अपडेट 39 क्रिसमस डे एंड आफ्टर
सुबह 6 बजे अभी की नींद टूट गयी और वो बेचैन फील कर रहा था. उस्सने अपने डायरी लिया और बीते दिनों को पढ़ने लगा जो उस्सने रूही की आँगन में गुज़ारे थे. अभी ने अपने डायरी को आज लॉक किया अपने ड्रावर में.
बाद में अभी गया अपने क्लोज के शहर और घर में सबके लिए गिफ्ट्स ख़रीदा और वापस घर आकर सबको गिफ्ट्स दिया तो नैना और अभी की माँ ने सब बताने को कहा के किआ हुआ रूही के साथ कल. अभी नहीं बताना चाहता था और अपनी डायरी को लॉक कर दिया था अपने ड्रावर में तो नैना ने नहीं पढ़ा था.
आखिर में अभी ने ने सब बताया अपनी माँ और नैना को. तो नैना ने उस्सको उस शहर में जाने को कहा जहाँ रूही के चाचा का सुपरमार्केट था.
और हाँ अभी गया….. उस शहर में अभी ने बहोत वक़्त गुज़ारे थे दोस्तों के साथ और वहां के तमान जगहों को पहचानता था इस लिए उस्सको ढूंढ़ने में बिल्कुल टाइम नहीं लगा रूही के चाचा का सुपरमार्केट को.
अंदर गया उस से मिला. वो था गणपत. अभी ने पूछा किआ वो मनोज का चाचा है, तो उस्सने हाँ कहा और दोनों ने कोई 10 मिनट तक बात किये. क्यूंकि अभी ने मनोज, महेश, रूही का नाम लेते हुए बात किया तो चाचा समझ गया के वो सभी को जानता है सो उस ने खुल कर बात किया अभी से.
अभी ने उस से पूछा के वो अकेले क्यों है, और वर्कर होने चाहिए थे तो उस्सने जवाब दिया के पब्लिक हॉलिडे है, तो आज ज़्यादा काम नहीं है, कल रात को बहोत भीड़ था तो मनोज और उस्सकी बेहेन उसस्के साथ थे रात को बारह बजे तक…..
अभी वापस घर आगया क्यूंकि वहां रूही नहीं दिखी. उस्सको जगह का पता तो चल गया अब कभी भी जा सकता है उस्सने सोच लिया था.
घर पर अभी सिर्फ रूही की यादों में खोया रहा दिन भर, उन् हसीं लम्हों को सोच रहा था जो उस्सने रूही के साथ बिठाये थे…. रूही की यादें चोरर hi नहीं रहा था उस्सको बिल्कुल. रूही की मुस्कराहट, उस्सकी अभी का जीब से चढ़ना, उस्सकी आवाज़ सब अभी को याद आरहे थे… लाख कोशिश के बाद भी उसस्के दिमाग़ से वो हट hi नहीं रहे थे…
पिछले देर महीनों तक लगातार काम करने गया था अभी, एक दिन भी रेस्ट नहीं किया था, बहोत थकान था तो दिन में बीएड पर रेस्ट कर रहा था के आँख लग गयी और 6 घंटे तक सोता रहा, और रात के 8 बजे सोकर उठा…. सपनों में रूही को देखा.
देखा के रूही उस्सको बुला रही है, मुस्कुरा रही है और कह रही के के क्यों उस्सको अकेली चोरर कर चला गया अभी. रूही फिर रोने लगी और अपनी माँ के सीने से लग कर कह रही है के अभी ने उस्सको चोरर दिया, उस से अभी को वापस बुलाने को कह रही है रट हुए….
अभी ने सोचा किआ पता सच में रूही उस्सको याद कर रही होगी और छह रही होगी के अभी वापस उस से मिलने आये….
अभी ने सोच लिया के कल फिर जाएगा वहां उस सुपरमार्केट में रूही से मिलने, या इस बार पूछने के रूही किधर है…. उस से मिलना है उससे….
अभी ने लिखा अपने डायरी में….
