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- Dec 5, 2013
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अब तक...
कुछ स्टूडेंट्स ग्रुप बना कर निकल रहे थे, हस्सी मज़ाक करते हुए. राहुल को ये सब देख अपने कॉलेज के दिन याद आ गए. जब वो सृष्टि और ऋचा ऐसे hi साथ में कॉलेज की छुट्टी होने के बाद निकला करते थे. उसके चेहरे पर अपने आप मुस्कान आ गयी और ऋचा का चेहरा उसके मैं में आ गया.
"वो रही मिस", बगल में बैठे रजनीश ने ऊँगली दिखाते हुए स्टूडेंट्स के आ रहे झुण्ड की और पॉइंट किया जिस से राहुल का ध्यान भांग हुआ और उसने ऊँगली के डायरेक्शन का पीछा करते हुए देखा तोह पाया की...
अब आगे...
जब राहुल ने डायरेक्शन का पीछा किया तोह पाया की एक ख़ूबसूरत चेहरा, लम्बा कद, राहुल से बस थोड़ी छोटी हाइट में, और पतले स्लिम फिगर की लड़की वह से आ रही है. उस लड़की के साथ और भी कई लड़किया थी, पर राहुल को केवल एक hi नज़र में पहचान में आ गया की यही ख़ुशी है. उसके मास्टर ने बताया था की ख़ुशी बेहद ख़ूबसूरत है, अपनी माँ पे गयी है. अब क्युकी ख़ुशी की माँ चिनेसे थी तोह ख़ुशी में भी चिनेसे जैसे थोड़े बोहत फीचर्स थे. उसका दूध जैसा गोरा रंग, और काले काले लम्बे बाल.
ख़ुशी के साथ एक और लड़की थी जो भीड़ में अलग hi चमक रही थी पर वो हाइट में थोड़ी छोटी थी, दूध बड़े, क्यूट सा चेहरा, और गुलाबी गाल.
ख़ुशी उस लड़की के साथ कार की तरफ hi बढ़ रही थी की एक लम्बे बाल वाला लड़का उसकी तरफ पीछे से बढ़ा.
"ख़ुशी!!! ज़रा रुको न..." उस लड़के ने ख़ुशी का रास्ता रोकते हुए कहा, "ख़ुशी! बस एक चांस..."
ख़ुशी ने थोड़ा फ़्रस्ट्रेटेड लुक दिया उस लड़के को, "कारन! क्या तुम मेरा पीछा नहीं चोरर सकते? मेने पहले भी कहा है, ी don't लिखे यू, जाओ अब यहाँ से"
"पर ख़ुशी..." कारन अपने प्यार का इज़हार एक बार फिरसे करने वाला था की इस से पहले ख़ुशी उसके बगल से निकल गयी.
वो जल्दी जल्दी लम्बे कदमो के साथ कार के पास आयी, और बिना कोई समय गवाए सीधे कार में बैठ गयी.
राहुल को थोड़ी हैरानी हुई क्युकी ख़ुशी के साथ वाली लड़की ने भी बिलकुल ऐसा hi किया और वो भी कार में अंदर आके बैठ गयी.
"हे bh@gw@@n! ये कारन!! हमेशा मेरा पीछा करता रहता है, कोई और काम नहीं है क्या इसके पास?" ख़ुशी अभी भी गुस्से में थी पर एकदम से वो चुप्प हो गयी जब उसने कार की फ्रंट सीट पर राहुल को बैठा देखा, "तुम कोण हो?"
"Hi!! I'm राहुल!" राहुल ने थोड़ा प्यार से कहा क्युकी ख़ुशी वैसे भी खुश नहीं लग रही थी.
ख़ुशी : राहुल??? अंकल रजनीश!! ये यहाँ किस लिए है?
रजनीश : राहुल आपके एक साथी की तरह है जिससे आपके डैड ने आपके लिए रखा है मिस.
ख़ुशी : साथी? किसने कहा मुझे साथी चाहिए? मुझे तोह एक प्रोटेक्शन के लिए शील्ड चाहिए थी. और इससे देख के नहीं लगता ये कोई बेहतर प्रोटेक्शन दे पाएगा मुझे... हम्फ!
ख़ुशी थोड़ी दुविधा में थी राहुल को देखने के बाद. क्या पहना था राहुल? एक सिंपल वाइट टी शर्ट और एक जीन्स वो भी सैंडल्स के साथ? युक्क! उसकी नज़र में ये सबसे भद्दी ड्रेसिंग सेंस थी. ऐसा लग रहा था रास्ते चलते लड़के को पकड़ के ये कपडे पहना दिए है.
रजनीश ने भी अपना पसीना पोछा. राहुल मास्टर का सबसे ट्रस्टेड स्टूडेंट था, और ख़ुशी उसकी ऐसी इंसल्ट कर रही थी कही ये सुन्न के राहुल भड़क न जाए, पर उसने मैं hi मैं राहत की सास ली जब राहुल ने कोई रिएक्शन नहीं दिया.
इधर राहुल थोड़ा ावक्वार्ड फील कर रहा था. ख़ुशी वाक़ई एक रईस पारी की तरह पाली गयी है लगता. खर्र राहुल तोह घर से सिर्फ इम्पोर्टेन्ट चीज़े hi लेके आया था, फ़ालतू का सामान नहीं. इसलिए वो सिर्फ दो जोड़ी कपडे hi लाया था. उसने सोचा था की वो जब कमाएगा तोह खरीद लेगा. पर लगता है ख़ुशी को ये कुछ ख़ास पसंद नहीं आया.
