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अपडेट ..... 27
गीता के रूम मैं ..... गीता आवर पूजा बात कर रही होती है जो पूजा अपनी सोहागरात की बाते गीता को बता रही होती है गीता के पूछने पर आवर पास मैं hi बीएड पर पूजा की बेटी पारी खेल रही होती है पूजा की फ़ोन लेकर तभी अचानक गीता की नज़र फ़ोन पर पड़ती है जो कॉल आयी हुई होती है
उठी हुई फ़ोन देख कर गीता सोचती है पारी ने फ़ोन उठा ली है इस लिए पूजा को बता देती है
गीता के बताने पर पूजा फ़ोन देखती है तो अंजलि का नंबर होती है
ये तो छोटी का नंबर है क्या अंजलि हम्हारी बाते सुन रही थी ....... ही भगवन ये छोटी तो बहुत बदमाश हो गयी है ........ पूजा मन मैं सोचती है
पूजा कही जीजू का फ़ोन तो नहीं है .... गीता मुस्कुराती हुई कहती है
नहीं गीता कंपनी वालों का फ़ोन है .... पूजा झूट बोल देती है
वही अंजलि अपनी बीएड पे हांफ रही होती एक तो अंजलि की छूट से रास निकलने से अंजलि का जिस्म कैंप रही होती है
वही अपनी गीता दीदी की आवाज़ सुन कर अंजलि को दर भी लगने लगा था ये सोच कर के अब पूजा दीदी नंबर देख लेंगी आवर जान भी जाएँगी के मैं उनकी बाते रही थी
अंजलि सोच रही होती है आवर अंजलि की पेंटी पूरी तरह छूट की पानी से भींग चुकी होती है अंजलि फिर बीएड से उठ कर बाथरूम मैं चली जाती है
अर्जुन बीटा आराम से इतनी तेज़ी मैं क्यू भाग रहा है ...... अर्जुन को तेज़ी मैं शिदियों से उतारते हुआ देख कर आँचल कहती है अर्जुन कुछ बोले hi अंजलि के रूम मैं जाने लगता है मगर अंजलि का रूम बंद होती है तो अर्जुन गेट पीटने लगता है
अर्जुन बीटा ...... आँचल पास आकर बोलती है
हां माँ क्या हुआ ....... अर्जुन कहता है
अर्जुन बीटा वह ...... आँचल आगे कुछ बोल नहीं पति है आवर अर्जुन के तरफ मायूसी से देखने लगती है आवर थोड़ी सी घबराई हुई भी होती है
माँ क्या हुआ किसी ने आप कुछ बोलै है क्या आप परेशां लग रही है क्या बात है ...... अर्जुन झट से अपनी ममी माँ को पकड़ लेता है बोलते हुआ आँचल को मायूस देख कर अर्जुन भी थोड़ा घबरा जाता है
आँचल तुम घबरा क्यू रही है अर्जुन तुझपे कभी गुस्सा कर hi नहीं सकता है आवर सायद तेरी बात को मन भी नहीं करेगा बोल दे आँचल बोल दे आज इतने सल्ल के बाद सायद एक माँ अपने बेटे की आरती भी उतर लेगी ....... आँचल की आत्मा से आवाज़ आती है
बीटा वह मैं आवर दीदी मंदिर जा रही है क्या तुम भी मेरे साथ मंदिर चलेगा ! अर्जुन बीटा मन नहीं करना अपनी माँ को प्लीज बीटा ....... आँचल मुंह बना कर कहती है
अपनी ममी माँ के भोलेपन चहरे पर मायूसी देख कर अर्जुन कैसे मन कर सकता था
ठीक है आप कहती है तो मैं मंदिर साथ चलूँगा सिर्फ अपनी भोली माँ के लिए समझी ...... अर्जुन आँचल के गाल को पकड़ कर कहता है
अर्जुन का हां सुन कर आँचल बहुत खुश हो होती है आवर आँचल भी अर्जुन को साइन से लगा लेती है
अपनी इस माँ को इसी तरह प्यार करते रहना मैं तो तुझे hi देख देख कर ये जीवन बिता रही हुईं तू नहीं होता तो पता नहीं कैसी जीवन जिह रही होती मैं जब तू कुछ देर के लिए मुझसे दूर जाता है तो मुझे बहुत बेचैनी होने लगती है कभी कभी सोचती हुईं मैं तुझे अपनी जिस्म मैं छिपा लो जो तू हर वक़्त मेरे पास रहे ...... अर्जुन को गले लगाए हुआ आँचल मन मैं सोचती है
माँ मैं कपडे बदल कर आता हुईं ........ अर्जुन बोल कर फिर से अंजलि दीदी का गेट पीटने लगता है जो अंजलि गेट खोल देती है आवर अर्जुन रूम मैं चला जाता है मगर रूम मैं कोई भी नहीं होता है तभी बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़े आती है
अंजलि दीदी आप अंदर हो क्या ..... अर्जुन पूछता है
अर्जुन मैं नाहा रही हुईं ... अंजलि बोलती है
अर्जुन के साथ मंदिर जाने की सुन कर hi आँचल बहुत खुश होती है आवर मुस्कुराती हुई राखी देवी की रूम का गेट खोल कर अंदर जाती है तो देखती है राखी देवी बीएड पर बैठी है आवर साड़ी लिए हुई कुछ सोच रही होती है
राखी देवी की चहरे को देख कर आँचल समझ तो जाती है राखी देवी क्या सोच रही है
दीदी आप ये साड़ी पहन सकती है आप की तड़प भगवन ने सुन ली है ..... आँचल मुस्कुरा कर कहती है
अपनी नन्द आँचल की बात सुन कर राखी देवी को उस वक़्त इतनी ख़ुशी होती है की वह बीएड से उठ जाती है आवर भाग कर आँचल के पास आ जाती है
आँचल मेरी बहन क्या सच मैं अर्जुन बीटा साथ मंदिर जाने के लिए मान गया है तू मुझसे झूट तो नहीं कर रही न बोल न मेरी बहन बोल न ........ राखी देवी आँचल के हाँथ पकड़ कर मायूसी से पूछती है
इस वक़्त राखी देवी की आँखों मैं एक अजीब सी ख़ुशी होती है आवर राखी देवी खुश होकर पूछती है इस वक़्त भी राखी देवी की आँखों से आंसू निकल रही होती मगर ये आंसू ख़ुशी की होती है आवर इतनी बड़ी ख़ुशी की राखी देवी को यकीन नहीं हो रही थी की पूरी हो गयी है
दीदी मैं सच बोल रही हुईं अर्जुन हम्हारे साथ मंदिर जायेगा आप जल्दी से ये साड़ी को पहन लीजिये ये साड़ी कब से आप की जिस्म को छूना चाहती है मगर आप ने कभी इस साड़ी को अपनी जिस्म को छूने नहीं दिया है ...... आँचल मुस्कुरा कर कहती है
आँचल की बात सुन कर राखी देवी शर्मा जाती है
आँचल मैं अभी बाथरूम से साड़ी पहन कर आती हुईं .... राखी देवी बोलती है आवर बीएड से साड़ी लेकर बाथरूम मैं चली जाती है
हे भगवन कुछ आएसा कर दीजिये जो दीदी हर दिन आयी hi खुश रहती रहे ....... आँचल मन मैं सोचती है आवर खुद की आँखों मैं आई हुई आंसू पोछ लेती है जो राखी देवी की ख़ुशी देख कर आँचल की भी आँखों मैं आंसू आ गयी होती है
बाथरूम मैं जाने के बाद राखी देवी अपनी साड़ी निकल देती है
राखी देवी के चरणों पे अभी बहुत ख़ुशी होती है जो राखी देवी मुस्कुरा रही होती है राखी देवी अपने कपडे निकल कर साथ लेकर आई हुई साड़ी हाँथ मैं उठा लेती है आवर साड़ी को खुद hi चुम लेती है आवर फिर राखी देवी फिर कुछ सोचने लगती है
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अर्जुन बीटा यह क्या कर रहा है मैं बोली थी न मेरे hi साथ रहना फिर यह क्यू खड़ा है ........ राखी देवी कहती है
माँ वह देखिये कितनी अच्छी साड़ी है न वह साड़ी आप पर बहुत अच्छी लगेगी वह साड़ी आप ले लो ...... अर्जुन एक साड़ी की तरफ इशारा करते हुआ कहता है
जब राखी देवी अर्जुन के नज़रों की पीछा करती है तो सामने एक साड़ी दिखाई देती है जो बहुत खूबसूरत होती है राखी देवी भी उस साड़ी को देख कर खुश हो जाती है
