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अपडेट 75 अभी मीट्स रूही अगेन
जिस दिन को अभी को रूही के घर जाना था उस्सने नवीन को बता दिया के वो रूही से मिल चूका है उस्सको डायरीज भी दे दिया है और अब वापस लेने जा रहा है. नवीन हैरान हुई क्यूंकि उस्सको भी रूही से मिलना था तो नवीन ने सवाल किये के कब मिले कैसे मिले ेट्स और अभी ने सब बताया जिस दिन उस्सको यूनिवर्सिटी नहीं लेने आया था वहीँ से बात किया था और तब श्वेता से मिलने गया था उस से पूछने के क्यों उस्सने नहीं बताया के वो रूही को बेटी थी.
मतलब अब नवीन को भी सब कन्फर्मेशन मिल गयी के श्वेता रूही की hi बेटी है जैसे उस्सने सोचा था.
नवीन ने अभी से एक अजीब बात कहा. नवीन ने पहले अभी को बैठने को कहा क्यूंकि उस्सको कुछ इम्पोर्टेन्ट बात करनी थी. दोनों लाउन्ज में सोफे पर बैठ और नवीन ने कहा,
“आप को श्वेता से शादी कर लेना चाहिए!”
अभी चहुँक कर खड़ा हो गया ज़ोर से “व्हाट” कहते हुए.
नवीन ने उस्सको दोबारा बैठने को कहा, और उस्सको समझाया,
“देखो, वो अकेली है, आप दोनों के बिच सेक्सुअल रिलेशनशिप तो हो hi रहे हैं जिस्का मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं, तो शादी hi क्यों नहीं कर लेते? मैं यह अरुचि के लिए कह रही हूँ… वो बड़ी होती जाएगी तो सोचेगी के तुम कैसे उसस्के पिता हो और क्यों दो घरों में रहते हो, इन् सबका उस पर ग़लत एस्सार हो सकता है…. शादी कर लोगे श्वेता से तो कम से कम अरुचि को इतना तो पता होगा के उस्सकी पापा के दो वाइव्स हैं और इस लिए उस्सकी दो मोठेर्स हैं…. हाँ शादी कहने को कह रही हूँ इस घर में लाने को नहीं…. उसस्के लिए अलग घर बनवा लो, और जब चाहो वहां रहना जब चाहो यहाँ! जैसे अरुचि इन् दो घरों में पाली बढ़ेगी उसी तरह तुम भी उधर इधर आते जाते रहना. कभी अरुचि को मेरे पास रहने देना एकांत दिन और तुम श्वेता के यहाँ रह जाना……”
अभी का यह सब सुनकर जैसे दिमाग़ ब्लेंक हो गया. उस्सको पता था के श्वेता तो बहोत hi खुश होगी अगर उस से अभी ने शादी किया तो….. मगर अभी अब रूही के बारे में सोचने लगा था और नवीन से कहा;
“तुम एक इम्पोर्टेन्ट चीज़ बिल्कुल भूल गयी हो….. उसस्के बारे में नहीं सोचा तुमने?!”
नवीन हैरान होते हुए पूछा,
“व्हाट? किआ भूली हूँ?!”
अभी: “रूही! उस्सको नहीं पता चलेगा के मैं ने उस्सकी बेटी से शादी किया है? वो उस्सकी माँ है… और वो मेरी प्रेमिका थी!!”
नवीन: “अभी शुक्र है तुम्हारे और रूही के बीच कोई सेक्सुअल रिलेशनशिप नहीं हुआ था कभी वार्ना तुमको श्वेता से शादी करना बिल्कुल भी अल्लोवेद नहीं होता, मगर अभी हो सकता है, मोरल वैल्यूज पर भी नार्मल है, लीगली भी अल्लोवेद है…. सुनों एक काम करो, मुझको कब रूही से मिलवाओगे, कहा था नाह आप से के कभी उस से मिलो तो मुझे मिलवाना उस से? उस्सको थैंक्स करना है मुझे.”
अभी: “तुम ने यह शादी वाली बात कहकर मेरे दिमाग़ को सुन कर दिया…. देखो मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगा है…. श्वेता तो बहोत खुश होगी मगर रूही किआ सोचेगी…. मैं तो उस्सको यह सरप्राइज देने वाला हूँ के मैं ने अरुचि को अडॉप्ट किया है….. अब शादी की बात सुनी उस्सने तो??!! ओह no, It’s नॉट okay ी फील!!”
नवीन: “अगर उस्सको पता hi नाह चले तो? और जब उस्सको पता चलेगा के आप ने उसस्के पोती को गॉड लिया तो उस्सको शक तो होगा hi के तुम दोनों के बीच कुछ ज़रूर है…..!”
अभी: “दो यू थिंक सो? उस्सको शक होगा? कैसे?!”
नवीन: “उस से किआ कहोगे के क्यों आप ने अरुचि को अडॉप्ट किया? श्वेता कैसे मिली आप को, कब से दोनों इतने क्लोज हुए के अरुचि को अडॉप्ट भी कर लिया आप ने?!”
अभी: “मैं एहि सरप्राइज तो दूंगा नाह रूही को के मैं पिछले 7 सालों से श्वेता से मिल चूका हूँ और अरुचि को भी जानता हूँ उस्सको बढ़ते हुए देखा है मैं ने…..”
नवीन: “तभी रूही को सब समझ में आजाएगा अभी, शी इस ा वुमन हु लव्ड यू नाह? बूत वेयर इस शी? शी इस नॉट मैरिड? शी मस्ट हैवे हेर हस्बैंड एंड किड्स नाह?!”
