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अपडेट ..... 89
अर्जुन कुछ देर तक वही बाइक पर बैठा हुआ होता है आवर फिर घर के अंदर आ जाता है
अर्जुन हॉल मैं आकर टीवी ों कर देता है आवर देखने लगता है
अर्जुन बड़ी जल्दी आ गया कॉलेज से क्या बात है
अर्जुन टीवी देख रहा होता है तभी आँचल हॉल मैं आती हुई पूछती है
वही माँ की आवाज़ सुन कर अर्जुन थोड़ा दर कर शर्मा भी जाता है आवर टीवी से नज़र हटा कर माँ की तरफ देखता है जो आँचल मुस्कुराती हुई अर्जुन को देख रही होती है जो अर्जुन को थोड़ा अजीब लगता है की माँ उसे मुस्कुरा कर देख रही है क्या माँ को अपनी पेंटी मैं मेरा पानी नहीं दिखा ... या माँ को पता चलने के बाद भी उनेह मुझपे गुस्सा नहीं आया
मुझे यकीन है मेरा जितना पानी माँ की पेंटी पर था माँ को पता चल गयी होगी ...... अर्जुन मन मैं सोचता है
माँ वह मेरा मन नहीं लग रहा था कॉलेज मैं आज इस लिए घर आ गया .. अर्जुन माँ की चेहरे से नज़र हटा कर बोलता है
अर्जुन बीटा तेरा तबियत तो ठीक है न दिखा मुझे .. आँचल बोलती हुई अर्जुन की गले को टाच कर के देखती है तो पति है अर्जुन बिलकुल ठीक है
माँ मैं ठीक हुईं ... मुझे भूख लगी है ... अर्जुन बोलता है
ठीक है मैं खाना अभी लती हुईं ...... आँचल बोलती है आवर किचेन मैं चली जाती है
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ुछहःछः
आँचल जब किचेन मैं जाती है तो उसे अपनी पेंटी छूट मैं चिपकी हुई होने से थोड़ा अजीब लगती है तो आँचल पेंटी को अलग करने की कोशिश करती है तो आँचल को पकड़ कर आगे की तरफ करती है तभी आँचल को अपनी छूट का बाल भी खींचा जाता है आवर आँचल को अपनी छूट मैं दर्द होती है लेकिन पेंटी अभी भी छूट से चिपकी हुई होती है
आँचल दर्द मैं चीखती हुई वही थोड़ी देर के लिए बैठ जाती है
अह्ह्ह मायआ
ये पेंटी छूट मैं कैसे चिपक गयी
आँचल मन मैं सोचती है आवर फिर किचेन वाले रूम से हॉल मैं अर्जुन की तरफ देखती है जो अर्जुन टीवी देख रहा होता है .... अर्जुन को टीवी देखते हुआ देख कर आँचल वही अपनी साड़ी उठा कर पेंटी को पकड़ कर किसी तरह छूट से हटा देती है जिससे आँचल की छूट की बॉल भी पेंटी मैं चिपकी हुई आ जाती है
ये क्या मेरी पेंटी छूट मैं इतनी कैसे चिपक सकती है ..... ओह्ह गॉड ये क्या है
आँचल अभी मन मैं सोच hi रही होती है तभी आँचल की नज़र पेंटी पर चली जाती है जो पेंटी पर उजली उजली दिख रही होती है
आँचल पेंटी को अपनी आँखों के करीब लेकर देखती है आवर फिर सुख चुकी अर्जुन के मॉल को पेंटी छूती है जो अर्जुन का मॉल पेंटी मैं पूरी तरह चिपक चुकी होती है जब आँचल की ऊँगली मैं वह उजली चीज नहीं आती है तो आँचल पेंटी को अपनी नाक के पास कर के सूंघती है
Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh
ये कैसी बदबू है .... ाएसि बदबू तो मैंने कभी नहीं सूंघी .... क्या ये मेरी छूट से निकली है
कही मैं सोती हुई तो .... नहीं नहीं छूट से निकली होती तो मुझे पता चल hi जाती आवर पेंटी तो मैं धोकर राखी थी फिर मेरी पेंटी मैं ये कैसे लग गयी
आँचल पेंटी सूंघने के बाद मन मैं सोच रही होती है
आँचल पेंटी को पहनते हुआ भी अर्जुन का मॉल नहीं देखि होती है आवर वह कपडे पहन कर सो चुकी होती है जो आँचल को खुद पर सक हो रही होती है मगर आँचल ये भी सो रही होती है अगर वह सोते हुआ झड़ी भी है तो उसे पता कैसे नहीं चल रही है कुछ तो याद आ hi जाती है जो पहले भी आँचल झड़ी होती है सपने मैं तो उसे सुबह पता चल जाता था
आँचल अभी आवर इस बारे मैं नहीं सोचती है आवर अपने पेंटी को वही किचेन मैं रख कर हाथ धोती है आवर अर्जुन के लिए खाना निकल कर चल देती है आवर अर्जुन को खाना देकर वही बैठ कर अर्जुन के साथ टीवी देखने लगती है
अर्जुन बाबू तेरी तबियत ठीक है न ..... गीता हॉल मैं आती हुई बोलती है
गीता की आवाज़ सुन कर आँचल गीता की तरफ देखती है वही अर्जुन कहते हुआ रुक जाता है
गीता बेटी तू आयी क्यू पूछ रही है .... आँचल बोल पड़ती है
माँ वह अर्जुन लांच टाइम मैं hi कॉलेज से घर आ गया न इस लिए दी पूछ रही हुईं .... इस बार अंजलि बोलती है
वही की बात सुन कर आँचल मन hi मन थोड़ी हैरान होती है
क्या अर्जुन पहले से घर आया है हे भगवन कही वह अर्जुन का पानी तो नहीं है
