TUSHAR EK YODHA 《Incest, Thrill, Magical》 - Page 10 - SexBaba
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TUSHAR EK YODHA 《Incest, Thrill, Magical》

हम्म बिलकुल भाई आपकी बात सही है.. वैसे अब से मैं ऐसा hi कर रहा हु.. और अपडेट के बारे में कुछ कह नहीं सकता भाई.. कभी भी बड़ा ा सकता कभी भी छोटा, कोशिह जारी है भाई, जल्दी लिखने और जल्दी अपडेट देने कोशिश hi है.. अभी फुरसत मिली थी की याद आया मेगा अपडेट देना है तोह रात निकल ली उसके लिए.. आप निराश न हो यह मेरी कोशिश रहेगी...
 
सबसे पहले तोह भाई शुक्रिया आपका की आप इस गरीब की बस्ती में ए.. हम्म अपने काफी दिल से कह डाली साड़ी बाते.. हम सलाह तोह अछि है भाई देखते क्या होता है.. अभी इस बारे में सोचा नहीं कुछ.. हाँ भाई लाला और जग्गू बस उस सिटी नातिर के डॉन है.. यह कोई अलग hi ा रहा है.. यह बात तोह ठीक है भाई अपडेट नहीं जल्दी मिलते बहुत सरे रीडर्स बोलते कोई नहीं भाई मैं थोड़ा ध्यान दूंगा इसपर.. शुक्रिया भाई.. कीप सपोर्टिंग...
 
अपडेट-41

खास आदमी- बॉस मैं क्या कहता हु अभी आपकी मीटिंग है कल, इंडिया के सबसे बड़े डॉन वैभव सेठिए के साथ.. आप उससे मिलने की तयारी कीजिये.. वो baar-baar इंडिया नहीं आएगा, और आएंगे तोह जरुरी नहीं की हमसे मिलेंगे hi.. अगर हमारी डील हो गयी तोह क्रोरो का माल हाथ आएगा…

लाला- हाँ बात तोह तेरी यह भी सही है.. तू तयारी कर मिलने की.. और माल फ्रेश रखना.. यह सेल दया का पत्ता साफ़ करने को भी बोलना होगा उससे.. कुछ ज्यादा hi फुदक रहा है आते hi वो…

|अब अग्गे|


खास आदमी- बॉस लकिन एक और जरुरी बात है...

लाला- क्या..?

खास आदमी- बॉस कल जग्गू की कोर्ट में पेशी होगी...

लाला- (उठता हुआ) क्या..!! (चाकर लगता हुआ) नहीं.. नहीं.. नहीं.. नहीं.. यह दया उससे फांसी दिया देगा.. (अपने आदमी की और देखता हुआ) तू बता न क्या कर सकते है हम.. तेरे दिमाग में है कोई प्लान..?

खास आदमी- (मुस्कुराता हुआ) हाँ बॉस.. मैं कह रहा हु की जब जग्गू बॉस को ठाणे से कोर्ट में लेजाया जायेगा तोह हम उनका रास्ता रोक लेंगे.. क्या कहते हो.. इससे हमे ज्यादा परेशानी नहीं होगी उन् चंन्द पुलिसवालो से निपटने में, और हम आसानी से जग्गू को छुड़ा लेंगे...

लाला- (सोचते हुआ) हम्म.. यह प्लान तोह तेरा ठीक है.. पर क्या यह काम करेगा...

खास आदमी- बिलकुल करेगा बॉस.. देखो मैं समजता हु ************************...

लाला- (हस्ता हुआ) हाहाहाहा.. वाह.. वाह.. शबाशः...

|अगले दिन, डे-6|

|बैक तो तुषार|

(सब लोग उठ चुके थे और अभी ब्रेकफास्ट कर रहे थे.. तुषार सिया को देख रहा था जो अभी ब्रेड को बहुत सारा जैम लगा के अपने छोटे से मुँह में bade-bade टुकड़े दाल उससे मुश्किल से निगल रही थी...)

तुषार- (सिया को देख, हस्ता हुआ) अरे गले में अटक जायेगा.. thora-thora कहो सिया...

सिया- नहीं..!! मैं ऐसे hi खाउंगी...

प्रियल- सिया..!! क्या बोल रहे है भैया.. उनकी बात नहीं मानती तुम...

सिया- (उदास होकर) मुझे ऐसे hi पसंद...

तुषार- (हस्ता हुआ) हहह ाचा ठीक है, जैसे खाना है खाओ...

सिया- (खुश होकर) थैंक्स भैया.. आप अचे हो, आपको 20 नंबर...

तुषार- हाहाहा ाचा तोह मेरे अछेपन के मुझे पॉइंट्स दिए जा रहे...

सिया- हाँ...

तुषार- Okay ठीक है भाई...

प्रियल- वैसे तुषार जी आप क्या करते हो.. मतलब ऐसे hi पूछ रही थी मैं, अगर आप बताना चाहो तोह.....

तुषार- अरे नहीं नहीं आप कुछ बी पूछ सकती हो.. (मुस्कान के साथ) अभी आप मेरी भाभी हो.. क्यों..?

प्रियल- (मुस्कुराती हुई) जी बिलकुल.. (एक hi सास में बोलती हुई) तोह बताइये क्या करते हो आप.. आपकी फॅमिली में kon-kon है और कहा है वो सब, और येह जो एजेंट्स है आपके साथ यह किस लिए है, क्या आपको कोई खतरा है जो यह आपके साथ रहते है.. और यह हवेली आपकी है.?, आप यहाँ अकेले क्यों रहते हो, अपनी फॅमिली के साथ क्यों नहीं रहते, क्या कोई प्रॉब्लम हुई है..?

(प्रियल teji-teji सब बोल गयी, पास बैठी सिया जग से गिलास में पानी दाल प्रियल को देखती है.. जब सिया ने ऐसा किया तोह प्रियल को एहसास हुआ की वो अभी किस रफ़्तार से बोल गयी है.. उसने सामने देखता तोह तुषार मुस्कुराता हुआ उससे देख रहा था…)

प्रियल- वो….

तुषार- (मुस्कुराता हुआ) हम्म.. काफी सवाल है.. और काफी जल्दी भी है जान्ने की…

प्रियल- वो बस दिमाग में चल रहे थे कबसे तोह…..

तुषार- (बिच में बोलता हुआ) कोई बात नहीं.. मैं बताता हु.. मैं अभी 12तह का स्टूडेंट हु.. मेरे फॅमिली में मेरे Mummy-Papa, मेरी से एक साल बड़ी मेरी आरुषि दीदी, मेरी जुड़वाँ बहिन तान्या, मेरे से एक साल छोटी मेरी बहिन मेरी गुड़िया.. हाँ एक और बात मेरी एक नयी भाभी प्रियल, (प्यार से सिया की गाल खींच के) और मेरी सबसे छोटी और क्यूट गर्ल सिया भी अब मेरी फॅमिली का हिस्सा बन चुकी है…

(किसको बिना jan-pehchan के अपनी फॅमिली का हिस्सा बोलना, तुषार की यह बात प्रियल के दिल पर लग गयी.. ऐसे की उसकी आँखों से 2 बांड आंसू निकल ए, जिसे उसने बिना किसी की नजरो में ए साफ़ कर लिया.. बहुत मुश्किल है इस समाज में एक लड़की, एक औरत का बिना मर्द के रहना, लोग झट से उससे अकेली देख फयदा उठाना जानते है.. और अभी तोह प्रियल एक बहुत hi खतरनाक शहर में ठहरी थी, अपनी फूल सी बची के साथ.. अभी उससे यहाँ सिवाए तुषार के कोई नहीं जनता था, और तुषार भी बिना उसका बैकग्राउंड जाने baar-baar उससे यह एहसास दिला रहा था की वो अकेली नहीं है मैं उसके साथ हु मेरी पूरी फॅमिली उसके साथ, और आप मेरे फॅमिली का एक हिस्सा हो…)

सिया- भैया येह गुड़िया कोण है.. कोई डॉल है क्या…

तुषार- (हस्ता हुआ) हहह हाँ डॉल hi है वो.. इतनी बड़ी हो गयी लकिन उसकी मासूमियत और शरारते बिलकुल आपके जैसी है…

सिया- ओह्ह मेरी जैसी.. मैं उसके साथ खेलूंगी न..?

तुषार- हाँ बिलकुल.. वो भी आपसे मिलकर खुश हो जाएगी.. मेरी गुड़िया को भी एक छोटी सी गुड़िया मिल जाएगी…

सिया- वो बहुत अछि है..? मुझे मारेगी तोह नहीं…

तुषार- हाहाहा अरे नहीं नहीं.. वो तोह खुद आपसे दर जाये अस्सी है वो.. (सिया को पकड़ अपनी गौड़ में बिठाता हुआ) और मेरा सीयू तोह बहुत ाचा है.. उससे कोई हाथ भी नहीं लगा सकता…

(सिया और प्रियल, सिया के पापा का दिया हुआ नाम तुषार के मुँह से सुन एक दूसरे की और देखने लगे…)

सिया- (प्रियल की और देख) मुम्मा सीयू..!!

प्रियल- (बात बदलती हुई) तोह अपने आगे बताया नहीं तुषार जी.. आप अकेले क्यों रहते हो यहाँ इस हवेली में…

तुषार- आप तोह जानती हो की यह शहर के हालत बहुत बिगड़े हुए है.. बस समाज लो की उन्ही हालातो को सुधरने के लिए मैं यहाँ अपने एजेंट्स के साथ इस हवेली में रहता हु…

प्रियल- क्या..!! पर आप तोह अभी बहुत छोटे हो.. बहुत खतरनाक लोग है जो इस गंदे काम के पीछे है…

तुषार- जी जनता हु भाभी जी.. और इसलिए एजेंट्स मेरे साथ रहते है.. हाँ उम्र छोटी है मेरी पर अब भिड़ने का जज्बा इतना बढ़ चूका है की पीछे मुद कर देखना मेरी बेवकूफी होगी..

शिवं- (बहार से अंदर आता हुआ) बॉस..!! चलिए.. ट्रेनिंग शुरू करते है...

तुषार- (प्रियल को देख) देखा.. ट्रेनिंग जारी है, एक दिन रंग जरूर लाएगी.. (सिया को उठा के साइड करता हुआ) चलो सिया बीटा बाद में मिलते है.. थोड़े दिनों बाद मैं आपको अपनी गुड़िया से मिल्यूँगा.. Okay...

सिया- Okay भैया...

(तुषार उठा और शिवं के साथ बहार चला गया.. आज गुरूजी नहीं ए थे.. आज शिवं hi तुषार को ट्रेनिंग देने वाला था...)

तुषार- तोह आज गुरूजी छूती पर है क्या शिवं..?

शिवं- हाँ आप ऐसा समाज लीजिये की उनका काम हो गया है.. उनका जो फराज था उन्होंने वो पूरा कर दिया है.. वो आएंगे वापिस जब आपको उनकी जरुरत पड़ेगी...

तुषार- ाचा..!! ऐसा कोनसा फराज पूरा कर दिया उन्होंने.. मुझे कुछ खास तोह सिखाया नहीं अभी.. खीर ठीक है...

