Teri tadap jaldi khatam nahi hogi - Page 3 - SexBaba
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Teri tadap jaldi khatam nahi hogi

अपडेट __ 19

र्जुन चादर के अंदर दर्द से तड़प रहा होता है मगर अब चीख नहीं रहा होता है अर्जुन अपना दर्द किसी तरह से सहने की कोशिश कर रहा होता ताकि सामने वाली औरत अभी वह से चली जाये

अर्जुन भगवन के लिए मुझे देखने दे क्या हुआ है तुझे मैं तुझे दर्द मैं नहीं देख सकती हुईं .. प्लीज अर्जुन बीटा मुझे देखने दो .. औरत कहती है

मैं तुम्हारा भाई नहीं हुईं जो तुम्हारे सामने इस तरह आ जाऊंगा तुमेह फर्क पड़े या न पड़े मगर मुझे फर्क पड़ता है मेरी ममी माँ ने मुझे इतना तो सीखा दिया है किसी भी औरत के सामने नंगा नहीं जाना चाहिए तुम प्लीज अभी रूम से चली जाओ ..... अर्जुन चादर के अंदर से hi बोलता है

अर्जुन की बात राखी देवी को एक तीर की तरह लगती है आवर उसी वक़्त राखी देवी की आँखें नाम हो जाती है ......

कुछ वक़्त पहले तो राखी देवी को इतनी ख़ुशी हुई थी के राखी देवी भूल hi चुकी थी के वह नंगी hi अर्जुन के पास आ गयी है ये बिना सोचे की अर्जुन उनेह नंगी देख कर क्या सोचेंगे मगर राखी देवी को अभी बस अर्जुन के माँ पुकारने से hi राखी देवी की दिल ख़ुशी से मचने लगी थी

मगर फिर अर्जुन की बात सुन राखी देवी फिर अंदर से टूट गयी आवर अपने मुंह पे हाँथ रख कर एक कदम पीछे की तरफ हैट गयी

राखी देवी की आँखों से आंसू रुक नहीं रही होती है लेकिन फिर जल्द hi राखी देवी अपनी आंसू पोछ लेती है आवर राखी देवी एक दुप्पट्टा अपनी साइन पर रख लेती है मगर दुप्पटा रखने के बाद भी राखी देवी की भींगी हुई सीना पर तानी हुई बड़ी बड़ी चुकी की निप्पल दिख रही होती है मगर राखी देवी को अभी बस अर्जुन की फिकर हो रही होती इस लिए फिर अर्जुन के बीएड के पास चली जाती है आवर अर्जुन के चादर खींचने लगती है

अर्जुन तू मुझसे गुस्सा है तो गुस्सा रह मगर अभी मुझे देखने दे तुझे क्या हुआ है ..... राखी देवी चादर को खींचते हुआ कहती है

अर्जुन को बहुत दर्द हो रहा होता है क्यू के अर्जुन का लैंड की चमड़ी डाब गयी होती है आवर ऊपर से अर्जुन को पिशाब भी लगी हुई होती है अर्जुन अब क्या करे समझ मैं नहीं आ रहा होता है

वही राखी देवी भी अर्जुन की चादर खींचने लग जाती है अर्जुन को कुछ नहीं समझ मैं आता है तो अर्जुन झट से उठ जाता है आवर राखी देवी की तरफ बिना देखे hi चीखते हुआ बाथरूम की तरफ चलने लगता है अपने लैंड पर एक हाँथ रखे हुआ ताकि राखी देवी की दिखे न

अर्जुन को जाते देख राखी देवी फिर अर्जुन के पीछे जाती है मगर अर्जुन बाथरूम की गेट बंद कर देता है राखी देवी को देखते हुआ

राखी देवी बाथरूम की गेट के पास कड़ी होकर रोने लग जाती है

तभी रूम मैं आँचल आवर अंजलि आती है जो राखी देवी को रट हुआ पति है

दीदी क्या हुआ आप रो क्यू रही है आवर मुझे आएसा लगा की अर्जुन बीटा भी दर्द मैं चीखा था ..... अंचल कहती है

राखी देवी को नंगी हालत मैं देख कर अंचल आवर अंजलि को बहुत जयादा हैरानी भी होती है मगर आँचल प्यार से राखी से पूछती है

वही अंजलि जल्दी से साड़ी उठा कर अपनी माँ के ऊपर दाल देती है आवर राखी देवी को पकड़ लेती है

मगर राखी देवी सिर्फ अभी भी बाथरूम की तरफ देख कर रो रही होती है

माँ बोलिये न क्या हुआ आप क्यू रो रही है क्या आप बाथरूम मैं गिर गयी थी आप को छोट तो नहीं लगी न प्लीज माँ आप कुछ तो बोलिये ...... अपनी माँ को रट हुआ देख कर अंजलि भी रोनी जैसी सवार मैं पूछती है

आँचल वह अर्जुन दर्द मैं चीखा अंजलि अर्जुन को दर्द हो रहा होगा वह बाथरूम मैं है मेरे बेटे को दर्द हो रहा है ..... राखी देवी दर्द मैं तड़पती हुई बोलती है

राखी देवी को आज अर्जुन पर बहुत प्यार आ रहा होता है राखी देवी से आज अर्जुन का दर्द नहीं देखि जा रही होती है. .....

ये जानते हुआ भी के अर्जुन को दर्द तो हो रहा है मगर कोई बड़ी बात नहीं है वह जल्द hi ठीक हो जायेगा

मगर राखी देवी को आज अपने बेटे का दर्द नहीं देखा जा रहा था ... आवर उसकी वजह था कई सैलून के बाद अर्जुन के मुंह से खुद के लिए माँ पुकारना जो राखी देवी की मंमता आज उमड़ कर निकल रही थी

राखी देवी ये भी भूल गई थी के अभी कुछ देर पहले hi अर्जुन कितना कुछ बोल गया है उनेह मगर राखी देवी को बस अर्जुन के दर्द का फिकर हो रहा था

राखी देवी की बात सुन कर आँचल जल्दी से बाथरूम की गेट पीटने लग जाती है

अर्जुन अर्जुन अर्जुन बीटा प्लीज गेट खोल क्या हुआ तुझे प्लीज बीटा मुझे देखने दे बीटा गेट खोल बीटा .... आँचल भी थोड़ी दर जाती है अर्जुन को क्या हो गया है जो आँचल रोटी हुई गेट पीटने लग जाती है

वही बाथरूम के अंदर जाते hi अर्जुन ने अपने लैंड की चमड़ी चैन से निकल दिया था मगर निकलते वक़्त अर्जुन का लैंड थोड़ा चील गया था जो अर्जुन के लैंड से थोड़ा बहुत खून भी निकल रहा होता है अर्जुन को थोड़ा भी दर्द हो रहा था मगर अर्जुन ठीक था बस दर्द काम होने का वेट कर रहा था तभी अर्जुन को अपनी ममी माँ की रट हुआ गेट पीटने की आवाज़ आने लगाती है जो अर्जुन थोड़ा सहम जाता है आवर न चाहते हुआ भी लैंड पेंट मैं दाल कर गेट को खोल देता है

गेट खुलते थे आँचल झट से अर्जुन को पकड़ लेती है

अर्जुन क्या हुआ तुझे दीदी बोल रही है तू दर्द मैं चीख रहा था कहा पर दर्द हो रहा है दिखा मुझे बीटा कहा पर दर्द हो रहा है ..... आँचल कहती है

अपनी ममी माँ की बात सुन कर अर्जुन थोड़ा सहम जाता है ये सोच कर के ममी माँ को अब कैसे दिखाऊं

माँ मुझे कुछ भी नहीं हुआ है वह चैन का जीप फस्स गया था जो मैंने निकल दिया है अब आप चुप हो जाइये ....... अर्जुन अपनी माँ राखी देवी को देखते हुआ कहता है

सच कह रहा न दर्द तो नहीं हो रहा देख दीदी कितनी रो रही है ... आँचल कहती है

हां माँ मैं सच कह रहा हुईं मुझे दर्द नहीं हो रहा है ोुए आप उनके रोने पे मत जाइये वह बस नाटक कर रही है रोने की उनेह क्या फर्क पड़ेगा मैं दर्द मैं राहु ये नहीं मैं ज़िंदा राहु या मर जाऊं ....... अर्जुन गुस्से मैं राखी देवी की तरफ देखते हुआ कहता है

Aaaaaaaaaaaaaaanchal

मममममी

राखी देवी आवर अंजलि दोनों एक साथ hi चीख पड़ती है

अभी अर्जुन बोल hi रहा होता है के तभी अर्जुन के गाल पर एक ज़ोर की तप्पड़ पड़ती है जो तप्पड़ की आवाज़ पुरे रूम मैं गूंज जाती है

अर्जुन के तप्पड़ कहते hi दोनों माँ बेटी एक साथ आँचल को पुकारती है

वही आँचल भी बहुत गुस्से मैं होती है आवर उसी गुस्से के साथ अर्जुन को देख रही होती है जो अर्जुन बस अपनी ममी माँ को देख रहा होता है लेकिन कुछ कहता नहीं है

क्या बोल रहा है फिर कभी मरने की बात की तो आवर तप्पड़ मरूंगी ........ जा अभी तू यह से ....... आँचल थोड़ा गुस्से मैं कहती है

अर्जुन अपनी ममी माँ को एक नज़र देखता है जो आँचल की आँखें नाम हो चुकी होती है

फिर अर्जुन अपनी माँ राखी देवी को एक नज़र बहुत गुस्से से देखता है आवर फिर रूम से निकल जाता है

वही अर्जुन की बात सुन कर राखी देवी एक वक़्त के लिए संत हो जाती है राखी देवी के आँखों से सिर्फ आंसू hi निकल रहे होते है मगर राखी देवी की दिल मैं एक दर्द सी उठ जाती है जो राखी देवी की पूरा जिस्म hi कैंप सी जाती है राखी देवी को अर्जुन की बात सीधे दिल पर लगती है जो राखी देवी की दिल एक वक़्त के लिए दर्द करने लगती है

राखी देवी भींगी आँखों से बस अर्जुन को जाते हुआ देख रही होती है मगर अर्जुन एक बार देख कर रूम से निकल गया होता है

वही आँचल आवर अंजलि को भी अर्जुन की बात अच्छी नहीं लगी होती है

मगर आँचल को अभी अफ़सोस भी हो रही होती है के कैसे अर्जुन पे उनका हाँथ उठ गया जो बचपन से अभी तक नहीं उठी थी ये सोच कर आँचल की आँखें भींग जाती है

थोड़ी देर उस रूम मैं बिलकुल शांति सी छ जाती है राखी देवी तो बस निचे सर किये हुआ बस रोटी जा रही होती है

दीदी प्लीज चुप हो जाइये वह सायद दर्द की वजह से बोल गया हो वह भी आप से प्यार करता है बस दिखाना नहीं चाहता है प्लीज दीदी चुप हो जाइये ...... आँचल राखी देवी के पास आकर कहती है

माँ .. ममी सच बोल रही है अर्जुन भाई आप को बहुत प्यार करता है बस अभी दुखी है के आप ने उसे सहर भेज दिया था माँ आप चुप हो जाइये ..... आँचल भी रोनी सी होकर कहती है

राखी देवी कुछ बोलती नहीं है आवर उठ कर अपनी रूम की तरफ चल देती है

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गीता सोल्लगे के गेट पर कड़ी होकर अपने गाँव की लड़कियों की इंतज़ार कर रही होती है ताकि साथ घर जा सके गीता अभी फ़ोन से कॉल लगा रही होती है

दीदी अपना दुप्पट्टे को ऊपर कर लीजिये ज़मीन मैं गन्दा हो रहा है

गीता कॉल लगा रही होती है की उसे एक लड़की की आवाज़ सुनाई देती है तो देखती है सच मैं उसका दुप्पटा ज़मान पर गन्दा हो रहा है तो गीता अपना दुप्पट्टे को ऊपर कर लेती है

थैंक्स बेबी डॉल ....... गीता उस लड़की से कहती है

गीता की बात सुन वह लड़की भी खुश हो जाती है

दीदी मेरा नाम बेबी डॉल नहीं आस्था है

आवर ये मेरी बेस्टफ्रेंड नीता है आवर आप का नाम क्या है ........ आस्था पास आकर कहती है

ओह्ह्ह तो इतनी प्यारी बेबी डॉल का नाम आस्था है बहुत प्यारी नाम है

आवर तुम्हारी बेस्टफ्रेंड की भी प्यारी नाम है

तुम बिलकुल बेबी डॉल की तरह hi लग रही हो

मेरी गुड़िया भी तुम्हारी तरह hi बेबी डॉल लगती है

मेरा नाम गीता है मैंने पहले कभी तुमेह नहीं देखि सोल्लगे मैं नई एडमिशन है क्या ........ गीता कहती है

आप का भी नाम बहुत अच्छा है हम दोनों इस सोल्लगे मैं नई है आवर हम दोनों भी इसी गाँव के रहने वाली है बस कुछ दुरी पर हम्हरा घर है ...... आस्था मुस्कुराती हुई कहती है

ओह अच्छा फिर ठीक है अच्छे से पढाई करना कोई परेशानी हो तो मुझसे पूछ सकती हो पढाई के लिए ..... गीता कहती है

ठीक है दीदी आप किसका इंतज़ार कर रही है यह ..... आस्था फिर बोलती है

मैं अपनी गाँव की लड़कियों की इंतज़ार कर रही हुईं उनके साथ घर जाने के लिए .... गीता कहती है

ठीक है दीदी फिर कल मिलते है बोलती हुई आस्था वह से चली जाती है

बहुत प्यारी लड़की है .... गीता मन मैं सोचती है फिर जब गीता की गाँव की लड़कियां आती है तो साथ मैं गीता अपने घर की तरफ चल पड़ती है

रस्ते मैं अर्जुन के बारे मैं बस तारीफ hi कर रही होती है सभी लड़कियां जो गीता मन hi मन मुस्कुरा रही होती है अपने छोटे भाई की तारीफ सुन कर

यह घर पर राखी देवी अपनी रूम का गेट बंद कर दी थी

वही आँचल आवर अंजलि हॉल मैं मायूसी से बैठी हुई थी आँचल को बहुत अफ़सोस आवर दुःख हो रहा था अर्जुन को तप्पड़ मरने पर

आँचल तो कभी सोच भी नहीं सकती थी अर्जुन को तप्पड़ मारनी की मगर जब अर्जुन ने मरने को बात की तो आँचल को बड़ी गुस्सा आया आवर आँचल का हाँथ उठ गया था

अंजलि बेटी ज़रा दर्द वाला वह मरहम लेकर आ अर्जुन को दर्द हो रहा होगा थोड़ा लगा देती हुईं उसे आराम मिलेगा फिर ..... आँचल कहती है

वही अंजलि उठ कर अपनी ममी की रूम के तरफ चली जाती है आवर आँचल अर्जुन के रूम की तरफ चली जाती है


जो अभी अर्जुन अपनी अंजलि दीदी की रूम थोड़ा मायूसी से बैठा हुआ होता है

आँचल भी अर्जुन के पास मैं बैठ जाती है

मेरे बीटा को अभी अपनी माँ पर गुस्सा आया रहा है न चलो तुम भी अपनी माँ को तप्पड़ मार लो ....... आँचल पास बैठ कर बोलती है आवर अर्जुन का हाँथ उठा कर अपनी गाल पर मरवाने लगती है

माँ क्या कर रही है मैं क्यू आप पर गुस्सा होने लगा आप मुझे जब चाहे मार सकती है आप मेरी माँ है समझी ....... अर्जुन अपना हाँथ निचे करते हुआ कहता है

क्या मेरा बीटा सच बोल रहा है अपनी माँ से गुस्सा नहीं है मैं नहीं मानती तुम झूट बोल रहे हो .... आँचल झूठी नाराजगी से कहती है

माँ मैं आप से झूट क्यू बोलने लगा मैं सच मैं आप से गुस्सा नहीं हुईं ........ अर्जुन आँचल को देखते हुआ कहता है

ममी मुझे मिल नहीं रही है कहा पे राखी है आप ने वह मैंने हर जगह देख लिया ...... अंजलि रूम मैं आती हुई बोलती है

अगर मेरा बीटा सच मैं अपनी माँ से गुस्सा नहीं है तो जो मैं बोलती हुईं वह करदे तब मैं मानूंगी .... आँचल अंजलि को देखती हुई बोलती है

क्या करना है आप को बोलिये मैं करूँगा मगर मैं उस औरत से बात नहीं करूँगा तो वह मत बोलियेगा ........ अर्जुन कहता है

फिर ठीक है मेरा प्यारा बीटा अपनी माँ से कितना प्यार करता है .... आँचल मुस्कुराती हुई कहती है

अर्जुन को कुछ भी समझ नहीं अत है की उसकी ममी माँ क्या करने को बोल रही है जो अर्जुन भी हां बोल देता है

आँचल मुस्कुरा कर अर्जुन को किश करती है आवर अंजलि के साथ रूम से निकल जाती है आवर अपनी रूम मैं जाकर वह मरहम ले लेती है आवर फिर रूम से निकलते हुआ अंजलि को पीछे आने से मन कर देती है

आँचल जैसे hi अर्जुन के रूम मैं जाती है गेट बंद कर देती है

माँ गेट क्यू बंद कर रही है आवर आप के हाँथ मैं क्या है ...... गेट बंद करते देख अर्जुन कहता है

देखा मुझे दर्द कहा हो रहा है मैंने देखि तू रूम से निकलते हुआ थोड़ा लंगड़ा रहा था दे वह मरहम लगा देती हुईं ....... आँचल कहती है

अपनी ममी माँ की बात सुन के अर्जुन की आँखें बड़ी हो जाती है अर्जुन को शर्म भी आने लगता है

अर्जुन थोड़ा सहम भी जाता है माँ क्या बोल रही है क्या माँ मेरे लैंड पर मरहम लगाने के लिए बोल रही है ...

