाऊंगी जरूर..

Ansh-Aapke जाने का गम आपको तो नहीं पर इस पूरी दुनिया को तो है...

ये दुनिया, ये सृष्टि (विश्व) एक बार आपके जाने का गम सह चुकी है अब ये दुबारा नहीं सह सकती ये तो आपको भी पता है..

लेकिन जाने दो अगर आपको वह जाना hi है तो मई वह आपको छोड़ सकता हु...

पर मई वह रुक नहीं सकता क्यों की वह से भी ज्यादा अब कई और...

मेरी ज्यादा जरुरत है इसलिए मई वह जाना चाहता हु...

रितिका- तुमने इससे पहले भी हमारी कब हेल्प की है जो इस बार हेल्प करोगे..

तुम तो सिर्फ हमे यहाँ से वह और वह से यहाँ ले जाते हो..

लगता है रूद्र ने सिर्फ तुम्हे इसी काम के लिए पैदा किया है.. यही शक्ति दी है रूद्र ने उसके अपने अंश को.

बाकि तो तुम किसी काम के तो नहीं हो और नहीं तुम कभी करने वाले हो..

अंश इस बार कुछ नहीं कहता है सिर्फ मुस्कुराते हुए रितिका की तरफ देखता है लेकिन बाद में वो कह hi देता है...

अंश- जो होता है अचे के लिए hi होता है.. अगर ऐसा कहा जाये तो झूठ नहीं होगा...

क्यों की जो भी होगा या जो हो रहा है या जो इससे पहले हो गया था वो सब भगवन के hi हाथो में होता है...

और वो कभी किसी का बुरा नहीं चाहता और रही मेरी बात तो ये आपको वक़्त आने पर पता चल hi जायेगा की...

रुद्रदीप भाई ने मुझे क्यों जनम दिया hai..Mai उनका अंश होकर भी ऐसा क्यों हु..

और सबसे बड़ी बात की मई क्या क्या कर सकता हु.. ये भी आपको वक़्त आने पर hi पता लगेगा...

ये कहकर वो वह से गायब हो जाता है और साथ hi उसके जाने के बाद वह पर कही से एक धुवा आ जाता है...

जो बहुत hi घनघोर और कला था.. उस धुवे में अपने पास वाले को देखना असंभव था ऐसा धुवा था वह पर...

अंश के ऐसे ाकहाँक से गायब होने पर और ये इतना भयानक और खतरनाक धुवा आने से रितिका शॉक हो जाती है...

वो उसमे कुछ देख नहीं प् रही थी.. और नहीं कुछ समाज प् रही थी.. बल्कि अंश ने जो अभी सब कुछ कहा था उसके बारे में वो सोच hi नहीं पायी...

क्यों की वो एक खतरा महसूस कर रही थी जो उसे इस धुएं के कारन लग रहा था...

और अचानक से वो भयानक और खतरनाक धुँआ धीरे धीरे काम होने लगा..

ऋतू अब बहुत hi सावध हो गयी थी और आने वाले खतरे से निपटने को तैयार भी हो गयी थी...

पर जैसे hi वो धुवा काम हुवा उसकी नजर चारो और गयी तो उसे ये देखकर ज्यादा शॉक नहीं लगा की वो किसी दूसरे hi जगह पर है...

जहा पर अंधकार से भी ज्यादा अंधकार था और ऐसा अकेलापन जो ऊसर इससे पहले कभी नहीं महसूस हुवा था..

वो एक ऐसी जगह आ गयी थी जहा पर कुछ भी देख पाना बहुत hi असम्बह्व था..

और साथ hi उसे बहुत hi अजीब अजीब तरह की जंगली जानवरो की अबाजे सुनाई दे रही थी...

जो बहुत hi डरावनी और खतरनाक थी.. जिसे कोई आम आदमी सुने तो उसकी वही पहात के हाथ में आ जाये ..

रितिका को समझते देर नहीं लगी की वो उस जगह पहुंच गयी है जहा पर...

वो अघोरी तांत्रिक रसिका और सोनम को ले आया है और इन दोनों को बंदी बनाया हुवा हज

उसने चारो और देखा तो उसे अपने बायीं और बहुत दूर एक जगह पर कुछ रौशनी दिखाई दी तो वो उस तरफ जाने लगी...