तब अभी ने रूही के बारे में सब कुछ जितना जानता था बताया नवीन को. उस्सको बहोत अफ़सोस हुआ रूही के बारे में जान के. उसस्के बाद नवीन ने ज़्यादा कुछ नहीं कहा बुसस इतना कहा के श्वेता से उस्सको शादी करनी hi चाहिए.
अभी चला गया रूही से मिलने. जाने से पहले फ़ोन करके बता दिया रूही को के वो ारः है डायरीज लेने. रूही ने अभी के टांग खींचते हुए कहा,
“ाचा आप सिर्फ डायरीज वापस लेने आ रहे हो मुझसे मिलने नहीं?!”
वहां पहुँचने पर कहने की ज़रुरत नहीं दोनों के रोना धोना फिर शुरू हुआ…. अभी रूही के जवाब पढ़ते हुए रोने लगा, और रूही अभी को रट देख कर रोने लगी…. घंटों बाद दोनों छुप हुए….
अभी ने कहा,
“बहोत रो लिए हम ने…. अब रोना बांध… जितना जिस जिस को झेलना था झेल लिए दोनों ने है नाह? तुम अस्सल में मुझसे से ज़्यादा तकलीफ में रही देख सकता हूँ समझ सकता हूँ…. तुम अकेली रही, मुझे तो नवीन मिल गयी मुझे संभालने के लिए, मेरा देख भाल करने के लिए, वो नहीं आती मेरी ज़िन्दगी में तो पता नहीं मैं आज किआ होता….”
रूही ने कहा,
“अभी जैसे एक बोझ उतर गया सीने से नाह? किआ आप को भी वैसा फील हो रहा है?”
अभी: “एक्साक्ट्ली यस!! इतने दिनों से मैं खुद से कहता रहा के कब यह दोनों डायरीज तुम तक पहुंचा पाउँगा, कब पढ़ोगी के मैं तुमसे कितना प्यार करता था, कब तुम सब समझ पाओगी…. मैं मरने से पहले तुमको दोनों डायरीज देना hi देना चाहता था…. और आज एक सुकून फील हुआ सच में…. एक बोझ उतर गया सीने से यस यू अरे राइट…. यस ट्रू!”
दोनों कुछ देर खामोश रह एक दूसरे को देखते हुए और अभी ने पूछा,
“तुम अपनी मम्मी और मेहबूब के बारे में कुछ कहने वाली थी नाह?”
रूही ने तब कहा,
“होल्ड में प्लीज अभी”
अभी ने तुरंत रूही को अपने बाहों में भर लिया. बहोत कसके लिया रूही उस्सने अपने बाहों में, और उसस्के सीने से लग कर रूही ने कहा,
“इतनी मज़बूत बाहें मिली थी मुझे और मैं ने इनको ठुकराया, कितनी बेवकूफ थी मैं अभी? कितने बार आप ने मुझे ऐसे बाहों में लिया था फिर भी मुझे क्यों तब पहचान नहीं हुई थी के एहि वो बाहें हैं जीन में मैं अपनी उम्र गुज़ार सकती हूँ, एहि वो बाहें हैं जो मुझे उम्र भर आराम दे सकते थे, एहि वो सीना है जिस पर मैं ज़िन्दगी भर अपना सर रख कर आराम हासिल कर सकती थी, तब क्यों मुझको इस्सके एहसास नहीं हुआ था अभी?!”
अभी ने रूही के सर पर हाथ फरते हुए जवाब दिया,
“एहि ग़लती तो किया था तुमने नाह, के अमित और वहां के चका चॉंद और अमीरी को सोचा था और ऊपर से तुमको तुम्हारी माँ और मेहबूब इन्फ्लुएंस करते रहते थे, इसी लिए तुमने मुझको पा कर भी खो दिया…. ग़लती तुम्हारी है भी और नहीं भी… उस वक़्त अगर तुमने मुझको सब बता दिया होता तो मैं पक्का तुमको कन्विंस कर लेता, मैं तुम्हारे इस भेजे में बात अच्छी तरह से दाल देता के हम दोनों एक दूसरे के लिए बने हैं, हमारे रूह एक दूसरे से जुड़ चुके थे मगर उस्सको अलग तुम ने किआ रूही और किसी ने नहीं, तुम वो बोल्ड डिसिशन नहीं ले पायी जब लेना चाहिए था… तुमने डिसिशन तब लिया जब तुमने देखा मुझको कैसे ज़लील करके यहाँ से निकाला गया… तब तुमने डीडे किया सबको सबक सीखाने की…. मगर तब भी तुम मुझको एप्रोच कर सकती थी, मुझको एक खत लिख देती मैं दौड़ा चला आता तुम्हारे पास….
मैं उस दिन यहाँ से जाने के बाद कई महीनों तक तड़पता रहा तुम्हारे लिए, तभी डायरीज को लिखा अपने डेली डायरीज से इन् पर सब कॉपी किया और रहीम को देने आया…… तब भी तुम अगर चाहती तो मुझसे मिल सकती थी… तुम उस दिन घर में hi थी नाह? तुम्हारे पापा ने मुझ से हाथ उठाया था, शायद वो समझा था मैं तुम्हारे लिए आया हूँ फिर से….. मेरे चले जाने के बाद आयी थी तुम डायरीज लेने रहीम से, तो जिस वक़्त मैं रहीम के यहाँ था तभी क्यों नहीं निकली थी तुम? उसी वक़्त उसी टैक्सी में मेरे साथ चली आती… तुमने तब तो सब से मुंह फेरर hi लिया था नाह? मनोज से बात नहीं करती थी नाह? घर में कुछ नहीं करती थी नाह तब? अपनी माँ को भी सुनाती रहती थी नाह तब? तो ात लीस्ट तब क्यों नहीं निकली थी तुम रूही?!”
