TUSHAR EK YODHA 《Incest, Thrill, Magical》 - Page 11 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

TUSHAR EK YODHA 《Incest, Thrill, Magical》

अपडेट-45

तुषार- आप ठीक हो.. और दीदी कहा है…

हर्षिका- (अपनी पेण्ट को नाखून से छिलती हुई) हम्म मैं ठीक हु.. आरुषि भी इधर hi है.. सब सुन रही है…

तुषार- ओह्ह.. Hello दीदी.. कल आता हु मैं.. अभी थोड़ा काम है.. ख्याल रखना अपना.. Bye…


आरुषि- ठीक है.. तू भी ख्याल रख अपना.. Bye…

|अब अग्गे|

तुषार- (फ़ोन को पेण्ट की पॉकेट में रखता हुआ) बस पिने को पानी.. और कुछ नहीं देना इससे…

सफल- हम्म जी बॉस, जितने दिन भी जियेगा बस पानी hi पियेगा…

तुषार- सवाना कैमरा उठाओ और वीडियो एडिट करके मुझे सेंड कार्डो.. और आज से कंप्यूटर रूम सम्भालो तुम.. शिवं क्या कर रहा है देखो.. पुरे शहर पर नजर रखो.. और पता करो की सिया ने जग्गू की इतनी इनफार्मेशन कैसे और कहा से निकली.. तुम्हारे लिए बहुत से काम अग्गे आएंगे, वो वक़्त ऐनी पर तुम्हे बता दूंगा…

सवाना- हम्म बिलकुल बॉस मैं रेडी रहूंगी आपके हर आर्डर के लिए…

तुषार- सफल..!!

सफल- जी बॉस…

तुषार- हथियार लंङे को बोलै था मैंने तुम्हे.. क्या हुआ उसका…

सफल- हथियार मेरे अंडर ा चुके है बॉस.. आप बस बोलो कब उससे हवेली में लाना है…

तुषार- तोह इन्तजार किसका कर रहे हो.. ले ायो हवेली में…

सफल- जी बॉस…

(तुषार हवेली के अंदर चला जाता है.. और दोनों एजेंट्स भी apna-apna काम करने लगते है, हवेली के अंदर जाकर तुषार देखता है की प्रियल और सिया दोनों gum-sum सी होकर सोफे के दोनों किनारे बैठी हुई है…)

तुषार- (सिया का उदास चेहरा देख, खुद भी उदास होता हुआ) सिया..!!

सिया- (मुस्कुरा के तुषार को देखती हुई) तुषार भैया आप ा गए…

तुषार- (उसके साथ जाकर बैठता हुआ) हाँ बीटा मैं ा गया.. क्या हुआ आप इतनी उदास क्यों बैठी थी.. (प्रियल को देख) और आपकी मुम्मा भी..?

सिया- कुछ नहीं तुषार भैया बस ऐसे hi, पापा के बिना कुछ ाचा नहीं लगता है.. (साद फेस करके निचे देखती हुई) ऐसा लगता है जैसे मेरी लाइफ में कुछ adhura-adhura सा है.. और यह अधूरापन कोई पूरा नहीं कर पायेगा, कभी भी.. और मुम्मा को भी ऐसा hi लगता होगा न…

(सिया की बात सुन तुषार उससे साइड से गले लगा लेता है, और उसके सर पर हाथ फेरने लगते है…)

तुषार- ऐसे मत बोलो बीटा मैं हु न आपके साथ, हमेशा…

सिया- (सर उठा के देखती हुई) आप हमेशा मेरे साथ भैया…

तुषार- हाँ बिलकुल.. मैं आपके साथ हु…

प्रियल- (अपनी आखों में ा रखे आंसू साफ़ करती हुई) तुषार जी प्लीज आप हमे झूठे दिलसे मत दीजिये.. हम यह पहले भी बहुत लोगो से सुन चुके है.. और शायद अब हमे आपकी इस हवेली से जाना चाहिए, हम आपको और तकलीफ…..

तुषार- (बिच में हाथ का इशारा कर रोकता हुआ) क्या.. क्या बोलै अपने.. आपको क्या लग रहा है आपका यहाँ रहना मुझे तकलीफ दे रहा है..? किस बात की तकलीफ..?

प्रियल- (गुस्से और आंसू भरी आँखों से) यह अमीर लोगो से नफरत है मुझे.. मेरे पति और मेरी नन्ही सी जान के बाप को इन्ही अमीर लोगो ने छीन लिया मुझसे.. कुछ पैसो का लालच देकर वो मुझसे मेरी बेटी को भी छीनना चाहते थे.. (रोटी होइ) क्या कोई अपनी बेटी का भी सौदा करता है क्या भला.. क्या उन्हें इसमें जान नहीं दिखती सिर्फ पैसा hi दीखता है.. अपनी बची को बचने के लिया मेरे पति ने अपनी जान दे दी.. आपका भी क्या भरोसा जब आपको मेरी बेटी की सचाई पता चले तोह आप भी मेरी बेटी की पावर्स का गलत उसे करो या आपके अंदर भी लालच का कीड़ा दौड़ना शुरू करदे…

सिया- मां आप भैया को ऐसे क्यों बोल रही हो.. वो बहुत अचे भैया हैं…

प्रियल- बीटा तुम्हे नहीं पता इन् अमीरो की इरादे कब बदल जाये.. यह पल में कुछ और पल में कुछ और होते है…

(तुषार कुछ नहीं बोलता बस वह से उठ कर अपने कमरे में चला जाता है…)

सिया- (गुस्से में) मुम्मा..!! अपने ऐसा क्यों बोलै.. भैया नाराज हो गए…

प्रियल- पर बीटा मैं तोह आपकी और अपनी भलाई के लिए hi ऐसा बोली थी.. और कब तक हम इनके पैसो का कहते और उनके घर रहते.. कभी न कभी तोह हमे अपना घर ठिकाना ढूंढ़ना hi है.. और इन् लोगो पे ज्यादा भरोसा नहीं करते….

सिया- बस मुम्मा बहुत हुआ.. आप भैया को कुछ भी बोले जा रही हो.. मैं बताती हु भैया क्या है और इस हवेली में क्या कर रहे है…

प्रियल- क्या मतलब.. क्या है तुम्हारे भैया जरा समजाओ मुझे…

सिया- मुम्मा यह जो है ब्लैक कपड़ो में सवाना दीदी, सफल और शिवं भैया यह है एजेंट्स है.. और यह शायद तुषार भैया के लिए hi काम करते है.. मुम्मा कुछ दिन पहले तुषार भैया की बड़ी बहिन को कुछ गुंडों ने छेड़ा था तोह भैया ने उनका बदला लिया उन् सभी गुंडों को मर दिया भैया ने.. और थोड़े दिन बाद भैया के स्कूल में इनकी जुड़वाँ बहिन को कोई गुंडे उठे के ले गए तोह भैया वापिस उनकी पिटाई करके उन्हें वापिस लेकर ा गए.. और पता है मुम्मा अभी तुषार भैया एक मिशन पर है, वो इस शहर को गुंडों से आज़ाद करवाना चाहते है.. उनके पास बहुत पैसा है.. और पैसे वाले के पास बहुत पावर भी होती है लकिन वो यह काम खुद करना चाहते है.. उनके पापा इंडिया के रिचेस्ट मन में से एक है.. अब बताओ मुम्मा क्या वो अब भी आपको लालची या आपको कही गलत लगते है

प्रियल- (हैरानी से) क्या..!!

सिया- एक और बात बताती हु मुम्मा आपको.. थोड़े दिन पहले शहर के सबसे बड़े डॉन ने एक दीदी के साथ बहुत गन्दी हरकत की थी और बाद में उन्हें मार भी दिया, तब से भैया रोज ट्रेनिंग ले रहे है तककि वो उनके पकड़ के सबक सीखा सके.. और आज उन्होंने उस डॉन को पकड़ लिया और उससे सजा भी दी, शायद अभी वो इस हवेली में hi होगा या मर गया होगा.. तोह अभी क्या लगता है आपको भैया के बारे में..?

(सिया के बाते और तुषार की सचाई सुन प्रियल के होश उड़द चुके थे.. वो जिससे बुरा भला बोल रही थी वो किसी बागवान से काम नहीं था.. इतनी छोटी उम्र में अपने शहर के लिए लड़ने चला था.. इतनी बड़ी सोच है उसकी, वो उसकी मदद भी कर रहा है, अपना परिवार समाज रहा है, लकिन वो है की उससे बिना जाने बिना समझे इतना कुछ बोल गयी.. प्रियल को अपनी गलती का एहसास हो रहा था.. लकिन अभी वो तुषार से क्या बोले जाकर उससे समाज नहीं ा रहा था…)

सिया- (प्रियल का कन्धा हिला कर) मुम्मा..! मुम्मा.. मुझे भैया के साथ रहना है.. प्लीज वो बक्की लोगो जैसे बुरे नहीं है वो अचे….

तुषार- (अपने हाथ में एक बड़ा सा बैग लेकर आता हुआ) यह लीजिये..! इसमें 5लाख रुपए है.. मैं आपको घर ढूंढ कर दे दूंगा अगर आप चाहो तोह और यह पैसे रखलो.. (सिया की गाल सहलाता हुआ) मैं नहीं चाहता की मेरी प्यारी सिया को कोई तकलीफ हो.. मैंने आपको अपना परिवार मन्ना था लकिन शायद आपको मैं गलत लगा.. ठीक है आपकी मर्जी.. आप जहा भी रहोगी मेरी नजर होगी आप पर, कोई तकलीफ नहीं आने दूंगा आप पर और सिया पर यह वडा रहा…

(प्रियल खामोश हो चुकी थी.. क्या कोई इतनी भी हमदर्दी दिखा सकता है.. अब तोह बिलकुल भी उसके पास शब्द नहीं बचे थे तुषार को कुछ कहने के लिए...)

प्रियल- (अपनी कही हुई बातो को याद कर रोटी हुई) तुषार जी सॉरी…

तुषार- सॉरी.. फॉर व्हाट..? अरे आप रू क्यों....

प्रियल- (हाथ जोड़, तुषार के निचे झुकती हुई) जी मुझे माफ़ करदिजिये तुषार जी.. मुझे आप भी बाकी लोगो के जैसे hi घमंडी और मक्का देख फयदा उठाने वाले लगे थे.. मैं दर गयी थी कही मेरी बची के बारे में आपके पापा या किसी और बड़े आदमी को खबर लगी तोह कही मेरी बची मुझसे अलग न हो जाये इसलिए मैं कही दूर जाना चाहती थी.. मैं आपको जान नहीं पायी.. अपने बताया भी तोह नहीं था की आप इतना ाचा काम कर रहे हो.. वो तोह ाचा हुआ सिया ने मुझे बता दिया आपके बारे में.. मुझे विश्वास है ापर…

तुषार- (उनके हाथ पकड़, सीधा खड़ा पर साइन से लगा के) आप ऐसे हाथ मत जोड़िये प्लीज, ऐसे ाचा लगता है भला.. लकिन सिया ने क्या बता दिया आपको जो अभी आपको मुझपर विश्वास हो गया..?

प्रियल- मैं अभी आपको जान चुकी हु तुषार जी…

तुषार- पता नहीं आप क्या जान चुकी हो मेरे बारे में.. खीर, तोह मतलब आप मेरी प्यारी सीयू को लेकर नहीं जा रही न…

प्रियल- (मुस्कुराती हुई) जी नहीं बिलकुल नहीं.. अभी यह आपके पास hi है…

तुषार- (मुस्कुराता हुआ) हम्म और आप भी न..?

प्रियल- (मुस्कुरा के idher-udher देखती हुई) हाँ मैं भी हु hi.. अगर कोई इतना प्यार लुटता रहा है तोह हमे उससे नाराज नहीं करना चाहिए…

सिया- हाँ मुम्मा मुझे भी भैया अचे लगते…

तुषार- हम्म बीटा लकिन शायद आपकी मुम्मा को मैं ाचा नहीं लगता.. (प्रियल को मुस्कुरा के देखता हुआ) क्यों प्रियल जी…

प्रियल- नहीं तोह.. मैंने अभी कहा न की आपके जैसे काम और कोई नहीं कर सकता तोह इसमें आपको acha-bura जज क्या करना आप तोह बेस्ट हुए न…

तुषार- क्या आप मुझे बताएंगी की सिया में ऐसा क्या खास है जो सब लोग उससे हासिल करना चाहते है और आपके पति को क्यों मारा और किसने मारा..?

प्रियल- जी सब बताती हु.. आप बैठिये.. (सिया को देखत) सिया.. तुम जाओ रूम में…

सिया- नहीं..!! सब मुझे भागते रहते.. मैं नहीं जयुंगी.. मुझे भी सुन्ना…

तुषार- ाचा ठीक है आप ायो मेरे पास…

(तुषार उससे गौड़ में लेकर सोफे पर बेथ जाता है.. लकिन प्रियल कुछ बोलती उससे पहले hi सवाना उनके पास ा जाती है…)

सवाना- बॉस..!!

तुषार- हाँ क्या हुआ..?

सवाना- बॉस जरा 1 मिनट मेरे साथ आना…

तुषार- ठीक है चलो.. (सिया को साइड में बिठा के, प्रियल से) मैं बस अभी आया…

प्रियल- (मुस्कुरा के) Okay, कोई बात नहीं...

(तुषार उठ कर सवाना के साथ पक रूम में चला जाता है…)

तुषार- क्या बात सवाना..?

सवाना- बॉस आपको पता है न सिया ने जग्गू की इन्फो निकली थी.. और लाला की भी…

तुषार- हाँ.. वही चेक करने तोह मैंने बेझा था तुम्हे की उसने यह सब किया कैसे.. तोह कुछ पता चला…

सवाना- बॉस.. अभी जो मैं आपको बताने जा रही हु उससे धयान से सुनने…

तुषार- ोकायय..!!

सवाना- बॉस जग्गू के बस 2 hi काम थे उसके धंदे में.. एक अपनी हवस भुजने के लिए लड़कियों का रपे करना और दूसरा लुटेराबाजी करना.. वो जो भी करता था उससे रिकॉर्ड कर लिया करता था.. और उसकी साडी वीडियोस विथ फुल इन्फो वो उसने *********** नाम के सर्वर पर अपलोड की हुई थी.. यह दुनिआ का सबसे बेस्ट सर्वर है.. लाखो रुपया पैर मंथ देने पड़ते है इस सर्वर के लिए…

तुषार- तोह तुम कहना क्या चाहती हो…

सवाना- बात यह है की जग्गू का अकाउंट जो इस सर्वर पर था, जिससे हैक कर पाना नामुमकिन है, वो हैक हो चूका है.. बॉस अभी यह जग्गू की साडी इन्फो हमारे सर्वर पर अपलोड हो चुकी है…

तुषार- (छोंक के पीछे hat.ta हुआ) मतलब.. मतलब यह सिया ने किया है…

सवाना- उसके सिवा और कोण कर सकता बॉस.. और उसने खुद hi तोह कहा था की उसने जग्गू और लाला दोनों की इन्फो निकल ली है…

तुषार- लकिन ऐसे कैसे हो सकता है.. वो बची है अभी.. इन् सबकी तोह नॉलेज भी नहीं अभी उससे…

सवाना- वही तोह मैं समझने की कोशिश कर रही हु.. यकीन करना मुश्किल हो रहा है.. अभी तोह बॉस एक hi झटका था.. दूसरा झटका यह की लाला एक छोटा सा हिस्सा है एक बहुत बड़े गोल्ड माइंस का…

तुषार- क्याआ..!!!

