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अपडेट __ 19
ार्जुन चादर के अंदर दर्द से तड़प रहा होता है मगर अब चीख नहीं रहा होता है अर्जुन अपना दर्द किसी तरह से सहने की कोशिश कर रहा होता ताकि सामने वाली औरत अभी वह से चली जाये
अर्जुन भगवन के लिए मुझे देखने दे क्या हुआ है तुझे मैं तुझे दर्द मैं नहीं देख सकती हुईं .. प्लीज अर्जुन बीटा मुझे देखने दो .. औरत कहती है
मैं तुम्हारा भाई नहीं हुईं जो तुम्हारे सामने इस तरह आ जाऊंगा तुमेह फर्क पड़े या न पड़े मगर मुझे फर्क पड़ता है मेरी ममी माँ ने मुझे इतना तो सीखा दिया है किसी भी औरत के सामने नंगा नहीं जाना चाहिए तुम प्लीज अभी रूम से चली जाओ ..... अर्जुन चादर के अंदर से hi बोलता है
अर्जुन की बात राखी देवी को एक तीर की तरह लगती है आवर उसी वक़्त राखी देवी की आँखें नाम हो जाती है ......
कुछ वक़्त पहले तो राखी देवी को इतनी ख़ुशी हुई थी के राखी देवी भूल hi चुकी थी के वह नंगी hi अर्जुन के पास आ गयी है ये बिना सोचे की अर्जुन उनेह नंगी देख कर क्या सोचेंगे मगर राखी देवी को अभी बस अर्जुन के माँ पुकारने से hi राखी देवी की दिल ख़ुशी से मचने लगी थी
मगर फिर अर्जुन की बात सुन राखी देवी फिर अंदर से टूट गयी आवर अपने मुंह पे हाँथ रख कर एक कदम पीछे की तरफ हैट गयी
राखी देवी की आँखों से आंसू रुक नहीं रही होती है लेकिन फिर जल्द hi राखी देवी अपनी आंसू पोछ लेती है आवर राखी देवी एक दुप्पट्टा अपनी साइन पर रख लेती है मगर दुप्पटा रखने के बाद भी राखी देवी की भींगी हुई सीना पर तानी हुई बड़ी बड़ी चुकी की निप्पल दिख रही होती है मगर राखी देवी को अभी बस अर्जुन की फिकर हो रही होती इस लिए फिर अर्जुन के बीएड के पास चली जाती है आवर अर्जुन के चादर खींचने लगती है
अर्जुन तू मुझसे गुस्सा है तो गुस्सा रह मगर अभी मुझे देखने दे तुझे क्या हुआ है ..... राखी देवी चादर को खींचते हुआ कहती है
अर्जुन को बहुत दर्द हो रहा होता है क्यू के अर्जुन का लैंड की चमड़ी डाब गयी होती है आवर ऊपर से अर्जुन को पिशाब भी लगी हुई होती है अर्जुन अब क्या करे समझ मैं नहीं आ रहा होता है
वही राखी देवी भी अर्जुन की चादर खींचने लग जाती है अर्जुन को कुछ नहीं समझ मैं आता है तो अर्जुन झट से उठ जाता है आवर राखी देवी की तरफ बिना देखे hi चीखते हुआ बाथरूम की तरफ चलने लगता है अपने लैंड पर एक हाँथ रखे हुआ ताकि राखी देवी की दिखे न
अर्जुन को जाते देख राखी देवी फिर अर्जुन के पीछे जाती है मगर अर्जुन बाथरूम की गेट बंद कर देता है राखी देवी को देखते हुआ
राखी देवी बाथरूम की गेट के पास कड़ी होकर रोने लग जाती है
तभी रूम मैं आँचल आवर अंजलि आती है जो राखी देवी को रट हुआ पति है
दीदी क्या हुआ आप रो क्यू रही है आवर मुझे आएसा लगा की अर्जुन बीटा भी दर्द मैं चीखा था ..... अंचल कहती है
राखी देवी को नंगी हालत मैं देख कर अंचल आवर अंजलि को बहुत जयादा हैरानी भी होती है मगर आँचल प्यार से राखी से पूछती है
वही अंजलि जल्दी से साड़ी उठा कर अपनी माँ के ऊपर दाल देती है आवर राखी देवी को पकड़ लेती है
मगर राखी देवी सिर्फ अभी भी बाथरूम की तरफ देख कर रो रही होती है
माँ बोलिये न क्या हुआ आप क्यू रो रही है क्या आप बाथरूम मैं गिर गयी थी आप को छोट तो नहीं लगी न प्लीज माँ आप कुछ तो बोलिये ...... अपनी माँ को रट हुआ देख कर अंजलि भी रोनी जैसी सवार मैं पूछती है
आँचल वह अर्जुन दर्द मैं चीखा अंजलि अर्जुन को दर्द हो रहा होगा वह बाथरूम मैं है मेरे बेटे को दर्द हो रहा है ..... राखी देवी दर्द मैं तड़पती हुई बोलती है
राखी देवी को आज अर्जुन पर बहुत प्यार आ रहा होता है राखी देवी से आज अर्जुन का दर्द नहीं देखि जा रही होती है. .....