अर्जुन अभी घर आया तो उसके हाथ मैं कोई किताब नहीं तह वह सायद पहले hi घर आ गया था आवर घर का गेट भी खुला था दीदी के जाने के बाद क्या अर्जुन मेरे रूम आया था आवर मेरी पेंटी पर
माँ क्या सोच रही है .... आँचल को सोच मैं दुनिया देख कर अंजलि पूछती है
कक कुछ नहीं जा कपडे बदल कर आ मैं खाना निकलती हुईं ... आँचल बोलती है
वही गीता आवर अंजलि दोनों अपनी अपनी रूम मैं चली जाती है
अर्जुन बीटा तू घर इसके पहले भी आया था ... आँचल सवालिए नज़ारे से घूरती हुई पूछती है
आँचल की दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रही होती है आँचल मन मैं सोचने लगती है के अर्जुन बोल दे की वह घर नहीं आया तह मगर अर्जुन कुछ देर तक जवाब नहीं देता है
अर्जुन के कुछ न बोलते हुआ पाकर आँचल की साख अब यकीन मैं बदलने लगती है आवर आँचल की छूट मैं सिहर सी उठने लगती है ये सोच कर की अर्जुन का पानी उसकी छूट मैं अभी भी लगी हुई है
लेकिन आँचल की दिल अभी भी ये अर्जुन से सुन्ना छह रही होती है के अर्जुन पहले भी घर आया था
अर्जुन बीटा बता नहीं घर आया तह क्या .... आँचल एक बार फिर से पूछती है
सॉरी माँ www वह .... अर्जुन आगे आवर कुछ नहीं बोलता है आवर वह से उठ कर चला जाता है
Sssssssssssssssssssssss
अर्जुन के सॉरी बोल कर जाते हुआ देख कर आँचल अब समझ जाती है वह पानी अर्जुन का है जो नहाते वक़्त मेरे रूम मैं आये था आवर मेरी पेंटी मैं .... ये सोचती हुई हो आँचल की छूट मैं हलचल सी मच जाती है आवर आँचल वही सिहर कर दोनों पेअर फैला देती है जैसे अर्जुन का लैंड hi उसकी छूट मैं चली गयी है
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राखी देवी खेत वाली घर मैं अभी नंगी hi लेती हुई होती है आवर ज़ोर ज़ोर से हांफ रही होती है आवर राखी देवी की चिकनी छूट से पानी बाह कर गांड की दरार मैं जा रही होती है
वही पास मैं बैठी हुई कमला राखी देवी की जिस्म को ललचाई हुई नज़र से देख रही होती है जिसे बस कुछ देर पहले hi मसल मसल कर मालिश की होती है
मालकिन की जिस्म तो दिन पर दिन आवर भी खूबसूरत होती जा रही होती है मालकिन की जिस्म तो जवानी लड़की की जिस्म से भी बढ़ कर है जैसे मालकिन की जवानी तो अब आ रही है
Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhh
कई दिन के बाद मेरी छूट को इतनी आराम मिली है मालकिन की छूट मैं इतनी गर्मी है की मेरी छूट मालकिन की छूट मैं टाच होती hi रोने लगती है
मालकिन की इतनी खूबसूरत जिस्म तो भगवन ने दिया मगर इनकी जवानी एहि बर्बाद हो रही है मालकिन अभी भी चाहे तो कितने जवान लड़के इनकी जिस्म को देख कर शादी करने के लिए बेताब हो जायेंगे
मालकिन की छूट की गर्मी देख कर तो लग रही है मालकिन खुद को जयादा दिन आवर नहीं रोक पाएंगी ... यकीनन कोई गाओं का hi मर्द मालकिन की जिस्म की आग संत कर सकता है
कमला इस तरह क्या घर रही है .... तेरा काम हो गया जा तू अब ....
राखी देवी जब देखती है की कमला बस उनेह hi घूरे जा रही है तो राखी देवी थोड़ी गुस्सा हो जाती है आवर बोल पड़ती है जो कमला भी जल्दी से अपनी साड़ी ठीक करती हुई रूम से निकल जाती है
राखी देवी कुछ देर तक नंगी hi बीएड पर सोइ हुई होती है आवर अपनी जिस्म पर हाथ फेर रही होती है
Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh
राखी देवी की हाथ जैसे hi छूट पे जाती है राखी देवी की सिसकियाँ निकल जाती है राखी देवी तड़पती हुई अपनी पेअर एक दूसरे से मोड लेती है
हे भगवन जी आप ने ये क्या किया मेरे साथ भरी जवानी मैं मुझे तनहा कर दिया आप ने
भगवन जी आप को पता है मैंने आज तक कोई आएसा काम नहीं किया जिससे मेरे दमन पर कोई दाग लगे हां मैंने अपने छोटे भाई के साथ सम्भन्ध बनाया मगर आप को पता है मेरे भाई की हालत क्या है ... हां मगर मुझे उसके साथ सम्भन्ध बना कर मुझे अच्छा लगता था मेरी जिस्म की गर्मी संत हो जाती थी चाहे वह मैंने मज़बूरी मैं किया था
लेकिन आप को मेरी वह भी ख़ुशी नहीं देखि गयी आवर आप ने मुझे छोटे भाई के साथ मेरे बेटे को दिखा दिया ..... जो मैंने अपनी जिगर के टुकड़े को खुद से दूर कर दिया
आप hi बताये क्या मैंने गलत किया था अगर उस वक़्त मैं उसे दूर नहीं करती तो क्या उसे मैं खुद को बेशर्मी उसे दिखती ..... मैं तो चाहती थी मेरे भाई बस ठीक हो जाये आवर आँचल को उसकी ख़ुशी मिल जाये ... लेकिन मुझे ये नहीं पता था उस गलती की वजह से मेरे लाल मुझसे दूर चला जायेगा