(इधर शिवं जग्गू के भेज में लाला की हवेली में बैठा था.. अपना मास्क नहीं उतर रहा था वो तककि किसी को शक न हो.. किसी डिवाइस के जरिये वो जग्गू की आवाज में बात कर रहा था.. लाला से उसकी मुलाकात नहीं हुई थी, लाला पहले hi वैभव से मिलने के लिए निकल चूका था.. यह बात शिवं को पता लग चुकी थी.. अभी शिवं अपनी हवेली में लगे पक से कनेक्टेड था.. उसके गले में लगा लॉकेट जो एक डिवाइस था, लाला की हवेली की साडी लाइव फोटागे, आवाज और लोकेशन अभी तुषार के पक में पहुंचा रहा था…)

|बैक तो रूद्र|

(रूद्र अपने बार में बैठा पेज बना के पी रहा था, suit-boot में एक आदमी उसके पास आता है..)

आदमी- तोह Mr.Lucifer.. आपके चाचा चीन के लिए रवाना हो चुके है...

रूद्र- (मुस्कुरा के नशे में उठता हुआ) कितना ाचा बाँदा है रे तू सेल.. (उसके कंडे सेहलता हुआ) अपनी जान पर खेल जाता मुझे बचने के लिए, (गुस्से भरी आखो से) लकिन एक वो अपना चाचा है वो एक बाद एक पीठ पर खंजर खूब रहा है.. (साइड में थूकता हुआ) ऐसे बन्दे को तोह ठहणु है ठाउऊ है... वो कहते है न..

~इज़्ज़त दो उसी को जो हक़दार है,

यु तो मेरा कुत्ता भी वफादार है....

हाहाहाःहाहा... जेट रेडी है..?

आदमी- बिलकुल रेडी है...

रूद्र- चचाआ.. ा रहा हु मैं, बस तेरे पीछे hi हु...


《2141 -वर्ड्स》
 
अपडेट-46



~इज़्ज़त दो उसी को जो हक़दार है,


यु तो मेरा कुत्ता भी वफादार है....

हाहाहाःहाहा... जेट रेडी है..?

आदमी- बिलकुल रेडी है...



रूद्र- चचाआ.. ा रहा हु मैं, बस तेरे पीछे hi हु...

|अब अग्गे|

रूद्र- ाचा.!! सुन देव…

देव- हाँ बोल..

रूद्र- मेरी फुलझड़ी कहा है..?

देव- (गुस्सा होकर, ऊँगली दिखता हुआ) तमीज से बात कर, बहिन है वो मेरी…

रूद्र- हाहाहा ाचा.. कहा हाँ वैसे वो…

देव- इधर hi है.. (आवाज लगता हुआ) शिविका..!!

शिविका- (अंदर आती हुई) हाँ भाई.. चले.. वैसे kon-kon जा रहा है…

रूद्र- (मुस्कुराता हुआ उसके पास जाकर) अरे मेरी फुलझड़ी अभी तोह हमने आपको बस देखने के लिए hi बुलाया है…

शिविका- पीछे हैट..!! पीछे.. जिस काम के लिए हम ए है उसपर ध्यान दे…

रूद्र- पर मेरा धयान तोह हट hi नहीं रहा तेरे से…

देव- रूद्र..!!

रूद्र- हम्म..! Okay Okay.. तोह सुनो मैं और मेरी फुलझड़ी जायेंगे उस गुफा में, और देव तुम बस नजर रखो चाचा पर उससे बिलकुल शक नहीं होना चाहिए की उसके जो भी प्लान फ़ैल हो रहे है वो हम hi कर रहे है…

शिविका- पहली बात तोह तू मुझे phuljhadi-phuljhadi बुलाना बंद कर, समझा.. और दूसरी बात यह प्लान तोह शामे hi है पिछली बार की तरह…

रूद्र- प्लान तोह शामे है लकिन एक्शन शामे नहीं होगा न बेबी…

शिविका- क्या कहा बेबी..? तेरे ांडे फोड़ दूंगी मैं.. (गन निकल रूद्र की और पॉइंट करती हुई) अपनी लिमिट में रह वर्ण कही मैं अपनी लिमिट भूल गयी तोह तेरा भूल हाल कर दूंगी…

रूद्र- (मुस्कुराता हुआ) हैए मेरी जंगली बिल्ली.. अभी यह तोह मेरी लिमिट hi है.. तू बोले तोह इससे भी तोड़ दू.. वैसे तू कर कुछ नहीं सकती है यह तू भी जानती है…

शिविका- (पेअर पट्टक, रूम से बहार जाती हुई) कुत्ता.. चल भाई, चलने की तयारी करते है…

देव- हाँ चल…

|इंट्रो टाइम|

देव- (किसी बड़े बॉडीबिल्डर से काम नहीं है तगड़ा सीना, 8 एबीएस, 6.3 हाइट, lambe-lambe बाल, दिखने में किसी राक्षश से काम नहीं लगता, हठी जितना जोर है इसका, बहुत बार रूद्र के हिस्से की गोली खुद खा चूका है, लकिन यह उन् चुनिंदा लोगो मेंसे एक है जो मौत को बोलते हैं चल साइड हट हवा आने दे…)

शिविका- ( यह लड़की एक ब्लैक बेल्ट है, पहले कभी कमांडो रह चुकी है, 4 से 5 फाइटिंग स्किल अपने अंदर दाल चुकी है, किसी से भी भीड़ जाने की बहुत हिम्मत है इसमें, और ऑब्वियस्ली ब्यूटीफुल तोह है hi तभी तोह रूद्र हर वक़्त इससे छेड़ता रहता है…)

(यह दोनों bhai-behan है और रूद्र के बचपन के दोस्त भी है.. तन्नो ने शुरुवात में बहुत से मिशन मिलकर किये थे, लकिन अभी यह दोनों रूद्र के दुश्मन है लकिन रूद्र के चाचा के सामने…)

|बैक तो तुषार|

तुषार- तोह यह गोल्ड की माइनिंग कहा की जा रही है..? और क्या गवर्नमेंट जानती है इसके बारे में..?

सवाना- माइनिंग तोह बॉस इंडिया में hi कही हो रही है, लकिन उसकी एक्सएक्ट लोकेशन नहीं पता.. और गवर्नमेंट जानती है या नहीं यह भी मुझे नहीं पता, हो भी सकता है.. लकिन असली सवाल तोह यह है की यह साडी इनफार्मेशन सिया ने कैसे निकल ली…

तुषार- (सोचता हुआ) हम्म.. सिया एक खास लड़की है.. कुछ तोह बात है उसमे जो लोग उसके पीछे पड़े हुए थे, ाचा तुम देखो अगर कोई और खबर हाथ लगती है तोह…

सवाना- Okay बॉस..!!

(तुषार रूम से बहार आकर वापिस सिया और प्रियल के पास जाकर बेथ जाता है…)

तुषार- (प्रियल को देख) हाँ तोह भाभी जी कहा थी आप..?

सिया- (उठ कर तुषार की गौड़ में बैठती हुई) मैं तोह यहाँ थी बाकी मुझे पता नहीं, हहह…

तुषार- (हस्ता हुआ, कास के सिया को जकड के) उम्माह्ह्ह.. मेरी प्यारी सी जान.. हाँ तोह भाभी…..

प्रियल- (बिच में बोलती हुई) प्लीज तुषार जी.. मुझे भाभी मैट बुलाइये.. (साद होकर) इससे कही न कही मुझे अपने पति की याद आती है.. जो मैं नहीं चाहती की उन्हें वापिस याद करू और रोयु…

तुषार- जी बिलकुल.. आप कहती हो तोह मैं आगे से आपको भाभी नहीं बुलाऊंगा…

प्रियल- (मुस्कुराती हुई) जी थैंक्स…

तुषार- हाँ तोह अभी बताइये आप अपने बारे में, और सिया के बारे में…

प्रियल- हम्म.. तोह सुनिए.. मेरे पति एक साइंटिस्ट थे, वो और उनके दोस्त आर्यन पिछले 15 सालो से एक फार्मूला पर काम कर रहे थे…

तुषार- कैसा फार्मूला..?

प्रियल- ब्रेन की पावर बढ़ा देने वाला फार्मूला…

तुषार- मतलब..?

प्रियल- वो बहुत न असफल हुए लकिन आखिर उनकी 15 सालो की म्हणत और न जाने जितने hi सालो की रिसर्च रंग आयी और उन्होंने यह फार्मूला तैयार कर लिया.. अगर वो फार्मूला किसी इंसान के अंदर इंजेक्ट किया जाये तोह वो इस दुनिया का सबसे ताकतवर इंसान होगा ब्रेन पावर के मुकाबले में जो की इस वक़्त सिया है...

तुषार- क्या ऐसा कोई फार्मूला भी बन सकता है...


प्रियल- साइंस की दुनिया में इम्पॉसिबल शब्द सुन्ना है कभी.. मेरे पति ने इस दुनिया की सबसे बड़ी पावर का अविष्कार किया था.. लकिन.. लकिन उन्हें शायद यह करना नहीं चाहिए था.. जिसकी वझे से हमारी फॅमिली और यह दुनिया खतरे में ा जाएगी...

तुषार- क्या मतलब करना नहीं चाहिए था.. और कैसा खतरा..?




प्रियल- देखा.. देखा दिया था आर्यन ने हमे.. और खतरा hi है न तुषार जी, हमारा दिमाग और jeev-jantu से तेज निकला तोह हमने उन्हें गुलाम बनाइये अपना, फिर चाहे वो कितने hi ताकतवर क्यों न हो लकिन हमारे दिमाग के आगे आज वो शांत होकर बैठे है.. और सोचो की अगर एक इंसान का दिमाग हम बाकी सभी से तेज काम करने लगे तोह वो kya-kya तबाही ला सकता है...

तुषार- हम्म ठीक कहा.. लकिन धोका..? वो क्यों दिया आर्यन ने..?

प्रियल- एक रात आर्यन लैब में आया और jaldi-jaldi फार्मूला ढूंढ़ने लगा लकिन अचानक उससे कोई चीज़ निचे गिर जाती जिसका आवाज सुन मैं और मेरा पति लैब में ा पहुंचे.. हमे देख वो घभ्रा गया, पूछने पर पता चला की वो फार्मूला ढूंढ रहा है.. वो रोने लगा और कहने लगा की मुझे फार्मूला देदो मेरी फॅमिली को कुछ गुंडों ने किडनैप कर लिया है और वो फार्मूला मांग रहे है.. लकिन मेरे पति ने फार्मूला नहीं दिया, वो गलत हाथ लगते hi दुनिया का विनाश कर सकता था.. इसलिए वो नहीं मैंने.. लकिन अचानक आर्यन ने गन निकल ली इससे पहले की (और वो रोने लगी..)

सिया- (उठ के प्रियल के पास जाती हुई) मुम्मा.. नहीं रट न.. (उसके ांसो पोंछती हुई) गन्दी दिखती हो आप ऐसे.. हहै.. चुप करो प्लीज…

तुषार- देखिये प्रियल जी आप रोइये मत प्लीज.. और आगे क्या हुआ था बताइये…

प्रियल- (अपने आप को संभालती हुई) हम्म.. अचानक आर्यन ने गन निकल के मेरे पति की और निशाना कर दिया.. इससे पहले की वो शूट करता (वापिस ांसो बहती हुई) मैंने, मैंने पीछे से आर्यन की पीठ में चाकू मार दिया.. वो, वो वही गिर के मर गया.. (अपनी आँखे साफ़ करती हुई) हमने उसकी लाश को के घर के पीछे दफना दिया.. हमे दुःख था की उसकी फॅमिली को उन् गुंडों ने मार दिया होगा.. लकिन हम गलत थे उसकी फॅमिली बिलकुल sahi-salamat थी…

तुषार- तोह मतलब आर्यन झूठ बोल रहा था वो खुद फार्मूला हासिल करना चाहता था.. लकिन क्यों, और वो तब भी तोह हासिल कर सकता था जब यह फार्मूला बन के तैयार हुआ था.. अचानक उसके दिमाग में यह बात क्यों आयी..?

प्रियल- शायद वो किसी के बहकावावे में आकर लालच का शिकार हो गया था.. और एक दिन सिया स्कूल गयी लकिन वापिस घर नहीं आयी.. शाम बीत गयी, रात बीत गयी.. हम हर जगह dhund-dhund कर पागल हो गए, roo-roo कर हमारा बुरा हाल था की हमारी फूल सी बची कहा चली.. लकिन अगली सुभे मेरे पति के फ़ोन पर एक कॉल आया.. बात करने पर पता चला की इसने सिया को किडनैप कर लिया है और अगले 12 घंटे तक फार्मूला की मांग कर रहा है.. अगर उससे फार्मूला नहीं दिया तोह वो मेरी बची को…..

तुषार- हम्म.. तोह क्या किया अपने.. फार्मूला उससे दे दिया..?

प्रियल- नहीं.. हम ऐसा बिलकुल नहीं कर सकते थे.. लकिन मेरे पति बहुत हिम्मत वाले थे, वो अकेले hi उनसे लड़ने चले गए.. उन्होंने कॉल ट्रेस किया और अपने बनाए हुए खास गैजेट्स और गन्स साथ ले गए.. मैं घर में बैठी बागवान से बस यही पार्थना कर रही थी की मेरे दोनों दिल के टुकड़े sahi-salamat घर वापिस ा जाये, और बागवान ने मेरी सुन ली.. करीब 5 घंटे बाद मेरे पति उन् कुछ गुंडों को मार कर सिया को छुड़ा कर वापिस घर ले ए…

तुषार- तोह पता चला की कोण था जिसने सिया का किडनैप किया और वो फार्मूला हासिल करना चाहता है..?

प्रियल- वो कोई इंडिया का आदमी नहीं है.. उस का वो एक बहुत बड़ा साइंटिस्ट है.. जो अभी दुनिया की भलाई करने के बजाये दुनिया को हासिल करना चाहता है.. मेरे पति को अब दर था की वापिस कही हम पर हमला न हो इसलिए उन्होंने वो फार्मूला मिटता दिया लकिन उससे पहले उन्होंने सिया में इंजेक्ट कर दिया, उन्हें लगता था की हमारी सिया कोई गलत उसे थोड़ी करेगी इस पावर का, लकिन यह उनकी सबसे बड़ी गलती थी.. शायद वो भूल गए की हमारी सिया भले hi इस पावर का गलत उसे न करे लकिन सिया का तोह कोई गलत उसे कर सकता है न.. पता नहीं कैसे जब यह बात उस साइंटिस्ट को पता चली तोह वो बहुत गुस्से में ा गया.. उससे यकीन था की अपने इतने साल की म्हणत कोई यू hi बर्बाद नहीं करेगा, उससे शक्क होने लगा की फार्मूला कही हम तीनो में से किसी में तोह नहीं इंजेक्ट किया, जिसके बाद उसने हमे वापिस ढूंढा चालू कर दिया.. बस तब से हम भाग hi रहे है.. लकिन एक दिन हम पकडे गए हमे एक फार्महाउस में बांध दिया.. लकिन मेरे पति के पास एक गैजेट था जिससे हम खुद को आजाद करवा किसी तरह वह से बाघ निकले.. हमे वह एक बाइक कड़ी मिल गयी थी जिससे हम वह से निकल तोह गए लकिन जो थोड़ी देर पहले हमने बेहोशी वाला पानी दिया गया उसका असर होना शुरू हो गया.. हमे पता hi नहीं चला की कब हम चलती बाइक पर बेहोश हो गए और गिर गए.. सिया ने पानी नहीं पिता था, इसलिए यह बेहोश नहीं हुई, लकिन बागवान का शुक्र है की मेरी बची को कोई छोट नहीं आयी और वो सही सलामत थी आपके पास…

तुषार- ाचा.. तोह यह हुआ था उस दिन रोड पे.. लकिन वो हॉस्पिटल वह वो गुंडे वापिस कैसे…

प्रियल- पता नहीं कैसे लकिन उस साइंटिस्ट की पहुँच बहुत ऊपर तक है.. यहाँ के bade-bade डॉन से उसने हाथ मिला रखा है.. उसने दुबारा हमारा पता लगा लिया और हॉस्पिटल किसी डॉन के आदमी बेझ दिए.. (वापिस आँखे गेली करती हुई) बाकी का तोह आप जानते hi हो.. वो दिन मेरे पति का आखरी दिन था.. अब तोह बस अपनी बची के सहारे hi जी पयूंगी…

तुषार- प्रियल जी मैं आपके पति को तोह वापिस नहीं ला सकता लकिन एक वडा है मेरा की जब तक जिन्दा हु आपको और सिया को कोई छू भी लेगा तोह उसकी गर्दन काट के दूसरी तरफ लगा दूंगा.. विश्वास रखिये मुझपर और किसी बात की चिंता मत कीजिये…

प्रियल- हम्म.. वो तोह पूरा विश्वास हो गया है ापर इसलिए तोह इस दुनिया की सबसे बड़ी पावर आपकी गौड़ में बिठा राखी है…

सिया- (खुश होकर) मैं दुनिया की सबसे पावरफुल गर्ल हु..?

