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Update-18(A) (मेघा अपडेट)
भले hi हरी को शांति कोई ख़ास नहीं लगती थी मगर आसमा का ख्याल करते हुए वो आज बहुत सुकून महसूस कर रहा tha...............aab उसकी उमीदें बहुत हुड्ड तक बढ़ गयी थी उसका सपना अब सपना सच होने वाला tha...............dekhna था आगे हरी की ज़िन्दगी में कौन सा मोड़ आने वाला था.........................
अब आगे.................................................................
आसमा अपने कमरे में उदास बैठी thi...............uska दिल कहीं नहीं लग रहा tha...................sam भी एक दो दिन उसके पास hi रहा मगर आसमा उससे ठीक से बात नहीं ki...............shayad उस दिन की घटना की वजह se.................jisey वो अब तक भूल नहीं पायी thi................is लिए सैम भी अब अपने बुसिनेस्स के सिलसले में बहार जाना चाहता tha...........taki आसमा भी पहले जैसे सही हो जाये और सब कुछ भूल जाये..............
आसमा को रात में नींद नहीं आ रही thi.......wo बहुत कुछ सोच रही thi..............uska ध्यान बार बार हरी के तरफ भी जा रहा tha..............subeh सैम को फिर निकलना tha..................pata नहीं वो अब कितने दिनों के बाद वापस आने वाला था ये बात वो खुद नहीं जनता था...................
रात को सोते वक़्त उसने आसमा को अपनी बाँहों में जकड लिया tha..........jissey आसमा कुछ बोली तो नहीं बस किसी मूरत की तरह अपने बिस्टेर पर गुमसुम सी पड़ी rahi..............neend उसकी आँखों से उससे कोसों दूर thi...................wo बिस्टेर पर करवटें बदलते हुए बहुत कुछ सोच रही thi.............aur आपने आपक नार्मल करने की कोशिश कर रही thi............jaise तैसे रात गुज़री और सुबह सैम के लिए वो जल्दी उठी और उसके लिए नाश्ता और खाना बनाने lagi..........sam भी टाइम से उठ गया और फ्रेश होकर तैयार होने लगा.............
जाते वक़्त उसने आसमा को गले लगाया मगर आसमा अभी भी पत्थर की मूरत बानी thi............wo उसका दिल नहीं तोडना चाहती थी इस लिए वो उसे हुग करती हुई उसे मुस्कुराकर सी ऑफ kiya............aasma के इस तरह से मुस्कुराने से सैम के दिल का बोझ बहुत हल्का हो गया और वो फ्लाइंग किश देता हुआ अपने घर से .............और उससे दूर चला gaya................aasam फिर से उदास हो गयी thi...............sam का यु दूर जाना उसे ाचा नहीं लग रहा था मगर उसका जाना भी तो उसकी मज़बूरी थी...............
सैम के जाते hi शांति और हरी खुस हो गए they......................kyon की अब उनके प्लान में डिस्टर्ब करने वाला सैम उनके बीच नहीं tha...............sam के जाते hi शांति आसमा के पास आयी और आकर उससे बातें करने लगी...............
" memsaheb....................aap फ़िक्र मुट्ठ kijiye..............hum लोग हैं naa.....................agar किसी चीज़ की आपको कभी कोई ज़रुरत पड़े तो हमसे कह dijiyega.................main और हरी हैं ना......................" और शांति हौले से आसमा के कन्धों पर अपना हाथ रखती हुई धीरे से मुस्कुरा देती हैं वहीँ आसमा जवाब में धीरे से मुस्कुरा देती हैं...............
