अपडेट-27
(तुषार अभी भी अपने धयान में मगन था.. सफल और सवाना भी अपने काम गद्दा खोदने में लगे थे.. गुरूजी कब के जा चौके थे.. शिवं तुषार के पास hi कहड़ा था.. लकिन फिर वो chalte-chalte हवेली के बहार जाने लगा.. अभी उसने थोड़ी दूर रोड पर देखा तोह पाया की एक बाइक निचे गिरी पड़ी है. उसके पास में एक औरत और एक आदमी बशोष पड़े है शायद कोई एक्सीडेंट हुआ था.. दोनों पति होंगे क्युकी रोड के bicho-bich एक छोटी लड़की रू रही थी वो इनकी बेटी हो सकती है.. शिवं ने दूर रोड पर देखा की एक गाड़ी सामने से ा रही है जिसकी स्पीड काम hi नहीं हो रही.. शायद ड्राइवर ने थोड़ी पी राखी थी.. और वो कार फुल स्पीड से उस बची से जा लगेगी अगर वो साइड न हुई तोह.. शिवं को गुस्सा ा रहा था की सामने एक बची रोड के बिच रू रही है और यह लड़का कार क्यों नहीं स्लो कर रहा… खैर शिवं ने दूर लगा दी.. उससे कार वाले को सबक सीखने की सूजी.. स्पीड के तोह क्या कहने वो पालक झपकते बची के पास खड़ा था लकिन थोड़ा सा आगे.. कार अपनी स्पीड दिखती हुई शिवं से तकरानी वाली थी की शिवं ने अपना राइट हैंड एकदम से सीधा कर लिया गाड़ी जब शिवं के हाथ से टकराई तोह ासे रुक गयी जैसे दिवार से जा टकराई हो.. शिवं ने गाड़ी के बम्पर पे जोर से हाथ मारा था.. जिससे गाड़ी पीछे से थोड़ी ऊपर उछाल के वापिस निचे गिर गयी और गाड़ी के सरे गिलास chakna-chur हो गए.. बम्पर की हालत ख़राब थी.. इंजन से धुआँ छूट पड़ा था.. और जो सबसे बड़ी बात थी ड्राइवर के साथ वाला लड़का फ्रंट गिलास के टूटने के sath-sath वो भी गाड़ी से बहार आके रोड पे गिर गया.. ड्राइवर बशोष था… और पीछे भी 2 लड़के नशे में सू रहे थे और अचानक हुए इस सीन से दर गए दोनों के सर अगली सीट से जा जोर से टकराये थे….
|अब अग्गे|
लड़का.3- (अपना सर पकड़ कार से बहार निकलता हु) आअह्ह्ह्ह बहनचोद.. क्या हुआ बे यह साला… (कार की हालत देखता मुँह खोल देखता हु) ए दीपक.., राजू, पिंकू.. साला क्या हो गया यह… (ड्राइवर को कंधे से पकड़ हिलाते हुए) राजू.. ए राजू.. यह तोह बेहोश है… पिंकू कहा गया…
दीपक- मोंटी…
मोंटी- (दीपक की तरफ देख) हाँ..? पिंकू कहा गया.. (शिवं की और देख) यह कोण है सामने खड़ा और येह क्यों रू रही है.. तू बता तुजे कुछ पता है की क्या हुआ है.. मैं सू रहा था.. और एक झटका लगा kass.k के साला सर जेक सीट से टकरा…
दीपक- अबे सेल चुप कर.. (एक तरफ इशारा कर) और वो पड़ा पिंकू अग्गे…
मोंटी- (अग्गे जेक दीपक को देखता हुआ) भाई साहब.. (भाग के उसके पास जेक) अब्बे तब से तू देख क्या रहा था.. यह भी बेहोश है.. पानी ला… अब्बे ेहः साला हुआ क्या है कोई मुझे बटेगा…
शिवं- (बची को गौड़ में उठता हुआ. जो कब से रू रही थी) अरे बीटा ठीक हो आप.. chup-chup रट नहीं... (उसके आखों से ासु पोंछता हुआ) फ़िक्र मत करो बीटा.. सब ठीक है…
(शिवं उस बची को हवेली में ले जाता है.. लड़की थी की चुप होने का नाम नहीं ले रही थी…)
शिवं- (जोर से आवाज लगता हुआ) सफल.! सवाना.!!
सफल- (खड़े में से आवाज लगता हुआ) हाँ भाई.. क्या हुआ..?
