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तुषार- आप ठीक हो.. और दीदी कहा है…
हर्षिका- (अपनी पेण्ट को नाखून से छिलती हुई) हम्म मैं ठीक हु.. आरुषि भी इधर hi है.. सब सुन रही है…
तुषार- ओह्ह.. Hello दीदी.. कल आता हु मैं.. अभी थोड़ा काम है.. ख्याल रखना अपना.. Bye…
आरुषि- ठीक है.. तू भी ख्याल रख अपना.. Bye…
|अब अग्गे|
तुषार- (फ़ोन को पेण्ट की पॉकेट में रखता हुआ) बस पिने को पानी.. और कुछ नहीं देना इससे…
सफल- हम्म जी बॉस, जितने दिन भी जियेगा बस पानी hi पियेगा…
तुषार- सवाना कैमरा उठाओ और वीडियो एडिट करके मुझे सेंड कार्डो.. और आज से कंप्यूटर रूम सम्भालो तुम.. शिवं क्या कर रहा है देखो.. पुरे शहर पर नजर रखो.. और पता करो की सिया ने जग्गू की इतनी इनफार्मेशन कैसे और कहा से निकली.. तुम्हारे लिए बहुत से काम अग्गे आएंगे, वो वक़्त ऐनी पर तुम्हे बता दूंगा…
सवाना- हम्म बिलकुल बॉस मैं रेडी रहूंगी आपके हर आर्डर के लिए…
तुषार- सफल..!!
सफल- जी बॉस…
तुषार- हथियार लंङे को बोलै था मैंने तुम्हे.. क्या हुआ उसका…
सफल- हथियार मेरे अंडर ा चुके है बॉस.. आप बस बोलो कब उससे हवेली में लाना है…
तुषार- तोह इन्तजार किसका कर रहे हो.. ले ायो हवेली में…
सफल- जी बॉस…
(तुषार हवेली के अंदर चला जाता है.. और दोनों एजेंट्स भी apna-apna काम करने लगते है, हवेली के अंदर जाकर तुषार देखता है की प्रियल और सिया दोनों gum-sum सी होकर सोफे के दोनों किनारे बैठी हुई है…)
तुषार- (सिया का उदास चेहरा देख, खुद भी उदास होता हुआ) सिया..!!
सिया- (मुस्कुरा के तुषार को देखती हुई) तुषार भैया आप ा गए…
तुषार- (उसके साथ जाकर बैठता हुआ) हाँ बीटा मैं ा गया.. क्या हुआ आप इतनी उदास क्यों बैठी थी.. (प्रियल को देख) और आपकी मुम्मा भी..?
सिया- कुछ नहीं तुषार भैया बस ऐसे hi, पापा के बिना कुछ ाचा नहीं लगता है.. (साद फेस करके निचे देखती हुई) ऐसा लगता है जैसे मेरी लाइफ में कुछ adhura-adhura सा है.. और यह अधूरापन कोई पूरा नहीं कर पायेगा, कभी भी.. और मुम्मा को भी ऐसा hi लगता होगा न…
(सिया की बात सुन तुषार उससे साइड से गले लगा लेता है, और उसके सर पर हाथ फेरने लगते है…)
तुषार- ऐसे मत बोलो बीटा मैं हु न आपके साथ, हमेशा…
सिया- (सर उठा के देखती हुई) आप हमेशा मेरे साथ भैया…
तुषार- हाँ बिलकुल.. मैं आपके साथ हु…
प्रियल- (अपनी आखों में ा रखे आंसू साफ़ करती हुई) तुषार जी प्लीज आप हमे झूठे दिलसे मत दीजिये.. हम यह पहले भी बहुत लोगो से सुन चुके है.. और शायद अब हमे आपकी इस हवेली से जाना चाहिए, हम आपको और तकलीफ…..
तुषार- (बिच में हाथ का इशारा कर रोकता हुआ) क्या.. क्या बोलै अपने.. आपको क्या लग रहा है आपका यहाँ रहना मुझे तकलीफ दे रहा है..? किस बात की तकलीफ..?