“ी आस्क माइसेल्फ हाउ तो फॉरगेट हेर? हाउ तो फॉरगेट ठोस डेज, ठोस मोमेंट्स? थे वर्ड्स शी स्पोक, हेर लौघ्स, हेर वौइस्, हेर टीयर्स, हेर बेहेवियर….. शी इस ा part ऑफ़ में नाउ. हाउ तो फॉरगेट ा part ऑफ़ माइसेल्फ? It’s इम्पॉसिबल. ी CAN’T. ी CAN’T. ी ऍम सफ्रिंग. माय हार्ट इस अचिन्ग, it’s टॉर्न तो पीसेज. ी वांट तो सी हेर, तो टॉक तो हेर, तो होल्ड हेर इन माय आर्म्स, तो स्मेल हेर. ी वांट तो सी हेर स्माइल, ी वांट तो सी हेर लौघ्स, तो हेअर हेर स्वीट वौइस्, तो सी हेर प्रीटी फेस… ओह गॉड हेल्प में प्लीज….”
और दूसरे दिन को अभी फिर गया उस सुपरमार्केट के तरफ…. मगर जाने से पहले अभी ने उस किताब को लिया जो रूही ने उस्सको वापस किया था कल… किताब के पन्नों को ऐसे hi पलटते हुए अभी को एक छोटा सा कागज़ का तड़का मिला जिस पर रूही ने कुछ लिखा था….
ालवयस सिंकेरे लव अरे मेमोरेबल
बीुत don’t क्नोव व्हाई फाटे डस नॉट वांट में तो बे
हअप्पी.
ीन थे एन्ड ी ऑलवेज लूज़. साइंड -R.N.
अभी के नाम पर लिखा था रूही ने. उस्सको पढ़ कर अभी बहोत खुश हुआ कुछ पल के लिए; मगर तुरंत बाद रूही को बहोत मिस करने लगा, उस से मिलने के लिए अभी मचल गया और जाने के लिए तैयार हुआ…. रेडियो पर यह गण बज रहा था जो अभी के सिचुएशन को सूट कर रहा था,
“हर सुबह बहोत याद अत है
हर शाम बहोत याद अत है
कोई नाम, कोई नाम, कोई नाम
बहोत याद अत है….”
अभी तैयार हुआ और दिल में रूही को बसाये; गया उस शहर में.
सुपरमार्केट के पास रीच हुआ तो बाहर से hi अभी ने देखा के मनोज नेवसपपेर पढ़ रहा है, और उस्का बाप भी वहां बैठा हुआ है…. मगर रूही वहां नहीं थी…. अभी अंदर नहीं गया, बाहर से hi मूढ़ गया…. और ऐसे hi शहर में घूमता रहा घंटों भर इस उम्मीद से के किआ पता रूही दिख जाए उस्सको….
कोई एक घंटे बाद अभी वापस गया सुपरमार्केट के पास और एक औरत दिखा काउंटर के उस तरफ वहां…. अभी अंदर ग़ुस्सा और उस औरत से पूछा,
“किआ आप मनोज की चची हो?!”
उस औरत ने कहा, हाँ वही मनोज की चची मतलब गणपत की वाइफ है…
तो अभी ने उस से रूही के बारे में पूछा, तो उस्सने कहा के हाँ रूही उसी के घर रह रही है मगर अभी क्यों वो सब पूछ रहा है उस औरत ने पूछा… और अभी को सब कुछ बताना पारा….
अभी ने जब सब कुछ उसस्के और रूही के बारे में बता दिया तो संदेसा भेजा रूही के लिए उस्सकी चची से, कहा के रूही से कह देना मुझे उस्सको देखने की बहोत तमन्ना थी इसी लिए इधर आया हूँ….. इतना कह hi रहा था के मनोज दाखिल हुआ अंदर श्वेता के साथ…. श्वेता उसी औरत की बेटी थी मतलब वही गणपत चाचा था जिस्सकी बेटी श्वेता है, और मनोज ने अभी को उस्सकी चची से रूही के बारे में बात करते हुए सुनकर मुस्कुराया अपनी चची के तरफ देख कर, और श्वेता ने ज़ोर से वही, “अब्भहिएईईई” कहते हुए अभी के गले में झूल गयी और उस्सकी माँ देखती रह गयी…
श्वेता की माँ ने कहा,
“श्वेता तुम कैसे जानते हो इस्को?!”
