- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 94,206
अपडेट 43 वर्किंग ात ानोथेर प्लेस
अभी ने अब रोना बांध कर दिया था, लगता था उसस्के सारे आंसू अब सुख गए थे.
वो कुछ दिन बाद रॉयल सिनेमा गया एक मूवी देकने, और उस सुपरमार्केट में महेश को देखा, महेश ने भी अभी को देखा मगर एक दूसरे से किसी ने बात नहीं किये.
अभी ने अब अपने पर्सनल डायरी में लिखा,
“माय आईज दो नॉट क्राई नाउ बूत माय हार्ट वीप्स, एंड व्हेन थे हार्ट वीप्स नॉट टीयर्स के आउट बूत ओनली ब्लड. माय हार्ट ब्लीड्स एंड ी ऍम बेअरिंग आईटी. आईटी इस वैरी हार्ड, आईटी एचएस, आईटी पाइनस, ी सुफ्फेर, बूत ी गोत तो बेयर. बूत नाउ ी दो नॉट क्राई, लेट थे हार्ट कीप क्राइंग इनसाइड, no ओने विल सी तहत.”
*************************************************************
अगले दिन अभी काम करने गया और वो काम फिनिश किया और कल से उस्सको उस जगह काम पर जाना था जो रूही के घर से 10 कंस की दूरी पर था…. जब अभी रूही की आँगन में काम कर रहा था तो यह वाला बस ओनर आया था सईद और अभी को काम करते हुए देखने और उस ने अपने बस को रिपेयर करने के लिए कहा था…. मतलब कल से अभी को बस में रूही के आँगन के सामने से गुज़ारना होगा अगले 1 महीने के लिए क्यूंकि वहां का काम एक महीने के लिए था…
अभी को बिल्कुल मैं नहीं था उस तरफ काम करने जाने को और सईद से कहा भी मगर सईद ने कहा के उस तरफ देहना भी नहीं बुसस के दूसरे साइड में बैठना…. काम तो करना है, तुम रूही के आँगन में थोड़ा hi जा रहे हो!
और सुबह को जब अभी वहां से गुज़रा बस में तो किआ आलम था, किआ फीलिंग थी, वो बयां करना बहोत मुश्किल है… अभी को तुरंत बुसस से उतरने का मैं किया…. उसी बस स्टॉप पर हर सुबह 6 बजे आजाता था नाह? तो उस्सको वो नोस्टालजिक फील हुआ… उस्सको लगा के उस्सको वहीँ उतरना चाहिए था, और रूही की आँगन में hi जाना चाहिए था…. शुक्र है के सिर्फ 2 मीन्स के लिए बस उस बस स्टॉप पर रुका कोई उतरा फिर बस आगे बढ़ने लगा….
वो जो सुबह का फ़िज़ा होता था जब हर सुबह को अभी आया करता था सुबह सवेरे रूही के खिड़की पर उस से बात करने के लिए… वही अट्मॉस्फेरे अब भी था क्यूंकि उसी टाइम को अभी गुज़रा था आज फिर बस से…. उस्सने एक नज़र रूही की आंगन में देखा भी जब बस गुज़रा तो मगर सिर्फ 2 सांडस के लिए वो हुआ, और सिर्फ आँगन और रूही का घर नज़र आया अभी को, और बगीचे में फूल दिखे…. अभी ने सोचा अब पूरा एक महीना वैसे गुज़ारना है उस्सको तो उस्सको उम्मीद था के एक दिन रूही ज़रूर दिखेगा उस्सको उस आँगन में या गार्डन में या अपनी किचन की स्टैर्स पर……
उस्सकी गलियों में जान चोरर दिया अभी ने मगर अब मजबूरन एक महीने के लिए काम के सिलसिले में जाना पर गया अभी को…. फिर इस्सके बाद बिल्कुल गया hi नहीं उस तरफ सालों तक….
मगर इस एक महीने में काफी कुछ दिलचस्प जानकारी मिलने वाला था अभी को रूही से रिलेटेड…. क्यूंकि जहाँ अब अभी काम करने जा रहा था वहां भी जॉर्ज और सुनील आएंगे अपने काम करने को उसी बस में!!
उस जगह काम करने के लिए हर सुबह और शाम को बस रूही की मैं रोड से गुज़रता, और हर दिन दो बार अभी उसस्के घर के तरफ देखता. हालां के कुछ अब एक्सपेक्ट नहीं करता था मगर उस्सको यकीन था के किसी दिन तो रूही की झलक ज़रूर दिखेगा उससे. शाम को हमेशा रूही और उस्सकी माँ किचन के स्टैर्स पर हुआ करते थे यह पिछले ढाई महीनों में अभी ने देख तो लिया था इस लिए उस्सको पता था या तो कभी शाम को घर लौटते वक़्त या सुबह को रूही को बाद में ज़रूर देखेगा….
और हुआ वही इन 30 दिनों में 5 बार अभी ने रूही को स्टैर्स पर देखा, सिर्फ कुछ पल के लिए और 2 दिन सुबह को काम पर जाते वक़्त बाघ में फूल तोड़ते हुए देखा अभी ने… उसस्के दिल पर किआ गुज़रा, कैसा फील हुआ उस्सको किआ बयां करने लायक है? नहीं. बिल्कुल भी नहीं. फिर भी जान लो के अभी को तुरंत बस से उतर कर रूही के पास जाने को मैं किया उस से सिर्फ एक सवाल करने का मैं किया के क्यों उस दिन वो नहीं निकली जब मनोज उस्सको धित्कार रहा था…..
पहली बार जब सुबह को अभी ने रूही को देखा तो खुद से कहा के उस्सको बस से उतर कर जाना चाहिए था वो सवाल पूछने, मगर नहीं गया तो सोचा फिर कभी सुबह को वो दिखी तब अभी ज़रूर उतरेगा बस से और जाएगा उस से पूछने.
और जिस दिन दूसरी बार उस्सने रूही को देखा गार्डन में तो अभी बस से उतरा, चल कर उस्सकी आँगन तक गया, रूही को देखा, मगर तुरंत वापस बस स्टॉप पर लौट गया….. उससे हिम्मत नहीं हुई उस आँगन में अपने कदम रखने की…..
और एक दिन सुबह अभी काम पर जाते वक़्त बस के अंदर से मनोज को देखा मैं रोड के किनारे खड़े आँगन के पास, और मनोज ने बस के अंदर देखा और उस्सकी नज़र अभी पर पड़ा, बस आगे के बस स्टॉप पर रुका और शायद मनोज ने सोचा के अभी फिर वहां ारः है, तो वो वेट करने लगा देखने को के कौन बस से उतर रहा है, और बस के अंदर से मुड़कर अभी भी मनोज को देख रहा था, अभी समझ गया के मनोज एहि सोच रहा होगा के वो वहीँ ारः है फिर से उस्सकी बेहेन से मिलने के लिए, मनोज का चेहरा उस वक़्त थोड़ा फिकरमंद लगने लगा था….. मगर बस रीस्टार्ट हुआ और जाने लगा आगे बढ़ते हुए, तो मनोज को पता चला होगा के अभी कहीं उस तरफ काम कर रहा होगा….