वह साड़ी क्या सच मैं मेरे राजा बेटे को अच्छी लग रही है ....... राखी देवी अर्जुन को गॉड मैं उठा कर बोलती है
सच्ची माँ वह साड़ी बहुत अच्छी लग रही है
आप जब उस साड़ी को पहनोगी तो आप भी बहुत अच्छी लगोगी ..... अर्जुन राखी देवी से कहता है
वह साड़ी राखी देवी को भी बहुत अच्छी लगती है आवर अर्जुन भी लेने को बोलता है तो राखी देवी वह साड़ी ले लेती है
फिर आवर कुछ कपडे लेकर राखी देवी घर आ जाती है
हां क्या हुआ अभी तक मेरा बीटा सोया क्यू नहीं ...... राखी देवी अर्जुन को अपनी रूम मैं देखती है तो पूछती है
माँ आप वह साड़ी पहन कर मुझे दिखाइए न मुझे देखना है आप कितनी अच्छी लगाती है उस साड़ी मैं ....... अर्जुन कहता है
ओह मेरे राजा बेटे को देखना है उस साड़ी मैं माँ कैसी लगती है ठीक है चलो बीएड पर बैठ जाओ माँ अभी दिखती है पहन कर ...... राखी देवी कहती है
वही अर्जुन खुश होकर बीएड पर बैठ जाता है
राखी देवी वह साड़ी निकल कर एक बार अर्जुन को मुस्कुरा देखती है फिर अपनी पहनी हुई साड़ी निकलने लगती है
राखी देवी साड़ी निकल कर बलाउज की बटन खोल hi रही होती है तभी कोई गेट पीटने लगता है राखी देवी साड़ी पहन कर गेट खोलती है तो सामने गीता दरी हुई कड़ी होती है तो राखी देवी जल्दी से गीता को गले लगा लेती है
गीता बेटी क्या हुआ तुम दर क्यू रही हो ...... राखी देवी पूछती है
माँ वह गुड़िया बहुत रो रही है माँ गुड़िया को बहुत दर्द हो रही है ...... गीता बोलती हुई रोने लगती है
अंजलि के बारे मैं सुन कर राखी देवी जल्दी से रूम की तरफ भगति है आवर रूम मैं जाकर देखती है तो सच मैं अंजलि सिसक रही होती है तो राखी देवी अंजलि को गुड मैं ले लेती है
क्या हुआ मेरी पारी रानी को मेरी रानी बेटी रो क्यू रही है बताओ माँ को ....... राखी देवी अंजलि को गॉड मैं लेकर पूछती है
माँ स्कूल से आते वक़्त गुड़िया गिर गयी थी तो गिरते वक़्त गुड़िया के पेअर के अंगूठे मैं छोट लग गयी थी खून भी बाह रहा था उस वक़्त गुड़िया रोने लगी थी तो मैंने गुड़िया के अंगूठे पे कपडे से बांध दिया था तो गुड़िया चुप हो गयी फिर हम दोनों घर आ गए मैं आप को बताने वाली थी मगर गुड़िया ने मन कर दिया आप को बताने से ...... मगर अभी गुड़िया अचानक रोने लगी ........ गीता कहती है
गीता की बात सुन कर राखी देवी अंजलि की अंगूठे को देखने लगती है अंजलि के अंगूठे मैं बंधी हुई कपडा खून से भिनगा हुई होती है
खून से भींगी हुई कपडे देख कर राखी देवी थोड़ी दर जाती है कही छूट जयादा तो नहीं लगी है राखी देवी धीरे धीरे कपडे निकलती है तो देखती है अंगूठे की नाख़ून थोड़ी ऊपर की तरफ हो गयी है
ओह माँ दर्द हो रहा है ..... अंजलि राखी देवी की हाँथ पकड़ कर बोलती है
ओह ओह ओह मेरी गुड़िया पहले क्यू नहीं बताया कितना खून बाह रहा है राखी देवी दूसरे कपडे से खून साफ करती है आवर फिर अंजलि के जख्म पर दवा लगा देती है
रात मैं राखी देवी अंजलि के साथ hi सो जाती है उस रात अर्जुन के साथ गीता सो जाती है
उसके बाद अर्जुन फिर उस साड़ी के बारे मैं भूल जाता है वही राखी देवी भी भूल जाती है आवर इसी तरह दिन बीतने लगता है आवर फिर एक दिन राखी देवी अर्जुन को हॉस्टल मैं भेज देती है
मगर जब अर्जुन राखी देवी से नफरत करने लगता है तब राखी देवी बहुत दुखी रहने लगती है आवर फिर एक रात राखी देवी को साड़ी के बारे मैं याद आती है आवर राखी देवी आवर भी दुखी हो जाती है उस रात राखी देवी बहुत रोटी है आवर उस रात अर्जुन के रूम मैं जाकर वह साड़ी पहनने लगती है मगर वह साड़ी पहन नहीं पति है
अर्जुन मेरे लाल तेरी माँ तुझसे बहुत प्यार करती है तू क्यू अपनी माँ से इतनी नफरत करता है मैंने तुझे कैसे दूर किया मैं hi जानती हुईं तेरी ये नफरत एक दिन मेरी जान ले लेगी
अर्जुन तेरी माँ कोई भी गलत काम नहीं करती है जब तू बड़ा हो जायेगा आवर कभी मेरी तरह रिश्तों मैं बहस जायेगा तब तुझे पता चलेगा तेरी माँ नफरत के काबिल नहीं है समझेगा बीटा एक दिन तू अपनी इस माँ की मज़बूरी ज़रूर समझेगा मुझे पूरा यकीं है
अर्जुन बीटा मैं ये साड़ी को पहन कर पहले तुझे hi दिखूंगी एक न एक दिन तू ज़रूर मेरे पास आएगा ....... राखी देवी बोलती है आवर रट हुआ अर्जुन के रूम मैं सो जाती है
दीदी दीदी क्या हुआ जल्दी कीजिये मैं अर्जुन को रूम मैं भेज रही हुईं
राखी देवी यादों मैं खोई होती है तभी आँचल की आवाज़ आती है तो राखी देवी यादों से बहार आती है आवर जल्दी से साड़ी पहनने लगती है
इधर अर्जुन रूम मैं सरत पहन कर बहार आता है तो आँचल बहार hi मिल जाती है
माँ मैं बहार इंतज़ार कर रहा हुईं आप जल्दी से आइये ..... अर्जुन कहता है
बीटा मैं पूजा की थाली लेकर आती हुईं तू ज़रा मेरा फ़ोन उठा ले दीदी की रूम मैं है बोलती हुईं आँचल वह से चली जाती है
अर्जुन अपनी माँ की रूम मैं जाना तो नहीं चाहता है मगर फिर जाने लगता है अर्जुन अभी अपनी माँ की रूम का गेट खोलने hi वाला होता है तभी अंदर से गेट खुल जाती है आवर अर्जुन के सामने राखी देवी दिखाई देती है जो राखी देवी के चरणों पर मुस्कान होती है
अर्जुन की नज़र जैसे hi अपनी माँ पर पड़ती है अर्जुन बस अपनी माँ को देखता hi रह जाता है
राखी देवी पहनी हुई साड़ी मैं बहुत जयादा खूबसूरत लग रही होती है आवर राखी देवी के चहरे पर मुस्कान होती है जैसे राखी देवी एक बहुत बहुत खुश
अपनी माँ की चहरे पर अभी मुस्कान देख कर अर्जुन भी अपनी माँ के मुस्कान मैं खो जाता है
अर्जुन अपनी माँ की चहरे को बड़े hi प्यार से देखने लगता है आवर अचानक अर्जुन के भी चहरे पर मुस्कान आ जाता
सामने अपनी माँ के चहरे पर मुस्कान देख कर अर्जुन भूल जाता है की वह अपनी माँ से कितनी नफरत करता है
तभी अर्जुन की नज़र राखी देवी की पहनी हुई साड़ी पर नज़र जाता है
अर्जुन कुछ देर तक अपनी माँ की पहनी हुई साड़ी को देखता है
जैसे अर्जुन कुछ याद करने की कोशिश कर रहा हो
ये साड़ी तो वही है जो मैंने माँ को लेने को कहा था कितनी प्यारी लग रही है माँ .. मैं जनता था ये साड़ी माँ पर अच्छी लगेगी ...... अर्जुन मन मैं सोचता है
अर्जुन कभी अपनी माँ को देखता है तो कभी साड़ी मैं कासी हुई जिस्म को जो उस साड़ी मैं राखी देवी की जिस्म उभर कर दिख रही होती है
अभी अर्जुन के जगह कोई आवर बुद्धा भी होता तो राखी देवी को पकड़ कर राखी देवी की कासी हुई जिस्म पर टूट पड़ता आवर राखी देवी की जिस्म को मसल मसल कर लाल कर देता