कुछ देर आगे जाने के बाद उसे आगे का नजारा बहुत hi स्पष्ट रूप से दिखाई दिया..

जिसे देखकर वो बहुत hi शॉक और सरप्राइज हो गयी थी..

क्यों की उसके आगे का नजारा hi कुछ ऐसा था की उसे उसपर विश्वास कर पाना मुश्किल लग रहा था..........................
 
अपडेट 47

उसने चारो और देखा तो उसे अपने बायीं और बहुत दूर एक जगह पर कुछ रौशनी दिखाई दी तो वो उस तरफ जाने लगी...

कुछ देर आगे जाने के बाद उसे आगे का नजारा बहुत hi स्पष्ट रूप से दिखाई दिया..

जिसे देखकर वो बहुत hi शॉक और सरप्राइज हो गयी थी..

क्यों की उसके आगे का नजारा hi कुछ ऐसा था की उसे उसपर विश्वास कर पाना मुश्किल लग रहा था..........................

आगे............................

ऋतू को वह पर बहुत से तांत्रिक दिखाई दिए.. उनमे से आधे कुछ अजीब सा संगीत बजा रहे थे..

तो आधे तांत्रिक कुछ मंत्र पढ़कर अपने सामने रखे हुए यज्ञ में आहुति दे रहे थे..

जिसकी बजह से उस यज्ञ की आग भी बढ़ते hi जा रही थी.. और उसी की बजह से चारो और देख पाना संभव हो रहा था...

वह से कुछ hi दुरी पर और दो अघोरी तांत्रिक कुछ बाटे कर रहे the..Unme से एक बैठा हुवा था...

और दूसरा उसका सामने सर झुककर खड़ा था.. दिखने से ऐसा लग रहा था की वो उसका शिष्य था...

और वो बैठा हुवा अघोरी तांत्रिक दिखने में बहुत hi बुद्धा लग रहा था..

पर उसे देखकर उसकी शक्तियों को पहचानना बहुत hi मुश्किल लग रहा था और इसी में रितिका फस गयी...

क्यों की वो उस अघोरी तांत्रिक को काम समजने की भूल कर बैठी और उसने उस तांत्रिक से दो हाथ करने की सोची..

अभी वो कुछ आगे hi जाने hi वाली थी तभी उसकी नजर एक जगह गयी और वह पर देखकर तो वो और भी ज्यादा शॉक हो गयी..

वो तो इस शॉकिंग में आगे चलना भी भूल गयी और वही पर खड़े होकर वो नजारा देखने लगी...

और उसके बारे में सोचने लगी क्यों की उसने देखा hi कुछ ऐसा था की उसपर विश्वास कर पाना उसके लिए असंभव लग रहा था...

रितिका ने देखा की एक जगह रसिका और सोनम दोनों अपने आधे जिन और ड्रैगन के रूप में कड़ी है..

पर वो देखकर हैरान हो गयी की ये दोनों यहाँ होकर और आज़ाद होकर भी कुछ कर क्यों नहीं रही है..

और वो भी अपने आधे रूप में बल्कि उनकी इस रूप में उनकी शक्तिया तो और भी बढ़ जाती है.. पर ये तो सिर्फ एक जगह कड़ी हुयी है..

तभी उसे लगा की इस अघोरी तांत्रिक ने hi उन दोनों को अपने वश में किया होगा तभी तो ये दोनों ऐसे एक जगह कड़ी है..

और तभी अपने शक्तियों का इस्तेमाल अपने बचाव के लिए कर नहीं प् रही है..

उसे तो अब अब उस तांत्रिक पर भी बहुत गुस्सा आने लगा पर फिर भी वो उस तांत्रिक को काम समाज रही थी..

कहते है न की कभी भी अपने विरोधी को काम मत समजना चाहिए.. क्यों की वो कब क्या कर बैठे कुछ कहा नहीं जा सकता...

और हम उसे काम समझकर छोटी छोटी बातो को इग्नोर कर देते है और वो उसी चीजों का फायदा उठकर हमें हरा देता है...

शायद अब रितिका के साथ भी कुछ ऐसा hi होने वाला था...

रितिका अपने गुस्से के चलते उस तांत्रिक के सामने जाकर कड़ी हो जाती hai.Aur जोर से गुस्से में कहती है...