रूही रोने लगी, और रट हुए अभी के सीने से सत् कर कहा,
“मैं तब बदल गयी थी, ग़ुस्सा भरा हुआ था मुझ में, उस दिन जब आप आये थे दुन्या में आग लगा देने का मैं कर रहा था मेरा, उस दिन मैं ने आप के आने से पहले बहोत बहोत ग़ुस्सा किया था घर में, प्लेट तोड़े थे किचन में, ठीक टैक्सी जब आँगन में आये तब मैं अपनी कमरे में कुछ कपड़ों मैं आग लगाया था, सब जल रहे थे और मम्मी पापा धडपडाते आये थे पानी डालने उन् कपड़ों पर, तभी टैक्सी रुकी थी और मैं ने झाँका था बाहर तो आप को देख कर मेरे दिल के धड़कनें जैसे रुक गए थे… मैं रोने लगी थी, माँ ने भी आप को रहीम के घर जाते हुए देखा था और उस दिन मुझसे कहा था,
“जा वो आया है जा चली जा उसस्के साथ, भाग जा उसस्के साथ तब तेरे कलेजे में ठंडक पड़ेगी”
और मैं ने माँ को जवाब यह दिया था,
“क्यों चली जॉन? मैं तुझको इसी घर में रहकर तेरी काल बनूँगी, तुझको आहिस्ते आहिस्ते मरना देखना है मुझे, तुझको धीरे धीरे सारे चीज़ों का एहसास दिलाना है मुझे तुम सब को अभी और बहोत कुछ झेलना है, मुझे तुम सबको बहोत कुछ दिखाना है अभी… मैं और 50 साल इस घर में रहकर तड़पाने वाली हूँ तुम सब को? मैं क्यों जाऊं जब उस्सको आप सब ने बेइज़त करके इस घर से निकला था और मैं ने कुछ नहीं किया था, किश मुंह से उसस्के सामने जाउंगी मैं? मुझे मुंह छुपाना है उस से, शर्म आती है मुझे अब उसस्के सामने जाने के लिए कैसे जाऊं मैं उसस्के सामने किश मुंह से जॉन उसस्के सामने मैं?!”
यह सब सुनके अभी ने रूही के माथे को चूमा और रूही ने और कहा,
“मैं जिस तरह से बेहवे कर रही थी उन् दिनों सब समझ रहे थे मेरे ऊपर कोई आत्मा आगयी है, ओझा के पास ले गए थे मुझे, फिर डॉक्टर के पास, डॉक्टर ने पहसीच्यात्रिक मेडिसिन्स दिए थे और कहा था के अगर ऐसी hi रही तो ब्रेकडाउन हो सकता है पागल हो जाउंगी सच में और मेन्टल एसाइलम में भर्र्ती होना पड़ेगा…. मुझको पागल का टैग दे दिया गया था इस घर में मेरे बेहेवियर की वजह से हीहीहीहीही……. यह सब आप के डायरीज देने के 3 महीने बाद हुआ था….. और जब डॉक्टर ने मुझसे वो सब कहा तब मैं ने सोचा के मुझको अब सम्भलना चाहिए और कण्ट्रोल में रहना चाहिए….. घर में अपने कोने में रहती थी, एक भी काम नहीं करती, टीवी देखती, बुक्स रीड करती और अपनी रूम में घुसी रहती…. कई सालों तक वैसी hi रही… माँ बात करती तो उस्सको ग़ुस्से में जवाब देती और कहती के मुझसे बात नाह करें…. सिर्फ महेश से ठीक से बात करती और किसी से भी नहीं… माँ कपडे धोने जाती और बुलाती तो उस्सको गाली देती…. सिर्फ अपने कपड़ों को धोती थी, और किसी की नहीं, किचन में एक काम भी नहीं करती थी, सब माँ करती, मैं खाती थी हहहहए!! बहोत बुरी बन गयी थी मैं…. सालों तक ग़ुस्सा भरा हुआ था मुझ में…”
“और नार्मल कब हुए तुम?” अभी ने पूछा.
रूही: “नहीं हुई!! उन् लोगों के साथ नार्मल हुई HI नहीं मैं, ख़ास कर माँ के साथ तो आज तक नहीं हुई नार्मल…….. मनोज के लिए लड़की देखने गए सब, मैं नहीं गयी, मनोज बिनती करते थक गया मुझे चलने के लिए मगर पता है मैं ने उस्सको किआ जवाब दिया था? 5 साल बाद उस से बात किया था उस दिन और जवाब में उस से कहा ‘कितना ाचा होगा के तुझे भी कुत्ते की तरह वो लोग घर से लात मार कर निकाले जैसे तुमने अभी को निकला था, मैं क्यों जाउंगी? किआ तुम ने मेरे अभी को एक्सेप्ट किया था? जैसे तू लड़की देखने जा रहा है वो भी आया था, तब तुमने किआ किया था?!”
अभी: “काश जिस दिन मैं आया था तब तुमने उस से वो सब कहा होता!!”
रूही: “तब मैं बहोत अच्छी, ओबेडिएंट बेटी थी इस घर की नाह? आप के जाने के बाद मैं सबकी बाप बानी थी हहहहए, सब कुछ आप के बदौलत hi हुआ, मैं स्ट्रांग भी हुई तो आप की वजह से…. मेरी लाइफ में आप ने बहोत चंगेस लाये, पाजिटिविटी भी लाये बुसस आप नहीं मिले मुझे!”
