अपडेट 32 थे लास्ट संडे ात वर्क
अगला दिन संडे था, 21सत दिसंबर, फिर भी काम पर जाना था क्यूंकि काम को और 3 दिनों में एन्ड करना था. रात भर अभी ठीक से सोया नहीं था, करवटें बदलता रहा रूही की याद में उस्सकी बदलती हुई अदाओं को सोचते हुए. क्यों वो बदलने लगी थी? क्यों मेहबूब से दररने लगी थी? क्यों उस्सकी माँ भी कुछ अजीब बेहवे करने लगी थी….. अभी अपना चैन ो सुकून खोने लगा था इन् दिनों को….
रूही की आँगन में दाखिल होने से पहले अभी सोच रहा था के काश आज रूही सुबह को दिख जाए; कम से कम आज बगीचे में फूल तोड़ती हुई दिख जाए तो उस्सको गुड मॉर्निंग कहेगा पिछली बार की तरह…..
आंगन में दाखिल हुआ, सर निचे झुकाये सोच में डूबे अभी चला जा रहा था के उस्सकी मांगी हुई दुः क़ुबूल होते दिखाई दिए, रूही बगीचे में गुलाब तोड़ रही थी!! अभी का दिल उस दिन की तरह धड़का, रुक गया, खुश भी था और घूम ने भी घर किया हुआ था उसस्के दिल के अंदर, फिर भी कहा, “गुड मॉर्निंग रूही”
रूही ने जवाब नहीं दिया मगर मुस्कुराते हुए अभी को देखा. अभी खड़ा हो गया उस से बात करने के लिए, तब रूही ने कहा,
“उफ़ आप जाओ, सब लोग घर पर हैं मनोज भी यहीं है आज संडे है आप जाओ नाह प्लीज! मुझसे बात मत करो, और मुझको बार बार देखना मत काम करते वक़्त.”
मायूस, अभी वहां से बिना कुछ कहे गया वाशरूम के तरफ चेंज करने. चेंज कर लिया तो मेहबूब के किचन के पास से गुज़रा तो पाया के रूही भी उधर आयी हुई है, वो अपनी येलो निघ्टड्रेस में थी, जो बहोत लम्बी ड्रेस थी, जिस्सको रूही को एक हाथ से संभालना पड़ता था चलने के लिए थोड़ा सा ऊपर उठाकर…. तो वो और अभी बिल्कुल एक दुसरते के करीब थे, फिर अभी ने कहा,
“तुम ने आज भी गुड मॉर्निंग का जवाब नहीं दिया? किआ तुम लोग इस इलाके में गुड मॉर्निंग नहीं विश करते को एक दूसरे को? लगता है तुमको आदत नहीं गुड मॉर्निंग करने की नाह?!”
रूही ने डेंटन में जैसे सॉरी कहते हुए अपने होंठ को दबाया और रहीम की किचन में घुस गयी मुड़कर अभी को देखते हुए.
बाद में अभी बस के अंदर काम करने लगा और रूही किचन की स्टैर्स पर कड़ी अभी को देख रही थी एक मुस्कान के साथ. अभी ऐसा फील कर रहा था जैसे शुरू के दिनों में नए नए मिले थे दोनों, पहली बार… जैसे अभी नयी नयी पहचान हुई थी दोनों के….
फिर जब बाकी के लोग काम पर आये तो रूही ग़ायब हो गयी 2 घंटे तक नहीं दिखी. रूही की माँ कपडे धोते हुए नज़र आयी तो अभी ने उस से पूछा के रूही किधर है तो उस्सने कहा के रूही बीमार है!