इतनी जयादा सेक्सी सेक्स की देवी लग रही होती है राखी देवी
मगर अर्जुन के दिल मैं अपनी माँ के लिए कोई बुरे ख्याल नहीं आ रहे होते है अर्जुन बस अपनी माँ को पहनी हुई साड़ी को देख रहा होता है जो अर्जुन के चहरे पर मुस्कान आती hi चली जाती है
वही राखे देवी मुस्कुराते हुआ अर्जुन के पास hi आ जाती है अर्जुन को खुद को देखते हुआ देख कर राखी देवी की दिल मैं अजीब ख़ुशी होती है जो अर्जुन के बिलकुल पास hi आ जाती है
अर्जुन ये तेरी hi पसंद की हुई साड़ी है तू चाहता था न मैं ये साड़ी पहले तुझे पहन कर दिखाऊं ... अब बता कैसे लग रही है ये साड़ी मुझपे ........ राखी देवी मुस्कुराती हुई कहती है
अर्जुन तो अपनी माँ की मुस्कराहट भरी चहरे मैं खोता hi चला जाता है अर्जुन के दिल मैं अजीब सी हलचल होने लगाती है तभी राखी देवी की आवाज़ सुन कर अर्जुन को होश आता है आवर अर्जुन बिना कुछ बोले झट से घूम जाता है
अर्जुन बीटा मैं जानती हुईं तू मुझसे बहुत नाराज़ है बीटा तेरी ये माँ तुझसे बहुत प्यार करती है तू मुझसे बात नहीं करता है तो मेरा ये दिल कितना तड़पता है मैं hi जानती हुईं भगवन के लिए एक बार मुझसे बात करले मैं तेरी पेअर पड़ती हुईं ........ राखी देवी बोलती हुईं अर्जुन के पेअर पकड़ कर रोने लगती है
राखी देवी की आँखों से आंसू अर्जुन के पैरों पर गिरने लगती है
अपने पैरों पर पानी गिरने से अर्जुन को समझ आ जाता है उसकी माँ कितनी रो रही है जो अर्जुन के चहरे पर भी एक उदासी सी आ जाता है
अर्जुन को आज अपनी माँ पर बहुत तरस आने लगता है
फिर अचानक अर्जुन वह से जाने लगता है के सामने गीता आवर आँचल को देखता है जो भींगी आँखों से राखी देवी को देख रही होती है आवर अर्जुन की नज़र जैसे hi गीता आवर आँचल पर पड़ता है दोनों अर्जुन को देखते हुआ हाँथ जुड़ देती है
वही गीता तो रट हुआ हांथो से अर्जुन को इशारा करने लगती है के एक बार माँ से बात करले ...... वही आँचल भी रट हुआ इशारा करने लगती है
अपनी गीता दीदी आवर ममी माँ को रट हुआ देख कर अर्जुन को बहुत दुःख होता है अर्जुन अपनी से बात तो नहीं करना चाहता है मगर गीता आवर आँचल को दुखी देख कर अर्जुन पलट जाता है तो देखता है राखी देवी अभी भी ज़मीन पर निचे सर किये हुए रो रही होती है
अर्जुन अपनी माँ के पास जाता है आवर पकड़ कर उठा देता है
ये नाटक करना बंद कीजिये मैं अच्छी तरह जनता हुईं कितना प्यार करती है मुझसे
अगर आप मुझसे से सच मैं प्यार करती तो मुझे खुद से अलग नहीं करती
आप एहि जानना चाहती है न ये साड़ी आप पर कैसी लग रही है तो सुनिए
ये साड़ी मैंने अपनी उस माँ के लिए पसंद किया था जिस माँ को मैं बहुत बहुत प्यार करता था
अगर आज ये साड़ी मेरी उसी माँ ने पहनी है तो ये साड़ी बहुत अच्छी लग रही है आप पर
मगर मैं जनता हुईं अब वह माँ आप नहीं रही जिसे मैं प्यार करता था अब ये नाटक बंद कीजिये मैं अभी आप की वजह से दीदी आवर माँ को दुखी नहीं करना चाहता हुईं ...... अर्जुन ये सब बात राखी देवी को उठाते हुआ धीरे धीरे बोलता है ताकि कुछ दूर कड़ी गीता आवर आँचल न सुन ले
अर्जुन की हर बात राखी देवी के दिल पर तीर की तरह लगती है आवर बहुत दुखी भी होती है मगर कुछ बोलती नहीं है आवर बस अर्जुन को प्यार से देखती रहती है
फिर पता नहीं राखी देवी के दिल मैं क्या आता है जो राखी देवी अर्जुन के गले लग जाती है आवर अर्जुन को अपनी सीने से लगा लेती है
अचानक अपनी माँ से गले लगने से अर्जुन अलग होने के लिए होता है तभी अर्जुन की नज़र सामने गीता आवर आँचल पर पड़ता है जो अपनी आँखों से आंसू पोछते हुआ मुस्कुरा रही होती है
वही आँचल तो अर्जुन की बलए hi लेने लगती है
गीता आवर अपनी ममी माँ को खुश देख कर अर्जुन अपनी माँ से छह कर भी अलग नहीं हो पता है मगर अर्जुन का हाँथ निचे hi रहता है
राखी देवी अर्जुन को अपने सीने मैं दबती hi चली जाती है राखी देवी आज कई सल्ल के गले न लगाने का कसार आज पूरा करना चाहती थी राखी देवी जितना अर्जुन को अपने सीने से लगाती है उतनी hi राखी देवी की दिल को सकूँ मिलती है राखी देवी की आज ख़ुशी की कोई ठिकाना नहीं होती है अभी अर्जुन ने क्या बोलै भूल जाती है आवर ये भी भूल जाती है की वह जिस तरह अर्जुन को अपनी सीने से लगा रही है अर्जुन को कैसा महसूस हो रहा होगा
ख़ुशी मैं राखी देवी ये भी भूल जा रही होती है की अर्जुन कोई छोटा बच्चा नहीं अब एक जवान लड़का हो चूका है मगर कई सैलून से अर्जुन को गले न लगा आज पूरा करना है ये याद रहता है राखी देवी को
इधर अर्जुन के हालत ख़राब होने लगता है जब राखी देवी की दोनों कठोर चुकी का निप्पल अर्जुन के सीने मैं दबने लगता है जो अर्जुन का छोटा अर्जुन अपना सर उठाने लगता है
जो अर्जुन थोड़ा डरने भी लगता है क्यू के अर्जुन का लैंड अभी बिलकुल राखी देवी की छूट के पास hi होता है आवर राखी देवी की जिस्म की गर्मी से अर्जुन का लैंड हार्ड होने लगता है अर्जुन को जैसे hi लगता है के उसका लैंड खड़ा होकर उसकी माँ के छूट के सामने जाए अर्जुन झट से अलग हो जाता है
चलिए मंदिर जाना है नहीं तो देर हो जाएगी बोलते हुआ अर्जुन वह से बहार चला जाता है
अंजलि की रूम मैं
अंजलि आज गर्मी जयादा लग रही है क्या तुझे ...... पूजा अंजलि के रूम मैं आकर बोलती है
वही अंजलि सिर्फ टावल मैं शीशे के सामने बॉल सवार रही होती है आवर जैसे hi पूजा की आवाज़ सुनती है अंजलि थोड़ी दर भी जाती है ये सोच कर कही पूजा दीदी को पता तो नहीं चल गया के मैं इनकी आवर गीता दीदी की बाते सुन रही थी
नहीं पूजा दी जयादा गर्मी तो नहीं लग रही है क्यू आप को आज गर्मी जयादा लग रही है क्या ....... अंजलि भी वही बात पूजा से भी पूछ लेती है
छोटकी ये बात तो तू मुझे बताएगी क्यू की आज तो तुझे hi गर्मी जयादा लग रही है न ........ पूजा इस बार कुछ देखते हुआ मुस्कुराती हुई बोलती है आवर जाकर बीएड पर बैठ जाती है
वही पूजा को मुस्कुराते हुआ अंजलि शीशे से देख लेती है
पूजा दीदी मुस्कुरा क्यू रही है क्या पूजा दीदी को पता चल गयी है की मैं इनकी बाते सुन रही थी ..... आवर पूजा दीदी ये गर्मी की बात क्यू बोल रही है आज इतनी जयादा भी गर्मी नहीं लग रही है ....... अंजलि मन मैं सोचती है
दीदी मुझे तो जयादा गर्मी नहीं लग रही है ...... अंजलि घूमते हुआ बोलती है आवर बीएड से पेंटी उठा कर पहनने लगती है
अच्छा तो छोटकी को गर्मी नहीं लग रही है तो इतनी जल्दी जल्दी नाहा क्यू रही है फिर तू ....... पूजा फिर मुस्कुराते हुआ बोलती है आवर थोड़ी हस्स भी देती है जो अंजलि सुन लेती है
