अपडेट 60 रूही हद लॉट्स तो से
अभी का हाथ कांप गया उस परफ्यूम को हाथ में lekar…pichle 25 सालों में उस्सको यह परफ्यूम मिला hi नहीं कहीं भी. रूही से अलग होने के बाद अभी को 3 साल बाद मिला था वो परफ्यूम मतलब 1989 तक… उस के बाद इम्पोर्टर ने अभी से कहा था या तो बोरजोईस ने उस परफ्यूम को बनाना बांध कर दिया या नए पेर्फुमेस बनाने लगे इस लिए “सोइर दे पेरिस” नहीं मिलता अब…. फ्रांस की परफ्यूम है और इस्सके मतलब है “नाईट ऑफ़ पेरिस” अभी का पससंजीदा परफ्यूम था, और आज उस परफ्यूम को 25 साल बाद सूंघ कर सोचिये अभी ने किआ फील किया होगा, उस्सको कैसा लगा होगा?.....
अभी के जिस्म के रोवाण रोवाण उठ गए वो सूंघ कर, वो ज़माना याद आगया, वह दिन याद आगये, हर लम्हे की एक खुशभू होती है, हर पल का एक खुशभू होता है, हर वक़्त की एक पहचान होती है उसी तरह अभी के गुज़ारे हुए वह दिन इस खुशभू से इस तरह से जुड़े हुए थे, उस खुस्भू से रूही जुडी हुई थी, रूही की यादें जुड़े हुए थे. सईद, मेहबूब, महेश, श्वेता, सब जुड़े हुए थे इस खुशभू से… उन् दिनों जब अभी गंदे कपड़ों में काम करता था, और शाम को वाश करने के बाद जब अपना उस कमीज़ को पहनता था जिस से अब वो वापस बस से घर जाएगा, तो उस कमीज़ में यह खुशभू लगा हुआ होता था, अभी के जेब की रुमाल में यह खुशबू हुआ करता था, और अभी को वह दिन वापस याद आगये, उस्सको लगा के अभी वापस बस से घर जाएगा, शाम हो रहे थे तो काम ख़तम करने का वक़्त था और उस्सको अब घर वापस जाना था….. अभी उस परफ्यूम हो हाथ में लिए अलमारी के पास बैठ कर फर फुट कर रोने लगा….
रूही ने बच्चों से अपनी व्हीलचेयर लाने को कहा, उस पर कैसे भी करके बैठी और अभी के पास गयी, उस्सको अपने सीने से लगाते हुए उस्सको चुम्बन दिए, और आज 25 साल बाद अभी को रूही के सीने से दोबारा लगने को और उस्सकी जिस्म की खुशभू को फील करने का नसीब प्राप्त हुआ….. वो सोच कर वो और भी कसके रोने लगा रूही की छाती पर उस्सकी ड्रेस को भिगोते हुए….
रूही को भी एक चैन की सांस लेने का मौका मिला अपने अभी को बरसों बाद अपने सीने से कसके उस तरह से लगाने से…. वो भी तरस गयी थी अपने अभी को उस तरह से महसूस करने के लिए…. और रूही गुनगुनाने लगी अभी के सर पर हाथ फरते हुए, “प्यार करते हैं हम तुम्हें इतना…. प्यार करते हैं हम तुम्हें इतना, दो आँखें तो किआ दो जहाँ में समाये नाह जितनाआआआ प्यार करते हैं हम तुम्हें इत्नाहा” और इस गाने को रूही को गुनगुनाते सुनकर अभी और भी रोने लगा….
रूही ने उसस्के सर को चूमते हुए कहा,
“मेरा अभी तो अब भी वही बचा है, अब भी वैसे hi रोटा है, कितना इमोशनल था और आज भी है मेरा अभी हम्म्म? कितना रट हो आप? और कितना रोया होगा जब मेरे घर से आखरी बार निकाले गए थे आप? मेरा कलेजा फट जाता था बुसस वही सोच सोच कर, किसी को नहीं पता था मेरे सिवा के आप कितने इमोशनल हो, दिल के कितने नाज़ुक हो आप वो सिर्फ मुझे पता था, इस लिए सब सोच सोच कर मैं बहोत रोटी थी अभी…. मैं ने उस दिन आप के चले जाने के बाद घर में तूफ़ान खड़ा कर दिया था, इतनी चिलायी थी, कितने चीज़ों को तोडा फोड़ा था, नाह मेरी डायन माँ, नाह बाप नाह मनोज नाह महेश संभल पा रहे थे मुझे, उस घर के तक़रीबन सारा सामान तोड़ फोड़ दिया था मैं ने, एक भूत जैसी संवार हो गया था मुझ पर….