ये जानते हुआ भी के मेरे लैंड पर चील गया है ......... अर्जुन मन सोचता है आवर अपने चादर आवर ऊपर करने लगता है

अरे अरे क्या कर रहा है अभी बोलै न अपनी माँ की बात तू मानेगा फिर चादर ऊपर क्यू कर रहा है दे मैं मरहम को लगा दूँ जल्दी है

अर्जुन को चादर ऊपर करते हुआ देख कर आँचल कहती है

अब आँचल को क्या पता था अर्जुन को दर्द कहा पर हो रहा है आवर अर्जुन चादर को आवर ऊपर क्यू कर रहा है

आँचल भी अर्जुन की चादर को हटाने लग जाती है

माँ वह मरहम दीजिये मैं लगा लूंगा आप जाइये

maaaaaaaaaaaaaa

अभी अर्जुन बोल hi रहा होता है की आँचल चादर को ज़ोर से खिंच देती है जो अर्जुन चीख पड़ता है शरमाते हुआ

वही आँचल की आँखे बड़ी हो जाती है आवर आँचल की दिल ज़ोर ज़ोर से मचलने लगती है आँचल की नज़र सिर्फ एक जगह पर टिक जाती है

जो आँचल की गाला भी सूखने लग जाती है आँचल की हाँथ से मरहम भी निचे गिर जाता है

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अपडेट ... 20

आँचल बस एक तक अर्जुन के सोये हुआ लैंड को देखती रहती है जो सो अर्जुन का लैंड सोया हुआ भी 5 इंच का लग रहा होता है जो आँचल की नज़र हैट नहीं रही होती है अर्जुन के लैंड से

आँचल अभी देख रही होती है के तभी आँचल घूम कर अपनी शैशे रोकने की कोशिश करने लगती है

क्यू की अर्जुन फिर झट से चादर खिंच कर अपने ऊपर दाल लेता है जो आँचल घूम जाती है

थोड़ी वक़्त के बाद आँचल फिर से अर्जुन की तरफ घूम hi घूम जाती है जो अर्जुन दूसरी तरफ देखते हुआ शर्मा रहा होता जो आँचल मन hi मन मुस्कुरा देती है

आएसा नहीं था के आँचल को अर्जुन का लैंड देख के अच्छा लगा था

आँचल को भी शर्म आ रही होती है मगर अर्जुन को अभी शरमाते हुआ देख आँचल अपनी चहरे पर मुस्कान ला देती है

ताकि अर्जुन शर्मिंदा न हो जो अर्जुन अभी भी शर्मा के मरे दूसरी तरफ देख रहा होता है

अरे मेरा बीटा इतना क्यू शर्मा रहा है मैं कोई बहार की रहने वाली थोड़ी हुईं मैं तो तुम्हारी माँ हुईं ..... आवर माँ बेटे मैं इतना तो चलता है

तू सायद भूल गया है वह बचपन की बाटे जो मैं हर रोज़ तुझे अपने हांथों से नहलाती थी आवर तू खुद ज़िद्द करता रहता थे मेरे साथ नहाने के लिए जो मैं भी नहाते हुआ तुझे भी साथ लेकर नहाती थी आवर उस वक़्त भी तू बिलकुल नंगा hi रहता था आवर मैं तेरे hi नुन्नी पे साबुन लगा कर धोती थी .... आँचल हस्ती हुई कहती है

आअह्ह्ह्ह मगर अब मेरे बीटा का ये नुन्नी नहीं लैंड बन चूका है जो मेरी जैसी औरत की चीखें निकल सकता है

हे राम ये मैं क्या सोचने लगी छी छियई ..... आँचल मन मैं कहती है

माँ वह बचपन की बाते थी लेकिन अब मैं बड़ा हो गया हुईं आप वह मरहम मुझे दीजिये मैं खुद लगा लूंगा ..... अर्जुन अभी भी अपनी ममी माँ से नज़ारे चुराते हुआ कहता है

चल अब ज़िद्द मत कर खुद से लगाने मैं तुझे परेशानी होगी दे मैं लगा देती हुईं ..... आँचल थोड़ा गुस्से मैं बोलती है आवर अर्जुन का चादर फिर से हटा देती है

ओह्ह मेरा बच्चा तुझे दर्द तो नहीं हो रहा न आँचल बोलती हुई अर्जुन के लैंड पकड़ लेती है आवर अर्जुन के लैंड पर फुख मरने लगती है

अर्जुन के लैंड को देख कर आँचल थोड़ा सा घबड़ा भी जाती है क्यू के अर्जुन का लैंड पे खून लगा हुआ होता है

वही अपनी ममी की ांचनाक लैंड पकड़ने से अर्जुन थोड़ा सहम जाता है आवर उसी समय अपनी आँखें बंद कर लेता है

आँचल अर्जुन के लैंड के पास झुक कर अर्जुन के लैंड पर फुख मार रही होती है के आँचल की होंठ अर्जुन के लैंड पर टाच हो जाती है

ssssssssssssssssssssssssssss

आआआआहहहहह माआआआआ

तभी दोनों ममी भांजे एक साथ मस्ती मैं सिहर उठते है

जैसे hi आँचल की गुलाब की तरह होंठ अर्जुन के लैंड पे टाच होती है अर्जुन मचल सा जाता है आवर उसी वक़्त अर्जुन का एक हाँथ आँचल की दिख रही नरम कमर पर चली जाती है जो आँचल सिसक उठती है

वही अर्जुन भी अपनी ममी माँ के होंठ अपने लैंड पर टाच होने से तड़प जाता है जो चीख भी पड़ता है दर्द आवर ममी के बारे मैं सोच कर

थोड़ी देर दोनों मैं कोई कुछ नहीं बोलता है अर्जुन तो दूसरी तरफ अभी भी देख रहा होता है मगर आँचल अभी भी उसी तरह झुकी हुई होती है आवर आँचल की मुंह के पास अर्जुन का लैंड होता है जो अब आँचल के होंठ का चुम्मा पाकर उठाने लगा होता है

अर्जुन के लैंड को उठते हुआ देख कर आँचल की आँखें बड़ी होने लगाती है

हे भगवन ये क्या कर दिया मैंने मेरा अर्जुन क्या सोच रहा होगा मेरे बारे मैं

ये अच्छा नहीं हुआ कही मेरे अर्जुन को बुरा लग गया तो दीदी की तरह मुझसे भी नाराज़ हो जायेगा जो मैं बर्दाश्त नहीं कर सकती अर्जुन मुझसे रूठा तो मैं तो मर hi जाउंगी हे भगवन क्या हो गया ...... आँचल मन मैं सोचती है

अर्जुन के रूठने के बारे मैं सोच कर hi आँचल की आंसू निकलने लगती है आवर आँचल की आँखों से निकल जाती है आवर एक दो बून्द आंसू अर्जुन के लैंड पर गिर जाती है

अपने लैंड पर पानी का अहसास होते hi अर्जुन का धयान अपनी ममी माँ पे जाती है जो उसकी ममी माँ सिसक रही होती है अपनी ममी माँ की सिसकना सुन कर अर्जुन को थोड़ा अजीब लगता है आवर अर्जुन फिर खुद hi दुखी होने लगता है सोच कर के उसके कमर पकड़ने से उसकी ममी माँ को बुरा लगा है

माँ वह मैंने जान भुज कर नहीं किया वह अचानक hi मेरा हाँथ वह चला गया प्लीज मुझे मांफ कर दीजिये ाएसि गलती फिर नहीं करूँगा ....... अर्जुन हाँथ को जोड़ते हुआ कहता है

वही आँचल जब अर्जुन की बात सुनती है तो आँचल की आंसू रुक सी जाती है आवर अपनी सर उठा कर आँचल अर्जुन को देखने लग जाती है

वही अर्जुन अपनी ममी माँ की तरह अपना हाँथ जोड़े हुआ मायूसी से देख रहा होता है

अर्जुन के मायूस चहरे को देख आँचल को इतना प्यार आता है की आँचल वह कर जाती है जिस बारे मैं सोच कर अभी आँचल दुखी हो रही होती है

अर्जुन के मायुश चहरे को देख कर आँचल अभी खुद को रोक नहीं पति है आवर किसी शेरनी की तरह अर्जुन के होंठ पर टूट पड़ती है

वही अर्जुन की आँखें बड़ी आवर दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लग जाता है आवर लैंड तो फुल टाइट होकर फुफकार मरने लग जाता है आवर अर्जुन को समझ hi नहीं आता है अभी क्या हो रहा है उसके साथ आवर उसकी ममी माँ उसके साथ आएसा कैसे कर सकती है मगर अर्जुन अभी बोल नहीं सकता था क्यू के अभी अर्जुन का मुंह बंद पड़ा था आवर आँचल बड़ी hi मस्ती मैं अर्जुन का होंठ चूस रही होती है

अर्जुन कुछ देर तो तक बस ये सोचता रहा उसकी ममी माँ क्या कर रही है मगर ममी माँ के किश करने पर अर्जुन के जिस्म मैं भी हलचल सा होने लगा आवर अपनी ममी माँ की जिस्म की गर्मी से अर्जुन का लैंड पूरी तरह खड़ा होकर फुफकार मरने लगा था अर्जुन से आवर रहा नहीं गया आवर अर्जुन भी अपनी ममी माँ के चिकनी कमर पर दोनों हाँथ रख दिया

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अर्जुन के हाँथ रखने पर आँचल सिसक पड़ी मगर जल्द hi फिर अर्जुन को किश करने लगी जो इस बार अर्जुन भी अपनी ममी माँ के साथ किश कर रहा होता है

आँचल तो पहले भी कई बार राखी देवी आवर अपने पति के साथ किश कर चुकी थी मगर अर्जुन आज पहली बार किश कर रहा होता है वह भी अपने दिल के सबसे करीब रहने वाली ममी माँ के साथ जो अर्जुन को कुछ hi वक़्त मैं मज़ा आने लगता है अपनी ममी माँ की नरम मुलायम होंठ को चूमते हुआ ये कह सकते है अपनी ममी माँ के किश करने मैं साथ देने मैं

क्यू के अर्जुन का ये पहला किश कर रहा था जो अर्जुन बस अपनी ममी का साथ दे रहा होता है आवर आँचल अर्जुन के होंठ को चुस्ती hi जा रही होती है

धीरे धीरे अर्जुन का हाँथ अब कमर से होते हुआ ऊपर की तरह जाने लगता है अर्जुन का हाँथ अब आँचल की चुकी पर पड़ता hi है के तभी एक आवाज़ सुन कर आँचल जल्दी से अर्जुन से अलग हो जाती है आवर बीएड से उतर कर साड़ी को ठीक करने लगती है जो थोड़ा खुल चूका होता है वही अर्जुन फिर से चादर अपने ऊपर दाल लेता है

थोड़ी देर के लिए आँचल आवर अर्जुन दर भी जाते है आवर गेट की तरह देखते है जो उधर से hi आवाज़ आई होती है

अर्जुन बीटा मैं देखती हुईं कौन है तू मरहम लगा ले ....... आँचल नज़ारे चुराती हुई कहती है आवर गेट की तरफ चली जाती है वही अर्जुन बस हां मैं सर हिला देता है

आँचल घबराई हुई धीरे से गेट खोलती है मगर बहार कोई भी नहीं होता है

गेट के बहार किसी के न होने से आँचल आवर भी घबरा सी जाती है क्यू के गेट के बहार से hi आवाज़ आई हुई होती है जो आँचल को दर लगने लगता है गेट के बहार कौन थी क्यू की अभी घर मैं बस राखी देवी आवर अंजलि hi थी आँचल फिर अर्जुन के रूम मैं नहीं जाती है सीधे अपनी रूम मैं जाने लगती है के तभी आँचल को गीता किचेन की तरफ जाती हुई दिखाई देती है गीता को देख कर आँचल रूम मैं चली जाती है

आँचल रूम मैं जाते hi पहले रूम बंद करती है फिर बाथरूम मैं घुस जाती है आँचल अपनी कपडे उतर रही होती है आवर सोच रही होती है गेट पर कौन हो सकती है

आँचल ने गीता को देखि तो थी मगर आँचल को यकीन नहीं हो रहा था वह गीता hi होगी क्यू की गीता अगर होती तो वह आराम से किचेन की तरफ नहीं जाती

क्यू के जब आँचल की नज़र गीता पर पड़ी थी तो गीता बिलकुल आराम से चलते हुआ किचेन की तरफ जाती हुई दिखाई दी थी जो आँचल की दिल मान नहीं रही होती है वह गीता होगी

वही रूम मैं अर्जुन थोड़ा परेशां होकर कुछ देर हुई घटना के बारे मैं सोच रहा होता है आवर अपनी ममी माँ के किश के बारे मैं सोचने लगता है एक वक़्त के लिए अर्जुन को एक अजीब से नासा होता है अपनी ममी माँ के होंठों के बारे मैं सोचते हुआ अर्जुन अपनी आँखें बंद कर लेता है

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अर्जुन के हवेली के कुछ दूर एक घर के सामने एक बड़ी सी गाड़ी आकर रूकती है

वह घर नया बना हुआ होता है जो देखने मैं बहुत खूबसूरत लग रहा होता है गाड़ी की आवाज़ सुन कर उस घर से 3 से 4 औरत बहार आती है वह 4 औरते अपने आप मैं खूबसूरत होती है वह 4 औरते सायद नौकरानी होती है आवर वह इसी गाँव की होती है वह 4 गाड़ी के पास जाती है आवर गेट खोलती है

वही गेट खुलते hi पहले एक लड़का बहार आता है वह लड़का देखने मैं जयादा अच्छा तो नहीं होता है मगर वह लड़का हैघट मैं ठीक होता है आवर वह लड़का कुरता पजामा मैं होता है आवर माथे पर तिलक लगाया हुआ होता है अभी वह लड़का देखने मैं बिलकुल एक अच्छा लड़का होता है बड़े संस्कार वाला लड़का मगर जब वह लड़का गाड़ी से निकल रहा होता है तो उसकी नज़र उन 4 औरते की जिस्म पर होती है आवर वह लड़का बहुत hi हवस की नज़र से औरतों को देख रहा होता है मगर गाड़ी से उतर कर सीधे गाड़ी के दूसरी गेट की तरफ चला जाता है आवर गेट खोलता है

लड़का जब गेट खोलता है तो एक औरत दिखाई देती है जो गाड़ी मैं बैठी हुई होती है आवर वह एक चश्मा लगाई हुई होती है देखने मैं बहुत खूबसूरत होती है उस औरत की जिस्म भी भरी हुई होती है देखने मैं 32 सल्ल की लग रही होती वह औरत गाड़ी से निकलती है तभी औरत की नज़र उन 4 औरतों पर पड़ती है

ओह्ह्ह आदि बीटा यह भी सिर्फ औरत को लगा रखा है कुछ काम के लिए आदमी की भी ज़रूरत पड़ती है बीटा मेरी बात तू समझता क्यू नहीं है ..... वह औरत बड़े hi प्यार से अपने बेटे से कहती है

माँ आप चिंता न करे ये औरत भी आदमी वाला काम कर सकती है आप जानती है न नारी चाहे तो कुछ भी कर सकती है देखने ये हर काम कर देंगी ...... लड़का औरत से कहता है

ओह्ह तुझे समझाना hi बेकार है पता नहीं क्यू तू किसी आदमी को घर पर नहीं रखता है ...... औरत बोलती हुई घर मैं चली जाती है

वही चरों औरते एक एक बैग उठा कर घर मैं चली जाती है

तो आदि क्या इरादा है मेरे साथ चलोगे या अपनी माँ के साथ hi रहने वाले हो कही यह कोई नै ितम तो नहीं देख लिया है वर्ण तुम कभी अपनी माँ के साथ नहीं रहते हो ..... गाड़ी से एक लड़की निकल कर मुस्कुराती हुई कहती है

नीलम तुम जानती हो मेरी बस एक hi कमजोरी है वह है जिस्म आवर मैं यह आना तो नहीं चाहता था मगर मुझे आना hi पड़ा उस ितम के लिए बहुत कातिल जवानी है उसकी मगर यह माता श्री भी है तो थोड़ा संभल कर रखना होगा मुझे आवर माता श्री यह एक टीचर बन कर आई है तो उनको शर्मिंदा तो नहीं कर सकता था अपने लिए मगर उस जवानी को जैसे भी कर के मज़ा तो लूंगा hi ....... लड़का किसी को याद करते हुआ कहता है

नीलम तुम चाहो तो गाड़ी भी लेकर जा सकती हो किसी से भेज देना ...... लड़का जाते हुआ कहता है

वही लड़की मुस्कुरा कर उस लड़के को देखती है आवर गाड़ी मैं बैठ जाती है

साला हरामी दूसरों की माँ बहन बीवी को गन्दी नज़र से देखता है आवर अपनी माँ को बचने के लिए घर मैं एक आदमी भी नहीं रखता है

बचा बचा कितना बचाएगा अपनी रास भरी माँ को एक न एक दिन उसकी जवानी को कोई लूट hi लेगा तब तुझे पता चलेगा कैसा लगता है जब खुद की माँ को कोई छोड़ता है ........ लड़की कुछ सोचते हुआ कहती है आवर गाड़ी लेकर चल देती है

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अपडेट ... 21

आँचल अभी सिर्फ पेंटी आवर ब्रा मैं बाथरूम के अंदर झरने के निचे बैठी हुई होती है आवर झरने से पानी की बूंदें आँचल के ऊपर गिर रही होती है आँचल अपनी आँखें बंद किये हुआ अभी कुछ देर अपनी बेटे का होंठ चूसने के बारे मैं सोच रही होती है आवर रह रह कर आँचल के चहरे का रंग बदल रहे होते है आँचल कभी मुस्कुरा रही होती है तो कभी शर्मा रही होती है

आँचल को थोड़ा अजीब तो लगा था अर्जुन के साथ होंठों पे किश कर के मगर उससे कही जयादा मज़ा भी आया था आँचल को

आँचल का दिल आज बहुत hi तेज़्ज़ तेज़्ज़ धड़क रही होती है आँचल उन लम्हों को याद करते हुआ नहाने लग जाती है

इधर रूम मैं अर्जुन अपनी ममी माँ के साथ हुआ किश के बारे मैं सोचते हुआ सो जाता है

गीता किचेन से खाना निकल कर हॉल मं आकर खाने लग जाती है तभी वह अंजलि भी आ जाती है

दीदी आप कब आई आवर खाना भी खाने लगी ...... अंजलि आकर सोफे पर बैठ कर कहती

अभी आई तुम दोनों सोल्लगे से कब आये आवर अर्जुन कहा है दिखाई नहीं दे रहा है ....... गीता कहती है

दीदी अर्जुन मेरे रूम मैं सो रहा है ........ अंजलि कहती है

ठीक है.... अंजलि एक काम कर जाकर माँ से अर्जुन के रूम की चाभी मांग कर ला अब बस कुछ hi दिन बचे है होली के लिए तो अर्जुन का रूम इस बार हम दोनों कर देती है ....... गीता कहती है

दीदी क्या बोल रही है मैं तो नहीं जाने वाली माँ से चाभी मांगने के लिए क्यू की दीदी हम दोनों को पता है माँ कभी अर्जुन के रूम की चाभी हम दोनों क्या वह चाभी किसी को नहीं देने वाली है बस अर्जुन के सिवा ...... अंजलि कहती है

ओह्ह्ह गुड़िया मेरी बात मान आवर एक बार फिर जाकर माँ से चाभी मांग तू माँ से ज़िद्द कर सकती है मांगने के लिए मगर मैं माँ से ज़िद नहीं कर सकती हुईं अगर माँ ने एक मन कर दिया तो मैं बिना कुछ बोले चली आउंगी क्यू की मुझे माँ के साथ लड़ना अच्छा नहीं लगता है मगर तू माँ के साथ थोड़ी लड़ भी सकती है ....... गीता कहती है

दीदी मैं नहीं जाउंगी चाभी मांगने आवर आप माँ से इतनी क्यू डर्टी है आप भी तो माँ की बेटी है ....... अंजलि कहती है

अरे पागल मैं माँ से डर्टी नहीं हुईं बस मुझे अच्छा नहीं लगता माँ के साथ बहस करना मगर तू बचपन से माँ के साथ बहस करते हुआ बड़ी हुई है मैं इस लिए बोल रही हुईं ...... गीता कहती है

गुड़िया चाभी मेरी आलमारी मैं है जाकर निकल ले आवर अपनी दीदी को दे दे मैं अभी खेत की तरफ जा रही हुईं ........ राखी देवी जाते हुआ बोलती है जो रूम से निकलती हुई गीता आवर अंजलि की बाते सुन रही होती है

अपनी माँ की बात अंजलि आवर गीता खुश हो जाती है वही राखी देवी मुस्कुराती हुई चली जाती है

अपनी माँ की रूम से चाभी निकल कर दोनों बहन अर्जुन के रूम खोलती है आवर दोनों की आँखे बड़ी हो जाती है अर्जुन के रूम को देख कर

क्यू के अर्जुन का रूम बिलकुल hi साफ़ था कही भी कोई झोल आवर गार्डा धूल की नामोनिशान भी नहीं था अर्जुन का रूम बिलकुल चमक रहा होता है रूम मैं बस अर्जुन के खिलौने रखे हुआ थे आवर बहुत साडी अर्जुन की तस्करी थी जो अर्जुन का कुछ तस्वीर अकेला था तो कुछ मैं अंजलि आवर गीता भी थी तो किसी मैं अर्जुन के साथ राखी देवी भी थी तो किसी मैं अर्जुन अपनी ममी माँ के साथ भी था अर्जुन के रूम को अभी देख कर दोनों बहनों की आँखें भर आती है आवर उनेह बचपन की यादे आने लगती है किस तरह वह तीनो बहन भाई घर मैं भागते हुआ खेला करती थी

दीदी माँ कितनी प्यार करती है अर्जुन से रूम को देख कर पता चल रहा है हम दोनों समझ रही थी अर्जुन का रूम दुल्ल आवर झोल से भरी पड़ी होगी मगर अर्जुन का रूम तो हम दोनों से भी साफ़ है जो पता चल रहा है माँ अर्जुन के रूम को हर वक़्त साफ़ करती रहती है ..... अंजलि थोड़ी मायूसी से कहती है

तुम ठीक कह रही है गुड़िया माँ अर्जुन को बहुत जयादा प्यार करती है

कस इस होली के तेहवार मैं अर्जुन सब कुछ भूल कर माँ को मांफ करदे ...... गीता भी मायूसी से कहती है

थोड़ी देर रूम मैं रहती है फिर दोनों बहाने अर्जुन के रूम से निकल जाती है

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वही आदि घर मैं आने के बाद अपने रूम मैं आता है आवर बीएड पर गिर जाता है

कुछ hi दर मैं एक नौकरानी भी आदि के रूम मैं आती है जो औरत की हाँथ मैं कॉफ़ी भी होती है

मालिक कॉफ़ी लीजिये ........ औरत कहती है

आदि कॉफ़ी लेते हुआ बड़ी hi कामिनी नज़र से औरत को देखता है

मगर औरत कॉफ़ी देकर कर रूम से निकल जाती है

इस गाँव की तो सभी लड़कियां आवर औरत भरी जवानी वाली है लगता है कुछ दिन मुझे एहि रहना पड़ेगा ........ आदि औरत के जाते हुआ मटकती गांड को देखते हुआ सोचता है