पूजा को हस्ते सुन कर अंजलि को कुछ समझ मैं नहीं आता है की पूजा हस्स क्यू रही है अगर पूजा दीदी को पता भी चल गया है की मैं इनकी आवर गीता दीदी की बाते सुन रही थी तो अभी पूजा दीदी को मुझे डाटना चाहिए था मगर पूजा दीदी तो हस्स रही है ........ अंजलि मन मैं सोचती है
दीदी मन किया तो एक बार आवर नाहा लिया ... मगर सच मैं मुझे गर्मी नहीं लग रही है ..... अंजलि टावल को अपनी सीने पर लपेटते हुआ बोलती है
अच्छा तो मेरी छोटकी को आज दो बार नहाने का मन किया फिर ये क्या है ....... पूजा झट से कुछ दिखते हुआ बोलती है
वही पूजा के हाथ मैं चीज देख कर अंजलि दर जाती है आवर पीछे हैट जाती है अंजलि इतनी दर जाती है उस चीज को देख कर की टावल भी निचे गिर जाती है
क्यू की अचानक hi पूजा वह चीज अंजलि के आगे कर देती है जो अंजलि टावल भी लपेट नहीं पति है
वही टावल गिरते hi पूजा ज़ोर ज़ोर से हसने लगती है तभी हस्ते हुआ पूजा की नज़र सामने अंजलि की चुकी पर नज़र जाती है आवर पूजा की हसी चली जाती है
अंजलि की चुकी बड़ी होने के बाद भी सीने मैं टाइट चिपकी हुई होती है जो पूजा को अंजलि की चुकी देख कर पूजा की गाला सूखने लगती है मगर एक तक पूजा अंजलि की सीने से चिपकी हुई चुकी को देखती रहती है
गाँव की लड़कियां सही कहती है छोटकी की जिस्म अलग hi है लड़के तो लड़के मेरी जैसी शादी सुधा औरत भी पागल हो जाएगी छोटकी के जसम के लिए
सच मैं भगवन जी ने छोटकी को सबसे अलग hi बनाये है ........ पूजा अंजलि की जिस्म को घूरती हुई सोचती है
आवर हाँथ मैं ली हुई उस चीज को अपनी नाक के पास लेकर जाने लगती है
वही पूजा को अपनी जिस्म को घूरते हुआ देख कर अंजलि झट से टावल उठा कर फिर से अपनी जिस्म पर रख लेती है आवर भाग कर पूजा के हाँथ से वह चीज छीन लेती है
छियई दीदी ये आप क्या कर रही है ये गन्दी है ...... अंजलि कहती है
तो तुझे किसने कहा था पेंटी के अंदर hi निकलने के लिए आवर निकली भी तो एहि क्यू छोड़ दी ....... पूजा कहती है
पूजा की बात सुन कर अंजलि को बहुत शर्म आती है जो अंजलि पेंटी वही गिरा देती है
तब पूजा की नज़र अंजलि पर जाती है तो देखती है अंजलि कुछ जयादा hi शर्मा रही है तो पूजा आवर कुछ नहीं बोलती है
कुछ देर तक उस रूम मैं तो शांति छ जाती है अंजलि अपनी जिस्म को छुपा कर कड़ी रहती है निचे सर किये हुआ
वैसे अंजलि तो कभी किसी से शर्माती नहीं थी अंजलि पूजा से भी गन्दी गन्दी बाते करती थी मगर कभी किसी के सामने नंगी नहीं हुई थी जो आज पूजा ने अंजलि की पूरी जिस्म hi देख ली होती है वह तो अच्छा होता है अंजलि पहले hi पेंटी पहन ली होती है जो पूजा उसकी छूट नहीं देख पति है मगर फिर भी अभी अंजलि को बहुत शर्म आती रही होती है एक तो वह चीज जो पूजा की हाँथ मैं अभी भी होती है उससे भी बड़ी बात जो आज तक किसी ने भी नहीं देखा था वह देख ली थी पूजा ने
ये क्या है छोटकी तू मेरी आवर गीता की बात सुन कर ये सब करती है ये गन्दी बात है ....... पूजा कहती है लेकिन पूजा की आँखों के सामने अभी भी अंजलि की जिस्म घूम रही होती है
दीदी सॉरी मुझे मांफ कर दीजिये मुझसे गलती हो गयी प्लीज गीता दीदी को मत बताना ...... निचे सर किये hi अंजलि कहती है
गुड़िया सच मैं ये गन्दी हरकत है मैं जानती हुईं तू अब जवान हो गयी है मगर ये सब बाते सुन कर तू ये सब करने लग जाएगी तो तेरी इन सब की आदत लग जाएगी
...... पूजा कहती है
दीदी मैं अब नहीं करुँगी प्लीज मुझे मांफ कर दीजिये ...... अंजलि फिर कहती है
ठीक है मैं गीता को नहीं बताउंगी मगर तुझे भी मेरी एक काम करनी होगी क्या अपनी इस दीदी के लिए एक काम करेगी ....... पूजा कहती है
हे भगवन प्लीज गुड़िया मान जाये ....... पूजा मन मैं सोचती है
ये दीदी कौन सा काम करवाना चाहती है
कोई भी काम हो मैं कर दूंगी पूजा दी बहुत अच्छी है मुझे भी छोटी बहन की तरह प्यार करती है ...... अंजलि मन मैं सोचती है
हआ दीदी मैं करुँगी आप की काम को क्या करना है ..... अंजलि बोलती है
वही अंजलि के हां सुनते hi पूजा बहुत खुश होती है फिर अचानक hi पूजा की आँखें भर आती है आवर कुछ hi देर मैं पूजा की आँखों से आंसू की बूंदें गिरने लगती है आवर पूजा सिसकने लगती है पूजा की सिसकने की आवाज़ सुन कर अंजलि का ध्यान पूजा पर जाती है जो बीएड पर बैठ कर निचे सर किये हुआ रो रही होती है
अंजलि भाग कर पूजा के पास आती है
पूजा दीदी क्या हुआ आप रोने क्यू लगी ....... अंजलि पास आकर बोलती है आवर पूजा को चुप करवाने लगती है
पूजा कुछ देर रोटी रहती है फिर अपनी आंसू पोछते हुआ अंजलि को देखने लगती है
गुड़िया मुझे मांफ कर देना मैं ये काम तुझसे करवा रही हुईं ये काम एक पाप है मगर मैं ये पाप करना चाहती हुईं मैं कई बार पीछे हटना चाहती थी मगर मैं नहीं हैट पा रही हुईं मुझे मांफ कर देना गुड़िया तेरी ये दीदी मार जाएगी मगर अब पीछे नहीं हैट सकती है मेरी बात सुन कर सायद तुझे गुस्सा आये आवर तू मुझे अपने घर से जाने को भी बोले मगर मैं ये फिर भी करुँगी गुड़िया करुँगी ....... पूजा रोटी हुई बोलती है
दीदी मैं समझी नहीं आप क्या बोलना चाहती है कौन सा पाप करना चाहती है
जो भी बात है मुझे बताइये मैं आप की हेल्प करुँगी
दीदी मैं आप पर कभी गुस्सा नहीं हो सकती प्लीज मुझे बताइये क्या बात है अगर मेरी बस मैं हुआ तो मैं ज़रूर करुँगी ..... पूजा को दर्द मैं रट हुआ देख कर अंजलि की भी आँखें भर आती है
गुड़िया इसमें हर चीज है जो तुझे पता चल जायेगा मैं क्या काम तुझसे करवाना चाहती हुईं ...... पूजा अपनी बलाउज से एक छोटी डायरी निकल कर अंजलि को देते हुआ बोलती है
गुड़िया अपनी इस दीदी को मांफ करदेना अगर डायरी पढ़ कर बुरा लगे तो मगर इस डायरी मैं जो भी मैंने लिखा है वह मेरी दिल की बाते है
गुड़िया मैं ये भी जानती हुईं ये कभी पूरी नहीं होगी मगर मैं जब तक ज़िंदा रहूंगी मैं इसका पूरा होने का इंतज़ार करुँगी ...... पूजा रोटी हुई बोलती है आवर अपनी बेटी रानी को लेकर चली जाती है
वही अंजलि कभी पूजा को जाते हुआ देखती है तो कभी हाँथ मैं ली हुई डायरी को
हे भगवन आखिर इस डायरी मैं पूजा दी ने क्या लिखा है पूजा दीदी की बात सुन कर मुझे तो बहुत दर लग रही है ...... क्या मैं ये डायरी पढू या बिना पढ़े hi पूजा दीदी को ये डायरी लौटा दू
