अपडेट 41 - हैप्पी नई ईयर…. & 5 डेज आफ्टर
अभी म्यूजिक बहुत पसंद करता था, सिर्फ बॉलीवुड नहीं वेस्टर्न भी. तो इस 1सत जनुअरी को सुबह को उस्सने अपने टॉप तेन वेस्टर्न सांग्स को नोट किया अपने फवौरीते चैनल पर और वो यह थे, आप लोग भी एन्जॉय और याद कीजिये जिनको वह गाने याद हैं, सब 1986 में टॉप पर थे और 1सत जनुअरी 1987 को प्ले किया जा रहा था. तो अपने डायरी में अभी के टॉप तेन लिस्ट में यह गाने लिखे हुए थे:
1. ी वांट तो वेक उप विथ यू बी B.Gardiner
2. लेडी इन रेड बी क्रिस दे बुर्ज
3. डिफरेंट कार्नर बी जॉर्ज माइकल
4. पापा don’t प्रीच बी मैडोना
5. से यू से में बी लिओनेल रीचिए
6. लवर व्हाई बी सेंचुरी
7. प्रॉमिस यू मेड बी कॉक रोबिन
8. टेक माय ब्रेथ अवे बी बर्लिन
9. जाने बी सेंचुरी
10.ी जस्ट डीएड इन योर आर्म्स बी कटाई क्रू
अभी सुबह से दिन के 1 बजे तक घर पर hi था. कहीं नहीं गया, उस्सको कुछ ाचा नहीं लग रहा था सिर्फ रूही की याद आरही थी उससे. एक भारीपन सा महसूस हो रहा था उससे. सोच रहा था किआ उधर रूही भी उस्सको वैसे hi याद कर रही होगी? किआ रूही भी अभी को मिस कर रही होगी….
रूही को याद कर hi रहा था के राडिओं पर यह गण चला जिसस्ने अभी को रुला दिया, बहोत hi रोया वो इस गीत को सुनकर क्यूंकि इस गाने के शब्द सब जैसे उसी के लिए लिखे गए थे, गाना यह था:
“वो बीते दिन याद है, वो पल चीन याद है
गुज़ारे तेरे संग जो, लगाकके ुझे अंग जो
वो मुस्काना तेरा, वो शर्माना तेरा
दिसंबर का समा, वो भीगी भीगी सर्दियाँ
वो मौसम किआ हुआ नाह जाने कहाँ खो गया
बुसस यादें बाकी….”
यह गाना उन्ही दिनों का है और अभी को लगा के गण स्पेशलय उसस्के लिए और उसस्के सिचुएशन के लिए लिखा गया है… खूब रोया वो इस्को सुनकर और रूही को याद कर कर के.
कैसे नहीं रोटा जब गीत में वही सब लिखा है जो अभी और रूही के बीच हुए थे – दिसंबर का समां था, रूही का प्यार, उस्सको अंग लगाया था अभी ने, रूही का मुस्काना, उस्का शर्माना… सब कुछ तो हुआ था अभी और रूही के बीच वैसा hi, तो कैसे अभी नहीं रोटा भला.
शाम 2 बजे अभी अपने बीएड पर लेता हुआ था और उसस्के दिमाग़ में रूही लेते हुए दिखाई दिया और वो दिन याद आया जब उस्सने रूही को सोते हुए देखा ता अपनी नीली ड्रेस में…. उस दिन अभी को रूही को जाकर कर किश करने का मैं कर रहा था….. सब याद कर रहा था Abhi….wohi दिन था जब रेज़ा भी अभी के पीछे खड़ा हुआ था रूही को देखने के लिए….. यह सब कुछ अभी को पागल बना रहा था….. सब यादें उस्सको तड़पा रहा था….
