अनीता अपनी चुदाई के बारे में सोच hi रही थी की कैसे वह पूरी नंगी डोगग्य स्टाइल में झुकी हुयी है और हरिया भी पूरा नंगा होकर उसके पीछे खड़ा होकर उसे छोड़ रहा है की तभी उसे हरिया का मोटा लम्बा और तगड़ा लुंड का ध्यान आया की उसे कैसा महसूस होगा जब उसका उतना मोटा लम्बा और तगड़ा लुंड उसके अंदर घुसेगा. यह सोचते hi उसकी तेज़ सांस और धड़कन और भी तेज़ हो गयी और छूट की जो बेचैनी थी वह और बढ़ गयी.
अनीता को हरिया देखते हुए bola,"Kaa हुआ मेमसाहेब? का सोच रही हैं आप?"
फिर वह अनीता की चूँचियों को एक नज़र देखते हुए धीरे से bola,"Humse छुड़वाने का सोच रही हैं का आप?"
हरिया का बात सुनकर अनीता अपनी बेहयाई, अपनी बेशर्मी और रणदीपाने का साबुत देती हुयी मुस्कुरा दी और मुस्कुकर कामुक अंदाज़ में उसे देखती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Uhhmm हरिया जी" और फिर अपनी बायीं हाथ पीछे लेजाकर लुंगी के ऊपर से उसके लुंड को पकड़ कर उसपर अपनी हाथ फेरती हुयी वैसे hi रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Yeh सोच रही हूँ हरिया जी की सच में आपके हथियार को बुखार लगा होगा तभी तो मैं जब आयी तो आप अपने हथियार का बुखार चेक कर रहे थे"
हरिया समझ गया अनीता क्या कहना छह रही थी. वह मुस्कुराते हुए अनीता की कमर पर हाथ फेरते हुए एक नज़र उसकी जिस्म पर ऊपर से नीचे तक डालते हुए bola,"Haan मेमसाहेब अपना लौड़ा पकड़ कर उहे चेक कर रहे थे की आपकी यह गरम जवाब जिसम के लिए हमरा लौड़ा में कितना बुखार है"
अनीता यह सुनकर बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी कामुक अंदाज़ में उसे देखती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Bas बुखार देख रहे थे की यह भी सोच रहे थे की इसका बुखार कैसे उतरेगा?"
अनीता यह बोलकर थोड़ा सामने के तरफ झुककर दये हाथ को हरिया के मांग पर रखकर उस पर प्यार से हाथ फेरती हुयी बाये हाथ से उसके लुंड को पकड़ कर ऊपर नीचे करती हुयी कामुक रणदीपाने वाली आवाज़ में बात जारी रखती हुयी puchhi,"Uhhm बताइये न हरिया जी"
अनीता के झुकने से उसके क्लीवेज की गहराई हरिया के आँखों के सामने था जिसे देखकर उसका खून गरम हो गया और उसका असर उसके लुंड पर हुआ. हरिया का लुंड तन तना कर झटका मारा तो अनीता अपनी हाथ में महसूस की. यह महसूस होते hi उसकी छूट में सुरसुरी महसूस हुयी और दिल धड़क गयी. साथ hi उसकी चेहरे पर एक गर्व की भाव आ गई.
हरिया अनीता की क्लीवेज को देखते हुए bola,"Haan मेमसाहेब लौड़ा का बुखार कैसे उतरेगा ु hi सोच रहे थे. दरअसल हम आपका hi फोटो देख रहे थे और आपको छोड़ने का सोचते हुए लौड़ा को बता रहे थे की आपके जइसन गरम जवान औरत के अंदर जब घापा है करते हुए ी ससुरा जायेगा तो अपने आप ीका बुखार उतर जायेगा"
अनीता की चेहरे पर गर्व की भाव आ गयी. वह उसके लुंड को हिलती हुयी उसके मांग पर प्यार से हाथ फेरती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Uhhm हरिया जी"
अनीता के झुकने से उसकी गांड बिस्तर से थोड़ा ऊपर उठ गयी थी. हरिया चुदाई की बात पर अनीता की चेहरे पर बेशर्मी से भरा मुस्कान देख कर उसकी गांड पर चटक से थप्पड़ मार दिया जिससे अनीता चौंक kar,"ouch" करके अपनी आँखें बड़ी करके हरिया को देखकर रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Hariya जी" तो हरिया हसने laga,"Hahaha" तो अनीता भी बेशर्मी से खिलखिलाने lagi,"Hehehe".
अनीता को ऐसे झुककर बेशर्मी से खिलखिलाते देख हरिया का खून खौलने लगा खासकर उसकी गहरी क्लीवेज और लटकी हुयी चूँचियों को हांसे के कारण हिलते हुए देखकर. अनीता देख रही थी की कैसे हरिया उसकी चूँचियों को देखते हुए है रहा था और यह देखती हुयी वह बेशर्मी से खिलखिलाती हुयी हरिया के लुंड को पकड़ी हुयी हिला रही थी.
