इन्सेस्ट आखिर क्यों? फ्रॉम हैट्रेड तो लव (कम्प्लेटेड) - Page 16 - SexBaba
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इन्सेस्ट आखिर क्यों? फ्रॉम हैट्रेड तो लव (कम्प्लेटेड)

अपडेट - 80



अब तक...

कुछ hi देरर बाद राहुल इतनी जोरर से झरा और इतनी देरर तक झाड़ा की एक बार फिर तानिया की आँखें पलट गयी और राहुल वही उसके ऊपर hi हफ्ते हुए लेत गया और दोनों कुछ hi देरर में नींद की वादियों में चले गए.

अब आगे...

सुबह जब राहुल की नींद खुली तोह उससे अपने नीचे कुछ नरम नरम सा एहसास हुआ और माथे पर भी नरम और एक गीला सा एहसास उससे हुआ. जब उसने अपनी आँखें खोल के देखा तोह पाया की तानिया पूरी नग्न उसके नीचे लेती हुई थी और उसके माथे को चूम रही थी.

हलकी लाली उसके चेहरे पर बिखर गयी और उसने फौरन उठते hi अपने कपडे ढूंढ़ते हुए अपनी शर्ट पहनी. तानिया मुस्कुराते हुए बड़े hi प्यार से राहुल को देख रही थी और उसकी इस हरकत पर मंद मंद मुस्कुरा रही थी.

राहुल ने कपडे पहन ने के बाद तानिया के भी कपडे उससे उठा के दिए, तानिया कल की नाईट के बाद से काफी बोल्ड हो गयी थी, उससे नंगे होकर राहुल के सामने बैठने पर एक अलग hi नशा सा चढ़ रहा था. वो पहले की तरह उतना नहीं झिजक रही थी अब.

राहुल (ब्लश) : तानिया कपडे पहन लो

तानिया : उस से पहले मुझे कुछ पूछना है.

राहुल : क्या?

तानिया : यू लव में राइट?

राहुल : ऑफ़ कोर्स!!

तानिया : लिखे ा लवर राइट?

राहुल : हम्म्म हम्म्म्म!!

राहुल के मानते hi एक चौड़ी सी मुस्कराहट तानिया के होंठो में बिखर जाती है.

वो राहुल के हाथो से कपडे लेती है और उसकी आँखों में आँखें डालके पहन ने लगती है.

राहुल बेचारा शर्म के मारे आँख hi नहीं मिला पा रहा था. पहला कारण था तानिया की खूबसूरती. उसका वस्त्रहीन जिस्म इतना मनमोहक था की राहुल का मैं अभी उससे पटक के छोड़ने का कर रहा था. दूसरा कारण था तानिया उसकी कजिन बहिन थी और राहुल ने उसके साथ सेक्स किया और तोह और अपना पानी भी उसके अंदर hi गिरा दिया. क्या अब वो पहले की तरह भाई बहिन रह पाएंगे? या नहीं? वैसे तोह अंशु और वंशु के साथ भी वो ये कर चूका है पर अंशु और वंशु अभी भी उससे लवर के साथ साथ कौसिन्स की फीलिंग्स देती है.

तानिया : यही सोच रहे हो की अब हमारा रिलेशन क्या रहेगा?

तानिया के एकदम से ये प्रश्न उजागर करते hi राहुल थोड़ा चौंक जाता है और उससे देखने लगता है और धीरे से सर हां में हिला देता है.

तानिया को एक बार फिरसे राहुल पे बड़ा hi प्यार आता है. कितना भोला लग रहा था अभी उसका भाई. एक साल बड़े होने के नाते आज पहली बार तानिया को इस बात पर अच्छा लग रहा था की वो राहुल से एक साल बड़ी है और अपने छोटे भाई को दुविधा में देख वो उससे एक बड़ी बहिन की तरह समझाएगी, ये बात उससे बड़ा hi प्रफुल्लित कर रही थी.

तानिया : ज़्यादा मत सोच चपडगंजु! में सीधा क्लियर कट तुझे समझाती हु.

राहुल भी अपने कान खोल के सुन्न ने के लिए रेडी हो गया की आखिर तानिया का फाइनल डिसिशन क्या है?

तानिया उसके पास आयी, उसके ऊपर बैठी, उसका चेहरा अपने हाथो में ली और फिर बोली,

तानिया : अब से हम लवर्स है. मुझे सिर्फ तुम चाहिए. मुझे कोई परवाह नहीं है की हम कौसिन्स है. मेने तुम से प्यार किया, तुमने मुझसे बस उस से ज़्यादा मुझे कुछ नहीं सुन्न न. ी ओनली नीड यू!! भाड़ में जाए समाज और लोगो की सोच. मुझे सिर्फ तुम चाहिए.

राहुल : और... और घरवालों का क्या? क्या कहोगी उनसे?

तानिया : कह दूंगी की मुझे शादी नहीं करना और तुम तोह हो न? तुम अपना बिज़नेस जब बढ़ा लोगे तोह मुझे अपने पास बुला लेना. में फिर हमेशा के लिए वही तुम्हारे साथ रहूंगी. हम शादी कर लेंगे, हमारे बच्चे होंगे...

तानिया : तुम?? तुम शादी तोह करोगे न मुझसे?

राहुल को इसका जवाब अभी अंशु और वंशु भी पूछती तोह उससे नहीं पता था इसका जवाब.

क्युकी उसने तोह ऋचा और तनीषा को वादा दिया हुआ था शादी का. भले hi ऋचा और तनीषा तानिया की शादी के लिए मान जाए पर क्या तानिया राहुल को किसी और के साथ देख कर राज़ी हो सकती है? जवाब था नहीं! इतना राहुल को पता था. तानिया वंशु की तरह hi पोस्सेस्सिवे थी राहुल के लिए पर वंशु की तरह सीढ़ी नहीं थी. वंशु जहा समझाने बुझाने पर मान गयी पर तानिया का कुछ नहीं कह सकते थे.

तानिया वैसे hi बड़ी गुस्से वाली थी. उससे समझाना बोहत मुश्किल था. अब राहुल को आभास हो गया था की वो बोहत बड़ी दुविधा में फस्स चूका है. एक तरफ खायी है तोह दूसरे तरफ कुआ. जाए तोह जाए कहा?

इस से पहले की राहुल जवाब देता, दरवाज़े की खत खत ने दोनों को होश में लाया, जब राहुल ने खून से सनी बेडशीट देखि तोह जल्दी से हड़बड़ा के उसने बेडशीट उठायी और चेंज की और तानिया को गेट खोलने बोलै.

गेट खोलते hi देखा तोह बाहर अंशु और वंशु कड़ी हुई थी.

तानिया : आप दोनों?

अंशु : हेहेहे! Hello... चलिए ब्रेकफास्ट के लिए...

तानिया : उह्ह्ह हआ!

तानिया थोड़ा लड़खड़ाते हुए चल रही थी तोह अंशु की आँखों में एकदम से चमक आ गयी ये देखते हुए, उसने रात में भी दबे पाँव आकर जासूसी करने की सोची थी और उससे कुछ आवाज़ें सुनाई दी थी और अब ये तानिया का लड़खड़ा के चलना, एक hi बात को इशारा कर रहा था की तानिया और राहुल के बीच सेक्स हुआ है.

उससे अंदाजा होते hi उसने ऐसा कुछ बोल दिया जो शायद उससे नहीं बोलना चाहिए था,

अंशु (ख़ुशी से) : तानिया दीदी!? आपने भी भाई के साथ सेक्स कर लिया??

वो अभी खुश इतनी थी की उसने क्या बक दिया उससे होश hi नहीं था. ख़ुशी इस बात की थी की न केवल वंशु बल्कि अब साथ में तानिया भी शामिल हो गयी उसकी बहिन मंडल में और सभी राहुल की प्रेमिकाए है और सब साथ मिलकर रहेंगे, ये सोचते hi अंशु इतनी खुश हो गयी की उसने तानिया को लड़खड़ाते देखते hi ये सब बक दिया.

*सन्नाटा*

कुछ देरर तक तोह तानिया आँखें फाड़े अंशु को देखती रही, वही वंशु और राहुल भी एकदूसरे को और अंशु को देख रहे थे. राहुल ने तोह अपना हाथ सर पर दे मारा. अब तोह सिर्फ ऊपरवाला hi उससे बचा सकता था.

तानिया को समझने में देरर न लगी की अंशु की बात का मतलब क्या था?

आपने भी भाई के साथ सेक्स कर लिया? इसका मतलब क्या हुआ? मतलब अंशु भी राहुल के साथ सेक्स कर चुकी है??? और तोह और उसने ये सब वंशु के सामने कहा... इसका मतलब वंशु भी????

समझते hi उसकी आँख गुस्से से लाल हो गयी और उसने राहुल को हाथ से पकड़ के दरवाज़े तक लाया उससे गुस्से से देखा और पूछा,

तानिया : क्या ये सच है? तुम इसके पहले hi इनके साथ??

राहुल झूठ तोह बोल नहीं सकता था और उससे बोलना भी नहीं चाहिए, इसलिए उसने नीचे सर करके हां में हिला दिया...

*चटाक*

एक ज़ोरदार थप्पड़ सीधे राहुल के गालो पर पड़ा. पूरा गाल लाल हो गया राहुल का. राहुल ने कोई विरोध नहीं किया, उससे पता था गलती उसकी है और ये थप्पड़ उसी गलती का नतीजा था. तोह उसने बिना कुछ कहे सब कुछ एक्सेप्ट किया.

तानिया के ासु निकले और वो रट हुए राहुल की छाती पीटने लगी

तानिया : क्यों?? क्यों किया तुमने ऐसा?? बोलो..

राहुल : में तुम्हे बताने hi वाला था तानिया. गलती मेरी hi है. मुझे सब कुछ क्लियर कर देना था बूत मेने नहीं किया. मुझे तुम्हारी हर सजा मंज़ूर है.

तानिया राहुल से ये एक्सपेक्ट कर रही थी की वो ये कहेगा की सब कुछ झूठ है और वो सिर्फ तानिया का है. पर राहुल के ऐसा कहते hi तानिया का दिल और टूट गया और उसने राहुल को सीधे मुँह पे उसकी नज़रो से दूर जाने के लिए कह दिया.

तानिया : मुझसे दूर हो जाओ... मुझे अकेला चोरर दो. जस्ट गेट लॉस्ट.

अंशु : दीदी बात तोह सुनिए...

तानिया (चिल्लाके) : ी साइड गेट लॉस्ट!

ऊपर हो रही रूम में कुछ आवाज़ के कारण नीचे से निशा ने आवाज़ लगायी और सबको ब्रेकफास्ट के लिए बुलाया, निशा की आवाज़ सुन्न के सब होश में आए.

वंशु : तानिया देखो! पहले बात सुनो...

तानिया : ी don't वांट तो हेअर एनीथिंग. आप जाइये बस.

तानिया ने पलट ते hi तीनो के मुँह पे दरवाज़ा बंद कर दिया और अपने कमरे में चली गयी. बीएड पर गिरते hi वो जोरर जोरर से रोने लगी. हार्ट ब्रेक! आज उससे पता चला की हार्ट ब्रेक क्या होता है. केसा लगता है हर्ट होने पर!?

तानिया का दिल पूरी तरह से टूट चूका था. उससे पता था राहुल का कुछ चक्कर है ऋचा के साथ पर उसने ज़्यादा सीरियसली नहीं लिया था उसको और वो यही सोचती आ रही थी की सभी बहनो में वो एक है जो अपने भाई से प्यार करती है और उसके साथ सेक्स भी कर चुकी है. इस बात से राहुल कितना एक्ससिटेड होगा और उससे खूब प्यार देगा और वो राहुल के साथ हमेशा अपनी ज़िन्दगी बिताएगी पर हुआ क्या?

जिस राहुल पर उसने भरोसा किया, अपनी विर्जिनिटी तक उससे दे दी वो राहुल तोह पहले hi अपनी दो बहनो के साथ सेक्स कर चूका था.

चहहीइ!!! सबसे पहला ध्यान तानिया को यही आया की राहुल अपनी बहनो के साथ सेक्स कैसे कर सकता है? पर फिर उससे ये भी एहसास हुआ की आखिर वो भी तोह उसकी बहिन hi है!? पर जब उसने राहुल को इतना प्यार दिया तोह ज़रुरत क्या थी राहुल को अंशु और वंशु के पास जाकर सेक्स करने की? अरे राहुल कहता उस से की उससे सेक्स करना है, कोण सा वो मन कर देती? वो तोह ख़ुशी ख़ुशी राज़ी हो जाती. यही बातें तानिया को बोहत हर्ट कर रही थी इस वक़्त. शी वास् कम्प्लीटली हार्ट ब्रोकन.

उससे इस बात से उतना दुःख नहीं था की राहुल ने अंशु और वंशु के साथ सेक्स किया, उससे इस बात से ज़्यादा दुःख था की राहुल ने पहले उसके साथ सेक्स नहीं किया. वो यही सोच रही थी की सभी बहनो में वही सबसे ज़्यादा क्लोज है राहुल के पर राहुल ने उसको गलत साबित कर दिया. जितना वो सोच रही थी इन् सब के बारे में उससे उतनी hi रुलाई फुट रही थी.

बाहर वंशु अंशु को चिलाने लगी,

वंशु : छोटी तेरा दिमाग तोह ठीक है न? क्या बोल दिया तूने ये? सब कुछ तानिया के सामने रख दिया. अब उससे पता है की हम दोनों कुटी के साथ सेक्स करते है! क्या सोच रही होगी वह?

अंशु : पर दी वो भी तोह भाई के साथ कर चुकी है न?

वंशु (गुस्से में) : छोटी एक तोह तू गलती करि ऊपर से ज़बान लड़ा रही है!?

जब अंशु ने राहुल को देखा की वो अपना सर पकडे खड़ा है और काफी चिंतित है तोह उससे और बुरा लगने लगा.

अंशु : भाई! आप चिंता मत करो. मेने सब बिगाड़ा है न तोह में hi सब ठीक करुँगी. में hi तानिया दीदी को मानोगी और देखना आप वो मान जाएगी. I'm सो सॉरी भाई! मेने बिना सोचे समझे कुछ भी बोल दिया, I'm सॉरी दी! मेने आपसे बदतमीज़ी से बात की...

वंशु (पिघलते हुए) : पर सॉरी बोलने से सब कुछ पहले की तरह तोह नहीं हो जाएगा न

अंशु : पहले की तरह तोह नहीं बूत में वादा करती हु की पहले से भी अच्छा हो जाएगा.

एक अजीब सी चमक उसकी आँखों में थी और मैं में वो सोच रही थी, "अब प्लान के लिए एक और शिकार मिल गया हहै! तानिया दीदी को में अपनी टीम में शामिल करके रहूंगी, तभी सब खुश रह पाएंगे"

राहुल हां में सर हिला के नीचे चला जाता है वंशु के साथ और इधर अंशु तानिया का दूर नॉक करते हुए अंदर आने की गुहार लगाने लगती है.

पर तानिया दूर नहीं खोलती, बोहत गहरा सदमा लगा था उससे, बोहत ज़्यादा hi उदास थी.

काफी देरर तक जब खड़े रह कर अंशु लगातार दूर नॉक करती रही तब कही हार माँके तानिया ने दूर ओपन किया, उसकी आँखें पूरी लाल थी, आसुओ से पूरा चेहरा सना हुआ था.

तानिया (रट हुए) : अंशु प्लीज यहाँ से...

इस से पहले की तानिया बोल पाती अंशु अंदर आयी गेट को अंदर से लॉक किया और तानिया का हाथ पकड़ के उससे बीएड पर बिठा दी.

अंशु : में चली जाउंगी दी, पर उस से पहले मेरी बात सुन लीजिये...

*कुछ देरर बाद*

दिन का समय था सभी अपने अपने कमरे में आराम फरमाने निकल चले और राहुल सुबह की hi बात पर जोरर दाल कर सोच रहा था की आखिर क्या होगा? वो तानिया के लिए पूरी तरह से ज़िम्मेदार था. तानिया को रोटा देख उसका दिल भी रो रहा था. पर वो सॉरी कह कर कुछ सही नहीं कर पाटा. इस वक़्त राहुल टेंशन में था. करे तोह क्या करे? तभी उसके रूम में दूर को किसी ने नॉक किया.

जैसे hi रूम खोला तोह सामने तानिया थी, अंदर आते hi उसने दूर बंद किया और बीएड पर बैठ गयी.

राहुल वही खड़ा उससे स्तबध सा देख रहा था.

राहुल : तानिया??

तानिया : मेने तुम्हे माफ़ कर दिया है!

उसके इतना कहते hi राहुल का एक झटका सा लगा, सुबह तोह इतना रो रही थी, अंशु ने कोण सी जड़ी बूटी पीला दी इससे?? आखिर कुछ hi देरर बाद तानिया इतनी आसानी से कैसे माफ़ कर सकती है उससे? पर वो बोहत खुश था, उससे क्या अंशु ने क्या बात करि? अब तोह सब सोल्वे हो गया न? बस फिर काहे की चिंता!?

राहुल : तुम सच कह रही हो?

तानिया : हां!!

राहुल : वऊवववव...

तानिया : पर मेरी एक शर्त है! वादा करो की तुम पूरा करोगे उससे!?

राहुल : बेशक तानिया! बोलो! में राज़ी हु. बस कह daalo...kya चाहिए?

तानिया : अपनी बात से पीछे नहीं हटोगे फिर!?

राहुल : हां हां पूछो न??

राहुल को नहीं पता था की तानिया अब उस से वो चीज़ मांगने जा रही थी जो वो सभी से छुपाता आ रहा था,

तानिया : में चाहती हु की तुम्हारे और नेहा के बीच हुई वो घटना, उसकी साड़ी सच्चाई मुझे बताओ. अभी इसी वक़्त...

तानिया की डिमांड सुन्न राहुल अब पचता रहा था. जोश में लिया निर्णय हमेशा डुबाता है. बात तोह सही थी. पर अब क्या? अब तोह पीछे नहीं हैट सकता राहुल. अब तोह एक hi रास्ता है और वो ये की सच बता दिया जाए तानिया को.

राहुल (गहरी सास लेकर) : तुम जान न चाहती हो?

तानिया : हम्म्म!

राहुल : तोह सुनो...

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आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद्!
 
भाई जबसे पिष्बब गया है मेरा दिमाग खराब था तब से. Img बब में एक पिछ डालने के लिए इतनी लम्बी प्रोसेस है की पूछो मत और gif तोह मूव hi नहीं करते उसमे. इसलिए मेने बोहत काम कर दिया था पिक्स डालना. आगे कोशिश करूँगा कुछ पिक्स दाल दू.
 
