Ufff......Ye Kaisi Pyaas...........(A Story Of Housewife) - Page 4 - SexBaba
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Ufff......Ye Kaisi Pyaas...........(A Story Of Housewife)

Update-18(A) (मेघा अपडेट)

भले hi हरी को शांति कोई ख़ास नहीं लगती थी मगर आसमा का ख्याल करते हुए वो आज बहुत सुकून महसूस कर रहा tha...............aab उसकी उमीदें बहुत हुड्ड तक बढ़ गयी थी उसका सपना अब सपना सच होने वाला tha...............dekhna था आगे हरी की ज़िन्दगी में कौन सा मोड़ आने वाला था.........................



अब आगे.................................................................


आसमा अपने कमरे में उदास बैठी thi...............uska दिल कहीं नहीं लग रहा tha...................sam भी एक दो दिन उसके पास hi रहा मगर आसमा उससे ठीक से बात नहीं ki...............shayad उस दिन की घटना की वजह se.................jisey वो अब तक भूल नहीं पायी thi................is लिए सैम भी अब अपने बुसिनेस्स के सिलसले में बहार जाना चाहता tha...........taki आसमा भी पहले जैसे सही हो जाये और सब कुछ भूल जाये..............

आसमा को रात में नींद नहीं आ रही thi.......wo बहुत कुछ सोच रही thi..............uska ध्यान बार बार हरी के तरफ भी जा रहा tha..............subeh सैम को फिर निकलना tha..................pata नहीं वो अब कितने दिनों के बाद वापस आने वाला था ये बात वो खुद नहीं जनता था...................

रात को सोते वक़्त उसने आसमा को अपनी बाँहों में जकड लिया tha..........jissey आसमा कुछ बोली तो नहीं बस किसी मूरत की तरह अपने बिस्टेर पर गुमसुम सी पड़ी rahi..............neend उसकी आँखों से उससे कोसों दूर thi...................wo बिस्टेर पर करवटें बदलते हुए बहुत कुछ सोच रही thi.............aur आपने आपक नार्मल करने की कोशिश कर रही thi............jaise तैसे रात गुज़री और सुबह सैम के लिए वो जल्दी उठी और उसके लिए नाश्ता और खाना बनाने lagi..........sam भी टाइम से उठ गया और फ्रेश होकर तैयार होने लगा.............

जाते वक़्त उसने आसमा को गले लगाया मगर आसमा अभी भी पत्थर की मूरत बानी thi............wo उसका दिल नहीं तोडना चाहती थी इस लिए वो उसे हुग करती हुई उसे मुस्कुराकर सी ऑफ kiya............aasma के इस तरह से मुस्कुराने से सैम के दिल का बोझ बहुत हल्का हो गया और वो फ्लाइंग किश देता हुआ अपने घर से .............और उससे दूर चला gaya................aasam फिर से उदास हो गयी thi...............sam का यु दूर जाना उसे ाचा नहीं लग रहा था मगर उसका जाना भी तो उसकी मज़बूरी थी...............

सैम के जाते hi शांति और हरी खुस हो गए they......................kyon की अब उनके प्लान में डिस्टर्ब करने वाला सैम उनके बीच नहीं tha...............sam के जाते hi शांति आसमा के पास आयी और आकर उससे बातें करने लगी...............

" memsaheb....................aap फ़िक्र मुट्ठ kijiye..............hum लोग हैं naa.....................agar किसी चीज़ की आपको कभी कोई ज़रुरत पड़े तो हमसे कह dijiyega.................main और हरी हैं ना......................" और शांति हौले से आसमा के कन्धों पर अपना हाथ रखती हुई धीरे से मुस्कुरा देती हैं वहीँ आसमा जवाब में धीरे से मुस्कुरा देती हैं...............

आज हरी के तेवर बदले बदले से they.....................itne दिनों से वो आसमा के तरफ जान बूझकर जो नहीं देख रहा था अब वो अपनी नज़रें हटाए बिना आसमा को फिर से पहले जैसे स्कैन कर रहा tha...............hari का ऐसे उसकी तरफ देखना कहीं न कहीं आसमा को भी सुकून दे रहा tha............balki वो अब खुद चाहती थी की हरी उसे जी भरकर बस देखता rahe..............thode देर बाद आसमा ऊपर के कमरे की तरफ चल पड़ती हैं जहाँ हरी कमरे की साफ़ सफाई कर रहा tha.................ek बार फिर से उसका दिल ज़ोरों से धड़क उठा..............

जब हरी की नज़रें आसमा पर गयी उसके चेहरे पर फिर से वहीँ गन्दी सी मुस्कान तैर gayi................wo सर से लेकर पवन तक आसमा को ाचे से जी भरकर स्कैन करने laga.............uske दोनों चूचियों को ठीक से मुयायना करने के बाद वो उसके कमर और गांड के तरफ देखने laga..................wahin आसमा को ाचे से पता था की हरी की नज़रें इस वक़्त कहाँ पर hain......magar वो न hi उसे कुछ कहती हैं और न उसके सामने से हटती hain..............balki चुप चाप से वो वहीँ हरी की तरफ देखती रहती हैं..............

जब हरी उसे सर से लेकर पवन तक ाचे से देख लेता हैं तब वो आगे बढ़ता हुआ आसमा के करीब आता हैं और हौले से उसके दोनों हाथों को पकड़ता हुआ उसके क़दमों में नीचे की तरफ झुककर बैठ जाता hain........................ye देखकर आसमा हैरत से हरी के तरफ देखने लगती हैं..............

" मुझे माफ़ कर दीजिये memsaheb.................us दिन जो hua..................aage से अब दुबारा नहीं होगा................" और हरी जैसे आसमा के सामने फर्याद करने लगता हैं वहीँ आसमा की जैसे हंसी चूत जाती हैं और वो हौले से हरी की तरफ देखती हुई धीरे से मुस्कुरा देती hain............aasma को ऐसे मुस्कुराता हुआ देखकर हरी अपनी जीत पर मुन्न hi मुन्न बहुत खुस होता hain..............wahin आसमा फिर से बेचैन होने लगी thi.....................hari के इतने करीब होने से उसकी सांसों में फिर से वहीँ स्मेल एक बार फिर घुलने लगी थी जिससे वो एक बार फिर से मदहोश होती जा रही thi............wo हरी का हाथ छुड़ाते हुए हाँ में अपना सर हिलती हैं मगर उससे दूर नहीं जाती...................

"haaaaaaaaaannn....haan............maine तुम्हें माफ़ किया............." और आसमा की सांसें फिर से बेकाबू होने लगती hain.......wahin हरी आसमा का शिकार बड़े आराम से करना चाहता tha....................wo उसके पर बड़े आराम से कुतरना चाहता था ताकि वो कभी दुबारा से उड़द न sake......aur न कभी उससे कहीं दूर जा sake...................waise भी हरी को किसी बात की कहीं कोई जल्दी नहीं thi.................wo उसे धीरे धीरे इतना गरम करना चाहता था की आसमा हर वक़्त अपने बदन की आग में बस सुलगती rahe..............wo अंदर hi अंदर हर पल इतनी बेचैन रहे की वो धीरे धीरे अपनी शर्म हाय लाज और अपने संस्कार सब कुछ पीछे छोड़कर उसके पास दौड़ी चली आये................

हरी ये बात ाचे से जनता था की ये काम इतना आसान भी नहीं हैं मगर ये इतना मुश्किल भी नहीं hain............................choot की आग से वो बहुत ाचे से वाखिफ़ tha................usey पता था की जब नीचे आग लगती हैं तो औरत क्या कुछ कर सकती hain..............bus उसे इस जलती हुई आग में थोड़ा थोड़ा घी डालना tha..............taki ये आग बस सुलगती rahe............wo भी अब देखना चाहता था की आखिर आसमा खुद को कब तक रोक पति हैं................

" memsaheb....................bahut भूक लगी hain........upar से यहाँ इतनी गर्मी भी hain................agar कुछ नास्ता मिल जायेगा तो आपकी बड़ी मेहरबानी होगी.............." और हरी आसमा के बदन पर फिर से अपनी निगाह डालता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा बिना कुछ बोले फ़ौरन नीचे किचन की तरफ चल पड़ती हैं वहीँ हरी फिर से उसकी मटकती हुई गांड को देखे जा रहा tha...................halanki आसमा को मालूम था की हरी वहां खड़े होकर क्या देख रहा होगा फिर भी आसमा को अब किसी बात की कोई परवाह नहीं थी.............

हरी फ़ौरन बिना झिझक के अपना एक हाथ अपने लुंड पर ले जाता हैं और लोअर के ऊपर से hi आसमा की मटकती हुई गांड को घूरता हुआ .....................धीरे धीरे अपने लुंड को फिर सहलाने लगता hain..................aasma के चलने से सूट के ऊपर उसके गांड के बीच की दरार साफ़ नज़र आ रही थी जो हरी को बेचैन करने के लिए बस काफी thi..........jaise hi आसमा थोड़ी दूर गयी एक बार वो पीछे पलटकर हरी के तरफ देखने lagi..............aur जब हरी को अपने लोअर के ऊपर से अपना लुंड मसलता हुआ देखकर जैसे उसकी सांस अटक gayi..................ek अजीब सी सिरहन उसके तन बदन में दौड़ gayi..................wo फ़ौरन अपनी नज़रें फेरती हुई तेज़ी से नीचे की तरफ जाने lagi...............wahin हरी के चेहरे पर गन्दी हंसी थी.............

" बहुत मटक मटक कर चल रही हैं न tu..............dekh लेना जिस दिन ये लौड़ा पूरा तेरी गांड में जब घुसेगा tab..............us दिन तेरी चाल खुद बा खुद बदल jayegi..............wo दिन मेरी ज़िन्दगी का सबसे खुसनसीब दिन hoga...........aur तुझे बेशरम बनाना हैं तो पहले मुझे खुद hi बेशरम बनाना पड़ेगा..............." और हरी अपने लुंड को मसलता हुआ सब कुछ सोचने लगता hain..............wahin आसमा की सांसें जैसे भरी होने लगी thi.............hari की वो हरकतें वो भूला नहीं पा रही thi.................is तरह लोअर के ऊपर से लुंड मसानी से उसे अंदाजा तो हो hi गया था की हरी का लुंड कितना बड़ा और कितना मोटा hoga............ye सोच सोचकर उसका दिल घबरा रहा tha...................ajeeb सी बेचैनी उसके तन बदन में हो रही थी..........

वो किचन में एक ट्रे में एक बोतल पानी रखती हैं और ब्रेड पर बटर और जैम लगाकर उसे ओवन में गरम करती hain...............bhale hi वो किचन में काम कर रही थी मगर उसका सारा ध्यान कहीं और tha............wo जैसे तैसे अपनी सांसों को संभालती हुई उस ब्रेड को गरम करके ...........साथ में एक पका हुआ आम (मानगो) भी रखती hui.................dheere धीरे फिर ऊपर के कमरे में चल पड़ती हैं उसके हाथ थोड़े काँप रहे they..............aur जिस्म में अजीब सी बेचैनी बार बार उठ रही thi.................jaise hi वो अंदर जाती हैं हरी वहीँ फर्श पर बैठा हुआ सस्ती वाली बीड़ी पी रहा tha.................aasma को ऐसे अपनी तरफ आता हुआ देखकर वो एक तेज़्ज़ काश लेता हैं और उसका धुवां ऊपर की तरफ छोड़ने लगता हैं.............

बीड़ी के धुईं जब आसमा के सांसों में जब घुलती हैं वो वहीँ खास पड़ती हैं ये देखकर हरी धीरे से मुस्कुरा देता hain......magar आसमा न hi उसे कुछ कहती हैं और न hi उसे रोकती हैं..............
 
Update-18(B) (मेघा अपडेट)

" आपका बहुत बहुत शुक्रिया memsaheb.....................aap बहुत ाची hain..............waise एक बात बोलूं memsaheb.....................aap साड़ी में बेहद हसीं लगती hain..............aap हमेशा साड़ी hi पहना कीजिये............" और हरी एक नज़र आसमा के चेहरे की तरफ डालती हैं मगर वो उससे कुछ नहीं kehti.............kehti भी क्या..............

"waahhhhhhhhhhhhhhhh.............pake हुए aam.................waise memsaheb...............mujhe आम बेहद पसन् हैं...................." और हरी एक नज़र ट्रे में रखे उस बड़े से आम की तरफ देखता हुआ धीरे से हंस पड़ता हैं वहीँ आसमा हरी की तरफ देखती हुई धीरे से मुस्कुरा देती हैं............

" ये आम मैंने तुम्हारे लिए hi लाये hain..................pasand हैं तो फिर खावो ............." और आसमा हरी को ताने मरती हुई बोल पड़ती हैं वहीँ हरी को तो जैसे मौका मिल जाता hain...............uske चेहरे पर फिर से वहीँ कमीनी मुस्कान तैर जाती हैं............

" आपको पसंद हैं न memsaheb.....................aaam................waise आम को काटकर खाने से ज़्यादा मज़ा ........उसे चूसने में आता hain...............aur आम जितना बड़ा होगा उसे चूसने में उतना hi ज़्यादा मज़ा aayega.................aur उसमें उतना hi ज़्यादा रूस भी निकलेगा.............." और हरी आसमा के दोनों चुहियों को फिर से घूरता हुआ बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा के तन बदन में जैसे एक बार फिर से आग लग जाती hain............wo हरी के कहे हुए मतलब को बहुत ाचे से समझ रही थी की वो किस आम की बात कर रहा हैं....................

"ttoooooooooooo..khawo na...........tumhein दे तो दिया hain.....................aab चाहे इसे चूसो .........या फिर काटकर khawo.................mujhe क्या!!!!!!!!!!!!!!!!!" और आसमा की जुबान जैसे लाडखानी लगती हैं वहीँ उसकी सांस भी भरी होती चली जाती hain.................wahin हरी जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं...............

" आपको क्या ज़्यादा पसंद हैं memsaheb.........................aam.......ya फिर kela..................waise मैंने सुना हैं औरतों को केला चूसना बहुत ाचा लगता hain...............kya आपको भी................." और हरी इससे पहले कुछ कहती आसमा बीच में hi बोल पड़ती hain.............wo अब धीरे धीरे हरी की बाटिओं से गरम होती जा रही थी..............

