Teri tadap jaldi khatam nahi hogi - Page 4 - SexBaba
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Teri tadap jaldi khatam nahi hogi

अपडेट ..... 27

गीता के रूम मैं ..... गीता आवर पूजा बात कर रही होती है जो पूजा अपनी सोहागरात की बाते गीता को बता रही होती है गीता के पूछने पर आवर पास मैं hi बीएड पर पूजा की बेटी पारी खेल रही होती है पूजा की फ़ोन लेकर तभी अचानक गीता की नज़र फ़ोन पर पड़ती है जो कॉल आयी हुई होती है

उठी हुई फ़ोन देख कर गीता सोचती है पारी ने फ़ोन उठा ली है इस लिए पूजा को बता देती है

गीता के बताने पर पूजा फ़ोन देखती है तो अंजलि का नंबर होती है

ये तो छोटी का नंबर है क्या अंजलि हम्हारी बाते सुन रही थी ....... ही भगवन ये छोटी तो बहुत बदमाश हो गयी है ........ पूजा मन मैं सोचती है

पूजा कही जीजू का फ़ोन तो नहीं है .... गीता मुस्कुराती हुई कहती है

नहीं गीता कंपनी वालों का फ़ोन है .... पूजा झूट बोल देती है

वही अंजलि अपनी बीएड पे हांफ रही होती एक तो अंजलि की छूट से रास निकलने से अंजलि का जिस्म कैंप रही होती है

वही अपनी गीता दीदी की आवाज़ सुन कर अंजलि को दर भी लगने लगा था ये सोच कर के अब पूजा दीदी नंबर देख लेंगी आवर जान भी जाएँगी के मैं उनकी बाते रही थी

अंजलि सोच रही होती है आवर अंजलि की पेंटी पूरी तरह छूट की पानी से भींग चुकी होती है अंजलि फिर बीएड से उठ कर बाथरूम मैं चली जाती है

अर्जुन बीटा आराम से इतनी तेज़ी मैं क्यू भाग रहा है ...... अर्जुन को तेज़ी मैं शिदियों से उतारते हुआ देख कर आँचल कहती है अर्जुन कुछ बोले hi अंजलि के रूम मैं जाने लगता है मगर अंजलि का रूम बंद होती है तो अर्जुन गेट पीटने लगता है

अर्जुन बीटा ...... आँचल पास आकर बोलती है

हां माँ क्या हुआ ....... अर्जुन कहता है

अर्जुन बीटा वह ...... आँचल आगे कुछ बोल नहीं पति है आवर अर्जुन के तरफ मायूसी से देखने लगती है आवर थोड़ी सी घबराई हुई भी होती है

माँ क्या हुआ किसी ने आप कुछ बोलै है क्या आप परेशां लग रही है क्या बात है ...... अर्जुन झट से अपनी ममी माँ को पकड़ लेता है बोलते हुआ आँचल को मायूस देख कर अर्जुन भी थोड़ा घबरा जाता है

आँचल तुम घबरा क्यू रही है अर्जुन तुझपे कभी गुस्सा कर hi नहीं सकता है आवर सायद तेरी बात को मन भी नहीं करेगा बोल दे आँचल बोल दे आज इतने सल्ल के बाद सायद एक माँ अपने बेटे की आरती भी उतर लेगी ....... आँचल की आत्मा से आवाज़ आती है

बीटा वह मैं आवर दीदी मंदिर जा रही है क्या तुम भी मेरे साथ मंदिर चलेगा ! अर्जुन बीटा मन नहीं करना अपनी माँ को प्लीज बीटा ....... आँचल मुंह बना कर कहती है

अपनी ममी माँ के भोलेपन चहरे पर मायूसी देख कर अर्जुन कैसे मन कर सकता था

ठीक है आप कहती है तो मैं मंदिर साथ चलूँगा सिर्फ अपनी भोली माँ के लिए समझी ...... अर्जुन आँचल के गाल को पकड़ कर कहता है

अर्जुन का हां सुन कर आँचल बहुत खुश हो होती है आवर आँचल भी अर्जुन को साइन से लगा लेती है

अपनी इस माँ को इसी तरह प्यार करते रहना मैं तो तुझे hi देख देख कर ये जीवन बिता रही हुईं तू नहीं होता तो पता नहीं कैसी जीवन जिह रही होती मैं जब तू कुछ देर के लिए मुझसे दूर जाता है तो मुझे बहुत बेचैनी होने लगती है कभी कभी सोचती हुईं मैं तुझे अपनी जिस्म मैं छिपा लो जो तू हर वक़्त मेरे पास रहे ...... अर्जुन को गले लगाए हुआ आँचल मन मैं सोचती है

माँ मैं कपडे बदल कर आता हुईं ........ अर्जुन बोल कर फिर से अंजलि दीदी का गेट पीटने लगता है जो अंजलि गेट खोल देती है आवर अर्जुन रूम मैं चला जाता है मगर रूम मैं कोई भी नहीं होता है तभी बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़े आती है

अंजलि दीदी आप अंदर हो क्या ..... अर्जुन पूछता है

अर्जुन मैं नाहा रही हुईं ... अंजलि बोलती है

अर्जुन के साथ मंदिर जाने की सुन कर hi आँचल बहुत खुश होती है आवर मुस्कुराती हुई राखी देवी की रूम का गेट खोल कर अंदर जाती है तो देखती है राखी देवी बीएड पर बैठी है आवर साड़ी लिए हुई कुछ सोच रही होती है

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राखी देवी की चहरे को देख कर आँचल समझ तो जाती है राखी देवी क्या सोच रही है

दीदी आप ये साड़ी पहन सकती है आप की तड़प भगवन ने सुन ली है ..... आँचल मुस्कुरा कर कहती है

अपनी नन्द आँचल की बात सुन कर राखी देवी को उस वक़्त इतनी ख़ुशी होती है की वह बीएड से उठ जाती है आवर भाग कर आँचल के पास आ जाती है

आँचल मेरी बहन क्या सच मैं अर्जुन बीटा साथ मंदिर जाने के लिए मान गया है तू मुझसे झूट तो नहीं कर रही न बोल न मेरी बहन बोल न ........ राखी देवी आँचल के हाँथ पकड़ कर मायूसी से पूछती है

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इस वक़्त राखी देवी की आँखों मैं एक अजीब सी ख़ुशी होती है आवर राखी देवी खुश होकर पूछती है इस वक़्त भी राखी देवी की आँखों से आंसू निकल रही होती मगर ये आंसू ख़ुशी की होती है आवर इतनी बड़ी ख़ुशी की राखी देवी को यकीन नहीं हो रही थी की पूरी हो गयी है

दीदी मैं सच बोल रही हुईं अर्जुन हम्हारे साथ मंदिर जायेगा आप जल्दी से ये साड़ी को पहन लीजिये ये साड़ी कब से आप की जिस्म को छूना चाहती है मगर आप ने कभी इस साड़ी को अपनी जिस्म को छूने नहीं दिया है ...... आँचल मुस्कुरा कर कहती है

आँचल की बात सुन कर राखी देवी शर्मा जाती है

आँचल मैं अभी बाथरूम से साड़ी पहन कर आती हुईं .... राखी देवी बोलती है आवर बीएड से साड़ी लेकर बाथरूम मैं चली जाती है

हे भगवन कुछ आएसा कर दीजिये जो दीदी हर दिन आयी hi खुश रहती रहे ....... आँचल मन मैं सोचती है आवर खुद की आँखों मैं आई हुई आंसू पोछ लेती है जो राखी देवी की ख़ुशी देख कर आँचल की भी आँखों मैं आंसू आ गयी होती है

बाथरूम मैं जाने के बाद राखी देवी अपनी साड़ी निकल देती है

राखी देवी के चरणों पे अभी बहुत ख़ुशी होती है जो राखी देवी मुस्कुरा रही होती है राखी देवी अपने कपडे निकल कर साथ लेकर आई हुई साड़ी हाँथ मैं उठा लेती है आवर साड़ी को खुद hi चुम लेती है आवर फिर राखी देवी फिर कुछ सोचने लगती है

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अर्जुन बीटा यह क्या कर रहा है मैं बोली थी न मेरे hi साथ रहना फिर यह क्यू खड़ा है ........ राखी देवी कहती है

माँ वह देखिये कितनी अच्छी साड़ी है न वह साड़ी आप पर बहुत अच्छी लगेगी वह साड़ी आप ले लो ...... अर्जुन एक साड़ी की तरफ इशारा करते हुआ कहता है

जब राखी देवी अर्जुन के नज़रों की पीछा करती है तो सामने एक साड़ी दिखाई देती है जो बहुत खूबसूरत होती है राखी देवी भी उस साड़ी को देख कर खुश हो जाती है

वह साड़ी क्या सच मैं मेरे राजा बेटे को अच्छी लग रही है ....... राखी देवी अर्जुन को गॉड मैं उठा कर बोलती है

सच्ची माँ वह साड़ी बहुत अच्छी लग रही है

आप जब उस साड़ी को पहनोगी तो आप भी बहुत अच्छी लगोगी ..... अर्जुन राखी देवी से कहता है

वह साड़ी राखी देवी को भी बहुत अच्छी लगती है आवर अर्जुन भी लेने को बोलता है तो राखी देवी वह साड़ी ले लेती है

फिर आवर कुछ कपडे लेकर राखी देवी घर आ जाती है

हां क्या हुआ अभी तक मेरा बीटा सोया क्यू नहीं ...... राखी देवी अर्जुन को अपनी रूम मैं देखती है तो पूछती है

माँ आप वह साड़ी पहन कर मुझे दिखाइए न मुझे देखना है आप कितनी अच्छी लगाती है उस साड़ी मैं ....... अर्जुन कहता है

ओह मेरे राजा बेटे को देखना है उस साड़ी मैं माँ कैसी लगती है ठीक है चलो बीएड पर बैठ जाओ माँ अभी दिखती है पहन कर ...... राखी देवी कहती है

वही अर्जुन खुश होकर बीएड पर बैठ जाता है

राखी देवी वह साड़ी निकल कर एक बार अर्जुन को मुस्कुरा देखती है फिर अपनी पहनी हुई साड़ी निकलने लगती है

राखी देवी साड़ी निकल कर बलाउज की बटन खोल hi रही होती है तभी कोई गेट पीटने लगता है राखी देवी साड़ी पहन कर गेट खोलती है तो सामने गीता दरी हुई कड़ी होती है तो राखी देवी जल्दी से गीता को गले लगा लेती है

गीता बेटी क्या हुआ तुम दर क्यू रही हो ...... राखी देवी पूछती है

माँ वह गुड़िया बहुत रो रही है माँ गुड़िया को बहुत दर्द हो रही है ...... गीता बोलती हुई रोने लगती है

अंजलि के बारे मैं सुन कर राखी देवी जल्दी से रूम की तरफ भगति है आवर रूम मैं जाकर देखती है तो सच मैं अंजलि सिसक रही होती है तो राखी देवी अंजलि को गुड मैं ले लेती है

क्या हुआ मेरी पारी रानी को मेरी रानी बेटी रो क्यू रही है बताओ माँ को ....... राखी देवी अंजलि को गॉड मैं लेकर पूछती है

माँ स्कूल से आते वक़्त गुड़िया गिर गयी थी तो गिरते वक़्त गुड़िया के पेअर के अंगूठे मैं छोट लग गयी थी खून भी बाह रहा था उस वक़्त गुड़िया रोने लगी थी तो मैंने गुड़िया के अंगूठे पे कपडे से बांध दिया था तो गुड़िया चुप हो गयी फिर हम दोनों घर आ गए मैं आप को बताने वाली थी मगर गुड़िया ने मन कर दिया आप को बताने से ...... मगर अभी गुड़िया अचानक रोने लगी ........ गीता कहती है

गीता की बात सुन कर राखी देवी अंजलि की अंगूठे को देखने लगती है अंजलि के अंगूठे मैं बंधी हुई कपडा खून से भिनगा हुई होती है

खून से भींगी हुई कपडे देख कर राखी देवी थोड़ी दर जाती है कही छूट जयादा तो नहीं लगी है राखी देवी धीरे धीरे कपडे निकलती है तो देखती है अंगूठे की नाख़ून थोड़ी ऊपर की तरफ हो गयी है

ओह माँ दर्द हो रहा है ..... अंजलि राखी देवी की हाँथ पकड़ कर बोलती है

ओह ओह ओह मेरी गुड़िया पहले क्यू नहीं बताया कितना खून बाह रहा है राखी देवी दूसरे कपडे से खून साफ करती है आवर फिर अंजलि के जख्म पर दवा लगा देती है

रात मैं राखी देवी अंजलि के साथ hi सो जाती है उस रात अर्जुन के साथ गीता सो जाती है

उसके बाद अर्जुन फिर उस साड़ी के बारे मैं भूल जाता है वही राखी देवी भी भूल जाती है आवर इसी तरह दिन बीतने लगता है आवर फिर एक दिन राखी देवी अर्जुन को हॉस्टल मैं भेज देती है

मगर जब अर्जुन राखी देवी से नफरत करने लगता है तब राखी देवी बहुत दुखी रहने लगती है आवर फिर एक रात राखी देवी को साड़ी के बारे मैं याद आती है आवर राखी देवी आवर भी दुखी हो जाती है उस रात राखी देवी बहुत रोटी है आवर उस रात अर्जुन के रूम मैं जाकर वह साड़ी पहनने लगती है मगर वह साड़ी पहन नहीं पति है

अर्जुन मेरे लाल तेरी माँ तुझसे बहुत प्यार करती है तू क्यू अपनी माँ से इतनी नफरत करता है मैंने तुझे कैसे दूर किया मैं hi जानती हुईं तेरी ये नफरत एक दिन मेरी जान ले लेगी

अर्जुन तेरी माँ कोई भी गलत काम नहीं करती है जब तू बड़ा हो जायेगा आवर कभी मेरी तरह रिश्तों मैं बहस जायेगा तब तुझे पता चलेगा तेरी माँ नफरत के काबिल नहीं है समझेगा बीटा एक दिन तू अपनी इस माँ की मज़बूरी ज़रूर समझेगा मुझे पूरा यकीं है

अर्जुन बीटा मैं ये साड़ी को पहन कर पहले तुझे hi दिखूंगी एक न एक दिन तू ज़रूर मेरे पास आएगा ....... राखी देवी बोलती है आवर रट हुआ अर्जुन के रूम मैं सो जाती है

दीदी दीदी क्या हुआ जल्दी कीजिये मैं अर्जुन को रूम मैं भेज रही हुईं

राखी देवी यादों मैं खोई होती है तभी आँचल की आवाज़ आती है तो राखी देवी यादों से बहार आती है आवर जल्दी से साड़ी पहनने लगती है

इधर अर्जुन रूम मैं सरत पहन कर बहार आता है तो आँचल बहार hi मिल जाती है

माँ मैं बहार इंतज़ार कर रहा हुईं आप जल्दी से आइये ..... अर्जुन कहता है

बीटा मैं पूजा की थाली लेकर आती हुईं तू ज़रा मेरा फ़ोन उठा ले दीदी की रूम मैं है बोलती हुईं आँचल वह से चली जाती है

अर्जुन अपनी माँ की रूम मैं जाना तो नहीं चाहता है मगर फिर जाने लगता है अर्जुन अभी अपनी माँ की रूम का गेट खोलने hi वाला होता है तभी अंदर से गेट खुल जाती है आवर अर्जुन के सामने राखी देवी दिखाई देती है जो राखी देवी के चरणों पर मुस्कान होती है

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अर्जुन की नज़र जैसे hi अपनी माँ पर पड़ती है अर्जुन बस अपनी माँ को देखता hi रह जाता है

राखी देवी पहनी हुई साड़ी मैं बहुत जयादा खूबसूरत लग रही होती है आवर राखी देवी के चहरे पर मुस्कान होती है जैसे राखी देवी एक बहुत बहुत खुश

अपनी माँ की चहरे पर अभी मुस्कान देख कर अर्जुन भी अपनी माँ के मुस्कान मैं खो जाता है

अर्जुन अपनी माँ की चहरे को बड़े hi प्यार से देखने लगता है आवर अचानक अर्जुन के भी चहरे पर मुस्कान आ जाता

सामने अपनी माँ के चहरे पर मुस्कान देख कर अर्जुन भूल जाता है की वह अपनी माँ से कितनी नफरत करता है

तभी अर्जुन की नज़र राखी देवी की पहनी हुई साड़ी पर नज़र जाता है

अर्जुन कुछ देर तक अपनी माँ की पहनी हुई साड़ी को देखता है

जैसे अर्जुन कुछ याद करने की कोशिश कर रहा हो

ये साड़ी तो वही है जो मैंने माँ को लेने को कहा था कितनी प्यारी लग रही है माँ .. मैं जनता था ये साड़ी माँ पर अच्छी लगेगी ...... अर्जुन मन मैं सोचता है

अर्जुन कभी अपनी माँ को देखता है तो कभी साड़ी मैं कासी हुई जिस्म को जो उस साड़ी मैं राखी देवी की जिस्म उभर कर दिख रही होती है

अभी अर्जुन के जगह कोई आवर बुद्धा भी होता तो राखी देवी को पकड़ कर राखी देवी की कासी हुई जिस्म पर टूट पड़ता आवर राखी देवी की जिस्म को मसल मसल कर लाल कर देता

इतनी जयादा सेक्सी सेक्स की देवी लग रही होती है राखी देवी

मगर अर्जुन के दिल मैं अपनी माँ के लिए कोई बुरे ख्याल नहीं आ रहे होते है अर्जुन बस अपनी माँ को पहनी हुई साड़ी को देख रहा होता है जो अर्जुन के चहरे पर मुस्कान आती hi चली जाती है

वही राखे देवी मुस्कुराते हुआ अर्जुन के पास hi आ जाती है अर्जुन को खुद को देखते हुआ देख कर राखी देवी की दिल मैं अजीब ख़ुशी होती है जो अर्जुन के बिलकुल पास hi आ जाती है

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अर्जुन ये तेरी hi पसंद की हुई साड़ी है तू चाहता था न मैं ये साड़ी पहले तुझे पहन कर दिखाऊं ... अब बता कैसे लग रही है ये साड़ी मुझपे ........ राखी देवी मुस्कुराती हुई कहती है

अर्जुन तो अपनी माँ की मुस्कराहट भरी चहरे मैं खोता hi चला जाता है अर्जुन के दिल मैं अजीब सी हलचल होने लगाती है तभी राखी देवी की आवाज़ सुन कर अर्जुन को होश आता है आवर अर्जुन बिना कुछ बोले झट से घूम जाता है

अर्जुन बीटा मैं जानती हुईं तू मुझसे बहुत नाराज़ है बीटा तेरी ये माँ तुझसे बहुत प्यार करती है तू मुझसे बात नहीं करता है तो मेरा ये दिल कितना तड़पता है मैं hi जानती हुईं भगवन के लिए एक बार मुझसे बात करले मैं तेरी पेअर पड़ती हुईं ........ राखी देवी बोलती हुईं अर्जुन के पेअर पकड़ कर रोने लगती है

राखी देवी की आँखों से आंसू अर्जुन के पैरों पर गिरने लगती है

अपने पैरों पर पानी गिरने से अर्जुन को समझ आ जाता है उसकी माँ कितनी रो रही है जो अर्जुन के चहरे पर भी एक उदासी सी आ जाता है

अर्जुन को आज अपनी माँ पर बहुत तरस आने लगता है

फिर अचानक अर्जुन वह से जाने लगता है के सामने गीता आवर आँचल को देखता है जो भींगी आँखों से राखी देवी को देख रही होती है आवर अर्जुन की नज़र जैसे hi गीता आवर आँचल पर पड़ता है दोनों अर्जुन को देखते हुआ हाँथ जुड़ देती है

वही गीता तो रट हुआ हांथो से अर्जुन को इशारा करने लगती है के एक बार माँ से बात करले ...... वही आँचल भी रट हुआ इशारा करने लगती है

अपनी गीता दीदी आवर ममी माँ को रट हुआ देख कर अर्जुन को बहुत दुःख होता है अर्जुन अपनी से बात तो नहीं करना चाहता है मगर गीता आवर आँचल को दुखी देख कर अर्जुन पलट जाता है तो देखता है राखी देवी अभी भी ज़मीन पर निचे सर किये हुए रो रही होती है

अर्जुन अपनी माँ के पास जाता है आवर पकड़ कर उठा देता है

ये नाटक करना बंद कीजिये मैं अच्छी तरह जनता हुईं कितना प्यार करती है मुझसे

अगर आप मुझसे से सच मैं प्यार करती तो मुझे खुद से अलग नहीं करती

आप एहि जानना चाहती है न ये साड़ी आप पर कैसी लग रही है तो सुनिए

ये साड़ी मैंने अपनी उस माँ के लिए पसंद किया था जिस माँ को मैं बहुत बहुत प्यार करता था

अगर आज ये साड़ी मेरी उसी माँ ने पहनी है तो ये साड़ी बहुत अच्छी लग रही है आप पर

मगर मैं जनता हुईं अब वह माँ आप नहीं रही जिसे मैं प्यार करता था अब ये नाटक बंद कीजिये मैं अभी आप की वजह से दीदी आवर माँ को दुखी नहीं करना चाहता हुईं ...... अर्जुन ये सब बात राखी देवी को उठाते हुआ धीरे धीरे बोलता है ताकि कुछ दूर कड़ी गीता आवर आँचल न सुन ले

अर्जुन की हर बात राखी देवी के दिल पर तीर की तरह लगती है आवर बहुत दुखी भी होती है मगर कुछ बोलती नहीं है आवर बस अर्जुन को प्यार से देखती रहती है

फिर पता नहीं राखी देवी के दिल मैं क्या आता है जो राखी देवी अर्जुन के गले लग जाती है आवर अर्जुन को अपनी सीने से लगा लेती है

अचानक अपनी माँ से गले लगने से अर्जुन अलग होने के लिए होता है तभी अर्जुन की नज़र सामने गीता आवर आँचल पर पड़ता है जो अपनी आँखों से आंसू पोछते हुआ मुस्कुरा रही होती है

वही आँचल तो अर्जुन की बलए hi लेने लगती है

गीता आवर अपनी ममी माँ को खुश देख कर अर्जुन अपनी माँ से छह कर भी अलग नहीं हो पता है मगर अर्जुन का हाँथ निचे hi रहता है

राखी देवी अर्जुन को अपने सीने मैं दबती hi चली जाती है राखी देवी आज कई सल्ल के गले न लगाने का कसार आज पूरा करना चाहती थी राखी देवी जितना अर्जुन को अपने सीने से लगाती है उतनी hi राखी देवी की दिल को सकूँ मिलती है राखी देवी की आज ख़ुशी की कोई ठिकाना नहीं होती है अभी अर्जुन ने क्या बोलै भूल जाती है आवर ये भी भूल जाती है की वह जिस तरह अर्जुन को अपनी सीने से लगा रही है अर्जुन को कैसा महसूस हो रहा होगा

ख़ुशी मैं राखी देवी ये भी भूल जा रही होती है की अर्जुन कोई छोटा बच्चा नहीं अब एक जवान लड़का हो चूका है मगर कई सैलून से अर्जुन को गले न लगा आज पूरा करना है ये याद रहता है राखी देवी को

इधर अर्जुन के हालत ख़राब होने लगता है जब राखी देवी की दोनों कठोर चुकी का निप्पल अर्जुन के सीने मैं दबने लगता है जो अर्जुन का छोटा अर्जुन अपना सर उठाने लगता है

जो अर्जुन थोड़ा डरने भी लगता है क्यू के अर्जुन का लैंड अभी बिलकुल राखी देवी की छूट के पास hi होता है आवर राखी देवी की जिस्म की गर्मी से अर्जुन का लैंड हार्ड होने लगता है अर्जुन को जैसे hi लगता है के उसका लैंड खड़ा होकर उसकी माँ के छूट के सामने जाए अर्जुन झट से अलग हो जाता है

चलिए मंदिर जाना है नहीं तो देर हो जाएगी बोलते हुआ अर्जुन वह से बहार चला जाता है

अंजलि की रूम मैं

अंजलि आज गर्मी जयादा लग रही है क्या तुझे ...... पूजा अंजलि के रूम मैं आकर बोलती है

वही अंजलि सिर्फ टावल मैं शीशे के सामने बॉल सवार रही होती है आवर जैसे hi पूजा की आवाज़ सुनती है अंजलि थोड़ी दर भी जाती है ये सोच कर कही पूजा दीदी को पता तो नहीं चल गया के मैं इनकी आवर गीता दीदी की बाते सुन रही थी

नहीं पूजा दी जयादा गर्मी तो नहीं लग रही है क्यू आप को आज गर्मी जयादा लग रही है क्या ....... अंजलि भी वही बात पूजा से भी पूछ लेती है

छोटकी ये बात तो तू मुझे बताएगी क्यू की आज तो तुझे hi गर्मी जयादा लग रही है न ........ पूजा इस बार कुछ देखते हुआ मुस्कुराती हुई बोलती है आवर जाकर बीएड पर बैठ जाती है

वही पूजा को मुस्कुराते हुआ अंजलि शीशे से देख लेती है

पूजा दीदी मुस्कुरा क्यू रही है क्या पूजा दीदी को पता चल गयी है की मैं इनकी बाते सुन रही थी ..... आवर पूजा दीदी ये गर्मी की बात क्यू बोल रही है आज इतनी जयादा भी गर्मी नहीं लग रही है ....... अंजलि मन मैं सोचती है

दीदी मुझे तो जयादा गर्मी नहीं लग रही है ...... अंजलि घूमते हुआ बोलती है आवर बीएड से पेंटी उठा कर पहनने लगती है

अच्छा तो छोटकी को गर्मी नहीं लग रही है तो इतनी जल्दी जल्दी नाहा क्यू रही है फिर तू ....... पूजा फिर मुस्कुराते हुआ बोलती है आवर थोड़ी हस्स भी देती है जो अंजलि सुन लेती है

पूजा को हस्ते सुन कर अंजलि को कुछ समझ मैं नहीं आता है की पूजा हस्स क्यू रही है अगर पूजा दीदी को पता भी चल गया है की मैं इनकी आवर गीता दीदी की बाते सुन रही थी तो अभी पूजा दीदी को मुझे डाटना चाहिए था मगर पूजा दीदी तो हस्स रही है ........ अंजलि मन मैं सोचती है

दीदी मन किया तो एक बार आवर नाहा लिया ... मगर सच मैं मुझे गर्मी नहीं लग रही है ..... अंजलि टावल को अपनी सीने पर लपेटते हुआ बोलती है

अच्छा तो मेरी छोटकी को आज दो बार नहाने का मन किया फिर ये क्या है ....... पूजा झट से कुछ दिखते हुआ बोलती है

वही पूजा के हाथ मैं चीज देख कर अंजलि दर जाती है आवर पीछे हैट जाती है अंजलि इतनी दर जाती है उस चीज को देख कर की टावल भी निचे गिर जाती है

क्यू की अचानक hi पूजा वह चीज अंजलि के आगे कर देती है जो अंजलि टावल भी लपेट नहीं पति है

वही टावल गिरते hi पूजा ज़ोर ज़ोर से हसने लगती है तभी हस्ते हुआ पूजा की नज़र सामने अंजलि की चुकी पर नज़र जाती है आवर पूजा की हसी चली जाती है

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अंजलि की चुकी बड़ी होने के बाद भी सीने मैं टाइट चिपकी हुई होती है जो पूजा को अंजलि की चुकी देख कर पूजा की गाला सूखने लगती है मगर एक तक पूजा अंजलि की सीने से चिपकी हुई चुकी को देखती रहती है

गाँव की लड़कियां सही कहती है छोटकी की जिस्म अलग hi है लड़के तो लड़के मेरी जैसी शादी सुधा औरत भी पागल हो जाएगी छोटकी के जसम के लिए

सच मैं भगवन जी ने छोटकी को सबसे अलग hi बनाये है ........ पूजा अंजलि की जिस्म को घूरती हुई सोचती है

आवर हाँथ मैं ली हुई उस चीज को अपनी नाक के पास लेकर जाने लगती है

वही पूजा को अपनी जिस्म को घूरते हुआ देख कर अंजलि झट से टावल उठा कर फिर से अपनी जिस्म पर रख लेती है आवर भाग कर पूजा के हाँथ से वह चीज छीन लेती है

छियई दीदी ये आप क्या कर रही है ये गन्दी है ...... अंजलि कहती है

तो तुझे किसने कहा था पेंटी के अंदर hi निकलने के लिए आवर निकली भी तो एहि क्यू छोड़ दी ....... पूजा कहती है

पूजा की बात सुन कर अंजलि को बहुत शर्म आती है जो अंजलि पेंटी वही गिरा देती है

तब पूजा की नज़र अंजलि पर जाती है तो देखती है अंजलि कुछ जयादा hi शर्मा रही है तो पूजा आवर कुछ नहीं बोलती है

कुछ देर तक उस रूम मैं तो शांति छ जाती है अंजलि अपनी जिस्म को छुपा कर कड़ी रहती है निचे सर किये हुआ

वैसे अंजलि तो कभी किसी से शर्माती नहीं थी अंजलि पूजा से भी गन्दी गन्दी बाते करती थी मगर कभी किसी के सामने नंगी नहीं हुई थी जो आज पूजा ने अंजलि की पूरी जिस्म hi देख ली होती है वह तो अच्छा होता है अंजलि पहले hi पेंटी पहन ली होती है जो पूजा उसकी छूट नहीं देख पति है मगर फिर भी अभी अंजलि को बहुत शर्म आती रही होती है एक तो वह चीज जो पूजा की हाँथ मैं अभी भी होती है उससे भी बड़ी बात जो आज तक किसी ने भी नहीं देखा था वह देख ली थी पूजा ने

ये क्या है छोटकी तू मेरी आवर गीता की बात सुन कर ये सब करती है ये गन्दी बात है ....... पूजा कहती है लेकिन पूजा की आँखों के सामने अभी भी अंजलि की जिस्म घूम रही होती है

दीदी सॉरी मुझे मांफ कर दीजिये मुझसे गलती हो गयी प्लीज गीता दीदी को मत बताना ...... निचे सर किये hi अंजलि कहती है

गुड़िया सच मैं ये गन्दी हरकत है मैं जानती हुईं तू अब जवान हो गयी है मगर ये सब बाते सुन कर तू ये सब करने लग जाएगी तो तेरी इन सब की आदत लग जाएगी

...... पूजा कहती है

दीदी मैं अब नहीं करुँगी प्लीज मुझे मांफ कर दीजिये ...... अंजलि फिर कहती है

ठीक है मैं गीता को नहीं बताउंगी मगर तुझे भी मेरी एक काम करनी होगी क्या अपनी इस दीदी के लिए एक काम करेगी ....... पूजा कहती है

हे भगवन प्लीज गुड़िया मान जाये ....... पूजा मन मैं सोचती है

ये दीदी कौन सा काम करवाना चाहती है

कोई भी काम हो मैं कर दूंगी पूजा दी बहुत अच्छी है मुझे भी छोटी बहन की तरह प्यार करती है ...... अंजलि मन मैं सोचती है