अभी को काम करते हुए हथोड़े से लग गया उस्सकी एक ऊँगली में, खून निकल रहा था, रूही की माँ ने वो देखा, तो अभी गया रूही की माँ से यह कहने के रूही को बता दें के आज 1 बजे वापस चला जाएगा क्यों के संडे है; तो रूही उस से मिलने आये जाने से पहले क्यूंकि अभी को कुछ बहोत ज़रूरी बातें करनी है रूही से आज. मगर रूही की माँ ने अभी से कहा के रूही नहीं मिल पाएगी उस से आज क्यूंकि उस्का बड़ा भाई घर पर है, बहोत सारे लोग हैं आँगन में क्यूंकि संडे है और सब लोग दोनों को देखेंगे और मेहबूब को पसंद नहीं है. मगर रूही की माँ अंदर गयी और कुछ दवा लेकर आयी और अभी की घायल ऊँगली में लगाया, और पूछा कुछ आराम मिला के नहीं. तो अभी ने जवाब दिया,
“आप ने ऊँगली पर तो आराम दे दिया आंटी, कलेजे में लगी हुई रूही से केहदो नाह के वहां थोड़ा मरहम लगा दे प्लीज.”
यह कहते हुए अभी के ाँकेः भर आये, रूही की माँ ने अभी को ग़ौर से तरसती नज़रों से देखा और कहा,
“बहोत बड़े बड़े बातें करते हो तुम अभी, ऐसे hi बातों से मेरी बेटी को अपना दीवाना बनाया है नाह? मगर बुसस इतना कहूँगी के धीरज रखो तुम जो होना है सो होगा.”
जब 1 बज गया तो अभी ने देखा खिड़की के पास रूही की माँ कड़ी है और रूही उसस्के बगल में अभी को देखते हुए हंस रही है और अपने जीब से चढ़ा अभी को अपनी माँ के सामने हमेशा की तरह. तो अभी ने सोचा इस्सके मतलब यह हुआ के जो कुछ भी अभी ने रूही की माँ से कहा वो सब उस्सने अंदर जाकर रूही को बताया. माँ बेटी में जबरदसर बॉन्डिंग थी, प्यार की बातें जो एक आशिक ने कहा अपनी बेटी तक पहुँचाने के लिए वो माँ ने जा कर बेटी को बताया वह किआ बात है अभी ने यह सोचते हुए खुद से कहा के हो सकता है माँ से किसी ने ऐसे रोमांस नहीं किया होगा इस लिए उस्सको अभी का आशिकाना अंदाज़ बहुत पसंद आरहे थे इस लिए उसस्के मैसेज को अपनी बेटी तक पहुंचा रही थी.
रूही कोई 15 मिनट तक वहीँ खिड़की पर तक लगाए हुए अभी को देखती रही, जीब से उस्सको छेड़ती रही, 1.15 हो गया, मगर सईद काम एन्ड नहीं कर रहा था, और रूही अब तक अपनी निघ्टड्रेस में hi थी तो अभी ने खुद से कहा रूही की तबियत सच में ठीक नहीं है वार्ना इतने देर तक संडे के रोज़ वो निघ्टड्रेस में नहीं रहती. जिस तरह से रूही अभी को देखती, चढ़ती, वो अभी को बेहद पसंद था, और उस्सको हिम्मत होती थी और उस्का हौसला बढ़ता था और अभी खुद से कहता के ‘यह लड़की कितना प्यार करती है मुझसे वार्ना यह सब क्यों करती? तबियत ठीक नहीं फिर भी 15 मीन्स से ज़्यादा खिड़की के पास कड़ी होकर मुझको नहीं देखती’
जब अभी वाशरूम से धो ध कर अपने सफर करने वाला साफ़ सुथरा ड्रेस पेहेन कर आया तो रूही वहीँ कड़ी पायी गयी खिड़की से तक लगाए हुए. मतलब क्यूंकि अभी ने उस्सको वेट करने को कहा था वो वेट कर रही थी, अभी ने कहा था 1 बजे, और 1 बजे से 1.30 हो गए थे और वो वहीँ वेट करती रही, क्यूंकि अभी ने मैसेज भेजा था उस्सकी माँ से के उस्सको कुछ बहोत ज़रूरी बात करनी है. और माँ ने सब बिल्कुल एक्सएक्ट बताया होगा रूही को के अभी ने तुझे बोलने को कहा है के वो आज 1 बजे काम एन्ड करेगा और तुझसे मिलने को कहा है उस्सको कुछ बहोत ज़रूरी बातें करना है तुझसे!