अब अभी ने दिल hi दिल में सोचा किआ पता मनोज को उस दिन के व्योहार के लिए अफ़सोस है और वो चाहता था के अभी फिर ए और वो अभी से माफ़ी मांगे और उसकसो रूही से मिला दे…. किआ पता के मनोज पर सब ने मिलकर चिलाय होगा, किआ पता के रूही ने उस से बात करना चोरर दिया होगा उस दिन की व्योहार की वजह से और तब मनोज ने रूही से कहा होगा के ठीक है अभी इस बार आएगा तो उस से माफ़ी मांग लूंगा और तुम मिल लेना उस से….. अभी ऑपटिमिस्ट आदमी था तो हमेशा भला hi सोचता था, पॉजिटिव hi सोचता था इस लिए उसस्के लिए सब सही हो सकता था….
और उन् 30 दिनों में जब अभी ने उस तरफ काम किया टोटल में में 7 बार रूही दिखी और एक बार फ़र्ज़ीनः को भी देखा रूही की किचन से निकलते हुए मगर सब से ज्यादा एक दिन रूही को तब देखा जब शाम को जाते वक़्त एक ट्रक रुका हुआ था बस के आगे ट्रैफिक ब्लॉक थे और बस ठीक रूही के आँगन के सामने रुका था कोई 4 मीन्स तक….. अभी सीधा रूही के किचन की स्टैर्स को देख रहा था अपने चेहरे पर रुमाल रख कर और रूही की माँ दिखी थी स्टैर्स पर, फिर महेश दिखा था और फिर रूही दिखी थी स्टैर्स पर और वो सीधा बस में hi देख रही थी… बस से उस्सकी स्टैर्स तक का फासला कोई 12 मेट्रेस का होगा…. रूही उदास कढ़ी देखती रही अभी के तरफ, मगर पता नहीं रूही ने अभी को बस के अंदर पहचान लिया था या नहीं…. जिस निगाह से रूही देख रही थी लगता थार रो पड़ेगी, अभी ने अपने चेहरे को रुमाल से धानका हुआ था, उसस्के खुद के आँखें भर आये रूही को देख कर और क्यूंकि 4 मीन्स तक मौका मिला एक दूसरे को देखने के लिए, तो अभी के मौके का फायदा उठाते हुए उस्सको देखता गया, अब रूही ने शायद अभी बाल से, उसस्के पेशानी से, उसस्के रंग से अभी को पहचान लिया था, इसी लिए कड़ी देखती रही जब तक बस आगे नहीं बढ़ा… रूही स्टैर्स पर खड़े होकर अपने काँधे और सर को दरवाज़े से टिका दिया था बस में देखते हुए…. और जैसे उस्सकी आदत थी जब बस जाने लगा तो रूही ने आसमान को देखा और… अभी को यकीन था के उसस्के बाद उस्सकी आँखें भर आये होंगे क्यूंकि जब भी वो वैसा करती थी उस्सकी आँखें भर आते थे….. पता नहीं क्यों वो वैसा करती थी…. सर ऊपर उठाकर आसमान को देखती और सर वापस झुकाती तो उस्सकी आँखें भरे होते…. पिछले ढाई महीनों में अभी ने रूही को वैसा करते 20/25 बार देखा होगा…. अभी ने जाते हुए बस में सोचा के शायद अब रूही इस वक़्त उससे देख कर उन् दिनों को याद करने लगी थी, और हो सकता है रूही प्रे कर रही होगी के काश अभी बस से उतर कर वहां aajaye…hakikat में अभी का मैं वही चाहता था, उस्सको तुरंत बस से उतर कर भाग कर वहां जा कर रूही को अपने बाहों में जकरने का मान कर रहा था….
अगर उस दिन मनोज ने उस तरह से अभी को नहीं निकला होता, ात लीस्ट अचे से आराम से बात करके उस्सको वापस जाने को कहा होता या एक दोस्ती बनाये रखने को कहा होता तो आज अभी ज़रूर रूही से अस ा फ्रेंड तो मिलने जाता!!
ये सब सोचते हुए अभी उस दिन रूही की याद में घर पहुंचा और फिर से उस्सकी याद में पीने गया….
*********************************************************************
काम में जिस दिन सुनील से मिला अभी तो अभी उस से बात नहीं कर पाया, रो दिया अभी ने उससे देखते hi… और एहि दिन था जब सुनील ने अभी को बताया के उस दिन रूही की माँ ने सुनील से किआ कहा था और उस दिन सुनील उस्सको नहीं बता पाया था क्यूंकि मेहबूब वहीँ था तो सुनील नहीं चाहता था के उस वक़्त अभी और मेहबूब में लड़ाई हो. सुनील को पता था के अभी हॉट टेम्पर्ड है और वो बर्दाश्त नहीं कर पाटा और उसी वक़्त वो मेहबूब से लड़ लेता…. मगर अब सब बताते वक़्त सुनील ने कहा,
“मुझे उसी वक़्त तुमको शायद बता देना चाहिए था, और सब उसी वक़्त सामने आजाता तो शायद आज तुहि तेरी होती, तू शोर मचता, ग़ुस्सा करता मेहबूब से लड़ता मगर तब रूही और उस्सकी माँ को सब पता चलता तो शायद तब रूही तुमसे और खुश होती के तुम उस्सको पाने के लिए लड़ बैठे थे….”
सुनील ने बताया के उस दिन रूही की माँ ने उस से कहा था के मेहबूब ने उस्सको कहा था के अभी रूही के लिए ठीक लड़का नहीं है, अभी काम नहीं करता बेकार है, अभी सिर्फ सईद के कहने पर काम करने आया है और यहाँ सिर्फ रूही की वजह से रेगुलरली काम पर ारः है, वार्ना जहाँ भी काम करता है हफ्ते में दो दिन काम करता बाकी के दिन मौज मस्ती करता है, ऊपर से ग़रीब है, बहोत ग़रीब है, रूही को वो खुश नहीं रख पाएगा, रूही उसस्के घर में कभी खुश नहीं रहेगा उस्सकी दो बहनें हैं और 4 भाई, घर छोटा है कहाँ रहेगी रूही एक कमरे में 4 भाइयों और दो बहनों के बीच? ढंग का काम hi नहीं तो रूही का किआ हाल होगा उस घर में…..
और सुनील ने यह भी बताया के रूही के सामने यह सब कुछ कहा था और रूही से भी कहा था के खबरदार उस से ज़्यादा बात किया या उस्सको बढ़ावा दिया तो…. अभी से दूर रहने को आर्डर दिया था मेहबूब ने.
