Tumhaare Liye- Ek Prem Kahaani - Page 2 - SexBaba
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Tumhaare Liye- Ek Prem Kahaani

धन्यवाद आपका महोदय,

वक्त और हालात के आगे किसी का वश नहीं चलता। अभिषेक जिस हालात से गुजर रहा है उसका अंदाज़ा आनंद को है लेकिन वो कुछ कर नहीं पा रहा है क्योंकि अभिषेक किसी की सुन ही नहीं रह है। थोड़ा बहुत उसके अंदर कुछ देर के लिए अगर सुधार आता है तो वो भी कुछ देर बाद खत्म हो जाता है।

अब आगे बहुत कुछ मिलेगा देखने के लिए। हालात और परिस्थितियां बदलने वाली हैं।

साथ बने रहिए।।
 
अपडेट- 03

अपने कमरे में पहुंचकर रानी जी बिस्टेर पर बैठ गई और कुछ सोचने लगी. आनंद जी अभी तक सोये नहीं थे. जब उन्होंने अपनी धर्मपत्नी को सोच में डूबा हुवा देखा तो उन्होंने उनसे पूछा.

आनंद जी- क्या बात है भाग्यवान. किस सोच में डूबी हुई हो.

रानी जी- मैं अभिषेक के बर्ताव को लेकर थोड़ी परेशां हूँ. उसकी पढ़ाई को लेकर चिंतित हूँ.

आनंद जी- यही चिंता तो मुझे भी खाये जा रही है. पता नहीं आगे चलकर क्या होने वाला है. किस्मत में क्या लिखा है, मैं नहीं चाहता की अभिषेक भी मेरी तरह मुफ्लसी में अपना जीवन गुजरे. मैं चाहता हूँ की वो पढ़ लिखकर एक कामयाब इंसान बने.

रानी जी- मैं भी तो यही चाहती हूँ की उसे जीवन में कोई दुःख दर्द न हो. वो अच्छे से पढ़ाई करे और कामयाब हो, लेकिन वो पढ़ाई में बहुत कमजोर है. मैं सोच रही हूँ की क्यों न उसके लिए कोई टूशन लगा दिया जाये. जिससे उसकी पढाई में सुधर हो सके.

आनंद जी- कह तो तुम ठीक hi रही हो भगवान, मैं कल hi किसी अच्छे टीचर को देखता हूँ. हो सकता है टूशन से hi उसकी पढ़ाई सुधर जाये.

इसके बाद दोनों पति पत्नी सो गए. सुबह सबको स्कूल भेजने के बाद रानी जी ने आनंद जी के लिए भी टिफिनन पैक किया. आनंद जी भी अपना नाश्ता लेकर ऑटो चलने चले गए.

इसी तरह दो दिन बिट गए. इन दो दिनों में आनंद जी ने अपने परिचित से टूशन टीचर के बारे में बात की थी तो उन्होंने एक बहुत hi काबिल टीचर की व्यवस्था कर दी अभिषेक को पढ़ने के लिए.

टूशन टीचर रोज शाम को आकर एक घंटे तक अभिषेक को पढ़ने लगा. टीचर क्योंकि बहुत काबिल था. वह अभिषेक को हर तरह से निपुण बनाने में जुट गया.

इसी तरह समय गुजरता रहा, अभिषेक का पढाई में बिलकुल मन नहीं लगता था, तो टीचर ने भी एक दो महीने में अपने हाथ खड़े कर दिए. अब तो अभिषेक की maar-pit और शरारत के कारन उसके नाम पर शिकायते भी बढ़ने लगी. जिसके कारन कभी कभी आनंद जी की मार भी पड़ती थी अभिषेक को, मार खाने के कुछ दिन तक तो वो ठीक से पढता, और लड़ाई झगड़ा नहीं करता था, लेकिन कुछ दिन बाद फिर से उसका वही रवैया हो जाता.

आनंद जी और रानी जी बहुत परेशां हो गए थे अभिषेक के बर्ताव से, वही सरिता पढ़ाई में हमेशा ाऊवाल आती. जिससे उसकी सराहना भी होती थी. मनीषा भी पढाई में ठीक थक hi थी. एक दिन रात में बच्चो के सोने के बाद आनंद जी और रानी जी बैठकर बात कर रहे थे.

आनंद- अभिषेक का क्या होगा भाग्यवान. रोज किसी न किसी की शिकायत आती रहती है. वो बहुत बिगड़ गया है. मुझे तो उसका भविष्या अँधेरे में दिखाई दे रहा है. सरिता को देखो, कितनी समझदार है और पढाई में भी कितनी होशियार है. मनीषा की भी कोई चिंता नहीं है मुझे. वो भी पढाई में अच्छी है , लेकिन अभिषेक को लेकर मुझे दिन रात चिंता लगी रहती हैं.

