इन्सेस्ट आखिर क्यों? फ्रॉम हैट्रेड तो लव (कम्प्लेटेड) - Page 3 - SexBaba
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इन्सेस्ट आखिर क्यों? फ्रॉम हैट्रेड तो लव (कम्प्लेटेड)

अपडेट-19

अब तक...

अंशिका बड़ी हिम्मत करके वापस पीछे हो गयी और दुबारा से रूम में आने लगी मगर इस बार उसने आवाज़ पहले hi दे दी थी.

आवाज़ सुन्न राहुल और वंशु अलग हुए और वंशु राहुल को आंख मारते हुए अंशिका क साथ नेहा के कमरे में चली गयी.

जाते जाते अंशिका राहुल को घर रही थी और मासूम सा चेहरा बनाए हुए थी. राहुल ने उससे इग्नोर किया और अपने रूम में आराम करने क लिए लेत गया.

शाम को उससे ऋचा के घर जाना था और फिर रात में तनीषा से चेक उप करवाने भी.

अब आगे...

दिन का समय बीता और राहुल ने दिन का बखूबी इस्तेमाल करते हुए एक झपकी मार hi ली.

इधर नेहा के कमरे में नेहा अंशु और वंशु ने पूरा दिन कर्रम खेलते हुए हसी मज़ाक में, गप्पे लड़ाते हुए बिताया. आज इन् सभी लोगो ने घर पे hi रिलैक्स करने का डीडे किया था क्युकी कल वैसे hi बात बिगड़ गयी थी.

पर अंशिका असमंजस में डूबी हुई थी. क्युकी उसने जो देखा था, वो मंज़र उसकी आँखों के सामने से हैट hi नहीं रहा था. उसकी वंशु दी और राहुल दोनों किश कर रहे थे वो भी होंठो से होंठ मिला कर. ऐसे तोह कोई लवर्स या कपल्स hi करते है. ये कोई भाई बहिन वाला प्यार तोह कही से नहीं लग रहा था.

"क्या चल क्या रहा है? दी और भाई एक दूसरे से.... ी मैं कैसे? मतलब दी यहाँ जबसे आयी है तभी से शुरू है. दोनों में कुछ ज़रूर चल रहा है. पर दोनों भाई बहिन, दोनों समझदार है फिर आखिर कैसे? केसा लगा होगा दी को भाई को किश करते वक़्त?? वो फीलिंग... उफ्फ्फ!!! ये में क्या सोच रही हु. ये गलत है. पर मुझे उतना गुस्सा क्यों नहीं आ रहा जितना आना चाहिए. एक प्रकार से मुझे भी भाई के होंठ फील करने का मैं कर रहा है... ओह माय गॉड!!!! ये... ये किसी चीज़े सोचने लगी हु में... ऍम ी गेटिंग माध और व्हाट? उफ्फ्फ!!!"

अंशिका अपनी वंशु दी को देखती जा रही थी और मैं hi मैं सोचते जा रही थी.

नेहा ने अब अपने जज़्बातो पे नियत्रण रखा हुआ था, उसने अपनी प्यारी बड़ी बहिन अंशु को भी माफ़ कर दिया. कुल मिलाकर घर का वातावरण अभी शांत था और नार्मल पहले की तरह hi था. पर कब क्या हो जाए? कोण भड़क जाए? कोण किस से खफा हो जाए? कोण किस से लड़ जाए? आखिर क्या भरोसा? ज़िन्दगी का यही उसूल है जनाब. आज मौज में हो कल कब क्या सजा मिल जाए किस्से पता? अब भविष्य भी किसी ने देखा है क्या?

शाम के 4 बजे जैसे तैसे राहुल मिया उठे अपने बिस्तर से अंगड़ाई लेते हुए, अब ऋचा को बोल के जो रखा था की मिलने आएँगे उसके घर. वादा कर के मुकर तोह नहीं सकते न अब? है की नहीं दोस्तों? राहुल जुबां का बोहत पक्का था. जो बोल दिया मतलब बोल दिया. वो काम करना hi है फिर. वो डायलाग है न... "एक बार जो मेने कमिटमेंट कर दी तोह में अपने आप की भी नहीं सुनता". बस वही सन था राहुल के साथ.

अब ऋचा को जुबां दी थी, तोह उस जुबां पे कायम भी रहना पड़ेगा.

हाथ मुँह धो के फ्रेश होक राहुल नीचे हॉल में आया और निशा को आवाज़ लगाई...

"मा....!! ऋचा के घर जा रहा हु. स्नैक्स dedo...kuch खा के फिर निकलता हु."

निशा अपने रूम में थी, दिन का वक़्त था तोह वो भी घर के कामो से फुर्सत होक आराम फार्मा रही थी.

राहुल की पुकार सुन्न तुरंत बाहर आयी और उससे स्नैक्स देने के लिए किचन में चली गयी.

राहुल ने गयम ज़रूर चोरर दी थी पर घर पे वो एक्सरसाइजेज ज़रूर करता था जिस से उसका शरीर आउट ऑफ़ शेप नहीं था और लाजिनेस्स नहीं आती थी. ये ज़रूरी था. उसके मार्टिकल आर्ट ट्रेनर हमेशा उससे चुस्त रहने के लिए कहते थे.

निशा ने फौरन एक फ्रूट सलाद की प्लेट तैयार की और राहुल को सर्वे की पर आज उसका मैं विचलित सा था.

कल अपने बेटे के बारे में सोच के गीली जो हो गयी थी. आज उसी बेटे को देख उसका मैं बिलकुल भी शांत नहीं था. खुद पे घिन्न भी आ रही थी पर राहुल को देख उसका मैं भी दोल रहा था.

जैसे तैसे निशा ने अपनी उत्तेजनाओं को दबाए हुए रखा और राहुल फ्रूट्स खा क ऋचा के घर निकल गया अपनी बाइक उठा के.

*डिंग डाँग*

दूर बेल्ल बजाने पर निकिता ने गेट खोला. आज वो भी नेहा के कहने पर कॉलेज नहीं गयी थी. दोनों जाती थी तोह साथ में hi जाती थी. राहुल को देख चेहेक्ते हुए वो राहुल के गले लग गयी...

"भैया!!!!"

निकिता को गले लगा कर राहुल उसकी पीठ सेहला रहा था, पर अचानक उससे एक झटका सा लगा. निकिता का उभार उसके सीने में डब्ब रहा था.

अब निकिता बच्ची नहीं थी. बड़ी हो गयी थी. उसने पहले भी कई दफा इस नन्ही फुलझड़ी को गले लगाया था पर पहले उभार का एहसास बिलकुल ना के बराबर रहता था.

पर आज तोह....

हम्म लड़की बड़ी हो गयी है मतलब.

ज़्यादा देरर यदि राहुल रुका तोह निकिता का उभार तोह दिख hi रहा था साथ में राहुल के जीन्स का उभार दिखने में भी देरर नहीं लगती. यही सोचते हुए उसने निकिता को अपने सीने से जुड़ा किया...

"आइये न भैया!! अंदर आइये!! कितनो दिनों बाद आप आए हमारे घर. वर्ण जब कॉलेज जाते थे तोह अक्सर आया करते थे."

निकिता ने राहुल के सीने से अलग होते हुए कहा.

"क्या करू अब? देख तोह रही है तू कंपनी के चक्कर में हम सभी लोग बिजी रहते है. पर आज तोह आया न?" राहुल ने कहा.

दोनों फिर घर के अंदर आते है, निकिता राहुल को सोफे पे बैठा के अंदर दौड़ती हुई आवाज़ लगाते हुए चली जाती है...

"अरे डीई!!! राहुल भैया आए है, माआ!!!!!"

निकिता की माँ आरती उसकी आवाज़ सुन्न बहार आती ह तोह राहुल उनके चरण स्पर्श करता ह, पर आरती राहुल की बाहें पकड़ के उसको अपने गले से लगा लेती है...

जिस से उसके बड़े बड़े दूध राहुल के सीने में धस्स गए. आज आरती को भी राहुल को गले लगाते वक़्त बोहत अच्छा लगा. राहुल का चौड़ा मजबूत शरीर उसको बोहत अच्छा लगा. वर्ण रोज़ रोज़ अपने पति का थुल तुला शरीर hi मिलता है उससे.

"अरे बीटा परर वेरर मत छुआ कर तू भी तोह मेरे बीटा जैसा hi है... आज कितने दिनों बाद आया तू हां? याद नहीं आती क्या हमलोग की?"

आरती ने राहुल को गले से लगते हुए कहा.

"नहीं आंटी! किसी बात करती हो आप, अभी थोड़ा समय hi ऐसा है, घर पर भी सारा समय पढाई और प्रिपरेशन में निकल जाता है."

राहुल ने अपनी मजबूरी व्यक्त करते हुए कहा.

"हां बीटा!! ऋचा भी प्रिपरेशन में लगी रहती है. भगवान् करे तुम दोनों की अच्छी सी कंपनी में नौकरी लग जाए तोह तुमलोग भी अपने पेर्रो पे खड़े हो जाओगे. मेरी तोह बस यही विनती है."

आरती ने उसको वापस सोफे पे बैठाते हुए कहा...

र : "वैसे ऋचा कहा है आंटी??"

"बीटा वह अपने कमरे में है, तू एक काम कर ऊपर चले जा और में चाय नाश्ता वही भिजवा देती हु"

आरती इतना बोल किचन में चली गयी.

"चलिए भैया!! में ले चलती हु आपको दी के कमरे में..."

निकिता फिर राहुल का हाथ पकडे उसको ऊपर ले जाती है ऋचा के कमरे में...

दरवाज़ा खुला hi था और ऋचा शायद वाशरूम में थी. सजने सवारने में लगी थी शायद ये सोच के की आज राहुल आने वाला था.

राहुल और निकिता बीएड पे बैठ जाते है और कुछ एक दो मिनट बाद ऋचा वाशरूम से निकलती है. बाहर राहुल और निकिता को देख बिलकुल जम्म सी जाती है वही पे. लाली छा गयी थी उसके चेहरे पर राहुल को देखते hi. जो राहुल ने तोह नोटिस नहीं की पर निकिता की नज़रो ने सब भाप लिया था. वो बाद में आने का बोलके नीचे चली जाती है और दोनों को अकेला चोरर देती है.

"Hi!!!" राहुल ने बीएड से उठते हुए कहा.

आज ऋचा ने शॉर्ट्स और एक ब्लैक टॉप पतला सा डाला हुआ था. घर पर वो और निकिता दोनों लूसे कपडे hi पहनती थी. ऋचा वाक़ई एक बोहत hi ख़ूबसूरत लड़की थी. जबसे उसमे बदलाव आया था तब से वो और भी ज़्यादा आकर्षक लगने लगी थी.

ऋचा धीरे धीरे बिना कुछ बोले राहुल के नज़दीक आयी. दोनों की आँखें एक दूसरे को hi निहार रही थी. और इतने में ऋचा ने कस के राहुल को अपनी बाहो में जकड लिया.

जिस से राहुल भी अचंभित हो गया. राहुल ऋचा के घर आता रहता था पर ऋचा तब ऐसे उससे हुग नहीं करती थी. जब कोई स्पेशल ोक्सासिओं या कुछ और रहता था तब hi सिर्फ ऋचा हुग करती थी. पर आज तोह एकदम से hi उसने ये हमला कर दिया.

एक तोह पहले निकिता के उभरते दूध का एहसास और फिर आरती के बड़े बड़े मुलायम स्तन का एहसास और अब ये.

ऋचा के कड़क वेल राउंडेड दूध उसके सीने में धस्स रहे थे. और अभी अभी वो वाशरूम से आयी थी. पूरा बदन महक रहा था उसका. जो राहुल को मदहोश कर रहा था. किसी भी वक़्त उसका पप्पू खड़ा हो सकता था. :रोफ्लोल:

"तुम! तुम इतने दिनों बाद आए और बस एक hi !?" ऋचा ने बनावटी गुस्सा दिखाते हुए कहा.

"अरे!! तू देख तोह रही है न! कितना व्यस्त हु में. और ऊपर से दोनों बहने आयी हुई है मेरी. अब तोह आ गया न. और ये क्या आज तुझे क्या हो गया एकदम से?" राहुल ने ऋचा की पीठ थप तपाते हुए कहा. और तभी एक झटका और लगा उससे.

ऋचा की ब्रा के स्ट्राप का एहसास हो गया. न जाने आज कितने एहसास होएंगे उससे. कही पप्पू जाग न जाए. बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा आज उससे.

दोनों थोड़ी देरर तक यही हुग किये रहे. राहुल जहा ऋचा के शरीर से आती हुई खुस्भु में डूबा हुआ था तोह वही ऋचा राहुल के शरीर से आती हुई मर्दो वाली महक, डॉ की खुशबु और राहुल के मजबूत शरीर से मदहोश हुई जा रही थी.

फिर दोनों बीएड पे hi विराजमान हुए और राहुल ने hi चुप्पी तोड़ते हुए बोलना स्टार्ट किया वर्ण अट्मॉस्फेरे बोहत ऑक्वर्ड हो रहा था.

"बी थे वे मेने भी चेक किया व्हाट्सप्प ग्रुप. पहली कंपनी एक बड़ी मुलती नेशनल कंपनी है. 5 लाख का है पैकेज जो की बोहत बढ़िया है एक फ्रेशर के हिसाब से. तोह!? प्रिपरेशन किसी चल रही है!?"

राहुल ने अपनी बात रखते हुए कहा.

"ठीक hi है अभी. मुझे प्रैक्टिस की और ज़रुरत है. मेरा यदि कोई मोचक इंटरव्यू ले तोह मुझमे कॉन्फिडेंस और बढ़ जाएगा." ऋचा ने कहा...

"हम्म! तोह एक काम क्यों नहीं करती! एक दिन तुम मेरे यहाँ आ जाओ या में तुम्हारे घर आ जाता हु. में तुम्हारा मोचक इंटरव्यू ले लूंगा और तुम मेरा. इसी बहाने हम दोनों की प्रिपरेशन हो जाएगी. क्या कहती हो?" राहुल ने आईडिया देते हुए कहा.

"सूरे!! तुम hi आ जाना मेरे यहाँ. जब भी आना हो. पर 2 दिन बाद hi आ रही है कंपनी तोह हमारे पास सिर्फ दो hi दिन है."

ऋचा तोह चाह hi रही थी की राहुल उस से ये बोले इसलिए वो ख़ुशी ख़ुशी राज़ी हो गयी.

र: "Ok!!"

तभी इतने में निकिता चाय नाश्ता लेके आ गयी. राहुल ने इन् सब के लिए मन किया पर कहा मान ने वाली थी वो. राहुल ने भी फिर अपने हाथ खड़े कर दिए. और चाय नाश्ता में सभी लोग टूट पड़े फिर.

स्नैक्स वगैरह होने के बाद निकिता ट्रे वापस ले गयी. और राहुल ने अब निकलना बेहतर समझा. अभी उससे तनीषा दी के लिए गिफ्ट भी लेना था और उन्हें मनाना भी था. ये भी एक बड़ी प्रॉब्लम थी उसके लिए. क्युकी तनीषा कभी नाराज़ नहीं होती थी इस तरह उस से. कॉल तोह करती hi थी वह पर इस बार न कोई मैसेज और न hi कोई कॉल.

राहुल ने निकलने के लिए कहा और बीएड से उठ गया. की इतने में ऋचा ने एक बार और हुग कर लिया उससे.

अब राहुल सूरे था की ऋचा कुछ आज अजीब सा रियेक्ट कर रही है. थोड़ा ज़्यादा क्लोज थी आज वह. पर राहुल को सिर्फ शर्म hi आ रही थी. उससे इस बात का बुरा बिलकुल भी नहीं लगा था.

"हमारा सिलेक्शन हो तोह जाएगा न!?" ऋचा ने बात को घुमाते हुए उससे अपनी बाहो में ले लिया.

अब ये थोड़ी न कहती की राहुल मुझे तुम्हे हुग करना है. इतनी हिम्मत नहीं थी उसमे अभी. इसलिए बात को घुमा के उसने एप्रोच किया.

राहुल ने एक बार फिर उसकी पीठ थप थपै और उससे फिर से ब्रा की स्ट्राप का एहसास हुआ. पर इस बार राहुल को भी मज़ा आ रहा था और उसने जान बूझ के hi हाथ रखा था वह. मर्द था, मर्दो वाली हरकते हो hi जाती है.

"बिलकुल होएगा" राहुल ने उससे अलग करते हुए कहा.

की इतने में ऋचा ने उसके गालो पे अपने होंठ रख दिए. और तुरंत hi पीछे भी हट गयी.

अब ये कुछ नया था. ऋचा ने इस से पहले कभी भी राहुल को किश नहीं किया था ऐसे. एक बार hi किया था जब राहुल टेक फेस्ट वाले दिन सो गया था. उसके बाद से ऋचा ने आज तक किश नहीं किया था. उससे वैसा मौक़ा hi नई मिला कभी. और राहुल के जागते हुए किश करने की उसमे आज तक हिम्मत hi नहीं हुई थी

हुग तोह कई बार करि थी ऋचा पर किश नहीं. राहुल के पॉइंट ऑफ़ व्यू से ये फर्स्ट किश था ऋचा का उसके लिए. पर ऋचा के पॉइंट ऑफ़ व्यू से दूसरा. अब बेचारा राहुल पहली किश से अनजान था तोह इसमें उसकी क्या गलती.

इधर राहुल थोड़ा शॉकेड होक ऋचा को देख रहा था तोह वह ऋचा अपनी नज़रे चुराने में लगी हुई थी. पूरा चेहरा उसका शर्म से लाल टमाटर की तरह हो गया था.

न जाने कितनी हिम्मत जूता के उसने आज ये काम किया था. पर अब नज़रे कैसे मिलाए? उसके लिए और हिम्मत चाहिए थी. जो शायद ऋचा में अब नहीं बची थी.

"तुम कल hi आ जाना. हम कल hi मिलते है." बस इतना hi कहा ऋचा ने और फिर नीचे देखने लगी.

"हँ!? ओह्ह हआ... सूरे!!" राहुल जैसे उसकी बात सुन्न अपने शॉक से बाहर आया. कितनी क्यूट लग रही थी ऋचा शर्माते वक़्त. राहुल का भी दिल धक् धक् करने लगा था उससे ऐसे शर्माते देख.

फाइनली वो बाहर निकला और सभी को bye बोल और कल का आने का बोलके वो मार्किट साइड निकल गया. उससे गिफ्ट लेना था तनीषा दी के लिए. पर क्या? कोण सा गिफ्ट दे की तनीषा दी खुश हो जाए? क्या पसंद है उन्हें? मानेगी भी नहीं या नहीं? सवालों से उलझे राहुल बस बाइक पे सवार आस पास की दुकाने देख चलता जा रहा था...

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आज के लिए इतना hi फ्रेंड्स!!

कीप सपोर्टिंग एंड कीप रीडिंग!
 
अपडेट-20

अब तक...

"तुम कल hi आ जाना. हम कल hi मिलते है." बस इतना hi कहा ऋचा ने और फिर नीचे देखने लगी.