दोनों है रहे थे की तभी रामु वापस अंदर आया. अनीता उसे देख कर तुरंत हरिया के लुंड से हाथ हटाकर सीढ़ी होती हुयी boli,"Hehehehe रामु जी आइये"
यह सुनकर हरिया सर को पीछे के तरफ थोड़ा घुमा कर रामु के तरफ देखा तो रामु आ पानी का कटोरा लेकर आ रहा था.
अगले पल वह अनीता का आवाज़ suni,"Paani को यहाँ टेबल पर रख दीजिये"
अनीता फिर हरिया को देखती हुयी उसके मांग पर प्यार से हाथ फेरती हुयी boli,"Hariya जी का बुखार उतरना है. बहोत तेज़ बुखार है हरिया जी को"
रामु आकर हरिया के सिरहाने के तरफ रखे टेबल पर पानी का कटोरा रख दिया. हरिया अनीता की बात सुनकर उसकी कमर पर हाथ फेरते हुए उसकी जिस्म को देखते हुए bola,"Memsaheb काटना ख्याल है आपको हमरा बुखार का"
अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Kyun ख्याल नहीं रहेगा हरिया जी. जब आप मेरा इतना ख्याल रख सकते हैं तो क्या मैं इतना नहीं कर सकती"
अनीता फिर अगले पल अपनी बैग से एक रुमाल निकली जिसे हरिया देखकर bola,"Are मेमसाहेब आप अपनी रुमाल कहे खराब कर रही है?"
अनीता यह सुनकर boli,"Are कोई बात नहीं हरिया जी. यह पट्टी के लिए सही होगा. आप बस आराम से लेते रहिये मैं आपके सर पर पट्टी करके बुखार उतार देती हूँ"
हरिया अनीता की कमर सहलाते हुए उसकी बात सुना और फिर नज़र नीचे करके उसकी क्लीवेज, चूँचियों की उभार और उसके नीचे नंगी पेट को देखकर bola,"Theek है मेमसाहेब".
हरिया को ऐसे अपनी जिस्म को खुलकर हवस भरे अंदाज़ से देखते हुए देख अनीता को अपनी जवानी और ख़ूबसूरती पर गर्व हो रहा था. उसे ज़रा भी शर्म नहीं थी की हरिया ऐसे रामु के सामने hi उसकी जिस्म को ऐसे देख रहा है, बल्कि उसे हरिया का हिम्मत और खुलापन और अच्छा लग रहा था.
रामु का ख्याल आते hi अनीता रामु के तरफ देखि तो उसे भी खड़ा होकर अपनी चूँचियों को देखते हुए पायी. अनीता के देखने पर रामु वहां से नज़र ऊपर करके अनीता को देखा तो अनीता बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी कुर्सी के तरफ आँखों से इशारा करके boli,"Aap खड़े क्यों है? बैठिये न"
रामु यह सुनकर सर "हाँ" में हिलाते हुए bola,"Haan मेमसाहेब" तो हरिया मुस्कुराते हुए bola,"Are ससुरा खड़ा होकर खाई का गहराई देख रहा है".
अनीता यह सुनकर हैरानी से अपनी आँखें बड़ी करके हरिया को देखि मगर उसकी चेहरे पर एक मुस्कान थी और वह मुस्कुराती हुयी boli,"Hariya जी?" वहीँ रामु bola,"Are ससुरा का बोलत हो?"
हरिया यह सुनकर हसने laga,"Hahaha" तो अनीता बेशर्मी से मुस्कुराकर हरिया को देखती हुयी सर हिलाई. हरिया उसे देखकर मुस्कुराते हुए अपना नज़र नीचे करके अनीता की चूँचियों और नंगी पेट को देखने लगा तो अनीता बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी रामु को देखकर boli,"Ramu जी हरिया जी की बातों को छोड़िये आप कुर्सी लाकर बैठिये".
रामु यह सुनकर "हाँ" में सर हिलाकर कुर्सी लेकर बिस्तर के बगल में बैठ गया. वहीँ अनीता रुमाल लेकर हरिया के तरफ झुककर उसके सिरहाने के तरफ रखे टेबल पर कटोरा के पानी में रुमाल गीला करने लगी. ऐसे झुकने से उसकी बड़ी बड़ी चूँचियाँ हरिया के चेहरे के ऊपर कुछ इनचेस के फासले पर थी. हरिया को फिर से अनीता की चूँचियों को ऐसे अपनी चेहरे से कुछ इनचेस के फासले पर देखकर उसका लुंड बौखलाने लगा ौड सांस तेज़ होने लगा जिसे अनीता अपनी चूँचियों पर महसूस की.
अनीता रुमाल को गीला करके हरिया के मांग पर डाली की तभी बिजली चली गयी. बिजली जाने पर अनीता ऊपर पंखे के तरफ देखि वहीँ हरिया bola,"Are ससुरा ी बिजली को अभी hi जाना था जब मेमसाहेब आयी है तब".
