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आरती का दुबले बीएड छुऊं.. छुऊं.. करने लगा उधर मेरे धक्के से आरती का चेहरा गोरी से लाल हो चुके थे सेब की तरह और वो अपने होंठो को हलके दांतो से काटते हुए सह रही थी, अब माय भी झड़ने के कगार पे पहुंच गया था और मेरे धक्के भी अब बड़े बड़े हो चुके थे.. और माय अब हाफ रहा था....1 इंच भर निकल के थोड़ा अंदर डालता फिर थोड़ा सा बहार निकल के वापस थोड़ा अंदर डालता आरती इतना तो समझ गई की राधे चाचा का कभी भी गिरने वाला है वो भी बुरी तरह से थक गई थी उसने भी अपने पैरो को मेरे इर्द गिर्द घुमा के कमर पर रख देती है इसी तरह से मेरा मजा दुगना हो गया इधर माय और भी जोश के साथ आरती को किश करते करते छोड़ने लगा.. वही दूसरी तरफ आरती को एक मं के लिए एहसास हुआ की आज उसके पति के इलावा एक गैर मर्द जो उसके बाप के उम्र का है उसके अंदर अपना बीज डालने वाला था और ये एहसास से वो शर्मिंदा होने की..
जगह और ज्यादा एक्ससिटेड हो जाती है.. यह उसके अंदर का रंडी पाना था जो उसे और एक्ससिटेड कर रहा था वही इधर करीब और 15 मं आरती के अंदर धक्के मरने के बाद मैने अपना लुंड पूरी तरह से आरती के अंदर दबा दिया और मैं ने अपने हाँथ आरती के हाथो के निचे से ले जेक उसके कंधे को तितली पकड़ के अपने बदन से पूरा सत्ता लिया जिसकी वजह से आरती के 34 साइज के चुके मेरी काली छाती में पिश से गए वही मैं और भी जोर लगा के उस को अपने लौड़े पे खींच पाया ताकि पिचकारी पूरी की उसकी संस्कारी छूट के बच्चेदानी के अंदर छूटे इधर मेरे ऐसा करने से आरती अपने दोनों गोर नाजुक हांथो को मेरी कमर से दाल के पीठ पर कास ली सायद वो भी समझ गई की थी राधे चाचा अब कभी भी छूट सकते है क्युकी मेरे धक्के इतने तेज और दम दार हो गए थे की आरती का दुबले बीएड ऐसे हिल रहा था जैसे भूकंप आ रहा हो,
उधर आरती मेरे तूफानी धक्के के कारन मेरा लुंड अपने छूट की आखरी चोर तक महसूस कर रही थी और उसे अब फिर से दर्द का अनुभव हुआ जिससे उसके मुँह से आह्ह्ह्ह.. सशह्ह्ह्ह.. हहह्म्म.. ुफ्फूउ.. माआर.. गईई. पलासी.. धीरे.. राधे जी.. ऊह्ह्ह्हह्ह.. ममअअअअ.. औछहहहह.. (आरती को डर भी था की कही बगल क रूम म सोये उसके सास ससुर ये सोर सुन न ले), इधर मैं आह्ह्ह्ह मादरचोद रण्डी तेरी छूट बहुत गरम है साली मेरा लुंड अब तेरी इस छूट की गर्मी को सहन नहीं कर सकती इतना कहते hi मेरा गरमा गरम पानी छूटने लगा वही मेरे गर्म बीज का एहसास अपने अंदर होते hi आरती एक बड़ी सी आह्ह्ह्ह.. निकलते हुए.. राधे जीई.. उफ्फ्फ्फ्फ़. ुंहःहः.. सशह्ह्हह्ह.. ुग्मःहहह.. आह्ह्ह्ह उसका भी गरमा गरम काम राश अंदर छूटने लगा हम दोनों ने एक साथ अपने अपने ऑर्गैनिस्म को हासिल किया और दोनों पूरी तरह से सटिस्फीएड हो चुके थे आरती
