TUSHAR EK YODHA 《Incest, Thrill, Magical》 - Page 8 - SexBaba
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TUSHAR EK YODHA 《Incest, Thrill, Magical》

एक बार वापिस आपका सवागत है भाई..

एक्शन लिखने में hi ज्यादा मज़ा आता भाई, इसी लिए अपडेट भी बड़ा हो जाता..

सही कहा भाई अस्सी फिल्लिंग्स बागवान सबको दे..

यह तोह आगे पता चलेगा भाई सिया ने क्यों एंट्री ली है स्टोरी में..

इंस्पेक्टर दया के बारे में आज के अपडेट में मालूम हो जायेगा..

शुक्रिया फॉर थिस रिव्यु.. कीप सपोर्टिंग भाई...
 
अपडेट-32

|Jagala’s हवेली|

(लाला अभी बहुत गुस्से में था. वो हॉल में idher-udher चाकर लगाए जा रहा था. उसके पास hi उसके 3 आदमियों की लाशे भी पड़ी हुई थी जो उसने गुस्से में आकर अपने hi 3 आदमी मर दिए थे.. उसका गुस्सा होना जायज भी था, एक ऐसा डॉन जिसके घर पर पुलिस जाने से डर्टी है वही एक पुलिस वाला आकर उसके दोस्त को उठा ले गया. उसके लिए यह बात उसकी इज्जत को दाग लगाने बराबर थी.. आखिर यह इंस्पेक्टर दया आया कहा से.? किसने बेजा था उससे. यह soch-soch लाला अपना दिमाग ख़राब कर रहा था...)

लाला- (गुस्से से) आये कोण था यह इंस्पेक्टर दया.. इसकी माँ छोड़नी है.. निकालो इसका पूरा बायो डाटा.. साला 300 पुलिस वाले लाया था.. जाओ jaha-jaha अपने आदमी है सबको इकठ्ठा करो.. सर्रे पुलिस स्टेशन जला के रख कार्डो.. और जग्गू को किसी भी कीमत पर 2दिन के अंदर यहाँ वापिस लाओ.. (सामने खड़े अपने 4,5 आदमियों को देख) जाओ मादरचोदो जाओ, मेरा मुँह क्या देखते हो......


|अब आगे|

चाचा- (हस्ते हुए) हहहहह... अरे उसने तोह जाते hi तबाही माचाड़ी...

रूद्र- हुआ क्या चाचा. बड़ा गाला फाड़ है रहा है..?

चाचा- अरे दया ने किसी लाला नाम के डॉन की माँ छोड़ डाली...

रूद्र- चाचा तू ठीक से बताएगा कुछ या मैं तेरी छोड़ू..?

चाचा- ः.. हाँ हाँ. बेथ बताता हु...

(दोनों सोफे पे बेथ जाते है...)

रूद्र- हाँ बता क्या हुआ.. क्या किया दया ने जो इतना खुश हो रहा है...

चाचा- दया का ट्रांसफर मैंने ........... सिटी में करवा दिया था.. ताकि वो कैसर का पता लगा सके और उसकी सरे जानकारी लीगल तरीके से निकल सके.. लकिन जब वो सिटी पहुंचा तोह सिटी की हालत बहुत कहरब थी.. वह सिर्फ गुंडों का राज़ चलता था.. din-dahade लड़कियों को छेड़ना, लोगो को मरना पीटना, रपे तक हो जाना वह आम बात हो चुकी थी जिसका भी दिल करता लड़की को उठा ले जाते, और पुलिस क्या कर रही थी. कुछ दिन गुंडों को जेल में रखना और कुछ le-de के छोड़ देना.. कोई रस्ते से जा रहा है तोह बिना उसके ghar-pariwar के बारे में सोचो उससे वही गोली से मर देना.. यह गेम चल रही थी ............. सिटी में...

रूद्र- हम्म.. तोह इस गेम के पीछे कोण है..?

चाचा- जगाला...

रूद्र- तोह यह जगाला भोसड़ीवाले है इस गेम का असली प्लेयर. तोह इसको टपकने का न सीधा...

चाचा- कोई छोटा मोटा डॉन नहीं जो टपक जायेगा इतनी जल्दी.. और एक नहीं है 2 है.

रूद्र- मतलब..?

चाचा- मतलब यह 2 आदमी है.. जग्गू और लाला यानि जगाला...

रूद्र- ोुह्ह्ह.. बड़े स्मार्ट हो रखने है आज कल डॉन भी. छोडुपट्टी सेल.. ाचा तोह आगे बताओ...

चाचा- आगे क्या होना था.. दया जैसे hi सिटी पहुंचा वह का माहौल देख उसका दिमाग घूम गया. फिर उससे खबर मिली की जग्गू ने किसी लड़की का रपे किया और फिर उससे मर दिया.. बस यही सुन्ना था की उसने उसी रात अपनी टीम तैयार कर्ली और अगली सुभे होते hi जगाला की हवेली पहुंच गया.. करीब 300 पुलिसवालो के साथ वो सिटी के सबसे बड़े डॉन को उसी की हवेली से उठ ले गया.. बताओ इससे ज्यादा बेइज्जती वाली बात उसके लिए क्या होगी की एक नया पोलिसवाले सिटी में एंटर करता है और दूसरे hi दिन उसके साथी दोस्त को उठा ले जाता है...

रूद्र- (हस्ता हुआ) हाहाहा.. कमल कर दिया दया ने.. पर अब मुसीबत दया पे आएगी.. लाला जरूर जग्गू को छुड़ाने के लिए किसी भी हद को पर कर जियेगा.. सिटी खतरे में भी ा सकती है...

चाचा- हाँ बात तोह सही है.. पर जो करना है अब दया को hi करना है...

रूद्र- वो तोह करेगा hi.. इतना तोह विश्वास है मुझे उसपर.. लकिन मैं यह सोच रहा हु की सिटी का हीरो कैसर कहा है.. उसने अभी तक क्यों नहीं किया कुछ जग्गू के लिए.. अब तक तोह जग्गू की अस्थियां तक बह जनि चाहिए थी...

चाचा- हाँ वही मैं भी सोच रहा था की कैसर कहा चला गया...

|बैक तो तुषार|

(सब लोग अभी हर्षिका के घर पहुंच चुके थे.. और हॉल में सभी एक दम शांत होकर बैठे थे.. तुषार कभी किसी तोह कभी किसी के लटके हुए चेहरे को देख रहा था.. सब apni-apni सोचो में घूम थे.. कोई कुछ बोल hi नहीं रहा था तोह तुषार बोलै...)

तुषार- तोह (गाला साफ़ कर) ाहाहूम ाहाहूम. (किसी ने उसकी बात पे ध्यान नहीं दिया, तोह थोड़ा जोर से करता हुआ) आअह्ह्ह्हहुम्मम...

आरुषि- (अजीब से उससे देख) कुछ अटक गया क्या गले में...

हरलीन- (हस्ती हुई) हाहाहाहाहा.. क्या यार आरुषि. हँसा देती है मेरेको...

आरुषि- मैंने क्या हसाया तुझे...

हरलीन- छोड़ यार तू मेरे टाइप की बंदी नहीं है.. तू मेरी बातो को नहीं समाज सकती.. (ऊपर छत की और देख, सपनो में) मेरी बातो को तोह कोई स्मार्ट सा हैंडसम सा hi समाज सकता है. पता नहीं कहा है वो...

आरुषि- वो अभी घास खा रहा होगा...

हरलीन- ( आखें निकल उससे देख) ीह किसकी बात कर रही है तू..?

आरुषि- (मुस्कुरा के देख) तू घड़े की बात कर रही है न..?

तुषार- (पेट पकड़ हस्ता हुआ) हहहहहह...

हर्षिका- हेहेहे...

हरलीन- (गुस्से में) बड़ी कामिनी है तू आरुषि.. मैं कहती हु तुझे भी कोई बड़ा वाला कमीना hi मिले.. जो तेरी रोज subhe-sham बजाये...

आरुषि- (आखें दिखती हुई) क्या..?