वही दूसरे रूम मैं आदि की माँ अपने कुछ कपडे को लेकर बाथरूम मैं चली जाती है आवर फिर अपने कपडे निकलने लग जाती है

आदि की माँ पहले अपनी साड़ी की पल्लू अपने साइन से हटती है आवर फिर निचे गिरी देती है आदि की माँ की पल्लू गिरते hi आदि की माँ की दोनों चुकी उभर कर दिखने लग जाती है

लाल बलाउज के अंदर उजाला भी कुछ दिखने लगता है दोनों चुकी के बिच मैं आदि की माँ फिर अपनी बलाउज निकलती है

आदि माँ जब अपना बलाउज को निकल देती है फिर अपने दोनों हांथों से अपनी चुकी को सहलाने लगती है अभी आदि की माँ की चची देखने से जयादा बड़ी नहीं लग रही होती है अभी देखने से 32 या 34 की लग रही होती मगर जब आदि की माँ अपनी चुकी पर हाँथ फेर रही होती है अपनी चुकी पर हाँथ फेरते हुआ आदि की बहुत शर्मा रही होती है

आदि की माँ अपनी चुकी को शरमाते हुआ सहला रही होती है फिर अपने हाँथ से अपनी चुकी के ऊपर लिपटी हुई उजला कपडे को निकलने लगते है कपडे खोलते हुआ आदि की माँ की चहरे पर आवर भी शर्म होने लगाती है

आवर आदि की माँ जैसे hi अपने उजाला कपडे अपनी चुकी से हटती है आदि की माँ की वह दोनों चुकी पहाड़ की तरह कड़ी हो जाती है आदि की माँ अपनी पहाड़ जैसी चुकी को देख कर आवर भी शर्माने लगी जाती है आवर आदि की माँ की आँखे मदहोश होने लग जाती है

हे भगवन कैसा जुल्म किये है मुझपे एक तो मेरी उम्र जैसे जैसे बढ़ रही है मेरी जिस्म उतनी hi उभर कर निकल रही है मुझे देख कर हर कोई एहि कहता है आदि मेरा बीटा नहीं भाई है मगर क्या फायदा इस जवानी का भगवन जब मेरा पति इस दुनिया मैं नहीं है भगवन मैं क्या करू इस जवानी की मुझे इतनी शर्म आती है की मैं अपनी इस भरी हुई जोबन को कपडे मैं दबा कर रखती हुई ताकि ये किसी की नज़र मैं न आये भगवन जी क्यू मेरे पति को मुझसे दूर कर दिया मुझसे ये जिस्म की गर्मी सहन नहीं होती है मैं दूसरे मर्द के साथ सम्बन्ध बना कर अपने बेटे को शर्मिंदा भी नहीं कर सकती हुईं मैं क्या करू भगवन जी ........ आदि की माँ अपनी भरी जिस्म को आवर खास कर अपनी बड़ी चुकी को देखती हुई निराशा से कहती है

फिर अपनी पेटीकोट निकलती है आदि की माँ जब पेटीकोट निकल देती है तो आदि की माँ की भरी जवानी सामने दिखने लग जाती है

आदि की माँ की जिस्म अभी भी एक जवान होती हुई लड़की की तरह होती है कही से भी देखने पर आदि की माँ की जिस्म पर चमड़ी गिरी हुई नहीं होती है बल्कि टाइट आवर चिकनी होती है

पुरे कपडे को निकलने के बाद आदि की माँ झरने के निचे बैठ जाती है आवर अपनी जिस्म पे साबुन लगा कर मलने लग जाती है

आदि को माँ जैसे जैसे अपनी जिस्म को साबुन से मॉल रही होती है उसकी जिस्म की गर्मी भी बढ़ रही होती है आवर छूट मैं चींटियां रेंगने लग जाती है

स्स्स्सस्स्स्स आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मेरी छूट आदि की माँ सिसक पड़ती है

आदि की माँ से अब रहा नहीं जाता है तो साबुन से भिनगा हुआ हाँथ अपनी छूट के पास लेकर जाती है आवर चिकनी गोरी छूट जो छूट की दोनों होंठ बंद होती है उसको ऊपर से hi छूट को सहलाने लग जाती है

Ssssssssssssss आआआ हहहहहह hhhhhhhhhh ह्ह्हह्ह्ह्ह हहह

अपनी छूट पर हाँथ रखते hi आदि की माँ फिर से सिसक पड़ती है

आदि की माँ फिर धीरे धीरे अपनी हाँथ की एक ऊँगली को छूट की होंठ के अंदर करने लगती है

hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

अभी बिच वाली उंगली आधी hi डालती है की आदि की माँ लम्बी सिसकियाँ भरने लग जाती है

आधी ऊँगली डालने से hi आदि की माँ की बुरी हालत हो जाती है आदि की माँ की माथे पे पसीना आवर आँखों मैं एक हवस नज़र आने लग जाती है

आदि की माँ की छूट जलने लग जाती है अब आदि की माँ से आवर सहन करना मुश्किल हो जाती है जो आदि की माँ पहले अपनी आँखें बंद करती है आवर फिर अपनी ऊँगली छूट मैं एक पूरी दाल देती है

aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

छूट मैं ऊँगली डालते hi आदि की माँ को मुंह खुल जाती है आवर आदि की माँ गांड उठा उठा कर झरने लग जाती है

आदि की माँ की छूट से कुछ देर तक पानी निकलता hi रहता है छूट के पानी निकलते वक़्त आदि के माँ के चहरे पर एक अजीब से ख़ुशी नज़र आती है आवर झरते वक़्त बहुत hi खुश नज़र आती है जो कुछ hi देर मैं उनकी चहरे पे मुस्कान आ जाती है

हे भगवन ये कैसी आग लगी है मेरी जिस्म मैं जो उंगली जाते hi मेरी छूट से पानी निकल रही है ..... आदि की माँ मन मैं सोचती है फिर नहाने लग जाती

आदि की माँ अच्छे से नाहा कर बाथरूम से निकल कर रूम मैं आती है आदि की माँ अभी एक मैक्सी पहनी हुई होती है आदि की माँ की जिस्म पूरी तरह भींगी हुई होती है आवर पानी की कुछ बूंदें आदि की माँ की जिस्म से होती हुई गोरी गोरी गदराई टांगों से होते हुआ निचे की तरफ गिर रही होती है

आदि की माँ पहले लाल कलर की कपडे लेती है आवर अपनी मैक्सी जिस्म से अलग कर निचे गिरा देती है मैक्सी निचे गिरते hi आदि की माँ की नज़र शीशे से अपनी गदराई जिस्म पर जाती है जो आदि की माँ खुद hi अपनी जिस्म को देख शर्मा जाती है

आदि की माँ कुछ देर अपनी रास भरी गदराई मसल जिस्म को देखती है फिर वह लाल कपडे अपनी पहाड़ की तरह दिख रही चुकी पर लपेटने लग जाती है

आदि की माँ जब कपडे लपेट रही होती है तो उनके हाँथ से चुकी डाब रही होती है जो आदि की माँ सिसक जा रही होती है लाल कपडे लपेटने के बाद आदि की माँ कपडे पहन कर रूम से निकल जाती है

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अर्जुन की नींद शाम मैं खुलती है जब उसकी गीता दीदी आकर अर्जुन को उठती है आवर फिर चली जाती है

अर्जुन भी उठ कर बाथरूम मैं जाता है आवर फ्रेश होकर रूम से निकल जाता है रूम से निकलने के बाद अर्जुन अपने छत पर चला जाता है आवर छत के एक कोन मैं बैठ कर सिगरेट पिने लग जाता है

तभी अर्जुन को किसी के ऊपर आने की आवाज़ सुनाई देती है तो अर्जुन जल्दी से फुख मार कर सिगरेट भुजा देता है

तभी छत पर आँचल आती है आँचल अभी मैक्सी मैं होती है आवर आँचल की बॉल भींगी हुई होती है आँचल के चहरे पर ख़ुशी होती है आँचल छत पर आकर अपने भींगे हुआ कपडे छत पर डालने लगती है आवर चली जाती है मगर आँचल अर्जुन को देखती नहीं है अर्जुन भी अपनी ममी माँ को देख कर आवर छिप जाता है क्यू की अभी अर्जुन को अपनी ममी माँ से शर्म आती रहा होता है जो कुछ भी दिन मैं हुआ होता है

आँचल के छत से जाने के बाद अर्जुन भी निचे चला जाता है आवर घर से निकल कर गाँव मैं चला जाता है

गाँव मैं घूम कर अर्जुन फिर घर आ जाता है

रात मैं गीता आवर अंजलि रूम मैं hi अर्जुन के साथ खाना कहती है अर्जुन आज अपनी गीता दीदी के रूम मैं सोने चला जाता है ... गीता के कहने पर

वही राखी देवी बस थोड़ा बहुत खा कर रूम मैं चली जाती है

अगली सुबह अर्जुन जब उठता है तो देखता है उसकी गीता दीदी बीएड पर नहीं है तभी अर्जुन को बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आती है तो अर्जुन समझ जाता है गीता दीदी बाथरूम मैं है तो अर्जुन उठ कर छत पर जाने लग जाता है अर्जुन अभी छत पर जा hi रहा होता है के छत से राखी देवी उतर रही होती है अर्जुन अभी निचे hi होता है तो राखी देवी के निचे आने वह से हैट जाता है आवर थोड़ी दूर खड़ा हो जाता है

राखी देवी निचे उतरते हुआ बस अर्जुन को देख रही होती है मगर अर्जुन अपनी माँ की तरफ नहीं देखता है

राखी देवी अर्जुन को देखती हुई उतर रही होती है तभी राखी देवी का पेअर मुड़े जाता है आवर रसखान देवी की चीख निकल जाती है राखी देवी की चीख सुन कर अर्जुन भी थोड़ा दर जाता है आवर नज़र उठा कर देखता है तो उसकी माँ निचे की तरफ गिर रही होती है अर्जुन भाग कर अपनी माँ को पकड़ लेता है जो राखी देवी अर्जुन के बाँहों मैं गिर जाती है

राखी देवी जैसे hi अर्जुन के बाँहों मैं गिरती है वह अर्जुन के बाँहों से लिपट जाती है आवर अर्जुन को अपनी छाती से ज़ोर से लगा लेती है अर्जुन के गले लगने से राखी देवी की दिल को बड़ी सकूँ मिल रही होती है

राखी देवी अभी मन मैं मिन्नत करने लगती है यह पल अभी एहि रुक जाये आवर वह अपने बेटे के गले लगी रही

वही अर्जुन भी एक वक़्त के लिए अपनी माँ के गले लगने से सब कुछ भूल चूका था आवर अर्जुन भी अपनी माँ के बाँहों मैं चिपक जाता है

कुछ देर तक दोनों माँ बेटे बस गले लगे हुआ होते है मगर कोई कुछ बोल नहीं रहा होता है

राखी देवी भी सोचती है अर्जुन अब उनेह मांफ कर देगा ये सोच कर राखी देवी दिल मैं खुश हो जाती है आवर अपना एक हाँथ को अर्जुन के सर पर फेरने लग जाती है तभी अर्जुन एक झटके मैं अलग हो जाता है

तो गले लगाने के लिए गिरने की नाटक कर रही थी छी ...... बोल कर अर्जुन छत पर चला जाता है

वही राखी देवी की चहरे पर अर्जुन के बात से मायूसी तो होती है मगर उससे कही जयादा राखी देवी की चहरे पर ख़ुशी होती है

अर्जुन अभी कुछ भी समझा हो मगर राखी देवी खुद जानती थी के वह अभी गिरने वाली थी

बीटा मैंने कोई नाटक नहीं की मैं सच मैं गिरने वाली थी मगर तुम नहीं समझ सकते क्यू तुम मुझसे नफरत करते हो मगर मैं फिर भी खुश हुईं एक न एक दिन तुमेह अपनी माँ से नफरत ज़रूर ख़त्म हो जायेगा मैं उस दिन तक इंतज़ार करुँगी चाहे मुझे कितनी भी तकलीफ साहनी पड़े ....... राखी देवी अर्जुन को छत पर जाते हुआ देख कर सोचती है

अर्जुन का दिमाग ख़राब हो hi हो गया था अपनी माँ की गले लगने के लिए नाटक को करते हुआ सोच कर अर्जुन छत पे जाता है आवर ठंडी हवा का मज़ा लेने लगता है थोड़ी hi देर मैं अर्जुन को अच्छा लगने लगता है अर्जुन छत पर घूमता रहता है फिर थोड़ी देर के बाद अर्जुन निचे उतर जाता है

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आस्था आस्था बेटी उठ जा अब सोल्लगे जाने का वक़्त होने वाला है आवर तू अभी तक सो रही है ........ आस्था की माँ चादर खींचती हुई बोलती है

ओह्ह्ह माँ अभी सोने दीजिये न मुझे नींद आने रही है ...... आस्था चादर फिर खिंच कर ऊपर डालती हुई बोलती है

देख उठ नहीं तो अभी बीएड पे hi नहला दूंगी फिर सोते रहना रात दिन भींगे हुआ बीएड पर ........ आस्था की माँ थोड़ी गुस्से मैं बोलती है

नहीं मां मैं अभी उठ रही हुईं पानी मत डालियेगा ....... आस्था चीखते हुआ बोलती है आवर उठ जाती है

खडुश मां अपनी बेटी को ज़रा सोने भी नहीं देती है जैसी इनकी माँ है वैसी hi बेटी है रुकिए अभी दादी से आप की मां की बुराई करती हुईं ....... आस्था बाथरूम मैं भगति हुई कहती है

क्या मेरी माँ की बुराई करेगी मैं तेरी टाँगें तोड़ दूंगी ये बिलकुल अपनी दादी पर गयी है दादी की चमची जल्दी से फ्रेश होकर आ आवर सोल्लगे जा

ये दोनों दादी पोती एक जैसी है बस दूसरों की बुराई करने वाली .... हुईं .... आस्था की माँ थोड़ी गुस्से मैं कहती हुई चली जाती है

ओह्ह्ह फिर से सोल्लगे मुझे तो सोल्लगे जाने का दिल hi नहीं कर रहा है पता नहीं किस सोल्लगे मैं गया है मेरा हीरो

खडुश कही का एक वक़्त के लिए रुक कर मुझसे बात नहीं कर सकता था फिर मिला तो मैं तुमेह दो तप्पड़ मरूंगी

नहीं दो तप्पड़ नहीं तीन तप्पड़ मरूंगी

ह्ह्हह्ह्ह्ह कहा हो तुम प्लीज तुम मुझे मिल जाओ ... आस्था बाथरूम मैं कहती हुई खुद से बोल रही होती है

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अपडेट .... 22

माँ आप अकेली कैसे जाएँगी मैं साथ चल कर पहुंचा देता हुईं न बाइक से ..... आदि कहता हुआ अपनी माँ के पीछे आता है

आदि थोड़ा चलने से सेहत भी अच्छी रहती है आवर सोल्लगे भी जयादा दूर नहीं है तो मुझे चल कर hi जाना ठीक लग रहा है ........ आदि की माँ कहती हुई घर के बहार निकल जाती है

वही आदि भी अपने माँ के साथ बहार तक आ जाता है

hello बच्चों कहा जा रही हो आप दोनों ..... आदि की माँ कहती है

आदि की माँ अंजलि आवर गीता के हांथों मैं किताब देख लेती है तो समझ जाती है पढ़ने hi जा रही होगी

आंटी हम पास के सोल्लगे जा रही है क्या हुआ ..... गीता कहती है

ओह अच्छा हुआ बेटी तुम दोनों मुझे मिल गयी चलो मुझे भी सोल्लगे जाना है

आदि देख मैं अब अकेली नहीं ये दो खूबसूरत लड़कियां भी मेरे साथ जा रही है ... आदि की माँ कहती है

मगर आदि तो अपनी माँ की बात सुन hi नहीं रहा था वह बस अंजलि को प्यासी नज़रों से देखे जा रहा होता है

ौंकल कहा खो गए आंटी कुछ बोल रही है ....... अंजलि चुटकी बाजार कर कहती है

चुटकी की आवाज़ सुन आदि भी हवस के यादों से निकल के बस ठीक है ठीक है बोलते हुआ घर के अंदर चला जाता है

क्यू की जैसे hi आदि यादों से बहार आता है खुद को हैरानी के साथ अपनी माँ को देखते हुआ पता है जो जल्दी से चला जाता है ये सोच कर के उसकी माँ सायद गुस्सा हो रही है

आदि को भागते हुआ देख दोनों बहाने हसने लग जाती है

आंटी आप के देवर तो आप को बहुत प्यार करते है जो आप को अकेले नहीं जाने दे रहे थे ....... गीता हस्ती हुई कहती है

अंजलि आवर गीता की बात सुन कर आदि की माँ थोड़ी थोड़ी शर्माने लग जाती है ये सोच कर के दोनों लड़कियां उसके बेटे को देवर समझ रही है

बेटी आदि मेरा बीटा है देवर नहीं ...... आदि की माँ शर्मा कर बोलती है

अंजलि आवर गीता है रही होती है मगर आदि की माँ की बात सुन कर वह चुप हो जाती है

ओह सॉरी आंटी हमेह लगा वह आप के देवर है प्लीज आंटी हम दोनों को मांफ कर दीजिये ....... गीता कहती है

ok कोई बात नहीं बेटी अब मुझे जयादा हैरानी नहीं होती है अक्सर लोग आदि को मेरा बीटा नहीं देवर hi समझ जाते है ...... आदि की माँ कहती है

रस्ते मैं बाटे करते हुआ hi गीता आवर अंजलि आवर आदि की माँ सोल्लगे तक पहुँच जाती है

रस्ते मैं आदि की माँ अपने बारे मैं भी बता देती है की वह इस सोल्लगे मैं टीचर बन कर आई है जो अंजलि आवर गीता खुश हो जाती है

सोल्लगे मैं जाने के बाद hi आदि की माँ तो प्रिंसिपल के ऑफिस की तरफ चली जाती है मगर गीता आवर अंजलि अपनी कुछ सहेलियों के साथ बाते करने लगती है

होई दीदी कैसी हो आप ... गीता अपनी सहेलियों से बात कर रही होती है के पीछे से एक लड़की की आवाज़ आती है तो पलट कर गीता देखती है आवर उस लड़की को देख कर गीता मुस्कुरा देती है

वही अंजलि लड़की को देख कर मुंह बना देती है

ये मेरी दीदी को कैसे जानती है आवर देखो तो कितनी बन थान कर आई है ताकि सब इसे hi बस देखते रहे सोल्लगे पढ़ने आ रही है की मेला घूमने ......... अंजलि अपनी मन hi मन मैं बुदबुदाती है

अरे आस्था गुड़िया तुम ........ आवर तुमेह कैसे पता मैं hi हुईं क्यू के मेरा चेहरा तो तुमेह नहीं दिख रही थी ....... गीता थोड़ी हैरानी से कहती है

दीदी मैं जिसको एक बार देख लेती हुईं उसे पीछे से भी पहचान लेती है

Hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

नहीं दीदी मजाक कर रही हुईं मैंने आप को देखि आते हुआ अपने छत से ......... आस्था मुस्कुराती हुई कहती है

मगर आस्था की नज़र जैसे hi अंजलि पर पड़ती है आस्था बस अंजलि को hi देखने लगती है

वव कितनी खूबसूरत है ये दीदी आवर इनकी जिस्म भी भरा हुआ है ये अभी इतनी जयादा खूबसूरत लग रही है तो जब ये खुद को मेरी तरह तैयार करेंगी तो सोल्लगे मैं लड़कों की हालत बिगड़ देंगी ........ अंजलि को एक तक देखती हुई आस्था मन मैं सोचती है

ओह्ह्ह अच्छा तो तुमने मुझे आते हुआ देखि थी फिर ठीक है ....... गीता कहती है

दीदी एहि आप की गुड़िया है न ..... अंजलि को देखती हुई कहती है

यस बेबी एहि मेरी गुड़िया रानी है तुम्हारी तरह hi मेरी गुड़िया है न बोल ........ गीता मुस्कुराती हुई कहती है

दीदी आप की गुड़िया मुझसे भी कही जयादा खूबसूरत है ये दीदी कितनी सूंदर आवर एटम .... आस्था आगे कुछ नहीं बोलती है आवर खुद शर्मा जाती है ये सोच कर की क्या बोलने जा रही थी

