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मैं, अपने अंडरवियर भी उतर देता हु, लेकिन जैसे hi मैं अपना अंडरवियर उतरता हु वैसे hi बगल में बैठे माहि का पति राघव की आँखे बड़ी बड़ी हो जाती है उसे देख कर ऐसा लगता है जैसे वह कुछ ऐसा देख लिया जिसकी उसे कोई उम्मीद नहीं थी, इधर हम दोनों अब पूरी तरह से नंगे हो चुके थे, माहि अपने पति से बेवफाई कर रही थी उसी के सामने, मैं, अब माहि के दोनों हाँथ छोड़ देता हु और अपने दोनों हाथों से अब उसकी छूट को सहलाने लगता हु वही माहि, का जिस्म अकड़ जाता है मेरे हाँथ अपने छूट पर पाते hi साथ hi साथ वो अब अपने दोनों हाथ मेरे काळा सफ़ेद बालो में दाल कर सहलाने लगती है, उधर उसका पति राघव अपने बीवी की हरकत को बड़े गौर से देख रहा था, लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी, वह राधे को अपने पत्नी के छूट से मुँह हटाने को कह सके? वैसे भी वो छह कर भी कुछ नहीं कर सकता
था क्यों की उसका हाँथ, मुँह के साथ साथ उसके दोनों पतले टंगे भी मैने बांध के उसको सोफे के ऊपर बैठाया हुआ था, इधर मैं, माहि की हरकत पर, लगता है मेरी जान की प्यास अच्छे से नहीं बुझा पाटा तेरा पति ये कह के मैं राघव की और एक बार देखता हु, वही माहि, अपने आँखों को बंद किये हुए उम्.. महिमा की आवाज़ धीरे से निकलती है, इधर मैं, अब तू फ़िक्र मत कर मेरी जानेमन.. अब मैं आ गया हु न आज तेरी साडी अधूरी प्यास को बुझा के hi जाऊंगा.. हहहहए.. माय अब माहि की छूट की फैंको पर से ऊँगली फेरते हुए अपनी जुबान उसकी छूट के दाने (क्लाइटोरिस) पर रख कर चूमने लगता हु. माहि मेरी जुबान की जादू में फसने लगती है जिसका साबुत उसकी आहे कर रही थी.. आह्ह्ह्हह.. सशह्ह्ह्ह.. ऊम्मम.. उफ्फ्फ्फ्फ़.. की, इधर मैं, अब अपने हाँथ पर थूक लगा कर अपने लुंड को मसलने लगता हु, मैं थोड़ी देर तक अपनी जुबान बहुत hi
धीरे से ुर प्यार से माहि की छूट पर से फेरते हुए अपने लुंड को मसलता रहता हु, महिमा, बस्सस.. और नाहीइ.. उम्म्म.. आह्ह्ह्ह.. राधे.. सशह्ह्ह.. करती रहती है, साथ hi साथ वह अपने होंठ काटते हुए बस आँखे बंद किये अपनी छूट पर फेर रही जुबान का मजा लेने लगती है, लेकिन मैं, उसको और तड़पना चाहता था, इसलिए मैं अब एक दम से रुक जाता हु और माहि के नंगे सेक्सी बदन पर लेट जाता हूँ, मेरा कला एनाकोंडा अब माहि की जांघो के बीच में घुस जाता है.. उसकी गर्मी का एहसास होते hi वो अपनी पलके खोल कर मुझे अजीब तरह से देखने लगती है, इधर मैं, तेरी जांघो के बीच में काफी गर्मी है मेरी बुलबुल.. हहहहए.. उधर माहि को यकीन नहीं हो रहा था इस वक़्त उसकी दोनों टैंगो के बीच में एक दुमदार कला लुंड फसा हुआ है. मैं, माहि की आँखों में देखते हुए अपने लुंड को उसकी जांघो के बीच में घुसाने लगता हूँ.
था क्यों की उसका हाँथ, मुँह के साथ साथ उसके दोनों पतले टंगे भी मैने बांध के उसको सोफे के ऊपर बैठाया हुआ था, इधर मैं, माहि की हरकत पर, लगता है मेरी जान की प्यास अच्छे से नहीं बुझा पाटा तेरा पति ये कह के मैं राघव की और एक बार देखता हु, वही माहि, अपने आँखों को बंद किये हुए उम्.. महिमा की आवाज़ धीरे से निकलती है, इधर मैं, अब तू फ़िक्र मत कर मेरी जानेमन.. अब मैं आ गया हु न आज तेरी साडी अधूरी प्यास को बुझा के hi जाऊंगा.. हहहहए.. माय अब माहि की छूट की फैंको पर से ऊँगली फेरते हुए अपनी जुबान उसकी छूट के दाने (क्लाइटोरिस) पर रख कर चूमने लगता हु. माहि मेरी जुबान की जादू में फसने लगती है जिसका साबुत उसकी आहे कर रही थी.. आह्ह्ह्हह.. सशह्ह्ह्ह.. ऊम्मम.. उफ्फ्फ्फ्फ़.. की, इधर मैं, अब अपने हाँथ पर थूक लगा कर अपने लुंड को मसलने लगता हु, मैं थोड़ी देर तक अपनी जुबान बहुत hi
धीरे से ुर प्यार से माहि की छूट पर से फेरते हुए अपने लुंड को मसलता रहता हु, महिमा, बस्सस.. और नाहीइ.. उम्म्म.. आह्ह्ह्ह.. राधे.. सशह्ह्ह.. करती रहती है, साथ hi साथ वह अपने होंठ काटते हुए बस आँखे बंद किये अपनी छूट पर फेर रही जुबान का मजा लेने लगती है, लेकिन मैं, उसको और तड़पना चाहता था, इसलिए मैं अब एक दम से रुक जाता हु और माहि के नंगे सेक्सी बदन पर लेट जाता हूँ, मेरा कला एनाकोंडा अब माहि की जांघो के बीच में घुस जाता है.. उसकी गर्मी का एहसास होते hi वो अपनी पलके खोल कर मुझे अजीब तरह से देखने लगती है, इधर मैं, तेरी जांघो के बीच में काफी गर्मी है मेरी बुलबुल.. हहहहए.. उधर माहि को यकीन नहीं हो रहा था इस वक़्त उसकी दोनों टैंगो के बीच में एक दुमदार कला लुंड फसा हुआ है. मैं, माहि की आँखों में देखते हुए अपने लुंड को उसकी जांघो के बीच में घुसाने लगता हूँ.