बाहर एक तूफ़ान था और उस घर के अंदर मैं तूफ़ान बानी हुई थी, घर के सामने वाले सारे शीशे तोड़ डाले थे मैं ने यह कहकर के मेरे अभी को इस बारिश में तुम लोगों ने भीगने को भेजा तो लो मैं इस घर को भिगो देती हूँ, तमान शीशों को एक लोहे से तोड़ डाला था मैं ने, हाथ में लग भी गयी थी टूटे हुए शीशे से…. घर टेररासे से अंदर लाउन्ज तक ऐसे भीगे के आँगन लगने लगा था…. इतना बारिश हो रहा था के सोफों को लाउन्ज से उठा कर घर के अंदर करना पड़ा उन सब को… मैं एक पागल जैसे बेहवे करने लगी थी, हंस रही थी जब सब सामान उठा उठा कर अंदर ले जा रहे थे और मैं बहार कड़ी बारिश में भीग रही थी यह सोच कर के मेरा अभी भीग रहा होगा उन् कुत्तों की वजह से…. कुछ देर बाद मैं भी कांपने लगी थी, पापा घंटों बाद मुझे अंदर ले गए तब मुझे एहसास हुआ के आप भी कांप रहे होंगे, और उस हालत में इन् लोगों ने आप को वापस लौटाया था… यह चिल्लाते हुए मैं कह रही थी सब से, के देखो मैं कितना कांप रही हूँ अभी भी तो इसी हाल में होगा, क्यों उस्सको वापस भेजा तुम लोगों ने….”
अभी थोड़ा शांत हुआ था, रूही के सीने से hi लगा हुआ था, रूही ने बोलना बांध किया और अभी रूही के दिल के धड़कनों को सुन रहा tha….ussne एक किश किया रूही के सीने पर, रूही ने उस्सने गर्दन को चूमा, और अभी ने सर उठाकर रूही के चेहरे में देखा, तो रूही ने अभी के मुंह पर एक चुम्बन दिया और धीरे से कहा,
“किश करना तो भूल hi गयी हूँ मैं, 25 सालों तक किसी को किश नहीं किया नाह? मुझे सीखाड़ोगे दोबारा किश करना हम्म्म?!”
अभी ने ज़ोर से चिपका लिया रूही को अब अपने सीने पर और मुड़कर बच्चों को देखा, बचे समझ गए और सब बाहर निकल गए…. तब अभी ने हलके से रूही के होंठों से अपने होंठों को लगाया, और अपने जीब को फेर्रा रूही के कांपते होंठों पर, रूही ने आखें बांध कर ली, और अभी ने रूही के चेहरे को अपने हाथों में थाम कर एक लम्बा वाला पैशनेट किश किया…. रूही ने जैसे खुदको अभी को सरेंडर कर दिया था उस वक़्त, अपने जिस्म को बिल्कुल ढीला चोरर दिया था…. अभी को उस्सकी जीब का स्वाद दोबारा हासिल हुआ आज और श्वेता याद आयी इस बार…. और किश रोकते हुए अभी ने सोचा श्वेता का ज़िक्र करें.. मगर रूही ने कुछ और hi बोलना शुरू कर दिया…. उस ने कहा,
“मैं ने 5 साल तक मनोज से बात नहीं किये उस 5तह जनुअरी 1987 के बाद, और माँ से तो इस तरह बात करती जैसे मैं उस्सकी माँ थी वो मेरी नौकरानी…. कोई काम नहीं करती, सिर्फ घर में बैठती और किताबें पढ़ती, फ़र्ज़िना और दूसरे कजिन से बहोत सारे किताबें मागवती उनके स्कूल के लाइब्रेरी से और पढ़ती…. अभी आप के जाने के बाद यह आँगन सुना पापड़ गया था, जितना मेरी अभी का नाम गूंजा करता था इस आँगन में उतना hi सन्नाटा चा गया था, उस 24तह दिसंबर को जब मैं चली गयी थी और वापस आयी तो आगाँ में इतना सन्नाटा था के मुझे डर लगने लगा था यहाँ रहने को…. मेरे कानों में बार बार आप की सीटियों की आवाज़ सुनाई देते, आप उसी गाने की ढूंढ को सीटी बजाते हुए सुनाई देते मुझे… जिस दिन मैं वापस आयी थी 31सत से पहले या 31सत को hi अभी याद नहीं, तो मैं प्राथना करती के बस से उतरूं तो आँगन में किसी कारण देखूं के अभी तक काम चल रहा है बस में और आप यहीं हो, ऐसा अनुमान हो रहा था के आप ज़रूर किसी कारण इसी आँगन में मिलोगे मुझे, मैं ने आँख बांध करके मैं रोड से आँगन में दाखिल हुई, और आँखें खोली तो सब खली खाली देखा, बस भी नहीं था, कोई शोर शराबा नहीं था, सनाटा था, सब अलग सा लग रहा था, मेरा दिल बैठ गया और दिल ने कहा चला गया तेरा अभी, अब कभी नहीं वापस आने के लिए चला गया वो…..
