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रति, आअह्हह्ह्ह्ह.. जीजूउउउ.. ह्ह्हम्म्म्म.. वो सिसकते हुए अब मेरा अंडरवियर अपने हाथो से नीचे कर देती है उसके ऐसा करते hi मेरे लिए ये बहुत hi ख़ुशी का पल था क्युकी जो औरत कल रात तक मेरा विरोध करती थी?, वो आज खुस होकर मेरे लुंड को खुद hi अंडरवियर से बहार निकल रही थी, बिना किसी जोर जबरदस्ती के.. यही सोच रहा था की रति अब मेरे अंडरवियर पूरा नीचे कर देती है और मेरा कला मुसल लुंड अब उसके सामने उछाल के आ जाता है, ुर मेरे काळा लुंड पर काली सफ़ेद झांटे बड़ी वो भी गुच्छे दार और लुंड के सुपडे के छेद से कुछ चिप छिपा सा टपक रहा था ुर ये देख रति मेरे लुंड को अपने कोमल हाथ म पकड़ क्र मेरी फूली हुई मोती नसों को महसूस करने लगती है. उसके ऐसा करते hi मेरे मुँह से आठ.. बहनचोद क्या कोमल हाथ है मेरी जान..
तेरे एक दम मुलायम उस सहर वाली गफ चढ़नी की जैसे सख्त नहीं?, रति मेरे मुँह से अपने लिए तारीफ़ सुनकर खुश हो जाती है. क्या वक़्त आ गया था, जो एक मामूली डांस बार चढ़नी से खुद को कपरिसों में अच्छे होने पर वो खुश हो रही थी, खैर, मेरी बात सुनकर अब रति अच्छे से मेरा मुसल लुंड को मसलते हुए लुंड को निहारने लगती है. मेरे लुंड के सुपडे पर से मेरी काली चमड़ी ऊपर नीचे हो रही थी जिसे देख के रति खो सी गई थी उसके ऐसा करने से मेरे लुंड का सूपड़ा बिलकुल चिकना सा हो गया था ुर अब रति की नज़र मेरे लुंड से हैट hi नहीं रही थी. वो घर रही थी मेरे लुंड को. वही अपने मान में (जो लड़की कल तक मेरे लुंड को देखने पर शर्मा जाती थी और घिन से अपना मुँह घुमा लेती थी, वो आज बिना किसी शर्म के मेरे काळा लुंड को हिलाते हुए घर रही थी और कल क्या क्या बोल रही थी, आज के बाद हम एक दूसरे से कभी अकेले
नहीं मिलेंगे लेकिन मैं जनता था मेरी जबरदस्त हार्ड और रफ़ चुदाई के बाद भी रति फिर से एक बार मेरे छुडवायेगी और हुआ भी यही मेरे थोड़ा सा जोर देने पे वो खुद को मेरे हवाले कर चुकी थी उसका विरोध बस थोड़े टाइम का hi था क्युकी मेरा एक्सपीरियंस है की लड़किया एक बार छोड़ने के बाद दोबारा छोड़ने में ज्यादा आना कानि नहीं करती ुर उसका साबुत आज खुद रति दे रही थी), इधर मेरे कला लौड़े के फुले हुए सुपडे पर अब पानी जैसा कुछ जैम जाता है. रति के दिमाग में बस सहर वाली गफ चढ़नी की वो बाते घूमने लगती है जो मैने उसे सुनाई थी की कैसे वह मेरा लुंड बड़े सौक से चुस्ती थी चुदाई से पहले क्युकी रति को मेरी गर्लफ्रेंड चढ़नी से जलन हो रही थी, हाला की जब एक बार में बॉडीगार्ड था तो चढ़नी ने मेरे चुदाई से बहुत खुश होती थी और एक बार छोड़ने के बाद वो
बार बार मेरे लौड़े को अपने छूट में लेने की कोशिश करती थी और कहती थी की राधे आज तक तुम्हारे लौड़े जैसा बाँदा कभी नहीं देखा और जितना तेरे लौड़े से छोड़ने म मज़ा आता है उतना किसी दूसरे मर्द से नहीं यही वजह है की माय हर रोज तेरा लुंड अपने छूट म लेने के तरसती हु, इधर माय अपनी आँखे बंद किये दीवार से सात कर खड़ा आहे भर रहा था. वही रति, मेरी एक्सप्रेशंस देखती है और फिर अपनी ऊँगली मेरे सुपडे पर रख कर उसपर जमा हुआ रास अपनी ऊँगली से साफ़ करती है. इधर मैं, आँखे बंद किये बस सिसकारियां ले रहा था और रति अब अपनी ऊँगली पर जमा हुआ वो रास गौर से देखते हुए एक बार मुझे को देखती है.. इधर मैं मस्ती से पागल बाद बड़ा रहा था, आह्ह्ह्ह.. क्या हिलती है तू मेरी जान.. aahh..aahh.. ऐसी hi.. बहनचोद.. आठ उधर रति, अपने होश में नहीं थी इस वक़्त
