Usski Gali Mein Jaana Chorr Diya - Page 20 - SexBaba
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Usski Gali Mein Jaana Chorr Diya

हाँ चिंटू भाई बहोत देर करदी मेहमान आते आते, बिल्कुल सही कहा आप ने

जो सवाल आप ने किया के रूही आ सकती थी यह सब रूही खुद बताएगी अगले उपदटेस में कीजनके अभी ये सवाल करेगा रूही से उस्सकी वजह है अभी के पास आज के hi अपडेट में पढोगे आप :डी
 
बहोत शुक्रिया बिंदास भाई.. अब सब पता चलेगा के के रूही के तरफ से किआ किआ हुआ, किया, बीता... इतने dion/saalon से हम सिर्फ अभी के तरफ से कहानी को जान रहे थे नाह भाई, अब रूही के तरफ से सब पता चलेगा

बहोत शुक्रिया भाई
 
तेहि दिल से धन्यवाद विक्रम भाई रिव्यु के liye.....haan एक बात

भाई मैं किसी भी तरह के हाइप नहीं क्रिएट करना चाहता था बुसस नोर्मल्ली स्टोरी को कंटिन्यू करते जा रहा हूँ..... शायद आप वैसा सोच रहे थे के हाइप क्रिएट होना चाहिए था :डी
 
अपडेट 59 अभी & Ruhi’s वैरी इमोशनल मीटिंग

महेश ने अभी को कॉरिडोर में वेट करने को कहा, और एक कमरे में गया और कहा,

“देखो तो कौन आया है पहचानों इससे!”

तब महेश ने अभी का हाथ पाकर के कमरे के अंदर किया….

अभी के सामने एक पतली सी औरत एक व्हीलचेयर पर बैठी चश्मे के साथ अभी के चेहरे में देख रही थी!!!”

अब आगे….

इतने सालों तक अभी ने अपने दिमाग़ में रूही को उसी तरह बसाया हुआ था जैसे उस्सको 25 साल पहले जानता था, वही कमसीन सी, सुशिल सी, नज़रों को चुर्रा कर देखने और बात करने वाली, बेहद खूबसूरत आवाज़ की मालकिन, उस से भी ज़्यादा खूसूरत मुस्कान की मालकिन को अपने ज़हन में बसाया हुआ था अभी, मगर आज जिस्सको व्हीलचेयर पर सामने देख रहा था वो कोई और hi थी, वो उस्सकी रूही नहीं थी, उसस्के मैं में ऐसा ख्याल आया एक पल के लिए….

अभी का मुंह खुला रहा कुछ देर तक रूही के चेहरे में देखते हुए और उसस्के आँखें बिना जगह किये पानी चौररने लगे थे, उधर रूही सर उठाकर, अपन चश्मे को नाक पर सीधा करके अभी को घुर्र रही थी और उसस्के होंठ थरथराने लगे थे… उस्सने एक नज़र महेश को देखा, फिर ऊँगली से अभी के तरफ इशारा करके सिसकते हुए कहा पूछा,

“आज आया मेरा अभी, यह मेरा अभी है महेश अभी, मेरा अभी …… कहाँ थे aap….Abhi….. hhhhhaaaaaaaaaaaaaaa” इतनी ज़ोर से चिल्ला कर रोई रूही के घर गूंझ उठा

अब देख लो!! रूही ने भी अपने दिमाग़ में उसी अभी को कैद कर रखा था जिस्सको वो 25 साल पहले जानती थी!!

हाँ अभी की कद से ज़रूर रूही पहचान गयी थी के वही होगा, मगर चेहरा 25 साल बाद शामे तो नहीं रहेगा, अभी के सर पर उन् दिनों बहोत सारे बाल हुआ करते थे आज सर के सामने वाले हिस्से पर बाल बहोत कम होगये थे, और जीन दिनों अभी रूही के गॉड में अपना सर रखता था रूही को आदत थी उसस्के सर के बालों में अपने उँगलियों को फर्र्ना, आज तो उतने बाल थे hi नहीं अभी के सर पर……. कोई कुछ भी कहे इंसान का चेहरा, बॉडी, रंग सब में बदलाव अत है, और वो हर दिन अत है, तो 25 सालों में दोनों बिल्कुल भी वो नहीं थे तो 25 साल पहले दीखते थे…..

और रूही की हेल्थ की डेटोरिएशन की वजह उस में तो डिफरेंस 100 गुना ज़्यादा था…

जब अभी ने रूही के थरथराते होंठ देखे तो झट से रूही के व्हीलचेयर के सामने अपने घुटनों पर बैठ गया और अपने सर को रूही के गॉड में रख दिया सिसकते हुए…. रूही को जैसे एक शॉक लग गया था नाह हिल रही थी नाह दोल रही थी नाह कुछ बोल रही थी मगर उसस्के आँखों से आंसू जारी थे…. उसस्के गॉड में जिस तरह से एक छोटे बच्चे क तरह अभी रो रहा था, महेश खुद को रोक नहीं पाया और खुद रोने लगा दोनों को उस हाल में देख कर…

रूही ने धीरे धीरे अपने दांये हाथ को कांपते हुए अभी के सर पर रखा…. उसस्के सर को देखा और रोना रुक गयी अचानक तो अपनी उसी सुरीली आवाज़ में धीरे से कहा,

“आप के बाल नहीं रहे अभी? खो दिए इतने खूबसूरत ज़ुल्फ़ को आप ने? मेरे लिए भी नहीं बचा के रखे उन् खूबसूरत ज़ुल्फ़ों को आप ने?!..... कैसे हो आप अभी? बोलो नाह रोना बंद करो आप, आज भी वैसे hi रो रहे हो जैसे आखरी दिन आप को रट हुए चोर्रा था मैं !!”

अभी से सहा नहीं जा रहा था, उस्सने सर को उठाया रूही के गॉड से और उसस्के चेहरे में देखा और ज़्यादा रोने लगा ऊंची आवाज़ में…. महेश से रहा नाह गया और वो उस कमरे से निकल गया….

रूही ने अभी के सर सहलाते हुए उसके गालों पर अपने उँगलियों को फेर्रा और कहा,

“मुझे आज भी वो आखरी दिन याद है जब मैं जा रही थी और आप बस के पीछे वाले दरवाज़े से कूद कर आये थे और मुझको बाहों में भर कर किश किया था खुले आम सबके सामने, कितनी हिम्मत वाले थे आप, कितने स्ट्रांग और निदारर थे आप, मैं कमसिन थी, दरर्ति थी, आप ताक़त वाले थे तो क्यों पीछे कदम हत्ता लिए आप ने अभी? क्यों?!”

अभी और भी ज़्यादा रोने लगा मगर रट हुए hi रूही को रिप्लाई किया,

“किआ मैं कभी भूल सकता हूँ वो दिन? किआ एक पल के लिए भी भूला हूँ कभी? तुमको मुझे 3 सवालों का जवाब देना है आज….. 25 सालों से एहि 3 सवाल पूछना था मुझे तुमसे जवाब डौगी या नहीं?!”

रूही इमोशनली ज़्यादा स्ट्रांग लग रही थी, बल्कि thi…..unn दिनों को भी भी ऐसी hi थी…. अभी ज़्यादा रोटा था तब भी, तब भी अभी खुद कहा करता था के रूही उस से जितना इमोशनल नहीं…. सच था….. रूही स्ट्रांग थी, तो जल्दी से अपने आंसुओं को पोंछा रूही ने और तैयार हुआ अभी के सवालों को जवाब देने के लिए, और कहा,

“हाँ पूछो जो पूछना है अब मुझे किसी का डर नहीं, नहीं डर्टी किसी से भी अब मैं पूछो अभी जो भी पूछना है पूछो अब!”