शिवं- इधर ायो बहार... चुप हो जाओ बीटा. इतना मत रू प्लीज. मुझे ाचा नहीं लग रहा.. (वापिस उसकी आखें साफ़ कर) देखो तोह कैसे अपने रू रू के अपनी आखें लाल कर्ली है…
सवाना- (शिवं के पास अत्ति हुई) क्या हुआ शिवं..? ये प्यारी सी बची कोण है और क्यों रू रही है इतना.. (बची को पकड़ती हुई) इधर ला मुझे दो इससे अभी चुप करवाती हु मैं…
(शिवं उस बची को सवाना को पकड़ा देता है और खुद सफल के साथ हवेली के बहार चला जाता है…)
सफल- (बहार का नजारा देख) भाई यह सब क्या हुआ और कब हुआ..?
शिवं- (उन् बाइक वाले लड़का और लड़की की और इशारा कर) तू वो सब छोड़ उन्हें जल्द से गद्दी में दाल और हॉस्पिटल ले चल.. वैसे तोह ज्यादा छोटे नहीं लगी है सिर्फ बेहोशी की हालत में hi है लकिन रिस्क नहीं लेना.. जा जल्दी कर…
सफल- ठीक है भाई में जाता हु…
(सफल जल्दी से हवेली जेक तुषार की कार निकलता है और ek-ek करके पहले लड़की और फिर लड़के दोनों को कार में पिछले सीट पर बैठा के उन्हें सीट बेल्ट लगा देता है और कार को सेहर के हॉस्पिटल की तरफ मूड देता है…)
(अंडर दोनों लड़को ने अपने बेहोश पड़े दोनों दोस्तों को होश में ला दिया था.. लकिन दोनों को काफी छोटे आयी थी.. ड्राइवर के सर पे लगी थी दूसरे के हाथ पाव और चेहरा चील गया था कार का कांच और सड़क की रगड़ की वझे से…)
मोंटी- (शिवं के तरफ देख) ोये लड़के.. इधर आ…
शिवं- (उसके पास जा खड़ा होता हुआ) हम्म बोलो…
मोंटी- यह सब क्या हुआ तू जनता है.. कार टकराई कैसे.. और सबसे बड़ी बात किस्से टकराई..? यहाँ तोह मुझे कुछ न दिख रहा.. हाँ वह दूर एक बाइक और एक लड़का, लड़की बेहोश पड़े थे.. काहिर वो मेरे मतलब की बात नहीं.. कार का बाइक से टकराने से ऐसा एक्सीडेंट थोड़ी होगा.. यह कुछ और हुआ है.. अब बता जल्दी तू इधर hi खड़ा था तूने सब देखा होगा…
शिवं- मैं तोह खुद bar-bar बचा हु.. देखा नहीं मैं तुम लोग की गद्दी के सामने था.. अभी ुद्धा देते मेरेको तुम लोग.. ाचा वैसे ा कहा से रहे हो तुम लोग इतनी दारू पेक..?
दीपक- वो तेरे मतलब की बात नहीं है.. लकिन एक बात बता तू रोड के बिच क्या ग़लतिया मार रहा था.. पता न है था यह रोड है.. यहाँ गड्डिया, ट्रक, मोटरसाइकिल दौड़ते है…
शिवं- वो सब छोडो तुम्हारे वो दोनों साथी कहा है..?
मोंटी- वो दोनों कार में है.. होश में तोह ा चुके है पर समाज नहीं ा रहा कुछ बोल क्यों न रहे.. बस कम्पे जा रहा है तब से. जैसे कोई bhoot-voot देख लिया हो…
शिवं- (मुस्कुराता हुआ) ाचा चलो अपने फॅमिली वालो को या किसी दोस्त, रिश्तेदार को फ़ोन करके हेल्प मांग लो.. और fata-fat निकालो यहाँ से…
दीपक- (शिवं के पास अट्टा हुआ) क्यों बे सेल चले जायेंगे आराम से तुझे उससे क्या.. (हवेली की और देखता हुआ) तेरी इधर हवेली में रुके हुए है क्या.? जो तू बोल रहा निकलो यहाँ से.. चल तू फुट ले अपने घर को कही pit-wit न जइयो मेरे से…
(शिवं अग्गे कुछ नहीं बोलता और मुस्कुराता हुआ हवेली की और चल देता है…)
(शिवं हवेली पौंछा थो देखा तुषार अभी भी वैसे hi बैठा अपने ध्यान में लीं था.. और सवाना और वो बची दोनों बेंच पर बैठे थे.. अभी वो बची रू नहीं रही थी और hass-hass के सवाना से बाते कर रही थी…)
शिवं- (उनके पास जाता हुआ) अरे आप तोह चुप हो गयी…
बची- मैं रोटी थोड़ी रहती हु.. मैं अछि बची हु.. मुम्मा कहती है रोने वाले गंदे बचे होते है. इसलिए मैं नहीं रोटी…
सवाना- (उसको गले लगाती हुई) गुड गर्ल.. कितनी प्यारी बची है न यह शिवं…
शिवं- (उसके खूबसूरत चेहरे को निहारता हुआ) हाँ बहुत प्यारी है.. वैसे आपका नाम क्या है बीटा..?