हरलीन- (मुस्कुरा के) बंद...

तुषार- Okay-Okay शांत हो जाओ अभी आप लोग...

हर्षिका- हरलीन बस कर अभी.. तेरी वझे से हम कितनी बड़ी प्रॉब्लम में पद सकती थी जानती है न तू.. अभी तुझे मजाक सूज रहा है...

हरलीन- (एकदम से अपनी हसी गायब कर, निचे देखती हुई) सॉरी...

हर्षिका- सॉरी वाली बात नहीं है हरलीन......

तुषार- (बिच में) एक mint-ek मिंट.. मुझे भी बताओगे की आखिर क्या हुआ था..?

हरलीन- मैं बताती हु तुषार...

तुषार- हाँ प्लीज बताओ...

हरलीन- वो ऐसा हुआ था की आज मेरा क्लास लगाने का मन नहीं था तोह मैंने इन् दोनों से बोलै की चलो आज क्लास बंक करके कही घूमने चलते है, फिर थोड़ी देर roo-doo कर मैंने दोनों को मन लिया और निकल पड़े कार लेकर, लकिन हमे नहीं पता था की जो लड़के हम रोज गन्दी नजर से देखते है वो भी हमारा पीछा करेंगे.. हम रस्ते में जा रहे थे की मैंने सोचा क्यों न हम उस जंगल में कैंपिंग करे.. तोह मैंने जिद्द करके दोनों को मन लिया.. यह दोनों का कहना था की अकेले में ऐसे जंगल में जाना ठीक नहीं.. लकिन मेरे को मज़े करने की पड़ी थी.. लकिन मुझे थोड़ी पता था की वो लड़के हमारा पीछा कर रहे है.. हमे जंगल में ए आधा घंटा हुआ था की 2 गाड़ियां आकर वह रुकी.. यह वही थे हमारे कॉलेज के लड़के.. पर यह और भी लड़को को साथ ए थे.. उन्होंने आते hi हमे पकड़ लिया और (रोटी हुई) और हमारे साथ जबरदस्ती करने लगे...

तुषार- (उठ के उसके पास जाता है और छुप करने लगता है) अरे तोह इसमें आपकी गलती कहा हुई..? आप तोह बेवजहे रू रही हो.. रू मत.. (आरुषि और हर्षिका की और देख) तोह आप लोग इस वझे से नाराज थी इनसे जब की इनकी कोई गलती hi नहीं थी.. देखो अगर वो लड़के आपको जंगल में न पकड़ते तोह किसी और दिन किसी और जगह आपको पकड़ते hi पकड़ते.. सामजी आप.. ऐसे इनको दोषी मत ठहराओ की अगर यह जंगल में जाने के लिए जिद्द न करती तोह ऐसा नहीं होता...

आरुषि- बिलकुल सही कहा तुमने तुषार.. सॉरी हरलीन...

हर्षिका- हरलीन सॉरी...

हरलीन- (मुस्कुराती हुई) इतस okay यार...

तुषार- ाचा फिर बताओ क्या हुआ..?

आरुषि- फिर तुषार मैंने चालाकी से तुम्हे मैसेज किया.. लकिन काफी बार करने पर भी तुम्हरा रिप्लाई नहीं आया तोह मैंने शिवं को मैसेज कर दिया...

तुषार- ओह सॉरी दीदी मेरे पास मेरा मोबाइल नहीं था...

आरुषि- कोई बात नहीं मुझे लगा hi था इसीलिए शिवं को मैसेज किया.. लकिन तू मुझे बताएगा की काहिर इतनी जल्दी इतनी अछि फाइट करना कहा से सिक्ख गया.. खंजर तोह ऐसे चला रहा था जैसे कोई ास्सास्सिन हो.. इतनी जल्दी कैसे सिक्खा तू...

तुषार- इसमें सोचना क्या है दीदी.. मैं तोह बस मरने पे फोकस कर रहा था.. उस वक़्त मेरे अंदर बहुत गुस्सा था जो सामने आया मरता गया.. पता नहीं मैं कैसे इतना ाचा लड़ लिया पर हाँ शायद यह मेरे गुस्से के कारन हुआ था...

हर्षिका- आपका गुस्सा देख हम सब और ज्यादा दर गए थे.. और वो जो आपके साथ थे उन्होंने तोह सीधा अपना सोर्ड उस लड़के के साइन के पर कर दिया.. उफ़ बहुत डरावना था वो. मेरा तोह दिल कम्प गया था देख कर...

(तुषार उसकी बात करने के अंदाज में खो सा गया था.. दिल तीन शबदो का शब्द, इसी जुड़ी बातो के बारे में क्या लिख सकता हु.. ऐसा क्यों होता है की उससे पूरा दिन देख कर भी तेरा मन नहीं भरता, ऐसा क्यों होता है की उसका तेरे साथ न होने से दिन नहीं kat.ta, ऐसा क्यों होता है की सिवाए उसके किसी और की आवाज सुनने का तेरा दिल नहीं करता, ऐसा क्यों होता है की जब वो पास नहीं होती तोह बहुत dhura-dhura सा तुझे लगता, ऐसा क्यों होता है की उससे कोई छू तक ले तोह तेरा दिल अग्ग की तरह जलता, ऐसा क्यों होता है की अगर वो तुझे न मिली तोह यह सोच कर hi तेरा दिल बहुत डरता, ऐसा क्यों होता है की वो छोड़ कर चली गयी तुझे अब यह दिल हर वक़्त तुझसे लड़ता...)

(आरुषि तुषार को आवाज लगा रही थी जो कबसे हर्षिका को बस घूरे जा रहा था, हर्षिका ने भी देख लिया था वो मुँह निचे कर शर्मा रही थी.. आरुषि और हरलीन भी हसी कण्ट्रोल कर के है रही थी...)

आरुषि- तुषार..!

तुषार- (हडबडा के, अपनी सोचो से भर निकल) हैं.. हाँ दीदी...

आरुषि- क्या हुआ.. (हर्षिका को देख मुस्कुरा के) कहा खोइया था यह..?

हर्षिका- (शर्माती हुई) मुझे.. मुझे क्या पता.. मैंने तोह कुछ किया hi नहीं...

तुषार- वो.. अरे नहीं दरअसल मैं सू रहा.....

हरलीन- (बिच में) आखें खोल के सू रहे थे..?

तुषार- अरे नहीं मैं कह रहा हु सोच रहा था...

हरलीन- ओह्ह.. वैसे क्या सोच रहे थे..?

तुषार- वो.. अरे छोडो न...

हरलीन- (मुस्कुरा के, पहले तुषार फिर हर्षिका को देख) हमने तोह पकड़ा hi नहीं उससे...

तुषार- (idher-udher देखता हुआ) आप क्या बाते कर रही हो.. (बात बदलता हुआ) दीदी मुझे chai-coffee बना के दो न.. थोड़ी थकावट सी लग रही है...

आरुषि- (उठती हुई) ठीक है मैं लती हु...

हर्षिका- (jaldi-jaldi उठ के) रुक आरुषि, तू बेथ मैं लती हु बनके...

हरलीन- (धीरे से आरुषि से) क्या बात है.. शादी से पहले hi...

आरुषि- (धीरे से उससे भी) बस चुप कर्जा अभी.. बहुत बोलती है तू...


(उधर सिया, सवाना और सफल हॉस्पिटल जा रहे थे.. लकिन अभी वह दुखो का समंदर उनका इंतजार कर रहा था....)

《1764 -वर्ड्स》
 
थैंक्स शाहबाज़ भाई.. तुषार पहले से तोह काफी बदल गया है.. dhire-dhire उसमे चंगेस आते जायेंगे.. मैं नहीं चाहता की कल वो पतला था और अगले hi 6 एबीएस लिए ghume:D

सेक्स अभी थोड़ी डोर hi है भाई. एक बार स्टोरी सेट बेथ जाये फिर देखते है..

रूद्र अभी किसी की समाज नहीं आएगा लकिन इसके राज़ भी जल्दी सामने लता हु...