रजनीश : मास्टर ने खुद कहा है मिस, राहुल बोहत hi होशियार और काबिल है. वो स्मार्ट और स्ट्रांग है. आपको प्रोटेक्ट करना तोह वो आराम से कर सकता है.
ख़ुशी : ये??? डैड ने इससे...!??
ख़ुशी के बगल में बैठी लड़की धीरे धीरे खिल खिला के हस्सन लगी.
ख़ुशी : व्हाट थे? अब तुम्हे किस बात पर हस्सी आ रही है??
प्रीती ने अपनी जीभ बहार निकाली और सॉरी कहा, और वो उत्सुक नज़रो से राहुल की और देखने लगी.
ख़ुशी : रजनीश अंकल! उसको कहिये की वो कार से उतरे, मुझे कोई और चाहिए.
रजनीश : इसमें में कुछ नहीं कर सकता मिस. आपके डैड ने hi मिस्टर राहुल को भेजा है.
इधर ख़ुशी भौचक्की सी सामने राहुल को देख रही थी. उससे विश्वाश नहीं हो रहा था की उसके डैड ने ऐसा बाँदा भेजा है. यहाँ वो सोच रही थी की कोई प्रिंस की तरह दिखने वाला लड़का आएगा पर राहुल ने उसकी पूरी इमेजिनेशन पे पानी फेर दिया. राहुल वाक़ई बोहत स्मार्ट था पर अभी जो कपडे वो पहना था उसमे शायद उसकी 20% हॅंडसमेनेस्स भी नहीं दिख पा रही थी.
ख़ुशी : अच्छा ठीक है! तुम! तुम जाओ और वो लड़के को सबक सीखा के आओ, जो मेरा पीछा कर रहा था. यदि ये कर लिया तोह में राज़ी हो जाउंगी.
राहुल : वो बाँदा??
इधर राहुल कार से उतरा और उधर कारन अपने पंटरों के साथ गप्पे लड़ा रहा था,
कारन : साला ये ख़ुशी हर बार ऐसा करती है, यदि कोई और लड़की होती तोह कब का मेरी बाहो में आ गयी होती.
लड़का 1 : कारन भाई! ये ख़ुशी कोई आम लड़की नहीं है, देखा न कैसे जैगुआर में बैठ के आती है, ज़रूर इसके पास बोहत पैसा है.
कारन : हां! मुझे थोड़ा धीरज रखना होगा...
कारन कहते कहते ृक्क गया जब उसने देखा की एक सफ़ेद टी शर्ट और जीन्स पहने बाँदा उसकी तरफ आ रहा है, वो हैरान था की वो बाँदा कितनी तीजी से उसकी तरफ आ रहा था.
राहुल ने कोई समय नहीं गवाया और बड़ी hi स्पीड के साथ उसने एक ज़ोरदार किक कारन की गांड में पेल दी.
जैसे hi कारन मुँह के बल ज़मीन पर गिरा, राहुल पलटा और वापस से कार की तरफ आने लगा.
"कोण मादरचोद है बे? हिम्मत कैसे हुई?? बचेगा नहीं ...!!!" कारन ने झुंझलाते हुए कहा, थोड़ी धुल उसके मुँह पर भी छाप गयी थी जब वो उठ के खड़ा हुआ.
लड़का 1 (ऊँगली से इशारा करते हुए) : भाई वो बाँदा था.
कारन : तोह तुमलोग यहाँ खड़े खड़े क्या कर रहे हो मादरचोदो? Jao...aur पीटो साले को
लड़का 1 : पर भाई! वो आलरेडी जा चूका है.
कारन : धत्त बहनचोद! मेने उसका चेहरा देख लिया है, बचेगा नहीं साला. कल में उसका वो हाल करूँगा की साला कभी लात चलाने के लायक नहीं रह पाएगा.
प्रीती : ख़ुशी! मुझे पहले लगा नहीं था, बूत अब लग रहा है की ये राहुल में कुछ बात तोह है. हहै! उससे कारन से भी कोई डर नहीं लगा.
प्रीती सच कहे तोह एकदम स्तब्ध थी वो सन देखने के बाद. क्युकी कारन कोई ऐसा वैसा लड़का नहीं था. कॉलेज में सभी उस से दररते थे. इसलिए प्रीती ने जब ये देखा की राहुल ने एक लात में उससे ढेर कर दिया तोह बेचारी अपना शॉक कण्ट्रोल नहीं कर पायी.
ख़ुशी : पागल है वह! हम्फ!
ख़ुशी थोड़ा इम्प्रेस्सेड तोह थी पर उसका दिमाग अभी भी राहुल को निकलवाने के चक्कर में था. वो राहुल के अगेंस्ट hi थी.
प्रीती : तुम उससे रख क्यों नहीं लेती ख़ुशी?
ख़ुशी : प्रीती! तुम किसकी साइड हो? तुमको ये राहुल पसंद आ गया है क्या?
प्रीती : धत्त!! तेरे को आ गया होगा पसंद
ख़ुशी : जब तुम्हे वो पसंद नहीं है तोह क्यों रखवाना चाहती हो उससे तुम? ताकि में अपनी बेइज़्ज़ती करवा सकू?
