अपडेट 27 अभी स्पेंट थे नाईट ात Ruhi’s
अभी बेहद खुश था, यह उस्सको सब एक सपना जैसा लगने लगा था. उस्सको यकीन नहीं हो रहा था के यह सब सच में हो रहा है. हाँ उस्सने यह सब ख्यालों में कई बार सोचा था मगर सब हकीकत में बदल जाएगा यह उस्सने बिल्कुल नहीं सोचा था. था तो वो बिल्कुल पॉजिटिव, हमेशा भला hi सोचता था, और उम्मीद करता था के जो सोच रहा है वो सच और सही हो जाए मगर वैसा सच में होगा वो नहीं सोचता था. और आज जो हो रहा था उसस्के साथ वो बुसस एक ड्रीम के ट्रू था.
अब आगे….
जिस वक़्त दोनों बस के पीछे उस दरखत के पास किश कर रहे थे एक दोनों को बाहों में भाड़े तभी लेन में श्वेता की आवाज़ सुनाई दिए कहते हुए,
“नयी मैं नहीं भीगी हूँ आप के सर के बाल भीग गए हैं”
रूही डर गयी और अभी को इतना ज़ोर से जकरा के अभी को लगा उस्सकी पसलियां टूटने वाले हैं, तो रूही ने दररते हुए कहा,
“उफ़ मनोज भाई और श्वेता, अगर हमको यहाँ देख लिया तो मुसीबत आजाएगी अब किआ करें अभी?!”
अभी ने फुसफुसाते हुए कहा,
“सशह्ह्ह अँधेरा है कोई हमको नहीं देख पाएगा, बुसस निचे बैठ जाओ यहीं और बिल्कुल खामोश रहो, जब दोनों घर के अंदर चले जाएंगे तब हम उनके पीछे जाएंगे….”
और रूही और अभी एक दूसरे को जाकर हुए hi बैठ गए. अब ऑफ़ कोर्स क्यूंकि अँधेरा था और दोनों बुसस के उस तरफ थे, और हलकी सी बारिश भी थी तो मनोज तेज़ क़दमों से सीधे अपने किचन के दरवाज़े तक गया बिना इधर उधर देखे और श्वेता को उतरा किचन में…..
उतारते hi श्वेता चिल्लाई,
“रहीइइइइइइ didiiiiiiiiii मैं आगयीइइइइइइइ”
इधर बस के कोने में रूही ने अभी से कहा,
“उफ्फ्फ वो मेरा hi नाम फुंकार रही है, मुझको ढूंढ़ने गयी होगी, चलो अब जल्दी….”
तो दोनों पीछे से गए किचन में जैसे दाखिल हुए श्वेता अंदर से वापस लौट रही थी रूही को ढूंढ़ते हुए, अंदर रूही की माँ ने श्वेता से कहा के रूही घर पर नहीं है इस लिए वो वापस किचन में आरही थी और जैसे अभी को देखा वहीँ रुक गयी जहाँ रीच हुई थी अचानक! फिर ज़ोर से “अभीइइइइइइ” चिलाते हुए उसस्के तरफ बढ़ी दोनों बाहों को खोले तो अभी अपने टांगों पर बैठ गया उसस्के नन्ही बाहों को अपने कांडों पर लेने के लिए….
तब तक मनोज टॉयलेट गया हुआ था और उस्सने अंदर से श्वेता को अभी का नाम उतना ज़ोर से चिल्लाते हुए सुना तो उस्सको ताहजुब हुआ के अभी इस वक़्त यहाँ कैसे.
तब तक रूही की माँ भी किचन में आगयी थी. अभी ने तब रूही को वो प्लास्टिक बैग थमा दिया और टांगों पर बैठे हुए बेबी श्वेता के हुग में गम रहा. उस्सको ज़ोर से सीने से लगाया हुआ था. दादा जी भी आये अपनी टीवी प्रोग्राम चोरर कर और अभी और श्वेता को देख कर बोलै;
“बहोत लगाओ हो गया इस्सकी अभी के साथ, हो भी क्यों नहीं अभी बड़ा प्यारा बचा खुद है”
इस बात को मनोज ने सुना क्यूंकि तब तक वो बाहर निकल चूका था टॉयलेट से और खड़ा श्वेता को अभी के बाहों में देख रहा था, और मुस्कुरा रहा था रूही को और अपनी माँ को देखते हुए. उस्सने इशारे से रूही से पूछा के अभी इस वक़्त यहाँ कैसे. तो रूही ने फुसफुसाते हुए कहा,
“आज हमारे यहाँ रहेगा!”