रानी जी- चिंता तो मुझे भी उसकी लगी रहती है, लेकिन आप इतनी चिंता मत किया करिये जी. गुजरते समय के साथ वो सुधर जायेगा. अभी बचपना है उसमें. अभी समझदारी की कमी है उसमे. थोड़ा समय दीजिये उसे. धीरे धीरे सब ठीक हो जायेगा.

आनंद जी- भगवन करे सब ठीक हो जाये. मुझे तो अभिषेक की चिंता दिन रत खाये जा रही है. अगर ठीक से पढाई लिखे नहीं करेगा तो मेरी तरह hi दिन रात खटेगा. हम तो अपनी जिंदगी जैसे तैसे गुजर रहे हैं. लेकिन मैं तो चाहता हूँ की हमारे बच्चे अच्छी जिंदगी जिए. लकिन अभिषेक को तो जैसे कुछ फ़िक्र hi नहीं है. हर समय लड़ाई झगड़ा करता रहता है.

रानी जी- आप चिंता न करे. मैं उससे बात करती हूँ. वो मेरी बात जरूर सुनेगा. आप देखना जल्द hi वो लड़ाई झगड़ा छोड़कर जिम्मेदार लड़का बन जायेगा. चलिए अब सो जाइये रात बहुत हो गयी है.

उसके बाद आनंद जज और रानी जी सो जाते हैं. सुबह उठकर रानी जी ने सभी बच्चो को तैयार कर स्कूल भेज दिया और खाना बनाकर आनंद जी को भी दे दिया. और घर का और काम करने लगी. जब अभिषेक स्कूल से घर आया तो रानी जज ने उसे फिर से समझते हुवे कहा.

रानी जी- अभिषेक तू कब सुधरेंगे. हर समय लड़ाई झगड़ा करता रहता है. हर कोई तेरी शिकायत करता है. तू पढाई लिखे पर ध्यान दे बीटा. क्यों अपने भविष्य के साथ खेल रहा है.

अभिषेक- ठीक है माँ मैं इस बात का ध्यान रखूँगा की आगे से ऐसा कुछ न हो. और मैं पढाई भी मन लगाकर करूँगा. अब मैं सोने जॉन.

रानी ने अभिषेक को सोने के लिए भेज दिया. सरिता और मनीषा भी सो गयी, अभिषेक की बात sun-ne के बाद रानी जी ने जान लिया की अभिषेक सुधरने वाला नहीं है वो बस उसकी बात को तरककर उनके पास से जाना चाहता था इसलिए उसने हाँ कर ली. अब उनका भी परेशां होना बनता था.

समय अपनी राफ्तेर से चलता रहा और देखते hi देखते अभिषेक किसी तरह गिरते पढ़ते पासिंग मार्क लता गया और हिघ्स्चूल में पहुंच गया. सरिता 8तह क्लास में और मनीषा क्लास 5तह में पहुंच गयी. सरिता और मनीषा अब घर के कामो में रानी जी का हाथ बताने लगी और बचे हुवे समय में अपनी पढाई और उसके बाद जो समय बचता उसमे वो दोनों खेलने जाया करती थी.

लेकिन अभिषेक के बर्ताव में अभी तक कोई सुधर नहीं आया था. अब तो उसकी मार पीठ भी बढ़ गयी थी, लेकिन अभिषेक ने कभी इतनी बुरी तरह से किसी को नहीं मारा था. जिससे बात हद से ज्यादा बढ़ जाये. बस 2-4 झापड़ या मुक्के मरता था.

फिर भी शिकायते तो आणि hi थी. और इन्ही शिकायतों के कारन आनंद जी अभिषेक की पिटाई भी कर देते थे. लेकिन अभिषेक ठहरा एकदम ढीठ और निर्बुद्धि. वो न तो रानी जी की प्यार की भाषा समझता था और न hi आनंद जी की मार की भाषा. और पढ़ाई से तो उसका नाता जैसे टूट hi गया था. इसी के चलते वो हिघ्स्चूल की बोर्ड की परीक्षा में फ़ैल हो गया.

उसको केवल एक विषय में डिक्टेशन मिला था 90 नंबर वो भी ड्राइंग में. और हिंदी में उसे 45 नंबर मिले थे. बाकि के सभी विषयो में मिलकर भी वो 33 नंबर नहीं ला पाया था. यह देखकर आनंद जी का गुस्से का पारा हाई हो गया और उन्होंने अभिषेक को जी भर कर कुत्ता. रानी जी, सरिता और मनीषा अभिषेक को बचने के लिए भी आगे आये. पर आनंद जज ने किसी की भी नहीं सुनी और जी भर कर उसकी पिटाई कर दी. जिसके कारन पूरी रात अभिषेक रोटा रहा.