श्वेता: “मम्मी यह वहां काम करता था नाह, जहाँ रूही रहती है, तो मैं मिला था अभी से मेरा फ्रेंड है अभी”
जिस नज़र से रूही की चची देख रही थी अभी को लगा के उस्सको पसंद नहीं ारः था के अभी ने उस्सकी बेटी को लिया हुआ है तो अभी ने श्वेता को निचे उतार दिया, और उस्सको एक किसी देकर जाने लगा तो श्वेता ने कहा,
“अभी मैं नई ईयर को वहां आउंगी तब आप से मिलूंगी वहां….”
अभी के आँखें भर आये और मुड़कर श्वेता से कहा,
“बेबी अब मैं तुमको वहां नहीं दिखूंगा कभी भी!”
श्वेता बेचारी किआ समझेगी के बस का काम ख़तम हो गया तो अभी का वहां जाना भी ख़तम हुआ….
श्वेता ने पूछा,
“क्यों? नई ईयर को आप वहां नहीं आओगे रूही दी से नहीं मिलोगे आप नई ईयर को?”
अभी नाह में सर हिलाते हुए निकल गया वहां से…. और आंसू पोंछते हुए गया बस लेने, घर वापस जाने को.
अभी ने एड्रेस पूछा था रूही की चची की तो सिर्फ एक रोड का नाम दिया था उस्सने अभी को. अभी के लिए वो काफी था क्यूंकि वो उस रोड को जानता था के किधर है, और अभी ने सोच लिया था के उस रोड में जब गणपत नुनहुक को तलाश करेगा तो लोगों से पता चल जाएगा के उस्का घर किधर है और वो रूही से मिल पाएगा.
दूसरे दिन सुबह को, अभी ने सबसे पहले अपने पेनफ्रिएंड्स के खतों का रिप्लाई लिखा, पिछले देर महीने से उस्सने किसी को कोई जवाब नहीं दिया था, फ्रांस की पास्कल और स्कॉटलैंड की जेनिफर को रिप्लाई लिखा उस्सने, और लोकल के दो लड़कियों को भी रिप्लाई किया अभी ने और गया पोस्ट ऑफिस लेटर्स को पोस्ट करने.
तब अभी गया रूही की तलाश करने उस शहर की उस रोड में जो रूही की चची ने बतायी थी अभी को. पहले अभी गया सुपरमार्केट के पास और बाहर से मनोज और उसस्के चाचा को देखा अंदर, कुछ देर वेट किया के कहीं रूही इधर उधर तो नहीं है, आधे घंटे तक वेट करने के बाद जब रूही नहीं दिखी तो उस रोड में गया अभी ढूंढ़ने रूही के चाचा के घर को. जिस रोड का नाम कल उस्सकी चची ने दिया था वो रोड 5 किलोमीटर्स की लम्बाई थी, अब उस में किश तरफ वो घर था वो ढूंढ़ना आसान काम नहीं था मगर अभी ने ठान लिया था तो शुरू किया उस्सने रोड के स्टार्ट से एक एक कर के लोगों से पूछता गया के गणपत नुनहुक का घर किधर है….. किसी को पता नहीं था….. शाम के 1 बजे से शाम 6 बजे तक अभी ने पूरा रोड पैदल चल कर पूछ लिया मगर किसी को नहीं पता था के कोई अनिरुद नुनहुक नाम का रहता था उधर…. 6 घंटों तक चलते चलते अभी के पैरों में दर्द हो गए थे, वो बिल्कुल मायूस हो गया था और समझ गया के उस औरत ने झूट बोलै होगा उस से….. अब इतनी बड़ी शहर में किधर रहते होंगे वो लोग अभी को कैसे पता चलता?...