अभी ने कहा,

“5तह जनुअरी 1987 को उस बारिश में मैं इस घर में आया था तुम क्यों नहीं निकली थी मुझसे मिलने? तुम ने क्यों कुछ नहीं किया मेरे लिए? तुमने कैसे मुझको उस तरह से ज़लील होकर जाने दिया था? तुमको कुछ नहीं हुआ उस वक़्त? तुम ने कैसे वो सब सुना था जो मुझे कहा गया था रूही बता मुझे बता….. मुझ पर किआ गुज़र रहा था, तुम पर कोई एस्सार नहीं हुआ उस दिन उस वक़्त? तू यहीं थी अंदर दादा जी ने मुझे कहा था, फिर भी तुम अंदर hi रही मुझको बेइज़त किया जा रहा था…. और तू अंदर सुन्न रही थी, मैं बिल्कुल भीगा हुआ था रूही, कांप रहा था मैं, यह उम्मीद थी के तुम जल्दी से मुझको एक टॉवल डौगी, और पहले की तरह महेश की कोई शर्ट डौगी पेहेन्ने के लिए…. बाहर तूफ़ान था उसी तूफ़ान में मुझको बाहर निकला गया था और तुमने कुछ नहीं किया रूही? क्यों?? मुझे उस बात का जवाब चाहिए…. मैं 25 साल तक सोचता रहा के तुमने क्यों कुछ नहीं किया….. अगर उस वक़्त तुम आकर कह देती के तू मुझसे प्यार नहीं करती मैं चला जॉन यहाँ से तब चला जाता, कोई ग़म नहीं होता, मगर मुझे पता था के टब hi बहोत प्यार करती थी फिर क्यों तुम ने मुझे जाने दिया था उस रोज़ रूही बता मुझे जवाब दे!!” यह सब कहते हुए अभी इतना रो रहा था के उस्सकी आवाज़ टूट रहे थे बिच बिच में रुक रुक कर सब कहा था उस्सने…

उसस्के ांसो ने रूही के ड्रेस भिगो दिए थे उस्सकी गॉड में…. किआ रूही छुप रही? नहीं अब उस्सकी रोने की बारी थी…. रूही इतना ज़ोर से चिल्ला कर रोई अभी के इस सवाल को सुनकर, के महेश, उस्सकी वाइफ और 3 बचे सब चले आये कमरे में….

अभी ने तब रूही के गले में हाथ दाल दिया था, रूही ने झुक कर अभी के काँधे से हाथ करके उस्सको जकरा हुआ था और रोटी जा रही थी, जवाब नहीं दे पा रही थी इस लिए के रो रही थी, और उधर से रूही की माँ और बाप ने भी सुन लिया रोने की आवाज़ और वह लोग भी आ गए थे तब तक…..

महेश, उस्सकी वाइफ और बचे भी रो रहे थे उन दोनों को उस तरह से रट देख कर… और जब रूही ने अपनी माँ को कमरे के अंदर आते देखा तब रूही का रोना बंद हुआ और कहा,

“जवाब चाहिए नाह अभी, वो देखो, अपने पीछे देखो अभी यह वो औरत है एहि है वो….. उसस्के साथ रहना गवारा नहीं था मुझे उस दिन के बाद, उसी ने मुझे समझ लो बांध के रखा हुआ था, मेरे मुंह पर भी अपने हाथ दबा राखी थी उस्सने, मैं अंदर रो रही थी अभी, मैं छटपटा रही थी निकल कर तुम्हारे पास आने के लिए, मुझको दबाया गया था अभी… यह मेरी माँ नहीं डायन है अभी इसी की वजह से हम दोनों जुड़ा हुआ अभी सब कुछ इसी ने किया… इसी ने hi मनोज को वो सब कहने को भेजा था अभी, मनोज नहीं कहना चाहता था वो सब तुमसे; माँ ने उस्सको मजबूर किया था वही सब शब्द कहने को आप से….. यह डायन मुझे लाइफ भर अपने घर में बाँध कर रखना चाहती थी, मुझे अपना नौकरानी बना कर रखना चाहती थी, मेरी एक ग़लती की वजह से अभी….. वार्ना मैं तो तुम्हारे पास आने वाली थी…”

रूही की माँ पीछे कड़ी रो रही थी सब सुनते हुए, और रूही ने बेकाबू होते उस से कहा,

“तू निकल यहाँ से वार्ना कुछ उठाके मरूंगी तुझे, महेश निकल इस बुढया को यहाँ से वार्ना मैं कुछ कर बैठूंगी….”

अभी ने मुड़कर रूही की माँ को देखा, सारे बाल सफ़ेद हो गए थे और वो दोनों हाथ जोड़े अभी को देखते हुए जैसे उस से माफ़ी मांग रही थी…. तब तक महेश ने अपनी माँ को वापस जाने को कहा….

रूही ने थोड़ा खुद पर काबू पाते हुए, महेश की बेटी की हाथ से एक गिलास पानी से कुछ घूँट पीकर अभी से कहा,

“अभी कभी देखा है आप ने क़ुरबानी के दिन एक बकरी को किश तरह से एक खम्बे से बाँधा जाता है, समझ लीजिये मुझको उस दिन वैसे hi बाँधा गया था ताके मैं आप के पास आ नाह सकूँ, मैं एक जल बिन मछली की तरह छटपटा रही थी, मनोज की बातों को सुनकर और सोच रही थी के आप पर किआ गुज़र रहा होगा उसस्के बातों को सुनकर…. मैं रोने लगी थी, मेरी आवाज़ को भी दबाया गया था ताके आप सुन नाह सको…. जब आप घर से निकल गए थे तब मुझको चोर्रा गया और मैं दौड़ कर किचन के दरवाज़े के पास गयी, आप को जाते हुए देख रही थी, और निकलने वाली थी उसी बारिश में आप के पीछे आने को मगर मुझको फिर उस औरत ने पाकर लिया, अभी मैं चिल्ला कर रोने लगी थी अभी…. मैं ने अपनी पूरी कोशिश की थी अभी मगर मैं आप के जितना स्ट्रांग नहीं थी, मुझ में वो ताक़त नहीं थी जो आप में है वार्ना मैं खुद आप के पास चली आती अभी, मगर मुझ में वो हिम्मत और ताक़त नहीं है…. मैं ने हार मान लिया था उसस्के बाद अभी!!”

अभी रोटा गया… और कहा,

“दूसरा सवाल रूही!”

रूही: “मुझे उस सोफे पर बिठा दो प्लीज…..”

अभी ने रूही को उस व्हील चेयर से उठाया, अपने गॉड में लिया, चार कदम चल कर सोफे तक जाते हुए रूही के गाल को चूमा, रूही ने अपने बाहों को अभी के गले में लपेट लिया और अभी के गर्दन और गाल को चूमा, और अभी ने कहा,

“कुछ देर ऐसे hi मेरे बाहों में रहो और जवाब दो….”

रूही को अब भी मस्करी सूझ रही थी, उस्सने कहा,

“हाँ आप ने कहा था नाह जिस्सकी बीवी छोटी उस्का भी बड़ा नाम है, गॉड में बिठा लो बचे का किआ काम है वही कर रहे हो अब!”

अभी ने रट रट हंस दिया, और कहा “कुछ भी नहीं भोली तुम भी?!”

रूही ने उसस्के गॉड में रहते हुए कहा,

“आप का दूसरा सवाल किआ है अभी… पूछिए आज जो भी पूछना है पूछ लीजिये मैं सारे सवालों का जवाब देने को तैयार हूँ…?”

अभी: “मैं ने तुमको अपने खतों और कार्ड्स में अपना घर का रियल एड्रेस लिखा था, वो इसी लिए लिखा था के कभी तुमको मुझे कांटेक्ट करना परे तो तुम कर सकती थी तो क्यों मुझको कभी कुछ भी नहीं कहा रूही?!”

रूही ने अब रोना बांध कर दिया था और अभी का रोना भी थोड़ा थम गया था, महेश और उस्सकी वाइफ कमरे से निकल गए थे मगर महेश के बचे वहीँ रहे, सोफे के पास आकर बैठ गए जहाँ अभी ने अब रूही को बिठा दिया था, और खुद भी बैठ गया था रूही के काँधे पर अपना डायन हाथ किये हुए और बायां हाथ में रूही का हाथ थामे हुए था….. रूही ने एक गहरी सांस लेते हुए कहा,

“कैसे समझों आप को मैं? कहाँ से शुरू करूँ मेरी समझ में नहीं ारः है…. इतना कुछ कहना है के सच में नहीं समझ पा रही हूँ के कैसे बताऊँ…. मैं ने आप को बहोत कांटेक्ट करना चाहा, बहोत मैं था आप को ात लीस्ट एक चिठ्ठी दाल दूँ…. मगर हिम्मत नहीं हुई…. उन् दिनों जिस तरह से आप को घर से निकला गया था मुझे डर था के कहीं आप इतना नाराज़ नाह हो गए हों के मेरे चिठ्ठी को पढ़ने से पहले फाड़ कर फेंक नाह दें…. आप के ग़ुस्से को जानती हूँ नाह मैं, मुझे आज भी याद है जब आप की सईद से लड़ाई हुई थी तो किश तरह से मैं ने आप को शांत किया था…. तो उस डर से नहीं लिखा.. एक बार तो लिख दिया था कई महीने बाद मगर पोस्ट नहीं किया उसी डर से…. फिर मुझे खबर मिली के आप की मांगनी हो गयी…”

अभी: “व्हाट? वो कैसे पता चला तुमको? वो भी पता चला था तुमको? कैसे बताओ!!?”