साड़ी कहा चूड़ी भाई!? रूचि दीदी की तोह शादी हो गयी , चली गयी वह. बची नेहा तोह उसपे hi तोह स्टोरी बेस्ड है. शादी भाई अभी कुछ कह नहीं सकता में... फिलहाल सिर्फ ऋचा और तनीषा कन्फर्म है शादी के लिए.
 
अपडेट - 81



अब तक...

तानिया की डिमांड सुन्न राहुल अब पचता रहा था. जोश में लिया निर्णय हमेशा डुबाता है. बात तोह सही थी. पर अब क्या? अब तोह पीछे नहीं हैट सकता राहुल. अब तोह एक hi रास्ता है और वो ये की सच बता दिया जाए तानिया को.

राहुल (गहरी सास लेकर) : तुम जान न चाहती हो?

तानिया : हम्म्म!

राहुल : तोह सुनो...

अब आगे...

यहाँ तानिया तोह आ गयी राहुल से डिमांड मांगने पर आखिर ऐसा क्या कहा था अंशु ने जिससे सुन्न तानिया ने राहुल को माफ़ कर दिया? जब तानिया और अंशु अकेले में थे तोह उनके बीच कुछ ये बातें हुई...

तानिया : अंशु देखो... प्लीज यहाँ से चली जाओ. I'm नॉट इन थे मूड तो टॉक now...please

अंशु : चली जाउंगी दी, बूत एक बार मेरी बात सुन्न लीजिये

तानिया : अंशु...

अंशु : ी क्नोव आप हर्ट है...

तानिया : .......

अंशु : दी! ी क्नोव आप भाई से प्यार करती है और भाई भी आपसे प्यार करते है और जब आपने ये जाना की वो आपके अलावा हमारे साथ भी... तोह आपका दिल दुःख गया, और अब आप गुस्सा हो है न?

तानिया : ........

अंशु : दी! इसमें भाई की थोड़ी सी गलती है की उन्होंने आपको क्लियर नहीं किया पहले पर उन्हें पूरी तरह से दोषी नहीं ठहरा सकते.

तानिया : व्हाट दो यू मैं अंशु? हे चीटेड ों में...

अंशु : नूवो हे didn't... आप hi बताओ! क्या वो आपसे प्यार नहीं करते!?

तानिया : हां पर... पर...

अंशु : हम भी तोह उनकी बहने है, क्या वो हमसे और हम उनसे प्यार नहीं कर सकते आपकी तरह!?

तानिया : ी जस्ट...

अंशु : मेरी वंशु दी को एंड्रोफोबिअ था. पुरुषो से डर. भाई ने उन्हें इस दलदल से निकाला और वो भाई से प्यार करने लगी, दी ने पहले hi अपने प्यार का इज़हार कर लिया था और भाई भी मान गए थे क्युकी वो भी दी से प्यार करते थे.

तानिया : .......

तानिया सर झुकाए सब कुछ सुन्न रही थी, उससे बिलकुल भी नहीं पता था की वंशु को एंड्रोफोबिअ था, वंशु के बारे में जान के उससे बोहत hi साद फील हुआ.

अंशु : फिर मुझे उनसे प्यार हुआ... में भाई की जासूसी करती थी की मुझे उनके और नेहा के बारे में कुछ पता चले, पर मुझे वो तोह पता नहीं चल सका पर जितना भी पता चला उस से मेरे होश उड़द गए थे और में भाई की तरफ आकर्षित होने लगी. अंत में मेने खुद को समर्पित कर दिया उन्हें और अपने प्यार का इज़हार कर दिया, भाई इतने स्वीट है की वो मुझे मन hi नहीं कर सके. हां बार बार बोलते ज़रूर थे की ये सब गलत है पर वो मुझे ठुकरा hi नहीं sake...hehe

तानिया : पर...

अंशु : आप जेलस फील कर रही हो है न!?

तानिया (सुरप्रीसेड) : हँ!?? नहीं वो में...

अंशु : आप जेलस फील कर रही हो की आपने भाई को इतना प्यार किया पर भाई पहले से hi हमारे साथ रिलेशनशिप में है और आप उनकी फर्स्ट नहीं हो, है न!??

तानिया सर झुका के अपने निचले होंठ को दातो टेल दबा लेती है, अंशु की हर्र एक बात सच थी और सीधा दिल पे लग रही थी तानिया के.

अंशु : यदि आप इस बात को लेकर जेलस है तब तोह मुझे भी हक़ बनता है की में आपसे जेलस फील करू...

तानिया (सुरप्रीसेड) : हँ!?

अंशु : में कभी भी आपकी तरह शुरू से भाई से बात नहीं कर पायी, इनफैक्ट मेरी और भाई के बीच बातें होती hi नहीं थी. में नेहा का पूरा सपोर्ट करती थी और भाई से बात भी नहीं. पर आप मेरी तरह नहीं थी, आप भाई से नोर्मल्ली बात करती, उन्हें छेड़ती, सताती, प्यार करती. तोह बताइये... क्या में आपसे जेलस फील नहीं करू?

तानिया : wo...ummm

अंशु : वंशु दी को भी आपसे जेलस होना चाहिए फिर तोह! आपकी तरह वो भी भाई से बड़ी है पर भाई हमेशा उन्हें दी कह के hi बुलाते है पर आप को वो डायरेक्ट नाम लेकर बुलाते है. ये क्लोसनेस्स नहीं है तोह क्या है?

अंशु अपने शब्दों के बाढ़ फेक फेक कर तानिया को उलझा रही थी, और वैसे भी उसकी बात सही भी थी. यदि तानिया इस बात से जेलस थी की राहुल उसके पहले अंशु वंशु के साथ था. तोह अंशु और वंशु को भी पूरा हक़ था जेलस होने का.

अब शायद तानिया को रीलीज़ हो रहा था की वो कुछ कुछ गलत थी.

अंशु : भाई को पता था की उनकी गलती है, उन्हें क्लियर कर देना चाहिए था, और इसलिए उन्होंने आपका थप्पड़ ख़ुशी ख़ुशी एक्सेप्ट किया. उसका कोई विरोध नहीं किया.

तानिया को याद आता है की उसने राहुल को ज़ोरदार थप्पड़ मारा था और अब उससे गिलटी फील होने लगता है. उसने राहुल पे पहली बार ऐसे हाथ उठाया था की सीधे छाता hi रसीद दिया.

अंशु (नम्म आँखों से) : आप जानती नहीं हो की भाई पे कितना प्रेशर रहता है, उनका दिल बोहत कमज़ोर है दी, इसलिए वो सभी को प्यार करते है और किसी को भी हर्ट होने नहीं देना चाहते

हम सब की वजह से hi वो अब तक टूटे नहीं है वर्ण वो कब का बिखर गए होते.

तानिया : अंशु...!?

अंशु : हां दी! वो नहीं चाहते थे की आपका दिल हर्ट होये, वो आपसे प्यार करते है इसलिए उन्होंने आपको बताया नहीं, शायद उन्हें डर था की कही वो आपको खो न दे. और आपने उनके डर को हक़ीक़त में बदल दिया.

तानिया : toh...toh मुझसे झूट बोलेगा क्या?

अंशु : हां उन्हें पहले बता देना चाहिए था पर जैसा की मेने कहा, उनपे पहले से hi बोहत प्रेशर है, वो न केवल खुद का बिज़नेस कर रहे है बल्कि घर पर नेहा और अपने माँ डैड को भी प्रोटेक्ट कर रहे है, में जानती हु उन्हें अच्छे से

तानिया : क्या मतलब??

अंशु : तानिया दीदी! माफ़ कर दीजिये भाई को. यदि उन्होंने हमारे साथ पहले किया भी है तोह हम भी तोह आपकी और उनकी बहिन है, इसमें गलत क्या है? प्लीज माफ़ कर दीजिये. आप बदले में भाई से कुछ मांग सकती हो, एंड I'm सूरे वो मन नहीं करेंगे.

तानिया : kya...kya मांग सकती हु?

अंशु : आप उनसे वो सच मांगिये जिससे वो और चाचा चची 5 सालो से छिपाते आ रहे है.

अंशु (मैं में) : हहै!! भाई की जासूसी से तोह पता नहीं चला, पर अब तानिया दीदी के थ्रू मुझे ज़रूर पता चल जाएगा. और फिर निशा चची से कहके सबको... हहै! नेहा! तुम हर बार यही सोचती हो न की में तुम्हे अकेला चोरर के भाई से मिल गयी हु? तोह अब में तुम्हारे लिए वो करुँगी जिस से तुम्हारी आँखों से पत्ता हैट जाएगा और फिर तुम भी मेरे साथ.. हिहि! ी विल वेट फॉर तहत मोमेंट.

आगे बढ़ के अंशु तानिया की बाहो में रोने लगती है,

तानिया (सुरप्रीसेड) : a..anshu!?? Tum...tum क्यों रो रही हो?

अंशु : दीदी!! भाई जितना बहार से स्ट्रांग दीखता है, उतना hi अंदर से कमज़ोर है. आप उस से नाराज़ रहोगी न तोह वो खुद को पूरा दोष देके अंदर hi अंदर हर्ट होता रहेगा. वो ऐसा hi है. प्लीज उससे माफ़ कार्डो. और बदले में आप उनसे वो सच्चाई भी पूछ लेना. क्या आप क्यूरियस नहीं हो वो सच जान ने के लिए?

तानिया : हम्म!! क्यूरियस तोह में भी बोहत हु.

अंशु : तोह प्लीज!! क्या इतना hi प्यार करती है आप उनसे!? माफ़ कर दीजिये न...

तानिया : अच्छा ठीक है... ठीक है. ी विल फॉरगिव हिम.

अंशु (स्माइल्स) : थैंक यू दीदी! आप बोहत स्वीट हो!?

तानिया (अंशु के कान खींचते हुए) : बदमाश! तुझे ज़्यादा क्यूरोसिटी है सच जान ने की और तुम बाद में मुझ से जान न चाहती हो है न?

अंशु : हीहीही...

तानिया : चल अच्छा! में मिल के आती हु उस से.

अंशु : दीदी! आज रात में भाई मेरे और वंशु दी के साथ सोयेगा. यदि आप चाहो... तोह आप भी ज्वाइन कर सकती ho...hehe!!

तानिया (ब्लश) : धत्त्त! चांट कही की...

उसके बाद तानिया सीधे राहुल के कमरे में गयी और उस से सच जान ने के लिए डिमांड राखी.

राहुल ने पूरी सच्चाई उससे जब बताई तोह तानिया सिर्फ सर झुका के सुनती रही. बीच बीच में वो भावुक हो जाती, तोह कभी गुस्से में दातो से अपने निचले होंठ दबा लेती, कभी आँखें नम्म हो जाती.

राहुल : तोह ये है सच्चाई! ी होप तुम अब मुझसे कोई सवाल नहीं करोगी.

तानिया जो अब तक चुप बैठी थी वो उठती है और राहुल के गले लग जाती है, ासु थे आँखों में.

तानिया : मुझे माफ़ करदे भाई!!!

राहुल : नहीं! मुझे सॉरी कहना चाहिए! इसमें तुम्हारी क्या गलती?

तानिया : मेरी गलती बोहत बड़ी है मेरे भाई. एक बहिन होने के नाते में तेरे दर्द को नहीं पहचान पायी, तेरी वो स्माइल जिसके पीछे तू इतना सब कुछ छिपाया रहता रहा उसके पीछे क्या है... में उससे परख तक नहीं पायी... में तुझे अच्छे से जान hi नहीं पायी, और ऐसे वक़्त पे मेने तेरे लिए कुछ नहीं किया. मुझे माफ़ करदे.

राहुल : तुम्हारी गलती नहीं है तानिया! It's आल... *गहरी सास लेते हुए* खर्र!! जाने दो! I'm रियली सॉरी आज जो भी कुछ हुआ.

तानिया : मेने कहा न तुम्हे सॉरी कहने की ज़रुरत नहीं है , पर फिर भी तुम मानोगे नहीं. इसलिए! ी फॉरगिव यू!

आगे बढ़ के तानिया राहुल के गाल पर हाथ सहलाने लगती है.

तानिया : ज़्यादा जोरर से लगी क्या?

राहुल : it's okay!

तानिया फिर से आगे बढ़ राहुल के होंठ चूम लेती है और ये किश 10 मिनट तक धीरे धीरे चलती है और फिर दोनों अलग हो जाते है. जब तानिया रूम का दूर खोलती है तोह बाहर hi अंशु कड़ी हुई थी जो मुस्कुरा रही थी.

तानिया : तुम यहाँ?

अंशु : हेहेहे! में तोह भाई को बताने आयी थी की आज वो हमारे साथ सोने वाले है.

राहुल : ी क्नोव अंशु! मुझे याद है!

अंशु : तानिया दीदी! यदि आप को लोनेलिनेस्स या जेएलओसी फील होये तोह आप इन्वितेद हो, कभी भी बिस्तर में घुस सकती हो आके हमारे. हम मन नहीं करेंगे...

तानिया (ब्लश) : धत्तत्त!!!

कहते हुए वो चली जाती है.

राहुल (ब्लश) : क्या किया तूने? अब कोनसी चाल चल दी?

अंशु (हुग करते हुए) : सब आपके लिए भाई. एन्ड में सब कुछ अच्छा हो जाएगा. आप भरोसा रखिये मुझ पर. में आपके लिए सबको एक कर दूंगी. सब कुछ सुलझ चूका होगा.

राहुल : क्या मतलब?

अंशु : कुछ नहीं! बस इतना ध्यान रखिये की में सब ठीक कर दूंगी आपके लिए.

राहुल : ओह्ह्ह! और मेरे लिए इतना सब कुछ क्यों?

अंशु : आप भी न भाई... अरे आपको पता नहीं है क्या?? It's बिकॉज़ ी लव यू सो मच!!!! मुआअआआह्ह्ह!!!

ऐसे hi रात हुई, राहुल अंशु और वंशु के रूम में पहुचा, वह वंशु और अंशु ने उससे अपने से लगा के धेरर सारा प्यार दिया और ये प्यार कब सेक्स में तब्दील हो गया तीनो को hi पता नहीं चला. दोनों को पटक के छोड़ने के बाद राहुल काफी ेक्सहॉस्टेड था क्युकी पिछली रात तानिया के साथ भी उसने धुआँधार सेक्स किया था. और अब थ्रीसम.

तानिया का मैं ज़रूर था उन्हें ज्वाइन करने का पर उसके अंदर अभी भी मैनर्स नाम की कोई चीज़ थी और वो शर्मा रही थी. वो राहुल के साथ सेक्स को अपने तक hi रखना चाह रही थी. किसी के साथ शेयर नहीं. पर उसके दिल में अंदर hi अंदर एक एक्ससिटेमेंट थी बाकियो के साथ मिलकर राहुल के साथ सेक्स करने की...

समय गुज़रा, अगले दिन राहुल ने निशा के साथ प्यार भरे पल गुज़ारे, एक माँ होने के नाते उससे राहुल की बोहत चिंता लगी रहती थी और वो राहुल से ज़िद्द करने लगी की वो उसके साथ कुछ दिन वही पे रहेगी पर राहुल ने मन कर दिया और वापस घर जाने के लिए कहा.

तानिया ने राहुल की सच्चाई अंशु को बता दी जिससे सुन्न के अंशु के होश hi उड़द गए और वो काफी शॉकेड थी सच जान ने के बाद.

अगले दिन राहुल सहित सभी अपने अपने घर जा रहे थे. निशा बोहत उदास थी की अब न जाने कब वो देखेगी अपने बच्चे के चेहरे को.

निशा : बेतु! अब कब देख पाऊँगी में तुझे?

राहुल : don't वोर्री माँ! आप वीडियो कॉल कर लिया करो कभी भी. आपके लिए में हमेशा फ्री हु.

निशा : पर आएगा कब वापस?

राहुल : अब तोह बिज़नेस सेटल हो रहा है माँ. ी थिंक मुझे वही सेटल होने पड़ेगा.

निशा (नम्म आँखों से) : और अपनी इस लाचार माँ को अकेला चोरर देगा??

राहुल : आप लाचार नहीं हो माँ! और में कहा आपको अकेला चोरर रहा हु. में आपको बाद में वही बुला लूंगा. अब खुश!?

निशा (स्माइल्स) : हम्म्म!!!

अंशु (हुग करते हुए) : भाई!! ी होप हम अगली बार जल्दी मिलेंगे!?

राहुल : बिलकुल!

तानिया (हग्स) : चपडगंजु! वादा याद है न?

राहुल (ब्लश) : याद है छिपकली!

वंशु (हग्स) : कुटी अब कब मिलना होगा?

राहुल : बोहत जल्द दी!!

सभी से हुग करते हुए राहुल और सौरभ दोनों टैक्सी में सामान रखवाते है.

नेहा साइड में कड़ी सब कुछ देख रही थी पर कुछ नहीं बोली. वो राहुल को hi देख रही थी लगातार. उससे इस बात का ज़रा भी ध्यान नहीं था की वो लगातार राहुल को देख रही है और उससे ऐसा करते अंशु भी देख रही है.

अंशु : (बस कुछ समय का इंतज़ार करो नेहा. में सब कुछ ठीक कर दूंगी. आईटी विल हर्ट यू ा लोट बूत ये ज़रूरी है. वर्ण नाइंसाफी हो जाएगी बोहत बड़ी)

और ऐसे hi सभी अपने अपने घरो के लिए रवाना हो जाते है.

आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद्!!
 
अपडेट - 82

अब तक...

अंशु : (बस कुछ समय का इंतज़ार करो नेहा. में सब कुछ ठीक कर दूंगी. आईटी विल हर्ट यू ा लोट बूत ये ज़रूरी है. वर्ण नाइंसाफी हो जाएगी बोहत बड़ी)

और ऐसे hi सभी अपने अपने घरो के लिए रवाना हो जाते है.

अब आगे...

समय धीरे धीरे कब एकदम से आगे बढ़ गया पता hi नहीं चला. रूचि दीदी की शादी के बाद से 2 साल गुज़र चुके थे.

इन् दो सालो में जैसे बोहत कुछ बदल गया था. राहुल और सौरभ जो बिलकुल नीचे से अपना बिज़नेस स्टार्ट करे थे, आज उनके पास कही सारा पैसा था. ऐसा नहीं था की एकदम hi बिल्लिओनेरे हो गए पर उनका बिज़नेस बोहत आगे बढ़ चूका था. राहुल और सौरभ ने धीरे धीरे फंड्स जमा करके और स्पोंसरशिप्स लेके, कम्पनीज से टाई उप करके खुद की कंपनी खोली जो बसीकली दूसरी कम्पनीज को अपना सॉफ्टवेयर बेचती और तोह और कंप्यूटर और मोबाइल के लिए अप्प्स भी बनाती थी. नार्मल पब्लिक के लिए एक फ्री सॉफ्टवेयर वर्शन लांच किया, जो धीरे धीरे बोहत पॉपुलर हो गया और एक प्रीमियम वर्शन निकाला जो की फ्री नहीं था. प्रीमियम वर्शन और भी पॉपुलर हुआ क्युकी फीचर्स बोहत ज़्यादा थे.