हआ दीदी मैं करुँगी आप की काम को क्या करना है ..... अंजलि बोलती है

वही अंजलि के हां सुनते hi पूजा बहुत खुश होती है फिर अचानक hi पूजा की आँखें भर आती है आवर कुछ hi देर मैं पूजा की आँखों से आंसू की बूंदें गिरने लगती है आवर पूजा सिसकने लगती है पूजा की सिसकने की आवाज़ सुन कर अंजलि का ध्यान पूजा पर जाती है जो बीएड पर बैठ कर निचे सर किये हुआ रो रही होती है

अंजलि भाग कर पूजा के पास आती है

पूजा दीदी क्या हुआ आप रोने क्यू लगी ....... अंजलि पास आकर बोलती है आवर पूजा को चुप करवाने लगती है

पूजा कुछ देर रोटी रहती है फिर अपनी आंसू पोछते हुआ अंजलि को देखने लगती है

गुड़िया मुझे मांफ कर देना मैं ये काम तुझसे करवा रही हुईं ये काम एक पाप है मगर मैं ये पाप करना चाहती हुईं मैं कई बार पीछे हटना चाहती थी मगर मैं नहीं हैट पा रही हुईं मुझे मांफ कर देना गुड़िया तेरी ये दीदी मार जाएगी मगर अब पीछे नहीं हैट सकती है मेरी बात सुन कर सायद तुझे गुस्सा आये आवर तू मुझे अपने घर से जाने को भी बोले मगर मैं ये फिर भी करुँगी गुड़िया करुँगी ....... पूजा रोटी हुई बोलती है

दीदी मैं समझी नहीं आप क्या बोलना चाहती है कौन सा पाप करना चाहती है

जो भी बात है मुझे बताइये मैं आप की हेल्प करुँगी

दीदी मैं आप पर कभी गुस्सा नहीं हो सकती प्लीज मुझे बताइये क्या बात है अगर मेरी बस मैं हुआ तो मैं ज़रूर करुँगी ..... पूजा को दर्द मैं रट हुआ देख कर अंजलि की भी आँखें भर आती है

गुड़िया इसमें हर चीज है जो तुझे पता चल जायेगा मैं क्या काम तुझसे करवाना चाहती हुईं ...... पूजा अपनी बलाउज से एक छोटी डायरी निकल कर अंजलि को देते हुआ बोलती है

गुड़िया अपनी इस दीदी को मांफ करदेना अगर डायरी पढ़ कर बुरा लगे तो मगर इस डायरी मैं जो भी मैंने लिखा है वह मेरी दिल की बाते है

गुड़िया मैं ये भी जानती हुईं ये कभी पूरी नहीं होगी मगर मैं जब तक ज़िंदा रहूंगी मैं इसका पूरा होने का इंतज़ार करुँगी ...... पूजा रोटी हुई बोलती है आवर अपनी बेटी रानी को लेकर चली जाती है

वही अंजलि कभी पूजा को जाते हुआ देखती है तो कभी हाँथ मैं ली हुई डायरी को

हे भगवन आखिर इस डायरी मैं पूजा दी ने क्या लिखा है पूजा दीदी की बात सुन कर मुझे तो बहुत दर लग रही है ...... क्या मैं ये डायरी पढू या बिना पढ़े hi पूजा दीदी को ये डायरी लौटा दू

पूजा दीदी को इतनी दुखी तो मैं शादी के वक़्त देखि थी कितनी रो रही थी मुझसे आवर गीता दीदी से लिपट लिपट कर ....... अंजलि डायरी को देखते हुआ सोचती है
 
अपडेट .... 28

पूजा तो डायरी देकर चली जाती है ...... आवर यह अंजलि बेचारी थोड़ी उदास हो जाती है अंजलि सोचने लगती है इस डायरी को पढू की नहीं फिर अंजलि उस डायरी को अपनी बुक मैं रख देती है आवर रूम से बहार आ जाती है तो देखती है गीता हॉल मैं बैठ कर टीवी देख रही होती है तो अंजलि भी गीता के पास मैं बैठ जाती है

दीदी अर्जुन नहीं दिख रहा कही गया है क्या .... अंजलि पूछती है

हां छोटी अर्जुन माँ आवर ममी के साथ मंदिर गया है .... गीता कहती है

क्याआआ बोली दीदी अर्जुन माँ के साथ मंदिर गया है ...... अंजलि हैरान होती हुई बोलती है

जैसे अंजलि को यकीन hi नहीं हुआ हो ....... आवर ये सच भी था क्यू की अंजलि को अच्छे से पता था अर्जुन माँ से कितना गुस्सा रहता है फिर भला वह राखी देवी के साथ मंदिर कैसे जा सकता है

गुड़िया तुझे यकीन नहीं हो रहा है न ...... मगर ये सच है अर्जुन माँ के साथ मंदिर गया है गुड़िया आज मैं बहुत खुश हुईं आज माँ ने अर्जुन को गले भी लगायी ...... गुड़िया माँ आज बहुत खुश लग रही थी ..... गीता बहुत खुश होकर अंजलि से कहती है

गीता की बात सुन कर अंजलि भी बहुत खुश हो जाती है जो कुछ देर पहले अंजलि पूजा की वजह से थोड़ी दुखी आवर उड़ाव होती है वह उदासी भी अंजलि की चहरे से चली जाती है

दोनों बहाने एक दूसरे को गले लगा लेती है

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ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह दीदी मैं थक गयी अब आवर नहीं चल सकती हुईं कितना अच्छा होता हम गाड़ी से आते मगर आप ने मन कर दिया क्या आप एहि चाहती है आप की ये छोटी बहन इतनी धुप मैं पैदल चल कर बीमार हो जाये ....... पूनम रस्ते मैं एक पेड़ के निचे बैठ कर मायूसी से कहती है

पूनम के चहरे से बहुत पसीने बाह रहे होते है जो पूनम की हालत देख कर आस्था को थोड़ा दुःख होता है

ओह्ह्ह मेरी बेबी डॉल सॉरी सॉरी मुझे मांफ कर देना मैं भला क्यू अपनी बेबी डॉल को बीमार करने लगी मुझसे गलती हो गयी जो अपनी बेबी डॉल को बिना गाड़ी के चलने को बोली अपनी दीदी को मांफ करदे इस बार ....... पूनम को गले लगते हुआ बड़ी hi प्यार से आस्था कहती है

आस्था इतने प्यार से पूनम को गले लगा कर बोलती है की पूनम खुश हो जाती है

दीदी आवर कितनी दूर है वह मंदिर रस्ते मैं कई सरे मंदिर पड़े मगर बुआ को उसी मंदिर मैं जनि है ........ पूनम पोछती है

बेबी बस हम मंदिर के पास hi आ गए है आवर तेरी बुआ हर होली पर उसी मंदिर मैं पूजा करती है क्यू की उसी मंदिर मैं मन्नत मांगने पर तेरी ये दीदी तेरी बुआ के घर आई है ....... आस्था कहती है

वाओ मतलब बुआ को आप उसी मंदिर की वजह से मिली है फिर तो मैं उस मंदिर मैं जाउंगी hi ....... पूनम कहती है

आस्था आवर पूनम बात कर रही होती है तब तक आस्था की माँ आवर ममी भी आ जाती है तो आस्था आवर पूनम फिर से साथ चलने लगाती है

कुछ hi देर मैं आस्था आवर पूनम गाओं मैं चली जाती है जो असल मैं वह गाओं अर्जुन का होता है पूनम तो गाओं देखते हुआ चलती रहती है मगर आस्था की नज़र हर घर पर होती है रस्ते मैं जितने घर पार्टी है आस्था उस घर को निचे से ऊपर तक देखती रहती है आस्था लग भाग हर घर को देख लेती है निचे से लेकर ऊपर छत तक मगर आस्था जिसे धुंध रही होती है वह दीखता नहीं है जो आस्था थोड़ी उदास भी हो जाती है

तुम मुझे इतना क्यू सत्ता रहे हो तुम्हारे लिए मैं इतने दूर चल कर आई आवर अपनी भूल जैसी छोटी बहन को भी इतनी धुप मैं लेकर पैदल आई फिर भी मुझे तुम कही नहीं दिख रहा मैं बस तुमेह देखने के लिए आई हुईं प्लीज एक बार दिख जाओ ....... चलती हुई हर घर को देखती हुई आस्था मन मैं सोचती है

दीदी देखिये कितनी प्यारी ये हवेली है ...... रस्ते मैं चलते हुआ पूनम एक हवेली को देख कर कहती है

जो असल मैं वह हवेली अर्जुन का होता है आस्था उस हवेली को एक नज़र देखती है आस्था को हवेली अच्छी तो लगाती है मगर अभी आस्था अर्जुन के लिए थोड़ी परेशां होती है जो हवेली पर जयादा ध्यान नहीं देती है आवर पूनम को हां बोल कर आगे चलने लगाती है

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एक घर के रूम मैं एक लड़के बीएड पर लेता होता है वह बिलकुल नंगा होता है आवर उसका हाँथ अपने लैंड पर होती है लड़के की अभी आँखें बंद होती आवर वह लड़का अपने हाँथ से लैंड हिला रहा होता आँखे बंद किये कुछ सोचते हुआ

हहहहह बहन छोड़ मदर छोड़ मेरे साथ क्या हो रहा है हहहहह निकल जा हहहहह क्या देख लिया मैं हहहहहह कास नहीं देखता क्या जिस्म थी माता की कितनी लड़कियों आवर बड़ी औरतों को छोड़ा आवर उनकी जिस्म को देखा मगर माता की तरह किसी का जिस्म नहीं था ह्ह्हह्ह्ह्ह क्या जवानी है माता की हहहहहह मेरा लैंड कितना उछाल रहा है माता को देख कर मेरा ये लैंड जब उनकी गांड मैं जायेगा तो माता चीख hi पड़ेंगी

बिस्तर पर माता की गांड की खून hi खून होगा मैं माता की छूट को फाड् कर रख दूंगा उनकी छूट को मसल मसल कर उनकी छूट का रास निकल दूंगा hhhhhhhhhhh हहहह हहहहह माता हहहहहह माता hhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ...... आवर जब उस लड़के का लैंड से पानी निकल जाता है तो वह लड़का बीएड पर हाफने लगता है

ये मैं क्या कर रहा हुईं मैं कैसे अपनी माँ के बारे मैं आएसा सोच सकता हुईं मुझे माँ के बारे मैं आएसा नहीं सोचना चाहिए था था सोचते हुआ वह लड़का अपना सर पकड़ लेता है

बीटा बीटा क्या कर रहा है आज तुझे कही जाना है न .... वह लड़का सोच hi रहा होता है की उसके गेट से एक औरत पुकारती है

अपनी माँ की आवाज़ सुन कर वह लड़का झट से बीएड से उठा जाता है आवर अपने लैंड पर तंगी हुई कपडे से लैंड को पोछता है आवर उस कपडे को अपने तकिया के निचे छिपा देता है आवर फिर अपनी पेंट सरत पहन कर गेट खोलता है तो सामने अपनी माँ को देखता है आवर गेट खोल कर वह लड़का हैट जाता है आवर उसकी माँ रूम मैं आ जाती है

आदि बीटा आज तो तुम्हें दिल्ली जाना है न ...... रूम मैं आते हुआ उस लड़के की माँ बोलती है

जो असल मैं वह औरत लड़के की माँ रजनी होती है

आवर वह लड़का कोई आवर नहीं आदि होता है


हां माँ मैं बस थोड़ी देर मैं जाने वाला हुईं .... आदि दूसरी तरफ देखते हुआ अपनी माँ रजनी से कहता है

वही रजनी भी आदि से नज़रे चुरा रही होती है

कैसे सोता है तू बिस्तर पर सारा तोशक इधर उधर हो गया है ..... बोलती हुई आदि की माँ बिस्तर ठीक करने लगती है

तभी आदि भाग कर अपनी माँ के पास आ जाता है जो रजनी पीछे हैट जाती है

माँ आप ये सब क्यू कर रही है किसी नौकरानी को बोल दीजिये वह ठीक कर देगी आप नाश्ता लगाइये मुझे जल्दी से जाना है ...... आदि अपनी माँ के आगे खड़े होकर बोलता है

आदि के माथे पर पसीने आने लगते है जैसे अभी आदि बहुत दर गया हो

ठीक है बीटा तू जल्दी से आ मैं नास्ता लगा रही हुईं ....... आदि की माँ रजनी बोलती हुई रूम से निकल जाती है

हे भगवन बच गया अगर ये माँ के हाँथ लग जाता तो माँ मेरे बारे मैं क्या सोचती ..... आदि तकिये के निचे से उस कपडे को हाँथ मैं लेकर सोचता है आवर अपने माथे पर आया पसीना पोछ लेता है आवर उस कपडे को लेकर अपनी पेंट के जेब मैं रख लेता है आवर फिर रूम से निकल जाता है

आदि अपने रूम से निकल कर देखता है तो उसकी माँ रजनी दिंनिंग टेबल पर खाना लगा रही होती है तो आदि धीरे धीरे अपनी माँ के रूम मैं घुस जाता है आवर अपनी माँ की बाथरूम मैं घुस जाता है आवर अपने पेंट के जेब से उस कपडे को निकल कर बाथरूम मैं पड़ी अपनी माँ के कुछ भींगी हुई कपड़ों मैं उस कपडे को भी रख देता है आवर फिर रूम से निकल जाता है

आदि बीटा कुछ चाहिए क्या तुम्हें ..... खुद की रूम से आदि को निकलते हुआ देख कर रजनी कहती है

वही अपनी माँ को देख कर आदि फिर से दर जाता है आवर आदि के चहरे पर फिर से पसीने आने लगते है आदि अभी क्या बोले उसे कुछ समझ नहीं आता है

बीटा क्या हुआ तेरे माथे पर इतनी पसीने क्यू हो रही है तेरी तबियत तो ठीक है न ..... आदि के चहरे पर पसीने देख कर रजनी बोलती है आवर आदि के करीब चली जाती है

माँ मैं ठीक हुईं .... आदि बस इतनी बोल कर वह से चला जाता है

रजनी को थोड़ा अजीब तो लगता है मगर कुछ बोलती नहीं है जैसे रजनी को पता हो आदि के माथे पर पसीने आने की वजह क्या है

वही आदि बस एक रोटी खा कर उठ जाता है आवर घर से बहार निकल जाता है

रजनी बस अपने बेटे को जाते हुआ देखती रह जाती है आवर फिर उठ कर रजनी भी अपनी रूम मैं चली जाती है

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हे माँ जैसे आप ने मेरी माँ की इच्छा पूरी किया आप ने उसी तरह प्लीज मेरी भी इच्छा पूरी कर दीजिये माँ मैं आप से कोई धन दौलत नहीं मांग रही आप बस अर्जुन के दिल मैं मेरे लिए थोड़ा प्यार भर दीजिये अर्जुन मुझसे ठीक से बात भी नहीं करता है माँ मैं अर्जुन से बहुत प्यार करती हुईं प्लीज प्लीज माँ आप मेरी पुकार सुन लीजिये ...... देवी माँ की मूर्ति के सामने हाँथ जुडी अभी आस्था बोल रही होती है

आस्था की आँखें भी अभी बंद होती है आस्था जब देवी माँ से मन्नत मांग कर आँखे खोलती है तो आस्था की आँखें थोड़ी भींगी हुई होती है जिससे पता चलता है आस्था सच मैं अर्जुन से कितना प्यार करती है

दीदी आप ने क्या मांगी देवी माँ से ...... आस्था जब देवी माँ की मंदिर से निकलने लगती है तो पूनम पूछती है

बेबी सॉरी मैं अभी नहीं बता सकती क्या मांगी है ..... आस्था कहती है

कोई नहीं दीदी अभी आप मत बताइये मगर बाद मैं बता दीजियेगा जब देवी माँ आप की मांगी हुई इच्छा पूरी कर देंगी तो ..... पूनम कहती है

ok बेबी मैं पक्का आप को बता दूंगी क्या मांगी थी मगर पूरी होने के बाद ...... वैसे मेरी बेबी डॉल ने क्या मांगी देवी माँ से ...... आस्था कहती है

दीदी मैं भी आप को नहीं बताउंगी क्या मांगी है लेकिन इतना बता सकती हुईं मैंने देवी माँ से वही मांगी है जिसके लिए मेरी प्यारी दीदी घर से लेकर मंदिर तक मुझे पैदल लेकर आई है ...... पूनम मुस्कुराती हुई बोलती है

वही पूनम की बात सुन कर आस्था थोड़ी हैरान हो जाती है ये सोच कर की पूनम क्या बोलना चाहती है

दीदी जयादा मत सोचिये मुझे पता है आप उस लड़के के लिए hi यह आई हो

मैंने देखि इस गाँव मैं आते hi आप हर घर की तरफ उस लड़के को देख रही थी दीदी क्या सच मैं आप उस लड़के को पसंद करती है

मगर उस लड़के ने तो आप को उस पार्क मैं रोला दिया था ..... पूनम मायूसी से कहती है

पूनम की बात आवर पूनम की चहरे पर मायूसी देख कर आस्था थोड़ी उदास होती है मगर फिर थोड़ी मुस्कुरा देती है

आस्था बीटा ले पापा से बात कर

आस्था आवर पूनम बात कर रही होती है तभी पीछे से आस्था की माँ बोलती है तो आष्टा पूनम से कुछ बोलती नहीं है आवर अपने पापा से बात करने लगती है

वही देवी माँ के मंदिर के पीछे अर्जुन एक पेड़ के निचे बैठ कर फ़ोन से बाते कर रहा होता है आवर बार बार अपनी माँ आवर ममी माँ की तरफ देख रहा है होता आवर अपनी माथे पर लगी तिलक को पोछ रहा होता है

जो पूजा करने के बाद राखी देवी ने लगायी होती है आवर उस वक़्त अर्जुन अपनी माँ को मन भी नहीं कर पता है ममी माँ के होते हुआ

वही राखी देवी आवर आँचल मंदिर के तालाब के पास कड़ी होती है

दीदी शर्मा क्यू रही है बस साड़ी निकल कर तालाब मैं डुबकी मार लीजिये नहीं तो फिर घर चलते है ..... आँचल कहती है

आँचल फिर मेरी मन्नत का क्या होगा ..... राखी देवी झट से बोलती है

दीदी आप को मन्नत भी पूरी करनी है आवर शर्मा भी रही है अगर आप चाहती है आप की जिस्म कोई नहीं देखे तो अभी घर चलिए आवर रात मैं आकर तालाब मैं डुबकी मार लीजियेगा वर्ण अभी मन्नत उतरना है तो यकीनन आप की जिस्म पर हर किसी की नज़र पड़ेगी क्यू की पानी मैं भींगने से आप की साड़ी जिस्म से सात जाएगी आवर फिर आप की भरी जवानी दिखने लगेगी इस लिए बोल रही साड़ी निकल कर डुबकी मार लीजिये फिर जल्दी से साड़ी लपेट लीजियेगा एहि अच्छा रहेगा ...... आँचल कहती है

राखी देवी को आँचल की बात सही लगती है .राखी देवी तालाब के पास जाकर बैठ जाती है आवर चरों तरफ देखती है तो वह जयादा तर औरत hi होती है मगर कुछ दुरी पर कुछ बुड्ढे भी होते है जो वह सब रह रह कर राखी देवी की तरफ hi देख रहे होते है

राखी देवी तालाब के पास बैठ जाती है आवर आँचल को अपने आगे खड़े होने को बोलती है तो आँचल भी राखी देवी के आगे खड़े हो जाती है आँचल के खड़े होने से राखी देवी तो उन सब बुड्ढे से तो बच गयी होती है मगर राखी देवी ये भूल जाती है की उनेह कोई आवर भी देख रहा है आवर वह कोई आवर नहीं अर्जुन होता है जो फ़ोन पर बात करते हुआ उधर hi देख रहा होता है

दीदी उधर से अर्जुन आप को देख रहा है आप कहो तो उस तरफ आ जाती हुईं ......... आँचल की नज़र अर्जुन पर पड़ती है तो कहती है

आँचल तुम एहि कड़ी रहो अर्जुन हमसे दूर है आवर अर्जुन को सिर्फ मेरी पीठ hi दिखेगी मैं जल्दी hi तालाब मैं चली जाती हुईं ....... राखी देवी बोलती है

राखी देवी साड़ी निकल कर बैठे हुआ hi तालाब मैं चली जाती है

राखी देवी को तालाब मैं जाते hi पास मैं सब कड़ी गाँव की औरते राखी देवी की जिस्म को देखने लगती है राखी देवी की बलाउज मैं क़ैद बड़ी बड़ी चुकी hi देख कर पास कड़ी औरतों की आँखें बड़ी होने लगाती है

कई औरतें तो मन hi मन मैं भगवन जी को भी कोशने लगती है की उनकी भी जिस्म राखी देवी की तरह hi बनाते जो राखी देवी की खूबसूरत जिस्म को देख कर गाँव के मर्द तो मर्द औरत भी उसे छूना चाहती है

वही आँचल अपनी नज़र हर तरफ घुमा कर देखती है तो पति है वह जितने भी औरत है सभी रह रह कर राखी देवी की तरफ देख रही है फिर आँचल की नज़र अर्जुन की तरफ जाती है तो पति है अर्जुन वह से हैट गया होता है

दीदी सिर्फ पेटीकोट आवर बलाउज मैं है तो ये सब औरते आयी देख रही है अगर दीदी नंगी हो जाएँगी तो इन सब औरतों को पता नहीं क्या हाल होगा .... आँचल मन मैं सोचती है

बहन वह साड़ी मांग रही है

आँचल सोच रही होती है की एक औरत बोलती है तो आँचल जल्दी से साड़ी को राखी देवी को देती है साड़ी लेकर राखी देवी जल्दी से पहन लेती है

जी पापा बस थोड़ी देर मैं हम आने hi वाले है आप रामु काका को गाड़ी लेकर भेज दीजिये पापा ी लव यू उम्मम्मा

हुंनंन aaaaaaaaaaaaaaaaaaaa चींईईई

आस्था अपने पापा को ी लव यू बोल कर फ़ोन काटने hi वाली होती है आस्था की नाक मैं सिगरेट की दुआ समां जाती है आवर आस्था छिनख पड़ती है

तभी आस्था को पेड़ के पास एक लड़का दिखाई देता है आस्था को गुस्सा भी आता है

कौन हो तुम तुमेह ज़रा भी शर्म नहीं है एक तो ज़हर पि रहे हो आवर वह भी मंदिर मैं

आआआअर्जुन टट्टूं ........ आस्था बोलती हुई जैसे hi आगे जाती है तो अर्जुन का चेहरा दिखाई देता है जो आस्था दिल मैं बहुत खुश होती है आवर अभी जो आस्था की चहरे पर गुस्सा होती है वह चली जाती है

अचानक आस्था को देख कर अर्जुन भी थोड़ा घबरा जाता है आवर सिगरेट को पीछे कर देता है

चौंक क्यू रही हो ये मेरा गाँव है आवर ये मंदिर भी मेरे गाँव मैं है तो मुझे यह आने के लिए तुमसे परमिशन लेनी होगी क्या तुमेह आवर कोई काम नहीं है मेरे hi पीछे क्यू आ जाती हो ........ अर्जुन थोड़ा गुस्से मैं कहता है

हां मुझे पता है ये गाओं तुम्हारा है आवर मंदिर भी मैं तुमसे लड़ने नहीं आई हुईं तुमेह अचानक देखि तो बोल पड़ी ...... सॉरी तुमेह बुरा लगा तो आवर मैं यह तुम्हारे पीछे नहीं अपनी मम्मी के साथ आई हुईं

तुम हर वक़्त इतने गुस्से मैं क्यू रहते हो मैंने उस पहली दिन की बात को लेकर सॉरी जो तुमेह मैंने सिगरेट पिने को मन की अब मैं कभी तुमेह सिगरेट पिने को मन नहीं करुँगी आवर नहीं कभी तुमसे बात करुँगी ....... आस्था बोलती है आवर वह से चल देती है

आज आस्था को बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता है अर्जुन की बाते आस्था मायूसी के साथ वह से चली जाती है

आस्था को मायूसी से जाते हुआ देख कर अर्जुन को अपनी गलती का अहसास होता है

अर्जुन तुमने बिलकुल भी अच्छा नहीं किया आस्था ने हर बार तुमसे तो अच्छे से बात की थी मगर तुमने हर बार आस्था से गुस्से से बात की

अर्जुन तुमने अपनी माँ की गुस्सा आस्था पर निकल रहे हो बेचारी आज भी मायूस होकर चली गयी ...... अर्जुन आस्था की पहली मुलाकात से लेकर अब तक के बारे मैं सोचने लगता है हर बार hi आस्था ने अच्छे से बात की होती है मगर अर्जुन कभी उससे ठीक से बात नहीं करता है जो अर्जुन को थोड़ा दुःख होता है

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अंजलि भगवन के लिए तुम मुझे गलत मत समझना मैं बस एक बार अर्जुन को पाना चाहती हुईं अर्जुन मेरे रोम रोम मैं बस चूका है

मैं अर्जुन के लिए बहुत तदपि हुईं अर्जुन कल भी मेरा भाई था आवर आगे भी मेरा भाई hi रहेगा अंजलि गुड़िया मेरी एक बार मदद करदे प्लीज गुड़िया

पूजा कहा खो गयी है किसी ने कुछ बोलै है क्या अर्जुन के घर पर

पूजा को खोई हुई देख कर पूजा की माँ कहती है

अपनी माँ की आवाज़ सुन पूजा यादों से निकलती है

नहीं नहीं माँ अर्जुन के घर किसी ने कुछ नहीं बोलै मैं कुछ आवर सोच रही थी ...... पूजा झट से बोलती है

ठीक है चल जल्दी से घर को सफाई कर लेते है हम दोनों पारी अभी सो रही है वर्ण उठ गयी तो कोई भी काम नहीं होगा ...... पूजा की माँ कहती है


ठीक है माँ जल्दी से घर की सफाई कर लेते है ...... पूजा बोलती है आवर आँगन से झाड़ू उठा कर घर मैं चली जाती है

अर्जुन रास्ता चल रहा होता है आवर आस्था के बारे मैं सोच रहा होता है जो अर्जुन खुद को थोड़ा शर्मिंदा महसूस कर रहा होता है

राखी देवी आवर आँचल आगे आगे चल रही होती है राखी देवी उसी तरह साड़ी तो पहन ली हुई होती है मगर कुछ रस्ते चलने पर राखी देवी की साड़ी भी भींग गयी होती है जो राखी देवी को रस्ते मैं चलते हुआ बड़ी शर्म महसूस होती है राखी देवी जल्दी जल्दी चल रही होती है जिससे राखी देवी की बड़ी गांड हिल रही होती

ये तो अच्छा होता है रस्ते मैं कोई नहीं होता है फिर भी राखी देवी को शर्म बहुत आती है

कुछ वक़्त के बाद राखी देवी अपनी हवेली के अंदर चली आती है

माँ क्या हुआ आप भींगी हुई क्यू है रस्ते मैं बारिश हो रही थी क्या ...... अपनी माँ को भींगी हुई देखती है तो गीता पूछती है जो हॉल मैं टीवी देख रही होती है

नहीं गीता बेटी मंदिर के तालाब मैं नाहा कर आ रही हुईं ...... राखी देवी बोलती हुई अपनी रूम मैं चली जाती

गीता बीटा ज़रा पानी पीला मैं बहुत थक गयी हुईं ........ आँचल कुर्सी पर बैठते हुआ बोलती है

अभी लेकर आती हुईं ममी माँ ...... गीता बोलती है आवर उठ कर किचेन की तरफ चली जाती है

अंजलि दीदी गेट खोलिये ........ अर्जुन कहता है

वही रूम के अंदर अंजलि डायरी पढ़ रही होती है अंजलि डायरी मैं इतनी खोई हुई होती है की अंजलि को अर्जुन की आवाज़ पर धयान hi नहीं जाता है

अर्जुन 2 से 3 बार पुकारता है मगर अंदर से अंजलि दीदी के नहीं बोलने से सोचता है सायद अंजलि दीदी सो रही है तो अर्जुन आकर हॉल मैं बैठ जाता है

वही रूम मैं डायरी पढ़ने के बाद अंजलि चित होकर लेट जाती है अंजलि की आँखें भरी हुई होती है अंजलि अपनी रूम की ऊपर की तरफ देखने लगाती है

पूजा दीदी ये आप ने क्या कर दिया है आप अर्जुन को अपने भी भाई से बढ़ कर प्यार करती है फिर भला कोई बहन अपने hi भाई के साथ ये सब कैसे कर सकती है

दीदी मैं क्या करू मुझे कुछ समझ नहीं आ रही है ..... अंजलि मन मैं सोचती है

अंजलि क्या सोच रही है तुझे पूजा दीदी की मदद करनी चाहिए बेचारी पूजा दीदी कितनी दर्द मैं है उनकी बस एक छोटी सी इच्छा है

डायरी पढ़ने के बाद अंजलि को कुछ समझ नहीं आ रही होती है उसे क्या करनी चाहिए अंजलि की दिल कुछ आवर कह रहा था तो दिमाग कुछ आवर कह रहा होता है जो अंजलि समझ नहीं पा रही होती है उसे अभी दिल की सुन्नी चाहिए या दिमाग की सोचते हुआ hi अंजलि अपनी आँखे बंद कर लेती है
 
अपडेट ..... 29

अर्जुन आकर आँचल के पास hi बैठ जाता है

अर्जुन को थोड़ा उदास देख कर आँचल भी अपनी जगह से उठ कर अर्जुन के आवर भी पास आ जाती है आवर अर्जुन के सर पर हाँथ फेरने लगती है

क्या हुआ मेरा बच्चा उदास क्यू लग रहा है ...... अर्जुन के सर पर हाँथ फेरते हुआ आँचल बोलती है

आँचल के पूछने पर अर्जुन थोड़ा मुस्कुरा देता है

क्यू के आँचल भी थोड़ा उदास जैसी हो जाती है जो अर्जुन को अच्छा नहीं लगता है

माँ मैं उदास नहीं हुईं मैं तो दोनों नानी के बारे मैं सोच रहा हुईं दोनों नानी कैसी होंगी घर पर ....... अर्जुन मुस्कुराते हुआ बोलता है

अर्जुन की बात सुन आँचल भी मुस्कुराने लगती है

मेरा बच्चा कितना अच्छा है जो हर किसी के बारे मैं सोचता है

उदास न हो तेरे मां गए है घर कल होली है न इस लिए मैंने तेरे दोनों नानी को एहि बोलै लिया है शाम तक वह दोनों भी हम्हारे साथ होंगी आवर हम सब एक साथ होली का मज़ा लेंगे ..... आँचल मुस्कुराती हुई कहती है

मां के बारे मैं सुन के अर्जुन को थोड़ा गुस्सा तो आता है मगर अपनी ममी माँ के सामने ज़ाहिर नहीं करता है आवर अर्जुन भी मुस्कुरा देता है

ममी माँ ये लीजिये पानी ..... गीता बोलती है आँचल गीता से पानी लेकर पिने लगती है वही

गीता मुस्कुरा कर अर्जुन को देखती है आवर अर्जुन के गल्ल पर हाँथ फेरती है

अर्जुन तू कॉफ़ी पियेगा ..... गीता मुस्कुरा कर पूछती है

नहीं दीदी मुझे नींद आ रही है अभी मैं बस सोना चाहता हुईं मगर अंजलि दीदी पता नहीं कितनी नींद मैं सोइ है जो उठ नहीं रही है ..... अर्जुन कहता है