प्रियल- (गुस्से और आंसू भरी आँखों से) यह अमीर लोगो से नफरत है मुझे.. मेरे पति और मेरी नन्ही सी जान के बाप को इन्ही अमीर लोगो ने छीन लिया मुझसे.. कुछ पैसो का लालच देकर वो मुझसे मेरी बेटी को भी छीनना चाहते थे.. (रोटी होइ) क्या कोई अपनी बेटी का भी सौदा करता है क्या भला.. क्या उन्हें इसमें जान नहीं दिखती सिर्फ पैसा hi दीखता है.. अपनी बची को बचने के लिया मेरे पति ने अपनी जान दे दी.. आपका भी क्या भरोसा जब आपको मेरी बेटी की सचाई पता चले तोह आप भी मेरी बेटी की पावर्स का गलत उसे करो या आपके अंदर भी लालच का कीड़ा दौड़ना शुरू करदे…
सिया- मां आप भैया को ऐसे क्यों बोल रही हो.. वो बहुत अचे भैया हैं…
प्रियल- बीटा तुम्हे नहीं पता इन् अमीरो की इरादे कब बदल जाये.. यह पल में कुछ और पल में कुछ और होते है…
(तुषार कुछ नहीं बोलता बस वह से उठ कर अपने कमरे में चला जाता है…)
सिया- (गुस्से में) मुम्मा..!! अपने ऐसा क्यों बोलै.. भैया नाराज हो गए…
प्रियल- पर बीटा मैं तोह आपकी और अपनी भलाई के लिए hi ऐसा बोली थी.. और कब तक हम इनके पैसो का कहते और उनके घर रहते.. कभी न कभी तोह हमे अपना घर ठिकाना ढूंढ़ना hi है.. और इन् लोगो पे ज्यादा भरोसा नहीं करते….
सिया- बस मुम्मा बहुत हुआ.. आप भैया को कुछ भी बोले जा रही हो.. मैं बताती हु भैया क्या है और इस हवेली में क्या कर रहे है…
प्रियल- क्या मतलब.. क्या है तुम्हारे भैया जरा समजाओ मुझे…
सिया- मुम्मा यह जो है ब्लैक कपड़ो में सवाना दीदी, सफल और शिवं भैया यह है एजेंट्स है.. और यह शायद तुषार भैया के लिए hi काम करते है.. मुम्मा कुछ दिन पहले तुषार भैया की बड़ी बहिन को कुछ गुंडों ने छेड़ा था तोह भैया ने उनका बदला लिया उन् सभी गुंडों को मर दिया भैया ने.. और थोड़े दिन बाद भैया के स्कूल में इनकी जुड़वाँ बहिन को कोई गुंडे उठे के ले गए तोह भैया वापिस उनकी पिटाई करके उन्हें वापिस लेकर ा गए.. और पता है मुम्मा अभी तुषार भैया एक मिशन पर है, वो इस शहर को गुंडों से आज़ाद करवाना चाहते है.. उनके पास बहुत पैसा है.. और पैसे वाले के पास बहुत पावर भी होती है लकिन वो यह काम खुद करना चाहते है.. उनके पापा इंडिया के रिचेस्ट मन में से एक है.. अब बताओ मुम्मा क्या वो अब भी आपको लालची या आपको कही गलत लगते है…
प्रियल- (हैरानी से) क्या..!!
सिया- एक और बात बताती हु मुम्मा आपको.. थोड़े दिन पहले शहर के सबसे बड़े डॉन ने एक दीदी के साथ बहुत गन्दी हरकत की थी और बाद में उन्हें मार भी दिया, तब से भैया रोज ट्रेनिंग ले रहे है तककि वो उनके पकड़ के सबक सीखा सके.. और आज उन्होंने उस डॉन को पकड़ लिया और उससे सजा भी दी, शायद अभी वो इस हवेली में hi होगा या मर गया होगा.. तोह अभी क्या लगता है आपको भैया के बारे में..?
(सिया के बाते और तुषार की सचाई सुन प्रियल के होश उड़द चुके थे.. वो जिससे बुरा भला बोल रही थी वो किसी बागवान से काम नहीं था.. इतनी छोटी उम्र में अपने शहर के लिए लड़ने चला था.. इतनी बड़ी सोच है उसकी, वो उसकी मदद भी कर रहा है, अपना परिवार समाज रहा है, लकिन वो है की उससे बिना जाने बिना समझे इतना कुछ बोल गयी.. प्रियल को अपनी गलती का एहसास हो रहा था.. लकिन अभी वो तुषार से क्या बोले जाकर उससे समाज नहीं ा रहा था…)
सिया- (प्रियल का कन्धा हिला कर) मुम्मा..! मुम्मा.. मुझे भैया के साथ रहना है.. प्लीज वो बक्की लोगो जैसे बुरे नहीं है वो अचे….