थका हारा अभी घर वापस पहुंचा बिना किसी रिजल्ट के…..
डायरी में लिखा के अपनी लाइफ में आज पहली बार अभी ने 5 घंटों तक चल कर किसी की घर को ढूंढा और घर मिला hi नहीं…. रूही की याद उस्सको सताता गया…
अगले दिन संडे था और अभी गया सुपरमार्केट में और खुद रूही के चाचा से मिला और पूछा के वो रहता किधर है, और उस्सने एक दूसरे रोड का नाम दिया!! अभी दांग रह गया…. उस्सकी वाइफ ने झूट बोलै था अभी से.
अब जिस रोड का नाम रूही के चाचा ने दिया उस रोड में अभी का एक पुराण दोस्त रहता था तो अभी गया डायरेक्ट उस दोस्त के घर और पूछा के किआ वो उस सुपरमार्केट की ओनर का घर जनता है जिस्सकी वाइफ एक नर्स है…. दोस्त ने कहा हाँ उसस्के घर से 5 घर की दूरी पर था उस्का घर, मतलब गणपत नुनहुक का घर.
अभी ने एक लम्बी सांस चोर्रा और उस दोस्त ने चल कर अभी को चोर्रा रूही के चची के घर के सामने.
अभी गया और दरवाज़ा खटखटाया. बड़ा घर था फुल कंक्रीट का और 2 मंज़िलों वाला था.
अभी दिल hi दिल में सोच रहा था के कितना अच्छा होता के रूही की चची इस वक़्त हॉस्पिटल गयी होगी, और रूही और श्वेता अकेली होगी घर में तो अभी कितना हसीं टाइम गुज़रेगा रूही के साथ, अभी ने सोच लिया के आज तो मौका नहीं मिस करेगा वो रूही को बीएड पर ज़रूर लेयतायेगा तब कोई उस्सको रूही के साथ शादी करने से नहीं रोक पाएगा…. तरह तरह के ख्याल आरहे थे अभी के दिमाग़ में… उस्सने यह भी सोचा के रूही को अगर उस्सने प्रेग्नेंट कर दिया तो मजबूरन उसस्के पेरेंट्स को एक्सेप्ट करना पड़ेगा दोनों के शादी कराने के लिए..
अभी सोचने लगा के जिस रात को वो रूही के घर ठहरा था और रूही उसस्के साथ सेक्स करना चाहती थी तो उसी रात को अभी को रूही को प्रेग्नेंट कर देना चाहिए था, तो आज कोई दोनों को अलग करने का सोचता भी नहीं…. अभी पचता रहा था के क्यों उस्सने उस रात को कुछ नहीं किया था रूही के साथ..
तीन बार दरवाज़ा खटखटाने पर कोई नहीं आया खोलने तो अभी एक दो कदम चल कर घर के दूसरी तरफ देखने लगा के अभी ने किसी को घर के अंदर चलते हुए देखा, तो वो फिर गया दरवाज़े के पास और खटखटाया, तो रूही की चची बड़ी हैरानी से अभी को देखते हुए दरवाज़ा को अनलॉक किया और कहा,
“जी? आप मेरे घर तक आगये? आप को कैसे पता चला मैं यहाँ रहती हूँ?”
वो अभी को अजीब नज़रों से देख रही थी, उस्सको बिल्कुल पसंद नहीं था के अभी उसस्के यहाँ आ पहुंचा है.
अभी बाहर hi खड़ा था और अभी ने बोलते हुए रो दिए तब शायद उस औरत का दिल पिघला और अभी को अंदर आने को कहा….
अंदर जाते hi अभी ने श्वेता को स्टैर्स से निचे उतारते हुए देखा और वो जल्दी से आकर अभी के गले में झूल गयी फिरसे, अभी के गालों पर किसी करते हुए…. श्वेता की माँ ने अभी को बैठने को कहा, अभी सोफे पर बैठा और श्वेता उसस्के गॉड में बैठी.