शुक्रिया ासे hi सपोर्ट करते रहो...
 
थैंक्स आकाश बीआरओ.. हम्म रूद्र कैसर का साथ चाहता है यह बात रूद्र के शुरवाती अपडेट में बता दी है. लकिन क्यों और किस लिए चाहता है यह देखने वाली बात है..

हाँ माहौल बहुत गरम हो गया था तोह आज तोह hasi-majak से ठंडा करना hi सही लगा..

अभी यह तोह कल पता लगेगा की हॉस्पिटल का क्या सन होने वाला है..

शुक्रिया बीआरओ.. कीप सपोर्टिंग...
 
अपडेट-33

आरुषि- (उठती हुई) ठीक है मैं लती हु...

हर्षिका- (jaldi-jaldi उठ के) रुक आरुषि, तू बेथ मैं लती हु बनके...

हरलीन- (धीरे से आरुषि से) क्या बात है.. शादी से पहले hi...

आरुषि- (धीरे से उससे भी) बस चुप कर्जा अभी.. बहुत बोलती है तू...

(उधर सिया, सवाना और सफल हॉस्पिटल जा रहे थे.. लकिन अभी वह दुखो का समंदर उनका इंतजार कर रहा था....)




|अब अग्गे|

(सिया, सवाना और सफल हॉस्पिटल पहुंचे तोह उन्होंने देखा की हॉस्पिटल के अंदर से बहुत लोग घबराए हुए से bhag-daud कर रहे बहार ा रहे है.. सवाना और सफल यह देख थोड़ा हेरैं हो जाते है की लोग ासे हाला क्यों मचा रहे है.. तीनो अंदर जाते है तोह देखते है की डॉक्टर्स तक हड़बड़ाए हुए घूम रहे है.. सरे रूम्स के डोर्स क्लोज थे बस एक सामने वाले रूम का दूर था जो खुला हुआ था, और वह से रोने छिलने की आवाजे ा रही थी.. सवाना जल्दी से उस और जाने लगती है, सफल भी सिया को गौड़ में उठता है और जल्दी से रूम की और जाने लगता है.. रूम में एंटर होते hi सिया सामने देख जोर से चीला पड़ती है...)

सिया- (चिलाती हुई) मुउम्मम्माआआ...

(सामने निचे जमीन पर सिया की मुम्मा पड़ी हुई थी जिसके पेट में गोली लगी हुई थी.. वो खून से lath-path शायद दुनिया को अलविदा कह चुकी थी.. उसके साथ सिया के पापा जो बीएड पर बड़े थे उन्हें भी एक गोली उनके पेट में मर दी गयी थी लकिन अभी वो जिन्दा थे शायद अभी कुछ hi सासे बची थी उनकी.. और गोली चलने वाले 3 आदमी अभी भी वही थे, उनमेसे एक अभी भी सिया के पापा पर गन तने कहड़ा था और उससे कुछ सवाल कर रहा..)

आदमी.1- नहीं बताएगा यह ले फिर...

(वो आदमी शूट करने वाला था की सिया चीख पड़ी.. यह वही वक़्त था जब सिया, सवाना और सफल रूम में एंटर किये थे.. सिया जैसे hi चीखी तोह उनका धयान उस तरफ चला गया...)

Siya’s पापा- (दर्द से और हैरानी से) बेटीई.. तुम यहाँ क्यों आयी.. (सवाना और सफल को देख) आप लोग क्यों लाये इससे यहाँ.. क्यूँउउ..!!

आदमी.1- (हस्ता हुआ) ोई तू चुप कर लड़के.. हाहाहा.. यह तोह बहुत ाचा हुआ, (सफल को देख) ला ोये लड़के इस लड़की को मुझे देदे...

(बस यह इस लड़के की लास्ट लाइन थी.. सफल ने रोटी हुई सिया की आखों पे हाथ रखा और सवाना को इशारा किया, सवाना ने अपनी जैकेट के अंदर से 2 पिस्तौल निकले और सामने खड़े तीनो आदमियों के माथे पर एक बाद एक गोली चला दी.. तीनो शांति से जमीन पर गिर गए और कभी न उठने वाली नींद सू गए...)

(सफल ने सिया के आखों से हाथ हटाया तोह देखा सिया बेहोश हो गयी थी.. अब उसके Mamma-Papa सामने गोली कहए पड़े है तोह एक नन्ही सी जान कैसे यह देख बर्दाश कर सकती थी.. सफल ने सिया को एक बीएड पर लेटता दिया और जल्दी से सिया के पापा के पास गए...)

सफल- (उन्हें लगी गोली और बहते खून को देखता हुआ) आप.. आपको कुछ नहीं होगा.. मैं डॉक्टर को बुलाता हु.. चिंता मत करो आप...

Siya’s पापा- (दर्द में बोलता हुआ) शुक्रिया मेरी बेटी की जान बचने के लिए.. मेरी अह्ह्ह हहहा मेरी बात सुनो.. अपने बताया था की आप एजेंट्स हो देखो मैं अब नहीं बचूंगा...

सफल- (बिच में) सवाना डॉक्टर को बुलाओ जल्दी...

सवाना- हाँ मैं बुलाती हु डॉक्टर को...

(सवाना ने पहले जमीन पर पड़ी सिया की मम्मी को बीएड पर लेटाया और दौड़ कर बहार चली गयी डॉक्टर को लेन...)

Siya’s पापा- मेरी बात क्यों नहीं सुन रहे आप लोग मेरे पास वक़्त नहीं है.. बस इतना केहतना है की सिया को बचा के रखा यह कोई आम लड़की नहीं है.. कुछ लोग इससे पाना चाहते है.. मुझे वादा करो की इससे कुछ नहीं होने डोज.. वादा करो.. (रोटा हुआ) प्लीज मेरी बची को किसी को मत देना चाहे कोई कितनी hi मांग करे.. हमेशा इससे अपने पास रखना.. बोलो क्या आप करोगे आसा..?

सफल- हाँ फ़िक्र मत करो.. मुझे नहीं पता आप आसा क्यों बोल रहे हो लकिन आपकी बेटी को कुछ नहीं होगा.. यह मेरा वडा है आपसे...

Siya’s पापा- मेरी वाइफ को बचा लेना प्लीज.. वो बच सकती है...

सफल- चिंता मत कीजिये हम आपको भी.....

Siya’s पापा- (बिच में, दर्द में बोलने की कोशिश करते हुए) आठ नहीं.. मेरा बच पाना नामुमकिन नहीं है.. मुझे ज़हरीली गोली लगी है.. लकिन मेरी वाइफ बच..........

(बस इतनी hi कह पाए थे की सिया के पापा ने डैम तोड़ लिया.. अब क्या hi लिखू..? एक * साल की नन्ही सी जान के पापा नहीं रहे यह बात सफल उससे कैसे बताएगा..? सफल सिया के मासूम चेहरे को देख रहा था.. उसके रेशमी बाल हवा में उड़द रहे थे, एक छोटी सी प्यारी सी नाक, chote-chote होठ, बड़ी बड़ी आखें जो अभी बंद थी, प्यारा सा उसका फेस.. सफल की आखों में पानी बरस रहा था, यह सोच कर की अब यह बची किसको अपने पापा कहेगी, किस्से अपने लिए खिलोने मांगेगी, छोट लगने पर जो पापा उससे गौड़ी में उठा के चुप करते थे वो कोण करेगा अब, अपनी विदाई पर किसको गले से लगा कर रोयेगी, अभी तोह इतनी छोटी सी है, कैसे अपनी बक्की जिंदगी अपने पापा के बेगर, उनकी यादों में गुजारेगी.. इतने में सवाना 2 डॉक्टर्स और 3 नर्सेज के साथ ा गयी.. उन्होंने आते hi सबको बहार जाने को कहा.. सफल ने rote-rote hi सिया को उठिया और उससे अपनी गौड़ में उठा कर बहार चला गया और एक बेंच पर बेथ गया.. सवाना पानी लेकर आयी और सिया पर छिड़का तोह वो होश में ा गयी.. सिया होश में आते hi वापिस रोने लगी...)