क्या बोल रही थी बोल एटम आवर क्या बोलने वाली थी ........ गीता बोल पड़ती है

कुछ नहीं दीदी ........ आस्था थोड़ी शरमाते हुआ बोलती है

वही अंजलि तो दिल hi दिल मैं बड़ी खुश हो जाती है अपनी तारीफ सुन कर

हीई दीदी मेरा मेरा आस्था है आवर ये मेरी बेस्टफ्रेंड नीता है ....... आस्था बोलती हुई अपनी हाँथ आगे करती है

अंजलि भी दिल मैं मुस्कुराती हुई हाँथ आगे बढ़ा देती है आवर अपना भी नाम बताती है

फिर थोड़ी बाते कर के अपनी अपनी क्लास की तरफ चली चलने लग जाती है अंजलि आवर गीता अपनी क्लास मैं चली जाती है आवर आस्था अपनी क्लास मैं चली जाती है

आस्था जाकर आगे बैठ जाती है आवर पास मैं नीता भी कुछ देर मैं एक खूबसूरत टीचर क्लास मैं आती है आवर साथ मैं प्रिंसिपल भी होते है प्रिंसिपल को देख कर सभी लड़के आवर लड़किया कड़ी हो जाती है

hello बच्चों ये नै टीचर है जो तुम सब को माथे पढ़ाया करेंगी बाकि अपना परिचय ये खुद दे देंगी बोल कर प्रिंसिपल रूम से चले जाते है

hello बच्चों मैं अभी इस सोल्लगे मैं तो पहले मैं अपनी परिचय देती हुईं मेरा नाम रजनी है आवर मैं क्या पढ़ने आई हुईं प्रिंसिपल सर ने बता hi दिया है

तो आप सब भी अपना अपनी एक एक कर के नाम बता सकते हो ताकि हम सब एक दूसरे को जान सके ....... टीचर कहती है

सभी बच्चे एक एक कर के अपना अपना नाम बताने लग जाते है अब अगली बरी आस्था की आती है जो आस्था कड़ी होकर अपनी नाम बताने वाली होती है तभी रूम मैं एक आवाज़ आती है

मेम मैं अंदर आ सकता हुईं .... गेट पर खड़ा होकर एक लड़का कहता है

वही आवाज़ सुन कर सभी लड़के लड़कियां गेट पे देखने लगती है आवर लड़के को देख कर लड़कियों की आँखों मैं एक अजीब से ख़ुशी होती है

वही आस्था की तो दिल झूम उठता है आवर आस्था अपनी मुंह पर हाँथ रख लेती है

मेरा हीरो मेरे पास आ गया उउउउउम्म्माआ ी लव यू ...... आस्था मन मैं ख़ुशी से सोचती है

यस बीटा आ जाओ इतने लेट क्यू आ रहे हो ........ लड़के के क्लास रूम के अंदर जाते हुआ रजनी मेम बोलती है

वह टीचर बाइक ख़राब हो गया था ...... लड़का बेंच के पास जाकर बोलता है

हां ठीक है अगली बार से सही समय पर आना .......... रजनी मेम कहती है

यस मेम कहते हुआ लड़का बेंच पर बैठ जाता है

मेरा नाम आस्था सिंह है ........ आस्था लड़के की तरह देखती हुई बोलती है

ये लड़की बिलकुल पागल है इससे दूर hi रहना पड़ेगा कैसे देख रही है ....... लड़का मन मैं सोचता है फिर धीरे धीरे सभी लड़के लड़कियां अपनी अपने नाम बता देता है

अब बरी आती है है उस लड़के की जो सबसे पीछे जाकर बैठ गया होता है जब बगल वाला लड़का अपना नाम बता देता है तो वह लड़का भी खड़ा हो जाता है

लड़के को खड़ा होते देख कर आस्था अपनी मुंह पीछे कर लेती है आवर लड़के के बोलने का इंतज़ार करने लगी है जो कब से नाम जानने के लिए बेचैन होती है

हां बीटा तुम्हारे नाम क्या है बताओ मुझे ...... रजनी मेम कहती है

मेरा नाम अर्जुन सिंह है ........ अर्जुन कहता है

वव सुपर नाम आस्था आवर अर्जुन कितना मिल रहा है ....... आस्था मन मैं सोचती है आवर बहुत खुश हो जाती है

परिचय होने के बाद रजनी मेम चली जाती है आवर कुछ देर के बाद एक टीचर आकर सभी को घर जाने को बोलते है आवर कहते है होली के बाद सोल्लगे खुलेगा

सभी लड़के लड़कियां क्लास रूम से निकलने लगते है मगर आस्था वही बैठी hi रहती है वही अर्जुन भी ये सोच कर बैठा रहता है की आस्था के जाने के बाद वह क्लास से निकलेगा आवर अर्जुन आस्था की तरफ देखता है जो वही कड़ी होकर उसे hi देख रही होती

ये निकल क्यू नहीं रही है यार ....... अर्जुन मन मैं सोचता है आवर बैंच से उठ जाता है

अर्जुन को उठते देख आस्था भी उठ जाती है

बहुत प्यारा नाम है बहुत अच्छा लगा तुमेह सोल्लगे मैं देख कर

होई मेरा नाम आस्था है अर्जुन के साथ चलते हुआ आस्था कहती है

तो मैं क्या करू तुम्हारा कोई भी नाम हो ..... अर्जुन भी चलते हुआ बोलता है

कितना खड़ूस है हमेशा गुस्से मैं रहता है बन्दर ........ आस्था मन मैं सोचती है आवर मुंह बना लेती है

तुम ठीक से बात नहीं कर सकते मैं कितने प्यार से बोल रही आवर तुम गुस्से से बोल रहे हो ......... आस्था मुंह बना कर बोलती है

तुम मेरी गर्लफ्रेंड थोड़ी हो जो तुमेह प्यार से बात करू मैं तो तुमेह ठीक से जनता भी नहीं हुईं आवर तुम पागल लड़की हो

देखो अब तुम मुझसे थोड़ी दुरी पर रहो वर्ण मेरी दीदी देख लेंगी तो वह मेरे बारे मैं गलत समझ लेंगी ........ अर्जुन चलते हुआ बोलता है

तो मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बना लो मैं तो तुम्हारी बीवी भी बनने के लिए तैयार हुईं ......... आस्था बड़ी तैश मैं कहती है

चल हैट बड़ी आई बीवी बनने वाली जाकर किसी आवर को पकड़ मैं तेरी तरह पागल नहीं ......... अर्जुन कहते हुआ बाइक लेकर चल देता है

बन्दर खडुश बदमाश गुंडा ....... नहीं नहीं. गुंडा नहीं बन्दर खडुश हो तुम मैं भी देखती हुई कैसे तुम मुझसे प्यार नहीं करते हो ........ आस्था बुडबाति है आवर मुंह बना कर चलने लगाती है

एहि वह सहर वाला लड़का है क्या नीता पूछती है जो कब से पीछे पीछे चुप चाप चल रही होती

हआ एहि बन्दर है कैसा है ....... आस्था मुस्कुराते हुआ पूछती है

बहुत स्मार्ट लड़का है अगर तुझसे प्यार नहीं करेगा तो मैं कोशिश करुँगी ...... नीता हस्ती हुई बोलती

सोचना भी मत वह सिर्फ आवर सिर्फ मेरा है ..... आस्था ऊँगली देखा कर बोलती है

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अपडेट ... 23

अर्जुन बीटा तू आ गया तेरी दीदी कहा पे रह गयी है ..... अर्जुन को अकेले देख कर आँचल कहती है

माँ मैं बाइक से आया हुईं आवर गीता आवर अंजलि दीदी साथ मैं खेतों के रस्ते आ रही होंगी ...... अर्जुन कहता है

ठीक है बीटा मुंह हाँथ धो तब तक मैं खाना गर्म कर देती हुईं .... आँचल कहती है

दोनों ममी भांजे बात तो कर रहे होते है मगर एक दूसरे को कोई देख नहीं रहा था क्यू की दोनों hi अपने आप मैं शर्मा रहे होते है

अर्जुन हां बोल कर अपने रूम की तरफ चला जाता है

वही आँचल भी शर्माती हुई किचेन मैं चली जाती है आवर खाना गर्म करने लगती

ये मुझे क्या हो रही है मैं भला क्यू अपने बेटे से शर्मा रही हुईं वह मेरा बीटा है भले hi मैंने उसे जन्म नहीं दिया है मगर मैंने अर्जुन को बचपन से पला है अर्जुन जब छोटा था तब मैं नंगी होकर भी उसके सामने कपडे बदलने लगती थी मुझे तो उस वक़्त भी कोई शर्म नहीं आती थी मगर सिर्फ एक किश😘 करने के बाद मुझे इतनी शर्म क्यू आ रही है जो मैं अपने बेटे से नज़र भी नहीं मिला प् रही हुईं मैंने किसी गैर को किश 😘 थोड़ी किया है वह मेरा बीटा है जो मैं सबसे जयादा प्यार करती हुईं ....... आँचल खाना गर्म कर रही होती है आवर खुद hi बुब्बुदा रही होती है

ममी जी जल्दी खाना दो मुझे बहुत भूख लगी है नहीं तो मैं आप को खा जाउंगी ....... अंजलि किचेन मैं आकर बोलती है

मैं जानती थी भूख़ड लड़की आकर जल्दी से खाना मांगेगी इस लिए गर्म कर रही हुईं ..... आँचल मुस्कुराती हुई कहती है

ममी मैं भूख़ड नहीं हुईं समझी जब आप इतनी दूर से चल कर आएँगी तब पता चलेगा देखिये मैं कितनी पतली होती जा रही हुईं ... हुईं .......... अंजलि मुंह बना कर कहती है ......... आवर खुद अपनी जिस्म दिखते हुआ अपनी सूत को ऊपर करने लगती है अपनी ममी को दिखती हुई

अंजलि के कपडे उठाने से अंजलि की चिकनी पेट आवर कुंवे की तरह गोल नाभि दिखने लगती है

अंजलि अपने कपडे आवर उठती है तभी आँचल अंजलि की हाँथ को पकड़ लेती है आवर सर पर मरती है

क्या कर रही है शर्म नहीं आती रही आवर तुझे पता है न अर्जुन इस वक़्त घर पर है वह किचेन मैं आ गया तो ... पता नहीं कब तुझे अकाल आएगी ....... आँचल प्यार से मरती हुई बोलती है

हां तो क्या हो गया अर्जुन देख भी लेगा तो ...... आवर मुझे मन कर रही आवर आप हर वक़्त दिखती रहती है देखिये अभी भी आप की ये नाभि दिख रही ... अब बोलो बोलो कौन पागल है ....... अंजलि मुंह बना कर कहती है आवर किचेन से चली जाती है

अंजलि की बात सुनकर आँचल जल्दी से पल्लू को नाभि के ऊपर कर लेती है

वैसे ममी जी अगर अर्जुन किचेन मैं आ भी गया तो वह नाभि मेरी नहीं आप की देखेगा कितनी गोल है आप की नाभि उसमे अर्जुन पानी दाल कर पि जायेगा

aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ममी

कितना मज़ा आएगा जब अर्जुन आप की नाभि मैं मुंह दाल कर पानी पिने लगेगा बड़ा मज़ा आएगा आप को गुदगुदी भी होगी आवर आप

aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ssssssssssssssss

इस आप तरह सिसक पड़ेंगी ममी ....... अंजलि बड़ी माधोसी सवार मैं बोलती हुई आँचल के नाभि पर हाँथ फेरती है

अंजलि जब बोलती हुई आँचल की पेट से होते हुआ नाभि पर हाँथ फेर रही होती है तो आँचल कुछ देर के लिए अपनी आँखें बंद कर लेती है आवर सच मैं सोचने लगती है उसके पेट पर अभी हाँथ अर्जुन का hi घूम रहा है

मगर तभी अंजलि की सिसकियों को सुन कर आँचल अपनी आँखें खोल कर थोड़ी पीछे हैट जाती है आवर सामने अंजलि को हस्ते हुआ पति है

क्यू ममी कही आप अर्जुन को पानी पिलाने के बारे मैं सोच तो नहीं रही हो नाभि मैं ..... अंजलि फिर हस्ती हुई बोलती है

रुक ज़रा बताती हुई बेशर्म लड़की एहि सब पढ़ कर आ रही है ...... आँचल इस बारे थोड़ी शर्म आवर गुस्से से कहती हुई अंजलि की तरफ जाती है मगर अंजलि उसके पहले hi किचेन से निकल जाती है

हे माँ मैं क्या करू इस पागल लड़की की ये बिलकुल बेशर्म होती जा रही है ...... कही ये सोल्लगे मैं कोई गन्दी हरकत तो नहीं करने लगी है कही

ये पागल लड़की किसी आवारा लड़के की प्यार मैं तो नहीं पद गयी है ये इतनी नादाँ है की कोई भी इसे बहका कर फायदा उठा सकता है

हे भगवन मेरी गुड़िया रानी को गन्दी चीजों से दूर hi रखना ..... आँचल मन मैं बिनती करती है

फिर आँचल खाना गर्म कर के दिंनिंग टेबल पर लेकर जाती है तो सभी साथ मैं खाना कहते है

माँ नानी के पास फ़ोन किया था आप ने वह अच्छी तो है न मैं भी भूल गया था फ़ोन करने के लिए ......... अर्जुन खाना कहते हुआ पूछता है

बीटा सासु माँ बिलकुल ठीक है आवर तुम्हारी दोनों नानी भी एक नौकरानी को रखवा दिया उषा से बोल कर ...... आँचल कहती है

माँ उषा आंटी गाओं से वापस आ गयी है क्या ..... अर्जुन पूछता है

हां बीटा उषा गाओं से वापस आ गयी है आवर दूकान भी वही खोलती है ..... आँचल कहती है

खाना खा कर अर्जुन हॉल मैं hi बैठ जाता है आवर फ़ोन चलने लगता है

अर्जुन बीटा ज़रा मां आवर माँ के लिए खाना लेकर खेत पे चले जाओ प्लीज बीटा आज कोई भी घर पे नहीं आया खाना खाने के लिए लगता है जयादा काम है खेत पे ...... आँचल दो टिफ़िन लेकर आते हुआ बोलती है

अर्जुन तो अपने मां आवर माँ के नाम सुन कर hi थोड़ा गुस्से सा मुंह बना लेता है मगर फिर अपनी ममी माँ के चहरे को देख कर कुछ बोलता नहीं है बस फ़ोन देखने लगता है

तुम नहीं जायेगे तो ठीक है फिर मैं hi चली जाती हुईं एक तो पहले से पेअर दर्द कर रहे है थोड़ी सी आवर दर्द करने लगेगी अब क्या कर सकती हुईं मेरा बीटा hi मेरी बात नहीं मान रहा है ...... आँचल थोड़ी दर्द भरी हुई आवाज़ मैं कहती है आवर जाने लगती है तभी अर्जुन उठकर आँचल के आगे आ जाता है

कहा पर दर्द हो रहा है दीजिये मैं दबा देता हुईं वर्ण रात मैं ठीक से सो भी नहीं पाएंगी ....... अर्जुन आँचल को पकड़ कर सोफे पर बैठते हुआ कहता है

तू बस खाना लेजा रात मैं सोते वक़्त दीदी पेअर दबा देंगी आकर प्लीज बीटा ..... आँचल फिर से कहती है आआआआ मज़ा

मगर कहते हुआ इस बार थोड़ी सी आँचल कहर भी जाती है जैसे अर्जुन को लगे की सच मैं उसकी ममी माँ को दर्द हो रहा है

ठीक है मैं उधर से दवा भी लेकर आऊंगा आप के लिए किसी से पेअर दबवाने की ज़रूरत नहीं है ....... अर्जुन कहता है

ठीक है मैं अपने बेटे का दवा hi खा लुंगी ..... मेरा अच्छा बीटा ऊम्ममा .... आँचल अर्जुन के माथे को चुम कर बड़ी ख़ुशी से बोलती है

अर्जुन बाइक लेकर hi खेत पर जाता है रस्ते मैं आती हुई लड़कियां बस अर्जुन को hi देखती hi मगर अर्जुन किसी पर ध्यान नहीं देता है अर्जुन बाइक रोक कर थोड़ा चल कर अपने खेत के बगल मैं बने घर मैं जाता है तो देखता है उसकी माँ कुछ लिख रही होती है

अर्जुन समझ जाता है उसकी माँ मज़दूरों की हिसाब कर रही है

रूम मैं किसी के आने का अहसास प् कर राखी देवी सर उठा कर देखती है तो अर्जुन को देखती है अर्जुन को देख कर राखी देवी दिल मैं बहुत खुश होती है जो पेन को रख कर कहते भी बंद कर देती है

ओह्ह्ह सॉरी बीटा आज मजदूरों का हिसाब करना था तो घर जाने का टाइम नहीं मिला खाना लेन की क्या ज़रूरत थी मैं बस आने hi वाली थी ....... राखी देवी कहती है

मैं लता भी नहीं वह माँ ने ज़िद्द की इस लिए लेकर आये गया ये लीजिये आप का खाना आवर आप के भाई का भी अब मैं जाता हुईं ..... अर्जुन उसी नफरत से कहता है आवर टिफ़िन रख कर रूम से निकल जाता है

अर्जुन की बात सुन राखी देवी की दिल दुखने लग जाती है आज कितने सल्ल के बाद अर्जुन के साथ बात की थी खुश होकर मगर अर्जुन ने आज भी गुस्से से बात किया राखी देवी की आंसू निकलने लग जाती है

बीटा इतनी नफरत क्यू करता है अपनी इस अभागन माँ से मैंने वह गलती जान भुज कर नहीं की है जो तू समझ रहा है तेरी माँ बस मज़बूरी मैं वह गलती कर गयी बीटा जो गलती मैंने की अगर उस जगह पर कोई दूसरी औरत भी होती तो अपने भाई के लिए वही करती मगर तू नहीं समझेगा रहा है

तेरी ये नफरत मुझसे आवर साहा नहीं जाता बीटा तू चाहे तो मुझे मार पिट ले चाहे मुझे जान से मार दे मगर एक बार अपनी इस माँ से प्यार से बात करले प्लीज प्लीज बीटा अपनी माँ से इतने जयादा नफरत मत कर तेरी माँ मार जाएगी ....... राखी देवी बड़ी hi दर्द मैं सिसकते हुआ बोल रही होती है मगर वह कोई भी नहीं होता है राखी देवी की बात सुनने वाला

अर्जुन जब वह से जा रहा होता है तो अर्जुन की नज़र थोड़ी दूर पे अपने मां पर पड़ता है जो एक जगह अकेले बैठे हुआ होते है अर्जुन अपने मां को देखते हुआ बाइक से निकल जाता है

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वही गाओं के एक घर मैं आदि जाता है अब शाम होने वाली होती तो उस घर की औरत अपने आँगन मैं बैठ कर सब्जियां काट रही होती है उस औरत की पल्लू भी साइन से निचे गिर गया होती है गर्मी की मोषम होने से उसकी जिस्म पे भी पसीने हो रहे होते है आवर सबसे जयादा उस औरत की पसीने उसकी चुकी पर दिख रही होती है जो उस औरत की सीना चमक रही होती है आवर उसकी बलाउज भिनगा गयी होती है आवर अंदर ब्रा नहीं पहने से उस औरत की चुकी भी साफ़ दिख रही होती है औरत जैसे hi आदि को देखती है उस औरत की धड़कन तेज़्ज़ हो जाती है आवर वह औरत डरने भी लगती है आदि को आते हुआ देख कर वह जल्दी से अपनी पल्लू साइन पर दाल लेती है उस औरत को बड़ी हैरानी होती है के आदि इस गाँव मैं कैसे आ गया

अरे तुम इस गाँव मैं हो मुझे पता hi नहीं था मगर तुमेह जब रस्ते मैं देखा तो मैं कितना खुश हुआ बता नहीं सकता क्या हॉल हो गयी है तुम्हारी सुनीता ....... आदि सामने आकर कमीनी मुस्कान के साथ कहता है

तू तुम यह कैसे आ गया तुम मेरे पीछा करते हुआ यह तक आ गया तुम मेरे पीछा क्यू पड़े हो मैं तुमेह अपनी जिस्म नहीं दूंगी चाहे कुछ भी हो जाये चले जाओ मेरे घर से तुम नहीं तो मैं अभी चिल्ला कर गाँव के लोगों को बुला दूंगी ...... औरत गुस्से से कहती है

सुनीता तुम इतनी गुस्सा क्यू हो रही है मैं यह तुम्हारे साथ कुछ करने नहीं तुम्हारी मदद करने के लिए आया हुईं बहुत बुरा लगा सुन कर तुम्हारे बारे मई की अब तुम्हारा पति इस दुनियां मैं नहीं रहा ........ आदि औरत की बड़ी बड़ी चुकी को घूरते हुआ कहता है

