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अपडेट 62 बिरथ ऑफ़ श्वेता
“तुम्हारी एक 6 साल की बची थी 1986 में? और तुम तब 22 साल की थी, 22 माइनस 6 = 16…… ात 16 यू गोत तहत बेबी मीन्स ात 15 यू हद सेक्स एंड गोत प्रेग्नेंट?!!! ओह माय गॉड!!!”
अभी अब बहोत सीरियस हो गया था… रोना धोना बांध हो गया था, अब उस्का दिमाग़ काम करना बांध कर दिया था…..
अभी कमरे में इधर से उधर, उधर से इधर चल रहा था पागलों की तरह, सोच रहा था समझने की कोशिश किये जा रहा था, उसस्के दिमाग में तरह तरह के खयालात आरहे थे… और वापस मुड़कर रूही से पूछा,
“कौन? कौन है? बाप कौन है? कैसे हुआ जब तुम ुन्देरगे थी तो?!”
अब आगे….
बताने से पहले रूही ने नज़रें झुका लिए, उस्सकी आवाज़ टूट पड़े, उसस्के होंठ थरथराने लगे, और अश्कों के समुंदर से ऐसे लहरें उठे के रूही व्हीलचेयर से गिररने वाली थी जब अभी ने झट से उस्सको संभाला, और रूही निचे ज़मीन पर बैठ गयी रट हुए.
अभी ने उस्सको बाहों में भर लिया और छुप करते हुए उसस्के सर और पीठ पर हाथ फरने लगा….. वो रोटी जा रही थी, और अभी ने इन अल्फ़ाज़ों से उस्सको तस्सल्ली देते हुए कहा,
“इतस okay स्वीटहार्ट, होता है तुम्हारा कोई कुसूर नहीं इस में, तुम नादान थी, तुम्हारे भोलेपन का किसी ने फायदा उठाया होगा, ऐसा हुआ है कितनों के साथ, हो जाता है इसी को ग़लती कहते हैं नाह, बुसस छुप हो जाओ नाह, तब नाह बता पाओगी मुझे… देखो मुझे देर हो रही है नवीन को लेने जाना है अब बता भी दो… फिर चाहे तो और रो लेना मेरे चले जाने के बाद…. शहहहहह अब छुप हो जाओ बेबी!”
रूही ने रट रट हंस दिए यह कहकर,
“बेबी? अब भी बेबी कह रहे हो मुझे? बेबी मैं तब थी 25 साल पहले जब आप लंच करने आये थे मेरे यहाँ, अब तो पकाती भी नहीं के आप के लिए एक डिश बना सकूँ….”
यह कह कर रूही ने बाहों में भर लिया अभी को. अभी ने उस्सको वैसे hi गॉड में उठाके सोफे पर बिठाया और रूही से सब बताने को कहा.
रूही ने बोलना शुरू किया,
“अभी तब मेरा पीरियड रेगुलर नहीं रहा करता था…. कभी दो तो कभी तीन महीने बाद आते थे. इस लिए मुझे पता भी नहीं चला के प्रेग्नेंट थी…. वार्ना लेट नहीं होता उस्सको गिरा सकती थी, मगर पता चला तो चौथा महीना चल रहा था डॉक्टर ने कहा खतरा है अगर गिराने की कोशिश किया गया तो…..”
अभी: “अरे बाबा मुझे यह बताओ के बचे का बाप कौन है मेरी माँ!!”
रूही: ”मेरा एक क्लास मात था जो मुझे बहोत पसंद था, मुझसे प्यार करता था…. वो भी शामे आगे का था! कॉलेज के दिन थे, तीनगर थी मैं भी, चंचल शौक हसीनाओं में गिनी जाती थी, खूबसूरत थी उन् दिनों लरपरवाह रहा करती थी, किसी चीज़ का ख्याल नहीं था के किआ हो रहा है…. उस लड़के ने एक दिन मुझको प्रोपोज़ किया…. मैं इतनी नादान थी के झट से हाँ कह दिया उस्सको…. करती भी किआ, कोई बॉयफ्रेंड नहीं था मेरा, उन् दिनों होते भी नहीं थे किसी का बॉयफ्रेंड…. वो लड़का मुझसे प्यार करने का दवा करता था….. “
अभी ने रूही को रोकते हुए कहा,
“कहाँ का रहने वाला था? यहीं कहीं? किधर कॉलेज जाती थी तुम? यहाँ से दूर?!”
रूही ने जो बयां किया उस्सको अब फ्लैशबैक में दिखाते हैं.