भगवन जी मैं अपनी जिस्म की आग मैं जल सकती हुईं मगर मैं अब आएसा कोई काम नहीं करुँगी जो मुझे अपने लाल से दूर होना पड़े
राखी देवी मन hi मन सोच रही होती है आवर राखी देवी की आँखों से आंसू निकल रही होती है
राखी देवी फिर बीएड से उठती है आवर अपनी छूट पर लगी पानी को अपनी पेंटी मैं पोछ कर फिर से वही पेंटी पहन लेती है आवर फिर टाइम देखती है तो शाम होने वाली होती है तो राखी देवी घर की तरफ निकल पड़ती है
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गीता रूम मैं सोइ हुई होती है तभी गीता की फ़ोन बजने लगती है गीता पढ़ रही होती है तो पास मैं बैठी हुई अंजलि नई नंबर देख कर झट से फ़ोन उठा लेती है आवर कुछ बोले बिना hi फ़ोन को कान मैं लगा कर गीता को देखने लगती है
Hello गीता दीदी ..... अंजलि की कान मैं आवाज़ आती है
कौन बोल रहा है ...तुम लड़के हो न ..... अंजलि गीता को देखती हुई बोलती है
अंजलि को बोलते हुआ देख कर गीता अंजलि को घूरने लगती है
गुड़िया फ़ोन दे मुझे .... गीता बोलती हुई फ़ोन लेने के लिए हाथ बढाती है तब तक अंजलि बीएड से उतर जाती है
Hello कौन बोल रहा है बताओगे .... अंजलि फिर से बोलती है
आप अंजलि दी बोल रही है .. उधर से फिर से अंजलि की कान मैं लड़की की आवाज़ आती है
हां मैं अंजलि बोल रही हुईं .... तुम मुझे कैसे जानती हो .... आवर क्या तुम सच मैं लड़की हो वीडियो कॉल करो अभी ..... अंजलि बोल कर फ़ोन काट देती है
वही गीता अंजलि को अभी भी घर रही होती है .....
दीदी मुझे पता है वह लड़का आप किस लड़के से बात करती हो ... अंजलि मुस्कुराती हुई पूछती है
अह्ह्ह्हह डीई अंजलि मुस्कुराती हुई पूछती है hi है की गीता झट से उठ कर बीएड पर से hi अंजलि को पकड़ लेती है आवर पकड़ कर बीएड पर लेता देती है आवर गीता की पीठ पर 2 से 3 बार मार देती है जिसे अंजलि मुंह बना कर बैठ जाती है
तू घोड़ी जैसी होती जा रही है मगर तेरी दिमाग बच्चों जैसी hi है ..... तुझे पता है न मैं लड़कों से बात नहीं करती
गीता अभी बोल रही होती है तभी वीडियो कॉल आ जाती है तो गीता फ़ोन उठा लेती है
वही अंजलि मुंह बना कर दूसरी तरफ देख रही होती है मगर जैसे hi कॉल आता है झट से उठ कर गीता की पीछे चली जाती है ताकि देख सके वह लड़का है या लड़की वही गीता फ़ोन उठा कर फ़ोन निचे रख देती है ताकि अंजलि न देख सके
दीदी अब क्या हुआ दिखाइए मुझे नहीं तो मैं भी आप मरूंगी .... आवर माँ को बता दूंगी आप लड़कों से बात करती हो .... अंजलि एक छोटी बच्ची की तरह बोलती है
वही अंजलि की हरकत को देख कर गीता मुस्कुरा रही होती है
गीता दीदी कुछ दिख रही रहा है
गीता अभी मुस्कुरा hi रही होती है तभी फ़ोन से आवाज़ आ जाती है जो अंजलि भी आवाज़ सुन लेती है
ले तुहि बात कर माँ की चमची .... गीता फ़ोन अंजलि को दे देती है जो अंजलि भी फ़ोन ले लेती है
ही गीता डीई
अंजलि जैसे hi फ़ोन लेकर देखती है तो उसे एक खूबसूरत लड़की दिखाई देती है जो उसे गीता समझ कर ही कर रही होती है
तुम कौन हो आवर वह लड़का कहा है जो मेरी दीदी से बात करना चाहता है .... अंजलि लड़की को देखती हुई बोलती है
वही अंजलि की बात सुन कर गीता अपनी सर पकड़ लेती है
आप अंजलि दीदी हो .... मेरे साथ कोई लड़का नहीं मैं अभी अकेली हुईं आप किस लड़के की बात कर रही है मैं प्रीतमपुरा से बोल रही हुईं आप के बड़े दादा की पोती .... कोमल हुईं मैं
अंजलि की बात सुन कर कोमल थोड़ी हैरान हो रही होती है इस लिए पूरी बात बता देती है ताकि अंजलि यकीन कर सके
क्या तुम प्रीतमपुरा से बोल रही हो .... हां वह प्रीतमपुरा से बोल रही है पागल लड़की
गीता अंजलि से फ़ोन लेती हुईं बोलती है
ही कोमल कैसी हो तुम .... गीता पूछती है
मैं अच्छी हुईं गीता दीदी .. वह अंजलि दीदी किस लड़के की बारे मैं बी रही थी ..... कोमल पूछती है
अरे वह पागल है रे .. अच्छा बताओ तुमको हम लोगों की याद कैसे आई इतने सल्ल मैं कभी हमसे मिलने तो नहीं आये तुम लोग .... गीता पूछती है
दीदी हमेह तो पता hi नहीं था .... वह तो आंटी के आने के बाद पता चला इस लिए मैंने आंटी से फ़ोन नंबर लिया था ...... आप को पता था तो आप कभी हमसे मिलने क्यू नहीं आई ... कोमल थोड़ी मायूस होकर बोलती है