आज हरी के तेवर बदले बदले से they.....................itne दिनों से वो आसमा के तरफ जान बूझकर जो नहीं देख रहा था अब वो अपनी नज़रें हटाए बिना आसमा को फिर से पहले जैसे स्कैन कर रहा tha...............hari का ऐसे उसकी तरफ देखना कहीं न कहीं आसमा को भी सुकून दे रहा tha............balki वो अब खुद चाहती थी की हरी उसे जी भरकर बस देखता rahe..............thode देर बाद आसमा ऊपर के कमरे की तरफ चल पड़ती हैं जहाँ हरी कमरे की साफ़ सफाई कर रहा tha.................ek बार फिर से उसका दिल ज़ोरों से धड़क उठा..............
जब हरी की नज़रें आसमा पर गयी उसके चेहरे पर फिर से वहीँ गन्दी सी मुस्कान तैर gayi................wo सर से लेकर पवन तक आसमा को ाचे से जी भरकर स्कैन करने laga.............uske दोनों चूचियों को ठीक से मुयायना करने के बाद वो उसके कमर और गांड के तरफ देखने laga..................wahin आसमा को ाचे से पता था की हरी की नज़रें इस वक़्त कहाँ पर hain......magar वो न hi उसे कुछ कहती हैं और न उसके सामने से हटती hain..............balki चुप चाप से वो वहीँ हरी की तरफ देखती रहती हैं..............
जब हरी उसे सर से लेकर पवन तक ाचे से देख लेता हैं तब वो आगे बढ़ता हुआ आसमा के करीब आता हैं और हौले से उसके दोनों हाथों को पकड़ता हुआ उसके क़दमों में नीचे की तरफ झुककर बैठ जाता hain........................ye देखकर आसमा हैरत से हरी के तरफ देखने लगती हैं..............
" मुझे माफ़ कर दीजिये memsaheb.................us दिन जो hua..................aage से अब दुबारा नहीं होगा................" और हरी जैसे आसमा के सामने फर्याद करने लगता हैं वहीँ आसमा की जैसे हंसी चूत जाती हैं और वो हौले से हरी की तरफ देखती हुई धीरे से मुस्कुरा देती hain............aasma को ऐसे मुस्कुराता हुआ देखकर हरी अपनी जीत पर मुन्न hi मुन्न बहुत खुस होता hain..............wahin आसमा फिर से बेचैन होने लगी thi.....................hari के इतने करीब होने से उसकी सांसों में फिर से वहीँ स्मेल एक बार फिर घुलने लगी थी जिससे वो एक बार फिर से मदहोश होती जा रही thi............wo हरी का हाथ छुड़ाते हुए हाँ में अपना सर हिलती हैं मगर उससे दूर नहीं जाती...................
"haaaaaaaaaannn....haan............maine तुम्हें माफ़ किया............." और आसमा की सांसें फिर से बेकाबू होने लगती hain.......wahin हरी आसमा का शिकार बड़े आराम से करना चाहता tha....................wo उसके पर बड़े आराम से कुतरना चाहता था ताकि वो कभी दुबारा से उड़द न sake......aur न कभी उससे कहीं दूर जा sake...................waise भी हरी को किसी बात की कहीं कोई जल्दी नहीं thi.................wo उसे धीरे धीरे इतना गरम करना चाहता था की आसमा हर वक़्त अपने बदन की आग में बस सुलगती rahe..............wo अंदर hi अंदर हर पल इतनी बेचैन रहे की वो धीरे धीरे अपनी शर्म हाय लाज और अपने संस्कार सब कुछ पीछे छोड़कर उसके पास दौड़ी चली आये................
हरी ये बात ाचे से जनता था की ये काम इतना आसान भी नहीं हैं मगर ये इतना मुश्किल भी नहीं hain............................choot की आग से वो बहुत ाचे से वाखिफ़ tha................usey पता था की जब नीचे आग लगती हैं तो औरत क्या कुछ कर सकती hain..............bus उसे इस जलती हुई आग में थोड़ा थोड़ा घी डालना tha..............taki ये आग बस सुलगती rahe............wo भी अब देखना चाहता था की आखिर आसमा खुद को कब तक रोक पति हैं................