तो मनोज रूही को देख कर हंसा और अंदर चला गया.
तब रूही ने श्वेता से कहा,
“आरी वह रे श्वेतु, अब भी मुझसे नहीं मिली तू, फुंकार तो मुझे रही थी और अभी के पास चली गयी जाओ मैं तुमसे बात नहीं करुँगी, कटती!”
श्वेता ने रूही के तरफ देख कर ‘हीहीही” किया और अभी के सर के बालों पर हाथ फरते हुए कहा,
“आप के बाल भी भीग गए है आप बाहर थे नाह? मनोज भाई के बाल भी भीग गए मैं नहीं भीगी बिल्कुल!”
तो अभी ने श्वेता को चूमते हुए कहा,
“हम्म सच है; जाओ अब तुम अपनी रूही दीदी के पास वार्ना वो तुमसे बात भी नहीं करेगी और देखो उसस्के पास कितने सारे केक्स हैं वो तुमको नहीं देगी!”
श्वेता नहीं चोरर रही थी अभी को और कहा,
“नयी मैं आप के सात hi रहूंगी, आप आज यहीं रहोगे?!”
अभी ने मुड़कर रूही के तरफ देखा, फिर उस्सकी माँ को देखा, दोनों बड़े प्यार से अभी और श्वेता को देख रहे थे आस पास खड़े, दादाजी भी वहीँ खड़ा देख रहा था, उस वक़्त अभी और श्वेता मैं अट्रैक्शन बने हुए थे किचन में.
अभी ने श्वेता को प्यार से जवाब दिया के हाँ आज वो यहीं रुकेगा. तब तक एक टॉवल से अपने बाल को पोंछते हुए मनोज घर से किचन में आया और रूही से कहा,
“तुम कब जाओगी शूटिंग देखने, जाओगी भी या नहीं?!”
रूही ने अभी के तरफ देखते हुए अपने कांधों को उचकाया, तो रूही की माँ ने मनोज से कहा,
“अभी को टॉवल देदो, देखो उसस्के बाल भी भीगे हुए हैं!”
तो मनोज और अभी ने एक दूसरे को देखा और उस्सने अभी को मुस्कुराते हुए टॉवल दिया….. अभी ने टॉवल से अपने बाल पर रब किया तो श्वेता ने कहा,
“मुझे दो मैं पोंछती हूँ!”
अब अभी एक तो टांगों पर बैठा हुआ था, अब श्वेता ने उसस्के हाथ से टॉवल ले लिया तो अभी को अपने सर को और निचे झुकना पारा ताके श्वेता उसस्के बाल को रब करे टॉवल से…..
मनोज वापस अंदर चला गया टीवी देखने, और दादा जी भी उसस्के पीछे गया.
किचन में रूही ने श्वेता के हाथ से टॉवल लिया और उस्सने अभी के बालों में टॉवल रब किया उसस्के बाल सुखाने के लिए. अभी के सर पर बहोत बाल थे, उसस्के बाल भी थिक थे और उस्का हैरस्टीले खूबसूरत था जिस से उस्का लुक और भी बेहतर होता था. बहोत बाल थे अभी के सर पर, फुल काळा बाल जो उसस्के गोर रंग को बड़ा सूट करता था. रूही जब उसस्के सर को रब कर रही थी तो श्वेता अभी के कान को अपने मुठी में पाकर कर नोच रही थी, जैसे एक खिलौना था अभी के कान, और रूही ने श्वेता के मुठी पर छोटा सा चमाट लगते हुए कहा,
“क्यों मेरे अभी के कान नोच रही हो तुम!”
अभी को वो मोमेंट बहोत प्यारा लग रहा था के रूही उसस्के बालों में टॉवल रब कर रही थी, उस्सको लग रहा था वो अपने घर में है और उस्सकी पत्नी वो सब कर रहा था…..
श्वेता ने जवाब दिया रूही को,
“किआ यह आप की अभी है? क्यों यह आप का अभी है दीदी?!”
तो जल्दी से रूही ने श्वेता के मुंह पर अपने हाथ रखा ताके अंदर से मनोज उस्सकी आवाज़ नाह सुनें, और रूही की माँ हंससने लगी.