मुझे भी पता नहीं था कोमल ... गीता बोलती है गीता के बात करने के बाद अंजलि भी काफी देर तक कोमल से बात करती है
रात के 10 : पं
दिंनिंग टेबल पर सभी साथ बैठ कर खाना खा रहे होते है अर्जुन तो बस किसी को न देख कर बस खाना खा रहा होता है मगर आँचल आवर राखी देवी बार बार अर्जुन को देख रही होती है जहा राखी देवी की आँखों मैं अर्जुन के लिए बहुत सारा प्यार नज़र आ रही होती है
वही आँचल आँखों मैं अर्जुन के लिए प्यार के साथ एक अजीब सरम भी नज़र आ रही होती है जैसे अर्जुन को आज पहली बार आँचल देख रही है
आँचल खाना कहते हुआ कभी कभी hi अर्जुन को देख रही होती है जो गीता की नज़र आँचल पर पद जाती है जो गीता अकेले मैं पूछने को सोचती है
वही अर्जुन खाना खा कर अपने रूम मैं चला जाता हैं अर्जुन अपने रूम मैं लेटने को होता है तभी उसे याद आता है उसका फ़ोन गीता दीदी की रूम मैं चार्ज लगा है तो अर्जुन फ़ोन लेने के लिए गीता की रूम मैं चला जाता है
अर्जुन गीता दीदी की रूम मैं जाकर अपने फ़ोन लेकर जाने को होता है तभी गीता की फ़ोन पर मस्सगे की आवाज़ सुनता है तो अर्जुन जाकर गीता की फ़ोन देखता है जो वात्सप्प पर कुछ आया हुआ दिखाई देता है अर्जुन को गीता की लॉक पता होती है तो वह लॉक खोल कर वात्सप्प ओपन कर देता है
अर्जुन जैसे hi वात्सप्प ओपन कर के उस नंबर पर टाच करता है कई साडी फोटो लोड होने लगती है आवर एक एक फोटो को देख कर अर्जुन की आँखों मैं एक चमक सी आने लगती है
वाओ ये लड़की है या कोई आसमान की पारी है
अर्जुन तो लड़की की फोटो देख कर एक वक़्त के लिए खुद को hi भूल जाता है आवर एक तक लड़की को देखता रहता है
अर्जुन की आँखें भी नहीं हैट रही होती है अर्जुन लड़की की कभी चेहरे तो कभी लड़की की जिस्म को देख रहा होता है मगर की आँखें बस लड़की की चेहरे पर आकर रुक रही होती है
वही अर्जुन दिल भी ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा होता है
अर्जुन की लाइफ की ये पहली लड़की होती है जिसे देख कर अर्जुन की दिल घंटी बाज़ा चुकी होती है
अर्जुन पहले hi कई साडी एक से बढ़ एक खूबसूरत लड़की को देख चूका होता है मगर इस लड़की की पिछ देख कर अर्जुन की दिल मैं हवस नहीं प्यार आ रहा होता
बाबू क्या देख रहा है .... अर्जुन पिछ देख hi रहा होता है तभी रूम मैं आती हुई अर्जुन को देख कर गीता बोल पड़ती है वही अर्जुन हड़बड़ा कर गीता का फ़ोन लॉक कर देता है आवर फिर चार्ज मैं लगा कर अपना फ़ोन ले लेता है
वह दीदी फ़ोन लेने आया था ... अर्जुन बोलता है आवर फिर बिना गीता की तरफ देख रूम से चला जाता है
अर्जुन हड़बड़ाहट मैं गीता का वात्सप्प पर लॉक कर चूका होता है
____________________________ वही आदि के घर पर
आदि पहले से अच्छा हो चूका होता है अब वह अपने रूम मैं बेचैन होकर घूम रहा होता है आदि की आँखों मैं गुस्सा साफ नज़र आ रही होती है
ये ये यह कैसे पहुँच गयी इसकी ये हालत कैसे हुई ..... वह मक लोग क्या कर रहे थे ...... बस फ़ोन भी नहीं उठा रहे है
बस सभी की मैया छोड़ दूंगा
आदि रूम मैं गुस्से से घूमता हुआ बड़बड़ा रहा होता है
वही चांदनी भी रूम मैं इस वक़्त गुस्से मैं घूम रही होती है
तूने मेरी ज़िन्दगी बर्बाद कर दिया है
मैं तेरी ज़िन्दगी नर्क बना दूंगी मैं तुझे मौत के से बड़ी सजा दूंगी नहीं छोडूंगी तुझे मैं
चांदनी मन मैं सोचती है आवर चांदनी की आँखों मैं गुस्से के साथ आंसू भी बहने लगती है चांदनी रोटी हुई बीएड के निचे बैठ जाती है मगर चांदनी की आँखों मैं बेपनाह गुस्सा भरा हुआ होता है
___________________________ गीता बीएड पर सोइ हुई होती है आवर फ़ोन चला रही होती है तभी गीता की रूम पर कोई धीरे धीरे पीटने लगता है
गीता टाइम देखती है 1 : ऍम बज रहे होते है गीता मुस्कुरा पड़ती है
अभी तो बोल रहा था मन नहीं है देखों फिर भी आ hi गया .... आज तो मैं इसे सुबह तक नहीं छोड़ने वाली हुईं
गीता मन मैं सोचती है आवर उठ कर सिर्फ ब्रा पेंटी मैं hi गेट खोलने चली जाती है
ओह्ह आआ ाआपपपप
गीता जैसे hi गेट खोलती है सामने देख कर हड़बड़ा जाती है आवर जल्दी से भाग कर अपनी नाईट ड्रेस पहन लेती है
गीता बहुत शर्मा भी रही होती है जो अपनी सर निचे कर के देखने लगती है
वही वह सामने कड़ी औरत गीता को घूरती हुई रूम मैं आ जाती है जो गीता की हालत आवर भी ख़राब होने लगती है