प्रीती : अरे यार! ज़रा सोच! वो कारन जो मर्ज़ी चाहे कॉलेज में करता है, कोई भी उससे रोकने की कोशिश नहीं करता, पर फिर अचानक से एक हिम्मतवाला लड़का आता है और उसके बट पे लात जड़ देता है हहै! अब ये रोमांचक होने वाला है. क्या तुम्हे दिखाई नहीं देता?
ख़ुशी : व्हाट?? तुमको क्या लगता है कोण है कारन? ये राहुल छोटे से शहर का लड़का होगा, कारन इसकी वाट लगा देगा.
प्रीती : ख़ुशी तू कितनी बुद्धू है. यदि तू राहुल को अपने अंडर रख लेगी, तोह भला कारन कैसे उससे हाथ लगा सकता है?
ख़ुशी : हम्म! तुम्हारी बात में दम है. ठीक है. में उससे रहने दूंगी.
यहाँ राहुल वापस कार की तरफ आके कार में जब बैठा तोह उसने ख़ुशी की और देख के पूछा,
"तोह? केसा था? में पास हुआ या नहीं?"
ख़ुशी : हम्फ! मुश्किल से!
राहुल ने स्माइल किया और वापस से अपने स्थान पर अच्छे से विराजमान हो गया. पर ख़ुशी बिलकुल भी खुश नहीं थी. वो सोच रही थी की राहुल पलट के थैंक यू कहेगा पर यहाँ तोह उसने कुछ कहा भी नहीं. सच में! ख़ुशी वाक़ई खुद को पारी समझती थी.
उसके हिसाब से राहुल को तोह खुश होना चाहिए की उससे एक जॉब मिल गयी.
ख़ुशी : हेय! तुम मुझे थैंक यू क्यों नहीं कह रहे?
राहुल : हँ? थैंक यू? पर किसलिए?
ख़ुशी (गुस्से में) : तुम....
प्रीती (हस्ते हुए) : ख़ुशी कह रही है की उसने तुम्हे अपना लिया है तोह तुम थैंक यू क्यों नहीं कह रहे?
ख़ुशी : प्रीती?? व्हाट थे हेलल? अपना लिया से तुम्हारा क्या मतलब है?
प्रीती : ी मैं तुमने एक्सेप्ट कर लिया है.
राहुल : ओह्ह!! थैंक्स!!
खर्र! कार चलते चलते ख़ुशी के घर से 2 घर पहले hi ृक्क गयी और प्रीती कार से बाहर उतर गयी,
प्रीती : वेल! कल मिलते है ख़ुशी! और...
राहुल बॉय!!! हहै!!
कहते हुए वो फुदकते हुए चली गयी अपने अपार्टमेंट में, उसका घर सिर्फ 2 घर चोरर के hi था ख़ुशी के घर से. इधर राहुल और ख़ुशी भी ख़ुशी के घर में आ गए.
तब तक आइये चलते है राहुल के घर की तरफ और वह का हाल भी देख लेते है,
घर में निशा अपने कमरे में लेती हुई थी और बार बार अपने बेतु को याद कर रही थी.
जाने से पहले राहुल और उसके बीच हुई बातें उससे याद आ रही थी.
निशा : बेतु! आज तू चला जाएगा फिर मेरा क्या होगा? तूने ज़रा भी नहीं सोचा मेरे बारे में? की तेरे जाने के बाद में कैसे रहूंगी?
राहुल (पीछे से हुग करते हुए) : माँ!! ये आप क्या कह रही हो? एक न एक दिन तोह मुझे बहार जाना hi पड़ेगा न? क्या आप नहीं चाहती की में बड़ा आदमी बनु?
निशा : ऐसी कोण सी माँ होगी मेरे लाल जो अपने बच्चे का हिट नहीं चाहेगी? में तोह चाहती हु की तू दुनिया का सबसे कामयाब व्यक्ति बने.
राहुल : तोह क्या घर में बैठे बैठे व्यक्ति कामयाब बन्न जाता है माँ?
निशा : नहीं! पर...
राहुल : इधर देखिये माँ!
राहुल ने निशा के कंधो पर हाथ रखकर उससे पलटाया और उसकी आँखों में देखते हुए कहा,
राहुल : माँ! में भी आपके बिना नहीं रह सकता. पर में कोनसा हमेशा हमेशा के लिए थोड़ी न जा रहा हु. बीच बीच में आपसे मिलने आता रहूँगा. और जब में सक्सेसफुल हो जाऊंगा तोह आप सभी को लेके वही पर रखूँगा और हम सब साथ में रहेंगे.
निशा : मुझे तेरे ऊपर पूरा भरोसा है बेतु पर ये माँ का दिल नहीं मानता. तेरी फ़िक़र लगी रहेगी मुझे, तू क्या खाएगा, कहा रहेगा, ये सब बातें मुझे परेशां कर देती है.
राहुल : माँ! आपकी टेंशन अभी दूर कर देता हु, मेरे खाने और रहने का इंतज़ाम सब हो चूका है. मेरे एक दोस्त ने करवा दिया है. अब तब मुस्कुराइए.
निशा : ........
तभी राहुल निशा की चीन पकड़कर उसका मुँह उपाए करता है और प्यार से उसके होंठ चूम लेता है, बदले में निशा भी अपनी आँखें बंद कर लेती है और अपने बेतु के होंठो को महसूस करने लगती है, क्या पता वापस से ये एहसास उससे कब मिले?
राहुल (नॉटी वे में) : माँ! आज आप दूध नहीं पिलाओगी?
निशा : धत्त्त! पागल कही का. बहार सभी लोग मौजूद है.