फ्लैशबैक ऑफ़ Ruhi’s कॉलेज डेज
1980. बहोत सारे अमिताभ बच्चन के फंस थे दुन्या भर में. एक साल में उस्सकी 5 सुपर हिट्स होते थे, हर साल 2 या 3 फिल्में सुपर डुपेर हिट्स होते थे. सारे सिनेमा घरों में अमिताभ बच्चन की फिल्में लगते तो हळद मच जाया करता था.. और सालों तक उसस्के फिल्में थिएटर्स में चलते रहते थे. दोस्ताना, राम बलराम, शान, याराना, नसीब, लावारिस, कला पत्थर, Mr.Natwarlaal, शोले, जैसे फिल्में इस साल में तमान थिएटर्स में चल रहे थे और सब हाउस फुल रहते थे…. और सबके सब सुपर हिट्स थे. उसस्के फंस में से रूही एक थी जो थिएटर जाया करती थी अमिताभ की फिल्में देखने.
रूही को अपने घर से एक बस से कॉलेज जाना होता था उन् दिनों. सिर्फ 30 मीन्स की रूट थी और वो कॉलेज अर्ली रीच हो जाती थी हर सुबह. गौरव नाम का लड़का उस्का आशिक था, वो हर रोज़ रूही का वेट करता और दोनों घूमते थे जब तक स्कूल का टाइम नहीं हो जाता. दोनों हम उम्र थे और शामे क्लास में थे.
एक दिन गौरव ने क्लास बंक करने को कहा रूही से और सिनेमा जाने का प्लान बनाया दोनों ने और गए भी अमिताभ की नसीब देखने. मगर थिएटर जाने से पहले उनके पास बहुत वक़्त था 10 बजे का शो था तो सुबह 8 से 10 बजे तक दोनों पार्क में घूमने गए. उस वक़्त पार्क खली था सुबह जो था, तो दोनों एक दूर के कोने में गए और किश विस्स करने में लग गए…. रूही मन करती भी थी और करने भी देती थी, थोड़ा बहोत नखरें करती…. गौरव चिपक जाता था उस से और उसस्के हाथ रूही के जिस्म पर चारों तरफ फरता रहता…..
रूही कभी ग़ुस्सा होती तो कभी अफ़सोस करती गौरव पर चिल्लाने या उस्सको डांटने के बाद… गौरव काफी आगे बढ़ गया था रूही के ब्लाउज ने निचे हाथ दाल कर उस्सकी ब्रा की कप के निचे ऊँगली करके उस्सकी बूब और निप्पल को टटोलता और सहलाता रहता… चुस्सना चाहता मगर रूही आगे नहीं बढ़ने देती थी….
दोनों फिर सिनेमा चले गए…. सिनेमा में उस रोज़ ज़्यादा लोग नहीं थे 10 की शो में, हॉल खली खली था, तो एक बेहटाईं कोने को सेलेक्ट किया बैठने के लिए दोनों ने और फिल्म के दौरान गौरव फिल्म देख hi नहीं रहा था वो तो लगा हुआ था रूही को चूमने और उस्सकी जिस्म को मसलने में… बार बार रूही गौरव को मारती, मगर गौरव कुछ ज़्यादा hi आगे बढ़ गया था रूही की ब्रा भी उन्हुक कर गया था और उस्सकी स्कर्ट भी ज़्यादा ऊपर उठा चूका था और उस्का हाथ रूही के जिस्म पर चारों तरफ फेरर रहे थे….
रूही फिल्म देखने में इतनी डूबी हुई थी के गौरव उसस्के साथ किआ कर रहा था वो ख्याल hi नहीं कर रही थी… रूही तब चाहूँकि जब गौरव ने रूही के हाथ को अपने सेक्स पर रखा….. झट से रूही ने हाथ खिंचा और गौरव को एक चांटा मारा….. बाकी के फिल्म दोनों ने बिल्कुल खामोश होकर देखे…. किसी ने एक दूसरे एक बात नहीं किये, रूही ने अपने ड्रेस को चरों तरफ ठीक किया…..
जब मूवी एन्ड हो गयी तो दोनों को घर जाने के लिए अर्ली था इस लिए वापस उस पार्क में गए उसी कोने में और कोई था hi नहीं, पार्क बिल्कुल खली था….. गौरव ने रूही को किश करते हुए उस्सकी ड्रेस ऊपर कर लिया और उस्सकी पंतय उतारने लगी….
क्यूंकि रूही ने गौरव को थपड मारा था सिनेमा हॉल में और सॉरी फील किया था इस लिए इस बार रूही कम्पेनसाते करने के लिए गौरव को वो करने दे रही थी जो वो करना चाहता था…
देर नहीं लगा बिल्कुल गौरव को रूही को घांस पर लेटने के लिए और उस्सको पेनेत्रते करने के लिए…. सब बहोत फ़ास्ट हुआ और गौरव रूही के अंदर hi झाड़ गया, नादान था, तीनगर था उस्सको पता hi कहाँ था के बाहर निकालना चाहिए, या जोश में मौका hi नहीं मिला पुल्ल आउट करने के लिए और काम हो गया…..