अब मनोज से क्यों रूही, अभी के साथ अपना रिश्ता छुपा रही थी यह वही जाने, मगर मनोज को सब दिख तो रहा था क्यूंकि शुरू से जब भी अभी और रूही बात करते या आस पास होते थे तो मनोज दोनों को देख कर मुस्कुराता था हमेशा, मतलब उस्सको पर्सनली पता था के दोनों एक दूसरे को पसंद करते हैं, फिर भी पता नहीं क्यों मनोज से रूही या तो दरर्ति थी या छुपाना चाहती थी. मनोज रूही का बड़ा भाई था, घर का बड़ा बीटा था, महेश, रूही से छोटा था, और बड़ी बेहेन जिस्सकी शादी हो चुकी है वो मनोज के बाद थी. मतलब मनोज पहला औलाद था उस फॅमिली का.
कुछ देर बाद अभी ने रूही से आहिस्ते से कहा के उस्सको नहाना है, और अंडरवियर नहीं है उसस्के पास, और रात को सोने के लिए कपडे भी नहीं है.
तो रूही ने यह बात अपनी माँ से कहा तो माँ ने महेश का एक अंडरवियर, शार्ट और टीशर्ट दिया अभी को.
जब अभी नहाने जा रहा था ठीक तभी मनोज भी अपने कमरे से निकला टॉवल और अंडरवियर के साथ, और देखा अभी नहाने जा रहा है तो अभी से कहा,
“okay पहले तुम हो आओ,” और अभी ने कहा, “नहीं इतस okay पहले तुम हो आओ तब मैं नाहा लूंगा”
मगर आखिर में अभी hi गया नहाने.
जब अभी नाहा रहा था तब मनोज ने रूही के सामने अपनी माँ से सवाल किया,
“मेरी समझ में नहीं ारः के क्यों और कैसे आज अभी हमारे यहाँ ठहरा है, आप समजाओ मुझे माँ!”
माँ ने रूही को देखा और रूही अपनी माँ को. तो मनोज ने रूही से पूछा,
“तू बता सकती है? किआ यह तेरे कहने पर रुका है? या तेरे लिए रुका है?!”
माँ ने जवाब दिया,
“अरे यहीं उस्सको लेट हो गया था आज और उसस्के शहर जाने वाले बसेस मिस हो गए तो मैं ने hi कहा के क्यों टैक्सी को पता नहीं कितना पैसा देना पड़ेगा, तो हमारे यहाँ रुक जाए!”
मनोज ने फिर भी रूही को देखते हुए कहा,
“मगर तू बड़ी खुश हो रही के वो यहाँ ठहरा है क्यों? कहाँ गए थे तुम दोनों मेरे घर आने से पहले?!”
रूही सर झुकाये हुए निचे देख कर हंसी और कहा,
“वो अपने घर फ़ोन करके बताने गए थे के वो आज घर नहीं आरहे हैं!”
तब मनोज ने कहा,
“मगर उस्का टैक्सी का भाड़ा तो मेहबूब को देना चाहिए था नाह? या उस्सको मेहबूब के यहाँ रुकना था हमारे घर क्यों आया यह जानना चाहता हूँ मैं!”
माँ ने कहा,
“अरे तुम क्यों इतने सवाल करने लगे मैं ने खुद उस्सको यहाँ रुकने के लिए कहा कौन सी बड़ी बात हो गयी?”
तब मनोज ने रूही के तरफ देखते हुए hi कहा,
“बड़ी बात यह है के रूही के लिए रुका हमारे यहाँ वो और रूही खुश है के मेहबूब के बजाए हमारे यहाँ रुका!”
रूही ने धीमे आवाज़ में कहा,
“तो किआ हुआ भाई?!”
मनोज: “किआ लगता है वो तेरा?!”
रूही: “कुछ नहीं!”
मनोज: “तो तुझे क्यों ख़ुशी है के वो हमारे यहाँ रुके?!”
रूही: “मैं ने कब कहा के मुझे ख़ुशी है?!”
मनोज: “दिख रहा है मुझे!”
माँ ने दोनों को रोकते हुए कहा
“छुप हो जाओ तुम दोनों, अरे मनोज दोनों दोस्त हैं, हमउम्र हैं एक दूसरे से बातें करते हैं दिन में एक दूसरे से जान पहचान हो गए हैं तो किआ हो गया?!”
मनोज: “माँ या और कोई बात है? मैं कुछ ऐसी वैसी बात नहीं सुन्ना चाहता हूँ, अगर मुझे कुछ ऐसी वैसी बात का पता बाद में चला तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा कह देता हूँ. आज रुक गया है, घर आये मेहमान को कुछ नहीं कह सकता, मगर खबरदार अगर आईन्दा ऐसा हुआ तो!”