" मुझे कुछ भी पसंद नहीं hain..............na choosna.............na khana.........tumhein जो पसंद हैं वो तुम खावो..........." और आसमा की सांसें तेज़्ज़ चलने लगती हैं वहीँ हरी धीरे धीरे आसमा के दिमाग से अब खेल रहा tha..............wo जनता था की उसकी बातें आसमा को ाची लग रही हैं मगर वो ज़ाहिर नहीं होने दे रही thi............shayad शर्म और झिझक की वजह से..............

" कोई बात नहीं memsaheb.................jab भी मुझे आम मिलता हैं मैं उसे चूसे बिना छोड़ता nahin..............khas कर बड़े बड़े और रसीले aam...............isi आम को चूसने के चाकर में कई बार लफड़े भी हो चुके hain...............aur केला तो अपने घर की खेती hain...............jab चाहे किसी को भी खिला do......ya चूसा do..............koi बुरा थोड़ी न मानने वाला hain..............aur मेरे गांव में तो ये बड़े बड़े और मोठे मोठे केले होते हैं जिसे खाकर मज़ा hi आ जाता hain...................humein तो रखवाली करनी पड़ती हैं अपने केलों की..................

आदमियों से ज़्यादा दिक्कत हैं nahin...........zyada तर आदमी गाँव से बहार hi रहते hain.........durr तो लड़कियों और औरतों से रहता hain..................na जाने कब कौन आकर किसका केला चुरा ले ................." और हरी आसमा के तरफ देखने लगता हैं वहीँ आसमा का कलेजा ज़ोरों से धड़कने लगा tha...................uske तन बदन में आग लगती जा रही thi.......hari की ये डबल मीनिंग बातें आसमा के बदन को पल पल सुलगती जा रही thi................wo बहुत ाचे से जानती थी की हरी कौन से आम और केले की बात कर रहा हैं..............

" इतना hi दुर्र हैं तो क्यों खेती करते हो फिर तुम केले ki................kisi और चीज़ की खेती क्यों नहीं कर लेते................." और आसमा बात संभालती हुई धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ हरी जवाब में मुस्कुरा पड़ता हैं............

" उसकी दो वजह हैं एक तो जमीन वहां की उपजावून हैं तो केले की खेती ाची होती hain..................aur केला अगर मोटा और बड़ा हो तो ...............उसके दाम भी ाचे खासे मिल जाते hain.................magar ये सब तो जमीन पर भी निर्भर करता हैं की उस जमीन की जोताई कैसे हुई hain...............agar हल को ाचे से नहीं जमीन में धसाया जायेगा तो जमीन हार्ड (कड़ा ) hi रह jayegi..............jissey केला पतला और छोटा hi रह जायेगा.....................

उसके लिए हल को जमीन में बहुत अंदर तक धसना भी तो पड़ता हैं तब जाकर उस खेत की ाचे से जोताई होती hain.................jitna अंदर तक फॉर डसेगा जमीन उतनी hi ज़्यादा मुलायम और गीली rahegi.............jissey जोताई और बॉयवायी में दिक्कत नहीं होगी................" और हरी की ऐसी बाटिओं को सुनकर आसमा की सांसें जैसे अटक जाती hain.............uska सांस लेना भी अब मुश्किल होता जा रहा tha.................wahin उसके छूट में गीलापन भी बढ़ता जा रहा tha..................hari बाटिओं के ज़रिये उससे बहुत कुछ कहता जा रहा था वहीँ आसमा के पास उसके बाटिओं का कोई जवाब नहीं था..............

" mujhe..............ky पता की जोताई और बोवाई कैसे की जाती hain................................maine कभी करवाई हैं जो मैं जानूँगी................" और आसमा का गाला सूखने लगता हैं वहीँ हरी पानी की बोतल आसमा के तरफ धीरे से बढ़ा देता हैं वहीँ आसमा एक नज़र उसके तरफ देखती हैं और उस पानी को धीरे धीरे अपने हलक में उतरने लगती hain.............ye देखकर हरी धीरे से बोल पड़ता हैं..........

" memsaheb.................aap मुँह लगाकर पी lijiye.................mujhe आपका जत्था पीने में कोई दिखात नहीं hogi.....................waise भी हर जगह जत्था देखा जायेगा तो काम कैसे chalega...............kuch चीज़ें जत्था खाने और पीने में भी मज़ा आता हैं................." और हरी आसमा के तरफ देखता हुआ फिर से दो ार्थ में बात करने लगता हैं वहीँ आसमा का बदन धीरे धीरे अब गरम होता जा रहा tha............na जाने क्यों वो उसके करीब से हटना भी नहीं चाह रही thi................shayad हरी की ये बातें उसे ाची लग रही thi..............wo हरी की तरफ एक नज़र देखती हैं फिर वो उस बोतल को अपने मुँह लगाकर हरी के सामने पीने लगती hain............aadhi बोतल ख़तम हो जाने के बाद वो उस बोतल को रख देती हैं वहीँ हरी फ़ौरन उस बोतल को अपने हाथ में लेता हैं और जहाँ से आसमा अपना मुँह लगाकर पानी पी थी उसी जगह अपना मुँह लगाकर वो भी उस पानी को पीने लगता हैं..............

जब थोड़ा सा पानी बच जाता हैं तो वो उस पानी को छोड़ देता hain.............wahin हर बार की तरह उस पानी में हरी के मुँह से निकलने वाले अजीब से छोटे छोटे गुटीय और पान के पीक और बीड़ी के स्मेल सब उसमें धीरे धीरे घुलने लगती hain...............wahin आसमा अभी भी बड़े गौर से उस बोतल में तैर रहे उन छोटे छोटे टुकड़ों को तैरता हुआ देख रही थी...............

" अगर आप कहिये तो मैं सीखा दूंगा की खेत कैसे जोटा और बोया जाता hain...................waise मैं जब भी खेत जोतता हूँ पूरा फॉर जमीन में धसाकर hi जोतता hoon...............taki जमीन भी नरम रहे और फसल भी बढ़िया हो..............." और हरी धीरे से मुस्कुरा देता हैं और ट्रे में रखा हुआ आम को अपने हाथों में लेता हुआ उसे बड़े गौर से देखने लगता hain..............wo आम का आखिरी किनाना अपने उँगलियों से दबाता हैं जिससे थोड़ा सा आम का ऊपरी छिलका हुत्त जाट हैं और थोड़ा सा आम अपने हाथों में दबाने से उस जहाँ से रूस धीरे धीरे नीचे की तरफ टपकने लगता हैं वहीँ हरी आसमा के तरफ देखता हुआ उस जगह पर अपना मुँह हौले से रख देता hain...............hari की ये हरकतें देखकर आसमा का चेहरा शर्म से लाल पढ़ जाता हैं और वो फ़ौरन उस जगह से उठती हैं और हरी का पिया हुआ बोतल अपने हाटों में लेती हुई सीधा नीचे की तरफ आने लगती hain..................uska कलेजा बहुत ज़ोरों से धड़क रहा tha...................jism में अजीब सी सनसनाहट हो रही थी..................

वो बहुत ाचे से हरी का वो गन्दा इशारा समझ रही thi............ye सोचकर उसके छूट में गीलापन बहुत हुड्ड तक बढ़ चूका tha................jaise तैसे खुद को संभालती हुई वो किट्चें में आती हैं और उस बोतल को बड़े hi ध्यान से देखने लगती hain...............kuch देर तक वो टकटकी लगाए उस बोतल की तरफ देखती हैं फिर वो उस बोतल को अपने एक हाथ में उठती हैं और अपने दूसरे हाथ को अपने कमर पर ले जाती हुई उसे और neechay................apni लग्गी के अंदर एक ऊँगली दाल देती हैं और जब उसके हाथ उसके पंतय के अंदर उसके छूट पर पहुंचते हैं उसके चेहरे पर हैरानी और भी बढ़ने लगती hain................uski छूट पूरी तरह से गीली होकर पनिया गयी thi.......wo ऐसे hi अपना एक हाथ अपने छूट के दानों पर फेरती हैं और धीरे धीरे वो हरी का झूठा पानी अपने लबों पर रखती हुई उसे धीरे धीरे उस पानी को पीने लगती हैं...........

एक बार फिर से उसकी सांसें बेकाबू हो चुकी thi................aankhein लजात से बंद हो गयी thi...............jism किसी आग के भाटी के जैसे टप्प रहा tha............uske हाथ तब तक नहीं रुकते जब तक वो उस पानी की आखरी बूँद ख़तम नहीं कर leti............aur अपने छूट के दानों को हौले से रगड़ती हुई लुम्बी लुम्बी सांसें लेने लगती hain...............is वक़्त किचन में कोई भी आ सकता था इस वजह से आसमा खुद को काबू करती हैं और बहुत देर तक हरी की एक एक बातें सोचने लगती hain........aur सब कुछ सोचने के बाद आखिर उसके चेहरे पर के प्यारी सी मुस्कान आ hi जाती हैं.............................



तो बे कॉन्टिनोएड................................................
 
Update-19(A) (मेघा अपडेट)

एक बार फिर से उसकी सांसें बेकाबू हो चुकी thi................aankhein लजात से बंद हो गयी thi...............jism किसी आग के भाटी के जैसे टप्प रहा tha............uske हाथ तब तक नहीं रुकते जब तक वो उस पानी की आखरी बूँद ख़तम नहीं कर leti............aur अपने छूट के दानों को हौले से रगड़ती हुई लुम्बी लुम्बी सांसें लेने लगती hain...............is वक़्त किचन में कोई भी आ सकता था इस वजह से आसमा खुद को काबू करती हैं और बहुत देर तक हरी की एक एक बातें सोचने लगती hain........aur सब कुछ सोचने के बाद आखिर उसके चेहरे पर के प्यारी सी मुस्कान आ hi जाती हैं.............................



अब आगे..............................................................


आसमा काफी देर तक किचन में खामोश कड़ी rahi..............uski नज़रें अब तक हरी के उस जूठे बोतल पर hi जमी rahi.............jisey वो बड़े गौर से देख रही thi............usey हरी का जूठा पीना शायद ाचा लग रहा tha..............jab वो उस पानी को पीती ............एक अजीब सा नशा .............एक खुमार सा ऊपर च jata............wo मदहोश सी होने lagti............thode देर बाद शांति आसमा को खोजती हुई किचन के अंदर आयी तो आसमा वहीँ चुप चाप से कड़ी thi................aasma को ऐसे खामोश खड़ा हुआ देखकर वो हौले से उसके कन्धों पर अपना एक हाथ रखती हुई................. धीरे से उसकी तरफ देखती hain.............fir वो मुस्काने लगती हैं.............

" बात क्या हैं memsaheb..................aap ऐसे अकेले में यहाँ कड़ी क्या सोच रही hain..............kuch हुआ हैं क्या आपको............." और शांति आसमा के चेहरे को पढ़ने की कोशिश करती हुई धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ आसमा थोड़ी हड़बड़ा सी जाती हैं और अपने आपको नार्मल करती हुई शांति के तरफ palatkar.............usey बड़े गौर से देकने लगती हैं..........

" कुछ nahin.........bus ऐसे hi................." और आसमा हौले से बोल पड़ती हैं वहीँ शांति आसमा की तरफ देखती हुई धीरे से मुस्कुरा देती हैं............

" वो memsaheb.................aapke कपड़े वाशिंग मशीन में दाल दूँ धुलने ko............dhulney के बाद मैं उसे पीछे वाले बरामदे में नीचे सूखा dungi.............aapko टेंशन लेने की कउनो ज़रूरत नहीं हैं................." और शांति आसमा की परमिशन लेती हुई सीधा बाथरूम में जाती हैं और आसमा के सरे कपड़े वाशिंग मशीन में एक एक कर धुलने के लिए दाल देती hain.............aakhri में वो आसमा के पहने हुए ब्रा और पंतय को बड़े ध्यान से देखने लगती हैं और कुछ सोचकर धीरे से हंस पड़ती हैं...........

" आज से तेरी चंडी हो गयी hari............aab से तू रोज़ अपना माल मेमसाहेब की पंतय और ब्रा पर hi girayega............dekhtey हैं तू अपने प्लान में कितना कामयाब हो पता hain..............mujhe kya.............aakhir मुझे तो हर रोज़ तुझसे छोड़ना hi hain...............mere तो वैसे भी मज़े हैं................." और शांति ये सब सोचकर मुस्कुराते हुए आसमा के कपड़े धुलेंय लगती hain................jab कपड़े पूरी तरह से धूल जाते हैं तब शांति उसे नीचे की तरफ ले जाने लगती hain..........aur पीछे जाकर उसे बरामदे में सूखने लगती hain.............wo जान बूझकर आसमा के ब्रा और पंतय को सामने तंगी थी जिससे हरी की नज़र उसपर आराम से पढ़ सके.................

पीछे की तरफ एक छोटा सा कमरा था ................एक तरह का स्टोर रूम जहाँ कबाड़ रखा जाता tha...................usi के ठीक सामने एक मोटर का कमरा था जिसमें मोटर लगा tha............jiski साइज लगभग 6*6 की hogi..........................jismein एक दरवाज़ा भी था जो हमेशा बंद रहता tha.................kapdey सूखने के बाद वो अपने कमरे में लौट आती हैं जहाँ हरी उसका बेसब्री से इंतज़ार कर रहा tha...............shanti को देखकर उसके चेहरे पर एक कमीनी सी मुस्कान तैर जाती हैं..............

" क्या बात हैं तू आज बड़ा खुस नज़र आ raha...................baat क्या hain.........memsaheb तेरे बिछाये जाल में फंस गयी हैं क्या!!!!!!!!!!" ....................और शांति हरी को ताने मरती हुई धीरे से उसकी तरफ देखती हुई हंस पड़ती हैं वहीँ जवाब में हरी भी मुस्कुरा देता hain..............wo शांति की दोनों चूचियों को कसकर मसलता हुआ उसे अपने पास बैठा लेता hain............wahin शांति के मुँह से aaaahhhhhhhhhhhhhhh निकल जाती हैं..............