अभी: “फिर किआ कहना था तुम्हारे मम्मी और मेहबूब के बारे में?”
“मम्मी को ब्रैस्ट कैंसर हुई, पापा S.Arabia से वापस आये फिर कभी नहीं गए. 1994 की बात है. मनोज की शादी हो चुकी थी, उस से एकांत बात कर लेती थी, और उस्सकी बीवी से बनती थी मेरी. उस्सकी बीवी को सब कुछ बता दिया था खुद मनोज ने आप के और मेरे बारे में…. बाद में महेश की शादी हुई तो उस्सने भी मेरी और आप की कहानी बता दिए अपनी वाइफ को…. दोनों बहुओं को मेरी मुहबत की दास्तान पता है…. इस लिए बताये दोनों भाइयों ने क्यूंकि वह सवाल करते नाह के घर में एक बेहेन क्यों बैठी है बिना शादी किये…. तो मनोज की वाइफ को बहोत हमदर्दी हुई मुझसे सब जान कर आप के और मेरे बारे में और उस से अछि दोस्ती हुई… माँ को ब्रैस्ट कैंसर हुआ तब वो रट हुए मुझसे माफ़ी मांगे मैं ने उस्सको माफ़ नहीं किया और बात भी नहीं की बुसस इतना कहा के वो अपनी सज़ा भुगत रही है भगवान् ने उस्सको सज़ा दिया है….
उस्सकी ब्रैस्ट को ऑपरेट किया गया, एक ब्रैस्ट निकला गया 2 महीने तक हॉस्पिटल में रही , मैं एक दिन भी उस्सको देखने नहीं gayi…wapas आयी तो रोटी रही बीएड पर मैं बिल्कुल देखने नहीं गई उस्सको….. मैं उस्सको दूसरे कमरे से सुनाती यह सब कहकर,
“पैसे की भूकी कितना पैसा फेंका ऑपरेशन के लिए? मेरे पापा के सब पैसे खा गयी तू? एक बूब गया है और भी जाएगा तू मारेगी नहीं जीती रहेगी मगर तड़पते हुए जियेगी”….. मैं उस्सकी दुश्मन बाह गयी थी…. और उस्सकी कैंसर आज तक ठीक नहीं हुआ… सालों बाद दूसरी बूब में भी कैंसर फैला, फिर से वही दौड़ना, चेमो थेरेपी, रेडियो थेरेपी… उस्का दर्द से तरपना… चिल्लाना, सारे बाल झाड़ गए थे फिर उगे फिर झड़े….. उस दिन यहाँ आयी थी तो आप ने नोटिस नहीं किया कितनी पतली लकड़ी जैसी हो गयी है? ठीक से चल नहीं पाती है… आज भी थेरेपी बाकी है usski…kabhi महीनों भर हॉस्पिटल में रहती है.. किसी वक़्त भी टपक सकती है….. उस्सकी एहि सज़ा मिलना था ज़िंदा रहना और sehna…seh रही है और मुझको चैन और सुकून आ रहा है…..”
अभी ने रूही का सर सहलाते हुए कहा,
“चोर्रो जाने दो, तुम्हारी माँ है माफ़ कार्डो… जाने दो अब…. जस्ट फॉरगेट एंड फॉर्गो!”
रूही अभी के सीने से अलग होते हुए कहा,
“नेवर अभी, ी विल नेवर फॉरगेट एंड नेवर लेट जो…. वो मर्डर भी जाये तो मुझे कोई दुःख नहीं होगा अभी!”
अभी: “इतनी करवाहट ठीक भी नहीं स्वीटहार्ट….. अब भूल भी जाओ नाह!”
रूही: “25 साल से मैं इस घर में बैठी हूँ भूल जॉन? आज मेरे बचे होते आप के साथ. एक घर होता, मेरा पति होता मैं कितनी खुश होती वो सब भूल जॉन? सब कुछ उस्सकी वजह से हुआ? कभी नहीं भूलूंगी मैं अभी कभी नहीं!!”
अभी छुप हो गया….. फिर पूछा के मेहबूब को किआ हुआ.
रूही ज़ोर से हंसी और कहा,
“हहहहह कुत्ते हो हार्ट अटैक आया था 2 बार…. होस्पिटलिजे हुआ था वो भी… कमज़ोर हो गया… हार्ट का ऑपरेशन हुआ, वो भी मुझसे माफ़ी मांगने आया था मैं ने माफ़ नहीं किया रो रहा था मैं ने कहा जितना अभी को और मुझको रुलाया है उस से हज़ार गुना ज़्यादा तुझे भी रोना है… उसस्के दिल के अंदर एक कोई इलेक्ट्रॉनिक एपरेटस है वार्ना वो कभी भी टपक सकता है….. कभी भी फरफराने लगता है सब उस्सको उठा कर जल्दी से हॉस्पिटल लेजाते हैं….. एक दिन हॉस्पिटल जाते हुए hi मरेगा वो कुत्ता!!”
अभी को रूही की वो ग़ुस्सा, वो करवाहट उन दोनों के लिए समझ में ारः था… और उस्सने और कुछ नहीं कहा रूही को बुसस उस्सको और ज़ोर से अपने बाहों में भर के उस्सको चूमा उस्सको कूल करने के लिए.
और कुछ देर बाद रूही ने कहा,
“चाह चोर्रो यह सब अभी, आप अब मुझे यह बताओ कौन सा सरप्राइज देने वाले थे आप मुझे?!
