इन्सेस्ट आखिर क्यों? फ्रॉम हैट्रेड तो लव (कम्प्लेटेड) - Page 18 - SexBaba
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इन्सेस्ट आखिर क्यों? फ्रॉम हैट्रेड तो लव (कम्प्लेटेड)

अनाउंसमेंट :

नेक्स्ट अपडेट को पढ़ने से पहले सभी से अनुरोध है की कहानी का अपडेट 69 दुबारा पढ़ लीजिये. पूरा पढ़ने की ज़रुरत नहीं है बस नेहा का फ्लैशबैक पढ़ लीजिये. क्युकी यदि आप वो पढ़ लेंगे तोह आपको नेक्स्ट अपडेट बोहत hi अच्छे से समझ में आएगा. आपको पता चलेगा की असल में हुआ क्या था और कैसे हुआ.


बाकी आपकी मर्ज़ी है.

धन्यवाद्!
 
हां भाई! ये राज़ खुलने के बाद कुछ एडिशनल आर्क्स है छोटे छोटे जैसे की तनीषा का अपने माँ डैड से मिलना, मोनिका का बदला, ऐसे hi... उनका सन बाद में है और वो ज़्यादा लम्बे नहीं रहेंगे. मतलब! ऐसा ासुमे कर सकते हो की कहानी कुछ 100 उपदटेस के आस पास एन्ड होएगी, ज़्याद भी हो सकते है 100 से और काम भी.
 
अपडेट - 83

अब तक...



मुकेश (निशा के भाई) : अरे निशा बोलो! क्या हुआ? क्या बताने सभी को बुलाया है?

विनीता (अंशु वंशु की माँ) : निशा? कहो भी!

निशा (गहरी सास लेते हुए) : आज मेने आप सभी को वो सच बताने के लिए बुलाया है जिससे में 7 साल से छुपाती आ रही थी...




अब आगे...



ललिता (मुकेश की पत्नी) : कहो न निशा! कोनसी बात?

इस से पहले की निशा कुछ कहती उतने में दरवाज़े पर एकदम से कोई अंदर आता है,

"में लेट तोह नहीं हुई न??"

सामने तनीषा थी, जल्दबाज़ी में वो आयी और अभी बोहत हाफ रही थी.

निशा : सही टाइम पर आयी हो बीटा! आ जाओ! बैठ जाओ!

अंशु (मैं में) : यही सही टाइम है... सॉरी राहुल भैया! सॉरी नेहु! बूत ये ज़रूरी है.

मुकेश : ये कोण है निशा?

निशा : ये... तनीषा है! राहुल की डॉक्टर.

तनीषा को समझ आ गया था की निशा ने उससे अभी बहु कहके क्यों नहीं बुलाया. शायद अभी परिवार में सभी क्वेश्चन करने लगते इसलिए निशा ने अभी तनीषा को अस ा डॉक्टर hi बताया.

तनीषा इस बात से बिलकुल भी दुखी नहीं थी उससे पता था की क्या चल रहा है. उससे पहले hi निशा की जुबां मिल चुकी थी की वो इस घर की बहु बनेगी तोह उससे बाकी बातो से कोई लेना देना नहीं था. उससे पता था निशा की कोई मजबूरी होगी और इस वक़्त उससे निशा की मदद करनी चाहिए हां में हां मिला के.

तनीषा : जी में तनीषा. में राहुल को ट्रीट करती हु जब भी उससे चोट लगती है. I'm ा सर्जन ात क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स हॉस्पिटल.

रुपेश (राहुल के ताऊ जी) : सर्जन? क्या बात है! काबिलियत तारीफ! क्या उम्र है बीटा तुम्हारी?

तनीषा : j..jii?? में...28 की होने वाली हु.

रुपेश : वाह! 28 की उम्र में hi एक सर्जन!?

निशा : वो दो साल पहले hi सर्जन बन गयी थी जेठ जी.

रुपेश : क्या बात है!

मुकेश : पर ये यहाँ पर क्यों?

निशा : क्युकी वो हमारी फॅमिली मेंबर जैसी है और राहुल को वो 7 साल पहले से hi जानती है.

मुकेश : ओह्ह्ह!!

तानिया : जी बुआ! आप कुछ बताने वाली थी?

तानिया को तोह पता hi था सच. वो बस सबके सामने न जान ने की एक्टिंग कर रही थी.

वंशु : हां चची! हम सब सुन्न रहे है. कहिये!

निशा (गहरी सास लेकर) : हां! तोह में शुरू करती हु...

अब निशा की ज़ुबानी हम फ्लैशबैक के थ्रू देखेंगे...

*फ्लैशबैक*

बात 7 साल पुरानी है, राहुल ग्यारवी क्लास में था और नेहा आठवीं क्लास में. इन् दोनों के बीच बोहत प्यार था. एक नार्मल भाई बहिन से थोड़ा ज़्यादा. खासकर की नेहा... वो राहुल से चिपकी hi रहती थी. हर्र वक़्त उसके आगे पीछे घूमना, उससे तंग करना, लाढ़ करना, सब करती थी वह. कुछ ज़्यादा hi ऑब्सेस्सेड थी राहुल से. राहुल भी कुछ काम नहीं था ,बेशुमार प्यार देता था वह नेहा को. उसके लिए चीज़े लाना, गिफ्ट्स लाना, उसको घुमाने ले जाना, हर्र काम में उसकी मदद करना. एक आइडियल भाई की तरह था वह नेहा की नज़रो में.

पर न जाने इन् दोनों के प्यार को किसकी नज़र लग गयी. यहाँ ये दोनों तोह अपनी ज़िन्दगी में टेंशन फ्री थे पर राजेश की ज़िन्दगी कुछ सही नहीं चल रही थी.

राजेश अपनी नौकरी करके जब भी घर वापस आता तोह काफी चिढ चिढ़ा व्यवहार रहता उसका. राजेश शराब नहीं पीटा था उसके बाद भी ये चिढ चिढ़ापन किस लिए था ये निशा समझ नहीं पा रही थी. राजेश भी अपने मुँह से कुछ नहीं बोलता था बस सीधे मुँह बात नहीं करता था.

निशा ने कुछ दिन ये सोच के इस बात पर ज़्यादा नहीं टोका क्युकी हो सकता है काम का टेंशन हो और मूड चिढ चिढ़ा हो गया हो. पर जब दिन बा दिन ये होना शुरू हुआ तोह निशा को टेंशन होने लगी.

नेहा इस बात से पूरी तरह अनजान थी की घर में क्या चल रहा है. पर राहुल ने भांप लिया था की उसके डैड कुछ दिनों से सही से बेहवे नहीं कर रहे. राहुल एक डिस्कॉपलीनेड लड़का होने के नाते पेरेंट्स के बीच में नहीं बोलता था और साड़ी बातें अपने अंदर hi रखता था.

एक दिन राजेश जब अपनी नौकरी पर गए, इस वक़्त वो मैनेजर नहीं थे, केवल एक एम्प्लोयी थे बैंक में. स्ट्रेस, वर्क लोड, फ़्रस्ट्रेशन, इन्ही सब से रोज़ झूझना पड़ता था राजेश को.

राजेश बैठा हुआ काम कर रहा था और कुछ सोच रहा था, की कैसे नौकरी में आगे बढ़ा जाए वो केवल एम्प्लोयी बांके तोह नहीं रह सकता न हमेशा!?

तभी उसके बगल में उसके hi बैंक में एक और एम्प्लोयी जो काम करता रहा वो आके बैठ गया और राजेश से बात करने लगा.

"और भाई मिश्रा साहब क्या चल रहा है?"

राजेश : अरे क्या बताऊ अब शुक्ल जी! रोज़ रोज़ वही पंचायत. काम करो, लोगो की समस्याए सुनो, कंप्यूटर में दिमाग खपाओ और घर चले जाओ. कुछ रहा hi नहीं है ज़िन्दगी में.

शुक्ल : भाई ये तोह हर्र शादी शुदा व्यक्ति की समस्या है. खासकर हम मर्दो की.

राजेश : ......

शुक्ल : वैसे... तुमको पता है अभी जो खबर फेल रही?

राजेश : किसी खबर?

शुक्ल : अरे तुम्हे नहीं पता? अरे... वो पांडेय की बेटी है न? भाग गयी कल एक लौंडे के साथ...

राजेश (शॉकेड) : क्या बात कर रहे हो?

शुक्ल : अरे सुबह से उसके hi चर्चे हो रहे है सबमे... पांडेय की भी तोह गलती है.

राजेश : इसमें पांडेय की क्या गलती?

शुक्ल : अरे इतना छूट देके रखा था पांडेय ने उससे. लड़कियों को इतनी छूट नहीं देनी चाहिए. मेरी तोह तीन लड़किया है पर वो सपने में भी ऐसी हरकते करने की नहीं सोच सकती. मेने इतना दर्रा के रखा है उनको.

राजेश : हां पर हमारी बच्चिया ऐसा कभी नहीं करेंगी...

शुक्ल : मेरी का तोह मुझे पता है पर अपनी बेटी पर भी ध्यान दो ज़रा. ये लड़किया बोहत hi चिकल्लस होती है. मेरे घर में तीन तीन पैदा हो गयी. अब एक न एक दिन उन्हें जाना hi है घर चोरर के. उनकी शादी का खर्चा अलग, ऊपर से शादी के पहले उनके किसी ऐरे जर्रे लड़के के प्यार में पद जाने का डर, कही कुछ गड़बड़ न हो जाए उसका डर.

शुक्ल और राजेश की बातें यदि अभी कोई सुनता तोह वो आसानी से देख के ये बता देता की शुक्ल अभी राजेश को भड़का रहा था.

राजेश : मतलब?

शुक्ल : मतलब यही की लड़किया बोहत चिकल्लस होती है. मेरी सोचो... में तोह लूट hi जाऊंगा

तीन तीन लड़कियों की शादी. लड़कियों को हमेशा सख्ती से रखो.

राजेश : पर मेरी नेहा बोहत अच्छी है. उसमे कोई खराबी नहीं है. मेरी प्यारी बच्ची है वह.

शुक्ल : बच्ची सब प्यारी hi रहती है मिश्रा. पर जब ये बड़ी हो जाती है न तोह इनकी हरकते शुरू हो जाती है. पलट के जवाब देना, छोटे छोटे कपडे पहन न, रात में पार्टी में जाना, और न जाने क्या क्या. इस से पहले की हाथ से निकल जाए इन्हे अपने कण्ट्रोल में रखना.

राजेश : ........

शुक्ल : बेचारा पांडेय! मेरा करीबी है वो तोह. में जाता रहता हु उसके घर. कुछ दिन पहले गया था तोह उसकी लड़की मेरे सामने hi पांडेय से ज़बान लड़ा रही थी अब बताओ.

और कल बताओ एक ऐरे जर्रे लौंडे के साथ भाग गयी. पूरे आस पड़ोस में ठु ठु हो रही है पांडेय की. खर्र! यदि वो खुद hi थोड़ी सख्ती बरकता तोह ये अंजाम नहीं देखना पड़ता आज उससे... क्यों है न?

राजेश : हँ? Haa...haaa!

राजेश जो खयालो में खोया हुआ था एकदम से हां में हां मिलाते हुए कहा.

शुक्ल : काम से कभी आराम भी ले लिया करो राजेश. क्या कहते हो? काम के बाद चलोगे? थोड़ा खाने पीने बोले तोह?

राजेश : में शराब नहीं पीटा...

शुक्ल : अरे मत पीना, बस खा लेना कुछ. कुछ और भी लोग चल रहे है. चल दो, थोड़ा अच्छा महसूस होएगा.

राजेश ने भी सोचा की दिन बा दिन काम की वजह से उसका दिमाग वैसे hi खराब रहता है, थोड़ा घूम लेगा तोह अच्छा महसूस होएगा उससे.

राजेश : अच्छा ठीक है!

शाम हुई, बैंक में एम्प्लाइज ने अपना अपना काम ख़तम किया और सभी खाने पीने के लिए एक अच्छे से होटल गए जहा ड्रिंक्स भी सर्वे करि जाती रही.

सब हस्सी मज़ाक करते हुए स्नैक्स का लुत्फ़ लिए, राजेश ने घर पर फ़ोन करके बता दिया की वो लेट आएगा.

शुक्ल : लो भाई राजेश! पीयो!

राजेश : में नहीं पीटा शुक्ल साब बताया था आपको.

शुक्ल जो की पहले hi थोड़े नशे में था आके बगल में बैठ गया और ज़बरदस्ती आधा गिलास भर दिया.

शुक्ल : थोड़ा सा hi पी लो राजेश. ये जड़ीबूटी है. यही तोह हम सब की ज़िन्दगी को मज़े से भर्ती है. यदि ये न होये तोह हम सब तोह परिवार और काम के बोझ के नीचे डाब के मर्डर hi जाए.

राजेश : अच्छा!?

शुक्ल (नशे में) : पी के तोह देखो! में बोहत लाचार हु राजेश... मुझे साला... साला तीन तीन लड़किया हो गयी. एक भी लड़का नहीं. काश... काश मेरी बेतिया न होती

राजेश : ye...ye क्या बात कर रहे हो शुक्ल साब?

शुक्ल : हां राजेश! ये बात तुम्हे तब समझ आएगी जब तुम इसको ध्यान से देखोगे. कभी अपनी बेटी को ध्यान से परखा है? किस के साथ उठती बैठती है स्कूल में? कोण उसके दोस्त है? किस से बात करती है फ़ोन पर? एक दिन भाग गयी तोह क्या करोगे राजेश? बोलो?

राजेश (थोड़ा गुस्से में) : ये क्या बकवास कर रहे हो आप? नेहा मेरी बच्ची है! मेने उससे क्या संस्कार दिए है ये में जानता हु अच्छे से.

शुक्ल : अच्छा? तोह मेरा जवाब दो न? यदि... यदि वो भाग गयी तब तुम क्या करोगे?

राजेश : में...

शुक्ल : हाहाहा! नहीं है न जवाब? ये लो अब पियो थोड़ी सी. ऐसे समय में सिर्फ यही मदद करती है.

राजेश ने एक बार गिलास को देखा कुछ सोचा और फिर उठा के पीने लगा, उसके ऐसा करते hi शुक्ल के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी.