" कुछ ऐसा hi समझ ....................." फिर हरी आज सुबह की साडी घटना शांति को बताता चला जाता हैं जिसे सुनकर शांति भी उसकी तरफ देखती हुई धीरे से मुस्कुरा देती हैं............

" तू तो बड़ा शातिर हैं re..................wo सब छोड़ आगे बता क्या करना hain.................meri छूट में इस वक़्त बहुत ज़ोरों की खुजली हो rahi............tu अपने इस मोठे से लुंड से मेरी छूट की प्यास बुझा दे न..............." और शांति थोड़ी सी मचलती हुई हरी के और करीब आने लगती हैं वहीँ हरी उसे अपने से थोड़ा दूर करता हैं.............

" अभी nahin..............ye सही टाइम नहीं hain...............dopahar के वक़्त जब मेमसाहेब के कपड़े पूरी तरह से सूख जाएंगे तब.............." और हरी बहुत hi विश्तार से अपना सारा प्लान शांति को समझने लगता हैं जिसे सुनकर उसकी दोनों आँखें बड़ी हो जाती hain.................aur वो हाँ में अपना सर हिलाते हुए उसके लुंड को अपनी मुट्ठी में पकड़ लेती हैं और उसे लोअर के ऊपर से धीरे धीरे हिलने लगती हैं..................

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इधर आसमा अकेले अपने कमरे में पूरी तरह से बेचैन thi..................hari के बदन से उठने वाली वो smell...............uski गन्दी baatein...............uska देखना का नजरिया............... सब कुछ उसे बेचिअन करता जा रहा tha.............wo फ़ौरन अपने कपड़े एक एक कर उतरने लगती hain.................pehle अपना सूट ......फिर laggy..........fir bra......aur लास्ट में अपनी panty..............fir वो बिस्टेर पर पूरी नंगी लेट जाती हैं और अपनी दोनों टांगें पूरा फैलाती हुई धीरे धीरे अपने एक हाथ को अपने चूचियों पर फेरती hui................to दूसरे हाथ अपने छूट की तरफ ले जाती हैं और हौले हौले से वो अपने छूट के दानों को रगड़ने लगती हैं................

लजात से एक बार फिर उसकी आंखें बंद हो जाती हैं और वो अपने छूट को धीरे धीरे फिर सहलाने लगती hain................jaise जैसे उसके उँगलियों की रफ़्तार तेज़्ज़ होती जा रही थी वैसे वैसे उसकी सांसें भी बेकाबू होती जा रही thi....................excitement से उसका गाला अब सूखने लगा था..............

" जब हरी आम चूस रहा था तो मुझसे सीधा सीधा क्यों नहीं कह दिया की वो मेरे इन दोनों आमों को जी भरकर चूसना चाहता hain..............arey एक बार तो खुलकर मुझसे कह देता मैं उसे मन नहीं करती और अपने ये दोनों आम उससे चूस्वा leti...............aakhir उसे भी तो पता चले की मेरे ये दोनों आम कितने रसीले hain.............aur इनमें कितना रूस भरा हुआ हैं...............

तुम्हारे गांव में केले बहुत मोठे मोठे होते हैं na................aab मैं कैसे कहूं की मुझे भी मोठे केले चूसने और खाने का बहुत शौक hain.............magar मेरा ये शौक अब तक अधूरा hain...........kaash..........tumhara ये मोटा केला मुझे चूसने और खाने को मिल जाये to..............aaaaaahhhhhhhhhh..............

आखिर मैं भी तो देखना चाहती हूँ की तुम्हारे केले वाकई में कितने बड़े और मोठे hain..............jis दिन मैं तुम्हारा केला चूसूंगी na................us दिन पता चल जायेगा की तुम्हारे केले में कितना दम hain...............oooohhhhhh fffffffff......hari.............tum मुझसे ऐसी hi हमेशा गन्दी गन्दी बातें किया karo................na जाने क्यों जब तुम ऐसी बातें करते हो तो मुझे कुछ होने लगता hain...............oooooooooffffffffhhhhhhhhhh मुझे क्या होता जा रहा hain.................main न जाने क्या क्या सोचती जा रही hoon................ye ठीक नहीं hain.............ye सब गलत hain................mere मज़हब में गैर इंसान के बारे में ये सब सोचना सब पाप hain............gunaah hain..............main सैम को धोका नहीं दे sakti.............mera जिस्म बस उसकी के लिए हैं bus...............aur किसी के लिए नहीं............"

आसमा के हाथ तेज़ी से अपने छूट के दानों को रगड़ रहे थे जिससे उसकी छूट पूरी तरह से पनिया गयी thi..................uski ऊँगली उसके छूट रूस में बुरी तरह से सं चुकी thi............aur उसका छूट रूस धीरे धीरे टपकते हुए नीचे की तरफ बह रहा tha...............aasma धीरे धीरे बेकाबू होती जा रही thi.............wo सब कुछ गलत सही सोचती जा रही थी..............

" मैंने उस दिन हरी पे अपना हाथ उठकर ाचा नहीं kiya...............wo भी तो 10 साल से अकेले रह रहा hain............aurat की कमी उसे भी तो होती hogi..............bhale वो मेरे घर का नौकर हैं तो क्या hua!!!!!!!.................magar हैं तो वो भी एक मर्द hi na................kya उसे चाह नहीं होती hogi.................uska भी मुन्न मचलता hoga.............aur मेरे जैसी लड़की अगर उसके सामने होगी तो उसका मुन्न तो मचेलगा naa.................kya हुआ अगर वो मुझे गन्दी निगाह से देखता हैं to................uski आँखें हैं देखने do...............mujhe भी तो ाचा लगता हैं जब वो मेरे बदन को ाचे से जब स्कैन करता हैं तब..............
 
Update-19(B) (मेघा अपडेट)

मैं जानती हूँ वो अपनी नज़रियों से मुझे नंगा करता रहता hain............uska अगर बस चले तो वो मुझे नंगा hi कर de.............aaj के बाद मैं तुम्हें नहीं रोकूंगी hari..................tum चाहे जैसे मुझे dekho.............mere साथ गंदे इशारे और बातें भी करो तो भी मैं तुम्हें कुछ नहीं bolungi................kum से कम वो मुझसे सटिस्फी तो hoga................chahe जैसे भी क्यों न ho................mujhse जो बन पड़ेगा मैं उसके लिए karungi................wo अकेला अंदर hi अंदर तड़प रहा hoga.............ghut रहा hoga...........main उसकी तड़प को कम तो कर hi सकती हूँ न...............

ओह hhhhhhhhhhffffffffff.........tumare लोअर में तुम्हारा हथियार कितना बड़ा और मोटा tha..............jab मैं नीचे जा रही थी तो तुम मेरी गांड को देखकर अपने हथियार को मसल रहे थे naa................mujhe अंदाज़ा हो गया था की वाकई में शांति सच कह रही thi...................ooooooooohhhhhhhh ये मुझे क्या होता जा रहा hain........main अब इतनी ज़्यादा बेचैन क्यों रहने लगी hoon.............meri ये प्यास दिन बा दिन बढ़ती क्यों जा रही hain................aab मुझसे और बर्दास्त नहीं हो रहा ............ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhoooooooooooooooooooaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa करती हुई आसमा का जिस्म ऐठने लगता हैं और उसके छूट से ढेर सारा रूस बेहटा हुआ बिस्टेर पर गिरने लगता हैं ....................वहीँ आसमा इस बार ज़ोरों से चीख पड़ती हैं.....................

एक तूफ़ान सा उठा था जो अब शांत हो गया tha.................aasma हांफती हुई बिस्टेर पर लुम्बी लुम्बी सांसें ले रही thi...............pasiney से उसका जिस्म भीगा हुआ tha................saans तेज़्ज़ लेने से उसका गाला पूरी तरह से सूख गया tha................aankhein उसकी अभी भी बंद थी और चेहरे पर थोड़े सुकून नज़र आ रहे they.................magar जिस चीज़ की चाह थी वो अभी अधूरी thi................kuch देर तक आसमा वैसे hi लेते लेते कब नींद के आगोश में डूबती चली गयी उसे कुछ पता hi नहीं chala...................hosh तब आया जब घडी में 2 बजे they...............aur सैम का फ़ोन बज रहा था...........................

वो फ़ौरन बिस्टेर से हड़बड़ाकर उठी और सैम का फ़ोन रइवे ki............is वक़्त भी वो पूरी नंगी thi................aab उसे यु नंगा रहना अजीब नहीं लग रहा tha...............balki ाचा लग रहा था................

" hello........sam............kaise हो........." और आसमा जमाई लेती हुई धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ वो अपने खुले हुए बालों को अपने हाथों से घूमती हुई जुड़ा बना रही thi.........aur सैम से बात कर रही thi..............aaj उसे बहुत सुकून की नींद आयी thi............wo करीब 3 घंटे be-jhijhak सोई thi..........bina किसी चिंता और फ़िक्र के..................

" मैं तो ठीक हूँ darling...........par तुम्हें बहुत नींद आ rahi...........kyon!!!!! तुम्हारी तबियत तो ठीक हैं न................." और सैम आसमा की फ़िक्र करता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा जवाब में धीरे से मुस्कुरा देती हैं.............

" मुझे क्या hua..............bus बिस्टेर पर लेती हुई थी तो आँख लग gayi.............main जा रही हूँ nahane.............fir खाना बनूँगी ............." और आसमा अंगड़ाई लेती हुई बोल पड़ती हैं वहीँ वो अपने आपको बहुत हल्का महसूस कर रही थी..............

" तो मैं अभी वीडियो कॉल करता hoon.........tumhe बिन कपड़ों के देखने का मुन्न कर रहा............" और सैम आसमा को चढ़ते हुए धीरे से हंस पड़ता हैं...............

" मरूंगी haa..................sach में आप बहुत बदमाश hain................main नहीं दिखने वाली kuch.................aap तो ऐसे कह रहे जैसे मुझे आपने बिन कपड़ों के कभी देखा hi nahin...........jitna आप मुझे देखते हैं उतना hi आपका मुन्न करता hain.............hain naa............main फ़ोन रखती हूँ bye............mujhe देर हो रही अब..........." और आसमा हौले से मुस्कुराती हुई अपना फ़ोन डिसकनेक्ट कर देती hain..............aur एहि सोचने लगती हैं की अगर सैम इस वक़्त वीडियो कॉल किया होता और उसे इस हाल में देखता तो वो क्या सोचता.............

जो औरत सेक्स के बाद तुरंत पूरे कपड़े पहनकर सोती थी उसे नंगा रहना बिलकुल भी ाचा नहीं लगता tha...............aaj वो सारा दिन घर में बिन कपड़ों के रह रही hain..............ye उसके अंदर बदलाव नहीं तो और क्या tha.................aasma ऐसे hi उठती हैं और बाथरूम में जाकर शावर लेती hain.................thanda ठंडा पानी जब उसके बदन पर पड़ता हैं उसका तप्त हुआ बदन कुछ देर के लिए ठंडा तो हो जाता हैं मगर वो ये बात जानती थी की जो आग उसके अंदर लगी हुई हैं वो आग इस पानी से कभी नहीं बुझेगी...............

शादी के बाद वो इतनी बेचैन नहीं रहती थी जितनी बेचैन अब वो रहने लगी thi..............sex के प्रति उसका लगाव अब धीरे धीरे बढ़ता hi जा रहा tha.............uuski सहेलियां जब कहती थी तो उसे ये सब बातें बेकार की लगती थी मगर अब उसे सब कुछ सच लगने लगा tha...........usey इस तरह से फिंगरिंग करना अब ाचा लग रहा tha................nahane के बाद वो ऐसे hi पूरी नंगी बहार आती हैं और बैडरूम में जाकर एक ाची सी t-shrit और नीचे लेहंगा पहन लेती hain..............humesha की तरह वो इन कपड़ों में बेहद हसीं लग रही थी..................

खाना खाने के बाद वो कुछ देर तक t.v देखती rahi...............magar उसका ध्यान t.v स्क्रीन पर नहीं................ कहीं और tha..................shaam को आसमा टहलते हुए बहार गयी तो उसे ध्यान आया की सुबह से उसके कपड़े नीचे बरामदे में सूखने के लिए टंगे हुए hain..............ye ख्याल आते hi वो अपने कपड़ों के पास गयी तो सभी कपड़े ज्यों के त्यों तंग कर सूख चुके they....................wo एक एक कर अपने सरे कपड़े लेती हुई सीधा अपने रूम में आ गयी और उसे एक एक कर समेटने lagi................sare कपड़े समेत लेने के बाद जैसे hi वो अपने ब्रा और पंतय को जब समेटने लगी तभी उसके हाथों में कुछ कड़ापन सा मेहसूस hua.................khas का पंतय पर...................

वो एक baar......do बार .....कई बार अपने नाख़ून को अपने पंतय पर रगड़ने लगी मगर उसकी पंतय पर कुछ सफ़ेद सफ़ेद दाग सा भी नज़र आ रहा tha.................jo अब पूरी तरह से सूख चूका था............... जहाँ वो दाग लगा था वो हिस्सा थोड़ा कड़क हो गया tha.............aasma को कुछ समझ में नहीं आया की ये आखिर हैं kya....................jab उसने वो पंतय धुलने के लिए राखी थी तब तो ठीक thi.............to फिर ये दाग आखिर आया कहा से.................

वो अपने ब्रा और पंतय को अपने हाथों में लिए बहुत देर तक सोच रही thi.............kuch सोचकर वो अपने पंतय को अपने नाक के पास ले गयी तो उसमें से वीर्य की हल्की हल्की सी खुसबू आ रही thi............aasma अब इतनी भी na-samajh नहीं थी की वो उस खुसबू को नहीं pehchanti..................jab वो वीर्य की खुसबू उसके सांसों में गयी उसके बदन में एक अजीब सी लहर .......अजीब सी सिरहन दौड़ gayi............aankhein लजात से जैसे बंद होने लगी और सीने में जो दिल था वो भी ज़ोरों से धड़कने laga.....................sansein फिर से तेज़्ज़ होने लगी..................