"हँ!? ओह्ह हआ... सूरे!!" राहुल जैसे उसकी बात सुन्न अपने शॉक से बाहर आया. कितनी क्यूट लग रही थी ऋचा शर्माते वक़्त. राहुल का भी दिल धक् धक् करने लगा था उससे ऐसे शर्माते देख.

फाइनली वो बाहर निकला और सभी को bye बोल और कल का आने का बोलके वो मार्किट साइड निकल गया. उससे गिफ्ट लेना था तनीषा दी के लिए. पर क्या? कोण सा गिफ्ट दे की तनीषा दी खुश हो जाए? क्या पसंद है उन्हें? मानेगी भी नहीं या नहीं? सवालों से उलझे राहुल बस बाइक पे सवार आस पास की दुकाने देख चलता जा रहा था...

अब आगे...

राहुल अपनी गिग्सेर पे सवार आस पास की दुकाने देखते हुए चल रहा था की तभी उससे एक अच्छी सी गिफ्ट शॉप दिखी और राहुल ने बिना कुछ सोचे समझे सीधे गाडी को उस दूकान के सामने पार्क कर दिया.

अंदर दूकान में गया तोह बोहत सारे गिफ्ट्स के आइटम्स थे, नए नए प्रकार के गिफ्ट्स थे, कपल्स के लिए ढेरो आइटम्स थे तोह वही फॅमिली में किसी को गिफ्ट करने के लिए भी भरपूर आइटम्स मौजूद थे.

"आइये सर!! बोलिये क्या चाहिए... केसा गिफ्ट दिखाऊ!?" दूकान वाले ने अंदर आते राहुल को देखते हुए पूछा.

दूकान वाला भी सज्जन आदमी लग रहा था, किस प्रकार से अपने कस्टमर को सर्विस देनी है और केसा बोल चाल रखना है ये काम उससे अच्छे से आता था. आखिर व्यवहार देख के hi तोह आदमी दुबारा दूकान में आएगा न?

"थोड़ा देख लू अंकल! 2 मं सोच के बताता हु" राहुल ने ढेर सारे सामने शोकसेस में रखे गिफ्ट्स को देखते हुए कहा.

"जी बिलकुल! आप देख लो अच्छे से या मुझे बता दीजियेगा किस टाइप का गिफ्ट चाहिए में आपको दिखा दूंगा"

दुकानवाला बोलै.

अब राहुल सोच में डूबा बस अपनी प्यारी तनीषा दी के बारे में सोच रहा था. कैसे हर्र बार उसकी तनीषा दी जब भी उससे चोट पहुचती थी तोह कितनी सावधानी और प्यार से उससे ट्रीट करती थी. यहाँ तक की कोई पैसे भी नहीं लेती थी. बस फर्स्ट टाइम hi उसने पैसे लिए थे वो भी राहुल के कहने पर, राहुल ने जो भी उसके लिए किया था तनीषा उसको हमेशा याद रखती थी और राहुल से पैसे लेना उससे बिलकुल पसंद नहीं था. दूसरी बात ये की उससे राहुल को चोटिल देखना भी पसंद नहीं था. इसलिए हमेशा वो राहुल को लड़ाई से दूर रहने की हिदायत देती थी.

क्या उसकी तनीषा दी मानेगी? क्या पसंद था उससे? और फ़ोन क्यों नहीं उठा रही है? ठीक भी है या नहीं? रूत तोह नहीं गयी? यही सारे सवाल मैं में उथल पुथल मचा के रखे हुए थे उसके मैं में.

राहुल देख तोह रहा था इधर से उधर पर कुछ समझ में नहीं आ रहा था उसको की क्या गिफ्ट दे. ऊपर से वैसे भी ऋचा के घर से निकलते निकलते उससे 7:30 बज चुके थे. और घर पहुँच के डिनर भी करना था उससे. वर्ण लेट हुआ तोह वंशु तोह सवाल पे सवाल रख देती उसके सामने. ऊपर से उसकी चोट, जैसे तैसे राहुल दर्द बर्दाश्त कर रहा था. ड्राइविंग की वजह से उसका पैन और बढ़ जाता पर वो कैसे भी करके सेहन कर रहा था.

"कुछ समझ में नहीं आ रहा हो तोह में मदद करू क्या बीटा!?" दुकानवाले ने राहुल को कन्फ्यूज्ड देखते हुए कहा.

र : अंकल हां... वो में...

दुकानवाला: पहले ये बताओ बीटा गिफ्ट किस के लिए चाहिए!? मतलब जिसको देना है वो तुम्हारा क्या लगता है या लगती है!?

र : जी wo...wo मेरी....

"गर्लफ्रेंड के लिए चाहिए!? यही बात hai...kyu है न!? तुम जैसे नौजवान की तोह वैसे भी गफ होगी hi..." दुकानवाले ने राहुल से कहा.

र : हँ!!?? जी वो... में...

"देखो बीटा! गफ को यदि पहला गिफ्ट दे रहे हो तोह में यही सुग्गेस्ट करूँगा की एक अच्छा सा सॉफ्ट तोय दो. लड़कियों को ये बेहद पसंद आते है. और वो जब अपने रूम्स में उसको सजा के रखती है तोह वो तुम्हारी याद दिलाएंगे उसको. और साथ hi साथ चॉकलेट्स लेते जाना अच्छी वाली...

लिख के देता हु तुम्हारी गफ इम्प्रेस हो जाएगी. ये कॉमन ज़रूर है पर सॉफ्ट तोय आजकल अलग अलग प्रकार के आने लगे है, और चॉकलेट्स भी. इसलिए ये कॉम्बो हमेशा काम करता है..."

दुकानवाला राहुल कुछ कह पाटा उस से पहले hi बोल दिया.

र : ओह्ह्ह्ह!

R(mann में ) : पर चाचा अब तुमको क्या बताऊ, ये मेरी बहिन जैसी प्यारी तनीषा दी के लिए है, अजीब है दूकान वाला भी, अरे भाई बोलने तोह देते... खर्र...

राहुल बस फ्लो के साथ चलता जा रहा था. तभी दुकानवाला अंदर से कुछ सॉफ्ट टॉयज लाया अलग अलग प्रकार के अलग अलग जानवर के, कुछ बोहत hi क्यूट थे, कुछ बड़े थे, कुछ मध्यम साइज के.

की तभी राहुल की नज़र एक पांडा वाले सॉफ्ट तोय पर पड़ी जो बोहत hi क्यूट लग रहा था. और साइज भी मध्यम था. राहुल को वो पांडा देखते hi साथ लुभा गया. मैं में hi विचार आना शुरू हो गए उसके, की ये तोह तनीषा दी को पसंद आ hi जाएगा. उसने तुरंत वो पांडा पैक करवाया और एक कररयबाग में रखते हुए बाइक पे टांग के निकल गया चॉकलेट्स लेने.

एक स्टोर में पहुँच के वो डार्क चॉकलेट का एक बड़ा पैकेट खरीदता है और सब कुछ लेके वो तनीषा के घर की तरफ रवाना हो जाता है.

रात की चांदिनी में राहुल अपनी बाइक को माध्यम गति में चलाते हुए, तनीषा के विचारो में डूबा हुआ था.

तनीषा का घर एक फ्लैट में था, सेकंड फ्लोर पे जहा लिफ्ट भी लगी हुई थी. राहुल बाइक पार्क कर के लिफ्ट में सेकंड फ्लोर की तरफ बढ़ा और तनीषा के घर की और चल दिया.

कुछ क्षण बाद hi तनीषा के घर के पास पहुचा तोह राहुल को एक झटका सा लगा. घर पे टाला लगा हुआ था. अब राहुल को थोड़ी टेंशन होना शुरू हो चुकी थी. एक तोह तनीषा कॉल नहीं उठा रही थी, और ऊपर से घर पे ताला लगा हुआ था.

"दी कहा चली गयी? वो तोह शाम 7 बजे तक घर आ जाती है हॉस्पिटल से. फिर!?? कॉल भी पिक नहीं कर रही... दी!!! वेयर अरे यू!?? अब मुझे टेंशन होने लगी है, कही कोई मुसीबत में ना हो...

हॉस्पिटल!! येह!! हॉस्पिटल में कॉल करके पूछता हु."

राहुल ने मैं में विचार करते हुए आईडिया ढूंढा.

और फौरन तनीषा के हॉस्पिटल में रिसेप्शन में कॉल किया, दूसरी साइड से रिसेप्शनिस्ट ने कॉल पिक किया और बात करने पे पता चला की तनीषा तोह शाम 6 बजे hi घर की तरफ निकल चुकी थी.

अब राहुल को दूसरा झटका लगा, 8:30 बज रहा था और यहाँ तनीषा का कोई अत पता नहीं था. राहुल अब बोहत hi ज़्यादा विचलित हो रहा था.

मैं में गलत ख़याल आने शुरू हो गए थे, कही कुछ बुरा न हुआ हो तनीषा के साथ. तनीषा को बोहत मानता था वो, और उसकी हेल्प करने के लिए हमेशा आगे रहता था वही तनीषा भी सेज भाई की तरह ट्रीट करती थी राहुल को. एक बड़ी बहिन जैसे केयर करती है बिलकुल वैसे hi वो राहुल को बोहत प्यार देती थी.

आज जब तनीषा का कोई अत पता नहीं था तोह राहुल का दिल घबरा उठा. राहुल को एक अजीब सी घबराहट हो रही थी, एक अजीब सी फीलिंग आ रही थी, उससे डर था की कही उसकी तनीषा दी उस से दूर न चली जाये, कही वो बिछड़ न जाए उस से, पसीने की लकीरे उसके माथे पे साफ़ झलक रही थी. साफ़ पता चल रहा था की राहुल अभी कितनी टेंशन में है.

जब आपकी एक ऐसे व्यक्ति से पहचान होती है जो आपको बखूबी चाहे और आपके लिए कुछ भी करने का जज़्बा रखे तोह एक मज़बूत बंधन सा बन जाता है उस व्यक्ति के साथ. और वो बंधन और भी मज़बूत हो जाता है जब उस व्यक्ति पे कोई मुसीबत ाँ पड़ती है.

तब आप सब कुछ भूल कर उसके बारे में hi सोचते हो.

ऐसा hi कुछ सन अभी राहुल के साथ हो रहा था. अब समझ नहीं आ रहा था की क्या करे... करता भी क्या!? न फ़ोन करने का कोई फायदा था और ना hi हॉस्पिटल में पूछने का.

तभी राहुल के दिमाग की बत्ती जाली और वो सीधा कैर्री बैग पकडे पकडे hi नीचे गया और बाहर थोड़ी दूर चल के एक फल वाले के पास पहुचा.

"अरे राजू!! तनीषा दी को देखा क्या तुमने!?" राहुल ने उस फल वाले से पूछते हुए कहा.

इस फल वाले का नाम राजू था और ये फ्लैट वाली सोसाइटी के बाहर hi फल का ठेला लगाया करता है, राहुल ने इस से जान बुझ के पहचान बना के राखी हुई थी. तनीषा भी फल राजू के यहाँ से hi खरीदती थी. सोसाइटी से कोई भी आता जाता था तोह राजू अक्सर देखा करता और उससे साड़ी खबर लगभग रहती थी. इसलिए राहुल ने उस से पहचान बना के राखी हुई थी, सिर्फ और सिर्फ अपनी तनीषा दी के लिए.

"भैया जी! अभी यही कोई 1 घंटे पहले hi दीदी गयी थी बहार पैदल, उसके बाद से अब तक नहीं आयी है." राजू बोलै.

र : क्या?? एक... एक घंटे पहले?? वो भी पैदल?

राजू : जी भैया जी! कोणु दिक्कत हो गयी क्या भैया!?

र : n...nahi... ठीक है कोई बात नहीं.

राहुल फौरन अपनी बाइक उठाया और सोसाइटी से बाहर निकला. अब उसकी घबराहट बोहत ज़्यादा थी. डर सताए सा जा रहा था उससे, किसी होगी उसकी तनीषा दी? क्या कर रही है अकेले? फ़ोन क्यों नहीं उठा रही? सही सलामत है की नहीं?

दिल तेज़्ज़ी से धक् धक् कर रहा था उसका. बस बाइक को स्पीड में भगाए जा रहा था. उसने पहले आस पास के इलाके में देखना बेहतर समझा और गलियों में hi बाइक पे सवार अपनी नज़रो से उस एक प्यारे से चेहरे की तलाश में चला जा रहा था.

एक गली से निकलते हुए राहुल को एक पार्क दिखा जो मैनटैनेड नहीं था, उधर की लाइट्स भी खराब थी, इसलिए वह सुन्न सपाटा था. अँधेरा काफी था और 2 3 कुत्ते आपस में लड़ रहे थे. राहुल ने पहले इग्नोर मारा और आगे बढ़ा की तभी उसको थोड़ी दूर एक पेड़ के पास साया दिखा और उसने गाडी को तुरंत रोक दिया और उतर के उस साये के पास चल दिया.

आहिस्ता आहिस्ता राहुल अपने कदम बढ़ाता हुआ उस पेड़ की तरफ चला जा रहा था, उसने कैर्री बैग को बाइक पे hi टांग के चोरर दिया था.

आगे बढ़ता रहा और जैसे hi वो पेड़ के नज़दीक पहुचा तोह एक लड़की की पीठ दिखी उससे, और राहुल ने उसके कंधे पे जैसे hi हाथ रखा तोह लड़की की एकदम चींख निकल गयी और तुरंत पलट गयी.

तनीषा दी!! हां ये तनीषा दी hi तोह थी. तनीषा ने जैसे hi राहुल को देखा तोह एकदम शांत हो गयी, पहले तोह 3 4 सेकंड तक राहुल के चेहरे को देखती रही की तभी राहुल ने "दी" कह के पुकारा...

और तभी तनीषा की आँखों से आंसुओ की धाराए लबालब बहने लगी और झटके से उसने राहुल को भींच लिया.

उसके प्यारे नरम उरोज राहुल की छाती से जा टकराए.

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तनीषा सुबक सुबक के रोई जा रही थी, हिचकी तक आने लगी थी, सिसकती हुई वो बेचारी बस राहुल को अपनी बाहो में लिए फुट फुट कर रो रही थी.

राहुल की तोह कुछ समझ में hi नहीं आ रहा था उसको ये जान के ख़ुशी थी की तनीषा दी मिल गयी तोह वही टेंशन ये था की वो रो क्यों रही है. फिलहाल तोह राहुल ने उससे कम्फर्ट देने के लिए जोरर से उसको अपने सीने में समेत लिया. और उसकी बैक को सहलाने लगा.

तनीषा के जिस्म की खुशबू मदहोश कर देने वाली थी. इतना नाज़ुक सा शरीर और इतनी प्यारी सी सूरत पे तोह किसी को भी प्यार आ जाए.

थोड़ी देरर यही रहने के बाद राहुल ने उससे अपने सीने से मुक्त किया...

"दी!! आप यहाँ क्या कर रही हो? और कॉल क्यों नहीं उठा रही थी? पता भी है आपको मेने कितने कॉल किये? पता है आपको में कितना घबरा गया था? आपके घर गया तोह वह टाला... फिर हॉस्पिटल में पूछा तोह पता चला की आप 6 बजे hi निकल चुकी हो, फिर राजू से पूछा तोह वो बताया की आप एक घंटे से घर नहीं आयी हो... आपको पता भी है में कितना डर गया था? हां?? बताइये?? बोलिये कुछ!!" राहुल ने एक सास में सारे सवाल कर दिए, साफ़ पता चल रहा था की वो अपना सय्यम खो चूका था, सिर्फ और सिर्फ तनीषा के लिए.

तनीषा ने एक बार राहुल के चेहरे को निहारा, कितना परेशान था राहुल उसके लिए. और यहाँ वह उसके साथ क्या कर रही थी...

उसने साड़ी बातें को इग्नोर किया और राहुल को भरपूर निहारा, उसके फिरसे ासु चालक आए और राहुल के चेहरे को अपने दोनों कोमल हाथो में लिया, आगे बढ़ी और उसके पूरे चेहरे पे चुम्बन की बरसात कर दी.

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तनीषा राहुल को चूमते जा रही थी.

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फिर जब उसकी सास फूलने लगी तोह वो रुकी और एक बार और उसका चेहरा निहारा और तभी एकदम से......

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आज के लिए इतना hi फ्रेंड्स!!

कीप सपोर्टिंग!! :hi:
 
अपडेट - 21

अब तक...

तनीषा ने एक बार राहुल के चेहरे को निहारा, कितना परेशान था राहुल उसके लिए. और यहाँ वह उसके साथ क्या कर रही थी...

उसने साड़ी बातें को इग्नोर किया और राहुल को भरपूर निहारा, उसके फिरसे ासु चालक आए और राहुल के चेहरे को अपने दोनों कोमल हाथो में लिया, आगे बढ़ी और उसके पूरे चेहरे पे चुम्बन की बरसात कर दी.

तनीषा राहुल को चूमते जा रही थी. फिर जब उसकी सास फूलने लगी तोह वो रुकी और एक बार और उसका चेहरा निहारा और तभी एकदम से......

अब आगे...

तभी एकदम से तनीषा पीछे हट जाती है.

एक कदम, दो कदम...

तनीषा पीछे की और जाती रहती है और उस पेड़ से वापस टकरा जाती है और फिर ृक्क जाती है.

राहुल को कुछ समझ नहीं आया, चिंतित होते हुए सब परख रहा था वह. तनीषा दी पीछे क्यों चली गयी यु? अभी तोह इतना स्नेह जाता रही थी, फिर ये अचानक से क्या हुआ? कुछ गलती हो गयी क्या राहुल से? या अभी भी नाराज़ है?

"दी? आप... आप अभी भी नाराज़ हो क्या मुझसे? दी... उस दिन... उस दिन में अपनी साड़ी बहनो के साथ ज़ू गया था, उधर थोड़ा मन मुटाव हो गया सबके बीच इसलिए फिर में घर चला गया और चेक उप का मुझे ध्यान hi नहीं रहा, एकदम दिमाग से hi निकल गया...

I'm... I'm रियली सॉरी दी... इसलिए में गिफ्ट लाया हु आपके liye...aap...aap रुकिए" राहुल अपनी मजबूरी व्यक्त करते हुए वापस बाइक के पास जाके पैकेट लेके आता है.

और जैसे hi फिरसे तनीषा के पास जाता है तोह तनीषा फिरसे पीछे की और जाने लगती है और उसके चेहरे पे मायूसी झलक रही थी.

तनीषा को एकदम से क्या हो गया? अभी तोह इतना दुलार कर रही थी, फिर अचानक? राहुल की अब कुछ समझ नहीं आ रहा था की इतने में उसने तनीषा दी के गालो पे गौर किया जिनपे आसुओ के निशाँ बनने हुए थे और उससे तुरंत याद आया की तनीषा दी अभी कुछ देरर पहले रो रही थी.