वह गुड़िया ाएसि hi सोती है एक बार सो गयी तो जल्दी उठती नहीं है जा मेरी रूम मैं सजा ..... गीता कहती है

अर्जुन भी उठ कर गीता की रूम मैं सोने चला जाता है

वही गीता हॉल से सीधे अपनी माँ के रूम मैं जाती है गीता अपनी माँ की रूम का गेट खोल कर कुछ बोलने को होती है मगर बोल नहीं पति है आवर गेट के पास hi कड़ी हो जाती है

गीता की आँखें बड़ी हो जाती है आवर गीता की मुंह भी खुल जाती है गीता बस सामने कड़ी अपनी माँ की जिस्म को देखती रह जाती है

वही राखी देवी शीशे के सामने कड़ी होकर अपनी जिस्म पर तेल्ल लगा रही होती है राखी देवी का एक पेअर शीशे के टेबल पर होती है जिसके चलते राखी देवी की गांड पीछे की तरफ निकली हुई होती है आवर राखी देवी की लम्बी बॉल गांड के ऊपर होती है आवर राखी देवी की बॉल भींगने से बॉल से पानी टपक रही होती है जिससे राखी देवी की गांड के के पास भींग गयी होती आवर भींगने से राखी देवी की अंदर पहनी हुई रेड पेंटी दिख रही होती है

गीता बस अपनी माँ की जिस्म को ऊपर से निचे तक देखती रह जाती है

वाओ माँ की जिस्म अभी भी कितनी सॉफ्ट है मेरी सहेलियां सच कहती है माँ मेरी बहन जैसी लगती है

माँ की जिस्म अभी भी जवान लड़की की तरह है

क्या हुआ गीता कुछ काम है ..... गीता अपनी माँ की जिस्म को निहार रही होती है तभी राखी देवी बोल पड़ती है क्यू की राखी देवी गीता को रूम आते hi शीशे मैं देख चुकी होती है

अपनी माँ के बोलने पे गीता थोड़ा हड़बड़ा जाती है आवर फिर अपनी नज़ारे निचे कर लेती है

माँ वह मैं बोल रही थी क्या मैं अर्जुन के रूम को लॉक कर दू ...... गीता निचे सर किये hi बोलती है

गीता बेटी रूम लॉक मत करो कल होली है तो सुबह पूजा के बाद अर्जुन को उसी रूम मैं रहना है ...... राखी देवी कहती है

माँ चाभी एहि रख देती हुईं क्या आप कॉफ़ी पियेंगी ..... गीता पूछती है

हां बेटी कॉफ़ी पीला दे

गीता गुड़िया नहीं दिख रही है गाओं मैं घूमने के लिए भागी है क्या आज भी .... राखी देवी पूछती है

नहीं माँ गुड़िया अपनी रूम मैं सो रही है ..... गीता कहती है आवर किचेन मैं चली जाती है

शाम मैं

अंजलि सो कर उठती है आवर टाइम देखती है तो 6 :15 पं हो रहे होते है अंजलि उठ कर बाथरूम मैं चली जाती है

अंजलि बाथरूम से निकल कर हॉल मैं आती है तो देखती है उसकी नानी आई हुई होती है जो अंजलि खुश हो जाती है और भाग कर अपनी नानी से लिपट जाती है

अरे मेरी नानी उठ गयी क्या मैं कब से अपनी नानी को उठाने का इंतज़ार कर रही थी ....... गले लगे hi अंजलि की नानी कहती है

अंजलि को नानी कहते सुन वह सभी मुस्कुराने लगती है जो अंजलि मुंह बना लेती है

नानी आप मुझे नानी क्यू कहती है मैं थोड़ी आप की नानी हुईं नानी तो आप हो मेरी ....... अंजलि मुंह बना कर कहती है

हां तो तुम मेरी नानी हो तो नानी hi कहूँगी न

क्यू की मैं अपनी प्यारी नातिन मैं खुद को देखती हुईं ...... अंजलि की नानी कहती है

ठीक है फिर अब से मैं आप को नातिन कहूँगी समझी ..... अंजलि कहती है

ओह्ह्ह मेरी गुड़िया ये तो आवर अच्छा तुम मुझे नातिन hi कहना ..... अंजलि की नानी खुश होते हुआ कहती है

जो वह आँचल राखी देवी गीता आवर आँचल की माँ एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा देती है

माँ फिर तो गुड़िया मेरी माँ लगने लगेगी ..... राखी देवी मुस्कुरा कर कहती है

राखी तुम मेरे लिए एक कॉफ़ी लेकर आओ जल्दी से ..... जब सब को हस्ते हुआ देखती है तो अंजलि अपनी चंचल वाली मुंड मैं आ जाती है आवर अपनी माँ को नाम से बोलै देती है जैसे राखी उसकी बेटी hi है

अंजलि की बात सुन सभी की मुंह खुल जाती है सिर्फ नानी को छोड़ कर आवर सभी अंजलि को घूरने लगती है

मगर अंजलि बिंदास सोफे पर बैठ जाती है अपनी नानी के साथ आवर अंजलि की नानी भी अंजलि के सर अपनी गॉड मैं रख लेती है मुस्कुराती हुई

भाभी आयी क्यू देख रही है जाइये आवर अपनी माँ के लिए कॉफ़ी बना कर लाइए ....... आँचल भी हस्ती हुई कहती है

राखी देवी घूरती हुई चहरे से अंजलि को देखती है आवर उठ कर किचेन की तरफ चल पड़ती है किचेन की तरफ जाते हुआ राखी देवी मन मैं मुस्कुरा देती है

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माँ आप को रामु चाचा ने घर आने को बोलै है ....... पूजा कल चलती हुई बोलती है

क्या हुआ पूजा रामु ने घर आने को क्यू कहा है कुछ बताया नहीं है ..... पूजा की माँ कहती है

माँ वह चची की पेट मैं दर्द उठ रहा है लगता है चची आज माँ बन hi जाएगी ...... पूजा मुस्कुरा कर कहती है

देख मैं तो भूल hi गयी थी रामु ने सुबह hi कहा था घर आने के लिए अच्छा हुआ बिटिया तुमने याद दिला दिया ठीक है मैं जा रही हुईं तू अच्छे से दरवाजा बंद कर देना हो सकता है हॉस्पिटल भी जाना पड़े ...... पूजा की माँ कहती है आवर फिर चली जाती

गुड़िया देख आज माँ भी घर पर नहीं है हर होली की तरह आज भी तुम अर्जुन आवर गीता आ जाती तो कितना अच्छा होता मेरी दिल की तमन्ना भी पूरी हो जाती

क्या मैं गुड़िया को फ़ोन करू

नहीं सायद गुड़िया डायरी पढ़ कर गुस्सा हो गयी हो तो ..... पूजा मन मैं दुखी होकर सोचती है

आवर फिर आँगन मैं hi अपनी बेटी रानी को लेकर खत पर लेट जाती है

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अर्जुन कहा जा रहा है .... अर्जुन खाना खा कर रूम की तरफ जाने लगता है तो अंजलि पूछती है

दीदी मैं सोने जा रहा हुईं ....... अर्जुन कहता है

अर्जुन कितना सो रहा है अभी तो सो कर उठा है चल आज पूजा दीदी के घर चलते है तुझे याद है न कैसे गीता दीदी मैं आवर तू होली की रात पूजा दीदी के घर पे कितनी मस्ती करते थे चल पचपन की मस्ती फिर करते है क्यू दीदी क्या कहती हो ....... अंजलि मुस्कुरा कर कहती है

भगवन जी प्लीज आएसा कुछ कीजिये की गीता दीदी जाने से मन करदे ....... अंजलि मन मैं सोचती है गुड़िया मुझे भी जाने का मन तो है मगर मुझे बहुत नींद आने रही है तुम दोनों तो दिन मैं कभी सो भी लिया है मगर मैं तो नहीं सोइ तो मैं नहीं जाउंगी मैं सोने चली ...... गीता बोलती हुई उठ जाती है आवर अपनी रूम की तरफ चली जाती है

गीता के न कहने से अंजलि मन मैं बहुत खुश होती है मगर ऊपर से गीता के सामने मुंह बना लेती है

अंजलि के उतरा हुआ चेहरा देख कर अर्जुन भी गीता से कहता है मगर गीता फिर से मन कर देती है

दीदी हम दोनों hi चलते है सायद गीता दीदी आज थक गयी है ..... अर्जुन कहता है

अंजलि तो गीता न कहने से बहुत खुश होती है मगर ऊपर से उदास भरी सवार मैं ठीक है बोलती है अभी रात के 9: 15 पं हो रहे होते है अंजलि आवर अर्जुन उसी वक़्त पूजा के घर के लिए निकल जाते है

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आस्था बीटा क्या सोच रही है चल जल्दी से खाना ख़त्म कर ...... आस्था की माँ कहती है

जो कब से देख रही होती है आस्था रोटी का निवाला हाँथ मैं लिए कुछ सोच रही होती है

अपनी माँ की आवाज़ सुन कर आस्था सोच से बहार आती है आवर हाँथ मैं ली हुई रोटी का निवाला पलेट मैं रख कर उठ जाती है

माँ मुझे भूख नहीं है बोलती हुई आस्था अपनी रूम मैं चली जाती है

हे देवी माँ कैसी बेटी दिया है आप ने समझ मैं hi नहीं आती ये लड़की के दिमाग मैं क्या चलता रहता है है बिना खाना खाये hi उठ गयी ....... आस्था की माँ बोलती है आवर पलेट उठा कर किचेन मैं रखने चली जाती है

बुआ दीदी का खाना मुझे दीजिये मैं दीदी को खाना खिला दूंगी आप चिंता न कीजिये ..... पूनम किचेन मैं जाकर कहती है आवर खाना लेकर आस्था के रूम मैं चली जाती है


तन तना मेम साहब आप का खाना आ गया जल्दी से मुझे पैसा दीजिये मुझे आवर भी लोगो को खाना देना है ...... पूनम रूम मैं आते hi बोलती है

आस्था तो उदास होकर अपनी बीएड पर बैठी होती है मगर पूनम की आवाज़ सुन कर पूनम की तरफ देखती है आवर आस्था की हसी निकल जाती है

आस्था ज़ोर ज़ोर से रूम मैं हसने लगती है

गुड़िया ये कपडे तुझे कहा से मिला ...... आस्था हस्ती हुई कहती है आवर फिर ज़ोर ज़ोर से हसने लगती है

क्यू की पूनम अभी एक गंजी आवर हांफ पेंट मैं होती है आवर गंजी भी पूनम की घुटने तक होती है आवर कही कही से फटी हुई भी होती है पूनम देखने से फुटपाथ की दूकान वाली लगती है जिससे आस्था की हसी रूकती hi नहीं है

मेम साहब जल्दी पैसे दीजिये न वर्ण खा कर भाग गयी तो दूकान का मालिक मेरी पगार से पैसे काट लेगा ...... पूनम फिर बोलती है

गुड़िया आवर कुछ मत बोल वर्ण मैं हस्ती हस्ती मर जाउंगी ....... आस्था हस्ती हुई बोलती है

ठीक है मेम साहब पैसे बाद मैं दीजियेगा पहले जल्दी से खा कर पलेट दीजिये काफी लोग आ गए है ....... पूनम कहती है

ठीक ठीक बाबा मैं जल्दी से खा कर देती हुईं नहीं तो तू मेरी जान ले लेगी आवर ये कपडे बदल कर आ जल्दी से ...... आस्था खाने की पलेट लेती हुई बोलती है

ठीक है मेम साहब मैं अभी मालकिन बन कर आती हुईं ..... पूनम बोलती है आवर रूम से चली जाती है

ये छोटी गुड़िया भी न ...... आस्था सोचती है आवर खाना खाने लगती है

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पूजा वह लड़का कही अर्जुन तो नहीं है न

पूजा आवर 2 से 3 लड़कियां सर पर लकड़ी लिए हुआ आ रही होती है की उनमे से एक लड़की बोल पड़ती है

अर्जुन का नाम सुन कर hi पूजा लकड़ी को वही खेत मैं रख कर अर्जुन की तरफ भगति है

पूजा भगति हुई पास जाती है तो देखती है वह लड़का अर्जुन hi होता है आवर अपने से बड़े लड़के से लड़ रहा होता है

पूजा जल्दी से अर्जुन को पकड़ कर दूर करती है

क्यू रे बिरजू तुझे शर्म नहीं आती अपने से छोटे लड़के से लड़ाई करता है ...... पूजा गुस्से मैं कहती है

छोड़िये मुझे मैं उसे आवर मरूंगा दीदी छोड़िये मुझे आवर मरूंगा मैं

पूजा के बाँहों मैं अर्जुन उस लड़के को गली देते हुआ बोलता रहता है

अर्जुन के पकड़ते hi वह बिरजू वह से भाग जाता है

क्या हुआ लड़ाई क्यू कर रहा है चल अब संत होजा वह भाग गया ..... पूजा कहती है

नहीं मैं उसे आवर मरूंगा मैं उसके घर जाकर मरूंगा ...... अर्जुन कहता है

मैंने कहा न संत होजा चल पहले घर चलते है ..... पूजा कहती है

अर्जुन भी फिर कुछ नहीं बोलता है आवर पूजा के साथ पूजा के घर आ जाता है

अरे माँ कितना खून बाह रहा है अर्जुन दर्द हो रहा है न

तुझे किसने कहा लड़ाई करने को आवर स्कूल क्यू नहीं गया ...... अर्जुन के चहरे से खून साफ करती हुई पूजा कहती है

पूजा ाएसि मुंह बना रही होती है जैसे पूजा को दर्द हो रहा है

अर्जुन भी थोड़ा दर्द मैं चीखता है मगर पूजा की बात का जवाब नहीं देता है

अभी तक तुमने खाना भी नहीं खाया होगा न चल बैठ मैं खाना निकलती हुईं ...... खून साफ करने के बाद पूजा कहती है आवर उठ कर खाना लेन चली जाती है

दीदी खाना बहुत hi अच्छा बना था ..... खाने के बाद अर्जुन कहता है

खाने की तारीफ करके मुझे भुलवा मत अब बता लड़ाई क्यू किया तुमने बिरजू के साथ ..... पूजा कहती है

पूजा के पूछने से अर्जुन कुछ बोलता नहीं है

देख बता लड़ाई क्यू किया नहीं तो मैं फिर कभी तुझसे बात नहीं करुँगी ..... पूजा बोल कर घूम जाती है

दीदी वह बिरजू आप के बारे मैं गन्दी गन्दी बाते एक बड़े लड़के को बता रहा था आवर उस बड़े लड़के के जाने के बाद मैंने उससे कहा मेरी दीदी के बारे मैं उसे क्यू बता रहा था

तो उसने कहा आप मेरी दीदी नहीं हो आवर फिर आप के बारे मैं गन्दी बाते करने लगा

मैंने फिर कहा पूजा दीदी मेरी दीदी है उनके बारे मैं गन्दी बाते
मत कर नहीं तो मैं भी तेरी माँ को गली दूंगा

मगर वह आप के बारे मैं गन्दी बाते बोलते hi जा रहा था तो मैंने भी उसकी माँ के बारे मैं बोलने लगा आवर फिर उसने मुझे एक तप्पड़ मार दिया तो मैं भी उसे मरने लगा ....... अर्जुन बोल कर चुप हो जाता है

अर्जुन की बाते सुन पूजा के चहरे पे एक बड़ी मुस्कान आ जाती है आवर पूजा अर्जुन को अपनी बाँहों मैं भर लेती है

मुझे तो पता hi नहीं था मेरा अर्जुन इतना प्यार करता है मुझसे जो अपने से भी बड़े लड़के के साथ लड़ गया

दीदी मैं गीता दीदी अंजलि दीदी आवर आप से बहुत प्यार करता हुईं ...... अर्जुन कहता है

हां बाबू मुझे पता चल गया मेरा अर्जुन मुझसे बहुत प्यार करता है

वैसे क्या बोल रहा था वह बिरजू मेरे बारे मैं बता तो मैं उसकी माँ से कहती हुईं ...... पूजा कहती है

दीदी वह बिरजू बोल रहा था आप की काम उम्र मैं hi ये आप की बड़ी हो गयी है

अर्जुन बोलते हुआ पूजा की एक चुकी को पकड़ लेता है

अर्जुन जैसे hi पूजा की एक चुकी को पकड़ता है पूजा की आँखें बड़ी हो जाती है आवर पूजा सिसक पड़ती है आवर अर्जुन का हाँथ चुकी पर hi पकड़ लेती है

पूजा की धड़कन तेज़्ज़ डालने लगती है अर्जुन के अचानक hi पकड़ से पूजा को समझ hi नहीं आती है वह क्या करे पूजा कुछ देर के बाद अर्जुन का हाँथ चुकी से हटा देती है

कुछ देर तक पूजा कुछ नहीं बोलती है

पूजा इतनी भी बड़ी नहीं थी उस वक़्त सिर्फ पूजा सिर्फ 14 सल्ल की थी मगर पूजा की जिस्म काम उम्र मैं hi उभर गयी थी पूजा की जिस्म भरा हुआ होने से पूजा वक़्त के पहले hi जवान दिखने लगी थी इस लिए कुछ लड़के पूजा को पटना चाहते थे मगर पूजा लड़के से बात hi नहीं करती थी

दीदी मैं घर जा रहा हुईं अब स्कूल की छूती होने वाली होगी गीता दीदी आवर अंजलि दीदी के साथ नहीं गया तो माँ डाँटेगी ...... अर्जुन पूजा के बाँहों मैं से निकलते हुआ कहता है

हां ठीक है आवर तू स्कूल क्यू नहीं जाता है अगली बार स्कूल नहीं गया तो देखना मैं कैसे तुझे मरती हुईं

अर्जुन सुन आवर क्या बोल रहा था वह कमीना बिरजू ...... पूजा फिर से पूछती है

पूजा फिर से पूछने तो नहीं चाहती थी अर्जुन के वैसी हरकत करने से मगर पूजा पूछ hi लेती है ताकि साडी बाते जानने के बाद वह बिरजू की माँ से शिकायत कर सके

दीदी बाद मैं बता दूंगा अभी जा रहा हुईं ...... अर्जुन कहता है

नहीं अभी बता आवर क्या बोल रहा था वह कुत्ता .... पूजा कहती है

दीदी वह बोल रहा था आप की ये भी बड़ी है आवर आप जब चलती हो तो इधर उधर हिलती रहती है

अर्जुन पूजा की गांड पकड़ कर कहता है आवर फिर दौर कर भाग जाता है

अर्जुन के गांड पकड़ने से पूजा एक कदम आगे बढ़ जाती है पूजा की गाला सुख जाती है पूजा की गांड मैं हलचल हो जाती है जैसे पूजा की गांड मैं चींटियां चलने लगी हो

पूजा वही बैठ कर अपनी ज़ोर ज़ोर से चल रही शैशे को सँभालने लगती है

कुत्ता कमीना बिरजू तू अपनी माँ को नहीं देखता है उसकी कितनी बड़ी बड़ी गांड चुकी है अपनी माँ को क्यू नहीं छोड़ लेता हरामी मिल मुझे तो मैं तेरी लैंड hi काट दूंगी हरामी साला अगली बार मेरे भाई को मारा तो देखना मैं क्या करती हुईं

ये कुत्ते लोग मेरे अर्जुन को बिगड़ देंगे अर्जुन इन सब के साथ रह कर बिगड़ जायेगा मुझे hi अर्जुन को उनसे दूर रखनी होगी ..... पूजा मन मैं सोचती है

पूजा दीदी पूजा दीदी पूजा दीदी ......... आए कौन है अचानक चिल्लाने की आवाज़ सुन कर पूजा की नींद खुल जाती है आवर उठ कर दरवाजा खोलने चली जाती है
 
अपडेट ...... 30

पूजा नींद मैं hi उठ कर दरवाजा खोलने के लिए चली जाती है पूजा खुद को ठीक भी नहीं करती है जो अभी पूजा की बलाउज की कई बटन खुली हुई होती है आवर पूजा की एक चुकी भी बहार की तरफ निकली हुई होती है जो पूजा पारी को दूध पिलाती हुई सो गयी होती है

पूजा अपनी आँखें मल्टी हुई दरवाजा खोलती है आवर सामने अंजलि को कड़ी हुई देखती है

पूजा दी कहा थी आप मैं कितनी देर से दरवाजे को पिट रही हुईं ..... अंजलि कहती है आवर घर के अंदर चली जाती है

वही पूजा तो हैरान hi हो गयी होती है पूजा को यकीन hi नहीं हो रही होती है की अंजलि इतनी रात को उसके घर आई है आवर वह भी डायरी पढ़ने के बाद भी आवर साथ मैं अर्जुन को भी लेकर आई है

पूजा जो अभी नींद मैं होती है जो अर्जुन को सामने देख कर पूजा की नींद चली जाती है पूजा मन hi मन अर्जुन को देख शर्माने लगाती है

वही अर्जुन की हालत ख़राब हो रही होती है अर्जुन अपने फ़ोन की लाइट सीधे पूजा के ऊपर hi किये हुआ खड़ा होता है जो पूजा की चुकी का निपल दिख रही होती है

पूजा दीदी क्या हुआ आप आयी क्यू देख रही है आप खुश नहीं है हम दोनों के आने से ...... अर्जुन पूजा की दिख रही चुकी से नज़र हटा कर कहता है

अर्जुन क्या बोल रहा है तेरे आवर गुड़िया के आने से मैं बहुत खुश हुईं मुझे तो यकीन hi नहीं हो रहा आज कई सल्ल के बाद हम भाई बहन फिर से वह होली की मस्ती करने वाले है अर्जुन आज रात भर खूब मस्ती करेंगे है चल अंदर आ ..... पूजा ख़ुशी से कहती है

सही कहा दीदी आज हम रात भर मस्ती करेंगे ...... अर्जुन कहता है आवर अंदर आ जाता है

अर्जुन अंदर आता है तो देखता है पारी खत पर लेती हुई है आवर पारी की छोटी मुंह के छोटे छोटे मोलायम होंठों पर दूध लगे हुआ होते है पारी के होंठों पर दूध की बूंदें देख कर अर्जुन अपने एक उंगली पारी के होंठों पर रख देता है आवर पारी के होंठों पर लगी दूध को उंगली से पोछ लेता है आवर अर्जुन उस उंगली को मुंह के पास लेकर देखने लगता है फिर अर्जुन दरवाजा की तरफ देखता है तो पूजा दीदी अभी दिखाई नहीं देती है तो अर्जुन उस ऊँगली को मुंह मैं दाल लेता है

अर्जुन जब ऊँगली मुंह मैं डालता है तो अर्जुन को दूध बहुत मीठा लगता है आवर अर्जुन अपना दोनों होंठ सत्ता कर जीभ पर लगी दूध का मीठा अहसास लेने लगता है

क्यू भाई बहुत मीठा है क्या दीदी का दूध

अर्जुन पूजा दीदी की दूध का मज़ा ले रहा होता है की तभी उसे अंजलि दीदी की आवाज़ आती है

अंजलि दीदी की आवाज़ सुन कर अर्जुन हड़बड़ा जाता है आवर अपना सर निचे कर लेता है

अर्जुन शर्मा क्यू रहा है अगर तुझे दीदी का दूध पीना है तो पूजा दीदी से बोल दे वह पीला देंगी तू भी तो पूजा दीदी की बेटे की तरह है बड़ी दीदी माँ की तरह hi होती है ...... अंजलि मुस्कुरा कर कहती है

कौन दूध पीना चाहता है मैं अभी गर्म कर देती हुईं गुड़िया तुझे दूध पिणि है ...... पूजा आती हुई बोलती है

पूजा दीदी की आवाज़े सुन अर्जुन आवर भी हड़बड़ा जाता है आवर अपनी अंजलि दीदी की तरफ देख कर नहीं बताने का इशारा करने लगता है

दीदी दूध मुझे नहीं पिणि है अर्जुन को पिणि है वह भी आप की

वाओ दीदी आप तो पहले से तैयार है दूध पिलाने के लिए अर्जुन को जा भाई पिले जितना मन कर दीदी की दूध को ...... पूजा जैसे hi सामने आती है अंजलि बोल पड़ती है क्यू की पूजा की एक चुकी अभी भी दिख रही होती है जिसे देख कर अंजलि ख़ुशी से बोल पड़ती है

अंजलि की बात सुन तो पूजा की धड़कन hi तेज़्ज़ चलने लग जाती है आवर पूजा दो कदम पीछे हैट जाती है

guu.gudiya क्या मतलब है ...... पूजा हिचकती हुई बोलती है

आएसा नहीं था के अंजलि की बात पूजा को अच्छी नहीं लगी पूजा तो खुद hi अर्जुन को अपनी जिस्म देने वाली थी फिर दूध पिलाने से पीछे क्यू हैट जाती पूजा अंदर से बहुत hi जयादा खुश होती है

मगर अंजलि ने बड़ी जल्दी hi ाएसि बात बोल चुकी थी जो पूजा ने सोचा भी नहीं था के अंजलि आएसा भी कुछ बोल सकती है वह भी अर्जुन के सामने जो पूजा बहुत शर्मा जाती है

तभी पूजा की नज़र अंजलि से टकराती है जो अंजलि पूजा की चुकी को देख कर अभी भी मुस्कुरा रही होती है पूजा जब अंजलि की नज़रों की पीछा करती है तो खुद की चुकी को खुला पति है

हे भगवन जी ये कैसे हो गया मैं भी न जल्दी बागी दरवाजा खोलने के चक्कर मैं खुद को ठीक भी नहीं किया

गुड़िया भी बहुत बदमाश हो गयी है देख देख कर मुस्कुरा रही है मगर ये बता नहीं रही है अगर ये गुड़िया ने देख लिया है तो अर्जुन भी ...... सोच कर पूजा जल्दी से घूम जाती है आवर अपनी चुकी को ब्रा के अंदर कर के बलाउज की बटन लगा देती है

वही अर्जुन तो अभी शर्म से अपनी नज़र निचे hi किया होता है

ये अंजलि दीदी बिलकुल पागल है कुछ भी बोलती रहती है पूजा दीदी क्या सोच रही होंगी मेरे बारे मैं ....... अर्जुन मन मैं सोचता है

ओह्ह दीदी मैं बोल रही थी के अर्जुन को दूध पिणि है मगर आप की हांथों से जारी हुई दूध पिणि है आप ने अपनी हांथो से बजरी की दूध जारी है न वही दूध अर्जुन को दे दीजिये ..... अंजलि जब देखती है की उसकी बात से अर्जुन आवर पूजा दीदी दोनों शर्माने लगे है तो बात बदल देती है

अंजलि की बात सुन कर पूजा दीदी आवर अर्जुन को शर्म काम होती है

मगर अर्जुन आवर पूजा दोनों hi समझ चुके होते है अंजलि क्या बोली हुई होती है

हां गुड़िया बकरी की दूध मैंने अपनी हांथो से जारी है मैं अभी गर्म कर के लगाती हुईं .... पूजा बोलती हुई वह से चली जाती है पूजा के पीछे अंजलि भी चली जाती है

वही अर्जुन खत पर बैठ जाता है अर्जुन का दिल अभी भी धड़क रहा होता है

ये अंजलि दीदी कब क्या बोलती है कुछ समझ नहीं आता है अच्छा हुआ अंजलि दीदी ने बात बदल दी नहीं तो पूजा दीदी क्या क्या सोचती मेरे बारे मैं ....... अर्जुन खत पर बैठ कर सोचता है

वही पूजा आवर अंजलि अर्जुन से कुछ दूर चुल्ह के पास होती है पूजा दूध गर्म कर रही होती है आवर अंजलि मन hi मन मुस्कुरा रही होती है

गुड़िया देख मुस्कुराना बंद कर नहीं तो मरूंगी पागल कुछ भी बोलती है आवर तूने मुझे पहले क्यू नहीं बताया की मेरी चुकी दिख रही है .... पूजा थोड़ी गुस्से आवर धीरे से बोलती है पूजा को थोड़ी शर्म भी आती है अंजलि के सामने चुकी का नाम लेकर बोलने मैं

दीदी इसमें मेरी क्या गलती है आप hi बेचैन हो अर्जुन के लिए तो मैं वही कर रही हुईं आवर मैं इस लिए नहीं बताई के मुझे लगा आप इस बड़ी चुकी को खुद अर्जुन को दिखाना चाहती हो ...... अंजलि बिंदास बोलती है

हे भगवन ये गुड़िया तो सच मैं पागल है कैसे नाम लेकर बोल रही है

गुड़िया तुझे शर्म नहीं आ रही अपनी बड़ी बहन के सामने ाएसि बाते करते हुआ .... पूजा घूरती हुई बोलती है

दीदी मुझे क्यू शर्म आएगी जब आप को नहीं आ रही आवर मैं तो सिर्फ आप की चुकी का नाम ले रही हुईं मगर आप तो अपने छोटे भाई को दिखाना भी चाहती है आवर पता नहीं क्या क्या करेंगी आप ..... अंजलि कहती है आवर खुद मुस्कुरा हुई अपनी एक हाँथ आगे कर देती है

अंजलि की बात सुन पूजा आवर भी शर्मा जाती है मगर फिर पूजा की नज़र अंजलि की हाँथ पर पड़ती है

गुड़िया ये क्या है ...... पूजा कहती है

दीदी ये भांग है मैंने ये भांग आप के लिए ले हुईं जिससे आप की सपना पूरा हो सके आप जल्दी से इसे दूध मैं मिला दीजिये .... अंजलि मुस्कुरा कर कहती है

गुड़िया इससे क्या होगा इसके पिने से अर्जुन को नशा हो जायेगा ये अच्छी चीज नहीं है मैं अर्जुन को ये नहीं पिलाने वाली हुईं ...... पूजा अंजलि को घूरती हुई बोलती है

दीदी मैं आप के लिए लेकर आई हुईं मैं डायरी मैं पढ़ चुकी हुईं आप भाई से कितना प्यार करती है आप अपनी सोहागरात मैं भी भाई को याद कर रही थी आप भाई से बहुत प्यार करती है दीदी पता नहीं फिर कब आएसा मक्का मिले इस लिए आज आप अपनी सपना पूरा कर लीजिये

दीदी मैं आवर आप दोनों जानती है अगर अर्जुन होश मैं रहा तो कभी आप के साथ सेक्स नहीं करेगा क्यू की वह आप को बड़ी दीदी hi मानता है जो दीदी आप हर दिन अर्जुन के प्यार के लिए तड़पती रहेंगी जो मैं भी नहीं चाहती दीदी मैं भी आप को अपनी बड़ी दीदी hi मानती हुईं इस लिए कहती हुईं आप अर्जुन को आज रात के लिए पीला दीजिये अर्जुन ने कभी भांग नहीं पिया है तो यकीनन अर्जुन को जल्दी hi नशा हो जायेगा आवर अर्जुन आप की जिस्म देख कर खुद को रोक नहीं पायेगा आवर आप की सपना पूरा हो जायेगा ..... अंजलि थोड़ी इमोशनली होकर बोलती है

अंजलि की मासूम चहरे को देख कर पूजा भी थोड़ी इमोशनली हो जाती है आवर अंजलि को गले लगा लेती है