शिवं- (मुस्कुराता हुआ) तलवार...

तुषार- (पीछे मुद उसकी और देखता हुआ) क्या..?

शिवं- (तुषार की तलवार उससे देता हुआ) तलवार.. यह तलवार जो आपको गुरूजी देकर गए है इससे हासिल कर पाना बहुत मुश्किल था...

तुषार- (तलवार पकड़ उससे धयान से देखता हुआ) क्या बोलते हो यार, इससे हासिल करने में क्या दिक्कत आयी होगी.. कितने में पड़ी थी.. हहहह.. वैसे पहले से काफी चमक रही है.. जुंग कैसे उतर रहा है इसका.. कोई chemical-wemical छिड़का है क्या इसपर..?

शिवं- (मुस्कुराता हुआ) अपने मालिक के हाथ में है तोह केमिकल की क्या जरुरत है.. खुद hi उतरता हुआ नजर आएगा...

तुषार- (मुस्कुरा के) राइट..!!

शिवं- और हाँ बॉस कल जग्गू की कोर्ट में पेशी होगी...

तुषार- क्या..!! कल.. फिर तोह बहुत गड़बड़ हो जाएगी...

शिवं- हम्म.. जग्गू को छुड़ाने के लिए लाला कोई प्लान जरूर चलेगा.. तोह क्या करना है...

तुषार- सही कहा.. चलो हम ऐसा करते है देखो *********************** समजे..?

शिवं- (हस्ता हुआ) वाह बॉस..!! हाँ यह ठीक रहेगा...

तुषार- (मुस्कुराता हुआ) हम.. नाड़ी आराम से बह रही है तोह उससे बहने देंगे, अगर बिच में पत्थर रास्ता रोके तोह उससे उखड देंगे.. हहहह...

शिवं- बिलकुल बॉस...

(फिर तुषार अपनी ट्रेनिंग शुरू कर देता है.. बिना dhup-chaaya देखे, बिना thake-hare, बिना bhuk-pyass देखे सिर्फ और सिर्फ अपनी ट्रेनिंग में धयान लगता है.. लकिन एक बात उसके धयान में जो थी वो थी की आखिर उस दिन उसके साथ क्या हुआ था.. गुरूजी ने उससे जो अपना मन शांत करने के लिए धयान लगाने के लिए बोलै था, वो पहले तोह अपनी बचपन की यादो में खोइया हुआ था फिर अचानक उसके साथ क्या हुआ, उसने क्या देखा क्या नहीं, उससे कुछ याद क्यों नहीं है.. अंदर hi अंदर उसका शक गुरूजी पर हो रहा था की आखिर उन्होंने उससे बताया क्यों नहीं की उसके साथ क्या हुआ था.. और उसके बाद उसकी वो दिल दहला देने वाली हालत हो जाना क्या था आखिर वो सब.. तुषार के मन में कुछ देर यही सब चलता रहा लकिन फिर उसका ध्यान उस तरफ से हट गया और वापिस अपने अभ्यास में लग गया...)

|सिटी नातिर, पुलिस स्टेशन|

जग्गू- (सलाखों के पीछे से गाला फाड़ता हु) ाररी ोई इंस्पेक्टर.. नहीं लेजा पायेगा तू मुझे कोर्ट तक.. कल तेरा आखरी दिन होगा.. हाहाहा.. आआअह्ह्ह्ह.. आआअह्ह्ह्ह.. आआह्ह्ह्हह.. आआह्ह्ह्हह्ह...

इंस्पेक्टर दया- (हवलडर से, जो अभी जग्गू की टंगे तोड़ रहा था लाठी से) दे और दे.. साला बहुत bak-bak करता है, सुभे से दिमाग खा गया है bol-bol कर.. कल होगा तेरे गले में फांसी का फन्दा, फ़िलहाल एन्जॉय कर पुलिस का डंडा...

(कुछ देर बाद एक 29-30 साल की लड़की पुलिस स्टेशन में रोटी हुई आयी.. jagha-jagha से कपडे फटे हुए थे, बिखरे बाल, और एक कपडे से उसने अपना चेहरा पर ढाका हुआ था.. वो आयी और आकर दया के पैरो में गिर रोने लगी...)

लड़की- (रोटी हुई) साहब.. साहब क्या इस शहर का कानून मर गया है.. क्या मुझे न्याय नहीं मिल सकता.. क्या उन् हरामजादो को उनके किये की सजा नहीं मिलेगी..?

इंस्पेक्टर दया- (उसको उठता हुआ) क्या हुआ आपको.. ठीक से बताइये आप...

लड़की- (चिल्ला कर) रपे हुआ है मेरा.. मुझे.. मुझे अन्याय चाहिए...

इंस्पेक्टर दया- (हस्ता हुआ) हाहाःहाहाः.. ाचा..!! हम क्या वेहले बैठे है इधर.. (धक्का मर साइड करता हुआ) चल हट, भाग जा अपने घर.. फालतू कामो के लिए टाइम नहीं है मेरे पास.. चिंटू.!! एक कप चाय का बोल...

लड़की- (हैरानी से) वेहले बैठे हो मतलब.. आपका यही तोह काम.....

इंस्पेक्टर दया- (बिच में, गुस्से से बोलता हुआ) एक लाठी मरूंगा न साडी अकाल ठिकाने ा जाएगी.. चल भाग जा यहाँ से...

(दया के इस रिस्पांस से सरे पोलिसवाले हेरैं थे, यहाँ तक की वो तकला पोलिसवाले भी gur-gur कर दया को देख रहा था की आखिर इस ईमानदार पोलिसवाले से तोह यह उम्मीद नहीं थी.. पर यह अचानक कैसे बदल गया...)

लड़की- (दया से थोड़ी दुरी पर बैठे उस तकले पोलिसवाले के पाव पकड़, रोटी हुई) साहब आप तोह मेरी बात सुनिए.. वो 5 लोग थे, उन्हें मुझे जबरदस्ती मेरे घर से उठा.....

तकला पोलिसवाले- (बिच में, उसका हाथ अपनी तंग से झटका हुआ) ारी दुर्र हट.. साली कामिनी.. अब रोटी कहे है.. जो होना था हो गया.. अब जा घर जा.. कोई नहीं है इधर तेरी प्रेम खाता सुनने को...

(इतना बोल उस तलके पोलिसवाले ने एक लत्त उस लड़की के साइड में कमर पर मार्डी जिससे लड़की कास कर दूर जा गिर गयी.. वो गिरी तोह उसके मुँह पर जो उसने कपडा लपेटा हुआ था वो उतर गया और जैसे hi वो कपडा उतरा और उस तकले की नजर उस पर गयी वो वही घुटनो के बाल गिर गया...)

तकला पोलिसवाले- (आंसू बहता हुआ, मुश्किल से बोलै) कछौटीईई.. टटटूउउ...

इंस्पेक्टर दया- अरे ू हवलदार.. जा इस लड़की को बहार निकल.. चल fata-fat, यह rona-dhona नहीं चाहिए मुझे.. (तकले पोलिसवाले को देख) और आप नितेश भाई.. आप क्या घंटो पे बैठे रू रहे हो.. हवलदार तूने सुना नहीं.. क्या बोलै मैं.. चल जल्दी कर...

नितेश- (रोटा हुआ, उस लड़की की और जाकर उससे उठता हुआ) क्या बोल रहे हो भाई.. बहिन है यह मेरी छोटी...

इंस्पेक्टर दया- ओह्ह बहिन है यह आपकी.. ाचा ऐसा करो घर ले जाओ.. और आगे से कभी घर से बहार नहीं निकलने देना.. ठीक है जाओ अभी...

नितेश- (गुस्से से) क्या बोलै तू.. मेरी बहिन के साथ इतना गलत हुआ है.. खीर छोड़ तू.. (लड़की की और देख) बोल छोटी, किन हरामजादो से तुझे हाथ लगाया.. मैं उनका गाला काट डालूंगा.. बोल न.. (रोटा हुआ) सॉरी छोटी.. मैंने तुझे लत मरी.. मैं kya-kya बोल गया तुझे, लकिन.....

लकड़ी- (रोटी हुई, उसका हाथ साइड कर, कड़ी होकर) लकिन क्या भैया.. छोडो मैं घर जाती हु.. मम्मी को बोलूंगी की देख तेरी बेटी चुद....

नितेश- (अपना हाथ कास कर उसके मुँह पर रखता हुआ) बास.. क्या बोल रही है तू.. उठ कड़ी हो.. (रोटा हुआ) मेरी बहिन ऐसा मत बोल.. कोण थे वो लड़के मुझे एक बार बता दे मैं उनको जिन्दा नहीं छोडूंगा...

लकड़ी- (आंसू शांत कर, गुस्से में) क्यों क्या हुआ भैया.. रू क्यों रहे हो.. हम्म.? लो एक और लात मार लो अपनी छोटी पर.. क्या हुआ अभी दया ा रही है.. अपनी बहिन पर दया ा रही है.. अगर मेरा चेहरा नहीं दीखता आपको तोह आप मुझे ऐसे hi लत maar-maar कर यहाँ से निकल देते न.. हाँ सही तोह कहा मैंने.. और अपनी बहिन पर अपने इतने आंसू बहा दिए, लकिन किसी दूसरी लड़की की यह दशा देख आपके अंदर का जवाला मुखी नहीं जलता.. (रोटी हुई, अपने भाई के हाथ पकड़) वो भी तोह किसी की बहिन होगी न भैया.. उसका भाई भी ऐसे hi गिड़गिड़ाते हुए आपके पास आया होगा न.. और ऐसे hi अपने उससे डंडे, लेट मार कर बाघा दिया होगा.. ऐसे hi है न भैया.. बोलो भैया बोलु...

(नितेश वो सब याद करता है जब कोई माँ अपनी बेटी के लिए, जब एक बाप अपनी बेटी के लिए और जब एक भाई अपनी बहिन के रपे हो जाने की खबर लेकर उसके पास आया था.. सर, सर, सर, मेरी मेरी बहिन को कोई उठा ले गया सर प्लीज मेरे साथ चलिए सर.. बीटा मेरी बेटी के साथ किसी ने बहुत निच्च हरकत की है, तुम उससे.. नितेश- आबे कोई बहार निकालो रे इससे.. यह रोज का चलता रहता है.. अपनी बेटी को समजाओ की घर में रहा करे.. अब लड़को के दिल उससे देख दूल्ल hi जाते है क्या करे माँ जी.. जाइये आप, फिर कभी एना.. हहहहह.. नितेश को dhire-dhire हर मोड़ पर अपनी गलती का एहसास हो रहा था.. आज खुद जब उसकी बहिन गुंडों के सामने नंगी करि गयी तोह यह सोच कर hi उसके अंदर की आग पहात के बहार को आ रही थी.. वो समाज नहीं प् रहा था की वो अपनी गलती पर अभी खुल कर रोये, उन् लड़कियों से जाकर माफ़ी मांगे या अभी अपनी छोटी बहिन की जिसने इज्जत लुटती है उससे मौत के घट्ट उतरे...)