और वैसे लेते हुए अभी रूही के जिस्म को सोचने लगा, उस के हर उस अंग को सोचने लगा जो उसस्के जिस्म से कभी चिपका था, अभी रूही की जिस्म को सोचते हुए उत्तेजित होने लगा उस्सने सोचा के काश रूही इस वक़्त नए साल के दिन उसस्के साथ होता तो वो कैसे उसस्के कपड़ों को एक एक करके उतारता, कैसे उसस्के जिस्म के हर उन् कोमल हिस्सों को चूमता, अपना जीब फरता, रूही से कहता अपने जीब निकाल कर उस्सको वैसे hi चिढ़ाने को जैसे वो किया करती थी, तब झट से अभी उस्सकी जीब को अपने मुंह में ले लेता और उस्सको पशनातेली किश करता और अपने हाथ से किश करते हुए उस्सकी जिस्म को सहलाते हुए उस्सको बीएड पर लेटता….
अभी रूही को, उस्सकी टच को बहोत मिस करने लगा था…..
और कुछ देर बाद अभी सोचने लगा के 5तह को वहां जाएगा तो किआ होगा, कैसे किश से बात करेगा…….
1सत जनुअरी, 2ंद, 3रद 4तह को अभी बुसस रूही की यादों में खोया रहा…. सिर्फ सोचता रहा के 5तह को जब वो वहां जाएगा तो किआ होगा. अभी सोच रहा था के रूही ने बार बार खत पढ़ी होगी और क्यूंकि अभी ने खत में लिखा था के 3रद, 4तह और 5तह के बिच किसी एक दिन को आएगा तो रूही उस्का वेट करना 3रद से शुरू कर दिया होगा. अभी ऐसा सोच रहा था, उस्सको पता बिल्कुल भी नहीं था के उस तरफ किआ हो रहा था.
तो अभी जो कभी भी नेगेटिव नहीं सोचता था आज पहली बार नेगेटिव भी सोचा के किआ पता इस लिए के रूही ने अपनी पेरेंट्स को बता दिया होगा के अभी इन 3 दिनों में एक दिन को वहां आने वाला है इस लिए रूही के माँ बाप ने उन्ही 3 दिनों के लिए रूही को उसस्के नानी के घर भेज दिया हो और जब अभी वहां जाए तो रूही मिले hi नहीं उससे! यह सोच कर अभी घबरा रहा था, वो नहीं चाहता था के रूही उस्सको नहीं मिले वहां और सिर्फ उसस्के पेरेंट्स से मिलना परे उस्सको. अभी चाहता था के रूही भी सामने हो जब अभी उसस्के माँ बाप से बात करेगा.
4तह जनुअरी की रात को मुश्लाधार बारिश शुरू हुई पुरे देश में. मंडे का दिन था और 3रद और 4तह वीकेंड थे और नैना और अभी की माँ, अभी की छोटी बेहेन अपने नानी के घर चले गए थे नई ईयर के मौके पर. अभी और उसस्के पिता और बाकी के भाई घर पर थे…. इतनी बारिश हुए रात भर, फिर सुबह को अभी के घर से निकलना नामुमकिन था… अभी के घर के चरों तरफ पानी भरे हुए थे जैसे उस्का घर एक जहाज़ था समुंदर के बीच. रास्ते पर पानी ऐसे बह रहे थे जैसे नदी.
अभी को फिर भी जाना था रूही के घर क्यों के उस्सने सोचा वह लोग उस्का इंतज़ार कर रहे होंगे….
9.30को अभी तैयार होकर घर से निकला. अभी ने नए साल के मौके पर नए कपडे ख़रीदे थे अपने लिए भी, वही पहना था रूही के घर जाने के लिए. जब अभी घर से निकल रहा था तो उसस्के पिता ने उस से कहा के ऐसे मौसम में क्यों कहीं जाना है, बहोत तेज़ और खतरनाक तरीके से बारिश हो रही थी पिता ने कहा के बाढ़ भी आ सकते हैं कहीं भी देश में.
मगर अभी को जाना था चाहे तूफ़ान आये या क़यामत उस्सको रूही के घर जाना hi जाना था.
मगर पहले उस्सने सोचा के अपने नाना के घर से होते हुए तब जाए रूही के यहाँ, उस तरह से वो नैना से मिल लेता और उस्सकी गुड विशेष भी मिल जाता उससे.