Ritika-Ttaaannnttrrrriikkkkkkkk.................. Kutteeeee....Kaammiinmneee.... तूने हिम्मत कैसे की मेरी फॅमिली पर नजर डालने की...

मेरे बहनो को यहाँ लेन की और उन्हें ऐसे वश में कर के खड़ा करने की..

ऐसा करके तूने अपने मौत को दावत दी hai..Ab तू नहीं बच सकता मेरे हाथो से...

रितिका के गुस्से से उसकी दोनों आँखों से अंगारे निकलने लगे थे...

और ऋतू ने अपनी आँखों से एक बहुत hi तेज रेड लाइट उसके एक शिष्य पर छोड़ दी..



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जिससे वो उसी जगह जलकर खाक हो गया.. कुछ hi देर में उसकी तो रख भी नहीं दिखी..

उस अघोरी के सभी शिष्य ये देखकर तो बहुत hi दर गए थे की ये कोण आ गयी ऐसे गुस्से में और इतना शक्तिशाली...

की इतने गुस्से में उसकी आँखों से तेज अंगारे आ गए और सामने वाला भस्म...

पर वो तांत्रिक तो गुस्सा होने के बजाय और भी खुश हो गया और जोर जोर से हसने लगा....

ये देखकर रितिका को तो समाज hi नहीं आया ये क्या हो गया उसकी धमकी सुनकर येअघोरी पागल तो नहीं हो गया...

या उसे कोई दौरा पड़ा hai.Lekin तभी वो तांत्रिक कहता है...

तांत्रिक- Khhhussh..huva... ये Mandal(Tantrik का नाम) खुश हुवा... मई तो सिर्फ सैतान को खुश करके अपनी नयी शक्तिया पाने वाला था..

पर लगता है सैतान ने खुद मुझे भी खुश रहने के लिए hi तुम्हे भेजा है..

तभी उस तांत्रिक का शिष्य कन्ट्रा कहता है...

Kantra-Matlab गुरुदेव... आप क्या कहना चाहते हो..

तांत्रिक- यही की मई तो सिर्फ उन दोनों की बलि देकर सैतान को खुश करने वाला था...

और उन दो राजकुमारियों की शक्ति अपने अंदर लेकर इस दुनिया में सबसे शक्तिशाली होना चाहता था...

पर यहाँ तो उन दोनों के शक्तियों के साथ अब सैतान ने इस लड़की को भी यहाँ भेज दिया...

अब तो इस तीखी मिर्ची के भी शक्तिया हासिल करके मई तो इस पुरे विश्व में सबसे शक्तिशाली और बलवान बन जाऊंगा...

और अंत में इन तीनो की शक्ति हासिल करके उन दोनों राजकुमारियों की सैतान को बलि देने के बाद...

सैतान मुझे एक ऐसी शक्ति देने वाले है जिसके बाद मुझे कोई नहीं हरा सकता..

और मेरे आगे किसी भी तरह का कोई भी दुश्मन ज्यादा देर खड़ा नहीं रह सकेगा..

और सबसे खास बात मई इस पुरे विश्व का मालिक बन जाऊंगा. और फिर चारो तरफ सैतान का खौफ...

फिर तो मेरी मर्जी के खिलाफ पुरे विश्व में एक पत्ता भी नहीं हिल सकेगा...

इतना कहकर वो अघोरी तांत्रिक और जोर जोर से हसने लगा.. और उसके हसने की अबाज उस पुरे जंगल में गूंजने लगी..

उसकी ये हसने की अबाज भी बहुत hi डरावनी और खतरनाक थी...

पर ये सब सुनकर ऋतू तो और भी गुस्से में आ जाती है और वो उस तांत्रिक से कहती है...

Ritika-Tera ये सपना कभी पूरा नहीं होगा तांत्रिक.. क्यों की ये सपना मई कभी पूरा hi नहीं होने दूंगी...

तू दुसरो को काम समजने की भूल मत कर.. तेरी यही भूल तेरी मौत का कारन बनेगी याद रख..

और तेरी मौत बनकर आयी हु मई.. और तेरे लिए तो सिर्फ मई अकेली हु काफी हु...

इतना कहकर ऋतू अपने हाथ से एक आग का गोला बनती है और उस अघोरी तांत्रिक के सामने फेक देती है..