दरअसल सच्चाई तोह ये थी की शुक्ल की तीन बेतिया ज़रूर थी और वो उनसे परेशां भी था की उनका खर्चा आगे चल के शादी में बोहत लगेगा. पर उस से ज़्यादा उससे इस बात से जलन रहती थी की राजेश के पास राहुल जैसा लड़का था.

राहुल अक्सर बैंक आया करता था, बैंक में राजेश के सभी दोस्त राहुल को जानते थे और उससे एक बोहत hi अच्छे लड़के का टाइटल दिए हुए थे. राजेश को बड़ा प्राउड होता था जब भी वो राहुल को अपने दोस्तों के बीच खड़ा करता था.

पर शुक्ल इसी बात से और जल भून जाता. एक तोह उसका कोई लड़का नहीं था और ऊपर से तीन तीन लड़किया, उसका दिमाग सही से काम करना बंद हो गया था. आज उसने सोचा की यदि वो मैनेजर बन गया तोह आगे चल के अपनी लड़कियों की शादी करने के बाद उसके पास काम से काम कुछ तोह बचेगा. पर यदि सिर्फ एम्प्लोयी hi रहा तोह बेशक वो तोह लूट जाएगा फ्यूचर में.

और उसके रास्ते में सबसे बड़ा काटा था राजेश.

राजेश को हटा तोह नहीं सकता था शुक्ल पर उसको मानसिक रूप से उससे तनाव में ज़रूर दाल सकता था और आज वो यही करने का सोच के आया था.

अपनी बातो से उसने राजेश को शराब पीला पीला कर उसके मैं में एक नया विचार घुसेड़ दिया की लड़किया एक बोझ की तरह है. राजेश भी न चाहते हुए उसका ध्यान बार बार नेहा और उसके फ्यूचर पर hi जा रहा था और फिर पांडेय की बेटी भाग गयी उस बात से उसका सर और दुखने लगा.

सारे एम्प्लाइज खा पी कर होटल से जा चुके थे पर राजेश और शुक्ल अभी तक बैठे हुए थे. शुक्ल कान भरता और शराब का गिलास भी... राजेश ने काफी शराब पी ली थी.

और अभी वो गाडी चलाने की हालत में नहीं था. इस वक़्त राजेश के पास कोई कार नहीं थी. सिर्फ बाइक थी. कार तोह राजेश ने मैनेजर बन्न ने के बाद ली थी.

शुक्ल ने उसको हिदायत दी की वो कुछ देरर यही रहे और जब नशा काम हो जाए तोह वो घर चला जाए.

शुक्ल होटल के मैनेजर को बता गया की राजेश को यही पर रुकने दिया जाए और रात में उससे उठा कर घर भेज दिया जाए.

यहाँ राजेश का दिन तोह कुछ इस प्रकार गुज़रा पर घर में शाम से लेकर रात तक क्या हुआ वो भी जान लेते है...

जब शाम का वक़्त था, थोड़ी थोड़ी आंधी चल रही थी, पत्ते और धुल उड़द के घर के द्वार से अंदर की और आ रही थी, नेहा ने उठ के फौरन गेट को बंद किया.

नेहा : भाई! आज कितनी आंधी चल रही है...

नेहा ने दूर लॉक करते हुए राहुल से कहा जो की वही सोफे पर बैठा हुआ लैपटॉप में कुछ काम कर रहा था,

राहुल : ......की : भाई???

नेहा के कई बार कहने पर भी जब राहुल ध्यान नहीं देता तोह नेहा चिढ़ते हुए आती है और उसकी गोदी में उसकी तरफ मुँह कर के बैठ जाती है, और उसका चेहरा अपने हाथो में ले लेती है,

राहुल को भी महसूस हो रहा था की अब उसकी बहिन बड़ी होने लगी है, उसकी छथि पे नेहा के हलके उभरे हुए स्तन जो ठीके थे.

नेहा : भाई???

राहुल : गुड़िया! क्या कर रही हो तुम? में काम कर रहा हु न...

नेहा : तुम ये बार बार ताऊ जी का तोह कही डैड का काम क्यों करते रहते हो? तुम अभी सिर्फ स्कूल में hi हो. तुमको ये सब काम तोह बड़े होक करना चाहिए न, फिर डैड लोग तुमको इतना काम क्यों देते है?

राहुल : अब में बड़ा हु तोह मुझे तोह करना hi पड़ेगा न?

नेहा : वही तोह बोल रही हु मेरे भाई!! तुम अभी सिर्फ 11तह क्लास में हो, फिर ये लिस्ट वगैरह बनाना डैड तुमको क्यों देते है? तुम्हारी उम्र अभी पढ़ने की है, ये सब करने की नहीं. पिछली बार ताऊ जी ने तुम्हे दूसरे शहर भेज दिया था काम के लिए और वो भी अकेले.

राहुल : वो तोह छोटा सा काम था गुड़िया और वैसे भी वो शहर कोई बोहत दूर नहीं था.

नेहा : ओह्ह अच्छा? कोण से पेरेंट्स एक 11तह क्लास के स्टूडेंट को दूसरे शहर भेजते है अपने काम के लिए? और वो भी ताऊ जी ने भेजा. डैड ने मन तक नहीं किया उनको. हम्फ!!

राहुल : अच्छा मेरी गुड़िया मुझे माफ़ कर दे...

नेहा : तुम अब से इनके काम नहीं करोगे... मुझे अच्छा नहीं लगता. समझ गए न?

राहुल : जैसी आपकी आज्ञा मेरी माँ...

नेहा : हीहीही...

नेहा आगे बढ़ के राहुल के गालो पर किश कर देती है और उस से गले लग के उसकी छाती में अपना सर रख के चिपक जाती है,

नेहा : आज बोहत आंधी चल रही है भाई...

राहुल उसका सर सहलाते हुए कहता है,

राहुल : हम्म!!

नेहा : आज कुछ बुरा होएगा क्या?

राहुल : तू फ़ालतू बातें मत सोच! बस एन्जॉय कर.

नेहा : हम्म!!

नेहा : भाई???

राहुल : हम्म!?

नेहा (ब्लश) : यू लव में न??

राहुल (स्माइल्स) : ये भी कोई पूछने की बात है गुड़िया?

नेहा : हीहीही! ी लव यू तू!!

रात को नेहा सोने चली जाती है 9 बजे hi, थोड़ी बोहत बातें निकिता से करती है उसके बाद सोने चली जाती है.

इधर निशा और राहुल सोफे पर बैठे बात कर रहे थे,

राहुल : डैड अभी तक नहीं आए माँ? रोज़ तोह वो 8 बजे आ जाते है.

निशा : हां बीटा! मेने फ़ोन किया था, कह रहे थे की 10-11 बजे तक आएँगे.

राहुल : 10:30 तोह बज hi गया है माँ.

निशा : हां! तू अब सजा. वो आ जाएंगे. में भी अपने कमरे में थोड़ी देरर लेट लेती हु.

राहुल : बस अभी चला जाऊंगा, ये काम होने hi वाला है.

निशा उठ के अपने कमरे में चली जाती है, राहुल भी काम करते करते कब वही सोफे पर हलकी नींद में चला जाता है उससे पता hi नहीं चलता.

इधर 10:45 पे होटल में मैनेजर आके राजेश को टटोल के हिलाता है तोह राजेश होश में आता है.

मैनेजर : सर! अब आपको घर जाना चाहिए! क्या आप पहले से रेफ्रेशेड फील कर रहे है? ये पानी आपके लिए...

राजेश : हँ?? ओह्ह!! हां...

पानी पिके राजेश अपना चेहरा थोड़ा धोता है पर अभी भी नशा उसमे बचा हुआ था. उसने गाडी उठायी और तेज़्ज़ तूफ़ान में गाडी चलते हुए राजेश घर की और निकलने लगा.

जब राजेश घर पहुचा तोह काफी गीला हो चूका था. निशा ने दरवाज़ा खोला और देख के चौंक गयी. राजेश ऊपर से नीचे तक गीला था. तेज़्ज़ बदल गरज रहे थे, बिजली चमक रही थी. निशा ने फौरन बैग लेके उससे अंदर आने दिया.

सामने सोफे पे राहुल सोया हुआ था हलकी नींद में. राजेश ने एक नज़र उससे देखा और अंदर बैडरूम में कपडे बदलने चला गया.

निशा ने टॉवल दी और राजेश अपने बाल hi सूखा रहा था...

निशा : आज क्या हुआ? आप इतना लेट आए? कल नेहा का बर्थडे है पता है न आपको?

नेहा का नाम सुनते hi शुक्ल की बातें फिरसे राजेश के मैं में मंडराने लगी. हल्का नशा तोह उससे अभी भी चढ़ा हुआ था क्युकी उसने पहली बार जो पी थी. हैंगओवर अभी हटा नहीं था.

राजेश : पता है न निशा! बार बार क्यों लगी हो उसी बात के पीछे?

निशा : अरे!? पर में तोह आपको सिर्फ याद दिला रही थी. आप लेट क्यों हो गए?

राजेश : अब हो गया लेट! हर्र चीज़ बताऊ क्या तुम्हे?

निशा : अरे?? में तोह सिर्फ पूछ रही हु न?

राजेश : यही तोह प्रॉब्लम है. नौकरी करने जाओ वह सर थपाओ, घर आओ तोह यहाँ तुम सर खाती हो, आदमी जाए तोह जाए कहा. क्या में बिना बताए कही घूमने फिरने भी नहीं जा सकता क्या?

निशा (बॉहे सिकोड़ते हुए) : पर में तोह आपसे सिर्फ पूछ रही थी. बाहर बारिश इतनी हो रही है. चिंता लगी थी इसलिए पूछा मेने...

राजेश : मुझे पता है क्या करना है. चिंता के नाम पे हर वक़्त पीछे पद के मुझसे सवाल जवाब नहीं किया करो...

निशा : अरे... पर... वो तोह नेहा का कल बर्थडे है इसलिए मेने पूछा की आप इतनी लेट क्यों आए? क्या आप बात करने गए थे क्या होटल में? उससे सरप्राइज देना है क्या? या फिर कुछ और काम था? बस इतना hi तोह पूछ रही हु में.

राजेश : कोई सरप्राइज देने के लिए नहीं गया था. दोस्तों के साथ गया था एन्जॉय करने... क्या गलत किया?

निशा जो देख रही थी की राजेश बोलते वक़्त थोड़ा लड़खड़ा रहा था वो समझ गयी की राजेश आज पी के आया हुआ है.

निशा (शॉकेड) : आपने शराब पी??

राजेश : हां पी है! क्या कर लोगी तुम?

निशा : क्यों पी आपने?

राजेश : मेरा मैं! तुम और तुम्हारी लड़की...

निशा : नेहा कहा से आ गयी बीच में?

राजेश : अरे! कहा से नहीं आयी ये पूछो? हर्र वक़्त एन्जॉय करना, किसके साथ उठती है बैठती है स्कूल में हमे क्या पता? वो लकी हरामखोर उस दिन पेरेंट्स टीचर मीटिंग में घर के देख रहा था इसको...

निशा (शॉकेड) : अरे तोह? तोह आप किसी की भी बात का क्या मतलब निकाल रहे हो?

राजेश : किसी की भी बात का? अरे! कल वो पांडेय की लड़की भाग गयी किसी लफंगे के साथ.

निशा (शॉकेड) : k..kya??

राजेश : हां! अपनी लड़की को ज़रा कण्ट्रोल में रखो! समझी?

निशा (ुचि आवाज़ में) : हमारी लड़की ऐसी नहीं है. आपने सोच भी कैसे लिया...? छी! आपके मैं में ख़याल भी कैसे आया नेहा के लिए ऐसा...

इन् दोनों की बहस में राहुल की नींद खुल चुकी थी. वो फौरन उठा और बैडरूम में जाके देखना चाह रहा था की चल क्या रहा है पर दोनों की आवाज़ सुनकर उसने अपने कदम गेट के बाहर hi रोक लिए और सुन्न ने लगा.

राजेश : बस यही तोह दिक्कत है तुमलोगो के साथ, कभी अपनी गलती मान न hi नहीं है!

निशा : क्या गलती? किसी गलती? आप होश में तोह हो?

राजेश : यदि नेहा एक दिन भाग गयी तोह क्या करोगी?

निशा (तेज़्ज़ स्वर में) : आप वाहियात बातें कर रहे है. आप नशे में है.

राजेश : जवाब नहीं है न? सही कहा मेने एकदम! लड़किया सही में चिकल्लस होती है

निशा (गुस्से में) : आप...

राजेश : काश नेहा पैदा hi न हुई होती.

राजेश की बात सुनके न केवल निशा बल्कि बाहर खड़ा राहुल भी स्तब्ध था.

राहुल : (डैड? क्या बोल रहे है ये? माँ की बात से लगता है डैड होश में नहीं है. पर अभी रात में ये सब? कल गुड़िया का b'day है. ये सब क्यों हो रहा है? मुझे लगा hi था डैड के साथ कुछ गड़बड़ चल रहा है...)

अभी राहुल कुछ और सोचता इस से पहले hi बगल में नेहा की रूम की लाइट एकदम से जल जाती है, नेहा जो की बहस की आवाज़ से उठ चुकी थी वो यही सोच रही थी की क्या बातें हो रही है इतनी रात में डैड और माँ के बीच.

और वो आगे बढ़ के देखने जाने लगती है. बाहर खड़ा राहुल फौरन अलर्ट हो जाता है.

उससे नेहा की परछाई दरवाज़े के नीचे से पास आते हुए दिख गयी, उससे पता चल गया की नेहा इधर hi आने वाले hi और लगता है नेहा ने राजेश की बात भी सुन्न ली है.

राहुल : (ओह्ह no! गुड़िया!? लगता है गुड़िया ने सुन्न लिया है? और अब वो झगड़ने जा रही है. में ऐसा नहीं होने दे सकता. क्या बीतेगी उसपर जब उससे पता चलेगा की डैड ने उसके लिए क्या कहा है? हरगिज़ नहीं! कल गुड़िया का b'day है mein...mein ऐसा नहीं होने दे सकता. हां...)

राहुल एकदम से बैडरूम का दरवाज़ा खोल देता है और अंदर चला जाता है जिससे देख निशा सर राजेश चकित रह जाते है.

राहुल : क्या डैड? आपने मेरी बात क्यों कह दी??