रूही ने भी कुछ ख़ास ध्यान नहीं दिया, मगर रोई थी जब गौरव ने उस्सको पेनेत्रते किया था, और खून के कुछ कतरे अपने पंतय पर देख कर डर भी गयी थी….
दूसरे दिन इस बारे में दोनों ने बात भी किये थे और उसस्के बाद कभी भी रूही उसस्के साथ कहीं नहीं गयी और नाह hi गौरव को उससे छूने दिया…..
कॉलेज गर्ल थी तो रूही को पता था सेक्स करने से किआ होता है, और वही बात गौरव को भी पता था मगर क्यूंकि रूही की मेंस्ट्रुएशन रेगुलर नहीं थे तो उसी ने hi गौरव से कहा था के कोई प्रॉब्लम नहीं क्यूंकि उस्सकी पीरियड हुआ hi नहीं था कई महीनों से….
और दिन गुज़रते गए फिर चौथे महीने में जब रूही की पीरियड हुआ नहीं और उस्सको पथ का दर्द होने लगा तब उस्सकी माँ उस्सको डॉक्टर के पास लगाई तो पता चला के वो 4 महीनों से प्रेग्नेंट है!!!
एन्ड ऑफ़ फ्लैशबैक
जो फ्लैशबैक में लिखा अभी वो सब रूही ने अभी के सीने से चिपकी हुई बताया था अभी को, और फिर रूही ने अब अभी के चेहरे में देखते हुए कहा;
“किआ किया था हम ने? मुझे एक रिडिक्युलॉस बच्चों के खेल जैसे लगा था उस दिन सिनेमा के बाद जो पार्क में हुआ था, सोचा hi नहीं था उस्का गंभीरता… कुछ फील भी नहीं किया था मैं ने, कुछ समझ में आया hi नहीं था, बुसस एक चुभन सी फील हुई थी और 4 महीने की प्रेगनेंसी आया रिजल्ट…. आप मत पूछिए मेरा किआ हाल किया मम्मी ने, इतनी मार पड़ी मुझे के मैं बता नहीं सकती, इतनी गली गलोच सुनने को मिला, घर में शर्म के मारे मुंह नहीं दिखा पाती थी, भाइयों से मुंह छिपाये फिरती थी, कॉलेज जाना बांध हुआ और मम्मी पता नहीं किश किश से मिलकर किआ किआ बंदोबस्त करने लगी थी… पापा के सामने जाने से बहोत शर्म आती थी मुझे, फिर भी पापा मुझे बार बार तस्सली देने आता था… मनोज ग़ुस्सा करता था, महेश तो बहोत छोटा था उसस्के समझ में कुछ नहीं अत था…..”
अभी रूही के बालों में अपने उंगलियों को फरते हुए रूही के माथे को चूमा और पूछा,
“फिर किआ किया मेरी बेबी ने? कितना दुःख उठायी थी? हम्म? क्यों मैं तब तुमसे नहीं मिला था? तुमको तुरंत अपना लेता प्रेगनेंसी के साथ….. और उस गौरव से नहीं मिली तुम्हारी माँ?”
रूही: “मनोज अपने दोस्तों के साथ मिलकर उस्सको बहुत मारा था, उस्सको होस्पिटलिजे कर दिया था. अभी आज मैं आप को बताती हूँ मेरी डायन माँ पैसों की भूकी है, उस्का बास चलता तो मुझे बेच भी सकती थी पैसों के लिए. मम्मी गौरव के घरवाले से मिलने गयी और धमकी दिया के पुलिस में जाएगी और केस करेगी तो गौरव को जेल जाना होगा… मम्मी ने उन् दिनों 25 हज़ार रूपए लिए गौरव के पिता से मामला को रफा दफा करने के लिए…. आप से मेरी चची ने कहा था नाह के मेरी माँ एक लालची औरत है, बिल्कुल सही कहा था…. माँ हमेशा से पैसों की भूकी थी…. पापा यहीं ड्राइवर का काम करता था और सब ाचा चल रहा था… माँ ने पापा को मजबूर किया था के S.Arabia जाए ड्राइविंग करने ताके वहां ज़्यादा पैसा कमा सके…. माँ के लिए पैसा सब कुछ था… पैसों की दीवानी है वो आज भी…..
जब आप को टीवी पर देखा तो इतना ताना मारा था मैं ने उसस्के मुहं पर के जाओ भीक मानगो अब अभी से, उसस्के पास तो अब करोड़ों रूपए होंगे, देखो कितना बड़ा आदमी बन गया है, महल होगा उसके पास बड़े बड़े कार्स होंगे अभी के पास. आप के पति के पास आप के बेटों के पास किआ है घंटा?!!”
अभी ने पूछा,
फिर किआ हुआ स्वीटहार्ट? श्वेता तुम्हारे चची के पास कैसे पहुंची?”