रूही ने थोड़ा सा मुस्कुराया, जब से अभी आया था करीब देर घंटे हो चुके थे और पहली बार रूही को मुस्कुराते हुए देखा अभी ने, वही मुस्कराहट थी… वही होंठ. वही मासूम सी झलक जो बरसों पहले अभी तरसता था देखने के लिए.. चेहरे पर ज़ईफ़ी ने अपना निशाँ बनाना शुरू कर दिया था मगर रूही की वो ऐडा और चेहरे का अलग सा चमक अब भी मौजूद था जो अभी को दीवाना बनाया करता था…. एक पल के लिए अभी को लगा के वो श्वेता से बात कर रहा है, इतनी मिलते जुलते थे दोनों के चेहरे के भाव….. और रूही ने कहा,

“आप आखिर इसी तरफ आये नाह किसी और को अपनी वाइफ बनाने, मैं नहीं बन पायी तो ईस्ट में hi से किसी को बना लिया अपनी वाइफ?”

और रूही ने रट हुए अभी के गाल पर कई छोटे छोटे थपड मारते हुए कहा,

“बड़े आये उम्र भर शादी नहीं करने वाले, मुझसे तो कहा था, िफ़ ी दो नॉट गेट यू ी विल नेवर मर्री इन माय लाइफ, ी विल रेमें लिखे थिस आल माय लाइफ… एहि कहा था नाह आप ने? तो क्यों शादी की? क्यों? कहाँ गए आप के हु बड़ी बड़ी बातें? उल्टा मैं ने किसी से शादी नहीं की, मैं ने आप की कही हुई बात को सच कर दिखाया, आप ने तो शादी भी कर लिए और इतना बड़ा आदमी बन गए मगर मेरा किआ अभी? मेरा किआ हुआ, देख लो मुझे मुरझा गयी हूँ आप की याद, आप के इंतज़ार में, वफ़ा तो मैं ने निभायी आप से, बेवफा तो आप निकले अभी……….” और ज़ोरों से रोने लगी रूही, अभी को कसके जाकर के….. उन् बच्चों में से 1 छोटी लड़की थी और दो लड़के, उन् में से लड़की भी रोने लगी अपनी बड़ी फूफी को रट देख कर…..

अभी रूही के सर को अपने सीने से दबाये हुए उसस्के सर पर अपना हाथ फ्री जा रहा था और उसस्के आँखों से भी आंसू बह निकले फिर से रूही की बातों को सुनकर….

रूही ने फिर शांत होते हुए कहा,

“आप का तीसरा सवाल किआ था अभी?”

अभी ने उसस्के चेहरे को अपने हाथों में थाम कर उस्सकी आँखों में देखते हुए पूछा,

“जिस लिफ़ाफ़े में मैं ने डायरीज दिए थे, उस में एक गिफ्ट था तुम्हारे लिए वो मिला था तुझे या नहीं, और तुम डायरीज को कितना पढ़ पायी थी उस वक़्त? कितने पेजेज? तुम बहोत तेज़ पढ़ती थी, मुझे याद है कितने किताबें पढ़ा करती थी, तो मेरे ख्याल से तुमने काफी पेजेज पढ़ लिए हिन्ज…. बताओ…. “

रूही फिर मुस्कुरायी और इशारा अपने अलमारी की तरफ करते हुए अभी से कहा,

“जा कर उस अलमारी को खोलए प्लीज आप को कुछ दिखाना है आज….”

अभी उठा, अलमारी को खोला, रूही ने निचे वाले ड्रावर को खोलने को कहा, अभी ने खोला और उस छोटे से ड्रावर में सिर्फ एक चीज़ था… 25 साल पहले दी हुई वो चीज़ जो रूही ने आज तक संभाल कर रखा हुआ hai…wohi “सोइर दे पेरिस” परफ्यूम…. जो रूही को पसंद था जब अभी से पूछा था के कौन सी परफ्यूम इस्तेमाल करते हो आप कितना ाचा महेकता है, तो अभी ने उस से कहा था के किसी दिन उसस्के लिए भी खरीदेगा, और जिस दिन डायरीज दिया था वो परफ्यूम भी था…. 25 साल बाद परफ्यूम ऐसा था…. अभी ने तुरंत उसस्के फोटो लिए अपने मोबाइल से रट हुए….

और यह है वो परफ्यूम का बॉक्स जिस्सको रूही ने 25 साल तक संभाल कर रखा हुआ है



और ग़ौर से देखिये उस्सकी की कैप कितना पुराण हो गया है 25 सालों में – आज यह परफ्यूम मिलता hi नहीं, शायद बौरगेविस कंपनी बनता hi नहीं इस्को



उस में इतना आज भी बाकी है 25 सालों बाद और अभी ने खोल कर सुंघा परफ्यूम को और रूही के पास चल कर आया और बैठ कर ज़ोरों से रोने लगा!!!



ये फोटोज रियल हैं और आज भी मौजूद हैं रूही के पास आज तो 34 इयर्स हो चुके और इस में इतना परफ्यूम आज भी है!!

अभी उस दिन वहां 6 घंटों तक रहा, रूही और उस्सने एक दूसरे से अपने दुखड़े रोये, कल की अपडेट में और बताऊंगा किआ किआ बातें किया और किआ किआ हुआ था उस रोज़…. बहोत कुछ जानना, कहना सुन्ना बाकी है अभी….

तो बे कॉन्टिनोएड….. (2970 वर्ड्स)
 
थँक्स सो वैरी वैरी मच आकाश बीआरओ फॉर थे कीं अप्प्रेसिअशन

थिस इस ब्यूटीफुल

"मुझको फिर वही सुहाना नज़ारा मिल गया,

नज़रों को जो दीदार तुम्हारा मिल गया,

और किसी चीज़ की तमन्ना क्यों कारु,

जब मुझे तेरी बाहों में सहारा मिल गया..."
 
अपडेट 60 रूही हद लॉट्स तो से

अभी का हाथ कांप गया उस परफ्यूम को हाथ में lekar…pichle 25 सालों में उस्सको यह परफ्यूम मिला hi नहीं कहीं भी. रूही से अलग होने के बाद अभी को 3 साल बाद मिला था वो परफ्यूम मतलब 1989 तक… उस के बाद इम्पोर्टर ने अभी से कहा था या तो बोरजोईस ने उस परफ्यूम को बनाना बांध कर दिया या नए पेर्फुमेस बनाने लगे इस लिए “सोइर दे पेरिस” नहीं मिलता अब…. फ्रांस की परफ्यूम है और इस्सके मतलब है “नाईट ऑफ़ पेरिस” अभी का पससंजीदा परफ्यूम था, और आज उस परफ्यूम को 25 साल बाद सूंघ कर सोचिये अभी ने किआ फील किया होगा, उस्सको कैसा लगा होगा?.....

अभी के जिस्म के रोवाण रोवाण उठ गए वो सूंघ कर, वो ज़माना याद आगया, वह दिन याद आगये, हर लम्हे की एक खुशभू होती है, हर पल का एक खुशभू होता है, हर वक़्त की एक पहचान होती है उसी तरह अभी के गुज़ारे हुए वह दिन इस खुशभू से इस तरह से जुड़े हुए थे, उस खुस्भू से रूही जुडी हुई थी, रूही की यादें जुड़े हुए थे. सईद, मेहबूब, महेश, श्वेता, सब जुड़े हुए थे इस खुशभू से… उन् दिनों जब अभी गंदे कपड़ों में काम करता था, और शाम को वाश करने के बाद जब अपना उस कमीज़ को पहनता था जिस से अब वो वापस बस से घर जाएगा, तो उस कमीज़ में यह खुशभू लगा हुआ होता था, अभी के जेब की रुमाल में यह खुशबू हुआ करता था, और अभी को वह दिन वापस याद आगये, उस्सको लगा के अभी वापस बस से घर जाएगा, शाम हो रहे थे तो काम ख़तम करने का वक़्त था और उस्सको अब घर वापस जाना था….. अभी उस परफ्यूम हो हाथ में लिए अलमारी के पास बैठ कर फर फुट कर रोने लगा….