"दी! आप... आप पीछे क्यों जा रही हो? कुछ हुआ है क्या? क्या किसी ने आपके साथ बदतमीज़ी की है क्या? आप बस बताइये मुझे दी... ऐसे मत रुठिये मुझसे प्लीज, देखिए ना... में आपके लिए गिफ्ट भी लाया हु, खोल के बताइये न केसा है, बोलिये न दी कुछ, अब मुझे घबराहट हो रही है दी... प्लीज!!" राहुल ने अपने दिल की धड़कन का हाल बताते हुए कहा.

तनीषा के जो ासु अभी विराम पे थे वो फिरसे लबालब बहने लगे और उसके गालो पे लकीरे बना के नीचे गिरने लगे...

राहुल अब पूरा कन्फ्यूज्ड स्टेट में था. आगे बढ़ता तोह तनीषा पीछे हट रही थी, बात करता तोह वो रोये जा रही थी. अब आखिर करे तोह क्या करे राहुल? एक मिनट...

तनीषा पीछे जा रही है...

कही वो... कही वो खुद राहुल से तोह नहीं डर रही?

राहुल को ये ख़याल आया hi था की उस्सने पूछ hi लिया...

"दी... कही आप?... कही आप मुझसे.... डर तोह नहीं रही न??"

तनीषा के इतना सुन्नते hi उसकी गर्दन ज़ोरो से 'ना' में हिलती है और वो दो कदम तेज़्ज़ी से आगे बढ़ती है पर एक दम से कुछ सोच के वापस पीछे की और धीरे धीरे जाने लगती है.

अब राहुल को बोहत बुरा लग रहा था. उसकी तनीषा दी कुछ बोलने hi तैयार नहीं थी. क्या करता अब वह?

राहुल ने थोड़ा सोच समझ के विचार करने के बाद कहा...

"दी, चलिए यहाँ से, में आपको काम से काम घर तक तोह चोरर दू"

तनीषा बात सुनते hi राहुल की बाइक के पास चली जाती है. राहुल तनीषा को वापस उसके घर के दरवाज़े तक साथ में ले जाता है.

और फिर उसको पैकेट थमाते हुए कहता है...

"दी! आप यदि उस दिन मेरे ना आने से नाराज़ हो तोह I'm रियली सॉरी. में वाक़ई भूल गया था. और इसलिए मेने आपको मनाने के लिए ये गिफ्ट्स लिए... आप यदि चाहती है की में दूर राहु आपसे, तोह ठीक है... mein...mein यहाँ से चला जाता हु. यदि आपको इस से आराम मिलेगा तोह आपके लिए कुछ भी. आप प्लीज ऐसे रौ मत... चलता हु दी. I'm रियली सॉरी वन्स अगेन." राहुल ने अपने रट हुए दिल को सांत्वना देते हुए कहा.

और पलट गया जाने के लिए की इतने में तनीषा ने पीछे से इतनी जोरर से उससे भींचा मानो राहुल की जान hi निकल जाती.

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इतनी जोरर से जकड़ने के कारण राहुल की शर्ट के कल्लोर के नीचे वाली बटन टूट के नीचे गिर गयी. तनीषा राहुल की शर्ट को कस के पकड़ी हुई थी. उसके कोमल दूध राहुल की पीठ से दबे हुए थे. राहुल को उत्तेजना ज़रूर हुई पर उस से भी ज़्यादा उससे अचंभव हुआ.

तनीषा के रोने से उसके हाथ काँप रहे थे और सिसकी के कारण झटके मार रहे थे जो राहुल ने स्वयं अपनी शर्ट में जकड़े हुए हाथो को देख के भाप लिया.

"दी... आप को जाने भी नहीं देना है, और रुकने भी नहीं दे रही हो तोह आप क्या चाहती हो दी?"

राहुल ने आखिर सवाल पूछा.

अब तनीषा की रोने की आवाज़ आने लगी, पहले तोह वो बिन आवाज़ के ासु झाड़ा रही थी पर अब तोह जोरर जोरर से बिलखने की आवाज़ आने लगी. फुट फुट के वह बस रोये जा रही थी और उधर राहुल की शर्ट आगे से निम्बू की तरह निचुड़ गयी थी. वाक़ई... लड़कियों की पकड़ भी बोहत ज़ोरदार होती है, ये आज राहुल को मालुम पद गया.

थोड़ी देरर यही खड़े रहने के बाद जब तनीषा का रोने का स्वर थोड़ा कम् हुआ तोह वो राहुल को पलटा के खींचते हुए उससे अंदर लायी.

दूर को लॉक किया और उसका हाथ अपनी हथेली में थामते हुए कड़ी हो गयी.

"Mein...mein वो शाम को hi हॉस्पिटल से आ गयी थी. फिर, करीब 7 बजे में वो... वो... Wo...apne... p..periods के लिए पद लेने के लिए यही पास के hi मेडिकल स्टोर गयी थी, पर वो आज बंद था. इसलिए फिर में आगे बढ़ गयी... वह से पद लिया तोह... तोह लौट ते वक़्त वह एक शराब की दूकान थी, कुछ मवाली लोग मुझे देख के सीटी बजाने लगे, और कमैंट्स पास करने लगे, में... में घबराती हुई तेज़्ज़ चल के उधर से निकली तोह वो नशे में धीरे धीरे mera...mera पीछा करने lage...darr के मारे... मेने दौड़ लगा dii...aur..aur पद की थैली भी दौड़ते वक़्त कही गिर गयी और... Aur...aur जब तक दौड़ती रही जब तक मुझे थोड़ी भीड़ भाड़ न दिखने लगी, फिर आते आते... वो... वो सुनसान पार्क पड़ा... वह... वह कोई भी नहीं tha...aur वो... डॉग्स लड़ रहे थे... में boht..boht घबरा गयी thi...aur छुप gayi...boht डर लग रहा था... कही उनलोग फिर से आ jaate...ya.. या... डॉग हमला कर देता... कुछ समझ नहीं आ रहा tha..ki mein...mein..."

तनीषा इतना बोलते हुए खूब जोरर से रोने लगती है. शायद अभी उसमे इतना hi बोलने की हिम्मत आयी थी.

जो अब वापस घबराहट के कारण रुलाई में तब्दील हो गयी.

तनीषा पीरियड्स का ज़िक्र करते टाइम झिजक रही थी क्युकी वो राहुल से वार्तालाप कर रही थी इस वक़्त.

यदि कोई और होता तोह तनीषा को इतनी शर्म नहीं आती, आखिर वो भी एक सर्जन थी. एक मेडिकल स्टूडेंट.

राहुल की आँखें भी नाम हो गयी तनीषा को यु रट हुए देख. उसने फौरन तनीषा को अपनी बाहो में भर लिया और उसके पीठ और सर सहलाने लगा.

कितनी इनोसेंट और सेंसिटिव थी उसकी तनीषा दी. शुक्र है की वो राहुल जेसो से मिली, वर्ण क्या होता अगर कोई बुरी नज़र वाले से उसकी दोस्ती हुई होती...!?

डॉग्स से तक्क डर गयी थी वो. बोहत hi कोमल और नाज़ुक थी उसकी प्यारी तनीषा दी, ये आज राहुल को मालुम पद गया था.

"अच्छा दी... वो सब तोह ठीक है पर आप मुझे देख के पीछे क्यों जा रही थी? और कॉल क्यों नहीं पिक किया? कॉल कर देती आप मुझे जब मुसीबत में थी तोह... बोलिये? क्यों नई उठाया कॉल?? यदि आपको कुछ हो जाता तोह? क्या करता फिर में?? हां? बोलिये??"

राहुल ने उससे बाहो में hi भरे हुए सवाल किया.

"Wo...wo...mera फ़ोन घर पे hi रह गया था राहुल. तुम देख hi सकते हो... में खाली हाथ hu...sirf...sirf थोड़ा सा कॅश लेके गयी थी. पैड्स लेने के लिए."

तनीषा ने मजबूरी व्यक्त की...

जहा तनीषा को लगा की उसने अब मामला संभाल लिया है. वही राहुल तनीषा के इस जवाब से नाखुश था. क्यों? अब राहुल क्यों खुश नहीं है? तनीषा ने अपनी बात बता तोह दी, की वो फ़ोन भूल गयी थी. जो की वाक़ई सच था. फिर राहुल क्यों नाखुश था?

राहुल के चेहरे पे निराशा साफ़ साफ़ झलक रही थी. शायद उससे तनीषा से ऐसे जवाब की उम्मीद नहीं थी.

"अच्छाआ.... हम्म्म...

बूत तनीषा दी, आपने अभी तक ये नहीं बताया की आप मुझे इतना प्यार करने के बाद अचानक यु पीछे क्यों चली गयी, में जितना आगे आता आप उतना hi पीछे को जाती. एंड फॉर योर काइंड इनफार्मेशन दी...

आप 7 बजे फ़ोन भूल के निकली थी न? मेने आपको पहले भी कई दफा कॉल किया पर आपने मेरा एक भी कॉल पिक नहीं किया. अब ये मत कहना की आप फ़ोन हॉस्पिटल में भी भूल गयी थी और फिर रास्ते में भी... और कोई झूठ बोलना है तोह बोल दीजिये अभी दी"

राहुल ने अपनी नाराज़गी का कारण बताते हुए कहा...

अच्छा तोह इसलिए राहुल नाराज़ था.

बात तोह सही थी वैसे. तनीषा क्या करना चाह रही थी? ये केसा गेम खेल रही थी? क्या कारण था उसका ऐसा करने के पीछे? सवाल तोह कई उत्पन्न होते hi रहेंगे... फिलहाल हम आगे बढ़ते है.

राहुल जानता था की सच तनीषा दी ने नहीं बताया. तनीषा को भी पता चल गया की राहुल ने सब भाप लिया है और अब झूठ नहीं बोल सकती.

एक बार फिर उसकी आँखों से ासु निकलने लगते है और बस राहुल के चेहरे को देख रही थी. इधर राहुल ऐसे खड़ा था जैसे उससे बोहत बुरा लगा है और हर्ट है काफी इसलिए उसके चेहरे के एक्सप्रेशंस नहीं बदले बस वो लगातार तनीषा को hi देख रहा था.

"अब ये.. ये मत पूछो राहुल... ये मत पूछो..." तनीषा ने अपना सर राहुल के सीने में रखते हुए कहा.

राहुल का मुंडा अब सनक चूका था. एक तोह कल वैसे hi नेहा अंशिका के कारण भड़की हुई थी, और फिर उसके हाथ में लगी चोट, और शाम में ऋचा के घर अलग बहक गया था वो, फिर तनीषा को मनाने का टेंशन, फिर उससे ढूंढ़ने की टेंशन, और जब मिल गयी तोह रोये जा रही है और कुछ बता भी नहीं रही ऊपर से बोल रही है की मत पूछो. चिढ चिड़ापन आने लगा था अब राहुल में.

पर तनीषा उम्र में राहुल से 4 साल बड़ी थी, इसलिए राहुल ने उसका लिहाज रखते हुए उस से कुछ नहीं कहा और उसका सर और उसको अपने सीने से थोड़ा फाॅर्स से हटा के वापस दरवाज़े की तरफ जाने लगा.

अब जब तनीषा बताने hi तैयार नहीं है तोह भला राहुल यहाँ ृक्क के पुंगी बजाएगा क्या??

इतनी बार माफ़ी भी मांग ली, प्यार से भी पूछा. एक सीमा होती है हर्र आदमी की, और राहुल शायद आज बोहत फ़्रस्ट्रेटेड हो चूका था. और फ़्रस्ट्रेशन ने उस सीमा को पार कर लिया था. तनीषा दी अब सेफ थी और अपने घर पर थी. बस यही बात उसको सुनिश्चित करनी थी जो की हो गयी.

अब वो जल्द से जल्द अपना दिमाग अभी ठंडा करना चाहता था.

राहुल दूर को खोलने hi वाला था की तनीषा दौड़ के उसके पास आयी और उसके सीने से फिरसे लिपट गयी रट हुए.




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"प्लीज!! Please...mujhe माफ़ कार्डो राहुल... राहुल... प्लीज...

Tum...mat जाओ..."

र : जब आपको कुछ कहना hi नहीं है दी तोह क्या करू? पता भी है आपको में कितना टेंशन में था? दिल बाहर आ गया था आपको लापता पा के... कुछ यदि आपको हो जाता तोह खुद को माफ़ नहीं कर पाटा. अब आप अपने घर पर हो, सुरक्षित. घर पर मेरा सभी लोग वेट कर रहे होंगे डिनर के लिए. चलता हु.

फिरसे राहुल उससे हटाने की कोशिश करता है पर तनीषा तोह जैसे हट hi नहीं रही थी.

"नाराज़ हो न मुझसे? की में कुछ नहीं बता रही... कुछ छिपा रही हु... है न? यही लगता है न? Kyuki...kyuki में दरर्ति हु...

दरर्ति हु की यदि तुमसे कहा तोह पता नहीं आगे क्या होगा... अभी यु तुम्हे बाहो में ली हुई हु, क्या पता अगले पल तुम्हे बाहो में लेने के लिए तरस जाऊ ज़िन्दगी भर, क्या पता तुम्हे दुबारा देख भी पाउ या नहीं? इसलिए.. इसलिए प्लीज मुझसे मत पूछो..."

तनीषा ने राहुल को जकड़े हुए कहा.

राहुल को पता था ये बताने वाली तोह है नहीं तोह फ़िज़ूल की फ़ालतू बातें में क्यों समय व्यर्थ कर रही है. अभी राहुल बोहत ज़्यादा फ़्रस्ट्रेटेड था इसलिए उसने ज़्यादा तनीषा की बातो को गौर नहीं किया और वो सीधा निकलना चाहता था इधर से. मैं को शान्ति देनी थी उसको थोड़ी देरर के लिए.

इसलिए उसने एक बार और फाॅर्स से तनीषा को बिना कुछ कहे हटाने का प्रयत्न किया और हाथ हटा दिया और आगे बढ़ा गेट की तरफ.

की फिरसे तनीषा ने उससे पकड़ लिया और गेट के सामने अपने हाथ खोल के कड़ी हो गयी. जैसे राहुल को जाने से रोक रही हो...

तनीषा ने रट रट कहा...

"तुम्हे सुन्न न है न सच? सुन्न न है न?? तुम वैसे भी नहीं मानोगे है न? परेशान करने में मज़ा आता है न तुम्हे अपनी तनीषा को?? तोह सुनो..."

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आज के लिए इतना hi फ्रेंड्स.

थोड़ी व्यस्तता रहेगी अभी...

क्युकी त्यौहार का समय है.

तोह अगले कुछ उपदटेस यदि लेट हो जाए तोह मंद मत करना. :बुढऊ:
 
अपडेट-22

अब तक...

मैं को शान्ति देनी थी उसको थोड़ी देरर के लिए.

इसलिए उसने एक बार और फाॅर्स से तनीषा को बिना कुछ कहे हटाने का प्रयत्न किया और हाथ हटा दिया और आगे बढ़ा गेट की तरफ.

की फिरसे तनीषा ने उससे पकड़ लिया और गेट के सामने अपने हाथ खोल के कड़ी हो गयी. जैसे राहुल को जाने से रोक रही हो...

तनीषा ने रट रट कहा...

"तुम्हे सुन्न न है न सच? सुन्न न है न?? तुम वैसे भी नहीं मानोगे है न? परेशान करने में मज़ा आता है न तुम्हे अपनी तनीषा को?? तोह सुनो..."

अब आगे...

इस बार राहुल के कदम वही थम गए. उसने इस बार तनीषा की बात को गौर किया और उसकी आँखों में झाँकने लगा सच जान ने के लिए.

उसका ध्यान चाँद सेकंड के लिए अतीत पे चला गया तनीषा का रोटा हुआ चेहरा देख के, वो पल, वो लम्हा, वो मंज़र जब वो तनीषा से पहली बार मिला था. उस एक दिन क्या कुछ नहीं हुआ था राहुल की ज़िन्दगी में और अंत में उसकी तनीषा से मुलाक़ात हुई...

फ्लैशबैक...

बात तब की है जब राहुल 11तह स्टैण्डर्ड में था, यानी आज से लगभग 5 साल पहले...

रात का समय था, करीब 11 बज रहे थे. हलकी हलकी ठंडी हवाई चल रही थी. शांत माहौल...

स्ट्रीट लाइट्स...

रास्ते पे चलती थोड़ी बोहत गाड़िया...

पेड़ की पत्तियों की हिलने की हरकत...

चाँद की मद्धम रौशनी...

हसीं नज़ारा था.

"हां हां हां... है... हां" हफ्ते हुए एक लड़का धीरे धीरे अपने शरीर को पूरी ताकत से आगे चलने के लिए मजबूर कर रहा था. माथे से खून बह रहा था.

शर्ट पे खून के धब्बे...

गालो पे खरोंचे...

हथेलियों में खून...

अस्त व्यस्त हालत में वो बस आगे अभीष्ट आहिस्ता बढ़ा जा रहा था.

"Haah..haah.." हाफना बंद नहीं हो रहा था...

रास्ते में आगे एक पतला सा टर्न aaya...shayad वह एक गली थी...

लड़का चलता जा रहा था और अचानक मोड़ में मुद गया...

"ोुछः...."

की तभी वो किसी चीज़ से टकराया..

टकराने से लड़का नीचे गिर गया, पर साथ में hi कोई और भी गिरा.

ये कोई चीज़ नहीं थी...

ये तोह कोई शख्स था...

और वो भी एक लड़की ऊपर से...

लड़के ने गिरने के बाद उससे देखा तब पता चला उससे.

वो मुड़ने के बाद उस से टकरा गया था और बेचारी लड़की भी गिर गयी टकराने से. लड़के ने पहले तोह सिर्फ यही गौर किया की सामने जिस से वह टकराया वो एक लड़की है पर जब उसने ध्यान से देखा तोह पाया की वो एक बेहद hi ख़ूबसूरत लड़की थी.

लम्बे खुले काले बाल, पतला स्लिम शरीर, मस्तानी कमर, काली कजरिया नशीली आँखें, गुलाबी होठ जिनको अभी वो दातो टेल दबाई हुई थी शायद टकराने से हल्का दर्द हुआ...

लड़का उसको देख रहा था बस, क्या सौंदर्य था.

मैं hi मैं तारीफों के पल बाँध रहा था वह.

इधर लड़की ने जब लड़के को देखा तोह एकदम स्तब्ध रह गयी. क्यों न होएगी? खून से सना हुआ था वो.

"ये... ये खून?? ये खून कैसे? क्या हुआ तुम्हे??" चिंतित स्वर में लड़की ने कहा...

चिंतित आवाज़ में भी कितनी मधुर थी उसकी आवाज़. लड़के की तन्द्रा भांग हुई और उसने बदले में जवाब दिया...

"हँ!? Ji...jii..wohh..wo.. वो थोड़ी मार पीट में..."

उसके ऐसे जवाब से लड़की थोड़ी झिझकी. क्युकी रात का समय था, आस पास ज़्यादा लोग भी नहीं थे. ऊपर से खून से सना लड़का और मार पीट का केस...