" memsaheb....................bahut भूक लगी hain........upar से यहाँ इतनी गर्मी भी hain................agar कुछ नास्ता मिल जायेगा तो आपकी बड़ी मेहरबानी होगी.............." और हरी आसमा के बदन पर फिर से अपनी निगाह डालता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा बिना कुछ बोले फ़ौरन नीचे किचन की तरफ चल पड़ती हैं वहीँ हरी फिर से उसकी मटकती हुई गांड को देखे जा रहा tha...................halanki आसमा को मालूम था की हरी वहां खड़े होकर क्या देख रहा होगा फिर भी आसमा को अब किसी बात की कोई परवाह नहीं थी.............
हरी फ़ौरन बिना झिझक के अपना एक हाथ अपने लुंड पर ले जाता हैं और लोअर के ऊपर से hi आसमा की मटकती हुई गांड को घूरता हुआ .....................धीरे धीरे अपने लुंड को फिर सहलाने लगता hain..................aasma के चलने से सूट के ऊपर उसके गांड के बीच की दरार साफ़ नज़र आ रही थी जो हरी को बेचैन करने के लिए बस काफी thi..........jaise hi आसमा थोड़ी दूर गयी एक बार वो पीछे पलटकर हरी के तरफ देखने lagi..............aur जब हरी को अपने लोअर के ऊपर से अपना लुंड मसलता हुआ देखकर जैसे उसकी सांस अटक gayi..................ek अजीब सी सिरहन उसके तन बदन में दौड़ gayi..................wo फ़ौरन अपनी नज़रें फेरती हुई तेज़ी से नीचे की तरफ जाने lagi...............wahin हरी के चेहरे पर गन्दी हंसी थी.............
" बहुत मटक मटक कर चल रही हैं न tu..............dekh लेना जिस दिन ये लौड़ा पूरा तेरी गांड में जब घुसेगा tab..............us दिन तेरी चाल खुद बा खुद बदल jayegi..............wo दिन मेरी ज़िन्दगी का सबसे खुसनसीब दिन hoga...........aur तुझे बेशरम बनाना हैं तो पहले मुझे खुद hi बेशरम बनाना पड़ेगा..............." और हरी अपने लुंड को मसलता हुआ सब कुछ सोचने लगता hain..............wahin आसमा की सांसें जैसे भरी होने लगी thi.............hari की वो हरकतें वो भूला नहीं पा रही thi.................is तरह लोअर के ऊपर से लुंड मसानी से उसे अंदाजा तो हो hi गया था की हरी का लुंड कितना बड़ा और कितना मोटा hoga............ye सोच सोचकर उसका दिल घबरा रहा tha...................ajeeb सी बेचैनी उसके तन बदन में हो रही थी..........
वो किचन में एक ट्रे में एक बोतल पानी रखती हैं और ब्रेड पर बटर और जैम लगाकर उसे ओवन में गरम करती hain...............bhale hi वो किचन में काम कर रही थी मगर उसका सारा ध्यान कहीं और tha............wo जैसे तैसे अपनी सांसों को संभालती हुई उस ब्रेड को गरम करके ...........साथ में एक पका हुआ आम (मानगो) भी रखती hui.................dheere धीरे फिर ऊपर के कमरे में चल पड़ती हैं उसके हाथ थोड़े काँप रहे they..............aur जिस्म में अजीब सी बेचैनी बार बार उठ रही thi.................jaise hi वो अंदर जाती हैं हरी वहीँ फर्श पर बैठा हुआ सस्ती वाली बीड़ी पी रहा tha.................aasma को ऐसे अपनी तरफ आता हुआ देखकर वो एक तेज़्ज़ काश लेता हैं और उसका धुवां ऊपर की तरफ छोड़ने लगता हैं.............
बीड़ी के धुईं जब आसमा के सांसों में जब घुलती हैं वो वहीँ खास पड़ती हैं ये देखकर हरी धीरे से मुस्कुरा देता hain......magar आसमा न hi उसे कुछ कहती हैं और न hi उसे रोकती हैं..............