पूजा दीदी को इतनी दुखी तो मैं शादी के वक़्त देखि थी कितनी रो रही थी मुझसे आवर गीता दीदी से लिपट लिपट कर ....... अंजलि डायरी को देखते हुआ सोचती है
गीता के रूम मैं ..... गीता आवर पूजा बात कर रही होती है जो पूजा अपनी सोहागरात की बाते गीता को बता रही होती है गीता के पूछने पर आवर पास मैं hi बीएड पर पूजा की बेटी पारी खेल रही होती है पूजा की फ़ोन लेकर तभी अचानक गीता की नज़र फ़ोन पर पड़ती है जो कॉल आयी हुई होती है
उठी हुई फ़ोन देख कर गीता सोचती है पारी ने फ़ोन उठा ली है इस लिए पूजा को बता देती है
गीता के बताने पर पूजा फ़ोन देखती है तो अंजलि का नंबर होती है
ये तो छोटी का नंबर है क्या अंजलि हम्हारी बाते सुन रही थी ....... ही भगवन ये छोटी तो बहुत बदमाश हो गयी है ........ पूजा मन मैं सोचती है
पूजा कही जीजू का फ़ोन तो नहीं है .... गीता मुस्कुराती हुई कहती है
नहीं गीता कंपनी वालों का फ़ोन है .... पूजा झूट बोल देती है
वही अंजलि अपनी बीएड पे हांफ रही होती एक तो अंजलि की छूट से रास निकलने से अंजलि का जिस्म कैंप रही होती है
वही अपनी गीता दीदी की आवाज़ सुन कर अंजलि को दर भी लगने लगा था ये सोच कर के अब पूजा दीदी नंबर देख लेंगी आवर जान भी जाएँगी के मैं उनकी बाते रही थी
अंजलि सोच रही होती है आवर अंजलि की पेंटी पूरी तरह छूट की पानी से भींग चुकी होती है अंजलि फिर बीएड से उठ कर बाथरूम मैं चली जाती है
अर्जुन बीटा आराम से इतनी तेज़ी मैं क्यू भाग रहा है ...... अर्जुन को तेज़ी मैं शिदियों से उतारते हुआ देख कर आँचल कहती है अर्जुन कुछ बोले hi अंजलि के रूम मैं जाने लगता है मगर अंजलि का रूम बंद होती है तो अर्जुन गेट पीटने लगता है
अर्जुन बीटा ...... आँचल पास आकर बोलती है
हां माँ क्या हुआ ....... अर्जुन कहता है
अर्जुन बीटा वह ...... आँचल आगे कुछ बोल नहीं पति है आवर अर्जुन के तरफ मायूसी से देखने लगती है आवर थोड़ी सी घबराई हुई भी होती है
माँ क्या हुआ किसी ने आप कुछ बोलै है क्या आप परेशां लग रही है क्या बात है ...... अर्जुन झट से अपनी ममी माँ को पकड़ लेता है बोलते हुआ आँचल को मायूस देख कर अर्जुन भी थोड़ा घबरा जाता है
आँचल तुम घबरा क्यू रही है अर्जुन तुझपे कभी गुस्सा कर hi नहीं सकता है आवर सायद तेरी बात को मन भी नहीं करेगा बोल दे आँचल बोल दे आज इतने सल्ल के बाद सायद एक माँ अपने बेटे की आरती भी उतर लेगी ....... आँचल की आत्मा से आवाज़ आती है
बीटा वह मैं आवर दीदी मंदिर जा रही है क्या तुम भी मेरे साथ मंदिर चलेगा ! अर्जुन बीटा मन नहीं करना अपनी माँ को प्लीज बीटा ....... आँचल मुंह बना कर कहती है
अपनी ममी माँ के भोलेपन चहरे पर मायूसी देख कर अर्जुन कैसे मन कर सकता था
ठीक है आप कहती है तो मैं मंदिर साथ चलूँगा सिर्फ अपनी भोली माँ के लिए समझी ...... अर्जुन आँचल के गाल को पकड़ कर कहता है
अर्जुन का हां सुन कर आँचल बहुत खुश हो होती है आवर आँचल भी अर्जुन को साइन से लगा लेती है
अपनी इस माँ को इसी तरह प्यार करते रहना मैं तो तुझे hi देख देख कर ये जीवन बिता रही हुईं तू नहीं होता तो पता नहीं कैसी जीवन जिह रही होती मैं जब तू कुछ देर के लिए मुझसे दूर जाता है तो मुझे बहुत बेचैनी होने लगती है कभी कभी सोचती हुईं मैं तुझे अपनी जिस्म मैं छिपा लो जो तू हर वक़्त मेरे पास रहे ...... अर्जुन को गले लगाए हुआ आँचल मन मैं सोचती है
माँ मैं कपडे बदल कर आता हुईं ........ अर्जुन बोल कर फिर से अंजलि दीदी का गेट पीटने लगता है जो अंजलि गेट खोल देती है आवर अर्जुन रूम मैं चला जाता है मगर रूम मैं कोई भी नहीं होता है तभी बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़े आती है
अंजलि दीदी आप अंदर हो क्या ..... अर्जुन पूछता है
अर्जुन मैं नाहा रही हुईं ... अंजलि बोलती है
अर्जुन के साथ मंदिर जाने की सुन कर hi आँचल बहुत खुश होती है आवर मुस्कुराती हुई राखी देवी की रूम का गेट खोल कर अंदर जाती है तो देखती है राखी देवी बीएड पर बैठी है आवर साड़ी लिए हुई कुछ सोच रही होती है
राखी देवी की चहरे को देख कर आँचल समझ तो जाती है राखी देवी क्या सोच रही है
दीदी आप ये साड़ी पहन सकती है आप की तड़प भगवन ने सुन ली है ..... आँचल मुस्कुरा कर कहती है
अपनी नन्द आँचल की बात सुन कर राखी देवी को उस वक़्त इतनी ख़ुशी होती है की वह बीएड से उठ जाती है आवर भाग कर आँचल के पास आ जाती है
आँचल मेरी बहन क्या सच मैं अर्जुन बीटा साथ मंदिर जाने के लिए मान गया है तू मुझसे झूट तो नहीं कर रही न बोल न मेरी बहन बोल न ........ राखी देवी आँचल के हाँथ पकड़ कर मायूसी से पूछती है
इस वक़्त राखी देवी की आँखों मैं एक अजीब सी ख़ुशी होती है आवर राखी देवी खुश होकर पूछती है इस वक़्त भी राखी देवी की आँखों से आंसू निकल रही होती मगर ये आंसू ख़ुशी की होती है आवर इतनी बड़ी ख़ुशी की राखी देवी को यकीन नहीं हो रही थी की पूरी हो गयी है
दीदी मैं सच बोल रही हुईं अर्जुन हम्हारे साथ मंदिर जायेगा आप जल्दी से ये साड़ी को पहन लीजिये ये साड़ी कब से आप की जिस्म को छूना चाहती है मगर आप ने कभी इस साड़ी को अपनी जिस्म को छूने नहीं दिया है ...... आँचल मुस्कुरा कर कहती है
आँचल की बात सुन कर राखी देवी शर्मा जाती है
आँचल मैं अभी बाथरूम से साड़ी पहन कर आती हुईं .... राखी देवी बोलती है आवर बीएड से साड़ी लेकर बाथरूम मैं चली जाती है
हे भगवन कुछ आएसा कर दीजिये जो दीदी हर दिन आयी hi खुश रहती रहे ....... आँचल मन मैं सोचती है आवर खुद की आँखों मैं आई हुई आंसू पोछ लेती है जो राखी देवी की ख़ुशी देख कर आँचल की भी आँखों मैं आंसू आ गयी होती है
बाथरूम मैं जाने के बाद राखी देवी अपनी साड़ी निकल देती है
राखी देवी के चरणों पे अभी बहुत ख़ुशी होती है जो राखी देवी मुस्कुरा रही होती है राखी देवी अपने कपडे निकल कर साथ लेकर आई हुई साड़ी हाँथ मैं उठा लेती है आवर साड़ी को खुद hi चुम लेती है आवर फिर राखी देवी फिर कुछ सोचने लगती है
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अर्जुन बीटा यह क्या कर रहा है मैं बोली थी न मेरे hi साथ रहना फिर यह क्यू खड़ा है ........ राखी देवी कहती है
माँ वह देखिये कितनी अच्छी साड़ी है न वह साड़ी आप पर बहुत अच्छी लगेगी वह साड़ी आप ले लो ...... अर्जुन एक साड़ी की तरफ इशारा करते हुआ कहता है
जब राखी देवी अर्जुन के नज़रों की पीछा करती है तो सामने एक साड़ी दिखाई देती है जो बहुत खूबसूरत होती है राखी देवी भी उस साड़ी को देख कर खुश हो जाती है