"Ye...ye दिखने में तोह शरीफ लग रहा है, कपडे भी अच्छे है इसके पर खून से साणे है, यदि ये सभ्य लड़का है तोह मार पीट कैसे???... क्या मुझे मदद करनी चाहिए!? या निकल लू यहाँ से? कही इसने मेरे साथ छेद चाँद की तोह? पर ये ज़ख़्मी भी है और उम्र में छोटा लग रहा है... एक ज़ख़्मी की मदद करना कोई गलत बात नहीं है, ी थिंक मुझे मदद करनी चाहिए." लड़की ने सोचा.

"Tumko...tumko तोह बोहत चोट आयी है, तुम चलो मेरे साथ इधर पे आओ" लड़की ने पास में hi एक बेंच की तरफ मुँह करके इशारा करके कहा.

बिना कुछ कहे लड़का वह से उठने के लिए हुआ तोह लड़की पास में आयी उसकी बाज़ू को पकड़ के खड़ा किया.

क्या खुस्भु थी...

जो उसके शरीर और खुले बालो से आ रही थी.

नरम हाथो का कोमल स्पर्श.

लड़का मंत्रमुग्ध सा खींचा चला गया बस.

बेंच पे लड़के को बैठा के लड़की ने अपना बैकपैक खोला जो वह पीछे टांगी हुई थी बड़ा सा.

उसमे से उसने एक फर्स्ट अिध किट निकाली, किट से सवलों और कॉटन निकला.

कॉटन और सवलों की सहायता से वो उसका खून साफ़ करने लगी. हाथो में फिर गालो पे और फिर माथे में करने के लिए वो उसके एकदम करीब हो गयी. लड़की की सासे लड़के के चेहरे पे पड़ रही थी. उसकी गरम सासें लड़के को जला रही थी. पिघला के रख दिया था उस गर्माहट ने उस के दिल को.

यहाँ वो ज़ख्म पे ध्यान दे रही थी तोह वही लड़का ज़ख्म भूल के उसके चेहरे को करीब से निहार रहा था. अब लड़के के चेहरे पे लाली आने लगी थी. लड़की की सुंदरता ने उससे शर्माने पे मजबूर जो कर दिया था.

फिर अंत में उसने पत्तिया बाँधी और किट वापस बैकपैक में रख ली. ज़ख्म गहरे नहीं थे बस कई कई जगह थे जिसके कारण खून निकला और शर्ट भी सन्न गयी खून से.

"ये लो... मेने फर्स्ट अिध कर दी है" लड़की ने उसके बगल से बैठते हुए कहा.

"जी बोहत बोहत शुक्रिया... और सॉरी, wo..wo में बिना देखे एकदम से मुद गया." लड़के ने कहा.

"Ni...galti मेरी भी थी. में तोह ज़ख़्मी भी नहीं हु फिर भी ध्यान नहीं दिया. वैसे... तुम ये मार पीट में कैसे? दिखने में तोह शरीफ घर के लगते हो..." लड़की बोली.

"Jii...jii.. वह.. लम्बी कहानी है मिस"

"ओह्ह्ह!! बुरा न मानो तोह क्या बता सकते हो? यदि बताने लायक हो तोह?"

फिर लड़का उससे कुछ घंटे के पहले की वारदात अपनी ज़ुबानी में बताता है.

"ओह्ह माय गॉड!! Ye...ye तोह बोहत hi पेचीदा मामला है. पर तुमने पूरी बात नहीं बताई. और.. वैसे तुम्हारा नाम? " लड़की ने कहा.

"Jii..mein.. में राहुल.. राहुल मिश्रा और आप?" राहुल ने जवाब दिया.

"में तनीषा... तनीषा वर्मा"

र : नीस नाम...

टी : तोह!?? देखने में तोह तुम हिघ्स्चूल के लगते हो.

र : जी हं.. अभी 11तह में आया हु. आप यहाँ इतनी रात को? खो तोह नहीं गयी न?

टी : अभी अभी तोह इस शहर में आयी हु, बस जहा रास्ता दिख रहा है बढ़ती जा रही हु.

तनीषा की इस बात ने राहुल को चौंका दिया.

र : ky..kya मतलब?

टी : मतलब की में इस शहर में नयी हु, मुझे कोई रास्ता नहीं पता.

र : अरे तोह ऐसे रात को क्यों भटक रही हो? ी मैं... आपका घर कहा है? आप यहाँ किस लिए आयी हो?

टी (धीमी आवाज़ में ) : वो घर अब मेरा कहा है?

र : हँ!? आप.. आपने कुछ कहा?

टी : हँ? न न.. कुछ नहीं. मेरा कोई ठिकाना नहीं है. बस चलती जा रही हु.

र : ये आप क्या बोल रही हो? ी मैं आपके माँ डैड? आपका परिवार किधर है? और यहाँ आप आयी हो तोह कोई रीज़न तोह होगा hi...

टी : मेरे जो है भी.. वो मुझे अपना नहीं मानते. यहाँ आने का मेरा कोई रीज़न नहीं है. यहाँ पे मेरा कोई नहीं है. बस में अकेली हु...

ट्रैन यहाँ रुकी तोह बस मैं किया और उतर गयी इस शहर में.

बोलते बोलते उसकी आँखे नाम हो गयी.

राहुल फिरसे चौंका. एक बेहद खूबसूरत लड़की, अकेली एक नए अनजान शहर में इतनी रात में चली जा रही थी. क्या मजबूरी हो सकती है उसकी?

र : सबसे पहले तोह में एक बार और सॉरी बोलता हु की आपसे टकरा गया. पर टकराने से आप से मुलाक़ात हुई उस बात की ख़ुशी भी है. आप एक बोहत hi ख़ूबसूरत और मेहरबान लड़की हो. और शायद आप किसी वजह से अपनी मजबूरी नहीं बता पा रही है या बताना नहीं चाहती. शायद कोई बड़ी बात है, मुझे पता है... में समझता हु... कोई बात नहीं, पर अभी में जो कहूंगा वो आप प्लीज करियेगा...

टी : हँ!?

तनीषा को एक बार डर सा लगता है. क्या करने बोल रहा था राहुल?

र : पहले मुझे खुद को अच्छे से इंट्रोडस कराने दीजिये. में राहुल मिश्रा हु, 11तह स्टैण्डर्ड में हु. मेरे घर में माँ डैड और मेरी एक बहिन नेहा है. डैड बैंक में गोवत. जॉब पे है और माँ एक हाउसवाइफ है. मेरी बहिन अभी 8तह स्टैण्डर्ड में गयी है. ये था मेरा इंट्रो, ये देना इसलिए ज़रूरी था ताकि आप मुझे कोई एरा गेरा न समझे और आप निश्चिन्त रहे. में एक सभ्य मिडिल क्लास फॅमिली को बिलोंग करता हु. अब जहा तक मुझे पता है आपके पास कोई ठिकाना नहीं है और आपने मेरी इतनी मदद की तोह अब ज़रा मुझे भी आपकी खिदमत करने का मौक़ा दीजिये.

टी : ma..matlab?

राहुल ने स्माइल किया और फ़ोन निकाल के किसी को कॉल किया और फिर कॉल कट करने के बाद उसने तनीषा का हाथ पकड़ के उठाया और चलने को कहा.

टी : ka..kaha ले जा रहे हो मुझे? देखो... कोई गलत काम तोह नहीं कर रहे न? मेने तुम्हारी मदद की है देखो...

तनीषा घबरा गयी थी. कोई भी लड़की होती तोह शायद वो भी घबरा जाती.

राहुल के बारे में वो अभी जानती hi क्या थी? बस थोड़ी सी बातें...

र : घबराइए मत तनीषा जी. मेरे पहचान का एक मित्र है, उसका फ्लैट है यही पास में hi, फुल फर्निश्ड है. आप आज से वही ठहरेंगी.

बिलकुल दररने की ज़रुरत नहीं है. आप मुझपर ट्रस्ट कीजिये. आपने मुझपर एहसान किया, प्लीज मुझे उससे चुकाने दीजिये.

पैसो की चिंता मत कीजिये. जब तक में नहीं कहता वो आपसे पैसा नहीं लेगा. जब तक आप के ठिकाने का इंतज़ाम नहीं हो जाता आप वह ठहर सकती हो. फ्लैट में और कोई नहीं रहता है. आप निश्चिन्त रहिये. ऐसे रात को घूमना खतरे से खाली नहीं है.

राहुल की बातें सुन्न के तनीषा अचंभित सी कड़ी थी. उससे समझ नहीं आ रहा था की राहुल सच में अच्छा इंसान है या मीठी मीठी बातें करके उससे फसा रहा है!?

पर उसका दिल कह रहा था की राहुल एक सच्चा इंसान है. धीरे धीरे वो राहुल के साथ फ्लैट की तरफ बढ़ी. इस दौरान राहुल बोहत बातें कर रहा था ताकि तनीषा का मैं बेहाल सके, जबकि तनीषा सिर्फ हं हु में hi जवाब दे रही थी. शायद अभी भी उसके अंदर डर था. पर वो बैग में पीपर स्प्रे वगैरह सब राखी हुई थी इसलिए वो राहुल के साथ चल दी, यदि कुछ हुआ भी तोह स्प्रे उसको बचा लेगा ये सोच के.

थोड़ी देरर में सोसाइटी आ गयी, जहा हलकी फुलकी चहल पहल थी, रात के समय लोग खाना पीना खा के टहलने निकलते थे, ये नज़ारा देख तनीषा को थोड़ा रिलैक्स फील हुआ...

लिफ्ट लगी हुई थी जिसकी मदद से वो दोनों सेकंड फ्लोर पे गए, और वह एक दूर के सामने खड़े हो गए जो लॉक्ड था.

"बस मिस... मेरा फ्रेंड आता hi होगा" राहुल बोलै.

थोड़ी देरर में उसका फ्रेंड आया और फ्लैट का ताला खोल पूरा फ्लैट दिखाया जहा सब कुछ था. पूरा फर्निश्ड फ्लैट था वो. तनीषा को देख के यकीन hi नई हो रहा था की वो यहाँ रुकेगी और उससे कोई पैसे भी नहीं देने पड़ेंगे.

"ये लो राहुल भाई फ्लैट की के. मैडम को जबतक रुकना है ृक्क सकती है, में जब तक आप नहीं कहेंगे कोई चार्ज नहीं लूंगा इनसे. और इनकी सेफ्टी की चिंता मत कीजिये आप, ये सोसाइटी बोहत अच्छी है, नीचे गार्ड्स भी है, और पड़ोस में भी लोग है hi..." राहुल के फ्रेंड ने कहा.

"मिस! इस से मिलिए... ये है यश, ये फ्लैट इसी का है, ी मैं इनके पापा का है, वही बात है.

और यश इनसे मिलो, ये है मिस तनीषा वर्मा, मेरी मुलाक़ात इनसे अभी हुई है, और इन्होने मेरी बोहत मदद की है, इसलिए आज से ये यही पे रुकेंगी." राहुल ने दोनों को एक दूसरे से इंट्रोडस कराते हुआ कहा.

तनीषा भी बदले में hello बोलती है और फिर यश के देके चला जाता है.

र : "हां तोह मिस! आपके पास क्या क्या सामान है? यदि कुछ अभी चाहिए हो तोह बता दीजिये में ले आऊंगा"

तनीषा को अभी भी यकीन नहीं हो रहा था की इतना अच्छा फ्लैट उससे ऐसे hi मिल गया रहने के लिए. कही इसके पीछे कोई झोल तोह नहीं था न? उसको अभी भी शंका थी कही न कही की बाद में कुछ लफड़ा न हो...

टी : नहीं... मेरे पास सारा ज़रूरी सामान है.

तनीषा ने अपना बैकपैक निकाला और उसमे से सारा सामान बाहर कर दिया...

र : ये... ये डाक्यूमेंट्स कैसे?

टी : ये मेरे सर्टिफिकेट्स और ग्रेजुएशन रिपोर्ट कार्ड्स वगैरह है.

तनीषा मेडिकल की पढाई कर रही थी. राहुल ने डाक्यूमेंट्स देख के पता कर लिया था.

र (चौंकते हुए) : ek...ek मिनट... आप kahi..kahi घर से भाग के तोह नहीं आयी न?

टी : ना...

राहुल ने फिर ज़्यादा कुछ पूछना मुनासिब नहीं समझा.

र : ohh..ohkk अच्छा ये लीजिये... ये मेरी फर्स्ट अिध करने की फीस.

राहुल ने 500 का एक नोट निकाल के तनीषा को दिया.

तनीषा स्तब्ध सी कभी राहुल को तोह कभी नोट को देख रही थी.

टी : तुम पागल हो क्या? मेने तुम्हारी फर्स्ट अिध की और बदले में तुमने मुझे इतना बड़ा फ्लैट दिया मुझे रुकने के लिए, और अब पैसे भी दे रहे हो?

र : मिस देखिये! फर्स्ट अिध में हॉस्पिटल में भी करवाता तोह वो लोग पैसे लेते hi इसलिए प्लीज ये रख लीजिये.

टी : अच्छा? और में ये फ्लैट रेंट पे लेती तोह वह भी मुझसे पैसे लेते hi .... समझे?

र : ः... अच्छा बुरा मत मानियेगा.. पर क्या में आपको तनीषा दी कह के पुकार सकता हु?

तनीषा ने जैसे hi राहुल के मुँह से दी सुना उसकी आँखों में ासु आ गए. बड़ी बड़ी आँखों से वो राहुल को देख रही थी. और ासु बहे जा रहे थे. अचानक क्या हुआ? तनीषा रोने क्यों लगी? क्या बात है? और यहाँ अकेले क्या कर रही है?

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थैंक्स गाइस! आज के लिए इतना hi...

कीप सपोर्टिंग!

दो कमेंट योर व्यूज!!

और सभी को हैप्पी एंड सेफ दिवाली गाइस!

एन्जॉय कीजिये खूब...


:hi:
 
अपडेट-23

अब तक...

टी : अच्छा? और में ये फ्लैट रेंट पे लेती तोह वह भी मुझसे पैसे लेते hi .... समझे?

र : ः... अच्छा बुरा मत मानियेगा.. पर क्या में आपको तनीषा दी कह के पुकार सकता हु?

तनीषा ने जैसे hi राहुल के मुँह से दी सुना उसकी आँखों में ासु आ गए. बड़ी बड़ी आँखों से वो राहुल को देख रही थी. और ासु बहे जा रहे थे. अचानक क्या हुआ? तनीषा रोने क्यों लगी? क्या बात है?

अब आगे...

राहुल ने तनीषा को रोटा देख तुरंत पूछ लिया...

"Arre...aap, आप रो क्यों रही है? मेने कुछ गलत कह दिया क्या?"

तनीषा फौरन अपने ासु पॉच 'ना' में गर्दन हिला देती है.

टी : नहीं राहुल! तुमने कुछ भी गलत नहीं कहा. तुम मुझे दी कहके बुला सकते हो.

र ( स्माइल करते हुए) : अच्छा तोह ठीक है दी, अब में चलता हु, रात को किसी भी चीज़ की ज़रुरत हो तोह ये लीजिये मेरा नंबर, बस कॉल कर देना...

टी : पर मेरे पास फ़ोन नहीं है.

र : व्हॉट?? तोह आप बिना फ़ोन के..??

टी : हां, वो... वो... कुछ नहीं.

मेरे पास फ़ोन नहीं है बस. अब प्लीज और सवाल मत करना.

र : हम्म... ठीक है दी. कोई बात नहीं. में आपके फ़ोन का जुगाड़ कल कर दूंगा. अब चलता हु. लॉक कर लीजियेगा अच्छे से...

राहुल इतना कह कर पलट के जाने लगता है, और तनीषा बस नाम आँखों से उसको देखती रहती है और पल भर में राहुल उसकी आँखों के सामने से ओझल हो जाता है.

बहुत सी बाते थी जो तनीषा अभी राहुल से करना चाह रही थी पर शायद ये सही वक़्त नहीं था उसके हिसाब से.

आज hi तोह वो एक दूसरे से मिले है, पूरा भरोसा करना तनीषा को सही नहीं लगा. शायद उसके मैं में कही न कही डाउट था अभी भी.

ऐसे hi 1 महीना बीत गया. राहुल ने तनीषा के लिए फ़ोन का प्रबंध किया, और बाकी खर्चो का भी ध्यान रखा. तनीषा ने भी राहुल का नंबर सेव कर लिया था अपने फ़ोन में. और अब दोनों के रिलेशन की गाँठ मज़बूत हो गयी थी.

अब तनीषा से रुका नहीं जा रहा था. राहुल ने उसके लिए इतना किया और अपने परिवार के बारे में भी बोहत कुछ बता दिया पर तनीषा ने बदले में राहुल को पूरी सच्चाई नहीं बताई थी. क्या उससे बताना चाहिए? राहुल एक अच्छा, सभ्य लड़का था ये तोह तनीषा को कन्फर्म हो गया था.

"क्या करू? बता दू? कही कुछ गलत हुआ तोह? पर अब और क्या गलत हो सकता है? हां, मुझे बता देना चाहिए, बेचारे ने मेरी इतनी मदद की और में उससे अँधेरे में राखी हुई हु..." तनीषा अपने घर पर सोचते हुए राहुल को कॉल करती है...

र (कॉल पिक करता है) : hello!?

टी : hello!? हां राहुल...

र : हां तनीषा दी कहिये...

टी : राहुल, तुम जल्दी यहाँ आ जाओ...

र (टेंशन में) : क्यों दी? कुछ हुआ है क्या? क्या बात है?

टी : तुम्हे कुछ बताना है, प्लीज जल्दी आ जाओ, मुझे तुमसे इम्पोर्टेन्ट बात करनी है.

र : ok दी. I'm ों माय वे...

राहुल कॉल कट करके सीधा तनीषा के फ्लैट पोहचता है, तनीषा उससे अंदर बैठा देती है और चाय पानी सर्वे करने के बाद उसके बगल में बैठ जाती है.

"कहिये दी क्या बात है? अब तोह चाय भी हो गयी .." राहुल ने कहा.

तनीषा एक गहरी सांस लेती है और फिर बोलना स्टार्ट करती है...

"राहुल, सबसे पहले तोह I'm सॉरी. जिस रात हम मिले थे मेने तुम्हे कुछ बातें नहीं बताई थी, शायद मेरे अंदर तब थोड़ा संदेह था, पर आज हमे एक दुसरे को जाने महीना भर से ज़्यादा हो गया है, और मुझे तुम्हारी ऊपर पूरा यकीन हो गया है राहुल.

इसलिए... अब में तुम्हे सब कुछ बता देना चाहती हु...

तोह सुनो...

में इस शहर को बिलोंग नहीं करती, में मुंबई से बिलोंग करती हु. मेरे घर में मेरे पापा - अशोक वर्मा, मेरी माँ - रूपा वर्मा, फिर में और मेरा एक छोटा भाई भी था, 4 साल छोटा - तरुण वर्मा.

बात अभी रिसेंटली की है, मेरे पिता जी गोवत स्कूल में अध्यापक है, उनकी पेमेंट के हिसाब से हम एक मिडिल क्लास ज़िन्दगी जी रहे थे पर मुंबई जैसे शहर में मिडिल क्लास की क्या औकात? बस यु कह सकती हु की हमारी ज़िन्दगी काट रही थी.