"मेरी पंतय पर ये virya..............kiska हो सकता hain..............ghar के चरों तरफ तो ऊँची ऊँची बाउंड्री हैं और आस पास कोई यहाँ घर भी तो nahin...................mera घर सेहर से दूर हैं और एकांत में bhi.............yahan 300 मीटर की दूरी पर आस पास कोई घर भी nahin................to बहार से किसी आदमी का अंदर आने का सवाल hi नहीं पैदा हो sakta................kahin ये ..............हरी की करतूत तो नहीं..............." और जब आसमा के जेहन में ये ख्याल आते hi उसका चेहरा शर्म से लाल पढ़ जाता hain...........palkein नीचे की तरफ शर्म से झुक जाती हैं...............

"ो raaaba........................ho न हो ये हरी की hi करतूत hain...............aaj पहली बार उसने मेरी पंतय और ब्रा नीचे देखि होगी और ..........हो सकता हैं इसे देखने के बाद उसका मूड बदल गया होगा और वो मेरे उन्देर्गर्मेन्ट्स को अपने हथियार पर लपेटकर ............ooooooooooffffff............bilkul एहि हुआ होगा..................." ये ख्याल आते hi आसमा की सांसें फिर से तेज़्ज़ होने लगती hain..............wo एक बार ...........दो baar...........kai बार ..............उस वीर्य को सूंघती हैं और हर बार एक लुम्बी सी सांस लेती हुई पूरी उस वीर्य की खुसबू को अपने अंदर समेटने लगती hain...............uska दिल ज़ोरों से धड़क रहा tha..............virya की खुसबू उसे पल पल मदहोश करती जा रही थी..............

जिस्म में अजीब सी लहर और बेचैनी फिर से बढ़ने लगी thi..............tangon के बीच फिर से गीलापन बढ़ती hi जा रही thi...................aakhirkaar आसमा अपनी पंतय के उन हिस्सों को अपने लबों पर हौले से ले गयी और धीरे से अपनी जीभ निकलती hui.............us पंतय पर लगे सूखे हुए वीर्य को अपने जीभ से हौले हौले से चटनी lagi.............virya सूख जाने की वजह से उसका टास्ते तो उसे कुछ ख़ास पता नहीं चला मगर उसे एहसास ज़रूर हुआ की वो वीर्य को अपने जीभ पर महसूस कर रही thi................pehli बार उसे ये सब अजीब तो लग रहा था मगर ाचा भी लग रहा tha.............sam का वीर्य उसने कुछ दिन पहले hi तो पिया था इस लिए वो उसका टास्ते बहुत ाचे से जानती thi...................ek अजीब सा रोमांच और एक्ससिटेमेंट उसके अंदर उठ रहा था जिससे वो मज़े की दुनिया में खुद को जाने से नहीं रोक पा रही थी..............

जीभ से लगतार उन हिस्सों को ाचे से चटनी से पंतय का वो हिस्सा उसकी थोक से पूरी तरह गिला हो गया था साथ hi साथ आसमा की छूट भी गीली हो गयी thi............din बा दिन उसे क्या होता जा रहा था ये सोचकर वो खुद हैरान और परेशां thi............hari का लुंड भले hi वो न देख पायी हो मगर उसका छुम उसे चटनी को मिल रहा था ये क्या कम बात थी...............

एक बार आसमा फिर से बेचैन हो उठी thi...........uski ऊँगली फिर से अपने छूट पर चली गयी और वो फिर से अपने छूट को कपड़ों के ऊपर से धीरे धीरे सहलाने lagi.............usey रगड़ने lagi..............ander hi अंदर आसमा हमेशा अब बेचैन रहने लगी thi...........hari अब सच में आसमा को पल पल बेचैन होने पर मज़बूर करता जा रहा tha.............aab आसमा को भी मोठे और तगड़े लुंड की चाह होने लगी thi..............dekhna था की उसकी चाह कहाँ जाकर ख़तम होने वाली थी.............................

तो बे कॉन्टिनोएड...................................................................
 
अपडेट-20 (ा) (मेघा अपडेट)

एक बार आसमा फिर से बेचैन हो उठी thi...........uski ऊँगली फिर से अपने छूट पर चली गयी और वो फिर से अपने छूट को कपड़ों के ऊपर से धीरे धीरे सहलाने lagi.............usey रगड़ने lagi..............ander hi अंदर आसमा हमेशा अब बेचैन रहने लगी thi...........hari अब सच में आसमा को पल पल बेचैन होने पर मज़बूर करता जा रहा tha.............aab आसमा को भी मोठे और तगड़े लुंड की चाह होने लगी thi..............dekhna था की उसकी चाह कहाँ जाकर ख़तम होने वाली थी.............................



अब आगे..........................................................................


आसमा अपने कमरे में बैठी हुई बहुत देर तक ये सब बातें सोचती rahi.....................dil और दिमाग दोनों बार बार इसी तरफ जा रहा tha.....................aab उसके न दिल पर कोई वश tha..............aur न hi दिमाग pe..................raat तो जैसे तैसे गुज़री और सुबह hui..................har रोज़ की तरह सुबह के 8 बजे शांति और हरी अपने अपने टाइम पर पहुँच गए और अपने कामों में लगे rahe..............................aasma ने एक चीज़ सोच राखी थी की हरी जहाँ पर भी काम करेगा वहां शांति नहीं rahegi...............kyon की वो नहीं चाहती थी की उनके बीच जो भी बातें हो वो शांति सुन sake....................ya शांति को इस बात की ज़रा भी भनक लगे..............

हरी आज नीचे का कमरा अकेले साफ़ कर रहा था वहीँ शांति ऊपर के रूम में लगी हुई thi..............ek तरह से ाचा भी था की शांति बिना किसी वजह के नीचे नहीं आने वाली thi...........is लिए आसमा भी अब थोड़ी बेफिक्र thi............jaise hi हेयर पर उसकी नज़रें गयी उसकी नज़रें शर्म से अपने आप नीचे की तरफ झुक gayi..............wahin हरी हमेशा की तरह आसमा को सर से लेकर पवन तक ाचे से स्कैन कर रहा tha...............wahin आसमा ये जानते हुए भी बुरा नहीं मान रही थी.................

करीब 1 घंटे बाद वो हरी के कमरे की तरफ चल padi.......................fir से उसका दिल ज़ोरों से धड़कने laga................dil में अजीब सी बेचैनी होने लगी thi.............wahin उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान भी thi..................magar जैसे hi वो हरी के सामने गयी उसका मुस्कुराता हुआ चेहरा एकदम से नार्मल हो gaya..........wahin हरी आसमा को अपने पास आता हुआ देखकर खुस हो gaya...............aasma के मुन्न में कल वाली बातें फिर से घूम रही thi..................aur उधर हरी शायद आसमा के आने का hi नीतेज़ार कर रहा था.........................

" memsaheb...................dekh लीजिये इस कमरे ko...............maine बहुत ाचे से सब साफ़ कर दिया हैं................." और हरी फिर से आसमा के बदन को ाचे से स्कैन करता हुआ धीरे से बोल pada................wahin आसमा एक नज़र अपने कमरे की ओरे देखने लगी और जब उसने देखा की सारा कमरे बहुत ाचे से साफ़ हो गया तब वो जवाब में हरी की तरफ देखती हुई धीरे से मुस्कुरा दी.............

" एक बात बोले memsaheb..................aap जब हंसती हैं तो आप और भी ज़्यादा हसीं लगती hain.................kasam से................" और हरी अपने गुर्दें पर अपने हाथों को पकड़ता hua...........aasma को अपनी बात का विश्वास दिलाता हुआ.................. धीरे से बोल pada..................wahin आसमा टकटकी लगाए उसे hi देखती rahi..................usey ये समझ में नहीं आ रहा था की वो हरी की बाटिओं का क्या जवाब dein.............magar वो हरी के इस तारीफ से खुस थी.............

" memsaheb.......................doodh मिल सकता हैं क्या पीने ko...................maine सुबह नाश्ता नहीं किया था इस लिए मुझे थोड़ी कमज़ोरी सी लग रही हैं................." और इस बार हरी जान बूझकर आसमा के दोनों चूचियों को घूरते हुए बोल पड़ता hain................wo जानबूझकर अपनी नज़रें उसकी चूचियों पर से नहीं हटा रहा था ताकि आसमा भी उसके कहे हुए बाटिओं का मतलब बहुत ाचे से समझ sake................wahin आसमा की नज़रें जब हरी के नज़रों पर पड़ती हैं उसका कलेजा ज़ोरों से धड़क उठता hain..............wo भी समजह रही थी की हरी कौन से दूध पीने की उससे बात कर रहा हैं...........

" haaaannnnnnnnnnnnn to..........mil jayega............naaaa..............doooooddhhhhhhhhhhhh......." और आसमा की सांसें फिर से भरी होने लगती hain..............zoron की सांस लेने की वजह से उसके दोनों चूचियां तेज़ी से ऊपर नीचे की तरफ हो रहे they........................wahin हरी बड़े गौर से आसमा के दोनों चूचियों के उतर चढ़ाव को देखे जा रहा tha..............uske लुंड में भी हलचल होने लगी थी....................

" वैसे एक बात बोलूं memsaheb....................doodh पीने का असली maza..............jab अपने हाथों से दूध निचोड़कर खुद पियो तो................... उसका मज़ा तो बस पूछों mutt..............maine कई बार ऐसा किया हैं..........." और हरी गंदे तरीके से आसमा के चूचियों को घूरता हुआ दुबारा से बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा का फिर से बुरा हाल tha..............hari की ऐसी डबल मीनिंग बातें उसके तन बदन में आग लगा देती थी............

" to.........tum hi पियो fir......yahan ऐसे नहीं milega.........tumhein...........ddddoooodddhhhhhhh................."aur ये कहते कहते आसमा की सांसें और तेज़्ज़ हो जाती हैं वहीँ हरी जवाब में धीरे से हंस पड़ता हैं..............

" गाँव में हमारे यहाँ काऊ और बुफैलो ( भैंस) का दूध तो मैं खुद ढूढ़कर अपने हाथों से निकलता हूँ और फिर उसे मज़े से पीटा hoon.............agar ऐसे hi कोई दूध देनी वाली का अगर दूध खुद अपने हाथों से निचोड़कर पिया जाये तो ...................उसका मज़ा hi कुछ और हैं................" और हरी बहुत गंदे तरीके से आसमा के तरफ देखता हुआ फिर से बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा शर्म से अपनी नज़रें नीचे की तरफ झुका लेती hain...............wo जानती थी की हरी का इशारा किस तरफ hain.........uske छूट में फिर से गीलापन बढ़ता hi जा रहा tha...........hari की ऐसी गन्दी बातें उसे मज़ा तो दे रही thi...............magar उतना hi ज़्यादा उसे शर्म भी महसूस करा रही थी....................

" तो तुम अपने साथ कोई भैंस यहाँ लेते आते और रोज़ तुम उसका दूध निकलकर खुद hi पी लेते.................." और आसमा हरी की आँखों में देखते हुए इस बार धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ हरी जवाब में धीरे से हंस पड़ता हैं.............

" ले तो आता memsaheb..............magar मज़बूरी hain...............yahan कौन उसकी देख रेख karega..............khair..............doodh चाहे किसी का भी क्यों न ho....................humko तो बस पीने से मतलब hain...............wo भी मुँह lagakar............choos चूस kar................u का हैं na....................mooh लाकगार पीने से उसका स्वाद और बढ़ जाता hain...........khaas कर uska........jo पहली बार दूध दे रही हो..................." और हरी फिर से आसमा के दोनों चूचियों की तरफ देखता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा का जिस्म गरम होने लगता hain..................hari की बातें उसके तन बदन में आग लगाती जा रही थी...................

एक बार तो उसके मुन्न में आता हैं की वो अपनी ब्रा यहीं हरी के सामने उतर दे और अपने दोनों चूचियों को उसके मुँह में दे de.............magar शर्म की दीवार थी जो इतनी आसानी से नहीं गिरने वाली thi............wo मुन्न hi मुन्न साडी बातें बस सोचकर रह जाती हैं.............

" वैसे memsaheb..................aapne कभी गणना (सुगरकाने) चूसा हैं........................" और आसमा हरी के बाटिओं से थोड़ा संभालती.............. उसने अस्मा को पूरी तरह से बेचैन करने का फैसला कर लिया tha.................wo अब आसमा को एक पल चैन से नहीं रहने देने वाला था.................

" naaaaaahhhhhiiiin............magar क्यों ?????????.............." और आसमा की आवाज़ जैसे लड़खड़ा जाती हैं वहीँ हरी जवाब में धीरे से हंस पड़ता हैं.................

" जब आपने गणना नहीं चूसा तो फिर क्या choosa,...................hum सच कहत hain...............ganna चूसने में बहुत hi ज़्यादा मज़ा आवत hain..........................aur मेरे गांव में तो ये मोठे मोठे गानीय होवत hain.................poorey इ हाथ बराबर mote....................aur उसे चूसने पर इतना ज़्यादा रूस निकलत हैं की अगर कपड़े पहनकर चूसा तो ससुरा सारा कपडा hi ख़राब हो जाट hain......uske रूस से भीगकर..................

उसमें से ेंटा ज़्यदा छूटा हैं rus....................ki बस पूछो mutt.................kabhi मैं आपको अपने खेत का गणना chuswanga.....................kasam से कहता हूँ memsaheb...........jo आप एक बार मेरा खेत का गणना चूस लेंगी तो फिर उसे हमेशा मुहसे चूसने को कहती रहेंगी......................" और हरी फिर से आसमा के सामने ओपन वर्ड्स उसे करने लगता हैं वहीँ आसमा की बेचैनी धीरे धीरे और भी ज़्यादा बढ़ने लगती hain..................uski छूट में गीलापन बढ़ता hi जा रहा था................

"तुम्हारे गाँव में सब कुछ मोठे मोठे और लम्बे लम्बे hi होते hain............jaise की ganna............aur kela..................kya बात हैं.................!!!!!..............." और आसमा की सांसें भरी हो जाती hain..........usey भी हरी के साथ ऐसी बातें करने में मज़ा आ रहा tha.................wahin हरी समझ गया था की उसकी मेमसाहेब अंदर hi अंदर अब गरम हो रही hain.............ye सोचकर वो और बेझिझक आसमा से खुलकर सब कुछ कहने लगता हैं...............