वह साड़ी क्या सच मैं मेरे राजा बेटे को अच्छी लग रही है ....... राखी देवी अर्जुन को गॉड मैं उठा कर बोलती है
सच्ची माँ वह साड़ी बहुत अच्छी लग रही है
आप जब उस साड़ी को पहनोगी तो आप भी बहुत अच्छी लगोगी ..... अर्जुन राखी देवी से कहता है
वह साड़ी राखी देवी को भी बहुत अच्छी लगती है आवर अर्जुन भी लेने को बोलता है तो राखी देवी वह साड़ी ले लेती है
फिर आवर कुछ कपडे लेकर राखी देवी घर आ जाती है
हां क्या हुआ अभी तक मेरा बीटा सोया क्यू नहीं ...... राखी देवी अर्जुन को अपनी रूम मैं देखती है तो पूछती है
माँ आप वह साड़ी पहन कर मुझे दिखाइए न मुझे देखना है आप कितनी अच्छी लगाती है उस साड़ी मैं ....... अर्जुन कहता है
ओह मेरे राजा बेटे को देखना है उस साड़ी मैं माँ कैसी लगती है ठीक है चलो बीएड पर बैठ जाओ माँ अभी दिखती है पहन कर ...... राखी देवी कहती है
वही अर्जुन खुश होकर बीएड पर बैठ जाता है
राखी देवी वह साड़ी निकल कर एक बार अर्जुन को मुस्कुरा देखती है फिर अपनी पहनी हुई साड़ी निकलने लगती है
राखी देवी साड़ी निकल कर बलाउज की बटन खोल hi रही होती है तभी कोई गेट पीटने लगता है राखी देवी साड़ी पहन कर गेट खोलती है तो सामने गीता दरी हुई कड़ी होती है तो राखी देवी जल्दी से गीता को गले लगा लेती है
गीता बेटी क्या हुआ तुम दर क्यू रही हो ...... राखी देवी पूछती है
माँ वह गुड़िया बहुत रो रही है माँ गुड़िया को बहुत दर्द हो रही है ...... गीता बोलती हुई रोने लगती है
अंजलि के बारे मैं सुन कर राखी देवी जल्दी से रूम की तरफ भगति है आवर रूम मैं जाकर देखती है तो सच मैं अंजलि सिसक रही होती है तो राखी देवी अंजलि को गुड मैं ले लेती है
क्या हुआ मेरी पारी रानी को मेरी रानी बेटी रो क्यू रही है बताओ माँ को ....... राखी देवी अंजलि को गॉड मैं लेकर पूछती है
माँ स्कूल से आते वक़्त गुड़िया गिर गयी थी तो गिरते वक़्त गुड़िया के पेअर के अंगूठे मैं छोट लग गयी थी खून भी बाह रहा था उस वक़्त गुड़िया रोने लगी थी तो मैंने गुड़िया के अंगूठे पे कपडे से बांध दिया था तो गुड़िया चुप हो गयी फिर हम दोनों घर आ गए मैं आप को बताने वाली थी मगर गुड़िया ने मन कर दिया आप को बताने से ...... मगर अभी गुड़िया अचानक रोने लगी ........ गीता कहती है
गीता की बात सुन कर राखी देवी अंजलि की अंगूठे को देखने लगती है अंजलि के अंगूठे मैं बंधी हुई कपडा खून से भिनगा हुई होती है
खून से भींगी हुई कपडे देख कर राखी देवी थोड़ी दर जाती है कही छूट जयादा तो नहीं लगी है राखी देवी धीरे धीरे कपडे निकलती है तो देखती है अंगूठे की नाख़ून थोड़ी ऊपर की तरफ हो गयी है
ओह माँ दर्द हो रहा है ..... अंजलि राखी देवी की हाँथ पकड़ कर बोलती है
ओह ओह ओह मेरी गुड़िया पहले क्यू नहीं बताया कितना खून बाह रहा है राखी देवी दूसरे कपडे से खून साफ करती है आवर फिर अंजलि के जख्म पर दवा लगा देती है
रात मैं राखी देवी अंजलि के साथ hi सो जाती है उस रात अर्जुन के साथ गीता सो जाती है
उसके बाद अर्जुन फिर उस साड़ी के बारे मैं भूल जाता है वही राखी देवी भी भूल जाती है आवर इसी तरह दिन बीतने लगता है आवर फिर एक दिन राखी देवी अर्जुन को हॉस्टल मैं भेज देती है
मगर जब अर्जुन राखी देवी से नफरत करने लगता है तब राखी देवी बहुत दुखी रहने लगती है आवर फिर एक रात राखी देवी को साड़ी के बारे मैं याद आती है आवर राखी देवी आवर भी दुखी हो जाती है उस रात राखी देवी बहुत रोटी है आवर उस रात अर्जुन के रूम मैं जाकर वह साड़ी पहनने लगती है मगर वह साड़ी पहन नहीं पति है
अर्जुन मेरे लाल तेरी माँ तुझसे बहुत प्यार करती है तू क्यू अपनी माँ से इतनी नफरत करता है मैंने तुझे कैसे दूर किया मैं hi जानती हुईं तेरी ये नफरत एक दिन मेरी जान ले लेगी
अर्जुन तेरी माँ कोई भी गलत काम नहीं करती है जब तू बड़ा हो जायेगा आवर कभी मेरी तरह रिश्तों मैं बहस जायेगा तब तुझे पता चलेगा तेरी माँ नफरत के काबिल नहीं है समझेगा बीटा एक दिन तू अपनी इस माँ की मज़बूरी ज़रूर समझेगा मुझे पूरा यकीं है
अर्जुन बीटा मैं ये साड़ी को पहन कर पहले तुझे hi दिखूंगी एक न एक दिन तू ज़रूर मेरे पास आएगा ....... राखी देवी बोलती है आवर रट हुआ अर्जुन के रूम मैं सो जाती है
दीदी दीदी क्या हुआ जल्दी कीजिये मैं अर्जुन को रूम मैं भेज रही हुईं
राखी देवी यादों मैं खोई होती है तभी आँचल की आवाज़ आती है तो राखी देवी यादों से बहार आती है आवर जल्दी से साड़ी पहनने लगती है
इधर अर्जुन रूम मैं सरत पहन कर बहार आता है तो आँचल बहार hi मिल जाती है
माँ मैं बहार इंतज़ार कर रहा हुईं आप जल्दी से आइये ..... अर्जुन कहता है
बीटा मैं पूजा की थाली लेकर आती हुईं तू ज़रा मेरा फ़ोन उठा ले दीदी की रूम मैं है बोलती हुईं आँचल वह से चली जाती है
अर्जुन अपनी माँ की रूम मैं जाना तो नहीं चाहता है मगर फिर जाने लगता है अर्जुन अभी अपनी माँ की रूम का गेट खोलने hi वाला होता है तभी अंदर से गेट खुल जाती है आवर अर्जुन के सामने राखी देवी दिखाई देती है जो राखी देवी के चरणों पर मुस्कान होती है
राखी देवी पहनी हुई साड़ी मैं बहुत जयादा खूबसूरत लग रही होती है आवर राखी देवी के चहरे पर मुस्कान होती है जैसे राखी देवी एक बहुत बहुत खुश
अपनी माँ की चहरे पर अभी मुस्कान देख कर अर्जुन भी अपनी माँ के मुस्कान मैं खो जाता है
अर्जुन अपनी माँ की चहरे को बड़े hi प्यार से देखने लगता है आवर अचानक अर्जुन के भी चहरे पर मुस्कान आ जाता
सामने अपनी माँ के चहरे पर मुस्कान देख कर अर्जुन भूल जाता है की वह अपनी माँ से कितनी नफरत करता है
तभी अर्जुन की नज़र राखी देवी की पहनी हुई साड़ी पर नज़र जाता है
अर्जुन कुछ देर तक अपनी माँ की पहनी हुई साड़ी को देखता है
जैसे अर्जुन कुछ याद करने की कोशिश कर रहा हो
ये साड़ी तो वही है जो मैंने माँ को लेने को कहा था कितनी प्यारी लग रही है माँ .. मैं जनता था ये साड़ी माँ पर अच्छी लगेगी ...... अर्जुन मन मैं सोचता है
अर्जुन कभी अपनी माँ को देखता है तो कभी साड़ी मैं कासी हुई जिस्म को जो उस साड़ी मैं राखी देवी की जिस्म उभर कर दिख रही होती है
अभी अर्जुन के जगह कोई आवर बुद्धा भी होता तो राखी देवी को पकड़ कर राखी देवी की कासी हुई जिस्म पर टूट पड़ता आवर राखी देवी की जिस्म को मसल मसल कर लाल कर देता
इतनी जयादा सेक्सी सेक्स की देवी लग रही होती है राखी देवी
