अपडेट- 03
अपने कमरे में पहुंचकर रानी जी बिस्टेर पर बैठ गई और कुछ सोचने लगी. आनंद जी अभी तक सोये नहीं थे. जब उन्होंने अपनी धर्मपत्नी को सोच में डूबा हुवा देखा तो उन्होंने उनसे पूछा.
आनंद जी- क्या बात है भाग्यवान. किस सोच में डूबी हुई हो.
रानी जी- मैं अभिषेक के बर्ताव को लेकर थोड़ी परेशां हूँ. उसकी पढ़ाई को लेकर चिंतित हूँ.
आनंद जी- यही चिंता तो मुझे भी खाये जा रही है. पता नहीं आगे चलकर क्या होने वाला है. किस्मत में क्या लिखा है, मैं नहीं चाहता की अभिषेक भी मेरी तरह मुफ्लसी में अपना जीवन गुजरे. मैं चाहता हूँ की वो पढ़ लिखकर एक कामयाब इंसान बने.
रानी जी- मैं भी तो यही चाहती हूँ की उसे जीवन में कोई दुःख दर्द न हो. वो अच्छे से पढ़ाई करे और कामयाब हो, लेकिन वो पढ़ाई में बहुत कमजोर है. मैं सोच रही हूँ की क्यों न उसके लिए कोई टूशन लगा दिया जाये. जिससे उसकी पढाई में सुधर हो सके.
आनंद जी- कह तो तुम ठीक hi रही हो भगवान, मैं कल hi किसी अच्छे टीचर को देखता हूँ. हो सकता है टूशन से hi उसकी पढ़ाई सुधर जाये.
इसके बाद दोनों पति पत्नी सो गए. सुबह सबको स्कूल भेजने के बाद रानी जी ने आनंद जी के लिए भी टिफिनन पैक किया. आनंद जी भी अपना नाश्ता लेकर ऑटो चलने चले गए.
इसी तरह दो दिन बिट गए. इन दो दिनों में आनंद जी ने अपने परिचित से टूशन टीचर के बारे में बात की थी तो उन्होंने एक बहुत hi काबिल टीचर की व्यवस्था कर दी अभिषेक को पढ़ने के लिए.
टूशन टीचर रोज शाम को आकर एक घंटे तक अभिषेक को पढ़ने लगा. टीचर क्योंकि बहुत काबिल था. वह अभिषेक को हर तरह से निपुण बनाने में जुट गया.
इसी तरह समय गुजरता रहा, अभिषेक का पढाई में बिलकुल मन नहीं लगता था, तो टीचर ने भी एक दो महीने में अपने हाथ खड़े कर दिए. अब तो अभिषेक की maar-pit और शरारत के कारन उसके नाम पर शिकायते भी बढ़ने लगी. जिसके कारन कभी कभी आनंद जी की मार भी पड़ती थी अभिषेक को, मार खाने के कुछ दिन तक तो वो ठीक से पढता, और लड़ाई झगड़ा नहीं करता था, लेकिन कुछ दिन बाद फिर से उसका वही रवैया हो जाता.
आनंद जी और रानी जी बहुत परेशां हो गए थे अभिषेक के बर्ताव से, वही सरिता पढ़ाई में हमेशा ाऊवाल आती. जिससे उसकी सराहना भी होती थी. मनीषा भी पढाई में ठीक थक hi थी. एक दिन रात में बच्चो के सोने के बाद आनंद जी और रानी जी बैठकर बात कर रहे थे.
आनंद- अभिषेक का क्या होगा भाग्यवान. रोज किसी न किसी की शिकायत आती रहती है. वो बहुत बिगड़ गया है. मुझे तो उसका भविष्या अँधेरे में दिखाई दे रहा है. सरिता को देखो, कितनी समझदार है और पढाई में भी कितनी होशियार है. मनीषा की भी कोई चिंता नहीं है मुझे. वो भी पढाई में अच्छी है , लेकिन अभिषेक को लेकर मुझे दिन रात चिंता लगी रहती हैं.