वो फायर बॉल जैसे जैसे उस तांत्रिक के पास जा रहा था वैसे वैसे वो फायर बॉल बढ़ते hi जा रहा था..

पर उस तांत्रिक ने फायर बॉल को देखकर न हिलने की कोशिश की और नहीं उसके चहरे पर किसी भी प्रकार का दर दिख रहा था...

उसने तो सिर्फ अपना देना हाथ आगे किया और उस आग की गोले की तरफ देखने लगा...

उस फायर बॉल के सामने तो वो बॉल धीरे धीरे काम होता चला गया और उस तांत्रिक के हाथ में जाकर समां गया..

ये देखकर तो रितिका और भी ज्यादा शॉक हो गयी क्यों की ऐसे किसी फायर बॉल को अपने अंदर लेना संभव नहीं था...

और इस तांत्रिक ने ऐसे किया जैसे उसके लिए ये कोई बड़ी बात hi न हो...

पर ये देखकर भी शांत बैठे और अपने कदम पीछे ले वो रितिका कैसे...

इसलिए वो एक के बाद एक फायर बॉल्स तो पानी के होल वो बिजली के साथ तो कभी अबाज करती हुयी तेज बिजली...

और कभी तो एसिड का गोला बनाकर उस तांत्रिक पर फेक रही थी...

और वो तांत्रिक बड़े आराम से उस सभी चीजों को अपने अंदर ले रहा था..

जैसे उसको इन सब चीजों से कुछ भी नहीं हो रहा हो.. और उसे इन सब चीजों की आदत हो.

रितिका को तो कुछ समाज hi नहीं आ रहा tha..Wo सब तरह के गोले उस तांत्रिक पर आजमा रही थी..

पर कुछ भी नहीं हो रहा tha..Aur वही पर रसिका और सोनम तो सिर्फ बूत बनकर वो दृश्य देख प् रही थी.. उनसे भी कुछ नहीं हो प् रहा था...

क्यों की वो होश में होकर भी होश में नहीं थी क्यों की उन दोनों को उस अघोरी तांत्रिक ने वश में किया हुवा था...

इसलिए वो नहीं कुछ बोल प् रही थी और नहीं कुछ कर प् रही थी...

तभी रितिका ने कुछ सोचा तो वो खुद से hi कहने लगी...

Ritika-(Man में) लगता है मई जितना सोच रही थी ये तांत्रिक उससे भी कई ज्यादा पावरफुल है..

इससे तो दूसरे तरीके से hi लड़ना पड़ेगा... और वो भी अपने रियल रूप में...

रितिका ये सोच रही थी तभी वो तांत्रिक ऋतू से कहता है...

तांत्रिक- बहुत हुवा ये चूहे बिल्लियों का खेल मुझे इन सब चीजों के लिए वक़्त नहीं है..

तुम्हे मई बाद में देख लूंगा पहले मई जो काम करना चाहता था वो तो कर लू..

पर तुम तो हार नहीं मानोगी न नादाँ लड़की.. इसलिए मई पहले तुमसे तुम्हारी शक्तिया hi चीन लेता हु...

रितिका- ये इतना आसान नहीं है कमीने तांत्रिक... तेरे इस नापाक इरादे मई कभी पुरे नहीं होने दूंगी..

तभी ऋतू अपने आंखे बंद कर लेती है और अपने असली रूप में आने hi वाली होती है की तभी...

उस अघोरी तांत्रिक ने अपने मंत्र शक्ति का जाप करते हुए किसी भष्म को रितिका के ऊपर फेक दिया...

जिसकी बजह से रितिका जो अपना रूप ले रही थी वो बिच में hi रुक जाती है...

और उसके अंदर जितनी भी शक्तिया थी वो सब उस अघोरी तांत्रिक के अंदर किसी तेज रौशनी की तरह चली जा रही थी...

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और कुछ hi देर में रितिका के अंदर जितनी भी शक्तिया थी सो सब उस तांत्रिक के अंदर चली जाती है...

और उस अघोरी तांत्रिक की बॉडी एक अलग hi रौशनी से मतलब सुनहरी रौशनी से चमकने लगती है...