ये जानते हुआ भी के अर्जुन को दर्द तो हो रहा है मगर कोई बड़ी बात नहीं है वह जल्द hi ठीक हो जायेगा
मगर राखी देवी को आज अपने बेटे का दर्द नहीं देखा जा रहा था ... आवर उसकी वजह था कई सैलून के बाद अर्जुन के मुंह से खुद के लिए माँ पुकारना जो राखी देवी की मंमता आज उमड़ कर निकल रही थी
राखी देवी ये भी भूल गई थी के अभी कुछ देर पहले hi अर्जुन कितना कुछ बोल गया है उनेह मगर राखी देवी को बस अर्जुन के दर्द का फिकर हो रहा था
राखी देवी की बात सुन कर आँचल जल्दी से बाथरूम की गेट पीटने लग जाती है
अर्जुन अर्जुन अर्जुन बीटा प्लीज गेट खोल क्या हुआ तुझे प्लीज बीटा मुझे देखने दे बीटा गेट खोल बीटा .... आँचल भी थोड़ी दर जाती है अर्जुन को क्या हो गया है जो आँचल रोटी हुई गेट पीटने लग जाती है
वही बाथरूम के अंदर जाते hi अर्जुन ने अपने लैंड की चमड़ी चैन से निकल दिया था मगर निकलते वक़्त अर्जुन का लैंड थोड़ा चील गया था जो अर्जुन के लैंड से थोड़ा बहुत खून भी निकल रहा होता है अर्जुन को थोड़ा भी दर्द हो रहा था मगर अर्जुन ठीक था बस दर्द काम होने का वेट कर रहा था तभी अर्जुन को अपनी ममी माँ की रट हुआ गेट पीटने की आवाज़ आने लगाती है जो अर्जुन थोड़ा सहम जाता है आवर न चाहते हुआ भी लैंड पेंट मैं दाल कर गेट को खोल देता है
गेट खुलते थे आँचल झट से अर्जुन को पकड़ लेती है
अर्जुन क्या हुआ तुझे दीदी बोल रही है तू दर्द मैं चीख रहा था कहा पर दर्द हो रहा है दिखा मुझे बीटा कहा पर दर्द हो रहा है ..... आँचल कहती है
अपनी ममी माँ की बात सुन कर अर्जुन थोड़ा सहम जाता है ये सोच कर के ममी माँ को अब कैसे दिखाऊं
माँ मुझे कुछ भी नहीं हुआ है वह चैन का जीप फस्स गया था जो मैंने निकल दिया है अब आप चुप हो जाइये ....... अर्जुन अपनी माँ राखी देवी को देखते हुआ कहता है
सच कह रहा न दर्द तो नहीं हो रहा देख दीदी कितनी रो रही है ... आँचल कहती है
हां माँ मैं सच कह रहा हुईं मुझे दर्द नहीं हो रहा है ोुए आप उनके रोने पे मत जाइये वह बस नाटक कर रही है रोने की उनेह क्या फर्क पड़ेगा मैं दर्द मैं राहु ये नहीं मैं ज़िंदा राहु या मर जाऊं ....... अर्जुन गुस्से मैं राखी देवी की तरफ देखते हुआ कहता है
Aaaaaaaaaaaaaaanchal
मममममी
राखी देवी आवर अंजलि दोनों एक साथ hi चीख पड़ती है
अभी अर्जुन बोल hi रहा होता है के तभी अर्जुन के गाल पर एक ज़ोर की तप्पड़ पड़ती है जो तप्पड़ की आवाज़ पुरे रूम मैं गूंज जाती है
अर्जुन के तप्पड़ कहते hi दोनों माँ बेटी एक साथ आँचल को पुकारती है
वही आँचल भी बहुत गुस्से मैं होती है आवर उसी गुस्से के साथ अर्जुन को देख रही होती है जो अर्जुन बस अपनी ममी माँ को देख रहा होता है लेकिन कुछ कहता नहीं है
क्या बोल रहा है फिर कभी मरने की बात की तो आवर तप्पड़ मरूंगी ........ जा अभी तू यह से ....... आँचल थोड़ा गुस्से मैं कहती है
अर्जुन अपनी ममी माँ को एक नज़र देखता है जो आँचल की आँखें नाम हो चुकी होती है
फिर अर्जुन अपनी माँ राखी देवी को एक नज़र बहुत गुस्से से देखता है आवर फिर रूम से निकल जाता है
वही अर्जुन की बात सुन कर राखी देवी एक वक़्त के लिए संत हो जाती है राखी देवी के आँखों से सिर्फ आंसू hi निकल रहे होते है मगर राखी देवी की दिल मैं एक दर्द सी उठ जाती है जो राखी देवी की पूरा जिस्म hi कैंप सी जाती है राखी देवी को अर्जुन की बात सीधे दिल पर लगती है जो राखी देवी की दिल एक वक़्त के लिए दर्द करने लगती है
राखी देवी भींगी आँखों से बस अर्जुन को जाते हुआ देख रही होती है मगर अर्जुन एक बार देख कर रूम से निकल गया होता है
वही आँचल आवर अंजलि को भी अर्जुन की बात अच्छी नहीं लगी होती है