तुषार- (उसकी गाल पर किश करता हुआ) हाँ सबसे पावरफुल और सबसे प्यारी भी…

सिया- (घूम के तुषार के गले लगती हुई) आप भी प्यारे हो भैया…

तुषार- अरे मैं कोई pyara-vyara नहीं हु यार.. मैं बहुत खतरनाक आदमी हु…

प्रियल- (हस्ती हुई) आदमी..? बचे हो आप अभी बचे…

तुषार- ाचा..! बचा हु मैं..? दिखाऊंगा कभी…

प्रियल- (मुस्कुराती हुई) दिखाओगे.. क्या दिखाओगे..?

तुषार- यही की में बचा नहीं हु…

प्रियल- हम्म.. चलो देखते है फिर की आप कब क्या दिखते हो…

तुषार- (बात बदलता हुआ) ाचा सिया आप बताओ की आपको हैकिंग आती है.. अपने जग्गू और लाला दोनों डॉन का जितना भी डाटा ………… सर्वर पर था सारा हैक करके हमारे सर्वर पर दाल दिया.. कैसे..?

सिया- हैकिंग तोह मुझे आती है पापा ने सिखाई थी.. बहुत इजी है यह तोह…

प्रियल- ाचा तोह मैडम ने आते hi अपने कारनामे शुरू कर दिए…

सिया- मुम्मा मैंने ज्यादा कुछ नहीं किया…

तुषार- जो भी किया अपने मेरे बहुत काम का किया है…

सिया- भैया मैं आगे भी आपकी हेल्प करुँगी…

तुषार- हाँ क्यों नहीं.. इतनी स्मार्ट गर्ल मेरे पास है और मेरी हेल्प करना चाहती है तोह मुझे और क्या चाहिए…

प्रियल- (उठती हुई) चलो मैं डिनर बनाने की तयारी करती हु, आपको भूख लगी होगी…

तुषार- Okay.. सवाना को बुलाता हु आपकी मदद कर देगी…

प्रियल- ठीक है…

सिया- भैया आपकी गुड़िया से कब मिला रहे हो.. मुझे मिलना है उससे…

तुषार- ठीक है कल चलते है मिलने उससे…

सिया- (अपने छोटे से फेस पे बड़ी सी स्माइल आती हुई) सच्ची..!! थैंक्यू भैया…

|बैक तो Dr.Locket|

(यह बाँदा अपनी लोकेशन बदल चूका था.. एक छोटे से गेराज से निकल कर अभी यह एक छोटे से घर में सेट हो चूका था.. लकिन इसका सामान वैसे hi बिखरा पड़ा था…)



डॉ. लॉकेट- (कंप्यूटर में cheed-chaad करता हु) ऐसा कैसे हो सकता है.. (आसमान की और लगा रखे एक बड़े से टावर की और देखता हुआ) यह.. यह काम क्यों नहीं कर रहा.. मैंने सिग्नल तोह बेज दिया है, कोई जवाब क्यों नहीं ा रहा उनका...

《2200-वर्ड्स》
 
अपडेट-47





(यह बाँदा अपनी लोकेशन बदल चूका था.. एक छोटे से गेराज से निकल कर अभी यह एक छोटे से घर में सेट हो चूका था.. लकिन इसका सामान वैसे hi बिखरा पड़ा था…)

डॉ. लॉकेट- (कंप्यूटर में cheed-chaad करता हु) ऐसा कैसे हो सकता है.. (आसमान की और लगा रखे एक बड़े से टावर की और देखता हुआ) यह.. यह काम क्यों नहीं कर रहा.. मैंने सिग्नल तोह बेज दिया है, कोई जवाब क्यों नहीं ा रहा उनका...



|अब अग्गे|

डॉ. लॉकेट- (कीबोर्ड में कुछ टाइप कर देखता हुआ) मेरा सिग्नल तोह पहुंचा hi नहीं.. लकिन कैसे..? किसने रोका.. और, और हु लोग तोह ा चुके हैं तोह.. तोह कहा हैं वो..? कहा गए…

|बैक तो रूद्र|

(रूद्र, शिविका और देव तीनो जेट पर अभी चीन की और जा रहे की रस्ते में उन्हें आसमान में कुछ चमकता हुआ कोई ऑब्जेक्ट धरती की और आता नजर आया.. यह बहुत दूर था और छोटा भी लग रहा था इसलिए कोई धयान से देख नहीं पाया…)

देव- (हैरानी से) यह क्या था..?

शिविका- (अंदाज़ा लगाती हुई) कोई उफौ..?

रूद्र- हाँ.. वही होगा.. आज संडे है और फूफाजी की शादी भी तोह सोच रहे होंगे की वही अटेंड करने आये.. भोसड़ीवाले एलियन...

शिविका- लकिन लग तोह उफौ hi रहा था…

रूद्र- (अपना माथा पत्ता हुआ) पहले भी आते देखा है क्या जो वापिस देख कर बोल रही की वही है…

शिविका- तेरे से तोह बात करना hi बेकार है…

|नेक्स्ट डे, बैक तो तुषार|

(अगली सुबह तुषार, सिया और सवाना निकल पड़े हर्षिका के घर की और.. उसने अन्निका और तान्या को भी कॉल कर वही बुला लिया था.. तीनो अभी कार से जा रहे थे…)

तुषार- (बहार एक Ice-Cream की शॉप देख कार रोकता हुआ) Ice-Cream खाओगी सिया...

सिया- (खुश होती हुई) हाँ भैया.. मैं खाउंगी…

तुषार- चलो फिर चलते है, वो रही शॉप, ा जाओ.. (पीछे बैठी प्रियल को देखता हुआ) आप ा रही हो या आपके लिए यही ले आयु..?

प्रियल- नहीं नहीं मुझे नहीं Ice-cream.. आप दोनों खालो जाकर…

तुषार- अरे आयो न.. मैं और मेरी गुड़िया इधर बहुत बार आये है, बहुत अछि होती है इधर की Ice-cream…

प्रियल- ाचा ठीक है चलिए…

(तीनो कार से निकल शॉप में चले जाते है और 2 Ice-cream तुषार ने, 1 प्रियल ने खाई, और 3-3 Ice-cream सिया के खाई या कह लो नहीं कुछ कह नहीं सकते.. खाने के बाद तीनो वापिस आकर कार में बेथ गए.. तुषार कार स्टार्ट करता उससे पहले hi ‘तततततहहहहहाआआस्क्सक्स’ एक जोर से आवाज हुई और कार का विंडशील्ड गिलास चकना चुर्र हो गया.. उसकी वझे थी एक की एक बॉल जो जोर से आकर कार के पिछले गिलास के bicho-bich लगी और गिलास टूट गया.. प्रियल पिछली सेट पर बैठी थी जिससे उसकी गार्डन पर कुछ हलके टुकड़े लग गए जिससे खून भी बहने लगा…)

प्रियल- (हल्का दर्द बर्दाश करती हुई) आआह्ह्ह ससीई ओह्ह.. (अपनी गार्डन पर हाथ फेर) यह क्या हुआ…

सिया- (चिंता में) मुम्मा.. मुम्मा आप ठीक हो, भैया मुम्मा को लग गयी, कैसे लगी..?

तुषार- (कार के एक बॉक्स से कॉटन निकल प्रियल को देता हुआ) आप यह halka-halka बहते खून को साफ़ कीजिये.. (कार के बैक व्यू मिरर में देखता हुआ, अपनी गन निकल) मैं जरा देख के आता हु क्या हुआ…

(तुषार कार से बहार निकल पीछे जाता है जहा वही 4 लड़के खड़े थे जो उस दिन हवेली के पास अपनी कार शिवं से तुड़वा कर गए थे.. 3-4 लड़के और भी थे उनके साथ जो तुषार की उम्र के hi थे.. 2 के हाथ में बेसबॉल, और बात था.. वो सभी तुषार की और बढ़ने लगते है…)

लड़का.1- हाँ बे.. बॉल इधर ला.. शायद तेरी गाड़ी में चली गयी होगी, चेक कर.. ओह्ह एक मिनट -एक मिनट चेक क्या करना इतना बड़ा होल जो हो चूका है वो क्या काम सबूत है.. हाहाहाःहाहा…

(सभी लड़के उसकी बात पर हसने लगते है लकिन तुषार तोह पहले hi गुस्से में खड़ा था…)

लड़का.2- जा बे जा, बॉल ला इधर.. खड़ा क्या देख रहा है…

तुषार- (रोड के साइड में लगी विकेट को देख) यह.. इधर रोड के बिच में क्यों खेल रहे हो.. और मेरी कार के गिलास तोड़ने के पैसे कोण देगा.. और अंदर को एक लड़की को लग गयी है उसका क्या..?

लड़का.3- (आगे आता हुआ) च च मम मम छू छू मत कर ज्यादा जाकर बॉल लेकर आ वर्ण यह बात देख रहा, एक जबड़े पर ऐसा पड़ेगा की सरे दन्त बहार ा जायेंगे…

(बस अभी यह तुषार की बर्दाश के बहार था, वो अपनी कमर के साइड से गन निकल के 2 कदम आगे हो जाता है, गन देख के सबकी के सभी लड़को की फैट के हाथ में ा गयी और निचे भी गिर गयी.. सभी ने 2-2 कदम पीछे ले लिए…)

तुषार- एक तोह सालो गाड़ी का गिलास तोड़ दिया ऊपर से अपनी आकद दिखते हो.. आयो अग्गे जिससे बॉल चाहिए…

लड़का.1- (थोड़ी हिम्मत दिखा के आगे बढ़ता हुआ) आयी, आइये समझता क्या है अपने आपको.. गन दिखता है हमे.. तू चला तोह पायेगा नहीं.. यह गन है कोई तेरा लुंड नहीं जिससे 2 मिनट में हिला के तू अपना बेज निकल लेगा… हाहाहाःहाहा…

(सब उस लड़के की बात सुन हसने लगे और उनमें भी हौसला ा गया.. वो आगे आकर उसके साथ खड़े हो गए…)

तुषार- तेरे लुंड में भी लगता है दम नहीं है जो बस 2 मिनट हिला के hi दम तोड़ देता है…

(इतना बोल तुषार ने अपने गन की गोली उस लड़के के पैरो के bicho-bich चलदी.. गोली चलते hi बाकी के सरे लड़के dur-dur हो गए लकिन वो लड़का वही का वही जैम कर रह गया.. उसकी टंगे thar-thar कम्पनी लगी…)

तुषार- सालो जुबान मत लड़ाओ मुझसे.. (और एक गोली साइड में कड़ी विकेट्स पर लगाडी जिससे एक विकेट के 2 टुकड़े हो गए..) यह सब आज के बाद इधर नजर नहीं एना चाहिए…

लड़का.1- (दर से होंठ kam-kapata हुआ) भ. भाई. भाई. भाई.. आगे से हम भी आपको कभी रोड पर नहीं दिखेंगे, खेलना तोह दूर की बात.. (अपने साथियों से) च. चलो बे.. निकालो जल्दी.. और और हाँ जितने पैसे है तुम लोग के पास निकल के मुझे दो…

(सबकी लड़के अपने साथ जितने पैसे लाये थे सब उस लड़के को दे दिया…)

लड़का.1- (डरता हुआ पैसे गईं तुषार के पास जाता हुआ) यह यह लो भाई 15000 है.. शायद इतने में आपका नया गिलास लग जाये…

(तुषार ने उससे वो पैसे लिए लकिन पैसे लेते hi एक थप्पड़ कास के उसकी गाल पर मर दिया…)

तुषार- यह जो तेरे गिलास तोड़ने की वझे से अंदर किसीको छोट लगी उसके लिए.. चल अभी निकल…

(वो लड़का अपनी गाल पकड़ वापिस अपने साथियों के पास चला गया.. ( लड़का.3- भाई बेकार में पैसे दे दिया और थप्पड़ खा लिए, इतने लोग थे हम अगर ek-ek उसको घेरर लेता.. ) यह सब तुषार ने सुन लिया था उसने ऊपर आसमान की और गन पॉइंट की और गोली चलदी जिससे वो लड़का bolta-bolta रुक गया और बाकी सभी भी कुछ hi सेकण्ड्स में यहाँ से rafa-dafa हो गए…)

तुषार- (वापिस आकर प्रियल की सीट की विंडो खोलता हुआ) आगे होइए थोड़ा सा…

(प्रियल थोड़ा सा आगे खिसक जाती है तोह तुषार वह साथ बेथ जाता है और कार की सेट के साइड से फर्स्ट अिध बॉक्स निकल लेता है और एक पिन टूल से halke-halke गिलास के जो टुकड़े प्रियल की गार्डन में लगे थे उन्हें निकलने लगता है, और sath-sath में बहते खून को भी साफ़ करने लगता है…)

प्रियल- (अपने होंठो को दांतो में दबा दर्द बर्दाश करती हुई) ाःह हुऊ आह्हः.. ोूच.. छ्हम्म…

(तुषार हलके हाथो से प्रियल की गार्डन पर लगे कुछ chote-chote गिलास के तड़के निकल रहा था और कॉटन से खून को साफ़ कर रहा था.. प्रियल तुषार को ऐसे करते देख उसमे खो सी गयी थी.. उसको दर्द की जगह एक सकूं मिल रहा था तुषार को देख…)

तुषार- (बैंडेज लगता हुआ) हम्म.. बस हो गया.. 2-3 hi halke-halke तड़के थे, अभी मैंने निकल दिए.. अब दर्द तोह नहीं हो रहा न आपको..?

प्रियल- (अपनी गार्डन पर हाथ फेरती हुई) नहीं अभी ठीक है.. थैंक्यू तुषार जी.. (सिया को देख) अरे बीटा आप क्यों रू रही हो…

सिया- (अपने आंसू साफ़ करती हुई) मुम्मा आपको छोट लग गयी.. इसलिए मैं रोई.. आप सचमे ठीक हो न…

प्रियल- (उसको गले लगाती हुई) हाँ मेरा बचा मैं बिलकुल ठीक हु.. (तुषार को देख) आपके यह तुषार भैया हैना यह बहुत अचे है देखो मुझे ठीक कर दिया.. अभी रोना नहीं, बहुत रोटी हो तुम…

सिया- Okay…

प्रियल- (तुषार को देख) वैसे यह गोली चलने की आवाज कहा से आ रही थी, अपने चली क्या..?