तो बे कॉन्टिनोएड…. (2901 वर्ड्स)
जिस दिन को अभी को रूही के घर जाना था उस्सने नवीन को बता दिया के वो रूही से मिल चूका है उस्सको डायरीज भी दे दिया है और अब वापस लेने जा रहा है. नवीन हैरान हुई क्यूंकि उस्सको भी रूही से मिलना था तो नवीन ने सवाल किये के कब मिले कैसे मिले ेट्स और अभी ने सब बताया जिस दिन उस्सको यूनिवर्सिटी नहीं लेने आया था वहीँ से बात किया था और तब श्वेता से मिलने गया था उस से पूछने के क्यों उस्सने नहीं बताया के वो रूही को बेटी थी.
मतलब अब नवीन को भी सब कन्फर्मेशन मिल गयी के श्वेता रूही की hi बेटी है जैसे उस्सने सोचा था.
नवीन ने अभी से एक अजीब बात कहा. नवीन ने पहले अभी को बैठने को कहा क्यूंकि उस्सको कुछ इम्पोर्टेन्ट बात करनी थी. दोनों लाउन्ज में सोफे पर बैठ और नवीन ने कहा,
“आप को श्वेता से शादी कर लेना चाहिए!”
अभी चहुँक कर खड़ा हो गया ज़ोर से “व्हाट” कहते हुए.
नवीन ने उस्सको दोबारा बैठने को कहा, और उस्सको समझाया,
“देखो, वो अकेली है, आप दोनों के बिच सेक्सुअल रिलेशनशिप तो हो hi रहे हैं जिस्का मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं, तो शादी hi क्यों नहीं कर लेते? मैं यह अरुचि के लिए कह रही हूँ… वो बड़ी होती जाएगी तो सोचेगी के तुम कैसे उसस्के पिता हो और क्यों दो घरों में रहते हो, इन् सबका उस पर ग़लत एस्सार हो सकता है…. शादी कर लोगे श्वेता से तो कम से कम अरुचि को इतना तो पता होगा के उस्सकी पापा के दो वाइव्स हैं और इस लिए उस्सकी दो मोठेर्स हैं…. हाँ शादी कहने को कह रही हूँ इस घर में लाने को नहीं…. उसस्के लिए अलग घर बनवा लो, और जब चाहो वहां रहना जब चाहो यहाँ! जैसे अरुचि इन् दो घरों में पाली बढ़ेगी उसी तरह तुम भी उधर इधर आते जाते रहना. कभी अरुचि को मेरे पास रहने देना एकांत दिन और तुम श्वेता के यहाँ रह जाना……”
अभी का यह सब सुनकर जैसे दिमाग़ ब्लेंक हो गया. उस्सको पता था के श्वेता तो बहोत hi खुश होगी अगर उस से अभी ने शादी किया तो….. मगर अभी अब रूही के बारे में सोचने लगा था और नवीन से कहा;
“तुम एक इम्पोर्टेन्ट चीज़ बिल्कुल भूल गयी हो….. उसस्के बारे में नहीं सोचा तुमने?!”
नवीन हैरान होते हुए पूछा,
“व्हाट? किआ भूली हूँ?!”
अभी: “रूही! उस्सको नहीं पता चलेगा के मैं ने उस्सकी बेटी से शादी किया है? वो उस्सकी माँ है… और वो मेरी प्रेमिका थी!!”
नवीन: “अभी शुक्र है तुम्हारे और रूही के बीच कोई सेक्सुअल रिलेशनशिप नहीं हुआ था कभी वार्ना तुमको श्वेता से शादी करना बिल्कुल भी अल्लोवेद नहीं होता, मगर अभी हो सकता है, मोरल वैल्यूज पर भी नार्मल है, लीगली भी अल्लोवेद है…. सुनों एक काम करो, मुझको कब रूही से मिलवाओगे, कहा था नाह आप से के कभी उस से मिलो तो मुझे मिलवाना उस से? उस्सको थैंक्स करना है मुझे.”
अभी: “तुम ने यह शादी वाली बात कहकर मेरे दिमाग़ को सुन कर दिया…. देखो मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगा है…. श्वेता तो बहोत खुश होगी मगर रूही किआ सोचेगी…. मैं तो उस्सको यह सरप्राइज देने वाला हूँ के मैं ने अरुचि को अडॉप्ट किया है….. अब शादी की बात सुनी उस्सने तो??!! ओह no, It’s नॉट okay ी फील!!”
नवीन: “अगर उस्सको पता hi नाह चले तो? और जब उस्सको पता चलेगा के आप ने उसस्के पोती को गॉड लिया तो उस्सको शक तो होगा hi के तुम दोनों के बीच कुछ ज़रूर है…..!”
अभी: “दो यू थिंक सो? उस्सको शक होगा? कैसे?!”
नवीन: “उस से किआ कहोगे के क्यों आप ने अरुचि को अडॉप्ट किया? श्वेता कैसे मिली आप को, कब से दोनों इतने क्लोज हुए के अरुचि को अडॉप्ट भी कर लिया आप ने?!”
अभी: “मैं एहि सरप्राइज तो दूंगा नाह रूही को के मैं पिछले 7 सालों से श्वेता से मिल चूका हूँ और अरुचि को भी जानता हूँ उस्सको बढ़ते हुए देखा है मैं ने…..”
नवीन: “तभी रूही को सब समझ में आजाएगा अभी, शी इस ा वुमन हु लव्ड यू नाह? बूत वेयर इस शी? शी इस नॉट मैरिड? शी मस्ट हैवे हेर हस्बैंड एंड किड्स नाह?!”