मगर आँचल को अभी अफ़सोस भी हो रही होती है के कैसे अर्जुन पे उनका हाँथ उठ गया जो बचपन से अभी तक नहीं उठी थी ये सोच कर आँचल की आँखें भींग जाती है
थोड़ी देर उस रूम मैं बिलकुल शांति सी छ जाती है राखी देवी तो बस निचे सर किये हुआ बस रोटी जा रही होती है
दीदी प्लीज चुप हो जाइये वह सायद दर्द की वजह से बोल गया हो वह भी आप से प्यार करता है बस दिखाना नहीं चाहता है प्लीज दीदी चुप हो जाइये ...... आँचल राखी देवी के पास आकर कहती है
माँ .. ममी सच बोल रही है अर्जुन भाई आप को बहुत प्यार करता है बस अभी दुखी है के आप ने उसे सहर भेज दिया था माँ आप चुप हो जाइये ..... आँचल भी रोनी सी होकर कहती है
राखी देवी कुछ बोलती नहीं है आवर उठ कर अपनी रूम की तरफ चल देती है
#####################
गीता सोल्लगे के गेट पर कड़ी होकर अपने गाँव की लड़कियों की इंतज़ार कर रही होती है ताकि साथ घर जा सके गीता अभी फ़ोन से कॉल लगा रही होती है
दीदी अपना दुप्पट्टे को ऊपर कर लीजिये ज़मीन मैं गन्दा हो रहा है
गीता कॉल लगा रही होती है की उसे एक लड़की की आवाज़ सुनाई देती है तो देखती है सच मैं उसका दुप्पटा ज़मान पर गन्दा हो रहा है तो गीता अपना दुप्पट्टे को ऊपर कर लेती है
थैंक्स बेबी डॉल ....... गीता उस लड़की से कहती है
गीता की बात सुन वह लड़की भी खुश हो जाती है
दीदी मेरा नाम बेबी डॉल नहीं आस्था है
आवर ये मेरी बेस्टफ्रेंड नीता है आवर आप का नाम क्या है ........ आस्था पास आकर कहती है
ओह्ह्ह तो इतनी प्यारी बेबी डॉल का नाम आस्था है बहुत प्यारी नाम है
आवर तुम्हारी बेस्टफ्रेंड की भी प्यारी नाम है
तुम बिलकुल बेबी डॉल की तरह hi लग रही हो
मेरी गुड़िया भी तुम्हारी तरह hi बेबी डॉल लगती है
मेरा नाम गीता है मैंने पहले कभी तुमेह नहीं देखि सोल्लगे मैं नई एडमिशन है क्या ........ गीता कहती है
आप का भी नाम बहुत अच्छा है हम दोनों इस सोल्लगे मैं नई है आवर हम दोनों भी इसी गाँव के रहने वाली है बस कुछ दुरी पर हम्हरा घर है ...... आस्था मुस्कुराती हुई कहती है
ओह अच्छा फिर ठीक है अच्छे से पढाई करना कोई परेशानी हो तो मुझसे पूछ सकती हो पढाई के लिए ..... गीता कहती है
ठीक है दीदी आप किसका इंतज़ार कर रही है यह ..... आस्था फिर बोलती है
मैं अपनी गाँव की लड़कियों की इंतज़ार कर रही हुईं उनके साथ घर जाने के लिए .... गीता कहती है
ठीक है दीदी फिर कल मिलते है बोलती हुई आस्था वह से चली जाती है
बहुत प्यारी लड़की है .... गीता मन मैं सोचती है फिर जब गीता की गाँव की लड़कियां आती है तो साथ मैं गीता अपने घर की तरफ चल पड़ती है
रस्ते मैं अर्जुन के बारे मैं बस तारीफ hi कर रही होती है सभी लड़कियां जो गीता मन hi मन मुस्कुरा रही होती है अपने छोटे भाई की तारीफ सुन कर
यह घर पर राखी देवी अपनी रूम का गेट बंद कर दी थी
वही आँचल आवर अंजलि हॉल मैं मायूसी से बैठी हुई थी आँचल को बहुत अफ़सोस आवर दुःख हो रहा था अर्जुन को तप्पड़ मरने पर
आँचल तो कभी सोच भी नहीं सकती थी अर्जुन को तप्पड़ मारनी की मगर जब अर्जुन ने मरने को बात की तो आँचल को बड़ी गुस्सा आया आवर आँचल का हाँथ उठ गया था
अंजलि बेटी ज़रा दर्द वाला वह मरहम लेकर आ अर्जुन को दर्द हो रहा होगा थोड़ा लगा देती हुईं उसे आराम मिलेगा फिर ..... आँचल कहती है
वही अंजलि उठ कर अपनी ममी की रूम के तरफ चली जाती है आवर आँचल अर्जुन के रूम की तरफ चली जाती है
जो अभी अर्जुन अपनी अंजलि दीदी की रूम थोड़ा मायूसी से बैठा हुआ होता है
आँचल भी अर्जुन के पास मैं बैठ जाती है
मेरे बीटा को अभी अपनी माँ पर गुस्सा आया रहा है न चलो तुम भी अपनी माँ को तप्पड़ मार लो ....... आँचल पास बैठ कर बोलती है आवर अर्जुन का हाँथ उठा कर अपनी गाल पर मरवाने लगती है