रूही बोली,
“मेरा पांचवा महीना शुरू हुआ तो मेरा तबियत ख़राब होने लगा…. हॉस्पिटल लेजाया गया मुझे एक रात और चची उस रात को ड्यूटी पर थी तो उस्सको सब पता चल गया.
एक बात बतानी भूल गयी आप को, घर में मेरे पापा ने मुझे उतना नहीं कहा जितना मेहबूब ने मुझे सुनाया था… मम्मी ने मेहबूब को बता दिया था, मेहबूब ने मेरे पापा के सामने मुझे बड़े बड़े गली दिए थे, कहा थे तू रंडी बनने चली है? कॉलेज पढ़ने जाती थी या किसी कोठे वाली के यहाँ जाती थी धंदा करने के एक बचा लेकर आयी है तू पथ में?!’
मैं उस दिन से मेहबूब से दररने लगी थी. मुझे कभी किसी ने ऐसे गाली नहीं दिया था, मेहबूब ने hi मम्मी से कहा था के बचे के पैदा होने के बाद उस्सको किसी अनाथालय में चोरर दिया जाए ये किसी मंदिर, चर्च या मस्जिद के सामने रख दिया जाए….
मेरा पथ अब दिखने लगा था, मोहल्ले में किसी को मेरे पेरेंट्स ने कुछ नहीं बताया था… पापा सोचने लगे के किआ जवाब देंगे सबको, कैसे मुंह दिखाएंगे सब को, पापा की बड़ी इज़त थी मोहल्ले में उस्का नाम बदनाम हो जाता.. तब भी मेहबूब ने hi कहा के मुझको कहीं और चोरर देना चाहिए जब तक बचे को जनम नाह दे दूँ, कहीं बहोत दूर जाकर रहना चाहिए मुझे और उधर hi बचे को जनम देने के बाद मोहल्ले में वापस आऊं तो किसी को कुछ पता नहीं चलेगा….
और उस रात को जब चची को पता चला के मैं प्रेग्नेंट हूँ तो उस्सने सब बंदोबस्त किये.. वो भी बुरी है, ग़लत है मगर उस्सने मेरी बची को बचाया किसी आश्रम या कहीं और जाने से…. क्यूंकि उस्सकी शादी को कई साल हो गए थे और उस्सकी कोई औलाद नहीं थी तो उस्सने कहा के वो बची की माँ बनेगी, उस्का नाम आएगा बिरथ सर्टिफिकेट पर, और उस्सकी पति का नाम आएगा अस फादर.
उस रात के बाद मुझे चची अपनी घर लगाई तब से श्वेता की बिरथ तक मैं चची के घर में रही, उस्सकी जनम होने के एक साल बाद मैं अपने घर वापस आयी अपने दिल के टुकड़े को चची के पास चोरर कर…. एक प्राइवेट क्लिनिक में मुझको डिलीवर करवाया चची ने उस्सकी कॉन्टेक्ट्स थे, और उस डॉक्टर ने जिसस्ने मेरी डिलीवरी करवाया उस्सने मुझसे सब साफ़ साफ़ समझाया के मैं कोई बचा नहीं जनम दे रही हूँ, मेरी चची प्रेग्नेंट है और वो बिरथ दे रही है, मेरा तो नाम भी नहीं रजिस्टर हुआ था उस क्लिनिक में बल्कि चची का नाम रजिस्टर हुआ था अस ा प्रेग्नेंट वुमन और मेरी बिरथ के तुरंत बाद मेरी बेबी को चची के पास दिया गया क्यूंकि उसी वक़्त उसी रोज़ चची भी मैटरनल वार्ड में एक बीएड पर एडमिट हुई थी अस ा प्रेग्नेंट वुमन.
मैं बहोत रोई थी जब आखरी दिन को श्वेता को चोरर कर वापस घर आना पड़ा था…. उस्सको चौररने को मैं नहीं कर रहा था, उस्सको दूध पिलाई थी मैं ने एक साल तक…. बहोत खुबसुईरत बची हो गयी थी उस एक साल में, जी करता था उस्सको अपने गॉड में उठा कर भाग जॉन मगर पुलिस केस होती तो मैं तो उस्सकी माँ नहीं थी लीगली…. लीगली तो मेरी चची श्वेता की माँ और मेरा चाचा श्वेता की लीगल फादर था!!
मैं घर वापस आयी… महीनों तक रोटी रही, फिर कई महीने बाद चची श्वेता को लेकर आयी मुझे दिखने और मुझे उसस्के साथ खलने को देने के लिए…… और जब वापस जाने लगी तो श्वेता खुद रोने लगी, मेरे साथ रहना चाहती तजि… मेरा कलेजा फट रहा था अभी मेरी बची को कोई और लगाई और मैं कुछ नहीं कर पायी…..”