सिया- (रोटी हुई) भैया.. भैया. मुम्मा और पापा कहा है.. (jor-jor से रोटी हुई) उन्हें किसी ने मर दिया...

(सिया ने जब यह बात अपनी रोटी हुई सूरत से इतने दर्द भरी आवाज में बोली तोह सवाना और सफल का दिल भी jor-jor से रू पड़ा.. सवाना भी खूब रोने लगी.. सफल ने एक साइड से सिया और एक साइड से सवाना को अपने से लगा लिया...)

सफल- नहीं बीटा डॉक्टर्स गए है अंदर वो आपके Mumma-Papa को कुछ नहीं होने देंगे.. ठीक है, चिंता मत करो तुम...

सिया- (थोड़ी उम्मीद से) क्या वो Mumma-Papa को ठीक कर देंगे..?

(सफल सवाना को देखता है और सोच रहा होता है की क्या बोलो और किस मुँह से बोलो मैं, जब खुद उसने उसके पापा को अपनी आखों के सामने डैम तोड़ते देखा है...)

सफल- (अपने आंसू बहता हुआ) हाँ बीटा, वो ठीक कर देंगे तुम्हारे Mumma-Papa को...

(यह बोलते हुए सफल की आँखों से झरना बह निकला.. वो उठ कर बहार जाना चाहता था ताकि वो एक बार खुल कर रू सके लकिन वो बजाये ऐसा करने के उस नानी सी जान को हौसला देना चाहता था उसके आंसू पोछना चाहता था...)

|बैक तो तुषार|

हर्षिका- (किचन से कॉफ़ी लती हुई) यह लो ा गयी कॉफ़ी...

हरलीन- (हस्ती हुई) हम्म.. पहले अपने मर. को दीजिये कही नाराज न हो जाये...

हर्षिका- (हैरानी से) क्या बोली...

हरलीन- (टेढ़ी आँख से तुषार को देख) मैंने कहा पहले इन् मर. को कॉफ़ी दो कही नाराज न हो जाये...

(तुषार सब समझता हुआ भी मासूम बना फिर रहा था, वो uper-niche और idher-udher नज़ारे घुमा रहा था जैसे उसने तोह कुछ सुना hi नहीं.. हर्षिका ट्रे लेकर तुषार के पास जाती है और थोड़ा झुक कर जब ट्रे उसके सामने करती है तोह तुषार का ध्यान हर्षिका के बूब्स के bicho-bich बन रही लाइन पर टिक जाती है.. बस कुछ सेकण्ड्स तक hi सही लकिन तुषार का मन अंदर से खुश हो गया.. उसने जल्दी से अपनी नज़ारे ऊपर कर्ली और कॉफ़ी का कप पकड़ लिया.. हर्षिका को कुछ पता नहीं चला था लकिन कोई था जिसने उसकी इस हरकत को अचे से देख और नोट कर लिया था.. वो mand-mand मुस्कुरा रही थी और कुछ सोचने भी लगी थी.. हर्षिका ने सबको कॉफ़ी दी और अपनी कॉफ़ी का कप भी लेकर jan-bujhkar एक सोफे छोड़ कर तुषार के सामने वाले सोफे पर आकर बेथ गयी...)

(सब कॉफ़ी पे रहे थे की आरुषि के मोबाइल पर अन्निका का कॉल ा जाता है...)

आरुषि- (कॉल उठा के) hello मेरी बर्फी कैसी है...

अन्निका- (नाराजगी से) हूहः.. मुझे बर्फी क्यों बोलै.. मैं बर्फी हु क्या..?

आरुषि- (मुस्कुराती हुई) हाँ बर्फी hi तोह है इतनी मिट्ठी स.. एक दिन मैं तुझे खा जयुंगी...

अन्निका- नहीं मैं मिट्ठी नहीं हु मुझे मत खाना...

आरुषि- (हस्ती हुई) हेहेहे.. ाचा ठीक है नहीं कहती.. चल बता क्यों कॉल किया...

अन्निका- (वापिस नाराज होकर) मुझे भैया से बात नहीं करनी...

आरुषि- अल्ले क्या हुआ.. तुषार ने कुछ बोलै तुम्हे..?

अन्निका- बोलै नहीं है इसीलिए तोह बात नहीं करनी.. ठूठ...

आरुषि- यह huuhh-huuhh करना छोड़ और (तुषार को गुस्से से देख) बता क्या किया उसने, मैं अभी खबर लेती हु उसकी...

हर्षिका- यह आपकी बात कर रही है न.. क्या किया अपने..?

तुषार- (घभराता हुआ) मुझे, मुझे खुद नहीं पता...

अन्निका- नहीं दीदी.. भैया मुझसे बात नहीं कर रहे, इस्सलिये मैं गुस्सा हु.. वो मेरे कॉल भी नहीं उठा रहे.. (नाम आखों से) मैं उनके लिए इम्पोर्टेन्ट नहीं हु क्या..? (और रोने लगी)

आरुषि- अरे नहीं मेरा बचा रोने क्यों लगी आप.. देखो मेरी बात सुनो तुषार का मोबाइल... (अपनी कही बात को कोसती हुई) वो वो उसका मोबाइल...

अन्निका- क्या दीदी.. भैया का मोबाइल क्या...

आरुषि- वो तू तुषार से hi पूछ ले.. (और मोबाइल तुषार को दे दिया)

तुषार- (घबराता हुआ) hello गुड़िया.. कैसी है तू..?

अन्निका- (ख़ुशी से) मैं ठीक हु भैया.. (वापिस नाराज होकर) लकिन मुझे आपसे बात नहीं करनी...

तुषार- लकिन क्यों..?

अन्निका- आप मुझसे बात नहीं कर रहे थे.. न कॉल की न hi मेरी कॉल उठाई.. क्या मैं अब आपके लिए इम्पोर्टेन्ट नहीं रही..?

तुषार- (रिलैक्स होता हुआ) ओह्ह.. अस्सी बात थी.. सॉरी मेरी गुड्डू मेरा मोबाइल.. आह आह.. वो कही खो गया था.. हाँ.. वर्ण क्या मैं अपनी गुड़िया का कॉल ऐसे hi छोड़ देता.. बिलकुल भी नहीं...

अन्निका- (कन्फर्म करती हुई) पक्का..?

तुषार- (मन में) नहीं गुड़िया.. अब तुम्हे कैसे बताऊ की मोबाइल हवेली में है.. अगर हवेली के बारे में बता दिया तोह सब कुछ बताना पड़ेगा. और मैं नहीं चाहता की तुम्हे किसी तरह की टेंशन में दालु...

तुषार- हाँ पक्का मेरी जान...

अन्निका- (खुश होकर) फिर ठीक है.. तोह आप मुझसे बात कर सकते हो.. हहहह...

तुषार- ओह्ह तोह अब मुझे परमिशन मिल गयी.. ाचा क्या कर रही है मेरी प्यारी गुड़िया, और वो कहा है आग की पुड़िया.. कही तुझे तंग तोह नहीं करती..? करती है तोह बताना उसकी टंगे तोड़ दूंगा मैं.. हाहाहा...

अन्निका- (हस्ती हुई) हीहीही.. आप बहुत जोके मरते हो भैया.. मैं तोह आपसे बात कर रही हु न तोह मैं और क्या करुँगी.. और तान्या दीदी मुझे तंग नहीं करती.. मुझे बहुत संभल के रखती है.. दीदी इधर hi बैठी है मेरे पास hi...

तुषार- (घभराता हुआ) ओह्ह.. वो भी उधर hi है.. (अपने गले से थुक्ख निगलता हुआ) ाहुम्म तोह क्या मोबाइल.....

अन्निका- (बिच में बोलती हुई) भैया आपको एक गुड न्यूज़ दू.. वो न मोबाइल स्पीकर पर है.. हहहह...

तुषार- वो.. वो.. वो...

तान्या- (गुस्से से) अब वो वो क्या करता है, बोल अब.. तू टंगे तोड़ेगा मेरी.. तू घर ा तेरी टैंगो को ऐसे मोडूँगी न की बाबा रामदेव भी शर्मा जायेगा...