मगर अर्जुन के दिल मैं अपनी माँ के लिए कोई बुरे ख्याल नहीं आ रहे होते है अर्जुन बस अपनी माँ को पहनी हुई साड़ी को देख रहा होता है जो अर्जुन के चहरे पर मुस्कान आती hi चली जाती है
वही राखे देवी मुस्कुराते हुआ अर्जुन के पास hi आ जाती है अर्जुन को खुद को देखते हुआ देख कर राखी देवी की दिल मैं अजीब ख़ुशी होती है जो अर्जुन के बिलकुल पास hi आ जाती है
अर्जुन ये तेरी hi पसंद की हुई साड़ी है तू चाहता था न मैं ये साड़ी पहले तुझे पहन कर दिखाऊं ... अब बता कैसे लग रही है ये साड़ी मुझपे ........ राखी देवी मुस्कुराती हुई कहती है
अर्जुन तो अपनी माँ की मुस्कराहट भरी चहरे मैं खोता hi चला जाता है अर्जुन के दिल मैं अजीब सी हलचल होने लगाती है तभी राखी देवी की आवाज़ सुन कर अर्जुन को होश आता है आवर अर्जुन बिना कुछ बोले झट से घूम जाता है
अर्जुन बीटा मैं जानती हुईं तू मुझसे बहुत नाराज़ है बीटा तेरी ये माँ तुझसे बहुत प्यार करती है तू मुझसे बात नहीं करता है तो मेरा ये दिल कितना तड़पता है मैं hi जानती हुईं भगवन के लिए एक बार मुझसे बात करले मैं तेरी पेअर पड़ती हुईं ........ राखी देवी बोलती हुईं अर्जुन के पेअर पकड़ कर रोने लगती है
राखी देवी की आँखों से आंसू अर्जुन के पैरों पर गिरने लगती है
अपने पैरों पर पानी गिरने से अर्जुन को समझ आ जाता है उसकी माँ कितनी रो रही है जो अर्जुन के चहरे पर भी एक उदासी सी आ जाता है
अर्जुन को आज अपनी माँ पर बहुत तरस आने लगता है
फिर अचानक अर्जुन वह से जाने लगता है के सामने गीता आवर आँचल को देखता है जो भींगी आँखों से राखी देवी को देख रही होती है आवर अर्जुन की नज़र जैसे hi गीता आवर आँचल पर पड़ता है दोनों अर्जुन को देखते हुआ हाँथ जुड़ देती है
वही गीता तो रट हुआ हांथो से अर्जुन को इशारा करने लगती है के एक बार माँ से बात करले ...... वही आँचल भी रट हुआ इशारा करने लगती है
अपनी गीता दीदी आवर ममी माँ को रट हुआ देख कर अर्जुन को बहुत दुःख होता है अर्जुन अपनी से बात तो नहीं करना चाहता है मगर गीता आवर आँचल को दुखी देख कर अर्जुन पलट जाता है तो देखता है राखी देवी अभी भी ज़मीन पर निचे सर किये हुए रो रही होती है
अर्जुन अपनी माँ के पास जाता है आवर पकड़ कर उठा देता है
ये नाटक करना बंद कीजिये मैं अच्छी तरह जनता हुईं कितना प्यार करती है मुझसे
अगर आप मुझसे से सच मैं प्यार करती तो मुझे खुद से अलग नहीं करती
आप एहि जानना चाहती है न ये साड़ी आप पर कैसी लग रही है तो सुनिए
ये साड़ी मैंने अपनी उस माँ के लिए पसंद किया था जिस माँ को मैं बहुत बहुत प्यार करता था
अगर आज ये साड़ी मेरी उसी माँ ने पहनी है तो ये साड़ी बहुत अच्छी लग रही है आप पर
मगर मैं जनता हुईं अब वह माँ आप नहीं रही जिसे मैं प्यार करता था अब ये नाटक बंद कीजिये मैं अभी आप की वजह से दीदी आवर माँ को दुखी नहीं करना चाहता हुईं ...... अर्जुन ये सब बात राखी देवी को उठाते हुआ धीरे धीरे बोलता है ताकि कुछ दूर कड़ी गीता आवर आँचल न सुन ले
अर्जुन की हर बात राखी देवी के दिल पर तीर की तरह लगती है आवर बहुत दुखी भी होती है मगर कुछ बोलती नहीं है आवर बस अर्जुन को प्यार से देखती रहती है
फिर पता नहीं राखी देवी के दिल मैं क्या आता है जो राखी देवी अर्जुन के गले लग जाती है आवर अर्जुन को अपनी सीने से लगा लेती है
अचानक अपनी माँ से गले लगने से अर्जुन अलग होने के लिए होता है तभी अर्जुन की नज़र सामने गीता आवर आँचल पर पड़ता है जो अपनी आँखों से आंसू पोछते हुआ मुस्कुरा रही होती है
वही आँचल तो अर्जुन की बलए hi लेने लगती है
गीता आवर अपनी ममी माँ को खुश देख कर अर्जुन अपनी माँ से छह कर भी अलग नहीं हो पता है मगर अर्जुन का हाँथ निचे hi रहता है
राखी देवी अर्जुन को अपने सीने मैं दबती hi चली जाती है राखी देवी आज कई सल्ल के गले न लगाने का कसार आज पूरा करना चाहती थी राखी देवी जितना अर्जुन को अपने सीने से लगाती है उतनी hi राखी देवी की दिल को सकूँ मिलती है राखी देवी की आज ख़ुशी की कोई ठिकाना नहीं होती है अभी अर्जुन ने क्या बोलै भूल जाती है आवर ये भी भूल जाती है की वह जिस तरह अर्जुन को अपनी सीने से लगा रही है अर्जुन को कैसा महसूस हो रहा होगा
ख़ुशी मैं राखी देवी ये भी भूल जा रही होती है की अर्जुन कोई छोटा बच्चा नहीं अब एक जवान लड़का हो चूका है मगर कई सैलून से अर्जुन को गले न लगा आज पूरा करना है ये याद रहता है राखी देवी को
इधर अर्जुन के हालत ख़राब होने लगता है जब राखी देवी की दोनों कठोर चुकी का निप्पल अर्जुन के सीने मैं दबने लगता है जो अर्जुन का छोटा अर्जुन अपना सर उठाने लगता है
जो अर्जुन थोड़ा डरने भी लगता है क्यू के अर्जुन का लैंड अभी बिलकुल राखी देवी की छूट के पास hi होता है आवर राखी देवी की जिस्म की गर्मी से अर्जुन का लैंड हार्ड होने लगता है अर्जुन को जैसे hi लगता है के उसका लैंड खड़ा होकर उसकी माँ के छूट के सामने जाए अर्जुन झट से अलग हो जाता है
चलिए मंदिर जाना है नहीं तो देर हो जाएगी बोलते हुआ अर्जुन वह से बहार चला जाता है
अंजलि की रूम मैं
अंजलि आज गर्मी जयादा लग रही है क्या तुझे ...... पूजा अंजलि के रूम मैं आकर बोलती है
वही अंजलि सिर्फ टावल मैं शीशे के सामने बॉल सवार रही होती है आवर जैसे hi पूजा की आवाज़ सुनती है अंजलि थोड़ी दर भी जाती है ये सोच कर कही पूजा दीदी को पता तो नहीं चल गया के मैं इनकी आवर गीता दीदी की बाते सुन रही थी
नहीं पूजा दी जयादा गर्मी तो नहीं लग रही है क्यू आप को आज गर्मी जयादा लग रही है क्या ....... अंजलि भी वही बात पूजा से भी पूछ लेती है
छोटकी ये बात तो तू मुझे बताएगी क्यू की आज तो तुझे hi गर्मी जयादा लग रही है न ........ पूजा इस बार कुछ देखते हुआ मुस्कुराती हुई बोलती है आवर जाकर बीएड पर बैठ जाती है
वही पूजा को मुस्कुराते हुआ अंजलि शीशे से देख लेती है
पूजा दीदी मुस्कुरा क्यू रही है क्या पूजा दीदी को पता चल गयी है की मैं इनकी बाते सुन रही थी ..... आवर पूजा दीदी ये गर्मी की बात क्यू बोल रही है आज इतनी जयादा भी गर्मी नहीं लग रही है ....... अंजलि मन मैं सोचती है
दीदी मुझे तो जयादा गर्मी नहीं लग रही है ...... अंजलि घूमते हुआ बोलती है आवर बीएड से पेंटी उठा कर पहनने लगती है
अच्छा तो छोटकी को गर्मी नहीं लग रही है तो इतनी जल्दी जल्दी नाहा क्यू रही है फिर तू ....... पूजा फिर मुस्कुराते हुआ बोलती है आवर थोड़ी हस्स भी देती है जो अंजलि सुन लेती है