अभी ने सब सुनते हुए सुनील से पूछा,
“भाई इतना बता सकते हो के यह हुआ कब था? कब मेहबूब ने यह सब कहा था रूही और उस्सकी माँ से? उस्सकी नानी के घर जाने से पहले या बाद में?”
सुनील: “यह तो एक्साक्ट्ली नहीं पता भाई, मगर एहि सब कहा था उस दिन उसकसी माँ ने मुझसे जिस दिन रूही तेरे गले मिलकर रो रही थी जब तेरे ऊँगली में दवा लगा रही थी”
अभी: “यार यह सब बातें क्यों मेहबूब ने कहा था रूही और उस्सकी माँ से? यह सब तो बिल्कुल झूट है यार!”
सुनील: “अब सुन अभी और एक बात है जो मुझे कहने से डारर लग रहा है, पहले मुझे प्रॉमिस कर के तू छुप रहेगा और किसी को कुछ नहीं बताएगा और नाह कुछ कहेगा… बिल्कुल एक इंटेलीजेंट आदमी की तरह बात सुन और बुसस ऐसा बेहवे करना के तुझे वो बात बिल्कुल पता hi नहीं….”
अभी ने प्रॉमिस किया के छुप रहेगा और बुसस ऐसा करेगा के उस्सको कुछ पता hi नहीं, तब सुनील ने कहा,
“अभी यार, सब तेरे सईद जी का किया कराया है…. एक दिन सईद और उस्सकी माँ में बात हुई थी. रूही की माँ ने सईद से पूछा था के तू कैसा लड़का है इस लिए के उस्सकी बेटी तुझसे प्यार करने लगी है…. शुरू में सईद ने कहा तू ठीक लड़का है मगर बात करते हुए सईद ने कहा के तू काम नहीं करता, भागता रहता है काम से सिर्फ यहाँ रूही की वजह से हर रोज़ काम पर अत है और तेरा घर छोटा है, तेरे कितने भाई बेहेन हैं और रूही को उतने सारे लोगों के साथ तेरे घर में रहना पड़ेगा…. मतलब सईद ने रूही की माँ को तेरे घर में बेटी देने से डिस्कुरागे किया था, और एहि सब बातें सईद ने मेहबूब को भी बताया था… और दोनों मेहबूब और सईद ने मिलकर तेरा पत्ता कटा है भाई!”
अभी: “यार मैं हर रोज़ वहीँ रहता था कब उन् लोगों ने इतने सारे बातें कर लिए थे रूही की माँ के साथ यार?!
सुनील: “जब तू लंच टाइम में रूही के साथ हुआ करता था घर के पीछे तब तीनों उधर आपस में बात किया करते थे अभी, वो मैं ने भी देखा हुआ है!! उन् दिनों मैं समझ रहा था के सब एहि बात करते थे के तू और रूही छुप छुप कर मिलते हो ेट्स….”
अभी रोने लगा यह सब सुनकर और आज अभी को सुनील का कांधा मिला रोने के लिए….
बाद में सुनील ने कहा,
“मुझे पता चला के तू गया था वहां और मनोज ने तुझे वापस भेजा, सब बताया मुझे उस्सकी माँ ने यार बहोत अफ़सोस हुआ मुझे…”
अभी: “उस्सकी माँ ने तुझसे उस दिन के बारे में और किआ कहा सुनील मुझको सब सच सच बता प्लीज, मेरी रूही कहाँ थी वो क्यों नहीं आयी थी यार?”
सुनील: “भाई डिटेल नहीं दिया उस्सने, बुसस कहा के तू आया था और मनोज ने तुझसे बुरी तरह बात किये और तू बिना कुछ बोले चला गया… कहा के सब लोग नाराज़ इस लिए थे तुझसे के तू उस्सकी चची के घर गया था बात करने क्यूंकि वो लोग उस चची को बिल्कुल पसंद नहीं करते, उस चची ने पता नहीं किआ आग लगाया था के रूही की माँ, बाप और मनोज भड़के हुए थे, इतना पता चला के उस रोज़ रूही बहोत रो रही थी अउ उस्सकी माँ ने उस्सको तुझसे मिलने को मन किया था और उसस्के पिता ने भी, इसी लिए पिता तुझसे मिलने नहीं आया था क्यूंकि तू उसस्के भाई के घर गया था….”
अभी: “कमाल है यार खुद अपनी बेटी को उस चची के घर रहने को भेजती है और उस्सको पसंद नहीं करती? रूही की माँ ने खुद मुझे बताया था के रूही उसस्के घर रहने गयी है जैसे मुझे रूही से मिलने का इशारा कर रही थी लास्ट डे को…. खुद मनोज बेकार है अपने उसी चाचा के सुपरमार्केट में काम करता है और उस्सको पसंद नहीं करते वह लोग?!”
सुनील: “अभी यार होता है नाह फॅमिली में, लोग एक दूसरे के तर्रकी से जलते हैं तो वो शहर वाला चाचा और चची वेल ऑफ हैं तो इन् लोगों का जलता होगा ख़ास कर रूही की माँ की….”
अभी: “भाई किआ आगे कुछ हो सकता है? तू मेरे लिए कुछ कर सकता है?”
सुनील: “अभी मेरी बात मान तो तू बिल्कुल भूल जा रूही को, निकाल फेंक अपने दिल से उस्सको, तुझे बहोत साड़ी लड़कियां मिल जाएंगे यार!”
अभी: “भूल तो नहीं पाउँगा भाई, प्यार भी करता रहूँगा उम्र भर…. मिलना लिखा है किस्मत में तो मिलेगी…. वार्ना ऐसे hi काट लेंगे ज़िन्दगी को यार कौन सी बड़ी बात है….”
सुनील: “हाँ 4तह को मैं भी गया था पिकनिक सब के साथ रूही भी थी और रूही से पूछा था मैं ने किआ तुझसे सच में प्यार करती है, हाँ कहा था उस्सने शर्माते हुए और कहा था के तुमने उस से लिखा था के तू,3,4, या 5 को उसस्के घर आने वाला है, और उस्सको फ़िक्र थी के कहीं तो 4 को नाह जाए वहां क्यूंकि सब से साइड पर थे… और रूही ने तेरे बारे में काफी बातें किये थे जॉर्ज के साथ, मुझे और जॉर्ज को पता था के तुम और सईद यहाँ इस बस में काम करने आने वाले हो तो मैं ने जॉर्ज से कहा के तू जब यहाँ उस से मिलेगा तब वो तुझे बताये के रूही ने किआ कहा उस्सको तेरे बारे में, तो कल या परसों जॉर्ज इस बस की इंजन को चेक करने आएगा तो वो तुझे बताएगा…..”
अभी: “जॉर्ज से किआ बात किया रूही ने मेरे बारे में? और क्यों?”