थोड़े उतार चढ़ाव भी देखे दोनों ने, कभी प्रॉफिट होता तोह कभी लोस्स होता बूत दोनों ने हार नहीं मानी और आगे बढ़ते रहे. आज उनकी खुद की कंपनी की साइट थी, बिल्डिंग थी जो उन्होंने बोहत जल्द hi कड़ी कर ली मुंबई में hi, अभी भी दोनों को और आगे बढ़ना था बूत राहुल ने बिज़नेस को ऐसा बढ़ाया की 2 साल में hi पूरी काय hi पलट दी. उसने अपना खुद का ब्रांड बना दिया जो धीरे धीरे पॉपुलर हो रहा था. ब्रांड सॉफ्टवेयर के लिए मसहूर होने लगा. कंपनी सॉफ्टवेयर बनाने में बोहत अच्छा काम करने लगी. राहुल ने ढेर्रो होनहार एम्प्लाइज भी रख लिए.

बाहर की अथवा देश की कई कम्पनीज से टाई उप करके कैसे काम निकलवाना है राहुल पूरा मास्टर हो गया था. उसने पहले अपने देश में काम, डायरेक्ट सबसे पहले बाहर के देशो में अपनी ब्रांचेज खोली. क्युकी डॉलर रुपया से बड़ा है और फण्ड यदि डॉलर में जमा होएगा तोह आप उतनी तेज़्ज़ी से बढ़ोगे. बिलकुल ये उतना आसान नहीं था पर जैसे तैसे राहुल और सौरभ ने मशक्कत करके किया ये सब.

राहुल के पास मुंबई की मैं ब्रांच के अलावा 2 और ब्रांच थी. उसने 1 ब्रांच अपनी उसे में खुलवाई, क्युकी यही से उससे डॉलर की सप्लाई मिलने वाली थी, इस ब्रांच को खुलवाने में बोहत म्हणत लगी थी और बोहत पैसा भी. पर दोनों कामयाब हो गए. जो लास्ट ब्रांच थी वो राहुल ने श्री लंका में खुलवाई.

सौरभ ने बोहत पूछा की वो आखिर श्री लंका में अपनी ब्रांच क्यों खोल रहा है? उस से अच्छी जगह भी है जहा पर वो कंपनी खोल सकते थे. फिर एक छोटी सी जगह में क्यों?

पर इसका जवाब सिर्फ राहुल के पास hi था और वो सौरभ को फिलहाल अभी बताना नहीं चाहता था. आज राहुल के पास शोहरत थी, पैसा था, रुतबा था, बैंक बैलेंस था और हां माँ भी थी.

इन् 2 सालो में राहुल निशा से मिलने आता कभी कभी और वापस चला जाता. पर राहुल हमेशा ऐसे टाइम पे आता जब नेहा घर पर नहीं होती.

नेहा भी कम्प्लीटली चेंज हो चुकी थी. वो पढ़ने में और भी होशियार, शातिर हो चुकी थी. रौशनी ma'am उसकी क्लास में बोहत तारीफ करती और उससे बिलकुल अपनी छोटी बहिन की तरह hi ट्रीट करती थी. नेहा का 3रद ईयर कम्पलीट होने वाला था और उसने कॉलेज में अपनी एक इमेज बना ली थी.

इन् 2 सालो में उसने राहुल को देखा hi नहीं, और धीरे धीरे वो अपने कामो और पढ़ाई पर ध्यान देने लगी जिस से वो धीरे धीरे उभरने लगी. रात में बेशक उससे राहुल का चेहरा कभी सपनो में तोह कभी मैं में घूमता जिसके कारण वो बेचैन हो जाती पर पहले से काफी हद्द तक अब वो कण्ट्रोल करने लगी थी.

ऋचा जो की अपनी जॉब कर रही थी, राहुल ने मुंबई में ब्रांच खोलने के बाद hi ऋचा को अपने पास बुला लिया और अब वो राहुल की अस ा सेक्रेटरी उसी की कंपनी में काम करती, उसी के साथ उसके घर पर रहती जो राहुल ने मुंबई में ले लिया था.

राहुल जब वापस अपने शहर ग्वालियर आता तोह तनीषा से भी मिलता, प्रेम जताता, अंशु और वंशु से भी मिलता, सभी को धेरर सारा गिफ्ट्स देता. यहाँ तक राहुल ने अपने मां से लिया पैसा भी चूका दिया वो भी डबल अमाउंट में.

कुल मिलाके सभी की लाइफ आगे बढ़ चुकी थी बस सभी को उस मोमेंट का इंतज़ार था जहा सब एक हो जाए.

अंशु जो की कुछ प्लान करि थी, उसने अपने प्लान को तब तक के लिए रोक के रखा जब तक राहुल सक्सेसफुल नहीं हो जाता क्युकी यदि वो अपने प्लान को पहले अंजाम देती तोह राहुल के लिए संभालना मुश्किल होता. इसलिए अंशु ने वेट किया और अब जब राहुल सक्सेसफुल आदमी बन चूका था, उसने डीडे कर लिया की अब प्लान का लास्ट स्टेप उससे शुरू कर देना चाहिए.

राहुल ने निशा और अपनी बहनो के बैंक अकाउंट में पैसे भेजता रहता था. निशा बोहत खुश थी की उसका बेतु इतना आगे बढ़ गया.

और आज अंशु अपने घर में यु hi बैठे हुए पुराने बीते पालो के बारे में सोच रही थी और उसने ठान लिया की अब hi सब कुछ करना है.

अंशु ने फौरन निशा को कॉल लगाया,

निशा : hello!?

अंशु : चची! अब बस बोहत हुआ!!

निशा : hello? अंशु? K..kya?.. क्या हुआ?

अंशु : चची!! बस अब बोहत हो गया!

निशा : अरे पर हुआ क्या बीटा?

अंशु : चची! भाई को गए दो साल से भी ज़्यादा हो गया, अब आप उनके और नेहा के बीच की बात बता hi क्यों नहीं देती?

निशा (उदासी से) : क्या hi कहु में अंशु? मेरे बस में नहीं है. में चाहु तोह कबका नेहा को बता देती पर में वचन बढ़ हु.

अंशु : आप मुझे इतना बताइये की आप ये चाहती है की नेहा को सच पता चले या नहीं?

निशा : चाहती भी हु और नहीं भी...

अंशु : में समझ सकती हु चची आपकी समस्या. मुझे सच्चाई पता है आलरेडी.

निशा (शॉकेड) : क्या??

अंशु : हां चची! मुझे और तानिया दीदी को पता है. भाई ने hi बताया.

निशा : पर?? बेतु ने क्यों??

अंशु : अरे कुछ नहीं! तानिया दीदी और भाई का थोड़ा झगड़ा हो गया था और गलती भाई की थी तोह बदले में तानिया दीदी ने सच्चाई मांग ली और एन्ड में भाई को बताना पड़ा.

निशा : ओह्ह्ह! तब तोह उसने तुम्हे भी नेहा को बताने से मन किया होगा...

अंशु : हां! बिलकुल! पर में चाहु तोह कुछ और कर सकती हु

निशा : हँ??

अंशु : पर में ऐसा करुँगी नहीं!

निशा : हम्म??

अंशु : क्युकी में ये चीज़ ग्रैंड रखना चाहती हु.

निशा : मतलब?

अंशु : वो आपको बाद में पता चल जाएगा चची. आपको एक बात और बतानी है की मुझे कई चीज़े ऐसी पता है जिन्हे आप जानती भी नहीं है.

निशा (तेनसेद) : क्या? कोनसी चीज़े?

अंशु : में अभी नहीं बता सकती चची! अब आप सुनिए! क्या आप वैसा करेंगी जैसा में कह रही हु?

निशा : k...kya?

अंशु : पहले वादा करिये की करेंगी या नहीं!?

निशा : पर बिना जाने कैसे वादा कर दू?

अंशु : आपको मुझपर भरोसा नहीं है क्या चची?

निशा : भरोसा तोह है अंशु पर तुम करने क्या वाली हो?

अंशु : कुछ ऐसा, जिस से नेहा को सच्चाई पता चल जाएगी, हमारी कसम भी नहीं टूटेगी और सब कुछ सही हो जाएगा.

निशा : k...kya?

अंशु : एक बात बताइये चची! भाई ने आपको कसम देते वक़्त क्या कहा था?

निशा : usne...usne कहा था की "चाहे कुछ भी हो जाये आप ये बात नेहा को कभी नहीं बताओगी"

अंशु : हाआआआ!! एक्साक्ट्ली!!

निशा : ky...kya?

अंशु : यही पर तोह लूपहोल है चची?

निशा : लू.. लूपहोल?

अंशु : भाई ने आपसे, मुझ से, और सभी लोगो को जिन्हे सच्चाई बताई है या पता है उन्हें यही कहा है की नेहा को कभी मत बताना!

निशा : हां!

अंशु : पर भाई ने ये थोड़ी न कहा की नेहा के अलावा हम किसी और को नहीं बता सकते

निशा (शॉकेड) : हँ??

अंशु : क्यों चची? है न लोहोले? अब आप बाकी सब को ये सच्चाई बता hi सकती है.

निशा : पर ऐसे में... परिवार की बात... सबके बीचे...

अंशु : ये ज़रूरी है चची. आप सुनिए मेरी बात... आप सभी अपने घरवालों को बुलाएंगी. जिन्हे ये पता है की नेहा और भाई की आपस में नहीं बनती.

आप सबको ये बोलिये की सभी को एक बात बतानी है जो बोहत ज़रूरी है और सभी का वह होना आवश्यक है.

निशा : फिर?

अंशु : उसके बाद आप सभी को सच्चाई बता दीजियेगा. सब अपने अपने सच बता देंगे जो वो राहुल भाई के बारे में जानते है ताकि सभी को उनके कर्मो के बारे में पता चल सके. तभी तोह सबको पता चलेगा की परिवार में हो क्या रहा है और कोण सही है और कोण गलत.

निशा : ओह्ह्ह्ह

अंशु : पर ध्यान रहे चची! आपको चाचा को उस वक़्त बाहर भेजना पड़ेगा और नेहा को भी. और ये बात आप चाचा को नहीं बता सकती की आप सभी को यहाँ बुलाने वाली हो.

निशा : हां पर!? पर में इनकी जरर हाज़िरी में इनसे सब छुपा के ये कैसे कर सकती हु?

अंशु : आप अभी भी उनकी साइड ले रही हो?

निशा : आंशुओ... तुम नहीं समझोगी!

अंशु : पर में समझ सकती हु चची. आपके लिए ये बोहत हार्ड होगा. पर में आपको वचन देती हु. इन् सब के बाद सब कुछ सही हो जाएगा. ये मेरा आपसे वादा है. भाई और नेहा के बीच पहले से भी अच्छे सम्बन्ध हो जाएंगे और भाई वापस से पहले की तरह खुश रहने लगेंगे.

निशा : अच्छा!? और...

अंशु : और... मुझे पता है आप क्या सोच रही है. घबराइए मत चची! में अपनी जान दे दूंगी पर परिवार में अब और तनाव नहीं आने दूंगी. प्लीज ट्रस्ट में!

निशा : हां अंशु! ी ट्रस्ट यू!

अंशु : जी! अब आप सभी को कॉल करिये और सभी को आपके घर पर आने के लिए बोल दीजिये, बाकी में संभाल लुंगी.

निशा : अच्छा ठीक है! सब ठीक तोह हो जाएगा न?

अंशु : मेने कहा न चची! सब सही हो जाएगा! थोड़ा ऊपर नीचे होएगा बूत एन्ड में सब सही हो जाएगा...

निशा : ऊपर नीचे मतलब? कुछ गड़बड़ तोह नहीं होएगी न?

अंशु : चची! नेहा का थोड़ा लफड़ा है. ी मैं उससे हैंडल करना पड़ेगा बाकी तोह सब ठीक है, एन्ड में सब सही हो जाएगा. Don't वोर्री!!

निशा : अच्छा ठीक है तोह कब बुलाना है?

अंशु : पहले आप चाचा को बाहर भेजिए! कुछ दिनों के लिए!

निशा : क्या? में ये कैसे करुँगी?

अंशु : अरे!!! अच्छा रुकिए!! में डैड से बोलके उन्हें बाहर भिजवाती हु.

निशा : हां!

अंशु : और आप नेहा को ये बता सकती है की सब आपके यहाँ आ रहे है, यदि वो पूछे की क्यों? तोह कहना की ऐसे hi फॅमिली गाथेरिंग राखी थी बोहत पहले. और उससे सामान लेने या फ्रेंड के यहाँ कही भी भेज दीजियेगा.

निशा : अच्छा ठीक है. कभी कभी तोह लगता है की तू मेरी चची है.

अंशु : हाहाहा! ी लव यू चची! आप बेस्ट हो! कभी बुरा नहीं मानती.

निशा : हां हां! मक्खन लगाना तोह कोई तुझसे सीखे.

अंशु : क्या हुआ? उदास क्यों लग रही हो? भाई ने प्यार नहीं किया क्या जब आया था ? हीहीही!

निशा (ब्लश) : धत्त्त! चची हु में तेरी...

अंशु : चची हो तभी तोह आपसे ये सब बातें शेयर कर पा रही हु मेरी प्यारी चची... Don't वोर्री! भाई अब जब आएगा तोह उससे में आपके पास भेजूंगी सबसे पहले.

निशा (ब्लश) : चल चल! बोहत हुआ!

अंशु : हिहि! अच्छा चलिए bye! जैसा कहा है बिलकुल वैसा hi करना!

*कॉल एंड्स*

अगले दिन अंशु अपने डैड यानी की राहुल के ताऊ जी से रिक्वेस्ट करती है की वो राजेश को कुछ दिनों के लिए कैसे भी करके आउट ऑफ़ सिटी भेज दे क्युकी ऐसा करने से सभी को परिवार का सच पता चल पाएगा.

अंशु की रिक्वेस्ट पर उसके डैड राजेश को आउट ऑफ़ सिटी भेज देते है कुछ ज़रूरी काम के लिए, जिससे राजेश छोटा भाई होने पर बिलकुल भी मन नहीं करता और अगले दिन hi घर पर निशा और नेहा को बता के चला जाता है दूसरे शहर.

उसके जाते hi निशा तैयारियों में जुट जाती है क्युकी उसने पहले hi सभी को कॉल करके बता दिया था उसके घर आने के लिए. और ये भी बता दिया था की कोई भी ये बात राजेश को न बताए.

नेहा : क्या हुआ माँ? कोई आ रहा है क्या?

निशा : हां! तेरे मां जी विथ फॅमिली, अंशु वंशु की फॅमिली भी आ रही है.

नेहा : व्हाट? क्यों? कोई फंक्शन है क्या? डैड चले गए और सब एकदम से आ रहे है?

निशा : हां! वो पहले से hi एक फॅमिली गाथेरिंग राखी हुई थी मेने. अब तुम्हारे डैड को अभी ज़रूरी काम पद गया तोह इसमें में क्या करू?

नेहा : हां पर ऐसे अचानक?

निशा : क्यों? तुझे कोई प्रॉब्लम है क्या?

नेहा : na..nahi! में बस थोड़ा हैरान थी.

निशा : अच्छा सुन्न! में वो अपना क्राकरी आइटम का दूकान वाला है न? उसके यहाँ डिनर सेट के पैसे दे के आयी थी बूत वो सेट उसके यहाँ अवेलेबल नहीं था कल. तुम जाना अभी और उस से सेट ले आना. और तुम्हे कुछ काम था न? कॉलेज का?

नेहा : ओह्ह! हां ले आउंगी! हां वो प्रोजेक्ट का काम था, फ्रेंड के यहाँ बात करने जाना था.

निशा : हां तोह वही से वो भी निपटा के आना.

नेहा : okay!!

तभी बहार गाडी की आवाज़ आती है और अंशु वंशु विथ फॅमिली घर में एंट्री कार्टर है.

निशा : आइये! भाभी!... आइये... अंशु वंशु आओ... बैठो.

अंशु (हुग करते हुए) : नेहुउउ!!! किसी हो??

नेहा (स्माइल्स) : अच्छी hi दी! आप सब यहाँ एकदम से?

अंशु : अरे चची ने बताया नहीं क्या?

नेहा : नहीं में बस ऐसे hi पूछ रही थी. माँ ने आलरेडी बता दिया है.

तभी थोड़ी देरर बाद एक कार और रूकती है और उसमे से तानिया विथ फॅमिली निकलती है और सभी से मिल जुलने के बाद सभी हॉल में hi इखट्टे बैठ जाते है.

निशा : नेहा! जाओ जाके सेट ले आओ, सबको उसी नए सेट में खाना परसूँगी फिर... और अपना काम भी कर आओ.

नेहा : okay माँ! आप सभी बैठिये में अभी आती हु थोड़ी देरर में.

नेहा उठ के जैसे hi अपनी गाडी उठा के निकलती है तभी 5 मिनट बाद निकिता अपनी माँ को स्कूटी से लेके नेहा के घर आती है.

आरती (nikita's माँ) : क्या हुआ निशा? क्या बताने बुलाई है?

निकिता : हां आंटी?

निशा : सभी बैठिये पहले...

निशा ने निकिता और आरती को भी बुलाया था क्युकी उन्हें भी पता था की राहुल और नेहा की आपस में नहीं बनती है और आरती और निशा काफी अच्छे दोस्त थे इसलिए निशा ने आरती को फॅमिली गाथेरिंग में शामिल किया.

मुकेश (निशा के भाई) : अरे निशा बोलो! क्या हुआ? क्या बताने सभी को बुलाया है?

विनीता (अंशु वंशु की माँ) : निशा? कहो भी!

निशा (गहरी सास लेते हुए) : आज मेने आप सभी को वो सच बताने के लिए बुलाया है जिससे में 7 साल से छुपाती आ रही थी...

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आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद्!!
 
अपडेट - 83

अब तक...



मुकेश (निशा के भाई) : अरे निशा बोलो! क्या हुआ? क्या बताने सभी को बुलाया है?

विनीता (अंशु वंशु की माँ) : निशा? कहो भी!