तो बे कॉन्टिनोएड….. (2502 वर्ड्स)
“तुम्हारी एक 6 साल की बची थी 1986 में? और तुम तब 22 साल की थी, 22 माइनस 6 = 16…… ात 16 यू गोत तहत बेबी मीन्स ात 15 यू हद सेक्स एंड गोत प्रेग्नेंट?!!! ओह माय गॉड!!!”
अभी अब बहोत सीरियस हो गया था… रोना धोना बांध हो गया था, अब उस्का दिमाग़ काम करना बांध कर दिया था…..
अभी कमरे में इधर से उधर, उधर से इधर चल रहा था पागलों की तरह, सोच रहा था समझने की कोशिश किये जा रहा था, उसस्के दिमाग में तरह तरह के खयालात आरहे थे… और वापस मुड़कर रूही से पूछा,
“कौन? कौन है? बाप कौन है? कैसे हुआ जब तुम ुन्देरगे थी तो?!”
अब आगे….
बताने से पहले रूही ने नज़रें झुका लिए, उस्सकी आवाज़ टूट पड़े, उसस्के होंठ थरथराने लगे, और अश्कों के समुंदर से ऐसे लहरें उठे के रूही व्हीलचेयर से गिररने वाली थी जब अभी ने झट से उस्सको संभाला, और रूही निचे ज़मीन पर बैठ गयी रट हुए.
अभी ने उस्सको बाहों में भर लिया और छुप करते हुए उसस्के सर और पीठ पर हाथ फरने लगा….. वो रोटी जा रही थी, और अभी ने इन अल्फ़ाज़ों से उस्सको तस्सल्ली देते हुए कहा,
“इतस okay स्वीटहार्ट, होता है तुम्हारा कोई कुसूर नहीं इस में, तुम नादान थी, तुम्हारे भोलेपन का किसी ने फायदा उठाया होगा, ऐसा हुआ है कितनों के साथ, हो जाता है इसी को ग़लती कहते हैं नाह, बुसस छुप हो जाओ नाह, तब नाह बता पाओगी मुझे… देखो मुझे देर हो रही है नवीन को लेने जाना है अब बता भी दो… फिर चाहे तो और रो लेना मेरे चले जाने के बाद…. शहहहहह अब छुप हो जाओ बेबी!”
रूही ने रट रट हंस दिए यह कहकर,
“बेबी? अब भी बेबी कह रहे हो मुझे? बेबी मैं तब थी 25 साल पहले जब आप लंच करने आये थे मेरे यहाँ, अब तो पकाती भी नहीं के आप के लिए एक डिश बना सकूँ….”
यह कह कर रूही ने बाहों में भर लिया अभी को. अभी ने उस्सको वैसे hi गॉड में उठाके सोफे पर बिठाया और रूही से सब बताने को कहा.
रूही ने बोलना शुरू किया,
“अभी तब मेरा पीरियड रेगुलर नहीं रहा करता था…. कभी दो तो कभी तीन महीने बाद आते थे. इस लिए मुझे पता भी नहीं चला के प्रेग्नेंट थी…. वार्ना लेट नहीं होता उस्सको गिरा सकती थी, मगर पता चला तो चौथा महीना चल रहा था डॉक्टर ने कहा खतरा है अगर गिराने की कोशिश किया गया तो…..”
अभी: “अरे बाबा मुझे यह बताओ के बचे का बाप कौन है मेरी माँ!!”
रूही: ”मेरा एक क्लास मात था जो मुझे बहोत पसंद था, मुझसे प्यार करता था…. वो भी शामे आगे का था! कॉलेज के दिन थे, तीनगर थी मैं भी, चंचल शौक हसीनाओं में गिनी जाती थी, खूबसूरत थी उन् दिनों लरपरवाह रहा करती थी, किसी चीज़ का ख्याल नहीं था के किआ हो रहा है…. उस लड़के ने एक दिन मुझको प्रोपोज़ किया…. मैं इतनी नादान थी के झट से हाँ कह दिया उस्सको…. करती भी किआ, कोई बॉयफ्रेंड नहीं था मेरा, उन् दिनों होते भी नहीं थे किसी का बॉयफ्रेंड…. वो लड़का मुझसे प्यार करने का दवा करता था….. “
अभी ने रूही को रोकते हुए कहा,
“कहाँ का रहने वाला था? यहीं कहीं? किधर कॉलेज जाती थी तुम? यहाँ से दूर?!”
रूही ने जो बयां किया उस्सको अब फ्लैशबैक में दिखाते हैं.