भले hi हरी को शांति कोई ख़ास नहीं लगती थी मगर आसमा का ख्याल करते हुए वो आज बहुत सुकून महसूस कर रहा tha...............aab उसकी उमीदें बहुत हुड्ड तक बढ़ गयी थी उसका सपना अब सपना सच होने वाला tha...............dekhna था आगे हरी की ज़िन्दगी में कौन सा मोड़ आने वाला था.........................
अब आगे.................................................................
आसमा अपने कमरे में उदास बैठी thi...............uska दिल कहीं नहीं लग रहा tha...................sam भी एक दो दिन उसके पास hi रहा मगर आसमा उससे ठीक से बात नहीं ki...............shayad उस दिन की घटना की वजह se.................jisey वो अब तक भूल नहीं पायी thi................is लिए सैम भी अब अपने बुसिनेस्स के सिलसले में बहार जाना चाहता tha...........taki आसमा भी पहले जैसे सही हो जाये और सब कुछ भूल जाये..............
आसमा को रात में नींद नहीं आ रही thi.......wo बहुत कुछ सोच रही thi..............uska ध्यान बार बार हरी के तरफ भी जा रहा tha..............subeh सैम को फिर निकलना tha..................pata नहीं वो अब कितने दिनों के बाद वापस आने वाला था ये बात वो खुद नहीं जनता था...................
रात को सोते वक़्त उसने आसमा को अपनी बाँहों में जकड लिया tha..........jissey आसमा कुछ बोली तो नहीं बस किसी मूरत की तरह अपने बिस्टेर पर गुमसुम सी पड़ी rahi..............neend उसकी आँखों से उससे कोसों दूर thi...................wo बिस्टेर पर करवटें बदलते हुए बहुत कुछ सोच रही thi.............aur आपने आपक नार्मल करने की कोशिश कर रही thi............jaise तैसे रात गुज़री और सुबह सैम के लिए वो जल्दी उठी और उसके लिए नाश्ता और खाना बनाने lagi..........sam भी टाइम से उठ गया और फ्रेश होकर तैयार होने लगा.............
जाते वक़्त उसने आसमा को गले लगाया मगर आसमा अभी भी पत्थर की मूरत बानी thi............wo उसका दिल नहीं तोडना चाहती थी इस लिए वो उसे हुग करती हुई उसे मुस्कुराकर सी ऑफ kiya............aasma के इस तरह से मुस्कुराने से सैम के दिल का बोझ बहुत हल्का हो गया और वो फ्लाइंग किश देता हुआ अपने घर से .............और उससे दूर चला gaya................aasam फिर से उदास हो गयी thi...............sam का यु दूर जाना उसे ाचा नहीं लग रहा था मगर उसका जाना भी तो उसकी मज़बूरी थी...............
सैम के जाते hi शांति और हरी खुस हो गए they......................kyon की अब उनके प्लान में डिस्टर्ब करने वाला सैम उनके बीच नहीं tha...............sam के जाते hi शांति आसमा के पास आयी और आकर उससे बातें करने लगी...............
" memsaheb....................aap फ़िक्र मुट्ठ kijiye..............hum लोग हैं naa.....................agar किसी चीज़ की आपको कभी कोई ज़रुरत पड़े तो हमसे कह dijiyega.................main और हरी हैं ना......................" और शांति हौले से आसमा के कन्धों पर अपना हाथ रखती हुई धीरे से मुस्कुरा देती हैं वहीँ आसमा जवाब में धीरे से मुस्कुरा देती हैं...............
आज हरी के तेवर बदले बदले से they.....................itne दिनों से वो आसमा के तरफ जान बूझकर जो नहीं देख रहा था अब वो अपनी नज़रें हटाए बिना आसमा को फिर से पहले जैसे स्कैन कर रहा tha...............hari का ऐसे उसकी तरफ देखना कहीं न कहीं आसमा को भी सुकून दे रहा tha............balki वो अब खुद चाहती थी की हरी उसे जी भरकर बस देखता rahe..............thode देर बाद आसमा ऊपर के कमरे की तरफ चल पड़ती हैं जहाँ हरी कमरे की साफ़ सफाई कर रहा tha.................ek बार फिर से उसका दिल ज़ोरों से धड़क उठा..............