रूही ने बच्चों से अपनी व्हीलचेयर लाने को कहा, उस पर कैसे भी करके बैठी और अभी के पास गयी, उस्सको अपने सीने से लगाते हुए उस्सको चुम्बन दिए, और आज 25 साल बाद अभी को रूही के सीने से दोबारा लगने को और उस्सकी जिस्म की खुशभू को फील करने का नसीब प्राप्त हुआ….. वो सोच कर वो और भी कसके रोने लगा रूही की छाती पर उस्सकी ड्रेस को भिगोते हुए….

रूही को भी एक चैन की सांस लेने का मौका मिला अपने अभी को बरसों बाद अपने सीने से कसके उस तरह से लगाने से…. वो भी तरस गयी थी अपने अभी को उस तरह से महसूस करने के लिए…. और रूही गुनगुनाने लगी अभी के सर पर हाथ फरते हुए, “प्यार करते हैं हम तुम्हें इतना…. प्यार करते हैं हम तुम्हें इतना, दो आँखें तो किआ दो जहाँ में समाये नाह जितनाआआआ प्यार करते हैं हम तुम्हें इत्नाहा” और इस गाने को रूही को गुनगुनाते सुनकर अभी और भी रोने लगा….

रूही ने उसस्के सर को चूमते हुए कहा,

“मेरा अभी तो अब भी वही बचा है, अब भी वैसे hi रोटा है, कितना इमोशनल था और आज भी है मेरा अभी हम्म्म? कितना रट हो आप? और कितना रोया होगा जब मेरे घर से आखरी बार निकाले गए थे आप? मेरा कलेजा फट जाता था बुसस वही सोच सोच कर, किसी को नहीं पता था मेरे सिवा के आप कितने इमोशनल हो, दिल के कितने नाज़ुक हो आप वो सिर्फ मुझे पता था, इस लिए सब सोच सोच कर मैं बहोत रोटी थी अभी…. मैं ने उस दिन आप के चले जाने के बाद घर में तूफ़ान खड़ा कर दिया था, इतनी चिलायी थी, कितने चीज़ों को तोडा फोड़ा था, नाह मेरी डायन माँ, नाह बाप नाह मनोज नाह महेश संभल पा रहे थे मुझे, उस घर के तक़रीबन सारा सामान तोड़ फोड़ दिया था मैं ने, एक भूत जैसी संवार हो गया था मुझ पर….

बाहर एक तूफ़ान था और उस घर के अंदर मैं तूफ़ान बानी हुई थी, घर के सामने वाले सारे शीशे तोड़ डाले थे मैं ने यह कहकर के मेरे अभी को इस बारिश में तुम लोगों ने भीगने को भेजा तो लो मैं इस घर को भिगो देती हूँ, तमान शीशों को एक लोहे से तोड़ डाला था मैं ने, हाथ में लग भी गयी थी टूटे हुए शीशे से…. घर टेररासे से अंदर लाउन्ज तक ऐसे भीगे के आँगन लगने लगा था…. इतना बारिश हो रहा था के सोफों को लाउन्ज से उठा कर घर के अंदर करना पड़ा उन सब को… मैं एक पागल जैसे बेहवे करने लगी थी, हंस रही थी जब सब सामान उठा उठा कर अंदर ले जा रहे थे और मैं बहार कड़ी बारिश में भीग रही थी यह सोच कर के मेरा अभी भीग रहा होगा उन् कुत्तों की वजह से…. कुछ देर बाद मैं भी कांपने लगी थी, पापा घंटों बाद मुझे अंदर ले गए तब मुझे एहसास हुआ के आप भी कांप रहे होंगे, और उस हालत में इन् लोगों ने आप को वापस लौटाया था… यह चिल्लाते हुए मैं कह रही थी सब से, के देखो मैं कितना कांप रही हूँ अभी भी तो इसी हाल में होगा, क्यों उस्सको वापस भेजा तुम लोगों ने….”

अभी थोड़ा शांत हुआ था, रूही के सीने से hi लगा हुआ था, रूही ने बोलना बांध किया और अभी रूही के दिल के धड़कनों को सुन रहा tha….ussne एक किश किया रूही के सीने पर, रूही ने उस्सने गर्दन को चूमा, और अभी ने सर उठाकर रूही के चेहरे में देखा, तो रूही ने अभी के मुंह पर एक चुम्बन दिया और धीरे से कहा,

“किश करना तो भूल hi गयी हूँ मैं, 25 सालों तक किसी को किश नहीं किया नाह? मुझे सीखाड़ोगे दोबारा किश करना हम्म्म?!”

अभी ने ज़ोर से चिपका लिया रूही को अब अपने सीने पर और मुड़कर बच्चों को देखा, बचे समझ गए और सब बाहर निकल गए…. तब अभी ने हलके से रूही के होंठों से अपने होंठों को लगाया, और अपने जीब को फेर्रा रूही के कांपते होंठों पर, रूही ने आखें बांध कर ली, और अभी ने रूही के चेहरे को अपने हाथों में थाम कर एक लम्बा वाला पैशनेट किश किया…. रूही ने जैसे खुदको अभी को सरेंडर कर दिया था उस वक़्त, अपने जिस्म को बिल्कुल ढीला चोरर दिया था…. अभी को उस्सकी जीब का स्वाद दोबारा हासिल हुआ आज और श्वेता याद आयी इस बार…. और किश रोकते हुए अभी ने सोचा श्वेता का ज़िक्र करें.. मगर रूही ने कुछ और hi बोलना शुरू कर दिया…. उस ने कहा,

“मैं ने 5 साल तक मनोज से बात नहीं किये उस 5तह जनुअरी 1987 के बाद, और माँ से तो इस तरह बात करती जैसे मैं उस्सकी माँ थी वो मेरी नौकरानी…. कोई काम नहीं करती, सिर्फ घर में बैठती और किताबें पढ़ती, फ़र्ज़िना और दूसरे कजिन से बहोत सारे किताबें मागवती उनके स्कूल के लाइब्रेरी से और पढ़ती…. अभी आप के जाने के बाद यह आँगन सुना पापड़ गया था, जितना मेरी अभी का नाम गूंजा करता था इस आँगन में उतना hi सन्नाटा चा गया था, उस 24तह दिसंबर को जब मैं चली गयी थी और वापस आयी तो आगाँ में इतना सन्नाटा था के मुझे डर लगने लगा था यहाँ रहने को…. मेरे कानों में बार बार आप की सीटियों की आवाज़ सुनाई देते, आप उसी गाने की ढूंढ को सीटी बजाते हुए सुनाई देते मुझे… जिस दिन मैं वापस आयी थी 31सत से पहले या 31सत को hi अभी याद नहीं, तो मैं प्राथना करती के बस से उतरूं तो आँगन में किसी कारण देखूं के अभी तक काम चल रहा है बस में और आप यहीं हो, ऐसा अनुमान हो रहा था के आप ज़रूर किसी कारण इसी आँगन में मिलोगे मुझे, मैं ने आँख बांध करके मैं रोड से आँगन में दाखिल हुई, और आँखें खोली तो सब खली खाली देखा, बस भी नहीं था, कोई शोर शराबा नहीं था, सनाटा था, सब अलग सा लग रहा था, मेरा दिल बैठ गया और दिल ने कहा चला गया तेरा अभी, अब कभी नहीं वापस आने के लिए चला गया वो…..

और जब आप की नई ईयर वाली विशिंग कार्ड मिला खत के साथ तो दिल झूम उठा के आप आओगे…. दिल को सुकून हासिल हुई…. और तब एक तमाशा हुआ था अभी…. फॅमिली मेंबर्स में एक बड़ा तमाशा हुआ था…. आप गए थे नाह मेरी चची के घर मुझको ढूंढ़ते हुए…. शायद 28तह दिसंबर था नाह? मैं वही थी उस रोज़. बेहद खुश हुई थी आप को देख कर, इतना ाचा लगा था देख कर के आप मुझको धुनते हुए वहां तक चले आये थे…. अभी तभी मुझे पूरा यकीन हो गया था के आप मुझसे कितना प्यार करते हो और सीरियस हो…. उसी रोज़ मैं ने डीडे किया था के अब चाहे कुछ भी हो मैं किसी की नहीं बनूँगी आप के सिवा, और कोई मैने नहीं रखता था मेरे लिए आप के सिवा उस दिन मैं ने डीडे किया था जब आप को रट हुए मेरे लिए मेरी चची से बात करते सुना था, चची और माँ की बिल्कुल नहीं बनती दुश्मन हैं दोनों एक दूसरे के इस लिए मुझे चची की बात माननी पड़ी और मैं कमरे के अंदर चली गयी थी उस्सकी लेहाज़ करते हुए….

