TUSHAR EK YODHA 《Incest, Thrill, Magical》 - Page 7 - SexBaba
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TUSHAR EK YODHA 《Incest, Thrill, Magical》

दोस्तों अभी स्टोरी कुछ दिन बंद रहेगी.. कोई डेट फिक्स नहीं है पर बहुत बिजी हु मैं.. सोचा आप सब को बाटाडू ताकि आप रोज थ्रेड पर आकर परेशां न हो की अपडेट आया या नहीं.. 25-30 दिन तक कोई अपडेट नहीं आएगा... कोई रीडर्स नाराज न होना.. Bye........

एडिटेड: इग्नोर थिस नोट. एंड एन्जॉय थे स्टोरी...
 
अपडेट-29

चाचा- (अजीब सा मुँह बना के) अरे याद मात दिला नाखून की.. तूने पुरे एक साल तक मर. स्टीवन को बंद करके रखा था और उसके नाखूनों को जड़ से उखाड़ देता था.. और ऐसा तूने पुरे 1 साल तक किया था. जब भी उसके नाखून लम्बे होते…

रूद्र- (बिच में) तोह उस बारे हुए डस्टबिन को और ऊपर तक भर देते… हाहाहाहा….

|अब अग्गे|

|Tushar’s हाउस|

(नजाने क्या बात थी की तुषार का घर पे न होना न तोह अन्निका को ाचा लग रहा था और न hi तान्या को.. जैसे उसके बिना वो दोनों अधूरी है.. दोनों अभी apne-apne रूम में करवट badal-badal के सोने की कोशिश कर रही थी लकिन नींद दोनों को नहीं आ रही थी...

|नेक्स्ट डे मॉर्निंग|

|Jagala's हवेली|

(लाला सोफे पे टंगे पहला के बैठा कुछ सोच रहा था.. उधर एक रूम से जग्गू बहार निकलता है और लाला को ऐसे सोच में देख पूछता है…)

जग्गू- (उसके साथ वाले सोफे पे बैठा हुआ) क्या हुआ भाई.. किश सोच में घूम हो..?

लाला- यह शांति कैसी है…

जग्गू- (न समझता हुआ) शांति.. कैसी शांति..?

लाला- वही तोह मुझे समाज नहीं आ रही…

जग्गू- आप क्या कह रहे हो भाई. मुझे खुद कुछ समाज नहीं आ रहा.. saaf-saaf बोलो न…

लाला- (सोफे से उठता हुआ) आबे काम अकाल.. मैं उसी शांति की बात कर रहा जो तेरे इतने बड़े काण्ड करने के बाद भी पहेली हुई है…

जग्गू- (सर पे हाथ रख सोफे से उठ, बहार जाता हुआ)

लाला- (उससे यू जाते देख) कहा जा रहा है…

जग्गू- (वापिस घूम के देख) भाई लगता है शायद लड़किया chod-chod कर मेरा दिमाग ख़राब हो गया है.. मुझे आपकी बाते समाज नहीं आ रही.. थोड़ी ठंडी हवा लेने जा रहा था…

(लाला उसके पास जाता है और कस के एक थप्पड़ जग्गू के गाल पे मरता है.. लाला को ज्यादा गुस्सा तभी आता था जब वो बहकर टेंशन में हो.. अभी जग्गू के इलावा कोई दूसरा होता तोह उसकी इस हरकत के लिए लाला उससे जान से मार देता.. जग्गू को उसके आदमियों के सामने थप्पड़ पड़ा था इसलिए गुस्सा उससे भी बहुत आया था.. वो अपना मुँह निचे कर गुस्से में चुप रहा...)

लाला- यह फालतू के मजाक मेरे साथ न किया कर.. समजा..?

जग्गू- (वैसे hi निचे देखता हुआ) सॉरी भाई.. पर क्या आप खुल कर बताओगे की आखिर बात क्या है...

लाला- मैं कह रहा हु की आज 2 दिन हो गए तेरा वो रपे वाली वीडियो डेल लकिन अभी........

(लाला कुछ आगे बोलता राजू अंदर आता हुआ बोलै...)

राजू- बॉस...

लाला- (उसकी और गुस्से से देखता हुआ) तुझे दिख नहीं रहा क्या. मैं कुछ बात कर रहा हु...

राजू- (सर निचे कर के) सॉरी बॉस वो एक जरुरी बात थी...

लाला- (सोफे पे जा बैठता हुआ) वो सब बाद में.. अभी निकल यहाँ से.. जब बुलाऊ तोह आना...

राजू- पर बॉस...

अंजनी आवाज- (राजू के कलर को पीछे से पकड़ साइड करता हुआ) साइड हातले तेरे बस न, मैं बात करता हु तेरे बॉस से.. (लाला को देख उसके करीब जाता हुआ) हाँ तोह तू hi लालू..?

लाला- (सोफे खड़ा होता हुआ, गुस्से में) सेल.. कोण है बे तू.. हिम्मत कैसी हुई मेरी इज्जाजत के बिना मेरी हवेली में पेअर रखने की.. जनता है मैं कोण हु..?

अंजनी आवाज- (सोफे पे बेथ, अपने कपड़ो की और इशारा करता हुआ) यह यूनिफार्म देख रहा है.. कोण लोग पहनते है यह यूनिफार्म?.. इंस्पेक्टर दया नाम है मेरा.. तेरे भाई को अंदर करने आया हु.. (उठता हुआ जग्गू की तरफ जाता हुआ) चल आजा बीटा.. तुझे मुक्ति दू.. (हथकड़ी निकलता हुआ) यह ले पहन ले.. या मैं खुद पेहनौ..?

लाला- ोये इंस्पेक्टर.. जनता है तू क्या कर रहा है.. लगता है इस एरिया में नया है..

इंस्पेक्टर दया- (जबरदस्ती जग्गू के हाथ पकड़ हथकड़ी लगता हुआ) अपना काम कर रहा हु.. और पहले जिधर का भी था अब इधर का hi हु...

जग्गू- (अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करता हुआ) हाथ छोड़ मेरा.. सेल मदर..... आअह्ह्ह्हह

(यह जग्गू को थप्पड़ पड़ा था.. जो इंस्पेक्टर दया ने मारा था कस के.. जग्गू को थप्पड़ लगते hi हाल में जितने भी गुंडे थे सबने इंस्पेक्टर दया पर अपनी बंदूके तन ले..)

इंस्पेक्टर दया- (सरे गुंडों को एक नजर देखता हुआ, जग्गू से) जबान संभल के.. तुम जैसे chindi-chhoro का बाप हु मैं.. समजा.. chup-chap मेरे साथ चल...

लाला- (वापिस बैठता हुआ) हम्म.. ईंमानदार पोलिसवाले.. चलो तुझे भी तेरे जैसे बाकि साथियो के पास बेज देता हु.. (अपने आदमियों से) सालो अभी तक बंदूके तने क्या खड़े हो.. माँ छोड़ दो इस इंस्पेक्टर की...

इंस्पेक्टर दया- (लाला को देख मुस्कुराता हुआ) न न न.. ासी गलती भूल से मत करना.. वर्ण यह हवेली के छितरे उड़ा दूंगा...

लाला- (हैरानी से उससे देखता) क्या मतलब है तेरा.. (राजू को देख) ए राजू.. पहले यह बता यह अंदर कैसे आ गया.. बहार अपने 200 आदमी खड़े थे न.. उनके बावजूद भी यह अंदर आ गया.. इतनी हिम्मत तोह आज तक किसी में नहीं आयी की कोई हमारी हवेली के अंदर तक ा जाये.. जनता नहीं है क्या यह हमें...

राजू- वो वो बॉस.. यह अकेला नहीं आया है...

लाला- (हस्ता हुआ) तोह और कितने अपने जैसे ईंमानदार पुलिस वाले लाया है यह.. 4, 6 या 12.. सबको ऊपर बेजड़ो जल्दी से.. मुझे और भी बहुत से जरुरी काम है...

राजू- बॉस यह पूरी फ़ौज लाया है.. 300.. 300पुलिस वाले है जो अपने हर आदमी पे गन लगाए खड़े है... पूरी हवेली को घेरर रखा है.. एक हेलीकाप्टर ऊपर बम लिए ुद्ध रहा है.. हम किसी भी वक़्त मर सकते है बॉस...

लाला- (छोंकता हुआ) क्या!! बहनचोद.. ीठ साला.. तू तोह फुल तयारी किये आया है बे... (उठता हुआ) चाहता क्या है तू...

इंस्पेक्टर दया- यह जग्गू मुझे देदे.. मैं तुझे और तेरे आदमियों को छोड़ दूंगा...

जग्गू- मैं कोई चीज़ हु क्या.. जो तू मेरी मांग कर रहा है...

लाला- ऐसे कैसे देदे बे जग्गू तेरेको.. इसने किया क्या है...

इंस्पेक्टर दया- (जग्गू के कास के वापिस थप्पड़ लगता हुआ) यह हरामखोर ने किसी लड़की का रपे किया है.. और तू बोलता की इसने किया क्या है.. इसको तोह फांसी दिलवानी है मुझे...