राहुल : वाह! उस रात तोह आपने सब लोगो के मौजूद होने के बावजूद मेरे ऊपर धावा बोल दिया था और आज इतनी शर्म? हां?
निशा (ब्लश) : वो तोह mein...mein...hattt पागल!
राहुल : हहै! कोई नहीं आएगा माँ! दूर तोह अंदर से लॉक्ड है.
निशा (मैं में) : मुझे पता है कोई नहीं आएगा बेतु, क्युकी अंशु जो सबको बातो में लगा के राखी है. आज वाक़ई उसकी मदद मेरे काम में आ रही है.
निशा : अच्छा ठीक है. आ जा बीएड पर.
निशा राहुल को अपनी गॉड में लिटा के अपना ब्लाउज खोलती है और ऊपर कर के दोनों दूध जैसे गोर दूध राहुल के मुँह के सामने कर देती है, आज के बाद दोनों को कब हे मौका मिले क्या पता?
निशा : आज मुझे तृप्त कर दे बेतु. खूब पी इन्हे! इनका कचूमड़ बना दे. निचोड़ दे इन्हे. ताकि तेरी gerr-haziri में ये मुझे परेशां न करे ....आह्हः बेतु... में तेरे बिना नहीं रह पाऊँगी मेरे laal...aaaahhhhh.
राहुल भेड़िये की तरह दूधो पे टूट पड़ा और आज तोह वो उन्हें चूस नहीं रहा था बल्कि खा रहा था, जी हां! वो दातो से दबाता, हाथो से निचोड़ता और पूरा दूध अपने मुँह में भर लेता, खा खा के निशा के दूध भयंकर लाल कर दिए थे राहुल ने.
निशा ने बात को और समय की पाबन्दी को समझते हुए फौरन अपनी साड़ी उतार दी और अपनी पंतय खोल के टांग फैला के छूट खोलकर बैठ गयी.
निशा : बेतु!! आजा! मुझमे समां जा... आज तेरे बदन को में पूरी तरह से महसूस करना चाहती हु, तेरी खुशबू को अपने अंदर बिखेरना चाहती hu...aaja मेरे लाल
राहुल ने फौरन शर्ट उतारी और निशा के ऊपर चढ़ के वो उससे ज़ोरदार किस्सेस करने लगाएर दूध निचोड़ने लगा पर इस से पहले की वो आगे बढ़ता, दरवाज़े की खत खत ने सारा गेम चौपट कर दिया.
पता चला की वंशु थी और राहुल के साथ आखिरी दिन समय बिताना चाह रही थी, बदले में अंशु ने निशा से माफ़ी मांगी की वो वंशु को ज़्यादा देरर बातो में नहीं लगा पायी.
निशा और राहुल के बीच का ये अधूरा मिलान दोनों के लिए अत्यंत पीड़ा दायक था. बदले में राहुल ने निशा से वादा किया था की वो निशा को एक बोहत बड़ा सरप्राइज देगा उनके इस अधूरे मिलान के लिए.
खर्र! इन्ही बातो को याद कर निशा अपनी पीड़ा तोह न रोक सकीय लेकिन अपने बेतु के लिए वो कामना ज़रूर करती की उससे जल्द से जल्द कामयाबी मिले और उसका चेहरा वो जल्द से जल्द देख सके. अपना ध्यान हटाने के लिए निशा उठ के किचन में चली गयी.
ऊपर नेहा अपने कमरे में लेते हुए सीलिंग को देख रही थी और उसी दिन की बात उससे भी याद आ रही थी. उसके चलते उस दिन उसने राहुल के जाने के बाद पार्टी भी नहीं की क्युकी वो पूरी तरह से हिल जो चुकी थी.
बार बार वही सन उसकी आँखों के सामने मंडरा रहा था,
उसने जब अपनी आँखें बंद करि तोह एक बार फिरसे वही सन आ गया,
कैसे उसके माँ डैड राहुल से हुग करने के लिए फाॅर्स कर रहे थे, कैसे वो ना चाहते हुए मजबूरन आगे बढ़ी, कैसे उसने अपने हाथ आगे किये, पर अचानक राहुल ने उसका कन्धा पकड़ा, एक हाथ उसके गुलाबी गाल पर रखा, और आगे बढ़ के राहुल उसके कान की तरफ झुका और कहा,
"अभी नहीं गुड़िया! अब कभी नहीं..."
अचानक नेहा की आँखें एकदम से खुल गयी, और वापस से उसकी धड़कन तेज़्ज़ हो गयी. यह वाकया राहुल हमेशा उस से कहता था जब भी नेहा अपने मैं के विरोध कोई काम करती थी. उस दिन भी नेहा बेमानन से राहुल को हुग कर रही थी और राहुल ने यही वाकया उसके कान में कहा था. नेहा इससे भुलाने की भरपूर कोशिश कर रही थी पर भुला नहीं पा रही थी. उसका दिमाग यही कह रहा था की राहुल ने ये सब उससे चिढ़ाने के लिए, और उससे तंग करने के लिए कहा था पर उसका दिल किसी और तरफ इशारा कर रहा था जिससे वो जान नहीं पा रही थी.
क्या मतलब था उस वाकया का? (अपडेट 52 की स्टार्टिंग आप पढ़ सकते है, ये वाकया कहानी में पहले भी इस्तेमाल हुआ है पर इस बार इसका अर्थ थोड़ा अलग था)
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आज के लिए इतना hi गाइस!