निशा (गहरी सास लेते हुए) : आज मेने आप सभी को वो सच बताने के लिए बुलाया है जिससे में 7 साल से छुपाती आ रही थी...




अब आगे...



ललिता (मुकेश की पत्नी) : कहो न निशा! कोनसी बात?

इस से पहले की निशा कुछ कहती उतने में दरवाज़े पर एकदम से कोई अंदर आता है,

"में लेट तोह नहीं हुई न??"

सामने तनीषा थी, जल्दबाज़ी में वो आयी और अभी बोहत हाफ रही थी.

निशा : सही टाइम पर आयी हो बीटा! आ जाओ! बैठ जाओ!

अंशु (मैं में) : यही सही टाइम है... सॉरी राहुल भैया! सॉरी नेहु! बूत ये ज़रूरी है.

मुकेश : ये कोण है निशा?

निशा : ये... तनीषा है! राहुल की डॉक्टर.

तनीषा को समझ आ गया था की निशा ने उससे अभी बहु कहके क्यों नहीं बुलाया. शायद अभी परिवार में सभी क्वेश्चन करने लगते इसलिए निशा ने अभी तनीषा को अस ा डॉक्टर hi बताया.

तनीषा इस बात से बिलकुल भी दुखी नहीं थी उससे पता था की क्या चल रहा है. उससे पहले hi निशा की जुबां मिल चुकी थी की वो इस घर की बहु बनेगी तोह उससे बाकी बातो से कोई लेना देना नहीं था. उससे पता था निशा की कोई मजबूरी होगी और इस वक़्त उससे निशा की मदद करनी चाहिए हां में हां मिला के.

तनीषा : जी में तनीषा. में राहुल को ट्रीट करती हु जब भी उससे चोट लगती है. I'm ा सर्जन ात क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स हॉस्पिटल.

रुपेश (राहुल के ताऊ जी) : सर्जन? क्या बात है! काबिलियत तारीफ! क्या उम्र है बीटा तुम्हारी?

तनीषा : j..jii?? में...28 की होने वाली हु.

रुपेश : वाह! 28 की उम्र में hi एक सर्जन!?

निशा : वो दो साल पहले hi सर्जन बन गयी थी जेठ जी.

रुपेश : क्या बात है!

मुकेश : पर ये यहाँ पर क्यों?

निशा : क्युकी वो हमारी फॅमिली मेंबर जैसी है और राहुल को वो 7 साल पहले से hi जानती है.

मुकेश : ओह्ह्ह!!

तानिया : जी बुआ! आप कुछ बताने वाली थी?

तानिया को तोह पता hi था सच. वो बस सबके सामने न जान ने की एक्टिंग कर रही थी.

वंशु : हां चची! हम सब सुन्न रहे है. कहिये!

निशा (गहरी सास लेकर) : हां! तोह में शुरू करती हु...

अब निशा की ज़ुबानी हम फ्लैशबैक के थ्रू देखेंगे...

*फ्लैशबैक*

बात 7 साल पुरानी है, राहुल ग्यारवी क्लास में था और नेहा आठवीं क्लास में. इन् दोनों के बीच बोहत प्यार था. एक नार्मल भाई बहिन से थोड़ा ज़्यादा. खासकर की नेहा... वो राहुल से चिपकी hi रहती थी. हर्र वक़्त उसके आगे पीछे घूमना, उससे तंग करना, लाढ़ करना, सब करती थी वह. कुछ ज़्यादा hi ऑब्सेस्सेड थी राहुल से. राहुल भी कुछ काम नहीं था ,बेशुमार प्यार देता था वह नेहा को. उसके लिए चीज़े लाना, गिफ्ट्स लाना, उसको घुमाने ले जाना, हर्र काम में उसकी मदद करना. एक आइडियल भाई की तरह था वह नेहा की नज़रो में.

पर न जाने इन् दोनों के प्यार को किसकी नज़र लग गयी. यहाँ ये दोनों तोह अपनी ज़िन्दगी में टेंशन फ्री थे पर राजेश की ज़िन्दगी कुछ सही नहीं चल रही थी.

राजेश अपनी नौकरी करके जब भी घर वापस आता तोह काफी चिढ चिढ़ा व्यवहार रहता उसका. राजेश शराब नहीं पीटा था उसके बाद भी ये चिढ चिढ़ापन किस लिए था ये निशा समझ नहीं पा रही थी. राजेश भी अपने मुँह से कुछ नहीं बोलता था बस सीधे मुँह बात नहीं करता था.

निशा ने कुछ दिन ये सोच के इस बात पर ज़्यादा नहीं टोका क्युकी हो सकता है काम का टेंशन हो और मूड चिढ चिढ़ा हो गया हो. पर जब दिन बा दिन ये होना शुरू हुआ तोह निशा को टेंशन होने लगी.

नेहा इस बात से पूरी तरह अनजान थी की घर में क्या चल रहा है. पर राहुल ने भांप लिया था की उसके डैड कुछ दिनों से सही से बेहवे नहीं कर रहे. राहुल एक डिस्कॉपलीनेड लड़का होने के नाते पेरेंट्स के बीच में नहीं बोलता था और साड़ी बातें अपने अंदर hi रखता था.

एक दिन राजेश जब अपनी नौकरी पर गए, इस वक़्त वो मैनेजर नहीं थे, केवल एक एम्प्लोयी थे बैंक में. स्ट्रेस, वर्क लोड, फ़्रस्ट्रेशन, इन्ही सब से रोज़ झूझना पड़ता था राजेश को.

राजेश बैठा हुआ काम कर रहा था और कुछ सोच रहा था, की कैसे नौकरी में आगे बढ़ा जाए वो केवल एम्प्लोयी बांके तोह नहीं रह सकता न हमेशा!?

तभी उसके बगल में उसके hi बैंक में एक और एम्प्लोयी जो काम करता रहा वो आके बैठ गया और राजेश से बात करने लगा.

"और भाई मिश्रा साहब क्या चल रहा है?"

राजेश : अरे क्या बताऊ अब शुक्ल जी! रोज़ रोज़ वही पंचायत. काम करो, लोगो की समस्याए सुनो, कंप्यूटर में दिमाग खपाओ और घर चले जाओ. कुछ रहा hi नहीं है ज़िन्दगी में.

शुक्ल : भाई ये तोह हर्र शादी शुदा व्यक्ति की समस्या है. खासकर हम मर्दो की.

राजेश : ......

शुक्ल : वैसे... तुमको पता है अभी जो खबर फेल रही?

राजेश : किसी खबर?

शुक्ल : अरे तुम्हे नहीं पता? अरे... वो पांडेय की बेटी है न? भाग गयी कल एक लौंडे के साथ...

राजेश (शॉकेड) : क्या बात कर रहे हो?

शुक्ल : अरे सुबह से उसके hi चर्चे हो रहे है सबमे... पांडेय की भी तोह गलती है.

राजेश : इसमें पांडेय की क्या गलती?

शुक्ल : अरे इतना छूट देके रखा था पांडेय ने उससे. लड़कियों को इतनी छूट नहीं देनी चाहिए. मेरी तोह तीन लड़किया है पर वो सपने में भी ऐसी हरकते करने की नहीं सोच सकती. मेने इतना दर्रा के रखा है उनको.

राजेश : हां पर हमारी बच्चिया ऐसा कभी नहीं करेंगी...

शुक्ल : मेरी का तोह मुझे पता है पर अपनी बेटी पर भी ध्यान दो ज़रा. ये लड़किया बोहत hi चिकल्लस होती है. मेरे घर में तीन तीन पैदा हो गयी. अब एक न एक दिन उन्हें जाना hi है घर चोरर के. उनकी शादी का खर्चा अलग, ऊपर से शादी के पहले उनके किसी ऐरे जर्रे लड़के के प्यार में पद जाने का डर, कही कुछ गड़बड़ न हो जाए उसका डर.

शुक्ल और राजेश की बातें यदि अभी कोई सुनता तोह वो आसानी से देख के ये बता देता की शुक्ल अभी राजेश को भड़का रहा था.

राजेश : मतलब?

शुक्ल : मतलब यही की लड़किया बोहत चिकल्लस होती है. मेरी सोचो... में तोह लूट hi जाऊंगा

तीन तीन लड़कियों की शादी. लड़कियों को हमेशा सख्ती से रखो.

राजेश : पर मेरी नेहा बोहत अच्छी है. उसमे कोई खराबी नहीं है. मेरी प्यारी बच्ची है वह.

शुक्ल : बच्ची सब प्यारी hi रहती है मिश्रा. पर जब ये बड़ी हो जाती है न तोह इनकी हरकते शुरू हो जाती है. पलट के जवाब देना, छोटे छोटे कपडे पहन न, रात में पार्टी में जाना, और न जाने क्या क्या. इस से पहले की हाथ से निकल जाए इन्हे अपने कण्ट्रोल में रखना.

राजेश : ........

शुक्ल : बेचारा पांडेय! मेरा करीबी है वो तोह. में जाता रहता हु उसके घर. कुछ दिन पहले गया था तोह उसकी लड़की मेरे सामने hi पांडेय से ज़बान लड़ा रही थी अब बताओ.

और कल बताओ एक ऐरे जर्रे लौंडे के साथ भाग गयी. पूरे आस पड़ोस में ठु ठु हो रही है पांडेय की. खर्र! यदि वो खुद hi थोड़ी सख्ती बरकता तोह ये अंजाम नहीं देखना पड़ता आज उससे... क्यों है न?

राजेश : हँ? Haa...haaa!

राजेश जो खयालो में खोया हुआ था एकदम से हां में हां मिलाते हुए कहा.

शुक्ल : काम से कभी आराम भी ले लिया करो राजेश. क्या कहते हो? काम के बाद चलोगे? थोड़ा खाने पीने बोले तोह?

राजेश : में शराब नहीं पीटा...

शुक्ल : अरे मत पीना, बस खा लेना कुछ. कुछ और भी लोग चल रहे है. चल दो, थोड़ा अच्छा महसूस होएगा.

राजेश ने भी सोचा की दिन बा दिन काम की वजह से उसका दिमाग वैसे hi खराब रहता है, थोड़ा घूम लेगा तोह अच्छा महसूस होएगा उससे.

राजेश : अच्छा ठीक है!

शाम हुई, बैंक में एम्प्लाइज ने अपना अपना काम ख़तम किया और सभी खाने पीने के लिए एक अच्छे से होटल गए जहा ड्रिंक्स भी सर्वे करि जाती रही.

सब हस्सी मज़ाक करते हुए स्नैक्स का लुत्फ़ लिए, राजेश ने घर पर फ़ोन करके बता दिया की वो लेट आएगा.

शुक्ल : लो भाई राजेश! पीयो!

राजेश : में नहीं पीटा शुक्ल साब बताया था आपको.

शुक्ल जो की पहले hi थोड़े नशे में था आके बगल में बैठ गया और ज़बरदस्ती आधा गिलास भर दिया.

शुक्ल : थोड़ा सा hi पी लो राजेश. ये जड़ीबूटी है. यही तोह हम सब की ज़िन्दगी को मज़े से भर्ती है. यदि ये न होये तोह हम सब तोह परिवार और काम के बोझ के नीचे डाब के मर्डर hi जाए.

राजेश : अच्छा!?

शुक्ल (नशे में) : पी के तोह देखो! में बोहत लाचार हु राजेश... मुझे साला... साला तीन तीन लड़किया हो गयी. एक भी लड़का नहीं. काश... काश मेरी बेतिया न होती

राजेश : ye...ye क्या बात कर रहे हो शुक्ल साब?

शुक्ल : हां राजेश! ये बात तुम्हे तब समझ आएगी जब तुम इसको ध्यान से देखोगे. कभी अपनी बेटी को ध्यान से परखा है? किस के साथ उठती बैठती है स्कूल में? कोण उसके दोस्त है? किस से बात करती है फ़ोन पर? एक दिन भाग गयी तोह क्या करोगे राजेश? बोलो?

राजेश (थोड़ा गुस्से में) : ये क्या बकवास कर रहे हो आप? नेहा मेरी बच्ची है! मेने उससे क्या संस्कार दिए है ये में जानता हु अच्छे से.

शुक्ल : अच्छा? तोह मेरा जवाब दो न? यदि... यदि वो भाग गयी तब तुम क्या करोगे?

राजेश : में...

शुक्ल : हाहाहा! नहीं है न जवाब? ये लो अब पियो थोड़ी सी. ऐसे समय में सिर्फ यही मदद करती है.

राजेश ने एक बार गिलास को देखा कुछ सोचा और फिर उठा के पीने लगा, उसके ऐसा करते hi शुक्ल के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी.

दरअसल सच्चाई तोह ये थी की शुक्ल की तीन बेतिया ज़रूर थी और वो उनसे परेशां भी था की उनका खर्चा आगे चल के शादी में बोहत लगेगा. पर उस से ज़्यादा उससे इस बात से जलन रहती थी की राजेश के पास राहुल जैसा लड़का था.

राहुल अक्सर बैंक आया करता था, बैंक में राजेश के सभी दोस्त राहुल को जानते थे और उससे एक बोहत hi अच्छे लड़के का टाइटल दिए हुए थे. राजेश को बड़ा प्राउड होता था जब भी वो राहुल को अपने दोस्तों के बीच खड़ा करता था.

पर शुक्ल इसी बात से और जल भून जाता. एक तोह उसका कोई लड़का नहीं था और ऊपर से तीन तीन लड़किया, उसका दिमाग सही से काम करना बंद हो गया था. आज उसने सोचा की यदि वो मैनेजर बन गया तोह आगे चल के अपनी लड़कियों की शादी करने के बाद उसके पास काम से काम कुछ तोह बचेगा. पर यदि सिर्फ एम्प्लोयी hi रहा तोह बेशक वो तोह लूट जाएगा फ्यूचर में.

और उसके रास्ते में सबसे बड़ा काटा था राजेश.

राजेश को हटा तोह नहीं सकता था शुक्ल पर उसको मानसिक रूप से उससे तनाव में ज़रूर दाल सकता था और आज वो यही करने का सोच के आया था.

अपनी बातो से उसने राजेश को शराब पीला पीला कर उसके मैं में एक नया विचार घुसेड़ दिया की लड़किया एक बोझ की तरह है. राजेश भी न चाहते हुए उसका ध्यान बार बार नेहा और उसके फ्यूचर पर hi जा रहा था और फिर पांडेय की बेटी भाग गयी उस बात से उसका सर और दुखने लगा.

सारे एम्प्लाइज खा पी कर होटल से जा चुके थे पर राजेश और शुक्ल अभी तक बैठे हुए थे. शुक्ल कान भरता और शराब का गिलास भी... राजेश ने काफी शराब पी ली थी.

और अभी वो गाडी चलाने की हालत में नहीं था. इस वक़्त राजेश के पास कोई कार नहीं थी. सिर्फ बाइक थी. कार तोह राजेश ने मैनेजर बन्न ने के बाद ली थी.

शुक्ल ने उसको हिदायत दी की वो कुछ देरर यही रहे और जब नशा काम हो जाए तोह वो घर चला जाए.

शुक्ल होटल के मैनेजर को बता गया की राजेश को यही पर रुकने दिया जाए और रात में उससे उठा कर घर भेज दिया जाए.

यहाँ राजेश का दिन तोह कुछ इस प्रकार गुज़रा पर घर में शाम से लेकर रात तक क्या हुआ वो भी जान लेते है...

जब शाम का वक़्त था, थोड़ी थोड़ी आंधी चल रही थी, पत्ते और धुल उड़द के घर के द्वार से अंदर की और आ रही थी, नेहा ने उठ के फौरन गेट को बंद किया.

नेहा : भाई! आज कितनी आंधी चल रही है...

नेहा ने दूर लॉक करते हुए राहुल से कहा जो की वही सोफे पर बैठा हुआ लैपटॉप में कुछ काम कर रहा था,

राहुल : ......की : भाई???

नेहा के कई बार कहने पर भी जब राहुल ध्यान नहीं देता तोह नेहा चिढ़ते हुए आती है और उसकी गोदी में उसकी तरफ मुँह कर के बैठ जाती है, और उसका चेहरा अपने हाथो में ले लेती है,

राहुल को भी महसूस हो रहा था की अब उसकी बहिन बड़ी होने लगी है, उसकी छथि पे नेहा के हलके उभरे हुए स्तन जो ठीके थे.

नेहा : भाई???

राहुल : गुड़िया! क्या कर रही हो तुम? में काम कर रहा हु न...

नेहा : तुम ये बार बार ताऊ जी का तोह कही डैड का काम क्यों करते रहते हो? तुम अभी सिर्फ स्कूल में hi हो. तुमको ये सब काम तोह बड़े होक करना चाहिए न, फिर डैड लोग तुमको इतना काम क्यों देते है?

राहुल : अब में बड़ा हु तोह मुझे तोह करना hi पड़ेगा न?

नेहा : वही तोह बोल रही हु मेरे भाई!! तुम अभी सिर्फ 11तह क्लास में हो, फिर ये लिस्ट वगैरह बनाना डैड तुमको क्यों देते है? तुम्हारी उम्र अभी पढ़ने की है, ये सब करने की नहीं. पिछली बार ताऊ जी ने तुम्हे दूसरे शहर भेज दिया था काम के लिए और वो भी अकेले.

राहुल : वो तोह छोटा सा काम था गुड़िया और वैसे भी वो शहर कोई बोहत दूर नहीं था.

नेहा : ओह्ह अच्छा? कोण से पेरेंट्स एक 11तह क्लास के स्टूडेंट को दूसरे शहर भेजते है अपने काम के लिए? और वो भी ताऊ जी ने भेजा. डैड ने मन तक नहीं किया उनको. हम्फ!!

राहुल : अच्छा मेरी गुड़िया मुझे माफ़ कर दे...

नेहा : तुम अब से इनके काम नहीं करोगे... मुझे अच्छा नहीं लगता. समझ गए न?

राहुल : जैसी आपकी आज्ञा मेरी माँ...

नेहा : हीहीही...

नेहा आगे बढ़ के राहुल के गालो पर किश कर देती है और उस से गले लग के उसकी छाती में अपना सर रख के चिपक जाती है,

नेहा : आज बोहत आंधी चल रही है भाई...

राहुल उसका सर सहलाते हुए कहता है,

राहुल : हम्म!!

नेहा : आज कुछ बुरा होएगा क्या?

राहुल : तू फ़ालतू बातें मत सोच! बस एन्जॉय कर.

नेहा : हम्म!!

नेहा : भाई???

राहुल : हम्म!?

नेहा (ब्लश) : यू लव में न??

राहुल (स्माइल्स) : ये भी कोई पूछने की बात है गुड़िया?

नेहा : हीहीही! ी लव यू तू!!