रानी जी ने रात में खाने के लिए उसे बुलाया, लेकिन उसने खाना खाने से मन कर दिया, जिसके कारन आनंद जी का गुस्सा और भी बढ़ गया और वो अभिषेक को मरने के लिए उठे. लेकिन रानी जी ने उन्हें शांत करा कर खाना खाने के लिए दे दिया और खुद खाना लेकर अभिषेक के कमरे में चली गयी, लेकिन अभिषेक खाना खाने के लिए तैयार नहीं हुआ. थक हार कर वो वापस बहार चली आई. फिर सरिता न खाना खाया और एक थाली खाना लेकर अभिषेक के पास गयी और बोली.

सरिता- भैया खाना क्यों नहीं खा रहे हैं आप. चलिए जल्दी से खाना खाइये.

अभिषेक- मुझे नहीं खाना. तू जा यहाँ से.

सरिता- आप खाने से क्यों गुस्सा हैं. इसने तो आपको कुछ नहीं कहा. जो भी कहा है पापा ने कहा है तो पापा का गुस्सा खाने पर निकलना अच्छी बात थोड़ी न है.

अभिषेक- मैंने कहा न. मुझे नहीं खाना. तुझे एक बार में समझ में नहीं आता है क्या.

अभिषेक ने ये बात थोड़ा तेज़ आवाज़ में कही थी. जिससे सरिता रोने जैसी हो गयी और उसकी आँखों से दो बून्द आँशु उसकी आँखों से बहार निकल गए. अभिषेक घर में सबसे ज्यादा अपनी दोनों बहनो को प्यार करता था. उनकी आँखों में आँशु नहीं देख सकता था, इसलिए जब सरिता की आँखों में आँशु आये तो उसे अपनी भूल का एहसास हुवा की उसने बेवजह hi सरिता को डट दिया, इसलिए उसने सरिता को अपने पास बिठाया और उसके आँशु पोछते हुवे बोलै.

अभिषेक- अरे मेरी लड़ो. देखो रोना नहीं. चलो मैं खाना खता हूँ. अपने हांथो से खिलाओ मुझे.

अभिषेक की बात सुनकर सरिता बहुत खुश हुई और अपने हांथो से सरिता अभिषेक को खाना खिलने लगी. कमरे के बहार से रानी जी और आनंद जी ये नज़ारा देख रहे थे. उन्हें अभिषेक पर भले hi गुस्सा आ रहा था, लेकिन दोनों भाई बहनो का प्यार देखकर दोनों को बहुत ख़ुशी हो रही थी. वो दोनों चुपचाप बहार चले गए और आनंद ने रानी से कहा.

आनंद जी- देखा तुमने भाग्यवान. कितना प्यार है दोनों भाई बहनो में. सरिता के एक आँशु ने उसका सारा गुस्सा और नाराज़गी ख़तम कर दिए. भगवन इन दोनों का प्यार हमेशा बनाये रखे.

आनंद जी ने ये दवा भगवन से मांग तो ली थी, लेकिन जरूरी नहीं है की हम जो भी भगवन से मांगते हैं वो दवा भगवन हमेशा पूरी hi करे, ऐसा hi अभिषेक और घरवालों के साथ भी होने वाला था. जिसका उन्हें दूर दूर तक अनुमान नहीं था. खैर. सरिता ने अभिषेक को खाना खिला दिया था और अभिषेक के हाँथ धुलकर बोली.

सरिता- अआप ऐसा क्यों करते हैं भैया. आप को पता है पापा कितनी म्हणत करते हैं ताकि हम सब अचे से पढ़े. लेकिन आप हमेशा पहडै के अलावा वो सब कुछ करते हैं जो पापा को अच्छा नहीं लगता. इसीलिए पापा ने आपको मारा. इसमें पापा की कोई गलती नहीं है भैया. इसमें आपको गलती है. फिर भी आप सबसे नाराज़ हो गए. मुझको भी डाटा दिया. आपको पापा से माफी मांगनी चाहिए.

अभिषेक- अच्छा मेरी माँ. मुझसे गलती हो गयी. मुझे माफ़ कर दे. मैं पापा से सुबह माफ़ी मांग लूंगा. अब तो खुश हो जा. और मुझे सोने दे.

सरिता- बस यही करिये आप. घूमिये, लढ़िये- झगड़िये, नाराज़ होइए और खाना खाकर सो जाइये. आइल आलावा पढाई भी होती है जो आपकी डिक्शनरी में नहीं है. इसीलिए आपको मार पड़ती है. अगली बात अगर मार पड़ी तो मैं नहीं आउंगी बचने आपको देख लेना.

अभिषेक- हां हां कह तो ऐसे रही है जैसे तू hi मुझे बचती है हर बार. अब जा यहाँ से.

सरिता अभिषेक को जीभ दिखते हुवे थाली लेकर बहार चली गयी और अभिषेक बिस्टेर पर लेट कर गहरी नींद में सो गया. सुबह भोर में उठकर सबसे पहले वो फ्रेश हुवा और फिर अपने पापा के पास चलगा गया और उनके पास बैठ कर बोलै.