अनीता यह सुनकर हरिया को देखि और मुस्कुरा कर boli,"Ab हरिया जी बिजली को क्या पता की मैं आयी हूँ हेहेहे". अनीता की बात सुनकर हरिया हंस diya,"Hahaha" और रामु भी मुस्कुरा दिया. अनीता कुछ सेकण्ड्स बाद उसके फिर से रुमाल उसके मांग से उठाकर सामने झुककर गीला करने लगी तो हरिया उसकी चूँचियों को फिर से हवस भरे नज़र से देखते हुए गरम सांस छोड़ने लगा जिसे अनीता अपनी क्लीवेज पर महसूस कर पा रही थी. वहीँ रामु भी पास में बैठा साइड से अनीता की बड़ी चूँचियों को लटके हुए देख रहा था और साथ hi पीछे उसकी लगभग पूरी नंगी पीठ देख रहा था. इतनी गोरी चिकनी पीठ और बाद बड़ी चूँचियों को ऐसे लटका देख रामु के बूढ़े लुंड में भी बेचैनी आने लगा था और खड़ा होने लगा था.
अनीता वापस सीढ़ी होकर रुमाल को हरिया के मांग पर रख दी.
बिजली जाने से गर्मी के कारण अनीता की गोरी चिकनी बदन पर पसीना आने लगा और उसकी गोरी जिस्म में हल्का गुलाबीपन आने लगा. उसकी क्लीवेज में एक बून्द पसीना घुसने लगा तो हरिया उसकी नंगी कमर सहलाते हुए bola,"Memsaheb गर्मी से आपका बदन पसीना से भीगने लगा. ससुरा हम ग़रीब लोगन का घर में इहे परेशानी होता है"
अनीता यह सुनकर थोड़ी नाराज़गी से हरिया को देखकर boli,"Offo हरिया जी फिर से अमीर ग़रीब की बात. अरे थोड़ा देर गर्मी में रह लुंगी तो क्या जो जायेगा?"
फिर वह प्यार से हरिया के बालो में उँगलियाँ फेरती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Aur ऐसे भी आप तो खुद बोल रहे थे की मेमसाहेब गरम है. अब मैं गरम हूँ तो गर्मी तो लगेगी hi न"
हरिया यह सुनकर हंस दिया "हाहाहा" तो अनीता भी बेशर्मी से मुस्कुराई और फिर अपनी नज़र रामु के तरफ ले गयी जो की उसे देखते हुए मुस्कुरा रहा था.
अगले पल हरिया उसकी कमर सहलाते हुए bola,"U तो है मेमसाहेब".
अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी उसे देखि तो वह उसकी कमर सहलाते हुए उसकी जिस्म को एक बार ऊपर से नीचे तक देखने लगा, उसकी क्लीवेज, उसकी चूँचियों की उभर और उसके नीच नंगी चिकनी और सपाट पेट जिसके बीच नाभि में चमकती हुयी बेल्ली बटन रिंग लटकी थी और देखते हुए bola,"Aap गरम तो हैं hi"
अनीता चुप चाप हरिया को देखती हुई अपनी हाथ उसके मांग पर रखकर गीले रुमाल को उठाई और झुककर सिरहाने के पास रखे टेबल पर पानी के कटोरी में रुमाल को डालकर उसे फिर से भीगने लगी. ऐसे झुकने से अनीता की दोनों बड़ी बड़ी चूँचियाँ हरिया के चेहरे के ऊपर कुछ इंच के फासले पर लटक गयी. हरिया का सांस यह देखकर तेज़ हो रहा था जिसे अनीता अपनी क्लीवेज पर महसूस कर पा रही थी मगर वह बिना कोई शर्म या झिजक के वैसे hi झुकी हुयी रुमाल को गीला कर रही थी.
अनीता रुमाल को निचोड़ कर सीढ़ी हो hi रही थी उसे एहसास हुआ की वह पसीना का बंध उसकी क्लीवेज की गहराईयों से फिसल रहा था और जैसे hi वह सीधा होने वाली थी की तभी वह पसीना का बंध उसकी चूँचियों की उभर से अलग होते हुए महसूस हुआ. वह सीधे होती हुयी हरिया को देखि तो हरिया के होंठों पर पानी का बंध था. अनीता को समझ आ गया की उसकी क्लीवेज से पसीना का बंध हरिया के होंठों पर hi गिरा.
अनीता यह देखती हुयी boli,"Are हरिया जी मैं पोंछ देती हूँ" मगर हरिया तभी मुस्कुराते हुए अपना ज़बान निकाल कर वह चाट गया. अनीता बेशर्मी से अपनी आँखें पहाड़ कर हरिया को देखती हुयी मुस्कुराकर boli,"Hariya जी यह क्या किया आपने? ऐसे कोई करता है क्या?"
हरिया मुस्कुराते हुए उसकी कमर सहलाते हुए bola,"Are मेमसाहेब का हो गवा तो". अनीता बस अपनी सर हिलाकर उसे देखि और फिर उसके मांग पर रुमाल रखकर प्यार से उसके सर के बालों में उंगलियां फेरने लगी. हरिया फिर से देखा की अनीता की गर्दन से होते हुए पसीने की बूंदें नीचे सदाकने लगा.