माँ क्या कर रही है मैं क्यू आप पर गुस्सा होने लगा आप मुझे जब चाहे मार सकती है आप मेरी माँ है समझी ....... अर्जुन अपना हाँथ निचे करते हुआ कहता है
क्या मेरा बीटा सच बोल रहा है अपनी माँ से गुस्सा नहीं है मैं नहीं मानती तुम झूट बोल रहे हो .... आँचल झूठी नाराजगी से कहती है
माँ मैं आप से झूट क्यू बोलने लगा मैं सच मैं आप से गुस्सा नहीं हुईं ........ अर्जुन आँचल को देखते हुआ कहता है
ममी मुझे मिल नहीं रही है कहा पे राखी है आप ने वह मैंने हर जगह देख लिया ...... अंजलि रूम मैं आती हुई बोलती है
अगर मेरा बीटा सच मैं अपनी माँ से गुस्सा नहीं है तो जो मैं बोलती हुईं वह करदे तब मैं मानूंगी .... आँचल अंजलि को देखती हुई बोलती है
क्या करना है आप को बोलिये मैं करूँगा मगर मैं उस औरत से बात नहीं करूँगा तो वह मत बोलियेगा ........ अर्जुन कहता है
फिर ठीक है मेरा प्यारा बीटा अपनी माँ से कितना प्यार करता है .... आँचल मुस्कुराती हुई कहती है
अर्जुन को कुछ भी समझ नहीं अत है की उसकी ममी माँ क्या करने को बोल रही है जो अर्जुन भी हां बोल देता है
आँचल मुस्कुरा कर अर्जुन को किश करती है आवर अंजलि के साथ रूम से निकल जाती है आवर अपनी रूम मैं जाकर वह मरहम ले लेती है आवर फिर रूम से निकलते हुआ अंजलि को पीछे आने से मन कर देती है
आँचल जैसे hi अर्जुन के रूम मैं जाती है गेट बंद कर देती है
माँ गेट क्यू बंद कर रही है आवर आप के हाँथ मैं क्या है ...... गेट बंद करते देख अर्जुन कहता है
देखा मुझे दर्द कहा हो रहा है मैंने देखि तू रूम से निकलते हुआ थोड़ा लंगड़ा रहा था दे वह मरहम लगा देती हुईं ....... आँचल कहती है
अपनी ममी माँ की बात सुन के अर्जुन की आँखें बड़ी हो जाती है अर्जुन को शर्म भी आने लगता है
अर्जुन थोड़ा सहम भी जाता है माँ क्या बोल रही है क्या माँ मेरे लैंड पर मरहम लगाने के लिए बोल रही है ...
ये जानते हुआ भी के मेरे लैंड पर चील गया है ......... अर्जुन मन सोचता है आवर अपने चादर आवर ऊपर करने लगता है
अरे अरे क्या कर रहा है अभी बोलै न अपनी माँ की बात तू मानेगा फिर चादर ऊपर क्यू कर रहा है दे मैं मरहम को लगा दूँ जल्दी है
अर्जुन को चादर ऊपर करते हुआ देख कर आँचल कहती है
अब आँचल को क्या पता था अर्जुन को दर्द कहा पर हो रहा है आवर अर्जुन चादर को आवर ऊपर क्यू कर रहा है
आँचल भी अर्जुन की चादर को हटाने लग जाती है
माँ वह मरहम दीजिये मैं लगा लूंगा आप जाइये
maaaaaaaaaaaaaa
अभी अर्जुन बोल hi रहा होता है की आँचल चादर को ज़ोर से खिंच देती है जो अर्जुन चीख पड़ता है शरमाते हुआ
वही आँचल की आँखे बड़ी हो जाती है आवर आँचल की दिल ज़ोर ज़ोर से मचलने लगती है आँचल की नज़र सिर्फ एक जगह पर टिक जाती है
जो आँचल की गाला भी सूखने लग जाती है आँचल की हाँथ से मरहम भी निचे गिर जाता है
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ार्जुन चादर के अंदर दर्द से तड़प रहा होता है मगर अब चीख नहीं रहा होता है अर्जुन अपना दर्द किसी तरह से सहने की कोशिश कर रहा होता ताकि सामने वाली औरत अभी वह से चली जाये
अर्जुन भगवन के लिए मुझे देखने दे क्या हुआ है तुझे मैं तुझे दर्द मैं नहीं देख सकती हुईं .. प्लीज अर्जुन बीटा मुझे देखने दो .. औरत कहती है
मैं तुम्हारा भाई नहीं हुईं जो तुम्हारे सामने इस तरह आ जाऊंगा तुमेह फर्क पड़े या न पड़े मगर मुझे फर्क पड़ता है मेरी ममी माँ ने मुझे इतना तो सीखा दिया है किसी भी औरत के सामने नंगा नहीं जाना चाहिए तुम प्लीज अभी रूम से चली जाओ ..... अर्जुन चादर के अंदर से hi बोलता है
अर्जुन की बात राखी देवी को एक तीर की तरह लगती है आवर उसी वक़्त राखी देवी की आँखें नाम हो जाती है ......