रात को नेहा सोने चली जाती है 9 बजे hi, थोड़ी बोहत बातें निकिता से करती है उसके बाद सोने चली जाती है.

इधर निशा और राहुल सोफे पर बैठे बात कर रहे थे,

राहुल : डैड अभी तक नहीं आए माँ? रोज़ तोह वो 8 बजे आ जाते है.

निशा : हां बीटा! मेने फ़ोन किया था, कह रहे थे की 10-11 बजे तक आएँगे.

राहुल : 10:30 तोह बज hi गया है माँ.

निशा : हां! तू अब सजा. वो आ जाएंगे. में भी अपने कमरे में थोड़ी देरर लेट लेती हु.

राहुल : बस अभी चला जाऊंगा, ये काम होने hi वाला है.

निशा उठ के अपने कमरे में चली जाती है, राहुल भी काम करते करते कब वही सोफे पर हलकी नींद में चला जाता है उससे पता hi नहीं चलता.

इधर 10:45 पे होटल में मैनेजर आके राजेश को टटोल के हिलाता है तोह राजेश होश में आता है.

मैनेजर : सर! अब आपको घर जाना चाहिए! क्या आप पहले से रेफ्रेशेड फील कर रहे है? ये पानी आपके लिए...

राजेश : हँ?? ओह्ह!! हां...

पानी पिके राजेश अपना चेहरा थोड़ा धोता है पर अभी भी नशा उसमे बचा हुआ था. उसने गाडी उठायी और तेज़्ज़ तूफ़ान में गाडी चलते हुए राजेश घर की और निकलने लगा.

जब राजेश घर पहुचा तोह काफी गीला हो चूका था. निशा ने दरवाज़ा खोला और देख के चौंक गयी. राजेश ऊपर से नीचे तक गीला था. तेज़्ज़ बदल गरज रहे थे, बिजली चमक रही थी. निशा ने फौरन बैग लेके उससे अंदर आने दिया.

सामने सोफे पे राहुल सोया हुआ था हलकी नींद में. राजेश ने एक नज़र उससे देखा और अंदर बैडरूम में कपडे बदलने चला गया.

निशा ने टॉवल दी और राजेश अपने बाल hi सूखा रहा था...

निशा : आज क्या हुआ? आप इतना लेट आए? कल नेहा का बर्थडे है पता है न आपको?

नेहा का नाम सुनते hi शुक्ल की बातें फिरसे राजेश के मैं में मंडराने लगी. हल्का नशा तोह उससे अभी भी चढ़ा हुआ था क्युकी उसने पहली बार जो पी थी. हैंगओवर अभी हटा नहीं था.

राजेश : पता है न निशा! बार बार क्यों लगी हो उसी बात के पीछे?

निशा : अरे!? पर में तोह आपको सिर्फ याद दिला रही थी. आप लेट क्यों हो गए?

राजेश : अब हो गया लेट! हर्र चीज़ बताऊ क्या तुम्हे?

निशा : अरे?? में तोह सिर्फ पूछ रही हु न?

राजेश : यही तोह प्रॉब्लम है. नौकरी करने जाओ वह सर थपाओ, घर आओ तोह यहाँ तुम सर खाती हो, आदमी जाए तोह जाए कहा. क्या में बिना बताए कही घूमने फिरने भी नहीं जा सकता क्या?

निशा (बॉहे सिकोड़ते हुए) : पर में तोह आपसे सिर्फ पूछ रही थी. बाहर बारिश इतनी हो रही है. चिंता लगी थी इसलिए पूछा मेने...

राजेश : मुझे पता है क्या करना है. चिंता के नाम पे हर वक़्त पीछे पद के मुझसे सवाल जवाब नहीं किया करो...

निशा : अरे... पर... वो तोह नेहा का कल बर्थडे है इसलिए मेने पूछा की आप इतनी लेट क्यों आए? क्या आप बात करने गए थे क्या होटल में? उससे सरप्राइज देना है क्या? या फिर कुछ और काम था? बस इतना hi तोह पूछ रही हु में.

राजेश : कोई सरप्राइज देने के लिए नहीं गया था. दोस्तों के साथ गया था एन्जॉय करने... क्या गलत किया?

निशा जो देख रही थी की राजेश बोलते वक़्त थोड़ा लड़खड़ा रहा था वो समझ गयी की राजेश आज पी के आया हुआ है.

निशा (शॉकेड) : आपने शराब पी??

राजेश : हां पी है! क्या कर लोगी तुम?

निशा : क्यों पी आपने?

राजेश : मेरा मैं! तुम और तुम्हारी लड़की...

निशा : नेहा कहा से आ गयी बीच में?

राजेश : अरे! कहा से नहीं आयी ये पूछो? हर्र वक़्त एन्जॉय करना, किसके साथ उठती है बैठती है स्कूल में हमे क्या पता? वो लकी हरामखोर उस दिन पेरेंट्स टीचर मीटिंग में घर के देख रहा था इसको...

निशा (शॉकेड) : अरे तोह? तोह आप किसी की भी बात का क्या मतलब निकाल रहे हो?

राजेश : किसी की भी बात का? अरे! कल वो पांडेय की लड़की भाग गयी किसी लफंगे के साथ.

निशा (शॉकेड) : k..kya??

राजेश : हां! अपनी लड़की को ज़रा कण्ट्रोल में रखो! समझी?

निशा (ुचि आवाज़ में) : हमारी लड़की ऐसी नहीं है. आपने सोच भी कैसे लिया...? छी! आपके मैं में ख़याल भी कैसे आया नेहा के लिए ऐसा...

इन् दोनों की बहस में राहुल की नींद खुल चुकी थी. वो फौरन उठा और बैडरूम में जाके देखना चाह रहा था की चल क्या रहा है पर दोनों की आवाज़ सुनकर उसने अपने कदम गेट के बाहर hi रोक लिए और सुन्न ने लगा.

राजेश : बस यही तोह दिक्कत है तुमलोगो के साथ, कभी अपनी गलती मान न hi नहीं है!

निशा : क्या गलती? किसी गलती? आप होश में तोह हो?

राजेश : यदि नेहा एक दिन भाग गयी तोह क्या करोगी?

निशा (तेज़्ज़ स्वर में) : आप वाहियात बातें कर रहे है. आप नशे में है.

राजेश : जवाब नहीं है न? सही कहा मेने एकदम! लड़किया सही में चिकल्लस होती है

निशा (गुस्से में) : आप...

राजेश : काश नेहा पैदा hi न हुई होती.

राजेश की बात सुनके न केवल निशा बल्कि बाहर खड़ा राहुल भी स्तब्ध था.

राहुल : (डैड? क्या बोल रहे है ये? माँ की बात से लगता है डैड होश में नहीं है. पर अभी रात में ये सब? कल गुड़िया का b'day है. ये सब क्यों हो रहा है? मुझे लगा hi था डैड के साथ कुछ गड़बड़ चल रहा है...)

अभी राहुल कुछ और सोचता इस से पहले hi बगल में नेहा की रूम की लाइट एकदम से जल जाती है, नेहा जो की बहस की आवाज़ से उठ चुकी थी वो यही सोच रही थी की क्या बातें हो रही है इतनी रात में डैड और माँ के बीच.

और वो आगे बढ़ के देखने जाने लगती है. बाहर खड़ा राहुल फौरन अलर्ट हो जाता है.

उससे नेहा की परछाई दरवाज़े के नीचे से पास आते हुए दिख गयी, उससे पता चल गया की नेहा इधर hi आने वाले hi और लगता है नेहा ने राजेश की बात भी सुन्न ली है.

राहुल : (ओह्ह no! गुड़िया!? लगता है गुड़िया ने सुन्न लिया है? और अब वो झगड़ने जा रही है. में ऐसा नहीं होने दे सकता. क्या बीतेगी उसपर जब उससे पता चलेगा की डैड ने उसके लिए क्या कहा है? हरगिज़ नहीं! कल गुड़िया का b'day है mein...mein ऐसा नहीं होने दे सकता. हां...)

राहुल एकदम से बैडरूम का दरवाज़ा खोल देता है और अंदर चला जाता है जिससे देख निशा सर राजेश चकित रह जाते है.

राहुल : क्या डैड? आपने मेरी बात क्यों कह दी??

नेहा उठ के आगे बढ़ती है और अपने कमरे का दरवाज़ा खोलती है, और वो माँ डैड के कमरे में जाने hi वाली थी की उसके कानो में राहुल की आवाज़ पड़ती है और वो वही ृक्क जाती है,

राहुल भी माँ डैड के कमरे में hi था?

नेहा कान लगा के सुन्न ने लगती है तोह उससे कुछ ये सब सुनाई देता है,

राहुल : ......बात क्यों कह दी??

निशा : क्या मतलब??

राहुल : मतलब सही hi तोह कहा. पर ये मेरे जज़्बात है. काश नेहा पैदा hi नहीं होती...

नेहा की आँखें चौड़ी हो जाती है अपने भाई के मुँह से ऐसी बात सुन कर...

निशा (चिल्ला कर) : राहुल!! ये क्या बोले जा रहे हो तुम? होश में हो की नहीं?

राहुल : होश में तोह अब आया हु माँ! काश! सिर्फ में होता... नेहा नहीं. तोह कितना अच्छा होता न?

निशा (गुस्से में) : तुम्हे क्या हो गया है एकदम से? आज हो क्या रहा है घर में? किसी बकवास बातें कर रहे हो?

राहुल : हां न माँ! सिर्फ में होता... तोह कितना अच्छा रहता. मुझे कोई बहिन वगैरह नहीं चाहिए थी... पर आपने मुझे एक बहिन देदी. मुझे वह बिलकुल भी पसंद नहीं है माँ...

नेहा के शरीर में रोये खड़े हो जाते है अपने भाई के मुँह से ऐसी बातें सुन कर, उससे यकीन hi नहीं हो रहा था की राहुल उसके बारे में ऐसा कह रहा है.

तभी राहुल पलट कर दरवाज़ा खोल देता है और नेहा कड़ी हुई सबको दिख जाती है, उसकी आँखों में ासु थे, उसके परर काँप रहे थे, उसका बदन सिहर रहा था.

जैसे उस से उसका सब कुछ छीन लिया हो. नेहा को देख निशा के होश hi उड़द गए, साथ hi साथ राजेश के भी.

निशा : ने... नेहा???

नेहा (कापते हुए) : माँ?? ये सब क्या चल रहा है? B..bhai?? ये... ये तुम क्या कह रहे थे अभी? हां? मज़ाक कर रहे हो? ः!! B'day सरप्राइज देने के लिए... है न??

राहुल उससे घूरते हुए आगे बढ़ता है और उसकी आँखों में आँखें दाल के कहता है,

राहुल : ओह्ह्ह्ह! तोह तुमने सब सुन्न लिया?? मुझे लगा तुम नहीं सुन्न पाओगी. खर्र अब जब तुमने सुन्न hi लिया है तोह इससे अपने दिमाग में बइठल लो... ी हेट यू!!

नेहा का शरीर फिरसे काँप उठता है, जिस भाई से अभी वह कुछ देरर पहले प्यार करने की रे ले रही थी, वही भाई उससे कह रहा था की वो उससे हेट करता है, यहाँ तक की वो तोह चाहता hi नहीं था की उसकी बहिन पैदा होये.

नेहा : कह दो की ये झूठ है ... भाई... कह दो की ये झूठ है ... आपने अभी बहार कहा था मुझसे... की... यू लव में. यू लव में राइट? ये सब झूठ है...

राहुल एक कदम आगे बढ़ाता है तोह नेहा एक कदम पीछे चली जाती है,

निशा (चिल्ला कर) : रहलललल!!!

राहुल : नहीं! वो तोह सब नाटक था मेरी गुड़िया. काश तू पैदा hi नहीं हुई होती नेहा...

ी जस्ट हेट यू!!! या फिर तू... ः!!

राहुल फिर से एक कदम आगे बढ़ाता है, और नेहा फिरसे पीछे चली जाती है, वो पूरी तरह से घबराई हुई थी और सिहर रही थी.

पूरा चेहरा आसुओ से भीगा हुआ था. वो तोह यहाँ आवाज़ सुन्न के आयी थी, ये सोचके शायद उसके लिए सबने सरप्राइज प्रेपर किया होगा पर यहाँ तोह कुछ और hi सन था जिसकी उम्मीद शायद नेहा ने कभी नहीं की होगी.

राहुल (धीरे से कान में) : या फिर tu...swarg सिधार गयी होती??

नेहा जोरर से चिल्ला कर रोने लगती है और तभी निशा आगे बढ़ के राहुल को दो थप्पड़ रसीद देती है और चिल्ला के उससे बाहर निकाल देती है,

निशा नेहा को लेकर रूम में चली जाती है और राजेश राहुल को लेकर रूम में चला जाता है.

राजेश की आँखों में ासु थे. वो इसलिए क्युकी राहुल ने सारा इलज़ाम अपने सर लिया. राजेश राहुल की बोहत क़द्र करता था, और इसी वजह से वो अपने होश में आ गया. राहुल की आँखों में भी ासु थे.

राजेश : राहुल??

राहुल : डैड! मेने जितना हो सका उतना बचा लिया. अब आगे आपको संभालना है. दुबारा ऐसी हरकत कभी मत करना.

राजेश को अपनी गलती का एहसास फौरन हो जाता है और वो रट हुए राहुल को पकड़ते हुए खुद को कोसने लगता है.

राजेश : तुझे ये सब करने की क्या ज़रुरत थी बीटा?

राहुल : ज़रा सोचिये डैड! एक लड़की का बाप यदि ये कह दे की वो पैदा hi नहीं हुई होती तोह उससे केसा लगेगा? शुक्र मनाइये की में समय पे आ गया. नेहा ने शायद आपकी बात सुन्न ली थी और इसलिए मुझे ये कहना पड़ा की आप मेरी बात क्यों कह रहे हो? ताकि उससे यकीन हो जाए की आप नहीं बल्कि में चाहता हु की वो पैदा hi न हुई होती.

राजेश : .......

राहुल : माँ बाप का साथ रहेगा तोह गुड़िया सर्वाइव कर लेगी. मेने उससे जनम नहीं दिया है, मेरे कहने का उससे बुरा लगेगा बोहत पर धीरे धीरे वो मुझे भूल जाएगी. पर यदि एक बाप hi उससे ऐसा कहेगा तोह उसका असर कई हद्द तक ज़्यादा रहेगा. शायद वो सर्वाइव hi न कर पाए. अब आपको और माँ को कसम है. आपलोग उससे कुछ भी नहीं बताएंगे. अब ऐसा hi चलने देना. वो मुझे भूल जाएगी बूत एटलीस्ट उसकी शादी के बाद आप लोग तोह टच में रहोगे उसके. ये सही एंडिंग है.

राजेश कुछ भी बोलने लायक नहीं था वो बस अपने को hi दोष दे रहा था.

*फ्लैशबैक एंड्स*

निशा : और यही है सच्चाई...

निशा ने जैसे hi बोलना बंद किया उसकी आँखों में ासु थे, सामने बैठे सभी लोग सच जान के स्तब्ध थे, लेडीज में सभी रोने लगी, मुकेश और रुपेश जैसे तैसे खुद को संभाले हुए थे.

निकिता (रट हुए) : ये यहाँ पे hi ख़तम नहीं होता आंटी... मुझे भी कुछ कहना है!!

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आज के लिए इतना hi गाइस!


धन्यवाद्!
 
अपडेट - 84

अब तक...

निशा : और यही है सच्चाई...


निशा ने जैसे hi बोलना बंद किया उसकी आँखों में ासु थे, सामने बैठे सभी लोग सच जान के स्तब्ध थे, लेडीज में सभी रोने लगी, मुकेश और रुपेश जैसे तैसे खुद को संभाले हुए थे.

निकिता (रट हुए) : ये यहाँ पे hi ख़तम नहीं होता आंटी... मुझे भी कुछ कहना है!!

अब आगे...

निशा : ?? क्या?? क्या कहना है निकिता?

निकिता (क्रिस) : राहुल भैया के बारे में...

आरती : कहो बीटा... क्या कहना है?

निकिता : jii...mom!! बात ये है की...

*फ्लैशबैक*

बात आज से 7 साल पहले की है, जब ये सब घटना हुई और राहुल ने सारा इलज़ाम अपने सर पर ले लिया था. अगले दिन hi उसकी गुड़िया यानी की नेहा का b'day था.

"आज तोह नेहु का b'day है! कमीनी अभी तक इनविटेशन भी नहीं भेजी मुझे! पार्टी दे भी रही है या नहीं?" बैठे हुए निकिता नाश्ता कर रही थी सुबह और नेहा की b'day पार्टी के बारे में सोच रही थी.

अभी वो सोच hi रही थी की इतने में hi उसका कीपैड वाला फ़ोन बजने लगता है और वो फ़ोन उठाती है तोह नेहा का hi था.

निकिता : hello?

नेहा : हां!

निकिता : कमीनी कही की! सुबह तुझे विश करने के लिए फ़ोन लगायी तोह उठायी भी नहीं तू.

नेहा : हां वो सॉरी! लेट उठी!

निकिता : आज तोह जल्दी उठ जाती काम से काम मैडम? जन्मदिन है तुम्हारा!? हैप्पी बर्थडे तो माय बेस्टेस्ट फ्रेंड!

कहा से जल्दी उठ जाती नेहा? रात भर सो hi नहीं पायी बेचारी. रात में जो कुछ भी हुआ वो उसकी ज़िन्दगी का सबसे बुरा वक़्त था. इस से बड़ा सदमा नेहा को कभी नहीं लगा था. पूरी रात रोटी जो रही.

नेहा : हम्म! थैंक यू!

निकिता : ये तू इतनी उखड़ी उखड़ी तरह क्यों बात कर रही है? कुछ हुआ है क्या?

नेहा : नहीं तोह? क्या हुआ? मुझे क्या हुआ? सब सही तोह है!

निकिता : o...okay!

नेहा : शाम 7 बजे से पार्टी है होटल क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स में. आ जाना याद से.

निकिता : ओह्ह! Okay! चल फिर पार्टी में मिलते है.

*कॉल एंड्स*

राजेश ने जो इतनी बड़ी गलती की थी. उससे सुधारना तोह अब उसी का काम था. उसने सुबह hi नेहा के b'day के लिए शाम के लिए होटल में अर्रंगेमेन्ट्स के लिए कॉल कर दिया था.

नेहा तोह पूरी तरह से टूट चुकी थी. वो दिन भर अपने रूम में रोटी hi रही. खुद को समझाती पर फिर फिरसे रोने लगती. उसकी चाहत hi इतनी थी राहुल के लिए. कई बार तोह उसका मैं hi नहीं मानता था की राहुल ने ऐसा किया है.