लाला- (हस्ता हुआ) हाहाहाहा.. ाचा तू मेरे भाई जैसे दोस्त को फांसी दिलवाएगा और मैं यहाँ chup-chap तमाशा देखता रहूँगा.. अभी के अभी बहार सरे पुलिस वालो को एक मिंट में ख़तम कर सकता हु.. मेरी बात सुन.. क्यों इतना खून खराबा करना हैं..? चल तू बोल तेरेको कितना पैसा चाहिए..? 10करोड़..? 15करोड़.. बोल.. मुँह मांगी किम्मत दूंगा.. माला मॉल कर दूंगा.. यह पुलिस की नौकरी मैं तू पूरी जिंदगी इतना नहीं कमा पायेगा जितना तुझे मैं अभी इसी वक़्त दूंगा... क्या बोलता है...

इंस्पेक्टर दया- तेरा हो गया हो तोह मैं इससे अब ले जाऊ....

लाला- (गुस्से में) ाचा तोह तू ऐसे नहीं मानेगा.. तेरे पास क्या साबुत है की इसने hi किसी लड़की का रपे किया है...

इंस्पेक्टर दया- इधर कोई टेक एक्सपेक्ट है क्या..?

राजू- हाँ मैं हु...

इंस्पेक्टर दया- ाचा बता यहाँ का िप एड्रेस क्या है..?

राजू- 88.22....................

इंस्पेक्टर दया- (अपने मोबाइल में कुछ दिखता हुआ) इसमें देख यह वीडियो जहा से अपलोड हुई है उसका िप एड्रेस क्या है...

लाला- िप क्या होता है उससे मुझे मतलब नहीं.. (राजू को देख) राजू कोनसा सबूत है यह.. क्या सही बोल रहा है...

राजू- हाँ बॉस.. यह सही है.. इनके पास एक बहुत मजबूत प्रूफ है.. मुझे वीडियो डालते वक़्त इस बात का ध्यान रखना चाहिए था की िप हाईड रहे.. सॉरी बॉस गलती हो गयी...

इंस्पेक्टर दया- (हस्ता हुआ) हाहाहा.. शुक्रिया राजू भाई.. (अपने जेब से एक डिवाइस निकल उसमे एक बटन प्रेस कर) चलो एक और प्रूफ जंहा हो गया की यह वीडियो तूने अपलोड की है.. चल तू भी साथ... (उससे भी हथकड़ी लगता हुआ)

लाला- ोये इंस्पेक्टर यह कोई सबूत नहीं तू ऐसे hi जग्गू को नहीं ले जा सकता...

इंस्पेक्टर दया- (अपनी गन उसके आदमियों की और कर जो तबसे उसपे गन लगाए खड़े थे) निचे करो गन्स अपनी.. (चीखता हुआ) निचे करो.. तुम लोग की कोई औकात नहीं की मुझपे गन तनो.. अभी एक मिंट में तुम सभी बत्ती घुल करदूंगा... (सरे आदमी अपनी गन निचे कर लेते है) (लाला की और देख) तोह लाला सुन.. प्रूफ और फ़ौज मैं साथ लाया हु.. इससे तोह यहाँ से लेकर hi जायूँगा.. मुझे तुझे कोई प्रूफ दिखने की जरूरत नहीं है.. प्रूफ तोह मैं कोर्ट में पेश करूँगा.. और ज्यादा होशियारी की तोह यही भून दूंगा...

(इंस्पेक्टर दया अपने मोबाइल से कुछ करता है और तभी 20, 25 और पुलिस वाले अंदर हवेली में आ जाते है.. जो आते hi सरे गुंडों की खोपड़ी पे apni-apni बंदूके लगा देते है.. 4, 5 हवलदार जग्गू और राजू को अचे से हथकड़ी लगा देते है और ढके dete-dete हवेली से बहार ले जाते है.. लाला बस हाथ की मुट्ठियों को दबाता इंस्पेक्टर को घूरता रह जाता है...)

|Tushar’s हाउस|

|Annika’s रूम|

(अन्निका जस्ट abhi-abhi उठी है और बीएड पे बैठी हुई अपने सामने दिवार पे लगी तुषार की बड़ी सी तस्वीर को देखती है और बोलती है...)

अन्निका- (मुस्कुराती हुई) गुड मॉर्निंग मेरे हैंडसम भैया... (बुरा सा फेस बना के) भैया जल्दी से आ जाओ न.. आपके बिना कुछ भी ाचा नहीं लगता.. ी लव यू भैया.. ऊऊह्ह्हम्म्म्मा...

(कुछ देर बाद सभी ब्रेकफास्ट करने दिंनिंग टेबल पर बैठे थे..)

तान्या- येह उल्लू कब घर आएगा पापा..?

पापा- उल्लू क्या होता है.. तमीज नहीं है तुम्हे.. भाई है वो तेरा...

तान्या- (उदास होक) सॉरी पापा...

पापा- अभी बहुत दिन है उससे आने में.. तुम लोग जेक मिल आया करो जब भी दिल करे.. (मुस्कुराते हुए) वैसे मुझे ख़ुशी है की तुम लोग अपने भाई से इतना प्यार करने लगी हो की एक पल भी नहीं रह सकती उसके बिना.. और एक मैं था....

(पापा आगे कुछ बोलते मम्मी ने टेबल के निचे से उनके पेअर पे पेअर मार दिया..)

अन्निका- और आप क्या थे पापा..?

मम्मी- (उनकी प्लेट में परोसती हुई) chalo-chalo जल्दी फिनिश करो अपना ब्रेकफास्ट.. स्कूल के लिए देर हो रही तुम दोनों को...

(दोनों ने अपना ब्रेकफास्ट ख़तम किया और दोनों चली गयी स्कूल..)

मम्मी- क्या करते हो आप भी.. अगर गलती से आपके मुँह से निकल जाता तोह...

पापा- अरे सॉरी बाबा.. थोड़ी याद ा गयी थी उनकी...

मम्मी- उनकी..? इतनी इज्जत के हक़दार नहीं है वो.. जो सलूक उन्होंने किया है आपके साथ.. उन्हें इसकी सजा मिलनी चाहिए न की इज्जत...

पापा- हम भी कहा दूध के धुले है.. गलती तोह हमारी भी थी न...

मम्मी- अपने जो किया सही किया मैं आपके हमेशा साथ हु.. (पापा के गले लगती हुई) आगे से गलती से भी अस्सी गलती मत करना बचो को कुछ पता न चले. वर्ण पता नहीं क्या हो जायेगा...

पापा- (कास के मम्मी को गले गलती हुए) जो हुकम मेरी रानी.. चलो अभी मुझे दूध पिलाओ.. आज बहुत बड़ी मीटिंग है.. जल्दी जाना है मुझे...

मम्मी- (मुस्कुराती हुई) ाचा.. यह आपका रोज रोज का हो गया है.. ठीक है बताओ यही पीला दू या रूम में जाना है...

पापा- (गले में बहे दाल) नहीं चलो चलते है रूम में.. इधर तोह सिर्फ दूध hi पे पायूँगा उधर तोह मुझे चाशनी भी चखने को मिल सकती है...

मम्मी- (हस्ती हुई) बहुत ज्यादा बदमाश हो गए हो.. अभी उम्र बढ़ चुकी है आपकी.. छोड़ दो यह सब हरकते...

पापा- नहीं.. नहीं छोड़ सकता.. तुम्हारी चाशनी का सवाद जब पहले दिन चक्खा था आज भी वैसा का वैसा hi टास्ते है.. और यह टास्ते मैं आगे भी पूरी जिंदगी चक्खणा चाहता हु मेरी जान.. चल आजा...

(फिर पापा मम्मी को गौड़ में उठा के रूम में ले जाते है.. और कुछ पल प्यार करने के बाद वो अपने ऑफिस चले जाते है..)

|बैक तो तुषार|

(हवेली में अभी सब उठ चुके थे और सब अभी बहार गार्डन में अलग अलग बेंच पर बैठे थे...)

तुषार- शिवं यह गुरूजी कब ा रहे है.. जल्दी बुला न यार उन्हें.. मुझे तोह कल से घभरात सी हो रही है.. (सिया को देख) तुम जानते हो न शिवं मेरे कहने का क्या मतलब है...

शिवं- हाँ बॉस मैं समाज रहा हु आपकी बात.. पर आप घभराओ नहीं.. गुरूजी अभी आते hi होंगे...

सिया- (पास बैठी सवाना से) दीदी यह शिवं भैया तुषार भैया को बॉस क्यों कहते है.. और आप भी भैया को बॉस कहती हो.. आसा क्यों..?

सवाना- वो बीटा क्युकी मैं, शिवं और सफल तीनो आपके तुषार भैया के लिए काम करते है इसलिए...

सिया- कोनसा काम करते हो आप भैया के लिए..?

सवाना- (तुषार की और देख) वो बीटा हम लोग......

शिवं- (बिच में) हम बीटा बुरे लोगो को सजा देने का काम करते है...

सिया- (खुश होक) ओह्ह जैसे अपने कल कार वाले भैया लोगो को सजा दी थी वैसे hi न.. अगर आप न आते तोह वो मुझे कार के निचे दे देते.. लकिन अपने आकर एक पंच में उनकी कार hi तोड़ दी हीहीही.. आप बहुत पावरफुल हो...