कुछ वक़्त पहले तो राखी देवी को इतनी ख़ुशी हुई थी के राखी देवी भूल hi चुकी थी के वह नंगी hi अर्जुन के पास आ गयी है ये बिना सोचे की अर्जुन उनेह नंगी देख कर क्या सोचेंगे मगर राखी देवी को अभी बस अर्जुन के माँ पुकारने से hi राखी देवी की दिल ख़ुशी से मचने लगी थी
मगर फिर अर्जुन की बात सुन राखी देवी फिर अंदर से टूट गयी आवर अपने मुंह पे हाँथ रख कर एक कदम पीछे की तरफ हैट गयी
राखी देवी की आँखों से आंसू रुक नहीं रही होती है लेकिन फिर जल्द hi राखी देवी अपनी आंसू पोछ लेती है आवर राखी देवी एक दुप्पट्टा अपनी साइन पर रख लेती है मगर दुप्पटा रखने के बाद भी राखी देवी की भींगी हुई सीना पर तानी हुई बड़ी बड़ी चुकी की निप्पल दिख रही होती है मगर राखी देवी को अभी बस अर्जुन की फिकर हो रही होती इस लिए फिर अर्जुन के बीएड के पास चली जाती है आवर अर्जुन के चादर खींचने लगती है
अर्जुन तू मुझसे गुस्सा है तो गुस्सा रह मगर अभी मुझे देखने दे तुझे क्या हुआ है ..... राखी देवी चादर को खींचते हुआ कहती है
अर्जुन को बहुत दर्द हो रहा होता है क्यू के अर्जुन का लैंड की चमड़ी डाब गयी होती है आवर ऊपर से अर्जुन को पिशाब भी लगी हुई होती है अर्जुन अब क्या करे समझ मैं नहीं आ रहा होता है
वही राखी देवी भी अर्जुन की चादर खींचने लग जाती है अर्जुन को कुछ नहीं समझ मैं आता है तो अर्जुन झट से उठ जाता है आवर राखी देवी की तरफ बिना देखे hi चीखते हुआ बाथरूम की तरफ चलने लगता है अपने लैंड पर एक हाँथ रखे हुआ ताकि राखी देवी की दिखे न
अर्जुन को जाते देख राखी देवी फिर अर्जुन के पीछे जाती है मगर अर्जुन बाथरूम की गेट बंद कर देता है राखी देवी को देखते हुआ
राखी देवी बाथरूम की गेट के पास कड़ी होकर रोने लग जाती है
तभी रूम मैं आँचल आवर अंजलि आती है जो राखी देवी को रट हुआ पति है
दीदी क्या हुआ आप रो क्यू रही है आवर मुझे आएसा लगा की अर्जुन बीटा भी दर्द मैं चीखा था ..... अंचल कहती है
राखी देवी को नंगी हालत मैं देख कर अंचल आवर अंजलि को बहुत जयादा हैरानी भी होती है मगर आँचल प्यार से राखी से पूछती है
वही अंजलि जल्दी से साड़ी उठा कर अपनी माँ के ऊपर दाल देती है आवर राखी देवी को पकड़ लेती है
मगर राखी देवी सिर्फ अभी भी बाथरूम की तरफ देख कर रो रही होती है
माँ बोलिये न क्या हुआ आप क्यू रो रही है क्या आप बाथरूम मैं गिर गयी थी आप को छोट तो नहीं लगी न प्लीज माँ आप कुछ तो बोलिये ...... अपनी माँ को रट हुआ देख कर अंजलि भी रोनी जैसी सवार मैं पूछती है
आँचल वह अर्जुन दर्द मैं चीखा अंजलि अर्जुन को दर्द हो रहा होगा वह बाथरूम मैं है मेरे बेटे को दर्द हो रहा है ..... राखी देवी दर्द मैं तड़पती हुई बोलती है
राखी देवी को आज अर्जुन पर बहुत प्यार आ रहा होता है राखी देवी से आज अर्जुन का दर्द नहीं देखि जा रही होती है. .....