तुषार- (अपने हाथ में एक बड़ा सा बैग लेकर आता हुआ) यह लीजिये..! इसमें 5लाख रुपए है.. मैं आपको घर ढूंढ कर दे दूंगा अगर आप चाहो तोह और यह पैसे रखलो.. (सिया की गाल सहलाता हुआ) मैं नहीं चाहता की मेरी प्यारी सिया को कोई तकलीफ हो.. मैंने आपको अपना परिवार मन्ना था लकिन शायद आपको मैं गलत लगा.. ठीक है आपकी मर्जी.. आप जहा भी रहोगी मेरी नजर होगी आप पर, कोई तकलीफ नहीं आने दूंगा आप पर और सिया पर यह वडा रहा…
(प्रियल खामोश हो चुकी थी.. क्या कोई इतनी भी हमदर्दी दिखा सकता है.. अब तोह बिलकुल भी उसके पास शब्द नहीं बचे थे तुषार को कुछ कहने के लिए...)
प्रियल- (अपनी कही हुई बातो को याद कर रोटी हुई) तुषार जी सॉरी…
तुषार- सॉरी.. फॉर व्हाट..? अरे आप रू क्यों....
प्रियल- (हाथ जोड़, तुषार के निचे झुकती हुई) जी मुझे माफ़ करदिजिये तुषार जी.. मुझे आप भी बाकी लोगो के जैसे hi घमंडी और मक्का देख फयदा उठाने वाले लगे थे.. मैं दर गयी थी कही मेरी बची के बारे में आपके पापा या किसी और बड़े आदमी को खबर लगी तोह कही मेरी बची मुझसे अलग न हो जाये इसलिए मैं कही दूर जाना चाहती थी.. मैं आपको जान नहीं पायी.. अपने बताया भी तोह नहीं था की आप इतना ाचा काम कर रहे हो.. वो तोह ाचा हुआ सिया ने मुझे बता दिया आपके बारे में.. मुझे विश्वास है ापर…
तुषार- (उनके हाथ पकड़, सीधा खड़ा पर साइन से लगा के) आप ऐसे हाथ मत जोड़िये प्लीज, ऐसे ाचा लगता है भला.. लकिन सिया ने क्या बता दिया आपको जो अभी आपको मुझपर विश्वास हो गया..?
प्रियल- मैं अभी आपको जान चुकी हु तुषार जी…
तुषार- पता नहीं आप क्या जान चुकी हो मेरे बारे में.. खीर, तोह मतलब आप मेरी प्यारी सीयू को लेकर नहीं जा रही न…
प्रियल- (मुस्कुराती हुई) जी नहीं बिलकुल नहीं.. अभी यह आपके पास hi है…
तुषार- (मुस्कुराता हुआ) हम्म और आप भी न..?
प्रियल- (मुस्कुरा के idher-udher देखती हुई) हाँ मैं भी हु hi.. अगर कोई इतना प्यार लुटता रहा है तोह हमे उससे नाराज नहीं करना चाहिए…
सिया- हाँ मुम्मा मुझे भी भैया अचे लगते…
तुषार- हम्म बीटा लकिन शायद आपकी मुम्मा को मैं ाचा नहीं लगता.. (प्रियल को मुस्कुरा के देखता हुआ) क्यों प्रियल जी…
प्रियल- नहीं तोह.. मैंने अभी कहा न की आपके जैसे काम और कोई नहीं कर सकता तोह इसमें आपको acha-bura जज क्या करना आप तोह बेस्ट हुए न…
तुषार- क्या आप मुझे बताएंगी की सिया में ऐसा क्या खास है जो सब लोग उससे हासिल करना चाहते है और आपके पति को क्यों मारा और किसने मारा..?
प्रियल- जी सब बताती हु.. आप बैठिये.. (सिया को देखत) सिया.. तुम जाओ रूम में…
सिया- नहीं..!! सब मुझे भागते रहते.. मैं नहीं जयुंगी.. मुझे भी सुन्ना…
तुषार- ाचा ठीक है आप ायो मेरे पास…
(तुषार उससे गौड़ में लेकर सोफे पर बेथ जाता है.. लकिन प्रियल कुछ बोलती उससे पहले hi सवाना उनके पास ा जाती है…)
सवाना- बॉस..!!
तुषार- हाँ क्या हुआ..?