_____________________________
अर्जुन कुछ देर तक वही बाइक पर बैठा हुआ होता है आवर फिर घर के अंदर आ जाता है
अर्जुन हॉल मैं आकर टीवी ों कर देता है आवर देखने लगता है
अर्जुन बड़ी जल्दी आ गया कॉलेज से क्या बात है
अर्जुन टीवी देख रहा होता है तभी आँचल हॉल मैं आती हुई पूछती है
वही माँ की आवाज़ सुन कर अर्जुन थोड़ा दर कर शर्मा भी जाता है आवर टीवी से नज़र हटा कर माँ की तरफ देखता है जो आँचल मुस्कुराती हुई अर्जुन को देख रही होती है जो अर्जुन को थोड़ा अजीब लगता है की माँ उसे मुस्कुरा कर देख रही है क्या माँ को अपनी पेंटी मैं मेरा पानी नहीं दिखा ... या माँ को पता चलने के बाद भी उनेह मुझपे गुस्सा नहीं आया
मुझे यकीन है मेरा जितना पानी माँ की पेंटी पर था माँ को पता चल गयी होगी ...... अर्जुन मन मैं सोचता है
माँ वह मेरा मन नहीं लग रहा था कॉलेज मैं आज इस लिए घर आ गया .. अर्जुन माँ की चेहरे से नज़र हटा कर बोलता है
अर्जुन बीटा तेरा तबियत तो ठीक है न दिखा मुझे .. आँचल बोलती हुई अर्जुन की गले को टाच कर के देखती है तो पति है अर्जुन बिलकुल ठीक है
माँ मैं ठीक हुईं ... मुझे भूख लगी है ... अर्जुन बोलता है
ठीक है मैं खाना अभी लती हुईं ...... आँचल बोलती है आवर किचेन मैं चली जाती है
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ुछहःछः
आँचल जब किचेन मैं जाती है तो उसे अपनी पेंटी छूट मैं चिपकी हुई होने से थोड़ा अजीब लगती है तो आँचल पेंटी को अलग करने की कोशिश करती है तो आँचल को पकड़ कर आगे की तरफ करती है तभी आँचल को अपनी छूट का बाल भी खींचा जाता है आवर आँचल को अपनी छूट मैं दर्द होती है लेकिन पेंटी अभी भी छूट से चिपकी हुई होती है
आँचल दर्द मैं चीखती हुई वही थोड़ी देर के लिए बैठ जाती है
अह्ह्ह मायआ
ये पेंटी छूट मैं कैसे चिपक गयी
आँचल मन मैं सोचती है आवर फिर किचेन वाले रूम से हॉल मैं अर्जुन की तरफ देखती है जो अर्जुन टीवी देख रहा होता है .... अर्जुन को टीवी देखते हुआ देख कर आँचल वही अपनी साड़ी उठा कर पेंटी को पकड़ कर किसी तरह छूट से हटा देती है जिससे आँचल की छूट की बॉल भी पेंटी मैं चिपकी हुई आ जाती है
ये क्या मेरी पेंटी छूट मैं इतनी कैसे चिपक सकती है ..... ओह्ह गॉड ये क्या है
आँचल अभी मन मैं सोच hi रही होती है तभी आँचल की नज़र पेंटी पर चली जाती है जो पेंटी पर उजली उजली दिख रही होती है
आँचल पेंटी को अपनी आँखों के करीब लेकर देखती है आवर फिर सुख चुकी अर्जुन के मॉल को पेंटी छूती है जो अर्जुन का मॉल पेंटी मैं पूरी तरह चिपक चुकी होती है जब आँचल की ऊँगली मैं वह उजली चीज नहीं आती है तो आँचल पेंटी को अपनी नाक के पास कर के सूंघती है
Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh
ये कैसी बदबू है .... ाएसि बदबू तो मैंने कभी नहीं सूंघी .... क्या ये मेरी छूट से निकली है
कही मैं सोती हुई तो .... नहीं नहीं छूट से निकली होती तो मुझे पता चल hi जाती आवर पेंटी तो मैं धोकर राखी थी फिर मेरी पेंटी मैं ये कैसे लग गयी
आँचल पेंटी सूंघने के बाद मन मैं सोच रही होती है
आँचल पेंटी को पहनते हुआ भी अर्जुन का मॉल नहीं देखि होती है आवर वह कपडे पहन कर सो चुकी होती है जो आँचल को खुद पर सक हो रही होती है मगर आँचल ये भी सो रही होती है अगर वह सोते हुआ झड़ी भी है तो उसे पता कैसे नहीं चल रही है कुछ तो याद आ hi जाती है जो पहले भी आँचल झड़ी होती है सपने मैं तो उसे सुबह पता चल जाता था
आँचल अभी आवर इस बारे मैं नहीं सोचती है आवर अपने पेंटी को वही किचेन मैं रख कर हाथ धोती है आवर अर्जुन के लिए खाना निकल कर चल देती है आवर अर्जुन को खाना देकर वही बैठ कर अर्जुन के साथ टीवी देखने लगती है
अर्जुन बाबू तेरी तबियत ठीक है न ..... गीता हॉल मैं आती हुई बोलती है
गीता की आवाज़ सुन कर आँचल गीता की तरफ देखती है वही अर्जुन कहते हुआ रुक जाता है
गीता बेटी तू आयी क्यू पूछ रही है .... आँचल बोल पड़ती है
माँ वह अर्जुन लांच टाइम मैं hi कॉलेज से घर आ गया न इस लिए दी पूछ रही हुईं .... इस बार अंजलि बोलती है
वही की बात सुन कर आँचल मन hi मन थोड़ी हैरान होती है
क्या अर्जुन पहले से घर आया है हे भगवन कही वह अर्जुन का पानी तो नहीं है