नेहा उठ के आगे बढ़ती है और अपने कमरे का दरवाज़ा खोलती है, और वो माँ डैड के कमरे में जाने hi वाली थी की उसके कानो में राहुल की आवाज़ पड़ती है और वो वही ृक्क जाती है,

राहुल भी माँ डैड के कमरे में hi था?

नेहा कान लगा के सुन्न ने लगती है तोह उससे कुछ ये सब सुनाई देता है,

राहुल : ......बात क्यों कह दी??

निशा : क्या मतलब??

राहुल : मतलब सही hi तोह कहा. पर ये मेरे जज़्बात है. काश नेहा पैदा hi नहीं होती...

नेहा की आँखें चौड़ी हो जाती है अपने भाई के मुँह से ऐसी बात सुन कर...

निशा (चिल्ला कर) : राहुल!! ये क्या बोले जा रहे हो तुम? होश में हो की नहीं?

राहुल : होश में तोह अब आया हु माँ! काश! सिर्फ में होता... नेहा नहीं. तोह कितना अच्छा होता न?

निशा (गुस्से में) : तुम्हे क्या हो गया है एकदम से? आज हो क्या रहा है घर में? किसी बकवास बातें कर रहे हो?

राहुल : हां न माँ! सिर्फ में होता... तोह कितना अच्छा रहता. मुझे कोई बहिन वगैरह नहीं चाहिए थी... पर आपने मुझे एक बहिन देदी. मुझे वह बिलकुल भी पसंद नहीं है माँ...

नेहा के शरीर में रोये खड़े हो जाते है अपने भाई के मुँह से ऐसी बातें सुन कर, उससे यकीन hi नहीं हो रहा था की राहुल उसके बारे में ऐसा कह रहा है.

तभी राहुल पलट कर दरवाज़ा खोल देता है और नेहा कड़ी हुई सबको दिख जाती है, उसकी आँखों में ासु थे, उसके परर काँप रहे थे, उसका बदन सिहर रहा था.

जैसे उस से उसका सब कुछ छीन लिया हो. नेहा को देख निशा के होश hi उड़द गए, साथ hi साथ राजेश के भी.

निशा : ने... नेहा???

नेहा (कापते हुए) : माँ?? ये सब क्या चल रहा है? B..bhai?? ये... ये तुम क्या कह रहे थे अभी? हां? मज़ाक कर रहे हो? ः!! B'day सरप्राइज देने के लिए... है न??

राहुल उससे घूरते हुए आगे बढ़ता है और उसकी आँखों में आँखें दाल के कहता है,

राहुल : ओह्ह्ह्ह! तोह तुमने सब सुन्न लिया?? मुझे लगा तुम नहीं सुन्न पाओगी. खर्र अब जब तुमने सुन्न hi लिया है तोह इससे अपने दिमाग में बइठल लो... ी हेट यू!!

नेहा का शरीर फिरसे काँप उठता है, जिस भाई से अभी वह कुछ देरर पहले प्यार करने की रे ले रही थी, वही भाई उससे कह रहा था की वो उससे हेट करता है, यहाँ तक की वो तोह चाहता hi नहीं था की उसकी बहिन पैदा होये.

नेहा : कह दो की ये झूठ है ... भाई... कह दो की ये झूठ है ... आपने अभी बहार कहा था मुझसे... की... यू लव में. यू लव में राइट? ये सब झूठ है...

राहुल एक कदम आगे बढ़ाता है तोह नेहा एक कदम पीछे चली जाती है,

निशा (चिल्ला कर) : रहलललल!!!

राहुल : नहीं! वो तोह सब नाटक था मेरी गुड़िया. काश तू पैदा hi नहीं हुई होती नेहा...

ी जस्ट हेट यू!!! या फिर तू... ः!!

राहुल फिर से एक कदम आगे बढ़ाता है, और नेहा फिरसे पीछे चली जाती है, वो पूरी तरह से घबराई हुई थी और सिहर रही थी.

पूरा चेहरा आसुओ से भीगा हुआ था. वो तोह यहाँ आवाज़ सुन्न के आयी थी, ये सोचके शायद उसके लिए सबने सरप्राइज प्रेपर किया होगा पर यहाँ तोह कुछ और hi सन था जिसकी उम्मीद शायद नेहा ने कभी नहीं की होगी.

राहुल (धीरे से कान में) : या फिर tu...swarg सिधार गयी होती??

नेहा जोरर से चिल्ला कर रोने लगती है और तभी निशा आगे बढ़ के राहुल को दो थप्पड़ रसीद देती है और चिल्ला के उससे बाहर निकाल देती है,

निशा नेहा को लेकर रूम में चली जाती है और राजेश राहुल को लेकर रूम में चला जाता है.

राजेश की आँखों में ासु थे. वो इसलिए क्युकी राहुल ने सारा इलज़ाम अपने सर लिया. राजेश राहुल की बोहत क़द्र करता था, और इसी वजह से वो अपने होश में आ गया. राहुल की आँखों में भी ासु थे.

राजेश : राहुल??

राहुल : डैड! मेने जितना हो सका उतना बचा लिया. अब आगे आपको संभालना है. दुबारा ऐसी हरकत कभी मत करना.

राजेश को अपनी गलती का एहसास फौरन हो जाता है और वो रट हुए राहुल को पकड़ते हुए खुद को कोसने लगता है.

राजेश : तुझे ये सब करने की क्या ज़रुरत थी बीटा?

राहुल : ज़रा सोचिये डैड! एक लड़की का बाप यदि ये कह दे की वो पैदा hi नहीं हुई होती तोह उससे केसा लगेगा? शुक्र मनाइये की में समय पे आ गया. नेहा ने शायद आपकी बात सुन्न ली थी और इसलिए मुझे ये कहना पड़ा की आप मेरी बात क्यों कह रहे हो? ताकि उससे यकीन हो जाए की आप नहीं बल्कि में चाहता हु की वो पैदा hi न हुई होती.

राजेश : .......

राहुल : माँ बाप का साथ रहेगा तोह गुड़िया सर्वाइव कर लेगी. मेने उससे जनम नहीं दिया है, मेरे कहने का उससे बुरा लगेगा बोहत पर धीरे धीरे वो मुझे भूल जाएगी. पर यदि एक बाप hi उससे ऐसा कहेगा तोह उसका असर कई हद्द तक ज़्यादा रहेगा. शायद वो सर्वाइव hi न कर पाए. अब आपको और माँ को कसम है. आपलोग उससे कुछ भी नहीं बताएंगे. अब ऐसा hi चलने देना. वो मुझे भूल जाएगी बूत एटलीस्ट उसकी शादी के बाद आप लोग तोह टच में रहोगे उसके. ये सही एंडिंग है.

राजेश कुछ भी बोलने लायक नहीं था वो बस अपने को hi दोष दे रहा था.

*फ्लैशबैक एंड्स*

निशा : और यही है सच्चाई...

निशा ने जैसे hi बोलना बंद किया उसकी आँखों में ासु थे, सामने बैठे सभी लोग सच जान के स्तब्ध थे, लेडीज में सभी रोने लगी, मुकेश और रुपेश जैसे तैसे खुद को संभाले हुए थे.

निकिता (रट हुए) : ये यहाँ पे hi ख़तम नहीं होता आंटी... मुझे भी कुछ कहना है!!

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आज के लिए इतना hi गाइस!


धन्यवाद्!
 
अपडेट - 84

अब तक...

निशा : और यही है सच्चाई...


निशा ने जैसे hi बोलना बंद किया उसकी आँखों में ासु थे, सामने बैठे सभी लोग सच जान के स्तब्ध थे, लेडीज में सभी रोने लगी, मुकेश और रुपेश जैसे तैसे खुद को संभाले हुए थे.

निकिता (रट हुए) : ये यहाँ पे hi ख़तम नहीं होता आंटी... मुझे भी कुछ कहना है!!

अब आगे...

निशा : ?? क्या?? क्या कहना है निकिता?

निकिता (क्रिस) : राहुल भैया के बारे में...

आरती : कहो बीटा... क्या कहना है?

निकिता : jii...mom!! बात ये है की...

*फ्लैशबैक*

बात आज से 7 साल पहले की है, जब ये सब घटना हुई और राहुल ने सारा इलज़ाम अपने सर पर ले लिया था. अगले दिन hi उसकी गुड़िया यानी की नेहा का b'day था.

"आज तोह नेहु का b'day है! कमीनी अभी तक इनविटेशन भी नहीं भेजी मुझे! पार्टी दे भी रही है या नहीं?" बैठे हुए निकिता नाश्ता कर रही थी सुबह और नेहा की b'day पार्टी के बारे में सोच रही थी.

अभी वो सोच hi रही थी की इतने में hi उसका कीपैड वाला फ़ोन बजने लगता है और वो फ़ोन उठाती है तोह नेहा का hi था.

निकिता : hello?

नेहा : हां!

निकिता : कमीनी कही की! सुबह तुझे विश करने के लिए फ़ोन लगायी तोह उठायी भी नहीं तू.

नेहा : हां वो सॉरी! लेट उठी!

निकिता : आज तोह जल्दी उठ जाती काम से काम मैडम? जन्मदिन है तुम्हारा!? हैप्पी बर्थडे तो माय बेस्टेस्ट फ्रेंड!

कहा से जल्दी उठ जाती नेहा? रात भर सो hi नहीं पायी बेचारी. रात में जो कुछ भी हुआ वो उसकी ज़िन्दगी का सबसे बुरा वक़्त था. इस से बड़ा सदमा नेहा को कभी नहीं लगा था. पूरी रात रोटी जो रही.

नेहा : हम्म! थैंक यू!

निकिता : ये तू इतनी उखड़ी उखड़ी तरह क्यों बात कर रही है? कुछ हुआ है क्या?

नेहा : नहीं तोह? क्या हुआ? मुझे क्या हुआ? सब सही तोह है!

निकिता : o...okay!

नेहा : शाम 7 बजे से पार्टी है होटल क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स में. आ जाना याद से.

निकिता : ओह्ह! Okay! चल फिर पार्टी में मिलते है.

*कॉल एंड्स*

राजेश ने जो इतनी बड़ी गलती की थी. उससे सुधारना तोह अब उसी का काम था. उसने सुबह hi नेहा के b'day के लिए शाम के लिए होटल में अर्रंगेमेन्ट्स के लिए कॉल कर दिया था.

नेहा तोह पूरी तरह से टूट चुकी थी. वो दिन भर अपने रूम में रोटी hi रही. खुद को समझाती पर फिर फिरसे रोने लगती. उसकी चाहत hi इतनी थी राहुल के लिए. कई बार तोह उसका मैं hi नहीं मानता था की राहुल ने ऐसा किया है.

शाम हुई, इनविटेशन के अकॉर्डिंग सभी इन्वितेद गेस्ट्स पहुँच गए वेन्यू पर और पार्टी शुरू हुई.

नेहा राहुल को फेस नहीं करना चाह रही थी. ये पल उसके लिए सबसे कठिन पल था. उससे समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे. एक रात में कितना कुछ बदल गया. जिस भाई से वो इतना प्यार करती थी उसी भाई ने उसके साथ ऐसा किया.

निकिता जब अपनी फॅमिली के साथ पहुची तोह नेहा को सभी ने विश किया, गिफ्ट्स दिए, और सभी पार्टी एन्जॉय करने लगे.

"हैप्पी बर्थडे नेहा" एक आवाज़ आयी और निकिता ने जब देखा तोह उसकी बॉहे टेंशन के मारे सिकुड़ गयी.

ये लकी था. लकी एक फ्रेंड होने के नाते नेहा ने उससे इन्विते किया था. पर उसके आने से राहुल निकिता और राजेश तीनो hi खुश नहीं थे. ऐसा इसलिए क्युकी ये तीनो को इस बात का आभास था की ये लकी कुछ सही नहीं है.

राहुल तोह खासकर उसपे hi नज़र रख रहा था. उसके स्कूल के कुछ जूनियर्स हर्र वक़्त खबर देते रहते थे की लकी नेहा के साथ केसा बेहवे करता है और पीठ पीछे क्या क्या बातें करता है.

पार्टी चल रही थी और राहुल थोड़ी दूर खड़ा हुआ था. सभी ने ये बात नोटिस करि और राजेश और निशा से पूछा भी इस बारे में तोह दोनों ने यही जवाब दिया की दोनों के बीच थोड़ा झगड़ा हो गया है थोड़े दिन में सुलझ जाएगा.

बच्चो के झगडे के बारे में सोच कर लोगो ने ज़्यादा प्रश्न नहीं किया क्युकी सिब्लिंग्स में झगडे तोह होते hi रहते है. कोई नयी बात नहीं थी.

राहुल दूर खड़ा स्नैक्स खा रहा था की उससे दिखाई दिया की लकी के कान में एक लड़का कुछ बोलता है और लकी एकदम से खुश हो जाता है.

उसके बाद वही लड़का बाहर निकलता है और उसके पीछे पीछे राहुल उसका छुप कर पीछे करने लगता है.

लड़का निकल के कार में से एक केक का बॉक्स निकालता है और फिर जेब में से कुछ पुड़िया निकालता है और उस केक के बॉक्स को खोलकर केक पर छिड़कने लगता है.

अभी वो ये काम इत्मीनान से कर रहा होता है की एकदम से उसकी गर्दन पर एक मज़बूत हाथ की पकड़ बांधती है. लड़का घबरा के पीछे देखता है और राहुल के देख के उसके होश उड़द जाते है.

राहुल : क्यों बी? क्या कर रहा है यहाँ?

लड़का (घबरा के) : wo..wo केक ले जा रहा था. नेहा के लिए. लकी भाई ने मंगवाया है.

राहुल : अच्छा? और ये केक में क्या मिलाया है?

लड़का (डर के) : wo...wo... वो कुछ nahi...kuch भी तोह नहीं!

राहुल बिना कुछ बोले उसको साइड में घसीटता है और उससे दो घुसे मुँह पे hi रसीद के जड़ देता है. बेचारे लड़के को गांड hi फट जाती है. दो घुसे में hi उसकी हालत खराब हो जाती है और वो गिड़गिड़ाने लगता है.

राहुल : अब बोल! सच सच!

लड़का : wo...wo... ये कोई पाउडर है. लकी भाई ने बोलै था केक में मिला के लाना.