तुषार, सवाना- (छोंकते हुए) क्या...

तुषार- शिवं तुमने एक पंच में कार तोड़ दी मतलब..?

सिया- हाँ तुषार भैया.. शिवं भैया ने (कर के दिखती हुई) ऐसे अपना हाथ आगे किया और कार जब उनके हाथ से टकराई तोह कार वही रुक गयी और टूट gayi,ek भैया तोह कार के बहार hi निकल ए. हीहीह.. और जो भैया लोग अंदर बैठे थे न उन् सभी को छोट लग गयी.. उसके बाद शिवं भैया मुझे अंदर ले ए मुझे नहीं पता फिर क्या हुआ...

(तुषार उठा और शिवं को लेके एक साइड ा गया और बोलै...)

तुषार- शिवं (वापिस सिया की और घूम के देखता हुआ) यह सिया क्या बोल रही है.. तुमने एक पंच से गाड़ी तोड़ दी.. कैसे..?

शिवं- अरे बॉस.. बची है वो.. मजाक कर रही है.. आप भी कहा उस नन्ही दिमाग वाली की बातो पे ा रहे हो...

तुषार- (उससे घर के देखता हुआ) सचमे..?

शिवं- हाँ बॉस.. (गेट की और देखता हुआ) वो देखो नाम लिया और गुरूजी भी आ गए...

तुषार- (गुरूजी की कार को आते देखता हुआ) मैंने तोह नहीं लिया नाम.. और न hi तुम्हे लेते सुना...

शिवं- ( धीरे से) वो तोह मन में लिया था आपको कैसे सुनेगा...) वो बॉस.. चलो आपको बात करनी थी न गुरूजी से...

(दोनों गुरूजी के पास जाते है.. गुरूजी के साथ सफल भी थाखा हुआ सा कपड़ो पे पसीना आ रखा था.. जैसे कार में बेथ कर नहीं घोड़े के साथ दौड़ लगा के आया हो...)

सवाना- (हैरानी से) सफल तू गुरूजी की कार से कहा से रहा है.. तू हॉस्पिटल में था न.. और इतना पसीना..?

सिया- हाँ मेरे मां, पापा के पास थे न भैया आप.. वो ठीक है न..?

सफल- (सिया के पास जेक निचे बैठता हुआ) बिलकुल बचा.. वो बिलकुल ठीक है.. आप फ़िक्र मत करो.. हम थोड़ी देर में उनसे मिलने जायेंगे.. Okay...

सिया- (उसके गले लगाती हुई) थैंक्यू भैया.. आप सभी लोग बहुत अचे हो.. पता है मैं इतने अचे लोगो से कभी नहीं मिली...

तुषार- हम अचे लोग हमेशा तुम्हारे साथ रहेंगे सिया...

सवाना- हाँ तोह तूने बताया नहीं सफल.. तू गुरूजी के साथ कहा से..?

सफल- बताता हु यार आज का तोह अपना बदलूक hi खराब था..

|3 घंटे पहले|

(सफल कार लेकर हॉस्पिटल से निकला और हवेली की और आ रहा था की रस्ते में कार का आयल ख़तम हो गया.. रास्ता काफी सुनसान था लिफ्ट मिलने तक न चांस नहीं था तोह आयल तोह दूर की बात थी.. सफल ने कार को लॉक किया और निकल पड़ा पेडल hi आगे की और.. करीब 1घंटा chalte-chalte सफल को थोड़ी आगे एक ऑटो खड़ा दिख गया..)

सफल- (थाखा हुआ ऑटो का सहारा लेके बोलै) अरे भाई बैठा ले मुझे...

ऑटो वाला- क्या हुआ साहब.. कहा जाना है.. इतने थाखे हुए क्यों हो...

सफल- कुछ मत पूछ.. बस ले चल मुझे...

ऑटो वाला- ठीक है साहब बैठो...

सफल- (आगे ऑटो वाले के साथ में hi बैठता हुआ) ले चल हवेली की और...

ऑटो वाला- हवेली.. एहहह.. कोनसी हवेली साहब...

(फिर सफल उससे हवेली का एड्रेस बताता है और ऑटो चल पड़ता है अपनी मंजिल की और.. सफल को नींद ा रही थी.. एक तोह वो साडी रात सिया के मम्मी, पापा के होश में आने का वेट करते जागता रहा.. और दूसरा वो 1 घंटा पैदल चल के थक चूका था तोह वो वैसे hi सीट से पीठ टिकाये सोने की कोशिश करने लगा...)

सफल- (नींद में hi) अरे थोड़ा तेज चलो.. तुम तोह ासे चला रहे जैसे ऑटो चला रहे हो...

ऑटो वाला- साहब ऑटो hi चला रहा हु.. आपको क्या यह hawai-jahajh लग रहा...

सफल- (आखें खोल) ओह्ह सॉरी.. (ऑटो में लटकती हुई एक रस्सी को देख) यह क्या है.. खहींचो इससे. तेज चलेगा...

ऑटो वाला- साहब यह आप क्या बोल रहे हो.. इससे तेज नहीं चलेगा.. इससे ऑटो बंद हो जायेगा...

(फिर सफल कुछ नहीं बोलै.. आधा घंटा चलने के बाद एक दम से ऑटो के टायर के निचे कोई नोकीली चीज़ आ लगती है और ऑटो के टायर में चीड़ हो जाता है.. ऑटो वाले ने मुश्किल से ऑटो को स्लो किया और बैलेंस संभाला.. इसमें 2 धमाके हुए थे.. पहले तोह टायर फटने से और दूसरा सफल जो आगे ऑटो वाले के साथ में बैठा था टायर फटने से ऑटो का बैलेंस बिगड़ा और सफल ऑटो से बहार गिर गया.. ऑटो वाले ने जल्दी से ऑटो से बहार निकल कर सफल को उठाया...)

सफल- (पीठ के बल से कहद होता हुआ) आबे यह क्या था.. मुझे धक्का मारा तूने...

ऑटो वाला- अजीब आदमी हो साहब.. एक तोह मैंने आपको आकर उठाया ऊपर से मुझे hi बोल रहे की मैंने धक्का मारा...

सफल- तोह मैं गिरा कैसे...

ऑटो वाला- जब आप सू रहे थे न तब ऑटो के टायर के निचे कुछ आ गया वो देखो टायर पंचर हो गया. बैलेंस बिगड़ने के कारन आप बहार गिर गए वो तोह शुक्र करो आपको मेरे जैसा टॉप का ड्राइवर मिला था.. जिसने टाइम पे ऑटो को संभल के रोक लिया...

सफल- कहे का टॉप का ड्राइवर बे.. मैं तोह बहार गिर गया.. और टॉप के ड्राइवर होता तोह टायर न फटने देता.. यह कोई रोड पे पड़ी नोकीली चीज़ से फटा होगा.. तुझे दिखी न वो टॉप के ड्राइवर..? खेर छोडो अब और बताओ अब क्या करना है..?

ऑटो वाला- करना क्या है मेरा भद्दा दो और आप जाओ.. इसको ठीक करने में वक़्त लगेगा...

सफल- (रोड को देखता हुआ) अभी इधर वापिस कोई लिफ्ट मिलने का चांस नहीं है.. मैं वेट करता हु तू बदल टायर...

ऑटो वाला- नाह साहब मैं आपको नहीं झेल सकता.. मुझे मेरा भद्दा दो और आप जाओ...

(सफल उससे भद्दा दे देता है और चल पड़ता है वापिस पैदल hi.. रस्ते मैं उसने काफी लोगो से लिफ्ट लेने की कोशिश की लकिन कोई नहीं रुका.. कुछ देर और चलने के बाद गुरूजी पीछे से अपनी कार लिए आते है.. सफल उन्हें देख बोलै…)

सफल- अरे गुरूजी आप.. (हाथ जोर ऊपर देखता हुआ) शुक्रिया बागवान.. आखिर मुश्किल वक़्त में गुरु hi काम आता है.. दूर खोलो गुरूजी…

गुरूजी- (दूर का मिरर निचे करके) आ जाओ बीटा…

सफल- यह क्या गुरूजी.. क्या यह खिड़की से hi अंदर ा जाऊ.. दूर तोह खोलो दूसरी साइड से…

गुरूजी- ऐसा करो थोड़ा आगे ायो.. (इशारा करते हुए) वो वह जेक खोलता हु दूर…

(सफल आगे गया तोह गुरूजी dhire-dhire कार को आगे लेजाते गए लकिन रोका नहीं.. गुरूजी सफल के साइड से निकल गए.. सफल भी पीछे पीछे चल पड़ा की शायद गुरूजी बैठा ले.. कार dhire-dhire चलती रही उसके पीछे सफल भी.. करीब और अँधा K\M चलने के बाद गुरूजी ने आगे जेक कार रोकी और दूर ओपन कर दिया.. सफल ख़ुशी से दौड़ता हुआ जेक कार में बेथ गया…)

सफल- (हफ्ता हुआ) गुरूजी.. गुरूजी क्या आप भी मजाक करते हो.. सुभे से मेरे साथ मजाक हो रहा है… (पीछे सीट पे सर टिका आराम लेता हुआ) बहुत थक गया मैं तोह…

गुरूजी- (कार हवेली के अंदर मोड़ते हुए) लो भाई ा गयी अपनी मंजिल.. चल उतर.. हाहाहा…

(सफल तोह हेरैं रह गया अपने सामने हवेली देख.. फिर वो कुछ नहीं बोलै उससे पता चल गया था आज उसका दिन नहीं है…)

|बैक तो स्टोरी|

(सभी सफल की आज सुभे की दुःख भरी कहानी सुन has-has के lot-pot हो रखे थे…)

सफल- चलो यार बहुत है लिया.. (अपनी म्हणत का खोदा हुआ घड़ा देख) गुरूजी वो देखो मेरा खोदा हुआ घड़ा.. इसमें क्या aaloo-pyaaj ुघा दे..? (और हसने लगा..)