नितेश- (हाथ जोड़ता हुआ, phut-phut कर रोटा हुआ) छोटी.. मुझे माफ़ करदे.. मैं
गुन्हेगार हु उन् सभी लड़कियों का जिसके साथ भी गलत हुआ है.. जितनी गलती उस लड़की की इज्जत लूटने वालो की थी उतनी hi गलती मेरी भी बनती है.. मुझे सजा मिलनी चाहिए.. मैं वडा करता हुआ अग्गे से कभी भी किसी पर भी जुल्म न देखूंगा, न कभी होने दूंगा, चाहिए उससे बचने के लिए मेरी जान hi क्यों न चली जाये.. (दया की तरफ देख) दया भाई.. आप क्यों बदल गए.. आप तोह अचे और ईंमानदार पुलिस वाले हो न तोह मेरी बहिन के लिए आपको दया नहीं आयी.. अपने ऐसे क्यों किया...

लड़की- (मुस्कुराती हुई, नितेश की आँखों से आंसू साफ़ कर) भैया.. वो ईंमानदार है, और उन्होंने आपको भी शायद एक िम्मदार पोलिसवाले बना दिया है...

नितेश- (न समझता हुआ) मतलब.. क्या मतलब है तुम्हारा छोटी.. (चेयर खींच कर उसके सामने करता हुआ) यहाँ बैठो तुम, (वापिस ा रहे आंसू साफ़ कर) और मुझे मेरे किये के लिए माफ़ कार्डो.. हाँ मैं माफ़ी के काबिल नहीं हु पर...

लड़की- (चार पर बैठती हुई, बिच में बोली) घभराओ मत भैया, आपकी छोटी को कुछ नहीं हुआ है.. और मैं खुश हु की मैं सफल हुई आपको बदलने में, इस शहर को िम्मदार पुलिस वालो की बहुत जौरात है.. शायद अब आप भी उन् मेंसे एक हो.. और हाँ यह सब दया सर का प्लान था...

नितेश- क्या..!! प्लान था मतलब.. तोह मतलब जो तब से चल रहा था वो सब नाटक था..?

इंस्पेक्टर दया- (उसके पास आता हुआ) हाँ भाई.. यह सब नाटक था.. पैसे kha-kha तेरे अंदर जो हैवानियत भरी थी उससे इंसानियत में बदलना जरुरी था.. इसलिए मैंने तेरी जान से प्यारी तेरी छोटी बहिन के साथ मिलकर यह खेल खेला.. जब मैंने तेरी असलियत इससे बताई तोह पहले तोह इससे यकीं नहीं हुआ की उसका भाई पैसे और आराम के चलते किसी पे दया नहीं खता.. उससे किसी की इज्जत, किसी की मज़बूरी नहीं दिखती.. दीखता है तोह सिर्फ और सिर्फ पैसा.. मुश्किल से मैंने इससे यकीन दिलाया और यह रेडी हो गयी.. फिर आगे का जो प्लान आप जानते hi हो.. लकिन आप एक अस्सी हालत करोगे एक अस्सी हालत में भी लड़की को लात मरोगे.. मैं यह सोच भी नहीं सकता था.. ट्ठहाआआआररररररररर (और एक थप्पड़ की आवाज पुरे ठाणे में जंघ उठी जो दया ने नितेश को मारा था..)

नितेश- (अपनी लाल हो चुकी गाल पकड़) सॉरी दया भाई.. मैं अपनी गलती के लिए शर्मिंदा हु.. कसम है मुझे उस उपरवाले की, जब तक इस शरीर में जान रहेगी मेरे सामने तोह क्या मेरी पीठ पीछे भी कोई किसी लड़की को हाथ नहीं लगा पायेगा...

|Tushar’s हाउस|

(तान्या अन्निका के रूम में जाकर देखती है तोह अन्निका हाथ ऊपर हवा में उठिये अपने हाथो में तुषार की तस्वीर लिए लेती थी, और कुछ बड़बड़ा रही थी...)

अन्निका- गंदे कही के.. भूल hi गए न मुझे.. बात भी नहीं करते.. अपनी गुड़िया की कोई फ़िक्र नहीं.. फ़ोन तोह कर hi सकते हो न.. कितने दिन हो गए अपने मेरा हाल भी नहीं पूछा.. आप बुरे हो गए हो.. मुझे नहीं बात नहीं आपसे.. (स्माइल करके, तस्वीर में तुषार के होंटो को गौर से देखती हुई) हाँ में आपके इन् होंठ......

तान्या- (अंदर आती हुई, बिच में बोली) ओह्ह.. (अन्निका के हाथ से तस्वीर छीन कर) तोह इस लोंडो को याद किया जा रहा है.. हम्म.. बिगड़ गया यह लड़का.. अब हमारी कहा फ़िक्र है इससे.. पता नहीं kaha-kaha kya-kya करता फिरता होगा.. घर आएगा तोह जुटते खायेगा मेरी.. देखना दोनों टंगे बांध कर छत से निचे उल्टा लटका दूंगी...

अन्निका- (जो कब से बुरा का मुँह बना के तान्या की बाते सुन रही थी बोली) दीदी..!! आप भैया को कुछ नहीं करोगे.. वो किसी काम में फेज होंगे.. वो मुझे कभी नहीं भूल सकते.. और आपको भी नहीं भूल सकते.. वो अचे है.. वो बिगड़े नहीं है...

तान्या- लो जी.. एक पल में इधर एक पल में उधर.. अभी तोह महारानी आप कुढ़ उनकी तस्वीर लिए उन्हें दांत रही थी, और अब मैंने कुछ बोल दिया तोह आपको बुरा लग गया.. चलो छोडो बीती बातो को.. (गण गुनगुनाती हुई) जब कोई अपना पराया हो जाये, तोह उससे भी साथ hi लटका दो छत से...

अन्निका- आये दीदी यह कोनसा गण है.. आप मुझे तंग कर रही हो.. (उठती हुई) मैं अभी मुम्मा से आपकी शिकायत कर के आती हु...

तान्या- (उसको पकड़ रोकती हुई) अरे क्या करती है यार.. अब वो बन्दर तोह घर में है नहीं तोह थोड़ा मज़े ले रही थी तेरे.. चल ा तुझे कल कही घूमने ले चलती हु...

अन्निका- (उदास होकर) मुझे नहीं जाना कही.. मुझे भैया के साथ hi जाना है...

तान्या- ाचा ठीक है कल उससे मिलने चलते है.. Okay...


अन्निका- (खुश होकर, तान्या के गले लगती हुई) Okay.. ठंकु दीदी...

《3208 -वर्ड्स》
 
थैंक्स आकाश बीआरओ.. हम्म बात तोह ठीक है भाई.. मेरे हाथ में भी कुछ खास नहीं है सच बताऊ तोह, :डी आगे पीछे सब देख कर लिखना पड़ता है ताकि कही आगे जाकर पछतावा था हो.. अन्निका और बाकी का पूरा परिवार जल्द hi एकता हो जायेगा.. हम्म नितेश को सबक मिल चूका है.. दया ऑनेस्ट है या क्या है यह तोह स्टोरी आगे चल कर बटेगी.. थैंक्स भाई.. कीप सपोर्टिंग...
 
अपडेट-42

तान्या- (उसको पकड़ रोकती हुई) अरे क्या करती है यार.. अब वो बन्दर तोह घर में है नहीं तोह थोड़ा मज़े ले रही थी तेरे.. चल ा तुझे कल कही घूमने ले चलती हु...

अन्निका- (उदास होकर) मुझे नहीं जाना कही.. मुझे भैया के साथ hi जाना है...

तान्या- ाचा ठीक है कल उससे मिलने चलते है.. Okay...

अन्निका- (खुश होकर, तान्या के गले लगती हुई) Okay.. ठंकु दीदी...


|अब अग्गे|

|बैक तो आरुषि|

(आरुषि और हर्षिका दोनों कॉलेज जाने की तयारी कर रही थी...)

आरुषि- (jaldi-jaldi ब्रेड चबाती हुई, अपने पहले हुए मुँह से) अरे जल्दी कर.. मुझे भी लेट करवाती है तू...

हर्षिका- (अपनी सेंडल पहनती हुई) सॉरी सॉरी.. चल आजा...

(जल्द बजी में दोनों कार में बैठी और चल दी सोल्लगे की और.. करीब आधे घंटे बाद दोनों कॉलेज पहुँच गयी.. आरुषि ने कार पार्किंग की और मोड़ दी हरलीन भी उधर hi अपनी कार के साथ इन् दोनों का वेट कर रही थी.. हरलीन दोनों से मिली और तीनो एक साथ अपनी क्लास की और चली गयी.. लेक्चर स्टार्ट हो चूका था, तीनो जाकर jaldi-jaldi बेथ गयी.. उनकी थोड़ी पीछे 1 लड़का उन्हें देख रहा था और मुस्कुरा रहा था...)

लड़का.1- (अपने पास बैठे लड़के से) यार यह लड़की कोण है...

लड़का.2- (उसकी नजर का पीछा कर, सामने बैठी हर्षिका, आरुषि और हरलीन को देख) कोनसी वाली..?

लड़का.1- (इशारा कर) अरे यह ब्लू जीन्स, ब्लू टॉप वाली...

लड़का.2- ाचा वो, हर्षिका नाम है उसका.. क्यों क्या हुआ भाई...

लड़का.1- (मुस्कुराता हुआ, अपने दिल पर हाथ रख) हर्षिका..!! हम्म.. कभी मोहबात हुई है तुझे, क्युकी आज मुझे हो गयी है इससे...

लड़का.2- ओह्हू.. तोह यह सन है.. भाई को प्यार हो गया, पहली नजर वाला प्यार...

लड़का.1- हाँ कह सकता है.. पता लगा यार कहा से है.. kon-kon है फॅमिली में...

लड़का.2- इतने सपने मत देखो.. आज hi रिश्ता लेकर जाओगे क्या घर पे.. और पहले उससे पर्पस तोह करो.. और उससे पहले यह तोह पता लगाओ की क्या वो सिंगल है या.....

लड़का.1- (बिच में बोलता हुआ) न न न.. सिंगल हो या मिंगले हो अब तोह यह लड़की मेरी है, इसकी तोह शादी भी मेरे साथ होगी और सुहागरात भी मेरे साथ होगी.. ठाकुर है हम.. जो चीज़ पसंद ा गयी वो हमारी हो कर रहती है.. लकिन इस फूल को मैं आराम से हासिल करूँगा...

लड़का.2- ठीक है भाई.. जो करना है आपको hi करना है.. बाकि मदद के लिए तोह मैं हु hi आपके साथ...