मगर वही मौका था आप को सुनने की और आप की सच्ची मुहबत को पहचानने की. मेरी चची आप के लिए एक अजनबी थी और आप ने एक अजनबी से रोया था मेरे लिए, आप ने अपना प्यार साबित किया था मेरे लिए उस रोज़ अभी… मैं ने तभी डीडे किया था के अब घर वापस जाकर आप के बारे में माँ से कहूँगी के मैं और किसी को भी नहीं एक्सेप्ट करुँगी सिर्फ अभी को एक्सेप्ट करुँगी वार्ना किसी को भी नहीं….

मगर तमाशा यह हुआ था के चची मेरे पहुँचने से पहले मेरी माँ और बाप के कान भरने चली आयी थी के आप किश तरह के इंसान हो के उसस्के घर तक आ गए थे मुझको ढूढ़ने के लिए… आप को गुंडा मावली कहा था उस्सने और माँ और पापा उसस्के बात को लेकर इतना ग़ुस्सा थे, साथ में मनोज भी था… सब आप के खिलाफ थे उस बात के लिए के आप उसस्के घर गए हुए थे मेरे लिए…. सब उल्टा हुआ था, बल्कि चची ने सब उल्टा करके बताया था यहाँ आकर………”

अभी ने रूही को रोकते हुए कहा,

“और तुम पिकनिक गयी थी तब मुझ तक संदेसा पहुंचना चाहती थी जॉर्ज के ज़रिए है नाह?!”

रूही चहुंका और अभी के चेहरे में देखते हुए कहा,

“ओह माय गॉड आप को वो पता था? आप को संदेसा मिला था? तो क्यों आये थे आप 5तह को?!”

अभी: “नहीं मिला था संदेसा रूही, अगर मिला होता तो नहीं अत मैं 5तह को…. मुझको तो करीब एक महीने बाद उस बात का पता चला के तुम पिकनिक गयी थी तो जॉर्ज से मेरे बारे में पूछ रही थी और मुझे 5तह को नहीं आने को कहा था…. खबर बहोत लेट मिला था मुझे…. उसस्के बाद मैं सोचने लगा था ऐसा किआ हुआ होगा के तुम नहीं चाहती थी के मई 5तह को आऊं….”

रूही: “मैं चाहती थी के चची वाली बात ठंडा हो जाए तब आप आओ, वो बात गरम थी 5तह tak…Manoj, भी नाराज़ था के आप क्यों गए थे उसस्के घर जब आप का कोई रिश्ता नहीं था उस से? एक मम्मी की बनती नहीं थी उस से, ऊपर से उस्सने इतना तमाशा किया था एक पुराणी बात को लेकर के मैं कैसे बताऊँ आप को मेरी समझ में नहीं अत अभी….

मेरी उस चची से और हमारा इस घर से एक बड़ा hi अजीब ो ग़रीब रिश्ता है अभी मैं यह बाद में बताउंगी आप को…. मेरी लाइफ की सबसे बड़ी ग़लती वाली रिश्ता है मेरा उस घर से अभी…. मगर अभी मत पूछना मैं धीरे धीरे आप से सब कुछ बताउंगी…. अभी कुछ और बोलना है मुझे आप से…

जब आप की शादी की खबर सुनी तो बहोत रोई मैं….”

अभी: “पहले मुझे यह बताओ के तुमको मेरी मांगनी फिर शादी की खबर मिली कैसे? नवीन तो उस साइड रहती है, यहाँ से 10/15 किलोमीटर्स दूर है, और इधर के लोग उस तरफ से बिल्कुल काटते हुए हैं, तुम्हारे मैं रोड से ईस्ट जाते हैं सारे रस्ते, उस्सकी रोड से साउथ ज़्यादा टर्र जाते हैं तो तुमको कैसे खबर मिलते थे? कोई रिलेटेड फॅमिली मेंबर्स था किआ तुम्हारा?!”

रूही ने मुस्कुराया, अपने चश्मे को निकला और फिर अभी के चेहरे को सहलाते हुए कहा,

“मैं आप की खबर रखती थी अभी, मुझे सिर्फ इतना नहीं पता के रहते किधर हो मगर आप के हर हरकत की खबर रखती थी मैं!”

अभी: “मगर कैसे? अगर इतना hi खबर रखती थी मेरा तो मुझसे कांटेक्ट hi कर लेती तुम? तुम्हें नहीं लगता के तुमने ग़लत किया? कुमसे कम तब तो मुझसे मिल लेती जब मैं रहीम के घर डायरीज चौररने आया था, वो मेरा आखरी बार यहाँ आना था, मैं और भी आना चाहता था मगर जब मेहबूब ने मुझे मेरे डायरीज वापस किये तो ऐसा कुछ कहा के यहाँ आना बांध करना hi पड़ा मुझे!”

रूही: “अभी तक़दीर का खेल समझो या यूँ कहूं के ऊपर वाला चाहता था के मुझे आप के बारे में सब पता चलता रहे हमेशा… किसी तरह भी मुझे आप के बारे में पता चल hi जाता था…. अब बताती हों के कैसे मांगनी की खबर मिली और फिर कैसे शादी का पता चला मुझे…. एक तरह से कुसूरवार मैं थी नाह? मैं ने आप को तकलीफ दिया था, मैं ने आप को दूर किया था खुद से, मैं ने आप को ठुकराया था, मैं ने अपनी माँ की बात सुनी थी आप के प्यार को ठुकराया था तो मुझे सब सजा मिलना था और मैं तब तैयार हो गयी थी सारे सजा भुगतने के लिए, मैं ने ठान लिया था के मैं दटके सामना करुँगी अपने मुकदर की, मैं ने बहोत स्ट्रॉन्ग्ली डीडे कर लिया था और माँ और पापा से बहोत गंभीरता से ऊंची आवाज़ में रट हुए मनोज और महेश के सामने कह दिया था के उम्र भर शादी नहीं करुँगी, बिना शादी किये hi मर्डर जाउंगी, चाहे आप से नाह भी मिलूं तो ऐसे hi मर्डर जाउंगी, मैं देखना चाहती थी के किस्मत मुझसे से कब तक रूठी रहती है, कब तक आप से दूर रखती है मुझे और मैं सज़ा भुगतना चाहती थी, मेरे और मेरे परिवार के तरफ से आप को जितना दुःख मिला था उस्का सज़ा भुगतने के लिए तैयार हो गयी थी मैं 1987 में hi….

और देखो सज़ा यह मिली के व्हीलचेयर पर बैठा दिया मुकदर ने मुझे, आप को बहुत रुलाया और दुःख दिया था नाह मैं ने इसी की सज़ा पाया मैं ने अभी…. आप दिल के बहोत साफ़ थे, मैं नहीं थी, मैं डबल कार्ड्स प्ले कर रही थी, आप से कितना झूट बोलै था, आप से कितना कुछ छुपाया था मैं ने, फिर भी आप मुझसे प्यार करते रहे, मैं ने आप को बता भी दिया था मैं वर्जिन नहीं फिर भी आप मुझसे प्यार करते रहे, आप को माँ और पापा से मिलकर झूट कहा के पापा के साथ चली जाउंगी, आप को यहाँ कितना तड़पाती रही, आप चाहते थे के आप के सामने दिखूं फिर भी खिड़की बंद कर दिया करती थी, आप के सामने नहीं आती थी, बहोत तड़पाती थी आप को, सिर्फ माँ की बातों को सुनती थी, एक बार तो आप को सुना भी रही थी के आप किआ समझते हो के मैं आप से शादी करुँगी….

आप को कितना दुःख दिया था मैं ने उन् देर महीनों में… सब याद है मुझे अभी उसी की सज़ा पाने के लिए मैं तैयार हो गयी थी… यह एक और वजह थी के आप को खत नहीं लिखा और आप से मिलने की कोशिश नहीं किया था मैं ने क्यों के मैं खुद को सज़ा देना चाहती थी, आप के पाक और सच्चे प्यार को जैसे ठुकराया था, वैसे hi खुद को सज़ा देना शुरू कर दिया था मैं ने आप से दूर होकर और तय करके के किसी को भी अपनी लाइफ में नहीं आने दूंगी, आप की बन कर रहूंगी चाहे दूर hi सही….