और जब आप की नई ईयर वाली विशिंग कार्ड मिला खत के साथ तो दिल झूम उठा के आप आओगे…. दिल को सुकून हासिल हुई…. और तब एक तमाशा हुआ था अभी…. फॅमिली मेंबर्स में एक बड़ा तमाशा हुआ था…. आप गए थे नाह मेरी चची के घर मुझको ढूंढ़ते हुए…. शायद 28तह दिसंबर था नाह? मैं वही थी उस रोज़. बेहद खुश हुई थी आप को देख कर, इतना ाचा लगा था देख कर के आप मुझको धुनते हुए वहां तक चले आये थे…. अभी तभी मुझे पूरा यकीन हो गया था के आप मुझसे कितना प्यार करते हो और सीरियस हो…. उसी रोज़ मैं ने डीडे किया था के अब चाहे कुछ भी हो मैं किसी की नहीं बनूँगी आप के सिवा, और कोई मैने नहीं रखता था मेरे लिए आप के सिवा उस दिन मैं ने डीडे किया था जब आप को रट हुए मेरे लिए मेरी चची से बात करते सुना था, चची और माँ की बिल्कुल नहीं बनती दुश्मन हैं दोनों एक दूसरे के इस लिए मुझे चची की बात माननी पड़ी और मैं कमरे के अंदर चली गयी थी उस्सकी लेहाज़ करते हुए….
मगर वही मौका था आप को सुनने की और आप की सच्ची मुहबत को पहचानने की. मेरी चची आप के लिए एक अजनबी थी और आप ने एक अजनबी से रोया था मेरे लिए, आप ने अपना प्यार साबित किया था मेरे लिए उस रोज़ अभी… मैं ने तभी डीडे किया था के अब घर वापस जाकर आप के बारे में माँ से कहूँगी के मैं और किसी को भी नहीं एक्सेप्ट करुँगी सिर्फ अभी को एक्सेप्ट करुँगी वार्ना किसी को भी नहीं….
मगर तमाशा यह हुआ था के चची मेरे पहुँचने से पहले मेरी माँ और बाप के कान भरने चली आयी थी के आप किश तरह के इंसान हो के उसस्के घर तक आ गए थे मुझको ढूढ़ने के लिए… आप को गुंडा मावली कहा था उस्सने और माँ और पापा उसस्के बात को लेकर इतना ग़ुस्सा थे, साथ में मनोज भी था… सब आप के खिलाफ थे उस बात के लिए के आप उसस्के घर गए हुए थे मेरे लिए…. सब उल्टा हुआ था, बल्कि चची ने सब उल्टा करके बताया था यहाँ आकर………”
अभी ने रूही को रोकते हुए कहा,
“और तुम पिकनिक गयी थी तब मुझ तक संदेसा पहुंचना चाहती थी जॉर्ज के ज़रिए है नाह?!”
रूही चहुंका और अभी के चेहरे में देखते हुए कहा,
“ओह माय गॉड आप को वो पता था? आप को संदेसा मिला था? तो क्यों आये थे आप 5तह को?!”