अभिषेक- पापा. मुझे माफ़ कर दो. मैंने जो कल रात में आप सब के साथ व्यव्हार किया उसके लिए.

आनंद जी- {अभिषेक के सर पर प्यार से हाथ फिरते हुवे} बीटा हम तुम्हारे कोई दुसमन नहीं हैं. अगर हम तुम्हे मारते हैं या data-te हैं तो तुम्हारे भले के लिए hi तो करते हैं. अगर तुम ठीक से पढाई करो. मैं ये नहीं कहता की तुम डिक्टेशन ले आकर दिखाओ. मैं तो बस इतना चाहता हूँ की तुम बस पास हो जाओ. आखिर पढ़ लिख जाओगे तो कही काम धंधा पकड़ लोगे. तुम्हारी ज़िन्दगी अचे से बीतेगी. नहीं तो बीटा. मुझे देखो दिन भर khat-ta रहता हूँ तब जाकर दो वक्त की रोटी का जुवाद होता है. मैं नहीं चाहता बीटा की तुम्हारे साथ भी ऐसा हो. इसलिए मैं तुमको data-ta रहता हूँ. पढ़ाई करने के लिए कहता हूँ.

अभिषेक- ठीक है पापा मैं पूरी कोशिश करूँगा की इस बार पास हो कर दिखाऊंगा.

आनंद जी- मुझको तुमसे यही उम्मीद है मेरे बेटे. कोशिश करना की तुम मेरी उम्मीदों पर खरे उतरो.

फिर आनंद जी ने अपना खाना पैक करवाया और ऑटो लेकर अपने काम पर चले गए.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
धन्यवाद आपका महोदय।।

पता तो पहले से ही था माँ को, लेकिन वो सोच रही थी कि शायद वो सुधर जाएगा लेकिन ऐसा हो न सका।।

कोई भी बाप हो अगर उसके बच्चे ऐसी हरकत करेंगे तो उन को मार जरूर पड़ेगी। आनंद जी को भी गुस्सा आया उसके फेल हो जाने पर, ऐसा नहीं। है कि और बच्चे फेल नहीं होते लेकिन उसकी शरारत और मार पीट से पहले से ही परेशान थे ऊपर से वो फेल भी हो गया।।

चित्रकारी तो बहुत अच्छी है लेकिन हर मां बाप की तरह उसके मां बाप को भी लग रहा है कि इस क्षेत्र में कोई स्कोप नहीं है। शायद इसलिए वो इसपर ध्यान नहीं दे रहे हैं।।

वो तो पहले से ही ऐसा ही था इसीलिए तो उसकी पढ़ाई देर से शुरू हुई।।

ये आने वाले कुछ भागों में पता चल जाएगा।

साथ बने रहिए।।
 
🙏🙏👏👏👋👋👋

यही तो।।

अभिषेक अब नहीं सुधारने वाला ऐसा मुझे भी लग रहा है। लेकिन माँ बाप और बहन अभी भी कोशिश कर रहे हैं कि वो सुधर जाए और इसके लिए वो हर संभव प्रयाश कर रहे हैं अब आगे वो सुधरता है या नहीं ये तो बाद में पता चलेगा।।

आपका अनुमान सही है। ऐसा ही कुछ होने वाला है लेकिन कुछ बातें और हैं जो बाद में पूरे परिवार को पछताने पर विवश कर देंगी क्योंकि स्थिति और परिस्थिति दोनों अजब गजब खेल खेलेंगी।

अब ये तो आने वाला समय बताएगा कि अभिषेक कैसे सुधरता है और कौन उसको सुधारता है।

सरिता बनती है निश्चल की प्रेमिका या फिर मनीषा बनती है उसकी प्रेमिका ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। मनीषा पढ़ाई में ऐसी ही है।।

ये सब आप सभी पाठकों का कहानी के प्रति अपार प्रेम के कारण संभव हुआ है। आगे भी ऐसे ही सहयोग की आशा है।।

अब ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि क्या लिखा है अभिषेक के नसीब में।।

धन्यवाद आपका नैना जी।

संघ बनी रहिए।।
 
अपडेट- 04

आनंद जी के जाने के बाद अभिषेक ने थोड़ी देर पढाई की, लेकिन फिर से वही धक् के तीन पात वाला हॉल हो गया. थोड़ी देर पढ़ने के बाद अभिषेक फिर से घर से बहार निकल गया. अभिषेक की शरारते जारी रही और पढाई से उसका नाता toot-ta गया. जब आनंद जी घर में होते थे तो अभिषेक बस किताब खोले बैठा रहता था, लेकिन जब वो बहार जाते तो अभिषेक भी बहार निकल जाता.