अर्जुन अभी घर आया तो उसके हाथ मैं कोई किताब नहीं तह वह सायद पहले hi घर आ गया था आवर घर का गेट भी खुला था दीदी के जाने के बाद क्या अर्जुन मेरे रूम आया था आवर मेरी पेंटी पर
माँ क्या सोच रही है .... आँचल को सोच मैं दुनिया देख कर अंजलि पूछती है
कक कुछ नहीं जा कपडे बदल कर आ मैं खाना निकलती हुईं ... आँचल बोलती है
वही गीता आवर अंजलि दोनों अपनी अपनी रूम मैं चली जाती है
अर्जुन बीटा तू घर इसके पहले भी आया था ... आँचल सवालिए नज़ारे से घूरती हुई पूछती है
आँचल की दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रही होती है आँचल मन मैं सोचने लगती है के अर्जुन बोल दे की वह घर नहीं आया तह मगर अर्जुन कुछ देर तक जवाब नहीं देता है
अर्जुन के कुछ न बोलते हुआ पाकर आँचल की साख अब यकीन मैं बदलने लगती है आवर आँचल की छूट मैं सिहर सी उठने लगती है ये सोच कर की अर्जुन का पानी उसकी छूट मैं अभी भी लगी हुई है
लेकिन आँचल की दिल अभी भी ये अर्जुन से सुन्ना छह रही होती है के अर्जुन पहले भी घर आया था
अर्जुन बीटा बता नहीं घर आया तह क्या .... आँचल एक बार फिर से पूछती है
सॉरी माँ www वह .... अर्जुन आगे आवर कुछ नहीं बोलता है आवर वह से उठ कर चला जाता है
Sssssssssssssssssssssss
अर्जुन के सॉरी बोल कर जाते हुआ देख कर आँचल अब समझ जाती है वह पानी अर्जुन का है जो नहाते वक़्त मेरे रूम मैं आये था आवर मेरी पेंटी मैं .... ये सोचती हुई हो आँचल की छूट मैं हलचल सी मच जाती है आवर आँचल वही सिहर कर दोनों पेअर फैला देती है जैसे अर्जुन का लैंड hi उसकी छूट मैं चली गयी है
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राखी देवी खेत वाली घर मैं अभी नंगी hi लेती हुई होती है आवर ज़ोर ज़ोर से हांफ रही होती है आवर राखी देवी की चिकनी छूट से पानी बाह कर गांड की दरार मैं जा रही होती है
वही पास मैं बैठी हुई कमला राखी देवी की जिस्म को ललचाई हुई नज़र से देख रही होती है जिसे बस कुछ देर पहले hi मसल मसल कर मालिश की होती है
मालकिन की जिस्म तो दिन पर दिन आवर भी खूबसूरत होती जा रही होती है मालकिन की जिस्म तो जवानी लड़की की जिस्म से भी बढ़ कर है जैसे मालकिन की जवानी तो अब आ रही है
Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhh
कई दिन के बाद मेरी छूट को इतनी आराम मिली है मालकिन की छूट मैं इतनी गर्मी है की मेरी छूट मालकिन की छूट मैं टाच होती hi रोने लगती है
मालकिन की इतनी खूबसूरत जिस्म तो भगवन ने दिया मगर इनकी जवानी एहि बर्बाद हो रही है मालकिन अभी भी चाहे तो कितने जवान लड़के इनकी जिस्म को देख कर शादी करने के लिए बेताब हो जायेंगे
मालकिन की छूट की गर्मी देख कर तो लग रही है मालकिन खुद को जयादा दिन आवर नहीं रोक पाएंगी ... यकीनन कोई गाओं का hi मर्द मालकिन की जिस्म की आग संत कर सकता है
कमला इस तरह क्या घर रही है .... तेरा काम हो गया जा तू अब ....
राखी देवी जब देखती है की कमला बस उनेह hi घूरे जा रही है तो राखी देवी थोड़ी गुस्सा हो जाती है आवर बोल पड़ती है जो कमला भी जल्दी से अपनी साड़ी ठीक करती हुई रूम से निकल जाती है
राखी देवी कुछ देर तक नंगी hi बीएड पर सोइ हुई होती है आवर अपनी जिस्म पर हाथ फेर रही होती है
Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh
राखी देवी की हाथ जैसे hi छूट पे जाती है राखी देवी की सिसकियाँ निकल जाती है राखी देवी तड़पती हुई अपनी पेअर एक दूसरे से मोड लेती है
हे भगवन जी आप ने ये क्या किया मेरे साथ भरी जवानी मैं मुझे तनहा कर दिया आप ने
भगवन जी आप को पता है मैंने आज तक कोई आएसा काम नहीं किया जिससे मेरे दमन पर कोई दाग लगे हां मैंने अपने छोटे भाई के साथ सम्भन्ध बनाया मगर आप को पता है मेरे भाई की हालत क्या है ... हां मगर मुझे उसके साथ सम्भन्ध बना कर मुझे अच्छा लगता था मेरी जिस्म की गर्मी संत हो जाती थी चाहे वह मैंने मज़बूरी मैं किया था
लेकिन आप को मेरी वह भी ख़ुशी नहीं देखि गयी आवर आप ने मुझे छोटे भाई के साथ मेरे बेटे को दिखा दिया ..... जो मैंने अपनी जिगर के टुकड़े को खुद से दूर कर दिया
आप hi बताये क्या मैंने गलत किया था अगर उस वक़्त मैं उसे दूर नहीं करती तो क्या उसे मैं खुद को बेशर्मी उसे दिखती ..... मैं तो चाहती थी मेरे भाई बस ठीक हो जाये आवर आँचल को उसकी ख़ुशी मिल जाये ... लेकिन मुझे ये नहीं पता था उस गलती की वजह से मेरे लाल मुझसे दूर चला जायेगा