शाम हुई, इनविटेशन के अकॉर्डिंग सभी इन्वितेद गेस्ट्स पहुँच गए वेन्यू पर और पार्टी शुरू हुई.

नेहा राहुल को फेस नहीं करना चाह रही थी. ये पल उसके लिए सबसे कठिन पल था. उससे समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे. एक रात में कितना कुछ बदल गया. जिस भाई से वो इतना प्यार करती थी उसी भाई ने उसके साथ ऐसा किया.

निकिता जब अपनी फॅमिली के साथ पहुची तोह नेहा को सभी ने विश किया, गिफ्ट्स दिए, और सभी पार्टी एन्जॉय करने लगे.

"हैप्पी बर्थडे नेहा" एक आवाज़ आयी और निकिता ने जब देखा तोह उसकी बॉहे टेंशन के मारे सिकुड़ गयी.

ये लकी था. लकी एक फ्रेंड होने के नाते नेहा ने उससे इन्विते किया था. पर उसके आने से राहुल निकिता और राजेश तीनो hi खुश नहीं थे. ऐसा इसलिए क्युकी ये तीनो को इस बात का आभास था की ये लकी कुछ सही नहीं है.

राहुल तोह खासकर उसपे hi नज़र रख रहा था. उसके स्कूल के कुछ जूनियर्स हर्र वक़्त खबर देते रहते थे की लकी नेहा के साथ केसा बेहवे करता है और पीठ पीछे क्या क्या बातें करता है.

पार्टी चल रही थी और राहुल थोड़ी दूर खड़ा हुआ था. सभी ने ये बात नोटिस करि और राजेश और निशा से पूछा भी इस बारे में तोह दोनों ने यही जवाब दिया की दोनों के बीच थोड़ा झगड़ा हो गया है थोड़े दिन में सुलझ जाएगा.

बच्चो के झगडे के बारे में सोच कर लोगो ने ज़्यादा प्रश्न नहीं किया क्युकी सिब्लिंग्स में झगडे तोह होते hi रहते है. कोई नयी बात नहीं थी.

राहुल दूर खड़ा स्नैक्स खा रहा था की उससे दिखाई दिया की लकी के कान में एक लड़का कुछ बोलता है और लकी एकदम से खुश हो जाता है.

उसके बाद वही लड़का बाहर निकलता है और उसके पीछे पीछे राहुल उसका छुप कर पीछे करने लगता है.

लड़का निकल के कार में से एक केक का बॉक्स निकालता है और फिर जेब में से कुछ पुड़िया निकालता है और उस केक के बॉक्स को खोलकर केक पर छिड़कने लगता है.

अभी वो ये काम इत्मीनान से कर रहा होता है की एकदम से उसकी गर्दन पर एक मज़बूत हाथ की पकड़ बांधती है. लड़का घबरा के पीछे देखता है और राहुल के देख के उसके होश उड़द जाते है.

राहुल : क्यों बी? क्या कर रहा है यहाँ?

लड़का (घबरा के) : wo..wo केक ले जा रहा था. नेहा के लिए. लकी भाई ने मंगवाया है.

राहुल : अच्छा? और ये केक में क्या मिलाया है?

लड़का (डर के) : wo...wo... वो कुछ nahi...kuch भी तोह नहीं!

राहुल बिना कुछ बोले उसको साइड में घसीटता है और उससे दो घुसे मुँह पे hi रसीद के जड़ देता है. बेचारे लड़के को गांड hi फट जाती है. दो घुसे में hi उसकी हालत खराब हो जाती है और वो गिड़गिड़ाने लगता है.

राहुल : अब बोल! सच सच!

लड़का : wo...wo... ये कोई पाउडर है. लकी भाई ने बोलै था केक में मिला के लाना.

राहुल : क्यों?

लड़का : वो ये केक सिर्फ नेहा के लिए है. जब वो ये केक खाएगी तोह उससे कुछ कुछ होने लगेगा.

राहुल : क्या?

लड़का : मुझे नहीं पता. लकी भाई ने बोलै था की नेहा को कुछ कुछ होने लगेगा और फिर लकी भाई नेहा को किश करेंगे चुपके में. तोह नेहा ख़ुशी ख़ुशी करवाएगी.

ये बात सुनते hi राहुल इतना आग बबूला हो गया की उसने 2 घुसे और जड़ दिए उस लड़के को.

राहुल ने अंदाजा लगाया की ये पाउडर और कुछ नहीं एक अफ्रोदिसिअस टाइप का hi होगा. लकी को किसी ने बताया होगा की इससे मिला देना और लड़की को ज़्यादा होश नहीं रहेगा. और लड़की की सेक्स करने की िक्षा बढ़ जाएगी.

राहुल उस लड़के को पीट कर सीधे घर भगा दिया और जब वो अंदर आया तोह पार्टी ज़ोरो शोरो से चल रही थी.

निकिता : राहुल भैया! आप दूर दूर क्यों भाग रहे हो? अरे आज तोह नेहु का b'day है. जाइये उससे गिफ्ट दीजिये.

राहुल : हँ? Umm...haa! देता हु...

राहुल ने वो केक वाला बॉक्स लिया और वाशरूम में डस्टबिन में फेकने hi जा रहा था. वाशरूम में पर लकी पहले से hi था और जैसे hi उसने देखा की राहुल उसका केक वाला बॉक्स फेकने वाला है, लकी ने दौड़ के उससे छिना लिया.

लकी भागते हुए बाहर जाने लगा. उससे पता था राहुल और नेहा के बीच कुछ झगड़ा हुआ है और नेहा अभी राहुल का सपोर्ट नहीं करेगी.

लकी वाशरूम से बाहर निकल नेहा को आवाज़ दिया, वो किसी भी हालत में नेहा को ये केक खिलाना चाहता था पर जैसे hi नेहा ने उसकी तरफ देखा और राहुल ने पीछे से उससे एक ज़ोरदार ठोकर मारी और केक हवा में उड़के सीधे ज़मीन पर ठप्प से गिरा.

ये वह मौजूद लोगो में लगभग सभी ने देखा.

नेहा जो की सब देख रही थी उसकी आँखें गुस्से से एकदम लाल हो गयी. ऊपर से लकी ने और आग में घी डालने का काम कर दिया.

लकी : नेहा तुम्हारा भाई केसा है? में तुम्हारे लिए केक लाया था और इसने मुझे धक्का देके गिरा दिया. सारा केक बर्बाद कर दिया.

राहुल (नेहा को देखते हुए) : wo...usme...

नेहा (जोरर से) : शुत्टट उपपपप!!!

नेहा के इतनी तेज़्ज़ चिल्लाने से सभी शांत हो गए. सब उससे hi देख रहे थे. निकिता बोहत हैरान थी. ये नेहा को क्या हो गया आज?

राहुल : ी...

नेहा (चिल्ला कर) : ी साइड शुत्टट ुप्प्प! गेट आउट!! गेत्त्त ोुत्तत्त!!!

राजेश : ने...

राहुल : it's okay डैड!

राजर्ष खुद के ऊपर गुस्सा करते हुए डाट पीस रहा था, मुट्ठी कस रहा था. सब उसकी गलती के कारण हो रहा था.

राहुल बाहर जाते जाते लकी को कान में बाहर मिलने के लिए कहता है और लकी के साथ उसके 3 दोस्त थे इसलिए वो बिना दर्रे 3 दोस्तों के लेकर बाहर चला गया. इस वक़्त राहुल को मार्टिकल आर्ट्स नहीं आता था. तोह ज़ाहिर सी बात थी की क्या होने वाला था. हालांकि राहुल 3 साल बड़ा था इन् सब से पर फिर भी 4 लौंडो को एक साथ संभालना थोड़ा मुश्किल काम था उस वक़्त राहुल के लिए.

निकिता : (कुछ चल रहा है नेहा की फॅमिली में. बात कुछ और hi है. नेहा कभी भी राहुल भैया से ऐसे बात नहीं करती. मुझे जाके देखना चाहिए)

कुछ देरर के बाद जब निकिता बाहर जाकर देखती है तोह स्तब्ध हो जाती है. रोड के साइड में लकी और उसके दोस्त अपने अपने पेट पकड़ के कराह रहे थे और राहुल खड़ा हुआ उन्हें देख रहा था. पर जब राहुल पलटा तोह निकिता और हैरान हो गयी.

उसके सर से खून निकल रहा था, और कई जगह चोट भी आयी हुई थी. लगता है किसी ने पत्थर से वार किया था.

निकिता : राहुल भैया??

निकिता सब देख चुकी थी, उस से छिपाने का कोई मतलब नहीं था. इसलिए राहुल जल्दी से उससे सब कुछ बताता है की लकी क्या करने वाला था और राहुल ने उससे क्यों मारा. पर बदले में राहुल ने एक वचन ले लिया निकिता से.

वो था नेहा को कभी भी ये बात नहीं बताना.

और राहुल वह से पता नहीं कहा चल दिया पैदल hi...

निकिता सिर्फ उसकी पीठ देखती रही जो धीरे धीरे रात के अँधेरे में गायब हो गयी.

*फ्लैशबैक एंड्स*

जब निकिता ने बोलना बंद किया तोह वो फुट फुट कर रोने लगी. उसके साथ hi साड़ी लेडीज वह पर बैठी रोने लगी.

तनीषा (रट हुए) : एक मिनट... Omg!!

निशा (रट हुए) : क्या हुआ बीटा??

तनीषा : इसका मतलब... Omg!!!

तनीषा को अब कुछ ऐसा पता चलता है जिससे जानकार वो और रोने लगती है.

निशा : बीटा क्या हुआ बोल न!

तनीषा : मतलब मेरी मुलाक़ात राहुल से उसी दिन हुई thi...mene उस से पूछा था की इतनी चोट कैसे आयी? जब वो रात में मुझे खाली सड़क पर मिला था. उसके सर से काफी खून बह रहा था. तोह उसने जवाब दिया था की ऐसे hi लड़ाई में फस्स गया था... मतलब... वो जैसा की निकिता ने बताया... वो उस वक़्त वह से लड़के निकल आया था और फिर इत्तेफ़ाक़ से मेरी मुलाक़ात उसी वक़्त उस से हुई.

अभी वो सभी सुबक hi रहे थे की इतने में कुछ गिरने की आवाज़ आयी, ऐसा लगा कुछ टूटा है.

दरवाज़े के पास कड़ी अंशु ने अटका हुआ दरवाज़ा जब खोला तोह नज़ारा देख के सबके होश hi उड़द गए.

वंशु : (ओह्ह्ह शीट्ट्ट्ट!!)

नीचे एक क्राकरी डिनर सेट का बॉक्स पड़ा हुआ था जो की अंदर से लगता है टूट चूका था और उसके ठीक पीछे एक व्यक्ति खड़ा हुआ था.

वो कोई और नहीं नेहा hi थी. आँखे फाड़े वो बस सभी को देख रही थी. उसका शरीर कांप रहा था.

निशा नेहा को देख के इतना हैरान हो गयी और डर भी रही थी की अब नेहा कैसे बेहवे करेगी. पर नेहा तोह बॉक्स लेने के बाद अपनी फ्रेंड के यहाँ जाने वाली थी न? फिर इतनी जल्दी कैसे आ गयी?

जब निशा की नज़र दरवाज़े पर कड़ी अंशु पर गयी तोह अंशु के चेहरे पर एक अजीब मुस्कान थी और अंशु ने अपनी नज़रे फेरर ली. निशा को समझने में देरर न लगी की अंशु ने hi कुछ किया है. बस कुछ भी गड़बड़ न होये यही निशा उपरवाले से दुआ कर रही थी.

एक कदम, दो कदम... नेहा धीरे धीरे सभी को आँखे फाड़े देखते हुए आगे बढ़ती है.

वो निशा के पास पहुचती है...

नेहा (कापते हुए होंठो से) : k...kya था ये माँ??? ये सब? Y..ye.. मज़ाक है n..na? है न? हां??

निशा रट हुए अपनी नज़रे झुका लेती है.

नेहा और डर जाती है, वो बगल में कड़ी तानिया के पास जाती है.

नेहा (कांपते हुए) : d...diii.. y..yee देखो न माँ ko...haa? केसा मज़ाक कर रही! आप सब मज़ाक कर रहे हो न? कहते क्यों नहीं!? दी! आप बोलिये न कुछ!

तानिया : (अंशु ने कहा था की बाकी काम मेरा है! लुक्स लिखे मेरी टर्न आ गयी है!)

तानिया : नहीं नेहा! यहाँ कोई मज़ाक नहीं चल रहा. तुमने जो सुना है! वही सच है! एकदम सच!

सभी अपनी अपनी सीट से खड़े हो गए ताकि ये गंभीर माहौल बिगड़े तोह वो संभाल सके.

नेहा को जैसे यकीन hi नहीं हो रहा था. आखिर वो हर्र वक़्त गलत कैसे रह सकती है? राहुल उससे हेट करता है इस बात से तोह वो सूरे थी पर फिरसे वो गलत कैसे साबित हो गयी? नहीं! ये ज़रूर कोई ढोंग है!

नेहा (जोरर से) आप सब झूठ बोल रहे है... सब झूठ है!! सब झूठ! Wo...wo...mujhe मारना चाहता था! वो झूठा था! दिखावटी था! वो एक बुराई से भरा हुआ इंसान है! He's ा लिएर्!!!

तानिया अपनी बॉहे सिकोड़े बस नेहा को hi देख रही थी. उसने एक झलक अंशु को देखा तोह अंशु ने सर हिला कर उससे ok का इशारा किया यानी की तानिया अगले स्टेप के लिए आगे बढे.

तानिया ने गहरी सास ली और फिर कहना स्टार्ट किया.

तानिया : नहीं नेहा! तुमने जो कुछ भी सुना है!

वो सब सच है!

नेहा (रट हुए) : नाहीई!! आप झूठ बोल रही हो! सब झूठ बोल रहे है!

तानिया (गहरी सास लेते हुए) : नेहा...

नेहा (जोरर से) : शुत्टट ुप्प्प!!! सब झूठ है! सब दिखावा है...

तानिया: उसने सब कुछ तुम्हारे लिए किया! तुम्हे सुन्न न होगा मेरी बात! तुम चाहो या न चाहो! बुआ, फूफा जी को कसम थी की तुम्हे ये सच कभी न बताया जाए.

नेहा : झूठ... झूठ!! सब शांत हो जाइये...

नेहा अपना सर पकडे रट हुए सब कुछ सुन्न के स्तब्ध थी! पर शायद अभी उससे पूरी तरह से यकीन दिलाने का काम तानिया के ऊपर था.

नेहा यहाँ इसलिए आ पायी क्युकी उसके फ़ोन में अंशु का केवल एक मैसेज पड़ा हुआ था!

"जितनी जल्दी हो सके घर आओ! और घर के बहार दरवाज़े के पास कड़ी रहना! Don't ओपन थे दूर! Don't मेक अन्य नॉइज़! बस खड़े रहना!"

नेहा ने जब ये मैसेज पढ़ा था तोह बोहत अटपटा लगा था पर अंशु ने कहा है मतलब कुछ बात तोह होगी, यही सोच के वो यहाँ आयी थी और उसने बिलकुल वैसा hi किया जैसा की अंशु ने बताया था.

पर उससे क्या पता था की उससे इतना बड़ा झटका लगने वाला है!

तानिया : तोह में शुरू करती हु...

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आज के लिए इतना hi गाइस!!


धन्यवाद्!!
 
अपडेट - 85

अब तक...

नेहा यहाँ इसलिए आ पायी क्युकी उसके फ़ोन में अंशु का केवल एक मैसेज पड़ा हुआ था!

"जितनी जल्दी हो सके घर आओ! और घर के बहार दरवाज़े के पास कड़ी रहना! Don't ओपन थे दूर! Don't मेक अन्य नॉइज़! बस खड़े रहना!"

नेहा ने जब ये मैसेज पढ़ा था तोह बोहत अटपटा लगा था पर अंशु ने कहा है मतलब कुछ बात तोह होगी, यही सोच के वो यहाँ आयी थी और उसने बिलकुल वैसा hi किया जैसा की अंशु ने बताया था.

पर उससे क्या पता था की उससे इतना बड़ा झटका लगने वाला है!

तानिया : तोह में शुरू करती हु...


अब आगे...

तानिया : तुम्हे लगता है तुम्हे सब कुछ पता था अपने भाई के बारे में नेहा! पर असल बात तोह ये है की तुम्हे कुछ भी नहीं पता था.

नेहा : नूवो! Mein...mein जानती हु उससे अच्छे से, wo...wo...

नेहा की हालत इस वक़्त बोहत hi खराब हो रही थी. उसका शरीर काँप रहा था, आँखों में हलके हलके आसुओ की बुँदे थी, आँखें शॉक के मारे एकदम चौड़ी हो गयी थी.

तानिया : ये सच्चाई सिर्फ और सिर्फ में, अंशु और तुम्हारे माँ डैड hi जानते थे. इनफैक्ट मुझे और अंशु को बोहत बाद में पता चला ये. बुआ और फूफा तोह तुम्हे बताने से rahe...aur राहुल का ये सच हमेशा हमेशा के लिए अँधेरे की गहराईयो में खो जाता... बिलकुल वैसे hi... जैसे राहुल चाहता था.

नेहा : नाहीइ!! झूठ!!!... आप झूठ बोल रही हो!!

नेहा बाहर से तोह ये कह रही थी पर उसका दिमाग सब समझ रहा था, वो जान रहा था की असली सच क्या है. फिर भी नेहा इससे मान न नहीं चाहती थी, शायद उसमे इस सच को एक्सेप्ट करने की हिम्मत नहीं थी और इसलिए ऐसा कहके वो खुद को झुटला रही थी, इस उम्मीद में की हो सकता है वो किसी सपने में हो या फिर सब झूठ हो.

तानिया : याद करो! याद करो अपने प्यारे बड़े भाई को... वही भाई, जिसके साथ तुम इतना जुडी हुई थी.

नेहा के ना चाहने पर भी तानिया की आवाज़ सुनते hi उसका दिमाग राहुल के साथ बितायी यादो से भरने लगता है, राहुल का वो चेहरा, नेहा का उसकी गॉड में बैठ के तंग करना, राहुल का उससे घुमाना, सारे सीन्स उसके दिमाग में घूमने लगते है.

और नेहा का शरीर और कांपने लगता है, सासें तेज़्ज़ होने लगती है, उसका सीना बड़ी hi तेज़्ज़ी से ऊपर नीचे हो रहा था, वो बोहत hi हेअविलय ब्रेअथे कर रही थी.