हरिया यह देखकर बोलै अनीता की कमर सहलाते हुए bola,"Memsaheb आपकी बदन का गर्मी मिटाना ज़रूरी है"
अनीता यह सुनकर हरिया के आँखों में देखि तो वह भी अनीता की आँखों में देखकर उसकी क्लीवेज के तरफ आँखों से इशारा kiya,"Dekhiye कितना पसीना से आप भीग रही है"
इससे पहले अनीता कुछ बोलती या रियेक्ट करती हरिया रामु के तरफ देखते हुए bola,"Are ससुरा रामु सिर्फ मेमसाहेब का पसीना hi देखेगा की मेमसाहेब का गर्मी मिटने का भी सोचेगा".
अनीता यह सुनकर रामु के तरफ देखि जो अब हरिया के तरफ देखकर उसका बात सुन्न रहा था.
हरिया रामु को bola,"Are ु हाथ पंखा लेकर आओ तो".
फिर वह अनीता की क्लीवेज को देखते हुए उसके तरफ आँखों से इशारा करके bola,"Dekh रहे हो की मेमसाहेब पसीने से भीग रही है, कैसे उनका गोरा दूध जैसा बदन गर्मी से लाल हो रहा है लेकिन कउनो इंतज़ाम नहीं कर रहे हो"
अनीता देखि की कैसे हरिया उसकी जिस्म को देखते हुए पसीने की बात कर रहा है मगर उसे ना hi कोई ऐतराज़ हो रहा था न hi कोई शर्म आ रही थी. बल्कि उसे अच्छा लग रहा था की हरिया उसके जिस्म पर पसीना देखकर उसे आराम देने के लिए पंखे का इंतज़ाम करने के लिए बोल रहा था.
रामु यह सुनकर उठते हुए bola,"Haan हम लाता हूँ".
यह बोलकर वह उठकर कमरे के बिस्तर के सिरहाने के तरफ के एक कोने में दीवार से लटकाये हुए हाथ के पंखे को लेने चला गया.
इतने में अनीता उसके मांग से रुमाल उठाकर फिर से सामने झुककर रुमाल को भीगने लगी. ऐसा करने से अनीता की बड़ी बड़ी चूँचियाँ जो ब्लाउज में दो तिहाई कैद और एक तिहाई बाहर थी वह हरिया के चेहरे के ऊपर कुछ इनचेस के फासले पर लटक गयी. हरिया उसे पुरे हवस से देखने लगा. ऐसा होने से उसका सांस तेज़ हो गया जिसे अनीता अपनी क्लीवेज पर महसूस करने लगी.
अनीता रुमाल को भीगा कर निचोड़ रही थी की तभी वह नज़र उठाकर सामने देखि तो रामु को अपनी क्लीवेज की गहराईयों में देखते हुए देखि. सिरहाने के तरफ होने से जब अनीता झुकी तो उसकी क्लीवेज की गेहरिया रामु के आँखों के सामने था और वह जैसे hi पंखा उतर कर घुमा तो उसका नज़र अनीता की क्लीवेज की गहराईयों में गया और वह वैसे hi खड़ा हुए देखने लगा.
जैसे hi रामु को एहसास हुआ की अनीता उसे देख रही है तो वह नज़र उसकी क्लीवेज की गहराईयों से हटाकर उसकी चेहरे पर देखा तो अनीता बेशर्मी से मुस्कुरा दी. अनीता को ऐसे बेशर्मी से मुस्कुराते देख रामु भी मुस्कुरा दिया. अनीता कुछ नहीं बोली और रुमाल निचोड़ कर सीधा होकर हरिया के मान पर रखकर एक नज़र रामु के तरफ देखि तो उसे पंखा लेकर आते हुए देखि.
इतने में हरिया अनीता की कमर पर हाथ फेरते हुए उसकी क्लीवेज में बहते हुए पसीने को देखकर bola,"Uff मेमसाहेब काटना दूध जइसन गोरा बदन है आपका की गर्मी में लाल हो रहा है"
अनीता यह सुनकर बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी boli,"Hariya जी अच्छी नहीं लग रही क्या मैं ऐसे लाल हो जाने से?"
हरिया यह सुनकर उसकी कमर सहलाते हुए bola,"Are मेमसाहेब कइसन बात बोलत हैं आप" फिर वह अनीता की जिस्म को हवस से देखने के बाद उसे देखकर धीरे से bola,"Aap अच्छी नहीं लगे ी हो सकत है. ु तो हम आपको जो गर्मी लगत है ुका बात बोलत हूँ की कैसे गर्मी से आपका ी गोरा" फिर वह आँखों से अनीता की चूँचियों के तरफ इशारा करके bola,"doodh जइसन बदन लाल हो गवा है".