ये जानते हुआ भी के अर्जुन को दर्द तो हो रहा है मगर कोई बड़ी बात नहीं है वह जल्द hi ठीक हो जायेगा
मगर राखी देवी को आज अपने बेटे का दर्द नहीं देखा जा रहा था ... आवर उसकी वजह था कई सैलून के बाद अर्जुन के मुंह से खुद के लिए माँ पुकारना जो राखी देवी की मंमता आज उमड़ कर निकल रही थी
राखी देवी ये भी भूल गई थी के अभी कुछ देर पहले hi अर्जुन कितना कुछ बोल गया है उनेह मगर राखी देवी को बस अर्जुन के दर्द का फिकर हो रहा था
राखी देवी की बात सुन कर आँचल जल्दी से बाथरूम की गेट पीटने लग जाती है
अर्जुन अर्जुन अर्जुन बीटा प्लीज गेट खोल क्या हुआ तुझे प्लीज बीटा मुझे देखने दे बीटा गेट खोल बीटा .... आँचल भी थोड़ी दर जाती है अर्जुन को क्या हो गया है जो आँचल रोटी हुई गेट पीटने लग जाती है
वही बाथरूम के अंदर जाते hi अर्जुन ने अपने लैंड की चमड़ी चैन से निकल दिया था मगर निकलते वक़्त अर्जुन का लैंड थोड़ा चील गया था जो अर्जुन के लैंड से थोड़ा बहुत खून भी निकल रहा होता है अर्जुन को थोड़ा भी दर्द हो रहा था मगर अर्जुन ठीक था बस दर्द काम होने का वेट कर रहा था तभी अर्जुन को अपनी ममी माँ की रट हुआ गेट पीटने की आवाज़ आने लगाती है जो अर्जुन थोड़ा सहम जाता है आवर न चाहते हुआ भी लैंड पेंट मैं दाल कर गेट को खोल देता है
गेट खुलते थे आँचल झट से अर्जुन को पकड़ लेती है
अर्जुन क्या हुआ तुझे दीदी बोल रही है तू दर्द मैं चीख रहा था कहा पर दर्द हो रहा है दिखा मुझे बीटा कहा पर दर्द हो रहा है ..... आँचल कहती है
अपनी ममी माँ की बात सुन कर अर्जुन थोड़ा सहम जाता है ये सोच कर के ममी माँ को अब कैसे दिखाऊं
माँ मुझे कुछ भी नहीं हुआ है वह चैन का जीप फस्स गया था जो मैंने निकल दिया है अब आप चुप हो जाइये ....... अर्जुन अपनी माँ राखी देवी को देखते हुआ कहता है
सच कह रहा न दर्द तो नहीं हो रहा देख दीदी कितनी रो रही है ... आँचल कहती है
हां माँ मैं सच कह रहा हुईं मुझे दर्द नहीं हो रहा है ोुए आप उनके रोने पे मत जाइये वह बस नाटक कर रही है रोने की उनेह क्या फर्क पड़ेगा मैं दर्द मैं राहु ये नहीं मैं ज़िंदा राहु या मर जाऊं ....... अर्जुन गुस्से मैं राखी देवी की तरफ देखते हुआ कहता है
Aaaaaaaaaaaaaaanchal
मममममी
राखी देवी आवर अंजलि दोनों एक साथ hi चीख पड़ती है
अभी अर्जुन बोल hi रहा होता है के तभी अर्जुन के गाल पर एक ज़ोर की तप्पड़ पड़ती है जो तप्पड़ की आवाज़ पुरे रूम मैं गूंज जाती है
अर्जुन के तप्पड़ कहते hi दोनों माँ बेटी एक साथ आँचल को पुकारती है
वही आँचल भी बहुत गुस्से मैं होती है आवर उसी गुस्से के साथ अर्जुन को देख रही होती है जो अर्जुन बस अपनी ममी माँ को देख रहा होता है लेकिन कुछ कहता नहीं है
क्या बोल रहा है फिर कभी मरने की बात की तो आवर तप्पड़ मरूंगी ........ जा अभी तू यह से ....... आँचल थोड़ा गुस्से मैं कहती है
अर्जुन अपनी ममी माँ को एक नज़र देखता है जो आँचल की आँखें नाम हो चुकी होती है
फिर अर्जुन अपनी माँ राखी देवी को एक नज़र बहुत गुस्से से देखता है आवर फिर रूम से निकल जाता है
वही अर्जुन की बात सुन कर राखी देवी एक वक़्त के लिए संत हो जाती है राखी देवी के आँखों से सिर्फ आंसू hi निकल रहे होते है मगर राखी देवी की दिल मैं एक दर्द सी उठ जाती है जो राखी देवी की पूरा जिस्म hi कैंप सी जाती है राखी देवी को अर्जुन की बात सीधे दिल पर लगती है जो राखी देवी की दिल एक वक़्त के लिए दर्द करने लगती है