पर वो रौशनी धीरे धीरे काळा धुएं में बदल कर उसके अंदर पूरी तरह समां जाती है...

और तभी वो अघोरी कुछ यंग दिखाई देने लगता है... जैसे इस शक्ति से उसकी Ayu(Age) बैश चुकी है...

पहले तो वो करीब 95-100 इयर्स का लग रहा था अब वो उससे कुछ काम 75 साल का बूढ़ा लग रहा था...



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इस नए अवतार को देख वो अघोरी तांत्रिक तो बहुत hi खुश होता है...

और इधर रितिका की पूरी तक़द चली जाने की बजह से वो बेजान हो जाती है...

उसके अंदर तो किसी भी तरह की कोई शक्ति कोई हिम्मत hi नहीं बची थी की वो कुछ कर sake.Wo धाद्दमम से धरती पर फॉर जाती है...

वो एक तरह से बेहोश hi हो जाती है अब वो नार्मल गर्ल की तरह hi हो गयी थी...

उसके चहरे पर जितना भी तेज था जितनी भी फ्रेशनेस थी वो सब चली गयी थी...

उसे देखकर ऐसा लग रहा था की उसने 1 महीने से कुछ खाया hi न हो...

पूरी तरह से वो पतली हो गयी थी वो अपने बॉडी से एक बूढी की तरह hi दिख रही थी रितिका...

रास्तो के भिखारी जैसी हालत हो गयी थी उसकी... रितिका के अंदर हिलने तक की भी तक़द नहीं बची थी...

और कुछ देर बाद रसिका और सोनम की भी ऐसी hi हालत होने वाली थी...

जिससे वो दोनों जानकर ब्बि अनजान होकर वही कड़ी रही जहा वो दोनों पहले से hi कड़ी थी...

तभी वो तांत्रिक उसके शिष्य कन्ट्रा से कहता है...

तांत्रिक- इस लड़की को उस लकड़ी से बांध दो.. हमारा कार्य पुरे हो जाने के बाद हम इसको देखंगे..

हमे देर हो रही है जल्दी करो.. तब तक हम अगले कार्य को पूरा करते है...

ये कहकर वो वह से दूसरी और चला जाता है.. जहा पर वो दोनों कड़ी थी...

और उसका शिष्य कन्ट्रा ऋतू को किसी लकड़ी के साथ ऐसे बंद देता है की ऋतू बेहोश होकर भी उसे बहुत दर्द हो रहा था...

और ऋतू को देखकर ऐसा लग रहा था की वो उसी लकड़ी का एक हिस्सा हो ऐसा हाल हो गया था उसका...

न जाने इसका ऐसा हाल देखकर या महसूस करके किसका क्या हाल हो रहा होंगे...

या फिर भविष्य में किसी का क्या हाल होगा ये तो काल hi जाने...

तब तक चलो हम चलते है रद के पास देखते है वो कैसे मनाता है अपनी सबसे लाड़ली बहन दित्य को...

मई दित्य की रूम की तरफ चला गया और सीधे उसके रूम में चला गया तो वो बीएड पर बैठी कुछ पढ़ रही थी...

मई सोचने लगा की कमल है लोग यहाँ पर भी पड़ते है पर क्या पड़ते होंगे यहाँ.. चलो जाने दो उससे hi पूछता हु..

मेरे पैरो की अबाज सुन दित्य मेरी तरफ देखती है और जैसे hi उसने मुझे देखा...

वो सीधे भागकर एते हुए मेरे गले लग गयी एक बचे की तरह और उसने जोर से मुझे पकड़ लिया कुछ इस तरह...



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Ditya-Bhaiya आप आ गए... वैसे आप तो कही बहार गए थे न तो कब ए हो मुझे बताया क्यों नहीं...

खाना खाया क्या आपने.. या माँ बे आपको खिलाया मई यहाँ रहते हुए माँ आपको खिला hi कैसे सकती है...

आप तो कुछ बोल hi नहीं रहे ho..Acha जाने दो...

वैसे क्या किया आपने बहार जाकर.. किस्से मिलने गए थे नानाजी से. क्या कहा उन्होंने...

जरूर इस बार भी कुछ शक्तिया दी होगी आपको... क्या आप इस बार भी बेहोश हुए...

आप तो कुछ बोल hi नहीं रहे हो... ाचा जाने दो..