हाँ मुझे पता कैसे चला, तो सुनिए आप की वाइफ एक बहोत अछि टीचर थी, इतनी अछि के हमारे इलाके की कई स्टूडेंट्स जाते थे उस्सकी कॉलेज में पढ़ने, उन् में से एक थी रेज़ा की छोटी बेहेन. उस से मुझे खबर मिलती थी, क्यूंकि वो आप को जानती थी, और उस्सने आप को एक रोज़ अपने टीचर के साथ देखा था जब आप उस्सको कॉलेज के सामने वेट कर रहे थे आप की मांगनी के बाद.

तब उस्सने अपनी टीचर से पूछा थे के आप कौन हो, और टीचर ने उस से कहा था के आप उस्सकी मांगितर हो… आप को इंग्लिश लिखना पढ़ना पसंद था, मुझे भी, तो आप को एक इंग्लिश टीचर मिली हम्म्म? अभी? इंग्लिश लिख कर hi पटाया होगा उस्सको नाह आप ने? आप इतनी अछि लव लेटर लिखते थे, तो सोचने लगी थी मैं के ज़रूर आप ने उस्सको लिखा होगा, कुछ तो लिखा होगा आप ने जो उस्सकी दिल को भा गयी होगी और आप से प्यार हो गयी होगी उस्सको… मैं hi पागल थी के आप के तीन बेहतरीन लव लेटर्स को पढ़ने के बाद भी आप के प्यार को नहीं पहचाना था मैं ने, या यूँ केहये के पहचाना तो था मगर दो घोड़े पर संवार कर रही थी उस फ्रांस के अमित को बेहतर समझ रही थी माँ की बातों में आकर…. सही कहा था आप ने के मुझे शान , शौकत, धन दौलत की भूक थी, हाँ शायद थी उन् दिनों, आप से तुलना करती थी अमित की, तो आप निचा दिखाई देते थे बल्कि माँ आप को निचा दिखाती थी मुझे, मैं आप को माँ की नज़रों से और मेहबूब के नज़रों से देखती थी… आप को अपनी नज़रों से तब से देखना शुरू किया जब आप को खो दिया मैं ने……”

तो बे कॉन्टिनोएड…. (3035 वर्ड्स)
 
बहोत शुक्रिया विक्रम भाई....

इतने इंतज़ार के बाद मैं ने आखिर दोनों के मिलाप दिखाया, और आप जो हमेशा एक पूरा अपडेट लिख देते थे एक अपडेट को रिव्यु करते हुए, तो सोचा था इस अपडेट पर बहुत बड़ा रिव्यु आएगा मगर आया एक छोटा सा रिव्यु....

मगर कोई बात नहीं, ी ऍम हैप्पी विथ योर रिस्पांस विक्रम भाई :डी

थैंक्स वैरी मच.

इस लाइन में बहोत कुछ कह दिया आप ने और समझ गया मैं :डी
 
बहोत शुक्रिया सोना डिअर, हम्म तब रूही को अभी का प्यार समझ में नहुं आया था तब कपड़े किया था... बाद में अमित की नहीं बननी नाह अभी की बन कर hi रही नाह? :डी
 
अपडेट 61 थे सीक्रेट रिवील्ड

सही कहा था आप ने के मुझे शान , शौकत, धन दौलत की भूक थी, हाँ शायद थी उन् दिनों, आप से तुलना करती थी अमित की, तो आप निचा दिखाई देते थे बल्कि माँ आप को निचा दिखाती थी मुझे, मैं आप को माँ की नज़रों से और मेहबूब के नज़रों से देखती थी… आप को अपनी नज़रों से तब से देखना शुरू किया जब आप को खो दिया मैं ने……”

अब आगे….

अभी ने रूही को फिर व्हीलचेयर से अपने गॉड में उठाया और इस बार अभी सोफे पर बैठा और रूही को अपने गॉड में बिठाया एक बच्चे की तरह… अभी हमेशा कहता आया था उन् दिनों को के रूही बहोत हलकी है और अब उस से भी ज़्यादा हलकी हो गयी थी क्यूंकि और पतली हो गयी थी, उस्सकी वेट और भी घट्ट गयी थी…. सोफे पर रूही को अपने गॉड में लेकर बैठने के बाद रूही ने अभी के गले में अपने बाहों को दाल दिया और अभी के आंखों की गहराई में झाँकने लगी फिर कहा,

“आप की आँखें नहीं बदले शुक्र है, वही गहराई, वही खूबसूरती, और आप की एएब्रोस जो है नाह अब भी वैसे hi हैं, मुझे डिस्टर्ब फील होता था जब इससे देखती थी पता है क्यों? क्यूंकि यह मेरे एएब्रोस से बहुत ज़्यादा खूबसूरत हैं, लड़कियों को पीलिंग्स करवाने पड़ते हैं ऐसे एएब्रोस बनाने के लिए और आप के नेचुरल इतने खूबसूरत एएब्रोस हैं, किआ यह पता है आप को?!”

“अभी ने मुस्कुराते हुए कहा,

“हाँ नैना हमेशा कहती थी, फिर बाद में नवीन ने भी कहा, उस्सकी बहनों ने भी कहा, और षहस्स….”

अभी श्वेता का नाम लेने जा रहा था मगर रुक गया…. रूही ने फिर अभी से उस्सको और किश करने को कहा…. अभी ने रूही को कसके बाँहों में भरके किश किया, और रूही से कहा,

“जवान था, मौका था, फुर्सत भी था, तब तो नखरें करती थी, तब की बात और होती नाह, कितना तड़पता था तुझे किश करने के लिए, जवानी की जोश में वो किश कुछ और hi था है के नहीं? आज सब फीका नहीं लग रहा हम्म्म? तब क्यों इतना तड़पती थी मुझे?”

रूही के आँखें भर आये और कहा,

“ताना मार रहे हो आप? आप के जाने के बाद, उम्र ढलने से पहले किआ आप के उन् किश और छुवन को मिस नहीं किया मैं ने आप के ख्याल से? पिछले 25 सालों में करोड़ों बार सोची हूँ उन् पलों को जिस जिस वक़्त आप ने मुझे छुआ, कहाँ कहाँ छुआ, कब कब छुआ… वो सब आज भी फील करती हूँ… याद है जब घर के पीछे पहली बार आप ने मेरे बूब दबाया था तो मैं ने आप को छोटा सा छाता मारा था, और आप ज़बरदस्ती पाकर रहे फिर से?! किआ मैं वो सब नहीं सोचती आप के ख्याल से?... जिस दिन आप को लंच के लिए इन्विते किया था आप कितना छह रहे थे, मैं ने आप को रेफुसे किया था आगे बढ़ने के लिए…. जब आप से जुड़ा हो गए तो हज़ार बार कहा के आप को सब कर देना चाहिए था, जितनी बार आप का मैं था मुझे आप को फ्री चोरर देना चाहिए था… आप ने कितनी बार कहा था के आप ने लाइफ में कभी नहीं किया है आप को बड़ा मैं था वो सब करने को मगर मैं फ्री थी करने दे सकती थी क्यूंकि वर्जिन नहीं थी मगर पता नहीं क्यों नहीं करने दिया था…..

आप से बिछड़ने के बाद इतना अफ़सोस हुआ के रोटी रह गयी उन् पलों को सोच सोच कर… खून के आंसू रोये हैं मैं ने आप को याद कर कर के अभी….”

इतने में महेश की वाइफ आयी रूही के कमरे में और कहा,

“आप डिनर करके घर जाना खाना ऑलमोस्ट तैयार है….”

अभी जल्दी से खड़ा हो गया और कहा,

“ओह no? 6 बज गए? इतनी जल्दी, no ी ऍम सॉरी मुझे जाना होगा, फिर कभी डिनर करूँगा, रूही ी गोत तो जो, मस्ट जो तो टेक बैक नवीन ात थे ऊनि…. इधर से hi डायरेक्ट जाऊंगा….”

रूही अभी के चेहरे में देखती रही, बड़े प्यार भरे नज़रों से और तब अभी ने अपने मोबाइल निकला और नवीन को जल्दी जल्दी टेक्स्ट लिख कर सेंड किया, फिर रूही को देखते हुए कहा,

“यू मस्ट नाउ हैवे ा मोबाइल नाह? दो यू? गिव में योर नंबर रूही!”

