Ufff......Ye Kaisi Pyaas...........(A Story Of Housewife) - Page 5 - SexBaba
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Ufff......Ye Kaisi Pyaas...........(A Story Of Housewife)

Update-23(A) (मेघा अपडेट)

" hari...............please.........aise गंदे वर्ड्स मेरे सामने उसे मुट्ठ करो..............." और आसमा लुम्बी लुम्बी सांसें लेती हुई धीरे से बोल padi.................sharam से उसका चेहरा एक बार फिर से लाल पढ़ गया था वहीँ हरी अब कहाँ पीछे रहने वाला tha...................wo आज बानी बनायीं कहानी आसमा के सामने नमक मिर्च का तड़का lagakar..........pooorey मसले के साथ.................. सब कुछ उसके सामने पेश करने वाला tha..............dekhna था की आसमा अब खुद को कितना रोक पति हैं..........................

अब आगे..................................................................................

आसमा को ऐसे बेचैन होता हुआ देखकर हरी के चेहरे पर एक कमीनी सी मुस्कान तैर gayi..........................wo ाचे से समझ रहा था की उसका तीर सही निशाने पर लग रहा hain.............wo तो आसमा के बुर में इतना आग भरना चाहता था की वो हर pal...............har घडी.............. हमेशा उसका लुंड लेने के लिए बस बेचैन rahe.................taiyaar रहे.............

" इसमें गन्दा क्या हैं memsaheb.....................chudai को चुदाई नहीं बोलेंगे तो और क्या bolengey................main आपकी तरह ज़्यादा पढ़ा लिखा नहीं hoon...........jo मुझे आपकी जितनी अंग्रेजी आती hogi..............10th फ़ैल हूँ................." और हरी भोलेपन से बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा की सांसें तो तेज़्ज़ चलने लगती हैं मगर हरी की ऐसी बाटिओं को सुनकर उसे हंसी भी आ जाती hain............wo अपनी क्वालिफिकेशन ऐसे बता रहा था जैसे ग्रेजुएट पास हो................

" तुम भी न hari...............rehney do................mujhe सब समझ में आ गया................." और आसमा जैसे बात टालते हुए वहां से जाने लगी मगर आज हरी आसमा को कहाँ इतनी आसनाई से छोड़ने वाला tha....................wo तो आज उसकी बुर से पानी टपकने के मूड में था...............

" क्या समझी आप .........ज़रा बताइये मुझे...................." और हरी बीच में hi बोल पड़ा वहीँ आसमा की जैसे बोलती बंद हो gayi..............uske पास कहने को कुछ नहीं था इस लिए वो चुप रहना hi ज़्यादा बेहतर samjhi...............wo जान गयी थी की हरी आज उसे इतनी आसानी से नहीं छोड़ने wala............wo हर वो चीज़ उसके सामने कहेगा जिससे उसकी बुर में केवल आग hi bhadkegi...........bujhegi nahin.............yehi तो हरी भी चाहता था........

" तो जब हम दोस्तों से चुदाई वाली वीडियो लेकर उसके पास गए तो हमारे मुन्न में ढेर सरे अरमान जागने lage.................."aur हरी फिर से एक कमीनी मुस्कान के साथ बोल पड़ा वहीँ आसमा की बेचैनिपाल पल बढ़ती hi जा रही थी.............

" wo..............usey अंग्रेजी में फ़क कहते hain..............tum फ़क कहो मैं समझ jawungi................hari............." और आसमा अपनी सांसों को संभालते हुए धीरे से बोल पड़ी वहीँ हरी जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ा...............

" तो जब हम दोस्तों से फुककककिस्सशहठ वाली वीडियो लेकर उसके पास गए तो ..............." और हरी आगे कुछ कहता तभी आसमा धीरे से बोल padi............wo अंदर hi अंदर बेचैन होती जा रही थी मगर ये सब में उसे मज़ा भी आ रहा था..............

" ffukkkkiiiiissshhhhh..........nahin फ़क.............." और आसमा धीरे से बोल पड़ी वहीँ हरी समझते हुए हाँ में अपना सर हिलने लगा..............

" तो जब हम fffuuuucccchhhhhh...........wali वीडियो लेकर उसके पास गए तो............." और हरी खामोश होता हुआ आसमा के तरफ देखने laga..............jaise वो पूछ रहा हो की उसने जो वर्ड कहा था क्या वो सही बोल रहा था की nahin.............wahin आसमा उसे आगे बोलने का इशारा करने lagi...........hansi के साथ साथ उसके तन बदन में आग भी लगती जा रही thi.............wahin हरी फिर आगे बोलना शुरू किया..............

" हमें भी उसके साथ वो सब करने का मुन्न करने laga..........jo जो उस वीडियो में tha.............ffffuuuucchhhhhhh............raat में जब हम उसके पास गए तो वो घूँघट ओढ़े बैठी हुई thi...............humara तो मुन्न किया की हम पटककर अपनी बीवी को वहीँ फ्फ्फ्फफ्फूऊक्कछहहहह कर dein...................magar हम कउनो जल्दीबाज़ी नहीं करना चाहते they.................is लिए आज भी उसके पास गए और उसे बड़े प्यार से समझने लगे................

" ये देखो na.........hum तुम्हारे लिए कुछ लाये हैं......................." ये कहकर हम अपने पॉकेट से मोबाइल निकले और उसके सामने वो फफ्फुक्कछ्हःहः वाली वीडियो चालू कर diye..............jab वो देखि तो शर्माकर अपनी नज़रें दूसरी तरफ घुमा li...........magar हम आज उसे इतनी आसानी से छोड़ने वाले नहीं they.....................humne भी उसकी गुर्दें पकड़ ली और मोबाइल उसके सामने रखकर उसे पूरा वीडियो dikhaya.............ye देखकर वो भी गरम हो गयी फिर हम उसके चूचियों को कसकर मसल दिए जिससे वो ज़ोरों से सिसक पड़ी..............." और हरी आसमा की तरफ देखता हुआ फिर से कमीनी मुस्कान के साथ बोल pada.......................wahin आसमा का बुरा हाल tha........................uska अब शर्म से बुरा हाल था................

" रहने दो hari.......aagey कुछ मुट्ठ बोलो..................." और आसमा का गाला सूखने laga...........wahin वो अंदर hi अंदर बेचैन हो उठी थी............

" अरे memsaheb...............aap तो अपनी hain.............aur भला अपनों से कैसा sharam...................aap सुन लेंगी तो मेरे दिल से बोझ उतर jayega..............aur मुझे ख़ुशी मिलेगी.............." और हरी ने फिर से अपनी चाल चल दी जिससे आसमा न चाहते हुए भी कुछ न बोल सकीय.....................

" जब मैंने उसकी चूचियों को मसलना शुरू किया तो वो पहले बहुत चिल्लाई फिर मैंने उसके एक एक कर सरे कपड़े उतरने लगा..........." और हरी आगे कुछ कहता आसमा फिर से धीरे से बोल padi.......uski आवाज़ में कनकपाहट साफ़ झलक रही थी..........

"वो औरत के सीने को अंग्रेजी में ब्रैस्ट कहते हैं................" और आसमा हरी को समझते हुए फिर से बोल पड़ी वहीँ हरी जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ा.............

" तो जब हम उसके ब्रेस्टवा को मसलना शुरू किया तो वो पहले बहुत chillayi...........fir मैंने उसके एक एक कर सरे कपड़े उतर diye............wo बहुत नाटक कर रही thi.................jab मैं भी अपने कपड़े उतर दिया और जब वो मेरा लुंड देखि तो उसे यकीन नहीं हुआ की लुंड ऐसा भी होता हैं.........." और इस बार हरी जान बूझकर चुप हो गया जैसे आसमा से पूछ रहा हो की मैंने कुछ गलत तो नहीं कह diya...............wahin आसमा लुम्बी लुम्बी सासनें ले रही thi...............bhale hi वो हरी को अंग्रेजी में सब कुछ कहना सीखा रही थी मगर हरी तो सब कुछ उसके सामने बोलता जा रहा tha.............apni शुद्ध भासा ..................हिंदी में............

" मर्द के नीचे वाले प्राइवेट part को पेनिस कहते hain...............aur औरत के प्राइवेट part ko.......vagina..............." और आसमा धीरे से बोल padi.........jaise जैसे वो ये सब कह रही थी उसका दिल ज़ोरों से धड़कता जा रहा tha..................wahni हरी आदर्श स्टूडेंट की तरह हाँ में अपना सर हिला रहा था...............
 
अपडेट-23 (बी) (मेघा अपडेट)

" haan...............to वो कुछ नहीं बोली और मैं उसे बिस्टेर पर लेता दिया और उसके ऊपर चढ़ गया और उसकी ..............क्या कहा था aapne........vai..gadwa....mein अपना पेनिसिवा सेट करता हुआ एक ज़ोर का ढाका मारा जिससे वो ज़ोरों से चीख padi...........maine इतनी ज़ोर से उसकी vai..gandwa...... में अपना पेनिसिवा पेला था की वो वहीँ बेहोश हो gayi........bister पर खून गिरा हुआ था................

मैं फ़ौरन पानी ले आया और उसके मुँह पर गिरने laga.............jaise तैसे उसे थोड़े देर बाद जब होश आया तो मुझे मेरा पेनिसिवा लेने से साफ़ इंकार कर diya..............baad में जब भी मैं उसके पास जाता वो मुझे .....................क्या बताया था aapne........yaad नहीं आ raha.................chodhiye अंग्रेजी हमारे बस का नहीं हैं memsaheb..................hum तो शुद्ध हिंदी में hi bolengey...............wo क्या हैं न उस भासा में बोलने पर एक अलग hi मज़ा और फीलिंग आता हैं..............." और हरी आसमा की तरफ देखता हुआ धीरे से मुस्कुरा पड़ा वहीँ आसमा का अब बुरा हाल tha...............uska वहां और रुकना पल पल मुश्किल होता जा रहा था...............

" बाद में जब भी मैं उसके पास जाता वो मुझे छोड़ने नहीं deti..............na hi अपना बदन पर हाथ रखने deti.................kehti की आपका बहुत बड़ा और मोटा लुंड hain................kisi घोड़े jitna................main नहीं ले पाउंगी इसे अपनी बुर mein............aap hi बताइये जब मैं उसे छोड़ा hi नहीं तो मेरा बाचा कहाँ से hoga.................shadi के बाद भी मैं उसके पास जाने को तरसता raha.................aurat का सुख मेरी ज़िन्दगी में हैं hi नहीं............." और हरी मायूस होता हुआ धीरे से अपनी बात ख़तम करता है वहीँ आसमा का कलेजा धड़क उठा tha..............usey सांस भी ठीक से नहीं लिया जा रहा tha..............ander hi अंदर वो पूरी तरह से बेचैन हो उठी thi...............usey समझ में नहीं आ रहा था की वो हरी को समझाए या बिना कुछ कहे वहां से चली jaye................magar कुछ सोचकर वो वहीँ रुक गयी..................

" जो हुआ सो हुआ hari..............aab उसे बदला तो नहीं जा सकता na..................mujhe तुम्हारी बीती हुई ज़िन्दगी का अफ़सोस हैं...................." और आसमा फ़ौरन वहां से चल पड़ती hain...............uske दिमाग में हज़ारों सवाल उठ रहे they...............hari के प्रति उसकी सहभनति अब और बढ़ती जा रही thi................wo उसके दुःख से वाकिफ thi.................wo उसके दुःख को दूर तो नहीं कर सकती थी मगर कम ज़रूर कर सकती thi..............thoi सी उसकी मदद karke.....................chahe तरीका जो भी हो.............

इतना तो हरी भी अब समझ गया था की आसमा उसके बारे में अब सोच रही hain...............aur उसके लिए अब धीरे देहेरे बेचैन भी रह रही hain.....................wo अब इस बेचैनी को हुड्ड से ज़्यादा बढ़ाने वाला tha...............taki कल को आसमा साडी दीवारें todhkar.................sab रिश्ते नाते chodhkar..............sari मान माँर्यादा लांघकर ..............बिना किसी झिझक के उसकी बाँहों में चली aaye...............aur हरी को उस दिन का बहुत hi बेसब्री से इंतज़ार था..................