भगवन जी मैं अपनी जिस्म की आग मैं जल सकती हुईं मगर मैं अब आएसा कोई काम नहीं करुँगी जो मुझे अपने लाल से दूर होना पड़े
राखी देवी मन hi मन सोच रही होती है आवर राखी देवी की आँखों से आंसू निकल रही होती है
राखी देवी फिर बीएड से उठती है आवर अपनी छूट पर लगी पानी को अपनी पेंटी मैं पोछ कर फिर से वही पेंटी पहन लेती है आवर फिर टाइम देखती है तो शाम होने वाली होती है तो राखी देवी घर की तरफ निकल पड़ती है
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गीता रूम मैं सोइ हुई होती है तभी गीता की फ़ोन बजने लगती है गीता पढ़ रही होती है तो पास मैं बैठी हुई अंजलि नई नंबर देख कर झट से फ़ोन उठा लेती है आवर कुछ बोले बिना hi फ़ोन को कान मैं लगा कर गीता को देखने लगती है
Hello गीता दीदी ..... अंजलि की कान मैं आवाज़ आती है
कौन बोल रहा है ...तुम लड़के हो न ..... अंजलि गीता को देखती हुई बोलती है
अंजलि को बोलते हुआ देख कर गीता अंजलि को घूरने लगती है
गुड़िया फ़ोन दे मुझे .... गीता बोलती हुई फ़ोन लेने के लिए हाथ बढाती है तब तक अंजलि बीएड से उतर जाती है
Hello कौन बोल रहा है बताओगे .... अंजलि फिर से बोलती है
आप अंजलि दी बोल रही है .. उधर से फिर से अंजलि की कान मैं लड़की की आवाज़ आती है
हां मैं अंजलि बोल रही हुईं .... तुम मुझे कैसे जानती हो .... आवर क्या तुम सच मैं लड़की हो वीडियो कॉल करो अभी ..... अंजलि बोल कर फ़ोन काट देती है
वही गीता अंजलि को अभी भी घर रही होती है .....
दीदी मुझे पता है वह लड़का आप किस लड़के से बात करती हो ... अंजलि मुस्कुराती हुई पूछती है
अह्ह्ह्हह डीई अंजलि मुस्कुराती हुई पूछती है hi है की गीता झट से उठ कर बीएड पर से hi अंजलि को पकड़ लेती है आवर पकड़ कर बीएड पर लेता देती है आवर गीता की पीठ पर 2 से 3 बार मार देती है जिसे अंजलि मुंह बना कर बैठ जाती है
तू घोड़ी जैसी होती जा रही है मगर तेरी दिमाग बच्चों जैसी hi है ..... तुझे पता है न मैं लड़कों से बात नहीं करती
गीता अभी बोल रही होती है तभी वीडियो कॉल आ जाती है तो गीता फ़ोन उठा लेती है
वही अंजलि मुंह बना कर दूसरी तरफ देख रही होती है मगर जैसे hi कॉल आता है झट से उठ कर गीता की पीछे चली जाती है ताकि देख सके वह लड़का है या लड़की वही गीता फ़ोन उठा कर फ़ोन निचे रख देती है ताकि अंजलि न देख सके
दीदी अब क्या हुआ दिखाइए मुझे नहीं तो मैं भी आप मरूंगी .... आवर माँ को बता दूंगी आप लड़कों से बात करती हो .... अंजलि एक छोटी बच्ची की तरह बोलती है
वही अंजलि की हरकत को देख कर गीता मुस्कुरा रही होती है
गीता दीदी कुछ दिख रही रहा है
गीता अभी मुस्कुरा hi रही होती है तभी फ़ोन से आवाज़ आ जाती है जो अंजलि भी आवाज़ सुन लेती है
ले तुहि बात कर माँ की चमची .... गीता फ़ोन अंजलि को दे देती है जो अंजलि भी फ़ोन ले लेती है
ही गीता डीई
अंजलि जैसे hi फ़ोन लेकर देखती है तो उसे एक खूबसूरत लड़की दिखाई देती है जो उसे गीता समझ कर ही कर रही होती है
तुम कौन हो आवर वह लड़का कहा है जो मेरी दीदी से बात करना चाहता है .... अंजलि लड़की को देखती हुई बोलती है
वही अंजलि की बात सुन कर गीता अपनी सर पकड़ लेती है
आप अंजलि दीदी हो .... मेरे साथ कोई लड़का नहीं मैं अभी अकेली हुईं आप किस लड़के की बात कर रही है मैं प्रीतमपुरा से बोल रही हुईं आप के बड़े दादा की पोती .... कोमल हुईं मैं
अंजलि की बात सुन कर कोमल थोड़ी हैरान हो रही होती है इस लिए पूरी बात बता देती है ताकि अंजलि यकीन कर सके
क्या तुम प्रीतमपुरा से बोल रही हो .... हां वह प्रीतमपुरा से बोल रही है पागल लड़की
गीता अंजलि से फ़ोन लेती हुईं बोलती है
ही कोमल कैसी हो तुम .... गीता पूछती है
मैं अच्छी हुईं गीता दीदी .. वह अंजलि दीदी किस लड़के की बारे मैं बी रही थी ..... कोमल पूछती है
अरे वह पागल है रे .. अच्छा बताओ तुमको हम लोगों की याद कैसे आई इतने सल्ल मैं कभी हमसे मिलने तो नहीं आये तुम लोग .... गीता पूछती है
दीदी हमेह तो पता hi नहीं था .... वह तो आंटी के आने के बाद पता चला इस लिए मैंने आंटी से फ़ोन नंबर लिया था ...... आप को पता था तो आप कभी हमसे मिलने क्यू नहीं आई ... कोमल थोड़ी मायूस होकर बोलती है
मुझे भी पता नहीं था कोमल ... गीता बोलती है गीता के बात करने के बाद अंजलि भी काफी देर तक कोमल से बात करती है