पूजा को हस्ते सुन कर अंजलि को कुछ समझ मैं नहीं आता है की पूजा हस्स क्यू रही है अगर पूजा दीदी को पता भी चल गया है की मैं इनकी आवर गीता दीदी की बाते सुन रही थी तो अभी पूजा दीदी को मुझे डाटना चाहिए था मगर पूजा दीदी तो हस्स रही है ........ अंजलि मन मैं सोचती है
दीदी मन किया तो एक बार आवर नाहा लिया ... मगर सच मैं मुझे गर्मी नहीं लग रही है ..... अंजलि टावल को अपनी सीने पर लपेटते हुआ बोलती है
अच्छा तो मेरी छोटकी को आज दो बार नहाने का मन किया फिर ये क्या है ....... पूजा झट से कुछ दिखते हुआ बोलती है
वही पूजा के हाथ मैं चीज देख कर अंजलि दर जाती है आवर पीछे हैट जाती है अंजलि इतनी दर जाती है उस चीज को देख कर की टावल भी निचे गिर जाती है
क्यू की अचानक hi पूजा वह चीज अंजलि के आगे कर देती है जो अंजलि टावल भी लपेट नहीं पति है
वही टावल गिरते hi पूजा ज़ोर ज़ोर से हसने लगती है तभी हस्ते हुआ पूजा की नज़र सामने अंजलि की चुकी पर नज़र जाती है आवर पूजा की हसी चली जाती है
अंजलि की चुकी बड़ी होने के बाद भी सीने मैं टाइट चिपकी हुई होती है जो पूजा को अंजलि की चुकी देख कर पूजा की गाला सूखने लगती है मगर एक तक पूजा अंजलि की सीने से चिपकी हुई चुकी को देखती रहती है
गाँव की लड़कियां सही कहती है छोटकी की जिस्म अलग hi है लड़के तो लड़के मेरी जैसी शादी सुधा औरत भी पागल हो जाएगी छोटकी के जसम के लिए
सच मैं भगवन जी ने छोटकी को सबसे अलग hi बनाये है ........ पूजा अंजलि की जिस्म को घूरती हुई सोचती है
आवर हाँथ मैं ली हुई उस चीज को अपनी नाक के पास लेकर जाने लगती है
वही पूजा को अपनी जिस्म को घूरते हुआ देख कर अंजलि झट से टावल उठा कर फिर से अपनी जिस्म पर रख लेती है आवर भाग कर पूजा के हाँथ से वह चीज छीन लेती है
छियई दीदी ये आप क्या कर रही है ये गन्दी है ...... अंजलि कहती है
तो तुझे किसने कहा था पेंटी के अंदर hi निकलने के लिए आवर निकली भी तो एहि क्यू छोड़ दी ....... पूजा कहती है
पूजा की बात सुन कर अंजलि को बहुत शर्म आती है जो अंजलि पेंटी वही गिरा देती है
तब पूजा की नज़र अंजलि पर जाती है तो देखती है अंजलि कुछ जयादा hi शर्मा रही है तो पूजा आवर कुछ नहीं बोलती है
कुछ देर तक उस रूम मैं तो शांति छ जाती है अंजलि अपनी जिस्म को छुपा कर कड़ी रहती है निचे सर किये हुआ
वैसे अंजलि तो कभी किसी से शर्माती नहीं थी अंजलि पूजा से भी गन्दी गन्दी बाते करती थी मगर कभी किसी के सामने नंगी नहीं हुई थी जो आज पूजा ने अंजलि की पूरी जिस्म hi देख ली होती है वह तो अच्छा होता है अंजलि पहले hi पेंटी पहन ली होती है जो पूजा उसकी छूट नहीं देख पति है मगर फिर भी अभी अंजलि को बहुत शर्म आती रही होती है एक तो वह चीज जो पूजा की हाँथ मैं अभी भी होती है उससे भी बड़ी बात जो आज तक किसी ने भी नहीं देखा था वह देख ली थी पूजा ने
ये क्या है छोटकी तू मेरी आवर गीता की बात सुन कर ये सब करती है ये गन्दी बात है ....... पूजा कहती है लेकिन पूजा की आँखों के सामने अभी भी अंजलि की जिस्म घूम रही होती है
दीदी सॉरी मुझे मांफ कर दीजिये मुझसे गलती हो गयी प्लीज गीता दीदी को मत बताना ...... निचे सर किये hi अंजलि कहती है
गुड़िया सच मैं ये गन्दी हरकत है मैं जानती हुईं तू अब जवान हो गयी है मगर ये सब बाते सुन कर तू ये सब करने लग जाएगी तो तेरी इन सब की आदत लग जाएगी
...... पूजा कहती है
दीदी मैं अब नहीं करुँगी प्लीज मुझे मांफ कर दीजिये ...... अंजलि फिर कहती है
ठीक है मैं गीता को नहीं बताउंगी मगर तुझे भी मेरी एक काम करनी होगी क्या अपनी इस दीदी के लिए एक काम करेगी ....... पूजा कहती है
हे भगवन प्लीज गुड़िया मान जाये ....... पूजा मन मैं सोचती है
ये दीदी कौन सा काम करवाना चाहती है
कोई भी काम हो मैं कर दूंगी पूजा दी बहुत अच्छी है मुझे भी छोटी बहन की तरह प्यार करती है ...... अंजलि मन मैं सोचती है
हआ दीदी मैं करुँगी आप की काम को क्या करना है ..... अंजलि बोलती है
वही अंजलि के हां सुनते hi पूजा बहुत खुश होती है फिर अचानक hi पूजा की आँखें भर आती है आवर कुछ hi देर मैं पूजा की आँखों से आंसू की बूंदें गिरने लगती है आवर पूजा सिसकने लगती है पूजा की सिसकने की आवाज़ सुन कर अंजलि का ध्यान पूजा पर जाती है जो बीएड पर बैठ कर निचे सर किये हुआ रो रही होती है
अंजलि भाग कर पूजा के पास आती है
पूजा दीदी क्या हुआ आप रोने क्यू लगी ....... अंजलि पास आकर बोलती है आवर पूजा को चुप करवाने लगती है
पूजा कुछ देर रोटी रहती है फिर अपनी आंसू पोछते हुआ अंजलि को देखने लगती है
गुड़िया मुझे मांफ कर देना मैं ये काम तुझसे करवा रही हुईं ये काम एक पाप है मगर मैं ये पाप करना चाहती हुईं मैं कई बार पीछे हटना चाहती थी मगर मैं नहीं हैट पा रही हुईं मुझे मांफ कर देना गुड़िया तेरी ये दीदी मार जाएगी मगर अब पीछे नहीं हैट सकती है मेरी बात सुन कर सायद तुझे गुस्सा आये आवर तू मुझे अपने घर से जाने को भी बोले मगर मैं ये फिर भी करुँगी गुड़िया करुँगी ....... पूजा रोटी हुई बोलती है
दीदी मैं समझी नहीं आप क्या बोलना चाहती है कौन सा पाप करना चाहती है
जो भी बात है मुझे बताइये मैं आप की हेल्प करुँगी
दीदी मैं आप पर कभी गुस्सा नहीं हो सकती प्लीज मुझे बताइये क्या बात है अगर मेरी बस मैं हुआ तो मैं ज़रूर करुँगी ..... पूजा को दर्द मैं रट हुआ देख कर अंजलि की भी आँखें भर आती है
गुड़िया इसमें हर चीज है जो तुझे पता चल जायेगा मैं क्या काम तुझसे करवाना चाहती हुईं ...... पूजा अपनी बलाउज से एक छोटी डायरी निकल कर अंजलि को देते हुआ बोलती है
गुड़िया अपनी इस दीदी को मांफ करदेना अगर डायरी पढ़ कर बुरा लगे तो मगर इस डायरी मैं जो भी मैंने लिखा है वह मेरी दिल की बाते है
गुड़िया मैं ये भी जानती हुईं ये कभी पूरी नहीं होगी मगर मैं जब तक ज़िंदा रहूंगी मैं इसका पूरा होने का इंतज़ार करुँगी ...... पूजा रोटी हुई बोलती है आवर अपनी बेटी रानी को लेकर चली जाती है
वही अंजलि कभी पूजा को जाते हुआ देखती है तो कभी हाँथ मैं ली हुई डायरी को
हे भगवन आखिर इस डायरी मैं पूजा दी ने क्या लिखा है पूजा दीदी की बात सुन कर मुझे तो बहुत दर लग रही है ...... क्या मैं ये डायरी पढू या बिना पढ़े hi पूजा दीदी को ये डायरी लौटा दू
पूजा दीदी को इतनी दुखी तो मैं शादी के वक़्त देखि थी कितनी रो रही थी मुझसे आवर गीता दीदी से लिपट लिपट कर ....... अंजलि डायरी को देखते हुआ सोचती है