तुषार- (कार से बहार निकल ड्राइविंग सीट पर जाता हुआ) हाँ मैंने hi चली.. कुछ बदमाश लड़के थे.. हम्म तोह चले अभी…

सिया- (पीछे वाली सीट से आगे वाली सीट तक बिच मेंसे निकलती हुई) हाँ चलो चलो चालूओ…

|बैक तो रूद्र|

(रूद्र एंड टीम अभी चीन लैंड हो चुके थे, और कार से चीन के सबसे विशाल जंगल की और जा रहे थे.. यह जंगल खुद में hi एक राज़ था, यहाँ दुनिआ से बेखबर बहुत से धंदे चल रहे थे.. लकिन चीन रूद्र का अपना घर था.. यह वो जगह थी यहाँ रूद्र लूसिफ़ेर बना था.. यहाँ से लूसिफ़ेर का खूफ पेद्दा होना शुरू हुआ था, यहाँ के लोगो ने देखा था की कोई मौत को इतना बटेर भी बना सकता है.. लकिन यह लूसिफ़ेर कब, क्यों, किसलिए बना..?)

|बैक तो तुषार|

(तुषार की कार हर्षिका के घर पहुँच चुकी थी.. तुषार उतर कर दुर्बल बजता है, यहाँ कुछ hi देर में आरुषि आकर दूर खोलती है…)

आरुषि- (खुश होती हुई) ारी ा गया तुषार…

तुषार- जी दीदी.. कैसी हो आप..?

आरुषि- मैं बिलकुल ठीक.. अजजा अंदर…

(तुषार अंदर चला जाता और आरुषि दूर बंद करने लगती है तोह पीछे प्रियल और सिया को देख रुक जाती है..)

प्रियल- (मुस्कुराती हुई) हमे नहीं ऐनी डौगी अंदर..?

आरुषि- जी आप कोण हो.. मैंने पहचाना नहीं…

तुषार- (पीछे से आवाज देता हुआ) अरे पहचानोगी कैसे दीदी जब तक जानन्योगी नहीं.. (प्रियल को देख) अरे आप खड़े क्या हो अंदर ायो…

(दोनों अंदर ा जाते है और आरुषि भी कन्फ्यूज्ड सी हुई दूर बंद कर उनके पास ा जाती है…)

आरुषि- यह कोण है दोनों तुषार..?

तुषार- (idher-udher देख हर्षिका को ढूंढ़ता हुआ) हर्षिका जी किधर है..?

आरुषि- उसको बाद में मिल लेना पहले यह बता जो मैं पूछ रही हु…

तुषार- ारी मैं कह रहा हु की उन्हें भी साथ में hi बता दूंगा न.. स्टोरी काफी लम्बी होगी तोह… (हर्षिका को आती देख) ओह्ह आप खुद hi ा गयी, चलो ाचा है…

हर्षिका- (अपनी मुस्कान छुपाती हुई) hello.. कब ए आप…

तुषार- जी बस abhi-abhi.. तोह…

हर्षिका- (प्रियल और सिया को देख) यह दोनों कोण है..?

तुषार- (अपने माथे पे हाथ मरता हुआ) वही तोह, वही तोह बताने वाला हु.. ाचा बैठो सभी...

(फिर तुषार शुरू करता है उस दिन हुए प्रियल की फॅमिली के एक्सीडेंट से लेकर अब तक की पूरी स्टोरी सुनाने में.. इसी में 1 घंटा निकल गया, लकिन सिया एक स्पेशल गर्ल है, और कैसे है यह सब तुषार ने नहीं बताया.. पूरी कहानी सुनने के बाद आरुषि, हर्षिका के sath-sath प्रियल और सिया की भी अपने अतीत को वापिस याद कर आँखे भर आयी…)

हर्षिका- (सिया का मस्सों चेहरा देख) इतनी छोटी सी बची है.. कैसे रहेगी यह अपने पापा के बिना, मैं समाज सकती हु दिलासा देना आसान होता है लकिन जिसपर गुजार रही हो वही जनता है यह तकलीफ…

आरुषि- कोई बात नहीं बीटा, और दीदी आप भी हम हैं आपके साथ.. कभी भी आपको कोई चीज़ की जरुरत हो तोह हमे बताना.. (मुस्कुरा के सिया को देख) Okay बीटा…

तुषार- उसकी जरुरत नहीं पड़ेगी दीदी.. मैंने इन्हे अपनी फॅमिली का एक हिस्सा मैं मिला लिया है.. यह अब हमारे साथ hi रहेंगे.. मैंने ठीक किया हैना दीदी…

आरुषि- क्या.. सचमे.. यह तोह बहुत अछि बात है तुषार बिलकुल ठीक किया तूने...

(((((Ting-Tong)))))

हर्षिका- कोण आया होगा.. रुको मैं देख के आता हु…

आरुषि- (मुस्कुराती हुई) तुषार..!!

तुषार- हाँ दीदी..?

आरुषि- रेडी रह…

तुषार- रेडी.. किस लिए..?

आरुषि- (दूर की और देखती हुई) वो देख…

(तुषार ने दूर की और देखा और पाया की अन्निका भगति हुई उसकी और ा रही है…)

अन्निका- (चिलाती हुई) भाआईईएईयाआआ…

तुषार- ारी बापरे… ओह्ह्ह आठ…

(और यह अन्निका कूद गयी सोफे पे तुषार के साथ…)

अन्निका- (उसके पुरे फेस पे किश करती हुई) उउउउम्मा उम्म्मा उम्म्म उउउउउम्मम्मा उम्मम्मम्हहः.. (और यह तोह उसने तुषार की एक गाल अपने दांतो से पकड़ के खींच hi ली) uuuuuuuuuummmmmmmmmmmmmaaaaaaaaahhhhhhhhh….

तुषार- (चीला के) आआआयीयईईईईई.. (मुश्किल से बोलता हुआ) अले चोल भी दे…

(तुषार बेसहारा सा पड़ा हुआ था और बाकी सभी का hass-hass के पेट दुःख रहा था, बस एक सिया hi थी जो अन्निका को अजीब सा देख रही थी…)

आरुषि- (हस्ती हुई, अन्निका का हाथ पकड़ हटती हुई) ारे बस कर.. क्या कच्चा चबा जाएगी.. छोड़ अभी उससे…

अन्निका- (उठी हुई, साइड में बेथ कर, मुस्कुराती हुई) कैसे हो प्यारे भैया.. मेरी याद न आयी इतने दिन तक.. एक बार भी फ़ोन नहीं किया मुझे.. (सिया को देख एकदम चुप होकर उससे गोरर से देखती हुई) यह कोण है..?

सिया- तुम गुड़िया हो..?

अन्निका- (तुषार को साइड से गले लगाती हुई) हाँ मैं भैया की गुड़िया हु.. लकिन तुम कोण हो.. पहले तोह कभी नहीं दिखी…

सिया- मैं सिया हु.. मैं आज hi आयी हु.. तुषार भैया मुझे लेकर ए…

अन्निका- (मुँह खोल हैरानी से, तुषार के मुँह को देखती हुई) भैया..? यह आपको भैया क्यों बुला रही.. (सिया को देख) देखो भैया को भैया बस मैं बुला सकती हु.. और कोई नहीं बुला सकता.. उफ़ मुझसे तोह यह बर्दाश hi नहीं हो रहा.. आगे से मत बुलाना.. समझी तुम...

सिया- (उदास होती हुई) पर क्यों.. मैं तोह उन्हें तुषार भैया hi बुलाती हु पहले भी…

अन्निका- (आँखे दिखती हुई) पर अब से नहीं बुलाना.. क्युकी अब मैं ा गयी हु.. यह पगले भैया तोह मेरे पीछे पता नहीं kya-kya करते है.. हूह्फ्फ पता नहीं क्या होगा आपका मेरे बिना…

सिया- तुषार भैया यह….

अन्निका- (बिच में डंडी हुई) फिर भैया बोल रही है तू…..

आरुषि- (बिच में उसको रोकती हुई) ारी रुकजा मेरी माँ.. आते hi बवाल शुरू कर दिया तूने.. मुझसे तोह मिल ले पहले…

अन्निका- ओह्ह hello कैसी हो दीदी…

आरुषि- बस वही से hello.. और तुषार से तोह ऐसे लिपट रही थी जैसे जन्मो बाद मिली हो…

अन्निका- (अपनी ऊँगली से गिणती हुई) आपको नहीं पता दीदी मेरा भैया के बिना एक दिन एक जनम जैसा लगता है.. और अभी तोह इतने दिन निकल गए इनके बिना…

तान्या- (एक भरी सा बैग लेकर अंदर आती हुई, तुषार से) आठ.. आबे ू कुत्ते इन लड़कियों के बिच बेहटा क्या गप्पे मार रहा और है रहा है, इधर मैं इतना भरी बैग अकेली उठा कर ला रही हु.. मद्दद नहीं कर सकता था…

तुषार- (निचे देख न में अपनी गार्डन हिलता हुआ) ा गयी यह.. आते hi जानवर बना दिया… उफ़ आजा तू भी कड़ी क्या है अब.. रखदे बैग वही.. और यह इतना बड़ा बैग लेकर इधर क्यों आयी हो तुम दोनों.. इधर क्या छुटियाँ काटने का िर्र्धा है…

अन्निका- अभी हम कुछ दिन नहीं जायेंगे यहाँ से…

तान्या- (तुषार के साथ आकर बैठी हुई) हाँ सही कहा.. और बता कैसे है.. बड़ी body-vody पहला राखी है.. इधर क्या रोज आलू के पराठे बनते है…

तुषार- ारी कसरत नाम की भी कोई चीज़ होती है.. सब तेरी तरह बेथ कर खाने वाले नहीं होते…

तान्या- लगता है तू मुक्का खा के मानेगा…

तुषार- (थोड़ा दर के) हहहह.. (हल्का सा साइड से गले लगा के) अरे नहीं नहीं.. गुस्सा क्यों होती है.. मैं मुक्के के बिना hi मन जायूँगा.. हहह.. और बता सब बढ़िया..?

तान्या- (मुस्कुराती हुई) हम्म सब मस्त…


《2575 -वर्ड्स》
 
सेफ..? मैंने नहीं देखि भाई यह मूवी, सब मेरी खुद की hi इमेजिनेशन है, हाँ वैसे हो सकता है यह फार्मूला वाला सन ामम है, कुछ नई नहीं था...

:डी मैंने पहले hi एक हिंट दिया था आपको भाई, और अब तोह दूसरा भी दे दिया, सिया. !! करो करो पता लगाओ.. यह स खास क्यों है, शायद आप जान जाओ, और यस अगर जान गए तोह यहाँ बताना नहीं, :डी

4 सन भाई मुझे रात निकली थी सू 4 करने पड़े, हाँ मैं आगे से कुछ और तरय करूँगा ऐसा करने के बाजए.. शुक्रिया भाई, कीप सपोर्टिंग...
 
अपडेट- 48

तुषार- ारी कसरत नाम की भी कोई चीज़ होती है.. सब तेरी तरह बेथ कर खाने वाले नहीं होते…

तान्या- लगता है तू मुक्का खा के मानेगा…

तुषार- (थोड़ा दर के) हहहह.. (हल्का सा साइड से गले लगा के) अरे नहीं नहीं.. गुस्सा क्यों होती है.. मैं मुक्के के बिना hi मन जायूँगा.. हहह.. और बता सब बढ़िया..?


तान्या- (मुस्कुराती हुई) हम्म सब मस्त…



|अब आगे|

तुषार- हम्म ाचा इनसे मिलो, यह है प्रियल जी, अपनी भाभी कह सकते हो इन्हे…

तान्या, अन्निका- (चौंकती हुई) क्याआ.. भाभी..????

तान्या- तूने लड़की पता ली.. और यह तोह तुमसे कितनी बड़ी लगती है.. वो सब बाद में, (तुषार का कलर पकड़ के) पहले यह बता यह बात मुझे अब क्यों पता चल रही है.. पटाने से पहले मुझे क्यों नहीं बताया.. बोल वर्ण मुक्का मरूंगी…

अन्निका- (साद होती हुई) भैया यह अपने ाचा नहीं किया… (और रोने वाला फेस बना लिया)

तुषार- (तान्या का हाथ हटाता हुआ) अरे छोड़.. क्या कुछ भी मतलब निकल रहे हो.. मेरा मतलब था की यह हम सबकी भाभी है मेरी भी है.. और पूरी बात सुनो…

(फिर तुषार प्रियल और सिया दोनों की बेटी कहानी दुबारा सुना देता है, जिससे सुन एक बार माहौल वापिस इमोशनल हो जाता है…)

(आया जानते है जब वैभव सेठिए इंडिया आया था तोह क्या हुआ था.. वैभव सेठिए की फ्लाइट जब जापान से बेंगलुरु लैंड हुई तोह उसके दुश्मनो को खबर लग गयी के इंडिया में कोई धमाका होने वाला है.. उन्हें यकीन था की अब वो उन्हें मरे बिना नहीं जायेगा.. यह दर इंडिया के हर उस chote-bade डॉन के दिल में दूर रहा था.. वैभव के दुश्मन कोई और नहीं यह डॉन hi थे, जिन्हे अपना धंदा चालू रखने के बदले में बहुत मोती रकम और लोग देने पड़ते थे.. पुरे इंडिया के डॉन डरते थे वैभव से लकिन उन्ही मेंसे कुछ बहुत नफरत भी करते थे उससे, जो उससे मरना चाहता थे.. और आज की मीटिंग होने वाली थी एक बहुत बड़े अंडरग्राउंड हॉल में.. यहाँ इंडिया की हर एक स्टेट और सेहर से करीब 100 से भी ज्यादा डॉन एकता हुए थे.. सभी डॉन की अंदर आते वक़्त पूरी तलाशी ली गयी थी, ताकि कही कोई गन, बन्दुक, या किसी तरह का कोई हथियार साथ अंदर नाह ले जा पाए...)

(हॉल में एक के बाद एक सभी डॉन आते गए और वह 5 lambi-lambi टेबल के साथ चेयर्स लगी हुई थी जहा वो सभी बैठते गए.. कुछ देर बाद एक फ़ौज के साथ वैभव की एंट्री हुई.. करीब 25 कमांडोज़ वैभव के ired-gird थे और उसके साथ चलते हुए आ रहे थे.. अभी वो उन् कमांडोज़ के बिच दिख नहीं रहा था लकिन जैसे hi वो स्टेज तक पहुंचे तोह कमांडोज़ रुक गए और उनके बिच मेंसे वैभव निकल कर बहार ा गया.. छोड़ी छाती, लम्बे बाल, लम्बी दाढ़ी, आँखों पे कला चश्मा, फेस के ऊपर, गार्डन के पास कट लगे हुए थे, कोई शेतें जैसे अभी धरती पे आया हो, बचे तोह छोडो किसी अचे खासे आदमी की भी उससे देख गांड पहात जाये ऐसा था दिखने में वैभव सेठिए.. उससे देखते hi सभी डॉन खड़े हो गए.. किसीकी हिम्मत नहीं थी की वैभव खड़ा है और वो लोग बेथ जाये.. वो आया और सीधा सामने स्टेज पर चढ़ गया…)

वैभव- (मिछ के पास आकर, मुस्कुरा के सभी की और देखता हुआ, भरी आवाज में) बेथ जाओ…

(सभी डॉन बेथ जाते है, कुछ डॉन के बिना किसी दर के पसीने छोट रहे थे उससे देख के, और यह देख वैभव को बहुत सकूं मिल रहा था…)

वैभव- मैं जनता हु की तुम सब अपना काम बहुत इम्मंदारी से कर रहे हो.. मगर फिर भी चावल को कितना hi छान लो एक न एक कंकर तोह रह hi जाता है.. (स्टेज से उतर निचे आता हुआ) और आज वो कंकर हमारे बिच मौजूद है…

(वैभव फिर सभी के टेबल्स के चक्कर लगाने लगा.. आगे से, बिच से, पीछे से, वैभव jis-jis डॉन के पास के गुजरता उसके पसीने मुँह से होते हुए टेबल पर गिरने लगते.. कुछ देर राउंड मरने के बाद वैभव बोलै…)

वैभव- (मुस्कुराता हुआ) ज़रा सा खामोश होकर, मैंने आज़मा लिया सबको.. (एक डॉन के पीछे जाता हुआ, जो बिना किसी दर के आराम से बैठा हुआ था) कहते है की नाम बदनाम न हुआ तोह फिर क्या नाम हुआ.. और मेरे नाम से कोई न डरने वाला पैदा हुआ तोह उसकी खोपड़ी में गोली मैं यू चला देता हु…

(वैभव ने अपनी बन्दुक निकल उस डॉन के सर के पीछे रख दी वो बस ट्रिगर दबाने वाला था की उसके पास बैठा डॉन एकदम से उठ के हाथ जोड़ने लगा और रोने लगा...)