रानी जी ने आनंद जी को ये भी बताया की उनके जाने के बाद अभिषेक बहार निकल जाता है तो वो बहुत परेशां हुवे. फिर जब दोबारा अभिषेक का नाम लिखाया गया तो उन्होंने खुछ सोचते हुवे अभिषेक का टूशन फिर से लगवा दिया की शायद इस बार अभिषेक अच्छे से पढ़ाई कर ले, लेकिन टूशन में भी अभिषेक पढाई पर ध्यान नहीं देता था.

टूशन से भी अभिषेक की शिकायते आने लगी. तो अभिषेक को फिर से आनंद जी ने मारा. कुछ महीने बाद टूशन टीचर ने अभिषेक को टूशन से निकल दिया. रोज की मार और पढाई से अलगाव के कारन अभिषेक फ़्रस्ट्राटे होने लगा. इसका नतीजा ये हुवा की अब वो दिन भर घर से गायब hi रहने लगा.

धीरे धीरे फिर से बोर्ड की परीक्षा आ गयी और अभिषेक इस बार फिर से फ़ैल हो गया. बस इस बार भी हिंदी और ड्राइंग में hi उसको नंबर मिले थे. बाकि सभी सब्जेक्ट में वह फ़ैल हो गया. आनंद जी को बहुत ज्यादा गुस्सा आया इस बात पर. उस दिन आनंद जी ने अभिषेक को बहुत बुरी तरह मारा. इस बार सरिता ने बिच में आकर अभिषेक को बचाया. इसी चक्कर में एक डंडा सरिता को भी पद गया.

सरिता अभिषेक को लेकर अपने कमरे में चली गयी और उसके घावों पर मरहम लगाया. अभिषेक चुपचाप आँशु बहता रहा. सरिता ने भी अभी कुछ बोलना सही नहीं समझा. उसे अपने पापा पर भी गुस्सा आ रहा था, परन्तु आनंद जी ने जो भी किया वो गुस्से में किया. उसका गुस्सा करना भी जायज था.

थोड़ी देर बाद जब उनका गुस्सा शांत हो गया तो उन्हें इस बात का पछतावा होने लगा की उन्हें अभिषेक को इतनी बुरी तरीके से नहीं मरना चाहिए था. वो अभिषेक के पास गए और उसके सर पर हाँथ फिरकर प्यार से कहा.

आनंद जी- अभिषेक बीटा. मुझे माफ़ कर दे. मैंने गुस्से में आखर तुंझे बहुत मारा. इतना तो मैं समझ गया हूँ की तुझसे अब पढाई लिखे नहीं हो पाएगी. लेकिन तेरी ड्राइंग बहुत बढ़िया है तो अगर तू उसी फील्ड में अपना कर्रिएर बना ले तो ठीक रहेगा. मुझे भी तुझ पर बार बार हाँथ उठाने में तकलीफ होती है.

उस रात आनंद जी को भ्ही ठीक से नींद नहीं आयी और घर के अन्य सदस्य भी अभिषेक को लेकर बहुत दुखी थे. धीरे धीरे समय बीतता रहा और आनंद जी ने अपने जान पहचान वालो से किसी बैनर और होर्डिंग वाली कंपनी में अपने बेटे को रखवाने के लिए बात भी कर ली.

एक दो जगह बात भी बानी, लेकिन उसकी पहडै बिच में आड़े आ जाती. काफी मसक्कत के बाद अभिषेक को एक बैनर और होर्डिंग बनाना वाली कंपनी में काम मिल hi गया, लेकिन पढ़े लिखे न होने के कारन उसे पैसे ज्यादा नहीं मिलते थे. आनंद जी इतने में hi खुश थे की काम से काम अभिषेक को काम तो मिल गया है. इसी बहाने अब वो बिजी रहेगा तो लड़ाई घगड़ा भी नहीं करेगा. और चार पैसे भी घर में आएंगे. लेकिन आनंद जी की ये ख़ुशी भी ज्यादा दिन नहीं चली.

अब सरिता ने हाई स्कूल में एडमिशन करवा लिया था और मनीषा क्लास 7 में थी. समय धीरे धीरे आगे बाहड़ता रहा और समय के साथ अभिषेक की लाइफ में परिवत्तनं आने लगा. उसकी सांगत कुछ गलत लड़को से हो गयी और वो उनकी सांगत में बिगड़ता चला गया.

अब वो दारू, बीड़ी, पान, तम्बाकू और गुटखा जैसी नशीली चीजों का भी सेवन करने लगा, लेकिन अब वो मार पिट और लड़ाई झगड़ा नहीं करता था, या यूं कहें की उसे इसके लिए समय hi नहीं मिलता था.

जब आनंद जी को इस बात का पता चला तो उन्होंने अभिषेक को बहुत समझाया. इतना तो अब वो जान गए थे की मार पीठ कर अभिषेक को समझाना बहुत मुश्किल है. और वैसे भी एक कहावत है की अगर बीटा बाप के कंधे को पार कर जाता है तो उसे मरने में बाप को संकोच होता है. इसलिए वो अभिषेक को प्यार से समझते हुवे बोले.