राखी देवी भींगी आँखों से बस अर्जुन को जाते हुआ देख रही होती है मगर अर्जुन एक बार देख कर रूम से निकल गया होता है
वही आँचल आवर अंजलि को भी अर्जुन की बात अच्छी नहीं लगी होती है
मगर आँचल को अभी अफ़सोस भी हो रही होती है के कैसे अर्जुन पे उनका हाँथ उठ गया जो बचपन से अभी तक नहीं उठी थी ये सोच कर आँचल की आँखें भींग जाती है
थोड़ी देर उस रूम मैं बिलकुल शांति सी छ जाती है राखी देवी तो बस निचे सर किये हुआ बस रोटी जा रही होती है
दीदी प्लीज चुप हो जाइये वह सायद दर्द की वजह से बोल गया हो वह भी आप से प्यार करता है बस दिखाना नहीं चाहता है प्लीज दीदी चुप हो जाइये ...... आँचल राखी देवी के पास आकर कहती है
माँ .. ममी सच बोल रही है अर्जुन भाई आप को बहुत प्यार करता है बस अभी दुखी है के आप ने उसे सहर भेज दिया था माँ आप चुप हो जाइये ..... आँचल भी रोनी सी होकर कहती है
राखी देवी कुछ बोलती नहीं है आवर उठ कर अपनी रूम की तरफ चल देती है
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गीता सोल्लगे के गेट पर कड़ी होकर अपने गाँव की लड़कियों की इंतज़ार कर रही होती है ताकि साथ घर जा सके गीता अभी फ़ोन से कॉल लगा रही होती है
दीदी अपना दुप्पट्टे को ऊपर कर लीजिये ज़मीन मैं गन्दा हो रहा है
गीता कॉल लगा रही होती है की उसे एक लड़की की आवाज़ सुनाई देती है तो देखती है सच मैं उसका दुप्पटा ज़मान पर गन्दा हो रहा है तो गीता अपना दुप्पट्टे को ऊपर कर लेती है
थैंक्स बेबी डॉल ....... गीता उस लड़की से कहती है
गीता की बात सुन वह लड़की भी खुश हो जाती है
दीदी मेरा नाम बेबी डॉल नहीं आस्था है
आवर ये मेरी बेस्टफ्रेंड नीता है आवर आप का नाम क्या है ........ आस्था पास आकर कहती है
ओह्ह्ह तो इतनी प्यारी बेबी डॉल का नाम आस्था है बहुत प्यारी नाम है
आवर तुम्हारी बेस्टफ्रेंड की भी प्यारी नाम है
तुम बिलकुल बेबी डॉल की तरह hi लग रही हो
मेरी गुड़िया भी तुम्हारी तरह hi बेबी डॉल लगती है
मेरा नाम गीता है मैंने पहले कभी तुमेह नहीं देखि सोल्लगे मैं नई एडमिशन है क्या ........ गीता कहती है
आप का भी नाम बहुत अच्छा है हम दोनों इस सोल्लगे मैं नई है आवर हम दोनों भी इसी गाँव के रहने वाली है बस कुछ दुरी पर हम्हरा घर है ...... आस्था मुस्कुराती हुई कहती है
ओह अच्छा फिर ठीक है अच्छे से पढाई करना कोई परेशानी हो तो मुझसे पूछ सकती हो पढाई के लिए ..... गीता कहती है
ठीक है दीदी आप किसका इंतज़ार कर रही है यह ..... आस्था फिर बोलती है
मैं अपनी गाँव की लड़कियों की इंतज़ार कर रही हुईं उनके साथ घर जाने के लिए .... गीता कहती है
ठीक है दीदी फिर कल मिलते है बोलती हुई आस्था वह से चली जाती है
बहुत प्यारी लड़की है .... गीता मन मैं सोचती है फिर जब गीता की गाँव की लड़कियां आती है तो साथ मैं गीता अपने घर की तरफ चल पड़ती है
रस्ते मैं अर्जुन के बारे मैं बस तारीफ hi कर रही होती है सभी लड़कियां जो गीता मन hi मन मुस्कुरा रही होती है अपने छोटे भाई की तारीफ सुन कर
यह घर पर राखी देवी अपनी रूम का गेट बंद कर दी थी
वही आँचल आवर अंजलि हॉल मैं मायूसी से बैठी हुई थी आँचल को बहुत अफ़सोस आवर दुःख हो रहा था अर्जुन को तप्पड़ मरने पर
आँचल तो कभी सोच भी नहीं सकती थी अर्जुन को तप्पड़ मारनी की मगर जब अर्जुन ने मरने को बात की तो आँचल को बड़ी गुस्सा आया आवर आँचल का हाँथ उठ गया था