" मैंने बताया तो था memsaheb..........ki मैं हल जमीन में बहुत अंदर तक धसाकर खेत जोतता hoon................jissey मिटटी नरम हो जाती हैं और फसल खूब हरी भरी होती hain.............mere खेत के गन्ने और केले को hi ले लो memsaheb...............bahar से जितना मोटा और बड़ा दीखता हैं अंदर से उतना hi मज़ेदार और लज़ीज़ भी तो होता हैं................" और हरी अपने पेण्ट के ऊपर से अपने लुंड को आसमा के सामने उसे दिखते हुए धीरे से सेहला देता हैं जिसे देखकर आसमा के गाला सूखने लगता hain...............wo आँखें फाड़े हरी के छुपे लोअर के अंदर फूले हुए लुंड के उभार की तरफ देख रही thi................ye देखकर हरी के चेहरे पर एक बार फिर से कमीनी मुस्कान आ जाती हैं............
 
अपडेट-20 (बी) (मेघा अपडेट)

" वो तो तुम्हारे खेत के गन्ने और केला खाने के बाद hi पता चलेगा की .............तुम्हारे गन्ने में कितना रूस भरा हुआ hain.................aur केला कितना बड़ा और मोटा hain.................aab ये मुट्ठ कहना की तुम्हारे गांव की औरतें तुम्हारे केले के साथ साथ तुम्हारा गणना भी चुरा ले जाती hain............aur भला कपड़े ख़राब होने की दुर्र से क्या औरतें अपने कपड़े निकलकर क्या गणना चूसेंगी................" और आसमा हौले से हंस पड़ती hain..................uski छूट में गीलापन बढ़ता hi जा रहा था.........................

हरी की बातें उसके तन बदन में आग लगा रही thi................wahin उसे हरी के साथ ऐसी बातें मज़ा भी दे रही thi...............aasma को ऐसे खुलता हुआ देखकर हरी की आँखें चमक जाती हैं और वो अब समझ जाता हैं की उसकी मेमसाहेब धीरे धीरे उसके लुंड पर चढ़ने की तैयारी कर रही hain.................to भला वो इस शुभ काम में कहाँ पीछे रहने वाला था...................

" आपको कैसे पता चला memsaheb....................ki मेरे गांव की औरतें ऐसी hain..................waise देखा जाये तो औरतों को अक्सर मोठे गन्ने को चूसने में ....................और मोठे केले को खाने में कुछ ज़्यादा hi मज़ा आता hain....................aur सही मायने में औरतों को गणना उनके कपड़े उतरवाकर hi चूसवाने में एक अलग मज़ा hain...............issey ये फायदा होता हैं की कपड़े ख़राब नहीं hote.........jissey दाग लगने का दुर्र नहीं rehta.................aur गन्ने में से रूस और भी ज़्यादा निकलते रहते hain...........aap भी जब गणना चूसेंगी तो आप भी अपने कपड़े उतारकर choosiyega...................dekhiyega उस गन्ने में से कितना ज़्यादा रूस निकलता हैं................." और हरी आसमा के तरफ फिर से गन्दी नज़रियों से देखने लगता हैं वहीँ अब आसमा का वहां और रुकना मुश्किल होता जा रहा tha.................wo उसे बाटिओं से पल पल नंगा करता जा रहा था.....................

" मैं ले आती हूँ तुम्हारे लिए दूध..............." और आसमा का चेहरा शर्म से लाल पढ़ जाता hain....................hari की बाटिओं का उसके पास कोई जवाब नहीं tha................wo उससे कहती भी क्या!!!!!!!!!!! वो उस बात को वहीँ ख़तम करती हुई फ़ौरन नीचे की तरफ चल पड़ती हैं वहीँ उसकी सांसें पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी thi................idher हरी बड़े गौर से आसमा की थिरकी हुई गांड को बेखौफ्फ़ घूर रहा tha.................usey पूरा यकीन था की अब आसमा उसे कुछ नहीं कहेगी...............

जैसे hi आसमा किचन में आयी वो वहीँ लुम्बी लुम्बी सांसें लेती हुई अपने दोनों हाथ किचन के स्लैप पर राखी हुई ....................अपने बेकाबू हो रहे सांसों को पूरी तरह से नार्मल करने lagi.............magar उसकी ये सांसें अब नार्मल नहीं हो रही thi...............hari की बाटिओं से वो बहुत गरम हो चुकी thi...................wo फ्रीज में से तीन चार ब्रेड निकलती hui..........doodh को एक कटोरे में रखती hain.............pani की एक बोतल उस ट्रे में रखकर फिर से कुछ खड़े खड़े वहीँ सोचने lagi..............aur कुछ सोचकर उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान तैर गयी............

वो पीछे मुड़कर देखने लगी तो उसे कोई नज़र नहीं aaya...........wo फ़ौरन अपने लग्गी को और साथ hi साथ अपने पंतय को नीचे की तरफ सरकती hui............apne एक हाथ को नीचे की तरफ अपने छूट पे ले गयी ................और जब उसकी ऊँगली उसके छूट पर गयी उसकी छूट पूरी तरह से गीली थी जिससे आसमा की ऊँगली उसपर फिसलने lagi..........kuch सोचकर वो अपने ऊँगली को आस पास अपने छूट के चरों तरफ घूमती hui................samney रखे उस ब्रेड को बड़े गौर से निहारने lagi.................fir वो धीरे से अपने छूट रूस से सनी उस ऊँगली को उस ब्रेड पर ले गयी और अपने छूट का पानी धीरे धीरे उसपर पूछने लगी.................

जब ऊपर का हिस्सा साफ़ हो गया तो वो उस ऊँगली को अपने छूट के अंदर ले गयी और उसमें से वही गीली ऊँगली को वो एक एक कर सभी ब्रेड पर लगाने lagi..............na जाने क्यों उसे ये सब करने में बड़ा मज़ा आ रहा tha...................wo आज हरी को स्पेशल ब्रेड खिलाना चाहती thi...................apne छूट रूस वाला स्पेशल ब्रेड................

जब चरों ब्रेड पर आसमा की छूट रूस ाचे से लग गया तब वो अपने कपड़े ऊपर करने लगी और धीरे से फिर मुस्कुरा दी..............

" आज तुम्हें मैं स्पेशल ब्रेड khilaungi..............tum भी क्या याद करोगे की तुम्हारा पला किस्से पड़ा था..................." और आसमा अपना ड्रेस सही करती हुई उस ट्रे को हरी के कमरे की तरफ लेकर चल पड़ती हैं वहीँ उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान thi............hari जब आसमा को अपने पास आता हुआ देखा तो वो भी खुस हो गया.................

" पहले तुम नास्ता कर lo...................fir काम karna.................tumhein भूख लगी थी naa.................dekho मैं तुम्हारे लिए दूध और ब्रेड लायी हूँ............." और आसमा वहीँ हरी के पास चेयर पर जाकर बैठ जाती हैं वहीँ हरी बिना अपना हाथ धोये उस ब्रेड को एक नज़र देखता हैं फिर वो ऐसे hi एक ब्रेड को अपने मुँह में डालता हुआ ...........अपने गंदे डेंटन से चबाता hua..................upar से थोड़ा थोड़ा दूध पीने लगता hain............bread मुँह में डालने से उसे उसका स्वाद कुछ नमकीन सा लगता हैं मगर वो उसकी परवाह किये बगैर बड़े मज़े से उस ब्रेड और दूध कोएक साथ खाने लगता हैं.............

" ये तुम कैसे खा rahe..........us ब्रेड को दूध में डालकर ाचे से भिगो lo.........fir तुम्हें इसका असली स्वाद aayega..............waise ये ब्रेड मैंने तुम्हारे लिए ख़ास तौर पर बनवाया हैं..................." और आसमा धीरे से खिलखिलाती हुई हंस पड़ती हैं वहीँ हरी थोड़ा झेप जाता hain..............wo फिर उस ब्रेड को दूध में डालता हैं फिर उसे खाने लगता हैं.............

" हाँ memsaheb.............ye ब्रेड तो कुछ ख़ास hi लग raha................aise लग रहा जैसे इसमें कुछ नमीं सा मिला हुआ ho...............magar जो भी कहिये इसका स्वाद बहुत hi मस्त हैं.............." और हरी बड़े मज़े से उस ब्रेड को खाने लगता हैं वहीँ आसमा न चाहते हुए भी अपने चेहरे पर मुस्कान लेन से खुद को नहीं रोक pati..............humesha की तरह हरी उसके करीब आता हैं और हमेशा की तरह उसकी सांसों में वहीँ स्मेल घुलने लगती हैं जो उसे और भी बेचैन करती जाती hain.................wahin हरी हर बार की तरह अपना जूठा पानी छोड़ देता हैं और आसमा उसे नीचे लेजाकर उस पानी को सबसे छुपकर पीती hain.............ye आसमा का रोज़ का सिलसिला बन चूका था..................

आसमा पहले से कहीं ज़्यादा अब और गरम रहने लगी thi................hari और शांति के जाते hi वो दरवाज़ा बंद कर लेती हैं और अपने सरे कपड़े एक एक कर उतरती hui..................bister पर पूरा नंगी लेट जाती हैं और आज की जो भी हरी से बातें हुई थी और जो कुछ उसने kiya..............wo सब कुछ याद करके वो तेज़ी से अपने छूट में अपनी ऊँगली चलने लगती hain...........................dheere धीरे उसकी ये मदहोशी बढ़ती जा रही thi........kuch चाँद मिनट hi गुज़ारे थे की आसमा हर बार की तरह ज़ोरों से चीखते हुए झरने लगती hain.................har रोज़ की तरह उसकी छूट से पानी आज कुछ ज़्यादा hi निकल रहा था..................

लम्बी लम्बी सांसें लेती हुई वो बिस्टेर पर मदहोश सी पड़ी हुई thi..............uski छूट से बेहटा हुआ उसका वीर्य धीरे धीरे बेहटा हुआ बिस्टेर पर गिर रहा tha..............paisney से उसका जिस्म पूरी तरह भीगा हुआ tha................sansein तो उसके बस में कभी थी hi nahin.........jo अब क्या rahengi...................itna तो तय था आसमा गुज़रते वक़्त के साथ धीरे धीरे बदलती जा रही thi...................sab कुछ गुज़रते वक़्त के साथ अब बदल रहा tha.....................dekhna था की ये बदलाव उसकी ज़िन्दगी में कौन सा मोड़ लेकर आने वाला था...........................

तो बे कॉन्टिनोएड..............................................
 
अपडेट-21 (ा) (मेघा अपडेट)

लम्बी लम्बी सांसें लेती हुई वो बिस्टेर पर मदहोश सी पड़ी हुई thi..............uski छूट से बेहटा हुआ उसका वीर्य धीरे धीरे बेहटा हुआ बिस्टेर पर गिर रहा tha..............paisney से उसका जिस्म पूरी तरह भीगा हुआ tha................sansein तो उसके बस में कभी थी hi nahin.........jo अब क्या rahengi...................itna तो तय था आसमा गुज़रते वक़्त के साथ धीरे धीरे बदलती जा रही thi...................sab कुछ गुज़रते वक़्त के साथ अब बदल रहा tha.....................dekhna था की ये बदलाव उसकी ज़िन्दगी में कौन सा मोड़ लेकर आने वाला था...........................

अब आगे.........................................................................

घडी में 3 बज रहे they.................aasma अपने कमरे में बेसुध नंगी सोई हुई thi............usey अब किसी भी चीज़ का होश कहा tha.................pichley दो दिनों से वो बहुत सुकून और बेफिक्र होकर सोई thi............wo फ़ौरन अपने बिस्टेर से उठी और बिना कपड़ों के ऐसे hi अपने बाथरूम की ओरे चल padi...........bina किसी झिझक ke......................shower का ठंडा ठंडा पानी उसके ताप्ती हुए बदन को थोड़ा बहुत रहत तो दे रहा था मगर उसके अंदर की बढ़ती हुई उस प्यास को कम नहीं कर पा रहा tha..................jis प्यास को बुझाने के लिए आसमा अब दिन रात बेचैन रह रही थी..................

शावर लेने के बाद वो ऐसे hi बिन कपड़ों के अपने बैडरूम में आती हैं और हमेशा की तरह अपने बदन पर सूट और लेहंगा पहन लेती hain................thoda हल्का सा मेकउप करके वो सीधा किचन में कुछ अपने लिए खाना बनाने चल पड़ती hain.............subeh से उसने कुछ खाया नहीं था तो इस वक़्त उसे भूख ज़ोरों की लगी thi.......................khana बनाने के बाद वो आराम से कहती हुई एक एक बातें फिर से सोचने लगती hain................bread पर उसका ध्यान जाते hi उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान फिर से तैर जाती हैं...............

करीब शाम को 5 बजे वो बहार बरामदे की तरफ जाती हैं तो उसे ध्यान आता हैं की रोज़ की तरह आज भी उसके कपड़े बहार hi अब तक सूख रहे होंगे ............फिर अचानक उसका ध्यान अपने ब्रा और पंतय की तरफ जाता हैं जिससे उसके चलने की रफ़्तार और तेज़्ज़ हो जाती hain....................uska कलेजा फिर से ज़ोरों से धड़क उठा tha..................wo एक एक कर अपने सरे कपड़े समेटने लगती हैं और जब वो अपने ब्रा और पंतय के पास पहुँचती हैं वो बड़े गौर से हेंगर में तंगी अपने उन्देर्गर्मेन्ट्स को निहारती हैं ..................मनो वो उसमें कुछ ढूढ़ रही हो.....................

ढूढ़ hi तो रही थी मगर उसे ऐसा कुछ ख़ास नज़र नहीं aaya..........jiski उसे तलाश thi.....................kuch सोचकर वो अपने ब्रा और पंतय को जब अपने हाथों में लेती हैं कल की तरह उसके पंतय और ब्रा के कुछ हिस्सों में कड़कपन साफ़ नज़र आया जिससे उसका कलेजा ज़ोरों से धड़क उठा.................. साथ hi उसके चेहरे पर मुस्कान भी तैर gayi....................wo चरों तरफ इधर उधर देखती हुई जल्दी से अपने ब्रा और पंतय को उठती हुई सीधा एप कमरे की ओरे चल padi................jaise hi वो अंदर आयी उसने जल्दी से अपना रूम लॉक किया और सीधा सरे कपड़े लेती हुई अपने बैडरूम में चली गयी.............