अनीता यह सुनकर बेशर्मी से मुस्कुरा कर उसे देखि तब तक रामु पंखा लेकर आते हुए bola,"Haan मेमसाहेब आपका गोरा बदन गर्मी से लाल होने लगा है"
अनीता यह सुनकर रामु को देखि तो उसे अपनी क्लीवेज में झांकते हुए देखि. अगले पल रामु bola,"Hum पंखा से हवा कर देता हूँ आपको"
अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर उसे देखकर boli,"Sach में आप और हरिया जी कितना ख्याल रखते हैं मेरा. कुछ भी हो जाये आप दोनों मेमसाहेब को कोई तकलीफ होने नहीं देंगे".
हरिया यह सुनकर bola,"Are मेमसाहेब अब हमलोगां जइसन मरद के होते हुए आपको कउनो चीज़ का तकलीफ होये ी तो हमरे मर्दानगी पर ठु है"
हरिया यह बोलकर रामु को देखकर bola,"Kaa रामु?"
रामु कुछ बोलता इससे पहले अनीता यह सुनकर आँखें बड़ी करके boli,"Offo हरिया जी आप और आपकी बातें".
हरिया यह सुनकर मुस्कुराया और फिर रामु से bola,"Are ससुरा अब देखत का हो? पंखा करो मेमसाहेब को".
अगले पल हरिया अपना हाथ अनीता की क्लीवेज के तरफ लेजाकर वहां बहती हुयी पसीने की एक बंध को अपनी उँगलियों से पोंछकर bola,"Dekh रहे हो की मेमसाहेब को पसीना आ रहा है मगर पंखा नहीं कर रहे हो"
अनीता देखि की कैसे हरिया रामु के सामने उसकी क्लीवेज की शुरुआत में ऊँगली से पसीने को पोंछा मगर वह कोई ऐतराज़ नहीं की और न hi चेहरे पर शर्म थी.
रामु यह सुनकर bola,"Haan करात हूँ" और वह खड़ा होकर अनीता की जिस्म पर पंखा करने लगा. ठंडी हवा मिलने पर अनीता को राहत मिला और वह मुस्कुराकर रामु को देखकर boli,"Ramu जी खड़े क्यों हैं आप, बैठिये न"
रामु यह सुनकर कुर्सी पर बैठ गया. अनीता हरिया के मांग से रुमाल हटाकर फिर से झुककर रुमाल गीला करने लगी. हरिया वैसे hi उसकी लटकी हुयी चूँचियों को हवस से देखते हुए गरम सांस छोड़ने लगा जिसे अनीता अपनी क्लीवेज पर महसूस कर रही थी. साथ hi वह अपनी जिस्म पर पंखा का हवा महसूस कर रही थी. रामु भी अनीता की लटकी हुयी चूँचियों को साइड से देखते हुए उसकी नंगी गोरी पीठ को देखते हुए पंखा कर रहा था.
अनीता जब वापस सीढ़ी होकर हरिया के मांग पर रुमाल राखी तो उसकी क्लीवेज में एक बंध पसीना फिर से फिसलने लगा. हरिया यह देखकर अपना ऊँगली ले जाकर उसे पोंछकर bola,"Memsaheb अभी भी पसीना हो रहा है" फिर वह उसकी कंधे के तरफ आँखों से इशारा करके bola,"Yeh पल्लू खोलकर पिछले दिन के तरह आराम से बैठिये न. आपको वैसे आराम मिलेगा"
रामु यह सुनकर हरिया को देखा और फिर अनीता को. अनीता अपनी बेशर्मी, बेहयाई और रणदीपाने का साबुत देती हुयी हरिया से boli,"Hariya जी थोड़ी बहोत पसीना तो आएगा hi, गर्मी जो है"
हरिया यह सुनकर bola,"Haan मेमसाहेब लेकिन ी खोलकर बैठिएगा तो आपको आराम मिलेगा"
अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर अपनी सर हिलती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Hariya जी मेमसाहेब को थोड़ा भी तकलीफ में आप देख नहीं सकते हैं है न? बस मेमसाहेब का आराम का ख्याल रहता है आपको"
हरिया उसकी कमर पर हाथ फेरते हुए bola,"Ab हमरी मेमसाहेब है hi ऐसी तो कहे आराम का ख्याल नहीं रखूँगा हम. का रामु ठीक बोले की नहीं हम?"
रामु भी मुस्कुरा कर bola,"Haan मेमसाहेब, खोल दीजिये न ुका आपको आराम मिलेगा"
अनीता यह सुनकर रामु को देखकर boli,"Aap और हरिया जी भी न, बस मेमसाहेब की आराम का hi ख्याल रहता है. आप लोग भी तो पसीने में भीगने लगे हैं".
हरिया यह सुनकर मुस्कुरा कर bola,"Are मेमसाहेब हम मज़दूर लोग हूँ, गर्मी का आदत है. आप देखिये काटना नाज़ुक बदन है आपका, गर्मी से पूरा लाल हो रहा है"
अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Achha ठीक है हरिया जी लेकिन देख तो रहे हैं की मेरी हाथ पानी से भीगा हुआ है".
फिर वह अपनी कंधे के तरफ आँखों से इशारा करके boli,"Aap hi खोल दीजिये न"
हरिया यह सुनकर bola,"Haan मेमसाहेब हम खोल डेट हैं".