सुनील: “अरे वो सब देखती थी नाह के तुम किश किश के दोस्त हो? तो रूही को ज़रूर पता था के तुम जॉर्ज का ाचा दोस्त हो इसी लिए उस्सने उसस्के साथ तेरे बारे में बात किया शायद कोई मैसेज भी दिया है जॉर्ज को तुझे देने के लिए!!”
अभी को ख़ुशी भी हुई ग़म भी यह जान कर के रूही ने कोई मैसेज भेजा है जॉर्ज के साथ, मगर it’s तू लेट कहा अभी ने….. अगर मैसेज 5 तारिक़ से पहले मिलता तो कोई बात होती अब तो बहोत देर हो चूका है….
****************************************************************
जॉर्ज मिला दो दिन बाद तो अभी ने उस से बात किये.
जॉर्ज ने कहा,
“रूही को पता नहीं कैसे पता था के तुम और हम दोस्त हैं, मैं खुद केरान हुआ जब पिकनिक वाले दिन को वो मेरे पास आयी और पूछा के किआ मुझे पता है के अभी कहाँ रहता है….”
अभी हैरान हुआ और जॉर्ज से पूछा,
“मगर क्यों मेरा पता पूछा तुमसे जॉर्ज?”
जॉर्ज: “अरे पता नहीं पूछा, उस्सने मुझसे कहा के तुम ने उस्सको कहा था के 5तह तारिक़ को तू वहां आने वाला था तो उस्सने मुझसे कहा के तुम को बोल दूँ के 5तह को नहीं आने को वो बाद में बताएगी के किश दिन को आना!”
अभी: “व्हाट? 5तह को नहीं आने को कहा? अरे यार तो तू ने मुझे कांटेक्ट क्यों नहीं किया किसी तरह से भी यार? मुझको बता देते नाह यार किसी तरह से भी जॉर्ज?!”
जॉर्ज: “भाई 4तह तारिक़ को देर साम को हम घर लौटे पिकनिक से… मुझे इस लिए चलने को कहा था के कहीं बस की इंजन में कोई प्रॉब्लम हो तो मैं बना सकूँ….. अब रात को कैसे मैं इधर से तेरे पास अत? मैं ने सोचा के 5तह को सुबह एक दोस्त की कार लेकर तेरे घर आकर तुझे बताऊंगा, मगर इतना बारिश होने लगी थी के निकलना नामुमकिन था यार!”
अभी: “यार जॉर्ज पता नहीं क्यों आने से मन किया था 5तह को?! कुछ तो बात हुई होगी नाह….. तो किआ तुमने उस से कहा था के तू मुझे बता देगा?”
जॉर्ज: “नहीं मैं ने उस से कहा के मैं बहोत दूर रहता हूँ, उस्सने मुझसे पहले पूछा के किआ मैं तेरा घर जानता हूँ किधर है, तो मैं ने कहा के हाँ जिस रात को लास्ट दिन बस कम्पलीट हुए थे तो हम तुझे चौररने गए थे तो तेरा घर देखा था. तब उस्सने कहा के किआ मैं उस्सको मदद कर सकता हूँ क्यूंकि मैं तेरा दोस्त हूँ तो मदद करना पड़ेगा तो मैं ने कहा के हाँ मदद करूँगा….. मैं ने सोचा था के कोई लेटर वग़ैरा देगी तुझे देने के लिए, मगर जब उस्सने कहा के तुझसे मिलकर तुझे बताना होगा के अगले दिन तुझे नहीं आने को वहां तो मैं ने उससे बताया के नामुमकिन है, क्यों के कल 5तह है और आज 4तह तो एक दिन में कहाँ से जा पाउँगा तुझे बताने को…. तो वो समझ गयी के नहीं हो पाएगा…. फिर भी मैं ने सोचा था के अगले दिन सुबह को मैं अत तुझे बताने…. मगर बारिश की वजह से नहीं आया.”
और कुछ पूछा या कहा था मेरे बारे में उस्सने तुझसे जॉर्ज?
जॉर्ज: “हम्म्म पूछा था के तेरा घर कैसा है हहहहए!”
अभी ने मुस्कुराते हुए पूछा,
“और तुम ने किआ कहा?”
जॉर्ज: “मैं ने कहा रात के 1 बजा था तो ठीक से नहीं देखा”
अभी: “फिर किआ बोली?”
जॉर्ज: “पूछा के कंक्रीट का घर है या तीन और लड़की का!”
अभी: “और तुम ने बोलै??”
जॉर्ज: “हाँ मैं ने बता दिया के कंक्रीट का बड़ा घर है और मैं रोड पर है.”
अभी: “तब किआ बोली?”
जॉर्ज: “खुश दिखी और मुस्कुरा दिए, तब उस्सको उस्सकी माँ ने बुला लिया.”
अभी हैरान और परेशां हुआ के आखिर किआ बात हुई होगी.
फिर कुछ देर बाद जॉर्ज ने कहा,
“अभी वो लड़की तुझे बहोत प्यार करती है, उस्सको धोका मत देना, तू उसस्के साथ बहोत खुश रहेगा.”
अभी: “तुझे नहीं पता किआ हुआ है जॉर्ज?”
तब सुनील ने जॉर्ज को सब बताया जो 5तह तारिक़ को अभी के सात हुआ…..
जॉर्ज हैरान हुआ और याद करते हुए कहा,
“मगर रूही ने तो मुझसे कहा था के उस्का चाचा और चची अगेंस्ट है मगर उसस्के घरवाले राज़ी है.. और हाँ सुन अभी, एक बार वो रेज़ा रूही को कुछ बोल रहा था तो रूही ने उस्सको ग़ुस्से में गली दिया था और शट उप कहा था उस दिन.”
अभी: “चोर्रो यार अब यह सब बातें मेरे किश काम का सब ख़तम हो गए हैं….”
जॉर्ज ने और याद करते हुए कहा,
“हाँ एक बार जब हम वापस आरहे थे तो बस में रूही ने मुझसे कहा के ‘अभी बहोत ाचा लड़का है, नेक है, होशियार और बहोत तेज़ है है नाह?’ तो मैं ने उस से कहा हाँ सच में तेज़ है, इंटेलीजेंट है, तुम्हारे लिए बहोत सही है, तुम दोनों की जोड़ी बहोत अछि रहेगी”
अभी: “तब किआ बोली?!”
जॉर्ज: “हंसी बहोत खुश थी और थैंक यू कहा.”
अभी: “जॉर्ज तो किश्तों में क्यों बता रहा है सब बता नाह और किआ किआ कहा था रूही ने तुझे?!”
जॉर्ज: “बुसस एहि कुछ और याद आएगा तो बोलूंगा नाह!”
अभी को बहोत ख़ुशी हुई, उस्सको यकीन था के उस्का प्यार कभी ग़लत नहीं हो सकता, अभी को पूरा यकीन था पहले से hi के रूही उस से बहोत प्यार करती है….. मगर अब किआ फायदा…..