राहुल : क्यों?

लड़का : वो ये केक सिर्फ नेहा के लिए है. जब वो ये केक खाएगी तोह उससे कुछ कुछ होने लगेगा.

राहुल : क्या?

लड़का : मुझे नहीं पता. लकी भाई ने बोलै था की नेहा को कुछ कुछ होने लगेगा और फिर लकी भाई नेहा को किश करेंगे चुपके में. तोह नेहा ख़ुशी ख़ुशी करवाएगी.

ये बात सुनते hi राहुल इतना आग बबूला हो गया की उसने 2 घुसे और जड़ दिए उस लड़के को.

राहुल ने अंदाजा लगाया की ये पाउडर और कुछ नहीं एक अफ्रोदिसिअस टाइप का hi होगा. लकी को किसी ने बताया होगा की इससे मिला देना और लड़की को ज़्यादा होश नहीं रहेगा. और लड़की की सेक्स करने की िक्षा बढ़ जाएगी.

राहुल उस लड़के को पीट कर सीधे घर भगा दिया और जब वो अंदर आया तोह पार्टी ज़ोरो शोरो से चल रही थी.

निकिता : राहुल भैया! आप दूर दूर क्यों भाग रहे हो? अरे आज तोह नेहु का b'day है. जाइये उससे गिफ्ट दीजिये.

राहुल : हँ? Umm...haa! देता हु...

राहुल ने वो केक वाला बॉक्स लिया और वाशरूम में डस्टबिन में फेकने hi जा रहा था. वाशरूम में पर लकी पहले से hi था और जैसे hi उसने देखा की राहुल उसका केक वाला बॉक्स फेकने वाला है, लकी ने दौड़ के उससे छिना लिया.

लकी भागते हुए बाहर जाने लगा. उससे पता था राहुल और नेहा के बीच कुछ झगड़ा हुआ है और नेहा अभी राहुल का सपोर्ट नहीं करेगी.

लकी वाशरूम से बाहर निकल नेहा को आवाज़ दिया, वो किसी भी हालत में नेहा को ये केक खिलाना चाहता था पर जैसे hi नेहा ने उसकी तरफ देखा और राहुल ने पीछे से उससे एक ज़ोरदार ठोकर मारी और केक हवा में उड़के सीधे ज़मीन पर ठप्प से गिरा.

ये वह मौजूद लोगो में लगभग सभी ने देखा.

नेहा जो की सब देख रही थी उसकी आँखें गुस्से से एकदम लाल हो गयी. ऊपर से लकी ने और आग में घी डालने का काम कर दिया.

लकी : नेहा तुम्हारा भाई केसा है? में तुम्हारे लिए केक लाया था और इसने मुझे धक्का देके गिरा दिया. सारा केक बर्बाद कर दिया.

राहुल (नेहा को देखते हुए) : wo...usme...

नेहा (जोरर से) : शुत्टट उपपपप!!!

नेहा के इतनी तेज़्ज़ चिल्लाने से सभी शांत हो गए. सब उससे hi देख रहे थे. निकिता बोहत हैरान थी. ये नेहा को क्या हो गया आज?

राहुल : ी...

नेहा (चिल्ला कर) : ी साइड शुत्टट ुप्प्प! गेट आउट!! गेत्त्त ोुत्तत्त!!!

राजेश : ने...

राहुल : it's okay डैड!

राजर्ष खुद के ऊपर गुस्सा करते हुए डाट पीस रहा था, मुट्ठी कस रहा था. सब उसकी गलती के कारण हो रहा था.

राहुल बाहर जाते जाते लकी को कान में बाहर मिलने के लिए कहता है और लकी के साथ उसके 3 दोस्त थे इसलिए वो बिना दर्रे 3 दोस्तों के लेकर बाहर चला गया. इस वक़्त राहुल को मार्टिकल आर्ट्स नहीं आता था. तोह ज़ाहिर सी बात थी की क्या होने वाला था. हालांकि राहुल 3 साल बड़ा था इन् सब से पर फिर भी 4 लौंडो को एक साथ संभालना थोड़ा मुश्किल काम था उस वक़्त राहुल के लिए.

निकिता : (कुछ चल रहा है नेहा की फॅमिली में. बात कुछ और hi है. नेहा कभी भी राहुल भैया से ऐसे बात नहीं करती. मुझे जाके देखना चाहिए)

कुछ देरर के बाद जब निकिता बाहर जाकर देखती है तोह स्तब्ध हो जाती है. रोड के साइड में लकी और उसके दोस्त अपने अपने पेट पकड़ के कराह रहे थे और राहुल खड़ा हुआ उन्हें देख रहा था. पर जब राहुल पलटा तोह निकिता और हैरान हो गयी.

उसके सर से खून निकल रहा था, और कई जगह चोट भी आयी हुई थी. लगता है किसी ने पत्थर से वार किया था.

निकिता : राहुल भैया??

निकिता सब देख चुकी थी, उस से छिपाने का कोई मतलब नहीं था. इसलिए राहुल जल्दी से उससे सब कुछ बताता है की लकी क्या करने वाला था और राहुल ने उससे क्यों मारा. पर बदले में राहुल ने एक वचन ले लिया निकिता से.

वो था नेहा को कभी भी ये बात नहीं बताना.

और राहुल वह से पता नहीं कहा चल दिया पैदल hi...

निकिता सिर्फ उसकी पीठ देखती रही जो धीरे धीरे रात के अँधेरे में गायब हो गयी.

*फ्लैशबैक एंड्स*

जब निकिता ने बोलना बंद किया तोह वो फुट फुट कर रोने लगी. उसके साथ hi साड़ी लेडीज वह पर बैठी रोने लगी.

तनीषा (रट हुए) : एक मिनट... Omg!!

निशा (रट हुए) : क्या हुआ बीटा??

तनीषा : इसका मतलब... Omg!!!

तनीषा को अब कुछ ऐसा पता चलता है जिससे जानकार वो और रोने लगती है.

निशा : बीटा क्या हुआ बोल न!

तनीषा : मतलब मेरी मुलाक़ात राहुल से उसी दिन हुई thi...mene उस से पूछा था की इतनी चोट कैसे आयी? जब वो रात में मुझे खाली सड़क पर मिला था. उसके सर से काफी खून बह रहा था. तोह उसने जवाब दिया था की ऐसे hi लड़ाई में फस्स गया था... मतलब... वो जैसा की निकिता ने बताया... वो उस वक़्त वह से लड़के निकल आया था और फिर इत्तेफ़ाक़ से मेरी मुलाक़ात उसी वक़्त उस से हुई.

अभी वो सभी सुबक hi रहे थे की इतने में कुछ गिरने की आवाज़ आयी, ऐसा लगा कुछ टूटा है.

दरवाज़े के पास कड़ी अंशु ने अटका हुआ दरवाज़ा जब खोला तोह नज़ारा देख के सबके होश hi उड़द गए.

वंशु : (ओह्ह्ह शीट्ट्ट्ट!!)

नीचे एक क्राकरी डिनर सेट का बॉक्स पड़ा हुआ था जो की अंदर से लगता है टूट चूका था और उसके ठीक पीछे एक व्यक्ति खड़ा हुआ था.

वो कोई और नहीं नेहा hi थी. आँखे फाड़े वो बस सभी को देख रही थी. उसका शरीर कांप रहा था.

निशा नेहा को देख के इतना हैरान हो गयी और डर भी रही थी की अब नेहा कैसे बेहवे करेगी. पर नेहा तोह बॉक्स लेने के बाद अपनी फ्रेंड के यहाँ जाने वाली थी न? फिर इतनी जल्दी कैसे आ गयी?

जब निशा की नज़र दरवाज़े पर कड़ी अंशु पर गयी तोह अंशु के चेहरे पर एक अजीब मुस्कान थी और अंशु ने अपनी नज़रे फेरर ली. निशा को समझने में देरर न लगी की अंशु ने hi कुछ किया है. बस कुछ भी गड़बड़ न होये यही निशा उपरवाले से दुआ कर रही थी.

एक कदम, दो कदम... नेहा धीरे धीरे सभी को आँखे फाड़े देखते हुए आगे बढ़ती है.

वो निशा के पास पहुचती है...

नेहा (कापते हुए होंठो से) : k...kya था ये माँ??? ये सब? Y..ye.. मज़ाक है n..na? है न? हां??

निशा रट हुए अपनी नज़रे झुका लेती है.

नेहा और डर जाती है, वो बगल में कड़ी तानिया के पास जाती है.

नेहा (कांपते हुए) : d...diii.. y..yee देखो न माँ ko...haa? केसा मज़ाक कर रही! आप सब मज़ाक कर रहे हो न? कहते क्यों नहीं!? दी! आप बोलिये न कुछ!

तानिया : (अंशु ने कहा था की बाकी काम मेरा है! लुक्स लिखे मेरी टर्न आ गयी है!)

तानिया : नहीं नेहा! यहाँ कोई मज़ाक नहीं चल रहा. तुमने जो सुना है! वही सच है! एकदम सच!

सभी अपनी अपनी सीट से खड़े हो गए ताकि ये गंभीर माहौल बिगड़े तोह वो संभाल सके.

नेहा को जैसे यकीन hi नहीं हो रहा था. आखिर वो हर्र वक़्त गलत कैसे रह सकती है? राहुल उससे हेट करता है इस बात से तोह वो सूरे थी पर फिरसे वो गलत कैसे साबित हो गयी? नहीं! ये ज़रूर कोई ढोंग है!

नेहा (जोरर से) आप सब झूठ बोल रहे है... सब झूठ है!! सब झूठ! Wo...wo...mujhe मारना चाहता था! वो झूठा था! दिखावटी था! वो एक बुराई से भरा हुआ इंसान है! He's ा लिएर्!!!

तानिया अपनी बॉहे सिकोड़े बस नेहा को hi देख रही थी. उसने एक झलक अंशु को देखा तोह अंशु ने सर हिला कर उससे ok का इशारा किया यानी की तानिया अगले स्टेप के लिए आगे बढे.

तानिया ने गहरी सास ली और फिर कहना स्टार्ट किया.

तानिया : नहीं नेहा! तुमने जो कुछ भी सुना है!

वो सब सच है!

नेहा (रट हुए) : नाहीई!! आप झूठ बोल रही हो! सब झूठ बोल रहे है!

तानिया (गहरी सास लेते हुए) : नेहा...

नेहा (जोरर से) : शुत्टट ुप्प्प!!! सब झूठ है! सब दिखावा है...

तानिया: उसने सब कुछ तुम्हारे लिए किया! तुम्हे सुन्न न होगा मेरी बात! तुम चाहो या न चाहो! बुआ, फूफा जी को कसम थी की तुम्हे ये सच कभी न बताया जाए.

नेहा : झूठ... झूठ!! सब शांत हो जाइये...

नेहा अपना सर पकडे रट हुए सब कुछ सुन्न के स्तब्ध थी! पर शायद अभी उससे पूरी तरह से यकीन दिलाने का काम तानिया के ऊपर था.

नेहा यहाँ इसलिए आ पायी क्युकी उसके फ़ोन में अंशु का केवल एक मैसेज पड़ा हुआ था!

"जितनी जल्दी हो सके घर आओ! और घर के बहार दरवाज़े के पास कड़ी रहना! Don't ओपन थे दूर! Don't मेक अन्य नॉइज़! बस खड़े रहना!"

नेहा ने जब ये मैसेज पढ़ा था तोह बोहत अटपटा लगा था पर अंशु ने कहा है मतलब कुछ बात तोह होगी, यही सोच के वो यहाँ आयी थी और उसने बिलकुल वैसा hi किया जैसा की अंशु ने बताया था.

पर उससे क्या पता था की उससे इतना बड़ा झटका लगने वाला है!

तानिया : तोह में शुरू करती हु...

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आज के लिए इतना hi गाइस!!


धन्यवाद्!!
 
अपडेट - 85

अब तक...

नेहा यहाँ इसलिए आ पायी क्युकी उसके फ़ोन में अंशु का केवल एक मैसेज पड़ा हुआ था!

"जितनी जल्दी हो सके घर आओ! और घर के बहार दरवाज़े के पास कड़ी रहना! Don't ओपन थे दूर! Don't मेक अन्य नॉइज़! बस खड़े रहना!"

नेहा ने जब ये मैसेज पढ़ा था तोह बोहत अटपटा लगा था पर अंशु ने कहा है मतलब कुछ बात तोह होगी, यही सोच के वो यहाँ आयी थी और उसने बिलकुल वैसा hi किया जैसा की अंशु ने बताया था.

पर उससे क्या पता था की उससे इतना बड़ा झटका लगने वाला है!

तानिया : तोह में शुरू करती हु...


अब आगे...

तानिया : तुम्हे लगता है तुम्हे सब कुछ पता था अपने भाई के बारे में नेहा! पर असल बात तोह ये है की तुम्हे कुछ भी नहीं पता था.

नेहा : नूवो! Mein...mein जानती हु उससे अच्छे से, wo...wo...

नेहा की हालत इस वक़्त बोहत hi खराब हो रही थी. उसका शरीर काँप रहा था, आँखों में हलके हलके आसुओ की बुँदे थी, आँखें शॉक के मारे एकदम चौड़ी हो गयी थी.

तानिया : ये सच्चाई सिर्फ और सिर्फ में, अंशु और तुम्हारे माँ डैड hi जानते थे. इनफैक्ट मुझे और अंशु को बोहत बाद में पता चला ये. बुआ और फूफा तोह तुम्हे बताने से rahe...aur राहुल का ये सच हमेशा हमेशा के लिए अँधेरे की गहराईयो में खो जाता... बिलकुल वैसे hi... जैसे राहुल चाहता था.

नेहा : नाहीइ!! झूठ!!!... आप झूठ बोल रही हो!!

नेहा बाहर से तोह ये कह रही थी पर उसका दिमाग सब समझ रहा था, वो जान रहा था की असली सच क्या है. फिर भी नेहा इससे मान न नहीं चाहती थी, शायद उसमे इस सच को एक्सेप्ट करने की हिम्मत नहीं थी और इसलिए ऐसा कहके वो खुद को झुटला रही थी, इस उम्मीद में की हो सकता है वो किसी सपने में हो या फिर सब झूठ हो.