अभी ने एक बस लिया, बस के सारे पैसेंजर्स भीगे हुए थे और खुद अभी भी बिल्कुल भीग गया सिर्फ घर से निकल कर बस स्टॉप तक जाते हुए.
उस शहर से होकर अभी को अपने नाना के घर जाना था जिस शहर में रूही के चाचा का सुपरमार्केट है. वहां से एक दूसरा बस लेना था अभी को.
उस शहर में भी बारिश वैसा hi था और रास्ते में जगह जगह पर गाड़ियां ब्रेक डाउन दिखाई देते रहे चरों ररफ बारिश की वजह से… एक भी आदमी कहीं सूखा हुआ नहीं दिख रहा था, छतरी हो या नहीं, सब भीगे हुए थे…. अभी खुद इतना भीग गया के उसस्के ुंडेरवेअर्स भी भीगे हुए थे…..
अपने नाना के घर पहुंचे तो नैना, अपनी माँ और छोटी बेहेन से मिले, नाना, मामू मासी सबसे भी मिले, और अपने कपडे उतार कर दे दिया नैना को आयरन से सुखाने के लिए जब तक वो खाना खा रहा था.
और वहां से 1 घंटे बाद अभी निकला रूही के घर जाने के लिए. नैना और उस्सकी माँ को पता था के अभी रूही के घर जा रहा है और शायद एक या दो हफ्ते बाद अपने माता पिता को लेकर अभी जाता रूही का हाथ ऑफिशियली मांगने शादी के लिए, सब आज की मीटिंग पर देपेंद करता के वह लोग किआ कहते हैं अभी को. नैना ने अभी को गुड लक विश किया और अभी निकल पड़ा…. और वहां भी बुसस नाना के घर से निकल कर बस तक पहुंचते हुए hi अभी फिर पूरा भीग गया….. तर तर हो गया अंदर के कपडे भी भीग गए अभी के….
उधर से एक और छोटा शहर था जहाँ से अभी को बस लेना पड़ा रूही के घर पहुंचे के लिए….. और उस्सको बस में सुनील का अपरेंटिस मिला और उस यह खबर मिली के कल मेहबूब ने सबको अपने बस में लेकर पिकनिक के लिए सीसाइड गया था, सुनील, जॉर्ज, रेज़ा, उसस्के बहनें, रूही का बाप, उस्सकी माँ, मनोज, महेश, रहीम, फ़र्ज़ीनः, रूही की दूसरी कजिन, सब गए थे सीसाइड कल…. तो अभी को तस्सल्ली हुई के अगर कल सीसाइड गए थे पिकनिक पर सब तो आज थक्के होंगे तो घर पर ज़रूर होगी रूही आराम करने के लिए.
और आखिर में अभी रीच हुआ आज रूही की आँगन में दाखिल होते हुए मैं रोड से, मुश्लाधार बारिश में….. रूही के घर जाते जाते अभी एकदम भीग गया, उसस्के सर से पाऊँ तक सब कुछ भीगा हुआ था… सर के बाल से पानी ऐसे बह रहे थे जैसे अभी एक नदी से निकला था….
रूही के घर के लाउन्ज के पास टेरेस पर खड़े होकर अभी ने दरवाज़ा खटखटाया….. बारिश इतनी तेज़ थी के एक जिव जंतु नज़र नहीं ारः था नाह कहीं किसी रास्ते पर, नाह उधर रूही की आँगन में…. वो आँगन अभी को अब बहोत बड़ा दिख रहा था और साफ़ सुथरा था… नई ईयर के मौके पर रूही ने टेरेस पर नई फ्लोर पोलिश किया हुआ था वो देख कर अभी को पता चल गया के रूही घर पर hi है क्यूंकि उसस्के इलावा उस्सकी माँ वो काम कभी नहीं करती थी सिर्फ रूही करती थी वो काम….. जितना देर अभी काढ़ा रहा दरवाज़ा खटखटाने के बाद उतना hi वो और भीगता रहा….. अभी के हाथ में एक प्लास्टिक बैग था जिस में कुछ चॉकलेट्स थे रूही के लिए, च्युइंग गम का पैकेट भी था और वो परफ्यूम भी था, सब रूही के लिए.