(कुछ लेक्टर्स लगाने के बाद तीनो लड़कियां उठ कर कैंटीन में चली गयी.. वो दोनों लकड़ी भी उनके साथ hi piche-piche ा रहे थे, और वो कैंटीन में पहुँच कर किसी दूर एक टेबल पर बेथ गए.. यह तीनो लड़कियां अपने टेबल पर बैठी कुछ न कुछ खा रही थी, और जापे लढा रही थी…)

लड़का.1- (ऊँगली से एक तरफ इशारा करता हुआ) काफी से देर देख रहा हु सूरज, वो 2,3 लड़के मेरी जान को घूरे जा रहे है…

सूरज- (दूर एक टेबल पर बैठे 3 लड़के जो हर्षिका और बाकि दोनों लड़कियों को देख रहे थे उनकी तरफ देखता हुआ) हम्म.. मामला कुछ ठीक नहीं है विराट भाई…

विराट- मामला गड़बड़ होने दे, फिर शांत तोह मैं कर hi दूंगा…

(काफी देर विराट उन् लड़को को देखता रहा और आखिर उन् लड़को ने वो कर hi दिया जिसका विराट को इंतजार था.. 2 लड़को उठे और अपनी चेयर्स को उठा के एक लड़का हर्षिका और दूसरा लड़का हरलीन के चेयर के पीछे अपनी चेयर रख बेथ गया और दोनों ने पीछे से हर्षिका और हरलीन की कमर पकड़ ली…)

हर्षिका, हरलीन- (चौंकती और घबराती हुई पीछे मुद देखि) ाहाः कोण..!!

हरलीन- (कड़ी होती हुई) क्या बतमीजी है येह.. क्या कर रहे थे तुम लोग.. एक छत्ता लागू क्या…

हर्षिका- (उठ के ऊँगली दिखती हुई) पीछे हैट.. हैट पीछे.. हाथ कैसे लगाया तूने मुझे…

लड़का.1- (आँखों से चश्मा हटाता हुआ) अरे बापरे यह तोह अब और भी गोरी दिख रही है रे भाईलोग.. यह तोह मेरी वाली है भाई…

लड़का.2- वैसे तोह तीनो एक से बढ़कर एक है भाई.. लकिन जो आपको पसंद आप रखो…

आरुषि- अरे ओह्ह लफंगे, मैं किसकी वाली हु फिर यह भी बता दे…

लड़का.3- (उनकी तरफ आता हुआ) न तू मेरी है.. (बहे फैलता हुआ) ा गले लग जा जान मेरी…

आरुषि- (उठ के उसकी तरफ जाती हुई) जरूर…

(आरुषि उसके पास गयी और उसके गले लगने वाली होती है की अपनी घुटना उस लड़के के टैंगो के बिच ांडो पे मार देती है.. लड़का एक चीख के साथ अपने ांडे पकड़ मुँह लटकाये कहड़ा था की आरुषि ने ek-ek थप्पड़ उसकी दोनों गलो पे चिपका दिया.. आरुषि वही नहीं रुकी उसने उसके बाल पकड़े और वापिस अपने घुटने का वॉर उसके मुँह पे कर दिया.. वॉर काफी जोरदार था, लड़के के नाक से खून बह निकला था.. एक लास्ट वॉर उसने अपनी खोहनी का लड़के की पीठ पर दिया और लड़का वही जमीन पर धीर हो गया.. हर्षिका और हरलीन तोह हैरानी से आरुषि को देख रही थी, लकिन वो दोनों लड़के aag-babula हो चुके थे.. दोनों जल्दी से आरुषि के पास गए और एक ने पीछे से उसके बाल पकड़ लिए और दूसरे ने उसका हाथ कास के मरोड़ लिया…)

लड़का.2- ीह तेरी हिम्मत कैसी हुई भाई को हाथ लगाने की.. तेरी तोह देख आज क्या हालत करता हु...

आरुषि- (अपने आप को छुड़वाती हुई) कमीने.. ाःह छोड़ मुझे.. आह्हः…

विराट- (मुस्कुराता हुआ उसके पास आकर) अरे वाह जी.. क्या मस्त लड़ती हो आप, गजब.. (लड़को से) चलो छोड़ दो बे, उनको को दर्द हो रहा है.. छोडो उससे…

लड़का.1- (आरुषि के बाल खींचता हुआ) कोण तू.. भाग इधर से...

विराट- (उसके पास आकर एक थप्पड़ मरता हुआ, चिल्ला के) मैंने कहा छोड़ उन्हें...

लड़का.1- (विराट का कलर पकड़) तेरी माँ की सेल.. थप्पड़ मारा तूने मुझे...

सूरज- (उनकी तरफ आकर बिच में बोलता हुआ) ठाकुर सज्जन सिंह का नाम सुना है.. इस वक़्त तूने उनके बेटे की कलर पकड़ राखी है.. (हस्ता हुआ) लगता है तेरा दिन पुरे हो चुके है…

(यह नाम सुनकर दोनों लड़के thar-thar कम्पना शुरू कर दिए.. उन्होंने झट्ट से विराट का कलर और आरुषि को छोड़ दिया, और दोनों हाथ जोड़ कर घुटनो के बल विराट के सामने बेथ गए…)

लड़का.2- सूरररययय भाई.. सॉरी मुझे पता नहीं था.. आप, आप ठाकुर विराट हो.. मुझे, हमे माफ़ कार्डो भाई…

लड़का.1- हाँ भाई.. आगे से अस्सी गलती नहीं होगी.. हम किसी को परेशां नहीं करेंगे.. हमे जाने दो भाई, हम हाथ जोड़ते है…

विराट- न दीदथ जाट मुझे भी कुछ बोलने दो.. चलो तीनो लाइन में लग जाओ.. चलो…

(दोनों लड़के और जो लड़का निचे पता था वो भी tedha-medta खड़ा होकर विराट के सामने फेस कर ek-dusre के aaju-baju में खड़े हो गए…)

लड़का.1- क्या करोगे भाई.. अब से हम किसी को परेशां नहीं करेंगे, वड्डा करते है भाई…

(विराट उनके सामने आया और तन्नो के kas-kas के थप्पड़ चिपका दिए.. 5, 10, 15, 20.. कभी लेफ्ट कभी राइट.. उनके गाल लाल और कान दोनों लाल हुए तोह विराट ने उन्हें छोड़ दिया और एक इशारा किया तीनो लड़कियों की और.. बस फिर तन्नो अपने हाथ की ऊँगली कस्ती हुई उनके सामने आयी और तीनो ने अपने सामने वालो को 20 से 25 थप्पड़ चिपका दिए.. लड़को के होश ठिकाने नहीं थे अभी.. लकिन लड़कियों ने अपना गुस्सा शांत करवाकर hi उन्हें छोड़ा.. कुछ देर थप्पड़ो की बारिश लड़को पर बरसी.. इसी बिच उनकी हिमत नहीं थी की सामने विराट खड़ा है और वो अपने गाल पर भी हाथ रख सके भागना तोह दूर की बात है…)

विराट- बस करो देवियो.. अब क्या उनकी गाल से मॉस hi उतर डौगी…

आरुषि- (तीनो लड़को से) चलो भागो यहाँ से, फिर कभी दिखना नहीं और किसीको परेशां किया तोह देख लेना.. घूरता क्या है वापिस दू क्या एक.. (लात मरती हुई) चल भाग…

(लड़के अपनी अछि कुटाई और आधे कॉलेज के सामने अपनी बजती करवा के मुँह लटकाये चले गए…)

आरुषि- आपका शुक्रिया विराट जी.. अपने हमारी मदद की…

विराट- अरे कोई बात नहीं जी.. वैसे आप ाचा लड़ लेती हो.. कहा से सिक्खा…

आरुषि- इसमें सीखना क्या है भला, इतनी मार पिटाई तोह हर कोई जनता hi है…

विराट- हम्म सही कहा.. (हर्षिका को देख) लकिन आपकी यह दोनों दोस्त तोह शायद…..

आरुषि- (बिच में बोलती हुई) भोली है, यह दोनों बहुत भोली है.. ाचा हम लोग चले है अभी, फिर कभी मिलेंगे…

विराट- जी जर्रूर…

(आरुषि हर्षिका और हरलीन का हाथ पकड़ वह से उन्हें ले जाती है…)

हरलीन- (थोड़ी आगे जाकर बोली) अरे क्या हुआ.. कुछ baat-vaat तोह करने देती.. तू तोह जबरदस्ती खहींच के ले आयी.. थोड़ी दोस्ती तोह करने देती...

आरुषि- (ऊँगली दिखती हुई) दूर रहो उससे.. यह 2 चेहरे वाला लड़का है...

हरलीन- मतलब..?

आरुषि- मतलब यह की जो यह दिखता है वो यह है नहीं.. ठाकुर विराट सिंह है यह.. ठाकुर सज्जन सिंह का बीटा.. नजाने कितने बहगुणा लोगो को मारा है इसने.. और इसका बाप तोह इससे भी बड़ा कमीना इंसान है.. यह साथ दुरी बना के रहको बस...

हरलीन- ाचा ठीक है, लकिन तू कैसे जानती है इसके बारे में इतना..?

आरुषि- वो बस मैं जानती हु.. फिर कभी बाटूंगी.. चलो अभी क्लास में...

|बैक तो तुषार|

(शाम हो चुकी थी.. तुषार अपनी ट्रेनिंग में jee-tood से म्हणत कर रहा था.. अभी उसकी बॉडी में भी बदलाव आना शुरू हो गया था.. उसने इतनी म्हणत नहीं की थी जितनी जल्दी उससे उसका फल मिल रहा था.. अंदर हवेली में प्रियल खाने की तयारी कर रही थी और सिया आज वापिस सुभे से पक रूम में बैठी कुछ कर रही थी…)

(रात हो चुकी थी.. प्रियल किचन से सिया को आवाज लगाती हुई…)

प्रियल- सिया बीटा जाओ तुषार और शिवं भैया को बोलै लाओ डिनर के लिए…

सिया- Okay मुम्मा…

(सिया दोनों को बहार से बुलाकर लती है, शिवं अपना डिनर उठा कर अपने रूम में ले गया, प्रियल जानना चाहती थी की वो उनके साथ बेथ कर क्यों नहीं खता लकिन उसने तब पूछा नहीं तुषार से.. तन्नो ने कुछ नार्मल बाते करते हुए डिनर ख़तम किया और थोड़ी hi देर में सभी सोने चले गए…)

|अगले दिन|

(एक रोड पर 7 गाड़ियां एक के पीछे एक लगी हुई अपनी मंजिल की और जा रही तह.. यह पुलिस की थी गाड़ियां जो जग्गू को कोर्ट तक लेजा रही थी.. पुलिस अपनी तरफ से पूरी सुरक्षा के साथ जग्गू को लेजा रही थी.. 3 गाड़ियां आगे और 3 गाड़ियां पीछे जिसमे 20 पुलिस वाले थे, और बिच में मजूद थी एक ब्लू रंग की पुलिस वन जिसमे बैठा हुआ था जग्गू.. गाड़ियां शहर से बहार ा चुकी थी, अभी यह जंगली इलाका ा चूका था.. धोरी hi आगे जाकर इनके रस्ते में एक मुसीबत इनका रास्ता रोके कड़ी थी.. सड़क के बिच 1 आदमी मिसाइल लांचर लिए खड़ा था और उनके पीछे करीब 60-70 गुंडे हाथो में बंदूके लिए सामने से ा रही पुलिस की गाड़ियों की और निशाना किये बैठे थे.. दूर से देख गुंडों की भीड़ और उनके हाथो में दिख रहे हथियार देख पुलिस की गाड़ियां वही रुक गयी..)