तुमेह हमदर्दी जताने की कोई भी ज़रूरत नहीं है मेरे पति नहीं रहे तो क्या हुआ मेरी बेटी है न मैं अपनी बेटी के साथ खुश हुईं ....... औरत कहती है

बिलकुल सुनीता तुम अपनी बेटी के साथ खुश रहो मैं भी एहि चाहता हुईं पूजा मैं अब वह आदि नहीं रहा जो पहले था अब मैं बदल गया हुईं मैं यह तुमेह परेशान करने नहीं आया हुईं तुम सोच रही हो मैं यह तुम्हारे पीछे आया हुईं तुम गलत सोच रही हो मैं तुम्हारे पीछे नहीं मैं यह अपने माँ के साथ आया हुईं ....... आदि कहता तो है मगर औरत की जिस्म को घूरना बंद नहीं करता है

वह औरत आदि की माँ की उम्र की थी मगर आदि उस औरत को उसके नाम से बुला रहा होता है जैसे वह औरत उसकी उम्र की हो वह औरत कुछ बोल नहीं रही होती है ये जान कर भी के आदि उसके जिस्म को घर रहा है

क्या ये सच कह रहा है यह पे ये अपनी माँ के साथ आया है मेरे लिए नहीं मुझे यकीन नहीं हो रहा इतनी घटिया आदमी भी बदल सकता है जो औरत को बस सिर्फ गन्दी नज़र से देखता है ....... औरत मन मैं सोचती है

मुझे कुछ नहीं पता तुम मेरे घर से अभी के अभी निकालो ....... औरत कहती है

साली ये बहुत नखरे कर रही है इसको तो कुटिया बना कर छोड़ने मैं बहुत मज़ा आएगा बस एक बार चुद जाए साली अपनी मर्ज़ी से ...... आदि मन मैं कहता है

ठीक है सुनीता अगर तुमेह मुझपे विश्वास नहीं है तो मैं चला जाता हुईं ....... आदि बोलते हुआ उस औरत के करीब जाने लगता है आवर वह औरत डरने लगती है

आवर तभी वह आदि को ज़ोरदार एक तप्पड़ मार देती है

दूर रहो मुझसे मैं तुमसे नहीं डरने वाली ...... औरत कहती है

पूजा वह तुम्हारे कपडे आदि अपने गाल पकड़ कर बोलता है जो वह औरत की साड़ी का पल्लू आग के पास चली गयी होती

औरत जल्दी से अपनी पल्लू आगे से दूर हटा लेती है

सुनीता तुम मनो या नहीं मगर मैं बदल गया हुईं आवर अभी मैं तुमेह आग से दूर कर रहा था ...... आदि कहता है

आदि की बात सुन कर वह औरत एक वक़्त के लिए थोड़ी शर्मिंदगा हो जाती ये सोच कर की आदि को तप्पड़ बिना वजह hi मार दिया आदि तो उसे बचा रहा था

वह औरत आदि को देखती है जो अभी भी उसकी जिस्म को देख रहा होता है ये नहीं सुधरने वाला है मगर इसने आज मेरी साड़ी मैं आग लगाने से बचा लिए

नहीं इसकी वजह से hi मेरी पल्लू आग के पास चली गयी थी ...... औरत मन मैं सोचती है आवर आदि को देखने लग जाती है दोनों एक दूसरे की आँखों मैं देखने लगते है

साली तू थोड़ी देर से आएगी मगर मेरे निचे आएगी ज़रूर फिर मैं तेरी बुर गांड की धज्जियाँ उदा दूंगा तुझे इतना छोडूंगा की तू लैंड के लिए कही भी अपनी पेअर खोल देगी लैंड के लिए साली के होंठ कितनी मोलायम है बुद्धि हो रही मगर इसकी जिस्म आवर भी उभर रहा है ...... आदि मन मैं सोचता है

दोनों एक दूसरे को देख रहे होते है वही आदि धीरे धीरे औरत के फिर से पास जाने लगता है मगर इस बार औरत पीछे नहीं हैट रही होती वही बैठी बस आदि को देख रही होती है आदि अब भी औरत को कुछ बोलते न पा कर आवर करीब जाने लगता है औरत भी अपने आँखें बंद करने लगती है

तभी बहार से आती हुई आवाज़ सुन कर वह औरत अपनी आँखें खोल देती है आवर थोड़ी पीछे हैट जाती है

आदि भी थोड़ा दूर होकर खड़ा हो जाता है


आदि को अभी बहुत गुस्सा आया रहा होता है आवाज़ देने वाले लड़के पर आवर आदि गुस्से से घर के दरवाजे की तरफ देख रहा होता है तभी सामने से एक लड़का आता है

तै मैं कब से पुकार रहा हुईं तुम बोल क्यू नहीं रही थी ...... आवर ये कौन है आप का भाई .......... आदि को देखते हुआ लड़का कहता है वही आदि बस लड़के को गुस्से से देख कर फिर अपने चहरे पर एक मुस्कान ला देता है

आदि को अंदर से बहुत गुस्सा आता है लड़के पे एक तो औरत के साथ कुछ करने से पहले आ गया था आवर ऊपर से आदि को उस औरत का भाई भी बना दिया था

हां बीटा ये दूर का भाई hi है जो अब इसी गाँव मैं रहने वाला है मगर तुम कौन हो मैं तुमको नहीं पहचानी हुईं ........ औरत लड़के को देखती हुई कहती है

तै आखिर तू मुझे भूल hi गयी न मैं वही आप का नटखट सा बदमाश बीटा हुईं जिसके घर आने पर पहले आप मुझे खाना खिलाती थी ...... लड़का कहता है

तू अर्जुन है ....... अपने मुंह पर हाँथ रख कर औरत कहती है आवर जैसे hi अर्जुन मुस्कुराते हुआ सर हिलता है औरत झट से अर्जुन को गले लगा लेती है

मैं तुझे कभी नहीं भूली बीटा मगर तू सहर जाकर अपनी तै को ज़रूर भूल गया ....... औरत अर्जुन के पीठ पर हाँथ फेरते हुआ बोलती है

वही औरत के गले लगे हुआ देख कर आदि आवर गुस्सा होता रहता है अर्जुन पर आवर अपनी हाँथ को मुट्ठी बना लेता है

वही औरत बिना कोई शर्म के अर्जुन को अपने साइन से लगाई हुई होती है औरत की दोनों बड़ी बड़ी चुकी अर्जुन के साइन मैं दबी हुई होती है आवर अर्जुन का हाँथ औरत के पीठ पर होती है जो पीठ थोड़ा नंगी होती है आवर अर्जुन पकड़ कर गले लगा हुआ होता है

औरत आवर अर्जुन कभी देर तक गले लगे हुआ होते है औरत के खड़े होने से औरत की गदराई हुई गांड आदि के सामने होती है जो आदि औरत के गांड देख कर गर्म होने लगता है आवर आदि का लैंड पंत मैं खड़ा होने लगता है अब आदि के आँखों मैं गुस्सा आवर हवस दोनों hi होते है

वही आदि की नज़र फिर अर्जुन पर पड़ता है अर्जुन देखने से थोड़ा दूसरे लड़कों से अलग लगता है जो अर्जुन का मज़बूत जिस्म को देख कर आदि थोड़ा डरने लगता है ये सोच कर के वह औरत कुछ बता न दे अर्जुन को इस लिए आदि अभी यह से जाना hi ठीक समझता है

ठीक है अभी मैं चलता हुईं फिर कभी आऊंगा सुनीता जी ...... आदि अर्जुन को देखता हुआ कहता है

मगर औरत कोई जवाब नहीं देती है जो आदि मन मैं औरत को गली देते हुआ घर से निकल जाता है

तै पूजा दीदी नहीं है क्या घर पे पूजा दीदी भी बहुत गुस्सा होंगी मुझपे ....... अर्जुन कहता है

सही बोल रहा है वह तो मुझसे भी कही जयादा गुस्सा है तुझपे क्यू की तू उसकी शादी मैं भी नहीं आया था तुझे बहुत याद करती थी रक्षाबंधन पैर आवर उसकी शादी के वक़्त भी वह तेरे लिए बहुत रोटी थी ....... औरत कहती है खुद अपनी आंसू पोछने लगती है उन लम्हों की याद कर के कैसे उसकी पूजा बेटी रोटी थी

क्या पूजा दीदी की शादी भी हो गयी ओह्ह No फिर तो पूजा दीदी बहुत hi गुस्सा होंगी

ताई प्लीज मुझे बच्चा लेना पूजा दीदी से मुझे भी पूजा दीदी की याद आती थी मगर मैं यह नहीं आ पता था ........ अर्जुन भी थोड़ा दुखी होकर कहता है

क्यू के औरत को आंसू पोछते हुआ देख कर अर्जुन समझ जाता है के पूजा दीदी कितनी दुखी होंगी

माँ देखो पारी फिर पता नहीं क्यू रोने लगी है ....... एक लड़की आते हुआ बोलती है जो लड़की की गॉड मैं एक छोटी लड़की होती है जो रो रही होती है

ला दे मैं देखती हुईं औरत पास जाकर बोलती है आवर छोटी लड़की को ले लेती है

पूजा डीई ........ लड़की जैसे hi पास आती है अर्जुन बोल पड़ता है

अर्जुन ....... लड़की उसी जगह पर कड़ी रह कर पूछती है

वही अर्जुन मैं सर हिला देता है अर्जुन जैसे hi सर हिलता है पूजा दीदी भाग कर आती है आवर अर्जुन के गले लग जाती है

पूजा दीदी बस कुछ सेक् hi गले लगती है फिर अर्जुन से अलग हो जाती है आवर अलग होते hi अर्जुन को तप्पड़ पर तप्पड़ मरने लगती है

अभी आई तुझे मेरी याद बोल क्यू आया है फिर से मुझे रोलने के लिया बोलता क्यू नहीं है ...... पूजा दीदी रोटी हुई मरती रहती है आवर बोल रही होती

वही पूजा दीदी को देख कर अर्जुन को अपनी गलती पे बहुत अफ़सोस होती है अर्जुन बस खड़ा रहता है

पूजा दीदी कुछ देर मरती रहती है फिर अर्जुन से दूर चली जाती है जा तू मेरे घर से तेरी पूजा दीदी अब यह नहीं रहती है ......... दूर जाकर पूजा दीदी कहती है

पूजा क्या बोल रही है तू ....... पूजा दीदी की माँ कहती है तभी अर्जुन कुछ बोलने से मन कर देता है

पूजा दीदी की बात सुन कर अर्जुन भी बहुत दुखी होता है आवर घर से जाने लगता है

अर्जुन जैसे hi तै के बगल से निकलता है तभी रुक जाता है आवर अर्जुन के चहरे पर मुस्कान आ जाता है

क्यू के अर्जुन का सरत का कोलर पारी अपनी नन्ही हांथों से पदक ली होती है आवर अर्जुन को देख कर मुस्कुरा रही होती

अर्जुन झट से पारी को गॉड मैं ले लेता है आवर पारी के गलों को चूमने लगता है

वही पारी को हस्ते हुआ सुन कर पूजा दीदी पलट कर देखती है तो हैरान हो जाती है जो लड़की अभी थोड़ी देर पहले कितनी रो रही थी मगर अर्जुन के गॉड मैं जाते hi हस्स रही है

देख तेरी बेटी अपने मां के लिए रो रही थी अपने मां के गॉड मैं जाते hi हसने लगी अब अर्जुन को मांफ भी करदे मैं जानती हुईं तू अर्जुन से कभी गुस्सा नहीं हो सकती है आवर तू अर्जुन से कितना प्यार करती है पारी बता रही है तू सिर्फ हर वक़्त अर्जुन को याद करती रहती होगी जो पारी को अहसास होता होगा आवर देख अर्जुन के घर आते hi ये रोना भी सुरु करदी थी अपने मां से मिलने के लिया ....... पूजा दीदी की माँ कहती है

पूजा दीदी हस्ती हुई आती है आवर फिर से अर्जुन को गले लगा लेती है

फिर कभी मुझे छोड़ कर नहीं जायेगा मेरी सर की कसम खा फिर मांफ करुँगी ...... पूजा दीदी अलग होकर बोलती है

नहीं आप को छोड़ का कभी दूर नहीं जाऊंगा मगर मैं आप की कसम नहीं खाऊंगा अगर आप को अपने भाई पर विश्वास है तो मान लीजिये ........ अर्जुन कहता है

मुझे अपने भाई पर यकीन है ..... पूजा दीदी कहती है आवर फिर से अर्जुन को गले लगा लेती है

माँ आज मीठा बनाते है अर्जुन को मीठा बहुत पसंद है ...... पूजा दीदी कहती है

दीदी मैं खाना नहीं खाऊंगा घर पर माँ इंतज़ार कर रही होंगी ..... अर्जुन कहता है

नहीं खाना खा कर hi जाना चल अपनी भांजी के साथ खेल मैं जल्दी से खाना बना देती हुईं ..... पूजा दीदी कहती है

अर्जुन भी फिर मन नहीं करता है आवर पारी के साथ खेलने लगता है

बहुत रुलाया है तुमने मुझे भाई लगता है मैंने तुझे बचपन मैं जयादा प्यार नहीं दिया जो तू मुझे छोड़ कर चला गया मगर अब मैं तुझे इतना प्यार दूंगी की तू मुझे कभी छोड़ कर नहीं जायेगा

मैं तुझे गीता आवर अंजलि से भी कही जयादा प्यार दूंगी ..... पूजा खाना बनाते हुआ hi मन मैं सोचती है

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अपडेट ... 24

अर्जुन रूम मैं पारी के साथ खेल रहा होता है कुछ देर के बाद पूजा दीदी खाना लेकर रूम मैं आ जाती है

अर्जुन पारी को मुझे दे आवर चल खाना खा ....... पूजा दीदी कहती है

पूजा दीदी आप ने खाना खा लिया क्या ........ अर्जुन जब एक hi पलेट देखता है तो कहता है

मगर पलट मैं खाना देख कर अर्जुन के मुंह मैं पानी आने लगते है

मैं अभी नहीं कहूँगी पारी के सोने के बाद hi खाउंगी चल तू खाना खा ...... पूजा दीदी कहती है

दीदी आप भी साथ खाइये नहीं तो मैं भी नहीं खाऊंगा .... अर्जुन कहता है

गुड़िया देख तेरी माँ ने कितना अच्छा खाना बनाया है तेरे इस मां को खीर पूरी बहुत पसंद है मगर मुझे नहीं लगता तेरा मां खीर पूरी खा पायेगा ...... अर्जुन मुंह बना कर कहता है

वही पूजा दीदी मुस्कुरा देती है

तू अभी भी ज़िद्दी hi है ठीक है मैं आवर लेकर आती हुईं .... पूजा दीदी कहती है आवर अपने लिए भी खाना लेन चली जाती है

अर्जुन के कहने पर पूजा दीदी भी अपने लिए भी खाना लेकर आ जाती है आवर अर्जुन वाले पलेट मैं रख देती है फिर पारी को अपनी गॉड मैं लेकर खाने लगती है

वाओ दी आप पहले से भी अच्छा खीर पूरी बनाने लगी पहले तो आप पूरी जला देती थी आवर तै फिर बहुत बोलती थी आप को ....... अर्जुन कहते हुआ कहता है . आवर हसने लगता है

देख है मत नहीं तो मरूंगी उस वक़्त तो मैं छोटी थी आवर खाना बनाना सिख रही थी तो जल जाती थी समझा आया बड़ा हसने वाला ........ पूजा दीदी मुंह बना कर कहती है

तभी पारी रोने लगती है पारी के रट hi पूजा दीदी अपनी साड़ी के पल्लू अपने साइन से निचे गिरा देती है आवर बलाउज के साथ ब्रा भी ऊपर कर के अपने एक चुकी निकल लेती है आवर फिर एक चुकी को पकड़ के पारी के मुंह मैं दे देती है आवर फिर पल्लू को साइन पर रख लेती है तभी पूजा दीदी की नज़र अर्जुन पे पड़ती है आवर पूजा थोड़ी शर्मा जाती है

वही अर्जुन अपने हाँथ मैं एक निवाला लिए हुआ पारी को दूध पिटे हुआ पूजा की चुकी को घर रहा होता है

क्या हुआ खाना खा पारी को भी भूख लगी है उसे भी तो खाना चाहिए ....... पूजा शर्मा कर कहती है आवर अपनी पल्लू से आवर ठीक से पारी के ऊपर दाल देती है ताकि चुकी अर्जुन को न दिखे

वही पूजा दीदी की बात सुन कर अर्जुन भी खाना खाने लगता है मगर अर्जुन की नज़र बार बार पूजा दीदी की चुकी की तरफ जाता है

अर्जुन पकड़ इसे मैं पलेट रख कर आती हुईं खाने के बाद पूजा कहती है तो अर्जुन पारी को फिर से गॉड मैं ले लेता है .. तो पूजा पलेट उठा कर रूम से चली जाती है

अर्जुन जब पारी को गॉड मैं लेता है आवर पारी के हस्ते हुआ चहरे को देख कर अर्जुन पारी चूमने लगता है तभी अर्जुन के मुंह मैं बहुत मीठे से अहसास होता है जो अर्जुन का जिस्म सनसना जाता है

मीठे का अहसास होते hi अर्जुन पारी को देखने लगता है आवर जब अर्जुन की नज़र पारी के मुंह पे पड़ता है तो देखता है पारी के मुंह पर दूध लगा हुआ है पारी के मुंह पर दूध देख कर अर्जुन समझ जाता है पारी की मुंह पर किसका दूध लगा हुआ है अर्जुन को दूध का स्वाद बहुत अच्छा लगा हुआ होता है

अर्जुन एक ऊँगली से पारी के मुंह पर लगी दूध को पोछते है आवर वह ऊँगली अपने मुंह मैं दाल देता है

दूध लगी हुई ऊँगली अर्जुन मुंह मैं जैसे hi डालता है अर्जुन को फिर से वही मीठे स्वाद आती है अर्जुन अपनी ऊँगली मुंह मैं चूसने लगता है

वाओ कितना मीठा है पूजा दी की दूध पारी तो बहुत मस्ती मैं पीती होगी कास पूजा दी मुझे भी पीला देती

सेल क्या सोच रहा है भूल मत पूजा दी तेरी बहन है भला कोई भाई अपनी बहन की दूध पि सकता है क्या ये गलत है क्या सोचेंगी पूजा दी तेरे बारे मैं ........ अर्जुन सोचते हुआ अपनी ऊँगली मुंह से निकल लेता है

बहुत मीठा है न भाई आवर भी पीना है .... पूजा दीदी रूम मैं आती हुई बोलती है

पूजा दीदी को बोलते हुआ सुन कर अर्जुन हड़बड़ा जाता है आवर फिर अपनी भींगी ऊँगली को अपने कपडे मैं पोछने लगता है

ककककया बोली दी ....... अर्जुन थोड़ा डरते हुआ कहता है

क्यू के अर्जुन को लगता है पूजा दीदी ने देख लिया है पारी के मुंह से दूध को छत्ते हुआ जो अर्जुन को थोड़ा दर भी लगने लगता है जो अर्जुन अपनी नज़ारे भी चुराने लगता है

अरे बुद्धू मैं बोल रही हुईं आवर भी खीर कहानी है तुझे उसमे दूध भी बहुत जयादा है तो पिने के लिए बोल रही हुईं ........ पूजा दीदी अर्जुन को देखती हुई मुस्कुरा कर कहती है

दीदी आज बहुत खा लिया अब मैं घर जाता हुईं ममी माँ मेरा इंतज़ार कर रही होंगी ....... अर्जुन बोलते हुआ बीएड से उतर जाता है

ठीक है कल फिर आना बहुत साडी बाते करनी है मुझे समझा ........ पूजा दीदी बोलती हुईं अभी भी मुस्कुरा रही होती आवर थोड़ी शर्म भी होती है पूजा दीदी के चहरे पर

अर्जुन हां बोल कर निकल जाता है घर से

अर्जुन को जाते हुआ देख कर पूजा दीदी खुद शर्मा रही होती है आवर कब उनका हाँथ चुकी पर चला जाता है पूजा दीदी को भी समझ नहीं आता है

अर्जुन कैसा लगा अपनी पूजा दीदी की दूध चाट कर क्या तुझे पीना है बोल तेरी ये दीदी पीला देगी ....... पूजा मन मैं सोचती हुई अपनी चुकी दबा देती है