जैसे hi आसमा अंदर गयी वो फ़ौरन बाथरूम में जाती हुई.................... एक एक कर अपने बदन के सरे कपड़े उतरने lagi..................jab वो पूरी नंगी हो गयी तब वो शावर को ों करते हुए उसके नीचे कड़ी हो गयी और अपने बदन पर हाथ फेरने lagi..................uska बदन आग के भाटी के सामान टप्प रहा tha................wo अंदर hi अंदर मोठे लुंड के लिए तड़प रही thi................hari की ऐसी गन्दी बाटिओं ने उसे पूरी तरह से बेचैन कर दिया tha...............wo अपनी आँख बंद करती हुई फ़ौरन अपनी छूट में ऊँगली डालती हैं और धीरे धीरे अपने क्लिटस को रगड़ने लगती hain...............aur अपने गुलाबी निप्पल्स को बरी बरी से मसलने लगती हैं...................

शावर का ठंडा ठंडा पानी उसके बदन को ठंडा तो नहीं कर पा रहा था........... मगर अंदर उस भड़की हुई आग को थोड़ा शांत तो कर hi रहा tha....................dheere धीरे आसमा की उँगलियों की रफ़्तार और तेज़्ज़ होने लगी और उसकी सांसें तेज़्ज़ होती चली gayi................jaise जैसे उँगलियों की रफ़्तार तेज़्ज़ होती चली गयी आसमा की आहें भी उस बाथरूम के अंदर गूँजनेय lagi.................chand मिनट गुज़ारे थे की वो एक बार फिर से ज़ोरों से aaassssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhhhh ...........चीखती हुई वहीँ ज़ोरों से झरने lagi............ek लावा उसकी बदन से फुट पड़ा और आसमा वहीँ लुम्बी लुम्बी सांसें लेती हुई अपने बेकाबू हो रहे सांसों को दुरूरस्त करने lagi.............magar अब उसके बस में कुछ भी नहीं था..............

काफी देर तक वो उस शावर के नीचे ऐसे hi कड़ी rahi.............aur अपने सांसों को दुरुस्त करती rahi...............aankhein सुर्ख लाल हो चुकी thi..............aur बदन थोड़ा हल्का महसूस हो रहा tha...........uske छूट से निकला हुआ कामरुस उस शावर के पानी के साथ साथ कहीं बह चूका tha.............magar उसके अंदर की ये प्यास दिन बा दिन अब बढ़ती hi जा रही thi................................wo जानती थी की उसकी हालत इस वक़्त कैसी hain................wo अपनी हालत किसी को बयां नहीं कर सकती थी...............

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आज वो हरी के पास नहीं गयी thi...............wo दोनों काम करके वहां से अपने कमरे की तरफ चले gaye...............wahin हरी अंदर hi अंदर आसमा के न आने से दुखी tha.............pareshan tha.............aasma एक बार फिर गहरी नींद में सू चुकी thi.............fingering करने के बाद उसे बहुत ाचे से नींद जो आती thi......................waise उसने आज ये सोच लिया था की वो आज हरी को अपने पंतय और ब्रा पर अपना वीर्य गिरते हुए pakdegi...............aakhir उसे भी तो हरी का लुंड देखा tha.............wo रोज़ शाम को जाने के बजाये आज 3 बजे जाने का फैसला कर चुकी थी...............

दोपहर में उसकी नींद खुली और वो खाना बनती हुई एक एक बातें हरी की सोचने lagi...............hari की ऐसी गन्दी बातें उसके मुन्न को जहाँ गुदगुदा रही थी वहीँ उसके तन बदन में आग भी लगा रही thi...........jab घडी में 3 बजा वो दबे पवन नीचे बरामदे में गयी जहाँ उसके कपड़े सूखने के लिए टंगे हुए they................wo चरों तरफ अपनी नज़रें इधर उधर फेरने लगी मगर उसे कोई नज़र नहीं aaya.................ek बार फिर उसके चेहरे पर निराशा झलक padi..........fir वो अपने कपड़े समेटने lagi...........jaise hi वो अपने ब्रा और पंतय उतरने लगी उसके उन्देर्गर्मेन्ट्स पर चिपचिपा सा गीला गीला कुछ नज़र आया...............

जिससे महसूस करने के बाद वो चिचुक सी padi..............aaj भी उसके ब्रा और पंतय पर हरी के वीर्य थे मगर आज न वो पूरे गीले they.........aur न पूरी तरह से सूखे hue................wo फ़ौरन अपने कपड़े समेटती हुई अपने रूम के अंदर गयी और फिर से उस ब्रा और पंतय को निकलती हुई ..............उसे बड़े गौर से देखने lagi...............taaza ताज़ा वीर्य उसकी पंतय पर देखकर आसमा का दिल ज़ोरों से धड़क utha..................wo फ़ौरन उस पंतय को अपने नाक के पास ले गयी और उसमें से उठ रही वीर्य की खुसबू को धीरे धीरे सूंघने lagi............apne सांसों के ज़रिये उसे अपने बदन में उतरने लगी..............

एक बार फिर से वो खुसबू उसे मदहोश कर देने के लिए काफी tha..............ek बार फिर से उसका दिल ज़ोरों से धड़क utha..............sansein तेज़्ज़ होने lagi..............badan में गर्माहट फिर से बढ़ने lagi.............aaj उस पंतय में से वीर्य की खुसबू ज़्यादा आ रही thi............wo हौले से अपना जीभ निकलती हुई पंतय पर लगा उस वीर्य को धीरे धीरे चटनी lagi................ek अजीब सा nasha............khumaar उसपर चने लगा tha.................wo एक एक कर अपने बदन से कपड़े फिर उतरने lagi...........aur एक बार फिर से वो पूरी नंगी होकर अपने बिस्टेर पर जाकर लेट गयी................

आँखें उसकी बंद थी और सांसें ज़ोरों से चल रही thi..........ek अजीब सा एक्ससिटेमेंट उसके अंदर बढ़ता hi जा रहा tha............aab वो उस वीर्य को चटनी के लिए जैसे पागल होती जा रही thi...............us वीर्य का स्वाद उसे बहुत ाचा लगने लगा था जिसके आगे सब पकवान फीकी thi..............wo अपने बुर में ऊँगली करती हुई अपने पंतय और ब्रा को अपने होंठों पर रखती हुई चाट रही thi..........choos रही thi..................saath hi साथ अपने बुर में ऊँगली भी कर रही thi.................wo तब तक अपने पंतय को चाटती रहती हैं जब तक वो पंतय उसकी थूक से पूरी तरह गीली नहीं हो jati...........aur आख़िरकार बेचैनी उसके अंदर इस कदर बढ़ जाती हैं की वो एक बार फिर से अपनी बुर में ऊँगली करती हुई ज़ोरों से चीखते हुए फिराग हो जाती hain.................aur किसी लाश की तरह बिस्टेर पर बेसुध पड़ी रहती हैं.................

पहले तो वो दिन में बस एक बार फिंगरिंग करती थी .........मगर आज दिन में दो baar...............din बा दिन उसे न जाने क्या होता जा रहा tha.............wo हर वक़्त बस सेक्स में पूरी तरह डूब जाना चाहती thi................har वक़्त वो अब मदहोश रहना चाहती thi..............baki कसार उसकी हरी पूरी कर दिया करता tha..............usey हरी की लुंड देखने की चाह बढ़ गयी thi............kal वो कैसे भी करके हरी का लुंड देकना चाहती thi..........har कीमत par.................is लिए कल उसने एक घंटा और पहले जाने का फैसला कर लिया था......................

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" hari......................jab तू मेमसाहेब के साथ इतनी खुली बातें कर रहा हैं ऊपर से मेमसाहेब मन नहीं कर रही तो फिर अब देर किस बात ki...................jakar चढ़ क्यों नहीं जाता fir.........................kar ले अपने अरमान जो तेरे दिल में hain..................mujhe नहीं लगता की वो अब तुझे मन भी karegi..................kahin ऐसा न हो की तू बस मौका ढूढ़ता रह जाये और वो तेरे हाथ से निकल jaye...............fir मलते रहना साडी ज़िन्दगी अपने ये हाथ..............." और शांति हरी को समझती हुई धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ हरी जवाब में धीरे से मुस्कुरा देता हैं...............

" वो कहीं नहीं जाने wali...............iski चिंता तू मुट्ठ kar..................agar मुझे मेमसाहेब को छोड़ना होता तो मैं कब का उसे अपने लुंड के नीचे सुला चूका hota..............main तो उसे अपने लुंड का ग़ुलाम बनाना चाहता hoon...............jis दिन वो मेरे इस लुंड का घुलम बनेगी उस दिन वो अपनी साडी लाज sharam.............apni मान मर्यादा यहाँ तक की वो अपने शौहर को भी पीछे छोड़कर मेरे एक इशारों पर वो सब कुछ करेगी जो मैं चाहता hoon...............tujhe पता हैं ऐसी औरतें जब बेशर्मी पर पूरा उतर आती हैं तो वो बड़ी से बड़ी रंडियों को भी पीछे छोड़ देती hain.........fir तुम उनसे जो मर्ज़ी करवा lo.........wo सब कुछ karegi.....bina किसी झिझक और शर्म लाज के............." और हरी बीड़ी अपने जेब से निकलता हुआ ...........उसे जलाता हुआ ..........एक ज़ोर का काश लेता हैं जिससे उसकी आँखें बंद हो जाती हैं वहीँ शांति की बुर दुबारा से गीली होने लगती हैं...........

" hari............tu मुझसे ऐसी बातें मुट्ठ किया kar..................teri ऐसी बाटिओं से मेरी छूट गीली हो जाती hain..............fir से ये तेरा लुंड लेने के लिए तड़पने लगती hain............aab कौन ठंडा करेगा isey..............bata...................." और शांति अपनी टांगें फैलाती हुई अपने बुर की तरफ अपने हाथों से इशारा करती हैं वहीँ हरी अजीब सी नज़रियों से उसे देखने लगता हैं..............

अभी 2 घंटे पहले hi तो तुझे छोड़ा था na........fir..............rehne दे अभी मेरा मूड नहीं hain...................jaa और मेरे लिए गरमागरम दूध लेकर aa................tujhe इतना रगड़ने के बाद थोड़ी कमज़ोरी सी लगती हैं मुझे.........................." और हरी एक ज़ोर का काश लेता हुआ बोल पड़ता हैं वहीँ शांति जवाब में धीरे से मुस्कुरा देती हैं..............

" तेरे प्लान का क्या हुआ hari................aab तक तो नहीं आयी memsaheb............humein dekhney...............kya हम लोग टाइम बदल dein..................dopahar के बजाये शाम ko..........agar तू कहे तो................" और शांति फिर धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ हरी ना में अपनी गुर्दें धीरे से हिला देता हैं.............

" नहीं आयी तो वो ज़रूर aayegi..................aaj नहीं तो कल .............देख lena..............kab तक वो खुद को सम्बहल सकती हैं एहि तो मैं भी जानना चाहता hoon...............uske अंदर कितना साबरा हैं एहि तो मैं भी देखना चाहता hoon....................dekhta हूँ की उसका साबरा भरी पड़ता hain...................ya मेरी ये koshish..................ye तो अब वक़्त hi बताएगा................." और हरी एक गहरी काश लेता हुआ अपनी आँखें हौले से बंद कर लेता हैं और उस नशे में डूबता चला जाता हैं...............................

तो बे कॉन्टिनोएड....................................
 
एक सुग्गेस्टिव चाहिए की आप लोग कहानी में केवल सेक्स hi पढ़ना चाहते है या फिर थ्रिल के साथ suspense....agar थ्रिल भी रहेगा तो कहानी का मज़ा दुगुना हो jayega...sex एनकाउंटर तो आते रहेंगे मगर सोच रहा इसमें थोड़ा मर्डर मिस्ट्री भी ऐड करूँ जिससे कहानी में सस्पेंस और थ्रिल भी साथ साथ rahe...aap सब का क्या ख्याल हैं इस बारे में आप सब अपनी राइ dijiye...fir कहानी उसी के अकॉर्डिंग चलेगी ..नहीं तो जैसे चल रही थी वैसे hi
 
अपडेट-24 (ा) (मेघा अपडेट)

" नहीं आयी तो वो ज़रूर aayegi..................aaj नहीं तो कल .............देख lena..............kab तक वो खुद को सम्बहल सकती हैं एहि तो मैं भी जानना चाहता hoon...............uske अंदर कितना साबरा हैं एहि तो मैं भी देखना चाहता hoon....................dekhta हूँ की उसका साबरा भरी पड़ता hain...................ya मेरी ये koshish..................ye तो अब वक़्त hi बताएगा................." और हरी एक गहरी काश लेता हुआ अपनी आँखें हौले से बंद कर लेता हैं और उस नशे में डूबता चला जाता हैं...............................