खास आदमी- (हाथ में स्पीकर पकडे उसमे बोलता हुआ) बस रुक जाओ.. मुझे ज्यादा बहस करनी की जरुरत नहीं है.. आराम से जग्गू बॉस को हमारे हवाले कार्डो और apni-apni गाड़ियों को U-turn में लेलो.. वर्ण कही ऐसा न हो की तुम लोग के biwi-bache कल तुम्हारे लिए शमशान में रू रहे हो.. तुम लोग की भलाई इसी में है की जग्गू बॉस को chup-chap बिना गोली बरी के हमारे हवाले किया जाये.. 1 मींचे है तुम लोग के पास, उसके बाद यह मिसाइल दिख रही है.. तुम्हारी 6 के 6 गाड़ी को ुधा डालेगी...

पुलिस वाला.1- (कार से बहार आता हुआ) ोइये.. रस्ते से हैट जा.. बहुत महंगा पड़ेगा तुझे...

खास आदमी- (गन उसकी और करके, हस्ता हुआ) महंगा तोह तुझे पद गया...

(और उस आदमी ने अपनी गन का फायर उस पुलिस वाले की और कर दिया, गोली आकर उस पुलिस वाले की छाती पर लगी और उसने वही गिर कर अपना डैम तोड़ दिया.. गोली चलते hi बक्की के सभी पुलिस वाले हरकत में ा गए उन्होंने सामने की 3 गाड़ियों को मोड़ के घुमा लिया और apni-apni baduke-pistol निकल के गाड़ी से बहार निकल कर पोजीशन ले ली...)

खास आदमी- (गुस्से से) चलदे ोये मिसाइल.. यह ुधा दे सामने की दो गाड़ियां.. सेल यह लोग नहीं मानेगे.. चलो ायो ोये पीछे खड़े एक दूसरे का मुँह क्या देख रहे हो, जाओ आगे जाकर भून दो सबको और निकल कर बहार लाओ बॉस को...

(पुलिस वाले गाड़ी के पीछे से गोली चला रहे थे.. जो एक दो सामने दिख रहा था उससे शूट भी कर चुके थे.. लकिन बक्की सब गुंडे साइड में खड़े अपने ट्रक के पीछे चुप कर गोली चला रहे थे...)

खास आदमी- तेरी माँ की छूट.. मिसाइल चलनी नहीं आती क्या तुझे.. इधर ला...

(उस आदमी ने मिसाइल लांचर पकड़ा ट्रक से थोड़ा बहार की और निकल कर लांचर का निशाना सामने पुलिस की गाड़ियों की और चला दिया.. पुलिस की 2 गाड़ियों के साथ 8 पुलिस वाले भी साथ hi जल कर मरे गए.. वो आदमी पीछे हठता उससे पहले hi उसके हाथ पर एक पुलिस वाले ने गोली चला थी और उसके हाथ से लांचर निचे गिर गया.. उसने अपने सरे गुंडों को सामने जाने को कहा.. 60 गुंडे जब एक डैम से बंदूके लिए उनके सामने ा गए तोह बक्की के 12 पुलिस वाले भी कुछ 15-20 गुंडों को hi मार पाए और फिर ज्यादा देर इतने गुंडों के सामने टिक्क नहीं पाए...)

खास आदमी- (अपने हाथ पर लगी गोली के दर्द को सेहत हुआ) मर गए न, सालो को बोलै था chup-chap बात मन लो लकिन नहीं.. (अपने आदमियों से) जाओ जग्गू बॉस को बहार लेकर जाओ...

(10-12 गुंडे एक साथ वन की और गए लकिन उधर भी 2 पुलिस वाले वन के पीछे उनका इंतजार कर रहे था.. गुंडों को देखते hi पुलिस वालो ने फायर करना शुरू कर दिया और 4 गुंडों की छाती पर hi गोली चला पाए थे की बक्की गुंडों ने उन् दोनों पर फायर कर दिया.. आखरी बचे हुए पुलिस वालो को मार कर उन्होंने वन का पीछे से गोली मार कर दरवाजे पर लगा ताला तोड़ दिया और अंदर मुँह पर मास्क लगाए बैठे जग्गू को उन्होंने बहार निकल लिया...)

जग्गू- (हस्ता हुआ) हहहह.. वाह मेरे शेरो.. जबरदस्त लड़े हो तुम लोग...

गुंडा.1- शुक्रिया बॉस.. चलो चलते है.. हवेली आपका राह देख रही है...

जग्गू- (वन से बहार निकलता हुआ) हाँ हवेली तोह कब से राह देख रही है मेरा.. हाहाहाहा...

खास आदमी- ( गोली का दर्द सेहत हुआ) क्या हाल है बॉस.. (आदमियों से) मेरी अभी हालत ख़राब है बॉस.. चलो गाड़ी निकालो जल्दी ोये.. मुझे भी हॉस्पिटल पहुंचाओ जल्दी...

(जल रही पुलिस की गाड़ियों और उनकी लाशो को वही छोड़ जग्गू और उसके आदमी चल पड़ते है हवेली की और.. यहाँ से थोड़ी hi दुरी पर एक पहाड़ी से तुषार खड़ा यह सब देख रहा था...)


《2440 -वर्ड्स》
 
थैंक्स सोर्बाभुक भाई.. हाँ भाई मैं समझता हु अपडेट छोटा था लकिन मुझे aaj-kal टाइम नहीं मिल रहा है, सच कहु तोह अभी खुद मुझे लिखे में मज़ा तोह ा रहा है, लकिन हाँ अभी मेरे साथ रीडर्स बहुत जुड़ चुके है तोह मुझे ख्याल रखना पड़ता है की मैं सब सम्भल के लिखू तोह उसमे भी काफी वक़्त लगता है.. हम्म तुषार क्या करता है देखना है अब.. कीप सपोर्टिंग...
 
थैंक्स आकाश बीआरओ.. हम्म भाई लकिन सब नहीं समझते न यह बात तोह उन्हें हम गुस्से से विल्लन बुलाते hai..:D हम्म मेरा यही तरीका है भाई चरक्टेर्स इंट्रोडस करने का, एक hi लिस्ट में दाल कर बता देना उससे यद् रखना मुश्किल है, फिर लोग याद करते है की अरे भाई यह ताऊ किसका था भाई..? ... हाहाहा पता नहीं भाई सिया क्या करती फिर रही है.. आये हाय choti-choti बाते नोट करने लगा है tu..:D हम्म तुषार का प्लान था कोई याद ा रहा है मुझे भी thora-thora.. देखते है क्या होता है.. कीप सपोर्टिंग भाई...
 
अपडेट-43

गुंडा.1- शुक्रिया बॉस.. चलो चलते है.. हवेली आपका राह देख रही है...

जग्गू- (वन से बहार निकलता हुआ) हाँ हवेली तोह कब से राह देख रही है मेरा.. हाहाहाहा...

खास आदमी- ( गोली का दर्द सेहत हुआ) क्या हाल है बॉस.. (आदमियों से) मेरी अभी हालत ख़राब है बॉस.. चलो गाड़ी निकालो जल्दी ोये.. मुझे भी हॉस्पिटल पहुंचाओ जल्दी...

(जल रही पुलिस की गाड़ियों और उनकी लाशो को वही छोड़ जग्गू और उसके आदमी चल पड़ते है हवेली की और.. यहाँ से थोड़ी hi दुरी पर एक पहाड़ी से तुषार खड़ा यह सब देख रहा था...)




|अब अग्गे|

तुषार- (सामने गुंडों की गाड़ियों को जाता देख, हस्ता हुआ) तोह कैसा रहा प्लान दया सर…

दया- (जग्गू जो अभी घुटनो पर था उसके हाथ, पेअर, मुँह सब बंधे हुए थे, उसकी गार्डन पीछे से पकड़ बोलै) लाला की हवेली से उसके खुद के hi आदमी खरीद लिए और उनको उनके साथियो से hi लाडवा के मरवा दिया, हाहाहा.. जबरदस्त प्लान छोटे..

तुषार- (दया के हाथ में पड़की जग्गू की गार्डन की और देखता हुआ) तोह अभी इसका क्या करना है.. अगर आप इससे मुझे देदे तोह…

दया- इसको कोर्ट ले जाकर वैसे भी कोई फयदा नहीं था, ऊपर से इतना प्रेशर ा रहा था की मैं तोह इससे मुश्किल से जेल में कुछ दिन बंद रख पाया था, और फांसी दिला पाना इससे मुश्किल था, हाँ शायद मैं फांसी दिला भी देता इससे पर अगर मैं नाकामयाब हो जाता तोह फिर यह मेरे हाथ से निकल जाता और शायद मुझे दुबारा मौका न मिलता इससे पकड़ने का.. पर इस बन्दे ने जो हरकत की है यह जिन्दा रहने लायक नहीं है.. खेर…

तुषार- कोई न सर जी, मैं हु इससे देखने के लिए.. मैंने भी किसी को वडा किया था की 7दिन के अंदर इसकी रूह इसके जिस्म से अलग कर दूंगा, और आज सत्व दिन है…

दया- तेरा वडा पूरा हो जाये और इस हरामी को सजा मिल जाये इसलिए तुझे इससे सौंप रहा हु.. कानून तुझे इसकी इजाजत नहीं देगा लकिन कानून को बटेगा कोण.. हाहाहा.. ाचा सुन मैं चाहता हु की तू अपने मैं की करे और इससे सजा दे, (मुस्कुराता हुआ) हाँ मैं जनता हु तू इससे कोई आसान मौत नहीं देगा कैसर…

तुषार- (चौंकता हुआ) कैसर..? कोण कैसर.. मैं नहीं हु कैसर.. क्या बोल रहे हो आप सर जी...

दया- हाहाहा ाचा ठीक है.. बहुत कुछ बताना है और बहुत कुछ जानना है तेरे से.. जा लेकर जा इससे.. अपने अंदर की आग शांत कर, और इसकी मौत की वीडियो देख मैं अपने दिल को सकूं तोह पहुंचा hi लूंगा.. हाहाहा…

तुषार- जी बिलकुल सर जी.. लकिन वीडियो मैं समजा नहीं.. क्या आप जानते की मैं को….

दया- (बिच में बोलता हुआ) वक़्त ऐनी पर सब बता दूंगा.. और यह बता की तेरा वो दोस्त शिवं जो उन् गुंडों के साथ जग्गू बन के हवेली गया है, क्या करेगा वो उधर..?