तब अभी ने रूही के बारे में सब कुछ जितना जानता था बताया नवीन को. उस्सको बहोत अफ़सोस हुआ रूही के बारे में जान के. उसस्के बाद नवीन ने ज़्यादा कुछ नहीं कहा बुसस इतना कहा के श्वेता से उस्सको शादी करनी hi चाहिए.
अभी चला गया रूही से मिलने. जाने से पहले फ़ोन करके बता दिया रूही को के वो ारः है डायरीज लेने. रूही ने अभी के टांग खींचते हुए कहा,
“ाचा आप सिर्फ डायरीज वापस लेने आ रहे हो मुझसे मिलने नहीं?!”
वहां पहुँचने पर कहने की ज़रुरत नहीं दोनों के रोना धोना फिर शुरू हुआ…. अभी रूही के जवाब पढ़ते हुए रोने लगा, और रूही अभी को रट देख कर रोने लगी…. घंटों बाद दोनों छुप हुए….
अभी ने कहा,
“बहोत रो लिए हम ने…. अब रोना बांध… जितना जिस जिस को झेलना था झेल लिए दोनों ने है नाह? तुम अस्सल में मुझसे से ज़्यादा तकलीफ में रही देख सकता हूँ समझ सकता हूँ…. तुम अकेली रही, मुझे तो नवीन मिल गयी मुझे संभालने के लिए, मेरा देख भाल करने के लिए, वो नहीं आती मेरी ज़िन्दगी में तो पता नहीं मैं आज किआ होता….”
रूही ने कहा,
“अभी जैसे एक बोझ उतर गया सीने से नाह? किआ आप को भी वैसा फील हो रहा है?”
अभी: “एक्साक्ट्ली यस!! इतने दिनों से मैं खुद से कहता रहा के कब यह दोनों डायरीज तुम तक पहुंचा पाउँगा, कब पढ़ोगी के मैं तुमसे कितना प्यार करता था, कब तुम सब समझ पाओगी…. मैं मरने से पहले तुमको दोनों डायरीज देना hi देना चाहता था…. और आज एक सुकून फील हुआ सच में…. एक बोझ उतर गया सीने से यस यू अरे राइट…. यस ट्रू!”
दोनों कुछ देर खामोश रह एक दूसरे को देखते हुए और अभी ने पूछा,
“तुम अपनी मम्मी और मेहबूब के बारे में कुछ कहने वाली थी नाह?”
रूही ने तब कहा,
“होल्ड में प्लीज अभी”
अभी ने तुरंत रूही को अपने बाहों में भर लिया. बहोत कसके लिया रूही उस्सने अपने बाहों में, और उसस्के सीने से लग कर रूही ने कहा,
“इतनी मज़बूत बाहें मिली थी मुझे और मैं ने इनको ठुकराया, कितनी बेवकूफ थी मैं अभी? कितने बार आप ने मुझे ऐसे बाहों में लिया था फिर भी मुझे क्यों तब पहचान नहीं हुई थी के एहि वो बाहें हैं जीन में मैं अपनी उम्र गुज़ार सकती हूँ, एहि वो बाहें हैं जो मुझे उम्र भर आराम दे सकते थे, एहि वो सीना है जिस पर मैं ज़िन्दगी भर अपना सर रख कर आराम हासिल कर सकती थी, तब क्यों मुझको इस्सके एहसास नहीं हुआ था अभी?!”
अभी ने रूही के सर पर हाथ फरते हुए जवाब दिया,
“एहि ग़लती तो किया था तुमने नाह, के अमित और वहां के चका चॉंद और अमीरी को सोचा था और ऊपर से तुमको तुम्हारी माँ और मेहबूब इन्फ्लुएंस करते रहते थे, इसी लिए तुमने मुझको पा कर भी खो दिया…. ग़लती तुम्हारी है भी और नहीं भी… उस वक़्त अगर तुमने मुझको सब बता दिया होता तो मैं पक्का तुमको कन्विंस कर लेता, मैं तुम्हारे इस भेजे में बात अच्छी तरह से दाल देता के हम दोनों एक दूसरे के लिए बने हैं, हमारे रूह एक दूसरे से जुड़ चुके थे मगर उस्सको अलग तुम ने किआ रूही और किसी ने नहीं, तुम वो बोल्ड डिसिशन नहीं ले पायी जब लेना चाहिए था… तुमने डिसिशन तब लिया जब तुमने देखा मुझको कैसे ज़लील करके यहाँ से निकाला गया… तब तुमने डीडे किया सबको सबक सीखाने की…. मगर तब भी तुम मुझको एप्रोच कर सकती थी, मुझको एक खत लिख देती मैं दौड़ा चला आता तुम्हारे पास….
मैं उस दिन यहाँ से जाने के बाद कई महीनों तक तड़पता रहा तुम्हारे लिए, तभी डायरीज को लिखा अपने डेली डायरीज से इन् पर सब कॉपी किया और रहीम को देने आया…… तब भी तुम अगर चाहती तो मुझसे मिल सकती थी… तुम उस दिन घर में hi थी नाह? तुम्हारे पापा ने मुझ से हाथ उठाया था, शायद वो समझा था मैं तुम्हारे लिए आया हूँ फिर से….. मेरे चले जाने के बाद आयी थी तुम डायरीज लेने रहीम से, तो जिस वक़्त मैं रहीम के यहाँ था तभी क्यों नहीं निकली थी तुम? उसी वक़्त उसी टैक्सी में मेरे साथ चली आती… तुमने तब तो सब से मुंह फेरर hi लिया था नाह? मनोज से बात नहीं करती थी नाह? घर में कुछ नहीं करती थी नाह तब? अपनी माँ को भी सुनाती रहती थी नाह तब? तो ात लीस्ट तब क्यों नहीं निकली थी तुम रूही?!”