फ्लैशबैक ऑफ़ Ruhi’s कॉलेज डेज
1980. बहोत सारे अमिताभ बच्चन के फंस थे दुन्या भर में. एक साल में उस्सकी 5 सुपर हिट्स होते थे, हर साल 2 या 3 फिल्में सुपर डुपेर हिट्स होते थे. सारे सिनेमा घरों में अमिताभ बच्चन की फिल्में लगते तो हळद मच जाया करता था.. और सालों तक उसस्के फिल्में थिएटर्स में चलते रहते थे. दोस्ताना, राम बलराम, शान, याराना, नसीब, लावारिस, कला पत्थर, Mr.Natwarlaal, शोले, जैसे फिल्में इस साल में तमान थिएटर्स में चल रहे थे और सब हाउस फुल रहते थे…. और सबके सब सुपर हिट्स थे. उसस्के फंस में से रूही एक थी जो थिएटर जाया करती थी अमिताभ की फिल्में देखने.
रूही को अपने घर से एक बस से कॉलेज जाना होता था उन् दिनों. सिर्फ 30 मीन्स की रूट थी और वो कॉलेज अर्ली रीच हो जाती थी हर सुबह. गौरव नाम का लड़का उस्का आशिक था, वो हर रोज़ रूही का वेट करता और दोनों घूमते थे जब तक स्कूल का टाइम नहीं हो जाता. दोनों हम उम्र थे और शामे क्लास में थे.
एक दिन गौरव ने क्लास बंक करने को कहा रूही से और सिनेमा जाने का प्लान बनाया दोनों ने और गए भी अमिताभ की नसीब देखने. मगर थिएटर जाने से पहले उनके पास बहुत वक़्त था 10 बजे का शो था तो सुबह 8 से 10 बजे तक दोनों पार्क में घूमने गए. उस वक़्त पार्क खली था सुबह जो था, तो दोनों एक दूर के कोने में गए और किश विस्स करने में लग गए…. रूही मन करती भी थी और करने भी देती थी, थोड़ा बहोत नखरें करती…. गौरव चिपक जाता था उस से और उसस्के हाथ रूही के जिस्म पर चारों तरफ फरता रहता…..
रूही कभी ग़ुस्सा होती तो कभी अफ़सोस करती गौरव पर चिल्लाने या उस्सको डांटने के बाद… गौरव काफी आगे बढ़ गया था रूही के ब्लाउज ने निचे हाथ दाल कर उस्सकी ब्रा की कप के निचे ऊँगली करके उस्सकी बूब और निप्पल को टटोलता और सहलाता रहता… चुस्सना चाहता मगर रूही आगे नहीं बढ़ने देती थी….
दोनों फिर सिनेमा चले गए…. सिनेमा में उस रोज़ ज़्यादा लोग नहीं थे 10 की शो में, हॉल खली खली था, तो एक बेहटाईं कोने को सेलेक्ट किया बैठने के लिए दोनों ने और फिल्म के दौरान गौरव फिल्म देख hi नहीं रहा था वो तो लगा हुआ था रूही को चूमने और उस्सकी जिस्म को मसलने में… बार बार रूही गौरव को मारती, मगर गौरव कुछ ज़्यादा hi आगे बढ़ गया था रूही की ब्रा भी उन्हुक कर गया था और उस्सकी स्कर्ट भी ज़्यादा ऊपर उठा चूका था और उस्का हाथ रूही के जिस्म पर चारों तरफ फेरर रहे थे….
रूही फिल्म देखने में इतनी डूबी हुई थी के गौरव उसस्के साथ किआ कर रहा था वो ख्याल hi नहीं कर रही थी… रूही तब चाहूँकि जब गौरव ने रूही के हाथ को अपने सेक्स पर रखा….. झट से रूही ने हाथ खिंचा और गौरव को एक चांटा मारा….. बाकी के फिल्म दोनों ने बिल्कुल खामोश होकर देखे…. किसी ने एक दूसरे एक बात नहीं किये, रूही ने अपने ड्रेस को चरों तरफ ठीक किया…..
जब मूवी एन्ड हो गयी तो दोनों को घर जाने के लिए अर्ली था इस लिए वापस उस पार्क में गए उसी कोने में और कोई था hi नहीं, पार्क बिल्कुल खली था….. गौरव ने रूही को किश करते हुए उस्सकी ड्रेस ऊपर कर लिया और उस्सकी पंतय उतारने लगी….
क्यूंकि रूही ने गौरव को थपड मारा था सिनेमा हॉल में और सॉरी फील किया था इस लिए इस बार रूही कम्पेनसाते करने के लिए गौरव को वो करने दे रही थी जो वो करना चाहता था…
देर नहीं लगा बिल्कुल गौरव को रूही को घांस पर लेटने के लिए और उस्सको पेनेत्रते करने के लिए…. सब बहोत फ़ास्ट हुआ और गौरव रूही के अंदर hi झाड़ गया, नादान था, तीनगर था उस्सको पता hi कहाँ था के बाहर निकालना चाहिए, या जोश में मौका hi नहीं मिला पुल्ल आउट करने के लिए और काम हो गया…..