अन्निका- (पेट पकड़ हस्ती हुई) हहहहह.. भैया अभी घर आने से पहले 2 बार सोच के आना...

तुषार- इसमें सोचना क्या है.. मैं नहीं ायूँगा घर...

तान्या- ासे कैसे नहीं आएगा.. तू नहीं आएगा तोह मैं ा जयुंगी वह, एक बार तेरी खबर तोह लेनी है मुझे...

तुषार- ठीक है ले लेना मेरी खबर.. ाचा बताओ तुम सब ठीक हो, घर में कोई प्रॉब्लम तोह नहीं, और स्कूल में कोई तंग तोह कर रहा...

तान्या- (हैरानी से) नहीं अस्सी तोह कोई बात नहीं है.. लकिन ऐसे क्यों पूछ रहा है तू...

तुषार- कुछ नहीं बस ऐसे hi.. ाचा ठीक है अपना धयान रखो.. BYE...

तान्या- BYE...

अन्निका- BYE भैया, हम आपसे मिलने आएंगे...

तुषार- हाँ मेरा गुड्डू मुझे भी मिलना है तुमसे, दिल नहीं लगता तेरे बिना.. BYE...


《1983 -वर्ड्स》
 
अपडेट-34

तुषार- ठीक है ले लेना मेरी खबर.. ाचा बताओ तुम सब ठीक हो, घर में कोई प्रॉब्लम तोह नहीं, और स्कूल में कोई तंग तोह कर रहा...

तान्या- (हैरानी से) नहीं अस्सी तोह कोई बात नहीं है.. लकिन ऐसे क्यों पूछ रहा है तू...

तुषार- कुछ नहीं बस ऐसे hi.. ाचा ठीक है अपना धयान रखो.. BYE...

तान्या- BYE...

अन्निका- BYE भैया, हम आपसे मिलने आएंगे...

तुषार- हाँ मेरा गुड्डू मुझे भी मिलना है तुमसे, दिल नहीं लगता तेरे बिना.. BYE...


|अब अग्गे|

हर्षिका- (ख़ुशी से) आपकी सिस्टर्स का कॉल था..?

तुषार- (मुस्कुराता हुआ) हाँ मेरी प्यारी बहनो का...

हर्षिका- मुझे भी मिलवाओ न उनसे.. मैंने आपसे पहले भी कहा था, (साद फेस बनके) लकिन अपने मुझे मिलवाया नहीं...

हरलीन- हाँ वो आपकी छोटी गुड़िया से तोह मैं मिल चुकी हु एक बार, बहुत स्वीट है वो.. लकिन आपकी जुड़वाँ बहिन से नहीं मिली.. मुझे भी एक बार मिलवाना प्लीज...

तुषार- हाँ हाँ क्यों नहीं जरूर मिलवाऊंगा उनसे आपको.. (आरुषि की और देख) क्या हुआ दीदी आप इतनी उदास क्यों लग रही हो...

आरुषि- कुछ नहीं मैं बस सोच रही थी की आज जिन लड़को को तुमने मारा है क्या उन्हें मरना सही था.? ी मैं जान से मार देना कुछ ज्यादा नहीं हो गया तुषार..?

हरलीन- (उदास होकर) मुझे भी यही लग रहा है की.......

तुषार- (बिच में चिल्ला के खड़ा होता हुआ) बसससससस.. सुनलो मेरी बात, मैंने जो किया कुछ गलत नहीं किया, (आरुषि को गुस्से में देखता हुआ) दीदी आप कह रही उन्हें जान से मार देना ज्यादा हो गया, अगर मैं वह वक़्त पर नहीं होता तोह क्या ज्यादा नहीं हो जाता..? तब क्या आपके दिल में उनके लिए बेइंतेहा नफरत नहीं होती..? क्या तभ भी आप यह नहीं चाह रही होती की मेरे साथ इतनी बदसलूकी करने वाले इंसान की गार्डन काट जाये.. मैंने वही किया है दीदी मैंने अनहोनी होने से पहले hi गार्डन काट दी.. (गुस्से में चीखता हुआ) मेरी बहिन को कोई छू तक नहीं सकता.. अगर आगे से किसी ने ऐसा करना का सोचा भी तोह मैं उससे वो बन के दिखाऊंगा जो उसने कभी न देखा न सोचा होगा...

(तुषार अपनी हर लाइन इतने cheekh-cheekh कर बोलै था की तीनो लड़कियां तोह दर के कम्प गयी...)

तुषार- (आरुषि को गुस्से से देखता हुआ) बोलो दीदी बोलती क्यों नहीं.. क्या तभ भी आप यही कहती की जो हुआ गलत हुआ है.. बोलूओ...

(आरुषि तुषार की अस्सी बातो से रू hi पड़ी थी.. उसके मुँह से कुछ निकल hi नहीं रहा था बेचारी क्या बोलती.. कुछ देर कोई कुछ नहीं बोलै, अचानक तुषार को एहसास हुआ की आज वो पहली बार अपनी बहिन पर चिलाय है, उससे कोई हक़ नहीं है की वो अपनी बड़ी बहिन से ऐसे गुस्से से बात करे, वो dhire-dhire उसके पास गया और उसके सामने जाकर खड़ा हो गया, आरुषि अभी भी बैठी हुई थी तोह तुषार ने उसको उसकी कमर से पकड़ उठा के खड़ा कर दिया, और पहले उसके बहंते आंसू को अपने हाथो से साफ़ किया और फिर कस के उससे अपने गले से लगा लिया...)

तुषार- सॉरी.. सॉरी दीदी.. मैं बहुत ज्यादा बोल गया आपको.. मुझे माफ़ कार्डो प्लीज...

आरुषि- (मुस्कुराती हुई) नहीं तू सॉरी न बोल.. और तुषार यह आंसू इस्सलिये नहीं ए की तूने मुझपे गुस्सा किया बल्कि इस्सलिये ए क्युकी तुझे मेरी कितनी फ़िक्र है.. जिस हक़ से तूने आज मुझे डांटा है न मेरे तोह आंसू निकलेंगे है.. पगला कही का तूने तोह मुझे रुला hi दिया.. (कस के गले लगाती हुई) और सॉरी, मैं गलत थी तुषार तूने सही किया उनके साथ...

हरलीन- हाँ तुषार सॉरी.. मैं भी यही सोच रही थी की अपने कुछ ज्यादा hi बड़ी सजा देदी उन्हें, लकिन अगर दूसरी तरफ से देखा जाये तोह हमारे यहाँ का कानून बिगढरा हुआ है, हम उनसे अपनी सेफ्टी की गारंटी तोह ले hi नहीं सकते...

हर्षिका- बिलकुल ठीक कहा अपने.. मैं आपकी हर बात से सहमत हु तुषार.. अगर आप वह वक़्त पर आकर हमे उसने सही बचते तोह हमारे साथ कुछ भी गलत हो सकता था.. आज हमारे साथ होता कल किसी और के साथ होता.. उनका हौसला बढ़ता जाता.. और इसी पाप के काम में और लड़के भी उनके साथ जुड़ते जाते.. और हम.. और हम तोह बस बैठी अभी रू hi रही होती न.. अगर एक अचे इंसान को बचने के लिए 100 बुरे लोग भी मरने पढ़ जाये तोह वो गलत नहीं है.. हमारे साथ बुरा होता इससे ाचा तोह उन् बुरे के साथ hi बुरा हुआ...

|बैक तो हॉस्पिटल|

(सिया अभी सवाना की गौड़ में बैठी, उसकी और फेस किया उससे चिपक के dhire-dhire सुबक रही थी.. सवाना और सफल भी बस इसी एक उम्मीद में थे की शायद डॉक्टर सिया के Mummy-Papa को बच ले.. दोनों का धयान उस रूम की तरफ यहाँ सिया के Mummy-Papa का इलाज चल रहा था...)