अभी: “नहीं मिला था संदेसा रूही, अगर मिला होता तो नहीं अत मैं 5तह को…. मुझको तो करीब एक महीने बाद उस बात का पता चला के तुम पिकनिक गयी थी तो जॉर्ज से मेरे बारे में पूछ रही थी और मुझे 5तह को नहीं आने को कहा था…. खबर बहोत लेट मिला था मुझे…. उसस्के बाद मैं सोचने लगा था ऐसा किआ हुआ होगा के तुम नहीं चाहती थी के मई 5तह को आऊं….”
रूही: “मैं चाहती थी के चची वाली बात ठंडा हो जाए तब आप आओ, वो बात गरम थी 5तह tak…Manoj, भी नाराज़ था के आप क्यों गए थे उसस्के घर जब आप का कोई रिश्ता नहीं था उस से? एक मम्मी की बनती नहीं थी उस से, ऊपर से उस्सने इतना तमाशा किया था एक पुराणी बात को लेकर के मैं कैसे बताऊँ आप को मेरी समझ में नहीं अत अभी….
मेरी उस चची से और हमारा इस घर से एक बड़ा hi अजीब ो ग़रीब रिश्ता है अभी मैं यह बाद में बताउंगी आप को…. मेरी लाइफ की सबसे बड़ी ग़लती वाली रिश्ता है मेरा उस घर से अभी…. मगर अभी मत पूछना मैं धीरे धीरे आप से सब कुछ बताउंगी…. अभी कुछ और बोलना है मुझे आप से…
जब आप की शादी की खबर सुनी तो बहोत रोई मैं….”
अभी: “पहले मुझे यह बताओ के तुमको मेरी मांगनी फिर शादी की खबर मिली कैसे? नवीन तो उस साइड रहती है, यहाँ से 10/15 किलोमीटर्स दूर है, और इधर के लोग उस तरफ से बिल्कुल काटते हुए हैं, तुम्हारे मैं रोड से ईस्ट जाते हैं सारे रस्ते, उस्सकी रोड से साउथ ज़्यादा टर्र जाते हैं तो तुमको कैसे खबर मिलते थे? कोई रिलेटेड फॅमिली मेंबर्स था किआ तुम्हारा?!”
रूही ने मुस्कुराया, अपने चश्मे को निकला और फिर अभी के चेहरे को सहलाते हुए कहा,
“मैं आप की खबर रखती थी अभी, मुझे सिर्फ इतना नहीं पता के रहते किधर हो मगर आप के हर हरकत की खबर रखती थी मैं!”
अभी: “मगर कैसे? अगर इतना hi खबर रखती थी मेरा तो मुझसे कांटेक्ट hi कर लेती तुम? तुम्हें नहीं लगता के तुमने ग़लत किया? कुमसे कम तब तो मुझसे मिल लेती जब मैं रहीम के घर डायरीज चौररने आया था, वो मेरा आखरी बार यहाँ आना था, मैं और भी आना चाहता था मगर जब मेहबूब ने मुझे मेरे डायरीज वापस किये तो ऐसा कुछ कहा के यहाँ आना बांध करना hi पड़ा मुझे!”
रूही: “अभी तक़दीर का खेल समझो या यूँ कहूं के ऊपर वाला चाहता था के मुझे आप के बारे में सब पता चलता रहे हमेशा… किसी तरह भी मुझे आप के बारे में पता चल hi जाता था…. अब बताती हों के कैसे मांगनी की खबर मिली और फिर कैसे शादी का पता चला मुझे…. एक तरह से कुसूरवार मैं थी नाह? मैं ने आप को तकलीफ दिया था, मैं ने आप को दूर किया था खुद से, मैं ने आप को ठुकराया था, मैं ने अपनी माँ की बात सुनी थी आप के प्यार को ठुकराया था तो मुझे सब सजा मिलना था और मैं तब तैयार हो गयी थी सारे सजा भुगतने के लिए, मैं ने ठान लिया था के मैं दटके सामना करुँगी अपने मुकदर की, मैं ने बहोत स्ट्रॉन्ग्ली डीडे कर लिया था और माँ और पापा से बहोत गंभीरता से ऊंची आवाज़ में रट हुए मनोज और महेश के सामने कह दिया था के उम्र भर शादी नहीं करुँगी, बिना शादी किये hi मर्डर जाउंगी, चाहे आप से नाह भी मिलूं तो ऐसे hi मर्डर जाउंगी, मैं देखना चाहती थी के किस्मत मुझसे से कब तक रूठी रहती है, कब तक आप से दूर रखती है मुझे और मैं सज़ा भुगतना चाहती थी, मेरे और मेरे परिवार के तरफ से आप को जितना दुःख मिला था उस्का सज़ा भुगतने के लिए तैयार हो गयी थी मैं 1987 में hi….