तो बे कॉन्टिनोएड….
अभी ने अब रोना बांध कर दिया था, लगता था उसस्के सारे आंसू अब सुख गए थे.
वो कुछ दिन बाद रॉयल सिनेमा गया एक मूवी देकने, और उस सुपरमार्केट में महेश को देखा, महेश ने भी अभी को देखा मगर एक दूसरे से किसी ने बात नहीं किये.
अभी ने अब अपने पर्सनल डायरी में लिखा,
“माय आईज दो नॉट क्राई नाउ बूत माय हार्ट वीप्स, एंड व्हेन थे हार्ट वीप्स नॉट टीयर्स के आउट बूत ओनली ब्लड. माय हार्ट ब्लीड्स एंड ी ऍम बेअरिंग आईटी. आईटी इस वैरी हार्ड, आईटी एचएस, आईटी पाइनस, ी सुफ्फेर, बूत ी गोत तो बेयर. बूत नाउ ी दो नॉट क्राई, लेट थे हार्ट कीप क्राइंग इनसाइड, no ओने विल सी तहत.”
*************************************************************
अगले दिन अभी काम करने गया और वो काम फिनिश किया और कल से उस्सको उस जगह काम पर जाना था जो रूही के घर से 10 कंस की दूरी पर था…. जब अभी रूही की आँगन में काम कर रहा था तो यह वाला बस ओनर आया था सईद और अभी को काम करते हुए देखने और उस ने अपने बस को रिपेयर करने के लिए कहा था…. मतलब कल से अभी को बस में रूही के आँगन के सामने से गुज़ारना होगा अगले 1 महीने के लिए क्यूंकि वहां का काम एक महीने के लिए था…
अभी को बिल्कुल मैं नहीं था उस तरफ काम करने जाने को और सईद से कहा भी मगर सईद ने कहा के उस तरफ देहना भी नहीं बुसस के दूसरे साइड में बैठना…. काम तो करना है, तुम रूही के आँगन में थोड़ा hi जा रहे हो!
और सुबह को जब अभी वहां से गुज़रा बस में तो किआ आलम था, किआ फीलिंग थी, वो बयां करना बहोत मुश्किल है… अभी को तुरंत बुसस से उतरने का मैं किया…. उसी बस स्टॉप पर हर सुबह 6 बजे आजाता था नाह? तो उस्सको वो नोस्टालजिक फील हुआ… उस्सको लगा के उस्सको वहीँ उतरना चाहिए था, और रूही की आँगन में hi जाना चाहिए था…. शुक्र है के सिर्फ 2 मीन्स के लिए बस उस बस स्टॉप पर रुका कोई उतरा फिर बस आगे बढ़ने लगा….
वो जो सुबह का फ़िज़ा होता था जब हर सुबह को अभी आया करता था सुबह सवेरे रूही के खिड़की पर उस से बात करने के लिए… वही अट्मॉस्फेरे अब भी था क्यूंकि उसी टाइम को अभी गुज़रा था आज फिर बस से…. उस्सने एक नज़र रूही की आंगन में देखा भी जब बस गुज़रा तो मगर सिर्फ 2 सांडस के लिए वो हुआ, और सिर्फ आँगन और रूही का घर नज़र आया अभी को, और बगीचे में फूल दिखे…. अभी ने सोचा अब पूरा एक महीना वैसे गुज़ारना है उस्सको तो उस्सको उम्मीद था के एक दिन रूही ज़रूर दिखेगा उस्सको उस आँगन में या गार्डन में या अपनी किचन की स्टैर्स पर……
उस्सकी गलियों में जान चोरर दिया अभी ने मगर अब मजबूरन एक महीने के लिए काम के सिलसिले में जाना पर गया अभी को…. फिर इस्सके बाद बिल्कुल गया hi नहीं उस तरफ सालों तक….
मगर इस एक महीने में काफी कुछ दिलचस्प जानकारी मिलने वाला था अभी को रूही से रिलेटेड…. क्यूंकि जहाँ अब अभी काम करने जा रहा था वहां भी जॉर्ज और सुनील आएंगे अपने काम करने को उसी बस में!!
उस जगह काम करने के लिए हर सुबह और शाम को बस रूही की मैं रोड से गुज़रता, और हर दिन दो बार अभी उसस्के घर के तरफ देखता. हालां के कुछ अब एक्सपेक्ट नहीं करता था मगर उस्सको यकीन था के किसी दिन तो रूही की झलक ज़रूर दिखेगा उससे. शाम को हमेशा रूही और उस्सकी माँ किचन के स्टैर्स पर हुआ करते थे यह पिछले ढाई महीनों में अभी ने देख तो लिया था इस लिए उस्सको पता था या तो कभी शाम को घर लौटते वक़्त या सुबह को रूही को बाद में ज़रूर देखेगा….
और हुआ वही इन 30 दिनों में 5 बार अभी ने रूही को स्टैर्स पर देखा, सिर्फ कुछ पल के लिए और 2 दिन सुबह को काम पर जाते वक़्त बाघ में फूल तोड़ते हुए देखा अभी ने… उसस्के दिल पर किआ गुज़रा, कैसा फील हुआ उस्सको किआ बयां करने लायक है? नहीं. बिल्कुल भी नहीं. फिर भी जान लो के अभी को तुरंत बस से उतर कर रूही के पास जाने को मैं किया उस से सिर्फ एक सवाल करने का मैं किया के क्यों उस दिन वो नहीं निकली जब मनोज उस्सको धित्कार रहा था…..
पहली बार जब सुबह को अभी ने रूही को देखा तो खुद से कहा के उस्सको बस से उतर कर जाना चाहिए था वो सवाल पूछने, मगर नहीं गया तो सोचा फिर कभी सुबह को वो दिखी तब अभी ज़रूर उतरेगा बस से और जाएगा उस से पूछने.
और जिस दिन दूसरी बार उस्सने रूही को देखा गार्डन में तो अभी बस से उतरा, चल कर उस्सकी आँगन तक गया, रूही को देखा, मगर तुरंत वापस बस स्टॉप पर लौट गया….. उससे हिम्मत नहीं हुई उस आँगन में अपने कदम रखने की…..
और एक दिन सुबह अभी काम पर जाते वक़्त बस के अंदर से मनोज को देखा मैं रोड के किनारे खड़े आँगन के पास, और मनोज ने बस के अंदर देखा और उस्सकी नज़र अभी पर पड़ा, बस आगे के बस स्टॉप पर रुका और शायद मनोज ने सोचा के अभी फिर वहां ारः है, तो वो वेट करने लगा देखने को के कौन बस से उतर रहा है, और बस के अंदर से मुड़कर अभी भी मनोज को देख रहा था, अभी समझ गया के मनोज एहि सोच रहा होगा के वो वहीँ ारः है फिर से उस्सकी बेहेन से मिलने के लिए, मनोज का चेहरा उस वक़्त थोड़ा फिकरमंद लगने लगा था….. मगर बस रीस्टार्ट हुआ और जाने लगा आगे बढ़ते हुए, तो मनोज को पता चला होगा के अभी कहीं उस तरफ काम कर रहा होगा….