तुषार- फिलहाल तोह यू समाज लीजिये वो एक एजेंट है सब संभल लेगा उधर.. (मुस्कुराता हुआ) बक्की फिर यह मैं आपको वक़्त ऐनी पर बता दूंगा…

दया- (हस्ता हुए) हाहाहा, ाचा चलो ठीक है देखते है फिर…

(चलो इसको शार्ट में लकिन डिटेल में समजता हु की आखिर क्या हुआ था.. तुषार का प्लान यही था, शिवं ने जब उससे बताया था की दया ने लाला की 25-30 गाड़ियों के साथ 300 के करीब आदमी कुछ मिनटों में धीर कर दिए थे तोह उसने सोचा यह बाँदा काफी तेज है, यह भी कुछ प्लान बना चूका होगा.. उसने दया से मिलने की सोची और सुभे hi उसके पास चला गया, उधर जाकर तुषार ने दया को एक प्लान समजा दिया, दया को भी यह प्लान ाचा लगा वो जग्गू को कोर्ट अपने प्लान से लेजा तोह रहा था लकिन उससे दर था की क्या वो जग्गू को फांसी दिलाने में सफल हो पायेगा.. दया ने तुषार का साथ दिया, और तुषार का प्लान था किसी पुलिस वाले की जान न जाये इसलिए उसने लाला के आदमियों को मोती रकम से खरीद लिया और उन्हें असली पुलिस वालो से रेप्लस कर दिया, इतने पाप किये है उन् गुंडों ने की उनके मरने जिनने से किसी को कोई फरक नहीं पड़ता.. आगे प्लान था की जब जग्गू को पुलिस वन से लेजाया जा रहा होगा तोह लाला के आदमी उनके रस्ते में जग्गू को छुड़ाने जरूर आएंगे, और जब वो लोग आएंगे और अपने hi आदमियों को मरने में व्यस्त होंगे तब दया और तुषार जग्गू को बांध कर वन से बहार निकल लेंगे, और शिवं को कड़ी के कपडे और उसका अपना मास्क पहना कर अंदर वन में बिठा देंगे.. जब लाला के आदमी अपने hi साथियों को मर कर जग्गू को वन से निकलने आएंगे तोह जग्गू के बजाये वो शिवं को अपने साथ ले जायेंगे…)

(दया वह से अपनी कार में बैठता है और चला जाता है.. तुषार जग्गू को घसीटकर अपनी कार तक ले जाता है और पीछे का दूर खोल कर जग्गू को अंदर फेक देता है और खुद ड्राइविंग सीट पर आकर कार अपनी हवेली की और मोड़ देता है…)

तुषार- (ड्राइव करता हुआ, सवाना को कॉल लगा के) Hello सवाना..!!

सवाना- Hello हाँ बॉस.. क्या हाल है आपके और क्या चल रहा है अभी…

तुषार- सब कुछ बढ़िया है.. फिलहाल मैं कार में हु और पिछली सीट पर जग्गू को बांध कर बिठा रखा है…

सवाना- (चौंकती हुई) व्हाट..!! जग्गू आपके साथ.. कैसे..? कब..? क्यों..?

(फिर तुषार उसे अब तक जो भी हुआ वो सब सवाना को बता देता है.. मोबाइल स्पीकर पर था सफल भी धयान से सुन रहा था सब कुछ...)

सफल- वह वह वह बॉस.. क्या प्लान था.. काफी दूर की सोची अपने.. जग्गू आपके हाथ भी ा गया और उधर कानून सोच रहा होगा की जग्गू को उसके आदमी छुड़वा ले गए.. अभी देखना है कैसर करता क्या है…

तुषार- (मुस्कुरता हुआ) वो तोह मैंने सोच लिया है.. तुम यह बताओ की जो काम दिया है कहा तक पहुंचा..?

सवाना- लगभग बॉस सरे hi स्टूडेंट्स हॉस्पिटल में एडमिट है.. कुछ hi दिनों में सब नार्मल हो जायेंगे.. लकिन बॉस इससे कुछ नहीं होगा.. आज नहीं तोह कल ऐसे hi कई और बचे इस ड्रग्स नाम के कीड़े का शिकार हो सकते है.. हमे रोकना है उन् ड्रग्स देने वाले लोगो से, हमे रोकना है उन्हें जो सिटी में ड्रग्स सप्लाई कर रहे है.. हमे इसकी जड़ को जल्द hi ख़तम करना होगा…

तुषार- हम्म बिलकुल सही कहा तुमने, मैं भी इसी बारे में सोच रहा था.. खेर ऐसा करो जल्दी हवेली ा जाओ.. (शैतानी मुस्कान के साथ, सामने लगे मिरर से पीछे पड़े जग्गू को देखता हुआ, जो अभी घभराय हुआ था) कुछ तैयारियां भी करनी है अभी…

सवाना- (मुस्कुराती हुई) बिलकुल बॉस, हम समाज गए…

सफल- अब आएगा मज़ा...

|बैक तो अन्निका, आरुषि|

(यह दोनों अभी अपने स्कूल में थी.. छूती हो चुकी थी अन्निका अपनी फ्रेंड्स को bye बोल आरुषि के पास पार्किंग में जाती है जहा आरुषि के फ्रेंड्स जस्मिने, जूही और जश्न खड़े थे…)

अन्निका- (uchalti-kudti आती हुई, सबको) Hello…

जस्मिने- (उसके कान के पास जाकर जोर से बोलती हुई) ोइये लड़क्कीी.. कैससीई हाई चू…

अन्निका- (एक डैम से पीछे हैट डर्टी हुई) हहहह.. यह क्या दीदी, ऐसे बुरे तरीके से हाल कोण पूछता है...

जस्मिने- (हस्ती हुई) हेहेहे.. ऐसे मैं पूछती हु.. यह जस्मिने का स्टाइल है.. और बता क्या करती है आज कल, और तेरा भाई क्यों नहीं आता स्कूल…

अन्निका- मैं क्या करुँगी, स्कूल से घर और घर से स्कूल, और भैया का तोह आपको पता है न उन्हें छूट लगी थी तोह वो रेस्ट ले रहे है कुछ दिन.. आप कैसी हो..?

जस्मिने- मैं तोह बिलकुल ठीक हु.. जब से तेरे भाई का मुँह नहीं दिख रहा न तब से तोह और भी अछि हु.. हाहाहा…

अन्निका- (गुस्से में) आपका मतलब क्या है.. आप भैया के बारे में ाचा नहीं बोल सकती तोह बुरा भी मत बोलिये, सामजी आप…

जस्मिने- (अपने बाल ठीक करती हुई) हूह्ह, उस लोसर के बारे में ाचा क्या बोलना भला.. और उस जैसे लोसर को तोह जितना सुनिए उतना काम है.. केले के छिलके से पेअर फिसल कर गिर गया होगा और उस हड्डी की haddi-pasli टूट चुकी होगी.. काम से काम 1-2 साल तोह लगेगा hi ठीक होने में.. हाहाहाहा…

(साइड में कड़ी तान्या आग का गोला बन चुकी थी.. इतना गुस्सा उसके अंदर भर चुक्का था की उसने 2 कदम आगे बढ़ के एक कास के छटा जस्मिने की गाल पर मार दिया.. काफी लोग खड़े थे उधर जिन्होंने यह नजारा देख लिया था.. जस्मिने तोह थी hi लकिन जूही और जश्न भी यह देख के डॅंग रह गए की जिससे अपने भाई की बुराई सुनने में इतना मज़ा आता था आज उससे अचानक क्या हुआ, उसकी बुराई पे उससे गुस्सा कैसे ा रहा है…)

जस्मिने- (अपनी गाल सहलाती हुई, गुस्से से) तुझे क्या हुआ.. थप्पड़ क्यों मारा मुझे…

तान्या- (ऊँगली दिखती हुई) आखरी बार था यह, अगली बार मुझे तुझ पर हाथ उठाने की जरुरत न पड़े.. अगर तूने तुषार को कुछ भी बोलै तोह समाज लेना तेरा क्या हशर होगा, सामजी.. चल अन्नू घटिया लोग से ज्यादा बात नहीं करते…

जूही- (तान्या का हाथ पकड़) अरे रुक तोह तान्या.. बात तोह सुन…

जस्मिने- जाने दे जूही जो जाता है जाये…

(जूही तान्या को छोड़ देती है और तान्या अन्निका का हाथ पकड़ ले जाती है अपनी कार की तरफ और गुस्से से निकल जाती है वह से...)

जश्न- हुआ क्या इससे आखिर.. पहले तोह ऐसा कभी नहीं किया…

जस्मिने- (गुस्से में उबलती हुई) मुझे थप्पड़ मारा इसने.. उस लोसर भाई के लिए इतने लोगो के सामने मुझे थप्पड़ मारा.. जानती नहीं क्या यह की कोण हु मैं.. एक चुटकी में मेरे पापा इसकी पूरी फॅमिली को रोड पर ला देंगे.. हरामजादी मुझे ऊँगली दिखती है.. उस लोसर के लिए.. इससे मज़ा चक्खा के रहूंगी मैं…

जूही- (उसके कंधे पे हाथ रखती हुई) छोड़ न जस्मिने.. उससे थोड़ा गुस्सा ा गया होगा.. आखिर एक भाई को उसकी बहिन के सामने कुछ बोलेगी तोह गुस्सा तोह आएगा hi न.. समजा कर यार.. तुझे ऐसे नहीं बोलना चाहिए था…

जश्न- क्या बोल रही है तू.. आज अचानक उससे अपने भाई पर बड़ा प्यार ा रहा है.. जानती है न तू की कैसे वो तुषार की बुराई करती थी.. और हम सब भी उसका साथ देते थे और तुषार की खूब बुराई करते थे लकिन तब तोह वो बहुत हस्ती थी.. लकिन अब क्या हुआ उससे…

जूही- लकिन….

जस्मिने- (बिच में गुस्से से पेअर पटकती हुई) एनफ.. मेरी इंसल्ट की उसने सबके सामने.. मेरे Mummy-Papa ने भी आज तक मुझ पर हाथ नहीं उठाया.. इतनी छोटी सी बात के लिए मुझे थप्पड़ मर दिया उसने.. इससे तोह मैं छोडूंगी नहीं…

(इधर कार में अन्निका मुँह फुलाए chup-chap बैठी थी…)

तान्या- (ड्राइव करती हुई, उसकी और देख) क्या हुआ...

अन्निका- भैया को बुरा क्यों बोलती वो.. वो तोह इतने अचे है.. बुरे लोगो से भी लड़ते है.. मैं उस दीदी को सब बताती भैया के बारे में.. फिर वो कभी कुछ नहीं बोलती…

तान्या- नहीं अन्निका तुषार के बारे में किसी को कुछ नहीं पता चलना चाहिए.. उसको खतरा भी हो सकता है.. तू जानती है न वो यह सब काम chup-chup कर. कर रहा है…

अन्निका- हम्म.. लकिन उन्हें कोई बुरा बोले मुझे ाचा नहीं लगता…

तान्या- (उसकी गाल कठिक्ति हुई) मेरी प्यारी अन्नू.. ाचा तोह मुझे भी नहीं लगता, आखिर यह गद्दे तोह मैंने hi खोदे हैना, इससे अब मुझे hi भरना होगा…

|बैक तो रूद्र|

(उस दिन रात को कैरा की ठुकाई करने के बाद रूद्र सुभे अपने घर वापिस ा गया.. चुदाई के इलावा भी उससे कुछ काम थे जो वो उस दिन पूरा करके गया था…)

चाचा- (रूम में एंटर करता हुआ, सामने बालकनी में खड़े रूद्र से) सुन रूद्र..!!