रूही रोने लगी, और रट हुए अभी के सीने से सत् कर कहा,
“मैं तब बदल गयी थी, ग़ुस्सा भरा हुआ था मुझ में, उस दिन जब आप आये थे दुन्या में आग लगा देने का मैं कर रहा था मेरा, उस दिन मैं ने आप के आने से पहले बहोत बहोत ग़ुस्सा किया था घर में, प्लेट तोड़े थे किचन में, ठीक टैक्सी जब आँगन में आये तब मैं अपनी कमरे में कुछ कपड़ों मैं आग लगाया था, सब जल रहे थे और मम्मी पापा धडपडाते आये थे पानी डालने उन् कपड़ों पर, तभी टैक्सी रुकी थी और मैं ने झाँका था बाहर तो आप को देख कर मेरे दिल के धड़कनें जैसे रुक गए थे… मैं रोने लगी थी, माँ ने भी आप को रहीम के घर जाते हुए देखा था और उस दिन मुझसे कहा था,
“जा वो आया है जा चली जा उसस्के साथ, भाग जा उसस्के साथ तब तेरे कलेजे में ठंडक पड़ेगी”
और मैं ने माँ को जवाब यह दिया था,
“क्यों चली जॉन? मैं तुझको इसी घर में रहकर तेरी काल बनूँगी, तुझको आहिस्ते आहिस्ते मरना देखना है मुझे, तुझको धीरे धीरे सारे चीज़ों का एहसास दिलाना है मुझे तुम सब को अभी और बहोत कुछ झेलना है, मुझे तुम सबको बहोत कुछ दिखाना है अभी… मैं और 50 साल इस घर में रहकर तड़पाने वाली हूँ तुम सब को? मैं क्यों जाऊं जब उस्सको आप सब ने बेइज़त करके इस घर से निकला था और मैं ने कुछ नहीं किया था, किश मुंह से उसस्के सामने जाउंगी मैं? मुझे मुंह छुपाना है उस से, शर्म आती है मुझे अब उसस्के सामने जाने के लिए कैसे जाऊं मैं उसस्के सामने किश मुंह से जॉन उसस्के सामने मैं?!”
यह सब सुनके अभी ने रूही के माथे को चूमा और रूही ने और कहा,
“मैं जिस तरह से बेहवे कर रही थी उन् दिनों सब समझ रहे थे मेरे ऊपर कोई आत्मा आगयी है, ओझा के पास ले गए थे मुझे, फिर डॉक्टर के पास, डॉक्टर ने पहसीच्यात्रिक मेडिसिन्स दिए थे और कहा था के अगर ऐसी hi रही तो ब्रेकडाउन हो सकता है पागल हो जाउंगी सच में और मेन्टल एसाइलम में भर्र्ती होना पड़ेगा…. मुझको पागल का टैग दे दिया गया था इस घर में मेरे बेहेवियर की वजह से हीहीहीहीही……. यह सब आप के डायरीज देने के 3 महीने बाद हुआ था….. और जब डॉक्टर ने मुझसे वो सब कहा तब मैं ने सोचा के मुझको अब सम्भलना चाहिए और कण्ट्रोल में रहना चाहिए….. घर में अपने कोने में रहती थी, एक भी काम नहीं करती, टीवी देखती, बुक्स रीड करती और अपनी रूम में घुसी रहती…. कई सालों तक वैसी hi रही… माँ बात करती तो उस्सको ग़ुस्से में जवाब देती और कहती के मुझसे बात नाह करें…. सिर्फ महेश से ठीक से बात करती और किसी से भी नहीं… माँ कपडे धोने जाती और बुलाती तो उस्सको गाली देती…. सिर्फ अपने कपड़ों को धोती थी, और किसी की नहीं, किचन में एक काम भी नहीं करती थी, सब माँ करती, मैं खाती थी हहहहए!! बहोत बुरी बन गयी थी मैं…. सालों तक ग़ुस्सा भरा हुआ था मुझ में…”
“और नार्मल कब हुए तुम?” अभी ने पूछा.
रूही: “नहीं हुई!! उन् लोगों के साथ नार्मल हुई HI नहीं मैं, ख़ास कर माँ के साथ तो आज तक नहीं हुई नार्मल…….. मनोज के लिए लड़की देखने गए सब, मैं नहीं गयी, मनोज बिनती करते थक गया मुझे चलने के लिए मगर पता है मैं ने उस्सको किआ जवाब दिया था? 5 साल बाद उस से बात किया था उस दिन और जवाब में उस से कहा ‘कितना ाचा होगा के तुझे भी कुत्ते की तरह वो लोग घर से लात मार कर निकाले जैसे तुमने अभी को निकला था, मैं क्यों जाउंगी? किआ तुम ने मेरे अभी को एक्सेप्ट किया था? जैसे तू लड़की देखने जा रहा है वो भी आया था, तब तुमने किआ किया था?!”
अभी: “काश जिस दिन मैं आया था तब तुमने उस से वो सब कहा होता!!”
रूही: “तब मैं बहोत अच्छी, ओबेडिएंट बेटी थी इस घर की नाह? आप के जाने के बाद मैं सबकी बाप बानी थी हहहहए, सब कुछ आप के बदौलत hi हुआ, मैं स्ट्रांग भी हुई तो आप की वजह से…. मेरी लाइफ में आप ने बहोत चंगेस लाये, पाजिटिविटी भी लाये बुसस आप नहीं मिले मुझे!”