तानिया : याद करो! याद करो अपने प्यारे बड़े भाई को... वही भाई, जिसके साथ तुम इतना जुडी हुई थी.

नेहा के ना चाहने पर भी तानिया की आवाज़ सुनते hi उसका दिमाग राहुल के साथ बितायी यादो से भरने लगता है, राहुल का वो चेहरा, नेहा का उसकी गॉड में बैठ के तंग करना, राहुल का उससे घुमाना, सारे सीन्स उसके दिमाग में घूमने लगते है.

और नेहा का शरीर और कांपने लगता है, सासें तेज़्ज़ होने लगती है, उसका सीना बड़ी hi तेज़्ज़ी से ऊपर नीचे हो रहा था, वो बोहत hi हेअविलय ब्रेअथे कर रही थी.

नेहा (चिल्ला के) : नहहीइ!!! वो लिएर् था...

वो मुझे मारना चाहता था, उसने मुझसे खुद कहा था, वो इस घर का अकेला वारिस होना चाहता था, usse...usse...

तानिया : अभी भी तुम्हे समझ नहीं आया नेहा!? राहुल ने जो भी कहा था, वो तुम्हारे डैड का इलज़ाम अपने सर पर लेने के लिए कहा था.

नेहा : ........

तानिया का अब पारा थोड़ा चढ़ चूका था. इतना सब होने के बाद भी नेहा सच मान ने तैयार नहीं थी तोह उसने सीधा आखिरी हमला करने की सोची...

तानिया ने बोलना स्टार्ट किया और बोलते बोलते वो एक एक कदम धीरे धीरे नेहा की तरफ बढ़ा रही थी...

तानिया : राहुल ने तुम्हारे और उसके रिलेशन का बलिदान दिया क्युकी वो तुम्हे बचाना चाहता था. बचाना चाहता था तुम्हे कुछ गलत कर लेने से. यदि तुम्हे ये पता चलता की तुम्हारे डैड तुम्हे नहीं चाहते थे, तोह उस वक़्त तुम्हारा रिएक्शन क्या होता? क्या तुम इस घर में रहती? ये जानते हुए भी की तुम्हारे डैड तुम्हारा जन्म चाहते hi नहीं थे? तुम्हारा रिश्ता अपने पिता से टूट गया होता. तुम्हारा रिश्ता अपनी माँ से बिगड़ जाता. तुम्हारी उम्र छोटी थी, तुम अपना घर चोरर के भाग जाती. तुम ये सब सेहन नहीं कर पाती और कुछ गलत कदम भी उठा सकती थी. और इसलिए! इसलिए राहुल ने तुम्हे इन् सब से बचाने के लिए, खुद का बलिदान दे दिया, उसने अपने उस प्यारे रिश्ते को डाव पे लगा दिया ताकि वो तुम्हे इन् सब से बचा सके. उसने तुम्हे जन्म नहीं दिया, इसलिए उससे लगता था की तुम उसके साथ रिश्ता टूट जाने से जल्दी उभर जाओगी. पर यदि तुम्हारा रिश्ता अपने माँ या बाप से टूट गया तोह तुम किधर जाती? उससे पता था की तुम घर चोरर के भाग जाती. इसलिए सब कुछ... सब कुछ उसने तुम्हे बचाने के लिए किया...

नेहा की सासें और तेज़्ज़ हो गयी थी, लग रहा था वो किसी भी वक़्त बेहोश हो सकती है. वो अपने हथेलियों को खोल कर उन्हें कांपते हुए देखे जा रही थी, जैसे उसने उन् हथेलियों से किसी का खून कर दिया हो.

तानिया (आगे बढ़ते हुए) : में ये कहने से बिलकुल भी पीछे नहीं हटूंगी की तुम्हारे डैड खुदगर्ज़ थे... राहुल hi तुम्हारे परिवार को लकी और बाकी खतरों से पीठ पीछे बचाता, तुम्हे अभी ये बात भी नहीं पता होगी की जब अंशु और वंशु तुम्हारे घर रहने आए थे और जब तुम सभी राहुल को चोरर कर घूमने गए थे, उस रात भी राहुल ने पीठ पीछे तुम सभी को बचाया था. उस वक़्त लकी तुम्हे वह अगवा करने आया था...

तानिया की बात सुन्न कर सभी शॉकेड रह जाते है सिवाए अंशु और वंशु के. अंशु ने तानिया को सब बता दिया था और तानिया वही सब बातें बोल रही थी.

नेहा फटी आँखों से तानिया को घूरे जा रही थी और तानिया धीरे धीरे उसके पास hi बढ़ रही थी.

तानिया : राहुल तुम्हे बुरा भला कहता, कहता की तुम कभी भी उस से आगे नहीं निकल पाओगी, हमेशा उस से पीछे hi रहोगी क्युकी वो चाहता था... की तुम उस से नफरत करो, उसने तुम्हे एक रीज़न दिया की तुम मज़बूत बन सको और उस से सच में एक दिन आगे निकल सको. वो सोचता था की ऐसा करने से तुम्हारा आत्मविश्वाश बढ़ेगा. तुम उस से नफरत करोगी और उससे धीरे धीरे भूल जाओगी, तुम पहले से कही ज़्यादा होशियार हो चुकी होगी, और तुम्हारे पास अपने माता पिता का साथ भी बरकरार रहेगा. यही चाहता था वह...

शुरू से लेकर अंत तक... उसने केवल तुम्हारा भला hi चाहा. तुम्हे प्रोटेक्ट करना चाहा और किया भी... उसने अपने माता पिता को कसम दी की कुछ भी हो जाए तुम्हे इस सच्चाई का पता न चले...

कोनसा भाई अपनी बहिन को मारना चाहेगा? यदि वो मारना चाहता भी... तोह ये बताओ! की तुम अब तक ज़िंदा कैसे हो? उसने ये सब बड़े hi स्मार्टली किया, उसने तुम्हे उस पॉइंट तक पहुचा दिया जहा तुम उसके जाल में फस्स गयी और उसकी बातो को सच मान बैठी.

तानिया आगे बढ़ते बढ़ते नेहा के पास पहुँच चुकी थी और वो देख रही थी की नेहा की हालत अभी क्या है, तानिया ने उसकी चीन को पकड़ा और उसका सर ऊपर उठाया और उसकी आँखों में देखा...

तानिया : उसने सारा का सारा इलज़ाम अपने कंधो पर लिया और यहाँ से चला गया. उसने अपनी नौकरी के लिए खुद इंतज़ाम किया और वह रहकर भी उसने तुम्हारे ऊपर से ज़रा भी ध्यान नहीं हटाया, वो वह रहकर भी तुम्हे यहाँ प्रोटेक्ट कर रहा था.

उसकी बात सुन्न नेहा को मोनिका का चेहरा और लकी वाला इंसिडेंट याद आ जाता है और उसकी आँखों से फिरसे आसुओ की धाराए निकलने लगती है...

तानिया : तुम इन् आँखों से कभी भी उसका सच नहीं जान पायी, तुम कभी भी उसके ढोंग से उसका पर्दा हटा नहीं पायी, तुमने ये कभी जान ने की कोशिश नहीं करि की क्या उसने जो किया वो उसने अपनी मर्ज़ी से किया या फिर किसी और कारण से!?

तानिया : उसने सम्मान की जगह अपमान स्वीकार किया, प्यार की जगह नफरत स्वीकार की. और उसके बाद भी वो ख़ुशी ख़ुशी अपना बलिदान देके यहाँ से गया... अंत तक तुम्हे ये जताता रहा की वो तुमसे नफरत करता है.

तानिया की ज़ुबानी सुनके सभी की आँखों में ासु थे, नेहा बिलखते हुए अपने घुटनो पर गिर पड़ी और अपने चेहरे को हाथो में लेकर जोरर जोरर से रोने लगी...

उससे देख के निशा भी खुद को नहीं रोक पायी और वो भी अपना चेहरा छिपाते हुए रोने लगी.

आगे बढ़ के अंशु ने नीचे बैठी नेहा को साइड से हुग किया और उससे शांत करने की कोशिश की पर नेहा को जैसे एक दम से कुछ सूझा और वो फौरन उठी और दौड़ते हुए अपने कमरे की और भागी.

उससे ऐसे जाते देख निशा की धड़कन बढ़ गयी, जिसका उससे सबसे ज़्यादा डर था कही वही न हो जाए. कही नेहा कुछ गलत कदम न उठा ले. सभी उसके पीछे उससे आवाज़ लगाते हुए दौड़े पर नेहा ने अपना कमरा लॉक करके रखा हुआ था.

अंशु और निशा जोरर जोरर से दरवाज़ा खत खटाने लगे की नेहा कुछ गलत न करले अंदर

निशा (रट हुए) : बेटा!! बेटा दरवाज़ा खोल... नेहा!!! प्लीज दरवाज़ा खोल मेरी बच्ची... प्लीज!!!

अंशु (रट हुए) : नेहुउउ!! दरवाज़ा खोल नेहु प्लीज!! तुझे हम सब की कसम है, राहुल भैया की कसम तुझे... तू कुछ भी नहीं करेगी... कोई गलत कदम नहीं उठाएगी...

सब दररते हुए बस दरवाज़ा थोक रहे थे की तभी अंदर से नेहा की आवाज़ आयी

नेहा (रोटी हुई आवाज़ में) : ी won't दो एनीथिंग स्टुपिड! आप लोग घर से थोड़ी देरर के लिए चले जाइये! ी वांट तो बे अलोन फॉर सोमेटिमे.

निशा : नहीं!! हम कही नहीं जाएंगे! तू दरवाज़ा खोल नेहा!!!

अंशु : चची! It's okay! नेहु ने कहा है मतलब वो कुछ गलत नहीं करेगी! हमे उसकी बात मान न चाहिए!

निशा : अरे अंशु पर में कैसे...!?

अंशु : नेहुउउ!! प्रॉमिस उस यू won't दो एनीथिंग स्टुपिड.

नेहा : ी प्रॉमिस दी! Don't वोर्री! जस्ट लीव में अलोन फॉर सोमेटिमे. लीव थे हाउस प्लीज. ी बेग यू!!!

अंशु उसकी बात सुन्न थोड़ी राहत की सास लेती है और सभी को सांत्वना देते हुए घर से बहार ले जाती है और कार में बैठ के सभी थोड़ी देरर के लिए बहार चल देते है. निशा बिलकुल राज़ी नहीं थी उससे डर था अभी भी की नेहा खुद को कुछ कर न ले पर अंशु ने उससे हौसला दिया की वो कुछ भी नहीं करेगी. अंत में घर को बाहर से hi लॉक करके सभी थोड़ी hi दूर के मार्किट की और चले गए और नेहा के लिए कुछ कुछ सामान खरीदने लगे.

इधर नेहा घर में अपने कमरे में फुट फुट कर रोई, वो अपनी स्टडी टेबल पर बैठी हुई थी और रोये जा रही थी, आसुओ से उसका पूरा चेहरा भीग चूका था.

उसने गुस्से में आकर टेबल पर रखे पेन होल्डर को गिरा दिया. पर पेन होल्डर के गिरते hi उसमे से कुछ पेपर के टुकड़े निकले. नेहा ने उन् पर पहले तो ध्यान नहीं दिया वो सिर्फ रोटी रही पर जब उसका ध्यान उन् पेपर्स पर गया तोह उससे जैसे कुछ सूझा और उसने पेपर्स के टुकड़े जो की मुड़े हुए थे उन्हें एक एक कर के खोला और जब उसने सभी पेपर्स को जोड़ के देखा तोह उसकी आँखों में और ज़्यादा ासु आ गए और अपने मुँह को हाथो से ढकते हुए वो और जोरर से रोने लगी...

ये वही पेपर था जिस पर राहुल ने नेहा के लिए ड्राइंग बनायीं थी (अपडेट 18).

जब अंशु और वंशु आयी हुई थी और नेहा की लड़ाई अंशु से ज़ू में हो गयी थी उसके बाद वो एक रोटी हुई स्त्री का स्केच बना रही थी पर बना नहीं पा रही थी. तब राहुल ने चुपके से उसके रूम में आकर एक खिल खिलाती स्त्री का चेहरा बनाया था, जिससे देख कर नेहा गुस्से में आकर उससे फाड़ के इसी पेन होल्डर में ठूस दी थी. किस्मत की बात ये थी की वो अभी तक उसी पेन होल्डर में पड़ा हुआ था.

रट हुए जब नेहा अपने रूम से बहार गयी और सामने राहुल के रूम का गेट देखा तोह उसकी रुलाई चूत गयी. यही पर तोह उसने राहुल के चेहरे पर पानी फेका था (अपडेट 1)

वो रट हुए नीचे जाने के लिए हुई तोह उसकी नज़र सीढ़ियों पर पड़ी और फिरसे उसके ासु निकल गए. इन्ही स्टैर्स पर वो राहुल का परर कुचल के बिना कोई इमोशन दिखाए चली जाय करती थी. ऐसी कोई जगह नहीं थी जहा पर उसने राहुल को हर्ट नहीं किया था.

नेहा दौड़ के नीचे से राहुल के रूम की के लेके आयी क्युकी राहुल का रूम लॉक्ड रहता था. हर्र 2 दिन में निशा उसके रूम की सफाई करती थी और फिर लॉक लगा देती थी. सफाई कल hi हुई थी इसलिए अभी लॉक लगा हुआ था.

नेहा ने फौरन राहुल का रूम खोला और जैसे hi अंदर दाखिल हुई, वही पुराना रूम देख के उसकी आँखों से ासु रुकने का नाम hi नहीं ले रहे थे. वो चारो तरफ घूमते हुए उसके रूम को देखने लगी, आगे बढ़ते हुए धीरे से उसने आस पास राखी हुई चीज़ो को छू के देखा जैसे मानो वो किसी ख़ज़ाने को छू रही हो.

उसने राहुल की अलमारी जो की वही राखी हुई थी उससे खोला तोह अंदर राहुल के hi कपडे रखे हुए थे. अपने हाथो को उन् कपड़ो पर फेरते हुए उसने राहुल की एक टी शर्ट उठायी और उससे अपने सीने से लगा लिया, उसने टी शर्ट में से राहुल की खुशबु लेने का अथक प्रयास किया पर उनमे से अब राहुल की कोई भी खुसबू नहीं आ रही थी.