जब हरी की नज़रें आसमा पर गयी उसके चेहरे पर फिर से वहीँ गन्दी सी मुस्कान तैर gayi................wo सर से लेकर पवन तक आसमा को ाचे से जी भरकर स्कैन करने laga.............uske दोनों चूचियों को ठीक से मुयायना करने के बाद वो उसके कमर और गांड के तरफ देखने laga..................wahin आसमा को ाचे से पता था की हरी की नज़रें इस वक़्त कहाँ पर hain......magar वो न hi उसे कुछ कहती हैं और न उसके सामने से हटती hain..............balki चुप चाप से वो वहीँ हरी की तरफ देखती रहती हैं..............
जब हरी उसे सर से लेकर पवन तक ाचे से देख लेता हैं तब वो आगे बढ़ता हुआ आसमा के करीब आता हैं और हौले से उसके दोनों हाथों को पकड़ता हुआ उसके क़दमों में नीचे की तरफ झुककर बैठ जाता hain........................ye देखकर आसमा हैरत से हरी के तरफ देखने लगती हैं..............
" मुझे माफ़ कर दीजिये memsaheb.................us दिन जो hua..................aage से अब दुबारा नहीं होगा................" और हरी जैसे आसमा के सामने फर्याद करने लगता हैं वहीँ आसमा की जैसे हंसी चूत जाती हैं और वो हौले से हरी की तरफ देखती हुई धीरे से मुस्कुरा देती hain............aasma को ऐसे मुस्कुराता हुआ देखकर हरी अपनी जीत पर मुन्न hi मुन्न बहुत खुस होता hain..............wahin आसमा फिर से बेचैन होने लगी thi.....................hari के इतने करीब होने से उसकी सांसों में फिर से वहीँ स्मेल एक बार फिर घुलने लगी थी जिससे वो एक बार फिर से मदहोश होती जा रही thi............wo हरी का हाथ छुड़ाते हुए हाँ में अपना सर हिलती हैं मगर उससे दूर नहीं जाती...................
"haaaaaaaaaannn....haan............maine तुम्हें माफ़ किया............." और आसमा की सांसें फिर से बेकाबू होने लगती hain.......wahin हरी आसमा का शिकार बड़े आराम से करना चाहता tha....................wo उसके पर बड़े आराम से कुतरना चाहता था ताकि वो कभी दुबारा से उड़द न sake......aur न कभी उससे कहीं दूर जा sake...................waise भी हरी को किसी बात की कहीं कोई जल्दी नहीं thi.................wo उसे धीरे धीरे इतना गरम करना चाहता था की आसमा हर वक़्त अपने बदन की आग में बस सुलगती rahe..............wo अंदर hi अंदर हर पल इतनी बेचैन रहे की वो धीरे धीरे अपनी शर्म हाय लाज और अपने संस्कार सब कुछ पीछे छोड़कर उसके पास दौड़ी चली आये................
हरी ये बात ाचे से जनता था की ये काम इतना आसान भी नहीं हैं मगर ये इतना मुश्किल भी नहीं hain............................choot की आग से वो बहुत ाचे से वाखिफ़ tha................usey पता था की जब नीचे आग लगती हैं तो औरत क्या कुछ कर सकती hain..............bus उसे इस जलती हुई आग में थोड़ा थोड़ा घी डालना tha..............taki ये आग बस सुलगती rahe............wo भी अब देखना चाहता था की आखिर आसमा खुद को कब तक रोक पति हैं................