अब आगे..................................................................


सुबह के 8 बजे they......................har रोज़ की तरह आसमा को हरी के आने का आज भी इंतज़ार tha....................is लिए वो आज थोड़ा सज संवर उसके आने की राह तक रही thi................haathon पे चूड़ियां और मांग में sindoor...........honton पर लाल रंग की गहरी lipstick........aur माथे पर छोटी सी bindiya........neelay रंग की सूट और उसपर वाइट कलर की laggy...........jo उसके बदन से पूरी तरह चिपकी हुई thi............kul मुलकर वो आज बेहद खूबसूरत लग रही thi..........aur हमेशा की तरह उसके चेहरे पर आज भी मुस्कान thi............wahin हरी भी हर रोज़ की तरह ठीक टाइम पर पहुँच गया.............

जैसे hi उसकी नज़रें आसमा पर गयी वो उसके बदन को ाचे से स्कैन करता हुआ धीरे से फिर मुस्कुरा pada................wahin आसमा भी जवाब में धीरे से मुस्कुरा padi............har रोज़ की तरह दोनों अपने अपने अलग कमरे की ओरे चल pade.................shanti के जाते hi हरी के चेहरे पर एक गन्दी सी मुकसान फिर से तैर gayi...............wahin आसमा चुप चाप कड़ी रही............

" memsaheb..................aap सच में बहुत खूबसूरत hain..............dil करता हैं बस मैं आपको ऐसे hi देखता rahun.............waise देखने का मज़ा और आता जब ये दीवारें आपके और मेरे बीच न रहती..................." और हरी आसमा के कपड़ों की तरफ धीरे से इशारा करता हुआ बोल पड़ा वहीँ आसमा को जब उसकी बातें समझ में आयी उसका चेहरा शर्म से लाल पढ़ gaya............yani हरी अब उसे सर से लेकर पवन तक पूरा नंगा देखना चाहता था................

न जाने क्यों हरी की ऐसी बातें आसमा के दिल को गुदगुदा देती मगर शर्म और हाय की दीवार जो उसके दरमियान थी वो कहा इतनी आसानी से टूटने वाली thi..................magar हरी कहाँ पीछे रहने वालों में से tha..............wo उस दीवार को पल पल तोड़ने में लगा हुआ था...............

" memsaheb......................ek बात कहूं तो आप बुरा नहीं मानेंगी ना....................." और आसमा को ऐसे खामोश होता हुआ देखकर हरी धीरे से बोल pada................wo बहुत गौर से आसमा की चूचियों के उतर चढ़ाव को देख रहा था और मुन्न hi मुन्न उसके दोनों चूचियों को मसलता हुआ सा महसूस भी कर रहा tha.................agar उसका बस चलता तो वो इसी वक़्त आसमा के दोनों चूचियों को इतना मसलता की वो लाल हो jati.............agar उसमें से दूध भी निकलता तो वो उसका सारा रूस गार leta...........magar उसे थोड़ी भी जल्दी नहीं thi...............wahin आसमा ाचे से जान रही थी की इस वक़्त हरी की नज़रें कहाँ पर हैं.....................

"haaan...............bolo न hari.............baat क्या हैं..............." और आसमा हौले से बोल padi.............wo इस वक़्त नार्मल तो थी मगर कब तक वो ऐसे hi नार्मल रहेगी ये उसे खुद नहीं पता tha............................kyon की हरी उसे नार्मल होने देने वाला hi कहा था..............

" memsaheb...................mujhe आपका नंबर chahiye......................wo क्या हैं na..................kabhi किसी काम की ज़रुरत पढ़ जाये तो समझ में नहीं आता की आपसे कोई बात कैसे kahun...............phone नंबर रहेगा तो मैं aasani........se................" और हरी इतना कहकर खामोश हो जाता हैं वहीँ आसमा जवाब में कुछ नहीं कहती और अपने फ़ोन में से अपना नंबर निकलती हुई हरी के सामने दिखा देती hain............wahin हरी खुस हो जाता हैं............

" memsaheb................is नंबर पर क्या व्हाट्सप्प चलता हैं.......!!!!!!!! और हरी धीरे से बोल पड़ा वहीँ आसमा अजीब नज़रियों से हरी की ओरे देखने लगी...................

"मेरे पास एक hi नंबर hain...............main दो चार नंबर नहीं chalati......................zaahir सी बात हैं जब एक hi नंबर हैं तो इसी नंबर पर मेरा व्हाट्सप्प भी तो होगा..................." और आसमा धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ उसका दिल एक बार फिर ज़ोरों से धड़कने लगा tha....................wo समझ नहीं पा रही थी की हरी उससे व्हाट्सप्प नंबर क्यों मांग रहा hain...........agle hi पल आसमा को उसके सवालों का जवाब मिल गया जब हरी अपने जेब से अपना एंड्राइड फ़ोन निकलता हुआ उस नंबर को अपने फ़ोन में सेव करने लगा.............

" ाचा तो तुम भी एंड्राइड फ़ोन चलते ho................kamal hain..............isi लिए तुम व्हाट्सप्प नंबर मुझसे मांग रहे थे.............." और आसमा हौले से बोल पड़ी वहीँ हरी जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ा..............

" हाँ memsaheb..............is बड़े वाले फ़ोन पास में रहने से कभी कभी टाइम भी कुत्त जाता hain............jab कभी हमारा मूड करता हैं तो हम इसमें फिल्म भी देख लेते hain............film देखते देखते पता hi नहीं चलता की कितना वक़्त निकल गया.............." और हरी बड़े गौर से आसमा के खूबसूरत से चेहरे की तरफ फिर से देखने लगता hain..............waise उसने अब आसमा का नंबर सेव कर लिया था.............. वहीँ आसमा नार्मल hi thi....................jab वो कोई सवाल नहीं पूछती तो हरी आगे फिर कहना शुरू करता हैं...................

" वैसे तो हम ज़्यादातर इंग्लिश पिक्चर hi देखते hain................u का हैं न ससुरा उसे देखने में बड़ा मज़ा आता हैं............" और हरी अजीब सी नज़रियों से आसमा के चेहरे की तरफ एक बार फिर से देखने लगता हैं वहीँ आसमा भी हरी को अजीब नज़रियों से देख रही thi.................wo और इंग्लिश picture..............ye बात उसकी समझ में नहीं आ रही थी............

" aacha............to क्या तुम्हें इंग्लिश समझ में आती हैं जो तुम इंग्लिश पिक्चर देखते हो................." और आसमा हौले से बोल पड़ती हैं वहीँ एक बार फिर से हरी के करीब होने से उसके सांसों में वहीँ स्मेल धीरे धीरे घुल रही थी जो उसकी बेताबी और बेचैनी को धीरे धीरे बढ़ती जा रही थी...............

" हाँ memsaheb...................aisi अंग्रेजी पिक्टुरों में ज़्यादा समझना क्या hain...................ladka अपने कपड़े उतरता हैं और लड़की apne...............fir उनके बीच जमकर चुदाई का खेल शुरू होता hain.................kasam से कहता हूँ मेमसाहेब उसे देखने के बाद मज़े की कोई सीमा नहीं रहती...................." और हरी की ऐसी बातें सुनकर आसमा का दिल धाक से करता hain..............wo ाचे से समझ गयी थी की हरी कौन सी मूवी की बात उससे कर रहा hain..................ye सब ख्याल आते hi उसका बदन फिर से सिहर उठता hain............chehrey पर फिर से शर्म की लखीरें साफ़ नज़र आने लगती हैं वहीँ आसमा का सर नीचे की तरफ झुक जाता hain................uska कलेजा ज़ोरों से एक बार फिर धड़कने लगा था..............

" memsaheb............aap नहीं देखती हैं क्या अंग्रेजी picture......................usmein लड़का लड़की को ऐसे ऐसे तरीके से पेलता हैं की bus..............poocho mutt..................ek खेशियात तो हैं उन पिक्टुरों में memsaheb...............ladki कैसी भी हो उसकी माँ ाचे से छोड़ी जाती हैं usmein.............uski बुर और गांड की धाज्जियाँ कैसे उड़ाई जाती हैं ये उन पिक्टरों में ाचे से दिखाया जाता hain................ye सब देखकर मुझे तो बहुत मज़ा आता हैं.............." और हरी के चेहरे पर एक बहुत hi गन्दी मुस्कान फिर से तैर जाती हैं वहीँ आसमा की सांसें जैसे उखाड़ने लगती hain..............uske बदन में अजीब सी सिरहन फिर से दौड़ गयी thi...............sharam से उसका चेहरा पूरा लाल पढ़ गया tha.............wo फ़ौरन ना में अपनी गुर्दें धीरे से हिला देती हैं...........

" ये क्या memsaheb................aisi पिक्टूरें तो देखनी chahiye...........waise ये साडी पिक्टूरें जवान लोगों को दिखने के लिए hi तो बनाया जाता हैं................." और हरी एक बार फिर आसमा के चूचियों को घूरते हुए बोल पड़ता हैं ..............
 


Update-24(B) मेघा अपडेट)


" मुझे दूध पीने का मुन्न कर रहा memsaheb................kya आज मुझे पीने को दूध मिलेगा..............." और हरी जान बूझकर आसमा के दोनों चूचियों को ऐसे hi घूरते हुए बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा एक नज़र हरी के चेहरे की तरफ देखती हैं फिर वो शर्माकर अपनी नज़रें हाँ में कहती हुई नीचे की तरफ झुका लेती हैं और बिना कुछ कहे वहां से फ़ौरन अंदर कमरे की तरफ चल पड़ती hain..................wahin हरी एक बार से उसकी लचकती हुई गांड को खा जाने वाली नज़रियों से घूर रहा tha...............wahin उसका हाथ एक बार फिर से अपने लोअर पर चला गया था जिससे वो अपने लुंड को मसल रहा tha....................aasma के जाने के बाद हरी कुछ देर तक वहीँ खड़ा खड़ा बहुत कुछ सोचने लगता हैं..............

" फ़िक्र मुट्ठ कर मेरी chidiya......................wo दिन अब दूर नहीं जब तू मेरा दिया हुआ दाना chugegi...........aur मेरे इस लुंड के नीचे hogi..............waise एक बात तो hain................jab मेरे इतना कहने पर भी तू मुझे रोक टोक नहीं कर रही तो मतलब साफ़ हैं की तेरी तरफ से भी सिग्नल हाँ hain.....................jab तू मेरे मुँह से इतनी गन्दी बातें सुन सकती हैं तो कर क्यों नहीं sakti...............main तो तेरे साथ वो सब कुछ करूँगा जितना अंग्रेजी पिक्टुरों में सब दिखाया जाता hain.............ya उससे भी कहीं zyada.........aur मुझे पूरा यकीन हैं की तू पीछे नहीं hategi.............aur तुमने मेरा काम और आसान कर दिया मुझे अपना नंबर dekar....................mere मुन्न में थोड़ी झिझक थी की तू अपना नंबर देगी या नहीं............

मगर तुमने तो बड़ी hi आसानी से अपना नंबर दे diya...................aab आज से हर रात में मैं अपनी एक एक फंतासी की नंगी नंगी फोटो तेरे मोबाइल पर हर रोज़ भेजूंगा. ..........जिसे देखने के बाद होस्ट तो तेरे वैसे भी गम हो jayengey.............aur न चाहते हुए भी तू रात दिन हमेशा गरम hi rahegi...........teri बुर की आग को मैं इतनी भड़काऊंगा की तू अपनी शर्म लाज सब कुछ छोड़कर सीधा मेरे पास चली aayegi...........bus दो चार दिन और इंतज़ार कर le........fir ये पारी तेरी मुट्ठी में होगी................" और हरी अपने लुंड पर हाथ फेरता हुआ सब कुछ सोचता चला जाता हैं वहीँ उसके चेहरे पर एक बार फिर से वहीँ गन्दी मुस्कान थी................