रूही की चची ने अब मुस्कुराते हुए कहा,
“श्वेता इतना घुल मिल गयी है आप से कुछ दिनों को वहां रहने गयी तो? बहोत प्यार करती है आप से, जैसे आप की कोई रिश्तेदार या बेटी है…. मुझे ताहजुब है क्यूंकि यह किसी से ऐसे नहीं घुलती मिलती है बहोत रिज़र्व है यह बची किआ जादू किया आप ने मेरी बेटी पर?!”
अभी ने सीधा सवाल किया,
“आप रूही को बुलाइये नाह प्लीज!”
चची ने कहा,
“वो तो कल hi घर वापस गयी, आप एक दिन लेट आये हो.!”
अभी ने एक हाथ से अपने सर को थामा और एक लम्बी सांस बाहर चोर्रा…. और उस्सने श्वेता से पूछा,
“चली गयी रूही सच?!”
श्वेता ने कुछ ऐसा एक्सप्रेशन दिया जिस से अभी को लगा के रूही वहीँ थी किसी कमरे में और चची ने उस्सको बाहर आने से मन किया. जब अभी ने श्वेता से पूछा के किआ रूही सच में चली गयी तो श्वेता ने नाह हाँ कहा न नाह, उस्सने अभी को देखा तुरंत बाद अपनी माँ के चेहरे में देखा…. इस लिए अभी को थोड़ा यकीन सा था के रूही वहीँ है अंदर किसी कमरे में.
मगर अभी की जुरअत नहीं थी के वो किसी अजनबी के घर में आया है तो अब उसस्के घर के कमरों को खोल कर चेक करे के रूही वहां है या नहीं, ऐसा तो नहीं कर सकता था नाह अभी.
और रूही की चची ने आराम से पूछा,
“ाचा बताओ अभी….. एर्रर्र अभी नाम है नाह आप का?”
अभी: “जी अभिनव नाम है सब अभी hi बुलाते हैं, रूही भी, श्वेता भी!”
चची मुस्कुरायी, और कहा,
“Okay ठीक है अभी आप मुझे सब कुछ डिटेल में बताइये, शायद मैं आप की कोई मदद कर सकूँ.”
अभी ने बोलना शुरू किया और बोलते बोलते रोने लगा, खुद के आंसुओं को रोकना नामंकन था…. चची जी पिघल गयी और अपनी तरफ से जो बताना था वो बताने लगी, मगर बिच में श्वेता ने अभी के आंसू को पोंछा और पूछा के क्यों रो रहा है तो अभी ने श्वेता को सीने से लगा कर कहा के जब वो रूही के यहाँ जाएगी नई ईयर को तो रूही को बताये के वो श्वेता के घर आया था उस्सको ढूढ़ने और रूही को बताना के अभी उसस्के घर रूही के लिए रो रहा था.
तब चची ने कहा, के श्वेता सच में सब कुछ बक देगी रूही के घर जा कर तो अभी ने कहा ाचा hi होगा अगर श्वेता ने वहां जाकर सब कुछ बता दिया तो, अभी वही चाहता था.
तब चची जी ने अभी को बताया के वो फ्रांस वाला लड़के की बात सच है मगर रूही ने उस्सको कभी देखा hi नहीं और मिली भी नहीं कभी उस से, उस लड़के ने रूही को अपनी नानी के यहाँ एक बार देखा था जब वेकेशन के लिए अपने घर आया था एक महीने के लिए, फिर वापस फ्रांस जाने के बाद उस लड़के ने एप घर खबर भेजा के रूही के नानी के घर जाकर बता दें के रूही को उसस्के लिए रखें क्यूंकि जब वो वापस आएगा तो रूही का हाथ मांगने जाएगा…. बुसस इतना hi हुआ था कुछ ज़्यादा नहीं…
तो अभी ने कहा के शायद इसी लिए जब रूही का बाप आया तो सब उसस्के नानी के घर गए थे उस लड़के के बारे में पूछने के किआ वो सीरियस है या नहीं क्यूंकि यहाँ अभी उस्का हाथ मांग रहा है और अगर उस लड़के ने हाँ कहा होगा तो रूही को फ्रांस जाना बेहतर लगा होगा तो उस्का इंतज़ार करना ज़्यादा पसंद किया होगा किआ?