इतना कहकर मनोज वहां से निकल गया और रूही रोने लगी अपनी माँ के सीने से लग कर. माँ ने उस से कहा,
“छुप कर वो ऐसा hi है उस्सकी फ़िक्र मत कर…. “
डिनर के टाइम सब किचन में एकता हुए. और अभी ने देखा के रूही उस से दूरी किये हुए हैं. अभी बार बार रूही के तरफ देख रहा था और उस्सको ाचा नहीं लग रहा था के रूही उस से दूर है. रूही को भी पता था के अभी को ाचा नहीं लग रहा होगा तो उस्का मैं बहलाने के लिए उस्सने श्वेता को अभी के पास जाने को कहा धीरे से.
श्वेता जब अभी के पास गयी तो अभी के गॉड में घुस के बैठ गयी, रूही और उस्सकी माँ डिनर सर्वे करने लगे. रूही ने धीरे धीरे अपने माँ से कुछ कहा सर्वे करते वक़्त. दादा जी को, मनोज को और खुद माँ ने अपने लिए सर्वे कर लिया टेबल पर. अभी को नहीं सर्वे किया. तो दादा जी ने पूछा,
“अरे अभी को भी खाने दो नाह!”
तब रूही ने कहा,
“हम कमरे में खाएंगे दादा जी!”
और मनोज ने एक नज़र रूही को देखा मगर कुछ नहीं कहा.
रूही ने तब उस दिन की तरह खुद की और अभी का खाना अपनी रूम में लगाई और अभी को आने को कहा. श्वेता रूही के माँ के साथ चली गयी. और अभी गया रूही के रूम में.
अभी एहि तो चाहता था, उस्सकी दिली तमन्ना थी के दोनों अकेले एक साथ खाना काये और उसी कमरे में खाने का मैं था उससे एहि बात रूही से कहने को सोचा था नहाते वक़्त मगर नाहा कर वापस निकला तो मौका नहीं मिला उस्सको रूही से बात करने के लिए. तो कितना खुश हुआ यह देख कर के रूही ने भी बिल्कुल वही सोचा जो अभी के दिल में था. दोनों के बीच जैसे एक अंजना कनेक्शन होता था, जो अभी सोचता होता था वही रूही भी सोचती थी. दोनों के बीच एक गहरा कनेक्शन था…. रूहानी थी या किआ था मगर दोनों एक दूसरे से जैसे बंधे हुए थे किसी तरह से. ऐसा अभी को लगता था और सोचता था वो.
जब दोनों रूही के कमरे में चले गए तो मनोज शुरू हुआ किचन में.
“यह किआ है? क्यों उस्सको इस्पेशल ट्रीटमेंट दिया जा रहा है? घर का जमाई राजा है किआ वो? क्यों रूही के साथ डिनर करना चाहिए उससे? हमारे साथ यहाँ नहीं खा सकता वो?!”
दादा जी ने कहा,
“अरे बचे हैं दोनों खाने दो एक साथ किआ बुराई है?!”
मनोज ने अपने दादा जी को बड़े बड़े आँखों से देखते हुए कहा,
“आप तो छुप hi रहो तो बेहतर है आप की गए नहीं माँगा है मैं ने!”
बूढ़ा दादा छुप हो गया, और चुप चाप खाने लगा. उस्सकी जैसे कोई एहमियत hi नहीं थी घर में. बूढ़ा था 77 इयर्स का, कमज़ोर था, पतला सा था, अपने में hi गम रहता था मगर उस्सको सब दीखता था. और उस्सको पता था के रूही और अभी एक दूसरे को पसंद करते हैं और उस्सको रिश्ता पसंद tha.magar उस घर में उस्का कोई नहीं सुनता था, सब उस्सको इग्नोर मारते थे, जैसे वो था hi नहीं उस घर में.
मनोज ने अपनी माँ से दोबारा पूछा के क्यों अभी और रूही कमरे में खा रहे हैं, तो माँ ने भी छुटकारा पाने के लिए कहा,
“तू खुद जा कर रूही से क्यों नहीं पूछता? पूछ सकता है? जा वहां जाकर पूछ ले रूही से”
माँ को पता था के मनोज इतना तो बद्तमीज़ नहीं के एक घर आये मेहमान के सामने जाकर कुछ ग़लत करेगा.