नानाजी ने क्या कहा.. माँ कहा है... वैसे आप यहाँ कैसे... कुछ तो बोलो न भैया आप तो कुछ बोल hi नहीं रहे हो... ाचा जा......

दित्य तो अपना मुँह बंद hi नहीं कर रही थी.. और ऊपर से मुझे hi कह रही थी की आप तो कुछ बोल hi नहीं रहे हो..

अरे कैसे बोलू वो चुप बैठेगी तभी तो कुछ बोल पाउँगा न...

मैंने बिच में बोलने की कोशिश की पर छोटी के सामने कैसे बोल पता वो तो मुझे कोई मौका hi नहीं दे रही थी...

आखिर में खुद मुझे hi उसका मुँह अपने हाथो से बंद करना पड़ा तन जाकर वो चुप हो गयी और फिर उसे मई कहने लगा...

Mai-Are मेरी माँ... बस कर.. कितना बोलेगी.. मुझे भी तो कुछ बोलने का मौका दे...

मुझे तो तुम बोलने का मौका hi नहीं दे रही हो और ऊपर से कह रही हो तो आप तो कुछ जवाब hi नहीं दे रहे हो..

अरे कैसे Du...Jab तू चुप हो जाएगी तब hi तो कुछ बोलूंगा न...

अब तू क्यों कुछ बोल नहीं रही है. तेरी क्यों बोलती बंद हो गयी कुछ तो बता न अब...

तभी दित्य ने इशारा करके मुझसे कहा की मैंने उसका मुँह बंद किया हुवा है तो वो कहेगी कैसे मुझे और बोलेगी किस मुँह से...

मुझे मेरी गलती का अहसास होते hi मैंने अपना हाथ उसकी मुँह से हटाया और मेरा हाथ साइड में करते hi..

दित्य जोर जोर से हसने लगी और वो भी अपना पेट पकड़कर..

उसके हसने का कारन समझकर मुझे भी हसी आ गयी तो मई भी जोर जोर से हसने लगा...

वैसे दित्य हस्ते हुए बहुत hi प्यारी दिख रही थी.. मई तो अपना हसना भूलकर उसे हस्ते हुए hi देखता रहा...

दित्य हसने के बाद कहती है...

Ditya-Kya भैया आप मुझे कह रहे थे और आप क्या कर रहे थे.. मेरा मुँह बंद करके खुद hi बोलते जा रहे थे...

और ऊपर से मुझे hi दन्त रहे थे की मई आप का बोलने का मौका hi नहीं दे रही हो..

और आप क्या कर रहे थे मेरा hi मुँह बंद करके मुझसे hi कह रहे थे की अब तुम क्यों कुछ बोल नहीं रहे हो...

ये कहकर वो फिर से हसने लगी... इस बार मई उससे थोड़ा हड़बड़ाते हुए कहने लगा...

मई- Hha..to क्या हुवा... तेरा hi बड़ा भाई हु मई कुछ तो आदते आएगी न तेरी मुझमे...

(मैंने जो ाभज गलत कहा वो याद एते hi) अरे.. नहीं नहीं मेरी तुझमे...

ये सुनने के बाद वो तो फिर से हसने लगी... अब तो उसका पेट भी बहुत दुःख रहा था है हसकर...

क्यों की ऐसा मैंने इसीलिए hi कहा था की वो हसे और वो भी खुलकर जी भरकर और हुवा भी बिलकुल वैसा hi....

दित्य- (पेट पकड़ते हुए) Bas....Bhaiya...Bas...Bahut huva...Ab मई बिलकुल नहीं है सकती...

(हसी कण्ट्रोल करते हुए) पहली बार मेरा पेट और मुँह दोनों दुःख रहे है इतना हसाया है आपने मुझे...

तभी मुझे कुछ याद अत है तो मई दित्य से कहता हु...

Mai-Waise दित्य तुम कुछ देर पहले वो कुछ किताबे पढ़ रही थी वो कैसी किताबे थी और वो तुम्हे किसने दी थी...

Ditya-Acha वो... वो तो मुझे नानाजी ने दी थी उन्होंने कहा था की इसमें बहुत सी पुराणी कहानिया है..

इस सृष्टि के बारे में सबकुछ और अलग अलग तरह की शक्तियों के बारे भी बताया था...