(गुरूजी और सवाना उससे घर के देखते है तोह सफल शांत होकर खड़ा हो गया...)

तुषार- अरे यह घड़ा मेरे काम आएगा यार तुम क्यों टेंशन लेते हो…

|Arushi’s कॉलेज|

(अभी आरुषि, हर्षिका और हरलीन तीनो पार्किंग से बहार आ रही थी और आज वापिस वोही 3,4 लड़के उन्हें ghur-ghur कर देख रहे थे.. आरुषि ने येह बात नोटिस कर्ली…)

लड़का.1- यार आज तोह नहीं छोडूंगा.. किसी एक को मुझे अपने निचे लेटना hi है…


लड़का.2- हाँ आज कोई जुडगर बनाते है.. और लेते है मजे.. देख तोह साली कैसे matak-matak के चल रही है…….

《3415 -वर्ड्स》
 
एक बात केहनी है दोस्तों! हर रोज एक नया रीडर मेरी साथ जुड़ रहा है पर अफ़सोस की बात साथ में hi मेरा एक रीडर काम भी हो जाता.. वो दोस्त जिनके साथ मैंने स्टोरी स्टार्ट की थी अब वो स्टोरी में नहीं आते.. उन् सभी दोस्तों के यूजरनाम तक याद है.. पर शायद अब उन्हें स्टोरी सिलेंटली पढ़नी अछि लगती है.. या अभी रीड करना पसंद नहीं करते.. खीर उनकी अपनी मर्जी है.. पर हाँ स्टार्टिंग में उन्होंने मुझे बहुत हौसला दिया था अपनी राइ दी थी की आज मैं यहाँ एक अछि स्टोरी लिख रहा हु.. अब इतने सरे दोस्त बन चुके मेरे तब इतने रीडर नहीं थे पर वो सब साथ थे.. अभी भी भुला नहीं हु.. शुक्रिया अगर आप यह नोट रीड कर रहे हो तोह आप सभी का शुक्रिया....
 
सच बात बोलूंगा भाई.. अपने कल कहा था की मजा किरकिरा मत करना.. इसलिए मैंने उस आड़े ुपड़ते को आज कम्पलीट किया है.. वर्ण शयद अपडेट कल आता.. आप सबकी कोई बात बुरी नहीं लगती बुरी वो बात लगती है जो आप बताते नहीं.. आपकी जैसी भी अछि बुरी फेल्लिंग हो मुझे बता सकते.. अपडेट जस्ट अभी पोस्ट करने जा रहा hu...Shukriya साथ बनाये रखने के लिए बीआरओ...
 
अपडेट-30

|Arushi’s कॉलेज|


(अभी आरुषि, हर्षिका और हरलीन तीनो पार्किंग से बहार आ रही थी और आज वापिस वोही 3,4 लड़के उन्हें ghur-ghur कर देख रहे थे.. आरुषि ने येह बात नोटिस कर्ली…)

लड़का.1- यार आज तोह नहीं छोडूंगा.. किसी एक को मुझे अपने निचे लेटना hi है…


लड़का.2- हाँ आज कोई जुडगर बनाते है.. और लेते है मजे.. देख तोह साली कैसे matak-matak के चल रही है…….

|अब अग्गे|



(चारो लड़के तब तक तीनो लड़कियों को ताड़ते रहे और पता नहीं kya-kya बोलते गए उनके बारे जब तक की वो तीनो कॉलेज के अंदर नहीं चली गयी…)

हर्षिका- देखा!.. आज भी वो कमीने लड़के कैसे हमे देख रहे थे…

हरलीन- हाँ.. देखा मैंने.. मुझे कुछ ठीक नहीं लगता.. कही यह हमारे साथ कुछ गलत न कर दे…

आरुषि- कुछ नहीं होगा.. डरो मत…

हर्षिका- मैं दर नहीं रही हु.. पर हमे ऐसे गन्दी नजर से देखना का हक़ नहीं है उन्हें.. (हाथ का ग़ुस्सा बना के, गुस्से में) ऐसे लोगो के तोह मुँह तोड़ने का मन करता है…

हरलीन- क्यों न हम प्रिंसिपल से शिकायत करे..?

आरुषि- वो लोग धमकियों या कुछ थप्पड़ से डरने वाले नहीं है.. प्रिंसिपल से पहले भी बहुत लड़कियों ने कंप्लेंट की पर उनपर कोई असर नहीं होता…

हर्षिका- तोह फिर क्या हम उन्हें ऐसे hi घूरने दे खुद को..?

आरुषि- चलो पहले क्लास में.. बाद में इसका हल निकलते है…

(तीनो साद सी होकर क्लास में चली जाती है…)

|बैक तो तुषार|

तुषार- (गुरूजी को देख) गुरूजी आपसे बात करनी थी.. (और सवाना को देखता है तोह वो समाज जाती है उससे क्या करना है..)

सवाना- (सिया को उठके) चलो सिया बीटा.. आप भूखी होगी आपको कुछ बना के खिलाती हु…

सिया- मुझे भूख नहीं लगी.. मैं खाना नहीं खाउंगी जब तक मुझे मेरे Mumma-Papa से नहीं मिला देते.. मुझे मुम्मा से मिलना है…

सफल- सिया हम थोड़ी देर में उनसे मिलने जायेंगे.. आप खाना खा लो अगर आप नहीं खाओगी तोह आपकी मुम्मा हमे डाँटेगी की तुम लोग ने मेरी सिया को खाना क्यों नहीं खिलाया.. ठीक है आप जेक खाना खा लो…

सिया- नहीं मुम्मा आपको नहीं डाँटेगी.. आप लोग बहुत अचे हो.. मेरा ख्याल रखते हो.. चलो दीदी मुझे खाना खिला दो फिर.. (मुस्कुराती हुई) वैसे मुझे भूक भी लगी थी…

सवाना- पागल लड़की अगर भूख लगी थी तोह बोलै क्यों नहीं..?

सिया- (निचे देखती हुई) वो ासे आप लोगो से मांगना अछि बात नहीं है न…

सवाना- (थोड़ा नाराज होक) तोह अगर मैं तुम खाना का नहीं पूछती तोह क्या तुम भूखी रहती…

तुषार- देखो सिया मैंने तुमसे पहले hi कहा था की हमे पराया मत संजो.. अपनी फॅमिली संजो हमे.. तुम मुझे भैया कहती हो न. तोह भैया का घर भी तुम्हारा hi हुआ न.. आगे से ऐसा कभी मत करना.. वैसे आप बहुत समझदारी वाली बाते करती हो लकिन आगे से आसा नहीं बोलना... (सवाना ने सिया को गौड़ में उठिया हुआ था, तुषार सिया के गाल पर किश करता हुआ) ठीक है बचा…

सिया- Okay भैया…

(फिर सवाना सिया को हवेली के अंदर ले जाती है.. तुषार गुरूजी को देख बोलै..)

तुषार- गुरूजी कल मैं साधना में था.. और मेरी आखों से खून बहने लगा आखें चमकने लगी, बॉडी सफ़ेद पद गयी.. यह क्या हुआ था मेरे साथ.. और मुझे इसका एहसास क्यों नहीं हुआ.. मेरे साथ कुछ गलत हो रहा है क्या..? मेरे ऊपर कोई jantar,mantar jaddu-tona तोह नहीं कर रहा…

सफल- (चौंकता हुआ) क्या..? क्या… क्या बोल रहे हो बॉस.. आखों से कौन कैसे निकला आपके.. कोई bimari-vimari तोह नहीं लग गयी आपको…

गुरूजी- (सफल को अजीब से देख) तू ऐसा कर जेक नाहा और कपडे बदल के आ कितनी बेहनाक बदबू ा रही तेरे से.. चल जा जल्दी से वर्ण गधे में गिरा दूंगा.. चल..!

(सफल जल्दी वह से rafu-chakar हो जाता है यह सोच कर की कही गधे में गिरा कर और खोदने को न बोल दे... तभी शिवं के फ़ोन पर एक मैसेज आया.. उसने खोल कर देखा और पढ़ने के बाद गुरूजी को कुछ इशारा किया…)

तुषार- तोह गुरूजी….

गुरूजी- (बिच में हाथ का इशारा कर उससे रोखते हुए) अभी तुम्हे कही जाना है...

तुषार- कहा जाना है गुरूजी..? पर पहले मेरे सवाल का जवाब तोह….