रात के 10 : पं
दिंनिंग टेबल पर सभी साथ बैठ कर खाना खा रहे होते है अर्जुन तो बस किसी को न देख कर बस खाना खा रहा होता है मगर आँचल आवर राखी देवी बार बार अर्जुन को देख रही होती है जहा राखी देवी की आँखों मैं अर्जुन के लिए बहुत सारा प्यार नज़र आ रही होती है
वही आँचल आँखों मैं अर्जुन के लिए प्यार के साथ एक अजीब सरम भी नज़र आ रही होती है जैसे अर्जुन को आज पहली बार आँचल देख रही है
आँचल खाना कहते हुआ कभी कभी hi अर्जुन को देख रही होती है जो गीता की नज़र आँचल पर पद जाती है जो गीता अकेले मैं पूछने को सोचती है
वही अर्जुन खाना खा कर अपने रूम मैं चला जाता हैं अर्जुन अपने रूम मैं लेटने को होता है तभी उसे याद आता है उसका फ़ोन गीता दीदी की रूम मैं चार्ज लगा है तो अर्जुन फ़ोन लेने के लिए गीता की रूम मैं चला जाता है
अर्जुन गीता दीदी की रूम मैं जाकर अपने फ़ोन लेकर जाने को होता है तभी गीता की फ़ोन पर मस्सगे की आवाज़ सुनता है तो अर्जुन जाकर गीता की फ़ोन देखता है जो वात्सप्प पर कुछ आया हुआ दिखाई देता है अर्जुन को गीता की लॉक पता होती है तो वह लॉक खोल कर वात्सप्प ओपन कर देता है
अर्जुन जैसे hi वात्सप्प ओपन कर के उस नंबर पर टाच करता है कई साडी फोटो लोड होने लगती है आवर एक एक फोटो को देख कर अर्जुन की आँखों मैं एक चमक सी आने लगती है
वाओ ये लड़की है या कोई आसमान की पारी है
अर्जुन तो लड़की की फोटो देख कर एक वक़्त के लिए खुद को hi भूल जाता है आवर एक तक लड़की को देखता रहता है
अर्जुन की आँखें भी नहीं हैट रही होती है अर्जुन लड़की की कभी चेहरे तो कभी लड़की की जिस्म को देख रहा होता है मगर की आँखें बस लड़की की चेहरे पर आकर रुक रही होती है
वही अर्जुन दिल भी ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा होता है
अर्जुन की लाइफ की ये पहली लड़की होती है जिसे देख कर अर्जुन की दिल घंटी बाज़ा चुकी होती है
अर्जुन पहले hi कई साडी एक से बढ़ एक खूबसूरत लड़की को देख चूका होता है मगर इस लड़की की पिछ देख कर अर्जुन की दिल मैं हवस नहीं प्यार आ रहा होता
बाबू क्या देख रहा है .... अर्जुन पिछ देख hi रहा होता है तभी रूम मैं आती हुई अर्जुन को देख कर गीता बोल पड़ती है वही अर्जुन हड़बड़ा कर गीता का फ़ोन लॉक कर देता है आवर फिर चार्ज मैं लगा कर अपना फ़ोन ले लेता है
वह दीदी फ़ोन लेने आया था ... अर्जुन बोलता है आवर फिर बिना गीता की तरफ देख रूम से चला जाता है
अर्जुन हड़बड़ाहट मैं गीता का वात्सप्प पर लॉक कर चूका होता है
____________________________ वही आदि के घर पर
आदि पहले से अच्छा हो चूका होता है अब वह अपने रूम मैं बेचैन होकर घूम रहा होता है आदि की आँखों मैं गुस्सा साफ नज़र आ रही होती है
ये ये यह कैसे पहुँच गयी इसकी ये हालत कैसे हुई ..... वह मक लोग क्या कर रहे थे ...... बस फ़ोन भी नहीं उठा रहे है
बस सभी की मैया छोड़ दूंगा
आदि रूम मैं गुस्से से घूमता हुआ बड़बड़ा रहा होता है
वही चांदनी भी रूम मैं इस वक़्त गुस्से मैं घूम रही होती है
तूने मेरी ज़िन्दगी बर्बाद कर दिया है
मैं तेरी ज़िन्दगी नर्क बना दूंगी मैं तुझे मौत के से बड़ी सजा दूंगी नहीं छोडूंगी तुझे मैं
चांदनी मन मैं सोचती है आवर चांदनी की आँखों मैं गुस्से के साथ आंसू भी बहने लगती है चांदनी रोटी हुई बीएड के निचे बैठ जाती है मगर चांदनी की आँखों मैं बेपनाह गुस्सा भरा हुआ होता है
___________________________ गीता बीएड पर सोइ हुई होती है आवर फ़ोन चला रही होती है तभी गीता की रूम पर कोई धीरे धीरे पीटने लगता है
गीता टाइम देखती है 1 : ऍम बज रहे होते है गीता मुस्कुरा पड़ती है
अभी तो बोल रहा था मन नहीं है देखों फिर भी आ hi गया .... आज तो मैं इसे सुबह तक नहीं छोड़ने वाली हुईं
गीता मन मैं सोचती है आवर उठ कर सिर्फ ब्रा पेंटी मैं hi गेट खोलने चली जाती है
ओह्ह आआ ाआपपपप
गीता जैसे hi गेट खोलती है सामने देख कर हड़बड़ा जाती है आवर जल्दी से भाग कर अपनी नाईट ड्रेस पहन लेती है
गीता बहुत शर्मा भी रही होती है जो अपनी सर निचे कर के देखने लगती है
वही वह सामने कड़ी औरत गीता को घूरती हुई रूम मैं आ जाती है जो गीता की हालत आवर भी ख़राब होने लगती है
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