सवाना- बॉस जरा 1 मिनट मेरे साथ आना…
तुषार- ठीक है चलो.. (सिया को साइड में बिठा के, प्रियल से) मैं बस अभी आया…
प्रियल- (मुस्कुरा के) Okay, कोई बात नहीं...
(तुषार उठ कर सवाना के साथ पक रूम में चला जाता है…)
तुषार- क्या बात सवाना..?
सवाना- बॉस आपको पता है न सिया ने जग्गू की इन्फो निकली थी.. और लाला की भी…
तुषार- हाँ.. वही चेक करने तोह मैंने बेझा था तुम्हे की उसने यह सब किया कैसे.. तोह कुछ पता चला…
सवाना- बॉस.. अभी जो मैं आपको बताने जा रही हु उससे धयान से सुनने…
तुषार- ोकायय..!!
सवाना- बॉस जग्गू के बस 2 hi काम थे उसके धंदे में.. एक अपनी हवस भुजने के लिए लड़कियों का रपे करना और दूसरा लुटेराबाजी करना.. वो जो भी करता था उससे रिकॉर्ड कर लिया करता था.. और उसकी साडी वीडियोस विथ फुल इन्फो वो उसने *********** नाम के सर्वर पर अपलोड की हुई थी.. यह दुनिआ का सबसे बेस्ट सर्वर है.. लाखो रुपया पैर मंथ देने पड़ते है इस सर्वर के लिए…
तुषार- तोह तुम कहना क्या चाहती हो…
सवाना- बात यह है की जग्गू का अकाउंट जो इस सर्वर पर था, जिससे हैक कर पाना नामुमकिन है, वो हैक हो चूका है.. बॉस अभी यह जग्गू की साडी इन्फो हमारे सर्वर पर अपलोड हो चुकी है…
तुषार- (छोंक के पीछे hat.ta हुआ) मतलब.. मतलब यह सिया ने किया है…
सवाना- उसके सिवा और कोण कर सकता बॉस.. और उसने खुद hi तोह कहा था की उसने जग्गू और लाला दोनों की इन्फो निकल ली है…
तुषार- लकिन ऐसे कैसे हो सकता है.. वो बची है अभी.. इन् सबकी तोह नॉलेज भी नहीं अभी उससे…
सवाना- वही तोह मैं समझने की कोशिश कर रही हु.. यकीन करना मुश्किल हो रहा है.. अभी तोह बॉस एक hi झटका था.. दूसरा झटका यह की लाला एक छोटा सा हिस्सा है एक बहुत बड़े गोल्ड माइंस का…
तुषार- क्याआ..!!!
(इधर शिवं जग्गू के भेज में लाला की हवेली में बैठा था.. अपना मास्क नहीं उतर रहा था वो तककि किसी को शक न हो.. किसी डिवाइस के जरिये वो जग्गू की आवाज में बात कर रहा था.. लाला से उसकी मुलाकात नहीं हुई थी, लाला पहले hi वैभव से मिलने के लिए निकल चूका था.. यह बात शिवं को पता लग चुकी थी.. अभी शिवं अपनी हवेली में लगे पक से कनेक्टेड था.. उसके गले में लगा लॉकेट जो एक डिवाइस था, लाला की हवेली की साडी लाइव फोटागे, आवाज और लोकेशन अभी तुषार के पक में पहुंचा रहा था…)
|बैक तो रूद्र|
(रूद्र अपने बार में बैठा पेज बना के पी रहा था, suit-boot में एक आदमी उसके पास आता है..)
आदमी- तोह Mr.Lucifer.. आपके चाचा चीन के लिए रवाना हो चुके है...
रूद्र- (मुस्कुरा के नशे में उठता हुआ) कितना ाचा बाँदा है रे तू सेल.. (उसके कंडे सेहलता हुआ) अपनी जान पर खेल जाता मुझे बचने के लिए, (गुस्से भरी आखो से) लकिन एक वो अपना चाचा है वो एक बाद एक पीठ पर खंजर खूब रहा है.. (साइड में थूकता हुआ) ऐसे बन्दे को तोह ठहणु है ठाउऊ है... वो कहते है न..
~इज़्ज़त दो उसी को जो हक़दार है,
यु तो मेरा कुत्ता भी वफादार है....
हाहाहाःहाहा... जेट रेडी है..?
आदमी- बिलकुल रेडी है...
रूद्र- चचाआ.. ा रहा हु मैं, बस तेरे पीछे hi हु...