घर पर पिता जी बस कमाने वाले थे, में डॉक्टर बन न चाहती थी इसलिए मेडिकल चुना. पर पिता जी इतना खर्चा नहीं उठाना चाहते थे, वो अपने बेटे को ज़्यादा अच्छे से पढ़ना चाहते थे क्युकी आगे वही उनको संभालता. उनका मान न था की मेरी तोह शादी हो जाएगी फिर डॉक्टर की पढाई पे खर्चा क्यों करना इतना? पर मेरा सपना था डॉक्टर बन न...

इसलिए माँ ने मुझे मेडिकल की पढाई करने दी और पिता जी को मन लिया. पर पापा इस बात के बाद से हमेशा मुझसे खफा रहते थे और सीधे मुँह बात hi नहीं करते थे. मेने भी ठान ली की जिस दिन डॉक्टर बन जाउंगी पापा खुद मेरी तरफ सर उठा के देखेंगे.

मेरा मेडिकल कॉलेज में एडमिशन भी हो गया और मेने 2 साल मब्ब्स की जमके पढाई भी करि, अच्छे सर्टिफिकेट्स भी मिले.

फिर एक दिन... में और मेरा भाई तरुण एक फंक्शन से लौट रहे थे.

पिता जी की बाइक पे हम दोनों सवार थे. उस वक़्त उसने बाइक चलाना नया नया सीखा था, तोह हम काफी स्पीड में थे. मुझे भी रफ़्तार पसंद थी. इसलिए में भी एन्जॉय कर रही थी और तरुण से और तेज़्ज़ चलने के लिए कहने लगी.

पर ये शायद मेरी सबसे बड़ी गलती थी, जिसने सब कुछ बर्बाद कर के रख दिया. अचानक उसने अपना हेलमेट निकला और मुझे तुरंत पहन ने के लिए कहा. मेने उसकी बात मान ली पर तभी उसने कहा 'दी! आप बोहत अच्छी हो, में आपको बहुत चाहता हु दी. यदि में किसी दिन न रहा, तोह वादा करिये की आप डॉक्टर बन्न के दिखाएंगी और डैड को भी मन लेंगी...'

मुझे उसकी बाते कुछ समझ नहीं आयी पर अगले hi पल उसने मुझे गाडी से धक्का दे दिया जिस के कारण में उलट पुलट होक गिरती हुई बेहोश हो गयी.

जब मेरी आँख खुली तोह में हॉस्पिटल में थी.





पूरा शरीर दर्द कर रहा था. थोड़े बोहत ज़ख्म थे बॉडी पे. मुझे रिकवर होने में लगभग 3 हफ्ते लग गए.

में रोज़ पूछती की तरुण कहा है तोह लोग बस यही बोलते की वह आराम कर रहा है. पर असल बात तोह कुछ और hi थी. जब घर लौट के आयी माँ डैड के साथ तोह उनसे पूछा की तरुण कहा है? तोह माँ अचानक मेरे सीने से लग के रोने लगी और उन्होंने चुप्पी तोड़ते हुए कह hi दिया 'तेरा भाई अब इस दुनिया में नहीं रहा'

स्तब्ध सी में वही जम्म गयी. शरीर में कम्पन होने लगा था. ऐसा सदमा शायद मुझे पहले कभी नहीं लगा था. और फुट फुट कर में पागलो की तरह रोने लगी...

'मेरी गलती है सब... सब मेरी गलती है... अब समझ आया मुझे... मेने hi उससे गाडी तेज़्ज़ चलाने को कहा था... गाडी के ब्रेक्स पक्का फ़ैल हो गए थे... इसलिए तरुण ने मुझे हेलमेट दे दिया और मुझे गाडी से धकेल दिया... और उसकी गाडी जाके भीड़ गयी... उसने मुझे बचाया माँ डैड... मुझे बचाने के लिए...

और आपने... आपने... मुझे उससे देखने तक नहीं दिया? क्यों छिपाया मुझसे सच? मुझे उससे देखना था....' में साड़ी बात कहके रोने लगी पर जैसे hi मेने ये सब कहा...

तोह पापा को एक झटका सा लगा, वो मेरे करीब आए और मुझे ज़ोर से एक झापड़ मारा...

'तेरे कारण... तेरे कारण hi मेरा बीटा आज इस दुनिया से चला गया.

तूने hi उससे मरवाया है... निकल जा... में कहता हु निकल जा इस घर से... क्या डॉक्टर बनेगी तू? बचा पायी अपने भाई को? खुद तोह डाली रही वही अस्पताल में... तेरी करतूतों की वजह से आज मेने अपना चिराग खो दिया, निकल जा तू... ' वो मुझे मारते रहे और मेरी माँ उनको समझाती रही.

पर मुझे भी लगने लगा था की में hi अपने भाई की मौत की कसूरवार हु. मुझे भी अब इस दुनिया से चले जाना चाहिए. यही सोच के में अपने कमरे में आ गयी और सुसाइड की तैयारी करने लगी.

पर तुरंत hi मेरे कानो में वो बात फिर से गूंज गयी ...

'वादा करिये की आप डॉक्टर बन्न के दिखाएंगी और डैड को भी मन लेंगी'

मेरे भाई की आखिरी कही बात.

उसकी ख्वाहिश थी.

कैसे सुसाइड करती?

मेने रात में hi साड़ी तैयारी की और निकल आयी अपनी घर से.

फिर उस रात इस शहर में आयी और तुमसे मुलाक़ात हुई. सच कहती हु राहुल तुम मेरे लिए फ़रिश्ते से काम नहीं हो. फिर जब तुमने पहले दिन मुझे दी कह के पुकारा तोह मुझे तरुण की याद आ गयी. और मेरी आँखों नाम हो गयी थी.

आज तुम्हे ये सब बताना बोहत ज़रूरी था. क्युकी जब भी तुम्हे देखती हु मुझे तरुण की याद आ जाती है. मेरा सपना है सर्जन बन ने का. जो सर्जन मेरे भाई को न बचा सके, इसलिए में खुद एक होनहार सर्जन बनना चाहती हु ताकि में ऐसे hi कई लोगो की जान बचा सकू. बस यही है मेरी दास्ताँ..."

राहुल सिर्फ ज़मीन में नज़रे गड़ाए बातो को ध्यान से सुन्न रहा था.

जब तनीषा की बात ख़तम हुई तोह उसने तनीषा को देखा तोह पाया की पूरा चेहरा आसुओ से भरा था.

ऐसी दिल दहला देने वाली आपबीती राहुल ने पहली बार सुनी थी.

कितनी मज़बूत थी उसकी तनीषा दी अंदर से. सब कुछ खो देने के बाद भी उसने हार नहीं मानी थी. और अभी भी लड़ने के लिए तैयार थी.

राहुल ने कुछ पल उसके चेहरे को देखा, आसुओ को पोछा और तुरंत अपने गले से लगा लिया.

आज पहली बार दोनों ने एक दूसरे को गले लगाया था.





दोनों के अंदर का रोम रोम खिल उठा. दोनों ऐसे गले मिले जैसे सच मच में सेज भाई बहिन हो.

तनीषा को ये एहसास होते hi उसके आसुओ का बाँध फिरसे टूट गया और नदी की तरह जहर जहर कर के ासु बहने लगे.

"आज से आप मेरी ज़िम्मेदारी हो! आपका सपना पूरा करना मेरा सपना है. अब जो कहूंगा आप वैसा hi करेंगी" राहुल ने जज़्बाती होते हुए कहा.

उसके बाद राहुल ने अपने मां जी जो की लखनऊ शहर में डॉक्टर है उनसे बात करि और तनीषा को आगे की पढाई के लिए वह भिजवाया. राहुल ने मां से रिक्वेस्ट कर के तनीषा का खर्चा उठवाया और राहुल ने वादा किया की वो जब कामने लगेगा तोह मां को पूरा पैसा लौटा देगा.

राहुल और उसके मां की बोहत जमती थी इसलिए मां ने उसकी रिक्वेस्ट मान ली और यदि राहुल पैसे नई भी लौटाता तोह भी उन्हें बुरा नहीं लगता. क्युकी वो राहुल को बोहत मानते थे. पर उन्हें विश्वाश था की राहुल उनका पैसा आज जितना लगेगा उसका दुगुना लौटाएगा. यह राहुल की खूबी थी उसमे...

राहुल के मां की फॅमिली का इंट्रो समय आने पर मिल जाएगा.

तनीषा 20 साल की थी और उसने 2 साल का मब्ब्स किया हुआ था और बाकी की डिग्री उसने राहुल के मां के यहाँ लखनऊ से कम्पलीट की. तनीषा अब 23 साल की हो चुकी थी, साथ hi में उसने M.D भी किया जो की तीन साल का था और अब फाइनली तनीषा 26 की हो चुकी थी. और बीच बीच में राहुल से मिलने आती रहती थी.

दोनों डिग्री लेने के बाद तनीषा को हॉस्पिटल में ैसिलय जॉब मिल गयी. उसकी स्किल्स देख के जॉब कोई भी दे देता. आज वो एक होनहार डॉक्टर थी. पर उससे अभी और भी होनहार बन न था. उसके लिए उससे पीएचडी करनी थी. पर आज जो कुछ भी मुमकिन हो पाया उसमे राहुल का बोहत बड़ा योगदान था.

यदि राहुल न होता तोह शायद आज जो तनीषा है वो तनीषा कभी भी न हो पाती. उससे भी ये बात पता थी.

राहुल उसकी हर्र छोटी बड़ी प्रोब्लेम्स का ध्यान रखता था. रक्षा बंधन के टाइम वो राहुल को राखी बाँधने आती थी. और अब रिसेंटली उससे जॉब यही ग्वालियर में hi मिल गयी तोह उसने वापस यही रहने का फैसला लिया. शायद इतने साल राहुल से दूर रह के उसका सब्र ख़तम हो रहा था. अब और दूर नहीं रहना चाहती थी वो शायद. और उसने पीएचडी करने की भी ग्वालियर से hi सोची.

फ्लैशबैक एंड्स...

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थैंक्स गाइस आज के लिए इतना hi अगले अपडेट से कहानी प्रेजेंट में आ जाएगी मतलब जब तनीषा और राहुल पार्क से लौटे थे...
 
पहले के अपडेट में तनीषा को सिर्फ एक बार hi दिखाया ह जब उसने ट्रीटमेंट किया था...

तनीषा अपनी फीलिंग्स दबा के रखती है...

आने वाले अपडेट में पता चल जाएगा

थैंक्स एंड कीप सपोर्टिंग!!
 
अपडेट-24

बैक तो प्रेजेंट...

राहुल को अतीत का सब याद आ रहा था. एक झलक में उसने तनीषा के साथ बिताए पल याद कर लिए.

"तुम्हे सुन्न न है न सच? सुन्न न है न?? तुम वैसे भी नहीं मानोगे है न? परेशान करने में मज़ा आता है न तुम्हे अपनी तनीषा को?? तोह सुनो..."

राहुल तनीषा की बात सुन्न जैसे अपने अतीत वाले खयालो से जाएगा जिनमे वो चाँद सेकण्ड्स के लिए खो गया था. (और यही पे आप लोगो को फ्लैशबैक दिखाया गया)

दोनों एक दूसरे को देख रहे थे.

राहुल इंतज़ार कर रहा था उसके बोलने का. उसका गुस्सा भी अब कुछ हद्द तक शांत हो गया था. पुरानी बातें जो याद आ गयी थी उससे.

"ी लव यू...!!!!" तनीषा ने ज़ोर से चिल्लाते हुए कह hi दिया आखिर.

लो भैया!! एक तोह वंशु के प्यार का इज़हार, फिर अंशु भी क्लोज होने लगी है, और ऋचा भी आज अजीब सा बेहवे कर रही थी और अब तनीषा भी आ गयी.

सब एक साथ एक hi टाइम पे क्यों क्लोज आ रहे थे राहुल के? ये सवाल राहुल के मैं में भी था.

कुछ सेकंड तक तोह सन्नाटा छाया रहा शायद राहुल प्रोसेस hi नहीं कर पाया की हुआ क्या. पर जब उसने गौर किया तोह...

"व्हाआआअत्ततत्तत्त!??" यातायात राहुल के मुँह से निकला.

दौड़ के तनीषा ने उससे अपने सीने से चिपका लिया और रट हुए कहना स्टार्ट किया ...

"अब सुन्न लिया न? इसलिए... इसलिए तुमसे दूर जा रही थी. उस दिन जब तुम्हारा ट्रीटमेंट किया उसके बाद से hi तुम्हारे लिए चिंतित थी, तुंहारा hi ख़याल हर्र बार आता था. फिर तुम कहा करते थे की 'दी आपको बर्फ बना लेना चाहिए जो आपकी हर वक़्त मदद करे..' तुम तोह मज़ाक में कह देते थे पर में?? तुम्हारी इस बात से मेरी नज़र तुमपर hi जा के ठहर जाती थी. मेरी मदद करने वाले तोह तुम hi हो न?

उस दिन जब तुम चेक उप करवाने नहीं आए तोह में इतनी ज़्यादा गुस्से में थी, की तुम नहीं आए और बेचैन थी, हर वक़्त तुम्हारा hi ख़याल आता. फिर खुद से अकेले में बात करि तब पता चला ...

की में तुम्हे प्यार करने लगी हु. अब कैसे बोलती में? हां? की मुझे अपने hi राहुल जो मुझे अपनी बहिन मानता है, जिससे में राखी बांधती हु उस से प्यार हो गया है? और ये आज से नहीं है राहुल, जबसे तुमसे मिली हु ये फीलिंग तबसे स्ट्रांग होती जा रही थी. तुमसे इतने साल दूर रहकर अपनी पढाई पूरी की पर मुझसे और नहीं हो पाया, तुम्हारे करीब आना था मुझे. इसलिए जब भी तुम्हे चोटिल देखती हु तोह मेरा दिल काँप उठता है.

इसलिए... इसलिए में तुमसे दूर जा रही थी. की वो फीलिंग्स डाब के रह जाए और हमारा अनोखा रिश्ता खराब न हो पर तुम नाराज़ हो गए. तुम्हारी नाराज़गी कैसे सेहती? बोलो? तुम hi तोह सब कुछ हो मेरा!! यदि तुम hi नाराज़ हो जाते और यु खफा हो जाते तोह में तोह टूट hi जाती पूरी तरह, अपनी जान भी दे देती..."

राहुल ने फौरन उसके मुँह पे हाथ रख दिया.

"जान देने की बात कभी मत करना दी, आपको तोह जीना है मेरे लिए. आपको अभी और भी होनहार बन के दिखाना है." राहुल ने उसको बाहो में भर के कहा.

"ओह्ह्ह तोह ये बात थी! इसलिए दी मुझसे दूर जा रही थी. पर ये भी कोई तरीक़ा हुआ? ः!! कितनी भोली है दी..." राहुल मैं में.

तनीषा के बूब्स भी राहुल के सीने में दब्बते हुए उससे जोश दिला रहे थे. वो भी तोह प्यार करता था तनीषा से , कई बार तनीषा को एक लड़की की तरह देखता था, पर अपने आप को समझा लेता था की वो उसकी बहिन है. और आज तनीषा ने खुद hi प्यार का इज़हार कर दिया.

तोह वो कैसे पीछे हट ता? वैसे भी तनीषा उसकी सगी बहिन नहीं thi...par वंशु का क्या? उसको पता चला तोह जान खा जाएगी. वैसे hi उस दिन जेलस हो गयी थी...

पर एकदम से तनीषा के प्रपोजल से थोड़ा झिझक रहा था राहुल. अब बड़ी दुविधा में था वह...

क्या करे? एक्सेप्ट करे या नहीं? एक्सेप्ट कर लिया तोह सबसे क्या कहेगा? राहुल ने सोचना बंद किया और ठान लिया की जो होगा देखा जायेगा.

जब प्यार किया तोह दररना क्या??

"दी, दरअसल मेरे अंदर भी आपके लिए प्यार वाली फीलिंग्स थी पर डरता था की आप तोह बहिन हो, आप बुरा मान जाओगी..." राहुल ने अपनी विवशता व्यक्त की.

तनीषा तोह ख़ुशी के मारे फूली नहीं समा रही थी. क्युकी राहुल के अंदर भी प्यार वाली फीलिंग्स थी, वो अकेली नहीं थी.

टी : "किश में"

र (शॉकेड होते हुए) : हँ!???

टी : ी साइड किश में...

र : दी... par...wo...

तनीषा ने न पर सुना न कुछ और राहुल की कल्लोर पकड़ के उससे अपनी और खींचा और अपने गुलाबी होंठ जड़ दिए उसके होंठो पर...

Aaj...aaj पहली बार राहुल ने अपनी बहिन जैसी तनीषा दी के होंठो के स्पर्श का एहसास पाया.

इधर बेचारा राहुल...

निकिता और ऋचा के प्रहार से पहले hi उत्तेजित था और अब होंठो पे पप्पी मिल गयी और वो भी अपनी तनीषा दी से.

सारे सोये हुए अरमान जो उसके तनीषा दी के लिए थे आज जाग गए.

पप्पू खड़ा हो hi गया आखिर.

और जिसका डर था वो भी हो गया.

तनीषा जो की राहुल से चिपक के कड़ी हुई थी उससे अपने पेट पे राहुल के पप्पू का उभार महसूस हो hi गया.

राहुल तोह बेचारा डर hi गया था की तनीषा दी क्या सोचेंगी? पर इधर तोह तनीषा के गाल शर्म से गुलाबी हो चुके थे. उससे पता था की किश के कारण राहुल उत्तेजित हो गया.

एक बात की उससे ख़ुशी भी थी की राहुल के उसको किश करने से यदि उसका पप्पू खड़ा हुआ मतलब राहुल के मैं में पहले से hi तनीषा के लिए कुछ अतरंगी विचार थे. जिसको जान के तनीषा को ख़ुशी भी थी पर साथ hi शर्म के चलते आँखें नहीं मिला पा रही थी.

र : वो दी... एक्चुअली... I'm... I'm सॉरी...

T(khil खिलाते हुए) : ी क्नोव!! ी थिंक अब तुम्हे जाना चाहिए... घर पर सभी वेट कर रहे होंगे.

र : हनन वो... ठीक... में चलता हु दी.

राहुल जाने के लिए पीछे मुड़ता है की तभी तनीषा उसकी शर्ट पीछे से पकड़ लेती है ...

"तुमने... तुमने मुझे कोई रिप्लाई नहीं दिया राहुल."

राहुल पीछे मुड़कर तुरंत तनीषा को गले से लगा लेता है.

"ी लव यू दी... आपको पता तोह है.

अब जाऊ?"

तनीषा शर्मा के बस हां में गर्दन हिला देती है.

फिर राहुल वह से लौट के घर आता है, सभी के साथ डिनर करता है और रात में पढ़ने के लिए अपने रूम में चला जाता है.

उसके जाने के बाद तनीषा गेट की तरफ बढ़ती है लॉक करने तोह नीचे उससे राहुल की शर्ट का बटन दिख जाता है जो टूट गया था.