“वह मम्मी जी सही मैसेज पहुँचाया आप ने अपनी बेटी को! थैंक्स मम्मी जी. होने वाली सासु माँ.” ऐसा अभी कह रहा था अपने दिल के अंदर.
तो जब अभी ने रूही को वहीँ खिड़की के पापैस् पाया जाते वक़्त तो खिड़की के तरफ बढ़ा रूही से बात करने के लिए. रूही मुस्कुराते हुए उस्सको अपने तरफ आते हुए देख रही थी. अभी उसस्के करीब रीच हुआ तो सबसे पहले कहा,
“निघ्टड्रेस में हो, रात हो गयी किआ?!”
रूही और उस्सकी माँ दोनों हंस पड़े. फिर माँ ने कहा,
“बहुत लज़ी है यह किआ तुमको ऐसी लज़ी लड़की चाहिए अभी?!”
अभी ने कहा,
“चलेगा, मैं उसस्के हिस्से के कामों को कर दिया करूँगा जिस दिन उस्सको ऐसे लज़ी फील होगी तो, वैसे मुझे पता है के रूही बिल्कुल लज़ी नहीं है, क्यूंकि इतने दिनों से उससे इतने सारे घर के कामों को करते देखते आया हूँ, किचन में पकाती है, मुझको कितना ाचा पकवान पका के खिलाई है िस्सने, झाड़ू पोंछा लगाती है, कपडे धोती है…. तो लज़ी कैसे हुई आंटी जी!”
रूही मुस्कुरा रही थी अभी के चेहरे में देखते हुए के किश तरह से अभी उस्सकी तारीफ़ कर रहा था, उसस्के चेहरे में एक चमक थी अभी को अड्मिरतीओं से देखते हुए. माँ ने कहा,
“सुन ऋ रूही तेरी तो बड़ी तारीफ़ कर रहा है यह, तुझको पटना अत है इस्को, बड़ा होशियार है यह अभी!”
रूही ने अभी को देखते हुए hi अपनी मम्मी से कहा,
“मैं ने कहा था नाह आप से के बहोत होशियार है अभी!”
फिर रूही ने अभी से पूछा,
“अभी आप ने कहा के आप मेरे हिस्से के कामों को कर डोज जब मैं लज़ी फील करुँगी तो, तो आप मुझे बताइये के आप को घरके कौन सा काम करना अत है?!”
जो जवाब अभी ने दिया रूही और उस्सकी माँ को वो सुन कर दोनों माँ और बेटी दांग रह गए और अभी को इस तरह देखते रहे के जैसे कभी नहीं देखा था उस्सको.
अभी ने जवाब में यह कहा,
“मैं बड़ा बीटा हूँ अपनी माँ का, बाकी 3 भाई और मुझसे छोटे हैं, बहनें तो लास्ट में पैदा हुए, मैं ने दोनों को पला, खिलाया अपने हाथों से, और भाइयों को भी. जब भी माँ बीमार होती मुझे hi घर के सारे काम करने पड़ते थे, कपडे धोना, हर सुबह को आता गुंदना और रोटी पकाना, चाय बनाना, भाइयों को नहलाना, खाना देना, स्कूल के लिए तैयार करना, स्कूल भेजना, और खुद तैयार होना और स्कूल जाना, वापस आना, सब के लिए खाना पकाना, पत्थर पर कपडे धोना जैसे आप दोनों धोते हो, बड़े बड़े चादर को धोना ऐसे hi पत्थर पर, पत्थर पर मसाला पीसना…. और सारे बर्तनों को धोना, साफ़ करना, घर में हर रोज़ झाड़ू लगाना, पूंछा लगाना….. सब कुछ करना आता है मुझे!”