क्युकी कपडे निशा धोती रहती थी और वो राहुल के भी कपडे निकाल के उन्हें धोती ताकि वो फ्रेश बने रहे.

नेहा बिलखती हुई टी शर्ट लिए ज़मीन पर घुटनो के बल गिर पड़ी और तभी उसकी नज़र बीएड के नीचे एक नेवसपपेर पर पड़ी जिसके अंदर कुछ रखा हुआ था.

उसने झुकते हुए बीएड के नीचे से नेवसपपेर को खींच के कुछ निकाला और उसमे लगे धागे खोलने लगी, धागा खोलते hi उसने नेवसपपेर को जब खोला तोह अंदर की राखी हुई चीज़ देख के उसकी फिरसे रुलाई चूत गयी.

ासु की बड़ी बड़ी बोंडे उसके चेहरे को भिगोते हुए गिरने लगी. सामने एक जला हुए टेडी बेयर पड़ा था. ये वही टेडी था, जिससे अंशु ने उसके b'day पर दिया था 2 साल पहले और नेहा को जब ये बात पता चली की ये असल में राहुल का दिया हुआ गिफ्ट था तोह नेहा ने टेडी को नीचे जाकर जला दिया था. (अपडेट 37)

आज वही आधा जला हुआ टेडी जब उससे फिरसे दिखा तोह उस से बिलकुल कण्ट्रोल नहीं हुआ और वो जोरर जोरर से रोने लगी. उसने टेडी को उठा के अपने सीने से इतनी जोरर से भीचा जैसे अपने अंदर hi समां लेगी.

उससे याद है ये टेडी 10,000 का था. और उसने बिना कुछ सोचे समझे जला दिया था. उस वक़्त तोह राहुल कमाता भी नहीं था, न जाने कितनी म्हणत से उसने पैसे इखट्टे करके ये खरीदा होगा!? और उसने ने यु hi उससे जला दिया था. नेहा इस वक़्त इतना गिल्ट फील कर रही थी की यदि उसकी जगह कोई और होता तोह इसी गिल्ट में hi डूब के मर जाता.

जब वो उठी तोह उसने फिर से अलमारी चेक करि पर उससे कुछ मिला नहीं. पर उसका ध्यान जैसे hi लाकर पे गया तोह उसने के से उससे खोला और अंदर जो देखा तोह उसकी गिल्ट और भी बढ़ गयी. ासु तोह non-stop बह hi रहे थे. पर हर्र बार वो और इमोशन के साथ बहते.

अंदर एक तस्वीर थी जो की एक बचपन की तस्वीर थी राहुल और नेहा की. नेहा राहुल के कंधो पर बैठी हुई है और जीभ निकाली हुई है और राहुल उससे संभाल के पकडे हुए है.

पुराणी तस्वीर देख नेहा को हस्सी आ जाती है, कैसे वो बच्चो टाइप जीभ निकाली हुई है और राहुल उससे पकड़ा हुआ है. तस्वीर में भी वो कितनी केयर से नेहा को संभाला हुआ था ताकि वो कही गिर न जाए. तस्वीर देख के नेहा के चेहरे पर एक मुस्कान आयी और उसने तस्वीर उठा के राहुल की फोटो वाले हिस्से को चूम लिया.

जब उसने तस्वीर पलटाई तोह उससे फिर से रुलाई आ गयी. पीछे राहुल की लिखावट में लिखा हुआ था,

"ी विल ऑलवेज लव माय गुड़िया"

रट हुए उसने अपने सीने से वो तस्वीर को लगाया और टेडी और तस्वीर लेके वो अपने कमरे में चली गयी.

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आज के लिए इतना hi गाइस!


धन्यवाद्!!
 
मिथिलेश भाई फिरसे आपको देख के वाक़ई बोहत ख़ुशी हुई!!

मुझे पता है बोहत से रीडर्स ऐसे है जो साइलेंट में मेरी स्टोरी पढ़ते है और कभी कभी hi कमेंट करते है. और इस बात की मुझे बेहद ख़ुशी होती है. बनने रहिएगा!

धन्यवाद्!!
 
आपके पहले पॉइंट पर यही कहूंगा की स्टोरी अपनी एंडिंग पर है, पर आने वाले आर्क्स को में डिटेल्ड कर सकता हु, में उन्हें जल्दी में ख़तम करने वाला था पर अब उन्हें डिटेल्ड रखूँगा.

रोमांटिक कन्वर्सेशन तोह रहता hi है.

मोनिका के साथ सन मोनिका का बदला वाले अर्च में बनेगा, जैसा भी होगा, हॉट होगा!!

सेक्स सीन्स में में कंवर्सशन्स रखता hi हु बीआरओ!

धन्यवाद्!!
 
जी हां भाई! बस 2-3 आर्क्स hi बचे हुए है अब.

फिर हम भी स्टोरी सेक्शन में सिर्फ कमैंट्स में दिखाई देंगे जब तक की दूसरी स्टोरी स्टार्ट नहीं हो जाती (. ❛ ᴗ ❛.)
 
अपडेट - 86

अब तक...

जब उसने तस्वीर पलटाई तोह उससे फिर से रुलाई आ गयी. पीछे राहुल की लिखावट में लिखा हुआ था,

"ी विल ऑलवेज लव माय गुड़िया"

रट हुए उसने अपने सीने से वो तस्वीर को लगाया और टेडी और तस्वीर लेके वो अपने कमरे में चली गयी.


अब आगे...

इधर निशा का जी बोहत घबरा रहा था की उसकी बेटी कुछ उल्टा सीधा न कर ले. वैसे hi निशा ने राजेश से ये सब छिपा के किया है और अब यदि नेहा ने कुछ कर लिया तोह राहुल और राजेश पता नहीं कैसे रियेक्ट करेंगे और उसकी सबसे ज़्यादा टेंशन यही थी की नेहा को कुछ भी न हो.

निशा : अंशु! चल बीटा जल्दी घर चल! मुझे बोहत फिक्र हो रही है मेरी बच्ची की... में उसकी माँ हु, मुझे पता है उसपे क्या बीत रही होगी! वह पूरा का पूरा दोष खुद को दे रही होगी, कही वो कुछ गलत न करले...

अंशु : चची! Don't वोर्री! आप नेहा की माँ है पर में उसकी बड़ी बहिन और उसकी बोहत अच्छी दोस्त भी हु. ी क्नोव हेर वैरी वेल! शी won't दो एनीथिंग.

निशा : तू इतने यकीन के साथ कैसे कह सकती है अंशु?

अंशु : क्युकी में उससे अच्छे से जानती हु. ऊपर से मेने उससे हम सबकी और राहुल भैया की कसम भी दी है! आप भरोसा रखिये! और वो सब सोचना बंद करिये और ये सोचिये की आगे की स्थिति को कैसे संभालना है? फिलहाल तोह हम उसकी मैं पसंद चीज़े ले रहे है ताकि उसका मैं शांत हो सके पर उसके बाद क्या? क्या होगा जब चाचा यहाँ आएँगे और उनको ये सब पता चलेगा? नेहा कैसे रियेक्ट करेगी?

अंशु के ये बात कहने पर निशा अब घबराने लगती है, उसने अभी तक इतने आगे की नहीं सोची थी, अभी वो सिर्फ नेहा पर फोकस्ड थी. पर अब जब अंशु ने उससे रीलीज़ कराया की स्थिति और भी बिगड़ सकती है तोह निशा वाक़ई घबरा गयी...

निशा : अंशु! तू मुझे दर्रा क्यों रही है? तेरे कहने पर hi मेने ये सब किया है! और अब तू मुझे अकेला चोरर रही है?

अंशु : क्या चची!!! मेने कब कहा की में आपको अकेला चोरर रही हु? में तोह आपके साथ hi हु! में बस आपको हिंट दे रही हु की मामला कितना सीरियस है. और आगे आपको कैसे संभालना है उसके बारे में अभी से आपको सोचना पड़ेगा!

निशा : हम्म! अब यहाँ तक तू लायी है तोह आगे का भी तू hi सोचेगी.

अंशु : अच्छा बाबा ठीक है एंड don't वोर्री अबाउट नेहा चची! She's मेंटली स्ट्रांग नाउ! भाई के कारण वो अब पहले जैसी नहीं रही!

निशा : क्या मतलब?

अंशु : ी मैं! भाई उस से कहता था न की नेहा कभी भी उस से आगे नहीं निकल पाएगी. तोह नेहा ने इन् दो सालो में अपने आप को बोहत इम्प्रूव किया है. She's मच मोरे मातुरे नाउ.

निशा : हँ!?

अंशु : आपने देखा था न नेहा को जब तानिया दी ने सब कुछ बताया तोह नेहा कैसे फुट फुट कर रोने लगी थी?

निशा : हां!!

अंशु : आपको क्या लगता है वो क्यों रोई थी?

निशा : हँ??

अंशु : वो इसलिए नहीं रोई थी की उसके डैड उसका जन्म नहीं चाहते थे, वो इसलिए रोई थी की उसका बड़ा भाई उसके लिए सारे दर्द लेता रहा और उसकी देखभाल करता रहा. बिना उससे कुछ भी बताये, और नेहा सिर्फ उससे नफरत करती रही. वो इसलिए रोई थी. उससे अपने बड़े भाई के लिए बोहत बुरा लग रहा था और बोहत hi गिल्ट फील कर रही थी वह. उसने उस वक़्त चाचा के बारे में सोचा तक नहीं. वो सिर्फ और सिर्फ अपने भाई के दर्द के बारे में सोच रही थी.

निशा : तुम्हे कैसे पता?

अंशु : ी क्नोव हेर! उसकी जगह में होती तोह मेरा भी यही होता. आखिर भाई से इतना प्यार जो करती हु में. और आप भी तोह करती हो न!? *विंक्स*

निशा : हँ?? *ब्लश* हम्म्म!!

सभी लोग नेहा की मैं पसंद चीज़ खरीदने में लगे रहते है ताकि जब वो घर पर पहुचे तोह नेहा का मैं हल्का कर सके.

इधर नेहा अभी भी हाथ में वो तस्वीर लिए हुए थी और खुद से hi बात करे जा रही थी!

"क्यों?? क्यों किया तुमने मेरे लिए इतना?? बोलो न? आखिर क्यों? तुमने मेरे लिए इतना सब कर दिया, और मुझे इसकी भनक तक लगने नहीं दी! में तुमपे कितना अत्याचार करती... तुम्हे फ़साने के लिए नए नए आइडियाज सोचती, तुम्हे नीचे दिखाने के लिए सब कुछ करती, तुम्हारी इंसल्ट करती, तुमसे नफरत करती. उसके बाद भी तुमने कभी bhi...kabhi भी मेरे ऊपर हाथ नहीं उठाया, कभी भी तुम अपने रास्ते से नहीं भटके, कभी भी तुमने मेरे लिए कुछ भी बुरा नहीं सोचा. तुम शुरू से hi मुझे प्रोटेक्ट करते आए और में जानती हु की अभी भी तुम मुझे प्रोटेक्ट कर रहे हो! यदि अभी में कही बाहर जाती हु तोह I'm सूरे वो मोनिका या फिर कोई और तुम्हारे कहने पर ज़रूर मुझे प्रोटेक्ट करेगा फिरसे. पर... पर क्या में तुम्हारे इतने प्यार के लायक थी? मेरे भाई...!?"

नेहा ने तस्वीर पर राहुल को देखते हुए उसपे हाथ फेरते हुए कहा और उसके ासु छलक आए.

उसने तस्वीर को फिरसे उठाया और उसमे राहुल को देख फिरसे चूम लिया. उसके हाथ में राहुल की एक मनपसंद टी शर्ट भी थी.

नेहा एकदम से उठी, उसने अपना टॉप उतारा तोह उसकी दूध जैसी गोरी मुलायम त्वचा रूम की बंद लाइट में भी चमक रही थी. शीशे में खुद को देखते हुए उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी. लाइट पिंक कलर की ब्रा उसके स्तनों को संभाले हुए थी और स्तन का थोड़ा हिस्सा ब्रा के बहार से झांक रहा था.

उसने राहुल की टी शर्ट उठायी और उससे पेहेन लिया और खुद को शीशे में देखने लगी और रोने लगी!

फिरसे तस्वीर को उठा के वो उस से बात करने लगी!

"काश इस टी शर्ट में तुम्हारी महक होती! में और भी ज़्यादा खुद को तुम्हारे करीब मेषसूस कर पाती. भाई!! तुम्हे यही डर था न की में कही डैड की बात सुन्न न लू और कुछ गलत कदम न उठा लू!? इसलिए तुमने ये सब किया न? पर मेरे बुद्धू भाई! में तोह डैड की बात सुन्न hi नहीं पायी थी. पर फिर भी तुमने मेरे लिए इतना सब कर दिया... नाउ ी क्नोव! की क्यों डैड मुझे इतने अच्छे से ट्रीट करते थे, क्यों डैड मुझे कभी ज़्यादा चिल्लाते नहीं थे, क्यों वो मुझे महंगे महंगे गिफ्ट्स देते थे, क्यों वो माँ को मुझे डाटने से रोक देते थे, सब कुछ अपनी गिल्ट काम करने के लिए. और में समझती थी की डैड सबसे अच्छे है! और तुम सबसे खराब! कितनी ना समझ थी न में??"

नेहा ने रट हुए कहना ज़ारी रखा,

"पर तुम्हे टेंशन लेने की कोई ज़रुरत नहीं है मेरे भैया!!! में मेंटली काफी स्ट्रांग हो चुकी हु. आल थैंक्स तो यू! में ये सब जान ने के बाद कोई भी गलत कदम नहीं उठाने वाली हु. तुम्हारी गुड़िया हु में... इतनी कमज़ोर थोड़ी न हु. बस अब तुम्हारे करीब आना है जितना जल्द हो सके. में कुछ भी कर दूंगी ऐसा करने के लिए... तुम जानते hi हो की में कितनी ज़िद्दी हु... ी क्नोव तुम मुझे देखते hi मुझसे दूर जाने की कोशिश करोगे... पर में ऐसा होने hi नहीं दूंगी... तुम्हे अपने आप से जकड के रखूंगी... ी लव यू सो मच भाई!!"