तो इतना सटिस्फीएड कभी नहीं हुई थी जितना आज हुई थी और उसे इस चुदाई में जितना दर्द और मजा मिला था वो आज तक उसे अपने पति से कभी नहीं मिल पाया था और आज उसे असली चुदाई का मतलब भी पता चली थी और इतना मजा लेने के बाद आरती पता नहीं क्यों चाहती थी की ये राधे जी से पहली hi सही पर आखरी चुदाई नहीं होगी और मैं तो यही थान के बैठा था की ये पहली चुदाई hi सही आखरी नहीं होगी इस पारी सी दिखने वाली जवान औरत के साथ, आरती अपनी दर्द और मजे से भरी चुदाई के बाद हाफ रही thi...wahi मैं, किला फ़तेह कर के खुस था और मैने जो चाहा था वो मुझे मिल गया था और अपने काळा लौड़े को आरती जैसी जवान खूबसूरत दूध की तरह गोरी लड़की की छूट में लिंग डालने की ख्वाइश पूरी हो चुकी थी.. यहाँ तक की मैने अपना वीर्य भी उसकी छूट में छोड़ दिया था जो मैने कभी सोचा नहीं था और ना hi आरती ने मुझे रोका ऐसा करने
से ये सोच की मैं एक जवान खूबसूरत लड़की के बच्चे दानी में अपना बीज दाल चूका हु मतलब, मेरी बेटी की उम्र की लड़की जो अब मेरे बच्चो की माँ बन सकती है ये सोच कर मेरी खुसी का ठिकाना नहीं रहा था?, वही मैं, अभी भी आरती के अंदर अपना मुसल लुंड दाल के उसके ऊपर लेता हुआ जोर जोर से सांसे ले रहा था, वही मेरा लुंड आरती के छूट में दूसरी बार पानी छोड़ने के बाद अब ढीला पड़ने लगा था इसे देखते हुए मैं, बहु तेरे अंदर लौड़ा डालने का मजा मैं कभी भी नहीं भूल पाउँगा? सच में तुझे छोड़ के मजा आ गया आरती, भी खुद के भावना को रोक नहीं पाई और वो मुझे भी अच्छा लगा राधे जी आपके काम आके माय आपकी hi हूँ?“ इतना बोल के आरती ने मेरे चेहरे को अपने पास खींचा और किश करेने लगी अपने से 22 साल छोटी उम्र की लड़की के होठो पर किश करने का मजा बहुत hi ज्यादा था.
जगह और ज्यादा एक्ससिटेड हो जाती है.. यह उसके अंदर का रंडी पाना था जो उसे और एक्ससिटेड कर रहा था वही इधर करीब और 15 मं आरती के अंदर धक्के मरने के बाद मैने अपना लुंड पूरी तरह से आरती के अंदर दबा दिया और मैं ने अपने हाँथ आरती के हाथो के निचे से ले जेक उसके कंधे को तितली पकड़ के अपने बदन से पूरा सत्ता लिया जिसकी वजह से आरती के 34 साइज के चुके मेरी काली छाती में पिश से गए वही मैं और भी जोर लगा के उस को अपने लौड़े पे खींच पाया ताकि पिचकारी पूरी की उसकी संस्कारी छूट के बच्चेदानी के अंदर छूटे इधर मेरे ऐसा करने से आरती अपने दोनों गोर नाजुक हांथो को मेरी कमर से दाल के पीठ पर कास ली सायद वो भी समझ गई की थी राधे चाचा अब कभी भी छूट सकते है क्युकी मेरे धक्के इतने तेज और दम दार हो गए थे की आरती का दुबले बीएड ऐसे हिल रहा था जैसे भूकंप आ रहा हो,