डॉन.1- नहीं, नहीं नहीं मालिक, ऐसा मत करिये.. मेरा भाई है वो.. वो डरता है आपसे.. बहुत डरता है.. देखो.. देखो आपके दर से उसका पसीना निकल चूका है.. वो मेरा भाई है, मेरा अपना है वो, छोटा है बेचरा मैंने hi उससे डॉन बनाया है, एक ाचा डॉन बनेगा वो...

वैभव- भाई..? हहहहह.. (उसके भाई के कंडे को पकड़ उसकी चेयर अपनी और घूमता हुआ) हमे तोह अपनों ने सिखाया है, की कोई अपना नहीं होता.. क्यों तुझे तेरे भाई ने नहीं सिखाया..?

डॉन.2- (एकदम से उठा और अपने पीछे से गन निकल के वैभव के मत्थे पे रखड़ी)

(अभी उसके बड़े भाई का क्या प्लान था..? यह बताता हु मैं आपको.. उसके बड़ा भाई, वो चाहता था की वो अपने छोटे भाई को एक मोहरा बनाये, उसने एक प्लान रखा था वैभव को मरने का, किसी तरह badi-badi बाते, लालच देना और साथ देने की बाते करके उसने अपने भाई का ब्रेन वाश कर दिया था.. अगर तोह वो वैभव को मरने में सफल हो जाता है तोह यह इंडिया आधा उसका होगा.. और अगर वो सफल नहीं भी होता है और उसका भाई मर जाता है तोह भी वो अपनी स्टेट का अकेला डॉन होगा.. वो अपने बाप के रहते अपने छोटे भाई को नहीं मर सकता था.. इसलिए उससे यह प्लान सबसे सही लगा.. अभी वो अंदर से मुस्कुरा रहा था और बहार से rone-dhone का दिखावा कर रहा था…)

डॉन.1- यह क्या किया तूने छोटे.. (मन में कह रहा था की जल्दी ट्रिगर दबा दे) अब मालिक तुझे जिन्दा नहीं छोड़ेंगे.. क्यों किया तू ऐसा… (मन में- सेल चला दे गोली क्या देख रहा है…)

डॉन.1- (ट्रिगर पे ऊँगली रख, गन अपने भाई की और करता हुआ) बिलकुल सही कहा अपने मालिक.. मुझे तोह अपनों ने Hi सिखाया है की कोई अपना नहीं होता.. हाहाहाहा.. भाई छोटा हु लकिन गधा नहीं हु.. चल अभी.. तू क्या इंडिया का डॉन बनेगा तू तोह स्टेट के लायक भी नहीं है...

(तततततहहहहहाआआरररररररकक)

(और यह गोली उसने अपने भाई के माथे के bicho-bich चला दी…)

वैभव- तू चाहता तोह अभी मुझे गोली मार सकता था, लकिन तूने मरी नहीं.. क्यों..?

डॉन.2- आपको सब पता था मालिक की अभी क्या होने वाला है.. सबकी चेकिंग हुई थी मेरी भी हुई लकिन मेरी गन तक किसी का हाथ नहीं पहुंचा, और यह गन मैं साथ लाया नहीं हु, यह गन आप लोग चाहते थे की मैं साथ लयू.. आपको सब कैसे पता चला यह मैं नहीं जनता, अगर मेरा इरादा आपको मरने का होता तोह मैं कब का मर चूका होता.. मेरे पास मौका था आपको मरने का लकिन आप ज़रा सा भी नहीं डरे, आपको पता था की मैं गोली आप पर नहीं चाल्युन्गा, इतना कॉन्फिडेंस..!! तोह फिर दर तोह लगेगा न.. गोली चलना तोह दुर्र की बात मैं तोह बहुत हिम्मत जूता के आपके सामने गन बहार निकल पाया था… (और वो अपने भाई की और देखने लगा जिससे उसने अभी थोड़ी देर पहले मारा था)

वैभव- (आगे जाता हुआ) अब क्या देख रहा है उससे.. सांसे किसी का इंतज़ार नहीं करती, चलती है या चली जाती है...

(उसके बाद वैभव की सभी डॉन के साथ कुछ पैसो की, लड़कियों और लड़को और हतियारो की डील्स हुई.. कुछ तैयारीजन हमले की भी की गयी थी.. और किसकी स्टेट या सेहर में कोई आदमी जो देवता बन कर आया है उसकी आग को कैसे बुझाना है सब डिसकस हो रहा था, वही दया का नाम भी आया जो लाला ने लिया था…)

|बैक तो रूद्र|

(रूद्र चीन के जंगल में अभी अपने घर में था.. तभी उससे एक कॉल आता है…)

रूद्र- (फ़ोन उठा के) Hello कैरा..!!

कैरा- (घभरैः हुई) रूद्र..! रूद्र.. सुनो..!!

रूद्र- (मुस्कुराता हुआ) हाँ बोलो डार्लिंग क्या हुआ..? घभरैः हुई क्यों हो.. बताओ मुझे…

कैरा- रूद्र मैं.. मैं प्रेग्नेंट हु.. हाँ मैं प्रेग्नेंट हु…

रूद्र- तोह इसमें इतना घभ्रा क्यों रही हो.. यह तोह ख़ुशी की बात हैना…

कैरा- क्या बोल रहे हो तू.. मैं पिल्स ली थी, फिर भी मैं प्रेग्नेंट कैसे हो गयी.. और.. और…

रूद्र- और क्या डार्लिंग…

कैरा- मेरे पेट में बचा पल रहा है.. जिससे जनम देने में 9 महीने लगते है उससे में अगले महीने में जनम देने वाली हु.. यह तुम्हारे बजे हुए डॉक्टर्स कह रहे है.. (रोटी हुई) रूद्र यह सब क्या हो रहा है.. मुझे दर लग रहा है.. ऐसा होना इम्पॉसिबल है.. जब यह बचा लात मरता है तोह मुझे ऐसा महसूस होता है कोई आदमी ने सचमे मेरे पेट पर लात मरी हो.. इतना दर्द होता है.. मुझे खून की उल्टियां ा रही है…

रूद्र- रिलैक्स रिलैक्स.. रिलैक्स..!! कुछ नहीं होगा तुम्हे…

कैरा- और यह तुम्हारे आदमी और डॉक्टर्स मुझे कही जाने भी नहीं दे रहे.. मुझे हॉस्पिटल जाना है रूद्र.. मैं यह बचा गिरना चाहती हु…

रूद्र- (उसकी यह बात सुन गुस्से में चिलता हुआ) लूसिफ़ेर की बात नहीं माननी तोह गाला काट डालूंगा तुम्हारा.. chup-chap पड़ी रहो घर में.. और दुबारा अस्सी बात मुँह से निकली तोह समाज लेना तेरा खेल ख़तम…

कैरा- (हैरानी से, रोटी हुई) रूद्र..!! यह तुम क्या बोल रहे हो.. कैसे बात कर रहे तुम मुझसे..? प्रेजिडेंट की बेटी हु मैं.. पापा से झूठ बोल कर तुम्हारे साथ रह रही हु, तुमने जो कहा मैंने किया.. वो तुम्हे मरना चाहते है लकिन मैं उनके खिलाफ हु इसलिए आज तुम ज़िंदा हो.. क्युकी मैं तुमसे प्यार करती हु, मैं तुम्हे मरने नहीं दे सकती.. (अपने आंसू साफ़ करती) ठीक है तुम चाहते हो न मैं इस बचे को जनम दू ठीक है मैं दूंगी इससे जनम.. पर तुम मेरे पास तोह ायो...

(उसके बाद रूद्र कुछ नहीं बोलता और कॉल कट कर देता है.. उसको चक्कर ा रहे थे वो उठा वह से और सीढ़ियां छड़ रूम में चला गया, यहाँ अभी शिविका बीएड पर बैठी लैपटॉप में कुछ कर रही थी.. रूद्र आया और उसने आते hi रूम का दूर लॉक कर लिया…)

शिविका- (उसकी आँखों को देख जो अभी अस्सी लग रही थी जैसे वो कोई नशा करके आया हो) क्या हुआ.. तुम्हारी आँखे…..

रूद्र- (अपने होंठो पर ऊँगली रख) स्स्सस्स्स्शह्ह्ह्ह…

(रूद्र अपनी शर्ट के बटन खोलता हुआ आगे बढ़ने लगा.. उसकी यह हरकत देख शिविका घबराने लगी.. वो बीएड से thori-thori पीछे होने लगी.. रूद्र ने अपनी शर्ट के बटन खोल उससे उतर के साइड फीक दिया और उसकी और आने लगा…)

शिविका- यह तुम क्या कर रहे हो.. पीछे हटो.. हटो पीछे मैं कहती हु (गन निकल दिखती हुई) वर्ण गोली मर दूंगी.. तुझे सुनाई……

(त्तठ्हारररररममममम)

(यह आवाज थी जब रूद्र बीएड के पास आकर उसपर उल्टा गिर गया.. वो शायद बेहोश हो गया था.. उसका जिस्म भाति की तरह गरम था जिसमे halka-halka धुआँ उड़द रहा था…)

|बैक तो तुषार|

(अभी दुपहर हो चुकी थी, सभी लोग apne-apne रूम में आराम कर रहे थे.. अन्निका, सिया एक hi रूम में थे…)

अन्निका- तेरा नाम क्या था.. मैं भूल गयी हु…

सिया- (मासूमीयत से) दीदी मेरा नाम सिया है…

अन्निका- (खुश होती हुई) वाओ दीदी.. मैं सबसे छोटी थी, इसलिए मुझे सबको दीदी, और भैया कह के बुलाना पड़ता था आज मुझे भी कोई दीदी कहने वाली ा गयी.. वाओ क्या फेल्लिंग है.. एक बार दुबारा कहना…

सिया- (मुस्कुरा के) दीदी..!!

अन्निका- हहह.. ाचा है, ाचा है.. तोह सिया…

सिया- हाँ दीदी…

अन्निका- मुझे पानी लेकर दो…

सिया- Okay अभी लायी दीदी…

(सिया जाती है और किचन से पानी का गिलास लेकर अन्निका को दे देती है…)

अन्निका- (थोड़ा सा पानी पीकर गिलास साइड टेबल पर रखती हुई) हहस्स.. हाँ तोह सिया यह लो मेरा फ़ोन चार्जिंग पर लगा दो…

सिया- Okay दीदी…

(सिया उसका फ़ोन पकड़ के बहार से चार्जर ढूंढ के लती है और फ़ोन चार्जिंग पर भी लगा देती है…)

सिया- लगा दिया दीदी…

अन्निका- ाचा अभी एक और काम करो भैया से पूछ के ायो की कल कही घूमने चले.. जा फटाफट पूछ के आ…

सिया- Okay दीदी अभी आयी पूछ के…

(सिया गयी तुषार के रूम में यहाँ तुषार और तान्या बैठे हुए थे…)

सिया- (दूर से पूछती हुई) भैया मैं अंदर ा जायु..?

तुषार- अल्ले ा जा मेरा बचा.. पूछता क्यों है…

सिया- भैया वो न अन्निका दीदी पूछ रही थी कल कही घूमने चले..?

तुषार- अन्निका ने बोलै है.. हाँ कोई बात नहीं बीटा तुम भी चलना मस्ती करेंगे…

सिया- (ख़ुशी से) उह वववव.. थैंक्यू भैया…

(सिया वह से hasti-muskurati अन्निका के पास आती है…)

अन्निका- (उसका मुस्कुरता चेहरा देख) क्या हुआ भैया मान गए न…

सिया- हाँ.. भैया बोले चलेंगे…

अन्निका- एस्सस.. अभी न तू कपडे निकल मेरे मैं नहाने जा रही हु.. और मैं नाहा कर आयु तब तक तू..... (एकदम से दूर की और देख चुप होती हुई)

तुषार- (रूम में आता हुआ) हम्म.. गुड़िया..!! तोह यह सब हो रहा है यहाँ.. मैं भी सोचो सिया कभी पानी गिलास में डेल इधर ा रही है, कभी चार्जर हाथ में लिए, और इसके पास तोह फ़ोन hi नहीं है, कभी मेरे पास ा रही की घूमने चले तेरे बारे में कह कर, और अभी जो मैंने सुना तेरे कपडे निकल दे, और नहाने के बाद क्या..? खाना रेडी रखे तेरे लिए.. हाँ..? अब समझा मैं आर्डर यह महारानी की और से आ रहे थे…

अन्निका- (थोड़ी दर के) हीहीही, वो भैया कभी किसी को आर्डर नहीं दिया न, तोह सोचा आज थोड़ा टास्ते करलु कैसा मज़ा आता है.. हहै…

तुषार- (उसके नजदीक आता हुआ) ओह्ह.. टास्ते लिया जा रहे है.. इधर आ तुझे टास्ते दू.. (और तुषार ने अन्निका की कमर से पकड़ और उसके साथ hi बीएड पर कूद गया, उसके पेट पर गुदगुदी करता हुआ) आठ.. अब बता कैसा टास्ते ा रहा है.. हम्म.. मेरी सिया को परेशां करेगी.. हाँ बोल…

अन्निका- (हस्ती और छटपटाती हुई) आठ हहहह ेहेहेह आह हहै भैया मत करो, हहहह हेठे हैः प्लीज.. मैं नहीं करुँगी हहै अभी हहहह आह्हः.. पक्का नहीं करुँगी…

तुषार- (उसकी गाल पे एक लम्बी सी किश लेता हुआ) उउउउउउम्मम्मा.. हाँ अभी नहीं करना Okay, गंदे बचे करते ऐसा…

अन्निका- नहीं करुँगी भैया प्रॉमिस.. यह बहुत क्यूट है, मेरी साडी बाते मानी इसने, कोई भी नाह नहीं की…

तुषार- हम्म, तुम दोनों hi बहुत क्यूट हो, (उसकी गाल खींचता हुआ) बस तुम थोड़ी शरती होती जा रही हो......


《2423 -वर्ड्स》
 
अपडेट-49

तुषार- (उसकी गाल पे एक लम्बी सी किश लेता हुआ) उउउउउउम्मम्मा.. हाँ अभी नहीं करना Okay, गंदे बचे करते ऐसा…

अन्निका- नहीं करुँगी भैया प्रॉमिस.. यह बहुत क्यूट है, मेरी साडी बाते मानी इसने, कोई भी नाह नहीं की…

तुषार- हम्म, तुम दोनों hi बहुत क्यूट हो, (उसकी गाल खींचता हुआ) बस तुम थोड़ी शरती होती जा रही हो......


|अब अग्गे|

(फिर तुषार वह से उठ और अपने रूम की और जा रहा था की उसने आरुषि को उसके रूम में उदास सी किसी सोच में दुब्बी देखा, तोह तुषार उसके रूम में चला गया…)

तुषार- (उसके पास आकर बीएड पर बैठता हुआ) क्या हुआ दीदी…?