आनंद जी- ये सब क्या है अभिषेक, पहले तो तू पढ़ाई भी नहीं करता था, लड़ाई झगड़ा करता था और अब तू गलत सांगत में भी पद गया है. क्यों हम लोगो को जीते जी मरना चाहता है. आखिर हमने क्या बिगाड़ा है तुम्हारा. यही न की तुम हमारे घर में पैदा हुवे. क्यों करता है तू ये सब. क्या तुम्हे अपने बूढ़े होते माँ बाप पर तरस भी नहीं आता. या हम लोगो की जान लेकर hi मानेगा तू.

अभिषेक- मैंने क्या किया है पापा. आप ने कहा काम करने के लिए तो मैं कर रहा हूँ. बाकि दोस्तों के साथ उठाना बैठना भी बंद कर दूँ क्या पापा.

आनंद जी- मुझे कभी दोस्तों के साथ उठने बैठने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन वो तेरे दोस्त नहीं दुश्मन हैं जो तुझे गलत रस्ते पर ले जा रहे हैं. उनका साथ छोड़ दे. अच्छे लड़कों के साथ अपनी जान पहचान बढ़ा, अब भी वक्त है सुधर जा बीटा. अगर तुझे ये जॉब नहीं करनी तो तू छोड़ दे उसे और घर में बैठ. मैं अभी कमा रहा हूँ. मैं अभी भी तुम सबको पाल सकता हूँ, लेकिन तुम उनका साथ छोड़ दे अभिषेक.

अभिशा- क्या यार पपप. पहले आपको मेरी पढाई से दिक्कत थी और अब मेरे दोस्तों से भी परेशानी है आपको. आखिर आप चाहते क्या हैं. अब मैं खुद भी समझदार हो गया हूँ. अपना अच्छा बुरा खुद समझ सकता हूँ, आप हर समय मुझे मत समझाया करिये. और मेरी लाइफ में इंटरफेरे मत करिये.

इतना कहकर अभिषेक घर से बहार निकल गया. आनंद जी ठगे से उसे बहार जाते हुवे देखते रहे. आज पहली बार अभिषेक ने उनसे इस लहजे में बात की थी. अपने बेटे की बात सुनकर उनका दिल टूट गया था और उनकी आँखों में आँशु आ गए. रानी जी ने जब आनंद जी को रट हुवे देखा तो वो घबरा गयी और आनंद जी के पास आकर बोली.

रानी जी- क्या हुवा आप की आँखों में आँशु. किसी ने कुछ कहा क्या आपसे.

आनंद जी रानी जी की बात सुनकर उसके कंधे पर सर रखकर फफक फफक कर रोने लगे. अपने पापा के रोने की आवाज़ सुनकर सरिता और मनीषा भी उनके पास चली गयी और अपने आनंद जी से लिपट कर कड़ी हो गयी. थोड़ी देर बाद जब आनंद जी नार्मल हुवे तब उन्होंने कहा.

आनंद जी- आज मैं हार गया भाग्यवान. आज मैं अपने बेटे से हार गया.

रानी जी- आप ऐसा क्यों कह रहे हैं जी. क्या कह दिया अभिषेक ने ऐसा जो आप ऐसी बात कर रहे हैं.

आनंद जी- वो बोल रहा है मुझे उसके दोस्तों से परेशानी है. मुझे उसकी ख़ुशी से परेशानी है. वो बोलता है की मैं उसकी लाइफ में दखल न दूँ. क्या यही दिन देखने के लिए हमने उसे पाल पास कर इतना बड़ा किया था. मैं आज अपनी hi संतान से हर गया .

सरिता- आप शांत हो जाइये पापा. मैं बात करती हूँ भैया से. वो आपसे जरूर इसके लिए माफ़ी मांगेंगे. उन्हें ये नहीं कहना चाहिए था.

रात को 8 बजे जब अभिषेक बहार से घर आता है तो सरिता उससे बात करने के लिए अभिषेक के पास गयी और बोली.

सरिता- ये सब क्या है भैया. आप को पता है की आपकी इस हरकत की वजह से पाप रो रहे थे. क्या ये अच्छा लगता है की एक बाप अपने बेटे के कारन रोने लगे.

अभिषेक- लेकिन मैंने तो ऐसा कुछ भी नहीं कहा था जिसके कारन पापा को दुःख पंहुचा हो.

सरिता- आपने जो कुछ कहा है. उसी बात ने पापा के दिल को चोट पहुचायी है. आपको क्या जरुरत थी पलटकर जवाब देने की. चुपचाप सुन नहीं सकते थे क्या. और वैसे भी पापा ने कोई गलत बात तो नहीं बोली थी. केवल यही कहा था की आपके दोस्त अचे नहीं हैं वो आपको बिगड़ रहे हैं. मुझे भी लगता है की पापा सही कह रहे हैं. आप अब पहले जैसे नहीं रहे भैया.