शर्म के मारे फिरसे गाल गुलाबी हो जाते है और धत्त करते हुए वो बटन उठा के उससे संभाल के रख लेती है.

आज घर पर वंशु ने उससे पढ़ने hi दिया क्युकी परसो कंपनी आने वाली थी.

इसलिए वंशु ने उससे एक गूडनिघत किश दी और फिर सोने के लिए बिस्तर पर लेत गयी. राहुल थोड़ी देरर तक पढता रहा...

अगले दिन सुबह उठ के ब्रेकफास्ट के बाद वो ऋचा के घर पहुँच गया.

इंटरव्यू की प्रिपरेशन करने.

और ऋचा के hi रूम में दोनों प्रिपरेशन में लगे हुए थे.

"सो?? तुमने कोई गर्लफ्रेंड बनायीं की नहीं राहुल?" बीच में ऋचा ने सवाल किया.

आज नेहा निकिता दोनों कॉलेज गयी थी.

इसलिए ऋचा को अपने रूम में अच्छी खासी प्राइवेसी मिल गयी.

"ः... तुम्हे पता तोह है ऋचा. तुम्हारे और सृष्टि के अलावा में किस से बात करता हु कॉलेज में? " राहुल बोलै.

"ी क्नोव... तोह? कही सृष्टि तोह नहीं? हहै!!"

"तुम भी तोह हो सकती हो?"

राहुल ने स्माइल करते हुए कहा...

इस जवाब से ऋचा झेप सी गयी. दिल धक् धक् हो रहा था... सासें तेज़्ज़... पर उसने अपने आप को काबू में किया और जवाब दिया...

"Haha...mein कहा?"

आज ऋचा वाइट टॉप और नीचे नेवी ब्लू शॉर्ट्स में थी. बोहत hi कमाल की लग रही थी. तोह आज राहुल का भी फ़्लर्ट करने का दिल होने लगा.

राहुल ने उसके हाथ पे अपना हाथ रखा...

"क्यों नहीं हो सकती? तुम तोह मेरे और भी क्लोज ho...shrishti से भी ज़्यादा" उसने फिरसे स्माइल करते हुए सीरियस वे में कहा.

अब बेचारी ऋचा. एक तोह उस से कोई पहली बार ऐसी बातें कर रहा था और वो भी राहुल जिस से वो प्यार करती थी. जितना संभालना था ऋचा ने अपने आप को संभाला पर शायद इस हमले के लिए वो तैयार नहीं थी.

शर्म के मारे गालो पे लाली छै हुई थी. और उसकी नज़रे खुद बा खुद नीचे हो गयी.

और इधर राहुल समझ गया था की ऋचा शर्मा रही है, इसलिए उसने एक स्टेप और आगे बढ़ने की सोची.

राहुल उसके थोड़ा करीब हो गया और फिरसे बोलै...

"बोलो न? तुम भी तोह हो सकती हो? है की नहीं?"

ऋचा बेचारी बड़ी मुश्किल से अपने अलफ़ाज़ जो मुँह में दबे थे उन्हें बाहर निकालती है...

"हो सकती हु, पर हु तोह नहीं न?"

"तोह बन न चाहोगी?" राहुल ने और क्लोज होते हुए कहा...

ऋचा ने जैसे hi ये सुना तोह उसकी धड़कन बढ़ गयी... क्या राहुल ने प्रोपोज़ किया अभी अभी? हां!! उसने यही तोह कहा की बन न चाहोगी या नहीं!? अब इसका मतलब क्या था? राहुल चाह रहा है की वो उसकी गफ बनेगी या नहीं?

ऋचा मैं में खुद hi सवाल कर रही थी और खुद hi उत्तर भी दे रही थी.

अंत में उससे समझ आया की राहुल ने उससे प्रोपोज़ किया है. कहा यहाँ ऋचा राहुल को प्रोपोज़ करने के लिए मौके ढूंढती थी पर यहाँ तोह राहुल ने खुद hi काम कर दिया.

ऋचा ने फौरन राहुल को गले से लगा लिया...

"हाँ... हाँ... में ज़रूर बन न चाहूंगी... प्लीज! मुझे एक्सेप्ट कर लो"

"ओह्ह्ह शीट्ट्ट्ट!!!! ये... ये क्या हो गया?? में तोह फ़्लर्ट कर रहा था, ऋचा सीरियस हो गयी? और ये क्या बोल रही है? इससे मेरी गफ बन न है? Omg!!! Wtf? अरे... में तोह बस फ़्लर्ट किया था... याररर अब... अब क्या करू? राहुल?? क्या सोच रहा है?" राहुल ने मैं में सोचा.

"ी लव यू राहुल!! आज यदि तुम ये न कहते तोह शायद आज भी में अपनी ये हिम्मत नहीं जूता पाती ...

तुम्हारे कहने से मुझमे हिम्मत आ गयी.

कबसे तुमसे कहना चाहती थी. उस दिन से जबसे तुमने मुझे चेंज किया था. पर हिम्मत नहीं होती थी. पर आज...

ी लव you...I लव यू" ऋचा ने कस के राहुल के जकड के कह दिया...

राहुल का दिमाग : "भाई राहुल! तू तोह गया. क्या बोलेगा तनीषा दी को? क्या बोलेगा वंशु दी को? क्या बोलेगा ऋचा को? तेरी अब वात लगने वाली है.

हर्र जगह तूने सबको एक्सेप्ट जो कर लिया है. जल्दी से मन कर दे, बता दे की तू किसी और को चाहता है...

दिल : नहीं... राहुल!! तुझे भी तोह ऋचा पसंद है न? देख कितनी सेक्सी लड़की है. एक्सेप्ट कर ले. दिल नहीं तोड़ते... कितना प्यार करती है वह, हमेशा खुश रखेगी तुमको.

दिमाग : अच्छा बसड्क? और तनीषा और वंशु का क्या...

दिल : वंशु दी तोह बहिन है तोह घर की बात घर में hi रहेगी. और तनीषा दी तोह उम्र में 5 साल बड़ी है राहुल से तोह राहुल उनसे शादी नहीं करेगा क्युकी घरवाले कैसे मानेंगे? ऋचा को तोह तुम बोहत अच्छे से जानते हो राहुल...

और तुम्हारी उम्र की है, मस्त लड़की है यार, राहुल एक्सेप्ट कर ले.

अब दिल के आगे दिमाग की ज़्यादा कहा चलती है? पर राहुल ने न तोह अपने दिल की सुनी और न hi अपने दिमाग की.

"Richa...ummm... मुझे थोड़ा वक़्त चाहिए"

"हँ!?? Par...par अभी तोह तुमने मुझे प्रोपोज़ किया न"

"हां पर... प्लीज समझो ऋचा! थोड़ा वक़्त बस..."

"हम्म! Okay!! में समझती हु, कोई बात नहीं, I'll वेट" ऋचा ने थोड़ा उदास होते हुए कहा.

ऐसे hi बातें करते करते और प्रिपरेशन करते हुए इनका समय निकल जाता है और कल थी इनकी कंपनी में सिलेक्शन की प्रोसेस.

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क्या होएगा? क्या राहुल और ऋचा कंपनी में सेलेक्ट हो पाएंगे? क्या राहुल ऋचा का प्यार एक्सेप्ट करेगा? क्या वंशु और तनीषा को कुछ पता चलेगा? क्या नेहा को सच पता चलेगा? अंशिका कैसे क्लोज आएगी? आगे सारे राज़ खुलते जाएंगे..

आज के लिए इतना hi फ्रेंड्स!

थैंक्स!!
 
अपडेट-25

अब तक...

"Richa...ummm... मुझे थोड़ा वक़्त चाहिए"

"हँ!?? Par...par अभी तोह तुमने मुझे प्रोपोज़ किया न"

"हां पर... प्लीज समझो ऋचा! थोड़ा वक़्त बस..."

"हम्म! Okay!! में समझती हु, कोई बात नहीं, I'll वेट" ऋचा ने थोड़ा उदास होते हुए कहा.

ऐसे hi बातें करते करते और प्रिपरेशन करते हुए इनका समय निकल जाता है और कल थी इनकी कंपनी में सिलेक्शन की प्रोसेस.

अब आगे...

अगले दिन राहुल सुबह जल्दी उठ जाता है, बगल में देखता है तोह वंशु सोई हुई थी, किसी पारी से काम नहीं लग रही थी. राहुल को उसपे बड़ा hi प्यार उमड़ता है और वो सोती हुई वंशु के गालो पे एक मीठी सी किश कर देता है, और फिर वाशरूम में रेडी होने के लिए चला जाता है.

फ्रेश होने के बाद जैसे hi वो वाशरूम से बाहर आता है तोह उसके मोबाइल की घंटी बजने लगती है जो बीएड पे hi पड़ा हुआ था. रिंगटोन से वंशु जाग न जाए इसलिए राहुल तुरंत hi फ़ोन उठा लेता है, स्क्रीन पे देखता है तोह पाटा है की तनीषा का कॉल था.

र (कॉल उठाते हुए) : hello!? हां तनीषा दी कहिये...

टी : buddhu...buddhu....buddhu हो तुम...

र : हँ!? Ky...kya हुआ दी?

टी : तुम बहुत बड़े बुद्धू हो...

र : अरे दी पर बताइये तोह हुआ क्या!?

टी : तुम कल किस लिए आए थे मेरे यहाँ?

र : में?? में तोह ट्रीटमेंट कराने.... ओह्ह्ह सहित!!!

टी : इसलिए तुम बुद्धू हो... हम्फ!! कल ट्रीटमेंट कराने आए थे और बिना करवाए चले भी gaye...waah!!

र : अब आपने बीच में मुझे ी लव यू कह दिया तोह भला ट्रीटमेंट के बारे में कैसे याद रहेगा किसी को...

टी (शर्माते हुए) : धत्तत्त!! मेने तोह सिर्फ सच कहा था. वो सब चोर्रो...

आज आ hi जाना याद से, मुझे वोँड देखना है, कितना ठीक हुआ है...

र : जी... बिलकुल!

टी : हम्म्म... और... और....

र : हम्म?????

टी : ी लव यू....

तनीषा इतना बोल तुरंत hi शर्म के मारे कॉल कट कर देती है.

"ये दी भी न..." राहुल मंद मंद मुस्कुराते हुए.

राहुल फिर नीचे नाश्ता करने चला जाता है पर शायद कोई था जिसने ये वार्तालाप सुन्न लिया.

बीएड पे लेती वंशु आलरेडी जाग चुकी थी जब कॉल आया था. पर वो जान बुझ के सोने का नाटक करने लगी थी और एन्ड में उसकी ट्रिक काम कर गयी.

"राहुल को ी लव यू बोलै?? ये वही थी... जिसने ट्रीटमेंट किया था. मुझे तोह उस दिन hi डाउट हो गया था की उसकी नज़र में कुटी के लिए सिर्फ बहिन वाला प्यार नहीं था. और ये कुटी!?? ये मान गया क्या? इसने भी ी लव यू तू तोह नहीं कह दिया? Hmm....mujhe अच्छे से छान बीन करनी होगी. मेरा कुटी है वह... ऐसे hi थोड़ी कोई भी उससे अपना बना लेगा. देखती हु कैसे चींटी है वो मुझसे कुटी को. कुटी की खबर लेनी पड़ेगी..." वंशु ने लेते हुए अपने मैं में सोचा.

इधर तनीषा अपने रूम में बीएड पर लेती हुई अपने खयालो में खोयी हुई थी...

"ये क्या हो रहा है मुझे!? मेने कल राहुल को प्रोपोज़ कर दिया!? भाई जैसा है वो तेरा तनीषा! तू राखी बांधती है उसको! अब क्या करेगी? राखी बांधेगी की नहीं? कल उसके होंठ... उफ्फ्फ... पता नहीं क्या हो गया है मुझे, बस उसका hi ख़याल आता है. मुझे पता है ये गलत है पर पता नहीं क्यों, मुझे अच्छा लगता है उसके साथ ये सब karna...kal वो किश... उफ़... मेरी पहली किश थी. अब में पीछे नहीं मुद सकती. मुझे राहुल चाहिए. वो मेरा सब कुछ है. हां!! में राहुल को भरपूर प्यार दूंगी. मेरा तन, मैं, धन सबकुछ उसका है... ी लव यू सोऊ मच राहुल"

आज के दिन राहुल ने लास्ट प्रिपरेशन किया और शाम को तनीषा के घर चल दिया जहा तनीषा ने उसका ज़ख्म चेक किया और पट्टी को भी बदल दिया. और ऑइंटमेंट भी लगा दिया ताकि ज़ख्म और जल्दी उभरे. अब बोहत हद्द तक आराम था राहुल को.

"ज़्यादा जोरर मत देना इस हाथ में. स्ट्रेच मत करना. ये जल्दी उभरेगा"

तनीषा ने पट्टी बांधते हुए कहा.

"जी!!" राहुल ने सिर्फ इतना hi कहा.

तनीषा को कल की बात याद आते hi शर्म आने लगी. इधर राहुल ने जब तनीषा का यु शर्माता चेहरा देखा तोह उससे और प्यार आने लगा तनीषा पे.

राहुल आगे बढ़ा धीरे से और तनीषा के दोनों गालो को हाथ में लिया.

यु अचानक राहुल के करीब आने से तनीषा को कुछ समझ नहीं आया और जब तक उससे कुछ समझ आता उस से पहले hi उसके होंठ राहुल के होंठो की गिरफ्त में जा चुके थे.





"उम्मंपहहह..." तनीषा के मुँह से सिर्फ इतनी hi आवाज़ निकली और उससे भी हल्का हल्का नशा सा चढ़ना लगा.

हाथो को पीछे ले जाके उसने राहुल का सर पकड़ा और किसिंग में साथ देने लगी. "उम्म्म... उम्म्म्मुआहहह" दोनों की जीभ आपस में गोल गोल घूम कर एक दूसरे के थूक का टास्ते ले रही थी.

*स्लुर्प स्लुर्प* की आवाज़ पूरे कमरे के सन्नाटे को चीयर रही थी.

ना जाने कब राहुल के हाथ उसके गालो से हटकर अपने आप hi तनीषा के उभार पर चले गए और मदहोशी में उसने जमकर एक हाथ जो तनीषा के दूध पे था , मसल दिया ...





"अह्ह्ह्हह" दोनों की आवाज़ एक साथ निकली.

तनीषा की इसलिए क्युकी राहुल ने उसका दूध मसल दिया था जम्म के.

और राहुल की इसलिए क्युकी दूध मसलने के एहसास से उसकी सिसकी निकल गयी.

कितने सॉफ्ट थे वह... नरम नरम, बड़े बड़े कोमल दूध का एहसास पाके राहुल को तोह जैसे जन्नत मिल गयी थी.

अचानक इस हमले से किश टूट चुकी थी. और तनीषा शर्म के मारे सर नीचे कर ली.

टी (शर्माते हुए) : गंदे कही के...

र : अहह!?? So..sorry दी, वो अपने आप hi...

राहुल का चेहरा मुरझा गया, कितना अच्छा चल रहा था सब और उसने जोश जोश में सब कचरा कर दिया. क्या सोचेंगी अब दी?

तनीषा ने जब वापस राहुल को देखा तोह उसका उदास चेहरा देख के डर गयी.

अंदर से तनीषा को भी तकलीफ हुई.

सब कुछ उसी का तोह है! उसने तोह ठान hi लिया था की सब कुछ राहुल का है, उसका दिल, बदन, पैसा... सब कुछ. अब राहुल आज नहीं तोह कल उसके शरीर को भोगेगा hi, तोह फिर ये झिजक क्यों? तनीषा ऐसा सोच आगे बढ़ी ...

राहुल को कुछ आवाज़ आती है तोह वो चेहरा ऊपर उठा के देखता है तोह स्तब्ध रह जाता है, तनीषा ने अपना कुरता उतार दिया था. और अब केवल एक ब्लैक ब्रा में थी.

क्या दूध थे उसके, हलके नंगे दूध ब्रा के ऊपर से झलक रहे थे. गोर बदन पे काली ब्रा केहर सा ध रही थी.

तनीषा को आज पहली बार राहुल ने ब्रा में देखा था. क्या खूबसूरती थी. और राहुल आज तक इस खूबसूरती से अनजान था!? आज राहुल खुद को लकी फील कर रहा था की तनीषा उससे मिली. वर्ण वो हमेशा तनीषा को एक बॉयफ्रेंड बनाने के लिए कहता था. आज राहुल को खुद की बात पे hi बेवकूफी नज़र आ रही थी.

ऐसी सुंदरता को ठुकरा रहा था राहुल!? वो तोह अच्छा हुआ की तनीषा खुद उससे पसंद करने लगी वर्ण बाद में राहुल शायद पछताता...

तनीषा ने राहुल का लेफ्ट हैंड पकड़ के उठाया और अपने एक दूध पे ले जाके रख दिया.

"अहह" दोनों की फिरसे सिसकी निकल गयी.

टी (शर्माते हुए) : सॉरी मत बोलो राहुल. में अब तुम्हारी हु, मेरा सब कुछ तुम्हारा है. फिर सॉरी क्यों?

ये तुम्हारे है, और...

मुझे पता है तुम राइट हैंडेड हो पर अभी उस हाथ में स्ट्रेच नहीं देना है

इसलिए अपने इस लेफ्ट हैंड से hi दबाना इनको...

बोलते हुए तनीषा बिलकुल लाल टमाटर हो चुकी थी.

राहुल का उसके मुँह से ऐसी बात सुनके पप्पू खड़ा हो गया.

और फिर राहुल आगे बढ़ा और किश को कंटिन्यू किया और साथ hi अब वह धीरे धीरे तनीषा के दूध मसल रहा था. इस से पहले भी राहुल वंशु के दूध का एहसास पा चूका था, तोह उससे पता था कैसे मसलना है.

"आअह्ह्ह्हह हणममममममः" तनीषा की सिसकी रुकने का नाम hi नहीं ले रही थी. हर्र एक दबाव पे उसके मुँह से आठ निकल रही थी. राहुल के हमले उससे एक अजीब सा आनंद दे रहे थे.

तनीषा के निप्पल्स हार्ड हो चुके थे और ब्रा को फाड़ने की कोशिश कर रहे थे. राहुल धीरे धीरे होंठो से हट के तनीषा की गर्दन की तरफ बढ़ा और उसका रसपान किया, फिर कंधो का, फिर उसके दूध के निप्पल्स को ब्रा के ऊपर से hi मुँह में ले लिया.

"Aaaahhhhhhhhhhh....ssssssss" तनीषा के मुँह से निकला, शायद ये हमला कुछ ज़्यादा hi उत्तेजित कर दिया था उससे.

सब कुछ बढ़िया चल रहा था, आज शायद तनीषा लड़की से औरत बन जाती पर एक कॉल ने सब डिस्टर्ब कर दिया.

राहुल का फ़ोन जेब में hi बजने लगा और उसने तुरंत फ़ोन देखा तोह पाया वंशु का कॉल था.

र ( कॉल पिक करते हुए) : hello? दी??

व् : कहा है तू कुटी!?

र : बताया तोह था..!! में तनीषा दी के यहाँ हु, ट्रीटमेंट करवाने आया था.