अभी अपने पॉकेट से अपने रुमाल निकल कर सर पांच रहा था बार बार रुमाल को पिरो कर उस में से पानी निकलते हुए….
देर लगाया अंदर से दरवाज़ा खोलने के लिए उन् लोगों ने… अभी एक्सपेक्ट कर रहा था के रूही hi दरवाज़ा खोलेगी मगर मनोज ने खोला दरवाज़े को…..
अभी ने उस्सको ग्रीट किया, हाथ मिलाया, मनोज ने पूछा
“किआ चाहिए”
तो अभी ने कहा के उसस्के पापा से मिलना है, फिर मनोज ने कहा “अंदर आओ बुलाता हूँ….”
और अभी अंदर गया तब मनोज घर के अंदर गया अपने पेरेंट्स को बुलाने के लिए…. और रूही की माँ आयी, अभी ने उस्सको ग्रीट किया, वो अभी से मुस्कुरायी फिर मनोज के पीछे घर के अंदर चली गयी… मनोज के चेहरे में बिल्कुल ख़ुशी नहीं दिखा अभी को, वो जैसे नाराज़ था अभी को अपने द्वार पर देख कर…. अभी इतना भीगा हुआ था के उस्सको उन् के घर के सोफे पर बैठना ाचा नहीं लगा वो खड़ा वेट कर रहा था तब दादा जी आये अभी से मिलने… अभी ने उन् से भी हाथ मिलाया, और दादा जी ने अभी को बैठने को कहा. मगर अभी ने कहा के वो बिल्कुल भीगा हुआ है नहीं बैठ पाएगा, दादा जी ज़िद करता रहा तो अभी ने कहा के सबको अजाने दिया जाए तब बैठेगा. दादा जी को अभी ने नए साल की शुबकामनाएं दिए और दादा जी ने भी अभी को शामे कहा. तो दादा जी ने पूछा,
“किश से मिलने आये हो?!”
अभी ने कहा,
“आप सब से!”
तो दादाजी ने हँस्ते हुए पूछा,
“या रूही के लिए आये हो हाहाहाहा!”
अभी को अच्छा लगा मगर उस्का चेहरा पता नहीं क्यों लाल हो गया उस्सको जैसे शर्म सा लगा… और अभी ने दादा जी से पूछा,
“यहीं है नाह रूही?!”
दादा जी ने हाँ में सर हिलाया और कहा,
“आते होंगे तुम से मिलने सब, मनोज बुलाने गया है नाह!”
दादा जी ने अभी से पूछा किआ जिधर वो रहता है उधर भी ऐसे hi बारिश हो रहा है, तो अभी ने बताया के पुरे देश में ऐसे hi बारिश हो रहे हैं और रास्ते भर चरों तरफ कार्स ब्रेक डाउन हैं और रास्ते पर जैसे नदी मिटटी और कीचड़ समेत चारों तरफ बह रहे हैं….
कोई नहीं ारः था अभी से मिलने, उल्टा अभी ने सोचा था रूही धडपडती हुई दौड़ कर आएगी अभी से मिलने और बहोत खुश दिखेगी, शर्माएगी अभी को अपने घर में देख कर… अभी अपने ख्यालों में हर तरह की दृष्ट बना रहा था रूही को लेकर…. उस्सने सोच लिया था के रूही को अपना गाल देगा किश करने के लिए, क्यूंकि यह एक ट्रेडिशन था नई ईयर पर वैसे किश करके विश करना… तो अभी तैयार था और रूही का वेट कर रहा था….
5 मिनट्स बीत चूका था, दादा जी और अभी बात किये जा रहे थे, अभी अब तक खड़ा था और दादा जी उस्सको बैठने के लिए कहे जा रहे थे मगर अभी कह रहा था के सब को आने का वेट करेगा तब बैठेगा….