अभिषेक- देख सरिता. अब तू भी मत शुरू हो जाना. नहीं तो मैं अभी घर से फिर चला जाऊंगा.

सरिता- अच्छा ठीक है मैं नहीं बोलती कुछ. वैसे भी मेरी कोई बात आप मानते कहाँ हैं. लेकिन आपको पापा से माफ़ी मांगनी चाहिए. आपकी वजह से पापा आज रो दिए.

अभिषेक- ठीक है मेरी माँ. मैं माफ़ी मांग लूँगा पापा से. मुझे भी लगता है की मैंने कुछ ज्यादा hi ओवर रियेक्ट कर दिया. मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था.

सरिता- जब आप को पता है की की पापा हमेशा आपके भले के लिए कहते हैं तो आप ऐसे क्यों बर्ताव करते हैं पापा से.

अभिषेक- पता नहीं सरिता, लेकिन उस समय मुझे पता नहीं क्या हो जाता है. मुझे ऐसा लगता है की पापा मुझपर बंदिश लगा रहे हैं.

सरिता- आप कितना गलत सोचते हैं भैया. जो आपको बंदिश नजर आती है. वो पापा का प्यार है आपके लिए, लेकिन आप अपने आवारा दोस्तों के साथ रहकर बिगड़ गए हैं. आपको पापा का प्यार दिखाई hi नहीं दे रहा है.

अभिषेक- अच्छा ठीक है. अब तू शुरू मत हो जा. मैं कह तो रहा हूँ की मैं माफ़ी मांग लूंगा पापा से.

सरिता- ठीक है भैया मैं चलती हूँ. पापा से माफ़ी जरूर मांग लीजियेगा आप.

इतना कहकर सरिता बहार चली गयी. थोड़ी देर बाद खाना बन गया और सभी खाने के लिए बैठ गए. खाना कहते हुवे अभिषेक ने कहा.

अभिषेक- पापा मुझे माफ़ कर दीजिए. मुझे उस तरह आपसे बात नहीं करनी चाहिए थी. पता नहीं उस समय मुझे क्या हो गया था जो मैंने आपसे ऐसी भाषा में बात की.

आनंद जी- बीटा मैं तेरा दुश्मन नहीं हूँ. मैं जो भी कर रहा हूँ या जो भी तुझे कहता हूँ. तेरे भले के लिए कहता हूँ. आखिर मुझे चिंता है तेरी.

अभिषेक- ठीक है पापा आगे से मैं इस बात का ध्यान रखूँगा.

लेकिन सभी को पता था की ये बात बस 2-4 दिन में hi अभिषेक भूल जायेगा. सभी खाना खाने के बाद अपने अपने बिस्टेर पर सोने चले गए.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में.
 
धन्यवाद आपका महोदय,

अभिषेक का पढ़ाई से दूर दूर तक नाता नहीं है इसलिए उसे फेल होना ही था, आखिर माँ बाप को गुस्सा क्यों न आये। उन्होंने कितनी मेहनत की है अपने बच्चों की परवरिश में। उन्हें दुःख और दर्द तो होगा ही।।

बाप का फैसला तो सही था, आखिर में उन्होंने भी उनकी रुचि में ध्यान दिया कि वो क्या चाहता है।।

बाप के फैसले को अभिषेक ने गलत साबित कर दिया। बाप ने उसका अच्छा सोचकर उसको जॉब पर लगवाया था लेकिन वो तो और भी ज्यादा बिगड़ गया।। जब बेटा बाप को पलटकर जवाब देने लगे तो बाप की आंखे नम हो ही जाती है।।

अभी तो बहुत कुछ होने वाला है। जो अगले भाग में पता चल जाएगा।

साथ बने रहिए।।
 
👋👏👏🙏

हर बाप की ख्वाहिश होती है कि उनका बेटा कामयाबी की नई ऊंचाइयों को छुवे, लेकिन अगर बेटा नालायक निकल जाए तो फिर कहने ही क्या। सभी की उम्मीदों पर कुठाराघात हो जाता है ऐसे में। अभिषेक के साथ भी यही हो रहा है। वो कुछ भी समझना नहीं चाह रहा है।।

कोशिश पूरी कर रहे हैं वो की अभिषेक सुधर जाए लेकिन वो ठहरा मोटी बुद्धि वाला प्राणी उसे कुछ समझ मे ही नहीं आ रहा है।।

आनंद जी ने अभिषेक के मन की बात और उसकी रुचि देखते हुए उसे चित्रकारी में ही अपना भविष्य बनाने के लिए प्रेरित किया लेकिन वो उसमे भी सफल नहीं हो पाए।।