( और 2 घंटे बेट जाने के बाद रूम का दूर खुलता है और एक डॉक्टर बहार आता है.. सफल ने उससे देखा तोह उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी की वो डॉक्टर से जाकर बात करे की आखिर क्या हुआ.. सफल उठा नहीं तोह आखिर डॉक्टर ने hi सफल को इशारे से अपनी और बुलाया तोह सफल घभराता हुआ उठ कर डॉक्टर के पास चला गया...)

सफल- जी डॉक्टर क्या हुआ..?

डॉक्टर- आपका नाम..?

सफल- सफल...

डॉक्टर- वो जो Ladka-Ladki अंदर है वो आपके क्या लगते थे..?

सफल- (घभराहट से) लगते थे मतब..? क्या हुआ है वो ठीक तोह है न....

डॉक्टर- मेरी बात सुनो अभी करीब 3 घंटे पहले कुछ 3,4 आदमी हॉस्पिटल में घुस ए और जबरदस्ती उन् Ladka-Ladki का रूम नंबर पूछने लगे.. हमारे गार्ड्स ने उन्हें रोकने की कोशिश की तोह उन्होंने दोनों गार्ड्स को गोली मार दी.. गोली लगते hi हॉस्पिटल में bagh-dhor मैच गयी.. जो रूम्स में थे उन्होंने दूर बंद कर लिए और जो बहार थे वो हॉस्पिटल से छीलते हुए बहार को भागने लगे.. कुछ देर बाद एक रूम से 2 बार गोली चलने की आवाज आयी.. कुछ देर और बेट जाने के बाद वापिस 3 गोली चलने की आवाज आयी, और थोड़ी hi देर में (सवाना की और इशारा कर) वो लड़की हमारे पास आयी और अपना ईद कार्ड दिखा के हमे बोली के वो एजेंट है और उसने तन्नो आदमियों को मार दिया है.. Ladka-Ladki को गोली लगी है उन्हें कुछ हो न जाये जल्दी चलो...

सफल- तोह क्या वो दोनों अब ठीक है..?

डॉक्टर- (सफल के कंधे पर हाथ रखता हुआ) देखो मर. सफल, हमने अपनी कोशिश पूरी की बचने की, हमारे पास वक़्त भी काफी था लकिन...

सफल- (अपने कंधे से डॉक्टर का हाथ झटकता हुआ, घभराहट से) लकिन क्या डॉक्टर.. आप मुझे saaf-saaf बताएंगे प्लीज..?

डॉक्टर- बात दरअसल यह है की लड़की को एक मामूली गोली लगी थी, जिससे आप कह सकते हो की सिर्फ बेहोश करने वाली गोली.. लकिन लड़के को एक ऐसे जहर की गोली लगी है जिसका कोई इलाज नहीं है...

सफल- (आँखों में आंसू भरता हुआ) तोह मतलब...

डॉक्टर- हाँ..! हमने लड़की को बचा लिया है, लकिन लड़के को नहीं बचा पाए.. उसका बच पाना इम्पॉसिबल था.. सॉरी...

(इतना बोल डॉक्टर वह से चला गया.. और सफल की हिम्मत ने डैम तोड़ दिया और वो वही घुटनो पर बेथ गया.. दूर बैठी सवाना ने जब सफल को ऐसे देखा तोह कस के सिया को अपने से लगा लिया.. वो dhire-dhire यह सोच कर रोने लगी की अब वो क्या जवाब देगी सिया को...)

सिया- (अपने ऊपर पद रहे सवाना के आंसू को फील कर, सर उठा कर) क्या हुआ दीदी.. आप रू रही हो...

सवाना- नहीं बीटा.. (सफल की और इशारा कर) वो देखो चलो भैया के पास चले...

(सवाना सिया को गौड़ में उठा के सफल के पास ले जा रही होती है की सामने रूम से 2 नर्सेज स्ट्रेचर पर किसी बॉडी को लेकर बहार चली गयी.. शायद यह सिया के पापा की बॉडी थी.. उनका फेस धोखा हुआ था तोह सिया देख नहीं पायी की कोण है वो.. अब मासूम लड़की तोह समाज भी नहीं पायी थी यह बॉडी उसके मुम्मा या पापा की हो सकती है.. लकिन सवाना ने जब यह देखा थो उसका दिल कम्पना शुरू कर दिया...)

सवाना- (सफल के पास पहुँचती हुई) सफल...

सफल- (सर ऊपर उठा, अपनी बेगहि आँखों से सवाना को देखता हुआ) हाँ...

सवाना- (दर्द भरी आवाज में) क्या कहा डॉक्टर ने...

सफल- (सिया को देख) बीटा चलो आपको आपकी मुम्मा से मिलता हु...


सिया- (बहुत खुश होकर) मुम्मा ठीक हो गए...

सफल- (आंसू को रोक मुस्कुराता हुआ) हाँ बिलकुल ठीक हो गयी आपकी मुम्मा.. (उठता हुआ) चलो...


(सिया सफल की एक ऊँगली पकड़ती है और दोनों रूम के अंदर जाने लगते है.. अभी कुछ देर पहले hi उसके पापा की बॉडी को उसके सामने से लेजाया गया था.. सवाना भी समाज गयी थी की सिया की मुम्मा जिन्दा है लकिन उसके पापा नहीं रहे.. वो वापिस एक बेंच पर बेथ कर रोने लगी उसका सर दर्द करने लगा था, एक फूल सी बची यह सदमा कैसे सेह पायेगी यह सोच कर, जब वो सुनेगी की उसके पापा अब इस दुनिआ में नहीं रहे...)

(सफल और सिया रूम में पहुंचे तोह एक बीएड पर पीठ टिकाये एक लड़की बैठी थी जो बस रोये जा रही थी.. यह थी सिया की मम्मी.. 27 साल की उम्र, खूबसूरत चेहरा, काळा बार जो अभी बिखरे हुए थे, आँखों में jhar-jhar बेहटा पानी, गुलाबी होंठ जो अभी सुख चुके थे.. इनका नाम था प्रियल.. प्रियल ने जैसे hi सिया को देखा वो और रोने लगी.. उसके पास एक नर्स कड़ी थी को उससे शांत करवा रही थी. लकिन यह दुःख तोह उससे साडी उम्र झेलना था...)



(सिया भी भाग कर गयी और बीएड पर छलांग लगा कर अपनी मुम्मा से लिपट गयी...)




सिया- (खुश होकर) मुम्मा आप ठीक हो गयी...

प्रियल- (मुस्कुराने की कोशिश कर, हाँ में सर हिलती हुई)

सिया- (अपनी मुम्मा के टपकते आंसू देख) क्या हुआ मुम्मा आप रू क्यों रही हो.. (दूरसे खली बीएड हो देख) पापा कहा है.. (झूठे गुस्से से) उन्होंने डांटा आपको.. बताओ कहा है मैं अभी उनकी खबर लेती हु...

(बेचारी प्रियल क्या बताये की अब उससे dantne-dhamkane वाला, उससे रोटी हुई को चुप करने वाला, उसके साथ cheed-chaad करने वाला, हर मुसीबत में उसका साथ देने वाला अब इस दुनिआ को छोड़ कर जा चूका है.. प्रियल से सहा नहीं जा रहा था.. उसने अपनी बेटी को पकड़ के अपने साइन से लगा लिया और अपनी आने वाली जिंदगी के बारे में सोच कर रोने लगी.. इस अनजान दुनिआ में उसका और कोई है भी नहीं.. वो कहा जाएगी, उसकी बेटी को कुछ लोग पाना चाहते है कैसे वो अपनी बेटी को उनसे बचा पायेगी, क्या वो अकेली उनसे लड़ पायेगी या यह जिंदगी बस कुछ hi दिन की होने वाली है...)


《1757 -वर्ड्स》
 
थैंक्स विक्रम भाई.. तुषार की बहिन के साथ गलत हुआ इसलिए आपको निराशा हुई मनाता हु.. पर यह गंदगी पूरी सिटी में पहेली हुई है तोह अभी तोह तुषार का दिन बस यही गया यहाँ उसके अपने थे, बाकि और लोगो को तोह वो बचा hi प् रहा.. इसको आगे से अचे से एक्सप्लेन करूँगा.. उम्मीद है तभ आप डिसअप्पोइंट नहीं होंगे...