धन्यवाद्!
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कुछ स्टूडेंट्स ग्रुप बना कर निकल रहे थे, हस्सी मज़ाक करते हुए. राहुल को ये सब देख अपने कॉलेज के दिन याद आ गए. जब वो सृष्टि और ऋचा ऐसे hi साथ में कॉलेज की छुट्टी होने के बाद निकला करते थे. उसके चेहरे पर अपने आप मुस्कान आ गयी और ऋचा का चेहरा उसके मैं में आ गया.
"वो रही मिस", बगल में बैठे रजनीश ने ऊँगली दिखाते हुए स्टूडेंट्स के आ रहे झुण्ड की और पॉइंट किया जिस से राहुल का ध्यान भांग हुआ और उसने ऊँगली के डायरेक्शन का पीछा करते हुए देखा तोह पाया की...
अब आगे...
जब राहुल ने डायरेक्शन का पीछा किया तोह पाया की एक ख़ूबसूरत चेहरा, लम्बा कद, राहुल से बस थोड़ी छोटी हाइट में, और पतले स्लिम फिगर की लड़की वह से आ रही है. उस लड़की के साथ और भी कई लड़किया थी, पर राहुल को केवल एक hi नज़र में पहचान में आ गया की यही ख़ुशी है. उसके मास्टर ने बताया था की ख़ुशी बेहद ख़ूबसूरत है, अपनी माँ पे गयी है. अब क्युकी ख़ुशी की माँ चिनेसे थी तोह ख़ुशी में भी चिनेसे जैसे थोड़े बोहत फीचर्स थे. उसका दूध जैसा गोरा रंग, और काले काले लम्बे बाल.
ख़ुशी के साथ एक और लड़की थी जो भीड़ में अलग hi चमक रही थी पर वो हाइट में थोड़ी छोटी थी, दूध बड़े, क्यूट सा चेहरा, और गुलाबी गाल.
ख़ुशी उस लड़की के साथ कार की तरफ hi बढ़ रही थी की एक लम्बे बाल वाला लड़का उसकी तरफ पीछे से बढ़ा.
"ख़ुशी!!! ज़रा रुको न..." उस लड़के ने ख़ुशी का रास्ता रोकते हुए कहा, "ख़ुशी! बस एक चांस..."
ख़ुशी ने थोड़ा फ़्रस्ट्रेटेड लुक दिया उस लड़के को, "कारन! क्या तुम मेरा पीछा नहीं चोरर सकते? मेने पहले भी कहा है, ी don't लिखे यू, जाओ अब यहाँ से"
"पर ख़ुशी..." कारन अपने प्यार का इज़हार एक बार फिरसे करने वाला था की इस से पहले ख़ुशी उसके बगल से निकल गयी.
वो जल्दी जल्दी लम्बे कदमो के साथ कार के पास आयी, और बिना कोई समय गवाए सीधे कार में बैठ गयी.
राहुल को थोड़ी हैरानी हुई क्युकी ख़ुशी के साथ वाली लड़की ने भी बिलकुल ऐसा hi किया और वो भी कार में अंदर आके बैठ गयी.
"हे bh@gw@@n! ये कारन!! हमेशा मेरा पीछा करता रहता है, कोई और काम नहीं है क्या इसके पास?" ख़ुशी अभी भी गुस्से में थी पर एकदम से वो चुप्प हो गयी जब उसने कार की फ्रंट सीट पर राहुल को बैठा देखा, "तुम कोण हो?"
"Hi!! I'm राहुल!" राहुल ने थोड़ा प्यार से कहा क्युकी ख़ुशी वैसे भी खुश नहीं लग रही थी.
ख़ुशी : राहुल??? अंकल रजनीश!! ये यहाँ किस लिए है?
रजनीश : राहुल आपके एक साथी की तरह है जिससे आपके डैड ने आपके लिए रखा है मिस.
ख़ुशी : साथी? किसने कहा मुझे साथी चाहिए? मुझे तोह एक प्रोटेक्शन के लिए शील्ड चाहिए थी. और इससे देख के नहीं लगता ये कोई बेहतर प्रोटेक्शन दे पाएगा मुझे... हम्फ!
ख़ुशी थोड़ी दुविधा में थी राहुल को देखने के बाद. क्या पहना था राहुल? एक सिंपल वाइट टी शर्ट और एक जीन्स वो भी सैंडल्स के साथ? युक्क! उसकी नज़र में ये सबसे भद्दी ड्रेसिंग सेंस थी. ऐसा लग रहा था रास्ते चलते लड़के को पकड़ के ये कपडे पहना दिए है.
रजनीश ने भी अपना पसीना पोछा. राहुल मास्टर का सबसे ट्रस्टेड स्टूडेंट था, और ख़ुशी उसकी ऐसी इंसल्ट कर रही थी कही ये सुन्न के राहुल भड़क न जाए, पर उसने मैं hi मैं राहत की सास ली जब राहुल ने कोई रिएक्शन नहीं दिया.
इधर राहुल थोड़ा ावक्वार्ड फील कर रहा था. ख़ुशी वाक़ई एक रईस पारी की तरह पाली गयी है लगता. खर्र राहुल तोह घर से सिर्फ इम्पोर्टेन्ट चीज़े hi लेके आया था, फ़ालतू का सामान नहीं. इसलिए वो सिर्फ दो जोड़ी कपडे hi लाया था. उसने सोचा था की वो जब कमाएगा तोह खरीद लेगा. पर लगता है ख़ुशी को ये कुछ ख़ास पसंद नहीं आया.