हरिया फिर हाथ बढ़ा कर अनीता की बायीं कंधे पर पिन किया हुआ पल्लू के पिन को खोल दिया और उसकी पल्लू सड़क कर बिस्तर पर गिर गयी. अनीता यह देखके मुस्कुरा कर boli,"Thank यू हरिया जी"
हरिया उसकी चूँचियों की उभर और क्लीवेज देखकर bola,"Are मेमसाहेब थेंकु का का ज़रूरत है. हम तो हूँ hi आपके मदद के लिए".
फिर वह पिन को अपने सिरहाने वाले टेबल पर रख दिया. अनीता अगले पल उसके मांग से रुमाल उठाकर झुक कर रुमाल को गीला करने लगी और फिर सीढ़ी होकर उसके मांग पर रख दी.
अनीता हरिया के मांग पर रुमाल रख रही थी की तभी हरिया रामु से bola,"Abe ससुरा देख नहीं रहा है की मेमसाहेब का"
फिर वह अनीता की चूँचियों के तरफ आँखों से इशारा करते हुए bola,"Eehan काटना गर्मी है". फिर वह रामु के हाथ से पंखा लेते हुआ bola,"Do हम पंखा करता हूँ" और यह बोलकर वह उसके हाथ से पंखा लेकर अनीता की चूँचियों के सामने पंखा हिलने लगा जिससे उसकी चूँचियों पर सीधा हवा लगे. अनीता जब अपनी चूँचियों पर हवा महसूस की तो उसे अच्छा लगा.
सच तो एहि था की अनीता की ऊपरी जिस्म में अगर कपडा कहीं थी तो वह चूँचियों के ऊपर hi थी, पीठ तो लगभग नंगी थी. ऐसे में अनीता को सबसे ज़्यादा गर्मी उसकी चूँचियों में hi लग रही थी और हरिया का यह बोलना की उसकी चूँचियों में कितनी गर्मी है यह सुनकर अनीता को अच्छा लगा की हरिया हालात को समझते हुए उसकी चूँचियों के ऊपर हवा कर रहा था.
कोई और औरत होती तो यह सब होने से शर्म आता उसे मगर यह तो अनीता थी जिसके अंदर शर्म नाम की चीज़ नहीं थी और वह हरिया का यूँ उसकी चूँचियों के सामने पंखा करना उसकी समझदारी लगा. अनीता को राहत मिल रही थी ऐसे पंखा का हवा अपनी चूँचियों पर महसूस करने से.
वह फिर से रुमाल को उठाकर झुककर रुमाल गीला करके सीढ़ी होकर अपनी क्लीवेज और चूँचियों पर हवा महसूस करती हुई हरिया के मांग पर रुमाल रख रही थी की तभी हरिया अपना बाय हाथ उसकी चूँचियों के तरफ बढ़ा कर बातो चूंकि की ऊपरी भाग जो ब्लाउज के बाहर थी उस पर से बाल का लत हटाने लगा.
अनीता के झुकने से बाल का एक लत्त सामने उसकी चूँचियों पर गिर गयी थी. हरिया यह देखकर बाय हाथ वहां लेजाकर अपनी उँगलियों से अनीता की चूँचियों से सत्ता हुआ बाल का वह लत्त हटाया तो अनीता मुस्कुराकर नीचे देखि और बाल का वह हिस्सा पकड़ा कर पीछे कर दी. अगले पल हरिया उसकी क्लीवेज की गहराई में फंसे बाल के एक लत को देखकर अपने बाये हाथ का अंगूठा और इंडेक्स फिंगर को उसकी क्लीवेज की गहराई के शुरुआत में डालकर बाल को पकड़ कर निकालते हुए bola,"Paseena से पूरा भीग गवा है मेमसाहेब इसलिए ससुरा बाल सात जा रहा है"
अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर उस बाल को पकड़ कर पीछे के तरफ करती हुयी boli,"Haan हरिया जी मगर आप तो अब पंखा कर दे रहे हैं तो आराम मिल रहा है"
हरिया को ऐसे अपनी चूँचियों के ऊपरी भाग और क्लीवेज पर ऊँगली रखकर बाल हटते देख, वह भी रामु के सामने, अनीता की चेहरे पर न hi कोई शर्म थी और न hi झिझक.
हरिया यह सुनकर bola,"memsaheb थोड़ा झुक जाइये न, अच्छे से हवा कर देते हैं".
अनीता यह सुनकर बिना शर्म के थोड़ा सा झुक गयी और हरिया उसकी क्लीवेज के ऊपर हवा करने लगा जिससे अनीता को आराम मिल रहा था. अपनी क्लीवेज की गहराईयों में हवा महसूस करके अनीता को अच्छा लग रहा था और हरिया के इस अंदाज़ से वह इम्प्रेस्सेड हो रही थी. वह प्यार से हरिया के बाल में उँगलियाँ फेरकर उसके मांग से रुमाल उठाई और फिर से सामने झुककर रुमाल गीला करने लगी. ऐसा करने से उसकी चूँचियाँ ठीक हरिया के चेहरे के ऊपर लटक गयी.