रट हुए उसने वो तस्वीर उठायी और अपने टी शर्ट के अंदर हाथ ले जाते हुए उससे अपने स्तनों के बीच फसा के तस्वीर को अंदर कर दिया. बिलकुल वैसे hi जैसे महिलाए अपना छोटा सा पर्स अपने ब्लाउज में स्तनों के अंदर छुपा कर रखती है.

"तुम्हारी जगह तोह मेरे दिल में hi है! केवल तुम्हारी तस्वीर को यु रखने से मुझे इतना बेटर फील हो रहा है, फिर तोह जब तुम्हे में अपने..."

बोलते बोलते वो एक दम से ृक्क जाती है और अपनी आँखें खोल के खुद को शीशे में देखने लगती है. उसके गाल एकदम अचानक hi लाल हो गए. अपने गालो को दोनों हथेलियों पर रखते हुए उसने अपना सर हिलाया वो सब सोचने से पर कोई फायदा नहीं!

नेहा (ब्लश) : omg!! निक्की!! ी थिंक यू वेरे राइट... It's डीडेड थें!!

वो अपने रूम का दरवाज़ा लॉक करके नीचे आती hi है की इतने में सभी घरवाले वापस आ जाते है. वो सभी बहार से hi घर को लॉक करके गए हुए थे और निशा फौरन दौड़ती भागती हुई लॉक खोलते hi घर में घुसती है तोह देखती है की नेहा शान्ति से सोफे पर बैठी हुई है और अपना फ़ोन चला रही है!

निशा दौड़ते हुए उसके पास जाती है और उससे अपने सीने से लगा लेती है,

निशा (नम्म आँखों से) : मेरी बच्ची!!

नेहा को अब मालुम चल रहा था की उसकी माँ हमेशा से hi अपने दोनों बच्चो को एक्वाली प्यार करती आयी है. नेहा समझती थी की उसकी माँ सिर्फ राहुल को hi ज़्यादा प्यार करती है. कितनी गलत थी वह! शुरू से hi उसकी माँ हमेशा दोनों को hi बराबर प्यार करती रही, और नेहा सोचती थी की उसके डैड सबसे अच्छे है!

नेहा (नम्म आँखों से) : माँ!!!

निशा : ओह्ह्ह! मेरी बच्ची! तू ठीक तोह है न? क्या कर रही थी तू?

नेहा (स्माइल्स) : I'm okay माँ! Don't वोर्री! बस थोड़ा टाइम अकेले में चाहिए था.

निशा एक राहत भरी सास लेती है और नेहा को मार्किट से लाया उसकी मैं पसंद का सामान देने लगती है.

नेहा ये सब देख के वाक़ई बोहत खुश थी की सब उसकी कितनी चिंता करते है, उसके लिए सभी इतना सोच के उसकी मैं पसंद चीज़े खरीद कर लाए उसके लिए वो बोहत खुश थी.

नेहा : आप सभी को बोहत बोहत थैंक यू!

विनीता : बेटा! तुम ठीक तोह हो न? तुम्हे देख के ऐसा लग रहा है जैसे तुम अभी बोहत दुखी हो और झूठी स्माइल दे रही हो! बिलकुल वैसे hi जैसे मेरी बच्ची वंशु दिया करती थी जब इससे एंड्रोफोबिअ था.

वंशु : हां नेहा! ी क्नोव it's हार्ड बूत प्लीज बे स्ट्रांग!

नेहा (स्माइल्स) : नहीं दी! I'm रियली फाइन नाउ! आपको टेंशन लेने की कोई ज़रुरत नहीं है!

निकिता (हग्स) : नेहुउउ!! तू बस कुछ करना मत अपने आप को!

नेहा : इडियट! ी won't दो एनीथिंग स्टुपिड! और मुझे तेरे को थैंक्स भी कहना है.

निकिता : किस बात के लिए?

नेहा (ब्लश) : वो... तुझे समय आने पर पता लग जाएगी!

मुकेश : चलो! नेहा बिटिया को अब ऐसा देख थोड़ी राहत महसूस हुई! वर्ण टेंशन के मसरे सर फटा जा रहा था!

ललिता : सही में!! बेचारी निशा की तोह हालत hi खराब थी रास्ते भर! में समझ सकती हु एक माँ पर क्या बीत रही होगी उस वक़्त. अपर अब सब ठीक है.

रुपेश : मुझे तोह अब भी यकीन नहीं होता की राजेश ऐसा कैसे कर सकता है? अरे शराब के नशे में भी इतना सब कैसे बोल गया वह? आने दो उसको! उसकी खबर लूंगा में...

साइड में कड़ी विनीता उससे तुरंत नेहा की तरफ इशारा करती है...

विनीता (धीरी आवाज़ में) : क्या करते हो आप? बेचारी अभी अभी सदमे से थोड़ा बहार निकली है. अब देवर जी का ज़िक्र क्यों कर रहे हो आप?

रुपेश : ओह्ह! सॉरी!

विनीता : निशा! अब हम निकलते है! कोई भी कभी भी किसी भी चीज़ की ज़रुरत हो. बे झिजक कॉल कर देना. हम आ जाएंगे!

वंशु : माँ... डैड!! में और अंशु यही रुकेंगे आज रात.

रुपेश : ठीक है बीटा! कोई दिक्कत नहीं!

और रुपेश और विनीता अंशु वंशु को चोरर अपने घर के लिए निकल जाते है.

मुकेश और उसकी फॅमिली क्युकी लखनऊ से आये थे तोह वो तोह यहाँ पर कुछ दिन रुकने वाले थे. दूसरे शहर से जो आये हुए थे. काम से काम एक दिन तोह रुकता hi मुकेश.

निशा : भाई आप सभी लोग फ्रेश हो लीजिये और अपने कपडे बदल लीजिये तब तक में कुछ मस्त खाने के लिए बनाती हु आपके लिए.

निकिता : चल नेहा! में भी चलती हु अब. और यदि ज़रुरत पड़े तोह मुझे बुला लेना.

आरती : हां! बीटा! बिलकुल झिझकना मत! हमारा घर तोह बिलकुल पास में hi है!

नेहा : जी आंटी! थैंक यू! थैंक्स निक्की!

निकिता : हां हां! बूत वो तू जो मुझे थैंक्स कहने वाली बात बोल रही थी, उसके बारे में भूलना मत हां?

नेहा (ब्लश) : हां बाबा!

और ऐसे hi निकिता और आरती भी वह से अपने घर की और चल दिए.

तनीषा : आंटी! में भी चलती हु अब! और मेरी ज़रुरत हो तोह आप बस कॉल कर देना!

निशा : okay बीटा! पर कुछ खा तोह लेती...

तनीषा : अरे में तोह रोज़ hi आती हु! आप कल खिला दीजियेगा. अभी आप अपने घर पर ध्यान दीजिये ख़ास कर नेहा पर. अब में चलती हु.

वो मुड़ती hi है की नेहा उससे पीछे से आवाज़ देती है,

"तनीषा दीदी"

तनीषा पलटते हुए नेहा को सवालिया नज़रो से देखती है.

नेहा : थैंक यू!!

तनीषा (स्माइल्स) : it's okay माय डिअर!

और तनीषा भी अपने घर की और चल देती है.

नेहा : अंशु दी, तानिया दी, वंशु दी! प्लीज! आप मेरे रूम में चलिए न! आपसे कुछ कहना है!

मुकेश ललिता फ्रेश होने चले जाते है और नेहा अपनी बहनो को लेकर अपने रूम में ले जाती है और रूम अंदर से लॉक कर देती है.

वंशु : कहो नेहा!

नेहा : सबसे पहले तोह! थैंक यू सो मच! आपने ऐसे टाइम पर मेरी माँ और मेरा हौसला रखा और हमारा साथ दिया.

वंशु : नेहा! परेशानी में घरवाले काम नहीं आएँगे तोह कोण आएगा मेरी बहिन?

नेहा (स्माइल्स) : उसी के लिए... थैंक यू सो मच!

तानिया : you've ग्रोन नेहा! मुझे तोह लगा था की तुम पूरे टाइम रोटी hi रहोगी और उभर नहीं पाओगी इतनी जल्दी. बूत I'm रियली अमज़द की तुमने अपने आप को बोहत hi जल्दी कलम कर लिया.

नेहा (स्माइल्स) : सच कहु तोह आपकी स्पीच सुन कर में पूरी तरह टूट गयी थी. ी वास् हर्ट. बूत में पहले की तरह कमज़ोर नहीं रही अब. में समझ गयी पूरी सिचुएशन को और मेने छोपे उप किया.

तानिया (स्माइल्स) : गुड!

अंशु : एंड लेट में आस्क यू... यू वेरे हर्ट बिकॉज़ राहुल वेंट थ्रू आल ऑफ़ थिस जस्ट फॉर योर सके राइट?

नेहा (सुरप्रीसेड) : यस! यू क्नोव में वेल दी!

अंशु : ी कनेव आईटी!

नेहा : अंशु दी! में आपकी और तानिया दी की ज़िन्दगी भर आभारी रहूंगी!!

अंशु : हँ?

तानिया : ??

नेहा : यदि आप ने ये सब प्लान नहीं किया होता और मुझे यहाँ नहीं बुलाया होता तोह... तोह I'm अफ्रेड... मुझे शायद hi कुछ पता चल पाटा... और भाई का सच... हमेशा के लिए लुप्त हो गया होता.

अंशु : it's okay स्वीटी! सब तुम्हारे लिए!

नेहा : यू अरे थे बेस्ट दी!!

वंशु : वेट! दीद यू जस्ट... नेहा?? तुमने कुटी को भाई बोलै?

नेहा (ब्लश) : भाई hi तोह बोलूंगी न दी!! वो मेरा प्यार भाई जो है!

वंशु : अव्व्व! माय ओल्ड क्यूट लिटिल सीस इस बैक! I'm सोऊ हैप्पीययय!!

वंशु उससे बाहो में लेके हुग कर देती है.

उधर राहुल अपनी कार में बैठ के एक घर के सामने रुकता है!

राहुल : (ये ख़ुशी ने मुझे अचानक क्यों बुलवा लिया है!?)

अंदर आते hi उससे रजनीश गेट पे hi मिल जाता है जो अभी इस वक़्त गार्डनिंग कर रहा था.

राहुल : रजनीश अंकल??

रजनीश : मिस्टर राहुल?? आइये न! अंदर सभी आपका वेट कर रहे है!

राहुल : सभी???

राहुल अंदर जाता है तोह जैसे hi दरवाज़ा खोलता है तोह सामने नज़ारा देख के थोड़ा सरप्राइज हो जाता है...

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आज के लिए इतना hi गाइस!

नेक्स्ट अर्च है बीन स्टार्टेड!!


धन्यवाद्!!
 
अपडेट 87

अब तक...

राहुल : (ये ख़ुशी ने मुझे अचानक क्यों बुलवा लिया है!?)

अंदर आते hi उससे रजनीश गेट पे hi मिल जाता है जो अभी इस वक़्त गार्डनिंग कर रहा था.

राहुल : रजनीश अंकल??

रजनीश : मिस्टर राहुल?? आइये न! अंदर सभी आपका वेट कर रहे है!

राहुल : सभी???

राहुल अंदर जाता है तोह जैसे hi दरवाज़ा खोलता है तोह सामने नज़ारा देख के थोड़ा सरप्राइज हो जाता है...


अब आगे...

राहुल जैसे hi अंदर आता है तोह सामने हॉल में hi उससे मास्टर, प्रीती, ख़ुशी बैठे हुए दिखाई देते है.





प्रीती अपना छोटा सा मिरर निकाल के लिपस्टिक लगा रही थी पर जैसे hi राहुल अंदर आया उसने हड़बड़ाते हुए एकदम से मिरर बंद कर लिया और एकदम से कड़ी हो गयी.

ख़ुशी राहुल को देखते hi एकदम से ख़ुशी के मारे उठाते हुए लम्बे कदमो के साथ राहुल के पास आयी और अपने एक हाथ से उसने राहुल का हाथ थाम लिया,

ख़ुशी : तुम आ गए!! कैसे हो?

अभी वो इतनी खुश थी की उसके चेहरे से अलग hi पता चल रहा था, जैसे hi ख़ुशी को इस बात का अंदाजा हुआ की अभी उसकी हरकत कुछ अलग hi थी और खासकर उसके डैड ठीक उसके पीछे hi बैठे हुए उससे देख रहे है उसके गाल एकदम शर्म से लाल हो गए और न चाहते हुए भी उसने राहुल का हाथ चोरर दिया और नज़रे फेरर ली.

राहुल (स्माइल्स) : में ठीक हु!

मास्टर जो की पीछे बैठे हुए अपनी बेटी ख़ुशी की हरकत देख चुके थे उनकी आँखों में एकदम से जैसे चमक आ गयी. मतलब ख़ुशी के अंदर वाक़ई राहुल के लिए फीलिंग्स है. मुस्कुराते हुए वो सब देख रहे थे की कैसे उनकी बेटी थोड़ी देरर पहले इतनी शांत बैठी हुई थी और राहुल के आते hi किसी बच्ची की तरह दौड़ लगाते हुए उसके पास चली गयी. आज तक इस से पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था. न जाने कितने बड़े बड़े लोगो के साथ मास्टर का उठना बैठना होता था और उन् सब के लड़के अमीर होने के साथ साथ दिखने में भी हैंडसम थे और ख़ुशी को कई बार प्रोपोज़ भी कर चुके थे पर ख़ुशी ने कभी भी उन् सब पर घास तक नहीं डाली. पर राहुल को देखते hi ख़ुशी की पर्सनालिटी पूरी 180 डिग्री पलट जाती है

प्रीती भी एकदम से आगे बढ़ते हुए राहुल का हाथ थाम लेती है, वैसे तोह वो सीधे हुग करने वाली थी पर क्युकी ख़ुशी के पापा वही पर थे इसलिए उसने अपनी इस इच्छा को दबा लिया

राहुल : मास्टर आप यहाँ!?

मास्टर : हम्म! बैठो!

राहुल सोफे पर मास्टर के सामने बैठ जाता है तोह ख़ुशी शर्माती हुई उसके बगल में hi बैठ जाती है और ख़ुशी के बगल से प्रीती.

राहुल : कहिये मास्टर!

मास्टर : हम्म! वैसे तोह में यहाँ दो कारण से आया हु पहला कारण में तुमसे अकेले में डिसकस करना चाहूंगा और दूसरा कारण तुम्हे मोनिका खुद बताएगी.