फिर वो अपने ब्रा और पंतय को अपने हाथों में लेती हुई बड़े गौर से उसे देखने lagi...................aaj भी उसके पंतय और ब्रा के कुछ हिस्सों पर सफ़ेद सफ़ेद दाग के साथ साथ कड़कपन भी साफ़ महसूस हो रहा tha............wo एक बार फिर पने पंतय को अपने नाक के पास ले गयी और उसमें से वीर्य की खुसबू को सूंघने lagi............ek हल्की सी खुसबू उसके सांसों में घुलने लगी................. जिससे उसकी दिल की धड़कनें फिर से तेज़ होती चली gayi.............wo कई बार उस खुसबू को सूंघने लगी और आंत में अपना जीभ धीरे से निकलती हुई उस कड़क हिस्से को धीरे धीरे फिर चटनी लगी..................

एक बार फिर से वो मदहोश होती जा रही thi.............jism में अजीब सी सिरहन फिर से दौड़ने लगी thi..................sansein हर बार की तरह बेकाबू होते जा रहे they.................aankhein लजात से बंद हो गयी और सांसों पर काबू न raha...................dheere धीरे आसमा को वीर्य की खुसबू ाची लगने लगी thi...................wo उस वीर्य को चखना चाहती thi.............uska दिल तो कर रहा था की हरी सीधा अपना वीर्य उसके मुँह में डालकर उसे khilaye................virya की खुसबू उसे मदहोश के साथ साथ पागल भी करती जा रही thi.............ek बार फिर से उसके छूट में गीपापान बढ़ने लगा था..............

आसमा तब तक अपने जीभ को उस पंतय और ब्रा पर से नहीं हटती जब तक वो हिस्सा पूरा उसकी थूक से गिला नहीं हो जाता ..................वो अब पहले से कहीं ज़्यादा बेचैन और गरम रहने लगी thi...............din बा दिन उसके तन बदन में आग बढ़ती hi जा रही thi.....................jo धीरे धीरे अब शोला का रूप ले रही thi.............shayad इस वजह से आसमा पहले से ज़्यादा ओपन होने लगी थी..............

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" hari.......................jab तू जनता हैं की मेमसाहेब तुझे पसंद करती हैं तो फिर तू अब तक रुका कहे को hain........................mauka मिले और जाकर धार दबोच ले मेमसाहेब ko...........nikal ले अपनी पूरी भड़ास......................" और शांति हरी के तरफ देखती हुई धीरे से बोल पड़ती hain............wahin जवाब में हरी धीरे से मुस्कुराता हुआ उसकी तरफ अजीब नारज़ियन से देखने लगता हैं..............

" मैंने ये कोशिश भी की थी मगर तुमने उसका अंजाम देखा na.................magar इस बार मैं अगर मेमसाहेब को धार दबोचु तो वो मुझे किसी बात के लिए इंकार नहीं karegi............ye बात मैं पूरे गुरंटी से कह सकता hoon............magar औरत हैं तो थोड़े बहुत नखरे तो दिखाएगी hi.............fir बाद में मुझे सब कुछ करने देगी जो मैं चाहता hoon.....................lekin...................." और हरी इतना बोलकर चुप हो जाता हैं वहीँ शांति सवाल भरे नज़रियों से हरी के चेहरे की तरफ देखने लगती हैं..................

" लेकिन क्या????????????? " और शांति धीरे से हरी की तरफ देखती हुई बोल पड़ती हैं वहीँ हरी कुछ देर तक चुप रहता हैं फिर वो आगे बोलना शुरू करता हैं............

" एहि तो मैं नहीं चाहता की मैं इस बार मेमसाहेब के साथ थोड़ा भी ज़बरदस्ती karun......................balki मैं ये चाहता हूँ की वो खुद मेरे पीछे पीछे aaye...............aur खुद अपने आपको मेरे हवाले कर dein................chingari तो मैं हर रोज़ उसके तन बदन में भड़का hi रहा hoon............bus देर हैं तो बस ..............कब ये चिंगारी शोला bane.................aur अगर ऐसा हो गया न शांति तो मैं मेमसाहेब के साथ हर वो चीज़ कर सकता हूँ जो मेरा सपना हैं.................

मेरे मुन्न में बहुत सी ऐसी चीज़ें हैं जो मैं अब तक दबाकर रखा hoon................aur मैं वो चीज़ें आज तक कभी किसी लड़की या औरत के साथ अब तक नहीं किया hoon..............na तेरे साथ ....................और न किसी और के saath............kyon की मुझे अब तक वैसी लड़की या औरत मिली hi nahin..................aab मिली भी हैं तो मैं उसका शिकार धीरे धीरे karunga...................aur बहुत इत्मीनान से karunga..................shikar को जितना तपाया जाये शिकारी को मज़ा उतना hi ज़्यादा आता हैं......................
 
Update-21(B) (मेघा अपडेट)

मगर मुझे यकीन हैं की अगर मेमसाहेब मेरे हाथ में आ गयी तो वो मेरे लिए वो सब कुछ करेगी जो मैं बरसों से किसी लड़की के साथ करना चाहता hoon...............aur जिस दिन ऐसा हो गया na........................us दिन मेरी ये सोई हुई किस्मत हमेशा के लिए बुलंद हो जाएगी............" और हरी फिर से अपने ख्यालों में खोता चला जाता हैं वहीँ शांति अजीब सी नज़रियों से उसके चेहरे को घूर रही thi...............usey तो हरी एक सनकी या पागल नज़र आ रहा था.............

" ाचा ......................तो साहेब के इतने बड़े बड़े सपने भी hain..............dekh ले हरी कहीं ऐसा न हो की वो तेरे लुंड के नीचे आते आते कहीं तुझसे हमेशा हमेशा के लिए दूर न हो jaye................kyon की तेरा ये लुंड मुझे नहीं लगता की वो पूरा कभी ले भी payegi....................baki औरतों की tarah...............ek मैं हूँ जो तेरे इस लुंड को झेल रही hoon...............aur अपनी उम्र का तो लिहाज़ kar...........kahan तू 45 साल का और कहाँ वो सिर्फ 19 साल की .................तेरे सामने तो वो बाची hi हैं naa............upar से काची kali...............aur तू तो घंटों घंटों मुझे रगड़ता रहता हैं उसका kya.................teri चुदाई तो कभी भी एक घंटे से पहले ख़तम hi नहीं hoti................wo तुझे क्या इतने देर तक झेल payegi..................kabhi nahin.............ye ख्याली पुलाव पकाना बंद कर hari...........aisa कुछ नहीं होने wala..................jo तू सोच रहा......................" और शांति हरी को ताने मरती हुई धीरे से हंस पड़ती हैं वहीँ हरी कुछ देर तक फिर चुप रहता हैं.................

" ऐसा कुछ नहीं होगा shanti.................jab छूट में आग धीरे धीरे धड़काया जाये तो औरत उस आग को बुझाने के लिए कुछ भी कर सकती hain.................kisi भी हुड्ड तक जा सकती hain.................aur ये बात मैं यु hi नहीं कह raha...............balki दावे से कह रहा ................तू मान चाहे मुट्ठ मान..............." और हरी बीड़ी को अपने जेब से निकलता हैं और उसे जलाता हुआ....................... एक तेज़्ज़ काश खींचता हैं और उसका धुवां शांति के मुँह पर छोड़ने लगता हैं वहीँ शांति ज़ोरों से खांस पड़ती हैं.............

" तू तो नाराज़ हो gaya...................main तो नहीं चाहती की मेरा राजा मुझसे गुस्सा kare...............waise तू मंसूब के साथ करना क्या चाहता हैं ज़रा मैं भी तो jaanu............aisa कौन सा अरमान हैं जो सिर्फ वो hi पूरा कर सकती hain.................main nahin....................."aur शांति हरी के बालों में अपना हाथ फेरते हुए धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ हरी अपना मोबाइल उठता हैं और उसे अनलॉक करता हुआ एक पिछ का फोल्डर खोलता हैं और उसे शांति के हाथों में दे देता hain.................waise हरी के पास भी एक एंड्राइड मोबाइल फ़ोन था....................

शांति जैसे hi उस फोडेर के पिक्स को ओपन करती हैं उसकी छूट में एक साथ हज़ारों चीटियां रेंगने लगती hain.................us फोल्डर में हज़ारों ऐसी नंगी नंगी पिक्स थी जिसे देखकर शांति के होश उड़द गए they...................uski छूट पूरी तरह से पनिया गयी थी और उसका गाला सूखने लगा था...................

" ये ख़ास पिक्स हैं जो मैं नेट से डाउनलोड करके लिया hoon................ismein जितने भी फोटोज हैं वो सब मेरी पसंद की hain.............aur जो कुछ भी हैं वो सब की सब चीज़ें मैं अपनी मेमसाहेब के साथ खुलकर करवाना चाहता hoon......................jo एक पेशावर रंडी भी करने से पहले सौ बार सोचती hain.................main तो एहि चाहता हूँ की मैं अपनी मेमसाहेब को अपनी पर्सनल रंडी banawun...................janta हूँ की ये काम थोड़ा मुश्किल हैं मगर नामुमकिन nahin......................agar जिस दिन ऐसा हो गया उस दिन इस फोटोज में जितने भी तसवीरें हैं मैं सब कुछ अपनी मेमसाहेब के साथ करता चला jawunga..............aur उस दिन मुझे और मेरे इस लुंड को कहीं जाकर सुकून मिलेगा................" और हरी बीड़ी की एक ज़ोर की काश खींचता हुआ अपनी आँखें बंद कर लेता हैं वहीँ शांति पलंग पर बैठी hui.........apni दोनों टांगें हरी के सामने पूरा फैलाती हुई................ फ़ौरन अपनी साड़ी ऊपर की तरफ उठा लेती हैं ...................अपने जांघों तक...............

पंतय अंदर न पहनने की वजह से उसकी नंगी छूट हरी के सामने be-parda thi....................jab हरी की नज़रें शांति के तरफ जाती हैं उसके चेहरे पर मुस्कान तैर जाती hain.........wahin शांति हरी के मोबाइल को देखती हुई एक एक पिक्स को बदल रही thi......................uski छूट से बेहटा पानी इस बात का सबूत था की उस पिक्स में वाकई बहुत hi अश्लील तसवीरें होंगी जिसे देखने के बाद शांति भी अपने आपको कण्ट्रोल नहीं कर पायी thi.................wo हरी के सामने किसी सस्ती रांड की तरह अपनी दोनों टांगें पूरा फैलाती हुई अपनी छूट में धीरे धीरे ऊँगली कर रही thi...................wahin हरी बड़े गौर से शांति के गीले छूट को देखे जा रहा था....................

"aaaaaasssshhhhhhhhhhhhhhhhhh...........hari..................ismein तो बहुत hi ज़्यादा गन्दी तसवीरें hain................mujhe नहीं पता था की तू औरतों के बारे में इतना ज़्यादा घटिया भी सोचता hain.................mujhe नहीं लगता की तेरी ये फँसतास्य एक भी मेमसाहेब पूरी कर payegi.................aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh........" और शांति तेज़ी से अपने छूट के दानों को हरी के सामने रगड़ती हुई सिसकने लगती हैं वहीँ हरी बीड़ी की आखरी काश खींचता हुआ उस बीड़ी को अपने पैरों से मसलता hua..............seedha शांति के पीछे जाकर खड़ा हो जाता हैं और हौले से अपनी दो मोती ऊँगली सरकते हुए शांति के छूट के लिप्स पर रख देता हैं और उसे धीरे धीरे रगड़ने लगता hain.................wahin शांति की आहें और तेज़्ज़ होने लगती hain...............hari के हाथ लगते hi उसकी छूट और भी ज़्यादा पानी छोड़ने लगती हैं और वो बुरी तरह से मचल उठती हैं.............

" तेरे जिस्म में मुझे तेरे ये दो पपीते बड़े ाचे लगते hain..................jee तो करता हैं मैं बस इसे ऐसे hi मसलता रहूं................." और हरी शांति के ब्लाउज के ऊपर से hi उसके एक चुकी को कसकर मसलने लगता हैं वहीँ शांति और भी ज़ोरों से सिसक पड़ती hain....................wahin उसका दूसरा हाथ उसके छूट के डैनों पर धीरे धीरे रगड़ रहा tha...............wahin शांति की सांसें तेज़्ज़ होती आ रही thi..............lajaat से उसका गाला सूखने लगा था...............

" तो मसल न hari..............aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh................tujhe रोका किसने hain..................ye सब तेरे लिए hi hain................aur मेरे छूट पर ऊँगली क्या घुमा raha...........apni ऊँगली अंदर कर naa.................meri छूट को ाचे से ragad.................mujhe इसी वक़्त मेरा पानी गिरवाना हैं.............." और शांति अपने हाथ में मोबाइल लिए हुए पिक्स को भी बदलती जा रही थी वहीँ हरी धीरे धीरे उसकी छूट के अंदर अपनी दो मोती मोती ुंलियों को घुसा रहा था वहीँ शांति का सिसकना और भी ज़्यादा बढ़ गया था............................

" क्यों अभी कुछ देर पहले तो तू मुझे बड़ा उपदेश दे रही thi.............har रोज़ मैं तुझे घंटों छोड़ता हूँ उस खुले बरामदे mein...........khule आसमान के neechay..............fir भी तेरी छूट हमेशा प्यासी hi रहती hain.....................jab तेरा ये हाल हैं तो सोच अपनी मेमसाहेब तो जवानी के दहलीज़ पर कड़ी hain.............usey अगर इन सब चीज़ों का चस्का लगा दिया जाये to................main यु hi बात नहीं करता................." और हरी इस बार अपनी दो उँगलियों को शांति के बुर में पूरा घुसा देता हैं जिससे शांति की मज़े से आँखें कुछ देर के लिए बंद हो जाती hain....................wo सिसकते हुए अपनी कमर को और फैला लेती हैं ताकि हरी आसानी से उसकी बुर में अपनी उँगलियाँ पेल सके..................