नेहा (चिल्ला के) : नहहीइ!!! वो लिएर् था...

वो मुझे मारना चाहता था, उसने मुझसे खुद कहा था, वो इस घर का अकेला वारिस होना चाहता था, usse...usse...

तानिया : अभी भी तुम्हे समझ नहीं आया नेहा!? राहुल ने जो भी कहा था, वो तुम्हारे डैड का इलज़ाम अपने सर पर लेने के लिए कहा था.

नेहा : ........

तानिया का अब पारा थोड़ा चढ़ चूका था. इतना सब होने के बाद भी नेहा सच मान ने तैयार नहीं थी तोह उसने सीधा आखिरी हमला करने की सोची...

तानिया ने बोलना स्टार्ट किया और बोलते बोलते वो एक एक कदम धीरे धीरे नेहा की तरफ बढ़ा रही थी...

तानिया : राहुल ने तुम्हारे और उसके रिलेशन का बलिदान दिया क्युकी वो तुम्हे बचाना चाहता था. बचाना चाहता था तुम्हे कुछ गलत कर लेने से. यदि तुम्हे ये पता चलता की तुम्हारे डैड तुम्हे नहीं चाहते थे, तोह उस वक़्त तुम्हारा रिएक्शन क्या होता? क्या तुम इस घर में रहती? ये जानते हुए भी की तुम्हारे डैड तुम्हारा जन्म चाहते hi नहीं थे? तुम्हारा रिश्ता अपने पिता से टूट गया होता. तुम्हारा रिश्ता अपनी माँ से बिगड़ जाता. तुम्हारी उम्र छोटी थी, तुम अपना घर चोरर के भाग जाती. तुम ये सब सेहन नहीं कर पाती और कुछ गलत कदम भी उठा सकती थी. और इसलिए! इसलिए राहुल ने तुम्हे इन् सब से बचाने के लिए, खुद का बलिदान दे दिया, उसने अपने उस प्यारे रिश्ते को डाव पे लगा दिया ताकि वो तुम्हे इन् सब से बचा सके. उसने तुम्हे जन्म नहीं दिया, इसलिए उससे लगता था की तुम उसके साथ रिश्ता टूट जाने से जल्दी उभर जाओगी. पर यदि तुम्हारा रिश्ता अपने माँ या बाप से टूट गया तोह तुम किधर जाती? उससे पता था की तुम घर चोरर के भाग जाती. इसलिए सब कुछ... सब कुछ उसने तुम्हे बचाने के लिए किया...

नेहा की सासें और तेज़्ज़ हो गयी थी, लग रहा था वो किसी भी वक़्त बेहोश हो सकती है. वो अपने हथेलियों को खोल कर उन्हें कांपते हुए देखे जा रही थी, जैसे उसने उन् हथेलियों से किसी का खून कर दिया हो.

तानिया (आगे बढ़ते हुए) : में ये कहने से बिलकुल भी पीछे नहीं हटूंगी की तुम्हारे डैड खुदगर्ज़ थे... राहुल hi तुम्हारे परिवार को लकी और बाकी खतरों से पीठ पीछे बचाता, तुम्हे अभी ये बात भी नहीं पता होगी की जब अंशु और वंशु तुम्हारे घर रहने आए थे और जब तुम सभी राहुल को चोरर कर घूमने गए थे, उस रात भी राहुल ने पीठ पीछे तुम सभी को बचाया था. उस वक़्त लकी तुम्हे वह अगवा करने आया था...

तानिया की बात सुन्न कर सभी शॉकेड रह जाते है सिवाए अंशु और वंशु के. अंशु ने तानिया को सब बता दिया था और तानिया वही सब बातें बोल रही थी.

नेहा फटी आँखों से तानिया को घूरे जा रही थी और तानिया धीरे धीरे उसके पास hi बढ़ रही थी.

तानिया : राहुल तुम्हे बुरा भला कहता, कहता की तुम कभी भी उस से आगे नहीं निकल पाओगी, हमेशा उस से पीछे hi रहोगी क्युकी वो चाहता था... की तुम उस से नफरत करो, उसने तुम्हे एक रीज़न दिया की तुम मज़बूत बन सको और उस से सच में एक दिन आगे निकल सको. वो सोचता था की ऐसा करने से तुम्हारा आत्मविश्वाश बढ़ेगा. तुम उस से नफरत करोगी और उससे धीरे धीरे भूल जाओगी, तुम पहले से कही ज़्यादा होशियार हो चुकी होगी, और तुम्हारे पास अपने माता पिता का साथ भी बरकरार रहेगा. यही चाहता था वह...

शुरू से लेकर अंत तक... उसने केवल तुम्हारा भला hi चाहा. तुम्हे प्रोटेक्ट करना चाहा और किया भी... उसने अपने माता पिता को कसम दी की कुछ भी हो जाए तुम्हे इस सच्चाई का पता न चले...

कोनसा भाई अपनी बहिन को मारना चाहेगा? यदि वो मारना चाहता भी... तोह ये बताओ! की तुम अब तक ज़िंदा कैसे हो? उसने ये सब बड़े hi स्मार्टली किया, उसने तुम्हे उस पॉइंट तक पहुचा दिया जहा तुम उसके जाल में फस्स गयी और उसकी बातो को सच मान बैठी.

तानिया आगे बढ़ते बढ़ते नेहा के पास पहुँच चुकी थी और वो देख रही थी की नेहा की हालत अभी क्या है, तानिया ने उसकी चीन को पकड़ा और उसका सर ऊपर उठाया और उसकी आँखों में देखा...

तानिया : उसने सारा का सारा इलज़ाम अपने कंधो पर लिया और यहाँ से चला गया. उसने अपनी नौकरी के लिए खुद इंतज़ाम किया और वह रहकर भी उसने तुम्हारे ऊपर से ज़रा भी ध्यान नहीं हटाया, वो वह रहकर भी तुम्हे यहाँ प्रोटेक्ट कर रहा था.

उसकी बात सुन्न नेहा को मोनिका का चेहरा और लकी वाला इंसिडेंट याद आ जाता है और उसकी आँखों से फिरसे आसुओ की धाराए निकलने लगती है...

तानिया : तुम इन् आँखों से कभी भी उसका सच नहीं जान पायी, तुम कभी भी उसके ढोंग से उसका पर्दा हटा नहीं पायी, तुमने ये कभी जान ने की कोशिश नहीं करि की क्या उसने जो किया वो उसने अपनी मर्ज़ी से किया या फिर किसी और कारण से!?

तानिया : उसने सम्मान की जगह अपमान स्वीकार किया, प्यार की जगह नफरत स्वीकार की. और उसके बाद भी वो ख़ुशी ख़ुशी अपना बलिदान देके यहाँ से गया... अंत तक तुम्हे ये जताता रहा की वो तुमसे नफरत करता है.

तानिया की ज़ुबानी सुनके सभी की आँखों में ासु थे, नेहा बिलखते हुए अपने घुटनो पर गिर पड़ी और अपने चेहरे को हाथो में लेकर जोरर जोरर से रोने लगी...

उससे देख के निशा भी खुद को नहीं रोक पायी और वो भी अपना चेहरा छिपाते हुए रोने लगी.

आगे बढ़ के अंशु ने नीचे बैठी नेहा को साइड से हुग किया और उससे शांत करने की कोशिश की पर नेहा को जैसे एक दम से कुछ सूझा और वो फौरन उठी और दौड़ते हुए अपने कमरे की और भागी.

उससे ऐसे जाते देख निशा की धड़कन बढ़ गयी, जिसका उससे सबसे ज़्यादा डर था कही वही न हो जाए. कही नेहा कुछ गलत कदम न उठा ले. सभी उसके पीछे उससे आवाज़ लगाते हुए दौड़े पर नेहा ने अपना कमरा लॉक करके रखा हुआ था.

अंशु और निशा जोरर जोरर से दरवाज़ा खत खटाने लगे की नेहा कुछ गलत न करले अंदर

निशा (रट हुए) : बेटा!! बेटा दरवाज़ा खोल... नेहा!!! प्लीज दरवाज़ा खोल मेरी बच्ची... प्लीज!!!

अंशु (रट हुए) : नेहुउउ!! दरवाज़ा खोल नेहु प्लीज!! तुझे हम सब की कसम है, राहुल भैया की कसम तुझे... तू कुछ भी नहीं करेगी... कोई गलत कदम नहीं उठाएगी...

सब दररते हुए बस दरवाज़ा थोक रहे थे की तभी अंदर से नेहा की आवाज़ आयी

नेहा (रोटी हुई आवाज़ में) : ी won't दो एनीथिंग स्टुपिड! आप लोग घर से थोड़ी देरर के लिए चले जाइये! ी वांट तो बे अलोन फॉर सोमेटिमे.

निशा : नहीं!! हम कही नहीं जाएंगे! तू दरवाज़ा खोल नेहा!!!

अंशु : चची! It's okay! नेहु ने कहा है मतलब वो कुछ गलत नहीं करेगी! हमे उसकी बात मान न चाहिए!

निशा : अरे अंशु पर में कैसे...!?

अंशु : नेहुउउ!! प्रॉमिस उस यू won't दो एनीथिंग स्टुपिड.

नेहा : ी प्रॉमिस दी! Don't वोर्री! जस्ट लीव में अलोन फॉर सोमेटिमे. लीव थे हाउस प्लीज. ी बेग यू!!!

अंशु उसकी बात सुन्न थोड़ी राहत की सास लेती है और सभी को सांत्वना देते हुए घर से बहार ले जाती है और कार में बैठ के सभी थोड़ी देरर के लिए बहार चल देते है. निशा बिलकुल राज़ी नहीं थी उससे डर था अभी भी की नेहा खुद को कुछ कर न ले पर अंशु ने उससे हौसला दिया की वो कुछ भी नहीं करेगी. अंत में घर को बाहर से hi लॉक करके सभी थोड़ी hi दूर के मार्किट की और चले गए और नेहा के लिए कुछ कुछ सामान खरीदने लगे.

इधर नेहा घर में अपने कमरे में फुट फुट कर रोई, वो अपनी स्टडी टेबल पर बैठी हुई थी और रोये जा रही थी, आसुओ से उसका पूरा चेहरा भीग चूका था.

उसने गुस्से में आकर टेबल पर रखे पेन होल्डर को गिरा दिया. पर पेन होल्डर के गिरते hi उसमे से कुछ पेपर के टुकड़े निकले. नेहा ने उन् पर पहले तो ध्यान नहीं दिया वो सिर्फ रोटी रही पर जब उसका ध्यान उन् पेपर्स पर गया तोह उससे जैसे कुछ सूझा और उसने पेपर्स के टुकड़े जो की मुड़े हुए थे उन्हें एक एक कर के खोला और जब उसने सभी पेपर्स को जोड़ के देखा तोह उसकी आँखों में और ज़्यादा ासु आ गए और अपने मुँह को हाथो से ढकते हुए वो और जोरर से रोने लगी...

ये वही पेपर था जिस पर राहुल ने नेहा के लिए ड्राइंग बनायीं थी (अपडेट 18).

जब अंशु और वंशु आयी हुई थी और नेहा की लड़ाई अंशु से ज़ू में हो गयी थी उसके बाद वो एक रोटी हुई स्त्री का स्केच बना रही थी पर बना नहीं पा रही थी. तब राहुल ने चुपके से उसके रूम में आकर एक खिल खिलाती स्त्री का चेहरा बनाया था, जिससे देख कर नेहा गुस्से में आकर उससे फाड़ के इसी पेन होल्डर में ठूस दी थी. किस्मत की बात ये थी की वो अभी तक उसी पेन होल्डर में पड़ा हुआ था.

रट हुए जब नेहा अपने रूम से बहार गयी और सामने राहुल के रूम का गेट देखा तोह उसकी रुलाई चूत गयी. यही पर तोह उसने राहुल के चेहरे पर पानी फेका था (अपडेट 1)

वो रट हुए नीचे जाने के लिए हुई तोह उसकी नज़र सीढ़ियों पर पड़ी और फिरसे उसके ासु निकल गए. इन्ही स्टैर्स पर वो राहुल का परर कुचल के बिना कोई इमोशन दिखाए चली जाय करती थी. ऐसी कोई जगह नहीं थी जहा पर उसने राहुल को हर्ट नहीं किया था.

नेहा दौड़ के नीचे से राहुल के रूम की के लेके आयी क्युकी राहुल का रूम लॉक्ड रहता था. हर्र 2 दिन में निशा उसके रूम की सफाई करती थी और फिर लॉक लगा देती थी. सफाई कल hi हुई थी इसलिए अभी लॉक लगा हुआ था.

नेहा ने फौरन राहुल का रूम खोला और जैसे hi अंदर दाखिल हुई, वही पुराना रूम देख के उसकी आँखों से ासु रुकने का नाम hi नहीं ले रहे थे. वो चारो तरफ घूमते हुए उसके रूम को देखने लगी, आगे बढ़ते हुए धीरे से उसने आस पास राखी हुई चीज़ो को छू के देखा जैसे मानो वो किसी ख़ज़ाने को छू रही हो.

उसने राहुल की अलमारी जो की वही राखी हुई थी उससे खोला तोह अंदर राहुल के hi कपडे रखे हुए थे. अपने हाथो को उन् कपड़ो पर फेरते हुए उसने राहुल की एक टी शर्ट उठायी और उससे अपने सीने से लगा लिया, उसने टी शर्ट में से राहुल की खुशबु लेने का अथक प्रयास किया पर उनमे से अब राहुल की कोई भी खुसबू नहीं आ रही थी.

क्युकी कपडे निशा धोती रहती थी और वो राहुल के भी कपडे निकाल के उन्हें धोती ताकि वो फ्रेश बने रहे.

नेहा बिलखती हुई टी शर्ट लिए ज़मीन पर घुटनो के बल गिर पड़ी और तभी उसकी नज़र बीएड के नीचे एक नेवसपपेर पर पड़ी जिसके अंदर कुछ रखा हुआ था.

उसने झुकते हुए बीएड के नीचे से नेवसपपेर को खींच के कुछ निकाला और उसमे लगे धागे खोलने लगी, धागा खोलते hi उसने नेवसपपेर को जब खोला तोह अंदर की राखी हुई चीज़ देख के उसकी फिरसे रुलाई चूत गयी.

ासु की बड़ी बड़ी बोंडे उसके चेहरे को भिगोते हुए गिरने लगी. सामने एक जला हुए टेडी बेयर पड़ा था. ये वही टेडी था, जिससे अंशु ने उसके b'day पर दिया था 2 साल पहले और नेहा को जब ये बात पता चली की ये असल में राहुल का दिया हुआ गिफ्ट था तोह नेहा ने टेडी को नीचे जाकर जला दिया था. (अपडेट 37)

आज वही आधा जला हुआ टेडी जब उससे फिरसे दिखा तोह उस से बिलकुल कण्ट्रोल नहीं हुआ और वो जोरर जोरर से रोने लगी. उसने टेडी को उठा के अपने सीने से इतनी जोरर से भीचा जैसे अपने अंदर hi समां लेगी.

उससे याद है ये टेडी 10,000 का था. और उसने बिना कुछ सोचे समझे जला दिया था. उस वक़्त तोह राहुल कमाता भी नहीं था, न जाने कितनी म्हणत से उसने पैसे इखट्टे करके ये खरीदा होगा!? और उसने ने यु hi उससे जला दिया था. नेहा इस वक़्त इतना गिल्ट फील कर रही थी की यदि उसकी जगह कोई और होता तोह इसी गिल्ट में hi डूब के मर जाता.

जब वो उठी तोह उसने फिर से अलमारी चेक करि पर उससे कुछ मिला नहीं. पर उसका ध्यान जैसे hi लाकर पे गया तोह उसने के से उससे खोला और अंदर जो देखा तोह उसकी गिल्ट और भी बढ़ गयी. ासु तोह non-stop बह hi रहे थे. पर हर्र बार वो और इमोशन के साथ बहते.

अंदर एक तस्वीर थी जो की एक बचपन की तस्वीर थी राहुल और नेहा की. नेहा राहुल के कंधो पर बैठी हुई है और जीभ निकाली हुई है और राहुल उससे संभाल के पकडे हुए है.

पुराणी तस्वीर देख नेहा को हस्सी आ जाती है, कैसे वो बच्चो टाइप जीभ निकाली हुई है और राहुल उससे पकड़ा हुआ है. तस्वीर में भी वो कितनी केयर से नेहा को संभाला हुआ था ताकि वो कही गिर न जाए. तस्वीर देख के नेहा के चेहरे पर एक मुस्कान आयी और उसने तस्वीर उठा के राहुल की फोटो वाले हिस्से को चूम लिया.

जब उसने तस्वीर पलटाई तोह उससे फिर से रुलाई आ गयी. पीछे राहुल की लिखावट में लिखा हुआ था,

"ी विल ऑलवेज लव माय गुड़िया"

रट हुए उसने अपने सीने से वो तस्वीर को लगाया और टेडी और तस्वीर लेके वो अपने कमरे में चली गयी.

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आज के लिए इतना hi गाइस!


धन्यवाद्!!
 
मिथिलेश भाई फिरसे आपको देख के वाक़ई बोहत ख़ुशी हुई!!

मुझे पता है बोहत से रीडर्स ऐसे है जो साइलेंट में मेरी स्टोरी पढ़ते है और कभी कभी hi कमेंट करते है. और इस बात की मुझे बेहद ख़ुशी होती है. बनने रहिएगा!

धन्यवाद्!!
 
अपडेट - 86

अब तक...

जब उसने तस्वीर पलटाई तोह उससे फिर से रुलाई आ गयी. पीछे राहुल की लिखावट में लिखा हुआ था,

"ी विल ऑलवेज लव माय गुड़िया"

रट हुए उसने अपने सीने से वो तस्वीर को लगाया और टेडी और तस्वीर लेके वो अपने कमरे में चली गयी.


अब आगे...

इधर निशा का जी बोहत घबरा रहा था की उसकी बेटी कुछ उल्टा सीधा न कर ले. वैसे hi निशा ने राजेश से ये सब छिपा के किया है और अब यदि नेहा ने कुछ कर लिया तोह राहुल और राजेश पता नहीं कैसे रियेक्ट करेंगे और उसकी सबसे ज़्यादा टेंशन यही थी की नेहा को कुछ भी न हो.

निशा : अंशु! चल बीटा जल्दी घर चल! मुझे बोहत फिक्र हो रही है मेरी बच्ची की... में उसकी माँ हु, मुझे पता है उसपे क्या बीत रही होगी! वह पूरा का पूरा दोष खुद को दे रही होगी, कही वो कुछ गलत न करले...