यह सब सुनने के बाद रूही के आँखें बिल्कुल भर आये थे, और लगता था के वो लपक कर अभी के गले में बाहें भाड़ देगी….. रूही की माँ बिल्कुल खामोश हो गयी थी कुछ देर तक और अभी के चेहरे में देखि जा रही थी… फिर दोनों माँ बेटी ने एक दूसरे को देखा, और रूही की माँ ने पूछा,
“तुम्हारी माँ अक्सर बीमार रहती है किआ?”
अभी: “अब नहीं, जीन दिनों मैं पढता था तब बहोत बीमार रहती थी, 3 ऑपरेशन हुई उस्सकी तब ठीक हुई, स्टोन्स हुए थे ब्लैडर में और एक बार गोइटर की ऑपरेशन किया था फिर एक बार पथ में कुछ हुआ tha…unn दिनों मैं 8 से 18 साल का था…. मेरे 19 होने के बाद माँ कभी बीमार नहीं हुई, और तब तक नैना बड़ी हो गयी और अब वो माँ की मदद करती है किचन में और बाकी के घर के कामों में. नैना ने बहोत सारे घर के काम मुझसे सीखी है माँ से नहीं! आज भी कुछ पकाती है तो मुझसे पूछने आती है के यह ऐसा करना है या वैसा? नमक कितना डालना है ेट्स…..”
रूही सब फिर से बड़े ध्यान से सुन रही थी और कहा,
“हम्म्म तो आप को पकाना भी अत है, उस दिन मेरा पकाया हुआ जो खाया था कैसा था?”
अभी: “आरी आज पूछ रही हो? बेस्ट था स्वीटहार्ट!”
और आखिर में अभी ने रूही को पीछे आने को कहा क्यूंकि उस्सको कुछ ज़रूरी कहना था अभी ने कहा उस्सको. मगर रूही ने कहा “नाह” और अभी को जीब से चिढ़ाया और घर के अंदर भाग गयी!”
अभी ने उसस्कीमा को देखते हुए कहा,
“कमाल है समझती नहीं के “ज़रूरी” का मतलब किआ है यह लड़की?!”
रूही की माँ ने धीरे से कहा,
“नहीं आ पाएगी, मनोज घर पर है, बाहर मेहबूब है उस्सको सुन्ना पड़ेगा जब आप चले जाओगे तो, अब आप जाओ अभी…..”
अभी जाने लगा था के रूही की माँ ने हँस्ते हुए कहा,
“वैसे, आप किआ कुछ करते हो घर के कामों को बता कर उस्सको और ज़्यादा पता लिया लगता है, है नाह अभी?”
और अभी को वापस घर लौटना पड़ा बिना रूही से अपना इम्पोर्टेन्ट बात कहे….. जाते हुए बार बार मुड़कर देखता गया के काश रूही किचन के पास दिखे या खिड़की के पास आये मगर नहीं दिखी…..
घर जाने से पहले अभी ने ा क्रिसमस विशिंग कार्ड ख़रीदा रूही के लिए, एक बड़ा सा कार्ड लिया उस्सने.
अभी ने खुद से कहा के वो अब रूही को समझ नहीं पा रहा है. कहाँ अब रूही को उस से और ज़्यादा करीब आना चाहिए था मगर रूही उस से ज़्यादा दूरी बनायी हुई थी. इस से पहले रूही उस से घंटों से ज़्यादा बातें किया करती थी और अब 5 मीन्स भी नहीं करती और कहती के लोग देख रहे हैं….
घर वापस आकर अभी ने सब कुछ अपने डायरी में लिखा, शाम के 5 बजे बीएड पर लेटने गया, उस्सको जगाने से मन किया नैना और अपनी माँ को - और रात को बारह बजे जाएगा… इतनी थकान थी के उस्सको होश hi नहीं रहा के कब दिन है और कब रात.
और रात के 2 बजे अभी ने रूही के लिए दूसरा खत लिखा जिस्सको विशिंग क्रिसमस कार्ड के साथ कल पोस्ट करेगा रूही के hi इलाके वाले पोस्ट ऑफिस में.
तो बे कॉन्टिनोएड….(2002 वर्ड्स)