" क्यों कैसी लगी तुझे ये साडी photos.................hain न सब कमल ki............ek काम और तू मेरा कर de.............bus तू मेमसाहेब का नंबर मुझे दिला de..............aur मेरा नंबर उन्हें दे दे bus..............fir देखना मैं कैसे इसमें की एक एक फोटोज मैं उनको व्हाट्सप्प करके हर रोज़ उन्हें आग lagaunga......................bada मज़ा आएगा..................." और हरी तेज़ी से शांति के छूट के अंदर अपनी दो मोती उँगलियों को तेज़ी से चलने लगता हैं साथ hi साथ वो उसके दोनों चूचियों को कपड़े के ऊपर से बरी बरी से मसलता भी जा रहा tha..................shanti के लिए अब ये सब और बर्दास्त करना उसके बस के बहार था...........................

अगले hi पल वो वहीँ ज़ोरों से aaaaaaaaahhhhhhhhhssssssssssssssiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii........................ करती हुई चीखते हुए झरने लगती हैं और ज़ोरों से हांफती हुई मोबाइल को साइड में रखती हुई ................अपने दोनों पवन को ऐसे hi फैलाती हुई बिस्टेर पर धाम से गिर पड़ती हैं वही हरी के चेहरे पर फिर से एक कमीनी सी मुस्कान तैर जाती hain.................wo अपने इस जीत को देखकर मुन्न hi मुन्न बहुत खुस tha.................pichley कुछ दिनों से शांति हर वक़्त नशे और मदहोशी के आलम में डूबी रहती thi....................har वक़्त वो भी मदहोश सी रहने लगी thi...............karan था hari...........jo उसे हर रोज़ घंटों छोड़ता tha..............jissey शांति की ये प्यास दिन बा दिन अब बढ़ती जा रही thi...................usey भी हरी के लुंड के अलावा और कुछ नज़र नहीं आ रहा था.......................

शांति ने कल सोच लिया था की जब वो आसमा से मिलेगी तो वो अपना नंबर और हरी का नंबर उसे दे देगी और उसका भी नंबर अपने पास रख legi..................sab कुछ चल रहा था मगर धीरे dheere...............guzarte वक़्त के साथ सब कुछ धीरे धीरे अब बदल रहा था.....................

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शाम को सैम का फ़ोन आया और आसमा उससे इधर उधर की कुछ बातें ki...................usney बताया की वो फिलहाल दो महीनों तक घर नहीं आ payega...............kisi काम के सिलसिले में उसे विदेश भी जाना पढ़ सकता hain................aasma कुछ नहीं boli.................wo बोलेगी भी क्या!!!!!!! .............अगर वो सैम को बुलाती तो भी वो अपने अब्बू के दुर्र से घर नहीं aata................ye सोचकर वो चुप हो जाती हैं............

शाम को खाना खाने के बाद उसे नींद नहीं आ रही thi.............ghanton वो अपने बिस्टेर पर इधर से उधर बस करवटें बदलती rahi................virya की खुसबू उसे पल पल बेचैन करती जा रही thi................do तीन दिनों से वो हरी का सिर्फ सूखा हुआ वीर्य hi चाट रही थी जिससे उसका स्वाद कुछ ख़ास पता नहीं चल रहा tha..............wo तो चाहती थी की हरी उसके आँखों के सामने अपना वीर्य nikaley................uske मुन्न में ये इच्छा अब बढ़ने लगी थी .....................साथ hi साथ वो अब हरी का लुंड भी देखना चाहती thi..............yehi सब सोचकर कल उसने शाम को जाने के बजाये थोड़ा एक दो घंटे पहले जाने का निश्चय किया..........

जिससे वो हरी का वीर्य अपने पंतय और ब्रा पर निकलता हुआ भी देख सके और साथ hi उसका लुंड का भी दीदार कर sake..............magar कहीं उसका सामना उससे इस हाल में अगर हो गया to...............to वो उससे क्या kahegi................sharam और झिझक की वजह से कहीं हरी भी कुछ न बोल paye..............aur हो सकता हैं की वो हमेशा उससे फिर अपनी नज़रें चुराता firey.........................ya फिर वो अपना छुम उसकी पंतय पर या ब्रा पर गिरना hi बंद कर dein....................jo आसमा को अब शायद मंज़ूर नहीं tha.........................wo बहुत ज़्यादा झिझक रही थी....................

हालाँकि उसे बुरा नहीं लग रहा था हरी जो रोज़ उसके ब्रा और पंतय पर अपना वीर्य गिरता था to................balki वो तो खुस हो रही थी की वो किसी न किसी तरह से उसकी मदद कर रही hain...............jissey उसकी तड़प तो कम हो rahi............saath hi साथ थोड़ा बहुत सुकून भी उसे मिल रहा tha.................ye सब ख्याल आते hi आसमा के चेहरे पर मुस्कान आ जाती हैं और वो नींद के आगोश में डूबती चली जाती हैं..................................

तो बे कॉन्टिनोएड..................................................................
 
अपडेट-22 (ा) (मेघा अपडेट)

हालाँकि उसे बुरा नहीं लग रहा था हरी जो रोज़ उसके ब्रा और पंतय पर अपना वीर्य गिरता था to................balki वो तो खुस हो रही थी की वो किसी न किसी तरह से उसकी मदद कर रही hain...............jissey उसकी तड़प तो कम हो rahi............saath hi साथ थोड़ा बहुत सुकून भी उसे मिल रहा tha.................ye सब ख्याल आते hi आसमा के चेहरे पर मुस्कान आ जाती हैं और वो नींद के आगोश में डूबती चली जाती हैं..................................

अब आगे..............................................................................

हर रोज़ की तरह सुबह के 8 बजे हरी और शांति अपने काम पे पहुँच जाते hain...............jab घर की दूर बेल्ल बजती हैं तो आसमा के चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान तैर जाती hain..................kahin न कहीं वो भी हरी के आने का अब इंतज़ार कर रही thi...............jaise hi वो दरवाज़ा खोलती हैं सामने सिर्फ शांति कड़ी thi..................apne हाथों में झाड़ू और पुछा लिए hue....................ye देखकर आसमा का चेहरा उतर जाता hain....................jo खुशियां अभी कुछ देर पहले उसके चेहरे पर झलक रही थी उसकी जगह अब मायूसी ने घेर ली thi........magar वो शांति के सामने ज़रा भी ज़ाहिर नहीं होने देती की वो हरी के ना आने से दुखी हैं...........

" शांति tum....................aur हरी कहाँ hain...............wo नहीं आएगा क्या आज काम पे........................" और आसमा अपने चरों तरफ एक नज़र दौड़ती हुई फिर से शांति के चेहरे की तरफ देखने लगती हैं वहीँ शांति मुँह बनती हुई अंदर आती हैं और आसमा की तरफ देखती हुई धीरे से फिर मुस्कुरा देती हैं............

" memsaheb.................aapko पता हैं न हरी पूरा बैल (ॉक्स) hain.............wo हमेशा अपनी वाली hi करता hain.....................subeh से अपना शर्ट लेकर बैठा हुआ hain.................uske शर्ट के दो बटन टूट गए हैं और वो काफी देर से सुई में धागा दाल raha...........................magar उससे वो धागा नहीं जा raha...............to वो भी आज ज़िद्द पर ऐडा हुआ हैं की आज वो कुछ भी हो जाये अपनी शर्ट की बातां लगाकर hi manega...............aab कौन समझाए उस बैल को.............." और शांति मुँह बिचकाते हुए धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ आसमा जवाब में धीरे से हंस पड़ती हैं..................

" तो क्या hua..............tum सुई में धागा दाल deti...............agar उससे धागा नहीं पढ़ रहा तो................." और आसमा शांति को ताने देती हुई बोल पड़ती हैं वहीँ शांति बुरा सा मुँह बनाते hue.............thoda सा इतराते हुए.................... बोल पड़ती हैं.................

" वो देगा मुझे तब na...................zidd पर ऐडा हैं की मैं hi सुई में धागा dalunga.................to dalunga................kaun समझाए usey...............main चली काम पे memsaheb.................agar आप चाहे तो जाकर उसे देख सकती हैं..............." और शांति अपनी गांड मटकती हुए .............थोड़ा अपनी पवन फैलते हुए धीरे धीरे चलने लगती हैं ये देखकर आसमा फ़ौरन बोल पड़ती हैं...............

" तुम्हारी चाल को क्या हुआ shanti............pairon में कुछ तकलीफ हैं क्या........................" और आसमा बड़े गौर से शांति को सर से लेकर पवन तक निहारने लगती हैं वहीँ शांति के चेहरे का रंग थोड़ा फीका पढ़ जाता hain.............aab वो अपनी मेमसाहेब को क्या बताती की उसकी चाल तो हरी ने ख़राब कर दी hain.....................chod छोड़ के.................

" वो memsaheb..................bus यु hi................" और शांति थोड़ा हड़बड़ा जाती हैं और बिलकुल चुप हो जाती hain.................wahin आसमा टकटकी लगाए शांति के चेहरे को बस देखे जा रही थी..............

" पीरियड्स की वजह से ऐसे प्रोब्लेम्स अक्सर आते hain...........tum पद उसे करती हो ना........................." और आसमा धीरे से मुस्कुरा देती हैं वहीँ शांति हाँ में अपना सर हिलती हुई ऊपर के कमरे की तरफ जाने लगती हैं...............

" जिस दिन आप हरी के लुंड के नीचे आएँगी na..............us दिन आपको खुद बा खुद पता चल जायेगा की औरत की चाल कैसे ख़राब होती hain...............hari जैसा लुंड अगर हर

मर्द के पास हो तो औरत की चाल तो वैसे भी ख़राब हो hi jayegi.................jaise उस कामिनी ने मेरी कर दी hain............kamina मुझे इतना ज़्यादा पेलता हैं की मेरी बुर की धाज्जियाँ उदा देता hain..................aur जब मैं मूतने जाती हूँ तो मुँह से बस.... अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.... hi निकलती hain..............moot nahin.....................jis दिन आपकी चाल ख़राब हुई उस दिन मैं भी आपसे एहि सवाल karungi...................fir मैं भी देखूंगी की आप क्या जवाब देती हैं............." और शांति मुन्न hi मुन्न बहुत सी चीज़ें सोचती हुई ऊपर जाने लगती हैं..................

इधर आसमा हरी के न आने से बेचैन thi..................wo बहुत असमंजश में फांसी थी की वो उसके कमरे में जाये की nahin............agar वो जाती हैं तो हरी उसके जाने का गलत मतलब ज़रूर niklega...............jo वो नहीं चाहती thi..................ye भी हो सकता हैं की वो ये बात जान जाये की मैं उसे अब पसंद करने लगी हूँ तो वो मेरा गलत फायदा uthayega.......................aabhi तक तो वो मेरे साथ डबल मीनिंग में सिर्फ बातें करता tha..................ye भी हो सकता हैं की वो मेरा हाथ पदक le............aur मुझे इधर उधर chuye.................mere बदन के हर हिस्से पर अपना हाथ भी लगाए................

और हरी अगर ऐसा मेरे साथ करता हैं तो मैं उसे शायद अब मन नहीं कर pawungi...............kyon की मैं भी चाहती हूँ की हरी मेरे बदन को chuye..............mere बदन के उन हिस्सों को छुए जिसपर अधिकार सिर्फ और सिर्फ मेरे शोहर का hain................aur किसी का nahin......................magar ये गलत hain.................main अपना ये हसीं बदन किसी और को ऐसे छूने नहीं दे sakti....................ye पाप hain............gunaah hain..............magar इस गुनाह को करने से अगर किसी का भला हो सकता हैं तो ..................मुझे इस गुनाह को करने में कोई ऐतराज़ नहीं हैं.....................

वो भी तो बरसों से किसी औरत के लिए तड़प रहा hain...............agar उसने मेरे बदन पर हाथ रख भी दिया तो कौन सा गुनाह हो jayega..............kum से कम वो तो संतुष्ट रहेगा न mujhse..............main उसके साथ सेक्स थोड़ी न karungi..................bus उसे अपने बदन का मज़ा करने doongi...........bus................issey ज़्यादा और कुछ नहीं......................" आसमा अपने ख्यालों में खोयी हुई दरवाज़े पर अभी तक कड़ी थी तभी उसे सामने से हरी आता हुआ दिखाई diya....................usney नीचे लोअर पहना रखा था और ऊपर सिर्फ banyaan.........................uske एक हाथ में वहीँ पुराणी वाली शर्ट thi................jispar वो बहुत देर से बटन लगा रहा था जो शायद अब तक नहीं लग पाया था......................

जैसे hi उसकी नज़र आसमा पर पड़ी उसकी आँखें फर से चमक gayi......................aasma बड़े गौर से उसे hi देख रही thi...........hari भले hi सांवला था मगर उसका बदन काफी गठीला tha...............gym में जैसे लोग बॉडी बनाते हैं कुछ वैसे hi कट्स उसके बदन पर भी they...............magar ये सिर्फ मेहनत और काम करने से ऐसे नज़र आ रहे they.....................pet थोड़ा था मगर काफी हेअल्थी tha.................wajan उसका करीब 90 कग से कम नहीं होगा..........................

" मेमसाहेब आप yahan....................der से आने के लिए मुझे माफ़ कर dijiye..................ye कम्भख्त सुबह से इस शर्ट ने मुझे परेशां करके रखा hain....................aur ये सुई हैं की इसमें धागा घुस नहीं रहा................." और हरी गुस्से में आसमा की तरफ देखता हुआ बड़बड़ाने लगता हैं वहीँ आसमा उसके तरफ देखती हुई धीरे से मुस्कुरा देती हैं.............

" क्या घुस नहीं रहा .............dhaga...................lawo मुझे do.................main घुसा देती हूँ................" और आसमा हौले से बोल पड़ती हैं वहीँ उसे अपनी गलती का एहसास होता हैं की जाने अनजाने में उसने हरी को कहने का दुबारा से मौका दे diya.......................magar अब तीर कमान से निकल चूका tha...................hari आसमा की बाटिओं को सुनकर धीरे से मुस्कुरा देता हैं............