रूही ने भी कुछ ख़ास ध्यान नहीं दिया, मगर रोई थी जब गौरव ने उस्सको पेनेत्रते किया था, और खून के कुछ कतरे अपने पंतय पर देख कर डर भी गयी थी….
दूसरे दिन इस बारे में दोनों ने बात भी किये थे और उसस्के बाद कभी भी रूही उसस्के साथ कहीं नहीं गयी और नाह hi गौरव को उससे छूने दिया…..
कॉलेज गर्ल थी तो रूही को पता था सेक्स करने से किआ होता है, और वही बात गौरव को भी पता था मगर क्यूंकि रूही की मेंस्ट्रुएशन रेगुलर नहीं थे तो उसी ने hi गौरव से कहा था के कोई प्रॉब्लम नहीं क्यूंकि उस्सकी पीरियड हुआ hi नहीं था कई महीनों से….
और दिन गुज़रते गए फिर चौथे महीने में जब रूही की पीरियड हुआ नहीं और उस्सको पथ का दर्द होने लगा तब उस्सकी माँ उस्सको डॉक्टर के पास लगाई तो पता चला के वो 4 महीनों से प्रेग्नेंट है!!!
एन्ड ऑफ़ फ्लैशबैक
जो फ्लैशबैक में लिखा अभी वो सब रूही ने अभी के सीने से चिपकी हुई बताया था अभी को, और फिर रूही ने अब अभी के चेहरे में देखते हुए कहा;
“किआ किया था हम ने? मुझे एक रिडिक्युलॉस बच्चों के खेल जैसे लगा था उस दिन सिनेमा के बाद जो पार्क में हुआ था, सोचा hi नहीं था उस्का गंभीरता… कुछ फील भी नहीं किया था मैं ने, कुछ समझ में आया hi नहीं था, बुसस एक चुभन सी फील हुई थी और 4 महीने की प्रेगनेंसी आया रिजल्ट…. आप मत पूछिए मेरा किआ हाल किया मम्मी ने, इतनी मार पड़ी मुझे के मैं बता नहीं सकती, इतनी गली गलोच सुनने को मिला, घर में शर्म के मारे मुंह नहीं दिखा पाती थी, भाइयों से मुंह छिपाये फिरती थी, कॉलेज जाना बांध हुआ और मम्मी पता नहीं किश किश से मिलकर किआ किआ बंदोबस्त करने लगी थी… पापा के सामने जाने से बहोत शर्म आती थी मुझे, फिर भी पापा मुझे बार बार तस्सली देने आता था… मनोज ग़ुस्सा करता था, महेश तो बहोत छोटा था उसस्के समझ में कुछ नहीं अत था…..”
अभी रूही के बालों में अपने उंगलियों को फरते हुए रूही के माथे को चूमा और पूछा,
“फिर किआ किया मेरी बेबी ने? कितना दुःख उठायी थी? हम्म? क्यों मैं तब तुमसे नहीं मिला था? तुमको तुरंत अपना लेता प्रेगनेंसी के साथ….. और उस गौरव से नहीं मिली तुम्हारी माँ?”
रूही: “मनोज अपने दोस्तों के साथ मिलकर उस्सको बहुत मारा था, उस्सको होस्पिटलिजे कर दिया था. अभी आज मैं आप को बताती हूँ मेरी डायन माँ पैसों की भूकी है, उस्का बास चलता तो मुझे बेच भी सकती थी पैसों के लिए. मम्मी गौरव के घरवाले से मिलने गयी और धमकी दिया के पुलिस में जाएगी और केस करेगी तो गौरव को जेल जाना होगा… मम्मी ने उन् दिनों 25 हज़ार रूपए लिए गौरव के पिता से मामला को रफा दफा करने के लिए…. आप से मेरी चची ने कहा था नाह के मेरी माँ एक लालची औरत है, बिल्कुल सही कहा था…. माँ हमेशा से पैसों की भूकी थी…. पापा यहीं ड्राइवर का काम करता था और सब ाचा चल रहा था… माँ ने पापा को मजबूर किया था के S.Arabia जाए ड्राइविंग करने ताके वहां ज़्यादा पैसा कमा सके…. माँ के लिए पैसा सब कुछ था… पैसों की दीवानी है वो आज भी…..
जब आप को टीवी पर देखा तो इतना ताना मारा था मैं ने उसस्के मुहं पर के जाओ भीक मानगो अब अभी से, उसस्के पास तो अब करोड़ों रूपए होंगे, देखो कितना बड़ा आदमी बन गया है, महल होगा उसके पास बड़े बड़े कार्स होंगे अभी के पास. आप के पति के पास आप के बेटों के पास किआ है घंटा?!!”
अभी ने पूछा,
फिर किआ हुआ स्वीटहार्ट? श्वेता तुम्हारे चची के पास कैसे पहुंची?”