थोड़े देर बाद आसमा हरी के लिए दूध और केला ले aayi...............kele को देखकर हरी फिर से आसमा की तरफ धीरे से मुस्कुरा पड़ा.................

" memsaheb..................ye केले थोड़े ठीक ठाक hain.............mote भी हैं और थोड़े बड़े भी hain.....................magar मेरे गांव में जितने मोठे और लम्बे केले होते हैं ये उसके मुकाबले अभी भी छोटे hain......................samajh लो ये उसके आधे हैं................" और हरी एक केला अपने हाथों में उठता हुआ आसमा के तरफ उसे दिखता हुआ धीरे से बोल pada...................wahin आसमा बड़े गौर से हरी के हाथों में थामे उस केले को देख रही thi.................wo भी समझ रही थी की हरी उससे कौन से केले की बात कर रहा hain...............magar आसमा को भी उससे ऐसी बातें करने में अब मज़ा आने लगा था.....................

" aacha...................tab तो मुझे तुम्हारे गाँव के केले एक बार ज़रूर खाकर देखने की padengey...................ki तुम्हारी बाटिओं में कितनी सचाई हैं की नहीं........................." और आसमा हौले से बोल पड़ी वहीँ उसका कलेजा फिर से ज़ोरों से दहाड़ने लगा tha..................usey यकीन था की हरी ज़रूर कुछ न कुछ ऐसी बात करेगा जिससे उसकी छूट फिर से गीली हो जाएगी............

" हाँ memsaheb................main सच कह raha.............................tabhi तो मेरे गाँव में केले की अक्सर चोरियां होती रहती hain..............aur ये काम केवल वहां की औरतें hi करती hain.........waise केला कितना भी मोटा और लुम्बा क्यों न हो उसे एक hi बार में मुँह के अंदर डालकर चूस चूस कर खाने में .........उसका मज़ा hi कुछ और hain........................main तो जब भी आपको अपना केला खिलाऊंगा पूरा आपके मुँह में अंदर तक डालकर उसे चूस्वा चूस्वा कर hi khilayunga...................dekhiyega उसका मज़ा hi कुछ और हैं....................." और हरी धीरे से आसमा की तरफ मुस्कुराता हुआ बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा शर्म से अपनी नज़रें नीचे झुका लेती हैं..............

" तुम भी न hari...................kuch भी बोलते ho.........aise थोड़ी न केला खाया जाता hain..............kaat कर खाने वाली चीज़ों को चूसा थोड़ी न जाता हैं..............." और आसमा हौले से बोल पड़ती हैं वहीँ उसकी छूट में गीलापन फिर से बढ़ने लगा था.............

" तब तो आप कुछ भी नहीं जानती memsaheb...................kaat कर खाने से ज़्यादा मज़ा उसे चूस कर खाने में आता hain............aapko मैं बहुत जल्द अपना केला khilaunga.......................dekhiyega आपको मज़ा भी खूब aayega.............waise कुछ चीज़ें कुछ ख़ास जगहों पर डालकर खाने और खिलाने का मज़ा hi कुछ और हैं................" और हरी के चेहरे पर फिर से एक गन्दी सी मुस्कान तैर जाती hain..............wahin आसमा चुप हो जाती hain...................usey भी कहीं न कहीं हरी के उस केले को खाने का इंतज़ार tha...................uski छूट बहुत हुड्ड तक गीली हो चुकी थी.......

कमरे में जाने के बाद वो हमेशा की तरह नंगी हो गयी और अपने छूट में ऊँगली करती हुई अपनी इस जवानी की आग को ठंडा करने lagi.............magar हरी तो हर पल उसकी छूट में आग भरता जा रहा था तो ये आग अब कहाँ बुझने वाली thi.............is आग को तो आखिर भड़कना hi tha.......................dekhna था आसमा खुद पर कब तक अपना कण्ट्रोल रख पति hain..............ye तो आने वाला वक़्त hi बता सकता था............

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दोपहर का समय tha.....................aaj आसमा ने सोच लिया था चाहे कुछ हो जाये आज वो हरी का लुंड देखकर hi manegi.................wo 12.30 बजे के करीब बरामदे में gayi.....................jahan इस वक़्त उसके कपड़े सूखने के लिए टंगे they......................filhaal तो अभी वो पूरी तरह से सूखे नहीं they..............aur उसपर वीर्य भी नहीं लगा हुआ tha..........wahin आसमा अपने चरों तरफ नज़रें दौड़ा रही thi...............shayad वो वहां कोई छुपने की जगह दूध रही थी जहाँ से छुपकर वो आसानी से हरी का लुंड जी भरकर देख sake...............aur ये भी देख सके की कैसे वो अपना वीर्य उसकी पंतय पर गिरता हैं...................

अपने चरों तरफ देखने के बाद उसे ठीक सामने वो मोटर वाला छोटा सा केबिन नज़र आया जिसे देखने के बाद उसके चेहरे पर एक मुस्कान तैर gayi................wo कमरा छोटा था और उसमें एक 2*2 की एक छोटी सी एक खिड़की थी जिसपर जाली लगी हुई thi...............ander से देकने पर बहार साफ़ नज़र आता था मगर कोई बहार से ध्यान से देखे तो वो भी बड़ी hi आसानी से अंदर बैठे इंसान को देख सकता tha..................filhaal तो आसमा को ये जगह ठीक laga..................wo फ़ौरन उस छोटे से कमरे का कुण्डी खोलती हुई अंदर आयी और उसने उस दरवाज़े को अंदर से ाचे से बंद कर लिया...................

आसमा उस कमरे में चाह कर भी कड़ी नहीं हो सकती थी क्यों की उसकी हाइट 4 फ़ीट के आस पास thi...........aur कमरा भी कोई ख़ास बड़ा नहीं tha.................magar वो उसके अंदर आसानी से बैठ सकती thi...................aur बहार का लाइव टेलीकास्ट अपनी आँखों से बड़ी आसानी से देख सकती thi..............jaise जैसे वक़्त बीतता गया उसका दिल धीरे धीरे घबराने laga..............aur आँखों में हरी के लुंड को देखने की चाह भी बढ़ती चली gayi....................kareeb 10 मिनट बाद शांति और हरी के बोलने की आवाज़ उसे सुनाई di...........wo बिल्कूलचुप होकर बहार की तरफ देखने लगी................

थोड़े देर बाद उस हेंगर के सामने हरी और शांति आकर खड़े हो gaye...............wahin शांति हरी के बाँहों में अपने गले डालती हुई उसकी आँखों में देखकर धीरे से मुस्कुरा padi................tabhi हरी उस मोटर रूम की तरफ एक नज़र ाचे से डालता हुआ हौले से मुस्कुरा पड़ा वहीँ आसाम का दिल ज़ोरों से धड़क utha.................usey ये दुर्र लगेंय लगा की कहीं हरी ने उसे देख तो नहीं लिया मगर हरी पहले की तरह बिलकुल नार्मल होता हुआ अपने दोनों हाथ शांति के गांड पर रखता हुआ ................उसे अपनी तरफ खींचता हुआ ................धीरे से मुस्कुरा पड़ा..................

" कब से मैं तरस गयी thi.............tumhare इस अज़गर को मुँह में लेने के liye.............jadli से अपने इस कपड़े को आज़ाद karo..................mujhe तुम्हारा लुंड चूसना hain..............memsaheb to.....................aur शांति आसमा के बारे में कुछ बोलने जा रही थी तभी हरी उसे इशारों में चुप करता हुआ उसके चूचियों पर अपना एक हाथ रखता hua.................usey कसकर मसलने लगा जिससे शांति की कही हुई बात उसके अंदर hi दबकर रह गयी...................

" तो चूस न मेरा lund...........tujhe रोका किसने hain..................ek मिनट................." और हरी शांति को रोकते हुए उससे थोड़ा दूर हुआ और पास में टंगे हेंगर में से आसमा के पंतय और ब्रा को अपने हाथों में लेता hua..................uski खुसबू को धीरे धीरे सूंघने laga................kuch देर सूंघने के बाद वो उसके पंतय के छूट वाली जगह पर अपनी जीभ फेरता हुआ धीरे धीरे उसे चटनी laga..........ye देखकर शांति धीरे से मुस्कुरा पड़ी...................

" लगता हैं तुझे मेमसाहे की पंतय और ब्रा से बहुत प्यार हैं..............." और शांति वहीँ घुटनो के बल फर्श पर बैठती हुई धीरे से बोल पड़ी और हरी के लोअर को धीरे धीरे नीचे की तरफ सरकने lagi.............aur खुद अपने साड़ी का आँचल अपने सीने से हटती हुई हरी के लुंड की तरफ बड़े गौर से देखने लगी................

" प्यार नहीं rahega............tu जानती हैं की मेमसाहेब हमारी कितनी प्यारी hain...........unki तरफ कोई आँख उठाकर भी देखे तो मैं उसकी आँखें नूच lunga..................mujhe तो अपनी मेमसाहेब के हर चीज़ से प्यार hain..................fir ये उनकी पंतय और ब्रा hi क्यों न हो......................" और हरी उस मोटर वाले कमरे की तरफ एक नज़र डालता हुआ धीरे से मुस्कुरा पड़ा .....................वहीँ अंदर बैठी आसमा का कलेजा ज़ोरों से धड़कने लगा tha..................hari के मुँह से उसकी ये तारीफ उसे ाची भी लग रही thi...............wo अब जानती थी की हरी अब उसकी परवाह करने लगा hain.................magar इस वक़्त उसकी नज़रें तो बस हरी के लुंड पर hi थी....................

जैसे जैसे शांति उसके लोअर को नीचे कर रही थी वैसे वैसे आसमा का कलेजा ज़ोरों से धड़क रहा tha...............jab शांति हरी का लोअर उसके घुटन तक कर दी तब वो उसके अंडरवियर को उसके दोनों कमर पर अपने हाथ रखकर उसे एक बार फिर से नीचे की तरफ सरकने lagi....................jaise जैसे अंडरवियर नीचे की तरफ सरकता जा रहा था वैसे वैसे आसमा का गाला सूखता जा रहा था और उसकी आँखें बड़ी होती जा रही thi................kyon की हरी का लौड़ा इस समय खड़ा हो चूका था और उसके अंडरवियर के अंदर एक बड़ा सा टेंट बना हुआ साफ़ आसमा को भी नज़र आ रहा था..................

जैसे hi उसका ुंडेरवार भी घुटनों तक नीचे sarka...............hari का 10 इंच मोटा लुंड झूलता हुआ ऊपर की तरफ तन्न गया जो किसी नाग की तरह लहरा रहा था ..........वहीँ शांति की आँखों में जैसे चमक थी वहीँ दूसरी तरफ आसमा अपने दोनों हाथों को अपने मुँह पर ले गयी और अपने मुँह को दोनों हाथों से छुपाने लगी............. क्यों की हरी का लुंड देखने के बाद उसका मुँह खुद hi पूरा खुल गया tha................usey अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था जो वो सामने इस वक़्त देख रही thi.............ki क्या इंसान का भी लुंड इतना मोटा और बड़ा हो सकता हैं..............

उसकी बुर पूरी तरह से पनिया गयी थी और कलेजा ज़ोरों से धड़क उठा tha.................sansein उसके बस में थी nahin.................aaj आसमा की ये ख्वाहिश भी पूरी हो गयी thi...............hari का विशाल और मोठे लुंड को dekhkar..................dekhna था की आगे हरी की ख्वाहिशें पूरी हो पति हैं या nahin................................ye तो आने वाला वक़्त बता सकता था.......................

तो बे कॉन्टिनोएड...................................................
 
Update-25(A) (मेघा अपडेट)

उसकी बुर पूरी तरह से पनिया गयी थी और कलेजा ज़ोरों से धड़क उठा tha.................sansein उसके बस में थी nahin.................aaj आसमा की ये ख्वाहिश भी पूरी हो गयी thi...............hari का विशाल और मोठे लुंड को dekhkar..................dekhna था की आगे हरी की ख्वाहिशें पूरी हो पति हैं या nahin................................ye तो आने वाला वक़्त बता सकता था.......................



