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रति, समीर अब ऊपर चले हम कब से यहाँ है कही नीता मेरी ननद न खोजने आ गई हो और मुझे न देख के वो परेशां हो जायगी माय अपने मुसार छूट से निकला तो उसकी छूट से पक्क की आवाज़ ै ये आवाज़ सुन क रति के चेहरे प मुस कण फ़ैल गई वो उठी तो उसकी कमर में बहुत ज्यादा दर्द होने लगा तो वो मेरी तरफ देखि तो माय गुफा की चमत्कारी पानी अपने हांथो में लेके उसके मु में दाल क पिलाया जब उसका पेट भर गया तो वो उठी और अपनी पेटीकोट पीर साड़ी पाह ान के मेरी तरफ देखि तो माय अभी भी नग्गा ता वो मुझे ऐसा देख क शरमाते हुए चलिए न ऊपर नहीं करना है क्या दोबारा ये सुन के..
माय उसकी तरफ देख के तुम करवाना चाहती हो इतने दर्द के बाद भी वो अपनी नज़र उठा के मेरी आँखों में देखते हुए माय क्यों नहीं चहु ंगी अब चले ऊपर क्युकी वह से निचे तक दिख ता है कोई ेगा तो हम दोनों देख सकते है तो मैं उसकी तरफ देख के कोई भी आ जाये लेकिन जब तक मेरा पानी नहीं गिरेगा तब तक तुम्हारी बुर को छोड़ू ंगा ये सुन के रति शरमाते हुए है बोली तो माय अपना कपडा पहना और हम दोनों गुफा से जैसे hi निकल के बहार ए और ऊपर की और गए तो देखा नीता वह पथरो के ऊपर बैठी हुई दिखी और हम दोनों को देख के चौकते हुए समीर भैया और भाभी आप दोनों कहा से आ रही हो माय पिछले 30 मिनट्स से आपका..
इंतजार कर रही हु तो रति थोड़ा डरते हुए मालिक मुझे गुफा में ले गए थे मेरी झाड़ फुक के लिए ये सुन के नीता थोड़ा रिलेक्स होक ok भाभी माय तो दर गई थी की आप कहा चली गई क्युकी बकरिया तो घर पहुंच गई है लेकिन आप नहीं ै तो माय खुद hi यहाँ आ गई और आने के बाद जब आप कही नहीं दिखी तो सोची थोड़ी देर यही बैठ क इंतजार करती हु अगर नहीं होगी तो माय सारा पहाड़ धुन धति ये सुन के रति थोड़ा स्माइल की और मेरी तरफ देख के थोड़ा उदास हो गई और अपने मान में ("अब समीर का पानी कैसे निकलू मैने hi तो उन्हें ऊपर ले थी य बोल क की ऊपर करेंगे अब नीता आ गई और एक तो इतने महीनो बाद मिले है..
खास कुछ ऐसा करो मालिक के नीता के सामने hi मुझे पकड़ के छोड़ दो और जब से गुफा की पानी पि हु तब से मेरी छूट इतना पानी क्यों बहा रही है और इतने खुजली क्यों बढ़ गई है अब तो माय बिना चूड़े मालिक से नहीं रह पाऊँगी कुछ करो मालिक") इधर मेरे मुसार अभी भी खड़ा था तो माय एक आईडिया निकला सुनो नीता तुम्हारी भाभी अभी भी ठीक नहीं हुई है इस लिए मुझे अभी के अभी उन्हें छोड़ना पड़ेगा तुम्हारे सामने वैसे माय तुम्हारे घर आने वाला था लेकिन तुम्हारी भाभी आज यहाँ मिल गई जब माय गुफा में जप तूप करने आया तो ये सुन के नीता थोड़ा शर्मा के भैया भाभी यही कड़ी है आप को जो करना है करे माय भाभी को..
माय उसकी तरफ देख के तुम करवाना चाहती हो इतने दर्द के बाद भी वो अपनी नज़र उठा के मेरी आँखों में देखते हुए माय क्यों नहीं चहु ंगी अब चले ऊपर क्युकी वह से निचे तक दिख ता है कोई ेगा तो हम दोनों देख सकते है तो मैं उसकी तरफ देख के कोई भी आ जाये लेकिन जब तक मेरा पानी नहीं गिरेगा तब तक तुम्हारी बुर को छोड़ू ंगा ये सुन के रति शरमाते हुए है बोली तो माय अपना कपडा पहना और हम दोनों गुफा से जैसे hi निकल के बहार ए और ऊपर की और गए तो देखा नीता वह पथरो के ऊपर बैठी हुई दिखी और हम दोनों को देख के चौकते हुए समीर भैया और भाभी आप दोनों कहा से आ रही हो माय पिछले 30 मिनट्स से आपका..
इंतजार कर रही हु तो रति थोड़ा डरते हुए मालिक मुझे गुफा में ले गए थे मेरी झाड़ फुक के लिए ये सुन के नीता थोड़ा रिलेक्स होक ok भाभी माय तो दर गई थी की आप कहा चली गई क्युकी बकरिया तो घर पहुंच गई है लेकिन आप नहीं ै तो माय खुद hi यहाँ आ गई और आने के बाद जब आप कही नहीं दिखी तो सोची थोड़ी देर यही बैठ क इंतजार करती हु अगर नहीं होगी तो माय सारा पहाड़ धुन धति ये सुन के रति थोड़ा स्माइल की और मेरी तरफ देख के थोड़ा उदास हो गई और अपने मान में ("अब समीर का पानी कैसे निकलू मैने hi तो उन्हें ऊपर ले थी य बोल क की ऊपर करेंगे अब नीता आ गई और एक तो इतने महीनो बाद मिले है..
खास कुछ ऐसा करो मालिक के नीता के सामने hi मुझे पकड़ के छोड़ दो और जब से गुफा की पानी पि हु तब से मेरी छूट इतना पानी क्यों बहा रही है और इतने खुजली क्यों बढ़ गई है अब तो माय बिना चूड़े मालिक से नहीं रह पाऊँगी कुछ करो मालिक") इधर मेरे मुसार अभी भी खड़ा था तो माय एक आईडिया निकला सुनो नीता तुम्हारी भाभी अभी भी ठीक नहीं हुई है इस लिए मुझे अभी के अभी उन्हें छोड़ना पड़ेगा तुम्हारे सामने वैसे माय तुम्हारे घर आने वाला था लेकिन तुम्हारी भाभी आज यहाँ मिल गई जब माय गुफा में जप तूप करने आया तो ये सुन के नीता थोड़ा शर्मा के भैया भाभी यही कड़ी है आप को जो करना है करे माय भाभी को..