《2141 -वर्ड्स》
तुषार- आप ठीक हो.. और दीदी कहा है…
हर्षिका- (अपनी पेण्ट को नाखून से छिलती हुई) हम्म मैं ठीक हु.. आरुषि भी इधर hi है.. सब सुन रही है…
तुषार- ओह्ह.. Hello दीदी.. कल आता हु मैं.. अभी थोड़ा काम है.. ख्याल रखना अपना.. Bye…
आरुषि- ठीक है.. तू भी ख्याल रख अपना.. Bye…
|अब अग्गे|
तुषार- (फ़ोन को पेण्ट की पॉकेट में रखता हुआ) बस पिने को पानी.. और कुछ नहीं देना इससे…
सफल- हम्म जी बॉस, जितने दिन भी जियेगा बस पानी hi पियेगा…
तुषार- सवाना कैमरा उठाओ और वीडियो एडिट करके मुझे सेंड कार्डो.. और आज से कंप्यूटर रूम सम्भालो तुम.. शिवं क्या कर रहा है देखो.. पुरे शहर पर नजर रखो.. और पता करो की सिया ने जग्गू की इतनी इनफार्मेशन कैसे और कहा से निकली.. तुम्हारे लिए बहुत से काम अग्गे आएंगे, वो वक़्त ऐनी पर तुम्हे बता दूंगा…
सवाना- हम्म बिलकुल बॉस मैं रेडी रहूंगी आपके हर आर्डर के लिए…
तुषार- सफल..!!
सफल- जी बॉस…
तुषार- हथियार लंङे को बोलै था मैंने तुम्हे.. क्या हुआ उसका…
सफल- हथियार मेरे अंडर ा चुके है बॉस.. आप बस बोलो कब उससे हवेली में लाना है…
तुषार- तोह इन्तजार किसका कर रहे हो.. ले ायो हवेली में…
सफल- जी बॉस…
(तुषार हवेली के अंदर चला जाता है.. और दोनों एजेंट्स भी apna-apna काम करने लगते है, हवेली के अंदर जाकर तुषार देखता है की प्रियल और सिया दोनों gum-sum सी होकर सोफे के दोनों किनारे बैठी हुई है…)
तुषार- (सिया का उदास चेहरा देख, खुद भी उदास होता हुआ) सिया..!!
सिया- (मुस्कुरा के तुषार को देखती हुई) तुषार भैया आप ा गए…
तुषार- (उसके साथ जाकर बैठता हुआ) हाँ बीटा मैं ा गया.. क्या हुआ आप इतनी उदास क्यों बैठी थी.. (प्रियल को देख) और आपकी मुम्मा भी..?
सिया- कुछ नहीं तुषार भैया बस ऐसे hi, पापा के बिना कुछ ाचा नहीं लगता है.. (साद फेस करके निचे देखती हुई) ऐसा लगता है जैसे मेरी लाइफ में कुछ adhura-adhura सा है.. और यह अधूरापन कोई पूरा नहीं कर पायेगा, कभी भी.. और मुम्मा को भी ऐसा hi लगता होगा न…
(सिया की बात सुन तुषार उससे साइड से गले लगा लेता है, और उसके सर पर हाथ फेरने लगते है…)
तुषार- ऐसे मत बोलो बीटा मैं हु न आपके साथ, हमेशा…
सिया- (सर उठा के देखती हुई) आप हमेशा मेरे साथ भैया…
तुषार- हाँ बिलकुल.. मैं आपके साथ हु…
प्रियल- (अपनी आखों में ा रखे आंसू साफ़ करती हुई) तुषार जी प्लीज आप हमे झूठे दिलसे मत दीजिये.. हम यह पहले भी बहुत लोगो से सुन चुके है.. और शायद अब हमे आपकी इस हवेली से जाना चाहिए, हम आपको और तकलीफ…..
तुषार- (बिच में हाथ का इशारा कर रोकता हुआ) क्या.. क्या बोलै अपने.. आपको क्या लग रहा है आपका यहाँ रहना मुझे तकलीफ दे रहा है..? किस बात की तकलीफ..?