अब आगे.........................................................................


उस छोटे से केबिन के अंदर तो पहले से hi गर्मी thi..................aur आसमा अपनी आँखों के सामने जो नज़ारा इस वक़्त देख रही थी उसे देखने के बाद उसके बदन में गर्माहट वैसे भी बढ़ती जा रही thi............maathey और बदन पर तो पसीने की चाँद बूँदें नज़र आ hi रही थी वहीँ टांगों के बीच भी हरी के उस विशाल लुंड को देखकर उसके छूट को पसीने आने शुरू हो गए they...........wo भी पूरी तरह से गीली होती जा रही थी..............

एक बार तो उसके दिल में आया की वो वहीँ अपनी बुर में ऊँगली डालकर उसे ाचे से सहलाये ...............वहीँ रगड़ de................magar जगह कम थी और वो अगर इधर उधर ज़्यादा हिलती तो कहीं उसकी आहात से हरी और शांति समझ जाती तो बात बिगड़ सकती thi..................ye ख्याल आते hi आसमा फिर से अपनी नज़रें सामने हो रहे लाइव टेलीकास्ट को बड़े ध्यान से देखने lagi............uska गाला सूखता जा रहा था............

" ये तेरा लुंड हैं na...............mujhe कहीं एक पल चैन से रहने नहीं dega................jee तो करता हैं की मैं इसे हर वक़्त अपनी छूट के अंदर बस डाली रहूं.............." और शांति हरी के लुंड को चूमती हुई................ उसे धीरे धीरे अपने मुँह में लेती हुई.................. उसके मोठे सुपाड़ी पर अपना जीभ हौले से फेरती हुई उसे धीरे धीरे से चटनी लगी ...............वहीँ हरी की मज़े से aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh निकल जाती हैं.............

हरी एक नज़र उस मोटर वाले कमरे की तरफ देखता हुआ धीरे से सिसक पड़ता हैं वहीँ आसमा की सांसें रुक जाती hain..............bahar का नज़ारा ऐसा था जिससे वो अपनी पलकें झपकना भी भूल गयी thi.............hari फिर अपना एक हाथ शांति के चुकी पर रखता हैं और उसके ब्लाउज के ऊपर से hi उसे कसकर मसलने लगता हैं जिससे शांति अपना मुँह और खोलती हुई हरी का लुंड अपने और अंदर लेने लगती हैं मगर वो आधा भी उसका लुंड अपने मुँह में अब तक नहीं ले पायी थी................

" shanti...............tu कब खिला रही हैं मुझे kela.......................janti हैं न मुझे फल खाने का कितना शौक हैं....................." और हरी अपना लुंड शांति को चूस्वाता हुआ बोल पड़ता hain............wahin शांति उसके सवालों को सुनकर धीरे से मुस्कुरा पड़ती हैं................

" इतना मोटा केला तो तेरे पास हैं hi........to फिर तू अब कौन से केले खाने की बात कर रहा हैं मुझसे................" और शांति हरी का लुंड चूसती हुई उसकी तरफ देखकर धीरे से मुस्कुरा देती हैं वहीँ हरी जवाब में धीरे से हंस पड़ता हैं............

" सब जानकर भी तू मुझसे अनजान मुट्ठ बना kar.................main खाने वाले केले की बात कर रहा हूँ .....................तू उस केले को अपने कौन से छेद में डालकर मुझे खिलेगी ये तुझपर निर्भर करता hain............mujhe तो बस केले खाने से मतलब हैं....................." और हरी सिसकता हुआ धीरे से बोल पड़ता hain.................is वक़्त नशे में उसकी आँखें सुर्ख लाल होती जा रही थी अभी भी उसके हाथों में आसमा की पंतय और ब्रा थी जिसे वो बार बार सूंघ रहा tha.................aur चाट भी रहा tha..................wahin आसमा का अब बुरा हाल tha......................kela अंदर डालकर खाने वाली बात अब आसमा को समझ में आ गयी थी जो कल हरी ने उससे कही thi...............ye ख्याल आते hi आसमा का चेहरा शर्म से पूरा लाल पढ़ जाता हैं और उसकी छूट पूरी तरह से पनिया जाती हैं............

" ाचा तो तू साफ़ साफ़ ये क्यों नहीं कहता की तू मेरे बुर में केला दकलर खाना चाहता hain...............chal तेरा ये शौक मैं बहुत जल्द पूरा karungi..............agar आज इस वक़्त केला अगर होता तो मैं तुझे यहीं अभी खिला deti................aur तेरी ये इच्छा पूरी कर देती............." और शांति की छूट पूरी तरह से पनिया गयी thi..............wo फ़ौरन कड़ी होती हैं और अपनी साड़ी को अपने जिस्म से अलग करती हैं फिर वो अपनी पेटीकोट भी उतर देती hain.................aab शांति कमर के नीचे पूरी नंगी थी जहाँ उसकी हल्की बालों में काली छूट आसमा को साफ़ नज़र आ रही thi................wahin हरी शांति को उस मोटर वाले कमरे की तरफ उसका चेहरा करता hua.................uske ठीक पीछे जाकर खड़ा हो जाता हैं और उसके गुर्दें को चूमने लगता हैं वहीँ शांति की aaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh निकल जाती हैं...............

" अपनी टांगें पूरा खोल ................." और हरी शांति के कानों को धीरे से काटता हुआ ...................एक नज़र सामने की तरफ देखता हुआ .....................धीरे से अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाता hain.................shanti के दोनों टांगों के beech...............aur पीछे से अपनी दो ऊँगली उसकी बुर में घुसता hua...............uski बुर को धीरे धीरे अपनी उँगलियों से रगड़ना शुरू करता हैं ................उसका दूसरा हाथ शांति के बड़े बड़े चूचियों पर था जिन्हें वो बहुत hi बेरहमी से मसल रहा tha...............uske निप्पल्स को ब्लाउज के पर से खींच रहा tha..............apne दोनों उँगलियों के बीच दबा रहा tha..............marod रहा tha..................wahin शांति की आहें तेज़्ज़ होती जा रही thi.................wo ाचे से जानती थी की हरी एक मिनट के अंदर उसकी छूट से पानी निकल देगा...................

शांति अपने दोनों हाथ पीछे की तरफ ले जाती hui.....................dheere से हरी का विशाल लुंड अपनी मुट्ठी में पकड़ लेती हैं और उसे धीरे धीरे हिलने लगती hain............wahin हरी अपने उँगलियों की रफ़्तार को तेज़्ज़ करता जा रहा tha.....................wahin शांति का अब बुरा हाल tha................uski छूट पानी पे पानी छोड़ रही thi.............ungliyan तेज़्ज़ चलने से ffffffffaaaaaaaaccchhhhhhhhhhhhhhhhhhh जैसी आवाज़ें बार बार सुनाई दे रही थी जो उस माहोल को और भी ज़्यादा गरम करती जा रही thi..............khel शुरू हो चूका tha...............jahan शांति गरम हो चुकी थी वहीँ इधर आसमा का भी कुछ वैसा hi हाल था....................
 
पदएते- 25(बी) (मेघा अपडेट)

उसकी छूट पूरी तरह से पनिया गयी thi.................usey महसूस हो रहा था की इस वक़्त उसकी पंतय भीगती जा रही hain................shanti उसके तरफ कड़ी होने से उसे बहार का नज़ारा सब कुछ साफ़ साफ़ नज़र आ रहा tha...................ki कैसे हरी अपनी मोती उँगलियों को उसकी बुर में तेज़ी से अंदर बहार कर रहा tha................aur उसकी बुर को अपनी उँगलियों से छोड़ रहा था.................

ये खेल ज़्यादा देर नहीं चला और शांति की सांसें फूलने लगी और हरी के उँगलियों की रफ़्तार और तेज़्ज़ होती चली gayi................aakhirkaar शांति का साबरा टूट गया और वो वहीँ इस बार ज़ोरों से aaaaaaassssssssssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhhhhooooooooooooooooooooooo करती हुई ज़ोरों से झरने lagi.................ye देखकर हरी धीरे से मुस्कुरा pada.............wahin आसमा का गाला सूख चूका tha...........uska कलेजा ज़ोरों से धड़क रहा tha..............uska वहां और रुकना मुश्किल होता जा रहा tha.............sach तो ये था की उसे भी अब साबरा नहीं हो रहा था..................

हरी वहीँ शांति को फर्श पर पीठ के बल सुलाता हैं और आसमा के पंतय को अपने सर पर किसी मास्क की तरह पहनता हुआ.............. उसके छूट के उस हिस्से को अपने मुँह पर से सेट करता हैं और उसकी ब्रा को अपने हाथों में लेता hua.................shanti के छूट पर धीरे से अपना लुंड रखता हैं और एक ज़ोर का धक्का मरता हैं जिससे उसका लुंड puuuuuuuuuuchhhhhhhhhhhh की आवाज़ के साथ अंदर घुस जाता hain..................waise छूट इस वक़्त पूरी गीली होने की वजह से उसका मोटा लुंड बड़ी hi आसानी से शांति के बुर में घुस गया tha.................fir भी हमेशा की तरह शांति के मुँह से एक दर्द भरी सिसकारी निकल पड़ी थी.....................

हरी ने जान बूझकर ऐसी पोजीशन बनायीं थी जिससे अंदर बैठी आसमा को शांति की हो रही चुदाई उसे साफ़ साफ़ नज़र aaye...............halanki वो आसमा को अंदर बैठा हुआ पहले hi देख चूका tha..............is लिए वो अनजान बनकर शांति के साथ इस तरह के खेल खेल रहा tha...................hari अंदर hi अंदर बहुत खुस था क्यों की अब आसमा उसकी मुट्ठी में लगभग आ hi चुकी thi................kyon की वो बहुत ाचे से जनता था की आसमा वहां क्या देखने आयी thi.............aur क्यों आयी थी..................

" aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh.............zara धीरे से पेल न hari.................waise भी तूने मेरी बुर का भोसड़ा पहले hi बना रखा hain..................aab क्या पूरा फाड़ेगा!!!!!!!!!!!" और शांति सिसकते हुए अपनी टांगें और फैलते हुए धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ हरी धीरे से हंस पड़ता hain................idher आसमा का वहां बैठना मुस्खिल होता जा रहा tha...........hairani तो उसे तब हुई जब वो शांति के मुँह से ऐसे गंदे वर्ड्स सुन रही thi..................jo आम तौर पर लडकियां या औरतें नहीं बोलै karti............shanti की ऐसी गन्दी बातें आसमा के तन बदन में और आग लगाती जा रही thi................aasma का दिल अब पूरी तरह से मचल उठा था..........

वो बहुत बेचैन हो गयी thi.............wo अपनी छूट में ऊँगली डालकर अपनी इस उफनती हुई जवानी को शांत करना चाहती थी मगर सामने ऐसे खुले में चुदाई चल रही हो और ऐसे खुद को कण्ट्रोल करना ..................कितना मुश्किल होता hain........................ye इस वक़्त आसमा से बेहतर और कोई नहीं जान सकता tha.............uski पंतय भीगकर अब उसकी लग्गी को भी गिला करने लगी थी..........

" धीरे छोड़ने में वो मज़ा कहा जो रगड़ रगड़ के पेलने में hain..........aur मैं तो तुझे ऐसे hi छोडूंगा.................." और हरी तेज़ी से ढ़ाके लगता हुआ बोल pada................kareeb 15 मिनट तक वो शांति की बुर में ऐसे hi लुंड पेलता रहा फिर हरी फर्श पर पीठ के बल लेट गया और शांति को अपने लुंड पर अपनी टांगें फैलता हुआ बैठने का इशारा करने laga..............wahin शांति हरी के ऊपर आयी और अपनी दोनों टांगें दोनों तरफ फैलाती हुई धीरे धीरे उसके लुंड पर बैठने lagi.................jaise जैसे वो उसके लुंड पर बैठती जा रही थी वैसे वैसे शांति का मुँह पूरा खुलता जा रहा tha.............idher आसमा का भी मुँह पूरा खुल गया था.................