बची- मेरा नाम सिया है…
शिवं- सिया.. बहुत प्यारी नाम है आपका..
सिया- (खुश होक) थैंक्यू भैया.. (मासूमियत से) क्या मैं आपको भैया बुला सकती हु..?
शिवं- हाँ हाँ क्यों नहीं आप मुझे भैया बुला सकती हो.. और आपकी आगे क्या है..?
सिया- मैं * साल की हु…
शिवं- ओह्ह फिर तोह आप काफी बड़ी हो…
सिया- (गर्दन न में हिलती हुई) नहीं मैं 8 साल की हु. मैं छोटी हु…
शिवं- (हस्ता हुआ) ाचा ठीक है…
सिया- भैया आप हसे क्यों.. और दीदी बोल रहे थे की आप मेरे मुम्मा, पापा को लेन गए थे.. कहा है वो..? आप उन्हें लेकर नहीं ए..?
शिवं- बीटा उन्हें थोड़ी छोट आयी थी इसलिए उन्हें आपके दूसरा भैया हॉस्पिटल लेकर गया है…
सिया- (रोटी हुई) मुम्मा को छोट आयी है.. (सवाना से लिपट के) दीदी मुम्मा, पापा को छोट लगी है.. उन्हें दर्द हो रहा होगा न…
सवाना- (उसकी पीठ सहलाती हुई) रट नहीं मेरा बचा.. देखो उन्हें ज्यादा छोट नहीं लगी.. बस हलकी सी थोड़ी सी लगी है.. ठीक है.. वो जल्दी ठीक हो जायेंगे इसलिए तोह उन्हें हॉस्पिटल लेकर गए है…
सिया- ठीक है दीदी.. लकिन मुझे मिलना है उनसे…
शिवं- ठीक है आपके मां, पापा को होश ा जायेगा तोह हम उनसे मिलने चलेंगे.. Okay…
सिया- Okay भैया.. दीदी मुझे नींद ा रही है क्या मैं यहाँ सू जाऊ क्या..?
सवाना- हाँ बीटा लकिन आप यहाँ क्यों सोयुगी.. चलो मैं आपको अंदर रूम में सुला के आती हु…
सिया- नहीं दीदी मैं ऐसे hi सू जायूँगा.. आप फ़िक्र मत करो...
सवाना- नहीं.. मैंने बोलै न की आप अंदर रूम में चलो उधर जेक सू लेना.. ऐसे बचे ज़िद नहीं करते...
सिया- Okay दीदी.. आप बहुत अछि हो…
(सवाना सिया को ले जाती है हवेली के अंदर और जाने से पहले शिवं से इशारे से पूछती है की कोण है यह और क्या हुआ है आखिर तोह शिवं उससे बाद में बताने का इशारा कर देता…)
(सवाना सिया को अपने रूम में ले जाती है…)
सवाना- लो बीटा आप आराम से बीएड पर सू जाओ. ठीक है...
सिया- दीदी यह कितना सूंदर रूम है.. आपका घर भी बहुत बड़ा है.. मैंने तोह पहले ऐसा रूम कभी नहीं देखा...
सवाना- ाचा.. चलो कोई न अब से इस रूम को अपना hi संजो.. जब तक आपके मम्मी, पापा ठीक नहीं हो जाते आप यही रहो ठीक है…
सिया- Okay दीदी…
सवाना- और बताओ कुछ खाने को लाऊं क्या आपके लिए…
सिया- नहीं दीदी.. मुझे बस सोना है.. नींद ा रही है.. खाना मैं बाद में खा लुंगी…
सवाना- (उसके माथे पे किश करती हुई) ठीक है सू जाओ.. आप बहुत प्यारी बची हो…
(सवाना वापिस शिवं के पास ा जाती है और आकर तुषार को देखती है…)
सवाना- बॉस तपश्या क्यों कर रहे है तब से..?
शिवं- गुरूजी ने बोलै.. इससे इनका मन शांत रहेगा…
सवाना- हम्म गुरूजी ने बोलै है तोह जरूर होगा.. उनकी बाते किसी चमत्कार से काम है क्या.. उन्होंने तुझे क्या बना के रख दिया.. और हमे क्या बना दिया…
शिवं- (मुस्कुराता हुआ) हम्म्म..
(सवाना अग्गे कुछ पूछती उसने तुषार की तरफ देखा और एकदम से घबरा के बोली…)
सवाना- (घबराती हुई) Shii..Shiiivaann……
《1721 वर्ड्स》