रात को कुछ देर बाद सब लोग टीवी के सामने बैठे सीरियल देख रहे थे, उन् दिनों “हम लोग” चलता था हर रोज़, जिस में अशोक कुमार कहानी को बयां करता था. बहोत प्रचलित और सक्सेसफुल सीरियल रहा था वो. अब याद नहीं के रिपीट था या फर्स्ट टेलीकास्ट था. – रूही और अभी एक दूसरे के बगल में बैठे थे और छुपा कर हाथ पकड़े हुए थे एक दूसरे के. जिस जगह पर मनोज बैठा था उस्सको नज़र नहीं अत दोनों का हाथ पकड़ना.
फिर बात हुई के अभी कहाँ सोयेगा. अभी का बड़ा मैं था के रूही के साथ सोये मगर उस्सको पता था के वो मुमकिन नहीं था. फिर भी कुछ पल वो रूही के आग़ोश में बीतने चाहता था.
रूही ने कहा के दादा जी के कमरे में सोयेगा अभी. वहां एक बीएड खली था इस लिए. रूही को पता था के उस्सने क्यों दादा जी के कमरे में अभी को सोने को कहा. उस्का कमरा ठीक रूही के कमरे के साइड में था, और कभी भी अभी रूही के पास आ सकता था या रूही उसस्के पास जा सकती थी.
करीब 10 बजे मनोज चला गया सोने और रूही की माँ भी श्वेता को लेकर चली गयी अपनी कमरे में. दादा जी, रूही और अभी बैठे रहे टीवी के सामने. अब अभी ने रूही को बाँहों में भर लिया था, दोनों किश करते तो कभी फुसुर फुसुर बात करते, के सुना दादा जी आर्मचेयर पर खर्राटे मार रहे हैं तो रूही ने उस्सको जगाया और अपने कमरे में जाने को कहा. उसी टाइम अभी के बीएड को भी तैयार कर दिया रूही ने और दोनों गए रूही के कमरे में उस्सकी बीएड पर कुछ देर साथ रहने के लिए.
कुछ देर साथ बैठ कर एक दूसरे को करेस किया, किश किया और रूही ने कहा उस्सको चेंज करना है, अपनी निघ्टड्रेस पेहेनना था उससे. तो उसी कमरे में अभी के मौजूदगी में रूही ने ड्रेस चाहगे किया मगर अलमारी के दरवाज़े को खोल कर उस्सकी आध में चेंज किया…. फिर भी अभी उस्सकी जिस्म के कुछ हिस्सों को देख पा रहा था जैसे उस्सकी पीठ, काँधे पर ब्रा के स्ट्राप और रूही ने ब्रा उतरा जो अभी ने फुल देखा, और वो उत्तेजित हुआ….
जब रूही वापस आयी बीएड पर अपनी निघ्टड्रेस में, वो लम्बा था फुल निचे तक, मगर अभी को पता था के अंदर ब्रा नहीं पहना था रूही ने और उस्सकी गोरी बाहें दिख रहे थे पूरा क्यूंकि ड्रेस स्लीवलेस था.
अभी ने रूही को जाकर लिया और बीएड पर लेता कर चूमने लगा. रूही ने सरेंडर कर दिया था खुद को, जैसे वो चाहती थी के अभी उस से हमबिस्तर होए. अभी का हाथ धीरे धीरे किश के दौरान रूही के बाज़ू को सहलाते हुए ऊपर उस्सकी काँधे तक रुके, फिर दूसरा हाथ रूही के ड्रेस के निचे उस्सकी तंग पर फरते हुए काफी ऊपर उस्सकी जाँघों तक पहुँच चूका था और इस से पहले के और ऊपर जाता रूही ने उस्का हाथ रोक लिया अपने हाथ को ऊपर से दबा कर.
अभी रूही के ऊपर चढ़ चूका था, और अब वो रूही के गर्दन पर अपने जीब फेरर रहा था, रूही हांफ रही थी और अभी का एक हाथ अब उस्सकी उरोजों को दबा रहा था, तो रूही ने तड़पती आवाज़ में आहिस्ते से कहा,
“प्लीज रुक जाओ, स्टॉप अभी मुझ से सहा नहीं जाएगा, मैं खुद को रोक नहीं पाऊँगी, प्लीज स्टॉप नाह!
रूही के बूब्स को और दबाते हुए अभी ने घुर्राटे हुए कहा,
“एहि तो मैं चाहता हूँ स्वीटहार्ट, खुद को मेरे हवाले कार्डो नाह, पूरी तरह से….”