वो अपना मुँह पर दोनों हाथ रखती हुई सामने हरी का विशाल लुंड शांति के छूट में पूरा घुसता हुआ पल पल देख रही thi............ek बार तो उसे ख्याल आया की वो काश शांति की जगह वो होती तो कितना मज़ा आया hota.............ye सब सोचकर उसकी बुर गीली पे गीली होती जा रही thi.................udher जैसे तैसे शांति हरी का 10 इंच लुंड अब पूरा अपने छूट में उतर चुकी थी जिससे उसकी छूट पूरी तरह से फूल गयी thi.........fail गयी thi...............wahin हरी उसके ब्लाउज के बटन को खोलता हुआ अब उसके दोनों गदरायी हुई चूचियों को मसल रहा tha.................wahin शांति धीरे धीरे अब हरी के लुंड पर कूद रही thi..................ussey छुड़वा रही thi.................jaise जैसे उसकी रफ़्तार बढ़ने लगी कमरे में एक बार faaaachhhhhhhhhhhhh faaaachhhhhhhhhhh और शांति की aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ाऊऊऊऊओ ............ जैसी आहें दोनों एक साथ गूँजनेय लगी....................

शानित पहले से hi खेली खिलाई औरत thi..................usey पता ता कैसे लुंड पर चढ़कर कूड़ा जाता हैं और कैसे दुमदार लुंड से छुड़वाया जाता hain............samney आसमा बड़े गौर से हरी का लुंड शांति के छूट में अंदर बहार होता हुआ देख रही thi............wahin हरी उसकी पंतय को अपने मुँह में किसी मास्क की तरह पहना हुआ tha..............aaj उसके ढाकों की रफ़्तार बहुत तेज़्ज़ थी और हरी पहले से कहीं ज़्यादा जोश में भी tha....................wajah थी aasma...................wo बहुत ाचे से जनता था की वो जो कुछ भी कर रहा हैं आसमा सब देख और सुन रही होगी..............

करीब 1/2 घंटे तक हरी ज़ोरों से शांति की छूट मरता हैं तभी शांति ज़ोरों से चीख पड़ती हैं और फिर से aaaaaaaasssssssssshhhhhhhhhhhhhhhhhh.................... करते हुए झरने लगती hain.................wo चीख इस लिए पड़ी थी क्यों की हरी से छुड़वाते छुड़वाते उसके बुर से मूट निकल गयी thi.......................jaise hi वो उसके लुंड पर से हटी और जैसे hi उसने अपना बुर उसके लुंड से बहार निकला उसकी मूट तेज़ी से बहती हुई हरी के पेट और जांघों पर गिरने lagi.............aur कुछ मूट बहकर फर्श पर गिरने laga.................jo बेहटा हुआ उस मोटर वाले कमरे की तरफ धीरे धीरे अपना रास्ता बना रहा था जिसे देखकर शांति धीरे से मुस्कुरा पड़ी...................

वहीँ अंदर बैठी आसमा का अब साबरा जवाब दे चूका tha................wo शांति के छूट से बेहटा हुआ मूट को अपनी तरफ धीरे धीरे आता हुआ देख रही thi.............uske चेहरे पर हैरानी इस लिए थी क्यों की आज से वो न कभी पहले वो ये नज़ारा देखि थी और................. न कभी सुनी thi................magar सैम ने उसे एक बार कहा था की अगर औरत की ज़्यादा चुदाई होती हैं तो वो अक्सर मूट देती hain..............is वक़्त आसमा की ये हालत थी की अगर वो अपनी ऊँगली भी अपने छूट पर रख देती तो उसका पानी निकल jata...............itni गरम वो आज से पहले कभी नहीं हुई थी जितनी आज हुई थी.............

" फिर से तू मूट दी ना...................." और हरी फिर से अपना लुंड शांति के छूट में डालता हुआ उसे घोड़ी की पोजीशन में छोड़ना शुरू करता हैं जिससे शांति की आहें तेज़्ज़ होने लगती hain...............hari एक नज़र उस मोटर वाले कमरे की तरफ देखता हैं फिर वो धीरे से हँसता हुआ शांति के गांड पे एक कसकर थप्पड़ मरता हैं जिससे शांति ज़ोरों से सिसक पड़ती हैं और उसकी गांड लाल हो जाती हैं.................

" तेरा ये लौड़ा किसी के बुर में जब घुसेगा तो औरत म्यूटेगी नहीं तो और क्या karegi..........................arey तू पेलता भी तो घंटों तक हैं तो कब तक मैं खुद को बर्दास्त karungi..................aur पता नहीं जब तू पेलता हैं तो मेरे मूट अपने आप क्यों निकल जाती हैं.................." और शांति फिर से छुड़वाते हुए सिसक पड़ती हैं वहीँ हरी दो तीन थप्पड़ उसकी गांड पर मरता हुआ उसकी बुर में लुंड पूरा अंदर तक घुसता हुआ शांति की चुदाई करने लगता hain...................chudayi के दौरान कई बार शांति के बुर से मूट निकलती रहती हैं जो सामने बैठी आसमा बड़े गौर से ये नज़ारा देख रही thi..................jahan पर हरी उसकी चुदाई कर रहा था वो जगह शांति के मूट से पूरी तरह भीग चुकी thi................magar उन दोनों को कोई परवाह नहीं thi...............aasma का जिस्म किसी आग के भाटी के समां टप्प रहा था.................

खेल छठा रहा और करी 1/2 घंटे बाद हरी का जिस्म ऐठने लगा और वो शांति के चूचियों को पूरी ताक़त से मसलता hua.............uske बुर में कसकर लुंड और अंदर तक घुसता hua............zoron से aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh करता हुआ चीख pada...........aur उसके बदन पर किसी लाश की तरह पड़ा raha..................wahin शांति फर्श पर लेती हुई हरी को अपने ऊपर सुलाई hui................uske बदन को कसकर अपनी बाँहों में जकड लेती hain...................hari अपना सारा वीर्य शांति के नंगी पेट और कमर पर गिरा चूका था जो उसके जिस्म पर भी लगा हुआ था..............

थोड़े देर बाद वो उठता हैं और अपने मुँह पर लगा हुआ मास्क के रूप में आसमा की पंतय को अपने हाथों में लेता हैं और शांति के पेट और कमर पर जहाँ जहाँ उसका वीर्य गिरा हुआ था वो उस जगह पर कभी उसके पंतय से पूछता hain....................to कभी उसके ब्रा se..................wahin शांति बड़े गौर से उसे hi देखे जा रही thi.............magar कह कुछ नहीं रही thi..................hari फ़ौरन अपनी जगह से उठता हैं और उसी हेंगर पर आसमा के ब्रा और पंतय को फिर से टांग देता hain..............aur जान बूझकर अपना चेहरा उस मोटर वाले कमरे की ओरे करता hua...........apne लुंड को थोड़ा सा हिलता hua........apne अंडरवियर और लोअर को ऊपर की तरफ सरकने लगता हैं....................

अब हरी का लुंड छोटा हो गया था फिर भी वो नार्मल में 4 इंच से कम नहीं लग रहा tha................neechay दो बड़े बड़े ाँद लटक रहे थे जो किसी ाण्डेय के साइज जितने honge...............aasma का साबरा जवाब दे चूका tha.................pichley 2 घंटों से वो अंदर बैठी हुई पसीने से पूरी तरह भीग चुकी thi..............uski पंतय को अगर निचोड़ा जाये तो यकीनन पानी ज़रूर टपक पड़ेगा इस कदर उसकी पंतय इस वक़्त गीली हो चुकी thi...............hari और शांति जल्दी से अपने कपड़े पहकर फ़ौरन वहां से निकल पड़ते हैं तब आसमा रहत की सांस लेती हैं...............

थोड़े देर बाद वो बहार निकलती हैं और अपने चरों तरफ इधर उधर देखने लगती hain..................jab वो उस जगह पर कड़ी होती हैं तो वो जगह अभी भी पूरी तरह से भीगा हुआ tha.......shanti की मूट se...............kahin कहीं उसका मूट का पानी सूख भी चूका tha..............pichley 1/2 घंटे से वो लगातार मूट रही थी जब जब हरी उसे पेल रहा tha..................jab उसकी नज़रें अपने ब्रा और पंतय पर जाती हैं वो फ़ौरन अपने ब्रा और पंतय को अपने हाथों में लेती हैं और सीधा वहां से तेज़ी से भगति हुई ऊपर अपने कमरे की ओरे जाने लगती hain.................uske मुन्न में ये भी सवाल था की कहीं हरी ने उसे देख तो नहीं liya...............magar अब उसे ज़्यादा फर्क नहीं पड़ने वाला tha..............agar हरी जान भी जायेगा तो उसके लिए रास्ता और भी आसान हो jayega..................ye ख्याल आते hi आसमा के चेहरे पर एक मुस्कान तैर गयी............

जैसे hi वो अंदर कमरे में आती हैं बिना एक पल के देर किये वो एक एक कर अपने सरे कपड़े अपने बदन से उतरने लगती hain.................jab वो पूरी तरह से नंगी हो जाती हैं वो वहीँ बीएड पर जाकर लेट जाती हैं और उस पंतय और ब्रा के उन हिस्सों को सूंघती हुई लुम्बी सी एक सांस लेती hain.................jissey वीर्य की मादक खुसबू उसके सांसों के ज़रिये उसके बदन में उतर जाती hain.............ek अजीब सा नशा खुमार फिर से उसपर चने लगती hain...............garam तो आज वो बहुत ज़्यादा thi..............wo फ़ौरन हरी के ताज़े वीर्य को अपने मुँह के पास ले जाती हैं और उसके वीर्य पर अपने जीभ रखकर उसके चटनी लगती हैं साथ में अपनी छूट में ऊँगली करती हुई अपने छूट को रगड़ना शुरू करती हैं......................

हरी का वीर्य बुरा नहीं लग रहा tha...........balki उसका स्वाद उसे अब पल पल मदहोश करता जा रहा tha............aankhein बंद होने से सब कुछ उसकी आँखों के सामने किसी फिल्म की तरह अब घूमने लगा tha...................hari का लुंड अब उसके दिमाग से निकलने का नाम नहीं ले रहा tha.............chand सेकण्ड्स गुज़ारे होंगे और इस बार आसमा की सांसें फूलने lagi...........uska जिस्म ऐठने laga...............pichley दो घंटों से जिस ज्वालामुखी को वो अपने अंदर रोके हुई thi............usey ऐसा लगा जैसे उसके अंदर कोई लावा बहुत देर से रुका हुआ हो और वो फुट कर बहार आने को बेताब ho...............aur आखिर आसमा के साबरा का बाँध टूट hi गया और वो इस बार ज़ोरों से चीखती हुई तेज़ी से झरने लगी....................

आज वो इतनी ज़ोरों से झरि थी की बिस्टेर पर उसके बुर से कुछ मूट की बूँदें बहार टपक पड़ी thi..................jissey बिस्टेर का कुछ हिस्सा गिला हो चूका tha..................wahin उसके छूट से सफ़ेद सफ़ेद वीर्य बेहटा हुआ बहार की ओरे बह रहा tha.................aasma लुम्बी लुम्बी सांसें लेती हुई अपने बेकाबू हो रहे सांसों को नार्मल कर रही थी मगर आज कुछ भी उसके बस में नहीं they..........pasiney से वो पूरी तरह भीग चुकी thi................gala उसका सूख चूका tha..............lumbi लुम्बी सांसें लेती हुई वो नींद के आगोश में डूबती चली gayi.................dekhna था आगे वक़्त को क्या मंज़ूर था............................

तो बे कॉन्टिनोएड...............................................
 
Update-26(A) (मेघा अपडेट)

आज वो इतनी ज़ोरों से झरि थी की बिस्टेर पर उसके बुर से कुछ मूट की बूँदें बहार टपक पड़ी thi..................jissey बिस्टेर का कुछ हिस्सा गिला हो चूका tha..................wahin उसके छूट से सफ़ेद सफ़ेद वीर्य बेहटा हुआ बहार की ओरे बह रहा tha.................aasma लुम्बी लुम्बी सांसें लेती हुई अपने बेकाबू हो रहे सांसों को नार्मल कर रही थी मगर आज कुछ भी उसके बस में नहीं they..........pasiney से वो पूरी तरह भीग चुकी thi................gala उसका सूख चूका tha..............lumbi लुम्बी सांसें लेती हुई वो नींद के आगोश में डूबती चली gayi.................dekhna था आगे वक़्त को क्या मंज़ूर था............................