रानी जी- चिंता तो मुझे भी उसकी लगी रहती है, लेकिन आप इतनी चिंता मत किया करिये जी. गुजरते समय के साथ वो सुधर जायेगा. अभी बचपना है उसमें. अभी समझदारी की कमी है उसमे. थोड़ा समय दीजिये उसे. धीरे धीरे सब ठीक हो जायेगा.
आनंद जी- भगवन करे सब ठीक हो जाये. मुझे तो अभिषेक की चिंता दिन रत खाये जा रही है. अगर ठीक से पढाई लिखे नहीं करेगा तो मेरी तरह hi दिन रात खटेगा. हम तो अपनी जिंदगी जैसे तैसे गुजर रहे हैं. लेकिन मैं तो चाहता हूँ की हमारे बच्चे अच्छी जिंदगी जिए. लकिन अभिषेक को तो जैसे कुछ फ़िक्र hi नहीं है. हर समय लड़ाई झगड़ा करता रहता है.
रानी जी- आप चिंता न करे. मैं उससे बात करती हूँ. वो मेरी बात जरूर सुनेगा. आप देखना जल्द hi वो लड़ाई झगड़ा छोड़कर जिम्मेदार लड़का बन जायेगा. चलिए अब सो जाइये रात बहुत हो गयी है.
उसके बाद आनंद जज और रानी जी सो जाते हैं. सुबह उठकर रानी जी ने सभी बच्चो को तैयार कर स्कूल भेज दिया और खाना बनाकर आनंद जी को भी दे दिया. और घर का और काम करने लगी. जब अभिषेक स्कूल से घर आया तो रानी जज ने उसे फिर से समझते हुवे कहा.
रानी जी- अभिषेक तू कब सुधरेंगे. हर समय लड़ाई झगड़ा करता रहता है. हर कोई तेरी शिकायत करता है. तू पढाई लिखे पर ध्यान दे बीटा. क्यों अपने भविष्य के साथ खेल रहा है.
अभिषेक- ठीक है माँ मैं इस बात का ध्यान रखूँगा की आगे से ऐसा कुछ न हो. और मैं पढाई भी मन लगाकर करूँगा. अब मैं सोने जॉन.
रानी ने अभिषेक को सोने के लिए भेज दिया. सरिता और मनीषा भी सो गयी, अभिषेक की बात sun-ne के बाद रानी जी ने जान लिया की अभिषेक सुधरने वाला नहीं है वो बस उसकी बात को तरककर उनके पास से जाना चाहता था इसलिए उसने हाँ कर ली. अब उनका भी परेशां होना बनता था.
समय अपनी राफ्तेर से चलता रहा और देखते hi देखते अभिषेक किसी तरह गिरते पढ़ते पासिंग मार्क लता गया और हिघ्स्चूल में पहुंच गया. सरिता 8तह क्लास में और मनीषा क्लास 5तह में पहुंच गयी. सरिता और मनीषा अब घर के कामो में रानी जी का हाथ बताने लगी और बचे हुवे समय में अपनी पढाई और उसके बाद जो समय बचता उसमे वो दोनों खेलने जाया करती थी.
लेकिन अभिषेक के बर्ताव में अभी तक कोई सुधर नहीं आया था. अब तो उसकी मार पीठ भी बढ़ गयी थी, लेकिन अभिषेक ने कभी इतनी बुरी तरह से किसी को नहीं मारा था. जिससे बात हद से ज्यादा बढ़ जाये. बस 2-4 झापड़ या मुक्के मरता था.