अब अभी ने दिल hi दिल में सोचा किआ पता मनोज को उस दिन के व्योहार के लिए अफ़सोस है और वो चाहता था के अभी फिर ए और वो अभी से माफ़ी मांगे और उसकसो रूही से मिला दे…. किआ पता के मनोज पर सब ने मिलकर चिलाय होगा, किआ पता के रूही ने उस से बात करना चोरर दिया होगा उस दिन की व्योहार की वजह से और तब मनोज ने रूही से कहा होगा के ठीक है अभी इस बार आएगा तो उस से माफ़ी मांग लूंगा और तुम मिल लेना उस से….. अभी ऑपटिमिस्ट आदमी था तो हमेशा भला hi सोचता था, पॉजिटिव hi सोचता था इस लिए उसस्के लिए सब सही हो सकता था….
और उन् 30 दिनों में जब अभी ने उस तरफ काम किया टोटल में में 7 बार रूही दिखी और एक बार फ़र्ज़ीनः को भी देखा रूही की किचन से निकलते हुए मगर सब से ज्यादा एक दिन रूही को तब देखा जब शाम को जाते वक़्त एक ट्रक रुका हुआ था बस के आगे ट्रैफिक ब्लॉक थे और बस ठीक रूही के आँगन के सामने रुका था कोई 4 मीन्स तक….. अभी सीधा रूही के किचन की स्टैर्स को देख रहा था अपने चेहरे पर रुमाल रख कर और रूही की माँ दिखी थी स्टैर्स पर, फिर महेश दिखा था और फिर रूही दिखी थी स्टैर्स पर और वो सीधा बस में hi देख रही थी… बस से उस्सकी स्टैर्स तक का फासला कोई 12 मेट्रेस का होगा…. रूही उदास कढ़ी देखती रही अभी के तरफ, मगर पता नहीं रूही ने अभी को बस के अंदर पहचान लिया था या नहीं…. जिस निगाह से रूही देख रही थी लगता थार रो पड़ेगी, अभी ने अपने चेहरे को रुमाल से धानका हुआ था, उसस्के खुद के आँखें भर आये रूही को देख कर और क्यूंकि 4 मीन्स तक मौका मिला एक दूसरे को देखने के लिए, तो अभी के मौके का फायदा उठाते हुए उस्सको देखता गया, अब रूही ने शायद अभी बाल से, उसस्के पेशानी से, उसस्के रंग से अभी को पहचान लिया था, इसी लिए कड़ी देखती रही जब तक बस आगे नहीं बढ़ा… रूही स्टैर्स पर खड़े होकर अपने काँधे और सर को दरवाज़े से टिका दिया था बस में देखते हुए…. और जैसे उस्सकी आदत थी जब बस जाने लगा तो रूही ने आसमान को देखा और… अभी को यकीन था के उसस्के बाद उस्सकी आँखें भर आये होंगे क्यूंकि जब भी वो वैसा करती थी उस्सकी आँखें भर आते थे….. पता नहीं क्यों वो वैसा करती थी…. सर ऊपर उठाकर आसमान को देखती और सर वापस झुकाती तो उस्सकी आँखें भरे होते…. पिछले ढाई महीनों में अभी ने रूही को वैसा करते 20/25 बार देखा होगा…. अभी ने जाते हुए बस में सोचा के शायद अब रूही इस वक़्त उससे देख कर उन् दिनों को याद करने लगी थी, और हो सकता है रूही प्रे कर रही होगी के काश अभी बस से उतर कर वहां aajaye…hakikat में अभी का मैं वही चाहता था, उस्सको तुरंत बस से उतर कर भाग कर वहां जा कर रूही को अपने बाहों में जकरने का मान कर रहा था….
अगर उस दिन मनोज ने उस तरह से अभी को नहीं निकला होता, ात लीस्ट अचे से आराम से बात करके उस्सको वापस जाने को कहा होता या एक दोस्ती बनाये रखने को कहा होता तो आज अभी ज़रूर रूही से अस ा फ्रेंड तो मिलने जाता!!
ये सब सोचते हुए अभी उस दिन रूही की याद में घर पहुंचा और फिर से उस्सकी याद में पीने गया….
*********************************************************************
काम में जिस दिन सुनील से मिला अभी तो अभी उस से बात नहीं कर पाया, रो दिया अभी ने उससे देखते hi… और एहि दिन था जब सुनील ने अभी को बताया के उस दिन रूही की माँ ने सुनील से किआ कहा था और उस दिन सुनील उस्सको नहीं बता पाया था क्यूंकि मेहबूब वहीँ था तो सुनील नहीं चाहता था के उस वक़्त अभी और मेहबूब में लड़ाई हो. सुनील को पता था के अभी हॉट टेम्पर्ड है और वो बर्दाश्त नहीं कर पाटा और उसी वक़्त वो मेहबूब से लड़ लेता…. मगर अब सब बताते वक़्त सुनील ने कहा,
“मुझे उसी वक़्त तुमको शायद बता देना चाहिए था, और सब उसी वक़्त सामने आजाता तो शायद आज तुहि तेरी होती, तू शोर मचता, ग़ुस्सा करता मेहबूब से लड़ता मगर तब रूही और उस्सकी माँ को सब पता चलता तो शायद तब रूही तुमसे और खुश होती के तुम उस्सको पाने के लिए लड़ बैठे थे….”
सुनील ने बताया के उस दिन रूही की माँ ने उस से कहा था के मेहबूब ने उस्सको कहा था के अभी रूही के लिए ठीक लड़का नहीं है, अभी काम नहीं करता बेकार है, अभी सिर्फ सईद के कहने पर काम करने आया है और यहाँ सिर्फ रूही की वजह से रेगुलरली काम पर ारः है, वार्ना जहाँ भी काम करता है हफ्ते में दो दिन काम करता बाकी के दिन मौज मस्ती करता है, ऊपर से ग़रीब है, बहोत ग़रीब है, रूही को वो खुश नहीं रख पाएगा, रूही उसस्के घर में कभी खुश नहीं रहेगा उस्सकी दो बहनें हैं और 4 भाई, घर छोटा है कहाँ रहेगी रूही एक कमरे में 4 भाइयों और दो बहनों के बीच? ढंग का काम hi नहीं तो रूही का किआ हाल होगा उस घर में…..
और सुनील ने यह भी बताया के रूही के सामने यह सब कुछ कहा था और रूही से भी कहा था के खबरदार उस से ज़्यादा बात किया या उस्सको बढ़ावा दिया तो…. अभी से दूर रहने को आर्डर दिया था मेहबूब ने.