अब आगे...........................................................................

हमेशा की तरह आसमा अपने बिस्टेर पर पूरी नंगी सोई हुई thi..................usey इस हाल में अगर कोई मर्द देख भी लेता तो वो उसे ज़रूर नोच khata..............waise भी आसमा अपना ये हसीं बदन नोचवाने के लिए खुद को हरी के लिए अब तैयार कर रही thi.............ki कब हरी आये और उसके इस काची जवानी को बेरहमी से नोचता rahe............masalta रहे.............

घडी में शाम के 4.30 बज रहे they...............tabhi आसमा का फ़ोन बज utha.................phone सैम का tha...................agar सैम आज उसे इस वक़्त कॉल नहीं करता तो आसमा न जाने कितने देर तक ऐसे hi सोती rehti................phone बजने से वो तुरंत उठ गयी और हड़बड़ाती हुई अपना फ़ोन उठाने लगी...............

" कैसी हो डार्लिंग..................." उधर से सैम धीरे से बोल पड़ा वहीँ आसमा जमाई लेती हुई हौले से मुस्कुरा दी......................

" मैं ठीक hoon.........bus आँख लग गयी थी thodi..............aacha किया सैम जो आपने मुझे जगा diya..............mujhe मार्किट जाना tha................kuch शॉपिंग करनी thi..................agar देर तक मैं सोती रहती तो शायद आज मैं मार्किट भी ना जा पति.............." और आसमा अपने बिस्टेर से नंगी उतरती हुई आईने के सामने जाकर कड़ी हो गयी और अपने आपको सर से लेकर पवन तक नंगी निहारती rahi.................uske चेहरे पर एक हल्की मुस्कान thi...........wo अपने बल के लातों पर अपनी उंगलियां धीरे धीरे फेर रही थी वहीँ दूसरे हाथ में अपना मोबाइल थामे हुई सैम से बात कर रही थी.............

मार्किट का नाम सुनकर सैम के चेहरे पर थोड़ी उदासी और घबराहट के बदल उमड़ pade.................wahin वो थोड़ा चिंतित होता हुआ धीरे से बोल पड़ा..............

" darling................thoda संभलकर jana...............pichli बार की तरह वो गुंडे कहीं इस बार भी tumhein...............tum एक काम karo..............hari को तुम अपने साथ क्यों नहीं ले jati...............issey दो फायदे हो jayengey..............ek तो वो तुम्हारे साथ रहेगा तो उन बदमाशों का दुर्र तुम्हें नहीं rahega...............aur दूसरा वो तुम्हारा सामान उठाकर लेता आएगा...................." और सैम अपनी परेशानी जताता हुआ धीरे से बोल पड़ा वहीँ आसमा का चेहरा ख़ुशी से खिल उठा.........................

सच तो ये था की वो खुद हरी को अपने साथ मार्किट ले जाना चाहती थी मगर वो ये सोचकर परेशां थी की ये बात वो हरी से कैसे kahe...........ya सैम को कैसे bataye.................magar सैम ने तो जैसे आर्डर देकर उसकी साडी समस्या को दूर कर दिया था......................

" आप मेरी फ़िक्र मुट्ठ kijiye..........................main हरी को अपने साथ लेती jawungi..................mujhe नहीं लगता की वे बदमाश फिर से मेरे साथ कोई बदतमीज़ी करेंगे................" और आसमा धीरे से बोल पड़ी वहीँ सैम कुछ परेशां सा नज़र आ रहा tha.................aasma ये बात जानती थी की सैम का डरना बेबुनियाद नहीं tha.................itna तो उसे भी मालूम था की वे गुंडे उसे देखकर फिर से बढ़तमीज़ी कर सकते हैं...............

" darling..................agar उन्होंने तुम्हारे साथ कोई बढ़तमीज़ी भी की तो तुम वहां से चुप चाप निकल jana..........tumhein उनसे उलझने की कोई ज़रुरत नहीं हैं.................." और सैम आसमा को समझते हुए धीरे से बोल पड़ा वहीँ आसमा हाँ में अपना सर हिलाते हुए सैम के दुर्र को कम करने lagi..............do चार बातें इधर उधर होने के बाद सैम ने अपना कॉल डिस्कॉंनेट कर diya.............phone रखने के बाद आसमा कुछ देर तक सोचती रही फिर वो सब कुछ नसीब पर छोड़कर अपने मंद को दूसरी तरफ डाइवर्ट करने लगी................

हरी की याद आते hi उसके जेहन में दोपहर वाली घटना फिर से किसी फिल्म की तरह उसके आँखों के सामने घूमने lagi.....................zyada उस सब के बारे में न सोचकर उसने अपना फ़ोन पिक किया और हरी को कॉल लगाने lagi..................na जाने क्यों हरी को फ़ोन लगाने से उसका कलेजा एक बार फिर ज़ोरों से धड़क utha..............udher हरी बहार अकेला बैठा हुआ tha.............jaise hi उसने आसमा का कॉल देखा वो ख़ुशी से झूम utha...............waise उसने आसमा का नंबर ......." मेरी रांड....." नाम से सेव किया tha............sach तो ये था की उसे अपनी आँखों पर ज़रा भी विश्वास नहीं हो रहा tha.................ki उसकी मेमसाहेब उसके पास इस तरह से कॉल भी कर सकती हैं..............

" हाँ memsaheb...............bataiye...............kya बात हैं..............." और हरी बिलकुल नार्मल होता हुआ धीरे से बोल pada.............wahin आसमा का कलेजा ज़ोरों से धड़क रहा tha.............usey समझ में नहीं आ रहा था की वो हरी से क्या bole..............kaise बोले..................

" hari..............wo .......मैं कह रही थी ki...........tum इस वक़्त फ्री हो............" और आसमा धीरे से बोल पड़ी वहीँ हरी हाँ में कहता हुआ आसमा के आगे बोलने का इंतज़ार करने लगा................

" मुझे शॉपिंग के लिए जाना hain.................tumhare साहेब ने कहा हैं की तुम्हें भी मेरे साथ चलने को..............." और आसमा का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा वहीँ हरी की तो जैसे कोई बरसों की मुराद पूरी हो गयी ho..........wo ख़ुशी से चहक उठा................

" ठीक हैं memsaheb............aap तैयार होकर aaiye.......main आपके साथ चलूँगा................" और हरी आगे कुछ कहता आसमा अपना फ़ोन डिस्कॉंनेट कर di.............wo भी मुन्न hi मुन्न बहुत खुस thi................wo नंगी hi बाथरूम में गयी और फिर शावर लेने lagi................aachey से शावर लेने के बाद वो ऐसे hi चलती हुई अपने बैडरूम में आयी और अपने ालमिरह से एक ाची सी साड़ी अपने लिए सेलेक्ट करने lagi.................ek ब्लैक रंग की साड़ी पर जब उसकी नज़रें गयी वो थोड़ी मुस्कुराती हुई उस साड़ी को निकलने लगी और उस साड़ी को पहने lagi.............pehle उसने ब्लैक रंग की ब्रा और पंतय pehni..........jo डिज़ाइनर थी................

फिर उसी रंग का पेटीकोट पहनती हुई साड़ी पहनने lagi........blouse का कलर लाल था जो उस ब्लैक साड़ी में बेहद सूट कर रहा tha...............blouse हमेशा की तरह पीछे से स्लीवलेस tha..........jissey आसमा की नंगी गोरी पीठ काफी हुड्ड तक नज़र आ रही thi....................aur उसका आगे का गाला काफी बड़ा था जिससे उसकी बड़ी बड़ी चूचियों की गोलाई साफ़ बहार की तरफ नज़र आ रही थी............... जो किसी मर्द के लुंड में आग भर देने के लिए काफी थी..................

पीछे ब्लाउज के हिस्सा में एक 4 इंच की पट्टी थी जिसपर उसकी 36 साइज की बड़ी बड़ी चूचियां तिकी हुई thi................maang में लाल रंग की सिन्दूर और होंठों पर डार्क रेड lipstick...........kanon में दो बड़े बड़े झुमके और माथे पर एक काली छोटी सी bindi............naak में एक राउंडेड शेप में गोल्डन ring........jo उसकी खूबूसरती को और चार चाँद लगा रहे they..............thoda सा क्रीम पाउडर लगाती हुई फाइनल टच देकर वो अपने आपको आईने में एक तुक निहारती rahi............wakai में वो बेहद हॉट लग रही thi............aapne आपको देखने के बाद वो फिर धीरे से मुस्कुरा पड़ी............

इधर हरी पिछले 1 घंटे से आसमा के आने का इंतज़ार कर रहा tha............jaise जैसे वक़्त गुज़र रहा था उसकी बेकरारी भी पल पल बढ़ती जा रही thi......................aakhirkaar उसका साबरा जीत गया और आसमा उसे अंदर से बहार आती हुई दिखाई di.............aur जब उसकी नज़रें आसमा पर पड़ी वो टकटकी लगाए आसमा के खूबसूरती को बस निहारता raha.............usey तो यकीन नहीं हो रहा था की आसमा इन सदियों में इतनी हसीं lagegi...............aise लग रहा था जैसे वो खुली आँख से कोई सपना देख रहा ho..................magar जो भी था हकीकत था.................
 
Update-26(B) (मेघा अपडेट)

जैसे hi आसमा हरी के पास आयी हरी का मुँह खुला का खुला रह gaya.............uske चलने से पायलों की झंकार से वो मदहोश हो चूका tha.................wo बड़े गौर से आसमा का ये रूप देखे जा रहा था वहीँ आसमा हौले हौले हरी के तरफ देखकर मुस्कुरा रही thi.............aaj तो बिजली हरी पर गिरनी hi थी.................

" तुम तैयार नहीं हुए..............." और आसमा हरी की तरफ देखती हुई धीरे से मुस्कुरा padi................wahin हरी अपने हाथों से अपने कपड़े को झाड़ता hua...............fir हाँ में सर हिलता हुआ................. आसमा के बाजु में आकर चुप चाप से खड़ा हो गया.............

" मैं तैयार हूँ memsaheb...............bhala मुझे कौन dekhega................dekhney वाली चीज़ तो आप hain..............sach कहता हूँ मेमसाहेब आज आप बेहद हसीं लग rahi..............upar से लेकर नीचे तक................." और हरी आसमा के बदन को ाचे से स्कैन करता हुआ बोल पड़ा वहीँ आसमा जवाब में धीरे से मुस्कुरा padi............wahin बाजु में शांति कड़ी थी वो भी आसमा को देखती हुई उसकी तारीफ करने लगी..........

" शांति तुम देखती rehna.................hum एक घंटे में आ जाएंगे...................." और हमेशा की तरह आसमा आगे आगे चलने लगी वहीँ हरी पीछे से उसकी नंगी पीठ और लचकती हुई कमर और गांड को खा जाने वाली नज़रियों से घूर रहा tha..............uska जी आसमा को देखकर मचल उठा tha............janta था ये चिड़िया उसके हाथ में हैं मगर उसका भी साबरा धीरे धीरे जवाब देता जा रहा था............

"कार में बैठो हरी.............." और अस्मा एक ऐडा से पीछे मुड़ती हुई हरी की तरफ देखने लगी वहीँ हरी की नज़रें तो अभी भी उसके गांड और नंगी पीठ पर hi तिकी thi..............wo ललचायी हुई नज़रियों से आसमा को घूर रहा tha..................wahin आसमा उसकी नज़रें बहुत ाचे से पहचानती थी..................

" आप कार चला लेती हैं क्या मेमसाहेब.............?????????? और हरी चौकता हुआ बोल पड़ा वहीँ आसमा जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ी.............