प्रियल- (गुस्से और आंसू भरी आँखों से) यह अमीर लोगो से नफरत है मुझे.. मेरे पति और मेरी नन्ही सी जान के बाप को इन्ही अमीर लोगो ने छीन लिया मुझसे.. कुछ पैसो का लालच देकर वो मुझसे मेरी बेटी को भी छीनना चाहते थे.. (रोटी होइ) क्या कोई अपनी बेटी का भी सौदा करता है क्या भला.. क्या उन्हें इसमें जान नहीं दिखती सिर्फ पैसा hi दीखता है.. अपनी बची को बचने के लिया मेरे पति ने अपनी जान दे दी.. आपका भी क्या भरोसा जब आपको मेरी बेटी की सचाई पता चले तोह आप भी मेरी बेटी की पावर्स का गलत उसे करो या आपके अंदर भी लालच का कीड़ा दौड़ना शुरू करदे…
सिया- मां आप भैया को ऐसे क्यों बोल रही हो.. वो बहुत अचे भैया हैं…
प्रियल- बीटा तुम्हे नहीं पता इन् अमीरो की इरादे कब बदल जाये.. यह पल में कुछ और पल में कुछ और होते है…
(तुषार कुछ नहीं बोलता बस वह से उठ कर अपने कमरे में चला जाता है…)
सिया- (गुस्से में) मुम्मा..!! अपने ऐसा क्यों बोलै.. भैया नाराज हो गए…
प्रियल- पर बीटा मैं तोह आपकी और अपनी भलाई के लिए hi ऐसा बोली थी.. और कब तक हम इनके पैसो का कहते और उनके घर रहते.. कभी न कभी तोह हमे अपना घर ठिकाना ढूंढ़ना hi है.. और इन् लोगो पे ज्यादा भरोसा नहीं करते….
सिया- बस मुम्मा बहुत हुआ.. आप भैया को कुछ भी बोले जा रही हो.. मैं बताती हु भैया क्या है और इस हवेली में क्या कर रहे है…
प्रियल- क्या मतलब.. क्या है तुम्हारे भैया जरा समजाओ मुझे…
सिया- मुम्मा यह जो है ब्लैक कपड़ो में सवाना दीदी, सफल और शिवं भैया यह है एजेंट्स है.. और यह शायद तुषार भैया के लिए hi काम करते है.. मुम्मा कुछ दिन पहले तुषार भैया की बड़ी बहिन को कुछ गुंडों ने छेड़ा था तोह भैया ने उनका बदला लिया उन् सभी गुंडों को मर दिया भैया ने.. और थोड़े दिन बाद भैया के स्कूल में इनकी जुड़वाँ बहिन को कोई गुंडे उठे के ले गए तोह भैया वापिस उनकी पिटाई करके उन्हें वापिस लेकर ा गए.. और पता है मुम्मा अभी तुषार भैया एक मिशन पर है, वो इस शहर को गुंडों से आज़ाद करवाना चाहते है.. उनके पास बहुत पैसा है.. और पैसे वाले के पास बहुत पावर भी होती है लकिन वो यह काम खुद करना चाहते है.. उनके पापा इंडिया के रिचेस्ट मन में से एक है.. अब बताओ मुम्मा क्या वो अब भी आपको लालची या आपको कही गलत लगते है…
प्रियल- (हैरानी से) क्या..!!
सिया- एक और बात बताती हु मुम्मा आपको.. थोड़े दिन पहले शहर के सबसे बड़े डॉन ने एक दीदी के साथ बहुत गन्दी हरकत की थी और बाद में उन्हें मार भी दिया, तब से भैया रोज ट्रेनिंग ले रहे है तककि वो उनके पकड़ के सबक सीखा सके.. और आज उन्होंने उस डॉन को पकड़ लिया और उससे सजा भी दी, शायद अभी वो इस हवेली में hi होगा या मर गया होगा.. तोह अभी क्या लगता है आपको भैया के बारे में..?
(सिया के बाते और तुषार की सचाई सुन प्रियल के होश उड़द चुके थे.. वो जिससे बुरा भला बोल रही थी वो किसी बागवान से काम नहीं था.. इतनी छोटी उम्र में अपने शहर के लिए लड़ने चला था.. इतनी बड़ी सोच है उसकी, वो उसकी मदद भी कर रहा है, अपना परिवार समाज रहा है, लकिन वो है की उससे बिना जाने बिना समझे इतना कुछ बोल गयी.. प्रियल को अपनी गलती का एहसास हो रहा था.. लकिन अभी वो तुषार से क्या बोले जाकर उससे समाज नहीं ा रहा था…)
सिया- (प्रियल का कन्धा हिला कर) मुम्मा..! मुम्मा.. मुझे भैया के साथ रहना है.. प्लीज वो बक्की लोगो जैसे बुरे नहीं है वो अचे….