उधर आरती मेरे तूफानी धक्के के कारन मेरा लुंड अपने छूट की आखरी चोर तक महसूस कर रही थी और उसे अब फिर से दर्द का अनुभव हुआ जिससे उसके मुँह से आह्ह्ह्ह.. सशह्ह्ह्ह.. हहह्म्म.. ुफ्फूउ.. माआर.. गईई. पलासी.. धीरे.. राधे जी.. ऊह्ह्ह्हह्ह.. ममअअअअ.. औछहहहह.. (आरती को डर भी था की कही बगल क रूम म सोये उसके सास ससुर ये सोर सुन न ले), इधर मैं आह्ह्ह्ह मादरचोद रण्डी तेरी छूट बहुत गरम है साली मेरा लुंड अब तेरी इस छूट की गर्मी को सहन नहीं कर सकती इतना कहते hi मेरा गरमा गरम पानी छूटने लगा वही मेरे गर्म बीज का एहसास अपने अंदर होते hi आरती एक बड़ी सी आह्ह्ह्ह.. निकलते हुए.. राधे जीई.. उफ्फ्फ्फ्फ़. ुंहःहः.. सशह्ह्हह्ह.. ुग्मःहहह.. आह्ह्ह्ह उसका भी गरमा गरम काम राश अंदर छूटने लगा हम दोनों ने एक साथ अपने अपने ऑर्गैनिस्म को हासिल किया और दोनों पूरी तरह से सटिस्फीएड हो चुके थे आरती
तो इतना सटिस्फीएड कभी नहीं हुई थी जितना आज हुई थी और उसे इस चुदाई में जितना दर्द और मजा मिला था वो आज तक उसे अपने पति से कभी नहीं मिल पाया था और आज उसे असली चुदाई का मतलब भी पता चली थी और इतना मजा लेने के बाद आरती पता नहीं क्यों चाहती थी की ये राधे जी से पहली hi सही पर आखरी चुदाई नहीं होगी और मैं तो यही थान के बैठा था की ये पहली चुदाई hi सही आखरी नहीं होगी इस पारी सी दिखने वाली जवान औरत के साथ, आरती अपनी दर्द और मजे से भरी चुदाई के बाद हाफ रही thi...wahi मैं, किला फ़तेह कर के खुस था और मैने जो चाहा था वो मुझे मिल गया था और अपने काळा लौड़े को आरती जैसी जवान खूबसूरत दूध की तरह गोरी लड़की की छूट में लिंग डालने की ख्वाइश पूरी हो चुकी थी.. यहाँ तक की मैने अपना वीर्य भी उसकी छूट में छोड़ दिया था जो मैने कभी सोचा नहीं था और ना hi आरती ने मुझे रोका ऐसा करने
से ये सोच की मैं एक जवान खूबसूरत लड़की के बच्चे दानी में अपना बीज दाल चूका हु मतलब, मेरी बेटी की उम्र की लड़की जो अब मेरे बच्चो की माँ बन सकती है ये सोच कर मेरी खुसी का ठिकाना नहीं रहा था?, वही मैं, अभी भी आरती के अंदर अपना मुसल लुंड दाल के उसके ऊपर लेता हुआ जोर जोर से सांसे ले रहा था, वही मेरा लुंड आरती के छूट में दूसरी बार पानी छोड़ने के बाद अब ढीला पड़ने लगा था इसे देखते हुए मैं, बहु तेरे अंदर लौड़ा डालने का मजा मैं कभी भी नहीं भूल पाउँगा? सच में तुझे छोड़ के मजा आ गया आरती, भी खुद के भावना को रोक नहीं पाई और वो मुझे भी अच्छा लगा राधे जी आपके काम आके माय आपकी hi हूँ?“ इतना बोल के आरती ने मेरे चेहरे को अपने पास खींचा और किश करेने लगी अपने से 22 साल छोटी उम्र की लड़की के होठो पर किश करने का मजा बहुत hi ज्यादा था.