रजनीश : मास्टर ने खुद कहा है मिस, राहुल बोहत hi होशियार और काबिल है. वो स्मार्ट और स्ट्रांग है. आपको प्रोटेक्ट करना तोह वो आराम से कर सकता है.
ख़ुशी : ये??? डैड ने इससे...!??
ख़ुशी के बगल में बैठी लड़की धीरे धीरे खिल खिला के हस्सन लगी.
ख़ुशी : व्हाट थे? अब तुम्हे किस बात पर हस्सी आ रही है??
प्रीती ने अपनी जीभ बहार निकाली और सॉरी कहा, और वो उत्सुक नज़रो से राहुल की और देखने लगी.
ख़ुशी : रजनीश अंकल! उसको कहिये की वो कार से उतरे, मुझे कोई और चाहिए.
रजनीश : इसमें में कुछ नहीं कर सकता मिस. आपके डैड ने hi मिस्टर राहुल को भेजा है.
इधर ख़ुशी भौचक्की सी सामने राहुल को देख रही थी. उससे विश्वाश नहीं हो रहा था की उसके डैड ने ऐसा बाँदा भेजा है. यहाँ वो सोच रही थी की कोई प्रिंस की तरह दिखने वाला लड़का आएगा पर राहुल ने उसकी पूरी इमेजिनेशन पे पानी फेर दिया. राहुल वाक़ई बोहत स्मार्ट था पर अभी जो कपडे वो पहना था उसमे शायद उसकी 20% हॅंडसमेनेस्स भी नहीं दिख पा रही थी.
ख़ुशी : अच्छा ठीक है! तुम! तुम जाओ और वो लड़के को सबक सीखा के आओ, जो मेरा पीछा कर रहा था. यदि ये कर लिया तोह में राज़ी हो जाउंगी.
राहुल : वो बाँदा??
इधर राहुल कार से उतरा और उधर कारन अपने पंटरों के साथ गप्पे लड़ा रहा था,
कारन : साला ये ख़ुशी हर बार ऐसा करती है, यदि कोई और लड़की होती तोह कब का मेरी बाहो में आ गयी होती.
लड़का 1 : कारन भाई! ये ख़ुशी कोई आम लड़की नहीं है, देखा न कैसे जैगुआर में बैठ के आती है, ज़रूर इसके पास बोहत पैसा है.
कारन : हां! मुझे थोड़ा धीरज रखना होगा...
कारन कहते कहते ृक्क गया जब उसने देखा की एक सफ़ेद टी शर्ट और जीन्स पहने बाँदा उसकी तरफ आ रहा है, वो हैरान था की वो बाँदा कितनी तीजी से उसकी तरफ आ रहा था.
राहुल ने कोई समय नहीं गवाया और बड़ी hi स्पीड के साथ उसने एक ज़ोरदार किक कारन की गांड में पेल दी.
जैसे hi कारन मुँह के बल ज़मीन पर गिरा, राहुल पलटा और वापस से कार की तरफ आने लगा.
"कोण मादरचोद है बे? हिम्मत कैसे हुई?? बचेगा नहीं ...!!!" कारन ने झुंझलाते हुए कहा, थोड़ी धुल उसके मुँह पर भी छाप गयी थी जब वो उठ के खड़ा हुआ.
लड़का 1 (ऊँगली से इशारा करते हुए) : भाई वो बाँदा था.
कारन : तोह तुमलोग यहाँ खड़े खड़े क्या कर रहे हो मादरचोदो? Jao...aur पीटो साले को
लड़का 1 : पर भाई! वो आलरेडी जा चूका है.
कारन : धत्त बहनचोद! मेने उसका चेहरा देख लिया है, बचेगा नहीं साला. कल में उसका वो हाल करूँगा की साला कभी लात चलाने के लायक नहीं रह पाएगा.
प्रीती : ख़ुशी! मुझे पहले लगा नहीं था, बूत अब लग रहा है की ये राहुल में कुछ बात तोह है. हहै! उससे कारन से भी कोई डर नहीं लगा.
प्रीती सच कहे तोह एकदम स्तब्ध थी वो सन देखने के बाद. क्युकी कारन कोई ऐसा वैसा लड़का नहीं था. कॉलेज में सभी उस से दररते थे. इसलिए प्रीती ने जब ये देखा की राहुल ने एक लात में उससे ढेर कर दिया तोह बेचारी अपना शॉक कण्ट्रोल नहीं कर पायी.
ख़ुशी : पागल है वह! हम्फ!
ख़ुशी थोड़ा इम्प्रेस्सेड तोह थी पर उसका दिमाग अभी भी राहुल को निकलवाने के चक्कर में था. वो राहुल के अगेंस्ट hi थी.
प्रीती : तुम उससे रख क्यों नहीं लेती ख़ुशी?
ख़ुशी : प्रीती! तुम किसकी साइड हो? तुमको ये राहुल पसंद आ गया है क्या?
प्रीती : धत्त!! तेरे को आ गया होगा पसंद
ख़ुशी : जब तुम्हे वो पसंद नहीं है तोह क्यों रखवाना चाहती हो उससे तुम? ताकि में अपनी बेइज़्ज़ती करवा सकू?