अंशु : चची! Don't वोर्री! आप नेहा की माँ है पर में उसकी बड़ी बहिन और उसकी बोहत अच्छी दोस्त भी हु. ी क्नोव हेर वैरी वेल! शी won't दो एनीथिंग.

निशा : तू इतने यकीन के साथ कैसे कह सकती है अंशु?

अंशु : क्युकी में उससे अच्छे से जानती हु. ऊपर से मेने उससे हम सबकी और राहुल भैया की कसम भी दी है! आप भरोसा रखिये! और वो सब सोचना बंद करिये और ये सोचिये की आगे की स्थिति को कैसे संभालना है? फिलहाल तोह हम उसकी मैं पसंद चीज़े ले रहे है ताकि उसका मैं शांत हो सके पर उसके बाद क्या? क्या होगा जब चाचा यहाँ आएँगे और उनको ये सब पता चलेगा? नेहा कैसे रियेक्ट करेगी?

अंशु के ये बात कहने पर निशा अब घबराने लगती है, उसने अभी तक इतने आगे की नहीं सोची थी, अभी वो सिर्फ नेहा पर फोकस्ड थी. पर अब जब अंशु ने उससे रीलीज़ कराया की स्थिति और भी बिगड़ सकती है तोह निशा वाक़ई घबरा गयी...

निशा : अंशु! तू मुझे दर्रा क्यों रही है? तेरे कहने पर hi मेने ये सब किया है! और अब तू मुझे अकेला चोरर रही है?

अंशु : क्या चची!!! मेने कब कहा की में आपको अकेला चोरर रही हु? में तोह आपके साथ hi हु! में बस आपको हिंट दे रही हु की मामला कितना सीरियस है. और आगे आपको कैसे संभालना है उसके बारे में अभी से आपको सोचना पड़ेगा!

निशा : हम्म! अब यहाँ तक तू लायी है तोह आगे का भी तू hi सोचेगी.

अंशु : अच्छा बाबा ठीक है एंड don't वोर्री अबाउट नेहा चची! She's मेंटली स्ट्रांग नाउ! भाई के कारण वो अब पहले जैसी नहीं रही!

निशा : क्या मतलब?

अंशु : ी मैं! भाई उस से कहता था न की नेहा कभी भी उस से आगे नहीं निकल पाएगी. तोह नेहा ने इन् दो सालो में अपने आप को बोहत इम्प्रूव किया है. She's मच मोरे मातुरे नाउ.

निशा : हँ!?

अंशु : आपने देखा था न नेहा को जब तानिया दी ने सब कुछ बताया तोह नेहा कैसे फुट फुट कर रोने लगी थी?

निशा : हां!!

अंशु : आपको क्या लगता है वो क्यों रोई थी?

निशा : हँ??

अंशु : वो इसलिए नहीं रोई थी की उसके डैड उसका जन्म नहीं चाहते थे, वो इसलिए रोई थी की उसका बड़ा भाई उसके लिए सारे दर्द लेता रहा और उसकी देखभाल करता रहा. बिना उससे कुछ भी बताये, और नेहा सिर्फ उससे नफरत करती रही. वो इसलिए रोई थी. उससे अपने बड़े भाई के लिए बोहत बुरा लग रहा था और बोहत hi गिल्ट फील कर रही थी वह. उसने उस वक़्त चाचा के बारे में सोचा तक नहीं. वो सिर्फ और सिर्फ अपने भाई के दर्द के बारे में सोच रही थी.

निशा : तुम्हे कैसे पता?

अंशु : ी क्नोव हेर! उसकी जगह में होती तोह मेरा भी यही होता. आखिर भाई से इतना प्यार जो करती हु में. और आप भी तोह करती हो न!? *विंक्स*

निशा : हँ?? *ब्लश* हम्म्म!!

सभी लोग नेहा की मैं पसंद चीज़ खरीदने में लगे रहते है ताकि जब वो घर पर पहुचे तोह नेहा का मैं हल्का कर सके.

इधर नेहा अभी भी हाथ में वो तस्वीर लिए हुए थी और खुद से hi बात करे जा रही थी!

"क्यों?? क्यों किया तुमने मेरे लिए इतना?? बोलो न? आखिर क्यों? तुमने मेरे लिए इतना सब कर दिया, और मुझे इसकी भनक तक लगने नहीं दी! में तुमपे कितना अत्याचार करती... तुम्हे फ़साने के लिए नए नए आइडियाज सोचती, तुम्हे नीचे दिखाने के लिए सब कुछ करती, तुम्हारी इंसल्ट करती, तुमसे नफरत करती. उसके बाद भी तुमने कभी bhi...kabhi भी मेरे ऊपर हाथ नहीं उठाया, कभी भी तुम अपने रास्ते से नहीं भटके, कभी भी तुमने मेरे लिए कुछ भी बुरा नहीं सोचा. तुम शुरू से hi मुझे प्रोटेक्ट करते आए और में जानती हु की अभी भी तुम मुझे प्रोटेक्ट कर रहे हो! यदि अभी में कही बाहर जाती हु तोह I'm सूरे वो मोनिका या फिर कोई और तुम्हारे कहने पर ज़रूर मुझे प्रोटेक्ट करेगा फिरसे. पर... पर क्या में तुम्हारे इतने प्यार के लायक थी? मेरे भाई...!?"

नेहा ने तस्वीर पर राहुल को देखते हुए उसपे हाथ फेरते हुए कहा और उसके ासु छलक आए.

उसने तस्वीर को फिरसे उठाया और उसमे राहुल को देख फिरसे चूम लिया. उसके हाथ में राहुल की एक मनपसंद टी शर्ट भी थी.

नेहा एकदम से उठी, उसने अपना टॉप उतारा तोह उसकी दूध जैसी गोरी मुलायम त्वचा रूम की बंद लाइट में भी चमक रही थी. शीशे में खुद को देखते हुए उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी. लाइट पिंक कलर की ब्रा उसके स्तनों को संभाले हुए थी और स्तन का थोड़ा हिस्सा ब्रा के बहार से झांक रहा था.

उसने राहुल की टी शर्ट उठायी और उससे पेहेन लिया और खुद को शीशे में देखने लगी और रोने लगी!

फिरसे तस्वीर को उठा के वो उस से बात करने लगी!

"काश इस टी शर्ट में तुम्हारी महक होती! में और भी ज़्यादा खुद को तुम्हारे करीब मेषसूस कर पाती. भाई!! तुम्हे यही डर था न की में कही डैड की बात सुन्न न लू और कुछ गलत कदम न उठा लू!? इसलिए तुमने ये सब किया न? पर मेरे बुद्धू भाई! में तोह डैड की बात सुन्न hi नहीं पायी थी. पर फिर भी तुमने मेरे लिए इतना सब कर दिया... नाउ ी क्नोव! की क्यों डैड मुझे इतने अच्छे से ट्रीट करते थे, क्यों डैड मुझे कभी ज़्यादा चिल्लाते नहीं थे, क्यों वो मुझे महंगे महंगे गिफ्ट्स देते थे, क्यों वो माँ को मुझे डाटने से रोक देते थे, सब कुछ अपनी गिल्ट काम करने के लिए. और में समझती थी की डैड सबसे अच्छे है! और तुम सबसे खराब! कितनी ना समझ थी न में??"

नेहा ने रट हुए कहना ज़ारी रखा,

"पर तुम्हे टेंशन लेने की कोई ज़रुरत नहीं है मेरे भैया!!! में मेंटली काफी स्ट्रांग हो चुकी हु. आल थैंक्स तो यू! में ये सब जान ने के बाद कोई भी गलत कदम नहीं उठाने वाली हु. तुम्हारी गुड़िया हु में... इतनी कमज़ोर थोड़ी न हु. बस अब तुम्हारे करीब आना है जितना जल्द हो सके. में कुछ भी कर दूंगी ऐसा करने के लिए... तुम जानते hi हो की में कितनी ज़िद्दी हु... ी क्नोव तुम मुझे देखते hi मुझसे दूर जाने की कोशिश करोगे... पर में ऐसा होने hi नहीं दूंगी... तुम्हे अपने आप से जकड के रखूंगी... ी लव यू सो मच भाई!!"

रट हुए उसने वो तस्वीर उठायी और अपने टी शर्ट के अंदर हाथ ले जाते हुए उससे अपने स्तनों के बीच फसा के तस्वीर को अंदर कर दिया. बिलकुल वैसे hi जैसे महिलाए अपना छोटा सा पर्स अपने ब्लाउज में स्तनों के अंदर छुपा कर रखती है.

"तुम्हारी जगह तोह मेरे दिल में hi है! केवल तुम्हारी तस्वीर को यु रखने से मुझे इतना बेटर फील हो रहा है, फिर तोह जब तुम्हे में अपने..."

बोलते बोलते वो एक दम से ृक्क जाती है और अपनी आँखें खोल के खुद को शीशे में देखने लगती है. उसके गाल एकदम अचानक hi लाल हो गए. अपने गालो को दोनों हथेलियों पर रखते हुए उसने अपना सर हिलाया वो सब सोचने से पर कोई फायदा नहीं!

नेहा (ब्लश) : omg!! निक्की!! ी थिंक यू वेरे राइट... It's डीडेड थें!!

वो अपने रूम का दरवाज़ा लॉक करके नीचे आती hi है की इतने में सभी घरवाले वापस आ जाते है. वो सभी बहार से hi घर को लॉक करके गए हुए थे और निशा फौरन दौड़ती भागती हुई लॉक खोलते hi घर में घुसती है तोह देखती है की नेहा शान्ति से सोफे पर बैठी हुई है और अपना फ़ोन चला रही है!

निशा दौड़ते हुए उसके पास जाती है और उससे अपने सीने से लगा लेती है,

निशा (नम्म आँखों से) : मेरी बच्ची!!

नेहा को अब मालुम चल रहा था की उसकी माँ हमेशा से hi अपने दोनों बच्चो को एक्वाली प्यार करती आयी है. नेहा समझती थी की उसकी माँ सिर्फ राहुल को hi ज़्यादा प्यार करती है. कितनी गलत थी वह! शुरू से hi उसकी माँ हमेशा दोनों को hi बराबर प्यार करती रही, और नेहा सोचती थी की उसके डैड सबसे अच्छे है!

नेहा (नम्म आँखों से) : माँ!!!

निशा : ओह्ह्ह! मेरी बच्ची! तू ठीक तोह है न? क्या कर रही थी तू?

नेहा (स्माइल्स) : I'm okay माँ! Don't वोर्री! बस थोड़ा टाइम अकेले में चाहिए था.

निशा एक राहत भरी सास लेती है और नेहा को मार्किट से लाया उसकी मैं पसंद का सामान देने लगती है.

नेहा ये सब देख के वाक़ई बोहत खुश थी की सब उसकी कितनी चिंता करते है, उसके लिए सभी इतना सोच के उसकी मैं पसंद चीज़े खरीद कर लाए उसके लिए वो बोहत खुश थी.

नेहा : आप सभी को बोहत बोहत थैंक यू!

विनीता : बेटा! तुम ठीक तोह हो न? तुम्हे देख के ऐसा लग रहा है जैसे तुम अभी बोहत दुखी हो और झूठी स्माइल दे रही हो! बिलकुल वैसे hi जैसे मेरी बच्ची वंशु दिया करती थी जब इससे एंड्रोफोबिअ था.

वंशु : हां नेहा! ी क्नोव it's हार्ड बूत प्लीज बे स्ट्रांग!

नेहा (स्माइल्स) : नहीं दी! I'm रियली फाइन नाउ! आपको टेंशन लेने की कोई ज़रुरत नहीं है!

निकिता (हग्स) : नेहुउउ!! तू बस कुछ करना मत अपने आप को!

नेहा : इडियट! ी won't दो एनीथिंग स्टुपिड! और मुझे तेरे को थैंक्स भी कहना है.

निकिता : किस बात के लिए?

नेहा (ब्लश) : वो... तुझे समय आने पर पता लग जाएगी!

मुकेश : चलो! नेहा बिटिया को अब ऐसा देख थोड़ी राहत महसूस हुई! वर्ण टेंशन के मसरे सर फटा जा रहा था!

ललिता : सही में!! बेचारी निशा की तोह हालत hi खराब थी रास्ते भर! में समझ सकती हु एक माँ पर क्या बीत रही होगी उस वक़्त. अपर अब सब ठीक है.

रुपेश : मुझे तोह अब भी यकीन नहीं होता की राजेश ऐसा कैसे कर सकता है? अरे शराब के नशे में भी इतना सब कैसे बोल गया वह? आने दो उसको! उसकी खबर लूंगा में...

साइड में कड़ी विनीता उससे तुरंत नेहा की तरफ इशारा करती है...

विनीता (धीरी आवाज़ में) : क्या करते हो आप? बेचारी अभी अभी सदमे से थोड़ा बहार निकली है. अब देवर जी का ज़िक्र क्यों कर रहे हो आप?

रुपेश : ओह्ह! सॉरी!

विनीता : निशा! अब हम निकलते है! कोई भी कभी भी किसी भी चीज़ की ज़रुरत हो. बे झिजक कॉल कर देना. हम आ जाएंगे!

वंशु : माँ... डैड!! में और अंशु यही रुकेंगे आज रात.

रुपेश : ठीक है बीटा! कोई दिक्कत नहीं!

और रुपेश और विनीता अंशु वंशु को चोरर अपने घर के लिए निकल जाते है.

मुकेश और उसकी फॅमिली क्युकी लखनऊ से आये थे तोह वो तोह यहाँ पर कुछ दिन रुकने वाले थे. दूसरे शहर से जो आये हुए थे. काम से काम एक दिन तोह रुकता hi मुकेश.

निशा : भाई आप सभी लोग फ्रेश हो लीजिये और अपने कपडे बदल लीजिये तब तक में कुछ मस्त खाने के लिए बनाती हु आपके लिए.

निकिता : चल नेहा! में भी चलती हु अब. और यदि ज़रुरत पड़े तोह मुझे बुला लेना.

आरती : हां! बीटा! बिलकुल झिझकना मत! हमारा घर तोह बिलकुल पास में hi है!

नेहा : जी आंटी! थैंक यू! थैंक्स निक्की!

निकिता : हां हां! बूत वो तू जो मुझे थैंक्स कहने वाली बात बोल रही थी, उसके बारे में भूलना मत हां?

नेहा (ब्लश) : हां बाबा!

और ऐसे hi निकिता और आरती भी वह से अपने घर की और चल दिए.

तनीषा : आंटी! में भी चलती हु अब! और मेरी ज़रुरत हो तोह आप बस कॉल कर देना!

निशा : okay बीटा! पर कुछ खा तोह लेती...

तनीषा : अरे में तोह रोज़ hi आती हु! आप कल खिला दीजियेगा. अभी आप अपने घर पर ध्यान दीजिये ख़ास कर नेहा पर. अब में चलती हु.

वो मुड़ती hi है की नेहा उससे पीछे से आवाज़ देती है,

"तनीषा दीदी"

तनीषा पलटते हुए नेहा को सवालिया नज़रो से देखती है.

नेहा : थैंक यू!!

तनीषा (स्माइल्स) : it's okay माय डिअर!

और तनीषा भी अपने घर की और चल देती है.

नेहा : अंशु दी, तानिया दी, वंशु दी! प्लीज! आप मेरे रूम में चलिए न! आपसे कुछ कहना है!

मुकेश ललिता फ्रेश होने चले जाते है और नेहा अपनी बहनो को लेकर अपने रूम में ले जाती है और रूम अंदर से लॉक कर देती है.

वंशु : कहो नेहा!

नेहा : सबसे पहले तोह! थैंक यू सो मच! आपने ऐसे टाइम पर मेरी माँ और मेरा हौसला रखा और हमारा साथ दिया.

वंशु : नेहा! परेशानी में घरवाले काम नहीं आएँगे तोह कोण आएगा मेरी बहिन?

नेहा (स्माइल्स) : उसी के लिए... थैंक यू सो मच!

तानिया : you've ग्रोन नेहा! मुझे तोह लगा था की तुम पूरे टाइम रोटी hi रहोगी और उभर नहीं पाओगी इतनी जल्दी. बूत I'm रियली अमज़द की तुमने अपने आप को बोहत hi जल्दी कलम कर लिया.

नेहा (स्माइल्स) : सच कहु तोह आपकी स्पीच सुन कर में पूरी तरह टूट गयी थी. ी वास् हर्ट. बूत में पहले की तरह कमज़ोर नहीं रही अब. में समझ गयी पूरी सिचुएशन को और मेने छोपे उप किया.

तानिया (स्माइल्स) : गुड!

अंशु : एंड लेट में आस्क यू... यू वेरे हर्ट बिकॉज़ राहुल वेंट थ्रू आल ऑफ़ थिस जस्ट फॉर योर सके राइट?

नेहा (सुरप्रीसेड) : यस! यू क्नोव में वेल दी!

अंशु : ी कनेव आईटी!

नेहा : अंशु दी! में आपकी और तानिया दी की ज़िन्दगी भर आभारी रहूंगी!!

अंशु : हँ?

तानिया : ??

नेहा : यदि आप ने ये सब प्लान नहीं किया होता और मुझे यहाँ नहीं बुलाया होता तोह... तोह I'm अफ्रेड... मुझे शायद hi कुछ पता चल पाटा... और भाई का सच... हमेशा के लिए लुप्त हो गया होता.

अंशु : it's okay स्वीटी! सब तुम्हारे लिए!

नेहा : यू अरे थे बेस्ट दी!!

वंशु : वेट! दीद यू जस्ट... नेहा?? तुमने कुटी को भाई बोलै?

नेहा (ब्लश) : भाई hi तोह बोलूंगी न दी!! वो मेरा प्यार भाई जो है!

वंशु : अव्व्व! माय ओल्ड क्यूट लिटिल सीस इस बैक! I'm सोऊ हैप्पीययय!!

वंशु उससे बाहो में लेके हुग कर देती है.

उधर राहुल अपनी कार में बैठ के एक घर के सामने रुकता है!

राहुल : (ये ख़ुशी ने मुझे अचानक क्यों बुलवा लिया है!?)

अंदर आते hi उससे रजनीश गेट पे hi मिल जाता है जो अभी इस वक़्त गार्डनिंग कर रहा था.

राहुल : रजनीश अंकल??

रजनीश : मिस्टर राहुल?? आइये न! अंदर सभी आपका वेट कर रहे है!

राहुल : सभी???

राहुल अंदर जाता है तोह जैसे hi दरवाज़ा खोलता है तोह सामने नज़ारा देख के थोड़ा सरप्राइज हो जाता है...

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आज के लिए इतना hi गाइस!

नेक्स्ट अर्च है बीन स्टार्टेड!!


धन्यवाद्!!
 
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