मैं बहुत hi किस्मत वाली हुईं जो मुझे तेरी जैसी एक गुड़िया मिली मैं एक आवर भाई बहन के लिए माँ से बोलती रहती थी बचपन मैं फिर मुझे अर्जुन मिला आवर उसके बाद तुम आवर गीता फिर मैंने कभी माँ से भाई बहन के बारे मैं नहीं बोली क्यू की मुझे तुम तीनो मैं अपनी भाई बहन देखती थी मेरी अपनी बहन भी होती तो इतना प्यार सायद hi करती मैं अगले जनम मैं तुम तीनो के साथ जनम लेना चाहती हुईं ..... पूजा बोलती हुई रोने लग जाती है

ये क्या दीदी आप तो रोने लगी दीदी सच मैं अगले जनम मैं हम भाई बहन एक माँ से जनम लेंगे मगर दीदी आप तो अभी hi रोने लगी दीदी अभी थोड़ी आंसू बचा लीजिये क्यू की जब अर्जुन का वह आप की उसमे जायेगा तो आप की आंसू आवर भी बहेंगे ........ अंजलि मुस्कुरा कर कहती है

क्या बोली मरूंगी फिर बोली तो आवर तुझे कैसे पता के मैं रोने लगूंगी भूल मत मेरी शादी हो गयी है आवर मैं कई बार सेक्स कर चुकी हुईं पागल लड़की ...... पूजा कहती है

हां पता है आप सेक्स कर चुकी है तभी तो मेरी वह पारी आई है मगर दीदी आज आप की असली वाली सोहागरात होने वाली है कल सुबह आप ठीक से चल भी नहीं पाओगी मुझे ये यकीन है क्यू की भाई का बहुत बड़ा है ..... अंजलि कुछ सोचते हुआ बोलती है मगर फिर अपनी मुंह बंद कर लेती है जब अंजलि को अहसास होते है की वह क्या बोल गयी

क्या बोल रही है तुझे कैसे पता अर्जुन का बड़ा है क्या तूने देखा है बता मुझे ........ पूजा घूरती हुई कहती है

नहीं दीदी मैं तो आयी hi मज़ाक कर रही थी आप को सताने के लिए मैंने थोड़ी देखि है अर्जुन का कितना बड़ा है ....... अंजलि खुद को संभल कर बोलती है

अंजलि आवर पूजा यह धीरे धीरे बात कर रही होती है वही अर्जुन पारी के साथ लेट कर पारी के छोटे छोटे हांथो को चुम रहा होता है आवर पारी की मासूम सी चहरे को देख देख कर मुस्कुरा रहा होता है

अर्जुन पारी को क्यू उठा रहा है उसे सोने दे वर्ण वह उठ गयी तो हमेह खेलने भी नहीं देगी ले दूध पिले मैं एहि पर निचे बिछा रही हुईं फिर हम लोदो खेलते है ...... पूजा आकर कहती है आवर अर्जुन को दूध दे देती है अर्जुन भी दूध लेकर एक शंश मैं hi पि जाता है

दीदी दूध मैं कुछ डाली थी क्या ...... दूध कड़वा लग रही थी

दूध पिने के बाद अर्जुन कहता है

कुछ डालने की सुन कर पूजा थोड़ी हड़बड़ा सी जाती है

अर्जुन दूध मैं तो कुछ नहीं डाली थी फिर कड़वा क्यू लगी थी एहि दूध तो गुड़िया ने भी पिया वह तो कुछ नहीं बोली ...... पूजा नज़ारे चुराती हुई कहती है

दीदी सायद बहुत दिन के बाद मैं बकरी का दूध पि रहा हुईं इस लिए आएसा लगा मुझे ...... अर्जुन कहता है

हां हो सकता है भाई चल अब लोदो खेलते है बहुत मज़ा आएगा हम दोनों मिल कर गुड़िया को हरा देंगे तब देखना गुड़िया कैसी कैसी हरकते करेगी ...... पूजा हस्ती हुई कहती

अर्जुन उठ कर निचे बिछी हुई बिस्तर पर बैठ जाता है पास मैं गुड़िया भी लोदो लेकर बैठी हुई होती है

पूजा भी पारी को ठीक से सुला कर अर्जुन के सामने बैठ जाती है

एक तरफ अर्जुन होता है आवर अर्जुन के बाद अंजलि आवर अंजलि के बाद पूजा

अर्जुन के ठीक सामने hi पूजा बैठी होती है

अंजलि पहले चल कर स्टार्ट करती है तीनो लोदो खेलने लगते है कुछ देर के बाद अर्जुन के जिस्म मैं गर्मी होने लगाती है जो भांग अपना असर दिखने लगता है

दीदी आज कितनी गर्मी लग रही है हवा भी नहीं चल रही है .... अर्जुन सरत को निकलते हुआ कहता है

हां आज गर्मी तो बहुत लग रही है भाई दीदी आप कैसे इतने कपडे पहनी हो आप को भी बहुत गर्मी लग रही होगी आप को भी कोई ढीला सा कपडा पहन लेना चाहिए मेरी तरह ....... अंजलि कहती है आवर मुस्कुरा देती है

पूजा भी अंजलि की तरफ देख कर मुस्कुरा देती है

गुड़िया अब तो मैं तेरी तरह कपडे नहीं पहन सकती न अगर तेरी तरह कपडे पहनी तो अच्छा नहीं लगेगा मैं ाएसि hi ठीक हुईं ...... पूजा कहती है आवर अपनी पल्लू को हिलने लगती है

पूजा के पल्लू से हवा निकल कर जैसे hi अर्जुन के ऊपर जाती है अर्जुन को बहुत hi अच्छा महसूस होता है आवर अर्जुन पूजा की तरफ देखता है आवर अर्जुन की नज़र पूजा की छाती पर रुक जाती है

पूजा दीदी की छाती की तरफ देख कर अर्जुन की आँखों मैं एक अजीब सा नशा होने लगता है

अर्जुन की आँखें अभी पूजा दीदी की छाती पर होती है जो बिलकुल गोरी होती है आवर पूजा दीदी की छाती पर एक दो बूंदें भी होती है जो पूजा दीदी की छाती से बहती हुई निचे बलाउज से होती हुई चुकी पर जा रही होती है अर्जुन की आँखें जैसे hi पूजा की चुकी के ऊपर जाती है अर्जुन का लैंड एक बार सर उठा देता है अर्जुन की आँखें पूजा दीदी की बड़ी चुकी से हटती hi नहीं है

अर्जुन पूजा दीदी की चुकी को घर hi रहा होता है की अर्जुन को लगता है पूजा दीदी की निपल के पास कुछ जयादा hi भिनगा हुआ है जो अर्जुन आवर भी गौर से देखता है तो अर्जुन को पता चलता है पूजा दीदी की चुकी से दूध निकल रही होती है

अर्जुन पूजा दीदी की चुकी को एक बच्चे की तर घूरने लगता है आवर अपना होंठों पर जीभ फेरने लगता है अर्जुन की आँखे आवर भी माधोसी मैं होने लगाती है वही अर्जुन का लैंड भी बार बार सर उठाने लगता है

अर्जुन क्या हुआ चल अब तेरी चलने की बरी है .... वैसे तू दीदी की छाती की तरफ क्या देख रहा है ..... अंजलि कहती है

अंजलि दीदी की बात सुन कर अर्जुन हड़बड़ा जाता है आवर जल्दी से चलने लगता है

दीदी अच्छा कर रही हो आप बस थोड़ी सी आवर अपनी चुकी को दबा दीजिये जिससे आप की ब्रा के साथ बलाउज से दूध पता चलने लगे फिर तो भाई की हालत hi बिगड़ जाएगी कैसे घर रहा था जैसे दीदी की दूध पि रहा है ...... अंजलि मन मैं सोचती है

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आदि के घर पर

आदि की माँ रजनी बिस्तर पे लेती हुई होती है उनकी जिस्म पर सिर्फ एक कपड़ा होता है जो सिर्फ दोनों चुकी आवर छूट पर होती है आवर वह कपडा छूट मैं गयी हुई होती है जैसे आदि की माँ रजनी अपनी छूट मैं ऊँगली की हो आवर जैसे छूट मैं ऊँगली गयी हो उसी तरफ अभी भी कपडा होती है आवर छूट के पास की कपडे पूरी भींगी हुई होती है जिससे पता चल रही होती है आदि की माँ अपनी छूट से कई बार अमृत बहा चुकी है

आदि की माँ रजनी की माध भरी आँखों मैं अजीब सी माधोसी छै हुई होती है आवर आदि की माँ की शैशे तेज़्ज़ी से चल रही होती है

ये कैसी आग लगी है मेरी ऊँगली दर्द करने लगी मेरी जिस्म मैं ज़रा सी भी जान नहीं बची है मगर ये निगोड़ी मेरी छूट शांत hi नहीं हो रही है

क्या करू मैं इस निगोड़ी छूट की मैं अब खुद को रोक नहीं प् रही हुईं मैं अपनी ये जिस्म किसी को नहीं छूने देना चाहती हुईं इस जिस्म पर सिर्फ मेरे पति परमेश्वर का हक़ है मैं किसी दूसरे को ये हक़ नहीं दे सकती हुईं आप क्यू

मुझे छोड़ के चले गए आप ने hi मुझको दिन रात छोड़ छोड़ कर मेरी जिस्म मैं इतनी आग भर दिया है जो अब भड़काने लगी है

मैं कितने सल्ल से इस आग को बुझा कर राखी हुई हुईं मगर अब मैं खुद को नहीं संभल सकती हुईं

आप सुन रहे है न आदि के पापा

मैं अब इस आग को आवर नहीं दबा सकती हुईं आदि के पापा मैं पागल हो जाउंगी इस जिस्म की गर्मी से पागल हो जाउंगी ...... आदि की माँ सामने आदि के पापा की दिवार पर लटकी हुई तस्वीर को देख बोल रही होती है

फिर आदि की माँ सिसकियाँ लेती हुई बीएड से उठती है आवर पास मैं टेबल से दवा उठा कर खा लेती है आवर पानी पीकर बीएड पर लेट जाती है आवर कुछ hi देर मैं आदि की माँ नींद की आगोश मैं चली जाती है

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अर्जुन के घर

आँचल बीएड पर सोइ हुई होती है आवर पास मैं अर्जुन के मां भी सोये हुआ होते है आँचल बीएड पर सोइ हुई ऊपर की तरफ देखती रहती है फिर पता नहीं आँचल के दिमाग मैं क्या आता है आँचल बीएड से उठ जाती है आवर अपने पति की तरफ देखती है तो वह खरते ले रहे होते आँचल अपने पति को देख कर रूम से निकल जाती है आवर सीधे राखी देवी की रूम मैं जाती है तो देखती है गेट खुला हुआ है आँचल रूम मैं चली जाती है तो देखती है रूम मैं राखी देवी नहीं है

आँचल राखी देवी को रूम मैं न देख कर थोड़ी हैरान हो जाती है आँचल जल्दी से बाथरूम मैं देखती है तो बाथरूम खुला हुआ होता है आवर राखी देवी बाथरूम मैं भी नहीं होती है आँचल थोड़ी परेशां हो जाती है आवर जल्दी से अर्जुन वाला रूम मैं जाती है मगर अर्जुन के रूम का गेट पर टाला लगा हुआ होता है आँचल फिर गीता आवर अपनी माँ आवर सास की रूम मैं देखने की कोशिश करती है मगर रूम अंदर से बंद होती है तो आँचल रात होने से गेट पित्ती नहीं है तभी आँचल को याद आता है आज अंजलि घर पर नहीं है तो सायद दीदी उसी रूम मैं होगी तो आँचल अंजलि की रूम मैं जाती है अंजलि की रूम खुली हुई होती है तो आँचल अंदर जाकर देखती है तो राखी देवी वह भी नहीं होती है आँचल अंजलि की बाथरूम भी देख लेती है मगर राखी देवी नहीं मिलती है आँचल बहुत परेशां हो जाती है

आँचल भगति हुई राखी देवी की रूम मैं फिर जाती है आवर बीएड पर बैठ जाती है

दीदी इतनी रात मैं कहा चली गयी है आवर कही जाना भी था तो मुझे क्यू नहीं बताई दीदी ने दीदी को फ़ोन करती हुईं ...... आँचल मन मैं सोचती है आवर तभी फ़ोन की याद आती है तो आँचल फ़ोन लगा देती है

आँचल जैसे hi फ़ोन लगती है फ़ोन उसी रूम मैं बजने लगती है आँचल आवाज़ को सुनती है तो राखी देवी की सर के पास hi फ़ोन चार्ज मैं लगा हुआ होता है

आँचल भाग कर फ़ोन लेती है तभी फ़ोन के साथ एक कागज भी होता है आँचल उस कागज को उठा कर पढ़ने लगती है

आँचल मैं जानती हुईं तू रात मैं मेरे रूम मैं आएगी आवर मुझे न देख कर परेशां होगी

आँचल तू परेशां नहीं होना मैं अपनी एक दोस्त के घर जा रही हुईं उसने अचानक फ़ोन किया तो मैं आ गयी आँचल सुबह तक मैं घर आ जाउंगी

मैं तुझे बताने के लिए रूम मैं आई थी मगर तू सायद सो गयी थी इस लिए तुझे उठाई नहीं वैसे माँ को बता दिया है आवर फ़ोन चार्ज नहीं था इस लिए लेकर नहीं जा रही हुईं

आँचल पढ़ कर थोड़ी संत होती है मगर फिर भी आँचल को थोड़ी टेंशन होने लगाती है राखी देवी गयी कहा होगी

आँचल जल्दी से राखी देवी की फ़ोन देखने लगती है आवर जब दिल नंबर देखती है तो ऊपर hi एक नंबर दिखाई देता है तो आँचल उस नंबर पर फ़ोन लगा देती है मगर कोई फ़ोन नहीं उठता है

आँचल फिर से फ़ोन लगाती है इस बार फ़ोन एक औरत उठती है

hello क्या मैं राखी दीदी से बात कर सकती हुईं ...... आँचल झट से बोलती है

सॉरी मेम मैं उनसे बात नहीं करवा सकती हुईं वह आवर मेरी मालकिन एक पार्टी मैं गयी हुई है मेरी मालकिन भी फ़ोन घर पर छोड़ कर गयी है ..... उधर से वह औरत बोल कर रख देती है

आँचल थोड़ी परेशां तो होती है मगर फिर सोचती है चलो सासु माँ को बता कर तो दीदी गयी है

आँचल फिर राखी देवी की रूम मैं hi सो जाती है

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इधर अर्जुन का सर घूम रहा होता है आवर अर्जुन के आँखों मैं नशा हो रहा होता है रह रह कर अर्जुन की आँखें बंद हो रही होती है मगर अर्जुन की नज़र बार बार पूजा दीदी की चुकी पर जा रही होती है

वही पूजा दीदी अभी अर्जुन के सामने झुकी हुई होती है पूजा दीदी की पल्लू भी उनकी साइन से निचे गिरी हुई होती है आवर पूजा दीदी अपनी चाल चल रही होती है

दीदी लगता है पारी को भूख लगी है जो उठ गयी मैं अभी लेकर आती हुईं पारी को ...... जब अंजलि को पारी की रोने की आवाज़ आती है तो कहती है

हां गुड़िया उसे भूख hi लगी है लेकर आ दूध पीला देती हुईं ..... पूजा दीदी भी कहती है तो अंजलि उठ कर पारी को लेन चली जाती है

ओह्ह्ह मेरी नन्ही पारी को भूख लगी है अभी दूध पिलाती है मां पारी को ओह्ह्ह्ह मेरी पारी ....... अंजलि बोलती हुई लेकर आती है आवर पूजा दीदी को दे देती है

पारी को गॉड मैं लेकर पूजा दीदी अर्जुन आवर अंजलि के सामने hi बलाउज के साथ ब्रा भी ऊपर कर के अपनी एक चुकी को पारी के मुंह मैं दे देती है

पारी भी अपनी माँ की गुलाबी निप्पल को मुंह मैं लेकर दूध पिने लगती है

अंजलि तो अपनी चाल चलने लगती है मगर अर्जुन की नज़र पूजा दीदी की चुकी पर अटक जाती है पूजा दीदी की टाइट चुकी को देख अर्जुन अपनी मुंह मैं थूक घोटने लगता है अर्जुन का लैंड भी पूरी तरह खड़ा होकर फनफनाने लगता है अर्जुन बच्चा की तरह लालची नज़रों से पूजा दीदी की चुकी को घूरते जाता है आवर अपना एक हाँथ अपने लैंड के ऊपर रख देता है

अर्जुन को अभी बिलकुल भी होश नहीं होता है के वह अभी क्या कर रहा है वह अभी जिसे घर रहा है वह उसकी बड़ी बहन है जिसकी वह बहुत इज़्ज़त करता है

फिर अर्जुन के दिमाग मैं पता नहीं क्या होता है अर्जुन उठ जाता है

दीदी आप लोग खेलों मैं अभी आता हुईं .... अर्जुन बोलता है आवर उठ जाता है

दीदी अर्जुन को गुल नशा हो गया है देखि न कैसे बोलै अभी उसकी जुबान लड़खड़ा रही थी

दीदी मुझे यकीन है अर्जुन अभी सु सु करने गया है आप की इतनी बड़ी जोबन देख कर अर्जुन का छोटा अर्जुन ज़रूर परेशां कर रहा होगा

दीदी लोहा गर्म है बस आप थोड़ा सा अपनी जिस्म की गहि दाल दीजिये फिर तो आप की सपना पूरा हो जायेगा ..... अंजलि मुस्कुराती हुई कहती है

गुड़िया अब मैं क्या करू इतना कुछ तो कर चुकी हुईं वह खुद रात मैं मेरे पास आकर जायेगा ..... पूजा दीदी कहती है

अरे दीदी अर्जुन को नशा हो गया है वह पता नहीं कब सो जायेगा इस लिए अभी जाइये आवर अपनी ये मस्त जिस्म की मस्त बड़ी गांड दिखा दीजिये मुझे पूरा यकीन है अर्जुन आप बाथरूम मैं hi पकड़ लेगा आकर ..... अंजलि मुस्कुरा कर कहती है

गुड़िया तू बोलना क्या चाहती है मैं समझी नहीं

गुड़िया मैं अर्जुन के साथ प्यार करना चाहती हुईं मगर भूल मत अर्जुन को मैं भाई hi मानती हुईं

मैं अर्जुन से भाई की तरह प्यार करना चाहती हुईं आवर मैं इतनी बेशर्म नहीं हुईं जो अर्जुन के सामने ाएसि गन्दी हरकत करुँगी अर्जुन अभी भले hi नशा मैं है मगर उसे कल याद भी आ सकता है इस लिए गुड़िया मैं अर्जुन के सामने खुद नंगी नहीं हो सकती हुईं ...... पूजा दीदी कहती है

ओह्ह्ह भोली दीदी तो मैं ये थोड़ी बोल रही हुईं आप जाकर अर्जुन के सामने नंगी हो जाइये

अपनी कान इधर कीजिये मैं आप को बताती हुईं क्या करना है आप को .... अंजलि कहती है

पता नहीं क्या चल रहा है गुड़िया के दिमाग मैं ....... मगर मैं तो अर्जुन के सामने नंगी नहीं होने वाली हुईं

मैं नहीं चाहती अर्जुन को जब रात की बाते याद आये तो वह मुझे गलत समझे

मैं चाहती हुईं अर्जुन खुद पहले मेरी जिस्म को मसले फिर मैं करुँगी

सुन लेती हुईं गुड़िया क्या कहती है .... पूजा मन मैं सोचती है

पूजा अपनी कान अंजलि के पास कर देती है

अंजलि जैसे जैसे बात बताती है पूजा की धड़कने तेज़ होती चली जाती है

मगर अंजलि की बात पूजा को सही लग रही होती है तो सुनती रहती है

दीदी कैसी लगी मेरी आईडिया आप की काम भी हो जाएगी आवर अर्जुन को रात की बात भी याद आएगी तो वह आप को हालत नहीं समझेगा वह खुद को गलत समझेगा आवर आप से सायद मांफी भी मांगेगा फिर आप सायद अर्जुन के साथ आगे भी प्यार कर सकती हो ........ अंजलि खुश होकर कहती है

अंजलि की आईडिया पूजा को सही लगती है मगर इसमें भी पूजा को शर्म आती है मगर पूजा करने को तैयार हो जाती है

गुड़िया सच मैं अर्जुन मुझे गलत तो नहीं समझेगा ने मुझे दर भी लग रही है

गुड़िया मैं नहीं चाहती के अर्जुन मुझसे गुस्सा होकर बात करना भी बंद करदे इतने दिन के बाद तो अर्जुन हम्हारे पास आया है आवर इस घटना के बाद वह फिर से ममी के घर चला गया तो ..... पूजा कहती है

दीदी ाएसि कोई बात नहीं होने वाली है आप बहुत सोचती है अब जाइये जल्दी से वर्ण अर्जुन यह आ जायेगा

दीजिये मैं गुड़िया को सुला देती हुईं आवर खुद भी उसके साथ सो जाउंगी

दीदी आज सारा प्यार कर लेना अर्जुन से आवर अपनी इस फूल झड़ी को खूब रोलणा

पारी को लेते हुआ अंजलि अपनी एक हाँथ पूजा दीदी की छूट पर रखती हुई बोलती है

मरूंगी बदमाश लड़की भाग यह से ..... पूजा शर्माती हुई बोलती है

अंजलि पारी को लेकर खत पर पारी को लेकर लेट जाती है

वही अंजलि के जाते hi पूजा भी अर्जुन के तरफ चली जाती है
 
अपडेट ...... 31

अर्जुन को अभी इतना नशा हो रहा होता है की अर्जुन ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा होता है अर्जुन बाथरूम मैं खड़ा होकर मूत रहा होता है जो सिर्फ चरों तरफ से कपडे से घेरा हुआ होता है

अर्जुन पिसाब कर रहा होता है आवर अपने एक हाँथ से लैंड को भी हिला रहा होता है अर्जुन के आँखों के सामने सिर्फ पूजा दी की बड़ी चुकी घूम रही होती है अर्जुन पूजा दीदी की चुकी को यद् कर के अपना लैंड आवर ज़ोर ज़ोर से हिलने लगता है

अर्जुन सब कुछ भूल चूका होता है अभी बस किसी तरह अपने दर्द कर रहे लैंड को शांत करना चाहता था जिसे पूजा दीदी ने अपनी चुकी को दिखा दिखा कर खड़ा करदी होती है

अर्जुन क्या तू अंदर है भाई जल्दी निकल मुझे भी करनी है बहुत ज़ोर की लगी है ...... अर्जुन पिसाब करते हुआ लैंड हिला रहा होता है की पूजा दी बोल पड़ती है

पूजा दीदी की आवाज़ सुन अर्जुन का हाँथ वही रुक जाता है

अर्जुन को नशा तो काफी हो गया होता है मगर अर्जुन खुद को संभल रहा होता है आवर बार बार अपनी सर पर मार कर अपनी आँखें बंद होने से रोक रहा होता है

अर्जुन लैंड को पेंट के अंदर दाल कर चैन बंद कर लेता है आवर बाथरूम से निकल जाता है तो देखता है पूजा दीदी बहार hi कड़ी होती है आवर उनकी एक हाँथ छूट के ऊपर होती है

हहहह अर्जुन क्या कर रहा था इतने देर से तेरी वजह से मेरी कपडे गंदे हो जाती ...... पूजा बोलती हुई बाथरूम मैं चली जाती है

पूजा दीदी के जाते hi अर्जुन भी थोड़ा लड़खड़ाते हुआ जाने लगता है

अर्जुन अभी दो कदम चलता है की वही रुक जाता है आवर पलट कर बाथरूम से आती हुई आवाज़ को सुनने लगता है जो अभी भी आ रही होती है

आवर वह आवाज़ पूजा दीदी की मूतने की होती है जो पूजा दीदी बाथरूम मैं जाते hi अपनी साड़ी उठा कर आवर पेंटी को निचे कर के मूतने लगती है जो पूजा दीदी की छूट से सूअरर की आवाज़े निकलने लगती है

जैसे बाथरूम मैं जाकर पूजा दीदी सिटी बाज़ा रही हो

सूअरर सुरर्र की आवाज़ सुन कर अर्जुन आगे न जाकर के वह पीछे मुद कर बाथरूम के करीब आ जाता है

बाथरूम मैं कोई गेट तो नहीं होता है गेट की जगह बस एक कपडा होता है

अर्जुन कपडे को थोड़ा हटा कर अंदर देखने लगता है आवर अंदर का नज़ारा देख कर अर्जुन के आँखों मैं एक अजीब सी चमक आ जाती है

अंदर पूजा दीदी आगे की तरफ बैठ कर मूत रही होती है आवर पूजा दीदी की बैठने से उनकी गांड आवर बड़ी दिख रही होती है

पूजा दीदी की गांड पर मांश जाते होने के कारन उनकी गांड बहुत बड़ी आवर मोती दिख रही होती है

पूजा दीदी की नंगी गांड को देखते हुआ अर्जुन का हाँथ एक बार फिर से लैंड पर चला जाता है जो अभी कुछ देर पहले हिलने से खड़ा hi होता है आवर अर्जुन के छूने से अर्जुन का लैंड फुफकारने लगता है अर्जुन के आँखों मैं अब हवस वाला नशा दिखाई देने लगता है

अर्जुन अभी लैंड को मसल hi रहा होता है की पता नहीं क्या अर्जुन के दिमाग मैं आता है अर्जुन धीरे से अंदर चला जाता है

वही पूजा दीदी मूतने के बाद भी अभी तक वैसे hi बैठी हुई होती है पूजा दीदी की दिल बहुत ज़ोर ज़ोर से मचल रही होती है मगर पूजा दीदी की चहरे पर एक मुस्कान होती है

पूजा दीदी को जैसे hi ये अहसास होती है की अर्जुन बाथरूम मैं आ रहा है पूजा दीदी की होंठों पर बड़ी मुस्कान आ जाती है आवर पूजा दीदी धीरे धीरे अपनी गांड को उठा कर उठने लगती है

पूजा दीदी जैसे hi कुत्तिया वाली स्टाइल मैं होती है पूजा दीदी की शैशे एक वक़्त के लिए तो रुक hi जाती है आवर पूजा दीदी की धड़कने ज़ोर ज़ोर से चलने लगती है पूजा दीदी की आँखें बड़ी हो जाती है आवर मुंह भी खुल जाती है पूजा दीदी थोड़ा आगे की तरफ चली जाती है

हे माँ ये क्या था क्या वह अर्जुन का लैंड था नहीं वह अर्जुन का लैंड नहीं हो सकता है इतना बड़ा थोड़ी किसी का होता है सायद अर्जुन का कलाई होगा ... पूजा मन मैं सोचती है

पूजा दीदी अभी सोच hi रही होती है की अर्जुन फिर से पूजा दीदी को पीछे से पकड़ लेता है अर्जुन के पकड़ने से पूजा दीदी की दिल फिर से ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगती है पूजा दीदी हहहहहह करती हुई आगे की तरफ बढ़ जाती है जिससे पूजा दीदी की एक पेअर बाथरूम के नाली मैं चली जाती है

वही अर्जुन अब पूजा दीदी को पकड़ लिया होता है आवर अर्जुन का एक हाँथ पूजा दीदी के गोल नाभि पर होता है तो दूसरा हाँथ बिलकुल चुकी के करीब होता है आवर अर्जुन का मुंह पूजा दी की पीठ के करीब होता है

अर्जुन का हाँथ अपनी जिस्म पर पा कर पूजा दीदी की शैशे माधोसी मैं निकल पड़ती है पूजा दीदी तो सिसकने hi लग जाती है

हहहहह भाई क्या कर रहा है देख मैं नाली मैं गिर जाउंगी हहहहहह छोड़ अर्जुन ....... पूजा दीदी को अर्जुन का इस तरह पकड़ना तो बहुत अच्छी लग रही होती है मगर पूजा दीदी को शर्म भी आती रही होती है

अर्जुन का हाँथ अब पूजा दीदी की एक चुकी पर चली जाती है आवर अर्जुन पूजा दीदी की निपल को पकड़ कर 2 ऊँगली से निपल को मसल रहा होता है बलाउज के ऊपर से hi आवर पीछे से अपना लैंड पूजा दीदी की गांड मैं सत्ता रहा होता है

अपनी गांड पर अर्जुन का लैंड की अहसास से पूजा की जिस्म मैं गर्मी बढ़ने लगती है आवर छूट मैं भी हलचल होने लगाती है क्यू की अर्जुन लगातार पूजा दीदी की निपल को मसलते hi जाते है जो पूजा दीदी की छूट की दोनों होंठ खुल बंद होने लगाती है

अर्जुन छोड़ मुझे देख तूने मेरी साड़ी भी गन्दी कर दी अब मुझे साड़ी भी बदलनी पड़ेगी .. क्या हो गया है आज तुझे .... पूजा दीदी खुद को अलग करती हुई कहती है आवर बाथरूम से निकल कर चली जाती है

अर्जुन को अब ज़रा सा भी होश नहीं होता है अर्जुन के लैंड खड़ा होने से अर्जुन को सिर्फ उसे संत करने के लिए सोच रहा होता है

अर्जुन धीरे धीरे बाथरूम से निकलता है आवर लड़खड़ाते हुआ अंजलि दीदी की तरफ जाता है

वही अंजलि खत पर सोइ हुई पूजा दीदी आवर अर्जुन के साथ हो रही मस्ती को सुन रही होती है आवर अर्जुन को अपनी तरफ आते हुआ देख अंजलि अपनी आँखें बंद कर लेती है

अर्जुन लड़खड़ाते हुआ अंजलि दीदी के पास आता है आवर अपनी अंजलि दीदी की को देखने लगता है

अर्जुन अपना सर अंजलि दीदी के करीब कर के देखता है तो पता है अंजलि दीदी उसकी नींद से सो रही है

वही अर्जुन को आते देख hi अंजलि आँखे बंद कर के खरते लेने लगती है ताकि अर्जुन को लगे मैं सो गयी हुईं आवर अर्जुन भी वही समझ लेता है लेकिन अंजलि दीदी तो बस सोने की नाटक कर रही होती है

अर्जुन अंजलि दीदी को देखने के बाद वह पारी की तरफ जाता है आवर पारी की नन्ही गाल को प्यार से छूटा है आवर फिर अपनी ऊँगली से पारी की होंठ पे चला देता है आवर फिर उस ऊँगली को अपने मुंह मैं दाल देता है

अर्जुन को एक बार फिर से अपनी पूजा दीदी की चुकी की दूध की मीठा अहसास होता है आवर फिर अर्जुन का लैंड एक बार सर उठा देता है

अर्जुन वह से लड़खड़ाते हुआ पूजा दीदी की तरफ चलने लगता है अर्जुन जब घर के गेट के पास जाता है तो सामने पूजा दीदी को देखता है जो पूजा दीदी अपनी साड़ी निकल के कड़ी होता है

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पूजा दीदी को पकड़ कर गांड के ऊपर कर रही होती है पूजा दीदी की एक चुकी बिलकुल अर्जुन के सामने होती है आवर पूजा दीदी की बड़ी चुकी ब्रा मैं दिख रही होती है पूजा दीदी की भरी जवानी को देखते हुआ अर्जुन अपना एक हाँथ अपने लैंड पर रख देता है आवर ऊपर से hi लैंड को मसलने लगता है

वही पूजा दीदी को जैसे hi ये अहसास होता है अर्जुन के पास आ गया है पूजा दीदी अपनी पेटीकोट को धीरे से निचे गिरा देती है