गुरूजी- (बिच में टोकते हुए) जो कह रहा हु पहले वो करो.. यह सब बाते जरुरी नहीं है…

तुषार- ठीक है.. बताया कहा जाना है मुझे..?

गुरूजी- शिवं के साथ जाओ…

(फिर तुषार शिवं के साथ कार में बेथ कर चला जाता है.. कार रोड पर तेजी से दौड़ रही थी...)

तुषार- शिवं बताओगे तुम मुझे कहा ले जा रहे हो..?

शिवं- हाँ बॉस बताता हु.. वो ……….

तुषार- (चौंकता हुआ) क्या..! चल चल जल्दी बाघा.. लकिन उन्होंने मुझे क्यों नहीं बताया…

शिवं- आपके पास आपका फ़ोन नहीं है बॉस…

तुषार- हाँ याद आया वो तोह हवेली में था.. कितनी देर लगेगी और.. dauda-dauda (गुस्से में) कार को hawai-jahaj बना दे सालो के टैंगो के बिच में ठोकना.. मदारजातट!!!!!!!!.....

(10 मिंट और चलने के बाद शिवं ने कार को एक सुनसान कच्चे रस्ते की और मोड़ दिया…)

तुषार- इधर है क्या वो..?

शिवं- हाँ बॉस…

(यह एक जंगल टाइप जगह थी चारो तरफ घने ped-podhe थे.. अभी आसमान गहरा काळा रंग में बदल रहा था.. लगता है बारिश होने वाली है.. हवाएं भी चल रही थी जो dhire-dhire तेज हो रही थी.. शिवं ने एक जगह आकर कार रोक दी…)

तुषार- (सामने देख अपना गुस्सा दबाता हुआ) हतियार kya-kya लाये हो..?

शिवं- आपको क्या चाहिए…

तुषार- (आखों से बहते पानी को रोकता हुआ) मुझे बस एक खंजर दे दो…

(शिवं कार में बने एक छोटे से बॉक्स से एक tej-dhar खंजर निकल के तुषार को देता है...)


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(तुषार कार से बहार निकलता है और सामने की और चलने लगता है.. तुषार jaise-jaise आगे बढ़ रहा था आसमान में बिजलियाँ चमकने लगी.. तुषार खंजर को एक हाथ से अपने पीछे कर के सामने चला जा रहा था.. उसकी आखें में गुस्सा और दिल में तड़फ उठ रही थी.. जब वो सामने देखता है की उसकी बहिन आरुषि को 6 लड़के कार के साथ टिका के उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहे है.. साइड में 4 लोग उसके प्यार हर्षिका को घेर के खड़े है.. और 5 लोग हरलीन को एक साइड में किश कर करने, jagha-jagha टच की कोशिश कर रहे है...)

हरलीन- प्लीज आसा मत करो.. (जैसे hi उस एक लड़के ने उससे हाथ लगाया, गुस्से से) छोडो मुझे.. गन्दी नाली के कड़े हो तुम लोग.. हाथ भी मत लग्न मुझे...

आरुषि- (हस्ती हुई) ाचा..? रपे कर्जा मेरा..? वो तेरे hath-pau काट के तुझे ासी जगह दफ़न करेगा की पछतायेगा..! पछतायेगा तू की क्यों तूने इस धरती पे जनम लिया...

लड़का.1- कोण..? कोण कटेगा hath-pair.. हाहाहाहा.. कोण..? ः यहाँ जंगल में तुझे मोगली बचेगा आकर...

लड़का.2- (हस्ता हुआ) ः.. हाँ कोण बचेगा तुझे.. हाँ कोण..?

(तुषार जो कब से इनके पीछे खड़ा निचे मुँह कर के उनकी बाते सुन रहा था.. वैसे hi गुस्से में जमीन को घूरता शांत स्वर में बोलै..)

तुषार- मैं...

(तुषार जैसे hi बोलै.. सबने पीछे मुद कर देखा.. की एक लड़का अपना एक हाथ पीछे किये निचे देख रहा है.. जिसने एक ब्लैक कलर की जैकेट और जैकेट की कैप पहनी हुई है जो जमीन को घूरे जा रहा है.. आरुषि समाज गयी थी की है यह तुषार है लकिन हर्षिका, हरलीन और बाकि लड़के उससे ghur-ghur कर देख रहे थे...)

तुषार- (वैसे hi निचे देखता हुआ) कुछ हुआ तोह नहीं..?

आरुषि- (एक लड़के ने उसके टॉप के ऊपर से पकड़ रखा था उसका हाथ झटकती हुई) नहीं..! सब ठीक है...

तुषार- हम्म!.. चलो कार में बेथ जाओ तीनो...

(आरुषि ने एक लड़के के ांडों पे कास के लात मर उससे निचे बिठा दिया.. और जोर से कार का दूर खोला लकिन जैसे hi वो अंदर बैठने लगी एक लड़के ने उसका हाथ पकड़ लिया.. लकिन यह उसने गलती करदी थी.. उसने जैसे hi आरुषि का हाथ पकड़ा तुषार का गुस्सा आसमान पहाड़ गया.. और आसा फायदा की आसमान में जो बदल थे उन्होंने भी गरजते हुए पानी बरसाना शुरू कर दिया.. तेज दर बारिश सुरु हो गयी.. तुषार ने चीखे हुए अपने सर से कैप हटाई और दूसरे हाथ से छुपा रखा खंजर निकल उस लड़के के हाथ की कलाई पे जोर से मार 3इंच अंदर ग़ुस्सा दिया और शर्ट को फाड़ता हुआ खंजर ऊपर शोल्डर तक ले गया.. लड़के की बाजु ऐसे हो गयी थी जैसे किसी ने करेले को बिच में से काट दिया हो...)

लड़का.3- (cheekhta-chhilata हुआ) आअह्हह्ह्ह्ह आआअह्हह्ह्ह्ह आहहहह अह्ह्ह्हह.. (करता अपनी बाजु पकड़ पीछे गिर गया..)

हरलीन- (छोंकती हुई) तुषार.. तुम..?

हर्षिका- (धीरे से, मुस्कुराती हुई) मेरा तुषार...

लड़का.4- (हैरानी से देख) आबे ोई यह क्या किया तू.. कहा से आया है तू.. है konnnnaaaaaaaaaaa.....

(यह चीख तब निकली उस लड़के की जब तुषार ने वो खंजर उसके मुँह में जड़ तक घुसा के घुमा दिया.. मुँह से तोह एक सेक् में खून की धारे बहार आने लगी.. लड़के की आखें बहार को निकल गयी थी.. तुषार ने जब खंजर घुमाया तोह उसके दांत तक टूट गए.. वो लड़का भी चीखता हुआ एक साइड होक निचे बेथ गया और तड़फने लगा...)

लड़का.-5 (डरता हुआ पीछे हैट के) भाइयो यह साला अपने को मार न दे.. सब एक साथ मारो इससे.. हम तोह इतने सरे है क्या hi कर लेगा अकेला...

(तुषार वैसे hi खड़ा रहा.. जो लकड़ी कार की दूसरी साइड हर्षिका और हरलीन को छेड़ रहे थे वो भी इनके साथ आने लगे.. सब dhire-dhire आगे बढ़ रहे थे.. वो दर भी रहे थे क्युकी तुषार के हाथ में खंजर था लकिन उन्हें खली हाथ hi लड़ना था.. बारिश अभी बहुत तेज हो गयी.. सबके कपडे फुल भेघ चुके थे...)

तुषार- (नजर उठा के आरुषि, हर्षिका, हरलीन को देख) घडी में बैठो...

(तुषार ने इतना बोल अपना जैकेट उतर साइड में फ़ेंक दिया और एक दम से आगे दौड़ कर एक लड़के को पकड़ लिया और पालक झपकते hi उसने उस लड़के के बालो को पकड़ निचे किया और कास के एक घुटना उसके चेहरे पे मारा और उसी खून बहते चेहरे पर उसने निचे से ऊपर को खंजर मार दिया. जो उसकी नाक को tehas-nehas कर गया... सब लड़के तोह कैंप hi गए.. लकिन सबने तुषार को घेर कर पकड़ hi लिया.. और फिर शुरू हुई hatha-pai.. कोई तुषार को ग़ुस्सा तोह कोई लाते मार रहा था.. 4,5 ने तुषार को पकड़ के रखा था तोह बाकि सरे उसकी टैंगो पे, सीने पर, पेट पर, मुँह पर. घुसे, लाते जड़ रहे थे...)

हर्षिका- (जो बहुत देर से रू रही थी) तुषार.. (अपना हाथ चुदवाती हुई) छोड़ मुझे आरुषि. क्या कर रही है.. वो तुषार को मार देंगे.. छोड़...

आरुषि- (अपनी आखें साफ़ कर अपने भाई की हालत देखती हुई) नहीं.. कुछ नहीं होगा तुषार को.. उससे मैंने यहाँ मरने के लिए थोड़ी बुलाया था.. कहा है वो आता hi होगा...

हरलीन- (नाम आखों से) कोण..?

आरुषि- (बहार की और इशारा कर) वो देख...

(हरलीन और हर्षिका बहार देखती है तोह पति है एक लम्बी तलवार लिए एक लड़का खड़ा है.. यह शिवं था...)