अभी ने सब सुनते हुए सुनील से पूछा,
“भाई इतना बता सकते हो के यह हुआ कब था? कब मेहबूब ने यह सब कहा था रूही और उस्सकी माँ से? उस्सकी नानी के घर जाने से पहले या बाद में?”
सुनील: “यह तो एक्साक्ट्ली नहीं पता भाई, मगर एहि सब कहा था उस दिन उसकसी माँ ने मुझसे जिस दिन रूही तेरे गले मिलकर रो रही थी जब तेरे ऊँगली में दवा लगा रही थी”
अभी: “यार यह सब बातें क्यों मेहबूब ने कहा था रूही और उस्सकी माँ से? यह सब तो बिल्कुल झूट है यार!”
सुनील: “अब सुन अभी और एक बात है जो मुझे कहने से डारर लग रहा है, पहले मुझे प्रॉमिस कर के तू छुप रहेगा और किसी को कुछ नहीं बताएगा और नाह कुछ कहेगा… बिल्कुल एक इंटेलीजेंट आदमी की तरह बात सुन और बुसस ऐसा बेहवे करना के तुझे वो बात बिल्कुल पता hi नहीं….”
अभी ने प्रॉमिस किया के छुप रहेगा और बुसस ऐसा करेगा के उस्सको कुछ पता hi नहीं, तब सुनील ने कहा,
“अभी यार, सब तेरे सईद जी का किया कराया है…. एक दिन सईद और उस्सकी माँ में बात हुई थी. रूही की माँ ने सईद से पूछा था के तू कैसा लड़का है इस लिए के उस्सकी बेटी तुझसे प्यार करने लगी है…. शुरू में सईद ने कहा तू ठीक लड़का है मगर बात करते हुए सईद ने कहा के तू काम नहीं करता, भागता रहता है काम से सिर्फ यहाँ रूही की वजह से हर रोज़ काम पर अत है और तेरा घर छोटा है, तेरे कितने भाई बेहेन हैं और रूही को उतने सारे लोगों के साथ तेरे घर में रहना पड़ेगा…. मतलब सईद ने रूही की माँ को तेरे घर में बेटी देने से डिस्कुरागे किया था, और एहि सब बातें सईद ने मेहबूब को भी बताया था… और दोनों मेहबूब और सईद ने मिलकर तेरा पत्ता कटा है भाई!”
अभी: “यार मैं हर रोज़ वहीँ रहता था कब उन् लोगों ने इतने सारे बातें कर लिए थे रूही की माँ के साथ यार?!
सुनील: “जब तू लंच टाइम में रूही के साथ हुआ करता था घर के पीछे तब तीनों उधर आपस में बात किया करते थे अभी, वो मैं ने भी देखा हुआ है!! उन् दिनों मैं समझ रहा था के सब एहि बात करते थे के तू और रूही छुप छुप कर मिलते हो ेट्स….”
अभी रोने लगा यह सब सुनकर और आज अभी को सुनील का कांधा मिला रोने के लिए….
बाद में सुनील ने कहा,
“मुझे पता चला के तू गया था वहां और मनोज ने तुझे वापस भेजा, सब बताया मुझे उस्सकी माँ ने यार बहोत अफ़सोस हुआ मुझे…”
अभी: “उस्सकी माँ ने तुझसे उस दिन के बारे में और किआ कहा सुनील मुझको सब सच सच बता प्लीज, मेरी रूही कहाँ थी वो क्यों नहीं आयी थी यार?”
सुनील: “भाई डिटेल नहीं दिया उस्सने, बुसस कहा के तू आया था और मनोज ने तुझसे बुरी तरह बात किये और तू बिना कुछ बोले चला गया… कहा के सब लोग नाराज़ इस लिए थे तुझसे के तू उस्सकी चची के घर गया था बात करने क्यूंकि वो लोग उस चची को बिल्कुल पसंद नहीं करते, उस चची ने पता नहीं किआ आग लगाया था के रूही की माँ, बाप और मनोज भड़के हुए थे, इतना पता चला के उस रोज़ रूही बहोत रो रही थी अउ उस्सकी माँ ने उस्सको तुझसे मिलने को मन किया था और उसस्के पिता ने भी, इसी लिए पिता तुझसे मिलने नहीं आया था क्यूंकि तू उसस्के भाई के घर गया था….”
अभी: “कमाल है यार खुद अपनी बेटी को उस चची के घर रहने को भेजती है और उस्सको पसंद नहीं करती? रूही की माँ ने खुद मुझे बताया था के रूही उसस्के घर रहने गयी है जैसे मुझे रूही से मिलने का इशारा कर रही थी लास्ट डे को…. खुद मनोज बेकार है अपने उसी चाचा के सुपरमार्केट में काम करता है और उस्सको पसंद नहीं करते वह लोग?!”
सुनील: “अभी यार होता है नाह फॅमिली में, लोग एक दूसरे के तर्रकी से जलते हैं तो वो शहर वाला चाचा और चची वेल ऑफ हैं तो इन् लोगों का जलता होगा ख़ास कर रूही की माँ की….”
अभी: “भाई किआ आगे कुछ हो सकता है? तू मेरे लिए कुछ कर सकता है?”
सुनील: “अभी मेरी बात मान तो तू बिल्कुल भूल जा रूही को, निकाल फेंक अपने दिल से उस्सको, तुझे बहोत साड़ी लड़कियां मिल जाएंगे यार!”
अभी: “भूल तो नहीं पाउँगा भाई, प्यार भी करता रहूँगा उम्र भर…. मिलना लिखा है किस्मत में तो मिलेगी…. वार्ना ऐसे hi काट लेंगे ज़िन्दगी को यार कौन सी बड़ी बात है….”
सुनील: “हाँ 4तह को मैं भी गया था पिकनिक सब के साथ रूही भी थी और रूही से पूछा था मैं ने किआ तुझसे सच में प्यार करती है, हाँ कहा था उस्सने शर्माते हुए और कहा था के तुमने उस से लिखा था के तू,3,4, या 5 को उसस्के घर आने वाला है, और उस्सको फ़िक्र थी के कहीं तो 4 को नाह जाए वहां क्यूंकि सब से साइड पर थे… और रूही ने तेरे बारे में काफी बातें किये थे जॉर्ज के साथ, मुझे और जॉर्ज को पता था के तुम और सईद यहाँ इस बस में काम करने आने वाले हो तो मैं ने जॉर्ज से कहा के तू जब यहाँ उस से मिलेगा तब वो तुझे बताये के रूही ने किआ कहा उस्सको तेरे बारे में, तो कल या परसों जॉर्ज इस बस की इंजन को चेक करने आएगा तो वो तुझे बताएगा…..”
अभी: “जॉर्ज से किआ बात किया रूही ने मेरे बारे में? और क्यों?”