चची ने कहा के नहीं सच में नानी बीमार है इसी लिए उस्सको सब देखने गए थे कहीं बुढ़िया टपक नाह जाए!
चची ने पूछा,
“तो जो कुछ आप ने मुझे बताया इस से यह समझ रही हूँ के वह लोग समझते हो के आप ग़रीब हो, और रूही आप एक साथ खुश नहीं रह पाएगी….?”
अभी ने जवाब दिया,
“मैं ग़रीब फॅमिली से हूँ मगर हम उतना ग़रीब भी नहीं के एक शादी का खर्चा नाह उठा सके या एक दुल्हन को अफ़्फोर्ड नाह कर सके…. रूही की माँ किआ समझती है के मैं भिकारी हूँ किआ? मेरा घर कंक्रीट का है उस्का घर तीन और लकड़ी का तो किश की हैसियत कितनी हुई? मेरे पापा के ज़मीन हैं जिस पर गन्ने के खेत हैं जब वो बटवारा करेगा तो उस में से मेरा हिस्सा होगा जहाँ अपना खुद का घर बना पाउँगा एक दिन… तो मैं ग़रीब कैसे हुआ?”
चची ने तब कहा,
“अभी तो मैं आप को एडवाइस करती हूँ के आप जाओ वहां, जो कुछ आप ने मुझे बताया जाकर रूही के पापा को बताओ. हो सकता है के वो समझ रहे हैं के आप रूही को खुश नहीं रख पाओगे, जाकर बताओ के आप के पापा के खेत हैं, ज़मीन हैं आप को हिस्सा मिलेगा, उनको ख़ुशी होगी, क्यूंकि आप के पास तो ज़मीन हैं उनके पास तो कुछ भी नहीं अपने बेटे बेटियों को देने के लिए तो आप उन् से बहोत ज़्यादा बेहतर हुए… और आप से एक बात कहती हूँ आप वहां किसी से कहना मत, रूही की माँ एक बहोत लालची औरत है – उस्सने हमेशा पैसा चाहा है ज़्यादा इसी लिए अपने पति को स. अरबिया जाकर पैसा कमाने को कहा… शायद इसी लिए रूही को फ्रांस भेजना चाहती है उसस्के लिए सब आराम धनवालों के पास होते हैं उस्सकी बुसस चले तो अपनी बेटी के लिए राजा महाराजाओं के रिश्ते तलाश करे वो… रूही अगर आप से प्यार करती है तो सिर्फ उस्सकी माँ है जो आप को रूही से अलग कर रही है….”
अभी खामोश सुनतारहा और सोचा यह दो sister-in-laws के झमेले में कहाँ फंस गया वो, समझ गया के दोनों सिस्टर इन लॉज़ के नहीं बनते होंगे. फिर चची जी ने कहा,
“अभी इस से पहले के रूही के पापा वापस अरबिया चला जाए आप जा कर उस से मिल लो, वो जनुअरी में वापस जा रहे हैं.”
अभी ने कहा,
“हाँ लास्ट डे को खुद रूही के पापा और उस्सकी माँ ने मुझसे कहा के वो रूही को अपने साथ लेकर S.Arabia जा रहे हैं?!”
चची: “किश ने आप से यह बात पहले कहा? पक्का रूही की माँ ने कहा होगा हाँ या नाह?!”
अभी: “हाँ”
चची: “और कितने देर बाद एहि बात रूही के पापा ने आप से कहा?”