रूही बोली,
“मेरा पांचवा महीना शुरू हुआ तो मेरा तबियत ख़राब होने लगा…. हॉस्पिटल लेजाया गया मुझे एक रात और चची उस रात को ड्यूटी पर थी तो उस्सको सब पता चल गया.
एक बात बतानी भूल गयी आप को, घर में मेरे पापा ने मुझे उतना नहीं कहा जितना मेहबूब ने मुझे सुनाया था… मम्मी ने मेहबूब को बता दिया था, मेहबूब ने मेरे पापा के सामने मुझे बड़े बड़े गली दिए थे, कहा थे तू रंडी बनने चली है? कॉलेज पढ़ने जाती थी या किसी कोठे वाली के यहाँ जाती थी धंदा करने के एक बचा लेकर आयी है तू पथ में?!’
मैं उस दिन से मेहबूब से दररने लगी थी. मुझे कभी किसी ने ऐसे गाली नहीं दिया था, मेहबूब ने hi मम्मी से कहा था के बचे के पैदा होने के बाद उस्सको किसी अनाथालय में चोरर दिया जाए ये किसी मंदिर, चर्च या मस्जिद के सामने रख दिया जाए….
मेरा पथ अब दिखने लगा था, मोहल्ले में किसी को मेरे पेरेंट्स ने कुछ नहीं बताया था… पापा सोचने लगे के किआ जवाब देंगे सबको, कैसे मुंह दिखाएंगे सब को, पापा की बड़ी इज़त थी मोहल्ले में उस्का नाम बदनाम हो जाता.. तब भी मेहबूब ने hi कहा के मुझको कहीं और चोरर देना चाहिए जब तक बचे को जनम नाह दे दूँ, कहीं बहोत दूर जाकर रहना चाहिए मुझे और उधर hi बचे को जनम देने के बाद मोहल्ले में वापस आऊं तो किसी को कुछ पता नहीं चलेगा….
और उस रात को जब चची को पता चला के मैं प्रेग्नेंट हूँ तो उस्सने सब बंदोबस्त किये.. वो भी बुरी है, ग़लत है मगर उस्सने मेरी बची को बचाया किसी आश्रम या कहीं और जाने से…. क्यूंकि उस्सकी शादी को कई साल हो गए थे और उस्सकी कोई औलाद नहीं थी तो उस्सने कहा के वो बची की माँ बनेगी, उस्का नाम आएगा बिरथ सर्टिफिकेट पर, और उस्सकी पति का नाम आएगा अस फादर.
उस रात के बाद मुझे चची अपनी घर लगाई तब से श्वेता की बिरथ तक मैं चची के घर में रही, उस्सकी जनम होने के एक साल बाद मैं अपने घर वापस आयी अपने दिल के टुकड़े को चची के पास चोरर कर…. एक प्राइवेट क्लिनिक में मुझको डिलीवर करवाया चची ने उस्सकी कॉन्टेक्ट्स थे, और उस डॉक्टर ने जिसस्ने मेरी डिलीवरी करवाया उस्सने मुझसे सब साफ़ साफ़ समझाया के मैं कोई बचा नहीं जनम दे रही हूँ, मेरी चची प्रेग्नेंट है और वो बिरथ दे रही है, मेरा तो नाम भी नहीं रजिस्टर हुआ था उस क्लिनिक में बल्कि चची का नाम रजिस्टर हुआ था अस ा प्रेग्नेंट वुमन और मेरी बिरथ के तुरंत बाद मेरी बेबी को चची के पास दिया गया क्यूंकि उसी वक़्त उसी रोज़ चची भी मैटरनल वार्ड में एक बीएड पर एडमिट हुई थी अस ा प्रेग्नेंट वुमन.
मैं बहोत रोई थी जब आखरी दिन को श्वेता को चोरर कर वापस घर आना पड़ा था…. उस्सको चौररने को मैं नहीं कर रहा था, उस्सको दूध पिलाई थी मैं ने एक साल तक…. बहोत खुबसुईरत बची हो गयी थी उस एक साल में, जी करता था उस्सको अपने गॉड में उठा कर भाग जॉन मगर पुलिस केस होती तो मैं तो उस्सकी माँ नहीं थी लीगली…. लीगली तो मेरी चची श्वेता की माँ और मेरा चाचा श्वेता की लीगल फादर था!!
मैं घर वापस आयी… महीनों तक रोटी रही, फिर कई महीने बाद चची श्वेता को लेकर आयी मुझे दिखने और मुझे उसस्के साथ खलने को देने के लिए…… और जब वापस जाने लगी तो श्वेता खुद रोने लगी, मेरे साथ रहना चाहती तजि… मेरा कलेजा फट रहा था अभी मेरी बची को कोई और लगाई और मैं कुछ नहीं कर पायी…..”
तो बे कॉन्टिनोएड….. (2502 वर्ड्स)