रूद्र- (वैसे hi सामने chand-sitaro को देखता हुआ) हाँ चाचा बोल…

चाचा- कुछ दिन के लिए मुझे चीन जाना पड़ेगा.. टंचाई से मिलने.. अपने हथ्यारो का काम बहुत ढीला चल रहा है उधर…

रूद्र- हम्म.. ठीक है…

चाचा- वैसे कैरा का क्या हुआ…

रूद्र- कुछ नहीं.. मैंने सब संभल लिया.. और वो दया के क्या हालत है इंडिया में..?

चाचा- आज जग्गू को कोर्ट में पेश किया जाने वाला था.. पता नहीं अभी क्या हुआ होगा…

रूद्र- (मुस्कुराता हुआ) हम्म.. लगता है कैसर एक और वीडियो अपलोड करने वाला है…

चाचा- मतलब.. उसका वीडियो कैसे ा गया बिच में…

रूद्र- बिच में तोह वो खुद hi आया होगा.. चल छोड़ तू ज्यादा छोड़ू बाते न कर, निकल ले अगली फ्लाइट से चीन…

चाचा- (मुस्कुराता हुआ) हाँ वो काम भी जरुरी है.. चल मैं चलता हु…

(चाचा वह से निकल जाता है चीन जाने की तयारी करने, पीछे रूद्र अपनी गन का निशाना चाँद पे लगाए मुस्कुराता हुआ बोलै…)

रूद्र- मैं बातो से ज़ात और हरकतों से औकात जान लेता हु चाचा.. तू तोह अभी बचा है.. (चाँद को देख) ीह चाँद तुझे पता है न तेरे और मेरे में एक चीज़ कमान है, और वो है की हम दोनों में hi दाग है… हहहहहहहह… (त्तठ्ठारररर.. और यह गोली रूद्र ने चाँद की और चला दी…)


《2137 -वर्ड्स》
 
अपडेट-44

(चाचा वह से निकल जाता है चीन जाने की तयारी करने, पीछे रूद्र अपनी गन का निशाना चाँद पे लगाए मुस्कुराता हुआ बोलै…)

रूद्र- मैं बातो से ज़ात और हरकतों से औकात जान लेता हु चाचा.. तू तोह अभी बचा है.. (चाँद को देख) ीह चाँद तुझे पता है न तेरे और मेरे में एक चीज़ कमान है, और वो है की हम दोनों में hi दाग है… हहहहहहहह… (त्तठ्ठारररर.. और यह गोली रूद्र ने चाँद की और चला दी…)


|अब अग्गे|

|बैक तो तुषार|

(तुषार कार को हवेली के गेट से अंदर मोड़ता है और सामने देखता है की सवाना और सफल पहले से hi मजूद खड़े है वह…)

तुषार- (कार रोक कर बहार निकलता हुआ) ा गए तुम लोग, बड़ी जल्दी ा गए…

सफल- (हाथ आपस में रगड़ता हुआ) हाँ बॉस मैं तोह बड़ा एक्ससिटेड हु कैसर को देखने के लिए…

तुषार- हाहाहा ाचा ऐसा क्यों भाई…

सफल- बॉस सीधी सी बात है आपका वो कैसर वाला रूप आपकी दूसरी आइडेंटिटी बन चूका है.. मैंने या न मानो तुषार एक गुड बॉय है लकिन कैसर एक दरिंदा hi है.. उससे khun-khraba पसंद है, बॉस किसी को मरने के लिए, किसी के हाथ पेअर काटने के लिए बहुत बड़ा जिगरा चाहिए और आपमें वो शायद हम सबसे ज्यादा है.. जब आप मास्क पहन कर किसी को सजा देने लगते हो तोह कोई नहीं कह सकता की यह वही bhola-bhala meethi-meethi बाते करने वाला, hasne-hasane वाला तुषार hi है.. kabhi-kabhi तोह बॉस ऐसा लगता है की कैसर आपकी दूसरी पर्सनालिटी है, क्युकी मैंने ऐसे बहुत से केस देखे है जिसमे लोगो की 2-2, 3-3 पर्सनालिटी होती है.. कही आप भी…..

तुषार- हाहाहा अरे नहीं भाई अस्सी कोई बात नहीं है. किसी के साथ बुरा हो यह मैं होते देख नहीं सकता.. और रही बात कैसर की तोह वो कोई मेरी दूसरी आइडेंटिटी है पर्सनालिटी नहीं.. जब मैं कैसर बनता हु तोह पुरे अपने hosh-o-awaj में hi होता हु.. हाँ एक बात है तब मैं अपने अंदर एक अलग सी एनर्जी एक ताकत हो फील करता हु यह में तुम लोग को पहले भी बता चूका हु…

सवाना- हाँ बॉस अपने बोलै तोह था एक बार, लकिन हम समझने नहीं थे आपकी बात का मतलब…

तुषार- अभी यह सब छोडो.. इस बात पर डिस्कशन करना इम्पोर्टेन्ट नहीं है (कार में पड़े जग्गू की और इशारा कर) इम्पोर्टेन्ट है वो.. निकालो उससे बहार…

(तुषार की बात मन कर सफल कार का पिछले दूर खोलता है और जग्गू को कलर से पकड़ उससे घसिटके कार से बहार निकल लेता है…)

सफल- लीजिये बॉस.. शिकार रेडी है…

सवाना- (कैसर का मास्क निकलती हुई) शिकारी भी रेडी हो जाये…

कैसर- (मास्क पहन कर) इसपर ज्यादा वक़्त बर्बाद करने की जरुरत नहीं है हमे.. कैमरा से करो.. जरा लाला भी देखे अपने प्यारे दोस्त की मौत…

सफल- क्या..!! तोह मतलब देखने में मज़ा नहीं आएगा.. एक गोली मार के पत्ता साफ़ कर देना है बस…

कैसर- अरे न न.. ऐसा करना होता तोह इससे यहाँ क्यों लत्ता…

(सवाना ने कैमरा सेट कर दिया था.. जिसका वीडियो बाद में लाला को झटका देने में काम आएगा…)

कैसर- (थोड़ा राइट जाकर एक जगह रूककर) ाचा यह देखो…

(कैसर ने निचे घास पे लत मरी तोह उसकी तलवार आर्टिफीसियल घास के दो हिस्सों में बांटी हुई बहार आकर ऊपर की और सीधी कड़ी हो गयी.. यह शिवं बना कर गया था तुषार की तलवार के लिए.. सफल और सवाना यह देख हेरैं रह गए…)

कैसर- (तलवार खींच कर मुस्कुराता हुआ) कैसी लगी मेरी तलवार…

सफल- वाह बॉस.. कमल है…

कैसर- (जग्गू की और बढ़ता हुआ) चलो अभी काम पे लगो…

सफल- जी बॉस बताइये करना क्या है…

(इधर जग्गू का हाल दर के मरे बुरा हो चूका था, वो कम्प रहा था, उसने कैसर की दरिंदगी देखि थी, कैसर उसकी उंगलिया कटेगा, उसकी आँखे निकल लेगा जा फिर उसका दिल.. यह सब soch-soch कर उससे जैसे चाकर ा रहे थे.. वो कब का अपने मुँह से ghuti-ghuti आवाजे निकल रहा था की उससे छोड़ दो जाने दो लकिन सब उससे इग्नोर कर रहे थे, क्युकी मुर्गा काटने से पहले खूब fadh-fadata hi है…)

कैसर- सफल तुम अभी एक पैट्रॉल टैंक का इंतज़ाम करो जाओ…

सफल- (हैरानी से) क्या..? (निकलता हुआ) ाचा ठीक है बॉस…

कैसर- सवाना सुनो वो दूसरी साइड में तुम लोग ने जो घड़ा खोदा है…..

सिया- (उनकी तरफ आती हुई) अरे भैया क्या कर रहे हो आप लोग.. (सवाना) ओह्ह दीदी आप ा गयी…

कैसर- (मुस्कुराता हुआ) ा गयी आप…

सिया- (हैरानी से) आप तुषार भैया हो..? अपने भी मास्क पहन लिया.. (साद होकर) सब लोग अपना फेस क्यों छुपा रहे है मुझसे…

कैसर- नहीं बचा .. मैं भला आपसे क्यों अपना फेस छुपूँगा.. (उसको पकड़ गॉड में उठता हुआ) आप तोह मेरे प्यारे सीयू हो न…

सिया- (जग्गू को देख हेरैं होती हुई) यह..? यह तोह गंदे आदमी है.. यह यहाँ क्या कर रहे है भैया…

कैसर- (खुद हेरैं होता हुआ) आपको कैसे पता यह गंदे आदमी है…

सिया- मैंने देखा है आपके कंप्यूटर पर, पता है भैया इन्होने न 156 दीदी लोग के साथ गन्दी हरकत की है.. और उन्हें मार भी दिया.. और न (ek-ek वर्ड इंग्लिश में बताती हुई) 25करोड़ रुपए गरीब लोगो को मार कर और उनसे छिन्न लिए थे.. इनका दोस्त भी है लाला वो तोह इनसे भी…..

कैसर- एक मिनट एक मिनट बीटा.. आप यह सब कैसे जानती हो.. (सवाना को देख) क्या कोई डाटा रिकॉर्ड है जग्गू और लाला का कंप्यूटर में..?

सवाना- नहीं तोह.. बल्कि अभी तोह मौका hi नहीं मिला ऐसा कुछ करने का.. सिया कैसे पता किया तुमने यह सब..?

सिया- जग्गू और लाला का नाम था कंप्यूटर में, मैंने बस थोड़ी chhed-chhad की और उनके बारे में जान लिया…

कैसर- (जग्गू को गुस्से से देखता हुआ) चलो कोई बात नहीं यह बात हम बाद में करेंगे.. सिया अभी आप जाओ अंदर, हम इस गंदे आदमी को पनिशमेंट देकर आते है…

सिया- मुझे भी देखना है भैया…

कैसर- (मुस्कुराता हुआ, उसकी गाल पर किश करके) नहीं मेरी प्यारी सीयू हो न आप.. मेरी बात नहीं मानोगी…

सिया- (स्माइल करती हुई) भैया आपको पता है मेरे पापा भी मुझे प्यार से सीयू बुलाते थे.. आप बहुत अचे हो पापा की तरह hi…

कैसर- ाचा.. आप भी एक गुड गर्ल हो.. (सिया को कार के ऊपर बिठा के कार के अंदर से एक बड़ी सी चॉकलेट निकलता हुआ) यह लो आप यह खाओ और अभी जाओ अंदर मैं थोड़ी देर में आता हु…

सिया- (खुश होकर) वूवव.. इतनी बड़ी चॉकलेट.. (तुषार को किश करके) थैंक्यू भैया...