ऐसा होने से हरिया अनीता की चूँचियों पर पंखा नहीं कर सकता था तो वह अनीता के पीछे पीठ पर पंखा करने लगा. अनीता अपनी नंगी पीठ पर हवा महसूस की तो उसे राहत मिली.
रामु का खून यह सब देखकर खौल रहा था की कैसे अनीता के झुकने पर उसकी बड़ी बड़ी चूँचियाँ ब्लाउज में कैद hi लटक रही थी और उसकी गोरी चिकनी पीठ पूरी नंगी हल्का पसीने से चमक रही थी. इतनी खूबसूरत और सेक्सी औरत को ऐसे देखकर अगर किसी का खून नहीं खौलता तो वह मर्द हो hi नहीं सकता था.
अनीता वापस सीधा होकर रुमाल को हरिया के मांग पर रखने लगी तो हरिया वापस पीठ से पंखा सामने चूँचियों पर झलने लगा तो अनीता बेशर्मी से थोड़ा झुक गयी और हरिया उसकी क्लीवेज के पास पंखा झलने लगा तो अनीता मुस्कुराकर हरिया को देखि.
हरिया अनीता से puchha,"memsaheb आराम मिल रहा है तो?"
अनीता मुस्कुराकर boli,"Haan हरिया जी".
फिर वह अपनी बायीं हाथ पीठ के तरफ लेजाकर boli,"Ramu जी वह मेरा बैग से एक टिश्यू पेपर लाकर दीजियेगा तो. पीछे पीठ पर पसीना हो रहा है"
रामु यह सुनकर उठा और टेबल पर रखे बैग के सामने वाले चैन से टिश्यू पेपर निकाल कर लायक और साथ hi एक पेपर लेकर आया और bola,"Memsaheb हम पीछे ी अखबार से पंखा कर डेट हूँ"
अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Are रामु जी आप दोनों कितना परेशां होंगे मेरी वजह से"
हरिया जो अनीता जी बात सुनकर उसकी पीठ पर पंख कर रहा था वह bola,"Are मेमसाहेब रामु ठीक तो कहत है. ी में परेशानी का का बात है. आपको एक में रहने का आदत है और इहाँ पंखा भी नहीं चल रहा है. फिर वह उसकी क्लीवेज हुए नंगी पेट के तरफ आँखों से इशारा करते हुए bola,"Dekhiye कैसे गर्मी से पूरा बदन आपका लाल हो रहा है. हम दोनों के रहते हुए आपको परेशानी होगा ी हुंका अच्छा नहीं लगेगा".
अगले पल रामु bola,"Are मेमसाहेब का पीठ भी पूरा लाल हो गवा है"
अनीता यह सुनकर रामु को देखि जो उसकी नंगी पीठ को देख रहा था. हरिया यह सुनकर bola,"Dekhiye मेमसाहेब पीछे भी लाल हो गवा है. थोड़ा हवा लगेगा तो आपको आराम मिलेगा"
अनीता यह सुनकर रामु से puchhi,"Bahot ज़्यादा लाल हो गया है क्या रामु जी?"
रामु यह सुनकर अनीता की नंगी पीठ को देखकर bola,"Nahin मेमसाहेब बहोत ज़्यादा नहीं हुआ है मगर आपका अटना दूध जइसन गोरा बदन है की थोड़ा रंग बदलने से साफ़ साफ़ पता चल रहा है"
हरिया यह सुनकर bola,"Haan मेमसाहेब आपका बदन पूरा दूध जइसन है"
अनीता के हल्का झुकने से उसकी क्लीवेज की गहराई दिख रही थी. हरिया वही देखते हुए यह बात बोलै तो अनीता हरिया का बात सुनकर मुस्कुराकर boli,"Hariya जी?" तो हरिया मुस्कुरा दिया और bola,"Kaa रामु कुछो ग़लत बोलै हूँ का हम?"
अनीता यह सुनकर रामु के तरफ देखि जो उसकी क्लीवेज की गहराई को देखते हुए bola,"Nahin हरिया हम भी तो उहे बोलत हूँ की मेमसाहेब का बदन दूध जइसन है"
रामु यह बोलकर नज़र ऊपर करके अनीता को देखकर मुस्कुरा दिया तो अनीता की चेहरे पर भी एक मुस्कराहट थी और साथ hi एक गर्व की भाव थी. उसे अपनी जवानी, जिस्म की ख़ूबसूरती और जिस्म की उतर चढाव पर गर्व हो रहा था और साथ hi इस बात पर गर्व हो रहा था की वह दो ऐसे मर्द के साथ थी जो अपने दिल की बात बोलने से झिझक नहीं रहे थे और जो भी देख रहे थे उसे खुलकर बोल रहे थे.