फिर भी शिकायते तो आणि hi थी. और इन्ही शिकायतों के कारन आनंद जी अभिषेक की पिटाई भी कर देते थे. लेकिन अभिषेक ठहरा एकदम ढीठ और निर्बुद्धि. वो न तो रानी जी की प्यार की भाषा समझता था और न hi आनंद जी की मार की भाषा. और पढ़ाई से तो उसका नाता जैसे टूट hi गया था. इसी के चलते वो हिघ्स्चूल की बोर्ड की परीक्षा में फ़ैल हो गया.
उसको केवल एक विषय में डिक्टेशन मिला था 90 नंबर वो भी ड्राइंग में. और हिंदी में उसे 45 नंबर मिले थे. बाकि के सभी विषयो में मिलकर भी वो 33 नंबर नहीं ला पाया था. यह देखकर आनंद जी का गुस्से का पारा हाई हो गया और उन्होंने अभिषेक को जी भर कर कुत्ता. रानी जी, सरिता और मनीषा अभिषेक को बचने के लिए भी आगे आये. पर आनंद जज ने किसी की भी नहीं सुनी और जी भर कर उसकी पिटाई कर दी. जिसके कारन पूरी रात अभिषेक रोटा रहा.
रानी जी ने रात में खाने के लिए उसे बुलाया, लेकिन उसने खाना खाने से मन कर दिया, जिसके कारन आनंद जी का गुस्सा और भी बढ़ गया और वो अभिषेक को मरने के लिए उठे. लेकिन रानी जी ने उन्हें शांत करा कर खाना खाने के लिए दे दिया और खुद खाना लेकर अभिषेक के कमरे में चली गयी, लेकिन अभिषेक खाना खाने के लिए तैयार नहीं हुआ. थक हार कर वो वापस बहार चली आई. फिर सरिता न खाना खाया और एक थाली खाना लेकर अभिषेक के पास गयी और बोली.
सरिता- भैया खाना क्यों नहीं खा रहे हैं आप. चलिए जल्दी से खाना खाइये.
अभिषेक- मुझे नहीं खाना. तू जा यहाँ से.
सरिता- आप खाने से क्यों गुस्सा हैं. इसने तो आपको कुछ नहीं कहा. जो भी कहा है पापा ने कहा है तो पापा का गुस्सा खाने पर निकलना अच्छी बात थोड़ी न है.
अभिषेक- मैंने कहा न. मुझे नहीं खाना. तुझे एक बार में समझ में नहीं आता है क्या.
अभिषेक ने ये बात थोड़ा तेज़ आवाज़ में कही थी. जिससे सरिता रोने जैसी हो गयी और उसकी आँखों से दो बून्द आँशु उसकी आँखों से बहार निकल गए. अभिषेक घर में सबसे ज्यादा अपनी दोनों बहनो को प्यार करता था. उनकी आँखों में आँशु नहीं देख सकता था, इसलिए जब सरिता की आँखों में आँशु आये तो उसे अपनी भूल का एहसास हुवा की उसने बेवजह hi सरिता को डट दिया, इसलिए उसने सरिता को अपने पास बिठाया और उसके आँशु पोछते हुवे बोलै.
अभिषेक- अरे मेरी लड़ो. देखो रोना नहीं. चलो मैं खाना खता हूँ. अपने हांथो से खिलाओ मुझे.
अभिषेक की बात सुनकर सरिता बहुत खुश हुई और अपने हांथो से सरिता अभिषेक को खाना खिलने लगी. कमरे के बहार से रानी जी और आनंद जी ये नज़ारा देख रहे थे. उन्हें अभिषेक पर भले hi गुस्सा आ रहा था, लेकिन दोनों भाई बहनो का प्यार देखकर दोनों को बहुत ख़ुशी हो रही थी. वो दोनों चुपचाप बहार चले गए और आनंद ने रानी से कहा.
आनंद जी- देखा तुमने भाग्यवान. कितना प्यार है दोनों भाई बहनो में. सरिता के एक आँशु ने उसका सारा गुस्सा और नाराज़गी ख़तम कर दिए. भगवन इन दोनों का प्यार हमेशा बनाये रखे.