(और सिया khushi-khushi चॉकलेट हाथ में पकडे अंदर चली गयी.. लकिन बहार अभी कैसर फुल गुस्से में अपनी चमकती हुई लाल आखों से जग्गू की गार्डन पड़के कार से लगा के बैठा था…)

कैसर- सेल.. इतनी मासूम लड़कियों के साथ यह हरकत कर चूका है तू.. (उसके मुँह पर बंदी पट्टी खोल कर) बोलल.. क्या कसूर था उनका, क्या मिला तुझे कुछ मिंटो का मज़ा लेकर.. अभी देख पूरी उम्र भर कैसे मज़े दूंगा तुझे.. (चिलता हुआ) सल्ली हरमखूररी मदारचूडड़ड.. (उसके बाल पकड़ सर ऊपर उठता हुआ) तुझे जीने भी नहीं दूंगा और मरने भी नहीं दूंगा…

जग्गू- भाई.. भाई मेरी बात सुन.. वो लड़की झूट बोल रही है.. मैंने इतनी लड़कियों के साथ नहीं किया कुछ…

कैसर- (खींच के एक थप्पड़ उसके लगता हुआ) क्या बोलै.. क्या बोलै तू.. वो छोटी सी बची झूट बोलेगी.. हाँ..? (और अपना घुटना उसके ांडो पर मर देता है..)

जग्गू- (अपने दोने घुटने आपस में जोड़ कर, चीखता हुआ निचे बेथ जाता है) आअह्ह्ह्हहयययययीईइई…

कैसर- (अपना मास्क निकल कर) सफल को फ़ोन करो और बोलो की खली हाथ वापिस ा जाये…

सवाना- क्या हुआ बॉस.. इससे मरना नहीं है क्या..?

तुषार- नहीं सवाना.. इससे ज़िंदा रखना है मुझे.. tadpa-tadpa कर मरना है.. एक hi जहटके में नहीं मरूंगा इससे.. सिर्फ एक का नहीं उन् सभी लड़कियों का बदला लेना है…

(जग्गू तुषार की बात सुन खुश हो जाता है की उससे मरना नहीं पड़ेगा.. सवाना उससे देखते hi गुस्से में ा गयी वो उसके पास गयी और निचे पड़े जग्गू के मुँह पे 2 घुटने kas-kas के जड़ दिए, जिससे उसके नाक और होतनो से खून बह निकला…)

सवाना- तोह बॉस उस लड़की को दिया हुआ आपका प्रॉमिस.. उसका क्या होगा..?

तुषार- उससे प्रॉमिस दिया था की उसका बदला जरूर लूंगा.. (जग्गू को देख) वो भी आज hi.. (ऊपर की और देख चिलता हुआ) लकिन अपने अंदर की आग को मैं इससे रोज सजा देकर शांत करना चाहता हूउउ.. मुझसे बर्दाश नहीं हो रहा आआह्ह्ह्ह…

(तुषार सवाना को कुछ बोलता है तोह सवाना सफल को कॉल करके कुछ लेकर ऐनी को कहती है.. तब तक तुषार और सवाना जग्गू को हवेली के पीछे से सीक्रेट अंडरग्राउंड रूम में ले जाते है.. इसका इंतजाम तुषार ने पहले hi कर रखा था.. काफी बड़ा रूम था.. वह जाकर तुषार ने जग्गू को एक जंजीर से बांध दिया.. कुछ देर बाद सफल वह ा गया और जो तुषार ने उससे मंगवाया था वो तुषार को दे दिया.. यह थे कुछ चेमिकल्स और कुछ खतरनाक जंगल कीड़े…)

तुषार- (सफल से) केमिकल डालो इसपर…

(सफल बड़ी सी बोतल से केमिकल उसकी पूरी बॉडी पर छिड़क देता है…)

जग्गू- (आखों में आँसू लिए भोली सूरत बनता हुआ) भाई क्या कर रहे हो भाई.. मुझे मत मारो.. वो लड़की झूट बोल रही थी...

तुषार- (निचे झुक कर उसके बाल पकड़ कास के उसका सर दिवार से मरता हुआ) अगर वापिस तूने यह बात बोली तोह समाज ले अभी टपक दिया जायेगा तू…

(और तुषार ने दूर से कीड़ो से भरे हुए डिब्बे का धक्का खोल दिया.. वो कीड़े केमिकल की खुशबू का पीछा करते हुए जग्गू की और जाने लगे.. कीड़े बहुत खतरनाक लग रहे थे.. tikke-tikke पेअर, सींग, और दांतो वाले कीड़े देख जग्गू की पूरी अंदर तक फात गयी.. वो अपनी गांड utha-utha के पीछे होने लगा लकिन पीछे दिवार थी, और उसके दोनों हाथ बंधे हुए थे.. कीड़े तेजी से जग्गू की और बढ़ रहे थे…)

जग्गू- (दर और खूफ से) ाहहए नहीं.. नही.. नहीं.. मुझे.. आआअह्ह्ह्हहह्ह…

(और यह एक कीड़े ने जग्गू के पेअर को काट लिए.. करीब आधी ऊँगली जितने bade-bade कीड़े थे जो अभी जग्गू की पूरी बॉडी पर फूल चुके थे.. कभी उसकी गार्डन तोह कभी टंगे और हाथ, पेट, कमर, शरीर के हर हिस्से में वो अपने टिक्के दन्त और सींग मर कर जग्गू का खून निकल पर पे रहे थे और नाहा रहे थे.. जग्गू की चीखे बहुत शूर मचा रही थी पुरे कमरे में, लकिन रूम साउंड प्रूफ था तोह आवाज बहार नहीं जा सकती थी चाहे जितना भी जोर से चिल्ला ले जग्गू…)

जग्गू- (गाला पहाड़ चीखता हुआ) आअह्हह्हह्हआ हहहहह.. नाहाहैई बाछहा बचोऊ ू आअह्ह्ह माआ…

सवाना- पर बॉस इससे तोह यह कीड़े इसका खून chus-chus कर मर डालेंगे, लकिन आप तोह इससे जिन्दा रखना चाहते थे न..?

तुषार- नहीं मरेगा.. यह कीड़े मर जायेंगे.. क्युकी यह कीड़े बस पानी में जिन्दा रह सकते है और अभी कुछ 5-7 मिनट में hi मर जायेंगे…

(उधर जग्गू का कीड़ो ने डांक mar-mar कर बुरा हाल कर दिया था.. एक ऐसा ज़हरीला दर्द हो रहा था उससे हर एक डांक के साथ की उससे लग रहा था की जैसे की उसके शरीर में एक लम्बी सुई दाल कर उसकी नसों से खून खींचा जा रहा हो…)

तुषार- जितने दिन जिन्दा है बस पानी देना है इससे और कुछ नहीं…

सवाना- Okay बॉस…

|बैक तो Harshik’s हाउस|

(आरुषि और हर्षिका दोनों abhi-abhi कॉलेज से घर आयी थी..)

आरुषि- ला मैं पानी लेकर आती हु रुक…

हर्षिका- (सोफे पर गिरती हुई) हाँ ला यार, बहुत थक गयी मैं तोह…

(थोड़ी देर बाद आरुषि पानी लेकर हर्षिका को देती है और खुद भी उसके पास बेथ जाती है…)

हर्षिका- ाचा यह विराट कोण था हर्षिका.. तू क्या जानती है उससे..?

आरुषि- नहीं कुछ खास जानती नहीं हु लकिन सुन्ना है की ठाकुरो का बीटा है, बहुत hi बिड़गड़ा हुआ लड़का है.. पिछले कॉलेज में किसी लड़की के साथ गलत हरकत करते पकड़ा गया था तोह निकल दिया वह से अभी यहाँ एडमिशन लिया है...

हर्षिका- लकिन तुझे यह सब कैसे पता उसके बारे में..?

आरुषि- कुछ नहीं यार पापा ने बताया था बस.. पापा अपने प्रिंसिपल के खास दोस्त है तोह उन्होंने बोलै था की यह लड़का ऐसा है अपनी बेटी को दूर रखे इससे…

हर्षिका- हम्म.. वैसे यार तू बताती नहीं है की तेरे पापा करते क्या है…

आरुषि- अरे बता दूंगी फिर कभी.. बस इतना धयान रख की उस लड़के से दूर रहना.. सामजी.. (उसके पास जाकर उसका एक दूध पकड़ मसलती हुई) मेरे भाई की अमानत कही उस विराट को मत सौंप देना…

हर्षिका- ोोुच.. कामिनी कही की.. वैसे तुषार कितने दिन हो गए आया hi नहीं घर...

आरुषि- ओह्हू.. तोह मैडम को याद ा रही है तुषार की.. आहाँ.. हेई इतना शर्माती क्यू है.. ालले ालले देखो तोह गाल कैसे लाल हो गए…

हर्षिका- (अपनी स्माइल पर कण्ट्रोल करके) चुप कर.. अस्सी कोई बात नहीं है...

आरुषि- (अपना फ़ोन निकल कर) रुक मैं तुषार को कॉल करती हु…

(आरुषि तुषार को कॉल करती है उधर तुषार सीक्रेट रूम से बहार निकल रहा था…)

आरुषि- (फ़ोन हर्षिका को पकड़ती हुई) ले बात कर और बोल की मेरा दिल नहीं लग रहा जणू जल्दी घर आजा.. हहहह…

हर्षिका- अरे मैं नहीं करुँगी.. तू कर न…

आरुषि- (आखे दिखती हुई) पकड़.. वर्ण एक कान के निचे लगयूंगी…

हर्षिका- (फ़ोन कान को लगा के) Hello..!!

तुषार- (मुस्कुराता हुआ) जी..!! कब से मैं Hello, Hello कर रहा हु आप कोई जवाब नहीं दे रही…

हर्षिका- नहीं जी वो.. मैं.. यह आरुषि मुझे परेशां कर रही थी…

आरुषि- (गुस्से से) क्या बोली.. फ़ोन स्पीकर पर कर…

तुषार- ओह्ह ाचा.. यह दीदी भी न.. हर वक़्त मस्ती करती रहती है…

हर्षिका- हम्म.. वैसे क्या कर रहे हो आप.. कब तक ायोगे घर…

तुषार- कुछ खास नहीं वो गुंडे को मैंने पकड़ लिया है.. कल मैं ा रहा हु घर…

हर्षिका- (खुश होती हुई) उह रियली..!! यह तोह बहुत अछि बात है…

तुषार- आप ठीक हो.. और दीदी कहा है…

हर्षिका- (अपनी पेण्ट को नाखून से छिलती हुई) हम्म मैं ठीक हु.. आरुषि भी इधर hi है.. सब सुन रही है…

तुषार- ओह्ह.. Hello दीदी.. कल आता हु मैं.. अभी थोड़ा काम है.. ख्याल रखना अपना.. Bye…

आरुषि- ठीक है.. तू भी ख्याल रख अपना.. Bye…


《2338 -वर्ड्स》
 
हाँ भाई अभी थोड़ी पकड़ बन रही है स्टोरी पर और अंदाजा हो रहा की स्टोरी चलती कैसे है और रीडर्स क्या चाहते है,

हम्म बहुत तेज हो भाई, कहना पड़ेगा आप मेरे सबसे होशियार रीडर हो..

हम्म भाई मैं आपकी बात मंटा हु, और मेरे दिमाग में भी यह बात थी लकिन यह क्वेश्चन करने वाला कोई नहीं था स्टोरी में सो मैंने इससे आगे लिखने का सोच लिया, हाँ बात आपकी सही जैसा अपने कहा है मैं भी वही लिखने वाला था, शयद इससे आगे क्लियर कडु मैं...

शुक्रिया विक्रम भाई.. इतने अचे सपोर्ट क लिए.. कीप सपोर्टिंग...
 
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