उसके दिमाग पर हवस छ चुकी थी वही वह मेरे लुंड को एक हाथ से हिलाते हुए अब रास से भरी अपनी ऊँगली अपने होंठो के पास लाती है, वह जो कुछ भी था, उसकी बॉस बहुत hi अजीब सी थी, रति उस रास को देख अपनी जुबान बहार निकलती है, ("मैंने आज तक अपने पति के साथ ये नहीं किया, तो आपके साथ क्यों करू? और "माय ये सब कभी नहीं करुँगी.. ये सपना आपका कभी पूरा नहीं होगा.."), रति के आँखों के सामने वह पल याद आते है जब कल रात उसने मेरे को लुंड चूसने से मन किया था. यही सोचते हुए वो अब वो ऊँगली अपने मुँह में डालती है और उस रास का स्वाद अब उसके मुँह में मिल जाता है.. और रति के मुँह में अब एक नमक जैसी टास्ते फ़ैल जाती है और वो अपनी ऊँगली मुँह से तुरंत बहार निकटि है, लेकिन अनजाने में रति उस गधे काम रास को निगल hi जाती है,
इधर माय आँखे band..kiye अभी भी आहे भर रहा था, मुझे तो भनक तक नहीं थी अभी2 रति ने मेरे लौड़े से निकला हुआ pre-cum छठा है. वही रति भी हवस में अंधी होकर अपने होंठो पर से जुबान फेरते हुए मेरे लुंड को हिलाते जा रही थी, इधर मेरी अपने टेनिस बाल जैसे तत्तो जो झांटो से भरी थी उसमे कसावट महसूस होती है. वही अब रति भी समझ जाती है की मेरा पानी निकलने वाला था इस वक़्त, लेकिन इस बार रति को मस्ती सूझता है ुर वो मेरे कला लुंड हिलना एकदम से छोड़ hi देती है इधर मेरा लुंड पूरा फुल चूका था और ऐसे रति ने बीच में छोड़ देने के कारन मैं जोर से चीखते हुयी मादरचोद आअह्ह्ह्ह छ्हम्म.. ुर रति मेरी य फ़्रस्ट्रेशन देख खुश हो जाती है. मेरा कला कोबरा अपना जहर निकलने के बहुत करीब था लेकिन रति की करतूत से माय नाकामयाब हो गया था.
तेरे एक दम मुलायम उस सहर वाली गफ चढ़नी की जैसे सख्त नहीं?, रति मेरे मुँह से अपने लिए तारीफ़ सुनकर खुश हो जाती है. क्या वक़्त आ गया था, जो एक मामूली डांस बार चढ़नी से खुद को कपरिसों में अच्छे होने पर वो खुश हो रही थी, खैर, मेरी बात सुनकर अब रति अच्छे से मेरा मुसल लुंड को मसलते हुए लुंड को निहारने लगती है. मेरे लुंड के सुपडे पर से मेरी काली चमड़ी ऊपर नीचे हो रही थी जिसे देख के रति खो सी गई थी उसके ऐसा करने से मेरे लुंड का सूपड़ा बिलकुल चिकना सा हो गया था ुर अब रति की नज़र मेरे लुंड से हैट hi नहीं रही थी. वो घर रही थी मेरे लुंड को. वही अपने मान में (जो लड़की कल तक मेरे लुंड को देखने पर शर्मा जाती थी और घिन से अपना मुँह घुमा लेती थी, वो आज बिना किसी शर्म के मेरे काळा लुंड को हिलाते हुए घर रही थी और कल क्या क्या बोल रही थी, आज के बाद हम एक दूसरे से कभी अकेले