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पेटीकोट निचे गिरते hi अर्जुन से सबर का बांध टूट जाता है आवर अर्जुन अपना लैंड निकल के सीधे पूजा दीदी की पीछे चला जाता है आवर अपना लैंड को पूजा दीदी के बड़ी गांड मैं सत्ता कर पूजा दीदी को पकड़ लेता है

अर्जुन एक हाँथ से पूजा दीदी की चुकी दबा रहा होता है तो एक हाँथ से लैंड पकड़ कर पूजा दीदी की गांड पर रगड़ रहा होता है

चुकी को मसलने आवर गांड पर लैंड रगड़ने से पूजा दीदी भी गर्म हो जाती है पूजा दीदी की शैशे गर्म निकलने लगती है पूजा दीदी आँखें बंद कर के सिसकने लगती है मगर इस बार अर्जुन को खुद से अलग नहीं करती है मगर माधोसी मैं सिसकती रहती है अर्जुन पूजा दीदी की चुकी मसलते हुआ उस हाँथ को निचे लेकर जाने लगता है आवर अर्जुन का हाँथ जैसे hi छूट के पास जाता है पूजा दीदी एक लम्बी सिसकियाँ लेती है आवर घूम कर अर्जुन के बाँहों मैं लिपट जाती है

पूजा दीदी अर्जुन से जैसे hi लिपटती है अर्जुन का लैंड पूजा दीदी के छूट के मुंह पर आ जाता है है पूजा दीदी झट से अर्जुन का लैंड पकड़ लेती है

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पूजा दीदी जैसे hi अर्जुन के लैंड को पकड़ती है पूजा दीदी की पूरी जिस्म hi कैंप सी जाती है आवर छूट मैं पानी आने लगती है

अरे मा ये क्या है अर्जुन का लैंड तो मेरे पति से भी कुछ बड़ा है ये मेरी छूट मैं जब जायेगा तो बहुत दर्द देगा मैं तो मार hi जाउंगी

तभी पूजा दीदी को अंजलि की बात याद आती ै कैसे वह बोल रही सुबह मेरी हालत कैसी होगी

हे भगवन इसका मतलब कही गुड़िया ने अर्जुन का ये देख चुकी है

नहीं नहीं मेरी गुड़िया ाएसि नहीं है वह थोड़ी नटखट है मस्ती करने के लिए बोली होगी ...... पूजा दीदी अर्जुन का लैंड पकड़े hi सोचती है

वही पूजा दीदी अर्जुन का लैंड जैसे hi पक्ति है अर्जुन की भी एक आआआह्ह्ह्ह निकल जाती है आवर अर्जुन पूजा दीदी की गांड को पकड़ कर दबा देता है

अर्जुन पूजा दीदी की गर्दन को चूमते हुआ पूजा दीदी की अब होंठों के करीब आती जाता है

अर्जुन जब पूजा दीदी की होंठो के करीब अत है तो दोनों भाई बहन की नज़ारे एक दूसरे से टकराती है

अर्जुन के आँखों मैं तो बस हवस दिख रही होती है जो अर्जुन माधोसी मैं पूजा दीदी को देख रहा होता है

अपने भाई अर्जुन के आँखों मैं मासूमियत आवर हवस देख कर पूजा झट से अपनी होंठ अर्जुन के होंठ से मिला देती है

पूजा दी भी अब पूरी तरह जिस्म की गर्मी मैं मदहोश हो चुकी होती है वह अर्जुन के होंठों को चूमने लगती है

वही अर्जुन पूजा दीदी की दोनों हाथों से सर पकड़ कर पूजा दीदी की होंठों को चूमने लगता है

दोनों भाई बहन की जिस्म मैं गर्मी अब हद से जयादा बढ़ने लगाती है जो पूजा दीदी की जिस्म आग की तरह गर्म होने लगाती है

क्यू की पूजा दीदी कई महीने से अपनी छूट की गर्मी को दबा के राखी हुई थी मगर वह छूट की गर्मी आज उभर कर निकल रही थी जो पूजा दीदी की जिस्म बहुत गर्म होने लगाती है

वही अर्जुन नशे की हालत मैं बस पूजा दीदी की सर को अपने करीब ार के होंठ को चूमता रहता है

पूजा दीदी की शैशे रुकने लगती है मगर पूजा दीदी फिर भी अर्जुन से अलग नहीं होती है आवर नहीं अर्जुन का हाँथ अपने सर से हटती है बस अर्जुन के साथ देती रहती है पूजा दीदी की आँखों मैं आंसू की बून्द भी छलक जाती है शैशे अटकने से मगर फिर भी वह अलग नहीं होती है

अर्जुन किश करते हुआ पूजा दी को बीएड पर धक्का दे देता है पूजा दीदी पीठ के बल बीएड पर गिर जाती है पूजा दीदी की दोनों पेअर अभी भी ज़मीन पर होती है आवर पूजा दीदी की गांड बीएड के किनारे होती है जो पूजा दीदी की छूट थोड़ी ऊपर की तरफ हो गयी होती है आवर पूजा दीदी की मोती पहली हुई चिकनी छूट अर्जुन के आँखों के सामने दिखने लगती है

अर्जुन जल्दी से अपना पूरा कपडा निकल देता है आवर अपने लैंड को पकड़ कर पूजा दीदी की छूट के पास चला जाता है अब अर्जुन का लैंड ठीक पूजा दीदी की छूट के पास होता है आवर

अर्जुन का लैंड अभी बार बार फुफकार मार रहा होता है पूजा दीदी की गुफा की बिल मैं जाने के लिए

वही पूजा दीदी बीएड पर गिरते hi हाफने लगती है पूजा दीदी की बड़ी दोनों चुकी ऊपर निचे हो रही होती है पूजा दीदी की आँखों से अभी भी एक दो बून्द बाह रहे होते है पूजा दीदी आँखें बंद किये हुआ हांफ रही होती है तभी पूजा दीदी को अपनी छूट मैं कोई हार्ड चीज का अहसास होता है जो पूजा दीदी झट से आँखे खोल देती है आवर आँखें खोलते hi पूजा दीदी चीख पड़ती है

प्लीज अर्जुन भाई आयी नहीं aaaaaaaaaaaaaaaa

पूजा दीदी चीख पड़ती है जो अर्जुन रुक जाता है

अभी अर्जुन का सिर्फ लैंड का ऊपर वाला हिस्सा hi पूजा दीदी की छूट मैं जाता है पूजा दीदी की चीख निकल जाती है जो अर्जुन वही पर रुक जाता है

पूजा दी अपने हाँथ से अर्जुन का लैंड छूट से निकल लेती है

आवर फिर पूजा दीदी अपनी छूट मैं ऊँगली करने लगती है ऊँगली करते हुआ आँखे बंद कर के अर्जुन के लैंड छूट मैं है सोचने लगती है आवर अर्जुन के बारे मैं सोचते hi पूजा दीदी की छूट से पानी निकल जाता है पूजा दीदी एक लम्बी ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह भर लेती है

पूजा दीदी की छूट से पानी जब निकल जाता है तो पूजा दीदी उसी पानी को अर्जुन के लैंड पर रगड़ने लगती है

वही अर्जुन मस्ती मैं सिसक पड़ता है

हे राम कितना बड़ा है भाई का आवर ये पागल सूखा सूखा hi मेरी बुर मैं दाल रहा है मेरी छूट तो अंदर से चील जाएगी मुझे कितनी दर्द होगी

हे माँ आज मेरी रक्षा करना .... अर्जुन का लैंड कुछ जयादा hi बड़ा है .... पूजा दीदी मन मैं सोचती है

जब पूजा दीदी को लगने लगता है अर्जुन का लैंड गिला हो गया है तो पूजा दीदी अर्जुन का लैंड अपनी छूट मैं खुद से डालने लगती है

पूजा दीदी को छूट के पास लैंड करते hi अर्जुन अपने लैंड पूजा दीदी की छूट मैं ठेलने लगता है ... आवर पूजा दीदी की एक बड़ी चीख गूंज पड़ती है मगर पूजा दीदी जल्दी से अपने दोनों हाँथ मुंह पर रख देती है

पूजा दीदी इस तरह लेती हुई होती है की पूजा दीदी की छूट ऊपर की तरफ उठी हुई थी आवर गांड निचे बीएड के किनारे दबा हुआ होता है जिससे पूजा दीदी को थोड़ा दर्द तो होती है मगर पूजा दीदी को अभी अर्जुन की फिकर होती है जो माधोसी मैं अपना लैंड हिला रहा होता है आवर ाआहे भर रहा होता है इस लिए पूजा दीदी लैंड को छूट मैं hi दाल देती है

आवर फिर क्या अर्जुन धक्के पर धक्के मरने लगता है जो पूजा दीदी दर्द मैं सिसकने लगती है

पूजा दीदी की आँखों से आंसू निकलने लगती है मगर वह अर्जुन को रोकती नहीं है

अर्जुन माधोसी मैं पूजा दी की छूट मैं धक्का मरते hi जाता है

अर्जुन धक्के मरते हुआ hi एक हाँथ पूजा दीदी की चुकी पर रख देता है चुकी पर हाँथ पड़ते hi पूजा दीदी की जिस्म मैं एक अजीब सी खुमारी होती है आवर पूजा दीदी अपनी चहरे से एक हाँथ उठा कर अर्जुन के हाँथ पर रख देती है आवर अर्जुन का हाँथ को अपनी चुकी पर दबाने लगती है

पूजा दीदी दर्द आवर मस्ती मैं सिसकियाँ लेती रहती है पूजा दीदी दर्द मैं भी उनकी चहरे पर मुस्कराहट होती है

क्यू की आज कितने सल्ल के बाद पूजा दीदी की सपना पूरा हो रही होती है अर्जुन धक्का मरते हुआ पूजा दीदी की चुकी भी दबा रहा होता है

फिर अर्जुन अपना मुंह मैं पूजा दीदी की निपल लेकर चूसने लगता है

हहहहहह ह हहहहहह स्स्सस्स्स्स सससस ससससस सससससस आआआ ऊह्ह्हह्ह ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह मां हहहहहह रूम मैं सिर्फ पूजा दीदी की सिसकियाँ hi गूंज रही होती है

वही जब अर्जुन पूजा दीदी की चुकी मुंह मैं लेता है तो पूजा दीदी को एक प्यारा अहसास होती है आवर पूजा दीदी मस्ती मैं अपनी गांड उठा देती है जिससे अर्जुन का लैंड पूजा दीदी की छूट मैं पूरा चला जाता है की पूरा जिस्म गंगना से जाता है ये सोच कर के उसका भाई उसका दूध पि रहा है आवर पूजा दीदी की छूट एक बार फिर से पानी बहाने लगती है

जब पूजा दीदी की छूट से पानी निकल जाती है तो पूजा दीदी बीएड पर हफ्ते हुआ अर्जुन को प्यार से देखने लगती है जो अर्जुन अभी भी धक्का मार रहा होता है अर्जुन इतना तेज़्ज़ धक्के मरने लगता है की पूजा दीदी की आहे रूम मैं गूंजने लगती है जो एक बार फिर से पूजा दीदी अपने हाँथ से मुंह दबा लेती है

ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मा कोई रोको अर्जुन को ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह मेरी छूट हहहहह गुड़िया प्लीज आकर बचा मुझे hhhhhhhhhh

पूजा दीदी अपनी मुंह दबा के दर्द मैं तड़पती हुई सोच रही होती है

अर्जुन कुछ देर तेज़ धक्के मरता है आवर फिर रुक जाता है अर्जुन के पेअर भी कंपनी लगते है आवर अर्जुन पूजा दीदी की छूट मैं झड़ने लगता है

वही पूजा दीदी तो अपनी मुंह दबा कर चीखें रोक रही होती है तभी पूजा दीदी को अपनी छूट मैं गर्म चीज की अहसास होती है आवर पूजा दीदी की चहरे पर दर्द मैं होने के बाद भी मुस्कान आ जाती है

अर्जुन कुछ देर पूजा दीदी की दोनों टंगे पकड़ खड़ा होकर पूजा दीदी की छूट मैं अपना राश निकलते रहता है आवर फिर पूजा दीदी के बगल मैं गिर जाता है

अर्जुन के बगल मैं गिरते hi पूजा दीदी फिर मुस्कुरा पड़ती है

कोई बात नहीं भाई पहली बार मैं आएसा hi होता है आवर तुमने तो मेरी जान hi निकल दिया नशा मैं होने के बाद भी जब तुम बिना नशे मैं करोगे तो मेरी पता नहीं क्या हालत होगी ..... सोचती हुई पूजा दीदी अर्जुन को किश कर देती है

मैं आज खुश हुईं की मेरा भाई ने पहले मेरे साथ सेक्स किया भले hi मैं कुवारी नहीं हुईं मगर मेरे भाई ने आज पहली बार hi सेक्स किया है वह भी मेरे साथ भाई तेरे लैंड मुझे बहुत दर्द दिया है देख तेरी दीदी की आँखों मैं अभी भी आंसू निकल रही है मगर मैं खुश हुईं भाई ..... अर्जुन को देखती हुई पूजा दीदी फिर मन मैं सोचती है

पूजा दीदी उठ कर अपनी छूट पोछने लगती है की पूजा दीदी की नज़र अर्जुन की लैंड पर पड़ती है जो अर्जुन का लैंड अभी भी खड़ा होता है

अर्जुन का खड़ा लैंड देख कर पूजा दीदी मुस्कुरा पड़ती है

क्या फिर मुझे छोड़ना है तू तो सो गया मगर तेरे ये छोटा अभी भी सर उठा कर खड़ा है ठीक है अब मैं खुद तेरे इस छोटे अर्जुन से मज़ा लेती हुईं ....... अर्जुन के खड़े लैंड को देखती हुई पूजा दीदी मन मैं सोचती है आवर मुस्कुरा देती है

पूजा दीदी अपनी मुंह अर्जुन के लैंड के पास लेकर जाने लगती है ... आवर अर्जुन के लैंड के पास रुक जाती है

क्या कर रही है पूजा क्या तू अर्जुन का लैंड मुंह मैं लेने वाली है कितना गन्दा है देख अभी तेरी छूट से निकला है आवर देख अर्जुन का गन्दा पानी भी लगा हुआ है

पूजा तू तो अपने पति के कहने पर भी मुंह मैं नहीं लेती है आवर अपने भाई का गन्दा लैंड मुंह मैं लेने जा रही है पूजा बहुत गन्दा है मुंह मैं मत ले ..... पूजा की दिल से आवाज़ आती है

ये मेरे भाई का है तभी तो लेना चाहती हुईं तू मुझे बहका मत मेरे लिए अर्जुन के लैंड पर लगा पानी गन्दा नहीं है मैं लुंगी अर्जुन का लैंड मुंह मैं ..... पूजा सोचती है

वही रूम के बहार आंगन मैं कड़ी के पास से अंजलि भी थोड़ी हैरानी से पूजा दीदी को देख रही होती है

अभी अंजलि की हालत भी बहुत ख़राब होती है अंजलि दीदी की कुरता भी ऊपर की तरफ चढ़ी हुई होती है आवर ब्रा से चुकी निकली हुई होती है निचे भी अंजलि दीदी की पजामा गिरी हुई होती है आवर अंजलि दीदी की एक हाँथ की ऊँगली पेंटी की अंदर होती है

मगर अभी अंजलि कुछ कर नहीं होती है बस हैरानी से पूजा दीदी को देख रही होती है तभी पारी रोने लगती है

पारी की रोने की आवाज़ सुन कर अंजलि दीदी हड़बड़ा जाती है अंजलि दीदी क्या करे कुछ भी समझ नहीं आती तो अंजलि पजामा उठा कर बाथरूम मैं भाग जाती है

ताकि पूजा दीदी को पता न चल जाये की वह भी दोनों की चौड़ाई देख रही है

पूजा दीदी लैंड मुंह मैं लेने hi जाती है की पारी की रोने की आवाज़ आने लगाती है

ओह मेरी पारी उठ गयी पूजा बोलती हुई धीरे धीरे नंगी hi बहार आ जाती है

पूजा खत के पास आकर देखती है तो अंजलि वह नहीं होती है पूजा दीदी पारी को उठा लेती है

ओह मेरी पारी को भूख लगी है लो माँ आ गयी पारी को दूध पिलाने के लिए ..... पूजा दीदी पारी के मुंह मैं एक चुकी दे देती है ये

गुड़िया यह नहीं है तो फिर कहा गयी क्या वह हम दोनों को देख रही थी

हे भगवन ये गुड़िया पागल तो नहीं hi गयी उसे मैंने मन किया था फिर भी

गुड़िया गुड़िया कहा है तू .... पूजा पुकारती है

थोड़ी देर के बाद hi अंजलि बाथरूम से निकलती है

हां दीदी क्या हुआ ..... अंजलि पास आकर कहती है

गुड़िया क्या तू हम दोनों को ... पूजा दीदी बस इतना hi बोलती है

दीदी आप क्या बोल रही है मैं तो सु सु करने के लिए गयी थी अभी hi उठी हुईं आवर सायद मेरे उठने पर गुड़िया भी उठ गयी दीदी मैं सच कह रही हुईं ..... अंजलि अपनी आँखे मल्टी हुई बोलती है

पूजा दीदी अंजलि को थोड़ी घर के देखती है फिर अंजलि के बात पर यकीन कर लेती है

दीदी क्या अर्जुन सो गया कुछ किया की नहीं .... खत के दूसरी तरफ से सोती हुई अंजलि पूछती है

हां अर्जुन सो गया है चल अब तू भी सजा मुझे भी नींद आ रही है कल होली भी खेलना है ..... पूजा दीदी कहती है आवर पारी के साथ लेट जाती है

वही अंजलि दीदी के चहरे पर एक मुस्कान आ जाती है आवर वह भी अपनी आँखें बंद कर लेती है

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अगली सुबह

गाओं मैं हर कोई होली खेल रहे होते है मगर सामने से आती हुई औरत को देख कर वह गोंवाले होली खेलते हुआ रुक जाते है आवर उस औरत को देखने लगते है

होली की बधाई राखी मालकिन मालकिन आज आप आवर भी ज्यादा खूबसूरत लग रही है किसी की नज़र न लगे मालकिन .... एक औरत कहती है

वही राखी देवी मुस्कुरा देती है

आएसा नहीं था के राखी देवी खूबसूरत नहीं थी वह तो बिना कोई सिंगर किये hi खूबसूरत लगती थी जिसे देख कर गाओं के बुड्ढे भी अपना लैंड पकड़ लेते थे

मगर राखी देवी आज सच मैं हर दिन से कई जयादा hi खूबसूरत लग रही होती है

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क्यू की राखी देवी आज पूरी सिंगर मैं थी जो देखने से hi एक खूबसूरत रानी की तरह लग रही होती है

राखी देवी की चहरे hi इतना खूबसूरत था की कोई बीमार आदमी भी देख ले तो उसकी चहरे पर खुश आ जाये राखी देवी की जिस्म की बनावट भी भगवन ने अलग hi किया था चौड़ा सीना आवर उसपे बड़ी जोबन फिर पतली कमर फिर उसके बाद उभरी हुई मदमस्त गांड जो हर इंसान की नज़र राखी देवी पर पड़ते hi वह कामना करने लगता है कास राखी देवी उसकी बीवी होती

राखी देवी की खुले हुआ बॉल माथे पर एक लाल बिंदिया हांथों मैं कंगन गले हार जिस्म पर गोल्ड कलर साड़ी राखी देवी बहुत hi खूबसूरत लग रही होती है

तुमको भी होली की बधाई कमला खूब मस्ती कर रही है रामु भाई के साथ मैं ठीक है कमला अभी चलती हुईं ...... राखी देवी कहती है आवर अपनी हवेली की तरफ चल पड़ती है

अरे मेरी नज़र न लगे मेरी राजकुमारी बिटिया तो बहुत खूबसूरत लग रही है ..... राखी देवी अपनी हवेली की गेट पर होती है तभी गीता को देखती है जो पेड़ के पास कड़ी होती है तो कहती है आवर अपनी आँखों से काजल निकल कर गीता के गल्ल पर लगा देती है

गीता सच मैं खूबसूरत लग रही होती है आखिर थी तो राखी देवी बेटी hi आवर जब माँ hi इतनी खूबसूरत थी तो बेटी कैसे बदसूरत होती जो गीता भी अपनी माँ की तरह hi खूबसूरत लग रही होती है

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माँ मुझे आप से बात नहीं करनी है मैं कब से आप की राह देख रही हुईं आप को पता है आज होली है आवर जब तक आप पूजा नहीं करती हम होली नहीं खेल सकती है फिर भी आप इतने देर से आ रही है ..... गीता रूठी हुई सवार मैं बोलती है

सॉरी सॉरी मेरी राजकुमारी तुम मुझे इस बार मांफ कार्डो मैं रात मैं hi आने वाली थी मगर माया ने आने hi नहीं दिया ......... आवर तुमको तो पता है नहीं गयी तो वह रूत जाती है ..... राखी देवी कहती है

हां पता है आवर आप मंडी मत मांगिये मैं तो मस्ती कर रही थी .... गीता हस्ती हुई कहती है जिससे राखी देवी भी हस्ती हुई गीता को गले लगा लेती है

राखी देवी वही से अपनी हवेली के ऊपर देखने लगती है मगर हवेली के ऊपर कोई नहीं दीखता है तो राखी देवी के चहरे पर थोड़ी मायूसी आ जाती है

गीता अर्जुन

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दीदी जल्दी से आइये भी वर्ण आवर देरी होगी ...... अंदर से आती हुईं आँचल कहती है जो राखी देवी अंदर चली जाती है

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अंजलि चैन से सो रही होती है तभी अंजलि की कानो मैं किसी के चिल्लाने आवर गेट पीटने की आवाज़े सुनाई देनी लगती है

गीता दीदी देखिये न कौन गेट पिट रहा है ... अंजलि नींद मैं hi बोलती है

वही आवाज़ आवर आने लगती है गेट पीटने की जो अंजलि उठ कर बैठ जाती है

कौन है जो गेट इतना पिट रहा है दरवाजा तोडना चाहता है क्या

अरे मैं तो पूजा दीदी के घर हुईं लगता है चची आई होंगी ..... अंजलि आँखे मल्टी हुई सोचती है आवर उठ कर गेट खोलने चली जाती है

अंजलि जब दरवाजा खोलती है तो पूजा दीदी की माँ hi होती है

अरे अंजलि बेटी तुम कब आई .... पूजा की माँ पूछती है

चची मैं तो रात मैं hi आई थी अर्जुन के साथ

अच्छा किया बेटी तुम आ गयी थी मुझे तो दर लग रहा था पूजा अकेली कैसे होगी ..... पूजा की माँ कहती है आवर अंदर चली जाती है

अंजलि अभी आँखे मल्टी हुई चल hi रही होती है की तभी अंजलि को कुछ याद आती है आवर अंजलि वह से तेज़ी से भगति है आवर चची बोल कर चीख पड़ती है

वही पूजा दीदी की माँ रूम मैं घुसाने वाली होती है की अंजलि की चीख सुन वही पर रुक जाती है

अंजलि इतनी ज़ोर से चीखती है की पारी भी उठ कर रोने लगाती है आवर पूजा दीदी भी उठ जाती है

पूजा दीदी की माँ आवर पूजा दीदी दोनों हैरानी से अंजलि को देखने लगती है

वही अंजलि की आँखों मैं एक दर सी बन गयी होती है अंजलि भाग कर रूम के गेट पर कड़ी हो जाती है जो पूजा दीदी की माँ आवर भी हैरान रह जाती है

अंजलि बेटी क्या हुआ तुम इतनी दरी हुई क्यू हो ..... पूजा दीदी की माँ कहती है

अब अंजलि क्या बोले अंजलि को कुछ समझ नहीं आती है तो अंजलि पूजा दीदी को देखने लगती है

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अपडेट ..... 32

माँ वह अंजलि कहना चाहती है आप हॉस्पिटल से आई है तो पहले नाहा कर घर मैं जाइये ..... पूजा दीदी झट से बोलती है

हां चची मैं पहले आप नाहा लीजिये ..... अंजलि भी कहती है जो काफी दरी हुई होती है

हां अंजलि बेटी ठीक कह रही है मैं भी पागल हुईं जो हॉस्पिटल से आने के बाद आएसा hi घर मैं जा रही हुईं ..... अंजलि बेटी तुम मेरी कपडे ज़रा अंदर से लेकर मुझे दो .... पूजा दीदी की माँ कहती है

अंजलि थोड़ी रहत की शंस लेती है आवर ठीक है बोल कर रूम मैं चली जाती है

अंजलि जब रूम मैं जाती है तो देखती है अर्जुन ने कपडे पहने है जो अंजलि रहत की शंश लेती है जो थोड़ी देर पहले बहुत दर गयी होती अंजलि कपडे लेकर रूम से निकल जाती है

अंजलि जब कपडे लेकर निकल रही होती है तब पूजा दीदी रूम मैं आती है जो धीरे धीरे चल रही होती मगर पूजा दीदी की चहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान होती है

दीदी आप ने तो डरा hi दिया था मुझे ... अंजलि निकलती हुई बोलती है

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राखी देवी पूजा कर चुकी होती है आवर आँचल आवर गीता हवेली के गर्दन मैं कड़ी होती है दोनों के हांथो मैं रंग होती है

गीता बेटी आज दीदी को हम दोनों नहीं छोड़ेंगे दीदी हर बार बच जाती है इस बार हम दोनों दीदी की साड़ी के साथ उनकी ब्रा पेंटी भी लाल कर देंगे ...... आँचल कहती

वही गीता बस मुस्कुरा के हआ मैं गर्दन हिला देती है

राखी देवी अपनी साड़ी ठीक करती हुई हवेली से निकलती है तभी गीता आकर अपनी माँ को पकड़ लेती है अचानक पकड़ने से अभी राखी देवी थोड़ी दर भी जाती है

ह्ह्हह्ह्ह्ह गीता बीटा प्लीज छोड़े दे मुझे होली नहीं खेलनी है aaaaaaaaaaaaaa

राखी देवी बोल रही होती है तभी आँचल बाल्टी उठा कर सीधे राखी देवी के ऊपर दाल देती है जो राखी देवी चीख पड़ती है मगर तब तक राखी देवी की पूरी जिस्म लाल हो जाती है

बाल्टी भी पूरी भरी हुई होती है रंगों आवर पानी से जिससे राखी देवी ऊपर से निचे तक भींग जाती है आवर कुछ पानी गीता के ऊपर भी गिर जाते है जिससे गीता भी भींग जाती मगर गीता अपनी माँ को छोड़ती है है

वही जल्दी से बाल्टी रख कर निचे राखी हुई रंग की थाली उठा लेती है उस थाली मैं रंग जयादा आवर पानी बहुत काम होता है अभी रंग बस पानी से थोड़ी सी भींगी हुई होती है आँचल रंग दोनों हांथों मैं लगा कर धीरे धीरे आगे बढ़ने लगाती है

वही राखी देवी भींगने के बाद भी अपनी बेटी गीता से छोड़ने के लिए बोल रही होती है मगर गीता भी मज़बूत से पकड़ी हुई होती है

आँचल को मुस्कुराती हुई अपनी तरफ आते हुआ देख कर राखी देवी ज़ोर लगाने लगती है ताकि वह गीता से अलग हो सके मगर राखी देवी अलग नहीं हो पति है जिससे राखी देवी की जिस्म मैं गुदगुदी सी होने लगाती है आवर आगे क्या होगा ये सोच कर राखी देवी को शर्म भी आने लगती है

राखी देवी कुछ देर के बाद थक कर शांत हो जाती है

आँचल देख अभी मत लगा चल अंदर तुझे जितना भी लगाना है लगा लेना मगर गीता बेटी के सामने नहीं ....... राखी देवी शर्माती हुई बोलती है

दीदी इतनी क्यू शर्मा रही हो आप अब गीता बेटी बच्ची नहीं है वह हम्हारे साथ मस्ती कर सकती है एक माँ की असली सहेली तो बेटी hi होती है जिससे हर बात माँ बेटी एक दूसरे को बता सकती है तो आज हम साथ मैं मस्ती करते है गीता बेटी को भी पता चले आओ कितनी जयादा खूबसूरत हो आवर आप की ये जिस्म कितनी मतवाली है जिसके चलते एहि जिस्म गीता बेटी को भी मिली है ...... आँचल मुस्कुराती हुई कहती है

वही राखी देवी के साथ भी शर्मा जाती है

आँचल राखी देवी के पास आती है आवर एक हाँथ उठा कर राखी देवी की तानी हुई साइन के ऊपर रख देती है आवर एक हाँथ नाभि के ऊपर रख देती है आँचल की हाँथ अपनी जिस्म पर पड़ते hi राखी देवी की जिस्म मैं गुदगुदी सी मच जाती है आवर राखी देवी अपनी आँखे बंद कर लेती है

आँचल साइन पे अपनी हाँथ मलते हुआ निचे लेकर जाने लगती है

राखी देवी की जिस्म तो पानी आवर रंग से पहले hi भींग चुकी होती है जो राखी देवी की बड़ी बड़ी आवर सख्त चुकी अभी ब्रा मैं उठी हुई निप्पल दिख रही होती है

वही साड़ी भी राखी देवी की जिस्म मैं सात गयी होती है जो राखी देवी की मदमस्त गदराई हुई मसल जांघ दिख रही होती है

आँचल राखी देवी की साइन को मलते हुआ अपनी हाँथ से राखी देवी की बलाउज की बटन खोलने लगती है

आँचल जब बटन पर ऊँगली रखती है तो बटन से ऊँगली फिसल जाती है आवर राखी देवी की सख्त चुकी मैं टाच हो जाती है जो राखी देवी एक ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भर लेती है

सससस आँचल प्लीज मर कर हहहहह .... गीता बीटा प्लीज छोड़ मुझे मेरी अच्छी बेटी सससससस ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ........ बोलते हुआ राखी दिया सिसकियाँ लेते हुआ अपनी सीना आवर उठा देती है जिससे बलाउज की 2 से 3 बटन टूट जाती है आवर राखी देवी की ब्लैक कलर की ब्रा दिखने लगती है

दीदी आज मैं आप को नहीं छोड़ने वाली हुईं मैं हर बार आप की बात मणि है आवर मैं आप को अपनी बड़ी बहन भी मानती हुईं मगर आज नहीं दीदी आज होली है आवर आप मेरी नन्द है तो मैं आज आप को नन्द की तरह होली खेलना चाहती हुईं

वाओ नन्द रानी कितनी टाइट जोबन है आप की 3 बच्चे होने के बाद भी आप की ये चुकी अभी भी जवान लड़की की तरह है नन्द रानी लगता है जवानी मैं मस्ती नहीं किया है आप ने नहीं तो ये आप की ये जोबन ढीली हो गयी होती ...... आँचल कहती है आवर राखी देवी की चुकी दबा देती है जिससे राखी देवी कहर सी जाती है

ससससससा आह्ह्ह्हह मत करो hhhhhhhhhh आँचल मत ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

राखी देवी आँखे बंद कर के सिसकते हुआ मन करने लगती है

राखी देवी को मज़ा तो आ रही होती है मगर गीता के सामने शर्मा भी रही होती है राखी देवी तो आँचल के सामने कई बार नंगी हो गयी होती है आवर अपनी छूट से पानी बहा चुकी होती है मगर गीता के सामने कभी राखी देवी जान भुज कर अपनी जिस्म की नुमाइश नहीं करती थी राखी देवी हमेशा अपने बच्चों के सामने फुल कपडे मैं होती थी