प्रीती : अरे यार! ज़रा सोच! वो कारन जो मर्ज़ी चाहे कॉलेज में करता है, कोई भी उससे रोकने की कोशिश नहीं करता, पर फिर अचानक से एक हिम्मतवाला लड़का आता है और उसके बट पे लात जड़ देता है हहै! अब ये रोमांचक होने वाला है. क्या तुम्हे दिखाई नहीं देता?
ख़ुशी : व्हाट?? तुमको क्या लगता है कोण है कारन? ये राहुल छोटे से शहर का लड़का होगा, कारन इसकी वाट लगा देगा.
प्रीती : ख़ुशी तू कितनी बुद्धू है. यदि तू राहुल को अपने अंडर रख लेगी, तोह भला कारन कैसे उससे हाथ लगा सकता है?
ख़ुशी : हम्म! तुम्हारी बात में दम है. ठीक है. में उससे रहने दूंगी.
यहाँ राहुल वापस कार की तरफ आके कार में जब बैठा तोह उसने ख़ुशी की और देख के पूछा,
"तोह? केसा था? में पास हुआ या नहीं?"
ख़ुशी : हम्फ! मुश्किल से!
राहुल ने स्माइल किया और वापस से अपने स्थान पर अच्छे से विराजमान हो गया. पर ख़ुशी बिलकुल भी खुश नहीं थी. वो सोच रही थी की राहुल पलट के थैंक यू कहेगा पर यहाँ तोह उसने कुछ कहा भी नहीं. सच में! ख़ुशी वाक़ई खुद को पारी समझती थी.
उसके हिसाब से राहुल को तोह खुश होना चाहिए की उससे एक जॉब मिल गयी.
ख़ुशी : हेय! तुम मुझे थैंक यू क्यों नहीं कह रहे?
राहुल : हँ? थैंक यू? पर किसलिए?
ख़ुशी (गुस्से में) : तुम....
प्रीती (हस्ते हुए) : ख़ुशी कह रही है की उसने तुम्हे अपना लिया है तोह तुम थैंक यू क्यों नहीं कह रहे?
ख़ुशी : प्रीती?? व्हाट थे हेलल? अपना लिया से तुम्हारा क्या मतलब है?
प्रीती : ी मैं तुमने एक्सेप्ट कर लिया है.
राहुल : ओह्ह!! थैंक्स!!
खर्र! कार चलते चलते ख़ुशी के घर से 2 घर पहले hi ृक्क गयी और प्रीती कार से बाहर उतर गयी,
प्रीती : वेल! कल मिलते है ख़ुशी! और...
राहुल बॉय!!! हहै!!
कहते हुए वो फुदकते हुए चली गयी अपने अपार्टमेंट में, उसका घर सिर्फ 2 घर चोरर के hi था ख़ुशी के घर से. इधर राहुल और ख़ुशी भी ख़ुशी के घर में आ गए.
तब तक आइये चलते है राहुल के घर की तरफ और वह का हाल भी देख लेते है,
घर में निशा अपने कमरे में लेती हुई थी और बार बार अपने बेतु को याद कर रही थी.
जाने से पहले राहुल और उसके बीच हुई बातें उससे याद आ रही थी.
निशा : बेतु! आज तू चला जाएगा फिर मेरा क्या होगा? तूने ज़रा भी नहीं सोचा मेरे बारे में? की तेरे जाने के बाद में कैसे रहूंगी?
राहुल (पीछे से हुग करते हुए) : माँ!! ये आप क्या कह रही हो? एक न एक दिन तोह मुझे बहार जाना hi पड़ेगा न? क्या आप नहीं चाहती की में बड़ा आदमी बनु?
निशा : ऐसी कोण सी माँ होगी मेरे लाल जो अपने बच्चे का हिट नहीं चाहेगी? में तोह चाहती हु की तू दुनिया का सबसे कामयाब व्यक्ति बने.
राहुल : तोह क्या घर में बैठे बैठे व्यक्ति कामयाब बन्न जाता है माँ?
निशा : नहीं! पर...
राहुल : इधर देखिये माँ!
राहुल ने निशा के कंधो पर हाथ रखकर उससे पलटाया और उसकी आँखों में देखते हुए कहा,
राहुल : माँ! में भी आपके बिना नहीं रह सकता. पर में कोनसा हमेशा हमेशा के लिए थोड़ी न जा रहा हु. बीच बीच में आपसे मिलने आता रहूँगा. और जब में सक्सेसफुल हो जाऊंगा तोह आप सभी को लेके वही पर रखूँगा और हम सब साथ में रहेंगे.
निशा : मुझे तेरे ऊपर पूरा भरोसा है बेतु पर ये माँ का दिल नहीं मानता. तेरी फ़िक़र लगी रहेगी मुझे, तू क्या खाएगा, कहा रहेगा, ये सब बातें मुझे परेशां कर देती है.
राहुल : माँ! आपकी टेंशन अभी दूर कर देता हु, मेरे खाने और रहने का इंतज़ाम सब हो चूका है. मेरे एक दोस्त ने करवा दिया है. अब तब मुस्कुराइए.
निशा : ........
तभी राहुल निशा की चीन पकड़कर उसका मुँह उपाए करता है और प्यार से उसके होंठ चूम लेता है, बदले में निशा भी अपनी आँखें बंद कर लेती है और अपने बेतु के होंठो को महसूस करने लगती है, क्या पता वापस से ये एहसास उससे कब मिले?
राहुल (नॉटी वे में) : माँ! आज आप दूध नहीं पिलाओगी?
निशा : धत्त्त! पागल कही का. बहार सभी लोग मौजूद है.