अभी: “तक़रीबन 3 घंटे बाद”
चची: “देखा नाह? समझ गए होंगे आप के रूही की माँ सब कण्ट्रोल करती है उस घर में, सबको वो चलाती है, लालची औरत है, रूही के पापा एक बहोत ाचा इंसान है, इतना कूल एंड खामोश टाइप आदमी है के उस्सकी वाइफ उस्सको कण्ट्रोल करती है, उस घर में हस्बैंड रूही की माँ है और वाइफ है रूही के पिता!”
Abhi:”wo तो मुझे जिस दिन रूही के पापा आये तभी मुझे दिख गया था, क्यूंकि वो हेपेक हस्बैंड लगा मुझे क्यूंकि वो वही कहता और करता जो रूही की माँ कहती थी.”
Chachi:”To समझ गए आप के रूही कभी भी अपने पिता के साथ नहीं जा रही है, एक बात बताती हूँ, के रूही के पापा ने बहोत पहले कह दिया था के उस्सकी कोई भी बेटी कभी भी देश के बाहर नहीं जायेंगे, उस्सको बिल्कुल नहीं पसंद यह, तो यह फ्रांस वाली बात भी मैं जानती हूँ नहीं बढ़ने वाली, इस लिए आप का चांस बहोत ज़्यादा है क्यूंकि आप यहीं का हो और उसस्के पिता को पसंद है के उसस्के बेटियां यहीं रहे ताके जब भी वह चाहे आपने माँ बाप से मिल सके.”
अभी को यह सुनकर बहोत अच्छा लगा के उस्का चान्सेस बेहतर और ज़्यादा है उस फ्रांस वाले अमित से!
चची ने फिर कहा,
“अभी आप मिलो रूही के माँ बाप से और कहो के आप के घर देखने आये, सगाई या रिश्ते के लिए नाह सही केहदो के ऐसे hi एक बार आये आप के घर तब वापस अपने घर जा कर डीडे करें के आप उस्सकी बेटी के लिए सही हो या नहीं!”
अभी ने कहा उस्सको वही करना होगा अब.
थैंक्स किया चची को और श्वेता को बाहों में भरके किसी किये अभी ने और bye किया दोनों को अभी.
जब अभी निकलने लगा तो चची ने लास्ट लाइन कहा अपनी,
“आप एक सच्चे लवर हो अभी, मैं ने आप को ग़लत एड्रेस दिया था फिर भी आप ने सही एड्रेस का पता लगा लिया और चले आये रूही को यहाँ धुनते हुए, यह जान कर मुझे पूरा यकीन हो गया के आप रूही को कितना प्यार करते हो और वो आप के साथ जीवन भर खुश रहेगी – यह बात मैं खुद रूही के पापा से कहूँगी, उस्सकी माँ को भी बताउंगी यह बात के आप सही लड़का हो रूही के लिए, ी विल सपोर्ट यू अभी – अगर आज रूही नहीं गयी होती तो मैं आप दोनों को मिला देती आज hi. मैं रूही से भी बात करुँगी अभी don’t वोर्री. एंड ी रिग्रेट के मैं ने आप को उस दिन ग़लत एड्रेस दिया दर अस्सल वो मेरी माँ की एड्रेस वहां मैं रहती थी शादी से पहले, अगर उस दिन सही एड्रेस दिया होता तो फ्राइडे को आप रूही से यहीं मिल पाते…. वैरी सॉरी अभी बूत ी ऍम विथ यू.”
रूही की चची से मिलके और तमाम बातों पर ग़ौर करके अभी को बहोत अच्छा लगा और उस्सको एक उम्मीद की किरण फिर नज़र आया, और इस बार बहोत स्ट्रांग फीलिंग हुआ अभी को के इस बार सब ठीक हो जाएगा उसस्के और रूही के बीच.
क्यूंकि अभी ने लास्ट लेटर में और ज़ुबानी भी कह दिया था रूही से के वो उस्सको 31सत दिसंबर से पहले एक और खत पोस्ट करेगा, तो अब सोच लिया के उसी लेटर में रूही को यह सब बताएगा के वो उसस्के घर आएगा उसस्के पापा और उस से मिलने.
तो बे कॉन्टिनोएड…. (3812 वर्ड्स)