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साहब ये आप क्या कर रहे है छोड़िये मुझे ये गलत है मैं ये सब नहीं कर सकती हुईं मुझे घर जाना है घर पर मेरे बच्चे इंतज़ार कर रहे होंगे ....... एक औरत कहती है

जो अभी आदि की रूम मैं होती है आवर आदि उस औरत के चुकी को पकड़ कर मसल रहा होता है

देख आज मैं बहुत तड़प रहा हुईं उस साली की भरी जवानी देख कर मेरा लैंड बहुत दर्द कर रहा है एक बार अपनी छूट मैं लेकर ठंडा करदे फिर चली जाना उसके बदले जो भी मांगेगी मैं तुझे दूंगा ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह तू भी बड़ी मस्त गदराई हुई है लगता है तू भी तड़प रही है लैंड के लिए हां बोल दे मैं तेरी छूट की गर्मी निकल दूंगा ......... कहता है

आदि उस औरत की चुकी ज़ोर से दबाते रहता है आवर अपना लैंड उस औरत के गांड पर रगड़ रहा होता है आवर वह औरत दूर होने की कोशिश कर रही होती है

साहब मुझे कुछ नहीं चाहिए मुझे अपनी इज़्ज़त नहीं बेचैनी है साहब मुझे छोड़ दीजिये मालकिन भी आ जाएँगी भगवन के लिए छोड़ दीजिये

ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह आआआ स्स्स्सस्स्स्स नहीं हहहहहह ससससस ह्ह्हह्हहननन

औरत अभी बोल hi रही होती है के आदि अपना हाँथ से उस औरत की छूट पकड़ कर मसलने लगता है जो वह औरत सिसकियाँ लेकर तड़पने लगती है

मुझे पता तू बहुत प्यासी है जो छूट छूटे hi तड़पने लगी है तेरी छूट को भी लैंड की ज़रूरत है डालने दे मेरा लैंड को मेरा लैंड बड़ा भी है एक बार छूट मैं ले लेगी तो मुझसे छोड़वाने के लिए पागल हो जाएगी दुबारा से

hhhhhhhhhh क्या जवानी है तेरी लगती hi नहीं तू जवान बच्चों की माँ है तेरी ये गांड ह्ह्हह्ह्ह्ह मेरा लैंड को दबा रहा है

तू माँ की फिकर मत कर वह अभी पूजा वाले रूम मैं पूजा कर रही होंगी अभी नहीं आने वाली वह बस एक बार छोड़ लेने दे

मैं भज इतना किसी औरत से नहीं कहता हुईं छोड़ने के लिए औरत खुद छोड़वाने के लिए मेरे पास आती है मगर मैं आज बहुत गरम हो गया हुईं आवर मेरा लैंड भी दर्द कर रहा है छोड़ लेने दे ....... आदि कहता

है ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह स्स्सस्स्स्स अअअअअ ऊऊऊओ हहहहह आआआ सससससस हहहहहह

औरत अब सिसकने लगती है आदि के छूट मसलने से वह अपनी गांड पीछे करने लगती है जो आदि के लैंड से दबने लगते है मगर औरत फिर भी आदि को मन कर रही होती है

मुझे लग रहा है तेरी छूट पर बल भी नहीं है मज़ा आएगा तुझे छोड़ कर तेरी छूट को चाट के hi पानी निकल दूंगा बड़ी मस्त बुर है तेरी जो पहली हुआ भी है ....... आदि औरत की छूट को आवर ज़ोर ज़ोर से मसलने हुआ कहता है

औरत भी गर्म होने लगाती है आदि के छूट मसलने से मगर औरत की आँखों से आंसू भी निकल रहे होते है

सांता सांता कहा है तू आवाज़ आने से आदि घबरा जाता है

आवाज़ को सुन कर आदि झट से औरत को छोड़ देता है आवर जल्दी से बाथरूम मैं भाग जाता है आवर वह औरत भी जल्दी से रूम से निकल जाती है

बहार आकर जल्दी से आदि के माँ के पास जाती है जो अभी पूजा वाले रूम के गेट पर होती है

सांता ज़रा पानी लेकर दे मुझे .... आदि की माँ कहती है

औरत को आदि की माँ एक देवी की तरह लगती है जो आज उसकी इज़्ज़त बच गयी होती है औरत थोड़ी खुश होते हुआ पानी लेन चली जाती है

वही बाथरूम मैं आदि अपना लैंड हिला रहा होता है ... क्या हो रहा है मेरा साथ

वह साला वह लड़का आकर रंडी सुनीता के सह कुछ करने नहीं दिया ........... आवर यह माता जी की वजह से ये साली भी बच गयी साला जब से इस गाँव मैं आया हुईं किसी को छोड़ नहीं पाया हुईं मगर मैं हर नहीं मानूंगा सुनीता को तो छोड़ कर hi रहूँगा चाहे ज़बरजस्ती क्यू न छोड़ना पड़े साली को ...... हहहहह सेल बर्दाश्त कर छूट मिलेगी तुझे ........... आदि अपना लैंड हिलाते हुआ कहता है

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यह घर पर सभी परेशां होते है मगर आवर सबसे जायदा परेशां राखी देवी जी होती है वह सोच सोच रो रही होती है की सायद बात करने की वजह से अर्जुन गुस्सा होकर सहर चला गया है मगर किसी से कुछ कहती नहीं है बस हवेली के बहार घूम रही होती है आवर गाँव के रस्ते मैं देख रही होती है अर्जुन आ रहा है की नहीं मगर अर्जुन नहीं दिख रहा होता है

वही आँचल भी कॉल पर कॉल कर रही होती है

अर्जुन को बाइक चलते हुआ पता तो चल जाता है किसी का कॉल आ रहा है मगर बाइक चला रहा होता है तो कॉल नहीं उठता है आवर सोचता है घर जाने पर देखता हुईं

अर्जुन कुछ देर मैं अपने घर के गेट पार कर देता है बाइक की आवाज़ सुन कर hi आँचल भाग कर बहार आती है तो अर्जुन को देख कर थोड़ी चैन की शंश लेती है जो कब से परेशां होती है

अर्जुन कहा चला गया था इतने वक़्त के बाद आ रहा है ......... आँचल पास आकर पूछती है

माँ मैं पूजा दीदी के घर पर गया था उनसे मिलने के लिए आवर पूजा दीदी ने रोक ली थी ....... अर्जुन बाइक खड़ा करते हुआ कहता है

ठीक है बीटा चल हाँथ मुंह धोकर आ मैं खाना लगाती हुईं ...... आँचल कहती है

माँ मैं खाना खा कर hi आ रहा हुईं पूजा दीदी ने खिला कर hi भेजा है इस लिए लेट हो गया था उन्होंने के ज़िद्द किया था तो मैं मन न कर सका उनेह ...... अर्जुन कहता है

मेरा प्यारा बीटा अपने चाहने वालों का कितना ख्याल रखता है ठीक है जा आराम कर ... आँचल कहती है

अर्जुन वह से रूम मैं चला जाता है

अर्जुन जब रूम मैं जाता है तो देखता है गीता दीदी आवर अंजलि दीदी बीएड पर बैठी हुई है अर्जुन भी जाकर बीएड पर गिर जाता है

अर्जुन बीएड पर गिर कर लेट तो जाता है मगर उसकी दोनों दीदी कुछ भी बात नहीं करती है वह बस दूसरी तरफ मुंह कर के लेती हुई किताब देख रही होती है

गीता आवर अंजलि के कुछ नहीं बोलने पर अर्जुन को बहुत अजीब लगता है जो बहन अर्जुन को बस देखते hi खुश हो जाती थी आवर बहुत से बाते करती थी मगर अभी कुछ बोल रही आवर नहीं देख रही है जो अर्जुन थोड़ा दुखी भी हो जाता है

गीता दीदी क्या हुआ आप मुझसे नाराज़ है मगर मैंने तो कुछ किया भी नहीं है दीदी क्या हुआ .......... अर्जुन गीता के पीठ पर मुंह रख कर कहता है

पीठ पर मुंह रखने से गीता तो गुदगुदी होती है आवर गीता थोड़ी सिसक जाती है मगर कुछ बोलती है नहीं

गीता दीदी प्लीज बोलिये न क्या हुआ ....... अर्जुन फिर होता है आवर इस बार अपनी गीता दीदी को अपने तरफ घुमा देता है आवर गीता के हाँथ से किताब छीन लेता है

अर्जुन किताब दे मुझे पढ़ना है ....... गीता कहती है गीता थोड़ी गुस्से से कहती है

पहले बताइये आप मुझसे गुस्सा क्यू है फिर मैं किताब दूंगा ....... अर्जुन कहता है

किताब दे मैं गुस्सा नहीं हुईं जल्दी दे मुझे पढ़ने के बाद सोना भी है ........ गीता कहती है

ओह्ह कितना भाव खा रही है अब जल्दी से मान जाइये फिर अर्जुन मेरे पास भी आएगा तब देखना मैं क्या करने को बोलती हुईं अर्जुन से

आवर आज तो अर्जुन मन भी नहीं करेगा आआआआहहहहह कैसा लगेगा जब अर्जुन मेरे साथ करने के लिए मान जायेगा ....... अंजलि किताब पढ़ते हुआ सोचती है आवर खुद hi शर्मा जाती है

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अबे तू सच मैं झंडों hi है क्या तुझे बोलै मत पढ़ फिर कहे पढ़ रहा है आवर तुझे लगता है कभी पूरी नहीं होगी तो मत पढ़ तुझे पढ़ने के लिए नहीं बुला रहा मैं

तुझे लगता है मैं पेज पर पेज भर रहा हुईं तो इस स्टोरी को तू जल्दी से पूरा करदे है

आवर तेरे मैं पूरा करने का डैम नहीं है तो :बकवास: कर आवर अगली बार कोई कमैंट्स मत करना मेरी स्टोरी पर

आवर एक बात ये मेरी स्टोरी है मैं कितने सल्ल मैं भी पूरा करू स्टोरी के लिए तो एक भी कमैंट्स नहीं किया मगर बकवास के लिए कमैंट्स पर कमैंट्स कर रहा है :बुटकिक:
 
थैंक्स बीआरओ

:अप्प्रोवे: पूजा अपनी प्यार साबित करने के लिए कुछ भी करेगी क्यू के उसकी नज़र मैं लगता है अर्जुन उसे भूल गया है आवर पूजा अर्जुन को बचपन से भाई मान चुकी है

सही है आदि बहुत बुराई कर चूका है जो अब आदि को उसकी सजा मिलेगी धीरे धीरे तब आदि को समझ मैं आएगा जब खुद के साथ आएसा होता है तो कैसा लगता है

राखी देवी अब अर्जुन को खोना नहीं चाहती ये सच तो है मगर

क्या अर्जुन सब कुछ भूल कर उनके पास आ पायेगा देखते है भाई

आगे देखते है बीआरओ गीता आवर अंजलि क्या करने वाली है
 
अपडेट ..... 25

दीदी क्या हुआ आप इतना गुस्सा क्यू हो रही है मैंने तो कुछ किया भी नहीं है ....... अर्जुन थोड़ा दुखी सा मुंह बना कर गीता से कहता है

अर्जुन के मायूसी चेहरा को देख कर गीता भी किताब को रख देती है

तुम कहा गए थे हम कब से परेशां है आवर अंजलि तो रोने भी लगी थी ये सोच कर के तू सहर चला गया है आवर तुम फ़ोन भी नहीं उठा रहा था किसी का ........ गीता कहती है

दीदी मैं फ़ोन पे धयान नहीं दिया था ... वह पारी के साथ खेलने के चक्कर मैं प्लीज मुझे मांफ कर दीजिये ....... अर्जुन मुंह बना कर hi कहता है

अर्जुन का चेहरा देख कर गीता को अच्छा नहीं लगता है

ओह तो तुम पूजा के घर गया था ..... चल ठीक है पूजा के घर गया था तो मैं मांफ कर सकती हुईं मगर मेरी एक बात माननी पड़ेगी ...... गीता कहती है

सच मैं आप ने मांफ कर दिया ठीक है मैं आप की एक नहीं दो बात भी मान सकता हुईं ..... अर्जुन खुश होकर कहता है

ठीक है तुम आज मेरे साथ सोयेगा जल्दी से कपडे बदल कर मेरे रूम मैं आजा ...... गीता कहती है आवर उठ कर चली जाती है

अंजलि दीदी आप भी इस बार मुझे मांफ कर दीजिये फिर मैं आप का फ़ोन रिंग होने से पहले hi उठा लूंगा प्लीज प्लीज दीदी ..... अर्जुन अंजलि के कमर पकड़ते हुआ कहता है

वही अंजलि तो मन hi मन मैं मुस्कुरा देती है

गीता दीदी की बात मन न तो मेरी भी बात माननी पड़ेगी तुझे तभी मैं भी मांफ करुँगी ....... अंजलि कहती है

ठीक है बोलिये क्या करना पड़ेगा मुझे जो मुझे आप मांफ करेगी .... अर्जुन कहता है

आयी नहीं पहले ममी माँ की कसम खा तभी बताउंगी ....... अंजलि कहती है

वही अर्जुन सोच मैं पद जाता है कौन सी बात है जो दीदी माँ की कसम खिला रही है अर्जुन सोच मैं पद जाता है

क्यू की अगर अर्जुन ने आँचल की कसम खाया तो फिर वह अंजलि दीदी की बात ताल नहीं सकता है इस लिए अर्जुन सोच मैं पद जाता है

मैं जानती हुईं अगर तुमने ममी की कसम खा लिया तो फिर मेरी किश 😘 पक्की है ..... सोच कर अंजलि दिल मैं मुस्कुरा देती है

अर्जुन कुछ देर सोचता है फिर ममी माँ की कसम खा लेता है

अर्जुन के कसम कहते hi अंजलि दिल मैं hi उछाल पड़ती है

ठीक है तो अब तुमने ममी माँ की कसम खाया है _ तो जो मैं बोलूंगी वह करना है तुझे बोल करेगा न ...... अंजलि दिल मैं खुश होते हुआ बोलती है

बेचारा अर्जुन भी हां मैं सर हिला देता है

ओह मेरा प्यारा भाई ममी माँ से कितना प्यार करता है चल अब अपनी दीदी को भी प्यार दे दे अपनी दीदी की इन होंठों को चुम कर ..... अंजलि अपनी चहरे को अर्जुन की तरफ करती हुई कहती है आवर अपनी होंठ अर्जुन के आगे कर लेती है आवर दोनों होंठों को चुम्मी की तरह कर देती है

अंजलि दीदी की हरकत देख कर तो अर्जुन एक वक़्त के लिए पीछे hi हैट जाता है

दीदी क्या बोल रही है आवर आप ये क्या कर रही है ..... अर्जुन खुद पीछे हटते हुआ कहता है

अर्जुन को पीछे हटते हुआ देख कर अंजलि बस अर्जुन को देखने लगती है जो बहुत hi अजीब तरह से देख रहा होता है .... अंजलि दीदी अपना सर पीछे कर लेती है थोड़ी मायूसी से जो अर्जुन को अच्छा नहीं लगता है

अर्जुन देख अभी ममी माँ की कसम खाया है तुमने इस लिए जो मैं कहूँगी करना पड़ेगा नहीं तो मैं तुझसे बात नहीं करुँगी ...... अंजलि बोल कर अपना मुंह फेर लेती है

अर्जुन अब फेर मैं पर जाता है एक तरफ अर्जुन ने ममी माँ की कसम भी खाया होता है आवर उसकी अंजलि दीदी नाराज़ भी होने लगाती है

दीदी ये हालत है हम दोनों भाई बहन है आप आएसा कैसे कर सकती है ..... अर्जुन मायूसी से कहता है

अर्जुन मुझे किश 😘 कर के ये पता करना है कैसा लगता है किश 😘 कर के ..... मेरी कई सहेलियां किश 😘 कर चुकी है सोल्लगे मैं लड़कों के साथ आवर वह बाते करती है किश 😘 करते हुआ अच्छा लगता है मेरा भी दिल करता है किश 😘 करने की मगर मैं नहीं करती हुईं क्यू की मुझे किसी लड़के पर यकीन नहीं है पता नहीं वह क्या क्या मेरे साथ करने लगेंगे इस लिए तुझसे बोल रही हुईं अगर तुझे किश 😘 किया तो मुझे पता भी चल जायेगा कैसा लगता है किश 😘 कर के

अगर तेरे मन नहीं है तो जाने दे .... अंजलि थोड़ी उदास होकर बोलती है

अपनी अंजलि दीदी की बात सुन कर अर्जुन को उन लड़कियों पर गुस्सा आता मगर अंजलि दीदी की अभी मायूस चहरे देख कर अर्जुन भी ठीक है बोल देता है

अर्जुन के हां बोलते hi अंजलि दीदी खुश हो जाती है

एक बात तो है मेरे अर्जुन मैं वह कभी हमेह दुखी नहीं देख सकता है आज मैं भी किश 😘 कर के देख hi लेती हुईं कैसा लगता है ...... अंजलि दीदी मन मैं सोचती है

अर्जुन हां तो बोल देता है मगर अर्जुन का जिस्म कैंप जाता है आवर अर्जुन अंजलि को देखने लगता है

अंजलि धीरे धीरे अर्जुन के करीब आती है आवर अंजलि अर्जुन को देखते हुआ अपनी होंठ को अर्जुन के होंठ के सामने कर देती है

अब अर्जुन आवर अंजलि की होंठ एक दूसरे के सामने होती है अंजलि पहले अर्जुन के गर्दन को दोनों हाथों से पकड़ती है आवर फिर अपनी होंठ अर्जुन के होंठ से मिला देती है

अपनी अंजलि दीदी की होंठों का अहसास पते hi अर्जुन का एक हाँथ अंजलि के कमर पर चला जाता है ... कमर पर अर्जुन का हाँथ का अहसास पते hi अंजलि सिसक सी जाती है मगर अपनी होंठ को अलग नहीं करती है

अभी बस कुछ सेक् hi होता है के अर्जुन अलग हो जाता है आवर अंजलि दीदी को देखने लगता है

वही अंजलि भी बड़ी हैरानी से अर्जुन को देख रही होती है

अर्जुन फिर कुछ बोले hi वह से चला जाता है

वाओ कितना अच्छा लग रहा था अर्जुन के होंठ चुम कर अंजलि मन मैं सोचती है आवर वह भी बीएड से उतर कर बाथरूम की तरफ भगति है

अंजलि बाथरूम मैं जाकर अपनी लूजर निचे करती है आवर फिर पेंटी निचे कर बैठ जाती है निचे बैठते hi अंजलि की छूट से surrrrrrrrrr से आवाज़ आती है

अंजलि की पिशाब निकलते hi अंजलि सिसक सी जाती है आवर अंजलि मस्ती मैं अपनी आँखे बंद कर लेती है

hhhhhhhhhhhhh मेरी छूट इतनी गर्म क्यू हो रही है क्या लड़कों के किश 😘 करते हुआ जिस्म मैं इतनी गर्मी होती है ........ अंजलि पिशाब करती हुई सोचती है आवर अंजलि की हाँथ छूट पर चली जाती है

हे ये क्या मेरी छूट से तो सोच कर अंजलि शर्मा जाती है फिर अंजलि अपनी छूट को धोती है आवर बीएड पर आकर गिर जाती है

वही गीता रूम मैं आकर hi अर्जुन बीएड पर लेट गया होता है आवर अंजलि के किश 😘 के बारे मैं सोच रहा होता है आवर अपने हाँथ से लैंड को दबाने की कोशिश कर रहा होता जो अब खड़ा हो गया होता है

अर्जुन अभी अपना लैंड दबाने की कोशिश कर hi रहा होता है की तभी बाथरूम से अपनी गीता दीदी को निकलते हुआ देख कर कर अर्जुन का लैंड आवर टाइट होने लग जाता है


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अर्जुन अपनी गीता दीदी को देखता है जो बाथरूम के पास कड़ी पिंक कलर के के नाईट ड्रेस मैं निकल रही होती है आवर मुस्कुरा कर खुद मैं शर्मा रही होती

अर्जुन जैसे hi धयान से अपनी गीता दीदी के नाईट ड्रेस को देखता है अर्जुन की आँखें बड़ी हो जाती है आवर अर्जुन का लैंड फनफनाने लगता है

अर्जुन को यकीन हो जाता है की उसकी दीदी अंदर ब्रा पेंटी नहीं पहनी हुई है

वही गीता जैसे hi बाथरूम से निकलती है बीएड पर अर्जुन को देख कर खुद hi शर्मा जाती है आवर अपनी नज़रे निचे किये हुआ वह धीरे धीरे चलते हुआ आकर बीएड पर बैठ जाती है