मगर आज आँचल गीता के सामने hi गन्दी हरकत कर रही होती है आवर राखी देवी की जिस्म के बारे मैं भी बोल रही होती है जो राखी देवी को बहुत hi शर्म लग रही होती है मगर राखी देवी की जिस्म मैं गर्मी बढ़ रही होती है जो राखी देवी अपनी दोनों पेअर एक दूसरे से सत्ता रही होती है जो पता चल रही होती है राखी देवी की छूट मैं गुदगुदी हो रही है आवर सायद राखी देवी की छूट भी गीली हो रही होती है

वही आँचल की बात सुन गीता भी शर्माने लगाती है आवर अपनी माँ की बलाउज की बटन टूटने से गीता की आँखें बड़ी हो जाती है जो गीता की भी शैशे तेज़ी से चलने लगाती है आवर गीता की हाँथ खुद hi अपनी माँ की चुकी पर चली आती है आवर गीता अपनी माँ की एक चुकी दबा देती है जिससे राखी देवी की एक दर्द भरी सिसकियाँ निकल जाती है

गीता के चुकी दबाते hi राखी देवी उछाल पड़ती है जिससे गीता थोड़ी पीछे की तरफ चली जाती है गीता के पीछे होने से राखी देवी जल्दी से वह से भाग जाती है राखी देवी की पीछे आँचल भी भगति है मगर गीता वही पर कड़ी रह जाती है

ममी माँ सही कह रही थी माँ की चुकी तो बहुत hi सख्त है कैसे माँ उछाल पड़ी ........ गीता वही कड़ी सोचने लगती है आवर गीता की हाँथ खुद hi अपनी चुकी पर चली जाती है आवर गीता खुद की चुकी को सहलाने लगती है

गीता अपनी नै नै उभरी हुई चुकी को बड़े hi प्यार से सहला रही होती है गीता को होश भी नहीं होती है की वह अभी हवेली के बहार है आवर गेट के सामने भी जो किसी की भी नज़र पद सकती है

मगर गीता बस अपनी माँ की चुकी की अहसास करती हुई खुद की चुकी को सहला रही होती है गीता को यकीन hi नहीं हो रही होती है की उसकी माँ की चुकी अभी भी इतनी टाइट हो सकती है क्यू की गीता गाओं की बहुत औरतों को देख चुकी होती है जिनकी चुकी थोड़ी ढीली हो गयी होती है मगर उन सब औरतों के मुकाबले उसकी माँ की चुकी कई गुना टाइट थी जैसे जवान लड़की की चुकी है आवर वही गीता अपनी चुकी को सहला कर अपनी माँ की चुकी की पता कर रही होती है क्या उसकी माँ की चुकी भी उसकी तरह टाइट है जो गीता समझ नहीं पा रही होती है क्यू गीता ने बस थोड़ा hi अपनी माँ की चुकी को टाच की थी

ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह गीता सिसकते हुआ बैठ जाती है

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गाओं के कुछ लड़के होली खेल रहे होते है अंजलि पूजा दीदी के घर से निकली है अंजलि थोड़ी दर भी रही होती के मोहल्ले के लड़के कही उसपे न रंग फेक दे

वही गाओं के लड़के भी पूजा दीदी के घर से अंजलि को निकलते देख खुश हो जाते है आवर वह सोच लेते है अंजलि के पास आते hi रंग से अंजलि को भिनगा देंगे इस लिए वह रंग आवर तेज़ी से एक दूसरे पर डालने लगते है जो अंजलि थोड़ी किनारे होकर चलने लगती है

आएसा नहीं था के अंजलि को रंग नहीं खेलनी थी अंजलि अभी रंग मैं भींगी हुई होती है जो अभी पूजा दीदी के घर से खेल कर निकली हुई होती है आवर अंजलि के कपडे भी फटी हुई होती है मगर अभी अंजलि के चहरे पर ख़ुशी होती है आवर अंजलि मुस्कुराती हुई आगे बढ़ रही होती है अपनी जिस्म को टुपट्टे से धक् कर

अंजलि जैसे hi उन लड़कियों के करीब आती है वह लड़के पिचकारी अंजलि के ऊपर मरने लगते है जो अंजलि तेज़ी से निकल जाती है मगर वह लड़के अंजलि के पीछे जाने लगते है तभी उनमें से एक लड़का सभी को रोक लेता है आवर खुद पीछे हैट जाता है

आवर सब लड़के उस लड़के को गुस्से से घूरने लगते है की आखिर उसने रोका क्यू तभी वह लड़का पीछे की तरफ इशारा करता है आवर पीछे आते हुआ अर्जुन को देख कर वह लड़के भी अपना सर निचे कर के पीछे हैट जाते है

क्यू के अर्जुन उन सभी को गुस्से से घर रहा होता है

फिर कभी ाएसि गलती मत करना नहीं तुम सब की माँ छोड़ दूंगा .... अर्जुन एक लड़के को तप्पड़ मरते हुआ hi कहता है

एक तो अर्जुन का दिमाग उठने के बाद से hi रात के बारे मैं सोच सोच कर ख़राब हो रहा होता है आवर फिर सुबह मैं पूजा दीदी आवर अंजलि दीदी को मन करने के बाद भी वह दोनों अर्जुन के साथ रंग खेल गयी थी आवर रंग खेलते हुआ hi अर्जुन आवर अंजलि के बिच आएसा हो गया था जिससे अर्जुन का दिमाग आवर ख़राब हो गया था जो अर्जुन कुछ समझ नहीं पा रहा था आखिर उसके साथ रात से हो क्या रहा है आवर वह साडी बाते सोच सोच कर अर्जुन आवर भी परेशां हो रहा था ... आवर लड़कों को अपनी अंजलि दीदी पर रंग डालते हुआ देख कर तो अर्जुन का सर घूम hi जाता है मगर अर्जुन बस उस लड़के को एक तप्पड़ hi मरता है आवर उस सभी लड़कों को घूरते हुआ चला जाता है वह सभी लड़के भी सर निचे किये हुआ पीछे हैट जाते है

अंजलि मन मैं मुस्कुराती हुई अपनी हवेली के गेट पर आती है आवर सामने अपनी गीता दीदी की हरकत देख कर अपनी मुंह पर हाँथ रख लेती है

ये गीता दीदी कैसी हरकत कर रही है क्या गीता दीदी को ज़रा भी शर्म नहीं आती रही अच्छा हुआ अभी अर्जुन दूर है वर्ण क्या सोचेगा दीदी के बारे मैं ..... अंजलि सोचती है आवर भाग कर गीता के पास चली जाती है

दीदी ये आप क्या कर रही है लगता है आप को बड़ी जल्दी है जीजा जी के पास जाने का मैं आज hi माँ से बोल देती हुईं की वह आप की शादी कर दे ...... अंजलि थोड़ी मुस्कुरा कर कहती है

अंजलि की आवाज़ सुन कर गीता होश मैं आती है आवर गीता हड़बड़ा कर कड़ी हो जाती है आवर कुछ बोले hi हवेली के अंदर चली जाती है ..... अंजलि भी मुस्कुराती हुई अपने रूम मैं चली जाती है

गीता दीदी भगति हुई आती है आवर सीधे अपनी वह बाथरूम मैं चली जाती है

अर्जुन भी घर आता है तो उसे अभी हॉल मैं कोई नहीं दीखता है तो अर्जुन सीधे गीता के रूम मैं चला जाता है आवर अपने भींगे हुआ कपडे निकलने लगता है

वही राखी देवी की रूम के बाथरूम मैं बस अभी सिसकने की आवाज़े आ रही होती है बाथरूम मैं राखी देवी लेती हुई होती है राखी देवी की जिस्म पर बस एक पेंटी होती है बाकि कुछ भी नहीं होती है

वही हाल आँचल की भी होती है आँचल भी राखी देवी के साथ नंगी होती है आवर राखी देवी की जिस्म के ऊपर होती है आवर आँचल की मुंह मैं राखी देवी की एक चुकी होती है जो आँचल बड़े hi मज़े से चूस रही होती है आवर राखी देवी आँचल को अपने से दूर कर रही होती है मगर आँचल राखी देवी की हाँथ अपनी दोनों हाँथ से पकड़ी होइ होती है

आँचल अभी प्लीज कुछ मत कर रात मैं तुझे जितना मन करे आवर तुझे जो मन करे कर लेना देख अभी गीता भी घर पर है आवर पता नहीं कब अंजलि आवर अर्जुन भी आ जाये

ह्ह्हह्ह्ह्ह ोोोू ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह स्स्स्सस्स्स्स hhhhhhhhhh हह aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa ..... राखी देवी सिसकते हुआ कहती है

दीदी गीता तो अभी सायद रूम मैं चली गयी होगी आवर अर्जुन आवर अंजलि अभी तो घर नहीं आने वाले है मैं जानती हुईं गुड़िया अब पूजा के घर से होली खेल कर hi आएगी तो दीदी मुझे अभी आप मत रोकिये मुझे अभी आप की चुकी से दूध निकालनी है बहुत दूध भरा है आप की इस चुकी मैं ....... आँचल राखी देवी की चुकी को चूसते हुआ मुंह हटा कर बोलती है

राखी देवी की चुकी तो बड़ी होती है आवर देखने से लगती है उसमे दूध भी होगी मगर राखी देवी की चुकी मैं अभी कोई दूध नहीं होती है राखी देवी की चुकी राखी देवी की साइन से सटी हुई होती है आवर मोती भी होती है आवर सबसे खाश बात होती है राखी देवी की निपल थोड़ी बड़ी होती है जो राखी देवी की टाइट चुकी मैं मैं उभरी हुई होती है जो आँचल बड़े hi प्यार से चूस रही होती है

आँचल इतने राखी देवी की चुकी इतने प्यार से चूसने लगती है की राखी देवी की आँखों मैं नशा होने लगाती है आवर राखी देवी की हाँथ खुद hi आँचल की सर पर चली जाती है

राखी देवी आँचल के सर को अपनी चुकी पर दबाने लगती है जो आँचल समझ अति है राखी देवी भी अब गर्म हो गई है आवर उसी का फायदा उठा कर आँचल अपनी एक हाँथ राखी देवी की छूट की तरफ ले जाने लगती है

आँचल अपनी सर उठा कर राखी देवी को देखती है जो आँखे बंद कर के सिसक रही होती है जो आँचल की चहरे पर एक मुस्कान आ जाती है

आँचल राखी देवी को एक नज़र देख कर अपना हाँथ राखी देवी की पेंटी के ऊपर से hi छूट पर रख देती है

वही राखी तो आँखे बंद कर सिसक रही होती है मगर छूट पर हाँथ रखते hi राखी देवी की आँखें खुल जाती है आवर राखी देवी अपनी गांड उठा देती है आवर फिर खुद hi उठ जाती है

राखी देवी उठाते hi आँचल को पकड़ कर बाथरूम से बहार निकल देती है आवर बाथरूम की गेट बंद कर देती है

आँचल गेट खोलने के लिए बोलती रह जाती है मगर राखी देवी गेट नहीं खोलती है

दीदी आखिर आप अपनी छूट मुझे देखने क्यू नहीं देती है आप की छूट तो मेरी तरह hi होगी न आप जब भी मेरे साथ मसि करती है तो लाइट बंद कर के hi करती है दीदी आखिर आप की छूट मुझसे अलग है क्या या आप मुझसे शर्माती है आखिर क्यू मुझे अपनी छूट नहीं दिखती है

दीदी एक दिन तो मैं आप की छूट देख कर hi रहूंगी .... आँचल मन मैं सोचती है

राखी देवी गेट बंद कर के गेट के पास कड़ी हो जाती है आवर लम्बी लम्बी शैशे लेने लगती है आवर खुद HI अपनी छूट पर हाँथ रख कर पेंटी के ऊपर से सहलाने लगती है

यह अर्जुन अपने कपडे निकल कर बाथरूम मैं जाने को होता है की बाथरूम के गेट पर hi रुक जाता है अर्जुन का पेअर डगमगा जाता है अर्जुन के दिल की धड़कन भी तेज़ी से चलने लगाती है आवर अर्जुन फिर धीरे धीरे बाथरूम के आवर करीब जाने लगता है
 
अपडेट ..... 33

अर्जुन बाथरूम मैं जाने को होता है तभी अर्जुन को बाथरूम से सिसकने की आवाज़े आ रही होती है आवाज़े सुन कर तो अर्जुन समझ गया होता है की बाथरूम मैं कौन है

अर्जुन दबे पाऊँ बाथरूम के पास जाता है आवर बाथरूम का गेट हल्का से खोल कर अंदर देखने की कोशिश करने लगता है आवर अंदर का नजारा देख कर अर्जुन के पेअर डगमगा जाता है अर्जुन बाथरूम के दीवार से सात जाता है अर्जुन के दिल की धड़कन भी ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगती है

अंदर बाथरूम की नज़ारा hi कुछ आएसा था जिसे देख कर अर्जुन को यकीन नहीं हो रहा था के उसकी गीता दीदी इस तरह भी कुछ कर सकती है अर्जुन के आँखों के सामने उसकी गीता दीदी की नंगी पीठ आवर नंगी गांड दिख रही होती है

वही गीता बाथरूम मैं कड़ी होती है आवर वह बिलकुल hi नंगी होती है गीता दीदी की जिस्म पर ब्रा पेंटी भी नहीं होती है गीता दीदी ठीक अभी झरने के निचे होती है आवर झरने से पानी की बूंदें भी गीता दीदी की ऊपर गिर रही होती है

गीता दीदी की मुंह से कभी हहहहहह की तो कभी सिसकने की आवाज़े आ रही होती है आवर गीता दीदी रह रह कर अपनी गांड आगे से पीछे कर रही होती है

अर्जुन कुछ देर दीवार से सात कर गीता दीदी की मदहोशी भरी आवाज़े सुनता रहता है अपनी जवान बड़ी बहन की इस मदहोशी भरी आवाज़े सुन कर अर्जुन का लैंड भी खड़ा हो जाता है मगर अर्जुन की हिम्मत नहीं हो रही होती है की वह फिर बाथरूम की अंदर देखे अर्जुन को अपनी गीता दीदी को नंगी देख कर hi पसीने छूटने लगे हुआ होते है अर्जुन का दिल कर रहा होता है वह अभी रूम से निकल जाये मगर अर्जुन का दिल फिर से अंदर देखने को बोल रहा होता है ऊपर से गीता दीदी की सिसकने की आवाज़े आवर भी माधोसी भरी आने लगाती है

गीता दीदी सिसकने की आवाज़े सुन कर अर्जुन का हाँथ खुद hi अपने लैंड पर चला जाता है आवर अर्जुन अपने लैंड को धीरे धीरे सहलाने लगता है

अर्जुन लैंड सहला रहा होता जो गीता दीदी की सिसकने की आवाज़ सुन कर लैंड आवर भी टाइट खड़ा होकर बार बार सर उठाने लगता है जैसे लैंड को जल्दी है गीता दीदी की गोरी चिकनी मस्त गदराई हुई गांड मैं जाने के लिए

अर्जुन अपनी आँखे बंद कर लेता है आवर लैंड को सहलाने लगता है तभी फिर गीता दीदी की एक ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह निकलती है जो अर्जुन की आँखे खुल जाती है अर्जुन आवर खुद को नहीं रोक पता है आवर बाथरूम मैं देखने के लिए दीवार से हैट जाता है आवर बाथरूम मैं देखने लगता है

वही अंदर बाथरूम मैं झरने के निचे कड़ी गीता दीदी की सिसकने की आवाज़े आवर भी तेज़ हो जाती है गीता दीदी की इस बार सिसकने की आवाज़ मैं मदहोशी के साथ दर्द भी होने की आवाज़े आ रही होती है आवर गीता दीदी कनपटी हुई कभी आगे तो कभी पीछे हो रही होती है जैसे गीता दीदी की छूट मैं कोई बड़ा सा लैंड जा रहा है जो गीता दीदी दर कर अपनी छूट लैंड से हटा रही है आवर फिर खुद से अपनी छूट लैंड मैं लेना चाहती हो इस तरह गीता दीदी झरने के निचे कड़ी होकर कर रही होती है

मगर बाथरूम के बहार से अर्जुन देख नहीं पा रहा होता है आखिर उसकी गीता दीदी इस तरह क्यू कर रही है आवर गीता दीदी भी आगे की तरफ कड़ी होती है जो अर्जुन को सिर्फ गीता दीदी की गांड hi दिख रही होती है

गीता दीदी को देख कर अर्जुन को समझ नहीं आ रहा होता है आखिर उसकी गीता दीदी इतनी क्यू सिसक रही है आवर गीता दीदी की सिसकने मैं दर्द भरी आवाज़े क्यू आ रही है

अर्जुन ये तो समझ गया होता है उसकी गीता दीदी अभी अपनी छूट मैं ऊँगली कर रही है मगर छूट मैं ऊँगली करते हुआ इतना कैसे कैंप रही है अर्जुन लैंड हिला रहा होता है आवर सोच रहा होता है

अंदर गीता दीदी झरने के निचे कड़ी तो होती है आवर गीता दीदी की आँखें बंद होती है गीता दीदी के चहरे पर इतनी मदहोशी होती है की गीता दीदी की मुंह भी खुली हुई होती है आवर वह रह रह कर सिसक रही होती है गीता दीदी झरने के निचे कड़ी होने के बाद भी गीता दीदी की चहरे पर पसीने हो रही है आएसा लग रही होती है

वही गीता दीदी की दोनों हाँथ उनकी छूट की दोनों तरफ होती है आवर अपनी छूट की होंठों को पकड़ी होती है है आवर सामने लगी हुई नल की मुंह पर छूट रगड़ रही होती है आवर जैसे hi नल का मुंह गीता दीदी की छूट मैं जाने को होती है गीता दीदी अपनी गांड पीछे की तरफ कर देती है जिससे नल का बस थोड़ा सा हिस्सा hi छूट मैं जाता है जैसे गीता दीदी नल आवर अपनी छूट की किश करवा रही हो

राखी देवी की बड़ी आवर अभी भी टाइट चुकी को छू कर इतनी गर्म हो गयी थी गीता की गीता को सिर्फ अपनी माँ की चुकी की अहसास हो रही होती है जो गीता खुद की जिस्म को राखी देवी की जिस्म समझ कर मसल रही होती है जो गीता की छूट मैं भी आग लग जाती है आवर गीता दीदी को इतनी बेचैनी हो जाती है की वह नल को hi छूट मैं डालने लगाती है जिससे गीता दीदी की छूट मैं नल थोड़ा सा hi जाता है जो गीता दीदी को दर्द की अहसास होती आवर गीता दीदी छूट को नक् के अंदर जाने से पहले hi निकल दे रही होती है

गीता दीदी की भूल जैसी बदन आग की तरह तप रही होती है गीता दीदी आज तक इतनी गर्म सायद hi कभी हुई थी गीता दीदी एक वक़्त के लिए नल को छूट मैं डालने के लिए सोचती है मगर फिर पता नहीं क्या सोच कर टाच होते hi छूट को नक् से दूर कर दे रही होती है

गीता दीदी वही नल के निचे बैठ जाती है आवर अपनी दोनों हांथों से अपनी छूट की दोनों होंठ अलग कर के अपनी छूट को देखने कहती है आवर गीता दीदी फिर अपनी एक उंगली से गुलाबी दिख रही बिल मैं डालने लगाती है आवर बस थोड़ी सी hi ऊँगली छूट मैं जाती है जो गीता दीदी की सिसकियाँ निकल जाती है मगर गीता दीदी अपनी ऊँगली छूट से नहीं निकलती है आवर ऊँगली को छूट के अंदर दाल कर धीरे धीरे अंदर बहार करने लगाती है

ऊँगली जैसे hi छूट के अंदर जाती है गीता दीदी सिसक पड़ती है ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह माआआ क्या आप की छूट भी मेरी तरह है देखिये एक ऊँगली भी नहीं जा रही है hhhhhhhhhh आप की चुकी तो मेरी तरह है माँ आप की चुकी तो जवान लड़की की तरह है जब से आप की चुकी को टाच किया है मन कर रही है आप की चुकी को फिर से अपने हाँथ मैं लूँ ह्ह्हह्ह्ह्ह माँ सच मैं आप बहुत खूबसूरत है आप के सामने जवान लड़कियां भी फीकी पद जाएँगी स्स्सस्स्स्स ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह मुझे यकीन है आप की छूट भी मेरी तरह hi होगी ये पापा ने आप की को बहुत प्यार किया है ह्ह्हह्ह्ह्ह माआआ आप को बहुत मज़ा आयी होगी पापा के साथ सससससस hhhhhhhhhhhhhhhhhh आप बहुत चीखी होंगी ह्ह्हह्ह्ह्ह मेरी छूट aaaaaaaaaaaaaaa हहहहहह मा hhhhhhhhhh ह्ह्हह्ह्ह्ह

ाअररज्जजजुन

गीता दीदी जैसे hi झड़ती हुई पीछे घूमती है गेट पर अर्जुन को देखती है जो अर्जुन लैंड हिला रहा होता है

अर्जुन को देख कर गीता दीदी के होश hi उड़ जाती है गीता दीदी एक हाँथ छूट पर रखती है तो एक हाँथ से दोनों चुकी पर रख लेती है

एक हाँथ से तो गीता दीदी अपनी छोटी सी छूट छिपा लेती है मगर वह अपनी दोनों बड़ी चुकी को छिपा नहीं पति है वह बस दोनों चुकी की निपल को छिपा पति है आवर गीता दीदी की चुकी का आधा हिस्सा बिलकुल अर्जुन के आँखों के सामने होती है

गीता दीदी के आचानक बोलने से अर्जुन भी हड़बड़ा जाता है आवर अपने लैंड को छिपा लेता है मगर अर्जुन की नज़र जब गीता दीदी की चुकी पर पड़ती है तो अर्जुन देखता रह जाता है आवर अर्जुन का हाँथ खुद hi फिर से लैंड को हिलने लगता है अर्जुन का हाँथ इतनी तेज़ी मैं चलने लगाती है की बस कुछ सेक् मैं hi अर्जुन के लैंड से पानी निकल जाता है

अब आलम ये होती है की अंदर बाथरूम मैं बैठी गीता दीदी की भी छूट से पानी निकल रही होती है जो अभी भी बाह रही होती है ऊँगली के बिच से मगर गीता दीदी निचे देख रही होती है आवर गीता दीदी की जिस्म भी कैंप रही होती है

वही बाथरूम के गेट पे भी अर्जुन के लैंड से पानी निकल रहे होती है आवर अर्जुन की भी सर निचे होती है

जब दोनों भाई बहन के लैंड आवर छूट से पानी निकल जाती है तो दोनों hi अपने जिस्म को छिपाना चाहने लगते है मगर उन दोनों का जिस्म hi साथ नहीं दे रही होती है जो दोनों एक जगह पर hi रह जाते है

कोई 2 मिनट के बाद गीता दीदी अपनी सर उठती है आवर अर्जुन को देखने लगाती है गीता दीदी की चहरे पर अब वह हवश नहीं बल्कि एक मायूसी होती है गीता दीदी की आँखों मैं नमी भी आ गयी होती है आवर चेहरा तो बिलकुल फीका hi पद गयी होती है आएसा लग रही होती गीता दीदी की आँखों से कभी भी आंसू छलक जाएँगी गीता दीदी बस बेबसी से अर्जुन को देख रही होती है

वही अर्जुन निचे सर किया हुआ खड़ा रहता है अर्जुन की हालत तो गीता दीदी से भी ख़राब होती है अर्जुन के आँखों से आंसू निकल रही होती है

अर्जुन नज़र उठा कर अपनी गीता दीदी को देखता है तो अर्जुन के दिल मैं बहुत दर्द होता है

सॉरी दीदी ....... अर्जुन की मुंह से बस इतना hi निकलता है आवर अर्जुन बाथरूम का गेट बंद कर देता है

दीदी बहुत मज़ा आया दीदी आप कमल की हो आप के साथ मस्ती कर के मुझे बहुत मज़ा आती है अगर मेरे पास लैंड होती तो आप को दिन रात रूम मैं रखती आवर खूब आप की जिस्म को रगड़ती .......... आँचल कहती है जो अभी दोनों नन्द भाभी किचेन मैं होती है आवर होली के अच्छे अच्छे खाना बनाने की तयारी कर रही होती है

अच्छा हुआ तेरे पास लैंड नहीं है वर्ण पता नहीं मेरी क्या हालत होती ...... राखी देवी मुस्कुरा कर कहती है

दीदी आप की हालत टूओ ...... आँचल चुप हो जाती है क्यू की आँचल को अंजलि की आवाज़ सुनाई देती है जो किचेन के पास hi होती है

क्या बाटे कर रही हो भाभी नन्द मिल के ...... अंजलि पास आकर बोलती है

तुझे क्यू जानना है हम नन्द भाभी की बाते है आवर तू किचेन मैं क्यू आई जा पहले नाहा ले ...... आँचल कहती है क्यू की अंजलि अभी भी रंगों वाले कपडे मैं होती है

ओह ओह ओह ओह नन्द भाभी की बाते है तो क्या हुआ मैं भी तो आप दोनों की बेटी हुईं आवर मुझे भी जानने का हक़ है कही आप दोनों मेरी शिकायत कर रही होंगी तो ..... अंजलि मुंह बना कर कहती है

अंजलि की बोलने का तरीका सुन कर राखी देवी आवर आँचल दोनों hi मुस्कुरा देती है

अभी कोई शैतानी नहीं देख टाइम बहुत हो गयी है तो हमेह खाना बनाने दे ..... आवर बता क्या करने आई है किचेन मैं ..... आँचल के बोलने से पहले राखी देवी बोल पड़ती है

राखी देवी के बोलने पर अंजलि अभी कुछ नहीं बोलती है आवर किचेन से चली जाती है मगर जाते जाते अपनी ममी की कमर पर चींटी काट देती है जिससे आँचल उछाल पड़ती है

सैतान लड़की ...... आँचल कहती है

हां तो तूने hi तो उसे सैतान बनाई है जो तेरे साथ कुछ भी करती रहती है आवर तू उसे कुछ नहीं कहती है ...... राखी देवी कहती है

हां दीदी सही बोल रही हो आप मगर क्या करूँ आखिर वह hi तो मुझे माँ भी कहती है आवर आप जानती हो मुझे माँ सुन कर मेरी दिल को कितनी सकूँ मिलती है आवर दीदी आप को याद है hi अंजलि hi थी जिसने मुझे पहली बार मैं hi माँ बोली थी ...... आँचल मुस्कुराती हुई कहती है

हां मुझे भी याद है आवर तू इतनी खुश हुई थी की अपनी चुकी उसके मुंह मैं दे दी थी ....... राखी देवी हस्ती हुई कहती है जो आँचल भी हस्स देती है

आदि के घर

आदि की माँ रजनी अपनी रूम से निकलती है आवर छत की तरफ चली जाती है आवर छत से गाओं की तरफ देखने लगती है जो गोंवाले रंग खेल रहे होते है

आदि की माँ रजनी बिलकुल भी रंग नहीं खेली होती है रजनी की जिस्म पर ज़रा सा भी रंग कही पर नहीं होती है वह दूर लड़कों को रंग खेलते हुआ देखती है

वही रजनी देवी के छत पर जाने के कुछ देर बाद hi रजनी की फ़ोन बजने लगाती है जो रजनी फ़ोन उठा नहीं पति है

कुछ देर के बाद रजनी जब निचे जाती है तो वह पहले किचेन मैं जाती है आवर कॉफ़ी बनाने लगाती है क्यू के आज होली होने से काम करने वाली नहीं आई होती है

आदि की माँ कॉफ़ी बना कर हॉल मैं जाने लगाती है तभी फ़ोन की रिंग सुनाई देती है तो आदि की माँ रूम मैं चली जाती है आवर फ़ोन देखती है तो नई नंबर होता तो आदि की माँ फ़ोन उठा लेती है

हां कौन बोल रहा है ..... आदि क माँ रजनी फ़ोन उठा कर बोलती है

साली रंडी वेसिया मैं तेरा होने वाला पति बोल रहा हुईं बोल कब तेरी छूट मैं अपना दाल डालूं ........ उधर से तेज़्ज़ आवाज़ मैं एक आदमी की आवाज़ आती है ..... आवाज़ इतनी तेज़्ज़ आवर गुस्से भरी मैं आती है की आदि की माँ की पूरी जिस्म hi कैंप सी जाती है आवर उस आदमी की बाते सुन कर तो आदि की माँ की चेहरा गुस्से आवर शर्म से लाल पद जाती है

आदि की माँ कुछ देर तक चुप हो जाती है आज तक किसी ने आदि की माँ के साथ इस तरह गन्दी बात नहीं किया था यह तक के आदि के पापा भी कभी आदि की माँ से गन्दी बाते नहीं बोले थे मगर आज एक पराया आदमी आदि की माँ को इतनी गन्दी बाते बोल चूका था जिससे आदि की माँ एक वक़्त के लिए शर्म से लाल हो जाती है

यह तक आदि की माँ के आँखों मैं ममी तक आ जाती है

कौन हो तुम आवर क्या बकवास कर रहे हो औरत से कैसे बात करते है तुमेह नहीं पता क्या ..... मैं तो तुम्हें जानती भी नहीं हुईं फिर मेरे साथ ाएसि बाते क्यू कर रहे हो ..... थोड़ी देर के बाद आदि की माँ कहती है

तू मुझे जानती है की नहीं ये मुझे नहीं पता मगर मैं तुझे जानना चाहता हुईं जब से तेरी तस्वीर देखा है साला मेरा लैंड बैठ hi नहीं रहा है मेरा लैंड तड़प रहा है तेरी छूट मैं जाने के लिए ..... उधर से फिर से उस आदमी की आवाज़ आती है आवर इस बार भी उस आदमी ने गंदे तरीके से hi बोलता है

इस बार उस आदमी की गन्दी बाते सुन कर आदि की माँ की आँखों से आंसू छलक hi जाते है आवर आदि की माँ अपनी मुंह पर हाँथ रख कर थोड़ी सिसक पड़ती है

आप ने सायद गलती नंबर लगा दिया है आप जिसे समझ रहे है मैं वह औरत नहीं हुईं आप सही नंबर लगा लीजिये ....... आदि की माँ थोड़ी हकलाते हुआ धीरे धीरे बोलती है आवर फ़ोन काट देती है

फ़ोन काटने के बाद आदि की माँ वही बिस्तर पर गिर पड़ती है आवर सिसकने लगती है आदि की माँ को अभी भी यकीन नहीं हो रही होती है की अभी किसी अनजान इंसान ने उसे इतनी गन्दी बाते बोलै जिसे मैं जानती भी नहीं

आदि की माँ अभी सिसक hi रही होती है के तभी फिर से फ़ोन की रिंग होने लगाती है आदि की माँ देखती है तो इस बार भी वही नंबर होती है जो आदि की माँ फ़ोन काट देती है मगर फिर से फ़ोन पर रिंग होने लगाती है आदि की माँ इस बार भी फ़ोन काट देती है मगर काटने के बाद hi फ़ोन पर रिंग होने लगाती थी जो आदि की माँ फ़ोन उठा लेती है