तुषार- (अपने हाथ में एक बड़ा सा बैग लेकर आता हुआ) यह लीजिये..! इसमें 5लाख रुपए है.. मैं आपको घर ढूंढ कर दे दूंगा अगर आप चाहो तोह और यह पैसे रखलो.. (सिया की गाल सहलाता हुआ) मैं नहीं चाहता की मेरी प्यारी सिया को कोई तकलीफ हो.. मैंने आपको अपना परिवार मन्ना था लकिन शायद आपको मैं गलत लगा.. ठीक है आपकी मर्जी.. आप जहा भी रहोगी मेरी नजर होगी आप पर, कोई तकलीफ नहीं आने दूंगा आप पर और सिया पर यह वडा रहा…
(प्रियल खामोश हो चुकी थी.. क्या कोई इतनी भी हमदर्दी दिखा सकता है.. अब तोह बिलकुल भी उसके पास शब्द नहीं बचे थे तुषार को कुछ कहने के लिए...)
प्रियल- (अपनी कही हुई बातो को याद कर रोटी हुई) तुषार जी सॉरी…
तुषार- सॉरी.. फॉर व्हाट..? अरे आप रू क्यों....
प्रियल- (हाथ जोड़, तुषार के निचे झुकती हुई) जी मुझे माफ़ करदिजिये तुषार जी.. मुझे आप भी बाकी लोगो के जैसे hi घमंडी और मक्का देख फयदा उठाने वाले लगे थे.. मैं दर गयी थी कही मेरी बची के बारे में आपके पापा या किसी और बड़े आदमी को खबर लगी तोह कही मेरी बची मुझसे अलग न हो जाये इसलिए मैं कही दूर जाना चाहती थी.. मैं आपको जान नहीं पायी.. अपने बताया भी तोह नहीं था की आप इतना ाचा काम कर रहे हो.. वो तोह ाचा हुआ सिया ने मुझे बता दिया आपके बारे में.. मुझे विश्वास है ापर…
तुषार- (उनके हाथ पकड़, सीधा खड़ा पर साइन से लगा के) आप ऐसे हाथ मत जोड़िये प्लीज, ऐसे ाचा लगता है भला.. लकिन सिया ने क्या बता दिया आपको जो अभी आपको मुझपर विश्वास हो गया..?
प्रियल- मैं अभी आपको जान चुकी हु तुषार जी…
तुषार- पता नहीं आप क्या जान चुकी हो मेरे बारे में.. खीर, तोह मतलब आप मेरी प्यारी सीयू को लेकर नहीं जा रही न…
प्रियल- (मुस्कुराती हुई) जी नहीं बिलकुल नहीं.. अभी यह आपके पास hi है…
तुषार- (मुस्कुराता हुआ) हम्म और आप भी न..?
प्रियल- (मुस्कुरा के idher-udher देखती हुई) हाँ मैं भी हु hi.. अगर कोई इतना प्यार लुटता रहा है तोह हमे उससे नाराज नहीं करना चाहिए…
सिया- हाँ मुम्मा मुझे भी भैया अचे लगते…
तुषार- हम्म बीटा लकिन शायद आपकी मुम्मा को मैं ाचा नहीं लगता.. (प्रियल को मुस्कुरा के देखता हुआ) क्यों प्रियल जी…
प्रियल- नहीं तोह.. मैंने अभी कहा न की आपके जैसे काम और कोई नहीं कर सकता तोह इसमें आपको acha-bura जज क्या करना आप तोह बेस्ट हुए न…
तुषार- क्या आप मुझे बताएंगी की सिया में ऐसा क्या खास है जो सब लोग उससे हासिल करना चाहते है और आपके पति को क्यों मारा और किसने मारा..?
प्रियल- जी सब बताती हु.. आप बैठिये.. (सिया को देखत) सिया.. तुम जाओ रूम में…
सिया- नहीं..!! सब मुझे भागते रहते.. मैं नहीं जयुंगी.. मुझे भी सुन्ना…
तुषार- ाचा ठीक है आप ायो मेरे पास…
(तुषार उससे गौड़ में लेकर सोफे पर बेथ जाता है.. लकिन प्रियल कुछ बोलती उससे पहले hi सवाना उनके पास ा जाती है…)
सवाना- बॉस..!!
तुषार- हाँ क्या हुआ..?