राहुल : मोनिका दी भी आयी है?

प्रीती : हां! वो ऊपर ख़ुशी के कमरे में है, वाशरूम में. आती hi होंगी!

राहुल : ओह्ह्ह!!

मास्टर : ख़ुशी बीटा, प्रीती बीटा आप दोनों जाइये, मुझे राहुल से अकेले में कुछ बात करनी है.

ख़ुशी : okay डैड!

ख़ुशी राहुल को अनिच्छा भरी नज़रो से देखते हुए जाने लगती है.

राहुल : जी कहिये मास्टर!

मास्टर (स्माइल्स) : तुम्हारा बिज़नेस केसा चल रहा है!?

राहुल : उपरवाले के आशीर्वाद से और आप सभी की मेहेरबानी से सब अच्छा चल रहा है मास्टर

मास्टर देख रहे थे की इतना आगे आने के बाद भी राहुल में ज़रा भी घमंड नहीं आया, वो जैसा पहले था बिलकुल वैसा hi अब भी है.

मास्टर : गुड! में तुमसे सिर्फ एक चीज़ पूछना चाहता हु

राहुल : जी! कहिये...

मास्टर (गहरी सास लेकर) : देखो राहुल! मेरी बच्ची ख़ुशी, किन्न हालातो से खुद लड़ते हुए आगे आयी है, ये तुम देख hi चुके हो. बचपन में hi उसकी माँ चल बसी. मेने एक पिता होने के नाते उससे वो प्यार कभी नहीं दिया जैसा की एक आम माँ बाप देते है. वो मुझसे कई सालो तक दूर रही. ऐसे में ना तोह उससे माँ का ना hi बाप का और न hi किसी भाई बहिन का प्यार मिला. वो शुरू से hi अकेली थी. केवल प्रीती hi उसके हरदम साथ रहती थी. मेरी भी कुछ मजबूरिया रही जिस कारण में उससे अपने पास बुला न सका.

राहुल : जी...

मास्टर : और इसलिए मेने तुम्हे उससे प्रोटेक्ट करने के लिए भी भेजा. तुम्हारी मदद की वजह से वो खतरा तोह ताल गया, मेने उनके साथ डील कर लिया है, अब आगे कभी भी ख़ुशी को कोई खतरा नहीं होगा. थैंक्स तो यू!

राहुल : वो तोह मेरा फ़र्ज़ था मास्टर. आपको गुरु दक्षिणा में मेने ये काम करने के लिए कहा था तोह भला में पीछे कैसे हट सकता था!?

मास्टर : वही! पर अब मुझे एक hi टेंशन है. मेरे सवाल का होनेस्त्ली उत्तर देना राहुल

राहुल : जी

मास्टर : तुम ख़ुशी से प्यार करते हो?

राहुल (शॉकेड) : हँ??

"ख़ुशी से प्यार? ये मास्टर क्या पूछ रहे है? ऐसे एकदम से? क्या में ख़ुशी से प्यार करता हु? में खुद नहीं जानता. हां वो एक अच्छी लड़की है, थोड़ी शैतान है पर दिल की अच्छी है! ये में खुद जानता हु. पर प्यार... अब क्या कहु मास्टर को?..." राहुल ने अपने मैं में सोचा.

मास्टर : क्या तुम उससे पसंद करते हो? सच सच बताओ राहुल.

राहुल : ुहम्म... मास्टर... में सिर्फ यही कहूंगा की हां ख़ुशी एक अच्छी लड़की है और में उससे लिखे करता हु पर प्यार के बारे में में कुछ कह नहीं सकता, क्युकी मेरा और ख़ुशी का उतना इंटरेक्शन नहीं हुआ है. हम सिर्फ 3 महीने hi साथ थे और शुरू में तोह वो मुझे कुछ ख़ास पसंद नहीं करती थी, पर धीरे धीरे हमारा रिलेशन अच्छे फ्रेंड्स की तरह हो गया.

मास्टर : तोह यदि एक दिन ख़ुशी की शादी किसी और लड़के से होती है तोह तुम्हे केसा फील होएगा?

राहुल : ये ...

राहुल की जुबां पर लगाम लग जाती है. उसके मान में ख़ुशी का चेहरा मंडराने लगता है तभी उसके अंदर से उसके मैं की एक आवाज़ आती है, "अबे सोच क्या रहा है? बोल की तुझे बिलकुल भी अच्छा नहीं लगेगा"

मैं की आवाज़ सुन्न राहुल तपाक से बिना कुछ सोचे समझे hi बोल देता है,

राहुल : मुझे बिलकुल भी अच्छा नहीं लगेगा!

मास्टर : ओह्ह! पर ऐसा क्यों? अभी तोह तुमने कहा की तुम ख़ुशी से प्यार नहीं करते.

राहुल : वो... ी मैं! मास्टर... ी लिखे हेर अस ा गुड फ्रेंड... सो ऐसे में यदि उसकी शादी होती है सो ी won't फील गुड

मास्टर : वही तोह पूछ रहा हु में... की क्यों? ख़ुशी तुम्हारी गुड फ्रेंड है, तुम्हे तोह खुश होना चाहिए उसकी शादी से.

राहुल समझ गया था की मास्टर उससे फसा रहे है और उसके मुँह से कुछ उगलवाना चाहते है और राहुल सब जानते हुए भी उस जाल में गिरता जा रहा था क्युकी जाल में ख़ुशी जो थी और हमारे राहुल भैया को तोह सब चाहिए. राहुल का ईविल मंद उससे सब कुछ हथियाने के लिए विवश कर रहा था. उसके मैं में सब कुछ पा लेने की अत्यंत इच्छा जाग रही थी.

पर वो झूठ बोल के कुछ भी हासिल नहीं करना चाहता था और इसलिए,

राहुल : यस! ी लिखे हेर मास्टर! में नहीं चाहता की वो मुझसे दूर जाए, मेरा मैं चाहता है की वो मेरे पास रहे. ी... ी थिंक ी लव हेर. बूत में आपको ये बता देना चाहता हु की ी आलरेडी हैवे ऋचा! उसके बाद भी ख़ुशी यदि मेरे साथ राज़ी है सो ी don't हैवे अन्य प्रॉब्लम.

आखिर कार राहुल ने कह hi दिया और ये सुनते hi मास्टर के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी.

मास्टर : मुझे पता है तुम्हारा और ऋचा का रिलेशनशिप है आलरेडी. मुझे उस से कोई दिक्कत नहीं है. में सिर्फ इतना चाहता हु की मेरी बेटी तुम्हारे साथ खुश रहे.

राहुल : फिर तोह! सब कुछ ख़ुशी पे hi चोरर देना चाहिए.

मास्टर : हां! में सहमत हु. अच्छा! अब तुम जा के मोनिका से मिल लो, उससे तुमसे कुछ बात करनी है.

राहुल : जी!

राहुल ऊपर जाके ख़ुशी का रूम नॉक करता है तोह प्रीती दूर खोलती है सुर दूर खोलते hi वो राहुल से एकदम से लिपट जाती है,

प्रीती : ओह्ह्ह्ह! ी मिस्ड यू सो मच...

ख़ुशी : परीटीई!!?? ये क्या बेशर्मी है?

प्रीती : बेशर्मी? व्हाट दो यू मैं बी बेशर्मी? I'm हग्गिंग हिम बिकॉज़ ी मिस्ड हिम. अरे यू जेलस? हहै!

ख़ुशी (ब्लश) : यू...

उसके हट ते hi ख़ुशी धीरे से राहुल के करीब आती है, शर्मा के अपनी नज़रे ऊपर करती है और आगे बढ़ के उसके गले लग जाती है.

प्रीती : वूऊव्व! में करू तोह साला करैक्टर ढीला है हां??

राहुल (हस्ते हुए) : किसी हो तुम दोनों?

ख़ुशी (ब्लश) : I'm गुड! क्या बातें हो रही थी डैड के साथ?

राहुल : ेहः? नई!! वो कुछ नहीं, ऐसे hi...

ख़ुशी कुछ आस भरी नज़रो से राहुल को देख रही थी, सच तोह ये था की उससे आलरेडी पता था की उसके डैड क्या बात करने वाले है राहुल से, वो सिर्फ यही सोच रही थी की राहुल ने क्या उत्तर दिया. क्या राहुल ने उससे एक्सेप्ट किया?

तभी मोनिका बाथरूम में से सिर्फ एक बाथ टॉवल लपेटे हुए निकलती है, और जैसे hi राहुल को देखती है, उसकी आँखों में एकदम से चमक आ जाती है, वो इस बात को बिलकुल hi भूल गयी थी की वो अभी केवल एक बाथ टॉवल पहनी हुई है.

उसके गीले बाल, नंगे गोर कंधे, नंगी दूध जैसी सफ़ेद जाँघे, और गीला बदन किसी का भी लुंड खड़ा कर दे. वो एकदम से दौड़ती हुई आगे बढ़ी और राहुल को गले से लगा लिया.

उसकी हुग में एक कसावट थी, एक बेसब्री, एक उत्तेजना. हुग बोहत hi टाइट थी. इधर राहुल स्तब्ध सा बस मूर्ति बने हुए खड़ा था.

पहले प्रीती की हुग, जिसके कारण उससे थोड़ा बोहत जोश चढ़ चूका था, उसके बाद ख़ुशी की हुग, बूब्स का डबल डोज़ मिलते hi राहुल का लुंड महाराज संकेत देने लगा था और अब मोनिका और वो भी बाथ टॉवल में वो भी गीली एकदम.

पहली बार था जो राहुल ने उससे बाथ टॉवल में देखा था. वो बस बिना कुछ बोले चुप चाप खड़ा हुआ था और अपने लुंड को कण्ट्रोल करने में लगा हुआ था. इधर ख़ुशी और प्रीती की आँखें फटी की फटी रह गयी सामने सन को देख कर.

मोनिका ने राहुल को हुग किया और वो भी बाथ टॉवल पहने? ऐसा तोह खुद ख़ुशी ने आज तक करने की हिम्मत भी नहीं की, न hi प्रीती ने किया था ऐसा और यहाँ ये...

अभी दोनों के मैं में एक hi चीज़ चल रही थी

"ज़रूर कुछ तोह लफड़ा है दोनों के बीच में"

मोनिका : ोये हेरूओ!! ी मिस्ड यू सो मच!

राहुल : ....

जैसे hi मोनिका उससे चोररटी है ख़ुशी और प्रीती उससे याद दिलाती है की वो अभी केवल बाथ टॉवल में है. शर्म के मारे मोनिका दौड़ती हुई वाशरूम में अपने कपडे लेकर चली जाती है.

ख़ुशी : ये पहेली बार है जो मेने मोनिका दी को बाथ टॉवल में ऐसे इतना कारेफ़री घूमते देखा है

प्रीती : शामे बहिन शामे... ज़रूर इन् दोनों के बीच कुछ तोह है.

दोनों लड़किया राहुल को आँखें सिकोड़ कर देखने लगती है, बेचारे राहुल के पसीने छूटने लगते है. अब इसमें उसकी क्या गलती भाई?

राहुल : हाहाहा... नई नई... तुम दोनों गलत सोच रही हो. वो एक्ससिटेड थी इसलिए उन्होंने ध्यान नहीं दिया होगा...

ख़ुशी (कान के पास आते हुए) : उन्होंने भले ध्यान न दिया हो पर मेने ज़रूर दिया. I'm वाचिंग यू...

प्रीती (दूसरे कान के पास आते हुए) : यू क्नोव व्हाट? मोनिका दी को चोर्रो... जो फॉर ख़ुशी! वह एक ऑफर है. बुय 1 गेट 1 फ्री! ख़ुशी को पा लोगे तोह तुम्हे ये प्रीती भी मिल जाएगी. वो भी एकदम फ्री. ऐसा ऑफर नहीं मिलेगा कही. Okay?

प्रीती राहुल के कान की निचले हिस्से को मुँह में भर कर काट लेती है और आँख मारते हुए ख़ुशी को लेकर वह से चली जाती है और राहुल अपने माथे से पसीना पॉच के सोचने लगता है,

"Omg! दोनों कितनी भयानक लग रही थी. ऐसा लग रहा था मुझे कच्चा चबा जाएंगी. लड़किया बोहत घातक किस्म की होती है यार. और ये प्रीती... बाप रे!! It's ऑलवेज बीन प्रीती राहुल... It's ऑलवेज बीन प्रीती. यदि ख़ुशी डेंजरस है तोह प्रीती तोह खुद डेंजर है. I'll कीप तहत इन मंद... फेव!!"

*क्लिक*

वाशरूम का दूर खुलता है और मोनिका एक वाइट शर्ट और जीन्स में हाज़िर होती है, उसके बाल अभी भी गीले थे और वो बोहत hi सेडक्टिव लुक दे रही थी.





मोनिका : कैसे हो हीरो?

राहुल : वववव...

मोनिका : ???

राहुल (ब्लश) : wo...wo में... I'm गुड! आल गुड!

"मोनिका दी! काश मेरी वाइफ होती, उनके साथ घूमना, फिरना, बातें करना, कितनी ख़ूबसूरत है दी! अंशु भी इनकी जितनी ख़ूबसूरत है पर मोनिका दी उम्र में बड़ी है और इसलिए मोनिका दी का एक अलग hi लेवल है. सेक्सी होने के साथ साथ वो हॉट भी है, वो क्यूट भी है, मातुरे भी है, कुल मिलाके एक वाइफ मटेरियल"

मैं में राहुल ने सोचा तोह उसका मैं फिरसे उससे उत् पटांग रे देने लगा की जा के अभी दबोच ले मोनिका को, उसके नरम दूध अभी दबा दे, और उसके होंठ अभी के अभी अपने होंठो से जोड़ दे.

इधर खुद hi राहुल अपने मैं से लड़ रहा था उतने में hi मोनिका ने उससे फिरसे एक बार अपनी बाहो में ले लिया. पर इस बार... इस बार मोनिका ने राहुल का खड़ा लुंड खुद महसूस किया पर बोलै कुछ भी नहीं... उसके बाद उसकी थोड़ी रुवासी सी आवाज़ आयी...

"I'm गोइंग राहुल!!!"

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आज के लिए इतना hi गाइस!


धन्यवाद्!
 
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