मैंने आप को कही न आप जिस औरत से बात करना चाहते है मैं वह नहीं हुईं अगर आप ने फिर फ़ोन किया तो मैं इस नंबर पर पुलिस कम्प्लेन कर दूंगी ..... आदि की माँ इस बार थोड़ी हिम्मत जूता कर कहती है

वही दूसरे तरफ से उस आदमी की हसने की आवाज़े आने लगाती है फिर आदि की माँ को किसी के चीखने की भी आवाज़े आने लगाती है

साली ये चीखें सुन रही है न पुलिस कम्प्लेन करने के बारे मैं सोची तो फिर तू ये चीखें भी कभी नहीं सुन पायेगी

मैं तुझे कुछ वीडियो भेज रहा हुईं पहले ये वीडियो देख फिर बाते करते है आवर सुन वीडियो देखने के बाद भी तू अगर मेरी लैंड अपनी छूट मैं नहीं ली तो अच्छा नहीं होगा फिर बे रसमलाई बेबी ोुम्माआ ...... वह आदमी हस्ते हुआ बोल कर फ़ोन रख देता है

यह आदि की माँ का दिल बहुत ज़ोर ज़ोर से चलने लगाती है जैसे वह चीखें की आवाज़ निकल रहे इंसान को जानती हो

आदि की माँ अपनी दोनों हांथों से अपनी छाती पकड़ लेती है

कौन था वह मुझे आएसा लगा जैसे मैं उस आवाज़ को जानती हुईं

हे माँ मेरे बेटे का रक्षा करना ...... आदि की माँ बोल पड़ती है तभी आदि की माँ की फ़ोन पर मैसेज आने लगाती है जो आदि की माँ की दिल आवर भी तेज़ी से चलने लगाती है

आदि की माँ डर्टी हुई फ़ोन उठा कर व्हाट्सप्प मैं जाती है आवर आई हुई वीडियो को ओपन करती है

वीडियो जैसे hi ओपन होती है आदि की माँ की आँखों के सामने कुछ आएसा दिखाई देता है जो आदि की माँ की चेहरा शर्म से लाल हो जाती है आवर आदि की माँ फ़ोन दूर फेक देती है

ये आदमी आखिर चाहता क्या है मुझसे ये कितना हरामी है इसके अंदर ज़रा भी शर्म नहीं है जो अपने लान ..... इसके आगे कुछ सोच नहीं पति है आदि की माँ क्यू की वीडियो मैं फिर से उस आदमी की आवाज़े सुनाई देने लगाती है जो आदि की माँ फ़ोन उठा लेती है

कैसा लगा मेरा लैंड मेरी रंडी को एहि लैंड से तेरी छूट आवर गांड मैं डालूंगा तेरी छूट की गर्मी पूरा निकल दूंगा सुन रही है न तू जानेमन ..... वह आदमी बोलता है मगर उसका चेहरा नहीं दिखा देता है जो आदि की माँ देखने की कोसिस कर रही होती है

बड़ी बेचैन है न मुझे देखने के लिए जल्द hi तुझसे मिलूंगा मेरा लैंड तेरी छूट मैं जाने के लिए बेक़रार है चल अब आगे भी देख ले ..... वह आदमी कहता है

आदि की माँ की आँखों से फिर से आंसू निकलने लगी है आदि की माँ को इतनी शर्म आती रही होती है की मन कर रही होती है वह फ़ोन रख कर वीडियो को न देखे मगर वह आवाज़ आदि की माँ को वीडियो देखने पर मज़बूर कर रही होती है जो न छह कर भी आदि की माँ वह वीडियो देखती रहती है

आदि की माँ वीडियो देख रही होती है की अचानक Hi आदि की माँ के सामने एक चेहरा आता है आवर आदि की माँ की एक चीख निकल जाती है

नहीं ये नहीं हो सकता ..... आदि की माँ इतनी hi बोलती है आवर वह बीएड पर गिर जाती है
 
अपडेट .... 34

शाम के 5 पं

अर्जुन अपने छत पर बैठा हुआ होता है आवर अर्जुन के चहरे पर मायूसी होती है अर्जुन खुद को दोषी समझ रहा होता है

मैंने अच्छा नहीं किया मैं इतना निचे कैसे गिर सकता हुईं गीता दीदी मेरी बड़ी दीदी है वह मुझे कितना प्यार करती है आवर मैं उनेह नंगी देख क्या कर रहा था छी मैं भाई के नाम पर एक कलंक बन गया हुईं

गीता दीदी के आँखों मैं कितनी दर्द दिखी मुझे वह मुझे प्यार करती है इस लिए मुझे कुछ नहीं बोली मगर उनेह कितनी दुःख हो रही होगी मेरे बारे मैं सोच कर .... मैं गीता दीदी की सामना अब कैसे करूँगा डीईई .... अर्जुन छत पर बैठे हुआ सोच hi रहा होता है की तभी अर्जुन के कंधे पर किसी का हाँथ पड़ता है तो अर्जुन देखता है तो गीता दीदी होती है जो अर्जुन के मुंह से बस डीई hi निलकता है आवर अर्जुन अपना सर निचे कर लेता है

वही गीता दीदी अर्जुन के पास hi बैठ जाती है गीता दीदी को भी शर्म तो बहुत आ रही होती है मगर उसके बाद से अर्जुन को न देख कर गीता दीदी को अर्जुन की फिकर होने लगाती है जो गीता दीदी अर्जुन को ढूंढते हुआ वह अर्जुन के पास आ जाती है

कहा गया था मैं कब से तुझे दूध रही थी .... गीता अर्जुन के सर के बॉल ठीक करती हुई पूछती है

गीता दीदी बिलकुल आयी बात कर रही होती है जैसे कुछ हुआ hi नहीं है

दीदी मुझे मांफ कर दीजिये मैं जान भुज कर आएसा नहीं कर रहा था मैं तो आप की रूम मैं फ्रेश होने के लिए आया था मगर आप की अजीब आवाज़े सुन कर मैं बाथरूम मैं देखने लगा जो आप दीदी मेरा यकीन कीजिये मैं आप के ..... अर्जुन बोलते हुआ सिसकने लगता है जो गीता दीदी अर्जुन का सर अपनी गॉड मैं रख लेती है

अर्जुन मेरा प्यारा भाई मत सोच उस बारे मैं वह बस एक गलती थी जो मेरी वजह से हुई मुझे बाथरूम की गेट बंद करनी चाहिए थी वह मेरी गलती थी ........ गीता दीदी कहती है अर्जुन को सिसकते हुआ सुन कर गीता दीदी भी दुखी होती है आवर उनकी भी आँखे भर जाती है मगर वह अपनी आंसू गिरने नहीं देती है

अर्जुन कुछ देर तक अपनी गीता दीदी के बाँहों मैं सिसकते रहता है आवर गीता दीदी अर्जुन के सर पर हाँथ फेरती रहती है

अर्जुन मेरी hi गलती थी तू खुद को दोषी मत मान मैं आगे से ध्यान रखूंगी फिर से ाएसि गलती न हो ..... अर्जुन तू हमेह छोड़ कर फिर से सहर तो नहीं चला जायेगा न .... गीता दीदी उदासी भरी हुई सवार मैं कहती है जैसे गीता दीदी को थोड़ी दर भी लग रही है के अर्जुन फिर से सहर चला जायेगा

अपनी गीता दीदी की मायूसी भरी आवाज़ सुन कर अर्जुन झट से गीता दीदी के बाँहों से अलग हो जाता है आवर गीता दीदी को देखने लगता है जो गीता दीदी भी अर्जुन को देख रही होती है

गीता दीदी मैं कभी आप को छोड़ कर नहीं जाऊंगा आप भी मुझे मांफ कर दीजिये मुझे रूम से निकल जाना चाहिए था उसी वक़्त मगर मैं नहीं निकल पाया दीदी मुझे प्लीज आप मांफ कर दीजिये ..... अर्जुन देखते हुआ बोलता है

अर्जुन की मायूसी भरी सबद सुन कर गीता दीदी का दिल मचल जाता है जो गीता दीदी अर्जुन को अपनी साइन से लगा लेती है

ओह मेरा प्यारा मासूम भाई मैंने मांफ किया तुमेह तुम भी अपनी दीदी को मांफ कर देना ........ गीता दीदी थोड़ी खुश होकर बोलती अर्जुन भी हां मैं गर्दन हिला देता है

चलो पूजा के घर चलते है वह इंतज़ार कर रही होंगी ...... गीता दीदी कहती है

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वही एक बड़ी हवेली के सबसे अंदर एक रूम मैं एक औरत गेट के सामने झुकी हुई होती है उस औरत के दोनों चुकी थोड़ी लटकी हुई होती है आवर पास मैं hi उस औरत की बलाउज गिरी हुई होती है जो उस बलाउज की बटन भी गिरी हुई होती है जैसे किसी ने उस औरत की बलाउज hi फाड् दिया हो आवर उस औरत की ब्रा चुकी के निचे होती है वह औरत अपनी दोनों हाँथ मुंह पर राखी हुई होती है जैसे वह अपनी आवाज़ दबा रही हो मगर रह रह कर वह औरत सिसक hi रही होती है

वही उस औरत के पीछे एक आदमी खड़ा होता है आवर उस औरत के कमर पकड़ कर पीछे से धक्का मार रहा होता है

ओह्ह्ह्ह रंडी भाभी तेरी छूट तो अभी भी बहुत टाइट है ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बहुत मज़ा आया रहा है ये तेरी छूट को छोड़ कर लगता है भाई साहब अब तेरी छूट मैं लैंड नहीं डालते है aaaaaaaaaa भाभी मैं झरने वाला हुईं कहा लेगी बोल ..... वह आदमी मस्ती मैं कहता है

हहहहह मैं भी झरने वाली हुईं प्लीज आवर तेज़ मेरी छूट मैं धक्का मारो ह्ह्हह्ह्ह्ह भुजा दो मेरी छूट की आग को ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह आवर तेज़ ssssssssss ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह aaaaaaaaaaaaaaa आवर तेज़ मारो मेरी छूट को hhhhhhhhhhhhhhhhh फाड् दो आज ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह मेरी छूट अअअअअ ससससससा हहहहहह aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa आवर दोनों एक साथ झाड़ जाते है

वह आदमी भी उस औरत के छूट मैं hi झाड़ जाता है जो दोनों की पानी निचे ज़मीन पर गिरने लगते है ..... वह आदमी पीछे होकर औरत को फिर से पकड़ कर चुकी को दबाने लगता है

ह्ह्हह्ह्ह्ह आवर नहीं काफी देर हो गयी है मुझे ढूंढते हुआ कोई भी आ सकता है मत करो न तुम आते hi मुझे छोड़ दिया ज़रा भी सबर नहीं है तुम मैं ....... क्या वह अपनी बीवी को नहीं तू छोड़ता नहीं था ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह ..... वह औरत सिसकते हुआ बोलती है

छोड़ता तो रोज़ था मगर जो मज़ा तेरी छूट मार कर आता है वह मज़ा बीवी की छूट मार कर नहीं आता ....... आवर क्या करता आते hi तेरी भरी जवानी देख लिया तो रहा नहीं गया एक बार आवर छोड़ने दो न अभी भी मन नहीं भरा मेरा ...... वह आदमी कहता है

नहीं बिलकुल नहीं फिर से किया तो मैं चलने के काबिल नहीं रहूंगी फिर घर का काम कौन करेगा ...... वह औरत कहती है आवर उस आदमी को धक्का देकर भाग जाती है

अभी आस्था अपने रूम मैं बैठी हुई हेडफोन्स मैं सांग सुन रही होती है आवर खुद भी गुनगुना रही होती की तभी आस्था की रूम का गेट कोई पीटने लगता है मगर आस्था को सुनाई नहीं देती है तभी आस्था के फ़ोन पर एक मैसेज आती है आवर सांग कुछ सेक् के लिए रूकती है तो आष्टा को गेट पीटने की आवाज़े सुनाई देती है तो आष्टा सांग बंद कर देती है

देख गुड़िया मुझे होली नहीं खेलनी है तूने सुबह मैं रंग लगाई न अब मुझे होली नहीं खेलने है फिर मुझे क्यू परेशां कर रही है तू जा माँ दादी के साथ खेल ...... आस्था कहती है ....... मगर बहार से कोई बोलने की आवाज़ नहीं आती है आवर गेट भी ज़ोर ज़ोर से बजने लगाती है

गेट को ज़ोर ज़ोर से पीटने की आवाज़ सुन कर आस्था को गुस्सा आया जाती है

गुड़िया मैं तुझे छोडूंगी नहीं रुक मैं अभी तुझे होली खेलती हुई

हे मा मैं सपना तो नहीं देख रही ओह्ह्ह्हह मेरी जान आप कब आई

गेट खोलते hi सामने कड़ी लड़की को देख आस्था कहती है ..... एक वक़्त के लिए आस्था तो झटका hi खा जाती है आवर आस्था को यकीन hi नहीं हो रही होती है की वह लड़की सच मैं उसके सामने कड़ी है जिसे आस्था दिलो जान से प्यार करती है

सामने कड़ी लड़की कोई आवर नहीं आस्था की चाचा की लड़की पूजा होती है

आस्था झट से पूजा को गले लगा लेती है

ओह्ह्ह मेरी राजकुमारी आप ने तो मुझे डरा hi दिया मुझे अभी भी यकीन नहीं हो रही मेरी छोटी बहन मुझसे गले लगी है बहुत याद किया मैंने आप को ....... आस्था बहुत hi ख़ुशी मैं बोलती है

मैं भी आप को बहुत बहुत मिस कर रही थी दीदी तभी तो मैं आप के पास आ गयी

बहुत अच्छा किया बेबी मैं अब तुमेह कही नहीं जाने दूंगी ...... आस्था कहती है

हैप्पी होली दीदी ...... पूजा बोलती है आवर सूखा रंग hi आस्था की गाल पर लगा देती है

रंग लगने पर भी आस्था पूजा को कुछ नहीं कहती है बस अपनी पूजा को प्यार से देखती है आवर फिर पूजा को भी अपनी गलों पर लगी रंग को पोछ कर लगा देती है

लो सुरु हो गया दोनों बहन की मस्ती ..... रूम मैं आती हुई एक औरत बोलती है

छोटी माँ मैंने आप को बहुत मिस किया ...... आस्था बोलती है आवर उस औरत से लिपट जाती है ..... वह औरत पूजा की माँ होती है

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आदि की माँ रात होने के बाद उठती है आदि की माँ जैसे hi उठती है वह अपनी सर पकड़ लेती है आवर आदि की माँ के आँखों के सामने वह वीडियो चलने लगाती है

तुम कमीने लोगों ने आएसा क्यू किया मेरे बेटे ने क्या बिगाड़ा है तुम लोगों का मेरा बीटा तो हर किसी की मदद करता रहता है फिर मेरे बेटे की इतनी बुरी हालत क्यू किया ...... ओह्ह्ह मेरा बच्चा मैं अपने दिल के टुकड़े को आवर कुछ नहीं होने दूंगी वह hi तो मेरा एक सहारा है ..... मैं कुछ भी करुँगी बस मेरे बेटे को मुझे दे दो .... मेरा बीटा कितना तड़प रहा है ..... तुम लोगों को ज़रा भी दया नहीं आया मेरे बेटे के साथ वैसे करते हुआ ... तुम सब दरिंदे हो ....... कोई देरिदा भी किसी की इस तरह नहीं करता है ..... ओह मेरा लाल ....... आदि की माँ की आँखों से आंसू नदी की तरह बहाने लगाती है आदि की माँ की बचानी बढ़ने लगाती है आदि के लिए ... आदि की माँ झट से अपनी फ़ोन उठा कर उस नंबर पर फ़ोन करने लगाती है मगर वह नंबर बंद आ रही होती है जिससे आदि की माँ आवर भी जयादा रोने लगाती है आदि की माँ रट हुआ hi बीएड पर गिर जाती है

आज किस्मत ने गजब सा खेल खेला था आदि की माँ रणजी के साथ आज होली के दिन आदि की माँ कितनी खुश थी मगर एक पल के साथ आदि की माँ की खुशियां छीन गयी होती है

आदि की माँ बेजान सी बीएड पर पड़ी सिसकती रह जाती है

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दीदी वह बगल वाला नया घर जो बना है उसमे कोई फॅमिली रहने के लिए आया है न ......... आँचल राखी देवी से पूछती है

है आँचल सायद एक माँ बेटे है .... अंचल तू क्यू पूछ रही है .... राखी देवी कहती है

वह दीदी इस गाओं मैं नए नए है तो सायद उनेह होली मैं अच्छा नहीं लग रही होगी ....आप तो जानती hi है होली परिवार के साथ hi अच्छी लगाती है मगर वह तो बस माँ बेटे है आवर सायद hi वह यह किसी को जानती होंगी तो क्यू न हम उनके घर जाये आवर थोड़ी बाते करे आवर गुलाल लगा दे उनेह ...... दीदी उनका भी दिल बहाल जायेगा .... आँचल कहती है

हां सोच अच्छी है दिन मैं भी मैंने उन दोनों माँ बेटे को नहीं देखि सायद वह लोग किसी को नहीं जानते है तो वह लोग घर मैं hi होंगी चल मिल लेती है इसी बहाने उनके बारे मैं भी कुछ जान लेंगी हम लोग ...... राखी देवी कहती है

ठीक है दीदी मैं अभी आई ... आँचल बोल कर रूम मैं चली जाती है

वही आँचल के जाते hi राखी देवी की फ़ोन बजने लगाती है तो राखी देवी फ़ोन उठा कर बात करने लगती है

मैं कुछ नहीं जानती आवर आज तो मैं बिलकुल भी नहीं आने वाली समझी अब फ़ोन रख तू ....... राखी देवी इतना बोलती हुई फ़ोन रख देती है

क्या हुआ कौन थी आवर आप कहा पर न जाने की बात कर रही थी कोई बात तो नहीं है न ..... आँचल पूछती है

आँचल कोई बात नहीं है वह मेरी एक सहेली थी आज होली की ख़ुशी मैं पार्टी कर रही है तो मुझे बुला रही थी ..... वही मन कर रही थी मैं .... राखी देवी कहती है .... आवर फिर दोनों आदि के घर के लिए निकल जाती है
 
अपडेट ..... 35

गीता अभी भी अर्जुन से थोड़ी थोड़ी शर्मा रही होती है इस लिए गीता दीदी अर्जुन से अपनी नज़र मिला नहीं पा रही होती है

अर्जुन भी पूजा दीदी के घर पे एकदम संत सा रहता है आवर आँगन मैं बैठा हुआ होता है

ठीक है पूजा अब हम चलते है माँ भी इंतज़ार कर रही होगी .... गीता दीदी कहती है

ठीक है गीता कल घर ज़रूर आना कल hi मुझे ससुराल जाना है ....... पूजा दीदी गीता दीदी से कहती है मगर पूजा दीदी की नज़र अर्जुन पे होती है जो गुमसुम सा बैठा हुआ होता है ..... तभी पूजा दीदी का फ़ोन बजने लगता है तो पूजा दीदी फ़ोन उठा लेती है पूजा दीदी जब फ़ोन उठा कर hello बोलती है तभी उधर से एक लड़की की रोने की आवाज़ आती है जो पूजा दीदी थोड़ी घबरा जाती है

रम्य क्या हुआ तू रो क्यू रही है क्या हुआ बता न .... पूजा दीदी घबराई हुई बोलती है

भाभी माँ हॉस्पिटल मैं है ... भाभी मुझे बहुत दर लग रही है .... उधर से रम्य रोटी हुई बोलती है

रम्य पहले रोना बंद करो आवर बताओ क्या हुआ है माँ को ..... पूजा दीदी कहती है

भाभी वह माँ छत से .... रम्य इतना hi बोलती है की फ़ोन काट जाती है

इधर पूजा दीदी hello hello बोलने लगाती है मगर फ़ोन तो काट चुकी होती है पूजा दीदी फिर फ़ोन लगाने लगाती है जो फ़ोन बंद आने लगाती है पूजा दीदी सिसकने लगती है तब तक पूजा दीदी की माँ भी वह आ जाती है

वही अर्जुन भी उठ कर पास आ जाता है

पूजा बेटी क्या हुआ .... पूजा दीदी की माँ पूछती है

माँ लगता है सासु माँ छत से गिर गयी है वह अभी हॉस्पिटल मैं है रम्य भी बहुत रो रही थी रम्य से ठीक से बात भी नहीं हुई आवर फ़ोन बंद हो गया है .... माँ मुझे अभी वह जाना होगा ...... पूजा दीदी कहती है

बेटी ये तो बहुत बुरा हुआ है भगवन करे कही जयादा छोट न लगी हो उनेह ..... बेटी तू अभी अकेली कैसे जाएगी अभी तो कोई गाड़ी भी नहीं मिलेगी कल सुबह hi चली जाना ... पूजा दीदी की माँ कहती है

नहीं माँ मुझे अभी जाना है रात मैं एक बस जाती है गाओं के रस्ते से मैं उसी पर चली जाउंगी ..... रम्य वह अकेली है वह अकेली वह पर क्या करेगी वह बहुत रो भी रही थी ......... पूजा दीदी कहती है

बेटी मगर वह बस रात के 10 :पं को आती है इतनी रात मैं क्या तू वह अकेली कड़ी रहेगी नहीं मैं तुझे नहीं जाने दूंगी अभी .... पूजा दीदी की माँ कहती है

पूजा दीदी चची सही कह रही है आप सबह hi चली जाना आप अकेली नहीं जा सकती है वह भी पारी को लेकर ..... अंजलि कहती है

सभी के मन करने के बाद भी पूजा दीदी नहीं मानती है आवर अपना बैग पैक करने लगाती है

दीदी आप रुकिए मैं बाइक लेकर आता हुईं ...... जब अर्जुन देखता है के पूजा दीदी नहीं मान रही है तो बोलता है आवर पूजा दीदी के घर से निकल जाता है

अर्जुन घर जाकर बाइक लेकर थोड़ी hi देर मैं आ जाता है आवर पूजा दीदी को लेकर रात मैं hi निकल जाता है

अर्जुन आवर पूजा दीदी के जाने के बाद गीता दीदी आवर अंजलि कुछ देर पूजा दीदी के घर रूकती है फिर दोनों बहाने घर के लिए निकल जाती है

आदि के घर

दीदी कोई परेशानी तो नहीं है न आप थोड़ी उदास लग रही है ...... हम दोनों कब से बेल बजा रही थी ..... आँचल कहती है

ाएसि कोई बात नहीं है मैं घर पर अकेली थी तो घर का काम कर के ज़रा सो गयी थी ....... आदि की माँ अपनी नज़रे चुराते हुआ कहती है ..... क्यू की आँचल के पूछने से आदि की माँ थोड़ी दुखी हो जाती है मगर वह आदि की माँ खुद को संभल लेती है

वैसे दीदी आप का एक बीटा भी साथ रहता है न वह नहीं दिख रहा है ........ राखी देवी पूछती है

हां मेरा आदि बीटा भी साथ रहता है .... वह कल hi एक काम के सिलसिले मैं देहली गया है कुछ दिन मैं आ जायेगा ...... आदि की माँ कहती है

तब तो आप ने तेहवार भी ठीक से नहीं मनाई होंगी सॉरी हमेह मांफ कर दीजिये हम लोगो को आप के घर आ जाना चाहिए था ..... आप इस गाओं मैं अकेली है आवर किसी को जानती भी नहीं है ..... जो आप को अच्छा नहीं लग रही होगी ...... आँचल कहती है

सॉरी की कोई बात नहीं है ..... मैं वैसे भी होली खेलती नहीं हुईं

है परिवार के लोग साथ होता तो अच्छा लगता

फिर भी मैं खुश हुईं की आप दोनों मेरे घर आई

बहुत सुक्रिया आप दोनों का आवर आप के बारे मैं बहुत सुना है गाओं के लोग आप की बहुत तारीफें करते है आप गाओं के लोगों की बहुत मदद करती है ये जान कर मैं खुद आप से मिलने वाली थी मगर आप की अच्छे का नतीजा है की आप खुद मेरे घर मुझसे मिलने आ गयी ...... आदि की माँ राखी देवी से कहती है

सही सुना है दीदी आप ने दीदी जब से इस गाओं मैं दुल्हन बन के आई है कुछ सल्ल के बाद से hi दीदी इस गाओं की लोगों की मदद करने लगी क्यू को दीदी की पति भी आयी hi थे वह भी अपने गाओं के लोगों की मदद करते थे इस लिए दीदी भी उनके नक़्शे कदम पर चलती है ...... ताकि गाओं के सभी लोग अच्छी ज़िंदगी जिह सके ...... आँचल खुश होकर कहती है क्यू की आँचल को बहुत ख़ुशी होती है की गाओं के लोग राखी देवी की तारीफ करते है

सॉरी मैं बातों मैं भूल गयी .. क्या लोगी आप दोनों ..... आदि की माँ कहती है

दीदी आज कुछ नहीं लेंगी हम पहले hi बहुत कुछ खा लिया है पेट भरा पता है ........ आँचल कहती है

आप लोग पहली बार आये है तो मैं आयी तो नहीं जाने दूंगी कुछ नहीं तो बस एक एक कॉफ़ी hi पि लीजिये मैं अभी बना देती हुईं ..... आदि की माँ बोल कर उठ जाती है आवर किचेन की तरफ चली जाती है

आदि की माँ किचेन मैं कॉफ़ी बना रही होती है तभी फ़ोन पर रिंग होने लगाती है आदि की माँ की नज़र जब फ़ोन के नंबर पर पड़ती है तो वह दिन वाला hi नंबर होती है जो आदि की माँ घबरा जाती है

आदि की माँ की आँखों मैं भी दर दिखने लगती है आदि की माँ डर्टी हुई फ़ोन उठा लेती है

भगवन के लिए मेरे बेटे को मुझे लौटा दो आप लोग मेरा सहारा मेरा बीटा hi है आप लोग जो कहोगे मैं वह करुँगी प्लीज मेरे बीटा लौटा दो मैं हाँथ जोड़ती हुईं ...... आदि की माँ रोटी हुई कहती है

तू अपने बेटे के लिए कुछ भी करेगी न ...... उधर से आदमी बोलता

हां मैं कुछ भी करुँगी बस मेरे बेटे को मुझे लौटा दो ..... आदि की माँ कहती है

ठीक है मैं एक जगह का पता भेज रहा हुईं तू कल शाम तक वह मिल मुझे आवर अपने बेटे को लेकर जा आवर कोई चालाकी नहीं पुलिस के पास गयी थी फिर अपने बेटे को भूल जाना तू ..... उधर से आदमी कहता है

नहीं नहीं मेरे लाल को कुछ मत करना मैं पुलिस के पास नहीं जाउंगी आप पता दो मैं पहुँच जाउंगी .... आदि की माँ की आँखों से आंसू गिरने लगाती है

तू पुलिस के पास नहीं जाएगी तो तेरा बीटा तुझे मिल जायेगा मैं पता भेज रहा हुईं आजा मेरी बुलबुल मेरा लैंड तड़प रहा है तेरी पहली हुई छूट मैं जाने के लिए मैं तुझे इतना मज़ा दूंगा की तू अपने पति को भूल जाएगी ... ी लव यू मेरी जान ूमा ...... उधर से आदमी किश करते हुआ फ़ोन रख देता है

आदि की माँ की पूरी जिस्म hi कैंप सी जाती है आज तक किसी मर्द ने आदि की माँ के साथ इस तरह की बाते नहीं किये थे मगर आज सुबह से वह आदमी आदि की माँ से गन्दी से गन्दी बाते कर रहा होता है जो आदि की माँ अपने आप मैं hi शर्मिंदा हो रही होती है आवर आदि की माँ की आँखों से आंसू छलक रहे होते है

आदि की माँ किचेन मैं बात कर रही होती है तो राखी देवी या आँचल को बात करने की आवाज़ नहीं सुनाई देती है

आदि की माँ कुछ देर किचेन मैं सिसकती रहती है आदि की माँ फिर अपनी आंसू पोछ कर कॉफ़ी लेकर राखी देवी के पास आ जाती है

आदि की माँ जब राखी देवी को कॉफ़ी देती है तो उनकी चहरे पर एक फीकी सी मुस्कान होती है

राखी देवी आवर आँचल भी कॉफ़ी लेकर पिने लगती है

तीनो कॉफ़ी पि रही होती है के कोई गेट पीटने लगता है तो आदि की माँ उठ कर गेट पर देखने चली जाती है

आदि की माँ के जाते hi उनका फ़ोन बजने लगती है जो आदि की माँ फ़ोन वही टेबल पर रख दी होती है

दीदी क्या मैं फ़ोन उठाऊं .... आँचल कहती है

तब तक राखी देवी फ़ोन उठा hi लेती है राखी देवी जैसे hi फ़ोन उठा कर कान के पास रखती है उधर से किसी की आवाज़ सुनाई देती है आवर राखी देवी की शर्म से चेहरा लाल पद जाती है

hello आप जिससे बात करना चाहते है मैं वह नहीं हुईं वह यह अभी नहीं है .. राखी देवी बोल कर फ़ोन रख देती है आवर पानी का गिलास उठा कर पिने लगती है

कौन था वह कैसी बाते की उसने क्या रजनी जी उसके साथ ...... राखी देवी मन मैं सोचने लगती है

राखी देवी की शर्म से आँखें भी लाल लाल हो जाती है राखी देवी सोचने कहती है आखिर मैंने फ़ोन hi क्यू उठाया वही आँचल भी राखी देवी को अजीब नज़र से देखने लगाती है

दीदी क्या हुआ आप इतनी घबरा क्यू रही है कौन था आवर आएसा क्या बोल रहा था वह ...... आँचल पूछती है

आँचल जाने दे कोई जानने वाला होगा रजनी जी का ...... राखी बोल कर चुप हो जाती है

आँचल आवर घर कर राखी देवी को देखने कहती है तभी फिर से फ़ोन पर रिंग होने लगाती है ..... फ़ोन पर रिंग होते hi राखी देवी फ़ोन टेबल पर रख देती है जो अभी भी फ़ोन राखी देवी की हाँथ मैं होती है

राखी देवी जैसे hi फ़ोन को टेबल पे रखती है आँचल फ़ोन उठाने के लिए हाँथ बढाती है मगर राखी देवी इशारे से मन कर देती है तब तक आदि की माँ भी वह आ जाती है आवर फ़ोन पर रिंग होते सुन कर फ़ोन हाँथ मैं लेकर देखती है तो वही नंबर होती है जो आदि की माँ घबरा जाती है आवर वह फ़ोन लेकर वह से चली जाती है

आदि की माँ को फ़ोन लेकर जाते देख राखी देवी आवर आँचल को बड़ी अजीब लगाती है क्यू की फ़ोन पर नंबर देख कर आदि की माँ की आँखों मैं एक दर सा दोनों देखती है

दीदी आप को नहीं लग रहा ये थोड़ी दरी हुई है दीदी मुझे लगता है कोई िनेह परेशां कर रहा है ..... आँचल कहती है

आँचल सायद वह हम दोनों के यह होने से दर गयी हो ..... राखी देवी कुछ सोचते हुआ बोलती है

नहीं दीदी सच मैं वह दर गयी है मैंने देखि फ़ोन देख कर उनकी आँखों मैं अजीब सा दर था ..... चलिए उनकी बाते सुनते है पता चल जायेगा ..... आँचल कहती है