अभी: “फिर किआ कहना था तुम्हारे मम्मी और मेहबूब के बारे में?”
“मम्मी को ब्रैस्ट कैंसर हुई, पापा S.Arabia से वापस आये फिर कभी नहीं गए. 1994 की बात है. मनोज की शादी हो चुकी थी, उस से एकांत बात कर लेती थी, और उस्सकी बीवी से बनती थी मेरी. उस्सकी बीवी को सब कुछ बता दिया था खुद मनोज ने आप के और मेरे बारे में…. बाद में महेश की शादी हुई तो उस्सने भी मेरी और आप की कहानी बता दिए अपनी वाइफ को…. दोनों बहुओं को मेरी मुहबत की दास्तान पता है…. इस लिए बताये दोनों भाइयों ने क्यूंकि वह सवाल करते नाह के घर में एक बेहेन क्यों बैठी है बिना शादी किये…. तो मनोज की वाइफ को बहोत हमदर्दी हुई मुझसे सब जान कर आप के और मेरे बारे में और उस से अछि दोस्ती हुई… माँ को ब्रैस्ट कैंसर हुआ तब वो रट हुए मुझसे माफ़ी मांगे मैं ने उस्सको माफ़ नहीं किया और बात भी नहीं की बुसस इतना कहा के वो अपनी सज़ा भुगत रही है भगवान् ने उस्सको सज़ा दिया है….
उस्सकी ब्रैस्ट को ऑपरेट किया गया, एक ब्रैस्ट निकला गया 2 महीने तक हॉस्पिटल में रही , मैं एक दिन भी उस्सको देखने नहीं gayi…wapas आयी तो रोटी रही बीएड पर मैं बिल्कुल देखने नहीं गई उस्सको….. मैं उस्सको दूसरे कमरे से सुनाती यह सब कहकर,
“पैसे की भूकी कितना पैसा फेंका ऑपरेशन के लिए? मेरे पापा के सब पैसे खा गयी तू? एक बूब गया है और भी जाएगा तू मारेगी नहीं जीती रहेगी मगर तड़पते हुए जियेगी”….. मैं उस्सकी दुश्मन बाह गयी थी…. और उस्सकी कैंसर आज तक ठीक नहीं हुआ… सालों बाद दूसरी बूब में भी कैंसर फैला, फिर से वही दौड़ना, चेमो थेरेपी, रेडियो थेरेपी… उस्का दर्द से तरपना… चिल्लाना, सारे बाल झाड़ गए थे फिर उगे फिर झड़े….. उस दिन यहाँ आयी थी तो आप ने नोटिस नहीं किया कितनी पतली लकड़ी जैसी हो गयी है? ठीक से चल नहीं पाती है… आज भी थेरेपी बाकी है usski…kabhi महीनों भर हॉस्पिटल में रहती है.. किसी वक़्त भी टपक सकती है….. उस्सकी एहि सज़ा मिलना था ज़िंदा रहना और sehna…seh रही है और मुझको चैन और सुकून आ रहा है…..”
अभी ने रूही का सर सहलाते हुए कहा,
“चोर्रो जाने दो, तुम्हारी माँ है माफ़ कार्डो… जाने दो अब…. जस्ट फॉरगेट एंड फॉर्गो!”
रूही अभी के सीने से अलग होते हुए कहा,
“नेवर अभी, ी विल नेवर फॉरगेट एंड नेवर लेट जो…. वो मर्डर भी जाये तो मुझे कोई दुःख नहीं होगा अभी!”
अभी: “इतनी करवाहट ठीक भी नहीं स्वीटहार्ट….. अब भूल भी जाओ नाह!”
रूही: “25 साल से मैं इस घर में बैठी हूँ भूल जॉन? आज मेरे बचे होते आप के साथ. एक घर होता, मेरा पति होता मैं कितनी खुश होती वो सब भूल जॉन? सब कुछ उस्सकी वजह से हुआ? कभी नहीं भूलूंगी मैं अभी कभी नहीं!!”
अभी छुप हो गया….. फिर पूछा के मेहबूब को किआ हुआ.
रूही ज़ोर से हंसी और कहा,
“हहहहह कुत्ते हो हार्ट अटैक आया था 2 बार…. होस्पिटलिजे हुआ था वो भी… कमज़ोर हो गया… हार्ट का ऑपरेशन हुआ, वो भी मुझसे माफ़ी मांगने आया था मैं ने माफ़ नहीं किया रो रहा था मैं ने कहा जितना अभी को और मुझको रुलाया है उस से हज़ार गुना ज़्यादा तुझे भी रोना है… उसस्के दिल के अंदर एक कोई इलेक्ट्रॉनिक एपरेटस है वार्ना वो कभी भी टपक सकता है….. कभी भी फरफराने लगता है सब उस्सको उठा कर जल्दी से हॉस्पिटल लेजाते हैं….. एक दिन हॉस्पिटल जाते हुए hi मरेगा वो कुत्ता!!”
अभी को रूही की वो ग़ुस्सा, वो करवाहट उन दोनों के लिए समझ में ारः था… और उस्सने और कुछ नहीं कहा रूही को बुसस उस्सको और ज़ोर से अपने बाहों में भर के उस्सको चूमा उस्सको कूल करने के लिए.
और कुछ देर बाद रूही ने कहा,
“चाह चोर्रो यह सब अभी, आप अब मुझे यह बताओ कौन सा सरप्राइज देने वाले थे आप मुझे?!
तो बे कॉन्टिनोएड…. (2901 वर्ड्स)