" घुसाने का काम तो सिर्फ मर्द करते हैं memsaheb................aurtein nahin......................aurtein तो सिर्फ घुसवाना जानती hain................chahe घुसाने वाला चीज़ कितना बड़ा hi क्यों न ho................wo अपने अंदर पूरा घुसवा hi लेती हैं................." और हरी इस बार जान बूझकर आसमा के सामने अपने लोअर के ऊपर से अपने लुंड को मसल देता हैं जिससे आसमा की सांसें फिर से तेज़्ज़ होने लगती hain..............kal तक तो हरी सिर्फ डबल मीनिंग में बातें कर रहा था मगर आज तो वो एक दम खुले और ओपन वर्ड्स उसे कर रहा tha.....................jissey आसमा शर्म से लाल हो जाती hain.............wahin उसका गोरे चेहरे का रंग लाल पढ़ जाता हैं................

" अब दिक्कत ये हैं की इसका छेद बहुत छोटा हैं और ................ये mota.................kambhakt ये अंदर घुस नहीं raha................kahin कहीं जागों पर जब चीज़ें अंदर नहीं घुसती हैं तो बहुत परेशानी होती hain.............koi और जगह होती तो कुछ न कुछ मैं जुगाड़ कर leta................yahan क्या करूँ!!!!!!! " और हरी आसमा की ओरे अजीब सी नज़रियों से देखने लगता हैं वहीँ आसमा शर्म से अपनी नज़रें ऊपर नहीं कर pat..............uska कलेजा ज़ोरों से धड़क रहा tha................hari अभी तक हाथ में सुई और धागा लिए हुए वहीँ खड़ा था.................
 
Update-22(B) (मेघा अपडेट)

" अगर आप चाहे तो डलवा सकती hain...............main तो दाल दाल कर थक गया हूँ मगर ये अंदर जाने का नाम hi नहीं ले raha...................chote छेद में अक्सर एहि दिक्कत होती हैं..............." और हरी इस बार आसमा के तरफ उस सुई और धागे को धीरे से बढ़ा देता हैं वहीँ आसमा शर्म से लाल हो जाती hain..............uske टांगों के बीच फिर से गीलापन बढ़ने लगा tha..............hari बोल तो सही रहा था मगर तरीका हमेशा की तरह उसका गलत tha.................jo वो आसमा को समझाना चाहता था वो आसमा बहुत ाचे से समझ रही thi..............ye सोचकर उसका कलेजा ज़ोरों से धड़क रहा tha..............hari की बातें उसे ाची लग रही थी मगर शर्म की वजह से वो कुछ बोल नहीं पा रही थी वहीँ हरी उसकी शर्म को ख़तम करता जा रहा tha................aur उसे धीरे धीरे बेशरम बनता जा रहा था..........

" lawo.............hari..........main कोशिश करती हूँ..........." और आसमा हरी के हाथों से सुई और धागे को अपने हाथों में लेती हैं और पहले उस धागे को अपने दांतों से कटती हैं फिर उस धागे को अपने थूक से गिला करती हुई उस सुई के छोटे से छेद में अंदर डालने लगती hain.......do तीन कोशिशों के बाद भी वो धागा इधर उधर चला जाता हैं ये देखकर हरी फिर से बोल पड़ता हैं...........

" मैं न कहता था ये काम औरतों के बस का नहीं hain...............wo सिर्फ डलवाना जानती hain..............dalna nahin.......................is सुई का छेद बहुत पलटा hain.............is लिए ये अंदर नहीं घुस raha..........upar से धागा भी मोटा hain..............ye इसमें कैसे जायेगा................" और हरी आसमा के बदन को घूरता हुआ फिर से बोल पड़ता हैं वहीँ उसका लुंड धीरे धीरे हरकत कर रहा tha...............aasma के सामने वो इतना कुछ कह रहा था वहीँ आसमा उसे एक भी बार न रोक रही thi.........aur न hi उसे किसी बात के लिए मन कर रही thi.........isi वजह से उसकी हिम्मत दिन बा दिन अब बढ़ने लगी थी...............

" तुम तो एक्सपर्ट हो न छोटे से छेद में बड़ी मोती चीज़ घुसाने ko..............us दिन पाइप जब लगा रहे थे तो ये लम्बे लम्बे उपदेश दे रहे they..............aab क्या hua..............nikal गयी साडी hekdi..............mana की ये काम औरतों के बस का नहीं हैं तो तुम भी तो इतने देर से इस सुई में धागे डालने की कोशिश कर रहे they.............gaya क्या ........नहीं न............." और आसमा एक बार फिर से कोशिश करती हैं और इस बार उस सुई में धागा अंदर चला जाता हैं वहीँ हरी जवाब में मुस्कुरा देता हैं...............

" अरे वाह!!!!!!........... ये तो अंदर घुस gaya.................aapne तो अंदर डलवा hi liya................aapka बहुत बहुत shukriya.........................khair.................wo उस दिन की बात अलग थी memsaheb..............jismein घुसाया जाये वो चीज़ अगर मज़बूत हो तो उसमें कोई भी चीज़ अंदर चली जाती hain..................chahe उसका छेद मोटा हो ..........या patla..................wo अपनी जगह खुद बना hi legi..............magar यहाँ तो जिसमें घुसाया जा रहा वो चीज़ hi कमज़ोर हैं तो क्या ख़ाक ghusega................jismein घुसाया जाये वो चीज़ नाजुक हो और घुसाने वाला चीज़ मज़बूत तो छेद कैसा भी क्यों न ho................ander तो घुसकर hi रहेगा........................" और हरी आसमा के सामने फिर से गन्दी तरीके से हंस पड़ता हैं वहीँ आसमा उस सुई और धागे को हरी के हाथों में थमती hui.................fauran वहां से अपने रूम की तरफ जाने लगती हैं.............

हरी की बातें उसके तन बदन में फिर से आग लगा रही thi...................aab उसका वहां रुकना एक पल भी मुश्किल होता जा रहा tha.................aasma की छूट फिर से पूरी गीली हो चुकी thi.............badan फिर से आग के भत्ते के सामान टप्प रहा tha................aasma को ऐसे जाते हुए देखकर हरी फिर से बोल पड़ता हैं............

" मेमसाहेब आज भी मैं नास्ता करके नहीं आया hoon...............thoda नास्ता लेकर आएगा तो आपकी बड़ी मेहरबानी होगी..............." और हरी फिर से आसमा के थिरकती हुई गांड को देखने लगता हैं साथ hi अपने हाथ से एक बार फिर से वो अपने लुंड पर ले जाता हैं और उसे आसमा के सामने फिर से मसल देता hain................wahi आसमा का चेहरा सुर्ख लाल पढ़ जाता hain................wo जवाब में एक लफ्ज़ कुछ नहीं बोल पति और सीधा किचन की ओरे चली जाती हैं....................

जैसे hi आसमा किचन में जाती हैं उसका कलेजा ज़ोरों से धड़कने लगता hain...................lumbi लुम्बी सांसें लेती हुई वो अपने दोनों हाथ किचन के स्लैप पर फिर से राखी हैं और अपने बेकाबू हो रहे सांसों को संभालने की कोशिश करती hain................magar हरी उसे कहाँ अब संभालने देने वाला tha..................wo हर रोज़ हर वक़्त उसके छूट में आग भरता जा रहा tha...............usey ओपन करता जा रहा था...............

आसमा फ्रीज से दो अंडे (एग) निकलती हैं और उसका ऑमलेट बनाने लगती hain............wo एक बार फिर से अपने उँगलियों को अपने छूट पर ले जाती हैं और उसका पानी पास में रखे ब्रेड पर कल की तरह लगाने लगती hain............ek बार फिर से वो ब्रेड उसकी छूट रूस से सं चूका था और उसका टास्ते हल्का नमकीन सा हो गया tha...............wo उस ब्रेड को वैसे hi ऑमलेट के साथ राखी हुई एक बोतल पानी लेती हैं और उसे ट्रे में रखती हुई सीधा हरी के कमरे की तरफ चल पड़ती hain.................ek बार फिर से उसकी बेचैनी बढ़ चुकी थी...........

हरी की नज़रें जब दुबारा से आसमा पर पड़ी उसकी आँखें दुबारा से चमक uthi........................wo तो खुद बेचैन था आसमा जैसी पारी को पाने के liye...............usey अपने लुंड के नीचे सुलाने के liye.......................magar वो आसमा को अब पूरी तरह से खुलना चाहता tha................uske अंदर की शर्म और झिझक को हमेशा हमेशा के लिए दूर करना चाहता tha................taki कल को वो उसके लुंड के नीचे आये तो वो उसके एक इशारों पर वो सब कुछ करे जो वो उसके साथ करना चाहता hain..............usey इस बात पर यकीन नहीं ...............बल्कि पूरा विश्वास था.....................

हरी फिर से उस ब्रेड को ऐसे hi खाने लगता हैं और आज भी उस ब्रेड का टास्ते थोड़ा नमकीन जैसा लगता hain............ye देखकर हरी फिर से आसमा की तरफ देखता हुआ धीरे से मुस्कुरा देता हैं................

" वैसे जो भी कहिये memsaheb..........is ब्रेड का टास्ते वाकई में बहुत ाचा hain.................khaata खाता नमकीन sa................ye स्वाद मुझे कुछ याद दिलाता हैं............." और हरी आसमा के तरफ देखता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा का दिल ज़ोरों से धड़क उठता हैं ये सोचकर की कहीं हरी जान तो नहीं गया की वो खाता खाता नमकीन सा पानी क्या hain..................ye ख्याल आते hi आसमा का चेहरा शर्म से फिर लाल पढ़ जाता हैं..............

"मुझे क्या pata................jahan से ये ब्रेड बनकर आता hoga.............wey लोग जाने............" और आसमा जैसे हरी के सामने सफाई देने लगती हैं वहीँ हरी अपने शर्ट के दोनों बटन अब लगा चूका tha..............aur अब वो उसे पहनने वाला tha................fir आसमा की तरफ देखकर वो उस शर्ट को वहीँ फर्श पर रख देता हैं और फिर धीरे से मुस्कुरा देता हैं...............

" क्या फायदा इस शर्ट को पहनने se................aabhi पहनूंगा तो फिर से गंदे हो jayengey..............kaam ख़तम हो जायेगा तो hi इसे pehnunga.............waise मेमसाहेब आप हर कपड़ों में बहुत सूंदर लगती हैं..............." और हरी आसमा के तरफ देखता हुआ धीरे से हंस पड़ता हैं वहीँ आसमा जवाब में धीरे से मुस्कुरा देती hain..............hari तो ऐसे कह रहा था जैसे वो बड़े साफ़ सफाई से रहता हैं.....................

" तुम्हारी शादी को कितने साल हो गए हरी................." और अचानक आसमा हरी से ये सवाल कर बैठी वहीँ हरी कुछ देर तक खामोश रहता हैं.............. फिर वो धीरे से बोल पड़ा................

"20 saal.............magar पिछले 10 सैलून से मैं अकेला hi hoon..................bin औरत ke.................aap तो मेरी तकलीफ समझ सकती हैं naa............ki अगर घर में औरत न रहे तो मर्द की रातें अकेले काटे नहीं katati.................na मर्द को औरत के bina.......aur न औरत को मर्द के बिना.............." और हरी अब आसमा से साडी बातें खुलकर कहने लगा था जिससे आसमा कोई विरोध नहीं करती और चुप चाप से उसकी साडी बातें सुनती रहती hain................fir कुछ सोचकर वो धीरे से बोल पड़ती हैं..............

" 10 साल तो तुम अपनी बीवी के साथ थे ना fir.............tumhare कोई बाचे नहीं हुए क्या..................." और आसमा के इस सवाल ने हरी के मुन्न में हलचल ज़रूर मचा दी thi................wo अब ाचे से समझ गया था की आसमा उसके मुँह से क्या सुनना चाहती hain...................is लिए वो थोड़ा सा बात बनाते हुए अपनी बात आगे कहता hain...............usney सोच लिया था की उसे अब कहा पे क्या बोलना hain..........kaise बोलना hain...............wo ऐसा hi कुछ मौका ढूढ़ रहा tha................jo आज आसमा ने उसे दे दिया था..............

" आपकी बात सही हैं memsaheb..................magar ......................जब वो पहली बार मेरे पास आयी थी तो बहुत दरी दरी सी रहती thi.............suhagraat के दिन उसने मुझे अपने पास आने hi नहीं diya.................magar दूसरे दिन मैं उसके पास गया और उससे बातें ki........to वो कहने लगी की उसे मर्द से दुर्र लगता hain.............fir मैंने उसे बहुत समझाया तब जाकर वो जैसे तैसे mani............jab मैं उसके पास रात में गया और जब मैंने उसके कपड़े उतरे तो वो फिर से दुर्र gayi...............mujhe हाथ भी नहीं लगाने दिया............

ऐसे hi एक हफ्ता गुज़र गया और वो मेरे पास नहीं aayi.............tab मैंने दोस्तों से इस बारे में बात की तो उसने बताया की उसे चुदाई वाली फिल्म dikhawo.............jab वो चुदाई वाली फिल्म देखेगी तब वो गरम होगी तब उसका भी छोड़ने को मुन्न करेगा............" और हरी आसमा के सामने गांडेय वर्ड्स जान बूझकर उसे करने लगा जिससे आसमा की एक बार फिर से सांसें तेज़्ज़ हो gayi..................wo अपने बेकाबू हो रहे सांसों को संभालती हुई धीरे से बोल पड़ी.................

" hari...............please.........aise गंदे वर्ड्स मेरे सामने उसे मुट्ठ करो..............." और आसमा लुम्बी लुम्बी सांसें लेती हुई धीरे से बोल padi.................sharam से उसका चेहरा एक बार फिर से लाल पढ़ गया था वहीँ हरी अब कहाँ पीछे रहने वाला tha...................wo आज बानी बनायीं कहानी आसमा के सामने नमक मिर्च का तड़का lagakar..........pooorey मसले के साथ.................. सब कुछ उसके सामने पेश करने वाला tha..............dekhna था की आसमा अब खुद को कितना रोक पति हैं..........................

तो बे कॉन्टिनोएड...........................................................
 
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