व् : ट्रीटमेंट hi करवा रहे हो न? या कुछ और...?

वंशु के ऐसा कहने से दोनों राहुल और तनीषा थोड़ा झेप से गए.

र : N...n..nahi दी. ट्रीटमेंट hi करवा रहा हु.

व् : ओह्ह अच्छा!? तू इतना घबरा क्यों रहा है कुटी!? कही कुछ छुपा तोह नहीं रहा न!?

र : n...nahi दी, कुछ भी तोह नहीं.

व् : अच्छा!? चल जल्दी आ घर पर, तुझसे बात करनी है.

र : ji...jii... दी

कॉल कट हो जाता है. तनीषा राहुल की गॉड में बैठी हुई थी और खिलखिला के हस्स रही थी. पास होने के कारण उसको साड़ी बात सुनाई दी थी.

र : दी ने ऐसा क्यों पूछा? कही उन्हें... कुछ!? ...और आप क्यों हस्स रही हो!?

टी (और तेज़्ज़ हस्ते हुए) : बुद्धू हो सही में तुम. अरे पागल... शी कनौस!!

र : शी कनौस व्हाट!?

टी : यही की तुम मेरे साथ रंगरेलिया मन रहे हो (हस्ते हुए).

र : व्हाटट!? Ke..kese !?

टी : मुझे क्या पता!? कल तुमने मय्बे कुछ कहा हो या आज कह दिया हो गलती से और उसने सुन्न लिया होगा.

राहुल को सुबह कॉल वाली बात याद आ जाती है और वो अपने सर पर हाथ रख लेता है. वंशु ने सब सुन्न लिया था और अब कन्फर्म कर रही थी, और राहुल के झिझकने से उससे कन्फर्म भी हो गया. अब वंशु घर बुला रही थी, पक्का वात लगाने वाली है.

र (मैं में) : सहित!! ये आजकल मुझे हो क्या रहा है? में दिमाग से कमज़ोर हो रहा हु या फिर मेरी बहने दिमाग से तेज़्ज़ हो रही है!? आगे मुझे बोहत सावधानी बरतनी होगी, आज तोह दी मेरी पुंगी बजा देगी *सिघ*...

टी (मुस्कुराते हुए) : तुम्हारे और उसके बीच भी कुछ चल रहा है. है न!?

र (चौंकते हुए) : हहह!? N..nahi दी, वो तोह मेरी बहिन hai...haha

टी : और में क्या हु? में भी तोह बहिन जैसी हु न!? फिर भी देखो तुम क्या कर रहे हो... (आँखों से अपने दूध की तरफ इशारा करती है जिसपे राहुल का हाथ रखा हुआ था)

राहुल हड़बड़ाते हुए अपना हाथ पीछे कर लेता है. पसीने की लकीर साफ़ दर्शा रही थी की अभी वो घबराया हुआ है. उसको ऐसी हालत में देख तनीषा को तरस आ जाता है और सोचती है की अब और परेशां नहीं करना चाहिए उससे.

टी (हस्ते हुए) : buddhu....haha... अरे मुझे पता है आलरेडी! तुम्हारे और उसके बीच भी भाई बहिन से ज़्यादा वाला रिलेशन है. बोलो है न!? सच बोलो ...

र : ummm....wo...wo... हम्म्म... आपने सही कहा (सर झुकाते हुए).

टी (राहुल की चीन पकड़ के उसका सर ऊपर करती है और लिप्स पे एक प्यारी सी किश करती है) : मुझे उस दिन hi पता चल गया था जब तुम ट्रीटमेंट करवाने आए थे. जब मेने तुम्हे किश किया था तब उसने तुम्हारा हाथ कास के पकड़ लिया था. और मुझे जेएलओसी वाली नज़रो से देख रही thi...haha... ऐसी कोण सी बहिन होगी जो किसी और लड़की की किश अपने भाई पे देख जेलस फील करेगी?

ऑब्वियस सी बात है... ऐसी वो hi बहिन होगी जो अपने भाई से भाई बहिन वाले प्यार से भी ज़्यादा प्यार करती हो.

और आज उसकी बात से मुझे कन्फर्म हो गया... देखो उससे शक है, और घर पर बुला के तुम्हारी खबर legi...haha

र (मैं में) : ले बीटा! गया तू... और कर ले बकचोदी! वंशु दी से पहले तेरी यहाँ गांड मारेगी. तैयार हो जाओ पीटने के लिए.

राहुल अपनी गलती समझते हुए आँखे बंद कर के सर नीचे झुका लेता है जैसे तनीषा के थप्पड़ का वेट कर रहा हो.

तनीषा को ये देख और भी प्यार आ जाता है राहुल पे और वो आगे बढ़ के राहुल के होंठो को चुम लेती है.

"ये क्या!? अबे... में तोह थप्पड़ का वेट कर रहा था, ये क्या हो गया!? दी नाराज़ नहीं है क्या!?" राहुल ने मैं में सोचा.

र (किश तोड़ते हुए) : दी आप... आप नाराज़ नहीं हो?

टी (मुस्कुराते हुए) : बुद्धू! में क्यों नाराज़ होउंगी!? सिर्फ 5 साल में hi तुमने मुझे अपना बना लिया. तोह तुम्हारी बहिन वंशु तोह बचपन से तुम्हारे साथ रही है, न जाने क्या क्या तुमने उसके लिए किया होगा इतने सालो में. इसी वजह से उससे तुमसे बोहत प्यार है, जो साफ़ झलकता है. और वैसे भी उसका हक़ तुमपे पहला है. हलाकि भाई बहिन में ये गलत है, पर में समझ सकती हु की वो इस हद्द को पार करने के लिए क्यों तैयार है.

र : क्यों!?

टी : उसका रीज़न तुम हो (मुस्कुराते हुए)

इतना बोल तनीषा राहुल की गॉड से उठ जाती है और जब अपनी हालत पे गौर करती है तोह शर्मा जाती है...

"गंदे कही के..." फिरसे वह कहती है और अपना कुरता उठा के वाशरूम में चली जाती है.

"ये दी भी न. खुद hi अपना कुरता उतारी थी और अब मुझे गन्दा कह रही है. पर कितनी अच्छी है, उन्हें सब समझ आ गया और बिलकुल भी गुस्सा नहीं हुई. ी रियली लव यू दी" राहुल मैं में सोचता है और तनीषा के बाहर आने के बाद गुडबाय कहके वापस अपने घर की और चल देता है.

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आज के लिए इतना hi गाइस!!

 
अपडेट-26

अब तक...

टी (मुस्कुराते हुए) : बुद्धू! में क्यों नाराज़ होउंगी!? सिर्फ 5 साल में hi तुमने मुझे अपना बना लिया. तोह तुम्हारी बहिन वंशु तोह बचपन से तुम्हारे साथ रही है, न जाने क्या क्या तुमने उसके लिए किया होगा इतने सालो में. इसी वजह से उससे तुमसे बोहत प्यार है, जो साफ़ झलकता है. और वैसे भी उसका हक़ तुमपे पहला है. हलाकि भाई बहिन में ये गलत है, पर में समझ सकती हु की वो इस हद्द को पार करने के लिए क्यों तैयार है.

र : क्यों!?

टी : उसका रीज़न तुम हो (मुस्कुराते हुए)

इतना बोल तनीषा राहुल की गॉड से उठ जाती है और जब अपनी हालत पे गौर करती है तोह शर्मा जाती है...

"गंदे कही के..." फिरसे वह कहती है और अपना कुरता उठा के वाशरूम में चली जाती है.

"ये दी भी न. खुद hi अपना कुरता उतारी थी और अब मुझे गन्दा कह रही है. पर कितनी अच्छी है, उन्हें सब समझ आ गया और बिलकुल भी गुस्सा नहीं हुई. ी रियली लव यू दी" राहुल मैं में सोचता है और तनीषा के बाहर आने के बाद गुडबाय कहके वापस अपने घर की और चल देता है.

अब आगे...

राहुल घर आता है तोह उससे लगभग आते आते 8 बज गए थे और डिनर की तैयारी चल रही थी.

लिविंग रूम में घुसते hi उससे नेहा दिखी जो सोफे पे बैठ के टीवी देख रही थी.

राहुल को देख एक बार उसकी तरफ देखती है और वापस टीवी देखने लगती है.

राहुल अपने शूज उतार के अंदर की और जाने लगता है तभी नेहा कमेंट पास करती है.

"कुछ बेवक़ूफ़ लोगो को टाइम की कोई अहमियत नहीं रहती..."

राहुल उसकी बात को टोटली इग्नोर कर के अंदर जाता है तोह किचन में एक बार झांकता है, जहा उसकी माँ निशा और अंशिका खाने की तैयारी कर रहे थे.

अंशिका राहुल को देख स्माइल पास करती है और कहती है...

"भाई!! आ गए आप!? जल्दी से फ्रेश होक आ जाइये, खाना बस रेडी hi होने वाला है."

अंशिका की बात सुन्न राहुल भी एक स्माइल पास करता है और हां में गर्दन हिला के ऊपर रूम में चला जाता है.

रूम में एंटर करते hi उसकी सिटी पित्ती गम हो जाती है. बीएड पे वंशु बैठी हुई थी जैसे मानो राहुल का hi वेट कर रही हो.

र (चौंकते हुए) : दी! आप यहाँ!? मेरे रूम में...!?

व् : हाँ तोह!? ये केसा सवाल है? तुम्हारे hi रूम में तोह सोती हु न में?

र : हां wo...wo सब नीचे है न और आप यहाँ pe...isliye...

व् : तू फ्रेश होक आ, तुझसे कुछ बात करनी है.

र : जी...

राहुल इतना बोल वाशरूम में चला जाता है और अंदर घुसते hi दूर को अंदर से लॉक कर लेता है.

र (मैं में) : दी तोह बोहत गुस्से में लग रही है एरर. तनीषा दी तोह आसानी से समझ गयी थी पर वंशु दी तोह लगता है मेरी गांड मार कर रहेंगी. में भी सही में स्टुपिड हु एरर, क्या ज़रुरत थी फ़ोन कॉल को उनके सामने अटेंड करने की. पता नहीं दी क्या करने वाली है मेरे साथ...

राहुल फ्रेश होक बाहर आता है तोह वंशु उससे खाना खाने के लिए नीचे चलने कहती है. सभी लोग डिनर करते है, डिनर के दौरान 2 लोग राहुल को चुपके चुपके नज़रे चुरा के देख रहे थे.

पहली अंशिका थी और दूसरी और कोई नहीं राहुल की माँ निशा थी. दोनों के मैं में क्या चल रहा था इस वक़्त ये तोह वही दोनों जाने.

डिनर के बाद राहुल अपनी गांड मरवाने के लिए तैयार हो जाता है. उससे पता था वंशु तनीषा जितनी सीढ़ी नहीं है, और बहुत पोस्सेसिवे है उसके लिए. इसलिए राहुल खुद को प्रेपर कर रहा था.

राहुल के रूम में आते hi वंशु राहुल को बीएड पे बैठने बोलती है और रूम को अंदर से लॉक कर देती है.

राहुल की गांड पहात के चार हो गयी थी. पता नहीं वंशु क्या करेगी...

वंशु सीधा राहुल को बीएड पे धक्का देके लिटा देती है और उसके ऊपर बैठ जाती है. ऐसा करने से वंशु की गांड सीधा राहुल के लुंड के ठीक ऊपर थी. राहुल की कल्लोर दोनों हाथो में पकड़ लेती है और फिर बोलना स्टार्ट करती है ...





व् : क्या हरकते हो रही थी उस तनीषा के साथ?

र : ky...kya मतलब?

व् (कल्लोर को और टाइट पकड़ते हुए) : मेने कहा क्या हरकते हो रही थी उस तनीषा के साथ!?

र : ye...ye किसी बातें कर रही हो दी? में ट्रीटमेंट करवाने गया था.

व् : चुम्मा छाती वाला ट्रीटमेंट!?

राहुल ये सुन्न के चौंक जाता है की दी को कैसे पता चला!?

राहुल को खामोश देख वंशु की गेस्सिंग सही निकल जाती है.

व् (हाथ उठाते हुए) : यू इडियट!!! तुम...

राहुल आँख बंद कर लेता है और थप्पड़ का वेट करने लगता है की तभी उससे चेहरे पे गीलेपन का एहसास होता है. आँखे खोल के देखता है तोह पाटा है की वंशु रो रही है, और उसके ासु राहुल के चेहरे पर गिर रहे थे. जो हाथ वंशु ने मारने के लिए उठाया था वह वापस नीचे जा चूका था. अंत में उसकी हिम्मत नहीं हुई राहुल को मारने की, प्यार जो करती थी.

व् (रट हुए) : क्यों? क्यों कुटी? क्यों धोका दिया मुझे कुटी? क्या बिगाड़ा रहा मेने तुम्हारा? ऐसा क्या दे दिया उस तनीषा ने की तुम उसकी तरफ खींचे चले गए? एक बार कहते तोह में तुम्हे सब कुछ दे देती. क्या में ख़ूबसूरत नहीं हु कुटी?

वंशु राहुल का हाथ उठा के अपने दूध पे रख देती है....

व् : क्या मेरे बूब्स छोटे है कुटी? क्या ये पसंद नहीं तुम्हे? क्या में पसंद नहीं?

र : दी आप ऐसा क्यों सोचती हो की मुझे लड़कियों के शरीर से प्यार है बस. मुझे तोह आपकी हर्र एक चीज़ पसंद है दी, पर उस से भी ज़्यादा इम्पोर्टेन्ट बात है की शरीर से ज़्यादा, किसी व्यक्ति का दिल मटर करता है. और में आपको दिल से प्यार करता हु, अब आप मेरी पूरी बात सुनेंगी!?

वंशु रोने लगती है...

वंशु को रोटा देख राहुल को भी रुलाई आ जाती है और उठ के सीधा अपनी बाहो में ले लेता है. वंशु खुद को छुधा रही थी पर छुधा नहीं पायी और उसके सीने से लग के रोने लगी.

थोड़ी देरर रोने के बाद जब वंशु नार्मल हुई तब राहुल ने सोचा यही सही मौका है तनीषा के बारे में बताने का, फिर राहुल तनीषा का पूरा अतीत वंशु को बताता है की कैसे वो घर से निकाल दी गयी थी, कैसे उसके भाई की मौत हुई, कैसे वो राहुल से मिली, कैसे उसने डिग्री हासिल की,

कैसे वो राहुल से प्यार करने लगी और ये बात भी बताता है की तनीषा को उसके और वंशु के रिलेशन के बारे में भी पता है.

वंशु को अब जेएलओसी की जगह तनीषा से हमदर्दी होने लगी थी.

व् : उनके माँ डैड ने hi घर से बाहर कर दिया, इसमें उनकी क्या गलती थी!? कितनी अकेली हो गयी होंगी वह... ऐसे टाइम पे तुमने उनकी इतनी मदद की, I'm प्राउड ऑफ़ यू कुटी!!

र : हाँ दी! उन्होंने बहुत कुछ सहा है...

व् : मुझे समझ आ गया की वो तुमसे प्यार क्यों करती है. मुझे उनसे बात करनी है अकेले में, तुम मुझे उनसे बाद में मिलवाना ठीक!?

र : जी. तोह अब आप मुझसे नाराज़ तोह नहीं हो न!?

व् : फिलहाल तोह नहीं...

र : क्या मतलब?

व् : कुछ नहीं, इधर आओ तुमसे चिपक के सोना है...

दोनों अभी अभी हुई नोक झोक को भूल नींद की वादियों में चले गए.

अगले दिन राहुल जल्दी सुबह 7 बजे उठ गया. आज उसके कॉलेज में कंपनी आ रही थी. इतने दिनों से राहुल खुद को इसके लिए तैयार कर रहा था. आज वह दिन आ hi गया. फ्रेश होने के बाद राहुल सीधा ड्रेस पहन के नीचे आ गया. कॉलेज ड्रेस में बिलकुल जेंटलमैन लग रहा था.

नीचे आते hi उसकी नज़र किचन में माँ पर पड़ती है जो उसके और नेहा के लिए टिफ़िन तैयार कर रही थी. साथ में hi अंशिका थी जो निशा की हेल्प करवा रही थी. अंशिका का सपोर्ट देख राहुल को उसपे प्यार आता है और राहुल जाके पीछे से पहले अपनी माँ के गले लग जाता है.

र( पीछे से निशा को जकड़ते हुए) : गुड मॉर्निंग मम्मी!!!

अचानक इस हुग से निशा थोड़ी चौंक जाती है और जब उससे पता चलता है की उसका बीटा है तोह उससे वापस गुड मॉर्निंग विश करती है. पर निशा की सासें तेज़्ज़ हो गयी थी. क्यों? निशा hi जानती थी.

माँ बेटे का प्यार देख अंशिका के चेहरे पर स्माइल आ जाती है, की तभी राहुल उसकी तरफ बढ़ता है और अपनी बाहे फैला के अंशिका को अपने सीने में समेत लेता है.

अंशिका की आँखे नाम हो जाती है. आज सुबह सुबह hi उससे इतनी बड़ी ख़ुशी मिल गयी. उसके बड़े भाई ने उससे गले लगाया. अंशिका भी जोरर से राहुल को भींच लेती है और उसके शरीर से आती हुई खुसबू से मदहोश हो जाती है, और मदहोशी में वो राहुल के गाल चुम लेती है. शर्माते हुए वो राहुल को बेस्ट ऑफ़ लक बोलती है और अपने काम में लग जाती है.

राहुल टिफ़िन रख के, अपनी माँ निशा के परर छू के आशीर्वाद लेता है तोह निशा उससे आशीर्वाद देने के बाद अपने गले से लगा लेती है और पीछे से उसके बाल सहलाने लगती है. फिर उसके दोनों गालो को चुम के गीला कर देती है.

निशा : बेटू! अच्छे से देना अपना इंटरव्यू! बेस्ट ऑफ़ लक!

र : थैंक्स माँ! अब जाऊ!?

फिर राहुल दोनों को bye बोल चल देता है कॉलेज की तरफ. नेहा को अभी जाने में टाइम था इसलिए वो रेडी हो रही थी.

वंशु तोह घोड़े बेच के सोई हुई थी.

राजेश बैंक जाने के लिए रेडी हो रहे थे.

कॉलेज पहुँच राहुल कैंटीन में वेट करता है तबतक ऋचा और सृष्टि भी आ जाती है.

र : रेडी तो फेस थे कंपनी!?

ऋचा और सृष्टि साथ में : यस वे अरे.

र : गुड! चलो चलते है हॉल में.

एक बड़ा सा हॉल था जहा पे सभी स्टूडेंट्स थे जो सेलेक्ट होने के लिए आए हुए थे. ये तीनो भी एक जगह जा के बैठ गए.





पहले कंपनी के कुछ लोग स्टेज पे आए उनका स्वागत किया गया. फिर कंपनी के लोगो ने प्रोजेक्टर पे अपनी कंपनी के बारे में लेक्चर दिया और समझाया कंपनी के बारे में.