अभी की आवाज़ दबा हुआ था, उसस्के भी सांसें जैसे फुल रहे थे, और उस्का हाथ इस बार रूही के ड्रेस को इतना ऊपर उठा चूका था जिस से रूही के बूब्स अभी के सामने था, तब अभी ने निचे के तरफ देखा तो रूही की पैंटी दिख रहा था, अभी को खुद पता नहीं चला के कब उस्सने उस्सकी निघ्टड्रेस को उतना ऊपर उठा लिया था….. रूही को अधनंगी देख कर अभी शर्मिंदा हुआ और जल्दी से उस्सकी ड्रेस को निचे करके उस्सको ढांक दिया और रूही से सॉरी कहा.
रूही ने अभी के गाल को सहलाते हुए प्यार से उसस्के चेहरे में देखते हुए कहा,
“यू दो नॉट हैवे तो बे सॉरी अभी, ी वास् लेट्टिंग यू मूव उप माय ड्रेस, मैं आप रोक नहीं रही थी, इससमे तुम्हारी कोई ग़लती नहीं है.”
अभी ने रूही के गालों को चूमते हुए कहा,
“मुझे होश hi नहीं था के मैं ने इतना उठा दिया था तुम्हारे ड्रेस को, पता होता तो नहीं करता…. सॉरी अगेन.”
रूही अभी को ग़ौर से देखते हुए कहा,
“अभी समझ लो के यह हमारी फर्स्ट नाईट है शादी के बाद तब भी तुम ऐसा करते किआ?!”
अभी ने बड़े प्यार से रूही को चूमते हुए कहा,
“तब बात और होती, तब मैं तुम्हारे नहीं अपने घर में होता, और तब सब ऑफिसियल होता नाह? हमारे पास यह सब करने की लाइसेंस होता, अभी अलग बात है नाह!”
रूही ने अभी के छाती को चूमते हुए कहा,
“उस दिन तो तुम कुछ ज़्यादा hi करना चाहते थे तो आज क्यों नहीं?!”
अभी: “पता नहीं आज माहौल अलग लग रहा है, उस दिन घर पर कोई नहीं था, आज दिमाग़ में यह बात है के मनोज है, आंटी है, श्वेता भी hai…to माहौल बिल्कुल अलग है आज और ऊपर से रात है आज!!”
लग रहा था आज रूही उत्तेजित हो रही थी, क्यूंकि उस्सने खुद अपने हाथ को अभी के शार्ट के ऊपर उसस्के लिंग के ऊपर रखा और एक रिझाती हुई ऐडा में कहा,
“उस दिन तो आप ने मेरे हाथ को खिंच कर यहाँ रखा था और मुझसे कुछ और चाहते थे आप, आज वो नहीं चाहिए आप को?!”
अभी ने एक गहरी सांस लेते हुए, और रूही की तरसती नज़रों को देखते हुए कहा,
“स्वीटहार्ट चाहिए तो मुझे बहोत कुछ, बहोत ज़्यादा कुछ चाहिए तुमसे, तुम्हारी गहराई में समा जाने को दिल करता है, तुम्हारे साँसों में घुल जाने को मान करता है, तुम्हारे आहों में मिल जाने को मैं करता है, तुम्हारे दिल में उतर जाने को मैं करता है, तुम्हारे एक एक अंग को अपने अंगों में बसाने को मैं करता है मगर डरता हूँ; डरता हूँ के तुमको रुस्वा नाह करदूँ, दर है के यह सब करके तुमको खो नाह बैठूं, डरता हूँ के कल तुम यह नाह कहो के मैं ने ग़लत फायदा उठाया तुम्हारा इस लिए बेहतर है के उस कमरे में चला जॉन अब!”
अभी दादा जी के कमरे में सोते हुए सोच रहा था के आज उस्सने रूही को प्यासा चोरर दिया. उस्सकी प्यास नहीं बुझाई उस्सने. रूही प्यासी थी इस्सके एहसास हो रहा था अभी को.
अभी गहरी नींद में थी, बिच रात में रूही तीन बार उसस्के पास आयी थी इस्सके अभी को बिल्कुल पता नहीं चला, पता चला तो यह के रूही उस्सको सुबह 6 बजे जगा रही थी उठने के लिए, काम पर जाने के लिए.
तो बे कॉन्टिनोएड…. (3520 वर्ड्स)