शिवं- (तलवार को जमीन में गोल गोल घूमता हुआ) ोये लोंडो..!

(सभी लड़के उसकी तरफ देकने लगे.. उसके हाथ में तलवार देख सभी सोचने लगे की आखिर अब येह कोण ा गया...)

लड़का.7- अब तू क.....

(बस इतना hi बोलै था की शिवं की तलवार हवा में उठ गयी जो झटके के साथ उसके सीने को चीरती हुई पीछे से पीठ के पर हो गयी.. जितने लोग खड़े थे सबका यह दृषिया देख दिल देहल गया.. कार में बैठी तीनो लड़किया thar-thar कम्प गयी. और उन्होंने अपना चेहरा दूसरी और कर लिया.. शिवं ने बाकि खड़े लड़को को गुस्से से देख तलवार को उस लड़के के सीने में घूमते हुए dhire-dhire बहार निकल लिया.. सभी लड़को की फात चुकी थी.. उनके पास बोलने को और करने को कुछ नहीं था.. लकिन फिर भी सभी ने हिम्मत न हारते हुए एक दूसरे की और देख हौसला भेड़िया और शिवं की और आने लगे..)

(तुषार जो अभी कार के टायर के सहारे पीठ टिका के बैठा था. जैसे hi एक लड़का उसके पास से निकला उसने अपने पेअर का झटका उसके पेअर पर दिया जिससे वो उसकी और गिरने लगा लकिन जैसे hi उसका सर निचे जमीन से टकराने लगा तोह तुषार ने उसके सर के आगे अपना खंजर कर दिया.. खंजर उसकी एक आँख से निकल कर खोपड़ी में जा फिट हो गया.. एक चीख के साथ यह लड़का भी खामोश हो गया.. तुषार ने लड़के को सीधा किया और अपने खंजर को dhire-dhire उस लड़के की फूटती हुई आँख से बहार निकल लिया.. लड़के यह देख वापिस अपनी रूह छोड़ गए.. उनकी टंगे कम्प रही थी.. जैसे अब शरीर में जान नहीं बची..)

(शिवं ने देर न करते हुए छोटी सी दौड़ लगाई और एक जम्प एक लड़का एक ऊपर मरी इसी के साथ उसने अपनी तलवार उलटी कर ली और तलवार की मुठी उस लड़के की खोपड़ी पे दे मरी.. मुठी का कुछ हिस्सा उस लड़के के सर में घुस गया.. और वो लड़का बिना कोई आवाज किये ऊपर को निकल लिया.. सब लड़के तोह दांग रह गए थे.. वो अस्सी एक कभी न देखि मौत मरेंगे उन्होंने सोचा नहीं था.. लकिन सबको यकीन हो चूका था की वो अब बचेंगे नहीं.. तेज बारिश का पानी और जमीन पर पड़े लड़को का बेहटा खून अभी मिक्स होकर जमीन को लाल रंग में बदल रहा था. जो अभी सभी के पाव के निचे था...)

लड़का.5- (निचे घुटनो पर बेथ हाथ जोड़, रोटा हुआ) भाई हमे छोड़ दो हम आगे से किसी लड़की को परेशां नहीं करेंगे...

(तुषार उठा उसके मन में वही बाते दौड़ रही थी जो इन् लोगो ने अभी उसकी दीदी और उसके प्यार के साथ की थी.. यह सोच कर hi एक बार वापिस उसमे असीम गुस्सा भर आया.. वो उठ के जो लड़का शिवं के सामने अपना सर निचे किया बैठा था उसके पास गया और शिवं के हाथ में लटकी उसकी लम्बी तलवार को उससे के हाथो पकड़ा ऊपर को उठा लिया. लड़को के मुँह वापिस दर से खुल गए वो जान गए की क्या होने वाला है.. तुषार ने शिवं का हाथ उसकी तलवार के साथ हवा में उठाया और एक tej-dhar आसमान में गरज रही बिजलायों से चमकती तलवार को उस बैठे हुए लड़के की गर्दन पे दे मारा. उसका सर धड़ से अलग होक निचे जा गिरा. और घूमता हुआ उन् लड़को के सामने जा रुका.. बस यह देखना था की एक लड़का बेहोश hi हो गया.. बाकि के लड़के दर के मरे वह से बघणे लगे...)

तुषार- (शिवं और उसकी खून टपकती तलवार को देख) एक भी न बचे...!

शिवं- (हाँ में सर हिला) एक भी नहीं बचेगा...

(और शिवं ने दौड़ लगा दी उन् लड़को की तरफ...)

(तुषार ने अपनी बहिन की और देखा.. तीनो लड़कियों से बहार का नजारा देखा नहीं जा रहा था.. वो तीनो मुँह निचे कर dhire-dhire सुबक रही थी...)

तुषार- (अपना खंजर निचे फ़ेंक) दीदी..!

(तीनो लड़किया उसकी आवाज सुन कार से बहार ा गयी...)

आरुषि- (रोटी हुई, तुषार को भाग के उसके साइन से लगती हुई) तुषारर..!!

तुषार- (उसके सर को प्यार से सहलाता हुआ) नहीं दीदी रोना नहीं.. देखो मैंने मर दिया सबको.. (जमीन पे पड़ी लाशों को देख) देखो एक को भी नहीं छोड़ा और जो बाघ गए है उससे शिवं जान से मर कर hi वापिस आएगा...

(आरुषि कुछ देर तुषार के गले लग अपने दिल को ठंडक देती रही.. और फिर उसने हर्षिका के तरफ देखा जो शायद कह रही थी की तुषार मुझे भी गले लगा लो.. आरुषि तुषार से अलग हुई और हर्षिका की तरफ जाने लगी और उसके पास जेक एक ढाका उससे मर दिया.. धक्का लगते हे हर्षिका तुषार की बहो में जा गिरी.. और उसने कास कर तुषार को जकड लिया.. हर्षिका भी halke-halke ासों बहा रही थी..)

तुषार- (अपनी बहो को उसकी पीठ पर कास कर जकड़ता हुआ) रोना बंद करो.. ठीक हो न आप..?

हर्षिका- (तुषार के कंधे से सर हटा के, उसकी आखों में देखती हुई) हम्म.. बिलकुल ठीक.. आप कुछ होने दे सकते मुझे.. आपको कही पे छोट तोह नहीं लगी न..?

तुषार- नहीं मुझे कही नहीं लगी.. ठीक हु मैं...

हर्षिका- ाचा और यह क्या है.. (उसकी छिली हुई बाजु, हाथ को देख और उसके फाटे हुए होठो को अपनी दोनों उंगलियों में पकड़ दिखती हुई) कैसे देखो बाजु पूरी चिल चुकी है.. और यह होंठ देखो अपने...

हरलीन- (हस्ती हुई) ोये प्रेमियों.. चले क्या अब.. इधर बारिश में khade-khade बीमार हो जाओगे.. अपने प्रेम का सागर घर में जाकर कंटिन्यू कर लेना...

(हर्षिका को तोह एहसास hi नहीं थी की अभी वो क्या कर रही है, और किसके हाथो में इतनी मजबूरति से कैद है.. जब उससे फील हुआ तोह उसने तुषार को छोड़ दिया और निचे देख शर्माने लगी. लकिन तुषार ने उससे नहीं छोड़ा था.. वो तोह बस उसके हसीं चेहरे में कब से खोइया हुआ था...)

हर्षिका- (शर्माती हुई) अब छोड़ भी मुझे...

तुषार- (उसमे खोइया हुआ) हम्म..?

हर्षिका- मैंने कहा मुझे छोडो.. मुझे क्यों पकड़ रखा है..?

तुषार- (होश में आता हुआ) आह.. हाँ.. क्यों क्यों मैंने पकड़ रखा है.. हाँ ऐसे hi...

हर्षिका- (मुस्कुराती हुई) तोह फिर छोडो मुझे...

(तुषार उससे छोड़ देता है.. अभी बारिश dhire-dhire काम हो रही थी लकिन अभी भी जारी थी...)

आरुषि- तुषार चल अब.. घर चले...

तुषार- हाँ चलो.. अभी यह सब कैसे सुरु हुआ मुझे बात भी करनी है.. मैं शिवं की कार ले आता हु आप लोग अपनी कार ले ायो..

(आह्हः.. यह आवाज थी उस लड़के की जो अभी थोड़ी देर पहले चक्कर खाकर बेहोश हुआ था.. तुषार उसकी तरफ बढ़ा लकिन आरुषि ने उसका हाथ पकड़ रोक लिया...)

आरुषि- (न में सर हिलती हुई) नहीं तुषार.. बस कर अब.. वो हमे कुछ नहीं कर सकता.. जाने दे अभी...

तुषार- नहीं दीदी इसने सब देखा है.. यह मुझे अंदर करवाएगा...

(इतना बोल तुषार ने जो निचे पड़ा अपना खंजर था उससे पेअर से hi सीधा किया और एक कास के किक उसपे मार्डी.. खंजर एक स्पीड के साथ उस जमीन पे पड़े लड़के की गर्दन में घुस गया और एक छोटी सी चीख के साथ उसकी सासें रुक गयी...)