राखी देवी को जाने का मन तो नहीं होती है मगर आँचल के कहने पर वह आदि की माँ की बाते सुनने के लिए चली जाती है

आँचल आवर राखी देवी हॉल से अंदर जाती है तो किचेन मैं hi आदि की माँ दिखाई देती है तो दोनों किचेन के गेट पर hi कड़ी हो जाती है आवर आदि की माँ की बाते सुनने लगती है

मैं आएसा नहीं कर सकती हुईं ..... आदि की माँ कहती है

भगवन के लिए मेरे बेटे को कुछ मत करना म मैं अभी भेजती हुईं ...... कुछ hi देर के बाद आदि की माँ डर्टी हुई बोलती है आवर फ़ोन लेकर बैठ जाती है आवर सिसकने लगाती है

आदि की माँ की हालत देख कर राखी देवी का दिल मचल जाती है आवर राखी देवी आदि की माँ के पास चली जाती है

कौन है वह क्या करने को बोल रहा है क्या आप का बीटा उसके पास है ... राखी देवी पूछती है

वही आदि की माँ बस रोटी रहती है

देखिये रोने से कुछ नहीं होने वाला है क्या हुआ है आप मुझे बताइये मेरे बस मैं हुआ तो मैं ज़रूर आप की मदद करुँगी हो सके तो मैं पुलिस की भी मदद दिलाऊंगी आप को ..... राखी देवी कहती है

भगवन के लिए पुलिस को मत बताइये वर्ण वह जान से मार देगा मेरे बेटे को मैं हाँथ जोड़ती हुईं मत बताइयेगा पुलिस को .... आदि की माँ रोटी हुई बोलती है

कौन मार देगा आप के बेटे को क्या हुआ है प्लीज बताइये मुझे ..... राखी देवी कहती है ...... तभी राखी देवी की नज़र फ़ोन पर पड़ती है जो अभी भी कॉल पर hi होती है तो राखी देवी फ़ोन उठा लेती है

कौन हो तुम आवर क्यू परेशां कर रहे हो िनेह ..... राखी देवी कहती है

साली रंडी मैं कौन हुईं ये मैंने नहीं रखता मुझे अभी उस रंडी की बड़ी बड़ी चुकी की फोटो चाहिए नहीं तो मैं उसके बेटे को जान से मार दूंगा समझी ..... उधर से आदमी कहता है

हरामी कुत्ता तू इंसान है या जानवर तेरी माँ ने नहीं सिखाया औरत से कैसे बात करते है ...... सामने होता तो मैं तेरी जुबान hi घींच देती ..... राखी देवी गुस्से मैं कहती है

तू मेरी जुबान घींचेगी अभी फ़ोन ों कर मैं तुझे कुछ सुनता हुईं आवर उस रंडी को भी सुना ..... उधर से आदमी कहता है

इधर राखी दिया फ़ोन को ों कर देती है फ़ोन जब ों होती है तो एक लड़के की बहुत hi दर्द मैं चीखें की आवाज़ आने लगाती है जो राखी देवी भी दर जाती है आवर राखी देवी की हाँथ से फ़ोन निचे गिर जाती है

वही आदि की माँ झट से फ़ोन उठा लेती है भगवन के लिए मेरे बेटे को मत मारो ममम मम मैं अभी भेजती हुईं भगवन के लिए मेरे बेटे को मत मारो मत मारो ...... आदि की माँ दर्द मैं सिसकती हुईं बोलने लगाती है

आदि की माँ रोटी हुई hi अपनी साइन से पल्लू हटा देती है जो आदि की माँ की चुकी उभर कर दिखने लगाती है

आदि की माँ रोटी हुई hi अपनी चुकी की फोटो लेने लगती है आवर कई सरे फोटो लेकर व्हाट्सप्प कर देती है

व्हाट्सप्प करने के बाद आदि की माँ सिसक सिसक कर रोने लगाती है

ये आप ने क्या कर दिया आप आएसा कैसे कर सकती है आप को पता नहीं है क्या वह हरामी इंसान आप की इस फोटो को साडी दुनिया को दिखा कर बदनाम कर सकता है आप एक टीचर होकर ज़ाहिल जैसी हरकत कैसे कर सकती है ..... राखी देवी थोड़ी नाराजगी सवार मैं कहती है तो मैं आवर क्या करूँ मैं अपने बेटे को उन जालिम के हांथों मरने दूँ मैं बदनामी सह सकती हुईं मगर मैं अपने जीते जिह अपने बेटे को मरने नहीं दे सकती हुईं नहीं मरने दे सकती हुईं ..... आदि की माँ रोटी हुई बोलती है

वह रंडी क्या चुकी है तेरी गजब की चुकी छिपा कर राखी है तेरी चुकी से तो बहुत दूध निकलेगा हहहहहह देख कर hi मेरे लैंड से पानी निकल रहा है ह्ह्हह्ह्ह्ह रंडी तेरी छूट कैसी होगी hhhhhhhhhh सोच सोच कर पागल हो रहा हुईं

साली रैंड इस बार तेरे बेटे को नहीं मार रहा हुईं तूने उस साली को बता कर अच्छा नहीं किया उसे समझा देना अगर उसने कोई चालाकी की आवर पुलिस को बताया तो तेरे बेटे को जान से मार कर कुत्तों को खिला दूंगा ...... उधर से वह आदमी कहता है

तू एक नामर्द है जो एक बेटे का सहारा लेकर उसकी माँ को पाना चाहता है मेरे पास होता तो तुझे मैं बिच सड़क पर गोली मार देती भड़वे सेल ...... राखी देवी गुस्से मैं कहती है

हाहाहा तू कही की डॉन है क्या साली लगता है तेरी भी जिस्म मैं आग लगी है आजा तू भी उस रंडी के साथ तेरी साडी गर्मी निकल दूंगा ...... उधर से हस्ते हुआ वह आदमी कहता है

तू मेरी गर्मी निकलेगा तू एक भादवा है जाकर अपनी माँ की गर्मी निकल हरामी की औलाद ..... राखी देवी गुस्से मैं कहती है बोल कर राखी देवी गुस्से मैं फ़ोन रख देती है मैं छोडूंगी नहीं कुत्ते को जान से मार दूंगी ... वह हरामी मेरी गर्मी निकलेगा ..... राखी देवी गुस्से मैं लाल हो जाती है

अब प्लीज बताइये क्या हुआ है आप का उसके पास कैसे है आप ने बताया की वह देहली गया है आप झूट क्यू बोल रही है .... राखी देवी कहती है

आदि की माँ कुछ देर चुप रहती है फिर सुबह की साडी बाते बता देती है राखी देवी को जिसे सुन कर आँचल की भी आँखों मैं नमी आ जाती है

मैं भी आप के साथ चलूंगी मैं उस कुत्ते को नहीं छोड़ने वाली हुईं वह मेरी गर्मी निकलेगा न ...... राखी देवी गुस्से मैं कहती है

आदि की माँ बहुत मन करती है मगर राखी देवी वह पता अपने फ़ोन मैं दाल देती है

आप परेशां न हो मैं दूर से आप की पीछे रहूंगी किसी को भी पता नहीं चलेगा वह हरामी इंसान है पता नहीं क्या करेगा आप के साथ इस लिए मैं छिप कर आप के पीछे आउंगी ....... राखी देवी कहती है

आप मेरी वजह से क्यू खुद को मुसीबत मैं दाल रही है ..... आदि की माँ रोटी हुई कहती है

मैं आप की मदद आप के बेटे के लिए कर रही हुईं मैं जानती हुईं एक माँ को कैसा लगता है जब उसका बीटा उसके पास नहीं होता है इस माँ का दिल हर वक़्त रोटा रहता है ...... कहते हुआ राखी देवी की आँखें भर आती है

वही आँचल दीदी बोल कर राखी देवी के गले लग जाती है

राखी देवी आदि की माँ को बताती है क्या करना है आवर फिर अपने घर के लिए निकल जाती है

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दीदी कुछ जीजू के बारे मैं बताइये न आप कैसे मिली उनसे ...... पूजा पूछती है जो अभी आस्था के रूम मैं साथ सोइ हुई होती है आवर साथ मैं पूनम भी होती है

पूजा की बात सुन कर आस्था पूनम को घूरने लगती है

गुड़िया तेरी पेट मैं कोई बात नहीं रहती है न दे तेरी पेट hi फाड् देती हुईं ....... आस्था कहती है आवर पूनम को अपनी तरफ खिंच कर पेट मैं गुदगुदी करने लगाती है जो पूनम गुदगुदी होने से बीएड पर मचलने लगाती है

दीदी प्लीज मैंने खुद से नहीं बताया वह तो पूजा दीदी ने चीटिंग से पूछ लिया दीदी मैं सच बोल रही हुईं

पूजा दीदी बचाइए नहीं तो दीदी मेरी पेट सच मैं फाड् देंगी प्लीज पूजा दीदी aaaaaaaaaa ....... पूनम हस्ती हुई बोलती है

दीदी गुड़िया सही बोल रही है मैंने hi गुड़िया से पूछी थी बस मुझे अपनी एक ड्रेस गुड़िया को देनी पड़ी .... पूजा बोल कर मुस्कुराने लगाती है

मोती एक ड्रेस के लिए सब कुछ बता दिया मैं इस लिए कहती हुईं तू छोटी बच्ची hi है ...... आस्था मुंह बना कर कहती है

दीदी मैं अब बच्ची नहीं बड़ी हो गयी हुईं समझी आप को यकीन नहीं हो रही तो आप खुद देख लीजिये मेरी भी आप की तरह ये बड़ी हो गयी है ........ पूनम कहती है आवर अपना कुरता निकलने लगती है

गुड़िया गुड़िया नहीं .... आस्था आवर पूजा दोनों एक साथ चीख पड़ती है मगर तब तक देर हो चुकी होती है आवर पूनम अपनी कुरता निकल चुकी होती है आवर पूनम की साइन मैं सटी हुई अभी संतरे की तरह चुकी दिखने लगाती है जो इस वक़्त पूनम ब्रा भी नहीं पहनी होती है

पूनम की नंगी संतरे की तरह चुकी देख कर पूजा आवर आस्था की आँखे बड़ी हो जाती है

वाओ गुड़िया तू सच मैं बड़ी हो गयी है कितनी सॉफ्ट है तेरी ये .. पूजा बोलती हुई पूनम के करीब चली जाती है आवर पूनम की संतरे की तरह चुकी को सहलाते हुआ निपल को मसल देती है जिससे पूनम को दर्द होती है आवर पूनम सिसक कर पीछे हैट जाती है

ssssssssss गन्दी दीदी आप ने क्या किया मैं आप दोनों के साथ नहीं सोने वाली हुईं ..... पूनम बोलती हुई रूम से निकल जाती है

वही आस्था आवर पूजा एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा देती है
 
अपडेट .... 36

अर्जुन रात के 3:ऍम तक पूजा दीदी के घर पहुँच जाता है जब वह दोनों घर जाते है तो घर पर टाला लगी हुई होती है अभी रात भी होती है तो पूजा दीदी अर्जुन को हॉस्पिटल मैं hi चलने को बोलती है जो वह हॉस्पिटल पास मैं hi होती है तो अर्जुन बाइक हॉस्पिटल की तरफ लेकर चल पड़ता है

हॉस्पिटल मैं जाने के बाद अर्जुन पूजा दीदी की सास के बारे मैं एक बार्स से पूछता है तो पास के hi रूम मैं जाने को बोलती है तो पूजा दीदी आवर अर्जुन उस रूम मैं चले जाते है तो सामने hi पूजा दीदी की नन्द नज़र आती है जो अपनी माँ के पास बैठी होती है

पूजा दीदी को देख कर उनकी नन्द रोटी हुई गले लग जाती है

पूजा दीदी अपनी सास को देखती है तो वह भी दुखी हो जाती है क्यू की पूजा दीदी की सास की एक पेअर पर प्लास्टर हुई होती है जो पूजा दीदी समझ जाती है की उनकी सास की पेअर टूटी हुई है

पूजा दीदी अपनी नन्द को रोने से मन करती है फिर पूजा दीदी अपनी सास के पास बैठ जाती है पूजा दीदी की सास भी अभी बेहोश मैं नहीं होती है

वही अर्जुन थोड़ी दूर hi पारी को गॉड मैं लेकर खड़ा होता है जो पारी अभी सोइ हुई होती है

भाभी पारी को लेकर नहीं आई क्या .... पूजा दीदी की नन्द कहती है

पूजा : पारी अपने मां की गॉड मैं है उधर देख

पूजा दीदी के कहने पर उनकी नन्द पीछे देखती है तो अर्जुन खड़ा होता है पारी को गॉड मैं लिए हुआ फिर पूजा दीदी की नन्द हैरानी से पूजा दीदी को देखने लगाती है की ये लड़का कौन है

पूजा दीदी अपनी नन्द की हैरानी समझ जाती है

पूजा :: रम्य एहि अर्जुन है मेरा भाई

अपनी भाभी की बात सुन कर रम्य एक नज़र फिर अर्जुन को देखती है फिर अर्जुन की तरफ बढ़ जाती है

पारी को मुझे दीजिये आवर ये मेरे घर की चाभी है आप जाकर आराम कर सकते है .... रम्य कहती है

आप परेशां न हो मैं एहि ठीक हुईं आप आवर दीदी घर चली जाइये मैं एहि पे रुक जाता हुईं ..... अरुण पारी को देते हुआ कहता है

अर्जुन चाभी लेकर तू घर पे चला जा थक गया होगा बाइक चला कर आवर रम्य को भी साथ लेकर जा मैं सासु माँ के पास रूकती हुईं ....... पूजा दीदी कहती है

मगर न hi अर्जुन घर जाता है आवर नहीं रम्य दोनों hi हॉस्पिटल मैं रुक जाते है क्यू के कुछ घंटे मैं सुबह भी होने वाली होती है

सुबह के 8 :पं

आदि की माँ रात भर नहीं सोती है आवर सुबह मैं वह घर से निकल गयी होती है जो गाओं से चल रही बस मैं बैठ गयी होती है

राखी जी मुझे मांफ कर दीजियेगा मैं नहीं चाहती मेरी वजह से आप पर कोई मुसीबत आये वह बहुत कमीना इंसान है मेरे साथ जो होना होगा वह होगा मैं अपने बेटे के लिए सब गम सह लुंगी ssssssssss ...... आदि की माँ बस मैं सोच रही होती है की तभी सिसक पड़ती है आवर फिर पीछे देखती है

पीछे एक लड़का खड़ा होता है जो थोड़ा मुस्कुरा रहा होता है आवर उस लड़के के पीछे आवर भी लड़के होते है मगर वह लड़का आदि की माँ की बिलकुल पास होता है आवर उस लड़के का लैंड आदि की माँ की गांड से सत्ता हुआ होता है

बीटा थोड़ा पीछे रहो न आगे एक बूढी माँ है ...... आदि की माँ कहती है

आंटी पीछे ज़रा भी जगह नहीं है आप खुद देख लीजिये ..... वह लड़का कहता है

आदि की माँ पीछे देखती है तो सच मैं वह बस भरा हुआ होता है तो आदि की माँ फिर आगे की तरफ देखने लगाती है

आदि की माँ जैसे hi आगे की तरफ देखने लगाती है वह लड़का आवर भी आदि की माँ के करीब आती जाता है आवर वह लड़का एक हाँथ से ऊपर की पाइप पकड़ लेता है आवर एक हाँथ निचे कर लेता है आवर वह हाँथ आदि की माँ की गांड के ऊपर रख देता है

अपनी गांड पर उस लड़के का हाँथ का अहसास पाकर आदि की माँ अपनी गांड थोड़ी हिला देती है ताकि उस लड़के का हाँथ गांड से हैट जाए जो लड़के का हाँथ हैट भी जाता है मगर जल्द hi वह लड़का फिर से हाँथ गांड पर रख देता है

दोबारा अपनी गांड पर हाँथ का अहसास पाकर आदि की माँ सिहर सी जाती है आवर आदि की माँ की शैशे तेज़्ज़ चलने लगाती है

ये आदि की माँ के साथ पहली बार हो रहा था के कोई गैर आदमी उनकी जिस्म को छू रहा होता है वह भी उनके बेटे से भी काम उम्र का लड़का जिससे आदि की माँ को बहुत शर्म आ रही होती है आवर माथे पर पसीने आने लगाती है

आदि की माँ शादी के बाद आज पहली बार बस मैं सफर कर रही थी वह भी इतनी भीड़ मैं

आदि की माँ को समझ मैं नहीं आती है वह क्या करे आदि की माँ आगे की तरफ जा भी नहीं सकती थी क्यू के आगे एक बूढी औरत होती है जो एक लाठी के सहारे कड़ी होती है आदि की माँ उसी तरह hi कड़ी रह जाती है आवर अपनी माथे पर आई पसीने को पोछने लगाती है

वही आदि की माँ को कुछ न बोलते देख लड़के की हिम्मत बढ़ जाती है आवर वह लड़का अपने हाँथ से आदि की माँ की गांड को सहलाने लगता है

आदि की माँ की गांड इतनी गर्म होती है की वह लड़का एक बार अपना हाँथ खुद हटा लेता है जो आदि की माँ थोड़ी चैन की शंश लेती है मगर वह बस कुछ hi सेक् की होती है क्यू की वह लड़का फिर से अपना हाँथ गांड पर रख देता

लड़का इस बार हाँथ रखते hi आदि की माँ की गांड को दबा देता है जो आदि की माँ सिसक hi पड़ती है आवर अपनी पल्लू को मुंह पर रख देती है

हे देवी माँ कैसी परीछा ले रही है मुझसे मैंने आज तक किसी का कुछ नहीं बिगाड़ा है फिर मेरे साथ आएसा क्यू हो रहा है

पति के मरने के बाद भी मैंने अपनी जिस्म किसी की छूने नहीं दिया मगर आज ये मेरे बेटे से भी छोटा लड़का मेरी जिस्म को छू रहा है देवी माँ मुझे बच्चा लीजिये इस हरामी लड़के से ...... आदि की माँ मुंह पर हाँथ रखे हुआ hi सोचती है

आदि की माँ आँखे भी भर आती है

वही वह लड़का अब धीरे धीरे आदि की माँ को गांड को दबाते जा रहा होता है जिससे आदि की माँ की जिस्म की गर्मी बढ़ रही होती है

आदि की माँ एक बार पलट कर उस लड़के को देखती है जो वह लड़का मुस्कुरा रहा होता है आवर उस लड़के के पीछे भी जो लड़के खड़े होते है वह भी आदि की माँ को देख कर हस्स रहे होते है जो आदि की माँ थोड़ी दर भी जाती है

क्यू कर रहे हो ये मेरे साथ मैं तुम्हारी माँ की उम्र की हुईं अपनी माँ समझ कर मत करो ये सब मेरे साथ .... आदि की माँ ये बात बहुत hi धीरे से बोलती है

आंटी आप मेरी माँ की उम्र की है मगर मेरी माँ नहीं है ..... आवर आंटी सच कहता हुईं अगर आप की जिस्म की तरह मेरी माँ को जिस्म होती तो मैं उसके साथ भी एहि करता ....... आंटी सच कहता हुईं आप की ये जिस्म कमल की है ....... आंटी पता नहीं फिर काम आप मिलोगी बस थोड़ा मस्ती कर रहा हुईं करने दीजिये न ..... आप भी थोड़ी मज़ा लीजिये ...... मुझे पता है आप की उम्र की औरत की जिस्म मैं कुछ जयादा hi गर्मी होती है ...... देखने आंटी जल्द hi आप की छूट से पानी निकल जायेगा .... आवर मेरे लैंड से भी पानी निकल जायेगा ...... वह लड़का बिलकुल आदि की माँ के कान मैं धीरे से कहता है

एक तो बस मैं आदि की माँ अकेली थी ऊपर से वह लड़का गुंडा जैसा लग रहा होता है आवर उस लड़के की बात सुन कर आदि की माँ की शैशे तेज़्ज़ चलने लगाती है आदि की माँ शर्म से आगे की तरफ देखने लगाती है आवर आदि की माँ की आँखों से आंसू भी निकल जाती है जो आदि की माँ अपनी पल्लू से पोछ लेती है

वही वह लड़का गांड दबाते हुआ वह हाँथ आदि की माँ की कमर पर रख देता है आवर साड़ी को हटा कर आदि की माँ की पेट को सहलाने लगता है

लड़के के पेट पर हाँथ रखते hi आदि की माँ सिसक पड़ती है मगर इस बार आदि की माँ की सिसकिया मस्ती मैं निकल जाती है

आदि की माँ कई सैलून से अपनी जिस्म की गर्मी दबा कर राखी हुई होती है मगर आज उस लड़के के छूने से बढ़ने लगाती है

वह लड़का पेट को सहलाते हुआ अपना मुंह आदि की माँ की गर्दन के करीब ला देता है

आंटी कसम से आप कमल की हो आप मेरी माँ होती तो मैं अपना लैंड आप की छूट मैं hi डेल हुआ होता .... आंटी आप की गांड ह्ह्हह्ह्ह्ह ..... आंटी आप की गांड के लिए तो मैं फांसी भी चढ़ जाऊंगा .... वह लड़का बोलते हुआ आदि की माँ की गर्दन चुप लेता है

लड़का दोनों हाँथ से पेट को सहलाते हुआ आदि की माँ को अपनी तरफ खिंच लेता है जो आदि की माँ की गांड पीछे की तरफ आ जाती है आवर उस लड़के के लैंड आदि की माँ की दरार मैं फास जाता है

पीछे जाते hi आदि की माँ एक लम्बी सिसकियाँ लेती है आवर आदि की माँ की जिस्म अब आग की तरह धधकने लगती है आवर आदि की माँ समझ चुकी होती है उस लड़का का लैंड उनकी गांड के दरार मैं है

वह लड़का को पता नहीं क्या होता है वह लड़का अपना जिस्म आगे पीछे करने लगता है

आदि की माँ की मुंह पर हाँथ राखी सिसक रही होती है अब आदि की माँ को भी मज़ा आने लगता है या कह सकते आदि की माँ अब आवर अपनी जिस्म की गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर रही होती है

आदि की माँ कुछ hi देर मैं एक लम्बी सिसकियाँ लेती है या कह सकते है आदि की माँ उस भरी हुई बस मैं मस्ती मैं चीख पड़ती है

आदि की माँ इतनी ज़ोर से चीखती है के आगे कड़ी हुई बूढी औरत भी पलट जाती है मगर उसी वक़्त बस भी हचक कर रुक जाती है जो आदि की माँ की आवाज़ कोई सुन नहीं पता है सिवाए उस बूढी औरत के

अचानक बस रुकने से वह लड़का भी आदि की माँ को छोड़ देता है आवर अपना लैंड पेंट मैं दाल लेता है बस से कभी लोग उतरने लगते है

वह बूढी औरत भी आदि की माँ को अजीब नज़र से देखती हुई बस से उतर जाती है वही आदि की माँ अपनी नज़र दूसरी तरफ कर लेती है

बस से लोगों को उतारते हुआ देख कर आदि की माँ चैन की शंश लेती है आवर उस लड़के के चहरे पर गुस्सा आ रहा होता उस लड़के की माथे पर बहुत सारा पसीना हो रहा होता है आवर वह लड़का थोड़ा निचे की तरफ होकर खड़ा हो जाता है जैसे उस लड़के को कही पर दर्द हो रहा है

भैया तिलक नगर आवर कितना दूर है ...... आदि की माँ बस के खलासी से पूछती है

बस के खलासी आदि की माँ को घर कर देखता है

ये कब आई बस मैं बस गजब की जिस्म है इसकी कहा जा रही है रानी इसकी चुकी कितनी बड़ी है इसकी जिस्म कमल के बनाया है भगवन ने पता नहीं किस्से छोड़वाने जा रही है

भैया क्या हुआ बताया नहीं तिलक नगर कब आने वाला है .. आदि की माँ फिर से पूछती है जब खलासी नहीं बोलता है तो

आदि की माँ की आवाज़ सुन कर वह खलासी यादों से बहार आता है

मेडम अगला स्टॉप तिलक नगर hi है बस थोड़ी देर मैं बस निकलेगी .....वह खलासी बोलता है आवर आदि की माँ को घूरते हुआ बस से उतर जाता है

खलासी के जाते hi आदि की माँ की नज़र पीछे जाती है जो वह लड़का वही सीट पर बैठ गया होता है आवर हवस भरी आँखों से आदि की माँ को देख रहा होता है जो आदि की माँ झट से आगे की तरफ देखने कहती है फिर आदि की माँ की नज़र आगे की तरफ जाती है तो देखती है एक औरत सीट पर अकेली बैठी हुई होती है तो आदि की माँ उस औरत के पास चली जाती है आवर उस औरत के पास hi बैठ जाती है

कुछ वक़्त मैं भिड़े फिर से होने लगाती है आवर बस मैं काफी लोग आ जाते है

आदि की माँ भिड़े देख कर फिर से डरने लगाती है वही वह लड़के की चहरे पर एक कमीना मुस्कान आ जाती है आवर वह लड़का सीट से खड़ा हो जाता है आवर उसके साथी भी खड़े हो जाते है वह लड़का आगे चलते हुआ आदि की माँ के पास hi आ जाता है आवर पास मैं खड़ा हो जाता है जो आदि की माँ को दर लगने लगता है ये सोच कर के ये लड़का फिर से हरामी पैन करेगा

बस की हॉर्न बजने लगाती है आवर बस स्टार्ट भी हो जाती है बस जैसे hi स्टार्ट होती है वह लड़का अपना हाँथ आदि की माँ के गर्दन पर रख देता है

आदि की माँ डर्टी हुई अपने एक हाँथ गर्दन पर रख कर उस लड़के की हाँथ हटा देती है मगर वह लड़का फिर से हाँथ रख देता है

हीरो ज़रा पीछे चल ..... एक आवाज़ आती है आवर उस भिड़े से एक आदमी सामने आता है

वह आदि 7 फुट का लम्बा चौड़ा होता है आवर उसका जिस्म भी बॉडीगार्ड की तरह होता है उस आदि की बड़ी बड़ी मूंछे होती है उस आदि को देख कर वह लड़का भी थोड़ा दर सा जाता है जो पीछे की तरफ हैट जाता है

वह आदमी आदि की माँ के पास hi खड़ा हो जाता है आवर आदि की माँ के कंधे पर दो बार थपथपाता है आवर फिर अपना हाँथ हटा लेता है

आदि की माँ उस आदमी की तरफ देखती है तो वह आदमी बस मुस्कुरा कर देखता है आवर फिर आगे की तरफ देखने लगता है

आदि की माँ चैन की शंश लेती है आवर दिल मैं देवी माँ की धन्यवाद करती है

सुबह के 9:ऍम

अर्जुन आवर रम्य साथ घर आते है .... रम्य रस्ते भर बस अर्जुन को hi देख रही होती है मगर दोनों मैं कोई बात नहीं होती है

मैं अभी कॉफ़ी बना देती हुईं तब तक तुम फ्रेश हो जाओ उधर बाथरूम है ..... बाथरूम की तरफ इशारा करते हुआ रम्य कहती है

अर्जुन बस ठीक है बोल कर बाथरूम की तरफ चला जाता

कितना हैंडसम है अर्जुन एक हीरो की तरह लग रहा है कैसा मेरी शादी की दिन नहीं तैय हुई होती तो मैं अर्जुन से hi शादी कर लेती ..... रम्य बुदबुदाती

रम्य तू पागल हो गयी है क्या तू आएसा सोच भी कैसे सकती है अपनी उम्र देख आवर अर्जुन की उम्र देख ..... अर्जुन तुझसे बहुत छोटा होगा .... रम्य की मन से आवाज़ आती है

रम्य फिर कुछ नहीं सोचती है आवर कॉफ़ी बनाने लगाती है

रम्य कॉफ़ी बना रही होती है की तभी रम्य को कुछ याद आती है आवर रम्य भगति हुई बाथरूम के पास जाती है तो देखती बाथरूम का गेट बंद होती है

रम्य तू इतनी भुलक्कड़ कैसे हो सकती है अब अर्जुन अंदर जाकर गेट भी बंद कर दिया है वह क्या सोचेगा तेरे बारे मैं ..... रम्य मन मैं सोचती है रम्य की धड़कन भी तेज़ चल रही होती है आवर रम्य की आँखों मैं शर्म सी होती है

रम्य बिना बाथरूम के गेट पिटे फिर से किचेन मैं चली जाती है

अर्जुन फ्रेश होकर आता है तो रम्य कॉफ़ी देती है

अर्जुन कॉफ़ी लेकर पिने लगता है

कॉफ़ी देने के बाद रम्य जल्दी से बाथरूम मैं जाती है आवर रम्य की दिल बड़ी ज़ोर ज़ोर से चलने लगाती है आवर रम्य की आँखे चरों तरफ घूमने लगाती है

जैसे रम्य की आँखें कुछ धुंध रही है मगर वह चीज नहीं दिख रही होती है रम्य की माथे पर पसीने आने लगाती है

रम्य फिर बाथरूम से निकल जाती है मुझे अच्छे से याद है मैंने बाथरूम मैं hi छोड़ दिया था मगर वह बाथरूम मैं नहीं है क्या अर्जुन ने चुरा लिया है मगर वह अर्जुन क्या करेगा .....रम्य किचेन मैं सोचने कहती है

आवर शर्म के मरे रम्य की हालत ख़राब हो रही होती है

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आदि की माँ बस से उतर चुकी होती है आवर बस स्टॉप पर कड़ी हो जाती है

आदि की माँ बस स्टॉप पर कड़ी होकर उस आदमी को देखती है जो उन लड़कों के पीछे जा रहा होता है आवर फिर वह आदि आवर वह लड़के आदि की माँ की नज़र से ुझल हो जाते है

आदि की माँ को बस स्टॉप पर खड़े हुआ कुछ hi मिनट होते है की आदि की माँ की फ़ोन बजने लगाती है तो आदि की माँ फ़ोन उठा लेती है

Hello मैं तिलक नगर बस स्टॉप पर कड़ी हुईं कहा आने है बताओ ..... आदि की माँ कहती है

सामने देख एक ब्लैक गाड़ी कड़ी है उसमे जाकर बैठ जा ...... उधर से उस आदमी की आवाज़ आती है

आदमी की माँ दरी सहमी हुई ब्लैक गाड़ी मैं जाकर बैठ जाती है

आदि की माँ गाड़ी मैं जैसे hi बैठती है पीछे से एक इंजेक्शन हाँथ मैं लगती है आवर आदि की माँ के आँखों मैं अँधेरा सा छाने लगता है आवर फिर कुछ hi सेक् मैं आदि की माँ गाड़ी मैं बेहोश हो जाती है आवर वह गयी वह से निकल जाती है

वही कुछ दुरी पर वह आदमी खड़ा होता है जो छिप कर देख रहा होता है उस गाड़ी को निकलते hi वह आदमी फ़ोन लगा देता है

Hello मैडम वह एक ब्लैक गाड़ी मैं बैठ गयी है आवर वह गयी निकल रही है यह से क्या मैं पीछे जाऊं ..... वह आदमी कहता है

उधर से एक आवर कुछ कहती है जो वह आदमी बस जी जी कहता है

हां मेडम मुझे गाड़ी का नंबर याद है ..... ठीक है जल्दी से आइये ...... वह आदमी इतना बोल कर फ़ोन रख देता है
 
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