अनीता रामु को देखकर मुस्कुराकर एक कामुक अंदाज़ में boli,"Achha ठीक है रामु जी. लेकिन अब मेमसाहेब का"
फिर वह अपनी बेशर्मी, बेहयाई और रणदीपाने का साबुत देती हुयी अपनी चूँचियों के तरफ आँखों से इशारा करके मुस्कुराकर boli,"doodh जैसा बदन सिर्फ देखेंगे hi या पंखा भी करेंगे?"
हरिया यह सुनकर है diya,"Hahaha मेमसाहेब ठीक बोले आप, ससुरा सिर्फ देख रहा है कुछो मदद नहीं कर रहा है"
रामु भी अनीता की बेहयाई, बेशर्मी और रान्दीपना देखकर मुस्कुरा दिया मगर अनीता का रान्दीपना उसे अगले पल फिर देखने को मिला जब वह हरिया के बात पर मुस्कुराकर boli,"Haan हरिया जी, आप जब देखे की"
फिर वह अपनी चूँचियों के तरफ आँखों से इशारा करके मुस्कुराकर boli,"idhar पसीना है तो कैसे आप इधर पंखा करने लगे"
फिर वह रामु को देखकर मुस्कुराकर boli,"Aur रामु जी पंखा करने की बात करके बस देख रहे हैं"
रामु यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Are मेमसाहेब हम अभी कर देते हैं पीछे पंखा"
अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Are रामु जी कोई बात नहीं आराम से कीजिये मैं तो बस मज़ाक कर रही थी?"
हरिया यह सुनकर है दिया तो अनीता भी खिलखिलाने लगी. रामु भी मुस्कुरा दिया. अनीता के हसने से उसकी बड़ी बड़ी चूँचियाँ हिलने लगी और रामु और हरिया का ध्यान उस पर hi चला गया.
अनीता की बाल की एक लत वापस उसकी क्लीवेज में फँस गयी तो वह हस्ती हुयी अपनी क्लीवेज के तरफ देखि और अगले पल हरिया का हाथ भी वहां देखि. हरिया उसकी क्लीवेज में ऊँगली घुसकर बाल को बाहर किया तो अनीता उसे पकड़ कर मुस्कुराती हुयी हरिया को देखकर कान के पीछे करने लगी.
तभी अनीता अपनी पीठ पर टिश्यू पेपर महसूस करके रामु के तरफ देखि जो उसकी पीठ से पसीना पोंछने लगा था और दूसरे हाथ से अखबार को हिलालकर पंखा कर रहा था. अनीता यह देखकर boli,"Ramu जी आराम से पीछे बैठ जाइये न. आपको पसीना पोंछने में आराम मिलेगा"
रामु यह सुनकर कुर्सी को थोड़ा एडजस्ट करके बीएड के पास ऐसे रखा की उस पर बैठ कर अनीता की पीठ उसके सामने हो.
रामु को ऐसे अनीता की नंगी पीठ इतने करीब से देखकर धड़कन और सांस तेज़ हो गया और लुंड में बेचैनी होने लगा. धोती में उसका लुंड हिलने लगा था.
वह टिश्यू पेपर लेकर अनीता की पीठ पोंछते हुए अखबार से पंखा करने लगा जिससे अनीता को राहत मिली और सामने से हरिया उसकी चूँचियों पर तो पंखा कर hi रहा था.
रामु धीरे अनीता की पीठ को पोंछने लगा. हरिया भी अपना सर घुमा कर टेबल के तरफ देखा और अनीता को पर्स से एक टिश्यू पेपर निकालकर अनीता की क्लीवेज पोंछने लगा. अनीता कुछ नहीं बोली और उसके मांग से रुमाल उठाकर झुककर रुमाल गीला करने लगी. रामु इस बीच उसकी नंगी पीठ को और हरिया उसकी क्लीवेज को पोंछता रहा.
अनीता सीढ़ी होकर रुमाल को हरिया के मांग पर राखी तो रामु उसकी पीठ से सटे बाल के कुछ लातो को हटाने लगा. अनीता अपनी नंगी पीठ पर रामु का हाथ मेहुस करके boli,"Ek मिनट रामु जी. आपको और हरिया जी को बालों के वजह से परेशानी हो रही है".
फिर अनीता अपनी बाल से क्लिप निकाल कर बालों को पकड़ कर बन हैरस्टीले करके क्लिप लगा दी. ऐसा करते hi अनीता की पूरा पीठ अब नंगी दिख रही थी. अनीता बन करके साइड में गर्दन करके रामु को देखकर boli,"Ab ठीक है तो रामु जी?"
रामु यह देखकर bola,"Haan मेमसाहेब ठीक है".
अनीता मुस्कुराकर boli,"Aap और हरिया जी को अब परेशानी नहीं होगी पसीना साफ़ करने में"
रामु और हरिया दोनों अनीता की खूबसूरत जिस्म को टिश्यू पेपर से साफ़ करते हुए पंखा करने लगे.
हरिया अनीता की क्लीवेज साफ़ करने के बाद उसकी नंगी पेट पर और कमर साफ़ करने लगा जहाँ उसकी नाभि से लटकी बेल्ली बटन रिंग चमक रही थी.