आरुषि- (अपनी सोचो से बहार आकर) अरे तुषार तू कब आया…

तुषार- बस अभी.. क्या हुआ आप इतनी उदास क्यों लग रही हो.. कोई प्रॉब्लम है तोह बताओ मुझे…

आरुषि- (हाथ से बीएड की चद्दर ठीक करती हुई) नहीं.. कोई प्रॉब्लम नहीं…

तुषार- (उसकी आँखों में देखता हुआ) दीदी.. इधर मेरी और देखो…

(आरुषि तुषार की आँखों में देखने लगी लकिन कुछ hi देर देख पायी थी की उसकी आँखों से आंसू बह निकले…)

तुषार- (अपनी हाथ से उसके आंसू साफ़ करता हुआ) क्या मैं इन् बहते आंसूं की वझे जान सकता हु दीदी..?

आरुषि- (बीएड से उठती हुई) हम्म, बस दुःख रहेगा तुषार पूरी ज़िंदगी की मैं तेरी बहो में लिपट न सकीय, तुझे प्यार न कर सकीय, तुझसे प्यार प् ना सकीय, वो हसीं लम्हे वो राते तेरे साथ गुजर न सकीय, एक सपना जो मैं कुछ सालो से देख रही थी की कब तुझे मैं अपने दिल की बात बाटूंगी और तू मुझे अपना लेगा, इस दुनिया से लड़ जायेगा मेरे लिए, वो सपना पूरा ना कर सकीय.. बस यही दुःख रहेगा मुझे पूरी ज़िंदगी.. और हाँ यह सोच भी मत लेना की तेरी जगह कोई और लड़का ले सकता है...

(एकदम से आरुषि ने पीछे मुद के तुषार को देखा तोह वो वह नहीं था जा चूका था रूम से.. यह देख आरुषि को बहुत ज्यादा दुःख हुआ.. क्या तुषार ने उसकी पूरी बात सुन्नी..? क्या उससे उसकी बाते बुरी लगी लग गयी जो वि चला गया..? आरुषि जो पहले hi बहुत टूटी हुई थी तुषार के यू जाने से और ज्यादा दुखी होकर बीएड पर बेथ गयी…)

(तुषार आरुषि के रूम से पता नहीं कब अपने रूम में ा गया था, यहाँ अभी भी तान्या बैठी हुई थी…)

तान्या- कहा गया था गधे..? और दूर बंद करके आ मुझे बात करनी कुछ...

तुषार- (दूर बंद करके, उसके पास आकर बैठा हुआ) कही नहीं इधर hi था.. (मुस्कुराता हुआ) क्यों तू बड़ी aaj-kal मुझे मिस करने लगी है क्या बात है..?

तान्या- हाँ करती हु मिस, क्यों कोई तकलीफ तोह नहीं हैना तुझे…

तुषार- (ऊपर देखता हुआ) हे बागवान यह पता नहीं क्या लड़की है.. तुझे खुद पता है की तू क्या बोलती और क्या करती है..?

तान्या- (मुस्कुराती हुई) हाँ सब पता है मुझे.. वैसे क्या अब बटेगा मुझे की क्या हुआ था उस दिन..?

तुषार- (सोचता हुआ) हाँ.. ठीक है बताता हु.. तुझे तेरे बारे में जो हुआ था पता है लकिन मेरे साथ क्या हुआ था शायद तू नहीं जानती…

तान्या- (गंभीर होती हुई) क्यों क्या हुआ था तेरे साथ.. बता न जल्दी…

तुषार- जब हम उस फार्महाउस पहुंचे और उन् गार्ड्स ने पहला दूर खोला तोह सामने का नजारा देख मैं टूट गया…

तान्या- क्या देखा तूने सामने..?

तुषार- (आंखें भरता हुआ) सामने मेरा प्यार मेरी इशिका ऊपर पंखे से लटकी हुई थी…

(उसकी यह बात सुन तान्या एकदम से छोंक के कड़ी हो गयी…)

तान्या- (हकलाती हुई) क्क की क्या..!! तू तुषार.. (रोटी हुई) तुषार क्या इशिता नहीं रही..? हम्म.. बोलो, बोलो न…

तुषार- मैं रूम में गया और तोह देखा इशिता के गले में फंदा था और वो पंखे के साथ झूल रही थी.. बड़ी मुश्किल से मैंने उससे ऊपर से उतरा.. उसकी नाक से खून बह रहा था.. jagha-jagha छोट लगी हुई थी.. उसकी पूरी बॉडी सफ़ीद पढ़ चुकी थी.. (रोटा हुआ) वो, वो मर चुकी थी तान्या.. वो मर चुकी थी…

(तान्या उसकी पूरी बात सुनकर उसके सामने घुटनो पर बेथ गयी.. और रोने लगी.. उसने देखा था तुषार और इशिता का प्यार.. अब उससे समाज आ रहा था की क्यों उसका भाई यू हो गया था, लकिन कभी भी उसने यह बात जानने की कोशिश नहीं की, की क्यों उस दिन उसका भाई उससे बचने नहीं आया, और दिन प्रति दिन कैसे वो कमजोर होता जा रहा था.. बल्कि हर बार वो उससे सबके सामने बेजित करती रही, लकिन फिर भी तुषार ने कभी कुछ नहीं बोलै बल्कि उसको बचने के लिए उसने बिना soche-samjhe कितने लोगो को मौत के घात उतर दिया…)

तान्या- (उसके चेहरे की और देखती हुई) लकिन, लकिन हमारे साथ ऐसा हुआ क्यों था.. क्या मकसद था इसके पीछे, और किसका, और मुझे किसने बचाया था तभ..?

तुषार- (गुस्से से) मुझे नहीं पता तान्या किसने और क्यों यह सब किया था.. लेकिननं.. आह्हः लकिन छोडोऊ गए नही मैं सल्लू ककूवो.. वो जोऊ कोई भी था.. जल्द hi उससे अस्सी मौत दूंगा की ज़माना याद रखेगाआ आअह्ह्ह्ह.. ( ऊपर देख चीखता हुआ) hhhaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh…

(तुषार जब ऐसे गरजा तोह तान्या कांप गयी.. वो डरके पीछे गिर गयी.. उसने जल्दी से उठ के तुषार का हाथ पकड़ा उससे शांत करने के लिए लकिन जब उसने तुषार को हाथ लगाया तोह उसका हाथ जलने तक ा गया इतना गरम था तुषार का हाथ और उसकी पूरी बॉडी.. तान्या और ज्यादा गभरा गयी.. तुषार के आंसू नहीं रुक रहे थे और साथ hi में वो किसी जानवर की तरह हाफ रहा था.. तान्या को कुछ नहीं सुझा और नजाने उसके दिमाग में क्या आया की उसने सीधा अपने होंठ तुषार के होंठो के साथ जोड़ लिए…)

(तान्या तुषार की गौड़ में ा गयी और उसके होंठो को चूमती हुई उससे किश करने लगी.. तुषार के होंठ भी किसी भट्टी थी तरह गरम थे.. लकिन तान्या नहीं रुकी वो jor-jor से उसके होंठो को उसकी पीठ सहलाती, बाल सहलाती हुई चूसने लगी और एकदम उसने अपनी जीब तुषार के मुँह में दाल दी.. कुछ 2 मिनट तक किश करने के बाद तुषार जैसे होश में आने लगा, उसकी बॉय ठंडी और नार्मल होने लगी.. उसकी आँखे जो पहले कही और hi खोयी हुई थी अब सिर्फ तान्या की आँखों में खू चुकी थी.. तान्या जो बारे प्यार से उसके होठो चुस्ती हुई halke-halke आंसू बहा रही थी.. तुषार को उसपर इतना ज्यादा प्यार आया की उसने तान्या की पतली नाजुक कमर से पकड़ा और बीएड पर उसके साथ पीछे गिर गया, तान्या भी अभी होश में नहीं थी वो और ज्यादा तेजी से उसके होंठ चूसने लगी, तुषार ने धीरे से उसकी जुबान को अपने दोनों होंठो में पकड़ा और उसका रास निचोड़ने लगा.. तान्या तुषार का ऊपर का होंठ चूसने लगी और तुषार उसकी जीब को दांतो से काटने और चूसने लगा.. तुषार अपना हाथ dhire-dhire उसके बूब्स तक T-shirt के अंदर से ले जा रहा था की तान्या ने उससे रोक लिया और अपनी जीब उसके मुँह से बहार निकल ली और होंठ अलग कर लिए...)

तान्या- (शर्माती हुई) वो.. क्या कर रहा है तू.. (उसका हाथ अपनी कमर से हटती हुई) छोड़ मुझे…

तुषार- (उसकी इस आधा पे फिदा होता हुआ) मैंने क्या किया.. सब तोह मैडम अपने किया…

(तान्या कुछ नहीं बोली वो बीएड से उठी, दूर खोला और बहार जाने लगी, जाने से पहले उसने एक बार तुषार को देखा और मुस्कुरा कर बहार चली गयी…)

|बैक तो रूद्र|

(जैसे hi रूद्र बीएड पर गिरा और उसकी पीठ से धुआँ उड़ने लगा तोह शिविका ने जल्दी से देव को बुलाया…)

शिविका- यह क्या होता रहता है इससे देव..?

देव- (उसको सीधा करता हुआ) मुझे क्या पता.. जब भी पूछता हु तोह बात पलट देता है.. चल आजा तू बहार.. इसने कहा हैना की जब भी इससे ऐसा हो तोह इससे अकेला छोड़ दो खुद ठीक हो जायेगा यह…

(देव ने रूद्र की बंद आखों को खोल के देखा तोह वो हैरान रह गया…)

शिविका- (उसको यू शॉकेड देख) क्या हुआ…

देव- इसकी आखें देखि.. कैसे लाल हो राखी है, देखो…

images


शिविका- (घभराती हुई) चलो देव हमे इससे अकेला छोड़ देना चाहिए.. चलो…

देव- हाँ चलो…

(शिविका बहार चली गयी लकिन देव रूद्र को वैसे hi देखता हुआ बहार जा रहा था की उससे रूद्र की आँखों से होती हुई गालो तक एक लाल चमकती रौशनी नजर आयी,

images


जिससे देख देव भी दर गया और जल्दी से बहार चला गया…)

|हवेली ठाकुर सज्जन सिंह की|

(ठाकुर सज्जन सिंह की हवेली बहुत बड़ी थी लकिन बहुत पुराणी भी.. अभी ठाकुर सज्जन सिंह अपनी हवेली में बैठा कुछ सोच रहा था…)

सज्जन सिंह- कितने दिन हो गए यह विराट कहा है.. (आवाज लगता हुआ) सम्राट..!!

(सम्राट- एक वफादार आदमी.. नजाने इसने कितनी बार ठाकुर सज्जन सिंह और उसके पुरे परिवार की जान बचाई है.. दिमाग से भले hi कमजोर हो लकिन बल से बड़े से बड़े हठी को रोक डेल…)

सम्राट- जी ठाकुर साहब, अपने बुलाया…

सज्जन सिंह- विराट कहा है..?

सम्राट- छोटे ठाकुर तोह हमे बता कर नहीं गए की कहा जा रहे है.. हाँ बस इतना कहा था की वो 2, 3 दिन में वापिस आएंगे…

सज्जन सिंह- (उसके पास आता हुआ) सम्राट तुम जानते हो की हमारे दुश्मन कितने है.. ऐसे में विराट का अकेले घर से बहार जाना खतरा साबित हो सकता है.. उसके साथ कुछ आदमी लगा दो, और उससे पता नहीं लग्न चाहिए, समझे.. जाओ अभी ढूंढो उन्हें…

सम्राट- जी ठाकुर साहब…

|बैक तो Tushar’s हवेली|

(आज तीसरी बार था की सफल जग्गू को उसके किये की सजा देने जा रहा था.. जग्गू की हालत तोह कुत्तो से भी बत्तर हो चुकी थी.. खाने के नाम पे सिर्फ पानी मिलता था.. वो न उठ सकता था ना hi अपने बैठने की पोजीशन चेंज कर सकता था.. कीड़े उसकी बॉडी का आधा कौन पि चुके थे और उसके खून की lambi-lambi धार फर्श पर दूर तक पहेली हुई थी.. सफल ने दूर खोला और अंदर ा गया.. सफल को देख जग्गू के आंसू बहने लगे.. सफल ने ज्यादा उसके साथ बकवास ना की और सीधा उसने कैमरा सेट किया, जग्गू के ऊपर केमिकल छिड़का और कीड़ो से भरा डिब्बा खोल उसकी और कर दिया.. कीड़ो को देख जग्गू तड़पने लगा.. कीड़ो ने पहले hi जग्गू की ऊपरी चमड़ी kha-kha कर उद्धर डाली थी उसी में कीड़े वापिस काटने छिलने लगे और खून चूसने लगे.. जग्गू में हिम्मत नहीं थी की वो cheekhe-chilaye बस उसकी आँखे आंसू बहा रही थी.. dhire-dhire कीड़े उसके और ऊपर की तरफ ऐनी लगे एक कीड़ा उसके मुँह के पास होंठ तक आया तोह जग्गू ने उससे पकड़ के मुँह में ले लिया और चबा डाला.. यह जग्गू की भूख थी जिसने उससे यह करवाया.. आलिशान हवेली में रहने वाला जग्गू, 24 घंटे लड़कियों के बिच घिरा रहने वाला जग्गू आज भूख के मरे कीड़े तक्क खाने को तैयार था.. ऐसे hi जग्गू दर्द से तड़पता रहा और कोई कीड़ा उसके मुँह के पास आता तोह वो उससे चबा के खा जाता…)

|बैक तो तुषार|

(ताआकककककक, ताआयकककककक, ताआयककककक)

(रात के करीब 12 बज रहे थे जब आरुषि के दूर पर नॉक होता है.. आवाज सुन आरुषि एकदम से उठी उसने लाइट ों की और बीएड से उठकर दूर खोलने जाने लगी...)

आरुषि- (घडी की और देखती हुई) इतनी रात को कोण हो सकता है.. (दूर खोल कर सामने खड़े शक्श को देख) तुषार..!! तुम.......


《1863 -वर्ड्स》
 
शुक्रिया भाई अपनी बात सामने रखने के लिए.. मैं आपकी बात समझा नहीं लकिन.. हाँ मैंने थोड़ी स्टोरी को स्पीड देदी तककि लोग बोर न हो क्युकी मैं को ह hi सीन्स में अटका हुआ था सो मुझे लगा कुछ हिस्सों को स्किप कर देता हु, लकिन अगर आप चाहते तोह मैं वैसे hi लिखता हु, थोड़ा मुझे आप डिटेल में समझा सकते हो....
 
अपडेट-50

(ताआकककककक, ताआयकककककक, ताआयककककक)

(रात के करीब 12 बज रहे थे जब आरुषि के दूर पर नॉक होता है.. आवाज सुन आरुषि एकदम से उठी उसने लाइट ों की और बीएड से उठकर दूर खोलने जाने लगी...)

आरुषि- (घडी की और देखती हुई) इतनी रात को कोण हो सकता है.. (दूर खोल कर सामने खड़े शक्श को देख) तुषार..!! तुम.......


|अब अग्गे|

आरुषि- तुषार तुम, इस वक़्त.. क्या बात है, सब ठीक तोह……

(आरुषि आगे कुछ बोलती तुषार ने उसके मुँह पर अपना हाथ रख उससे चुप करा दिया, और उसकी आँखों में देखता हुआ उसके sath-sath पीछे जाना लगा.. आरुषि ख़ामोशी से उससे देखती हुई dhire-dhire ek-ek पेअर अपना पीछे लेजाने लगी.. पीछे, पीछे और पीछे और पीछे.. आखिर दोनों रुक गए जब आरुषि का पेअर बीएड से टकरा गया.. तुषार ने अपना हाथ उसके मुँह पर से हटाया और बोलै…)

तुषार- दीदी.. आप मुझे प्यार करती हो…

आरुषि- (अपनी नजरे निचे करती हुई, धीरे से) हाँ…

तुषार- ाचा, लकिन मैं तोह हर्षिका से प्यार करता हु…

(आरुषि उसकी बात सुन चुप रही, उसकी आँखों में halke-halke आंसू ा गए थे…)

तुषार- दीदी.. ऊपर देखो मेरी और.. (लकिन आरुषि वैसे hi उसके सामने सर निचे किये आंसू बहती रही) दीदी.. मैंने आपकी बाते सुनी थी, मैं उसी बारे में कब से सोच रहा था, और इसलिए अब मैं यहाँ आया हु...