" memsaheb....................bahut भूक लगी hain........upar से यहाँ इतनी गर्मी भी hain................agar कुछ नास्ता मिल जायेगा तो आपकी बड़ी मेहरबानी होगी.............." और हरी आसमा के बदन पर फिर से अपनी निगाह डालता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा बिना कुछ बोले फ़ौरन नीचे किचन की तरफ चल पड़ती हैं वहीँ हरी फिर से उसकी मटकती हुई गांड को देखे जा रहा tha...................halanki आसमा को मालूम था की हरी वहां खड़े होकर क्या देख रहा होगा फिर भी आसमा को अब किसी बात की कोई परवाह नहीं थी.............
हरी फ़ौरन बिना झिझक के अपना एक हाथ अपने लुंड पर ले जाता हैं और लोअर के ऊपर से hi आसमा की मटकती हुई गांड को घूरता हुआ .....................धीरे धीरे अपने लुंड को फिर सहलाने लगता hain..................aasma के चलने से सूट के ऊपर उसके गांड के बीच की दरार साफ़ नज़र आ रही थी जो हरी को बेचैन करने के लिए बस काफी thi..........jaise hi आसमा थोड़ी दूर गयी एक बार वो पीछे पलटकर हरी के तरफ देखने lagi..............aur जब हरी को अपने लोअर के ऊपर से अपना लुंड मसलता हुआ देखकर जैसे उसकी सांस अटक gayi..................ek अजीब सी सिरहन उसके तन बदन में दौड़ gayi..................wo फ़ौरन अपनी नज़रें फेरती हुई तेज़ी से नीचे की तरफ जाने lagi...............wahin हरी के चेहरे पर गन्दी हंसी थी.............
" बहुत मटक मटक कर चल रही हैं न tu..............dekh लेना जिस दिन ये लौड़ा पूरा तेरी गांड में जब घुसेगा tab..............us दिन तेरी चाल खुद बा खुद बदल jayegi..............wo दिन मेरी ज़िन्दगी का सबसे खुसनसीब दिन hoga...........aur तुझे बेशरम बनाना हैं तो पहले मुझे खुद hi बेशरम बनाना पड़ेगा..............." और हरी अपने लुंड को मसलता हुआ सब कुछ सोचने लगता hain..............wahin आसमा की सांसें जैसे भरी होने लगी thi.............hari की वो हरकतें वो भूला नहीं पा रही thi.................is तरह लोअर के ऊपर से लुंड मसानी से उसे अंदाजा तो हो hi गया था की हरी का लुंड कितना बड़ा और कितना मोटा hoga............ye सोच सोचकर उसका दिल घबरा रहा tha...................ajeeb सी बेचैनी उसके तन बदन में हो रही थी..........
वो किचन में एक ट्रे में एक बोतल पानी रखती हैं और ब्रेड पर बटर और जैम लगाकर उसे ओवन में गरम करती hain...............bhale hi वो किचन में काम कर रही थी मगर उसका सारा ध्यान कहीं और tha............wo जैसे तैसे अपनी सांसों को संभालती हुई उस ब्रेड को गरम करके ...........साथ में एक पका हुआ आम (मानगो) भी रखती hui.................dheere धीरे फिर ऊपर के कमरे में चल पड़ती हैं उसके हाथ थोड़े काँप रहे they..............aur जिस्म में अजीब सी बेचैनी बार बार उठ रही thi.................jaise hi वो अंदर जाती हैं हरी वहीँ फर्श पर बैठा हुआ सस्ती वाली बीड़ी पी रहा tha.................aasma को ऐसे अपनी तरफ आता हुआ देखकर वो एक तेज़्ज़ काश लेता हैं और उसका धुवां ऊपर की तरफ छोड़ने लगता हैं.............
बीड़ी के धुईं जब आसमा के सांसों में जब घुलती हैं वो वहीँ खास पड़ती हैं ये देखकर हरी धीरे से मुस्कुरा देता hain......magar आसमा न hi उसे कुछ कहती हैं और न hi उसे रोकती हैं..............