और देखो सज़ा यह मिली के व्हीलचेयर पर बैठा दिया मुकदर ने मुझे, आप को बहुत रुलाया और दुःख दिया था नाह मैं ने इसी की सज़ा पाया मैं ने अभी…. आप दिल के बहोत साफ़ थे, मैं नहीं थी, मैं डबल कार्ड्स प्ले कर रही थी, आप से कितना झूट बोलै था, आप से कितना कुछ छुपाया था मैं ने, फिर भी आप मुझसे प्यार करते रहे, मैं ने आप को बता भी दिया था मैं वर्जिन नहीं फिर भी आप मुझसे प्यार करते रहे, आप को माँ और पापा से मिलकर झूट कहा के पापा के साथ चली जाउंगी, आप को यहाँ कितना तड़पाती रही, आप चाहते थे के आप के सामने दिखूं फिर भी खिड़की बंद कर दिया करती थी, आप के सामने नहीं आती थी, बहोत तड़पाती थी आप को, सिर्फ माँ की बातों को सुनती थी, एक बार तो आप को सुना भी रही थी के आप किआ समझते हो के मैं आप से शादी करुँगी….
आप को कितना दुःख दिया था मैं ने उन् देर महीनों में… सब याद है मुझे अभी उसी की सज़ा पाने के लिए मैं तैयार हो गयी थी… यह एक और वजह थी के आप को खत नहीं लिखा और आप से मिलने की कोशिश नहीं किया था मैं ने क्यों के मैं खुद को सज़ा देना चाहती थी, आप के पाक और सच्चे प्यार को जैसे ठुकराया था, वैसे hi खुद को सज़ा देना शुरू कर दिया था मैं ने आप से दूर होकर और तय करके के किसी को भी अपनी लाइफ में नहीं आने दूंगी, आप की बन कर रहूंगी चाहे दूर hi सही….
हाँ मुझे पता कैसे चला, तो सुनिए आप की वाइफ एक बहोत अछि टीचर थी, इतनी अछि के हमारे इलाके की कई स्टूडेंट्स जाते थे उस्सकी कॉलेज में पढ़ने, उन् में से एक थी रेज़ा की छोटी बेहेन. उस से मुझे खबर मिलती थी, क्यूंकि वो आप को जानती थी, और उस्सने आप को एक रोज़ अपने टीचर के साथ देखा था जब आप उस्सको कॉलेज के सामने वेट कर रहे थे आप की मांगनी के बाद.
तब उस्सने अपनी टीचर से पूछा थे के आप कौन हो, और टीचर ने उस से कहा था के आप उस्सकी मांगितर हो… आप को इंग्लिश लिखना पढ़ना पसंद था, मुझे भी, तो आप को एक इंग्लिश टीचर मिली हम्म्म? अभी? इंग्लिश लिख कर hi पटाया होगा उस्सको नाह आप ने? आप इतनी अछि लव लेटर लिखते थे, तो सोचने लगी थी मैं के ज़रूर आप ने उस्सको लिखा होगा, कुछ तो लिखा होगा आप ने जो उस्सकी दिल को भा गयी होगी और आप से प्यार हो गयी होगी उस्सको… मैं hi पागल थी के आप के तीन बेहतरीन लव लेटर्स को पढ़ने के बाद भी आप के प्यार को नहीं पहचाना था मैं ने, या यूँ केहये के पहचाना तो था मगर दो घोड़े पर संवार कर रही थी उस फ्रांस के अमित को बेहतर समझ रही थी माँ की बातों में आकर…. सही कहा था आप ने के मुझे शान , शौकत, धन दौलत की भूक थी, हाँ शायद थी उन् दिनों, आप से तुलना करती थी अमित की, तो आप निचा दिखाई देते थे बल्कि माँ आप को निचा दिखाती थी मुझे, मैं आप को माँ की नज़रों से और मेहबूब के नज़रों से देखती थी… आप को अपनी नज़रों से तब से देखना शुरू किया जब आप को खो दिया मैं ने……”
तो बे कॉन्टिनोएड…. (3035 वर्ड्स)