अंजलि बेटी ज़रा दर्द वाला वह मरहम लेकर आ अर्जुन को दर्द हो रहा होगा थोड़ा लगा देती हुईं उसे आराम मिलेगा फिर ..... आँचल कहती है
वही अंजलि उठ कर अपनी ममी की रूम के तरफ चली जाती है आवर आँचल अर्जुन के रूम की तरफ चली जाती है
जो अभी अर्जुन अपनी अंजलि दीदी की रूम थोड़ा मायूसी से बैठा हुआ होता है
आँचल भी अर्जुन के पास मैं बैठ जाती है
मेरे बीटा को अभी अपनी माँ पर गुस्सा आया रहा है न चलो तुम भी अपनी माँ को तप्पड़ मार लो ....... आँचल पास बैठ कर बोलती है आवर अर्जुन का हाँथ उठा कर अपनी गाल पर मरवाने लगती है
माँ क्या कर रही है मैं क्यू आप पर गुस्सा होने लगा आप मुझे जब चाहे मार सकती है आप मेरी माँ है समझी ....... अर्जुन अपना हाँथ निचे करते हुआ कहता है
क्या मेरा बीटा सच बोल रहा है अपनी माँ से गुस्सा नहीं है मैं नहीं मानती तुम झूट बोल रहे हो .... आँचल झूठी नाराजगी से कहती है
माँ मैं आप से झूट क्यू बोलने लगा मैं सच मैं आप से गुस्सा नहीं हुईं ........ अर्जुन आँचल को देखते हुआ कहता है
ममी मुझे मिल नहीं रही है कहा पे राखी है आप ने वह मैंने हर जगह देख लिया ...... अंजलि रूम मैं आती हुई बोलती है
अगर मेरा बीटा सच मैं अपनी माँ से गुस्सा नहीं है तो जो मैं बोलती हुईं वह करदे तब मैं मानूंगी .... आँचल अंजलि को देखती हुई बोलती है
क्या करना है आप को बोलिये मैं करूँगा मगर मैं उस औरत से बात नहीं करूँगा तो वह मत बोलियेगा ........ अर्जुन कहता है
फिर ठीक है मेरा प्यारा बीटा अपनी माँ से कितना प्यार करता है .... आँचल मुस्कुराती हुई कहती है
अर्जुन को कुछ भी समझ नहीं अत है की उसकी ममी माँ क्या करने को बोल रही है जो अर्जुन भी हां बोल देता है
आँचल मुस्कुरा कर अर्जुन को किश करती है आवर अंजलि के साथ रूम से निकल जाती है आवर अपनी रूम मैं जाकर वह मरहम ले लेती है आवर फिर रूम से निकलते हुआ अंजलि को पीछे आने से मन कर देती है
आँचल जैसे hi अर्जुन के रूम मैं जाती है गेट बंद कर देती है
माँ गेट क्यू बंद कर रही है आवर आप के हाँथ मैं क्या है ...... गेट बंद करते देख अर्जुन कहता है
देखा मुझे दर्द कहा हो रहा है मैंने देखि तू रूम से निकलते हुआ थोड़ा लंगड़ा रहा था दे वह मरहम लगा देती हुईं ....... आँचल कहती है
अपनी ममी माँ की बात सुन के अर्जुन की आँखें बड़ी हो जाती है अर्जुन को शर्म भी आने लगता है
अर्जुन थोड़ा सहम भी जाता है माँ क्या बोल रही है क्या माँ मेरे लैंड पर मरहम लगाने के लिए बोल रही है ...
ये जानते हुआ भी के मेरे लैंड पर चील गया है ......... अर्जुन मन सोचता है आवर अपने चादर आवर ऊपर करने लगता है
अरे अरे क्या कर रहा है अभी बोलै न अपनी माँ की बात तू मानेगा फिर चादर ऊपर क्यू कर रहा है दे मैं मरहम को लगा दूँ जल्दी है
अर्जुन को चादर ऊपर करते हुआ देख कर आँचल कहती है
अब आँचल को क्या पता था अर्जुन को दर्द कहा पर हो रहा है आवर अर्जुन चादर को आवर ऊपर क्यू कर रहा है
आँचल भी अर्जुन की चादर को हटाने लग जाती है
माँ वह मरहम दीजिये मैं लगा लूंगा आप जाइये
maaaaaaaaaaaaaa
अभी अर्जुन बोल hi रहा होता है की आँचल चादर को ज़ोर से खिंच देती है जो अर्जुन चीख पड़ता है शरमाते हुआ
वही आँचल की आँखे बड़ी हो जाती है आवर आँचल की दिल ज़ोर ज़ोर से मचलने लगती है आँचल की नज़र सिर्फ एक जगह पर टिक जाती है
जो आँचल की गाला भी सूखने लग जाती है आँचल की हाँथ से मरहम भी निचे गिर जाता है
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