हम्म भाई यह बात है स्टोरी थोड़ी स्लो है लकिन मुझे ेंन 7 दिनों में काफी साडी सीन्स ऐड करने है.. उसके बाद स्टोरी वापिस अपनी रफ़्तार पकड़ लेगी...
 
शुक्रिया विक्रम भाई.. मैं आपकी बाते समाज गया था पर में चाहता हु की उससे में स्टोरी में hi बताओ, हाँ स्टोरी थोड़ी स्लो थी उससे मैंने अभी रफ़्तार दे दी है.. आपकी एजेंट्स को लेकर जो बात थी उससे मैं अछि तरह समाज गया, आगे आपको स्टोरी निखरती हुई नजर आएगी.. हाँ मैंने पिछले कुछ उपदटेस में गलती की जो की आपकी बातो को समझने के बाद मुझे पता चली.. काफी दांते वाला रिव्यु था लकिन मुझे ाचा लगा की अपने सब sach-sach कहा, यह कहना गलत नहीं है की आपके कारण मुझे स्टोरी को सुधने में कितनी मदद मिली है, एक बार वापिस आपको दिल से शुक्रिया करूँगा, मेरे साथ हमेसा बने रहेगा दोस्त.. धन्यवाद इतना टाइम निकल के मेरी स्टोरी से पॉइंट निकल मुझे सही सलाह देने के लिए....
 
अपडेट-35

(बेचारी प्रियल क्या बताये की अब उससे dantne-dhamkane वाला, उससे रोटी हुई को चुप करने वाला, उसके साथ cheed-chaad करने वाला, हर मुसीबत में उसका साथ देने वाला अब इस दुनिआ को छोड़ कर जा चूका है.. प्रियल से सहा नहीं जा रहा था.. उसने अपनी बेटी को पकड़ के अपने साइन से लगा लिया और अपनी आने वाली जिंदगी के बारे में सोच कर रोने लगी.. इस अनजान दुनिआ में उसका और कोई है भी नहीं.. वो कहा जाएगी, उसकी बेटी को कुछ लोग पाना चाहते है कैसे वो अपनी बेटी को उनसे बचा पायेगी, क्या वो अकेली उनसे लड़ पायेगी या यह जिंदगी बस कुछ hi दिन की होने वाली है...)

|अब अग्गे|


सिया- (अपनी मुम्मा के चेहरा पर हाथ फेरती हुई) क्या हुआ मुम्मा.. रू क्यों रही हो.. और पापा कहा है..?

प्रियल- कुछ नहीं बीटा.. और अब आपके पापा कभी नहीं आएंगे…

सिया- क्यों नहीं आएंगे.. वो मेरे बिना नहीं रह सकते, और मैं भी उनके बिना नहीं रह सकती.. वो जरूर आएंगे.. लकिन वो गए कहा है..?

प्रियल- सिया बीटा आपको पता है आपके पापा को क्या हुआ था...

सिया- पापा को और आपको गोली लगी थी न.. लकिन फिर डॉक्टर अंकल ने आपको और पापा को ठीक कर दिया था...

प्रियल- आपको कैसे पता की डॉक्टर अंकल ने उन्हें भी ठीक कर दिया...

सिया- (आँखों में आंसू लती हुई) तोह उन्होंने पापा को ठीक नहीं किया..?

प्रियल- बीटा आपके पापा बोले की उन्हें इस दुनिया में नहीं रहना है.. आपको कुछ लोग पाना चाहते थे न...

सिया- हाँ अपने कहा था गंदे लोग मुझे पाना चाहते है.. लकिन पापा क्यों नहीं रहना चाहते है इस दुनिआ में.. (रोटी हुई) मुम्मा पापा मुझे छोड़ कर चले गए..?

प्रियल- नहीं बीटा वो कही नहीं गए है.. वो उन् गंदे लोगो से लड़ने के लिए बागवान के पास गए है मदद लेने के लिए.. (सिया के आंसू पोछती हुई) रट नहीं मेरा बचा.. पापा आपके हमेशा पास है.. (खुद भी रोटी हुई) वो हमे छोड़ कर कही नहीं जा सकते...

सिया- तोह पापा कहा है, कहा है.. बताओ न मुझे...

प्रियल- देखो बीटा.. (सिया की बग्घी आँखों में देखती हुई) आपके पापा अब इस दुनिआ में नहीं रहे.. लकिन.....

सिया- लकिन क्या मुम्मा..? लकिन क्या..? उन्हें पता नहीं था की मैं उनके बगैर बस कुछ दिन hi जी पयूंगी...

प्रियल- (उसको गले लगाती हुई) नहीं मेरा बचा.. अस्सी बाते नहीं करते.. अभी तोह आपकी छोटी सी उम्र है.. अस्सी गन्दी बाटी नहीं करते.. मैं हु न आपके पास...

सिया- (अपनी मुम्मा के गले लग बेइंतेहा रोटी हुई) मुम्मा.. मुम्मा...

(प्रियल ने अपनी आंसू की लड़ी को रोक कर प्यार से सिया को उसके पापा की मौत की खबर सुना दी थी.. लकिन बहुत मुश्किल था एक पत्नी के लिए उसके पति की खबर अपनी बेटी को सुन्ना.. एक तरफ तोह उसके पति गुजर गए और दूसरी तरफ उससे अपनी बेटी की चिंता थी.. जो सपने दोनों हस्बैंड, वाइफ ने सोचे होते है अपने बचे के लिए.. शायद अब उन् सपनो को प्रियल कभी पूरा नहीं कर पायेगी.. वो सोच रही थी एक ऐसे समाज में उससे अब अकेले लड़ना था जहा एक औरत की इज्जत करने से वालो ज्यादा औरत की इज्जत लूटने वाले घूमते है.. एक बाप और पति हो तोह किसी की हिम्मत नहीं किसी लड़की को घर कर भी देख ले, कोई लड़की जा रही हो तोह कुछ लड़के देख कर यही बोलते है की, अरे पीछे हटो सालो यह उसकी बेटी है, नमस्ते भाभी जी. यह कोण थी बे? यह उनकी वाइफ है.. कभी घूमकर भी मत देखना वो साला आँखें फूड देगा.. यह होता है एक पापा का एक पति का दर.. प्रियल को चिंता तोह थी, वो हिम्मत जुटता रही थी खुद को और अपनी बेटी को सँभालने की लकिन नहीं कर प् रही थी..)

~ हाँ मन्ना की अभी ज़ख़्म तजा है इससे सूखने में वक़्त तोह लगेगा,

लकिन हिम्मत क्यों हारती है पगली, ढूंढ के तोह देख तुझे ब्यूरो से ज्यादा अच्छा का साथ hi मिलेगा... ~

(खीर एक माँ को दर तोह होता hi है.. जो जिम्मेदारियां दोनों Pati-Patni में बत्ती हुई थी अब वो सब उससे अकेली को hi निभानी थी.. सफल पहले hi बहार चला गया था.. और उसने बहार जाकर सबसे पहले तुषार को सब saaf-saaf बता दिया था की अभी हॉस्पिटल में क्या हुआ था...)

|शामे सिटी नातिर, लोकेशन पुलिस स्टेशन|

आआअह्ह्ह्हहह्ह

(यह चीख की आवाज थी जग्गू की जो सुभे से तेल से lath-path लाठी से अपनी नंगी पीठ पर निशान बनवा रहा था. पहले दया ने अपने अंदर जल रही अग्ग को जग्गू की कुटाई कर थोड़ा बहुत शांत किया, और उसके बाद यह काम उसके हवलदार badal-badal कर, कर रहे थे.. जग्गू की कुटाई पिछले 2,3 घंटो से नॉनस्टॉप चल रही थी.. उससे जितना दर्द दे सकता था दया उससे दे रहा था.. दया ने जग्गू के कपडे नहीं उतरे से बल्कि कभी लाठी तोह कभी बेल्ट से उसका मैं part को छोड़ कर बाकि बॉडी के हर हिस्से पर वॉर किये थे जिससे उसके कपडे अब पहात चुके थे.. दया लाकर के बहार से जग्गू की हालत को देख अपने दिल को सकूं दे रहा था.. दया ने जग्गू की कुटाई रुकवा दी, जग्गू की बॉडी के कई हिस्सों पर सूजन ा चुकी थी, पिछले 2, 2:30 घंटो से उसने cheekh-cheekh कर पूरा पुलिस स्टेशन हिला राहकः था.. दया चाहता तोह उसका मुँह बंद कर सकता था पर वो उसकी चीखे सुन्ना चाहता था.. दया उठा और लाकर का दूर खोल अंदर चला गया.. जग्गू अभी जमीन पर पड़ा उससे मिले हुए ज़ख्मो के लिए रू रहा था...)