नहीं मिलेंगे लेकिन मैं जनता था मेरी जबरदस्त हार्ड और रफ़ चुदाई के बाद भी रति फिर से एक बार मेरे छुडवायेगी और हुआ भी यही मेरे थोड़ा सा जोर देने पे वो खुद को मेरे हवाले कर चुकी थी उसका विरोध बस थोड़े टाइम का hi था क्युकी मेरा एक्सपीरियंस है की लड़किया एक बार छोड़ने के बाद दोबारा छोड़ने में ज्यादा आना कानि नहीं करती ुर उसका साबुत आज खुद रति दे रही थी), इधर मेरे कला लौड़े के फुले हुए सुपडे पर अब पानी जैसा कुछ जैम जाता है. रति के दिमाग में बस सहर वाली गफ चढ़नी की वो बाते घूमने लगती है जो मैने उसे सुनाई थी की कैसे वह मेरा लुंड बड़े सौक से चुस्ती थी चुदाई से पहले क्युकी रति को मेरी गर्लफ्रेंड चढ़नी से जलन हो रही थी, हाला की जब एक बार में बॉडीगार्ड था तो चढ़नी ने मेरे चुदाई से बहुत खुश होती थी और एक बार छोड़ने के बाद वो
बार बार मेरे लौड़े को अपने छूट में लेने की कोशिश करती थी और कहती थी की राधे आज तक तुम्हारे लौड़े जैसा बाँदा कभी नहीं देखा और जितना तेरे लौड़े से छोड़ने म मज़ा आता है उतना किसी दूसरे मर्द से नहीं यही वजह है की माय हर रोज तेरा लुंड अपने छूट म लेने के तरसती हु, इधर माय अपनी आँखे बंद किये दीवार से सात कर खड़ा आहे भर रहा था. वही रति, मेरी एक्सप्रेशंस देखती है और फिर अपनी ऊँगली मेरे सुपडे पर रख कर उसपर जमा हुआ रास अपनी ऊँगली से साफ़ करती है. इधर मैं, आँखे बंद किये बस सिसकारियां ले रहा था और रति अब अपनी ऊँगली पर जमा हुआ वो रास गौर से देखते हुए एक बार मुझे को देखती है.. इधर मैं मस्ती से पागल बाद बड़ा रहा था, आह्ह्ह्ह.. क्या हिलती है तू मेरी जान.. aahh..aahh.. ऐसी hi.. बहनचोद.. आठ उधर रति, अपने होश में नहीं थी इस वक़्त
उसके दिमाग पर हवस छ चुकी थी वही वह मेरे लुंड को एक हाथ से हिलाते हुए अब रास से भरी अपनी ऊँगली अपने होंठो के पास लाती है, वह जो कुछ भी था, उसकी बॉस बहुत hi अजीब सी थी, रति उस रास को देख अपनी जुबान बहार निकलती है, ("मैंने आज तक अपने पति के साथ ये नहीं किया, तो आपके साथ क्यों करू? और "माय ये सब कभी नहीं करुँगी.. ये सपना आपका कभी पूरा नहीं होगा.."), रति के आँखों के सामने वह पल याद आते है जब कल रात उसने मेरे को लुंड चूसने से मन किया था. यही सोचते हुए वो अब वो ऊँगली अपने मुँह में डालती है और उस रास का स्वाद अब उसके मुँह में मिल जाता है.. और रति के मुँह में अब एक नमक जैसी टास्ते फ़ैल जाती है और वो अपनी ऊँगली मुँह से तुरंत बहार निकटि है, लेकिन अनजाने में रति उस गधे काम रास को निगल hi जाती है,
इधर माय आँखे band..kiye अभी भी आहे भर रहा था, मुझे तो भनक तक नहीं थी अभी2 रति ने मेरे लौड़े से निकला हुआ pre-cum छठा है. वही रति भी हवस में अंधी होकर अपने होंठो पर से जुबान फेरते हुए मेरे लुंड को हिलाते जा रही थी, इधर मेरी अपने टेनिस बाल जैसे तत्तो जो झांटो से भरी थी उसमे कसावट महसूस होती है. वही अब रति भी समझ जाती है की मेरा पानी निकलने वाला था इस वक़्त, लेकिन इस बार रति को मस्ती सूझता है ुर वो मेरे कला लुंड हिलना एकदम से छोड़ hi देती है इधर मेरा लुंड पूरा फुल चूका था और ऐसे रति ने बीच में छोड़ देने के कारन मैं जोर से चीखते हुयी मादरचोद आअह्ह्ह्ह छ्हम्म.. ुर रति मेरी य फ़्रस्ट्रेशन देख खुश हो जाती है. मेरा कला कोबरा अपना जहर निकलने के बहुत करीब था लेकिन रति की करतूत से माय नाकामयाब हो गया था.