सवाना- बॉस जरा 1 मिनट मेरे साथ आना…
तुषार- ठीक है चलो.. (सिया को साइड में बिठा के, प्रियल से) मैं बस अभी आया…
प्रियल- (मुस्कुरा के) Okay, कोई बात नहीं...
(तुषार उठ कर सवाना के साथ पक रूम में चला जाता है…)
तुषार- क्या बात सवाना..?
सवाना- बॉस आपको पता है न सिया ने जग्गू की इन्फो निकली थी.. और लाला की भी…
तुषार- हाँ.. वही चेक करने तोह मैंने बेझा था तुम्हे की उसने यह सब किया कैसे.. तोह कुछ पता चला…
सवाना- बॉस.. अभी जो मैं आपको बताने जा रही हु उससे धयान से सुनने…
तुषार- ोकायय..!!
सवाना- बॉस जग्गू के बस 2 hi काम थे उसके धंदे में.. एक अपनी हवस भुजने के लिए लड़कियों का रपे करना और दूसरा लुटेराबाजी करना.. वो जो भी करता था उससे रिकॉर्ड कर लिया करता था.. और उसकी साडी वीडियोस विथ फुल इन्फो वो उसने *********** नाम के सर्वर पर अपलोड की हुई थी.. यह दुनिआ का सबसे बेस्ट सर्वर है.. लाखो रुपया पैर मंथ देने पड़ते है इस सर्वर के लिए…
तुषार- तोह तुम कहना क्या चाहती हो…
सवाना- बात यह है की जग्गू का अकाउंट जो इस सर्वर पर था, जिससे हैक कर पाना नामुमकिन है, वो हैक हो चूका है.. बॉस अभी यह जग्गू की साडी इन्फो हमारे सर्वर पर अपलोड हो चुकी है…
तुषार- (छोंक के पीछे hat.ta हुआ) मतलब.. मतलब यह सिया ने किया है…
सवाना- उसके सिवा और कोण कर सकता बॉस.. और उसने खुद hi तोह कहा था की उसने जग्गू और लाला दोनों की इन्फो निकल ली है…
तुषार- लकिन ऐसे कैसे हो सकता है.. वो बची है अभी.. इन् सबकी तोह नॉलेज भी नहीं अभी उससे…
सवाना- वही तोह मैं समझने की कोशिश कर रही हु.. यकीन करना मुश्किल हो रहा है.. अभी तोह बॉस एक hi झटका था.. दूसरा झटका यह की लाला एक छोटा सा हिस्सा है एक बहुत बड़े गोल्ड माइंस का…
तुषार- क्याआ..!!!
(इधर शिवं जग्गू के भेज में लाला की हवेली में बैठा था.. अपना मास्क नहीं उतर रहा था वो तककि किसी को शक न हो.. किसी डिवाइस के जरिये वो जग्गू की आवाज में बात कर रहा था.. लाला से उसकी मुलाकात नहीं हुई थी, लाला पहले hi वैभव से मिलने के लिए निकल चूका था.. यह बात शिवं को पता लग चुकी थी.. अभी शिवं अपनी हवेली में लगे पक से कनेक्टेड था.. उसके गले में लगा लॉकेट जो एक डिवाइस था, लाला की हवेली की साडी लाइव फोटागे, आवाज और लोकेशन अभी तुषार के पक में पहुंचा रहा था…)
|बैक तो रूद्र|
(रूद्र अपने बार में बैठा पेज बना के पी रहा था, suit-boot में एक आदमी उसके पास आता है..)
आदमी- तोह Mr.Lucifer.. आपके चाचा चीन के लिए रवाना हो चुके है...
रूद्र- (मुस्कुरा के नशे में उठता हुआ) कितना ाचा बाँदा है रे तू सेल.. (उसके कंडे सेहलता हुआ) अपनी जान पर खेल जाता मुझे बचने के लिए, (गुस्से भरी आखो से) लकिन एक वो अपना चाचा है वो एक बाद एक पीठ पर खंजर खूब रहा है.. (साइड में थूकता हुआ) ऐसे बन्दे को तोह ठहणु है ठाउऊ है... वो कहते है न..
~इज़्ज़त दो उसी को जो हक़दार है,
यु तो मेरा कुत्ता भी वफादार है....
हाहाहाःहाहा... जेट रेडी है..?
आदमी- बिलकुल रेडी है...
रूद्र- चचाआ.. ा रहा हु मैं, बस तेरे पीछे hi हु...
《2141 -वर्ड्स》