" haan.......aur नहीं तो kya!!!!!!!!!!........mujhe ड्राइविंग आती hain..........aawo और आकर फ्रंट सीट पर बैठ जाओ........" और आसमा कार को अनलॉक करती हुई ड्राइविंग सीट पर जाकर बैठ गयी और पीछे पीछे हरी भी चलता हुआ उस कार के पास आया और सामने वाली सीट पर आकर बैठ gaya............usey सब कुछ एक सपना सा लग रहा tha............usey अपनी किस्मत पर ज़रा भी यकीन नहीं हो रहा था ..................मगर वो ये जनता था की आज उसकी किस्मत बुलंद हैं..............

आसमा कार ों की और कार ड्राइव करने lagi...........usney सीट बेल्ट लगाया और हरी को भी सीट बेल्ट लगा दिया जिससे ड्राइव करने में सेफ्टी rahe............hari की नज़रें बार बार आसमा के तरफ जा रही थी हालाँकि वो आसमा से कुछ बोल नहीं रहा था मगर वो बार बार उसके तरफ देखता जा रहा tha................khidki खुली होने से हवा के झोंके बार बार उसके रेशमी बालों से टकराते जिससे उसके बल उसके नरम गलों को बार बार छु jate.................aasma अपनी एक हाथ लेजाकर अपनी खुली जुल्फों को अपने खूबसूरत से चेहरे पर से हटा deti................jissey हरी टकटकी लगाए बस आसमा को देखता रह jata.............na जाने क्यों आज हरी के मुँह से एक भी आवाज़ नहीं निकल रहा tha................aasma का ये रूप उसे पागल करता जा रहा था.............

वहीँ आसमा भी शांत thi..............wo खुद हैरान थी की हरी कभी चुप न रहने वाला इंसान आज इतना खामोश क्यों hain...............poorey रास्ते भर हरी बस आसमा को निहारता raha..........magar बोलै कुछ nahin..................wahin आसमा भी खामोश थी और सारा ध्यान अपनी ड्राइविंग पर लगा रही thi.............hari के चुप रहने का कारन भी शायद एहि था की वो आसमा को डिस्टर्ब नहीं करना चाहता था............

थोड़े देर बाद वो दोनों उसी जगह पर पहुँच गए जहाँ सैम ने अपनी कार पिछली बार पार्क की thi..............car पार्क करने के बाद आसमा आगे आगे चलने लगी और हरी पीछे peechay.............thode दूर जाने पर आसमा रुक गयी और पीछे मुड़कर हरी को बड़े गौर से देखने लगी............

" मेरे साथ साथ चलो............... hari...........mere कदम से कदम मिलकर.............." और आसमा हरी की तरफ देखने लगी वहीँ हरी उसके करीब आया और "....जी मेमसाहेब "...कहता हुआ उसके बाजु में साथ चलने laga............un दोनों के बीच थोड़ी दूरी thi..............aasma जब भी हरी के करीब आती उसके बदन से वही स्मेल दुबारा से उठने लगती जिससे वो पूरी तरह से बेचैन होने lagti..............aaj भी उसका कुछ वैसा hi हाल था.................

जब वो दोनों थोड़े दूर गए वहीँ पिछली बार की तरह 4 आवारा टाइप के वही आदमी आते जाते लड़कियों और औरतों को छेद रहे they...............un सब के साथ बढ़तमीज़ी कर रहे they.............unmein से एक की जब नज़र आसमा पर पड़ी वो उसे फ़ौरन पहचान गया और अपने बाकि साथियों की तरह गंदे तरीके से इशारा करता हुआ आसमा के सामने ज़ोरों से बोल पड़ा..............

" अरे वो dekh.........ye वही पताका हैं naa.............sali पिछली बार तो बच गयी थी humse..................aaj नहीं bachegi............isko याद कर करके मैं कितनी बार इसके नाम की मुट्ठ मार चूका hoon.............aaj मैं सारा हिसाब चुकता karunga................isko अपने नीचे लेटकर..............." उनमें से एक बोल पड़ा और वो चरों ज़ोरों से हंस pade..........wahin आसमा कुछ पल तक वहां रुकी फिर वो अपनी नज़रें नीचे झुकाती हुई............. हरी के साथ कदम से कदम मिलती हुई .....................आगे चलने lagi...............wahin बाजु में हरी साडी बातें उनकी सुन रहा tha.................sach तो ये था की अंदर hi अंदर वो उनपर सुलग गया था...................

मगर सिचुएशन को देखते हुए वो फिलहाल चुप tha............wo देखना चाहता था की आसमा क्या करती hain.............wahin उसे पूरा यकीन हो गया था जो पिछली बार जिसने आसमा के साथ बढ़तमीज़ी की थी ये वहीँ चरों they.............to भला हरी अब उन्हें कहाँ छोड़ने वालों में से tha...............aasma को वो सच में दिल से चाहता था और कोई उसे बुरी नज़र से देखे या उसे कुछ कहे ये उसके बर्दास्त के अब बहार था.................

"क्यों be...............tujhe देखने से तो तू इसका नौकर लगता hain...............sala इसका हिज़ड़ा पति कहाँ भाग gaya.................chalo ाचा hua..........bhag gaya............humare लिए तो उसने यहाँ इसे अकेला भेजा हैं na................aab तो हम चरों के मज़े हो गए................." उनमें से एक बोल पड़ा और चरों आसमा और हरी के पास आकर खड़े हो gaye.........wahin आसमा का दिल अंदर hi अंदर घबरा utha...............wo जानती थी की हरी अगर कुछ करना भी चाहे तो भी उनका कुछ नहीं बिगड़ payega............kyon की वो अकेला tha.................nihaatha...............aur वो चार they.........unke हाथों में चाकू भी tha....................jisey वो बहार अब निकल चुके थे.....................

" memsaheb.................mujhe ज़ोरों की सुसु आयी hain............aap यहीं रुकिए मैं अभी थोड़े देर में आता हूँ........................." और हरी आसमा की तरफ देखता हुआ ..........थोड़ा घबराता hua................wahan से निकलने लगा ................वहीँ आसमा जो हरी के मर्दानगी पर अब विश्वास करने लगी थी उसने कभी सपने में भी ये नहीं सोचा था की हरी मौके का फायदा उठकर अपनी जान बचाकर वहां से भाग jayega...............aur उसे इन डरिनोदों के बीच अकेला छोड़ dega.................kum से कम इससे ाचा तो सैम tha.........bhale hi वो कुछ नहीं कर पाया था मगर उसका साथ तो उसने नहीं छोड़ा था................

ये सब ख्याल आते hi आसमा के आँखों से ाँसों चालक pade.....................wahin हरी फ़ौरन वहां से निकल गया और आसमा ख़ामोशी से वहीँ चुप चाप हरी को अपने से दूर जाता हुआ देखती rahi.................aab वो जान चुकी थी की आज उसे इन दरिंदों से कोई नहीं बचने wala...............sam का दुर्र बेबुनियाद नहीं tha...................aab तो उसे भी पछतावा होने लगा था की वो यहाँ क्यों aayi................aur उससे भी ज़्यादा पछतावा हो रहा था की वो हरी के साथ क्यों aayi.................jo भी उसके दिल में हरी के लिए था सब कुछ अब धुन्दला सा पड़ता जा रहा था...........

जैसे hi सामने वाला आदमी आसमा के कंधे को chuwa..............uske ठीक पीछे खड़ा आदमी आसमा को पीछे से कसकर दबोचने laga............wahan मौजूद भीड़ बस खड़े खड़े तमाशा देख रही thi......magar कोई वहां आसमा को बचने नहीं aaya...................jissey आसमा को बहुत ज़्यादा उम्मीद thi.......wo भी नहीं...............

" please........mujhe जाने do.............maine तुम सब का क्या बिगाड़ा हैं.........." और आसमा फ़रियाद करती हुई उन चरों की तरफ असहाय सी नज़रियों से देखने lagi.............wahin उन चरों के चेहरे पर गन्दी हंसी साफ़ झलक रही थी............

" तू चीज़ hi ऐसी हैं की मर्द की नियत तुझे देखकर दोल jaye..............ismein तेरा कसूर नहीं बल्कि तेरे ये हुस्न का हैं................." और सामने खड़ा साक्ष आसमा के बालों पर जैसे hi अपना हाथ रखा................ उसके हाथों पर एक ज़ोरदार लाठ पड़ा जिससे उसकी ज़ोरों की चीख निकल padi.................wahin वो दर्द से तिलमिला utha.................jab उसकी नज़रें सामने खड़े इंसान पर गयी जो अभी भी हाथ में एक मोती सी लाठ लिए हुए था...................... और वो कोई नहीं बल्कि आसमा का नवकार .............हरी hi था..................

इससे पहले वो सब कुछ करते हरी तेज़ी से एक एक कर सबको उस मोठे डंडे से मरने पीटने laga.................wahin दो लोग हाथों में चाकू लिए हुए हरी को चरों तरफ से घेरने lage...............idher आसमा के आँखों में जो कुछ देर पहले गम के आंसूं थे अब हरी को ऐसे अपने करीब पता हुआ देखकर अब उसके आंसूं ख़ुशी में बदल गए they..............wo आसमा के ठीक सामने आकर खड़ा हो गया और उस मोठे लाठ को तेज़ी से घूमने लगा..................

इससे पहले की हरी सामने वाले को मरता तभी पीछे से एक आदमी अचानक से चाकू से हुम्ला कर दिया जिससे हरी की कलाई उस चाकू को चीरती हुई निकल गयी जिससे हरी दर्द से चीख pada..........uske कलाई से खून की धरा फुट padi..........zakhm गहरा tha.........wo अब बहुत गुस्से में tha...................usney तेज़ी से उस लाठ को अपने हाथों में घुमाया और बिना रुके एक एक कर सबको उस लाठ से मरना शुरू कर diya...............do तो काफी ज़ख़्मी हो गए और दो के सर पर भी चोट lagi................magar हरी नहीं ruka..................wo उन्हें दौड़ता रहा और उन्हें मरता raha...............aur तब तक मरता रहा जब तक वो वहां से भाग नहीं gaye............hari ने उन्हें इतना मारा की अब वो शायद वहां कभी न दिखे.............

" बहनचोद की aulad...........haramkhor...........maa छोड़ दूंगा तुम सब ki....................itna सस्ता समझते हैं मेरी मेमसाहेब ko................jo ऐसे छू lengey.............jo मर्ज़ी सो karengey...............agar किसी ने भी मेरी मेमसाहेब की तरफ आँख उठाकर भी देखि तो मैं उन सब की आँखें नूच loonga.................main अपनी जान से ज़्यादा परवाह करता होने inki..............agar किसी ने कुछ कहा तो मैं उसकी जान ले लूँगा......................" और हरी गुस्से से बौखलाता हुआ वहीँ ज़ोरों से चीखने लगा ...............वहीँ साडी भीड़ की नज़रें उसपर hi आकर टिक गयी.............

कुछ दूर पर कड़ी आसमा के आँखों में भले hi आंसूं थे मगर वो अपनी नज़रें नीचे झुकाये उस भीड़ के बीचों बीच कड़ी thi..............hari कुछ देर तक ऐसे hi सबको घूरता रहा फिर सबको भागता हुआ आसमा के तरफ बड़े प्यार से देखने laga.................wo फिर हौले हौले आसमा के करीब गया और आसमा के सामने जाकर किसी गुनेहगार की तरह चुप चाप से खड़ा हो gaya...........uske हाथ में थमा लाठ अब छूटकर सड़क पर गिर चूका tha................dono के लैब खामोश they....................na हरी कुछ कह रहा tha.....................aur न आसमा..........................................

तो बे कॉन्टिनोएड................................................
 
थैंक यू सो मच फॉर योर काइंड सपोर्ट

अगला अपडेट आज शाम 4बजे तक आ जायेगा.....

दो दिन तक इस कहानी का अपडेट रेगुलर आएंगे क्यों की मंडे को मैं आउट ऑफ़ स्टेशन जा रहा हूँ 15दिनों के लिए तो अपडेट देना पॉसिबल नहीं हो पायेगा.... लौट के आने के बाद स्टोरी अस आईटी इस चलेगा जैसे पहले चल रहा tha...ye मुट्ठ समझना मैं मैं स्टोरी छोड़कर भाग jawunga..bus 15 दिन गपे के बाद फिर से स्टोरी कंटिन्यू चलेगी.... थैंक्स
 
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