रूही ने सिसकते हुए कहा,

“हाँ है अक्सर रोटी हूँ यह सोच कर के क्यों हमारे जवानी के दिनों में नहीं था यह मोबाइल, जिस दिन आप आये थे आप को मोबाइल से कह देती नाह नहीं आने को, सब ठंडा होने के बाद बुलाती आप को…. और आप को निकला भी गया था घर से तो आप को कॉल करके बात तो कर सकती थी नाह? मोबाइल तो किआ फ़ोन भी नहीं लगा था उन् दिनों आप के जाने के 5/6 महीने बाद फ़ोन भी लग गयी थी आप को घर का नंबर देना चाहती थी मगर उन्ही दिनों आप की मांगनी की खबर मिली थी तो आईडिया ड्राप किया था मैं ने…..”

अभी ने रूही का नंबर लिया. और तुरंत उस्सको मिसकॉल किया और कहा,

“सुनों, कल आऊंगा तुमसे मिलने और डायरीज लाऊंगा, तुमने बताया नहीं कितने पढ़े थे उस रोज़ डायरी को?!”

रूही: “सिर्फ 10 पेजेज पढ़े थे अभी, बहोत मैं था पढ़ने को किआ लिखा था आप ने…. उन् 10 पहले पेजेज को पढ़ते हुए इतनी खुश थी मैं और आप ने डेस्क्रिबे किया था आप यहाँ काम करने आये हो और एक लड़की दिखी आप को, आप सब एक्सप्लेन कर रहे थे, मैं बड़ी दिलचस्पी से पढ़ रही थी के अचानक उस डायन ने मेरे हाथ से डायरीज छिना, मैं ने तब उस से बात करनी बांध कर दी थी, तो वो मुझे और सताना चाहती थी… मैं ने सोचा था कुछ देर बाद मुझे वापस कर देगी मगर बिल्कुल नहीं सोचा था के वो मनोज को दे देगी…. मैं मनोज से भी बात नहीं करती थी तो कैसे उस से मांगती…. मनोज ने थोड़ा कुछ पढ़ा और वापस मेहबूब को दे दिया था…”

अभी: “कल तो किआ आज रात को hi ला सकता हूँ आधी रात में पढ़ लोगी…. मैं चाहता था के मरने से पहले तुमसे एक बार मिल पौन और वो तुमको पढ़ने को दे पौन…. तुम्हारे बजाए नवीन ने पढ़ा था उन् डायरीज को, तभी उस्सक्को मुझसे प्यार हुआ… याद रखना मुझको नवीन से प्यार नहीं हुआ था उस्सको मुझसे प्यार हुई थी, और मैं तुम्हारी तरह नहीं था के उस्सको और उसस्के प्यार को ठुकरा दूँ…. एक्सेप्ट किया उसस्के प्यार को और हम दोनों आज तक खुश हैं”

रूही: “बेस्ट किया आप ने… आप को ठुकराने का मतलब का पता चल गया था यहाँ से रिजेक्ट होने के बाद… आप को ज़रूर उस्सको एक्सेप्ट करना hi था.. बहोत ाचा किया आप ने क्यूंकि उस्सकी जैसी औरत दुन्या में करोड़ों में एक होते हैं, मुझे पता है कैसी है वो….. मैं खुश होती थी; उस्सको जब आप के साथ सोचती थी, पता था आप को कोई वैसा hi चाहिए था जो आप का अच्ची तरह से ख्याल रख सके, जो आप से बेहद प्यार करे, बहोत डेसेर्विंग थे आप वैसी कोई अपनी लाइफ में पाने के लिए, मैं तो तुम दोनों के सलामती के लिए दुआएं करती आयी हूँ हमेशा से अभी…… मगर अभी, अभी इस वक़्त जिस झटके से आप ने मुझे सोफे पर रलह कर उठे, और कहा के 6 बज गए और आप को नवीन को लेने जाना है वो देख कर मुझे जलन फील हुई… इस लिए के सोचा आज मैं होती आप की लाइफ में तो आप आज ये मेरे लिए कह रहे होते के आप को रूही को लेने जाना है आप को लेट हो रही है….. हमारे लाइफ में तो यह दिन बिल्कुल नहीं आया अभी….”

अभी ने कहा,

“हमारे लाइफ में भी वह दिन आगये अभी, अब मैं नवीन से अक्सर कहूंगा के मुझे रूही को लेने जाना है या मुझे रूही के घर जाना है वो दिन आ गए रूही”

रूही: “वो आप को मुझसे मिलने आने देगी?”

अभी: “तुम उससे नहीं जानती रूही वो फरिश्ता है, वो तो तुमसे मिलना चाहती है, मुझको बहोत पहले कह दिया है के कभी आप को रूही मिली तो मुझसे ज़रूर मिलवाना मुझे उस्सको थैंक्स करना है…”

रूही हैरान होते हुए पूछती है,

“मुझको थैंक्स करना है किश लिए?!”

अभी: “किश लिए वो मैं नहीं बताऊंगा जब उस से मिलोगी तब खुद पूछ लेना… मैं कल hi नवीन को लेकर आऊं किआ? No no no…. फर्स्ट यू शुड कम्पलीट रीडिंग थे डायरीज थें ओनली ी विल मेक यू मीट नवीन….. अरे सुनों रूही, तुम मेरे घर चलोगी?”

रूही: “व्हाट? किआ? कब? अभी इस वक़्त अभी?!”

अभी: “इस वक़्त अगर नहीं तो कभी भी, या तो तुमको अपने घर लेचलूँ नवीन से मिलने या उस्सको लेकर आऊं तुमसे मिलने…”

रूही: “No, बाद में अभी…… वैसे अभी मुझे और बहोत कुछ कहना है तुमसे…. और बहोत इम्पोर्टेन्ट है मुझे वो सब बता देनी चाहिए आज अभी इसी वक़्त….”

अभी: “Okay और 15/20 मीन्स रुकता हूँ के ों स्वीटहार्ट तेल्ल में मोरे….”

रूही ने हिम्मत करके अब जो सबसे ज़रूरी बात अभी को इतने सालों से बतानी थी आज बताने को ठान लिया था, रूही ने गहरी सांस लेते हुए अभी के चेहरे में देखते हुए कहा,

“अभी याद है पहली बार जब आप ने मुझे बताया था लेटर के थ्रू के आप मुझसे प्यार करते हो तो मैं ने कुछ देर बाद सबसे पहली बात आप से यह कही थी के किआ आप मेरे ग़लतियों को माफ़ कर सकते हो? याद है अभी? और आप ने तुरंत बिना सोचे समझते झट से कहा था के हाँ आप मेरे सरे ग़लतियों को माफ़ कर डोज….”

अभी ने कहा,

“कैसे भूल सकता हूँ रूही? सब के सब रिटेन हैं मेरे डायरीज में कल तुम सब खुद पढ़ना अब….”

रूही: “अभी, आप ने क्यों कभी जान्ने की कोशिश नहीं किये के मेरी ग़लती किआ थी? कौन सी ग़लती किया था मैं ने वो आप ने क्यों नहीं पूछा मुझसे अभी?”

अभी: “आरी वो तुमने बता दिया था नाह के तुम वर्जिन नहीं हो तो उसी को ग़लती समझा था मैं, क्यों और कोई ग़लती थी किआ? वैसे अब इस से किआ लेना देना रूही फॉरगेट आईटी नाह यार!!”

रूही: “No अभी यू नीड तो क्नोव आईटी इस वैरी इम्पोर्टेन्ट…. अभी मेरी उसी ग़लती की वजह से माँ और मेहबूब मुझे आप से दूर करते गए, उसी ग़लती की वजह से मैं आज इस मुकाम पर हूँ, उसी मेरी एक ग़लती की वजह से जो भी माँ कहती मैं करती गयी, क्यूंकि मैं एक मुजरिम जैसी थी, सज़ा भुगत रही थी तो जो भी माँ कहती मुझे करना पड़ता था, वो कहे यह लाल नहीं सफ़ेद है तो मुझे उस्सको लाल रंग को सफ़ेद कहना पड़ता था….”

अभी: “आरी ऐसा भी किआ? ऐसा किआ किया था तुमने भला? कौन सी गलती कर डाली थी के इतना भी डोमिनेशन हो रहा था तुम्हारे साथ?”

रूही: “अभी आप उस ग़लती को जानते हो, वो ग़लती आप के सामने था, कई बार वो ग़लती आप के पास भी था….”