आरुषि- (हैरानी से उसकी और देखती हुई) क्या मतलब है तुम्हारा…

तुषार- सब मतलब छोडो दीदी.. आज मैं आपके पास हु, आपका जो दिल करता है कर सकती हो…

आरुषि- (मुस्कुराती हुई) मैं क्या करुँगी तुम्हारा…

तुषार- क्या.. पहले मुझसे बात करने को तरस रही थी और जब मैं अकेले में रात में आपसे मिलने आया हु तोह आप बोल रही मेरा क्या करोगी.. (उदास होकर) ठीक है मैं जा रहा हु…

(तुषार मुद कर जाने लगता है की आरुषि जल्दी से उसका हाथ पकड़ उससे रोक लेती है…)

आरुषि- रुक कहा जा रहा है…

तुषार- हाँ बताओ क्या बात है...

आरुषि- (उदास मन से) यार तुषार मेरी थोड़ी मसाज करदे, मेरे पीठ में थोड़ा दर्द…….

तुषार- (बिच में) आपकी पीठ पर दर्द हो रहा है और उसके बाद मैं आपकी मसाज करने लगता हु, फिर आप बोलती और निचे दर्द हो रहा, और निचे.. ऐसे karte-karte आपके सरे कपडे उतारते जायेंगे.. (मुस्कुराता हुआ) और और और.. हहहहहहह.. क्यों मेरी नॉटी दीदी.. अपने भाई को पटाने वाली कोई बुक रीड की थी क्या.. हाहाहाहा…

आरुषि- (शर्मा के उसके कंधे पे जोर से मरती हुई) तुषारर.. तू बहुत ख़राब है.. जा मुझे नहीं करनी तेरे से बात…

तुषार- अरे दीदी, मैंने आपको पहले hi बोलै न आप जो चाहो करलो मेरे साथ, इसलिए मैं यहाँ आया हु…

आरुषि- (मुस्कुराती हुई) ाचा.. क्या करलु मैं तेरे साथ.. (उसकी कालर पकड़ उससे अपनी और खींचती हुई) हम्म, बोल…

तुषार- (आरुषि की कमर पर हाथ रख) कुछ भी दीदी.. जो आपका मन करे कुछ भी कर सकती हो…

आरुषि- क्या तू सचमे मुझसे प्यार करता है…

तुषार- हाँ, आपको कोई शक है तोह बोलो, अभी दूर कर देता हु…

आरुषि- नहीं मुझे कोई शक नहीं है.. लकिन.. आगे क्या होगा…

तुषार- आगे का आगे देखेंगे.. अभी आपके आगे मैं हु, तोह अभी सिर्फ मुझे देखो…

आरुषि- (तुषार के गले में दोनों बहे डालती हुई) ूहकाय.. आपको hi देख रही हु मर. तुषार…

तुषार- इतनी दूर से क्यों देख रही हो.. थोड़ी पास ायो न…

आरुषि- (थोड़ा उसके और करीब जाती हुई) यह लो…

तुषार- बस इतना सा..? और थोड़ी और पास ायो.. इतना की आपके और मेरे बिच से हवा तक न गुजर पाए…

(आरुषि मुस्कुराती हुई एकदम उसके साथ चिपक जाती है.. आरुषि के बूब्स तुषार की छाती में धस्स चुके थे, उसके soft-soft बूब्स तुषार महसूस कर रहा था, उससे बहुत ाचा लगा रहा था…)

आरुषि- क्यों, यही फील करना चाहता था क्या…

तुषार- यही नहीं दीदी मुझे तोह सब कुछ फील करना है, और आपको भी करवाना है…

(इतना बोल तुषार ने अपना हाथ आरुषि की कमर से हटा कर उसके सर के पीछे ले गया और उसके बालो से रबर बंद पकड़ के निकल लिया, आरुषि के बाल खुल गए जिससे वो और भी खूबसूरत लगने लगी.. तुषार हाथ उसके सर के पीछे लेकर गया और dhire-dhire उसका फेस अपने करीब लेन लगा.. दोनों के होंठ ek-dusre के एकदम करीब थे, लकिन आरुषि के होंठ halke-halke कम्प रहे थे.. तुषार ने अपने थोड़े से होंठ खोले और आरुषि का निचला होंठ अपने मुँह में भर लिया.. इतने सॉफ्ट और मीठे होंठ जब तुषार के मुँह में पड़े तोह जैसे वो पागल सा hi हो गया.. वो dhire-dhire उससे चूसने लगा, आरुषि कोई हरकत नहीं कर रही थी, वो बस अपनी आँखे बंद करके फील कर रही थी.. dhire-dhire तुषार उसके निचला होंठ चुस्त रहा और फिर उसने उसका उपरला होंठ मुँह में भर लिया और चूसने लगा.. दोनों की आँखे बंद थी, लकिन आरुषि कोई हरकत नहीं कर रही थी, तुषार ने एकदम से अपनी जीब उसके मुँह में दलदी, इससे आरुषि को एक करंट सा महसूस हुआ, तुषार अपनी जीब आरुषि के मुँह में फेरने लगा, अचानक आरुषि ने अपने होंठ बंद कर लिए और अपने दन्त भी, दोनों ने आँखे खोल ली और ek-dusre की आँखों में देखने लगे.. तुषार की जीब अभी आरुषि के दांतो में कद हो चुकी थी.. आरुषि वैसे hi तुषार की आखों में देख उसकी जीब को चूसने लगी, तुषार न तोह अपने होंठ हिला प् रहा था और न hi जीब, उससे मज़ा भी ा रहा था आरुषि के ऐसे करने से.. कुछ देर तक आरुषि ने उसकी जीब का रसा रास निचोड़ कर उससे सुखी कर डाला.. फिर आरुषि ने उससे छोड़ दिया.. लकिन इसके बाद दोनों में बहुत वाइल्ड किश होनी शुरू हो गयी.. दोनों एक दूसरे की होंठ और जीब को किसी जानवरो जैसे चूसने और काटने लगे.. आरुषि के होंठो पर जो कुछ देर पहले halki-halki लिपस्टिक थी अब उसका namo-nishan नहीं था…)

(आरुषि ने एक रेड निघ्त्य पहनी हुई थी.. तुषार ने हल्का से आरुषि को अलग किया और उसकी निघ्त्य की डोरी पकड़ खोल दी.. आरुषि को इसकी उम्मीद नहीं थी की तुषार आगे भी कुछ करेगा.. तुषार ने आरुषि की निघ्टलय पकड़ उतर दी.. अभी आरुषि सिर्फ वाइट Bra-Penty में कड़ी थी.. उससे थोड़ी शर्म सी भी ा रही थी.. जिससे वो तुषार से छुपा नहीं प् रही थी, और तुषार को उसका यह शर्माता हुआ चेहरा देख उसपर और ज्यादा प्यार ा रहा था…)

तुषार- (उससे परेशां करता हुआ) दीदी बहुत छोटे है…

आरुषि- (अपनी शर्म छुपकर बोलती हुई) क्या छोटे है…

तुषार- (उसके बूब्स को घूरता हुआ) वही जो इस वक़्त मेरे सामने है…

आरुषि- (अपनी नजर idher-udher दौड़राती हुई) तोह मैं क्या करू छोटे है तोह…

तुषार- हम्म.. लगता है मुझे hi म्हणत करनी होगी इनपर भी…

आरुषि- (शर्माती हुई) बेशरम...

(इतना बोल तुषार अपना हाथ आरुषि की पीठ पर ले गया और उसने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया.. हुक खुलते hi ब्रा झट से निचे गिर गयी जिससे आरुषि पकड़ना छह रही थी लकिन पकड़ नहीं पायी.. आरुषि शर्म के मरे pani-pani हो चुकी थी.. अपने भाई के सामने वो ऊपर से पूरी नंगी थी और निचे भी सिर्फ एक पेंटी hi थी.. तुषार उसके बूब्स को देख नहीं पाया था, आरुषि ने अपने दोनों हाथो से अपने बूब्स दक्ख रखे थे.. तुषार अपना हाथ आगे बढ़ता है और आरुषि के हाथ उसके बूब्स पर से अलग कर देता है.. हाथ hat.te hi आरुषि अपनी आखें बंद कर लेती है..)

(अभी तुषार के सामने आरुषि के मध्यम साइज के खूबसूरत बूब्स थे, उसके गुलाबी और chote-chote निप्पल जिससे देख तुषार के मुँह में पानी ा रहा था.. पहली बार वो ज़िन्दगी में किसी के बूब्स देख रहा था, वो भी अपनी बड़ी बहिन के.. तुषार ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और आरुषि का लेफ्ट बूब्स धीरे से प्रेस कर दिया…)

तुषार- ओह्ह दीदी.. ममम इतनी सॉफ्ट चीज़ को मैं पहली बार हाथ लगा रहा हु.. दीदी, दीदी.. अपनी आखें खोलो न…

आरुषि- (मुस्कुराती ही) नहीं.. मुझे शर्म ा रही तुषार.. तू कर न जो करना…

तुषार- जो चाहे कर लू.. आप मन नहीं करोगी क्या..?

आरुषि- (शर्माती हुई) नहीं, मैं क्यों मन करुँगी, पूरी तुम्हारे सामने नंगी कड़ी हु…

तुषार- पूरी कहा हो दीदी.. अभी तोह एक कपडा बचा हुआ है आपके शरीर पर, हाहाहा…

आरुषि- तुषाररर.. मरूंगी एक.. तुम तोह बहुत ज्यादा hi जल्दी कर रहे हो…

तुषार- बस दीदी मुझसे तोह कण्ट्रोल hi नहीं हो रहा था, मैं तोह यहाँ सिर्फ आपको किश करने आया था, लकिन पता नहीं kya-kya करके जायूँगा...

आरुषि- ाचा, लकिन तू मुझे……

तुषार- (उसके होंठो पर ऊँगली रख उससे चुप करता हुआ) स्स्स्सस्छ्हःहःहः दीदी.. कुछ मत बोलो…

(तुषार dhire-dhire आरुषि को पीछे ले जाता और उससे बीएड पर सीधा लेता देता है, खुद भी तुषार अपनी T-shirt उतर आरुषि के ऊपर ा जाता है.. तुषार की छाती आरुषि के बूब्स के साथ चिपकी हुई थी, दोनों के नंगे जिस्म ek-dusre के साथ रगड़ खा रहे थे जिससे दोनों को बहुत आनंद ा रहा था.. तुषार का हाथ आरुषि की गर्दन के निचे था और उसके होंठ आरुषि के होंठो के करीब…)

तुषार- दीदी ी लव यू.. आप बहुत ब्यूटीफुल हो.. (मुस्कुराता हुआ) बहार से भी और अंदर से भी..

(और उसकी एक गाल पर पहले प्यार से किश किया और फिर उसकी गाल दांतो से पकड़ काट लिया, जिससे वह निशाँ बन गया..)

आरुषि- (मुस्कुराती हुई) आह्हः, क्या कर रहा है.. कितनी जोर से काटा…

तुषार- अरे दीदी अभी तोह बहुत दर्द सहने है.. यह तोह कुछ भी नहीं…

(इसके बाद तुषार आरुषि के होंठो को दुबारा चूसने लगता है.. इसमें आरुषि ने भी खूब खुल कर उसका साथ दिया.. कुछ देर बाद तुषार थोड़ा सा निचे आरुषि के बूब्स की और खिसक गया.. उसने अपने दोनों हाथो से आरुषि के बूब्स पकड़ लिए.. और dhire-dhire उन्हें दबाना लगा.. आरुषि को halka-halka दर्द और मज़ा ा रहा था.. कुछ hi देर में उसके बूब्स ठोस हो चुके थे तुषार ने हलके से अपना मुँह निचे किया और उसका एक निप्पल अपने मुँह में भर लिया…)

आरुषि- (अपना हाथ तुषार के सर पर रख) ीिस्स्सस्स ह्ह्ह्हहोऊ.. हहह्म्म मममम आठ मममम आ तूउसारर अहह उफ्फ्फ्फ्फ़.. ओह्ह माँ.. ममममम…

तुषार- (उसका एक बूब दबाता हुआ और दूसरा आराम से चुस्त हुआ) स्सल्प्प्प मंहमं स्ललपपपपप स्सल्ल्प्प्प आठ दीदी.. मज़ा ा रहा आपको…

आरुषि- ममम आह्हः हाँ तुषार उह्ह्ह ओह. बहोत.. ोहहममम…

(कुछ देर तक वैसे hi तुषार उसके बूब चुस्त रहा और फिर उसने उसका दूसरा बूब मुँह में दाल लिया और उससे jor-jor से चूसने लगा और bich-bich में उसके निप्पल पर काटने भी लगा.. आरुषि दर्द और मज़ा से तड़फ रही थी, वो तुषार के बालो में हाथ फेर रही थी लकिन जैसे hi तुषार उसके निप्पल पर कट्टा तोह वो उसके बाल खिंच देती.. करीब आधे घंटे तक तुषार उसके बूब्स चुस्त रहा.. उसके होंठ सुख चुके थे chus-chus कर और आरुषि के बूब्स एकदम लाल पढ़ चुके थे…)

तुषार- (उसके साइड में लेट कर उससे गले लगा कर) दीदी.. मज़ा आया…

आरुषि- (उसको और जोर से अपने से लगाती हुई) हम्म.. बहुत मज़ा आया तुषार.. तुम्हे आया क्या…

तुषार- यह कोई पूछने वाली बात है दीदी.. मुझे आपसे भी ज्यादा मज़ा आया…

आरुषि- (मुस्कुराती हुई) हम्म, वो तोह मैं जानती थी की तू अगर इन्हे एक बार पकड़ लेगा तोह छोड़ेगा नहीं, उस दिन हर्षिका के भी कैसे ghur-ghur कर देख रहा था…

तुषार- ओह्ह तोह मेरी सेक्सी दीदी ने देख लिया था…

आरुषि- हाँ मैंने देख लिया था...

तुषार- कोई बात नहीं दीदी, मैं हर्षिका के भी टास्ते करूँगा फिर आपको बताऊंगा की ज्यादा टेस्टी किसके है…

आरुषि- बदमाश कही का.. चल सू जाते अभी…

तुषार- (उसके बूब प्रेस करता हुआ) ठीक है दीदी.. इनपर रोज मेहनत होगी तोह जल्दी बड़े हो जायेंगे…

आरुषि- (हस्ती हुई) हहहहए, ाचा.. ठीक है करलियो.. (उसके होंठो को कास के चूमती हुई) ी लव यू तुषार…

तुषार- ी लव यू तू दीदी…

आरुषि- (मन में) मुझे नहीं पता था तुषार की तुम मेरे प्यार को समाज सकोगे.. और कुछ नहीं चाहिए मुझे तुमसे, बस यू hi मुझे मेरे हिस्से का प्यार देते रहना.. तुम नहीं जानते मैं तुमसे कितना प्यार करती हु तुषार…

(और आरुषि ने तुषार को कास के गले लगा लिया.. दोनों वैसे hi ऊपर से नंगे ek-dusre की बहो में लिपटे सू गए.. आज तुषार ने आरुषि को अप्पन कर उसके दिल से बहुत बड़ा बोज हल्का कर दिया था, लकिन तुषार के इस फैसले पर उसके दिमाग ने बहुत सरे सवाल छोड़ दिए थे.. जिसका जवाब उसने वक़्त पर छोड़ दिया था, वो अपनी दीदी को दुखी नहीं करना चाहता था, उसने वही किया हो उसके और उसकी दीदी के लिए ठीक था.. समाज के ताने और उनकी नफरत से ज्यादा उससे अपनी दीदी का दुःख ज्यादा बड़ा लगा.. और वो खुद भी तोह करता था आरुषि से प्यार.. बचपन ने दोनों एक पल के लिए भी ek-dusre से अलग नहीं हुए.. एक लगाव सा हो गया था दोनों को ek-dusre से, और यह लगाव कब प्यार का रूप ले लिया, दोनों को hi पता नहीं चला.. दोनों bhai-behan है इसलिए कोई भी ek-dusre को कभी कुछ कह नहीं पाया की वो उससे कितना प्यार करते है.. लकिन आज दोनों मिल गए थे.. और दोनों के मन और दिल को बहुत शांति थी..........