सुनील: “अरे वो सब देखती थी नाह के तुम किश किश के दोस्त हो? तो रूही को ज़रूर पता था के तुम जॉर्ज का ाचा दोस्त हो इसी लिए उस्सने उसस्के साथ तेरे बारे में बात किया शायद कोई मैसेज भी दिया है जॉर्ज को तुझे देने के लिए!!”
अभी को ख़ुशी भी हुई ग़म भी यह जान कर के रूही ने कोई मैसेज भेजा है जॉर्ज के साथ, मगर it’s तू लेट कहा अभी ने….. अगर मैसेज 5 तारिक़ से पहले मिलता तो कोई बात होती अब तो बहोत देर हो चूका है….
****************************************************************
जॉर्ज मिला दो दिन बाद तो अभी ने उस से बात किये.
जॉर्ज ने कहा,
“रूही को पता नहीं कैसे पता था के तुम और हम दोस्त हैं, मैं खुद केरान हुआ जब पिकनिक वाले दिन को वो मेरे पास आयी और पूछा के किआ मुझे पता है के अभी कहाँ रहता है….”
अभी हैरान हुआ और जॉर्ज से पूछा,
“मगर क्यों मेरा पता पूछा तुमसे जॉर्ज?”
जॉर्ज: “अरे पता नहीं पूछा, उस्सने मुझसे कहा के तुम ने उस्सको कहा था के 5तह तारिक़ को तू वहां आने वाला था तो उस्सने मुझसे कहा के तुम को बोल दूँ के 5तह को नहीं आने को वो बाद में बताएगी के किश दिन को आना!”
अभी: “व्हाट? 5तह को नहीं आने को कहा? अरे यार तो तू ने मुझे कांटेक्ट क्यों नहीं किया किसी तरह से भी यार? मुझको बता देते नाह यार किसी तरह से भी जॉर्ज?!”
जॉर्ज: “भाई 4तह तारिक़ को देर साम को हम घर लौटे पिकनिक से… मुझे इस लिए चलने को कहा था के कहीं बस की इंजन में कोई प्रॉब्लम हो तो मैं बना सकूँ….. अब रात को कैसे मैं इधर से तेरे पास अत? मैं ने सोचा के 5तह को सुबह एक दोस्त की कार लेकर तेरे घर आकर तुझे बताऊंगा, मगर इतना बारिश होने लगी थी के निकलना नामुमकिन था यार!”
अभी: “यार जॉर्ज पता नहीं क्यों आने से मन किया था 5तह को?! कुछ तो बात हुई होगी नाह….. तो किआ तुमने उस से कहा था के तू मुझे बता देगा?”
जॉर्ज: “नहीं मैं ने उस से कहा के मैं बहोत दूर रहता हूँ, उस्सने मुझसे पहले पूछा के किआ मैं तेरा घर जानता हूँ किधर है, तो मैं ने कहा के हाँ जिस रात को लास्ट दिन बस कम्पलीट हुए थे तो हम तुझे चौररने गए थे तो तेरा घर देखा था. तब उस्सने कहा के किआ मैं उस्सको मदद कर सकता हूँ क्यूंकि मैं तेरा दोस्त हूँ तो मदद करना पड़ेगा तो मैं ने कहा के हाँ मदद करूँगा….. मैं ने सोचा था के कोई लेटर वग़ैरा देगी तुझे देने के लिए, मगर जब उस्सने कहा के तुझसे मिलकर तुझे बताना होगा के अगले दिन तुझे नहीं आने को वहां तो मैं ने उससे बताया के नामुमकिन है, क्यों के कल 5तह है और आज 4तह तो एक दिन में कहाँ से जा पाउँगा तुझे बताने को…. तो वो समझ गयी के नहीं हो पाएगा…. फिर भी मैं ने सोचा था के अगले दिन सुबह को मैं अत तुझे बताने…. मगर बारिश की वजह से नहीं आया.”
और कुछ पूछा या कहा था मेरे बारे में उस्सने तुझसे जॉर्ज?
जॉर्ज: “हम्म्म पूछा था के तेरा घर कैसा है हहहहए!”
अभी ने मुस्कुराते हुए पूछा,
“और तुम ने किआ कहा?”
जॉर्ज: “मैं ने कहा रात के 1 बजा था तो ठीक से नहीं देखा”
अभी: “फिर किआ बोली?”
जॉर्ज: “पूछा के कंक्रीट का घर है या तीन और लड़की का!”
अभी: “और तुम ने बोलै??”
जॉर्ज: “हाँ मैं ने बता दिया के कंक्रीट का बड़ा घर है और मैं रोड पर है.”
अभी: “तब किआ बोली?”
जॉर्ज: “खुश दिखी और मुस्कुरा दिए, तब उस्सको उस्सकी माँ ने बुला लिया.”
अभी हैरान और परेशां हुआ के आखिर किआ बात हुई होगी.
फिर कुछ देर बाद जॉर्ज ने कहा,
“अभी वो लड़की तुझे बहोत प्यार करती है, उस्सको धोका मत देना, तू उसस्के साथ बहोत खुश रहेगा.”
अभी: “तुझे नहीं पता किआ हुआ है जॉर्ज?”
तब सुनील ने जॉर्ज को सब बताया जो 5तह तारिक़ को अभी के सात हुआ…..
जॉर्ज हैरान हुआ और याद करते हुए कहा,
“मगर रूही ने तो मुझसे कहा था के उस्का चाचा और चची अगेंस्ट है मगर उसस्के घरवाले राज़ी है.. और हाँ सुन अभी, एक बार वो रेज़ा रूही को कुछ बोल रहा था तो रूही ने उस्सको ग़ुस्से में गली दिया था और शट उप कहा था उस दिन.”
अभी: “चोर्रो यार अब यह सब बातें मेरे किश काम का सब ख़तम हो गए हैं….”
जॉर्ज ने और याद करते हुए कहा,
“हाँ एक बार जब हम वापस आरहे थे तो बस में रूही ने मुझसे कहा के ‘अभी बहोत ाचा लड़का है, नेक है, होशियार और बहोत तेज़ है है नाह?’ तो मैं ने उस से कहा हाँ सच में तेज़ है, इंटेलीजेंट है, तुम्हारे लिए बहोत सही है, तुम दोनों की जोड़ी बहोत अछि रहेगी”
अभी: “तब किआ बोली?!”
जॉर्ज: “हंसी बहोत खुश थी और थैंक यू कहा.”
अभी: “जॉर्ज तो किश्तों में क्यों बता रहा है सब बता नाह और किआ किआ कहा था रूही ने तुझे?!”
जॉर्ज: “बुसस एहि कुछ और याद आएगा तो बोलूंगा नाह!”
अभी को बहोत ख़ुशी हुई, उस्सको यकीन था के उस्का प्यार कभी ग़लत नहीं हो सकता, अभी को पूरा यकीन था पहले से hi के रूही उस से बहोत प्यार करती है….. मगर अब किआ फायदा…..
तो बे कॉन्टिनोएड….