घर के अंदर भुनभुन बातें करते हुए सुनाई दे रहा था, मतलब अंदर रूही के माता पिता, मनोज सब बात कर रहे थे…. अभी सोच रहा था के वह लोग शायद सोच रहे होंगे के अब अभी से सब सेटल कर लेना है और उस्सको अपने पेरेंट्स को साथ लेकर आने को कहेंगे इसी लिए घर के अंदर सब डीडे कर रहे थे के अभी से किआ बोलै जाए….
क्यूंकि कोई भी नहीं ारः था तो दादा जी ने आवाज़ दिया,
“अरे कहाँ हो तुम लोग घर में मेहमान आये हुए हैं इतनी देर कोई लगता है मेहमान की खातिर दारी करने के लिए? आरी ओह रूही आकर देख तो कौन आया है सुन रही हो?!”
और मनोज वापस आया….. आते hi ग़ुस्से में लाल बबूला होकर अभी से कहा
“मेरा बाप तुम से नहीं मिलना चाहता, उस्सने कहा के वो तुमको एक बार जवाब दे चूका है बार बार वही बात नहीं दोहराएगा क्यों आये हो यहाँ? हम किआ तुम्हारे रिश्तेदार है? वे अरे नॉट रिलेटेड तो यू? हमको तुमसे कोई वास्ता नहीं है. अगर मेहबूब से मिलने आये हो तो वो उस्का घर है मेहबूब यहाँ नहीं रहता. उधर जाओ. और फिर कभी भी इधर मत आना तुम हमारे रिश्तेदार नहीं हो, और सुनों खबरदार अगर मेरे दूसरे रिश्तेदार के घर गए किसी से मिलने उस शहर में या श्वेता से मिलने गया तो! और ये लो जो लास्ट के बस के फोटोज लिए थे इस्सके पैसे नहीं चाहिए मुझे ले जाओ, चलो निकलो बाहर मेरा घर खराब कर दिया, पानी भर दिया चारों तरफ – गेट आउट!!”
अभी का गाला सुख गया, एक लव्ज़ भी नहीं निकला बल्कि आँख से आंसू टपके मनोज की बातों को सुनकर…. उसस्के पेयर कांप उठे, होंठ थरथरा गए हाथ कांपने लगे उस्सको लगा के वहीँ गिर्र पड़ेगा… सिर्फ मनोज के चेहरे में देखता रहा उस्सको सुनते हुए….. इतनी ज़िल्लत लाइफ में कभी नहीं झेला था अभी ने… उस्सको लगा के उसस्के गांड में लात मार के, धक्के देकर मनोज ने घर से निकला ussko….wo तुरंत बिना कुछ कहे अपने कदम को घर के बाहर निकला…. दादा जी बिल्कुल हैरान मनोज को देख रहा था और खड़ा हुआ यह कहते,
“अरे रूही को बुलडो वो उसस्के लिए आया हुआ है नाह?”
मनोज ने ऊंचे आवाज़ में दादाजी से कहा,
“आप छुप रहिये किसी ने आप की राये नहीं मांगी है!”
तब तक अभी बाहर निकल चूका था और दादा जी को यह कहते हुए सुना,
“तो क्यों इतने दिनों तक रूही को उससे बढ़ावा देने दिया था तुम लोगों ने? अब दोनों की शादी करवा देना चाहिए!”
अभी के पाऊँ नहीं उठ रहे थे चलने के लिए, आँख से आंसू जारी थे उस बारिश में में अभी को उस आँगन से मैं रोड तक चलते हुए उस फासला को तय करने में लगा उस्सने एक घंटा लिया रूही के घर से मैं रोड तक रीच होने में… ताक़त नहीं बाकी रहा था अभी में….. मैं रोड पर आया तो रास्ता खली पड़ा था… एक भी इंसान नहीं दिख रहा था अभी बैठ गया रास्ते पर और बहोत ज़ोर से चिल्ला कर रोना शुरू kiya!!!!!itna ज़ोर से चिलाय के मीलों के फासले तक उस्सकी आवाज़ रीच हुई होगी हालां के बड़े ज़ोरों की बारिश हो रहे थे…..