अभी: “रूही प्लीज स्टॉप प्लेइंग गेम्स, no पज़ल्स नाउ साफ़ साफ़ बताओ जो बताना है!”

रूही के आँखें भर आये और अभी को फिक्स देखते हुए कहा,

“अभी याद है एक रोज़ जब हम घर के पीछे किश कर रहे थे तो आप ने मुझसे कहा था के मैं आप को एक बेटी दूँ जो बिल्कुल मेरी तरह दिखे इतनी hi खूबसूरत और स्वीट? याद है मैं ने कहा था हाँ एक दिन दूंगी आप को वो बेटी?!”

अभी: “वो कैसे भूल सकता हूँ मैं कभी रूही? बूत नाउ इस आईटी नॉट तू लेट फॉर तहत?!”

रूही: “अभी मेरी ग़लती वही मेरी बेटी है अभी!! ी हद ा चाइल्ड इन 1986 अभी!!!”

अभी को झटका लगा, वो उठ खड़ा हुआ, और उसस्के दिमाग़ सुन्न हो गया, उसस्के दिल के धड़कनें तेज़ हुए, उस्सको जैसे सांस लेने में तकलीफ होने लगे और दो चार कदम रूम में चला अभी और रूही के पास आते हुए कहा…..,

“रूही ी होप के वो नहीं जिससे मैं सोच रहा हूँ इस वक़्त, शी कन्नोत बे ….NO. N..N..N.. न.. NO… NO NO NO ओह माय गॉड!!! श्वेता????!!!”

रूही ज़ोर से रोने लगी और हाँ में सर हिलाया!!!

अभी घुटनों के बल आगया और सिसकने लगा….. थोड़ा हांफ रहा था थोड़ा रो रहा था, उस्सको बहोत तकलीफ हो रही थी, उसस्के आँखों के सामने जैसे अँधेरा छाने लगा था… वो अपने फिजिकल रिश्ते को सोचने लगा श्वेता के साथ और सोचा के वो अगर अब रूही को पता चला तो किआ होगा….

रूही ने कहा,

“जब आप ने पहली बार श्वेता को देखा था तो मुझसे कहा था के वो बिल्कुल मेरी तरह दिखती है और मैं ने इंकार किया था आप से यह कहते के नहीं वो मेरी तरह नहीं दिखती…. मुझे पता था के आप सही थे…. और श्वेता आप को इतना प्यार करती थी वो मुझे बहोत hi अच्छा लगा था उन् दिनों, वो आप से बहोत घुल मिल गयी थी…. उस्सको तो यह भी नहीं पता था के मैं उस्सकी माँ थी उन् दिनों…..”

अभी फर्श पर बैठा एक सजदे के पोजीशन में था और रट जा रहा था ज़मीन पर अपना सर पटकते हुए….

रूही ने तब कहा,

“अभी मैं ने आप को, मांगने से पहले hi वो बेटी दे दिया था आप को…. याद है मैं ने उस्सक्को भेजा था किसी देने के लिए जब आप काम से वापस जा रहे थे और उस्सने ऊंची आवाज़ में सबको बता दिया था के मैं ने उससे आप को किसी देने को कहा था?!!!”

अभी की बोलती बांध था… वो हैंफ रहा था, जैसे उस्सको सांस लेने में तकलीफ हो रहे थे…. अभी फिर उठा, चल कर खिड़की के पास गया ठंडी हवा खाने के लिए, वहीँ खड़े रहकर मुधर वापस रूही के चेहरे में देखा और पूछा…..

“अभी श्वेता को पता है के तुम उस्सकी माँ हो?!”

रूही: “हाँ अब पता है उस्सको, जब 18 साल की हुई तब पता चला उस्सको, वो बहोत ग़ुस्सा हुई मुझसे के क्यों मैं ने उस्सको बचपन से नहीं पता चलने दिया के मैं उस्सकी माँ हूँ, मुझसे झगड़ा करके चली गयी वो आज तक वापस नहीं आयी…. जैसे मैं अपनी माँ से बात नहीं करती वो भी मुझसे बात नहीं करती…. बहोत ग़ुस्सा है मुझसे से क्यूंकि वो कहती है के मैं ने उस्सको 18 साल अपनी ममता से महरूम rakha….ghussa है के क्यों वो मेरी चची को अपनी माँ समझती रही, क्यों उस्सको अफेक्शन नहीं दिया, क्यों उस्सको मैं ने अपने से दूर रखा…. अभी मैं मजबूर थी…. जिस हालात में वो पैदा हुई मुझे समझ में नहीं आया के किआ करना चाहिए, जो भी घरवालों ने ठीक समझा वही किया और मुझसे सबके हाँ में हाँ मिलाना hi पड़ा था अभी.”

अभी ने रट हुए रूही के पास आकर कहा,

“रूही यह किआ किया तुमने… मैं ने तभी तुमसे कह दिया था के अगर तुम एक बची की माँ भी होती तब भी मैं तुमसे शादी करने को तैयार था, यार मैं तुमसे शादी करता और श्वेता को गॉड ले लेता मुझे कितना ाचा लगता के श्वेता मेरी बेटी होती, तुमने यह बात छुपा कर इतना बड़ी एक और ग़लती कर दिया के मैं कैसे बताऊँ तुझे के तुम ने किआ किया है रूही…. मैं कितना प्यार करती थी उस से…. अब भी करता हूँ….. मगर रूही तंमने कहा के श्वेता को उस्सकी 18 साल से पता है के तुम उस्सकी माँ हो?? मतलब उस्सको सब पता होते हुए भी मुझ से……??!!”

अभी सोचने लगा के स्वेता को पता था के वो रूही की बेटी है फिर भी वो अभी से सेक्सुअल रिलेशनशिप में बननी रही….. अब अभी समझा के जब श्वेता ने कहा था के वो बदला ले रही है किसी से तो वो रूही को मैं कर रही थी…. वो अभी को छीन रही थी अपनी माँ से….. एहि बदला ले रही थी श्वेता अपनी माँ से….!

ओह!!! अभी ने सर पर दोनों हाथ रख कर माथे को पीटने लगा…. रूही हैरान उस्सको देखती रही मगर शुक्र है के रूही कुछ भी नहीं समझी… रूही को बिल्कुल भी नहीं पता था के अभी और श्वेता एक दूसरे से मिलते हैं…..

अभी अब रूही के चेहरे में देखते हुए पूछा,

“यू वेरे अराउंड 20/21 व्हेन ी कनेव यू राइट? और वेरे यू ओल्डर रूही?”

रूही: “ी वास् ऑलमोस्ट शामे आगे अस यू राथेर ी ऍम 6 मोनथस यंगर थान यू अभी, ी हद लीड व्हेन ी हद टोल्ड यू ी वास् 20….”

अभी ने सर खुजाते हुए कहा,

“तुम्हारी एक 6 साल की बची थी 1986 में? और तुम तब 22 साल की थी, 22 माइनस 6 = 16…… ात 16 यू गोत तहत बेबी मीन्स ात 15 यू हद सेक्स एंड गोत प्रेग्नेंट?!!! ओह माय गॉड!!!”

अभी अब बहोत सीरियस हो गया था… रोना धोना बांध हो गया था, अब उस्का दिमाग़ काम करना बांध कर दिया था…..

अभी कमरे में इधर से उधर, उधर से इधर चल रहा था पागलों की तरह, सोच रहा था समझने की कोशिश किये जा रहा था, उसस्के दिमाग में तरह तरह के खयालात आरहे थे… और वापस मुड़कर रूही से पूछा,

“कौन? कौन है? बाप कौन है? कैसे हुआ जब तुम ुन्देरगे थी तो?!”

तो बे कॉन्टिनोएड…. (2930 वर्ड्स)
 
इस से पहले क 2 उपदटेस को किआ मैं ने बेकार में लिखा था कामदेव भाई? क्यों 2 उपदटेस को स्किप करके रिव्यु दे रहे हो आप?

और शातिर वाले कोई बात नहीं थक जाता हूँ टाइप करते.... करीब 3क वर्ड्स टाइप किया... ऊँगली दर्द करने लगे ग में दर्द हो गया बैठे हुए :lol:

इसी लिए एक टर्न मिला तो रोक diya:D

और हाँ सिलसिला के कई डायलॉग्स खुद अभी और रूही क बिच हुए हैं इस कहानी में.... जो लाइन्स आप ने कहे इम्मोर्टल हैं भाई और फिट होता है इस सिचुएशन में :डी
 
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