उसके बाद सिलेक्शन प्रोसेस चालु हुई, जिसमे एक ऑनलाइन टेस्ट था पहला.

पहले राउंड में तीनो लोग पास हो गए और नेक्स्ट राउंड जो की ग्रुप डिस्कशन राउंड था, उसमे भी ये तीनो ने अव्वल परफॉरमेंस दी और तीनो ने वो राउंड भी क्लियर कर दिया.

2 राउंड्स के बाद बहुत से स्टूडेंट्स पहले hi बाहर हो गए थे. अब थोड़े स्टूडेंट्स hi बचे थे.

अगला राउंड टेक्निकल इंटरव्यू का था.

यही मैं था. यदि इसको क्लियर कर लिया तोह जॉब पक्की...

राहुल और बाकी सब रूम की तरफ जा रहे थे जहा इंटरव्यू कंडक्ट हो रहे थे.

पर कोई एक शख्स था जो दूर से राहुल को देख रहा था. और उसके साथ में दो लोग और भी थे. जिनमे से एक सिलेक्शन स्टाफ में काम करता था.

लड़का : उसको देख रहे हो सर!? उस लड़के को....!? उसका सिलेक्शन नहीं होना चाहिए.

सर : अरे बीटा! कोण!? अरे वह? वो तोह राहुल है... होनहार स्टूडेंट है बहुत. ऐसा करने मत बोलो बीटा, मेरी नौकरी खतरे में आ जाएगी. किसी और के बारे में हो तोह फिर भी में कर दू पर वो राहुल उतना सीधा नहीं है...

लड़का : आपकी नौकरी में संभाल लूंगा, कुछ नहीं होने दूंगा आपकी नौकरी को. आप बस दाम बोलिये...

सर : बीटा!! अब क्या बोलू... तुमको भी नाराज़ नहीं कर सकता. चलो...

तुम 20,000 दे देना.

लड़का : चलो ठीक है, आप भी क्या याद रखोगे सर...

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आज के लिए इतना hi फ्रेंड्स!!
 
अपडेट-27

अब तक...

लड़का : आपकी नौकरी में संभाल लूंगा, कुछ नहीं होने दूंगा आपकी नौकरी को. आप बस दाम बोलिये...

सर : बीटा!! अब क्या बोलू... तुमको भी नाराज़ नहीं कर सकता. चलो...

तुम 20,000 दे देना.

लड़का : चलो ठीक है, आप भी क्या याद रखोगे सर...

अब आगे...

फिर वो टीचर वह से चला जाता है.

ये प्लेसमेंट स्टाफ में काम करता है और पिछले कई सालो से घूस खा खा के सिलेक्शन करवा रहा है. इसका नाम संजय है, सभी इसको संजय सर कहके बुलाते है.

संजय सर के जाने के बाद वो दो लोग बचे थे और आपस में बात कर रहे थे...

लड़का 2 : अरे भाई, मुझे ये समझ नहीं आ रहा है की तुम राहुल की जॉब क्यों नहीं लगने दे रहे... यदि उसकी जॉब लग गयी तोह फायदा तोह तुमको hi है न?

लड़का 1 : वो कैसे!?

लड़का 2 : यदि उसकी जॉब लग गयी तोह वह बाहर चला जाएगा और वो बाहर गया तोह उसकी बहिन नेहा अकेली पद जाएगी और फिर तोह तुम कुछ भी कर सकते ho...hehe और फिर में भी उस ऋचा के साथ जैम जाऊंगा. साली पिछली बार बच गयी थी.

लड़का 1 : तू मुझसे 3 साल बड़ा ज़रूर है पर अकाल ढेला भर नहीं है.

लड़का 2 : क्यों!?

लड़का 1 : अबे भोस्डिके! में दूर की सोचता हु, ज़रा सोच... राहुल की जॉब नहीं लगेगी तोह उसका पूरा कॉन्फिडेंस गिर जाएगा, वो अकेला पड़ जाएगा, घर वाले ताने मारेंगे, और उसकी बहिन तोह उससे ज़लील कर देगी ः...

पर यदि उसकी जॉब लग गयी, तोह उसके पास और भी पैसा आ जाएगा और भी कॉन्टेक्ट्स बढ़ जाएंगे उसके, फिर में कुछ नहीं कर पाउँगा...

लड़का 2 : हां भाई बात तोह सही है

लड़का 1 : साला अभी तक शरीर दर्द कर रहा है... राहूऊऊऊलललललल, छोड़ूंगा नहीं तेरे को.

जी हां! आपने सही सोचा. ये लड़का और कोई नहीं लकी hi है. राहुल की मार से अभी तक शरीर उसका दर्द में है, और दूसरा लड़का के नाम है रोहित.

रोहित ऋचा का क्लासमेट है. बाप का बिज़नेस है तोह पढाई लिखे की कोई चिंता hi नहीं है. जॉब से कोई मतलब नहीं. फर्स्ट ईयर में ऋचा के साथ फ्रेंडशिप कर के उससे मीठी मीठी बातो से फसाया था, रोहित को तोह सिर्फ ऋचा के शरीर का शोषण करना था, कोई प्यार वीआर नहीं था उससे.

बस सेक्स करना चाहता था और जब ऋचा को रोहित के इंटेंशन्स पता चले तोह वो भड़क गयी थी, उसका दुनिया से भरोसा उठ गया था. पर ाचा हुआ की हमारे राहुल ने उससे उस वक़्त बचा लिया, और अब आज ऋचा राहुल की दीवानी है.

ये जान के रोहित की गांड और भी जलने लगती है. किस्मत से लकी और रोहित एक दूसरे से मिले और एक दूसरे की ख्वाहिश के बारे में भी पता चला, तोह दोनों साथ में राहुल की बंद बजाने के लिए एक हो गए.

लकी को नेहा चाहिए थी तोह वही रोहित को ऋचा.

और बीच में जो काटा आ रहा था वो था राहुल.

दोनों को उसी एक काटे को हटाना था और फिर दोनों को उनका खज़ाना मिल जाता

रोहित : भाई पर ऋचा की जॉब लग गयी तोह वह तोह चली जाएगी na...fir में?

लकी : अबे तोह जॉब लग भी गयी तोह अभी थोड़ी न जाएगी, लास्ट ईयर पूरा तोह करेगी न? बोहत टाइम है, आराम से छोड़ लेना ... अब चल यहाँ से. संजय सर अपना काम कर देंगे.

फिर दोनों वह से चले जाते है.

इधर रूम में अंदर एक केबिन था जहा 2 इन्तेर्विएवेर बैठे थे.

रोल नंबर के हिसाब से राहुल का इंटरव्यू पहले होना था. इसलिए राहुल पहले अंदर जाता है और बैठ जाता है.

तभी अंदर संजय सर आते है और इन्तेर्विएवेर के कान में कुछ कहते है.

इन्तेर्विएवेर भी अजीब निगाहो से राहुल को देख रहा था और अंत में उसने एक अजीब सी स्माइल पास करि जो शायद hi कोई गौर कर पाटा. राहुल को कुछ समझ नहीं आया पर उससे कुछ सही नहीं लग रहा था.

जाते वक़्त संजय सर ने राहुल के कंधो पर थप तपाया और कहा "दो योर बेस्ट!" और वापस चले गए.

संजय सर के ऐसा कहना पर राहुल को एक कॉन्फिडेंस सा मिला और मोटीवेट हो गया.

पर हमारे बेचारे राहुल को क्या पता था की संजय सर उसके साथ गेम खेल रहे है और वो तोह केवल इस शतरंज के खेल में एक मोहरा है जिससे संजय सर ने बलि पे चढ़ा दिया है.

और फिर स्टार्ट होता है इंटरव्यू...

शुरू में तोह राहुल से बेसिक क़ुएस्तिओन्स किये गए और राहुल ने पूरे कॉन्फिडेंस के साथ सारे जवाब सही दिए पर तभी उसने ऐसा सवाल किया की राहुल को विश्वाश hi नहीं हुआ...

इन्तेर्विएवेर : सो व्हाट विल यू दो िफ़ यू के तो क्नोव तहत योर माँ इस ा सलूट?

राहुल (चौंकते हुए) : व्हाटट!?

इन्तेर्विएवेर : मेने पूछा की तुम क्या करोगे यदि तुम्हे ये पता चला की तुम्हारी माँ एक सलूट है?

राहुल का मैं कर रहा था की वो उठ के इन्तेर्विएवेर की hi माँ छोड़ दे.

पर उसने पढ़ा था कही पे की ऐसे क़ुएस्तिओन्स भी कभी कभी पूछे जाते है जिसमे आप मेंटली प्रेपर नहीं हो पाते हो और अपनी जॉब खो बैठते हो.

राहुल ने खुद को शांत किया और फिर जवाब दिया.

राहुल : यदि मेरी माँ सलूट होंगी तोह उनका एक hi कस्टमर रहेगा और वह है मेरे डैड.

राहुल से ऐसे उत्तर की इन्तेर्विएवेर को भी उम्मीद नहीं थी. कितनी चतुराई से राहुल ने ऐसे सवाल को भी बड़े hi शांत मैं से झेला और उत्तर भी ऐसा दिया की उसका कोई तोड़ नहीं था.

पर इन्तेर्विएवेर तोह संजय सर को जुबां दे चूका था क्युकी उसको संजय सर से नगद पैसा जो मिलने वाला था तुरंत. संजय सर ने तुरंत उससे 20,000 देने का बोलै था और तुरंत के तुरंत जब आपकी जेब में 20,000 रुपये आ रहे है एक सिलेक्शन को रुकवा के तोह आप मन कैसे कर सकते हो? यही सोचते हुए उसने राहुल को बाहर करने की ठान ली.

थोड़ा सोचते हुए उसने फिरसे उसी प्रश्न पे तंग कैसा. पर इस बार प्रश्न को और आगे तक ले गया.

इन्तेर्विएवेर : पर मान लो तुम्हारी माँ के 1 से ज़्यादा कस्टमर है तोह क्या करोगे?

अब इन्तेर्विएवेर बदतमीज़ी पे उतर आया था. वो प्रश्न वही का वही ख़तम हो गया था जब राहुल ने उसका उत्तर दिया पर इन्तेर्विएवेर कैसे भी करके राहुल को जल्द से जल्द हटाना चाहता था और अपनी जेबो को रंगीन नोटों से भरना चाहता था.

राहुल का पारा अब उसकी सीमा से पार हो चूका था. उसकी माँ निशा जो की एक सुशील, ख़ूबसूरत, प्यारी, संस्कारी, और एक संवेदनशील महिला है उसकी नज़रो में उसके बारे में कोई पराया व्यक्ति ऐसी बात करे तोह राहुल को गुस्सा कैसे नहीं आता? अब तोह इन्तेर्विएवेर भी लाइन क्रॉस कर रहा था.

राहुल ने एक नज़र दुसरे इन्तेर्विएवेर पे दौड़ाई जो पिछले आधे घंटे से फ़ोन पे लगा हुआ था और उससे कोई मतलब hi नहीं था. साला बस समोसे ठूसने और आराम फरमाने आया था.

राहुल (बॉहे कस्ते हुए) : सर! You're क्रासिंग थे लाइन ी थिंक...

इन्तेर्विएवेर : इस थिस थे वे तो टॉक तो योर सुपीरियर!? विल यू बेहवे लिखे थिस इन थे कंपनी तू!? हाउ you're सूटेबल फॉर आवर कंपनी!?

राहुल : सर! यू अरे टेकिंग आईटी रॉंग. ी मैंट तहत यू shouldn't जस्ट से रॉंग थिंग्स अबाउट माय माँ.

इन्तेर्विएवेर : ये इंटरव्यू का हिस्सा है, कोई आपत्ति है तोह आप बिलकुल जा सकते हो.

राहुल : बूत यू अरे टेकिंग थे क्वेश्चन तू फार सर...

इन्तेर्विएवेर (तेज़्ज़ स्वर में) : यू अरे रिजेक्टेड! यू don't हैवे अन्य अथॉरिटी तो क्वेश्चन में. इस तहत क्लियर!? ी don't केयर व्हेदर योर माँ इस ा सलूट और नॉट, जस्ट गेट लॉस्ट.

राहुल फिरसे अपनी माँ के बारे में गलत सुन्न के, उसका गुस्सा अब कण्ट्रोल न हो पाया और तुरंत उठ के एक hi झटके में उसने इन्तेर्विएवेर की कल्लोर पकड़ के खींच लिया.

एकदम से इस हमले से इन्तेर्विएवेर की गांड hi फट गयी.

राहुल : यदि एक शब्द और बोलै न मेरी माँ के बारे में तोह तेरी hi माँ छोड़ dunga...samjha!?

इन्तेर्विएवेर की गांड तोह फट गयी थी पर उसने सोचा कॉलेज में राहुल क्या कर लेगा इसलिए हिम्मत करके उसने राहुल के हाथ दररते हुए हटाए और सिक्योरिटी को चिल्ला कर बुलवाया पर तब तक राहुल खुद hi बाहर जा चूका था.

बाहर आते hi राहुल को सृष्टि और ऋचा दिखाई दी. दोनों उठ के राहुल के करीब आयी पता करने की राहुल का सिलेक्शन हुआ या नहीं. पर राहुल का गुस्सा वाला चेहरा देख के दोनों को कुछ समझ नहीं आया और कुछ न बोल पायी.

हिम्मत करते हुए ऋचा ने पूछ hi लिया...

"राहुल क्या हुआ!? कुछ तोह बताओ..."

राहुल कुछ नहीं कहता है बस दोनों को बेस्ट ऑफ़ लक कहके निकल जाता है कॉलेज से.

रास्ते भर उसका दिमाग खराब था.

सब कुछ अच्छा चल रहा था.

पर इन्तेर्विएवेर अचानक इतना बेकार सा सवाल कैसे कर सकता है.

राहुल बस अपनी माँ निशा के बारे में सोचता हुआ घर पहुचा तोह अंशिका ने गेट खोला...

"भाई आप!? सिलेक्शन हो गया क्या!?"

अंशिका की बात को इग्नोर कर राहुल सीधा किचन में गया जहा उसकी माँ खाने की तैयारी कर रही थी.

और तुरंत जाके अपनी माँ को पीछे से गले लगा लिया.

अचानक इस हुग से निशा थोड़ी डर गयी पर जब उसने देखा की राहुल है तोह उससे थोड़ा राहत मिली पर वो थोड़ी शॉकेड भी थी...

पर ना जाने क्यों राहुल के अचानक हुग करने से निशा को बहुत अच्छा लग रहा था और वो चाह रही थी की राहुल उससे कभी न छोड़े. ऐसे hi बाहो में लिए रहे.





"बेटू!! इतनी जल्दी आ गया!? क्या हुआ!? हो गया सिलेक्शन कंपनी में!?"

र (और टाइट हुग करते हुए) : भाड़ में गयी वो कंपनी...

टाइट हुग से राहुल का लुंड निशा की गांड की दरार में धस्स रहा था जो निशा ने फील किया और उसने एक गहरी सांस ली और फौरन मुद गयी...

निशा (उसकी तरफ मुड़ते हुए) : क्या हुआ बेतु!? तू गुस्से में क्यों है? क्या हुआ? बता मुझे...

र : कुछ नहीं माँ...

निशा : अब अपनी माँ से भी चीज़े छुपाने लगा!?

र : आज आप मेरे साथ सोना, रात में सब बताऊंगा...

निशा : कोई परेशानी वाली बात तोह नहीं है न?

र : नहीं माँ, कोई परेशानी की बात नहीं है, आज आप रात में मेरे साथ सोना बस... वंशु दी नेहा के कमरे में सो जाएंगी...

निशा : ठीक है बाबा... पर सिलेक्शन का तोह कुछ बता मुझे...

र : नहीं हुआ सिलेक्शन. में आपको सब कुछ विस्तार से रात में बताऊंगा न...

अब आप और सवाल मत करिये.

निशा : अच्छा बाबा ठीक है. रात को तेरे साथ hi soungi...thik!?

फिर राहुल चेंज करने कमरे में जाता जहा वंशु राहुल के लैपटॉप पे मूवी देख रही थी. और राहुल को देख तुरंत लैपटॉप बंद कर देती है और उसके फ्रेश होने के बाद उसके साथ hi नीचे खाना खाने आ जाती है.

लंच होते hi सभी अपने रूम्स में आ जाते है. अंशिका भी राहुल के hi रूम में आ जाती है क्युकी नेहा कॉलेज में थी.

तीनो आपस में बात कर रहे थे पर अंशिका के मैं में कुछ और hi चल रहा था...

अंशिका (मैं में ) : दी और भाई के बीच ज़रूर कुछ है. उस दिन के बाद से मेने फिरसे उनको किश करते तोह नहीं देखा पर में जानती हु कुछ गड़बड़ ज़रूर है, कही उनको पता तोह नहीं चल गया की मेने उन्हें देख लिया था. भाई से hi बात करनी पड़ेगी मुझे अकेले में...

रात को सभी लोग डिनर करते है ॉयर फिर निशा राहुल के कमरे में आ जाती है और वंशु नेहा के कमरे में चली जाती है.

निशा बीएड पे बैठ जाती है, एक नेवी ब्लू कलर की निघ्त्य पहने हुई थी, जिसमे उसके दूध बड़े hi आकर्षक लग रहे थे क्युकी निशा रात में ब्रा नहीं पहनती थी.

निशा राहुल के जवाब का इंतज़ार कर रही थी पर राहुल ने तुरंत उससे गले से लगा लिया और एक किश उसके कंधे पे जड़ दिया.

निशा बेचारी हिल सी गयी उस एक किश से. राहुल तोह बस भावना में बह के माँ को गले लगाया और किश किया था क्युकी इन्तेर्विएवेर की बात से उससे बोहत गुस्सा आया था इसलिए अपनी माँ के प्रति वो प्यार दर्शा रहा था.

पर निशा तोह इससे कुछ और hi समझ रही थी. उसके हाथ अपने आप hi राहुल के पीछे बाल को सहलाने लगे...

"क्या हुआ बेतु!?"

फिर राहुल अपनी पूरी बात बताता है की आज क्या क्या हुआ और निशा को अब समझ में आता है की उसका बीटा आज इतना जज़्बाती क्यों था. पर साथ hi साथ उससे ग्लानि के भाव भी आ रहे थे की उसका बीटा कितना प्यार करता है उस से और वो यहाँ कुछ और hi सोच रही थी.

ममता और कामेक्छा के मिले जुले भाव में डूबते हुए निशा राहुल के चेहरे को पकड़ के अपने सीने में छुपा लेती है.






ब्रा न पहने होने के कारण नरम मुलायम दूध का एहसास राहुल को भी पागल कर देता है और वो बस अपना सर दूध की दरार में घुसाया रहता है और गरम गरम साँसे छोड़ता रहता है.

निशा भी उसकी सासो से पागल होक उसके माथे को चुम्बनों से भर देती है और पुचकारते हुए उससे प्यार करने लगती है.

शायद ये रात लम्बी होने वाली थी, ममता के अलावा शायद कोई और भी चीज़ थी जो निशा पर हावी हो रही थी...

क्या थी वो!?

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आज के लिए इतना hi गाइस!!
 
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