《2173 -वर्ड्स》
 
ऐसा कुछ नहीं है भाई, यह स्टोरी कम्पलीट होगी और वैसे hi होगी जैसे मैंने शुरू में सोची थी, यह स्टोरी का CHAPTER-1 है.. स्टोरी बहुत स्लो चल रही है, बात स्लो की नहीं है बात है स्टोरी बहुत डिटेल्ड में चल रही है, क्युकी मुझसे वैसे hi लिखना पसंद है.. और अभी मैं काफी बिजी हु सो फिर भी bich-bich में टाइम निकल thora-thora लिखता रहता हु...
 
अपडेट-51





(और आरुषि ने तुषार को कास के गले लगा लिया.. दोनों वैसे hi ऊपर से नंगे ek-dusre की बहो में लिपटे सू गए.. आज तुषार ने आरुषि को अप्पन कर उसके दिल से बहुत बड़ा बोज हल्का कर दिया था, लकिन तुषार के इस फैसले पर उसके दिमाग ने बहुत सरे सवाल छोड़ दिए थे.. जिसका जवाब उसने वक़्त पर छोड़ दिया था, वो अपनी दीदी को दुखी नहीं करना चाहता था, उसने वही किया हो उसके और उसकी दीदी के लिए ठीक था.. समाज के ताने और उनकी नफरत से ज्यादा उससे अपनी दीदी का दुःख ज्यादा बड़ा लगा.. और वो खुद भी तोह करता था आरुषि से प्यार.. बचपन ने दोनों एक पल के लिए भी ek-dusre से अलग नहीं हुए.. एक लगाव सा हो गया था दोनों को ek-dusre से, और यह लगाव कब प्यार का रूप ले लिया, दोनों को hi पता नहीं चला.. दोनों bhai-behan है इसलिए कोई भी ek-dusre को कभी कुछ कह नहीं पाया की वो उससे कितना प्यार करते है.. लकिन आज दोनों मिल गए थे.. और दोनों के मन और दिल को बहुत शांति थी..........



|अब अग्गे|

|नेक्स्ट डे, मॉर्निंग|

(सुभे के 6 बज रहे थे लकिन तुषार और आरुषि दोनों एकदूसरे से लिपटे बेफिकरे सू रहे थे, की अचानक कोई जोर से दूर नॉक करने लगता है…)

अन्निका- (दूर जोर से नॉक करती हुई) अरे भैया आप इधर हो क्या…

(अंदर से कोई जवाब नहीं..)

अन्निका- hello.. दीदी.. कोई है भी या नहीं अंदर, दूर खोलो…

(अन्निका की इतनी jor-jor की आवाज सुन तुषार और आरुषि उठ जाते है…)

तुषार- (नींद में) क्या हुआ दीदी.. कोण इतना चिल्ला रहा…

आरुषि- (अंगड़ाई लेती हुई) हम्म अन्नू है...

तुषार- हम्म, गुड़िया है, रुको मैं खोलता हु दूर.. (फिर एकदम से आरुषि के बूब्स को देख) ओह माय गॉड दीदी.. बहार गुड़िया है… (और ऊँगली का इशारा उसके बूब्स की और करता हुआ)

आरुषि- (उसके इशारे का पीछे कर अपने बूब्स को नंगे देखती है, पहले तोह उससे थोड़ी शर्म आयी लकिन फिर उससे एहसास हुआ की तुषार क्या कहना चाहता है) ओह्ह सहित.. ruko-ruko मुझे कुछ पहनने दो.. तुम पकड़ो अपनी T-shirt पहनो…

(दोनों ने jaldi-jaldi कपडे पहन लिए, अभी अन्निका की आवाज नहीं आ रही थी और ना hi वोह दूर नॉक कर रही थी…)

तुषार- (दूर खोलता हुआ) लगता है गुड़िया चली गयी…

(लकिन अन्निका दूर के सामने अपनी कमर पे दोनों हाथ रखे कड़ी थी…)

तुषार- (उससे ऐसे कड़ी देख) अरे मेरी गुड़िया तुम यही हो अभी…

अन्निका- (आँखे टेढ़ी कर रूम के अंदर देखती हुई) मैं तोह यही थी कबसे, लकिन अपने इतना टाइम क्यों लगाया दूर खोलने में, रस्ते में क्या समंदर पड़ता है जिससे पर करके ए आप.. हुह्ह्ह..?

तुषार- (उसके नजदीक जाकर) अरे नहीं मेरी जान, सू रहे थे मैं और दीदी.. इसलिए uthte-uthte टाइम लगा.. तू बता इतनी subhe-subhe, कुछ काम है क्या…

अन्निका- (रूठ के) इतने दिन बाद आपसे मिली, रात को भी आपके रूम में आयी आपके साथ सोने के लिए, लकिन आप वह नहीं थे, फिर मैं सू गयी, सुभे भी मुझे लगा आप मुझे किसी देकर उठाने ायोगे लकिन आप नहीं ए.. आप मस्त खर्राटे मार्के दीदी के साथ सू रहे.. मुझे बात नहीं करनी आपसे.. मैं चली…

(और इतना बोल अन्निका घूम के जाने लगी, तुषार उससे जाते हुए देखता रहा, अन्निका को लगा था की तुषार उससे रोक लेगा लकिन वो बस उससे मुस्कुराते हुआ देखता रहा, फिर थोड़ी आगे जाने के बाद अन्निका ने घूम के देखा तोह पाया की तुषार उससे मुस्कुराता देख रहा था उसको जाने से रोक नहीं रहा, तोह उसने बुरा सा फेस बना लिया…)

अन्निका- मैं जा रही आप मुझे पकड़ भी नहीं रहे भैया.. आप बुरे हो गए…

तुषार- (हस्ता हुआ उसके पास आकर) नौटंकी कही की.. किसी चाहिए तुझे.. इधर आ बहुत साडी किसी करूँगा तुझे आज.. देख अभी…

(और इतना बोल तुषार ने अन्निका को खींच के अपने पास लगा लिया और फिर शुरू हुई किश की बरसात, तुषार ने अन्निका की गाल पे, माथे पे, गर्दन पे, उसके कानो को khich-khich के बहुत jor-jor से किश किया, जिससे अन्निका को मज़ा भी आ रहा था और वो गुदगुदी होने से तड़पत भी रही थी…)

अन्निका- (तुषार का मुँह पीछे करती हुई) हेहेहे यह नहीं, हहह भैया, आहहहहए बस करो, मुझे गुदगुदी हो रही आहहहहहए…

(लकिन तुषार था की रुकने का नाम नहीं ले रहा था, थोड़ी देर बाद सिया अपने रूम से बहार आयी और उसने यह सन देखा की तुषार और अन्निका दोनों फर्श पर लेते हुए है और तुषार अन्निका को जबरदस्ती किश किये जा रहा है और अन्निका हसे जा रही है, यह देख सिया भी jor-jor से हसने लगी और उनके पास ा गयी…)

सिया- (हस्ती हुई) भैया यह क्या कर रहे हो.. क्या अन्निका दीदी को परेशां कर रहे, हीहीहीह…

तुषार- नहीं सिया बीटा, यह मुझे बहुत परेशां करती है.. आज इससे मज़ा चखा रहा हु…

(कुछ देर बाद तुषार ने उससे छोड़ दिया, आरुषि भी उनके पास ा गयी…)

आरुषि- (उनकी यह हालत देख) हे बागवान, यह क्या कर रहे थे तुम लोग…

सिया- दीदी भैया ने अन्निका दीदी को मज़ा चखाया.. हेहेहे…

तुषार- (अन्निका को देख मुस्कुराता हुआ) अब खुश है गुड़िया, और किसी चाहिए..? हाहाहाहा…

अन्निका- (बुरा सा फेस बना के) मेरा पूरा फेस गिला कर दिया, ऐसे भी कोई किसी करता है, गंदे भैया.. मैं अभी नाहा के आयी थी.. बालो का भी घोसला बना दिया...

हर्षिका- (उनकी और आती हुई) अरे इधर क्या मेला लगा रखा तुम लोगो ने, कुछ हुआ है क्या…

सिया- (हस्ती हुई) बहुत कुछ हुआ है दीदी…

हर्षिका- (तुषार को मुस्कुरा के देखती हुई) ाचा क्या हुआ है.. (अन्निका को देख) और यह बिल्ली आज जंगली बिल्ली क्यों बानी हुई है...

अन्निका- यह भैया ने किया.. मुझे जबरदस्ती पकड़ के किसी किया.. बाल और गाल दोनों ख़राब किये...

हर्षिका- (धीरे से, तुषार को देख) ाचा मेरे भी कार्डो...

तुषार- (मुस्कुराता हुआ) क्या कहा...?

हर्षिका- (हड़बड़ा के) नहीं कुछ नहीं.. वो मैं ऐसे......

आरुषि- (बिच में) वो सब छोड़, ब्रेकफास्ट बन गया क्या, यह बता…

हर्षिका- हाँ बन गया…

अन्निका- (अपने होंठो पर जीब फेरती हुई) हम्म, बहुत भूख लगी, भैया ने तोह subhe-subhe थका दिया मुझे… हहै…

तुषार- (उसको साइड से गले लगा के) यह मेरी मोती भुखार गुड़िया कभी नहीं सुधेरगी…

|बैक तो रूद्र|

(रूद्र अपने रूम में था अभी, वो अपने बीएड पर लेता हुआ था की अचानक उसकी आँखे दो रंगो में चमकने लगी, लाल, नीली.. वो उठा और देखा की पास टेबल पर दारू से भरी बोतल राखी हुई है, उसने वो उठाई और मुँह से लगा के gata-gat पूरी पि गया…)

रूद्र- (अपने होंठ साफ़ करता हुआ) हहसष्ह.. साला बहुत टाइम हो गए.. जरा देख के आयु क्लब के क्या हाल है…

(वो गेराज गया और अपना कार जो बहुत टाइम से वह पड़ी हुई थी उससे निकल घर से भर सेहर की और जाने लगा.. और jata-jata जोर से बोल के गया की मैं क्लब जा रहा हु.. शिविका और देव उससे जाते हुए खिड़की से देख रहे थे…)

शिविका- यह यहाँ अपने चाचा के पीछे उसका गेम ओवर करने आया है या खुद क्लब में घूमने…

देव- यह बाँदा मेरी समाज में आज तक नहीं आया…

रीडर्स- (तेरी समाज में नहीं आया, हमारी खुद की समाज में नहीं ा रहा है…)

|जगाला हवेली|

(इतने दिनों में शिवं ने जग्गू बनकर वह हवेली में बहुत कुछ कर लिया था.. और आज वो चुपके से वह से निकल गया था…)

|Tushar's हवेली|

सवाना- (पक पर कुछ करती हुई) यार सफल मैंने कितना तरय किया बूत मैं यह फाइल्स को खोल hi नहीं प् रही हु…

सफल- हम्म, कोई नहीं तुम तरय करती रहो.. अगर यह फाइल्स खुल गयी तोह लाला के बहुत सरे राज़ हमारे सामने ा सकते है…

सवाना- कल पूरी रात मैं कोशिश करती रही, लकिन बात नहीं बानी.. पता नहीं सिया ने कैसे किया था उसने फाइल्स ट्रांसफर तोह कर्ली, बूत अभी मैं इससे ओपन नहीं कर प् रही.. शायद यह एक तरीके से ओपन हो सकती है, बूत I’m नॉट सूरे, फाइल्स कोर्रुप्त भी हो सकती जो बाद में हमारे किसी काम नहीं आएंगी…

सफल- हम्म, तुम तरय करो, हमारे पास और कोई ऑप्शन भी तोह नहीं है.. शायद फाइल्स खुल जाये…

सवाना- यह राइट.. ठीक है मैं करती हु कोशिश…

(उसके बाद सवाना उन् फाइल्स को ओपन करनी की लास्ट कोशिश करने लगी, करीब 30 मिनट बाद…)

सवाना- (शॉकेड होकर) ोूहः नू.. ओह्ह फ़क.. नहीं नहीं नहीं…

सफल- क्या हुआ…

सवाना- सफल उन्हें पता चल गया की हम कुछ ched-chad कर रहे है उन्हें सर्वर्स की फाइल्स में.. और अभी साडी फाइल्स कोर्रुप्त हो गयी.. (अपना सर टेबल पर रख के) फ़क यार…

सफल- सहित.. यह तोह बहुत गड़बड़ हो गयी.. अब बॉस को क्या जवाब देंगे…

सवाना- मुझे नहीं पता.. मुझे बहुत गुस्सा आ रहा है अब.. चल आ उस जग्गू की कहानी ख़तम करते है…

सफल- लकिन…

सवाना- देखा जायेगा आजा, मुझे बहुत गुस्सा ा रहा, जग्गू पे निकलती हु.. वो और मैं दोनों ठन्डे हो जायेंगे...

सफल- ठीक है चल…

|बैक तो ठाकुरस|

(ठाकुर सज्जन सिंह का वफादार आदमी सम्राट, विराट को ढूंढ़ते हुए एक खण्डार सी जगह जा पहुंचा…)

विराट- गांड देखि थी मेरी जान की, क्या hila-hila के चलती है, जैसे मुझे hi दिखा रही हो.. मज़ा आ जायेगा अगर रोज मरने को मिल जाये…

सूरज- फ़िक्र मत करो भाई, उस हर्षिका की शादी आपसे hi होगी.. फिर तोह आप कभी भी कुछ भी मारो उसका.. ः...

विराट- वो तोह मैं जनता हु.. लकिन मैं कोई jor-jabardasti नहीं करनी चाहता.. पहले प्यार से उससे अपने प्यार में उतरूंगा और फिर प्यार से अपने लुंड पर उतर दूंगा.. हाहाहाहाहा…

सूरज- हाहाहाहा हाँ भाई सही कहा…

सम्राट- (दूर से आता हु आवाज लगा के) छोटे ठाकुर आप यहाँ क्या कर रहे है…

विराट- ा गया बावली गांड…

सम्राट- आप क्या कर रहे है यहाँ.. आपको पता है न आपका घर से बहार जाना मन है.. और खास कर अस्सी ख़ानदार जैसी जगह पर.. हमारा सबसे बड़ा दुश्मन जेल से फरार हो गया है.. आपकी जान को खतरा हो सकता है इसलिए अभी कुछ वक़्त के लिए आप घर से बहार मत निकलिए…

विराट- (बहार जाता हुआ) चल ज्यादा ज्ञान मत छोड़.. कुत्ता मेरे बाप का…



(सम्राट ने उसकी बात सुनली वो उससे गुस्से भरी नजरो से जाते हुए देखता रहता है…)

《1695 -वर्ड्स》
 
Back
Top