राहुल : वाह! उस रात तोह आपने सब लोगो के मौजूद होने के बावजूद मेरे ऊपर धावा बोल दिया था और आज इतनी शर्म? हां?
निशा (ब्लश) : वो तोह mein...mein...hattt पागल!
राहुल : हहै! कोई नहीं आएगा माँ! दूर तोह अंदर से लॉक्ड है.
निशा (मैं में) : मुझे पता है कोई नहीं आएगा बेतु, क्युकी अंशु जो सबको बातो में लगा के राखी है. आज वाक़ई उसकी मदद मेरे काम में आ रही है.
निशा : अच्छा ठीक है. आ जा बीएड पर.
निशा राहुल को अपनी गॉड में लिटा के अपना ब्लाउज खोलती है और ऊपर कर के दोनों दूध जैसे गोर दूध राहुल के मुँह के सामने कर देती है, आज के बाद दोनों को कब हे मौका मिले क्या पता?
निशा : आज मुझे तृप्त कर दे बेतु. खूब पी इन्हे! इनका कचूमड़ बना दे. निचोड़ दे इन्हे. ताकि तेरी gerr-haziri में ये मुझे परेशां न करे ....आह्हः बेतु... में तेरे बिना नहीं रह पाऊँगी मेरे laal...aaaahhhhh.
राहुल भेड़िये की तरह दूधो पे टूट पड़ा और आज तोह वो उन्हें चूस नहीं रहा था बल्कि खा रहा था, जी हां! वो दातो से दबाता, हाथो से निचोड़ता और पूरा दूध अपने मुँह में भर लेता, खा खा के निशा के दूध भयंकर लाल कर दिए थे राहुल ने.
निशा ने बात को और समय की पाबन्दी को समझते हुए फौरन अपनी साड़ी उतार दी और अपनी पंतय खोल के टांग फैला के छूट खोलकर बैठ गयी.
निशा : बेतु!! आजा! मुझमे समां जा... आज तेरे बदन को में पूरी तरह से महसूस करना चाहती हु, तेरी खुशबू को अपने अंदर बिखेरना चाहती hu...aaja मेरे लाल
राहुल ने फौरन शर्ट उतारी और निशा के ऊपर चढ़ के वो उससे ज़ोरदार किस्सेस करने लगाएर दूध निचोड़ने लगा पर इस से पहले की वो आगे बढ़ता, दरवाज़े की खत खत ने सारा गेम चौपट कर दिया.
पता चला की वंशु थी और राहुल के साथ आखिरी दिन समय बिताना चाह रही थी, बदले में अंशु ने निशा से माफ़ी मांगी की वो वंशु को ज़्यादा देरर बातो में नहीं लगा पायी.
निशा और राहुल के बीच का ये अधूरा मिलान दोनों के लिए अत्यंत पीड़ा दायक था. बदले में राहुल ने निशा से वादा किया था की वो निशा को एक बोहत बड़ा सरप्राइज देगा उनके इस अधूरे मिलान के लिए.
खर्र! इन्ही बातो को याद कर निशा अपनी पीड़ा तोह न रोक सकीय लेकिन अपने बेतु के लिए वो कामना ज़रूर करती की उससे जल्द से जल्द कामयाबी मिले और उसका चेहरा वो जल्द से जल्द देख सके. अपना ध्यान हटाने के लिए निशा उठ के किचन में चली गयी.
ऊपर नेहा अपने कमरे में लेते हुए सीलिंग को देख रही थी और उसी दिन की बात उससे भी याद आ रही थी. उसके चलते उस दिन उसने राहुल के जाने के बाद पार्टी भी नहीं की क्युकी वो पूरी तरह से हिल जो चुकी थी.
बार बार वही सन उसकी आँखों के सामने मंडरा रहा था,
उसने जब अपनी आँखें बंद करि तोह एक बार फिरसे वही सन आ गया,
कैसे उसके माँ डैड राहुल से हुग करने के लिए फाॅर्स कर रहे थे, कैसे वो ना चाहते हुए मजबूरन आगे बढ़ी, कैसे उसने अपने हाथ आगे किये, पर अचानक राहुल ने उसका कन्धा पकड़ा, एक हाथ उसके गुलाबी गाल पर रखा, और आगे बढ़ के राहुल उसके कान की तरफ झुका और कहा,
"अभी नहीं गुड़िया! अब कभी नहीं..."
अचानक नेहा की आँखें एकदम से खुल गयी, और वापस से उसकी धड़कन तेज़्ज़ हो गयी. यह वाकया राहुल हमेशा उस से कहता था जब भी नेहा अपने मैं के विरोध कोई काम करती थी. उस दिन भी नेहा बेमानन से राहुल को हुग कर रही थी और राहुल ने यही वाकया उसके कान में कहा था. नेहा इससे भुलाने की भरपूर कोशिश कर रही थी पर भुला नहीं पा रही थी. उसका दिमाग यही कह रहा था की राहुल ने ये सब उससे चिढ़ाने के लिए, और उससे तंग करने के लिए कहा था पर उसका दिल किसी और तरफ इशारा कर रहा था जिससे वो जान नहीं पा रही थी.
क्या मतलब था उस वाकया का? (अपडेट 52 की स्टार्टिंग आप पढ़ सकते है, ये वाकया कहानी में पहले भी इस्तेमाल हुआ है पर इस बार इसका अर्थ थोड़ा अलग था)
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आज के लिए इतना hi गाइस!
धन्यवाद्!