आनंद जी ने ये दवा भगवन से मांग तो ली थी, लेकिन जरूरी नहीं है की हम जो भी भगवन से मांगते हैं वो दवा भगवन हमेशा पूरी hi करे, ऐसा hi अभिषेक और घरवालों के साथ भी होने वाला था. जिसका उन्हें दूर दूर तक अनुमान नहीं था. खैर. सरिता ने अभिषेक को खाना खिला दिया था और अभिषेक के हाँथ धुलकर बोली.
सरिता- अआप ऐसा क्यों करते हैं भैया. आप को पता है पापा कितनी म्हणत करते हैं ताकि हम सब अचे से पढ़े. लेकिन आप हमेशा पहडै के अलावा वो सब कुछ करते हैं जो पापा को अच्छा नहीं लगता. इसीलिए पापा ने आपको मारा. इसमें पापा की कोई गलती नहीं है भैया. इसमें आपको गलती है. फिर भी आप सबसे नाराज़ हो गए. मुझको भी डाटा दिया. आपको पापा से माफी मांगनी चाहिए.
अभिषेक- अच्छा मेरी माँ. मुझसे गलती हो गयी. मुझे माफ़ कर दे. मैं पापा से सुबह माफ़ी मांग लूंगा. अब तो खुश हो जा. और मुझे सोने दे.
सरिता- बस यही करिये आप. घूमिये, लढ़िये- झगड़िये, नाराज़ होइए और खाना खाकर सो जाइये. आइल आलावा पढाई भी होती है जो आपकी डिक्शनरी में नहीं है. इसीलिए आपको मार पड़ती है. अगली बात अगर मार पड़ी तो मैं नहीं आउंगी बचने आपको देख लेना.
अभिषेक- हां हां कह तो ऐसे रही है जैसे तू hi मुझे बचती है हर बार. अब जा यहाँ से.
सरिता अभिषेक को जीभ दिखते हुवे थाली लेकर बहार चली गयी और अभिषेक बिस्टेर पर लेट कर गहरी नींद में सो गया. सुबह भोर में उठकर सबसे पहले वो फ्रेश हुवा और फिर अपने पापा के पास चलगा गया और उनके पास बैठ कर बोलै.
अभिषेक- पापा. मुझे माफ़ कर दो. मैंने जो कल रात में आप सब के साथ व्यव्हार किया उसके लिए.
आनंद जी- {अभिषेक के सर पर प्यार से हाथ फिरते हुवे} बीटा हम तुम्हारे कोई दुसमन नहीं हैं. अगर हम तुम्हे मारते हैं या data-te हैं तो तुम्हारे भले के लिए hi तो करते हैं. अगर तुम ठीक से पढाई करो. मैं ये नहीं कहता की तुम डिक्टेशन ले आकर दिखाओ. मैं तो बस इतना चाहता हूँ की तुम बस पास हो जाओ. आखिर पढ़ लिख जाओगे तो कही काम धंधा पकड़ लोगे. तुम्हारी ज़िन्दगी अचे से बीतेगी. नहीं तो बीटा. मुझे देखो दिन भर khat-ta रहता हूँ तब जाकर दो वक्त की रोटी का जुवाद होता है. मैं नहीं चाहता बीटा की तुम्हारे साथ भी ऐसा हो. इसलिए मैं तुमको data-ta रहता हूँ. पढ़ाई करने के लिए कहता हूँ.
अभिषेक- ठीक है पापा मैं पूरी कोशिश करूँगा की इस बार पास हो कर दिखाऊंगा.
आनंद जी- मुझको तुमसे यही उम्मीद है मेरे बेटे. कोशिश करना की तुम मेरी उम्मीदों पर खरे उतरो.
फिर आनंद जी ने अपना खाना पैक करवाया और ऑटो लेकर अपने काम पर चले गए.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..