अर्जुन क्या सोच रहा होगा अभी मेरे बारे मैं ये गुड़िया भी न छोडूंगी नहीं उसे मैं बस मेरी समय आ जाये ........ गीता बीएड पर बैठी हुई सोचती है

वही अर्जुन कभी अपनी गीता दीदी की जिस्म को देख रहा था तो कभी शर्मा कर नज़ारे चुरा रहा होता है अर्जुन का लैंड भी दर्द करने लगता है

अर्जुन बीएड से उठ कर बाथरूम मैं चला जाता है

अर्जुन बाथरूम मैं जाते hi अपना लैंड निकल कर पिशाब करने लग जाता है अर्जुन पिशाब कर रहा होता है तो अर्जुन को थोड़ा शांति मिल रहा होता है

ये गीता दीदी आवर अंजलि दीदी को क्या हो गया है अंजलि दीदी आज अचानक मेरी होंठों पर चूमने को क्यू बोली अंजलि दीदी कैसे मेरी होंठों को चुम रही थी आवर उनकी जिस्म भी कितनी गर्म हो रही थी क्या करना छह रही थी अंजलि दीदी मेरे साथ ..... आवर अभी गीता दीदी कैसी कपडे पहनी हुई है दीदी की दूध दिख रहा था कितनी गोरी थी दीदी की दूध

अर्जुन पिशाब करते हुआ गीता की जिस्म को याद कर के लैंड पर हाँथ रख कर हिलने लगता है

अर्जुन जब लैंड हिला रहा होता है तभी अर्जुन को अपनी गीता दीदी के कपडे पर नज़र पड़ती है जो सूत सलवार तंगी हुई होती है कपडे देख कर अर्जुन समझ जाता है ये वही कपडे है जो अभी थोड़ी देर पहले दीदी पहनी हुई थी

अर्जुन लैंड हिलाते हुआ चल कर गीता दीदी के कपडे के पास hi पहुँच जाता है आवर गीता की सलवार को सूंघने लगता है गीता दीदी के कपडे से एक अजीब सी खुशबु अर्जुन के नाक मैं जाता है जिससे अर्जुन अपनी आँखे मस्ती मैं बंद कर लेता है

अर्जुन अपनी दीदी की कपडे को सूंघ hi रहा होता है तभी कपडे से ब्रा आवर पेंटी निचे गिर जाते है

ब्रा तो निचे गिर जाता है मगर पेंटी अर्जुन के लैंड पर लटक जाता अपनी गीता दीदी की पेंटी लैंड पर गिरते hi अर्जुन का लैंड फनफना जाता है

अब अर्जुन बहुत गर्म हो गया होता है जो अपनी गीता दीदी की पेंटी को पकड़ कर लैंड उसमे दाल देता है

अब अर्जुन का लैंड ठीक गीता दीदी की छूट की छूट वाली जगह पर होती है अर्जुन आँखे बंद कर के अपना लैंड ज़ोर ज़ोर से हिलने लगी जाता है

वही अर्जुन के बाथरूम मैं जाते hi अंजलि रूम मैं आती है आवर अंजलि की आँखें बड़ी हो जाती है बीएड पर बैठी हुई गीता दीदी को देख कर जो बीएड पर बैठ कर शर्मा रही होती है


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वाओ दीदी आप बहुत खूबसूरत लग रही है आप की ये बूब्स भी कितने प्यारे लग रहे है

वाओ दीदी मान गयी आप को आप अर्जुन के सामने बिना पेंटी ब्रा के आ गयी ....... गीता दीदी की जिस्म को घुट्टी हुई अंजलि कहती है

चल निकल मेरे रूम से तेरी hi वजह से ये सब हुआ क्या सोच रहा होगा अर्जुन मेरे बारे मैं ...... गीता थोड़ी गुस्से मैं कहती है आवर अंजलि को रूम से निकल देती है

अंजलि भी थोड़ी मुंह बना कर रूम से चली जाती है

अंजलि को रूम से निकलने के बाद गीता भी बीएड पर लेट जाती है आवर अपने ऊपर चादर दाल लेती है

अर्जुन बाथरूम से निकल कर बीएड पर लेट जाता है अर्जुन अभी पसीने से भिनगा हुआ होता है जैसे बहुत मेहनत का काम कर के आ रहा है

अर्जुन अभी गीता दीदी की तरफ अब देखता भी नहीं है दूसरी तरफ मुंह कर के आँखे बंद कर लेता है वही गीता भी शर्म से कुछ बोलती नहीं है अर्जुन से

वही राखी देवी की रूम के बीएड पर राखी देवी पेंटी ब्रा मैं लेती हुई होती है आवर वही आँचल भी पेंटी ब्रा मैं hi होती है आवर राखी देवी की मोती जांघ को चुम रही होती है मगर राखी देवी कोई भी प्रकिरिया नहीं दे रही होती है

आँचल कुछ देर राखी देवी की मोती जांघ से होते हुआ छूट तक चूमती है फिर राखी देवी के बगल मैं लेट जाती है

दीदी क्या हुआ मेरी इतना सब कुछ करने के बाद भी आप कोई भी प्रकिरिया नहीं दे रही है क्या आप की जिस्म मैं अब कुछ नहीं हो रही है ...... आँचल हैरानी से कहती है

आँचल तू किसी मर्द को पकड़ ले आवर अपनी गर्मी संत करले तू कितनी दिन तक यही तड़पती रहेगी मैंने बहुत कोशिश की मगर मैं कामयाब नहीं हुई मुझे मांफ करदे

एक वक़्त था जब छोटे मेरे कपडे के साथ खेलते हुआ लैंड से पानी निकल देता था आवर मैं उसे भला बुरा बोल कर मरती थी

मगर जब वह हदशा हुआ तो मैं खुद छोटे को अपनी जिस्म hi दिखने लगी आवर उसे छूने भी दिया फिर भी वह कुछ नहीं कर पाया मगर अब मैं थक गयी हुईं आँचल

अर्जुन के नफरत ने मुझे अंदर से कमज़ोर कर दिया है अर्जुन की बाते मेरी दिल मैं तीर की तरह लगती है ....... राखी देवी बोलती है

राखी देवी की आँखों आंसू निकल कर चहरे पर गिर रही होती है जो आँचल आंसू को देख कर पोछने लगती है

दीदी आप की ये तड़प अब मुझसे नहीं देखि जाती है मैं अर्जुन को सब कुछ बता दूंगी आप ने जो किया वह सब मेरे लिए किया इसमें आप की गलती नहीं है ....... आँचल राखी देवी की जिस्म पर सर रख कर कहती है

आँचल तू अर्जुन को कुछ नहीं बताएगी मैं जानती हुईं सच जानने के बाद अर्जुन सायद मुझे मांफ करदे मगर वह तुझसे दूर हो जायेगा वह सबसे जयादा तुझे hi प्यार करता है

मैंने hi गलती करदी थी मुझे उस वक़्त अर्जुन को हॉस्टल मैं नहीं भेजना चाहिए था ...... राखी देवी तड़पती हुई बोलती है

दीदी आप अर्जुन के लिए बहुत तड़प चुकी हो अर्जुन उस वक़्त के बाद कभी आप से ठीक से बात नहीं किया है

आप की ममता कितनी तड़पती होगी मैं hi जानती हुईं आप एक बार माँ सुनाने के लिए कितनी तड़पती होगी मैं जानती हुईं

अर्जुन जब मुझे माँ कहता है तो मुझे कितनी ख़ुशी होती है की दिल करता है मैं अर्जुन को अपनी जिस्म के किसी कोने मैं छिपा लू आवर अर्जुन को अपनी नज़रों से कभी दूर न जाने दू

जब मुझे इतनी ख़ुशी मिलती है अर्जुन के माँ पुकारने से तो आप तो उसकी अपनी माँ हो आप को कितनी दुःख होती होगी आप की दिल कितना तड़पता होगा

दीदी अब कुछ भी हो मगर मैं अर्जुन को वह सच बता कर hi रहूंगी हम्हरा अर्जुन अब बड़ा हो गया है वह समझ जायेगा ....... आँचल भी भींगी हुई नाम आँखों से कहती है

इस बार राखी देवी कुछ नहीं बोलती है बस अपनी आँखे बंद कर लेती है

राखी देवी की मायूसी से आँचल को आवर भी दुःख होती है आवर आँचल राखी देवी से लिपट कर सो जाती है

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सुबह के 7 : ऍम को एक हवेली के सामने एक गाड़ी आकर रूकती है आवर उसमे से एक लड़की बहुत ख़ुशी मैं निकलती है

बेटी आराम से उतर वर्ण तू गिर जाएगी ...... लड़की को जल्दी मैं उतारते हुआ देख एक औरत कहती है

माँ मैं नहीं गिरने वाली ...... लड़की बोलती हुई गाड़ी से उतर कर हवेली मैं भगति है

लड़की की हाँथ मैं एक पिचकारी भी होती है लड़की हवेली मैं जैसे hi जाती है लड़की को एक औरत दिखाई देती

वह औरत लड़की को देख कर खुश हो जाती है आवर कुछ बोलने वाली होती है के लड़की चुप होने के लिए बोलती है

वह औरत अपनी मुंह पर हाँथ रख देती है आवर इशारा से पूछती है चुप क्यू करवा रही है

बुआ आस्था दीदी अभी सो रही है न ....... लड़की कहती है

लड़की की बात सुन कर आवर लड़की की हांथों मैं पिचकारी देख औरत समझ जाती है बात क्या है

औरत भी हां मैं सर हिला देती है औरत के हां मैं सर हिलाते hi लड़की जल्दी से शिदियों की तरफ भगति है

आज तो पक्का आस्था घर मैं हंगामा कर देगी अब भगवन hi बचाये हमेह उसे रंग तो बिलकुल भी पसंद नहीं है ........ वह औरत कहती है ..... जो असल मैं वह औरत आस्था की माँ होती है आवर वह लड़की पूनम होती है

दीदी ........ आस्था की माँ वही कड़ी रहती है तभी पूनम की माँ आती हुई दीदी पुकारती है जो आस्था की माँ खुश होकर पूनम की माँ को गले लगा लेती है

दिव्या अच्छा किया यह आ गयी ....... आस्था की माँ कहती है

दीदी आस्था थोड़ा बहुत तो रंग अब खेलती है न ....... आस्था की ममी कहती है

दिव्या उसे सच मैं रंग नहीं पसंद है आज तो घर मैं हंगामा पक्का है

वह तो पूनम को कुछ नहीं करेगी मगर हम सब के साथ पता नहीं क्या क्या करेगी ........ आस्था की माँ कहती है

वही आस्था चैन से सो रही होती है आवर सोते हुआ मुस्कुरा रही होती है

पूनम कुछ देर अपनी दीदी को मुस्कुराते हुआ देखती है फिर आगे बढ़ जाती है

पूनम धीरे से बीएड पर जाकर कर पिचकारी को ठीक आस्था की छूट के ऊपर कर देती है आवर फिर पिचकारी को धीरे धीरे दबती है जो लाल रंग आस्था के लूजर पर गिरती है

रंग गिरते वक़्त आस्था थोड़ी मचल जाती है आवर अपनी छूट पर हाँथ रगड़ कर फिर हटा लेती है

वही मन मैं मुस्कुराने लग जाती है पूनम धीरे धीरे रंग आस्था की छूट के ऊपर दाल कर धीरे से उतर कर रूम से चली जाती है

वही निचे आस्था की माँ आवर ममी आस्था की चीखें न सुन कर थोड़ी हैरान हुई होती है तभी उनेह पूनम शिदियों से उतरती हुई दिखती है

चलो अच्छा दिव्या के गुड़िया ने रंग नहीं डाला आस्था को हम चैन की शंश ले सकती है ...... आस्था की माँ कहती है

तब तक पूनम वह पर आ जाती है क्या हुआ बुआ आप खुश नहीं है मेरे आने से ........पूनम कहती है

अरे कौन बोल रहा है मैं खुश नहीं हुईं मैं तो बहुत खुश हुईं की मेरी नन्ही पारी अपनी बुआ के साथ होली खेलने के लिए आई है ...... आस्था की माँ कहती है

मेरी प्यारी बुआ ....... बोलती हुई पूनम आस्था की माँ के गले लग जाती है


पूनम कुछ देर अपनी बुआ के साथ रहती है फिर आस्था की रूम की तरफ चली जाती है

दीदी जब बाथरूम मैं जाएँगी तो रंग देख कर ज़रूर दर जाएँगी बड़ा मज़ा आएगा दीदी की सकल देख कर ...... पूनम सोचती हुई आस्था के रूम की तरफ चलने लगाती है

आस्था अंगड़ाई लेते हुआ उठती है आवर सीधे बाथरूम मैं चली जाती है

आस्था बाथरूम करने के बाद अपनी लूजर उतर देती है आस्था बाथरूम करते हुआ भी अपनी लूजर पर धयान नहीं देती है

मगर जब नहाते हुआ लूजर निकल कर पेंटी निकलने को होती है तभी अपनी पेंटी पर लाल रंग देख कर सहम सी जाती है

आस्था अभी थोड़ी नींद मैं होती है तो वह सोच नहीं पति है के वह रंग है की खून है आस्था को बड़ी हैरानी होती है

आस्था की धड़कने तेज़ चलने लगती है आस्था फिर धीरे धीरे अपनी पेंटी को निचे करती है आवर अपनी छूट पर रंग देख कर आवर दर जाती है

ये मेरी छूट से खून क्यू निकल रहा है क्या मैंने सोते हुआ कुछ किया ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह दर्द हो रहा है ...... आस्था सोचते हुआ अपनी छूट मैं उंगली डालती है आवर दर्द से सिसक जाती है

उंगली डालने से तो मुझे दर्द हो रहा है मतलब मेरी छूट ठीक है फिर खून कैसे निकल रहा है ....... आस्था सोचती है

आस्था खून देख कर कुछ सोच नहीं पा रही होती है वही आस्था की छूट से रंग कुछ hi वक़्त मैं पानी के साथ बाह जाता है मगर आस्था रंग है धयान नहीं दे पति है

आस्था बस नाहा कर बाथरूम से निकल जाती है मगर आस्था की दिमाग मैं अभी भी वह लाल रंग चल रहा होता है के कैसे आया

आस्था भुजे मन से बाथरूम से निकलती है आवर बार बार अपनी छूट पर हाँथ रख कर दबा रही होती है दर्द हो रहा है की नहीं मगर आस्था को अपनी छूट मैं कोई दर्द नहीं होती है

आस्था जैसे hi बाथरूम से निकल कर बहार आती है सामने पूनम को देख कर खुश हो जाती है

गुड़िया तू कब आई ...... आस्था खुश होकर पूनम को गले लगा कर कहती है

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hello पूजा कहा थी मैं कब से कॉल कर रहा हुईं ...... एक लड़के की आवाज़ आती है

मैं एहि थी वह पारी को दूध पीला रही थी तो धयान नहीं दिया आप कब घर आ रहे है कितने दिन हो गए है आप को गए हुआ ....... पूजा थोड़ी नाराजगी से कहती है

पूजा मैं इंडिया मैं नहीं हुईं जो जब मन किया आ जाऊंगा बस कुछ दिन फिर हम दोनों साथ होंगे

वैसे मेरी पारी कैसी है तंग तो नहीं कर रही न ...... उधर से लड़का कहता है

आप की बेटी पारी तो तंग नहीं करती है मगर मेरी निचे की पारी बहुत तंग करती है मैं कितने दिन आयी रहूंगी प्लीज आप घर आ जाइये न ...... पूजा थोड़ी रूठे सवार मैं कहती है

बेबी बस कुछ दिन आवर बर्दाश्त करलो फिर मैं तुम्हारी निचे की पारी को इतना प्यार दूंगा की फिर तंग नहीं करेगी ..... उधर से लड़का कहता है

पारी hello कहा पापा बोलो बेटी बोलो ...... पूजा पारी के पास फ़ोन करती हुई कहती है मगर पारी फ़ोन लेकर खेलने लगती है

पूजा तुम घर कब जा रही हो माँ पूछ रही थी वह थोड़ी गुस्सा भी हो रही थी ..... उधर से लड़का कहता है

बस कुछ दिन आवर अभी माँ की तबियत थोड़ी ख़राब है माँ के ठीक होते hi चली जाउंगी .... पूजा कहती है

ठीक है मैं माँ से बोल दूंगा अच्छा पारी का ख्याल रखना मैं शाम मैं फ़ोन करता हुईं ..... लड़का बोल कर फ़ोन रख देता है

मुझे मांफ करना जी मैं आप से झूट बोली की माँ की तबियत ख़राब है

मैं झूट अपने भाई के लिए बोली कितने दिन के बाद तो मिला है मैं उससे बहुत साडी बाते करना चाहती हुईं आवर मैं अर्जुन के साथ होली भी खेलना चाहती हुईं इस लिए झूट बोली मुझे मांफ कर दीजियेगा ..... पूजा मन मैं सोचती है

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अपडेट ...... 26

गीता की नींद पहले खुलती है आवर खुद को अभी अर्जुन के बाँहों मैं पति है अर्जुन तो नींद मैं सो रहा होता है मगर अर्जुन का एक हाँथ गीता की कमर पर होता है आवर एक हाँथ गीता की सर के निचे होता है

वही अर्जुन का गीता की चुकी के निचे के पास hi होता है आवर अर्जुन का पेअर गीता के पेअर पर होता है

अभी अर्जुन आवर गीता की ाएसि हालत होती है की जैसे दोनों भाई बहन नहीं पति पत्नी है

गीता की नींद खुलते hi गीता खुद शर्मा जाती है गीता की आचानक शैशे तेज़्ज़ होने लगती है जब गीता को अपनी छूट के पास कुछ हार्ड चीज महसूस होती है गीता खुद समझ तो जाती है वह क्या चीज है उसकी छूट के पास मगर फिर भी गीता को यकीन नहीं हो रहा होता है इतना हार्ड अर्जुन का लैंड hi है ....