(तुषार की इस हरकत ने कुछ देर के लिए तीनो की सासें एक बार वापिस रोक दी...)

《2985 -वर्ड्स》
 
थैंक्स आकाश बीआरओ.. सही कहा बीआरओ सिया अभी छोटी है किसी भी छोटी सी बची का दिल अपनी mummy-papa के बिना नहीं लगता.. जल्द hi उससे उसके पेरेंट्स से मिलता hu..bilkul सही बीआरओ इसबार तुषार टाइम पर पहुँच गया और किसी को कोई छोट वोट नहीं आयी.. गुरूजी अभी 1,2 उपदटेस के बाद जवाब देंगे भाई.. कीप सपोर्टिंग...
 
थैंक्स शिवू.. रूद्र का राज़ और तुषार से कनेक्शन क्या मुझे खुद नहीं पता.. :डी आगे चल के जल्द hi क्लियर करूँगा...

हाँ दया को अभी चिंता करने की जरुरत तोह है, पन्गा कोई छोटा नहीं है...

गुरूजी भी बता देंगे क्या हुआ था, बस थोड़े उपदटेस के बाद..

फाइट सन.. बस यही एक काम है इससे लिखने में सबसे ज्यादा मजा आता hai..:D

शिवं तोह है स्ट्रांग, उसने hi स्टोरी को भी स्ट्रांग कर रखा है... कीप सपोर्टिंग...
 
अपडेट-31

(आह्हः.. यह आवाज थी उस लड़के की जो अभी थोड़ी देर पहले चक्कर खाकर बेहोश हुआ था.. तुषार उसकी तरफ बढ़ा लकिन आरुषि ने उसका हाथ पकड़ रोक लिया...)

आरुषि- (न में सर हिलती हुई) नहीं तुषार.. बस कर अब.. वो हमे कुछ नहीं कर सकता.. जाने दे अभी...

तुषार- नहीं दीदी इसने सब देखा है.. यह मुझे अंदर करवाएगा...

(इतना बोल तुषार ने जो निचे पड़ा अपना खंजर था उससे पेअर से hi सीधा किया और एक कास के किक उसपे मार्डी.. खंजर एक स्पीड के साथ उस जमीन पे पड़े लड़के की गर्दन में घुस गया और एक छोटी सी चीख के साथ उसकी सासें रुक गयी...)

(तुषार की इस हरकत ने कुछ देर के लिए तीनो की सासें एक बार वापिस रोक दी...)




|अब आगे|




(तन्नो लड़कियां तुषार को ghur-ghur कर देख रही थी.. अभी एक लड़का जो थोड़े दिन पहले 3 आदमियों से पिट कर हॉस्पिटल पहुँच गया था आज उसने 15, 16 को आटे की तरह मसल दिया.. यही सोच कर सभी हेरैं थी, हलाकि आरुषि जानती थी की तुषार लड़ने की ट्रेनिंग ले रहा है लकिन वो इतना ज्यादा और इतनी जल्दी परफेक्ट कैसे हो गया.. लकिन तुषार अपने में मुस्कुरा रहा था. पता नहीं क्या सोच कर...)

आरुषि- तुषार..!

तुषार- (आरुषि की तरफ देख) हाँ दीदी...

आरुषि- चले घर..? मुझे बहुत साडी बाते करनी है अभी तुमसे...

तुषार- ठीक है चलो दीदी.. आप इस कार से ायो मैं शिवं की कार लेकर आता हु...

(तन्नो लड़कियां अपनी कार में बेथ रही थी और तुषार अकेला शिवं की कार की और जा रहा था तोह हरलीन तुषार को आवाज लगा के बोली...)

हरलीन- तुषार..!!!

तुषार- (पीछे मुद देखता हुआ) जी..?

हरलीन- आप कहा जा रहे हो अकेले.. (मुस्कुराती हुई हर्षिका को देख, जो अभी कार का दूर पकड़ बैठने को हुई थी) ऐसा करो हर्षिका को साथ ले जाओ.. कंपनी मिलेगी.. कहा आप बोर होते हुए आओगे...

हर्षिका- (गुस्से से उससे देख) क्यों.. तू. तू चली जा न.. तेरे साथ कंपनी नहीं मिलेगी क्या...?

हरलीन- (मुस्कुराती हुई) ठीक है मैं चली जाती हु.. (तुषार को देख) क्यों तुषार..?

तुषार- हाँ ा जाओ...

(हरलीन तुषार के पास जाने लगती है तोह हर्षिका थोड़ी उदास हो जाती है.. वो हरलीन से मन hi मन गुस्सा हो रही थी की थोड़ा और फाॅर्स नहीं कर सकती थी जाने के लिए.. कही तुषार इससे न पत्ता ले. फिर उसका क्या होगा.. एक कार में दोनों ladka-ladki अकेले है. यह हरलीन तोह पहले hi चालू किसम की है कही तुषार के साथ कुछ assa-waisa न करले.. उससे बहुत फ़िक्र हो रही थी.. वो अपने प्यार को किसी दुरसी लड़की के साथ नहीं देखना चाहती थी. चाहे फिर वो उसकी फ्रेंड hi क्यों न हो.. उससे अभी खुद पर hi बहुत गुस्सा ा रहा था की तू और शर्माती रह वो देख चली गयी तुषार के साथ.. आरुषि कब से हर्षिका के फेस पर आ रहे एक्सप्रेशंस को देख समाज चुकी थी की उसके दिल में अभी क्या चल रहा है.. वो जाना तोह चाहती थी लकिन बस शर्म के कारन मन कर दिया.. तोह आरुषि उसकी हालत को समझती हुई हरलीन को आवाज लगाती है...)

आरुषि- हरलीन.!! रुक...

हरलीन- (पीछे मुद देख) हाँ क्या हुआ...

आरुषि- ऐसा कर तू इधर आ मेरे साथ.. हर्षिका तू जा तुषार के साथ...

(हर्षिका बहुत तोह खुश हो जाती है उसकी बात सुनके. और मन hi मन आरुषि को थैंक्यू कहती है. लकिन तुषार तंग ा गया था. की क्या कर रही है यह पागल लड़कियां.. ऊपर से बारिश हो रही है और इन्हे कार पसंद नहीं ा रही की कोण किस्मे जायेगा...)

हरलीन- (साद होक) पर क्यों...

आरुषि- मुझे कुछ बात करनी है तेरे से.. (आखें दिखती हुई) बस कह दिया न.. चल अब आजा जल्दी से...

तुषार- देखो जिससे आना है जल्दी ायो.. मुझे और बिघ्ना नहीं है.. वर्ण मैं अकेला hi चला जायूँगा...

आरुषि- हर्षिका khadi-khadi मुस्कुरा क्या रही है जा जल्दी...

(तुषार जो अभी जाकर कार में बेथ चूका था.. हर्षिका भी जाकर उसकी कार में khushi-khushi बेथ जाती है.. वो बहुत मुस्कुरा रही थी...)

तुषार- (उसका मुस्कुराता हुआ चेहरा देख) क्या हु हर्षिका जी.. इतना क्यों मुस्कुरा रही हो आप..?

हर्षिका- (थोड़ा मुँह बना कर, एकदम से उसकी और देख) यह जी, जी क्या कहते रहते हो मुझे आप.. मैंने पहले भी कहा है की दोस्तों में ji-vi कहना नहीं होता.. आप मुझे प्यार से.....

तुषार- (बिच में, अपने जज्बातो को खोता हुआ बोल hi पड़ा) हरु बुला सकता हु..?

(हर्षिका उसके ासे बोलने से मुस्कुराने लगी.. उसके प्यार का उसके लिए कोई पहली बार निक नाम रखना यह एहसास hi उससे एक लग सी ख़ुशी दे रहा था.. किसी दूसरे के लिए भले hi यह बाते मायने न रखती हो लकिन जब कोई प्यार में होता है तोह उससे उसके प्यार से जुडी हर छोटी बात भी बड़ी लगती है.. हर्षिका बस कार की विंडो से बहार देख मुस्कुराये जा रही थी और छः कर भी अपनी मुस्कराहट को रोक नहीं पा रही थी.. तुषार उसका कोई जवाब न सुन कर मायूस हो जाता है, लकिन उससे क्या पता था की उसकी हरु उसके हरु कहने से कितनी ज्यादा खुश है की अपनी ख़ुशी छुपा नहीं पा रही है...)

तुषार- (साद फेस करके) आपको बुरा लगा मेरा आपको इस नाम से बुलाना..? अगर ऐसा है तोह मैं आगे से आपको इस नाम से नहीं बुलाऊंगा.. (उसके कंडे पे हाथ रख) प्लीज ऐसे उदास मत हो.. I’m सॉरी...

हर्षिका- (जाहत से उसकी तरफ घूम के, मुस्कुराती हुई) अरे नहीं नहीं.. ऐसा क्यों बोल रहे हो आप.. मुझे बुरा नहीं लगा.. (स्माइल करके) आप मुझे हरु कह के बुला सकते हो.. मुझे ाचा लगेगा...

(इनकी बाते खतम नहीं हो रही थी और उधर आरुषि हरलीन के साथ कार लिए हर्षिका के विंडो साइड की और आकर रुक गयी...)