और है भैया उन सबमे एक ऐसी किताब है उस किताब को खोलने से पहले आपके मन में कोई सवाल हो तो वो सवाल याद कर लो...

और उसके बाद वो किताब खोल लो आपको आपके सरे सवालो के जवाब उस किताब में मिल जायेंगे और वो भी सब सही सही...

मई तो उन किताबो के बारे में सुनकर बहुत hi खुश हुवा तो मेक दित्य से कहने लगा...

मई- ाचा ये तो बहुत hi अछि बात है. तुम्हारा हो जाने के बाद ये किताबे मुझे दे देना मई भी उन सब किताबो को एक बार पढ़ना चौंगा...

दित्य- क्यों नहीं भैया मैंने तो वो किताबे बहुत बार पड़ी है आप जब भी कहो मई आपको दे दूंगी...

इतना कहकर वो शांत हो गयी और मई भी. पर फिर उसे क्या हुवा क्या मालूम...

मतलब यहाँ आने के बाद जो भी हुवा था उसे वो याद आ गया होगा इसलिए वो फिर से मेरी तरफ देखके हसने लगी...

चाहे पेट में दर्द हो या मुँह में पर कुछ देर शांत रहने के बाद वो फिर से मुझे चिढ़ाते हुए अपनी हसी hi कण्ट्रोल नहीं कर प् रही थी...

वैसे मैंने जान बूझकर विषय चेंज किया था की वो भूल जाये.. पर आखिर में वो भी मेरी hi बहन थी वो भी छोटी...

लेकिन बाद में मई भी उसका साथ देने लगा हसी मजाक में ..

तभी अचानक हस्ते हुए मेरे दिल में एक बहुत तेज दर्द शुरू हुवा...

वो दर्द कुछ तेज हुवा था उसी की बजह से मई सीधा निचे गिर गया...

(ये वही वक़्त था जब रितिका की पूरी तक़द उस अघोरी तांत्रिक ने अपने अंदर खींच ली थी...

और रितिका अधमरी हालत में निचे धरती पर गिर गयी थी...)

मेरा ये दर्द ऐसा था की मेरे अंदर से कोई मेरी जान को खींच रहा हो.. मेरे दिल को बहार निकलना चाहता हो...

और मई कुछ कर नहीं प् रहा हु.. ये ऐसा कैसे हुवा मुझे भी नहीं पता चला...

और उस दर्द के चलते मई क्या करू कुछ समाज hi नहीं आ रहा था..

मुझे दर्द में देखकर पहले तो दित्य को लगा की मई नौटंकी कर रहा हु...

पर जब उसे लगा की ये सब असल में है तब वो अपनी हसी रोकते हुए मेरे पास आ गयी..

मुझे दर्द में देख उसके भी आँखों में आंसू आ गए...

दित्य- (रट हुए) Bhaiya....Kya हुवा आपको... ये आपको अचानक से क्या हो रहा है...

Bhaiya.....Bhaiya....kuch तो बोलो न Bhaiya...Rudra भैया....

ऐसा कहकर वो रोने लगी... यहाँ पर दर्द के मरे मुझे खुद समाज नहीं आ रहा था की ये सब कैसे हो रहा है...

तो उस नादाँ बची को मई कैसे बताता और क्या बताता...

तभी दित्य ने रट हुए मुझे अपने साइन से लगाया तो उसकी कुछ बुँदे मेरे चहरे पर गिरी...

तब अचानक से मुझे कुछ होश आया और मेरे जो दर्द था वो अचानक से कही गायब हो गया...

मई पहले की तरह ठीक हो गया... पर उस दर्द की फीलिंग अभी भी मुझे हो रही थी...

न जाने कैसा दर्द था wo..Par बहुत hi दर्दनाक tha..p

लेकिन दित्य के आंसुओ की बजह से hi वो दर्द भी कही गायब हो गया और मई ठीक हो गया..

मैंने उसकी तरफ देखा तो दित्य रो रही है मुझे गले लगाकर...

और तब मुझे याद आया की मई यहाँ पर क्यों आया हु और मुझे दित्य से क्या कहना था...

ये याद एते hi मैंने खुद को दित्य की बहो से अलग किया और उसे प्यार से कहने लगा..................................
 
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