बहुत बहुत धन्यवाद आपका मान्यवर।

साथ बने रहिए।।
 
आपका कहना सही है महोदय,

लेकिन क्या है ना कि कहानी और वास्तविकता में जमीन आसमान का अंतर होता है। वास्तविकता से ही कहानी का आगाज होता है और कहानी से ही वास्तविकता को जीने की कोशिश की जाती है, लेकिन कुछ ऐसी बातें, कुछ ऐसे वाकये होते हैं जो कहानी में तो आसानी से सुलझ जाते हैं लेकिन वास्तविकता में उस वाकये को सुलझाने में पूरी ज़िंदगी कम पड़ जाती है।

इसी बात को मद्देनजर रखते हुए हमने ये बात कही है। वास्तविक पुलिसिया काम और कहानियों का पुलिसिया काम बहुत अलग होता है, लेकिन पाठकगण इतने समझदार तो जरूर हैं कि वो इस बात को समझ जाएंगे।।

आपकी बात भी एकदम दुरुस्त है, लेकिन वो क्या है न कि हमको सरिता और सविता नाम बहुत ज्यादा पसंद है। इसका एक कारण भी है।। इसलिए मैं इस नाम को हर कहानी में रखने की कोशिश करती हूँ।

जहां तक नाम की बात है तो इस कहानी को लिखते समय हमको परेशानी होनी चाहिए, क्योंकि पूरे 5 महीने हमने इन्हीं नामों को लेकर एक सेक्स कहानी लिखी थी और घमासान मचाया था। गो लिखते समय दिक्कत हमको आएगी थोड़ी बहुत।

पाठक को तो केवल कहानी पढ़ना है। वो दिन भर में भिन्न भिन्न नामों की कई तरह की कहानियां पढ़ते हैं इसलिए उन्हें कोई फर्क तो पड़ने वाला नहीं है। और वैसे भी ये नई कहानी है तो पुरानी कहानी को अपने दिमाग से निकाल कर ये कहानी पढ़ें कोई दिक्कत नहीं होगी।😃🤣😂😁..
 
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कुत्ते की दुम भी सीधी हो जाती है मैडम। आजकल कलयुग जो चल रहा है।।🤣😃😁

बाकी अभिषेक जो बचपन से अपनी माँ के प्यार के कारण बिगड़ गया है वो सुधरेगा तो है ही लेकिन तब जब बहुत देर हो गई होगी तब।।

ये उम्र ही ऐसी होती है, लोग सोचते हैं कि वो

जिस रास्ते पर चलकर जीवन का आनंद उठा रहे है वो रास्ता गलत है, उसे अगर कोई समझाए तो ऐसा लगता है उसे कि समझाने वाला व्यक्ति उसका दुश्मन है। कुछ भी कह लो। एक कान से सुन लिया और दूसरे कान से निकाल दिया। इस उम्र में ये अंदाजा बच्चों को बिल्कुल भी नहीं होता कि उनके इस कदम से उनके घरवालों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।।

बाहर बिगड़े हुए दोस्तों के साथ रहकर अभिषेक बहुत बदल गया है अब उसमें तहज़ीब की भी कमी आ चुकी है। झुंझुलाहत में उसने अपने बाप को क्या बोल दिया ये उसको अंदाजा नहीं है, लेकिन उसके इन वाक्यों ने आनन्द जी को तोड़ जरूर दिया है।।

बहुत बहुत धन्यवाद आपका इस खूबसूरत समीक्षा के लिए।

साथ बनी रहिए।।
 
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ये बात तो बिल्कुल सत्य है महोदय की कुछ चीजें भगवान की देन होती है जिसमे इंसान की रुचि होती है और वो उसे अपने परिश्रम और लगन से निखार सकता है।। चित्रकारी भी एक कला है जो सभी के बस की बात नहीं है।।

बात बिल्कुल सही है। अगर पढ़ाई लिखाई में रुचि नहीं है तो चित्रकारी में भी अपना भविष्य बनाया जा सकता है, लेकिन ये तभी संभव है जब अभिषेक इंटर मीडिएट की परीक्षा पास कर ले लेकिन वो उसके बुते से बाहर की बात लग रही है।।

आपने जिन चित्रकारों के नाम बताए हैं उनका कोई सानी ही नहीं है। बहुत ही बेहतरीन चित्रकार है ये लोग।।

आपकी बात सही है महोदय, लेकिन जब बच्चे अभिषेक की तरह हों जिन्हें गुड़ और गोबर में अंतर करना ही नहीं आता तो अभिभावक भी क्या कर सकते हैं उसके बाप ने वो सबकुछ करके देख लिया जो उसे सुधार सकते थे, लेकिन अभिषेक सुधरा ही नहीं। वो सुधरेगा जरूर लेकिन सबकुछ बर्बाद करके।।

बहुत बहुत धन्यवाद आपका संजू सर।।
 
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