इंस्पेक्टर दया- (जग्गू की पहटि हुई कमीज से पकड़ उससे ऊपर उठता हुआ) खड़ा हो हरमजादे खड़ा हो.. (कास के थप्पड़ उसकी गाल पे देता हुआ) खड़ा होओओओओ...

(थप्पड़ और दया की दहाड़ से जग्गू अपनी कम्पटी हुई टैंगो पर खड़ा हो जाता है...)

इंस्पेक्टर दया- तोह बता कैसा मज़ा ा रहा है chekhne-chillane में...

जग्गू- (रेहम भरी आँखों से उससे देखता हुआ, कंपते होठो से) मुझे छोड़ दो...

इंस्पेक्टर दया- (हस्ता हुआ) हाहाहाहा.. छोड़ दूंगा लकिन तेरे गले में फांसी का फंदा लटकने के बाद.. आज जैसे तू चिल्ला रहा है क्या यह चीखने तुझे उस लड़की की नहीं सुनाई दी.. तेरे से बात करना मैं अपनी बेज्जती समझता हु...

(दया ने हवलदार से लाठी ली और जितने जोर से हो सके जग्गू की एक तंग पर दे मरी.. लाठी टूट के 2 हिस्सों में बैठत गयी और जग्गू बिन पानी मछली की तरह तड़पने लगा...)

|बैक तो तुषार|

(अभी शाम होने को आयी थी सबने khana-pina कहा लिया था.. सिया के पापा की डेथ हो चुकी है यह बात तुषार को सफल ने कुछ घंटो पहले बता दी थी.. तुषार को काफी दुःख हुआ, अपने रूम में बैठा आंसू बहा चूका था, लकिन कहते है न किसी की कही बातो से ज्यादा खुदकी आँखों देखि मौत ज्यादा दर्द देती है.. सफल भले hi एक एजेंट था और एजेंट इतनी जल्दी भावुक नहीं होते, लकिन फिर भी एक लड़की के उसके पिता का उसके सामने डैम तोडना उससे सहा नहीं गया और वो भी रू पड़ा.. दिल रुई का हो या पत्थर का साहब, इससे पिघलने और टूटने में ज्यादा वक़्त नहीं लगता...)

(तुषार ने सिया कोण है और उसके पापा की डेथ वाली बात किसी को नहीं बता थी.. और सफल को उसने बोल दिया था की सिया और उसकी मम्मी को लेकर वो हवेली ा जाये.. उसने यह जिम्मेदारी खुद को सौंप दी थी की अब वो सिया और उसकी मम्मी का धयान रखेगा.. उनका kharcha-pani और जरुरत की हर चीज़ वो उससे देने वाला था.. यह बात शिवं को भी बता दी गयी थी.. अभी सिया के पापा की बॉडी का antim-sanskaar भी करना था.. सिया को सवाना के साथ हवेली छोड़ कर बाकि सब यानि प्रियल, तुषार, शिवं, सफल चारो जायेंगे...)

|लोकेशन अमेरिका, सिटी डेन्वेर|

(एक छोटे से गेराज में एक आदमी कुछ रिपेयर कर रहा था.. उसके हाथ में अभी वेल्डिंग मशीन थी.. कुछ लोहे के tutte-putte टुकड़े थे जो वो जोड़ रहा था.. उसके गले में एक सोने का तल्ला लटक रहा था जो एक चैन से बंधा हुआ था, गंदे- मैले कपडे, बिखरे dhul-mitti से सुनहरे बाल .. गेराज की हालत थी की ऊपर थोड़ी सी छत में छेड़ था.. निचे 5, 7 रॉकेट्स और राकेट लांचर के sath-sath jagha-jagha पिस्तौल और गोलियां बिखरी हुई थी.. एक बिच में कंप्यूटर था उसके मॉनिटर पर किसी प्लेनेट को मार्क किया गया था.. किसी दिवार पर कोई कंट्री की कोई लोकेशन थी, और किसी दिवार पर किसी बिल्डिंग या Admi-Aurat की फोटो के साथ उसपर मार्कर से रेड क्रॉस बना हुआ था.. अभी गेराज में 2 आदमी थे.. दूसरा आदमी समझने की कोशिश कर रहा था की आखिर यह करना क्या चाहता है...)

अननोन.1- करना क्या चाहता है तू..?

अननोन.2- (idher-udher घूम के अपने काम में लगा हुआ, कुछ नहीं बोलै)

अननोन.1- (उसके पास आता हुआ) आबे तेरे से बात कर रहा हु.. बोलता क्यों नहीं कुछ.. तू बोलै था मुझे यह माल चोरी करके दे तोह तुझे मैं मोती रकम दूंगा.. ला अभी दे...

अननोन.2- रुक मुझे मेरा काम करने दे...

अननोन.1- बाद में करते रहना यह सब काम.. मुझे और भी कही जाना है...

अननोन.2- (अपना काम में लगा हुआ) आबे यार.. क्यों परेशां कर रहा है...

अननोन.1- देख ज्यादा टाइम नहीं है.. जल्दी मुझे मेरा पैसा दे और जो करना है करते रहना बाद में...

अननोन.2- (बिना उसकी और देखे) वो फ्रीजर दिख रहा है...

अननोन.1- (idher-udher देख ढूंढ़ता हुआ) यह.. हाँ.. इसका क्या करू...

अननोन.2- ऊपर वाले ड्रावर में रखे है पैसे निकल ले जितने चाहिए...

अननोन.1- (फ्रीज़ज़ीर के पास जाकर) अब्बे इतना खून कहे लगा है.. अंदर क्या lashe-washe रख राखी है क्या.. आअह्ह्ह्ह...

(यह एक चीख उस आदमी की तभ गूंजी जब उस आदमी ने फ्रीजर का उप्पेर ड्रावर खोला तोह एक लम्बा नोकीला टूल आकर उस आदमी की गर्दन में घुस गया.. आदमी की सांसी वही जैम गयी और वो एक साइड को गिर गया.. दूसरे आदमी ने अपने पास रखा एक बटन प्रेस किया तोह वो टूल वापिस अंदर चला गया और ड्रावर बंद हो गया.. उसने उस आदमी की लाश को मन मरते हुए एक काळा बड़े से बैग में डाला और एक कोने में रख दिया...)



अननोन.2- (हस्ता हुआ) हे हे ः है हाहाहाहा.. (अपने एक हाथ को gol-gol घूमता हुआ) डॉ. लॉकेट नाम है मेरा इस दुनिआ को अपनी जंजीर में बांधना सपना है मेरा.. हे हे हे है है है है...

《1722 -वर्ड्स》
 
थैंक्स आकाश बीआरओ.. सिया को अभी यह दर्द सहना है मैं भी कुछ नहीं कर सकता.. हम्म प्रियल भी सही है पानी जगह दर तोह लगता hi है इस समाज से.. हाँ यह तोह है तुषार वाला काम दया कर रहा है.. पर तुषार को मौका मिलता या नहीं यह आगे पता चलेगा.. लॉकेट का राज़ अभी राज़ hi रेहन दो.. शुक्रिया भाई.. कीप सपोर्टिंग...
 
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