अभी लाइफ में कभी उस तरह से नहीं रोया था, ठीक रूही की आँगन और मैं रोड के दरमियान बैठा हुआ था, पानी बह रहा था उसस्के निचे जैसे एक स्ट्रीम में बैठ कर रो रहा था,
“HAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAA”
“HAAAAAAAAAAAAAAAAAAA”
“HAAAAAAAAAAAAAAAAAAA”
इस तरह से चिलाते हुए रोटा गया कोई 5 मिनट्स तक….. फिल्मों में देखा होगा सब ने, मूवीज में आते हैं ऐसे सन मगर यहाँ सच में, हकीकत में वैसा हो रहा tha…magar सुनने वाला, या देखने वाला कोई नहीं था… अभी ने अपने सर को पीटा, कुछ इस तरह पीटा अपने सर को जैसे खुद को मार रहा था, खुद को किसी बात का सज़ा दे रहा था, जैसे उस से कोई गुनाह हो गयी थी और उस गुनाह के लिए अभी खुद को मारते हुए सजा दे रहा था…..
अभी के हाथ पेयर सब कांप रहे थे उस्सको समझ में नहीं ारः था के वैसा क्यों हो रहा है, वो कांप रहा था… एक बस गुज़रा कुछ तेज़ रफ़्तार से और रोड का सारा पानी कीचड़ समेत बस के गुजरने से अभी को 100 गुनाह और भिगो दिया… अभी के नए कपडे पर कीचड़ लग गए, सफ़ेद कमीज़ था, और क्रीम कलर का पंत पहना हुआ था अभी ने, मैला पानी कीचड़ के साथ उसस्के ऊपर अंदाज़ा लगाइये कैसा दिख रहा होगा उस वक़्त…. उस प्लास्टिक बैग में जो चॉकलेट्स और परफ्यूम थे वो अभी ने रोड पर वहीँ रखा हुआ था सब भीग रहे थे, प्लास्टिक बैग के अंदर पानी चला गया और वो बहने लगे थे… अभी के हाथों में जैसे ताक़त नहीं था उस प्लास्टिक बैग को पकड़ने के लिए… अगर एक पत्थर से वो बैग नहीं टकराता तो सब वहीँ चोरर देता अभी….
अभी को किसी के सहारे की ज़रुरत महसूस हुई उस वक़्त, एक दोस्त की, या कोई भी ऐसा इंसान जो उस्सको अपना सहारा देता, उस्सको वहां से उठता, उस्सको सहारा देकर बस स्टॉप तक पहुंचता… अपने दोस्तों को सोच कर रोया अभी…. नैना को सोच कर रोया और चिल्ला कर कहा के काश उस्सको कोई थोड़ा ज़हर देता उस वक़्त तो बे झिझक वो पी जाता उस ज़हर को… उसी पल को अभी को मर जाने को मैं कर रहा रहा, सोचा के एक ट्रक या बस उधर से आते दिखाई देता तो उसस्के सामने आ जाता…. मगर तब रास्ता बिल्कुल खली था, सन्नाटा था चारों तरफ बारिश के इलावा और कुछ नहीं था…. अभी ने आसमान के तरफ सर उठा कर देखा और आसमान से बात किया,
“इसी लिए आज रो रहा है तू ेय आसमान? मेरे आंसूओं को तू भी बहा रहा है, तुझे पता था मेरे साथ यह होने वाला है तो तुम ने पहले से रोना शुरू कर दिया है….. जनुअरी 5तह 1987 यह डेट अभी कभी नहीं भूलेगा… उस्सकी लाइफ की एक ऐसी तारिक़ थी यह जो उस्सको उम्र भर याद रहेगा, इस डेट को अभी ने मरने की तमन्ना की थी.
15 मिनट्स के बाद खुद को संभालते हुए अभी वहां से उठा, मूढ़ कर पीछे आँगन में नहीं देखा…. उस्सको नहीं पता था के कोई रूही या मेहबूब के घर से उस्सको देख रहा होगा या नहीं… वैसे मौसम इतना खराब था के हर घर में सब लोग पकोड़े ताल कर टीवी के सामने बैठे होंगे….