गीता फिर धीरे धीरे अर्जुन से अलग होती है आवर अर्जुन से अलग होकर अर्जुन के चहरे की तरफ देखती है जो अर्जुन चैन से सो रहा होता है जब गीता को यकीन हो जाता है के अर्जुन सो रहा है तो गीता एक हाँथ धीरे धीरे अर्जुन के लैंड के पास करती है जो अभी भी ट्राउजर मैं टाइट होता है जो ट्राउजर मैं hi देख कर गीता की धड़कन तेज़ी से चल रही होती है

अभी गीता की आँखों मैं एक अजीब सा नशा होता है आवर गीता का हाँथ अपने आप hi अर्जुन के लैंड की तरफ बढ़ने लगते है गीता की हाँथ भी थोड़ा बहुत कैंप रहे होते है

ये मैं क्या करने जा रही हुईं अगर अर्जुन उठ गया तो क्या सोचेंगे मेरे बारे मैं नहीं अर्जुन अभी गहरी

नहीं मुझे आएसा नहीं करना चाहिए ..... अर्जुन उठ गया तो वह मुझे गलत समझेगा मुझे

गीता अपना हाँथ अर्जुन के लैंड के पास से हटा लेती है आवर बाथरूम मैं चली जाती है

अर्जुन का कितना बड़ा लग रहा था अंदर होने के बाद वह जब लूजर से बहार निकलेगा तो कितना बड़ा होगा

छियई मैं भी क्या सोच रही हुईं कितना भी बड़ा हो मुझे क्या अर्जुन मेरा छोटा भाई है उसकी जो बीवी होगी वह बहुत मज़ा करेगी

हे भगवन गीता तू ये सब क्या सोच रही है

गीता बाथरूम मैं नहाते वक़्त भी अर्जुन के लूजर मैं खड़े हुआ लैंड के बारे मैं सोच रही होती है

गीता को बार बार अर्जुन का लैंड लैंड याद आ रहा होता है आवर गीता की जिस्म आवर भी गर्म हो रही होती है

गीता फिर किसी तरह अर्जुन के लैंड का ख्याल निकल कर ठन्डे पानी से अपनी गदराई जिस्म को मॉल मॉल कर नहाने लगती है

गीता नाहा कर बाथरूम से बहार आने लगती है तभी hi गीता की नज़र सामने दिवार के कोने मैं अपनी पेंटी को देखती है

जो गीता को थोड़ी हैरानी भी होती है आवर गीता जाकर अपनी पेंटी उठा लेती है

अपनी पेंटी तो मैंने कपड़ों के अंदर राखी थी फिर यह कैसे आ गयी ........ पेंटी को देखती हुई गीता सोचती है

गीता फिर अपनी उस पेंटी को जहर कर सही करने लगती है मगर गीता की पेंटी सही नहीं होती है तो गीता अपनी पेंटी को देखती है तो पति है उसकी छूट वाली जगह पर पेंटी बिलकुल सटी हुई है आवर छूट वाली जगह पर पेंटी बिलकुल कड़ा जैसा हो गया है गीता अपनी छूट के पास सटी हुई आवर टाइट पेंटी को देख कर गीता को आवर हैरानी होती है आवर गीता फिर पेंटी को हांथों से ठीक करती है मगर वह ठीक नहीं होती है गीता फिर अपनी पेंटी को पानी मैं भिनगा देती है

गीता जैसे hi अपनी पेंटी पानी मैं भींगती है छूट के पास चिचिपा सा हो जाती है जो गीता की ऊँगली भी एक दूसरे से सटने लगती है

ये क्या है छूट की पानी जैसा लग रहा है मगर ये पेंटी तो मैंने पेन्हनी भी नहीं थी जो मेरी छूट की पानी लगे इसमें इसको मैं कल पहनने वाली थी मगर गुड़िया की वजह से नहीं पहनी फिर ये कैसे लग गयी है

हे कही अर्जुन ने कुछ किया तो नहीं है न वही बाथरूम मैं आया था रात मैं क्या अर्जुन ने मेरी पेंटी मैं

ांचनाक गीता को याद आता है के रात मैं अर्जुन hi बाथरूम मैं आया था याद आते hi गीता की आँखें बड़ी हो जाती है

फिर गीता के दिल मैं पता नहीं क्या सूझता है गीता अपनी उन दोनों ऊँगली को मुंह मैं लगा लेती है

ठु ठु ठु आआआअऊऊऊ

छी छिईई कितना गन्दा लग रहा है

ऊँगली मुंह मैं लगते hi गीता थूखने लगती है आवर पेंटी को अपने कपड़ों मैं रख कर बहार आती जाती है

गीता जब रूम मैं आती है तो उसकी नज़र अर्जुन पर पड़ती है जो अभी भी सो रहा होता है गीता अर्जुन को अजीब नज़र से देखती है फिर अपनी कपडे लेकर रूम से निकल जाती है

वाओ दीदी बहुत खूबसूरत लग रही है क्या अर्जुन ने कुछ कर तो नहीं दिया न आप की जिस्म को नंगी देख कर ........ गीता जैसे hi अंजलि को रूम मैं जाती है अंजलि हस्ती हुई कहती है

चुप कर पागल लड़की नहीं तो मरूंगी क्या बोल रही है क्या किया है अर्जुन ने तू जानती है न अर्जुन हम्हरा भाई है चल बहार जा मुझे कपडे पहनना है ....... गीता थोड़ी गुस्से मैं कहती है

अपनी दीदी को गुस्से मैं देख कर अंजलि मुंह बना कर रूम से निकल जाती है

गीता इतनी गुस्से मैं क्यू है कही अर्जुन ने सच मैं अपना वह दीदी की उसमे दाल तो नहीं दिया

वाओ दीदी को बहुत मज़ा आयी होगी मगर ऊपर से दीदी गुस्सा करने की नाटक कर रही है

मगर सच मैं अर्जुन ने दीदी के साथ किया है तो गीता लंगड़ क्यू नहीं रही थी मेरी दोस्त तो बता रही थी पहली बार करने पर चलने मैं दर्द होती है

यह क्या सोच रही है थोड़ा मेरी मदद नहीं कर सकती है ये कॉफ़ी अपनी माँ को देकर किचेन मैं आ

अंजलि रूम के बहार सोच hi रही होती है के पीछे से आँचल आकर बोलती है

अंजलि कॉफ़ी लेकर अपनी माँ के रूम मैं जाती है जो अभी राखी देवी कपडे पहन रही होती है

गुड मॉर्निंग माँ ..... कॉफ़ी रख कर अंजलि कहती है आवर राखी देवी को किश कर देती है

गुड मॉर्निंग गुड़िया आज तो सुबह hi उठ क्या बात है ...... अंजलि के माथे पे किश करते हुआ राखी देवी कहती है

माँ मैं तो हर रोज़ hi सुबह उठती हुईं बस रूम मैं पढाई करती हुईं समझी ...... अंजलि कहती है

ओह मेरी गुड़िया इतनी पढाई करती है आज पता चली अच्छी बात है

गुड़िया अर्जुन उठ गया है क्या ..... राखी देवी अर्जुन के बारे मैं पूछते वक़्त थोड़ी दुखी हो जाती है

पता नहीं माँ मैंने अर्जुन को देखि नहीं सायद अर्जुन अभी भी सो रहा है

माँ मैंने बहुत बार आप से पूछी है मगर आप ने बस एहि बताया के हॉस्टल भेजने से गुस्सा है मगर माँ इसमें गुस्से होने की क्या बात है आप ने ये अर्जुन के लिए hi तो किया यह रहता तो पढ़ भी नहीं पता बस नदी मैं नाहटा रहता अपनी आवारा दोस्तों के साथ मगर सहर जाकर अर्जुन कितना पढ़ने मैं तेज़्ज़ हो गया है अर्जुन को खुश होना चाहिए आप पर मगर वह अभी भी आप से गुस्सा करता है माँ मुझे बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता आप दोनों को इस तरह देख कर ........ अंजलि थोड़ी मायूसी से कहती है

अंजलि की बात सुन कर राखी देवी की जिस्म झनझना सा जाता है राखी देवी थोड़ी दुखी भी हो जाती है

गुड़िया वह सहर हॉस्टल मैं भेजने से अर्जुन गुस्सा है आवर कोई बात नहीं है तू मेरी बात पर यकीन कर मैं झूट नहीं बोल रही प्लीज बीटा यकीन कर ........ राखी देवी बोलती हुई रोने लगाती है

माँ मुझे आप पर यकीन है प्लीज आप रोइये नहीं अर्जुन एक दिन ज़रूर समझ जायेगा माँ मुझे मांफ कर दीजिये मैंने अर्जुन के बारे मैं बात की मैं आप को दुखी नहीं करना चाहती थी

अपनी माँ को रट हुआ देख कर अंजलि भी रोने लगती है अंजलि को रट देख राखी देवी रोने बंद कर देती है

देखों मैं नहीं रो रही मेरी गुड़िया सही बोल रही है एक दिन अर्जुन ज़रूर मुझे मांफ कर देगा मेरी गुड़िया की बात कभी झूट नहीं हो सकती है ....... अंजलि की आंसू को पूछती हुई राखी देवी कहती है

अंजलि भी थोड़ी मुस्कुरा कर अपनी माँ के गले लग जाती है

तेरा धयान किधर है मैं कब से सभी मांग रही हुईं मगर पता नहीं किन ख्यालों मैं खोई हुई है ........ अंजलि के सर पर मरती हुईं आँचल कहती है

मैं जा रही हुईं मुझे आप से कोई बात नहीं करनी आप बस हर वक़्त मरती रहती है आप मुझसे प्यार नहीं करती है गन्दी ममी ..... हुईं

अंजलि बोलती है आवर किचेन के गेट पर जाकर कड़ी हो जाती है

आँचल सभी कड़ाही मैं दाल कर पीछे देखती है तो पति है अंजलि किचेन के गेट पर कड़ी है तो मन मैं मुस्कुरा देती है तभी अंजलि सामने आकर कड़ी हो जाती है

अब क्या हुआ तुझे मुझसे बात नहीं करनी आवर मेरी मदद भी नहीं करनी है आवर मैं तुझे हर वक़्त मरती रहती हुईं फिर क्यू आई जा यह से मेरी बस 2 hi बच्चे है आवर वह दोनों मुझपे बहुत प्यार करते है गीता आवर अर्जुन ....... आँचल बोलती हुई मुंह फेर लेती है आवर मन मैं मुस्कुराती है अंजलि की शकल देख कर जो मुंह बना कर गुस्से से देख रही होती है

आँचल मैं तुमसे बहुत प्यार करती हुईं समझी फिर कहा न की मैं प्यार नहीं करती तो देख लेना आवर मैं आप को अच्छी बेटी हुईं ......... अंजलि ऊँगली दीखते हुआ बोलती है

वही आँचल अपनी मुंह पर हाँथ रख लेती है अंजलि की बात सुन कर

हे भगवन ये सच मैं मेरी गुड़िया पागल तो नहीं हो गयी मेरी नाम लेकर बोल रही है ........ आँखे बड़ी कर के आँचल मन मैं सोचती है आवर मुस्कुराती रहती है

अच्छा ठीक है बाबा तू मेरी अच्छी बेटी है तो फिर ये सरे पलेट अभी साफ़ करके अपनी ममी को मदद करदे आज कमला भी नहीं आई है ....... आँचल कहती है

अंजलि थोड़ी देर आँचल को देखती है फिर पलट उठा लेती है

बड़ी चालक है ममी गीता दीदी से कोई काम नहीं करवाती बस मुझे hi बोलती रहती है अभी पलट साफ़ कर देती हुईं अभी मुझे ममी से काम भी है ...... अंजलि मन मैं सोचती है

ममी मैंने सरे पलट साफ़ कर दिया ...... अंजलि पास आकर आँचल से कहती है

ओह मेरी गुड़िया मैं जानती हुईं गुड़िया मुझसे बहुत प्यार करती है ...... आँचल अंजलि के माथा चूमते हुआ बोलती है जो अंजलि भी खुश हो जाती है

ममी एक बात जननी थी मुझे प्लीज बता दीजिये न प्लीज प्लीज ...... अंजलि आँचल के दोनों गाल को खींचती हुई कहती है जो आँचल दर्द का नाटक करते हुआ दूर करने लगाती है

ठीक है क्या जानना है मेरी गुड़िया को ...... आँचल कहती है

क्या ममी से पूछ लो ममी गुस्सा तो नहीं होंगी मगर ये बात ममी hi सच बता सकती है

पूछ hi लेती हुईं ममी माँ मुझसे तो कभी गुस्सा होती hi नहीं है ......... अंजलि मन मैं सोचती है

ममी वह वह अंजलि आगे कुछ बोल नहीं पा रही होती है अंजलि को शर्म आने लगाती है पूछते हुआ

अरे बाबा वह वह क्या लगा रही है बोल क्या जानना है मैं अभी बता देती हुईं अगर मुझे पता है तो ....... आँचल अंजलि के हाँथ पकड़ कर कहती है

ममी वह जब लड़का लड़की पहली बार एक दूसरे से प्यार करते है तो क्या लड़की को उसके बाद लड़की को वह पर दर्द होती है

अंजलि बोलती हुईं अपनी ममी के बिलकुल करीब हो जाती है आवर अपनी ममी के साइन मैं अपनी चेहरा छुपा लेती है

वही अंजलि की बात सुन कर आँचल भी शर्मा जाती है

आँचल को थोड़ी हैरानी भी होती है आवर अंजलि पर थोड़ी गुस्सा भी आती है

मगर जब अंजलि को अपनी साइन से लगते हुआ पति है तो वह अंजलि को कुछ नहीं बोलती है आवर अंजलि के सर पर हाँथ फेरने लगती है

तुमेह ये क्यू जानना है कही तुम किसी लड़के के चक्कर मैं तो नहीं पद गयी हो गुड़िया ये गलत बात है ...... आँचल अंजलि के सर पर हाँथ फेरते हुआ कहती है

ममी आप क्या बोल रही है मैं किसी लड़के के चक्कर मैं नहीं हुईं आप आवर माँ की कसम मैं तो बस आयी hi पूछ रही थी ........ अंजलि मासूमियत से कहती है

ओह्ह्ह मेरी गुड़िया रानी मैं जानती हुईं मेरी गुड़िया कोई आएसा काम नहीं करेगी जिससे मुझे आवर दीदी को शर्मिंदा होना पड़े

ठीक है ये बात मेरी गुड़िया को पता चल जाएगी जब मेरी गुड़िया की शादी होगी ........ आँचल मुस्कुराती हुई बोलती है आवर अंजलि के गाल चुम लेती है वही अंजलि मुंह बना लेती है

ममी मुझे अभी जननी है प्लीज बता दीजिये न प्लीज ममी माँ प्लीज ...... अंजलि थोड़ी भोलेपन से बोलती है

आँचल ममी बता भी दीजिये कितनी प्यार से पूछ रही है छोटी ........ पूजा आती हुई बोलती है

अरे पूजा तू कहा थी इतने दिन मैं भी तुझसे मिलना चाहती थी

अले अले ये कौन है आ गया ये मेरी नातिन तो नहीं है अले अले कितनी प्यारी है आजा अपनी नानी माँ के पास .......... पारी को लेते हुआ आँचल बोलती है

ममी मुझे तो पता hi नहीं था आप आई है आवर मैं घर पर नहीं थी मां के घर शादी मैं गयी थी कल अर्जुन घर तो पता चला आवर मैं आप से मिलने आया गयी ममी मैं आप से नाराज़ हुईं आप शादी मैं मेरी नहीं आई ......... पूजा नाराजगी से कहती है

पूजा मांफ करदे मुझे तेरी शादी की पता चली थी मगर उसी वक़्त मेरी तबियत थोड़ी ख़राब हो गयी थी आवर अर्जुन का एग्जाम भी चल रहा था इस लिए नहीं आई ....... आँचल कहती है

पूजा दीदी अब ममी माँ को मांफ भी कर दीजिये ममी माँ सच बोल रही है ......... पूजा कुछ बोलती के अंजलि बोल पड़ती है

हां समझ गयी ममी माँ की चमची हमेशा ममी की तरफ hi रहती है कभी मेरी तरफ से भी बोल दिया कर ........ पूजा कहती है

ये मेरी लाड़ली बेटी है एहि बस मुझपे गुस्सा आवर मुझे कुछ बोल सकती है बाकि किसी को नहीं बोलने देगी ........ आँचल हस्ती हुई कहती है जो पूजा भी साथ मैं मुस्कुरा देती है

अर्जुन रूम से फ्रेश होकर अभी छत पर घूम रहा होता है अर्जुन अपने शिदियों के पास खड़ा होकर निचे की तरफ देखता है कोई आ तो नहीं रहा जब अर्जुन को यकीन हो जाता है तो अर्जुन जेब से सिगरेट निकल कर जला कर पिने लगता है

अर्जुन जब सिगरेट पि रहा होता है तभी सामने छत पर अर्जुन की नज़र पड़ता है आवर अर्जुन एक वक़्त के लिए सिगरेट मुंह के पास हाँथ रोक कर सामने छत पर देखने लगता है

वाओ कितनी खूबसूरत है वह आंटी ....... सामने छत पर औरत को देख कर अर्जुन के मुंह से निकलता है

सामने छत पर औरत को देख कर अर्जुन के हालत ख़राब हो जाता है अर्जुन बस एक तक सामने छत की तरफ औरत की बड़ी गांड आवर पीठ देख रहा होता है जो औरत की पीठ से पता चल रहा होता है की वह औरत अपनी 2 अनमोल रतन चुकी को कैसे क़ैद कर के रखी होगी

औरत बाल पोछते हुआ पलट जाती है आवर फिर अर्जुन की नज़र पहले औरत चहरे पर पड़ती है

ये तो वही टीचर है ........ अर्जुन मन मैं सोचता है आवर तभी अर्जुन की नज़र निचे की तरफ जाती है आवर अर्जुन का हालत ख़राब होने लगता है

वह औरत आवर कोई नहीं आदि की माँ रजनी होती है

आदि की माँ की मदमस्त जिस्म को देख कर एक वक़्त के लिए अर्जुन का मुंह मैं पानी आने लगता है अर्जुन देखते हुआ जैसे जैसे निचे बढ़ रहा होता है अर्जुन बेचैन होने लगता है आवर उसका असर अर्जुन के लैंड पर पड़ता है अर्जुन का लैंड जैसे hi खड़ा होकर फनफनाता है अर्जुन को होश आता है आवर अर्जुन अपनी नज़र सामने की छत से हटा लेता है

ये क्या हो रहा है मेरे साथ हर कोई आयी मेरे सामने क्यू आ रही है रात मैं गीता दीदी भी आवर मैंने क्या किया दीदी की वह कपडे के साथ कही उस कपडे को दीदी ने देख तो नहीं ली होगी

अर्जुन को ांचनाक hi याद आता है आवर वह सिगरेट को आधा पीकर hi छत की दूसरी तरफ जाकर फेकता है

अर्जुन सिगरेट फेक कर घूमने वाला होता है तभी आदि की माँ अपनी चेहरा उठा लेती है आवर फिर अर्जुन आवर आदि की माँ एक दूसरे को देखने लग जाते है फिर अचानक hi आदि की माँ

वही बैठ जाती है आदि की माँ के बैठने से अर्जुन भी हड़बड़ा जाता है आवर जल्दी से निचे की तरफ भागता है

वही सामने छत पर आदि की माँ निचे बैठी हुई गांड रही होती है आवर आदि की माँ की क़ैद होने पर भी पहाड़ जैसी चुकी ऊपर निचे हो रही होती है आदि की माँ निचे बैठ कर अपनी मुंह पर हाँथ रखी हुई होती है आदि की माँ को बड़ी शर्म आती रही होती है

कई सैलून के बाद आज उनकी जिस्म को किसी ने इस हालत मैं देखा था वह भी उनके बेटे से भी छोटे लड़के ने ये सोच कर आदि की माँ आवर शर्मा रही होती है

हे माँ ये मैंने क्या कर दिया मुझे क्या ज़रूरत थी छत पर आकर बाल सूखने की क्या सोच रहा होगा वह लड़के मेरे बारे मैं पता नहीं कब से वह मुझे देख रहा था आवर मुझे इस हालत मैं देख कर ........ इतना सोच कर आदि की माँ अपनी चुकी को देखने लगती है जो लाल कपडे मैं क़ैद की होती है

आदि की माँ छत के निचे बैठकर कर सोच रही होती है आदि की माँ की हिम्मत नहीं हो रही होती है खड़ा होने की आदि की माँ को दर लगता है फिर खड़ा हुई तो लड़के की नज़र जिस्म पे पर जाएगी

आदि की माँ कुछ देर बैठी होती है फिर धीरे धीरे अपनी सर उठा कर अर्जुन के छत की तरफ देखती है बस थोड़ी सी नज़र से देखती है तो उनेह अर्जुन नज़र नहीं आता है तो आदि की माँ जल्दी से उठा कर अपनी दीदियों की तरफ भगति है आवर शिदियों के पास जाकर कड़ी हो जाती है उनकी शैशे बहुत तीज चल रही होती है वह शिदियों के पास कड़ी होकर अपनी शंशो को काबू करने लगती है

वही आदि की माँ को तेज़ी से भागने पर छत से थम थम की आवाज़े निचे जाती है आवर आदि अभी नाश्ता कर रहा होता है आवाज़ सुन कर आदि छत की तरफ भागता है

अंजलि अभी अपनी रूम मैं बीएड पर लेती हुई होती है आवर अंजलि सिर्फ ब्रा पेंटी मैं होती है आवर अंजलि का एक हाँथ पेंटी के अंदर होती है आवर एक हाँथ उसकी मुंह पर होती है आवर अंजलि अपनी छूट मैं ऊँगली करते हुआ अपनी मुंह से निकलती हुई आवाज़ रोक रही होती है

अंजलि के दोनों कान मैं हैडफ़ोन भी होती है आएसा लगता है अंजलि कोई एडल्ट मूवी देख रही है मगर अंजलि का फ़ोन दूसरी तरफ उल्टा पड़ा होता है

अंजलि धीरे धीरे अपनी पेंटी मैं हाँथ आवर ज़ोर ज़ोर से चलने लगती है अंजलि की माथे पर पसीने बता रहा होता है वह कितनी गर्म है आवर वह जल्दी से ठंडी होनी चाहती है

अंजलि पेंटी को धीरे धीरे निचे कर देती है आवर अपनी छूट को सहने लगाती है आवर aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa करते हुआ अपनी ऊँगली छूट मैं डालने लगाती है आवर फिर से अपनी ऊँगली को छूट मैं ज़ोर ज़ोर से अंदर बहार करने लगाती है आवर कुछ hi देर मैं अंजलि की शैशे के साथ उसकी चुकी उछलने लगाती है आवर अंजलि अपनी गांड दो तीन बार उठा कर संत हो जाती है

पूजा देख लगता है किसी का फ़ोन आया है आवर पारी ने उठा लिया खेलते हुआ

अंजलि के कानो मैं आवाज़ आती है आवर अंजलि उठ कर बैठ जाती है आवर जल्दी से अपनी फ़ोन से हैडफ़ोन निकल कर फ़ोन बंद कर देती है
 
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