आरुषि- (कार का हॉर्न बजती हुई, चिल्ला के) आयीये.. तुम दोनों को आना है या नहीं आना.. (गुस्से से) कब से देख रही हु की कब तुषार आगे कार लेकर जाये तोह मैं उसके पीछे अपनी कार लागू.. लकिन तुम दोनों हो की हिलने का नाम नहीं ले रहे.. क्या कर रहे थे अंदर..?

हरलीन- (हस्ती हुई) अरे करने दे जो भी कर रहे थे.. यही तोह उम्र है इनकी और क्या तेरी उम्र में करेंगे.. हाहाहा...

आरुषि- (आपकी कमर पे हाथ रख गुस्से से उससे देख) क्या मतलब है तेरा.. मैं क्या बुद्धि हो गयी हु, मेरी क्या उम्र निकल गयी है..? एक लाफ़्हा मृगी तेरे...

तुषार- दीदी यार आप लोग शांत हो जाओ.. क्यों लड़ रहे हो.. चलो अभी जल्दी यहाँ से...

आरुषि- वही बोलने के लिए तोह मैं यहाँ रुकी हु.. चल जल्दी गाड़ी मोड़...

(तुषार कार स्टार्ट करता है और आगे चल पड़ता है.. piche-piche आरुषि भी अपनी कार लगा देती है...)

तुषार- (कार ड्राइव करता हुआ, हर्षिका को देख) तोह हुआ एक्चुअल में हुआ क्या था. (झिझक के) आ.. हरु..?

हर्षिका- (मुस्कुराने लगी..)

तुषार- (उससे यू मुस्कुराता देख) क्या हुआ..?

हर्षिका- कुछ नहीं...

तुषार- तोह फिर बताओ की आखिर आप तीनो वह जंगल में कैसे पौंची.. और वो लड़के कोण थे.. कहा से ए वो..?

हर्षिका- (गुस्से वाला फेस बना के) वो सब उस हरलीन के कारन हुआ है...

तुषार- क्या मतब..? मैं समझा नहीं...

हर्षिका- आप एक काम करना यह सब आप हरलीन के मुँह से hi सुन्ना.. वही बटगी की आखिर उसकी वझे से कितना बड़ा कांत हो गया.. अगर आप वक़्त पर नहीं आते तोह..? (नाम आखों से) पता नहीं वो हमारा साथ क्या करते...

तुषार- (उसकी आँखों में बहते आंसूं को देख) अरे आप तोह रू रही हो.. (एक हाथ से उसकी गाल पर आ रहे आंसूं साफ़ कर) देखो मैंने आकर आप सभी को बचा लिया.. तोह फिर रोने वाली क्या बात.. जो बात हुई hi नहीं उससे सोच कर क्यों रोना भला.. हाँ..? (उसकी गाल को पकड़ खींचता हुआ) आप तोह इतनी प्यारी हो.. ऐसे रट हुए अछि नहीं लगती...

(हर्षिका बस हलकी सी है देती है तुषार का उससे ासे बचो जैसे ट्रीट करने पर.. पुरे रस्ते उसके फेस पर से मुस्कान नहीं गयी.. वो बैठी बस यही सोच रही थी की आज तक जिससे कभी किसीने हंसाया तक नहीं था, वही आज कोई उससे एक बूँद आंसूं तक नहीं बहाने देता...)

|बैक तो हवेली|

सिया- दीदी, भैया चलो न Mumma-Papa से मिलने जाना है मुझे.. मुझे लेकर चलो जल्दी...

सफल- हाँ ठीक है बीटा चलो.. हमे भी बहुत कुछ पूछना है उनसे...

(सिया, सफल और सवाना तीनो हवेली से बहार निकलते है तोह देखते है की कोई है hi नहीं बहार.. न तुषार, न शिवं, न गुरूजी...)

सवाना- यह बॉस, गुरूजी और शिवं कहा गए..?

सफल- पता नहीं.. अभी थोड़ी देर पहले तोह इधर hi थे सब.. अचानक कहा गए.. रुको मैं फ़ोन करता हु बॉस को...

(सफल तुषार को फ़ोन करता है लकिन 2,3 बार तरय करने के बाद भी तुषार फ़ोन नहीं पिक करता. करता भी कैसे उसका फ़ोन तोह हवेली में पड़ा था.. फिर सफल शिवं को कॉल करता है. शिवं ने 5 लड़को को टपका दिया था. और अभी एक अधमरे लड़के की छाती पर अपना पेअर रख उससे और तड़फा रहा था.. शिवं उसकी गर्दन काटने वाला था की उससे सफल का कॉल ा जाता है.. 2,3 रिंग्स में शिवं फ़ोन पिक कर लेता है...)

शिवं- hello.. हाँ बोलो सफल...

सफल- भाई कहा हो तुम लोग..? हवेली में कही दिख hi नहीं रहे हो...

शिवं- वो एक प्रॉब्लम हो गयी थी भाई...

सफल- (चिंता से) कैसी प्रॉब्लम भाई..?

(शिवं उससे जो भी कुछ देर पहले हुआ सब sahi-sahi बता देता हाउ...)

सफल- तोह भाई मुझे भी साथ ले जाते.. वो इतने सरे लड़के थे अगर.....

शिवं- (मुस्कुरता हुआ) कही तुझे मुझ पर शक तोह नहीं है...

साफा- (हस्ता हुआ) हहह.. अरे नहीं नहीं भाई.. आप हो तोह कोई किसी का बाल भी बका नहीं कर सकता.. बस मैं यू hi बोलै था.. (मुस्कुराता हुआ) कितनी गर्दन कटी...

शिवं- (उस अड़मारे लड़के की गर्दन पर तलवार फेरता हुआ, मुस्कुराके) छाते की आवाज खुद सुन ले...

(आआह्ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह)

सफल- (हस्ता हुआ) हाहाहा, भाई आपका कोई जवाब नहीं क्युकी आप लाजवाब हो.. चलो अभी मैं सवाना के साथ सिया के पेरेंट्स के पास जा रहा हु. पता लगाने की आखिर उनके साथ क्या हुआ था. जो रोड पर यू बेहोश पड़े थे...

शिवं- हम्म. ठीक है तुम लोग निकल लो मैं थोड़ी देर में हवेली पहुँच जायूँगा...

सफल- Okay भाई...

|Jagala’s हवेली|

(लाला अभी बहुत गुस्से में था. वो हॉल में idher-udher चाकर लगाए जा रहा था. उसके पास hi उसके 3 आदमियों की लाशे भी पड़ी हुई थी जो उसने गुस्से में आकर अपने hi 3 आदमी मर दिए थे.. उसका गुस्सा होना जायज भी था, एक ऐसा डॉन जिसके घर पर पुलिस जाने से डर्टी है वही एक पुलिस वाला आकर उसके दोस्त को उठा ले गया. उसके लिए यह बात उसकी इज्जत को दाग लगाने बराबर थी.. आखिर यह इंस्पेक्टर दया आया कहा से.? किसने बेजा था उससे. यह soch-soch लाला अपना दिमाग ख़राब कर रहा था...)

लाला- (गुस्से से) आये कोण था यह इंस्पेक्टर दया.. इसकी माँ छोड़नी है.. निकालो इसका पूरा बायो डाटा.. साला 300 पुलिस वाले लाया था.. जाओ jaha-jaha अपने आदमी है सबको इकठ्ठा करो.. सर्रे पुलिस स्टेशन जला के रख कार्डो.. और जग्गू को किसी भी कीमत पर 2दिन के अंदर यहाँ वापिस लाओ.. (सामने खड़े अपने 4,5 आदमियों को देख) जाओ मादरचोदो जाओ, मेरा मुँह क्या देखते हो......


《1861 -वर्ड्स》
 
थैंक्स Mr.X भाई.. सही कहा भाई मैंने भी यही सोच कर लिखता था की ऐसे लोग आज बच गए तोह कल किसी और लड़की को छेड़ेंगे.. पाप साफ़ हो तोह hi बेहतर है..

हाँ बात तोह सही है. लकिन भाई अगर आप स्टोरी के स्टाटिंग से देखो तोह पता चलेगा की पूरी सिटी में hi यह गंदे लोग पहले हुए है. तुषार को तोह मालूम चल गया, लकिन कितने और लड़की तोह नजाने बचती हुई होंगी जा नहीं.. समाज रहे न भाई.. बुरा कुछ नहीं भाई.. बस अपने मन की बात मुझे बताओ तोह ज्यादा ाचा लगा..

कीप सपोर्टिंग...
 
थैंक्स आकाश बीआरओ.. हाँ भाई वो टाइम आने hi वाला है जब हर्षिका पर्पस करेगी तुषार को.. बात तोह सही है भाई आरुषि भी बहुत प्यार करती है तुषार से, उसकी ख़ुशी के लिए उसने एक बार भी वापिस नहीं पूछा तुषार से की वो उससे अपना ले.. लेटस सी क्या होता है.. ः हाँ दुश्मन तिलमिला जाये तोह हसी तोह बहुत आती hai:D

कीप सपोर्टिंग बीआरओ.. थैंक्स फॉर थिस लवली रिव्यु...
 
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