उस प्लास्टिक बैग को उठाया अभी ने उस में से सारे पानी को निकला और चॉकलेट्स को फेंक दिया मगर परफ्यूम को संभाल लिया….. किसी तरह भी रूही तक ज़रूर पहुँचाना था उस्सको वो परफ्यूम….. बस की फोटोज जो मनोज ने उससे दिया था वो बिल्कुल भीग गए थे; फिर भी वैसे hi सारे फोटोज को अभी ने उसी भीगे हुए प्लाटिक बैग में दाल दिया…
अभी ने अपने दिमाग़ में सब सोच लिया था के अब आगे उस्सको किआ करना है…..
वहां से उठते हुए, बस टॉप के पास कड़े होकर, अभी ने इतना कहा ऐसे hi हवा में,
“घर आये मेहमान का ऐसे स्वागत किया जाता है मनोज, बददुआह लगेगी मेरे टूटे हुए दिल का तुझे याद रखना, कहीं कुत्ते की मौत नसीब नाह हो जाए तुझे एक दिन इसी जगह” अभी के जुबां से ऐसे hi यह अल्फ़ाज़ निकल गया था, क्यूंकि उस्का दिल बुरी तरह से टुटा हुआ था उस वक़्त… उस्सको पता भी नहीं था के वो किआ बोल रहा है, मगर किआ पता एक दिन यह बाद दुः लग जाएगा मनोज को? हु कनौस?
अभी के ांसो बहने लगे बिना रोये यह सोच कर के रूही क्यों नहीं आयी उस से मिलने? मनोज अभी को इतना बेइज़त कर रहा था, उस्सको धित्कार रहा था और अंदर बैठी रूही सब सुन रही थी? उस्सको अभी से बहोत प्यार है इस्सके यकीन था अभी को, तो अभी खुद से पूछ रहा था कैसा प्यार था यह के मुझको रुस्वा किया जा रहा था, मुझको कुत्ते की तरह ढके देकर घर से बाहर निकला जा रहा था मगर रूही ने कुछ नहीं कहा, क्यों वो नहीं आयी अभी से मिलने, दादा जी ने कहा उस्सको आने के लिए फिर भी नहीं आयी क्यों?! और अभी को डर था के कहीं उसस्के टूटे हुए दिल की बाद दुहा कहीं रूही को भी नाह लग जाए…. अभी नहीं चाहता था के उस्सकी रूही को कोई भी तकलीफ हो मगर उस्का दिल बहोत रो रहा था के रूही ने क्यों उस्सको उस तरह से रुस्वा होने दिया!!
बड़े बेआबरू होकर हम तेरे कूचे से निकले…. खुद से कहा अभी ने… बिना आवाज़ के, बिना रोये उसस्के आँखों से दरया बह रहा था आसमान के बारिश से आंसू धूल रहे थे, बारिश और आंसू के मिलाप हो रहे थे अभी के चेहरे पर….
उस वक़्त अभी ने देखा वो दूकान खुला है जहाँ उस रात को अभी ने रूही के लिए केक्स और आइस क्रीम्स ख़रीदे थे… अभी वहां पहुंचा….. दूकान वाले के सिवा कोई भी नहीं था वहां… सिर्फ एक दरवाज़ा खुला था दूकान की, बाकी बंद थे बरसात की वजा से….. अभी ने शराब ख़रीदा और पिया 1 घंटे तक वहां बैठ कर… तब बस लिया घर वापस जाने के लिए…
इस दिन के बाद अभी ने उस्सकी गली में जाना चोरर दिया मगर नहीं एक बार गया एक बहोत HI इम्पोर्टेन्ट काम के लिए – किसी से मिला विला नहीं सिवाए उस एक इंसान से जिस से मिलने गया था उस काम के लिए
शाम के 4 बज चुके थे और अभी घर वापस आया और नैना के गले लग कर इतना रोया, इतना रोया के नैना के साथ उस्सकी माँ, और सारे भाई सब रो पड़े…..
तो बे कॉन्टिनोएड…… (3822 वर्ड्स)